RBSE Solutions Class 7 Science Chapter 17 कचरा प्रबन्धन

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Detailed Chapter 17 कचरा प्रबन्धन RBSE Solutions for Class 7 Science

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Class 7 Science Chapter 17 कचरा प्रबन्धन RBSE Solutions PDF

सही विकल्प का चयन कीजिए

 

Question 1. निम्नलिखित में से किसके नष्ट होने की अवधि अधिक है?
(अ) केले का छिलका
(ब) लकड़ी का टुकड़ा
(स) प्लास्टिक की थैली
(द) अखबार की थैली (कागज की थैली)
Answer: (स) प्लास्टिक की थैली
In simple words: प्लास्टिक को प्रकृति में नष्ट होने में बहुत लंबा समय लगता है, जो इसे अन्य चीजों से ज्यादा टिकाऊ बनाता है। प्लास्टिक की थैलियाँ पर्यावरण में लंबे समय तक बनी रहती हैं।

🎯 Exam Tip: अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों (जैसे प्लास्टिक) के उदाहरणों को याद रखें, क्योंकि वे पर्यावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं।

 

Question 2. अपशिष्ट को खुले में फेंक देने से होता है
(अ) मृदा प्रदूषण
(ब) जल प्रदूषण
(स) वायु प्रदूषण
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: जब हम कचरा खुले में फेंकते हैं, तो वह मिट्टी, पानी और हवा, तीनों को गंदा करता है। यह हमारे आसपास की जगह को खराब करता है और बीमारियाँ फैला सकता है।

🎯 Exam Tip: खुले में कचरा फेंकने से होने वाले विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों को हमेशा याद रखें (मिट्टी, जल, वायु)।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

 

Question. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
1. जैविक अपशिष्ट जीवाणु की सहायता से कम समय में .......... हो जाते हैं।
2. हम दैनिक कार्यों के दौरान जो अनावश्यक वस्तुएँ फेंक देते हैं वे .......... हैं।
3. अपशिष्ट पदार्थों को ठोस, व .......... के रूप में विभाजित किया जा सकता है।
4. प्लास्टिक से बनी अनावश्यक वस्तुओं का लम्बे समय तक .......... नहीं होती है।
Answer:
1. अपघटित
2. कचरा
3. द्रव, गैस
4. विघटन
In simple words: जैविक कचरा बैक्टीरिया से जल्दी टूट जाता है। जो चीजें हम फेंकते हैं, वे कचरा कहलाती हैं। कचरे को तीन रूपों - ठोस, तरल और गैस में बांटा जा सकता है। प्लास्टिक की चीजें आसानी से नहीं टूटतीं।

🎯 Exam Tip: जैविक और अजैविक कचरे के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें और प्रत्येक प्रकार के उदाहरण याद रखें।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 2. पॉलीथीन या प्लास्टिक के कारण पर्यावरण को होने वाली हानियाँ बताइए।
Answer: पॉलीथीन और प्लास्टिक ऐसे पदार्थ हैं जो जल्दी नहीं टूटते, इसलिए ये कई सालों तक पर्यावरण में रहते हैं। ये पर्यावरण की सुंदरता को खराब करते हैं और प्रदूषण फैलाते हैं। कभी-कभी जानवर कचरे के साथ प्लास्टिक की थैलियाँ खा लेते हैं, जिससे उनकी मौत हो जाती है। पॉलीथीन की थैलियाँ नालियों में फंसकर उन्हें बंद कर देती हैं, जिससे शहरों में पानी भर जाता है। इस रुके हुए पानी में मच्छर और कई छोटे हानिकारक जीव पनपते हैं, जो इंसानों को बीमार करते हैं। प्लास्टिक का सही निपटान बहुत ज़रूरी है।
In simple words: प्लास्टिक और पॉलीथीन जल्दी नहीं टूटते। वे पर्यावरण को गंदा करते हैं, जानवरों के लिए खतरनाक होते हैं और नालियों को बंद करके पानी जमा करते हैं।

🎯 Exam Tip: पॉलीथीन के कारण होने वाले मुख्य नुकसानों को बिंदुओं में लिखें, जैसे पर्यावरण प्रदूषण, पशुओं को नुकसान और जल निकासी अवरुद्ध होना।

 

Question 3. अपशिष्ट पदार्थ हमारे स्वास्थ्य को किस प्रकार प्रभावित करते हैं ?
Answer: अपशिष्ट पदार्थों के कारण हमें कई बीमारियाँ हो सकती हैं, जैसे दमा, डेंगू, वायरल बुखार, दस्त, मलेरिया और हैजा। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन कचरे में रोग फैलाने वाले कीटाणु पनपते हैं। इसलिए हमें हमेशा कचरे का सही तरीके से निपटान करना चाहिए ताकि ये बीमारियाँ न फैलें। उचित अपशिष्ट प्रबंधन से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम होते हैं।
In simple words: कचरे में बीमारियाँ फैलाने वाले कीटाणु होते हैं, जिससे हमें दमा, डेंगू, मलेरिया जैसी कई बीमारियाँ हो सकती हैं।

🎯 Exam Tip: अपशिष्ट पदार्थों से फैलने वाली बीमारियों के कुछ मुख्य उदाहरणों को याद रखें और समझाएँ कि रोगवाहक कैसे पनपते हैं।

 

Question 4. घरेलू कचरे को अलग-अलग डिब्बों में एकत्रित करने से क्या लाभ है ?
Answer: घरेलू कचरे को जैविक और अजैविक कचरे के रूप में अलग-अलग डिब्बों में इकट्ठा करने से कई फायदे होते हैं। इससे हम कचरे का सही तरीके से निपटान कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, फल-सब्जियों के छिलके, गोबर, पेड़-पौधों की पत्तियाँ और खराब चीजें खाद बनाने के काम आती हैं, जिसे खेतों में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरह, घरेलू कचरे का निपटान भी हो जाता है और हमें उपयोगी चीजें भी मिल जाती हैं। यह प्रक्रिया संसाधनों को बचाने में मदद करती है।
In simple words: घरेलू कचरे को अलग-अलग डिब्बों में इकट्ठा करने से हम उसे सही तरीके से फेंक सकते हैं और कुछ कचरे से खाद जैसी उपयोगी चीजें भी बना सकते हैं।

