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Detailed Chapter 6 सजीव की संरचना RBSE Solutions for Class 9 Science
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Class 9 Science Chapter 6 सजीव की संरचना RBSE Solutions PDF
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. कोशिका के किस कोशिकांग को आत्मघाती थैली के नाम से जाना जाता है ?
(अ) माइटोकॉण्डिया
(ब) लाइसोसोम
(स) राइबोसोम्
(द) गॉल्जीकाय।
Answer: (ब) लाइसोसोम
In simple words: लाइसोसोम कोशिका के अंदर मौजूद छोटे अंग होते हैं जो पुरानी या खराब हो चुकी चीजों को पचाकर साफ करते हैं। अगर ये थैली फट जाए, तो ये पूरी कोशिका को भी नष्ट कर सकते हैं, इसलिए इन्हें आत्मघाती थैली कहते हैं।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि लाइसोसोम में शक्तिशाली एंजाइम होते हैं जो कोशिका के अपशिष्ट पदार्थों को तोड़ने में मदद करते हैं।
Question 2. कोशिका के किस कोशिकांग को कोशिका का शक्तिगृह कहते हैं ?
(अ) माइटोकॉण्ड्रिया
(ब) लाइसोसोम
(स) राइबोसोम
(द) केन्द्रक।
Answer: (अ) माइटोकॉण्ड्रिया
In simple words: माइटोकॉण्ड्रिया कोशिका के लिए ऊर्जा बनाती है, जैसे एक घर के लिए बिजली घर ऊर्जा बनाता है। यह ऊर्जा शरीर के सभी कामों के लिए जरूरी होती है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय "ATP" (एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट) शब्द का उल्लेख करने से आपको पूरे अंक मिल सकते हैं, क्योंकि यह कोशिका की ऊर्जा मुद्रा है।
Question 3. केन्द्रक की खोज किस वैज्ञानिक ने की थी ?
(अ) राबर्ट ब्राउने
(ब) राबर्ट हुक
(स) ल्यूवेनहॉक।
(द) अलीडेन।
Answer: (अ) राबर्ट ब्राउने
In simple words: रॉबर्ट ब्राउने वह वैज्ञानिक थे जिन्होंने कोशिका के अंदर के महत्वपूर्ण हिस्से, केन्द्रक को सबसे पहले देखा और उसका नाम रखा। उन्होंने यह खोज पौधों की कोशिकाओं पर काम करते हुए की थी।
🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक के नाम और उनकी खोज को सही ढंग से याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे कोशिका विज्ञान जैसे मौलिक विषयों से संबंधित हों।
Question 4. कोशिका चक्र की किस प्रावस्था में DNA का संश्लेषण होता है ?
(अ) प्रावस्था
(ब) (विकल्प अनुपलब्ध)
(स) (विकल्प अनुपलब्ध)
(द) (विकल्प अनुपलब्ध)
🎯 Exam Tip: कोशिका चक्र की विभिन्न प्रावस्थाओं को जानना महत्वपूर्ण है; DNA संश्लेषण 'S' प्रावस्था (सिंथेसिस प्रावस्था) में होता है, जो कोशिका विभाजन की तैयारी का एक महत्वपूर्ण कदम है।
Question 5. (प्रश्न पाठ अनुपलब्ध)
(अ) मृदूतक
(ब) स्थूलकोण ऊतक
(स) दृढ़ोतक
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं।
Answer: (ब) स्थूलकोण ऊतक
In simple words: यह एक प्रकार का स्थायी ऊतक है जो पौधों को मजबूत और लचीला बनाता है। इसकी कोशिका भित्ति कोनों पर मोटी होती है जिससे पौधों को सहारा मिलता है।
🎯 Exam Tip: पौधों में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के ऊतकों को उनके कार्य और संरचना के साथ याद रखें, खासकर मृदूतक, स्थूलकोण ऊतक और दृढ़ोतक जैसे सरल स्थायी ऊतकों को।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 6. सर्वप्रथम जीवित कोशिका का अवलोकन करने वाले वैज्ञानिक का नाम लिखिए।
Answer: एन्टॉन वॉन ल्यूवेनहॉक। वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने माइक्रोस्कोप की मदद से जीवित कोशिकाओं को देखा और उनका वर्णन किया।
In simple words: सबसे पहले एंटॉन वॉन ल्यूवेनहॉक ने जीवित कोशिका को देखा।
🎯 Exam Tip: रॉबर्ट हुक ने मृत कोशिका देखी थी, जबकि ल्यूवेनहॉक ने जीवित कोशिका का अवलोकन किया। यह अंतर याद रखें।
Question 7. किन्हीं दो एककोशिकीय जीवों के नाम लिखिए।
Answer:
(i) अमीबा (Amoeba)
(ii) यूग्लीना (Euglena)
ये ऐसे जीव हैं जो केवल एक कोशिका से बने होते हैं और अपने सभी कार्य उसी एक कोशिका से करते हैं।
In simple words: दो एककोशिकीय जीव अमीबा और यूग्लीना हैं।
🎯 Exam Tip: एककोशिकीय जीवों के उदाहरण देते समय, यह याद रखें कि उनका पूरा शरीर केवल एक कोशिका से बनता है, जैसे बैक्टीरिया भी।
Question 8. मानव शरीर की सबसे लम्बी कोशिका का नाम लिखिए।
Answer: तन्त्रिका कोशिका (Neuron)। ये कोशिकाएँ शरीर में संदेशों को एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचाने का काम करती हैं, जिससे मस्तिष्क पूरे शरीर को नियंत्रित कर पाता है।
In simple words: मानव शरीर की सबसे लम्बी कोशिका तन्त्रिका कोशिका है।
🎯 Exam Tip: तंत्रिका कोशिकाएं न केवल लंबी होती हैं बल्कि जटिल शाखाओं वाली भी होती हैं, जो उन्हें संदेश संचार के लिए विशेष बनाती हैं।
Question 9. पादप कोशिका में कोशिका भित्ति का क्या कार्य है ?
Answer: कोशिका भित्ति पादप कोशिका को एक निश्चित आकार, दृढ़ता और साथ ही बाहरी आघातों और संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करती है। यह कोशिका को फटने से भी बचाती है जब वह पानी सोखती है।
In simple words: कोशिका भित्ति पेड़-पौधों की कोशिका को आकार, मजबूती और सुरक्षा देती है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि कोशिका भित्ति मुख्य रूप से सेलूलोज़ से बनी होती है और पादप कोशिका की बाहरी परत होती है, जो इसे बाहरी वातावरण से बचाती है।
Question 10. वर्णक के आधार पर पादपों में कौन-कौन से लवक पाये जाते हैं ?
Answer: वर्णक के आधार पर पादपों में मुख्य रूप से तीन प्रकार के लवक (Plastids) पाए जाते हैं:
(i) हरित लवक (Chloroplasts): इनमें क्लोरोफिल होता है जो प्रकाश संश्लेषण में मदद करता है।
(ii) वर्णी लवक (Chromoplasts): ये फूलों और फलों को रंग देते हैं।
(iii) अवर्णी लवक (Leucoplasts): ये रंगहीन होते हैं और भोजन (जैसे स्टार्च, तेल, प्रोटीन) का भंडारण करते हैं। ये सभी लवक पौधों के विभिन्न भागों में पाए जाते हैं और अलग-अलग काम करते हैं।
In simple words: पौधों में रंग के हिसाब से हरित लवक (हरे), वर्णी लवक (रंगीन) और अवर्णी लवक (रंगहीन) पाए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: तीनों प्रकार के लवकों के नाम और उनके प्रमुख कार्यों को याद रखें, खासकर हरित लवक के महत्व को।
Question 12. जीवों की कायिक कोशिका में किस प्रकार का कोशिका विभाजन होता है ?
Answer: जीवों की कायिक कोशिकाओं में समसूत्री कोशिका विभाजन (Mitosis) होता है। इस प्रक्रिया में एक कोशिका से दो नई कोशिकाएँ बनती हैं, जिनमें गुणसूत्रों की संख्या मूल कोशिका के समान ही रहती है। यह विभाजन जीवों की वृद्धि और शरीर के क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: कायिक कोशिकाओं में समसूत्री विभाजन होता है, जिससे शरीर बढ़ता है और ठीक होता है।
🎯 Exam Tip: समसूत्री विभाजन में गुणसूत्रों की संख्या समान रहती है, जबकि अर्धसूत्री विभाजन में आधी हो जाती है। यह अंतर ध्यान में रखें।
Question 13. अर्धसूत्री विभाजन को न्यूनकारी विभाजन क्यों कहते हैं ?
Answer: अर्धसूत्री विभाजन को न्यूनकारी विभाजन (Reduction division) कहते हैं क्योंकि इस विभाजन के परिणामस्वरूप बनने वाली प्रत्येक पुत्री कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या जनक कोशिका की तुलना में आधी हो जाती है। यह लैंगिक प्रजनन में महत्वपूर्ण है ताकि निषेचन के बाद गुणसूत्रों की संख्या पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थिर बनी रहे।
In simple words: अर्धसूत्री विभाजन में गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है, इसलिए इसे न्यूनकारी विभाजन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: न्यूनकारी विभाजन का मुख्य उद्देश्य युग्मक (शुक्राणु और अंडाणु) बनाना है, जिनमें आधी गुणसूत्र संख्या होती है।
Question 14. पादपों में कोशिका विभाजन के दौरान कोशिका द्रव्य विभाजन किस विधि द्वारा होता है ?
Answer: पादपों में कोशिका विभाजन के दौरान कोशिका द्रव्य विभाजन कोशिका पट्ट (Cell plate) निर्माण द्वारा होता है। पादप कोशिकाओं में कोशिका भित्ति की उपस्थिति के कारण, कोशिका झिल्ली अंदर की ओर धंसने की बजाय, केंद्र में एक नई भित्ति बनती है। यह नई भित्ति दोनों नई कोशिकाओं को अलग करती है।
In simple words: पौधों में कोशिका द्रव्य का विभाजन कोशिका पट्ट बनने से होता है।
🎯 Exam Tip: पादपों में कोशिका भित्ति की कठोरता के कारण कोशिका पट्ट विधि का उपयोग होता है, जबकि जंतुओं में विदलन खाँच (cleavage furrow) बनती है।
Question 15. स्थूल कोण ऊतक की कोशिकाओं की कोशिका भित्ति पर किस पदार्थ का निक्षेपण होता है ?
Answer: स्थूल कोण ऊतक की कोशिकाओं की कोशिका भित्ति पर सेल्यूलोज व पेक्टिन का निक्षेपण होता है। इन पदार्थों के जमाव के कारण कोशिका भित्ति मोटी हो जाती है, विशेषकर कोनों पर, जो पौधों को लचीलापन और यांत्रिक सहारा प्रदान करता है।
In simple words: स्थूल कोण ऊतक की कोशिका भित्ति पर सेल्यूलोज और पेक्टिन जमा होते हैं, जिससे वह मजबूत बनती है।
🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि स्थूल कोण ऊतक पौधों को बिना तोड़े लचीलापन देता है, खासकर युवा तनों और पत्तियों में।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. एककोशिकीय व बहुकोशिकीय जीव किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
Answer:
एककोशिकीय जीव (Unicellular Organisms): वे जीव जिनका शरीर केवल एक ही कोशिका से बना होता है, एककोशिकीय जीव कहलाते हैं। ये जीव अपने सभी जीवन कार्य (जैसे पोषण, श्वसन, प्रजनन) उसी एक कोशिका के माध्यम से करते हैं।
उदाहरण: अमीबा, यूग्लीना, पैरामीशियम, क्लेमाइडोमोनास, जीवाणु आदि।
बहुकोशिकीय जीव (Multicellular Organisms): वे जीव जिनका शरीर अनेक कोशिकाओं से मिलकर बना होता है, बहुकोशिकीय जीव कहलाते हैं। इन जीवों में कोशिकाएँ विभिन्न समूहों में संगठित होकर विशेष कार्य करती हैं, जिसे श्रम विभाजन (division of labour) कहते हैं। शरीर में अलग-अलग कोशिकाएँ अलग-अलग काम करती हैं।
उदाहरण: कृमि, कीट, पक्षी, पेड़-पौधे और मनुष्य।
In simple words: एककोशिकीय जीव एक ही कोशिका से बनते हैं (जैसे अमीबा), जबकि बहुकोशिकीय जीव बहुत सारी कोशिकाओं से बनते हैं (जैसे इंसान और पेड़)।
🎯 Exam Tip: एककोशिकीय और बहुकोशिकीय जीवों के बीच का मुख्य अंतर कोशिकाओं की संख्या और उनमें श्रम विभाजन की उपस्थिति है। उदाहरणों को याद रखना भी आवश्यक है।
Question 3. माइटोकॉन्ड्रिया की संरचना व कार्य समझाइए।
Answer:
माइटोकॉन्ड्रिया की संरचना (Structure of Mitochondria): माइटोकॉन्ड्रिया यूकैरियोटिक कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अंगक है जो दोहरी झिल्ली से घिरा होता है।
बाह्य झिल्ली (Outer membrane) चिकनी होती है और कोशिकाद्रव्य से संपर्क में रहती है।
आंतरिक झिल्ली (Inner membrane) कई जगह अंदर की ओर मुड़कर उंगली जैसी संरचनाएं बनाती है जिन्हें क्रिस्टी (Cristae) कहते हैं। यह क्रिस्टी आंतरिक सतह क्षेत्र को बढ़ाती है, जिससे ऊर्जा उत्पादन के लिए अधिक जगह मिलती है।
आंतरिक झिल्ली के अंदर एक जेली जैसा पदार्थ भरा होता है जिसे आधात्री (Matrix) कहते हैं, जिसमें राइबोसोम, DNA और श्वसन के एंजाइम होते हैं।
माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक संरचना का चित्र:
(चित्र में आधात्री, बाह्य झिल्ली, आंतरिक झिल्ली, और क्रिस्टी दर्शाए गए हैं।)
कार्य (Functions): माइटोकॉन्ड्रिया का मुख्य कार्य ऑक्सी श्वसन (Aerobic respiration) के माध्यम से ए.टी.पी. (ATP) का उत्पादन करना है। ATP कोशिका की ऊर्जा मुद्रा (Energy currency) होती है, इसलिए माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का 'पावर हाउस' (Power house) भी कहा जाता है। इसमें DNA और राइबोसोम होने के कारण यह अपनी कुछ प्रोटीन बना सकता है और अपनी संख्या बढ़ा सकता है, इसलिए इसे अर्धस्वशासी कोशिकांग (Semi-autonomous organelle) कहते हैं।
In simple words: माइटोकॉन्ड्रिया एक दोहरी झिल्ली वाला अंग है जिसमें ऊर्जा (ATP) बनती है, इसलिए इसे कोशिका का बिजली घर कहते हैं। इसकी आंतरिक झिल्ली पर मुड़ी हुई संरचनाएं (क्रिस्टी) होती हैं।
🎯 Exam Tip: माइटोकॉन्ड्रिया के दो मुख्य पहचान चिह्न याद रखें - इसका 'पावर हाउस' होना और 'अर्धस्वशासी' अंगक होना। इसकी दोहरी झिल्ली और क्रिस्टी भी महत्वपूर्ण संरचनात्मक विशेषताएँ हैं।
कोशिकांगों की तुलना (Comparison of Organelles)
| कोशिकांग (Organelle) | विशेषताएं (Characteristics) |
|---|---|
| कोशिका भित्ति (Cell wall) | यह कोशिका कला के बाहर सेलूलोज का बना दृढ़ कोशिका भित्ति पायी जाती है। |
| लवक (Plastids) | पादप कोशिका में किसी न किसी प्रकार के लवक पाये जाते हैं। |
| रिक्तिका (Vacuole) | परिपक्व कोशिका में एक या अधिक बड़ी रिक्तिका पाई जाती है। इसकी उपस्थिति के कारण केन्द्रक परिधि की ओर खिसक जाता है। |
| तारककाय (Centrosome) | अनुपस्थित होते हैं। |
Question 5. लाइसोसोम को आत्मघाती थैलियाँ क्यों कहा जाता है ?
