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Detailed Chapter 6 किशोरावस्था वृद्धि एवं परिवर्तन की RBSE Solutions for Class 7 Science
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Class 7 Science Chapter 6 किशोरावस्था वृद्धि एवं परिवर्तन की RBSE Solutions PDF
Class 7th Science Chapter 6 Question Answer in Hindi Medium
Science Class 7 Chapter 6 Question Answer in Hindi
Question 1. 11 वर्षीय लड़के रमेश के चेहरे पर कुछ लाल दाने (मुँहासे) निकले। उसकी माँ ने उसे बताया कि इसका कारण उसके शरीर में होने वाले जैविक परिवर्तन हैं। (i) उसके चेहरे पर इन मुँहासों के होने के संभावित कारण क्या हो सकते हैं?
Answer: किशोरावस्था के दौरान रमेश के चेहरे पर मुँहासे निकलने के संभावित कारण ये हो सकते हैं:
मुँहासे के कारण:
1. त्वचा की तेल ग्रंथियों (Sebaceous Glands) का अधिक सक्रिय होना: किशोरावस्था में हार्मोनल बदलाव के कारण त्वचा की तेल ग्रंथियाँ ज़्यादा सक्रिय हो जाती हैं।
2. अत्यधिक तेल (Sebum) का उत्पादन: ये ग्रंथियाँ सामान्य से अधिक मात्रा में तेल (sebum) बनाना शुरू कर देती हैं।
3. रोम छिद्रों का बंद होना: ज़्यादा तेल और मृत त्वचा कोशिकाएँ मिलकर रोम छिद्रों को बंद कर देती हैं, जिससे बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। इससे सूजन, लालिमा और मुँहासे हो जाते हैं।
राहत के उपाय:
रमेश मुँहासों से राहत पाने के लिए ये उपाय कर सकता है:
1. त्वचा की अच्छी सफाई: दिन में 2-3 बार चेहरे को हल्के साबुन या फेस वॉश से धोना चाहिए।
2. तेल वाले उत्पादों से बचाव: चेहरे पर भारी क्रीम या ज़्यादा तेल वाले उत्पादों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
3. मुँहासों को फोड़ने से बचें: मुँहासों को फोड़ने से संक्रमण फैल सकता है और चेहरे पर दाग रह सकते हैं।
4. संतुलित भोजन: तैलीय और मसालेदार भोजन कम खाएं और ताजे फल, सब्जियाँ ज़्यादा खाएं।
5. डॉक्टर से सलाह: यदि मुँहासे बहुत गंभीर हों, तो किसी त्वचा विशेषज्ञ (Dermatologist) से परामर्श लेना चाहिए। किशोरावस्था में हार्मोन में बदलाव के कारण मुँहासे एक सामान्य समस्या है, लेकिन सही देखभाल से इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है।
In simple words: किशोरावस्था में हार्मोन बदलने से चेहरे पर मुँहासे आ सकते हैं। ये ज़्यादा तेल बनने और रोम छिद्र बंद होने के कारण होते हैं। इनसे बचने के लिए त्वचा साफ रखें, ज़्यादा तेल वाले उत्पाद न लगाएं और डॉक्टर को दिखाएं।
🎯 Exam Tip: मुँहासों के कारणों और उनसे बचाव के उपायों को स्पष्ट रूप से लिखें, क्योंकि यह एक सामान्य समस्या है जिसके बारे में छात्रों को पता होना चाहिए।
Question 2. निम्नलिखित में से कौन-सा खाद्य समूह किशोरों के लिए अपेक्षाकृत अधिक उपयुक्त विकल्प होगा और क्यों?