🎯 Exam Tip: कचरे को अलग करने के मुख्य लाभों पर ध्यान दें, जैसे उचित निपटान और उपयोगी उत्पादों को पुनः प्राप्त करना।

 

Question 5. पुनः चक्रण विधि द्वारा किन-किन अपशिष्ट पदार्थों का निपटान किया जाता है ?
Answer: पुनः चक्रण विधि से प्लास्टिक और कांच जैसी अपशिष्ट सामग्रियों का निपटान किया जाता है। इन सामग्रियों को फैक्ट्रियों में दोबारा इस्तेमाल करके नई उपयोगी चीजें बनाई जाती हैं। पुनः चक्रण के दौरान इनमें कुछ रंग मिलाने वाले रसायन मिलाए जाते हैं। विशेष रूप से, ऐसी सामग्री का उपयोग खाद्य सामग्री को रखने वाले बैग, बोरियाँ और डिब्बे बनाने में किया जाता है। यह पर्यावरण के लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि इससे कचरा कम होता है।
In simple words: प्लास्टिक और कांच के कचरे को पुनः चक्रण विधि से निपटाया जाता है, जिससे उन्हें नई चीजें बनाने के लिए दोबारा इस्तेमाल किया जा सके।

🎯 Exam Tip: पुनः चक्रण के लिए उपयुक्त पदार्थों (प्लास्टिक, कांच) और उनके उपयोग को याद रखें।

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 2. जैविक अपशिष्ट पदार्थ व अजैविक अपशिष्ट पदार्थ में क्या अन्तर है ? उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।
Answer:
(i) जैविक अपशिष्ट पदार्थ: ये वे कचरे होते हैं जो जीवों से मिलते हैं और जीवाणुओं द्वारा टूटकर खाद बन जाते हैं। ये मिट्टी में जल्दी टूटकर मिल जाते हैं। उदाहरण के लिए, पेड़-पौधों की पत्तियाँ, फल-सब्जियों के छिलके, माँस, पुराने कागज, कपड़े, मल और गोबर जैसे पदार्थ जैविक अपशिष्ट पदार्थ कहलाते हैं। ये प्राकृतिक रूप से विघटित हो जाते हैं।
(ii) अजैविक अपशिष्ट पदार्थ: ये ऐसे कचरे होते हैं जिन्हें इंसान फैक्ट्रियों में बनाते हैं और जो जीवाणुओं द्वारा मिट्टी में टूटते नहीं हैं। ये पर्यावरण में प्रदूषण फैलाते हैं। उदाहरण के लिए, पेंट, कांच, धातु के टुकड़े और प्लास्टिक की वस्तुएँ अजैविक अपशिष्ट पदार्थ कहलाती हैं। इन पदार्थों का निपटान कठिन होता है।
In simple words: जैविक कचरा जीवों से आता है और बैक्टीरिया से टूट जाता है (जैसे फल-सब्जी के छिलके)। अजैविक कचरा इंसानों द्वारा बनाया जाता है और बैक्टीरिया से नहीं टूटता (जैसे प्लास्टिक)।

🎯 Exam Tip: जैविक और अजैविक अपशिष्ट पदार्थों की परिभाषाओं, उनके प्राकृतिक विघटन की क्षमता और प्रत्येक के कम से कम तीन उदाहरणों को स्पष्ट रूप से याद करें।

 

Question 3. अजैविक पदार्थों के निपटान की कौन-कौन सी विधियाँ हैं ? समझाइए।
Answer: अजैविक पदार्थों के निपटान की मुख्य विधियाँ इस प्रकार हैं:
(1) उपयोग की मात्रा कम करना (Reduce): इसका मतलब है अनुपयोगी चीजों की मात्रा को कम करना। जैसे, टूटे हुए टिन के डिब्बे, प्लास्टिक की बोतलें, डिब्बे और टूटी हुई मटकी जैसी अनुपयोगी चीजों का उपयोग छोटे-छोटे गमले या पौधे लगाने में किया जा सकता है। इस तरीके से कचरा कम होता है।
(2) पुनः उपयोग में लेना (Reuse): घरेलू अनुपयोगी चीजों में से उन चीजों को अलग करना जिन्हें दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। जैसे, पुरानी बैटरी, धातु के बर्तन, लोहे की छड़ें, टूटे हुए डिब्बे, कांच की बोतलें और जूट के सामान को दूसरे घरेलू कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे नई चीजों की ज़रूरत कम होती है।
(3) पुनः चक्रण (Recycle): प्लास्टिक और कांच जैसी अपशिष्ट सामग्री को फैक्ट्रियों में भेजकर दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाया जाता है। पुनः चक्रण के समय इनमें कुछ रंग भी मिलाए जाते हैं। विशेष रूप से, ऐसी सामग्री का उपयोग खाद्य सामग्री के लिए बैग, पैकिंग बोरियाँ और डिब्बे बनाने में किया जाता है। पुनः चक्रण से प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है।
In simple words: अजैविक कचरे को निपटाने के लिए हम 3R तरीकों का इस्तेमाल करते हैं: कम उपयोग करें (Reduce), दोबारा इस्तेमाल करें (Reuse), और पुनः चक्रण करें (Recycle)।

🎯 Exam Tip: अजैविक कचरे के निपटान के लिए 3R (Reduce, Reuse, Recycle) विधियों को उनके अर्थ और प्रत्येक के उदाहरणों के साथ अच्छी तरह समझें।

पाठगत प्रश्नोत्तर

 

Question 1. पौधे सूख जाते हैं तो उनका क्या होता है ? (पृष्ठ 176)
Answer: जब पौधे सूख जाते हैं, तो उनके कुछ भाग जमीन पर गिर जाते हैं। वहाँ जीवाणु उन्हें तोड़कर ह्यूमस में बदल देते हैं। ह्यूमस मिट्टी को उपजाऊ बनाता है, जो पौधों के विकास के लिए अच्छा होता है। पौधों के कुछ सूखे भागों को घरेलू ईंधन के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह प्राकृतिक चक्र का हिस्सा है।
In simple words: सूखे हुए पौधों के भाग जमीन पर गिरकर जीवाणुओं द्वारा खाद बन जाते हैं, जो मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं। कभी-कभी इन्हें जलाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि ह्यूमस मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाता है, जो कृषि के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. आपके घरों का गन्दा पानी कहाँ जाता है ?
Answer: हमारे घरों का गंदा पानी नालियों से होकर तालाबों, झीलों और नदियों जैसे जलाशयों या गंदे नालों में जाता है। यदि इस पानी को साफ न किया जाए, तो यह जल प्रदूषण का कारण बनता है। यह पर्यावरण और जलीय जीवन के लिए हानिकारक हो सकता है।
In simple words: हमारे घरों का गंदा पानी नालियों से बहकर तालाबों, झीलों और नदियों में जाता है।

