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Detailed Chapter 8 सजीवों की प्रमुख क्रियाएँ RBSE Solutions for Class 9 Science
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Class 9 Science Chapter 8 सजीवों की प्रमुख क्रियाएँ RBSE Solutions PDF
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. पादपों में जल का संवहन होता है
(a) फ्लोएम द्वारा
(b) जाइलम द्वारा
(c) चालनी नलिका द्वारा
(d) अधिचर्म द्वारा।
Answer: (b) जाइलम द्वारा
In simple words: पौधों में पानी एक खास रास्ते से ऊपर जाता है, जिसे जाइलम कहते हैं. यह पौधों के हर हिस्से तक पानी पहुँचाने का काम करता है.
🎯 Exam Tip: याद रखें कि जाइलम हमेशा जल का परिवहन करता है, जबकि फ्लोएम खाद्य पदार्थों का.
Question 2. पौधों को जो जल प्राप्त होता है, वह है
(a) आर्द्रताग्राही जल
(b) गुरुत्व जल
(c) बिन्द साव से प्राप्त जल
(d) केशिका जल।
Answer: (d) केशिका जल।
In simple words: पौधे मिट्टी से वही पानी सोखते हैं जो छोटे-छोटे छेदों में फंसा होता है, इसे केशिका जल कहते हैं. यह पौधों की जड़ों को आसानी से मिल जाता है.
🎯 Exam Tip: केशिका जल पौधों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह जड़ों के माध्यम से आसानी से उपलब्ध होता है.
Question 3. रन्ध्रों द्वारा विनिमय होता है
(a) जल वाष्प एवं गैसों का
(b) ऑक्सीजन एवं कार्बोहाइड्रेट का
(c) ऑक्सीजन एवं हाइड्रोजन का
(d) नाइट्रोजन एवं जलवाष्प का।
Answer: (a) जल वाष्प एवं गैसों का
In simple words: पौधों की पत्तियों पर छोटे-छोटे छेद होते हैं जिन्हें रंध्र कहते हैं. इन्हीं छेदों से पौधे पानी को भाप बनाकर बाहर निकालते हैं और हवा से गैसों को अंदर-बाहर करते हैं.
🎯 Exam Tip: रंध्रों के खुलने और बंद होने से वाष्पोत्सर्जन और गैसीय विनिमय नियंत्रित होता है, जो पौधे के लिए बहुत जरूरी है.
Question 4. खाद्य पदार्थों का संवहन निम्न के द्वारा होता है
(a) जाइलम।
(b) फ्लोएम।
(c) वातरन्ध्र
(d) अधिचर्म।
Answer: (b) फ्लोएम।
In simple words: पौधों में बना खाना, जो पत्तियों में बनता है, फ्लोएम नाम की नसों से पौधे के बाकी हिस्सों तक पहुँचता है. यह खाना पूरे पौधे को बढ़ने और ताकत देने में मदद करता है.
🎯 Exam Tip: फ्लोएम पत्तियों से बने भोजन को पौधे के सभी भागों में पहुँचाता है, जबकि जाइलम जल और खनिजों का परिवहन करता है.
Question 5. हीमोग्लोबिन पाया जाता है
(a) लालरक्त कणिका
(b) श्वेतरक्त कणिका
(c) हीमोग्लोबिन
(d) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (a) लालरक्त कणिका
In simple words: हीमोग्लोबिन हमारे खून में लाल रक्त कोशिकाओं के अंदर होता है. यह ऑक्सीजन को पूरे शरीर में ले जाने का काम करता है.
🎯 Exam Tip: हीमोग्लोबिन की उपस्थिति के कारण ही रक्त का रंग लाल होता है और यह ऑक्सीजन का मुख्य वाहक है.
Question 6. सामान्यतः शरीर का प्रकुंचन दाब कितना होता है?
(a) 120 ruin Hg
(b) 90 mm Hg
(c) 140 tim H
(d) 80 mm Hg.
Answer: (a) 120 ruin Hg
In simple words: जब दिल सिकुड़ता है और खून को बाहर धकेलता है, उस समय रक्त धमनियों पर जो दबाव डालता है, उसे प्रकुंचन दाब कहते हैं. यह आमतौर पर 120 mm Hg होता है, जो स्वस्थ व्यक्ति का ऊपरी रक्तचाप है.
🎯 Exam Tip: सामान्य प्रकुंचन दाब 120 mm Hg होता है, जबकि अनुशिथिलन दाब 80 mm Hg होता है, और दोनों मिलकर रक्तचाप को दर्शाते हैं.
Question 7. आमाशय का कार्य नहीं हैं
(a) भोजन का संग्रहण
(b) अवशोषण
(c) पाचन
(d) वसा का पूर्ण पाचन।
Answer: (d) वसा का पूर्ण पाचन।
In simple words: पेट भोजन को जमा करता है और उसका पाचन शुरू करता है, लेकिन वसा का पूरा पाचन पेट में नहीं होता है. वसा का अधिकांश पाचन छोटी आँत में होता है.
🎯 Exam Tip: आमाशय में प्रोटीन का पाचन शुरू होता है, और यह भोजन को संग्रहित भी करता है, लेकिन वसा का पूर्ण पाचन छोटी आँत में ही होता है.
Question 8. विखण्डन का प्रमुख उदाहरण हैं
(a) स्पाइरोगायरा
(b) प्रायोफिल्लम
(c) यीस्ट
(d) अमीबा
Answer: (a) स्पाइरोगायरा
In simple words: विखंडन वह प्रक्रिया है जिसमें एक जीव दो या दो से अधिक टुकड़ों में टूटकर नए जीव बनाता है. स्पाइरोगायरा में यह प्रक्रिया आम है, जहाँ यह फिलामेंट छोटे खंडों में टूट जाते हैं.
🎯 Exam Tip: विखंडन अलैंगिक प्रजनन का एक तरीका है, जो सरल जीवों में नए जीव बनाने में मदद करता है.
Question 10. बीजाण्ड अवस्थित होते हैं
(a) अण्डाशय में
(b) वर्तिका में
(c) पुंकेसर में
(d) भ्रूणपोष में।
Answer: (a) अण्डाशय में
In simple words: पौधों में बीजांड अंडाशय के अंदर होते हैं. यहीं पर निषेचन के बाद बीज बनते हैं. अंडाशय फूल का वह हिस्सा है जहाँ से फल बनता है.
🎯 Exam Tip: बीजांड में ही अंडे कोशिकाएँ होती हैं जो परागण और निषेचन के बाद बीज में विकसित होती हैं.
Question 11. पादपों की उपापचय क्रिया मुख्यतः आधारित है
(a) प्रोटीन पर
(b) वसा पर
(c) कार्बोहाइड्रेट पर
(d) विटामिन 'पर।
Answer: (s) कार्बोहाइड्रेट पर
In simple words: पौधों में ज़्यादातर सभी ज़रूरी काम जैसे बढ़ना, खाना बनाना, और ऊर्जा पैदा करना कार्बोहाइड्रेट पर निर्भर करते हैं. कार्बोहाइड्रेट पौधे को तुरंत ऊर्जा और संरचनात्मक सहायता देते हैं.
🎯 Exam Tip: पौधों में कार्बोहाइड्रेट प्रकाश संश्लेषण द्वारा बनते हैं और ऊर्जा के मुख्य स्रोत के रूप में कार्य करते हैं.
Question 12. जल रन्ध्र पाये जाते हैं
(a) जड़ में
(b) तने में
(c) पत्ती में
(d) फूल में।
Answer: (c) पत्ती में
In simple words: जल रंध्र पौधों की पत्तियों पर मौजूद छोटे-छोटे छेद होते हैं, जिनसे अतिरिक्त पानी बूंदों के रूप में बाहर निकलता है. ये रंध्र पत्तियों के किनारों पर अधिक पाए जाते हैं.
🎯 Exam Tip: जल रंध्र से पानी का निकलना 'बिंदुस्राव' कहलाता है, जो उच्च मूल दाब के कारण होता है जब वाष्पोत्सर्जन कम होता है.
Question 14. यूरियोटेलिक उत्सर्जन पाया जाता है
(a) अमीबा व मेंढक में
(b) पक्षी व मछली में
(c) मछली व सर्प में
(d) मानव व मेंढक में।
Answer: (d) मानव व मेंढक में।
In simple words: यूरियोटेलिक उत्सर्जन का मतलब है कि जीव अपने अपशिष्ट पदार्थ को यूरिया के रूप में बाहर निकालते हैं. इंसान और मेंढक दोनों ऐसा करते हैं.
🎯 Exam Tip: यूरिया, अमोनिया की तुलना में कम विषैला होता है और इसे उत्सर्जित करने के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है.
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. जलीय पौधों में उत्सर्जन किस विधि द्वारा होता है?
Answer: जलीय पौधों में उत्सर्जन मुख्यतः विसरण (Diffusion) विधि द्वारा होता है. इस प्रक्रिया में पौधे अपने शरीर से अतिरिक्त पदार्थों को पानी में छोड़ देते हैं. जलीय वातावरण में रहने के कारण उन्हें विशेष उत्सर्जी अंगों की आवश्यकता नहीं होती है.
In simple words: जलीय पौधे अपने बेकार पदार्थों को पानी में घोलकर विसरण से बाहर निकालते हैं.
🎯 Exam Tip: विसरण एक निष्क्रिय प्रक्रिया है जिसमें पदार्थ अधिक सांद्रता वाले क्षेत्र से कम सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर गति करते हैं.
Question 2. द्वार कोशिकाओं का क्या कार्य है ?
Answer: पर्ण रंध्रों की द्वार कोशिकाएँ रंध्र (Stomata) को खोलने व बंद करने का कार्य करती हैं. जब यह स्फीत (turgid) होती हैं, तो रंध्र खुल जाते हैं और इनके पिचकने (flaccid) पर रंध्र बंद हो जाते हैं. ये कोशिकाएँ प्रकाश संश्लेषण और वाष्पोत्सर्जन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.
In simple words: द्वार कोशिकाएँ पत्ती के छोटे छेदों (रंध्र) को खोलती और बंद करती हैं, जिससे पौधे सांस ले सकें और पानी छोड़ सकें.
🎯 Exam Tip: द्वार कोशिकाओं में पानी की मात्रा रंध्रों के खुलने और बंद होने को सीधे प्रभावित करती है.
Question 3. यूरिकोटेलिक उत्सर्जन किसे कहते हैं ?
Answer: जब उपापचयी क्रियाओं में बने यूरिक अम्ल का उत्सर्जी पदार्थ के रूप में उत्सर्जन होता है, तब इसे यूरिकोटेलिक उत्सर्जन कहते हैं. पक्षी और छिपकली जैसे जीव यूरिक अम्ल का उत्सर्जन करते हैं, क्योंकि इसे निकालने के लिए बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है. यह विशेष रूप से उन जीवों के लिए उपयोगी है जो सूखे वातावरण में रहते हैं.
In simple words: जब कोई जीव अपने बेकार पदार्थ को यूरिक अम्ल के रूप में बाहर निकालता है, तो उसे यूरिकोटेलिक उत्सर्जन कहते हैं. पक्षी और छिपकली इसके उदाहरण हैं.
🎯 Exam Tip: यूरिकोटेलिक जीव अपने शरीर से पानी के नुकसान को कम करने के लिए यूरिक अम्ल का उत्सर्जन करते हैं.
Question 4. पौधे के मुख्य दो भाग बताइए।
Answer: पौधे के मुख्य दो भाग हैं:
(i) जड़ तंत्र या मूल तंत्र, जो पौधे को मिट्टी में स्थिर रखता है और पानी व खनिज सोखता है.
(ii) प्ररोह तंत्र (तना, शाखाएँ, पत्तियाँ व पुष्प), जो प्रकाश संश्लेषण, प्रजनन और परिवहन का कार्य करता है. ये दोनों भाग मिलकर पौधे को जीवित रहने में मदद करते हैं.
In simple words: पौधे के दो मुख्य भाग होते हैं: जड़ (जो मिट्टी में होती है) और प्ररोह (जो जमीन के ऊपर तना, पत्ते और फूल होते हैं).
🎯 Exam Tip: याद रखें कि जड़ तंत्र हमेशा मिट्टी के नीचे होता है और प्ररोह तंत्र मिट्टी के ऊपर, दोनों पौधे के जीवन के लिए आवश्यक हैं.
Question 6. फ्लोएम का क्या कार्य है ?
Answer: फ्लोएम नामक संवहन ऊतक का कार्य प्रकाश संश्लेषण द्वारा बनाये गये तरल कार्बनिक भोज्य पदार्थ का संवहन है. यह पत्तियों में बने भोजन (शर्करा) को पौधे के उन सभी भागों तक पहुँचाता है जहाँ उसकी आवश्यकता होती है, जैसे जड़ों, फलों और बढ़ते हुए भागों तक. यह एक महत्वपूर्ण परिवहन प्रणाली है.
In simple words: फ्लोएम पत्तियों में बने खाने को पौधे के हर हिस्से तक पहुँचाता है.
🎯 Exam Tip: फ्लोएम भोजन का परिवहन करता है, जबकि जाइलम जल का परिवहन करता है. यह दोनों पौधे के संवहन तंत्र के मुख्य भाग हैं.
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. जलीय पौधों में उत्सर्जन किस विधि द्वारा होता है?
Answer: जलीय पौधों में उत्सर्जन मुख्यतः विसरण (Diffusion) द्वारा होता है. इसमें पौधे अपने अपशिष्ट पदार्थों को सीधे आसपास के जल में छोड़ देते हैं, क्योंकि पानी में हमेशा कम सांद्रता होती है. यह एक सरल और प्रभावी तरीका है.
In simple words: पानी वाले पौधे अपने बेकार पदार्थों को सीधे पानी में विसरण की मदद से छोड़ते हैं.
🎯 Exam Tip: विसरण वह प्रक्रिया है जहाँ पदार्थ उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर गति करते हैं, जो जलीय पौधों के लिए आसान है.
Question 2. द्वार कोशिकाओं का क्या कार्य है ?
Answer: पर्ण रंध्रों की द्वार कोशिकाएँ रंध्र (Stomata) को खोलने व बंद करने का कार्य करती हैं. जब ये कोशिकाएँ पानी से भरकर फूल जाती हैं (स्फीत या turgid), तो रंध्र खुल जाते हैं, और जब ये पानी खोकर पिचक जाती हैं (flaccid), तो रंध्र बंद हो जाते हैं. यह क्रिया गैसीय विनिमय और वाष्पोत्सर्जन को नियंत्रित करती है. ये पौधे को पानी बचाने में मदद करती हैं.
In simple words: द्वार कोशिकाएँ पत्ती के छेदों (रंध्रों) को खोलती और बंद करती हैं, जिससे पौधे सांस ले सकें और पानी छोड़ सकें.
🎯 Exam Tip: द्वार कोशिकाओं की स्फीति अवस्था पानी के अंतःशोषण पर निर्भर करती है, जिससे रंध्र खुलते हैं.
Question 3. यूरिकोटेलिक उत्सर्जन किसे कहते हैं ?
Answer: जब उपापचयी क्रियाओं में बने यूरिक अम्ल का उत्सर्जी पदार्थ के रूप में उत्सर्जन होता है, तब इसे यूरिकोटेलिक उत्सर्जन कहते हैं. पक्षी और छिपकली इसके प्रमुख उदाहरण हैं. यूरिक अम्ल कम विषैला होता है और इसे शरीर से निकालने के लिए बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है, जो सूखे वातावरण में रहने वाले जीवों के लिए एक महत्वपूर्ण अनुकूलन है.
In simple words: यूरिकोटेलिक उत्सर्जन तब होता है जब जीव अपने बेकार पदार्थ को यूरिक अम्ल के रूप में बाहर निकालते हैं, जैसे पक्षी.
🎯 Exam Tip: यूरिक अम्ल का उत्सर्जन पानी के संरक्षण में मदद करता है, खासकर उन जीवों में जो पानी की कमी वाले क्षेत्रों में रहते हैं.
Question 4. पौधे के मुख्य दो भाग बताइए।
Answer: पौधे के मुख्य दो भाग निम्नलिखित हैं:
(i) जड़ तंत्र या मूल तंत्र, जो मिट्टी के अंदर होता है और पौधे को सहारा देता है तथा जल व खनिज पदार्थों का अवशोषण करता है.
(ii) प्ररोह तंत्र (तना, शाखाएँ, पत्तियाँ व पुष्प), जो मिट्टी के ऊपर होता है और प्रकाश संश्लेषण, भोजन उत्पादन, और प्रजनन के कार्यों को संभालता है.
In simple words: पौधे के दो मुख्य हिस्से होते हैं: जड़ (जो मिट्टी में होती है) और प्ररोह (जो जमीन के ऊपर तना, पत्ते और फूल होते हैं).
🎯 Exam Tip: जड़ तंत्र और प्ररोह तंत्र दोनों एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं और पौधे के संपूर्ण जीवन चक्र के लिए आवश्यक हैं.
Question 6. फ्लोएम का क्या कार्य है ?
Answer: फ्लोएम नामक संवहन ऊतक का मुख्य कार्य प्रकाश संश्लेषण द्वारा पत्तियों में बनाये गये तरल कार्बनिक भोज्य पदार्थ का संवहन है. यह शर्करा और अन्य पोषक तत्वों को पौधे के सभी भागों तक पहुँचाता है जहाँ उनकी वृद्धि या भंडारण के लिए आवश्यकता होती है. इस प्रकार, यह पौधे के पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
In simple words: फ्लोएम पौधे की पत्तियों में बने खाने को पूरे पौधे में फैलाता है, ताकि हर हिस्सा खाना पा सके.
🎯 Exam Tip: फ्लोएम और जाइलम मिलकर पौधे का संवहन तंत्र बनाते हैं, जहाँ फ्लोएम भोजन और जाइलम पानी का परिवहन करता है.
Question 7. जीवद्रव्य कुंचन को परिभाषित कीजिए।
Answer: जीवद्रव्य कुंचन (Plasmolysis) वह प्रक्रिया है जिसमें कोशिकाओं से जल के बहि:परासरण (exosmosis) द्वारा अत्यधिक मात्रा में बाहर निकल जाने के कारण जीवद्रव्य का संकुचन या सिकुड़ना होता है. इस वजह से पादप कोशिकाओं में जीवद्रव्य कोशिका भित्ति से दूर हो जाता है. यह तब होता है जब कोशिका को एक सांद्र या अतिपरासरी विलयन में रखा जाता है, जिससे पानी कोशिका से बाहर निकल जाता है. पौधों में यह कोशिका की जीवंतता को दर्शाता है.
In simple words: जब कोशिका का सारा पानी बाहर निकल जाता है, तो उसके अंदर का जीवद्रव्य सिकुड़ कर दीवार से चिपक जाता है, इसी को जीवद्रव्य कुंचन कहते हैं.
🎯 Exam Tip: जीवद्रव्य कुंचन कोशिका की झिल्ली के पानी के लिए अर्धपारगम्य होने का परिणाम है, जो परासरण द्वारा पानी के बहाव को नियंत्रित करता है.
Question 8. श्वसन किसे कहते हैं ?
Answer: श्वसन वह जैविक प्रक्रिया है जिसमें कोशिकाओं में कार्बनिक भोज्य पदार्थों (जैसे ग्लूकोज) का ऑक्सीकरण होता है, जिससे ऊर्जा मुक्त होती है. यह ऊर्जा जीव की विभिन्न जैविक क्रियाओं को चलाने के लिए उपयोग की जाती है. श्वसन दो प्रकार का होता है - वायवीय श्वसन (ऑक्सीजन की उपस्थिति में) और अवायवीय श्वसन (ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में).
In simple words: श्वसन वह प्रक्रिया है जिसमें शरीर खाने से ऊर्जा बनाता है, ताकि सभी काम हो सकें.
🎯 Exam Tip: श्वसन सभी जीवित जीवों के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह उन्हें जीवन के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है.
Question 9. द्वि विखण्डन क्या है ?
Answer: द्वि विखण्डन (Binary fission) अलैंगिक जनन का एक प्रकार है जिसमें एक कोशिकीय जीव की एक कोशिका दो समान प्रकार की कोशिकाओं में विभाजित हो जाती है. यह प्रजनन का एक सरल और तेज तरीका है. उदाहरण के लिए, अमीबा और पैरामीशियम में द्वि विखंडन देखा जाता है, जहाँ माता कोशिका पहले अपने नाभिक को विभाजित करती है, फिर कोशिका द्रव्य को. यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को स्थानांतरित करने का एक प्रभावी तरीका है.
