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सही विकल्प का चयन कीजिए।
Question 1. प्रयोगशाला तापमापी में निम्नलिखित में से किस पदार्थ का उपयोग होता है ?
(a) सोडियम
(b) पारा
(c) पिघला ऐल्युमीनियम
(d) चमकीला पानी
Answer: (b) पारा
In simple words: प्रयोगशाला में तापमान मापने के लिए पारे का उपयोग किया जाता है। पारा गर्मी पाकर फैलता है और ठंडा होने पर सिकुड़ता है, जिससे तापमान आसानी से पढ़ा जा सकता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि प्रयोगशाला तापमापी में पारा ही सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला तरल पदार्थ है क्योंकि यह ऊष्मा के प्रति बहुत संवेदनशील होता है।
Question 2. जब पदार्थ के अणु स्वयं चलकर ऊष्मा का एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरण करते हैं नो ऊष्मा संचरण की यह विधि कहलाती है
(a) चालन
(b) संवहन
(c) विकिरण
(d) चालन व विकिरण दोनों
Answer: (b) संवहन
In simple words: जब गर्मी अणुओं के खुद चलने से एक जगह से दूसरी जगह जाती है, तो उसे संवहन कहते हैं। यह अक्सर तरल और गैसों में होता है, जैसे पानी गर्म होना या हवा का चलना।
🎯 Exam Tip: संवहन में, गर्म अणु ऊपर उठते हैं और ठंडे अणु उनकी जगह लेने के लिए नीचे आते हैं, जिससे एक चक्र बनता है।
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
Question. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
(i) वस्तु के गर्मपन या ठण्डेपन की माप को...............कहते हैं।
(ii) धातु के चम्मच को आइसक्रीम के प्याले में डुबोकर थोड़ी देर रखते हैं, तो वह..........हो जायेगी।
(iii) स्टील की कड़ाही में ताँबे की तली लगाई जाती है, क्योंकि ताँबा ऊष्मा का अच्छा .............है।
(iv) ऊष्मा का प्रवाह...............ताप वाली वस्तु से ताप वाली वस्तु की ओर होता है।
(v) वायु तथा जल ऊष्मा के ...........हैं।
Answer:
(i) वस्तु के गर्मपन या ठण्डेपन की माप को ताप कहते हैं।
(ii) धातु के चम्मच को आइसक्रीम के प्याले में डुबोकर थोड़ी देर रखते हैं, तो वह ठण्डा हो जायेगी।
(iii) स्टील की कड़ाही में ताँबे की तली लगाई जाती है, क्योंकि ताँबा ऊष्मा का अच्छा चालक है।
(iv) ऊष्मा का प्रवाह अधिक ताप वाली वस्तु से कम ताप वाली वस्तु की ओर होता है।
(v) वायु तथा जल ऊष्मा के कुचालक हैं।
In simple words: तापमान से पता चलता है कि कोई चीज़ कितनी गर्म या ठंडी है। गर्म चीज़ से ठंडी चीज़ की ओर गर्मी अपने आप जाती है। पानी और हवा गर्मी को आसानी से आर-पार नहीं जाने देते।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, वाक्य के पूरे अर्थ को समझें और सुनिश्चित करें कि भरा गया शब्द वैज्ञानिक रूप से सही हो।
Question 2. खाना पकाने के बर्तन धातुओं से बनाए जाते हैं, क्योंकि धातुएँ ऊष्मा की अच्छी चालक होती हैं।
Answer: सत्य
In simple words: खाना बनाने वाले बर्तन धातुओं से बनते हैं, क्योंकि धातुएं गर्मी को अच्छे से अंदर ले जाती हैं। इससे खाना जल्दी पक जाता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि धातुओं की अच्छी चालकता ही उन्हें खाना पकाने के लिए आदर्श बनाती है, क्योंकि वे गर्मी को खाने तक तेजी से पहुंचाती हैं।
Question 3. घरों की बाहरी दीवारों पर सफेद रंग पोतने से घर गर्मियों में कम गर्म होगा।
Answer: सत्य
In simple words: अगर घर की बाहरी दीवारों पर सफेद रंग किया जाए, तो गर्मी में घर कम गर्म होगा। सफेद रंग सूरज की गर्मी को लौटा देता है।
🎯 Exam Tip: सफेद रंग ऊष्मा का अच्छा परावर्तक होता है, जिसका मतलब है कि यह अधिकांश सूर्य के प्रकाश को वापस भेज देता है और उसे अवशोषित नहीं करता, जिससे घर ठंडा रहता है।
दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. ऊष्मा के चालक एवं कुचालक में उदाहरण देकर अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: जिन चीजों से गर्मी आसानी से आर-पार जा सकती है, उन्हें गर्मी का चालक (Good conductors) कहते हैं। जैसे, एल्यूमीनियम, लोहा और ताँबा, ये सभी गर्मी के अच्छे चालक हैं। दूसरी तरफ, जिन चीजों से गर्मी आसानी से नहीं जा पाती, उन्हें गर्मी का कुचालक या ऊष्मारोधी (Insulator) कहते हैं। जैसे, लकड़ी, प्लास्टिक, एबोनाइट और ऊनी कपड़े, ये सभी गर्मी के कुचालक हैं। यह समझना महत्वपूर्ण है कि चालक और कुचालक दोनों ही हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी में बहुत उपयोगी होते हैं।
In simple words: जो चीजें गर्मी को आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाती हैं, वे चालक हैं (जैसे धातुएं)। जो चीजें गर्मी को नहीं ले जातीं, वे कुचालक हैं (जैसे लकड़ी)।
🎯 Exam Tip: चालकों और कुचालकों के कम से कम दो-दो उदाहरण हमेशा याद रखें, क्योंकि यह अंतर अक्सर पूछा जाता है।
Question 2. ऊष्मा संचरण की कौन-सी विधियाँ हैं ? इनमें अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: ऊष्मा संचरण की तीन मुख्य विधियाँ हैं:
1. चालन (Conduction)
2. संवहन (Convection)
3. विकिरण (Radiation)
इन तीनों विधियों में अंतर को नीचे दी गई सारणी में स्पष्ट किया गया है। यह समझने के लिए ज़रूरी है कि गर्मी कैसे फैलती है।
| विशेषता | चालन | संवहन | विकिरण |
