RBSE Solutions Class 7 Social Science Chapter 15 वृहत्तर भारत

Official RBSE Solutions for Class 7 Social Science: Chapter 15 वृहत्तर भारत

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Chapter-wise Solutions for Social Science: Chapter 15 वृहत्तर भारत

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प्रश्न

 

Question 1. इस मानचित्र के वर्णित स्थानों के बारे में यह जानने का प्रयत्न करें कि आज हमारी संस्कृति प्रभाव किन-किन क्षेत्रों में तथा कैसा रहा है। (पृष्ठ118)
Answer: हमारी संस्कृति का प्रभाव विभिन्न क्षेत्रों जैसे चीन, बर्मा (म्यांमार), थाईलैंड, सुमात्रा, जावा द्वीप, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, कंबोडिया, और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में आज भी देखा जा सकता है। यह प्रभाव कला, साहित्य, धर्म और सामाजिक रीति-रिवाजों के माध्यम से रहा है, जिससे इन क्षेत्रों की सभ्यताओं पर गहरा असर पड़ा है। भारत अपनी समृद्ध विरासत के कारण इन सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सांस्कृतिक योगदान दे पाया।
In simple words: भारतीय संस्कृति का असर चीन, बर्मा, थाईलैंड और कई पड़ोसी देशों में अभी भी है, जो उनकी कला, धर्म और समाज में दिखता है।

🎯 Exam Tip: जब भी सांस्कृतिक प्रभाव के बारे में पूछा जाए, तो प्रमुख देशों के नाम और प्रभाव के कुछ उदाहरण (जैसे कला, धर्म, भाषा) जरूर शामिल करें।

 

Question 2. भारतीय संस्कृति के विभिन्न देशों पर पड़े प्रभाव को जानें एवं उसके उदाहरण अपनी नोटबुक में लिखें। (पृष्ठ 123)
Answer: भारत दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा और सांस्कृतिक रूप से विविध देश है। यहाँ की संस्कृति और परंपराओं का प्रभाव पड़ोसी देशों और अन्य सभ्यताओं पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। भारतीय संस्कृति के प्रभाव के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं:
1. चीनी भाषा में भारत के संस्कृत ग्रंथों का अनुवाद किया जाना।
2. इंडोनेशिया का एक इस्लामी देश होने के बावजूद भारतीय संस्कृति को अपनाना।
3. वियतनाम के अभिलेखों में संस्कृत छंदों व अलंकरणों का प्रयोग।
4. हिंदी चीनी भागों में पाली भाषा का प्रयोग, जो संस्कृत से उत्पन्न हुई है।
5. रामायण व महाभारत ग्रंथों का जावी भाषा में जावा में अनुवाद।
6. बर्मा और सिंहल (श्रीलंका) में बौद्ध पाली साहित्य का सृजन।
7. बर्मा और थाईलैंड में बौद्ध धर्म को राष्ट्र धर्म के रूप में स्वीकार करना।
8. भारतीय खेल जैसे जुआ, मुर्गों की लड़ाई, संगीत नृत्य और नाटक आदि का जावा में प्रचलन। भारतीय संस्कृति का फैलाव कला, धर्म, और विचारों के माध्यम से हुआ।
In simple words: भारतीय संस्कृति का असर कई देशों पर पड़ा है, जैसे चीन में संस्कृत किताबों का अनुवाद, इंडोनेशिया में भारतीय संस्कृति अपनाना और वियतनाम में संस्कृत का उपयोग।

🎯 Exam Tip: सांस्कृतिक प्रभाव के उदाहरण देते समय धर्म, भाषा, साहित्य और कला से जुड़े विशिष्ट बिन्दुओं को शामिल करें।

 

Question 3. विश्व में मानचित्र में उन स्थानों को चिह्नित करें जहाँ भारतीय संस्कृति का प्रभाव रहा है। (पृष्ठ 124)
Answer: भारतीय संस्कृति का प्रभाव चीन, बर्मा (म्यांमार), थाईलैंड, सुमात्रा, जावा द्वीप, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, कंबोडिया, और श्रीलंका जैसे कई देशों में देखा गया है। इन क्षेत्रों में धार्मिक प्रथाओं, कला रूपों और भाषा में भारतीय छाप मौजूद है। भारत से बौद्ध धर्म का प्रसार भी इनमें से कई देशों में हुआ।
In simple words: भारतीय संस्कृति का असर चीन, बर्मा, थाईलैंड, सुमात्रा, जावा, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, कंबोडिया और श्रीलंका जैसे देशों में देखा जा सकता है।

🎯 Exam Tip: मानचित्र पर स्थानों को चिह्नित करने के लिए, उन देशों के नाम याद रखें जहाँ भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण प्रभाव था।

 

Question 4. वृहत्तर भारत की सीमाओं को मानचित्र में प्रदर्शित करें। (पृष्ठ 124)
Answer: वृहत्तर भारत उन क्षेत्रों को दर्शाता है जहाँ प्राचीन भारतीय संस्कृति का गहरा प्रभाव फैला था, जो सिर्फ भौगोलिक भारत से कहीं अधिक था। इन क्षेत्रों में दक्षिण-पूर्व एशिया के देश जैसे बर्मा (म्यांमार), थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम, इंडोनेशिया (सुमात्रा, जावा, बाली), श्रीलंका, और मध्य एशिया के कुछ हिस्से शामिल हैं। ये सभी क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से भारतीय धर्मों, भाषाओं, कला और व्यापार से जुड़े हुए थे। व्यापारिक मार्गों ने भारतीय विचारों और संस्कृति को इन दूर के स्थानों तक पहुँचाने में मदद की।
In simple words: वृहत्तर भारत उन जगहों को कहते हैं जहाँ भारतीय संस्कृति का बहुत प्रभाव था। इसमें बर्मा, थाईलैंड, इंडोनेशिया, श्रीलंका और मध्य एशिया के कुछ हिस्से शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: 'वृहत्तर भारत' की अवधारणा को समझाते हुए प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों का उल्लेख करें जहाँ भारतीय संस्कृति का व्यापक प्रभाव था।

