RBSE Solutions Class 9 Science Chapter 9 बल और गति

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Detailed Chapter 9 बल और गति RBSE Solutions for Class 9 Science

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Class 9 Science Chapter 9 बल और गति RBSE Solutions PDF

उदाहरण 9.1. एक छात्र अपने वाहन से 100 किलोमीटर दूरी 2 घंटे में तय करता है। छात्र के वाहन की औसत चाल ज्ञात करिये।
Answer: दिए गए आंकड़ों के अनुसार, छात्र ने 100 किलोमीटर की दूरी 2 घंटे में तय की है। औसत चाल निकालने के लिए, हम कुल दूरी को कुल समय से भाग देते हैं। इस प्रकार, वाहन की औसत चाल 50 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। चाल यह बताती है कि कोई वस्तु कितनी तेजी से अपनी जगह बदल रही है।
In simple words: एक छात्र 100 किलोमीटर की दूरी 2 घंटे में तय करता है। उसकी औसत चाल 50 किलोमीटर प्रति घंटा है।

🎯 Exam Tip: औसत चाल की गणना करते समय, हमेशा कुल तय की गई दूरी को कुल लिए गए समय से विभाजित करें, चाहे रास्ते में गति में बदलाव हुआ हो या नहीं।

 

उदाहरण 9.2. एक बस पूर्व दिशा में गतिमान है। यह 4 घण्टे में 200 किलोमीटर चलती है। बस का वेग ज्ञात कीजिए।
Answer: बस ने 4 घंटे में 200 किलोमीटर की दूरी पूर्व दिशा में तय की है। वेग निकालने के लिए, हम विस्थापन को समय से भाग देते हैं, और इसमें दिशा भी शामिल होती है। इसलिए, बस का वेग 50 किलोमीटर प्रति घंटा पूर्व दिशा में है। वेग किसी वस्तु की गति और दिशा दोनों को बताता है।
In simple words: बस 4 घंटे में 200 किलोमीटर पूर्व दिशा में चलती है। इसका वेग 50 किलोमीटर प्रति घंटा पूर्व दिशा में है।

🎯 Exam Tip: चाल और वेग में अंतर को ध्यान में रखें; चाल केवल गति बताती है, जबकि वेग में गति और दिशा दोनों शामिल होती हैं।

 

उदाहरण 9.3. विराम अवस्था से चलकर रेलगाड़ी 10 मिनट में 72 किमी/घंटा का वेग प्राप्त कर लेती है। रेलगाड़ी को त्वरण एकसमान है है तो
(i) रेलगाड़ी का त्वरण,
(ii) रेलगाड़ी द्वारा इस वेग तक पहुँचने में तय की गई दूरी ज्ञात कीजिए।

Answer: दी गई जानकारी के अनुसार, रेलगाड़ी विराम अवस्था (शुरुआती वेग \( u = 0 \)) से चलना शुरू करती है। उसका अंतिम वेग \( v = 72 \) किमी/घंटा है, जिसे हमें मीटर प्रति सेकंड में बदलना होगा: \( 72 \times \frac{1000}{3600} = 20 \) मी/से। समय \( t = 10 \) मिनट है, जिसे सेकंड में बदलने पर \( 10 \times 60 = 600 \) सेकंड होता है।
(i) त्वरण (\( a \)) की गणना गति के पहले समीकरण \( v = u + at \) का उपयोग करके की जा सकती है।
\( 20 = 0 + a \times 600 \)
\( \implies a = \frac{20}{600} \)
\( \implies a = \frac{1}{30} \) मी/से\(^{2}\)
(ii) रेलगाड़ी द्वारा तय की गई दूरी (\( s \)) की गणना गति के दूसरे समीकरण \( s = ut + \frac{1}{2}at^{2} \) का उपयोग करके की जा सकती है।
\( s = 0 \times 600 + \frac{1}{2} \times \frac{1}{30} \times (600)^{2} \)
\( s = 0 + \frac{1}{60} \times 360000 \)
\( s = 6000 \) मी
\( \implies s = 6 \) किमी। त्वरण यह बताता है कि वेग में कितनी तेजी से बदलाव आ रहा है।
In simple words: एक रुकी हुई रेलगाड़ी 10 मिनट में 72 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ती है। इसका त्वरण 1/30 मी/से\(^{2}\) है और इस दौरान यह 6 किलोमीटर की दूरी तय करती है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, सभी इकाइयों को एक समान प्रणाली (जैसे SI इकाई) में बदलना बहुत महत्वपूर्ण है ताकि गणनाएँ सही हों।

 

उदाहरण 9.4. एक वस्तु का प्रारम्भिक वेग 4 मी/से है। यह वस्तु 2 मी/सेके त्वरण से गतिशील है। 5 सेकेण्ड पश्चात् वस्तु का वेग तथा उसके द्वारा तय की गई दूरी ज्ञात कीजिए।
Answer: दी गई जानकारी के अनुसार, वस्तु का प्रारंभिक वेग (\( u \)) 4 मी/से है, त्वरण (\( a \)) 2 मी/से\(^{2}\) है और समय (\( t \)) 5 सेकंड है। हमें अंतिम वेग (\( v \)) और तय की गई दूरी (\( s \)) ज्ञात करनी है।
गति के पहले समीकरण \( v = u + at \) का उपयोग करके:
\( v = 4 + 2 \times 5 \)
\( v = 4 + 10 \)
\( \implies v = 14 \) मी/से
गति के दूसरे समीकरण \( s = ut + \frac{1}{2}at^{2} \) का उपयोग करके:
\( s = 4 \times 5 + \frac{1}{2} \times 2 \times (5)^{2} \)
\( s = 20 + \frac{1}{2} \times 2 \times 25 \)
\( s = 20 + 25 \)
\( \implies s = 45 \) मी। यह दर्शाता है कि त्वरण के कारण वस्तु की गति और स्थिति दोनों बदल जाती हैं।
In simple words: एक वस्तु 4 मी/से की गति से शुरू होती है और 2 मी/से\(^{2}\) की रफ्तार से तेज होती है। 5 सेकंड बाद उसकी गति 14 मी/से होगी और वह 45 मीटर की दूरी तय कर चुकी होगी।

🎯 Exam Tip: गति के समीकरणों का उपयोग करते समय, सही समीकरण चुनना और सभी दी गई मात्राओं को सही इकाइयों में रखना आवश्यक है।

 

उदाहरण 9.5. 5 किग्रा देव्यमाने वाली वस्तु में 10 मी/सेका त्वरण उत्पन्न करने के लिए कितने बल की आवश्यकता होगी ? यदि बल को दो गुना कर दिया जाए तो त्वरण कितना ले जाएगा ?
Answer: दिए गए आंकड़ों के अनुसार, वस्तु का द्रव्यमान (\( m \)) 5 किग्रा है और उसमें उत्पन्न होने वाला त्वरण (\( a \)) 10 मी/से\(^{2}\) है। बल की गणना न्यूटन के दूसरे नियम (\( F = ma \)) का उपयोग करके की जा सकती है।
\( F = 5 \times 10 \)
\( F = 50 \) न्यूटन
अतः, आवश्यक बल का मान 50 न्यूटन होगा।
प्रश्न के दूसरे भाग के अनुसार, यदि बल को दो गुना कर दिया जाए, तो:
In simple words: 5 किग्रा की वस्तु को 10 मी/से\(^{2}\) की गति से चलाने के लिए 50 न्यूटन बल चाहिए। यदि बल को दुगना किया जाए, तो त्वरण भी दुगना हो जाएगा।

🎯 Exam Tip: न्यूटन का दूसरा नियम, \( F=ma \), यह बताता है कि बल द्रव्यमान और त्वरण के सीधे अनुपात में होता है। यदि बल दुगुना हो, तो त्वरण भी दुगुना हो जाता है, बशर्ते द्रव्यमान स्थिर रहे।

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

प्रश्न 1. निम्न में से सदिश राशि है
(a) कार्य
(b) समय
(c) द्रव्यमान
(d) गुरुत्वीय बल
Answer: (d) गुरुत्वीय बल
In simple words: सदिश राशि वह होती है जिसमें दिशा और परिमाण दोनों होते हैं। गुरुत्वीय बल में एक निश्चित दिशा (पृथ्वी के केंद्र की ओर) होती है, इसलिए यह एक सदिश राशि है।

🎯 Exam Tip: सदिश और अदिश राशियों के उदाहरणों को याद रखें। अदिश राशियों में केवल परिमाण होता है, जबकि सदिश राशियों में परिमाण के साथ-साथ दिशा भी होती है।

 

प्रश्न 2. 4N एवं 3N के दो बल एक ही वस्तु पर विपरीत दिशा में कार्यरत हैं, कण पर बल का परिमाण होगा
(a) 5N
(b) 7N
(c) 1N
(d) 1N एवं 7N के बीच
Answer: (c) 1N
In simple words: जब दो बल विपरीत दिशा में लगते हैं, तो कुल बल निकालने के लिए उन्हें एक-दूसरे से घटाया जाता है। यहाँ, 4 न्यूटन - 3 न्यूटन = 1 न्यूटन का बल लगेगा।

🎯 Exam Tip: बलों को जोड़ते समय, उनकी दिशा पर ध्यान दें। समान दिशा में लगने वाले बल जुड़ते हैं, जबकि विपरीत दिशा में लगने वाले बल घटते हैं।

 

प्रश्न 3. वेग में परिवर्तन की दर है
(a) बल
(b) संवेग
(c) त्वरण
(d) विस्थापन
Answer: (c) त्वरण
In simple words: किसी वस्तु के वेग में समय के साथ बदलाव को त्वरण कहते हैं। यह बताता है कि वस्तु कितनी तेजी से अपनी गति बदल रही है।

🎯 Exam Tip: त्वरण की परिभाषा और उसका सूत्र (\( a = \frac{\Delta v}{\Delta t} \)) को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 5. एकसमान वेग से गतिमान वस्तु का वेग समय आरेख
(a) R
P
समय
(b) P
समय
(c)
समय P
(d)
समय
Answer: (c)
In simple words: जब कोई वस्तु एकसमान वेग से चलती है, तो उसका वेग समय के साथ नहीं बदलता। इसलिए, वेग-समय ग्राफ में वेग को दर्शाने वाली रेखा समय अक्ष के समानांतर एक सीधी रेखा होगी।

🎯 Exam Tip: वेग-समय ग्राफ को ध्यान से पढ़ें। एकसमान वेग का मतलब है कि ग्राफ में वेग की रेखा समय अक्ष के समानांतर और सीधी रहेगी।

 

प्रश्न 6. वस्तु का संवेग निर्भर करता है
(a) वस्तु के द्रव्यमान पर
(b) वस्तु के विस्थापन पर
(c) विस्थापन में लगे समय पर
(d) उपरोक्त सभी पर
Answer: (a) वस्तु के द्रव्यमान पर
In simple words: संवेग किसी वस्तु के द्रव्यमान और उसके वेग पर निर्भर करता है। यदि किसी एक में बदलाव होता है, तो संवेग भी बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: संवेग का सूत्र \( p = mv \) (द्रव्यमान गुणा वेग) याद रखें। इससे स्पष्ट होता है कि संवेग सीधे द्रव्यमान और वेग पर निर्भर करता है।

 

प्रश्न 7. बल (F), द्रव्यमान (m) तथा त्वरण (a) सम्बन्धित समीकरण है
(a) F = ma
(b) m = aF
(c) a = mF
(d) ma = \( \frac {1}{\mathrm{F}} \)
Answer: (a) F = ma
In simple words: यह न्यूटन का दूसरा नियम है जो बताता है कि किसी वस्तु पर लगने वाला बल उसके द्रव्यमान और उसमें उत्पन्न त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के गति के दूसरे नियम का सूत्र \( F=ma \) भौतिकी में सबसे महत्वपूर्ण सूत्रों में से एक है और इसे हमेशा याद रखना चाहिए।

 

प्रश्न 9. संवेग का मात्रक है
(a) मीटर/सेकण्ड
(b) किग्रा-मीटर/सेकण्ड
(c) किग्रा-भार
(d) किग्रा-मीटर/सेकण्ड
Answer: (d) किग्रा-मीटर/सेकण्ड
In simple words: संवेग का मात्रक द्रव्यमान (किलोग्राम) और वेग (मीटर प्रति सेकंड) के मात्रकों को गुणा करके मिलता है, इसलिए यह किग्रा-मीटर/सेकंड होता है।

🎯 Exam Tip: किसी भी भौतिक राशि का मात्रक उसके सूत्र से प्राप्त किया जा सकता है। संवेग \( p = mv \) होता है, इसलिए इसका मात्रक \( \text{kg} \times \text{m/s} \) है।

 

प्रश्न 10. यदि कोई पिण्ड नियत संवेग से सीधी रेखा में गतिमान है। यदि उस पर कोई बाह्य बल न लगे तो
(a) इसके वेग में वृद्धि होगी
(b) वेग नियत रहेगा
(c) थोड़ी देर पश्चात् पिण्ड रुक जायेगा
(d) चाल में वृद्धि होगी
Answer: (b) वेग नियत रहेगा
In simple words: यदि कोई बाहरी बल नहीं लगता है और संवेग स्थिर है, तो वस्तु का वेग भी स्थिर रहता है। यह न्यूटन के गति के पहले नियम जैसा ही है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन का पहला नियम (जड़त्व का नियम) बताता है कि कोई वस्तु अपनी गति की अवस्था को तब तक नहीं बदलती जब तक उस पर कोई बाहरी बल न लगे। नियत संवेग का मतलब भी यही है।

 

प्रश्न 11. किसी वस्तु का जड़त्व निर्भर करता है
(a) वस्तु के गुरुत्व केन्द्र पर
(b) वस्तु के द्रव्यमान पर
(c) गुरुत्वीय त्वरण पर
(d) वस्तु के आकार पर
Answer: (b) वस्तु के द्रव्यमान पर
In simple words: किसी वस्तु का जड़त्व उसके द्रव्यमान पर निर्भर करता है। जिस वस्तु का द्रव्यमान जितना अधिक होता है, उसे रोकने या उसकी गति बदलने के लिए उतना ही अधिक बल लगाना पड़ता है।

🎯 Exam Tip: जड़त्व, वस्तु का वह गुण है जो उसकी गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करता है। यह सीधे द्रव्यमान के समानुपाती होता है।

 

प्रश्न 12. 5 किग्रा का एक पिण्ड 10 m/sec\(^{2}\) त्वरण से सरल रेखा में गतिमान है। पिण्ड पर कार्यरत परिणामी बल होगा
(a) 50 N
(b) 0.5 N
(c) 0
(d) (Typesetting math: 27%)
Answer: (a) 50 N
In simple words: बल निकालने के लिए द्रव्यमान (5 किग्रा) और त्वरण (10 मी/से\(^{2}\)) को गुणा करते हैं, जिससे 50 न्यूटन का बल आता है।

🎯 Exam Tip: बल की गणना के लिए \( F=ma \) सूत्र का उपयोग करें, जहाँ \( F \) बल, \( m \) द्रव्यमान और \( a \) त्वरण है। सभी इकाइयों को SI प्रणाली में रखना सुनिश्चित करें।

 

प्रश्न 14. 1 किग्रा, द्रव्यमान की वस्तु का भार होगा
(a) 1 न्यूटन
(b) 9.08 न्यूटन
(c) 9.8 न्यूटन
(d) 8.9 न्यू टन्
Answer: (s) 9.8 न्यूटन
In simple words: वस्तु का भार उसके द्रव्यमान (1 किग्रा) और गुरुत्वीय त्वरण (\( g \), लगभग 9.8 मी/से\(^{2}\)) का गुणनफल होता है, इसलिए यह 9.8 न्यूटन होता है।

🎯 Exam Tip: भार (\( W \)) और द्रव्यमान (\( m \)) में अंतर समझें। भार एक बल है (\( W = mg \)), जबकि द्रव्यमान वस्तु में पदार्थ की मात्रा है। पृथ्वी पर \( g \) का मान लगभग 9.8 मी/से\(^{2}\) होता है।

 

प्रश्न 15. यदि वस्तु का द्रव्यमान, वेग v, व त्वरण a है तो संवेग p होगा
(a) Z = m x a
(b) p = m x v
(c) p = m/v
(d) P = u/m.
Answer: (b) p = m x v
In simple words: संवेग को किसी वस्तु के द्रव्यमान और उसके वेग के गुणनफल के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह बताता है कि कोई वस्तु कितनी गति में है।

🎯 Exam Tip: संवेग एक सदिश राशि है। इसका मतलब है कि इसकी दिशा वही होती है जो वेग की दिशा होती है।

 

प्रश्न 16. कोई वस्तु अपनी स्थिर या गति की अवस्था में परिवर्तन नहीं कर सकतीं
(a) अपने द्रव्यमान के कारण
(b) अपने भार के कारण
(c) अपने त्वरण के कारण
(d) अपने जड़त्व के कारण
Answer: (d) अपने जड़त्व के कारण
In simple words: जड़त्व किसी वस्तु का वह प्राकृतिक गुण है जिसके कारण वह अपनी विराम या गति की अवस्था में बदलाव का विरोध करती है।

🎯 Exam Tip: जड़त्व, न्यूटन के गति के पहले नियम का आधार है। यह हर वस्तु में होता है और उसके द्रव्यमान पर निर्भर करता है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. 40 मी/से, के समान वेग से गतिशील वस्तु का 10 सेकण्ड के बाद कितना त्वरण होगा ?
Answer: यदि कोई वस्तु समान वेग से गतिशील है, तो उसके वेग में कोई परिवर्तन नहीं होता। क्योंकि त्वरण वेग में परिवर्तन की दर है, इसलिए ऐसी वस्तु का त्वरण शून्य होगा। एक स्थिर वेग वाली वस्तु पर कोई शुद्ध बल काम नहीं कर रहा होता।
In simple words: एक वस्तु यदि हमेशा एक ही गति से चल रही है, तो उसका वेग नहीं बदलता। इसलिए, उसका त्वरण शून्य होगा।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि त्वरण केवल तभी होता है जब वेग बदलता है, चाहे वह गति की मात्रा (चाल) में बदलाव हो या दिशा में।

 

प्रश्न 2. m द्रव्यमान एवं u वेग से गतिशील वस्तु दीवार से टकराने के पश्चात् पुनः u वेग से लौट जाती है वस्तु के संवेग में कितना परिवर्तन होगा।
Answer: प्रारंभिक संवेग वस्तु के द्रव्यमान (\( m \)) और प्रारंभिक वेग (\( u \)) का गुणनफल होता है, यानी \( mu \)। जब वस्तु विपरीत दिशा में उसी वेग (\( u \)) से लौटती है, तो उसका अंतिम वेग \( -u \) हो जाता है (क्योंकि दिशा बदल गई है)। अंतिम संवेग तब \( m(-u) = -mu \) होगा। संवेग में परिवर्तन अंतिम संवेग में से प्रारंभिक संवेग को घटाकर निकाला जाता है, इसलिए संवेग में कुल परिवर्तन \( -mu - (mu) = -2mu \) होगा। यह दर्शाता है कि बल लगने पर संवेग में बदलाव आता है।
In simple words: जब \( m \) द्रव्यमान की वस्तु \( u \) वेग से टकराकर वापस आती है, तो संवेग में कुल बदलाव \( -2mu \) होता है क्योंकि वेग की दिशा उल्टी हो जाती है।

🎯 Exam Tip: संवेग एक सदिश राशि है, इसलिए उसकी दिशा का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। विपरीत दिशा में गति को दर्शाने के लिए ऋणात्मक चिह्न का उपयोग करें।

 

प्रश्न 3. एक रेलगाड़ी 120 किमी/घण्टा के वेग से चल रही है। यह 30 मिनट में कितनी दूरी तय करेगी ?
Answer: रेलगाड़ी की चाल 120 किमी/घंटा है। समय 30 मिनट है, जिसे घंटे में बदलने पर \( \frac{30}{60} = \frac{1}{2} \) घंटा होता है। तय की गई दूरी की गणना चाल और समय के गुणनफल से की जाती है।
दूरी = चाल \( \times \) समय
दूरी = \( 120 \) किमी/घंटा \( \times \frac{1}{2} \) घंटा
दूरी = \( 60 \) किमी। इस तरह के सीधे गणना वाले प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
In simple words: 120 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने वाली रेलगाड़ी 30 मिनट में 60 किलोमीटर की दूरी तय करेगी।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, सुनिश्चित करें कि चाल और समय की इकाइयां एक-दूसरे से मेल खाती हों (जैसे किमी/घंटा और घंटा)। यदि नहीं, तो उन्हें एक समान इकाई में बदलें।

 

प्रश्न 4. किसी गतिमान वस्तु के वेग-समय ग्राफ तथा समय अक्ष के बीच स्थित क्षेत्रफल किसके बराबर होता है ?
Answer: किसी गतिमान वस्तु के वेग-समय ग्राफ और समय अक्ष के बीच का क्षेत्रफल वस्तु द्वारा तय की गई दूरी के बराबर होता है। यह क्षेत्रफल वस्तु के विस्थापन को दर्शाता है। यह एक महत्वपूर्ण ग्राफिकल अवधारणा है।
In simple words: वेग-समय ग्राफ के नीचे का क्षेत्र वस्तु ने कितनी दूरी तय की, यह बताता है।

🎯 Exam Tip: वेग-समय ग्राफ का ढलान त्वरण देता है, जबकि ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल विस्थापन या तय की गई दूरी देता है। यह अंतर याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 6. एक गतिशील साइकिल पर घर्षण बल किस दिशा में होता है ?
Answer: एक गतिशील साइकिल पर घर्षण बल हमेशा उसकी गति की विपरीत दिशा में लगता है। यह बल साइकिल को धीमा करने की कोशिश करता है। घर्षण बल वह प्रतिरोध है जो दो सतहों के संपर्क में आने पर उत्पन्न होता है जब वे एक दूसरे के ऊपर फिसलती हैं या फिसलने की कोशिश करती हैं।
In simple words: चलती साइकिल पर घर्षण बल हमेशा साइकिल के चलने की उल्टी दिशा में लगता है।

🎯 Exam Tip: घर्षण बल हमेशा गति का विरोध करता है। यह याद रखें कि गति की दिशा चाहे जो भी हो, घर्षण बल हमेशा उसके विपरीत होगा।

 

प्रश्न 7. एक क्रिकेट का खिलाड़ी गेंद को पकड़ने के लिए अपना हाथ नीचे (पीछे) की ओर क्यों करता है ?
Answer: क्रिकेट का खिलाड़ी गेंद को पकड़ते समय अपने हाथों को नीचे (पीछे) की ओर इसलिए खींचता है ताकि गेंद को रोकने का समय बढ़ जाए। जब गेंद को रोकने का समय बढ़ता है, तो गेंद के संवेग में परिवर्तन की दर (मंदन) कम हो जाती है। न्यूटन के दूसरे नियम के अनुसार, यदि संवेग परिवर्तन की दर कम होती है, तो गेंद द्वारा खिलाड़ी के हाथों पर लगाया गया बल भी कम हो जाता है, जिससे खिलाड़ी को कम चोट लगती है। यह एक व्यावहारिक अनुप्रयोग है।
In simple words: खिलाड़ी गेंद पकड़ते समय हाथ पीछे करते हैं ताकि गेंद को रुकने में ज़्यादा समय लगे। इससे गेंद का बल कम हो जाता है और उन्हें चोट कम लगती है।

🎯 Exam Tip: संवेग परिवर्तन की दर बल के सीधे समानुपाती होती है। समय को बढ़ाकर बल के प्रभाव को कम किया जा सकता है, जो आवेग-संवेग प्रमेय का एक उदाहरण है।

 