|---|---|---|---|
| 1. माध्यम की आवश्यकता | माध्यम आवश्यक है। | माध्यम आवश्यक है। | माध्यम आवश्यक नहीं है। |
| 2. कणों की गति | कण अपना स्थान नहीं छोड़ते हैं, वे केवल कंपन करते हैं और ऊर्जा पास करते हैं। | कण अपना स्थान छोड़ते हैं और खुद गर्मी ले जाते हैं। | कणों की कोई आवश्यकता नहीं होती है। |
| 3. ऊष्मा संचरण का मार्ग | ऊष्मा संचरण का मार्ग सभी ओर से संभव हो सकता है। | ऊष्मा संचरण का मार्ग टेढ़ा-मेढ़ा या घुमावदार हो सकता है। | ऊष्मा संचरण सदैव सीधी रेखा में होता है। |
| 4. गति | ऊष्मा संचरण की गति धीमी होती है। | संचरण की गति धीमी होती है। | ऊष्मा संचरण प्रकाश के वेग की दर से होता है। |
| 5. तरंगों की आवश्यकता | किसी प्रकार की तरंगों की आवश्यकता नहीं होती है। | तरंगों की आवश्यकता नहीं होती है। | विद्युत चुम्बकीय तरंगों द्वारा ऊष्मा का संचरण होता है। |
In simple words: गर्मी तीन तरह से फैलती है: चालन (ठोस में, कण नहीं चलते), संवहन (तरल/गैस में, कण खुद चलते हैं), और विकिरण (बिना किसी माध्यम के, जैसे सूरज की रोशनी)।
🎯 Exam Tip: तीनों विधियों के मुख्य अंतरों-माध्यम की आवश्यकता, कणों की गति और संचरण के मार्ग-को याद रखना, इस प्रश्न के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
Question 3. धूप में समान आकार वाली काली और चमकदार वस्तुएँ रखने पर काली वस्तु अधिक गर्म क्यों हो जाती है ?
Answer: काली वस्तुएँ गर्मी को बहुत अच्छे से सोखती हैं, जबकि चमकदार वस्तुएँ गर्मी को वापस भेजती हैं। इसका मतलब है कि काली वस्तुएँ सूरज से आने वाली ज़्यादातर गर्मी को अपने अंदर खींच लेती हैं। वहीं, चमकदार वस्तुएँ सूरज की ज़्यादातर गर्मी को वापस लौटा देती हैं। इसीलिए, धूप में एक जैसी काली और चमकदार चीज़ें रखने पर काली चीज़ें ज़्यादा गर्मी सोखने के कारण बहुत ज़्यादा गर्म हो जाती हैं। यह हमें बताता है कि गहरे रंग की वस्तुएं गर्मी के अवशोषण के लिए बेहतर होती हैं।
In simple words: काली चीज़ें सूरज की गर्मी को अच्छे से सोख लेती हैं, जबकि चमकदार चीज़ें उसे वापस भेज देती हैं। इसलिए, काली चीज़ें धूप में ज़्यादा गर्म हो जाती हैं।
🎯 Exam Tip: गर्मी के अवशोषण और परावर्तन में रंग की भूमिका को स्पष्ट रूप से समझाना, और काली वस्तुओं को अच्छा अवशोषक बताना, पूर्ण अंक प्राप्त करने में मदद करेगा।
Question 4. समुद्र में गर्म जल की धाराएँ बनने का क्या कारण है?
Answer: भूमध्य रेखा के पास सूरज की किरणें ध्रुवों की तुलना में सीधी पड़ती हैं, जिससे महासागरों में भूमध्य रेखा का पानी ज़्यादा गर्म हो जाता है। यह गर्म पानी हल्का होने के कारण ऊपर तैरता है और ध्रुवीय क्षेत्रों की ओर बहने लगता है। इस तरह से गर्म पानी के बहने को ही गर्म जल की धारा कहते हैं। ये धाराएं पृथ्वी के तापमान संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
In simple words: भूमध्य रेखा पर सूरज की रोशनी सीधी पड़ती है, जिससे वहां का पानी गर्म और हल्का होकर ध्रुवों की ओर बहने लगता है। यही गर्म जल की धाराएँ हैं।
🎯 Exam Tip: गर्म जल धाराओं के निर्माण में भूमध्य रेखा पर सूर्य के प्रकाश की तीव्रता और गर्म पानी के घनत्व में कमी को मुख्य कारण के रूप में बताना ज़रूरी है।
Question 5. खाना पकाने के बर्तनों में लकड़ी या ऐबोनाइट के हत्थे लगाए जाते हैं क्यों ?
Answer: खाना बनाने के बर्तनों में लकड़ी या ऐबोनाइट के हत्थे इसलिए लगाए जाते हैं ताकि बर्तन गर्म होने पर उन्हें आसानी से पकड़ा जा सके। लकड़ी और ऐबोनाइट गर्मी के कुचालक होते हैं। इसका मतलब है कि वे गर्मी को अपने अंदर से आसानी से नहीं गुजरने देते। इसलिए, जब बर्तन गर्म होता है, तो उसके हत्थे गर्म नहीं होते और हमारा हाथ जलने से बच जाता है। यह सुरक्षा और सुविधा दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: खाना बनाने वाले बर्तनों में लकड़ी या ऐबोनाइट के हत्थे होते हैं क्योंकि ये गर्मी को नहीं फैलने देते। इससे गर्म बर्तन पकड़ने पर हाथ नहीं जलता।
🎯 Exam Tip: लकड़ी और ऐबोनाइट जैसे पदार्थों के कुचालक होने का सिद्धांत समझाना, और इसे सुरक्षा व सुविधा से जोड़ना, इस प्रश्न का सही उत्तर है।
Question 7. सर्दियों में ऊनी कपड़े पहनने से ठण्ड से बचाव क्यों होता है ? कारण स्पष्ट कीजिए।
Answer: हवा गर्मी की कुचालक होती है, यानी यह गर्मी को आसानी से आर-पार नहीं जाने देती। ऊनी कपड़ों में छोटे-छोटे छेद होते हैं जिनके अंदर हवा भर जाती है। ऊन खुद भी गर्मी का कुचालक होता है। इस तरह, ऊन और उसके अंदर फंसी हवा दोनों मिलकर हमारे शरीर की गर्मी को बाहर नहीं जाने देते। इससे हमारा शरीर गर्म रहता है और हमें ठंड से बचाव मिल जाता है। यह एक प्राकृतिक इन्सुलेशन का काम करता है।
In simple words: ऊनी कपड़ों में हवा फंसी रहती है और ऊन भी गर्मी को बाहर नहीं जाने देती। इसलिए, सर्दियों में ऊनी कपड़े पहनने से ठंड नहीं लगती।
🎯 Exam Tip: ऊन और हवा दोनों के ऊष्मा कुचालक गुणों को एक साथ जोड़कर समझाना कि कैसे ये शरीर की गर्मी को रोकते हैं, यह इस प्रश्न का मुख्य बिंदु है।
क्रियात्मक कार्य
Question 1. तापमापी की सहायता से इनका ताप ज्ञात करके बताइए कि कौन जल्दी गर्म होता है और क्यों?
