RBSE Solutions Class 9 Social Science Chapter 2 विश्व के प्रमुख दर्शन

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Class 9 Social Science Chapter 2 विश्व के प्रमुख दर्शन RBSE Solutions PDF

Chapter 2 विश्व के प्रमुख दर्शन

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. महावीर स्वामी का जन्म कब हुआ ?
(अ) 699 ई. पू.
(ब) 570 ई.पू.
(स) 675 ई. पू.
(द) 599 ई. पू.
Answer: (द) 599 ई. पू.
In simple words: महावीर स्वामी का जन्म 599 ईसा पूर्व में हुआ था। यह जैन धर्म के एक महत्वपूर्ण नेता थे।

🎯 Exam Tip: धार्मिक नेताओं के जन्म वर्ष और स्थान अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं, इन्हें ठीक से याद रखें।

 

Question 2. महात्मा बुद्ध ने प्रथम उपदेश कहाँ दिया था ?
(अ) कपिलवस्तु
(ब) सारनाथ
(स) गया
(द) बौद्धगया
Answer: (द) बौद्धगया
In simple words: महात्मा बुद्ध ने अपना पहला उपदेश बौद्धगया में दिया था। यहीं पर उन्हें ज्ञान भी प्राप्त हुआ था।

🎯 Exam Tip: बुद्ध के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं (जैसे ज्ञान प्राप्ति, पहला उपदेश, महापरिनिर्वाण) के स्थान और उनके क्रम को याद रखें।

 

Question 3. हिजरी संवत् का प्रारम्भ कब हुआ ?
(अ) 622 ई. पू.
(ब) 632 ई. पू.
(स) 570 ई. पू.
(द) 566 ई. पू.
Answer: (अ) 622 ई. पू.
In simple words: हिजरी संवत् की शुरुआत 622 ईसा पूर्व में हुई थी। यह इस्लाम धर्म से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कैलेंडर है।

🎯 Exam Tip: प्रमुख धार्मिक कैलेंडरों और उनके प्रारंभिक वर्षों को जानें, क्योंकि यह अक्सर सामान्य ज्ञान के प्रश्नों में आता है।

 

Question 12. ईसा मसीह के प्रमुख शिष्य कौन थे ?
(अ) संत पॉल
(ब) संत पीटर
(स) संत पॉल व संत पीटर
(द) बाईबिल
Answer: (स) संत पॉल व संत पीटर
In simple words: ईसा मसीह के मुख्य शिष्यों में संत पॉल और संत पीटर शामिल थे। इन्होंने ईसाई धर्म को फैलाने में मदद की।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण धर्मों के संस्थापकों और उनके प्रमुख अनुयायियों के नाम याद रखें।

 

Question 13. बाईबिल के प्राचीन सिद्धान्तों पर चलने वाले लोग क्या कहलाते हैं ?
(अ) रोमन कैथोलिक
(ब) प्रोटेस्टेन्ट
(स) ईसाई
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (अ) रोमन कैथोलिक
In simple words: जो लोग बाइबिल के पुराने नियमों का पालन करते हैं, उन्हें रोमन कैथोलिक कहते हैं। यह ईसाई धर्म का एक बड़ा हिस्सा है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न धर्मों के मुख्य संप्रदायों और उनकी विशेषताओं के बारे में जानें।

 

Question 14. पारसी धर्म के संस्थापक कौन थे ?
(अ) जरथुष्ट्र
(ब) मोहम्मद साहब
(स) ईसा मसीह
(द) महावीर स्वामी
Answer: (अ) जरथुष्ट्र
In simple words: जरथुष्ट्र पारसी धर्म के संस्थापक थे। उन्होंने इस प्राचीन धर्म की नींव रखी थी।

🎯 Exam Tip: विश्व के प्रमुख धर्मों और उनके संस्थापकों के नाम अवश्य याद रखें।

 

Question 15. पारसी धर्म में दैवी शक्ति का प्रतीक किसे माना जाता है ?
(अ) अहरिमन को
(ब) अहूरमजदा को
(स) जल को
(द) अग्नि को
Answer: (ब) अहूरमजदा को
In simple words: पारसी धर्म में अहूरमजदा को दैवीय शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह अच्छाई और प्रकाश का प्रतीक है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक धर्म में पवित्र माने जाने वाले प्रतीकों या देवताओं के नाम और उनके महत्व को समझें।

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. पुरुषार्थ कितने हैं ? नाम बताइए।
Answer: पुरुषार्थ चार हैं:
1. धर्म
2. अर्थ
3. काम
4. मोक्ष
In simple words: जीवन के चार मुख्य लक्ष्य या पुरुषार्थ हैं: धर्म (सही काम), अर्थ (धन), काम (इच्छाएँ) और मोक्ष (मुक्ति)। इन लक्ष्यों को प्राप्त करना जीवन का उद्देश्य माना जाता है।

🎯 Exam Tip: चारों पुरुषार्थों के नाम और उनके सामान्य अर्थ को स्पष्ट रूप से याद रखें।

 

Question 2. वसुधैव कुटुम्बकम् की बात किसमें कही गई है ?
Answer: वैदिक दर्शन में वसुधैव कुटुम्बकम् की बात कही गयी है। इस विचार का अर्थ है कि पूरी पृथ्वी एक परिवार है।
In simple words: 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का विचार वैदिक दर्शन में मिलता है। इसका मतलब है कि पूरा संसार एक परिवार के जैसा है।

🎯 Exam Tip: यह वाक्यांश भारतीय संस्कृति का आधार है, इसलिए इसे और इसके मूल स्रोत (वैदिक दर्शन) को जानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. वैदिक दर्शन के अनुसार सृष्टि का सृष्टा पालक व संहारक कौन है ?
Answer: वैदिक दर्शन के अनुसार सृष्टि का सृष्टा, पालक और संहारक एक ईश्वर है। ईश्वर को ब्रह्मांड का निर्माता, रक्षक और विनाशक माना जाता है।
In simple words: वैदिक दर्शन कहता है कि संसार को बनाने वाला, पालने वाला और खत्म करने वाला केवल एक ईश्वर है।

🎯 Exam Tip: ईश्वर की अवधारणा से संबंधित मुख्य धार्मिक विचारों को याद रखें।

 

Question 4. जैन धर्म के प्रथम व 24वें तीर्थंकर का नाम बताइए।
Answer: जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव या आदिनाथ थे और 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी थे। ऋषभदेव ने जैन धर्म के सिद्धांतों की स्थापना की, जबकि महावीर स्वामी ने इसे अंतिम रूप दिया।
In simple words: जैन धर्म के पहले तीर्थंकर ऋषभदेव थे और आखिरी (24वें) तीर्थंकर महावीर स्वामी थे।

🎯 Exam Tip: जैन धर्म के पहले और अंतिम तीर्थंकरों के नाम परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं, इन्हें याद रखें।

 

Question 5. पाँच महाव्रत कौन-कौन से हैं ?
Answer: जैन धर्म के पाँच महाव्रत हैं:
1. अहिंसा (किसी को चोट न पहुँचाना)
2. सत्य (हमेशा सच बोलना)
3. अस्तेय (चोरी न करना)
4. अपरिग्रह (आवश्यकता से अधिक चीजें जमा न करना)
5. ब्रह्मचर्य (इंद्रियों पर नियंत्रण रखना)
In simple words: जैन धर्म के पाँच बड़े नियम हैं: अहिंसा, सत्य, चोरी न करना, ज्यादा सामान जमा न करना और इंद्रियों को काबू में रखना।

🎯 Exam Tip: इन पाँचों महाव्रतों के नाम और उनका संक्षिप्त अर्थ बिल्कुल सही याद रखें।

 

Question 6. जैन धर्म में अहिंसा की व्याख्या क्या की गई है ?
Answer: जैन धर्म के अनुसार, अहिंसा का अर्थ है मन, वचन और कर्म से किसी भी प्राणी के प्रति बुरा सोचने या नुकसान पहुँचाने की भावना न रखना। यह केवल शारीरिक चोट पहुँचाने से बचना नहीं, बल्कि विचारों और शब्दों में भी हिंसा से दूर रहना है।
In simple words: जैन धर्म में अहिंसा का मतलब है कि मन, बोली और काम से किसी को भी नुकसान न पहुँचाना।

🎯 Exam Tip: अहिंसा के व्यापक अर्थ को समझें, जिसमें शारीरिक, मानसिक और वाचिक अहिंसा तीनों शामिल हैं।