प्रश्न 8. एक खिलाडी ऊँची कूद/लम्बी कूद में कूदने से पहले कुछ देर क्यों भागता है ?
Answer: एक खिलाड़ी ऊँची कूद या लंबी कूद में कूदने से पहले इसलिए दौड़ता है ताकि उसे प्रारंभिक वेग मिल सके। दौड़ने से खिलाड़ी का क्षैतिज संवेग बढ़ जाता है। संवेग के कारण, कूदने के बाद भी खिलाड़ी आगे की ओर बढ़ता रहता है, जिससे वह अधिक दूरी या ऊँचाई तक पहुँच पाता है। यह संवेग के सिद्धांत का एक उदाहरण है।
In simple words: खिलाड़ी कूदने से पहले इसलिए भागते हैं ताकि उन्हें तेज़ी मिल सके। इससे वे ज़्यादा दूर या ऊँचा कूद पाते हैं।

🎯 Exam Tip: संवेग (द्रव्यमान × वेग) एक महत्वपूर्ण कारक है जो यह तय करता है कि कोई वस्तु कितनी दूर या कितनी ऊँची जा सकती है, खासकर कूदने जैसी गतिविधियों में।

 

प्रश्न 9. चलती बस के खड़ा यात्री आगे की ओर क्यों गिरता है ?
Answer: चलती बस में खड़ा यात्री अचानक ब्रेक लगने पर आगे की ओर गिरता है क्योंकि गति के जड़त्व के कारण उसका शरीर बस के साथ गति में होता है। जब बस अचानक रुकती है, तो यात्री के पैर (जो बस के फर्श के संपर्क में होते हैं) बस के साथ तुरंत विराम अवस्था में आ जाते हैं। लेकिन शरीर का ऊपरी हिस्सा गति के जड़त्व के कारण उसी गति में बने रहने की कोशिश करता है, जिससे वह आगे की ओर झुक जाता है। यह न्यूटन के गति के पहले नियम का एक उदाहरण है।
In simple words: चलती बस में अचानक ब्रेक लगने पर यात्री आगे गिरते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर का ऊपरी हिस्सा गति के कारण आगे बढ़ता रहता है, जबकि पैर रुक जाते हैं।

🎯 Exam Tip: जड़त्व एक वस्तु का गुण है जो उसकी गति की अवस्था में किसी भी परिवर्तन का विरोध करता है, चाहे वह विराम की अवस्था में हो या गति की।

 

प्रश्न 10. एक वस्तु नियत वेग से गतिशील है, तो उस पर परिणामी बल कितना होगा ?
Answer: यदि कोई वस्तु नियत वेग से गतिशील है, तो उस पर कार्य करने वाला परिणामी बल शून्य होगा। इसका कारण यह है कि नियत वेग का अर्थ है कि वस्तु के वेग में कोई परिवर्तन नहीं हो रहा है, यानी उसका त्वरण शून्य है। न्यूटन के गति के दूसरे नियम (\( F = ma \)) के अनुसार, यदि त्वरण (\( a \)) शून्य है, तो बल (\( F \)) भी शून्य होगा। यह संतुलन की अवस्था है।
In simple words: यदि कोई वस्तु हमेशा एक ही गति से और एक ही दिशा में चल रही है, तो उस पर कोई बल नहीं लग रहा होता, इसलिए परिणामी बल शून्य होता है।

🎯 Exam Tip: नियत वेग का अर्थ हमेशा शून्य त्वरण होता है। न्यूटन के गति के पहले और दूसरे नियमों को समझने के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवधारणा है।

 

प्रश्न 11. एक व्यक्ति बर्फ से जमे हुए तालाब के बीच में बर्फ पर खड़ा है उसे किनारे पर पहुँचने के लिए क्या प्रयास करने चाहिए ?
Answer: यदि कोई व्यक्ति बर्फ से जमे हुए तालाब के बीच में बर्फ पर खड़ा है और उसे किनारे पर पहुँचना है, तो उसे कुछ ऐसे प्रयास करने चाहिए जिससे वह न्यूटन के तीसरे नियम का उपयोग कर सके। एक प्रभावी तरीका यह है कि वह अपने हाथ या किसी वस्तु को विपरीत दिशा में फेंके, जिससे उसे प्रतिक्रिया बल के रूप में आगे की ओर धक्का मिलेगा। कीलदार जूते घर्षण को कम करते हैं, जो यहाँ समस्या है। बर्फ पर फिसलने से बचने के लिए, वह अपने शरीर के गुरुत्वाकर्षण केंद्र को भी थोड़ा झुका सकता है और छोटे-छोटे कदम उठा सकता है।
In simple words: बर्फ पर किनारे पहुँचने के लिए व्यक्ति को कोई चीज विपरीत दिशा में फेंकनी चाहिए ताकि प्रतिक्रिया बल से वह आगे बढ़ सके।

🎯 Exam Tip: न्यूटन का तीसरा नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम) ऐसे मामलों में लागू होता है: हर क्रिया के लिए एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।

 

प्रश्न 13. जड़त्व क्या है ?
Answer: जड़त्व किसी वस्तु का वह गुण है जिसके कारण वह अपनी विराम की अवस्था या एकसमान गति की अवस्था में किसी भी परिवर्तन का विरोध करती है। दूसरे शब्दों में, जड़त्व के कारण कोई वस्तु तब तक अपनी अवस्था नहीं बदल सकती जब तक उस पर कोई बाहरी असंतुलित बल न लगाया जाए। यह वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर करता है; जितना अधिक द्रव्यमान, उतना अधिक जड़त्व।
In simple words: जड़त्व किसी वस्तु का वह गुण है जो उसे तब तक अपनी जगह पर या गति में रखता है जब तक कोई बाहरी बल उसे न बदल दे।

🎯 Exam Tip: जड़त्व न्यूटन के गति के पहले नियम का मूल सिद्धांत है। यह हर वस्तु में होता है और उसके द्रव्यमान के सीधे अनुपात में होता है।

 

प्रश्न 14. ब्रेक लगाने से चलती हुई गाड़ी रुक जाती है। इस प्रक्रिया में गाड़ी के संवेग का क्या होता है ?
Answer: जब चलती हुई गाड़ी में ब्रेक लगाए जाते हैं, तो गाड़ी का संवेग कम होने लगता है और अंततः शून्य हो जाता है। इस प्रक्रिया में, गाड़ी का संवेग संरक्षित नहीं रहता बल्कि यह स्थानांतरित हो जाता है। गाड़ी के संवेग का अधिकांश हिस्सा सड़क (पृथ्वी) और आसपास की हवा के अणुओं में घर्षण के रूप में स्थानांतरित हो जाता है, जिससे गतिज ऊर्जा का नुकसान होता है। यह एक ऊर्जा और संवेग स्थानांतरण का उदाहरण है।
In simple words: ब्रेक लगाने पर गाड़ी का संवेग कम होकर रुक जाता है। यह संवेग सड़क और हवा में गर्मी और गति के रूप में फैल जाता है।

🎯 Exam Tip: संवेग के संरक्षण का नियम केवल तब लागू होता है जब सिस्टम पर कोई बाहरी बल कार्य न कर रहा हो। ब्रेक लगाने की स्थिति में घर्षण एक बाहरी बल है, इसलिए संवेग संरक्षित नहीं रहता।

 

प्रश्न 15. बन्दूक से गोली छोड़ने से पहले बन्दूक तथा गोली का संवेग कितना है ?
Answer: बन्दूक से गोली छोड़ने से पहले, बन्दूक और गोली दोनों विराम अवस्था में होते हैं। चूंकि संवेग द्रव्यमान और वेग का गुणनफल होता है, और दोनों का वेग शून्य है, तो उनका कुल संवेग भी शून्य होगा। यह स्थिति संवेग संरक्षण के नियम का प्रारंभिक बिंदु है।
In simple words: गोली चलाने से पहले, बन्दूक और गोली दोनों रुके हुए होते हैं, इसलिए उनका कुल संवेग शून्य होता है।

🎯 Exam Tip: संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार, यदि कोई बाहरी बल कार्य न करे, तो किसी भी प्रक्रिया (जैसे गोली चलाना) से पहले और बाद में कुल संवेग समान रहता है।

 

प्रश्न 16. प्रणोद क्या है ?
Answer: प्रणोद किसी सतह पर लंबवत (सीधी) लगने वाले बल को कहते हैं। यह वह बल है जो किसी वस्तु की सतह पर उसके सामान्य रूप से कार्य करता है। प्रणोद का उपयोग अक्सर तरल पदार्थों में दबाव के संदर्भ में किया जाता है, जहाँ यह सतह पर कुल लंबवत बल को दर्शाता है। यह एक प्रकार का बल ही है।
In simple words: प्रणोद वह बल है जो किसी चीज की सतह पर सीधा (90 डिग्री पर) लगता है।

🎯 Exam Tip: प्रणोद और दाब के बीच अंतर समझें: दाब प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाला प्रणोद है, जबकि प्रणोद स्वयं एक बल है।

 

प्रश्न 17. आपेक्षिक घनत्व की इकाई क्या है ?
Answer: आपेक्षिक घनत्व की कोई इकाई नहीं होती है। आपेक्षिक घनत्व किसी पदार्थ के घनत्व और संदर्भ पदार्थ (आमतौर पर पानी) के घनत्व का अनुपात होता है। क्योंकि यह दो समान राशियों का अनुपात है, इनकी इकाइयाँ एक-दूसरे को रद्द कर देती हैं, जिससे आपेक्षिक घनत्व एक विमा रहित राशि बन जाती है।
In simple words: आपेक्षिक घनत्व की कोई इकाई नहीं होती क्योंकि यह दो घनत्वों का अनुपात है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि अनुपात वाली राशियाँ, जैसे आपेक्षिक घनत्व, का कोई मात्रक नहीं होता। यह समझने के लिए महत्वपूर्ण है कि यह केवल एक तुलनात्मक मान है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. निम्न की परिभाषा दीजिए-.
(i) विश
(ii) पण,

Answer:
(i) विश्राम (विराम): विश्राम की अवस्था वह होती है जब कोई वस्तु समय के साथ अपनी स्थिति में परिवर्तन नहीं करती है। यह गति का अभाव है, यानी वस्तु का वेग शून्य होता है। विराम अवस्था में भी वस्तु में जड़त्व होता है।
(ii) प्रणोद: प्रणोद किसी सतह पर लंबवत (90 डिग्री के कोण पर) लगने वाले बल को कहते हैं। यह वह बल है जो किसी वस्तु की सतह पर सामान्य रूप से कार्य करता है। इसे अक्सर तरल पदार्थों में दबाव के संदर्भ में उपयोग किया जाता है। प्रणोद वह धक्का है जो किसी सतह को सीधा महसूस होता है।
In simple words: (i) विश्राम मतलब जब कोई चीज हिलती नहीं, अपनी जगह पर रहती है। (ii) प्रणोद वह सीधा बल है जो किसी सतह पर लगता है।

🎯 Exam Tip: परिभाषाएँ स्पष्ट और संक्षिप्त होनी चाहिए। महत्वपूर्ण शब्दों जैसे 'समय के साथ स्थिति में परिवर्तन नहीं' (विश्राम) और 'सतह पर लंबवत बल' (प्रणोद) का उपयोग करें।

 

प्रश्न 2. एकसमान गति से क्या तात्पर्य है ? एक उदाहरण बताइए।
Answer: एकसमान गति का अर्थ है कि जब कोई वस्तु समान समय-अंतरालों में समान दूरी तय करती है, तो उसकी गति एकसमान गति कहलाती है। ऐसी गति में, वस्तु का वेग स्थिर रहता है, यानी न तो उसकी चाल बदलती है और न ही उसकी दिशा। इसका मतलब है कि वस्तु पर कोई बाहरी असंतुलित बल कार्य नहीं कर रहा है और उसका त्वरण शून्य होता है।
उदाहरण: एक सीधी सड़क पर स्थिर चाल से चलती हुई कार। यदि एक कार हर सेकंड में 20 मीटर की दूरी तय करती है और सीधी चलती है, तो उसकी गति एकसमान होती है। यह दर्शाता है कि गति में नियमितता होती है।
In simple words: एकसमान गति तब होती है जब कोई वस्तु हर बार एक ही समय में उतनी ही दूरी तय करती है। जैसे सीधी सड़क पर एक ही गति से चलती कार।

🎯 Exam Tip: एकसमान गति में, वेग स्थिर होता है और त्वरण शून्य होता है। इसे दूरी-समय ग्राफ पर एक सीधी रेखा (जिसका ढलान स्थिर होता है) या वेग-समय ग्राफ पर समय अक्ष के समानांतर एक सीधी रेखा द्वारा दर्शाया जाता है।

 

प्रश्न 3. यदि क्रिया सदैव प्रतिक्रिया के बराबर होती है तो स्पष्ट कीजिये कि घोड़े द्वारा खींची गई घोडा गाडी आगे की ओर कैसे चलती है ?
Answer: घोड़ा गाड़ी को न्यूटन के गति के तीसरे नियम के अनुसार आगे खींचता है। जब घोड़ा आगे बढ़ने के लिए ज़मीन पर बल लगाता है, तो वह अपने पैरों से ज़मीन को पीछे की ओर धकेलता है (क्रिया बल)। न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार, ज़मीन घोड़े पर एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया बल लगाती है, जो घोड़े को आगे की ओर धकेलता है। इसी प्रतिक्रिया बल के कारण घोड़ा और उसके पीछे जुड़ी गाड़ी आगे बढ़ पाती है। यह एक प्रणाली के भीतर बलों के संतुलन का उदाहरण है।
In simple words: घोड़ा ज़मीन को पीछे धकेलता है। ज़मीन घोड़े को आगे धकेलती है, और इसी बल से घोड़ा-गाड़ी आगे बढ़ती है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन का तीसरा नियम हमेशा क्रिया-प्रतिक्रिया बलों को अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हुए बताता है, न कि एक ही वस्तु पर। यही कारण है कि वे एक-दूसरे को रद्द नहीं करते।

 

प्रश्न 4. फल से लदे पेड़ की शाखाओं को जोर-जोर से हिलाने पर फल नीचे गिरते हैं। कारण बताओ।
Answer: फल से लदे पेड़ की शाखाओं को जोर-जोर से हिलाने पर फल नीचे गिरते हैं, इसका कारण विराम का जड़त्व है। जब शाखाओं को हिलाया जाता है, तो वे गति में आ जाती हैं। लेकिन उन पर लगे फल विराम अवस्था में रहने की कोशिश करते हैं क्योंकि उनमें विराम का जड़त्व होता है। इस अचानक गति परिवर्तन के कारण, फल शाखाओं से टूटकर नीचे गिर जाते हैं। यह जड़त्व के सिद्धांत का एक सरल उदाहरण है।
In simple words: जब पेड़ की शाखाएं हिलती हैं, तो फल अपनी जगह पर रहने की कोशिश करते हैं। इससे वे शाखा से टूटकर नीचे गिर जाते हैं।

🎯 Exam Tip: विराम का जड़त्व बताता है कि कोई वस्तु तब तक विराम अवस्था में रहती है जब तक उस पर कोई बाहरी बल न लगे। अचानक गति देने पर वस्तु अपनी प्रारंभिक विराम अवस्था को बनाए रखने का प्रयास करती है।

 

प्रश्न 5. पानी के टैंकरों को भरते समय उनके ऊपर कुछ खाली स्थान छोड़ दिया जाता है। कारण स्पष्ट कीजिए।
Answer: पानी के टैंकरों को भरते समय उनके ऊपर कुछ खाली स्थान इसलिए छोड़ा जाता है ताकि पानी के फैलने (तापमान बढ़ने पर) और वाष्पीकरण (भाप बनने पर) के लिए पर्याप्त जगह मिल सके। यदि टैंकर पूरी तरह से भर दिए जाएँ, तो तापमान बढ़ने पर पानी के आयतन में वृद्धि होने या पानी के वाष्पीकृत होकर भाप बनने से टैंकर पर अत्यधिक दबाव पड़ सकता है। यह दबाव इतना अधिक हो सकता है कि टैंकर फट जाए या क्षतिग्रस्त हो जाए। इसलिए, खाली जगह एक सुरक्षा उपाय के रूप में काम करती है।
In simple words: पानी के टैंकरों को पूरा नहीं भरते ताकि पानी फैलने या भाप बनने पर टैंकर पर ज़्यादा दबाव न पड़े और वह सुरक्षित रहे।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि अधिकांश तरल पदार्थ गर्म होने पर फैलते हैं और भाप में बदलने पर बहुत अधिक जगह घेरते हैं। यह भौतिक गुण खाली जगह छोड़ने का मुख्य कारण है।

 

चित्र- नाव से कूदने पर क्रिया-प्रतिक्रिया बल।
Answer: इस चित्र में न्यूटन के तीसरे नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम) को दर्शाया गया है। जब कोई व्यक्ति नाव से कूदने के लिए आगे की ओर धक्का देता है, तो वह अपने पैरों से नाव को पीछे की ओर धकेलता है (क्रिया)। इसके जवाब में, नाव व्यक्ति पर आगे की ओर एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया बल लगाती है। इसी प्रतिक्रिया बल के कारण व्यक्ति आगे की ओर कूद पाता है। नाव पीछे की ओर हट जाती है। यह बल हमेशा जोड़े में कार्य करते हैं।
In simple words: जब कोई आदमी नाव से कूदता है, तो वह नाव को पीछे धकेलता है। बदले में नाव आदमी को आगे धकेलती है, जिससे वह कूद पाता है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार, क्रिया और प्रतिक्रिया बल हमेशा अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं। इसलिए, वे एक-दूसरे को रद्द नहीं करते।

 

प्रश्न 7. “किसी वस्तु पर सदा दो बल जोड़े से लगते हैं, उस पर एक बल सम्भव नहीं होता हैं” इस कथन पर टिप्पणी कीजिए।
Answer: यह कथन न्यूटन के गति के तीसरे नियम को दर्शाता है, जिसे क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम भी कहा जाता है। इस नियम के अनुसार, जब एक वस्तु किसी दूसरी वस्तु पर बल लगाती है (क्रिया), तो दूसरी वस्तु भी पहली वस्तु पर एक समान और विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया बल लगाती है। इसका अर्थ यह है कि बल हमेशा जोड़े में ही मौजूद होते हैं। कोई भी अकेला बल प्रकृति में मौजूद नहीं हो सकता। उदाहरण के लिए, जब आप किसी दीवार को धकेलते हैं, तो दीवार भी आप पर उतना ही बल विपरीत दिशा में लगाती है। यह हमें सिखाता है कि बलों का प्रभाव हमेशा एक दूसरे से जुड़ा होता है।
In simple words: कोई भी बल अकेला काम नहीं करता; हर बल के लिए एक उल्टा और बराबर बल भी हमेशा होता है। यह न्यूटन का तीसरा नियम है।

🎯 Exam Tip: क्रिया और प्रतिक्रिया बल एक ही समय में होते हैं और हमेशा दो अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं, जिससे वे एक-दूसरे को रद्द नहीं करते।

 

प्रश्न 8. गतिक घर्षण एवं लुढकने वाले घर्षण में अन्तर बताइए।
Answer: गतिक घर्षण और लोटनिक घर्षण दोनों ही गति का विरोध करने वाले बल हैं, लेकिन वे अलग-अलग प्रकार की गति में उत्पन्न होते हैं।
**गतिक घर्षण:** यह वह घर्षण बल है जो तब उत्पन्न होता है जब एक वस्तु की सतह दूसरी वस्तु की सतह पर फिसलती है। यह फिसलने वाली गति का विरोध करता है। उदाहरण के लिए, जब आप एक बॉक्स को फर्श पर घसीटते हैं, तो गतिक घर्षण लगता है।
**लोटनिक घर्षण:** यह वह घर्षण बल है जो तब उत्पन्न होता है जब एक वस्तु (जैसे पहिया) दूसरी वस्तु की सतह पर लुढ़कती है। लोटनिक घर्षण आमतौर पर गतिक घर्षण की तुलना में बहुत कम होता है। इसीलिए, गाड़ियों में पहिए लगाए जाते हैं ताकि वे फिसलने के बजाय लुढ़कें और कम घर्षण का अनुभव करें। घर्षण बल हमेशा गति का विरोध करता है।
In simple words: गतिक घर्षण तब लगता है जब चीजें एक-दूसरे पर फिसलती हैं, जबकि लोटनिक घर्षण तब लगता है जब चीजें लुढ़कती हैं। लोटनिक घर्षण, गतिक घर्षण से कम होता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि घर्षण बल हमेशा गति की दिशा के विपरीत लगता है। लोटनिक घर्षण कम होने के कारण पहिए वाली गाड़ियाँ चलाना आसान होता है।

 

प्रश्न 9. संवेग संरक्षण का नियम क्या है ? उदाहरण देकर समझाइए।
Answer: **संवेग संरक्षण का नियम:** यह नियम बताता है कि यदि किसी प्रणाली पर कोई बाहरी असंतुलित बल कार्य नहीं कर रहा है, तो उस प्रणाली का कुल संवेग हमेशा स्थिर (संरक्षित) रहता है। इसका मतलब है कि टकराव या किसी भी आंतरिक क्रिया से पहले और बाद में प्रणाली का कुल संवेग समान रहेगा। यह भौतिकी का एक मौलिक सिद्धांत है।
**उदाहरण:** एक बम का विस्फोट। मान लीजिए एक बम शुरू में विराम अवस्था में है, तो उसका प्रारंभिक वेग शून्य होता है। इसलिए, उसका प्रारंभिक संवेग भी शून्य होगा। जब बम फटता है, तो उसके टुकड़े अलग-अलग दिशाओं में बिखर जाते हैं। हालांकि टुकड़े अलग-अलग दिशाओं में गति करते हैं, लेकिन यदि कोई बाहरी बल कार्य नहीं कर रहा है, तो सभी टुकड़ों के संवेगों का योग (सदिश योग) अभी भी शून्य ही रहेगा। यह आंतरिक बल के कारण होता है।
In simple words: संवेग संरक्षण का नियम कहता है कि जब कोई बाहरी बल न लगे, तो किसी भी चीज का कुल संवेग हमेशा एक जैसा रहता है। जैसे, बम फटने से पहले उसका संवेग शून्य था, और फटने के बाद भी सभी टुकड़ों का कुल संवेग शून्य ही रहेगा।

🎯 Exam Tip: संवेग संरक्षण का नियम तब लागू होता है जब सिस्टम पर कोई बाहरी बल न हो। यह न्यूटन के गति के तीसरे नियम का एक सीधा परिणाम है।

 

प्रश्न 11. एक कार एवं एक ट्रक के रेखीय संवेग बराबर हैं। दोनों में से किसकी चाल अधिक होगी ?
Answer: हमें दिया गया है कि एक कार और एक ट्रक का रेखीय संवेग बराबर है। संवेग (\( p \)) का सूत्र द्रव्यमान (\( m \)) और वेग (\( v \)) का गुणनफल है, यानी \( p = mv \)। चूंकि संवेग बराबर हैं, तो \( p_{car} = p_{truck} \)।
यानी, \( m_{car} \times v_{car} = m_{truck} \times v_{truck} \)। हम जानते हैं कि ट्रक का द्रव्यमान कार के द्रव्यमान से बहुत अधिक होता है (\( m_{truck} > m_{car} \))। समीकरण को संतुलित रखने के लिए, यदि ट्रक का द्रव्यमान अधिक है, तो उसकी चाल (\( v_{truck} \)) कम होनी चाहिए। इसके विपरीत, कार का द्रव्यमान कम होने के कारण उसकी चाल (\( v_{car} \)) अधिक होनी चाहिए ताकि दोनों का संवेग बराबर रहे।
इसलिए, कार की चाल अधिक होगी। यह द्रव्यमान और वेग के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध दिखाता है।
In simple words: कार और ट्रक का संवेग एक जैसा है। क्योंकि ट्रक बहुत भारी होता है, इसलिए कार की गति ट्रक से ज़्यादा होगी।

