RBSE Solutions Class 8 Science Chapter 8 हमारा स्वास्थ्य, बीमारियाँ एवं बचाव

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Detailed Chapter 8 हमारा स्वास्थ्य, बीमारियाँ एवं बचाव RBSE Solutions for Class 8 Science

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Class 8 Science Chapter 8 हमारा स्वास्थ्य, बीमारियाँ एवं बचाव RBSE Solutions PDF

Chapter 8 हमारा स्वास्थ्य, बीमारियाँ एवं बचाव

पाठगत प्रश्न

 

Question 1. आपने अस्पतालों में देखा होगा कि कुछ रोगियों के लिए विशेष प्रकोष्ठ बनाये जाते हैं। क्या आप बता सकते हैं कि ऐसा क्यों किया होगा?
Answer: कुछ बीमारियाँ ऐसी होती हैं जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संपर्क से फैलती हैं, इन्हें संक्रामक रोग कहते हैं। ये बीमारियाँ खास मौसमों में ज़्यादा फैलती हैं। इसलिए, अस्पतालों में ऐसे संक्रमित रोगियों के लिए अलग से विशेष कमरे बनाए जाते हैं, ताकि दूसरे स्वस्थ लोगों को यह संक्रमण न लगे। एक बीमार व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति को रोग न फैले, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है।
In simple words: अस्पतालों में कुछ मरीजों को अलग कमरों में रखा जाता है ताकि उनकी बीमारी दूसरों को न फैले, खासकर संक्रामक रोग जो आसानी से फैलते हैं।

🎯 Exam Tip: संक्रामक रोगों को फैलने से रोकने के लिए अलग-थलग रखना एक महत्वपूर्ण बचाव उपाय है।

 

Question 2. सर्दी, खाँसी, जुकाम के समय आपको खाँसते समय मुख पर रुमाल रखने को क्यों कहा जाता है?
Answer: सर्दी, खाँसी और जुकाम संक्रामक रोग होते हैं, जो संपर्क से फैलते हैं। जब कोई व्यक्ति इन रोगों से पीड़ित होकर खाँसता है, तो खाँसी के साथ रोग के कीटाणु मुँह से बाहर निकलते हैं। ये कीटाणु हवा में फैल जाते हैं और स्वस्थ लोगों को भी बीमार कर सकते हैं। इसलिए, खाँसते समय मुँह पर रुमाल रखने को कहा जाता है ताकि कीटाणु हवा में न फैलें और दूसरों को संक्रमित न करें।
In simple words: सर्दी-खाँसी में मुँह पर रुमाल रखने से कीटाणु हवा में नहीं फैलते और दूसरों को बीमार होने से बचाया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: खाँसते या छींकते समय मुँह और नाक को रुमाल या टिश्यू से ढकना 'श्वसन शिष्टाचार' कहलाता है और यह संक्रमण रोकने में बहुत प्रभावी है।

 

Question 3. आपने अखबार में पढ़ा होगा कि गुजरात में बाढ़ आने के बाद हैजा फैल गया, ऐसा क्यों हुआ होगा?
Answer: हैजा एक संक्रामक बीमारी है जो दूषित पानी और भोजन से फैलती है। बाढ़ के बाद चारों ओर पानी, नमी और गंदगी फैल जाती है, जिससे कई तरह के बैक्टीरिया और रोगाणु पैदा हो जाते हैं। इस कारण उस क्षेत्र का भोजन और पानी दूषित हो जाता है। जब लोग उस दूषित भोजन और पानी का सेवन करते हैं, तो पूरे क्षेत्र में हैजा फैल जाता है। यही कारण है कि गुजरात में बाढ़ आने के बाद हैजा फैल गया होगा। स्वच्छता का अभाव बीमारियों के फैलने का मुख्य कारण है।
In simple words: बाढ़ से पानी और भोजन दूषित हो जाता है, जिससे हैजा फैलाने वाले कीटाणु पैदा होते हैं और बीमारी तेज़ी से फैल जाती है।

🎯 Exam Tip: बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बाद जल-जनित रोग, जैसे हैजा, फैलने का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि स्वच्छता और साफ पानी की उपलब्धता कम हो जाती है।

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

सही विकल्प का चयन कीजिए

 

Question 2. संक्रामक रोग का उदाहरण है
(अ) हैजा
(ब) एनीमिया
(स) जोड़ों का दर्द
(द) कैन्सर
Answer: (अ) हैजा
In simple words: हैजा एक संक्रामक रोग है क्योंकि यह दूषित पानी और भोजन से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।

🎯 Exam Tip: संक्रामक रोग वे होते हैं जो किसी माध्यम (जैसे हवा, पानी, संपर्क) से एक से दूसरे में फैलते हैं।

 

Question 3. छोटी माता (चिकन पॉक्स) का संचरण करने वाला वायरस है
(अ) वेरीसेला जोस्टर
(ब) राइनोवायरस
(स) प्लाज्मोडियम
(द) ई-कोलाई
Answer: (अ) वेरीसेला जोस्टर
In simple words: चिकन पॉक्स वेरीसेला जोस्टर नाम के वायरस से होता है, जो इसे बच्चों और वयस्कों में फैलाता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न रोगों के लिए जिम्मेदार विशिष्ट वायरस या बैक्टीरिया के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. एनीमिया में शरीर में किसकी कमी हो जाती है
(अ) रक्त में हीमोग्लोबिन की
(ब) विटामिन की।
(स) जल की
(द) खनिज लवणों की
Answer: (अ) रक्त में हीमोग्लोबिन की
In simple words: एनीमिया तब होता है जब खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है, जो ऑक्सीजन ले जाने के लिए जरूरी है।

🎯 Exam Tip: एनीमिया में हीमोग्लोबिन की कमी लोहे की कमी से जुड़ी होती है, इसलिए आयरन युक्त भोजन खाना और सप्लीमेंट लेना महत्वपूर्ण है।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

 

Question. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. पोलियो रोग का संचरण "और.............द्वारा होता है।
2. दस्त एवं पेचिश में 'घोल का । उपयोग किया जाता है।
3. सर्दी-जुकाम "द्वारा होता है।
4. की गोली कृमि से मुक्ति दिलाने में मदद करती है।

Answer:
1. पोलियो रोग का संचरण वायु और जल द्वारा होता है।
2. दस्त एवं पेचिश में ओ.आर.एस. घोल का उपयोग किया जाता है।
3. सर्दी-जुकाम वायरस द्वारा होता है।
4. अल्बेंडाजॉल की गोली कृमि से मुक्ति दिलाने में मदद करती है।
In simple words: पोलियो हवा और पानी से फैलता है, दस्त में ओ.आर.एस. घोल का प्रयोग होता है, सर्दी-जुकाम वायरस से होता है, और कृमि मुक्ति के लिए अल्बेंडाजॉल की गोली ली जाती है।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति करते समय, दिए गए विकल्पों को ध्यान से देखें और प्रत्येक वाक्य के लिए सबसे सटीक शब्द चुनें।

सुमेलित कीजिए

 

