RBSE Solutions Class 9 Science Chapter 5 जीवन की अवधारणा

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Detailed Chapter 5 जीवन की अवधारणा RBSE Solutions for Class 9 Science

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Class 9 Science Chapter 5 जीवन की अवधारणा RBSE Solutions PDF

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. पृथ्वी के पश्चात् हमारे सौर मण्डल में कौन-से ग्रह पर जीवन सम्भव है?
(a) बुध
(b) बृहस्पति
(c) शुक्र
(d) मंगल
Answer: (d) मंगल
In simple words: पृथ्वी के बाद, हमारे सौरमंडल में मंगल ग्रह पर जीवन होने की संभावना सबसे अधिक मानी जाती है। वैज्ञानिकों को वहाँ पानी और जीवन के लिए ज़रूरी चीज़ों के संकेत मिले हैं।

🎯 Exam Tip: सौरमंडल के ग्रहों पर जीवन की संभावना से जुड़े सवालों में, उन ग्रहों पर ध्यान दें जहाँ पानी या उसके निशान पाए गए हैं, जैसे कि मंगल ग्रह।

 

Question 2. निम्न में से कौन-सा गुण निर्जीवों में नहीं पाया जाता?
(a) प्रजनन
(b) विकास
(c) वृद्धि
(d) उपरोक्त सभी
Answer: (d) उपरोक्त सभी
In simple words: निर्जीव चीज़ें बच्चे पैदा नहीं करतीं, न ही वे बड़ी होती हैं या समय के साथ बदलती हैं। सजीवों में यह सभी गुण होते हैं, लेकिन निर्जीवों में नहीं।

🎯 Exam Tip: सजीव और निर्जीव के बीच के अंतर को समझने के लिए, प्रजनन, वृद्धि, विकास, उपापचय और कोशिकीय संरचना जैसे मुख्य गुणों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. ओपेरिन के सिद्धान्त द्वारा जीव की उत्पत्ति को कितने चरणों में विभाजित किया गया है?
(a) 5
(b) 6
(c) 7
(d) 8
Answer: (c) 7
In simple words: ओपेरिन के सिद्धांत के अनुसार, धरती पर जीवन की शुरुआत 7 अलग-अलग चरणों में हुई थी। यह बताता है कि कैसे साधारण चीज़ों से जटिल जीव बने।

🎯 Exam Tip: ओपेरिन के सिद्धांत के चरणों की संख्या सीधे तौर पर पूछी जाती है, इसलिए संख्या '7' को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. जीव जननवाद किसके द्वारा दिया गया है ?
(a) ओपेरिन
(b) फ्रांसिस्को रेडी
(c) वान हैल्मोंट
Answer: (b) फ्रांसिस्को रेडी
In simple words: जीव जननवाद का सिद्धांत फ्रांसिस्को रेडी ने दिया था। इस सिद्धांत का अर्थ है कि जीवन केवल पहले से मौजूद जीवन से ही उत्पन्न होता है।

🎯 Exam Tip: जीव जननवाद जैसे सिद्धांतों और उन्हें प्रतिपादित करने वाले वैज्ञानिकों के नाम याद रखना जीव विज्ञान के महत्वपूर्ण प्रश्न होते हैं।

 

Question 5. 17 अप्रैल, 2014 को खोजे गये पृथ्वी के समान ग्रह का नाम है
(a) केपलर 186f
(b) केपलर 452a
(c) केपलर 1866g
(d) केपलर 452b
Answer: (a) केपलर 186f
In simple words: 17 अप्रैल, 2014 को केपलर 186f नाम का एक ग्रह खोजा गया था, जो पृथ्वी के जैसा माना जाता है। यह ग्रह अपने तारे के 'गोल्डीलॉक्स ज़ोन' में है, जिसका मतलब है कि वहाँ तरल पानी मौजूद हो सकता है।

🎯 Exam Tip: विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़े सामान्य ज्ञान के प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण खगोलीय खोजों और उनके नामों को याद रखें।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 6. स्वतः जननवाद को किस वैज्ञानिक द्वारा खण्डित किया गया ?
Answer: स्वतः जननवाद के सिद्धांत को लुई पाश्चर ने गलत साबित किया था। उन्होंने अपने प्रयोगों से दिखाया कि जीवन अपने आप निर्जीव चीज़ों से पैदा नहीं होता। पाश्चर के काम ने जीव विज्ञान की एक बड़ी बहस को सुलझाने में मदद की।
In simple words: लुई पाश्चर ने यह दिखाया कि जीवन अचानक निर्जीव चीजों से नहीं आता।

🎯 Exam Tip: स्वतः जननवाद के खंडन में लुई पाश्चर का नाम और उनके प्रयोगों का महत्व याद रखना आवश्यक है।

 

