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Detailed Chapter 26 हमारे गौरव RBSE Solutions for Class 8 Social Science
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Class 8 Social Science Chapter 26 हमारे गौरव RBSE Solutions PDF
Chapter 26 हमारे गौरव
पाठगत प्रश्न
गतिविधि-पदें व बताएँ
(पृष्ठ संख्या 180)
Question 1. चन्दबरदाई के पिता का नाम क्या था?
Answer: चन्दबरदाई के पिता का नाम राव वैण था। वैण राव अपने समय के एक प्रसिद्ध व्यक्ति थे।
In simple words: चन्दबरदाई के पिता का नाम राव वैण था।
🎯 Exam Tip: कवि और लेखक के व्यक्तिगत विवरण जैसे उनके माता-पिता के नाम को हमेशा ठीक से याद रखें।
Question 2. चन्दबरदाई का जन्म कहाँ हुआ?
Answer: चन्दबरदाई का जन्म साल 1148 में लाहौर में हुआ था। लाहौर एक ऐतिहासिक शहर है जिसका भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है।
In simple words: चन्दबरदाई का जन्म 1148 में लाहौर में हुआ था।
🎯 Exam Tip: जन्म स्थान और तारीख जैसे मुख्य तथ्यों को हमेशा याद रखें।
Question 3. चन्दबरदाई में कवि के अतिरिक्त कौन-कौनसे गुण थे?
Answer:
1. चन्दबरदाई भाषा, साहित्य, व्याकरण, छंद और ज्योतिष जैसे कई विषयों के जानकार थे।
2. उन्होंने अस्त्र-शस्त्र चलाने की भी अच्छी शिक्षा ली थी और युद्ध के समय हमेशा सेना के साथ रहकर अपनी युद्ध-कला का परिचय देते थे। यह दिखाता है कि वे सिर्फ कवि नहीं, बल्कि एक योद्धा भी थे।
3. चन्दबरदाई में विद्वत्ता, वीरता, दयालुता और मित्र के प्रति भक्ति जैसे महान गुण थे।
In simple words: चन्दबरदाई सिर्फ कवि ही नहीं, बल्कि कई भाषाओं के जानकार, शस्त्र विद्या में निपुण और वीर योद्धा भी थे। वे बहुत दयालु और अपने दोस्तों के प्रति वफादार थे।
🎯 Exam Tip: किसी व्यक्ति के गुणों का वर्णन करते समय, प्रत्येक गुण को अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट रूप से बताएं और उदाहरण भी दें।
Question 4. चन्दबरदाई की प्रसिद्ध रचना कौनसी है?
Answer: 'पृथ्वीराज रासो' चन्दबरदाई की सबसे प्रसिद्ध रचना है। यह एक महाकाव्य है जो पृथ्वीराज चौहान के जीवन का वर्णन करता है।
In simple words: चन्दबरदाई की मशहूर किताब का नाम 'पृथ्वीराज रासो' है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख लेखकों और उनकी सबसे महत्वपूर्ण रचनाओं के नाम हमेशा याद रखें।
गतिविधि
आओ उत्तर खोजें
(पृष्ठ संख्या 182)
Question 2. शल्य क्रिया के क्षेत्र में प्राचीन भारतीय ग्रन्थ का नाम बताइये।
Answer: 'सुश्रुत संहिता' शल्य क्रिया के क्षेत्र में एक बहुत पुराना और महत्वपूर्ण भारतीय ग्रंथ है। यह पुस्तक सर्जरी के कई तरीकों के बारे में बताती है।
In simple words: सर्जरी के लिए भारत की सबसे पुरानी किताब का नाम 'सुश्रुत संहिता' है।
🎯 Exam Tip: प्राचीन भारतीय विज्ञान और साहित्य से संबंधित प्रमुख ग्रंथों के नाम और उनके विषय हमेशा याद रखें।
Question 3. सुश्रुत संहिता ग्रन्थ किसके द्वारा लिखा गया है?
Answer: 'सुश्रुत संहिता' ग्रंथ महर्षि सुश्रुत द्वारा लिखा गया है। महर्षि सुश्रुत को प्राचीन भारत के महान सर्जनों में से एक माना जाता है।
In simple words: 'सुश्रुत संहिता' नामक किताब महर्षि सुश्रुत ने लिखी थी।
🎯 Exam Tip: प्रमुख ग्रंथों के लेखकों को उनके ग्रंथों के साथ सही ढंग से जोड़कर याद रखना चाहिए।
Question 4. सुश्रुत ने ऐसी कौनसी वस्तुओं का आविष्कार किया जिनका प्रयोग आज भी हो रहा है?