Answer: लाइसोसोम एकल झिल्ली से घिरे ऐसे कोशिकांग हैं जिनमें शक्तिशाली जल अपघटनी या हाइड्रोलिटिक एंजाइम (Hydrolytic enzymes) भरे होते हैं। ये एंजाइम कोशिका के अंदर के टूटे-फूटे या पुराने अंगों को पचाकर खत्म कर देते हैं। जब कोशिका किसी कारण से क्षतिग्रस्त या कमजोर हो जाती है, तो लाइसोसोम फट जाते हैं और अपने ही एंजाइमों से पूरी कोशिका को पचा लेते हैं। इसी कारण इन्हें आत्मघाती थैलियाँ (Suicidal bags) कहा जाता है।
In simple words: लाइसोसोम में ऐसे एंजाइम होते हैं जो कोशिका को ही पचा सकते हैं। जब कोशिका को नुकसान होता है, तो ये फटकर खुद को खत्म कर देते हैं, इसलिए इन्हें आत्मघाती थैली कहते हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय लाइसोसोम में मौजूद 'जल अपघटनी एंजाइमों' का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही उनकी आत्मघाती प्रकृति का कारण है।
Question 6. केन्द्रक की संरचना, व कार्य का वर्णन कीजिए।
Answer:
केन्द्रक की संरचना (Structure of Nucleus): केन्द्रक कोशिका का सबसे महत्वपूर्ण अंगक है, जो कोशिका की सभी गतिविधियों को नियंत्रित करता है। यह दोहरी केन्द्रक कला (Nuclear membrane) से घिरा होता है। इस कला में छोटे-छोटे छिद्र होते हैं जिन्हें केन्द्रक छिद्र (Nuclear pore) कहते हैं, जो केन्द्रक द्रव्य और कोशिका द्रव्य के बीच पदार्थों के आदान-प्रदान में मदद करते हैं। केन्द्रक के अंदर एक गाढ़ा पदार्थ भरा होता है जिसे केन्द्रक द्रव्य (Nucleoplasm) कहते हैं। केन्द्रक द्रव्य में पतले धागे जैसी संरचनाएं होती हैं जिन्हें क्रोमेटिन जालिका (Chromatin network) कहते हैं। कोशिका विभाजन के समय ये क्रोमेटिन धागे संघनित होकर गुणसूत्र (Chromosomes) बनाते हैं। केन्द्रक के अंदर एक छोटी गोलाकार संरचना भी होती है जिसे केन्द्रिका (Nucleolus) कहते हैं, जो राइबोसोम निर्माण में मदद करती है।
केन्द्रक की संरचना का चित्र:
(चित्र में अन्तर्द्रव्यी जालिका, केन्द्रक छिद्र, केन्द्रिका, क्रोमेटिन जालिका, राइबोसोम, केन्द्रक झिल्ली, केन्द्रक द्रव्य दर्शाए गए हैं।)
कार्य (Functions):
केन्द्रक कोशिका की सभी गतिविधियों और कार्यों को नियंत्रित करता है, जैसे वृद्धि, विकास और प्रोटीन संश्लेषण।
इसमें आनुवंशिक जानकारी (DNA) होती है, जो प्रजनन, विकास और जीव के व्यवहार से संबंधित होती है।
यह आनुवंशिक जानकारी का द्विगुणन और अगली पीढ़ी में संचरण के लिए जिम्मेदार होता है।
In simple words: केन्द्रक कोशिका का मुख्य कंट्रोल सेंटर है। इसमें आनुवंशिक जानकारी (DNA) होती है और यह सभी सेल के काम को संभालता है। यह दोहरी झिल्ली और छिद्रों से घिरा होता है।
🎯 Exam Tip: केन्द्रक को कोशिका का 'नियंत्रण कक्ष' कहना और उसके दो मुख्य कार्य (आनुवंशिक जानकारी का भंडारण और कोशिका गतिविधियों का नियंत्रण) का उल्लेख करना आवश्यक है।
Question 7. कोशिका चक्र को समझाइए।
Answer: विभाजन में सक्षम प्रत्येक कोशिका एक तय चक्र का पालन करती है जिसे कोशिका चक्र (Cell cycle) कहते हैं। कोशिका चक्र वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक कोशिका बढ़ती है और दो पुत्री कोशिकाओं में विभाजित होती है। इसमें दो मुख्य प्रावस्थाएँ होती हैं: लम्बी अन्तरावस्था (Interphase) और छोटी विभाजन प्रावस्था (M-phase या Mitotic phase)।
अन्तरावस्था (Interphase): यह वह अवधि है जब कोशिका विभाजन की तैयारी करती है और इसमें तीन उप-प्रावस्थाएँ होती हैं:
1. \( \mathbf{G_1} \) प्रावस्था (Growth 1 phase): इस दौरान कोशिका आकार में बढ़ती है और RNA व प्रोटीन का संश्लेषण सक्रिय रूप से होता है।
2. \( \mathbf{S} \) प्रावस्था (Synthesis phase): इस प्रावस्था में DNA का संश्लेषण होता है, यानी DNA की प्रतिकृति बनती है।
3. \( \mathbf{G_2} \) प्रावस्था (Growth 2 phase): इस प्रावस्था में RNA और प्रोटीन का संश्लेषण जारी रहता है ताकि कोशिका विभाजन के लिए पूरी तरह से तैयार हो सके।
विभाजन प्रावस्था (M-phase): यह वह अवस्था है जिसमें वास्तविक कोशिका विभाजन होता है, जैसे समसूत्री विभाजन।
कोशिका चक्र का चित्र:
(चित्र में G1, S, G2 प्रावस्थाओं के साथ अन्तरावस्था और विभाजन प्रावस्था, साथ ही प्रथम व द्वितीय वृद्धि काल तथा संश्लेषी काल दर्शाए गए हैं।)
In simple words: कोशिका चक्र वह प्रक्रिया है जिसमें कोशिका बड़ी होती है और फिर दो नई कोशिकाओं में बंट जाती है। इसमें एक तैयारी का समय (अन्तरावस्था) और फिर बंटने का समय (विभाजन प्रावस्था) होता है।
🎯 Exam Tip: कोशिका चक्र की सभी प्रावस्थाओं (G1, S, G2, M) को उनके विशिष्ट कार्यों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर S प्रावस्था में होने वाले DNA संश्लेषण को।
Question 8. पादप व जन्तु कोशिका में कोशिका द्रव्य विभाजन की विधियों को समझाइए।
Answer: कोशिका द्रव्य विभाजन (Cytokinesis) वह प्रक्रिया है जिसमें एक कोशिका का कोशिका द्रव्य दो पुत्री कोशिकाओं में बंट जाता है। पादप और जंतु कोशिकाओं में यह अलग-अलग तरीकों से होता है:
जंतु कोशिका में: कोशिका द्रव्य विभाजन एक विदलन खाँच (Cleavage furrow) बनने से होता है। यह खाँच कोशिका की परिधि से केन्द्र की ओर बढ़ती है और अंततः गहरी होकर जनक कोशिका को दो पुत्री कोशिकाओं में विभाजित कर देती है। यह प्रक्रिया एक रबर बैंड की तरह कोशिका को बीच से कसती जाती है।
पादप कोशिका में: कोशिका द्रव्य विभाजन कोशिका पट्ट (Cell plate) निर्माण द्वारा होता है। पादप कोशिकाओं में कठोर कोशिका भित्ति होने के कारण विदलन खाँच नहीं बन पाती। इसके बजाय, कोशिका के केन्द्र में एक नई संरचना, कोशिका पट्ट, बनती है जो बाहर की ओर बढ़कर दो नई कोशिका भित्तियों का निर्माण करती है और दो पुत्री कोशिकाओं को अलग करती है।
पादप कोशिका में कोशिका पटलिका विधि का चित्र:
(चित्र में कोशिका प्लेट का बनना, कोशिका भित्ति निक्षेपण और नवकोशिकाभित्ति दर्शाए गए हैं।)
In simple words: जंतु कोशिका में कोशिका बीच से सिकुड़कर बंटती है (खाँच बनाकर), जबकि पादप कोशिका में बीच में एक नई दीवार (कोशिका पट्ट) बनकर बंटती है।
🎯 Exam Tip: पादप और जन्तु कोशिका में कोशिका द्रव्य विभाजन के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझना महत्वपूर्ण है, खासकर कोशिका भित्ति की भूमिका को।
Question 9. समसूत्री विभाजन की मध्यावस्था का चित्र बनाकर समझाइए।
Answer:
मध्यावस्था (Metaphase): समसूत्री विभाजन की मध्यावस्था में गुणसूत्र कोशिका के मध्यवर्ती क्षेत्र में एक सीधी रेखा में व्यवस्थित हो जाते हैं, जिसे मध्यावस्था पट्टिका (Metaphase plate) कहते हैं। इस अवस्था में गुणसूत्र सर्वाधिक संघनित और मोटे होते हैं। प्रत्येक गुणसूत्र अपने सेंट्रोमियर (Centromere) के माध्यम से तर्कु तंतुओं (Spindle fibres) से जुड़ा रहता है। गुणसूत्रों की भुजाएँ ध्रुवों (poles) की ओर विन्यसित रहती हैं, जिससे वे केन्द्र में सही ढंग से संरेखित हो सकें।
समसूत्री विभाजन की मध्यावस्था का चित्र:
(चित्र में सेंट्रोमियर, तर्कु तंतु और क्रोमेटिड दर्शाए गए हैं।)
In simple words: मध्यावस्था में गुणसूत्र कोशिका के बीच में एक लाइन में खड़े हो जाते हैं और तर्कु तंतुओं से जुड़े होते हैं।
🎯 Exam Tip: मध्यावस्था की पहचान गुणसूत्रों के कोशिका के मध्य में संरेखित होने और तर्कु तंतुओं से सेंट्रोमियर पर जुड़ने से होती है। चित्र में इन बिंदुओं को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
Question 10. कोशिका विभाजन के सन्दर्भ में पश्चावस्था अभिगमन को समझाइए।
Answer: कोशिका विभाजन की पश्चावस्था (Anaphase) में गुणसूत्रों का अभिगमन होता है। इस प्रावस्था में प्रत्येक गुणसूत्र का सेंट्रोमियर विभाजित होता है, जिससे दो अर्द्धगुणसूत्र (Chromatids) एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं। ये अलग हुए पुत्री गुणसूत्र (Daughter chromatids) विपरीत ध्रुवों की ओर गति करना शुरू कर देते हैं। इस विपरीत गति को पश्चावस्था अभिगमन (Anaphasic movement) कहते हैं। इस गति के लिए आवश्यक शक्ति और दिशा तर्कु तंतुओं (Spindle fibres) के संकुचन और छोटे होने से मिलती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि प्रत्येक नई कोशिका में गुणसूत्रों की समान संख्या पहुंचे।
पश्चावस्था अभिगमन का चित्र (क्रोमेटिड्स विपरीत ध्रुवों की ओर जाते हुए):
(चित्र में क्रोमेटिड दर्शाए गए हैं जो विपरीत ध्रुवों की ओर अभिगमित हो रहे हैं।)
In simple words: पश्चावस्था में, गुणसूत्र के आधे-आधे हिस्से (क्रोमेटिड) अलग होकर कोशिका के दो अलग-अलग छोरों की ओर चले जाते हैं। यह गति तर्कु तंतुओं की मदद से होती है।
🎯 Exam Tip: पश्चावस्था में सेंट्रोमियर का विभाजन और पुत्री क्रोमेटिड्स का ध्रुवों की ओर अभिगमन प्रमुख विशेषताएं हैं, जिन्हें सही ढंग से समझाना चाहिए।
Question 11. अर्द्धसूत्री विभाजन का महत्व लिखिए।
Answer: अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis) जीवों के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
(i) युग्मक निर्माण: यह लैंगिक प्रजनन वाले जीवों में नर व मादा अगुणित युग्मकों (haploid gametes), जैसे शुक्राणु और अंडाणु, के निर्माण को संभव बनाता है।
(ii) गुणसूत्रों की संख्या की स्थिरता: यदि अर्धसूत्री विभाजन न हो तो निषेचन (fertilization) के बाद बनने वाले युग्मनज (Zygote) में गुणसूत्रों की संख्या बढ़ती जाएगी। अर्धसूत्री विभाजन यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक पीढ़ी में गुणसूत्रों की संख्या स्थिर बनी रहे।
(iii) आनुवंशिक भिन्नता: क्रॉसिंग ओवर (crossing over) के दौरान समजात गुणसूत्रों के बीच जीन विनिमय (exchange of genes) होता है। इससे चार आनुवंशिक रूप से भिन्न प्रकार की कोशिकाएँ बनती हैं, जो जनक कोशिका से अलग होती हैं। यह आनुवंशिक भिन्नता (genetic variation) जैव विकास (Organic evolution) का आधार है।
In simple words: अर्धसूत्री विभाजन से नए जीव बनते हैं, गुणसूत्रों की संख्या सही रहती है, और जीवों में विविधता आती है, जिससे विकास होता है।
🎯 Exam Tip: अर्धसूत्री विभाजन के तीन प्रमुख महत्व - युग्मक निर्माण, गुणसूत्र संख्या को बनाए रखना और आनुवंशिक भिन्नता लाना - को स्पष्ट रूप से याद रखें।
Question 12. जाइलम की संरचना व कार्य को समझाइए।
Answer:
जाइलम की संरचना (Structure of Xylem): जाइलम पादपों का एक जटिल स्थायी ऊतक (complex permanent tissue) है जो पौधों में जल और खनिज लवणों के परिवहन का कार्य करता है। जाइलम चार प्रकार की कोशिकाओं (घटकों) के मिलने से बनता है:
(i) वाहिनिकाएँ (Tracheids): ये नुकीले सिरे वाली, मृत कोशिकाएँ होती हैं जो जल के परिवहन में मदद करती हैं।
(ii) वाहिकाएँ (Trachea या Vessels): ये बेलनाकार व चौड़ी गुहा वाली कोशिकाएँ होती हैं जो एक-दूसरे से जुड़कर लंबी नलिकाकार संरचना बनाती हैं। ये भी मृत होती हैं।
(iii) जाइलम तंतु (Xylem fibre): ये लंबी, पतली और दृढ़ कोशिकाएँ होती हैं जो पौधों को यांत्रिक सहारा प्रदान करती हैं। ये मृत कोशिकाएँ होती हैं।
(iv) जाइलम मृदूतक (Xylem parenchyma): ये जीवित कोशिकाएँ होती हैं जो भोजन का भंडारण करती हैं और जल के पार्श्व परिवहन में मदद करती हैं।
वाहिनिका, वाहिका व जाइलम तंतु की द्वितीयक कोशिका भित्ति पर लिग्निन (lignin) जमा होता है, जिसके कारण ये मृत हो जाती हैं।
जाइलम की संरचना का चित्र:
(चित्र में वाहिका, वाहिनिका और जाइलम तंतु दर्शाए गए हैं।)
कार्य (Functions): जाइलम का प्रमुख कार्य जड़ से पत्तियों तक जल और खनिज लवणों का संवहन (conduction) करना है। यह पौधों को यांत्रिक सहारा भी प्रदान करता है। इसलिए, जाइलम एक संवहन ऊतक (Vascular tissue) है।
In simple words: जाइलम पौधों में पानी और खनिज पहुंचाने वाला ऊतक है। यह वाहिनिका, वाहिका, जाइलम तंतु और जाइलम मृदूतक से बनता है।
🎯 Exam Tip: जाइलम के चार घटकों के नाम और उनका मुख्य कार्य (जल व खनिज लवणों का परिवहन) याद रखें। यह भी ध्यान रखें कि जाइलम का अधिकांश भाग मृत कोशिकाओं से बना होता है।
Question 13. तन्त्रिका कोशिका का नामांकित चित्र बनाइए।
Answer:
तन्त्रिका कोशिका (Neuron): तंत्रिका कोशिका तंत्रिका ऊतक की एक इकाई है। प्रत्येक तंत्रिका कोशिका एक कोशिका काय (Cell body या Soma), तंत्रिकाक्ष (Axon) और द्रुमाश्म (Dendrites) से मिलकर बनी होती है। कोशिका काय में एक बड़ा केन्द्रक और सघन कोशिका द्रव्य होता है। तंत्रिकाक्ष पर माइलिन आवरण (Myelin sheath) पाया जा सकता है, जो आवेगों के तेजी से संचरण में मदद करता है।
तंत्रिका कोशिका का चित्र:
(चित्र में केन्द्रक, तंत्रिकाक्ष, मायलिन आवरण और तंत्रिका कोशिका के विभिन्न भाग दर्शाए गए हैं।)
तंत्रिका कोशिका किसी उद्दीपन को ग्रहण करने, उसे तंत्रिका आवेग (Nerve impulse) के रूप में संचरित करने और उसके प्रति होने वाली अनुक्रिया (response) के लिए जिम्मेदार होती है। द्रुमाश्म आवेगों को ग्रहण करते हैं, कोशिका काय तक पहुंचाते हैं, और तंत्रिकाक्ष आवेगों को दूसरी कोशिकाओं तक ले जाते हैं।
In simple words: तंत्रिका कोशिका शरीर में संदेशों को पहुंचाने वाली इकाई है। इसमें एक मुख्य शरीर (कोशिका काय), संदेश ले जाने वाला एक लंबा हिस्सा (तंत्रिकाक्ष) और संदेश लेने वाली शाखाएं (द्रुमाश्म) होती हैं।
🎯 Exam Tip: तंत्रिका कोशिका के प्रमुख भागों (कोशिका काय, तंत्रिकाक्ष, द्रुमाश्म) और उनके कार्यों को सही ढंग से नामांकित करके दिखाएं।
Question 14. जन्तुओं में पाई जाने वाली विभिन्न पेशियों का वर्णन कीजिए।
Answer: जन्तुओं में मुख्य रूप से तीन प्रकार की पेशियाँ पाई जाती हैं, जो शरीर में विभिन्न कार्य करती हैं:
1. रेखित पेशी (Striated Muscle या Skeletal Muscle): यह पेशी हड्डियों (कंकाल) से जुड़ी होती है, इसलिए इसे कंकाल पेशी भी कहते हैं। इसमें गहरे और हल्के रंग की धारियाँ (striations) होती हैं। ये पेशियाँ हमारी इच्छा के अनुसार संकुचित होती हैं, इसलिए इन्हें ऐच्छिक पेशी (Voluntary muscle) भी कहते हैं। ये शरीर की गति और चलन में मदद करती हैं, जैसे हाथ की बाइसेप्स और ट्राइसेप्स पेशियाँ।
2. अरेखित पेशी (Unstriated Muscle या Smooth Muscle): ये पेशियाँ शरीर के आंतरिक अंगों, जैसे आहारनाल, रक्त वाहिकाओं और जनन मार्ग की दीवारों में पाई जाती हैं। इनमें धारियाँ नहीं होतीं। इनका संकुचन हमारी इच्छा के अधीन नहीं होता, इसलिए इन्हें अनैच्छिक पेशी (Involuntary muscle) कहते हैं। ये शरीर के अंदरूनी कामों को नियंत्रित करती हैं, जैसे भोजन को पचाना।
3. हृदयी पेशी (Cardiac Muscle): यह पेशी केवल हृदय की दीवार बनाती है। इसमें धारियाँ होती हैं, इसलिए यह रेखित पेशी जैसी दिखती है, लेकिन यह अनैच्छिक होती है, यानी इसका संकुचन हमारी इच्छा के अधीन नहीं होता। इसकी कोशिकाएँ शाखित (branched) होती हैं और लगातार जीवन भर बिना थके काम करती हैं।
पेशीय ऊतक का चित्र:
(चित्र में कंकाल (रेखित पेशी), चिकनी पेशी और हृदयपेशी दर्शाए गए हैं।)
In simple words: जन्तुओं में तीन तरह की मांसपेशियां होती हैं: रेखित (जो हम अपनी इच्छा से हिलाते हैं, जैसे हाथ), अरेखित (जो अपने आप काम करती हैं, जैसे पेट) और हृदयी (जो सिर्फ दिल में होती हैं और खुद चलती रहती हैं)।
🎯 Exam Tip: तीनों प्रकार की पेशियों (रेखित, अरेखित, हृदयी) की मुख्य विशेषताओं (धारियाँ, ऐच्छिक/अनैच्छिक नियंत्रण, स्थान) को उदाहरणों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 15. वाइरस की संरचना समझाइए तथा जीवाणु भोजी का नामांकित चित्र बनाइए।
Answer:
विषाणु (Virus): विषाणु या वाइरस कोशिका रहित जीव हैं, जो केवल जीवित परपोषी कोशिका के अंदर ही प्रजनन कर सकते हैं। ये इतने छोटे होते हैं कि इन्हें केवल इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की मदद से ही देखा जा सकता है। इनका आकार 30 नैनोमीटर (nm) से 300 नैनोमीटर तक होता है। प्रत्येक विषाणु कण को विरिआन (Virion) कहते हैं।
विरिआन मुख्य रूप से दो भागों से मिलकर बना होता है:
(i) बाह्य आवरण या कैप्सिड (Capsid): यह प्रोटीन का बना खोल होता है, जो अनेक छोटी-छोटी इकाइयों (कैप्सोमियर्स) से बना हो सकता है। यह आवरण विषाणु के आनुवंशिक पदार्थ को सुरक्षा प्रदान करता है।
(ii) नाभिकीय अम्ल (Nucleic Acid): प्रोटीन खोल के अंदर केवल एक प्रकार का नाभिकीय अम्ल होता है, या तो DNA (डी.एन.ए.) या RNA (आर.एन.ए.), दोनों एक साथ नहीं होते। यह नाभिकीय अम्ल विषाणु का आनुवंशिक पदार्थ होता है जो परपोषी कोशिका में प्रवेश करके प्रतिकृति बनाता है।
जीवाणु भोजी (Bacteriophage) एक प्रकार का विषाणु है जो केवल जीवाणुओं को संक्रमित करता है।
जीवाणु भोजी का नामांकित चित्र:
(चित्र में आच्छद, आधार प्लेट, और तंतु पुच्छ दर्शाए गए हैं।)
In simple words: वाइरस बहुत छोटे जीव होते हैं जिनके पास अपनी कोशिका नहीं होती। इनमें बाहर प्रोटीन का एक कवच (कैप्सिड) होता है और अंदर DNA या RNA होता है। जीवाणु भोजी ऐसे वाइरस हैं जो सिर्फ बैक्टीरिया को बीमार करते हैं।
🎯 Exam Tip: वाइरस को सजीव और निर्जीव के बीच की कड़ी के रूप में समझना महत्वपूर्ण है। जीवाणु भोजी के चित्र में उसके प्रमुख भागों जैसे हेड, कॉलर, शीथ, बेस प्लेट और टेल फाइबर्स को नामांकित करना न भूलें।
निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. पादप कोशिका का नामांकित चित्र बनाकर इसके निम्न कोशिकांगों की संरचना व कायों का वर्णन कीजिए
(अ) हरित लवक
(ब) अन्तर्दुव्यी जालिका
(स) माइटोकॉन्ड्रिया
(द) केन्द्रक।
Answer:
(अ) हरित लवक (Chloroplast): हरित लवक पादप कोशिकाओं में पाया जाने वाला दोहरी झिल्लीयुक्त कोशिकांग है। ये पौधों में प्रकाश संश्लेषण के लिए जिम्मेदार होते हैं।
बाह्य झिल्ली (Outer membrane) और अंतः झिल्ली (Inner membrane) के बीच का स्थान पीठिका या स्ट्रोमा (Stroma) कहलाता है। स्ट्रोमा रंगहीन प्रोटीनयुक्त पदार्थ का बना होता है, जिसमें DNA, राइबोसोम और प्रकाश संश्लेषण के एंजाइम पाए जाते हैं।
स्ट्रोमा में अनेक चपटी, थैलीनुमा संरचनाएँ होती हैं जिन्हें थाइलेकॉइड (Thylakoid) कहते हैं। 20-50 थाइलेकॉइड सिक्के के चट्टे की तरह एक के ऊपर एक व्यवस्थित होकर एक ग्रेनम (Granum) बनाते हैं। कई ग्रेना मिलकर इंटरग्रेनम (Intergranum) या स्ट्रोमा लेमिली से जुड़े होते हैं।
हरित लवक की संरचना का चित्र:
(चित्र में बाह्य झिल्ली, ग्रेनम, अवकाशिका, आंतरिक झिल्ली, इंटरग्रेनमपीठिका, थाइलेकोइड दर्शाए गए हैं।)
कार्य (Functions): हरित लवक का मुख्य कार्य सौर ऊर्जा को ग्रहण करके उसे रासायनिक ऊर्जा में बदलना है। यह प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा खाद्य पदार्थ (ग्लूकोज) का निर्माण करता है।
(ब) अन्तर्द्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum - ER): अन्तर्द्रव्यी जालिका कोशिका द्रव्य में फैली हुई सूक्ष्म नलिकाओं और झिल्लीदार थैलियों (सिस्टर्न) का एक जटिल जाल है। यह कोशिका कला से लेकर केन्द्रक झिल्ली तक फैली होती है।
यह दो प्रकार की होती है:
(i) खुरदरी अन्तर्द्रव्यी जालिका (Rough Endoplasmic Reticulum - RER): इसकी सतह पर राइबोसोम लगे होते हैं, इसलिए यह खुरदरी दिखती है। इसका मुख्य कार्य प्रोटीन संश्लेषण और उनके परिवहन में मदद करना है।
(ii) चिकनी अन्तर्द्रव्यी जालिका (Smooth Endoplasmic Reticulum - SER): इसकी सतह पर राइबोसोम नहीं होते, इसलिए यह चिकनी दिखती है। इसका मुख्य कार्य लिपिड (वसा) और स्टेरॉयड का संश्लेषण करना है, और दवाओं व विषैले पदार्थों को कोशिका से बाहर निकालने में मदद करना है।
🎯 Exam Tip: पादप कोशिका के इन महत्वपूर्ण अंगों की संरचनाओं और कार्यों को अलग-अलग समझना और उनके बीच के अंतरों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। चित्र बनाते समय सभी महत्वपूर्ण भागों को सही ढंग से नामांकित करें।
Question 1. पादप कोशिका का नामांकित चित्र बनाकर इसके निम्न कोशिकांगों की संरचना व कार्यों का वर्णन कीजिए
(अ) हरित लवक
(ब) अन्तर्द्रव्यी जालिंका
(स) माइटोकॉन्ड्रिया
(द) केन्द्रक।
Answer:(अ) हरित लवक (Chloroplast): यह पादप कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अंग है, जो दो झिल्लियों से घिरा होता है. बाहरी झिल्ली चिकनी होती है, जबकि भीतरी झिल्ली परतों वाली होती है. झिल्लियों के बीच के खाली स्थान को पीठिका या स्ट्रोमा कहते हैं. स्ट्रोमा में रंगहीन प्रोटीन, एक गोल DNA, राइबोसोम और कई एंजाइम होते हैं. स्ट्रोमा में कई चपटी, झिल्ली-बंद संरचनाएँ होती हैं जिन्हें थाइलेकॉइड कहते हैं. लगभग 20-50 थाइलेकॉइड एक सिक्के के ढेर की तरह व्यवस्थित होकर एक ग्रेनम बनाते हैं. एक हरित लवक में ऐसे कई ग्रेना होते हैं. कुछ नली जैसी संरचनाएँ, जिन्हें इन्टरग्रेनम या स्ट्रोमा लेमिली कहते हैं, चाइलेकोइड को आपस में जोड़ती हैं. हरित लवक पौधों के लिए खाना बनाने में मदद करता है.