Question. सुमेलित कीजिए

कॉलम-1कॉलम-2
1. एनीमिया(अ) एल्बेंडाजॉल
2. स्वाइन फ्लू(ब) रक्त अल्पतता
3. कृमि संक्रमण(स) ओ.आर.एस. घोल
4. दस्त(द) टैमी फ्लू
Answer:
1. (ब) रक्त अल्पतता
2. (द) टैमी फ्लू
3. (अ) एल्बेंडाजॉल
4. (स) ओ.आर.एस. घोल
In simple words: एनीमिया का मतलब खून की कमी है, स्वाइन फ्लू का इलाज टैमी फ्लू से होता है, कृमि संक्रमण के लिए अल्बेंडाजॉल की दवा है, और दस्त में ओ.आर.एस. घोल दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: रोगों, उनके कारणों और उपचारों को याद रखने के लिए उन्हें एक तालिका के रूप में समझना और याद करना बहुत मददगार होता है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. एच.आई.वी. का चित्र बनाइए।
Answer:
आवरण ग्लाइको प्रोटीन प्रोटीन क्रोड और.एन.ए. रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज चित्र - HIV वायरस
In simple words: यह चित्र एच.आई.वी. वायरस की संरचना को दर्शाता है, जिसमें बाहरी आवरण, ग्लाइको प्रोटीन, अंदरूनी प्रोटीन क्रोड और आनुवंशिक सामग्री (RNA) तथा रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज एंजाइम होते हैं।

🎯 Exam Tip: किसी भी जैविक संरचना का चित्र बनाते समय, उसके मुख्य भागों को सही ढंग से दर्शाना और उन्हें स्पष्ट रूप से लेबल करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. टीके का क्या कार्य है?
Answer: टीके (वैक्सीन) का मुख्य कार्य शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा करना है। जब मृत या कमजोर सूक्ष्मजीवों को शरीर में डाला जाता है, तो शरीर की कोशिकाएँ उनके खिलाफ लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाती हैं। ये एंटीबॉडी भविष्य में उसी रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों से लड़ने में मदद करती हैं और बीमारी से बचाती हैं। टीकाकरण शरीर को रोग से लड़ने के लिए तैयार करता है।
In simple words: टीके शरीर को बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार करते हैं, जिससे हम बीमार नहीं पड़ते।

🎯 Exam Tip: टीके शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं, इसलिए बच्चों और वयस्कों के लिए नियमित टीकाकरण महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. एड्स के बचाव के उपाय लिखिए।
Answer: एड्स के बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं:
1. दाढ़ी बनाने के लिए हमेशा नई ब्लेड का ही उपयोग करना चाहिए।
2. रक्त चढ़ाने से पहले एच.आई.वी. की जाँच करवाना अनिवार्य है।
3. सिरिंज और इंजेक्शन की सुई को एक बार इस्तेमाल करने के बाद नष्ट कर देना चाहिए।
4. संयमित और सुरक्षित जीवन शैली अपनानी चाहिए।
एड्स एक गंभीर बीमारी है, इसलिए इसके बचाव के उपाय अपनाना बहुत जरूरी है।
In simple words: एड्स से बचने के लिए नई ब्लेड, जाँचा हुआ खून, एक बार इस्तेमाल होने वाली सुई का उपयोग करें और सुरक्षित जीवनशैली अपनाएँ।

🎯 Exam Tip: एड्स (AIDS) के बचाव के उपाय मुख्यतः संक्रमण के स्रोतों को नियंत्रित करने और सुरक्षित आदतों को अपनाने पर केंद्रित होते हैं।

 

Question 5. कैंसर रोग के लक्षण लिखिए।
Answer: कैंसर रोग के मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं:
1. जिस जगह कोशिका विभाजन बहुत तेज़ी से और अनियंत्रित तरीके से होता है, वहाँ एक गांठ बन जाती है।
2. शुरुआती अवस्था में गांठ में आमतौर पर कोई दर्द नहीं होता है।
3. बीमारी के बढ़ने पर (उच्च अवस्था में) गांठ में असहनीय दर्द होने लगता है।
4. कैंसर शरीर के विभिन्न अंगों में हो सकता है, जैसे जीभ, गले, हड्डियों, फेफड़ों और गर्भाशय में। कैंसर के लक्षण अक्सर धीरे-धीरे बढ़ते हैं और उन्हें पहचानना मुश्किल हो सकता है।
In simple words: कैंसर में शरीर में गांठ बनती है, शुरू में दर्द नहीं होता, लेकिन बढ़ने पर बहुत दर्द होता है, और यह शरीर के कई हिस्सों में हो सकता है।

🎯 Exam Tip: किसी भी असामान्य गांठ या लगातार दर्द को अनदेखा न करें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि शुरुआती पहचान कैंसर के उपचार में महत्वपूर्ण है।

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. कृमि संक्रमण चक्र को समझाइए। बच्चों की । सेहत पर कृमि के हानिकारक प्रभाव, कृमि संक्रमण के बचाव के तरीके व बच्चों को कृषि नियंत्रण से होने वाले फायदों को विस्तार से समझाइए।
अथवा
कृमि संक्रमण से होने वाले चार हानिकारक प्रभाव लिखते हुए बचाव के दो उपाय लिखिए तथा कृमि संक्रमण का रेखाचित्र बनाइए।
अथवा
कृमि संक्रमण से बचाव के चार तरीके (उपाय) लिखिए।

Answer:
कृमि संक्रमण चक्र:
कृमि संक्रमण एक चक्र के रूप में चलता है। यह तब शुरू होता है जब कृमि के अंडे मिट्टी में विकसित होते हैं। फिर, कोई व्यक्ति संक्रमित भोजन, गंदे हाथों या त्वचा के लार्वा के संपर्क में आने से संक्रमित हो जाता है। ये कृमि व्यक्ति की आंत में विकसित होते हैं और फिर अंडे मल के साथ बाहर निकल जाते हैं, जो फिर से मिट्टी में मिलकर चक्र को जारी रखते हैं। स्वच्छता की कमी इस चक्र को बढ़ावा देती है।
विकासत हा जाता ह और उस व्यक्ति की आंत में रहता है। अण्ड हात हाय अण्डे मिट्टी में विकसित हो जाते हैं। अन्य व्यक्ति संक्रमित भोजन से, गंदे हाथों से या फिर त्वचा के लार्वा (विकसित अण्डे) के सम्पर्क में आने से संक्रमित हो जाते हैं। चित्र - कृमि संक्रमण चक्र
बच्चों की सेहत पर कृमि के हानिकारक प्रभाव:
1. थकान और बेचैनी होना
2. भूख न लगना
3. पेट में दर्द, उल्टी और दस्त
4. मल में खून आना
5. खून की कमी
6. कुपोषण
7. पेट में सूजन
8. लगातार वजन में कमी होना
कृमि बच्चों के पोषण को बाधित कर उनकी वृद्धि और विकास को प्रभावित करते हैं।
कृमि संक्रमण से बचाव के तरीके:
1. खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ अच्छी तरह धोएँ।
2. फलों और सब्जियों को खाने से पहले पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए।
3. साफ और उबला पानी पीना चाहिए।
4. जूते पहनने चाहिए और नाखून छोटे व साफ रखने चाहिए।
5. खुली जगह की बजाय साफ शौचालय में शौच करें।
6. शौचालय के आसपास सफाई रखनी चाहिए।
बच्चों में कृमि नियंत्रण से फायदे:
कृमि नियंत्रण से बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर होता है, उनमें पोषण बढ़ता है, शारीरिक और मानसिक विकास अच्छा होता है, और वे स्कूल में बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं। यह बच्चों को स्वस्थ और सक्रिय रखने में मदद करता है।
In simple words: कृमि संक्रमण चक्र यह दिखाता है कि कृमि के अंडे कैसे फैलते हैं और लोगों को संक्रमित करते हैं। बच्चों को कृमि होने से थकान, भूख न लगना, पेट दर्द और खून की कमी हो सकती है। बचाव के लिए हाथ धोना, साफ पानी पीना और स्वच्छता रखना जरूरी है। कृमि नियंत्रण से बच्चों का स्वास्थ्य और पढ़ाई बेहतर होती है।

