RBSE Solutions Class 9 Science Chapter 11 ध्वनि

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Detailed Chapter 11 ध्वनि RBSE Solutions for Class 9 Science

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Class 9 Science Chapter 11 ध्वनि RBSE Solutions PDF

उदाहरण 1.1. किसी ध्वनि तरंग की आवृत्ति 4kHz और उसकी तरंगदैर्ध्य 17.5 cm है। यह 3.5km की दूरी चलने में कितना समय लेगी ?
Answer: सबसे पहले ध्वनि तरंग का वेग ज्ञात करेंगे। हमें आवृत्ति \( n = 4 \text{ kHz} = 4000 \text{ Hz} \) और तरंगदैर्ध्य \( \lambda = 17.5 \text{ cm} = 0.175 \text{ m} \) दी गई है।
तरंग का वेग \( v = n \times \lambda \)
\( v = 4000 \text{ Hz} \times 0.175 \text{ m} \)
\( v = 700 \text{ m/s} \)
अब, ध्वनि को 3.5 km की दूरी तय करने में लगा समय ज्ञात करेंगे। दूरी \( d = 3.5 \text{ km} = 3.5 \times 1000 \text{ m} = 3500 \text{ m} \)
समय \( t = \frac{d}{v} \)
\( t = \frac{3500 \text{ m}}{700 \text{ m/s}} \)
\( t = 5 \text{ s} \)
इसलिए, ध्वनि 3.5 km की दूरी 5 सेकण्ड में तय करेगी। ध्वनि की गति माध्यम के गुणों पर निर्भर करती है और एक ही माध्यम में स्थिर रहती है।
In simple words: ध्वनि की गति निकालने के लिए उसकी आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य को गुणा किया जाता है। फिर, दूरी को गति से भाग देकर पता चलता है कि ध्वनि को कितनी देर लगेगी। इस मामले में, ध्वनि को 3.5 किलोमीटर चलने में 5 सेकण्ड लगेंगे।

🎯 Exam Tip: दूरी, गति और समय के ऐसे प्रश्नों में हमेशा इकाइयों (जैसे km को m में, kHz को Hz में, cm को m में) को एक समान करना याद रखें, ताकि गणना सही हो।

 

उदाहरण 1.2. किसी दिए हुए माध्यम में एक ध्वनि तरंग की आवृत्ति 220Hz तथा वेग 440ms-1 है। इस तरंग की तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए।
Answer: हमें ध्वनि तरंग की आवृत्ति \( n = 220 \text{ Hz} \) और वेग \( v = 440 \text{ m/s} \) दिया गया है।
तरंगदैर्ध्य \( \lambda \) ज्ञात करने के लिए सूत्र \( v = n \times \lambda \) का उपयोग करेंगे, जिसे \( \lambda = \frac{v}{n} \) के रूप में लिखा जा सकता है।
\( \lambda = \frac{440 \text{ m/s}}{220 \text{ Hz}} \)
\( \lambda = 2 \text{ m} \)
अतः, इस ध्वनि तरंग की तरंगदैर्ध्य 2 मीटर है। यह दर्शाता है कि एक माध्यम में, आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य का गुणनफल हमेशा तरंग का वेग देता है।
In simple words: यदि आपको ध्वनि की गति और आवृत्ति पता है, तो आप तरंगदैर्ध्य को गति को आवृत्ति से भाग देकर निकाल सकते हैं। यहाँ, तरंगदैर्ध्य 2 मीटर है।

🎯 Exam Tip: तरंग वेग, आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य के बीच का संबंध \( v = n\lambda \) (या \( v = f\lambda \)) याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे संबंधित कई प्रश्न पूछे जाते हैं।

पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

प्रश्न 1. वह तरंग जिसमें संपीडन और विरलन है, कहलाती
(a) अनुप्रस्थ तरंग
(b) अनुदैर्ध्य तरंग
Answer: (b) अनुदैर्ध्य तरंग
In simple words: अनुदैर्ध्य तरंगें वे होती हैं जिनमें माध्यम के कण तरंग के चलने की दिशा में ही आगे-पीछे कंपन करते हैं, जिससे संपीडन (कण पास-पास) और विरलन (कण दूर-दूर) बनते हैं। ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगों का एक अच्छा उदाहरण हैं।

🎯 Exam Tip: संपीडन और विरलन अनुदैर्ध्य तरंगों की खास विशेषता है, जबकि अनुप्रस्थ तरंगों में श्रृंग (crest) और गर्त (trough) बनते हैं। इस अंतर को याद रखें।

 

प्रश्न 2. तरंग के वेग तरंगदैर्ध्य (\( \lambda \)) तथा आवृत्ति n के बीच सम्बन्ध है
(a) \( v = n\lambda \)
(b) \( \lambda = vn \)
(c) \( n = v\lambda \).
(d) \( v = \lambda /n \).
Answer: (a) \( v = n\lambda \)
In simple words: तरंग का वेग उसकी आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य को गुणा करने से मिलता है। यह एक मूल सूत्र है जो बताता है कि तरंग कितनी तेजी से चलती है।

🎯 Exam Tip: यह सूत्र \( v = n\lambda \) (या \( v = f\lambda \)) तरंगों के अध्ययन में सबसे महत्वपूर्ण में से एक है और अक्सर सीधे या परोक्ष रूप से प्रश्नों में प्रयोग किया जाता है।

 

प्रश्न 3. अनुदैर्ध्य तरंगें उत्पन्न की जा सकती हैं
(a) ठोस व गैस में
(b) ठोस व द्रव में
(c) गैस व द्रव में
(d) ठोस, द्रव व गैस तीनों में।
Answer: (d) ठोस, द्रव व गैस तीनों में।
In simple words: अनुदैर्ध्य तरंगें हर तरह के माध्यम में चल सकती हैं, चाहे वह ठोस हो, द्रव हो या गैस। यह उनकी प्रकृति के कारण संभव है, जहाँ कण तरंग के चलने की दिशा में ही कंपन करते हैं।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं और वे ठोस, द्रव और गैस सभी में यात्रा कर सकती हैं, लेकिन निर्वात में नहीं, क्योंकि उन्हें माध्यम की आवश्यकता होती है।

 

प्रश्न 4. अनुदैर्ध्य तरंग में माध्यम के कणों का कम्पन
(a) तरंग की दिशा में होता है।
(b) तरंग की दिशा के लम्बवत् होता है।
(c) कण कम्पन नहीं करते हैं।
(d) तरंग की दिशा में 60° के कोण पर होता है।
Answer: (a) तरंग की दिशा में होता है।
In simple words: अनुदैर्ध्य तरंगों में, माध्यम के छोटे-छोटे कण तरंग के आगे बढ़ने की दिशा में ही हिलते-डुलते हैं, जैसे एक स्प्रिंग को धक्का देने पर उसके कुंडलियों का हिलना।

🎯 Exam Tip: अनुदैर्ध्य तरंगों में कणों का कंपन तरंग संचरण के समानांतर होता है, जबकि अनुप्रस्थ तरंगों में यह लंबवत होता है। यह अंतर दोनों प्रकार की तरंगों को पहचानने की कुंजी है।

 

प्रश्न 5. ध्वनि की चाल अधिकतम होती है
(a) वायु में
(b) ठोस में
(c) जल में
(d) जल व ठोस दोनों में।
Answer: (b) ठोस में
In simple words: ध्वनि ठोस पदार्थों में सबसे तेज़ चलती है क्योंकि ठोस के कण एक-दूसरे के बहुत करीब होते हैं और ध्वनि ऊर्जा को आसानी से एक से दूसरे तक पहुंचा सकते हैं।

🎯 Exam Tip: ध्वनि की चाल ठोस में सबसे ज्यादा, फिर द्रव में और सबसे कम गैस में होती है। इसका कारण माध्यम के कणों की निकटता और उनके बीच की बंधन ऊर्जा है।

 

प्रश्न 7. एक तरंग की चाल 350m/s तथा तरंगदैर्ध्य 50 cm है, तो तरंग की आवृत्ति होगी
(a) 13500 Hz
(b) 700 Hz
(c) 400 Hz
(d) 300 Hz.
Answer: (b) 700 Hz
In simple words: तरंग की आवृत्ति पता करने के लिए, उसकी गति को तरंगदैर्ध्य से भाग देते हैं। यहाँ, 50 cm को 0.5 m में बदलकर, 350 m/s को 0.5 m से भाग देने पर 700 Hz मिलता है।

🎯 Exam Tip: ऐसे सवालों में हमेशा याद रखें कि तरंगदैर्ध्य की इकाई को सेंटीमीटर से मीटर में बदलना आवश्यक है ताकि सभी इकाइयाँ SI प्रणाली में हों। \( n = \frac{v}{\lambda} \) सूत्र का उपयोग करें।

 

प्रश्न 8. प्रति सेकण्ड समय में पूर्ण किए गए दोलनों की संख्या को कहते हैं
(a) आयाम
(b) चाल
(c) आवर्तकाल
(d) आवृत्ति।
Answer: (d) आवृत्ति।
In simple words: एक सेकण्ड में जितनी बार कोई चीज़ कंपन करती है या दोलन करती है, उसे उसकी आवृत्ति कहते हैं। इसे हर्ट्ज़ में मापा जाता है।

🎯 Exam Tip: आवृत्ति और आवर्तकाल एक-दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं। आवृत्ति (Hz) प्रति सेकण्ड दोलनों की संख्या है, जबकि आवर्तकाल (सेकण्ड) एक दोलन पूरा करने में लगने वाला समय है।

 

प्रश्न 9. कम्पन करती एक वस्तु का आवर्तकाल 0.02 s है, वस्तु के कम्पन की आवृत्ति होगी
(a) 100 Hz
(b) 20 Hz
(c) 50 Hz
(d) 1 Hz,
Answer: (c) 50 Hz
In simple words: आवर्तकाल (एक कंपन में लगा समय) और आवृत्ति (एक सेकण्ड में कंपनों की संख्या) एक दूसरे के उल्टे होते हैं। इसलिए, आवृत्ति निकालने के लिए 1 को आवर्तकाल से भाग देते हैं, जो 50 Hz आता है।

🎯 Exam Tip: आवर्तकाल (T) और आवृत्ति (n या f) के बीच संबंध \( n = \frac{1}{T} \) याद रखना चाहिए। इस सूत्र का उपयोग करके आप एक से दूसरे की गणना आसानी से कर सकते हैं।

 

प्रश्न 11. श्रव्यता सीमा होती है
(a) 200 Hz से 20000 Hz तक
(b) 20 Hz से 20000 Hz तक
(c) 2 Hz से 20 Hz तक
(d) 20000 Hz से अधिक।
Answer: (b) 20 Hz से 20000 Hz तक
In simple words: मनुष्य आमतौर पर 20 हर्ट्ज़ से 20,000 हर्ट्ज़ के बीच की ध्वनियों को सुन सकते हैं। इससे कम आवृत्ति की ध्वनियाँ अपश्रव्य और इससे अधिक आवृत्ति की ध्वनियाँ पराश्रव्य होती हैं।

🎯 Exam Tip: श्रव्यता सीमा व्यक्ति की उम्र के साथ बदलती रहती है; युवाओं में ऊपरी सीमा अधिक होती है जो उम्र के साथ घटती जाती है।

 

प्रश्न 12. प्रतिध्वनि सुनने के लिए हमारे कान तक ध्वनि कम से कम कितने समय बाद पहुंचनी चाहिए ?
(a) 0.1s
(b) 0.5s
(c) 1s
(d) 2s.
Answer: (a) 0.1s
In simple words: हमें किसी ध्वनि की प्रतिध्वनि तभी सुनाई देती है जब मूल ध्वनि और परावर्तित ध्वनि के हमारे कानों तक पहुंचने के बीच कम से कम 0.1 सेकण्ड का अंतर हो। यह हमारे सुनने की क्षमता के कारण होता है।

🎯 Exam Tip: प्रतिध्वनि के लिए आवश्यक न्यूनतम दूरी ध्वनि के वेग पर निर्भर करती है। सामान्य वायु वेग पर यह लगभग 17.2 मीटर होती है।

 

प्रश्न 13. अल्ट्रासोनोग्राफी में प्रयुक्त तरंगों की आवृत्ति है
(a) 20 Hz
(b) 20 Hz से कम
(c) 20 Hz से 20000 Hz तक
(d) 20000 Hz से अधिक।
Answer: (d) 20000 Hz से अधिक।
In simple words: अल्ट्रासोनोग्राफी में ऐसी ध्वनि तरंगों का उपयोग किया जाता है जिनकी आवृत्ति 20,000 हर्ट्ज़ से बहुत अधिक होती है, क्योंकि ये उच्च आवृत्ति तरंगें शरीर के अंदर की स्पष्ट छवियां बनाने में मदद करती हैं।

🎯 Exam Tip: पराश्रव्य तरंगों (ultrasound) की उच्च आवृत्ति उन्हें छोटी तरंगदैर्ध्य प्रदान करती है, जिससे वे छोटी संरचनाओं को भी भेदकर स्पष्ट प्रतिबिंब बना पाती हैं।

 

प्रश्न 14. आयाम का मात्रक है
(a) m
Answer: (a) m
In simple words: आयाम का मात्रक मीटर (m) होता है, क्योंकि यह एक विस्थापन है जो किसी कण की संतुलन स्थिति से अधिकतम दूरी को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: आयाम हमेशा तरंग के माध्यम के कणों के विस्थापन को दर्शाता है, इसलिए इसकी इकाई दूरी की इकाई, यानी मीटर, होती है।

 

प्रश्न 15. ध्वनि की निर्वात में चाल होती है
(a) 3 × 10⁸ m/s
(b) 330 m/s
(c) ध्वनि निर्वात् में नहीं चल सकती
(d) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (c) ध्वनि निर्वात् में नहीं चल सकती
In simple words: ध्वनि को चलने के लिए एक माध्यम की आवश्यकता होती है, जैसे ठोस, द्रव या गैस। निर्वात में कोई माध्यम नहीं होता, इसलिए ध्वनि वहाँ नहीं चल सकती।

🎯 Exam Tip: प्रकाश तरंगों के विपरीत, जो निर्वात में भी यात्रा कर सकती हैं, ध्वनि तरंगें यांत्रिक तरंगें हैं जिन्हें संचरण के लिए कणों की आवश्यकता होती है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. अनुदैर्ध्य तरंगें किस प्रकार के माध्यम में उत्पन्न की जा सकती हैं ?
Answer: अनुदैर्ध्य तरंगें ठोस, द्रव और गैस तीनों प्रकार के माध्यमों में उत्पन्न की जा सकती हैं। यह इसलिए संभव है क्योंकि इन तरंगों में कणों का कंपन तरंग के चलने की दिशा में होता है, जिससे संपीडन और विरलन बनते हैं।
In simple words: अनुदैर्ध्य तरंगें ठोस, द्रव और गैस, सभी में बन सकती हैं।

🎯 Exam Tip: ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं, और वे विभिन्न माध्यमों से गुजर सकती हैं, जो इस बात का एक सामान्य उदाहरण है।

 