 

Question 7. महात्मा बुद्ध के बचपन का नाम क्या था ?
Answer: महात्मा बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था। उन्होंने बाद में ज्ञान प्राप्त करके बुद्ध कहलाए।
In simple words: महात्मा बुद्ध का बचपन का नाम सिद्धार्थ था।

🎯 Exam Tip: प्रमुख धार्मिक हस्तियों के वास्तविक नाम और उनके बाद के नाम याद रखें।

 

Question 8. महात्मा बुद्ध ने दुःख का कारण क्या बताया?
Answer: महात्मा बुद्ध ने दुःख का मुख्य कारण तृष्णा (लालसा) या वासना को बताया। उनकी शिक्षाओं के अनुसार, इच्छाओं के कारण ही हम दुख भोगते हैं।
In simple words: महात्मा बुद्ध ने कहा कि दुख का कारण हमारी इच्छाएँ (लालसा) हैं।

🎯 Exam Tip: बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्यों में दुःख के कारण को अच्छी तरह समझें।

 

Question 9. बौद्ध धर्म कितने सम्प्रदाय में विभक्त हुआ?
Answer: बौद्ध धर्म मुख्य रूप से दो सम्प्रदायों में विभक्त हुआ-1. हीनयान और 2. महायान। इन दोनों संप्रदायों के मानने के तरीके और लक्ष्य थोड़े अलग हैं।
In simple words: बौद्ध धर्म दो मुख्य हिस्सों में बँट गया: हीनयान और महायान।

🎯 Exam Tip: बौद्ध धर्म के मुख्य संप्रदायों के नाम और उनके बीच के प्रमुख अंतरों को जानें।

 

Question 10. मोहम्मद साहब का मक्का से मदीना जाने की घटना को क्या कहते हैं ?
Answer: मोहम्मद साहब का मक्का से मदीना जाने की घटना को हिजरत कहते हैं। यह इस्लाम धर्म में एक बहुत महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है।
In simple words: मोहम्मद साहब जब मक्का से मदीना गए, उस यात्रा को हिजरत कहते हैं।

🎯 Exam Tip: इस्लाम धर्म की महत्वपूर्ण घटनाओं के नाम और उनके महत्व को याद रखें।

 

Question 11. हजरत मोहम्मद का जन्म कहाँ हुआ ?
Answer: हजरत मोहम्मद का जन्म मक्का में हुआ था। मक्का सऊदी अरब का एक पवित्र शहर है।
In simple words: हजरत मोहम्मद का जन्म मक्का में हुआ था।

🎯 Exam Tip: इस्लाम के संस्थापक के जन्म स्थान को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 12. ईसा मसीह के प्रमुख शिष्य कौन थे ?
Answer: ईसा मसीह के प्रमुख शिष्य संत पॉल एवं पीटर थे। इन दोनों ने ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
In simple words: संत पॉल और पीटर ईसा मसीह के मुख्य शिष्य थे।

🎯 Exam Tip: ईसाई धर्म के शुरुआती प्रचारकों के रूप में इनके योगदान को याद रखें।

 

Question 13. बाईबिल के प्राचीन सिद्धान्तों पर चलने वाले लोग क्या कहलाते हैं ?
Answer: बाईबिल के प्राचीन सिद्धान्तों पर चलने वाले लोग रोमन कैथोलिक कहलाते हैं। यह ईसाई धर्म का सबसे बड़ा संप्रदाय है।
In simple words: जो बाइबिल के पुराने नियमों को मानते हैं, वे रोमन कैथोलिक कहलाते हैं।

🎯 Exam Tip: ईसाई धर्म के मुख्य संप्रदायों और उनके मानने वालों के नाम याद रखें।

 

Question 14. पारसी धर्म के संस्थापक कौन थे ?
Answer: पारसी धर्म के संस्थापक जरथुष्ट्र थे। उन्होंने इस धर्म की शिक्षाओं को दुनिया में फैलाया।
In simple words: जरथुष्ट्र ने पारसी धर्म की शुरुआत की थी।

🎯 Exam Tip: धर्मों के संस्थापकों के नाम याद रखना सामान्य ज्ञान के लिए उपयोगी है।

 

Question 15. पारसी धर्म में दैवी शक्ति का प्रतीक किसे माना जाता है ?
Answer: पारसी धर्म में दैवी शक्ति का प्रतीक अहूरमजदा को माना जाता है। यह अच्छाई और ज्ञान का देवता है।
In simple words: पारसी धर्म में अहूरमजदा को भगवान (अच्छी शक्ति) मानते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक धर्म में सर्वोच्च शक्ति या देवता के नाम को याद रखें।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. वैदिक दर्शन में सहिष्णुता के संदेश को समझाइए।
Answer: वैदिक दर्शन भारत के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण दर्शनों में से एक है। इसमें कहा गया है कि ईश्वर एक है, भले ही विद्वान उसे कई नामों से पुकारते हों। उपनिषदों के अनुसार, पूरे ब्रह्मांड में फैली हुई आत्मा (ब्रह्म) और व्यक्ति के भीतर की आत्मा एक ही है। मनुष्य के जीवन का मुख्य उद्देश्य इसी एकत्व को महसूस करना है। जब व्यक्ति इस एकता को जान लेता है, तो उसे हमेशा के लिए शांति मिलती है। वैदिक दर्शन की इसी मान्यता ने पूरी मानव जाति को सहिष्णुता और आपसी समझ का संदेश दिया है, यह सिखाते हुए कि सभी जीव एक ही सत्ता का हिस्सा हैं।
In simple words: वैदिक दर्शन सिखाता है कि भगवान एक है और सभी आत्माएँ उसी का हिस्सा हैं। यह हमें बताता है कि सभी इंसानों को एक-दूसरे के साथ प्यार और शांति से रहना चाहिए, क्योंकि हम सब एक बड़े परिवार की तरह हैं।

🎯 Exam Tip: सहिष्णुता की अवधारणा को स्पष्ट करने के लिए "एकत्व" और "ब्रह्म व आत्मा की समानता" जैसे कीवर्ड्स का उपयोग करें।

 

Question 2. जैन दर्शन के त्रिरत्न की अवधारणा का वर्णन कीजिए।
Answer: महावीर स्वामी ने मोक्ष (मुक्ति) पाने के लिए तीन मुख्य उपाय बताए थे, जिन्हें त्रिरत्न कहा जाता है। ये त्रिरत्न हैं:
1. सम्यक् दर्शन (सही विश्वास): इसका मतलब है कि जैन धर्म की शिक्षाओं और सिद्धांतों पर सही विश्वास रखना। यह हमें सत्य को स्वीकार करने की ओर ले जाता है।
2. सम्यक् ज्ञान (सही ज्ञान): इसका अर्थ है जैन धर्म के सिद्धांतों और वास्तविकताओं का सही और पूरा ज्ञान प्राप्त करना। ज्ञान केवल किताबों से नहीं, बल्कि सही समझ से आता है।
3. सम्यक् चरित्र (सही आचरण): इसका मतलब है सही ज्ञान और विश्वास के अनुसार अपना जीवन जीना। इसमें पाँच महाव्रतों (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य) का पालन करना शामिल है। इन तीन रत्नों का पालन करके व्यक्ति मोक्ष की ओर बढ़ता है और सभी दुखों से मुक्ति पाता है।
In simple words: जैन धर्म में मोक्ष पाने के लिए तीन खास बातें बताई गई हैं, जिन्हें त्रिरत्न कहते हैं। ये हैं: सही विश्वास, सही ज्ञान और सही काम करना।

🎯 Exam Tip: त्रिरत्न के तीनों घटकों (सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चरित्र) के नाम और उनके संक्षिप्त अर्थों को याद रखें।

 