🎯 Exam Tip: कृमि संक्रमण चक्र, उसके प्रभाव और बचाव के तरीकों को चरण-दर-चरण समझना और चित्र के साथ समझाना आपको पूरे अंक दिलाएगा।

 

Question. निम्नलिखित को विस्तार से समझाइए
(i) हीमोफीलिया
(ii) खाद्य विषाक्तन
(iii) नाक रोग
(iv) एनीमिया
(v) कुष्ठ रोग।।

Answer:
(i) हीमोफीलिया: यह एक आनुवंशिक बीमारी है। यह रोग पुरुषों में लिंग गुणसूत्र (X) पर पाया जाता है और महिलाओं के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में चला जाता है। यह शरीर की रक्त जमावट प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
लक्षण:
(क) इस बीमारी में छोटी चोट लगने पर भी खून का बहना बंद नहीं होता है।
(ख) खून का थक्का नहीं जमता है।
(ग) अधिक खून बहने से मृत्यु भी हो सकती है।
उपचार: रोगी को समय पर खून चढ़ाकर या थक्के बनाने वाले कारकों को देकर इलाज किया जा सकता है।

(ii) खाद्य विषाक्तन: यह तब होता है जब सूक्ष्मजीवों द्वारा दूषित भोजन खाया जाता है। दूषित भोजन में सूक्ष्मजीव जहरीले पदार्थ बनाते हैं, जिससे भोजन विषैला हो जाता है।
लक्षण:
उल्टी होना, जी मिचलाना आदि।
बचाव: दूषित भोजन खाने से बचना चाहिए।
उपचार: तुरंत चिकित्सीय सलाह लेकर उचित इलाज करवाना चाहिए। समय पर इलाज से गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है।

(iii) नाक रोग: यह रोग सफेद धागे जैसे गोल कृमि के कारण होता है, जिनकी लंबाई 30 सेमी. से 125 सेमी. तक हो सकती है। साइक्लोप्स नामक सूक्ष्मजीव, पानी के माध्यम से स्वस्थ व्यक्ति में प्रवेश कर जाते हैं।
लक्षण:
(क) हाथ या पैर की त्वचा पर गांठें बन जाना।
(ख) मादा कृमि मांसपेशियों में विकसित होती है।
(ग) गांठ वाली जगह पर दर्द होना।
(घ) बुखार होना।
(ङ) कृमि के मरने से गांठें होना।
रोग का कारण: गंदा या दूषित पानी पीने से यह संक्रमण हो सकता है।

(iv) एनीमिया: शरीर में लोहे की कमी और रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी होने से एनीमिया रोग होता है। हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन ले जाने में मदद करता है।
लक्षण:
(क) चेहरा पीला पड़ जाना।
(ख) शरीर कमजोर हो जाना।
(ग) जल्दी थकना।
(घ) चक्कर आना।
(ङ) जीभ पर सफेद छाले होना।
बचाव: शारीरिक आवश्यकता के अनुसार पौष्टिक आहार लेना, जैसे अंकुरित दालें, अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, अंजीर, चुकंदर, तिल आदि खाना।
उपचार: डॉक्टर की सलाह से आयरन की गोलियाँ लेना चाहिए।

(v) कुष्ठ रोग: यह रोग रोगी से लगातार संपर्क में रहने से फैलता है। इसे 'हैन्सन रोग' के नाम से भी जाना जाता है।
लक्षण:
(क) त्वचा पर चकत्ते (धब्बे) पड़ना।
(ख) चकत्तों का सुन्न होना (संवेदनहीनता)।
(ग) संक्रमण बढ़ने से संक्रमित अंगों का काम न करना।
(घ) उंगलियों में विकृति होना।
बचाव:
(क) ऐसे रोगियों को अलग रखा जाना चाहिए।
(ख) रोगियों की चीजें अलग रखी जानी चाहिए।
(ग) रोगी के कपड़ों को डेटॉल आदि से धोना चाहिए।
उपचार:
(क) शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन)।
(ख) टीकाकरण।
(ग) यदि अंग बहुत खराब हो गया है तो कृत्रिम अंग लगाना।
In simple words: हीमोफीलिया खून न जमने वाली आनुवंशिक बीमारी है। खाद्य विषाक्तन दूषित भोजन से होता है, जिसमें उल्टी होती है। नाक रोग एक प्रकार का कृमि संक्रमण है जो गंदे पानी से फैलता है। एनीमिया खून में हीमोग्लोबिन की कमी से होता है, जिससे कमजोरी आती है। कुष्ठ रोग संपर्क से फैलता है, त्वचा पर चकत्ते और अंग विकृति इसके लक्षण हैं।

🎯 Exam Tip: इन सभी रोगों के लिए उनके कारणों, लक्षणों, बचाव के उपायों और उपचारों को अलग-अलग समझना और याद रखना जरूरी है, खासकर आनुवंशिक और संक्रामक रोगों के बीच के अंतर को पहचानना।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 2. निम्न में से हैजा रोग का जीवाणु है
(अ) साल्मोनेला टाइफो
(ब) विब्रिया कोलेरो
(स) बैरोसोल्म जोस्टर
(द) ई-कोलाई
Answer: (ब) विब्रिया कोलेरो
In simple words: हैजा बीमारी विब्रिया कोलेरो नाम के जीवाणु से फैलती है, जो मुख्य रूप से दूषित पानी में पाया जाता है।

🎯 Exam Tip: जीवाणु से होने वाली बीमारियों के नाम और उनके जिम्मेदार जीवाणु के नाम याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. ई कोलाई नामक जीवाणु से कौनसा रोग होता।
(अ) मलेरिया
(ब) दुत
(स) एड्स
(द) टाइफाइड
Answer: (ब) दुत
In simple words: ई. कोलाई बैक्टीरिया से आमतौर पर दस्त या पेट से जुड़ी बीमारियाँ होती हैं।

🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि विभिन्न बैक्टीरिया शरीर में किस प्रकार के रोग उत्पन्न करते हैं, खासकर आंतों से संबंधित रोग।

 

Question 4. टाइफाइडरोग के जौवाणु का नाम क्या है?
(अ) सालमोनेल को
(ब) माइक्रोबैक्टीरियस
(स) राइनी वापस ।
(द)) ई-कोलाई
Answer: (अ) सालमोनेल को
In simple words: टाइफाइड रोग सालमोनेला टाइफी नामक बैक्टीरिया के कारण होता है, जो दूषित भोजन और पानी से फैलता है।

🎯 Exam Tip: टाइफाइड के जीवाणु का नाम याद रखें, जो साल्मोनेला टाइफी है, यह एक सामान्य प्रश्न है।

 

Question. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. एस . वाइरस के कारण फैलता है। (चौ.ए.एच./एच.आई.वी.)
2. डेंगू एह" 'बीमारी है। (वायरल/आनुवंशिक)
3. डेंगू बुखार मच्छर के करने से होता | है। (एडिस इजिप्टी/एनोफीलिज)
4. नारु रोग सफेद धागों के समान हरा होता है। (चपटे कृमि/गोल कृमि)
5. नारु रोग का संचरण द्वारा होता है। (जल / हवा)

Answer:
1. एस . एच.आई.वी. वाइरस के कारण फैलता है। (चौ.ए.एच./एच.आई.वी.)
2. डेंगू वायरल बीमारी है। (वायरल/आनुवंशिक)
3. डेंगू बुखार एडिस इजिप्टी मच्छर के करने से होता है। (एडिस इजिप्टी/एनोफीलिज)
4. नारु रोग सफेद धागों के समान गोल कृमि हरा होता है। (चपटे कृमि/गोल कृमि)
5. नारु रोग का संचरण जन (लोगों) द्वारा होता है। (जल / हवा)
In simple words: एच.आई.वी. वायरस से एड्स होता है, डेंगू वायरल बीमारी है जो एडिस इजिप्टी मच्छर से फैलती है। नारु रोग गोल कृमि से होता है और यह लोगों के संपर्क से फैलता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न रोगों के कारण, संचरण के तरीके और उनके प्रकार (वायरल, आनुवंशिक) को स्पष्ट रूप से याद रखें।