(क)
(ख)
Answer: विकल्प (ख) में दिखाया गया खाद्य समूह किशोरों के लिए ज़्यादा उपयुक्त है। इस समूह में अनाज, दालें, हरी सब्जियाँ, दूध और दूध से बने उत्पाद, सलाद आदि शामिल हैं। इन खाद्य पदार्थों में शरीर की वृद्धि और विकास के लिए ज़रूरी पोषक तत्व होते हैं। बढ़ती उम्र में शरीर और मांसपेशियों के सही विकास के लिए प्रोटीन की बहुत ज़रूरत होती है। प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत, हार्मोन्स और एंजाइम्स बनाने में भी मदद करता है। यह स्वस्थ भोजन का चुनाव एक किशोर के शारीरिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
In simple words: विकल्प (ख) में दालें, अनाज, सब्जियाँ और दूध जैसे स्वस्थ खाद्य पदार्थ हैं, जो किशोरों के विकास और शरीर के सही कामकाज के लिए बहुत ज़रूरी प्रोटीन और पोषक तत्व देते हैं।
🎯 Exam Tip: किशोरों के लिए स्वस्थ आहार की पहचान करते समय, केवल खाद्य पदार्थों को सूचीबद्ध न करें बल्कि यह भी बताएं कि वे शरीर के लिए क्यों फायदेमंद हैं।
Question 3. निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित शब्दों को सही रूप में लिखिए:
(क) किशोरवय लड़कियों में 28-30 दिनों के अंतराल पर होने वाला रक्तस्राव सिकर्ममाध है।
(ख) को चिह्नित करते हैं।
(घ) हमें लल्कोहॉ और ग्सड़ को 'ना' कहना चाहिए क्योंकि ये व्यसनकारी हैं।
Answer:
(क) सही रूप – मासिक धर्म (Menstruation)। यह किशोरवय लड़कियों में एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है जो प्रजनन क्षमता की शुरुआत को दर्शाती है।
(ख) सही रूप – यौवनारंभ (Puberty)। यह शब्द उस अवस्था को बताता है जब बच्चे का शरीर वयस्कता में बदलता है और प्रजनन के लिए सक्षम हो जाता है।
(घ) सही रूप – एल्कोहॉल (Alcohol) और ड्रग्स (Drugs)। ये ऐसे पदार्थ हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं और जिनसे बचना चाहिए।
In simple words: (क) सिकर्ममाध को 'मासिक धर्म' (Menstruation) कहते हैं। (ख) किशोरावस्था की शुरुआत को 'यौवनारंभ' (Puberty) कहा जाता है। (घ) लल्कोहॉ और ग्सड़ के सही शब्द 'एल्कोहॉल' (Alcohol) और 'ड्रग्स' (Drugs) हैं।
🎯 Exam Tip: दिए गए वाक्यों में गलत शब्दों को पहचानें और उनके सही वैज्ञानिक या सामाजिक रूप को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 4. शालू ने अपनी सहपाठी से कहा “किशोरावस्था में मात्र शारीरिक परिवर्तन होते हैं जैसे लंबा होना या शरीर पर बालों का निकलना।” क्या वह सही है? आप किशोरावस्था के इस वर्णन में क्या परिवर्तन करेंगे?
Answer: नहीं, शालू का कहना पूरी तरह सही नहीं है। किशोरावस्था में केवल शारीरिक परिवर्तन ही नहीं होते, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण बदलाव भी होते हैं। मैं इस वर्णन में निम्नलिखित परिवर्तन/जोड़ करूंगा:
1. मानसिक परिवर्तन: इसमें सोचने-समझने की क्षमता का विकास और तार्किक तरीके से सोचने की शक्ति बढ़ती है।
2. भावनात्मक परिवर्तन: इस दौरान मूड में उतार-चढ़ाव (Mood Swings) होते हैं और संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
3. सामाजिक परिवर्तन: दोस्तों के साथ रिश्तों में बदलाव आते हैं और समाज में अपनी भूमिका समझने लगते हैं।
4. जैविक परिवर्तन: हार्मोन्स का स्राव होता है, लड़कियों में मासिक धर्म शुरू होता है और लड़कों में शुक्राणु बनने लगते हैं। किशोरावस्था शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास का एक जटिल दौर है।
In simple words: शालू गलत है, क्योंकि किशोरावस्था में सिर्फ शरीर ही नहीं बदलता। इस दौरान सोचने का तरीका, भावनाएँ और समाज से रिश्ते भी बदलते हैं, साथ ही हार्मोन भी सक्रिय होते हैं।
🎯 Exam Tip: किशोरावस्था के बहुआयामी परिवर्तनों को स्पष्ट रूप से वर्गीकृत करें - शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक - ताकि उत्तर पूरा और सटीक हो।
Question 5. कक्षा में चर्चा के समय कुछ विद्यार्थियों ने निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की। आप किन प्रश्नों को पूछकर इन बिंदुओं के औचित्य को सिद्ध करेंगे?