Question 3. जैन धर्म के प्रमुख तीर्थंकर कौन-कौन से हैं ?
Answer: जैन परंपरा के अनुसार जैन धर्म में कुल 24 तीर्थंकर हुए हैं, जिन्होंने समय-समय पर जैन धर्म का प्रचार किया। महावीर स्वामी से पहले 23 तीर्थंकर और हुए थे। पहले तीर्थंकर ऋषभदेव (या आदिनाथ) थे, जिन्होंने जैन धर्म की स्थापना की। तेईसवें तीर्थंकर पार्श्वनाथ थे, जिन्होंने अहिंसा और अन्य नैतिक सिद्धांतों पर जोर दिया। अन्य प्रमुख तीर्थंकरों में अजितनाथ, संभवनाथ, पदमप्रभ और अरिष्टनेमि शामिल हैं। 24वें और अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी थे, जिन्होंने जैन धर्म को अंतिम रूप दिया।
In simple words: जैन धर्म में 24 खास गुरु हुए हैं, जिन्हें तीर्थंकर कहते हैं। इनमें पहले ऋषभदेव और 24वें महावीर स्वामी थे। अन्य प्रसिद्ध तीर्थंकरों में पार्श्वनाथ भी शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: पहले, तेईसवें और चौबीसवें तीर्थंकर के नाम विशेष रूप से याद रखें, क्योंकि ये सबसे महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 4. बौद्ध दर्शन में चार आर्य सत्यों की अवधारणा का वर्णन कीजिए।
Answer: महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं का आधार चार आर्य सत्य हैं, जो जीवन और दुःख की प्रकृति को समझाते हैं:
1. विश्व दुःखमय है: बुद्ध ने बताया कि संसार में सब कुछ दुःख से भरा है। जन्म, बुढ़ापा, बीमारी, मृत्यु, प्रियजनों से बिछड़ना, नापसंद चीजों का मिलना- ये सभी दुःख हैं।
2. दुःख का कारण: दुःख का मूल कारण तृष्णा (लालसा) या वासना है। हमारी इच्छाएँ और चाहतें ही हमें दुःख देती हैं, क्योंकि वे कभी पूरी नहीं होतीं।
3. दुःख दमन: दुःख को खत्म किया जा सकता है। जब हम अपनी इच्छाओं और लालसा को खत्म कर देते हैं, तो दुःख भी खत्म हो जाता है।
4. दुःख निवारक मार्ग: दुःख को खत्म करने का रास्ता अष्टांगिक मार्ग या मध्यम मार्ग है। इसमें आठ उपाय शामिल हैं, जिनके पालन से हम दुःख पर जीत हासिल कर सकते हैं। यह मार्ग हमें संतुलित जीवन जीने का तरीका सिखाता है।
In simple words: बौद्ध धर्म में चार सच्चाईयाँ बताई गई हैं: संसार दुखों से भरा है, दुखों का कारण हमारी इच्छाएँ हैं, इच्छाओं को खत्म करके दुख खत्म किया जा सकता है, और दुखों को खत्म करने का रास्ता अष्टांगिक मार्ग है।

🎯 Exam Tip: चार आर्य सत्यों के नाम और उनका संक्षिप्त विवरण क्रम से याद रखें, यह बौद्ध दर्शन का मुख्य आधार है।

 

Question 5. बौद्ध दर्शन के आत्मवाद को समझाइए।
Answer: बौद्ध दर्शन आत्मा की अमरता में विश्वास नहीं करता है, जैसा कि कई अन्य धर्म मानते हैं। महात्मा बुद्ध ने आत्मा को एक रहस्यमय विषय बताया, जिस पर उन्होंने यह नहीं कहा कि आत्मा है या नहीं। इसके बजाय, बुद्ध कर्मवाद के सिद्धांत में विश्वास रखते थे, जिसका अर्थ है कि व्यक्ति अपने कर्मों के अनुसार ही फल भोगता है। उनका मानना था कि मानव अपने कर्मों के कारण ही पुनर्जन्म लेता है, लेकिन यह पुनर्जन्म आत्मा का नहीं, बल्कि अहंकार का होता है। जब व्यक्ति की सभी इच्छाएँ खत्म हो जाती हैं, तो उसका अहंकार भी नष्ट हो जाता है और वह पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति पाकर निर्वाण प्राप्त कर लेता है। निर्वाण का अर्थ है सभी दुखों और इच्छाओं का अंत।
In simple words: बौद्ध धर्म आत्मा को हमेशा रहने वाला नहीं मानता। बुद्ध के अनुसार, हमारे काम तय करते हैं कि हम दोबारा जन्म लेंगे, लेकिन यह हमारी 'मैं' की भावना का जन्म होता है, आत्मा का नहीं। जब सारी इच्छाएँ खत्म होती हैं, तो मुक्ति मिलती है।

🎯 Exam Tip: बौद्ध धर्म में आत्मा की अवधारणा को अन्य धर्मों से अलग करके समझें, विशेषकर 'पुनर्जन्म' को 'अहंकार के पुनर्जन्म' के रूप में।

 

Question 6. मोहम्मद साहब की शिक्षाओं का अरब वासियों पर क्या प्रभाव पड़ा।
Answer: मोहम्मद साहब की शिक्षाओं का अरब वासियों पर गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने एक ईश्वर (अल्लाह) की अवधारणा पेश की, जिससे बहुदेववाद और मूर्तिपूजा का अंत हुआ। उनकी शिक्षाओं ने सामाजिक समानता और न्याय पर जोर दिया, जिससे कबीलाई भेदभाव कम हुए। मोहम्मद साहब ने गरीबों और कमजोरों की मदद करने, दान देने और नैतिक जीवन जीने को बढ़ावा दिया। उनकी शिक्षाओं ने आपसी भाईचारे और शांति को महत्व दिया, जिससे अरब समाज में एकता बढ़ी। इस्लाम ने जीवन के हर पहलू को नियंत्रित करने वाले नियम दिए, जिससे एक व्यवस्थित समाज का निर्माण हुआ।
In simple words: मोहम्मद साहब की शिक्षाओं से अरब के लोगों में एक ही भगवान को मानने का विचार आया, मूर्तिपूजा खत्म हुई और लोग आपस में ज्यादा मिल-जुलकर रहने लगे। इससे समाज में भाईचारा और शांति बढ़ी।

🎯 Exam Tip: मोहम्मद साहब की शिक्षाओं के सामाजिक, धार्मिक और नैतिक प्रभावों को स्पष्ट बिंदुओं में लिखें।

 

Question 7. पारसी दर्शन के अनुसार दैवी और दानवीय शक्तियों का वर्णन कीजिए।
Answer: पारसी दर्शन के संस्थापक जरथुष्ट्र थे। इस दर्शन के अनुसार, पूरे संसार में दैवी और दानवीय, दो तरह की शक्तियाँ काम करती हैं। दैवी शक्ति का प्रतीक 'अहूरमजदा' है, जिसे एक महान देवता माना जाता है। अहूरमजदा ने पृथ्वी, मनुष्य और स्वर्ग को बनाया है। वह मनुष्यों को बुरी बातों से दूर रहने, सही रास्ते पर चलने और बुरे काम न करने की प्रेरणा देती है। दूसरी ओर, दानवीय शक्ति का प्रतीक 'अहरिमन' है, जो मनुष्यों को शैतान बनाकर नरक की ओर ले जाता है। पारसी दर्शन मानता है कि अहूरमजदा और अहरिमन के बीच लगातार संघर्ष चलता रहता है। इस संघर्ष में अंततः अहूरमजदा यानी दैवीय शक्ति की ही जीत होती है, जो अच्छाई की बुराई पर विजय दर्शाती है।
In simple words: पारसी धर्म कहता है कि दुनिया में दो तरह की शक्तियाँ हैं: एक अच्छी (अहूरमजदा) और एक बुरी (अहरिमन)। ये दोनों हमेशा लड़ती रहती हैं, लेकिन आखिर में अच्छी शक्ति ही जीतती है।

🎯 Exam Tip: दैवी और दानवीय शक्तियों के नामों और उनके प्रतीक के रूप में उनके कार्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. वैदिक दर्शन की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer: वैदिक दर्शन भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो प्राचीन काल से चला आ रहा है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. ईश्वर की एकता: वैदिक दर्शन मानता है कि ईश्वर एक है, जिसे विद्वान अलग-अलग नामों से जानते हैं। यह हमें सिखाता है कि सभी देवी-देवता एक ही परम शक्ति के विभिन्न रूप हैं।
2. पुरुषार्थ: जीवन के चार मुख्य लक्ष्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष हैं। मोक्ष यानी आत्मा की मुक्ति, जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य माना जाता है।
3. कर्म का महत्व: यह दर्शन कर्म पर जोर देता है, कहता है कि हमें फल की चिंता किए बिना अपना कर्म करना चाहिए। अच्छे कर्म से अच्छा फल मिलता है और बुरे कर्म से बुरा।
4. पुनर्जन्म का सिद्धांत: वैदिक दर्शन मानता है कि हमारे कर्मों के आधार पर ही हमारा अगला जन्म होता है। इससे व्यक्ति अच्छे कर्म करने और जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास करता है।
5. वसुधैव कुटुम्बकम्: यह दर्शन पूरे विश्व को एक परिवार मानता है। यह संकीर्ण सोच को खत्म करके लोगों को विश्वव्यापी भाईचारे से जुड़ने की प्रेरणा देता है।
6. प्रकृति पूजा: वैदिक दर्शन अग्नि, जल, पृथ्वी, वायु जैसे प्राकृतिक तत्वों को पवित्र मानता है और उनकी पूजा करने की प्रेरणा देता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण भी होता है।
7. त्यागपूर्वक उपभोग: उपनिषदों में बताया गया है कि हमें चीजों का उपयोग त्याग की भावना से करना चाहिए, लोभ और मोह से दूर रहकर अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
In simple words: वैदिक दर्शन कहता है कि भगवान एक है, जीवन के चार लक्ष्य हैं, अपने कर्मों का फल मिलता है, और हमें पूरे संसार को अपना परिवार समझना चाहिए। यह प्रकृति का सम्मान करना और बिना लालच के चीजों का उपयोग करना भी सिखाता है।

