Get the most accurate RBSE Solutions for Class 8 Science Chapter 10 ध्वनि here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest RBSE textbooks for Class 8 Science. Our expert-created answers for Class 8 Science are available for free download in PDF format.
Detailed Chapter 10 ध्वनि RBSE Solutions for Class 8 Science
For Class 8 students, solving RBSE textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 8 Science solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 10 ध्वनि solutions will improve your exam performance.
Class 8 Science Chapter 10 ध्वनि RBSE Solutions PDF
Question 1. ध्वनि की उत्पत्ति का वैज्ञानिक कारण क्या है?
Answer: ध्वनि की उत्पत्ति का वैज्ञानिक कारण वस्तुओं में होने वाला कम्पन है। कम्पन का अर्थ है किसी वस्तु का अपनी मध्य स्थिति से इधर-उधर या ऊपर-नीचे गति करना। यह गति ध्वनि तरंगों को उत्पन्न करती है जिसे हम सुन पाते हैं।
In simple words: ध्वनि तब उत्पन्न होती है जब कोई वस्तु कंपन करती है, यानी तेजी से आगे-पीछे हिलती है।
🎯 Exam Tip: ध्वनि के उत्पादन के लिए हमेशा कम्पन (vibration) को मुख्य कारण के रूप में स्पष्ट करें।
पृष्ठ 109
Question 2. एक रबर बैण्ड के एक सिरे को दीवार पर लगी कील से बाँधकर तानते हैं। अब दूसरे हाथ से रबर बैण्ड को मध्य से खींचकर छोड़ने पर क्या ध्वनि उत्पन्न होती है?
Answer: हाँ, जब आप एक रबर बैण्ड को खींचकर छोड़ते हैं, तो ध्वनि उत्पन्न होती है। यह इसलिए होता है क्योंकि रबर बैण्ड के कण इस क्रिया के कारण तेजी से कंपन करने लगते हैं। यह कंपन हवा के माध्यम से ध्वनि तरंगों के रूप में हमारे कानों तक पहुँचता है।
In simple words: हाँ, जब रबर बैण्ड को खींचकर छोड़ा जाता है तो वह कंपन करता है, जिससे ध्वनि उत्पन्न होती है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रयोगों में हमेशा 'कंपन' और 'माध्यम' (जैसे हवा) के महत्व को बताएं जो ध्वनि को उत्पन्न और संचारित करते हैं।
Question 3. यदि रबर बैण्ड की गति रोक दी जाए तो क्या ध्वनि सुनाई देगी?
Answer: नहीं, यदि रबर बैण्ड की गति को रोक दिया जाए, तो आपको ध्वनि सुनाई नहीं देगी। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ध्वनि उत्पन्न होने के लिए वस्तु में कंपन होना आवश्यक है। जब कंपन रुक जाता है, तो ध्वनि का उत्पादन भी बंद हो जाता है। उदाहरण के लिए, एक बजती हुई घंटी को छूने पर उसकी ध्वनि रुक जाती है क्योंकि कंपन बंद हो जाते हैं।
In simple words: नहीं, अगर रबर बैण्ड का हिलना बंद हो जाए, तो ध्वनि भी रुक जाएगी क्योंकि ध्वनि के लिए कंपन जरूरी है।
🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि ध्वनि के उत्पादन और निरंतरता के लिए कंपन आवश्यक है। यदि कंपन रुक जाए, तो ध्वनि भी रुक जाती है।
Question 4. जब हम बोलते हैं तो हमारे कंठ से ध्वनि उत्पन्न होती है। यह वाकुध्वनि कैसे उत्पन्न होती है?
Answer: जब हम बोलते हैं, तो हमारे गले की कंठ नली (स्वरयंत्र) में मौजूद दो वाकतंतुओं (vocal cords) से ध्वनि उत्पन्न होती है। ये वाकतंतु बोलने के दौरान एक-दूसरे से खिंचकर आपस में पास आ जाते हैं, जिससे उनके बीच एक पतली झिरी (slit) बन जाती है। जब फेफड़ों से हवा इस झिरी में से तेजी से गुजरती है, तो वाकतंतुओं में कंपन होता है और यही कंपन वाक् ध्वनि को उत्पन्न करता है। इन तंतुओं में तनाव को बदलकर हम आवाज की पिच (तारत्व) को भी बदल सकते हैं।
In simple words: जब हम बोलते हैं, तो फेफड़ों से हवा हमारे गले में मौजूद वाकतंतुओं से टकराकर उन्हें कंपन कराती है, जिससे ध्वनि पैदा होती है।
🎯 Exam Tip: वाक् ध्वनि की उत्पत्ति में वाकतंतुओं के कंपन और फेफड़ों से निकलने वाली हवा की भूमिका को स्पष्ट रूप से समझाना चाहिए।
पृष्ठ 110
Question 5. क्या ठोस तथा द्रव में भी ध्वनि का संचरण होता है?
Answer: हाँ, ध्वनि का संचरण ठोस और द्रव दोनों माध्यमों में भी होता है, केवल गैस (हवा) में ही नहीं। वास्तव में, ध्वनि की चाल ठोस में सबसे तेज होती है, फिर द्रव में और गैस में सबसे धीमी। उदाहरण के लिए, आप दीवार पर कान लगाकर दूर से आती आवाज सुन सकते हैं।
In simple words: हाँ, ध्वनि ठोस और तरल पदार्थों में भी चल सकती है।
🎯 Exam Tip: ध्वनि को यात्रा करने के लिए एक माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) की आवश्यकता होती है। निर्वात में ध्वनि का संचरण नहीं होता।
पृष्ठ 111-112
Question 6. संबंधित तथ्यों की सरल गणना करके रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
Answer: दी गई तालिका में कंपन प्रति सेकंड की गणना की गई है। यह दर कंपन की कुल संख्या को लिए गए समय से भाग करके ज्ञात की जाती है। प्रत्येक गणना कंपन की आवृत्ति को सटीक रूप से दर्शाती है।
| संख्या | कम्पन/sec. | ||
|---|---|---|---|
| 1. A | 500 | 10 सेकण्ड | \( \frac{500}{10} = 50 \) कम्पन/sec. |
| 2. B | 400 | 10 सेकण्ड | \( \frac{400}{10} = 40 \) कम्पन/sec. |
| 3. C | 100 | 5 सेकण्ड | \( \frac{100}{5} = 20 \) कम्पन/sec. |
In simple words: हम प्रति सेकंड होने वाले कंपनों को निकालने के लिए कुल कंपनों को लगे समय से भाग करते हैं।
🎯 Exam Tip: कंपन प्रति सेकंड की गणना करते समय, सुनिश्चित करें कि कंपन की कुल संख्या को हमेशा सेकंड में दिए गए समय से विभाजित किया गया हो।
पृष्ठ 112-113
Question 7. नीचे दी गई सारणी में दिए जोडों में से क्षीण एवं प्रबल ध्वनियों की पहचान कीजिए।
Answer: नीचे दी गई सारणी में प्रत्येक जोड़े में से क्षीण (कमजोर) और प्रबल (तेज) ध्वनियों की पहचान की गई है। प्रबल ध्वनियाँ आमतौर पर अधिक आयाम वाली होती हैं, जिससे वे जोर से सुनाई देती हैं, जबकि क्षीण ध्वनियाँ कम आयाम वाली होती हैं।
| क्र. सं. | जोड़ा | क्षीण ध्वनि (कम प्रबल) | प्रबल ध्वनि (अधिक प्रबल) |
|---|---|---|---|
| 1. | चिमटा एवं घण्टा | चिमटा | घण्टा |
| 2. | शेर की दहाड़ एवं मच्छर की भिनभिनाहट | मच्छर की भिनभिनाहट | शेर की दहाड़ |
| 3. | ढोल एवं सितार | सितार | ढोल |
| 4. | बाँसुरी एवं बैण्डवालों का बड़ा बाजा | बाँसुरी | बैंड वालों का बड़ा बाजा |
| 5. | चुंघरू एवं ताशा | घुंघरू | ताशा |
In simple words: यह तालिका दिखाती है कि दिए गए जोड़ों में कौन सी ध्वनि धीमी है और कौन सी तेज।
🎯 Exam Tip: क्षीण और प्रबल ध्वनियों को पहचानते समय, उनकी तीव्रता और आयाम पर ध्यान दें। अधिक आयाम वाली ध्वनि अधिक प्रबल होती है।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
सही विकल्प का चयन कीजिए
Question 1. निम्नांकित में से किसमें ध्वनि का संचरण संभव नहीं है
(अ) लोहे की छड़
(ब) पानी
(स) हवा
(द) निर्वात
Answer: (द) निर्वात
In simple words: ध्वनि को चलने के लिए किसी चीज़ की जरूरत होती है, जैसे हवा, पानी या ठोस वस्तु। खाली जगह (निर्वात) में ध्वनि नहीं चल सकती।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है और इसे संचरण के लिए एक माध्यम की आवश्यकता होती है। निर्वात में कोई कण नहीं होते, इसलिए ध्वनि संचारित नहीं हो पाती।
Question 2. किसी कण या वस्तु के माध्य स्थिति के ऊपर/ नीचे (इर्द-गिर्द) गति को कहते हैं
(अ) कम्पन
(ब) आयाम
(स) आवृत्ति
(द) आवर्तकाल
Answer: (अ) कम्पन
In simple words: जब कोई कण या वस्तु अपनी बीच वाली जगह से ऊपर-नीचे या अगल-बगल हिलती है, तो उसे कंपन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: कंपन को गति के प्रकार के रूप में परिभाषित करें जो ध्वनि उत्पादन के लिए जिम्मेदार है, न कि उसकी विशेषताओं जैसे आयाम, आवृत्ति या आवर्तकाल के रूप में।
Question 3. 0°C पर वायु में ध्वनि की चाल होती हैं
(अ) 350 मी/से.
