RBSE Solutions Class 9 Science Chapter 3 परमाणु संरचना

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Detailed Chapter 3 परमाणु संरचना RBSE Solutions for Class 9 Science

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Class 9 Science Chapter 3 परमाणु संरचना RBSE Solutions PDF

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. परमाणु संरचना का 'प्लम पुडिंग' प्रतिरूप दिया था
(a) नील्स बोर ने
(b) थॉमसन ने।
(c) अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने
(d) गोल्डस्टीन ने।
Answer: (b) थॉमसन ने।
In simple words: जे. जे. थॉमसन ने परमाणु का एक शुरुआती मॉडल प्रस्तुत किया था, जिसे 'प्लम पुडिंग' मॉडल के नाम से जाना जाता है। इस मॉडल में परमाणु को एक धनावेशित गोले के रूप में माना गया था जिसमें इलेक्ट्रॉन धंसे होते हैं।

🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक के नाम और उनके द्वारा दिए गए प्रमुख मॉडल या खोज को याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर परमाणु संरचना से संबंधित।

 

Question 2. न्यूट्रॉन के खोजकर्ता थे।
(a) सी. वी. रमन
(b) रदरफोर्ड
(c) जे. जे. थॉमसन
(d) जेम्स चैडविक।
Answer: (d) जेम्स चैडविक।
In simple words: न्यूट्रॉन एक ऐसा कण है जो परमाणु के नाभिक में पाया जाता है और इस पर कोई विद्युत आवेश नहीं होता है। इसकी खोज जेम्स चैडविक ने की थी।

🎯 Exam Tip: परमाणु के विभिन्न मौलिक कणों (इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन) और उनके खोजकर्ताओं के नाम हमेशा याद रखें।

 

Question 3. परमाणु का आकार होता है
(a) 10 cm
(b) 10-15 cm
(c) 10-2 cm
(d) 10-5 cm.
Answer: (d) 10-5 cm.
In simple words: परमाणु बहुत छोटे होते हैं। उनका आकार आमतौर पर लगभग 10\(^{-10}\) मीटर या 10\(^{-8}\) सेंटीमीटर की श्रेणी में होता है, लेकिन दिए गए विकल्पों में 10\(^{-5}\) cm निकटतम है।

🎯 Exam Tip: परमाणु के आकार का अनुमानित मान अक्सर पूछा जाता है; आपको इसे मीटर और सेंटीमीटर दोनों इकाइयों में याद रखना चाहिए।

 

Question 4. हाइड्रोजन के समस्थानिक ड्यूटीरियम में न्यूट्रॉन की संख्या होती है
(a) एक
(b) दो
(c) शून्य
(d) तीन
Answer: (a) एक
In simple words: ड्यूटीरियम हाइड्रोजन का एक विशेष रूप है। सामान्य हाइड्रोजन में कोई न्यूट्रॉन नहीं होता, लेकिन ड्यूटीरियम में एक प्रोटॉन के साथ एक न्यूट्रॉन भी होता है।

🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन के तीनों समस्थानिकों (प्रोटियम, ड्यूटीरियम, ट्राइटियम) में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की संख्या को याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. समस्थानिक किसे कहते हैं ?
Answer: समस्थानिक- एक ही तत्व के परमाणु जिनकी परमाणु क्रमांक समान हो, लेकिन द्रव्यमान संख्या अलग-अलग हो, उन्हें समस्थानिक कहते हैं। उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक होते हैं: प्रोटियम, ड्यूटीरियम और ट्राइटियम। ये सभी रासायनिक रूप से समान होते हैं लेकिन द्रव्यमान में भिन्न होते हैं।
In simple words: एक ही तरह के तत्व के परमाणु जिनके पास प्रोटॉन की संख्या तो एक जैसी होती है, पर न्यूट्रॉन की संख्या अलग होती है, उन्हें समस्थानिक कहते हैं।

🎯 Exam Tip: समस्थानिकों की परिभाषा में "समान परमाणु क्रमांक" और "भिन्न द्रव्यमान संख्या" इन दो मुख्य बिंदुओं को शामिल करना आवश्यक है।

 

Question 6. समभारिक तत्व किसे कहते हैं ?
Answer: समभारिक तत्व- भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या समान होती है, परंतु परमाणु क्रमांक भिन्न-भिन्न होते हैं, उन्हें समभारिक कहते हैं। उदाहरण के लिए, 20Ca\(^{40}\) और 18Ar\(^{40}\) दोनों समभारिक तत्व हैं क्योंकि इन दोनों का द्रव्यमान संख्या 40 है लेकिन परमाणु क्रमांक भिन्न हैं।
In simple words: अलग-अलग तत्वों के परमाणु जिनका वजन (द्रव्यमान संख्या) एक जैसा हो, पर उनकी प्रोटॉन संख्या (परमाणु क्रमांक) अलग हो, उन्हें समभारिक कहते हैं।

🎯 Exam Tip: समभारिकों की परिभाषा में "भिन्न परमाणु क्रमांक" और "समान द्रव्यमान संख्या" इन दो मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट करना न भूलें।

 

Question 7. परमाणु में उपस्थित मूल कणों के नाम लिखिए।
Answer: परमाणु में मुख्य रूप से तीन मूल कण उपस्थित होते हैं। ये हैं इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन। इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित होते हैं, प्रोटॉन धनावेशित होते हैं और न्यूट्रॉन उदासीन होते हैं।
In simple words: परमाणु के तीन सबसे छोटे हिस्से होते हैं: इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन।

🎯 Exam Tip: इन तीनों कणों के नाम, उनके आवेश और परमाणु में उनकी स्थिति को हमेशा याद रखें।

 

Question 8. परमाणु भार को परिभाषित कीजिए।
Answer: परमाणु भार- किसी तत्व का परमाणु भार वह संख्या है जो यह दर्शाती है कि तत्व का एक परमाणु कार्बन-12 परमाणु के 1/12वें भाग से कितना गुना भारी है। यह मूल रूप से किसी परमाणु का सापेक्ष द्रव्यमान होता है।
In simple words: परमाणु भार एक संख्या है जो बताती है कि कोई परमाणु हाइड्रोजन के परमाणु से या कार्बन के 1/12वें हिस्से से कितना भारी है।

🎯 Exam Tip: परमाणु भार की परिभाषा में सापेक्षता का उल्लेख और किसी मानक परमाणु (जैसे कार्बन-12) के संदर्भ को शामिल करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. परमाणु क्रमांक किसे कहते हैं ?
Answer: परमाणु क्रमांक- किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉन की कुल संख्या को परमाणु क्रमांक या परमाणु संख्या कहते हैं। इसे 'Z' अक्षर से दर्शाते हैं। परमाणु क्रमांक किसी तत्व की पहचान बताता है।
In simple words: परमाणु क्रमांक का मतलब है कि एक परमाणु के केंद्र में कितने प्रोटॉन हैं।

🎯 Exam Tip: परमाणु क्रमांक को हमेशा प्रोटॉन की संख्या के रूप में परिभाषित करें, क्योंकि यही तत्व की पहचान निर्धारित करता है।

 

Question 10. न्यूट्रॉन पर आवेश बताइए।
Answer: न्यूट्रॉन पर कोई विद्युत आवेश नहीं होता है। यह एक उदासीन कण है। इसका मतलब है कि यह न तो धनात्मक होता है और न ही ऋणात्मक।
In simple words: न्यूट्रॉन पर कोई चार्ज नहीं होता। यह बिलकुल उदासीन होता है।

🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉन (ऋणात्मक), प्रोटॉन (धनात्मक) और न्यूट्रॉन (उदासीन) के आवेशों को याद रखें।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 12. प्रोटॉन के खोजकर्ता का नाम लिखिए।
Answer: प्रोटॉन के खोजकर्ता गोल्डस्टीन थे। उन्होंने 1886 में कैनाल किरणों की खोज की, जिससे धनावेशित कणों, यानी प्रोटॉन की उपस्थिति का पता चला।
In simple words: प्रोटॉन को गोल्डस्टीन ने खोजा था।

🎯 Exam Tip: प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के खोजकर्ताओं के नाम अक्सर आपस में भ्रमित हो जाते हैं, इसलिए इन्हें ध्यान से याद करें।

 

Question 13. विसर्जन नलिका क्या है ? सचित्र समझाइये।
Answer: विसर्जन नलिका एक लंबी कांच की ट्यूब होती है जिसके दोनों सिरों पर धातु के इलेक्ट्रोड लगे होते हैं। इससे एक वैक्यूम पंप जुड़ा होता है, जिससे ट्यूब के अंदर का दबाव कम या ज्यादा किया जा सकता है। इसका उपयोग कैथोड और एनोड किरणों जैसे विभिन्न प्रकार के विकिरणों का अध्ययन करने के लिए किया जाता है। कैथोड एनोड निर्वात पम्प को चित्र-विसर्जन नलिका
In simple words: विसर्जन नलिका एक लंबी कांच की ट्यूब होती है जिसमें इलेक्ट्रोड लगे होते हैं और एक पंप से दबाव को नियंत्रित किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: विसर्जन नलिका का चित्र बनाते समय कैथोड, एनोड और वैक्यूम पंप कनेक्शन को सही ढंग से लेबल करना सुनिश्चित करें।

 

Question 14. थॉमसन के परमाणु प्रतिरूप को समझाइए।
Answer: थॉमसन का परमाणु प्रतिरूप- 1898 में जे.जे. थॉमसन ने परमाणु का पहला मॉडल प्रस्तुत किया, जिसे 'प्लम पुडिंग मॉडल' भी कहा जाता है। इस मॉडल के अनुसार, परमाणु 10\(^{-10}\) मीटर त्रिज्या का एक ठोस धनावेशित गोला होता है। इस गोले में ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन इस तरह धंसे होते हैं जैसे तरबूज में बीज धंसे होते हैं। इसमें परमाणु के धनावेश और ऋणावेश बराबर होते हैं, जिससे परमाणु उदासीन रहता है। + e e e e चित्र-थॉमसन का परमाणु प्रतिरूप
In simple words: थॉमसन ने परमाणु को एक धनात्मक गोले के रूप में बताया, जिसमें छोटे ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन (जैसे तरबूज के बीज) फैले हुए थे।