Question 7. पृथ्वी से समानता दर्शाने वाले दो ग्रह कौन से हैं?
Answer: पृथ्वी से समानता दर्शाने वाले दो ग्रह केपलर 452b और केपलर 186f हैं। ये दोनों ग्रह अपने तारों से उचित दूरी पर स्थित हैं, जहाँ जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ हो सकती हैं।
In simple words: केपलर 452b और केपलर 186f दो ऐसे ग्रह हैं जो पृथ्वी जैसे माने जाते हैं।

🎯 Exam Tip: खगोल विज्ञान के प्रश्नों में, पृथ्वी के समान ग्रहों के नाम और उनकी खोज की तारीखों को याद रखना उपयोगी है।

 

Question 8. कास्मोजोइक सिद्धान्त किस वैज्ञानिक द्वारा प्रतिपादित किया गया।
Answer: कॉस्मोजोइक सिद्धांत को लीबिग, केल्विन और आरिनियस जैसे वैज्ञानिकों ने पेश किया था। इस सिद्धांत के अनुसार, जीवन पृथ्वी पर अंतरिक्ष से आया है। लेसली ऑरगेल ने भी इस विचार का समर्थन किया।
In simple words: लीबिग, केल्विन और आरिनियस ने कॉस्मोजोइक सिद्धांत दिया था, जिसे लेसली ऑरगेल ने समर्थन किया।

🎯 Exam Tip: विभिन्न जीवोत्पत्ति सिद्धांतों और उन्हें प्रस्तावित करने वाले प्रमुख वैज्ञानिकों के नाम याद रखना चाहिए।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 9. सजीव व निर्जीव में अन्तर को उदाहरण सहित समझाइये।
Answer: सभी सजीव जीवंत मशीनों की तरह होते हैं और कुछ खास गुण दिखाते हैं। सजीवों में उपापचय (Metabolism) होता है, जिसमें पोषण, श्वसन और उत्सर्जन जैसी जैविक क्रियाएँ शामिल हैं। इसके विपरीत, निर्जीव चीज़ों में उपापचय नहीं होता। सजीवों की कोशिका संरचना और संगठन होता है, जबकि निर्जीवों में कोशिकाएँ नहीं होतीं। उदाहरण के लिए, एक पौधा (सजीव) बढ़ता है और भोजन बनाता है, जबकि एक पत्थर (निर्जीव) ऐसा कुछ नहीं करता।
In simple words: सजीवों में जीवन के गुण होते हैं जैसे खाना, साँस लेना, बढ़ना, जबकि निर्जीवों में ये गुण नहीं होते और वे कोशिकाओं से नहीं बने होते।

🎯 Exam Tip: सजीव और निर्जीव के अंतर को स्पष्ट करने के लिए, उपापचय, प्रजनन, वृद्धि, गति और कोशिकीय संगठन जैसे गुणों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. मिलर के प्रयोग को चित्र द्वारा समझाइये।
Answer: मिलर ने 1953 में ओपेरिन और हाल्डेन की परिकल्पना को वैज्ञानिक रूप से साबित करने के लिए एक प्रयोग किया था। उन्होंने प्रयोगशाला में आदि पृथ्वी (primitive earth) की स्थितियों को फिर से बनाया। इसके लिए, उन्होंने एक विशेष काँच के उपकरण (फ्लास्क) का इस्तेमाल किया, जिसमें हाइड्रोजन, अमोनिया, मीथेन और पानी की भाप का मिश्रण लिया। इस गैसीय कक्ष में इलेक्ट्रोडों से विद्युत चिंगारी और ऊष्मा दी गई। यह आदिम पृथ्वी पर बिजली गिरने और ज्वालामुखी की गर्मी की नकल करता था।
गैसें (CH₄, NH₃, H₂) वैक्यूम पम्प स्पार्क डिस्चार्ज संघनित्र जल बिंदु कार्बनिक यौगिक उबलता जल जल बाहर जल अंदर
लगभग एक सप्ताह बाद, इस द्रव का विश्लेषण किया गया, और इसमें एलानिन, ग्लाइसीन, ग्लिसरॉल और अन्य कार्बनिक पदार्थ मिले। यह प्रयोग बताता है कि 3-4 अरब साल पहले पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत इसी तरह के रासायनिक विकास से हुई होगी।
In simple words: मिलर ने एक उपकरण में आदि पृथ्वी की तरह की स्थिति बनाई, जिसमें गैसों, बिजली और गर्मी का इस्तेमाल किया। इस प्रयोग से उन्हें ऐसे पदार्थ मिले जिनसे जीवन बन सकता है।

🎯 Exam Tip: मिलर के प्रयोग का वर्णन करते समय उसके उद्देश्य, उपकरण, सामग्री (गैसें), प्रक्रिया और प्राप्त निष्कर्षों को स्पष्ट रूप से समझाएँ। यह विज्ञान में एक महत्वपूर्ण प्रयोग है।