Answer: समान पात्रों में समान मात्रा में पानी, तेल, रेत और नमक आदि को धूप में एक ही समय के लिए रखने पर हमने पाया कि सबसे पहले नमक गर्म हुआ, फिर रेत, उसके बाद पानी और अंत में तेल गर्म हुआ। यह इसलिए होता है क्योंकि हर पदार्थ की गर्मी सोखने की क्षमता अलग-अलग होती है, जिसे विशिष्ट ऊष्मा कहते हैं। जिस पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा कम होती है, वह जल्दी गर्म हो जाता है।
In simple words: धूप में रखी अलग-अलग चीजें अलग-अलग समय पर गर्म होती हैं। नमक सबसे पहले गर्म हुआ, फिर रेत, पानी और अंत में तेल। यह उनकी गर्मी सोखने की अलग क्षमता के कारण होता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न पदार्थों की ऊष्मा अवशोषण क्षमता (विशिष्ट ऊष्मा) में अंतर को स्पष्ट रूप से बताना, इस अवलोकन के पीछे का वैज्ञानिक कारण है।
Question 2. फॉरनेहाइट तथा सेल्सियस पैमाने वाले तापमापियों के चित्र का चार्ट बनाकर प्रदर्शित कीजिए।
Answer: सेल्सियस और फॉरेनहाइट तापमान मापकों के चित्र को एक चार्ट पर बनाकर प्रदर्शित किया जा सकता है। इन दोनों पैमानों का उपयोग तापमान को मापने के लिए किया जाता है, लेकिन उनके माप बिंदु और विभाजन अलग-अलग होते हैं। सेल्सियस पैमाना आमतौर पर वैज्ञानिक और रोजमर्रा के उपयोग में आता है, जबकि फॉरेनहाइट मुख्य रूप से कुछ देशों में, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में, उपयोग होता है।
In simple words: सेल्सियस और फॉरेनहाइट तापमापी के चित्रों को एक चार्ट पर दिखाएँ। ये दोनों ही तापमान नापने के काम आते हैं लेकिन अलग-अलग तरीके से काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: चार्ट में सेल्सियस और फॉरेनहाइट पैमानों के मुख्य बिंदु (जैसे पानी का जमना और उबलना) और उनके बीच के संबंध को स्पष्ट रूप से दर्शाना महत्वपूर्ण है।
Question 3. तापमापी की सहायता से बर्फ का गलनांक तथा दूध का क्वथनांक ज्ञात कीजिए।
Answer: किसी ठोस को गर्मी देने पर जब वह पिघलकर तरल में बदल जाता है, तो इस प्रक्रिया को गलन (melting) कहते हैं। जिस तापमान पर कोई ठोस पूरी तरह से तरल में बदलता है, उसे उसका गलनांक (melting point) कहते हैं। बर्फ का गलनांक जानने के लिए, एक बीकर में बर्फ लेकर उसे स्प्रिट लैंप की मदद से गर्म करें। जब बर्फ पूरी तरह पिघलकर पानी में बदल जाए, तो तापमापी से उसका तापमान नोट करें। बर्फ का गलनांक 0°C होता है।
जब किसी तरल को गर्म करने पर वह उबलने लगता है, तो इस प्रक्रिया को क्वथन (boiling) कहते हैं। जिस तापमान पर कोई तरल उबलता है, उसे उसका क्वथनांक कहते हैं। दूध का क्वथनांक जानने के लिए, एक बीकर में दूध लेकर उसे स्प्रिट लैंप की मदद से गर्म करें। जब दूध उबलने लगे, तो तापमापी से उसका तापमान नोट करें। यह तापमान ही दूध का क्वथनांक है। इन प्रक्रियाओं से पदार्थों के भौतिक गुणों को समझने में मदद मिलती है।
In simple words: तापमापी का उपयोग करके, बर्फ का गलनांक (वह तापमान जिस पर वह पिघलती है) और दूध का क्वथनांक (वह तापमान जिस पर वह उबलता है) ज्ञात किया जा सकता है। बर्फ 0°C पर पिघलती है।
🎯 Exam Tip: गलनांक और क्वथनांक की परिभाषा और उन्हें ज्ञात करने की विधि को स्पष्ट रूप से समझाना आवश्यक है। साथ ही, बर्फ का गलनांक (0°C) और पानी का क्वथनांक (100°C) जैसे मानक मानों को याद रखें।
Question 4. सादे जल और शक्कर घुले जल का क्वथनांक ज्ञात कर दोनों की तुलना कीजिए।
Answer: एक बीकर में सादा पानी और दूसरे बीकर में चीनी घुला पानी लेकर उन्हें त्रिपाद स्टैंड पर रखकर स्प्रिट लैंप से गर्म करें। जब दोनों बीकरों में पानी उबलने लगे, तो तापमापी से दोनों का तापमान अलग-अलग नोट कर लें। हम देखेंगे कि सादे पानी का क्वथनांक 100°C होता है, जबकि चीनी घुले पानी का क्वथनांक 100°C से ज़्यादा होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पानी में कोई चीज़ मिलाने से उसका क्वथनांक बढ़ जाता है, और यह बढ़ी हुई मात्रा घुली हुई चीनी की मात्रा पर निर्भर करती है।
In simple words: सादे पानी का क्वथनांक 100°C होता है, लेकिन चीनी घुले पानी का क्वथनांक उससे ज़्यादा होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पानी में कुछ भी मिलाने पर उसका उबलने का तापमान बढ़ जाता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रयोग में, यह समझना महत्वपूर्ण है कि अशुद्धियाँ (जैसे चीनी) घोल के क्वथनांक को बढ़ा देती हैं, जिसे क्वथनांक में उन्नयन कहा जाता है।
पाठगत प्रश्नोत्तर
Question. सारणी
Answer: यहाँ दी गई सारणी में कुछ वस्तुओं की गर्मी या ठंडी स्थिति बताई गई है। यह हमें सिखाता है कि हम अपने दैनिक जीवन में चीजों को कैसे महसूस करते हैं और उन्हें वर्गीकृत करते हैं।
| क्र. सं. | वस्तु का नाम | गर्म है या ठण्डी |
|---|---|---|
| 1 | बर्फ | ठण्डी |
| 2 | आइसक्रीम | ठण्डी |
| 3 | शीतल पेय | ठण्डी |
| 4 | उबलता जल | गर्म |
| 5 | उबलता तेल | गर्म |
In simple words: सारणी दिखाती है कि बर्फ, आइसक्रीम और ठंडे पेय ठंडे होते हैं, जबकि उबलता पानी और तेल गर्म होते हैं।
🎯 Exam Tip: इस तरह की सारणी को भरते समय, अपने सामान्य ज्ञान और अनुभव का उपयोग करें कि कौन सी वस्तु आमतौर पर गर्म या ठंडी महसूस होती है।
गतिविधि-1: (पृष्ठ 146)
Question 1. आप क्या अनुभव करते हैं ?