🎯 Exam Tip: थॉमसन के मॉडल को 'प्लम पुडिंग' या 'तरबूज मॉडल' के रूप में याद रखना और इसमें धनावेशित भाग व इलेक्ट्रॉनों की स्थिति को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 15. मोल अवधारणा क्या है ? समझाइए।
Answer: मोल अवधारणा- किसी पदार्थ का एक मोल उसके ग्राम परमाणु भार अथवा ग्राम अणुभार के बराबर होता है। एक मोल में हमेशा \(6.022 \times 10^{23}\) कण (परमाणु, अणु या आयन) होते हैं। यह संख्या एवोगैड्रो संख्या कहलाती है। उदाहरण- 18 ग्राम जल (H\(_{2}\)O) 1 मोल के बराबर है, 17 ग्राम अमोनिया (NH\(_{3}\)) 1 मोल है, 44 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO\(_{2}\)) 1 मोल है, और 12 ग्राम कार्बन (C) भी 1 मोल है।
In simple words: मोल किसी पदार्थ की वह मात्रा है जिसका द्रव्यमान उसके परमाणु या अणु के ग्राम में वजन के बराबर होता है, और इसमें हमेशा \(6.022 \times 10^{23}\) कण होते हैं।

🎯 Exam Tip: मोल अवधारणा को परिभाषित करते समय एवोगैड्रो संख्या ( \(6.022 \times 10^{23}\) ) और मोलर द्रव्यमान के बीच संबंध को स्पष्ट करना न भूलें।

 

Question 16. डॉल्टन के परमाणु सिद्धान्त के मुख्य बिन्दु लिखिए।
Answer: डॉल्टन का परमाणु सिद्धान्त जॉन डॉल्टन ने 1808 में प्रस्तुत किया था, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
• सभी द्रव्य बहुत छोटे-छोटे कणों, जिन्हें परमाणु कहते हैं, से मिलकर बने होते हैं।
• परमाणु अविभाज्य कण हैं, जिन्हें न तो रासायनिक अभिक्रिया में बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।
• एक तत्व के सभी परमाणु आकार, द्रव्यमान और रासायनिक गुणों में समान होते हैं।
• भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणु भिन्न-भिन्न आकार, द्रव्यमान और रासायनिक गुणधर्म रखते हैं।
• भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणु एक निश्चित और सरल अनुपात में मिलकर यौगिक अणु बनाते हैं।
• रासायनिक परिवर्तन वास्तव में परमाणुओं का संयोजन, वियोजन अथवा पुनर्विन्यास होता है।
In simple words: डॉल्टन ने कहा था कि सभी चीजें बहुत छोटे कणों (परमाणुओं) से बनी हैं, जिन्हें तोड़ा या बनाया नहीं जा सकता। एक ही तत्व के परमाणु समान होते हैं, जबकि अलग-अलग तत्वों के परमाणु भिन्न होते हैं।

🎯 Exam Tip: डॉल्टन के परमाणु सिद्धांत के मुख्य बिंदुओं को क्रमबद्ध रूप से और संक्षिप्त वाक्यों में प्रस्तुत करें, जिसमें परमाणु की अविभाज्यता और रासायनिक अभिक्रियाओं में उनकी भूमिका शामिल हो।

 

Question 17. कैथोड किरणों के गुणधर्म बताइए।
Answer: कैथोड किरणों के मुख्य गुणधर्म निम्नलिखित हैं:
• ये सीधी रेखा में गमन करती हैं।
• ये प्रतिदीप्ति उत्पन्न करती हैं, यानी जब ये किसी पदार्थ से टकराती हैं तो उसे चमकाती हैं।
• ये विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों से प्रभावित होती हैं, जो दर्शाता है कि इन पर आवेश होता है।
• ये ऋणावेशित कणों (इलेक्ट्रॉनों) से बनी होती हैं।
• जब ये किसी गैस से गुजरती हैं तो उसे आयनित कर देती हैं।
In simple words: कैथोड किरणें सीधी चलती हैं, चीजों को चमकाती हैं, बिजली और चुंबक से मुड़ जाती हैं, और ये ऋणात्मक चार्ज वाले छोटे कणों से बनी होती हैं।

🎯 Exam Tip: कैथोड किरणों के गुणों को याद करते समय उनके आवेश, गति, और प्रभावों पर ध्यान केंद्रित करें।

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 19. रदरफोर्ड के स्वर्णपत्र कण प्रकीर्णन के प्रेक्षणों पर आधारित परमाणु प्रतिरूप की विवेचना करिए।
Answer: रदरफोर्ड के स्वर्ण पत्र प्रकीर्णन के प्रयोग के प्रेक्षण- 1911 में अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने अपने सहयोगियों के साथ एक प्रयोग किया, जिसमें उन्होंने बहुत पतली सोने की पन्नी (लगभग 10\(^{-7}\) मीटर मोटी) पर अल्फा कणों की बौछार की। इस प्रयोग में उन्हें निम्नलिखित प्रेक्षण प्राप्त हुए:
1. अधिकांश अल्फा कण बिना किसी विचलन के सीधे सोने की पन्नी से निकल गए।
2. कुछ अल्फा कण छोटे कोणों (जैसे 90° या 120°) पर विक्षेपित हुए।
3. लगभग 20,000 अल्फा कणों में से केवल एक कण ऐसा था जो 180° के कोण से विक्षेपित होकर वापस लौट आया, जैसे कि वह किसी कठोर वस्तु से टकराया हो।
प्रेक्षणों के आधार पर रदरफोर्ड ने परमाणु प्रतिरूप प्रस्तुत किया। जिसके अनुसार:
1. परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान और समस्त धनावेश एक बहुत छोटे क्षेत्र में केंद्रित होता है, जिसे 'नाभिक' कहते हैं। नाभिक की त्रिज्या लगभग 10\(^{-15}\) मीटर होती है।
2. परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त होता है, जिसमें ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार कक्षाओं में घूमते हैं। इन कक्षाओं को 'कोश' कहा जाता है।
3. धन आवेशित नाभिक और ऋणावेशित इलेक्ट्रॉनों के बीच लगने वाला स्थिर विद्युत आकर्षण बल, तीव्र गति से वृत्तीय पथ में इलेक्ट्रॉनों की गति के लिए आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल प्रदान करता है। यह मॉडल सौर मंडल के समान था, जहाँ ग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते हैं। + चित्र-रदरफोर्ड का परमाणु प्रतिरूप
In simple words: रदरफोर्ड ने सोने की पन्नी पर अल्फा कणों से हमला करके देखा कि अधिकतर कण सीधे निकल गए, कुछ मुड़ गए, और बहुत कम वापस आ गए। इससे उन्होंने बताया कि परमाणु का सारा वजन और प्लस चार्ज उसके केंद्र में एक छोटे से हिस्से (नाभिक) में होता है और इलेक्ट्रॉन उसके चारों ओर घूमते हैं।

🎯 Exam Tip: रदरफोर्ड के प्रयोग के तीनों मुख्य प्रेक्षणों और उनसे निकले निष्कर्षों को सही क्रम में और स्पष्ट रूप से लिखना बहुत जरूरी है, साथ ही नाभिक की अवधारणा को भी समझाएं।

 

Question 20. नील्स बोर के परमाणु प्रतिरूप की मुख्य अवधारणा को चित्रित करिए।
Answer: नील्स बोर के परमाणु प्रतिरूप की मुख्य अवधारणाएँ 1913 में प्रस्तुत की गईं और ये रदरफोर्ड के मॉडल की कमियों को दूर करती हैं:
1. हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित त्रिज्या और ऊर्जा की वृत्ताकार कक्षाओं में ही घूम सकते हैं। इन कक्षाओं को 'कक्ष' या 'कोश' कहते हैं और इन्हें 1, 2, 3, 4... या K, L, M, N अक्षरों से दर्शाया जाता है।
2. इन निश्चित कक्षाओं में घूमते समय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का विकिरण नहीं करते हैं। इसका मतलब है कि उनकी ऊर्जा स्थिर रहती है।
3. इन कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग (mvr) हमेशा \( \frac{h}{2\pi} \) का पूर्ण गुणज होता है, जहाँ \(h\) प्लांक नियतांक है। \(m\) इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान है, \(v\) इलेक्ट्रॉन का वेग है और \(r\) कक्षा की त्रिज्या है।
4. इलेक्ट्रॉन एक निचली ऊर्जा स्तर वाली कक्षा से उच्च ऊर्जा स्तर वाली कक्षा में जाने पर ऊर्जा का अवशोषण करते हैं, और उच्च ऊर्जा स्तर वाली कक्षा से निचली ऊर्जा स्तर वाली कक्षा में आने पर ऊर्जा का उत्सर्जन करते हैं। इस उत्सर्जित या अवशोषित ऊर्जा को विकिरण के रूप में देखा जाता है।
नीचे हाइड्रोजन, सोडियम और पोटैशियम परमाणुओं के इलेक्ट्रॉन वितरण के चित्र दिए गए हैं, जो बोर के मॉडल पर आधारित हैं: 1p 0n चित्र-हाइड्रोजन परमाणु प्रतिरूप 11P 12n सोडियम तत्व की परमाणु संरचना 19p 20n पोटेशियम तत्व की परमाणु संरचना
In simple words: बोर के मॉडल ने बताया कि इलेक्ट्रॉन केवल खास कक्षाओं में ही घूमते हैं और उनकी ऊर्जा स्थिर रहती है। वे ऊर्जा छोड़ते या लेते हैं जब वे एक कक्षा से दूसरी कक्षा में जाते हैं।

🎯 Exam Tip: बोर के मॉडल के प्रत्येक अभिगृहीत को स्पष्ट रूप से समझें और लिखें। क्वांटम संख्याएँ (K, L, M, N) और कोणीय संवेग की अवधारणा महत्वपूर्ण है। दिए गए परमाणु संरचनाओं में इलेक्ट्रॉनों का वितरण सही ढंग से दिखाएं।

 