🎯 Exam Tip: गंदे पानी के निपटान के माध्यमों को याद रखें और जल प्रदूषण के खतरों को समझें।

 

Question 3. प्लास्टिक की सामग्री जिसे हम फेंक देते हैं उसका क्या होता है ?
Answer: प्लास्टिक की सामग्री अजैविक अपशिष्ट है, जिसका मतलब है कि यह जीवाणुओं की क्रिया से टूटती नहीं है। जब हम इसे फेंक देते हैं, तो यह लंबे समय तक पर्यावरण में बनी रहती है और गंभीर प्रदूषण फैलाती है। यह मिट्टी और जल निकायों को दूषित करती है। प्लास्टिक को पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से नष्ट होने में सैकड़ों साल लग जाते हैं।
In simple words: प्लास्टिक का कचरा टूटता नहीं है और पर्यावरण में बहुत लंबे समय तक रहकर प्रदूषण फैलाता है।

🎯 Exam Tip: प्लास्टिक के अजैविक निम्नीकरणीय गुण और इससे होने वाले पर्यावरणीय प्रदूषण पर ध्यान दें।

 

Question 4. पंचायत, नगर निगम, जिला परिषद आदि द्वारा जगह-जगह कचरा पात्र रखे जाते हैं। उस संग्रहित कचरे को कहाँ ले जाया जाता है ?
Answer: पंचायत, नगर निगम और जिला परिषद द्वारा जगह-जगह रखे गए कचरा पात्रों से इकट्ठा किए गए कचरे को कचरा निस्तारण स्थलों पर ले जाया जाता है। इन स्थलों को लैंडफिल साइट्स या अपशिष्ट उपचार संयंत्र कहते हैं। यहाँ कचरे को वैज्ञानिक तरीकों से अलग किया जाता है, पुनः चक्रण किया जाता है, खाद बनाई जाती है या सुरक्षित रूप से दबाया जाता है।
In simple words: इकट्ठा किए गए कचरे को कचरा निस्तारण स्थलों या अपशिष्ट उपचार संयंत्रों में ले जाया जाता है जहाँ उसे सही तरीके से निपटाया जाता है।

🎯 Exam Tip: कचरा एकत्रण के बाद के चरणों और विभिन्न अपशिष्ट निपटान विधियों को याद रखें।

 

Question. विद्यालय, गाँवों में घर-घर, बाजार एवं सड़कों के किनारे सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छ एवं सुरक्षित शौचालय बनाए जाते हैं ? इनकी आवश्यकता क्यों है ? (पृष्ठ 178)
Answer: स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय इसलिए बनाए जाते हैं ताकि मानव मल-मूत्र का सही तरीके से निपटान हो सके। यदि ऐसा नहीं होता है, तो लोग खुले में शौच करते हैं। इससे गंदा पानी इधर-उधर फैल जाता है या बहता रहता है, जिससे पर्यावरण प्रदूषित होता है। इसके परिणामस्वरूप, लोगों में कई संक्रामक रोग फैल सकते हैं। सुरक्षित शौचालय स्वच्छता बनाए रखने में मदद करते हैं।
In simple words: स्वच्छ शौचालय मानव मल-मूत्र के सही निपटान के लिए ज़रूरी हैं, ताकि पर्यावरण प्रदूषण और बीमारियों को रोका जा सके।

🎯 Exam Tip: खुले में शौच से होने वाले मुख्य स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रभावों को समझाएँ, जैसे प्रदूषण और संक्रामक रोग।

 

Question 2. खुले में शौच करने से क्या हानि है ?
Answer: खुले में शौच करने से पर्यावरण प्रदूषित होता है और लोगों में कई संक्रामक रोग फैलते हैं। यह मिट्टी और पानी को दूषित करता है, जिससे कई तरह की बीमारियाँ जैसे दस्त और हैजा फैल सकती हैं। इसके अलावा, यह बदबू और गंदगी फैलाता है।
In simple words: खुले में शौच करने से पर्यावरण गंदा होता है और लोगों को बीमारियाँ हो सकती हैं।

🎯 Exam Tip: खुले में शौच के हानिकारक प्रभावों को स्पष्ट करें, खासकर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से।

 

Question 3. खुले में शौच वाले स्थलों पर रहने वाले प्राणियों के स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
Answer: खुले में शौच वाले स्थानों पर बहुत गंदगी और बदबू का माहौल होता है। ऐसे स्थानों पर मक्खियाँ और मच्छर बहुत अधिक संख्या में पनपते हैं। ये मक्खियाँ और मच्छर कई बीमारियाँ फैलाते हैं, जिससे वहाँ रहने वाले प्राणियों के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है। इससे वे बीमार पड़ जाते हैं और उनकी जीवन प्रत्याशा कम हो सकती है।
In simple words: खुले में शौच वाली जगहों पर गंदगी और बदबू के कारण मक्खी-मच्छर बहुत ज्यादा होते हैं, जिससे वहाँ रहने वाले जानवरों को कई बीमारियाँ हो जाती हैं।

🎯 Exam Tip: खुले में शौच से प्राणियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को बीमारियों और कीटाणुओं के पनपने से जोड़कर समझाएँ।

क्रियाकलाप

गतिविधि-1: (पृष्ठ 172)

 

Question 1. कचरा किसे कहते हैं ?
Answer: हम अपने रोज़मर्रा के कामों के दौरान जो चीजें अनावश्यक और अनुपयोगी होती हैं, उन्हें फेंक देते हैं। ये अनावश्यक और अनुपयोगी पदार्थ ही कचरा कहलाते हैं। कचरा कई प्रकार का हो सकता है, जैसे जैविक और अजैविक।
In simple words: जो चीजें हमारे काम की नहीं होतीं और जिन्हें हम फेंक देते हैं, उन्हें कचरा कहते हैं।