प्रश्न 2. लोहे में उत्पन्न ध्वनि तरंगें किस प्रकार की होती हैं?
Answer: लोहे में उत्पन्न ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं। ठोस पदार्थों में ध्वनि इसी प्रकार संचरित होती है, जहाँ माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा में कंपन करते हैं।
In simple words: लोहे में बनने वाली ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं।

🎯 Exam Tip: ठोस पदार्थों में कणों के बीच मजबूत अंतरा-आणविक बल ध्वनि को बहुत तेज़ी से संचरित करने में मदद करते हैं, आमतौर पर गैसों और द्रवों की तुलना में।

 

प्रश्न 3. वायु में उत्पन्न ध्वनि तरंगें किस प्रकार की होती
Answer: वायु में उत्पन्न ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं। हवा में, ध्वनि हवा के कणों को तरंग के आगे बढ़ने की दिशा में ही संपीड़ित और विरलित करके यात्रा करती है।
In simple words: हवा में बनने वाली ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं।

🎯 Exam Tip: गैसों में ध्वनि अनुप्रस्थ तरंगों के रूप में संचरित नहीं हो सकती क्योंकि उनमें दृढ़ता (rigidity) की कमी होती है जो अनुप्रस्थ कंपन को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

 

प्रश्न 4. किसी तार को दो खुटियों के बीच तानकर लम्बाई के लम्बवत् खींचकर छोड़ दिया जाता है तो तार में उत्पन्न तरंग का नाम बताइए।
Answer: जब किसी तार को दो खुटियों के बीच तानकर लम्बाई के लम्बवत् खींचकर छोड़ा जाता है, तो तार में उत्पन्न तरंग अनुप्रस्थ तरंग कहलाती है। इस प्रकार की तरंग में कणों का कंपन तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् होता है।
In simple words: तार को खींचकर छोड़ने पर उसमें अनुप्रस्थ तरंग बनती है।

🎯 Exam Tip: अनुप्रस्थ तरंगें आमतौर पर ठोस माध्यमों या द्रव की सतह पर बनती हैं जहाँ माध्यम में पर्याप्त प्रत्यास्थता (elasticity) होती है ताकि कण अपनी संतुलन स्थिति में वापस आ सकें।

 

प्रश्न 5. तरंगदैर्ध्य का S.I. मात्रक क्या है ?
Answer: तरंगदैर्ध्य का S.I. मात्रक मीटर (m) है। यह एक तरंग में दो क्रमागत समान बिंदुओं (जैसे दो श्रृंग या दो गर्त) के बीच की दूरी को दर्शाता है।
In simple words: तरंगदैर्ध्य की इकाई मीटर होती है, क्योंकि यह एक दूरी है।

🎯 Exam Tip: तरंगदैर्ध्य दूरी का माप है, इसलिए इसकी इकाई वही होती है जो दूरी की इकाई होती है। कुछ स्रोतों में आवृत्ति का मात्रक भ्रमवश दिया जा सकता है, लेकिन सही मात्रक मीटर ही है।

 

प्रश्न 7. एक स्वतन्त्र रूप से लटकी स्लिंकी को खींचकर छोड़ दिया जाए तो किस प्रकार की तरंगें उत्पन्न होंगी ?
Answer: एक स्वतन्त्र रूप से लटकी स्लिंकी को खींचकर छोड़ दिया जाए तो उसमें अनुदैर्ध्य तरंगें उत्पन्न होंगी। स्लिंकी के कुंडलियों का आगे-पीछे का कंपन तरंग संचरण की दिशा के समानांतर होता है।
In simple words: स्लिंकी को खींचकर छोड़ने पर अनुदैर्ध्य तरंगें बनती हैं।

🎯 Exam Tip: स्लिंकी अनुदैर्ध्य और अनुप्रस्थ दोनों प्रकार की तरंगों का प्रदर्शन करने के लिए एक उत्कृष्ट उपकरण है, लेकिन खींचकर छोड़ना अनुदैर्ध्य तरंगों का सामान्य उदाहरण है।

 

प्रश्न 8. घड़ी की सुइयों की गति किस प्रकार की होती है ?
Answer: घड़ी की सुइयों की गति आवर्ती गति होती है। आवर्ती गति वह गति होती है जो एक निश्चित समय अंतराल के बाद खुद को दोहराती है।
In simple words: घड़ी की सुइयाँ एक खास समय के बाद एक ही चाल पर वापस आती हैं, इसे आवर्ती गति कहते हैं।

🎯 Exam Tip: आवर्ती गति के अन्य उदाहरणों में पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर घूमना या एक झूले का आगे-पीछे झूलना शामिल है, जहाँ गति एक निश्चित पैटर्न में दोहराई जाती है।

 

प्रश्न 9. तरंगदैर्ध्य की परिभाषा दीजिए।
Answer: तरंगदैर्ध्य किसी आवर्ती तरंग में दो क्रमागत श्रृंगों (crest) या दो क्रमागत गर्तों (trough) के बीच की दूरी होती है। अनुदैर्ध्य तरंगों के लिए, यह दो क्रमागत संपीडनों या दो क्रमागत विरलनों के बीच की दूरी होती है। इसे ग्रीक अक्षर \( \lambda \) (लैम्डा) से दर्शाया जाता है।
In simple words: तरंगदैर्ध्य मतलब तरंग में दो सबसे ऊँचे हिस्सों या दो सबसे नीचे हिस्सों के बीच की दूरी।

🎯 Exam Tip: तरंगदैर्ध्य की माप मीटर में की जाती है और यह तरंग के आकार का एक महत्वपूर्ण गुण है जो उसके वेग और आवृत्ति के साथ संबंधित होता है।

 

प्रश्न 10. आवृत्ति की परिभाषा दीजिए।
Answer: आवृत्ति किसी माध्यम में तरंग संचरण के दौरान एक सेकण्ड में किसी निश्चित बिंदु से गुजरने वाले कम्पनों (या दोलनों) की संख्या को कहते हैं। इसे \( n \) या \( f \) से प्रदर्शित किया जाता है और इसका S.I. मात्रक हर्ट्ज़ (Hz) है।
In simple words: आवृत्ति बताती है कि एक सेकण्ड में कितनी बार कोई चीज़ कंपन करती है या कितनी तरंगें एक बिंदु से गुज़रती हैं।

🎯 Exam Tip: उच्च आवृत्ति का मतलब है कि तरंगें तेज़ी से कंपन कर रही हैं, जबकि कम आवृत्ति का मतलब है कि वे धीरे-धीरे कंपन कर रही हैं। यह ध्वनि की पिच (तारत्व) से सीधा संबंधित है।

 

प्रश्न 11. राडार क्या है ?
Answer: राडार (RADAR) एक वैज्ञानिक प्रणाली है जो रेडियो तरंगों पर आधारित है। इसका उपयोग अंतरिक्ष में आने-जाने वाले वायुयानों का पता लगाने, उनकी दूरी, गति और स्थिति ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
In simple words: राडार एक ऐसी मशीन है जो रेडियो तरंगों का उपयोग करके हवाई जहाज़ों और दूसरी चीज़ों की जगह और गति बताती है।

🎯 Exam Tip: राडार का पूरा नाम 'रेडियो डिटेक्शन एंड रेंजिंग' है। यह हवाई यातायात नियंत्रण, मौसम पूर्वानुमान और सैन्य अनुप्रयोगों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. ध्वनि उत्पन्न करने के लिए क्या आवश्यक हैं ?
Answer: ध्वनि उत्पन्न करने के लिए मुख्य रूप से कम्पन (vibration) आवश्यक है। कोई भी वस्तु जो कंपन करती है, वह अपने आस-पास के माध्यम (जैसे हवा, पानी या ठोस) में विक्षोभ उत्पन्न करती है। यही विक्षोभ तरंगों के रूप में आगे बढ़ता है और ध्वनि के रूप में हमारे कानों तक पहुँचता है। उदाहरण के लिए, जब हम बोलते हैं, तो हमारे स्वरयंत्र (vocal cords) में कंपन होता है।
In simple words: ध्वनि तभी बनती है जब कोई चीज़ कंपन करती है।

🎯 Exam Tip: कंपन करने वाली वस्तु ध्वनि स्रोत कहलाती है। ध्वनि की गुणवत्ता और प्रबलता कंपन के आयाम और आवृत्ति पर निर्भर करती है।

 

प्रश्न 3. अनुदैर्ध्य तरंगें क्या हैं ?
Answer: अनुदैर्ध्य तरंगें वे तरंगें होती हैं जिनमें माध्यम के कण, तरंग के संचरण की दिशा में ही आगे-पीछे कंपन करते हैं। इन तरंगों में संपीडन (जहाँ कण पास-पास होते हैं) और विरलन (जहाँ कण दूर-दूर होते हैं) बनते हैं। ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगों का एक प्रमुख उदाहरण हैं। जब एक स्वरित्र द्विभुज कंपन करता है, तो उसकी भुजाएँ बाहर जाने पर हवा को संपीड़ित करती हैं और अंदर आने पर विरलित करती हैं।
In simple words: अनुदैर्ध्य तरंगों में, माध्यम के कण उसी दिशा में हिलते हैं जिसमें तरंग चलती है, जिससे संपीडन और विरलन बनते हैं।

🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि अनुदैर्ध्य तरंगें ऊर्जा का संचार करती हैं, लेकिन माध्यम के कण स्वयं आगे नहीं बढ़ते, वे केवल अपनी संतुलन स्थिति के इर्द-गिर्द कंपन करते हैं।

 

प्रश्न 4. तरंग संचरण के लिए क्या आवश्यक है ?
Answer: तरंग संचरण के लिए एक माध्यम (medium) का होना आवश्यक है। ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है, जिसका अर्थ है कि इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए ठोस, द्रव या गैस जैसे पदार्थ की आवश्यकता होती है। निर्वात में ध्वनि का संचरण संभव नहीं है क्योंकि वहाँ कोई कण नहीं होते जो कंपन को आगे बढ़ा सकें। अनुदैर्ध्य तरंगें संपीडन और विरलन के रूप में आगे बढ़ती हैं, और यह प्रक्रिया माध्यम के कणों के घनत्व और आयतन में परिवर्तन से जुड़ी होती है।
In simple words: तरंगों को एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए किसी माध्यम की ज़रूरत होती है, जैसे हवा या पानी।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि सभी तरंगों को माध्यम की आवश्यकता नहीं होती; उदाहरण के लिए, प्रकाश एक विद्युतचुंबकीय तरंग है और यह निर्वात में भी यात्रा कर सकती है।

 

प्रश्न 5. तरंग संचरण में एक स्थान से दूसरे स्थान तक किसका स्थानान्तरण होता है, ऊर्जा का या भौतिक द्रव्यमान का ?
Answer: तरंग संचरण में एक स्थान से दूसरे स्थान तक ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है, न कि भौतिक द्रव्यमान का। माध्यम के कण केवल अपनी संतुलन स्थिति के चारों ओर कंपन करते हैं, वे एक जगह से दूसरी जगह नहीं जाते। इस प्रकार, तरंगें बिना पदार्थ को ले जाए केवल ऊर्जा और संवेग को आगे बढ़ाती हैं।
In simple words: जब तरंगें चलती हैं, तो वे ऊर्जा को एक जगह से दूसरी जगह ले जाती हैं, न कि किसी पदार्थ को।

🎯 Exam Tip: यह तरंगों की एक मूलभूत विशेषता है। उदाहरण के लिए, समुद्र की लहरें ऊर्जा तट पर लाती हैं, लेकिन समुद्र का पानी खुद तट पर नहीं आता।

 

प्रश्न 6. अनुदैर्ध्य तरंगों के दो उदाहरण दीजिए।
Answer: अनुदैर्ध्य तरंगों के दो प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं:

  • वायु में चलने वाली ध्वनि तरंगें।
  • जल के अन्दर चलने वाली तरंगें, जैसे पनडुब्बी से निकलने वाली सोनार तरंगें।
ये दोनों उदाहरण दिखाते हैं कि माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा में कैसे कंपन करते हैं।
In simple words: ध्वनि तरंगें जो हवा में चलती हैं और पानी के अंदर चलने वाली तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगों के उदाहरण हैं।

🎯 Exam Tip: स्प्रिंग में उत्पन्न तरंगें भी अनुदैर्ध्य तरंगों का एक अच्छा उदाहरण हैं जब स्प्रिंग को उसकी लंबाई के समानांतर खींचा और छोड़ा जाता है।

 

प्रश्न 8. राडार के उपयोग एवं इसके स्थिति निर्धारण की पद्धति बताइए।
Answer: राडार के उपयोग और स्थिति निर्धारण की पद्धति इस प्रकार है:
राडार के उपयोग:

  • राडार का उपयोग अंतरिक्ष में आने-जाने वाले वायुयानों का पता लगाने और उनकी स्थिति ज्ञात करने में होता है।
  • नौकाओं, जहाजों या वायुयानों के संचालन में राडार का महत्वपूर्ण उपयोग है ताकि रास्ते में आने वाली बाधाओं का पता लगाया जा सके।
  • मिसाइलों के प्रक्षेपण और उनके मार्गदर्शन में भी राडार का प्रयोग होता है।

स्थिति निर्धारण की पद्धति:
राडार में लगे एंटेना से लक्ष्य की दिशा का ठीक-ठीक पता चल जाता है। राडार का प्रेषित्र नियमित अंतराल पर रेडियो ऊर्जा के छोटे, तीव्र स्पंद भेजता रहता है। इन भेजे गए स्पंदों के बीच के समय में, राडार का ग्राही बाहरी किसी वस्तु से परावर्तित होकर वापस आने वाली तरंगों को ग्रहण करता है। परावर्तित होकर वापस आने का समय विद्युत परिपथों द्वारा सही-सही ज्ञात कर लिया जाता है। समय के अनुपात में, ग्राही यंत्र पर एक सूचक की मदद से वस्तु की दूरी तुरंत पता चल जाती है, जिसे कैथोड किरण नलिका पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। राडार वस्तु की दूरी और गति का सटीक अनुमान प्रदान करता है।
In simple words: राडार हवाई जहाजों का पता लगाता है और उनकी दिशा बताता है। यह रेडियो तरंगें भेजकर और उनके वापस आने में लगे समय को मापकर दूरी और स्थिति पता करता है।

🎯 Exam Tip: राडार की कार्यप्रणाली ध्वनि के परावर्तन (प्रतिध्वनि) के सिद्धांत के समान है, लेकिन यह रेडियो तरंगों का उपयोग करता है। याद रखें कि राडार का उपयोग केवल हवाई जहाजों तक सीमित नहीं है, यह मौसम की निगरानी में भी काम आता है।

 