 

Question 11. जीव जननवाद का वर्णन कीजिए।
Answer: जीव जननवाद, जिसे बायोजेनेसिस भी कहते हैं, इटली के वैज्ञानिक फ्रांसिस्को रेडी ने शुरू किया था। उन्होंने अपने साधारण प्रयोगों से दिखाया कि जीवन पहले से मौजूद जीवन से ही उत्पन्न होता है। इसका मतलब है कि नया जीवन केवल जीवित चीजों से ही बन सकता है। हालांकि, उनके प्रयोग पूरी तरह से स्वतः जननवाद को गलत साबित नहीं कर पाए थे। स्वतः जननवाद को पूरी तरह से खंडित करने और जीव जननवाद को सही साबित करने का श्रेय बाद में लुई पाश्चर को मिला।
In simple words: जीव जननवाद कहता है कि नया जीवन हमेशा पुराने जीवन से ही आता है। फ्रांसिस्को रेडी ने इसकी शुरुआत की और लुई पाश्चर ने इसे पूरी तरह से साबित किया।

🎯 Exam Tip: जीव जननवाद के सिद्धांत को समझाते समय फ्रांसिस्को रेडी और लुई पाश्चर दोनों के योगदान का उल्लेख करना और यह बताना कि यह सिद्धांत स्वतः जननवाद के विपरीत कैसे है, महत्वपूर्ण है।

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 13. जीव के उत्पत्ति सम्बन्धित ओपेरिन के सिद्धान्त को समझाइये।
Answer: रूसी वैज्ञानिक ओपेरिन ने बताया कि लगभग 4.5 अरब साल पहले ब्रह्मांड में पृथ्वी बनी थी। उन्होंने जीवन की उत्पत्ति का आधार जैव रासायनिक विकास के सिद्धांत को माना। ओपेरिन ने जीवन की उत्पत्ति की पूरी प्रक्रिया को 7 चरणों में बाँटा है:
1. पहले चरण में, आदिम पृथ्वी का तापमान लगभग 5000-6000°C था। उस समय हाइड्रोजन, कार्बन और ऑक्सीजन अणु बहुत ज़्यादा थे। इनके मिलने से पानी, अमोनिया और मीथेन जैसे यौगिक बने।
2. दूसरे चरण में, हाइड्रोजन की अधिकता के कारण पृथ्वी का शुरुआती वातावरण अपचायक था। करोड़ों साल बाद, जब पृथ्वी का तापमान कम हुआ, तो मीथेन के संघनन से सरल हाइड्रोकार्बन बनने लगे। इन्हीं सरल अणुओं से शर्करा, ग्लिसरीन, वसा अम्ल, एमीनो अम्ल, पिरिमिडीन और प्यूरीन जैसे जटिल कार्बनिक अणु बने।
3. तीसरे चरण में, रासायनिक संश्लेषण से बने जटिल कार्बनिक यौगिक समुद्र के गर्म पानी में घुल गए, जो एक गर्म सूप जैसा बन गया। इन्हीं के मिलने से कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल बने।
4. चौथे चरण में, तीसरे चरण में बने बहुत जटिल कार्बनिक यौगिकों की आपस में क्रिया से न्यूक्लियोप्रोटीन्स और दूसरे जटिल बड़े अणु बने। कुछ खास न्यूक्लियोप्रोटीन्स में खुद की कॉपी बनाने की क्षमता आ गई, जिससे प्रजनन संभव हो सका।
5. पाँचवें चरण में, पहली कोशिका बनी। समुद्री जल में भोजन कम होने पर न्यूक्लियोप्रोटीन्स के बीच मुकाबला शुरू हो गया। उत्परिवर्तन के कारण नए न्यूक्लियोप्रोटीन्स चिपचिपे होने लगे।
In simple words: ओपेरिन ने बताया कि जीवन की शुरुआत रासायनिक विकास के 7 चरणों से हुई, जहाँ पहले साधारण अणु बने, फिर जटिल अणु, और अंत में पहली कोशिका बनी।

🎯 Exam Tip: ओपेरिन के सिद्धांत के सभी 7 चरणों को क्रम से याद रखना और प्रत्येक चरण में होने वाली मुख्य रासायनिक क्रियाओं को समझाना महत्वपूर्ण है।

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उनके उत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. उपापचय प्रदर्शित करते हैं
(a) सभी निर्जीव
(b) सभी कोशिकीय सजीव
(c) सभी विषाणु
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (b) सभी कोशिकीय सजीव
In simple words: सिर्फ वे जीव जिनमें कोशिकाएँ होती हैं, उपापचय दिखाते हैं, जिसका मतलब है कि वे अपने शरीर के अंदर रासायनिक बदलाव करते हैं।