Question 21. धन किरणें क्या हैं ? इन्हें कैसे प्राप्त किया जा सकता है ? इनके गुणधर्म भी लिखिए।
Answer: धन किरणें- सन् 1886 में गोल्डस्टीन ने एक संशोधित विसर्जन नलिका (छिद्रित कैथोड वाली) में कम दबाव और उच्च वोल्टेज पर एक नई प्रकार की किरणों की खोज की, जिन्हें 'धन किरणें' या 'कैनाल किरणें' कहा गया। इन्हें ऐनोड किरणें भी कहते हैं क्योंकि ये एनोड से कैथोड की ओर जाती प्रतीत होती हैं।
धन किरणों के गुणधर्म:
• धन किरणें सीधी रेखा में गमन करती हैं।
• इनका आवेश/द्रव्यमान (e/m) अनुपात नलिका में भरी हुई गैस की प्रकृति पर निर्भर करता है, जो कैथोड किरणों के विपरीत है।
• ये विद्युत एवं चुंबकीय क्षेत्रों से प्रभावित होती हैं।
• ये धनावेशित कणों की बनी होती हैं।
• ये द्रव्य किरणें ही होती हैं, यानी इनमें द्रव्यमान होता है। छिद्रित कैथोड एनोड कैथोड उच्च वोल्टेज स्रोत कम दाब पर गैस चित्र-विसर्जन नलिका में धन किरणों का बनना
In simple words: धन किरणें धनात्मक कणों से बनी होती हैं, जिन्हें एक खास ट्यूब में कम दबाव और ज्यादा बिजली से बनाया जाता है। ये सीधी चलती हैं और गैस के प्रकार पर निर्भर करती हैं।

🎯 Exam Tip: धन किरणों को कैनाल किरणों के नाम से भी जाना जाता है। उनके गुणधर्मों की तुलना कैथोड किरणों से करना महत्वपूर्ण है, खासकर उनके आवेश और e/m अनुपात के संदर्भ में।

आंकिक प्रश्न

 

Question 22. एक तत्व के समस्थानिक में न्यूट्रॉन की संख्या 9 है तथा द्रव्यमान संख्या का मान 17 है तो तत्व का नाम व परमाणु क्रमांक बताइए।
Answer: द्रव्यमान संख्या (A) = 17
न्यूट्रॉन की संख्या (n) = 9
परमाणु क्रमांक (Z) = ?
हम जानते हैं कि द्रव्यमान संख्या (A) = परमाणु क्रमांक (Z) + न्यूट्रॉन की संख्या (n)
\( \implies \) Z = A - n
\( \implies \) Z = 17 - 9
\( \implies \) Z = 8
चूंकि तत्व का परमाणु क्रमांक 8 है, यह ऑक्सीजन का परमाणु क्रमांक है। ऑक्सीजन एक बहुत ही सामान्य तत्व है जो हमारे वायुमंडल में पाया जाता है।
In simple words: द्रव्यमान संख्या से न्यूट्रॉन की संख्या घटाने पर परमाणु क्रमांक 8 मिलता है। परमाणु क्रमांक 8 वाला तत्व ऑक्सीजन है।

🎯 Exam Tip: द्रव्यमान संख्या, परमाणु क्रमांक और न्यूट्रॉन की संख्या के बीच के संबंध को याद रखना (A = Z + n) ऐसे सवालों को हल करने की कुंजी है।

 

Question 23. NTP पर 22.4 लीटर नाइट्रोजन का भार ग्रामों में बताए।
Answer: NTP (सामान्य ताप एवं दाब) पर प्रत्येक गैस के 22.4 लीटर आयतन का भार उसके एक मोल के बराबर होता है।
नाइट्रोजन (N\(_{2}\)) का अणु भार = \(2 \times 14 = 28\) ग्राम।
इसलिए, NTP पर 22.4 लीटर नाइट्रोजन का भार 28 ग्राम के बराबर होगा। नाइट्रोजन गैस वायुमंडल का एक महत्वपूर्ण घटक है।
In simple words: NTP पर 22.4 लीटर नाइट्रोजन गैस का वजन उसके एक मोल के बराबर होता है, जो कि 28 ग्राम है।

🎯 Exam Tip: NTP पर किसी भी गैस के मोलर आयतन (22.4 लीटर) और उसके मोलर द्रव्यमान के संबंध को हमेशा याद रखें।

 

Question 24. कार्बन के 1.5 मोल में कार्बन के कितने परमाणु उपस्थित होते हैं ?
Answer: हम जानते हैं कि 1 मोल किसी भी पदार्थ में एवोगैड्रो संख्या के बराबर परमाणु होते हैं।
एवोगैड्रो संख्या = \( 6.022 \times 10^{23} \) परमाणु/मोल।
इसलिए, कार्बन के 1.5 मोल में परमाणुओं की संख्या = \( 1.5 \times 6.022 \times 10^{23} \)
\( \implies \) परमाणुओं की संख्या = \( 9.033 \times 10^{23} \) परमाणु।
कार्बन प्रकृति में विभिन्न रूपों में पाया जाता है, जैसे हीरा और ग्रेफाइट।
In simple words: 1.5 मोल कार्बन में कुल \( 9.033 \times 10^{23} \) परमाणु होते हैं, क्योंकि एक मोल में एवोगैड्रो संख्या जितने परमाणु होते हैं।

🎯 Exam Tip: मोल और एवोगैड्रो संख्या के बीच संबंध को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह कणों की संख्या की गणना करने में मदद करता है।

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उनके उत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. हाइड्रोजन परमाणु में नहीं पाया जाता है
(a) प्रोटॉन
(b) न्यूट्रॉन
(c) इलेक्ट्रॉन
(d) इलेक्ट्रॉन व प्रोटॉन।
Answer: (b) न्यूट्रॉन
In simple words: सामान्य हाइड्रोजन परमाणु में केवल एक प्रोटॉन और एक इलेक्ट्रॉन होता है, इसमें न्यूट्रॉन नहीं पाया जाता है।

🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन के समस्थानिकों (प्रोटियम, ड्यूटीरियम, ट्राइटियम) में प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन की संख्या को अलग-अलग याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. किसी परमाणु में प्रोटॉन की संख्या होती है
(a) न्यूट्रॉन के बराबर
(b) इलेक्ट्रॉन के बराबर
(c) परमाणु द्रव्यमान के बराबर
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
Answer: (b) इलेक्ट्रॉन के बराबर
In simple words: एक उदासीन परमाणु में प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन की संख्या हमेशा बराबर होती है ताकि परमाणु पर कुल आवेश शून्य रहे।

🎯 Exam Tip: एक उदासीन परमाणु के लिए, प्रोटॉन की संख्या (परमाणु क्रमांक) इलेक्ट्रॉन की संख्या के बराबर होती है। आयन बनने पर इलेक्ट्रॉन की संख्या बदल सकती है।

 

Question 4. परमाणु भार का आधुनिक आधार क्या है
(a) O\(^{16}\)
(b) C\(^{12}\)
(c) H\(^{1}\)
(d) C\(^{135}\)
Answer: (b) C\(^{12}\)
In simple words: आजकल परमाणु भार को कार्बन-12 परमाणु के द्रव्यमान के 1/12वें हिस्से के आधार पर मापा जाता है।

🎯 Exam Tip: कार्बन-12 को परमाणु भार के मानक के रूप में उपयोग किया जाता है। इसे याद रखना परमाणु भार से संबंधित प्रश्नों में मदद करेगा।

 

Question 5. रदरफोर्ड ने कणों के प्रकीर्णन प्रयोग में प्रथम बार दर्शाया कि परमाणु में होता है।
(a) इलेक्ट्रॉन
(b) प्रोटॉन
(c) नाभिक
(d) न्यूट्रॉन।
Answer: (c) नाभिक
In simple words: रदरफोर्ड के प्रयोग से पता चला कि परमाणु के केंद्र में एक छोटा और घना हिस्सा होता है जिसे नाभिक कहते हैं।

🎯 Exam Tip: रदरफोर्ड का स्वर्ण पत्र प्रयोग नाभिक की खोज के लिए जाना जाता है। यह परमाणु संरचना के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

 

Question 6. कैथोड किरणों के गुण हैं।
(a) ये सीधी रेखा में गमन करती हैं।
(b) ये प्रतिदीप्ति उत्पन्न करती हैं।
(c) ये ऋणावेशित कणों से बनती हैं।
(d) उपर्युक्त सभी।
Answer: (d) उपर्युक्त सभी।
In simple words: कैथोड किरणें सीधी चलती हैं, चीजों को चमकाती हैं और ऋणात्मक आवेश वाले कणों से बनी होती हैं।

🎯 Exam Tip: कैथोड किरणों के सभी प्रमुख गुणों को याद रखें, क्योंकि यह अक्सर एक बहुविकल्पीय प्रश्न के रूप में पूछा जाता है।

 

Question 8. आवोगाद्रो संख्या है
(a) \( 6.022 \times 10^{23} \)
(b) \( 6.022 \times 10^{22} \)
(c) \( 6.022 \times 10^{24} \)
(d) \( 6.022 \times 10^{25} \)
Answer: (a) \( 6.022 \times 10^{23} \)
In simple words: एवोगैड्रो संख्या बताती है कि किसी भी पदार्थ के एक मोल में कितने कण (परमाणु, अणु या आयन) होते हैं।

🎯 Exam Tip: एवोगैड्रो संख्या का सटीक मान और इसकी घात (\(10^{23}\)) को याद रखना मोल अवधारणा से संबंधित सभी गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. कार्बन – 13 के 100 परमाणुओं की परमाणु द्रव्यमान इकाई का भार क्या होगा?
Answer: कार्बन-13 के एक परमाणु का द्रव्यमान 13 amu होता है।
इसलिए, कार्बन-13 के 100 परमाणुओं का कुल भार = \( 13 \text{ amu} \times 100 \)
\( \implies \) कुल भार = \( 1300 \text{ amu} \)।
कार्बन-13 कार्बन का एक समस्थानिक है जिसमें 7 न्यूट्रॉन होते हैं।
In simple words: कार्बन-13 के 100 परमाणुओं का वजन 1300 परमाणु द्रव्यमान इकाई (amu) होगा, क्योंकि एक परमाणु का वजन 13 amu होता है।

🎯 Exam Tip: परमाणु द्रव्यमान इकाई (amu) को किसी एक परमाणु के द्रव्यमान को व्यक्त करने के लिए उपयोग किया जाता है। ऐसे प्रश्नों में बस दिए गए परमाणुओं की संख्या से एक परमाणु के द्रव्यमान को गुणा करें।

 