प्रश्न 9. अनुप्रस्थ एवं अनुदैर्ध्य तरंगों में क्या अन्तर है?
Answer: अनुप्रस्थ और अनुदैर्ध्य तरंगों के बीच मुख्य अंतर निम्नलिखित तालिका में दिए गए हैं। दोनों तरंगों में कणों का कंपन ऊर्जा के संचरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अनुप्रस्थ तरंगअनुदैर्ध्य तरंग
1. इन तरंगों में माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के लम्बवत् कंपन या दोलन करते हैं।1. इन तरंगों में माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के अनुरूप ही कंपन या दोलन करते हैं।
2. इनमें श्रृंग (crest) और गर्त (trough) बनते हैं जिनकी सहायता से ये तरंगें संचरित होती हैं। एक श्रृंग व एक गर्त मिलकर एक तरंग बनाते हैं।2. इनमें संपीडन तथा विरलन बनते हैं जिनकी सहायता से ये तरंगें संचरित होती हैं। एक संपीडन व एक विरलन मिलकर एक तरंग बनाते हैं।
3. ये तरंगें ठोस में तथा द्रवों की ऊपरी सतहों पर से संचरित हो सकती हैं। ये वायु या अन्य गैसों में संचरित नहीं हो सकतीं।3. ये तरंगें ठोस, द्रव तथा गैस तीनों में से संचरित हो सकती हैं।

In simple words: अनुप्रस्थ तरंगों में कण ऊपर-नीचे (तरंग की दिशा के लंबवत) हिलते हैं, जैसे पानी की लहरें। अनुदैर्ध्य तरंगों में कण आगे-पीछे (तरंग की दिशा के समानांतर) हिलते हैं, जैसे ध्वनि तरंगें।

🎯 Exam Tip: यह तालिका दोनों प्रकार की तरंगों के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण है। उदाहरणों के साथ इनके मूलभूत गुणों को याद रखना आपको प्रश्नों को हल करने में मदद करेगा।

 

प्रश्न 1. निम्नलिखित की परिभाषाएँ दीजिए: (i) आयाम, (ii) आवृत्ति, (iii) आवर्तकाल, (iv) तरंगदैर्ध्य।
Answer:
(i) आयाम: तरंग संचरण के कारण माध्यम के किसी कण का माध्य स्थिति से एक ओर का अधिकतम विस्थापन तरंग का 'आयाम' कहलाता है। यह उस ऊर्जा को दर्शाता है जो तरंग द्वारा संचारित होती है। ध्वनि तरंग के लिए आयाम का मात्रक मीटर होता है।
(ii) आवृत्ति: किसी माध्यम में तरंग संचरण के कारण माध्यम के किसी कण द्वारा 1 सेकण्ड में किए गए कम्पनों की संख्या को उस तरंग की 'आवृत्ति' कहते हैं। इसे \( n \) से प्रदर्शित करते हैं। आवृत्ति का S.I. मात्रक हर्ट्ज़ (प्रतीक Hz) है। यह ध्वनि की तारत्व को निर्धारित करती है।
(iii) आवर्तकाल: माध्यम में तरंग संचरण के कारण, माध्यम के किसी कण द्वारा एक कम्पन पूरा करने में लिया गया समय तरंग का 'आवर्तकाल' कहलाता है। इसे \( T \) से प्रदर्शित करते हैं। इसका S.I. मात्रक सेकण्ड है। यह आवृत्ति का व्युत्क्रम होता है। अथवा ध्वनि तरंग के दो क्रमागत संपीडनों या दो क्रमागत विरलनों को एक निश्चित बिन्दु से गुजरने में लगा समय भी तरंग का 'आवर्तकाल' कहलाता है।
(iv) तरंगदैर्ध्य: माध्यम के किसी कण को एक कम्पन करने में लगे समय के दौरान तरंग द्वारा चली गई दूरी को तरंगदैर्ध्य कहते हैं। अथवा अनुप्रस्थ तरंग में किन्हीं दो निकटवर्ती श्रृंगों अथवा दो निकटवर्ती गर्तों के बीच की दूरी तरंगदैर्ध्य कहलाती है। अनुदैर्ध्य तरंग में किन्हीं दो निकटवर्ती अधिकतम संपीड़न अथवा किन्हीं दो निकटवर्ती अधिकतम विरलन वाले कणों के बीच की दूरी तरंगदैर्ध्य कहलाती है। तरंगदैर्ध्य को \( \lambda \) (लैम्डा) से प्रदर्शित करते हैं। इसका मात्रक मीटर है। तरंगदैर्ध्य ध्वनि की गति और आवृत्ति के साथ संबंधित है।
In simple words: आयाम बताता है कि कण कितना दूर हिलता है। आवृत्ति बताती है कि एक सेकण्ड में कितने कंपन होते हैं। आवर्तकाल एक कंपन में लगा समय है। तरंगदैर्ध्य दो चोटियों के बीच की दूरी है।

🎯 Exam Tip: इन चारों परिभाषाओं को उनके मात्रकों और संबंधित सूत्रों के साथ अच्छी तरह से याद करें, क्योंकि ये तरंगों के अध्ययन के मूल आधार हैं।

 

प्रश्न 2. सम्बन्ध बताइए (i) आवर्तकाल और आवृत्ति (ii) आवृत्ति, तरंगदैर्ध्य और वेग।
Answer:
(i) आवर्तकाल और आवृत्ति: आवर्तकाल (\( T \)) और आवृत्ति (\( n \)) एक-दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं। इसका मतलब है कि यदि किसी वस्तु की आवृत्ति \( n \) हर्ट्ज़ है, तो वस्तु 1 सेकण्ड में \( n \) कम्पन करती है। इसलिए, 1 कम्पन करने में वस्तु द्वारा लिया गया समय \( T = \frac{1}{n} \) सेकण्ड होता है। ये दोनों भौतिक राशियाँ कंपन की दर को अलग-अलग तरीके से व्यक्त करती हैं।
(ii) आवृत्ति, तरंगदैर्ध्य और वेग: किसी तरंग का वेग (\( v \)), उसकी आवृत्ति (\( n \)) और तरंगदैर्ध्य (\( \lambda \)) के बीच संबंध इस प्रकार है: \( v = n \times \lambda \)। इसका अर्थ है कि तरंग का वेग उसकी आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य के गुणनफल के बराबर होता है। यदि तरंग का आवर्तकाल \( T \) है, तो \( n = \frac{1}{T} \), तो सूत्र को \( v = \frac{\lambda}{T} \) के रूप में भी लिखा जा सकता है। यह सूत्र तरंग गति के मूलभूत सिद्धांतों में से एक है।
In simple words: आवर्तकाल और आवृत्ति एक दूसरे के उल्टे होते हैं। तरंग का वेग उसकी आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य को गुणा करने से मिलता है।

🎯 Exam Tip: ये दो संबंध भौतिकी में तरंग गति के लिए मौलिक हैं। इन्हें गणितीय सूत्रों और उनके अर्थ के साथ स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है। इन्हें याद करने से कई संख्यात्मक समस्याओं को हल करने में मदद मिलेगी।

 

प्रश्न 3. उत्तर दीजिए
(i) माध्यम का कोई कण जब एक दोलन पूरा करता है तो वह कितनी दूरी तय करता है ?
(ii) वायु में ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य हैं या अनुप्रस्थ।
(iii) किसी लम्बी स्लिंकी (spring) में उत्पन्न हो सकने वाली तरंग/तरंगों के नाम लिखिए।
(iv) अनुप्रस्थ और अनुदैर्ध्य तरंगों के दो-दो उदाहरण दीजिए।
(v) उस भौतिक राशि का नाम लिखिए जिसको मात्रक हर्ट्ज़ है ?
Answer:
(i) जब माध्यम का कोई कण एक दोलन पूरा करता है, तो तरंग एक तरंगदैर्ध्य (\( \lambda \)) के बराबर दूरी तय करती है। यह तरंगदैर्ध्य कण के एक पूर्ण चक्र को पूरा करने में लगने वाले समय में तरंग द्वारा तय की गई दूरी है।
(ii) वायु में ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं। वायु के कण तरंग संचरण की दिशा के समानांतर कंपन करते हैं, जिससे संपीडन और विरलन उत्पन्न होते हैं।
(iii) किसी लम्बी स्लिंकी (spring) में अनुदैर्ध्य तरंगें उत्पन्न की जा सकती हैं। यदि स्लिंकी को खींचकर और फिर छोड़कर कंपन कराया जाए, तो कुंडलियाँ आगे-पीछे कंपन करती हैं।
(iv) अनुप्रस्थ तरंगों के उदाहरण:
1. वायलिन, सितार आदि की तनी हुई डोरियों में उत्पन्न तरंगें।
2. जल की सतह पर उत्पन्न तरंगें।
अनुदैर्ध्य तरंगों के उदाहरण:
1. वायु में चलने वाली ध्वनि तरंगें।
2. जल के अन्दर चलने वाली तरंगें।
(v) वह भौतिक राशि जिसकी मात्रक हर्ट्ज़ (Hz) है, आवृत्ति (Frequency) कहलाती है। यह एक सेकण्ड में होने वाले कंपनों की संख्या को दर्शाती है।
In simple words: एक कण के एक पूरे हिलने पर तरंग एक तरंगदैर्ध्य जितनी दूरी चलती है। हवा में ध्वनि अनुदैर्ध्य तरंग है। स्लिंकी में भी अनुदैर्ध्य तरंग बन सकती है। तार और पानी की सतह पर अनुप्रस्थ तरंगें बनती हैं, जबकि हवा और पानी के अंदर ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं। आवृत्ति की इकाई हर्ट्ज़ है।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न विभिन्न तरंग अवधारणाओं के आपके ज्ञान का परीक्षण करता है। तरंगों के प्रकार, उनकी विशेषताओं और वास्तविक दुनिया के उदाहरणों को अच्छी तरह से समझें।

 

प्रश्न 4. पराध्वनि के पाँच उपयोग लिखिए।
Answer: पराध्वनि (ultrasound) के पाँच प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं:

  • समुद्र की गहराई मापने और समुद्र में पनडुब्बी का पता लगाने में।
  • इमारतों की दीवारों तथा धातु की चादरों में छोटी दरारों और दोषों का पता लगाने में।
  • शरीर के भीतर स्थित व्रण (घाव), पथरी आदि का पता लगाने में (अल्ट्रासोनोग्राफी)।
  • मानव भ्रूण की वृद्धि और दोषों की जानकारी प्राप्त करने में।
  • पराध्वनि तरंगों को हृदय के विभिन्न भागों से परावर्तित कर हृदय का प्रतिबिम्ब बनाने में (इकोकार्डियोग्राम)।
पराध्वनि की उच्च आवृत्ति उन्हें विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए उपयोगी बनाती है।
In simple words: पराध्वनि का उपयोग समुद्र की गहराई मापने, धातुओं में दरारें खोजने, शरीर के अंदर देखने (अल्ट्रासाउंड), बच्चे की जांच करने और हृदय की तस्वीरें लेने के लिए होता है।

🎯 Exam Tip: पराध्वनि की उच्च आवृत्ति और छोटी तरंगदैर्ध्य उन्हें बाधाओं से टकराकर स्पष्ट प्रतिध्वनि उत्पन्न करने में सक्षम बनाती है, जो इन सभी अनुप्रयोगों का आधार है।

 

प्रश्न 5. SONAR का विस्तृत रूप लिखिए। समुद्र की गहराई आप प्रतिध्वनिक परास का उपयोग कर कैसे ज्ञात करेंगे?
Answer: SONAR का विस्तृत रूप Sound Navigation and Ranging है।
समुद्र की गहराई ज्ञात करने की विधि:
सोनार एक ऐसी युक्ति है जिसमें जल में स्थित पिण्डों की दूरी, दिशा तथा चाल मापने के लिए पराध्वनिक तरंगों का उपयोग किया जाता है। इसकी कार्यविधि में एक प्रेषित्र (transmitter) और एक संसूचक (detector) होता है, जो किसी नाव या जहाज में लगाया जाता है। प्रेषित्र पराध्वनि तरंगें उत्पन्न करता है जो जल में गमन करती हैं और समुद्र तल या किसी पिण्ड से टकराकर परावर्तित होकर संसूचक द्वारा ग्रहण कर ली जाती हैं।
संसूचक इन पराध्वनि तरंगों को विद्युत संकेतों में बदल देता है। ध्वनि की चाल (जल में) और पराध्वनि के प्रेषण तथा अभिग्रहण के बीच के समय अंतराल को ज्ञात करके उस पिण्ड की दूरी की गणना की जा सकती है जिससे ध्वनि तरंग परावर्तित हुई है।
माना पराध्वनि संकेत के प्रेषण तथा अभिग्रहण का कुल समय अंतराल \( t \) है और समुद्री जल में ध्वनि की चाल \( v \) है। चूंकि तरंग जहाज से तल तक जाकर वापस आती है, इसलिए कुल दूरी \( 2d \) होगी, जहाँ \( d \) जहाज से समुद्र तल की दूरी है।
तो, \( 2d = v \times t \)
\( \implies d = \frac{v \times t}{2} \)
इस विधि को प्रतिध्वनिक परास (Echo ranging) कहते हैं।
U नाव या जहाज पानी की सतह प्रेषित्र संसूचक समुद्र तल
In simple words: सोनार का मतलब है 'साउंड नेविगेशन एंड रेंजिंग'। इसका उपयोग समुद्र की गहराई जानने के लिए किया जाता है। एक जहाज से ध्वनि तरंगें भेजी जाती हैं जो समुद्र के तल से टकराकर वापस आती हैं। तरंग को जाने और वापस आने में लगे समय को मापकर, हम समुद्र की गहराई का पता लगा सकते हैं।

🎯 Exam Tip: सोनार का सिद्धांत चमगादड़ों द्वारा उपयोग किए जाने वाले प्रतिध्वनि निर्धारण (echolocation) के समान है। सूत्र \( d = \frac{v \times t}{2} \) में 2 से भाग देना न भूलें, क्योंकि तरंग को दूरी तय करने और वापस आने में समय लगता है।

 

प्रश्न 7. ध्वनि के परावर्तन के नियम लिखिए। इनके सत्यापन के लिए एक क्रियाकलाप का वर्णन कीजिए।
Answer: ध्वनि का परावर्तन प्रकाश के परावर्तन के नियमों का पालन करता है। ये नियम इस प्रकार हैं:
1. परावर्तक पृष्ठ के आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब (normal) तथा ध्वनि के आपतन होने की दिशा और परावर्तन होने की दिशा के बीच बने कोण आपस में बराबर होते हैं। अर्थात, आपतन कोण हमेशा परावर्तन कोण के बराबर होता है।
2. आपतन ध्वनि, परावर्तन ध्वनि और अभिलंब तीनों एक ही तल (plane) में होते हैं।
सत्यापन के लिए क्रियाकलाप:
यह क्रियाकलाप दर्शाने के लिए किया जा सकता है कि ध्वनि के परावर्तन के नियम प्रकाश के परावर्तन के नियमों के समान हैं।
1. एक मेज पर दो समान लम्बाई के पाइप लें। इन पाइपों को एक दीवार के पास रखें, जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।
2. एक पाइप के खुले सिरे के पास एक छोटी घड़ी रखें।
3. दूसरे पाइप की ओर से ध्वनि सुनने की कोशिश करें।
4. पाइपों को इस तरह से समायोजित करें कि घड़ी की ध्वनि सबसे स्पष्ट सुनाई दे।
5. अब, दोनों पाइपों और दीवार पर खींचे गए अभिलंब के बीच के कोणों को मापें।
6. आप पाएंगे कि ध्वनि के आपतन और परावर्तन के कोण बराबर हैं, और सभी संबंधित रेखाएँ एक ही तल में स्थित हैं।
कानघड़ीअभिलंबआपतन ध्वनिपरावर्तन ध्वनि
In simple words: ध्वनि भी प्रकाश की तरह टकराकर वापस आती है। इसके दो नियम हैं: पहला, ध्वनि जिस कोण पर आती है, उसी कोण पर वापस जाती है; दूसरा, आने वाली ध्वनि, जाने वाली ध्वनि और बीच की सीधी रेखा (अभिलंब) एक ही जगह पर होते हैं। पाइपों से एक छोटी घड़ी की आवाज़ सुनकर हम इसे देख सकते हैं।