Answer: शल्य चिकित्सा के लिए सुश्रुत ने 100 से भी ज़्यादा औजारों और उपकरणों का आविष्कार किया था। इनमें से ज़्यादातर उपकरण आज भी सर्जरी में इस्तेमाल किए जाते हैं, जो उनकी दूरदर्शिता को दर्शाता है।
In simple words: सुश्रुत ने सर्जरी के लिए बहुत से औजार बनाए थे, जिनमें से कई आज भी काम आते हैं।
🎯 Exam Tip: प्राचीन आविष्कारों और उनके वर्तमान उपयोग के बारे में लिखते समय, संख्यात्मक जानकारी को सटीक रूप से प्रस्तुत करें।
(गतिविधि)
(पृष्ठ संख्या 183)
Question 1. भारत के अन्य वैज्ञानिक कौन-कौन रहे हैं? अपने गुरुजी से जानकारी प्राप्त करें और सूची बनाएँ।
Answer: भारत के अन्य वैज्ञानिकों की सूची निम्नांकित है:
शास्त्री
5. चन्द्रशेखर वेंकटरमन - 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार विजेता
6. धन्वन्तरी - आयुर्वेद विज्ञान के चिकित्सा शास्त्री
7. बीरबल साहनी - प्रसिद्ध वनस्पतिज्ञ
8. भास्कर - गणितज्ञ लेखक
9. मेघनाद साहा - भौतिकी के प्रसिद्ध विद्वान
10. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया - सिंचाई एवं जल प्रबन्ध की तकनीकों का अनुसंधान
11. विक्रम अम्बालाल साराभाई - भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के वैज्ञानिक
12. वराहमिहिर - गुप्तकालीन भारत के प्रसिद्ध ज्योतिषी एवं गणितज्ञ
13. शान्तिस्वरूप भटनागर - चुम्बकीय प्रभावों पर अनुसंधान
14. सत्येन्द्रनाथ बोस - क्वांटम सिद्धान्त में अनुसंधान
15. होमी जहांगीर भाभा - परमाणु अनुसंधान
16. जगदीश चन्द्र बोस - भौतिकी विज्ञानी
In simple words: भारत में बहुत से महान वैज्ञानिक हुए हैं, जैसे चन्द्रशेखर वेंकटरमन, धन्वन्तरी, बीरबल साहनी, भास्कर, मेघनाद साहा, विश्वेश्वरैया, विक्रम साराभाई, वराहमिहिर, शान्तिस्वरूप भटनागर, सत्येन्द्रनाथ बोस, होमी जहांगीर भाभा और जगदीश चन्द्र बोस। इन सभी ने अलग-अलग विज्ञान के क्षेत्रों में बहुत महत्वपूर्ण काम किया है।
🎯 Exam Tip: वैज्ञानिकों की सूची बनाते समय, उनके नाम के साथ उनके योगदान या विशेषज्ञता के क्षेत्र को संक्षेप में जरूर बताएं।
गतिविधि-पढ़ें जानें एवं बतायें
(पृष्ठ संख्या 184)
Question 1. माघ के पिता का नाम क्या था?
Answer: माघ के पिता का नाम दत्तक था। दत्तक अपने समय के एक सम्मानित व्यक्ति थे।
In simple words: कवि माघ के पिता का नाम दत्तक था।
🎯 Exam Tip: लेखकों और कवियों के परिवार से संबंधित मुख्य जानकारी को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. माघ द्वारा लिखी गई काव्य-रचना कौनसी है ?
Answer: माघ ने 'शिशुपालवधम्' नामक काव्य की रचना की थी। यह संस्कृत साहित्य का एक प्रसिद्ध महाकाव्य है।
In simple words: माघ ने 'शिशुपालवधम्' नाम की कविता लिखी थी।
🎯 Exam Tip: कवियों और उनकी सबसे प्रसिद्ध साहित्यिक कृतियों के नाम हमेशा याद रखें।
(गतिविधि-पट्टे व बताएँ)
(पृष्ठ संख्या 186)
Question 2. वास्तुशास्त्र का मुख्य विषय क्या होता है?
Answer: वास्तुशास्त्र का मुख्य विषय स्थापत्य कला होता है। यह कला इमारतों और संरचनाओं के निर्माण के नियमों और सिद्धांतों से संबंधित है।
In simple words: वास्तुशास्त्र का मुख्य काम बिल्डिंग और घर बनाने की कला से जुड़ा है।
🎯 Exam Tip: किसी भी शास्त्र के मुख्य विषय को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से परिभाषित करें।
Question 3. महर्षि पाराशर ने किस ग्रन्थ की रचना की?
Answer: महर्षि पाराशर ने 'कृषि पाराशर' नामक ग्रंथ की रचना की। यह ग्रंथ कृषि विज्ञान और खेती के तरीकों पर आधारित है।
In simple words: महर्षि पाराशर ने 'कृषि पाराशर' नाम की किताब लिखी थी।
🎯 Exam Tip: ऋषि-मुनियों और उनके ग्रंथों के नाम और विषय को याद रखना चाहिए।
Question 4. चक्रपाणि मिश्र ने कौन-कौनसे ग्रन्थों की रचना की?
Answer: चक्रपाणि मिश्र ने चार प्रमुख ग्रंथों की रचना की थी। वे थे:
1. विश्ववल्लभ
2. मुहूर्तमाला
3. व्यवहारादर्श
4. राज्याभिषेक पद्धति
यह ग्रंथ विभिन्न विषयों जैसे वास्तुकला, ज्योतिष और शासन से संबंधित थे।
In simple words: चक्रपाणि मिश्र ने 'विश्ववल्लभ', 'मुहूर्तमाला', 'व्यवहारादर्श' और 'राज्याभिषेक पद्धति' नाम की चार किताबें लिखी थीं।
🎯 Exam Tip: जब कई ग्रंथों का उल्लेख करना हो, तो उन्हें सूचीबद्ध रूप में प्रस्तुत करें।
Question 5. 'वृक्षायुर्वेद' ग्रन्थ की रचना किसने की ?