 

पाठ्य पुस्तक के प्रश्नोत्तर

 

Question 2. कम्युज के कौन-से नरेश ने कुल 325 छन्दों के घार अभिलेखों की रचना की?
(अ) जयवर्मन
(ब) यशोवर्मन
(स) राजवर्मन।
(द) बहुवर्मन।
Answer: (ब) यशोवर्मन
In simple words: यशोवर्मन नाम के राजा ने कम्युज में 325 छंदों वाले अभिलेख बनवाए थे।

🎯 Exam Tip: राजाओं के नाम और उनके प्रमुख कार्यों को याद रखें, खासकर जब वे किसी विशिष्ट संख्या या कृति से संबंधित हों।

 

Question 3. जावा की सबसे लोकप्रिय मूर्ति का नाम क्या हैं?
Answer: जावा की सबसे लोकप्रिय मूर्ति का नाम भटार गुरु है। यह मूर्ति भारतीय ऋषि अगस्त्य से भी जुड़ी मानी जाती है। यह मूर्ति वहाँ के लोगों के लिए बहुत खास है।
In simple words: जावा में सबसे प्रसिद्ध मूर्ति का नाम भटार गुरु है।

🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध मूर्तियों और उनके स्थानों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे किसी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान हों।

 

Question 4. भारतीय वर्ण व्यवस्था में वर्णित चार वर्षों के नाम लिखिए
(i) ब्राह्मण
(ii) क्षत्रिय
(iii) वैश्य
(iv). शुद्र।
Answer: भारतीय वर्ण व्यवस्था में चार मुख्य वर्ण हैं:
(i) ब्राह्मण: ज्ञान और शिक्षा के कार्य करने वाले।
(ii) क्षत्रिय: शासन और युद्ध से जुड़े लोग।
(iii) वैश्य: व्यापार और कृषि के काम करने वाले।
(iv) शूद्र: सेवा और श्रम के कार्य करने वाले। यह व्यवस्था समाज में कार्यों के आधार पर बनी थी।
In simple words: भारतीय समाज में चार मुख्य समूह थे - ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र, जो अलग-अलग काम करते थे।

🎯 Exam Tip: वर्ण व्यवस्था के चार प्रमुख वर्णों को उनके कार्यों सहित याद रखें।

 

Question 5. वयंग क्या है? स्पष्ट करें
Answer: वयंग जावा का एक बहुत प्रसिद्ध नाटक है। यह असल में 'छाया नाट्य' का एक रूप है, जहाँ पर्दे पर पुतलियों की छाया से नाटक दिखाया जाता है। 'वयंग' की कहानियाँ ज्यादातर रामायण और महाभारत जैसे भारतीय महाकाव्यों से ली गई हैं। यह कला रूप जावा की संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
In simple words: वयंग जावा का एक प्रसिद्ध छाया नाटक है, जिसमें रामायण और महाभारत की कहानियाँ पुतलियों की छाया से दिखाई जाती हैं।

🎯 Exam Tip: सांस्कृतिक शब्दों को परिभाषित करते समय, उसके स्थान (जैसे जावा) और मुख्य विशेषता (जैसे छाया नाट्य) का उल्लेख करें।

 

Question. लोरो-जंगरंग- यह भी जावा में स्थित एक मन्दिर है। भव्यता के मामले में इस मन्दिर का बरोबोदूर के बाद दूसरा स्थान हैं। इसके अन्तर्गत आठ मुख्य मन्दिर हैं जिनमें शिव, विष्णु एवं ब्रह्मा की मूर्तियाँ विद्यमान हैं।
Answer: लोरो-जंगरंग जावा में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है, जो अपनी भव्यता के लिए जाना जाता है। यह इंडोनेशिया के बरोबोदूर मंदिर के बाद दूसरा सबसे बड़ा मंदिर माना जाता है। इस मंदिर परिसर में आठ मुख्य मंदिर शामिल हैं, जिनमें प्रमुख हिंदू देवताओं जैसे शिव, विष्णु और ब्रह्मा की मूर्तियाँ स्थापित हैं। यह मंदिर भारतीय वास्तुकला और धार्मिक प्रभाव का एक अद्भुत उदाहरण है।
In simple words: लोरो-जंगरंग जावा का एक बड़ा मंदिर है। यह बरोबोदूर के बाद दूसरा सबसे बड़ा मंदिर है, जहाँ शिव, विष्णु और ब्रह्मा की मूर्तियाँ हैं।

🎯 Exam Tip: मंदिरों के बारे में बताते समय उनके स्थान, आकार (अगर तुलनात्मक हो), और प्रमुख देवताओं का उल्लेख करें।

 

Question 7. अंगकोर वाट के मन्दिर पर टिप्पणी लिखो।
Answer: अंगकोर वाट का मंदिर कंबोडिया में स्थित एक विशाल विष्णु मंदिर है। इस मंदिर के बीच और किनारों पर बने शिखर उत्तर भारतीय शैली में बनाए गए हैं। इस मंदिर की बनावट काफी हद तक भारतीय मंदिरों जैसी है। मंदिर के चारों ओर 60 फीट चौड़ी खाई है और 36 फीट चौड़ा पत्थर का रास्ता है। मंदिर के सबसे ऊपरी मंजिल का केंद्रीय शिखर जमीन से 210 फीट ऊपर है। अंगकोर वाट का मंदिर विश्व की वास्तुकला में एक बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसकी भव्यता और वास्तुकला भारतीय कला के प्रभाव को दर्शाती है।
In simple words: अंगकोर वाट कंबोडिया में एक बड़ा विष्णु मंदिर है। यह भारतीय शैली में बना है और इसके चारों ओर खाई है, जो इसे दुनिया की खास इमारतों में से एक बनाती है।

🎯 Exam Tip: किसी भी ऐतिहासिक स्मारक पर टिप्पणी करते समय, उसके स्थान, मुख्य देवता, स्थापत्य शैली और प्रमुख विशेषताओं को शामिल करें।

