RBSE Solutions Class 9 Science Chapter 12 आकाशीय पिण्ड एवं भारतीय पंचांग

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Detailed Chapter 12 आकाशीय पिण्ड एवं भारतीय पंचांग RBSE Solutions for Class 9 Science

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Class 9 Science Chapter 12 आकाशीय पिण्ड एवं भारतीय पंचांग RBSE Solutions PDF

आकाशीय पिण्ड एवं भारतीय पंचांग

पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. जिन पिण्डों में अपना स्वयं का प्रकाश एवं ऊष्मा होती है उन्हें किस नाम से जानते हैं ?
(अ) तारे
(ब) ग्रह
(स) उपग्रह
(द) उल्काएँ।
Answer: (अ) तारे
In simple words: जिन पिण्डों की अपनी रोशनी और गर्मी होती है, उन्हें तारे कहते हैं। सूर्य भी एक तारा है क्योंकि उसकी अपनी गर्मी और प्रकाश होता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि तारे अपनी रोशनी खुद बनाते हैं, जबकि ग्रह और उपग्रह तारों की रोशनी से चमकते हैं।

 

Question 2. सौर मण्डल में चन्द्रमा को किस श्रेणी में रखा गया हैं ?
(अ) तारा
(ब) ग्रह
(स) उपग्रह
(द) क्षुद्रग्रह
Answer: (स) उपग्रह
In simple words: सौर मंडल में, चंद्रमा को उपग्रह की श्रेणी में रखा गया है क्योंकि यह पृथ्वी के चारों ओर घूमता है। उपग्रह ऐसे खगोलीय पिण्ड होते हैं जो ग्रहों की परिक्रमा करते हैं।

🎯 Exam Tip: उपग्रह हमेशा किसी ग्रह के चारों ओर घूमते हैं, जबकि ग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते हैं।

 

Question 3. भारतीय पंचांगानुसार नक्षत्रों की संख्या कितनी
(अ) 15
(ब) 27
(स) 12
(द) 7
Answer: (ब) 27
In simple words: भारतीय पंचांग के अनुसार, आकाश में 27 नक्षत्रों को गिना जाता है। ये नक्षत्र चंद्रमा के रास्ते में आने वाले तारों के समूह होते हैं, जो ज्योतिष और समय की गणना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

🎯 Exam Tip: भारतीय ज्योतिष में नक्षत्रों का उपयोग शुभ-अशुभ समय, विवाह और अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए किया जाता है।

 

Question 5. हमारे सौर मण्डल का सबसे बड़ा पिण्ड कौन-सा है ?
(अ) बृहस्पति
(ब) सूर्य
(स) पृथ्वी
(द) शनि।
Answer: (ब) सूर्य
In simple words: हमारे पूरे सौरमंडल में सूर्य सबसे बड़ा पिण्ड है। सूर्य इतना विशाल है कि इसमें लगभग 99% से अधिक सौरमंडल का कुल द्रव्यमान समाहित है और यह पृथ्वी से लगभग 109 गुना बड़ा है।

🎯 Exam Tip: सूर्य हमारे सौरमंडल का केंद्र है और इसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण सभी ग्रह इसके चारों ओर घूमते हैं।

 

Question 6. हमारे सौर मण्डल का सबसे बड़ा ग्रह कौन सा है?
(अ) बृहस्पति
(ब) शनि
(स) अरुण
(द) वरुण
Answer: (अ) बृहस्पति
In simple words: हमारे सौर मंडल में बृहस्पति ग्रह सबसे बड़ा है। यह इतना बड़ा है कि इसमें हमारे सभी अन्य ग्रहों से भी ज़्यादा पदार्थ समा सकता है।

🎯 Exam Tip: बृहस्पति एक विशालकाय गैस-ग्रह है, जिसका मतलब है कि यह ज़्यादातर गैसों से बना है, जिसमें ठोस सतह बहुत कम या न के बराबर है।

 

Question 7. अधिक मास कितने वर्ष के अन्तराल के बाद आता है ?
(अ) 1 वर्ष बाद
(ब) 2 वर्ष बाद
(स) 3 वर्ष बाद
(द) 4 वर्ष बाद
Answer: (ब) 2 वर्ष बाद
In simple words: अधिक मास, जिसे मलमास भी कहते हैं, हर दो से तीन वर्ष के अंतराल पर आता है। यह चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच के अंतर को संतुलित करने के लिए होता है।

🎯 Exam Tip: अधिक मास भारतीय पंचांग की एक विशेष व्यवस्था है जो चंद्र-सौर कैलेंडर को सौर वर्ष से मेल खाने में मदद करती है, ताकि त्यौहार और ऋतुएँ सही समय पर आएं।

 

Question 8. दक्षिणायन के प्रारम्भ में सूर्य की स्थिति किस राशि पर होती है?
Answer: दक्षिणायन के प्रारम्भ में सूर्य की स्थिति कर्क राशि पर होती है। यह वह समय होता है जब सूर्य कर्क संक्रांति में प्रवेश करता है।
In simple words: जब दक्षिणायन शुरू होता है, तो सूर्य कर्क राशि में होता है।

🎯 Exam Tip: दक्षिणायन और उत्तरायण सूर्य की पृथ्वी के सापेक्ष वार्षिक गति के कारण होते हैं, जिससे दिन और रात की अवधि बदलती है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. अंकगणित पर आधारित पुस्तक लीलावती के लेखक कौन थे ?
Answer: लीलावती नामक अंकगणित की पुस्तक के लेखक भास्कराचार्य थे। यह पुस्तक 12वीं सदी में लिखी गई थी।
In simple words: लीलावती किताब भास्कराचार्य ने लिखी थी।

🎯 Exam Tip: भास्कराचार्य भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे जिन्होंने 'सिद्धांत शिरोमणि' भी लिखी थी, जिसका एक भाग लीलावती है।

 

Question 2. प्रथम भारतीय उपग्रह का नाम किस भारतीय वैज्ञानिक के नाम पर रखा गया है ?
Answer: भारत के पहले उपग्रह का नाम महान भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट के नाम पर 'आर्यभट्ट' रखा गया था। इसे 1975 में लॉन्च किया गया था।
In simple words: भारत के पहले उपग्रह का नाम आर्यभट्ट वैज्ञानिक के नाम पर रखा गया था।

🎯 Exam Tip: भारत का पहला उपग्रह 'आर्यभट्ट' 19 अप्रैल 1975 को सोवियत संघ द्वारा लॉन्च किया गया था।

 

Question 3. शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के बाद कौन-सी तिथि आती है ?
Answer: शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के बाद पूर्णिमा तिथि आती है। पूर्णिमा चंद्र महीने का अंतिम दिन होता है जब चंद्रमा पूरी तरह से दिखाई देता है।
In simple words: शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के बाद पूर्णिमा आती है।

🎯 Exam Tip: भारतीय पंचांग में शुक्ल पक्ष में चंद्रमा बढ़ता हुआ दिखाई देता है, और पूर्णिमा पर वह पूर्ण रूप से चमकता है।

 

Question 4. यदि पूर्णिमा को चन्द्रमा मृगशिरा नक्षत्र पर है तो उस चन्द्रमास का क्या नाम होगा ?
Answer: यदि पूर्णिमा को चन्द्रमा मृगशिरा नक्षत्र पर है तो उस चंद्र मास का नाम 'मार्गशीर्ष' होगा। भारतीय पंचांग में चंद्र मास का नाम पूर्णिमा के दिन चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, उसके आधार पर रखा जाता है।
In simple words: अगर पूर्णिमा को चंद्रमा मृगशिरा नक्षत्र में हो, तो उस महीने को मार्गशीर्ष कहते हैं।

🎯 Exam Tip: चंद्र मास के नामकरण में पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की स्थिति महत्वपूर्ण होती है।

 

Question 5. कौन-से ग्रह का कक्षीय काल सबसे कम है?
Answer: बुध ग्रह का कक्षीय काल सबसे कम है। बुध सूर्य के सबसे नज़दीक है, इसलिए यह 88 दिनों में सूर्य की परिक्रमा पूरी कर लेता है।
In simple words: बुध ग्रह सबसे कम समय में सूर्य का चक्कर लगाता है, सिर्फ 88 दिनों में।