Answer: चक्रपाणि मिश्र ने 'वृक्षायुर्वेद' नामक ग्रंथ की रचना की। यह ग्रंथ पौधों के जीवन और उनके उपचार से संबंधित था।
In simple words: 'वृक्षायुर्वेद' किताब चक्रपाणि मिश्र ने लिखी थी।
🎯 Exam Tip: ग्रंथों और उनके लेखकों के नामों को सही ढंग से याद रखना चाहिए।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
Question 1. का सही उत्तर कोष्ठक में लिखें
1. 'वृक्षायुर्वेद' ग्रन्थ की रचना की थी
(अ) सूत्रधार मण्डन ने
(ब) चक्रपाणि मित्र ने
(स) महर्षि सुश्रुत ने
(द) शारंगधर ने
Answer: (ब) चक्रपाणि मित्र ने
In simple words: 'वृक्षायुर्वेद' नामक ग्रंथ चक्रपाणि मित्र ने लिखा था।
🎯 Exam Tip: बहुविकल्पीय प्रश्नों में सही विकल्प को ध्यान से चुनें और उसे स्पष्ट रूप से लिखें।
Question. Match the following authors with their books.
| लेखक | नाम पुस्तक |
|---|---|
| 1. चन्दबरदाई | शिशुपालवधम् |
| 2. ब्रह्मगुप्त | वास्तुमंजरी |
| 3. महर्षि सुश्रुत | कृषि पाराशर |
| 4. महाकवि माघ | विश्ववल्लभ |
| 5. सूत्रधार मण्डन | ब्रह्मस्फुट सिद्धान्त |
| 6. महर्षि पाराशर | सुश्रुतसंहिता |
| 7. चक्रपाणि मिश्र | पृथ्वीराज रासो |
Answer:
| लेखक | नाम पुस्तक |
|---|---|
| 1. चन्दबरदाई | पृथ्वीराज रासो |
| 2. ब्रह्मगुप्त | ब्रह्मस्फुट सिद्धान्त |
| 3. महर्षि सुश्रुत | सुश्रुत संहिता |
| 4. महाकवि माघ | शिशुपालवधम् |
| 5. सूत्रधार मण्डन | वास्तुमंजरी |
| 6. महर्षि पाराशर | कृषि पाराशर |
| 7. चक्रपाणि मिश्र | विश्ववल्लभ |
In simple words: ऊपर दी गई तालिका में लेखकों और उनकी प्रसिद्ध पुस्तकों के सही जोड़े बताए गए हैं।
🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, दोनों स्तंभों को ध्यान से पढ़ें और प्रत्येक जोड़ी का सही संबंध सुनिश्चित करें।
Question 3. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
1. .................का जन्म भीनमाल में माना जाता है।
2. भारत का यह गणित तथा खगोल विज्ञान का ज्ञान अरब तथा याद में को प्राप्त हुआ।
3. .................ही ये प्रथम चिकित्सक माने जाते हैं जिन्होंने शल्य चिकित्सा को एक व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया।
4. .................को उनके शोधपत्रों के आधार पर बिना परीक्षा दिए स्नातक की उपाधि प्रदान की गई।
5. .................अत्यन्त दानशीलता के कारण दरिद्र हो गए।
6. महाराणा प्रताप के दरबारी पण्डित श्री – – थे।
7. महर्षि---का जन्म-स्थान पुष्कर था।
Answer:
1. ब्रह्मगुप्त
2. पश्चिम के देशों
3. महर्षि सुश्रुत
4. श्रीनिवास रामानुजन्
In simple words: ब्रह्मगुप्त का जन्म भीनमाल में हुआ था। भारत के गणित और खगोल विज्ञान का ज्ञान पश्चिम के देशों तक फैला। महर्षि सुश्रुत पहले डॉक्टर थे जिन्होंने सर्जरी को ठीक से सिखाया। श्रीनिवास रामानुजन् को उनके शोध के लिए बिना परीक्षा दिए ही डिग्री मिल गई।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, सही जानकारी के साथ वाक्य को पूरा करने के लिए पूरे वाक्य को समझें।
निम्नलिखित प्रश्नों में सत्य/असत्य कथन बताइये।
Question. सत्य/असत्य कथन बताइये।
1. चन्दबरदाई 'पृथ्वीराज रासो' के रचयिता थे।
2. ब्रह्मगुप्त गुप्तकाल के प्रमुख खगोलशास्त्री थे
3. सुश्रुत खण्डखासकम्' ग्रन्थ के रचयिता थे
4. माघ अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध थे।
Answer:
3. असत्य
4. असत्य
5. असत्य। (यह कथन मूल स्रोत में नहीं दिया गया है, पर उत्तर में मौजूद है।)
In simple words: सुश्रुत ने खण्डखाद्यकम् ग्रंथ नहीं लिखा था, और माघ वीरता से नहीं बल्कि दानशीलता के लिए जाने जाते थे।
🎯 Exam Tip: सत्य/असत्य प्रश्नों में, प्रत्येक कथन की सच्चाई को जांचने के लिए तथ्यों को ध्यान से पढ़ें।
Question. स्तम्भ 'अ' को स्तम्भ 'ब' से सुमेलित कीजिए
| स्तम्भ 'अ' | स्तम्भ 'ब' |
|---|---|
| 1. ब्रह्मगुप्त का जन्म | लाहौर |
| 2. चन्दबरदाई का जन्म | भीनमाल |
| 3. खण्डखाद्यकम् | सुश्रुत |
| 4. सुश्रुतसंहिता | ब्रह्मगुप्त |
| 5. माघ | वास्तुमंजरी |