🎯 Exam Tip: उपापचय सजीवों का एक मूलभूत गुण है; ध्यान दें कि विषाणुओं को आमतौर पर पूरी तरह से सजीव नहीं माना जाता क्योंकि वे मेजबान कोशिका के बाहर उपापचय नहीं कर सकते।

 

Question 2. कोशिकीय संरचना का अभाव होता है
(a) विषाणुओं में
(b) जीवाणुओं में
(c) सभी-जन्तुओं में
(d) सभी पादपों में
Answer: (a) विषाणुओं में
In simple words: विषाणुओं में अपनी खुद की कोशिका संरचना नहीं होती है; वे एक प्रोटीन खोल में आनुवंशिक सामग्री होते हैं।

🎯 Exam Tip: कोशिकीय संरचना की अनुपस्थिति विषाणुओं को अन्य सजीवों से अलग करती है और उनके परजीवी स्वभाव को रेखांकित करती है।

 

Question 3. सरल आद्य एककोशिकीय जीव से लाखों-करोड़ों वषों में विभिन्न प्रकार के जीवों का बनना कहलाता है
(a) रासायनिक विकास
(b) जैव विकास
(c) आनुवंशिकता
(d) जीवाश्म विज्ञान
Answer: (b) जैव विकास
In simple words: लाखों-करोड़ों सालों में एक सरल जीव से कई तरह के जीव बनने को जैव विकास कहते हैं।

🎯 Exam Tip: जैव विकास एक धीमी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से समय के साथ जीवों की विविधता विकसित होती है, जिसमें प्राकृतिक चयन और अनुकूलन प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

 

Question 5. जीवन की उत्पत्ति के कॉस्मोजोइक मत के विरुद्ध सबसे बड़ा तर्क है
(a) पृथ्वी से बाहर किसी अन्य ग्रह पर जीवन सम्भव नहीं
(b) पृथ्वी के वायुमण्डल तक आते-आते जीव ऊष्मा व विकिरण से जीवित बचे नहीं रह सकते।
(c) पृथ्वी पर जल की मात्रा बहुत अधिक है।
(d) उपर्युक्त सभी कथन असत्य हैं।
Answer: (b) पृथ्वी के वायुमण्डल तक आते-आते जीव ऊष्मा व विकिरण से जीवित बचे नहीं रह सकते।
In simple words: कॉस्मोजोइक सिद्धांत के खिलाफ सबसे बड़ा तर्क यह है कि बाहरी अंतरिक्ष से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय, अत्यधिक गर्मी और हानिकारक विकिरण के कारण कोई भी जीव जीवित नहीं बच सकता।

🎯 Exam Tip: विभिन्न जीवोत्पत्ति सिद्धांतों की आलोचनाएँ याद रखना ज़रूरी है, खासकर वे तर्क जो उनके मुख्य बिंदुओं को चुनौती देते हैं।

 

Question 6. आद्य पृथ्वी के अपचायक वायुमण्डल के आधुनिक ऑक्सीकारक वायुमण्डल में परिवर्तन के लिए उत्तरदायी है
(a) सरल कार्बनिक पदार्थ
(b) जटिल कार्बनिक पदार्थ
(c) प्रकाश संश्लेषी जीवों की संख्या में वृद्धि
(d) प्रकाश संश्लेषी जीवों की संख्या में कमी।
Answer: (c) प्रकाश संश्लेषी जीवों की संख्या में वृद्धि
In simple words: आदि पृथ्वी का ऑक्सीजन रहित वातावरण, प्रकाश संश्लेषण करने वाले जीवों के बढ़ने से ऑक्सीजन वाले वातावरण में बदल गया।

🎯 Exam Tip: पृथ्वी के वायुमंडल के विकास में प्रकाश संश्लेषी जीवों की भूमिका को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्होंने ऑक्सीजन का उत्पादन करके जीवन के लिए आवश्यक वातावरण बनाया।

सुमेलित कीजिए।

निम्नलिखित स्तम्भ A व B में मिलान कीजिए।

स्तम्भ Aस्तम्भ B
(i) स्वतः जननवाद(A) फ्रांसिस्को रेडी/लुई पाश्चर
(ii) जैव-रासायनिक विकास(B) मिलर
(iii) कॉस्मोजोइक सिद्धान्त(C) विषाणु
(iv) जीव जननवाद आरहेनियस(D) लीबिग, केल्विन,
(v) रासायनिक विकास की प्रायोगिक पुष्टि(E) वॉन हेल्मोंट
(vi) उपापचय विहीन जीव(F) औपेरिन

 

