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Detailed Chapter 6 पौधों में जनन RBSE Solutions for Class 8 Science
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Class 8 Science Chapter 6 पौधों में जनन RBSE Solutions PDF
पृष्ठ 60
Question 1. क्या आपने कभी सोचा है कि नीम के पेड़ के नीचे नीम के पौधे ही क्यों उगते हैं? अथवा बकरी अपने ही समान बच्चे को जन्म क्यों देती है?
Answer: सभी जीवों में जीन की एक खास बनावट होती है, जो हर जीव में तय होती है। आनुवंशिकता के नियमों के अनुसार, यह खास बनावट पीढ़ी दर पीढ़ी जनन के जरिए आगे बढ़ती है। इसी वजह से हर जीव अपने जैसे गुण वाले बच्चे पैदा करता है। यही कारण है कि नीम के पेड़ से उगने वाला पौधा नीम का ही होता है, या बकरी अपने जैसे बच्चे को जन्म देती है। यह प्रकृति का नियम है कि सजीव अपने जैसे जीव उत्पन्न करते हैं.
In simple words: हर जीव में जीन होते हैं जो अगली पीढ़ी में जाते हैं. इसलिए, नीम के पेड़ से नीम और बकरी से बकरी ही पैदा होती है.
🎯 Exam Tip: जब भी "क्यों" वाले प्रश्न आएं, हमेशा वैज्ञानिक कारण (जैसे जीन और आनुवंशिकता) का उल्लेख करें, क्योंकि यह उत्तर का मुख्य बिंदु होता है.
पृष्ठ 63-64
Question 2. धतूरे के पुष्प को देखकर निम्न सारणी को भरिए
| क्र.सं. | नाम संरचना | संख्या | रंग | कार्य |
|---|---|---|---|---|
| 1. | बाह्यदल | |||
| 2. | दल | |||
| 3. | पुंकेसर | |||
| 4. | स्त्रीकेसर |
| क्र.सं. | नाम संरचना | संख्या | रंग | कार्य |
|---|---|---|---|---|
| 1. | बाह्यदल | 5 | हरा | जनन प्रक्रिया में सहायता |
| 2. | दल | 5 | सफेद | परागण हेतु कीड़ों को आकर्षित करना |
| 3. | पुंकेसर | अनेक | पीला | परागकणों का निर्माण करना |
| 4. | स्त्रीकेसर | 1 | पीला-हरा | बीज और फल बनाना |
🎯 Exam Tip: सारणी वाले प्रश्नों में, सभी कॉलमों को ध्यान से भरना सुनिश्चित करें, खासकर संख्या और कार्य जैसे विवरण. धतूरे जैसे आम फूलों के अंगों की संख्या और कार्य याद रखना उपयोगी है.
पृष्ठ 66
Question 3. क्या सभी फलों में बीज होते हैं? किन फलों में बीज नहीं होते हैं?
Answer: सभी फलों में बीज नहीं होते हैं। जिन फलों में निषेचन (मेल और फीमेल सेल का मिलना) के बिना ही फल बन जाते हैं, उन्हें अनिषेकजनन से प्राप्त फल कहते हैं। ऐसे फलों में बीज नहीं होते। उदाहरण के लिए, केला और अंगूर ऐसे फल हैं जिनमें आमतौर पर बीज नहीं पाए जाते हैं। ये फल बिना बीज के भी विकसित हो सकते हैं.
In simple words: नहीं, सभी फलों में बीज नहीं होते हैं. केला और अंगूर जैसे फल बिना बीज के होते हैं क्योंकि वे बिना निषेचन के बनते हैं.
🎯 Exam Tip: अनिषेकजनन (parthenocarpy) वाले फलों के उदाहरणों को याद रखें, क्योंकि यह इस प्रकार के प्रश्नों में एक महत्वपूर्ण बिंदु है.
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
सही विकल्प का चयन कीजिए
Question 1. कायिक जनन पाया जाता है
(अ) आलू में
(ब) गेहूँ में
(स) नीम में
(द) मटर में
Answer: (अ) आलू में
In simple words: आलू में कायिक जनन होता है, जिसका मतलब है कि आलू अपने पौधे के किसी और हिस्से से नया पौधा बना सकता है, बीज से नहीं.
🎯 Exam Tip: कायिक जनन के लिए आलू एक प्रमुख उदाहरण है; अन्य पौधों में इसके उदाहरणों को भी याद रखना सहायक होता है.
Question 2. नर और मादा युग्मक के संयोजन को कहते हैं
(अ) परागण कण
(ब) निषेचन
(स) मुकुलने
(द) बीजाणु
Answer: (ब) निषेचन
In simple words: जब नर और मादा युग्मक (मेल और फीमेल सेल) आपस में मिलते हैं, तो इस प्रक्रिया को निषेचन कहते हैं.
🎯 Exam Tip: निषेचन प्रजनन की एक केंद्रीय प्रक्रिया है; इसकी परिभाषा और महत्व को अच्छी तरह समझ लें.
Question 3. एकलिंगी पुष्प है
(अ) मक्का
Answer: (अ) मक्का
In simple words: मक्का का फूल एकलिंगी होता है, जिसका मतलब है कि इसमें या तो सिर्फ नर भाग होता है या सिर्फ मादा भाग.
🎯 Exam Tip: एकलिंगी और द्विलिंगी पुष्पों के बीच के अंतर को याद रखें, और प्रत्येक के लिए एक या दो उदाहरण तैयार रखें.
Question 4. द्विलिंगी पुष्प है
(अ) पपीता
(ब) मक्का
(स) ककड़ी
(द) सरसों
Answer: (द) सरसों
In simple words: सरसों का फूल द्विलिंगी होता है, जिसका मतलब है कि इसमें नर और मादा दोनों जनन अंग एक ही फूल में होते हैं.
🎯 Exam Tip: द्विलिंगी पुष्प (जैसे सरसों, गुड़हल) और एकलिंगी पुष्प (जैसे पपीता, मक्का) के उदाहरणों को याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
Question. (i) फर्न तथा मॉस ............ द्वारा प्रजनन करते
(ii) सजीवों द्वारा अपने ही समान उत्पन्न करना ............ कहलाता है।
(iii) नर युग्मक व मादा युग्मक के संयोजन से ............ बनता है।
(iv) ............ में परागकण परागकोश से. उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं।
Answer:
(i) अलैंगिक जनन
(ii) संतति, जनन
(iii) युग्मनज
(iv) स्वपरागण
In simple words: फर्न और मॉस बिना लैंगिक जनन के बच्चे पैदा करते हैं. जब जीव अपने जैसे बच्चे पैदा करते हैं, तो उसे जनन कहते हैं. नर और मादा कोशिकाएं मिलकर युग्मनज बनाती हैं. जब परागकण एक ही फूल के वर्तिकाग्र पर जाते हैं, तो उसे स्वपरागण कहते हैं.
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान वाले प्रश्नों में, मुख्य वैज्ञानिक शब्दों को याद रखना महत्वपूर्ण होता है जो सही उत्तर को पूरा करते हैं.