In simple words: द्वि विखंडन तब होता है जब एक जीव दो बराबर हिस्सों में बंटकर दो नए जीव बनाता है, जैसे अमीबा.
🎯 Exam Tip: द्वि विखंडन में जनक कोशिका के आनुवंशिक पदार्थ की दो समान प्रतियां बनती हैं, जिससे आनुवंशिक विविधता नहीं आती है.
Question 10. पुष्पासन किसे कहते हैं ?
Answer: पुष्पासन (Thalamus) पुष्पवृंत का शीर्ष का फूला हुआ भाग है जहाँ पुष्प के चारों चक्र (बाह्यदलपुंज, दलपुंज, पुमंग और जायांग) जुड़े रहते हैं. यह फूल के सभी हिस्सों को सहारा देता है और उनके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. कुछ पौधों में यह मांसल होकर फल का हिस्सा भी बन जाता है.
In simple words: फूल का निचला फूला हुआ हिस्सा जहाँ पत्तियाँ और फूल के दूसरे भाग जुड़े होते हैं, उसे पुष्पासन कहते हैं.
🎯 Exam Tip: पुष्पासन फूल की संरचना का आधार प्रदान करता है, और इसका आकार और रूप विभिन्न पौधों में भिन्न हो सकता है.
Question 11. वायुदाब विधि के प्रमुख उदाहरण बताएँ।
Answer: वायुदाब विधि से प्रजनन करने वाले प्रमुख उदाहरण काष्ठीय पादप हैं; जैसे-अनार, लीची, नींबू और गुड़हल. इस विधि में पौधे की एक शाखा को मिट्टी में दबा दिया जाता है ताकि जड़ें विकसित हो सकें, जबकि वह अभी भी मूल पौधे से जुड़ी रहती है. यह विधि नए पौधों को उगाने का एक प्रभावी तरीका है.
In simple words: वायुदाब विधि से उगाए जाने वाले पौधों के उदाहरण अनार, लीची, नींबू और गुड़हल हैं.
🎯 Exam Tip: वायुदाब विधि अलैंगिक प्रजनन का एक तरीका है जो नए पौधों को मूल पौधे के समान गुणों के साथ विकसित करने में मदद करता है.
Question 12. जीवों में जनन की आवश्यकता क्यों होती है ?
Answer: जीवों में जनन की आवश्यकता अपनी प्रजाति की निरंतरता को बनाए रखने के लिए होती है. जनन के बिना, कोई भी प्रजाति पृथ्वी से लुप्त हो जाएगी. यह जीवों को अपनी संख्या बढ़ाने, आनुवंशिक विविधता बनाए रखने और बदलते वातावरण के अनुकूल होने में मदद करता है. यह जीवन के चक्र को बनाए रखने के लिए एक मौलिक प्रक्रिया है.
In simple words: जीवों में जनन ज़रूरी है ताकि उनकी प्रजाति बनी रहे और खत्म न हो.
🎯 Exam Tip: जनन आनुवंशिक सामग्री को अगली पीढ़ी तक पहुँचाता है और प्रजातियों की निरंतरता सुनिश्चित करता है.
Question 13. मूसला मूल एवं अपस्थानिक मूल में अन्तर बताइए।
Answer: मूसला मूल और अपस्थानिक मूल में अंतर नीचे दी गई तालिका में दर्शाया गया है. दोनों प्रकार की जड़ें पौधों के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनकी उत्पत्ति और संरचना भिन्न होती है. मूसला मूल गहरी पहुँच प्रदान करती है, जबकि अपस्थानिक मूल अक्सर अतिरिक्त सहारा देती है.
In simple words: मूसला जड़ें मुख्य जड़ से निकलती हैं, जबकि अपस्थानिक जड़ें पौधे के किसी और हिस्से से निकलती हैं.
| मूसला मूल (Tap Root) | अपस्थानिक मूल (Adventitious Root) |
|---|---|
| (i) मूसला मूल मूलांकुर (radicle) से विकसित होती है। | अपस्थानिक जड़ें मुख्यतः मूलांकुर के अतिरिक्त पादप शरीर के किसी अन्य भाग से बनती हैं। |
| (ii) प्राथमिक जड़ मोटी होती है जिससे पार्श्व में द्वितीयक व तृतीयक जड़ें निकलती हैं। | सभी जड़ें समान मोटाई की या रेशों जैसी होती हैं। |
| (iii) मुख्यतः पौधों को स्थिर रखने व जल खनिज अवशोषण का कार्य करती हैं। | जड़ें इन मुख्य कार्यों के अतिरिक्त अन्य अनेक कार्य करती हैं; जैसे-यांत्रिक सहारा, स्वांगीकरण, आरोहण, जनन आदि। |
🎯 Exam Tip: मूसला जड़ें आमतौर पर द्विबीजपत्री पौधों में पाई जाती हैं, जबकि अपस्थानिक जड़ें एकबीजपत्री और कुछ द्विबीजपत्री पौधों में भी पाई जाती हैं.
Question 14. जाइलम व फ्लोयम ऊतक में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Answer: जाइलम और फ्लोएम ऊतक पौधों में संवहन के लिए जिम्मेदार होते हैं, लेकिन उनके कार्य और संरचना में महत्वपूर्ण अंतर हैं. जाइलम मुख्य रूप से पानी और खनिजों का परिवहन करता है, जबकि फ्लोएम भोजन का परिवहन करता है. इन दोनों ऊतकों के अंतर नीचे दी गई तालिका में दिए गए हैं.
In simple words: जाइलम पानी और फ्लोएम खाना ले जाने का काम करते हैं.
| जाइलम (Xylem) | फ्लोएम (Phloem) | |
|---|---|---|
| प्रकृति | मुख्यतः मृत कोशिकाओं से बना जटिल स्थायी, संवहन ऊतक । | मुख्यतः जीवित कोशिकाओं से बना जटिल स्थायी संवहन ऊतक पत्तियों द्वारा बनाये गए कार्बनिक भोज्य पदार्थों का संवहन । |
| कार्य | जल व खनिज लवणों का संवहन। | पत्तियों द्वारा बनाए गए कार्बनिक भोज्य पदार्थों का संवहन। |
| घटक कोशिकाएँ | वाहिनिका, वाहिका जाइलम मृदूतक, जाइलम रेशे (जाइलम मृदूतक को छोड़कर शेष कोशिकाएँ लिग्नीभूत व मृत)। प्रमुख संवहन भाग वाहिनिका व वाहिका। | चालनी नलिका, सहकोशिका, फ्लोएम मृदूतक, फ्लोएम रेशे। (केवल फ्लोएम रेशे मृत, अन्य सभी कोशिकाएँ जीवित व सक्रिय) प्रमुख संवहन भाग चालनी नलिका। |
🎯 Exam Tip: जाइलम जल को जड़ों से ऊपर की ओर ले जाता है, जबकि फ्लोएम भोजन को पत्तियों से पौधे के सभी भागों में वितरित करता है.
Question 15. निम्नलिखित को परिभाषित कीजिएविसरण, परासरण, जीवद्रव्य कुंचन, अन्त:शोषण
Answer:
(i) **विसरण (Diffusion):** किसी पदार्थ के कणों का अधिक सांद्रता वाले क्षेत्र से कम सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर स्वतः गति करना विसरण कहलाता है. यह गैसों, तरल पदार्थों और यहाँ तक कि ठोस पदार्थों में भी होता है. विसरण जीवित कोशिकाओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पोषक तत्वों और गैसों के आदान-प्रदान में मदद करता है.
(ii) **परासरण (Osmosis):** परासरण वह प्रक्रिया है जिसमें विलायक (आमतौर पर पानी) के अणु एक अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से कम सांद्रता वाले घोल से अधिक सांद्रता वाले घोल की ओर गति करते हैं. यह प्रक्रिया कोशिकाओं में पानी के संतुलन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है.
(iii) **जीवद्रव्य कुंचन (Plasmolysis):** कोशिका को सांद्र या अतिपरासरी विलयन में रखने पर उसके जीवद्रव्य का, कोशिका से बहि:परासरण (exosmosis) द्वारा जल बाहर निकलने के कारण संकुचित हो जाना जीवद्रव्य कुंचन कहलाता है. इस प्रक्रिया में जीवद्रव्य कोशिका भित्ति से दूर हो जाता है.
(iv) **अन्त:शोषण (Imbibition):** जलरागी कोलॉइडों (Hydrophilic colloids) की उपस्थिति के कारण ठोस पदार्थ के अणुओं का द्रव के प्रति आकर्षण अन्त:चूषण या अन्त:शोषण कहलाता है. बरसात के दिनों में लकड़ी के दरवाजों का जल सोख कर फूल जाना और बीजों का जल में फूलना इसके उदाहरण हैं. यह प्रक्रिया बीज अंकुरण के लिए भी आवश्यक है.
In simple words: विसरण है जब चीज़ें अपने आप फैलती हैं; परासरण है जब पानी झिल्ली से गुजरता है; जीवद्रव्य कुंचन है जब कोशिका से पानी निकल जाए और वह सिकुड़ जाए; और अन्त:शोषण है जब कोई सूखी चीज़ पानी सोखकर फूल जाए.
🎯 Exam Tip: इन सभी प्रक्रियाओं में पदार्थों की गति और सांद्रता प्रवणता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो पौधों और जीवों में महत्वपूर्ण जैविक क्रियाएँ हैं.
Question 16. सिंचित जल जड़ द्वारा पत्तियों तक जिस सिद्धान्त के द्वारा पहुंचता है उसे समझाइए।
Answer: जड़ों द्वारा अवशोषित जल के जाइलम द्वारा पादपों की पत्तियों तक पहुँचने की व्याख्या करने हेतु वाष्पोत्सर्जन-संसजन-तनाववाद (Transpiration-Cohesion-Tension Theory) प्रस्तुत किया गया है. यह सिद्धान्त तीन कारकों पर आधारित है:
• जाइलम वाहिकाओं में जल निरंतर, अखण्डित स्तम्भ के रूप में विद्यमान होता है. जाइलम ऊतक व जल अणुओं के बीच आसंजक आकर्षण होता है. ये अणु एक साथ जुड़े रहते हैं.
• जल अणुओं में परस्पर दृढ़ आकर्षण (cohesion) होने से यह ससंजित होकर जल के स्तम्भ की निरंतरता को बनाए रखते हैं. ये अणु एक-दूसरे को खींचकर ऊपर चढ़ने में मदद करते हैं.
• पत्ती में जल स्तम्भ का ऊपरी भाग वाष्पोत्सर्जन द्वारा वायुमण्डल में मुक्त होता रहता है. इस कारण जल स्तम्भ पर ऊपर से एक खिंचाव या तनाव बना रहता है. दूसरे शब्दों में, पत्तियों में एक ऋणात्मक दाब उत्पन्न हो जाता है. इस खिंचाव के कारण संपूर्ण जल स्तम्भ ऊपर की ओर खिंचा चला जाता है. यह पानी को ऊपर खींचने वाला मुख्य बल है.
In simple words: पानी जड़ों से पत्तियों तक इसलिए पहुँचता है क्योंकि पत्तियां पानी को भाप बनाकर उड़ाती हैं (वाष्पोत्सर्जन), जिससे एक खिंचाव पैदा होता है जो पानी के अणुओं को एक-दूसरे से चिपकाकर ऊपर खींचता है.
🎯 Exam Tip: यह सिद्धांत समझाता है कि पानी बिना किसी बाहरी पंप के सैकड़ों फीट ऊँचे पेड़ों में भी कैसे पहुँचता है, जिसमें वाष्पोत्सर्जन एक ड्राइविंग बल है.
Question 17. आमाशय के कार्यों का वर्णन कीजिए।
Answer: आमाशय के कार्य (Functions of Stomach) निम्नलिखित हैं:
• अन्तर्ग्रहण किए भोजन का पाचन के लिए संग्रह करना. पेट भोजन को कुछ घंटों तक स्टोर करके रखता है.
• आमाशय रस के एन्जाइम भोजन को पचाते हैं. विशेषकर प्रोटीन का पाचन यहीं से शुरू होता है.
• आमाशय की ग्रन्थिल कोशिकाओं द्वारा स्रावित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल भोजन को अम्लीय बनाता है. यह अम्लीयता प्रोटीन का पाचन करने वाले एन्जाइमों के सक्रियण हेतु आवश्यक है. यह भोजन को तोड़ने में मदद करता है.
• HCL भोजन के साथ आये हानिकारक जीवाणुओं को मार देता है, जिससे भोजन सुरक्षित रहता है.
• भोजन को पतला लेई जैसा कर छोटी आँत में भेजता है, जिसे 'काइम' कहते हैं.
• प्रोटीन व वसा का पाचन यहाँ प्रारम्भ होता है. वसा का पूर्ण पाचन छोटी आँत में होता है.
• कुछ पदार्थों; जैसे-ग्लूकोज, जल, ऐल्कोहॉल, औषधियों आदि का अवशोषण आमाशय में प्रारम्भ होता है.
• पेप्सिन व रेनिन प्रोटीन पाचक एन्जाइमों का स्रावण करता है. पेप्सिन प्रोटीन को तोड़ता है और रेनिन दूध के प्रोटीन को जमाता है. ये दोनों मिलकर पाचन में मदद करते हैं.
In simple words: पेट खाने को जमा करता है, उसमें अम्ल और पाचक रस मिलाकर उसे पचाना शुरू करता है, कीटाणुओं को मारता है, और फिर पचे हुए खाने को छोटी आँत में भेजता है.
🎯 Exam Tip: आमाशय का अम्लीय वातावरण पेप्सिन एन्जाइम को सक्रिय करता है, जो प्रोटीन पाचन के लिए महत्वपूर्ण है.
Question 19. अपचयी व उपचयी क्रियाएँ किसे कहते हैं?
Answer: सजीवों के शरीर में होने वाली रासायनिक क्रियाएँ सामूहिक रूप से उपापचय क्रियाएँ या मेटाबॉलिज्म (metabolism) कहलाती हैं. यह दो प्रमुख प्रकार की होती हैं:
(a) **अपचयी क्रियाएँ (Catabolic reactions या Catabolism):** इस प्रकार की क्रियाओं में जटिल यौगिक अपघटित होकर सरल यौगिकों का निर्माण करते हैं; जैसे-श्वसन. इससे मुक्त हुई ऊर्जा शरीर की अन्य जैव प्रक्रियाओं में सहायता करती है. उदाहरण के लिए, जब हम भोजन खाते हैं, तो बड़े अणु छोटे अणुओं में टूट जाते हैं और ऊर्जा निकलती है.
(b) **उपचयी क्रियाएँ (Anabolic reactions or Anabolism):** इस प्रकार की क्रियाओं में सरल यौगिक मिलकर जटिल यौगिकों का निर्माण करते हैं, जैसे-प्रोटीन संश्लेषण और प्रकाश संश्लेषण. इन क्रियाओं में ऊर्जा का उपयोग होता है. उदाहरण के लिए, पौधे प्रकाश संश्लेषण से साधारण शर्करा बनाते हैं, फिर उनसे जटिल कार्बोहाइड्रेट बनाते हैं.
In simple words: अपचयी क्रियाएँ बड़े अणुओं को तोड़कर ऊर्जा बनाती हैं, और उपचयी क्रियाएँ छोटे अणुओं को जोड़कर बड़े अणु बनाती हैं और इसमें ऊर्जा का उपयोग होता है.
🎯 Exam Tip: अपचयी क्रियाएँ ऊर्जा मुक्त करती हैं, जबकि उपचयी क्रियाएँ ऊर्जा का उपभोग करती हैं. दोनों शरीर के कार्यों के लिए आवश्यक हैं.
Question 20. पादपों में विशेष उत्सर्जन अंग क्यों नहीं पाये जाते हैं ? समझाइए।
Answer: पादपों में उत्सर्जन प्रक्रिया सरल होने के कारण उत्सर्जी अंगों की आवश्यकता नहीं होती है. इनकी सरल उत्सर्जन प्रक्रिया, उत्सर्जी अंगों के अभाव के निम्न कारण हैं:
• जन्तुओं की तुलना में पादपों में उपापचय क्रियाओं की दर कम होती है, जिससे अपशिष्ट पदार्थों का उत्पादन कम होता है.
• पौधे उपापचय क्रियाओं में बने अपशिष्टों का प्रयोग उपचयी (anabolic) क्रियाओं में कर लेते हैं. जैसे-श्वसन में मुक्त हुई CO₂ का प्रयोग प्रकाश संश्लेषण में कर लिया जाता है. इस प्रकार वे अपशिष्टों का पुनः उपयोग करते हैं.
• पादपों का उपापचय मुख्यतः कार्बोहाइड्रेट आधारित जबकि जन्तुओं में यह प्रोटीन आधारित होता है. कार्बोहाइड्रेट से कम विषैले अपशिष्ट बनते हैं.
• पादपों में कुछ उत्सर्जी पदार्थ ठोस क्रिस्टल के रूप में पर्ण या तने की मृत कोशिकाओं में संग्रहित होते हैं. जब पत्तियां गिरती हैं, तो ये अपशिष्ट भी निकल जाते हैं.
• कुछ अपशिष्ट पदार्थ; जैसे-ऐल्केलॉयड, ग्लूकोसाइड व टेनिन भी रिक्तिकाओं में एकत्रित रहते हैं. कुछ पदार्थ अघुलित अवस्था में रिक्तिकाओं में पाये जाते हैं, जो पौधे को नुकसान नहीं पहुँचाते. ये पदार्थ अक्सर पौधों के लिए उपयोगी भी होते हैं. इस तरह, पौधे अपने अपशिष्टों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करते हैं.
In simple words: पौधों में खास उत्सर्जन अंग नहीं होते क्योंकि वे कम अपशिष्ट बनाते हैं, अपने अपशिष्टों का फिर से उपयोग करते हैं, और बेकार चीजों को पत्तियों या तने में जमा कर लेते हैं.
🎯 Exam Tip: पौधों में अपशिष्ट प्रबंधन की प्रक्रिया जन्तुओं से भिन्न होती है, जिसमें पत्ती गिराना, छाल उतारना और रिक्तिकाओं में भंडारण मुख्य तरीके हैं.
Question 22. प्रतिवर्ती क्रिया को सोदाहरण समझाइए।
Answer: प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) किसी उद्दीपन के प्रति अचानक व स्वतः होने वाली त्वरित तंत्रिका-माध्यित अनुक्रिया है. इसमें प्रमुखतः मेरुरज्जु भाग लेता है और इच्छा शक्ति का इस पर प्रभाव नहीं होता. प्रतिवर्ती क्रिया में अनुक्रिया के लिए बौद्धिक स्तर पर सोचे समझे विचार की आवश्यकता नहीं होती तथा एक प्रकार का उद्दीपन बार-बार वहीं अनुक्रिया उत्पन्न करता है. ये क्रियाएँ जीव को तुरंत खतरे से बचाने में मदद करती हैं.
**उदाहरण:**
(i) अगर हाथ यकायक किसी गर्म वस्तु या नुकीली वस्तु को छूता है तो वह तुरंत अनुक्रिया प्रदर्शित कर वहाँ से हट जाता है. यह क्रिया शरीर को चोट लगने से बचाती है.
(ii) आँखों पर टॉर्च का प्रकाश पड़ने पर पुतलियाँ सिकुड़ जाती हैं ताकि आँखों में बहुत ज़्यादा रोशनी न जाए. यह आँख की सुरक्षा के लिए एक स्वचालित प्रतिक्रिया है.
In simple words: प्रतिवर्ती क्रिया वह तेज़ प्रतिक्रिया है जो दिमाग के सोचने से पहले ही हो जाती है, जैसे गर्म चीज़ छूने पर हाथ हटाना.
🎯 Exam Tip: प्रतिवर्ती क्रियाएँ अक्सर रीढ़ की हड्डी से नियंत्रित होती हैं और जीवन रक्षा के लिए महत्वपूर्ण होती हैं, क्योंकि ये त्वरित प्रतिक्रियाएँ होती हैं.