| 6. सूत्रधार मण्डन | शिशुपालवधम् |
Answer:
| स्तम्भ 'अ' | स्तम्भ 'ब' |
|---|---|
| 1. ब्रह्मगुप्त का जन्म | भीनमाल |
| 2. चन्दबरदाई का जन्म | लाहौर |
| 3. खण्डखाद्यकम् | ब्रह्मगुप्त |
| 4. सुश्रुतसंहिता | सुश्रुत |
| 5. माघ | शिशुपालवधम् |
| 6. सूत्रधार मण्डन | वास्तुमंजरी |
In simple words: ब्रह्मगुप्त का जन्म भीनमाल में, चन्दबरदाई का लाहौर में हुआ। खण्डखाद्यकम् ब्रह्मगुप्त का ग्रंथ है और सुश्रुत संहिता सुश्रुत की रचना है। माघ ने शिशुपालवधम् लिखा और सूत्रधार मण्डन ने वास्तुमंजरी बनाई।
🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, पहले उन जोड़ियों को मिलाएं जिनके बारे में आप निश्चित हैं, और फिर बाकी को हल करें।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. चन्दबरदाई का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
Answer: चन्दबरदाई का जन्म सन् 1148 में लाहौर में हुआ था। लाहौर उस समय एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र था।
In simple words: चन्दबरदाई का जन्म 1148 में लाहौर में हुआ था।
🎯 Exam Tip: जन्म तिथि और स्थान जैसे सटीक तथ्यों को याद रखना बहुत जरूरी है।
Question 2. चन्दबरदाई कौन थे?
Answer: चन्दबरदाई दिल्ली के राजा पृथ्वीराज चौहान के राजकवि, उनके सलाहकार और एक अच्छे मित्र थे। उनका राजा के साथ गहरा संबंध था।
In simple words: चन्दबरदाई राजा पृथ्वीराज चौहान के कवि, सलाहकार और दोस्त थे।
🎯 Exam Tip: किसी भी ऐतिहासिक व्यक्ति के कई पदों और रिश्तों को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 3. चन्दबरदाई ने किस ग्रन्थ की रचना की थी?
Answer: ब्रह्मगुप्त गुप्तकाल के एक महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे। उन्होंने खगोल विज्ञान और गणित में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
In simple words: ब्रह्मगुप्त गुप्तकाल के एक बड़े गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे।
🎯 Exam Tip: प्रश्नों का उत्तर देते समय, सुनिश्चित करें कि आपका जवाब सीधे पूछे गए प्रश्न से संबंधित हो।
Question 5. ब्रह्मगुप्त द्वारा रचित ग्रन्थों के नाम लिखिए।
Answer: ब्रह्मगुप्त द्वारा रचित ग्रंथ थे:
1. ब्रह्मस्फुट सिद्धान्त
2. खण्डखाद्यकम्
ये दोनों ग्रंथ गणित और खगोल विज्ञान के महत्वपूर्ण सिद्धांत प्रस्तुत करते हैं।
In simple words: ब्रह्मगुप्त ने 'ब्रह्मस्फुट सिद्धान्त' और 'खण्डखाद्यकम्' नामक किताबें लिखी थीं।
🎯 Exam Tip: लेखकों और उनके ग्रंथों के नाम याद रखने के लिए, आप उन्हें एक सूची के रूप में लिख सकते हैं।
Question 6. विश्व के प्रथम शल्य चिकित्सक कौन थे?
Answer: महर्षि सुश्रुत विश्व के पहले शल्य चिकित्सक थे। उन्होंने प्राचीन भारत में सर्जरी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
In simple words: महर्षि सुश्रुत दुनिया के पहले सर्जन थे।
🎯 Exam Tip: "प्रथम" या "सबसे पहले" जैसे शब्दों वाले प्रश्नों के उत्तर में सही व्यक्ति का नाम याद रखना आवश्यक है।
Question 7. सुश्रुत ने किस ग्रन्थ की रचना की थी?
Answer: सुश्रुत ने 'सुश्रुतसंहिता' नामक ग्रंथ की रचना की थी। यह ग्रंथ शल्य चिकित्सा के कई पहलुओं का विस्तृत वर्णन करता है।
In simple words: सुश्रुत ने 'सुश्रुतसंहिता' नाम की किताब लिखी थी।
🎯 Exam Tip: किसी भी प्रसिद्ध व्यक्तित्व के प्रमुख कार्यों और ग्रंथों के नाम को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 8. प्लास्टिक सर्जरी का उल्लेख किस भारतीय शल्य चिकित्सक ने किया था?
Answer: प्लास्टिक सर्जरी का उल्लेख सुश्रुत नामक भारतीय शल्य चिकित्सक ने अपने ग्रंथ 'सुश्रुतसंहिता' में किया था। यह दर्शाता है कि प्राचीन भारत में भी जटिल सर्जिकल प्रक्रियाएं ज्ञात थीं।
In simple words: प्लास्टिक सर्जरी के बारे में सुश्रुत ने अपनी किताब 'सुश्रुतसंहिता' में बताया था।
🎯 Exam Tip: किसी विशिष्ट चिकित्सा प्रक्रिया के आविष्कारक या उल्लेखकर्ता का नाम और उनके ग्रंथ को याद रखें।
Question 9. माघ ने किस ग्रन्थ की रचना की थी?
