RBSE Solutions Class 7 Science Chapter 3 विद्युत परिपथ एवं उनके घटक

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Detailed Chapter 3 विद्युत परिपथ एवं उनके घटक RBSE Solutions for Class 7 Science

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Class 7 Science Chapter 3 विद्युत परिपथ एवं उनके घटक RBSE Solutions PDF

आइए, और अधिक सीखें

 

Question 1. असत्य कथन का चयन कीजिए।
(i) विद्युत परिपथ में स्विच धारा का स्रोत होता है।
(ii) परिपथ को पूरा करने अथवा भंग करने में स्विच सहायता करता है।
(iii) विद्युत के आवश्यकतानुसार उपयोग में स्विच सहायता करता है।
(iv) जब स्विच 'ऑफ' स्थिति में होता है तो इसके टर्मिनलों के मध्य वायु अंतराल रहता है।

🎯 Exam Tip: असत्य कथन का चुनाव करते समय, प्रत्येक विकल्प को विद्युत परिपथ के मूल सिद्धांतों से मिलाकर देखें ताकि सही उत्तर चुन सकें।

 

Question 3. चित्र 3.17 में यदि एक लैंप का तंतु विखंडित हो जाए तो क्या दूसरा लैंप दीप्तिमान होगा? अपने उत्तर उत्तर का औचित्य बताइए।
Answer: नहीं, यदि चित्र 3.17 में दर्शाए गए दोनों लैंप श्रेणीक्रम (सीरीज़ सर्किट) में जुड़े हैं और एक लैंप का तंतु टूट जाता है (यानी परिपथ खुला हो जाता है), तो पूरा परिपथ अधूरा हो जाएगा। इस कारण, दूसरा लैंप भी जलना बंद हो जाएगा। श्रेणीक्रम परिपथ में, विद्युत धारा के प्रवाह के लिए एक ही रास्ता होता है; यदि वह रास्ता कहीं से भी टूट जाता है, तो पूरे परिपथ में धारा रुक जाती है। यदि ये दोनों लैंप समानांतर क्रम (पैरेलल सर्किट) में जुड़े होते और एक का तंतु टूटता, तब भी दूसरे लैंप में धारा प्रवाहित हो सकती थी और वह जलता रहता, क्योंकि समानांतर क्रम में धारा के लिए कई रास्ते होते हैं।
In simple words: यदि दो लैंप श्रेणीक्रम में जुड़े हों और एक लैंप का तार टूट जाए, तो बिजली का रास्ता टूट जाएगा और दूसरा लैंप भी नहीं जलेगा।

🎯 Exam Tip: श्रेणीक्रम और समानांतर क्रम परिपथों के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें; यह कुंजी है कि कैसे एक घटक की विफलता दूसरों को प्रभावित करती है।

 

Question 6. चित्र 3.18 में-
(i) यदि S2, 'ऑन' स्थिति में और S₁, 'ऑफ' स्थिति में हो तो कौन-कौन से लैंप दीप्त होंगे?
(ii) यदि S2, 'ऑफ' स्थिति में और S₁, 'ऑन' स्थिति में हो तो कौन-कौन से लैंप दीप्त होंगे?
(iii) यदि S1, एवं S2, दोनों 'ऑन' स्थिति में हो तो कौन-कौन से लैंप दीप्त होंगे?
(iv) यदि S1, एवं S2, दोनों 'ऑफ' स्थिति में हो तो कौन-कौन से लैंप दीप्त होंगे?
Answer:
(i) यदि S2 'ऑन' और S1 'ऑफ' हो, तो कोई भी लैंप नहीं जलेगा।
(ii) यदि S2 'ऑफ' और S1 'ऑन' हो, तो कोई भी लैंप नहीं जलेगा।
(iii) यदि S1 और S2 दोनों 'ऑन' हों, तो दोनों लैंप (L1 और L2) जलेंगे।
(iv) यदि S1 और S2 दोनों 'ऑफ' हों, तो कोई भी लैंप नहीं जलेगा।
स्विच एक बिजली के रास्ते में दरवाजे की तरह काम करते हैं; जब तक दोनों स्विच बंद नहीं होंगे, बिजली दोनों लैंप तक नहीं पहुँच पाएगी।
In simple words: लैंप तभी जलेंगे जब S1 और S2 दोनों स्विच चालू (ऑन) हों। बाकी सभी स्थितियों में लैंप नहीं जलेंगे।

🎯 Exam Tip: परिपथ आरेख को ध्यान से देखें और प्रत्येक स्विच की स्थिति का विश्लेषण करें कि वह बिजली के प्रवाह को कैसे प्रभावित करता है।