 

Question 8. भाषा साहित्य के क्षेत्र में भारतीय संस्कृति के प्रभाव का वर्णन करो?
Answer: भाषा और साहित्य के क्षेत्र में भारतीय संस्कृति का प्रभाव बहुत व्यापक रहा है। उस समय भारतीय संस्कृति का प्रभाव संस्कृत में लिखे गए अभिलेखों के माध्यम से फैला, जो बर्मा, स्याम, मलय प्रायद्वीप, कंबोडिया, अन्नाम, सुमात्रा, जावा और बोर्नियो जैसे स्थानों पर पाए गए हैं। पूर्वी एशिया के वियतनाम और कंबोडिया जैसे देशों के अधिकांश हिस्सों में बोली जाने वाली पाली भाषा संस्कृत से ही निकली है। इसी तरह चम्पा में 100 से अधिक संस्कृत अभिलेख मिले हैं, जो भारतीय संस्कृति के प्रभाव को दिखाते हैं। कंबोडिया में मिले अभिलेखों की संख्या चम्पा से भी अधिक है और वे साहित्य की दृष्टि से बहुत उच्चकोटि के हैं। इन अभिलेखों में रामायण, महाभारत, पुराण और भारतीय दर्शन तथा आध्यात्मिक विचारों का गहरा प्रभाव दिखता है, जिससे पता चलता है कि उस समय भारतीय संस्कृति का प्रभाव हर जगह फैला हुआ था। संस्कृत भाषा ने इन क्षेत्रों की भाषाओं को बहुत प्रभावित किया।
In simple words: भारतीय संस्कृति ने भाषा और साहित्य में दूर-दूर तक असर दिखाया। संस्कृत में लिखे अभिलेख बर्मा, जावा और कंबोडिया जैसे देशों में मिले हैं। पाली भाषा भी संस्कृत से बनी है।

🎯 Exam Tip: भाषा और साहित्य पर प्रभाव बताते समय, संस्कृत के प्रसार, अभिलेखों की संख्या और प्रमुख ग्रंथों (रामायण, महाभारत) के प्रभाव का उल्लेख करें।

 

Question 9. समाज एवं धर्म के क्षेत्र में भारतीय संस्कृति के प्रभाव का वर्णन करो।
Answer: समाज के क्षेत्र में भारतीय संस्कृति का प्रभाव इंडोनेशिया के बाली और कंबोडिया की जाति व्यवस्था में दिखाई देता है, जो भारत की वर्ण व्यवस्था से मिलती-जुलती है। विवाह के तरीके और विभिन्न रीति-रिवाज भी भारत के समाज जैसे ही थे। यहाँ सती प्रथा का प्रचलन था लेकिन पद-प्रथा नहीं थी। मुख्य भोजन चावल और गेहूं थे, लोग आभूषण और वस्त्र पहनते थे, और पान खाने की आदत भी भारत जैसी ही थी।
धर्म के क्षेत्र में भारतीय संस्कृति का प्रभाव- बर्मा और स्याम में सभी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ मिली हैं। भारतीय संस्कृति के प्रभाव के कारण ही जावा की बहुत लोकप्रिय मूर्ति 'भटार गुरु' को कुछ लोग भारतीय ऋषि अगस्त्य का रूप मानते हैं। बौद्ध धर्म का प्रसार भी भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, जिसने इन क्षेत्रों के धार्मिक जीवन को बहुत प्रभावित किया।
In simple words: भारतीय संस्कृति ने समाज और धर्म दोनों को प्रभावित किया। समाज में जाति व्यवस्था और रीति-रिवाज भारत जैसे थे। धर्म में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ मिलीं और बौद्ध धर्म भी फैला।

🎯 Exam Tip: सामाजिक और धार्मिक प्रभाव को अलग-अलग समझाते हुए, विशिष्ट प्रथाओं (जैसे सती प्रथा, भोजन) और धार्मिक प्रतीक (जैसे मूर्तियाँ, धर्म) का उल्लेख करें।

 

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. निम्नलिखित में किसके शासन काल तक भारत कला, साहित्य, शिक्षा और विज्ञान में सम्पूर्ण विश्व में आगे था?
(अ) चन्द्रगुप्त मौर्य के काल तक
(ब) हर्ष के काल तक
(स) अशोक के काल तक
(द) टीपू सुल्तान के काल तक
Answer: (ब) हर्ष के काल तक
In simple words: राजा हर्ष के समय तक भारत कला, साहित्य, शिक्षा और विज्ञान में दुनिया में सबसे आगे था।

🎯 Exam Tip: शासकों और उनके शासनकाल के दौरान हुए प्रमुख विकासों को याद रखें, खासकर सांस्कृतिक और वैज्ञानिक क्षेत्रों में।

 

Question 2. निम्नलिखित में किसके अनुसार 'द्वीपान्तर भारत का आविर्भाव हुआ?
(अ) अग्नि पुराण
(ब) शिव पुराण
(स) रामायण
(द) महाभारत
Answer: (अ) अग्नि पुराण
In simple words: अग्नि पुराण के अनुसार 'द्वीपान्तर भारत' का उदय हुआ था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक अवधारणाओं (जैसे द्वीपान्तर भारत) और उनके मूल स्रोतों (जैसे पुराणों) को जोड़कर याद करें।

 

Question 3. हिन्द-चीन के अधिकांश भागों में आज भी बोली जाती
(अ) प्राकृत भाषा
(ब) संस्कृत भाषा
(स) हिन्दी भाषा
(द) पालि भाषा
Answer: (द) पालि भाषा
In simple words: हिन्द-चीन के ज्यादातर इलाकों में आज भी पालि भाषा बोली जाती है।

🎯 Exam Tip: क्षेत्रीय भाषाओं और उनके ऐतिहासिक संबंधों पर ध्यान दें, खासकर जब भारतीय भाषाओं का प्रभाव हो।

 