Answer: माघ ने 'शिशुपालवधम्' नामक ग्रंथ की रचना की थी। यह संस्कृत साहित्य का एक प्रमुख महाकाव्य है।
In simple words: माघ ने 'शिशुपालवधम्' नाम की किताब लिखी थी।
🎯 Exam Tip: कवियों और उनकी सबसे प्रसिद्ध साहित्यिक कृतियों के नाम को याद रखना जरूरी है।
Question 10. माघ किसलिए प्रसिद्ध थे?
Answer: माघ अपनी दानशीलता के लिए प्रसिद्ध थे। वे बहुत उदार और दान करने वाले व्यक्ति थे।
In simple words: माघ बहुत दान देने वाले व्यक्ति थे, इसलिए वे मशहूर थे।
🎯 Exam Tip: किसी व्यक्ति की प्रसिद्धि के कारण को एक या दो शब्दों में याद करें और उसे विस्तार से समझाएं।
Question 12. मण्डन के पिता का क्या नाम था?
Answer: मण्डन के पिता का नाम क्षेत्रार्क खेता था। क्षेत्रार्क खेता भी उस समय के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति थे।
In simple words: मण्डन के पिता का नाम क्षेत्रार्क खेता था।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण ऐतिहासिक हस्तियों के परिवार से संबंधित तथ्यों को सही ढंग से याद रखें।
Question 13. मण्डन द्वारा रचित दो ग्रन्थों के नाम लिखिए।
Answer: मण्डन द्वारा रचित दो ग्रंथ थे:
1. वास्तुमंजरी
2. वास्तुराजवल्लभं
ये दोनों ग्रंथ वास्तुकला और निर्माण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं।
In simple words: मण्डन ने 'वास्तुमंजरी' और 'वास्तुराजवल्लभं' नामक दो किताबें लिखी थीं।
🎯 Exam Tip: जब दो ग्रंथों का उल्लेख करने को कहा जाए, तो दोनों नाम स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 14. 'कृषिशास्त्र के प्रवर्तक' के रूप में किसे याद किया जाता हैं?
Answer: महर्षि पाराशर को 'कृषिशास्त्र के प्रवर्तक' के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने कृषि विज्ञान के सिद्धांतों को विकसित किया।
In simple words: महर्षि पाराशर को खेती-बाड़ी के विज्ञान का जनक माना जाता है।
🎯 Exam Tip: किसी भी विषय के जनक या प्रवर्तक के नाम को याद रखें।
Question 15. कृषि पाराशर के रचयिता कौन थे?
Answer: 'कृषि पाराशर' के रचयिता महर्षि पाराशर थे। यह ग्रंथ कृषि पर आधारित एक महत्वपूर्ण प्राचीन रचना है।
In simple words: 'कृषि पाराशर' किताब महर्षि पाराशर ने लिखी थी।
🎯 Exam Tip: प्रमुख कृषि ग्रंथों और उनके लेखकों के नाम को याद रखना चाहिए।
Question 16. चक्रपाणि मिश्र द्वारा रचित दो ग्रन्थों के नाम लिखिए।
Answer: चक्रपाणि मिश्र द्वारा रचित दो ग्रंथ थे:
1. विश्ववल्लभ
2. मुहूर्तमाला
ये ग्रंथ विभिन्न विषयों जैसे वास्तुकला और ज्योतिष से संबंधित थे।
In simple words: चक्रपाणि मिश्र ने 'विश्ववल्लभ' और 'मुहूर्तमाला' नामक दो किताबें लिखी थीं।
🎯 Exam Tip: लेखकों और उनकी रचनाओं के नाम याद रखने के लिए उन्हें दोहराना और सूची बनाना उपयोगी होता है।
Question 17. शारंगधर का योगदान बताइये।
Answer: शारंगधर का योगदान उनके द्वारा तैयार की गई संगीत पद्धति से है, जिसे 'शारंगधर पद्धति' कहा जाता है। यह पद्धति भारतीय संगीत कला में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
In simple words: शारंगधर का खास योगदान उनकी बनाई 'शारंगधर पद्धति' नाम की संगीत शैली में है।
🎯 Exam Tip: किसी भी व्यक्ति के विशिष्ट योगदान को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से परिभाषित करें।
Question 19. आप द्वारा गौशाला के रख-रखाव के दो तरीके समझाइये।
Answer: गौशाला के रख-रखाव के दो मुख्य तरीके ये हैं:
1. गौवंश की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इससे गायें स्वस्थ रहती हैं और बीमारियों से बचती हैं।
2. गोबर को जल्दी से जल्दी जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल कर लेना चाहिए। यह खेत की मिट्टी के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
In simple words: गौशाला को साफ रखना चाहिए और गोबर का जल्दी से खाद बनाकर इस्तेमाल करना चाहिए।
🎯 Exam Tip: जब किसी प्रक्रिया के तरीके पूछे जाएं, तो उन्हें बिंदुवार और स्पष्ट रूप से समझाएं।
लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. आप मौसम का पूर्वानुमान कैसे लगायेंगे? इस हेतु किन किन युक्तियों का प्रयोग करेंगे ? लिखिए।