 

Question 7. एक विद्यार्थी ने चित्र 3.19 में दर्शाए अनुसार विद्युत परिपथ संयोजित किया। परिपथ को बंद करने के बाद भी लैंप दीप्तिमान नहीं हुआ। इसके क्या संभावित कारण हो सकते हैं? इस दोषपूर्ण प्रचालन के लिए अधिक-से-अधिक कारणों की सूची बनाइए। लैंप के दीप्तिमान न होने के कारण का पता लगाने के लिए आप क्या करेंगे?
Answer: यदि परिपथ बंद करने पर भी लैंप नहीं जलता, तो इसके कई संभावित कारण हो सकते हैं। एक विद्युत परिपथ को काम करने के लिए एक पूरा रास्ता चाहिए।
संभावित कारण:
(क) बैटरी या सेल पूरी तरह डिस्चार्ज हो सकती है या खराब हो सकती है।
(ख) लैंप का तंतु टूटा हो सकता है (लैंप फ्यूज हो गया हो)।
(ग) स्विच ठीक से काम नहीं कर रहा हो, या जुड़ा हुआ न हो।
(घ) कनेक्शन में कोई ढीलापन या टूटा हुआ जोड़ हो सकता है।
(ङ) तारों के सिरों से विद्युतरोधी आवरण नहीं हटाया गया हो।
(च) तार बीच में से टूटा हुआ हो सकता है।

समस्या खोजने की विधि:
इन कारणों का पता लगाने के लिए, हम एक-एक करके परिपथ के सभी घटकों (जैसे सेल, स्विच, तार और लैंप) को बदल कर देख सकते हैं।
हम एक वैकल्पिक सेल या लैंप लगाकर जांच कर सकते हैं।
कनेक्शनों या तारों की निरंतरता की जांच के लिए एक बिजली परीक्षक (टेस्टर) का उपयोग कर सकते हैं।
स्विच को चालू और बंद करके जांचें कि क्या वह सही तरीके से संपर्क बना रहा है।
In simple words: बल्ब न जलने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे बैटरी खाली होना, बल्ब फ्यूज होना, या तार टूटे होना। इसे जानने के लिए, हमें एक-एक करके परिपथ की हर चीज़ की जाँच करनी होगी।

🎯 Exam Tip: जब कोई परिपथ काम न करे, तो हमेशा सरल से जटिल की ओर जाँच करें — पहले सबसे स्पष्ट समस्याओं की जाँच करें।

 

Question 8. चित्र 3.20 में दर्शाई गई किस व्यवस्था में स्विच 'ऑन' करने पर भी बल्ब दीप्तिमान नहीं होगा?
Answer: चित्र (ग) में स्विच 'ऑन' करने पर भी बल्ब दीप्तिमान नहीं होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस व्यवस्था में बैटरी उल्टी दिशा में जुड़ी है (जिसे रिवर्स बायस कहते हैं)। विद्युत धारा को प्रवाहित होने के लिए एक सही दिशा की आवश्यकता होती है, जो बैटरी के धनात्मक (+) टर्मिनल से ऋणात्मक (-) टर्मिनल की ओर हो। यदि बैटरी गलत तरीके से जुड़ी हो, तो परिपथ में धारा का प्रवाह नहीं हो पाता और बल्ब नहीं जलता।
In simple words: चित्र (ग) में बल्ब नहीं जलेगा क्योंकि बैटरी उल्टी जुड़ी हुई है, जिससे बिजली सही दिशा में नहीं बह पा रही है।

🎯 Exam Tip: बैटरी के धनात्मक और ऋणात्मक टर्मिनलों की सही पहचान और उनके कनेक्शन की दिशा बल्ब जलाने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. यदि किसी बैटरी पर '+' एवं '-' चिह्न पढ़े नहीं जा रहे हैं तो इस बैटरी के टर्मिनलों को पहचानने की कोई एक विधि सुझाइए।
Answer: यदि किसी बैटरी पर '+' और '-' चिह्न दिखाई नहीं दे रहे हैं, तो उसके टर्मिनलों को पहचानने का एक आसान तरीका है। बैटरी के ऊपरी सिरे पर जो छोटा धातु का कैप या टोपी वाला सिरा होता है, वह हमेशा धनात्मक ध्रुव (+) होता है। इसके विपरीत, बैटरी का निचला सपाट धातु वाला भाग ऋणात्मक ध्रुव (-) होता है। यह मानक पहचान लगभग सभी सामान्य बेलनाकार बैटरियों पर लागू होती है। बैटरी के सही सिरे जानना बहुत ज़रूरी है ताकि उसे किसी भी उपकरण में ठीक से लगाया जा सके।
In simple words: बैटरी का ऊपर उठा हुआ छोटा सिरा धनात्मक (+) होता है, और नीचे का सपाट सिरा ऋणात्मक (-) होता है।