कार्य: हरित लवक का मुख्य काम सूर्य की ऊर्जा को सोखना और उसे रासायनिक ऊर्जा में बदलना है, जिसे प्रकाश संश्लेषण कहते हैं.
(ब) अन्तर्द्रव्यी जालिंका (Endoplasmic Reticulum): यह आपस में जुड़ी हुई पतली नलिकाओं और झिल्लीदार थैलियों का एक नेटवर्क होता है. यह कोशिका झिल्ली और केंद्रक के बीच फैला होता है.
कार्य: खुरदरी अन्तर्द्रव्यी जालिंका प्रोटीन बनाने और झिल्ली प्रोटीन बनाने में मदद करती है. चिकनी अन्तर्द्रव्यी जालिंका लिपिड और स्टीरॉल बनाती है. यह अंगिका मिलकर कोशिका के अंदर चीजों को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाने का काम करती है.
(स) माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria): यह यूकैरियोटिक कोशिकाओं में पाई जाने वाली दोहरी झिल्ली से घिरी एक महत्वपूर्ण अंगिका है. दोनों झिल्लियों के बीच के स्थान को बाहरी कोष्ठक कहा जाता है. बाहरी झिल्ली चिकनी होती है, जबकि भीतरी झिल्ली में उँगलियों जैसी संरचनाएँ होती हैं जिन्हें क्रिस्टी कहते हैं. बीच के स्थान को आधात्री कहते हैं. आधात्री में DNA और राइबोसोम भी होते हैं. माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का ऊर्जा घर भी कहते हैं.
कार्य: माइटोकॉन्ड्रिया मुख्य रूप से ऑक्सी श्वसन और ATP (एटीपी) ऊर्जा बनाने के लिए जिम्मेदार होता है. एटीपी कोशिका की ऊर्जा मुद्रा है. DNA और राइबोसोम होने के कारण माइटोकॉन्ड्रिया अपनी कॉपी खुद बना सकते हैं, इसलिए इन्हें अर्ध-स्वायत्त अंगिकाएँ (semi-autonomous organelles) भी कहते हैं.
(द) केन्द्रक (Nucleus): यह कोशिका का सबसे महत्वपूर्ण अंग है, जो दोहरी केंद्रक झिल्ली से घिरा होता है. केंद्रक झिल्ली में छोटे-छोटे छेद होते हैं जिन्हें केंद्रक छिद्र कहते हैं. केंद्रक के अंदर भरे पदार्थ को केंद्रक द्रव्य (nucleoplasm) कहते हैं. केंद्रक छिद्र केंद्रक द्रव्य और कोशिका द्रव्य के बीच पदार्थों के आदान-प्रदान में मदद करते हैं. केंद्रक द्रव्य में पतले धागे जैसी संरचनाएँ होती हैं.
कार्य: केंद्रक सभी कोशिका की गतिविधियों को नियंत्रित करता है. इसमें प्रजनन, विकास, उपापचय और जीव के व्यवहार से जुड़ी आनुवंशिक जानकारी होती है. यह जानकारी को दोहराने और अगली पीढ़ी में भेजने के लिए भी जिम्मेदार है.
In simple words: पादप कोशिका में हरित लवक, अंतर्द्रव्यी जालिंका, माइटोकॉन्ड्रिया और केंद्रक जैसे कई छोटे अंग होते हैं. हरित लवक सूरज की रोशनी से खाना बनाता है, अंतर्द्रव्यी जालिंका प्रोटीन और वसा बनाती है, माइटोकॉन्ड्रिया ऊर्जा पैदा करता है, और केंद्रक कोशिका के सभी कामों को नियंत्रित करता है. ये सब मिलकर कोशिका को ठीक से काम करने में मदद करते हैं.
🎯 Exam Tip: जब भी किसी कोशिकांग की संरचना और कार्य पूछे जाएँ, तो सबसे पहले उसकी झिल्ली की बनावट, अंदरूनी हिस्से और फिर उसके मुख्य कामों को बिंदुवार समझाएँ. चित्र बनाने से उत्तर को समझने में आसानी होती है.
Question 2. समसूत्री विभाजन क्या हैं ? समसूत्री विभाजन की विभिन्न प्रावस्थाओं का सचित्र वर्णन कीजिए।
Answer:समसूत्री विभाजन (Mitosis): यह एक प्रकार का कोशिका विभाजन है जो शरीर की कोशिकाओं (कायिक कोशिकाओं) में होता है. इस प्रक्रिया में, एक जनक कोशिका (parent cell) दो समान नई कोशिकाएँ (daughter cells) बनाती है. इन नई कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या जनक कोशिका के समान ही रहती है. समसूत्री विभाजन में बनने वाली नई कोशिकाएँ आनुवंशिक रूप से अपनी जनक कोशिका जैसी ही होती हैं. यह विभाजन कोशिका की वृद्धि और मरम्मत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. समसूत्री विभाजन में मुख्य रूप से तीन प्रावस्थाएँ होती हैं:
(A) अन्तरावस्था (Interphase): यह वह समय है जब कोशिका विभाजन की तैयारी करती है. यह दो लगातार कोशिका विभाजनों के बीच का समय होता है. इस दौरान कोशिका अपनी सभी जरूरी चीजें बनाती है.
(B) केन्द्रकीय विभाजन (Karyokinesis): इसमें केंद्रक का विभाजन होता है. इसे आगे कई उप-प्रावस्थाओं में बांटा जाता है:
पूर्वावस्था (Prophase): यह समसूत्री विभाजन की पहली अवस्था है. इसमें क्रोमेटिन पदार्थ पतले धागों से बदलकर छोटे और मोटे गुणसूत्रों में बदल जाते हैं, जो साफ दिखाई देने लगते हैं. ये गुणसूत्र सेंट्रोमियर पर एक-दूसरे से जुड़े होते हैं. केंद्रक की झिल्ली और केंद्रिक (nucleolus) गायब होने लगते हैं. जंतु कोशिकाओं में, तारककाय दो नए तारककाय बनाते हैं जो ध्रुवों का निर्धारण करते हैं.
मध्यावस्था (Metaphase): इस अवस्था में गुणसूत्र कोशिका के मध्य भाग में एक कतार में व्यवस्थित हो जाते हैं. तर्कुतंतु (spindle fibers) पूरी तरह बन जाते हैं और गुणसूत्र सेंट्रोमियर से इन तंतुओं से जुड़ जाते हैं. गुणसूत्र के बाजू ध्रुवों की ओर मुड़े रहते हैं.
पश्चावस्था (Anaphase): इस अवस्था में प्रत्येक गुणसूत्र का सेंट्रोमियर विभाजित हो जाता है. इससे दोनों अर्द्धगुणसूत्र (क्रोमेटिड) अलग हो जाते हैं. ये पुत्री गुणसूत्र एक-दूसरे से विपरीत ध्रुवों की ओर बढ़ने लगते हैं. इस गति को पश्चावस्था अभिगमन कहते हैं, और यह तर्कुतंतुओं के सिकुड़ने से होती है.
अन्त्यावस्था (Telophase): यह पूर्वावस्था के बिल्कुल विपरीत होती है. इसमें पुत्री गुणसूत्र फिर से लंबे और पतले क्रोमेटिन जालिका में बदल जाते हैं. हर ध्रुव पर पुत्री गुणसूत्रों का एक समूह बन जाता है, और दो नए केंद्रक बनने लगते हैं.
(C) कोशिकाद्रव्य विभाजन (Cytokinesis): इसमें कोशिका द्रव्य विभाजित होकर दो नई कोशिकाओं का निर्माण करता है.
In simple words: समसूत्री विभाजन वह प्रक्रिया है जिसमें एक कोशिका दो नई, बिल्कुल एक जैसी कोशिकाएँ बनाती है. इसमें पहले केंद्रक और फिर कोशिका द्रव्य विभाजित होता है. यह वृद्धि और पुरानी कोशिकाओं को बदलने के लिए ज़रूरी है. हर चरण में गुणसूत्रों की व्यवस्था बदलती है और अंत में दो अलग केंद्रक बन जाते हैं.
🎯 Exam Tip: समसूत्री विभाजन की प्रत्येक अवस्था के मुख्य परिवर्तनों को याद रखें और चित्र बनाते समय गुणसूत्रों की संख्या और उनकी स्थिति का सही प्रदर्शन करें.
Question 3. ऊतक किसे कहते हैं ? पादपों में पाये जाने वाले सरल ऊतकों का सचित्र वर्णन कीजिए।
Answer:ऊतक (Tissue): ऊतक कोशिकाओं का वह समूह होता है जिनकी उत्पत्ति, विकास और कार्य समान होते हैं.
पादपों में मुख्य रूप से तीन प्रकार के सरल ऊतक पाए जाते हैं:
1. मृदूतक (Parenchyma): यह पौधों में सबसे अधिक पाया जाने वाला भरण ऊतक (ground tissue) है. इसकी कोशिकाएँ लगभग गोल या बराबर आकार की होती हैं. इन कोशिकाओं के बीच खाली जगह (intercellular spaces) होती है. यह जीवित ऊतक है जिसकी कोशिका भित्ति पतली और सेल्यूलोज की बनी होती है. मृदूतक भोजन जमा करने का काम करता है. जब इन कोशिकाओं में क्लोरोफिल होता है, तो वे प्रकाश संश्लेषण करती हैं, और तब इन्हें क्लोरेनकाइमा (chlorenchyma) कहते हैं.
2. स्थूलकोण ऊतक (Collenchyma): यह ऊतक भी जीवित कोशिकाओं से बना होता है, लेकिन इसकी कोशिका भित्तियाँ कोनों पर सेल्यूलोज और पेक्टिन के जमाव के कारण मोटी होती हैं. इन कोशिकाओं के बीच खाली जगह नहीं होती है. यह ऊतक पौधों के अंगों को लचीलापन और मजबूती देता है. यह आमतौर पर बाहरी परत (epidermis) के ठीक नीचे पाया जाता है.
3. दृढ़ोतक (Sclerenchyma): इस ऊतक की कोशिकाएँ लंबी, पतली और नुकीले सिरों वाली होती हैं. इनकी कोशिका भित्ति पर लिग्निन का जमाव होता है, जिसके कारण वे बहुत मोटी हो जाती हैं. लिग्निफाइड होने के कारण परिपक्व दृढ़ोतक कोशिकाओं में जीवद्रव्य नहीं होता, इसलिए ये मृत ऊतक होते हैं. यह ऊतक पौधों के हिस्सों को यांत्रिक सहायता (mechanical support) प्रदान करता है.
In simple words: ऊतक एक जैसे काम करने वाली कोशिकाओं का समूह होते हैं. पौधों में तीन सरल ऊतक होते हैं: मृदूतक (भोजन जमा करना), स्थूलकोण ऊतक (लचीलापन और मजबूती देना), और दृढ़ोतक (कठोरता और सहारा देना).
🎯 Exam Tip: सरल ऊतकों के वर्णन में उनकी कोशिकाओं के आकार, भित्ति की प्रकृति, और अंतराकोशिकीय अवकाश की उपस्थिति या अनुपस्थिति पर ध्यान दें. हर ऊतक का मुख्य कार्य स्पष्ट रूप से बताएँ.
Question 4. जन्तुओं में पाये जाने वाले विभिन्न ऊतकों का वर्णन कीजिए।
Answer:जंतु ऊतक (Animal Tissue): बहुकोशिकीय जंतुओं में मुख्य रूप से चार प्रकार के ऊतक पाए जाते हैं:
1. उपकला या एपीथीलियम ऊतक (Epithelium): यह ऊतक जंतु शरीर के बाहरी आवरण या खोखले आंतरिक अंगों की अंदरूनी सतह बनाता है. इसकी कोशिकाएँ एक-दूसरे से सटी होती हैं, इनके बीच खाली जगह नहीं होती, और रक्त वाहिकाएँ भी नहीं होतीं. यह मुख्यतः दो प्रकार का होता है:
(a) सरल एपीथीलियम (Simple Epithelium): यह कोशिकाओं की केवल एक परत से बना होता है. कोशिकाओं के आकार के आधार पर यह कई प्रकार का होता है:
* शल्की एपीथीलियम (Squamous epithelium) चपटी कोशिकाओं का बना होता है.