🎯 Exam Tip: किसी भी ग्रह का कक्षीय काल सूर्य से उसकी दूरी पर निर्भर करता है; जो ग्रह सूर्य के जितने करीब होता है, उसका कक्षीय काल उतना ही कम होता है।

 

Question 6. सूर्य से दूरी के आधार पर ग्रहों को क्रम से लिखिए।
Answer: सूर्य से दूरी के आधार पर ग्रहों का क्रम इस प्रकार है:
• बुध
• शुक्र
• पृथ्वी
• मंगल
• बृहस्पति
• शनि
• अरुण (यूरेनस)
• वरुण (नेपच्यून)।
In simple words: सूर्य से दूर जाते हुए ग्रहों का क्रम है: बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण।

🎯 Exam Tip: इस क्रम को याद रखने के लिए कोई मज़ेदार वाक्य बनाकर अभ्यास कर सकते हैं, जैसे "My Very Educated Mother Just Served Us Noodles"।

 

Question 7. स्थलीय ग्रहों के नाम लिखिए।
Answer: स्थलीय ग्रह वे होते हैं जो चट्टानों और धातुओं से बने होते हैं, और उनकी सतह ठोस होती है। हमारे सौरमंडल में स्थलीय ग्रह हैं: बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल।
In simple words: बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल स्थलीय ग्रह कहलाते हैं।

🎯 Exam Tip: स्थलीय ग्रह आकार में छोटे होते हैं और सूर्य के करीब पाए जाते हैं, जबकि गैस-ग्रह (जैसे बृहस्पति, शनि) बहुत बड़े और ज़्यादा दूर होते हैं।

 

Question 8. पृथ्वी के अतिरिक्त किस ग्रह पर जीवन की सम्भावना खोजी जा रही है ?
Answer: पृथ्वी के अलावा मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना खोजी जा रही है। वैज्ञानिक मानते हैं कि मंगल पर कभी पानी मौजूद था और यह भविष्य में जीवन को सहारा दे सकता है।
In simple words: वैज्ञानिक पृथ्वी के अलावा मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना ढूंढ रहे हैं।

🎯 Exam Tip: मंगल पर जीवन की खोज के लिए कई रोवर्स भेजे गए हैं जो वहाँ की मिट्टी, चट्टानों और वातावरण का अध्ययन कर रहे हैं।

 

Question 9. भारतीय पंचांगानुसार छाया ग्रह की श्रेणी में कौन-से ग्रह आते हैं?
Answer: भारतीय पंचांग के अनुसार, राहु और केतु को छाया ग्रह की श्रेणी में रखा गया है। ये वास्तविक खगोलीय पिण्ड नहीं हैं, बल्कि चंद्रमा और पृथ्वी के क्रांतिपथ के कटाव बिंदु हैं।
In simple words: भारतीय पंचांग में राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है।

🎯 Exam Tip: राहु और केतु का ज्योतिष में विशेष महत्व है और इन्हें ग्रहण के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

 

Question 10. दो ग्रह A और B सूर्य से क्रमशः \( \times \) और \( Y \) दूरी पर हैं यदि \( Y \) का मान \( \times \) से अधिक है तो कौन से ग्रह का परिभ्रमण काल अधिक होगा ?
Answer: यदि ग्रह B की सूर्य से दूरी \( Y \) का मान ग्रह A की दूरी \( \times \) से अधिक है, तो ग्रह B का परिभ्रमण काल अधिक होगा। यह केपलर के ग्रहों की गति के नियमों के अनुसार है, जहाँ दूर के ग्रहों को सूर्य की परिक्रमा करने में अधिक समय लगता है।
In simple words: जिस ग्रह की सूर्य से दूरी ज़्यादा होती है, उसे सूर्य का एक चक्कर लगाने में ज़्यादा समय लगता है, इसलिए B का परिभ्रमण काल अधिक होगा।

🎯 Exam Tip: केपलर का तीसरा नियम बताता है कि किसी ग्रह का कक्षीय काल (परिक्रमण अवधि) सूर्य से उसकी औसत दूरी के घन के वर्गमूल के समानुपाती होता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. पृथ्वी से दूरी के आधार पर ग्रहों को क्रम से लिखिए।
Answer: पृथ्वी से दूरी के आधार पर ग्रहों का क्रम इस प्रकार है:
• शुक्र
• मंगल
• बुध
• बृहस्पति
• शनि
• अरुण
• वरुण
In simple words: पृथ्वी से सबसे नज़दीक शुक्र है, फिर मंगल, बुध, बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण।

🎯 Exam Tip: शुक्र पृथ्वी के सबसे करीब है क्योंकि इसकी कक्षा पृथ्वी की कक्षा के सबसे नज़दीक पड़ती है।

 

Question 3. नक्षत्र से क्या अभिप्राय है ? इन्हें कितने भागों में बाँटा गया है ? किन्हीं पाँच नक्षत्रों के नाम लिखिए।
Answer: नक्षत्र का अर्थ है तारों का समूह जो चंद्रमा के क्रांतिपथ में आता है। चंद्रमा लगभग 27 दिनों में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करता है, और इस दौरान वह विभिन्न तारों के समूहों से होकर गुजरता है, जिन्हें नक्षत्र कहा जाता है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार, नक्षत्रों को कुल 27 भागों में बाँटा गया है।
पाँच नक्षत्रों के नाम:
• अश्विनी
• पुष्य
• चित्रा
• मूल
• रेवती
In simple words: नक्षत्र चंद्रमा के रास्ते में आने वाले तारों के समूह होते हैं, और भारतीय पंचांग में ये 27 होते हैं। अश्विनी, पुष्य, चित्रा, मूल और रेवती कुछ नक्षत्रों के नाम हैं।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक नक्षत्र का अपना एक विशिष्ट प्रभाव होता है और इनका उपयोग भारतीय ज्योतिष में व्यक्तियों के भाग्य और घटनाओं का आकलन करने के लिए किया जाता है।

 

Question 4. भारतीय पंचांगानुसार तिथि का निर्धारण किस प्रकार होता है ? संक्षेप में समझाइए।
Answer: भारतीय पंचांग में तिथि का निर्धारण सूर्य और चंद्रमा की सापेक्ष स्थिति के आधार पर होता है। अमावस्या के अंत में जब सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि पर होते हैं, तो उसके बाद चंद्रमा सूर्य से क्रमशः 12 अंश का अंतर पूरा करता है। इस कालांश अंतरांश को प्रतिपदा तिथि कहते हैं। इसी प्रकार, शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में 15-15 तिथियाँ होती हैं, जो चंद्रमा की कलाओं के अनुसार बदलती हैं।
In simple words: भारतीय पंचांग में तिथि, सूर्य और चंद्रमा की जगह देखकर तय होती है। जब चंद्रमा सूर्य से 12 अंश आगे बढ़ता है, तो एक नई तिथि शुरू होती है। हर पखवाड़े में 15 तिथियाँ होती हैं।

🎯 Exam Tip: तिथियों का निर्धारण खगोलीय गणनाओं पर आधारित होता है और यह भारतीय त्यौहारों और शुभ मुहूर्तों को तय करने में मदद करता है।

 

Question 5. ग्रहों के नाम उनके आकार के क्रम में लिखिए।
Answer: ग्रहों के नाम उनके बढ़ते आकार के क्रम में इस प्रकार हैं: बुध-मंगल-शुक्र-पृथ्वी-वरुण-अरुण-शनि-बृहस्पति। इसका अर्थ है कि बुध सबसे छोटा है, उसके बाद मंगल, शुक्र, पृथ्वी, वरुण, अरुण, शनि और बृहस्पति सबसे बड़ा ग्रह है।
In simple words: छोटे से बड़े आकार में ग्रहों का क्रम है: बुध, मंगल, शुक्र, पृथ्वी, वरुण, अरुण, शनि, बृहस्पति।

🎯 Exam Tip: बृहस्पति सबसे बड़ा ग्रह है, और यह अपनी विशालता के कारण सौरमंडल में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