🎯 Exam Tip: कचरे की परिभाषा को उसके 'अनावश्यक' और 'अनुपयोगी' होने के गुणों के साथ याद रखें।

गतिविधि-2: (पृष्ठ 173)

 

Question 1. सार्वजनिक स्थान के कचरे का प्रमुख घटक क्या है?
Answer: सार्वजनिक स्थानों पर कचरे का प्रमुख घटक प्लास्टिक और पॉलीथीन है। ये पदार्थ अजैविक होते हैं और पर्यावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं, जिससे प्रदूषण होता है। कूड़ेदान के बिना, ये अक्सर सड़कों और खुले स्थानों पर जमा हो जाते हैं।
In simple words: सार्वजनिक जगहों पर कचरे में सबसे ज्यादा प्लास्टिक और पॉलीथीन होते हैं।

🎯 Exam Tip: सार्वजनिक कचरे में प्लास्टिक और पॉलीथीन के प्रभुत्व पर ध्यान दें, और इसके पर्यावरणीय प्रभावों को समझें।

गतिविधि-3: (पृष्ठ 177)

 

Question 1. आप कबाड़ी की दुकान पर जाकर उनका अवलोकन कीजिए कि कबाड़ी उन अनुपयोगी सामग्री का क्या करते हैं?
Answer: कबाड़ी की दुकान पर अनुपयोगी सामग्री को विभिन्न प्रकारों में अलग-अलग किया जाता है। उदाहरण के लिए, लोहा, ताँबा, एल्युमीनियम, अखबार, गत्ता, नोटबुक, किताबें, इलेक्ट्रॉनिक तार और प्लास्टिक की सामग्री को अलग-अलग करके रखा जाता है। यह प्रक्रिया पुनः चक्रण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
In simple words: कबाड़ी अनुपयोगी चीजों को अलग-अलग छाँटते हैं, जैसे लोहा, प्लास्टिक, कागज आदि को अलग रखते हैं।

🎯 Exam Tip: कबाड़ी की भूमिका को कचरा प्रबंधन और पुनः चक्रण प्रक्रिया के शुरुआती चरण के रूप में समझें।

 

Question 2. कबाड़ी इस सामग्री को कहाँ पहुँचाता है या किसको बेचता है ?
Answer: कबाड़ी अनुपयोगी सामग्री को अलग-अलग करने के बाद उसे पुनः चक्रण के लिए संबंधित फैक्ट्रियों को भेज देता है। वहाँ यह अनुपयोगी सामग्री फिर से चक्रित होकर विभिन्न नए उत्पादों के रूप में बदल जाती है। यह प्रक्रिया संसाधनों को बचाने और कचरा कम करने में मदद करती है।
In simple words: कबाड़ी अलग किए गए कचरे को उन फैक्ट्रियों को बेच देता है जहाँ उसे दोबारा इस्तेमाल करके नई चीजें बनाई जाती हैं।

🎯 Exam Tip: पुनः चक्रण श्रृंखला में कबाड़ी के स्थान और औद्योगिक पुनः चक्रण की प्रक्रिया को याद रखें।

 

Question 3. पुनः चक्रण क्या है ?
Answer: अनुपयोगी सामग्री को दोबारा उपयोगी सामग्री में बदलना ही पुनः चक्रण कहलाता है। इस प्रक्रिया में पुरानी और बेकार चीजों को संसाधित करके नए उत्पादों में बदला जाता है। इससे प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है और कचरे की मात्रा कम होती है।
In simple words: पुनः चक्रण का मतलब है पुरानी और बेकार चीजों को फिर से इस्तेमाल लायक बनाना।

🎯 Exam Tip: पुनः चक्रण की परिभाषा और उसके पर्यावरणीय लाभों को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 4. पुनः चक्रण किन अपशिष्टों के निस्तारण के लिए उपयोगी विधि है ?
Answer: पुनः चक्रण ठोस अपशिष्टों के निस्तारण के लिए एक उपयोगी विधि है। विशेष रूप से, प्लास्टिक, धातु, कांच और कागज जैसे अजैविक ठोस कचरे का पुनः चक्रण सफलतापूर्वक किया जा सकता है। यह विधि ऐसे कचरे को कम करने में मदद करती है जो अन्यथा पर्यावरण में बहुत लंबे समय तक पड़ा रहता।
In simple words: पुनः चक्रण ठोस कचरे, खासकर प्लास्टिक, धातु और कांच जैसी चीजों को निपटाने का एक अच्छा तरीका है।

🎯 Exam Tip: पुनः चक्रण के लिए सबसे उपयुक्त ठोस अपशिष्टों के प्रकारों को याद रखें।

क्रियात्मक कार्य

 

Question 1. पॉलीथीन की थैलियों को पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रभाव पर शोध प्रायोजना कीजिए।
संकेत-
वर्तमान युग में पॉलीथीन की थैलियाँ अत्यधिक प्रचलन में है तथा हमारे पर्यावरण एवं जीव-जन्तुओं को खतरनाक स्थिति तक नुकसान पहुँचा रही हैं। पॉलीथीन अजैव निम्नीकरणीय होती हैं अर्थात् लम्बे समयान्तराल में भी जीवाणुओं की क्रिया से भी ये अपघटित नहीं होती हैं। पशु कचरे के साथ-साथ कभी-कभी पॉलीथीन की थैलियाँ खा लेते हैं

Question 2. पॉलीथीन की थैलियों का मृदा की जल अवशोषण क्षमता पर प्रभाव पर शोध प्रायोजना कीजिए।
संकेत-
पॉलीथीन की थैलियाँ मृदा की जल अवशोषण की क्षमता घटा देती हैं जिससे पेड़-पौधों को पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध नहीं हो पाता है। इसके परिणामस्वरूप, पेड़-पौधों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अपने अध्यापक की सहायता से पॉलीथीन की थैलियों का मृदा की जल अवशोषण क्षमता पर प्रभाव पर शोध प्रायोजना कीजिए तथा सर्वेक्षण कर निष्कर्ष निष्पादित कीजिए।

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट है
(अ) पेड़-पौधों की पत्तियाँ
(ब) फल-सब्जी के छिलके
(स) मल-गोबर
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: पेड़-पौधों की पत्तियाँ, फल-सब्जी के छिलके और मल-गोबर, ये सभी प्राकृतिक रूप से टूट जाने वाले कचरे हैं।