(क) “किशोरवयों को व्यवहारगत परिवर्तनों के संदर्भ में चिंता करने की आवश्यकता नहीं होती।”
(ख) “यदि कोई हानिकारक पदार्थ का एक बार सेवन कर लेता है तो वह इच्छानुसार इसका सेवन करना कभी भी बंद कर सकता है।”
Answer: इन बिंदुओं के औचित्य को सिद्ध करने के लिए मैं निम्नलिखित प्रश्न पूछूंगा:
(क) व्यवहारगत परिवर्तनों के संदर्भ में:
क्या व्यावहारिक परिवर्तन (जैसे चिड़चिड़ापन, गुस्सा, जोखिम लेने की प्रवृत्ति) किशोरों के जीवन और उनके रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं?
क्या इन परिवर्तनों को नजरअंदाज करने से भविष्य में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ (जैसे तनाव, अवसाद) हो सकती हैं?
क्या इन परिवर्तनों को समझना और उन पर चर्चा करना, उन्हें बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद नहीं करेगा? यह समझना ज़रूरी है कि व्यवहार में बदलाव अक्सर गहरे मुद्दों का संकेत होते हैं।
(ख) हानिकारक पदार्थों के सेवन के संदर्भ में:
क्या एक बार हानिकारक पदार्थ (जैसे नशीले पदार्थ) का सेवन करने के बाद उसे अपनी इच्छा से कभी भी रोका जा सकता है?
क्या एक बार के सेवन से भी आदत पड़ने का जोखिम होता है?
क्या ये पदार्थ शरीर और दिमाग पर लंबे समय तक नकारात्मक असर डाल सकते हैं?
क्या हानिकारक पदार्थों के सेवन से सामाजिक और कानूनी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं? ये प्रश्न यह समझने में मदद करते हैं कि क्यों हानिकारक पदार्थों से दूर रहना चाहिए।
In simple words: (क) किशोरों के व्यवहार में बदलावों को लेकर चिंता क्यों ज़रूरी है, क्या इनसे कोई नुकसान हो सकता है और इन्हें समझना क्यों अच्छा है, यह पूछना ज़रूरी है। (ख) यह भी पूछना चाहिए कि क्या हानिकारक चीज़ें एक बार लेने पर भी खतरनाक हो सकती हैं और क्या उनकी आदत लग सकती है।
🎯 Exam Tip: जब किसी कथन के औचित्य पर सवाल पूछा जाए, तो ऐसे प्रश्न तैयार करें जो उस कथन की सच्चाई या उसके परिणामों पर गहराई से विचार करने के लिए प्रेरित करें।
Question 6. किशोर कभी-कभी मनोदशा में निरंतर परिवर्तनों का अनुभव करते हैं। किसी दिन वे स्वयं को अत्यधिक ऊर्जावान और प्रसन्न अनुभव करते हैं जबकि किसी अन्य दिन वे अत्यंत उदासीनता का अनुभव करते हैं। अन्य कौन-से व्यवहारगत परिवर्तन इस आयु से संबंधित हैं?
Answer: किशोरावस्था में होने वाले अन्य व्यवहारगत परिवर्तन इस प्रकार हैं:
1. आत्मकेंद्रित होना: किशोर अपने शारीरिक बदलावों और रूप के बारे में बहुत ज़्यादा सोचने लगते हैं।
2. स्वतंत्रता की इच्छा: वे माता-पिता से थोड़ी दूरी बनाना चाहते हैं और अपने निर्णय खुद लेना पसंद करते हैं।
3. साथियों का दबाव (Peer Pressure): दोस्तों के कहने पर अच्छे या बुरे काम करने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है, और वे नए व खतरनाक काम करने की कोशिश करते हैं।
4. भावनाओं की तीव्रता: किसी भी बात पर वे बहुत अधिक खुश या बहुत अधिक दुखी हो जाते हैं, उनकी भावनाएँ तीव्र होती हैं। यह सब हार्मोनल परिवर्तनों और पहचान बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
In simple words: किशोर अपने बारे में ज़्यादा सोचते हैं, आज़ाद रहना चाहते हैं, दोस्तों की बात मानते हैं और उनकी भावनाएँ बहुत ज़्यादा बदलती रहती हैं, जैसे कभी बहुत खुश तो कभी बहुत दुखी होना।
🎯 Exam Tip: किशोरावस्था के व्यवहारगत परिवर्तनों को सूचीबद्ध करते समय, उनके पीछे के मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारणों का भी ध्यान रखें।
Question 7. शौचालय का प्रयोग करते समय मोहिनी ने ध्यान दिया कि प्रयोग किए गए सेनीटरी पैड कूड़ेदान के आस- पास बिखरे पड़े हैं। वह असहज हो गई और उसने इस विषय में अपनी सहेलियों को बताया। उन्होंने मासिक धर्म संबंधी स्वच्छता और स्वच्छता संबंधी अन्य अच्छी आदतों पर चर्चा की। आप अपने साथियों को मासिक धर्म संबंधी स्वच्छता और स्वच्छता संबंधी आदतों के विषय में क्या सुझाव देंगे?