Question 6. उत्तरायण-दक्षिणायण से क्या अभिप्राय है? समझाइए।
Answer: उत्तरायण और दक्षिणायण पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करने के कारण होते हैं। पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक निश्चित मार्ग पर घूमती है जिसे क्रांतिवृत्त कहते हैं। जब पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, तो सूर्य की किरणें भूमध्य रेखा के उत्तर या दक्षिण में पड़ती हैं, जिससे उत्तरायण (उत्तरी गोलार्ध में दिन लंबे होते हैं) और दक्षिणायन (दक्षिणी गोलार्ध में दिन लंबे होते हैं) की स्थिति आती है। पृथ्वी के क्रांतिवृत्त को दो भागों में बांटा गया है, जिससे ये दोनों स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं।
In simple words: उत्तरायण और दक्षिणायन पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर घूमने से होते हैं। उत्तरायण में उत्तरी गोलार्ध में दिन बड़े होते हैं और दक्षिणायन में दक्षिणी गोलार्ध में दिन बड़े होते हैं।

🎯 Exam Tip: उत्तरायण मकर संक्रांति से शुरू होकर कर्क संक्रांति तक होता है, जबकि दक्षिणायन कर्क संक्रांति से मकर संक्रांति तक होता है।

 

Question 7. पृथ्वी की विभिन्न गतियों के बारे में समझाइए ?
Answer: पृथ्वी की दो मुख्य गतियाँ हैं। पहली, पृथ्वी लगभग एक वर्ष में सूर्य का चक्कर लगाती है, जिसे परिक्रमण गति कहते हैं। इस गति के कारण सूर्य हर महीने एक नई राशि में रहता हुआ प्रतीत होता है। जब पृथ्वी एक राशि से दूसरी राशि में जाती है, तो उसे संक्रान्ति कहते हैं। दूसरी, पृथ्वी अपनी धुरी पर भी घूमती है, जिसे घूर्णन गति कहते हैं। इसी घूर्णन गति के कारण दिन और रात होते हैं।
In simple words: पृथ्वी दो तरह से घूमती है: एक साल में सूर्य का चक्कर लगाती है (परिक्रमण), और अपनी धुरी पर घूमती है जिससे दिन-रात होते हैं (घूर्णन)।

🎯 Exam Tip: पृथ्वी की परिक्रमण गति के कारण ही मौसम बदलते हैं और वर्ष की अवधि निर्धारित होती है।

 

Question 8. भारतीय पंचांगानुसार राशि का सम्बन्ध किसकी गति से है ? राशियों का निर्धारण किस प्रकार किया गया है?
Answer: भारतीय पंचांग के अनुसार राशि का संबंध पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर घूमने से है, जिसे पृथ्वी-भ्रमण कहते हैं। पृथ्वी के क्रांतिपथ को 12 बराबर भागों में बांटा गया है। इन प्रत्येक भाग को 'राशि' कहा जाता है। इन राशियों के नाम और आकृतियाँ आकाश में मौजूद तारों के विशेष समूहों (नक्षत्रों) के आधार पर तय की गई हैं। एक राशि में 2 या 3 नक्षत्र तक हो सकते हैं, और प्रत्येक नक्षत्र को 4 चरणों में बांटा गया है, जिससे एक राशि में कुल नौ चरण होते हैं। चूँकि पृथ्वी लगभग एक वर्ष में सूर्य का चक्कर लगाती है, इसलिए सूर्य प्रत्येक राशि पर लगभग एक माह रहता है, और इन राशियों की स्थितियों को 12 सौर मास कहते हैं।
In simple words: भारतीय पंचांग में राशियों का संबंध पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर घूमने से है। पृथ्वी के घूमने के रास्ते को 12 हिस्सों में बांटा गया है, जिन्हें राशि कहते हैं। इन राशियों के नाम तारों के समूहों के आधार पर रखे गए हैं।

🎯 Exam Tip: राशि चक्र का उपयोग भारतीय ज्योतिष में व्यक्ति के जन्म के समय ग्रहों की स्थिति का निर्धारण करने और भविष्यवाणियाँ करने के लिए किया जाता है।

 

Question 9. मकर संक्रान्ति से क्या अभिप्राय है?
Answer: मकर संक्रान्ति वह समय होता है जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है। इसे सूर्य की संक्रान्ति भी कहते हैं। पृथ्वी की गति के कारण जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में जाता है, तो इस घटना को संक्रान्ति कहते हैं, और मकर राशि में प्रवेश करने वाली संक्रान्ति को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है।
In simple words: मकर संक्रांति तब होती है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है।

🎯 Exam Tip: मकर संक्रांति आमतौर पर 14 या 15 जनवरी को मनाई जाती है और यह सर्दियों के अंत और लंबे दिनों की शुरुआत का प्रतीक है।

 

Question 10. अधिक मास से आप क्या समझते हैं ?
Answer: अधिक मास वह महीना होता है जो चंद्र वर्ष और सौर वर्ष की अवधि में सामंजस्य स्थापित करने के लिए जोड़ा जाता है। चूंकि चंद्र वर्ष (लगभग 354 दिन) सौर वर्ष (लगभग 365 दिन) से छोटा होता है, इस अंतर को पूरा करने के लिए हर तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त चंद्र मास जोड़ दिया जाता है। इस अतिरिक्त महीने को ही अधिक मास कहा जाता है।
In simple words: अधिक मास एक अतिरिक्त महीना है जो हर दो-तीन साल में जोड़ा जाता है। यह चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के समय को बराबर करने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: अधिक मास के दौरान शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं, और इस महीने को भक्ति और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष माना जाता है।

 

Question 11. बुध पारगमण को समझाइए तथा इसकी तुलना शुक्र पारगमण से कीजिए।
Answer: बुध पारगमण एक खगोलीय घटना है जिसमें बुध ग्रह पृथ्वी और सूर्य के बीच से होकर गुजरता है। इस दौरान, बुध सूर्य की सतह पर एक छोटे काले धब्बे के रूप में दिखाई देता है। शुक्र पारगमण भी एक समान घटना है, जिसमें शुक्र ग्रह सूर्य और पृथ्वी के बीच से होकर गुजरता है, और वह भी सूर्य की सतह पर एक काले धब्बे के रूप में दिखता है। दोनों ही घटनाओं में ग्रह सूर्य के सामने से गुजरते हैं।
In simple words: बुध पारगमण तब होता है जब बुध सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है, और शुक्र पारगमण तब होता है जब शुक्र सूर्य और पृथ्वी के बीच आता है। दोनों ही घटनाओं में ग्रह सूर्य पर एक छोटे काले धब्बे जैसे दिखते हैं।

🎯 Exam Tip: बुध और शुक्र पारगमण दुर्लभ खगोलीय घटनाएँ हैं जो ग्रहों की गति और सूर्य की संरचना का अध्ययन करने में मदद करती हैं।

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. आर्यभट्ट की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए इनके प्रमुख वैज्ञानिक कार्यों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
Answer: आर्यभट्ट, भारतीय गणित और खगोल विज्ञान के एक महान विद्वान थे, जिनका जन्म 476 ईस्वी में हुआ था। उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की और बाद में वहीं शिक्षक भी रहे। उन्होंने 'आर्यभट्टीय' नामक एक महत्वपूर्ण ज्योतिष ग्रंथ लिखा, जिसमें गणित और खगोल विज्ञान के कई पहलुओं का वर्णन किया गया है। यह ग्रंथ भारतीय गणितीय साहित्य में बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया है। आर्यभट्टीय के गणितीय भाग में अंकगणित, बीजगणित, सरल त्रिकोणमिति और गोलीय त्रिकोणमिति के सिद्धांत शामिल हैं।
आर्यभट्ट के प्रमुख वैज्ञानिक कार्य:
1. उन्होंने 'गीतिकपाद' (13 छंद) में समय की बड़ी इकाइयों जैसे कल्प, मनवंतर और युग का वर्णन किया।
2. 'गणितपाद' (33 छंद) में क्षेत्रमिति, सरल, द्विघात, युगपत और अनिश्चित समीकरणों के समाधान दिए।
3. 'काल क्रियापद' (25 छंद) में समय की विभिन्न इकाइयों और ग्रहों की स्थिति का निर्धारण करने की विधि, अधिक मास की गणना और सप्ताह के दिनों के नाम प्रस्तुत किए।
4. उन्होंने \( \pi \) (पाई) के मान को शुद्ध रूप में दर्शाया।
5. पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने का सिद्धांत प्रस्तुत किया।
6. वृत्त की परिधि और व्यास के बीच के संबंध को समझाया।
7. त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात करने का तरीका बताया।
8. सौरमंडल के भूकेंद्रीय मॉडल (जियोसेंट्रिक मॉडल) की कल्पना की और सूर्य-चंद्र ग्रहण की सही व्याख्या की।
9. पृथ्वी का आवर्तकाल 365 दिन, 6 घंटे, 12 मिनट, 30 सेकंड बताया, जो आधुनिक गणना के बहुत करीब है।
10. पृथ्वी की परिधि की गणना की जो वास्तविक मान से केवल 0.2% कम थी।
11. आर्यभट्ट पहले व्यक्ति थे जिन्होंने sine (ज्या) तालिकाओं को 0° से 90° तक बनाया।
12. उन्होंने तिथि गणना और पंचांग के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
In simple words: आर्यभट्ट एक बड़े वैज्ञानिक थे जिन्होंने 'आर्यभट्टीय' नाम की किताब लिखी। उन्होंने गणित में पाई का मान, ग्रहों की गति, दिन-रात, और समय की गणना जैसे कई महत्वपूर्ण काम किए। उन्होंने बताया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है।