Answer: जब हम बाएँ हाथ को गर्म पानी और दाएँ हाथ को ठंडे पानी में डालते हैं, तो हमें अलग-अलग एहसास होता है। बाएँ हाथ को पानी गर्म महसूस होता है, जबकि दाएँ हाथ को पानी ठंडा महसूस होता है। यह दर्शाता है कि हमारा शरीर तापमान में बदलाव के प्रति कैसे प्रतिक्रिया करता है।
In simple words: बाएँ हाथ को गर्म पानी और दाएँ हाथ को ठंडा पानी महसूस होता है।
🎯 Exam Tip: यह अनुभव दिखाता है कि हमारे हाथ अलग-अलग तापमान को कैसे महसूस करते हैं, यह ऊष्मा के संवेदी अनुभव का एक सरल उदाहरण है।
Question 2. क्या पात्र B का पानी ठण्डा अथवा गर्म है ?
Answer: पात्र B का पानी ठंडा है या गर्म, यह हम सिर्फ हाथ से छूकर निश्चित रूप से नहीं बता पाते हैं। हमारे हाथ का एहसास आसपास के तापमान पर निर्भर करता है, इसलिए यह हमेशा सही नहीं होता। इसके लिए एक तापमापी का उपयोग करना चाहिए।
In simple words: पात्र B का पानी ठंडा है या गर्म, यह छूकर ठीक से पता नहीं चलता।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न इस बात पर जोर देता है कि हमारी स्पर्श इंद्रिय तापमान मापने के लिए हमेशा विश्वसनीय नहीं होती है, वैज्ञानिक माप के लिए उपकरणों की आवश्यकता होती है।
Question 3. इस गतिविधि में दिया गया प्रयोग क्या दर्शाता है ?
Answer: यह प्रयोग दर्शाता है कि किसी वस्तु के गर्म या ठंडे होने का पता लगाने के लिए केवल स्पर्श पर भरोसा करना विश्वसनीय नहीं है। हमारी त्वचा का एहसास आसपास के तापमान और हमारे शरीर के अपने तापमान पर निर्भर करता है, जिससे गलत अनुमान लग सकते हैं। सटीक माप के लिए तापमापी जैसे उपकरणों का उपयोग करना ज़रूरी है।
In simple words: यह प्रयोग दिखाता है कि छूकर किसी चीज़ के गर्म या ठंडे होने का सही पता लगाना मुश्किल है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि मानवीय इंद्रियां तापमान के विश्वसनीय माप के लिए पर्याप्त नहीं हैं; वैज्ञानिक सटीकता के लिए यंत्रों का उपयोग अनिवार्य है।
Question 4. हम कैसे ज्ञात करें कि वस्तु वास्तव में कितनी गर्म है ?
Answer: किसी वस्तु का वास्तविक तापमान जानने के लिए हम तापमापी (थर्मामीटर) का उपयोग करते हैं। तापमापी हमें यह सटीक रूप से बता सकता है कि वस्तु कितनी गर्म है। यह हमें एक संख्या में तापमान बताता है, जिससे हम ठीक-ठीक जान पाते हैं।
In simple words: किसी वस्तु का तापमान जानने के लिए तापमापी का इस्तेमाल करते हैं।
🎯 Exam Tip: सटीक तापमान माप के लिए हमेशा तापमापी का उपयोग करें, क्योंकि यह मानवीय अनुभव से कहीं अधिक विश्वसनीय और वैज्ञानिक है।
गतिविधि-2: (पृष्ठ 147)
Question 1. इस तापमापी का ध्यानपूर्वक अवलोकन करके बताइए कि इसके पैमाने का अधिकतम एवं न्यूनतम मान कितना है ?
Answer: प्रयोगशाला तापमापी को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि इसके पैमाने का अधिकतम मान 110°C (सेल्सियस) है और न्यूनतम मान 10°C है। प्रयोगशाला तापमापी में आमतौर पर 10°C से लेकर 110°C तक के निशान होते हैं। इस सीमा को तापमापी का परिसर (रेंज) कहा जाता है। यह सीमा उसे विभिन्न प्रयोगों में तापमान मापने के लिए उपयोगी बनाती है।
In simple words: इस तापमापी का सबसे ज़्यादा माप 110°C और सबसे कम माप 10°C है। इसे इसका परिसर कहते हैं।
🎯 Exam Tip: किसी भी तापमापी का अधिकतम और न्यूनतम मान उसके उपयोग की सीमा को बताता है, इसलिए इन मानों को ध्यान से पढ़ना महत्वपूर्ण है।
Question 2. तापमापी से ताप का मापन कैसे करते हैं ?