Question 5. निम्नलिखित में से किस शासक ने अपने पुत्र पुत्री को बौद्ध धर्म के स्थाई प्रचारक के रूप में नियुक्त किया?
(अ) अशोक
(ब) चन्द्रगुप्त मौर्य
(स) रामगुप्त
(द) राणाप्रताए
Answer: (अ) अशोक
In simple words: सम्राट अशोक ने अपने बेटे-बेटी को बौद्ध धर्म फैलाने के लिए भेजा था।

🎯 Exam Tip: बौद्ध धर्म के प्रमुख प्रचारकों और उनके तरीकों को याद रखें, विशेषकर सम्राट अशोक के योगदान को।

 

Question 6. इयूरोसाईल ने विशेष अध्ययन किया है
(अ) आनन्द मन्दिर का
(ब) अंगकोर वाट मन्दिर का
(स) बरोबोदूर
(द) लोरो-जंगरंग मन्दिर का
Answer: (अ) आनन्द मन्दिर का
In simple words: इयूरोसाईल नाम के विद्वान ने आनन्द मंदिर पर खास पढ़ाई की थी।

🎯 Exam Tip: प्रमुख विद्वानों और उनके अध्ययन के विषयों या स्थलों को याद रखें।

 

निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

 

Question 1. इण्डोनेशिया का अर्थ..
Answer: इण्डोनेशिया का अर्थ है **भारतीय द्वीप**। यह नाम इस बात को दर्शाता है कि यह क्षेत्र भारत से बहुत प्रभावित था।
In simple words: इंडोनेशिया का मतलब 'भारतीय द्वीप' होता है।

🎯 Exam Tip: भौगोलिक स्थानों के अर्थों को याद रखें, खासकर जब वे किसी सांस्कृतिक संबंध को दर्शाते हों।

 

Question 2. चम्पा के.. नरेशों के विद्वान होने का उल्लेख मिलता है।
Answer: चम्पा के **तीन** नरेशों के विद्वान होने का उल्लेख मिलता है। इन नरेशों ने साहित्य और ज्ञान के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
In simple words: चम्पा के तीन राजा बहुत ज्ञानी माने जाते थे।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान की पूर्ति करते समय, संख्यात्मक तथ्यों पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 1. प्राचीन काल में भारत विश्व गुरु क्यों कहलाता था?
Answer: प्राचीन काल में भारत को विश्व गुरु इसलिए कहा जाता था क्योंकि यह कला, साहित्य, शिक्षा और विज्ञान के सभी क्षेत्रों में पूरी दुनिया से आगे था। भारत ज्ञान का एक बड़ा केंद्र था, जहाँ नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला और गया जैसे प्रसिद्ध विश्वविद्यालय थे। इन विश्वविद्यालयों ने पूरे विश्व के छात्रों को आकर्षित किया।
In simple words: पुराने समय में भारत को विश्व गुरु कहते थे क्योंकि यह पढ़ाई, कला और विज्ञान में सबसे आगे था।

🎯 Exam Tip: 'विश्व गुरु' कहलाने के कारणों में शिक्षा, साहित्य, कला और विज्ञान में भारत के योगदान का उल्लेख करें।

 

Question 2. प्राचीन भारत में शिक्षा के बड़े केन्द्रों के नाम लिखिए?
Answer: प्राचीन भारत में शिक्षा के कुछ बड़े और महत्वपूर्ण केंद्र थे नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला और गया के विश्वविद्यालय। ये सभी संस्थान ज्ञान और शिक्षा के प्रमुख स्रोत थे, जहाँ देश-विदेश से विद्यार्थी पढ़ने आते थे। इन केंद्रों ने भारतीय शिक्षा प्रणाली को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई।
In simple words: पुराने भारत में शिक्षा के बड़े केंद्र नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला और गया थे।

🎯 Exam Tip: प्राचीन शिक्षा केंद्रों के नाम याद रखें और उनके महत्व पर प्रकाश डालें।

 

Question 3. उन चीनी यात्रियों के नाम लिखिए जिन्होंने प्राचीन भारत की यात्रा की?
Answer: प्राचीन भारत की यात्रा करने वाले प्रमुख चीनी यात्रियों में फायन, वेनसांग और इत्सिंग शामिल हैं। ये यात्री भारत की संस्कृति, धर्म और ज्ञान-विज्ञान का अध्ययन करने के लिए आए थे। इन यात्रियों के विवरणों से प्राचीन भारत के बारे में बहुत महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।
In simple words: फायन, वेनसांग और इत्सिंग वे चीनी यात्री थे जो पुराने भारत घूमने आए थे।

🎯 Exam Tip: प्रमुख विदेशी यात्रियों और उनके यात्रा के उद्देश्य को याद रखें, विशेषकर भारत के संदर्भ में।

 

Question 4. प्राचीन भारत से कौन-सी वस्तुएँ विदेशों को निर्यात की जाती थीं।
Answer: प्राचीन भारत से विदेशों को भारी मात्रा में मलमल, छींट, रेशम, जरी के वस्त्र, नील, गरम मसाले और लौह इस्पात की वस्तुएँ निर्यात की जाती थीं। इन वस्तुओं की विदेशों में बहुत माँग थी, जिससे भारत का व्यापार फला-फूला। इन उत्पादों ने भारत को एक प्रमुख व्यापारिक शक्ति बनाया।
In simple words: पुराने भारत से मलमल, रेशम, नील, गरम मसाले और लोहे का सामान विदेशों में भेजा जाता था।

🎯 Exam Tip: प्राचीन भारत के प्रमुख निर्यात उत्पादों को याद रखें, खासकर उन उत्पादों को जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में उच्च माँग थी।

 

Question 5. विदेशों में भारतीय वस्तुओं का व्यापार कहाँ से कहाँ तक होता था?
Answer: विदेशों में भारतीय वस्तुओं का व्यापार जावा-सुमात्रा जैसे दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों से लेकर पश्चिम और मध्य एशिया तक होता था। ये व्यापारिक मार्ग बहुत लंबे और फैले हुए थे, जिससे भारतीय सामान दूर-दूर तक पहुँचता था। भारत ने इन मार्गों के माध्यम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी किया।
In simple words: भारतीय सामान का व्यापार दक्षिण पूर्वी एशिया (जैसे जावा-सुमात्रा) से लेकर पश्चिम और मध्य एशिया तक होता था।