 

Question. बताइए निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य
1. संक्रामक रोग एक रोगी के व्यस्थ व्यक्ति के सम्पर्क में आने से फैलते हैं।
2.. एड्स रोग रोगी से निरन्तर स्पर्श द्वारा फैलता है।
3.. कैसर एक आनुवंशिक रोग है।
4. रक में हीमोग्लोबिन की कमी से एमिया रोग हों आता है।
5. पोलियो ड्रॉप्स बच्चों को पोलियो रोग से बचाता है।
6. हैपेटइटिस रोग को टोके द्वारा रोको आ सकता है।

Answer:
1. सत्य
2. असत्य
3. असत्य
4. सत्य
5. सत्य
6. सत्य।
In simple words: संक्रामक रोग संपर्क से फैलते हैं, एड्स सीधे संपर्क से नहीं फैलता (बल्कि विशिष्ट तरीकों से), कैंसर आनुवंशिक नहीं है (ज्यादातर), खून में हीमोग्लोबिन की कमी से एनीमिया होता है, पोलियो ड्रॉप्स पोलियो से बचाती हैं, और हेपेटाइटिस को टीके से रोका जा सकता है।

🎯 Exam Tip: रोगों के संचरण के तरीके और उनकी रोकथाम के उपायों के बारे में सही जानकारी होना महत्वपूर्ण है। सत्य/असत्य प्रश्नों में अक्सर सामान्य गलतफहमियों का परीक्षण किया जाता है।

सही मिलान कीजिए

 

Question 1. अग्नांकित का सही मिलान कीजिए

कॉलम 'A'कॉलम 'B'
1. पोलियो(A) साल्मोनेला टाइफी
2. टायफाइड(B) विब्रियो कॉलेरा
3. हैजा(C) पोलियो वायरस
4. कुष्ठ रोग(D) प्लाज्मोडियम प्राटाजा
5. मलेरिया(E) राइनोवायरस
Answer:
1. (C) पोलियो वायरस
2. (A) साल्मोनेला टाइफी
3. (B) विब्रियो कॉलेरा
4. (E) राइनोवायरस
5. (D) प्लाज्मोडियम प्राटाजा
In simple words: पोलियो पोलियो वायरस से, टाइफाइड साल्मोनेला टाइफी से, हैजा विब्रियो कॉलेरा से, कुष्ठ रोग राइनोवायरस से और मलेरिया प्लाज्मोडियम प्राटाजा से होता है।

🎯 Exam Tip: रोगों और उनके जिम्मेदार सूक्ष्मजीवों के नाम याद करने से आपको मैचिंग प्रश्नों में सही उत्तर देने में मदद मिलेगी।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. हम रोगो कैसे हो जाते हैं।
Answer: हमारा शरीर लगातार कई जैविक क्रियाएँ करता रहता है। जब इन क्रियाओं में कोई गड़बड़ी या रुकावट आती है, तो हम बीमार हो जाते हैं। बीमारी शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली में बाधा का संकेत है।
In simple words: जब शरीर के अंदर की सामान्य प्रक्रियाएँ ठीक से काम नहीं करतीं, तो हम बीमार पड़ जाते हैं।

🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि बीमारी केवल लक्षणों की उपस्थिति नहीं है, बल्कि शरीर के आंतरिक संतुलन या कार्यप्रणाली में व्यवधान का परिणाम है।

 

Question 2. संक्रामक रोग किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
Answer: वे रोग जो एक बीमार व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलते हैं, संक्रामक रोग कहलाते हैं। ये रोग वायरस, बैक्टीरिया या अन्य सूक्ष्मजीवों के कारण होते हैं।
उदाहरण: हैजा, टाइफाइड, टी.बी. (क्षय रोग) आदि। ये बीमारियाँ आसानी से एक से दूसरे में फैल सकती हैं।
In simple words: संक्रामक रोग वे होते हैं जो एक बीमार व्यक्ति से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति तक फैल सकते हैं, जैसे हैजा और टाइफाइड।

🎯 Exam Tip: संक्रामक रोगों के प्रमुख उदाहरण और उनके फैलने के तरीकों को हमेशा याद रखें।

 

Question 3. असंक्रामक रोग किसे कहते हैं? उदाहरण दी
Answer: वे रोग जो एक व्यक्ति (रोगी) से दूसरे व्यक्ति (स्वस्थ) के संपर्क में आने से नहीं फैलते हैं, असंक्रामक रोग कहलाते हैं। ये रोग आमतौर पर जीवनशैली, आनुवंशिकी या पर्यावरणीय कारकों से जुड़े होते हैं, न कि संक्रामक एजेंटों से।
उदाहरण: कैंसर, जोड़ों का दर्द आदि।
In simple words: असंक्रामक रोग वे होते हैं जो एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलते, जैसे कैंसर या जोड़ों का दर्द।

🎯 Exam Tip: संक्रामक और असंक्रामक रोगों के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें, क्योंकि यह रोगों के प्रकारों को वर्गीकृत करने की एक मूलभूत अवधारणा है।

 

Question 5. क्षय रोग के लक्षण हैं?
Answer: क्षय रोग (टी.बी.) के मुख्य लक्षण हैं:
1. भूख न लगना।
2. वजन कम होना।
3. कमजोरी महसूस होना।
4. थूक के साथ खून आना।
5. साँस फूलना।
6. फेफड़ों का प्रभावित होना।
ये लक्षण धीरे-धीरे उभरते हैं और लंबे समय तक बने रहते हैं, जिससे बीमारी की गंभीरता बढ़ सकती है।
In simple words: क्षय रोग में भूख और वजन कम होते हैं, कमजोरी आती है, खून वाली खाँसी आती है और साँस लेने में दिक्कत होती है।

🎯 Exam Tip: क्षय रोग के लक्षणों को जल्दी पहचानना और तुरंत उपचार शुरू करना इसके फैलाव और गंभीर परिणामों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. हैजा कौनसे जीवाणुओं से फैलता है? इसके लक्षण क्या हैं?
Answer: हैजा विब्रियो कॉलेरा नामक जीवाणु से फैलता है।
इसके मुख्य लक्षण हैं:
1. उल्टी और दस्त होना।
2. मांसपेशियों में ऐंठन।
3. शरीर में पानी की कमी।
4. बहुत ज़्यादा प्यास लगना।
5. बुखार आना।
पानी की कमी हैजा का सबसे खतरनाक लक्षण है क्योंकि यह तेज़ी से डीहाइड्रेशन का कारण बन सकता है।
In simple words: हैजा विब्रियो कॉलेरा से फैलता है, इसके लक्षणों में उल्टी, दस्त, मांसपेशियों में ऐंठन, शरीर में पानी की कमी और बुखार शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: हैजा के जीवाणु का नाम और मुख्य लक्षणों को याद रखें, खासकर शरीर में पानी की कमी, जो इस बीमारी में जानलेवा हो सकती है।

 