🎯 Exam Tip: संवेग \( p = mv \) में, \( p \) को स्थिर रखने के लिए यदि \( m \) घटता है तो \( v \) बढ़ता है, और यदि \( m \) बढ़ता है तो \( v \) घटता है।

 

प्रश्न 12. घर्षण के लाभ एवं हानियों को समझाइए।
Answer: घर्षण एक बल है जो गति का विरोध करता है। इसके कई लाभ और हानियाँ हैं।
**लाभ:**
* घर्षण के कारण ही हम ज़मीन पर चल पाते हैं। पैरों और ज़मीन के बीच का घर्षण हमें आगे बढ़ने में मदद करता है।
* वाहन घर्षण के कारण ही सड़कों पर बिना फिसले चल पाते हैं और मोड़ ले पाते हैं। घर्षण के बिना गाड़ियाँ फिसलती रहेंगी।
* गाड़ियों के ब्रेक घर्षण के सिद्धांत पर काम करते हैं, जिससे वे सुरक्षित रूप से रुक पाती हैं।
* माचिस की तीली घर्षण के कारण ही जलती है।
* घर्षण के कारण ही हम पेन को पकड़ पाते हैं और लिख पाते हैं।
**हानियाँ:**
* मशीनों के पुर्जे घर्षण के कारण घिस जाते हैं और टूट-फूट जाते हैं, जिससे उनकी उम्र कम होती है।
* घर्षण के कारण मशीनें गर्म हो जाती हैं, जिससे ऊर्जा का नुकसान होता है और पुर्जों को नुकसान पहुँच सकता है।
* घर्षण के कारण मशीनों की दक्षता कम हो जाती है क्योंकि ऊर्जा का एक हिस्सा घर्षण पर काबू पाने में खर्च हो जाता है।
घर्षण दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग है।
In simple words: घर्षण हमें चलने, गाड़ी चलाने और लिखने में मदद करता है, लेकिन यह मशीनों को घिसाता और गर्म करता है, जिससे ऊर्जा बर्बाद होती है।

🎯 Exam Tip: घर्षण बल एक आवश्यक बुराई है। कुछ स्थितियों में यह फायदेमंद होता है (जैसे चलना), जबकि अन्य में यह हानिकारक होता है (जैसे मशीनों में टूट-फूट)।

 

प्रश्न 14. कुएँ से जल खींचते समय एकाएक रस्सी टूट जाने पर पानी खींचने वाला व्यक्ति पीछे की ओर क्यों गिर पड़ता है ?
Answer: जब कोई व्यक्ति कुएँ से पानी खींचता है, तो वह रस्सी पर अपनी ओर बल लगाता है। रस्सी भी व्यक्ति पर विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया बल लगाती है, जिससे व्यक्ति संतुलित रहता है। यदि अचानक रस्सी टूट जाती है, तो रस्सी द्वारा व्यक्ति पर लगने वाला प्रतिक्रिया बल तुरंत गायब हो जाता है। व्यक्ति आगे की ओर खींचने की आदत में होने के कारण संतुलन खो देता है और पीछे की ओर गिर पड़ता है, क्योंकि उसके शरीर का जड़त्व उसे आगे बढ़ने की कोशिश में रखता है, लेकिन प्रतिक्रिया बल के अभाव में वह संतुलन नहीं बना पाता। बाल्टी जितनी भारी होगी, व्यक्ति को उतना ही ज़्यादा झटका महसूस होगा।
In simple words: पानी खींचते समय रस्सी टूटने पर आदमी पीछे गिर जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि रस्सी का खींचाव अचानक खत्म हो जाता है और आदमी का शरीर पीछे की ओर धकेला जाता है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन का तीसरा नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया) यहाँ लागू होता है। जब क्रिया बल (रस्सी खींचना) अचानक हट जाता है, तो संतुलन बिगड़ जाता है।

 

प्रश्न 15. चलती हुई गाड़ी से अचानक उतरने पर यात्री आगे की ओर गिर पड़ता है, क्यों ? स्पष्ट कीजिए।
Answer: चलती हुई गाड़ी से उतरने पर यात्री आगे की ओर गिर पड़ता है, इसका कारण गति का जड़त्व है। जब यात्री चलती गाड़ी में होता है, तो उसका पूरा शरीर गाड़ी के साथ गति में होता है। जब वह गाड़ी से उतरता है और उसके पैर ज़मीन के संपर्क में आते हैं, तो पैर तुरंत विराम अवस्था में आने की कोशिश करते हैं। लेकिन शरीर का ऊपरी हिस्सा गति के जड़त्व के कारण अभी भी गाड़ी की गति में रहने की कोशिश करता है। इस अंतर के कारण यात्री का संतुलन बिगड़ जाता है और वह आगे की ओर गिर पड़ता है। इस समस्या से बचने के लिए, यात्री को उतरते ही गाड़ी की दिशा में थोड़ी दूर दौड़ना चाहिए।
In simple words: चलती गाड़ी से उतरते ही यात्री आगे गिरते हैं। उनके पैर रुक जाते हैं, लेकिन शरीर का ऊपरी हिस्सा गति के कारण आगे बढ़ता रहता है।

🎯 Exam Tip: जड़त्व, वस्तु का वह गुण है जो उसकी गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करता है। गतिमान वस्तु का जड़त्व उसे गतिमान रखने का प्रयास करता है।

 

प्रश्न 16. लोहे का जहाजे पानी में तैरता है लेकिन उसी लोहे की चद्दर पानी में डूब जाती है। क्यों ?
Answer: लोहे से बनी चीज़ें पानी में तैरती हैं या डूब जाती हैं, यह उनके घनत्व और आर्किमिडीज के सिद्धांत पर निर्भर करता है।
**लोहे की चद्दर का डूबना:** एक साधारण लोहे की चद्दर का घनत्व पानी के घनत्व से अधिक होता है। इसलिए, जब इसे पानी में डाला जाता है, तो यह अपने आयतन के बराबर पानी से अधिक भारी होती है और डूब जाती है।
**लोहे के जहाज का तैरना:** लोहे के जहाज को इस तरह से बनाया जाता है कि उसका आकार खोखला और अवतल (कटोरी जैसा) होता है। इस खोखले आकार के कारण, जहाज का कुल औसत घनत्व (जहाज और उसके अंदर की हवा को मिलाकर) पानी के घनत्व से कम हो जाता है। आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, कोई वस्तु तब तैरती है जब वह अपने भार के बराबर पानी को विस्थापित करती है। जहाज अपने बड़े खोखले आकार के कारण अपने भार से ज़्यादा पानी विस्थापित करता है, जिससे उस पर ऊपर की ओर लगने वाला उत्प्लावन बल उसके कुल भार से अधिक या उसके बराबर हो जाता है और वह तैरता रहता है।
In simple words: लोहे का जहाज इसलिए तैरता है क्योंकि उसका आकार बड़ा और खोखला होता है, जिससे वह अपने वजन से ज़्यादा पानी हटा पाता है। लोहे की चद्दर डूब जाती है क्योंकि उसका घनत्व पानी से ज़्यादा होता है।

🎯 Exam Tip: आर्किमिडीज का सिद्धांत याद रखें: किसी वस्तु पर ऊपर की ओर लगने वाला उत्प्लावन बल, वस्तु द्वारा विस्थापित किए गए तरल के भार के बराबर होता है। वस्तु तभी तैरती है जब उसका औसत घनत्व तरल के घनत्व से कम होता है।

 

प्रश्न 17. घनत्व व आपेक्षिक घनत्व में अन्तर लिखिए।
Answer: घनत्व और आपेक्षिक घनत्व दोनों ही पदार्थों के गुणों का वर्णन करते हैं, लेकिन वे अलग-अलग अवधारणाएँ हैं।
**घनत्व (Density):** किसी वस्तु का घनत्व उसके प्रति इकाई आयतन में मौजूद द्रव्यमान को कहते हैं। इसे \( \rho = \frac{m}{V} \) सूत्र से दर्शाया जाता है, जहाँ \( \rho \) घनत्व, \( m \) द्रव्यमान और \( V \) आयतन है। घनत्व का SI मात्रक किग्रा/मी\(^{3}\) (kg/m\(^{3}\)) होता है। प्रत्येक पदार्थ का एक विशिष्ट घनत्व होता है।
**आपेक्षिक घनत्व (Relative Density):** आपेक्षिक घनत्व किसी पदार्थ के घनत्व और एक संदर्भ पदार्थ (आमतौर पर 4°C पर पानी) के घनत्व का अनुपात होता है। इसे \( \text{आपेक्षिक घनत्व} = \frac{\text{पदार्थ का घनत्व}}{\text{पानी का घनत्व}} \) सूत्र से दर्शाया जाता है। आपेक्षिक घनत्व एक अनुपात होने के कारण इसका कोई मात्रक नहीं होता। यह केवल एक संख्या होती है जो बताती है कि कोई पदार्थ पानी से कितना भारी या हल्का है। यदि आपेक्षिक घनत्व 1 से कम है, तो वस्तु तैरेगी; यदि 1 से अधिक है, तो वह डूबेगी।
In simple words: घनत्व बताता है कि कोई चीज कितनी ठोस है, इसका मात्रक किग्रा/मी\(^{3}\) होता है। आपेक्षिक घनत्व यह बताता है कि कोई चीज पानी से कितनी भारी या हल्की है, इसका कोई मात्रक नहीं होता।

🎯 Exam Tip: घनत्व एक पूर्ण माप है जिसकी इकाई होती है, जबकि आपेक्षिक घनत्व एक तुलनात्मक माप है जिसकी कोई इकाई नहीं होती। यह अंतर महत्वपूर्ण है।

 

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. अदिश एवं सदिश राशियों को समझाइए। किसी सदिश राशि को लिखने का तरीका बताइए। एकांक सदिश की परिभाषा दीजिए।
Answer:

अदिश राशियाँ:
वे भौतिक राशियाँ जिन्हें व्यक्त करने के लिए केवल परिमाण (मात्रा) की आवश्यकता होती है, दिशा की नहीं, अदिश राशियाँ कहलाती हैं। उदाहरण के लिए, लम्बाई, दूरी, द्रव्यमान, समय, चाल, कार्य, ऊर्जा और दाब आदि। इन्हें संख्या और मात्रक से दर्शाया जाता है।

सदिश राशियाँ:
वे भौतिक राशियाँ जिन्हें व्यक्त करने के लिए परिमाण और दिशा दोनों की आवश्यकता होती है, सदिश राशियाँ कहलाती हैं। उदाहरण के लिए, विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, संवेग और आवेग आदि।

सदिश का प्रदर्शन:
सदिश को एक तीर वाली रेखा (तीरनुमा रेखा) से दिखाया जाता है। इस तीर वाली रेखा की लम्बाई राशि के परिमाण के अनुपात में होती है, और तीर का अगला सिरा दिशा बताता है। किसी भी सदिश को लिखते समय, शुरुआत के अक्षर (पुच्छ) को पहले और अंत के अक्षर (शीर्ष) को बाद में लिखा जाता है। एक सदिश को उसके ऊपर एक तीर लगाकर भी दर्शाया जा सकता है, जैसे \( \vec{A} \)।

A B R

चित्र में दिखाए गए सदिश को \( \vec{AB} \) लिखा जाएगा।

एकांक सदिश:
वह सदिश जिसका परिमाण एक (इकाई) होता है, एकांक सदिश कहलाता है। इसका मुख्य काम किसी सदिश राशि की दिशा को बताना होता है।
In simple words: अदिश राशि में सिर्फ मात्रा होती है, सदिश राशि में मात्रा और दिशा दोनों होती है। तीर से दिशा दिखाते हैं और जिस सदिश का मान एक हो, उसे एकांक सदिश कहते हैं।

🎯 Exam Tip: अदिश और सदिश राशियों के उदाहरण याद रखें और सदिश को दर्शाने के तरीके को स्पष्ट करें, खासकर तीर के निशान का महत्व।

 

Question 2. एकसमान एवं असमान गति को समझाइए। वेग-समय ग्राफ की सहायता से गति के समीकरण ज्ञात कीजिए।
Answer:

एकसमान गति:
यदि कोई गतिशील वस्तु बराबर समय-अंतरालों में हमेशा समान दूरी तय करती है, तो उस वस्तु की गति को एकसमान गति कहते हैं। उदाहरण के लिए, जब कोई वस्तु हर 1 सेकंड में 20 मीटर की दूरी तय करती है, तो यह एकसमान गति है। इस गति में वस्तु की चाल स्थिर रहती है।

असमान गति:
यदि कोई वस्तु बराबर समय-अंतरालों में अलग-अलग दूरी तय करती है, तो उसकी गति को असमान गति कहते हैं। उदाहरण के लिए, एक भीड़भाड़ वाली सड़क पर चलती हुई कार असमान गति में होती है क्योंकि उसकी चाल लगातार बदलती रहती है।

वेग-समय ग्राफ की सहायता से गति के समीकरण:
मान लीजिए कि एक गतिशील वस्तु का प्रारंभिक वेग \( u \) है और वह एकसमान त्वरण \( a \) से गति कर रही है। \( t \) समय बाद वस्तु का अंतिम वेग \( v \) हो जाता है। समय को X-अक्ष पर और वेग को Y-अक्ष पर दर्शाने पर, वेग-समय ग्राफ QP बनता है।

X Y O समय \( (t) \) वेग \( (v) \) Q P R S u v t

1. गति का प्रथम समीकरण (Velocity-Time Relation):
वेग-समय ग्राफ का ढलान त्वरण (acceleration) बताता है।
त्वरण \( a = \frac{\text{वेग में परिवर्तन}}{\text{समयान्तराल}} \)
\( a = \frac{PR}{QR} = \frac{SP - SR}{QR} = \frac{v - u}{t} \)
\( \implies at = v - u \)
\( \implies v = u + at \)

2. गति का द्वितीय समीकरण (Position-Time Relation):
वस्तु द्वारा तय की गई दूरी वेग-समय ग्राफ के नीचे के क्षेत्रफल के बराबर होती है।
तय की गई दूरी \( s = \text{समलम्ब चतुर्भुज QOPS का क्षेत्रफल} \)
\( s = \text{आयत QORS का क्षेत्रफल} + \text{त्रिभुज PQR का क्षेत्रफल} \)
\( s = (QO \times OS) + \frac{1}{2} (PR \times QR) \)
यहाँ \( QO = u \), \( OS = t \), \( QR = t \) और \( PR = v - u \).
चूंकि \( v - u = at \) (प्रथम समीकरण से), तो \( PR = at \).
\( s = (u \times t) + \frac{1}{2} (at \times t) \)
\( \implies s = ut + \frac{1}{2} at^2 \)

3. गति का तृतीय समीकरण (Position-Velocity Relation):
वस्तु द्वारा तय की गई दूरी \( s = \text{समलम्ब चतुर्भुज QOPS का क्षेत्रफल} \)
समलम्ब चतुर्भुज का क्षेत्रफल \( = \frac{1}{2} (\text{समान्तर भुजाओं का योग}) \times \text{लम्बवत् दूरी} \)
\( s = \frac{1}{2} (QO + SP) \times OS \)
\( s = \frac{1}{2} (u + v) \times t \)
प्रथम समीकरण से, \( t = \frac{v - u}{a} \)
\( s = \frac{1}{2} (u + v) \times \frac{v - u}{a} \)
\( \implies s = \frac{(v + u)(v - u)}{2a} \)
\( \implies 2as = v^2 - u^2 \)
\( \implies v^2 = u^2 + 2as \)
In simple words: एकसमान गति में वस्तु हमेशा एक ही रफ्तार से चलती है, जबकि असमान गति में उसकी रफ्तार बदलती रहती है। वेग-समय ग्राफ से हम यह पता लगा सकते हैं कि कोई चीज़ कितनी दूर गई या उसकी चाल कितनी बदली है, जिससे हम गति के तीन मुख्य नियम (समीकरण) निकाल पाते हैं।

🎯 Exam Tip: गति के तीनों समीकरणों के व्युत्पत्ति (derivation) के चरणों को याद रखें और वेग-समय ग्राफ के विभिन्न हिस्सों का महत्व समझें। ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल दूरी और ढलान त्वरण बताता है।

 

Question 4. न्यूटन के गति के नियमों को दैनिक जीवन के उदाहरण देते हुए समझाइए। द्वितीय नियम के आधार पर बल, द्रव्यमान एवं त्वरण में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
Answer:

1. न्यूटन का गति-विषयक प्रथम नियम (जड़त्व का नियम):
इस नियम के अनुसार, कोई वस्तु तब तक अपनी विराम अवस्था में रहेगी या एक सीधी रेखा में समान वेग से चलती रहेगी, जब तक उस पर कोई बाहरी असंतुलित बल न लगाया जाए। इसे गैलीलियो का नियम या जड़त्व का नियम भी कहते हैं। जड़त्व का मतलब है कि वस्तु अपनी स्थिति (विराम या गति) में बदलाव का विरोध करती है।
उदाहरण: एक गेंद जो ज़मीन पर लुढ़क रही है, थोड़ी देर बाद अपने आप रुक जाती है क्योंकि उस पर ज़मीन का घर्षण बल और हवा का प्रतिरोध लगता है। अगर ये बल न होते, तो गेंद हमेशा चलती रहती।

2. न्यूटन का गति-विषयक द्वितीय नियम:
इस नियम के अनुसार, किसी वस्तु के संवेग (momentum) में परिवर्तन की दर उस पर लगाए गए बाहरी असंतुलित बल के समानुपाती होती है, और यह परिवर्तन बल की दिशा में ही होता है। बल, द्रव्यमान और त्वरण के बीच संबंध को इससे स्थापित किया जा सकता है।
मान लीजिए \( m \) द्रव्यमान की एक वस्तु पर \( \vec{F} \) बल लगाया जाता है। बल की दिशा प्रारंभिक वेग \( u \) की दिशा में है, और \( t \) समय बाद वस्तु का अंतिम वेग \( v \) हो जाता है।
प्रारंभिक संवेग \( \vec{P}_1 = m\vec{u} \)
अंतिम संवेग \( \vec{P}_2 = m\vec{v} \)
\( t \) समय में संवेग परिवर्तन \( \Delta \vec{P} = \vec{P}_2 - \vec{P}_1 = m(\vec{v} - \vec{u}) \)
संवेग परिवर्तन की दर \( \frac{\Delta \vec{P}}{\Delta t} = \frac{m(\vec{v} - \vec{u})}{t} \)
हम जानते हैं कि त्वरण \( a = \frac{v - u}{t} \)।
इसलिए, \( \frac{\Delta \vec{P}}{\Delta t} = m\vec{a} \)
न्यूटन के द्वितीय नियम के अनुसार, बल \( \vec{F} \) संवेग परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है।
\( \vec{F} \propto \frac{\Delta \vec{P}}{\Delta t} \)
\( \implies \vec{F} \propto m\vec{a} \)
\( \implies \vec{F} = k m\vec{a} \)
जहाँ \( k \) एक स्थिरांक है। यदि बल, द्रव्यमान और त्वरण की इकाइयों को इस तरह चुना जाए कि \( k=1 \) हो, तो
\( \vec{F} = m\vec{a} \)
यह दर्शाता है कि बल, वस्तु के द्रव्यमान और त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है।

उदाहरण 1: क्रिकेट का खिलाड़ी गेंद को पकड़ते समय अपने हाथ पीछे की ओर खींचता है। ऐसा करने से गेंद के संवेग में परिवर्तन का समय बढ़ जाता है, जिससे गेंद पर लगने वाला बल कम हो जाता है और खिलाड़ी को कम चोट लगती है।
उदाहरण 2: बंदूक से निकली गोली शरीर में घुस जाती है क्योंकि बहुत तेज गति से चलती हुई गोली जब शरीर से टकराती है, तो उसका अंतिम वेग बहुत जल्दी शून्य हो जाता है। इससे संवेग परिवर्तन की दर बहुत ज़्यादा होती है, और गोली बहुत ज़्यादा बल के साथ शरीर में घुस जाती है।

3. न्यूटन का गति-विषयक तृतीय नियम:
इस नियम के अनुसार, हर क्रिया के लिए हमेशा एक बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। इसका मतलब है कि जब दो वस्तुएँ आपस में क्रिया करती हैं, तो पहली वस्तु द्वारा दूसरी पर लगाया गया बल, दूसरी वस्तु द्वारा पहली पर लगाए गए बल के बराबर और विपरीत दिशा में होता है।
उदाहरण: तैरते समय, मनुष्य पानी को अपने हाथों से पीछे की ओर धकेलता है (क्रिया)। इसके जवाब में, पानी मनुष्य को आगे की ओर धकेलता है (प्रतिक्रिया)। यही कारण है कि हम पानी में तैर पाते हैं।
In simple words: पहला नियम कहता है कि वस्तुएँ अपनी जगह तब तक नहीं बदलतीं, जब तक उन्हें कोई धक्का न दे। दूसरा नियम बताता है कि बल (धक्का) वस्तु के वजन और कितनी तेज़ी से उसकी चाल बदलती है, पर निर्भर करता है। तीसरा नियम कहता है कि हर एक्शन का बराबर और उल्टा रिएक्शन होता है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के तीनों नियमों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और प्रत्येक के लिए दैनिक जीवन से कम से कम एक उदाहरण दें। द्वितीय नियम के लिए सूत्र \( F = ma \) की व्युत्पत्ति महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. जड़त्व से क्या अभिप्राय है ? दो उदाहरण देकर समझाइए।
Answer:

जड़त्व (Inertia):
जड़त्व किसी वस्तु का वह प्राकृतिक गुण है जिसके कारण वह बिना किसी बाहरी बल के अपनी विराम अवस्था या समान गति की अवस्था में बदलाव का विरोध करती है। यानी, अगर कोई वस्तु रुकी हुई है तो वह रुकी रहना चाहती है, और अगर वह चल रही है तो उसी चाल से उसी दिशा में चलती रहना चाहती है। किसी वस्तु का द्रव्यमान जितना अधिक होता है, उसका जड़त्व भी उतना ही अधिक होता है। इसलिए, द्रव्यमान को जड़त्व की माप माना जाता है।

जड़त्व के प्रकार:
1. विराम का जड़त्व: यदि कोई वस्तु विराम अवस्था में है, तो वह तब तक विराम में ही रहेगी जब तक उस पर कोई बाहरी असंतुलित बल न लगाया जाए।
2. गति का जड़त्व: यदि कोई वस्तु एक सीधी रेखा में समान वेग से गतिमान है, तो वह तब तक उसी वेग से चलती रहेगी जब तक उस पर कोई बाहरी असंतुलित बल न लगाया जाए।

उदाहरण:
1. गेंद और पत्थर का उदाहरण: जब बंदूक की गोली से शीशे पर गोली मारी जाती है, तो शीशे में एक गोल छेद हो जाता है, जबकि पत्थर मारने से शीशा चटक जाता है। इसका कारण यह है कि गोली का वेग बहुत अधिक होता है, और यह इतनी तेज़ी से आती है कि शीशे का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही गति में आता है और टूट जाता है, जबकि बाकी शीशा अपने जड़त्व (विराम के जड़त्व) के कारण स्थिर रहता है। पत्थर का वेग कम होता है, इसलिए यह ज़्यादा क्षेत्र पर बल लगाता है और पूरे शीशे को चटका देता है।
2. बस में यात्री का उदाहरण: जब कोई गतिशील बस अचानक रुकती है, तो यात्री आगे की ओर झुक जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यात्री का शरीर गति के जड़त्व के कारण बस के साथ उसी गति में रहता है, लेकिन जब बस रुकती है, तो यात्री के पैर ज़मीन के संपर्क में आकर तुरंत रुक जाते हैं, जबकि शरीर का ऊपरी हिस्सा अभी भी आगे बढ़ने की कोशिश करता है। इसी तरह, जब रुकी हुई बस अचानक चलती है, तो यात्री पीछे की ओर झुक जाते हैं (विराम के जड़त्व के कारण)।
In simple words: जड़त्व का मतलब है कि कोई चीज़ अपनी जगह या चाल नहीं बदलना चाहती, जब तक उसे कोई बाहरी धक्का न दे। जैसे, अगर एक चलती बस अचानक रुक जाए, तो आप आगे की ओर झुक जाते हैं क्योंकि आपका शरीर अभी भी आगे चलना चाहता है।