🎯 Exam Tip: प्राचीन व्यापार मार्गों और भारतीय वस्तुओं के वितरण क्षेत्रों को भौगोलिक संदर्भ में याद रखें।

 

Question 6. इस बात का अन्लेख कहाँ मिलता है कि जम्बूदीप से अलग 'द्वीपान्तर भारत' का आविर्भाव हुआ?
Answer: इस बात का उल्लेख अग्नि पुराण में मिलता है कि जम्बूदीप से अलग 'द्वीपान्तर भारत' का आविर्भाव हुआ। अग्नि पुराण एक प्राचीन हिंदू ग्रंथ है जो भारत के विभिन्न भौगोलिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों का वर्णन करता है। यह जानकारी भारतीय इतिहास के भौगोलिक विस्तार को समझने में सहायक है।
In simple words: यह बात अग्नि पुराण में लिखी है कि 'द्वीपान्तर भारत' जम्बूदीप से अलग होकर बना।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक या पौराणिक अवधारणाओं के मूल स्रोतों (जैसे पुराणों) को याद रखें।

 

Question 7. इण्डोनेशिया का अर्थ क्या है?
Answer: इण्डोनेशिया का अर्थ है 'भारतीय द्वीप'। यह नाम इस क्षेत्र पर भारतीय सांस्कृतिक प्रभाव और भौगोलिक संबंध को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि प्राचीन काल में भारत का सांस्कृतिक और भौगोलिक प्रभाव कितना व्यापक था।
In simple words: इंडोनेशिया का मतलब 'भारतीय द्वीप' है।

🎯 Exam Tip: शब्दों के व्युत्पत्तिगत अर्थों को याद रखें, खासकर जब वे ऐतिहासिक या सांस्कृतिक महत्व रखते हों।

 

Question 9. किस स्थान पर मिले संस्कृत के अभिलेख साहित्य की दृष्टि से उच्चकोटि के हैं?
Answer: कम्युज में मिले संस्कृत के अभिलेख साहित्य की दृष्टि से उच्चकोटि के हैं। इन अभिलेखों में उत्कृष्ट काव्य शैली और व्याकरण का प्रयोग किया गया है, जो भारतीय साहित्य परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह दर्शाता है कि भारतीय साहित्य का प्रभाव इन क्षेत्रों में कितना गहरा था।
In simple words: कम्युज में मिले संस्कृत के लेख बहुत अच्छे साहित्य वाले माने जाते हैं।

🎯 Exam Tip: संस्कृत अभिलेखों के स्थानों और उनकी साहित्यिक गुणवत्ता पर ध्यान दें।

 

Question 10. किन भारतीय रचनाओं का जावी भाषा के गद्य में अनुवाद किया गया?
Answer: रामायण एवं महाभारत जैसी भारतीय रचनाओं का जावी भाषा के गद्य में अनुवाद किया गया। ये महाकाव्य जावा की संस्कृति और साहित्य पर बहुत गहरा प्रभाव डालते हैं। इन अनुवादों ने भारतीय कहानियों और नैतिक शिक्षाओं को जावा के लोगों तक पहुँचाया।
In simple words: रामायण और महाभारत को जावी भाषा में बदल दिया गया था।

🎯 Exam Tip: प्रमुख भारतीय ग्रंथों और उनके विदेशी भाषाओं में अनुवाद के स्थानों को याद रखें।

 

Question 11. भारत एवं चीन के सम्बन्धों का लम्बा इतिहास कब से प्रारम्भ होता है?
Answer: भारत एवं चीन के सम्बन्धों का लम्बा इतिहास दूसरी शती ईसा पूर्व से प्रारम्भ होता है। इस काल से ही दोनों सभ्यताओं के बीच व्यापारिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आदान-प्रदान शुरू हो गए थे। दोनों देशों ने प्राचीन काल से ही एक दूसरे पर गहरा प्रभाव डाला है।
In simple words: भारत और चीन के रिश्ते दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से शुरू हुए थे।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संबंधों की शुरुआत की अवधि (जैसे शती ईसा पूर्व) को सटीक रूप से याद रखें।

 

Question 12. नियती लामा धर्म की नींव किसने रखी?
Answer: तिब्बती लामा धर्म की नींव नव शांति रक्षित और परमसंभव नामक विद्वानों ने रखी। ये विद्वान तिब्बत गए और वहाँ बौद्ध धर्म की एक विशेष शाखा, लामा धर्म को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय बौद्ध दर्शन को तिब्बत में फैलाया।
In simple words: तिब्बती लामा धर्म को शांति रक्षित और परमसंभव ने शुरू किया था।

🎯 Exam Tip: किसी भी धर्म या पंथ के संस्थापकों या महत्वपूर्ण व्यक्तियों के नाम याद रखें।

 

Question 13. बर्मा और स्याम का मुख्य धर्म क्या था?
Answer: बर्मा और स्याम का मुख्य धर्म बौद्ध धर्म था। भारतीय बौद्ध धर्म का प्रभाव इन क्षेत्रों में बहुत गहरा था, जहाँ इसे राष्ट्रीय धर्म के रूप में स्वीकार किया गया था। बौद्ध धर्म ने इन देशों की कला, वास्तुकला और सामाजिक संरचना को भी प्रभावित किया।
In simple words: बर्मा और स्याम का मुख्य धर्म बौद्ध धर्म था।

🎯 Exam Tip: विभिन्न देशों के प्रमुख धर्मों को याद रखें, खासकर जब वे भारतीय सांस्कृतिक विस्तार से जुड़े हों।

 

