RBSE Solutions Class 9 Science Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

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Detailed Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण RBSE Solutions for Class 9 Science

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Class 9 Science Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण RBSE Solutions PDF

 

उदाहरण 10. 1. पृथ्वी का द्रव्यमान लगभग \( 6 \times 10^{24} \) kg है तथा चन्द्रमा का द्रव्यमान \( 7.4 \times 10^{22} \) kg है यदि पृथ्वी तथा चन्द्रमा के बीच की दूरी \( 3.84 \times 10^5 \) km है तो पृथ्वी द्वारा चन्द्रमा पर लगाये गये बल का परिकलन कीजिए। (यहाँ \( G = 6.7 \times 10^{-11} \frac{Nm^2}{kg^2} \))
Answer: दिए गए मान हैं:
पृथ्वी का द्रव्यमान \( M = 6 \times 10^{24} \) kg
चन्द्रमा का द्रव्यमान \( m = 7.4 \times 10^{22} \) kg
दूरी \( d = 3.84 \times 10^5 \) km \( = 3.84 \times 10^8 \) m (क्योंकि 1 km = 1000 m)
गुरुत्वाकर्षण नियतांक \( G = 6.7 \times 10^{-11} \frac{Nm^2}{kg^2} \)
न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के अनुसार, गुरुत्वाकर्षण बल \( F \) का सूत्र है:
\( F = \frac{GMm}{d^2} \)
अब, मान रखने पर:
\( F = \frac{(6.67 \times 10^{-11}) \times (6 \times 10^{24}) \times (7.4 \times 10^{22})}{(3.84 \times 10^8)^2} \)
\( F = \frac{6.67 \times 6 \times 7.4 \times 10^{(-11+24+22)}}{3.84 \times 3.84 \times 10^{(8+8)}} \)
\( F = \frac{295.788 \times 10^{35}}{14.7456 \times 10^{16}} \)
\( F \approx 20.06 \times 10^{(35-16)} \)
\( F \approx 20.06 \times 10^{19} N \)
इसे हम ऐसे भी लिख सकते हैं:
\( F \approx 2.01 \times 10^{20} N \)
तो, पृथ्वी द्वारा चन्द्रमा पर लगाया गया गुरुत्वाकर्षण बल लगभग \( 2.01 \times 10^{20} N \) है। यह एक बहुत बड़ा बल है जो दोनों पिंडों को एक साथ बांधे रखता है।
In simple words: हमें पृथ्वी और चंद्रमा के बीच का खिंचाव बल निकालना था। हमने सभी दिए गए मानों को गुरुत्वाकर्षण बल के सूत्र में रखा और गुणा-भाग किया। अंत में, हमें \( 2.01 \times 10^{20} \) न्यूटन का बल मिला, जो यह बताता है कि दोनों एक दूसरे को कितनी ताकत से खींचते हैं।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण बल के सवालों में, दूरियों को हमेशा किलोमीटर से मीटर में बदलना न भूलें और घातांकों की गणना सावधानी से करें।

 

उदाहरण 10. 2. एक 40 kg द्रव्यमान का गोला दूसरे 80 kg द्रव्यमान के गोले द्वारा \( 0.25 \times 10^{-6} \) kg-wt के बराबर गुरुत्वाकर्षण बल अनुभव करता है। दोनों गोलों के केन्द्र के मध्य 30 सेमी की दूरी है। यदि गुरुत्वीय त्वरण \( g = 9.8 \) m/s² है तो गुरुत्वाकर्षण नियतांक की गणना कीजिए।
Answer: दिए गए मान हैं:
पहले गोले का द्रव्यमान \( m_1 = 40 \) kg
दूसरे गोले का द्रव्यमान \( m_2 = 80 \) kg
गुरुत्वाकर्षण बल \( F = 0.25 \times 10^{-6} \) kg-wt
दूरी \( r = 30 \) सेमी \( = 0.3 \) मीटर (क्योंकि 1 मीटर = 100 सेमी)
गुरुत्वीय त्वरण \( g = 9.8 \) m/s²

पहले हमें बल (F) को न्यूटन में बदलना होगा, क्योंकि 1 kg-wt \( = g \) न्यूटन:
\( F = 0.25 \times 10^{-6} \times 9.8 \) N

गुरुत्वाकर्षण के नियम से, बल का सूत्र है:
\( F = \frac{Gm_1m_2}{r^2} \)
हमें \( G \) निकालना है, इसलिए सूत्र को ऐसे बदलेंगे:
\( G = \frac{Fr^2}{m_1m_2} \)

अब मान रखते हैं:
\( G = \frac{(0.25 \times 10^{-6} \times 9.8) \times (0.3)^2}{40 \times 80} \)
\( G = \frac{0.25 \times 9.8 \times 0.09 \times 10^{-6}}{3200} \)
\( G = \frac{0.2205 \times 10^{-6}}{3200} \)
\( G = 0.00006890625 \times 10^{-6} \)
\( G \approx 6.89 \times 10^{-11} Nm^2/kg^2 \)
तो, गुरुत्वाकर्षण नियतांक का मान लगभग \( 6.89 \times 10^{-11} Nm^2/kg^2 \) है। यह नियतांक बताता है कि ब्रह्मांड में दो वस्तुओं के बीच गुरुत्वाकर्षण बल कितना मजबूत होता है।
In simple words: हमें गुरुत्वाकर्षण नियतांक \( G \) का मान निकालना था। हमने बल को किलोग्राम-भार से न्यूटन में बदला, फिर सभी दिए गए मानों को गुरुत्वाकर्षण बल के सूत्र में रखकर \( G \) के लिए हल किया। उत्तर लगभग \( 6.89 \times 10^{-11} Nm^2/kg^2 \) आया।

🎯 Exam Tip: kg-wt को न्यूटन में बदलते समय 'g' के मान से गुणा करना याद रखें। साथ ही, सभी इकाइयों को SI प्रणाली में लाना सुनिश्चित करें (जैसे सेमी को मीटर में)।

 

उदाहरण 10. 4. एक वस्तु को ऊध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर फेंका जाता है जिससे वह 10m ऊँचाई तक पहुँचती है, तो निम्न को परिकलन कीजिए
(i) वस्तु कितने वेग से ऊपर फेंकी गई तथा
(ii) वस्तु द्वारा उच्चतम बिन्दु तक पहुँचने में लिया गया समय ?

Answer: यहाँ, वस्तु को ऊपर फेंका जा रहा है, इसलिए गुरुत्वीय त्वरण \( g \) को ऋणात्मक लिया जाएगा। उच्चतम बिंदु पर वस्तु का अंतिम वेग \( v = 0 \) m/s होगा।
दिए गए मान:
ऊँचाई \( h = 10 \) m
गुरुत्वीय त्वरण \( g = -9.8 \) m/s² (ऊपर की गति के लिए)
अंतिम वेग \( v = 0 \) m/s

(i) वस्तु को कितने वेग से ऊपर फेंका गया (\( u \))?
गति के तीसरे समीकरण का उपयोग करते हैं: \( v^2 = u^2 + 2gh \)
मान रखने पर:
\( 0^2 = u^2 + 2 \times (-9.8) \times 10 \)
\( 0 = u^2 - 196 \)
\( u^2 = 196 \)
\( u = \sqrt{196} \)
\( u = 14 \) m/s
इसलिए, वस्तु को 14 m/s के वेग से ऊपर फेंका गया था।

(ii) वस्तु द्वारा उच्चतम बिन्दु तक पहुँचने में लिया गया समय (\( t \))?
गति के पहले समीकरण का उपयोग करते हैं: \( v = u + gt \)
मान रखने पर:
\( 0 = 14 + (-9.8) \times t \)
\( 0 = 14 - 9.8t \)
\( 9.8t = 14 \)
\( t = \frac{14}{9.8} \)
\( t \approx 1.43 \) s
तो, वस्तु को उच्चतम बिंदु तक पहुँचने में लगभग 1.43 सेकंड का समय लगा। इस प्रकार, गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में वस्तु की गति को समझने के लिए गति के समीकरण बहुत उपयोगी होते हैं।
In simple words: हमने एक गेंद को ऊपर फेंकने के लिए उसका शुरुआती वेग और सबसे ऊँचे बिंदु तक पहुँचने में लगने वाला समय निकाला। सबसे ऊँचे बिंदु पर गेंद रुक जाती है, इसलिए उसका अंतिम वेग शून्य होता है। हमने गति के समीकरणों का इस्तेमाल करके पाया कि गेंद को 14 मीटर प्रति सेकंड की गति से फेंका गया था और उसे ऊपर पहुँचने में लगभग 1.43 सेकंड लगे।

🎯 Exam Tip: जब कोई वस्तु ऊपर फेंकी जाती है, तो गुरुत्वीय त्वरण \( g \) को हमेशा ऋणात्मक लें क्योंकि यह गति की दिशा के विपरीत काम करता है।

 

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

 

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

प्रश्न 1. न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम सार्वत्रिक होता है। क्योंकि
(अ) वह सदैव आकर्षण का होता है
(ब) वह सौरमण्डल के सभी सदस्यों व कणों पर लागू होता है।
(स) यह सभी द्रव्यमान पर सभी दूरियों पर लागू होता है। तथा माध्यम से प्रभावित नहीं होता है।
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं।

Answer: (स) यह सभी द्रव्यमान पर सभी दूरियों पर लागू होता है। तथा माध्यम से प्रभावित नहीं होता है।
In simple words: न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम हर जगह और हर वस्तु पर लागू होता है, चाहे उनका द्रव्यमान कुछ भी हो और उनके बीच कितनी भी दूरी हो। साथ ही, यह किसी माध्यम जैसे हवा या पानी पर निर्भर नहीं करता।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम की परिभाषा और उसके सभी महत्वपूर्ण बिन्दुओं को याद रखें, खासकर कि यह द्रव्यमान और दूरी पर कैसे निर्भर करता है और माध्यम से प्रभावित नहीं होता।

 

प्रश्न 2. वस्तु की वृत्ताकार गति के लिए आवश्यक बरन कौन-सा
(अ) गुरूत्वाकर्षण बल
(ब) घर्षण बल
(स) अभिकेन्द्र बल
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं।

Answer: (स) अभिकेन्द्र बल
In simple words: जब कोई वस्तु गोल-गोल घूमती है, तो उसे एक खास बल की जरूरत होती है जो उसे केंद्र की ओर खींचता है। इसी बल को अभिकेन्द्र बल कहते हैं।

🎯 Exam Tip: वृत्ताकार गति में अभिकेन्द्र बल की भूमिका को समझना महत्वपूर्ण है; यह बल हमेशा गति की दिशा के लंबवत, केंद्र की ओर कार्य करता है।

 

प्रश्न 4. पृथ्वी सतह पर किसी व्यक्ति का भार 60N है तो चन्द्रमा की सतह पर व्यक्ति का भार होगा ?
(अ) 60N
(ब) 30N
(स) 20N
(द) 10N.

Answer: (द) 10N.
In simple words: चंद्रमा पर गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी की तुलना में लगभग छह गुना कम होता है। इसलिए, यदि पृथ्वी पर किसी व्यक्ति का भार 60 न्यूटन है, तो चंद्रमा पर उसका भार 60 को 6 से भाग देने पर 10 न्यूटन होगा।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि चंद्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का लगभग 1/6 गुना होता है, इसलिए भार भी 1/6 गुना हो जाता है।

 

प्रश्न 5. m द्रव्यमान के किसी पिण्ड को गहरी खान के तल पर ले जाया जाता
(अ) उसका द्रव्यमान बढ़ता है।
(ब) उसका द्रव्यमान घटता है।
(स) उसका भार घटता है
(द) उसका भार बढ़ता है।

Answer: (स) उसका भार घटता है
In simple words: जब किसी वस्तु को पृथ्वी की सतह से गहरी खान में ले जाया जाता है, तो गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान कम हो जाता है। क्योंकि भार (mg) गुरुत्वीय त्वरण पर निर्भर करता है, इसलिए भार भी कम हो जाता है।

🎯 Exam Tip: द्रव्यमान हमेशा स्थिर रहता है, लेकिन भार गुरुत्वीय त्वरण (g) पर निर्भर करता है। पृथ्वी के अंदर या ऊपर जाने पर g का मान बदलता है, जिससे भार भी बदलता है।

 

प्रश्न 6. दो द्रव्यमानों के बीच की दूरी दुगुनी करने पर द्रव्यमानों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल
(अ) अपरिवर्तित रहेगा
(ब) चौथाई हो जायेगा
(स) आधा रह जायेगा
(द) दुगुना हो जायेगा।

Answer: (ब) चौथाई हो जायेगा
In simple words: गुरुत्वाकर्षण बल दो वस्तुओं के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसका मतलब है कि अगर आप दूरी को दुगुना करते हैं, तो बल \( 2^2 = 4 \) गुना कम हो जाएगा, यानी चौथाई हो जाएगा।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम याद रखें: बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह संबंध 'व्युत्क्रम वर्ग नियम' कहलाता है।

 

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 2. क्या एक कृत्रिम उपग्रह में किसी पिण्ड का गुरुत्वीय द्रव्यमान ज्ञात किया जा सकता है ?
Answer: नहीं, कृत्रिम उपग्रह में किसी पिण्ड का गुरुत्वीय द्रव्यमान ज्ञात नहीं किया जा सकता। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक कृत्रिम उपग्रह मुक्त रूप से गिरते हुए पिण्ड के समान होता है। जब कोई वस्तु मुक्त पतन की स्थिति में होती है, तो वह भारहीनता महसूस करती है, जिसका अर्थ है कि उसके भार को मापने के लिए कोई संदर्भ नहीं होता।
In simple words: नहीं, कृत्रिम उपग्रह में किसी वस्तु का द्रव्यमान नहीं निकाल सकते क्योंकि उपग्रह में सब कुछ भारहीन महसूस होता है, जैसे कि वह हवा में तैर रहा हो।

🎯 Exam Tip: भारहीनता की स्थिति में, वस्तु का द्रव्यमान सीधे मापना संभव नहीं होता क्योंकि भार मापने वाला यंत्र काम नहीं करता।

 