(ब) 200 मी/से.
(स) 400 मी/से.
(द) 331 मी/से.
Answer: (द) 331 मी/से.
In simple words: शून्य डिग्री सेल्सियस तापमान पर, हवा में ध्वनि की गति 331 मीटर प्रति सेकंड होती है।
🎯 Exam Tip: ध्वनि की चाल तापमान और माध्यम के प्रकार पर निर्भर करती है। 0°C पर वायु में ध्वनि की मानक चाल को याद रखें।
निम्नलिखित कथनों में से सही एवं गलत को छांटकर चिह्नित कीजिए
Question 1. ध्वनि वस्तुओं में कम्पन से उत्पन्न होती है। (सही/गलत)
2. ध्वनि तरंगों के संचरण के लिए माध्यम आवश्यक नहीं हैं। (सही/गलत)
3. ध्वनि का वेग ठोस में सर्वाधिक होता है। (सही/गलत)
4. ध्वनि की प्रबलता का मात्रक डेसीबल होता है। (सही/गलत)
Answer:
1. ध्वनि वस्तुओं में कम्पन से उत्पन्न होती है। (सही) - यह कथन सही है क्योंकि ध्वनि हमेशा वस्तुओं के कंपन से पैदा होती है।
2. ध्वनि तरंगों के संचरण के लिए माध्यम आवश्यक नहीं हैं। (गलत) - यह कथन गलत है; ध्वनि को एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए एक माध्यम (जैसे हवा, पानी, या ठोस) की जरूरत होती है।
3. ध्वनि का वेग ठोस में सर्वाधिक होता है। (सही) - यह कथन सही है; ध्वनि ठोस पदार्थों में सबसे तेजी से चलती है।
4. ध्वनि की प्रबलता का मात्रक डेसीबल होता है। (सही) - यह कथन सही है; ध्वनि की प्रबलता को डेसीबल (dB) में मापा जाता है।
In simple words: ध्वनि कंपन से बनती है (सही)। ध्वनि को चलने के लिए माध्यम चाहिए (गलत)। ध्वनि ठोस में सबसे तेज चलती है (सही)। ध्वनि की प्रबलता डेसीबल में मापते हैं (सही)।
🎯 Exam Tip: 'सही/गलत' प्रश्नों में, प्रत्येक कथन के पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांत को समझें और अपने उत्तरों को सटीक रूप से याद करें।
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
Question 1. मनुष्य में वाक् ध्वनि का मुख्य स्रोत __________ है।
2. 20,000 हर्ट्ज से अधिक आवृत्ति की ध्वनि तरंगों को __________ कहते हैं।
3. आवृत्ति का मात्रक __________ होता है।
4. ध्वनि की प्रबलता __________ पर निर्भर करती है।
5. ध्वनि का तारत्व __________ पर निर्भर करता है।
Answer:
1. मनुष्य में वाक् ध्वनि का मुख्य स्रोत वाक् तन्तु है। (मनुष्यों में बोलने की मुख्य आवाज वाक तंतुओं से आती है।)
2. 20,000 हर्ट्ज से अधिक आवृत्ति की ध्वनि तरंगों को पराश्रव्य कहते हैं। (20,000 Hz से ज्यादा आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को पराश्रव्य ध्वनि कहते हैं।)
3. आवृत्ति का मात्रक कम्पन प्रति सेकण्ड या हर्ट्ज होता है। (आवृत्ति की इकाई प्रति सेकंड कंपन या हर्ट्ज है।)
4. ध्वनि की प्रबलता कम्पन के आयाम पर निर्भर करती है। (ध्वनि की जोर कंपन के आयाम पर निर्भर करता है।)
5. ध्वनि का तारत्व ध्वनि की आवृत्ति पर निर्भर करता है। (ध्वनि की पिच (बारीक या मोटी) ध्वनि की आवृत्ति पर निर्भर करती है।)
In simple words: हमारी आवाज वाक तंतुओं से बनती है। 20,000 हर्ट्ज से ऊपर की ध्वनि पराश्रव्य होती है। आवृत्ति का मात्रक हर्ट्ज है। ध्वनि की प्रबलता आयाम पर और तारत्व आवृत्ति पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, सही तकनीकी शब्द और संबंधित अवधारणाओं को सटीक रूप से याद करें।
लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. एक वाद्य यंत्र 200 कम्पन पूर्ण करने में 2 सेकण्ड समय लेता है तो उसकी आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
Answer: दिया गया है कि एक वाद्य यंत्र 2 सेकंड में 200 कंपन पूरे करता है, तो उसकी आवृत्ति की गणना इस प्रकार की जा सकती है:
आवृत्ति \( = \frac{\text{कम्पनों की संख्या}}{\text{कम्पनों में लगा समय}} \)
\( \implies \) आवृत्ति \( = \frac{200 \text{ कम्पन}}{2 \text{ सेकण्ड}} \)
\( \implies \) आवृत्ति \( = 100 \) कम्पन प्रति सेकण्ड
इसका अर्थ है कि यंत्र हर सेकंड में 100 बार कंपन करता है।
In simple words: यदि एक यंत्र 2 सेकंड में 200 बार कंपन करता है, तो उसकी आवृत्ति 100 कंपन प्रति सेकंड है।
🎯 Exam Tip: आवृत्ति की गणना के लिए सही सूत्र (\( \text{कम्पनों की संख्या} / \text{समय} \)) का उपयोग करें और इकाई (कम्पन प्रति सेकंड या हर्ट्ज) को सही ढंग से लिखें।
Question 2. यदि किसी मंदिर की घंटी से उत्पन्न ध्वनि की आवृत्ति 400 कम्पन/सेकण्ड है, तो इसका आवर्तकाल ज्ञात कीजिए।
Answer: दिया गया है कि मंदिर की घंटी से उत्पन्न ध्वनि की आवृत्ति 400 कंपन प्रति सेकंड है। हमें इसका आवर्तकाल ज्ञात करना है। आवर्तकाल आवृत्ति का व्युत्क्रम होता है।
आवर्त काल \( = \frac{1}{\text{आवृत्ति}} \)
\( \implies \) आवर्त काल \( = \frac{1}{400 \text{ कम्पन/सेकण्ड}} \)
\( \implies \) आवर्त काल \( = 0.0025 \) सेकण्ड
यह गणना दर्शाती है कि एक पूर्ण कंपन को पूरा होने में कितना समय लगता है।
In simple words: यदि एक घंटी की ध्वनि 400 कंपन प्रति सेकंड है, तो उसका आवर्तकाल 0.0025 सेकंड होगा।
🎯 Exam Tip: आवर्तकाल और आवृत्ति के बीच के व्युत्क्रम संबंध को याद रखें। आवर्तकाल की इकाई हमेशा सेकंड में होती है।
Question 3. श्रव्य, अपश्रव्य तथा पराश्रव्य ध्वनि में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Answer: श्रव्य, अपश्रव्य और पराश्रव्य ध्वनि के बीच के अंतर को नीचे दी गई तालिका में समझाया गया है। ध्वनि की ये श्रेणियाँ उसकी आवृत्ति पर आधारित होती हैं।
| श्रव्य ध्वनि | अपश्रव्य ध्वनि | पराश्रव्य ध्वनि |
|---|---|---|
| 20 Hz से 20,000 Hz की ध्वनि को हम सुन सकते हैं। अतः इसे श्रव्य ध्वनि कहते हैं। | 20 Hz से कम आवृत्ति की ध्वनि को अपश्रव्य आवृत्ति ध्वनि कहते हैं। | 20,000 Hz (20 kHz) से अधिक आवृत्ति की ध्वनि को पराश्रव्य ध्वनि कहते हैं। |
In simple words: तालिका उन ध्वनियों में अंतर बताती है जिन्हें हम सुन सकते हैं (श्रव्य), उन ध्वनियों को जो बहुत धीमी हैं (अपश्रव्य), और उन ध्वनियों को जो बहुत तेज हैं (पराश्रव्य)।
🎯 Exam Tip: तीनों प्रकार की ध्वनियों के लिए आवृत्ति रेंज को सटीक रूप से याद रखें और उनके उदाहरणों को भी जानें।