🎯 Exam Tip: आर्यभट्ट को भारतीय गणित और खगोल विज्ञान का जनक माना जाता है, और उनके सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं।

 

Question 2. भास्कराचार्य की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए इनके प्रमुख वैज्ञानिक कार्यों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
Answer: भास्कराचार्य का जन्म 1114 ईस्वी में बीजापुर, कर्नाटक में हुआ था। वे 12वीं सदी के एक प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे। उन्होंने दशमलव प्रणाली की खोज की और 'सिद्धांत शिरोमणि' नामक संस्कृत ग्रंथ की रचना की, जिसके चार मुख्य भाग हैं: लीलावती (अंकगणित), बीजगणिताध्याय (बीजगणित), ग्रहगणिताध्याय (ग्रहों का गणित) और गोलाध्याय (गोले का संबंध)।
उनके प्रमुख वैज्ञानिक कार्य:
1. उन्होंने 'करण कौतुहल' नामक एक रचना भी की, जिसमें खगोल विज्ञान की गणनाएँ शामिल हैं, और इसका उपयोग पंचांग बनाने में किया जाता है।
2. भास्कराचार्य ने 'सूर्य सिद्धांत' में बताया कि पृथ्वी गोल है और सूर्य के चारों ओर एक निश्चित मार्ग पर घूमती रहती है।
3. वे पहले गणितज्ञ थे जिन्होंने बताया कि शून्य से किसी संख्या को भाग देने पर 'अनंत' प्राप्त होता है।
4. उन्होंने यह सिद्ध किया कि पृथ्वी बिना किसी आधार के टिकी हुई है, लेकिन इसके चारों ओर के ग्रह-नक्षत्र गुरुत्वाकर्षण के कारण एक-दूसरे को आकर्षित करते हुए संतुलन बनाए रखते हैं। उन्होंने गुरुत्वाकर्षण बल के सिद्धांत को न्यूटन से पहले ही अपने ग्रंथों में बताया था। पृथ्वी अपनी विशेष शक्ति से आकाशीय पदार्थों को अपनी ओर खींचती है।
In simple words: भास्कराचार्य एक महान भारतीय वैज्ञानिक थे जिन्होंने 'लीलावती' जैसी किताबें लिखीं। उन्होंने बताया कि शून्य से भाग देने पर अनंत मिलता है और पृथ्वी गुरुत्वाकर्षण के कारण सब कुछ अपनी ओर खींचती है।

🎯 Exam Tip: भास्कराचार्य के कार्य ने भारतीय गणित और खगोल विज्ञान के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया, खासकर बीजगणित और कैलकुलस में।

 

Question 3. भारतीय मासों के नामकरण का क्या आधार हैं? भारतीय मासों के नाम लिखकर उस समय बनने वाली आकाशीय स्थिति को विस्तार से लिखिए।
Answer: भारतीय मासों का नामकरण चंद्र मास की गति पर आधारित है, जैसे सौर मास सूर्य की गति पर आधारित है। कुल 12 चंद्र मास होते हैं। इन मासों के नाम चंद्रमा के क्रांतिपथ में पड़ने वाले नक्षत्रों और राशियों के आधार पर रखे जाते हैं।
अमावस्या के बाद, जब चंद्रमा मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र में प्रकट होता है और प्रतिदिन बढ़ता हुआ पूर्णिमा को चित्रा नक्षत्र में अपनी पूर्णता प्राप्त करता है, तब उस मास का नाम चित्रा पर आधारित होता है। पूर्णिमा के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, उस नक्षत्र के नाम पर चंद्र मास का नाम रखा जाता है।
भारतीय मासों के नाम और संबंधित आकाशीय स्थिति:

S.No.नक्षत्रराशिमास
1.चित्रामेषचैत्र
2.विशाखावृषवैशाख
3.ज्येष्ठामिथुनज्येष्ठ
4.पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ाकर्कआषाढ़
5.श्रवणसिंहश्रावण
6.पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपदकन्याभाद्रपद
7.अश्विनीतुलाआश्विन
8.कृतिकावृश्चिककार्तिक
9.मृगशिराधनुमार्गशीर्ष
10.पुनर्वसु, पुष्यमकरपौष
11.मघाकुंभमाघ
12.पूर्वाफाल्गुन, उत्तरफाल्गुनीमीनफाल्गुन

In simple words: भारतीय महीनों के नाम चंद्रमा की चाल और पूर्णिमा के दिन चंद्रमा जिस तारे के समूह (नक्षत्र) में होता है, उस पर रखे जाते हैं। कुल 12 महीने होते हैं, जैसे चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ आदि, जो अलग-अलग नक्षत्रों से जुड़े होते हैं।

🎯 Exam Tip: यह नामकरण प्रणाली चंद्र मास को सौर वर्ष के साथ जोड़ने में मदद करती है, जिससे धार्मिक और कृषि गतिविधियों के लिए सही समय निर्धारित किया जा सके।

 

Question 4. हमारे सौर मण्डल के बारे में विस्तार से लिखिए।
Answer: सौरमंडल सूर्य, आठ ग्रह, उनके उपग्रहों, क्षुद्रग्रहों, धूमकेतुओं, उल्कापिंडों और धूल के कणों से मिलकर बना है, जो सभी सूर्य के चारों ओर एक अण्डाकार मार्ग में परिक्रमा करते हैं। सूर्य अपने गुरुत्वाकर्षण के कारण इन सभी खगोलीय पिण्डों की गति को नियंत्रित करता है।
सौरमंडल से संबंधित मुख्य तथ्य इस प्रकार हैं:
1. सौर परिवार में ग्रह, उपग्रह, क्षुद्रग्रह, धूमकेतु, उल्कायें, उल्कापिंड और धूल के कण सूर्य के चारों ओर कक्षीय गति करते हैं।
2. सूर्य के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण इन ग्रहों की गति नियंत्रित होती है।
3. जो पिण्ड सूर्य की परिक्रमा करते हैं उन्हें ग्रह कहा जाता है, और जो पिण्ड ग्रहों की परिक्रमा करते हैं उन्हें उपग्रह कहते हैं। ये सभी हमारे सौर परिवार के हिस्से हैं।
4. कोई भी ग्रह अपनी रोशनी खुद नहीं बनाता, बल्कि सूर्य की रोशनी से चमकता है।
5. रात में कोई ग्रह टिमटिमाता नहीं है।
6. ग्रहों का आकार सूर्य या तारों की तुलना में बहुत छोटा होता है।
7. ग्रहों की स्थिति दिन-प्रतिदिन बदलती रहती है।
8. सूर्य हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा पिण्ड है, जिसमें सौरमंडल का लगभग 99 प्रतिशत से भी अधिक द्रव्यमान शामिल है। यह पृथ्वी से लगभग 109 लाख गुना बड़ा है।
9. सूर्य की ऊर्जा मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैसों के एक विशाल गोले से उत्पन्न होती है।
10. छोटे सौरमंडलीय पिण्डों में 166 ज्ञात उपग्रह और अन्य छोटे खगोलीय पिण्ड जैसे क्षुद्रग्रह पट्टी, धूमकेतु, उल्काएँ और ग्रहों के बीच की धूल शामिल हैं।
In simple words: हमारा सौरमंडल सूर्य और उसके चारों ओर घूमने वाले ग्रहों, चाँद, छोटे पत्थरों (क्षुद्रग्रह), और बर्फीले धूमकेतुओं से बना है। सूर्य सबसे बड़ा है और अपने गुरुत्वाकर्षण से सबको अपनी जगह पर रखता है।