🎯 Exam Tip: यह क्रियाकलाप ध्वनि परावर्तन के नियमों को समझने का एक व्यावहारिक तरीका है। आरेख बनाना और आपतन तथा परावर्तन कोणों को चिह्नित करना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 8. पराध्वनि क्या है? धातुओं में दोषों का पता लगाने में इसका उपयोग कैसे किया जाता है?
Answer:
पराध्वनि: वे ध्वनि तरंगें जिनकी आवृत्ति 20,000 हर्ट्ज़ (20 किलोहर्ट्ज़) से अधिक होती है, पराध्वनि कहलाती हैं। मनुष्य इन्हें सुन नहीं सकते, लेकिन चमगादड़, बिल्लियाँ, कुत्ते और कुछ पक्षी जैसी कुछ प्राणी इन्हें उत्पन्न और सुन सकते हैं। इन तरंगों को क्वार्ट्ज़ के क्रिस्टल के कंपनों से उत्पन्न किया जा सकता है।

धातुओं में दोषों का पता लगाने में उपयोग:
पराध्वनि का उपयोग धातुओं से बने ब्लॉकों या संरचनाओं में आंतरिक दोषों (जैसे दरारें, छेद या रिक्तियाँ) का पता लगाने के लिए किया जाता है। धातु के ब्लॉकों में विद्यमान दरारें या छिद्र बाहर से दिखाई नहीं देते हैं।
इस विधि में, पराध्वनि तरंगों को धातु के ब्लॉक से गुजारा जाता है। यदि ब्लॉक में कोई दोष (जैसे दरार या छेद) होता है, तो पराध्वनि तरंगें उस दोष से टकराकर वापस परावर्तित हो जाती हैं। एक संसूचक इन परावर्तित तरंगों को ग्रहण करता है। यदि कोई दोष होता है, तो संसूचक एक अनियमित पैटर्न या समय पर परावर्तित तरंगों को प्राप्त करता है, जो दोष की उपस्थिति को दर्शाता है। इस प्रकार, धातु के ब्लॉकों से दोषों को दूर किया जा सकता है या उनका पता लगाया जा सकता है, जिससे सामग्री की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।
धातु का ब्लॉक दोष प्रेषित्र संसूचक
In simple words: पराध्वनि 20,000 हर्ट्ज़ से ज़्यादा की आवाज़ होती है। धातुओं में छिपी हुई दरारें ढूंढने के लिए, इस तेज़ आवाज़ को धातु में से गुज़ारते हैं। अगर कोई दरार होती है, तो आवाज़ टकराकर वापस आ जाती है, जिससे हमें पता चल जाता है कि वहाँ कोई खराबी है।

🎯 Exam Tip: पराध्वनि की छोटी तरंगदैर्ध्य उसे छोटी-छोटी दरारों और दोषों का भी पता लगाने में सक्षम बनाती है, जो एक्स-रे या अन्य तकनीकों से संभव नहीं हो पाता। यह इसकी उच्च आवृत्ति का सीधा परिणाम है।

 

प्रश्न 9. राडार के अवयव एवं उपयोग पर प्रकाश डालिए।
Answer: राडार के मुख्य अवयव और उपयोग इस प्रकार हैं:
राडार के अवयव:
1. मॉड्यूलेटर (Modulator): यह रेडियो आवृत्ति दोलित्र (Radio frequency oscillator) को आवश्यक विद्युत शक्ति के विस्फोट प्रदान करता है ताकि रेडियो तरंगें उत्पन्न हो सकें।
2. रेडियो-आवृत्ति दोलित्र (Radio frequency Oscillator): यह उच्च आवृत्ति वाली रेडियो तरंगों के स्पंदों को उत्पन्न करता है जिनसे राडार के संकेत बनते हैं।
3. प्रेषित्र (Transmitter): यह दोलित्र द्वारा उत्पन्न रेडियो तरंगों को एंटेना तक पहुंचाता है।
4. एंटेना (Antenna): यह रेडियो तरंगों को अंतरिक्ष में भेजता है और परावर्तित तरंगों को वापस प्राप्त करता है।
5. संसूचक (Receiver): यह एंटेना द्वारा प्राप्त परावर्तित तरंगों को विद्युत संकेतों में बदलता है।
6. सूचक (Indicator/Display): यह प्राप्त संकेतों को दृश्य रूप में प्रदर्शित करता है, जिससे वस्तु की स्थिति और गति का पता चलता है।

राडार के उपयोग:

  • राडार का उपयोग अंतरिक्ष में आने-जाने वाले वायुयानों का संसूचन एवं उनकी स्थिति ज्ञात करने में किया जाता है।
  • राडार द्वारा नौका, जहाज या वायुयान चालन का परिचालन सम्भव है। इसके द्वारा चालकों को दूर स्थित पहाड़ों, हिमशैलों अथवा अन्य रुकावटों का पता चल जाता है।
  • राडार के कारण युद्ध के दौरान सहसा आक्रमण प्रायः असम्भव हो गया है। इसके द्वारा जहाजों, वायुयानों और रॉकेटों के आने की पूर्व सूचना मिल जाती है।
  • वायुयानों पर भी राडार यन्त्रों से आगन्तुक वायुयानों का पता चलता रहता है तथा इन यन्त्रों की सहायता से आक्रमणकारी विमान लक्ष्य तक जाने और अपने स्थान तक वापस आने में सफल होते हैं।

In simple words: राडार में एक मॉड्यूलेटर, रेडियो दोलित्र, एंटेना और रिसीवर जैसे कई हिस्से होते हैं। यह हवाई जहाजों का पता लगाने, जहाजों को रास्ता दिखाने और युद्ध में दुश्मनों का पता लगाने जैसे कई काम करता है।

🎯 Exam Tip: राडार एक जटिल प्रणाली है। इसके मुख्य घटकों को याद रखना और उनके कार्यों को समझना महत्वपूर्ण है। इसके सैन्य और नागरिक दोनों उपयोगों पर ध्यान दें।

आंकिक प्रश्न

 

प्रश्न 1. एक वस्तु 6600 कम्पन्न प्रति मिनट कर रही है। यदि वायु में ध्वनि का वेग 330 m/s हो तो ज्ञात कीजिए। (i) आवर्तकाल, (ii) आवृत्ति, (iii) तरंगदैर्ध्य।
Answer: हमें दिया गया है कि वस्तु प्रति मिनट 6600 कम्पन करती है, और वायु में ध्वनि का वेग \( v = 330 \text{ m/s} \) है।

(i) आवृत्ति (\( n \)):
वस्तु 1 मिनट (60 सेकण्ड) में 6600 कम्पन करती है।
इसलिए, 1 सेकण्ड में किए गए कम्पन (आवृत्ति) \( n = \frac{6600 \text{ कम्पन}}{60 \text{ सेकण्ड}} \)
\( n = 110 \text{ Hz} \)

(ii) आवर्तकाल (\( T \)):
आवर्तकाल आवृत्ति का व्युत्क्रम होता है: \( T = \frac{1}{n} \)
\( T = \frac{1}{110} \text{ सेकण्ड} \)
\( T \approx 0.00909 \text{ सेकण्ड} \)

(iii) तरंगदैर्ध्य (\( \lambda \)):
तरंग का वेग, आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य के बीच संबंध है: \( v = n \times \lambda \)
इसलिए, तरंगदैर्ध्य \( \lambda = \frac{v}{n} \)
\( \lambda = \frac{330 \text{ m/s}}{110 \text{ Hz}} \)
\( \lambda = 3 \text{ m} \)
यह दर्शाता है कि ध्वनि तरंग के ये तीनों गुण आपस में कैसे संबंधित हैं।
In simple words: पहले प्रति सेकण्ड कंपनों की संख्या (आवृत्ति) निकालते हैं, जो 110 Hz है। फिर, आवर्तकाल (एक कंपन का समय) 1/110 सेकण्ड आता है। आखिर में, ध्वनि की गति को आवृत्ति से भाग देकर तरंगदैर्ध्य 3 मीटर मिलती है।

🎯 Exam Tip: ऐसे संख्यात्मक प्रश्नों में, सबसे पहले दी गई सभी राशियों को SI इकाइयों में बदलें (जैसे मिनट को सेकण्ड में)। फिर, आवर्तकाल और आवृत्ति के बीच संबंध \( T = \frac{1}{n} \) और तरंग वेग सूत्र \( v = n\lambda \) का सही ढंग से उपयोग करें।

आंकिक प्रश्न

 

Question 1. एक वस्तु 6600 कम्पन्न प्रति मिनट कर रही है। यदि वायु में ध्वनि का वेग 330 m/s हो तो ज्ञात कीजिए।
(i) आवर्तकाल,
(ii) आवृत्ति,
(iii) तरंगदैर्थ्य।
Answer: सबसे पहले, हम एक मिनट में कुल कंपन को प्रति सेकंड कंपन में बदलेंगे। एक मिनट में 6600 कंपन होते हैं, तो एक सेकंड में \( \frac{6600}{60} = 110 \) कंपन होंगे। यही आवृत्ति (n) है।
(i) आवर्तकाल (T) निकालने के लिए, हम 1 को आवृत्ति से भाग देंगे: \( T = \frac{1}{n} = \frac{1}{110} \) सेकंड।
(ii) आवृत्ति (n) 110 हर्ट्ज है, क्योंकि यह प्रति सेकंड कंपनों की संख्या है।
(iii) तरंगदैर्ध्य \( (\lambda) \) निकालने के लिए, हम ध्वनि के वेग (v) को आवृत्ति (n) से भाग देंगे: \( \lambda = \frac{v}{n} = \frac{330}{110} = 3 \) मीटर। तरंगदैर्ध्य बताती है कि एक पूरी तरंग कितनी लंबी होती है।
In simple words: एक सेकंड में 110 बार हिलने वाली वस्तु का हर कंपन पूरा होने में \( \frac{1}{110} \) सेकंड लगता है, और उसकी तरंग की लंबाई 3 मीटर होती है।

🎯 Exam Tip: आवर्तकाल और आवृत्ति एक-दूसरे के उल्टे होते हैं। जब भी आपको किसी एक का मान पता हो, तो दूसरे का मान निकालने के लिए बस 1 को उस मान से भाग दें। हमेशा ध्यान रखें कि आवर्तकाल सेकंड में और आवृत्ति हर्ट्ज में होती है।

 

Question 2. एक वस्तु का आवर्तकाल 0.004s है, उसकी आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
Answer: आवृत्ति (n) और आवर्तकाल (T) एक-दूसरे के विपरीत होते हैं। इसका मतलब है कि आवृत्ति निकालने के लिए हमें आवर्तकाल को 1 से भाग देना होगा। यहाँ, आवर्तकाल 0.004 सेकंड है। तो, आवृत्ति \( n = \frac{1}{\text{आवर्तकाल}} = \frac{1}{0.004} \)। इसे हल करने पर हमें 250 हर्ट्ज की आवृत्ति मिलती है। आवृत्ति यह बताती है कि कोई वस्तु एक सेकंड में कितनी बार कंपन करती है।
In simple words: अगर कोई चीज़ 0.004 सेकंड में एक बार हिलती है, तो वह एक सेकंड में 250 बार हिलेगी।

🎯 Exam Tip: आवर्तकाल (T) हमेशा सेकंड में और आवृत्ति (n) हमेशा हर्ट्ज (Hz) में व्यक्त की जाती है। इन इकाइयों का सही उपयोग महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. एक तरंग जिसकी आवृत्ति 256 Hz है, 330 m/s के वेग से संचरण कर रही है। इसी माध्यम में 512 Hz वाली तरंग की गति क्या होगी ?
Answer: तरंग की गति उस माध्यम पर निर्भर करती है जिसमें वह चल रही है, न कि उसकी आवृत्ति पर। जब माध्यम एक ही रहता है, तो तरंग की गति भी समान रहती है, भले ही उसकी आवृत्ति बदल जाए। इसलिए, यदि पहली तरंग 330 m/s की गति से चल रही थी, तो 512 Hz वाली दूसरी तरंग भी उसी माध्यम में 330 m/s की गति से ही चलेगी।
In simple words: एक ही जगह पर, ध्वनि या तरंग की रफ्तार उसकी आवाज़ की मोटाई या पतलेपन से नहीं बदलती। अगर माध्यम एक ही है, तो रफ्तार भी वही रहेगी।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि किसी भी तरंग का वेग केवल माध्यम के गुणों पर निर्भर करता है, उसकी आवृत्ति या तरंगदैर्ध्य पर नहीं।

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उनके उत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. अनुप्रस्थ तरंगें अपन्न की जा सकती हैं
(अ) ठोस व गैस में
(ब) ठोस व द्रव में
(स) गैस व द्रव में
(द) ठोस, द्रव व गैस तीनों में।
Answer: (ब) ठोस व द्रव में
In simple words: अनुप्रस्थ तरंगें सिर्फ़ ठोस चीज़ों में और पानी जैसी तरल चीज़ों की ऊपरी सतह पर ही बन सकती हैं।

🎯 Exam Tip: अनुप्रस्थ तरंगों में कण तरंग की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं, जिसके लिए माध्यम में दृढ़ता का होना आवश्यक है।

 

Question 2. किसकी ध्वनि का तारत्व अधिक होता है।
(अ) शेर
(ब) मच्छर
(स) पुरुष
(द) स्त्री।
Answer: (ब) मच्छर
In simple words: मच्छर की भिनभिनाहट की आवाज़ बहुत पतली होती है, इसका मतलब है कि उसका तारत्व सबसे ज़्यादा होता है।

🎯 Exam Tip: तारत्व ध्वनि की आवृत्ति से सीधा संबंधित होता है; उच्च आवृत्ति का अर्थ उच्च तारत्व (पतली आवाज़) और निम्न आवृत्ति का अर्थ निम्न तारत्व (मोटी आवाज़) होता है।

 

Question 4. ध्वनि पट्ट कैसा होता है।
(अ) उत्तल पृष्ठ
(ब) अवतल पृष्ठ
(स) समतल पृष्ठ
(द) उत्तलोवतल पृष्ठ।
Answer: (ब) अवतल पृष्ठ
In simple words: ध्वनि पट्ट अंदर की ओर मुड़ा हुआ होता है ताकि आवाज़ को एक जगह पर इकट्ठा किया जा सके।