Question 4. आवृत्ति एवं आवर्तकाल किसे कहते हैं? इनमें संबंध को सूत्र से व्यक्त कीजिए।
Answer:
1. **आवृत्ति (Frequency):** आवृत्ति वह संख्या है कि कोई वस्तु एक सेकंड में कितनी बार कंपन या चक्र पूरा करती है। इसकी इकाई 'कंपन प्रति सेकंड' या हर्ट्ज (Hz) है। अधिक आवृत्ति का अर्थ है अधिक कंपन, जिससे ध्वनि की पिच ऊंची होती है।
\[ \text{आवृत्ति} = \frac{\text{कम्पनों की संख्या}}{\text{कम्पनों में लगा समय}} \]
2. **आवर्तकाल (Time Period):** आवर्तकाल वह समय है जो किसी वस्तु को एक पूर्ण कंपन या चक्र पूरा करने में लगता है। इसकी इकाई सेकंड है।
3. **संबंध (Relationship):** आवृत्ति और आवर्तकाल एक-दूसरे के व्युत्क्रम होते हैं। इसका मतलब है कि यदि एक बढ़ता है, तो दूसरा घटता है। यदि आवृत्ति \(f\) और आवर्तकाल \(T\) है, तो \(f = \frac{1}{T}\) और \(T = \frac{1}{f}\) होता है। यह संबंध तरंगों के गुणों को समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
In simple words: आवृत्ति बताती है कि एक सेकंड में कितने कंपन होते हैं, और आवर्तकाल बताता है कि एक कंपन में कितना समय लगता है। वे एक-दूसरे के उल्टे होते हैं।
🎯 Exam Tip: आवृत्ति और आवर्तकाल दोनों की परिभाषाएँ, उनकी इकाइयाँ और उनके बीच का व्युत्क्रम संबंध सूत्र के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है।
दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. मानव वाक् यंत्र का चित्र बनाकर कार्यप्रणाली समझाइए।
Answer: मानव वाक् यंत्र (स्वरयंत्र) गले की कंठ नली में स्थित होता है और यह ध्वनि उत्पन्न करने के लिए जिम्मेदार है।
**मानव वाक् यंत्र की कार्यप्रणाली:** मनुष्य के गले की कंठ नली में दो पतले, लचीले स्नायु बैंड होते हैं जिन्हें वाकतंतु कहा जाता है। ये वाकतंतु एक प्राकृतिक वाद्य यंत्र की तरह काम करते हैं। जब हम बोलते हैं, तो ये वाकतंतु खिंच जाते हैं और उनके बीच एक पतली झिरी बन जाती है। जब फेफड़ों से हवा इस झिरी में से तेजी से निकलती है, तो ये वाकतंतु कंपन करने लगते हैं। यह कंपन ही ध्वनि उत्पन्न करता है जिसे हम आवाज के रूप में सुनते हैं। वाकतंतुओं में तनाव को बदलकर, हम अपनी आवाज की पिच (तारत्व) को नियंत्रित कर सकते हैं।
In simple words: हमारे गले में वाकतंतु होते हैं। जब फेफड़ों से हवा इन तंतुओं से गुजरती है, तो वे कंपन करते हैं और हमारी आवाज पैदा होती है।
🎯 Exam Tip: मानव वाक् यंत्र के चित्र को स्पष्ट रूप से नामांकित करें और वाकतंतुओं के खिंचाव और हवा के प्रवाह से ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है, इसका वर्णन करें।
Question 2. ध्वनि प्रदूषण क्या हैं? ध्वनि प्रदूषण हमें किस प्रकार प्रभावित करता है? इसे किस प्रकार नियंत्रित किया जा सकता है? विस्तार से लिखिए।
अथवा
ध्वनि प्रदूषण से आप क्या समझते हैं ? ध्वनि प्रदूषण को सीमित रखने के चार उपाय लिखिए।
Answer:
(i) **ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution):** वे ध्वनियाँ जो हमारे कानों को अप्रिय लगती हैं, उन्हें शोर कहते हैं। ऐसे अनावश्यक या अत्यधिक शोर का हमारे पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव ध्वनि प्रदूषण कहलाता है। यातायात के साधनों से उत्पन्न ध्वनि, अत्यधिक तेज संगीत और कल-कारखानों से आने वाली आवाज ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं। लगभग 80 डेसीबल से ऊपर की ध्वनि को असह्य माना जाता है और यह ध्वनि प्रदूषण में योगदान करती है।
(ii) **ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव (Effects of Noise Pollution):** ध्वनि प्रदूषण दैनिक जीवन की गतिविधियों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है और कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ पैदा करता है। इसमें चिड़चिड़ापन, अनिद्रा (नींद न आना), उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) और सुनने की क्षमता में अस्थायी या स्थायी कमी शामिल है। लंबे समय तक तेज ध्वनि के संपर्क में रहने से कान को गंभीर नुकसान हो सकता है।
(iii) **नियंत्रण के उपाय (Control Measures):** ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
* टेलीविजन और लाउडस्पीकर की ध्वनि की प्रबलता को कम रखना चाहिए ताकि दूसरों को परेशानी न हो।
* सड़कों और भवनों के आसपास अधिक पेड़ लगाने चाहिए। पेड़ ध्वनि तरंगों को अवशोषित करके शोर को कम करने में मदद करते हैं।
ये उपाय हमारे आसपास के समग्र ध्वनि स्तर को कम करने में सहायक होते हैं।
In simple words: ध्वनि प्रदूषण वह है जब तेज, अवांछित आवाजें हमें परेशान करती हैं। यह हमें चिड़चिड़ा बना सकता है, नींद छीन सकता है, या सुनने की क्षमता को नुकसान पहुँचा सकता है। हम आवाज कम करके और पेड़ लगाकर इसे नियंत्रित कर सकते हैं।
🎯 Exam Tip: ध्वनि प्रदूषण की परिभाषा, उसके हानिकारक प्रभावों और उसे नियंत्रित करने के व्यावहारिक उपायों को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 3. ध्वनि संकेतों को मस्तिष्क तक पहुँचने की प्रक्रिया को मानव कर्ण के नामांकित चित्र की सहायता से समझाइए।
Answer: ध्वनि संकेतों के मस्तिष्क तक पहुँचने की प्रक्रिया मानव कान के विभिन्न भागों द्वारा संपन्न होती है, जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।
**मानव कान (कर्ण) द्वारा सुनने की क्रिया:** हमारे कान का बाहरी भाग एक कीप (फनल) की तरह होता है, जिसे पिन्ना कहते हैं। जब ध्वनि इसमें प्रवेश करती है, तो यह एक नलिका से होकर गुजरती है। इस नलिका के सिरे पर एक पतली झिल्ली मजबूती से तनी होती है, जिसे कर्ण पटह (कान का पर्दा) कहते हैं। जब ध्वनि के कंपन कर्ण पटह से टकराते हैं, तो कर्ण पटह कंपन करने लगता है। ये कंपन कर्ण पटह से आंतरिक कर्ण तक भेजे जाते हैं। आंतरिक कर्ण में, ये कंपन विद्युत संकेतों में बदल जाते हैं जो श्रवण तंत्रिका के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुँचते हैं। इस प्रकार हम ध्वनि को सुन पाते हैं।
In simple words: ध्वनि बाहरी कान में आती है, कान के परदे से टकराकर उसे कंपन कराती है। फिर यह कंपन आंतरिक कान से होते हुए मस्तिष्क तक पहुँचता है, जिससे हम सुन पाते हैं।