Question 23. बिन्दुस्राव किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: बिन्दुस्राव (Guttation) वह प्रक्रिया है जिसमें पौधों की पत्तियों के किनारों पर या शिराओं के सिरे पर स्थित जल रंध्रों (हाइड्रोथोड्स) से पानी छोटी बूंदों के रूप में बाहर निकलता है. यह तब होता है जब वाष्पोत्सर्जन (पानी का भाप बनकर उड़ना) की दर कम होती है और मूल दाब (जड़ों द्वारा पानी को ऊपर धकेलने का दबाव) अधिक होता है. इस स्थिति में, अतिरिक्त पानी को बूंदों के रूप में बाहर निकालना आवश्यक हो जाता है.
**उदाहरण:**
(i) सुबह के समय घास की पत्तियों के किनारों पर या टमाटर, धान, या कोलोकेसिया जैसे पौधों की पत्तियों पर पानी की बूंदें देखी जा सकती हैं. ये अक्सर ओस की बूंदों जैसी दिखती हैं, लेकिन वास्तव में बिंदुस्राव का परिणाम होती हैं.
(ii) यह प्रक्रिया रात में अधिक होती है, जब आर्द्रता अधिक होती है और वाष्पोत्सर्जन कम होता है, लेकिन जड़ें अभी भी पानी सोख रही होती हैं. यह पौधों में पानी के संतुलन को बनाए रखने का एक तरीका है.
In simple words: बिंदुस्राव वह है जब पत्तियों से पानी छोटी-छोटी बूंदों के रूप में बाहर आता है, खासकर सुबह के समय, जैसे घास की पत्तियों पर.
🎯 Exam Tip: बिंदुस्राव और ओस में अंतर यह है कि बिंदुस्राव पौधों के अंदर से पानी का उत्सर्जन है, जबकि ओस वायुमंडल की नमी का संघनन है.
Question 24. पर्ण की आन्तरिक रचना समझाइए।
Answer: पर्ण या पत्ती पौधे का क्लोरोफिल धारक हरा भाग है जो प्रकाश संश्लेषण में भाग लेता है. पत्ती की आन्तरिक संरचना भी प्रकाश संश्लेषण हेतु अनुकूलित होती है. पत्ती एक चपटी, फैली (flat, expanded) रचना है जो निम्न तीन प्रकार के ऊतक तंत्रों से बनी होती है:
(a) **त्वचीय ऊतक (Dermal tissue):** यह पत्ती की बाहरी परत है, जिसमें ऊपरी और निचली अधिचर्म (epidermis) होती है. अधिचर्म कोशिकाएँ चपटी और ढोलक के आकार की होती हैं. कुछ पौधों में अधिचर्म के ऊपर क्यूटकिल (Cuticle) नामक पदार्थ का पतला स्तर पाया जाता है, जो वाष्पोत्सर्जन की दर को कम करता है. निचली अधिचर्म पर अनेक छोटे-छोटे छिद्र पाए जाते हैं, जिन्हें पर्णरंध्र (Stomata) कहते हैं. प्रत्येक रंध्र दो सेम के बीज के आकार की रक्षक कोशिकाओं (guard cells) से घिरा रहता है. इन कोशिकाओं में क्लोरोफिल पाया जाता है. इन कोशिकाओं द्वारा जल के अवशोषण व जल के निकास से ही रंध्र खुलते व बंद होते हैं. इन्हीं रंध्रों द्वारा पत्ती में गैसों का विनिमय व वाष्पोत्सर्जन क्रियाएँ सम्पन्न होती हैं. रंध्र अधिकांश पौधों में निचली एपीडर्मिस पर ही सीमित रहते हैं. कुछ पौधों में यह ऊपरी एपीडर्मिस पर भी पाए जाते हैं.
(b) **भरण ऊतक (Ground Tissue):** पत्तियों का भरण ऊतक पर्णमध्योतक या मीसोफिल (Mesophyll) कहलाता है. ऊपरी अधिचर्म के ठीक नीचे का ऊतक स्तम्भ के आकार की कोशिकाओं से बना होता है, जिनमें प्रचुर मात्रा में हरित लवक पाए जाते हैं. यह ऊतक, मृदूतक (पैलीसेड पैरेन्काइमा) (Palisade Parenchyma) कहलाता है. इस ऊतक की कोशिकाओं के बीच अन्तरकोशिकीय अवकाश नहीं पाए जाते, यही ऊतक प्रकाश संश्लेषण में प्रमुखता से भाग लेता है. निचली बाह्य त्वचा के अंदर की ओर अर्थात स्तम्भी मृदूतक या पैलीसेड पैरेन्काइमा के नीचे स्पंजी मृदूतक या स्पंजी पैरेन्काइमा (Spongy parenchyma) पाया जाता है. इसकी क्लोरोफिल युक्त कोशिकाओं के बीच में बड़े-बड़े अन्तरकोशिकीय अवकाश पाए जाते हैं. यह अवकाश या खाली स्थान आपस में एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं. यह पर्णरंध्र के भी संपर्क में होते हैं. अतः इनके द्वारा गैसों का विनिमय आसानी से हो जाता है.
(c) **संवहन ऊतक (Vascular Tissue):** पत्तियों में जाइलम व फ्लोएम से बनी शिराओं का जाल बिछा होता है. यह जाइलम व फ्लोएम तने के जाइलम व फ्लोएम से जुड़े होते हैं. पत्तियों का शिरा जाल संवहन तंत्र के साथ-साथ पत्तियों का कंकाल भी बनाता है. संवहन ऊतक की यह शिराएँ भरण ऊतक में बिखरी रहती हैं. जाइलम पत्तियों तक खनिज लवण व जल पहुँचाती हैं जबकि फ्लोएम पत्तियों में बने कार्बनिक भोज्य पदार्थों को अन्य स्थानों तक पहुँचाती हैं.
In simple words: पत्ती के अंदर तीन मुख्य परतें होती हैं: बाहरी त्वचा (epidermis), बीच का मांसल भाग (mesophyll) जहाँ खाना बनता है, और नसें (vascular tissue) जो पानी और खाने को ले जाती हैं.
🎯 Exam Tip: पत्ती की आंतरिक संरचना प्रकाश संश्लेषण और वाष्पोत्सर्जन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के लिए अनुकूलित होती है, जिसमें ये तीनों ऊतक तंत्र मिलकर काम करते हैं.
Question 25. मूलदाब को प्रयोग द्वारा समझाइए।
Answer: मूलदाब (Root Pressure) जड़ों द्वारा जल के सक्रिय अवशोषण के कारण उत्पन्न धनात्मक दाब है, जिससे जल मृदा से जड़ के जाइलम तक पहुँचता है. इस सक्रिय जल अवशोषण के कारण जड़ की कोशिकाएँ स्फीति (turgid) हो जाती हैं और जाइलम में पहुँचने वाला जल पौधे में कुछ ऊँचाई तक चढ़ जाता है. यह सक्रिय दाब कुछ शाकीय पौधों के जाइलम में जल को ऊपर की ओर धकेलता है और यह एक जैव क्रिया (Vital process) है. इसको निम्न प्रयोग द्वारा समझा जा सकता है:
**प्रयोग:**
(i) एक गमले में लगा स्वस्थ पौधा लें. इसके तने को मिट्टी की सतह से लगभग 7 या 8 सेमी ऊपर तिरछा काट दें.
(ii) गमले में पानी डालें. तने के कटे भाग पर रबर की नली की सहायता से एक काँच की नली जोड़ दें.
(iii) इस काँच की नली में थोड़ा-सा जल भर दें और जल के स्तर को चिन्हित कर लें.
(iv) नलियों के जुड़ने के स्थान पर मोम लगाकर इसे वायुरोधी बना दें, ताकि कोई हवा अंदर न जा सके.
(v) कुछ समय बाद काँच की नली में जल का स्तर बढ़ जाता है. यह स्पष्ट करता है कि जल का स्तर मूल दाब के कारण बढ़ता है. मूल दाब केवल छोटे शाकीय पौधों में जल के ऊपर चढ़ने की व्याख्या कर सकता है, बहुत ऊँचे वृक्षों में नहीं. यह पानी को जड़ों से ऊपर धकेलने वाला एक महत्वपूर्ण बल है.
In simple words: मूलदाब वह दबाव है जो जड़ों में बनता है जब वे पानी सोखती हैं, जिससे पानी पौधे में थोड़ा ऊपर चढ़ता है. इसे एक प्रयोग से देख सकते हैं जहाँ कटे हुए तने पर नली लगाकर पानी का स्तर बढ़ते हुए देखा जा सकता है.
🎯 Exam Tip: मूलदाब रात में अधिक प्रभावी होता है जब वाष्पोत्सर्जन दर कम होती है, जिससे जड़ों द्वारा पानी का लगातार अवशोषण होता रहता है.
Question 26. मानव के श्वसन तन्त्र का सचित्र वर्णन कीजिए।
Answer: मानव का श्वसन तंत्र (Human Respiratory System) एक जटिल प्रणाली है जो शरीर में ऑक्सीजन लेने और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालने के लिए जिम्मेदार है. सभी अन्य स्तनधारियों के समान मनुष्य में भी श्वसन अंग फेफड़े होते हैं. मनुष्य का श्वसन तंत्र निम्न भागों से मिलकर बना होता है:
(a) **वह मार्ग जो बाह्य वायु को फेफड़ों की श्वसन सतह से जोड़ता है:** इसमें नासाछिद्र, नासिका मार्ग, गला या ग्रसनी, श्वास नली (ट्रैकिया), ब्रोंकाई और ब्रोकियोल्स शामिल हैं. ये मार्ग हवा को फेफड़ों तक ले जाते और वापस लाते हैं. नासिका मार्ग में पतले बाल और म्यूकस (mucus) हवा को साफ और नम करते हैं.
(i) **नासाछिद्र व नासिका मार्ग (Nostril and Nasal Passage):** वायु शरीर में नाक में स्थित नासिका छिद्रों के रास्ते प्रवेश करती है. यह मुख द्वारा भी श्वसन मार्ग में प्रवेश कर सकती है. नाक व मुँह, तालू (palate) द्वारा एक-दूसरे से अलग रहते हैं. नासिका मार्ग में लगे पतले बाल वायु को छानने का कार्य करते हैं व इससे धूल के कणों को अलग कर देते हैं. इस मार्ग में म्यूकस (mucus) का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है.
(iii) **श्वास नली या ट्रेकिया (Trachea):** यह एक पतली भित्ति वाली नली है. इस पर कार्टिलेज के बने छल्ले थोड़ी-थोड़ी दूरी पर लगे रहते हैं. यह छल्ले ट्रेकिया में वायु की पर्याप्त मात्रा की अनुपस्थिति में भी इसे पिचकने नहीं देते. ट्रेकिया का सबसे ऊपरी भाग ही लैरिंक्स के स्वर यन्त्र से जुड़ा रहता है.
(iv) **ब्रोंकाई (Bronchi):** ट्रेकिया गर्दन में होती हुई वक्ष गुहा तक पहुँचती है. वक्ष गुहा (Thoracic cavity) में यह दाएँ व बाएँ दो शाखाओं ब्रोंकाई में विभक्त हो जाती है. प्रत्येक ब्रोंकस अपनी-अपनी ओर के फेफड़े में प्रवेश कर और पतली नलिकाओं में विभक्त हो जाता हैं जिन्हें ब्रोकियौल्स कहते हैं.
(b) **श्वसन सतह (फेफड़े):** मनुष्य में दो फेफड़े होते हैं जो वक्ष गुहा में स्थित होते हैं. वक्ष गुहा उद्रीय गुहा से एक पेशीय पट्ट डायाफ्राम (Diaphragm) द्वारा पृथक रहती है. फेफड़े दो पतली झिल्लियों एल्यूरा (Pleura) द्वारा ढके रहते हैं तथा पसलियों (rib cage) में सुरक्षित रहते हैं. डायाफ्राम श्वसन प्रक्रिया में मदद करता है. प्रत्येक ब्रोकियौल और पतली ब्रोकियोल में विभाजित हो जाती है. प्रत्येक पतली ऑकियोल के अंतिम सिरे पर अनेक पतले वायु प्रकोष्ठ (air sac) या एल्वियोली (alveoli) होते हैं. फेफड़ों में गैसों का विनिमय इन्हीं एल्वियोली में होता हैं. इन एल्वियोली का सतही क्षेत्र बहुत अधिक होता है तथा इनकी अत्यन्त पतली भित्ति में रक्त केशिकाओं का जाल बिछा रहता है. डायाफ्राम वक्षीय गुहा व पसलियों में संकुचन व शिथिलन से इसका आयतन बढ़ता व घटता है, जिससे वायु फेफड़े में प्रवेश करती व बाहर निकलती है.
In simple words: मानव का श्वसन तंत्र नाक से शुरू होता है, जहाँ हवा साफ होती है. फिर यह नली (ट्रेकिया) से होकर फेफड़ों तक पहुँचती है. फेफड़ों में छोटे-छोटे गुब्बारे (एल्वियोली) होते हैं जहाँ खून में ऑक्सीजन मिलती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है.
🎯 Exam Tip: श्वसन तंत्र में डायाफ्राम की भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके संकुचन और शिथिलन से फेफड़ों में हवा अंदर और बाहर होती है.
Question 27. कलम रोपण (वर्णन कथा में) की विधि का वर्णन कीजिए।
Answer: कलम रोपण (ग्राफ्टिंग) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें दो पौधों के हिस्सों को जोड़कर एक नया पौधा बनाया जाता है। इस विधि में सबसे पहले अच्छी जड़ों वाला एक पौधा चुना जाता है, जिसे स्टॉक कहते हैं। फिर, एक स्वस्थ शाखा, जिसे कलम या सियन कहते हैं, को तिरछा काटा जाता है और उसे स्टॉक पर इसी तरह तिरछे काटे गए हिस्से पर जोड़ा जाता है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि दोनों हिस्सों के संवहन ऊतक (जो पानी और भोजन ले जाते हैं) एक-दूसरे से अच्छे से मिलें। जोड़े गए स्थान को गीले सूती कपड़े से कसकर बाँध दिया जाता है। कुछ दिनों के बाद, स्टॉक और कलम एक साथ जुड़कर एक ही पौधे के रूप में बढ़ने लगते हैं। यह विधि पौधों में वांछित गुणों को बनाए रखने के लिए बहुत उपयोगी है, खासकर जब बीज से उगाना मुश्किल हो।
In simple words: कलम रोपण में दो अलग-अलग पौधों के हिस्सों को जोड़कर एक नया पौधा बनाते हैं। एक पौधे की जड़ें (स्टॉक) और दूसरे पौधे की शाखा (कलम) को मिलाकर एक नया पौधा बनाया जाता है, जिसमें दोनों के अच्छे गुण होते हैं।
🎯 Exam Tip: कलम रोपण में स्टॉक और सियन के संवहन ऊतकों का सही मिलान ही सफल ग्राफ्टिंग की कुंजी है; इसे स्पष्ट रूप से समझाएँ।
Question 28. द्वि निषेचन किसे कहते हैं? व्याख्या कीजिए।
Answer: द्वि निषेचन पुष्पी पौधों में होने वाली एक अनोखी प्रक्रिया है। इसमें परागकण से निकली पराग नलिका भ्रूणकोष (बीज के अंदर) में दो नर युग्मक (पुरुष कोशिकाएँ) छोड़ती है। पहला नर युग्मक अण्ड कोशिका के साथ मिलकर एक युग्मनज (ज़ाइगोट) बनाता है, जिससे नया पौधा विकसित होता है। यह असली निषेचन है। दूसरा नर युग्मक भ्रूणकोष के बीच में मौजूद दो ध्रुवीय केन्द्रकों से मिलकर एक त्रिगुणित केन्द्रक बनाता है, जिसे प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक कहते हैं। यह भ्रूणपोष, बढ़ते हुए भ्रूण को भोजन देता है। चूंकि इस प्रक्रिया में दो बार संलयन होता है (एक अण्ड कोशिका के साथ और एक ध्रुवीय केन्द्रकों के साथ), इसे द्वि निषेचन कहते हैं। यह पुष्पी पौधों के जीवन चक्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
In simple words: द्वि निषेचन वह प्रक्रिया है जिसमें एक ही बीज में दो निषेचन होते हैं – एक से नया पौधा बनता है और दूसरे से भ्रूण को पोषण देने वाला हिस्सा बनता है।
🎯 Exam Tip: द्वि निषेचन की प्रक्रिया में बनने वाले युग्मनज और भ्रूणपोष दोनों की कार्यप्रणाली और गुणसूत्र संख्या को समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 29. परागण पर टिप्पणी लिखें।
Answer: परागण (Pollination) वह प्रक्रिया है जिसमें परागकण (pollen grains) एक फूल के परागकोष (नर भाग) से उसी प्रजाति के दूसरे फूल के वर्तिकाग्र (मादा भाग) तक पहुँचते हैं। पुष्पी पौधों में नर और मादा युग्मक चल नहीं सकते, इसलिए उनके मिलन के लिए परागण जरूरी है। परागण दो प्रकार का होता है: स्व-परागण (जब परागकण उसी फूल या पौधे के दूसरे फूल के वर्तिकाग्र पर जाते हैं) और पर-परागण (जब परागकण उसी प्रजाति के दूसरे पौधे के फूल के वर्तिकाग्र पर जाते हैं)। परागण अजैविक कारकों जैसे हवा और पानी या जैविक कारकों जैसे कीड़ों, पक्षियों और चमगादड़ों की मदद से होता है। यह पौधों में लैंगिक प्रजनन का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
In simple words: परागण का मतलब है कि फूलों के परागकण एक फूल से दूसरे फूल के मादा हिस्से तक पहुँचते हैं ताकि नया बीज बन सके।
🎯 Exam Tip: परागण के विभिन्न माध्यमों (वायु, जल, कीट) और उनके महत्व को उदाहरण सहित समझाना चाहिए।
Question 30. मानव जनन तन्त्र का नामांकित चित्र द्वारा वर्णन कीजिए।
Answer: मानव एकलिंगी प्राणी है, जिसका अर्थ है कि नर और मादा जनन अंग अलग-अलग व्यक्तियों में होते हैं। नर जनन तंत्र में मुख्य रूप से वृषण (testes) और सहायक नलिकाएँ व ग्रंथियाँ होती हैं। वृषण शरीर के बाहर वृषणकोष में स्थित होते हैं क्योंकि शुक्राणु उत्पादन के लिए शरीर के तापमान से 2-3°C कम तापमान की आवश्यकता होती है। वृषण में लाखों शुक्रजनन नलिकाएँ होती हैं जो एपिडिडाइमिस में खुलती हैं। एपिडिडाइमिस से शुक्रवाहिनी निकलती है जो शुक्राशय में पहुँचती है। शुक्राशय से निकली स्खलन वाहिनी मूत्रमार्ग से जुड़ती है। मूत्रमार्ग शिश्न से घिरा होता है और शरीर से बाहर खुलता है, जिससे मूत्र और जनन द्रव्य दोनों निकलते हैं। मादा जनन तंत्र में अण्डाशय, अण्डवाहिनी (फेलोपियन ट्यूब) और गर्भाशय शामिल होते हैं। प्रत्येक अण्डाशय के पास एक कीपाकार संरचना होती है, जिसके सिरे पर उंगली जैसे प्रवर्ध होते हैं। अण्डवाहिनियाँ गर्भाशय में खुलती हैं। गर्भाशय एक संकरी ग्रीवा द्वारा योनि में खुलता है। निषेचन अण्डवाहिनी में होता है और भ्रूण का विकास गर्भाशय में होता है। नर और मादा दोनों में प्राथमिक जनन अंग अंतःस्रावी ग्रंथियों की तरह भी काम करते हैं, हार्मोन का उत्पादन करते हैं जो प्रजनन क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
In simple words: मानव जनन तंत्र में नर और मादा के शरीर में अलग-अलग अंग होते हैं जो नए जीव बनाने में मदद करते हैं। नर में वृषण और मादा में अण्डाशय मुख्य अंग होते हैं, जो शुक्राणु और अंडे बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: मानव जनन तंत्र के प्रत्येक अंग के मुख्य कार्य को स्पष्ट रूप से बताना महत्वपूर्ण है, साथ ही यह भी कि शुक्राणु और अंडे का निर्माण कहाँ होता है।
Question 1. जो जीव अपना भोजन सड़े-गले पदार्थों से लेते हैं वे कहलाते हैं
(अ) माँसाहारी
(ब) परजीवी
(स) मृतजीवी
(द) सर्वाहारी
Answer: (स) मृतजीवी
In simple words: मृतजीवी वे जीव होते हैं जो सड़े-गले या मृत चीजों से अपना खाना लेते हैं, जैसे फफूँदी।
🎯 Exam Tip: मृतजीवी (saprophytes) अपघटनकर्ता होते हैं जो पर्यावरण को साफ रखने में मदद करते हैं।
Question 2. सर्वाहारी के उदाहरण हैं
(अ) चूहे और सूअर
(ब) फैजाई एवं बैक्टीरिया
Answer: (अ) चूहे और सूअर
In simple words: चूहे और सूअर सर्वाहारी जानवर हैं क्योंकि वे पौधों और मांस दोनों को खाते हैं।
🎯 Exam Tip: सर्वाहारी वे जीव होते हैं जो पौधे और जानवर दोनों खाते हैं, जैसे मनुष्य और भालू।
Question 3. रसायन संश्लेषी के उदाहरण हैं
(अ) सल्फर जीवाणु व पीपल
(ब) ताँबा जीवाणु एवं पीपल
(स) नीम एवं पीपल
(द) सल्फर जीवाणु एवं लौह जीवाणु
Answer: (द) सल्फर जीवाणु एवं लौह जीवाणु
In simple words: सल्फर जीवाणु और लौह जीवाणु वे जीव हैं जो प्रकाश का उपयोग किए बिना रासायनिक ऊर्जा से अपना भोजन बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: रसायन संश्लेषी (chemosynthetic) जीव गहरे समुद्र या अन्य चरम वातावरण में पाए जाते हैं जहाँ सूर्य का प्रकाश नहीं पहुँचता।
Question 4. यूकैरियोटिक कोशिका में प्रकाश संश्लेषी वर्णक पाये जाते हैं
(अ) कोशिका द्रव्य में
(ब) केन्द्रक में
(स) लवक में
(द) गॉल्जीबॉडी में।
Answer: (स) लवक में
In simple words: यूकैरियोटिक कोशिकाओं में प्रकाश संश्लेषण के लिए रंगीन पदार्थ लवक नामक छोटे अंगों में होते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रकाश संश्लेषी वर्णक, विशेष रूप से क्लोरोफिल, पौधों में प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
Question 5. युवा पयाँ व फलों में बढ़ता वर्णक
(अ) वर्णी लवक
(स) हरित लवक
(ब) अवर्णीलवक
(द) वर्णक नहीं पाये जाते।
Answer: (अ) वर्णी लवक
In simple words: पौधों के युवा पत्तों और फलों में रंगीन पदार्थ होते हैं जिन्हें वर्णी लवक कहते हैं, जो उन्हें रंग देते हैं।
🎯 Exam Tip: वर्णी लवक (chromoplasts) पौधों में फलों और फूलों को आकर्षक रंग प्रदान करते हैं, जो परागणकर्ताओं और बीज फैलाने वालों को आकर्षित करते हैं।
Question 6. कैरोटिन व जैन्थोफिल का रंग है
(अ) गहरा हरा
(ब) हल्का हरा
(स) पीला नारंगी
(द) नीला है।
Answer: (स) पीला नारंगी
In simple words: कैरोटिन और जैन्थोफिल नामक पदार्थ फलों और सब्जियों को पीला या नारंगी रंग देते हैं।
🎯 Exam Tip: कैरोटिन और जैन्थोफिल सहायक वर्णक होते हैं जो क्लोरोफिल के साथ मिलकर प्रकाश संश्लेषण में मदद करते हैं और पत्तियों को शरद ऋतु में रंग देते हैं।
Question 8. वायुमण्डल में उपलब्ध कार्बन डाई-ऑक्साइड का प्रतिशत है
(अ) 0.03
(ब) 0.3
(स) 3
(द) 0 - 001.
