RBSE Solutions Class 7 Science Chapter 9 जंतुओं में जैव प्रक्रम

Step-by-Step Textbook Solutions for Class 7 Science Chapter 09 जंतुओं में जैव प्रक्रम

Review structured textbook solutions for Class 7 Science Chapter 09 जंतुओं में जैव प्रक्रम. Built according to RBSE guidelines for the 2026-27 academic year, these downloadable answers support daily revision and problem-solving accuracy.

Download Chapter 09 जंतुओं में जैव प्रक्रम Textbook Solutions PDF

View or download the dedicated Chapter 09 जंतुओं में जैव प्रक्रम solution resource below. Engaging with these textbook answers under focused study conditions ensures continuous academic progress and mastery of the 2026-27 curriculum for Science.

प्रश्न 1. रिक्त बक्सों को उचित भागों से भरकर आहार नाल के द्वारा भोजन की यात्रा को पूरा कीजिए।
भोजन → मुख → ______ → आमाशय → ______ → ______ → गुदा

Answer: भोजन → मुख → ग्रासिका (Esophagus) → आमाशय (Stomach) → क्षुद्रांत्र (Small Intestine) → वृहदांत्र (Large Intestine) → गुदा (Anus).
यह पथ भोजन के पाचन और अवशोषण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
In simple words: भोजन पहले मुँह में जाता है, फिर ग्रासिका से पेट में पहुँचता है। इसके बाद छोटी आँत, बड़ी आँत से होते हुए शरीर से बाहर निकल जाता है।
🎯 Exam Tip: आहार नाल के सभी अंगों का क्रम सही से याद रखें, क्योंकि भोजन इसी क्रम में आगे बढ़ता है और पचता है।

 

प्रश्न 4. निम्नलिखित का मिलान कीजिए

भाग का नामप्रकार्य
(i) नासाद्वार(क) बाहर से हवा प्रवेश करती है।
(ii) नासा पथ(ख) गैसों का विनिमय होता है।
(iii) श्वासनली(ग) फेफड़ों को सुरक्षा प्रदान करते हैं।
(iv) कूपिकाएँ(घ) सूक्ष्म रोम और श्लेष्मा हमारे द्वारा ग्रहण की गई वायु में से धूल और गंदगी को रोकने में सहायक है।
(v) पसली पिंजर(ङ) इस भाग से होकर वायु हमारे फेफड़ों तक पहुँचती है।

Answer:

भाग का नामप्रकार्य
(i) नासाद्वार(घ) सूक्ष्म रोम और श्लेष्मा हमारे द्वारा ग्रहण की गई वायु में से धूल और गंदगी को रोकने में सहायक है।
(ii) नासा पथ(क) बाहर से हवा प्रवेश करती है।
(iii) श्वासनली(ङ) इस भाग से होकर वायु हमारे फेफड़ों तक पहुँचती है।
(iv) कूपिकाएँ(ख) गैसों का विनिमय होता है।
(v) पसली पिंजर(ग) फेफड़ों को सुरक्षा प्रदान करते हैं।

In simple words: नासाद्वार हवा को छानता है, नासा पथ से हवा अंदर जाती है, श्वासनली हवा को फेफड़ों तक ले जाती है, कूपिकाएँ गैस बदलती हैं, और पसली पिंजर फेफड़ों को बचाता है।
🎯 Exam Tip: शरीर के हर अंग का सही कार्य याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर श्वसन प्रणाली के अंगों का। यह आपको स्वास्थ्य और जीवन प्रक्रियाओं को समझने में मदद करेगा।

 

प्रश्न 6. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है और क्यों? अनु-हम वायु को अंतःश्वसित करते हैं। शानू- हम ऑक्सीजन को अंतःश्वसित करते हैं। तनु-हम ऑक्सीजन से समृद्ध वायु को अंतःश्वसित करते हैं।
Answer: सही कथन तनु का है। हम ऑक्सीजन से समृद्ध वायु को अंदर लेते हैं, शुद्ध ऑक्सीजन को नहीं। इसका कारण यह है कि हम जिस हवा में सांस लेते हैं, उसमें लगभग 78% नाइट्रोजन, 21% ऑक्सीजन और अन्य गैसें कम मात्रा में होती हैं।
In simple words: हम सिर्फ ऑक्सीजन नहीं, बल्कि ऐसी हवा अंदर लेते हैं जिसमें ऑक्सीजन ज़्यादा होती है।
🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि हम शुद्ध ऑक्सीजन नहीं लेते, बल्कि हवा का वह मिश्रण लेते हैं जिसमें ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है।

 