🎯 Exam Tip: जैव निम्नीकरणीय अपशिष्टों के मुख्य उदाहरणों को याद रखें, जो प्रकृति में आसानी से विघटित हो जाते हैं।

 

Question 2. अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट है।
(अ) पेण्ट
(ब) काँच
(स) धातु के टुकड़े
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: पेंट, कांच और धातु के टुकड़े, ये सभी ऐसे कचरे हैं जो प्रकृति में आसानी से नहीं टूटते।

🎯 Exam Tip: अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्टों के प्रमुख उदाहरणों को याद रखें, जो प्रकृति में विघटित नहीं होते।

 

Question 3. उद्योगों से निकलने वाले अवशिष्ट होते हैं
(अ) ठोस अपशिष्ट
(ब) द्रव अपशिष्ट
(स) गैस अपशिष्ट

Question 3. जैव निम्नीकरणीय अपशिष्टों के निस्तारण की विधि नहीं है-
(अ) पुनः चक्रण
(ब) कम्पोस्टिंग
(स) वर्मी कम्पोस्टिंग
(द) लेंड फिलिंग
Answer: (अ) पुनः चक्रण
In simple words: पुनः चक्रण जैव निम्नीकरणीय कचरे को निपटाने का तरीका नहीं है, क्योंकि यह विधि अजैविक कचरे के लिए उपयोग की जाती है।

🎯 Exam Tip: जैव निम्नीकरणीय और अजैविक कचरे के निपटान की विभिन्न विधियों को स्पष्ट रूप से जानें, ताकि आप बता सकें कि कौन सी विधि किसके लिए उपयुक्त नहीं है।

 

Question 5. किस पदार्थ का पुनः चक्रण संभव नहीं है ?
(अ) कागज
(ब) प्लास्टिक
(स) लकड़ी
(द) धातुएँ
Answer: (स) लकड़ी
In simple words: लकड़ी का पुनः चक्रण आमतौर पर संभव नहीं होता क्योंकि इसे सीधे जलाने या खाद बनाने जैसे अन्य तरीकों से निपटाया जाता है।

🎯 Exam Tip: उन पदार्थों की पहचान करें जिनका पुनः चक्रण आसानी से नहीं होता है, जैसे लकड़ी, जिसे अक्सर जलाया जाता है या खाद बनाया जाता है।

रिक्त स्थान

 

Question. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
1. कचरा मानव की .......... एवं सामाजिक क्रियाकलापों का परिणाम है।
2. प्लास्टिक तथा पॉलीथीन .......... अपशिष्ट हैं।
3. जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थ अपघटित होकर .......... में बदलते हैं।
4. कचरा के व्यवस्थित रूप से निपटान करने की प्रक्रिया .......... कहलाती है।
Answer:
1. प्राकृतिक
2. अजैव निम्नीकरणीय
3. ह्यूमस
4. कचरा प्रबन्धन
In simple words: कचरा मानव की प्राकृतिक और सामाजिक गतिविधियों से बनता है। प्लास्टिक और पॉलीथीन अजैविक कचरे हैं। जैव निम्नीकरणीय कचरा टूटकर ह्यूमस बन जाता है। कचरा को ठीक से निपटाना कचरा प्रबंधन कहलाता है।

🎯 Exam Tip: कचरा और उसके निपटान से संबंधित महत्वपूर्ण शब्दों और प्रक्रियाओं की परिभाषाएँ याद रखें।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. वग किसे कहते हैं ?
Answer: "वग" शब्द यहाँ एक त्रुटि हो सकती है क्योंकि यह कचरा प्रबंधन से संबंधित किसी ज्ञात वैज्ञानिक या हिंदी शब्द को नहीं दर्शाता है। यदि यह 'वर्ग' है, तो यह कचरे के प्रकारों को संदर्भित करता है। कचरा प्रबंधन में कचरे को आमतौर पर जैव निम्नीकरणीय और अजैविक निम्नीकरणीय वर्ग में बांटा जाता है।
In simple words: "वग" एक गलत शब्द हो सकता है। कचरे को 'वर्गों' में बांटा जाता है, जैसे कि जो सड़ जाता है और जो नहीं सड़ता।

🎯 Exam Tip: प्रश्नों को ध्यान से पढ़ें और सुनिश्चित करें कि आप तकनीकी शब्दों को सही ढंग से समझते हैं; यदि कोई शब्द अस्पष्ट है, तो संदर्भ पर विचार करें।

 

Question. अपशिष्ट पदार्थ कितने प्रकार के होते हैं ?
Answer: अपशिष्ट पदार्थ मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
(i) जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थ
(ii) अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थ
ये वर्गीकरण इस आधार पर किए जाते हैं कि पदार्थ प्राकृतिक रूप से विघटित हो सकते हैं या नहीं।
In simple words: कचरा दो तरह का होता है: एक जो मिट्टी में मिल जाता है (जैसे फल-सब्जी के छिलके) और दूसरा जो नहीं मिलता (जैसे प्लास्टिक)।

🎯 Exam Tip: अपशिष्ट पदार्थों के दो मुख्य प्रकारों (जैव और अजैव निम्नीकरणीय) और उनकी विशेषताओं को याद रखें।

 

Question 3. किन्हीं चार जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थों के नाम लिखिए।
Answer: चार जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थ हैं:
(i) पेड़-पौधों की पत्तियाँ
(ii) फल-सब्जी के छिलके
(iii) रद्दी कागज
(iv) कपड़ा
ये सभी पदार्थ प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा विघटित हो जाते हैं।
In simple words: पेड़-पौधों की पत्तियाँ, फल-सब्जी के छिलके, पुराने कागज और कपड़े आसानी से सड़ने वाले कचरे हैं।

🎯 Exam Tip: जैव निम्नीकरणीय पदार्थों के कम से कम चार सामान्य उदाहरण याद रखें जो प्रकृति में विघटित हो जाते हैं।

 

Question 4. किन्हीं चार जैव अनिम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थों के नाम लिखिए।
Answer: चार अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थ हैं:
(i) पेण्ट
(ii) काँच
(iii) धातु के टुकड़े
(iv) प्लास्टिक तथा पॉलीथीन
ये पदार्थ प्राकृतिक रूप से विघटित नहीं होते और पर्यावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं।
In simple words: पेंट, कांच, धातु के टुकड़े और प्लास्टिक ऐसी चीजें हैं जो जल्दी खराब नहीं होतीं और पर्यावरण में लंबे समय तक रहती हैं।