Answer: मासिक धर्म संबंधी स्वच्छता और अन्य अच्छी आदतों के विषय में मेरे सुझाव इस प्रकार हैं:
1. उपयोग किए गए पैड का सही निपटान: उपयोग किए गए सेनीटरी पैड को अखबार या कागज़ में अच्छी तरह लपेटकर ही कूड़ेदान में डालना चाहिए। उन्हें खुले में या फ्लश में नहीं फेंकना चाहिए।
2. नियमित अंतराल पर बदलना: संक्रमण से बचने के लिए पैड को हर 4-6 घंटे में बदलते रहना ज़रूरी है, भले ही रक्तस्राव कम हो।
3. साफ-सफाई का ध्यान: हाथों और जननांगों की नियमित सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए, खासकर पैड बदलने के बाद।
4. सही उत्पाद का चयन: अच्छी गुणवत्ता वाले सेनीटरी नैपकिन या मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल करना चाहिए जो त्वचा के अनुकूल हों।
5. खुलकर बात करें: इस विषय पर परिवार के सदस्यों या शिक्षकों से खुलकर बात करनी चाहिए ताकि इससे जुड़ी गलत धारणाएँ दूर हो सकें।
6. जागरूकता फैलाएँ: दूसरों को भी सही तरीके से निपटान और स्वच्छता के महत्व के बारे में प्रेरित करना चाहिए। अच्छी स्वच्छता प्रथाएँ संक्रमण को रोकती हैं और व्यक्तिगत स्वास्थ्य को बनाए रखती हैं।
In simple words: मासिक धर्म के दौरान पैड को ठीक से लपेटकर कूड़े में डालें, हर कुछ घंटे में बदलें, साफ-सफाई रखें और सही उत्पाद चुनें। परिवार और शिक्षकों से इस बारे में बात करें और दूसरों को भी जागरूक करें।
🎯 Exam Tip: मासिक धर्म स्वच्छता से संबंधित सभी व्यावहारिक और सामाजिक पहलुओं को शामिल करें, जैसे निपटान, बदलने की आवृत्ति और जागरूकता।
Question 8. मैरी और मनोज सहपाठी और अच्छे मित्र थे। 11 वर्ष की होने पर मैरी की गर्दन में सामने की ओर एक छोटा सा उभार विकसित हुआ। वह चिकित्सक के पास गई। उन्होंने उसे औषधि दी और आयोडीनयुक्त नमक खाने को कहा। 12 वर्ष का होने पर उसी प्रकार जो किशोरावस्था में लड़कों में होने वाला एक लैंगिक लक्षण है। यह एक प्राकृतिक परिवर्तन है, इसलिए डॉक्टर ने उसे आश्वस्त किया। मैरी का मामला : जबकि मैरी की गर्दन में बना उभार थायरॉयड ग्रंथि के अंडरएक्टिव (Hypothyroidism) होने का संकेत हो सकता है, जिसमें आयोडीन की कमी एक प्रमुख कारण है। इसलिए डॉक्टर ने उसे आयोडीनयुक्त नमक खाने और दवा लेने की सलाह दी।
Answer: मैरी और मनोज का मामला किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक बदलावों को दर्शाता है। मैरी की गर्दन में उभार थायरॉयड ग्रंथि की निष्क्रियता (Hypothyroidism) के कारण था, जिसका मुख्य कारण आयोडीन की कमी है। डॉक्टर ने उसे आयोडीन युक्त नमक खाने और दवा लेने की सलाह दी। वहीं, मनोज में किशोरावस्था के दौरान लड़कों में होने वाले लैंगिक परिवर्तन के लक्षण विकसित हुए, जो एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, और डॉक्टर ने उसे इस बारे में आश्वस्त किया। यह मामला दिखाता है कि किशोरावस्था में शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं, जिनमें हार्मोनल असंतुलन और सामान्य लैंगिक विकास दोनों शामिल हो सकते हैं। सही पहचान और इलाज से कई समस्याओं को हल किया जा सकता है।