Question 2. क्लोरीन परमाणु (Z = 17) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
Answer: क्लोरीन परमाणु का परमाणु क्रमांक (Z) 17 है। इसका मतलब है कि इसमें 17 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
इन इलेक्ट्रॉनों का वितरण बोर-ब्यूरी योजना के अनुसार इस प्रकार होगा:
K कोश में 2 इलेक्ट्रॉन
L कोश में 8 इलेक्ट्रॉन
M कोश में 7 इलेक्ट्रॉन
तो, क्लोरीन परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( 2, 8, 7 \) है। क्लोरीन एक हैलोजन तत्व है।
In simple words: क्लोरीन के इलेक्ट्रॉन पहले कोश में 2, दूसरे में 8 और तीसरे (बाहरी) कोश में 7 होते हैं।

🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखते समय, कोशों की अधिकतम क्षमता (2n\(^{2}\)) को ध्यान में रखें और इलेक्ट्रॉनों को क्रमानुसार भरें।

 

Question 3. क्लोरीन की परमाणु संख्या 17 है। इसमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्या है?
Answer: किसी उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या उसके परमाणु क्रमांक के बराबर होती है।
चूंकि क्लोरीन की परमाणु संख्या 17 है, इसलिए इसमें 17 इलेक्ट्रॉन होंगे।
क्लोरीन एक अत्यधिक प्रतिक्रियाशील अधातु है।
In simple words: क्लोरीन की परमाणु संख्या 17 है, इसलिए इसमें 17 इलेक्ट्रॉन होते हैं।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि एक उदासीन परमाणु में, प्रोटॉन की संख्या, इलेक्ट्रॉन की संख्या और परमाणु क्रमांक सभी समान होते हैं।

 

Question 4. कार्बन (Z= 6), फॉस्फोरस (Z=15) तथा गन्धक (Z = 16) परमाणुओं में कितने संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं?
Answer: संयोजी इलेक्ट्रॉन वे इलेक्ट्रॉन होते हैं जो परमाणु के सबसे बाहरी कोश में होते हैं।
• कार्बन (Z=6) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( 2, 4 \) है, इसलिए इसमें 4 संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं।
• फॉस्फोरस (Z=15) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( 2, 8, 5 \) है, इसलिए इसमें 5 संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं।
• गन्धक (Z=16) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( 2, 8, 6 \) है, इसलिए इसमें 6 संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं।
संयोजी इलेक्ट्रॉन ही किसी तत्व की रासायनिक प्रतिक्रियाशीलता निर्धारित करते हैं।
In simple words: कार्बन में 4, फॉस्फोरस में 5 और गन्धक में 6 बाहरी इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिन्हें संयोजी इलेक्ट्रॉन कहते हैं।

🎯 Exam Tip: संयोजी इलेक्ट्रॉन की संख्या ज्ञात करने के लिए, आपको तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखना होगा और सबसे बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या देखनी होगी।

 

Question 6. समस्थानिकों की पहचान कीजिए।
Answer: समस्थानिक वे तत्व होते हैं जिनका परमाणु क्रमांक समान होता है लेकिन द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है।
दिए गए विकल्पों में, \( ^{35}_{17}\text{Cl} \) तथा \( ^{37}_{17}\text{Cl} \) समस्थानिक हैं। दोनों का परमाणु क्रमांक (Z) 17 है, जो क्लोरीन का प्रतीक है, लेकिन उनकी द्रव्यमान संख्या (A) क्रमशः 35 और 37 है। क्लोरीन के ये समस्थानिक प्रकृति में पाए जाते हैं।
In simple words: क्लोरीन-35 और क्लोरीन-37 समस्थानिक हैं, क्योंकि उनके प्रोटॉन की संख्या समान है लेकिन द्रव्यमान संख्या अलग-अलग है।

🎯 Exam Tip: समस्थानिकों की पहचान के लिए हमेशा परमाणु क्रमांक (नीचे लिखी संख्या) और द्रव्यमान संख्या (ऊपर लिखी संख्या) पर ध्यान दें।

 

Question 7. दो रेडियोधर्मी समस्थानिकों के नाम बताइए।
Answer: दो रेडियोधर्मी समस्थानिकों के नाम हैं:
1. यूरेनियम-235 (U-235) - इसका उपयोग परमाणु रिएक्टरों और परमाणु हथियारों में होता है।
2. कोबाल्ट-60 (Co-60) - इसका उपयोग कैंसर के इलाज (रेडियोथेरेपी) और औद्योगिक विकिरण में होता है।
ये समस्थानिक अस्थिर होते हैं और रेडियोधर्मिता का उत्सर्जन करते हैं।
In simple words: यूरेनियम-235 और कोबाल्ट-60 दो रेडियोधर्मी समस्थानिक हैं।

🎯 Exam Tip: रेडियोधर्मी समस्थानिकों के नाम के साथ उनके एक-एक उपयोग को याद रखें, क्योंकि यह अक्सर पूछा जाता है।

 

Question 8. किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉनों के व्यवस्थापन को क्या कहा जाता है?
Answer: किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉनों के व्यवस्थापन को 'इलेक्ट्रॉनिक विन्यास' कहा जाता है। यह बताता है कि परमाणु के विभिन्न ऊर्जा स्तरों (कोशों) और उपकोशों में इलेक्ट्रॉन कैसे वितरित होते हैं। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास किसी तत्व के रासायनिक गुणों को निर्धारित करता है।
In simple words: परमाणु में इलेक्ट्रॉन कैसे सजे होते हैं, उसे इलेक्ट्रॉनिक विन्यास कहते हैं।

🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की परिभाषा में ऊर्जा स्तरों और कोशों में इलेक्ट्रॉनों के वितरण को स्पष्ट करें।

 

Question 9. तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से क्या तात्पर्य है?
Answer: तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास का तात्पर्य है कि किसी तत्व के परमाणु में इलेक्ट्रॉन विभिन्न ऊर्जा स्तरों (कोशों) या कक्षाओं में कैसे व्यवस्थित होते हैं। यह व्यवस्था तत्व के रासायनिक व्यवहार और प्रतिक्रियाशीलता को प्रभावित करती है। यह प्रत्येक तत्व के लिए अद्वितीय होता है।
In simple words: इलेक्ट्रॉनिक विन्यास यह बताता है कि किसी परमाणु के इलेक्ट्रॉन अलग-अलग ऊर्जा स्तरों में कैसे फैले हुए हैं।

🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की परिभाषा में ऊर्जा स्तरों/कोशों में इलेक्ट्रॉनों के वितरण के साथ-साथ उनके रासायनिक गुणों पर पड़ने वाले प्रभाव का भी उल्लेख करें।

 

Question 10. कार्बन-14 क्या है?
Answer: कार्बन-14 (C-14) कार्बन का एक समस्थानिक है। इसका मतलब है कि इसमें कार्बन के अन्य रूपों की तरह 6 प्रोटॉन होते हैं, लेकिन इसमें 8 न्यूट्रॉन होते हैं (जबकि सामान्य कार्बन-12 में 6 न्यूट्रॉन होते हैं)। कार्बन-14 एक रेडियोधर्मी समस्थानिक है और इसका उपयोग कार्बन डेटिंग में किया जाता है, जिससे पुरानी वस्तुओं की उम्र का पता लगाया जाता है।
In simple words: कार्बन-14 कार्बन का एक रेडियोधर्मी रूप है जिसका उपयोग पुरानी चीजों की उम्र जानने के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: कार्बन-14 को कार्बन के समस्थानिक के रूप में और इसके मुख्य उपयोग (कार्बन डेटिंग) को याद रखें।

 

Question 11. हाइड्रोजन परमाणु के मूल कण कौन से हैं ?
Answer: सामान्य हाइड्रोजन परमाणु (प्रोटियम) में केवल एक प्रोटॉन और एक इलेक्ट्रॉन होता है। इसमें कोई न्यूट्रॉन नहीं पाया जाता है। प्रोटॉन नाभिक में होता है और इलेक्ट्रॉन उसके चारों ओर घूमता है।
In simple words: हाइड्रोजन परमाणु में एक प्रोटॉन और एक इलेक्ट्रॉन होता है।

🎯 Exam Tip: सामान्य हाइड्रोजन परमाणु की अद्वितीयता को याद रखें कि इसमें न्यूट्रॉन नहीं होता है, जबकि इसके समस्थानिकों में न्यूट्रॉन होते हैं।

 

Question 12. हाइड्रोजन के कितने समस्थानिक हैं ?
Answer: हाइड्रोजन के तीन मुख्य समस्थानिक हैं:
1. प्रोटियम (\( ^{1}_{1}\text{H} \)): इसमें 1 प्रोटॉन, 0 न्यूट्रॉन और 1 इलेक्ट्रॉन होता है।
2. ड्यूटीरियम (\( ^{2}_{1}\text{H} \)): इसमें 1 प्रोटॉन, 1 न्यूट्रॉन और 1 इलेक्ट्रॉन होता है। इसे भारी हाइड्रोजन भी कहते हैं।
3. ट्राइटियम (\( ^{3}_{1}\text{H} \)): इसमें 1 प्रोटॉन, 2 न्यूट्रॉन और 1 इलेक्ट्रॉन होता है। यह एक रेडियोधर्मी समस्थानिक है।
ये सभी रासायनिक रूप से समान व्यवहार करते हैं।
In simple words: हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक हैं: प्रोटियम, ड्यूटीरियम और ट्राइटियम।

🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन के तीनों समस्थानिकों के नाम और उनमें प्रोटॉन, न्यूट्रॉन, इलेक्ट्रॉन की संख्या को याद रखना परीक्षा में मदद करेगा।

 

Question 14. निम्नलिखित परमाणु नाभिकों में से कौन समभारी तथा कौन समस्थानिक हैं
(i) (17 प्रोटॉन + 18 न्यूट्रॉन) तथा (17 प्रोटॉन + 20 न्यूट्रॉन)
(ii) (18 प्रोटॉन + 22 न्यूट्रॉन) तथा (20 प्रोटॉन + 20 न्यूट्रॉन)
Answer:
(i) पहला नाभिक: प्रोटॉन = 17, न्यूट्रॉन = 18. द्रव्यमान संख्या = \( 17 + 18 = 35 \).
दूसरा नाभिक: प्रोटॉन = 17, न्यूट्रॉन = 20. द्रव्यमान संख्या = \( 17 + 20 = 37 \).
यहां दोनों नाभिकों में प्रोटॉन की संख्या समान (17) है लेकिन द्रव्यमान संख्या भिन्न है, इसलिए ये नाभिक 'समस्थानिक' हैं।
(ii) पहला नाभिक: प्रोटॉन = 18, न्यूट्रॉन = 22. द्रव्यमान संख्या = \( 18 + 22 = 40 \).
दूसरा नाभिक: प्रोटॉन = 20, न्यूट्रॉन = 20. द्रव्यमान संख्या = \( 20 + 20 = 40 \).
यहां दोनों नाभिकों की द्रव्यमान संख्या समान (40) है लेकिन प्रोटॉन की संख्या भिन्न है, इसलिए ये नाभिक 'समभारिक' हैं।
समस्थानिक और समभारिक दोनों ही परमाणु के भीतर कणों की व्यवस्था को दर्शाते हैं।
In simple words: (i) पहले उदाहरण में नाभिक 'समस्थानिक' हैं क्योंकि उनमें प्रोटॉन समान हैं लेकिन न्यूट्रॉन अलग हैं। (ii) दूसरे उदाहरण में नाभिक 'समभारिक' हैं क्योंकि उनका कुल द्रव्यमान समान है लेकिन प्रोटॉन की संख्या अलग है।