🎯 Exam Tip: वैदिक दर्शन की प्रत्येक विशेषता को संक्षिप्त और स्पष्ट बिंदुओं में समझाएँ, उदाहरण के लिए "वसुधैव कुटुम्बकम्" या "पुरुषार्थ"।

 

Question 2. जैन दर्शन के त्रिरत्न की अवधारणा का वर्णन कीजिए।
Answer: जैन दर्शन प्राचीन भारतीय दर्शनों में से एक है, जिसकी प्रमुख शिक्षाएँ इस प्रकार हैं:
1. त्रिरत्न: जैन दर्शन में मोक्ष प्राप्त करने के लिए तीन मुख्य उपाय बताए गए हैं, जिन्हें त्रिरत्न कहते हैं: सम्यक् दर्शन (सही विश्वास), सम्यक् ज्ञान (सही ज्ञान) और सम्यक् चरित्र (सही आचरण)।
2. पंच महाव्रत: जैन धर्म में पाँच महाव्रतों- अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), अपरिग्रह (आवश्यकता से अधिक संग्रह न करना) और ब्रह्मचर्य (इंद्रियों पर नियंत्रण)- की शिक्षा दी गई है। ये भारत की आंतरिक और विदेश नीति का भी हिस्सा रहे हैं।
3. निवृत्तिमूलक: जैन दर्शन सांसारिक सुखों को अस्थायी मानता है और कहता है कि मोक्ष कठोर तपस्या और त्याग से ही प्राप्त होता है।
4. कर्म और पुनर्जन्म: जैन धर्म कर्म और पुनर्जन्म में विश्वास करता है। मनुष्य के सुख-दुख उसके अपने कर्मों का परिणाम होते हैं। कर्मों के फल भोगे बिना जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति नहीं मिलती।
5. सृष्टि की संरचना: जैन दर्शन के अनुसार, सृष्टि चेतन (जीव) और अचेतन (अजीव) तत्वों से बनी है। कर्म इन तत्वों को बाँधे रखते हैं, और कर्मबंधन तोड़ना ही मोक्ष है।
6. अनेकान्तवाद: जैन दर्शन अनेकान्तवाद, सहिष्णुता और समन्वय का महत्व बताता है। महावीर स्वामी ने कहा था कि किसी बात को एक ही नजरिए से नहीं देखना चाहिए, बल्कि कई पहलुओं से समझना चाहिए। यह आज के तनावों को कम करने में मदद करता है।
7. आत्मा की अमरता: महावीर स्वामी का मानना है कि आत्मा अजर-अमर है। जीव ही आत्मा है, और कण-कण में जीवात्मा निवास करती है।
In simple words: जैन धर्म सिखाता है कि हमें सही विश्वास, ज्ञान और आचरण से मोक्ष मिलता है। इसमें अहिंसा जैसे पाँच बड़े नियम हैं। यह कर्मों और पुनर्जन्म में विश्वास करता है और मानता है कि हर चीज को कई तरीकों से समझना चाहिए।

🎯 Exam Tip: जैन धर्म की मुख्य शिक्षाओं जैसे त्रिरत्न, पंच महाव्रत और अनेकान्तवाद को उनके अर्थ सहित स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 3. बौद्ध दर्शन की शिक्षाओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: बौद्ध दर्शन की मुख्य शिक्षाएँ इस प्रकार हैं:
1. चार आर्य सत्य: बौद्ध धर्म की नींव चार आर्य सत्यों पर आधारित है: संसार दुखमय है, दुख का कारण तृष्णा है, दुख का दमन संभव है, और दुख निवारण का मार्ग अष्टांगिक मार्ग है।
2. तृष्णा का त्याग: सांसारिक वस्तुओं की लालसा ही आत्मा को जन्म-मरण के बंधन में बाँधती है। मोक्ष पाने के लिए हमें इस लालसा को खत्म करना होगा, जिसके लिए अष्टांगिक मार्ग का पालन जरूरी है।
3. मध्यम मार्ग: अष्टांगिक मार्ग जीवन जीने का संतुलित रास्ता है। यह कठोर तपस्या और अत्यधिक भोग-विलास दोनों से दूर रहने की शिक्षा देता है, जिससे निर्वाण प्राप्त किया जा सके।
4. अष्टांगिक मार्ग के उपाय: इस मार्ग में आठ उपाय शामिल हैं: सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाक्, सम्यक् कर्मान्त, सम्यक् आजीव, सम्यक् प्रयत्न, सम्यक् स्मृति और सम्यक् समाधि। ये सभी हमें सही जीवन जीने में मदद करते हैं।
5. शील और नैतिकता: महात्मा बुद्ध ने अपनी शिक्षाओं में शील और नैतिकता पर बहुत जोर दिया। उन्होंने अपने शिष्यों को मन, वचन और कर्म से पवित्र रहने को कहा, जिससे आंतरिक शांति और बाहरी सद्भाव बना रहे।
6. दस शील: बुद्ध ने जीवन में दस नैतिक आचरणों का पालन करने को कहा, जिनमें अहिंसा, झूठ न बोलना, चोरी न करना, वस्तुओं का संग्रह न करना, भोग-विलास से दूर रहना, नृत्य-संगीत का त्याग, सुगंधित पदार्थों का त्याग, आरामदायक बिस्तर का त्याग, असमय भोजन न करना और स्त्री-धन का त्याग शामिल है।
7. मोक्ष या निर्वाण: बौद्ध धर्म का अंतिम लक्ष्य मोक्ष या निर्वाण प्राप्त करना है, जिसका अर्थ है मन में उत्पन्न होने वाली तृष्णा की अग्नि को बुझा देना और जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति पाना।
In simple words: बौद्ध धर्म की मुख्य शिक्षाएँ हैं कि संसार दुखों से भरा है, दुखों का कारण हमारी इच्छाएँ हैं, और इच्छाओं को अष्टांगिक मार्ग से खत्म करके मुक्ति (निर्वाण) पाई जा सकती है। यह हमें नैतिक जीवन जीने और दस नियमों का पालन करने को सिखाता है।

🎯 Exam Tip: बौद्ध धर्म की शिक्षाओं को चार आर्य सत्यों, अष्टांगिक मार्ग और दस शीलों के रूप में वर्गीकृत करके समझाएँ।

 

Question 4. मोहम्मद साहब के जीवन पर प्रकाश डालते हुए इस्लाम की शिक्षाओं का वर्णन कीजिए।
Answer:
मोहम्मद साहब का जीवन-परिचय: हजरत मोहम्मद साहब का जन्म 570 ईस्वी में मक्का में हुआ था। उनके पिता अब्दुल्ला और माता आमिना थीं। बचपन में ही माता-पिता दोनों का देहांत हो जाने के कारण, उनका पालन-पोषण उनकी दाई हलीमा ने किया। 25 साल की उम्र में उनका विवाह 40 साल की विधवा खदीजा से हुआ। उन्होंने अरब में फैली अंधविश्वासों और मूर्तिपूजा का विरोध करते हुए लोगों को संदेश दिया कि अल्लाह (ईश्वर) के अलावा कोई पूजनीय नहीं है और वे अल्लाह के पैगम्बर (दूत) हैं। मक्का के लोग उनकी बातों से नाराज हो गए, जिसके कारण 622 ईस्वी में वे मक्का छोड़कर मदीना चले गए। इस घटना को 'हिजरत' कहा जाता है। 632 ईस्वी में उनकी मृत्यु हो गई।