🎯 Exam Tip: कान के मुख्य भागों (पिन्ना, कर्ण पटह, श्रवण गुहिका और श्रवण तंत्रिका) को नामांकित करें और ध्वनि यात्रा के क्रम को समझाएं।
Question 4. ठोस, द्रव और गैस माध्यम में ध्वनि किस प्रकार संचरित होती है ? समझाइए।
Answer: ध्वनि को संचरण के लिए एक माध्यम (जैसे ठोस, द्रव या गैस) की आवश्यकता होती है; यह निर्वात में यात्रा नहीं कर सकती। ध्वनि माध्यम के कणों के कंपन द्वारा संचारित होती है।
(1) **ठोस में ध्वनि का संचरण (Sound Propagation in Solids):** ठोस पदार्थों में ध्वनि का संचरण कणों के कंपन द्वारा होता है। जब ठोस के एक सिरे पर कंपन उत्पन्न होते हैं, तो वे क्रमिक रूप से आगे बढ़ते हुए दूसरे सिरे तक पहुँचते हैं और सुनाई देते हैं। यही कारण है कि आप दूर से आ रही ट्रेन की आवाज पटरी पर कान लगाकर सुन सकते हैं। ठोस में ध्वनि की चाल सबसे अधिक होती है।
(2) **द्रव में ध्वनि का संचरण (Sound Propagation in Liquids):** ध्वनि द्रवों में भी संचारित होती है। उदाहरण के लिए, यदि आप पानी से भरी बाल्टी में दो पत्थरों को बजाते हैं, तो आप ध्वनि स्पष्ट रूप से सुन सकते हैं। पानी में रहने वाले जीव जैसे डॉल्फिन और व्हेल ध्वनि तरंगों का उपयोग करके एक-दूसरे से संवाद करते हैं।
(3) **गैस में ध्वनि का संचरण (Sound Propagation in Gases):** ध्वनि गैसों में भी संचारित होती है, जैसे कि हमारे चारों ओर की हवा। जब हम बोलते हैं, तो हमारे वाकतंतुओं के कंपन हवा के कणों में कंपन उत्पन्न करते हैं, और ये कंपन हमारे कानों तक पहुँचते हैं। हालांकि, ठोस और द्रवों की तुलना में गैसों में ध्वनि सबसे धीमी गति से चलती है।
In simple words: ध्वनि ठोस, द्रव और गैस में उनके कणों के कंपन से चलती है। यह ठोस में सबसे तेज, फिर द्रव में, और गैस में सबसे धीमी चलती है।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक माध्यम (ठोस, द्रव, गैस) में ध्वनि संचरण की प्रक्रिया को उदाहरणों के साथ समझाएं और यह भी बताएं कि ध्वनि की चाल तीनों में कैसे भिन्न होती है।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. शून्य डिग्री पर वायु में ध्वनि की चाल होती है
(अ) शून्य
(ब) 400 मीटर/सेकण्ड
(स) 331 मीटर/सेकण्ड
(द) 250 मीटर/सेकण्डू
Answer: (स) 331 मीटर/सेकण्ड
In simple words: जब तापमान 0 डिग्री सेल्सियस होता है, तो हवा में ध्वनि 331 मीटर प्रति सेकंड की गति से चलती है।
🎯 Exam Tip: ध्वनि की चाल विभिन्न माध्यमों और तापमान पर निर्भर करती है; 0°C पर वायु में ध्वनि की चाल एक मानक मान है जिसे याद रखना चाहिए।
Question 2. निम्न में से आवर्तकाल का मात्रक क्या है?
(अ) घण्टा
(ब) सेकण्ड
(स) मिनट
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ब) सेकण्ड
In simple words: आवर्तकाल को मापने के लिए सेकंड का उपयोग किया जाता है।
🎯 Exam Tip: आवर्तकाल एक समय माप है, इसलिए इसकी इकाई समय की मूल इकाई (सेकंड) होनी चाहिए।
Question 3. एक कम्पन करने में लगे समय को क्या कहते हैं?
(अ) आवर्तकाल
(ब) आवृत्ति
(स) आयाम
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (अ) आवर्तकाल
In simple words: एक पूरा कंपन करने में जितना समय लगता है, उसे आवर्तकाल कहते हैं।
🎯 Exam Tip: आवर्तकाल की परिभाषा को उसकी इकाई और आवृत्ति के साथ उसके संबंध के संदर्भ में समझें।
Question 5. निम्न में से कौनसा जन्तु पराश्रव्य ध्वनि सुन सकता हैं?
(अ) कुत्ता
(ब) चमगाई
(स) व्हेल
(द) सभी
Answer: (द) सभी
In simple words: कुत्ते, चमगादड़ और व्हेल सभी पराश्रव्य ध्वनि सुन सकते हैं, जो इतनी उच्च आवृत्ति वाली होती है कि मनुष्य नहीं सुन सकते।
🎯 Exam Tip: विभिन्न जानवरों की सुनने की क्षमता के बारे में जानें और वे पराश्रव्य ध्वनियों का उपयोग कैसे करते हैं (जैसे चमगादड़ का इकोलोकेशन)।
Question 6. ध्वनि की सर्वाधिक चाल किस माध्यम में होती
(अ) द्रव में
(ब) निर्वात में
(स) ठोस में
(द) गैस में
Answer: (स) ठोस में
In simple words: ध्वनि सबसे तेजी से ठोस वस्तुओं में चलती है।
🎯 Exam Tip: ध्वनि की चाल माध्यम के घनत्व और प्रत्यास्थता पर निर्भर करती है। ठोसों में कण अधिक पास होते हैं, जिससे ध्वनि तेजी से चलती है।
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
Question 1. ध्वनि के संचरण के लिए __________ की आवश्यकता होती है। (माध्यम/निर्वात)
2. ध्वनि __________ में संचरित नहीं होती है (माध्यम/निर्वात )
3. आवर्तकाल एवं आवृत्ति एक-दूसरे के __________ होते हैं। (व्युत्क्रम/विपरीत)
4. ध्वनि का तारत्व ध्वनि की __________ पर निर्भर करता है। (आवृत्ति/आयाम)
5. कर्ण पटह को सामान्य भाषा में __________ कहते है। (बाह्य कर्ण/कान का पर्दा)
Answer:
1. ध्वनि के संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है। (ध्वनि को चलने के लिए एक माध्यम चाहिए।)
2. ध्वनि निर्वात में संचरित नहीं होती है। (ध्वनि खाली जगह में नहीं चल सकती।)
3. आवर्तकाल एवं आवृत्ति एक-दूसरे के व्युत्क्रम होते हैं। (आवर्तकाल और आवृत्ति एक-दूसरे के उल्टे होते हैं।)
4. ध्वनि का तारत्व ध्वनि की आवृत्ति पर निर्भर करता है। (ध्वनि की पिच उसकी आवृत्ति पर निर्भर करती है।)
5. कर्ण पटह को सामान्य भाषा में कान का पर्दा कहते है। (कान का परदा जिसे कर्ण पटह कहते हैं, कान के अंदर का एक भाग है।)
In simple words: ध्वनि को चलने के लिए माध्यम चाहिए। ध्वनि खाली जगह में नहीं चलती। आवर्तकाल और आवृत्ति एक-दूसरे के उल्टे होते हैं। ध्वनि की पिच आवृत्ति पर निर्भर करती है। कर्ण पटह को कान का परदा कहते हैं।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, सही तकनीकी शब्द और उनके सटीक अर्थ को समझें ताकि आप सही विकल्प चुन सकें।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. कम्पन गति किसे कहते हैं?