प्रश्न 3. दो द्रव्यमान के बीच की दूरी दुगुनी करने पर द्रव्यमानों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल में क्या परिवर्तन सेगा ?
Answer: गुरुत्वाकर्षण बल दो द्रव्यमानों के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है, जैसा कि सूत्र \( F \propto \frac{1}{d^2} \) से पता चलता है। इसका मतलब है कि यदि आप दूरी को दुगुना (\( d' = 2d \)) करते हैं, तो नया बल \( F' \) मूल बल \( F \) का चौथाई हो जाएगा।
\( F' \propto \frac{1}{(2d)^2} \)
\( F' \propto \frac{1}{4d^2} \)
\( F' = \frac{1}{4} F \)
इसलिए, दूरी दुगुनी करने पर गुरुत्वाकर्षण बल एक-चौथाई रह जाएगा। यह नियम प्रकृति में कई घटनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: गुरुत्वाकर्षण बल दूरी के वर्ग के उल्टा होता है। अगर आप दो चीज़ों के बीच की दूरी को दोगुना करते हैं, तो उनके बीच का खींचने वाला बल चार गुना कम हो जाएगा।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण बल का व्युत्क्रम वर्ग नियम याद रखें: बल दूरी के वर्ग के साथ कैसे बदलता है। यदि दूरी \( n \) गुना बढ़ती है, तो बल \( n^2 \) गुना कम हो जाता है।

 

प्रश्न 4. एक वस्तु का द्रव्यमान 10 kg है तो उस वस्तु का पृथ्वी की सतह पर भार कितना होगा ?
Answer: पृथ्वी की सतह पर वस्तु का भार उसके द्रव्यमान और गुरुत्वीय त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है।
वस्तु का द्रव्यमान \( m = 10 \) kg
पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण \( g = 9.8 \) m/s²
भार \( W = mg \)
\( W = 10 \) kg \( \times 9.8 \) m/s²
\( W = 98 \) N
तो, वस्तु का पृथ्वी की सतह पर भार 98 न्यूटन होगा। गुरुत्वीय त्वरण का मान स्थानों के अनुसार थोड़ा बदल सकता है।
In simple words: किसी वस्तु का भार निकालने के लिए उसके द्रव्यमान को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण की ताकत (9.8 मीटर प्रति सेकंड वर्ग) से गुणा करते हैं। 10 किलो की वस्तु का भार 98 न्यूटन होगा।

🎯 Exam Tip: द्रव्यमान (kg में) और भार (न्यूटन में) के बीच का अंतर स्पष्ट रखें। भार एक बल है, जबकि द्रव्यमान वस्तु में पदार्थ की मात्रा है।

 

प्रश्न 5. दो पिण्डों के मध्य गुरुत्वाकर्षण बल का सूत्र लिखिए।
Answer: दो पिण्डों के मध्य गुरुत्वाकर्षण बल का सूत्र न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम द्वारा दिया जाता है:
\( F = G \frac{m_1m_2}{d^2} \)
यहाँ पर:
\( F \) = दोनों पिण्डों के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल
\( G \) = सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (जिसका मान लगभग \( 6.67 \times 10^{-11} Nm^2/kg^2 \) होता है)
\( m_1 \) = पहले पिण्ड का द्रव्यमान
\( m_2 \) = दूसरे पिण्ड का द्रव्यमान
\( d \) = दोनों पिण्डों के केन्द्रों के बीच की दूरी
यह सूत्र बताता है कि बल द्रव्यमानों के गुणनफल के सीधा समानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
In simple words: दो चीज़ों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल का सूत्र है \( F = G \frac{m_1m_2}{d^2} \)। इसमें \( G \) एक खास नंबर है, \( m_1 \) और \( m_2 \) चीज़ों का वज़न है, और \( d \) उनके बीच की दूरी है।

🎯 Exam Tip: सूत्र के सभी प्रतीकों का सही अर्थ याद रखें और G के मान के साथ उसकी इकाई को भी जानें।

 

प्रश्न 6. बॉल पैग किस सिद्धान्त पर कार्य करता है ?
Answer: बॉल पैग गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत पर कार्य करता है। जब एक बॉल पैग को जमीन पर रखा जाता है और उस पर गेंद रखी जाती है, तो पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल गेंद को पैग के ऊपर टिकाए रखने में मदद करता है। यह साधारण दैनिक वस्तु भी गुरुत्वाकर्षण के मूलभूत नियमों का पालन करती है।
In simple words: बॉल पैग गुरुत्वाकर्षण बल के सिद्धांत पर काम करता है, जो गेंद को अपनी जगह पर स्थिर रखने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण एक मूलभूत बल है जो रोजमर्रा की वस्तुओं को भी प्रभावित करता है, जैसे कि बॉल पैग का स्थिर रहना।

 

प्रश्न 8. एक-एक किग्रा के दो पिण्ड परस्पर एक मीटर की दूरी पर हैं तो इनके मध्य गुरुत्वाकर्षण बल का मान लिखिए।
Answer: दिए गए मान हैं:
पहले पिण्ड का द्रव्यमान \( m_1 = 1 \) kg
दूसरे पिण्ड का द्रव्यमान \( m_2 = 1 \) kg
दोनों पिण्डों के बीच की दूरी \( d = 1 \) m
गुरुत्वाकर्षण नियतांक \( G = 6.67 \times 10^{-11} Nm^2/kg^2 \)
गुरुत्वाकर्षण बल \( F \) का सूत्र है: \( F = G \frac{m_1m_2}{d^2} \)
मान रखने पर:
\( F = (6.67 \times 10^{-11}) \times \frac{1 \times 1}{1^2} \)
\( F = 6.67 \times 10^{-11} \times 1 \)
\( F = 6.67 \times 10^{-11} \) N
तो, एक-एक किग्रा के दो पिण्डों के बीच, जब वे एक मीटर की दूरी पर होते हैं, तो उनके मध्य लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल \( 6.67 \times 10^{-11} \) न्यूटन होता है। यह बल बहुत छोटा होता है क्योंकि सामान्य द्रव्यमानों के लिए गुरुत्वाकर्षण बल बहुत कमजोर होता है।
In simple words: जब दो 1 किलो की चीजें 1 मीटर की दूरी पर हों, तो उनके बीच का खिंचाव बल \( 6.67 \times 10^{-11} \) न्यूटन होगा। यह बल बहुत कम होता है।

🎯 Exam Tip: जब \( m_1 = m_2 = 1 \) kg और \( d = 1 \) m हो, तो गुरुत्वाकर्षण बल का मान सीधे गुरुत्वाकर्षण नियतांक \( G \) के बराबर होता है।

 

प्रश्न 9. चन्द्रमा पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल लगता है। तो चन्द्रमा पृथ्वी पर क्यों नहीं गिरता ?
Answer: चन्द्रमा पृथ्वी पर सीधे इसलिए नहीं गिरता क्योंकि पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल चन्द्रमा को पृथ्वी की ओर खींचता तो है, लेकिन यह बल चन्द्रमा को पृथ्वी के चारों ओर एक वृत्ताकार कक्षा में गति करने के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल प्रदान करता है। चन्द्रमा एक निश्चित वेग से गति कर रहा है, और यह बल उसे सीधे पृथ्वी पर गिरने की बजाय लगातार अपनी कक्षा में बनाए रखता है। यह एक जटिल संतुलन है जो ब्रह्मांडीय पिंडों को उनकी कक्षाओं में बनाए रखता है।
In simple words: चंद्रमा पृथ्वी पर इसलिए नहीं गिरता क्योंकि पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण उसे खींचता तो है, लेकिन यह बल उसे अपनी कक्षा में गोल-गोल घूमने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: ग्रहों और उपग्रहों की कक्षाओं में गति के लिए गुरुत्वाकर्षण बल अभिकेन्द्र बल के रूप में कार्य करता है।

 

प्रश्न 10. समुद्र में उत्पन्न ज्वार-भाटे का प्रमुख कारण क्या है ?
Answer: समुद्र में उत्पन्न होने वाले ज्वार-भाटे का प्रमुख कारण चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल है। चंद्रमा, पृथ्वी के सबसे करीब का खगोलीय पिंड होने के कारण, पृथ्वी और उसके समुद्रों पर गुरुत्वाकर्षण खिंचाव डालता है। चंद्रमा का यह बल पृथ्वी के विभिन्न हिस्सों पर अलग-अलग होता है। जिस हिस्से में चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल अधिक होता है, वहाँ पानी ऊपर उठ जाता है (ज्वार), और जहाँ यह बल कम होता है, वहाँ पानी नीचे गिर जाता है (भाटा)। सूर्य का गुरुत्वाकर्षण भी ज्वार-भाटे में योगदान देता है, लेकिन चंद्रमा का प्रभाव अधिक होता है।
In simple words: समुद्र में ज्वार-भाटा चंद्रमा के खींचने वाले बल के कारण आते हैं। चंद्रमा पृथ्वी के पानी को अपनी ओर खींचता है, जिससे कहीं पानी ऊपर उठता है और कहीं नीचे गिरता है।

🎯 Exam Tip: ज्वार-भाटे की व्याख्या करते समय चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल, विशेषकर चंद्रमा के बल के महत्व को उजागर करें।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम लिखिए।
Answer: न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम कहता है कि ब्रह्मांड में प्रत्येक पिण्ड दूसरे प्रत्येक पिण्ड को एक बल से आकर्षित करता है। इस आकर्षण बल का परिमाण दोनों पिण्डों के द्रव्यमानों के गुणनफल के सीधा समानुपाती होता है और उनके केन्द्रों के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इस नियम को गणितीय रूप में इस प्रकार लिखा जा सकता है:
\( F = G \frac{m_1m_2}{d^2} \)
यहाँ, \( F \) गुरुत्वाकर्षण बल है, \( G \) सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक है, \( m_1 \) और \( m_2 \) दोनों पिण्डों के द्रव्यमान हैं, और \( d \) उनके बीच की दूरी है। यह नियम ब्रह्मांड में सभी वस्तुओं पर लागू होता है।
In simple words: गुरुत्वाकर्षण का नियम कहता है कि ब्रह्मांड की हर चीज़ दूसरी चीज़ को अपनी तरफ खींचती है। यह खींचने वाला बल चीज़ों के वज़न पर निर्भर करता है और उनके बीच की दूरी जितनी ज्यादा होगी, बल उतना ही कम होता जाएगा।

🎯 Exam Tip: नियम के तीन मुख्य तत्वों को स्पष्ट करें: आकर्षण बल, द्रव्यमानों के गुणनफल के सीधा समानुपाती, और दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती।

 

प्रश्न 2. पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण g का मान कहाँ सबसे अधिक होता है और क्यों ?
Answer: पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण \( g \) का मान ध्रुवों पर सबसे अधिक होता है और विषुवत रेखा पर सबसे कम होता है। इसका मुख्य कारण यह है कि पृथ्वी पूरी तरह से गोलाकार नहीं है, बल्कि यह ध्रुवों पर थोड़ी चपटी और विषुवत रेखा पर थोड़ी उभरी हुई है। इसका मतलब है कि ध्रुवों पर पृथ्वी के केन्द्र से दूरी विषुवत रेखा की तुलना में कम होती है। गुरुत्वीय त्वरण \( g = \frac{GM_e}{R^2} \) सूत्र के अनुसार, त्रिज्या (\( R \)) कम होने पर \( g \) का मान बढ़ जाता है। ध्रुवीय त्रिज्या 6379 km और भूमध्यीय त्रिज्या 6400 km होती है।
In simple words: पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण की ताकत (g) ध्रुवों पर सबसे ज्यादा होती है क्योंकि पृथ्वी ध्रुवों पर थोड़ी चपटी है। इसका मतलब है कि ध्रुवों पर आप पृथ्वी के केंद्र के करीब होते हैं, जिससे खींचने वाला बल बढ़ जाता है।

🎯 Exam Tip: पृथ्वी की गैर-गोलाकार आकृति (ध्रुवों पर चपटा होना) और गुरुत्वीय त्वरण के लिए दूरी के व्युत्क्रम वर्ग संबंध को समझाएं।

U पृथ्वी ध्रुव (R=6379km) ध्रुव (R=6379km) विषुवत रेखा (R=6400km) विषुवत रेखा (R=6400km)

 

प्रश्न 3. गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियतांक का मान लिखकर इसका मात्रक भी लिखिए।
Answer: गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियतांक (\( G \)) का आंकिक मान लगभग \( 6.67 \times 10^{-11} \) होता है। इसका SI मात्रक न्यूटन मीटर स्क्वायर प्रति किलोग्राम स्क्वायर (\( Nm^2/kg^2 \)) है। यह नियतांक ब्रह्मांड में दो वस्तुओं के बीच गुरुत्वाकर्षण बल की शक्ति को दर्शाता है।
In simple words: गुरुत्वाकर्षण नियतांक \( G \) का मान \( 6.67 \times 10^{-11} \) होता है। इसकी इकाई \( Nm^2/kg^2 \) है।

🎯 Exam Tip: \( G \) का मान और इसकी इकाई दोनों ही याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये गुरुत्वाकर्षण से संबंधित गणनाओं में अक्सर उपयोग होते हैं।

 

प्रश्न 4. गुरुत्वीय त्वरण किसे कहते हैं ? इसका सूत्र भी लिखिए।
Answer: गुरुत्वीय त्वरण वह त्वरण है जो किसी वस्तु में पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण उत्पन्न होता है जब वह मुक्त रूप से गिरती है। इसका अर्थ है कि जब कोई वस्तु गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में स्वतंत्र रूप से गिरती है, तो उसके वेग में लगातार वृद्धि होती है। पृथ्वी की सतह पर इसका औसत मान लगभग \( 9.8 \) m/s² होता है। गुरुत्वीय त्वरण का सूत्र है:
\( g = \frac{GM_e}{R^2} \)
यहाँ,
\( g \) = गुरुत्वीय त्वरण
\( G \) = सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक
\( M_e \) = पृथ्वी का द्रव्यमान
\( R \) = पृथ्वी की त्रिज्या
यह त्वरण सभी वस्तुओं पर एक समान लगता है, चाहे उनका द्रव्यमान कुछ भी हो।
In simple words: गुरुत्वीय त्वरण उस तेजी को कहते हैं जिससे कोई चीज पृथ्वी की ओर गिरती है, क्योंकि पृथ्वी उसे खींचती है। इसका सूत्र है \( g = \frac{GM_e}{R^2} \), जहाँ \( G \) गुरुत्वाकर्षण नियतांक, \( M_e \) पृथ्वी का वज़न और \( R \) पृथ्वी की त्रिज्या है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वीय त्वरण की परिभाषा को उसके सूत्र और इसमें शामिल भौतिक राशियों के साथ याद रखें। मुक्त पतन के दौरान सभी वस्तुओं का त्वरण समान होता है।