* घनाकार एपीथीलियम (Cuboidal epithelium) इसकी कोशिकाएँ घन के आकार की होती हैं.
* स्तम्भकार एपीथीलियम (Columnar epithelium) लंबी और पतली स्तंभ जैसी कोशिकाओं का बना होता है.
(b) संयुक्त एपीथीलियम (Compound epithelium): यह दो या दो से अधिक कोशिकाओं की परतों से मिलकर बना होता है. जंतुओं की त्वचा और मुखगुहा की अंदरूनी परत संयुक्त उपकला ऊतक की बनी होती है. इसका काम सुरक्षा कवच बनाना, स्राव करना, अवशोषण करना और पदार्थों का आदान-प्रदान करना है.
2. संयोजी ऊतक (Connective Tissue): यह ऊतक शरीर के दूसरे ऊतकों और अंगों को आपस में जोड़ता है. इसकी कोशिकाएँ आधारभूत पदार्थ (matrix) में एक-दूसरे से दूर-दूर होती हैं. मैट्रिक्स की प्रकृति हर ऊतक में अलग होती है. संयोजी ऊतक कई प्रकार के होते हैं-कोमल संयोजी ऊतक, उपास्थि, हड्डी, रक्त और वसा ऊतक. रक्त में मैट्रिक्स तरल होता है, जबकि हड्डी और उपास्थि में यह ठोस होता है. अन्य ऊतकों में यह अर्ध-तरल होता है. रक्त को छोड़कर, सभी संयोजी ऊतक की कुछ कोशिकाएँ कोलेजन तंतु नामक प्रोटीन बनाती हैं. कोलेजन तंतु ऊतक को खिंचाव और लचीलापन देते हैं. इस ऊतक में भक्षक कोशिकाएँ (phagocytes) भी होती हैं. उपास्थि एक लचीला लेकिन ठोस संयोजी ऊतक है जो बाहरी कान, नाक और हड्डियों के जोड़ जैसी जगहों पर पाया जाता है. हड्डी में खनिज पदार्थों के जमाव के कारण मैट्रिक्स ठोस होता है. यह शरीर के नरम अंगों को सहारा देता है. रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है जिसमें प्लाज्मा नाम के तरल मैट्रिक्स में विभिन्न प्रकार की कोशिकाएँ (RBC, WBC और प्लेटलेट्स) तैरती रहती हैं. यह शरीर की कोशिकाओं तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को पहुँचाने का काम करता है. वसा ऊतक (Adipose tissue) एक ढीला संयोजी ऊतक है जो त्वचा के नीचे पाया जाता है. इसकी कोशिकाओं में वसा जमा होती है और यह गर्मी के नुकसान को रोककर शरीर को गर्म रखता है.
3. पेशी ऊतक (Muscular Tissue): पेशी ऊतक पेशी कोशिकाओं (muscle fibers) से बना होता है. यह कोशिका उत्तेजित होने पर सिकुड़कर प्रतिक्रिया करती है. प्रत्येक पेशी तंतु कई मायोफाइब्रिल (myofibrils) से बना होता है. मायोसिन और एक्टिन जैसे सिकुड़ने वाले प्रोटीन इसमें होते हैं.
जंतुओं में तीन प्रकार की पेशियाँ पाई जाती हैं:
* रेखित पेशी,
* अरेखित पेशी,
* हृदयी पेशी।
4. तन्त्रिका ऊतक (Nervous Tissue): यह ऊतक उत्तेजना को ग्रहण करता है और शरीर की प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करता है. मस्तिष्क और परिधीय तंत्रिका तंत्र इसी ऊतक से बने होते हैं. ये तंत्रिका कोशिकाएँ उत्तेजना को ग्रहण करके उसका संचार करती हैं. प्रत्येक तंत्रिका कोशिका एक कोशिकाकाय (cell body), एक तंत्रिकाक्ष (axon) और कई डेंड्रॉन (dendrons) से बनी होती है. डेंड्रॉन उद्दीपन को ग्रहण करते हैं जो विद्युत-रासायनिक संकेतों (electrochemical signals) के रूप में कोशिकाकाय तक सूचना पहुँचाते हैं. इसे आवेग (impulse) कहते हैं.
In simple words: जंतुओं में चार मुख्य ऊतक होते हैं: उपकला (जो शरीर को ढकती है और अंगों को पंक्तिबद्ध करती है), संयोजी (जो अंगों को जोड़ती और सहारा देती है), पेशी (जो गति करने में मदद करती है), और तंत्रिका (जो संदेशों को भेजकर शरीर को नियंत्रित करती है).
🎯 Exam Tip: प्रत्येक प्रकार के जंतु ऊतक के मुख्य कार्य, संरचनात्मक विशेषताएँ, और शरीर में उनके स्थान को याद रखना महत्वपूर्ण है. उदाहरणों के साथ वर्णन करने से बेहतर अंक मिलते हैं.
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Answer:
1. संवहन बंडल (Vascular Bundle): संवहन बंडल संवहनी ऊतक प्रणाली का हिस्सा होते हैं, जो पौधों में पाए जाते हैं. ये भरण ऊतक के बीच स्थित होते हैं. हर संवहन बंडल जाइलम और फ्लोएम से बना होता है. जाइलम पानी और खनिज लवणों को ऊपर ले जाने का काम करता है, जबकि फ्लोएम कार्बनिक भोजन पदार्थों को पौधे के सभी हिस्सों तक पहुँचाता है. यह पौधों में पोषक तत्वों के परिवहन का मुख्य मार्ग है.
2. तन्त्रिका कोशिका (Nerve Cell): तंत्रिका कोशिका तंत्रिका ऊतक की इकाई है. प्रत्येक तंत्रिका कोशिका में एक कोशिकाकाय (सेल बॉडी), एक तंत्रिकाक्ष (एक्सॉन) और कई डेंड्रॉन होते हैं. इसका केंद्रक बड़ा और कोशिका द्रव्य घना होता है. तंत्रिकाक्ष पर मायलिन आवरण हो सकता है. तंत्रिका कोशिका किसी उत्तेजना को ग्रहण करती है और तंत्रिका आवेग के रूप में उसका संचार करती है, जिससे शरीर प्रतिक्रिया करता है.
3. जीवाणुभोजी (Bacteriophage): जीवाणुभोजी परजीवी विषाणु होते हैं जो बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं. वे खुद को बैक्टीरिया से जोड़ लेते हैं और अपने आनुवंशिक पदार्थ (DNA या RNA) को बैक्टीरिया के अंदर डाल देते हैं. इसके बाद, जीवाणुभोजी बैक्टीरिया के सिस्टम का उपयोग करके अपनी कई और कॉपी बनाते हैं, अंततः बैक्टीरिया को नष्ट कर देते हैं. ये प्रकृति में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वे बैक्टीरिया की संख्या को नियंत्रित करने में मदद करते हैं.
4. दृढ़ोतक (Sclerenchyma): यह एक स्थायी पादप ऊतक है जो पौधों के हिस्सों को यांत्रिक शक्ति और सहारा प्रदान करता है. इसकी कोशिकाएँ अक्सर लंबी, पतली और नुकीले सिरों वाली होती हैं. उनकी कोशिका भित्ति पर लिग्निन का मोटा जमाव होता है, जो उन्हें कठोर और मृत बना देता है. दृढ़ोतक की कुछ कोशिकाएँ गोल आकार की होती हैं और उन्हें 'स्टोन कोशिकाएँ' (stone cells) कहते हैं. यह ऊतक पौधों को मजबूती और लचीलापन देता है ताकि वे हवा जैसी बाहरी शक्तियों का सामना कर सकें.
In simple words: संवहन बंडल पौधों में पानी और भोजन पहुँचाते हैं. तंत्रिका कोशिका दिमाग और शरीर के बीच संदेश भेजती है. जीवाणुभोजी एक तरह के वायरस हैं जो बैक्टीरिया को मारते हैं. दृढ़ोतक पौधों को कठोरता और सहारा देता है.
🎯 Exam Tip: टिप्पणी वाले प्रश्नों में, प्रत्येक विषय की परिभाषा, मुख्य विशेषताएँ और कार्य को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से समझाएँ. यदि संभव हो तो उदाहरण भी दें.
अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उनके उत्तर
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. सुस्पष्ट केन्द्रक नहीं पाया जाता है
(अ) हरे-नीले शैवालों में
(ब) अमीबा में
(स) लाल शैवालों में
(द) सभी एककोशिकीय जीवों में।
Answer: (अ) हरे-नीले शैवालों में
In simple words: हरे-नीले शैवाल एक सरल प्रकार के जीव होते हैं जिनमें कोशिका का मुख्य भाग, यानि केंद्रक, साफ-साफ नहीं दिखता है.
🎯 Exam Tip: प्रोकैरियोटिक जीवों में सुस्पष्ट केंद्रक नहीं होता, जबकि यूकैरियोटिक जीवों में होता है. इस अंतर को ध्यान में रखें.
Question 2. 80S व 70S किसके प्रकार हैं
(अ) रिक्तिका
(ब) लाइसोसोम
(स) तारककाय
(द) राइबोसोम ।
Answer: (द) राइबोसोम।
In simple words: राइबोसोम कोशिका के अंदर छोटे-छोटे कण होते हैं जो प्रोटीन बनाते हैं. इनके दो मुख्य प्रकार हैं, 70S (जो सरल कोशिकाओं में होते हैं) और 80S (जो जटिल कोशिकाओं में होते हैं).
🎯 Exam Tip: 70S राइबोसोम प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं और कुछ यूकैरियोटिक कोशिकांगों (जैसे माइटोकॉन्ड्रिया) में होते हैं, जबकि 80S राइबोसोम केवल यूकैरियोटिक कोशिकाओं में पाए जाते हैं.
Question 3. टोनोप्लास्ट किस कोशिकांग से सम्बन्धित है
(अ) खुरदरी अन्तर्द्रव्यी जालिका
(ब) चिकनी अन्तर्रव्यी जालिका
(स) रिक्तिका
(द) गॉल्जीकाय।
Answer: (स) रिक्तिका
In simple words: टोनोप्लास्ट वह झिल्ली है जो कोशिका के अंदर रिक्तिका नाम के बड़े थैले को घेरे रहती है.
🎯 Exam Tip: टोनोप्लास्ट रिक्तिका में पदार्थों को कोशिका द्रव्य से अलग रखता है और उनके सांद्रण को नियंत्रित करता है.
Question 5. कोशिका चक्र की अन्तरावस्था की प्रावस्थाओं का सही क्रम है
(अ) G1, S, G2
(ब) G1, G2, S
(स) S, G1, G2
(द) G2, G1, S.
Answer: (अ) G1, S, G2
In simple words: कोशिका चक्र में इंटरफेज़ के तीन चरण होते हैं: पहले G1 चरण में कोशिका बढ़ती है, फिर S चरण में DNA की कॉपी बनती है, और अंत में G2 चरण में कोशिका विभाजन के लिए तैयार होती है.
🎯 Exam Tip: कोशिका चक्र के चरणों का सही क्रम याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह कोशिका के सामान्य कामकाज और वृद्धि के लिए बुनियादी है.
Question 6. अमीबा में कोशिकाद्रव्य विभाजन होता है
(अ) विलन विधि से
(ब) कोशिका पटलिका विधि से
(स) उपर्युक्त दोनों विधियों से
(द) कोशिका द्रव्य विभाजन नहीं होता।
Answer: (अ) विलन विधि से
In simple words: अमीबा जैसी एकल-कोशिका वाले जीवों में, कोशिका द्रव्य का विभाजन 'विलन विधि' से होता है, जिसमें कोशिका बीच से सिकुड़कर दो हिस्सों में बंट जाती है.
🎯 Exam Tip: जंतु कोशिकाओं में कोशिका द्रव्य विभाजन विलन विधि से होता है, जबकि पादप कोशिकाओं में कोशिका पट्टिका विधि से. यह महत्वपूर्ण अंतर याद रखें.
Question 7. वाइरस में पाया जाने वाला नाभिकीय अम्ल है
(अ) DNA
(ब) RNA
(स) DNA या RNA
(द) DNA व RNA
Answer: (स) DNA या RNA
In simple words: वायरस में आनुवंशिक जानकारी या तो DNA के रूप में या RNA के रूप में होती है, कभी-कभी दोनों नहीं होते हैं.
🎯 Exam Tip: वायरस अद्वितीय होते हैं क्योंकि उनके पास या तो DNA होता है या RNA, लेकिन कभी भी दोनों एक साथ नहीं होते हैं, जो उन्हें जीवित कोशिकाओं से अलग बनाता है.
Question 9. कोलेजन तन्तु व भक्षकाणु किस प्रकार के जन्तु ऊतक में पाये जाते हैं
(अ) पेशी ऊतक
(ब) तन्त्रिकीय ऊतक
(स) एपीथीलियम
(द) संयोजी ऊतक
Answer: (द) संयोजी ऊतक
In simple words: कोलेजन फाइबर और फेगोसाइट कोशिकाएँ संयोजी ऊतकों में पाई जाती हैं, जो शरीर के अंगों को जोड़ने और सहारा देने का काम करते हैं.
🎯 Exam Tip: संयोजी ऊतक की पहचान उसके मैट्रिक्स और विशेष कोशिकाओं (जैसे कोलेजन फाइबर और मैक्रोफेज) से होती है. यह ऊतक शरीर को संरचनात्मक सहायता प्रदान करता है.
Question. निम्नलिखित स्तम्भ A व B के मदों में मिलान कीजिए
स्तम्भ A
(i) राइबोसोम
(ii) केन्द्रक
(iii) कोशिका
(iv) माइटोकॉन्ड्रिया
(v) लाइसोसोम
(vi) तारककाय
स्तम्भ B
(a) राबर्ट हुक
(b) डी. ड्यूवे
(c) वॉन वेन्डेन
(d) क्लाड व पैलेड
(e) कोलिकर व वेण्डा
(f) राबर्ट ब्राउने
Answer:
(i) राइबोसोम → (d) क्लाड व पैलेड
(ii) केन्द्रक → (f) राबर्ट ब्राउने
(iii) कोशिका → (a) राबर्ट हुक
(iv) माइटोकॉन्ड्रिया → (e) कोलिकर व वेण्डा
(v) लाइसोसोम → (b) डी. ड्यूवे
(vi) तारककाय → (c) वॉन वेन्डेन
In simple words: इस सवाल में कोशिका के विभिन्न हिस्सों और उन्हें खोजने या उनसे जुड़े वैज्ञानिकों के नाम का सही मिलान करना था. सही जोड़ियाँ ऊपर दी गई हैं.