इस्लाम धर्म की शिक्षाएँ: मोहम्मद साहब द्वारा दी गई शिक्षाएँ पवित्र ग्रंथ 'कुरान' में संकलित हैं, जो निम्न हैं:
1. एक ईश्वर में विश्वास: अल्लाह (ईश्वर) के अतिरिक्त कोई पूजनीय नहीं है, और मोहम्मद उनके पैगंबर हैं।
2. नमाज़: प्रत्येक मुसलमान को दिन में पाँच बार नमाज़ अदा करनी चाहिए।
3. रोज़ा: रमजान के महीने में रोज़ा रखना चाहिए।
4. जकात: अपनी आमदनी का 1/40वाँ भाग गरीबों को दान (जकात) के रूप में देना चाहिए।
5. हज: प्रत्येक मुसलमान को जीवन में कम से कम एक बार हज (मक्का-मदीना की यात्रा) अवश्य करनी चाहिए।
6. कर्म की प्रधानता: इस्लाम धर्म कर्म को महत्व देता है। अच्छे कर्म करने पर जन्नत (स्वर्ग) और बुरे कर्म करने पर दोजख (नरक) मिलता है।
7. पुनर्जन्म का खंडन: इस्लाम पुनर्जन्म के सिद्धांत में विश्वास नहीं करता।
8. मूर्ति पूजा वर्जित: इस्लाम धर्म के अनुयायियों के लिए मूर्ति पूजा मना है।
9. ब्याज लेना मना: इस्लाम धर्म के अनुसार ब्याज लेना मना है।
10. मादक वस्तुओं का निषेध: इस्लाम धर्म में मादक वस्तुओं का प्रयोग निषेध है।
11. आपसी प्रेम और भाईचारा: इस्लाम धर्म आपसी प्रेम व भाईचारे में विश्वास करता है।
In simple words: मोहम्मद साहब का जन्म मक्का में हुआ था और वे मदीना चले गए थे, जिसे हिजरत कहते हैं। उनकी शिक्षाओं में एक भगवान को मानना, दिन में पाँच बार नमाज पढ़ना, दान देना, रोज़े रखना, और मक्का की यात्रा करना शामिल है। इस्लाम बुरे कामों से बचाता है और आपसी प्रेम सिखाता है।

🎯 Exam Tip: मोहम्मद साहब के जीवन की मुख्य घटनाओं (जन्म, हिजरत, मृत्यु) और इस्लाम की प्रमुख शिक्षाओं (पंच स्तंभ) को स्पष्ट बिंदुओं में लिखें।

 

Question 5. ईसा मसीह का परिचय देते हुए ईसाई धर्म के दर्शन पर प्रकाश डालिए।
Answer:
ईसा मसीह का परिचय: ईसा मसीह का जन्म बैथलेहम नामक गाँव में हुआ था, जो जुडिया प्रांत में था। उनके पिता का नाम यूसुफ और माता का नाम मरियम था, जो बढ़ईगिरी का काम करते थे। ईसा मसीह ने भी शुरुआत में अपने माता-पिता के व्यवसाय को अपनाया। बाद में उन्हें आध्यात्मिक प्रेरणा मिली और उन्होंने अपने विचारों को लोगों में फैलाना शुरू कर दिया। 30 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने उपदेशों को ईसाई धर्म के रूप में लोगों तक पहुँचाना शुरू किया। उन्होंने यहूदी धर्म में फैली कुरीतियों और अंधविश्वासों का विरोध किया, सदाचारपूर्ण और प्रेममय जीवन जीने पर जोर दिया। उन्होंने गरीबों और पीड़ितों की सेवा करने पर विशेष बल दिया। उनकी बढ़ती लोकप्रियता से चिंतित यहूदी धर्माधिकारियों ने उन पर स्वतंत्र राज्य स्थापित करने और यहूदियों को शासक वर्ग के खिलाफ भड़काने का आरोप लगाया। इन्हीं षड्यंत्रों के तहत उनके शिष्य जुडास ने धोखे से उन्हें गिरफ्तार करवाया। ईसा मसीह को राजद्रोही और धर्मद्रोही घोषित कर शुक्रवार के दिन सूली पर चढ़ा दिया गया।

ईसाई धर्म-दर्शन (सिद्धान्त): ईसा मसीह के उपदेश ईसाइयों के पवित्र धार्मिक ग्रंथ 'बाईबिल' में संकलित हैं। ईसाई धर्म-दर्शन के सिद्धांत या उपदेश निम्नलिखित हैं:
1. ईश्वर एक है, वह सर्वशक्तिमान और सर्वव्यापी है।
2. ईश्वर की दृष्टि में सभी जीव समान हैं।
3. सभी मनुष्य ईश्वर की संतान हैं, अतः हम सभी आपस में भाई-भाई हैं। यह मानवता की एकता को दर्शाता है।
4. ईसाई धर्म का प्रमुख सिद्धांत प्रेम है। ईसा मसीह ने कहा था कि मनुष्य को सबके साथ प्रेम से रहना चाहिए।
5. ईसा मसीह ने क्षमाशीलता पर जोर देते हुए कहा था कि हमें सभी को क्षमा करना चाहिए तथा क्रोध और बदले की भावना से कोई काम नहीं करना चाहिए।
6. ईसा मसीह का कहना था कि "पाप से घृणा करो पापी से नहीं।"
7. ईसाई धर्म के अनुसार मनुष्य को सदाचारपूर्ण जीवन व्यतीत करना चाहिए।
8. ईसाई धर्म के अनुसार मानव को अधिक धन-संपत्ति का संग्रह नहीं करना चाहिए, बल्कि दूसरों के साथ बांटना चाहिए।
9. ईसा मसीह ने अहिंसा पर जोर देते हुए कहा था कि दूसरों को कष्ट नहीं पहुँचाना चाहिए।
10. ईसा मसीह ने दया, करुणा, सत्य, अहिंसा, परोपकार, सद्व्यवहार, सहिष्णुता आदि गुणों को ग्रहण करने पर जोर देते हुए कहा था कि सदाचारी व्यक्ति ही ईश्वरीय सत्ता में प्रवेश पा सकता है।
In simple words: ईसा मसीह का जन्म बैथलेहम में हुआ था। उन्होंने प्रेम, दया और क्षमा का संदेश दिया। ईसाई धर्म सिखाता है कि भगवान एक है, सभी लोग भाई-बहन हैं, और हमें दूसरों से प्यार करना चाहिए, धन जमा नहीं करना चाहिए और अहिंसा का पालन करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: ईसा मसीह के जीवन की मुख्य घटनाओं (जैसे जन्म, शिक्षाएँ, सूली) और ईसाई धर्म के प्रमुख सिद्धांतों (जैसे प्रेम, क्षमा, समानता) को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

 

Question 1. विश्व के किन्हीं दो प्रमुख दर्शनों का नाम बताइए।
Answer: विश्व के दो प्रमुख दर्शन हैं:
1. वैदिक दर्शन
2. जैन दर्शन
ये दोनों दर्शन भारत में उत्पन्न हुए और इन्होंने भारतीय संस्कृति को बहुत प्रभावित किया।
In simple words: दुनिया के दो बड़े दर्शन वैदिक दर्शन और जैन दर्शन हैं।

🎯 Exam Tip: भारतीय दर्शनों के नाम याद रखें, जैसे वैदिक, जैन, बौद्ध आदि।

 

Question 3. वैदिक युग में लोग किन-किन देव शक्तियों की उपासना करते थे?
Answer: वैदिक युग में लोग प्रकृति की विभिन्न शक्तियों को देव रूप में पूजते थे। कुछ प्रमुख देव शक्तियाँ जिनकी उपासना होती थी, वे निम्न हैं:
1. इन्द्र (वर्षा और युद्ध के देवता)
2. अग्नि (अग्नि देवता, जो यज्ञ में आहुति को देवताओं तक ले जाते हैं)
3. वरुण (जल और नैतिक व्यवस्था के देवता)
4. यम (मृत्यु के देवता)
इन देवताओं की पूजा प्रकृति के प्रति सम्मान और उनसे सुख-समृद्धि की कामना के लिए की जाती थी।
In simple words: वैदिक काल में लोग प्रकृति के कई देवताओं को पूजते थे, जैसे इंद्र, अग्नि, वरुण और यम।

🎯 Exam Tip: वैदिक काल के प्रमुख देवताओं के नाम और उनके कार्यों को याद रखें।

 