सुमेलित कीजिए
Question. अ
1. विखण्डन
2. मुकुलन
3. अनिषेक जनन
4. लैंगिक जनन
ब
(1) सरसों
(2) केला
(3) यीस्ट
(4) स्पाइरोगाइरा
Answer:
1. (4) स्पाइरोगाइरा
2. (3) यीस्ट
3. (2) केला
4. (1) सरसों
In simple words: विखंडन स्पाइरोगाइरा में होता है, मुकुलन यीस्ट में होता है, अनिषेक जनन केले में होता है, और लैंगिक जनन सरसों में होता है.
🎯 Exam Tip: "सुमेलित कीजिए" प्रश्नों में, प्रत्येक प्रक्रिया (जैसे विखंडन, मुकुलन) को उसके सही उदाहरण से सटीक रूप से जोड़ना महत्वपूर्ण है.
लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 2. एकलिंगी व द्विलिंगी पुष्प में अन्तर समझाइए।
Answer:एकलिंगी पुष्प: जब किसी फूल में पुंकेसर (नर जननांग) या स्त्रीकेसर (मादा जननांग) में से कोई एक ही जननांग मौजूद होता है, तो उसे एकलिंगी पुष्प कहते हैं। ऐसे फूलों में सिर्फ एक ही तरह का जनन अंग पाया जाता है। उदाहरण के लिए, तरबूज, पपीता और मक्का के फूल एकलिंगी होते हैं।द्विलिंगी पुष्प: जब किसी फूल में पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों जननांग एक साथ मौजूद होते हैं, तो उन्हें द्विलिंगी पुष्प कहते हैं। ये फूल नर और मादा दोनों भूमिकाएँ निभा सकते हैं। उदाहरण के लिए, सरसों, गुड़हल और धतूरा के फूल द्विलिंगी होते हैं।
In simple words: एकलिंगी फूल में सिर्फ एक जनन अंग (नर या मादा) होता है, जैसे मक्का. द्विलिंगी फूल में नर और मादा दोनों जनन अंग एक साथ होते हैं, जैसे सरसों.
🎯 Exam Tip: एकलिंगी और द्विलिंगी पुष्पों की परिभाषाओं को उनके सही उदाहरणों के साथ याद रखना सुनिश्चित करें, क्योंकि यह एक सामान्य अंतर है.
Question 3. स्वपरागण व परपरागण में अन्तर स्पष्ट कीजिए। अथवा परागकणों का किसी भी माध्यम द्वारा वर्तिकाग्र पर पहुँचना, परागण कहलाता है। स्वपरागण व परपरागण में अन्तर उदाहरण सहित लिखिए।
Answer: परागकणों का किसी भी तरीके (जैसे हवा, पानी, कीड़े, या जानवर) से परागकोश से निकलकर फूल के वर्तिकाग्र तक पहुँचना परागण कहलाता है। परागण की यह प्रक्रिया फूलों में प्रजनन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। परागण क्रिया दो प्रकार की होती है:
(1) स्वपरागण: जब परागकण उसी फूल के वर्तिकाग्र पर या उसी पौधे के किसी दूसरे फूल के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं, तो इस प्रक्रिया को स्वपरागण कहते हैं। इसमें परागकणों को कहीं और जाने की ज़रूरत नहीं पड़ती. उदाहरण के लिए, मटर और टमाटर के पौधों में स्वपरागण होता है।
(2) परपरागण: जब एक पौधे के फूल से परागकण उसी प्रजाति के किसी दूसरे पौधे के फूल के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं, तो इस क्रिया को परपरागण कहते हैं। इसमें परागकणों को एक फूल से दूसरे फूल तक जाना पड़ता है. उदाहरण के लिए, गुलाब और पॉपी जैसे पौधों में परपरागण होता है।
In simple words: परागण वह क्रिया है जिसमें परागकण फूल के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं. स्वपरागण में परागकण एक ही फूल या पौधे पर जाते हैं, जबकि परपरागण में वे दूसरे पौधे पर जाते हैं.
🎯 Exam Tip: परागण, स्वपरागण और परपरागण की परिभाषाओं को उनके सही उदाहरणों के साथ अच्छी तरह से याद करें, और दोनों के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें.
Question 4. पुष्प का नामांकित चित्र बनाइए।
Answer: यहाँ पुष्प के एक हिस्से (स्त्रीकेसर और पुंकेसर) का नामांकित चित्र दिखाया गया है, जो पुष्प के मुख्य जनन अंगों को दर्शाता है।
In simple words: यह चित्र एक फूल के अंदर के हिस्सों को दिखाता है, जैसे हरे बाह्यदल, तना (वृंत), और मादा भाग (वर्तिकाग्र, वर्तिका, अण्डाशय) और नर भाग (पुंकेसर).
🎯 Exam Tip: पुष्प के विभिन्न भागों (बाह्यदल, पुष्प वृन्त, पुंकेसर, वर्तिकाग्र, वर्तिका, अण्डाशय) का सही नाम और उनकी स्थिति याद रखना महत्वपूर्ण है. स्पष्ट और लेबल वाला चित्र बनाने का अभ्यास करें.
Question 5. अनिषेक जनन को उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: अनिषेक जनन वह प्रक्रिया है जिसमें पौधों में बिना निषेचन (नर और मादा युग्मकों के मिलन) के ही सीधे फूल से फल बन जाता है। इस प्रकार बने फलों में बीज नहीं होते हैं। यह एक प्राकृतिक विधि है जिससे कुछ पौधे बिना बीज बनाए ही फल पैदा कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, केला और अंगूर ऐसे फल हैं जो अनिषेक जनन द्वारा बनते हैं और उनमें आमतौर पर बीज नहीं पाए जाते हैं।
In simple words: अनिषेक जनन का मतलब है कि जब फूल से फल बिना निषेचन के ही बन जाता है, और ऐसे फलों में बीज नहीं होते. केला और अंगूर इसके अच्छे उदाहरण हैं.
🎯 Exam Tip: अनिषेक जनन की परिभाषा और इसके दो प्रमुख उदाहरणों (केला, अंगूर) को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अक्सर पूछा जाता है.
Question 6. मेण्डल के आनुवंशिकता के तीनों नियम लिखिए।
Answer: ग्रेगर मेण्डल को आनुवंशिकी का जनक माना जाता है। उन्होंने पौधों पर कई प्रयोग किए और आनुवंशिकता के तीन महत्वपूर्ण नियम दिए, जो इस प्रकार हैं:
1. प्रभाविता का नियम: इस नियम के अनुसार, जब दो विपरीत गुणों वाले पौधों का संकरण कराया जाता है, तो पहली पीढ़ी में केवल प्रभावी गुण ही दिखाई देते हैं। अप्रभावी गुण मौजूद होते हैं, लेकिन वे दिखते नहीं हैं.
2. पृथक्करण का नियम: इस नियम के अनुसार, संकरण के बाद, युग्मक बनते समय प्रत्येक गुण के कारक (एलिल) एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं, ताकि प्रत्येक युग्मक में उस गुण का केवल एक कारक ही जाए। ये कारक बिना मिले अलग होते हैं.