🎯 Exam Tip: अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों के कम से कम चार सामान्य उदाहरण याद रखें जो प्रकृति में विघटित नहीं होते।

 

Question 5. भौतिक अवस्थाओं के आधार पर अपशिष्ट पदार्थों को कितने भागों में वर्गीकृत किया जाता है ?
Answer: भौतिक अवस्थाओं के आधार पर अपशिष्ट पदार्थों को तीन मुख्य भागों में वर्गीकृत किया जाता है:
(i) ठोस अपशिष्ट पदार्थ
(ii) द्रव अपशिष्ट पदार्थ
(iii) गैस अपशिष्ट पदार्थ
यह वर्गीकरण कचरे के प्रबंधन के विभिन्न तरीकों को निर्धारित करने में मदद करता है।
In simple words: कचरे को उसके रूप के आधार पर तीन तरह से बांटा जाता है: ठोस, तरल और गैस।

🎯 Exam Tip: भौतिक अवस्था के आधार पर अपशिष्ट के तीन मुख्य वर्गीकरणों (ठोस, द्रव, गैस) को याद रखें।

 

Question 6. ठोस अपशिष्ट पदार्थों के कुछ उदाहरण लिखिए।
Answer: ठोस अपशिष्ट पदार्थों के कुछ उदाहरण हैं:
(i) प्लास्टिक
(ii) काँच के टुकड़े
(iii) सिरिंज के टुकड़े
ये सभी पदार्थ अपनी ठोस अवस्था में होते हैं और पर्यावरण में आसानी से विघटित नहीं होते।
In simple words: प्लास्टिक, कांच के टुकड़े और सिरिंज ठोस कचरे के कुछ उदाहरण हैं।

🎯 Exam Tip: ठोस अपशिष्ट पदार्थों के कम से कम तीन सामान्य उदाहरण याद रखें।

 

Question 8. गैसीय अपशिष्ट पदार्थ क्या होते हैं ?
Answer: गैसीय अपशिष्ट पदार्थ वे होते हैं जो वाहनों, औद्योगिक फैक्ट्रियों और कारखानों से धुएँ के रूप में निकलते हैं। ये गैसें हवा में मिलकर वायु प्रदूषण करती हैं। इनमें कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें शामिल हो सकती हैं।
In simple words: वाहनों और फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआँ गैसीय कचरा होता है, जो हवा को प्रदूषित करता है।

🎯 Exam Tip: गैसीय अपशिष्ट पदार्थों के स्रोतों (वाहनों, फैक्ट्रियों) और उनके वायु प्रदूषण के कारण पर ध्यान दें।

 

Question 9. पॉलीथीन पशुओं को किस प्रकार प्रभावित करती है?
Answer: पॉलीथीन पशुओं को बहुत बुरी तरह प्रभावित करती है। जानवर अक्सर कचरे के साथ पॉलीथीन की थैलियाँ खा लेते हैं। ये थैलियाँ उनके पेट में फंस जाती हैं, जिससे उन्हें पाचन संबंधी समस्याएँ होती हैं और कभी-कभी उनकी असमय मृत्यु भी हो जाती है। यह उनके श्वसन तंत्र को भी बाधित कर सकती है।
In simple words: जानवर जब कचरे के साथ पॉलीथीन खा लेते हैं, तो यह उनके पेट में फंस जाती है, जिससे वे बीमार पड़ते हैं और मर भी सकते हैं।

🎯 Exam Tip: पॉलीथीन के कारण पशुओं पर पड़ने वाले सीधे नकारात्मक प्रभावों को समझाएँ, विशेषकर पाचन तंत्र पर।

 

Question 10. कचरा प्रबन्धन किसे कहते हैं ?
Answer: कचरे का व्यवस्थित रूप से निपटान करने की प्रक्रिया को कचरा प्रबंधन (Waste management) कहते हैं। इसमें कचरे को इकट्ठा करना, छाँटना, उपचार करना और उसका निपटान करना शामिल है ताकि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को कोई नुकसान न हो।
In simple words: कचरे को सही तरीके से इकट्ठा करने, छाँटने और निपटाने की पूरी प्रक्रिया को कचरा प्रबंधन कहते हैं।

🎯 Exam Tip: कचरा प्रबंधन की परिभाषा और इसमें शामिल मुख्य चरणों को याद रखें।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. कचरे का वर्गीकरण किस आधार पर किया जाता है?
Answer: कचरे का वर्गीकरण इस आधार पर किया जाता है कि उसमें कुछ सामग्री ऐसी होती है जिसका पुनः उपयोग किया जा सकता है, जबकि कुछ सामग्री ऐसी होती है जिसका पुनः उपयोग नहीं किया जा सकता है। इस आधार पर कचरे को मुख्य रूप से जैव निम्नीकरणीय और अजैव निम्नीकरणीय वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है। भौतिक अवस्था (ठोस, द्रव, गैस) के आधार पर भी कचरे का वर्गीकरण किया जाता है।
In simple words: कचरे को इस आधार पर बांटा जाता है कि उसे फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं, और यह जैव निम्नीकरणीय है या अजैव निम्नीकरणीय।

🎯 Exam Tip: कचरा वर्गीकरण के मुख्य आधारों (उपयोगिता और निम्नीकरणीयता) को समझाएँ।

 

Question 2. क्या अपशिष्ट सामग्री का अपघटन समान समय में हो सकता है ?
Answer: नहीं, विभिन्न प्रकार की अपशिष्ट सामग्री का अपघटन समान समय में नहीं हो सकता है। कुछ सामग्री 10 दिनों में, कुछ 4-5 महीनों में, कुछ 4-5 वर्षों में, कुछ 500 वर्षों में और विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक लाखों वर्षों में अपघटित होते हैं। यह उनके रासायनिक संरचना पर निर्भर करता है।
In simple words: नहीं, अलग-अलग कचरे को टूटने में अलग-अलग समय लगता है; कुछ जल्दी टूटते हैं, तो कुछ को हजारों साल लगते हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट पदार्थों के अपघटन समय में अंतर के पीछे के कारणों पर ध्यान दें।