Answer: तापमापी से तापमान मापने के लिए, उसके बल्ब वाले हिस्से को उस तरल या वस्तु में डुबोया जाता है जिसका तापमान मापना है। फिर, कुछ देर रुकने के बाद, तापमापी में पारे का स्तर जहाँ तक पहुँचता है, उस निशान को नोट कर लिया जाता है। यही उस वस्तु का तापमान होता है। यह प्रक्रिया सही माप सुनिश्चित करती है।
In simple words: तापमापी के बल्ब को चीज़ में डुबोकर पारे का स्तर देखते हैं, वही तापमान होता है।
🎯 Exam Tip: तापमान पढ़ते समय तापमापी को सीधा रखें और आंखों को पारे के स्तर के बराबर रखें ताकि सही पाठ्यांक लिया जा सके।
गतिविधि-3: (पृष्ठ 148)
Question 1. स्वस्थ व्यक्ति के शरीर का ताप कितना होता है ?
Answer: एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर का सामान्य तापमान 37°C (सेल्सियस) होता है। यह तापमान शरीर के अंदर की सामान्य कार्यप्रणाली को दर्शाता है। अगर तापमान इससे ज़्यादा या कम हो, तो वह बीमारी का संकेत हो सकता है।
In simple words: एक स्वस्थ इंसान के शरीर का तापमान 37°C होता है।
🎯 Exam Tip: स्वस्थ शरीर का तापमान 37°C या 98.6°F होता है, इन दोनों पैमानों पर मान याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. डॉक्टरी तापमापी को प्रयोग करने से पूर्व प्रतिरोधी (ऐन्टीसेप्टिक) घोल से क्यों धोते हैं ?
Answer: डॉक्टरी तापमापी का उपयोग करने से पहले उसे एंटीसेप्टिक घोल से धोना बहुत ज़रूरी है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि तापमापी को कीटाणुओं से मुक्त किया जा सके और किसी भी संक्रमण के फैलने का खतरा कम हो जाए। यह स्वच्छता बनाए रखने और बीमारियों से बचाव के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
In simple words: डॉक्टरी तापमापी को उपयोग से पहले एंटीसेप्टिक घोल से धोते हैं ताकि कीटाणु मर जाएँ और कोई बीमारी न फैले।
🎯 Exam Tip: संक्रमण से बचाव के लिए डॉक्टरी तापमापी को हर उपयोग से पहले और बाद में एंटीसेप्टिक घोल से साफ करना एक अनिवार्य सुरक्षा उपाय है।
Question 3. डॉक्टरी तापमापी को प्रत्येक बार ताप लेने से पूर्व हाथ में कसकर पकड़कर झटका क्यों देते हैं ?
Answer: डॉक्टरी तापमापी में पारे का स्तर नीचे लाने के लिए, हर बार तापमान मापने से पहले उसे हाथ में कसकर पकड़कर झटका दिया जाता है। ऐसा इसलिए करते हैं ताकि पिछले तापमान के बाद पारा संकुचित होकर बल्ब में वापस चला जाए। यह सुनिश्चित करता है कि अगला माप सही और सटीक हो।
In simple words: तापमापी को झटका इसलिए देते हैं ताकि पारा नीचे आ जाए और नया तापमान सही से मापा जा सके।
🎯 Exam Tip: झटका देने की प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि पारे का स्तर शुरुआती बिंदु पर आ जाए, जो सटीक माप के लिए महत्वपूर्ण है; इसे हमेशा सावधानी से करें।
गतिविधि-4: (पृष्ठ 150)
Question 2. उपरोक्त गतिविधि में वर्णित प्रयोग से क्या निष्कर्ष प्राप्त होता है ?
Answer: इस प्रयोग से यह निष्कर्ष निकलता है कि गर्मी (ऊष्मा) हमेशा अधिक तापमान वाली वस्तु से कम तापमान वाली वस्तु की ओर जाती है। यह गर्मी के प्रवाह का एक बुनियादी सिद्धांत है। यह हमें बताता है कि गर्मी हमेशा संतुलन बनाने की कोशिश करती है।
In simple words: यह प्रयोग दिखाता है कि गर्मी ज़्यादा गर्म चीज़ से कम गर्म चीज़ की ओर जाती है।
🎯 Exam Tip: ऊष्मा का अधिक ताप से कम ताप की ओर प्रवाह ऊष्मागतिकी का एक मौलिक नियम है, इसे अच्छी तरह से समझें।
Question 3. गर्म पानी तथा ठण्डे पानी के ताप में क्या परिवर्तन होता है ?
Answer: जब गर्म पानी और ठंडा पानी एक-दूसरे के संपर्क में आते हैं, तो गर्म पानी का तापमान कम हो जाता है और ठंडे पानी का तापमान बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गर्मी हमेशा अधिक तापमान वाली जगह से कम तापमान वाली जगह की ओर जाती है, जब तक कि दोनों का तापमान बराबर न हो जाए। यह गर्मी के संतुलन का एक सरल उदाहरण है।
In simple words: गर्म पानी का तापमान कम हो जाता है और ठंडे पानी का तापमान बढ़ जाता है, जब वे मिलते हैं।
🎯 Exam Tip: ऊष्मा हमेशा गर्म वस्तु से ठंडी वस्तु की ओर तब तक प्रवाहित होती है जब तक दोनों का तापमान समान न हो जाए, इसे ऊष्मीय संतुलन कहते हैं।
गतिविधि-5: (पृष्ठ 151)
Question 1. छड़ के दूसरे सिरे को मोमबत्ती से गर्म कीजिए और बताइए क्या होता है ?
Answer: जब छड़ के एक सिरे को मोमबत्ती से गर्म किया जाता है, तो थोड़ी देर बाद छड़ के दूसरे सिरे पर लगा मोम पिघलना शुरू हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गर्मी छड़ के गर्म सिरे से दूसरे सिरे तक जाती है। यह गर्मी का चालन कहलाता है।
In simple words: छड़ के एक सिरे को गर्म करने पर, दूसरे सिरे का मोम पिघलना शुरू हो जाता है, क्योंकि गर्मी छड़ से होकर गुजरती है।
🎯 Exam Tip: यह प्रयोग ठोस वस्तुओं में ऊष्मा के चालन को स्पष्ट रूप से दर्शाता है, जहाँ कणों के कंपन से गर्मी एक सिरे से दूसरे सिरे तक पहुँचती है।
Question 2. मोम का कौन-सा टुकड़ा सबसे पहले नीचे गिरता है?