3. स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम: इस नियम के अनुसार, जब दो या दो से अधिक गुणों का एक साथ अध्ययन किया जाता है, तो एक गुण के कारक दूसरे गुण के कारकों से स्वतंत्र रूप से अलग होते हैं और अगली पीढ़ी में जाते हैं। इसका मतलब है कि एक गुण का वितरण दूसरे गुण को प्रभावित नहीं करता है।
In simple words: मेण्डल ने बताया कि गुण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में कैसे जाते हैं. उनके तीन नियम हैं: प्रभाविता (सिर्फ एक गुण दिखता है), पृथक्करण (गुण के कारक अलग होते हैं), और स्वतंत्र अपव्यूहन (अलग-अलग गुण एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से जाते हैं).
🎯 Exam Tip: मेण्डल के तीनों नियमों को उनकी परिभाषाओं और मुख्य सिद्धांतों के साथ स्पष्ट रूप से याद करें. प्रत्येक नियम को एक संक्षिप्त वाक्य में समझाने का अभ्यास करें.
दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. लैंगिक व अलैंगिक जनन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: लैंगिक और अलैंगिक जनन जीवों में प्रजनन की दो मुख्य विधियाँ हैं। उनमें मुख्य अंतर नीचे दी गई सारणी में स्पष्ट किए गए हैं:
| क्र.सं. | लैंगिक जनन | अलैंगिक जनन |
|---|---|---|
| 1. | इस क्रिया में दो जनक (एक नर और एक मादा) भाग लेते हैं। | यह क्रिया केवल एक जनक में पूरी होती है। |
| 2. | इसमें युग्मकों का निर्माण होता है (नर और मादा युग्मक)। | इसमें युग्मकों का निर्माण नहीं होता है। |
| 3. | इसमें निषेचन (युग्मकों का मिलन) होता है। | इसमें निषेचन नहीं होता है। |
| 4. | इसमें युग्मक संलयन होता है। | इसमें युग्मक संलयन नहीं होता है। |
| 5. | इसमें उत्पन्न संतति में आनुवंशिक भिन्नताएँ पाई जाती हैं। | इसमें संतान आनुवंशिक रूप से जनक के समान होती है (क्लोन)। |
🎯 Exam Tip: लैंगिक और अलैंगिक जनन के बीच अंतर को हमेशा सारणीबद्ध रूप में प्रस्तुत करें, जिससे तुलना स्पष्ट हो सके. प्रत्येक बिंदु के लिए एक स्पष्ट और संक्षिप्त विवरण दें.
Question 2. लैंगिक जनन की प्रक्रिया को सचित्र समझाइए।
Answer: लैंगिक जनन वह प्रक्रिया है जो विकसित पौधों में होती है। इसमें फूल के नर जननांग (पुंकेसर) और मादा जननांग (स्त्रीकेसर) शामिल होते हैं, जो एक ही फूल में या अलग-अलग फूलों में हो सकते हैं।मादा जननांग: स्त्रीकेसर के तीन मुख्य भाग होते हैं- वर्तिकाग्र, वर्तिका और अण्डाशय। अण्डाशय के अंदर बीजाण्ड होते हैं, और प्रत्येक बीजाण्ड में एक अण्डकोशिका होती है।नर जननांग: पुंकेसर में परागकोश होता है, जहाँ परागकण बनते हैं। एक परागकोश में कई परागकण होते हैं, और इसमें नर युग्मकों का निर्माण होता है।निषेचन: परागण की प्रक्रिया द्वारा परागकण स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं और अंकुरित होना शुरू कर देते हैं। परागकणों के अंकुरण से एक परागनली बनती है जो वर्तिका से होते हुए अण्डाशय तक पहुँचती है। परागनली में मौजूद नर केंद्रक, बीजाण्ड के अंदर स्थित अण्डकोशिका से मिल जाते हैं। इस तरह नर केंद्रक के मादा केंद्रक (अण्डकोशिका) से मिलने की प्रक्रिया को निषेचन कहते हैं। यह मिलन नए बीज के विकास का पहला कदम है।
In simple words: लैंगिक जनन में नर और मादा फूल के हिस्से होते हैं. परागकण वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं, एक नली बनाते हैं, और फिर नर कोशिका मादा कोशिका से मिलकर निषेचन करती है. इससे नया पौधा बनने की शुरुआत होती है.
🎯 Exam Tip: लैंगिक जनन के चरणों (नर/मादा जननांग, परागण, निषेचन) को क्रम से याद करें. चित्र बनाते समय सभी मुख्य भागों और प्रक्रिया को सही ढंग से नामांकित करें.
Question 3. कायिक जनन की विधियों को उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: कायिक जनन वह प्रक्रिया है जिसमें पौधे बीज के अलावा अपने किसी भी कायिक भाग, जैसे जड़, तना या पत्ती से विकसित होकर एक नया पौधा बनाते हैं। इस प्रकार बने पौधे अपने जनक पौधे के बिल्कुल समान गुणों वाले होते हैं, इसलिए इन्हें 'क्लोन' भी कहा जाता है। कायिक जनन की कुछ प्रमुख विधियाँ इस प्रकार हैं:
(1) भूमिगत तने से: आलू इसका एक अच्छा उदाहरण है। आलू के छोटे-छोटे टुकड़ों को काट लिया जाता है, जिनमें आँखें (कलिकाएँ) होती हैं। इन टुकड़ों को खाद वाली मिट्टी में दबाकर नियमित रूप से पानी दिया जाता है। कुछ समय बाद आलू की आँख से एक नया पौधा अंकुरित हो जाता है। इस विधि से बिना बीज के भी नया आलू का पौधा उगाया जा सकता है।
(2) ब्रायोफिलम (पत्थर चट्टा): ब्रायोफिलम की पत्तियों के किनारों पर छोटी-छोटी कलिकाएँ (छोटी कोंपलें) पाई जाती हैं। जब ये पत्तियाँ मिट्टी पर गिरती हैं या बोई जाती हैं, तो प्रत्येक कलिका विकसित होकर एक नया पौधा बनाती है। पत्तियों से पौधे उगना एक अद्भुत प्रक्रिया है।
(3) कैक्टस: कैक्टस में तना पादप से अलग होकर नए पादप को जन्म देता है। जब इसका एक हिस्सा टूटकर मिट्टी में गिरता है, तो वह नया पौधा बन जाता है।
(4) यीस्ट में मुकुलन: इस प्रकार का जनन यीस्ट जैसे छोटे जीवों में होता है। यीस्ट कोशिका पर एक छोटी सी कली या 'मुकुल' बनती है, जो धीरे-धीरे बड़ी होती है और फिर पैतृक कोशिका से अलग होकर एक नई यीस्ट कोशिका बनाती है। यह प्रक्रिया दोहराई जाती है, जिससे मुकुलों की एक श्रृंखला बन जाती है।
(5) विखण्डन: यह जनन शैवाल जैसे पौधों में पाया जाता है, खासकर स्पाइरोगाइरा में। ये शैवाल पानी में हरे रंग की काई के रूप में दिखते हैं। जब ये बढ़ते हैं, तो ये छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं। प्रत्येक टुकड़ा फिर से बढ़कर एक नया शैवाल बनाता है। इस तरह, एक शैवाल से कई नए शैवाल बन जाते हैं।
(6) बीजाणु निर्माण: यह जनन कवक में पाया जाता है, जिसे हम फफूंद भी कहते हैं। इसे आप पुरानी रोटी पर देख सकते हैं जो नमी में रह गई हो। यह रुई के जाल जैसा दिखता है और इसमें काले-भूरे रंग की छोटी-छोटी थैलियाँ होती हैं जिन्हें बीजाणुधानी कहते हैं। इन थैलियों के अंदर बहुत छोटे बीजाणु होते हैं। जब ये बीजाणु निकलते हैं, तो वे बहुत हल्के होने के कारण हवा में दूर-दूर तक फैल जाते हैं। हर बीजाणु अपने चारों ओर एक कठोर परत बना लेता है, जो उसे बहुत गर्मी या कम नमी जैसी खराब परिस्थितियों से बचाती है। जब अच्छी परिस्थितियाँ आती हैं, तो ये बीजाणु अंकुरित होकर नए फफूंद के पौधे बनाते हैं।
(7) गुलाब के तने से: गुलाब का पौधा कलम (कटिंग) के माध्यम से आसानी से उगाया जा सकता है। इसके लिए गुलाब की एक स्वस्थ शाखा का वह हिस्सा काटते हैं जहाँ से पत्तियाँ निकलती हैं, जिसे पर्वसंधि कहते हैं। इस हिस्से की लंबाई लगभग 10-12 सेमी. होनी चाहिए। इस कटे हुए हिस्से को तिरछा काटकर मिट्टी में दबाकर नियमित रूप से पानी दिया जाता है। कुछ समय बाद कलम से नई शाखाएँ निकलना शुरू हो जाती हैं, और धीरे-धीरे यह एक पूर्ण गुलाब के पौधे में विकसित हो जाता है।
In simple words: कायिक जनन में पौधे के तने, जड़ या पत्ती से नया पौधा बनता है, बीज से नहीं. इसमें आलू (तने से), ब्रायोफिलम (पत्ती से), कैक्टस (तना से), यीस्ट (मुकुलन से), स्पाइरोगाइरा (विखंडन से) और फफूंद (बीजाणु से) शामिल हैं. गुलाब की कलम से भी नया पौधा बन सकता है.