Question 1. विषाणुओं का कौन-सा गुण उनको सजीवों में वर्गीकृत करने हेतु उत्तरदायी है ?
Answer: विषाणुओं को सजीवों में वर्गीकृत करने का मुख्य कारण उनकी जीवित कोशिका के अंदर प्रतिलिपिकरण (प्रजनन) करने की क्षमता है। जब वे किसी जीवित कोशिका में होते हैं, तो वे अपनी संख्या बढ़ा सकते हैं। यह गुण उन्हें निर्जीवों से अलग करता है।
In simple words: विषाणु जीवित कोशिकाओं के अंदर अपनी संख्या बढ़ा सकते हैं, इसी कारण उन्हें सजीव माना जाता है।

🎯 Exam Tip: विषाणुओं को 'सजीव और निर्जीव के बीच की कड़ी' के रूप में समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे मेजबान कोशिका के बाहर निष्क्रिय रहते हैं और केवल अंदर ही जीवन के गुण दर्शाते हैं।

 

Question 2. सभी सजीवों में कोशिकीय संगठन पाया जाता है। कौन से जीव इसके अपवाद हैं ?
Answer: सभी सजीवों में कोशिकीय संगठन होता है, लेकिन विषाणु इसका अपवाद हैं। विषाणुओं में अपनी कोई कोशिका नहीं होती, बल्कि वे प्रोटीन के खोल में आनुवंशिक सामग्री होते हैं।
In simple words: विषाणु एकमात्र ऐसे जीव हैं जिनमें कोशिका नहीं होती, जबकि सभी सजीव कोशिकाओं से बने होते हैं।

🎯 Exam Tip: विषाणुओं की अनूठी संरचना और उनका कोशिकीय संगठन का अभाव जीव विज्ञान में एक महत्वपूर्ण अपवाद है जिसे याद रखना चाहिए।

 

Question 3. उपापचय (metabolism) के दो प्रमुख प्रकारों के नाम लिखिए।
Answer: उपापचय (Metabolism) के दो प्रमुख प्रकार उपचय (anabolism) और अपचय (catabolism) हैं। उपचय में छोटे अणुओं से बड़े अणु बनते हैं (जैसे प्रोटीन संश्लेषण), जबकि अपचय में बड़े अणु टूटकर छोटे अणु बनते हैं (जैसे भोजन का पाचन)।
In simple words: उपापचय के दो मुख्य प्रकार उपचय (चीज़ें बनाना) और अपचय (चीज़ें तोड़ना) हैं।

🎯 Exam Tip: उपचय और अपचय को अक्सर 'निर्माण' और 'विनाश' प्रक्रियाओं के रूप में समझा जाता है; इन दोनों के बीच के अंतर को याद रखें।

 

Question 4. किस वैज्ञानिक ने बताया कि पसीने से भीगी कमीज और गेहूं के भूसे को एक साथ रखने से 21 दिन में चूहे स्वतः उत्पन्न हो जाते हैं ?
Answer: वॉन हेल्मोंट नाम के वैज्ञानिक ने यह अजीब दावा किया था कि पसीने से भीगी कमीज और गेहूं के भूसे को एक साथ रखने से 21 दिनों में चूहे अपने आप पैदा हो जाते हैं। यह स्वतः जननवाद के विचार का एक उदाहरण था, जिसे बाद में गलत साबित कर दिया गया।
In simple words: वॉन हेल्मोंट ने कहा था कि पसीने वाली कमीज और गेहूं के भूसे से चूहे अपने आप बन जाते हैं।

🎯 Exam Tip: स्वतः जननवाद के सिद्धांतों से जुड़े गलत प्रयोगों और वैज्ञानिकों के नाम याद रखें, जैसे वॉन हेल्मोंट का यह दावा, जो वैज्ञानिक रूप से सही नहीं था।

 

Question 5. लुई पाश्चर से पहले स्वतः जननवाद को खण्डित करने का प्रयास किस वैज्ञानिक ने किया ?
Answer: लुई पाश्चर से पहले, फ्रांसिस्को रेडी ने स्वतः जननवाद को गलत साबित करने की कोशिश की थी। उन्होंने अपने प्रयोगों से दिखाया कि माँस पर कीड़े अपने आप नहीं आते, बल्कि वे मक्खियों के अंडों से पैदा होते हैं।
In simple words: लुई पाश्चर से पहले फ्रांसिस्को रेडी ने स्वतः जननवाद को गलत साबित करने का प्रयास किया था।

🎯 Exam Tip: स्वतः जननवाद के खंडन के ऐतिहासिक क्रम में फ्रांसिस्को रेडी का नाम और उनके प्रयोगों का महत्व याद रखें, क्योंकि उन्होंने पाश्चर के लिए मार्ग प्रशस्त किया।

 

Question 6. वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी की आयु लगभग कितने वर्ष है ?
Answer: वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी की अनुमानित आयु लगभग 4.5 से 5 अरब वर्ष है। यह अनुमान रेडियोमेट्रिक डेटिंग जैसी तकनीकों का उपयोग करके लगाया गया है।
In simple words: वैज्ञानिकों के हिसाब से पृथ्वी की उम्र लगभग 4.5 से 5 अरब साल है।