Answer: (अ) 0.03
In simple words: वायुमंडल में बहुत कम मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड गैस होती है, लगभग 0.03 प्रतिशत।
🎯 Exam Tip: कार्बन डाइऑक्साइड एक ग्रीनहाउस गैस है जो पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक है।
Question 9. बैंगनी जीवाणु व नील हरित जीवाणु प्रदर्शित करते
(अ) प्रकाश स्वपोषण
(ब) रासायनिक स्वपोषण
(स) मृतोपजीविता
(द) उपर्युक्त सभी।
Answer: (अ) प्रकाश स्वपोषण
In simple words: बैंगनी जीवाणु और नील हरित जीवाणु अपना भोजन सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके खुद बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रकाश स्वपोषण (photosynthesis) वह प्रक्रिया है जिसमें जीव सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके कार्बन डाइऑक्साइड और पानी से अपना भोजन बनाते हैं।
Question 10. विषमपोषी अवशोष प्रकार का पोषण पाया जाता
(अ) घरेलू मक्खी में
(ब) ऑक्टोपस में
(स) मशरूम में
(द) जोंक (leech) में।
Answer: (स) मशरूम में
In simple words: मशरूम जैसे जीव दूसरे जीवों या मृत पदार्थों से पोषक तत्व सोखकर अपना भोजन लेते हैं।
🎯 Exam Tip: विषमपोषी पोषण में जीव अपना भोजन खुद नहीं बनाते बल्कि दूसरों से प्राप्त करते हैं, जैसे फंगस या जानवर।
Question 12. दूध की प्रोटीन का पाचक एन्जाइम हैं
(अ) रेनिन
(ब) लाइपेज
(स) ट्रिप्सिन
(द) स्टिएप्सिन।
Answer: (अ) रेनिन
In simple words: रेनिन नामक एंजाइम दूध में मौजूद प्रोटीन को तोड़ने में मदद करता है, खासकर छोटे बच्चों में।
🎯 Exam Tip: रेनिन छोटे बच्चों के पाचन तंत्र में महत्वपूर्ण होता है, जहाँ यह दूध के कैसिइन प्रोटीन को जमा कर पाचन को आसान बनाता है।
Question 13. यीस्ट में अनविसी श्वसन से बनता है
(अ) CO2, जल व ऊर्जा
(ब) CO2, ऐल्कोहॉल व ऊर्जा
(स) CO2, लैक्टिक अम्ल व ऊर्जा
(द) CO2, व ऊर्जा।
Answer: (ब) CO2, ऐल्कोहॉल व ऊर्जा
In simple words: जब यीस्ट बिना ऑक्सीजन के सांस लेता है, तो वह कार्बन डाइऑक्साइड, शराब और ऊर्जा बनाता है।
🎯 Exam Tip: अवायवीय श्वसन (anaerobic respiration) ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है और यीस्ट में इसका मुख्य उत्पाद इथेनॉल (शराब) है, जिसका उपयोग शराब बनाने में होता है।
Question 14. श्वास रन्ध्र या स्पाइरेकल (Spiracles) किस जीव के श्वसन में सहायक हैं
(अ) मछली
(ब) केंचुआ
(स) तिलचट्टा
(द) मनुष्य।
Answer: (स) तिलचट्टा
In simple words: तिलचट्टा जैसे कीड़े अपने शरीर पर छोटे-छोटे छिद्रों (श्वास रन्ध्र) से सांस लेते हैं।
🎯 Exam Tip: कीड़ों में श्वास रन्ध्र श्वसन तंत्र का हिस्सा होते हैं जो वायु को सीधे शरीर के ऊतकों तक पहुँचाने में मदद करते हैं।
Question 15. दोहरा परिसंचरण तन्त्र पाया जाता है
(अ) मछली में
Answer: (द) मनुष्य में
In simple words: मनुष्य और अन्य स्तनधारियों में दोहरा परिसंचरण तंत्र होता है, जिसका मतलब है कि रक्त एक पूरे चक्कर में हृदय से दो बार गुजरता है।
🎯 Exam Tip: दोहरा परिसंचरण तंत्र रक्त को ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त को अलग रखने में मदद करता है, जिससे अधिक कुशल ऑक्सीजन वितरण होता है।
Question 16. मनुष्य में RBC का जीवन काल कितना होता है ?
(अ) 3 दिन
(ब) एक वर्ष
(स) 120 दिन
(द) 7-8 दिन।
Answer: (स) 120 दिन
In simple words: मनुष्य के शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं (RBC) लगभग 120 दिनों तक जीवित रहती हैं।
🎯 Exam Tip: लाल रक्त कोशिकाएं (RBCs) पूरे शरीर में ऑक्सीजन ले जाने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं और इनका सीमित जीवनकाल होता है।
Question 17. बरसात के दिनों में लकड़ी के दरवाजों का फूल जाना उदाहरण हैं
(अ) विसरण को
(ब) अन्तःशोषण का
(स) जीवद्रव्य कुंचन का
(द) केशिकत्व का।
Answer: (ब) अन्तःशोषण का
In simple words: लकड़ी के दरवाजे बरसात में नमी सोखकर फूल जाते हैं, इसे अन्तःशोषण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: अन्तःशोषण (imbibition) वह प्रक्रिया है जिसमें ठोस पदार्थ तरल को अवशोषित करके फूल जाते हैं, जैसे बीज का अंकुरण।
Question 18. निम्न में से अमोनोटेलिक जन्तु है
(अ) छिपकली
(ब) कबूतर
(स) हाइड्रा
(द) मेंढक।
Answer: (स) हाइड्रा
In simple words: हाइड्रा एक अमोनोटेलिक जीव है, जिसका अर्थ है कि यह अमोनिया को अपने अपशिष्ट के रूप में निकालता है।
🎯 Exam Tip: अमोनोटेलिक जीव सामान्यतः जलीय होते हैं क्योंकि अमोनिया एक अत्यधिक विषाक्त पदार्थ है और इसे पानी में घोलकर शरीर से बाहर निकालना पड़ता है।
Question 19. किस जीव में नाइट्रोजनी उत्सर्जी पदार्थ यूरिक अम्ल होता है
(अ) स्पंज
(ब) मनुष्य
(स) मछली
(द) तोता।
Answer: (द) तोता।
In simple words: तोता जैसे पक्षी अपने शरीर से यूरिक अम्ल को अपशिष्ट पदार्थ के रूप में निकालते हैं।
🎯 Exam Tip: यूरिक अम्ल का उत्सर्जन कम पानी की आवश्यकता के कारण शुष्क वातावरण में रहने वाले जीवों जैसे पक्षियों और सरीसृपों में आम है।
Question 21. केंचुए में उत्सर्जी अंग हैं
(अ) ग्रीन ग्रन्थि
(ब) वृक्कक या नैफ्रीडिया
(स) गुर्दे या किडनी
(द) संकुचनशील रिक्तिका।
Answer: (ब) वृक्कक या नैफ्रीडिया
In simple words: केंचुआ में नैफ्रीडिया नामक छोटे-छोटे अंग होते हैं जो उसके शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: केंचुआ में वृक्कक (नेफ्रीडिया) उसके शरीर में जल संतुलन और अपशिष्ट उत्सर्जन दोनों का कार्य करते हैं।
Question 22. कीटों में नाइट्रोजनी उत्सर्जी पदार्थ है
(अ) अमोनिया
(ब) यूरिया
(स) यूरिक अम्ल
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (स) यूरिक अम्ल
In simple words: कीट अपने शरीर से यूरिक अम्ल को नाइट्रोजन वाले अपशिष्ट पदार्थ के रूप में बाहर निकालते हैं।
🎯 Exam Tip: यूरिक अम्ल का उत्सर्जन कीटों को पानी बचाने में मदद करता है, क्योंकि यह कम पानी में ठोस रूप में उत्सर्जित किया जा सकता है।
Question 23. कीटों का उत्सर्जी अंग हैं
(अ) मैलपीजी नालिका
(व) नेफ्रीडिया
(स) गुर्दे
(द) संकुचनशील रिक्तिका।
Answer: (अ) मैलपीजी नालिका
In simple words: कीटों में मैलपीजी नालिका नामक विशेष अंग होते हैं जो उनके शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: मैलपीजी नालिकाएं कीटों में उत्सर्जन और ऑस्मोरेग्यूलेशन (जल संतुलन) दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
Question 25. नाइट्रोजनी अपशिष्ट मुख्यतः किसके उपापचय से बनते हैं ?
(अ) कार्बोहाइड्रेट
(ब) वसा
(स) प्रोटीन
(द) विटामिन।
Answer: (स) प्रोटीन
In simple words: शरीर में प्रोटीन के टूटने से मुख्य रूप से नाइट्रोजन वाले अपशिष्ट पदार्थ बनते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन उपापचय के उप-उत्पाद जैसे अमोनिया, यूरिया और यूरिक अम्ल को शरीर से बाहर निकालना आवश्यक होता है क्योंकि वे विषाक्त हो सकते हैं।
Question 26. वृक्षों की छाल में पाये जाने वाले रन्ध्र कहलाते हैं
(अ) पर्णरन्ध्र
(ब) जलरन्ध्र
(स) वातरन्ध्र
(द) उपर्युक्त कोई नहीं।
Answer: (स) वातरन्ध्र
In simple words: पेड़ों की छाल में छोटे छिद्र होते हैं जिनसे हवा अंदर-बाहर आती-जाती है, जिन्हें वातरन्ध्र कहते हैं।
🎯 Exam Tip: वातरन्ध्र (lenticels) पौधों में गैस विनिमय और वाष्पोत्सर्जन में मदद करते हैं, खासकर उन भागों में जहाँ स्टोमेटा मौजूद नहीं होते।
Question 27. लम्बवत् द्विविभाजन पाया जाता है
(अ) अमीबा में।
(ब) पैरामीशियम में
(स) यूग्लीना में
(द) प्लाज्मोडियम में।
Answer: (स) यूग्लीना में
In simple words: यूग्लीना नामक जीव में कोशिका लंबवत दो भागों में बंटकर नया जीव बनाती है।
🎯 Exam Tip: द्विविभाजन (binary fission) अलैंगिक प्रजनन का एक तरीका है, जिसमें एक एकल जीव दो लगभग समान संतति कोशिकाओं में विभाजित होता है।
Question 28. आनुवंशिक विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं
(अ) मुकुलन में
Answer: (द) लैंगिक जनन में
In simple words: आनुवंशिक अंतर तब आते हैं जब दो अलग-अलग जीवों से बच्चे पैदा होते हैं, क्योंकि उनके गुण मिलकर कुछ नया बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: लैंगिक जनन में युग्मकों के संलयन और क्रॉसिंग-ओवर के कारण आनुवंशिक विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं, जो प्रजातियों के अनुकूलन में सहायक होती हैं।
Question 29. माइलिन आच्छदं पाया जाता है
(अ) माश्म (dendrite) पर
(ब) तंत्रिकाक्ष (Axon) पर
(स) कोशिकाकाय (cyton) पर
(द) संवेदी अंगों पर।
Answer: (ब) तंत्रिकाक्ष (Axon) पर
In simple words: माइलिन आच्छद तंत्रिका कोशिका के लंबे तार जैसे हिस्से (एक्सॉन) को ढकता है, जिससे संदेश तेजी से जाते हैं।
🎯 Exam Tip: माइलिन आच्छद तंत्रिका आवेगों के संचरण की गति को बढ़ाता है और तंत्रिका अक्ष को विद्युत इन्सुलेशन प्रदान करता है।
Question 30. मेरुरज्जु का पृष्ठ मूल (dorsal root) बना होता है
(अ) चालक तंत्रिका तन्तुओं का
(ब) संवेदी तंत्रिका तन्तुओं का
(स) मिश्रित तंत्रिका तन्तुओं का
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
Answer: (ब) संवेदी तंत्रिका तन्तुओं का
In simple words: रीढ़ की हड्डी के पीछे का हिस्सा (पृष्ठ मूल) उन नसों से बना होता है जो शरीर से दिमाग तक सूचनाएं ले जाती हैं।
🎯 Exam Tip: मेरुरज्जु के पृष्ठ मूल में संवेदी न्यूरॉन होते हैं जो त्वचा, मांसपेशियों और आंतरिक अंगों से संवेदी जानकारी केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक पहुँचाते हैं।
Question 31. खरपतवार उन्मूलन हेतु प्रयोग किये जाने वाला वृद्धि पदार्थ है
(अ) ऑक्सिन
(ब) जिबरेलिन
(स) साइटोकाइनिन
(द) इथाईलीन।
Answer: (अ) ऑक्सिन
In simple words: ऑक्सिन एक ऐसा पौधा हार्मोन है जिसका उपयोग खरपतवारों को खत्म करने के लिए किया जाता है क्योंकि यह उनकी वृद्धि को अनियंत्रित कर देता है।
🎯 Exam Tip: ऑक्सिन पौधों में कोशिका वृद्धि और विकास को नियंत्रित करता है, और कृत्रिम ऑक्सिन का उपयोग चयनात्मक शाकनाशी (selective herbicides) के रूप में किया जाता है।
सुमेलन सम्बन्धी प्रश्न
| कॉलम-A | कॉलम-B |
|---|---|
| (i) अमीबा | (d) अनियमित द्विविखण्डन |
| (ii) यूग्लीना | (e) लम्बवत् द्विविखण्डन |
| (iii) पुनरुद्भवन | (a) तारा मछली |
| (iv) वृषण | (b) टेस्टोस्टीरॉन |
| (v) यीस्ट | (f) मुकुलन |
| (vi) इन्सुलिन | (c) अंग्न्याशय |
Answer:
(i) अमीबा → (d) अनियमित द्विविखण्डन
(ii) यूग्लीना → (e) लम्बवत् द्विविखण्डन
(iii) पुनरुद्भवन → (a) तारा मछली
(iv) वृषण → (b) टेस्टोस्टीरॉन
(v) यीस्ट → (f) मुकुलन
(vi) इन्सुलिन → (c) अंग्न्याशय
In simple words: यह मिलान सूची विभिन्न जीवों के प्रजनन के तरीकों या अंगों और उनसे संबंधित पदार्थों को सही ढंग से जोड़ती है।
🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में प्रत्येक विकल्प को ध्यान से देखें और प्रत्येक युग्म के संबंध को समझकर सही उत्तर चुनें।
Question 1. पोषक पदार्थों के कोई दो उपयोग लिखिए।
Answer: पोषक पदार्थों के दो मुख्य उपयोग निम्नलिखित हैं:
1. इनसे शरीर को सभी जैविक क्रियाओं जैसे चलने, सोचने और सांस लेने के लिए ऊर्जा मिलती है।
2. ये शरीर की वृद्धि और विकास के लिए, साथ ही टूटी-फूटी कोशिकाओं की मरम्मत और नए पदार्थ बनाने के लिए आवश्यक होते हैं।
In simple words: पोषक तत्व शरीर को ऊर्जा देते हैं और उसे बढ़ने तथा ठीक होने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: पोषक तत्व (nutrients) शरीर के लिए ईंधन और निर्माण सामग्री दोनों के रूप में कार्य करते हैं; ऊर्जा उत्पादन और ऊतक मरम्मत उनके प्राथमिक कार्य हैं।
Question 3. दो ऐसे प्रकाश संश्लेषी वर्णकों के नाम लिखिए। जो हरे रंग के नहीं होते।
Answer: दो प्रकाश संश्लेषी वर्णक जो हरे रंग के नहीं होते, वे हैं कैरोटिन और जैन्थोफिल। ये वर्णक पौधों में पीले, नारंगी या लाल रंग के होते हैं और प्रकाश संश्लेषण में क्लोरोफिल की सहायता करते हैं। ये सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करके क्लोरोफिल तक पहुँचाते हैं।
In simple words: कैरोटिन और जैन्थोफिल दो ऐसे रंगीन पदार्थ हैं जो हरे नहीं होते पर पौधों को सूरज की रोशनी सोखने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: सहायक वर्णक जैसे कैरोटिनॉइड (कैरोटिन और जैन्थोफिल) क्लोरोफिल को अत्यधिक प्रकाश क्षति से भी बचाते हैं।
Question 4. प्रकाश अभिक्रिया में बनने वाले ऐसे दो पदार्थों का नाम लिखिए जो अप्रकाशिक क्रिया में CO2 के स्थिरीकरण हेतु आवश्यक हैं।
Answer: प्रकाश अभिक्रिया में बनने वाले दो पदार्थ जो अप्रकाशिक क्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के स्थिरीकरण के लिए आवश्यक हैं, वे हैं ATP (एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट) और NADPH (निकोटिनामाइड एडेनिन डाइन्यूक्लियोटाइड फॉस्फेट)। ये दोनों ऊर्जा वाहक अणु होते हैं जो प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलकर अप्रकाशिक अभिक्रिया के लिए ऊर्जा और अपचायक शक्ति प्रदान करते हैं।
In simple words: प्रकाश अभिक्रिया से ATP और NADPH बनते हैं, जो पौधों को कार्बन डाइऑक्साइड को भोजन में बदलने के लिए ऊर्जा देते हैं।
🎯 Exam Tip: ATP और NADPH को 'स्वांगीकारी शक्ति' (assimilatory power) के रूप में जाना जाता है क्योंकि वे प्रकाश-स्वतंत्र प्रतिक्रियाओं को ऊर्जा प्रदान करते हैं।
Question 5. C3 चक्र को अन्य किस नाम से जाना जाता है ?