🎯 Exam Tip: कायिक जनन की प्रत्येक विधि (जैसे भूमिगत तने से, ब्रायोफिलम, कैक्टस, मुकुलन, विखण्डन, बीजाणु निर्माण, कलम) को उसके विशिष्ट उदाहरण और संक्षिप्त प्रक्रिया के साथ याद करें. आरेख बनाने का अभ्यास करें.
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वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. अलैंगिक जनन मुकुलन द्वारा होता है
(अ) अमीबा
(ब) यीस्ट
(स) आलू
(द) गुलाब
Answer: (ब) यीस्ट
In simple words: यीस्ट में नया जीव मुकुलन प्रक्रिया से बनता है, जहाँ एक छोटा सा मुकुल (कोंपल) मूल यीस्ट से अलग हो जाता है.
🎯 Exam Tip: मुकुलन अलैंगिक जनन की एक विशिष्ट विधि है; यीस्ट इसका सबसे आम उदाहरण है, जिसे याद रखना चाहिए.
Question 2. परागकण पाये जाते हैं
(अ) अण्डाशय में
(ब) परागकोश में
(स) बाह्यदल में
Answer: (ब) परागकोश में
In simple words: परागकण फूल के नर भाग, जिसे परागकोश कहते हैं, में पाए जाते हैं.
🎯 Exam Tip: फूल के विभिन्न भागों (जैसे परागकोश, अण्डाशय, बाह्यदल) और उनके कार्यों को ठीक से जानें, खासकर परागकणों के स्थान को.
Question 3. ब्रायोफिलम में कायिक जनन होता है
(अ) तने से
(ब) जड़ से
(स) पत्ती से
(द) उपरोक्त सभी से
Answer: (स) पत्ती से
In simple words: ब्रायोफिलम का नया पौधा उसकी पत्ती के किनारों पर उगने वाली कलिकाओं से बनता है.
🎯 Exam Tip: ब्रायोफिलम (पत्थरचट्टा) पत्तियों से कायिक जनन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है; यह बिंदु परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है.
Question 4. स्पाईरोगायरा में अलैंगिक जनन की विधि है
(अ) मुकुलन
(ब) विखण्डन
(स) बीजाणु निर्माण
(द) कर्तन
Answer: (ब) विखण्डन
In simple words: स्पाइरोगाइरा में नया जीव विखंडन से बनता है, जहाँ उसका शरीर छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाता है और हर टुकड़ा एक नया जीव बन जाता है.
🎯 Exam Tip: स्पाइरोगाइरा में विखंडन एक सामान्य अलैंगिक जनन विधि है; इसे हमेशा याद रखें जब अलैंगिक जनन के उदाहरणों पर विचार करें.
Question 5. निषेचन के पश्चात् बना युग्मनज होता है
(अ) अगुणित
(ब) बहुगुणित
(स) त्रिगुणित
(द) द्विगुणित
Answer: (द) द्विगुणित
In simple words: निषेचन के बाद, जब नर और मादा युग्मक मिल जाते हैं, तो जो नई कोशिका बनती है उसे युग्मनज कहते हैं और उसमें गुणसूत्रों की संख्या दुगुनी (द्विगुणित) होती है.
🎯 Exam Tip: निषेचन के बाद बनने वाले युग्मनज की द्विगुणित प्रकृति को समझना जीव विज्ञान में एक मूलभूत अवधारणा है.
Question 6. नर व मादा युग्मक के संयोजन से द्विगुणित युग्मनज का निर्माण होता है। यह क्रिया कहलाती है
(अ) निषेचन
(ब) मुकुलन
(स) परागण
(द) बीजाणु
Answer: (अ) निषेचन
In simple words: जब नर और मादा कोशिकाएं मिलकर एक नई द्विगुणित कोशिका बनाती हैं, तो इस पूरी प्रक्रिया को निषेचन कहते हैं.
🎯 Exam Tip: "निषेचन" शब्द की परिभाषा और इसके परिणाम (द्विगुणित युग्मनज) को स्पष्ट रूप से समझें; यह प्रजनन का मूल सिद्धांत है.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
Question. 1. कैक्टस में ............ पादप से अलग होकर नया पादप बनाता है। (तना/पत्ती)
2. अलैंगिक जनन में नये जीव की उत्पत्ति ............ से होती है। (एक ही जनक/अलग-अलग जनक)
3. पुष्प में सहायक चक्र ............ में पुष्प की सहायता करते हैं। (वाष्पोत्सर्जन प्रक्रिया/जनन प्रक्रिया)
4. फल बनने में जब केवल अण्डाशय ही भाग लेता है तो उसे ............ कहते हैं। (सत्य फल/असत्य फल)
Answer:
1. तना
2. एक ही जनक
3. जनन प्रक्रिया
4. सत्य फल
In simple words: कैक्टस में तना अलग होकर नया पौधा बनाता है. अलैंगिक जनन में एक ही जनक से नया जीव बनता है. फूल में जनन प्रक्रिया सहायक होती है. जब फल सिर्फ अण्डाशय से बनता है, तो उसे सत्य फल कहते हैं.