🎯 Exam Tip: सौरमंडल में मौजूद सभी पिण्डों में से केवल सूर्य ही अपनी खुद की ऊर्जा पैदा करता है, बाकी सभी पिण्ड सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करते हैं।

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उनके उत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. चन्द्रमा के क्रान्तिपथ को कितने भागों में विभाजित किया गया है ?
(अ) 7
(ब) 12
(स) 365
(द) 27
Answer: (द) 27
In simple words: चंद्रमा के घूमने के रास्ते को 27 हिस्सों में बांटा गया है, जिन्हें नक्षत्र कहते हैं। ये नक्षत्र भारतीय ज्योतिष में बहुत महत्वपूर्ण हैं।

🎯 Exam Tip: हर नक्षत्र का अपना एक नाम होता है, जैसे अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, आदि, और इनका उपयोग पंचांग और शुभ-अशुभ समयों को जानने के लिए किया जाता है।

 

Question 2. भरणी नक्षत्र की पहचान क्या है ?
(अ) घोड़ा
(ब) त्रिकोण
(स) गाड़ी
(द) धनुष
Answer: (ब) त्रिकोण
In simple words: भरणी नक्षत्र को त्रिकोण के रूप में पहचाना जाता है। यह भारतीय ज्योतिष के 27 नक्षत्रों में से दूसरा नक्षत्र है।

🎯 Exam Tip: नक्षत्रों को विभिन्न आकृतियों से पहचाना जाता है, जो तारों के समूहों से मिलती-जुलती होती हैं।

 

Question 3. 'निक्स ओलंपिया' पर्वत किस ग्रह पर हैं ?
(अ) मंगल
(ब) बुध
(स) शुक्र
(द) शनि।
Answer: (अ) मंगल
In simple words: निक्स ओलंपिया पर्वत मंगल ग्रह पर स्थित है। यह हमारे सौर मंडल का सबसे बड़ा ज्ञात ज्वालामुखी है।

🎯 Exam Tip: निक्स ओलंपिया पृथ्वी के माउंट एवरेस्ट से लगभग तीन गुना ऊंचा है, और इसकी विशालता मंगल की भूवैज्ञानिक गतिविधियों को दर्शाती है।

 

Question 5. सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक आने में कितना समय लगता है ?
(अ) लगभग 2 मिनट
(ब) लगभग 12 मिनट
(स) लगभग 8 मिनट
(द) लगभग 20 मिनट।
Answer: (स) लगभग 8 मिनट
In simple words: सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुँचने में लगभग 8 मिनट का समय लेता है। प्रकाश की गति बहुत तेज़ होती है, लेकिन सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी भी बहुत अधिक है।

🎯 Exam Tip: प्रकाश की गति लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड है, इसी गति से यह विशाल दूरी तय करता है।

 

Question 6. शुक्र पारगमण भविष्य में कब देखा जायेगा ?
(अ) 10-11 दिसम्बर 2117
(ब) 10-11 अप्रैल, 2117
(स) 10-11 सितम्बर, 2117
(द) 10-11 जून, 2117
Answer: (अ) 10-11 दिसम्बर 2117
In simple words: भविष्य में शुक्र पारगमन 10-11 दिसंबर 2117 को देखा जाएगा। यह एक दुर्लभ खगोलीय घटना है।

🎯 Exam Tip: शुक्र पारगमन तब होता है जब शुक्र ग्रह सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है, जिससे वह सूर्य की सतह पर एक छोटे काले धब्बे के रूप में दिखाई देता है।

 

Question 7. 12 से 24 अंतरांश पर कौन-सी तिथि का स्वरूप बनेगा ?
(अ) प्रतिपदा
(ब) द्वितीया
(स) तृतीया
(द) चतुर्वां।
Answer: (ब) द्वितीया
In simple words: भारतीय पंचांग के अनुसार, जब सूर्य और चंद्रमा के बीच का कोणीय अंतर 12 से 24 अंश के बीच होता है, तो वह द्वितीया तिथि कहलाती है। यह चंद्र मास की दूसरी तिथि होती है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक तिथि सूर्य और चंद्रमा के बीच के कोणीय अंतर के आधार पर निर्धारित होती है, जिसमें 12 अंश का अंतर एक तिथि को दर्शाता है।

 

Question 8. कार्तिक की पूर्णिमा को चन्द्रमा किस नक्षत्र पर रहेगा ?
Answer: कार्तिक मास की पूर्णिमा को चन्द्रमा कृत्तिका नक्षत्र पर रहेगा। भारतीय पंचांग में चंद्र मास का नामकरण पूर्णिमा के दिन चंद्रमा के नक्षत्र के आधार पर होता है।
In simple words: कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्रमा कृत्तिका नक्षत्र में होगा।

🎯 Exam Tip: कृत्तिका नक्षत्र को अग्नि का नक्षत्र माना जाता है और यह ऊर्जा और प्रकाश से जुड़ा है।

 

Question 9. वृत्त की परिधि और व्यास में सम्बन्ध किसने बताया ?
(अ) वराहमिहिर
(ब) आर्यभट्ट
(स) भास्कराचार्य
(द) ब्रह्मगुप्त।
Answer: (ब) आर्यभट्ट
In simple words: वृत्त की परिधि और व्यास के बीच का संबंध आर्यभट्ट ने बताया था। उन्होंने \( \pi \) (पाई) का मान बहुत सटीक रूप से निकाला था।

🎯 Exam Tip: आर्यभट्ट ने अपने ग्रंथ 'आर्यभट्टीय' में गणित और खगोल विज्ञान के कई महत्वपूर्ण सिद्धांतों को समझाया था।

 

Question 10. लीलावती का फारसी में अनुवाद किसने किया ?
(अ) श्रीधराचार्य
(ब) फैजी
(स) अकबर
(द) रहीम।
Answer: (ब) फैजी
In simple words: लीलावती, जो भास्कराचार्य की अंकगणित की पुस्तक है, का फारसी में अनुवाद फैजी ने किया था। फैजी मुगल बादशाह अकबर के दरबार के एक प्रसिद्ध कवि और विद्वान थे।

🎯 Exam Tip: यह अनुवाद भारतीय गणित के ज्ञान को मध्यकालीन इस्लामी दुनिया में फैलाने में सहायक रहा।

 

Question 11. सौर परिवार का सबसे गर्म ग्रह है।
(अ) मंगल
(ब) बुध
(स) शुक्र
(द) शनि
Answer: (स) शुक्र
In simple words: शुक्र ग्रह सौर मंडल का सबसे गर्म ग्रह है। इसका कारण इसके मोटे वायुमंडल में ग्रीनहाउस प्रभाव का अधिक होना है, जो गर्मी को अंदर फँसा लेता है।

🎯 Exam Tip: हालांकि बुध सूर्य के सबसे करीब है, लेकिन उसका वायुमंडल बहुत पतला है, जिससे वह अपनी गर्मी को बरकरार नहीं रख पाता और रात में बहुत ठंडा हो जाता है।

 

Question 12. ब्रह्माण्ड की आयु मानी जाती है।
(अ) अरब वर्ष
(ब) 10 अरब वर्ष
(स) 10 से 20 अरब वर्ष
(द) 1000 अरब वर्ष।

🎯 Exam Tip: ब्रह्मांड की आयु का अनुमान बिग बैंग सिद्धांत और ब्रह्मांड के विस्तार की दर के आधार पर लगाया जाता है।

 

Question 14. भारतीय पंचांगानुसार ग्रहों की संख्या है
(अ) 8
(ब) 9
(स) 10
(द) 7
Answer: (ब) 9
In simple words: भारतीय पंचांग के अनुसार, ग्रहों की कुल संख्या 9 मानी जाती है, जिसमें सूर्य और चंद्रमा जैसे खगोलीय पिण्डों को भी ग्रह के रूप में शामिल किया गया है। इन नौ ग्रहों को नवग्रह कहते हैं।

🎯 Exam Tip: आधुनिक खगोल विज्ञान में केवल आठ ग्रहों को मान्यता प्राप्त है, लेकिन भारतीय ज्योतिष में राहु और केतु को भी ग्रहों के रूप में गिना जाता है।

सुमेलन सम्बन्धित प्रश्न

 