प्रश्न 7. जब हम श्वास के साथ धूल भरी वायु को अंदर लेते हैं तो प्रायः हम छींकते हैं। इसके संभावित कारण क्या हो सकते हैं?
Answer: जब हम धूल भरी हवा में सांस लेते हैं, तो धूल के कण नाक के अंदर मौजूद श्लेष्मा (mucus) और छोटे-छोटे बालों में फँस जाते हैं। ये कण हमारे श्वसन तंत्र को परेशान करते हैं, जिससे शरीर उन्हें बाहर निकालने के लिए छींकने की प्रक्रिया शुरू करता है। छींकना एक प्राकृतिक सुरक्षात्मक क्रिया है जो धूल और नुकसानदायक कणों को शरीर से बाहर धकेलती है।
In simple words: धूल के कण जब नाक में जाते हैं, तो शरीर उन्हें बाहर निकालने के लिए छींकता है। यह एक तरह से शरीर की अपनी सफाई का तरीका है।
🎯 Exam Tip: छींकना हमारे शरीर की एक महत्वपूर्ण रक्षात्मक क्रिया है, जो श्वसन मार्ग को साफ रखने में मदद करती है।

 

प्रश्न 8. कक्षा 7 की छात्राएँ परिधि और अनुषा ने अपने प्रातः कालीन व्यायाम के लिए दौड़ना आरंभ किया। अपनी दौड़ पूरी करने के बाद उन्होंने प्रति मिनट ली जाने वाली श्वासों की गिनती की। अनुषा, परिधि की अपेक्षा अधिक तेजी से श्वास ले रही थी। परिधि की अपेक्षा अनुषा द्वारा अधिक तेजी से श्वास लेने के कम से कम दो संभावित कारण बताइए।
Answer: अनुषा के परिधि की अपेक्षा अधिक तेजी से श्वास लेने के दो संभावित कारण ये हो सकते हैं:
(1) अनुषा की शारीरिक क्षमता परिधि की अपेक्षा कम हो सकती है, जिससे उसे अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ी और उसकी श्वास दर बढ़ गई। शरीर को ऊर्जा बनाने के लिए अधिक ऑक्सीजन चाहिए होती है, खासकर जब हम कोई मेहनत वाला काम करते हैं।
(2) अनुषा ने परिधि से अधिक तेज या लंबी दूरी तक दौड़ लगाई होगी, जिससे उसके शरीर में ऊर्जा की अधिक माँग हुई और इसलिए श्वास की गति बढ़ गई।
In simple words: अनुषा को शायद ज़्यादा ऑक्सीजन की ज़रूरत थी क्योंकि वह कमज़ोर थी या उसने ज़्यादा तेज़ दौड़ लगाई थी, जिससे उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
🎯 Exam Tip: व्यायाम के दौरान शरीर की ऑक्सीजन की ज़रूरत बढ़ जाती है, जिससे श्वास दर बढ़ती है। शरीर की क्षमता और गतिविधि की तीव्रता इस पर सीधा असर डालती है।

 

प्रश्न 9. यदु ने अपने विचार परीक्षण के लिए एक प्रयोग किया। उसने दो परखनलियाँ 'क' और 'ख' लीं। परखनलियों को पानी से आधा भरकर और उनमें एक चुटकी चावल का आटा मिला कर उन्हें अच्छी तरह हिलाया। परखनली 'ख' में उसने कुछ बूंदें लार की मिलाई। दोनों परखनलियों को उसने 35-40 मिनट के लिए यथावत रहने दिया। उसके बाद उसने दोनों परखनलियों में आयोडीन विलयन डाला। प्रयोग के परिणाम चित्र 9.15 में दर्शाए गए हैं। आपके विचार से वह क्या परीक्षण करना चाहता है?
Answer: यदु यह परीक्षण करना चाहता था कि लार (Saliva) भोजन में उपस्थित स्टार्च (मंड) को तोड़कर सरल शर्करा (ग्लूकोज) में बदल देती है या नहीं। लार में 'सैलिवरी ऐमाइलेज' नामक एक एंजाइम होता है, जो स्टार्च को तोड़ने का काम करता है।
प्रयोग के परिणाम:
1. परखनली 'क' (जिसमें लार नहीं डाली गई थी) – आयोडीन डालने पर इसमें नीला-काला रंग बना। यह दर्शाता है कि इसमें स्टार्च अभी भी मौजूद है।
2. परखनली 'ख' (जिसमें लार डाली गई थी) – आयोडीन डालने पर इसमें नीला-काला रंग नहीं बना या हल्का बना। यह दर्शाता है कि लार में मौजूद एंजाइम 'सैलिवरी ऐमाइलेज' ने स्टार्च को शर्करा में बदल दिया था, इसलिए अब आयोडीन स्टार्च का पता नहीं लगा पा रहा है।
In simple words: यदु यह देखना चाहता था कि क्या लार खाने में मौजूद स्टार्च को चीनी में बदल देती है। जिस परखनली में लार मिलाई गई, उसमें स्टार्च खत्म हो गया क्योंकि लार ने उसे तोड़ दिया।
🎯 Exam Tip: आयोडीन विलयन का उपयोग स्टार्च की उपस्थिति का पता लगाने के लिए किया जाता है; स्टार्च होने पर यह नीला-काला हो जाता है। लार में मौजूद एंजाइम पाचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