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरने के लिए, प्रजनन और पौधों के हिस्सों से संबंधित प्रमुख शब्दों और अवधारणाओं को याद रखना आवश्यक है.
बताइए निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य
Question. 1. पृथ्वी पर प्रत्येक जीव जिसने जन्म लिया है। उसकी मृत्यु निश्चित है।
2. आलू में आँखयुक्त टुकड़े से पौधा प्राप्त नहीं कर सकते हैं।
3. डहेलिया पादप में जड़ से नया पादप प्राप्त हो जाता है।
4. पुष्प का सबसे बाहरी चक्र दल पुंज कहलाता है ।
5. स्त्रीकेसर में वर्तिकाग्र, वर्तिका और अण्डाशय होते। हैं।
6. टमाटर के पौधे में परपरागण पाया जाता है।
Answer:
1. सत्य
2. असत्य
3. सत्य
4. असत्य
5. सत्य
6. असत्य
In simple words: हर जीव को मरना होता है (सत्य). आलू के टुकड़ों से पौधा उगाया जा सकता है (असत्य). डहेलिया जड़ से उगता है (सत्य). फूल का बाहरी चक्र बाह्यदलपुंज होता है, दलपुंज नहीं (असत्य). स्त्रीकेसर के तीन भाग होते हैं (सत्य). टमाटर में स्वपरागण होता है, परपरागण नहीं (असत्य).
🎯 Exam Tip: सत्य/असत्य प्रश्नों के लिए, जीव विज्ञान की मूलभूत अवधारणाओं और सामान्य पौधों के उदाहरणों का स्पष्ट ज्ञान आवश्यक है.
सही मिलान कीजिए
Question 1. अग्रंकित का सही मिलान कीजिए
| अ | ब |
|---|---|
| 1. यीस्ट | (A) परागकण |
| 2. स्पाइरोगाइरा | (B) विखण्डन |
| 3. आँख | (C) बीजाण्ड |
| 4. मादा युग्मक | (D) आलू |
| 5. सबसे छोटा बीज | (E) मुकुलन |
| 6. असत्य फल | (F) फफूद |
1. (E) मुकुलन
2. (B) विखण्डन
3. (D) आलू
4. (C) बीजाण्ड
5. (A) परागकण
6. (F) फफूद
In simple words: यीस्ट में मुकुलन होता है, स्पाइरोगाइरा में विखंडन होता है, आलू में आँखें होती हैं, मादा युग्मक बीजाण्ड में होता है, सबसे छोटा बीज परागकण होता है, और असत्य फल फफूंद जैसा हो सकता है.
🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, प्रत्येक वस्तु या प्रक्रिया को उसके सही गुण या उदाहरण से सटीक रूप से जोड़ना महत्वपूर्ण है.
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. पुष्प दो प्रकार के होते हैं, एकलिंगी व द्विलिंगी । पुष्प के एक-एक उदाहरण दीजिए।
Answer:1. एकलिंगी पुष्प का उदाहरण-पपीता
2. द्विलिंगी पुष्प का उदाहरण-सरसों
In simple words: फूल दो तरह के होते हैं - एकलिंगी (जैसे पपीता, जिसमें सिर्फ एक लिंग होता है) और द्विलिंगी (जैसे सरसों, जिसमें दोनों लिंग होते हैं).
🎯 Exam Tip: एकलिंगी और द्विलिंगी पुष्पों के उदाहरणों को हमेशा याद रखें, क्योंकि यह अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों में से एक है.
Question 2. जनन किसे कहते हैं ?
Answer: सजीवों द्वारा अपने ही समान संतति (बच्चे) को उत्पन्न करने की प्रक्रिया जनन कहलाती है। यह प्रक्रिया जीवों को अपनी प्रजाति को बनाए रखने और उनकी संख्या बढ़ाने में मदद करती है।
In simple words: जनन का मतलब है जब जीव अपने जैसे बच्चे पैदा करते हैं ताकि उनकी प्रजाति बनी रहे.
🎯 Exam Tip: जनन की परिभाषा को सटीक रूप से याद करें और यह भी समझें कि यह क्यों महत्वपूर्ण है (प्रजाति की निरंतरता के लिए).
Question 3. कायिक जनन को परिभाषित कीजिए।
Answer: कायिक जनन वह प्रक्रिया है जिसमें एक पौधे के बीज के अलावा किसी अन्य हिस्से, जैसे जड़, तना या पत्ती से एक नया पौधा विकसित होता है। इस विधि में उत्पन्न नए पौधे अपने जनक के आनुवंशिक रूप से समान होते हैं।
In simple words: कायिक जनन वह तरीका है जहाँ एक नया पौधा बीज के बजाय पौधे के किसी और हिस्से (जैसे तना या पत्ती) से उगता है.
🎯 Exam Tip: कायिक जनन की परिभाषा को अच्छी तरह समझ लें और यह भी याद रखें कि यह एक प्रकार का अलैंगिक जनन है.
Question 4. गुलाब के पौधे में कायिक जनन का माध्यम क्या है?
Answer: गुलाब के पौधे में कायिक जनन कर्तन (कटिंग) या कलम के माध्यम से होता है। इसमें गुलाब की टहनी का एक छोटा टुकड़ा काटकर उसे मिट्टी में लगाया जाता है, जिससे नया पौधा विकसित होता है।
In simple words: गुलाब के पौधे में कायिक जनन उसके तने के कटे हुए हिस्से (कलम) से होता है, जिसे मिट्टी में लगाने पर नया पौधा उगता है.
🎯 Exam Tip: कलम विधि गुलाब जैसे पौधों में कायिक जनन का एक प्रमुख उदाहरण है; इसे याद रखना उपयोगी है.
Question 5. जब पुष्प में पुंकेसर अथवा स्त्रीकेसर में से कोई एक जननांग उपस्थित होता है तो ऐसे पुष्प क्या कहलाते है।
Answer: जब पुष्प में पुंकेसर अथवा स्त्रीकेसर में से कोई एक जननांग उपस्थित होता है तो ऐसे पुष्प एकलिंगी कहलाते हैं। यह फूल सिर्फ एक ही लिंग के प्रजनन अंगों को धारण करता है।
In simple words: जिस फूल में सिर्फ एक ही जनन अंग (या तो नर या मादा) होता है, उसे एकलिंगी फूल कहते हैं.
🎯 Exam Tip: एकलिंगी पुष्प की परिभाषा को उसके मुख्य गुण (केवल एक जननांग) के साथ याद रखें.
Question 6. उभयलिंगी पुष्प का कोई एक उदाहरण दीजिए।
Answer: उभयलिंगी पुष्प का उदाहरण गुड़हल एवं सरसों है। ये फूल नर और मादा दोनों जननांगों को एक साथ धारण करते हैं।
In simple words: गुड़हल और सरसों उभयलिंगी फूल के उदाहरण हैं, जिनमें नर और मादा दोनों हिस्से एक साथ होते हैं.
🎯 Exam Tip: उभयलिंगी पुष्पों के दो सामान्य उदाहरणों (गुड़हल, सरसों) को याद रखें, जो एक ही फूल में दोनों लिंगों को दर्शाते हैं.
Question 7. मादा जननांग अर्थात् स्त्रीकेसर पुष्प में कहाँ अवस्थित होता है?