Answer: हम मौसम का पूर्वानुमान संबंधित पुराने ग्रंथों के आधार पर लगाएंगे। इसके लिए महर्षि पाराशर द्वारा लिखे गए ग्रंथ 'कृषि पाराशर' में बताई गई विधियों का उपयोग करेंगे। हम निम्नलिखित तरीकों का प्रयोग करेंगे:
1. पशु-पक्षियों के व्यवहार को ध्यान से देखेंगे। जानवरों का व्यवहार अक्सर मौसम बदलने का संकेत देता है।
2. हवा की दिशा (वायु परीक्षण) और उसकी गति पर ध्यान देंगे। हवा की दिशा और गति मौसम में बदलाव लाती है।
इनके अलावा, हम आधुनिक उपकरणों जैसे थर्मामीटर, पवन वेग मापी, वायुदाबमापी और वायु दिग्दर्शक यंत्रों का भी इस्तेमाल करेंगे ताकि सटीक जानकारी मिल सके।
In simple words: हम पुराने ग्रंथों और पशु-पक्षियों के व्यवहार से मौसम का अनुमान लगाएंगे। साथ ही, हवा की दिशा और गति को देखेंगे। इसके लिए हम नए उपकरणों जैसे थर्मामीटर और पवन वेग मापी का भी इस्तेमाल करेंगे।
🎯 Exam Tip: मौसम के पूर्वानुमान के पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरीकों को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 2. चन्दबरदाई के व्यक्तित्व का परिचय दीजिए।
Answer: चन्दबरदाई का जन्म 1148 में लाहौर में हुआ था। उनके पिता का नाम राव वैण था। चन्दबरदाई बचपन से ही बहुत प्रतिभाशाली थे। उन्होंने जल्दी ही भाषा, साहित्य, व्याकरण, छंद, पुराण और ज्योतिष का ज्ञान प्राप्त कर लिया। वे दिल्ली के सम्राट पृथ्वीराज चौहान के राजकवि, सलाहकार और गहरे मित्र थे। उन्होंने अस्त्र-शस्त्र की भी व्यवस्थित शिक्षा प्राप्त की थी और युद्ध के समय हमेशा सेना के साथ रहकर अपनी युद्ध-कला का प्रदर्शन करते थे। उन्होंने 'पृथ्वीराज रासो' नामक ग्रंथ की रचना की। पृथ्वीराज रासो लगभग ढाई हजार पृष्ठों का हिंदी का पहला महाकाव्य है। इस ग्रंथ में चन्दबरदाई की विद्वत्ता, वीरता, दयालुता और मित्र के प्रति भक्ति का परिचय मिलता है।
In simple words: चन्दबरदाई 1148 में लाहौर में जन्मे एक बुद्धिमान और वीर कवि थे। वे पृथ्वीराज चौहान के दोस्त, सलाहकार और राजकवि थे। उन्होंने कई विषयों का ज्ञान प्राप्त किया और 'पृथ्वीराज रासो' नामक एक बड़ा काव्य ग्रंथ लिखा, जिसमें उनकी विद्वत्ता और वीरता झलकती है।
🎯 Exam Tip: किसी व्यक्ति के परिचय में, उनके जन्म, शिक्षा, पद और प्रमुख योगदान को क्रमबद्ध तरीके से बताएं।
Question 3. चिकित्सा के क्षेत्र में महर्षि सुश्रुत के योगदान का वर्णन कीजिए।
Answer: चिकित्सा के क्षेत्र में महर्षि सुश्रुत का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है।
3. सुश्रुत ने ही अपने ग्रंथ 'सुश्रुतसंहिता' में प्लास्टिक सर्जरी का उल्लेख सैकड़ों साल पहले ही कर दिया था। यूरोप ने भी सुश्रुत की इस पद्धति का पालन किया।
4. आज प्लास्टिक सर्जरी पूरी दुनिया में मशहूर है और यह भारत का दुनिया को दिया गया एक बड़ा उपहार है।
5. शल्य चिकित्सा के लिए सुश्रुत ने सौ से ज़्यादा औजारों और यंत्रों का आविष्कार किया था। इनमें से ज़्यादातर उपकरण आज भी इस्तेमाल किए जाते हैं, जो उनकी अद्भुत देन है।
In simple words: महर्षि सुश्रुत ने प्लास्टिक सर्जरी के तरीकों को अपनी किताब 'सुश्रुतसंहिता' में सैकड़ों साल पहले बताया था, जिसे यूरोप ने भी अपनाया। उन्होंने सर्जरी के लिए 100 से ज़्यादा औजार बनाए, जिनमें से कई आज भी उपयोग में हैं, जिससे भारत ने दुनिया को एक बड़ी देन दी।
🎯 Exam Tip: किसी भी वैज्ञानिक के योगदान को वर्णन करते समय, उनके प्रमुख आविष्कारों और उनके प्रभावों को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 4. महाकवि माघ के जीवन तथा कृतित्व का वर्णन कीजिए।
Answer: महाकवि माघ संस्कृत के एक महान कवि थे. उनका जन्म राजस्थान के भीनमाल में सातवीं और आठवीं शताब्दी के बीच हुआ था. उनके पिता का नाम दत्तक था. माघ का विवाह माल्हण देवी नाम की कन्या से हुआ था. उन्होंने 'शिशुपालवधम्' नाम का प्रसिद्ध काव्य लिखा था. वे बहुत ही दानी स्वभाव के थे, जिसके कारण वे गरीब भी हो गए थे. उनकी पत्नी भी उन्हीं की तरह दानी थीं. माघ ने साहित्य, व्याकरण, नीतिशास्त्र, पुराण, आयुर्वेद, न्याय, ज्योतिष, प्राकृतिक सौंदर्य, गाँव के जीवन, पशु-पक्षियों के बारे में, सौंदर्य, काव्य शैली और राजनीति जैसे कई विषयों को अपने ग्रंथ 'शिशुपालवधम्' में शामिल किया था. उनका काम हमें उस समय के समाज और ज्ञान के बारे में बहुत कुछ बताता है.