Answer: जब छड़ को गर्म किया जाता है, तो मोमबत्ती के सिरे की ओर वाला मोम का टुकड़ा सबसे पहले नीचे गिरता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गर्म करने वाली जगह के सबसे करीब वाला मोम सबसे पहले गर्मी पाता है और पिघल जाता है। यह दिखाता है कि गर्मी गर्म जगह से धीरे-धीरे आगे बढ़ती है।
In simple words: मोमबत्ती के सबसे पास वाला मोम का टुकड़ा सबसे पहले पिघलकर गिरता है।
🎯 Exam Tip: यह अवलोकन चालन प्रक्रिया के क्रम को दर्शाता है, जहाँ गर्मी का स्रोत सबसे करीब के पदार्थ को सबसे पहले प्रभावित करता है।
Question 3. ठोस में ऊष्मा संचरण की विधि क्या कहलाती है?
Answer: ठोस वस्तुओं में गर्मी के फैलने की विधि को चालन (Conduction) कहते हैं। चालन में, गर्मी एक जगह से दूसरी जगह पदार्थ के अणुओं के कंपन के ज़रिए जाती है, लेकिन अणु खुद अपनी जगह नहीं छोड़ते। यह धातु जैसी चीज़ों में बहुत अच्छे से होता है।
In simple words: ठोस चीज़ों में गर्मी के फैलने को चालन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: चालन विधि में गर्मी का स्थानांतरण पदार्थ के कणों के आपस में टकराने से होता है, न कि कणों के चलने से।
गतिविधि-6: (पृष्ठ 151)
Question 1. कौन-सी वस्तुओं का ऊपर वाला सिरा गर्म हो गया है?
Answer: एल्यूमीनियम, लोहा और स्टील जैसी धातुएँ गर्मी को बहुत अच्छे से अपने अंदर से गुजरने देती हैं। इसलिए, इन वस्तुओं का ऊपर वाला सिरा आसानी से गर्म हो जाता है। यह धातुओं की ऊष्मा चालकता के कारण होता है।
In simple words: एल्यूमीनियम, लोहा और स्टील जैसी धातुएँ गर्मी को आसानी से फैलाती हैं, इसलिए इनका ऊपरी हिस्सा गर्म हो जाता है।
🎯 Exam Tip: यह दर्शाता है कि धातुएँ ऊष्मा की अच्छी चालक होती हैं, जिससे ऊष्मा उनमें तेज़ी से फैलती है।
Question 3. लकड़ी, प्लास्टिक आदि के कम गर्म होने का क्या कारण है ?
Answer: लकड़ी और प्लास्टिक जैसी चीज़ें गर्मी की कुचालक होती हैं। इसका मतलब है कि ये अपने अंदर से गर्मी को आसानी से नहीं जाने देतीं। इसीलिए, ये चीज़ें जल्दी गर्म नहीं होतीं और छूने पर कम गर्म महसूस होती हैं। यह गुण उन्हें विभिन्न उपयोगों के लिए उपयोगी बनाता है, जैसे बर्तनों के हत्थे बनाने में।
In simple words: लकड़ी और प्लास्टिक गर्मी को नहीं फैलने देते, इसलिए वे जल्दी गर्म नहीं होते।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि कुचालक पदार्थ ऊष्मा को रोकते हैं, जिससे वे गर्म नहीं होते और हमें गर्म वस्तुओं को पकड़ने में मदद करते हैं।
Question 4. खाना पकाने के बर्तन धातु के क्यों बनाए जाते हैं। तथा उनके हत्थे लकड़ी या ऐबोनाइट के क्यों बनाए जाते हैं?
Answer: खाना बनाने के बर्तन धातुओं (जैसे एल्यूमीनियम, लोहा) से बनाए जाते हैं क्योंकि धातुएँ गर्मी की सुचालक होती हैं। इससे खाना जल्दी पकता है। वहीं, इन बर्तनों के हत्थे लकड़ी या ऐबोनाइट के बनाए जाते हैं क्योंकि ये चीज़ें गर्मी की कुचालक या ऊष्मारोधी होती हैं। जब बर्तन गर्म होते हैं, तो लकड़ी या ऐबोनाइट के हत्थे गर्म नहीं होते, जिससे उन्हें आसानी से पकड़ा जा सकता है और हाथ नहीं जलते। यह सुरक्षा और दक्षता दोनों सुनिश्चित करता है।
In simple words: खाना पकाने के बर्तन धातु के बनते हैं ताकि खाना जल्दी पके। हत्थे लकड़ी या ऐबोनाइट के होते हैं क्योंकि ये गर्मी को नहीं फैलने देते, जिससे हाथ नहीं जलते।
🎯 Exam Tip: इस उत्तर में ऊष्मा के चालक और कुचालक दोनों गुणों का सही उदाहरण और उपयोग समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 5. स्टेनलेस स्टील की कड़ाही में प्रायः ताँबे की तली क्यों लगायी जाती है ?
Answer: स्टेनलेस स्टील की कड़ाही में अक्सर तांबे की तली लगाई जाती है क्योंकि तांबा गर्मी का बहुत अच्छा चालक होता है। स्टेनलेस स्टील की तुलना में तांबा गर्मी को ज़्यादा तेज़ी से फैलाता है। इससे खाना जल्दी और एक समान तरीके से पकता है। तांबे की तली से गर्मी पूरे बर्तन में अच्छी तरह फैलती है, जिससे ऊर्जा की बचत भी होती है।
In simple words: स्टेनलेस स्टील की कड़ाही में तांबे की तली इसलिए लगाई जाती है क्योंकि तांबा गर्मी को अच्छे से और तेज़ी से फैलाता है, जिससे खाना जल्दी पकता है।
🎯 Exam Tip: तांबे की उच्च ऊष्मा चालकता को स्पष्ट रूप से बताना और इसे स्टेनलेस स्टील के बर्तनों में उपयोग करने के लाभों (जैसे तेज़ और एक समान खाना पकाना) को जोड़ना महत्वपूर्ण है।
Question 6. गर्मी के दिनों में धूप से गर्म हुए फर्श पर दरी या कालीन बिछाकर चलना कम कष्टदायक क्यों होता है ?