🎯 Exam Tip: वैज्ञानिकों के नाम और उनके योगदान को याद रखना जीव विज्ञान में महत्वपूर्ण है. कोशिकांगों की खोज से संबंधित नामों को सूचीबद्ध करके याद करें.
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. उस कोशिका का नाम बताइए जिसका व्यास 15 सेमी तक होता है।
Answer: शुतुरमुर्ग का अंडा (Ostrich egg) एक ऐसी कोशिका है जिसका व्यास 15 सेमी तक हो सकता है. यह दुनिया की सबसे बड़ी एकल कोशिका मानी जाती है.
In simple words: शुतुरमुर्ग का अंडा सबसे बड़ी कोशिकाओं में से एक है, जिसका आकार 15 सेंटीमीटर तक होता है.
🎯 Exam Tip: सबसे बड़ी कोशिका का उदाहरण आमतौर पर शुतुरमुर्ग का अंडा होता है. इस तथ्य को याद रखना सामान्य विज्ञान के प्रश्नों में उपयोगी है.
Question 3. कोशिका कला की मोटाई कितनी होती है ?
Answer: कोशिका झिल्ली (कोशिका कला) की मोटाई आमतौर पर 75 से 105 Å (एंगस्ट्रॉम) के बीच होती है. यह एक बहुत ही पतली, जीवित परत होती है जो कोशिका के अंदर और बाहर पदार्थों के आवागमन को नियंत्रित करती है.
In simple words: कोशिका की बाहरी झिल्ली बहुत पतली होती है, जिसकी मोटाई लगभग 75 से 105 एंगस्ट्रॉम होती है.
🎯 Exam Tip: कोशिका झिल्ली की मोटाई का मान याद रखें, क्योंकि यह जीव विज्ञान के छोटे प्रश्नों में अक्सर पूछा जाता है.
Question 4. किस कोशिकांग में जल अपघटनी एंजाइम पाये जाते हैं ?
Answer: जल अपघटनी एंजाइम लाइसोसोम में पाए जाते हैं. लाइसोसोम को 'आत्मघाती थैली' भी कहते हैं क्योंकि इनमें ऐसे एंजाइम होते हैं जो कोशिका के पुराने या खराब हिस्सों को पचा सकते हैं. यह कोशिका की सफाई में मदद करते हैं.
In simple words: लाइसोसोम में ऐसे खास एंजाइम होते हैं जो चीजों को तोड़ते हैं, इसीलिए इन्हें कोशिका की सफाई करने वाली थैलियाँ कहते हैं.
🎯 Exam Tip: लाइसोसोम के कार्य और उनमें पाए जाने वाले एंजाइमों का नाम याद रखें, क्योंकि यह कोशिकांग के महत्वपूर्ण कार्यों से संबंधित है.
Question 5. तारककाय का क्या कार्य है ?
Answer: तारककाय (Centrosome) जंतु कोशिकाओं में कोशिका विभाजन के दौरान तर्कुतंतु (spindle fibers) बनाने में मदद करता है. यह शुक्राणु की पूंछ (flagella) के निर्माण में भी भूमिका निभाता है, और अमीबा जैसे एककोशिकीय जीवों में कशाभिका (flagella) और पक्ष्माभ (cilia) जैसे चलन अंगों के लिए आधार बिंदु बनाता है. यह कोशिका की गति और विभाजन के लिए महत्वपूर्ण है.
In simple words: तारककाय जंतु कोशिकाओं में कोशिका विभाजन के लिए धागे जैसी संरचनाएँ बनाता है, शुक्राणु की पूंछ बनाता है, और छोटे जीवों में हिलने-डुलने वाले अंगों का आधार होता है.
🎯 Exam Tip: तारककाय केवल जंतु कोशिकाओं में पाया जाता है और कोशिका विभाजन में इसकी भूमिका को याद रखना महत्वपूर्ण है.
Question 6. संचित खाद्य की प्रकृति के आधार पर पादप कोशिका जन्तु कोशिका से किस प्रकार भिन्न होती है ?
Answer: पादप कोशिकाएँ अपना भोजन स्टार्च (मंड) के रूप में जमा करती हैं, जबकि जंतु कोशिकाएँ भोजन को ग्लाइकोजन के रूप में जमा करती हैं. स्टार्च पौधों में ऊर्जा का मुख्य भंडारण रूप है, जबकि ग्लाइकोजन पशुओं और मनुष्यों में ऊर्जा का त्वरित स्रोत होता है.
In simple words: पौधे अपना खाना स्टार्च के रूप में रखते हैं, और जानवर अपना खाना ग्लाइकोजन के रूप में रखते हैं.
🎯 Exam Tip: पौधों और जंतुओं में संचित भोजन के प्रकार का अंतर याद रखें, क्योंकि यह दोनों प्रकार की कोशिकाओं की चयापचय विशेषताओं को दर्शाता है.
Question 7. अन्तरावस्था का कोशिका चक्र में क्या महत्व है ?
Answer: अन्तरावस्था (Interphase) कोशिका चक्र की वह अवस्था है जिसमें कोशिका विभाजन की तैयारी करती है. यह कोशिका की वृद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. इस दौरान, DNA संश्लेषण के लिए जरूरी प्रोटीन और RNA बनते हैं. साथ ही, DNA की भी कॉपी बनती है (DNA द्विगुणन). यह प्रक्रिया विभाजन के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि DNA के दोहराव से ही नई कोशिकाओं में आनुवंशिक पदार्थ की सही और समान मात्रा बनी रहती है.
In simple words: अन्तरावस्था वह समय है जब कोशिका विभाजन की तैयारी करती है. इस समय DNA की कॉपी बनती है और जरूरी प्रोटीन भी, ताकि नई कोशिकाओं में सही जानकारी जा सके.
🎯 Exam Tip: याद रखें कि अन्तरावस्था केवल एक "विश्राम अवस्था" नहीं है, बल्कि यह एक बहुत ही सक्रिय चरण है जहाँ कोशिका वृद्धि करती है और विभाजन के लिए सभी आवश्यक घटकों को संश्लेषित करती है.
Question 8. कोशिका विभाजन की किस प्रावस्था में गुणसूत्र सर्वाधिक मोटे होकर तर्क के मध्यवर्ती क्षेत्र में व्यवस्थित हो जाते हैं ?
Answer: गुणसूत्र कोशिका विभाजन की मध्यावस्था (Metaphase) में सबसे मोटे होकर तर्कुतंतु के मध्यवर्ती क्षेत्र में व्यवस्थित हो जाते हैं. इस अवस्था में, सभी गुणसूत्र एक केंद्रीय रेखा पर संरेखित होते हैं, जिसे मध्यावस्था पट्टिका (metaphase plate) कहते हैं. यह गुणसूत्रों के सही अलगाव को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है.
In simple words: कोशिका विभाजन की मध्यावस्था में गुणसूत्र सबसे मोटे दिखते हैं और बीच में एक सीधी लाइन में लग जाते हैं.
🎯 Exam Tip: मध्यावस्था गुणसूत्रों के अध्ययन के लिए सबसे अच्छी अवस्था है क्योंकि वे सबसे अधिक संघनित और स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं. गुणसूत्रों का मध्यावस्था पट्टिका पर संरेखण एक महत्वपूर्ण पहचान विशेषता है.
Question 10. ऐसे जीवों का नाम लिखिए जो हमेशा अन्तः कोशिकीय, अविकल्प परजीवी होते हैं।
Answer: वायरस (Virus) ऐसे जीव हैं जो हमेशा कोशिका के अंदर रहते हैं और परजीवी (obligate intracellular parasites) होते हैं. इसका मतलब है कि वे किसी जीवित कोशिका के बाहर खुद से अपनी संख्या नहीं बढ़ा सकते या जीवित नहीं रह सकते. उन्हें बढ़ने-फलने-फूलने के लिए हमेशा एक मेजबान कोशिका की ज़रूरत होती है.
In simple words: वायरस ऐसे छोटे जीव हैं जो हमेशा किसी और जीव की कोशिका के अंदर रहते हैं और वहीं अपना काम करते हैं, वे अकेले नहीं जी सकते.
🎯 Exam Tip: 'अविकल्प परजीवी' का अर्थ है कि ये जीव मेजबान कोशिका के बिना जीवित नहीं रह सकते. यह वायरस की एक महत्वपूर्ण विशेषता है जो उन्हें अन्य सूक्ष्मजीवों से अलग करती है.
Question 11. जन्तु वाइरस व पादप वाइरस में क्या प्रमुख अन्तर है ?
Answer: जंतु वायरस और पादप वायरस में एक मुख्य अंतर उनके आनुवंशिक पदार्थ में होता है. जंतु वायरस का आनुवंशिक पदार्थ ज़्यादातर DNA होता है, जबकि पादप वायरस का आनुवंशिक पदार्थ ज़्यादातर RNA होता है. यह अंतर उनके विकास और मेजबान कोशिकाओं को संक्रमित करने के तरीके को प्रभावित करता है.
In simple words: जंतु वायरस में आमतौर पर DNA होता है, जबकि पादप वायरस में अक्सर RNA होता है.
🎯 Exam Tip: वायरस के प्रकारों को उनके आनुवंशिक पदार्थ (DNA या RNA) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है. यह अंतर वायरस के जीवन चक्र और मेजबान विशिष्टता को समझने के लिए महत्वपूर्ण है.
Question 12. विभज्योतक की कोशिकाओं की विभाजन की क्षमता के अतिरिक्त कोई दो विशेषताएँ बताइए।
Answer: विभज्योतक की कोशिकाओं की दो अतिरिक्त विशेषताएँ ये हैं:
* इनकी कोशिकाओं का कोशिका द्रव्य घना होता है, और उनमें रिक्तिकाएँ (vacuoles) नहीं होतीं. उनका केंद्रक बड़ा होता है.
* इन कोशिकाओं के बीच खाली जगह (अंतरकोशिकीय अवकाश) नहीं होती, जिससे वे एक-दूसरे से कसकर जुड़ी रहती हैं.
ये विशेषताएँ उन्हें लगातार विभाजित होने और नए ऊतक बनाने में मदद करती हैं.
In simple words: विभज्योतक कोशिकाएँ घने तरल से भरी होती हैं, उनमें खाली जगह नहीं होती और उनके बीच में कोई गैप नहीं होता, जिससे वे जल्दी-जल्दी नई कोशिकाएँ बना पाती हैं.
🎯 Exam Tip: विभज्योतक पौधों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार होते हैं. उनकी सघन संरचना और अंतरकोशिकीय अवकाश की अनुपस्थिति उन्हें तेजी से विभाजित होने में मदद करती है.
Question 13. घास व बाँस के पौधों की तीव्र वृद्धि के लिए उत्तरदायी ऊतक का नाम लिखिए।
Answer: घास और बाँस जैसे पौधों में तेजी से वृद्धि के लिए अन्तर्वेशी विभज्योतक (Intercalary meristem) जिम्मेदार होता है. यह ऊतक पत्तियों के आधार पर और तने के पर्व (nodes) पर पाया जाता है, जिससे इन पौधों की लंबाई तेजी से बढ़ती है. यह शाकाहारी जीवों द्वारा चराई के बाद क्षतिग्रस्त हिस्सों को फिर से उगाने में भी मदद करता है.
In simple words: घास और बाँस जैसे पौधे 'अन्तर्वेशी विभज्योतक' नाम के ऊतक की वजह से बहुत तेज़ी से बढ़ते हैं.
🎯 Exam Tip: अन्तर्वेशी विभज्योतक की पहचान पर्वसंधियों (nodes) पर उसकी उपस्थिति और पत्तियों के आधार पर होती है, जो पौधों में लंबाई की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
Question 14. रक्त के कोई दो कार्य लिखिए।
Answer: रक्त के दो मुख्य कार्य हैं:
* यह शरीर में ऑक्सीजन और अन्य जरूरी पदार्थों (जैसे पोषक तत्व, हार्मोन, अपशिष्ट पदार्थ) को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाता है.
* यह रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है, क्योंकि इसमें सफेद रक्त कोशिकाएँ (WBC) होती हैं जो रोगाणुओं से लड़ती हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा होती हैं.
In simple words: रक्त शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्व ले जाता है, और हमें बीमारियों से भी बचाता है.
🎯 Exam Tip: रक्त के कार्यों को परिवहन और सुरक्षा दो मुख्य श्रेणियों में याद रखें. इसके अलावा, शरीर के तापमान का नियंत्रण और घावों को ठीक करना भी रक्त के महत्वपूर्ण कार्य हैं.
Question 1. यूकैरियोटिक कोशिका किसे कहते हैं ? यह प्रोकैरियोटिक कोशिका से किस प्रकार भिन्न है ?
Answer:यूकैरियोटिक कोशिका: ऐसी कोशिकाएँ जिनमें एक स्पष्ट और पूरी तरह से विकसित केंद्रक होता है, जो केंद्रक झिल्ली से घिरा होता है, यूकैरियोटिक कोशिका कहलाती हैं. इनमें झिल्ली से घिरे हुए कोशिकांग (जैसे माइटोकॉन्ड्रिया, एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम) भी पाए जाते हैं. सभी पौधों, जानवरों और कवक में यूकैरियोटिक कोशिकाएँ होती हैं. ये कोशिकाएँ जटिल और बहुकोशिकीय जीवों का आधार बनती हैं.प्रोकैरियोटिक कोशिका से भिन्नता: प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में एक अविकसित या प्रारंभिक प्रकार का केंद्रक होता है, जिसे केंद्रकाभ (nucleoid) कहा जाता है. इस केंद्रकाभ में केंद्रक झिल्ली नहीं होती है. इनमें झिल्ली से घिरे कोशिकांग भी नहीं होते हैं. जीवाणु और नील-हरित शैवाल इसके उदाहरण हैं. प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में आमतौर पर केवल एक गुणसूत्र होता है.