🎯 Exam Tip: अवतल सतहें ध्वनि तरंगों को एक बिंदु पर केंद्रित करती हैं, जिससे ध्वनि की तीव्रता बढ़ जाती है।

 

Question 5. 0°C ताप पर वायु में ध्वनि की चाल कितनी होती है।
(अ) \( 3 \times 10^8 \) मी./से.
(ब) 331 मी./से.
(स) 33 मी./से.
(द) 660 मी./से.
Answer: (ब) 331 मी./से.
In simple words: जब हवा का तापमान 0 डिग्री सेल्सियस होता है, तो ध्वनि लगभग 331 मीटर प्रति सेकंड की गति से चलती है।

🎯 Exam Tip: ध्वनि की चाल माध्यम के तापमान और घनत्व पर निर्भर करती है; तापमान बढ़ने पर ध्वनि की चाल बढ़ती है।

 

Question 6. इकाई क्षेत्र से 1 सेकण्ड में गुजरने वाली ध्वनि को क्या कहते हैं ?
(अ) आवृत्ति
(ब) तरंगदैर्घ्य
(स) प्रबलता
(द) तरंगवेग।
Answer: (स) प्रबलता
In simple words: एक सेकंड में एक जगह से गुज़रने वाली ध्वनि की कुल ऊर्जा को उसकी प्रबलता कहते हैं, जिससे पता चलता है कि आवाज़ कितनी ज़ोरदार है।

🎯 Exam Tip: प्रबलता एक वस्तुनिष्ठ माप है जबकि ध्वनि की तीव्रता हमारे कानों की संवेदनशीलता का एक व्यक्तिपरक माप है।

सुमेलन सम्बन्धित प्रश्न

 

Question 3. पराश्रृव्य तरंगें
c. आवृत्ति 20 Hz से 20,000 Hz
Question 4. प्रघाती तरंगें
d. आवृत्ति 20 Hz से कम
Answer: यहाँ प्रश्न अधूरे हैं और मिलान के लिए केवल आंशिक विकल्प दिए गए हैं, जो 'उत्तर' के साथ मेल नहीं खाते। दिए गए आंशिक प्रश्न और उत्तर विकल्प इस प्रकार हैं:
Question 3. पराश्रृव्य तरंगें (Ultrasonic waves) - वे तरंगें जिनकी आवृत्ति 20,000 Hz से अधिक होती है। विकल्प c (20 Hz से 20,000 Hz) श्रव्यता सीमा को दर्शाता है, पराश्रव्य को नहीं।
Question 4. प्रघाती तरंगें (Infrasonic waves) - वे तरंगें जिनकी आवृत्ति 20 Hz से कम होती है। यह विकल्प d के साथ मेल खा रहा है।
In simple words: पराश्रव्य तरंगें वे होती हैं जिनकी आवाज़ इंसानों को सुनाई नहीं देती क्योंकि वे बहुत ऊंची होती हैं, जबकि प्रघाती तरंगें बहुत नीची आवाज़ वाली होती हैं जो इंसानों को भी सुनाई नहीं देतीं।

🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि पराश्रव्य तरंगें 20,000 Hz से अधिक आवृत्ति की होती हैं, जबकि प्रघाती तरंगें 20 Hz से कम आवृत्ति की होती हैं। श्रव्य तरंगें इन दोनों के बीच की होती हैं।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. अनुप्रस्थ तरंगें किस प्रकार के माध्यम में अपन्न की जा सकती हैं?
Answer: अनुप्रस्थ तरंगें केवल उन माध्यमों में बन सकती हैं जिनमें दृढ़ता होती है। इसलिए, ये मुख्य रूप से ठोस पदार्थों में और तरल पदार्थों की ऊपरी सतह पर उत्पन्न की जा सकती हैं। गैसों में ये तरंगें उत्पन्न नहीं हो पातीं क्योंकि उनमें दृढ़ता नहीं होती।
In simple words: अनुप्रस्थ तरंगें ठोस चीज़ों में या पानी की सतह पर बन सकती हैं।

🎯 Exam Tip: अनुप्रस्थ तरंगों को उत्पन्न होने के लिए माध्यम में प्रत्यास्थता या दृढ़ता का होना अनिवार्य है, जिसके कारण कण अपनी माध्य स्थिति से लंबवत विस्थापित हो सकें।

 

Question 2. जल में पत्थर फेंकने से जल की सतह पर अपन्न तरंगें किस प्रकार की होती हैं?
Answer: जब आप जल में पत्थर फेंकते हैं, तो जल की सतह पर अनुप्रस्थ तरंगें उत्पन्न होती हैं। इन तरंगों में जल के कण तरंग के आगे बढ़ने की दिशा के लंबवत ऊपर-नीचे गति करते हैं, जिससे लहरें बनती हैं। यह लहरों का सबसे सामान्य रूप है।
In simple words: जब पानी में पत्थर फेंकते हैं, तो सतह पर अनुप्रस्थ तरंगें बनती हैं, जहाँ पानी के कण ऊपर-नीचे हिलते हैं।

🎯 Exam Tip: जल की सतह पर बनने वाली लहरें अनुप्रस्थ तरंगों का एक उत्कृष्ट उदाहरण हैं क्योंकि इसमें माध्यम के कण (पानी) तरंग के संचरण की दिशा के लंबवत गति करते हैं।

 

Question 3. हमारे कान में ध्वनि की संवेदना कितने समय तक बनी रहती है?
Answer: हमारे कानों में ध्वनि की संवेदना लगभग 0.1 सेकंड तक बनी रहती है। इसका मतलब है कि अगर कोई आवाज़ आती है, तो उसका प्रभाव हमारे दिमाग में लगभग एक सेकंड के दसवें हिस्से तक रहता है। यह हमें लगातार आवाज़ें सुनने में मदद करता है और उन्हें एक साथ जोड़ता है।
In simple words: हमारे कान में कोई भी आवाज़ लगभग 0.1 सेकंड तक महसूस होती रहती है।

🎯 Exam Tip: यह समय सीमा (0.1 सेकंड) प्रतिध्वनि और अनुरणन जैसे ध्वनि से संबंधित घटनाओं को समझने में महत्वपूर्ण है, क्योंकि ध्वनि को स्पष्ट रूप से अलग सुनने के लिए इस अवधि से अधिक समय चाहिए होता है।

 

Question 4. प्रतिध्वनि सुनाई देने का क्या कारण है?
Answer: प्रतिध्वनि सुनाई देने का मुख्य कारण ध्वनि का परावर्तन है। जब ध्वनि तरंगें किसी बाधा (जैसे दीवार या पहाड़) से टकराती हैं, तो वे वापस उछलकर हमारे कानों तक पहुँचती हैं। यदि यह परावर्तित ध्वनि मूल ध्वनि के 0.1 सेकंड बाद हमारे कानों तक पहुँचती है, तो हम उसे एक अलग आवाज़ के रूप में सुनते हैं, जिसे प्रतिध्वनि कहते हैं।
In simple words: प्रतिध्वनि इसलिए सुनाई देती है क्योंकि आवाज़ किसी चीज़ से टकराकर वापस हमारे कान तक आती है, जैसे गेंद दीवार से टकराकर वापस आती है।

🎯 Exam Tip: प्रतिध्वनि सुनने के लिए, ध्वनि स्रोत और परावर्तक सतह के बीच की न्यूनतम दूरी लगभग 17.2 मीटर होनी चाहिए, ताकि ध्वनि को वापस आने में 0.1 सेकंड से अधिक का समय मिले।

 

Question 6. हम छोटे कमरों में प्रतिध्वनि क्यों नहीं सुन पाते?
Answer: हम छोटे कमरों में प्रतिध्वनि इसलिए नहीं सुन पाते क्योंकि प्रतिध्वनि सुनने के लिए ध्वनि स्रोत और दीवार के बीच न्यूनतम 17.2 मीटर की दूरी होनी चाहिए। यह दूरी इसलिए ज़रूरी है ताकि परावर्तित ध्वनि मूल ध्वनि से 0.1 सेकंड बाद हमारे कानों तक पहुँचे। छोटे कमरों में यह दूरी नहीं मिल पाती, इसलिए परावर्तित ध्वनि मूल ध्वनि के साथ मिल जाती है और हम उसे अलग से नहीं सुन पाते।
In simple words: छोटे कमरों में प्रतिध्वनि इसलिए नहीं सुनाई देती क्योंकि दीवारें इतनी पास होती हैं कि आवाज़ को लौटकर आने में पर्याप्त समय नहीं मिलता।

🎯 Exam Tip: 17.2 मीटर की दूरी ध्वनि के वेग (लगभग 344 m/s) और कान में ध्वनि की संवेदना की निरंतरता (0.1s) के आधार पर तय की जाती है।

 

Question 7. पराध्वनिक वस्तु किसे कहते हैं?
Answer: पराध्वनिक वस्तु वह होती है जो वायु में ध्वनि की चाल से ज़्यादा तेज़ गति से चलती है। ध्वनि की चाल को 'मैक 1' कहा जाता है। जब कोई वस्तु मैक 1 से ज़्यादा गति पर उड़ती है, तो उसे पराध्वनिक (सुपरसोनिक) कहा जाता है। ऐसे विमान या मिसाइलें ध्वनि बूम उत्पन्न करती हैं।
In simple words: पराध्वनिक वस्तु वह है जो हवा में आवाज़ की रफ़्तार से भी तेज़ चलती है।

🎯 Exam Tip: पराध्वनिक गति का अध्ययन वायुगतिकी और विमानन इंजीनियरिंग में महत्वपूर्ण है, खासकर जब विमानों या मिसाइलों के डिज़ाइन पर विचार किया जाता है।

 

Question 8. पराध्वनिक बूम क्यों सुनाई देता है?
Answer: पराध्वनिक बूम तब सुनाई देता है जब कोई वस्तु (जैसे विमान) वायु में ध्वनि की चाल से तेज़ गति से चलती है। जब वस्तु ध्वनि की चाल से तेज़ होती है, तो वह अपने पीछे ध्वनि तरंगों को एक शंकु (कोन) के आकार में संपीड़ित कर देती है। यह संपीड़ित हवा का एक बहुत तेज़ दबाव क्षेत्र बनाता है, जो ज़मीन पर पहुँचने पर एक ज़ोरदार विस्फोट जैसी आवाज़ उत्पन्न करता है, जिसे पराध्वनिक बूम कहते हैं।
In simple words: पराध्वनिक बूम तब सुनाई देता है जब कोई तेज़ उड़ने वाली चीज़ आवाज़ की गति से भी तेज़ चलती है और हवा को धकेलते हुए एक बड़ा धमाका करती है।

🎯 Exam Tip: ध्वनि बूम एक सामान्य ध्वनि है जो तब उत्पन्न होती है जब कोई वस्तु ध्वनि की गति से तेज चलती है, यह ध्वनि का अत्यधिक संपीड़न होता है।

 

Question 9. संपीडन किसे कहते हैं?
Answer: संपीडन एक ऐसी स्थिति है जब अनुदैर्ध्य तरंग आगे बढ़ती है तो माध्यम के कण एक-दूसरे के बहुत पास आ जाते हैं। ध्वनि तरंगों में, ये वे क्षेत्र होते हैं जहाँ माध्यम का दबाव और घनत्व सामान्य से अधिक हो जाता है। यह ध्वनि तरंग का वह हिस्सा है जहाँ ऊर्जा केंद्रित होती है।
In simple words: संपीडन का मतलब है कि जब आवाज़ आगे बढ़ती है, तो हवा के कण एक-दूसरे के बहुत पास आ जाते हैं।

🎯 Exam Tip: संपीडन के क्षेत्र में कणों की ऊर्जा और घनत्व दोनों ही सामान्य से अधिक होते हैं, जो ध्वनि के संचरण के लिए आवश्यक है।

 

Question 10. विरलन किसे कहते हैं?
Answer: विरलन संपीडन के विपरीत होता है। यह अनुदैर्ध्य तरंग का वह हिस्सा है जहाँ माध्यम के कण एक-दूसरे से दूर-दूर चले जाते हैं। इन क्षेत्रों में माध्यम का दबाव और घनत्व सामान्य से कम हो जाता है। विरलन संपीडन के साथ मिलकर ध्वनि तरंगों को आगे बढ़ाता है, जिससे ध्वनि हम तक पहुँचती है।
In simple words: विरलन का मतलब है कि जब आवाज़ आगे बढ़ती है, तो हवा के कण एक-दूसरे से दूर-दूर चले जाते हैं।

🎯 Exam Tip: विरलन के क्षेत्र में कणों की ऊर्जा और घनत्व दोनों ही सामान्य से कम होते हैं, जो संपीडन के साथ मिलकर ध्वनि तरंगों का निर्माण करते हैं।

 

Question 11. निम्न से सम्बन्धित आवृत्तियों का परास क्या
(अ) अपश्रव्य ध्वनि,
(ब) पराध्वनि।
Answer:
(अ) अपश्रव्य ध्वनि: अपश्रव्य ध्वनियाँ वे होती हैं जिनकी आवृत्ति 20 हर्ट्ज (Hz) से कम होती है। ये ध्वनियाँ इतनी कम होती हैं कि मनुष्य के कान इन्हें सुन नहीं पाते, लेकिन कुछ जानवर जैसे हाथी और व्हेल इन्हें सुन सकते हैं।
(ब) पराध्वनि: पराध्वनियाँ वे होती हैं जिनकी आवृत्ति 20,000 हर्ट्ज (Hz) से अधिक होती है। ये ध्वनियाँ भी मनुष्य के कान सुन नहीं पाते, लेकिन कुछ जानवर जैसे चमगादड़ और कुत्ते इन्हें सुन सकते हैं। इन तरंगों का उपयोग सोनार और अल्ट्रासाउंड जैसी तकनीकों में होता है।
In simple words: अपश्रव्य आवाज़ें बहुत नीची होती हैं (20 Hz से कम), और पराध्वनि आवाज़ें बहुत ऊंची होती हैं (20,000 Hz से ज़्यादा), दोनों ही हमें सुनाई नहीं देतीं।

🎯 Exam Tip: मानव श्रवण सीमा 20 Hz से 20,000 Hz तक होती है। इस सीमा से नीचे की आवृत्तियाँ अपश्रव्य और ऊपर की आवृत्तियाँ पराध्वनि कहलाती हैं।

 

Question 13. ध्वनि तरंगों के परावर्तन के दो व्यावहारिक उपयोग लिखिए।
Answer: ध्वनि तरंगों के परावर्तन के दो मुख्य उपयोग निम्नलिखित हैं:
1. श्रवण सहायक तंत्र: कान की मशीनें (Hearing aids) ध्वनि के परावर्तन के सिद्धांत पर काम करती हैं। ये छोटी मशीनें बाहर की ध्वनि को इकट्ठा करती हैं और उसे परावर्तित करके कान के अंदर भेजती हैं, जिससे कम सुनने वाले व्यक्तियों को बेहतर सुनाई देता है।
2. सोनार (SONAR): सोनार एक ऐसी तकनीक है जो पानी के अंदर वस्तुओं की दूरी, दिशा और गति का पता लगाने के लिए ध्वनि तरंगों के परावर्तन का उपयोग करती है। जहाज और पनडुब्बियाँ समुद्र की गहराई मापने, पानी के नीचे की वस्तुओं (जैसे पनडुब्बियों या मछली के झुंड) का पता लगाने के लिए सोनार का उपयोग करती हैं।
In simple words: ध्वनि के टकराकर वापस आने का इस्तेमाल कान की मशीन में आवाज़ बढ़ाने और सोनार में पानी के अंदर चीज़ें ढूंढने के लिए होता है।