In simple words: मैरी को गर्दन में उभार आयोडीन की कमी से हुई थायरॉयड समस्या के कारण था, जिसके लिए उसे दवा और आयोडीन युक्त नमक लेने को कहा गया। मनोज में लड़कों के सामान्य किशोरावस्था के बदलाव हुए, जिन्हें डॉक्टर ने प्राकृतिक बताया।
🎯 Exam Tip: ऐसे केस स्टडी प्रश्नों में, प्रत्येक व्यक्ति के शारीरिक बदलाव और उनके कारणों को स्पष्ट रूप से पहचानें, साथ ही डॉक्टरों द्वारा दी गई सलाह को भी नोट करें।
Question 9. किशोरावस्था के दौरान लड़कों और लड़कियों में कुछ शारीरिक परिवर्तन होते हैं जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं-
(i) आवाज में परिवर्तन
(ii) स्तनों का विकास
(iii) मूँछों में वृद्धि
(iv) चेहरे पर बालों की वृद्धि
(v) चेहरे पर मुँहासे
(vi) जघन क्षेत्र में बालों की वृद्धि
(vii) बगल में बालों की वृद्धि
इन परिवर्तनों को नीचे दी गई तालिका में वर्गीकृत कीजिए.
Answer:
| केवल लड़कों में देखे गए | केवल लड़कियों में देखे गए | लड़कों और लड़कियों दोनों में देखे गए |
|---|---|---|
| (iii) मूँछों में वृद्धि | (ii) स्तनों का विकास | (i) आवाज में परिवर्तन (लड़कों में अधिक स्पष्ट) |
| (iv) चेहरे पर बालों की वृद्धि | (v) चेहरे पर मुँहासे | |
| (vi) जघन क्षेत्र में बालों की वृद्धि | ||
| (vii) बगल में बालों की वृद्धि |
In simple words: किशोरावस्था में लड़कों में मूँछें और चेहरे पर बाल आते हैं, लड़कियों में स्तन विकसित होते हैं, जबकि आवाज में बदलाव (लड़कों में ज़्यादा), मुँहासे और जघन/बगल में बाल दोनों में होते हैं।
🎯 Exam Tip: तालिका बनाते समय, सुनिश्चित करें कि प्रत्येक परिवर्तन को सही श्रेणी में रखा गया है और 'दोनों में' वाली श्रेणी के लिए अतिरिक्त नोट (जैसे आवाज का भारी होना) शामिल करें।
Question 10. किशोरों के लिए एक स्वस्थ जीवनशैली जीने के सुझावों का उल्लेख करते हुए एक पोस्टर बनाइए।
Answer: यह एक क्रियात्मक प्रश्न है, पोस्टर के लिए सुझाव नीचे दिए गए हैं:
पोस्टर का शीर्षक: "किशोरावस्था: स्वस्थ जीवन की नींव"
सुझाव/बिंदु:
1. संतुलित आहार लें: ताजे फल, सब्जियाँ, दूध, दालें और साबुत अनाज को अपने भोजन में शामिल करें।
2. नियमित व्यायाम करें: खेलकूद, योगा या कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि रोज़ करें।
3. पर्याप्त नींद लें: रोज़ाना 8-9 घंटे की अच्छी और गहरी नींद लेना ज़रूरी है।
4. साफ-सफाई का ध्यान रखें: रोज़ नहाएं, दांत साफ करें और साफ कपड़े पहनना न भूलें।
5. नशे से दूर रहें: सिगरेट, शराब और ड्रग्स जैसी चीज़ों से हमेशा दूर रहें। 'ना' कहना सीखें।
6. तनाव मुक्त रहें: पढ़ाई के साथ-साथ अपने शौक के लिए भी समय निकालें। दोस्तों और परिवार से बात करें।
7. सोशल मीडिया का सही उपयोग करें: ऑनलाइन सुरक्षा का ध्यान रखें और सोशल मीडिया के इस्तेमाल की समय सीमा तय करें।
8. जागरूक बनें: अपने शरीर में होने वाले बदलावों के बारे में जानें और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर या शिक्षक से सलाह लें। एक स्वस्थ जीवनशैली किशोरावस्था में खुशी और अच्छे विकास की कुंजी है।