🎯 Exam Tip: जड़त्व की परिभाषा को सरल शब्दों में व्यक्त करें और प्रत्येक प्रकार के जड़त्व के लिए स्पष्ट, relatable उदाहरण दें। उदाहरणों में जड़त्व के सिद्धांत को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 6. संवेग को परिभाषित कीजिए। दो गतिशील वस्तुओं की सीधी टक्कर में संवेग संरक्षित रहता है। चित्र बनाकर समझाइए।
Answer:

संवेग (Momentum):
किसी वस्तु का संवेग उसके द्रव्यमान और वेग के गुणनफल के बराबर होता है। यह एक सदिश राशि है और इसकी दिशा वही होती है जो वस्तु के वेग की होती है। संवेग का सूत्र है: \( \text{संवेग} (P) = \text{द्रव्यमान} (m) \times \text{वेग} (v) \)। इसकी इकाई किलोग्राम-मीटर प्रति सेकंड (kg m/s) है।

संवेग संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Momentum):
दो या दो से अधिक वस्तुओं के निकाय (system) पर यदि कोई बाहरी असंतुलित बल नहीं लग रहा है, तो उनकी टक्कर से पहले और टक्कर के बाद का कुल संवेग हमेशा एक समान (संरक्षित) रहता है। यानी, निकाय का कुल संवेग न तो बदलता है और न ही कम होता है।

उपपत्ति (Derivation):
मान लीजिए कि दो गोले A और B हैं, जिनका द्रव्यमान क्रमशः \( m_A \) और \( m_B \) है। वे एक सीधी रेखा में क्रमशः \( u_A \) और \( u_B \) वेग से गति कर रहे हैं। मान लीजिए कि गोला A, गोला B से टकराता है। टक्कर के दौरान, गोला A, गोला B पर \( F_{AB} \) बल लगाता है, और गोला B, गोला A पर \( F_{BA} \) बल लगाता है। न्यूटन के गति के तीसरे नियम के अनुसार, ये बल परिमाण में बराबर और दिशा में विपरीत होते हैं।
इसलिए, \( F_{AB} = -F_{BA} \)

टक्कर के बाद, मान लीजिए कि दोनों गोले के वेग क्रमशः \( v_A \) और \( v_B \) हो जाते हैं। यदि टक्कर का समय \( t \) है, तो:
गोले A के संवेग में परिवर्तन \( = m_A v_A - m_A u_A \)
गोले B के संवेग में परिवर्तन \( = m_B v_B - m_B u_B \)

न्यूटन के द्वितीय नियम के अनुसार, बल संवेग परिवर्तन की दर के बराबर होता है:
गोले A पर लगा बल \( F_{BA} = \frac{m_A v_A - m_A u_A}{t} \)
गोले B पर लगा बल \( F_{AB} = \frac{m_B v_B - m_B u_B}{t} \)
चूंकि \( F_{AB} = -F_{BA} \), हम लिख सकते हैं:
\( \frac{m_B v_B - m_B u_B}{t} = - \frac{m_A v_A - m_A u_A}{t} \)
दोनों तरफ \( t \) से गुणा करने पर:
\( m_B v_B - m_B u_B = - (m_A v_A - m_A u_A) \)
\( m_B v_B - m_B u_B = - m_A v_A + m_A u_A \)
पदों को व्यवस्थित करने पर:
\( m_A u_A + m_B u_B = m_A v_A + m_B v_B \)

यह समीकरण दर्शाता है कि टक्कर से पहले का कुल संवेग (अर्थात \( m_A u_A + m_B u_B \)) टक्कर के बाद के कुल संवेग (अर्थात \( m_A v_A + m_B v_B \)) के बराबर होता है। इस प्रकार, दो गतिशील वस्तुओं की सीधी टक्कर में संवेग संरक्षित रहता है।
In simple words: संवेग किसी चीज़ का वज़न और उसकी रफ्तार का गुणा होता है। संवेग संरक्षण का नियम कहता है कि जब चीज़ें आपस में टकराती हैं, तो उनका कुल धक्का (संवेग) टक्कर से पहले और बाद में हमेशा बराबर रहता है, बशर्ते कोई बाहर से कोई और धक्का न दे रहा हो।

🎯 Exam Tip: संवेग की परिभाषा स्पष्ट करें और संवेग संरक्षण के नियम की व्युत्पत्ति को विस्तार से समझाएं। यदि चित्र बनाने का निर्देश है, तो टक्कर से पहले और बाद की स्थिति को दर्शाते हुए चित्र अवश्य शामिल करें। (नोट: इस उत्तर में चित्र उपलब्ध नहीं था)।

 

आंकिक प्रश्न

 

Question 1. एक जहाज जिसका द्रव्यमान \( 3 \times 10^7 \) kg है, विरामावस्था में हैं, \( 5 \times 10^4 \) बल से 3 m की दूरी तक खींचा जाता है, यदि जल का घर्षण नगण्य हो, तो जहाज की चाल ज्ञात करिए।
Answer:
दिया गया है:
द्रव्यमान \( m = 3 \times 10^7 \) kg
प्रारंभिक वेग \( u = 0 \) m/s (विरामावस्था में)
बल \( F = 5 \times 10^4 \) N
दूरी \( s = 3 \) m

सबसे पहले त्वरण \( a \) ज्ञात करें:
न्यूटन के द्वितीय नियम से, \( F = ma \)
\( a = \frac{F}{m} \)
\( a = \frac{5 \times 10^4 \text{ N}}{3 \times 10^7 \text{ kg}} \)
\( a = \frac{5}{3} \times 10^{-3} \text{ m/s}^2 \)

अब अंतिम वेग \( v \) ज्ञात करने के लिए गति के तीसरे समीकरण का उपयोग करें:
\( v^2 = u^2 + 2as \)
\( v^2 = (0)^2 + 2 \times \left(\frac{5}{3} \times 10^{-3}\right) \times 3 \)
\( v^2 = 2 \times 5 \times 10^{-3} \)
\( v^2 = 10 \times 10^{-3} \)
\( v^2 = 10^{-2} \)
\( v = \sqrt{10^{-2}} \)
\( v = 10^{-1} \text{ m/s} \)
\( v = 0.1 \text{ m/s} \)
इसलिए, जहाज की चाल \( 0.1 \) m/s होगी।
In simple words: पहले हमने बल और वज़न का इस्तेमाल करके यह पता लगाया कि जहाज कितनी तेज़ी से गति कर रहा है (त्वरण)। फिर हमने इस त्वरण और दूरी का उपयोग करके पता लगाया कि जहाज की अंतिम चाल क्या होगी।

🎯 Exam Tip: बल, द्रव्यमान, त्वरण और गति के समीकरणों के बीच संबंधों को याद रखें। इकाइयों का सही ढंग से रूपांतरण सुनिश्चित करें।

 

Question 2. एक बस की चाल 25 km/h से बढ़कर 5 sec में 70 km/h हो जाती है। बस का माध्य त्वरण ज्ञात कीजिए।
Answer:
दिया गया है:
प्रारंभिक वेग \( v_i = 25 \) km/h
अंतिम वेग \( v_f = 70 \) km/h
समय \( t = 5 \) s

सबसे पहले वेग को km/h से m/s में बदलें (क्योंकि समय सेकंड में है):
\( 1 \) km/h \( = \frac{1000 \text{ m}}{3600 \text{ s}} = \frac{5}{18} \) m/s

प्रारंभिक वेग \( v_i = 25 \times \frac{5}{18} = \frac{125}{18} \) m/s
अंतिम वेग \( v_f = 70 \times \frac{5}{18} = \frac{350}{18} \) m/s

अब माध्य त्वरण \( a \) ज्ञात करें:
माध्य त्वरण \( a = \frac{v_f - v_i}{t} \)
\( a = \frac{\frac{350}{18} - \frac{125}{18}}{5} \)
\( a = \frac{\frac{350 - 125}{18}}{5} \)
\( a = \frac{\frac{225}{18}}{5} \)
\( a = \frac{225}{18 \times 5} \)
\( a = \frac{225}{90} \)
\( a = \frac{45 \times 5}{18 \times 5} = \frac{45}{18} \)
\( a = \frac{9 \times 5}{9 \times 2} = \frac{5}{2} \)
\( a = 2.5 \) m/s\(^2\)

इसलिए, बस का माध्य त्वरण \( 2.5 \) m/s\(^2\) होगा।
In simple words: सबसे पहले, हमने कार की प्रारंभिक और अंतिम चाल को किलोमीटर प्रति घंटा से मीटर प्रति सेकंड में बदला। फिर, हमने चाल में आए बदलाव को समय से भाग करके कार का त्वरण निकाल लिया।

🎯 Exam Tip: वेग को किलोमीटर प्रति घंटा से मीटर प्रति सेकंड में बदलने के लिए \( \frac{5}{18} \) से गुणा करना याद रखें। त्वरण की गणना करते समय इकाइयों की संगति बनाए रखें।

 

Question 3. एक साइकिल चला रहे छात्र को साइकिल सहित संवेग 400 kg-m/s है। साईकिल 5 m/s के वेग से गतिमान है। छात्र एवं साइकिल का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
Answer:
दिया गया है:
साइकिल सहित छात्र का कुल संवेग \( P = 400 \) kg-m/s
साइकिल का वेग \( v = 5 \) m/s

हम जानते हैं कि संवेग \( P = m \times v \), जहाँ \( m \) कुल द्रव्यमान है।
तो, साइकिल सहित छात्र का कुल द्रव्यमान \( m = \frac{P}{v} \)
\( m = \frac{400 \text{ kg-m/s}}{5 \text{ m/s}} \)
\( m = 80 \) kg

इसलिए, छात्र और साइकिल का कुल द्रव्यमान \( 80 \) kg है।
In simple words: संवेग का मतलब होता है वज़न और रफ़्तार का गुणा। हमें कुल संवेग और रफ़्तार पता थी, तो हमने संवेग को रफ़्तार से भाग करके छात्र और साइकिल का कुल वज़न (द्रव्यमान) पता लगा लिया।

🎯 Exam Tip: संवेग के सूत्र \( P = mv \) का सही उपयोग करें और इकाइयों को सही ढंग से लिखें (kg m/s)।

 

Question 4. एक बालक किसी गेंद को ऊपर की ओर फेंक कर 88 के पश्चात् पुनः लपक लेता है, तो बतलाइए?
(क) किस वेग से गेंद को ऊपर फेंका गया था ?
(ख) कितनी ऊँचाई पर गेंद का वेग शून्य होगा ? \( (g = 9.8 \text{ m/s}^2) \)

Answer:
दिया गया है:
गेंद का ऊपर जाकर वापस आने में लगा कुल समय \( T = 8 \) s
गुरुत्वीय त्वरण \( g = 9.8 \) m/s\(^2\)

(क) किस वेग से गेंद को ऊपर फेंका गया था?
गेंद को ऊपर जाने में लगा समय \( t = \frac{\text{कुल समय}}{2} = \frac{8 \text{ s}}{2} = 4 \) s
जब गेंद अधिकतम ऊँचाई पर पहुँचती है, तो उसका अंतिम वेग \( v = 0 \) होता है।
गति के प्रथम समीकरण का उपयोग करें: \( v = u + at \)
यहाँ, \( a = -g \) (क्योंकि गति गुरुत्वाकर्षण के विपरीत दिशा में है)
\( 0 = u - gt \)
\( u = gt \)
\( u = 9.8 \text{ m/s}^2 \times 4 \text{ s} \)
\( u = 39.2 \) m/s
इसलिए, गेंद को \( 39.2 \) m/s के प्रारंभिक वेग से ऊपर फेंका गया था।

(ख) कितनी ऊँचाई पर गेंद का वेग शून्य होगा?
यह अधिकतम ऊँचाई \( h \) है जहाँ गेंद का वेग शून्य होता है।
गति के तीसरे समीकरण का उपयोग करें: \( v^2 = u^2 + 2as \)
यहाँ, \( v = 0 \), \( u = 39.2 \) m/s (जो हमने अभी ज्ञात किया), \( a = -g = -9.8 \) m/s\(^2\), और \( s = h \).
\( 0^2 = (39.2)^2 + 2(-9.8)h \)
\( 0 = (39.2)^2 - 19.6h \)
\( 19.6h = (39.2)^2 \)
\( h = \frac{39.2 \times 39.2}{19.6} \)
\( h = 2 \times 39.2 \)
\( h = 78.4 \) m
इसलिए, गेंद \( 78.4 \) मीटर की ऊँचाई पर जाकर उसका वेग शून्य होगा।
In simple words: गेंद को ऊपर जाने और वापस आने में जितना समय लगा, उससे हमने पहले पता लगाया कि उसे किस रफ़्तार से ऊपर फेंका गया था। फिर, उसी रफ़्तार का इस्तेमाल करके हमने हिसाब लगाया कि वह कितनी ऊँचाई तक पहुँची थी, जहाँ उसकी रफ़्तार कुछ पल के लिए रुक गई थी।

🎯 Exam Tip: ऊपर फेंकी गई वस्तु के लिए गुरुत्वीय त्वरण \( g \) को ऋणात्मक लेना याद रखें। यह भी याद रखें कि अधिकतम ऊँचाई पर अंतिम वेग शून्य होता है और कुल समय ऊपर जाने के समय का दोगुना होता है।

 

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उनके उत्तर

 

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. एक खिलाड़ी R त्रिज्या के वृत्ताकार पथ में एक पूर्ण चक्कर 40 सेकण्ड में लगता है। 2 मिनट 20 सेकण्ड पश्चात् इसका विस्थापन होगा
(अ) शून्य
(ब) R
(स) 2R
(द) \( \pi R \)
Answer: (स) 2R
In simple words: 2 मिनट 20 सेकंड में खिलाड़ी 3.5 चक्कर पूरे करेगा। आधे चक्कर के बाद विस्थापन वृत्त के व्यास के बराबर होता है, जो 2R है।

🎯 Exam Tip: विस्थापन को हमेशा प्रारंभिक और अंतिम बिंदु के बीच की न्यूनतम सीधी दूरी के रूप में परिभाषित करें, न कि तय की गई कुल दूरी के रूप में।

 

Question 2. कण की गति के लिये वेग तथा समय के मध्य बनाये गये ग्राफ में वक्र तथा समय अन्तराल \( t_1 \) और \( t_2 \) के बीच का क्षेत्रफल हैं
(अ) कण का संवेग
(ब) कण का विस्थापन
(स) कण का चरण
(द) कण पर बल
Answer: (ब) कण का विस्थापन
In simple words: वेग-समय ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल हमेशा वस्तु की जगह में हुए बदलाव (विस्थापन) को बताता है।

🎯 Exam Tip: वेग-समय ग्राफ के क्षेत्रफल से विस्थापन और ढलान से त्वरण मिलता है, इन संबंधों को याद रखें।

 

Question 3. तय किये गये विस्थापन एवं दूरी के अनुपात का आंकिक मान होता है
(अ) एक से काम
(ब) एक
(स) एक के बराबर अथवा एक से कम
(द) एक के बराबर अथवा एक से अधिक।
Answer: (स) एक के बराबर अथवा एक से कम
In simple words: विस्थापन हमेशा दूरी के बराबर या उससे कम होता है, इसलिए उनका अनुपात एक के बराबर या एक से कम होगा।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि दूरी हमेशा धनात्मक होती है, जबकि विस्थापन धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है। सीधी रेखा में गति के अलावा, विस्थापन हमेशा दूरी से कम होता है।

 

Question 4. गाड़ी द्वारा चली गयी दूरी बतायी जाती है
(अ) स्पीडोमीटर से
(ब) ओडोमीटर से
(स) मेनोमीटर से
(द) सीस्मोग्राफ से।
Answer: (ब) ओडोमीटर से
In simple words: ओडोमीटर वह मीटर होता है जो गाड़ी में यह बताता है कि गाड़ी कितनी दूर चली है।

🎯 Exam Tip: स्पीडोमीटर (चाल बताने वाला) और ओडोमीटर (दूरी बताने वाला) जैसे उपकरणों के कार्यों को याद रखें।

 

Question 5. किसी वस्तु की गति के लिए दूरी समय ग्राफ, समय अक्ष के समान्तर एक सरल रेखा है। यह ग्राफ प्रदर्शित करता है
(अ) एक समान गति
(ब) समान वेग
(स) त्वरित गति
(द) विरामविस्था।
Answer: (द) विरामविस्था।
In simple words: जब दूरी-समय ग्राफ समय अक्ष के समानांतर एक सीधी रेखा होती है, तो इसका मतलब है कि वस्तु की दूरी समय के साथ नहीं बदल रही है, यानी वह रुकी हुई है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न ग्राफों (दूरी-समय, वेग-समय) की व्याख्या करना सीखें। दूरी-समय ग्राफ में, क्षैतिज रेखा विराम अवस्था को दर्शाती है।

 

Question 7. कोई कार 54 किमी/घण्टा की चाल से चल रही है। 5 सेकण्ड पश्चात् उसकी चाल 72 किमी/घण्टा हो जाती है उसका त्वरण होगा
(अ) 2 मी/से
(ब) 4 मी/से
(स) 1 मी/से
(द) 3 मी/से।
Answer: (स) 1 मी/से
In simple words: पहले किलोमीटर प्रति घंटा की चाल को मीटर प्रति सेकंड में बदलें। फिर चाल में बदलाव को समय से भाग करके त्वरण निकालें।

🎯 Exam Tip: गति से संबंधित सवालों में इकाइयों का रूपांतरण (जैसे km/h से m/s) करना बहुत महत्वपूर्ण है। \( \frac{5}{18} \) के गुणक को याद रखें।

 

Question 8. यदि कोई पिण्ड संवेग से सीधी रेखा में गतिमान है। यदि उस पर कोई बाह्य बल न लगे तो
(अ) इसके वेग में वृद्धि होगी
(ब) वेग नियत रहेगा।
(स) थोड़ी देर पश्चात् पिण्ड रुक जायेगा।
(द) चाल में वृद्धि होगी।
Answer: (ब) वेग नियत रहेगा।
In simple words: न्यूटन के पहले नियम के अनुसार, जब तक किसी चीज़ पर बाहर से कोई धक्का नहीं लगता, वह अपनी चाल नहीं बदलती। अगर संवेग नियत है और द्रव्यमान भी नियत है, तो वेग भी नियत रहेगा।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के गति के पहले नियम (जड़त्व का नियम) और संवेग संरक्षण के सिद्धांत को याद रखें, जो कहता है कि बाहरी बल के बिना संवेग अपरिवर्तित रहता है।

 

Question 9. किसी वस्तु का जड़त्व निर्भर करता है
(अ) वस्तु के गुरुत्व केन्द्र पर
(ब) वस्तु के द्रव्यमान पर
(स) गुरुत्वीय त्वरण पर
(द) वस्तु के आकार पर।
Answer: (ब) वस्तु के द्रव्यमान पर
In simple words: जड़त्व, यानी किसी वस्तु का अपनी स्थिति बदलने का विरोध करने की क्षमता, उसके वज़न (द्रव्यमान) पर निर्भर करती है। जितनी भारी चीज़ होगी, उसका जड़त्व उतना ही ज़्यादा होगा।

🎯 Exam Tip: जड़त्व की अवधारणा को द्रव्यमान से जोड़कर याद रखें: द्रव्यमान जड़त्व का माप है।

 

Question 11. किसी पिण्ड का द्रव्यमान 5 किग्रा हो और उस पर 15 न्यूटन का बल आरोपित किया जाय तो उसमें उत्पन्न त्वरण होगा
(अ) 5 मीटर/सेकण्ड
(ब) 4 मीटर/सेकण्ड
(स) 3 मीटर/सेकण्ड
(द) 2 मीटर/सेकण्ड।
Answer: (स) 3 मीटर/सेकण्ड
In simple words: बल, वज़न और त्वरण के बीच का संबंध \( F=ma \) होता है। इस सूत्र का उपयोग करके, बल (15 न्यूटन) को द्रव्यमान (5 किग्रा) से भाग देने पर त्वरण (3 मीटर/सेकंड\(^2\)) मिलता है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के दूसरे नियम \( F=ma \) का उपयोग करें। सही इकाई (m/s\(^2\)) के साथ त्वरण का मान ज्ञात करें।

 

Question 12. जब नेट बल किसी वस्तु पर कार्य करता है, वस्तु निम्नलिखित के आनुपातिक त्वरण से बल की दिशा में त्वरित होगी
(अ) वस्तु के ऊपर बल
(ब) वस्तु के वेग
(स) वस्तु का द्रव्यमान
(द) वस्तु का जड़त्व
Answer: (स) वस्तु का द्रव्यमान
In simple words: न्यूटन के दूसरे नियम के अनुसार, जब किसी वस्तु पर कोई बल लगता है, तो वह बल उसके द्रव्यमान (वज़न) के सीधे अनुपात में त्वरण पैदा करता है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के द्वितीय नियम \( F=ma \) को याद रखें, जो बल, द्रव्यमान और त्वरण के बीच संबंध को दर्शाता है। त्वरण बल के सीधे और द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

 

Question 13. न्यूटन की गति का द्वितीय नियम मापन करता है
(अ) त्वरण का
(ब) बल का
(स) संवेग का
(द) कोणीय संवेग का।
Answer: (ब) बल का
In simple words: न्यूटन का दूसरा नियम बताता है कि किसी चीज़ पर कितना बल लग रहा है, यह उसकी रफ़्तार में बदलाव (त्वरण) और उसके वज़न (द्रव्यमान) से पता चलता है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के गति के द्वितीय नियम को बल की माप के रूप में पहचानें और इसे संवेग परिवर्तन की दर से जोड़ें।

 

Question 14. रॉकेट की गति किसके संरक्षण के सिद्धान्त पर
(अ) ऊर्जा
(ब) द्रव्यमान
(स) रेखीय संवेग
(द) कोणीय संवेग
Answer: (स) रेखीय संवेग
In simple words: रॉकेट आगे बढ़ता है क्योंकि वह पीछे की ओर बहुत तेज़ी से गैस फेंकता है। यह क्रिया और प्रतिक्रिया के नियम पर आधारित है, जिससे रॉकेट का कुल संवेग हमेशा बराबर रहता है।

🎯 Exam Tip: रॉकेट प्रणोदन और जेट इंजन संवेग संरक्षण के नियम का प्रत्यक्ष अनुप्रयोग हैं।

 

Question 15. दुग्धमापी तथा हाइड्रोमीटर किस सिद्धान्त पर आधारित हैं
(अ) न्यूटन का द्वितीय नियम
(ब) आर्किमिडीज का सिद्धान्त
(स) संवेग संरक्षण का नियम
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं।
Answer: (ब) आर्किमिडीज का सिद्धान्त
In simple words: दुग्धमापी और हाइड्रोमीटर यह पता लगाते हैं कि दूध या किसी तरल पदार्थ का घनत्व कितना है। वे आर्किमिडीज के सिद्धांत का उपयोग करते हैं, जो बताता है कि जब कोई चीज़ तरल में डूबती है, तो उस पर ऊपर की ओर कितना धक्का लगता है।

🎯 Exam Tip: आर्किमिडीज का सिद्धांत उत्प्लावन बल (buoyant force) और वस्तुओं के तरल में तैरने या डूबने से संबंधित है। इसके अनुप्रयोगों को याद रखें।

 

सुमेलित कीजिए।

 