Question 7. टायफाइड रोग के क्या लक्षण हैं? इसके क्या बचाव हैं।
Answer: टाइफाइड रोग के मुख्य लक्षण हैं:
1. छोटी आंत में संक्रमण।
2. लगातार बुखार रहना।
3. कब्ज होना।
4. धीमी हृदय गति।
5. जीभ पर चकत्ते होना।
बचाव:
1. भोजन और पानी को शुद्ध रखना चाहिए।
2. मल-मूत्र का विसर्जन उचित स्थान पर करना चाहिए।
टाइफाइड दूषित भोजन और पानी से फैलता है, इसलिए स्वच्छता का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है।
In simple words: टाइफाइड में आंत में संक्रमण, लगातार बुखार और कब्ज होता है। इससे बचने के लिए साफ भोजन और पानी का सेवन करें, और सही जगह शौच करें।

🎯 Exam Tip: टाइफाइड के लक्षणों और जल-जनित रोगों से बचने के लिए व्यक्तिगत और सार्वजनिक स्वच्छता के महत्व को समझें।

 

Question 8. पोलियो रोग के क्या लक्षण हैं।
Answer: पोलियो रोग के मुख्य लक्षण हैं:
1. रीढ़ की हड्डी (मेरु रज्जू), मस्तिष्क और पैरों का प्रभावित होना।
2. मांसपेशियों का सिकुड़ना।
3. हाथ-पैरों का धीमा विकास।
पोलियो वायरस तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है, जिससे लकवा हो सकता है।
In simple words: पोलियो में रीढ़ की हड्डी, दिमाग और पैर प्रभावित होते हैं, मांसपेशियाँ सिकुड़ती हैं और हाथ-पैर कमजोर हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: पोलियो के मुख्य लक्षणों और विशेष रूप से इसके तंत्रिका तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. पोलियो रोग से बचाव क्या है? उपचार भी
Answer: पोलियो रोग से बचाव का सबसे अच्छा तरीका पोलियो की दवा पिलाना (टीकाकरण) है।
उपचार के लिए, ऑपरेशन, जयपुर फुट जैसे कृत्रिम अंगों का उपयोग और फिजियोथेरेपी (भौतिक चिकित्सा) सहायक होती है। पोलियो का बचाव बचपन में ही टीकाकरण से संभव है।
In simple words: पोलियो से बचाव के लिए बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलानी चाहिए। अगर रोग हो जाए, तो ऑपरेशन और फिजियोथेरेपी से इलाज किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: पोलियो को रोकने के लिए टीकाकरण सबसे प्रभावी तरीका है; उपचार इसके प्रभावों को कम करने पर केंद्रित होता है।

 

Question 10. कृमिकारक रोगों के नाम बताओ।
Answer: कृमिकारक रोग वे होते हैं जो शरीर में कृमि (कीड़ों) के संक्रमण से होते हैं।
कुछ कृमिकारक रोगों के नाम हैं: नारु (बाला) रोग, कुष्ठ रोग, एड्स, हेपेटाइटिस ए, विषाक्तन, स्वाइन फ्लू आदि। इन रोगों का कारण विभिन्न प्रकार के परजीवी कृमि या अन्य सूक्ष्मजीव होते हैं।
In simple words: कृमि रोग वह होते हैं जो पेट के कीड़े या अन्य परजीवी के कारण होते हैं, जैसे नारु रोग, कुष्ठ रोग और एड्स।

🎯 Exam Tip: कृमिजनित रोगों के नाम याद करते समय, उनके सामान्य लक्षणों और बचाव के उपायों को भी ध्यान में रखें।

 

Question 12. कुछ रोग के लक्षण क्या हैं?
Answer: कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) के मुख्य लक्षण हैं:
1. त्वचा पर सुन्न (संवेदनहीन) चकत्ते पड़ना।
2. संक्रमण बढ़ने से संक्रमित अंग काम नहीं करते।
3. उंगलियाँ विकृत हो जाती हैं।
यह एक पुरानी संक्रामक बीमारी है जो माइकोबैक्टीरियम लेप्रे नामक बैक्टीरिया के कारण होती है।
In simple words: कुष्ठ रोग में त्वचा पर सुन्न धब्बे पड़ते हैं, संक्रमित अंग काम नहीं करते और उंगलियाँ टेढ़ी हो जाती हैं।

🎯 Exam Tip: कुष्ठ रोग के लक्षणों को पहचानना महत्वपूर्ण है, खासकर त्वचा पर संवेदनहीन धब्बे, जो बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

 

Question 13. एस रोग के क्या प्रभाव होते हैं? कोई तीन लिए।
Answer: एड्स (AIDS) रोग के मुख्य तीन प्रभाव हैं:
1. लसिका ग्रंथियों में सूजन होना।
2. प्लेटलेट्स की संख्या में कमी आना।
3. रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) का बहुत कम हो जाना।
एड्स शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है, जिससे व्यक्ति अन्य संक्रमणों और बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।
In simple words: एड्स से शरीर में गांठें सूज जाती हैं, प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं और बीमारी से लड़ने की शक्ति बहुत घट जाती है।

🎯 Exam Tip: एड्स के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का गंभीर रूप से कम होना इसका सबसे खतरनाक प्रभाव है, जिससे अन्य संक्रमणों का खतरा बढ़ जाता है।

 

Question 14. कैंसर का बचाव एवं उपचार क्या हैं?
Answer: यदि कैंसर का शुरुआती अवस्था में पता चल जाए, तो रोगी को ठीक किया जा सकता है। शुरुआती पहचान से बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है।
ग्रसित अंग को शरीर से निकालकर बचाया जा सकता है।
कैंसर के मुख्य उपचार हैं: शल्य क्रिया (सर्जरी), कोबाल्ट रेडियोथेरेपी (विकिरण चिकित्सा) और कीमोथेरेपी। ये सभी उपचार डॉक्टर की सलाह पर किए जाते हैं।
In simple words: कैंसर का जल्दी पता लगने पर इसे ठीक किया जा सकता है। इसके इलाज में ऑपरेशन, रेडिएशन और कीमोथेरेपी शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: कैंसर के उपचार में शुरुआती पहचान और मल्टीपल थेरेपी (जैसे सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी) का संयोजन बहुत महत्वपूर्ण है।

 

Question 15. होमोफीलिया रोग क्या हैं?
Answer: हीमोफीलिया एक आनुवंशिक रोग है। इस रोग के जीन पुरुषों के लिंग गुणसूत्र (X) पर पाए जाते हैं और यह रोग महिलाओं के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में चला जाता है। इस बीमारी में खून के थक्के बनने की प्रक्रिया बाधित होती है, जिससे छोटी सी चोट पर भी अधिक रक्तस्राव हो सकता है।
In simple words: हीमोफीलिया एक खानदानी बीमारी है जो पुरुषों में होती है, जिसमें खून का थक्का नहीं जमता और चोट लगने पर ज्यादा खून बहता है।

🎯 Exam Tip: हीमोफीलिया के आनुवंशिक स्वरूप और इसके रक्त जमावट पर पड़ने वाले प्रभाव को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 16. एनीमिया रोग क्या हैं?
Answer: एनीमिया रोग तब होता है जब शरीर में लोहे तत्व की कमी हो जाती है, और खून में हीमोग्लोबिन की भी कमी हो जाती है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला प्रोटीन है जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन ले जाने का काम करता है।
In simple words: एनीमिया वह बीमारी है जिसमें शरीर में खून की और हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है।

🎯 Exam Tip: एनीमिया को रोकने के लिए आयरन से भरपूर आहार लेना और नियमित रूप से स्वास्थ्य की जाँच करवाना महत्वपूर्ण है।

 

Question 18. कौनसी बीमारियों को टोके (वैक्सोन) द्वारा रोक सकते हैं?
Answer: कई बीमारियों को टीके (वैक्सीन) द्वारा रोका जा सकता है।
उदाहरण के लिए, हैजा, क्षय रोग (टी.बी.), चेचक, हेपेटाइटिस जैसी अनेक बीमारियों को टीके द्वारा रोका जा सकता है। टीके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करके रोगों से लड़ने में मदद करते हैं।
In simple words: हैजा, टी.बी., चेचक, हेपेटाइटिस जैसी कई बीमारियों को टीकों की मदद से रोका जा सकता है।