In simple words: स्वस्थ रहने के लिए संतुलित भोजन करें, रोज़ व्यायाम करें, पूरी नींद लें, साफ-सफाई रखें, नशे से दूर रहें, तनाव कम करें, सोशल मीडिया का ध्यान से उपयोग करें और शरीर के बदलावों के बारे में जानकारी रखें।
🎯 Exam Tip: पोस्टर के सुझावों को संक्षिप्त, स्पष्ट और आसानी से समझ में आने वाली भाषा में लिखें, और सुनिश्चित करें कि वे किशोरों के लिए प्रासंगिक हों।
Class 7 Science Chapter 6 Question Answer in Hindi (Intext)
Question 1. क्रियाकलाप 6.1 के अनुसार, पर्चियों पर लिखे अनुसार विद्यार्थियों में सामान्यतः दृष्टिगत परिवर्तन कौन से थे? इन्हें तालिका में सूचीबद्ध कीजिए।
Answer:
| परिवर्तन | दृष्टिगत बदलाव |
|---|---|
| 1. ऊँचाई | 1. लड़के-लड़कियों की ऊँचाई 8 साल की उम्र से बदल गई है। |
| 2. शारीरिक बनावट | 2. कुछ बच्चों में कंधों का चौड़ा होना या कमर का पतला होना। |
| 3. स्वरूप | 3. लड़के-लड़कियों का स्वरूप 8 के बीच बदल गया है। |
| 4. आवाज | 4. कक्षा-8 के कुछ बालकों की आवाज भारी हो गई है। |
| 5. कंठमणि (एडम्स एप्पल) | 5. कुछ में कंठमणि (आदम का सेब) दिखती है। |
| 6. मुँहासे | 6. कुछ लड़के-लड़कियों के मुँहासे दिखते हैं। |
In simple words: बच्चों में ऊँचाई बढ़ती है, शरीर की बनावट बदलती है, आवाज भारी होती है, कुछ में कंठमणि दिखती है और चेहरे पर मुँहासे भी आ सकते हैं।
🎯 Exam Tip: गतिविधि-आधारित प्रश्नों में, तालिका को स्पष्ट और संगठित तरीके से प्रस्तुत करें, जिसमें प्रत्येक परिवर्तन और उसका अवलोकन सही ढंग से सूचीबद्ध हो।
Question 2. किशोर विशेषकर किशोरवय लड़कियाँ शरीर में लौह तत्त्व अथवा विटामिन बी 12 की कमी के कारण बहुधा रक्त संबंधी स्वास्थ्य विकारों से पीड़ित होती हैं। ऐसे स्वास्थ्य विकारों के बारे में पत्ता लगाइये।
Answer: लौह तत्व या विटामिन बी12 की कमी के कारण किशोरियों में अक्सर रक्त संबंधी स्वास्थ्य विकार होते हैं, जैसे एनीमिया (खून की कमी)। ऐसे विकारों के कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:
1. थकान: लगातार थका हुआ महसूस करना, चाहे कितना भी आराम क्यों न किया हो।
2. सांस लेने में कठिनाई: थोड़ी सी मेहनत पर भी सांस फूलना।
3. हाथों-पैरों में झनझनाहट: सुन्नपन या झुनझुनी महसूस होना।
4. होंठ व एड़ियों का फटना: त्वचा का सूखापन और दरारें।
5. मांसपेशियों में कमजोरी: शारीरिक शक्ति में कमी महसूस होना।
6. चक्कर आना: खड़े होने पर या अचानक हिलने-डुलने पर चक्कर आना।
7. त्वचा का पीला पड़ना: त्वचा और आँखों के नीचे का हिस्सा पीला दिखना। यह सभी लक्षण शरीर में पर्याप्त ऑक्सीजन और ऊर्जा की कमी का संकेत देते हैं।
In simple words: लौह तत्व या विटामिन बी12 की कमी से थकावट, सांस लेने में परेशानी, हाथ-पैरों में झनझनाहट, होंठ फटना, मांसपेशियों में कमजोरी, चक्कर आना और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण हो सकते हैं।
🎯 Exam Tip: लौह तत्व और विटामिन बी12 की कमी से होने वाले विकारों के लक्षणों को सटीक और स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें।
Question 3. हम अपने शरीर में लौह तत्त्व की कमी की पूर्ति कैसे करते हैं?