 

Question 3. पर्यावरण प्रदूषण का प्रमुख कारण क्या है ?
Answer: वर्तमान में पर्यावरण प्रदूषण का प्रमुख कारण पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारे प्रेम और लगाव में कमी आना है। हम प्राकृतिक रूप से उपयोग की जाने वाली वस्तुओं के बजाय कृत्रिम वस्तुओं का अधिक उपयोग करने लगे हैं, जिनसे कचरा बढ़ता है। इसके अलावा, औद्योगिक विकास और शहरीकरण भी प्रदूषण के मुख्य कारण हैं। जनसंख्या वृद्धि भी प्रदूषण को बढ़ाती है।
In simple words: पर्यावरण प्रदूषण का मुख्य कारण प्राकृतिक चीजों की उपेक्षा और अधिक कृत्रिम चीजों का उपयोग है, जिससे कचरा और गंदगी बढ़ती है।

🎯 Exam Tip: पर्यावरण प्रदूषण के मानवीय कारणों (कृत्रिम वस्तुओं का उपयोग, औद्योगिक विकास) को स्पष्ट करें।

 

Question 5. वर्मी कम्पोस्टिंग किसे कहते हैं ?
Answer: वर्मी कम्पोस्टिंग एक प्रक्रिया है जिसमें जैविक अपशिष्ट पदार्थों में लाल केंचुए (Red Earthworm) मिलाए जाते हैं। ये केंचुए कार्बनिक पदार्थों को खाते हैं और उनसे निकलने वाला अपशिष्ट पदार्थ उच्च गुणवत्ता वाली खाद होता है। इस खाद को वर्मी कम्पोस्ट खाद कहते हैं, और यह पूरी प्रक्रिया वर्मी कम्पोस्टिंग कहलाती है। यह विधि कचरे को खाद में बदलने का एक प्राकृतिक और कुशल तरीका है।
In simple words: वर्मी कम्पोस्टिंग वह तरीका है जिसमें लाल केंचुओं का इस्तेमाल करके जैविक कचरे को खाद में बदला जाता है।

🎯 Exam Tip: वर्मी कम्पोस्टिंग की परिभाषा, इसमें शामिल जीवों (लाल केंचुए) और इसके अंतिम उत्पाद (उच्च गुणवत्ता वाली खाद) को याद रखें।

 

Question 6. अपशिष्ट पदार्थों के निस्तारण में 3R क्या है ?
Answer: अपशिष्ट पदार्थों के निस्तारण की तीन मुख्य विधियाँ 3R कहलाती हैं। इनका अभिप्राय निम्नलिखित है:

  • उपयोग की मात्रा कम करना (Reduce): इसका अर्थ है कि हम उन चीजों का कम इस्तेमाल करें जिनसे कचरा बनता है।
  • पुनः उपयोग में लेना (Reuse): इसका मतलब है कि चीजों को फेंकने के बजाय उन्हें दोबारा इस्तेमाल करें।
  • पुनः चक्रण (Recycle): इसका अर्थ है कि बेकार चीजों को संसाधित करके नई चीजें बनाई जाएँ।
यह तीनों विधियाँ मिलकर कचरा कम करने और पर्यावरण को बचाने में मदद करती हैं।
In simple words: अपशिष्ट प्रबंधन में 3R का मतलब है: उपयोग कम करें (Reduce), दोबारा इस्तेमाल करें (Reuse), और पुनः चक्रण करें (Recycle)।

🎯 Exam Tip: 3R के तीनों सिद्धांतों (Reduce, Reuse, Recycle) को उनके अर्थ और महत्व के साथ याद रखें।

 

Question 7. स्वच्छ भारत अभियान का लक्ष्य क्या है ?
Answer: स्वच्छ भारत अभियान का मुख्य लक्ष्य खुले में शौच के कारण फैलने वाली गंदगी, बदबू और पर्यावरण प्रदूषण को रोकना है, क्योंकि इनसे कई संक्रामक रोग फैलते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए इस अभियान के तहत विद्यालयों, गाँवों, घरों, बाजारों और सड़कों के किनारे सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय बनाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य पूरे देश में स्वच्छता को बढ़ावा देना है।
In simple words: स्वच्छ भारत अभियान का लक्ष्य खुले में शौच को खत्म करना और पूरे देश में साफ-सफाई लाना है ताकि बीमारियाँ न फैलें।

🎯 Exam Tip: स्वच्छ भारत अभियान के मुख्य उद्देश्य (खुले में शौच मुक्त भारत, स्वच्छता) और इसके कार्यान्वयन के तरीकों को याद रखें।

 

Question 8. पॉलीथीन जनित समस्याओं को चार्ट रूप में प्रदर्शित कीजिए।

Question 9. कचरा (अवशिष्ट) के निस्तारण के लिए हमें दैनिक जीवन में क्या उपाय करने चाहिए ?
Answer: कचरा (अपशिष्ट) के निपटान के लिए हमें दैनिक जीवन में निम्नलिखित उपाय करने चाहिए:
(i) हमें उपयोगी सामग्री को पुनः प्रयोग करने का प्रयत्न करना चाहिए, जिससे कचरा कम पैदा हो।
(ii) कचरा सदैव कूड़ेदान में डालना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कूड़ेदान ढका हुआ हो।
(iii) यदि कोई व्यक्ति कूड़ेदान में कचरा नहीं डालता है, तो उसे ऐसा करने के लिए विनम्रता से समझाना चाहिए।
इन उपायों से हम पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित रख सकते हैं।
In simple words: हमें कचरे को कम इस्तेमाल करना चाहिए, उसे हमेशा कूड़ेदान में डालना चाहिए, और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए कहना चाहिए।

🎯 Exam Tip: कचरा प्रबंधन के लिए दैनिक जीवन में अपनाए जाने वाले व्यावहारिक उपायों को सूचीबद्ध करें।