Answer: C3 चक्र को कैल्विन चक्र के नाम से भी जाना जाता है। इस चक्र में कार्बन डाइऑक्साइड का स्थिरीकरण होता है और यह प्रकाश संश्लेषण की अप्रकाशिक अभिक्रिया का मुख्य हिस्सा है। इस चक्र का नाम वैज्ञानिक मेल्विन कैल्विन के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने इसकी खोज की थी।
In simple words: C3 चक्र को कैल्विन चक्र भी कहते हैं, जहाँ पौधे कार्बन डाइऑक्साइड को अपने भोजन में बदलते हैं।
🎯 Exam Tip: कैल्विन चक्र में पहला स्थायी उत्पाद तीन कार्बन वाला यौगिक (3-फॉस्फोग्लिसरेट) होता है, जिससे इसे C3 चक्र कहते हैं।
Question 6. कोशिका में कार्बोहाइड्रेट्स के संचयन का प्रकाश संश्लेषण की दर पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
Answer: कोशिका में कार्बोहाइड्रेट्स के अधिक संचयन से प्रकाश संश्लेषण की दर कम हो जाती है। जब कोशिका में बहुत सारा कार्बोहाइड्रेट जमा हो जाता है, तो यह प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को धीमा कर देता है, क्योंकि पौधे को अब और भोजन बनाने की तुरंत आवश्यकता नहीं होती। इसके विपरीत, कार्बोहाइड्रेट्स की कमी से प्रकाश संश्लेषण की दर बढ़ जाती है ताकि पर्याप्त भोजन बनाया जा सके। पौधे अपनी ऊर्जा का प्रबंधन इस तरह करते हैं कि अनावश्यक उत्पादन से बचा जा सके।
In simple words: जब पौधे में बहुत सारा भोजन (कार्बोहाइड्रेट) जमा हो जाता है, तो वह कम प्रकाश संश्लेषण करता है, और जब भोजन कम होता है, तो वह ज़्यादा करता है।
🎯 Exam Tip: प्रकाश संश्लेषण की दर पर उत्पादों का संचयन एक प्रकार का नकारात्मक फीडबैक नियंत्रण है, जो पौधों को ऊर्जा के कुशल उपयोग में मदद करता है।
Question 7. भोजन के किस घटक का लगातार अभाव मनुष्य में कब्ज़ पैदा कर देता है ?
Answer: भोजन के आहारी रेशे या रुक्षांश (dietary fibre or roughage) की लगातार कमी से मनुष्य में कब्ज़ पैदा हो सकता है। आहारी रेशे हमारे पाचन तंत्र से आसानी से नहीं पचते, लेकिन वे भोजन को आंतों में आगे बढ़ाने में मदद करते हैं और मल को नरम रखते हैं, जिससे मल त्याग करना आसान हो जाता है। उनकी अनुपस्थिति में, मल कठोर हो जाता है और कब्ज़ की समस्या होती है।
In simple words: अगर हम खाने में रेशेदार चीजें कम खाते हैं, तो हमें कब्ज़ हो सकता है।
🎯 Exam Tip: आहारी रेशे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं, कब्ज़ से बचाते हैं और रक्त शर्करा तथा कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में भी सहायक होते हैं।
Question 8. आहारी रेशों के दो मुख्य कार्य बताइए।
Answer: आहारी रेशों के दो मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:
1. यह भोजन के आयतन को बढ़ाता है जिससे व्यक्ति को अधिक कैलोरी लिए बिना ही पेट भरा हुआ महसूस होता है। यह वजन नियंत्रण में मदद करता है।
2. यह व्यक्ति को कब्ज़ से बचाता है क्योंकि यह मल में पानी जोड़कर उसे नरम रखता है, जिससे मल त्याग आसान हो जाता है और आहार तंत्र स्वस्थ रहता है। रेशे आंतों की गति को उत्तेजित करते हैं।
In simple words: आहारी रेशे पेट को भरा हुआ महसूस कराते हैं और कब्ज़ से बचाते हैं, जिससे हमारा पाचन तंत्र ठीक से काम करता है।
🎯 Exam Tip: रेशेदार भोजन जैसे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फलियां पाचन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 9. प्राणिसमभोजी जीवों से आप क्या समझते हैं ?
Answer: प्राणिसमभोजी (Holozoic) जीव वे होते हैं जो ठोस भोजन को अपने शरीर के अंदर लेते हैं और फिर उसका पाचन करते हैं। इस प्रकार के पोषण में भोजन को निगलना, पचाना, अवशोषित करना और अनुपयोगी पदार्थ को बाहर निकालना शामिल होता है। मनुष्य, अमीबा और अन्य जानवर प्राणिसमभोजी पोषण दर्शाते हैं। ये जीव अपने भोजन के लिए सीधे या परोक्ष रूप से पौधों पर निर्भर होते हैं।
In simple words: प्राणिसमभोजी जीव अपना भोजन ठोस रूप में खाते हैं, फिर उसे शरीर के अंदर पचाते हैं और फिर इस्तेमाल करते हैं।
🎯 Exam Tip: प्राणिसमभोजी पोषण में भोजन के चरण (अंतर्ग्रहण, पाचन, अवशोषण, स्वांगीकरण, बहिष्करण) को स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है।
Question 11. पाचन तन्त्र में जीभ का क्या कार्य है ?
Answer: पाचन तंत्र में जीभ के कई महत्वपूर्ण कार्य हैं। सबसे पहले, जीभ भोजन को चबाने में दाँतों की सहायता करती है, उसे हिलाती है ताकि वह ठीक से पिसे। दूसरा, जीभ चबाए गए भोजन को ग्रासनली (food pipe) की ओर धकेलने में मदद करती है ताकि उसे निगला जा सके। तीसरा, जीभ पर स्वाद कलिकाएँ होती हैं जो हमें भोजन का स्वाद लेने में मदद करती हैं। इसके अलावा, जीभ बोलने में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे हम ध्वनियाँ बना पाते हैं।
In simple words: जीभ भोजन को चबाने और निगलने में मदद करती है, हमें स्वाद बताती है और बोलने में भी काम आती है।
🎯 Exam Tip: जीभ भोजन को लार के साथ मिलाने में भी मदद करती है, जिससे भोजन और नरम हो जाता है और पाचन की प्रक्रिया शुरू होती है।
Question 12. उस एन्जाइम का नाम लिखिए जो निष्क्रिय टिप्सिनोजन को सक्रिय टिप्सिन में बदल देता है।
Answer: निष्क्रिय टिप्सिनोजन को सक्रिय टिप्सिन में बदलने वाला एन्जाइम एन्टेरोकाइनेज (Enterokinase) है। यह एन्जाइम छोटी आंत की दीवारों से स्रावित होता है और अग्नाशय से आने वाले निष्क्रिय टिप्सिनोजन को सक्रिय करता है, जिससे प्रोटीन पाचन की प्रक्रिया शुरू हो पाती है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि सक्रिय ट्रिप्सिन अन्य प्रोटीन-पाचक एन्जाइमों को भी सक्रिय करता है।
In simple words: एन्टेरोकाइनेज नामक एंजाइम निष्क्रिय टिप्सिनोजन को सक्रिय टिप्सिन में बदल देता है, जिससे प्रोटीन पचने लगता है।
🎯 Exam Tip: एन्टेरोकाइनेज की क्रिया छोटी आंत में प्रोटीन पाचन को शुरू करने के लिए एक महत्वपूर्ण नियामक कदम है।
Question 13. पेशीय कोशिका में हुए अवायवीय श्वसन से अन्तिम उत्पाद क्या बनता है ?
Answer: पेशीय कोशिका में अवायवीय श्वसन (बिना ऑक्सीजन के श्वसन) से अन्तिम उत्पाद लैक्टिक अम्ल (Lactic acid) बनता है। जब मांसपेशियाँ तेज़ी से काम करती हैं और उन्हें पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, तो वे ग्लूकोज को लैक्टिक अम्ल में तोड़ती हैं ताकि ऊर्जा मिल सके। लैक्टिक अम्ल के जमाव के कारण ही मांसपेशियों में थकान और दर्द महसूस होता है।
In simple words: जब मांसपेशियों को ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो वे लैक्टिक अम्ल बनाती हैं जिससे उन्हें ऊर्जा मिलती है।
🎯 Exam Tip: लैक्टिक अम्ल के निर्माण से ऊर्जा तो मिलती है, लेकिन यह कम कुशल प्रक्रिया है और अधिक देर तक नहीं चल सकती।
Question 14. अवायवीय श्वसन की अपेक्षा वायवीय श्वसन में अधिक ऊर्जा उत्पन्न क्यों होती है ?
Answer: अवायवीय श्वसन की अपेक्षा वायवीय श्वसन (ऑक्सीजन की उपस्थिति में) में अधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है क्योंकि वायवीय श्वसन में आधारी पदार्थ (ग्लूकोज) का ऑक्सीजन की उपस्थिति में पूर्ण ऑक्सीकरण होता है। इससे ग्लूकोज पूरी तरह से कार्बन डाइऑक्साइड और जल में टूट जाता है, जिससे अधिकतम ऊर्जा निकलती है। इसके विपरीत, अवायवीय श्वसन में ऑक्सीजन की अनुपस्थिति के कारण ग्लूकोज का अधूरा ऑक्सीकरण होता है और उसके अंतिम उत्पादों में अभी भी बहुत ऊर्जा शेष रह जाती है।
In simple words: वायवीय श्वसन में ऑक्सीजन की मदद से भोजन पूरी तरह से टूटता है, इसलिए ज्यादा ऊर्जा मिलती है, जबकि अवायवीय श्वसन में भोजन अधूरा टूटता है और कम ऊर्जा मिलती है।
🎯 Exam Tip: वायवीय श्वसन में ग्लूकोज के प्रत्येक अणु से लगभग 38 ATP अणु बनते हैं, जबकि अवायवीय श्वसन में केवल 2 ATP अणु ही बनते हैं।
Question 15. नासा मार्ग के कोई दो कार्य लिखिए।
Answer: नासा मार्ग (Nasal passage) के दो मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:
1. नासा मार्ग में मौजूद बाल और म्यूकस (बलगम) वायु को अंदर जाने से पहले उसे साफ करते हैं, जिससे धूल के कण, पराग और अन्य छोटे कण फेफड़ों तक नहीं पहुँच पाते।
2. यह फेफड़ों में प्रवेश करने वाली वायु के तापमान को शरीर के तापमान के बराबर लाने में मदद करता है, जिससे फेफड़ों को ठंडी या बहुत गर्म हवा से होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। नासा मार्ग हवा को नम भी करता है।
In simple words: नासा मार्ग हवा को साफ करता है और उसके तापमान को ठीक करता है ताकि वह फेफड़ों को नुकसान न पहुँचाए।
🎯 Exam Tip: नासा मार्ग में पाए जाने वाले सिलिया (छोटे बाल) और म्यूकस मिलकर एक 'म्यूकोसिलियरी एस्केलेटर' बनाते हैं जो कणों को फेफड़ों से दूर धकेलता है।
Question 17. मनुष्य में श्वसन तन्त्र के किस भाग में कार्टीलेज के बने c आकार के छल्ले पाये जाते हैं ?
Answer: मनुष्य के श्वसन तंत्र में, श्वास नली (Trachea) में कार्टिलेज के बने C-आकार के छल्ले पाए जाते हैं। ये छल्ले श्वास नली को खुला रखने में मदद करते हैं, जिससे हवा आसानी से अंदर और बाहर जा सके। यह सुनिश्चित करता है कि श्वास नली हवा की कमी में पिचक न जाए।
In simple words: श्वास नली में C-आकार के छल्ले होते हैं। ये छल्ले श्वास नली को हमेशा खुला रखते हैं ताकि सांस लेने में दिक्कत न हो।
🎯 Exam Tip: श्वास नली में कार्टिलेज के छल्ले हवा के रास्ते को खुला रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, ताकि यह सांस लेने के दौरान पिचक न जाए।
Question 18. एपीग्लाटिस का क्या कार्य है ?
Answer: एपिग्लोटिस एक फ्लैप जैसा होता है जो भोजन निगलते समय वायुमार्ग को ढक देता है। इसका मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना है कि भोजन के कण सांस की नली में न जाएं। यह भोजन को भोजन नली (ग्रासनली) में और हवा को श्वास नली में जाने का रास्ता देता है।
In simple words: एपिग्लोटिस एक ढक्कन जैसा होता है। यह खाने को श्वास नली में जाने से रोकता है, ताकि आप ठीक से निगल सकें।
🎯 Exam Tip: एपिग्लोटिस का कार्य भोजन को श्वास नली में जाने से रोकना है, जो इसे पाचन और श्वसन प्रणाली के बीच एक महत्वपूर्ण सुरक्षा वाल्व बनाता है।
Question 19. बन्द परिसंचरण तन्त्र के दो लाभ लिखिए।
Answer: बंद परिसंचरण तंत्र के दो मुख्य लाभ हैं:
(i) इस तंत्र में रक्त का दबाव ठीक से नियंत्रित रहता है। इससे शरीर के किसी विशेष अंग को रक्त की आपूर्ति को बढ़ाया या घटाया जा सकता है, जो शरीर की जरूरतों के अनुसार रक्त प्रवाह को समायोजित करने में मदद करता है।
(ii) जहां रक्त की अधिक आवश्यकता होती है, वहां रक्त को शुद्धता के साथ भेजा जा सकता है। इसमें रक्त अनियमित रूप से इधर-उधर नहीं बहता है, जिससे रक्तचाप स्थिर रहता है और अंगों तक कुशल आपूर्ति होती है।
In simple words: बंद परिसंचरण तंत्र में रक्त का दबाव नियंत्रित रहता है। यह सुनिश्चित करता है कि रक्त सही जगह पर और सही मात्रा में शुद्धता से पहुंचे।
🎯 Exam Tip: बंद परिसंचरण तंत्र रक्तचाप को नियंत्रित करने और आवश्यकतानुसार अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की कुशल आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करता है।
Question 20. रक्त में पाये जाने वाले कुछ प्रोटीन के नाम लिखिए।
Answer: रक्त में कई महत्वपूर्ण प्रोटीन पाए जाते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख प्रोटीन एल्ब्यूमिन, ग्लोब्यूलिन, एंटीबॉडीज, फाइब्रिनोजेन और प्रोथ्रोम्बिन हैं। ये प्रोटीन शरीर के कई कामों में मदद करते हैं, जैसे द्रव संतुलन बनाए रखना और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना।
In simple words: रक्त में एल्ब्यूमिन, ग्लोब्यूलिन, एंटीबॉडीज, फाइब्रिनोजेन और प्रोथ्रोम्बिन जैसे प्रोटीन होते हैं।
🎯 Exam Tip: रक्त में पाए जाने वाले प्रोटीन जैसे एल्ब्यूमिन और फाइब्रिनोजेन, शरीर के द्रव संतुलन और रक्त के थक्के बनाने जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक होते हैं।
Question 21. उस शिरा का नाम लिखिए जिसमें शुद्ध रक्त पाया जाता है ?
Answer: आमतौर पर शिराओं में अशुद्ध रक्त होता है, लेकिन एक शिरा ऐसी है जिसमें शुद्ध रक्त पाया जाता है। वह फुफ्फुसीय शिरा (Pulmonary vein) है। यह शिरा फेफड़ों से ऑक्सीजन युक्त शुद्ध रक्त को हृदय तक वापस लाती है।
In simple words: फुफ्फुसीय शिरा में शुद्ध रक्त होता है। यह फेफड़ों से साफ खून को दिल तक पहुंचाती है।
🎯 Exam Tip: फुफ्फुसीय शिरा एक अपवाद है क्योंकि यह ऑक्सीजन युक्त रक्त ले जाती है, जो कि अधिकांश अन्य शिराओं के विपरीत है जो ऑक्सीजन रहित रक्त ले जाती हैं।
Question 22. स्वस्थ व्यक्ति के रक्त दाब का मान लिखिए।
Answer: एक स्वस्थ व्यक्ति का सामान्य रक्तचाप 120/80 mmHg (120 मिलीमीटर पारा सिस्टोलिक दबाव और 80 मिलीमीटर पारा डायस्टोलिक दबाव) होता है। ऊपरी संख्या (120) दिल के धड़कने पर दबाव को दिखाती है, और निचली संख्या (80) धड़कनों के बीच के आराम के दौरान दबाव को दिखाती है। इस सीमा में रक्तचाप स्वस्थ माना जाता है।
In simple words: स्वस्थ व्यक्ति का रक्तचाप आमतौर पर 120/80 mmHg होता है। 120 सिस्टोलिक है और 80 डायस्टोलिक है।
🎯 Exam Tip: रक्तचाप को सिस्टोलिक (हृदय के संकुचन के दौरान) और डायस्टोलिक (हृदय के आराम के दौरान) मानों में मापा जाता है, जो दोनों एक स्वस्थ शरीर के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 23. वाष्पोत्सर्जन के दो लाभ लिखिए।
Answer: वाष्पोत्सर्जन के दो प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
1. यह पौधों को ठंडा रखने में मदद करता है, खासकर गर्म मौसम में, जैसे पसीना हमें ठंडा रखता है।
2. यह पौधों में पानी और खनिजों को जड़ों से पत्तियों तक ऊपर खींचने के लिए एक खिंचाव बल (transpiration pull) बनाता है, जिससे पानी का संचलन होता है।
In simple words: वाष्पोत्सर्जन पौधों को ठंडा रखता है और पानी व खनिज को ऊपर खींचने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: वाष्पोत्सर्जन पौधों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो उन्हें ठंडा रखती है और पानी व पोषक तत्वों को ऊपर की ओर ले जाने में सहायता करती है।
Question 24. मूल रोम के कोई दो कार्य लिखिए।
Answer: मूल रोम के दो मुख्य कार्य इस प्रकार हैं:
1. मूल रोम मिट्टी से पानी और खनिज लवणों को सोखने का काम करते हैं। ये बालों जैसी संरचनाएं मिट्टी के कणों के बीच के पानी तक पहुँचती हैं।
2. मूल रोम पौधे की अवशोषण सतह को कई गुना बढ़ा देते हैं, जिससे पौधे को अधिक पानी और पोषक तत्व सोखने में मदद मिलती है।
In simple words: मूल रोम मिट्टी से पानी और खनिज सोखते हैं। वे पौधे की पानी सोखने वाली जगह को बहुत बढ़ा देते हैं।
🎯 Exam Tip: मूल रोम जड़ों की सतह का क्षेत्रफल बढ़ाते हैं, जिससे पौधों के लिए पानी और पोषक तत्वों का अवशोषण अधिक प्रभावी हो जाता है।
Question 25. सक्रिय अवशोषण क्या है ?
Answer: सक्रिय अवशोषण वह प्रक्रिया है जिसमें पौधे ऊर्जा का उपयोग करके विशेष अणुओं को कम सांद्रता वाले क्षेत्र से उच्च सांद्रता वाले क्षेत्र में अवशोषित करते हैं। यह विसरण (diffusion) के नियम के विपरीत होता है और इसमें ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। यह प्रक्रिया पौधों को उन पोषक तत्वों को भी प्राप्त करने में सक्षम बनाती है जो मिट्टी में कम मात्रा में होते हैं।
In simple words: सक्रिय अवशोषण में पौधे ऊर्जा का उपयोग करके पोषक तत्वों को सोखते हैं, भले ही वे मिट्टी में कम हों। इसमें ऑक्सीजन की जरूरत होती है।
🎯 Exam Tip: सक्रिय अवशोषण ऊर्जा-निर्भर होता है और यह पौधों को विसरण प्रवणता के विरुद्ध आवश्यक पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करता है।
Question 26. केशिकात्व क्या है ?