🎯 Exam Tip: पृथ्वी की आयु से संबंधित प्रश्नों में, सटीक संख्यात्मक मानों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह एक सामान्य ज्ञान का प्रश्न है।

 

Question 7. आदिकालीन पृथ्वी का तापमान क्या था ?
Answer: पृथ्वी के बनने के बाद, आदिकालीन पृथ्वी का तापमान बहुत ज़्यादा था, लगभग 5000-6000°C। यह अत्यधिक तापमान ज्वालामुखी गतिविधियों और उल्कापिंडों के लगातार टकराने के कारण था।
In simple words: आदि पृथ्वी का तापमान 5000 से 6000°C के बीच था, जो बहुत गर्म था।

🎯 Exam Tip: आदिकालीन पृथ्वी की परिस्थितियों को याद रखें, जिसमें अत्यधिक तापमान और अलग तरह का वातावरण शामिल है, क्योंकि ये जीवन की उत्पत्ति के सिद्धांतों का आधार हैं।

 

Question 9. आद्य पृथ्वी के गर्म समुद्र जल में किन सरल कार्बनिक पदार्थों के संयोग से कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल जैसे जटिल पदार्थों का संश्लेषण हुआ ?
Answer: आदि पृथ्वी के गर्म समुद्री जल में सरल कार्बनिक पदार्थ जैसे शर्कराएँ, ग्लिसरॉल, वसीय अम्ल, अमीनो अम्ल, प्यूरीन और पिरिमिडीन क्षारकों के मिलने से कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल जैसे जटिल पदार्थ बने थे। ये सभी पदार्थ जीवन के निर्माण खंड हैं।
In simple words: आदि पृथ्वी पर शर्कराएँ, वसीय अम्ल, अमीनो अम्ल जैसे सरल पदार्थों के मिलने से कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल जैसे जटिल पदार्थ बने।

🎯 Exam Tip: जीवन की उत्पत्ति में सरल से जटिल कार्बनिक अणुओं के संश्लेषण के क्रम को याद रखना, और इसमें शामिल प्रमुख अणुओं के नाम जानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. रासायनिक विकास में जीवन के उद्भव की आधारशिला रखने वाला पद कौन-सा था ?
Answer: रासायनिक विकास में जीवन के उद्भव की आधारशिला रखने वाला सबसे पहला कदम सरल अकार्बनिक पदार्थों से सरल कार्बनिक पदार्थों का निर्माण और फिर उनसे जटिल कार्बनिक पदार्थों का बनना था। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे हुई और जीवन के लिए आवश्यक अणुओं को उत्पन्न किया।
In simple words: जीवन की शुरुआत का सबसे पहला कदम यह था कि पहले साधारण अकार्बनिक चीज़ों से साधारण कार्बनिक चीज़ें बनीं, और फिर वे मिलकर जटिल कार्बनिक चीज़ें बन गईं।

🎯 Exam Tip: रासायनिक विकास के चरणों को क्रम से याद रखें, यह समझना महत्वपूर्ण है कि जीवन की जटिल संरचनाएँ कैसे साधारण पदार्थों से विकसित हुईं।

 

Question 11. आद्य पृथ्वी पर बने किस प्रकार के अणुओं में अनुलिपिकरण की क्षमता थी ?
Answer: आदि पृथ्वी पर बने कुछ खास न्यूक्लियोप्रोटीन्स (नाभिकीय अम्ल के यौगिकों) में खुद की कॉपी बनाने (अनुलिपिकरण या replication) की क्षमता थी। यह क्षमता जीवन के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण थी, क्योंकि इससे जानकारी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जा सकती थी।
In simple words: आदि पृथ्वी पर न्यूक्लियोप्रोटीन्स में खुद की कॉपी बनाने की क्षमता थी।

🎯 Exam Tip: अनुलिपिकरण की क्षमता वाले अणुओं की पहचान करना और उनके महत्व को समझना जीवोत्पत्ति के संदर्भ में आवश्यक है।

 

Question 12. आधुनिक पृथ्वी के वायुमण्डल में \( \text{CO}_2 \) व \( \text{N}_2 \) गैस कैसे बनीं ?
Answer: आधुनिक पृथ्वी के वायुमंडल में \( \text{CO}_2 \) (कार्बन डाइऑक्साइड) और \( \text{N}_2 \) (नाइट्रोजन) गैसें प्रकाश संश्लेषी सूक्ष्म जीवों द्वारा मुक्त ऑक्सीजन के मीथेन और अमोनिया के साथ क्रिया करने से बनीं। ऑक्सीजन ने इन गैसों को बदलकर आज के वायुमंडल को बनाने में मदद की।
In simple words: प्रकाश संश्लेषण करने वाले छोटे जीवों द्वारा छोड़ी गई ऑक्सीजन ने मीथेन और अमोनिया के साथ मिलकर \( \text{CO}_2 \) और \( \text{N}_2 \) गैसें बनाईं।