🎯 Exam Tip: हमेशा बैटरी के भौतिक स्वरूप (कैप और सपाट तल) से ध्रुवीयता की पुष्टि करें, खासकर जब चिह्न अस्पष्ट हों।

 

Question 10. आपको छः सेल दिए गए हैं जिन पर क, ख, ग, घ, ङ और च अंकित हैं। इनमें से कुछ कार्य कर रहे हैं और कुछ कार्य नहीं कर रहे हैं। एक क्रियाकलाप सुझाइए जिससे आप यह पहचान सकें कि कौन-कौन से सेल कार्य कर रहे हैं।
(i) आपको जो वस्तुएँ चाहिए उनकी एक सूची बनाइए।
(ii) वह कार्यविधि लिखिए जिसका अनुसरण आप करेंगे।
(iii) चरण (i) में सूचीबद्ध वस्तुओं का उपयोग करके पहचानिए कि कौन-कौन से सेल काम कर रहे हैं?
Answer: हमें यह पता लगाने के लिए एक सरल गतिविधि कर सकते हैं कि कौन से सेल काम कर रहे हैं और कौन से नहीं। यह परीक्षण करके हम जान सकते हैं कि किस सेल में बिजली है।
(i) आवश्यक वस्तुएँ:
एक छोटा बल्ब (लैंप)
तार के दो टुकड़े
बल्ब धारक (यदि उपलब्ध हो)
एक टेस्टिंग बोर्ड (या कोई सतह जिस पर कनेक्शन बना सकें)

(ii) कार्यविधि:
तार के दोनों सिरों को प्रत्येक सेल के दोनों टर्मिनलों (धनात्मक और ऋणात्मक) से जोड़ें।
इसके बाद, बल्ब के सिरों को उन तारों से जोड़ें।
जिन-जिन सेल पर बल्ब जलता है, वे सेल काम कर रहे हैं। जहाँ बल्ब नहीं जलता, वे सेल खराब हैं।

(iii) पहचान:
हर सेल को एक-एक करके इस परीक्षण में लगाकर जाँच लें। जो सेल सफलतापूर्वक बल्ब को जला पाते हैं, वही कार्यशील सेल होंगे।
In simple words: एक बल्ब और तार लेकर हर सेल पर बारी-बारी से बल्ब जलाकर देखें। जिस सेल से बल्ब जलेगा, वह सही काम कर रहा है।

🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करें कि बल्ब और तारों के कनेक्शन मजबूत हों ताकि गलत परिणामों से बचा जा सके।

 

Class 7 Science Chapter 3 Question Answer in Hindi (Intext)

 

Question 1. स्विच की एक स्थिति (ऑन स्थिति) में टॉर्च का लैंप दीप्तिमान क्यों हो जाता है?
Answer: जब स्विच को 'ऑन' स्थिति में रखा जाता है, तो विद्युत परिपथ पूरा हो जाता है। इससे बैटरी से विद्युत धारा प्रवाहित होने लगती है और लैंप में मौजूद तंतु (फिलामेंट) तक पहुँचती है। जैसे ही धारा तंतु से गुजरती है, वह गर्म हो जाता है और प्रकाश उत्सर्जित करके दीप्तिमान (चमकने) लगता है। यह गर्मी के कारण प्रकाश पैदा होने का एक उदाहरण है।
In simple words: स्विच ऑन होने पर बिजली का रास्ता पूरा हो जाता है, जिससे बल्ब का तार गरम होकर चमकने लगता है।

🎯 Exam Tip: स्विच के कार्य और तंतु के गर्म होकर प्रकाश उत्सर्जित करने की प्रक्रिया को याद रखें।

 

Question 2. टॉर्च में हम सामान्यतः एक से अधिक सेलों का उपयोग करते हैं। क्या वे इसमें किसी विशेष क्रम में लगे होते हैं?
Answer: हाँ, टॉर्च में सामान्यतः एक से अधिक सेलों का उपयोग किया जाता है, और वे एक विशिष्ट क्रम में लगे होते हैं। इस क्रम में, एक सेल का धनात्मक सिरा (+) अगले सेल के ऋणात्मक सिरा (-) से जुड़ा होता है। इस तरह के कनेक्शन को श्रेणीक्रम (सीरीज़ कनेक्शन) कहते हैं, जिससे सभी सेलों का वोल्टेज जुड़ जाता है और टॉर्च को अधिक शक्ति मिलती है।
In simple words: हाँ, टॉर्च में सेल एक खास क्रम में जुड़े होते हैं: एक का प्लस (+) दूसरे के माइनस (-) से जुड़ता है।