Question. सुमेलन सम्बन्धित प्रश्न

कॉलम Iकॉलम II
1. सूर्य का निकटतम ग्रहa. बृहस्पति
2. सांझ का ताराb. मंगल
3. लाल ग्रहc. शनि
4. लाल धब्बाd. शुक्र
5. वलयe. बुध
Answer:
1. e (सूर्य का निकटतम ग्रह - बुध)
2. d (सांझ का तारा - शुक्र)
3. b (लाल ग्रह - मंगल)
4. a (लाल धब्बा - बृहस्पति)
5. c (वलय - शनि)
In simple words: इन खगोलीय पिण्डों को उनकी खासियतों से मिलाया गया है, जैसे सूर्य के सबसे पास बुध है, शुक्र को सांझ का तारा कहते हैं, मंगल लाल दिखता है, बृहस्पति पर लाल धब्बा है और शनि के चारों ओर वलय होते हैं।

🎯 Exam Tip: ग्रहों की इन विशिष्टताओं को याद रखना खगोल विज्ञान से संबंधित प्रश्नों को हल करने में मदद करता है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 2. एक चन्द्रमास में कितने पक्ष होते हैं ? नाम बताइए।
Answer: एक चन्द्रमास में दो पक्ष होते हैं। ये हैं शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। चन्द्रमास में इन दोनों पक्षों के कारण ही अमावस्या और पूर्णिमा आती है।
In simple words: एक चन्द्रमास में दो हिस्से होते हैं: शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि शुक्ल पक्ष चाँद के बढ़ने वाले समय को दिखाता है, जबकि कृष्ण पक्ष चाँद के घटने वाले समय को दर्शाता है।

 

Question 3. नक्षत्र क्या है ?
Answer: तारों के एक खास समूह को नक्षत्र कहते हैं। ये समूह चन्द्रमा के रास्ते में होते हैं और इनकी संख्या कुल 27 होती है। नक्षत्रों का उपयोग भारतीय ज्योतिष और पंचांग में समय की गणना के लिए किया जाता है।
In simple words: नक्षत्र तारों के वो समूह होते हैं जो चाँद के रास्ते में आते हैं और इनकी संख्या 27 होती है।

🎯 Exam Tip: नक्षत्र शब्द की परिभाषा देते समय 'तारों का समूह' और 'चन्द्रमा के क्रान्तिपथ में स्थित' होना दोनों महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 4. तारामण्डल किसे कहते हैं ?
Answer: आकाश में तारों के बड़े समूहों को तारामण्डल कहा जाता है। ये समूह आकाश में विशेष आकृतियाँ बनाते हुए दिखते हैं और प्राचीन काल से ही अलग-अलग सभ्यताओं ने इन्हें नाम दिए हैं।
In simple words: आसमान में तारों के बड़े समूह को तारामण्डल कहते हैं।

🎯 Exam Tip: तारामण्डल खगोल विज्ञान और कहानियों दोनों का हिस्सा होते हैं, जो हमें रात के आकाश को समझने में मदद करते हैं।

 

Question 5. चन्द्रमा कितने दिनों में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करता है?
Answer: चन्द्रमा पृथ्वी का एक चक्कर लगभग 27 दिनों में पूरा करता है। इसी परिक्रमण गति के कारण पृथ्वी से हमें चंद्रमा के अलग-अलग कलाएँ (फेज़) दिखाई देती हैं।
In simple words: चाँद 27 दिनों में पृथ्वी का एक चक्कर लगाता है।

🎯 Exam Tip: चंद्रमा के पृथ्वी के चारों ओर घूमने की अवधि पृथ्वी के अक्षीय घूर्णन से अलग होती है।

 

Question 6. रेवती नक्षत्र में तारों की संख्या कितनी है ?
Answer: रेवती नक्षत्र में कुल 100 तारे माने जाते हैं। यह नक्षत्र भारतीय ज्योतिष में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और 27 नक्षत्रों में से एक है।
In simple words: रेवती नक्षत्र में 100 तारे होते हैं।

🎯 Exam Tip: नक्षत्रों में तारों की संख्या जानना भारतीय पंचांग को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. अन्तर्राष्ट्रीय खगोलशास्त्रीय संघ का प्राग सम्मेलन किस वर्ष हुआ था ?
Answer: अन्तर्राष्ट्रीय खगोलशास्त्रीय संघ का प्राग सम्मेलन वर्ष 2006 में हुआ था। इस सम्मेलन में ग्रहों की नई परिभाषा तय की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप प्लूटो को ग्रह की श्रेणी से हटा दिया गया था।
In simple words: अन्तर्राष्ट्रीय खगोलशास्त्रीय संघ का प्राग सम्मेलन 2006 में हुआ था।

🎯 Exam Tip: यह सम्मेलन प्लूटो को बौना ग्रह घोषित करने के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जिससे ग्रहों की संख्या बदल गई थी।

 

Question 9. मंगलयान को भारत ने कहाँ से प्रक्षेपित किया
Answer: भारत ने मंगलयान को श्री हरिकोटा (आन्ध्र प्रदेश) से प्रक्षेपित किया था। यह भारत का पहला अंतरग्रहीय मिशन था, जो मंगल ग्रह पर भेजा गया था।
In simple words: भारत ने मंगलयान को आन्ध्र प्रदेश के श्री हरिकोटा से लॉन्च किया था।

🎯 Exam Tip: श्री हरिकोटा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का मुख्य प्रक्षेपण स्थल है।

 

Question 10. भारतीय पंचांगानुसार ग्रहों के नाम बताइए।
Answer: भारतीय पंचांग के अनुसार ग्रहों के नाम हैं: सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, और केतु। ये सभी ग्रह ज्योतिष में महत्वपूर्ण माने जाते हैं और इनका प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर माना जाता है।
In simple words: भारतीय पंचांग में सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु को ग्रह माना जाता है।

🎯 Exam Tip: ध्यान दें कि भारतीय पंचांग में 'सूर्य' और 'चन्द्र' को भी ग्रह माना जाता है, जबकि राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है।

 

Question 11. चन्द्रमा द्वारा परावर्तित प्रकाश पृथ्वी तक कितने सेकण्ड में पहुँचता है ?
Answer: चन्द्रमा द्वारा परावर्तित प्रकाश पृथ्वी तक लगभग \( 1\frac { 1 }{ 4 } \) (एक सवा) सेकण्ड में पहुँचता है। यह प्रकाश चंद्रमा की सतह से परावर्तित होकर हमारी आँखों तक आता है।
In simple words: चाँद से आने वाली रोशनी को पृथ्वी तक पहुँचने में लगभग सवा सेकण्ड का समय लगता है।

🎯 Exam Tip: चंद्रमा के प्रकाश को परावर्तित प्रकाश कहा जाता है क्योंकि चंद्रमा का अपना कोई प्रकाश नहीं होता।

 

Question 12. उत्तरायण में सूर्य की स्थिति किस दिशा में रहती
Answer: उत्तरायण के दौरान सूर्य की स्थिति पूर्व-उत्तर-पश्चिम दिशा में रहती है। इस अवधि में सूर्य उत्तर की ओर गमन करता हुआ दिखाई देता है, जिससे दिन बड़े और रातें छोटी होती जाती हैं।
In simple words: उत्तरायण में सूर्य पूर्व-उत्तर-पश्चिम दिशा में होता है।

🎯 Exam Tip: उत्तरायण का अर्थ है सूर्य का मकर राशि से मिथुन राशि तक भ्रमण करना, जिसमें दिन की अवधि बढ़ती है।

 

Question 13. सूर्य कर्क रेखा व मकर रेखा में किस दिन पहुँचता है ?
Answer: सूर्य 21 जून को कर्क रेखा पर और 22 सितम्बर को मकर रेखा पर पहुँचता है। 21 जून उत्तरी गोलार्ध का सबसे लंबा दिन होता है, जबकि 22 सितम्बर को दिन और रात लगभग बराबर होते हैं, जिसे शरद विषुव कहते हैं।
In simple words: सूर्य 21 जून को कर्क रेखा पर और 22 सितम्बर को मकर रेखा पर पहुँचता है।

🎯 Exam Tip: ये तिथियाँ वर्ष के महत्वपूर्ण खगोलीय क्षणों को चिह्नित करती हैं जो ऋतुओं के बदलाव को दर्शाती हैं।

 