 

प्रश्न. किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा भार में क्या अन्तर है। स्पष्ट कीजिए ?
Answer: द्रव्यमान और भार दो अलग-अलग भौतिक राशियाँ हैं, जिनमें मुख्य अंतर नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट किए गए हैं। ये दोनों अवधारणाएँ गुरुत्वाकर्षण के अध्ययन में बहुत महत्वपूर्ण हैं।

क्र. सं.द्रव्यमानभार
1.किसी वस्तु में उपस्थित पदार्थ की मात्रा ही उसका द्रव्यमान होती है।किसी वस्तु का भार उस बल के बराबर होता है जिससे पृथ्वी उस वस्तु को आकर्षित करती है।
2.द्रव्यमान का मात्रक किलोग्राम है।भार का मात्रक न्यूटन या किलोग्राम भार है।
3.किसी वस्तु के द्रव्यमान का मान प्रत्येक स्थान पर समान रहता है।वस्तु का भार (mg) गुरुत्वीय त्वरण g के परिवर्तन के कारण भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न होता है। भार सदिश राशि है।
4.द्रव्यमान अदिश राशि है।भार को कमानीदार तुला से तोला जाता है।
5.द्रव्यमान को भौतिक तुला से तोला जाता है।भार को कमानीदार तुला से तोला जाता है।

In simple words: द्रव्यमान बताता है कि किसी चीज़ में कितना पदार्थ है और यह हर जगह एक जैसा रहता है। भार वह बल है जिससे पृथ्वी किसी चीज़ को अपनी ओर खींचती है, और यह अलग-अलग जगहों पर बदल सकता है।

🎯 Exam Tip: द्रव्यमान एक अदिश राशि है (केवल परिमाण), जबकि भार एक सदिश राशि है (परिमाण और दिशा दोनों)। इन दोनों के बीच के प्रमुख अंतरों को याद रखें।

 

प्रश्न 6. मुक्त पतन से क्या अभिप्राय है ? मुक्त पतन के उदाहरण भी दीजिए।
Answer: मुक्त पतन वह गति है जब वस्तुएँ केवल पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में गिरती हैं और उन पर कोई अन्य बल (जैसे हवा का प्रतिरोध) कार्य नहीं करता है। इस स्थिति में वस्तु का त्वरण पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण (\( g \)) के बराबर होता है।
उदाहरण:

  • एक गेंद को ऊपर फेंकने पर वह एक निश्चित ऊँचाई तक पहुँचती है और फिर नीचे गिरने लगती है। उसका नीचे गिरना मुक्त पतन का एक उदाहरण है।
  • एक पत्थर को कुछ ऊँचाई से छोड़ने पर वह स्वतः नीचे की ओर गिरने लगता है। यह भी मुक्त पतन का एक उदाहरण है, यदि हवा के प्रतिरोध को नगण्य मान लिया जाए।
ये उदाहरण दर्शाते हैं कि कैसे गुरुत्वाकर्षण बल के कारण वस्तुएँ पृथ्वी की ओर आकर्षित होती हैं।
In simple words: जब कोई वस्तु सिर्फ पृथ्वी के खिंचाव बल से नीचे गिरती है, तो उसे मुक्त पतन कहते हैं। जैसे, एक गेंद जो ऊपर फेंकने के बाद नीचे आती है या एक पत्थर जो ऊपर से छोड़ा जाता है।

🎯 Exam Tip: मुक्त पतन की परिभाषा देते समय 'केवल गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में' शब्द पर जोर दें, और उदाहरणों में हवा के प्रतिरोध की अनुपस्थिति को मानें।

 

प्रश्न 7. एक व्यक्ति पृथ्वी के ध्रुव से विषुवत रेखा की ओर आता है उसके भार में क्या परिवर्तन होगा और क्यों ?
Answer: जब एक व्यक्ति पृथ्वी के ध्रुव से विषुवत रेखा की ओर आता है, तो उसके भार में कमी आती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पृथ्वी ध्रुवों पर थोड़ी चपटी है और विषुवत रेखा पर थोड़ी उभरी हुई है। इसका मतलब है कि ध्रुवों पर पृथ्वी के केंद्र से दूरी कम होती है, जबकि विषुवत रेखा पर यह दूरी अधिक होती है। गुरुत्वीय त्वरण (\( g \)) का मान दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होने के कारण, ध्रुवों पर \( g \) का मान अधिक होता है और विषुवत रेखा पर कम होता है। चूँकि भार \( W = mg \) होता है, इसलिए \( g \) में कमी आने पर भार भी कम हो जाता है।
In simple words: जब कोई व्यक्ति पृथ्वी के ध्रुव से भूमध्य रेखा की ओर जाता है, तो उसका वज़न घटता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि भूमध्य रेखा पर पृथ्वी केंद्र से थोड़ी दूर होती है, जिससे गुरुत्वाकर्षण का खिंचाव थोड़ा कम हो जाता है।

🎯 Exam Tip: पृथ्वी की आकृति के कारण ध्रुवों और विषुवत रेखा पर \( g \) के मान में अंतर को याद रखें, और यह भी कि भार \( g \) पर निर्भर करता है।

 

भारहीनता-वह अवस्था जब वस्तु का भार शून्य हो जाता है, भारहीनता कहलाती है। उदाहरण-
1. पृथ्वी की कक्षा में अन्तरिक्ष यान में अन्तरिक्ष यात्रियों की भी यही स्थिति होती है। पृथ्वी की कक्षा में गतिशील अन्तरिक्ष यान, अन्तरिक्ष यात्री और तुला समान त्वरण से पृथ्वी की ओर गिरते हैं, और उन पर कोई बल कार्य नहीं करता है। यही कारण है कि अन्तरिक्ष यात्री तैरते हुए भारहीनता की स्थिति में होते हैं, यद्यपि उनका भार शून्य नहीं होता हैं।
2. एक कमानीदार तुला को अपने हाथ में पकड़कर उस पर कोई पिण्ड लटकायें तो तुला का संकेतक पिण्ड के भार को प्रदर्शित करता है। अब तुला को नीचे की और छोड़ देने पर हम देखते हैं कि तुला का संकेतक शून्य पर पहुँच जाता है। अर्थात् पिण्ड का भार शून्य प्रदर्शित करता है। इस स्थिति में पिण्ड, तुला पर कोई बल नहीं लगता क्योंकि पृथ्वी पिण्डु को भी उतनी तेजी से खींचती है जितनी तेजी से कमानीदार तुला को, जिससे पिण्ड द्वारा तुला पर शून्य बल लगता है। और पिण्ड का आभासी भार शून्य प्रतीत होता है।
In simple words: भारहीनता तब होती है जब कोई वस्तु अपना वजन महसूस नहीं करती, यानी उसका भार शून्य हो जाता है। उदाहरण के लिए, अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष यान में तैरते हैं, या जब कोई लिफ्ट तेजी से नीचे गिरती है तो अंदर की वस्तुएं भारहीन महसूस होती हैं।

🎯 Exam Tip: भारहीनता का अर्थ यह नहीं है कि गुरुत्वाकर्षण बल मौजूद नहीं है; इसका अर्थ है कि वस्तु पर शुद्ध बल शून्य है या प्रतिक्रिया बल अनुपस्थित है, जैसे मुक्त पतन की स्थिति में।

 

प्रश्न 9. मुक्त रूप से गिरती हुई वस्तु के लिए गति के तीनों समीकरण लिखिए एवं प्रतीकों का अर्थ भी लिखिए।
Answer: मुक्त रूप से गिरती हुई वस्तु के लिए गति के तीन समीकरण, जिसमें गुरुत्वीय त्वरण \( g \) एक समान होता है, इस प्रकार हैं:
(i) \( v = gt \)
(ii) \( h = \frac{1}{2}gt^2 \)
(iii) \( v^2 = 2gh \)
यहाँ पर:
\( v \) = वस्तु का अंतिम वेग (किसी निश्चित समय \( t \) पर)
\( t \) = वस्तु द्वारा लिया गया समय (प्रारंभिक बिंदु से अंतिम बिंदु तक)
\( h \) = वस्तु की कुल चली दूरी या ऊँचाई
\( g \) = गुरुत्वीय त्वरण (पृथ्वी की सतह पर लगभग \( 9.8 \) m/s²)
\( u = 0 \) (विरामावस्था से गिरने पर, क्योंकि मुक्त पतन में वस्तु को प्रारंभिक वेग नहीं दिया जाता)
ये समीकरण वस्तु की गति का विश्लेषण करने में मदद करते हैं।
In simple words: जब कोई वस्तु स्वतंत्र रूप से नीचे गिरती है, तो उसकी गति को बताने के लिए तीन सूत्र हैं: \( v = gt \), \( h = \frac{1}{2}gt^2 \) और \( v^2 = 2gh \)। इनमें \( v \) अंतिम गति, \( t \) समय, \( h \) दूरी या ऊँचाई, और \( g \) गुरुत्वाकर्षण की ताकत है।

🎯 Exam Tip: मुक्त पतन के लिए, प्रारंभिक वेग (\( u \)) को हमेशा शून्य मानें। समीकरणों और उनके प्रतीकों को सही ढंग से याद करें।

 

प्रश्न 10. किसी वस्तु को u वेग से ऊपर की ओर फेंका जाता है। जिससे वह h ऊँचाई तक जाती है। वस्तु के लिए गति के तीनों समीकरण लिखिए।
Answer: जब किसी वस्तु को प्रारंभिक वेग \( u \) से ऊपर की ओर फेंका जाता है, तो गुरुत्वाकर्षण बल उसकी गति के विपरीत दिशा में कार्य करता है। इसलिए, गुरुत्वीय त्वरण \( g \) को ऋणात्मक (\( -g \)) लिया जाता है। इस स्थिति में गति के तीनों समीकरण इस प्रकार हैं:
(i) \( v = u - gt \)
(ii) \( h = ut - \frac{1}{2}gt^2 \)
(iii) \( v^2 = u^2 - 2gh \)
यहाँ पर:
\( v \) = वस्तु का अंतिम वेग (ऊपर जाते समय किसी बिंदु पर)
\( u \) = वस्तु का प्रारंभिक वेग (जिससे उसे फेंका गया)
\( t \) = वस्तु द्वारा लिया गया समय
\( h \) = वस्तु द्वारा तय की गई दूरी या ऊँचाई
\( g \) = गुरुत्वीय त्वरण
ये समीकरण वस्तु की ऊपर की ओर की गति को समझने और उसका विश्लेषण करने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
In simple words: जब किसी चीज़ को ऊपर फेंका जाता है, तो उसकी गति के लिए तीन सूत्र हैं: \( v = u - gt \), \( h = ut - \frac{1}{2}gt^2 \) और \( v^2 = u^2 - 2gh \)। इन सूत्रों में \( u \) शुरुआती गति है और \( g \) को माइनस में लिया जाता है क्योंकि गुरुत्वाकर्षण नीचे की ओर खींचता है।

🎯 Exam Tip: ऊपर की ओर गति के लिए \( g \) को ऋणात्मक लेना न भूलें। उच्चतम बिंदु पर अंतिम वेग \( v \) शून्य होता है, जिसका उपयोग अक्सर गणनाओं में किया जाता है।

 

प्रश्न 11. एक अन्तरिक्ष यात्री को भारहीनता के कारण क्या-क्या कठिनाइयाँ होती हैं।
Answer: अन्तरिक्ष में भारहीनता के कारण अन्तरिक्ष यात्रियों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। गुरुत्वाकर्षण की अनुपस्थिति उनके सामान्य जीवन को बहुत प्रभावित करती है। मुख्य कठिनाइयाँ इस प्रकार हैं:

  • खाना खाने में परेशानी: भोजन के कण हवा में तैरने लगते हैं, जिससे उन्हें खाना खाने में दिक्कत होती है।
  • पानी पीने में परेशानी: पानी गिलास में स्थिर नहीं रहता बल्कि बूंदों के रूप में हवा में तैरता रहता है, जिससे पानी पीना मुश्किल हो जाता है।
  • भार मापने में असमर्थता: स्प्रिंग तुला जैसे उपकरण भारहीनता में काम नहीं करते, जिससे वे अपना या किसी अन्य वस्तु का भार नहीं ज्ञात कर सकते।
  • वस्तुओं का तैरना: यदि यात्री किसी गेंद या अन्य वस्तु को उपग्रह के अंदर छोड़ दे, तो वह नीचे फर्श पर नहीं गिरेगी, बल्कि हवा में ही तैरती रहेगी।
ये सभी कठिनाइयाँ अन्तरिक्ष यात्रियों को एक विशेष प्रशिक्षण और विशेष उपकरणों का उपयोग करने के लिए मजबूर करती हैं।
In simple words: अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण, अंतरिक्ष यात्रियों को खाने-पीने में दिक्कत होती है क्योंकि सब कुछ हवा में तैरता है। वे अपना वज़न भी नहीं नाप सकते और छोड़ी गई चीज़ें भी हवा में तैरती रहती हैं।

🎯 Exam Tip: भारहीनता के सीधे प्रभावों और उनसे होने वाली दैनिक जीवन की कठिनाइयों पर ध्यान केंद्रित करें।

 

प्रश्न 12. केपलर तथा न्यूटन से पहले प्राचीन भारतीय खगोल वैज्ञानिक कौन थे और इनका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में क्या योगदान था ?
Answer: केपलर और न्यूटन से पहले कई प्राचीन भारतीय खगोल वैज्ञानिकों ने गुरुत्वाकर्षण और ग्रहों की गति को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनमें से कुछ प्रमुख वैज्ञानिक और उनके योगदान इस प्रकार हैं:

  • आर्यभट्ट (5वीं शताब्दी): उन्होंने भूकेन्द्रीय मॉडल दिया, जिसमें पृथ्वी को ब्रह्मांड के केंद्र में माना गया और ग्रहों को उसके चारों ओर घूमते हुए बताया। उन्होंने पृथ्वी के घूर्णन और उसके प्रभाव की भी बात की।
  • भास्कराचार्य (12वीं शताब्दी): उन्होंने 'सिद्धांत शिरोमणि' नामक ग्रंथ लिखा, जिसमें गुरुत्वाकर्षण बल के सिद्धांतों और ग्रहों की गति का विस्तृत वर्णन किया गया है। उन्होंने पृथ्वी की गुरुत्व शक्ति का उल्लेख किया और पृथ्वी की त्रिज्या तथा परिधि की गणना भी की। भास्कराचार्य ने बताया कि पृथ्वी अपनी ओर वस्तुओं को खींचती है, जिसे बाद में गुरुत्वाकर्षण के रूप में जाना गया।
इन वैज्ञानिकों के कार्य ने खगोल विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण नींव रखी।
In simple words: केपलर और न्यूटन से पहले भारत में आर्यभट्ट और भास्कराचार्य जैसे वैज्ञानिकों ने ग्रहों की चाल और पृथ्वी के खिंचाव बल (गुरुत्वाकर्षण) के बारे में बताया था। आर्यभट्ट ने पृथ्वी को केंद्र में मानकर ग्रहों की गति समझाई, जबकि भास्कराचार्य ने पृथ्वी की खींचने की शक्ति और उसके आकार की गणना की।

🎯 Exam Tip: प्राचीन भारतीय वैज्ञानिकों के नाम और उनके विशिष्ट योगदानों को याद रखें, विशेषकर गुरुत्वाकर्षण और खगोल विज्ञान के संदर्भ में।

 

प्रश्न 13. कृत्रिम उपग्रह में स्थित वस्तुएँ भारहीनता अवस्था में होती हैं जबकि प्राकृतिक उपग्रह में यह स्थिति नहीं सेती ? कारण स्पष्ट कीजिए।
Answer: कृत्रिम उपग्रह में स्थित वस्तुएँ भारहीनता अवस्था में महसूस होती हैं क्योंकि उपग्रह और उसके अंदर की वस्तुएँ पृथ्वी के चारों ओर एक समान गुरुत्वीय त्वरण के साथ गति करती हैं। इस स्थिति में, वस्तु पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल उसे उपग्रह के फर्श पर दबाने के बजाय उसकी वृत्ताकार गति में सहायता करता है, जिससे प्रतिक्रिया बल शून्य हो जाता है और वस्तु भारहीन महसूस करती है।
इसके विपरीत, प्राकृतिक उपग्रह, जैसे चंद्रमा, का अपना काफी द्रव्यमान होता है और यह अपनी सतह पर वस्तुओं पर गुरुत्वाकर्षण बल लगाता है। इसलिए, चंद्रमा पर वस्तुएँ भारहीन नहीं होतीं, बल्कि उनका भार चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण होता है, जो पृथ्वी के भार का लगभग 1/6 होता है। चंद्रमा अपनी सतह पर गुरुत्वीय त्वरण प्रदान करता है, जिससे वहाँ वस्तुओं का वास्तविक भार होता है।
In simple words: कृत्रिम उपग्रह में चीजें भारहीन लगती हैं क्योंकि उपग्रह खुद भी पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में गिर रहा होता है, जिससे कोई वज़न महसूस नहीं होता। लेकिन चंद्रमा पर ऐसा नहीं होता, क्योंकि चंद्रमा का अपना वज़न है जो चीजों को अपनी सतह पर खींचता है, जिससे उनका वज़न महसूस होता है।

🎯 Exam Tip: कृत्रिम उपग्रह में भारहीनता का कारण 'मुक्त पतन' की स्थिति है, जबकि प्राकृतिक उपग्रह का अपना गुरुत्वाकर्षण होता है, इसलिए वहाँ वास्तविक भार मौजूद होता है।

 

निबन्धात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

 

प्रश्न 1. दो गोलों में प्रत्येक का भार 10 किग्रा है ये एक दूसरे से 50 सेमी. की दूरी पर हैं। इन दोनों के मध्य गुरुत्वाकर्षण बल का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: दिए गए मान हैं:
पहले गोले का द्रव्यमान \( m_1 = 10 \) kg
दूसरे गोले का द्रव्यमान \( m_2 = 10 \) kg
दोनों गोलों के बीच की दूरी \( d = 50 \) सेमी \( = 0.50 \) मीटर (क्योंकि 1 मीटर = 100 सेमी)
गुरुत्वाकर्षण नियतांक \( G = 6.67 \times 10^{-11} Nm^2/kg^2 \)

गुरुत्वाकर्षण बल \( F \) का सूत्र न्यूटन के सार्वत्रिक नियम से:
\( F = G \frac{m_1m_2}{d^2} \)
मान रखने पर:
\( F = (6.67 \times 10^{-11}) \times \frac{10 \times 10}{(0.50)^2} \)
\( F = (6.67 \times 10^{-11}) \times \frac{100}{0.25} \)
\( F = (6.67 \times 10^{-11}) \times 400 \)
\( F = 2668 \times 10^{-11} \)
\( F = 2.668 \times 10^{-8} \) N
तो, दोनों गोलों के मध्य लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल लगभग \( 2.67 \times 10^{-8} \) न्यूटन है। यह बल बहुत छोटा होता है क्योंकि यहाँ द्रव्यमान अपेक्षाकृत कम हैं और दूरी भी बहुत अधिक नहीं है।
In simple words: हमने दो 10 किलोग्राम वज़न वाले गोलों के बीच का खिंचाव बल निकाला, जो एक दूसरे से 50 सेंटीमीटर दूर थे। गुरुत्वाकर्षण बल के सूत्र का उपयोग करके, हमें लगभग \( 2.67 \times 10^{-8} \) न्यूटन का बल मिला।

🎯 Exam Tip: हमेशा दूरियों को सेंटीमीटर से मीटर में बदलना याद रखें और गुरुत्वाकर्षण नियतांक \( G \) का सही मान और इकाई का उपयोग करें।

 

प्रश्न 2. पृथ्वी की सतह पर स्थित एक 40 kg की वस्तु पर गुरुत्वाकर्षण बल की गणना करो। यदि पृथ्वी की त्रिज्या (R) = 6400 km तथा द्रव्यमान \( 6 \times 10^{24} \) kg हो।
Answer: दिए गए मान हैं:
वस्तु का द्रव्यमान \( m = 40 \) kg
पृथ्वी का द्रव्यमान \( M = 6 \times 10^{24} \) kg
पृथ्वी की त्रिज्या \( R = 6400 \) km \( = 6.4 \times 10^6 \) m (क्योंकि 1 km = 1000 m)
गुरुत्वाकर्षण नियतांक \( G = 6.67 \times 10^{-11} Nm^2/kg^2 \)

पृथ्वी की सतह पर वस्तु पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल का सूत्र है:
\( F = G \frac{mM}{R^2} \)
मान रखने पर:
\( F = (6.67 \times 10^{-11}) \times \frac{40 \times (6 \times 10^{24})}{(6.4 \times 10^6)^2} \)
\( F = (6.67 \times 10^{-11}) \times \frac{240 \times 10^{24}}{40.96 \times 10^{12}} \)
\( F = (6.67 \times 10^{-11}) \times 5.859375 \times 10^{(24-12)} \)
\( F = (6.67 \times 10^{-11}) \times 5.859375 \times 10^{12} \)
\( F \approx 39.07 \times 10^{(-11+12)} \)
\( F \approx 39.07 \times 10^1 \)
\( F \approx 390.7 \) N
तो, पृथ्वी की सतह पर 40 kg की वस्तु पर लगभग 390.7 न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण बल लगेगा। यह बल वस्तु के भार के बराबर होता है।
In simple words: हमने पृथ्वी की सतह पर 40 किलो की एक वस्तु पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल निकाला। पृथ्वी के द्रव्यमान और त्रिज्या को गुरुत्वाकर्षण के सूत्र में रखने पर, हमें लगभग 390.7 न्यूटन का बल मिला, जो उस वस्तु का भार है।

🎯 Exam Tip: जब सतह पर बल की गणना करें, तो दूरी के रूप में पृथ्वी की त्रिज्या का उपयोग करें। इकाइयों को SI में बदलना याद रखें।

 

प्रश्न 3. किसी पत्थर को 20 m/s के प्रारम्भिक वेग से ऊपर की ओर फेंका जाता है। \( g = 10 \) m/s² लेते हुए निम्न की गणना करो
(i) पत्थर द्वारा उच्चतम ऊँचाई तक पहुँचने में लगा समय
(ii) पत्थर द्वारा तय की गई दूरी।

Answer: दिए गए मान हैं:
प्रारंभिक वेग \( u = 20 \) m/s
गुरुत्वीय त्वरण \( g = -10 \) m/s² (ऊपर की ओर फेंके जाने के कारण ऋणात्मक)
उच्चतम ऊँचाई पर अंतिम वेग \( v = 0 \) m/s

(i) पत्थर द्वारा उच्चतम ऊँचाई तक पहुँचने में लगा समय (\( t \))?
गति के पहले समीकरण का उपयोग करते हैं: \( v = u + gt \)
मान रखने पर:
\( 0 = 20 + (-10) \times t \)
\( 0 = 20 - 10t \)
\( 10t = 20 \)
\( t = \frac{20}{10} \)
\( t = 2 \) सेकंड
तो, पत्थर को उच्चतम ऊँचाई तक पहुँचने में 2 सेकंड लगेंगे।

(ii) पत्थर द्वारा तय की गई उच्चतम दूरी (\( h \))?
गति के तीसरे समीकरण का उपयोग करते हैं: \( v^2 = u^2 + 2gh \)
मान रखने पर:
\( 0^2 = 20^2 + 2 \times (-10) \times h \)
\( 0 = 400 - 20h \)
\( 20h = 400 \)
\( h = \frac{400}{20} \)
\( h = 20 \) मीटर
तो, पत्थर द्वारा तय की गई उच्चतम दूरी 20 मीटर है। इन गणनाओं से वस्तु की प्रक्षेप्य गति को समझा जा सकता है।
In simple words: एक पत्थर को 20 मीटर प्रति सेकंड की गति से ऊपर फेंका गया था। हमने गणना की कि उसे सबसे ऊपर जाने में 2 सेकंड लगेंगे और वह 20 मीटर की ऊँचाई तक जाएगा।

🎯 Exam Tip: जब वस्तु को ऊपर फेंका जाता है, तो \( g \) को ऋणात्मक लेना महत्वपूर्ण है, और उच्चतम बिंदु पर \( v = 0 \) होता है।

 

प्रश्न 4. यदि चन्द्रमा का द्रव्यमान \( 0.073 \times 10^{24} \) kg एवं त्रिज्या 1738 km से तो चन्द्रमा की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण ज्ञात करो।
Answer: दिए गए मान हैं:
चंद्रमा का द्रव्यमान \( M = 0.073 \times 10^{24} \) kg
चंद्रमा की त्रिज्या \( R = 1738 \) km \( = 1.738 \times 10^6 \) m
गुरुत्वाकर्षण नियतांक \( G = 6.67 \times 10^{-11} Nm^2/kg^2 \)

चंद्रमा की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण \( g \) का सूत्र है:
\( g = \frac{GM}{R^2} \)
मान रखने पर:
\( g = \frac{(6.67 \times 10^{-11}) \times (0.073 \times 10^{24})}{(1.738 \times 10^6)^2} \)
\( g = \frac{6.67 \times 0.073 \times 10^{(-11+24)}}{1.738 \times 1.738 \times 10^{(6+6)}} \)
\( g = \frac{0.48691 \times 10^{13}}{3.020544 \times 10^{12}} \)
\( g \approx 0.16119 \times 10^{(13-12)} \)
\( g \approx 0.16119 \times 10^1 \)
\( g \approx 1.6119 \) m/s²
तो, चंद्रमा की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण लगभग 1.61 m/s² है। यह पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण से काफी कम है, यही कारण है कि चंद्रमा पर वस्तुएँ हल्की महसूस होती हैं।
In simple words: हमने चंद्रमा की सतह पर गुरुत्वाकर्षण की ताकत (गुरुत्वीय त्वरण) का पता लगाया। चंद्रमा के वज़न और उसकी त्रिज्या को सूत्र में रखने पर, हमें लगभग 1.61 मीटर प्रति सेकंड वर्ग का मान मिला।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वीय त्वरण की गणना करते समय \( G \), \( M \) और \( R \) के सही मानों और इकाइयों का उपयोग करना सुनिश्चित करें।

 

प्रश्न 5. 125m ऊंची मीनार से एक पत्थर छोड़ा जाता है तो निम्न की गणना करो
(i) नीचे पहुँचने में लगा समय
(ii) पत्थर का अन्तिम वेग

Answer: दिए गए मान हैं:
ऊँचाई \( h = 125 \) m
प्रारंभिक वेग \( u = 0 \) m/s (क्योंकि पत्थर छोड़ा जाता है)
गुरुत्वीय त्वरण \( g = 10 \) m/s² (नीचे की ओर गति के लिए धनात्मक लेते हैं)

(i) नीचे पहुँचने में लगा समय (\( t \))?
गति के दूसरे समीकरण का उपयोग करते हैं: \( h = ut + \frac{1}{2}gt^2 \)
मान रखने पर:
\( 125 = (0 \times t) + \frac{1}{2} \times 10 \times t^2 \)
\( 125 = 0 + 5t^2 \)
\( 5t^2 = 125 \)
\( t^2 = \frac{125}{5} \)
\( t^2 = 25 \)
\( t = \sqrt{25} \)
\( t = 5 \) सेकंड
तो, पत्थर को जमीन पर पहुँचने में 5 सेकंड लगेंगे।

(ii) पत्थर का अंतिम वेग (\( v \))?
गति के पहले समीकरण का उपयोग करते हैं: \( v = u + gt \)
मान रखने पर:
\( v = 0 + (10 \times 5) \)
\( v = 50 \) m/s
तो, पत्थर का अंतिम वेग 50 m/s होगा। ये गणनाएँ मुक्त पतन के सिद्धांतों को स्पष्ट करती हैं।
In simple words: एक पत्थर को 125 मीटर ऊँची मीनार से नीचे गिराया गया था। हमने पाया कि उसे जमीन तक पहुँचने में 5 सेकंड लगेंगे और उस समय उसकी गति 50 मीटर प्रति सेकंड होगी।