Question 14. जावा के प्रसिद्ध मन्दिर बरोबोदर के बाद किस अन्य प्रसिद्ध मन्दिर का स्थान आता है?
Answer: जावा के प्रसिद्ध मंदिर बरोबोदूर के बाद लोरो-जंगरंग मंदिर का स्थान आता है। लोरो-जंगरंग भी जावा में एक बहुत भव्य और महत्वपूर्ण मंदिर है, जो भारतीय स्थापत्य कला और धार्मिक परंपराओं को दर्शाता है। यह मंदिर अपनी सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।
In simple words: जावा में बरोबोदूर के बाद लोरो-जंगरंग मंदिर सबसे प्रसिद्ध है।

🎯 Exam Tip: किसी क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्मारकों की सूची और उनके सापेक्ष महत्व को याद रखें।

 

Question. यशोवर्मन ने कम्बुज में 100 आश्रम स्थापित किए थे। इन आश्रमों में बच्चों, वृद्धों, गरीबों और असहायों आदि की देखभाल की जाती थी। इतना ही नहीं इन आश्रमों ने भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के विस्तार का कार्य भी किया।
Answer: राजा यशोवर्मन ने कंबुज में 100 आश्रम बनवाए थे। इन आश्रमों में बच्चों, बूढ़ों, गरीब लोगों और बेसहारा लोगों की मदद की जाती थी। इन आश्रमों ने भारतीय सभ्यता और संस्कृति को फैलाने में भी बहुत मदद की। वे सिर्फ सेवा ही नहीं, बल्कि भारतीय विचारों को भी बढ़ावा देते थे।
In simple words: यशोवर्मन ने कंबुज में 100 आश्रम बनाए थे, जहाँ असहायों की देखभाल होती थी और भारतीय संस्कृति भी फैलती थी।

🎯 Exam Tip: शासकों के सामाजिक कार्यों और उनके सांस्कृतिक योगदान को याद रखें।

 

Question 16. 'जिन वास्तुकारों ने आनन्द मन्दिर का नियोजन व निर्माण किया, वे निःसंदेह भारतीय थे। यह कथन किसका
Answer: यह कथन प्रसिद्ध विद्वान ड्यूरोसाईल का है। उन्होंने आनन्द मंदिर के स्थापत्य और डिज़ाइन का गहराई से अध्ययन किया था। ड्यूरोसाईल ने अपने शोध में बताया कि आनन्द मंदिर की वास्तुकला में भारतीय शैली और कारीगरों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यह बात भारतीय संस्कृति के विदेशों में प्रसार को दिखाती है।
In simple words: यह बात ड्यूरोसाईल नाम के एक जाने-माने विद्वान ने कही थी।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण कथनों को उनके कहने वाले व्यक्ति के नाम से जोड़कर याद करें।

 

Question 17. आनन्द मन्दिर में पत्थरों पर की मूर्तियों की संख्या कितनी है?
Answer: आनन्द मंदिर में पत्थरों पर उत्कीर्ण मूर्तियों की संख्या 80 है। ये मूर्तियाँ बुद्ध के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्शाती हैं। इन मूर्तियों की संख्या मंदिर की कलात्मक भव्यता और ऐतिहासिक महत्व को बढ़ाती है।
In simple words: आनन्द मंदिर में पत्थरों पर बनी 80 मूर्तियाँ हैं।

🎯 Exam Tip: किसी ऐतिहासिक स्थल से संबंधित संख्यात्मक तथ्यों (जैसे मूर्तियों की संख्या) को याद रखें।

 

लघूत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. वृत्तर भारत का निर्माण कैसे हुआ?
Answer: वृहत्तर भारत का निर्माण इस प्रकार हुआ कि प्राचीन भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भारत की सीमाओं के बाहर के देशों के जीवन और संस्कृति पर भी भारतीय संस्कृति का प्रभाव पड़ा। भारत से दर्शन और विचारों का प्रवेश पड़ोसी देशों में हुआ, जिसके परिणामस्वरूप वहाँ भी भारतीय संस्कृति का विकास हुआ। इस तरह भारतीय संस्कृति के व्यापक विदेशी क्षेत्रों पर प्रभाव के कारण वृहत्तर भारत का निर्माण हुआ। व्यापार और धर्म के प्रसार ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई।
In simple words: वृहत्तर भारत तब बना जब भारतीय संस्कृति का असर भारत के बाहर के देशों, जैसे पड़ोसी मुल्कों की जीवनशैली और संस्कृति पर पड़ा।

🎯 Exam Tip: 'वृहत्तर भारत' की अवधारणा को समझाते हुए भारतीय संस्कृति के प्रसार के कारणों (जैसे दर्शन, व्यापार) का उल्लेख करें।

 

Question 2. प्राचीन काल में भारत विश्व गुरु क्यों कहलाता था?
Answer: प्राचीन काल में भारत को विश्व गुरु इसलिए कहा जाता था क्योंकि यह कला, साहित्य, शिक्षा और विज्ञान के सभी क्षेत्रों में पूरी दुनिया से आगे था। यहाँ नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला और गया जैसे बड़े शिक्षा केंद्र थे। इन विश्वविद्यालयों की प्रसिद्धि इतनी अधिक थी कि भारत के अलावा चीन, जापान, तिब्बत, श्रीलंका, कोरिया और मंगोलिया जैसे देशों के छात्र भी यहाँ ज्ञान प्राप्त करने आते थे। इन संस्थानों ने विश्व को ज्ञान का प्रकाश दिया।
In simple words: पुराने समय में भारत को विश्व गुरु कहते थे क्योंकि वह कला, शिक्षा और विज्ञान में दुनिया से आगे था, और यहाँ बड़े-बड़े विश्वविद्यालय थे।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न दोहराया गया है। उत्तर में शिक्षा, साहित्य और विज्ञान में भारत के योगदान को प्रमुखता से दर्शाएँ।

 