Answer: कम्पन गति किसी कण या वस्तु की माध्य स्थिति के ऊपर-नीचे या इर्द-गिर्द (आगे-पीछे) होने वाली गति को कहते हैं। यह तीव्र और आवर्ती गति होती है। वस्तुओं में ध्वनि इसी कंपन गति के कारण उत्पन्न होती है।
In simple words: कंपन गति का मतलब है जब कोई वस्तु अपनी जगह पर तेजी से आगे-पीछे या ऊपर-नीचे हिलती है।
🎯 Exam Tip: कम्पन गति की परिभाषा में माध्य स्थिति (mean position) और आवर्ती गति (periodic motion) शब्दों का प्रयोग करें।
Question 2. ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है?
Answer: ध्वनि वस्तुओं में कंपन के कारण उत्पन्न होती है। जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो वह अपने आसपास के माध्यम (जैसे हवा) के कणों को भी कंपन कराती है, और ये कंपन तरंगों के रूप में हमारे कानों तक पहुँचते हैं।
In simple words: ध्वनि तभी पैदा होती है जब चीजें कंपन करती हैं या हिलती हैं।
🎯 Exam Tip: ध्वनि उत्पादन का मूल सिद्धांत हमेशा कंपन ही होता है। यह एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जिसे याद रखना चाहिए।
Question 3. वाक् तन्तु किसे कहते हैं ?
Answer: वाक् तन्तु मनुष्य के गले को कंठ नली (स्वरयंत्र) में मौजूद दो स्नायु या संधि बन्धन होते हैं। ये तन्तु हवा के गुजरने पर कंपन करके ध्वनि उत्पन्न करते हैं, जिससे हमारी आवाज बनती है।
In simple words: वाक तंतु हमारे गले में दो पतले बैंड होते हैं जो आवाज पैदा करने के लिए कंपन करते हैं।
🎯 Exam Tip: वाक तंतुओं को कंठ नली में स्थित स्नायु बन्धन के रूप में परिभाषित करें जो ध्वनि उत्पादन के लिए जिम्मेदार हैं।
Question 4. ध्वनि का संचरण किन-किन माध्यमों में होता है?
Answer: ध्वनि का संचरण तीनों माध्यमों में होता है: ठोस, द्रव और गैस (वायु)। ध्वनि को संचरित होने के लिए एक भौतिक माध्यम की आवश्यकता होती है, इसलिए यह निर्वात में यात्रा नहीं कर सकती। ध्वनि प्रत्येक माध्यम में अलग-अलग गति से चलती है।
In simple words: ध्वनि ठोस, द्रव और गैस (हवा) में चलती है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि ध्वनि को यात्रा करने के लिए एक माध्यम की आवश्यकता होती है। यह तीनों भौतिक अवस्थाओं (ठोस, द्रव, गैस) में यात्रा कर सकती है, लेकिन निर्वात में नहीं।
Question 6. चन्द्रमा पर अन्तरिक्ष यात्री आपस में बात क्यों नहीं कर सकते हैं?
Answer: चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्री आपस में बात नहीं कर सकते हैं क्योंकि चंद्रमा पर वायुमंडल नहीं है, यानी वहाँ हवा नहीं है। ध्वनि तरंगों को संचरण के लिए एक माध्यम (जैसे हवा) की आवश्यकता होती है। चूंकि चंद्रमा पर निर्वात है, इसलिए ध्वनि तरंगें एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक नहीं पहुँच पातीं। उन्हें संवाद के लिए रेडियो जैसे अन्य माध्यमों का उपयोग करना पड़ता है।
In simple words: चंद्रमा पर हवा नहीं है, इसलिए ध्वनि नहीं चल सकती और अंतरिक्ष यात्री आपस में बात नहीं कर सकते।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय ध्वनि के माध्यम की आवश्यकता के सिद्धांत को स्पष्ट रूप से समझाएं।
Question 7. आयाम किसे कहते हैं ?
Answer: आयाम कंपन करने वाली वस्तु का उसकी माध्य स्थिति (विश्राम अवस्था) से अधिकतम विस्थापन या दूरी को कहते हैं। यह कंपन की शक्ति या तीव्रता का माप होता है। अधिक आयाम वाली ध्वनि अधिक प्रबल (तेज) होती है।
In simple words: आयाम का मतलब है कि जब कोई चीज कंपन करती है, तो वह अपनी सामान्य जगह से कितनी दूर तक हिलती है।
🎯 Exam Tip: आयाम को माध्य स्थिति से 'अधिकतम विस्थापन' के रूप में परिभाषित करें और ध्वनि की प्रबलता से उसके संबंध का उल्लेख करें।
Question 8. आवृत्ति किसे कहते हैं ? इसका मात्रक क्या होता है ?
Answer: आवृत्ति किसी वस्तु द्वारा एक सेकंड में किए गए कंपनों या चक्रों की संख्या को कहते हैं। इसका मानक मात्रक कंपन प्रति सेकंड है, जिसे हर्ट्ज (Hz) भी कहा जाता है। उच्च आवृत्ति का अर्थ है अधिक कंपन प्रति सेकंड, जिससे ध्वनि की पिच ऊंची होती है।
In simple words: आवृत्ति वह है कि कोई वस्तु एक सेकंड में कितनी बार कंपन करती है। इसे हर्ट्ज में मापते हैं।
🎯 Exam Tip: आवृत्ति की परिभाषा में 'एक सेकंड में कंपनों की संख्या' और उसकी इकाई 'हर्ट्ज' को शामिल करें।
Question 9. आवर्तकाल किसे कहते हैं ? इसका मात्रक क्या होता है ?
Answer: आवर्तकाल वह समय है जो किसी वस्तु को एक पूर्ण कंपन या चक्र पूरा करने में लगता है। आवर्तकाल की मानक इकाई सेकंड है। यह आवृत्ति का व्युत्क्रम होता है।
In simple words: आवर्तकाल वह समय है जो किसी कंपन को एक बार पूरा करने में लगता है, और इसे सेकंड में मापते हैं।
🎯 Exam Tip: आवर्तकाल को 'एक पूर्ण कंपन में लगने वाले समय' के रूप में परिभाषित करें और उसकी इकाई (सेकंड) को स्पष्ट करें।
Question 10. आवृत्ति एवं आवर्तकाल में सम्बन्ध दर्शाइए।
Answer: आवृत्ति और आवर्तकाल एक-दूसरे के व्युत्क्रम होते हैं। इसका अर्थ है कि यदि आवृत्ति \(f\) है और आवर्तकाल \(T\) है, तो उनके बीच का संबंध \(f = \frac{1}{T}\) या \(T = \frac{1}{f}\) होता है। यह संबंध तरंग गति के अध्ययन में मौलिक है।
In simple words: आवृत्ति और आवर्तकाल एक-दूसरे के उल्टे होते हैं। अगर आवृत्ति ज्यादा है, तो आवर्तकाल कम होगा।
🎯 Exam Tip: आवृत्ति और आवर्तकाल के बीच के व्युत्क्रम संबंध को सूत्र (\(f = 1/T\)) के साथ स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 11. ध्वनि की तीव्रता किस पर निर्भर करती है?
Answer: ध्वनि की तीव्रता (loudness) उसके कंपन के आयाम पर निर्भर करती है। जब किसी वस्तु का कंपन आयाम अधिक होता है, तो उत्पन्न ध्वनि की तीव्रता भी अधिक होती है और वह अधिक तेज सुनाई देती है। ध्वनि के आयाम और तीव्रता का सीधा संबंध होता है।
In simple words: ध्वनि कितनी तेज है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि कंपन कितनी दूर तक हो रहा है (आयाम)।
🎯 Exam Tip: ध्वनि की तीव्रता और आयाम के सीधे संबंध को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 13. ध्वनि के तारत्व से क्या अभिप्राय हैं?
Answer: ध्वनि का तारत्व (pitch) वह लक्षण है जिससे हम ध्वनि को तीक्ष्ण (बारीक) या भारी (मोटी) के रूप में पहचानते हैं। तारत्व ध्वनि की आवृत्ति पर निर्भर करता है: उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि का तारत्व उच्च (तीक्ष्ण) होता है, जबकि कम आवृत्ति वाली ध्वनि का तारत्व निम्न (भारी) होता है।
In simple words: ध्वनि का तारत्व हमें बताता है कि आवाज पतली है या मोटी। यह ध्वनि की आवृत्ति पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: तारत्व को ध्वनि के 'बारीक या मोटा' होने के गुण के रूप में परिभाषित करें और इसे आवृत्ति के साथ जोड़ें।
Question 14. महिला एवं बच्चों की आवाज सुरीली एवं बारीक क्यों होती हैं?