Question 4. वैदिक दर्शन में धर्म और पाप किसे कहा गया है।
Answer: वैदिक दर्शन में दूसरों की सेवा करने को 'धर्म' कहा गया है। धर्म का अर्थ है सही आचरण और नैतिक कर्तव्य का पालन करना। इसके विपरीत, दूसरों को दुःख देने और नुकसान पहुँचाने को 'पाप' कहा गया है। पाप वह कार्य है जो नैतिक सिद्धांतों के विरुद्ध हो और समाज को हानि पहुँचाए।
In simple words: वैदिक दर्शन कहता है कि दूसरों की मदद करना धर्म है और दूसरों को दुख पहुँचाना पाप है।

🎯 Exam Tip: धर्म और पाप की सरल परिभाषाओं को याद रखें, जो वैदिक दर्शन के नैतिक सिद्धांतों को दर्शाती हैं।

 

Question 5. जैन धर्म का वास्तविक संस्थापक किसे माना जाता है ?
Answer: जैन धर्म का वास्तविक संस्थापक महावीर स्वामी को माना जाता है। हालाँकि, जैन परंपरा में उनसे पहले भी 23 तीर्थंकर हुए थे, लेकिन महावीर स्वामी ने जैन धर्म को व्यवस्थित रूप दिया और उसकी शिक्षाओं को व्यापक रूप से प्रचारित किया।
In simple words: जैन धर्म के असली संस्थापक महावीर स्वामी माने जाते हैं।

🎯 Exam Tip: जैन धर्म के वास्तविक संस्थापक के नाम को पहले तीर्थंकर से अलग करके याद रखें।

 

Question 6. महावीर स्वामी का जन्म कब व कहाँ हुआ?
Answer: महावीर स्वामी का जन्म 599 ईसा पूर्व में वैशाली के समीप कुण्डग्राम में हुआ था। यह स्थान वर्तमान बिहार राज्य में स्थित है।
In simple words: महावीर स्वामी का जन्म 599 ईसा पूर्व में वैशाली के पास कुण्डग्राम में हुआ था।

🎯 Exam Tip: महावीर स्वामी के जन्म वर्ष और स्थान को ठीक से याद रखें।

 

Question 7. महावीर स्वामी के माता-पिता का क्या नाम था?
Answer: महावीर स्वामी के पिता का नाम सिद्धार्थ था और माता का नाम त्रिशला था। उनके माता-पिता दोनों क्षत्रिय कुल से संबंधित थे।
In simple words: महावीर स्वामी के पिता सिद्धार्थ और माता त्रिशला थीं।

🎯 Exam Tip: जैन धर्म के प्रमुख व्यक्तित्वों के पारिवारिक विवरण भी याद रखें।

 

Question 9. जैन धर्म का उद्देश्य क्या है?
Answer: जैन धर्म का मुख्य उद्देश्य संसार की मोह-माया और इंद्रियों पर विजय पाना है, ताकि व्यक्ति मोक्ष प्राप्त कर सके. इस तरह आत्मा को बंधन से मुक्ति मिलती है.
In simple words: जैन धर्म सिखाता है कि हमें दुनिया की चीजों और अपनी इच्छाओं से ऊपर उठना चाहिए ताकि हम मुक्ति पा सकें.

🎯 Exam Tip: जब भी किसी धर्म के उद्देश्य के बारे में पूछा जाए, तो उसके मूल दर्शन और अंतिम लक्ष्य (जैसे मोक्ष, निर्वाण) को स्पष्ट रूप से बताएं.

 

Question 10. त्रिरत्न क्या हैं? बताइए।
Answer: महावीर स्वामी ने मोक्ष प्राप्त करने के लिए तीन मुख्य उपाय बताए थे, जिन्हें त्रिरत्न कहा जाता है. ये हैं सम्यक् ज्ञान (सही ज्ञान), सम्यक् दर्शन (सही विश्वास), और सम्यक् चरित्र (सही आचरण). इन तीनों का पालन करने से आत्म-शुद्धि होती है.
In simple words: त्रिरत्न का मतलब है तीन अनमोल रत्न: सही जानना, सही मानना, और सही करना. इनसे हमें मुक्ति मिलती है.

🎯 Exam Tip: त्रिरत्न के तीनों भागों—सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन, और सम्यक् चरित्र—को हमेशा एक साथ याद रखें और तीनों को समझाएं.

 

Question 11. जैन दर्शन ने गृहस्थ लोगों के लिए कौन-कौन से नियम बताए?
Answer: जैन दर्शन ने गृहस्थ लोगों के लिए पाँच मुख्य नियम बताए हैं, जिन्हें पंच महाव्रत कहा जाता है. ये नियम हैं:
1. अहिंसा (किसी को मन, वचन या कर्म से कष्ट न देना)
2. सत्य (हमेशा सच बोलना)
3. अस्तेय (चोरी न करना)
4. अपरिग्रह (आवश्यकता से अधिक चीजें जमा न करना)
5. ब्रह्मचर्य (इंद्रियों पर नियंत्रण रखना)
In simple words: जैन धर्म में घर-परिवार वाले लोगों को पाँच बड़े नियम मानने होते हैं: किसी को दुख न देना, सच बोलना, चोरी न करना, ज्यादा सामान इकट्ठा न करना, और अपनी इंद्रियों को काबू में रखना.

🎯 Exam Tip: पंच महाव्रतों को याद करने के लिए उनके मुख्य शब्दों (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य) को क्रम से याद रखें.

 

Question 12. महात्मा बुद्ध का जन्म कब व कहाँ हुआ?
Answer: महात्मा बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में कपिलवस्तु गणराज्य के शाक्यवंशीय क्षत्रिय कुल में हुआ था. उनके जन्मस्थान को लुम्बिनी के नाम से भी जाना जाता है, जो अब नेपाल में है.
In simple words: महात्मा बुद्ध 563 ईसा पूर्व में कपिलवस्तु के शाक्य परिवार में पैदा हुए थे.

🎯 Exam Tip: प्रमुख ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के जन्म स्थान और समय को सही ईसा पूर्व (B.C.E.) या ईस्वी (C.E.) के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है.

 

Question 13. बौद्ध धर्म के संस्थापक कौन थे?
Answer: बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध थे. उन्हें 'सिद्धार्थ गौतम' के नाम से भी जाना जाता है और ज्ञान प्राप्त होने के बाद वे 'बुद्ध' कहलाए.
In simple words: बौद्ध धर्म महात्मा बुद्ध ने शुरू किया था.

🎯 Exam Tip: प्रमुख धर्मों के संस्थापकों के नाम और उनके धर्म को हमेशा स्पष्ट रूप से याद रखें.

 

Question 15. महात्मा बुद्ध ने सर्वप्रथम उपदेश कहाँ दिया?
Answer: महात्मा बुद्ध ने अपना सर्वप्रथम उपदेश बौद्ध गया (बोधगया) में दिया था. यह उपदेश उन्होंने ज्ञान प्राप्ति के बाद सारनाथ में अपने पाँच शिष्यों को दिया, जिसे 'धर्मचक्र प्रवर्तन' कहा जाता है.
In simple words: महात्मा बुद्ध ने सबसे पहले बोधगया में उपदेश दिया था.

🎯 Exam Tip: महात्मा बुद्ध के प्रथम उपदेश के स्थान (बोधगया/सारनाथ) और घटना (धर्मचक्र प्रवर्तन) दोनों को याद रखना चाहिए.

 

Question 16. महापरिनिर्वाण किसे कहा जाता है ?
Answer: महात्मा बुद्ध के शरीर त्यागने की घटना को महापरिनिर्वाण कहा जाता है. बौद्ध धर्म में यह माना जाता है कि महापरिनिर्वाण के बाद व्यक्ति जन्म और मृत्यु के चक्र से पूरी तरह मुक्त हो जाता है.
In simple words: जब महात्मा बुद्ध ने अपना शरीर छोड़ा, उस घटना को महापरिनिर्वाण कहते हैं.

🎯 Exam Tip: महापरिनिर्वाण का अर्थ केवल मृत्यु नहीं, बल्कि पुनर्जन्म के चक्र से अंतिम मुक्ति है.

 

Question 17. अष्टांगिक मार्ग किस दर्शन से सम्बन्धित है ?
Answer: अष्टांगिक मार्ग बौद्ध दर्शन से सम्बन्धित है. यह महात्मा बुद्ध द्वारा दुःखों को समाप्त करने और निर्वाण प्राप्त करने के लिए बताया गया एक महत्वपूर्ण मार्ग है.
In simple words: अष्टांगिक मार्ग बौद्ध धर्म का एक रास्ता है.