Question 3. भारतीय संस्कृति का विदेशों में प्रचार-प्रसार कैसे हुआ?
Answer: भारत की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली हुई थी, जिससे विदेशी यहाँ आकर्षित होते थे। कई विदेशी यात्री जैसे फाह्यान, ह्वेनसांग और इत्सिंग भारत आए। इन यात्रियों ने यहाँ रहकर भारतीय ज्ञान-विज्ञान का अध्ययन किया और अपने देश लौटते समय भारत की संस्कृति, साहित्य और ज्ञान को अपने साथ ले गए। उन्होंने भारतीय ग्रंथों का अपनी भाषाओं में अनुवाद भी किया। इस तरह भारतीय संस्कृति का विदेशों में प्रचार-प्रसार हुआ। व्यापारिक संबंध भी प्रसार का एक मुख्य कारण थे।
In simple words: भारत की संस्कृति विदेशों में यात्रियों और उनके ग्रंथों के अनुवाद से फैली। फाह्यान और ह्वेनसांग जैसे यात्री यहाँ से ज्ञान लेकर गए और उसे अपने देशों में फैलाया।

🎯 Exam Tip: सांस्कृतिक प्रसार के कारणों में यात्रियों की भूमिका और ग्रंथों के अनुवाद को प्रमुखता से बताएँ।

 

Question 5. भारतीय संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान, साहित्य, धर्म एवं दर्शन विदेशों तक कैसे पहुँचा?
Answer: भारत में बनी व्यापारिक वस्तुओं की विदेशों में बहुत माँग थी, जिसके कारण भारतीय वस्तुएँ जावा-सुमात्रा और अन्य दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ-साथ पश्चिम और मध्य एशिया तक भेजी जाती थीं। इस व्यापार के कारण इन क्षेत्रों में व्यापारियों का आना-जाना लगा रहता था। कई क्षेत्रों में भारतीय लोगों ने अपनी बस्तियाँ भी बसाईं। इस तरह केवल वस्तुओं का ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान, साहित्य, धर्म और दर्शन का भी विदेशों में प्रचार-प्रसार हुआ। शिक्षा के प्रसार ने भी इसमें सहायता की।
In simple words: भारतीय वस्तुएँ दूर देशों में बेची जाती थीं, जिससे भारतीय व्यापारी वहाँ आते-जाते रहते थे। इसी के साथ भारतीय संस्कृति, ज्ञान, साहित्य और धर्म भी विदेशों में फैल गए।

🎯 Exam Tip: सांस्कृतिक प्रसार के मुख्य माध्यमों (जैसे व्यापार, बस्तियाँ, ज्ञान-विज्ञान) को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 6. भारत की सभ्यता एवं संस्कृति के विस्तार पर प्रकाश डालिए।
Answer: भारत की सभ्यता और संस्कृति का विस्तार बर्मा (म्यांमार), स्याम (थाईलैंड), मलय प्रायद्वीप, कंबोडिया, सुमात्रा, जावा, बोर्नियो, बाली, अन्नाम और सुवर्णदीप, हिन्द-चीन जैसे कई स्थानों तक हुआ। आज भी इन जगहों पर भारतीय संस्कृति का प्रभाव देखा जा सकता है। इन स्थानों पर मिले पुराने अवशेषों से पता चलता है कि यहाँ की संस्कृति और निवासियों के जीवन पर भारतीय संस्कृति का गहरा प्रभाव और संबंध था। यह विस्तार व्यापारिक और धार्मिक मिशनों के माध्यम से हुआ।
In simple words: भारतीय सभ्यता और संस्कृति बर्मा, थाईलैंड, कंबोडिया, इंडोनेशिया और हिन्द-चीन जैसे कई देशों में फैली। आज भी उन जगहों पर भारतीय संस्कृति का असर दिखता है।

🎯 Exam Tip: सभ्यता और संस्कृति के विस्तार के भौगोलिक क्षेत्रों का उल्लेख करें और इसके प्रमाण (जैसे अवशेष, प्रभाव) को समझाएँ।

 

Question 7. भारतीय संस्कृति एवं स्थानीय संस्कृति के सम्मिश्रण से नई संस्कृति का जन्म कैसे हुआ?
Answer: जब भारतीय सभ्यता और संस्कृति दूर के देशों में पहुँची, तो वहाँ के लोगों ने उसे जाना-समझा और अपना लिया। भारत की भाषा, साहित्य, धर्म, कला और राजनीतिक तथा सामाजिक संस्थाओं ने अपने संपर्क में आए लोगों पर सांस्कृतिक प्रभाव डाला। इस तरह भारतीय संस्कृति और वहाँ की स्थानीय संस्कृति मिलकर एक नई मिश्रित संस्कृति को जन्म दिया। यह आदान-प्रदान दोनों संस्कृतियों के लिए फायदेमंद रहा।
In simple words: जब भारतीय संस्कृति दूसरे देशों में पहुँची, तो वहाँ की स्थानीय संस्कृति के साथ मिलकर एक नई मिली-जुली संस्कृति बन गई।

🎯 Exam Tip: सांस्कृतिक सम्मिश्रण की प्रक्रिया को समझाएँ, जिसमें स्थानीय और भारतीय तत्वों के मेल से नई पहचान बनती है।

 

Question 8. संस्कृत में लिखे अभिलेख कहाँ-कहाँ पाए गए हैं? इनकी विशेषताएँ क्या हैं?
Answer: संस्कृत में लिखे अभिलेख बर्मा (म्यांमार), स्याम (थाईलैंड), मलय प्रायद्वीप, कंबोडिया, अन्नाम, सुमात्रा, जावा और बोर्नियो जैसे स्थानों पर पाए गए हैं। इन अभिलेखों में से कई साहित्यिक दृष्टि से बहुत उच्चकोटि के हैं और सुंदर काव्य शैली में लिखे गए हैं। इन अभिलेखों में आमतौर पर संस्कृत साहित्य के सभी छंदों का उपयोग किया गया है। इनमें संस्कृत व्याकरण, अलंकार और इंद्र शास्त्र जैसे विकसित सिद्धांतों का पूरा ज्ञान दिखता है। इन अभिलेखों में रामायण, महाभारत, पुराण, भारतीय दर्शन और आध्यात्मिक विचारों का गहरा ज्ञान भी छिपा है। यह भारतीय संस्कृति के गहरे प्रभाव का प्रमाण है।
In simple words: संस्कृत में लिखे लेख बर्मा, थाईलैंड, कंबोडिया और इंडोनेशिया जैसे कई देशों में मिले हैं। ये लेख साहित्य में बहुत अच्छे हैं और इनमें भारतीय ज्ञान-विज्ञान की बातें लिखी हैं।