Question 14. अन्तिम तीन बार बुध पारगमण किन वर्षों में हुआ था ?
Answer: अंतिम तीन बार बुध पारगमण 100, 2003, और 2006 में हुआ था। यह एक दुर्लभ खगोलीय घटना है जब बुध ग्रह सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है।
In simple words: बुध पारगमण आखिरी बार 100, 2003 और 2006 में देखा गया था।

🎯 Exam Tip: बुध पारगमण शुक्र पारगमण से अधिक बार होता है, लेकिन फिर भी यह अपेक्षाकृत दुर्लभ घटना है।

 

Question 15. कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा कब होती है ?
Answer: कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा पूर्णिमा के बाद आती है। पूर्णिमा के अगले दिन से ही कृष्ण पक्ष शुरू हो जाता है, जब चंद्रमा धीरे-धीरे घटने लगता है।
In simple words: कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा पूर्णिमा के तुरंत बाद आती है।

🎯 Exam Tip: प्रतिपदा किसी भी पक्ष का पहला दिन होता है, चाहे वह शुक्ल पक्ष हो या कृष्ण पक्ष।

 

Question 17. गीतिकपाद में किस विषय का वर्णन है ?
Answer: गीतिकपाद में समय की बड़ी इकाइयों जैसे कल्प, मनवंतर और युग आदि का वर्णन है। यह आर्यभट्टीय ग्रंथ का एक महत्वपूर्ण भाग है जो काल-गणना की विस्तृत जानकारी देता है।
In simple words: गीतिकपाद में समय की बड़ी इकाइयों, जैसे कल्प और युग, के बारे में बताया गया है।

🎯 Exam Tip: गीतिकपाद आर्यभट्ट के ज्योतिषीय कार्यों का आधार स्तंभ है, जो प्राचीन भारतीय काल-गणना की गहराई को दर्शाता है।

 

Question 18. वृहज्जातक व पंचसिद्धांतिका किसके द्वारा लिखी गई थी ?
Answer: वृहज्जातक और पंचसिद्धांतिका वराहमिहिर द्वारा लिखी गई थी। वराहमिहिर एक महान भारतीय ज्योतिषी और खगोलशास्त्री थे, जिन्होंने इन ग्रंथों के माध्यम से ज्योतिष विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
In simple words: वृहज्जातक और पंचसिद्धांतिका किताबें वराहमिहिर ने लिखी थीं।

🎯 Exam Tip: वराहमिहिर के ये ग्रंथ भारतीय ज्योतिष के प्रमुख स्रोत माने जाते हैं और उनके ज्ञान का प्रतीक हैं।

 

Question 19. सवाई जयसिंह द्वितीय ने किन नगरों में वेधशालाओं (जंतर मंतर) का निर्माण करवाया ?
Answer: सवाई जयसिंह द्वितीय ने जयपुर, दिल्ली, मथुरा, वाराणसी और उज्जैन जैसे नगरों में वेधशालाओं (जंतर मंतर) का निर्माण करवाया था। इन वेधशालाओं का उद्देश्य खगोलीय पिंडों का अध्ययन और समय की सटीक गणना करना था।
In simple words: सवाई जयसिंह द्वितीय ने जयपुर, दिल्ली, मथुरा, वाराणसी और उज्जैन में जंतर मंतर बनवाए थे।

🎯 Exam Tip: जंतर मंतर प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान और इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जो खगोलीय प्रेक्षण के लिए बनाए गए थे।

 

Question 20. भारत सरकार ने द्वितीय कृत्रिम उपग्रह का क्या नाम रखा ?
Answer: भारत सरकार ने अपने द्वितीय कृत्रिम उपग्रह का नाम भास्कर रखा था। यह उपग्रह पृथ्वी के अवलोकन और मौसम संबंधी जानकारी जुटाने के उद्देश्य से प्रक्षेपित किया गया था।
In simple words: भारत का दूसरा उपग्रह भास्कर नाम से जाना जाता है।

🎯 Exam Tip: 'भास्कर' नाम प्राचीन भारतीय खगोलशास्त्री भास्कराचार्य के सम्मान में रखा गया था, जो विज्ञान और गणित के क्षेत्र में उनके योगदान को दर्शाता है।

 

Question 21. वराहमिहिर का मुख्य उद्देश्य क्या था ?
Answer: वराहमिहिर का मुख्य उद्देश्य गणित एवं विज्ञान को जनहित से जोड़ना था। उन्होंने अपने ज्ञान का उपयोग आम लोगों के कल्याण और उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए किया, ताकि विज्ञान सिर्फ कुछ विद्वानों तक सीमित न रहे।
In simple words: वराहमिहिर चाहते थे कि गणित और विज्ञान का लाभ आम लोगों तक पहुँचे।

🎯 Exam Tip: वराहमिहिर का यह दृष्टिकोण दर्शाता है कि प्राचीन भारतीय विद्वान ज्ञान को सामाजिक उपयोगिता से जोड़ते थे।

 

Question 22. अन्तर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ से मान्यता प्राप्त ग्रहों की संख्या कितनी है ?
Answer: अन्तर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ से मान्यता प्राप्त ग्रहों की संख्या 8 है। 2006 के प्राग सम्मेलन के बाद प्लूटो को ग्रह की श्रेणी से हटाकर बौना ग्रह घोषित कर दिया गया था।
In simple words: अन्तर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ के अनुसार अब 8 ग्रह हैं।

🎯 Exam Tip: '8' संख्या तब से लागू हुई है जब प्लूटो को ग्रह का दर्जा नहीं दिया गया था, यह वर्तमान वैज्ञानिक वर्गीकरण है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 2. भारतीय पंचांग के प्रमुख अंगों के नाम बताइए।
Answer: भारतीय पंचांग के प्रमुख अंग तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण हैं। ये सभी मिलकर किसी विशेष दिन की खगोलीय स्थिति और शुभ-अशुभ मुहूर्तों का निर्धारण करते हैं।
In simple words: भारतीय पंचांग के मुख्य हिस्से तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण हैं।

🎯 Exam Tip: ये पाँच अंग 'पंचांग' नाम को सार्थक करते हैं, क्योंकि 'पंच' का अर्थ पाँच होता है।

 

Question 3. पुच्छल तारा क्या है ?
Answer: पुच्छल तारा चट्टान जैसे छोटे-छोटे टुकड़ों से बना होता है और इसमें बर्फ, जल, अमोनिया व मीथेन जैसे पदार्थ बड़ी मात्रा में होते हैं जो आसानी से वाष्प बन जाते हैं। जब यह सूर्य के पास आता है, तो गर्मी से इसके पदार्थ वाष्पीकृत होकर एक लंबी पूँछ बनाते हैं।
In simple words: पुच्छल तारे छोटे पत्थर जैसे होते हैं जिनमें बर्फ होती है, और जब वे सूरज के पास आते हैं तो उनकी एक लंबी पूँछ बन जाती है।

🎯 Exam Tip: पुच्छल तारे की पूँछ हमेशा सूर्य से दूर की दिशा में होती है, भले ही वह सूर्य की ओर जा रहा हो या उससे दूर।

 

Question 4. उल्का तथा उल्का पिण्ड क्या हैं ?
Answer: उल्का और उल्का पिण्ड वे छोटे पत्थर और धातु के टुकड़े होते हैं जो सूर्य की ओर जाते हुए पुच्छल तारों या क्षुद्रग्रहों के टूटने से बनते हैं। जब ये टुकड़े पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं तो घर्षण के कारण बहुत गर्म होकर चमकते हुए दिखते हैं, जिसे उल्का या 'शूटिंग स्टार' कहते हैं। यदि ये टुकड़े वायुमंडल में पूरी तरह से न जलकर पृथ्वी की सतह तक पहुँच जाते हैं, तो उन्हें उल्का पिण्ड कहा जाता है।
In simple words: उल्का पत्थर के वे छोटे टुकड़े हैं जो आसमान में जलते हुए दिखते हैं, और अगर वे जमीन पर गिर जाते हैं तो उन्हें उल्का पिण्ड कहते हैं।

🎯 Exam Tip: उल्का पिंडों का अध्ययन करके वैज्ञानिक सौरमंडल के शुरुआती दौर के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं।

 