🎯 Exam Tip: सोनार (Sound Navigation and Ranging) और प्रतिध्वनि (Echo) जैसी तकनीकों में ध्वनि के परावर्तन का सीधा उपयोग होता है, जो दूरी मापने में बहुत सहायक है।

 

Question 14. हम चन्द्रमा पर होने वाले विस्फोट की आवाज पृथ्वी पर क्यों नहीं सुन पाते ?
Answer: हम चंद्रमा पर होने वाले विस्फोट की आवाज़ पृथ्वी पर इसलिए नहीं सुन पाते क्योंकि ध्वनि तरंगों को संचरण के लिए एक माध्यम की आवश्यकता होती है। चंद्रमा और पृथ्वी के बीच लगभग पूरी तरह से निर्वात (वैक्यूम) होता है, यानी वहाँ कोई हवा या अन्य माध्यम नहीं है। चूँकि ध्वनि निर्वात में नहीं चल सकती, इसलिए चंद्रमा पर हुए विस्फोट से उत्पन्न होने वाली कोई भी ध्वनि पृथ्वी तक नहीं पहुँच पाती है।
In simple words: चंद्रमा और पृथ्वी के बीच कोई हवा नहीं है, और आवाज़ हवा के बिना चल नहीं सकती, इसलिए हमें चंद्रमा पर कोई धमाका सुनाई नहीं देता।

🎯 Exam Tip: ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है और इसे संचरण के लिए हमेशा एक भौतिक माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) की आवश्यकता होती है, यह निर्वात में यात्रा नहीं कर सकती।

 

Question 15. कर्ण-तुर्य क्या है ?
Answer: कर्ण-तूर्य को कर्णपटल या कान का पर्दा (Eardrum) भी कहते हैं। यह कान के बाहरी हिस्से के अंत में स्थित एक पतली झिल्ली होती है। इसका मुख्य काम ध्वनि तरंगों को इकट्ठा करके कंपन में बदलना है। जब ध्वनि तरंगें कर्ण-तूर्य से टकराती हैं, तो यह कंपन करती है और इन कंपनों को मध्य कान की हड्डियों तक पहुँचाती है, जिससे हमें सुनाई देता है।
In simple words: कर्ण-तूर्य कान का पर्दा होता है जो आवाज़ सुनकर हिलता है और हमें सुनने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: कर्ण-तूर्य मध्य कान में ध्वनि ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलने का पहला और सबसे महत्वपूर्ण अंग है।

 

Question 16. टोन तथा स्वर में क्या अन्तर है ?
Answer: टोन और स्वर दोनों ध्वनियाँ हैं, लेकिन उनमें फर्क उनकी आवृत्ति में होता है। टोन एक एकल आवृत्ति की ध्वनि को कहते हैं, यानी यह एक शुद्ध और स्थिर आवाज़ होती है, जैसे कोई वाद्य यंत्र एक ही नोट बजाता है। वहीं, स्वर अनेक आवृत्तियों के मिश्रण से उत्पन्न होने वाली ध्वनि को कहते हैं। इसमें मुख्य आवृत्ति के साथ कई और छोटी आवृत्तियाँ (ओवरटोन) भी होती हैं, जिससे आवाज़ अधिक जटिल और समृद्ध सुनाई देती है, जैसे कि किसी व्यक्ति की आवाज़ या गाने की धुन।
In simple words: टोन सिर्फ़ एक तरह की आवाज़ है (जैसे एक ही सुर), जबकि स्वर कई आवाज़ों का मिला-जुला रूप है जो ज़्यादा मीठी या भरी हुई लगती है।

🎯 Exam Tip: टोन की शुद्धता के कारण इसे वैज्ञानिक प्रयोगों में उपयोग किया जाता है, जबकि स्वर की जटिलता संगीत और भाषण में भावनाओं और विविधता को व्यक्त करने के लिए आवश्यक है।

 

Question 17. सूचक का क्या कार्य है ?
Answer: सूचक का मुख्य कार्य राडार द्वारा भेजी गई रेडियो तरंगों को इकट्ठा करना और उनसे प्राप्त जानकारी को राडार परिचालक को देना होता है। जब राडार की तरंगें किसी वस्तु से टकराकर वापस आती हैं, तो सूचक उन परावर्तित तरंगों को पकड़ता है और उन्हें विद्युत संकेतों में बदल देता है। ये संकेत फिर राडार प्रणाली को वस्तु की दूरी, दिशा और गति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।
In simple words: सूचक राडार से वापस आने वाली तरंगों को पकड़कर उनके बारे में जानकारी देता है, जिससे पता चलता है कि कोई चीज़ कहाँ है।

🎯 Exam Tip: सूचक, राडार प्रणाली का एक महत्वपूर्ण घटक है क्योंकि यह परावर्तित संकेतों को प्राप्त करके वस्तु का पता लगाने और उसकी स्थिति निर्धारित करने में मदद करता है।

 

Question 18. राडार के लिए अतिलघु तरंगदैर्ध्व वाली तरंगें किससे उत्पन्न की जाती हैं ?
Answer: राडार के लिए अतिलघु तरंगदैर्ध्य वाली तरंगें मल्टिकेविटी मैग्नेट्रॉन (Multicavity Magnetron) नामक एक विशेष उपकरण द्वारा उत्पन्न की जाती हैं। मल्टिकेविटी मैग्नेट्रॉन एक वैक्यूम ट्यूब है जो उच्च शक्ति की माइक्रोवेव तरंगें उत्पन्न करता है। ये तरंगें छोटी तरंगदैर्ध्य की होती हैं, जो राडार को छोटी वस्तुओं का पता लगाने और अधिक सटीक जानकारी प्राप्त करने में मदद करती हैं।
In simple words: राडार के लिए बहुत छोटी तरंगें मल्टिकेविटी मैग्नेट्रॉन नाम के एक ख़ास उपकरण से बनती हैं।

🎯 Exam Tip: मल्टिकेविटी मैग्नेट्रॉन राडार प्रणाली में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, खासकर उन अनुप्रयोगों में जहाँ उच्च रिज़ॉल्यूशन और सटीक लक्ष्यीकरण की आवश्यकता होती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 2. गुणवत्ता क्या है ?
Answer: ध्वनि की गुणवत्ता या टिम्बर (Timbre) वह गुण है जो हमें एक ही तारत्व (Pitch) और समान प्रबलता (Loudness) वाली दो अलग-अलग ध्वनियों के बीच अंतर करने में मदद करता है। उदाहरण के लिए, जब एक पियानो और एक वायलिन एक ही नोट को समान प्रबलता से बजाते हैं, तो हम उनकी गुणवत्ता के कारण उन्हें अलग-अलग पहचान पाते हैं। यह गुण ध्वनि तरंगों के जटिल रूप और उनमें मौजूद विभिन्न आवृत्तियों (ओवरटोन) के कारण होता है।
In simple words: ध्वनि की गुणवत्ता बताती है कि एक जैसी ऊँचाई और ज़ोर की दो आवाज़ें कैसे अलग-अलग लगती हैं, जैसे अलग-अलग वाद्य यंत्रों की आवाज़ें।

🎯 Exam Tip: ध्वनि की गुणवत्ता मूल रूप से हार्मोनिक्स या ओवरटोन की उपस्थिति और उनके सापेक्ष तीव्रता पर निर्भर करती है, जो ध्वनि को उसका अनूठा 'रंग' देती है।

 

Question 3. तरंग का कौन-सा गुण निम्नलिखित को निर्धारित करता है
(a) प्रबलता
(b) तारत्व।
Answer:
(a) प्रबलता: किसी ध्वनि तरंग की प्रबलता मुख्य रूप से उसके आयाम (Amplitude) द्वारा निर्धारित होती है। आयाम तरंग के अधिकतम विस्थापन को दर्शाता है। बड़े आयाम वाली ध्वनि प्रबल (तेज़) होती है, जबकि छोटे आयाम वाली ध्वनि मृदु (धीमी) होती है। प्रबलता हमें यह बताती है कि कोई ध्वनि कितनी ज़ोरदार या हल्की है।
(b) तारत्व: ध्वनि का तारत्व उसकी आवृत्ति (Frequency) द्वारा निर्धारित होता है। आवृत्ति प्रति सेकंड होने वाले कंपनों की संख्या है। उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि का तारत्व ऊँचा (पतली आवाज़) होता है, जबकि निम्न आवृत्ति वाली ध्वनि का तारत्व नीचा (मोटी आवाज़) होता है। तारत्व हमें यह बताता है कि कोई ध्वनि कितनी पतली या मोटी है।
In simple words: आवाज़ कितनी ज़ोरदार है, यह उसके आयाम (ऊँचाई) पर निर्भर करता है, और आवाज़ कितनी पतली या मोटी है, यह उसकी आवृत्ति (कितनी जल्दी कंपन करती है) पर निर्भर करता है।

🎯 Exam Tip: आयाम ध्वनि ऊर्जा से संबंधित है, जो प्रबलता को प्रभावित करता है, जबकि आवृत्ति ध्वनि की पिच या तारत्व को निर्धारित करती है।

 

Question 4. ध्वनि की प्रबलता तथा तीव्रता में अन्तर बताइए।
Answer:

तीव्रता (Intensity)प्रबलता (Loudness)
1. एक सेकंड में किसी इकाई क्षेत्रफल से गुजरने वाली ध्वनि ऊर्जा को ध्वनि की तीव्रता कहते हैं। यह ध्वनि का एक वस्तुनिष्ठ माप है।1. कानों की संवेदनशीलता के आधार पर ध्वनि के ज़ोरदार या धीमे होने की माप को ध्वनि की प्रबलता कहते हैं। यह एक व्यक्तिपरक माप है।
2. ध्वनि की तीव्रता को सीधे यंत्रों से मापा जा सकता है, जैसे डेसिबल मीटर से।2. ध्वनि की प्रबलता को सीधे मापा नहीं जा सकता; यह कानों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करती है और इकाई व्यक्ति से व्यक्ति में भिन्न हो सकती है।
3. ध्वनि की तीव्रता का सीधा संबंध ध्वनि तरंग की ऊर्जा से होता है।3. ध्वनि की प्रबलता तरंग की ऊर्जा के साथ-साथ हमारे कानों की संवेदनशीलता पर भी निर्भर करती है।

In simple words: तीव्रता बताती है कि आवाज़ में कितनी शक्ति है और इसे नापा जा सकता है, जबकि प्रबलता बताती है कि हमें आवाज़ कितनी ज़ोरदार लग रही है और यह हर इंसान के लिए अलग हो सकती है।

🎯 Exam Tip: प्रबलता एक मनोवैज्ञानिक धारणा है जबकि तीव्रता एक भौतिक मात्रा है। ध्वनि की तीव्रता डेसिबल (dB) में मापी जाती है, लेकिन प्रबलता का कोई सीधा भौतिक मात्रक नहीं है।

 

Question 6. अनुरणन क्या है? इसे कैसे कम किया जा सकता है?
Answer: अनुरणन (Reverberation) वह घटना है जहाँ ध्वनि एक बड़े हॉल या कमरे में बार-बार दीवारों, छत और अन्य सतहों से टकराकर परावर्तित होती रहती है, जिससे मूल ध्वनि लंबे समय तक सुनाई देती रहती है। यह आवाज़ को गूँजदार और अस्पष्ट बना सकता है। इसे कम करने के लिए, सभा भवनों या सिनेमा हॉलों की छतों और दीवारों पर ध्वनि अवशोषक सामग्री जैसे संपीड़ित फाइबर बोर्ड, खुरदरे प्लास्टर, पर्दे और भारी कपड़े लगाए जाते हैं। ये सामग्री ध्वनि ऊर्जा को सोख लेती हैं और उसे कम परावर्तित होने देती हैं, जिससे अनुरणन कम हो जाता है।
In simple words: अनुरणन का मतलब है कि बड़े कमरों में आवाज़ बार-बार टकराकर गूँजती रहती है। इसे कम करने के लिए दीवारों और छतों पर ऐसी चीज़ें लगाते हैं जो आवाज़ को सोख लेती हैं, जैसे मोटे पर्दे या नरम बोर्ड।

🎯 Exam Tip: अनुरणन को नियंत्रित करना ध्वनि-विज्ञान में महत्वपूर्ण है, खासकर ऑडिटोरियम और संगीत हॉलों में स्पष्ट ध्वनि सुनने के लिए।

 

Question 7. अनुदैर्ध्य तरंगों के चलने पर माध्यम में घनत्व व दाब वितरण किस प्रकार होता है?
Answer: जब अनुदैर्ध्य तरंगें माध्यम में चलती हैं, तो वे संपीडन (Compression) और विरलन (Rarefaction) के क्षेत्र बनाती हैं। संपीडन वाले क्षेत्रों में माध्यम के कण एक-दूसरे के बहुत पास आ जाते हैं, जिससे वहाँ का घनत्व और दबाव सामान्य से अधिक हो जाता है। ये उच्च-दबाव वाले क्षेत्र होते हैं। इसके विपरीत, विरलन वाले क्षेत्रों में माध्यम के कण एक-दूसरे से दूर-दूर चले जाते हैं, जिससे वहाँ का घनत्व और दबाव सामान्य से कम हो जाता है। ये निम्न-दबाव वाले क्षेत्र होते हैं। इस तरह, अनुदैर्ध्य तरंगें माध्यम में घनत्व और दाब के एकांतर परिवर्तनों के रूप में आगे बढ़ती हैं।
In simple words: अनुदैर्ध्य तरंगों के चलने पर, कुछ जगहों पर कण पास-पास होते हैं (जहाँ दबाव ज़्यादा होता है), और कुछ जगहों पर दूर-दूर होते हैं (जहाँ दबाव कम होता है)।

🎯 Exam Tip: संपीडन और विरलन अनुदैर्ध्य तरंगों की विशिष्ट विशेषताएँ हैं, जो यह दर्शाती हैं कि ऊर्जा माध्यम से कैसे प्रसारित होती है, जबकि माध्यम के कण अपनी औसत स्थिति से ज़्यादा दूर नहीं जाते।

 