Answer: महिला एवं बच्चों की आवाज सुरीली और बारीक (उच्च तारत्व वाली) होती है क्योंकि उनकी आवाज का तारत्व अधिक होता है। इसका मतलब है कि उनके वाकतंतु उच्च आवृत्ति पर कंपन करते हैं, जिससे उच्च-पिच वाली ध्वनि उत्पन्न होती है।
In simple words: महिलाओं और बच्चों की आवाज बारीक और सुरीली इसलिए होती है क्योंकि उनका तारत्व (पिच) ज्यादा होता है।
🎯 Exam Tip: तारत्व और आवृत्ति के संबंध का उपयोग करके महिलाओं और बच्चों की आवाज की विशेषताओं को समझाएं।
Question 15. किस तारत्व वाली ध्वनि की आवृत्ति न्यून होती है?
Answer: निम्न तारत्व वाली ध्वनि की आवृत्ति न्यून होती है। इसका अर्थ है कि ध्वनि तरंगें धीरे-धीरे कंपन करती हैं। उदाहरण के लिए, पुरुषों की आवाज में आमतौर पर निम्न तारत्व और कम आवृत्ति होती है।
In simple words: जिस ध्वनि का तारत्व कम होता है, उसकी आवृत्ति भी कम होती है।
🎯 Exam Tip: निम्न तारत्व को कम आवृत्ति से और उच्च तारत्व को उच्च आवृत्ति से संबंधित करना याद रखें।
Question 16. हमारे कान न्यूनतम एवं अधिकतम कितनी आवृत्ति की ध्वनि सुन सकते हैं ?
Answer: मानव कान न्यूनतम 20 हर्ट्ज (Hz) और अधिकतम 20,000 हर्ट्ज (Hz) की आवृत्ति की ध्वनि को ही सुन सकते हैं। इस सीमा के बाहर की ध्वनियाँ या तो अपश्रव्य (बहुत कम आवृत्ति) या पराश्रव्य (बहुत उच्च आवृत्ति) होती हैं।
In simple words: हमारे कान 20 हर्ट्ज से 20,000 हर्ट्ज तक की ध्वनि सुन सकते हैं।
🎯 Exam Tip: मानव श्रवण सीमा (20 Hz से 20,000 Hz) को सटीक रूप से याद रखें क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण सामान्य ज्ञान तथ्य है।
Question 17. श्रव्य ध्वनि किसे कहते हैं ?
Answer: श्रव्य ध्वनि (Audible sound) उन ध्वनि तरंगों को कहते हैं जिन्हें मनुष्य सुन सकता है। इन ध्वनियों की आवृत्ति 20 हर्ट्ज से 20,000 हर्ट्ज की सीमा के भीतर होती है। यह वह सीमा है जिसमें हमारे कान ध्वनि को पहचान सकते हैं।
In simple words: श्रव्य ध्वनि वह ध्वनि है जिसे इंसान सुन सकते हैं, और इसकी आवृत्ति 20 से 20,000 हर्ट्ज के बीच होती है।
🎯 Exam Tip: श्रव्य ध्वनि की आवृत्ति सीमा को याद रखें और इसे मानव श्रवण की प्राकृतिक सीमा के रूप में समझाएं।
Question 18. अपश्रव्य ध्वनि किसे कहते हैं ?
Answer: अपश्रव्य ध्वनि (Infrasonic sound) उन ध्वनि तरंगों को कहते हैं जिनकी आवृत्ति 20 हर्ट्ज से कम होती है। ये ध्वनियाँ मानव श्रवण सीमा से नीचे होती हैं, इसलिए हम इन्हें सुन नहीं पाते, लेकिन कुछ जानवर जैसे हाथी और गैंडे इन्हें सुन सकते हैं।
In simple words: अपश्रव्य ध्वनि वह ध्वनि है जिसकी आवृत्ति 20 हर्ट्ज से कम होती है, और इसे इंसान नहीं सुन पाते।
🎯 Exam Tip: अपश्रव्य ध्वनि को 'मानव श्रवण सीमा से नीचे' के रूप में परिभाषित करें और उसकी आवृत्ति सीमा (20 Hz से कम) को स्पष्ट करें।
Question 19. पराश्रव्य ध्वनि किसे कहते हैं?
Answer: पराश्रव्य ध्वनि (Ultrasonic sound) उन ध्वनि तरंगों को कहते हैं जिनकी आवृत्ति 20,000 हर्ट्ज से अधिक होती है। ये ध्वनियाँ मानव श्रवण सीमा से ऊपर होती हैं और हम इन्हें सुन नहीं पाते हैं, लेकिन चमगादड़ और कुत्ते जैसे कुछ जानवर इन्हें सुन सकते हैं और इनका उपयोग करते हैं। चिकित्सा इमेजिंग में भी पराश्रव्य ध्वनि का उपयोग होता है।
In simple words: पराश्रव्य ध्वनि वह ध्वनि है जिसकी आवृत्ति 20,000 हर्ट्ज से ज्यादा होती है, और इसे इंसान नहीं सुन पाते।
🎯 Exam Tip: पराश्रव्य ध्वनि को 'मानव श्रवण सीमा से ऊपर' के रूप में परिभाषित करें और उसकी आवृत्ति सीमा (20,000 Hz से अधिक) को स्पष्ट करें।
लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. निम्नलिखित ध्वनियों में से प्रबल व क्षीण ध्वनियों को छाँटकर सारणीबद्ध कीजिए घुघरू, बाँसुरी, ढोल, शेर की दहाड़
Answer: दी गई ध्वनियों (घुँघरू, बाँसुरी, ढोल, शेर की दहाड़) को प्रबल (तेज) और क्षीण (धीमी) ध्वनियों में वर्गीकृत किया जा सकता है। प्रबल ध्वनियाँ वे होती हैं जिनका आयाम बड़ा होता है, जबकि क्षीण ध्वनियाँ कम आयाम वाली होती हैं।
| प्रबल ध्वनि | क्षीण ध्वनि |
|---|---|
| शेर की दहाड़ | बाँसुरी |
| ढोल | घुंघरू |
In simple words: यहाँ दी गई ध्वनियों को तेज (प्रबल) और धीमी (क्षीण) आवाजों में बांटा गया है। शेर की दहाड़ और ढोल प्रबल हैं, जबकि बाँसुरी और घुंघरू क्षीण हैं।
🎯 Exam Tip: ध्वनियों को प्रबल और क्षीण में वर्गीकृत करते समय, उनकी सामान्य तीव्रता और आपके अनुभव के आधार पर निर्णय लें।
Question 2. निम्नांकित सारणी का अवलोकन कर पूर्ति कीजिए
Answer: दी गई सारणी में प्रत्येक जोड़े के लिए क्षीण (कम प्रबल) और प्रबल (अधिक प्रबल) ध्वनियों की पहचान करके उसे पूरा किया गया है। यह तालिका ध्वनि की तीव्रता को समझने में मदद करती है।
| क्र. सं. | जोड़ा | क्षीण ध्वनि (कम प्रबल) | प्रबल ध्वनि (अधिक प्रबल) |
|---|---|---|---|
| 1. | चिमटा एवं घण्टा | चिमटा | घण्टा |
| 2. | ढोल एवं सितार | सितार | ढोल |
| 3. | धुंघरू एवं ताशा | घुंघरू | ताशा |
In simple words: इस तालिका में, प्रत्येक जोड़े में से धीमी और तेज ध्वनियों को सही कॉलम में रखा गया है।
🎯 Exam Tip: तालिका-आधारित प्रश्नों में, प्रत्येक जोड़े में ध्वनियों की सापेक्ष प्रबलता का सटीक मूल्यांकन करें और उन्हें सही श्रेणी में रखें।
Question 4. बन्द वाक् तन्त्रे, खुला वाक् तन्त्र का चित्र बनाइए।
Answer: वाक् तन्तुओं की बंद और खुली स्थिति को दर्शाने वाले चित्र नीचे दिए गए हैं। ये चित्र दिखाते हैं कि ध्वनि उत्पन्न करते समय वाक् तंतु कैसे दिखते हैं।
In simple words: आपको बंद और खुले वाक् तन्तुओं के चित्र बनाने हैं। ये चित्र दिखाते हैं कि जब हम बोलते हैं तो हमारे गले के वाक् तन्तु कैसे दिखते हैं।
🎯 Exam Tip: चित्रों को बनाते समय उनके महत्वपूर्ण भागों को सही ढंग से लेबल करना याद रखें, जैसे कि वाक् तंतुओं का आकार और गले का समग्र ढांचा।
Question 5. ठोस में ध्वनि संचरण को प्रयोग द्वारा समझाइए।
Answer: ठोस में ध्वनि कैसे चलती है, इसे समझने के लिए आप एक प्रयोग कर सकते हैं। एक लंबी धातु की छड़ या पटरी लें। अपने एक दोस्त से छड़ के एक सिरे पर धीरे से खटखटाने के लिए कहें। अब आप दूसरे सिरे पर अपना कान लगाएं। आप देखेंगे कि खटखटाने की आवाज आपको हवा से पहले धातु की छड़ से सुनाई देगी। यह दिखाता है कि ध्वनि ठोस में बहुत अच्छे से और तेजी से चलती है। ध्वनि ऊर्जा ठोस के कणों में कंपन के रूप में एक कण से दूसरे कण तक जाती है।
In simple words: एक लंबी छड़ लें। एक सिरे पर धीरे से खटखटाएं और दूसरे सिरे पर कान लगाएं। आपको आवाज जल्दी सुनाई देगी क्योंकि ध्वनि ठोस में तेजी से चलती है।
🎯 Exam Tip: यह प्रयोग करते समय, सुनिश्चित करें कि आपके दोस्त और आपके बीच कोई प्रत्यक्ष वायु मार्ग न हो ताकि आप केवल ठोस माध्यम से आने वाली ध्वनि को सुन सकें।
Question 7.