🎯 Exam Tip: टीकाकरण एक प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय है जो कई गंभीर संक्रामक रोगों को रोकने में मदद करता है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. रोग कितने प्रकार के होते हैं? उदाहरण सहित बताए।
Answer: रोग मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
1. संक्रामक रोग: वे रोग जो एक बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने से स्वस्थ व्यक्ति में फैलते हैं। ये वायु, जल, भोजन, और संपर्क से फैलते हैं।
उदाहरण: हैजा, टाइफाइड, क्षय रोग, सर्दी, जुकाम आदि।
2. असंक्रामक रोग: वे रोग जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने से नहीं फैलते हैं। ये रोग जीवनशैली, आनुवंशिकी या पर्यावरणीय कारणों से उत्पन्न होते हैं।
उदाहरण: कैंसर, जोड़ों का दर्द आदि।
यह वर्गीकरण रोगों की प्रकृति और उनके फैलने के तरीके को समझने में मदद करता है।
In simple words: रोग दो तरह के होते हैं: संक्रामक (जो फैलते हैं, जैसे हैजा) और असंक्रामक (जो नहीं फैलते, जैसे कैंसर)।

🎯 Exam Tip: रोगों के प्रकारों को उनके फैलने के तरीकों के आधार पर याद रखें, क्योंकि यह रोकथाम और उपचार के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. मनुष्य में होने वाले सामान्य रोगों की सूची बनाए।
Answer: मनुष्य में होने वाले कुछ सामान्य रोग निम्नलिखित हैं:
1. क्षय रोग (टी.बी.)
2. हैजा
3. टाइफाइड
4. पोलियो
5. रेबीज
6. छोटी माता (चिकन पॉक्स)
7. खसरा
8. सर्दी, जुकाम
9. दस्त एवं पेचिश
10. मलेरिया
ये रोग विभिन्न कारणों से होते हैं और विश्व भर में लोगों को प्रभावित करते हैं।
In simple words: इंसानों में आम बीमारियाँ जैसे टी.बी., हैजा, टाइफाइड, पोलियो, रेबीज, चिकन पॉक्स, खसरा, सर्दी-जुकाम, दस्त और मलेरिया होती हैं।

🎯 Exam Tip: बीमारियों की एक सामान्य सूची तैयार करना और उनके मुख्य लक्षणों को याद रखना रोगों की पहचान और समझ में मदद करता है।

 

Question 4. टायफाइड एवं पोलियो रोग के बारे में संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
Answer:

क्र.सं.रोग का नामरोगकारक सूक्ष्म जीवसंचरण का माध्यमलक्षणबचाव के उपायउपचार
1.टायफाइडसाल्मोनेला टाइफी जीवाणुजलछोटी आंत में संक्रमण
बुखार
शरीर में दर्द
हृदय में धीमा स्पन्दन
लाल चकत्ते
भोजन एवं जल को शुद्ध रखना,
मल एवं दूषित पदार्थों का उचित स्थान पर विसर्जन
आराम करना,
चिकित्सक की सलाह पर टीके एवं दवाई
2.पोलियोपोलियो वायरसवायु/जलमेरु रज्जू, मस्तिष्क एवं पैर प्रभावित
मांसपेशियों का सिकुड़ना
हाथ-पैर का धीमा विकास
पोलियो की दवा पिलाकरचिकित्सकीय निर्देशानुसार ऑपरेशन,
जयपुर फुट का उपयोग एवं फिजियोथैरेपी कराना
टायफाइड साल्मोनेला टाइफी जीवाणु से फैलता है, जबकि पोलियो पोलियो वायरस से फैलता है। दोनों ही बीमारियाँ दूषित पानी या हवा से फैल सकती हैं, इसलिए साफ-सफाई रखना बहुत ज़रूरी है.
In simple words: टायफाइड और पोलियो दोनों ही खतरनाक बीमारियाँ हैं जो जीवाणु और वायरस से फैलती हैं. इनकी रोकथाम के लिए साफ पानी पीना और टीके लगवाना ज़रूरी है.

🎯 Exam Tip: जब रोगों की जानकारी तालिका में पूछी जाए, तो कारण, लक्षण, बचाव और उपचार के मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट रूप से लिखें.

 

Question 5. रैबीज रोग के कारण, बचाव, लक्षणों आदि के बारे में बताइए।
Answer:रैबीज रोग का कारण: यह रोग संक्रमित कुत्ते, बंदर, लोमड़ी जैसे जानवरों की लार में मौजूद वायरस से होता है, जो उनके काटने से फैलता है। लक्षण: इस रोग के लक्षणों में तेज बुखार, सिर दर्द, बेचैनी, गले में रुकावट महसूस होना और पानी से डर लगना शामिल हैं। ये लक्षण वायरस के दिमाग तक पहुँचने पर दिखाई देते हैं। बचाव: आवारा कुत्तों और बिल्लियों को रोकना चाहिए। पालतू और आवारा जानवरों का टीकाकरण करवाना भी इस बीमारी से बचने का एक अच्छा तरीका है।In simple words: रैबीज संक्रमित जानवरों के काटने से फैलता है, जिससे बुखार और पानी से डर जैसे लक्षण होते हैं। इससे बचने के लिए जानवरों का टीकाकरण करवाएं और आवारा जानवरों से दूर रहें।

🎯 Exam Tip: रैबीज जैसे रोगों के लिए, संक्रमण के तरीके (जानवरों के काटने), खास लक्षण (जैसे पानी से डर) और टीकाकरण जैसे बचाव के उपाय याद रखें.

 

Question 7. मलेरिया रोग से बचाव के कोई चार उपाय लिखिए।
Answer: मलेरिया रोग से बचाव के चार मुख्य उपाय इस प्रकार हैं: 1. अपने घर के आस-पास पानी जमा न होने दें ताकि मच्छर पैदा न हो सकें। रुके हुए पानी में मच्छर अंडे देते हैं। 2. मच्छरों को खत्म करने के लिए कीटनाशकों का छिड़काव करना चाहिए। 3. शाम के समय फॉगिंग करवानी चाहिए, जिससे मच्छर मर जाते हैं। 4. मच्छरदानी का इस्तेमाल करना चाहिए, खासकर सोते समय, ताकि मच्छर काट न सकें।In simple words: मलेरिया से बचने के लिए, पानी जमा न होने दें, मच्छरों को मारें, फॉगिंग करवाएं और मच्छरदानी का उपयोग करें।

🎯 Exam Tip: मलेरिया जैसे वेक्टर-जनित रोगों के बचाव के उपायों में हमेशा मच्छरों को पनपने से रोकना और उनके काटने से बचाव शामिल करें.