🎯 Exam Tip: 'छोड़ा जाता है' का अर्थ है कि प्रारंभिक वेग \( u = 0 \) होता है। नीचे की ओर गति के लिए \( g \) को धनात्मक लिया जाता है।

 

प्रश्न 6. यदि पृथ्वी का व्यास उसके वर्तमान व्यास का आधा हो जाये तो दुव्यमान 1/8 रह जायेगा। इस आधे आकार की पृथ्वी पर g का मान क्या होगा ?
Answer: मान लीजिए पृथ्वी का प्रारंभिक व्यास \( D \) और प्रारंभिक त्रिज्या \( R \) है। नया व्यास \( D' = \frac{D}{2} \) है, इसलिए नई त्रिज्या \( R' = \frac{R}{2} \) होगी।
प्रारंभिक द्रव्यमान \( M \) है। नया द्रव्यमान \( M' = \frac{M}{8} \) है।

गुरुत्वीय त्वरण \( g \) का सूत्र है: \( g = \frac{GM}{R^2} \)
अब, नई स्थिति में गुरुत्वीय त्वरण \( g' \) होगा:
\( g' = \frac{GM'}{(R')^2} \)
दिए गए नए मानों को सूत्र में रखने पर:
\( g' = \frac{G (\frac{M}{8})}{(\frac{R}{2})^2} \)
\( g' = \frac{\frac{GM}{8}}{\frac{R^2}{4}} \)
\( g' = \frac{GM}{8} \times \frac{4}{R^2} \)
\( g' = \frac{4}{8} \times \frac{GM}{R^2} \)
\( g' = \frac{1}{2} \times g \)
तो, यदि पृथ्वी का व्यास आधा हो जाए और द्रव्यमान 1/8 रह जाए, तो गुरुत्वीय त्वरण \( g \) का मान वर्तमान मान का आधा हो जाएगा। यह दर्शाता है कि गुरुत्वाकर्षण बल कैसे भौतिक गुणों पर निर्भर करता है।
In simple words: अगर पृथ्वी का आकार आधा हो जाए और वज़न 1/8 गुना हो जाए, तो पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण की ताकत (g) अपने मौजूदा मान की आधी हो जाएगी।

🎯 Exam Tip: ऐसे सवालों में अनुपातिक संबंधों का उपयोग करें। त्रिज्या और द्रव्यमान में परिवर्तन के वर्ग संबंध को \( g = \frac{GM}{R^2} \) सूत्र से जोड़ें।

 

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उनके उत्तर

 

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 2. पृथ्वी पर रखी दो वस्तुओं के मध्य गुरुत्वाकर्षण बल F है। यदि उनमें से प्रत्येक का द्रव्यमान 1/4 कर दिया जाय तो गुरुत्वाकर्षण बल होगा
(अ) F
(ब) \( \frac {F}{16} \)
(स) \( \frac {F}{4} \)
(द) 4F
Answer: (ब) \( \frac {F}{16} \)
In simple words: गुरुत्वाकर्षण बल दो वस्तुओं के द्रव्यमान के गुणनफल के सीधे अनुपात में होता है। यदि प्रत्येक वस्तु का द्रव्यमान एक-चौथाई कर दिया जाए, तो कुल द्रव्यमान का गुणनफल 1/16 गुना हो जाएगा, इसलिए बल भी 1/16 गुना हो जाएगा। यह बताता है कि द्रव्यमान कम होने पर गुरुत्वाकर्षण बल बहुत कम हो जाता है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण बल के सूत्र \( F = G\frac{m_1 m_2}{d^2} \) को याद रखें और देखें कि बल द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती (directly proportional) और दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती (inversely proportional) होता है।

 

Question 3. सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक G का मात्रक होता है
(अ) न्यूटन/किग्रा
(ब) मीटर/सेकण्ड
(स) न्यूटन मीटर-किग्रा
(द) न्यूटन-मीटर/किग्रा
Answer: (द) न्यूटन-मीटर²/किग्रा²
In simple words: सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक G का मात्रक न्यूटन मीटर वर्ग प्रति किलोग्राम वर्ग (N m²/kg²) होता है। यह बल के उस सूत्र से आता है जो दो द्रव्यमानों के बीच की दूरी और उनके द्रव्यमान को जोड़ता है। यह मात्रक हर जगह समान रहता है।

🎯 Exam Tip: सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक G का मात्रक हमेशा न्यूटन-मीटर²/किग्रा² होता है, क्योंकि यह गुरुत्वाकर्षण बल के सूत्र से निकाला जाता है: \( F = G\frac{m_1 m_2}{r^2} \implies G = \frac{F r^2}{m_1 m_2} \)।

 

Question 4. किसी मकान की छत से पिण्ड गिराया जाता है। 50 मीटर गिरने के बाद पिण्ड की चाल होगी
(अ) 9.8 मीटर/सेकण्ड
(ब) 31.30 मीटर/सेकण्ड
(स) 3.13 मीटर/सेकण्ड
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
Answer: (ब) 31.30 मीटर/सेकण्ड
In simple words: जब कोई वस्तु मुक्त रूप से गिरती है, तो उसकी गतिज ऊर्जा बढ़ती है और वह तेजी से गिरने लगती है। 50 मीटर गिरने के बाद उसकी चाल लगभग 31.30 मीटर प्रति सेकंड हो जाएगी, क्योंकि पृथ्वी उसे लगातार खींच रही है।

🎯 Exam Tip: मुक्त पतन (free fall) के प्रश्नों में गति के समीकरण \( v^2 = u^2 + 2gh \) का उपयोग करें, जहाँ प्रारम्भिक वेग (u) शून्य होता है, g गुरुत्वीय त्वरण (9.8 m/s²) है और h तय की गई दूरी है।

 

Question 5. गुरुत्वीय त्वरण g का मान|
(अ) सभी ग्रहों पर समान होता है।
(ब) पृथ्वी के सभी स्थानों पर समान होता है।
Answer: (ब) पृथ्वी के सभी स्थानों पर समान होता है।
In simple words: गुरुत्वीय त्वरण 'g' का मान पृथ्वी पर हर जगह एक जैसा नहीं होता है। यह ध्रुवों पर थोड़ा ज्यादा होता है और भूमध्य रेखा पर थोड़ा कम। यह ऊँचाई के साथ भी बदलता है।

🎯 Exam Tip: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि गुरुत्वीय त्वरण 'g' का मान पृथ्वी पर ध्रुवों पर अधिकतम और भूमध्य रेखा पर न्यूनतम होता है, इसलिए यह सभी स्थानों पर समान नहीं होता। प्रश्न को ध्यान से पढ़ें क्योंकि कभी-कभी इसमें गलत कथन को चुनने के लिए कहा जा सकता है।

 

Question 6. ऊर्ध्वाधर ऊपर फेंके गये पिण्ड का महत्तम ऊँचाई पर वेग
(अ) शून्य होता है
(ब) अधिकतम होता है।
(स) न्यूनतम होता हैं
(द) 9.8 मी/सेकण्ड होता है।
Answer: (अ) शून्य होता है
In simple words: जब किसी वस्तु को ऊपर फेंका जाता है, तो वह एक बिंदु पर क्षण भर के लिए रुक जाती है, जहाँ से वह नीचे गिरना शुरू करती है। इस सबसे ऊंची जगह पर उसका वेग बिल्कुल शून्य हो जाता है।

🎯 Exam Tip: किसी वस्तु के महत्तम ऊँचाई पर पहुँचने पर उसका अंतिम वेग हमेशा शून्य होता है, क्योंकि वह अपनी दिशा बदलने से पहले क्षण भर के लिए रुकती है।

 

Question 7. दो पत्थर 2:3 के अनुपात के वेगों से फेंके जाते हैं। तो उनके द्वारा तय महत्तम ऊंचाइयों का अनुपात होगा
(अ) 2; 3
(ब) 3:2
(स) 9:1
(द) 4:9
Answer: (द) 4:9
In simple words: किसी वस्तु द्वारा प्राप्त की गई अधिकतम ऊँचाई उसके प्रारंभिक वेग के वर्ग के अनुपात में होती है। यदि वेग 2:3 के अनुपात में हैं, तो ऊँचाई का अनुपात \( 2^2:3^2 \) यानी 4:9 होगा। यह दर्शाता है कि अधिक प्रारंभिक वेग से वस्तु बहुत ऊँची जाती है।

🎯 Exam Tip: महत्तम ऊँचाई (h) और प्रारंभिक वेग (u) के बीच संबंध \( h \propto u^2 \) को याद रखें। जब वेगों का अनुपात दिया हो, तो ऊँचाई का अनुपात ज्ञात करने के लिए वेगों के अनुपात का वर्ग करें।

 

Question 8. पृथ्वी पर किसी वस्तु का भार 120 किग्रा है तो चन्द्रमा पर उसका भार होगा
(अ) 120 किग्रा
(ब) 60 किग्रा
(स) 20 किग्रा
(द) 10 किग्रा
Answer: (स) 20 किग्रा
In simple words: चन्द्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल का लगभग \( \frac{1}{6} \) होता है। इसलिए, यदि पृथ्वी पर किसी वस्तु का भार 120 किग्रा है, तो चन्द्रमा पर उसका भार \( \frac{1}{6} \) गुना होकर 20 किग्रा हो जाएगा।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि किसी वस्तु का भार एक स्थान से दूसरे स्थान पर बदलता है क्योंकि यह गुरुत्वाकर्षण पर निर्भर करता है, जबकि द्रव्यमान हमेशा समान रहता है।

 

Question 9. चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण का मान होता है
(अ) 9.8 m/s²
(ब) 1.57 m/s²
(स) 6.67 m/s²
(द) 0.98 m/s²
Answer: (ब) 1.57 m/s²
In simple words: चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण का मान पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का लगभग \( \frac{1}{6} \) होता है। पृथ्वी पर यह लगभग 9.8 m/s² है, इसलिए चन्द्रमा पर यह लगभग 1.62 m/s² के करीब होता है, जो 1.57 m/s² के बहुत पास है।

🎯 Exam Tip: चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण का मान लगभग 1.62 m/s² होता है, जो कि पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण (9.8 m/s²) का लगभग \( \frac{1}{6} \) गुना है। दिए गए विकल्पों में सबसे सटीक मान 1.57 m/s² है।

 

Question 10. निम्नलिखित में से कौन सा बल ज्वार-भाटे का प्रमुख कारण है?
(अ) चन्द्रमा का पृथ्वी पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल
(ब) सूर्य का पृथ्वी पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल
(स) शुक्र का पृथ्वी पर लगे वाला गुरुत्वाकर्षण बल
(द) पृथ्वी के स्वयं के वायुमण्डल का प्रभाव।
Answer: (अ) चन्द्रमा का पृथ्वी पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल
In simple words: ज्वार-भाटा मुख्य रूप से चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण होता है। चन्द्रमा पृथ्वी के जितना करीब है, उतना ही ज्यादा उसका गुरुत्वाकर्षण बल समुद्र के पानी को अपनी ओर खींचता है, जिससे ज्वार और भाटा आते हैं।

🎯 Exam Tip: ज्वार-भाटा के लिए चन्द्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल प्राथमिक कारण है, क्योंकि चन्द्रमा पृथ्वी के बहुत करीब है, जबकि सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल भी योगदान करता है लेकिन इसका प्रभाव कम होता है।

सुमेलन सम्बन्धित प्रश्न

निम्न को सुमेलित कीजिए

कॉलम-Iकॉलम-II
1. गुरुत्वाकर्षण का नियमa. भास्कराचार्य
2. प्रयोगशाला में G के मान की गणनाb. कॉपरनिकस
3. खगोल पिण्डों की गति का मॉडलc. कैवेन्डिश
4. भूकेन्द्रीय मॉडलd. आर्यभट
5. सिद्धांत शिरोमणिe. न्यूटन

Answer:
1 - (e)
2 - (c)
3 - (b)
4 - (d)
5 - (a)
In simple words: इस मिलान में वैज्ञानिक खोजों और उनके योगदानकर्ताओं को जोड़ा गया है। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण का नियम दिया, कैवेन्डिश ने G का मान मापा, कॉपरनिकस ने ग्रहों की गति का मॉडल दिया, आर्यभट ने भूकेन्द्रीय मॉडल दिया और भास्कराचार्य ने सिद्धांत शिरोमणि ग्रंथ लिखा।

🎯 Exam Tip: वैज्ञानिकों के नाम, उनके आविष्कार और सिद्धांतों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर भौतिकी और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. क्या गुरुत्वाकर्षण नियतांक G का मान प्रत्येक स्थान के लिए समान रहता है ?
Answer: हाँ, यह एक सार्वत्रिक नियतांक है। अतः G का मान प्रत्येक स्थान के लिए समान रहता है। गुरुत्वाकर्षण नियतांक G पूरे ब्रह्मांड में एक ही मूल्य रखता है, चाहे आप कहीं भी हों।
In simple words: हाँ, गुरुत्वाकर्षण नियतांक G हमेशा एक ही रहता है, यह कभी नहीं बदलता।

🎯 Exam Tip: G (सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक) और g (गुरुत्वीय त्वरण) के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है। G एक स्थिरांक है, जबकि g स्थान के साथ बदलता है।

 

Question 2. 60 किग्रा द्रव्यमान वाले मनुष्य का चन्द्रमा पर द्रव्यमान क्या होगा ?
Answer: चन्द्रमा पर 60 किग्रा द्रव्यमान वाले मनुष्य का द्रव्यमान 60 किग्रा ही रहेगा। द्रव्यमान किसी वस्तु में पदार्थ की मात्रा होता है, और यह ब्रह्मांड में कहीं भी नहीं बदलता है।
In simple words: किसी भी वस्तु का द्रव्यमान हर जगह एक जैसा रहता है। चन्द्रमा पर भी उसका द्रव्यमान 60 किग्रा ही रहेगा।