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. कचरा (अपशिष्ट) क्या है ? इन्हें कितने वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है ? कचरा निस्तारण की विभिन्न विधियों के नाम लिखिए।
Answer: कचरा (अपशिष्ट): हम अपने दैनिक कार्यों के फलस्वरूप जो पदार्थ अनावश्यक और अनुपयोगी होते हैं, उन्हें फेंक देते हैं। ये अनुपयोगी (अनावश्यक) पदार्थ कचरा कहलाते हैं। इसमें घरेलू, औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों से निकलने वाले सभी बेकार पदार्थ शामिल हैं।
कचरे का वर्गीकरण: कचरे को मुख्य रूप से दो भागों में वर्गीकृत किया जाता है:
(i) जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थ (Biodegradable waste Materials): ये वे अपशिष्ट पदार्थ हैं जो जीवाणुओं द्वारा अपघटित होकर खाद बनाते हैं। उदाहरणार्थ-पेड़-पौधों की पत्तियाँ, फल-सब्जी के छिलके, माँस, रद्दी कागज, कपड़ा, मल-गोबर आदि।
(ii) अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थ (Non-biodegradable waste Materials): वे अपशिष्ट पदार्थ, जो जीवाणुओं द्वारा अपघटित नहीं होते तथा पर्यावरण प्रदूषण उत्पन्न करते हैं, अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थ कहलाते हैं। उदाहरणार्थ-पेण्ट, काँच, धातु के टुकड़े, प्लास्टिक की वस्तुएँ आदि।
कचरा निस्तारण की विधियाँ: कचरा निस्तारण की कई विधियाँ हैं, जिनमें शामिल हैं:
1. जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थों के निस्तारण की विधियाँ:

  • कम्पोस्टिंग: इस विधि में जैविक अपशिष्ट पदार्थों (जैसे फल-सब्जी के छिलके, गोबर, पत्तियाँ) को एक गड्ढे में डालकर खाद बनाई जाती है। गड्ढे को छायादार कोने में बनाया जाता है और उसमें नमी व हवा बनाए रखी जाती है। कुछ समय बाद जीवाणु इसे खाद में बदल देते हैं, जिसका उपयोग खेतों में होता है।
  • वर्मी कम्पोस्टिंग: इस विधि में जैविक अपशिष्ट पदार्थों में लाल केंचुए (Red Earthworm) मिलाए जाते हैं। ये केंचुए इन पदार्थों को खाकर उच्च गुणवत्ता वाली खाद बनाते हैं, जिसे वर्मी कम्पोस्ट कहते हैं।
  • लैंडफिलिंग: इस विधि में ठोस अपशिष्ट पदार्थ को शहर के बाहर बड़े गड्ढों में इकट्ठा करके मिट्टी की परत से ढँक दिया जाता है। कुछ समय बाद ये अपशिष्ट अपघटित हो जाते हैं।

2. अजैविक निम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थों के निस्तारण की विधियाँ (3R):
  • उपयोग की मात्रा कम करना (Reduce): अनुपयोगी पदार्थों की मात्रा को कम करना। जैसे टूटे टिन के डिब्बे या प्लास्टिक की बोतलें घरेलू उपयोग में ली जा सकती हैं।
  • पुनः उपयोग में लेना (Reuse): घरेलू अनुपयोगी सामग्री में से ऐसी सामग्री को अलग करना जिन्हें दोबारा उपयोग में लिया जा सके; जैसे बैटरी, धातु के बर्तन, कांच की बोतलें।
  • पुनः चक्रण (Recycle): प्लास्टिक और कांच जैसी अपशिष्ट सामग्री को फैक्ट्रियों में भेजकर पुनः चक्रित किया जाता है, जिससे उपयोगी वस्तुएँ बनाई जाती हैं।
इसके अलावा, कचरे को रंगीन डिब्बों में अलग-अलग करके (जैसे विषैले पदार्थ, दवाइयाँ, बैटरी सेल एक अलग डिब्बे में) एकत्रित करना भी एक प्रभावी प्रबंधन विधि है।
In simple words: कचरा बेकार की चीजें हैं जिन्हें हम फेंक देते हैं। यह दो प्रकार का होता है: जो सड़ जाता है (जैसे पत्तियाँ) और जो नहीं सड़ता (जैसे प्लास्टिक)। कचरे को निपटाने के कई तरीके हैं, जैसे उसे खाद बनाना, केंचुओं से खाद बनाना, जमीन में दबाना, या उसे कम इस्तेमाल करना, दोबारा इस्तेमाल करना और फिर से बनाना।

🎯 Exam Tip: कचरे की परिभाषा, उसके दो मुख्य प्रकारों के उदाहरण और विभिन्न निपटान विधियों (जैसे कम्पोस्टिंग, वर्मी कम्पोस्टिंग, लैंडफिलिंग और 3R सिद्धांत) को पूरी तरह से याद करें।

 

Question 2. वाहित मल क्या है ? अनुपचारित वाहित मल को नदियों अथवा समुद्र में विसर्जित करना हानिकारक क्यों है, समझाइए।
Answer: वाहित मल अपशिष्ट जल होता है, जो घरों, उद्योगों, अस्पतालों और अन्य जगहों पर उपयोग के बाद बहता है। तेज बारिश के दौरान गलियों, सड़कों और छतों से बहकर आने वाला वर्षा का पानी भी इसमें शामिल होता है, जिसमें हानिकारक पदार्थ मिले होते हैं। वाहित मल में घुले हुए और निलंबित अपद्रव्य युक्त जल होता है, और ये अपद्रव्य संदूषक कहलाते हैं।
इस प्रकार, वाहित मल एक जटिल मिश्रण होता है, जिसमें निलंबित ठोस, कार्बनिक और अकार्बनिक अशुद्धियाँ, पोषक तत्व, मृतजीवी और रोगवाहक जीवाणु तथा अन्य सूक्ष्मजीव होते हैं। यही कारण है कि अनुपचारित वाहित मल को नदियों अथवा समुद्र में विसर्जित करना बहुत हानिकारक होता है। यह जल प्रदूषण फैलाता है, जलीय जीवों को नुकसान पहुँचाता है और मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करता है। इसमें मौजूद कीटाणु बीमारियाँ फैला सकते हैं।
In simple words: वाहित मल घरों और फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी होता है, जिसमें गंदगी और कीटाणु मिले होते हैं। इसे सीधे नदियों या समुद्र में डालना हानिकारक है क्योंकि यह पानी को गंदा करता है और बीमारियाँ फैलाता है।

🎯 Exam Tip: वाहित मल की परिभाषा, उसमें मौजूद हानिकारक घटकों और इसे जल निकायों में छोड़ने से होने वाले पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी खतरों को याद रखें।

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