Answer: केशिकात्व (Capillarity) एक ऐसी घटना है जिसमें कोई द्रव, जैसे पानी, अपनी सतह के तनाव के कारण किसी पतली नली या केशिका में अपने आप ऊपर चढ़ जाता है। इस कारण जब किसी पतली नली को पानी में सीधा खड़ा किया जाता है, तो पानी उसमें कुछ ऊंचाई तक चढ़ जाता है। यह पौधों में पानी के संचलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: केशिकात्व वह है जब कोई तरल पदार्थ पतली नली में अपने आप ऊपर चढ़ जाता है। यह पानी को पौधों में ऊपर जाने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: केशिकात्व तरल पदार्थों के लिए गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध छोटी नलियों में ऊपर चढ़ने की क्षमता को दर्शाता है, जो जल परिवहन जैसी जैविक प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 27. उपचयी क्रियाओं को परिभाषित कीजिए।
Answer: उपचयी क्रियाएँ (Anabolic reactions) वे उपापचयी क्रियाएँ होती हैं जिनमें सरल यौगिक मिलकर जटिल यौगिकों का निर्माण करते हैं। इन क्रियाओं के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। प्रकाश संश्लेषण इसका एक प्रमुख उदाहरण है, जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड और पानी मिलकर ग्लूकोज जैसे जटिल अणु बनाते हैं।
In simple words: उपचयी क्रियाओं में छोटे अणु जुड़कर बड़े अणु बनाते हैं। इसमें ऊर्जा लगती है, जैसे पौधों में खाना बनने की प्रक्रिया।
🎯 Exam Tip: उपचयी क्रियाएँ जटिल अणुओं के निर्माण के लिए ऊर्जा का उपयोग करती हैं, जबकि अपचयी क्रियाएँ ऊर्जा मुक्त करने के लिए जटिल अणुओं को तोड़ती हैं।
Question 28. अमीबा में परासरण नियमन किस कोशिकांग द्वारा होता है ?
Answer: अमीबा में परासरण नियमन (Osmoregulation) संकुचनशील रिक्तिका (Contractile Vacuole) द्वारा होता है। यह रिक्तिका कोशिका के अंदर जमा हुए अतिरिक्त पानी को बाहर निकालकर कोशिका के पानी के संतुलन को बनाए रखने में मदद करती है। अमीबा एककोशिकीय जीव होने के कारण पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए इस विशेष संरचना का उपयोग करता है।
In simple words: अमीबा में पानी का संतुलन संकुचनशील रिक्तिका नाम के अंग से होता है। यह अतिरिक्त पानी को बाहर निकालती है।
🎯 Exam Tip: संकुचनशील रिक्तिका अमीबा जैसे प्रोटोजोआ में अतिरिक्त पानी को निकालकर परासरण नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
Question 29. किन्हीं दो उभयलिंगी जन्तुओं के नाम लिखिए।
Answer: उभयलिंगी जन्तु वे होते हैं जिनमें एक ही जीव में नर और मादा दोनों जननांग होते हैं। किन्हीं दो उभयलिंगी जन्तुओं के नाम केंचुआ और टेपवर्म हैं। ये जीव एक ही समय में शुक्राणु और अंडे दोनों का उत्पादन कर सकते हैं।
In simple words: केंचुआ और टेपवर्म दो ऐसे जीव हैं जिनमें नर और मादा दोनों अंग एक साथ होते हैं।
🎯 Exam Tip: उभयलिंगी जीव वे होते हैं जिनमें नर और मादा दोनों प्रजनन अंग एक ही शरीर में होते हैं, जिससे उन्हें प्रजनन में अधिक लचीलापन मिलता है।
Question 31. प्लेसेंटा किसे कहते हैं ?
Answer: प्लेसेंटा एक विशेष संरचना है जो गर्भाशय में पल रहे भ्रूण के पोषण, ऑक्सीजन की आपूर्ति और उत्सर्जन के लिए विकसित होती है। यह भ्रूण को गर्भाशय की दीवार से जोड़ता है और माँ के रक्त से पोषक तत्वों व ऑक्सीजन को भ्रूण तक पहुँचाता है, जबकि भ्रूण के अपशिष्ट पदार्थों को माँ के रक्त में वापस भेजता है। यह भ्रूण के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
In simple words: प्लेसेंटा वह खास अंग है जो गर्भाशय में बच्चे को पोषण, ऑक्सीजन देता है और कचरा हटाने में मदद करता है। यह बच्चे को मां से जोड़ता है।
🎯 Exam Tip: प्लेसेंटा माँ और विकसित हो रहे भ्रूण के बीच पोषक तत्वों, गैसों और अपशिष्ट उत्पादों के आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण अस्थायी अंग है।
Question 32. दो ऐसे जन्तुओं के नाम लिखिए जिनमें मदचक्र (Estrons eyele) पाया जाता है।
Answer: मदचक्र (Estrus cycle) उन स्तनधारियों में होता है जिनमें प्रजनन क्षमता का एक विशिष्ट चक्र होता है। दो ऐसे जन्तु जिनमें मदचक्र पाया जाता है, वे गाय और कुत्ता हैं। इस चक्र के दौरान, मादा जानवर शारीरिक और व्यवहारिक परिवर्तन दिखाते हैं, जो प्रजनन के लिए तैयार होने का संकेत देते हैं।
In simple words: गाय और कुत्ता ऐसे जानवर हैं जिनमें मदचक्र होता है। इस चक्र में मादाएं प्रजनन के लिए तैयार होती हैं।
🎯 Exam Tip: मदचक्र उन स्तनधारियों में होता है जो मौसमी प्रजनन करते हैं, जहाँ प्रजनन व्यवहार और शरीर विज्ञान एक चक्रीय पैटर्न का पालन करते हैं।
Question 33. किसी एकलिंगी पादप का नाम लिखिए।
Answer: एकलिंगी पादप वे पौधे होते हैं जिनमें नर और मादा फूल अलग-अलग पौधों पर होते हैं। पपीता और साइकस दो ऐसे पौधे हैं जो एकलिंगी होते हैं। इसका मतलब है कि एक पौधे पर केवल नर फूल होते हैं और दूसरे पौधे पर केवल मादा फूल होते हैं।
In simple words: पपीता और साइकस एकलिंगी पौधे हैं। इसका मतलब है कि नर और मादा फूल अलग-अलग पौधों पर उगते हैं।
🎯 Exam Tip: एकलिंगी पौधों में नर और मादा फूल अलग-अलग पौधों पर पाए जाते हैं, जबकि उभयलिंगी पौधों में दोनों फूल एक ही पौधे पर होते हैं।
Question 34. तन्त्रिका कोशिका के विद्युतरोधी आच्छद का नाम लिखिए।
Answer: तंत्रिका कोशिका के विद्युतरोधी आच्छद को माइलिन आच्छद (Myelin sheath) कहा जाता है। यह एक वसायुक्त परत होती है जो तंत्रिका अक्षतंतु (axon) के चारों ओर लपेटी होती है। माइलिन आच्छद तंत्रिका आवेगों को तेजी से और कुशलता से संचारित करने में मदद करता है, जैसे बिजली के तारों पर प्लास्टिक की परत।
In simple words: तंत्रिका कोशिका के ऊपर बिजली के झटके से बचाने वाली परत को माइलिन आच्छद कहते हैं। यह संदेशों को तेजी से ले जाने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: माइलिन आच्छद तंत्रिका आवेगों के तेज और कुशल संचरण के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह एक विद्युत इन्सुलेटर के रूप में कार्य करता है।
Question 35. स्वायत्त तंत्रिका तंत्र के दो प्रमुख भागों के नाम लिखिए।
Answer: स्वायत्त तंत्रिका तंत्र के दो प्रमुख भाग निम्नलिखित हैं:
• अनुकंपी तंत्रिका तंत्र (Sympathetic nervous system)
• परानुकंपी तंत्रिका तंत्र (Parasympathetic nervous system)
ये दोनों भाग शरीर के अनैच्छिक कार्यों, जैसे हृदय गति, पाचन और श्वसन को नियंत्रित करने के लिए एक साथ काम करते हैं।
In simple words: स्वायत्त तंत्रिका तंत्र के दो मुख्य भाग अनुकंपी और परानुकंपी तंत्रिका तंत्र हैं।
🎯 Exam Tip: अनुकंपी तंत्रिका तंत्र शरीर को 'लड़ो या भागो' की प्रतिक्रिया के लिए तैयार करता है, जबकि परानुकंपी तंत्रिका तंत्र 'आराम और पाचन' की गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
Question 36. हॉर्मोन किसे कहते हैं ?
Answer: हॉर्मोन ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं जो अंतःस्रावी या नलिकाविहीन ग्रंथियों द्वारा सीधे रक्त में छोड़े जाते हैं। ये शरीर के विभिन्न अंगों और प्रणालियों को संदेशवाहक के रूप में कार्य करते हैं, जिससे वृद्धि, चयापचय और प्रजनन जैसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित किया जाता है। इंसुलिन एक ऐसा ही हॉर्मोन है जो रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है।
In simple words: हॉर्मोन शरीर में बनने वाले खास रसायन होते हैं। ये रक्त में मिलकर अंगों को संदेश देते हैं और शरीर के कामों को नियंत्रित करते हैं, जैसे इंसुलिन।
🎯 Exam Tip: हॉर्मोन शरीर के भीतर रासायनिक संदेशवाहक के रूप में कार्य करते हैं, जो विकास, चयापचय और प्रजनन सहित विभिन्न शारीरिक कार्यों को नियंत्रित करते हैं।
शरीर में भोजन के पोषक पदार्थों का उपयोग निम्न तीन प्रकारों से होता है
Question 2. परजीवी क्या होते हैं ? उदाहरण देकर स्पष्ट करें।
Answer: परजीवी वे जीव होते हैं जो अपने पोषण के लिए किसी अन्य जीवित जीव (मेजबान) पर निर्भर रहते हैं। वे मेजबान से भोजन प्राप्त करते हैं और उसे नुकसान पहुंचाते हैं। यह दो मुख्य प्रकार के होते हैं:
(a) स्थायी परजीवी: ये परजीवी अपना पूरा जीवन चक्र मेजबान के शरीर पर या उसके अंदर पूरा करते हैं। उदाहरण के लिए, फीताकृमि और एस्केरिस जैसे जीव मेजबान के शरीर के अंदर रहते हैं।
(b) आंशिक परजीवी: ये परजीवी अपने जीवन चक्र का केवल एक हिस्सा मेजबान के शरीर पर या उसके अंदर पूरा करते हैं। आंशिक परजीवी भी दो प्रकार के होते हैं: बाह्य परजीवी (जो मेजबान की त्वचा से चिपक कर पोषण प्राप्त करते हैं, जैसे अमरबेल) और अंतःपरजीवी (जो मेजबान के शरीर के अंगों में अपना जीवन पूरा करते हैं)।
In simple words: परजीवी वे जीव होते हैं जो जीने और खाने के लिए दूसरे जीव पर निर्भर करते हैं। वे मेजबान को नुकसान पहुंचाते हैं। उदाहरण के लिए, फीताकृमि या अमरबेल।
🎯 Exam Tip: परजीवी मेजबान पर निर्भर करते हैं, जिससे मेजबान को नुकसान होता है, और वे स्थायी या आंशिक रूप से मेजबान के शरीर पर या अंदर रह सकते हैं।
Question 3. लार के कोई चार कार्य लिखिए।
Answer: लार के चार मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:
• लार भोजन को गीला और नरम गूदे जैसा बनाती है। इसमें मौजूद म्यूसिन इस गूदे को चिपचिपा बनाकर निगलने में मदद करता है।
• लार में एमाइलेज एंजाइम स्टार्च को माल्टोज नामक चीनी में बदल देता है, जिससे पाचन की प्रक्रिया मुंह में ही शुरू हो जाती है।
• लार में एंटीबैक्टीरियल पदार्थ होते हैं जो मुंह के अंदर के कीटाणुओं से रक्षा करते हैं।
• लार शरीर में पानी के संतुलन को बनाए रखने में भी मदद करती है, जिससे मुंह सूखने से बचता है।
In simple words: लार भोजन को गीला करती है, स्टार्च को पचाती है, कीटाणुओं से बचाती है और मुंह में पानी का संतुलन बनाए रखती है।
🎯 Exam Tip: लार सिर्फ भोजन को नम नहीं करती बल्कि पाचन, मौखिक स्वच्छता और पानी के संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
Question 4. मनुष्य में पाचन तन्त्र का स्वच्छ नामांकित चित्र बनाइए।
Answer:
यह चित्र मनुष्य के पाचन तंत्र को दर्शाता है, जिसमें यकृत, आमाशय, छोटी आंत, बड़ी आंत और अन्य संबंधित अंग शामिल हैं। भोजन मुंह से शुरू होकर पाचन तंत्र के विभिन्न भागों से गुजरता है, जहां उसका पाचन और अवशोषण होता है।
In simple words: पाचन तंत्र का चित्र यहाँ दिया गया है। इसमें पेट, आंतें और अन्य अंग दिख रहे हैं जो भोजन पचाने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: मानव पाचन तंत्र के आरेख में सभी प्रमुख अंगों को सही ढंग से लेबल करना सुनिश्चित करें, जिसमें मुंह से लेकर गुदा तक का मार्ग शामिल है।
Question 5. मनुष्य में आमाशय की संरचना का वर्णन कीजिए।
Answer: मनुष्य का आमाशय (Stomach) डायाफ्राम के नीचे बाईं ओर स्थित होता है। यह अंग्रेजी के 'J' अक्षर के आकार का एक थैलीनुमा अंग है, जिसकी दीवारें मोटी और मांसपेशीय होती हैं। आमाशय में दो द्वार होते हैं: अग्रद्वार (cardiac orifice) जो ग्रासनली से जुड़ा होता है, और पश्चद्वार (pyloric orifice) जो छोटी आंत में खुलता है। आमाशय को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जा सकता है:
(a) कार्डियक भाग (Cardiac Stomach): यह भाग ग्रास नली से जुड़ा होता है।
(b) पाइलोरिक भाग (Pyloric Stomach): यह आमाशय का संकरा भाग है जो छोटी आंत से जुड़ा होता है।
(c) फंडिक भाग (Fundic Stomach): यह कार्डियक और पाइलोरिक आमाशय के बीच का क्षैतिज भाग है।
आमाशय में भोजन को संग्रहित किया जाता है और पाचक रस के साथ मिलाया जाता है, जिससे पाचन शुरू होता है।
In simple words: आमाशय एक 'J' आकार का थैला है जो डायाफ्राम के नीचे बाईं ओर होता है। इसके तीन मुख्य भाग कार्डियक, पाइलोरिक और फंडिक हैं।
🎯 Exam Tip: आमाशय के तीन मुख्य भागों और उसके दोनों छिद्रों को उनके कार्यों के साथ याद रखें, जो भोजन के पाचन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 6. अमीबा में पोषण किस प्रकार होता है ?
Answer: अमीबा एक परपोषी (heterotrophic) और प्राणीसमभोजी (holozoic) जीव है जो स्वच्छ जल में पाया जाता है। अमीबा में पोषण की प्रक्रिया को एंडोसाइटोसिस (endocytosis) कहते हैं। जब अमीबा किसी खाद्य पदार्थ (जैसे एल्गी) के संपर्क में आता है, तो वह अपने कूटपादों (pseudopodia) को फैलाकर उसे चारों ओर से घेर लेता है। ये कूटपाद आपस में मिलकर एक कप जैसी संरचना बनाते हैं और खाद्यधानी (food vacuole) का निर्माण करते हैं, जिसमें भोजन को अंदर ले लिया जाता है। यह अंतर्ग्रहण कहलाता है। खाद्यधानी के अंदर लाइसोसोम एंजाइम छोड़ते हैं जो भोजन को पचाते हैं। पचे हुए पदार्थ कोशिकाद्रव्य में अवशोषित हो जाते हैं और अपचित पदार्थ को एक्सोसाइटोसिस (exocytosis) द्वारा कोशिका से बाहर निकाल दिया जाता है।
In simple words: अमीबा अपने नकली पैरों (कूटपाद) से भोजन को घेर लेता है। फिर उसे एक खाने की थैली में डालकर पचाता है। बचे हुए कचरे को बाहर फेंक देता है।
🎯 Exam Tip: अमीबा में पोषण प्रक्रिया को एंडोसाइटोसिस कहा जाता है, जिसमें कूटपादों द्वारा भोजन को घेरकर खाद्यधानी में पचाया जाता है।
Question 7. अनॉक्सीश्वसन व ऑक्सीश्वसन में अन्तर लिखिए।
Answer: अनॉक्सीश्वसन और ऑक्सीश्वसन के बीच मुख्य अंतर निम्नलिखित तालिका में दिए गए हैं:
| अनॉक्सी श्वसन | ऑक्सी श्वसन |
|---|---|
| 1. ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है। | 1. ऑक्सीजन की उपस्थिति आवश्यक है। |
| 2. श्वसनीय पदार्थों का अधूरा ऑक्सीकरण होता है। | 2. श्वसनीय पदार्थों का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है। |
| 3. कम ऊर्जा मिलती है। | 3. अधिक ऊर्जा मिलती है। |
| 4. अंतिम उत्पाद - यीस्ट में \( \text{ऐल्कोहॉल} \) व \( \text{CO}_2 \), पेशी कोशिका में - \( \text{लैक्टिक अम्ल} \)। | 4. अंतिम उत्पाद \( \text{CO}_2 \) व जल होते हैं। |
In simple words: अनॉक्सीश्वसन बिना ऑक्सीजन के होता है और कम ऊर्जा देता है, जबकि ऑक्सीश्वसन ऑक्सीजन के साथ होता है और ज्यादा ऊर्जा देता है।
🎯 Exam Tip: ऑक्सीश्वसन में अधिक ऊर्जा मुक्त होती है क्योंकि ग्लूकोज का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है, जबकि अनॉक्सीश्वसन में आंशिक ऑक्सीकरण होता है, जिससे कम ऊर्जा बनती है।
Question 8. श्वसन व दहन की तुलना कीजिए।
Answer: श्वसन और दहन के बीच तुलना निम्नलिखित है:
| श्वसन | दहन |
|---|---|
| 1. यह एक जैव रासायनिक प्रक्रिया है। | 1. यह एक भौतिक-रासायनिक प्रक्रिया है। |
| 2. शरीर के अंदर होता है। | 2. शरीर के बाहर होता है। |
| 3. एंजाइमों द्वारा नियंत्रित होता है। | 3. एंजाइमों की आवश्यकता नहीं होती। |
| 4. यह एक धीमी और चरणबद्ध प्रक्रिया है। | 4. यह एक तेज और एक ही चरण की प्रक्रिया है। |
| 5. मुक्त ऊर्जा ATP के रूप में जमा होती है। | 5. इसमें ऊर्जा, ऊष्मा और कभी-कभी प्रकाश के रूप में मुक्त होती है। |
In simple words: श्वसन शरीर में धीरे-धीरे ऊर्जा बनाता है और उसे जमा करता है, जबकि दहन तेजी से होता है और गर्मी या रोशनी के रूप में सारी ऊर्जा एक बार में छोड़ देता है।
🎯 Exam Tip: श्वसन एक नियंत्रित जैविक प्रक्रिया है जो ATP के रूप में ऊर्जा को संग्रहित करती है, जबकि दहन एक अनियंत्रित प्रक्रिया है जो ऊर्जा को मुख्य रूप से ऊष्मा के रूप में मुक्त करती है।
Question 9. अमीबा में श्वसन किस प्रकार होता है ?