🎯 Exam Tip: द्रव्यमान और भार के बीच के अंतर को याद रखें। द्रव्यमान एक वस्तु का आंतरिक गुण है जो बदलता नहीं है, जबकि भार गुरुत्वाकर्षण पर निर्भर करता है और स्थान के साथ बदलता है।

 

Question 4. पृथ्वी पर किसी पिण्ड का भार ज्ञात करते समय हम सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल को क्यों नहीं लेते ?
Answer: क्योंकि किसी पिण्ड का भार उस बल के तुल्य होता है जो उस पर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण आरोपित होता है। सूर्य का द्रव्यमान बहुत अधिक है, लेकिन उसकी दूरी भी बहुत ज्यादा है, इसलिए उसका प्रभाव पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण की तुलना में बहुत कम होता है।
In simple words: हम सूर्य के बल को नहीं लेते क्योंकि भार वह होता है जो पृथ्वी हमें अपनी ओर खींचती है। सूर्य बहुत दूर है, इसलिए उसका खिंचाव कम महसूस होता है।

🎯 Exam Tip: किसी वस्तु का 'भार' हमेशा उस ग्रह या पिंड के गुरुत्वाकर्षण बल को संदर्भित करता है जिस पर वह वस्तु स्थित है। आसपास के दूर के बड़े पिंडों का प्रभाव नगण्य होता है।

 

Question 5. ग्रह अपने कक्ष में क्यों घूमते हैं ?
Answer: ग्रह अपने कक्ष में सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के कारण घूमते हैं। सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल ग्रहों को एक निश्चित पथ में घूमने के लिए आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल प्रदान करता है।
In simple words: ग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते हैं क्योंकि सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल उन्हें अपने रास्ते पर बनाए रखता है।

🎯 Exam Tip: ग्रहों की वृत्ताकार गति में सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल अभिकेन्द्रीय बल (centripetal force) के रूप में कार्य करता है, जो वस्तु को वृत्त में घुमाने के लिए आवश्यक होता है।

 

Question 6. पृथ्वी की सतह पर किसी वस्तु का भार 10 किग्रा है। इसका भार कितना होगा यदि इसे पृथ्वी के केन्द्र पर ले जायें ?
Answer: शून्य, क्योंकि पृथ्वी के केन्द्र पर गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान शून्य होता है। पृथ्वी के केंद्र में, सभी दिशाओं से गुरुत्वाकर्षण खिंचाव एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं, जिससे शुद्ध गुरुत्वाकर्षण बल शून्य हो जाता है।
In simple words: पृथ्वी के बीच में वस्तु का भार शून्य हो जाएगा, क्योंकि वहाँ गुरुत्वाकर्षण बल काम नहीं करता।

🎯 Exam Tip: पृथ्वी के केंद्र में गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान शून्य होता है, क्योंकि पिंड के सभी हिस्सों से लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल एक-दूसरे को संतुलित कर देता है।

 

Question 7. वस्तुओं का पृथ्वी की ओर मुक्त रूप से गिरना किस बल के कारण होता है?
Answer: पृथ्वी के गुरुत्व बल के कारण। यह बल पृथ्वी के केंद्र की ओर वस्तुओं को खींचता है, जिससे वे नीचे गिरती हैं।
In simple words: पृथ्वी की ओर चीजें गुरुत्वाकर्षण बल के कारण गिरती हैं।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण बल वह अदृश्य बल है जो सभी वस्तुओं को एक-दूसरे की ओर खींचता है, और पृथ्वी पर यह वस्तुओं को जमीन की ओर खींचता है।

 

Question 8. यदि दो भिन्न-भिन्न द्रव्यमान की वस्तुओं को एक ऊँचाई से एक साथ मुक्त रूप से गिराया जाए तो वे एक ही साथ पृथ्वी पर पहुंचेंगी या अलग-अलग समय पर?
Answer: एक ही साथ। यदि वायु प्रतिरोध न हो, तो सभी वस्तुएँ, उनके द्रव्यमान के बावजूद, एक ही गुरुत्वाकर्षण त्वरण के साथ गिरती हैं और एक ही समय पर पृथ्वी पर पहुँचती हैं।
In simple words: अगर हवा की रुकावट न हो, तो भारी और हल्की चीजें एक साथ जमीन पर गिरेंगी।

🎯 Exam Tip: मुक्त पतन (free fall) में, सभी वस्तुएं समान गुरुत्वीय त्वरण (g) के साथ गिरती हैं, यदि वायु प्रतिरोध को नगण्य माना जाए। गैलीलियो ने इस सिद्धांत का प्रदर्शन किया था।

 

Question 9. किन्हीं दो वस्तुओं के बीच अन्य कोई द्रव्य रखा जाए तो उनके बीच लगने वाला गुरुत्व बल समान रहता है। या बदल जाता है।
Answer: गुरुत्व बल का मान समान रहता है। गुरुत्वाकर्षण बल केवल वस्तुओं के द्रव्यमान और उनके बीच की दूरी पर निर्भर करता है, किसी तीसरे पदार्थ की उपस्थिति से अप्रभावित रहता है।
In simple words: गुरुत्वाकर्षण बल उतना ही रहेगा, भले ही कोई और चीज बीच में रख दी जाए।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण बल एक 'क्षेत्र बल' है, जिसका अर्थ है कि यह सीधे संपर्क या बीच में किसी माध्यम के बिना भी काम करता है।

 

Question 11. पृथ्वी तल से ऊपर जाने पर g के मान पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
Answer: पृथ्वी तल से ऊपर जाने पर g का मान घटता है। जैसे-जैसे हम पृथ्वी की सतह से दूर जाते हैं, गुरुत्वाकर्षण खिंचाव कमजोर होता जाता है।
In simple words: जब हम पृथ्वी से ऊपर जाते हैं, तो गुरुत्वाकर्षण बल 'g' कम हो जाता है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वीय त्वरण (g) की गणना के लिए सूत्र \( g = \frac{GM}{R^2} \) को याद रखें। जैसे-जैसे पृथ्वी के केंद्र से दूरी (R) बढ़ती है, g का मान घटता है।

 

Question 12. क्या गुरुत्वीय त्वरण एक सदिश राशि है अथवा अदिश ? इसका S.I. मात्रक लिखिए।
Answer: यह एक सदिश राशि है जिसकी दिशा सदैव पृथ्वी के केन्द्र की ओर होती है। इसका S.I. मात्रक मीटर/सेकण्ड² हैं। एक सदिश राशि में परिमाण (मात्रा) और दिशा दोनों होते हैं।
In simple words: गुरुत्वीय त्वरण एक सदिश राशि है जिसका अर्थ है कि इसमें दिशा (पृथ्वी के केंद्र की ओर) और मात्रा दोनों होते हैं। इसका SI मात्रक मीटर प्रति सेकंड वर्ग है।

🎯 Exam Tip: अदिश और सदिश राशियों के बीच के अंतर को याद रखना महत्वपूर्ण है। सदिश राशियों को उनकी दिशा के साथ परिभाषित किया जाता है।

 

Question 13. किसी वस्तु पर लगा गुरुत्व बल किस दिशा में कार्य करता है?
Answer: वस्तु से पृथ्वी के केन्द्र को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश कार्य करता है। इसका मतलब है कि गुरुत्व बल हमेशा सीधे पृथ्वी के केंद्र की ओर खींचता है।
In simple words: गुरुत्वाकर्षण बल हमेशा पृथ्वी के केंद्र की ओर खींचता है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण बल हमेशा दो पिंडों के द्रव्यमान केंद्रों को जोड़ने वाली सीधी रेखा के साथ कार्य करता है।

 

Question 14. एक ही ऊँचाई से एक पत्थर का टुकड़ा तथा एक कागज का टुकड़ा गिराने पर वे एक एक साथ पृथ्वी पर क्यों नहीं आते ?
Answer: वायु के घर्षण के कारण। पत्थर की तुलना में कागज पर वायु का घर्षण अधिक होता है, जिससे कागज धीरे गिरता है।
In simple words: पत्थर और कागज एक साथ नहीं गिरते क्योंकि हवा कागज को ज्यादा रोकती है।

🎯 Exam Tip: वायु प्रतिरोध (air resistance) किसी वस्तु के आकार, द्रव्यमान और सतह के क्षेत्र पर निर्भर करता है, जो उसके गिरने की दर को प्रभावित करता है। निर्वात में, वे एक ही समय पर गिरेंगे।

 

Question 15. उस वैज्ञानिक का नाम बताइए जिसने सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक का मान ज्ञात किया था?
Answer: हैनरी कैवेन्डिश। उन्होंने 1798 में एक मरोड़ तुला (torsion balance) का उपयोग करके पृथ्वी के घनत्व और गुरुत्वाकर्षण नियतांक G का मान निर्धारित किया।
In simple words: हैनरी कैवेन्डिश ने गुरुत्वाकर्षण नियतांक G का मान पता लगाया था।

🎯 Exam Tip: हैनरी कैवेन्डिश के प्रयोग ने गुरुत्वाकर्षण के नियम को मात्रात्मक रूप से समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

Question 16. पृथ्वी पर सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल लगता है, फिर पृथ्वी, सूर्य में क्यों नहीं गिर जाती ?
Answer: पृथ्वी एक स्थायी कक्षा में है तथा सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल इसके वेग को दिशा के लम्बवत् हैं। सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी को अपनी कक्षा में बनाए रखता है, और पृथ्वी की गति सूर्य में गिरने से बचती है।
In simple words: पृथ्वी सूर्य में इसलिए नहीं गिरती क्योंकि यह सूर्य के चारों ओर एक निश्चित रास्ते पर घूम रही है, और सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल उसे उस रास्ते पर बनाए रखता है।

🎯 Exam Tip: ग्रहों की कक्षाओं को समझने के लिए अभिकेन्द्रीय बल (centripetal force) और न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के नियम का ज्ञान महत्वपूर्ण है।

 

Question 17. भारहीनता की अवस्था में प्रतिक्रिया बल कितना होता है ?
Answer: शून्य। भारहीनता तब होती है जब किसी वस्तु पर कोई प्रतिक्रिया बल नहीं लगता, जैसे कि मुक्त पतन में।
In simple words: भारहीनता में कोई प्रतिक्रिया बल नहीं होता, यानी यह शून्य होता है।

🎯 Exam Tip: भारहीनता का अनुभव तब होता है जब वस्तु को कोई सतह सहारा नहीं देती, जैसे कि अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष यान में महसूस होता है जब वे पृथ्वी के चारों ओर स्वतंत्र रूप से गिर रहे होते हैं।

चन्द्रमा का द्रव्यमान, पृथ्वी के द्रव्यमान की तुलना में काफी कम है, इस कारण चन्द्रमा की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण का मान, पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण के मान का 1/6 होता है। अब चूंकि किसी स्थान पर किसी वस्तु का भार, उस स्थान पर गुरूत्वीय त्वरण के समानुपाती होता है। अत: चन्द्रमा पर किसी वस्तु का भार पृथ्वी पर उसके भार का 16 गुना होता है।

 

Question 2. यदि दो वस्तुओं के बीच की दूरी को आधा कर दिया जाए तो उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल किस प्रकार बदलेगा?
Answer: गुरुत्वाकर्षण बल का सूत्र है \( F = G\frac{m_1 m_2}{d^2} \)। इस सूत्र से, गुरुत्वाकर्षण बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है, यानी \( F \propto \frac{1}{(दूरी)^2} \)।
अतः, यदि दूरी को आधा (1/2) कर दिया जाए, तो बल \( \frac{1}{(1/2)^2} = \frac{1}{1/4} = 4 \) गुना हो जाएगा। इसका अर्थ है कि वस्तुओं को पास लाने पर गुरुत्वाकर्षण बल तेजी से बढ़ता है।
In simple words: गुरुत्वाकर्षण बल दूरी के वर्ग पर निर्भर करता है। अगर आप दूरी को आधा कर दें, तो बल चार गुना बढ़ जाएगा।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण के व्युत्क्रम वर्ग नियम (inverse square law) को याद रखें: बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। दूरी दोगुनी करने पर बल एक-चौथाई हो जाता है, और दूरी आधी करने पर बल चार गुना हो जाता है।

 

Question 3. यदि चन्द्रमा, पृथ्वी को आकर्षित करता है तो पृथ्वी, चन्द्रमा की ओर गति क्यों नहीं करती है ?
Answer: चन्द्रमा और पृथ्वी दोनों एक-दूसरे पर समान परिमाण का आकर्षण बल लगाते हैं, परन्तु चन्द्रमा का द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान की तुलना में बहुत कम होने के कारण, समान बल होने पर भी चन्द्रमा को पृथ्वी की ओर त्वरण, पृथ्वी के चन्द्रमा की ओर त्वरण से बहुत अधिक है। इसी कारण से चन्द्रमा, पृथ्वी के चारों ओर गति करता है, जबकि पृथ्वी, चन्द्रमा की ओर गति करती प्रतीत नहीं होती। न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार, हर क्रिया की एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।
In simple words: चन्द्रमा पृथ्वी को खींचता है और पृथ्वी चन्द्रमा को। लेकिन पृथ्वी बहुत भारी है, इसलिए चन्द्रमा की ओर उसका हिलना इतना कम होता है कि हमें दिखाई नहीं देता।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के तीसरे नियम को याद रखें: बल हमेशा युग्मों में लगते हैं। भारी वस्तु पर समान बल का प्रभाव (त्वरण) हल्की वस्तु की तुलना में कम होता है।

 

Question 4. गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के क्या महत्व
Answer: गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम का महत्व-यह नियम अनेक ऐसी परिघटनाओं की व्याख्या करता है, जो प्राचीनकाल में असम्बद्ध मानी जाती थीं; जैसे