प्रश्न 10. रक्षिता ने दो स्वच्छ परखनलियाँ 'क' और 'ख' लेकर एक परीक्षण अभिकल्पित किया। उसने दोनों परखनलियों को चित्र में दर्शाए अनुसार चूने के पानी से भर दिया। परखनली 'क' में अंतःश्वसित वायु को नली द्वारा चूषित करके प्रवाहित किया गया। परखनली 'ख' में नली के द्वारा उच्छ्वसित वायु को फूंक कर प्रवाहित किया गया। आपके विचार से वह क्या जाँचना चाहती है? वह कैसे अपने निष्कर्षों की पुष्टि कर सकती है?
Answer: रक्षिता यह जाँचना चाहती थी कि हम जो हवा बाहर निकालते हैं (उच्छ्वसित वायु), उसमें हम जो हवा अंदर लेते हैं (अंतःश्वसित वायु) की तुलना में कार्बन डाइऑक्साइड \((CO_2)\) की मात्रा अधिक होती है।
रक्षिता अपने निष्कर्षों की पुष्टि इस प्रकार कर सकती है:
1. प्रयोग के परिणाम:
    परखनली 'क' (अंतःश्वसित वायु) – चूने का पानी लगभग वैसा ही रहा। इससे पता चलता है कि अंदर ली गई हवा में \((CO_2)\) की मात्रा बहुत कम होती है।
    परखनली 'ख' (उच्छ्वसित वायु) – चूने का पानी दूधिया (milk like) हो गया।
2. निष्कर्ष की पुष्टि: चूने के पानी का दूधिया होना यह दर्शाता है कि उसमें \((CO_2)\) गैस उपस्थित है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड चूने के पानी (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड) के साथ क्रिया करके कैल्शियम कार्बोनेट बनाता है, जो एक सफेद पदार्थ है और पानी को दूधिया बना देता है। अंतःश्वसित और उच्छ्वसित वायु की तुलना करने से यह निष्कर्ष निकलता है कि हम जो वायु बाहर निकालते हैं, उसमें \((CO_2)\) की मात्रा अधिक होती है।

वायु इनलेट चूने का पानी आउटलेट चूने का पानी


In simple words: रक्षिता ने दिखाया कि जो हवा हम बाहर निकालते हैं, उसमें अंदर ली गई हवा से ज़्यादा कार्बन डाइऑक्साइड होती है। चूने का पानी इस गैस का पता लगाने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: चूने के पानी का दूधिया होना कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति का एक निश्चित परीक्षण है। यह श्वसन क्रिया में गैसों के आदान-प्रदान को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयोग है।

 