Answer: मादा जननांग अर्थात् स्त्रीकेसर पुष्प के केंद्र में अवस्थित होता है। यह फूल का केंद्रीय प्रजनन अंग है।
In simple words: फूल का मादा जननांग, स्त्रीकेसर, फूल के बीच में होता है.
🎯 Exam Tip: स्त्रीकेसर की केंद्रीय स्थिति को याद रखें; यह पुष्प प्रजनन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है.
Question 8. बीजाण्ड स्त्रीकेसर के किस भाग में स्थित होते हैं?
Answer: बीजाण्ड स्त्रीकेसर के अण्डाशय (Ovary) में स्थित होते हैं। अण्डाशय फूल का वह भाग है जो बाद में फल में विकसित होता है।
In simple words: बीजाण्ड स्त्रीकेसर के अण्डाशय में होते हैं.
🎯 Exam Tip: बीजाण्ड के स्थान (अण्डाशय के भीतर) को याद रखना फल और बीज विकास की प्रक्रिया को समझने के लिए महत्वपूर्ण है.
Question 9. निषेचन के पश्चात् बीजाण्ड किस में परिवर्तित हो जाता है?
Answer: निषेचन के पश्चात् बीजाण्ड बीज में परिवर्तित हो जाता है। यह पौधे के प्रजनन चक्र का एक महत्वपूर्ण कदम है।
In simple words: निषेचन के बाद, बीजाण्ड बीज बन जाता है.
🎯 Exam Tip: बीजाण्ड का बीज में परिवर्तन और अण्डाशय का फल में परिवर्तन, निषेचन के बाद के मुख्य परिणाम हैं, इन्हें याद रखें.
Question 10. परागण किसे कहते हैं?
Answer: परागण- किसी भी माध्यम (जैसे हवा, पानी, कीड़े, या जानवर) से परागकणों का परागकोश से निकलकर पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचना परागण कहलाता है। यह फूलों में प्रजनन की पहली और सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
In simple words: परागण वह क्रिया है जिसमें परागकण फूल के परागकोश से निकलकर वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं.
🎯 Exam Tip: परागण की परिभाषा और इसके विभिन्न माध्यमों (हवा, पानी, कीट) को याद रखें, क्योंकि यह प्रजनन का एक मूल सिद्धांत है.
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. पुष्प दो प्रकार के होते हैं, एकलिंगी व द्विलिंगी । पुष्प के एक-एक उदाहरण दीजिए।
Answer:
1. एकलिंगी पुष्प का उदाहरण है पपीता। एकलिंगी पुष्प में केवल नर या मादा जननांग होता है।
2. द्विलिंगी पुष्प का उदाहरण है सरसों। द्विलिंगी पुष्प में नर और मादा दोनों जननांग एक साथ होते हैं।
In simple words: फूल दो तरह के होते हैं: एकलिंगी (जैसे पपीता, जिसमें सिर्फ एक तरह का अंग होता है) और द्विलिंगी (जैसे सरसों, जिसमें दोनों अंग होते हैं)।
🎯 Exam Tip: हमेशा एकलिंगी और द्विलिंगी फूलों के कम से कम दो-दो उदाहरण याद रखें, क्योंकि यह अक्सर पूछा जाता है।
Question 2. जनन किसे कहते हैं ?
Answer: सजीवों द्वारा अपने ही जैसे नए जीव पैदा करने की प्रक्रिया को जनन कहते हैं। यह प्रक्रिया जीवन की निरंतरता को बनाए रखने के लिए बहुत ज़रूरी है।
In simple words: जनन का मतलब है जब जीव अपने जैसे नए जीव बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: जनन की परिभाषा को हमेशा सीधा और स्पष्ट रखें, जिसमें 'अपने समान संतति उत्पन्न करना' मुख्य शब्द हैं।
Question 3. कायिक जनन को परिभाषित कीजिए।
Answer: कायिक जनन वह प्रक्रिया है जिसमें बीज के अलावा पौधे के किसी भी अन्य भाग जैसे जड़, तना या पत्ती से नया पौधा विकसित होता है। यह एक अलैंगिक जनन का तरीका है।
In simple words: कायिक जनन वह तरीका है जब कोई पौधा बीज के बिना अपनी जड़, तने या पत्ती से एक नया पौधा उगाता है।
🎯 Exam Tip: कायिक जनन की परिभाषा में 'बीज के अतिरिक्त' और 'पौधे के अन्य भागों से' जैसे वाक्यांशों का उपयोग करें ताकि सटीक उत्तर मिले।
Question 2. पादपों में जनन की विधियाँ कौन-कौनसी हैं? नाम लिखिए। कायिक जनन के लाभ क्या हैं? लिखिए। अथवा कायिक जनन से आप क्या समझते हैं? कायिक जनन के चार लाभ लिखिए।
Answer: कायिक जनन वह प्रक्रिया है जिसमें बीज के अतिरिक्त पौधे के किसी अन्य कायिक भाग से नया पौधा बनता है। यह तरीका पौधे को तेज़ी से बढ़ने में मदद करता है।
पादपों में जनन की विधियाँ इस प्रकार हैं:
1. कायिक जनन
2. अलैंगिक जनन
3. लैंगिक जनन
4. अनिषेक जनन
कायिक जनन के लाभ:
1. इससे पौधे कम समय में बड़े हो जाते हैं।
2. इस विधि से पौधों में फूल और फल जल्दी आने लगते हैं।
3. नए पौधे केवल एक जनक से ही बनते हैं।
4. कायिक जनन से पैदा हुए पौधे आनुवंशिक रूप से अपने माता-पिता के समान होते हैं, जिससे उनके मूल गुण बने रहते हैं।
5. कायिक जनन से बने पौधों की पैदावार क्षमता अधिक होती है।
In simple words: कायिक जनन में पौधे बीज के अलावा अपने किसी और हिस्से से उगते हैं। जनन के कई तरीके हैं, जिनमें कायिक, अलैंगिक, लैंगिक और अनिषेक जनन शामिल हैं। कायिक जनन से पौधे जल्दी उगते हैं, ज्यादा फल-फूल देते हैं और अपने माता-पिता के समान रहते हैं।