🎯 Exam Tip: समस्थानिकों (समान Z, भिन्न A) और समभारिकों (भिन्न Z, समान A) की पहचान करने के लिए हमेशा प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की संख्या को ध्यान से जोड़कर द्रव्यमान संख्या ज्ञात करें।

 

Question 15. परमाणु के यदि K और L कोश पूर्णतः भरे हुए हैं, तो उनमें उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या होती है?
Answer: K कोश की अधिकतम क्षमता = 2 इलेक्ट्रॉन।
L कोश की अधिकतम क्षमता = 8 इलेक्ट्रॉन।
यदि K और L दोनों कोश पूर्णतः भरे हुए हैं, तो उनमें उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या = \( 2 + 8 = 10 \)।
यह नियॉन (Neon) तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है।
In simple words: K कोश में 2 इलेक्ट्रॉन और L कोश में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं, तो कुल 10 इलेक्ट्रॉन होते हैं जब दोनों कोश भरे होते हैं।

🎯 Exam Tip: बोर-ब्यूरी योजना के अनुसार प्रत्येक कोश (K, L, M, N) की अधिकतम इलेक्ट्रॉन क्षमता (2n\(^{2}\)) को याद रखें।

 

Question 16. हीलियम परमाणु का परमाणु द्रव्यमान 4u है और उसके नाभिक में दो प्रोटॉन होते हैं। इसमें कितने न्यूट्रॉन होंगे ?
Answer: परमाणु द्रव्यमान (A) = 4u
प्रोटॉन की संख्या (Z) = 2
हम जानते हैं कि न्यूट्रॉन की संख्या = परमाणु द्रव्यमान (A) - प्रोटॉन की संख्या (Z)
\( \implies \) न्यूट्रॉन की संख्या = \( 4 - 2 \)
\( \implies \) न्यूट्रॉन की संख्या = 2।
हीलियम एक निष्क्रिय गैस है और इसका उपयोग गुब्बारों को भरने में किया जाता है।
In simple words: हीलियम परमाणु के द्रव्यमान (4u) से प्रोटॉन की संख्या (2) घटाने पर न्यूट्रॉन की संख्या (2) मिलती है।

🎯 Exam Tip: किसी भी परमाणु में न्यूट्रॉन की संख्या ज्ञात करने के लिए द्रव्यमान संख्या में से परमाणु क्रमांक (प्रोटॉन की संख्या) को घटाया जाता है।

 

Question 17. कार्बन के परमाणु के लिये इलेक्ट्रॉन वितरण लिखिए।
Answer: कार्बन का परमाणु क्रमांक (Z) = 6 है, जिसका मतलब है कि इसमें 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
इलेक्ट्रॉन वितरण (इलेक्ट्रॉनिक विन्यास):
K कोश में 2 इलेक्ट्रॉन
L कोश में 4 इलेक्ट्रॉन
तो, कार्बन का इलेक्ट्रॉन वितरण \( 2, 4 \) है। कार्बन कई कार्बनिक यौगिकों का आधार है।
In simple words: कार्बन के 6 इलेक्ट्रॉन पहले कोश में 2 और दूसरे कोश में 4 होते हैं।

🎯 Exam Tip: कार्बन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उसकी संयोजकता और यौगिक बनाने की क्षमता को दर्शाता है।

 

Question 18. सोडियम परमाणु का इलेक्ट्रॉन वितरण लिखिए।
Answer: सोडियम का परमाणु क्रमांक (Z) = 11 है, जिसका मतलब है कि इसमें 11 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
इलेक्ट्रॉन वितरण (इलेक्ट्रॉनिक विन्यास):
K कोश में 2 इलेक्ट्रॉन
L कोश में 8 इलेक्ट्रॉन
M कोश में 1 इलेक्ट्रॉन
तो, सोडियम का इलेक्ट्रॉन वितरण \( 2, 8, 1 \) है। सोडियम एक अत्यधिक प्रतिक्रियाशील धातु है।
In simple words: सोडियम के 11 इलेक्ट्रॉन पहले कोश में 2, दूसरे में 8 और तीसरे (बाहरी) कोश में 1 होते हैं।

🎯 Exam Tip: सोडियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास याद रखें, क्योंकि इसके बाहरी कोश में केवल एक इलेक्ट्रॉन होने के कारण यह बहुत प्रतिक्रियाशील होता है।

 

Question 20. परमाणु की कक्षा (44) में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्या होगी?
Answer: कक्षा (शेल) 4 में इलेक्ट्रॉनों की संख्या \( n=4 \) द्वारा निर्धारित की जाती है। इस सूत्र के अनुसार, किसी भी कक्षा में अधिकतम इलेक्ट्रॉन की संख्या \( 2n^2 \) होती है। इस प्रकार, चौथी कक्षा में अधिकतम \( 2 \times (4)^2 = 32 \) इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं। यह सूत्र हमें बताता है कि जैसे-जैसे कक्षाएँ नाभिक से दूर होती जाती हैं, उनमें अधिक इलेक्ट्रॉन समाहित हो सकते हैं।
In simple words: एक कक्षा में कितने इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं, यह बताने के लिए \( 2n^2 \) सूत्र का उपयोग करते हैं। चौथी कक्षा में कुल 32 इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं।

🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करें कि आप \( n \) का मान सही ढंग से पहचानें, जो कि कक्षा की संख्या है।

 

Question 21. 44 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) में उपस्थित अणुओं की संख्या कितनी है?
Answer: कार्बन डाइऑक्साइड \((CO_2)\) का एक मोल उसके आणविक द्रव्यमान के बराबर होता है, जो 44 ग्राम है। एवोगैड्रो संख्या के अनुसार, किसी भी पदार्थ के एक मोल में \(6.022 \times 10^{23}\) अणु होते हैं। इसलिए, 44 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड में अणुओं की संख्या \(6.022 \times 10^{23}\) होगी। यह संख्या हमें बताती है कि बहुत कम मात्रा के पदार्थ में भी कितने सारे छोटे-छोटे कण मौजूद होते हैं।
In simple words: कार्बन डाइऑक्साइड का एक मोल 44 ग्राम के बराबर होता है। एक मोल में हमेशा \(6.022 \times 10^{23}\) अणु होते हैं।

🎯 Exam Tip: मोल अवधारणा के प्रश्नों में सबसे पहले पदार्थ का आणविक या परमाणु द्रव्यमान ज्ञात करें।

 

Question 22. धात्विक त्रिज्या किसे कहते हैं?
Answer: धात्विक त्रिज्या वह दूरी होती है जो धात्विक क्रिस्टल में साथ-साथ जुड़े हुए दो परमाणुओं के केंद्र बिंदुओं के बीच की कुल दूरी का आधा होती है। यह धातुओं के परमाणुओं के आकार को मापने का एक तरीका है। यह त्रिज्या धातुओं के मजबूत धात्विक बंधों और उनकी संरचना को समझने में मदद करती है।
In simple words: जब दो धातु परमाणु एक साथ होते हैं, तो उनके केंद्रों के बीच की आधी दूरी को धात्विक त्रिज्या कहते हैं।

🎯 Exam Tip: धात्विक त्रिज्या की परिभाषा में 'दो परमाणुओं के केंद्र' और 'कुल दूरी का आधा' शब्दों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 23. परमाण्वीय त्रिज्या किसे कहते हैं?
Answer: परमाण्वीय त्रिज्या किसी अलग-थलग परमाणु के नाभिक (केंद्र) से उसके सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन कोष के बीच की दूरी होती है। यह परमाणु के आकार को बताती है। यह त्रिज्या विभिन्न तत्वों के रासायनिक गुणों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि यह रासायनिक प्रतिक्रियाओं में शामिल इलेक्ट्रॉन की दूरी दर्शाती है।
In simple words: एक परमाणु के बीच के हिस्से (नाभिक) से सबसे बाहर वाले इलेक्ट्रॉन तक की दूरी को परमाण्वीय त्रिज्या कहते हैं।

🎯 Exam Tip: परमाण्वीय त्रिज्या की परिभाषा में 'विलगित परमाणु' (अलग-थलग परमाणु) और 'नाभिक से बाह्यतम कोश' का उल्लेख करना आवश्यक है।

 

Question 24. परमाणु की कक्षा में इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग कितना होता है?
Answer: परमाणु की कक्षा में इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग \((mvr)\) हमेशा \(\frac{nh}{2\pi}\) के बराबर या उसका पूर्ण गुणज होता है। यहाँ \(h\) प्लांक नियतांक है, \(n\) मुख्य क्वांटम संख्या है जो कक्षा की संख्या बताती है, \(m\) इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान है, \(v\) इलेक्ट्रॉन का वेग है, और \(r\) कक्षा की त्रिज्या है। यह क्वांटम यांत्रिकी का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है जो बताता है कि इलेक्ट्रॉन ऊर्जा स्तरों में मनमाने ढंग से नहीं घूमते हैं, बल्कि केवल विशिष्ट, स्थिर कक्षाओं में घूमते हैं।
In simple words: इलेक्ट्रॉन अपनी कक्षा में घूमते हुए एक खास गति रखता है। यह गति हमेशा \(\frac{nh}{2\pi}\) के बराबर या उसका गुणा होता है, जहाँ \(h\) एक विशेष संख्या है।