प्रश्न 2. मैंने गायों को अपना भोजन चबाते हुए देखा है जबकि उस समय न तो वे कुछ खा रही थी और न ही चर रही थी। ऐसा क्यों होता है?
Answer: यह क्रिया रोमंथन (Rumination) कहलाती है। गाय और अन्य जुगाली करने वाले जानवर घास और अन्य भोजन को आंशिक रूप से चबाकर जल्दी से निगल लेते हैं। यह भोजन पहले उनके आमाशय के एक विशेष भाग में चला जाता है। बाद में, जब वे आराम कर रहे होते हैं, तो वे इस आधे पचे भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में वापस अपने मुँह में ले आते हैं और उसे अच्छी तरह चबाते हैं। यह भोजन को बेहतर ढंग से तोड़ने और पाचन के लिए तैयार करने में मदद करता है।
In simple words: गायें आराम करते समय अपना पहले निगला हुआ खाना दोबारा मुँह में लाकर चबाती हैं। इसे जुगाली करना कहते हैं, जिससे खाना ठीक से पच सके।
🎯 Exam Tip: रोमंथन (जुगाली) एक विशेष पाचन प्रक्रिया है जो शाकाहारी जानवरों को कठोर पौधों सामग्री को पचाने में मदद करती है। यह घास खाने वाले जानवरों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 2. साहिल ने परखनली 'क' में रोटी के कुछ टुकड़े डाले। नेहा ने परखनली 'ख' में रोटी के टुकड़ों को चबा कर डाला और संतुष्टि ने परखनली 'ग' में उबले हुए आलू मसल कर डाले। उन सभी ने क्रमशः परखनली 'क', 'ख' और 'ग' में आयोडीन विलयन की कुछ बूँदें डालीं। उनके क्या अवलोकन होंगे? कारण बताइए।
Answer: उनके अवलोकन और कारण निम्नलिखित होंगे:
1. परखनली 'क' (रोटी के टुकड़े) – अवलोकन: नीला-काला रंग बनेगा। कारण: क्योंकि रोटी में स्टार्च उपस्थित है और लार द्वारा उसका पाचन नहीं हुआ है, इसलिए आयोडीन स्टार्च से क्रिया करके नीला-काला रंग देता है।
2. परखनली 'ख' (चबाई हुई रोटी) – अवलोकन: हल्का या न के बराबर नीला-काला रंग बनेगा। कारण: क्योंकि लार में उपस्थित एंजाइम (ऐमाइलेज) ने चबाई हुई रोटी में मौजूद स्टार्च को आंशिक रूप से शर्करा में तोड़ दिया है।
3. परखनली 'ग' (उबला आलू) – अवलोकन: गहरा नीला-काला रंग बनेगा। कारण: क्योंकि उबले आलू में स्टार्च प्रचुर मात्रा में होता है और उसका लार द्वारा पाचन नहीं हुआ है, इसलिए आयोडीन से क्रिया करके गहरा रंग देगा।
In simple words: बिना चबाई रोटी और उबले आलू में स्टार्च होता है, इसलिए आयोडीन डालने पर नीला-काला रंग आता है। चबाई हुई रोटी में लार के कारण स्टार्च कम हो जाता है, इसलिए रंग हल्का या नहीं आता।
🎯 Exam Tip: यह प्रयोग दर्शाता है कि लार में मौजूद एंजाइम (जैसे ऐमाइलेज) भोजन में मौजूद स्टार्च का पाचन शुरू कर देते हैं। स्टार्च परीक्षण के लिए आयोडीन एक अच्छा सूचक है।

 

प्रश्न 3. श्वास लेने में डायाफ्राम की क्या भूमिका है?
(i) वायु को निस्यंदित करना
(ii) ध्वनि उत्पन्न करना
(iii) अंत: श्वसन और उच्छवसन में सहायता करना
(iv) ऑक्सीजन अवशोषित करना

Answer: (iii) अंत: श्वसन और उच्छवसन में सहायता करना
डायाफ्राम एक गुंबद के आकार की मांसपेशी होती है जो फेफड़ों के नीचे होती है और श्वास लेने और बाहर निकालने में मदद करती है। जब यह सिकुड़ता है, तो फेफड़े फैलते हैं और हवा अंदर आती है, और जब यह आराम करता है, तो हवा बाहर निकलती है।
In simple words: डायाफ्राम एक मांसपेशी है जो ऊपर-नीचे होकर फेफड़ों को हवा अंदर लेने और बाहर निकालने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: डायाफ्राम श्वसन प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण मांसपेशियों में से एक है; इसकी गति के कारण ही फेफड़े हवा भर पाते हैं और खाली कर पाते हैं।

Free study material for Science

Free RBSE Textbook Explanations: Class 7 Science Chapter 09 जंतुओं में जैव प्रक्रम

Chapter Exercise Answers for Class 7 Science

Access structured RBSE textbook solutions for Chapter 09 जंतुओं में जैव प्रक्रम. Designed in alignment with the latest academic curriculum for Class 7 Science, these answers cover all end-of-chapter exercises to support daily learning and homework completion.

Detailed Answer Guides for Chapter 09 जंतुओं में जैव प्रक्रम

Beyond providing final answers, these guides offer step-by-step breakdowns for complex queries in the Class 7 Science module. This approach helps students balance theoretical depth with practical problem-solving skills required for RBSE exams.

Complete Preparation Kit for Class 7 Exams

Consistent practice with these solution guides cultivates faster problem-solving habits and clearer logical structuring. For a complete preparation experience, pair these textbook answers with our dedicated revision notes and sample papers for Class 7 Science.

FAQs

Where can I find the latest RBSE Solutions Class 7 Science Chapter 9 जंतुओं में जैव प्रक्रम for the 2026-27 session?

The complete and updated RBSE Solutions Class 7 Science Chapter 9 जंतुओं में जैव प्रक्रम is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 7 Science are as per latest RBSE curriculum.

Are the Science RBSE solutions for Class 7 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 7 Science Chapter 9 जंतुओं में जैव प्रक्रम as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 7 RBSE solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 7 Science Chapter 9 जंतुओं में जैव प्रक्रम will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 7 Science Chapter 9 जंतुओं में जैव प्रक्रम in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 7 Science. You can access RBSE Solutions Class 7 Science Chapter 9 जंतुओं में जैव प्रक्रम in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Science RBSE solutions for Class 7 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 7 Science Chapter 9 जंतुओं में जैव प्रक्रम in printable PDF format for offline study on any device.