🎯 Exam Tip: संस्कृत अभिलेखों के स्थानों और उनकी साहित्यिक, व्याकरणिक और दार्शनिक विशेषताओं को याद रखें।

 

दीर्य उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. वृहत्तर भारत में भारतीय संस्कृति और ज्ञान विज्ञान के प्रसार का विश्लेषण कीजिए।
Answer: वृहत्तर भारत में भारतीय संस्कृति और ज्ञान-विज्ञान का प्रचार-प्रसार कई कारणों से हुआ। प्राचीन समय में भारत में नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला और गया जैसे विश्वविद्यालय शिक्षा के बड़े केंद्र थे। यहाँ भारत के अलावा चीन, जापान, तिब्बत, श्रीलंका, कोरिया और मंगोलिया जैसे देशों के छात्र ज्ञान प्राप्त करने आते थे। विदेशी यात्रियों जैसे फाह्यान, ह्वेनसांग और इत्सिंग के कारण भी भारतीय संस्कृति और ज्ञान-विज्ञान का विदेशों में प्रसार हुआ, क्योंकि उन्होंने यहाँ रहकर भारतीय ज्ञान-विज्ञान का अध्ययन किया और अपने देश लौटते समय भारत की संस्कृति, साहित्य और ज्ञान को साथ ले गए। इन लोगों ने भारतीय ग्रंथों का अपनी भाषाओं में अनुवाद भी किया, जिससे भारतीय संस्कृति का विदेशों में बहुत अधिक प्रचार-प्रसार हुआ। इसके अलावा, भारत के विदेशों के साथ व्यापार ने भी भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, क्योंकि व्यापारिक वस्तुओं के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और ज्ञान-विज्ञान भी विदेशों में फैला। सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने इस प्रसार को और मजबूत किया।
In simple words: भारतीय संस्कृति और ज्ञान-विज्ञान विदेशों में कई कारणों से फैला। नालंदा जैसे बड़े शिक्षा केंद्रों और फाह्यान जैसे यात्रियों ने इसे फैलाया। यात्री यहाँ से ज्ञान लेकर गए और अपनी भाषाओं में ग्रंथों का अनुवाद किया। व्यापार से भी संस्कृति दूर तक पहुँची।

🎯 Exam Tip: संस्कृति और ज्ञान-विज्ञान के प्रसार के प्रमुख कारणों (शिक्षा केंद्र, यात्री, ग्रंथों का अनुवाद, व्यापार) का विस्तार से वर्णन करें।

 

Question 2. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए
(क) सांस्कृतिक आदान प्रदान की दृष्टि से भारत का चीन के साथ सम्बन्।
(ख) तिब्बत में भारतीय संस्कृति का प्रभाव।
(ग) भारतीय संस्कृति के प्रसार में सम्राट अशोक का योगदान।
Answer:
(क) भारत का चीन के साथ संबंध- भारत और चीन के संबंध दूसरी शती ईसा पूर्व से ही शुरू हो गए थे। भारत के विभिन्न हिस्सों से कई भारतीय विद्वान चीन गए और उन्होंने संस्कृत ग्रंथों का चीनी भाषा में अनुवाद किया। चालुक्य राजसभा में नियुक्त चीनी राजदूत के साथ बोधिरुचि नामक विद्वान 693 ईस्वी में नालंदा से चीन गए और वहाँ 53 ग्रंथों का अनुवाद किया। यह धार्मिक और बौद्धिक आदान-प्रदान दोनों देशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण था।
(ख) तिब्बत में भारतीय संस्कृति का प्रभाव- तिब्बत पर भारतीय संस्कृति का प्रभाव प्राचीन काल से ही रहा है। शांति रक्षित और पद्मसम्भव नामक विद्वान तिब्बत गए और वहाँ तिब्बती लामा धर्म की स्थापना की। इन लोगों ने तिब्बत में संस्कृत ग्रंथों का प्रचार किया और उनके अनुवाद के लिए प्रतिभाशाली लोगों को भी तैयार किया। इस तरह बौद्ध धर्म और भारतीय ज्ञान तिब्बत में गहराई से जड़ें जमा गया।
(ग) भारतीय संस्कृति के प्रसार में सम्राट अशोक का योगदान- भारतीय संस्कृति के प्रसार में सम्राट अशोक का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। अशोक ने अपनी प्रजा के कल्याण के लिए बौद्ध धर्म के सिद्धांतों को अपनाया। उन्होंने अपने पुत्र और पुत्री को भारतीय धर्म दर्शन और बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए लंका (श्रीलंका) भेजा था। अशोक ने धर्म प्रचार के लिए कई शिलालेख और स्तूप भी बनवाए। उनके प्रयासों से बौद्ध धर्म विश्व के कई हिस्सों में फैला।
In simple words:
(क) भारत और चीन के रिश्ते बहुत पुराने हैं। भारतीय विद्वानों ने चीन में संस्कृत किताबें बदलीं, जिससे संस्कृति फैली।
(ख) तिब्बत पर भारतीय संस्कृति का असर पुराना है। शांति रक्षित और पद्मसम्भव ने वहाँ लामा धर्म शुरू किया और संस्कृत किताबें फैलाईं।
(ग) सम्राट अशोक ने भारतीय संस्कृति फैलाने में बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने अपने बच्चों को बौद्ध धर्म सिखाने के लिए श्रीलंका भेजा और कई स्तूप भी बनवाए।

🎯 Exam Tip: टिप्पणी लिखते समय, हर बिंदु के लिए मुख्य घटनाएँ, व्यक्ति और उनके योगदान को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से समझाएँ।

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