मुख्य अंतर:
* केंद्रक: यूकैरियोटिक में सुस्पष्ट केंद्रक होता है, प्रोकैरियोटिक में नहीं (केंद्रकाभ होता है).
* झिल्ली-बद्ध कोशिकांग: यूकैरियोटिक में होते हैं, प्रोकैरियोटिक में नहीं.
* गुणसूत्र: यूकैरियोटिक में कई गुणसूत्र होते हैं, प्रोकैरियोटिक में एक होता है.
In simple words: यूकैरियोटिक कोशिकाएँ वे हैं जिनमें साफ-सुथरा केंद्रक और बहुत सारे छोटे अंग होते हैं, जैसे पौधे और जानवर. प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ सरल होती हैं, जिनमें केंद्रक साफ नहीं होता और कम अंग होते हैं, जैसे बैक्टीरिया.
🎯 Exam Tip: यूकैरियोटिक और प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं के बीच के मुख्य अंतरों को एक तालिका बनाकर याद करना सबसे अच्छा है. केंद्रक, झिल्ली-बद्ध कोशिकांग और DNA संरचना पर विशेष ध्यान दें.
Question 2. कुछ जन्तु कोशिकाओं में पाये जाने वाले सूक्ष्मांकुर (microvilli) क्या हैं? इनका क्या महत्व है ?
Answer:सूक्ष्मांकुर (Microvilli): सूक्ष्मांकुर कुछ जंतु कोशिकाओं की कोशिका झिल्ली पर पाए जाने वाले उंगली जैसे छोटे-छोटे उभार या एक्सटेंशन होते हैं.महत्व: ये कोशिका झिल्ली के सतही क्षेत्र (surface area) को बहुत बढ़ा देते हैं. सूक्ष्मांकुर उन कोशिकाओं और ऊतकों में मुख्य रूप से पाए जाते हैं जिनका काम पदार्थों को अवशोषित करना होता है. उदाहरण के लिए, छोटी आंत की अंदरूनी सतह को बनाने वाली उपकला कोशिकाएँ इसी प्रकार के सूक्ष्मांकुर से बनी होती हैं. सतही क्षेत्र बढ़ने से अवशोषण की क्षमता भी बढ़ जाती है.
In simple words: सूक्ष्मांकुर कोशिका की सतह पर छोटे उभार होते हैं जो अवशोषण (जैसे कि भोजन) के लिए सतह को बढ़ाते हैं.
🎯 Exam Tip: सूक्ष्मांकुर का मुख्य कार्य सतही क्षेत्र को बढ़ाकर अवशोषण की दक्षता बढ़ाना है. इसका सबसे अच्छा उदाहरण छोटी आंत की कोशिकाएँ हैं.
Question 3. कोशिका को जीव की कार्यात्मक व संरचनात्मक इकाई क्यों कहा जाता है ?
Answer: कोशिका को जीव की कार्यात्मक और संरचनात्मक इकाई कहा जाता है क्योंकि:
* संरचनात्मक इकाई: सभी जीवित जीवों का शरीर कोशिकाओं और उनके उत्पादों से बना होता है. कोशिकाएँ मिलकर ऊतक, अंग और फिर पूरा जीव बनाती हैं, इसलिए यह जीव की बुनियादी निर्माण खंड (रचनात्मक इकाई) है. एक कोशिका ही जीव की सबसे छोटी संरचना है जो जीवित मानी जाती है.
* कार्यात्मक इकाई: जीवों के शरीर में होने वाली सभी महत्वपूर्ण क्रियाएँ, जैसे भोजन को ऊर्जा में बदलना (उपापचय), साँस लेना (श्वसन), पोषण और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना (उत्सर्जन), कोशिकाओं द्वारा ही की जाती हैं. यहाँ तक कि एककोशिकीय जीवों में भी सभी जैविक क्रियाएँ केवल एक ही कोशिका द्वारा पूरी की जाती हैं. इसीलिए, कोशिका को जीव की कार्यात्मक इकाई भी कहते हैं.
In simple words: कोशिकाएँ हमारे शरीर को बनाती हैं और सभी ज़रूरी काम भी करती हैं, जैसे खाना पचाना और साँस लेना. इसलिए इन्हें जीवन की सबसे छोटी और सबसे खास इकाई कहते हैं.
🎯 Exam Tip: कोशिका सिद्धांत के मुख्य बिंदुओं को याद रखें, जो यह बताते हैं कि सभी जीव कोशिकाओं से बने हैं और कोशिकाएँ ही जीवन की बुनियादी कार्यात्मक और संरचनात्मक इकाई हैं.
Question 5. कोशिका में रिक्तिका द्वारा किये जाने वाले किन्हीं तीन कार्यों का उल्लेख कीजिए।
Answer: रिक्तिकाएँ (vacuoles) पौधों की कोशिकाओं में पानी, अतिरिक्त पोषक तत्व और बेकार पदार्थों को जमा करती हैं। यह सुनिश्चित करता है कि कोशिका के अंदर का दबाव सही बना रहे, जिससे पौधों को सहारा मिलता है। ये पौधों की कोशिकाओं को फुला हुआ और मज़बूत रखने में मदद करती हैं, जिससे वे सीधी खड़ी रह पाती हैं। कुछ छोटे जीव भी रिक्तिकाओं का उपयोग अपने शरीर से ज़्यादा पानी बाहर निकालने के लिए करते हैं।
In simple words: रिक्तिकाएँ पौधों में पानी और बेकार चीजें जमा करती हैं और उन्हें मज़बूत रखती हैं। कुछ जीव इनसे शरीर का ज़्यादा पानी बाहर निकालते हैं।
🎯 Exam Tip: रिक्तिका के कार्यों को याद करते समय, भंडारण, टर्गिडिटी (स्फूर्ति) और अपशिष्ट प्रबंधन - इन तीन मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 6. कोशिका भित्ति का क्या महत्व है ?
Answer: कोशिका भित्ति पौधों, फंगस और बैक्टीरिया जैसी कोशिकाओं को एक मज़बूत सुरक्षा कवच देती है। यह बाहरी वातावरण के कठोर प्रभावों से कोशिका को बचाकर उसकी अखंडता को बनाए रखती है। यह पादप कोशिकाओं को एक तय आकार और रूप देती है। ज़्यादातर चीज़ों को अपने अंदर से जाने देने के कारण यह कोशिका की अंदरूनी झिल्ली के काम को प्रभावित नहीं करती। क्योंकि पौधे एक जगह स्थिर रहते हैं, वे मौसम के बदलाव से बच नहीं सकते; कोशिका भित्ति होने से पौधे इन बदलावों को जंतुओं से ज़्यादा आसानी से झेल पाते हैं। इसमें छोटे छेद होते हैं जो पड़ोसी कोशिकाओं से जुड़ने में मदद करते हैं। यह कोशिका के अंदर के पानी के दबाव को बनाए रखने में भी मदद करती है।
In simple words: कोशिका भित्ति पौधों को बाहरी चोट से बचाती है और उन्हें एक निश्चित आकार देती है। यह उन्हें पानी के दबाव को बनाए रखने और पर्यावरण के बदलावों का सामना करने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: कोशिका भित्ति के महत्व को बताते समय, सुरक्षा, आकार प्रदान करना, पारगम्यता और पर्यावरणीय सहनशीलता जैसे मुख्य कार्यों पर जोर दें।
Question 7. निम्नलिखित में एक-एक अन्तर बताइए
(a) कोशिका द्रव्य व केन्द्रक द्रव्य।
(b) क्रोमेटिन व क्रोमोसोम।
(e) अवर्णलवक व वर्गीलवक।
(d) कशाभिका का पक्ष्माभ।
Answer:
(a) कोशिका झिल्ली और केंद्रक के बीच मौजूद जेली जैसे पदार्थ को कोशिका द्रव्य (cytoplasm) कहते हैं। वहीं, केंद्रक झिल्ली के अंदर भरे केंद्रकीय तरल को केंद्रक द्रव्य (nucleoplasm) कहते हैं। यह दोनों कोशिका के अलग-अलग हिस्सों में पाए जाते हैं और उनके कामों में मदद करते हैं। कोशिका द्रव्य में कोशिकांग (organelles) होते हैं, जबकि केंद्रक द्रव्य में आनुवंशिक सामग्री होती है।
In simple words: कोशिका द्रव्य कोशिका झिल्ली और केंद्रक के बीच का पदार्थ है, जबकि केंद्रक द्रव्य केंद्रक के अंदर पाया जाता है।
(b) जब कोशिका बँट नहीं रही होती है, तब उसका आनुवंशिक पदार्थ पतले, धागे जैसी संरचनाओं में होता है, जिसे क्रोमेटिन कहते हैं। कोशिका विभाजन के समय, यही क्रोमेटिन के धागे सिकुड़कर और मोटे होकर क्रोमोसोम बनाते हैं, जो विभाजन के दौरान स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। क्रोमोसोम में ही हमारे आनुवंशिक कोड (genes) होते हैं जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाते हैं।
In simple words: क्रोमेटिन कोशिका के आराम करने पर दिखने वाले धागे हैं, जबकि क्रोमोसोम विभाजन के समय बनने वाले मोटे, स्पष्ट ढांचे होते हैं।
🎯 Exam Tip: अंतर स्पष्ट करते समय प्रत्येक भाग के लिए एक संक्षिप्त और सटीक परिभाषा दें, साथ ही उनके मुख्य कार्य या स्थिति को भी बताएं।
Question 8. पादपों के उस जटिल ऊतक की संरचना का वर्णन कीजिए जो पौधों में कार्बनिक भोज्य पदार्थों के परिवहन के लिए उत्तरदायी होता है।
Answer: पौधों में खाने वाले पदार्थों (कार्बनिक भोज्य पदार्थ) को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम फ्लोयम (Phloem) नामक जटिल ऊतक करता है। यह ऊतक पौधों के सभी हिस्सों तक ऊर्जा पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, खासकर पत्तों से जड़ों तक। फ्लोयम चार मुख्य प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बना होता है:
(i) चालनी नलिकाएँ
(ii) सहकोशिकाएँ
(iii) फ्लोयम मृदूतक
(iv) फ्लोयम रेशे
**चालनी नलिकाएँ (Sieve tubes):** ये पतली और कोमल दीवारों वाली, बड़ी, खोखली जीवित कोशिकाएँ होती हैं। इनकी लंबाई ज़्यादा होने के कारण ये एक नली जैसी संरचना बनाती हैं। इन नलिकाओं के सिरे पर छेद वाली दीवारें होती हैं जिन्हें चालन पट्टिका (sieve plate) कहते हैं। ये कोशिकाएँ एक के ऊपर एक जुड़कर एक लंबी नली बनाती हैं। चालनी नलिकाओं में केंद्रक नहीं होता। इनके साथ सटी हुई कोशिकाओं को सहकोशिकाएँ (companion cells) कहते हैं, जो चालनी नलिकाओं के कामों को नियंत्रित करती हैं। फ्लोयम में फ्लोयम मृदूतक भी होता है। चालनी नलिकाएँ, सहकोशिकाएँ और फ्लोयम मृदूतक तीनों जीवित होते हैं, जबकि जाइलम का ज़्यादातर हिस्सा मृत होता है।
In simple words: फ्लोयम पौधों में भोजन पहुँचाने का काम करता है। इसमें चालनी नलिकाएँ, सहकोशिकाएँ, फ्लोयम मृदूतक और फ्लोयम रेशे होते हैं। चालनी नलिकाएँ मुख्य रास्ता हैं, जो सहकोशिकाओं की मदद से काम करती हैं। यह जाइलम से अलग है क्योंकि फ्लोयम के ज़्यादातर हिस्से जीवित होते हैं।
🎯 Exam Tip: फ्लोयम की संरचना और कार्य का वर्णन करते समय उसके चारों मुख्य घटकों और प्रत्येक घटक की भूमिका को विस्तार से समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 10. निम्न में से कौन से अंगक केवल पादप कोशिका में, कौन से केवल जन्तु कोशिका में व कौन से दोनों प्रकार की कोशिका में पाये जाते हैं ?