🎯 Exam Tip: बोहर के परमाणु मॉडल के अनुसार, कोणीय संवेग का क्वांटीकरण \(mvr = \frac{nh}{2\pi}\) सूत्र द्वारा व्यक्त किया जाता है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. किसी तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास उसकी संयोजकता से किस प्रकार सम्बन्धित है?
Answer: किसी तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास बताता है कि उसके इलेक्ट्रॉन विभिन्न कक्षाओं में कैसे व्यवस्थित हैं। सबसे बाहरी कक्षा को संयोजकता-कोश कहते हैं। इस संयोजकता-कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या ही उस तत्व की संयोजकता निर्धारित करती है। जिन तत्वों के संयोजकता-कोश में पूरे 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं (या 2 अगर केवल पहली कक्षा हो), वे स्थिर होते हैं और उनकी संयोजकता शून्य होती है। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और संयोजकता का यह संबंध हमें यह समझने में मदद करता है कि विभिन्न तत्व आपस में कैसे प्रतिक्रिया करते हैं।
In simple words: एक तत्व में इलेक्ट्रॉन कैसे बैठे हैं, इसे इलेक्ट्रॉनिक विन्यास कहते हैं। सबसे बाहर वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या ही तय करती है कि तत्व दूसरे तत्वों से कैसे जुड़ेगा, इसे संयोजकता कहते हैं।

🎯 Exam Tip: संयोजकता की गणना करते समय, हमेशा सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन शेल पर ध्यान केंद्रित करें; यह आमतौर पर 8 का नियम पूरा करने की प्रवृत्ति पर आधारित होता है।

 

Question 3. उन तत्वों का सामान्य नाम बताइए जिनके परमाणुओं के संयोजकता कोश में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
Answer: जिन तत्वों के परमाणुओं के संयोजकता कोश (सबसे बाहरी कक्षा) में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं, उन्हें निष्क्रिय गैसें या उत्कृष्ट गैसें (नोबल गैसें) कहा जाता है। इसके उदाहरण निऑन और आर्गन हैं। ये गैसें रासायनिक रूप से बहुत कम प्रतिक्रियाशील होती हैं क्योंकि इनकी बाहरी कक्षा भरी होती है। इन तत्वों को 'उत्कृष्ट' कहा जाता है क्योंकि वे अन्य तत्वों के साथ आसानी से प्रतिक्रिया नहीं करते, जैसे राजा या रानी अपने राज्य में अलग रहते हैं।
In simple words: जिन तत्वों की बाहरी कक्षा में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं, उन्हें अक्रिय गैसें कहते हैं, जैसे निऑन और आर्गन।

🎯 Exam Tip: उत्कृष्ट गैसों के नाम याद रखें और समझें कि उनकी संयोजकता शून्य क्यों होती है।

 

Question 4. परमाणु उदासीन क्यों होता है। यद्यपि इसके भीतर आवेशित कण विद्यमान हैं?
Answer: परमाणु उदासीन होता है क्योंकि इसमें धनावेशित प्रोटॉन और ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन की संख्या बराबर होती है। प्रोटॉन नाभिक में होते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन उनके चारों ओर घूमते हैं। इन विपरीत आवेशों की समान संख्या एक-दूसरे के प्रभाव को रद्द कर देती है, जिससे पूरे परमाणु पर कोई शुद्ध आवेश नहीं होता। यह संतुलन परमाणु को स्थिर रखता है, जिससे वह आसानी से टूटता नहीं है और रासायनिक बंध बना पाता है।
In simple words: परमाणु में जितने प्लस चार्ज वाले प्रोटॉन होते हैं, उतने ही माइनस चार्ज वाले इलेक्ट्रॉन होते हैं। ये एक-दूसरे के चार्ज को खत्म कर देते हैं, इसलिए परमाणु पर कोई चार्ज नहीं होता।

🎯 Exam Tip: परमाणु की उदासीनता को स्पष्ट करने के लिए प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन की समान संख्या तथा उनके विपरीत आवेशों का उल्लेख करें।

 

Question 5. एक बोतल में दो अमिश्रणीय द्रव हैं। इनको कौन-सी विधि से पृथक् किया जा सकता है
(अ) प्रभाजक स्तम्भ द्वारा
(ब) साधारण आसवन द्वारा
(स) विभेदी निष्कर्षण द्वारा
(द) भाप आसवन द्वारा
Answer: (स) विभेदी निष्कर्षण द्वारा
In simple words: अगर दो तरल आपस में नहीं घुलते, तो उनमें से किसी एक चीज़ को निकालने के लिए 'विभेदी निष्कर्षण' का तरीका इस्तेमाल कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: विभेदी निष्कर्षण विधि का चयन तब किया जाता है जब मिश्रण के एक घटक की घुलनशीलता दो अमिश्रणीय विलायकों में भिन्न होती है।

 

Question 6. किसी परमाणु के प्रथम ऊर्जा स्तर में अधिकतम कितने इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं?
Answer: किसी परमाणु के प्रथम ऊर्जा स्तर (जिसे K-कोष भी कहते हैं) में अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं। यह बोहर-बरी के नियम से निर्धारित होता है, जिसके अनुसार किसी भी ऊर्जा स्तर में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या \(2n^2\) होती है, जहाँ \(n\) ऊर्जा स्तर की संख्या है। पहले ऊर्जा स्तर के लिए \(n=1\), इसलिए \(2 \times (1)^2 = 2\) इलेक्ट्रॉन। यह नियम हमें बताता है कि नाभिक के पास वाली कक्षाएँ छोटी होती हैं और उनमें कम इलेक्ट्रॉन समा सकते हैं।
In simple words: परमाणु की पहली कक्षा में सबसे ज़्यादा 2 इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं। यह नियम \(2n^2\) से पता चलता है।

🎯 Exam Tip: बोहर-बरी नियम \(2n^2\) का उपयोग करके किसी भी ऊर्जा स्तर में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना करें।

 

Question 7. परमाणु संख्या तथा द्रव्यमान संख्या को परिभाषित कीजिए।
Answer:
**परमाणु संख्या (Atomic Number):** किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की कुल संख्या को परमाणु संख्या (Z) कहते हैं। यह तत्व की पहचान होती है।
**द्रव्यमान संख्या (Mass Number):** किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या के योग को द्रव्यमान संख्या (A) कहते हैं। यह परमाणु का लगभग पूरा द्रव्यमान बताती है। परमाणु संख्या एक तत्व को दूसरे तत्व से अलग करती है, जबकि द्रव्यमान संख्या एक ही तत्व के विभिन्न समस्थानिकों (आइसोटोप) में अंतर करने में मदद करती है।
In simple words: परमाणु संख्या बताती है कि कितने प्रोटॉन हैं। द्रव्यमान संख्या बताती है कि कितने प्रोटॉन और न्यूट्रॉन एक साथ हैं।

🎯 Exam Tip: परमाणु संख्या केवल प्रोटॉन की संख्या है, जबकि द्रव्यमान संख्या प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों का योग है।

 

Question 8. थॉमसन के परमाणु मॉडल को स्पष्ट कीजिए।
Answer: जे. जे. थॉमसन ने परमाणु का एक मॉडल प्रस्तुत किया, जिसे 'तरबूज मॉडल' या 'प्लम पुडिंग मॉडल' भी कहा जाता है। इस मॉडल के अनुसार, परमाणु 10-10 मीटर त्रिज्या का एक ठोस धनावेशित गोला होता है। इस धनावेशित गोले में ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन इस प्रकार धंसे होते हैं, जैसे तरबूज के लाल गूदे में उसके बीज धंसे होते हैं। उनका मानना था कि धनावेशित और ऋणावेशित आवेश बराबर मात्रा में होते हैं, जिससे परमाणु कुल मिलाकर उदासीन होता है। यह मॉडल पहला ऐसा प्रयास था जिसने परमाणु की आंतरिक संरचना को समझाने की कोशिश की, भले ही बाद में इसे गलत साबित कर दिया गया।

+ e⁻ e⁻ e⁻ e⁻
In simple words: थॉमसन ने कहा कि परमाणु एक बड़ी पॉजिटिव बॉल जैसा है और उसके अंदर छोटे-छोटे नेगेटिव इलेक्ट्रॉन तरबूज के बीजों जैसे धंसे हुए हैं।

🎯 Exam Tip: थॉमसन मॉडल की मुख्य विशेषताओं (धनावेशित गोला, धंसे हुए इलेक्ट्रॉन) और इसकी तरबूज या प्लम पुडिंग उपमा का उल्लेख करें।

 

Question 9. क्या एल्फा कणों का प्रकीर्णन प्रयोग सोने के अतिरिक्त दूसरी धातु की पन्नी से सम्भव होगा?
Answer: अल्फा कणों के प्रकीर्णन का प्रयोग सोने की पन्नी के अलावा किसी अन्य धातु की पन्नी से करना बहुत मुश्किल होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि सोने को अत्यंत पतली पन्नी में बदला जा सकता है, जो केवल कुछ परमाणुओं की मोटाई की होती है। अन्य धातुओं को इतनी पतली पन्नी में बनाना संभव नहीं होता, जिससे अल्फा कण ठीक से प्रकीर्णित हो सकें और प्रयोग के परिणाम स्पष्ट मिल सकें। सोने की अत्यधिक तन्यता और आघातवर्धनीयता (ductility and malleability) इसे इस प्रयोग के लिए आदर्श बनाती है।
In simple words: यह प्रयोग सोने की पतली पन्नी से ही हो पाता है क्योंकि सोने को बहुत पतला बनाया जा सकता है। दूसरी धातु इतनी पतली नहीं बन पातीं।

🎯 Exam Tip: सोने की पन्नी की अत्यधिक पतलेपन की क्षमता को अल्फा कणों के प्रकीर्णन प्रयोग के लिए उसकी उपयुक्तता का मुख्य कारण बताएं।

 

Question 10. समस्थानिक वे समभारिकों में तुलना कीजिए।
Answer:

क्र.समस्थानिक (Isotopes)समभारिक (Isobars)
1.एक ही तत्व के परमाणु होते हैं।विभिन्न तत्वों के परमाणु होते हैं।
2.परमाणु क्रमांक (प्रोटॉनों की संख्या) समान होता है।परमाणु क्रमांक (प्रोटॉनों की संख्या) भिन्न होता है।
3.द्रव्यमान संख्या (प्रोटॉन + न्यूट्रॉन) भिन्न होती है।द्रव्यमान संख्या (प्रोटॉन + न्यूट्रॉन) समान होती है।
4.रासायनिक गुण समान होते हैं।रासायनिक गुण भिन्न होते हैं।
5.भौतिक गुण (जैसे घनत्व, क्वथनांक) भिन्न होते हैं।भौतिक गुण भिन्न होते हैं।
6.इनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है।इनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास भिन्न होता है।
समस्थानिक एक ही तत्व के होते हैं, जबकि समभारिक अलग-अलग तत्वों के होते हैं, यह उनकी मूलभूत पहचान है।
In simple words: समस्थानिक एक ही तत्व के होते हैं लेकिन उनका वजन अलग होता है। समभारिक अलग-अलग तत्व होते हैं लेकिन उनका वजन एक जैसा होता है।

🎯 Exam Tip: समस्थानिक और समभारिक की तुलना करते समय, परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या के अंतर पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 11. हाइड्रोजन के तीनों समस्थानिकों में पाए जाने वाले अवपरमाणुक कणों को सारणीबद्ध कीजिए।
Answer:

समस्थानिकप्रोटॉनइलेक्ट्रॉनन्यूट्रॉन
प्रोटियम (\( {^1_1H} \))110
ड्यूटीरियम (\( {^2_1H} \))111
ट्रीटियम (\( {^3_1H} \))112
ये समस्थानिक हाइड्रोजन के विभिन्न रूप हैं, जो रासायनिक रूप से समान व्यवहार करते हैं, लेकिन उनके द्रव्यमान में अंतर होता है।
In simple words: हाइड्रोजन के तीन भाई हैं: प्रोटियम, ड्यूटीरियम और ट्रीटियम। उनके प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन एक जैसे होते हैं, पर न्यूट्रॉन की संख्या अलग-अलग होती है।

🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन के तीनों समस्थानिकों के प्रोटॉन, इलेक्ट्रॉन और न्यूट्रॉन की संख्या को सटीकता से याद रखें।

 

Question 12. इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के गुणों की तुलना कीजिए।
Answer:

क्र.गुणइलेक्ट्रॉनप्रोटॉनन्यूट्रॉन
1.प्रतीक\( e \) या \( e^0 \)\( p \) या \( H^+ \)\( n \) या \( n^0 \)
2.खोजकर्ताजे. जे. थॉमसनअर्नेस्ट रदरफोर्डजेम्स चैडविक
3.द्रव्यमान (amu)0.0005481.007571.00893
द्रव्यमान (किग्रा)\(9.1095 \times 10^{-31}\)\(1.6727 \times 10^{-27}\)\(1.6750 \times 10^{-27}\)
4.आवेश (कूलॉम)\(-1.6 \times 10^{-19}\)\(+1.6 \times 10^{-19}\)0 (उदासीन)
आवेश (esu)\(-4.808 \times 10^{-10}\)\(+4.808 \times 10^{-10}\)0
5.त्रिज्या (सेमी)\(2.8 \times 10^{-13}\)\(10^{-13}\)\(10^{-13}\)
ये तीनों कण परमाणु के मूलभूत घटक हैं, और इनके गुणों में भिन्नताएँ ही विभिन्न तत्वों और उनके रासायनिक व्यवहार को जन्म देती हैं।
In simple words: इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन परमाणु के तीन मुख्य हिस्से हैं। उनके चिन्ह, किसने खोजा, वजन, चार्ज और आकार अलग-अलग होते हैं।

🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के प्रतीक, खोजकर्ता, द्रव्यमान और आवेश जैसे मुख्य गुणों को सही ढंग से याद करें।

 

Question 13. जे. जे. थॉमसन के परमाणु मॉडल की क्या सीमाएँ थीं?
Answer: जे. जे. थॉमसन के परमाणु मॉडल की मुख्य सीमा यह थी कि यह दूसरे वैज्ञानिकों द्वारा किए गए प्रयोगों के परिणामों को ठीक से समझा नहीं सका। विशेष रूप से, रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग (gold foil experiment) में अल्फा कणों के विभिन्न दिशाओं में प्रकीर्णित होने की घटना को यह मॉडल स्पष्ट नहीं कर पाया। थॉमसन का मॉडल यह नहीं बता पाया कि परमाणु के अंदर एक छोटा, घना, धनावेशित नाभिक होता है। यह मॉडल एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक कदम था, लेकिन इसने परमाणु की जटिल संरचना को पूरी तरह से समझने की हमारी क्षमता को सीमित कर दिया।

+ e⁻ e⁻ e⁻ e⁻
In simple words: थॉमसन का मॉडल यह नहीं समझा पाया कि रदरफोर्ड के प्रयोग में अल्फा कण परमाणु से टकराकर अलग-अलग दिशाओं में क्यों मुड़े।

🎯 Exam Tip: थॉमसन मॉडल की मुख्य सीमा रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग के परिणामों को समझाने में इसकी असफलता है।

 

Question 14. रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की क्या सीमाएँ थीं?
Answer: रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की मुख्य सीमा यह थी कि यह परमाणु के स्थायित्व (stability) को समझा नहीं सका। उनके मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन धनावेशित नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार कक्षाओं में घूमते हैं। मैक्सवेल के विद्युत चुम्बकीय सिद्धांत के अनुसार, कोई भी आवेशित कण जब त्वरित गति करता है, तो वह ऊर्जा का विकिरण करता है। यदि इलेक्ट्रॉन लगातार ऊर्जा का विकिरण करेगा, तो उसकी ऊर्जा कम होती जाएगी, जिससे उसकी कक्षाएँ छोटी होती जाएंगी और अंततः वह नाभिक में गिर जाएगा। इसका मतलब होगा कि परमाणु अस्थायी होगा, जबकि परमाणु वास्तव में बहुत स्थिर होते हैं। इस समस्या का समाधान रदरफोर्ड का मॉडल नहीं दे सका।

N e⁻
In simple words: रदरफोर्ड का मॉडल यह नहीं बता पाया कि इलेक्ट्रॉन घूमते हुए अपनी ऊर्जा क्यों नहीं खोते और नाभिक में गिरकर परमाणु को अस्थिर क्यों नहीं कर देते।

🎯 Exam Tip: रदरफोर्ड मॉडल की सबसे बड़ी कमी यह थी कि यह परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर सका, क्योंकि घूमते हुए इलेक्ट्रॉन को ऊर्जा खोनी चाहिए और नाभिक में गिर जाना चाहिए।

 

Question 15. न्यूट्रॉन के महत्त्वपूर्ण गुणधर्म क्या हैं?
Answer: न्यूट्रॉन परमाणु का एक महत्वपूर्ण उप-परमाण्विक कण है, जिसके निम्नलिखित मुख्य गुणधर्म हैं:
1. न्यूट्रॉन उदासीन होता है, यानी उस पर कोई विद्युत आवेश नहीं होता। इसे 'n' प्रतीक से दर्शाया जाता है।
2. न्यूट्रॉन की अनुमानित त्रिज्या लगभग \(10^{-13}\) सेमी होती है।
3. न्यूट्रॉन का द्रव्यमान लगभग \(1.6748 \times 10^{-27}\) किलोग्राम या \(1.00893\) परमाणु द्रव्यमान इकाई (amu) होता है, जो प्रोटॉन के द्रव्यमान से थोड़ा अधिक है।
4. इसकी भेदन क्षमता (penetrating power) बहुत अधिक होती है, लेकिन यह कॉस्मिक किरणों की भेदन क्षमता से कम है।
5. एक स्वतंत्र न्यूट्रॉन अस्थिर होता है और लगभग 15 मिनट में एक प्रोटॉन, एक इलेक्ट्रॉन और एक एंटी-न्यूट्रिनो में क्षय (decay) हो जाता है, इस प्रक्रिया में ऊर्जा भी उत्सर्जित होती है। न्यूट्रॉन की उदासीन प्रकृति परमाणु बमों और परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जहाँ यह बिना किसी विद्युत प्रतिकर्षण के नाभिक में प्रवेश कर सकता है।
In simple words: न्यूट्रॉन पर कोई चार्ज नहीं होता। इसका आकार बहुत छोटा होता है और वजन प्रोटॉन से थोड़ा ज्यादा होता है। यह चीजों को आसानी से भेद सकता है।

🎯 Exam Tip: न्यूट्रॉन की उदासीनता, द्रव्यमान और भेदन क्षमता जैसे प्रमुख गुणों को याद रखें।

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. कैथोड किरणों और कैनाल किरणों की मुख्य विभिन्नताओं का वर्णन कीजिए।
Answer:

क्र.गुणधर्मकैथोड किरणें (Cathode Rays)कैनाल किरणें (Canal Rays)
1.कण की प्रकृतिऋणावेशित इलेक्ट्रॉन होते हैं।धनावेशित आयन होते हैं।
2.उत्पत्ति का स्थानकैथोड से उत्पन्न होते हैं।एनोड और कैथोड के बीच की गैस के आयनीकरण से उत्पन्न होते हैं।
3.आवेशऋणात्मकधनात्मक
4.द्रव्यमाननगण्य (इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान)गैस के परमाणुओं के द्रव्यमान के बराबर
5.भेदन क्षमताअधिक होती है।कम होती है।
6.e/m अनुपातनिश्चित और उच्च होता है, गैस पर निर्भर नहीं करता।गैस की प्रकृति पर निर्भर करता है, कैथोड किरणों से कम होता है।
7.आयनन क्षमताकम होती है।अधिक होती है।
8.गमन पथसीधी रेखा में गमन करती हैं।सीधी रेखा में गमन करती हैं।
9.विद्युत/चुम्बकीय क्षेत्र में विक्षेपणधनात्मक प्लेट की ओर विक्षेपित होती हैं।ऋणात्मक प्लेट की ओर विक्षेपित होती हैं।
कैथोड किरणें और कैनाल किरणें दोनों ही विसर्जन नलिका प्रयोगों से खोजी गई थीं, लेकिन इनकी प्रकृति और गुणों में मूलभूत अंतर होता है।
In simple words: कैथोड किरणें नेगेटिव इलेक्ट्रॉन होती हैं, जो पतली और तेज चलती हैं। कैनाल किरणें पॉजिटिव आयन होती हैं, जो गैस पर निर्भर करती हैं और धीमी चलती हैं।

🎯 Exam Tip: कैथोड और कैनाल किरणों के गुणों की तुलना करते समय, उनके आवेश, द्रव्यमान, e/m अनुपात और स्रोत गैस पर निर्भरता पर ध्यान दें।