 

Question 1. एड्स (AIDS) रोग होने के चार कारण लिखते हुए इसके बचाव के दो उपाय लिखिए। एचआईवी (HIV) वायरस का नामांकित चित्र भी बनाइए।
Answer:एड्स (AIDS) का पूरा नाम एक्वायर्ड इम्युनो डेफिसिएन्सी सिन्ड्रोम (Acquired Immuno Deficiency Syndrome) है। यह एक जानलेवा बीमारी है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को खत्म कर देती है। एड्स रोग होने के मुख्य कारण: 1. यह रोग मुख्य रूप से एचआईवी (HIV) वायरस के कारण फैलता है। 2. असुरक्षित यौन संबंध बनाने से यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में जा सकता है। 3. एक ही सुई का बार-बार इस्तेमाल करने या इंजेक्शन लगाते समय दूषित सुई का उपयोग करने से भी यह फैल सकता है। 4. संक्रमित ब्लेड, उस्तरे या नाई द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले धारदार औजारों से भी यह रोग फैल सकता है। एड्स से बचाव के उपाय: 1. दाढ़ी बनाने के लिए दूसरे व्यक्ति द्वारा उपयोग की गई ब्लेड का इस्तेमाल न करें। 2. एच.आई.वी. संक्रमित रक्त किसी को न चढ़ाएं। 3. इस्तेमाल की हुई सीरिंज और इंजेक्शन की सुई को एक बार प्रयोग करने के बाद नष्ट कर दें। 4. संयमित जीवनशैली अपनानी चाहिए। एड्स से बचाव ही इसका उपचार है। U ग्लाइको प्रोटीन आवरण प्रोटीन क्रोड आर.एन.ए. ट्रांसक्रिप्टेज चित्र - HIV वायरसIn simple words: एड्स एचआईवी वायरस से फैलता है, जो असुरक्षित संबंधों या संक्रमित सुइयों से फैल सकता है। इसका कोई इलाज नहीं है, इसलिए सावधान रहना और बचाव के उपाय अपनाना बहुत ज़रूरी है।

🎯 Exam Tip: एड्स जैसे गंभीर रोगों के लिए, पूरा नाम, फैलने के तरीके, बचाव के उपाय और वायरस का नामांकित चित्र बनाना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. निम्न रोगों के बारे में विस्तार से समझाइए
(i) खसरा
(ii) मलेरिया
(iii) कैंसर
(iv) हिपेटाइटिस A
Answer:
(i) खसरा: यह वायरस से फैलने वाला एक आम रोग है जो हवा के ज़रिए एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है। इसके लक्षणों में पूरे शरीर पर लाल दाने, खुजली और जलन शामिल हैं। इस रोग के दौरान मरीज को अलग रखना चाहिए और उसकी निजी चीज़ों को भी अलग रखना चाहिए। इसका उपचार एंटीसेप्टिक क्रीम लगाकर और डॉक्टर की सलाह से दवाइयाँ लेकर किया जा सकता है। (ii) मलेरिया: यह रोग प्लाज्मोडियम नामक प्रोटोजोआ से होता है, जो मादा एनोफिलीस मच्छर के काटने से फैलता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, कंपकंपी के साथ बुखार जो एक निश्चित समय के बाद आता है, शरीर में दर्द, बहुत प्यास लगना, चेहरा लाल होना, लीवर और प्लीहा में सूजन, और कमजोरी शामिल हैं। इस रोग से बचने के लिए घर के आसपास मच्छर पैदा न होने दें, फॉगिंग करवाएं और मच्छरदानी का उपयोग करें। उपचार के लिए रक्त की जांच करवाएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां लें। (iii) कैंसर: कैंसर एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है। रोग का कारण: 1. कोशिका विभाजन की गति जब अनियंत्रित हो जाती है, तो उस जगह पर एक गांठ बन जाती है। 2. प्रारंभिक अवस्था में इस गांठ में कोई दर्द नहीं होता है। 3. उन्नत अवस्था में इस गांठ में असहनीय दर्द होता है। 4. यह रोग जीभ, कंठ, हड्डी, फेफड़े और गर्भाशय जैसे कई अंगों में हो सकता है। बचाव: यदि इस रोग का प्रारंभिक अवस्था में पता चल जाए, तो कीमोथैरेपी से रोगी को बचाया जा सकता है। ज़रूरत पड़ने पर संक्रमित हिस्से को निकालकर भी बचाया जा सकता है। शल्य क्रिया, कोबाल्ट रेडियोथेरपी और कीमोथैरेपी से इसका इलाज किया जाता है। (iv) हिपेटाइटिस A: यह रोग वायरस के माध्यम से दूषित पानी और भोजन से फैलता है। लक्षण: (क) लीवर कमजोर हो जाता है। (ख) लीवर में पानी भर जाता है। (ग) पाचन शक्ति कम हो जाती है। बचाव: (क) हमेशा उबला हुआ पानी पीना चाहिए। (ख) समय पर टीकाकरण करवाना चाहिए। उपचार: एंटीबायोटिक दवाइयाँ डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेनी चाहिए।In simple words: खसरा और मलेरिया संक्रमण से फैलते हैं, जबकि कैंसर शरीर में कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि से होता है। हिपेटाइटिस A लीवर को प्रभावित करता है और दूषित पानी से फैलता है।

🎯 Exam Tip: रोगों के बारे में विस्तार से बताते समय, उनके कारण, लक्षण, बचाव और उपचार के मुख्य बिंदुओं को क्रम से लिखें.

 

Question 3. डेंगू बुखार पर एक लेख लिखा।
Answer:डेंगू बुखार: यह एक वायरल बीमारी है जो डेंगू वायरस के चार प्रकारों में से किसी एक से होती है। प्रसार: डेंगू बुखार संक्रमित मादा एडीस इजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। कारण: (क) घर के आसपास गंदे और रुके हुए पानी में मच्छर पनपते हैं। (ख) मच्छरों के काटने से यह वायरस फैलता है। (ग) शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती है। (घ) घर में रखे गड्डों और कूलरों में भरे पानी में मच्छर पनपते हैं। लक्षण: संक्रमित मच्छर के काटने के तीन से चौदह दिनों के बाद डेंगू बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं, जो इस प्रकार हैं: (क) तेज ठंड लगकर बुखार आना और सिर दर्द होना। (ख) प्रारंभिक अवस्था में गांठ में दर्द नहीं होता है। (ग) शरीर और मांसपेशियों में असहनीय दर्द होना। (घ) आँखों के पीछे दर्द होना। (ङ) त्वचा पर लाल चकत्ते (रैशेस) पड़ना। (च) थकान और कमजोरी महसूस होना। बचाव के उपाय: 1. घर और आसपास पानी जमा न होने दें। 2. घर में कीटनाशक का छिड़काव करें। 3. कूलर में पानी जमा न होने दें और उसे सूखा रखें। 4. खिड़की-दरवाजों पर जाली लगवाएं। 5. शरीर को पूरी तरह से ढक कर रखें। 6. रात को सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। 7. मच्छरों से बचाव के लिए क्रीम आदि का प्रयोग करें। 8. अपने आसपास के लोगों को मच्छरों के फैलाव को रोकने के लिए प्रोत्साहित करें। 9. अपने परिवेश को साफ रखें और मरीज का पता लगने पर इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को दें। उपचार: 1. रोगी को डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेकर आराम करना चाहिए। 2. रोगी को पर्याप्त मात्रा में आहार और पानी लेना चाहिए। 3. नियमित रूप से प्लेटलेट्स की जांच करवानी चाहिए। 4. पपीते के पत्ते का रस पीना चाहिए, इससे प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ती है।In simple words: डेंगू बुखार मच्छर के काटने से फैलने वाला एक वायरल रोग है, जिसके लक्षणों में तेज बुखार और शरीर में दर्द शामिल हैं। इससे बचने के लिए पानी जमा न होने दें और मच्छरों से खुद को बचाएं।

🎯 Exam Tip: डेंगू जैसे रोगों के लिए, वाहक (मच्छर), फैलने के कारण, लक्षण और रोकथाम के उपायों को विस्तार से समझाना ज़रूरी है.