1. ध्वनि की चाल सबसे अधिक एवं सबसे कम कौनसे माध्यम में होती है?
2. 0°C पर वायु में ध्वनि की चाल कितनी होती
3. चन्द्रमा पर एक यात्री दूसरे यात्री से बात क्यों नहीं कर सकता है?
Answer:
1. ध्वनि की चाल सबसे अधिक ठोस माध्यम में होती है, और सबसे कम गैस (वायु) माध्यम में होती है। द्रव में चाल ठोस से कम और गैस से अधिक होती है।
2. 0°C पर वायु में ध्वनि की चाल लगभग 331 मीटर प्रति सेकण्ड होती है। यह तापमान बढ़ने पर थोड़ी बढ़ जाती है।
3. चंद्रमा पर वायुमंडल नहीं होता, यानी वहाँ हवा नहीं होती है। ध्वनि को चलने के लिए एक माध्यम (जैसे हवा, पानी या ठोस) की जरूरत होती है। इसलिए, चंद्रमा पर एक अंतरिक्ष यात्री दूसरे यात्री से सीधे बात नहीं कर सकता क्योंकि ध्वनि के संचरण के लिए कोई माध्यम मौजूद नहीं होता।
In simple words: ध्वनि ठोस में सबसे तेज और हवा में सबसे धीमी चलती है। 0°C पर हवा में ध्वनि की गति 331 मीटर प्रति सेकंड होती है। चंद्रमा पर कोई हवा नहीं है, इसलिए वहाँ कोई भी ध्वनि नहीं सुन सकता।
🎯 Exam Tip: ध्वनि के संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता को हमेशा याद रखें, और विभिन्न माध्यमों में उसकी गति के क्रम को भी ध्यान में रखें (ठोस > द्रव > गैस)।
Question 8. निम्न के कारण बताइए
1. ढोलक की ध्वनि की अपेक्षा सितार की ध्वनि अधिक मधुर क्यों लगती है?
2. कोयल की ध्वनि, कौए की ध्वनि से अधिक मधुर क्यों लगती हैं?
Answer:
1. ढोलक की ध्वनि की तुलना में सितार की ध्वनि अधिक मधुर इसलिए लगती है, क्योंकि सितार की ध्वनि का तारत्व अधिक होता है। तारत्व ध्वनि की महीनता या तीक्ष्णता को दर्शाता है, और उच्च तारत्व वाली ध्वनियाँ अक्सर कानों को अधिक सुरीली लगती हैं।
2. कोयल की ध्वनि कौए की ध्वनि से अधिक मधुर इसलिए लगती है क्योंकि कोयल की आवाज का तारत्व अधिक होता है और उसकी ध्वनि में एक खास मिठास होती है। यह ध्वनि की गुणवत्ता या गुणता पर भी निर्भर करता है, जिससे कोयल की आवाज ज्यादा सुरीली महसूस होती है।
In simple words: सितार की आवाज ढोलक से मीठी लगती है क्योंकि सितार की आवाज का तारत्व (महीनपन) ज्यादा होता है। कोयल की आवाज कौए से मीठी होती है क्योंकि कोयल का तारत्व अधिक होता है और उसकी आवाज में एक खास मिठास होती है।
🎯 Exam Tip: तारत्व को ध्वनि के "महीन" या "भारी" होने से जोड़ें, और गुणवत्ता को ध्वनि की "मिठास" या "कठोरता" से जोड़कर उत्तर दें।
Question 10. मानव कर्ण में पिन्ना, श्रवण गुहिका, कर्ण पटह क्या होते हैं?
Answer: मानव कान के तीन मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:
1. **पिन्ना:** यह मनुष्य के कान का बाहरी भाग होता है, जिसकी आकृति एक कीप जैसी होती है। यह आसपास से ध्वनि तरंगों को इकट्ठा करके कान के अंदर भेजता है।
2. **श्रवण गुहिका:** जब ध्वनि पिन्ना से कान के अंदर जाती है, तो यह एक छोटी नली से होकर गुजरती है जिसे श्रवण गुहिका कहते हैं। यह नली ध्वनि को कर्ण पटह तक पहुंचाती है।
3. **कर्ण पटह:** यह श्रवण गुहिका नली के सिरे पर एक पतली और खिंची हुई झिल्ली होती है। इसे कान का पर्दा भी कहते हैं। जब ध्वनि तरंगें इस पर टकराती हैं, तो इसमें कंपन होता है, जो ध्वनि को आंतरिक कान तक भेजता है।
In simple words: पिन्ना कान का बाहरी हिस्सा है जो आवाज इकट्ठा करता है। श्रवण गुहिका वह नली है जिससे आवाज अंदर जाती है। कर्ण पटह कान का पर्दा है जो आवाज से हिलता है।
🎯 Exam Tip: मानव कान के प्रत्येक भाग के कार्य को स्पष्ट रूप से समझाएं, खासकर पिन्ना के ध्वनि संग्रह और कर्ण पटह के कंपन की भूमिका को।
Question 11. यदि एक धुंघरू 10 सेकण्ड में 400 कम्पन करता है, तो उसकी आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
Answer:
दिए गए प्रश्न के अनुसार:
कम्पनों की कुल संख्या \( = 400 \) कम्पन
कम्पनों में लगा कुल समय \( = 10 \) सेकण्ड
आवृत्ति का सूत्र है:
आवृत्ति \( = \frac{\text{कम्पनों की कुल संख्या}}{\text{कम्पनों में लगा समय}} \)
\( \implies \) आवृत्ति \( = \frac{400 \text{ कम्पन}}{10 \text{ सेकण्ड}} \)
\( \implies \) आवृत्ति \( = 40 \) कम्पन प्रति सेकण्ड
In simple words: एक घुंघरू 10 सेकंड में 400 बार हिलता है। उसकी आवृत्ति निकालने के लिए, कुल हिलने की संख्या को कुल समय से भाग दें। तो, यह 40 बार प्रति सेकंड हिलता है।
🎯 Exam Tip: आवृत्ति की गणना करते समय, हमेशा सुनिश्चित करें कि आप कम्पनों की कुल संख्या को समय से भाग दे रहे हैं और मात्रक 'कम्पन प्रति सेकण्ड' या 'हर्ट्ज' में लिखें।
Question 12. एक वाद्य यन्त्र 400 कम्पन पूरे करने में 4 सेकण्ड का समय लेता है। उसकी आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
Answer:
दिए गए प्रश्न के अनुसार:
कम्पनों की कुल संख्या \( = 400 \) कम्पन
कम्पनों में लगा कुल समय \( = 4 \) सेकण्ड
आवृत्ति का सूत्र है:
आवृत्ति \( = \frac{\text{कम्पनों की कुल संख्या}}{\text{कम्पनों में लगा समय}} \)
\( \implies \) आवृत्ति \( = \frac{400 \text{ कम्पन}}{4 \text{ सेकण्ड}} \)
\( \implies \) आवृत्ति \( = 100 \) कम्पन प्रति सेकण्ड
In simple words: यदि कोई वाद्य यंत्र 4 सेकंड में 400 बार कंपन करता है, तो उसकी आवृत्ति 100 कंपन प्रति सेकंड होगी। यह बस यह बताता है कि यह कितनी तेजी से कंपन करता है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, हमेशा 'कम्पन प्रति सेकण्ड' या 'हर्ट्ज' में सही मात्रक के साथ उत्तर दें।
Question 13. यदि एक विद्यालय की घण्टी से उत्पन्न ध्वनि की आवृत्ति 500 कम्पन/सेकण्ड है तो इसका आवर्तकाल ज्ञात कीजिए।
Answer:
दिए गए प्रश्न के अनुसार:
आवृत्ति \( = 500 \) कम्पन प्रति सेकण्ड
आवर्तकाल का सूत्र है:
आवर्तकाल \( = \frac{1}{\text{आवृत्ति}} \)
\( \implies \) आवर्तकाल \( = \frac{1}{500} \text{ सेकण्ड} \)
\( \implies \) आवर्तकाल \( = 0.002 \) सेकण्ड
In simple words: एक घंटी की आवाज 500 बार प्रति सेकंड हिलती है। इसका आवर्तकाल निकालने के लिए, 1 को आवृत्ति से भाग दें। तो, एक कंपन पूरा करने में 0.002 सेकंड लगेंगे।