🎯 Exam Tip: पृथ्वी के वायुमंडल की संरचना के विकास में सूक्ष्मजीवों और उनके द्वारा की गई रासायनिक अभिक्रियाओं की भूमिका पर ध्यान दें।

 

Question 13. किस वैज्ञानिक ने बताया कि ब्रह्माण्ड में आकाश गंगा एक-दूसरे से दूर होती जा रही हैं ?
Answer: एडविन हबल नाम के वैज्ञानिक ने बताया कि ब्रह्मांड में आकाशगंगाएँ एक-दूसरे से दूर होती जा रही हैं। उनके इस अवलोकन से 'विस्तारित ब्रह्मांड' के सिद्धांत का जन्म हुआ, जिसे बिग बैंग सिद्धांत का समर्थन मिला।
In simple words: एडविन हबल ने बताया था कि ब्रह्मांड में आकाशगंगाएँ एक-दूसरे से दूर जा रही हैं।

🎯 Exam Tip: ब्रह्मांड के विस्तार से जुड़े प्रमुख वैज्ञानिक और उनके खोजों के नाम याद रखना खगोल विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 14. सौर मण्डल के कौन से ग्रह का वायुमण्डल \( \text{CO} \) के घने बादलों का बना हुआ है ?
Answer: शुक्र ग्रह का वायुमंडल \( \text{CO}_2 \) (कार्बन डाइऑक्साइड) के घने बादलों से बना हुआ है। यह वायुमंडल बहुत घना और गर्म है, जिसके कारण शुक्र पर ग्रीनहाउस प्रभाव बहुत ज़्यादा होता है।
In simple words: शुक्र ग्रह का वायुमंडल कार्बन डाइऑक्साइड के घने बादलों से बना है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक ग्रह की वायुमंडलीय संरचना की विशेषताओं को याद रखें, क्योंकि यह उनके पर्यावरणीय गुणों को प्रभावित करती है।

 

Question 15. सौर मण्डल के किस ग्रहपर जीवन की सम्भावनाएँ व्यक्त की गई हैं ?
Answer: सौर मंडल में मंगल ग्रह पर जीवन की संभावनाएँ व्यक्त की गई हैं। विभिन्न मिशनों जैसे मार्स ऑर्बिटर मिशन (Mars Orbiter Mission) ने मंगल पर पानी और अन्य जीवन-सहायक तत्वों की खोज की है।
In simple words: मंगल ग्रह पर जीवन होने की संभावनाएँ व्यक्त की गई हैं।

🎯 Exam Tip: मंगल ग्रह पर जीवन की खोज से संबंधित अंतरिक्ष मिशनों और साक्ष्यों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 17. किन्हीं दो ग्रहों के नाम लिखिए जिनके वायुमण्डल में हाइड्रोजन, हीलियम, मीथेन व अमोनिया के बादल छाये हुए हैं।
Answer: बृहस्पति और शनि ग्रह ऐसे दो ग्रह हैं जिनके वायुमंडल में हाइड्रोजन, हीलियम, मीथेन और अमोनिया के घने बादल छाए हुए हैं। ये गैसें इन विशालकाय ग्रहों के ठंडे और सघन वायुमंडल का हिस्सा हैं।
In simple words: बृहस्पति और शनि के वायुमंडल में हाइड्रोजन, हीलियम, मीथेन और अमोनिया के बादल होते हैं।

🎯 Exam Tip: गैस-दैत्य ग्रहों की वायुमंडलीय संरचना और उनके प्रमुख रासायनिक घटकों को याद रखें।

 

Question 18. सूर्य के समान तारे का नाम लिखिए।
Answer: केपलर 452 तारा सूर्य के समान एक तारा है। यह तारा अपने ग्रह केपलर 452b के साथ मिलकर एक प्रणाली बनाता है, जिसे पृथ्वी-सूर्य प्रणाली के समान माना जाता है।
In simple words: केपलर 452 तारा हमारे सूर्य जैसा ही एक तारा है।

🎯 Exam Tip: 'सूर्य जैसे तारे' से संबंधित प्रश्नों में, मुख्य अनुक्रम के जी-प्रकार के तारों के उदाहरण याद रखना उपयोगी है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. जीवन की उत्पत्ति के आधुनिक मत के अनुसार जीवन की उत्पत्ति के विविध चरणों को एक फ्लोचार्ट के रूप में प्रस्तुत करें।
Answer:
सार मण्डल का निर्माण
\( \implies \) पृथ्वी का निर्माण
\( \implies \) पृथ्वी के वायुमण्डल का निर्माण (पूर्व जैविक संश्लेषण)
\( \implies \) बहुलकीकरण
\( \implies \) जीवन का रासायनिक विकास
\( \implies \) आद्य कोशिका
In simple words: जीवन की शुरुआत ब्रह्मांड के बनने से लेकर पृथ्वी, उसके वातावरण, बड़े अणुओं के बनने और अंत में पहली कोशिका के बनने तक कई चरणों में हुई।