  • इस नियम द्वारा सूर्य के चारों ओर ग्रहों की गति की व्याख्या की जाती है।
  • इस नियम द्वारा पृथ्वी के चारों ओर चन्द्रमा की गति को व्याख्या की जाती है।
  • इस नियम द्वारा वस्तुओं के पृथ्वी की ओर गिरने की व्याख्या की जाती है।
  • इस नियम द्वारा समुद्र में आने वाले ज्वार-भाटा की व्याख्या की जाती है।
यह नियम अंतरिक्ष में उपग्रह स्थापित करने, चन्द्रमा और अन्य ग्रहों तक खोजी यान भेजने तथा अंतरिक्ष स्टेशन बनाने में भी मदद करता है।
In simple words: गुरुत्वाकर्षण का नियम बताता है कि ग्रह सूर्य के चारों ओर क्यों घूमते हैं, चन्द्रमा पृथ्वी के चारों ओर क्यों घूमता है, चीजें नीचे क्यों गिरती हैं और समुद्र में ज्वार-भाटा क्यों आते हैं। इसने अंतरिक्ष यात्रा को भी संभव बनाया है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण का नियम एक मौलिक भौतिकी सिद्धांत है जो खगोलीय पिंडों की गति और पृथ्वी पर वस्तुओं के व्यवहार दोनों को नियंत्रित करता है।

 

Question 6. एक व्यक्ति A अपने मित्र के निर्देश पर ध्रुवों पर कुछ ग्राम सोना खरीदता है। वह इस सोने को विषुवत् वृत्त पर अपने मित्र को देता है। क्या उसका मित्र इस खरीदे हुए सोने के भार से सन्तुष्ट होगा ? यदि नहीं, तो क्यों ?
Answer: मित्र सोने के भार से सन्तुष्ट नहीं होगा। इसका कारण यह है कि विषुवत् वृत्त पर तोलने पर सोने का भार, ध्रुवों पर उसके भार की तुलना में कम होगा (g के मान में कमी के कारण)। पृथ्वी के आकार के कारण, भूमध्य रेखा पर गुरुत्वीय त्वरण (g) ध्रुवों की तुलना में थोड़ा कम होता है।
In simple words: मित्र खुश नहीं होगा क्योंकि भूमध्य रेखा पर सोने का वजन ध्रुवों की तुलना में कम होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि भूमध्य रेखा पर गुरुत्वाकर्षण बल थोड़ा कमजोर होता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि 'भार' गुरुत्वाकर्षण त्वरण 'g' पर निर्भर करता है, जबकि 'द्रव्यमान' नहीं। पृथ्वी के घूर्णन के कारण 'g' का मान भूमध्य रेखा पर थोड़ा कम होता है।

 

Question 7. एक कागज की शीट, उसी प्रकार की शीट को मोड़कर बनाई गई गेंद से धीमी क्यों गिरती है?
Answer: ऐसा वायु के प्रतिरोध के कारण होता है। वायु कागज की शीट पर, गेंद की अपेक्षा अधिक प्रतिरोध लगाती है। अतः कागज़ की शीट, गेंद की तुलना में धीमी गिरती है। हवा का प्रतिरोध वस्तु के आकार और सतह क्षेत्र पर निर्भर करता है।
In simple words: कागज की शीट धीरे गिरती है क्योंकि हवा उसे ज्यादा रोकती है, जबकि कागज की गेंद कम रुकती है।

🎯 Exam Tip: वायु प्रतिरोध किसी वस्तु के गिरने की गति को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है। किसी निर्वात में (जहां कोई हवा नहीं होती), कागज की शीट और कागज की गेंद दोनों एक ही गति से गिरेंगे।

 

Question 8. यदि पृथ्वी अपने अक्ष के परितः घूमना बन्द कर दे तो g के मान पर क्या प्रभाव पड़ेगा ? क्या यह प्रभाव सभी स्थानों पर एक-जैसा होगा ?
Answer: ध्रुवों को छोड़कर सभी स्थानों पर g का मान बढ़ जायेगा। g के मान में वृद्धि विभिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न होगी; विषुवत रेखा पर सबसे अधिक होगी। पृथ्वी के घूमने से उत्पन्न अपकेन्द्रीय बल का प्रभाव समाप्त हो जाएगा।
In simple words: अगर पृथ्वी घूमना बंद कर दे, तो ध्रुवों को छोड़कर बाकी सभी जगहों पर गुरुत्वाकर्षण बल 'g' बढ़ जाएगा, खासकर भूमध्य रेखा पर।

🎯 Exam Tip: पृथ्वी का घूर्णन एक अपकेन्द्रीय बल उत्पन्न करता है जो गुरुत्वाकर्षण बल का थोड़ा विरोध करता है, जिससे भूमध्य रेखा पर g का मान कम हो जाता है। घूर्णन रुकने पर यह बल समाप्त हो जाएगा।

 

Question 9. चन्द्रयात्री चन्द्रमा पर उतरने से पहले अपनी पीठ पर भारी वजन बाँध लेते हैं। कारण बताइए।
Answer: चन्द्रमा पर 'g' का मान पृथ्वी की तुलना में बहुत कम होता है। अत: चन्द्रतल पर चन्द्रयात्री को अधिक स्थिरता और पकड़ (traction) प्रदान करने के लिए अपनी पीठ पर भारी वजन बाँध लेते हैं। यह बढ़ा हुआ वजन उन्हें आसानी से चलने में मदद करता है।
In simple words: चन्द्रमा पर गुरुत्वाकर्षण बहुत कम होता है। इसलिए अंतरिक्ष यात्री अपनी पीठ पर वजन बांधते हैं ताकि वे ठीक से चल सकें और उड़ न जाएं।

🎯 Exam Tip: कम गुरुत्वाकर्षण वाले वातावरण में, किसी वस्तु का भार कम होता है। इस समस्या को दूर करने के लिए, स्थिरता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त द्रव्यमान जोड़ा जा सकता है।

 

Question 10. पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले कृत्रिम उपग्रह में बैठे यात्री को 'भारहीनता' का अनुभव होता है। कारण स्पष्ट कीजिए।
Answer: कोई भी मनुष्य अपना भार तब अनुभव करता है जबकि वह तल जिस पर मनुष्य खड़ा है उस पर प्रतिक्रिया बल लगाये। चूँकि अन्तरिक्ष यात्री और पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले कृत्रिम उपग्रह का त्वरण बराबर है। अतः यात्री का उपग्रह के सापेक्ष त्वरण शून्य है और उसे भारहीनता का अनुभव होता है। वे लगातार पृथ्वी के चारों ओर 'गिर' रहे होते हैं।
In simple words: अंतरिक्ष में यात्री भारहीनता महसूस करते हैं क्योंकि वे और उनका अंतरिक्ष यान दोनों पृथ्वी के चारों ओर एक साथ 'गिर' रहे होते हैं, और उन्हें सहारा देने वाला कोई बल महसूस नहीं होता।

🎯 Exam Tip: भारहीनता का अनुभव वास्तव में मुक्त पतन (freefall) की स्थिति है, न कि गुरुत्वाकर्षण की अनुपस्थिति। गुरुत्वाकर्षण बल अंतरिक्ष यान पर अभी भी कार्य कर रहा होता है।

 

Question 11. गुरुत्वीय बल के व्यावहारिक उपयोग बताइए।
Answer: गुरुत्वीय बल के कई व्यावहारिक उपयोग हैं। यह हमें पृथ्वी पर स्थिर रखता है, नदियों को बहने और बारिश को गिरने में मदद करता है। इसके बिना ग्रह और उपग्रह अपनी कक्षाओं में नहीं रह पाते। गुरुत्वाकर्षण हमें जमीन पर टिकाए रखता है और पृथ्वी पर अधिकांश प्राकृतिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है।
In simple words: गुरुत्वाकर्षण हमें जमीन पर टिकाता है, बारिश को नीचे गिराता है, नदियों को बहने देता है और ग्रहों को अपनी जगह पर रखता है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण बल एक मौलिक बल है जो हमारे दैनिक जीवन और ब्रह्मांड के कामकाज दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

निबन्धात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

 

Question 1. नीचे की ओर गिरती हुई और ऊपर की ओर फेंकी गयी वस्तुओं के लिए v, u, t, g और h में सम्बन्ध लिखिए।
Answer:
(1) यदि कोई वस्तु प्रारम्भिक वेग u से नीचे गिर रही है, तब t सेकण्ड पश्चात् अंतिम वेग v होगा:
\( v = u + gt \).........(1)
t सेकण्ड पश्चात् तय की गयी दूरी h होगी:
\( h = ut + \frac{1}{2}gt^{2} \).................(2)
v, u व h में सम्बन्ध होगा:
\( v^{2} = u^{2}+2gh \).................(3)

(2) यदि कोई वस्तु विराम अवस्था से नीचे गिर रही है तब प्रारम्भिक वेग \( u=0 \) होगा:
t सेकण्ड पश्चात् अंतिम वेग v होगा:
\( v = gt \).........(1)
t सेकण्ड पश्चात् तय की गयी दूरी h होगी:
\( h = \frac{1}{2}gt^{2} \).........(2)
v, u व h में सम्बन्ध होगा:
\( v^{2}=2gh \).........(3)

(3) जब कोई वस्तु प्रारम्भिक वेग u से ऊपर जा रही है, तब गुरुत्वीय त्वरण (g) ऋणात्मक होगा क्योंकि वस्तु के वेग की दिशा ऊपर की ओर है और गुरुत्वीय त्वरण की दिशा नीचे की ओर। इस स्थिति में g के स्थान पर –g रखते हैं:
t सेकण्ड पश्चात् अंतिम वेग v होगा:
\( v = u-gt \).........(1)
t सेकण्ड पश्चात् तय की गयी दूरी h होगी:
\( h = ut - \frac{1}{2}gt^{2} \).........(2)
v, u व h में सम्बन्ध होगा:
\( v^{2}=u^{2}-2gh \).........(3)
ये समीकरण गुरुत्वीय बल के अधीन गति का वर्णन करते हैं, चाहे वस्तु ऊपर जा रही हो या नीचे गिर रही हो।
In simple words: वस्तु जब नीचे गिरती है तो वेग बढ़ता है, इसलिए \( g \) को जोड़ते हैं। जब ऊपर फेंकते हैं तो वेग घटता है, इसलिए \( g \) को घटाते हैं। अगर वस्तु स्थिर से गिरना शुरू करे तो \( u \) शून्य होता है। इन समीकरणों से हम वेग, दूरी और समय निकाल सकते हैं।

🎯 Exam Tip: गति के इन तीनों समीकरणों को ध्यान से समझें और याद रखें, क्योंकि ये गुरुत्वाकर्षण के अधीन गति वाले प्रश्नों को हल करने की कुंजी हैं। ध्यान दें कि g का मान ऊपर की ओर गति के लिए ऋणात्मक लिया जाता है।

 

Question 2. क्या न्यूटन का गति का तीसरा नियम और गुरुत्वाकर्षण का नियम एक-दूसरे के विरोधी हैं। एक पत्थर और पृथ्वी की स्थिति के अनुसार इसका स्पष्टीकरण दीजिए।
Answer: न्यूटन का गति का तीसरा नियम और गुरुत्वाकर्षण का नियम एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि ये एक-दूसरे के पूरक हैं।
न्यूटन के गति के तीसरे नियम के अनुसार, “यदि एक वस्तु दूसरी वस्तु पर बल लगाती है तो दूसरी वस्तु भी पहली वस्तु पर बराबर एवं विपरीत दिशा में बल लगाती है। इसे क्रिया-प्रतिक्रिया नियम भी कहते हैं।”
न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के नियम के अनुसार, “ब्रह्माण्ड का प्रत्येक द्रव्यमान (पिण्ड), दूसरे द्रव्यमान (पिण्ड) को अपनी और आकर्षित करता है।"
एक पत्थर और पृथ्वी की स्थिति के अनुसार: जब एक पत्थर पृथ्वी की ओर स्वतंत्र रूप से गिरता है, तो पृथ्वी पत्थर को अपने केंद्र की ओर खींचती है। न्यूटन के गति के तीसरे नियम के अनुसार, पत्थर भी पृथ्वी को अपनी ओर खींचता है। यह एक क्रिया-प्रतिक्रिया युग्म है। पत्थर पर लगा गुरुत्व बल \( F = m \times a \) के कारण उसमें 9.8 मीटर/सेकण्ड² का त्वरण उत्पन्न होता है। लेकिन, पृथ्वी का द्रव्यमान बहुत अधिक (\( 6 \times 10^{24} \) किग्रा) होने के कारण, पत्थर द्वारा पृथ्वी पर लगाया गया समान बल पृथ्वी में नगण्य त्वरण उत्पन्न करता है, जिससे पृथ्वी का हिलना महसूस नहीं होता। इस प्रकार, दोनों नियम एक साथ काम करते हैं।
In simple words: न्यूटन के दोनों नियम एक-दूसरे के खिलाफ नहीं हैं। गुरुत्वाकर्षण नियम बताता है कि चीजें एक-दूसरे को खींचती हैं, और तीसरे नियम से पता चलता है कि यह खिंचाव दोनों तरफ से बराबर होता है। जैसे, पत्थर पृथ्वी को खींचता है और पृथ्वी पत्थर को, लेकिन पृथ्वी बहुत भारी होने के कारण वह हिलती नहीं दिखती।

🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम बल की प्रकृति का वर्णन करता है, जबकि गति का तीसरा नियम बलों की परस्पर क्रिया को बताता है। दोनों नियम ब्रह्मांड में बलों के व्यवहार की पूरी तस्वीर प्रदान करते हैं।

आंकिक प्रश्न

 

Question 1. किसी कक्षा में बैठे दो छात्रों के मध्य कितना आकर्षण बल लगेगा यदि इनके द्रव्यमान क्रमशः 20 किग्रा, 30 किग्रा हैं तथा इनके मध्य की दूरी 2 मीटर
Answer:
हल:
प्रश्नानुसार, दिए गए मान हैं:
पहले छात्र का द्रव्यमान \( m_1 = 20 \) किग्रा
दूसरे छात्र का द्रव्यमान \( m_2 = 30 \) किग्रा
उनके बीच की दूरी \( d = 2 \) मीटर
सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक \( G = 6.67 \times 10^{-11} \, \text{N-m}^2/\text{kg}^2 \)
हमें गुरुत्वाकर्षण बल \( F \) ज्ञात करना है।