🎯 Exam Tip: अष्टांगिक मार्ग बौद्ध धर्म की सबसे महत्वपूर्ण शिक्षाओं में से एक है, जो दुःख निरोध का मार्ग बताता है.

 

Question 18. हजरत मोहम्मद की शिक्षाएँ किस ग्रन्थ में संग्रहित हैं ?
Answer: हजरत मोहम्मद की शिक्षाएँ पवित्र ग्रन्थ 'कुरान शरीफ' में संग्रहित हैं. यह इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र और आधारभूत ग्रन्थ है.
In simple words: हजरत मोहम्मद की बातें कुरान शरीफ नाम की किताब में लिखी हैं.

🎯 Exam Tip: प्रमुख धर्मों के पवित्र ग्रंथों के नाम याद रखना सामान्य ज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है.

 

Question 19. खलीफा किसे कहते हैं ?
Answer: इस्लाम धर्म में हजरत मोहम्मद के शिष्यों और उनके उत्तराधिकारियों को खलीफा कहते हैं. खलीफा इस्लाम के राजनीतिक और धार्मिक नेता होते हैं.
In simple words: इस्लाम में, हजरत मोहम्मद के बाद आने वाले नेताओं को खलीफा कहते हैं.

🎯 Exam Tip: खलीफा का पद इस्लामिक इतिहास में राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था.

 

Question 20. ईसाई धर्म के दो सम्प्रदायों के नाम लिखिए।
Answer: ईसाई धर्म के दो प्रमुख सम्प्रदाय हैं:
1. रोमन कैथोलिक
2. प्रोटेस्टेन्ट
ये दोनों सम्प्रदाय ईसाई धर्म के अंदर विभिन्न मान्यताओं और प्रथाओं का पालन करते हैं.
In simple words: ईसाई धर्म के दो मुख्य हिस्से हैं: रोमन कैथोलिक और प्रोटेस्टेन्ट.

🎯 Exam Tip: विश्व के बड़े धर्मों के प्रमुख संप्रदायों के नाम जानना उपयोगी होता है.

 

Question 21. ईसा मसीह का जन्म कहाँ हुआ था ?
Answer: ईसा मसीह का जन्म बैथलेहम (जूडिया प्रांत) नामक गाँव में हुआ था. यह स्थान प्राचीन यहूदी साम्राज्य का हिस्सा था.
In simple words: ईसा मसीह बैथलेहम नाम की जगह पर पैदा हुए थे.

🎯 Exam Tip: ईसा मसीह का जन्मस्थान बैथलेहम ईसाई धर्म में एक पवित्र स्थान माना जाता है.

 

Question 23. जरथुष्ट्र का जन्म कहाँ हुआ ?
Answer: जरथुष्ट्र का जन्म पश्चिमी ईरान के अजरबेजान प्रान्त में हुआ था. उन्हें पारसी धर्म का संस्थापक माना जाता है.
In simple words: जरथुष्ट्र का जन्म ईरान के अजरबेजान इलाके में हुआ था.

🎯 Exam Tip: जरथुष्ट्र पारसी धर्म के पैगंबर थे, और उनका जन्मस्थान ईरान में है.

 

Question 24. पारसी धर्म में दानवीय शक्ति का प्रतीक किसे माना जाता है ?
Answer: पारसी धर्म में दानवीय शक्ति का प्रतीक 'अहरिमन' को माना जाता है. अहरिमन बुराई और अंधकार का प्रतिनिधित्व करता है, जो दैवी शक्ति अहुरमज्दा के विपरीत है.
In simple words: पारसी धर्म में 'अहरिमन' बुरी ताकत का प्रतीक है.

🎯 Exam Tip: पारसी धर्म में दैवी (अहुरमज्दा) और दानवीय (अहरिमन) शक्तियों के बीच संघर्ष एक केंद्रीय अवधारणा है.

 

Question 25. पारसी धर्म का पवित्र ग्रंथ कौन-सा है ?
Answer: पारसी धर्म का पवित्र ग्रंथ 'अवेस्ता-ए-जेंद' है. इसमें जरथुष्ट्र की शिक्षाएँ और पारसी धर्म के नियम शामिल हैं.
In simple words: पारसी धर्म की पवित्र किताब का नाम अवेस्ता-ए-जेंद है.

🎯 Exam Tip: सभी प्रमुख धर्मों के पवित्र ग्रंथों के नाम याद रखना सामान्य ज्ञान के लिए आवश्यक है.

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. वेदों के बारे में आप क्या जानते हैं ?
Answer: वेद विश्व के सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ हैं. ये चार हैं: ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद. ये भारतीय संस्कृति और ज्ञान के आधार स्तंभ हैं.
1. ऋग्वेद: यह विश्व का सबसे पुराना और पहला ग्रंथ माना जाता है. इसमें देवताओं की स्तुति में कहे गए भजन (सूक्त) हैं.
2. यजुर्वेद: इस वेद में यज्ञ और कर्मकांड से जुड़े नियम और मंत्र बताए गए हैं, जिनका उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों में होता है.
3. सामवेद: इसमें यज्ञों में गाए जाने वाले मंत्रों और संगीत का संकलन है. यह भारतीय संगीत का स्रोत भी माना जाता है.
4. अथर्ववेद: इस वेद में जादुई मंत्रों, औषधियों और सामान्य जीवन से जुड़े विषयों का संग्रह है. यह लोगों की समस्याओं को सुलझाने के उपाय बताता है.
In simple words: वेद दुनिया की सबसे पुरानी धार्मिक किताबें हैं. ये चार हैं- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, और अथर्ववेद. हर वेद में अलग-अलग तरह के ज्ञान और मंत्र हैं, जो प्राचीन भारत की संस्कृति को बताते हैं.

🎯 Exam Tip: चारों वेदों के नाम और प्रत्येक की मुख्य विशेषता को याद रखें, क्योंकि यह भारतीय इतिहास और संस्कृति का आधार है.

 

Question 2. जैन धर्म के पंच महाव्रत कौन-कौन से हैं? संक्षेप में बताइए।
Answer: जैन धर्म के पंच महाव्रत वे पाँच मुख्य नियम हैं जिनका पालन मोक्ष प्राप्त करने के लिए किया जाता है. ये हैं:
1. अहिंसा: मन, वचन और कर्म से किसी भी जीव को कोई हानि न पहुँचाना.
2. सत्य: हमेशा सच बोलना और अप्रिय व कठोर वचन न कहना.
3. अस्तेय: चोरी न करना; किसी भी वस्तु को बिना अनुमति के ग्रहण न करना.
4. अपरिग्रह: आवश्यकता से अधिक धन-संपत्ति या वस्तुओं का संग्रह न करना, ताकि मोह से बचा जा सके.
5. ब्रह्मचर्य: इंद्रियों पर पूरा नियंत्रण रखना, विशेष रूप से यौन इच्छाओं पर, और मन को शुद्ध रखना.
In simple words: जैन धर्म के पाँच बड़े नियम हैं: किसी को चोट न पहुँचाना, सच बोलना, चोरी न करना, ज्यादा सामान इकट्ठा न करना और अपनी इंद्रियों को काबू में रखना.

🎯 Exam Tip: पंच महाव्रत जैन धर्म के नैतिक जीवन का आधार हैं, इसलिए उनके नामों और संक्षिप्त अर्थों को जानना महत्वपूर्ण है.

 

Question 3. बौद्ध धर्म का मध्यम मार्ग क्या है ? समझाइए।
Answer: महात्मा बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के लिए न तो बहुत कठोर तपस्या और न ही अत्यधिक सुख-सुविधाओं का जीवन चुना. उन्होंने इन दोनों के बीच का रास्ता अपनाया, जिसे 'मध्यम मार्ग' या 'अष्टांगिक मार्ग' कहते हैं. यह मार्ग दुःख से मुक्ति और निर्वाण प्राप्त करने का व्यावहारिक तरीका है, जिसमें आठ उपाय शामिल हैं:
1. सम्यक् दृष्टि (सही समझ)
2. सम्यक् संकल्प (सही इरादा)
3. सम्यक् वाणी (सही बोल)
4. सम्यक् कर्म (सही काम)
5. सम्यक् आजीव (सही जीविका)
6. सम्यक् प्रयत्न (सही प्रयास)
7. सम्यक् स्मृति (सही याददाश्त)
8. सम्यक् समाधि (सही ध्यान)
बुद्ध ने उदाहरण देकर समझाया कि यदि वीणा के तार बहुत कस दिए जाएं तो वे टूट जाएंगे और ढीले छोड़ दिए जाएं तो उनसे स्वर नहीं निकलेगा, इसलिए संतुलन आवश्यक है.
In simple words: मध्यम मार्ग बौद्ध धर्म का रास्ता है जो बहुत ज्यादा कठोरता और बहुत ज्यादा आराम दोनों से बचाता है. इसमें आठ नियम हैं जो सही ढंग से जीने में मदद करते हैं ताकि दुख खत्म हो सकें.