🎯 Exam Tip: आवर्तकाल और आवृत्ति एक-दूसरे के उल्टे होते हैं। यदि आवृत्ति हर्ट्ज में है, तो आवर्तकाल हमेशा सेकंड में होगा।
Question 14. एक सितार 2 सेकण्ड में 300 कम्पन करता है तो उसकी आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
Answer:
दिए गए प्रश्न के अनुसार:
कम्पनों की कुल संख्या \( = 300 \) कम्पन
कम्पनों में लगा कुल समय \( = 2 \) सेकण्ड
आवृत्ति का सूत्र है:
आवृत्ति \( = \frac{\text{कम्पनों की कुल संख्या}}{\text{कम्पनों में लगा समय}} \)
\( \implies \) आवृत्ति \( = \frac{300 \text{ कम्पन}}{2 \text{ सेकण्ड}} \)
\( \implies \) आवृत्ति \( = 150 \) कम्पन प्रति सेकण्ड
In simple words: एक सितार 2 सेकंड में 300 बार कंपन करता है। उसकी आवृत्ति निकालने के लिए, कुल कंपन को कुल समय से भाग दें। तो, यह प्रति सेकंड 150 बार कंपन करता है।
🎯 Exam Tip: आवृत्ति की गणना करते समय, हमेशा कम्पनों की संख्या को समय से भाग दें और मात्रक 'कम्पन प्रति सेकण्ड' या 'हर्ट्ज' में लिखें।
Question 1. निम्न पर टिप्पणी लिखिए
1. आयाम
2. आवृत्ति
3. आवर्तकाल
4. आवृत्ति एवं आवर्तकाल में सम्बन्ध।
Answer:
1. **आयाम:** किसी कंपन करने वाली वस्तु का उसकी माध्य स्थिति (बिना हिले-डुले की स्थिति) से अधिकतम विस्थापन को आयाम कहते हैं। यह हमें बताता है कि कंपन कितना बड़ा या जोरदार है। उदाहरण के लिए, एक घंटी जोर से बजने पर उसका आयाम अधिक होता है।
2. **आवृत्ति:** किसी वस्तु द्वारा एक सेकंड में किए गए कम्पनों की कुल संख्या को आवृत्ति कहते हैं। इसे हर्ट्ज (Hz) में मापा जाता है। एक कंपन का मतलब है कि वस्तु एक बार आगे-पीछे पूरी तरह से हिलकर अपनी मूल स्थिति में लौट आती है।
3. **आवर्तकाल:** किसी वस्तु द्वारा एक कम्पन पूरा करने में लगे समय को आवर्तकाल कहते हैं। इसका मात्रक 'सेकण्ड' होता है। आवर्तकाल बताता है कि एक पूरा कंपन करने में कितना समय लगता है।
4. **आवृत्ति एवं आवर्तकाल में सम्बन्ध:** आवृत्ति और आवर्तकाल एक-दूसरे के व्युत्क्रम (उल्टे) होते हैं। इसका मतलब है कि यदि किसी चीज की आवृत्ति ज्यादा है, तो उसका आवर्तकाल कम होगा, और इसके विपरीत। इसे सूत्र के रूप में इस प्रकार लिखा जा सकता है:
\[ \text{आवृत्ति} = \frac{1}{\text{आवर्तकाल}} \]
या
\[ \text{आवर्तकाल} = \frac{1}{\text{आवृत्ति}} \]
In simple words: आयाम बताता है कि कंपन कितना बड़ा है। आवृत्ति बताती है कि एक सेकंड में कितने कंपन हुए। आवर्तकाल बताता है कि एक कंपन में कितना समय लगा। ये दोनों एक-दूसरे के उल्टे होते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक परिभाषा को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें और आवृत्ति व आवर्तकाल के बीच के गणितीय संबंध को सटीक रूप से सूत्र के साथ प्रस्तुत करें।
Question 2. ध्वनि की प्रबलता एवं तारत्व को समझाइए।
Answer: ध्वनि की प्रबलता और तारत्व ध्वनि के दो महत्वपूर्ण गुण हैं, जिनसे हम विभिन्न ध्वनियों को पहचानते हैं:
(i) **ध्वनि की प्रबलता:** ध्वनि की प्रबलता या तीव्रता वह गुण है जिससे हमें कोई ध्वनि धीमी या तेज सुनाई देती है। जब हम धीरे बोलते हैं तो ध्वनि की प्रबलता कम होती है, जबकि जोर से बोलने पर प्रबलता अधिक होती है। ध्वनि की प्रबलता उसके कंपन के आयाम पर निर्भर करती है। आयाम जितना अधिक होगा, ध्वनि उतनी ही प्रबल होगी। इसका मात्रक डेसीबल (dB) है। अधिक आयाम वाली ध्वनि में अधिक ऊर्जा होती है।
(ii) **ध्वनि का तारत्व:** ध्वनि का तारत्व वह गुण है जिससे हमें कोई ध्वनि मोटी या पतली (तीक्ष्ण) सुनाई देती है। उदाहरण के लिए, महिलाओं और बच्चों की आवाज आमतौर पर पतली होती है, जबकि पुरुषों की आवाज भारी होती है। तारत्व ध्वनि की आवृत्ति पर निर्भर करता है। उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि का तारत्व अधिक होता है (जैसे पतली आवाज), जबकि कम आवृत्ति वाली ध्वनि का तारत्व कम होता है (जैसे भारी आवाज)।
In simple words: ध्वनि की प्रबलता बताती है कि आवाज कितनी तेज या धीमी है, जो कंपन के आयाम पर निर्भर करती है। तारत्व बताता है कि आवाज कितनी पतली या मोटी है, जो कंपन की आवृत्ति पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: प्रबलता को आयाम (कितनी दूर तक कंपन) से और तारत्व को आवृत्ति (कितनी तेजी से कंपन) से जोड़ना याद रखें। उदाहरणों का उपयोग करके इन अवधारणाओं को स्पष्ट करें।
Free study material for Science
RBSE Solutions Class 8 Science Chapter 10 ध्वनि
Students can now access the RBSE Solutions for Chapter 10 ध्वनि prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 8 Science textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.
Detailed Explanations for Chapter 10 ध्वनि
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 8 Science chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 8 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Science Class 8 Solved Papers
Using our Science solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 8 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 10 ध्वनि to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated RBSE Solutions Class 8 Science Chapter 10 ध्वनि is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 8 Science are as per latest RBSE curriculum.
Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 8 Science Chapter 10 ध्वनि as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 8 Science Chapter 10 ध्वनि will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 8 Science. You can access RBSE Solutions Class 8 Science Chapter 10 ध्वनि in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 8 Science Chapter 10 ध्वनि in printable PDF format for offline study on any device.