(i) केन्द्रक,
(ii) तारककाय,
(iii) कोशिका भित्ति,
(iv) राइबोसोम,
(v) अवलवक,
(vi) माइटोकॉन्ड्रिया,
(vii) अन्त:द्रयी जालिका।
Answer: पादप कोशिका में पाए जाने वाले अंगक हैं: कोशिका भित्ति (cell wall) और अवलवक (plastids)। जंतु कोशिका में पाए जाने वाले अंगक हैं: तारककाय (centrosome)। पादप और जंतु कोशिका दोनों में पाए जाने वाले अंगक हैं: केंद्रक (nucleus), राइबोसोम (ribosomes), माइटोकॉन्ड्रिया (mitochondria) और अंतर्द्रव्यी जालिका (endoplasmic reticulum)। इन सभी कोशिकांगों के अपने खास काम होते हैं, जो कोशिका के जीवित रहने और ठीक से काम करने के लिए ज़रूरी हैं।
In simple words: पौधों में कोशिका भित्ति और लवक होते हैं। जानवरों में तारककाय होता है। केंद्रक, राइबोसोम, माइटोकॉन्ड्रिया और अंतर्द्रव्यी जालिका दोनों में होते हैं।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में हर अंगक की सटीक स्थिति को याद रखना महत्वपूर्ण है, ताकि आप बता सकें कि वह केवल पौधों, केवल जंतुओं या दोनों में पाया जाता है।
Question 11. गॉल्जीकाय पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: गॉल्जीकाय (Golgi apparatus) एक झिल्लीदार कोशिकांग है जो मुख्य रूप से जंतु कोशिकाओं में पाया जाता है। इसकी खोज 1898 में कैमिलो गॉल्जी ने की थी। यह थैलीनुमा संरचनाओं, चपटी थैलियों (सिस्टर्न) और कुंडलियों से मिलकर बना होता है और केंद्रक के पास स्थित होता है। गॉल्जीकाय शर्करा, प्रोटीन और अन्य पदार्थों को बनाता है, उन्हें पैक करता है और कोशिका के बाहर भेजता है। यह कोशिका के 'डाकघर' जैसा काम करता है, जो पदार्थों को संसाधित और गंतव्य तक पहुँचाता है। यह कोशिका के अंदर पदार्थों को सही जगह पहुँचाने में मदद करता है।
In simple words: गॉल्जीकाय एक कोशिकांग है जो कैमिलो गॉल्जी ने खोजा था। यह प्रोटीन और अन्य पदार्थों को बनाता, पैक करता और कोशिका के अंदर-बाहर भेजने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: गॉल्जीकाय के कार्यों को याद करते समय संश्लेषण (synthesis), पैकेजिंग (packaging) और स्रावण (secretion) इन तीन प्रमुख कार्यों पर ध्यान दें।
Question 12. जीवों में समसूत्रीं विभाजन की क्या उपयोगिता
Answer: समसूत्री विभाजन (Mitosis) जीवों के लिए बहुत उपयोगी है:
(i) यह बहुकोशिकीय जीवों में शरीर की वृद्धि के लिए जिम्मेदार होता है, जिससे जीव का आकार बढ़ता है।
(ii) कई जीवों में, यह अलैंगिक प्रजनन का मुख्य तरीका है, जिससे नए जीव बनते हैं जो मूल जीव के समान होते हैं।
(iii) बहुकोशिकीय जीवों में चोट लगने पर क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत और पुनरुत्पादन (regeneration) समसूत्री विभाजन से ही होता है।
(iv) इस प्रक्रिया से एक जीव के आनुवंशिक गुण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक समान बने रहते हैं, जिससे आनुवंशिक स्थिरता बनी रहती है। यह कोशिका विभाजन की एक मूलभूत प्रक्रिया है जो जीवन के निरंतरता और विकास के लिए आवश्यक है।
In simple words: समसूत्री विभाजन जीवों को बढ़ने में, नए जीव बनाने में (बिना लैंगिक प्रजनन के), चोट ठीक करने में और आनुवंशिक गुणों को एक जैसा रखने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: समसूत्री विभाजन की उपयोगिता लिखते समय वृद्धि, अलैंगिक प्रजनन, मरम्मत और आनुवंशिक स्थिरता जैसे बिंदुओं को शामिल करें।
निबन्धात्मक प्रश्न (Essay Type Questions)
Question 1. अर्द्धसूत्री विभाजन की विभिन्न प्रावस्थाओं के केवल नामांकित चित्र बनाइए।
Answer: अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) की विभिन्न अवस्थाओं को नीचे दिए गए चित्र में दिखाया गया है। अर्धसूत्री विभाजन लैंगिक प्रजनन वाले जीवों में आनुवंशिक विविधता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसमें कोशिका दो बार विभाजित होती है, जिससे चार नई कोशिकाएँ बनती हैं, जिनमें गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है। चित्र में पूर्वावस्था-I (Prophase-I), मध्यावस्था-I (Metaphase-I), पश्चावस्था-I (Anaphase-I), अन्त्यावस्था-I (Telophase-I), फिर पूर्वावस्था-II (Prophase-II), मध्यावस्था-II (Metaphase-II), पश्चावस्था-II (Anaphase-II) और अन्त्यावस्था-II (Telophase-II) को नामांकित किया गया है।
In simple words: यह चित्र अर्धसूत्री विभाजन के अलग-अलग चरणों को दिखाता है, जहाँ एक कोशिका से चार कोशिकाएँ बनती हैं, और उनमें गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है।
🎯 Exam Tip: अर्धसूत्री विभाजन के प्रत्येक चरण के प्रमुख लक्षणों को याद रखें और चित्र बनाते समय नामांकन स्पष्ट और सही करें।
Question 2. विभज्योतक से आप क्या समझते हैं ? इनकी कोशिकीय संरचना, स्थिति व कार्य का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer: विभज्योतक (Meristematic tissue) पौधों में पाया जाने वाला एक खास प्रकार का जीवित ऊतक है। इसकी कोशिकाएँ लगातार विभाजित होती रहती हैं और नई कोशिकाएँ बनाती हैं। यह ऊतक पौधों को जीवन भर बढ़ने और किसी भी क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत करने की क्षमता देता है। इन कोशिकाओं में पूरी तरह से विकसित होने की क्षमता नहीं होती, बल्कि वे पौधों के विकास और वृद्धि के लिए जिम्मेदार होती हैं।
**संरचनात्मक विशेषताएँ:** विभज्योतक की कोशिकाएँ छोटी, गोल या बहुभुजी होती हैं। इनकी कोशिका भित्ति पतली होती है और कोशिका द्रव्य (cytoplasm) घना होता है। इनमें केंद्रक बड़ा होता है और रिक्तिकाएँ (vacuoles) अक्सर छोटी या अनुपस्थित होती हैं। कोशिकाएँ एक-दूसरे से बहुत सटी हुई होती हैं और उनके बीच खाली जगह (अंतर-कोशिकीय अवकाश) नहीं होती।
**स्थिति और कार्य:** विभज्योतक पौधों में तीन मुख्य जगहों पर पाए जाते हैं, जो पौधे की वृद्धि को नियंत्रित करते हैं:
(a) **शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem):** यह तने और जड़ के सिरे पर होता है। इसका काम पौधे की लंबाई बढ़ाना है।
(b) **अंतर्वेशी विभज्योतक (Intercalary Meristem):** यह शीर्षस्थ विभज्योतक का ही हिस्सा होता है जो स्थायी ऊतकों के बीच आ जाता है। यह घास और बांस जैसे पौधों में गांठों के आधार पर पाया जाता है और तने व पत्तियों की लंबाई में तेजी से वृद्धि करता है।
(c) **पार्श्वीय विभज्योतक (Lateral Meristem):** यह तने और जड़ के किनारों (मोटे हिस्से) में होता है। यह पौधे की चौड़ाई या मोटाई बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होता है।
In simple words: विभज्योतक पौधों का एक खास ऊतक है जिसकी कोशिकाएँ लगातार बँटती रहती हैं, जिससे पौधे बढ़ते हैं। यह तने, जड़ और चौड़ाई बढ़ाने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: विभज्योतक के प्रकारों (शीर्षस्थ, अंतर्वेशी, पार्श्वीय) को उनकी स्थिति और प्रत्येक के विशिष्ट कार्य के साथ स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 3. समसूत्री विभाजन व अर्द्धसूत्री विभाजन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: समसूत्री विभाजन (Mitosis) और अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) कोशिका विभाजन के दो मुख्य प्रकार हैं, जिनमें कुछ महत्वपूर्ण अंतर होते हैं। समसूत्री विभाजन शरीर की कोशिकाओं में होता है, जिससे दो समान पुत्री कोशिकाएँ बनती हैं, जबकि अर्धसूत्री विभाजन जनन कोशिकाओं में होता है, जिससे चार आनुवंशिक रूप से भिन्न पुत्री कोशिकाएँ बनती हैं। यह कोशिका विभाजन की एक मूलभूत प्रक्रिया है जो जीवन के निरंतरता और विकास के लिए आवश्यक है। यह तालिका दोनों के बीच के प्रमुख अंतरों को दर्शाती है:
| समसूत्री विभाजन | अर्द्धसूत्री विभाजन |
|---|---|
| एक जनक कोशिका से दो संतति कोशिकाओं का निर्माण होता है। | एक जनक कोशिका से चार संतति कोशिकाओं का निर्माण होता है। |
| संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या जनक कोशिका की गुणसूत्र संख्या के समान होती है। | संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या जनक कोशिकाओं की गुणसूत्र संख्या की आधी होती है। |
| संतति कोशिकाएँ आनुवंशिक गुणों में आपस में व जनक कोशिकाओं के पूर्णत: समान होती हैं। | संतति कोशिकाएँ आनुवंशिक गुणों में आपस में व जनक कोशिका से भिन्नता प्रदर्शित करती हैं। |
| यह विभाजन सरल समसूत्री होने के कारण एक बार में समाप्त होता है। | विभाजन में सभी प्रावस्थाएँ दो बार दोहराई जाती हैं। पहला विभाजन अर्धसूत्री प्रकार का तथा द्वितीय विभाजन समसूत्री होता है। |
| पूर्वावस्था सरल होती है। | पूर्वावस्था अनेक उपप्रावस्थाओं से मिलकर बनी होने के कारण जटिल होती है। |
| जीन विनिमय नहीं होता। | जीन विनिमय होता है। |
| समजात गुणसूत्रों का युग्मन नहीं होता। | समजात गुणसूत्रों का युग्मन होता है। |
| पश्चावस्था में सेंट्रोमियर (गुणसूत्र बिंदु) टूट जाता है व अर्द्ध गुणसूत्र या क्रोमेटिड विपरीत ध्रुवों की ओर गति करते हैं। | पश्चावस्था में सेंट्रोमियर नहीं टूटता। समजात जोड़े का पूरा गुणसूत्र ही विपरीत ध्रुवों की ओर गति करता है। |
| जैव विकास में अल्पयोगदान। | जैव विकास हेतु अत्यन्त महत्वपूर्ण। |
In simple words: समसूत्री विभाजन से दो एक जैसी कोशिकाएँ बनती हैं, जबकि अर्धसूत्री विभाजन से चार अलग-अलग कोशिकाएँ बनती हैं। समसूत्री विभाजन वृद्धि और मरम्मत के लिए है, और अर्धसूत्री विभाजन प्रजनन और विविधता के लिए है।
🎯 Exam Tip: अंतर वाले प्रश्नों के लिए हमेशा एक स्पष्ट तालिका बनाएं और प्रत्येक बिंदु पर दोनों के बीच के प्रमुख अंतरों को संक्षेप में बताएं।
Question 4. निम्नलिखित में अन्तर स्पष्ट कीजिए
(i) जाइलम व फ्लोयम्।
(ii) मृदक व दृढ़ोतक।
Answer:
(i) जाइलम और फ्लोयम दोनों पौधों में पाए जाने वाले जटिल स्थायी ऊतक हैं, लेकिन इनके कार्य और संरचना अलग-अलग हैं। जाइलम मुख्य रूप से पानी और खनिज लवणों को जड़ों से पत्तियों तक पहुँचाता है, जबकि फ्लोयम पत्तियों द्वारा बनाए गए भोजन को पौधे के अन्य भागों तक ले जाता है। ये दोनों ऊतक मिलकर पौधों के संवहन तंत्र (vascular system) का निर्माण करते हैं, जो पौधों को बड़ा और जटिल बनने में सक्षम बनाता है। इन दोनों में मुख्य अंतर नीचे दिए गए हैं:
| जाइलम | फ्लोयम |
|---|---|
| जाइलम मृदूतक। (जाइलम चार प्रकार के घटकों से बना होता है, जिनमें से अधिकतर मृत होते हैं)। | फ्लोयम मृदूतक व फ्लोएम रेशे। (फ्लोयम चार प्रकार के घटकों से बना होता है, जिनमें से अधिकतर जीवित होते हैं)। |
| वाहिनिका, वाहिका, जाइलम तन्तु लिग्नीकृत (lignified) होने के कारण मृत होते हैं। | चालनी नलिका, सह-कोशिकाएँ व फ्लोयम मृदूतक जीवित कोशिकाएँ हैं। |
| वाहिनिका व वाहिका प्रमुख संवहन घटक हैं। | चालनी नलिका प्रमुख संवहन घटक है। |
| इसका कार्य जल व खनिज लवणों का संवहन है। | इसका कार्य कार्बनिक खाद्य पदार्थों का परिवहन है। |
In simple words: जाइलम पौधों में पानी पहुँचाता है और फ्लोयम भोजन। जाइलम के ज़्यादातर हिस्से मृत होते हैं, जबकि फ्लोयम के ज़्यादातर हिस्से जीवित होते हैं।
(ii) मृदूतक (Parenchyma) और दृढ़ोतक (Sclerenchyma) दोनों सरल स्थायी ऊतक हैं जो पौधों में पाए जाते हैं, लेकिन इनकी संरचना और कार्य अलग-अलग होते हैं। मृदूतक कोशिकाएँ जीवित होती हैं और मुख्य रूप से भोजन के भंडारण और प्रकाश संश्लेषण का काम करती हैं, जबकि दृढ़ोतक कोशिकाएँ मृत होती हैं और पौधों को यांत्रिक सहारा देती हैं। पौधे के विभिन्न भागों में इनकी उपस्थिति उसके विकास, पोषण और स्थिरता को सुनिश्चित करती है। उनके बीच के अंतर इस प्रकार हैं:
| मृदूतक | दृढ़ोतक |
|---|---|
| यह जीवित सरल स्थायी ऊतक है। | वयस्क कोशिकाएँ मृत होती हैं। अतः यह मृत सरल स्थायी ऊतक है। |
| कोशिका भित्ति पतली व सेल्यूलोज की बनी होती है। | सेल्यूलोज की कोशिका भित्ति पर लिग्निन के जमाव के कारण यह मोटी होती है। |
| कोशिकाएँ गोल, अण्डाकार या बहुभुजी होती हैं और भोजन का संचय करती हैं। | कोशिकाएँ लम्बी व संकरी रेशे जैसी होती हैं, जो यान्त्रिक दृढ़ता प्रदान करती हैं। |
In simple words: मृदूतक जीवित कोशिकाएँ हैं जो भोजन जमा करती हैं और पतली दीवारों वाली होती हैं। दृढ़ोतक मृत कोशिकाएँ हैं जो पौधों को मज़बूती देती हैं और उनकी दीवारें मोटी होती हैं।
🎯 Exam Tip: ऊतकों में अंतर स्पष्ट करते समय उनकी जीवित या मृत स्थिति, कोशिका भित्ति की प्रकृति और मुख्य कार्यों पर विशेष ध्यान दें।
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