🎯 Exam Tip: मध्यम मार्ग के लिए अष्टांगिक मार्ग के आठों तत्वों को याद रखना और यह समझना महत्वपूर्ण है कि यह संतुलन पर जोर देता है, अत्यधिक भोग या अत्यधिक त्याग पर नहीं.

 

Question 4. अष्टांगिक मार्ग के प्रमुख उपायों का वर्णन कीजिए।
Answer: अष्टांगिक मार्ग के आठ प्रमुख उपाय बौद्ध दर्शन के अनुसार दुखों को समाप्त करने और निर्वाण प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हैं. ये उपाय इस प्रकार हैं:
1. सम्यक् दृष्टि: सत्य और असत्य, पाप और पुण्य के बीच का अंतर समझना, और चार आर्य सत्यों पर विश्वास करना.
2. सम्यक् संकल्प: दुःख के मूल कारण (तृष्णा या लालसा) से दूर रहने का मजबूत इरादा रखना और दृढ़तापूर्वक इसका पालन करना.
3. सम्यक् वाणी: हमेशा सच बोलना, मीठी और उपयोगी बातें करना, और किसी को ठेस न पहुँचाना.
4. सम्यक् कर्मान्त: हमेशा सच्चे और अच्छे काम करना, जैसे कि किसी की जान न लेना, चोरी न करना, और गलत व्यवहार से बचना.
5. सम्यक् आजीव: अपनी आजीविका कमाने के लिए पवित्र और ईमानदारी के तरीके अपनाना, किसी को नुकसान न पहुँचाना.
6. सम्यक् प्रयत्न: शरीर को अच्छे कार्यों में लगाने के लिए उचित और निरंतर परिश्रम करना.
7. सम्यक् स्मृति: अपनी गलतियों को याद रखना, विवेक और सावधानी से कर्म करने का प्रयास करना, और शरीर, मन तथा भावनाओं के प्रति जागरूक रहना.
8. सम्यक् समाधि: अपने मन को एकाग्र करने के लिए ध्यान लगाना, जिससे मानसिक शांति और अंतर्दृष्टि प्राप्त हो.
In simple words: अष्टांगिक मार्ग में आठ तरीके हैं: सही सोचना, सही फैसला करना, सही बोलना, सही काम करना, सही तरीके से कमाना, सही कोशिश करना, सही याद रखना, और सही ध्यान लगाना. ये हमें सही जीवन जीने में मदद करते हैं.

🎯 Exam Tip: अष्टांगिक मार्ग के प्रत्येक उपाय के नाम और उसके संक्षिप्त अर्थ को याद रखें. यह बौद्ध धर्म की नैतिकता और अभ्यास का सार है.

 

Question 6. इस्लाम धर्म का विस्तार कैसे हुआ ? अथवा इस्लाम धर्म का दक्षिण एवं दक्षिण पूर्वी एशिया में अधिक प्रसार क्यों हुआ है ?
Answer: इस्लाम धर्म का विस्तार मुख्य रूप से खलीफाओं और उनके अनुयायी शासकों की वजह से हुआ. इन शासकों ने सैनिक बल का प्रयोग करके दक्षिण एशिया और विश्व के अन्य हिस्सों में अपने साम्राज्य स्थापित किए, जिससे इस्लाम का तेजी से प्रसार हुआ. इसके परिणामस्वरूप, आज इस्लाम के अनुयायियों की संख्या इसके उद्गम स्थल (अरब) की तुलना में दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशिया में कहीं अधिक है.
In simple words: इस्लाम धर्म खलीफाओं और राजाओं के ताकतवर शासन के कारण फैला. उन्होंने कई देशों में अपनी सत्ता फैलाई, जिससे दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशिया में यह धर्म बहुत ज्यादा फैल गया.

🎯 Exam Tip: इस्लाम के प्रसार में राजनीतिक और सैन्य कारकों की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करना आवश्यक है, साथ ही उन क्षेत्रों का भी उल्लेख करें जहाँ इसका अधिक विस्तार हुआ.

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. जरथुष्ट्र का जीवन-परिचय देते हुए पारसी दर्शन के प्रमुख सिद्धान्त बताइए।
Answer:
जरथुष्ट्र का जीवन परिचय:
जरथुष्ट्र का जन्म पश्चिमी ईरान के अजरबेजान प्रान्त में हुआ था. उनके पिता का नाम पोमशष्पा और माता का नाम दुरोधा था. वे बचपन से ही बहुत विचारशील थे. लगभग तीस वर्ष की आयु में उन्हें सबलान पर्वत पर ज्ञान प्राप्त हुआ. उन्हें पारसी धर्म और दर्शन का संस्थापक माना जाता है. पारसी धर्म का पवित्र ग्रंथ 'अवेस्ता-ए-जेंद' है.

पारसी दर्शन के मुख्य सिद्धान्त (शिक्षाएँ):
पारसी दर्शन के मुख्य सिद्धान्त निम्नलिखित हैं:
1. द्वैतवाद: पारसी धर्म मानता है कि संसार में दैवी और दानवीय, यानी अच्छी और बुरी, दो तरह की शक्तियाँ हैं. दैवी शक्ति का प्रतीक अहुरमज्दा है और दानवीय शक्ति का प्रतीक अहरिमन है.
2. अहुरमज्दा: यह एक महान देवता है जिसने पृथ्वी, मनुष्य और स्वर्ग को बनाया है. अहुरमज्दा मनुष्यों को गलत सोचने, गलत रास्ते पर चलने और बुरे काम करने से रोकता है. यह प्रकाश, अच्छाई और रचनात्मकता का प्रतिनिधित्व करता है.
3. अहरिमन: यह दानवीय शक्ति व्यक्ति को बुराई की ओर ले जाती है और नरक की ओर ढकेलती है. अहरिमन अंधकार, बुराई और विनाश का प्रतीक है.
4. संघर्ष और विजय: पारसी दर्शन के अनुसार, अहुरमज्दा और अहरिमन के बीच लगातार संघर्ष चलता रहता है, जिसमें अंततः अहुरमज्दा की ही विजय होती है. यह दिखाता है कि अच्छाई हमेशा बुराई पर जीत हासिल करती है.
5. सद्कर्म का महत्व: यह धर्म सिखाता है कि संसार में रहते हुए अच्छे कर्म (सद्कर्म) करने से ही स्वर्ग की प्राप्ति होती है. मनुष्य को 'सद् विचार, सद् वचन और सद् कर्म' का पालन करना चाहिए.
6. आत्मा और शरीर: इस दर्शन के अनुसार, शरीर के दो भाग होते हैं- शारीरिक और आध्यात्मिक. मृत्यु के बाद शरीर तो नष्ट हो जाता है, लेकिन आध्यात्मिक भाग जीवित रहता है और अपने कर्मों के अनुसार फल भोगता है.
7. पंच तत्व: पारसी धर्म यह भी मानता है कि यह संसार जल, अग्नि, वायु, पृथ्वी और आकाश जैसे पाँच तत्वों से बना है.
In simple words: जरथुष्ट्र पारसी धर्म के संस्थापक थे, जिनका जन्म ईरान में हुआ था. पारसी धर्म मानता है कि दुनिया में अच्छाई (अहुरमज्दा) और बुराई (अहरिमन) की दो ताकतें हैं. अच्छे काम करने से स्वर्ग मिलता है, और अंत में अच्छाई ही जीतती है.

🎯 Exam Tip: जरथुष्ट्र के जीवन-परिचय में उनके जन्मस्थान, संस्थापक के रूप में उनकी भूमिका, और पवित्र ग्रंथ का उल्लेख करें. सिद्धान्तों में द्वैतवाद, अहुरमज्दा और अहरिमन की अवधारणा को स्पष्ट करें.

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