In simple words: महाकवि माघ भीनमाल में पैदा हुए एक बड़े संस्कृत कवि थे. उन्होंने 'शिशुपालवधम्' ग्रंथ लिखा और बहुत दानी थे, जिसमें उन्होंने कई विषयों का ज्ञान दिया.
🎯 Exam Tip: जब किसी कवि या व्यक्ति के जीवन और कार्यों का वर्णन करना हो, तो जन्म स्थान, माता-पिता का नाम, प्रमुख रचनाएँ और उनके स्वभाव जैसे मुख्य बिंदुओं को शामिल करना महत्वपूर्ण है.
Question 5. भारतीय इतिहास का गौरव बढ़ाने में चक्रपाणि मिश्र के योगदान का वर्णन कीजिए।
Answer: चक्रपाणि मिश्र एक बहुत ही विद्वान व्यक्ति थे, जिन्होंने चार महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की थी. ये ग्रंथ थे:
1. विश्ववल्लभ
2. मुहूर्तमाला
3. व्यवहारादर्श
4. राज्याभिषेक पद्धति
चक्रपाणि मिश्र महाराणा प्रताप के दरबार में पंडित थे. शिल्पशास्त्र से जुड़े ग्रंथों को लिखने वाले विद्वानों में चक्रपाणि मिश्र का स्थान ऋषि जैसा माना जाता है. उनके कार्यों ने भारतीय ज्ञान परंपरा को और समृद्ध किया.
In simple words: चक्रपाणि मिश्र एक महान विद्वान थे जिन्होंने चार ग्रंथ लिखे. वे महाराणा प्रताप के दरबारी पंडित थे और शिल्पशास्त्र में उनका बहुत बड़ा योगदान था.
🎯 Exam Tip: किसी व्यक्ति के योगदान का वर्णन करते समय, उनके मुख्य कार्यों या रचनाओं और समाज में उनकी भूमिका को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए.
Question 6. महर्षि पाराशर ने किस ग्रन्थ की रचना की? विचार में उनके ग्रन्थ के मुख्य विषय क्या हैं?
Answer: महर्षि पाराशर का जन्म पुष्कर (अजमेर) में हुआ था. उन्होंने 'कृषि-पाराशर' नाम का एक ग्रंथ लिखा था. 'कृषि-पाराशर' ग्रंथ कृषि से जुड़े कामों के कैलेंडर के बारे में जानकारी देता है. इस ग्रंथ के मुख्य विषय इस प्रकार हैं:
1. कृषि का काम कब शुरू करना चाहिए?
2. कौन सी फसल खेत में कब उगानी चाहिए?
3. खेती में काम आने वाले पशुओं के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए?
4. गौशाला और उसके रख-रखाव का तरीका क्या होना चाहिए?
5. मौसम का अनुमान कैसे लगाना चाहिए?
यह ग्रंथ प्राचीन भारत में कृषि ज्ञान की गहराई को दर्शाता है और आज भी प्रासंगिक है.
In simple words: महर्षि पाराशर ने 'कृषि-पाराशर' ग्रंथ लिखा. इस ग्रंथ में कृषि के समय, फसलों, पशुओं के रख-रखाव, गौशाला और मौसम के पूर्वानुमान जैसे विषयों पर जानकारी दी गई है.
🎯 Exam Tip: जब किसी ग्रंथ के विषयों के बारे में पूछा जाए, तो लेखक और ग्रंथ के नाम के साथ-साथ उसमें बताए गए मुख्य बिंदुओं को सूची के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए.
Question 7. शारंगधर कौन था? उसके योगदान का वर्णन कीजिए।
Answer: शारंगधर रणथंभौर के शासक हम्मीर के गुरु राघव देव के पोते और दामोदर के पुत्र थे. उन्होंने हम्मीर रासो और शारंगधर संहिता जैसे ग्रंथों की रचना की थी. शारंगधर का योगदान कई क्षेत्रों में था:
1. शारंगधर ने एक संगीत पद्धति बनाई थी, जिसे 'शारंगधर पद्धति' कहा जाता है. इस पद्धति में 'गांधर्वशास्त्र' नामक पुराने संगीत ग्रंथ का संक्षिप्त रूप सुरक्षित है, जो पुराने भारतीय संगीत को समझने में बहुत मददगार है. इसी पद्धति में 'वृक्षायुर्वेद' ग्रंथ का छोटा रूप भी है, जिसके आधार पर कई राजाओं ने बगीचे बनवाए और पर्यावरण की रक्षा में योगदान दिया.