Answer: कपड़ा गर्मी का कुचालक या ऊष्मारोधी होता है। इसका मतलब है कि कपड़ा अपने अंदर से गर्मी को आसानी से नहीं जाने देता। जब गर्मी के दिनों में धूप से गर्म हुए फर्श पर दरी या कालीन बिछाकर चलते हैं, तो दरी फर्श की गर्मी को हमारे पैरों तक पहुंचने से रोकती है। इस कारण से, गर्म फर्श पर नंगे पैर चलने की तुलना में दरी या कालीन पर चलना कम कष्टदायक होता है। यह एक इन्सुलेशन का काम करता है।
In simple words: गर्मी के दिनों में गर्म फर्श पर दरी या कालीन बिछाने से चलना कम कष्टदायक होता है क्योंकि कपड़ा गर्मी को हमारे पैरों तक पहुंचने से रोकता है।
🎯 Exam Tip: कपड़े के ऊष्मा कुचालक गुण और उसके इन्सुलेशन प्रभाव को समझाना, इस प्रश्न का मुख्य उत्तर है।
गतिविधि-7: (पृष्ठ 152)
Question 1. जल में रंगीन धाराएँ क्यों बनती हैं ?
Answer: जब पानी के बर्तन के पेंदे को गर्म करते हैं, तो नीचे के पानी के अणु गर्मी पाकर हल्के हो जाते हैं और ऊपर की ओर उठते हैं। अपने साथ वे लाल दवा के क्रिस्टल या चाय के रंगीन कणों को भी ऊपर ले जाते हैं। इसी समय, ऊपर के ठंडे और भारी अणु नीचे की ओर आने लगते हैं ताकि गर्म होने वाली जगह ले सकें। इस लगातार ऊपर-नीचे की गति के कारण पानी में रंगीन धाराएँ बनती हुई दिखती हैं। यह संवहन धारा का उदाहरण है।
In simple words: जल में रंगीन धाराएँ तब बनती हैं जब गर्म पानी के हल्के अणु ऊपर उठते हैं और ठंडे, भारी अणु नीचे आते हैं।
🎯 Exam Tip: संवहन धाराओं को स्पष्ट करने के लिए गर्म और ठंडे पानी के घनत्व के अंतर और कणों की गति को समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 3. संवहन विधि में ऊष्मा संचरण किस प्रकार होता है ?
Answer: संवहन विधि में गर्मी का फैलना तरल और गैसीय पदार्थों में होता है। इस विधि में, पदार्थ के अणु खुद गर्मी पाकर गर्म होते हैं, हल्के हो जाते हैं और ऊपर की ओर चले जाते हैं। उनकी जगह लेने के लिए, ठंडे और भारी अणु नीचे आते हैं। इस तरह, अणुओं के स्वयं चलने से गर्मी एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाती है। यह प्रक्रिया एक चक्र बनाती है।
In simple words: संवहन विधि में, तरल या गैस के अणु खुद चलकर गर्मी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं।
🎯 Exam Tip: संवहन में, अणुओं का वास्तविक स्थानांतरण मुख्य विशेषता है, जो चालन से अलग है जहाँ अणु अपनी जगह पर रहते हुए ऊर्जा पास करते हैं।
Question 4. वायु में ऊष्मा संचरण किस विधि से होता है ?
Answer: हवा में गर्मी का फैलना मुख्य रूप से संवहन (convection) विधि से होता है। जब हवा का एक हिस्सा गर्म होता है, तो वह हल्का होकर ऊपर उठ जाता है। उसकी जगह ठंडी और भारी हवा नीचे आती है। इस तरह हवा के कणों के चलने से गर्मी एक जगह से दूसरी जगह जाती है।
In simple words: वायु में गर्मी संवहन विधि से फैलती है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि गैसों में (जैसे हवा में) ऊष्मा संचरण की प्रमुख विधि संवहन है, जहाँ गर्म हवा ऊपर उठती है और ठंडी हवा नीचे आती है।
अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. ऊष्मा चालकता अधिक होती है
(a) लकड़ी में
(b) लोहे में
(c) ताँबे में
(d) मिट्टी में
Answer: (c) ताँबे में
In simple words: तांबे में गर्मी सबसे अच्छे से फैलती है, क्योंकि यह गर्मी का बहुत अच्छा चालक है।
🎯 Exam Tip: धातुओं में, तांबा ऊष्मा और विद्युत दोनों का बहुत अच्छा चालक होता है, जो इसे कई उपयोगों के लिए आदर्श बनाता है।
Question 2. ऊष्मा संचरण तीव्र गति से होता है
(a) चालन में
(b) संवहन में
(c) विकिरण में
(d) स्वतः
Answer: (c) विकिरण में
In simple words: गर्मी सबसे तेज़ी से विकिरण विधि से फैलती है। यह प्रकाश की गति से होता है।
🎯 Exam Tip: विकिरण एकमात्र ऐसी विधि है जिसमें ऊष्मा के संचरण के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती और यह प्रकाश की गति से यात्रा करती है।
Question 3. सूर्य से पृथ्वी तक ऊष्मा पहुँचती है
Answer: (स) विकिरण द्वारा
In simple words: सूर्य से धरती तक गर्मी विकिरण के ज़रिए आती है।
🎯 Exam Tip: सूर्य से पृथ्वी तक ऊष्मा का संचरण विकिरण द्वारा ही संभव है क्योंकि बीच में कोई माध्यम (हवा या पानी) नहीं होता।
Question 4. ऊष्मा का कुचालक है।
(a) लोहो
(b) ताँबा
(c) ऐल्युमीनियम
(d) ऐबोनाइट
Answer: (d) ऐबोनाइट
In simple words: ऐबोनाइट गर्मी को नहीं फैलने देता, इसलिए यह गर्मी का कुचालक है।
🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि धातुएं चालक होती हैं जबकि प्लास्टिक (जैसे ऐबोनाइट) कुचालक होते हैं।
Question 5. वायु में ऊष्मा संचरण किस विधि से होता है ?