Question 5. बुध ग्रह की चार विशेषताएँ बताइए।
Answer: बुध ग्रह की चार मुख्य विशेषताएँ हैं: यह सबसे छोटा ग्रह है, यह सूर्य के सबसे नजदीक है, यह सौरमंडल का सबसे तीव्रतम (तेज) ग्रह है, और इस ग्रह पर कोई वायुमंडल नहीं है। बुध की तेज गति के कारण ही इसका कक्षीय काल सबसे कम होता है।
In simple words: बुध सबसे छोटा, सूर्य के सबसे पास, सबसे तेज और बिना वायुमंडल वाला ग्रह है।

🎯 Exam Tip: बुध पर वायुमंडल न होने के कारण दिन में अत्यधिक गर्मी और रात में अत्यधिक ठंड होती है।

 

Question 6. किन्हीं चार नक्षत्रों के नाम व उनकी पहचान बताइए।
Answer: किन्हीं चार नक्षत्रों के नाम और उनकी पहचान इस प्रकार हैं:
• रोहिणी - इसकी पहचान एक गाड़ी जैसी आकृति से होती है।
• चित्रा - इसकी पहचान एक मोती जैसी आकृति से होती है।
• अश्विनी - इसकी पहचान घोड़े के सिर जैसी होती है।
• पुष्य - इसकी पहचान एक तीर या फूलों के गुच्छे जैसी होती है।
ये नक्षत्र भारतीय ज्योतिष में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं और चन्द्रमा के पथ में स्थित होते हैं।
In simple words: रोहिणी (गाड़ी), चित्रा (मोती), अश्विनी (घोड़े का सिर) और पुष्य (तीर/फूल) कुछ नक्षत्र और उनकी पहचान हैं।

🎯 Exam Tip: नक्षत्रों की पहचान अक्सर उनके तारों की आकृति के आधार पर की जाती है, जो कि प्राचीन ऋषियों द्वारा दी गई थी।

 

Question 7. शुक्र ग्रह के विषय में बताइए।
Answer: शुक्र ग्रह की सतह चट्टानों से भरी हुई है और इसके चारों ओर सल्फ्यूरिक एसिड के घने बादल हैं। यह सौरमंडल का सबसे चमकीला ग्रह है, इसलिए इसे सुबह 'भोर का तारा' और शाम को 'सांझ का तारा' भी कहते हैं। आकार और द्रव्यमान में पृथ्वी के लगभग समान होने के कारण इसे 'पृथ्वी की बहन' भी कहा जाता है।
In simple words: शुक्र ग्रह चट्टानी सतह और सल्फ्यूरिक एसिड के बादलों से घिरा है। यह बहुत चमकीला है, इसलिए इसे भोर या सांझ का तारा कहते हैं, और यह पृथ्वी जैसा दिखता है।

🎯 Exam Tip: शुक्र का तापमान बहुत अधिक होता है, जिसका कारण इसके घने कार्बन डाइऑक्साइड वाले वायुमंडल का ग्रीनहाउस प्रभाव है।

 

Question 8. बसंत विषुव एवं शरद विषुव को समझाइए।
Answer: बसंत विषुव और शरद विषुव वे समय होते हैं जब सूर्य भूमध्य रेखा पर सीधा चमकता है और पृथ्वी का आधा प्रकाशित भाग भूमध्य रेखा के दोनों ओर समान रूप से फैलता है। इस स्थिति में दिन और रात की अवधि लगभग बराबर (12-12 घंटे) होती है। बसंत विषुव 21 मार्च को और शरद विषुव 22 सितम्बर को होता है, जो ऋतु परिवर्तन के महत्वपूर्ण संकेत हैं।
In simple words: बसंत विषुव (21 मार्च) और शरद विषुव (22 सितम्बर) वो दिन होते हैं जब दिन और रात बराबर होते हैं क्योंकि सूरज भूमध्य रेखा पर सीधा चमकता है।

🎯 Exam Tip: इन दोनों तिथियों पर पृथ्वी के अक्ष का झुकाव सूर्य के सापेक्ष ऐसा होता है कि दोनों गोलार्धों को समान मात्रा में सूर्य का प्रकाश मिलता है।

 

Question 9. मकर संक्रान्ति पर्व पर क्या कार्य किए जाते हैं ?
Answer: मकर संक्रान्ति पर्व पर कई धार्मिक कार्य किए जाते हैं, जैसे जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध और तर्पण। ऐसी मान्यता है कि इस दिन दान करने से सौ गुना अधिक फल मिलता है, और शुद्ध घी व कम्बल का दान मोक्ष प्रदान करता है। लोग इस दिन खिचड़ी बनाकर सूर्यदेव को भोग लगाते हैं, पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, और तिल-गुड़ से बनी वस्तुएँ खाते हैं। इस दिन पतंग उड़ाने का भी विशेष महत्व होता है।
In simple words: मकर संक्रान्ति पर लोग पूजा-पाठ, दान, स्नान करते हैं, खिचड़ी खाते हैं और पतंग उड़ाते हैं।

🎯 Exam Tip: मकर संक्रान्ति का पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है, जो सर्दियों के अंत और लंबे दिनों की शुरुआत का संकेत देता है।

 

Question 10. प्रतिपदा तिथि कब पड़ती है ?
Answer: प्रतिपदा तिथि अमावस्या के अंत पर पड़ती है, जब सूर्य और चन्द्रमा एक ही राशि और अंश पर होते हैं। इसके बाद, जब तीव्र गतिमान चन्द्रमा सूर्य से क्रमिक 12 अंश का अंतर पूरा करता है, तो उस कालखंड को प्रतिपदा तिथि कहा जाता है। यह किसी भी पक्ष (शुक्ल या कृष्ण) का पहला दिन होता है।
In simple words: प्रतिपदा तिथि अमावस्या के ठीक बाद शुरू होती है, जब चाँद और सूरज एक ही लाइन में होते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रतिपदा भारतीय चंद्र कैलेंडर की पहली तिथि होती है और यह अमावस्या के बाद शुरू होकर शुक्ल पक्ष की शुरुआत करती है।

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 2. भारतीय पंचांग के प्रमुख अंगों का विस्तृत रूप से वर्णन कीजिए।
Answer: भारतीय पंचांग के पाँच प्रमुख अंग इस प्रकार हैं:
1. तिथि: तिथि को अंग्रेजी महीने की तारीख के रूप में समझ सकते हैं। यह चन्द्रमास की तारीख से जुड़ा है। एक चन्द्रमास में दो पक्ष होते हैं - शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। प्रत्येक पक्ष में 15-15 तिथियाँ होती हैं, जिनमें पूर्णिमा और अमावस्या प्रमुख हैं। तिथि सूर्य और चंद्रमा की कोणीय दूरी पर आधारित होती है।
2. वार: वार का संबंध सप्ताह के दिनों से है, जो कुल सात होते हैं: रविवार, सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार। हर वार का अपना महत्व और प्रभाव होता है।
3. नक्षत्र: नक्षत्र का संबंध चन्द्रमा के मार्ग में स्थित उन आकाशीय भागों से है जहाँ चन्द्रमा उस समय स्थित होता है। भारतीय ज्योतिष में 27 नक्षत्र माने गए हैं। प्रत्येक नक्षत्र का अपना विशेष प्रभाव और गुण होता है।
4. योग: योग का संबंध सूर्य और चन्द्रमा की गति में किसी विशेष समय उत्पन्न अंतर से है। योग भी कुल 27 होते हैं और प्रत्येक योग का अपना ज्योतिषीय महत्व होता है, जो विभिन्न शुभ-अशुभ कार्यों के लिए उपयोग किया जाता है।
5. करण: करण तिथियों के सूक्ष्म प्रभावों को जानने के लिए बनाए गए हैं। प्रत्येक तिथि को दो बराबर भागों में बांटा गया है, और तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। कुल 11 करण होते हैं जो विभिन्न गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
In simple words: भारतीय पंचांग के पाँच मुख्य भाग तिथि (तारीख), वार (दिन), नक्षत्र (तारों का समूह), योग (सूरज और चाँद के बीच की दूरी) और करण (तिथि का आधा हिस्सा) हैं। ये सब मिलकर समय और शुभ-अशुभ का हिसाब बताते हैं।

🎯 Exam Tip: इन पाँच अंगों को याद रखने के लिए 'तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण' का क्रम बहुत उपयोगी है, क्योंकि यह पंचांग की संरचना को दर्शाता है।

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