 

Question 2. समस्थानिकों के मुख्य अनुप्रयोग क्या हैं?
Answer: समस्थानिकों के कई महत्वपूर्ण अनुप्रयोग (उपयोग) हैं:
1. **पुरातत्व और भू-कालानुक्रम (Dating):** पुरातत्वविद् किसी वस्तु में मौजूद विभिन्न समस्थानिकों की सापेक्षिक बहुतायत (relative abundance) का पता लगाकर प्राचीन पौधों, जानवरों या मानव अवशेषों की आयु का निर्धारण करते हैं। उदाहरण के लिए, कार्बन-14 डेटिंग।
2. **परमाणु ऊर्जा:** यूरेनियम के समस्थानिकों (जैसे यूरेनियम-235) का उपयोग परमाणु विखंडन प्रक्रियाओं में किया जाता है, जिससे परमाणु रिएक्टरों में बिजली उत्पादन के लिए भारी मात्रा में ऊर्जा प्राप्त होती है।
3. **विस्फोटक निर्माण:** कुछ समस्थानिकों का उपयोग विभिन्न प्रकार के विस्फोटक बनाने में किया जाता है।
4. **भूगर्भीय आयु निर्धारण:** चट्टानों और खनिजों में रेडियोधर्मी समस्थानिकों के क्षय दर का उपयोग करके उनकी आयु का पता लगाया जा सकता है।
5. **चिकित्सा उपचार:** कैंसर जैसे गंभीर रोगों के इलाज में रेडियोधर्मी समस्थानिकों का उपयोग होता है। उदाहरण के लिए, कोबाल्ट-60 का उपयोग कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए विकिरण चिकित्सा में किया जाता है। रेडियोधर्मी समस्थानिकों की नियंत्रित शक्ति ने चिकित्सा, ऊर्जा और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में क्रांति ला दी है।
In simple words: समस्थानिकों का उपयोग पुरानी चीजों की उम्र जानने, परमाणु ऊर्जा बनाने, बम बनाने और कैंसर का इलाज करने में होता है।

🎯 Exam Tip: समस्थानिकों के अनुप्रयोगों को याद करते समय, प्रत्येक उपयोग के साथ एक विशिष्ट उदाहरण (जैसे कार्बन-14 डेटिंग, यूरेनियम-235, कोबाल्ट-60) जोड़ें।

आंकिक प्रश्न

 

Question 1. सोडियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1 है। सोडियम-23 के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों तथा न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।
Answer: सोडियम (Na) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1 दिया गया है।
इससे पता चलता है कि परमाणु में कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या \(2 + 8 + 1 = 11\) है।
एक उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों की संख्या के बराबर होती है।
\( \implies \) इसलिए, प्रोटॉनों की संख्या = 11.
सोडियम का द्रव्यमान संख्या (जो सोडियम-23 में 23 है) प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या होती है।
\( \implies \) न्यूट्रॉनों की संख्या = द्रव्यमान संख्या - प्रोटॉनों की संख्या
\( \implies \) न्यूट्रॉनों की संख्या = \(23 - 11\)
\( \implies \) न्यूट्रॉनों की संख्या = 12.
अतः, सोडियम के नाभिक में 11 प्रोटॉन और 12 न्यूट्रॉन उपस्थित हैं। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास हमें यह भी बताता है कि सोडियम की संयोजकता 1 है, जिसका अर्थ है कि यह एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर स्थिर हो सकता है।
In simple words: सोडियम में कुल 11 इलेक्ट्रॉन हैं, इसलिए 11 प्रोटॉन भी हैं। द्रव्यमान संख्या 23 होने के कारण, न्यूट्रॉन की संख्या \(23 - 11 = 12\) है।

🎯 Exam Tip: प्रोटॉनों की संख्या हमेशा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में इलेक्ट्रॉनों के योग के बराबर होती है, और न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात करने के लिए द्रव्यमान संख्या में से प्रोटॉनों की संख्या घटाएँ।

 

Question 2. किसी तत्व का परमाणु क्रमांक 18 है। इस तत्व की बाह्य कक्षा में कितने प्रोटॉन तथा इलेक्ट्रॉन होंगे?
Answer: तत्व का परमाणु क्रमांक 18 है।
एक उदासीन परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या उसके परमाणु क्रमांक के बराबर होती है।
\( \implies \) प्रोटॉनों की संख्या = 18.
सभी प्रोटॉन परमाणु के नाभिक में स्थित होते हैं, इसलिए बाह्य कक्षा में कोई प्रोटॉन नहीं होगा (प्रोटॉन शून्य)।
उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या भी प्रोटॉनों की संख्या के बराबर होती है।
\( \implies \) इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या = 18.
इस तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \(2, 8, 8\) होगा।
\( \implies \) इस विन्यास के अनुसार, तत्व की बाह्यतम कक्षा में 8 इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं। यह तत्व एक उत्कृष्ट गैस (जैसे आर्गन) होगा, क्योंकि इसकी बाहरी कक्षा पूरी तरह से भरी हुई है, जिससे यह रासायनिक रूप से कम क्रियाशील होता है।
In simple words: परमाणु क्रमांक 18 है, तो 18 प्रोटॉन और कुल 18 इलेक्ट्रॉन हैं। प्रोटॉन केवल बीच में (नाभिक में) होते हैं, इसलिए बाहर कोई प्रोटॉन नहीं। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 8 है, तो सबसे बाहर की कक्षा में 8 इलेक्ट्रॉन हैं।

🎯 Exam Tip: प्रोटॉन हमेशा नाभिक में रहते हैं; वे बाहरी कक्षा में कभी नहीं होते। इलेक्ट्रॉनों की संख्या उसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से पता चलती है।

 

Question 3. एक तत्व का परमाणु क्रमांक 19 तथा द्रव्यमान संख्या 39 है। इसके नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।
Answer: तत्व का परमाणु क्रमांक 19 है, जिसका अर्थ है कि उसमें 19 प्रोटॉन हैं।
तत्व की द्रव्यमान संख्या 39 है।
न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात करने के लिए, हम द्रव्यमान संख्या में से प्रोटॉनों की संख्या घटाते हैं।
\( \implies \) न्यूट्रॉनों की संख्या = द्रव्यमान संख्या - प्रोटॉनों की संख्या
\( \implies \) न्यूट्रॉनों की संख्या = \(39 - 19\)
\( \implies \) न्यूट्रॉनों की संख्या = 20.
अतः, इस तत्व के नाभिक में 20 न्यूट्रॉन उपस्थित हैं। यह तत्व पोटेशियम (\(K\)) है, जो एक क्षार धातु है और एक इलेक्ट्रॉन खोकर स्थिर होना पसंद करता है।
In simple words: परमाणु क्रमांक 19 का मतलब 19 प्रोटॉन हैं। द्रव्यमान संख्या 39 है, तो न्यूट्रॉन की संख्या \(39 - 19 = 20\) होगी।

🎯 Exam Tip: न्यूट्रॉनों की संख्या निकालने का सीधा सूत्र है: द्रव्यमान संख्या - परमाणु क्रमांक (या प्रोटॉनों की संख्या)।

 

Question 4. एक तत्व का परमाणु द्रव्यमान 27 है। इस तत्व के नाभिक में 14 न्यूट्रॉन हैं। तत्व की संयोजकता क्या है?
Answer: तत्व का परमाणु द्रव्यमान 27 है और इसमें 14 न्यूट्रॉन हैं।
सबसे पहले, हम प्रोटॉनों की संख्या ज्ञात करेंगे, जो परमाणु क्रमांक के बराबर होती है।
प्रोटॉनों की संख्या = परमाणु द्रव्यमान - न्यूट्रॉनों की संख्या
\( \implies \) प्रोटॉनों की संख्या = \(27 - 14\)
\( \implies \) प्रोटॉनों की संख्या = 13.
चूंकि परमाणु क्रमांक 13 है, तो इस तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \(2, 8, 3\) होगा।
संयोजकता किसी परमाणु की बाहरी कक्षा में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या से निर्धारित होती है।
\( \implies \) इस तत्व की बाहरी कक्षा में 3 इलेक्ट्रॉन हैं, इसलिए इसकी संयोजकता 3 होगी। यह तत्व एल्यूमीनियम (\(Al\)) है, जो तीन इलेक्ट्रॉन खोकर अपने अष्टक को पूरा करता है।
In simple words: तत्व का वजन 27 और न्यूट्रॉन 14 हैं, तो प्रोटॉन \(27 - 14 = 13\) होंगे। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 3 है, इसलिए इसकी संयोजकता 3 है।

🎯 Exam Tip: संयोजकता ज्ञात करने के लिए, हमेशा तत्व का परमाणु क्रमांक निकालें, फिर उसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखें और अंत में बाहरी कक्षा के इलेक्ट्रॉनों की संख्या देखें।

 

Question 5. एक तत्व X के परमाणु में जिसकी परमाणु संख्या 17 है, कितने संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं? इस परमाणु के संयोजी कोश का नाम लिखिए।
Answer: तत्व X की परमाणु संख्या 17 है, जिसका अर्थ है कि इसमें 17 इलेक्ट्रॉन हैं।
इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \(2, 8, 7\) होगा।
सबसे बाहरी कक्षा में उपस्थित इलेक्ट्रॉन संयोजी इलेक्ट्रॉन कहलाते हैं।
\( \implies \) इस तत्व में 7 संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं।
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में कक्षाओं को K, L, M, N... अक्षरों से दर्शाया जाता है। पहली कक्षा K, दूसरी L, और तीसरी M होती है।
\( \implies \) चूंकि 7 इलेक्ट्रॉन तीसरी कक्षा में हैं, इसलिए संयोजी कोश का नाम M होगा। यह तत्व क्लोरीन (\(Cl\)) है, जो एक हैलोजन है और एक इलेक्ट्रॉन प्राप्त करके अपना अष्टक पूरा करने की प्रवृत्ति रखता है।
In simple words: परमाणु संख्या 17 वाले तत्व X का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7 है। सबसे बाहर की कक्षा में 7 इलेक्ट्रॉन हैं, जो संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं। यह सबसे बाहर की कक्षा 'M' है।

🎯 Exam Tip: संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या सीधे इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की अंतिम संख्या से प्राप्त होती है, और कक्षाओं के नामों (K, L, M) को सही क्रम में याद रखना महत्वपूर्ण है।

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