Answer: अमीबा में श्वसन (Respiration in Amoeba) एककोशिकीय जीव होने के कारण कोशिका झिल्ली के माध्यम से विसरण (diffusion) द्वारा होता है। अमीबा की कोशिका केवल एक कोशिका कला से ढकी होती है। जल में घुली ऑक्सीजन विसरण की प्रक्रिया द्वारा अमीबा के शरीर में प्रवेश करती है। यह ऑक्सीजन अमीबा के अंदर कोशिकीय श्वसन में उपयोग होती है। इस प्रक्रिया में बनी कार्बन डाइऑक्साइड फिर से विसरण द्वारा शरीर से बाहर निकल जाती है। श्वसन के बाद शरीर में \( \text{CO}_2 \) की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे \( \text{CO}_2 \) का विसरण स्वतः ही बाहर की ओर होने लगता है।
In simple words: अमीबा अपनी कोशिका झिल्ली से ऑक्सीजन अंदर लेता है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर छोड़ता है। यह सब विसरण नाम की प्रक्रिया से होता है।
🎯 Exam Tip: अमीबा में श्वसन केवल कोशिका झिल्ली के माध्यम से विसरण द्वारा होता है, क्योंकि यह एककोशिकीय जीव है और इसमें कोई विशेष श्वसन अंग नहीं होते।
Question 10. मछली में श्वसन अंगों का एक नामांकित चित्र बनाइए।
Answer:
मछली में श्वसन अंग गलफड़े (gills) होते हैं, जो पानी में घुली ऑक्सीजन को अवशोषित करने में मदद करते हैं। पानी मुंह से अंदर आता है और गलफड़ों से होकर बाहर निकलता है, जहां ऑक्सीजन रक्त में चली जाती है।
In simple words: मछली गलफड़ों से सांस लेती है। पानी मुंह से अंदर आता है, गलफड़ों से गुजरता है, और गलफड़े पानी से ऑक्सीजन ले लेते हैं।
🎯 Exam Tip: मछली के गलफड़े पानी में घुली ऑक्सीजन को प्रभावी ढंग से निकालने के लिए अनुकूलित होते हैं, जिसमें रक्त वाहिकाओं और पानी के बीच गैसों के आदान-प्रदान के लिए एक बड़ी सतह होती है।
Question 11. छोटी आंत की तीन ऐसी विशेषताएँ बताइए जो इसे अवशोषण हेतु एक अच्छा अंग बनाती हैं।
Answer: छोटी आंत को अवशोषण के लिए एक बेहतरीन अंग बनाने वाली तीन मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
1. छोटी आंत बहुत लंबी होती है, जिससे भोजन को पचने और पोषक तत्वों को अवशोषित होने के लिए पर्याप्त समय मिलता है। वयस्क मनुष्यों में यह लगभग 6-8 मीटर लंबी होती है।
2. छोटी आंत की अंदरूनी सतह पर उंगली जैसी छोटी-छोटी संरचनाएं होती हैं जिन्हें विलाई (villi) कहते हैं। ये विलाई अवशोषण के लिए सतह क्षेत्र को कई गुना बढ़ा देते हैं, ठीक वैसे ही जैसे एक स्पंज अधिक पानी सोखता है।
3. विलाई पर और भी छोटे-छोटे प्रवर्ध (extensions) होते हैं जिन्हें माइक्रोविलाई (microvilli) कहते हैं। ये माइक्रोविलाई अवशोषण के सतह क्षेत्र को और भी बढ़ा देते हैं, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण बहुत कुशल हो जाता है।
In simple words: छोटी आंत बहुत लंबी होती है, इसमें विलाई और माइक्रोविलाई होते हैं। ये सभी चीजें भोजन से पोषक तत्वों को सोखने के लिए बहुत सारी जगह देती हैं।
🎯 Exam Tip: छोटी आंत की लंबाई, विलाई और माइक्रोविलाई का संयोजन पोषक तत्वों के अधिकतम अवशोषण को सुनिश्चित करने के लिए इसके सतह क्षेत्र को अधिकतम करता है।
Question 12. रक्त के कार्यों का उल्लेख कीजिए।
Answer: रक्त शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्य करता है:
• रक्त शरीर की सभी कोशिकाओं तक पोषक तत्वों का परिवहन करता है। भोजन के पाचन के बाद बने अंतिम उत्पाद भी रक्त द्वारा कोशिकाओं तक पहुंचाए जाते हैं।
• रक्त हॉर्मोन का भी परिवहन करता है, जो शरीर के कार्यों को नियंत्रित करते हैं।
• रक्त शरीर में बने अपशिष्ट पदार्थों को इकट्ठा करके उत्सर्जन तंत्र तक ले जाता है ताकि उन्हें शरीर से बाहर निकाला जा सके।
• रक्त में मौजूद सफेद रक्त कोशिकाएं (WBCs) शरीर को रोगाणुओं और बीमारियों से बचाती हैं।
• रक्त शरीर के तापमान को एक समान बनाए रखने में मदद करता है।
In simple words: रक्त पोषक तत्वों, हॉर्मोन और अपशिष्ट पदार्थों को ले जाता है। यह बीमारियों से बचाता है और शरीर का तापमान बनाए रखता है।
🎯 Exam Tip: रक्त परिवहन, सुरक्षा, तापमान विनियमन और संचार जैसे कई महत्वपूर्ण शारीरिक कार्यों को अंजाम देता है, जो जीवन के लिए आवश्यक हैं।
Question 13. धमनी व शिरा में अन्तर बताए।
Answer: धमनी और शिरा के बीच मुख्य अंतर निम्नलिखित तालिका में दिए गए हैं:
| धमनी (Artery) | शिरा (Vein) |
|---|---|
| 1. यह रक्त वाहिकाएं रक्त को हृदय से शरीर के विभिन्न अंगों तक ले जाती हैं। | 1. यह रक्त को शरीर के विभिन्न अंगों से हृदय तक लाती हैं। |
| 2. शुद्ध रक्त का परिवहन करती हैं (फुफ्फुसीय धमनी अपवाद है)। | 2. अशुद्ध रक्त का परिवहन करती हैं (फुफ्फुसीय शिरा में शुद्ध रक्त पाया जाता है)। |
| 3. भित्ति मोटी और गुहा संकरी होती है। | 3. भित्ति पतली और गुहा बड़ी होती है। |
| 4. वाल्व अनुपस्थित होते हैं, रक्त में दाब होता है। | 4. वाल्व पाए जाते हैं, रक्त में पर्याप्त दाब का अभाव होता है। |
| 5. शरीर में अक्सर गहराई पर स्थित होती हैं। | 5. शरीर की सतह (त्वचा के नीचे) पर स्थित होती हैं। |
In simple words: धमनी दिल से खून को दूर ले जाती है और शिरा खून को दिल तक वापस लाती है। धमनी मोटी और गहरे में होती है, जबकि शिरा पतली और सतह पर होती है।
🎯 Exam Tip: धमनी और शिरा के बीच मुख्य अंतर उनकी रक्त प्रवाह की दिशा, दीवार की मोटाई और वाल्वों की उपस्थिति में निहित हैं, जो उन्हें परिसंचरण तंत्र में अलग-अलग भूमिकाएं देते हैं।
Question 14. पत्ती की आन्तरिक संरचना का चित्र बनाइए।
Answer:
पत्ती की आंतरिक संरचना प्रकाश संश्लेषण के लिए अनुकूलित होती है। इसमें एपिडर्मिस, मेसोफिल कोशिकाएं (हरी पत्ती ऊतक), और संवहन ऊतक (जाइलम और फ्लोएम) होते हैं। एपिडर्मिस बाहरी परत होती है, और मेसोफिल में क्लोरोप्लास्ट होते हैं जो प्रकाश संश्लेषण करते हैं।
In simple words: पत्ती का अंदरूनी चित्र यहां दिया गया है। इसमें बाहरी परत (त्वचा), हरे भाग (हरित लवक) और हवा की जगहें दिख रही हैं।
🎯 Exam Tip: पत्ती की आंतरिक संरचना के विभिन्न भागों- एपिडर्मिस, मेसोफिल और संवहन बंडलों को ठीक से लेबल करना सुनिश्चित करें, क्योंकि वे प्रकाश संश्लेषण और परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 15. तने के मुख्य कार्य लिखिए।
Answer: तने के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:
• तना शाखाओं को आधार प्रदान करता है। तने के मुख्य भाग से ही शाखाएं निकलती हैं, जो पत्तियों और फूलों को सहारा देती हैं।
• तना प्ररोह तंत्र (shoot system) का प्रमुख भाग होता है। इस पर पौधे के वायवीय अंग जैसे शाखाएं, पत्तियां और फूल बनते हैं।
• कुछ तने भोजन को जमा करने का कार्य करते हैं, जैसे आलू और अरवी, जो भूमिगत तने होते हैं।
• नागफनी जैसे पौधों में, तना चपटा और हरा होकर प्रकाश संश्लेषण का कार्य भी करता है, क्योंकि उनमें पत्तियां कम या नहीं होतीं।
In simple words: तना शाखाओं को सहारा देता है, पत्तियां और फूल बनाता है, भोजन जमा करता है (जैसे आलू), और कुछ पौधों में खाना भी बनाता है।
🎯 Exam Tip: तने के कार्य सिर्फ सहारा देना नहीं हैं, बल्कि इसमें भोजन का भंडारण, पानी और पोषक तत्वों का परिवहन, और कुछ पौधों में प्रकाश संश्लेषण भी शामिल है।
Question 16. आप कैसे सिद्ध करेंगे कि खाद्य पदार्थों का संवहन फ्लोएम द्वारा होता है ?
Answer: हम एक वलयन (girdling) प्रयोग करके सिद्ध कर सकते हैं कि खाद्य पदार्थों का संवहन फ्लोएम द्वारा होता है। इसके लिए, गमले में लगे एक स्वस्थ पौधे के मुख्य तने पर मिट्टी की सतह से लगभग 15 सेमी ऊपर एक इंच चौड़ी पट्टी के रूप में उसकी छाल हटा दी जाती है। छाल हटाने से छाल के साथ कोमल वल्कुट (cortex) और फ्लोएम ऊतक भी नष्ट हो जाते हैं, लेकिन जाइलम बरकरार रहता है। कुछ हफ्तों के बाद, छाल के ऊपर का हिस्सा सूज जाता है क्योंकि पत्तियों में बना भोजन नीचे नहीं जा पाता। यह सिद्ध करता है कि फ्लोएम ही खाद्य पदार्थों का संवहन करता है।
In simple words: हम एक पेड़ की छाल का एक गोल टुकड़ा निकाल कर यह पता लगा सकते हैं। छाल हटाने पर फ्लोएम हट जाता है, और पत्तियां जो भोजन बनाती हैं वह नीचे नहीं पहुंच पाता। इससे पता चलता है कि फ्लोएम ही भोजन ले जाता है।
🎯 Exam Tip: वलयन प्रयोग फ्लोएम के माध्यम से भोजन के परिवहन को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है, क्योंकि छाल हटाने से फ्लोएम बाधित हो जाता है, जिससे छाल के ऊपर पोषक तत्वों का संचय होता है।
Question 17. मूसला जड़ व अपस्थानिक जड़ों के चित्र बनाइए।
Answer:
मूसला जड़ में एक मुख्य, मोटी जड़ होती है जिससे छोटी शाखाएं निकलती हैं, जबकि अपस्थानिक जड़ों में कोई मुख्य जड़ नहीं होती, बल्कि कई पतली, रेशेदार जड़ें एक साथ निकलती हैं।
In simple words: मूसला जड़ में एक बड़ी मुख्य जड़ होती है और अपस्थानिक जड़ में बहुत सारी पतली जड़ें होती हैं।
🎯 Exam Tip: मूसला जड़ें बीज के मूलांकुर से विकसित होती हैं और एक मजबूत केंद्रीय जड़ बनाती हैं, जबकि अपस्थानिक जड़ें पौधे के तने जैसे गैर-जड़ भागों से निकलती हैं।
Question 18. जड़ की अनुप्रस्थ काट के एक चित्र द्वारा मूल रोम से मूल के जाइलम तक जल का मार्ग दिखाइए।
Answer:
जड़ की अनुप्रस्थ काट का यह चित्र दर्शाता है कि मूल रोम से पानी कैसे कोशिका दर कोशिका होते हुए जड़ के जाइलम तक पहुंचता है। पानी मिट्टी से मूल रोम में प्रवेश करता है, फिर कॉर्टेक्स की कोशिकाओं से होकर जाइलम तक जाता है, जहाँ से यह पौधे के अन्य भागों तक पहुंचता है।
In simple words: यह चित्र दिखाता है कि पानी मूल रोम से मिट्टी से जड़ में कैसे आता है और फिर जाइलम तक पहुंचता है।
🎯 Exam Tip: जड़ की अनुप्रस्थ काट में मूल रोम से जाइलम तक पानी का मार्ग विभिन्न ऊतकों जैसे एपिडर्मिस, कॉर्टेक्स और एंडोडर्मिस के माध्यम से होता है।
Question 19. मनुष्य के उत्सर्जन तन्त्र का नामांकित चित्र बनाइए।
Answer:
यह चित्र मनुष्य के उत्सर्जन तंत्र को दर्शाता है, जिसमें गुर्दे (वृक्क), गुर्दे की धमनी, गुर्दे की शिरा, मूत्राशय और मूत्रमार्ग शामिल हैं। गुर्दे रक्त को छानकर मूत्र बनाते हैं, जो मूत्राशय में जमा होता है और फिर मूत्रमार्ग से बाहर निकल जाता है।
In simple words: उत्सर्जन तंत्र का चित्र यहाँ है। इसमें गुर्दे (वृक्क), मूत्राशय और मूत्रमार्ग दिख रहे हैं, जो शरीर से कचरा बाहर निकालने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: मानव उत्सर्जन तंत्र के आरेख में गुर्दे, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और मूत्रमार्ग को सही ढंग से लेबल करें, क्योंकि ये सभी शरीर से अपशिष्ट हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Question 20. अलैंगिक जनन व लैंगिक जनन में अन्तर लिखिए।
Answer: अलैंगिक जनन और लैंगिक जनन के बीच मुख्य अंतर निम्नलिखित तालिका में दिए गए हैं:
| अलैंगिक जनन | लैंगिक जनन |
|---|---|
| 1. केवल एक जनक शामिल होता है। | 1. दो जनक (नर और मादा) शामिल होते हैं। |
| 2. युग्मकों का निर्माण और संलयन नहीं होता है। | 2. युग्मकों का निर्माण और संलयन होता है। |
| 3. केवल समसूत्री विभाजन होता है। | 3. अर्धसूत्री विभाजन लैंगिक जनन की एक आवश्यक प्रक्रिया है। |
| 4. जनक और संतति आनुवंशिक रूप से समान होते हैं। | 4. संतति जनक के साथ-साथ आपस में भी असमान होते हैं। |
| 5. आनुवंशिक विभिन्नताएं उत्पन्न नहीं होतीं, अतः जैव विकास में सहायक नहीं। | 5. आनुवंशिक विभिन्नताएं उत्पन्न होती हैं, अतः जैव विकास में सहायक। |
| 6. शैवाल, कवक, पौधों और निम्न कशेरुकी जन्तुओं में पाया जाता है। | 6. उच्च श्रेणी के जीवों में पाया जाता है। |
In simple words: अलैंगिक जनन में एक ही माता-पिता होते हैं और बच्चे उनके जैसे दिखते हैं। लैंगिक जनन में दो माता-पिता होते हैं और बच्चे अलग-अलग विशेषताओं के साथ पैदा होते हैं।
🎯 Exam Tip: अलैंगिक और लैंगिक जनन के बीच मुख्य अंतर जनक की संख्या, युग्मकों की उपस्थिति और संतति में आनुवंशिक भिन्नता की मात्रा से संबंधित हैं।
Question 21. कायिक या वर्षी प्रजनन के क्या लाभ हैं ?
Answer: कायिक प्रजनन (Vegetative Reproduction) के कई लाभ हैं:
• कायिक जनन से प्राप्त पौधे अपने माता-पिता के पौधों के बिल्कुल समान होते हैं। इससे हम उन अच्छे गुणों को बिना किसी बदलाव के बचा सकते हैं, जैसे कलम लगाकर आम उगाना।
• ऐसे पौधे जिनमें बीज नहीं बनते या बीज अंकुरित नहीं होते, उन्हें व्यावसायिक रूप से कायिक प्रजनन से उगाया जा सकता है, जैसे गुलाब, घास आदि।
• यह विधि तेज होती है और पौधों में फूल व फल जल्दी विकसित होते हैं। यह जनन की सफलता को भी सुनिश्चित करती है।
• यह विधि सस्ती है और इसमें कम मेहनत लगती है। साथ ही प्रजनन करने वाले हिस्सों का फैलाव भी तेजी से होता है।
• केवल एक जनक की आवश्यकता होती है, जिससे प्रक्रिया सरल हो जाती है।
In simple words: कायिक प्रजनन से पौधे अपने माता-पिता जैसे ही बनते हैं। यह बिना बीज वाले पौधों को उगाने में मदद करता है, यह तेज और सस्ता होता है, और इसमें सिर्फ एक ही जनक की जरूरत होती है।
🎯 Exam Tip: कायिक प्रजनन आनुवंशिक रूप से समान संतति बनाने, बीजरहित पौधों को उगाने और तेज प्रसार प्रदान करने के लिए फायदेमंद होता है।
Question 22. प्रोटोजोआ वर्ग के जीवों में विभिन्न प्रकार के द्विविखण्डन को केवल चित्रों द्वारा प्रदर्शित कीजिए।
Answer:
प्रोटोजोआ वर्ग के जीवों में द्विविखण्डन कई तरीकों से हो सकता है। चित्र में अमीबा में अनियमित द्विविखण्डन, यूग्लीना में लम्बवत् द्विविखण्डन और पैरामीशियम में अनुप्रस्थ द्विविखण्डन दिखाया गया है। यह अलैंगिक प्रजनन की एक विधि है।
In simple words: इस चित्र में दिखाया गया है कि अमीबा, यूग्लीना और पैरामीशियम जैसे छोटे जीव कैसे अलग-अलग तरीकों से दो हिस्सों में बंटकर नए जीव बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रोटोजोआ में द्विविखण्डन अलग-अलग जीवों में अलग-अलग अक्षों पर होता है, जैसे अमीबा में अनियमित, यूग्लीना में अनुदैर्ध्य और पैरामीशियम में अनुप्रस्थ।
Question 25. रज चक्र क्या है?