🎯 Exam Tip: फ्लोचार्ट को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करें और प्रत्येक चरण के मुख्य बिंदु को स्पष्ट करें ताकि जीवन की उत्पत्ति की प्रक्रिया को समझना आसान हो।

 

Question 2. जीवन की उत्पत्ति का स्वतः जनन का सिद्धान्त क्या है ? संक्षिप्त विवेचना कीजिए।
Answer: स्वतः जननवाद का सिद्धांत कहता है कि जीवन अपने आप निर्जीव चीज़ों से पैदा हो सकता है। जैसे, इस सिद्धांत के अनुसार कीचड़, सूर्य का प्रकाश, सड़ा माँस या भूसा (Straw) जैसी चीज़ों से जीवन बन सकता है। वॉन हेल्मॉण्ट (1557-1644) जैसे वैज्ञानिक ने बताया कि एक अलमारी में पसीने से भीगी कमीज और गेहूं के दानों को रखने से तीन सप्ताह में चूहे अपने आप पैदा हो सकते हैं। उस समय, जीवों के जीवन चक्र के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी, इसलिए ऐसा माना जाता था कि निर्जीव पदार्थों से जीवन स्वतः उत्पन्न हो सकता है। बाद में लुई पाश्चर ने अपने वैज्ञानिक प्रयोगों से इस विचार को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया।
In simple words: स्वतः जननवाद का सिद्धांत मानता है कि निर्जीव चीजें अपने आप जीवन पैदा कर सकती हैं, लेकिन लुई पाश्चर ने इसे गलत साबित कर दिया।

🎯 Exam Tip: स्वतः जननवाद की परिभाषा, उसके प्रमुख समर्थकों (जैसे वॉन हेल्मोंट) और लुई पाश्चर द्वारा इसके खंडन को याद रखना महत्वपूर्ण है।

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. जीवन की उत्पत्ति की आधुनिक अवधारणा किस वैज्ञानिक ने तथा क्या दी हैं ? समझाइये।
Answer: जीवन की उत्पत्ति की आधुनिक अवधारणा को जैव रासायनिक विकास (biochemical evolution) का सिद्धांत कहा जाता है। इसे प्राथमिक अजैविक संश्लेषण (primary biogenesis) या जीवन की उत्पत्ति का आधुनिक सिद्धांत (Modern theory) भी कहते हैं। रूसी वैज्ञानिक ए. आई. ओपेरिन और स्कॉटिश वैज्ञानिक जे. बी. एस. हाल्डेन ने स्वतंत्र रूप से यह विचार प्रस्तुत किया।
इन वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया कि आदि पृथ्वी पर ऊर्जा के मजबूत स्रोतों की मौजूदगी में पहले कार्बनिक अणु बने होंगे। सूर्य का विकिरण, पराबैंगनी प्रकाश और आकाशीय विद्युत (बिजली) इस ऊर्जा के मुख्य स्रोत रहे होंगे।
जीवन की उत्पत्ति की पूरी प्रक्रिया को ओपेरिन ने 7 चरणों में विभाजित किया, जैसा कि फ्लोचार्ट में दिखाया गया है:
अकार्बनिक रसायन
\( \implies \) छोटे कार्बनिक अणु
\( \implies \) अजैव संश्लेषण (और ऊर्जाग्रहण)
\( \implies \) बहुलकीकरण
\( \implies \) दीर्घअणु
\( \implies \) समूहन
\( \implies \) कोशिका कला
\( \implies \) कोशिका (प्रकाश संश्लेषण और कोशिकीय श्वसन)
\( \implies \) जैविक विकास
\( \implies \) आद्य कोशिका
जीवन की उत्पत्ति की पूरी प्रक्रिया को ओपेरिन ने 7 चरणों में विभाजित किया।
In simple words: ओपेरिन और हाल्डेन ने आधुनिक सिद्धांत दिया कि जीवन की शुरुआत आदि पृथ्वी पर रासायनिक विकास से हुई, जहाँ ऊर्जा (सूरज की रोशनी, बिजली) से सरल अणु बने और फिर जटिल जीव बने।

🎯 Exam Tip: जीवन की उत्पत्ति के आधुनिक सिद्धांत में ओपेरिन और हाल्डेन के योगदान, रासायनिक विकास के चरणों और ऊर्जा स्रोतों को विस्तार से समझाना आवश्यक है।

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