Answer: हम अपने शरीर में लौह तत्व की कमी की पूर्ति के लिए कुछ खास खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकते हैं। इसके लिए अंडा, हरी सब्जियाँ (जैसे पालक), साबुत अनाज, चुकंदर और सूखे मेवे (जैसे खजूर, किशमिश) का सेवन करना चाहिए। इन सभी में लौह तत्व भरपूर मात्रा में होता है जो शरीर में खून बनाने में मदद करता है। विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ भी लौह तत्व के अवशोषण को बढ़ाते हैं, इसलिए उन्हें लौह युक्त भोजन के साथ लेना फायदेमंद होता है।
In simple words: शरीर में लौह तत्व की कमी पूरी करने के लिए हमें अंडा, हरी सब्जियाँ, साबुत अनाज, चुकंदर और सूखे मेवे खाने चाहिए।
🎯 Exam Tip: लौह तत्व से भरपूर खाद्य पदार्थों की एक विविध सूची दें, क्योंकि विभिन्न प्रकार के भोजन से शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं।
Question 4. ऐसी सरकारी योजनाओं के बारे में पता लगाइये जिनका उद्देश्य इन तत्त्वों की कमी से होने वाले रोगों की रोकथाम करना है।
Answer: भारत सरकार ने लौह तत्व और विटामिन बी12 जैसे पोषक तत्वों की कमी से होने वाले रोगों की रोकथाम के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं। ऐसी कुछ प्रमुख सरकारी योजनाएँ निम्नलिखित हैं:
1. एनीमिया मुक्त भारत: यह योजना एनीमिया (खून की कमी) को कम करने के लिए आयरन और फोलिक एसिड सप्लीमेंट, पोषण संबंधी शिक्षा और अन्य हस्तक्षेप प्रदान करती है।
2. चावल फोर्टिफिकेशन: इस योजना में चावल को लौह तत्व, विटामिन बी12 और फोलिक एसिड जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों से समृद्ध किया जाता है।
3. राष्ट्रीय पोषण मिशन (पोषण अभियान): इसका उद्देश्य पोषण संबंधी परिणामों में सुधार करना है, जिसमें एनीमिया और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करना शामिल है।
4. प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना: यह योजना गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को आर्थिक सहायता प्रदान करती है ताकि वे बेहतर पोषण प्राप्त कर सकें।
5. आंगनबाड़ी सेवाएँ: इन सेवाओं के तहत बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पूरक पोषण और स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की जाती हैं। ये सभी योजनाएँ देश की आबादी के पोषण स्तर को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
In simple words: सरकार ने एनीमिया मुक्त भारत, चावल फोर्टिफिकेशन, राष्ट्रीय पोषण मिशन, प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना और आंगनबाड़ी सेवाओं जैसी कई योजनाएँ शुरू की हैं ताकि लोगों में ज़रूरी पोषक तत्वों की कमी को दूर किया जा सके।
🎯 Exam Tip: सरकारी योजनाओं को सूचीबद्ध करते समय, उनके सही नामों और उनके मुख्य उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 6. इस अवस्था (किशोरावस्था) में ये परिवर्तन क्यों होते हैं?
Answer: किशोरावस्था में होने वाले ये सभी शारीरिक और मानसिक परिवर्तन शरीर में विभिन्न ग्रंथियों द्वारा स्रावित होने वाले हार्मोन नामक रसायनों के कारण होते हैं। मस्तिष्क इन ग्रंथियों को संकेत देता है, जिसके जवाब में ये हार्मोन उपयुक्त समय पर निकलते हैं और वृद्धि व विकास को नियंत्रित करते हैं। हार्मोन हमारे शरीर के अंदर संदेशवाहक की तरह काम करते हैं और कई प्रक्रियाओं को शुरू करते हैं।
In simple words: किशोरावस्था में बदलाव इसलिए होते हैं क्योंकि शरीर में हार्मोन नाम के रसायन निकलते हैं। ये हार्मोन दिमाग के इशारे पर काम करते हैं और शरीर की बढ़ोतरी और विकास को नियंत्रित करते हैं।
🎯 Exam Tip: किशोरावस्था के परिवर्तनों के मूल कारण के रूप में हार्मोन्स और मस्तिष्क की भूमिका को स्पष्ट रूप से समझाएं।
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