Answer: मनुष्य और बंदर जैसे स्तनधारियों में जो जनन चक्र होता है, उसे रज चक्र या मासिक धर्म (Menstrual cycle) कहते हैं। जब मादा में अंडा निषेचित नहीं होता, तो अंडा निकलने के कुछ दिनों बाद गर्भाशय की अंदरूनी दीवार और रक्त वाहिकाएं टूटकर योनि से रक्तस्राव के रूप में बाहर आ जाती हैं। गर्भाशय में मोटी और ग्रंथिल अंदरूनी दीवार गर्भधारण के लिए तैयार होती है। गर्भधारण न होने पर यह दीवार टूट जाती है। यह प्रक्रिया महिलाओं में हर 27-30 दिन में होती है और इसे मासिक धर्म कहते हैं। स्त्रियों में पहली बार मासिक धर्म की शुरुआत को रजोदर्शन या मेनार्क कहा जाता है। यह एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक प्रक्रिया है जो प्रजनन क्षमता को दर्शाती है।
In simple words: मासिक धर्म एक प्राकृतिक चक्र है जिसमें अंडा निषेचित न होने पर गर्भाशय की परत टूटकर रक्त के रूप में बाहर निकल जाती है। यह चक्र महिलाओं की प्रजनन क्षमता का हिस्सा है और हर महीने होता है।
🎯 Exam Tip: जब आप रज चक्र के बारे में लिखें, तो इसकी परिभाषा, प्रक्रिया, अवधि और रजोदर्शन (मेनार्क) को स्पष्ट रूप से समझाएं।
Question 26. एक प्रारूपिक पुष्य की खड़ी काट के चित्र द्वारा विभिन्न अंगों को दर्शाइए।
Answer: एक प्रारूपिक पुष्प की खड़ी काट का चित्र नीचे दिया गया है, जो इसके विभिन्न अंगों को दर्शाता है। यह चित्र पुष्प के प्रजनन और गैर-प्रजनन भागों को स्पष्ट रूप से दिखाता है।
In simple words: यह चित्र एक फूल के अंदरूनी हिस्सों को दिखाता है, जैसे परागकोष, वर्तिकाग्र, अंडाशय और बीजांड, जो प्रजनन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
🎯 Exam Tip: पुष्प के विभिन्न भागों को सही ढंग से लेबल करना सुनिश्चित करें, खासकर प्रजनन अंगों को। चित्र जितना स्पष्ट होगा, उतने ही अच्छे अंक मिलेंगे।
Question 27. पुष्पी पादपों में अण्डप की खड़ी काट का चित्र बनाइए जो निम्न भाग प्रदर्शित करे
(a) वर्तिकाग्र पर परागकण,
(b) पराग नलिका भ्रूण कोष में प्रवेश करती हुई
(c) बीजाण्ड।
Answer: पुष्पी पादपों में अण्डप की खड़ी काट का चित्र जिसमें वर्तिकाग्र पर परागकण, पराग नलिका भ्रूण कोष में प्रवेश करती हुई, और बीजाण्ड दर्शाए गए हैं, नीचे दिया गया है। यह चित्र निषेचन की प्रक्रिया को समझने में मदद करता है।
In simple words: यह चित्र एक पौधे के फूल के अंडाशय के अंदर के हिस्सों को दिखाता है, जिसमें परागकण वर्तिकाग्र पर गिरते हैं और फिर पराग नलिका के जरिए बीजांड तक पहुँचते हैं।
🎯 Exam Tip: इस चित्र में परागण और निषेचन से संबंधित सभी भागों को सही ढंग से चिह्नित करना महत्वपूर्ण है। सुनिश्चित करें कि आप परागकणों और पराग नलिका की स्थिति को ठीक से दिखाएं।
निबन्धात्मक प्रश्न (Essay Type Questions)
Question 1. प्रकाश संश्लेषण की प्रकाश अभिक्रिया एवं अप्रकाशिक अभिक्रिया को समझाइए।
Answer: प्रकाश संश्लेषण एक जटिल रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें पौधे सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके अपना भोजन बनाते हैं। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से दो चरणों में होती है:
1. प्रकाश अभिक्रिया (Light Reaction)
2. अप्रकाशिक अभिक्रिया (Dark Reaction)
1. प्रकाश अभिक्रिया: यह प्रकाश संश्लेषण का पहला चरण है। इस प्रक्रिया में सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की मदद से ऊर्जा का निर्माण होता है, जिसे ATP और NADPH कहते हैं। यह ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा में बदल जाती है। इसके मुख्य चरण इस प्रकार हैं:
• क्लोरोफिल के अणु प्रकाश की किरणों को सोखते हैं।
• प्रकाश सोखने के बाद क्लोरोफिल के अणु उत्तेजित हो जाते हैं।
• उत्तेजित क्लोरोफिल के अणु पानी को प्रकाश की मदद से तोड़ देते हैं (प्रकाशिक अपघटन)।
• इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन गैस उप-उत्पाद के रूप में निकलती है।
• ATP और NADPH का निर्माण होता है। यह प्रकाश अभिक्रिया क्लोरोप्लास्ट की थाइलेकॉइड झिल्ली में पूरी होती है क्योंकि क्लोरोफिल के अणु वहीं पाए जाते हैं।
2. अप्रकाशिक अभिक्रिया: यह प्रकाश संश्लेषण का दूसरा चरण है। इस क्रिया में सीधे प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए इसे अप्रकाशिक अभिक्रिया कहते हैं। यह एक जैव रासायनिक प्रक्रिया है, जिसमें प्रकाश अभिक्रिया से बनी ऊर्जा (ATP और NADPH) का उपयोग कार्बन डाइऑक्साइड को कार्बोहाइड्रेट में बदलने के लिए किया जाता है। यह अभिक्रिया क्लोरोप्लास्ट के स्ट्रोमा भाग में होती है। कार्बन डाइऑक्साइड के उपयोग से बनने वाला पहला उत्पाद एक तीन-कार्बन वाला यौगिक फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल (PGA) होता है। इस चक्रीय प्रक्रिया को C3 चक्र या केल्विन चक्र भी कहते हैं। इस चक्र में ग्लूकोज अणु का निर्माण होता है और अन्य आवश्यक पदार्थ फिर से उपयोग के लिए पुनर्चक्रित होते रहते हैं।
प्रकाश संश्लेषण की पूरी अभिक्रिया को निम्न समीकरण द्वारा दिखाया जा सकता है:
\( 6CO_2 + 12H_2O \xrightarrow{\text{सूर्य का प्रकाश}} C_6H_{12}O_6 + 6H_2O + 6O_2 \)
In simple words: प्रकाश संश्लेषण में पहले सूर्य की रोशनी से ऊर्जा बनती है (प्रकाश अभिक्रिया), और फिर उस ऊर्जा का उपयोग करके कार्बन डाइऑक्साइड से भोजन (ग्लूकोज) बनाया जाता है (अप्रकाशिक अभिक्रिया)। यह पौधे के लिए बहुत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिससे पृथ्वी पर जीवन संभव होता है।
🎯 Exam Tip: प्रकाश और अप्रकाशिक अभिक्रिया के बीच के मुख्य अंतरों को याद रखें, जैसे प्रकाश की आवश्यकता, होने का स्थान और मुख्य उत्पाद। समीकरण को सही ढंग से लिखना भी महत्वपूर्ण है।
Question 2. एक सरल प्रयोग द्वारा वाष्पोत्सर्जन क्रिया का प्रदर्शन कीजिए।
Answer: वाष्पोत्सर्जन वह प्रक्रिया है जिसमें पौधे अपनी पत्तियों से पानी को वाष्प के रूप में बाहर निकालते हैं। इस क्रिया को दर्शाने के लिए एक सरल प्रयोग इस प्रकार किया जा सकता है:
आवश्यक सामान: मिट्टी से भरे समान आकार के दो गमले, एक स्वस्थ पौधा, एक सूखी लकड़ी, एक बड़ी कांच की प्लेट, दो बेल जार, पॉलीथीन शीट और ग्रीस।
क्रियाविधि:
1. लगभग एक ही आकार के दो गमले लें। एक गमले में एक स्वस्थ पौधा लगा हो, और दूसरे गमले में मिट्टी के स्थान पर एक सूखी लकड़ी गढ़ी हो।
2. दोनों गमलों की मिट्टी की सतह को पॉलीथीन शीट से ढक दें, ताकि मिट्टी से पानी का वाष्पीकरण न हो।
3. अब दोनों गमलों को अलग-अलग बेल जार के नीचे एक कांच की प्लेट पर रख दें।
4. बेल जार और प्लेट के बीच की जगह को वायुरोधी बनाने के लिए ग्रीस लगाएं।
5. इस उपकरण को कुछ घंटों के लिए धूप में रख दें।
अवलोकन: कुछ समय बाद, पौधे वाले बेल जार की अंदरूनी सतह पर पानी की छोटी-छोटी बूंदें दिखाई देंगी, जबकि सूखी लकड़ी वाले बेल जार में कोई बूंदें नहीं दिखेंगी।
निष्कर्ष: यह प्रयोग दर्शाता है कि पौधे वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रिया द्वारा पानी को वाष्प के रूप में बाहर निकालते हैं। वाष्पोत्सर्जन पौधों को ठंडा रखने और जड़ों से पानी को ऊपर खींचने में मदद करता है।
In simple words: हम एक पौधे को बेल जार से ढक कर धूप में रखते हैं, तो जार के अंदर पानी की बूंदें दिखती हैं। इससे पता चलता है कि पौधा पानी को वाष्प के रूप में बाहर निकालता है, जिसे वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रयोग की विधि और अवलोकन को स्पष्ट रूप से समझाएं। मिट्टी को पॉलीथीन से ढकना और लकड़ी के साथ एक नियंत्रण सेटअप (कंट्रोल) बनाना क्यों आवश्यक है, इसका उल्लेख करें।
Question 3. मनुष्य के हदय की संरचना तथा इसकी क्रियाविधि का वर्णन कीजिए।
Answer: मनुष्य का हृदय एक महत्वपूर्ण अंग है जो शरीर में रक्त को पंप करता है। यह शंक्वाकार होता है और छाती के बीच में, दोनों फेफड़ों के थोड़ा बाईं ओर स्थित होता है। हृदय में चार मुख्य कक्ष होते हैं: दो ऊपरी कक्षों को अलिंद (atria) और दो निचले कक्षों को निलय (ventricles) कहते हैं। अलिंद रक्त को प्राप्त करते हैं, जबकि निलय रक्त को शरीर में पंप करते हैं। दोनों अलिंदों के बीच एक अंतर-अलिंदीय पट (inter-atrial septum) और दोनों निलयों के बीच एक अंतर-निलयी पट (inter-ventricular septum) होता है। बाएं अलिंद और बाएं निलय के बीच एक कपाट होता है, और दाएं अलिंद और दाएं निलय के बीच भी एक कपाट होता है जो रक्त के उल्टे प्रवाह को रोकता है।
हृदय की क्रियाविधि (Cardiac Cycle): हृदय के अलिंद और निलय में एक निश्चित लय में संकुचन (contraction) और शिथिलन (relaxation) होता है। संकुचन को सिस्टोल (systole) और शिथिलन को डायस्टोल (diastole) कहा जाता है। एक संकुचन और एक शिथिलन मिलकर एक हृदय चक्र (cardiac cycle) बनाते हैं।
एक पूर्ण हृदय चक्र में निम्न अवस्थाएँ होती हैं:
1. **शिथिलन (Relaxation):** इस अवस्था में हृदय के सभी कक्ष शिथिल होते हैं। इस दौरान शरीर के सभी भागों से अशुद्ध रक्त (ऑक्सीजन रहित) दाएं अलिंद में आता है और फेफड़ों से शुद्ध रक्त (ऑक्सीजन युक्त) बाएं अलिंद में आता है।
2. **अलिंदों में संकुचन (Atrial Contraction):** अलिंदों के संकुचित होने पर अशुद्ध रक्त दाएं अलिंद से दाएं निलय में चला जाता है। इसी तरह, शुद्ध रक्त बाएं अलिंद से बाएं निलय में भर जाता है।
3. **निलयों में संकुचन (Ventricular Contraction):** निलयों के संकुचित होने पर, बायां निलय शुद्ध रक्त को महाधमनी के माध्यम से पूरे शरीर में पंप कर देता है। उसी समय, दायां निलय अशुद्ध रक्त को फुफ्फुसीय धमनी द्वारा फेफड़ों में भेज देता है, जहाँ रक्त शुद्ध होता है।
हृदय एक दोहरे पंप के रूप में कार्य करता है, जो शुद्ध और अशुद्ध रक्त को अलग-अलग रखता है।
In simple words: हमारा दिल चार हिस्सों वाला एक पंप है। यह रक्त को सिकुड़कर और फैलकर पूरे शरीर में और फेफड़ों में भेजता है, जिससे शरीर को ऑक्सीजन मिलती है।
🎯 Exam Tip: हृदय की संरचना का वर्णन करते समय सभी चार कक्षों, पटों (septum) और कपाटों (valves) का उल्लेख करें। क्रियाविधि में सिस्टोल और डायस्टोल को स्पष्ट करें और रक्त के प्रवाह को भी बताएं।
Question 4. मनुष्य में आन्त्र रस के स्राव उनके नाम व कार्य लिखिए।
Answer: मनुष्य में आन्त्र रस (intestinal juice) छोटी आंत द्वारा स्रावित होता है और इसमें कई एंजाइम होते हैं जो भोजन के पाचन में मदद करते हैं। इन स्रावों और उनके कार्यों को नीचे बताया गया है:
1. **पेप्टिडेज़ (Peptidase):** यह एंजाइम प्रोटीन के पेप्टोन को तोड़कर अमीनो एसिड में बदल देता है। यह अंतिम प्रोटीन पाचन के लिए महत्वपूर्ण है।
2. **माल्टेज़ (Maltase):** यह एंजाइम माल्टोज नामक शर्करा को तोड़कर ग्लूकोज (सरल शर्करा) में बदलता है।
3. **सुक्रज़ (Sucrase):** यह एंजाइम सुक्रोज को तोड़कर ग्लूकोज और फ्रक्टोज (अन्य सरल शर्करा) में बदलता है।
4. **आंत्रीय लाइपेज (Intestinal Lipase):** यह एंजाइम वसा पर काम करके उसे वसीय अम्ल और ग्लिसरॉल में बदल देता है।
5. **लैक्टेज़ (Lactase):** यह एंजाइम लैक्टोज नामक दूध की शर्करा को तोड़कर ग्लूकोज और गैलेक्टोज में बदलता है।
ये सभी एंजाइम यह सुनिश्चित करते हैं कि भोजन को छोटे, अवशोषित होने वाले रूपों में तोड़ा जा सके।
In simple words: छोटी आंत में कई पाचक रस होते हैं। ये रस भोजन के बड़े कणों को छोटे कणों में तोड़ने का काम करते हैं, जैसे प्रोटीन को अमीनो एसिड में, और चीनी व वसा को सरल रूपों में।
🎯 Exam Tip: आन्त्र रस के प्रमुख एंजाइमों के नाम और उनके विशिष्ट कार्यों को याद रखें। यह भी बताएं कि ये एंजाइम किस प्रकार के पोषक तत्वों पर कार्य करते हैं।
Question 5. एक नेफ्रॉन की संरचना स्पष्ट करते हुए मनुष्य में मूत्र निर्माण की प्रक्रिया समझाइए।
Answer: नेफ्रॉन गुर्दे (kidney) की सबसे छोटी कार्यात्मक इकाई है। लाखों पतली नलिकाएँ गुर्दे में पाई जाती हैं जिन्हें मूत्र नलिका या नेफ्रॉन कहते हैं। प्रत्येक नेफ्रॉन के दो मुख्य भाग होते हैं:
1. **बोमन सम्पुट (Bowman's capsule):** यह एक कप के आकार की संरचना है जिसमें ग्लोमेरुलस नामक रक्त केशिकाओं का एक गुच्छा होता है।
2. **स्रावी भाग (Secretory portion):** यह लंबी कुंडलित नलिका है जो बोमन सम्पुट से जुड़ी होती है। इसके तीन मुख्य भाग हैं:
• समीपस्थ कुंडलित नलिका (Proximal Convoluted Tubule - PCT)
• हैनले लूप (Loop of Henle)
• दूरस्थ कुंडलित नलिका (Distal Convoluted Tubule - DCT)
नेफ्रॉन ही गुर्दे में रक्त को साफ करके मूत्र बनाने का काम करते हैं।
**मनुष्य में मूत्र निर्माण की प्रक्रिया:**
मूत्र निर्माण की प्रक्रिया मुख्य रूप से तीन चरणों में होती है:
1. **परानिस्पंदन (Ultrafiltration):** अभिवाही धमनी (जो रक्त लाती है) का व्यास अपवाही धमनी (जो रक्त ले जाती है) से अधिक होता है। इस कारण ग्लोमेरुलस में रक्त का दबाव बढ़ जाता है। इस उच्च दबाव के कारण, रक्त में मौजूद छोटे अणु जैसे जल, ग्लूकोज, यूरिया, यूरिक अम्ल, लवण और आयन बोमन सम्पुट में छन जाते हैं। रक्त कोशिकाएं और बड़े प्रोटीन नहीं छनते।
2. **पुनरावशोषण (Reabsorption):** बोमन सम्पुट में छना हुआ द्रव (नेफ्रिक फिल्ट्रेट) नेफ्रॉन के स्रावी भाग में प्रवेश करता है। यहां, समीपस्थ कुंडलित नलिका और हैनले लूप में शरीर के लिए उपयोगी पदार्थ जैसे जल, ग्लूकोज, अमीनो अम्ल और महत्वपूर्ण आयन व लवण फिर से अवशोषित कर लिए जाते हैं। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि शरीर महत्वपूर्ण पोषक तत्वों को न खोए।
3. **स्रावण (Secretion):** इस चरण में, शरीर से अतिरिक्त अपशिष्ट पदार्थ जैसे कुछ आयन और दवाएं सीधे नलिकाओं में स्रावित होती हैं।
इन प्रक्रियाओं के बाद, बचा हुआ द्रव जिसमें यूरिया, यूरिक अम्ल, अतिरिक्त लवण और जल होता है, मूत्र कहलाता है। यह मूत्र गुर्दे के पेल्विस भाग से मूत्रवाहिनी के माध्यम से मूत्राशय में इकट्ठा होता है और फिर शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि शरीर के अंदरूनी वातावरण को स्थिर रखा जाए।
In simple words: नेफ्रॉन खून को छानकर पेशाब बनाता है। पहले खून से छोटी चीजें छन जाती हैं, फिर शरीर के काम की चीजें वापस सोख ली जाती हैं, और बाकी बेकार चीजें पेशाब बन कर शरीर से निकल जाती हैं।
🎯 Exam Tip: नेफ्रॉन के मुख्य भागों (बोमन सम्पुट, पीसीटी, हैनले लूप, डीसीटी) को याद रखें और प्रत्येक चरण-परानिस्पंदन, पुनरावशोषण, और स्रावण-में क्या होता है, उसे स्पष्ट रूप से समझाएं।
Question 6. अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ क्या होती हैं ? शरीर की महत्वपूर्ण अन्तःस्रावी ग्रन्थियों, उनके स्रावों व प्रमुख भूमिकाओं को एक सारणी के रूप में प्रस्तुत कीजिए।
Answer: अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ (Endocrine Glands) वे ग्रंथियां होती हैं जिनमें कोई नलिका नहीं होती। ये ग्रंथियां हॉर्मोन नामक रासायनिक पदार्थ बनाती हैं और उन्हें सीधे रक्त में छोड़ती हैं। रक्त इन हॉर्मोन को शरीर के लक्ष्य अंगों तक पहुँचाता है, जहाँ वे विभिन्न शारीरिक क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। हॉर्मोन बहुत कम मात्रा में स्रावित होते हैं और इनका प्रभाव धीरे-धीरे लेकिन व्यापक होता है। ये शरीर की विभिन्न क्रियाओं का समन्वय और नियमन करते हैं।
मनुष्य की कुछ प्रमुख अन्तःस्रावी ग्रंथियां, उनके हॉर्मोन और उनकी मुख्य भूमिकाएं निम्नलिखित सारणी में दी गई हैं:
| ग्रंथि (Gland) | हॉर्मोन (Hormone) | मुख्य भूमिका (Main Role) |
|---|---|---|
| थाइरॉइड या अवटु ग्रंथि | थायरॉक्सिन | कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के उपापचय का नियंत्रण करता है। इसकी कमी से गलगण्ड या ग्वाइटर रोग हो सकता है, जिससे गर्दन सूज जाती है। |
| थाइमस | थाइमोसिन | प्रतिरक्षी तंत्र (immune system) के विकास में मदद करता है। |
| अग्न्याशय | इंसुलिन | रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) के स्तर को नियंत्रित करता है। इसकी कमी से मधुमेह रोग हो जाता है। |
| एड्रीनल | एड्रीनेलीन | शरीर को आपातकालीन स्थितियों (जैसे डर या तनाव) के लिए तैयार करता है। यह हृदय की धड़कन, रक्त आपूर्ति और श्वसन दर को बढ़ाता है। |
| वृषण (पुरुषों में) | टेस्टोस्टीरॉन | बालकों में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों (जैसे आवाज का भारी होना, मांसपेशियों का विकास) का विकास करता है। |
| अण्डाशय (स्त्रियों में) | एस्ट्रोजन | बालिकाओं में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों (जैसे स्तनों का विकास) का विकास करता है। |
In simple words: अन्तःस्रावी ग्रंथियां बिना नलिकाओं के हॉर्मोन बनाती हैं, जो सीधे खून में मिलकर शरीर के कामों को नियंत्रित करते हैं। ये हॉर्मोन शरीर के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक ग्रंथि, उसके द्वारा स्रावित हॉर्मोन और उस हॉर्मोन के मुख्य कार्य को एक सारणी के रूप में याद रखना सबसे प्रभावी तरीका है। यह भी बताएं कि हॉर्मोन शरीर में किस तरह से संचारित होते हैं।
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RBSE Solutions Class 9 Science Chapter 8 सजीवों की प्रमुख क्रियाएँ
Students can now access the RBSE Solutions for Chapter 8 सजीवों की प्रमुख क्रियाएँ prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 9 Science textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.
Detailed Explanations for Chapter 8 सजीवों की प्रमुख क्रियाएँ
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 9 Science chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 9 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Science Class 9 Solved Papers
Using our Science solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 9 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 8 सजीवों की प्रमुख क्रियाएँ to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated RBSE Solutions Class 9 Science Chapter 8 सजीवों की प्रमुख क्रियाएँ is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 9 Science are as per latest RBSE curriculum.
Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 9 Science Chapter 8 सजीवों की प्रमुख क्रियाएँ as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 9 Science Chapter 8 सजीवों की प्रमुख क्रियाएँ will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 9 Science. You can access RBSE Solutions Class 9 Science Chapter 8 सजीवों की प्रमुख क्रियाएँ in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 9 Science Chapter 8 सजीवों की प्रमुख क्रियाएँ in printable PDF format for offline study on any device.