🎯 Exam Tip: कायिक जनन के लाभों को क्रमवार और स्पष्ट रूप से समझाएँ, ताकि परीक्षक को सभी मुख्य बिंदु मिल सकें।
Question 3. (अ) सामान्य ब्रेड फफूद का वैज्ञानिक नाम क्या है? (ब) ब्रेड फफूद की सूक्ष्म, धागा-नुमा संरचनाओं को कहा जाता है? (स) ब्रेड फफूद में महीन तनों के शीर्ष पर नन्हीं, धुंडी-नुमा संरचनाओं को क्या कहा जाता है? (द) ब्रेड फफूद की घुंडी-नुमा संरचनाओं में क्या होता
Answer:
(अ) सामान्य ब्रेड फफूद का वैज्ञानिक नाम राइजोपस (Rhizopus) है। यह नमी वाली जगह पर बहुत तेज़ी से उगता है।
(ब) ब्रेड फफूद की सूक्ष्म, धागा-नुमा संरचनाओं को कवक तंतु (Fungal hyphae) कहा जाता है।
(स) ब्रेड फफूद में महीन तनों के शीर्ष पर नन्हीं, घुंडीनुमा संरचनाओं को बीजाणुधानी (sporangia) कहा जाता है।
(द) बीजाणुधानी में ब्रेड फफूद की सूक्ष्म प्रजनक इकाइयाँ बीजाणु (Spores) होती हैं।
In simple words: ब्रेड फफूद का वैज्ञानिक नाम राइजोपस है। इसमें धागे जैसी संरचनाएँ होती हैं जिन्हें कवक तंतु कहते हैं। इनके सिरों पर छोटी गोल थैलियाँ होती हैं जिन्हें बीजाणुधानी कहते हैं, और इन थैलियों के अंदर छोटे-छोटे बीज जैसे बीजाणु होते हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के सभी उप-भागों का सटीक उत्तर दें, खासकर वैज्ञानिक नामों और विशिष्ट संरचनाओं के नाम याद रखें।
Question 5. पौधों में पुष्प के क्या कार्य हैं? लिखिए।
Answer: पुष्प पौधों के जनन अंग होते हैं, जिनके कई महत्वपूर्ण कार्य होते हैं:
1. पुष्प नर और स्त्री जननांगों (पुंकेसर और स्त्रीकेसर) को अपने अंदर रखते हैं।
2. जननांगों में नर और मादा युग्मकों का विकास करते हैं और उन्हें उत्पन्न करते हैं।
3. विपरीत लिंग के युग्मकों के संयोजन या निषेचन की प्रक्रिया पुष्प में पूरी होती है। यह प्रक्रिया नई पीढ़ी के निर्माण के लिए आवश्यक है।
4. पुष्प से फल और बीजों का निर्माण होता है, जो पौधे के वंश को आगे बढ़ाते हैं।
In simple words: फूल पौधों में जनन का काम करते हैं। वे नर और मादा जनन अंगों को रखते हैं, युग्मक बनाते हैं, निषेचन की प्रक्रिया पूरी करते हैं, और आखिर में फल व बीज बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: पुष्प के कार्यों को क्रमबद्ध रूप से लिखें, जैसे कि जननांगों को धारण करना, युग्मक बनाना, निषेचन करना और फल-बीज बनाना।
Question 6. अपनी जानकारी के आधार पर निम्र के नाम लिखिए
(1) सबसे बड़ा पुष्प
(2) सबसे छोटा पुष्प
(3) सबसे बड़ा बीज
(4) सबसे छोटा बीज
Answer:
1. सबसे बड़ा पुष्प-रेफ्लीशिया। यह अपने आकार के लिए प्रसिद्ध है और एक अनोखी खुशबू छोड़ता है।
2. सबसे छोटा पुष्प-वुल्फिया।
3. सबसे बड़ा बीज-लोडोइसिया।
4. सबसे छोटा बीज-ऑर्किड।
In simple words: सबसे बड़ा फूल रेफ्लीशिया है, सबसे छोटा वुल्फिया। सबसे बड़ा बीज लोडोइसिया है, सबसे छोटा ऑर्किड का।
🎯 Exam Tip: इस तरह के तथ्य-आधारित प्रश्नों के लिए, नामों को सही वर्तनी के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 7. फल का निर्माण पुष्य में कहाँ होता है ? ये कितने प्रकार के होते हैं?
Answer: फल का निर्माण पुष्प के अण्डाशय में होता है, जो निषेचन के बाद विकसित होता है। फल तीन मुख्य प्रकार के होते हैं, जो उनके बनने के तरीके पर निर्भर करते हैं।
फल तीन प्रकार के होते हैं:
1. सरल फल
2. पुंज फल
3. संग्रहित फल
In simple words: फल फूल के अंडाशय से बनते हैं। फल तीन तरह के होते हैं: सरल, पुंज और संग्रहित।
🎯 Exam Tip: फल के निर्माण स्थान और उसके प्रकारों को स्पष्ट रूप से बताएँ, ताकि सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ शामिल हो सकें।
Question 8. मेण्डल ने अपने आनुवंशिकी प्रयोगों के लिए मटर के पौधे का चयन क्यों किया?
Answer: मेण्डल ने अपने आनुवंशिकी प्रयोगों के लिए मटर के पौधे को कुछ खास कारणों से चुना:
1. मटर के पौधे में आसानी से दिखने वाले सात अलग-अलग लक्षण होते हैं, जैसे लंबा या बौना, लाल या सफेद फूल।
2. मटर के पौधे का जीवनकाल बहुत कम होता है, जिससे कम समय में कई पीढ़ियों का अध्ययन किया जा सकता है।
3. मटर के पौधे में फूल इस तरह के होते हैं कि उनमें ज़रूरत के हिसाब से स्वपरागण (खुद से परागण) और परपरागण (दूसरे फूल से परागण) आसानी से कराया जा सकता है।
In simple words: मेण्डल ने मटर के पौधे को इसलिए चुना क्योंकि इसमें कई साफ-साफ दिखने वाले गुण थे, इसकी उम्र कम होती थी, और इसमें परागण (खुद से या दूसरों से) करवाना आसान था।
🎯 Exam Tip: मेण्डल के मटर के पौधे चुनने के कारणों को बिंदुवार समझाएँ, ताकि मुख्य विशेषताओं पर ज़ोर दिया जा सके।
Question 9. जनन किसी जाति के अस्तित्व को स्थायी बनाने में किस प्रकार सहायक है?