🎯 Exam Tip: सेलों को सही क्रम में जोड़ना महत्वपूर्ण है; गलत क्रम से उपकरण काम नहीं करेगा।

 

Question 4. क्या हम परिपथ को अपेक्षाकृत अधिक सरल ढंग से निरूपित कर सकते हैं?
Answer: हाँ, विद्युत परिपथ को प्रतीकों द्वारा अपेक्षाकृत अधिक सरल ढंग से निरूपित किया जा सकता है। इन प्रतीकों का उपयोग करके, हम वास्तविक घटकों को बनाने के बजाय उन्हें सरल चित्रों के रूप में दिखाते हैं। उदाहरण के लिए, एक विद्युत सेल के प्रतीक में एक लंबा रेखाखंड धनात्मक टर्मिनल को दर्शाता है और एक छोटा रेखाखंड ऋणात्मक टर्मिनल को दर्शाता है। ये प्रतीक एक तरह की सांकेतिक भाषा होते हैं, जिसे इंजीनियर और इलेक्ट्रीशियन दुनिया भर में समझते हैं।
In simple words: हाँ, बिजली के परिपथ को आसान चित्रों (प्रतीकों) से दिखा सकते हैं। जैसे, बैटरी के लिए एक खास निशान होता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न विद्युत घटकों के मानक प्रतीकों को याद रखना महत्वपूर्ण है; यह परिपथ आरेख को समझने और बनाने में मदद करता है।

 

Question 5. विद्युत परिपथ बनाने में हमने धातु के संयोजी तारों का ही उपयोग क्यों किया? क्या हम संयोजी तारों के लिए कुछ अन्य पदार्थों का उपयोग भी कर सकते हैं?
Answer: विद्युत परिपथ बनाने में हम धातु के संयोजी तारों का उपयोग इसलिए करते हैं क्योंकि धातुएँ विद्युत की अच्छी चालक या सुचालक होती हैं। जिन पदार्थों में से विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित हो सकती है, उन्हें विद्युत के चालक या सुचालक कहते हैं। इसके विपरीत, जिन पदार्थों में से विद्युत धारा प्रवाहित नहीं हो सकती, उन्हें विद्युतरोधी या विद्युत के कुचालक कहते हैं। हम संयोजक तारों के लिए प्लास्टिक, रबर या चीनी मिट्टी जैसे अन्य पदार्थों का उपयोग नहीं कर सकते, क्योंकि वे विद्युत के कुचालक हैं। धातुओं का यह गुण बिजली को परिपथ के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक कुशलता से पहुंचाने में मदद करता है।
In simple words: हम धातु के तार इसलिए इस्तेमाल करते हैं क्योंकि उनमें से बिजली आसानी से गुजरती है। प्लास्टिक या रबड़ जैसे कुचालक पदार्थों का उपयोग नहीं कर सकते क्योंकि उनमें से बिजली नहीं गुजरती।

🎯 Exam Tip: चालकों और कुचालकों के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें और याद रखें कि बिजली के प्रवाह के लिए चालक आवश्यक हैं।

 

Question 6. विद्युत तारों पर प्लास्टिक अथवा रबर का ही आवरण क्यों चढ़ाया जाता है?
Answer: विद्युत तारों पर प्लास्टिक अथवा रबर का आवरण इसलिए चढ़ाया जाता है क्योंकि प्लास्टिक और रबर विद्युत के कुचालक होते हैं। इसका मतलब है कि उनमें से विद्युत धारा प्रवाहित नहीं हो सकती। यह आवरण हमें विद्युत-आघात (बिजली के झटके) से बचाता है और तारों को आपस में छूने से होने वाले शॉर्ट सर्किट को भी रोकता है। यह सुरक्षात्मक आवरण बिजली के सुरक्षित उपयोग के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
In simple words: तारों पर प्लास्टिक या रबड़ की परत इसलिए चढ़ाई जाती है क्योंकि ये बिजली को बाहर नहीं जाने देते और हमें बिजली के झटके से बचाते हैं।

🎯 Exam Tip: कुचालक आवरण का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा प्रदान करना और विद्युत रिसाव को रोकना है।

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