Question 1. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिएकॉलम-I कॉलम-II
(i) वेग (a) किग्रा-मी.\(^{-3}\)
(ii) घनत्व (b) किग्रा-मी./से.\(^{2}\)
(iii) बल (c) मीटर सेकण्ड\(^{-1}\)
(iv) संवेग (d) न्यूटन-मी.\(^{-2}\)
(v) दाब (e) किग्रा-मी./से.
Answer:
(i) वेग - (c) मीटर सेकण्ड\(^{-1}\)
(ii) घनत्व - (a) किग्रा-मी.\(^{-3}\)
(iii) बल - (b) किग्रा-मी./से.\(^{2}\)
(iv) संवेग - (e) किग्रा-मी./से.
(v) दाब - (d) न्यूटन-मी.\(^{-2}\)
In simple words: यहाँ हमने भौतिक राशियों को उनकी सही इकाइयों से मिलाया है।

🎯 Exam Tip: सभी महत्वपूर्ण भौतिक राशियों की SI इकाइयों को याद रखें। यह मिलान और बहुविकल्पीय प्रश्नों में बहुत उपयोगी होता है।

 

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. क्या एक अदिश को सदिश में जोड़ा जा सकता
Answer:
नहीं, एक अदिश राशि को एक सदिश राशि में नहीं जोड़ा जा सकता। ऐसा इसलिए है क्योंकि सदिश राशियों में परिमाण और दिशा दोनों होते हैं, जबकि अदिश राशियों में केवल परिमाण होता है। दो राशियों को जोड़ने के लिए, उनकी प्रकृति समान होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, आप 5 किलोग्राम को 10 मीटर प्रति सेकंड से नहीं जोड़ सकते।
In simple words: नहीं, एक अदिश राशि (जैसे वज़न) को सदिश राशि (जैसे वेग) में नहीं जोड़ सकते क्योंकि उनकी प्रकृति अलग होती है।

🎯 Exam Tip: अदिश और सदिश राशियों के बीच अंतर को स्पष्ट रखें और याद रखें कि उन्हें सीधे नहीं जोड़ा जा सकता।

 

Question 3. निम्नलिखित भौतिक राशियों में से बतलाइए कि कौन-सी सदिश है और कौन-सी अदिश ? आयतन, द्रव्यमान, चाल, त्वरण, मोल संख्या, वेग, कोणीय आवृत्ति, विस्थापन, कोणीय वेग।
Answer:
सदिश राशियाँ: त्वरण, वेग, विस्थापन, कोणीय वेग।
अदिश राशियाँ: आयतन, द्रव्यमान, चाल, मोल संख्या, कोणीय आवृत्ति।
In simple words: सदिश राशियों में मात्रा और दिशा दोनों होती हैं, जैसे वेग और त्वरण। अदिश राशियों में केवल मात्रा होती है, जैसे वज़न और आयतन।

🎯 Exam Tip: भौतिक राशियों को सदिश या अदिश के रूप में वर्गीकृत करने के लिए उनकी परिभाषाओं और गुणों को अच्छी तरह समझें (क्या उनमें दिशा शामिल है)।

 

Question 4. एक वस्तु एक समान वेग से चल रही है। इसका त्वरण ज्ञात कीजिए।
Answer:
यदि कोई वस्तु एक समान वेग से चल रही है, तो उसका त्वरण शून्य होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि त्वरण को वेग में परिवर्तन की दर के रूप में परिभाषित किया जाता है। जब वेग स्थिर होता है, तो वेग में कोई परिवर्तन नहीं होता, इसलिए त्वरण शून्य होता है।
In simple words: अगर कोई चीज़ एक ही रफ़्तार से सीधी चलती रहे, तो उसकी रफ़्तार में कोई बदलाव नहीं होता, इसलिए उसका त्वरण (तेज़ी या कमी) शून्य होगा।

🎯 Exam Tip: त्वरण की परिभाषा को वेग परिवर्तन की दर के रूप में याद रखें। एकसमान वेग का मतलब शून्य त्वरण है।

 

Question 5. क्या किसी गतिमान वस्तु का औसत वेग शून्य हो सकता है ?
Answer:
हाँ, किसी गतिमान वस्तु का औसत वेग शून्य हो सकता है। यह तब होता है जब एक निश्चित समय अंतराल में वस्तु का कुल विस्थापन शून्य हो। उदाहरण के लिए, यदि कोई वस्तु एक बिंदु से चलना शुरू करती है और एक चक्कर पूरा करके उसी बिंदु पर वापस आ जाती है, तो उसका कुल विस्थापन शून्य होगा, भले ही उसने कुछ दूरी तय की हो।
In simple words: हाँ, एक चलती हुई चीज़ का औसत वेग शून्य हो सकता है, अगर वह घूमकर अपनी शुरुआती जगह पर वापस आ जाए, क्योंकि उसकी जगह में कोई बदलाव नहीं हुआ।

🎯 Exam Tip: वेग और विस्थापन दोनों सदिश राशियाँ हैं, जबकि चाल और दूरी अदिश राशियाँ हैं। औसत वेग कुल विस्थापन पर निर्भर करता है, जबकि औसत चाल कुल दूरी पर निर्भर करती है।

 

Question 6. किसी वस्तु की चाल नियत है। क्या उसमें त्वरण हो सकता है ? उदाहरण दीजिए।
Answer:
हाँ, यदि किसी वस्तु की चाल नियत है, तब भी उसमें त्वरण हो सकता है, यदि उसकी गति की दिशा बदल रही हो। त्वरण एक सदिश राशि है जो वेग में परिवर्तन को दर्शाता है, और वेग में परिवर्तन या तो चाल बदलने से या दिशा बदलने से हो सकता है।
उदाहरण: एक कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी के चारों ओर एक वृत्ताकार कक्षा में नियत चाल से घूमता है। इसकी चाल स्थिर रहती है, लेकिन हर पल उसकी गति की दिशा बदलती रहती है। दिशा बदलने के कारण, उपग्रह में लगातार त्वरण होता है, जिसे अभिकेन्द्रीय त्वरण कहते हैं।
In simple words: हाँ, अगर कोई चीज़ एक ही रफ़्तार से गोल-गोल घूम रही है, तो उसकी चाल भले ही एक जैसी हो, लेकिन उसकी दिशा लगातार बदल रही होती है, इसलिए उसमें त्वरण होता है।

🎯 Exam Tip: वृत्ताकार गति में नियत चाल होने पर भी त्वरण होता है, यह एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। वेग एक सदिश राशि है, और इसकी दिशा बदलने पर भी वेग बदलता है।

 

Question 7. एक वस्तु द्वारा तय की गई दूरी समय के अनुक्रमानुपाती है, उसकी चाल कैसी होगी?
Answer:
यदि एक वस्तु द्वारा तय की गई दूरी समय के अनुक्रमानुपाती है, तो इसका मतलब है कि वस्तु समान समय में समान दूरी तय कर रही है। ऐसी स्थिति में, वस्तु की चाल एक समान (नियत) होगी। यानी, वस्तु एक स्थिर गति से चल रही है।
In simple words: अगर कोई चीज़ हमेशा बराबर समय में बराबर दूरी तय करती है, तो उसकी रफ़्तार हमेशा एक जैसी रहेगी।

🎯 Exam Tip: दूरी-समय ग्राफ में, यदि ग्राफ एक सीधी रेखा है जो मूलबिंदु से गुजरती है, तो यह नियत चाल को दर्शाता है।

 

Question 8. एक गेंद वायु में ऊपर फेंकी गई। गेंद का त्वरण तथा वेग सबसे ऊपर वाले भाग में क्या होगा ?
Answer:
जब एक गेंद को वायु में ऊपर फेंका जाता है, तो उसके सबसे ऊपर वाले बिंदु पर:
1. त्वरण: गेंद पर गुरुत्वाकर्षण बल लगातार नीचे की ओर कार्य करता रहता है, इसलिए त्वरण हमेशा \( 9.8 \) m/s\(^2\) (गुरुत्वीय त्वरण) होता है और इसकी दिशा हमेशा नीचे की ओर होती है। यह ऊपर वाले बिंदु पर भी बदलता नहीं है।
2. वेग: सबसे ऊपर वाले बिंदु पर गेंद एक क्षण के लिए रुक जाती है, इसलिए उसका वेग शून्य होता है। यह वह बिंदु होता है जहाँ गेंद अपनी दिशा बदलने लगती है - ऊपर से नीचे की ओर।
In simple words: जब गेंद सबसे ऊपर पहुँचती है, तो उसकी रफ़्तार एक पल के लिए रुक जाती है (वेग शून्य होता है), लेकिन धरती का खिंचाव (गुरुत्वाकर्षण) उसे अभी भी नीचे की ओर \( 9.8 \) m/s\(^2\) से खींच रहा होता है।

🎯 Exam Tip: ध्यान दें कि गुरुत्वीय त्वरण हमेशा नीचे की ओर कार्य करता है और हवा में फेंकी गई वस्तु के पथ पर हर बिंदु पर नियत रहता है, जबकि वेग उच्चतम बिंदु पर शून्य होता है।

 

Question 9. के वेग से गति कर रही है, यदि उसकी गति एकसमान हो तो 10 सेकण्ड पश्चात् उसका वेग क्या होगा ?
Answer:
यदि किसी वस्तु की गति एकसमान है, तो इसका अर्थ है कि उसका वेग समय के साथ नहीं बदल रहा है। इसलिए, यदि वस्तु \( x \) वेग से गति कर रही है, तो 10 सेकंड के बाद भी उसका वेग \( x \) ही रहेगा। एकसमान गति में त्वरण शून्य होता है, क्योंकि वेग में कोई परिवर्तन नहीं होता।
In simple words: अगर कोई चीज़ हमेशा एक ही रफ़्तार से चल रही है, तो 10 सेकंड बाद भी उसकी रफ़्तार उतनी ही रहेगी जितनी अभी है।

🎯 Exam Tip: एकसमान गति की परिभाषा को याद रखें: इसमें वेग स्थिर रहता है। इसलिए, वेग में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

 

Question 10. वेग-समय ग्राफ का ढलान क्या प्रदर्शित करता है?
Answer: वेग-समय ग्राफ का ढलान त्वरण को दर्शाता है. यह बताता है कि समय के साथ वस्तु का वेग कितनी तेज़ी से बदल रहा है.
In simple words: वेग-समय ग्राफ की ढलान हमें बताती है कि कोई चीज़ कितनी तेज़ी से अपनी गति बढ़ा या घटा रही है.

🎯 Exam Tip: वेग-समय ग्राफ की ढलान वस्तु के त्वरण (acceleration) को दर्शाती है, जबकि दूरी-समय ग्राफ की ढलान वस्तु की चाल (speed) को दर्शाती है.

 

Question 11. अगर किसी वस्तु का वेग-समय ग्राफ, समय अक्ष के समान्तर हो, तो इससे क्या निष्कर्ष निकलता है?
Answer: यदि किसी वस्तु का वेग-समय ग्राफ समय अक्ष के समानांतर है, तो इसका मतलब है कि पिंड का वेग एक समान है. ऐसे में, पिंड का त्वरण शून्य होगा क्योंकि वेग में कोई बदलाव नहीं हो रहा है. यह दर्शाता है कि वस्तु स्थिर गति से चल रही है.
In simple words: अगर ग्राफ की रेखा सीधी और समय लाइन के बराबर है, तो वस्तु एक ही स्पीड से चल रही है, न तेज़ हो रही है न धीरे.

🎯 Exam Tip: वेग-समय ग्राफ में समय अक्ष के समानांतर रेखा का अर्थ है नियत वेग, जिसका मतलब है शून्य त्वरण. यह एक समान गति की स्थिति को दर्शाता है.

 

Question 12. कोई वस्तु समान समय में समान दूरी तय करती है। इसके दूरी-समय ग्राफ का ढलान क्या होगा?
Answer: जब कोई वस्तु समान समय में समान दूरी तय करती है, तो उसके दूरी-समय ग्राफ का ढलान एक सीधी सरल रेखा होगी. यह रेखा Y-अक्ष के साथ एक निश्चित कोण बनाती है, जो वस्तु की स्थिर चाल को दर्शाता है.
In simple words: अगर कोई चीज़ हर सेकंड बराबर दूरी तय करती है, तो उसका दूरी-समय ग्राफ एक सीधी ऊपर जाती हुई लाइन बनेगी.

🎯 Exam Tip: दूरी-समय ग्राफ में सीधी रेखा एक समान चाल को दर्शाती है, जबकि वक्र रेखा असमान चाल को दर्शाती है.

 

Question 13. कोई वस्तु समान समय अन्तरालों में समान दूरी तय करती है। इसके चाल-समय ग्राफ का ढलान क्या होगा?
Answer: यदि कोई वस्तु समान समय-अंतराल में समान दूरी तय करती है, तो उसकी चाल स्थिर होती है. ऐसे में, चाल-समय ग्राफ का ढलान एक सीधी रेखा होगी, जो समय अक्ष के समानांतर होगी. यह दर्शाता है कि चाल में कोई परिवर्तन नहीं हो रहा है.
In simple words: अगर स्पीड हर बार एक जैसी है, तो चाल-समय ग्राफ की लाइन सीधी और समय वाली लाइन के साथ-साथ चलेगी.

🎯 Exam Tip: समान दूरी-समान समय अंतराल का अर्थ है एक समान चाल. एक समान चाल के लिए चाल-समय ग्राफ हमेशा समय अक्ष के समानांतर एक सीधी रेखा होती है, क्योंकि चाल बदल नहीं रही होती.

 

Question 14. यदि किसी वस्तु का विस्थापन-समय ग्राफ एक सीधी रेखा हो जो समय के साथ एक कोण बनाती है। गति की प्रकृति कैसी होगी?
Answer: यदि किसी वस्तु का विस्थापन-समय ग्राफ एक सीधी रेखा है जो समय अक्ष के साथ एक कोण बनाती है, तो इसका मतलब है कि वस्तु एकसमान गति में है. यह दर्शाता है कि वस्तु एक ही दिशा में स्थिर वेग से चल रही है.
In simple words: अगर विस्थापन-समय ग्राफ एक सीधी तिरछी लाइन है, तो वस्तु एक बराबर स्पीड से एक ही दिशा में चल रही है.

🎯 Exam Tip: विस्थापन-समय ग्राफ में सीधी रेखा (जो समय अक्ष से कोण बनाए) हमेशा एक समान वेग या एक समान गति को दर्शाती है. जितनी ज़्यादा ढलान, उतनी ज़्यादा गति.

 

Question 15. यदि किसी वस्तु का विस्थापन-समय ग्राफ समय अक्ष के समान्तर हो तो वस्तु की गति कैसी होगी?
Answer: यदि किसी वस्तु का विस्थापन-समय ग्राफ समय अक्ष के समानांतर है, तो इसका मतलब है कि वस्तु विराम अवस्था में है. समय बीतने के साथ भी वस्तु का विस्थापन नहीं बदल रहा है, यानी वह अपनी जगह पर स्थिर है.
In simple words: अगर विस्थापन-समय ग्राफ की लाइन सीधी और समय लाइन के साथ-साथ है, तो वस्तु हिले बिना एक जगह पर खड़ी है.

🎯 Exam Tip: विस्थापन-समय ग्राफ में समय अक्ष के समानांतर रेखा हमेशा वस्तु की विराम अवस्था (rest position) को दर्शाती है, क्योंकि विस्थापन में कोई परिवर्तन नहीं हो रहा होता है.

 

Question 16. समय-दूरी ग्राफ का ढाल क्या प्रदर्शित करता है?
Answer: समय-दूरी ग्राफ का ढाल (स्लोप) चाल को प्रदर्शित करता है. यह बताता है कि वस्तु कितनी तेज़ी से दूरी तय कर रही है.
In simple words: समय-दूरी ग्राफ की ढलान हमें बताती है कि कोई चीज़ कितनी तेज़ चल रही है.

🎯 Exam Tip: समय-दूरी ग्राफ की ढलान वस्तु की चाल को दर्शाती है, जबकि विस्थापन-समय ग्राफ की ढलान वस्तु के वेग को दर्शाती है.

 

Question 18. क्रिया और प्रतिक्रिया बराबर एवं विपरीत दिशाओं में होती हैं तो फिर वे एक-दूसरे को निरस्त क्यों नहीं करते हैं?
Answer: क्रिया और प्रतिक्रिया बल एक-दूसरे को इसलिए निरस्त नहीं करते हैं क्योंकि वे हमेशा दो अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं. न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार, यदि एक वस्तु दूसरी पर बल लगाती है (क्रिया), तो दूसरी वस्तु भी पहली पर बराबर और विपरीत बल लगाती है (प्रतिक्रिया). चूंकि ये बल अलग-अलग वस्तुओं पर काम करते हैं, वे एक ही वस्तु पर लगने वाले बलों की तरह एक-दूसरे को संतुलित नहीं करते.
In simple words: क्रिया और प्रतिक्रिया बल एक-दूसरे को खत्म नहीं करते क्योंकि वे अलग-अलग चीज़ों पर लगते हैं, एक ही चीज़ पर नहीं.

🎯 Exam Tip: न्यूटन का तीसरा नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया नियम) हमेशा याद रखें कि बल हमेशा जोड़ों में लगते हैं और ये जोड़े अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं, इसलिए वे एक-दूसरे को निरस्त नहीं करते.

 

Question 19. न्यूटन के गति का प्रथम नियम बताओ।
Answer: न्यूटन के गति का प्रथम नियम यह बताता है कि कोई वस्तु अपनी विरामावस्था में ही रहेगी या एक समान चाल से सीधी रेखा में चलती रहेगी, जब तक उस पर कोई बाहरी असंतुलित बल कार्य न करे. इसे जड़त्व का नियम या गैलीलियो का नियम भी कहा जाता है.
In simple words: कोई भी चीज़ तब तक अपनी जगह पर खड़ी रहेगी या सीधी चलती रहेगी, जब तक उसे कोई बाहरी ताकत न धकेले.

🎯 Exam Tip: न्यूटन के गति के प्रथम नियम में "बाहरी असंतुलित बल" (external unbalanced force) शब्द बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि केवल असंतुलित बल ही वस्तु की अवस्था में परिवर्तन कर सकता है.

 

Question 20. चलती हुई रेलगाड़ी में बैठे व्यक्ति द्वारा ऊर्ध्वाधर दिशा में फेंकी गेंद लौटकर उसके हाथ में वापस क्यों आ जाती है?
Answer: चलती रेलगाड़ी में व्यक्ति और गेंद दोनों रेलगाड़ी के साथ-साथ समान क्षैतिज वेग से गति कर रहे होते हैं. जब व्यक्ति गेंद को ऊपर फेंकता है, तो गेंद ऊपर-नीचे तो जाती है, लेकिन जड़त्व के कारण उसका क्षैतिज वेग वही रहता है जो व्यक्ति और रेलगाड़ी का है. इसलिए गेंद भी व्यक्ति के साथ आगे बढ़ती रहती है और वापस व्यक्ति के हाथ में आ गिरती है. वायु प्रतिरोध (air resistance) को नगण्य मानकर यह संभव होता है.
In simple words: ट्रेन में गेंद उछालने पर वह हाथ में वापस आ जाती है क्योंकि गेंद और आदमी दोनों ट्रेन के साथ एक ही स्पीड से आगे बढ़ रहे होते हैं.

🎯 Exam Tip: इस घटना का कारण जड़त्व (inertia) है, जो वस्तु को अपनी गति की अवस्था बनाए रखने में मदद करता है, खासकर जब वायु प्रतिरोध को अनदेखा किया जाता है.

 

Question 21. संवेग संरक्षण के लिये कौन-सा प्रतिबन्ध आवश्यक है?
Answer: संवेग संरक्षण के नियम के लिए आवश्यक शर्त यह है कि निकाय (system) पर कोई बाहरी असंतुलित बल कार्य नहीं करना चाहिए. यदि बाहरी बलों का शुद्ध मान शून्य है, तो निकाय का कुल संवेग स्थिर या संरक्षित रहता है.
In simple words: संवेग को बचाने के लिए यह ज़रूरी है कि किसी चीज़ पर बाहर से कोई और ताकत न लगे.

🎯 Exam Tip: संवेग संरक्षण का नियम तब ही लागू होता है जब निकाय पर नेट बाहरी बल शून्य हो. आंतरिक बल संवेग को प्रभावित नहीं करते, वे बस वस्तुओं के बीच संवेग का आदान-प्रदान करते हैं.

 

Question 22. बिजली का पंखा स्विच बन्द होने के बाद भी कुछ समय तक किस कारण से चलता है?
Answer: बिजली का पंखा स्विच बंद होने के बाद भी कुछ समय तक गति के जड़त्व (inertia of motion) के कारण चलता रहता है. जड़त्व के कारण, पंखा अपनी गति की अवस्था को तुरंत नहीं बदल पाता और उस पर लगने वाले घर्षण बल (frictional force) के कारण धीरे-धीरे रुकता है.
In simple words: पंखा स्विच बंद होने पर भी थोड़ी देर तक चलता रहता है क्योंकि वह तुरंत रुकना नहीं चाहता, यह उसकी आदत होती है.

🎯 Exam Tip: गति का जड़त्व यह गुण है जिसके कारण कोई वस्तु अपनी गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करती है. यह सिद्धांत कई दैनिक जीवन की घटनाओं में देखा जाता है.

 

Question 23. जूतों के तले क्यों घिस जाते हैं? स्पष्ट कीजिए।
Answer: जूतों के तले सड़क पर चलने के कारण घिस जाते हैं क्योंकि जूतों के तले और सड़क की सतह के बीच घर्षण बल (frictional force) कार्य करता है. यह घर्षण बल चलने के दौरान हमेशा मौजूद रहता है और समय के साथ धीरे-धीरे जूतों के पदार्थ को रगड़कर कम कर देता है, जिससे वे घिस जाते हैं.
In simple words: जूते इसलिए घिसते हैं क्योंकि चलने पर वे सड़क से रगड़ खाते हैं, और इस रगड़ से उनके नीचे का हिस्सा धीरे-धीरे खत्म हो जाता है.

🎯 Exam Tip: घर्षण बल गति का विरोध करता है और यह दो सतहों के संपर्क में आने पर लगता है. हालांकि घर्षण चलने के लिए ज़रूरी है, लेकिन यह पहनने और टूट-फूट का कारण भी बनता है.

 

Question 25. साइकिल के पहिये में तेल क्यों दिया जाता है।
Answer: साइकिल के पहिये में तेल या ग्रीस इसलिए लगाया जाता है ताकि घर्षण बल (frictional force) को कम किया जा सके. पहिये और धुरी (axle) के बीच घर्षण से पहिया घुमाने में अधिक बल लगाना पड़ता है. तेल एक स्नेहक (lubricant) के रूप में काम करता है, जो सतहों के बीच चिकनाई पैदा करके घर्षण को कम करता है, जिससे साइकिल आसानी से चलती है और ऊर्जा की बचत होती है.
In simple words: साइकिल के पहिये में तेल इसलिए डालते हैं ताकि वह आसानी से घूमे और ज़ोर न लगाना पड़े, क्योंकि तेल रगड़ को कम कर देता है.

🎯 Exam Tip: घर्षण कम करने के लिए स्नेहक (lubricants) जैसे तेल या ग्रीस का उपयोग करना मशीनों की दक्षता बढ़ाने और उनके पुर्जों को घिसने से बचाने का एक प्रभावी तरीका है.

 

Question 26. एक कॉर्क जल पर तैर रही है। इसका आभासी भार क्या है?
Answer: यदि एक कॉर्क जल पर तैर रही है, तो उसका आभासी भार शून्य होगा. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कॉर्क के भार को जल द्वारा लगाए गए उत्प्लावन बल (buoyant force) द्वारा पूरी तरह से संतुलित कर दिया जाता है. उत्प्लावन बल ऊपर की ओर कार्य करता है और यह विस्थापित जल के भार के बराबर होता है.
In simple words: पानी पर तैरते हुए कॉर्क का वजन हमें महसूस नहीं होता क्योंकि पानी उसे ऊपर की ओर धकेलता है, जिससे उसका असली वजन पानी में छिप जाता है.