गुरुत्वाकर्षण बल के सूत्र का उपयोग करने पर:
\( F = G \frac{m_1 m_2}{d^2} \)
\( = 6.67 \times 10^{-11} \times \frac{20 \times 30}{(2)^2} \)
\( = 6.67 \times 10^{-11} \times \frac{600}{4} \)
\( = 6.67 \times 10^{-11} \times 150 \)
\( = 1000.5 \times 10^{-11} \) न्यूटन
\( = 1.0 \times 10^{-8} \) न्यूटन (लगभग)
In simple words: दो छात्रों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल बहुत कम होता है क्योंकि उनके द्रव्यमान छोटे होते हैं। सूत्र में उनके द्रव्यमान और दूरी डालने पर, बल लगभग \( 1.0 \times 10^{-8} \) न्यूटन आता है, जो बहुत कमजोर खिंचाव है।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण बल की गणना करते समय, \( G \) के मान और उचित इकाइयों को सही ढंग से दर्ज करना सुनिश्चित करें। छोटी वस्तुओं के लिए गुरुत्वाकर्षण बल आमतौर पर बहुत कम होता है।

 

Question 2. यदि पृथ्वी की त्रिज्या \( 6.38 \times 10^6 \) मीटर तथा गुरुत्वाकर्षण नियतांक \( = 6.67 \times 10^{-11} \) न्यूटन-मी²/किग्रा² तथा \( g = 9.8 \) मीटर/सेकण्ड² हो तो पृथ्वी के द्रव्यमान की गणना कीजिए।
Answer:
हमें पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण (g) का सूत्र पता है:
\( g = \frac{GM}{R^2} \)
यहाँ, \( g = 9.8 \, \text{m/s}^2 \)
पृथ्वी की त्रिज्या \( R = 6.38 \times 10^6 \) मीटर
गुरुत्वाकर्षण नियतांक \( G = 6.67 \times 10^{-11} \, \text{N-m}^2/\text{kg}^2 \)
पृथ्वी का द्रव्यमान \( M \) ज्ञात करना है।

सूत्र को \( M \) के लिए पुनर्व्यवस्थित करने पर:
\( M = \frac{gR^2}{G} \)
\( M = \frac{9.8 \times (6.38 \times 10^6)^2}{6.67 \times 10^{-11}} \)
\( = \frac{9.8 \times 40.7044 \times 10^{12}}{6.67 \times 10^{-11}} \)
\( = \frac{398.90312 \times 10^{12}}{6.67 \times 10^{-11}} \)
\( = 59.805 \times 10^{23} \)
\( M = 5.98 \times 10^{24} \) किग्रा ।
In simple words: पृथ्वी के द्रव्यमान को ज्ञात करने के लिए, हम गुरुत्वीय त्वरण, पृथ्वी की त्रिज्या और गुरुत्वाकर्षण नियतांक का उपयोग करते हैं। सभी संख्याओं को सूत्र में डालने के बाद, गणना से पृथ्वी का द्रव्यमान लगभग \( 5.98 \times 10^{24} \) किलोग्राम निकलता है।

🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करें कि आप सूत्र \( M = \frac{gR^2}{G} \) का सही उपयोग करें और सभी मानों को मानक (SI) इकाइयों में बदलें। गणना में घातों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. एक पिण्ड को ऊर्ध्वाधरतः ऊपर की ओर किसे वेग से फेंकें कि वह 150 मीटर ऊँचाई तक जाये। (g=9.8 मीटर/सेकण्ड)
Answer:
हल:
प्रश्नानुसार, दिए गए मान हैं:
पिण्ड द्वारा तय की जाने वाली अधिकतम ऊँचाई \( h = 150 \) मीटर
गुरुत्वीय त्वरण \( g = 9.8 \) मीटर/सेकण्ड\(^2 \)
महत्तम ऊँचाई पर पिण्ड का अंतिम वेग \( v = 0 \) (क्योंकि इस बिंदु पर वह क्षण भर के लिए रुकता है)
हमें प्रारम्भिक वेग \( u \) ज्ञात करना है।

गति के तीसरे समीकरण का उपयोग करने पर (ऊपर की ओर गति के लिए g ऋणात्मक होता है):
\( v^2 = u^2 - 2gh \)
\( (0)^2 = u^2 - (2 \times 9.8 \times 150) \)
\( 0 = u^2 - 2940 \)
\( u^2 = 2940 \)
\( u = \sqrt{2940} \)
\( u \approx 54.22 \) मीटर/सेकण्ड
In simple words: किसी वस्तु को 150 मीटर ऊपर फेंकने के लिए, हमें उसे लगभग 54.22 मीटर प्रति सेकंड की प्रारंभिक गति से फेंकना होगा। इतनी तेजी से फेंकने पर ही वह इतनी ऊँचाई तक पहुँच पाएगी, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण उसे नीचे खींच रहा है।

🎯 Exam Tip: जब कोई वस्तु ऊपर की ओर फेंकी जाती है और अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचती है, तो उस बिंदु पर अंतिम वेग शून्य होता है। गति के समीकरणों में, g का मान ऋणात्मक लिया जाता है क्योंकि गति गुरुत्वाकर्षण के विपरीत दिशा में होती है।

 

Question 4. किसी व्यक्ति का पृथ्वी पर द्रव्यमान 60 किग्रा है। इसका चन्द्रमा पर भार तथा द्रव्यमान कितना होगा ? जबकि चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण, पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण g का \( \frac {1}{6} \) है।
Answer:
हल:
दिए गए मान हैं:
व्यक्ति का पृथ्वी पर द्रव्यमान \( m = 60 \) किग्रा
पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण \( g_{\text{पृथ्वी}} = 9.8 \) मीटर/सेकण्ड\(^2 \)
चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण \( g_{\text{चन्द्रमा}} = \frac{1}{6} \times g_{\text{पृथ्वी}} \)
\( g_{\text{चन्द्रमा}} = \frac{1}{6} \times 9.8 \)
\( g_{\text{चन्द्रमा}} \approx 1.63 \) मीटर/सेकण्ड\(^2 \)

अब, चन्द्रमा पर व्यक्ति का भार \( (W_{\text{चन्द्रमा}}) \) ज्ञात करते हैं:
\( W_{\text{चन्द्रमा}} = m \times g_{\text{चन्द्रमा}} \)
\( W_{\text{चन्द्रमा}} = 60 \, \text{किग्रा} \times 1.63 \, \text{मीटर/सेकण्ड}^2 \)
\( W_{\text{चन्द्रमा}} \approx 97.8 \) न्यूटन (किग्रा भार के रूप में) (लगभग)

व्यक्ति का चन्द्रमा पर द्रव्यमान:
द्रव्यमान किसी वस्तु में पदार्थ की मात्रा होती है और यह स्थान के साथ नहीं बदलता है।
अतः, चन्द्रमा पर व्यक्ति का द्रव्यमान \( = 60 \) किग्रा ।
In simple words: अगर किसी व्यक्ति का पृथ्वी पर द्रव्यमान 60 किग्रा है, तो उसका द्रव्यमान चन्द्रमा पर भी 60 किग्रा ही रहेगा, क्योंकि द्रव्यमान कभी नहीं बदलता। लेकिन उसका भार चन्द्रमा पर कम हो जाएगा, लगभग 97.8 न्यूटन, क्योंकि चन्द्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी से \( \frac{1}{6} \) गुना है।

🎯 Exam Tip: द्रव्यमान और भार के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें। द्रव्यमान एक आंतरिक गुण है जो नियत रहता है, जबकि भार गुरुत्वाकर्षण के कारण स्थान के साथ बदलता है। भार को आमतौर पर न्यूटन में व्यक्त किया जाता है, जबकि द्रव्यमान को किलोग्राम में।

 

Question 6. चन्द्रमा की सतह पर गुरुत्वीय बल, पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय बल की अपेक्षा 1/6 गुना है। एक 10 किग्रा द्रव्यमान की वस्तु का चन्द्रमा पर तथा पृथ्वी पर न्यूटन में भार कितना होगा?
Answer:
हल:
दिए गए मान हैं:
वस्तु का द्रव्यमान \( m = 10 \) किग्रा
पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण \( g_{\text{पृथ्वी}} = 9.8 \) मीटर/सेकण्ड\(^2 \)

पृथ्वी पर वस्तु का भार \( W_{\text{पृथ्वी}} \) ज्ञात करते हैं:
\( W_{\text{पृथ्वी}} = m \times g_{\text{पृथ्वी}} \)
\( W_{\text{पृथ्वी}} = 10 \, \text{किग्रा} \times 9.8 \, \text{मीटर/सेकण्ड}^2 \)
\( W_{\text{पृथ्वी}} = 98 \) न्यूटन

चूंकि चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी का \( \frac{1}{6} \) गुना है, इसलिए चन्द्रमा पर वस्तु का भार भी पृथ्वी के भार का \( \frac{1}{6} \) गुना होगा।
चन्द्रमा पर वस्तु का भार \( W_{\text{चन्द्रमा}} = \frac{1}{6} \times W_{\text{पृथ्वी}} \)
\( W_{\text{चन्द्रमा}} = \frac{1}{6} \times 98 \) न्यूटन
\( W_{\text{चन्द्रमा}} \approx 16.33 \) न्यूटन

अतः, पृथ्वी पर वस्तु का भार \( = 98 \) न्यूटन
तथा चन्द्रमा पर वस्तु का भार \( = 16.33 \) न्यूटन।
In simple words: एक 10 किग्रा की वस्तु का पृथ्वी पर भार 98 न्यूटन होगा। क्योंकि चन्द्रमा पर गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी से \( \frac{1}{6} \) गुना कम है, तो चन्द्रमा पर उसी वस्तु का भार केवल 16.33 न्यूटन होगा।

🎯 Exam Tip: भार \( (W = mg) \) गुरुत्वाकर्षण त्वरण पर निर्भर करता है, जबकि द्रव्यमान \( (m) \) नहीं। याद रखें कि चन्द्रमा पर भार पृथ्वी पर भार का लगभग \( \frac{1}{6} \) होता है।

 

Question 7. 125m ऊँची मीनार से एक पत्थर छोड़ा जाता है तो निम्न की गणना करो
(i) नीचे पहुँचने में लगा समय
(ii) पत्थर का अन्तिम वेग
Answer:
दिए गए मान हैं:
मीनार की ऊँचाई \( h = 125 \) मीटर
प्रारम्भिक वेग \( u = 0 \) (चूंकि पत्थर छोड़ा जाता है)
गुरुत्वीय त्वरण \( g = 10 \) मीटर/सेकण्ड\(^2 \) (मान लिया गया है)

(i) नीचे पहुँचने में लगा समय \( (t) \) ज्ञात करना:
गति के दूसरे समीकरण का उपयोग करने पर:
\( h = ut + \frac{1}{2}gt^2 \)
\( 125 = (0 \times t) + \frac{1}{2} \times 10 \times t^2 \)
\( 125 = 5t^2 \)
\( t^2 = \frac{125}{5} = 25 \)
\( t = \sqrt{25} \)
\( t = 5 \) सेकेण्ड।

(ii) पत्थर का अन्तिम वेग \( (v) \) ज्ञात करना:
गति के पहले समीकरण का उपयोग करने पर:
\( v = u + gt \)
\( v = 0 + (10 \times 5) \)
\( v = 50 \) मीटर/सेकण्ड।
या गति के तीसरे समीकरण का उपयोग करने पर:
\( v^2 = u^2 + 2gh \)
\( v^2 = (0)^2 + (2 \times 10 \times 125) \)
\( v^2 = 0 + 2500 \)
\( v = \sqrt{2500} \)
\( v = 50 \) मीटर/सेकण्ड।
In simple words: जब एक पत्थर 125 मीटर ऊँची मीनार से छोड़ा जाता है, तो उसे जमीन तक पहुँचने में 5 सेकंड लगेंगे, और जमीन से टकराते समय उसकी गति 50 मीटर प्रति सेकंड होगी। यह गुरुत्वाकर्षण के कारण होता है।

🎯 Exam Tip: मुक्त पतन के प्रश्नों को हल करते समय, ध्यान दें कि प्रारंभिक वेग \( u=0 \) होता है और गुरुत्वीय त्वरण \( g \) का मान सकारात्मक लिया जाता है क्योंकि वस्तु नीचे की ओर गति कर रही है।

 

Question 8. पृथ्वी तथा सूर्य के बीच गुरुत्वाकर्षण बल का परिकलन कीजिए। दिया है, पृथ्वी का द्रव्यमान \( = 6 \times 10^{24} \) किग्रा, सूर्य का द्रव्यमान \( = 2 \times 10^{30} \) किग्रा दोनों के बीच औसत दूरी \( = 1.5 \times 10^{11} \) मीटर है।
Answer:
हल:
दिए गए मान हैं:
पृथ्वी का द्रव्यमान \( m_1 = 6 \times 10^{24} \) किग्रा
सूर्य का द्रव्यमान \( m_2 = 2 \times 10^{30} \) किग्रा
पृथ्वी और सूर्य के बीच की औसत दूरी \( d = 1.5 \times 10^{11} \) मीटर
सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक \( G = 6.67 \times 10^{-11} \, \text{N-m}^2/\text{kg}^2 \)

गुरुत्वाकर्षण बल के सूत्र का उपयोग करने पर:
\( F = G \frac{m_1 m_2}{d^2} \)
\( = 6.67 \times 10^{-11} \times \frac{6 \times 10^{24} \times 2 \times 10^{30}}{(1.5 \times 10^{11})^2} \)
\( = 6.67 \times 10^{-11} \times \frac{12 \times 10^{54}}{2.25 \times 10^{22}} \)
\( = 6.67 \times 10^{-11} \times 5.3333 \times 10^{32} \)
\( = 35.555 \times 10^{21} \)
\( = 3.56 \times 10^{22} \) न्यूटन ।
In simple words: पृथ्वी और सूर्य एक-दूसरे को बहुत बड़े बल से खींचते हैं। सभी मानों को गुरुत्वाकर्षण के सूत्र में डालने पर, यह खिंचाव बल लगभग \( 3.56 \times 10^{22} \) न्यूटन आता है। यह बल इतना मजबूत है कि पृथ्वी को सूर्य के चारों ओर उसकी कक्षा में रखता है।

🎯 Exam Tip: बड़ी संख्यात्मक गणनाओं में घातांकों (powers of 10) का सही ढंग से प्रबंधन करना महत्वपूर्ण है। सुनिश्चित करें कि आप सभी इकाइयों को SI प्रणाली में बदल दें।

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