Question 8. “पराध्वनिक' से क्या तात्पर्य है? क्या यह पराश्रव्य से भिन्न है?
Answer: 'पराध्वनिक' (Supersonic) का तात्पर्य किसी वस्तु की गति से है जो माध्यम में ध्वनि की चाल से अधिक होती है। उदाहरण के लिए, एक जेट विमान जो ध्वनि की गति से तेज़ उड़ता है, उसे पराध्वनिक विमान कहा जाता है। हाँ, पराध्वनिक पराश्रव्य (Ultrasonic) से भिन्न है। पराश्रव्य तरंगें वे ध्वनि तरंगें होती हैं जिनकी आवृत्ति 20,000 Hz से अधिक होती है, जो मनुष्य के कान सुन नहीं पाते। पराश्रव्य आवृत्ति का एक गुण है, जबकि पराध्वनिक गति का एक गुण है। तो, पराश्रव्य आवाज़ की आवृत्ति के बारे में है, और पराध्वनिक आवाज़ की गति से तेज़ चलने के बारे में है।
In simple words: 'पराध्वनिक' का मतलब है आवाज़ से भी तेज़ चलना। यह 'पराश्रव्य' से अलग है, जिसका मतलब है ऐसी आवाज़ें जो इतनी ऊंची हों कि हम सुन न सकें।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि पराश्रव्य (ultrasonic) एक आवृत्ति (frequency) का वर्णन करता है, जबकि पराध्वनिक (supersonic) एक गति (speed) का वर्णन करता है। यह एक महत्वपूर्ण अंतर है।

 

Question 9. ध्वनि बूम से आप क्या समझते हैं?
Answer: ध्वनि बूम (Sonic Boom) एक ज़ोरदार विस्फोट जैसी आवाज़ है जो तब उत्पन्न होती है जब कोई वस्तु, जैसे पराध्वनिक वायुयान, वायु में ध्वनि की चाल से अधिक तेज़ गति से चलता है। जब वस्तु ध्वनि की चाल से तेज़ गति करती है, तो वह अपने पीछे हवा में एक शॉक वेव (प्रघाती तरंग) बनाती है। यह शॉक वेव हवा में अचानक दबाव परिवर्तन पैदा करती है। जब यह शॉक वेव ज़मीन पर पहुँचती है, तो हमें एक बहुत तेज़ धमाका सुनाई देता है, जिसे ध्वनि बूम कहा जाता है, यह अक्सर बादलों के फटने जैसा लगता है।
In simple words: ध्वनि बूम एक बड़ी आवाज़ है जो तब आती है जब कोई हवाई जहाज़ आवाज़ से भी तेज़ चलता है, जिससे हवा में ज़ोरदार झटका लगता है।

🎯 Exam Tip: ध्वनि बूम केवल तभी होता है जब वस्तु ध्वनि की गति (मैक 1) से अधिक गति से यात्रा करती है, और यह शॉक वेव के कारण होता है।

 

Question 10. ध्वनि के परावर्तन से आप क्या समझते हैं?
Answer: ध्वनि का परावर्तन (Reflection of sound) वह प्रक्रिया है जब ध्वनि तरंगें किसी माध्यम के सीमा पृष्ठ (जैसे दीवार, पहाड़ या किसी सतह) से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौट आती हैं। यह ठीक वैसे ही होता है जैसे कोई गेंद दीवार से टकराकर वापस आती है। परावर्तन के कारण ही हमें प्रतिध्वनि (echo) सुनाई देती है। जब ध्वनि किसी सतह से टकराकर वापस आती है, तो उसकी गति, आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य नहीं बदलती, लेकिन उसकी दिशा बदल जाती है।
In simple words: ध्वनि का परावर्तन तब होता है जब आवाज़ किसी चीज़ से टकराकर वापस आती है, जैसे आवाज़ का गूँजना।

🎯 Exam Tip: ध्वनि का परावर्तन प्रकाश के परावर्तन के नियमों का पालन करता है, जहाँ आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है और आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब एक ही तल में होते हैं।

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. एक प्रयोग द्वारा समझाइए कि ध्वनि संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है।
Answer: ध्वनि के संचरण के लिए एक माध्यम (जैसे हवा, पानी या कोई ठोस चीज़) की आवश्यकता होती है। इसे समझने के लिए एक प्रयोग किया जा सकता है: एक काँच का बेलजार लें और उसमें एक विद्युत घंटी को लटका दें। घंटी के स्विच को दबाने पर हमें उसकी ध्वनि स्पष्ट सुनाई देगी। अब, बेलजार से हवा को एक निर्वात पंप (Vacuum Pump) की मदद से बाहर निकालना शुरू करें। जैसे-जैसे बेलजार के अंदर से हवा कम होती जाएगी, घंटी की ध्वनि धीमी होती जाएगी, भले ही घंटी उसी तीव्रता से कंपन कर रही हो। जब बेलजार में बहुत कम हवा रह जाती है (लगभग निर्वात की स्थिति), तो घंटी की ध्वनि लगभग सुनाई देना बंद हो जाएगी। यह प्रयोग स्पष्ट रूप से दिखाता है कि ध्वनि को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए माध्यम (इस मामले में हवा) की आवश्यकता होती है, और वह निर्वात में संचरित नहीं हो सकती।
In simple words: एक घंटी को एक जार में रखकर हवा निकाल दें। जब हवा नहीं होगी, तो घंटी की आवाज़ सुनाई नहीं देगी। इससे पता चलता है कि आवाज़ को चलने के लिए हवा जैसी किसी चीज़ की ज़रूरत होती है।

🎯 Exam Tip: यह प्रयोग ध्वनि की प्रकृति को समझने के लिए एक मौलिक अवधारणा है कि ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है जो माध्यम के कणों के कंपन के माध्यम से ऊर्जा को स्थानांतरित करती है।

 

Question 2. यान्त्रिक तरंगें कितने प्रकार की होती हैं? प्रत्येक को उदाहरण देकर समझाइए तथा इनके प्रमुख गुणों का वर्णन कीजिए।
Answer: यांत्रिक तरंगें वे तरंगें होती हैं जिन्हें संचरण के लिए एक भौतिक माध्यम (जैसे ठोस, द्रव या गैस) की आवश्यकता होती है। ये माध्यम के कणों के दोलनों (कंपन) द्वारा उत्पन्न होती हैं और आगे बढ़ती हैं। उदाहरण के लिए, वायु में ध्वनि तरंगें, जल में पत्थर फेंकने से उत्पन्न तरंगें, या रस्सी में दोलनों से उत्पन्न तरंगें सभी यांत्रिक तरंगें हैं।
माध्यम के कणों के कंपन की दिशा के आधार पर यांत्रिक तरंगें दो प्रकार की होती हैं:
1. अनुप्रस्थ तरंगें: इन तरंगों में माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के लंबवत (90 डिग्री पर) कंपन या दोलन करते हैं। ये तरंगें श्रृंग (crest) और गर्त (trough) के रूप में बनती हैं। एक श्रृंग और एक गर्त मिलकर एक पूरी तरंग बनाते हैं।
उदाहरण: वायलिन या सितार की तनी हुई डोरियों में उत्पन्न तरंगें और जल की सतह पर उत्पन्न तरंगें।
गुण: ये तरंगें केवल ठोस पदार्थों में और तरल पदार्थों की ऊपरी सतह पर ही संचरित हो सकती हैं क्योंकि इनके संचरण के लिए माध्यम में दृढ़ता का होना आवश्यक है। ये गैसों में संचरित नहीं हो सकतीं क्योंकि गैसों में दृढ़ता नहीं होती।
2. अनुदैर्ध्य तरंगें: इन तरंगों में माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के समानांतर (उसी दिशा में) कंपन या दोलन करते हैं। ये तरंगें संपीडन (Compression) और विरलन (Rarefaction) के मिलने से बनती हैं। संपीडन में कण पास-पास होते हैं और विरलन में दूर-दूर होते हैं।
उदाहरण: वायु में ध्वनि तरंगें और जल के अंदर चलने वाली तरंगें।
गुण: ये तरंगें ठोस, द्रव और गैस तीनों माध्यमों में संचरित हो सकती हैं क्योंकि इनके संचरण के लिए माध्यम में प्रत्यास्थता (elasticity) का होना आवश्यक है, जो तीनों अवस्थाओं में मौजूद होती है।
In simple words: यांत्रिक तरंगों को आगे बढ़ने के लिए किसी चीज़ (जैसे हवा या पानी) की ज़रूरत होती है। वे दो तरह की होती हैं: अनुप्रस्थ (कण ऊपर-नीचे हिलते हैं, जैसे पानी की लहरें) और अनुदैर्ध्य (कण आगे-पीछे हिलते हैं, जैसे आवाज़ की तरंगें)।

🎯 Exam Tip: अनुप्रस्थ और अनुदैर्ध्य तरंगों के बीच का मुख्य अंतर कणों के कंपन की दिशा और तरंग के संचरण की दिशा के सापेक्ष होता है, जो उन्हें विभिन्न माध्यमों में संचरित होने की अनुमति देता है।

 

Question 1. एक तरंग की चाल 250 मीटर/सेकण्ड तथा आवृत्ति 500 हर्ट्ज है। तरंग की तरंगदैर्ध्य तथा आवर्तकाल की गणना कीजिए।
Answer: हमें तरंग की चाल \( v = 250 \) मीटर/सेकंड और आवृत्ति \( n = 500 \) हर्ट्ज दी गई है।
सबसे पहले, तरंगदैर्ध्य \( (\lambda) \) की गणना करेंगे। तरंग का वेग, आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य के बीच संबंध है \( v = n\lambda \)।
इसलिए, \( \lambda = \frac{v}{n} = \frac{250}{500} = 0.5 \) मीटर। यह एक पूरी तरंग की लंबाई है।
अब, आवर्तकाल \( (T) \) की गणना करेंगे। आवर्तकाल आवृत्ति का व्युत्क्रम होता है: \( T = \frac{1}{n} \)।
इसलिए, \( T = \frac{1}{500} = 0.002 \) सेकंड। यह एक कंपन पूरा करने में लगने वाला समय है।
In simple words: अगर एक तरंग 250 मीटर/सेकंड से चलती है और एक सेकंड में 500 बार हिलती है, तो उसकी लंबाई 0.5 मीटर होगी और उसे एक बार हिलने में 0.002 सेकंड लगेंगे।

🎯 Exam Tip: वेग (v), आवृत्ति (n), और तरंगदैर्ध्य \( (\lambda) \) के बीच के संबंध \( v = n\lambda \) को याद रखना ऐसे प्रश्नों को हल करने के लिए महत्वपूर्ण है। सुनिश्चित करें कि आप सभी इकाइयों को संगत रूप में रखें।

 

Question 2. एक सरल लोलक 20 सेकण्ड में 40 दोलन पूरे करता है। दोलनों की आवृत्ति तथा आवर्तकाल ज्ञात कीजिए।
Answer: एक सरल लोलक 20 सेकंड में 40 दोलन पूरे करता है।
सबसे पहले, आवृत्ति \( (n) \) की गणना करेंगे। आवृत्ति प्रति सेकंड होने वाले दोलनों की संख्या है।
इसलिए, \( n = \frac{\text{कुल दोलन}}{\text{लिया गया समय}} = \frac{40}{20} = 2 \) हर्ट्ज। इसका मतलब है कि लोलक एक सेकंड में 2 बार दोलन करता है।
अब, आवर्तकाल \( (T) \) की गणना करेंगे। आवर्तकाल आवृत्ति का व्युत्क्रम होता है।
इसलिए, \( T = \frac{1}{n} = \frac{1}{2} = 0.5 \) सेकंड। यह एक दोलन पूरा करने में लगने वाला समय है।
In simple words: अगर एक लोलक 20 सेकंड में 40 बार झूलता है, तो वह एक सेकंड में 2 बार झूलता है, और उसे एक बार झूलने में 0.5 सेकंड लगते हैं।

🎯 Exam Tip: ध्यान दें कि आवृत्ति और आवर्तकाल एक-दूसरे के व्युत्क्रम होते हैं। गणना करते समय, सुनिश्चित करें कि आप समय को सेकंड में ही प्रयोग कर रहे हैं।

 

Question 3. यदि प्रकाश का वेग \( 3 \times 10^8 \) मीटर/सेकण्ड हो तथा आवृत्ति \( 5 \times 10^{14} \) प्रति सेकण्ड हो, तो प्रकाश की तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें प्रकाश का वेग \( v = 3 \times 10^8 \) मीटर/सेकंड और आवृत्ति \( n = 5 \times 10^{14} \) प्रति सेकंड दी गई है।
हम जानते हैं कि वेग, आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य के बीच संबंध \( v = n\lambda \) है।
तो, तरंगदैर्ध्य \( (\lambda) \) निकालने के लिए, हम वेग को आवृत्ति से भाग देंगे: \( \lambda = \frac{v}{n} \)।
मान रखने पर: \( \lambda = \frac{3 \times 10^8}{5 \times 10^{14}} \)
\( \lambda = \frac{3}{5} \times 10^{8-14} = 0.6 \times 10^{-6} \) मीटर।
इसे और सरल करने पर: \( \lambda = 6 \times 10^{-7} \) मीटर। यह प्रकाश की तरंगदैर्ध्य है।
In simple words: अगर प्रकाश \( 3 \times 10^8 \) मीटर/सेकंड से चलता है और एक सेकंड में \( 5 \times 10^{14} \) बार कंपन करता है, तो उसकी तरंग की लंबाई \( 6 \times 10^{-7} \) मीटर होगी।

🎯 Exam Tip: प्रकाश की चाल एक स्थिरांक ( \( 3 \times 10^8 \) m/s) है, इसलिए इस मान को याद रखना महत्वपूर्ण है। घातांकों की गणना करते समय सावधानी बरतें।

 

Question 4. X किरणों की तरंगदैर्ध्य 1Å है। यदि X किरणों की चाल \( 3 \times 10^8 \) मीटर/सेकण्ड हो, तो इसकी आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें X किरणों की तरंगदैर्ध्य \( \lambda = 1 \text{Å} \) (एंगस्ट्रॉम) दी गई है। हम जानते हैं कि 1 एंगस्ट्रॉम \( = 1 \times 10^{-10} \) मीटर।
X किरणों की चाल \( v = 3 \times 10^8 \) मीटर/सेकंड है।
हमें आवृत्ति \( (n) \) ज्ञात करनी है। वेग, आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य के बीच संबंध \( v = n\lambda \) है।
इसलिए, आवृत्ति \( n = \frac{v}{\lambda} \)।
मान रखने पर: \( n = \frac{3 \times 10^8}{1 \times 10^{-10}} \)
\( n = 3 \times 10^{8 - (-10)} = 3 \times 10^{8+10} = 3 \times 10^{18} \) हर्ट्ज। X किरणें उच्च आवृत्ति वाली तरंगें होती हैं।
In simple words: अगर X किरणों की लंबाई 1 एंगस्ट्रॉम है और वे प्रकाश की गति से चलती हैं, तो वे एक सेकंड में \( 3 \times 10^{18} \) बार कंपन करेंगी।

🎯 Exam Tip: एंगस्ट्रॉम (Å) को मीटर में बदलना एक महत्वपूर्ण पहला कदम है, क्योंकि SI इकाइयों का उपयोग करना आवश्यक है। यह रूपांतरण 1 Å = \( 10^{-10} \) m याद रखें।

 