🎯 Exam Tip: जब कोई वस्तु पानी में तैरती है, तो उस पर लगने वाला उत्प्लावन बल उसके भार के बराबर होता है, जिसके परिणामस्वरूप उसका आभासी भार शून्य हो जाता है.

 

Question 27. किसी द्रव में डुबोई गई वस्तु पर उत्प्लावन बल किस दिशा में कार्य करता है?
Answer: किसी द्रव में डुबोई गई वस्तु पर उत्प्लावन बल हमेशा भार के विपरीत दिशा में, यानी ऊपर की ओर कार्य करता है. यह बल द्रव द्वारा वस्तु पर लगाए गए ऊपर की ओर के दबाव के कारण उत्पन्न होता है.
In simple words: पानी में डूबी हुई किसी भी चीज़ को पानी ऊपर की तरफ धकेलता है, यही उत्प्लावन बल है.

🎯 Exam Tip: उत्प्लावन बल ही वह बल है जो वस्तुओं को तैरने में मदद करता है, और यह बल हमेशा गुरुत्वाकर्षण बल के विपरीत दिशा में (ऊपर की ओर) कार्य करता है.

 

Question 28. पानी के भीतर किसी प्लास्टिक के गुटके को छोड़ने पर यह पानी की सतह पर क्यों आ जाता है?
Answer: पानी के भीतर प्लास्टिक के गुटके को छोड़ने पर वह सतह पर इसलिए आ जाता है क्योंकि प्लास्टिक का घनत्व पानी के घनत्व से कम होता है. जब गुटके को पानी में डुबोया जाता है, तो उस पर लगने वाला उत्प्लावन बल उसके भार से ज़्यादा होता है. यह अतिरिक्त उत्प्लावन बल गुटके को पानी की सतह पर ऊपर की ओर धकेलता है.
In simple words: प्लास्टिक का टुकड़ा पानी में ऊपर आ जाता है क्योंकि वह पानी से हल्का होता है, और पानी उसे ऊपर की तरफ धकेलता है.

🎯 Exam Tip: यदि किसी वस्तु का घनत्व द्रव के घनत्व से कम होता है, तो वह वस्तु द्रव में तैरती है क्योंकि उत्प्लावन बल उसके भार से अधिक होता है.

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. निम्नलिखित में से अदिश तथा सदिश राशियाँ छाँटो तापक्रम, संहति, आयतन, चाल, विस्थापन, समय, दूरी, वेग, विद्युत आवेश, त्वरण, बल, संवेग, कार्य, भार तथा ऊर्जा, घनत्व।
Answer:
अदिश राशियाँ (केवल परिमाण): तापक्रम, संहति (द्रव्यमान), आयतन, चाल, समय, दूरी, विद्युत आवेश, घनत्व, कार्य और ऊर्जा.
सदिश राशियाँ (परिमाण और दिशा): विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, संवेग तथा भार.
In simple words: अदिश राशियाँ सिर्फ यह बताती हैं कि कोई चीज़ कितनी है, जबकि सदिश राशियाँ यह भी बताती हैं कि किस दिशा में है.

🎯 Exam Tip: अदिश और सदिश राशियों को पहचानते समय याद रखें कि सदिश राशियों को तीर से दर्शाया जाता है क्योंकि उनमें दिशा भी शामिल होती है, जबकि अदिश राशियों में ऐसा नहीं होता.

 

Question 2. निम्न की परिभाषा दीजिए-.
(i) चाल
(ii) वेग
Answer:
(i) चाल (Speed): किसी वस्तु द्वारा इकाई समय में तय की गई दूरी को चाल कहते हैं. यह एक अदिश राशि है और यह हमेशा धनात्मक होती है.
(ii) वेग (Velocity): किसी वस्तु द्वारा इकाई समय में एक निश्चित दिशा में तय किए गए विस्थापन को वेग कहते हैं. यह एक सदिश राशि है और यह धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकती है.
In simple words: चाल बताती है कि आप कितनी दूर गए और कितनी तेज़ी से गए, जबकि वेग यह भी बताता है कि आप किस दिशा में गए.

🎯 Exam Tip: चाल और वेग के बीच का मुख्य अंतर दिशा का है: चाल केवल गति की दर है, जबकि वेग गति की दर और दिशा दोनों को दर्शाता है. वेग में परिवर्तन से त्वरण उत्पन्न होता है.

 

Question 3. किसी पेड़ की शाखा को तीव्रता से हिलाने पर कुछ पत्तियाँ झड़ जाती हैं, क्यों?
Answer: जब किसी पेड़ की शाखाओं को ज़ोर से हिलाया जाता है, तो शाखाएँ तुरंत गति की अवस्था में आ जाती हैं. लेकिन उन पर लगी पत्तियाँ जड़त्व (inertia) के कारण अपनी विरामावस्था में ही बनी रहने की कोशिश करती हैं. इस जड़त्व के कारण, शाखाओं के अचानक हिलने से पत्तियाँ अपनी जगह से अलग होकर नीचे गिर जाती हैं.
In simple words: जब हम पेड़ की डाली हिलाते हैं, तो पत्ते गिर जाते हैं क्योंकि पत्ते अपनी जगह पर ही रहना चाहते हैं, लेकिन डाली हिल जाती है.

🎯 Exam Tip: यह घटना जड़त्व के प्रथम नियम (inertia of rest) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो बताता है कि कोई वस्तु तब तक अपनी विराम अवस्था में रहती है जब तक उस पर बाहरी बल न लगे.

 

Question 4. जब कोई गतिशील बस अचानक रुकती है तो आप आगे की ओर झुक जाते हैं, और जब विरामावस्था से गतिशील होती है तो पीछे की ओर हो जाते हैं, क्यों?
Answer: यह जड़त्व (inertia) के कारण होता है.
जब गतिशील बस अचानक रुकती है: आपका शरीर गति के जड़त्व के कारण बस के साथ आगे बढ़ते रहना चाहता है, जबकि आपके पैर ज़मीन के संपर्क में होने के कारण बस के साथ तुरंत विराम अवस्था में आ जाते हैं. इससे आपका शरीर आगे की ओर झुक जाता है.
जब विरामावस्था से बस गतिशील होती है: आपका शरीर विराम के जड़त्व के कारण स्थिर रहना चाहता है. लेकिन आपके पैर बस के साथ आगे बढ़ जाते हैं. इससे आपका शरीर पीछे की ओर झुक जाता है. जड़त्व हमारे शरीर को अचानक होने वाले बदलावों का विरोध करने के लिए प्रेरित करता है.
In simple words: चलती बस रुकने पर हम आगे झुकते हैं क्योंकि शरीर आगे बढ़ना चाहता है, और रुकी बस चलने पर हम पीछे होते हैं क्योंकि शरीर वहीं रहना चाहता है.

🎯 Exam Tip: यह न्यूटन के गति के पहले नियम (जड़त्व के नियम) का सीधा उदाहरण है. जड़त्व वह गुण है जो किसी वस्तु को उसकी गति या विराम की अवस्था में होने वाले बदलाव का विरोध करने पर मजबूर करता है.

 

Question 5. एक अग्निशमन कर्मचारी को तीव्र गति से बहुतायत मात्रा में पानी फेंकने वाली रबर की नली को पकड़ने में कठिनाई क्यों होती है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: एक अग्निशमन कर्मचारी को तेज़ी से पानी फेंकने वाली नली को पकड़ने में कठिनाई होती है क्योंकि यह न्यूटन के गति के तीसरे नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया नियम) के कारण होता है. जब नली से पानी तेज़ी से और बड़ी मात्रा में बाहर निकलता है (क्रिया), तो पानी नली पर विपरीत दिशा में एक बराबर और तीव्र प्रतिक्रिया बल लगाता है. यह प्रतिक्रिया बल नली को पीछे की ओर धकेलता है, जिससे उसे पकड़े रखना मुश्किल हो जाता है.
In simple words: फायर फाइटर को पानी वाली पाइप पकड़ने में मुश्किल होती है क्योंकि जब पानी तेज़ी से बाहर निकलता है, तो पाइप भी पीछे की तरफ़ उतनी ही ज़ोर से धकेलती है.

🎯 Exam Tip: न्यूटन के तीसरे नियम का यह एक व्यावहारिक उदाहरण है: "प्रत्येक क्रिया के लिए एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है." रॉकेट का उड़ना भी इसी सिद्धांत पर आधारित है.

 

Question 6. जैवलिन थ्रो (भाला फेंक) में खिलाड़ी निश्चित रेखा तक पहुंचने में प्रायः असफल रहते हैं। स्पष्ट कीजिए, क्यों?
Answer: जैवलिन थ्रो (भाला फेंक) में खिलाड़ी अक्सर निश्चित रेखा तक पहुँचने में असफल रहते हैं क्योंकि वे भाला फेंकने के लिए तेज़ गति से दौड़ते हैं. जब वे फेंकने की रेखा के पास पहुँचते हैं, तो उनके शरीर का गति का जड़त्व (inertia of motion) उन्हें उसी गति में आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित करता है. इस जड़त्व के कारण, खिलाड़ी को तुरंत रुकने में मुश्किल होती है और वे अक्सर रेखा पार कर जाते हैं, जो फाउल माना जाता है.
In simple words: भाला फेंकने वाले खिलाड़ी दौड़ते हुए आते हैं, तो उनका शरीर उसी रफ्तार से आगे बढ़ता रहना चाहता है. इसलिए, उन्हें रुकना मुश्किल होता है और वे रेखा पार कर जाते हैं.

🎯 Exam Tip: गति का जड़त्व यह बताता है कि कोई वस्तु तब तक गति में रहती है जब तक उसे रोकने के लिए कोई बाहरी बल न लगाया जाए. खिलाड़ी को अचानक रोकने के लिए पर्याप्त बल नहीं मिल पाता, जिससे वे रेखा पार कर जाते हैं.

 

Question 7. स्पष्ट कीजिए कि गति विषयक द्वितीय नियम \( F = ma \) में न्यूटन का गति-विषयक प्रथम नियम स्वतः निहित है।
Answer: न्यूटन का गति का द्वितीय नियम \( F = ma \) बताता है कि बल (F) वस्तु के द्रव्यमान (m) और त्वरण (a) के गुणनफल के बराबर होता है. अगर हम मान लें कि वस्तु पर कोई बाहरी बल नहीं लग रहा है, यानी \( F = 0 \), तो समीकरण के अनुसार \( 0 = ma \) होगा. चूंकि द्रव्यमान \( m \) कभी शून्य नहीं हो सकता, तो इसका मतलब है कि त्वरण \( a = 0 \) होगा.
\( \implies \) जब त्वरण शून्य होता है, तो वस्तु या तो विरामावस्था में रहती है या एक समान वेग से सीधी रेखा में चलती रहती है. यही न्यूटन का गति का प्रथम नियम है, जो बताता है कि वस्तु अपनी अवस्था में बदलाव का विरोध करती है जब तक उस पर बाहरी बल न लगे. इस प्रकार, दूसरा नियम पहले नियम को अपने अंदर समेटे हुए है.
In simple words: अगर किसी चीज़ पर कोई ताकत न लगे, तो \( F=ma \) से पता चलता है कि वह न तेज़ होगी न धीरे, मतलब पहला नियम दूसरे नियम का ही हिस्सा है.

🎯 Exam Tip: न्यूटन के गति के दूसरे नियम से पहला नियम व्युत्पन्न होता है. यह संबंध \( F=0 \implies a=0 \) दिखाता है कि यदि कोई शुद्ध बाहरी बल नहीं है, तो वस्तु की गति की अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होगा.

 

Question 8. गिलास पर रखे गत्ते को अचानक हटा देने पर उस पर रखा सिक्का गिलास में क्यों गिर जाता है?
Answer: जब गिलास पर रखे गत्ते को अचानक हटाया जाता है, तो उस पर रखा सिक्का गिलास में गिर जाता है. इसका कारण विराम का जड़त्व (inertia of rest) है. शुरुआत में, सिक्का और गत्ता दोनों विराम अवस्था में होते हैं. जब गत्ते को तेज़ी से धकेला जाता है, तो गत्ता गति में आ जाता है और आगे बढ़ जाता है. लेकिन सिक्का, अपने जड़त्व के कारण, विराम अवस्था में ही बने रहना चाहता है और नीचे लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल के कारण सीधा गिलास में गिर जाता है.
In simple words: गत्ते को हटाते ही सिक्का गिलास में गिर जाता है क्योंकि सिक्का वहीं रहना चाहता है, जबकि गत्ता हट जाता है.

🎯 Exam Tip: यह घटना न्यूटन के गति के प्रथम नियम (विराम का जड़त्व) का एक क्लासिक उदाहरण है, जो दिखाता है कि वस्तुएँ अपनी प्रारंभिक अवस्था (यहाँ, विराम) में बने रहना चाहती हैं.

 

Question 9. रेलगाड़ी के अचानक चलने पर उसमें खड़ा यात्री पीछे की ओर क्यों गिर पड़ता है?
Answer: रेलगाड़ी के अचानक चलने पर उसमें खड़ा यात्री पीछे की ओर गिर पड़ता है. इसका कारण विराम का जड़त्व (inertia of rest) है. जब रेलगाड़ी अचानक चलना शुरू करती है, तो यात्री के शरीर का निचला भाग जो रेलगाड़ी के संपर्क में होता है, वह तुरंत रेलगाड़ी के साथ गति में आ जाता है. लेकिन शरीर का ऊपरी भाग, जड़त्व के कारण, अपनी प्रारंभिक विराम अवस्था में ही बने रहना चाहता है. इस वजह से, ऊपरी भाग पीछे की ओर धकेला जाता है और यात्री पीछे की ओर गिर पड़ता है.
In simple words: ट्रेन के चलने पर आदमी पीछे गिरता है क्योंकि उसके पैर ट्रेन के साथ आगे बढ़ते हैं, लेकिन शरीर का ऊपरी हिस्सा वहीं रहना चाहता है.

🎯 Exam Tip: इस घटना को गति के पहले नियम, यानी जड़त्व के नियम से समझा जा सकता है. यह दर्शाता है कि वस्तु अपनी प्रारंभिक स्थिति (विराम) को बनाए रखने का प्रयास करती है.

 

Question 10. भारी वाहनों के पहियों के टायर काफी चौड़े क्यों बनाए जाते हैं?
Answer: भारी वाहनों के टायर काफी चौड़े इसलिए बनाए जाते हैं ताकि सड़क पर लगने वाले दबाव को कम किया जा सके. दबाव (Pressure) बल (Force) और क्षेत्रफल (Area) के अनुपात \( P = F/A \) के बराबर होता है. टायर का क्षेत्रफल जितना ज़्यादा होगा, उतना ही कम दबाव ज़मीन पर पड़ेगा. कम दबाव से वाहन के ज़मीन में धंसने या सड़क को नुकसान पहुँचाने की संभावना कम होती है और वाहन ज़्यादा स्थिरता के साथ चल पाता है.
In simple words: भारी गाड़ियों के टायर चौड़े इसलिए होते हैं ताकि उनका वजन ज़्यादा जगह पर फैले और ज़मीन पर कम ज़ोर पड़े, जिससे गाड़ी धंसे नहीं.

🎯 Exam Tip: दबाव का सिद्धांत यहाँ महत्वपूर्ण है: बल को बड़े क्षेत्रफल पर वितरित करके, हम प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाले दबाव को कम कर सकते हैं, जिससे स्थिरता बढ़ती है और सतह को क्षति कम होती है.

 

Question 12. प्लवन (तैरने) के नियम लिखिए।
अथवा
किसी वस्तु के सन्तुलन में तैरने के लिए क्या आवश्यक शर्ते हैं?
अथवा
कोई वस्तु किसी दुव में कब तक तैरती है?
Answer: किसी वस्तु के संतुलन में तैरने के लिए दो मुख्य शर्तें आवश्यक हैं:

  • वस्तु का भार, वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होना चाहिए. यानी, वस्तु पर नीचे की ओर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल ऊपर की ओर लगने वाले उत्प्लावन बल के बराबर होना चाहिए.
  • वस्तु का गुरुत्व केंद्र और हटाए गए द्रव का उत्प्लावन केंद्र एक ही ऊर्ध्वाधर रेखा में होने चाहिए, ताकि वस्तु पर कोई घूर्णी प्रभाव (rotational effect) न पड़े.

जब ये दोनों शर्तें पूरी होती हैं, तभी वस्तु द्रव में स्थिर संतुलन में तैरती है.
In simple words: कोई चीज़ पानी में तब तैरती है जब उसका वज़न पानी के उस हिस्से के वज़न के बराबर हो जो वह हटाती है, और उसका संतुलन सही जगह पर हो.

🎯 Exam Tip: प्लवन के ये नियम आर्किमिडीज के सिद्धांत पर आधारित हैं. संतुलन में तैरने का मतलब है कि वस्तु बिना डूबे या डूबे हुए भाग के हिलने-डुलने के बिना द्रव की सतह पर स्थिर रहती है.

 

Question 13. रेलगाड़ी की पटरियों के नीचे लकड़ी अथवा लोहे के चौड़े स्लीपर क्यों लगाए जाते हैं?
Answer: रेलगाड़ी की पटरियों के नीचे लकड़ी या लोहे के चौड़े स्लीपर (cross-ties) इसलिए लगाए जाते हैं ताकि रेलगाड़ी के भारी वजन से पटरियों द्वारा ज़मीन पर लगने वाले दबाव को कम किया जा सके. स्लीपर पटरियों द्वारा पड़ने वाले बल को ज़्यादा बड़े क्षेत्रफल पर फैला देते हैं. जैसा कि दबाव \( P = F/A \) सूत्र से पता चलता है, जब क्षेत्रफल \( A \) बढ़ता है, तो दबाव \( P \) कम हो जाता है. इससे पटरियाँ ज़मीन में धंसती नहीं हैं और ट्रैक स्थिर रहता है, जिससे रेलगाड़ी सुरक्षित रूप से चल पाती है.
In simple words: ट्रेन की पटरियों के नीचे चौड़े स्लीपर इसलिए लगाते हैं ताकि ट्रेन का भारी वज़न ज़्यादा जगह पर फैल जाए और पटरियाँ ज़मीन में धंसे नहीं.

🎯 Exam Tip: यह दबाव के सिद्धांत का एक उत्कृष्ट अनुप्रयोग है, जहाँ बड़े क्षेत्रफल का उपयोग करके बड़े बल के हानिकारक प्रभावों को कम किया जाता है, जिससे संरचनात्मक स्थिरता सुनिश्चित होती है.

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. गणितीय विधि से एकसमान त्वरण के अन्तर्गत ऋजुरेखीय गति करती किसी वस्तु के लिए गति के समीकरणों का निगमन कीजिए।
Answer: एकसमान त्वरण से सीधी रेखा में गतिमान वस्तु के लिए गति के तीन समीकरणों को गणितीय विधि से इस प्रकार व्युत्पन्न किया जा सकता है:

1. गति का प्रथम समीकरण (वेग-समय संबंध):
हम जानते हैं कि त्वरण (a) वेग में परिवर्तन की दर है:
\( a = \frac { \text{अंतिम वेग} - \text{प्रारंभिक वेग} }{ \text{समयान्तराल} } \)
माना प्रारंभिक वेग \( u \), अंतिम वेग \( v \) और समय \( t \) है.
\( a = \frac {v - u}{t} \)
\( \implies at = v - u \)
\( \implies v = u + at \)
यह समीकरण समय \( t \) के बाद वस्तु का अंतिम वेग बताता है.

2. गति का द्वितीय समीकरण (स्थिति-समय संबंध):
वस्तु द्वारा तय की गई दूरी \( s \) औसत वेग और समय के गुणनफल के बराबर होती है:
\( s = \text{औसत वेग} \times t \)
औसत वेग \( = \frac { \text{प्रारंभिक वेग} + \text{अंतिम वेग} }{ 2 } = \frac {u + v}{2} \)
समीकरण \( v = u + at \) से \( v \) का मान रखने पर:
\( s = \left( \frac {u + (u + at)}{2} \right) \times t \)
\( \implies s = \left( \frac {2u + at}{2} \right) \times t \)
\( \implies s = \left( u + \frac {1}{2}at \right) \times t \)
\( \implies s = ut + \frac {1}{2}at^2 \)
यह समीकरण समय \( t \) में वस्तु द्वारा तय की गई दूरी बताता है.

3. गति का तृतीय समीकरण (स्थिति-वेग संबंध):
यह समीकरण पहले और दूसरे समीकरण का उपयोग करके प्राप्त किया जाता है.
पहले समीकरण से: \( t = \frac {v - u}{a} \)
दूसरे समीकरण में \( t \) का मान रखने पर:
\( s = u \left( \frac {v - u}{a} \right) + \frac {1}{2} a \left( \frac {v - u}{a} \right)^2 \)
\( \implies s = \frac {u(v - u)}{a} + \frac {1}{2} a \frac {(v - u)^2}{a^2} \)
\( \implies s = \frac {uv - u^2}{a} + \frac {(v - u)^2}{2a} \)
लघुत्तम समापवर्त्य \( 2a \) लेने पर:
\( \implies s = \frac {2(uv - u^2) + (v^2 - 2uv + u^2)}{2a} \)
\( \implies 2as = 2uv - 2u^2 + v^2 - 2uv + u^2 \)
\( \implies 2as = v^2 - u^2 \)
\( \implies v^2 = u^2 + 2as \)
यह समीकरण वेग, प्रारंभिक वेग, त्वरण और दूरी के बीच संबंध स्थापित करता है. इन समीकरणों का उपयोग करके एकसमान त्वरण से गतिमान वस्तु की गति का विश्लेषण किया जा सकता है.
In simple words: हम त्वरण और औसत वेग के सूत्र का इस्तेमाल करके यह पता लगा सकते हैं कि कोई चीज़ कितनी देर में कितनी दूर जाएगी, उसकी आखिरी स्पीड क्या होगी, और वह कितनी देर में कितनी दूर चलेगी.

🎯 Exam Tip: गति के तीनों समीकरणों के व्युत्पत्ति को समझना महत्वपूर्ण है. प्रत्येक समीकरण एक विशिष्ट भौतिक राशि (वेग, स्थिति) को समय और अन्य राशियों के संबंध में व्यक्त करता है, और ये भौतिकी के मूलभूत सिद्धांत हैं.

 

Question 2. चाल-समय ग्राफ से किसी वस्तु द्वारा चली गई दूरी किस प्रकार ज्ञात करोगे?
Answer: चाल-समय ग्राफ से किसी वस्तु द्वारा तय की गई दूरी को उस ग्राफ के समय अक्ष और चाल-समय वक्र के बीच के क्षेत्रफल को मापकर ज्ञात किया जाता है. इस ग्राफ में, चाल को Y-अक्ष पर और समय को X-अक्ष पर दर्शाया जाता है.
यदि चाल नियत है, तो ग्राफ एक आयत बनाता है और दूरी आयत के क्षेत्रफल \( (\text{चाल} \times \text{समय}) \) के बराबर होगी. यदि चाल बदल रही है, तो क्षेत्रफल को छोटे-छोटे आयतों या त्रिभुजों में बांटकर उनका योग किया जा सकता है या सीधे ग्राफ के नीचे के कुल क्षेत्रफल को ज्ञात किया जा सकता है.
उदाहरण के लिए, यदि एक वस्तु 20 मीटर/सेकंड की चाल से 2 सेकंड तक चलती है, तो तय की गई दूरी \( 20 \times 2 = 40 \) मीटर होगी, जो चाल-समय ग्राफ के नीचे एक आयत का क्षेत्रफल होगा.
In simple words: चाल-समय ग्राफ में, अगर आप ग्राफ के नीचे का पूरा हिस्सा माप लें, तो वह बताता है कि चीज़ कितनी दूर गई.