 

Question 4. स्वाइन फ्लू क्यों होता है? स्वाइन फ्लू की रोकथाम के चार उपाय लिखिए। टीका (वैक्सीन) द्वारा की जाने वाली दो बीमारियों के नाम लिखिए।
Answer:स्वाइन फ्लू: स्वाइन फ्लू एक संक्रामक रोग है। यह H1N1 वायरस के कारण होता है। स्वाइन फ्लू रोग होने के कारण: 1. यह संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है। 2. गंदे और संक्रमित हाथों से यह आसानी से फैल सकता है। स्वाइन फ्लू की रोकथाम के उपाय: 1. अपने हाथों को बार-बार साबुन से अच्छी तरह धोएं। 2. खांसते और छींकते समय मुंह और नाक को टिशु पेपर या रुमाल से ढकें। 3. भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। 4. बीमार होने पर घर पर रहें और आराम करें। टीके (वैक्सीन) द्वारा रोकी जा सकने वाली दो बीमारियाँ: 1. हैजा 2. चेचक स्वाइन फ्लू को रोकने के लिए अच्छी साफ-सफाई, बीमार लोगों से दूरी और जरूरत पड़ने पर टीकाकरण बहुत जरूरी है।In simple words: स्वाइन फ्लू वायरस से फैलता है और खांसने या छूने से फैल सकता है। इसे रोकने के लिए हाथ धोएं, मुंह ढकें और भीड़ से बचें। टीके हैजा और चेचक जैसी बीमारियों को रोकते हैं।

🎯 Exam Tip: संक्रामक रोगों के लिए, फैलने के तरीके और रोकथाम के उपाय हमेशा मुख्य बिंदु होते हैं। टीकाकरण से रोकी जा सकने वाली बीमारियों के नाम याद रखना भी ज़रूरी है.

 

Question. टीकाकरण एवं टीका से क्या अभिप्राय हैं?
Answer:
(i) टीकाकरण: टीकाकरण वह प्रक्रिया है जिसमें रोगों से बचाव के लिए बचपन से ही टीके लगाए जाते हैं। बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए समय-समय पर एक तय चार्ट के अनुसार टीके लगवाए जाते हैं। पोलियो ड्रॉप्स भी एक तरह का टीका है जो बच्चों को पोलियो रोग से बचाता है। टीकाकरण शरीर को बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार करता है। (ii) टीका: टीका एक ऐसी दवा है जिसमें मृत या निष्क्रिय सूक्ष्म जीवों को शरीर में डाला जाता है। इससे शरीर की कोशिकाएं इन जीवों के खिलाफ लड़ने के लिए प्रतिरक्षी उत्पन्न करती हैं। ये प्रतिरक्षी हमारे शरीर में हमेशा के लिए मौजूद रहते हैं और हमें भविष्य में उन रोगों से बचाते हैं। हैजा, खसरा, चेचक और हेपेटाइटिस जैसी कई बीमारियों को टीकों (वैक्सीन) के ज़रिए रोका जा सकता है।In simple words: टीकाकरण बीमारियों से बचाव के लिए टीके लगाने की प्रक्रिया है। टीका एक दवा है जो शरीर को रोगों से लड़ने के लिए तैयार करती है, जिससे हम बीमार होने से बचते हैं।

🎯 Exam Tip: टीकाकरण और टीका की परिभाषाओं को स्पष्ट और सटीक रूप से लिखें, उनके उद्देश्य और कार्यप्रणाली को समझाते हुए.

 

Question 6. भारत में सामाजिक जागृति लाने में अनेक महान् लोगों का योगदान रहा है। श्रीमती सावित्री बाई फुले उनमें से एक थी। उनके बारे में आप क्या जानते हैं। लिखिए।
Answer: श्रीमती सावित्री बाई फुले भारत की एक महान समाज सुधारक थीं, जिनका जन्म महाराष्ट्र के सतारा जिले के नए गांव में हुआ था। नौ साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई थी। उस समय समाज में छुआछूत बहुत ज़्यादा थी, लेकिन सावित्री फुले ने सभी लोगों के लिए अपने कुएं पर पानी भरने की व्यवस्था करवाई। उन्होंने छुआछूत और जाति प्रथा का कड़ा विरोध किया। प्लेग जैसी महामारियों के समय भी सावित्री ने लोगों की मदद की और गरीबों के लिए चिकित्सा शिविरों का आयोजन करवाया। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए भी संघर्ष किया और आधुनिक भारत की प्रमुख महिला नेताओं में से एक बनीं। उनका जीवन शिक्षा और समानता के लिए समर्पित था।In simple words: सावित्री बाई फुले एक समाज सुधारक थीं जिन्होंने छुआछूत और जाति प्रथा का विरोध किया। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और प्लेग जैसी महामारियों में लोगों की मदद की।

🎯 Exam Tip: सामाजिक सुधारकों के योगदान को लिखते समय, उनके मुख्य कार्य (जैसे शिक्षा, समानता, या किसी खास प्रथा का विरोध) और उनके प्रभावों को स्पष्ट करें.

 

Question 7. निम्नलिखित में से संक्रामक व असंक्रामक रोगों को पहचान कर श्रेणीबद्ध कोजिाए तधा संक्रामक व असंक्रामक रोगों में अन्तर स्पष्ट कीजिएसर्दी-जुकाम, क्षय रोग, के सर, जोड़ों का दर्द, टाइफाइड, हैजा, हृदयाघात, एसिडिटी।
Answer:

संक्रामक रोगअसंक्रामक रोग
1. रोगसर्दी-जुकाम, क्षय रोग, टाइफाइड, हैजाकैंसर, जोड़ों का दर्द, हृदयाघात, एसिडिटी
2. अन्तरसंक्रामक रोग वे रोग होते हैं, जो एक रोगी के संपर्क में आने से फैलते हैं। ये वायरस, बैक्टीरिया आदि से फैलते हैं।असंक्रामक रोग वे रोग होते हैं जो एक रोगी के दूसरे स्वस्थ व्यक्ति के संपर्क में आने से नहीं फैलते हैं। ये खराब जीवनशैली या आनुवंशिक कारणों से होते हैं।
संक्रामक रोग और असंक्रामक रोग में मुख्य अंतर यह है कि संक्रामक रोग एक व्यक्ति से दूसरे में फैल सकते हैं, जबकि असंक्रामक रोग नहीं फैलते हैं। इन रोगों को पहचानना बीमारियों से बचने और उनका सही इलाज करने के लिए ज़रूरी है।
In simple words: संक्रामक रोग छूने या हवा से फैलते हैं, जैसे सर्दी-जुकाम और हैजा। असंक्रामक रोग फैलते नहीं हैं, जैसे कैंसर और दिल का दौरा।

🎯 Exam Tip: संक्रामक और असंक्रामक रोगों में अंतर स्पष्ट करते समय, फैलने के तरीके और उनके उदाहरणों पर विशेष ध्यान दें. तालिका का उपयोग उत्तर को और प्रभावी बनाता है.

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Using our Science solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 8 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 8 हमारा स्वास्थ्य, बीमारियाँ एवं बचाव to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest RBSE Solutions Class 8 Science Chapter 8 हमारा स्वास्थ्य, बीमारियाँ एवं बचाव for the 2026-27 session?

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Are the Science RBSE solutions for Class 8 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 8 Science Chapter 8 हमारा स्वास्थ्य, बीमारियाँ एवं बचाव as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 8 RBSE solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 8 Science Chapter 8 हमारा स्वास्थ्य, बीमारियाँ एवं बचाव will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 8 Science Chapter 8 हमारा स्वास्थ्य, बीमारियाँ एवं बचाव in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 8 Science. You can access RBSE Solutions Class 8 Science Chapter 8 हमारा स्वास्थ्य, बीमारियाँ एवं बचाव in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Science RBSE solutions for Class 8 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 8 Science Chapter 8 हमारा स्वास्थ्य, बीमारियाँ एवं बचाव in printable PDF format for offline study on any device.