Question 5. एक इलेक्ट्रॉन के दोलन का आवर्तकाल 0.05 माइक्रोसेकण्ड है, इसकी आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें एक इलेक्ट्रॉन के दोलन का आवर्तकाल \( T = 0.05 \) माइक्रोसेकंड दिया गया है।
सबसे पहले, हम माइक्रोसेकंड को सेकंड में बदलेंगे। हम जानते हैं कि 1 माइक्रोसेकंड \( = 10^{-6} \) सेकंड।
तो, \( T = 0.05 \times 10^{-6} \) सेकंड \( = 5 \times 10^{-2} \times 10^{-6} = 5 \times 10^{-8} \) सेकंड।
अब, आवृत्ति \( (n) \) ज्ञात करेंगे। आवृत्ति आवर्तकाल का व्युत्क्रम होती है: \( n = \frac{1}{T} \)।
मान रखने पर: \( n = \frac{1}{5 \times 10^{-8}} = \frac{10^8}{5} \)
\( n = 0.2 \times 10^8 = 2 \times 10^7 \) हर्ट्ज। यह इलेक्ट्रॉन के दोलन की आवृत्ति है।
In simple words: अगर एक इलेक्ट्रॉन को एक बार हिलने में बहुत छोटा सा समय (0.05 माइक्रोसेकंड) लगता है, तो वह एक सेकंड में \( 2 \times 10^7 \) बार हिलेगा।

🎯 Exam Tip: इकाइयों का सही रूपांतरण (विशेषकर माइक्रोसेकंड को सेकंड में) महत्वपूर्ण है। \( \frac{1}{\text{दशमलव}} \) का मान निकालते समय सावधानी बरतें।

 

Question 6. एक रेडियो प्रसारण केन्द्र से 40 मेगाहर्ट्ज आवृत्ति की विद्युत चुम्बकीय तरंगें प्रसारित होती हैं। यदि विद्युत चुम्बकीय तरंग की चाल \( 3 \times 10^8 \) मीटर/सेकण्ड हो तो इन तरंगों की तरंगदैर्ध्य क्या होगी?
Answer: हमें रेडियो तरंग की आवृत्ति \( n = 40 \) मेगाहर्ट्ज दी गई है।
सबसे पहले, मेगाहर्ट्ज को हर्ट्ज में बदलेंगे। हम जानते हैं कि 1 मेगाहर्ट्ज \( = 10^6 \) हर्ट्ज।
तो, \( n = 40 \times 10^6 \) हर्ट्ज।
विद्युत चुम्बकीय तरंग की चाल \( v = 3 \times 10^8 \) मीटर/सेकंड है।
हमें तरंगदैर्ध्य \( (\lambda) \) ज्ञात करनी है। वेग, आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य के बीच संबंध \( v = n\lambda \) है।
इसलिए, तरंगदैर्ध्य \( \lambda = \frac{v}{n} \)।
मान रखने पर: \( \lambda = \frac{3 \times 10^8}{40 \times 10^6} = \frac{3 \times 10^8}{4 \times 10^7} \)
\( \lambda = \frac{3}{4} \times 10^{8-7} = 0.75 \times 10^1 = 7.5 \) मीटर। यह रेडियो तरंग की तरंगदैर्ध्य है।
In simple words: अगर रेडियो तरंग 40 मेगाहर्ट्ज की गति से कंपन करती है और प्रकाश की गति से चलती है, तो उसकी एक तरंग की लंबाई 7.5 मीटर होगी।

🎯 Exam Tip: मेगाहर्ट्ज से हर्ट्ज में सही रूपांतरण ( \( 10^6 \) से गुणा) और घातांकों के नियमों का सही अनुप्रयोग इस प्रकार के प्रश्नों को हल करने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. किसी ध्वनि तरंग की आवृत्ति 2 kHz और उसकी तरंगदैर्ध्य 35 cm है। यह 1.5 km दूरी चलने में कितना समय लेगी ?
Answer: हमें ध्वनि तरंग की आवृत्ति \( n = 2 \) kHz (किलोहर्ट्ज) और तरंगदैर्ध्य \( \lambda = 35 \) cm दी गई है।
सबसे पहले, इकाइयों को SI इकाइयों में बदलें:
\( n = 2 \text{ kHz} = 2 \times 10^3 \text{ Hz} = 2000 \text{ Hz} \)
\( \lambda = 35 \text{ cm} = 0.35 \text{ m} \)
अब, ध्वनि तरंग का वेग \( (v) \) ज्ञात करें: \( v = n\lambda \)
\( v = 2000 \text{ Hz} \times 0.35 \text{ m} = 700 \) m/s।
हमें दूरी \( d = 1.5 \) km दी गई है, जिसे मीटर में बदलेंगे: \( d = 1.5 \times 1000 = 1500 \) m।
समय \( (t) \) निकालने के लिए, सूत्र \( t = \frac{d}{v} \) का उपयोग करेंगे।
\( t = \frac{1500 \text{ m}}{700 \text{ m/s}} = \frac{15}{7} \text{ s} \approx 2.14 \) सेकंड। इसे लगभग 2.1 सेकंड लिखा जा सकता है।
In simple words: 2000 बार कंपन करने वाली और 35 सेमी लंबी ध्वनि तरंग 700 मीटर/सेकंड से चलती है, इसलिए 1.5 किलोमीटर की दूरी तय करने में उसे लगभग 2.1 सेकंड लगेंगे।

🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि सभी इकाइयाँ एक ही प्रणाली (SI) में परिवर्तित हो जाएँ। वेग, दूरी और समय के बीच के संबंध \( d = vt \) को याद रखना ऐसे सवालों को हल करने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 8. किसी दिए हुए माध्यम में एक ध्वनि तरंग की आवृत्ति 220 हर्ट्ज तथा वेग 400 मीटर/सेकण्ड है। इस तरंग की तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए।
Answer: हमें ध्वनि तरंग की आवृत्ति \( n = 220 \) हर्ट्ज और वेग \( v = 400 \) मीटर/सेकंड दिया गया है।
हम जानते हैं कि वेग, आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य \( (\lambda) \) के बीच संबंध \( v = n\lambda \) है।
तरंगदैर्ध्य निकालने के लिए, सूत्र \( \lambda = \frac{v}{n} \) का उपयोग करेंगे।
मान रखने पर: \( \lambda = \frac{400 \text{ m/s}}{220 \text{ Hz}} = \frac{40}{22} = \frac{20}{11} \approx 1.82 \) मीटर।
यह दी गई ध्वनि तरंग की तरंगदैर्ध्य है।
In simple words: 220 बार कंपन करने वाली और 400 मीटर/सेकंड से चलने वाली ध्वनि तरंग की लंबाई लगभग 1.82 मीटर होगी।

🎯 Exam Tip: वेग, आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य के बीच के मूल सूत्र \( v = n\lambda \) को याद रखना महत्वपूर्ण है। गणना करते समय, सुनिश्चित करें कि आप प्रश्न में दिए गए मानों का ही उपयोग करें।

 

Question 9. कोई प्रतिध्वनि 3s पश्चात् सुनाई देती है। यदि ध्वनि की चाल 342 m/s हो तो स्रोत तथा परावर्तक सतह के बीच कितनी दूरी होगी ?
Answer: हमें प्रतिध्वनि सुनाई देने का समय \( t = 3 \) सेकंड और ध्वनि की चाल \( v = 342 \) मीटर/सेकंड दी गई है।
जब प्रतिध्वनि सुनाई देती है, तो ध्वनि स्रोत से परावर्तक सतह तक जाती है और फिर वापस स्रोत तक आती है। इसका मतलब है कि ध्वनि ने दोगुनी दूरी तय की है।
ध्वनि द्वारा तय की गई कुल दूरी \( (2d) = v \times t \)
\( 2d = 342 \text{ m/s} \times 3 \text{ s} = 1026 \) मीटर।
स्रोत तथा परावर्तक सतह के बीच की दूरी \( (d) \) इस कुल दूरी का आधा होगी।
\( d = \frac{1026}{2} \text{ m} = 513 \) मीटर।
In simple words: अगर आवाज़ 3 सेकंड में लौटकर आती है और 342 मीटर/सेकंड की रफ़्तार से चलती है, तो आवाज़ जहाँ से निकली और जहाँ से टकराकर लौटी, उसके बीच की दूरी 513 मीटर है।

🎯 Exam Tip: प्रतिध्वनि के प्रश्नों में, ध्वनि द्वारा तय की गई कुल दूरी हमेशा स्रोत और परावर्तक सतह के बीच की दूरी की दोगुनी होती है। इसे याद रखना गलती से बचने में मदद करेगा।

 

Question 10. किसी ध्वनि स्रोत की आवृत्ति 100 Hz है। एक मिनट में यह कितनी बार कंपन करेगा?
Answer: हमें ध्वनि स्रोत की आवृत्ति \( n = 100 \) हर्ट्ज और समय \( t = 1 \) मिनट दिया गया है।
सबसे पहले, समय को सेकंड में बदलें: \( 1 \) मिनट \( = 60 \) सेकंड।
आवृत्ति प्रति सेकंड होने वाले कंपनों की संख्या है। इसलिए, कुल कंपनों की संख्या निकालने के लिए, हम आवृत्ति को समय से गुणा करेंगे।
कुल कंपन = आवृत्ति \( \times \) समय
कुल कंपन = \( 100 \text{ Hz} \times 60 \text{ s} = 6000 \) कंपन।
यह ध्वनि स्रोत एक मिनट में 6000 बार कंपन करेगा।
In simple words: अगर कोई आवाज़ एक सेकंड में 100 बार हिलती है, तो वह एक मिनट में कुल 6000 बार हिलेगी।

🎯 Exam Tip: आवृत्ति प्रति सेकंड की इकाई में होती है, इसलिए समय को हमेशा सेकंड में परिवर्तित करना सुनिश्चित करें ताकि आपकी गणना सही हो।

 

Question 12. एक पनडुब्बी सोनार स्पंद उत्सर्जित करती है, जो पानी के अंदर एक खडी चट्टान से टकराकर 1.02s के पश्चात् वापस लौटता है। यदि खारे पानी में ध्वनि की चाल 1531 m/s हो, तो चट्टान की दूरी ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें सोनार स्पंद के वापस लौटने का कुल समय \( t = 1.02 \) सेकंड दिया गया है। खारे पानी में ध्वनि की चाल \( v = 1531 \) मीटर/सेकंड है।
चट्टान की दूरी \( (d) \) ज्ञात करनी है। सोनार तरंग चट्टान तक जाती है और वापस आती है, इसलिए ध्वनि ने कुल दूरी \( 2d \) तय की है।
कुल दूरी \( 2d = v \times t \)
\( 2d = 1531 \text{ m/s} \times 1.02 \text{ s} = 1561.62 \) मीटर।
चट्टान की दूरी \( d = \frac{1561.62}{2} \text{ m} = 780.81 \) मीटर।
In simple words: अगर पनडुब्बी से निकली आवाज़ 1.02 सेकंड में वापस आती है और पानी में 1531 मीटर/सेकंड से चलती है, तो चट्टान 780.81 मीटर दूर है।

🎯 Exam Tip: सोनार और प्रतिध्वनि के प्रश्नों में, हमेशा कुल यात्रा समय को आधी दूरी के लिए विभाजित करें, क्योंकि ध्वनि को वस्तु तक जाने और वापस आने में समय लगता है।

 

Question 13. एक पनडुब्बी पर लगी एक सोनार युक्ति, संकेत भेजती है और उनकी प्रतिध्वनि 55 पश्चात् ग्रहण करती है। यदि पनडुब्बी से वस्तु की दूरी 3625 m हो तो ध्वनि की चाल की गणना कीजिए।
Answer: हमें प्रतिध्वनि प्राप्त होने का कुल समय \( t = 55 \) सेकंड दिया गया है। पनडुब्बी से वस्तु की दूरी \( d = 3625 \) मीटर है।
ध्वनि वस्तु तक जाती है और फिर वापस आती है, इसलिए ध्वनि द्वारा तय की गई कुल दूरी \( = 2d \)।
कुल दूरी \( = 2 \times 3625 \text{ m} = 7250 \) मीटर।
ध्वनि की चाल \( (v) \) ज्ञात करने के लिए, सूत्र \( v = \frac{\text{कुल दूरी}}{\text{कुल समय}} \) का उपयोग करेंगे।
\( v = \frac{7250 \text{ m}}{55 \text{ s}} \approx 131.82 \) मीटर/सेकंड।
यह पानी में ध्वनि की चाल है।
In simple words: अगर पनडुब्बी से कोई चीज़ 3625 मीटर दूर है और आवाज़ को वहाँ से लौटकर आने में 55 सेकंड लगते हैं, तो पानी में आवाज़ की रफ़्तार लगभग 131.82 मीटर/सेकंड है।

🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करें कि आप कुल दूरी (स्रोत से वस्तु तक और वापस) को कुल समय से भाग दें। समय की इकाइयों का सही उपयोग करना भी महत्वपूर्ण है।

 

Question 14. जहाज में लगा हुआ एक सोनार उपकरण समुद्र के अन्दर पराश्रव्य तरंगें भेजता है। ये तरंगें समुद्र तल से परावर्तित होती हैं। यदि पराश्रव्य तरंगें जहाज से समुद्र तल तक वापस चलने में 2 सेकण्ड का समय लेती हैं; तो समुद्र की गहराई क्या है? (जल में ध्वनि की चाल = 1500 m/s)
Answer: सोनार उपकरण द्वारा भेजी गई पराश्रव्य तरंगों को समुद्र तल तक जाने और वापस जहाज तक आने में 2 सेकंड का समय लगता है। इसका मतलब है कि तरंग को समुद्र तल तक पहुंचने में कुल समय का आधा यानी 1 सेकंड लगता है।
जल में ध्वनि की चाल \( = 1500 \) m/s
समुद्र तल तक जाने में लगा समय \( = \frac{2}{2} \) सेकंड \( = 1 \) सेकंड
हमें समुद्र की गहराई (दूरी) ज्ञात करनी है। हम जानते हैं कि चाल, दूरी और समय के बीच का संबंध है:
\( \text{चाल} = \frac { \text{दूरी} }{ \text{समय} } \)
\( \implies 1500 \text{ m/s} = \frac { \text{दूरी} }{ 1 \text{ सेकंड} } \)
\( \implies \text{दूरी} = 1500 \text{ m/s} \times 1 \text{ सेकंड} \)
\( \implies \text{दूरी} = 1500 \text{ m} \)
अतः, समुद्र की गहराई 1500 मीटर है। सोनार प्रणाली पानी के नीचे की वस्तुओं का पता लगाने में बहुत उपयोगी है, जैसे पनडुब्बियां या मछली के झुंड.
In simple words: ध्वनि तरंग को जहाज से समुद्र तल तक जाने और वापस आने में 2 सेकंड लगते हैं. तो, एक तरफ जाने में 1 सेकंड लगेगा. ध्वनि की चाल 1500 m/s है, इसलिए समुद्र की गहराई 1500 मीटर होगी.

🎯 Exam Tip: ऐसे सवालों में, कुल समय को आधा करना याद रखें क्योंकि ध्वनि तरंग को आने और जाने दोनों का समय लगता है, और हमें केवल एक तरफ की दूरी ज्ञात करनी होती है.

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