🎯 Exam Tip: चाल-समय ग्राफ के तहत का क्षेत्रफल तय की गई दूरी को दर्शाता है. यह सिद्धांत एक समान गति और असमान गति दोनों के लिए लागू होता है, और यह गति के विश्लेषण का एक शक्तिशाली उपकरण है.

 

Question 3. वेग-समय ग्राफ से त्वरण ज्ञात करने की विधि। उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: वेग-समय ग्राफ से त्वरण ज्ञात करने के लिए हमें ग्राफ के ढलान (slope) को मापना होता है. ढलान वेग में परिवर्तन और समय में परिवर्तन का अनुपात होता है, जो कि त्वरण की परिभाषा है.

\( \text{त्वरण } (a) = \frac { \text{वेग में परिवर्तन} }{ \text{समयान्तराल} } = \frac { \Delta v }{ \Delta t } \)

एक उदाहरण के लिए, मान लीजिए एक वस्तु का वेग 2 सेकंड पर 4 मी/से है और 5 सेकंड पर 10 मी/से है. वेग-समय ग्राफ पर इन दो बिंदुओं A (2s, 4m/s) और B (5s, 10m/s) को लें.

\( \text{वेग में परिवर्तन } (\Delta v) = 10 \text{ मी/से} - 4 \text{ मी/से} = 6 \text{ मी/से} \)
\( \text{समय में परिवर्तन } (\Delta t) = 5 \text{ सेकण्ड} - 2 \text{ सेकण्ड} = 3 \text{ सेकण्ड} \)

\( \implies \text{त्वरण } (a) = \frac {6 \text{ मी/से}}{3 \text{ सेकण्ड}} = 2 \text{ मी/से}^2 \)

इस प्रकार, वेग-समय ग्राफ की ढलान वस्तु का त्वरण दर्शाती है. यदि ग्राफ की ढलान सीधी है, तो त्वरण एक समान है; यदि यह वक्र है, तो त्वरण असमान है.
In simple words: वेग-समय ग्राफ की ढलान हमें बताती है कि कोई चीज़ कितनी तेज़ी से अपनी गति बढ़ा या घटा रही है. जितनी ज़्यादा ढलान, उतना ज़्यादा तेज़ बदलाव.

🎯 Exam Tip: वेग-समय ग्राफ की ढलान त्वरण का माप होती है. सकारात्मक ढलान सकारात्मक त्वरण दर्शाती है, नकारात्मक ढलान नकारात्मक त्वरण (मंदन) दर्शाती है, और शून्य ढलान शून्य त्वरण (नियत वेग) दर्शाती है.

 

Question 4. सन्तुलित तथा असन्तुलित बलों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: यहाँ संतुलित और असंतुलित बलों के बीच मुख्य अंतर दिए गए हैं:

संतुलित बलअसंतुलित बल
1. जब किसी वस्तु पर लगने वाले सभी बलों का परिणामी योग शून्य होता है, तो उन्हें संतुलित बल कहते हैं.1. जब किसी वस्तु पर लगने वाले सभी बलों का परिणामी योग शून्य नहीं होता है, तो उन्हें असंतुलित बल कहते हैं.
2. ये बल वस्तु की गति की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं करते हैं; वस्तु या तो विराम में रहती है या एकसमान वेग से गति करती रहती है.2. ये बल वस्तु की गति की स्थिति में परिवर्तन लाते हैं; वे वस्तु को विराम से गति में ला सकते हैं, गतिमान वस्तु को रोक सकते हैं, या उसकी गति की दिशा बदल सकते हैं.
3. संतुलित बल वस्तु की आकृति और आकार को बदल सकते हैं, लेकिन उसकी गति को नहीं.3. असंतुलित बल वस्तु की गति को बदलते हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं कि उसकी आकृति या आकार बदलें.

संतुलित बल एक टेबल पर रखी किताब पर काम करने वाले गुरुत्वाकर्षण और सामान्य बल की तरह होते हैं, जो उसे स्थिर रखते हैं. असंतुलित बल वह होता है जब कोई गेंद को धकेलता है, जिससे वह गति करने लगती है.
In simple words: संतुलित बल चीज़ों को हिलाते नहीं, बस उनकी शक्ल बदल सकते हैं. असंतुलित बल चीज़ों को हिलाते हैं या उनकी स्पीड बदल देते हैं.

🎯 Exam Tip: संतुलित और असंतुलित बलों के बीच का मुख्य अंतर यह है कि असंतुलित बल ही वस्तु में त्वरण (acceleration) उत्पन्न कर सकते हैं, जबकि संतुलित बल वस्तु की गति की अवस्था को नहीं बदलते, वे केवल उसकी आकृति को प्रभावित कर सकते हैं.

 

Question 5. जड़त्व का नियम कितने प्रकार का होता है? विस्तारपूर्वक समझाइए।
Answer: जड़त्व (Inertia) किसी वस्तु का वह प्राकृतिक गुण है जिसके कारण वह अपनी विराम अवस्था या एकसमान गति की अवस्था में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है, जब तक उस पर कोई बाहरी असंतुलित बल कार्य न करे. द्रव्यमान जड़त्व का माप होता है; जितना अधिक द्रव्यमान, उतना अधिक जड़त्व.

जड़त्व मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:
1. विराम का जड़त्व (Inertia of Rest): यह वह गुण है जिसके कारण कोई वस्तु अपनी विराम अवस्था में ही बनी रहना चाहती है. जब तक उस पर कोई बाहरी बल न लगे, वह अपनी जगह से नहीं हिलती.
उदाहरण: बस के अचानक चलने पर यात्री का पीछे की ओर गिरना या पेड़ की डाली हिलाने पर पत्तों का गिरना, विराम के जड़त्व के कारण होता है.
2. गति का जड़त्व (Inertia of Motion): यह वह गुण है जिसके कारण कोई वस्तु अपनी एकसमान गति की अवस्था में ही बनी रहना चाहती है. जब तक उस पर कोई बाहरी बल न लगे, वह उसी वेग से सीधी रेखा में चलती रहती है.
उदाहरण: चलती बस के अचानक रुकने पर यात्री का आगे की ओर झुकना या पंखे का स्विच बंद होने के बाद भी कुछ देर तक चलते रहना, गति के जड़त्व के कारण होता है. जड़त्व हमारे ब्रह्मांड में सभी वस्तुओं का एक मौलिक गुण है.
In simple words: जड़त्व का मतलब है कि कोई चीज़ जैसी है, वैसी ही रहना चाहती है – अगर खड़ी है तो खड़ी रहेगी और चल रही है तो चलती रहेगी, जब तक कोई बाहरी ताकत उसे न बदले.

🎯 Exam Tip: जड़त्व न्यूटन के गति के प्रथम नियम का आधार है. इसके दो मुख्य प्रकारों, विराम का जड़त्व और गति का जड़त्व को उदाहरणों के साथ समझना ज़रूरी है, क्योंकि ये दैनिक जीवन की कई घटनाओं की व्याख्या करते हैं.

 

Question 6. गति का तृतीय नियम क्या है? इसका प्रायोगिक सत्यापन कैसे करेंगे? दैनिक जीवन में गति विषयक तृतीय नियम के दो उदाहरण बताइए।
Answer:
न्यूटन का गति का तृतीय नियम: इस नियम के अनुसार, "प्रत्येक क्रिया के लिए एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है." इसका मतलब है कि जब एक वस्तु दूसरी वस्तु पर कोई बल लगाती है (क्रिया), तो दूसरी वस्तु भी पहली वस्तु पर परिमाण में बराबर लेकिन दिशा में विपरीत बल लगाती है (प्रतिक्रिया). ये बल हमेशा एक जोड़े में होते हैं और दो अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं.

प्रायोगिक सत्यापन (Experimental Verification):
इसे दो कमानीदार तुला (spring balances) का उपयोग करके सत्यापित किया जा सकता है.
एक तुला को एक दृढ़ समर्थन (जैसे दीवार) से लटका दें. दूसरी तुला को पहली तुला के हुक में फँसाकर खींचें.
आप देखेंगे कि दोनों तुलाओं के संकेतक समान रीडिंग (बल का मान) दर्शाते हैं, लेकिन लगाए गए बल विपरीत दिशाओं में होते हैं (एक खींच रहा है, दूसरा खींचने का विरोध कर रहा है). यह पुष्टि करता है कि क्रिया और प्रतिक्रिया बल हमेशा बराबर और विपरीत होते हैं.

दैनिक जीवन में उदाहरण:
1. तैरना: जब कोई व्यक्ति तैरता है, तो वह पानी को पीछे धकेलता है (क्रिया), और पानी व्यक्ति को आगे की ओर धकेलता है (प्रतिक्रिया).
2. बंदूक का प्रतिक्षेप (recoil): जब बंदूक से गोली छोड़ी जाती है, तो गोली आगे की ओर जाती है (क्रिया), और बंदूक पीछे की ओर हटती है (प्रतिक्रिया). रॉकेट का उड़ना भी इसी सिद्धांत पर आधारित है.
In simple words: न्यूटन का तीसरा नियम कहता है कि जब आप किसी चीज़ को धकेलते हैं, तो वह भी आपको उतनी ही ज़ोर से वापस धकेलती है.

🎯 Exam Tip: न्यूटन का तीसरा नियम बताता है कि बल हमेशा जोड़ों में होते हैं और ये जोड़े अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं. यह नियम संवेग संरक्षण के सिद्धांत का आधार भी है.

 

Question 2. जेट वायुयान तथा रॉकेट की गति- जेट यान अथवा रॉकेट के इंजन में ईंधन के जलने से अत्यधिक मात्रा में गरम गैसें उत्पन्न होती हैं जो इंजन के पीछे बने छिद्रों से तीव्र वेग से बाहर निकलती हैं जिससे रॉकेट पर आगे की ओर प्रतिक्रिया बल कार्य करता है। जिससे जेट-यान या रॉकेट आगे बढ़ता हैं।
Answer: जेट वायुयान और रॉकेट की गति न्यूटन के गति के तीसरे नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया नियम) पर आधारित होती है. इनके इंजनों में ईंधन जलने से बहुत ज़्यादा गर्म गैसें पैदा होती हैं. ये गैसें इंजन के पीछे बने छिद्रों से बहुत तेज़ी से बाहर निकलती हैं (क्रिया). इस क्रिया के परिणामस्वरूप, ये गैसें जेट या रॉकेट पर आगे की दिशा में एक बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया बल लगाती हैं. यही प्रतिक्रिया बल जेट या रॉकेट को आगे धकेलता है और उसे गति प्रदान करता है.
In simple words: जेट और रॉकेट इसलिए आगे बढ़ते हैं क्योंकि वे पीछे की तरफ़ गर्म गैसें बहुत तेज़ी से छोड़ते हैं, और गैसें उन्हें आगे धकेलती हैं.

🎯 Exam Tip: जेट और रॉकेट का प्रणोदन (propulsion) न्यूटन के तीसरे नियम का एक महत्वपूर्ण अनुप्रयोग है. यह सिद्धांत अंतरिक्ष यात्रा और आधुनिक वायु परिवहन का आधार है.

 

Question 7. प्लवन अथवा उत्प्लावन के नियम लिखिए।
Answer: प्लवन (तैरने) और उत्प्लावन (Buoyancy) के नियम इस प्रकार हैं:
प्लवन का नियम (Law of Floatation): कोई वस्तु किसी द्रव में तब तैरती है जब उसका कुल भार, वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होता है. दूसरे शब्दों में, तैरती हुई वस्तु पर लगने वाला उत्प्लावन बल उसके भार को पूरी तरह संतुलित कर देता है.

उत्प्लावन बल का नियम (Archimedes' Principle): जब कोई वस्तु किसी द्रव में पूरी तरह या आंशिक रूप से डुबोई जाती है, तो उस पर ऊपर की ओर एक बल लगता है जिसे उत्प्लावन बल कहते हैं. इस बल का परिमाण वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होता है. उत्प्लावन बल हमेशा वस्तु के भार के विपरीत दिशा में (ऊपर की ओर) कार्य करता है. यह बल वस्तु के डूबने या तैरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. जहाज जैसे भारी वस्तुएँ भी इसी सिद्धांत पर तैरती हैं, क्योंकि वे अपने भार के बराबर पानी विस्थापित करती हैं.
In simple words: कोई चीज़ पानी में तब तैरती है जब पानी उसे उतना ही ऊपर धकेलता है जितना उसका वज़न होता है.

🎯 Exam Tip: उत्प्लावन बल हमेशा ऊपर की ओर कार्य करता है और यह विस्थापित द्रव के भार के बराबर होता है. यह आर्किमिडीज के सिद्धांत का मूल आधार है.

 

Question 8. आर्किमिडीज का सिद्धान्त का सत्यापन कीजिए।
Answer: आर्किमिडीज के सिद्धांत का सत्यापन एक स्प्रिंग तुला, एक बीकर, एक अतिप्रवाह जार (overflow jar), एक ठोस वस्तु और पानी का उपयोग करके किया जा सकता है.

प्रायोगिक विधि:
1. सबसे पहले, स्प्रिंग तुला का उपयोग करके ठोस वस्तु का हवा में भार ज्ञात करें. इसे \( W_1 \) मान लें.
2. अतिप्रवाह जार को पानी से इतना भरें कि अतिरिक्त पानी उसकी नली से बाहर बह जाए.
3. अब, इस जार की नली के नीचे एक खाली बीकर रखें, ताकि जार से बहने वाला सारा पानी इसमें इकट्ठा हो सके.
4. ठोस वस्तु को धीरे-धीरे पानी में पूरी तरह डुबोएं (उसे जार के नीचे या किनारों को छूने न दें). जब वस्तु पानी में डूब जाती है, तो स्प्रिंग तुला पर उसका भार दोबारा ज्ञात करें. इसे \( W_2 \) मान लें.
5. वस्तु को डुबोने पर जार से जो पानी बाहर निकलता है, उसे बीकर में इकट्ठा करें.
6. अब, इस बीकर में इकट्ठा हुए विस्थापित पानी का भार ज्ञात करें. इसे \( W_3 \) मान लें.

प्रेक्षण (Observations):
आप देखेंगे कि वस्तु के हवा में भार \( (W_1) \) और पानी में भार \( (W_2) \) के बीच अंतर होता है.
\( \text{भार में कमी} = W_1 - W_2 \)
और यह भार में कमी विस्थापित पानी के भार \( (W_3) \) के बराबर होती है.
\( \implies W_1 - W_2 = W_3 \)
यह प्रायोगिक परिणाम आर्किमिडीज के सिद्धांत की पुष्टि करता है, जो कहता है कि किसी द्रव में डुबोई गई वस्तु पर ऊपर की ओर लगने वाला उत्प्लावन बल, वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होता है.
In simple words: आर्किमिडीज के नियम को जांचने के लिए, हम एक चीज़ का वज़न हवा में लेते हैं, फिर उसे पानी में डुबोकर वज़न लेते हैं. जो पानी बाहर निकलता है, उसका वज़न करते हैं. तब पता चलता है कि चीज़ का जितना वज़न पानी में कम हुआ, उतना ही वज़न उस पानी का है जो बाहर निकला.

🎯 Exam Tip: आर्किमिडीज के सिद्धांत को सत्यापित करने के लिए, ध्यान रखें कि वस्तु का पानी में आभासी भार उसके हवा में वास्तविक भार से कम होता है, और यह कमी विस्थापित द्रव के भार के बराबर होती है.

 

Question 9. किसी पदार्थ के आपेक्षिक घनत्व से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।
Answer: आपेक्षिक घनत्व (Relative Density) किसी पदार्थ के घनत्व (density) और पानी के घनत्व के अनुपात को कहते हैं. यह एक शुद्ध अनुपात होता है, इसलिए इसकी कोई इकाई (unit) नहीं होती है.

सूत्र:
\( \text{आपेक्षिक घनत्व} = \frac { \text{पदार्थ का घनत्व} }{ \text{पानी का घनत्व} } \)

पानी का घनत्व मानक स्थितियों में \( 1 \text{ ग्राम/सेमी}^3 \) या \( 1000 \text{ किग्रा/मी}^3 \) होता है. आपेक्षिक घनत्व हमें बताता है कि कोई पदार्थ पानी से कितना भारी या हल्का है.
यदि आपेक्षिक घनत्व 1 से कम है, तो पदार्थ पानी पर तैरेगा.
यदि आपेक्षिक घनत्व 1 के बराबर है, तो पदार्थ पानी में पूरी तरह डूब कर तैरेगा.
यदि आपेक्षिक घनत्व 1 से ज़्यादा है, तो पदार्थ पानी में डूब जाएगा.
यह एक उपयोगी राशि है क्योंकि इससे हमें सीधे पता चल जाता है कि कोई वस्तु पानी में तैरेगी या डूबेगी.

उदाहरण के लिए, यदि एक वस्तु का द्रव्यमान 50 ग्राम और आयतन 20 सेमी\( ^3 \) है, तो उसका घनत्व \( \frac{50}{20} = 2.5 \text{ ग्राम/सेमी}^3 \) होगा.
पानी का घनत्व \( 1 \text{ ग्राम/सेमी}^3 \) है.
\( \text{आपेक्षिक घनत्व} = \frac{2.5}{1} = 2.5 \)
चूंकि आपेक्षिक घनत्व 2.5 (जो 1 से ज़्यादा है), यह पदार्थ पानी में डूब जाएगा.
In simple words: आपेक्षिक घनत्व बताता है कि कोई चीज़ पानी से कितनी भारी है. अगर यह 1 से कम है, तो तैरेगी; अगर ज़्यादा है, तो डूब जाएगी.

🎯 Exam Tip: आपेक्षिक घनत्व एक इकाईहीन राशि है, जो पदार्थ के तैरने या डूबने की क्षमता को निर्धारित करने के लिए बहुत उपयोगी है. पानी के घनत्व को मानक संदर्भ बिंदु के रूप में लिया जाता है.

आंकिक प्रश्न

 

Question 1. एक बस की गति 5 सेकण्ड में 80 किमी/घण्टा से घटकर 60 किमी/घण्टा हो जाती है। बस का त्वरण ज्ञात कीजिए।
Answer: सबसे पहले, हमें गति को मीटर/सेकंड में बदलना होगा:
प्रारंभिक वेग \( u = 80 \text{ किमी/घण्टा} = 80 \times \frac {1000 \text{ मी}}{3600 \text{ से}} = 80 \times \frac {5}{18} \text{ मी/से} = \frac {400}{18} \text{ मी/से} = \frac {200}{9} \text{ मी/से} \)
अंतिम वेग \( v = 60 \text{ किमी/घण्टा} = 60 \times \frac {1000 \text{ मी}}{3600 \text{ से}} = 60 \times \frac {5}{18} \text{ मी/से} = \frac {300}{18} \text{ मी/से} = \frac {50}{3} \text{ मी/से} \)
समयान्तराल \( t = 5 \text{ सेकण्ड} \)

त्वरण \( a = \frac {v - u}{t} \)
\( \implies a = \frac { \left( \frac {50}{3} - \frac {200}{9} \right) }{ 5 } \)
\( \implies a = \frac { \left( \frac {150 - 200}{9} \right) }{ 5 } \)
\( \implies a = \frac { \left( \frac {-50}{9} \right) }{ 5 } \)
\( \implies a = \frac {-50}{9 \times 5} \)
\( \implies a = \frac {-10}{9} \text{ मी/से}^2 \)
\( \implies a \approx -1.11 \text{ मी/से}^2 \)
ऋणात्मक चिन्ह दर्शाता है कि त्वरण गति की विपरीत दिशा में है, अर्थात यह मंदन (retardation) है.
In simple words: पहले स्पीड को मीटर प्रति सेकंड में बदला, फिर अंतिम स्पीड में से पहली स्पीड घटाकर उसे समय से भाग दिया. इससे पता चला कि बस की स्पीड धीमी हो रही है.

🎯 Exam Tip: वेग को किमी/घण्टा से मी/से में बदलते समय \( \frac{5}{18} \) से गुणा करना याद रखें. त्वरण का ऋणात्मक मान हमेशा मंदन को इंगित करता है, जिसका अर्थ है वेग में कमी.

 

Question 3. कोई रेलगाड़ी 90 किमी/घण्टा की चाल से चल रही है। ब्रेक लगाए जाने पर वह 0.5 मीटर/सेकण्ड का एकसमान त्वरण उत्पन्न करती है। रेलगाड़ी विरामावस्था में जाने से पहले कितनी दूरी तय करेगी?
Answer: सबसे पहले, रेलगाड़ी की प्रारंभिक चाल को मीटर/सेकंड में बदलें:
प्रारंभिक वेग \( u = 90 \text{ किमी/घण्टा} = 90 \times \frac {5}{18} \text{ मी/से} = 25 \text{ मी/से} \)
अंतिम वेग \( v = 0 \text{ मी/से} \) (क्योंकि रेलगाड़ी विरामावस्था में आ जाती है)
त्वरण \( a = -0.5 \text{ मी/से}^2 \) (ब्रेक लगाने के कारण मंदन, इसलिए ऋणात्मक)

गति के तीसरे समीकरण का उपयोग करें: \( v^2 = u^2 + 2as \)
\( 0^2 = (25)^2 + 2 \times (-0.5) \times s \)
\( 0 = 625 - 1s \)
\( 1s = 625 \)
\( s = 625 \text{ मीटर} \)
अतः, रेलगाड़ी विरामावस्था में आने से पहले 625 मीटर की दूरी तय करेगी.
In simple words: ट्रेन की शुरुआती स्पीड को बदला, फिर फॉर्मूला लगाकर पता किया कि ब्रेक लगाने के बाद ट्रेन 625 मीटर चलकर रुकेगी.

🎯 Exam Tip: मंदन (deceleration) की स्थिति में त्वरण (a) का मान ऋणात्मक लेना न भूलें. यह सुनिश्चित करता है कि दूरी की गणना सही हो. \( v^2 = u^2 + 2as \) समीकरण दूरी, वेग और त्वरण के बीच सीधा संबंध देता है.

 

Question 4. किसी पत्थर को ऊर्ध्वाधरतः ऊपर की ओर 5 मीटर/सेकण्ड के वेग से फेंका जाता है। यदि गति के दौरान पत्थर का नीचे की ओर दिष्ट त्वरण 10 मीटर/सेकण्ड\( ^2 \) है। तो पत्थर के द्वारा कितनी ऊँचाई प्राप्त की गई तथा उसे वहाँ पहुँचने में कितना समय लगा?
Answer: दिया गया है:
प्रारंभिक वेग \( u = 5 \text{ मी/से} \)
गुरुत्वीय त्वरण \( a = -10 \text{ मी/से}^2 \) (ऊपर की ओर गति के लिए, त्वरण नीचे की ओर होने के कारण ऋणात्मक)
उच्चतम बिंदु पर अंतिम वेग \( v = 0 \text{ मी/से} \)

(i) प्राप्त ऊँचाई (h) की गणना:
गति के तीसरे समीकरण का उपयोग करें: \( v^2 = u^2 + 2as \)
\( 0^2 = 5^2 + 2 \times (-10) \times h \)
\( 0 = 25 - 20h \)
\( 20h = 25 \)
\( h = \frac {25}{20} = \frac {5}{4} = 1.25 \text{ मीटर} \)
अतः पत्थर 1.25 मीटर की ऊँचाई प्राप्त करेगा.

(ii) उच्चतम बिंदु तक पहुँचने में लगा समय (t) की गणना:
गति के पहले समीकरण का उपयोग करें: \( v = u + at \)
\( 0 = 5 + (-10) \times t \)
\( 0 = 5 - 10t \)
\( 10t = 5 \)
\( t = \frac {5}{10} = 0.5 \text{ सेकण्ड} \)
अतः पत्थर को उच्चतम बिंदु तक पहुँचने में 0.5 सेकंड का समय लगेगा.
In simple words: पत्थर को ऊपर फेंकने पर उसकी आखिरी स्पीड ज़ीरो हो जाती है. फॉर्मूला लगाकर पता किया कि वह 1.25 मीटर ऊपर जाएगा और वहाँ तक पहुँचने में 0.5 सेकंड लगेंगे.