2. शारंगधर की पद्धति योग जैसे विषयों को भी सिखाती है. अष्टांग योग का वैज्ञानिक तरीका इस ग्रंथ में स्वस्थ और सुरक्षित जीवन के साथ जुड़ा है. शारंगधर ने वैज्ञानिक ज्ञान का उपयोग करके कई आविष्कार किए, जिसके लिए दुनिया भर के विद्वानों ने उनकी बहुत प्रशंसा की है.
In simple words: शारंगधर एक विद्वान थे जिन्होंने हम्मीर रासो और शारंगधर संहिता जैसे ग्रंथ लिखे. उन्होंने 'शारंगधर पद्धति' नाम की एक संगीत विधि बनाई और योग तथा वैज्ञानिक ज्ञान के उपयोग में भी योगदान दिया.
🎯 Exam Tip: किसी विद्वान के योगदान का वर्णन करते समय, उनकी मुख्य रचनाओं, आविष्कारों और समाज पर पड़े प्रभावों पर ध्यान केंद्रित करें.
Question 8. वर्तमान समय में कृषि पाराशर ग्रंथ की सहायता से किस प्रकार फसल के उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है? अपनी कल्पनानुसार प्रक्रिया लिखिए।
Answer: कृषि पाराशर ग्रंथ महर्षि पाराशर ने लिखा था और यह कृषि पर एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्राचीन ग्रंथ है. इस ग्रंथ में कृषि की देखभाल की जानकारी के साथ-साथ पशु-पक्षियों के व्यवहार, हवा की दिशा जैसी बातों से मौसम का अनुमान लगाने के बारे में भी बताया गया है. इन सभी बातों का पालन करके हम आज भी फसल के उत्पादन में वृद्धि कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, ग्रंथ में बताए गए फसल चक्र और बुवाई के सही समय का पालन करने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और पैदावार बढ़ती है. आधुनिक विज्ञान के साथ-साथ प्राचीन ज्ञान को अपनाना खेती के लिए एक अच्छा तरीका हो सकता है.
In simple words: हम 'कृषि पाराशर' ग्रंथ की मदद से सही फसल चक्र और बुवाई के समय को जानकर, पशु-पक्षियों के व्यवहार से मौसम का अनुमान लगाकर फसल बढ़ा सकते हैं. यह प्राचीन ज्ञान आज भी खेती में सहायक है.
🎯 Exam Tip: इस तरह के कल्पना-आधारित प्रश्नों में, दिए गए स्रोत से जानकारी का उपयोग करें और फिर उसे वर्तमान परिस्थितियों से जोड़कर व्यवहारिक सुझाव दें.
Question 1. सूत्रधार मण्डन कौन था। भारतीय वास्तुशास्त्र में उसका क्या योगदान रहा है?
Answer: सूत्रधार मण्डन एक प्रसिद्ध वास्तुशिल्पी थे, जिन्होंने भारतीय स्थापत्य शास्त्र की परंपरा को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था. उन्होंने अपने ग्रंथों के माध्यम से स्थापत्यशास्त्रियों के लिए महल, तालाब, निवास स्थान, मंदिर और मूर्तियों के निर्माण के लिए नियम बनाए थे. भारतीय वास्तुशास्त्र में मण्डन का योगदान सबसे अधिक माना जाता है. कुंभलगढ़ का अभेद्य किला भी मण्डन के मार्गदर्शन और योजना के अनुसार ही बना था. भारतीय वास्तुशास्त्र के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं को जानने वाले विद्वानों में सूत्रधार मण्डन का नाम बहुत महत्वपूर्ण है. वास्तुशास्त्र के कला, गणित और ज्योतिष के क्षेत्र में मण्डन के विचारों को पिछले साढ़े पाँच सौ वर्षों से हमारे देश में माना जाता रहा है. उन्हें महलों, कुओं, जलाशयों और मूर्तियों से जुड़े स्थापत्य कार्यों का बहुत अनुभव था. मण्डन मेवाड़ के महाराजा कुम्भा के प्रिय वास्तुशिल्पी भी थे. मण्डन के द्वारा लिखे गए प्रमुख ग्रंथ 'देवतामूर्ति प्रकरण', 'प्रासादमण्डनम्', 'वास्तुराजवल्लभम्', 'वास्तुशास्त्रम्', 'वास्तु-मण्डनम्', 'वास्तुसार' और 'वास्तुमंजरी' आदि हैं. उनके कार्य आज भी स्थापत्य कला के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण अध्ययन स्रोत हैं.
In simple words: सूत्रधार मण्डन एक बड़े वास्तुकार थे जिन्होंने भारतीय स्थापत्य कला को बहुत कुछ दिया. उन्होंने महल और मंदिर बनाने के नियम बनाए और कुंभलगढ़ किला भी उनकी योजना से बना. उनके कई ग्रंथ आज भी वास्तुशास्त्र में महत्वपूर्ण हैं.
🎯 Exam Tip: निबंधात्मक प्रश्नों में, व्यक्ति की पहचान, मुख्य योगदान, और प्रमुख कार्यों को विस्तार से, लेकिन साफ-साफ बिंदुओं में समझाना चाहिए.
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