Answer: पृथ्वी पर हर जीव की मृत्यु निश्चित है, चाहे वह पौधा हो या जानवर। जनन की प्रक्रिया जातियों के अस्तित्व को स्थायी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि यह नई संतति को उत्पन्न करके जीवनचक्र को निरंतर रखती है। प्रत्येक सजीव अपने समान संतति पैदा करता है। जनन की प्रक्रिया से सजीवों की पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती है। इससे उनकी जातियों का अस्तित्व और निरंतरता बनी रहती है।
In simple words: जनन से जीव अपनी जैसी नई पीढ़ी बनाते रहते हैं, जिससे उनकी जाति धरती पर बनी रहती है और खत्म नहीं होती, क्योंकि हर जीव को मरना होता है।
🎯 Exam Tip: जनन के महत्व को 'जाति के अस्तित्व की निरंतरता' और 'मृत्यु की निश्चितता' जैसे मुख्य शब्दों के साथ समझाएँ।
निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. पुष्प के विभिन्न भागों की विशेषताएँ एवं कार्य लिखिए।
Answer: पुष्प पौधों का जनन अंग है, जिसके कई महत्वपूर्ण भाग होते हैं, और प्रत्येक भाग का अपना विशिष्ट कार्य होता है:
| क्र.सं. | भाग का नाम | विशेषताएँ | कार्य |
|---|---|---|---|
| 1. | बाह्यदलपुंज | यह हरे रंग की पत्तियों जैसी संरचना होती है, जो पुष्प के सबसे बाहरी हिस्से में होती है। | कली अवस्था में फूल के भीतरी भागों की रक्षा करता है। |
| 2. | दलपुंज | यह बाह्यदलपुंज के अंदर होता है। इसकी पंखुड़ियाँ रंगीन और सुगंधित होती हैं। | परागण के लिए कीटों और पक्षियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। |
| 3. | पुंकेसर | यह पुष्प का नर जनन अंग है, जिसमें दो मुख्य भाग होते हैं: परागकोश और पुतंतु। | परागकोश में परागकणों का निर्माण होता है, जो जनन में सहायक होते हैं। |
| 4. | स्त्रीकेसर | यह पुष्प का मादा जनन अंग है, जिसके तीन मुख्य भाग होते हैं: वर्तिकाग्र, वर्तिका और अण्डाशय। | अण्डाशय में बीजांड होते हैं, जहाँ अंडे बनते हैं। निषेचन के बाद अण्डाशय से फल और बीजांड से बीज बनते हैं। |
In simple words: फूल के कई हिस्से होते हैं, जैसे बाह्यदल, दल, पुंकेसर और स्त्रीकेसर। बाह्यदल कली की रक्षा करता है। दल (पंखुड़ियाँ) कीटों को आकर्षित करती हैं। पुंकेसर नर हिस्सा है जो परागकण बनाता है। स्त्रीकेसर मादा हिस्सा है जिसमें अंडाशय होता है, जहाँ से फल और बीज बनते हैं।
🎯 Exam Tip: पुष्प के प्रत्येक भाग का नाम, उसकी विशेषता और कार्य को एक तालिका के रूप में प्रस्तुत करना उत्तर को अधिक स्पष्ट और प्रभावशाली बनाता है।
Question 2. परागण से क्या आशय है? यह कितने प्रकार का होता है? सचित्र समझाइए।
Answer: परागण वह प्रक्रिया है जिसमें परागकण परागकोश से निकलकर पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं। यह प्रक्रिया जल, वायु, कीटों या जानवरों जैसे विभिन्न माध्यमों से होती है। अक्सर कीट फूलों पर बैठकर अपने शरीर पर परागकण चिपका लेते हैं और फिर दूसरे फूलों पर जाकर उन्हें वर्तिकाग्र तक पहुँचा देते हैं, जिससे परागण होता है।
परागण क्रिया के आधार पर दो प्रकार का होता है:
(1) स्वपरागण- इस क्रिया में परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर, या उसी पौधे के किसी दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं। जैसे-मटर और टमाटर में स्वपरागण होता है।
(2) परपरागण- इस क्रिया में परागकण एक पौधे के पुष्प से उसी प्रजाति के किसी दूसरे पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं। जैसे-गुलाब, पॉपी आदि में परपरागण पाया जाता है।
In simple words: परागण का मतलब है जब फूल के परागकण (छोटे कण) हवा, पानी या कीटों की मदद से एक फूल के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं। यह दो तरह का होता है: स्वपरागण (जब परागकण उसी फूल या पौधे के दूसरे फूल पर गिरें) और परपरागण (जब वे दूसरे पौधे के फूल पर गिरें)।
🎯 Exam Tip: परागण की परिभाषा और उसके प्रकारों को उदाहरणों के साथ याद रखें, और चित्र बनाकर उसे स्पष्ट करें।
Question 3. अनिषेकजनन क्या है? फल का निर्माण पौधे में कहाँ होता है? फलों को कितने वर्गों में बाँटा गया है? लिखिए।
Answer: अनिषेकजनन वह प्रक्रिया है जहाँ पौधों में बिना निषेचन (नर और मादा युग्मक के मिलने) के ही पुष्प सीधा फल में बदल जाता है। ऐसे फलों में आमतौर पर बीज नहीं होते हैं, जैसे केला और अंगूर।
फल का निर्माण पौधे में पुष्प के अण्डाशय में होता है। निषेचन के बाद अण्डाशय विकसित होकर फल का रूप ले लेता है।
फलों को बनने के तरीके के आधार पर मुख्य रूप से तीन वर्गों में बांटा गया है:
1. सरल फल- जब किसी एक पुष्प के अण्डाशय से केवल एक ही फल बनता है, तो उसे सरल फल कहते हैं। जैसे-आम, गेहूँ।
2. पुंज फल- जब एक ही पुष्प में कई अलग-अलग अण्डाशय होते हैं, और वे सभी मिलकर एक समूह के रूप में फल बनाते हैं, तो उसे पुंज फल कहते हैं। जैसे-स्ट्रॉबेरी।
3. संग्रहित फल- जब एक पूरे पुष्पक्रम (फूलों के समूह) के सभी पुष्प मिलकर एक बड़ा फल बनाते हैं, तो उसे संग्रहित फल कहते हैं। जैसे-शहतूत, कटहल। कुछ फल जैसे सेब और नाशपाती में पुष्पासन (फूल का आधार) भी फल बनाने में भाग लेता है, इसलिए इन्हें असत्य फल कहा जाता है।
In simple words: अनिषेकजनन का मतलब है बिना निषेचन के फल बनना, जिनमें बीज नहीं होते (जैसे केला)। फल फूल के अंडाशय से बनते हैं। फलों को सरल फल (जैसे आम), पुंज फल (जैसे स्ट्रॉबेरी), और संग्रहित फल (जैसे शहतूत) जैसे तीन मुख्य प्रकारों में बांटा गया है।
🎯 Exam Tip: अनिषेकजनन की परिभाषा, फल के निर्माण स्थान और फलों के तीनों प्रकारों को उदाहरणों के साथ स्पष्ट रूप से समझाएँ।
Question 4. आनुवंशिकी से क्या आशय है? मेण्डल द्वारा चयनित मटर के पौधे में पाए जाने वाले विपरीत लक्षणों (विपर्यासी लक्षण) की सारणी बनाइए।
Answer: आनुवंशिकी विज्ञान की वह शाखा है जो जीवों में गुणों के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाने (आनुवंशिकता) और इसे नियंत्रित करने वाले कारकों (जीन) का अध्ययन करती है। यह हमें समझाती है कि बच्चे अपने माता-पिता जैसे क्यों दिखते हैं।
मेण्डल द्वारा मटर के पौधे में अध्ययन किए गए विपरीत लक्षणों की सूची:
| क्र.सं. | लक्षण | गुण युग्म |
|---|---|---|
| 1. | तने की ऊँचाई | लंबा या बौना |
| 2. | फूल का रंग | लाल या सफेद |
| 3. | फूल की स्थिति | कक्षस्थ या शीर्षस्थ |
| 4. | फलों का आकार | चिकनी या खाँचेदार |
| 5. | फलों का रंग | हरा या पीला |
| 6. | बीज का आकार | गोल या झुर्रादार |
| 7. | बीज का रंग | पीला या हरा |
In simple words: आनुवंशिकी वह विज्ञान है जो यह बताता है कि माता-पिता के गुण बच्चों में कैसे जाते हैं। मेण्डल ने मटर के पौधे में सात अलग-अलग दिखने वाले गुणों का अध्ययन किया था, जैसे पौधे का लंबा या बौना होना, फूलों का रंग, और बीजों का आकार।
🎯 Exam Tip: आनुवंशिकी की परिभाषा स्पष्ट करें और मेण्डल के मटर के पौधे के सात विपरीत लक्षणों को सही-सही सारणीबद्ध करें, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण विषय है।
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