🎯 Exam Tip: ऊपर की ओर गति में गुरुत्वाकर्षण त्वरण हमेशा ऋणात्मक लिया जाता है क्योंकि यह गति की विपरीत दिशा में कार्य करता है. उच्चतम बिंदु पर वस्तु का अंतिम वेग हमेशा शून्य होता है.

 

Question 5. ऊषा 90 m लम्बे तालाब में तैरती है। वह एक सिरे से दूसरे सिरे तक सरल रेखीय पथ पर जाती है तथा वापस आती है। इस दौरान वह कुल 180 m की दूरी 1 मिनट में तय करती है। ऊषा की औसत चाल और औसत वेग को ज्ञात कीजिए।
Answer: ऊषा द्वारा 1 मिनट में तय की गई कुल दूरी 180 m है। 1 मिनट में ऊषा का विस्थापन 0 m है क्योंकि वह वापस शुरुआती बिंदु पर आ जाती है।
औसत चाल \( = \frac{\text{तय की गई कुल दूरी}}{\text{लिया गया कुल समय}} \)
\( = \frac{180 \text{ m}}{1 \text{ min}} = \frac{180 \text{ m}}{60 \text{ s}} = 3 \text{ ms}^{-1} \)
औसत वेग \( = \frac{\text{विस्थापन}}{\text{लिया गया कुल समय}} \)
\( = \frac{0 \text{ m}}{60 \text{ s}} = 0 \text{ ms}^{-1} \)
अतः ऊषा की औसत चाल \( 3 \text{ ms}^{-1} \) है और औसत वेग \( 0 \text{ ms}^{-1} \) है। एक वस्तु का औसत वेग शून्य हो सकता है यदि उसका कुल विस्थापन शून्य हो, भले ही उसने कोई दूरी तय की हो।
In simple words: ऊषा ने 180 मीटर चला लेकिन फिर से वहीं वापस आ गई, इसलिए उसकी औसत चाल 3 मीटर प्रति सेकंड है लेकिन औसत वेग शून्य है।

🎯 Exam Tip: औसत चाल और औसत वेग में अंतर को हमेशा स्पष्ट रखें - औसत चाल कुल दूरी को कुल समय से विभाजित करती है, जबकि औसत वेग कुल विस्थापन को कुल समय से विभाजित करता है।

 

Question 6. किसी कार पर ब्रेक लगाने पर गति के विपरीत दिशा में 6 ms⁻² का त्वरण उत्पन्न होता है। यदि कार ब्रेक लगाए जाने के बाद रुकने में 5s का समय लेती है तो उतने समय में तय की गई दूरी परिकलित करें।
Answer: दिया गया है:
त्वरण \( a = -6 \text{ ms}^{-2} \) (ऋणात्मक क्योंकि यह गति की विपरीत दिशा में है)
समय \( t = 5 \text{ s} \)
कार रुक जाती है, इसलिए अंतिम वेग \( v = 0 \text{ ms}^{-1} \)
गति के पहले समीकरण \( v = u + at \) का उपयोग करके, हम प्रारंभिक वेग (\( u \)) ज्ञात कर सकते हैं:
\( 0 = u + (-6) \times 5 \)
\( 0 = u - 30 \)
\( u = 30 \text{ ms}^{-1} \)
अब, तय की गई दूरी (\( s \)) ज्ञात करने के लिए गति के दूसरे समीकरण \( s = ut + \frac{1}{2}at^2 \) का उपयोग करें:
\( s = (30)(5) + \frac{1}{2}(-6)(5)^2 \)
\( s = 150 + \frac{1}{2}(-6)(25) \)
\( s = 150 - (3)(25) \)
\( s = 150 - 75 \)
\( s = 75 \text{ m} \)
अतः, ब्रेक लगाने के बाद कार द्वारा 75 मीटर की दूरी तय की जाएगी। यहाँ ऋणात्मक त्वरण का अर्थ है कि वस्तु धीमा हो रही है या उसकी गति घट रही है।
In simple words: ब्रेक लगाने पर कार गति के उल्टी दिशा में धीमी होती है। 5 सेकंड में रुकने से पहले, कार 75 मीटर आगे जाएगी।

🎯 Exam Tip: जब कोई वस्तु रुक रही हो, तो उसका अंतिम वेग हमेशा शून्य (\( v = 0 \)) होता है। ब्रेक लगाने से उत्पन्न त्वरण हमेशा ऋणात्मक होता है क्योंकि यह गति की विपरीत दिशा में होता है।

 

Question 7. किसी कार पर ब्रेक लगाने से वह गति की विपरीत दिशा में 6 मीटर/सेकण्ड² का त्वरण उत्पन्न करती है। यदि कार ब्रेक लगाये जाने के बाद रुकने में 2 सेकण्टु का समय लेती है तो उतने समय में तय की गई दूरी की गणना कीजिए।
Answer: दिया गया है:
त्वरण \( a = -6 \text{ m/s}^2 \) (गति की विपरीत दिशा में होने के कारण ऋणात्मक)
समय \( t = 2 \text{ s} \)
चूंकि कार रुक जाती है, उसका अंतिम वेग \( v = 0 \text{ m/s} \)।
सबसे पहले, हम कार का प्रारंभिक वेग (\( u \)) ज्ञात करेंगे, जब ब्रेक लगाए गए थे, गति के पहले समीकरण का उपयोग करके:
\( v = u + at \)
\( 0 = u + (-6 \text{ m/s}^2) \times (2 \text{ s}) \)
\( 0 = u - 12 \text{ m/s} \)
\( u = 12 \text{ m/s} \)
अब, गति के दूसरे समीकरण \( s = ut + \frac{1}{2}at^2 \) का उपयोग करके तय की गई दूरी (\( s \)) ज्ञात करें:
\( s = (12 \text{ m/s}) \times (2 \text{ s}) + \frac{1}{2}(-6 \text{ m/s}^2) \times (2 \text{ s})^2 \)
\( s = 24 \text{ m} + \frac{1}{2}(-6 \text{ m/s}^2) \times (4 \text{ s}^2) \)
\( s = 24 \text{ m} - 12 \text{ m} \)
\( s = 12 \text{ m} \)
अतः, ब्रेक लगाने के बाद कार 12 मीटर की दूरी तय करती है। यह दिखाता है कि कैसे प्रारंभिक वेग और त्वरण मिलकर वस्तु की गति को नियंत्रित करते हैं।
In simple words: ब्रेक लगाने के बाद, कार 2 सेकंड में रुकने से पहले 12 मीटर चली। त्वरण ऋणात्मक है क्योंकि यह गति को धीमा कर रहा है।

🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि आप त्वरण के चिन्ह को सही ढंग से लागू करें - गति कम होने पर यह ऋणात्मक होता है, और गति बढ़ने पर धनात्मक।

 

Question 8. एक गोली 90 मीटर/सेकण्ड के वेग से लक्ष्य से टकराकर (0,3) सेकण्ड में रुक जाती है। गोली का मन्दन ज्ञात कीजिए।
Answer: दिया गया है:
प्रारंभिक वेग \( u = 90 \text{ m/s} \)
अंतिम वेग \( v = 0 \text{ m/s} \) (क्योंकि गोली रुक जाती है)
समय \( t = 0.3 \text{ s} \)
गति के पहले समीकरण \( v = u + at \) का उपयोग करके, हम त्वरण (\( a \)) ज्ञात कर सकते हैं:
\( 0 = 90 + a \times 0.3 \)
\( -90 = a \times 0.3 \)
\( a = \frac{-90}{0.3} \)
\( a = -300 \text{ m/s}^2 \)
गोली का मन्दन \( 300 \text{ m/s}^2 \) है। मन्दन का अर्थ है ऋणात्मक त्वरण, यानी वस्तु की गति कम हो रही है।
In simple words: गोली 90 मीटर/सेकंड से चल रही थी, लेकिन 0.3 सेकंड में रुक गई। इसका मतलब है कि गोली 300 मीटर/सेकंड² की दर से धीमी हुई।

🎯 Exam Tip: मन्दन हमेशा त्वरण का ऋणात्मक मान होता है। जब किसी वस्तु की गति धीमी होती है, तो त्वरण ऋणात्मक होता है और इसे मन्दन कहते हैं।

 

Question 9. 9.8 kg द्रव्यमान की एक वस्तु पर 4 kg wt का बल लगता है। वस्तु में उत्पन्न त्वरण ज्ञात कीजिए। (g = 9.8 N/kg)
Answer: दिया गया है:
वस्तु का द्रव्यमान \( m = 9.8 \text{ kg} \)
लगाया गया बल \( F = 4 \text{ kg wt} \)
गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण \( g = 9.8 \text{ N/kg} \text{ (या m/s}^2 \))
सबसे पहले, बल को न्यूटन में परिवर्तित करें:
\( 1 \text{ kg wt} = 9.8 \text{ N} \)
तो, \( 4 \text{ kg wt} = 4 \times 9.8 \text{ N} = 39.2 \text{ N} \)
न्यूटन के गति के दूसरे नियम \( F = ma \) का उपयोग करके, हम त्वरण (\( a \)) ज्ञात कर सकते हैं:
\( a = \frac{F}{m} \)
\( a = \frac{39.2 \text{ N}}{9.8 \text{ kg}} \)
\( a = 4 \text{ m/s}^2 \)
अतः, वस्तु में उत्पन्न त्वरण \( 4 \text{ m/s}^2 \) है। यह दर्शाता है कि बल और द्रव्यमान सीधे त्वरण से कैसे संबंधित हैं।
In simple words: 9.8 किग्रा की वस्तु पर 4 किग्रा भार जितना बल लगाने पर, वह वस्तु 4 मीटर प्रति सेकंड की दर से तेज हो जाएगी।

🎯 Exam Tip: "kg wt" (किलोग्राम भार) बल की एक इकाई है जिसे न्यूटन में बदलना आवश्यक है। हमेशा ध्यान रखें कि 1 kg wt पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण 1 kg द्रव्यमान पर लगने वाले बल के बराबर होता है, जो लगभग 9.8 N है।

 

Question 10. 1500 kg की एक कार को विरामावस्था से 10s में 30 m/s का वेग प्रदान करने के लिए कितने बल की आवश्यकता होगी?
Answer: दिया गया है:
कार का द्रव्यमान \( m = 1500 \text{ kg} \)
प्रारंभिक वेग \( u = 0 \text{ m/s} \) (क्योंकि कार विरामावस्था में है)
अंतिम वेग \( v = 30 \text{ m/s} \)
समय \( t = 10 \text{ s} \)
सबसे पहले, हम कार का त्वरण (\( a \)) ज्ञात करेंगे, गति के पहले समीकरण \( v = u + at \) का उपयोग करके:
\( 30 = 0 + a \times 10 \)
\( 10a = 30 \)
\( a = \frac{30}{10} = 3 \text{ m/s}^2 \)
अब, न्यूटन के गति के दूसरे नियम \( F = ma \) का उपयोग करके बल (\( F \)) ज्ञात करें:
\( F = 1500 \text{ kg} \times 3 \text{ m/s}^2 \)
\( F = 4500 \text{ N} \)
अतः, कार को वांछित वेग प्रदान करने के लिए 4500 न्यूटन बल की आवश्यकता होगी। यह दर्शाता है कि अधिक द्रव्यमान वाली वस्तु को गति देने के लिए अधिक बल की आवश्यकता होती है।
In simple words: 1500 किग्रा की कार को 10 सेकंड में 30 मीटर/सेकंड की गति तक पहुँचाने के लिए 4500 न्यूटन बल लगाना होगा।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों को हल करते समय, पहले त्वरण ज्ञात करें और फिर उस त्वरण को प्राप्त करने के लिए आवश्यक बल की गणना करें। हमेशा न्यूटन के दूसरे नियम (\( F=ma \)) का उपयोग करें।

 

Question 11. एक 5 किग्रा. की रायफल 500 मीटर/सेकण्ड के वेग से 10 ग्राम की गोली छोड़ती है। रायफल का गोली छोड़ने का वेग ज्ञात करो।
Answer: संवेग संरक्षण के नियम का उपयोग करेंगे। इस नियम के अनुसार, एक बंद निकाय का कुल संवेग हमेशा संरक्षित रहता है यदि उस पर कोई बाहरी बल न लग रहा हो।
गोली छोड़ने से पहले, रायफल और गोली दोनों विरामावस्था में होते हैं, इसलिए कुल प्रारंभिक संवेग शून्य होता है।
गोली छोड़ने से पहले कुल संवेग \( = 0 \)
दिया गया है:
रायफल का द्रव्यमान \( m_1 = 5 \text{ kg} \)
गोली का द्रव्यमान \( m_2 = 10 \text{ g} = 10 \times 10^{-3} \text{ kg} = 0.01 \text{ kg} \)
गोली का वेग \( v_2 = 500 \text{ m/s} \)
मान लीजिए रायफल का प्रतिक्षेप वेग \( v_1 \) है।
संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार, गोली छोड़ने के बाद कुल संवेग भी शून्य होना चाहिए:
\( m_1v_1 + m_2v_2 = 0 \)
\( (5 \text{ kg}) \times v_1 + (0.01 \text{ kg}) \times (500 \text{ m/s}) = 0 \)
\( 5v_1 + 5 = 0 \)
\( 5v_1 = -5 \)
\( v_1 = -1 \text{ m/s} \)
अतः, रायफल का प्रतिक्षेप वेग \( -1 \text{ m/s} \) है। ऋणात्मक चिन्ह दर्शाता है कि रायफल गोली की गति की विपरीत दिशा में पीछे हटती है।
In simple words: जब बंदूक गोली छोड़ती है, तो गोली आगे जाती है और बंदूक पीछे हटती है। 5 किलो की बंदूक से 10 ग्राम की गोली 500 मीटर/सेकंड से निकलने पर, बंदूक 1 मीटर/सेकंड की गति से पीछे जाएगी।

🎯 Exam Tip: संवेग संरक्षण के नियम में, हमेशा ध्यान रखें कि कुल प्रारंभिक संवेग कुल अंतिम संवेग के बराबर होता है। दिशा का प्रतिनिधित्व करने के लिए वेग के लिए सही चिन्हों का उपयोग करें।

 

Question 12. दो गोले 20 kg तथा 80 kg द्रव्यमान के क्रमशः 40 m/s तथा 10 m/s के वेग से एक-दूसरे की ओर आ रहे हैं। यदि वे टकराकर जुड़ जायें तो संयुक्त गोला किस वेग से गति करेगा?
Answer: संवेग संरक्षण के नियम का उपयोग करेंगे।
दिया गया है:
पहले गोले का द्रव्यमान \( m_1 = 20 \text{ kg} \)
पहले गोले का वेग \( u_1 = 40 \text{ m/s} \)
दूसरे गोले का द्रव्यमान \( m_2 = 80 \text{ kg} \)
दूसरे गोले का वेग \( u_2 = -10 \text{ m/s} \) (क्योंकि यह पहले गोले की विपरीत दिशा में आ रहा है)
टक्कर से पहले कुल संवेग \( P_{\text{initial}} = m_1u_1 + m_2u_2 \)
\( P_{\text{initial}} = (20 \text{ kg})(40 \text{ m/s}) + (80 \text{ kg})(-10 \text{ m/s}) \)
\( P_{\text{initial}} = 800 \text{ kg m/s} - 800 \text{ kg m/s} \)
\( P_{\text{initial}} = 0 \text{ kg m/s} \)
टक्कर के बाद, दोनों गोले जुड़ जाते हैं, इसलिए उनका कुल द्रव्यमान \( M = m_1 + m_2 = 20 \text{ kg} + 80 \text{ kg} = 100 \text{ kg} \)
मान लीजिए संयुक्त गोले का वेग \( V \) है।
टक्कर के बाद कुल संवेग \( P_{\text{final}} = MV = (100 \text{ kg})V \)
संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार, \( P_{\text{initial}} = P_{\text{final}} \)
\( 0 = (100 \text{ kg})V \)
\( V = 0 \text{ m/s} \)
अतः, टक्कर के बाद संयुक्त गोला रुक जाएगा। यह एक अच्छा उदाहरण है कि कैसे दो विपरीत संवेग एक दूसरे को रद्द कर सकते हैं।
In simple words: 20 किग्रा और 80 किग्रा के दो गोले अलग-अलग गति से एक-दूसरे की ओर आ रहे थे। जब वे टकराकर जुड़ गए, तो वे रुक गए क्योंकि उनके शुरुआती वेगों ने कुल संवेग को शून्य कर दिया था।

🎯 Exam Tip: संवेग संरक्षण के प्रश्नों में, विपरीत दिशाओं में गति के लिए वेगों के चिन्हों का सही उपयोग करना महत्वपूर्ण है। यदि कुल प्रारंभिक संवेग शून्य है, तो अंतिम संवेग भी शून्य होगा।

 

Question 13. 6 किग्रा का एक पिण्ड स्थिर अवस्था में रखा है। उस पर कितना बल लगाया जाए कि उसमें 4 सेकण्ड में 4 मीटर/सेकण्ड का वेग उत्पन्न हो जाए।
Answer: दिया गया है:
पिण्ड का द्रव्यमान \( m = 6 \text{ kg} \)
प्रारंभिक वेग \( u = 0 \text{ m/s} \) (क्योंकि पिण्ड स्थिर अवस्था में है)
अंतिम वेग \( v = 4 \text{ m/s} \)
समय \( t = 4 \text{ s} \)
सबसे पहले, हम पिण्ड में उत्पन्न त्वरण (\( a \)) ज्ञात करेंगे, गति के पहले समीकरण \( v = u + at \) का उपयोग करके:
\( 4 = 0 + a \times 4 \)
\( 4a = 4 \)
\( a = \frac{4}{4} = 1 \text{ m/s}^2 \)
अब, न्यूटन के गति के दूसरे नियम \( F = ma \) का उपयोग करके आवश्यक बल (\( F \)) ज्ञात करें:
\( F = 6 \text{ kg} \times 1 \text{ m/s}^2 \)
\( F = 6 \text{ N} \)
अतः, पिण्ड में वांछित वेग उत्पन्न करने के लिए 6 न्यूटन बल की आवश्यकता होगी। यह दर्शाता है कि बल, द्रव्यमान और त्वरण आपस में कैसे जुड़े हुए हैं।
In simple words: 6 किग्रा के रुके हुए पिण्ड को 4 सेकंड में 4 मीटर/सेकंड की गति देने के लिए 6 न्यूटन का बल लगाना होगा।

🎯 Exam Tip: बल के प्रश्नों में, यदि वस्तु स्थिर अवस्था में है, तो उसका प्रारंभिक वेग हमेशा शून्य मानें। त्वरण की गणना करने के बाद, बल ज्ञात करने के लिए \( F=ma \) सूत्र का उपयोग करें।

 

Question 14. रायफल से 50 g की गोली 400 m/s के वेग से निकलती है। रायफल 4 m/s के वेग से पीछे हटती है। रायफल का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
Answer: संवेग संरक्षण के नियम का उपयोग करेंगे। गोली चलाने से पहले, रायफल और गोली दोनों विरामावस्था में होते हैं, इसलिए कुल प्रारंभिक संवेग शून्य होता है।
गोली चलाने से पहले कुल संवेग \( = 0 \)
दिया गया है:
गोली का द्रव्यमान \( m_g = 50 \text{ g} = 0.05 \text{ kg} \)
गोली का वेग \( v_g = 400 \text{ m/s} \)
रायफल का वेग \( v_r = -4 \text{ m/s} \) (ऋणात्मक चिन्ह क्योंकि यह गोली की गति की विपरीत दिशा में है)
मान लीजिए रायफल का द्रव्यमान \( m_r \) है।
संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार, गोली चलाने के बाद कुल संवेग भी शून्य होना चाहिए:
\( m_r v_r + m_g v_g = 0 \)
\( m_r \times (-4 \text{ m/s}) + (0.05 \text{ kg}) \times (400 \text{ m/s}) = 0 \)
\( -4m_r + 20 = 0 \)
\( 4m_r = 20 \)
\( m_r = \frac{20}{4} = 5 \text{ kg} \)
अतः, रायफल का द्रव्यमान 5 किग्रा है। यह परिणाम संवेग संरक्षण के सिद्धांत के अनुरूप है।
In simple words: एक बंदूक 400 मीटर/सेकंड की गति से 50 ग्राम की गोली चलाती है और 4 मीटर/सेकंड की गति से पीछे हटती है। इसका मतलब है कि बंदूक का वजन 5 किग्रा है।

🎯 Exam Tip: संवेग संरक्षण के प्रश्नों में, हमेशा ध्यान रखें कि गोली चलने से पहले और बाद का कुल संवेग समान होता है। विपरीत दिशाओं के लिए वेग के चिन्हों का सही उपयोग करें।

 

Question 15. 1000 kg की एक मोटर कार 4 m/s के वेग से जा रही है। 10,000 kg का एक ट्रक विपरीत दिशा से आता है तथा कार से टकरा जाता है। दोनों गाड़ियाँ तुरन्त रुक जाती हैं। ट्रक का वेग ज्ञात कीजिए।
Answer: संवेग संरक्षण के नियम का उपयोग करेंगे। टक्कर से पहले कुल संवेग टक्कर के बाद कुल संवेग के बराबर होता है।
दिया गया है:
कार का द्रव्यमान \( m_c = 1000 \text{ kg} \)
कार का वेग \( v_c = 4 \text{ m/s} \)
ट्रक का द्रव्यमान \( m_t = 10,000 \text{ kg} \)
ट्रक का वेग \( v_t \) (ज्ञात करना है, विपरीत दिशा में होने के कारण ऋणात्मक होगा)
टक्कर से पहले कुल संवेग \( P_{\text{initial}} = m_c v_c + m_t v_t \)
\( P_{\text{initial}} = (1000 \text{ kg})(4 \text{ m/s}) + (10,000 \text{ kg})v_t \)
\( P_{\text{initial}} = 4000 + 10000v_t \)
टक्कर के बाद, दोनों गाड़ियाँ तुरन्त रुक जाती हैं, इसलिए उनका अंतिम वेग \( V_{\text{final}} = 0 \text{ m/s} \)।
टक्कर के बाद कुल संवेग \( P_{\text{final}} = (m_c + m_t)V_{\text{final}} = (1000 + 10000) \times 0 = 0 \)
संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार, \( P_{\text{initial}} = P_{\text{final}} \)
\( 4000 + 10000v_t = 0 \)
\( 10000v_t = -4000 \)
\( v_t = \frac{-4000}{10000} \)
\( v_t = -0.4 \text{ m/s} \)
अतः, ट्रक का वेग टक्कर से पहले \( 0.4 \text{ m/s} \) था, और ऋणात्मक चिन्ह दर्शाता है कि यह कार की विपरीत दिशा में आ रहा था। टक्कर के बाद दोनों गाड़ियों का कुल संवेग शून्य हो जाता है।
In simple words: 1000 किग्रा की कार 4 मीटर/सेकंड से चल रही थी। 10,000 किग्रा का एक ट्रक विपरीत दिशा से आकर टकराया और दोनों रुक गए। इसका मतलब है कि ट्रक 0.4 मीटर/सेकंड की गति से आ रहा था।

🎯 Exam Tip: संवेग संरक्षण के प्रश्नों में, विपरीत दिशाओं में गति के लिए वेग के चिन्हों का सही उपयोग करना महत्वपूर्ण है। यदि वस्तुएँ टकराकर रुक जाती हैं, तो टक्कर के बाद उनका कुल वेग शून्य होता है।

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