(a) चालन से
(b) संवहन से
(c) विकिरण से
(d) चालन और संवहन से
Answer: (b) संवहन से
In simple words: हवा में गर्मी संवहन के ज़रिए फैलती है।
🎯 Exam Tip: गैसों और तरल पदार्थों में ऊष्मा का स्थानांतरण मुख्य रूप से संवहन द्वारा होता है, जहाँ पदार्थ के कण खुद गर्मी लेकर गति करते हैं।
रिक्त स्थान
Question. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
(i) मौसम की रिपोर्ट में ........... तापमापी का प्रयोग किया जाता है।
(ii) दो वस्तुओं में ऊष्मा का आदान-प्रदान तब तक होता है जब तक कि उनका ताप..........न हो जाये।
(iii) ठोसों में ऊष्मा का संचरण ............... द्वारा होता है।
(iv) द्रव तथा गैसों में ऊष्मा का संचरण ................ द्वारा होता है।
Answer:
(i) मौसम की रिपोर्ट में अधिकतम-न्यूनतम तापमापी का प्रयोग किया जाता है।
(ii) दो वस्तुओं में ऊष्मा का आदान-प्रदान तब तक होता है जब तक कि उनका ताप समान न हो जाये।
(iii) ठोसों में ऊष्मा का संचरण चालन द्वारा होता है।
(iv) द्रव तथा गैसों में ऊष्मा का संचरण संवहन द्वारा होता है।
In simple words: मौसम जानने के लिए खास थर्मामीटर का उपयोग होता है। गर्मी तब तक फैलती है जब तक चीजें एक ही तापमान पर न आ जाएँ। ठोस में गर्मी चालन से, और तरल व गैस में संवहन से फैलती है।
🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि ऊष्मा का प्रवाह हमेशा तापीय संतुलन की ओर होता है, और विभिन्न माध्यमों में संचरण की विधियाँ अलग-अलग होती हैं।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 2. वस्तु का ताप किस उपकरण से ज्ञात करते हैं ?
Answer: वस्तु का तापमान तापमापी (थर्मामीटर) से ज्ञात करते हैं। तापमापी एक ऐसा उपकरण है जो तापमान को सटीक रूप से मापने में मदद करता है।
In simple words: किसी चीज़ का तापमान तापमापी से जानते हैं।
🎯 Exam Tip: तापमापी एक वैज्ञानिक उपकरण है जो तापमान को वस्तुनिष्ठ रूप से मापता है, हमारी इंद्रियों की व्यक्तिपरकता के विपरीत।
Question 3. मनुष्य के शरीर का ताप किस तापमापी से ज्ञात करते हैं ?
Answer: मनुष्य के शरीर का तापमान डॉक्टरी थर्मामीटर (तापमापी) से ज्ञात करते हैं। यह एक विशेष प्रकार का तापमापी है जिसे मानव शरीर के तापमान को मापने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
In simple words: इंसान के शरीर का तापमान डॉक्टरी थर्मामीटर से नापते हैं।
🎯 Exam Tip: डॉक्टरी तापमापी की अपनी एक खास सीमा होती है, जो मानव शरीर के सामान्य तापमान के आसपास होती है, और इसमें एक किंक होता है जो पारे को अपने आप नीचे गिरने से रोकता है।
Question 4. मानव शरीर का औसत ताप कितना होता है ?
Answer: मानव शरीर का औसत तापमान 37°C या 98.6°F होता है। यह एक स्वस्थ व्यक्ति का सामान्य तापमान है।
In simple words: इंसान के शरीर का औसत तापमान 37°C या 98.6°F होता है।
🎯 Exam Tip: सेल्सियस और फॉरेनहाइट दोनों पैमानों पर मानव शरीर का सामान्य तापमान याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 5. तापमापी का प्रयोग करते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए ?
Answer: तापमापी का उपयोग करते समय कुछ खास बातें याद रखनी चाहिए। इसके बल्ब वाले हिस्से को कभी भी सीधे आग की लौ पर या उसके बहुत करीब नहीं रखना चाहिए। साथ ही, इसे धूप में बहुत देर तक भी नहीं रखना चाहिए, वरना यह टूट सकता है। हमेशा तापमापी को सावधानी से संभालना चाहिए।
In simple words: तापमापी को आग या धूप में सीधे नहीं रखना चाहिए, वरना वह टूट सकता है।
🎯 Exam Tip: तापमापी को अत्यधिक गर्मी या सीधे सूर्य के प्रकाश से दूर रखना, उसके सही कार्य और लंबी उम्र के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 6. ठोस वस्तुओं में ऊष्मा का संचरण किस विधि से होता है ?
Answer: ठोस वस्तुओं में गर्मी का फैलना मुख्य रूप से चालन विधि से होता है। चालन में, पदार्थ के अणु अपनी जगह पर रहते हुए कंपन करते हैं और अपनी गर्मी अगले अणु तक पहुंचाते हैं।
In simple words: ठोस चीज़ों में गर्मी चालन विधि से फैलती है।
🎯 Exam Tip: चालन विधि में गर्मी का स्थानांतरण पदार्थ के कणों के आपस में टकराने से होता है, न कि कणों के चलने से।
Question 7. द्रव तथा गैसों में ऊष्मा का संचरण किस विधि से होता है ?
Answer: तरल और गैसीय पदार्थों में गर्मी का फैलना मुख्य रूप से संवहन विधि से होता है। इसमें पदार्थ के गर्म अणु खुद चलकर ठंडी जगह की ओर जाते हैं और ठंडे अणु उनकी जगह लेते हैं।
In simple words: तरल और गैस में गर्मी संवहन विधि से फैलती है।
🎯 Exam Tip: संवहन तरल और गैसों में प्रभावी होता है क्योंकि उनके अणु स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं और गर्मी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा सकते हैं।
Question 8. सूर्य से ऊष्मा पृथ्वी तक किस विधि से पहुँचती है?
Answer: सूर्य से धरती तक गर्मी विकिरण विधि से पहुँचती है। विकिरण में गर्मी को फैलने के लिए किसी माध्यम की ज़रूरत नहीं होती। यह खाली जगह में भी फैल सकती है।
In simple words: सूरज से धरती तक गर्मी विकिरण से आती है।
🎯 Exam Tip: विकिरण ही एकमात्र ऐसी ऊष्मा संचरण विधि है जिसके लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती, यह अंतरिक्ष के निर्वात (vacuum) से भी गुजर सकती है।
Question 10. ऊनी कपड़े हमारा सर्दी से बचाव क्यों करते हैं ?
Answer: हवा और ऊनी कपड़े दोनों ही गर्मी के कुचालक होते हैं। ऊनी कपड़ों में बहुत सारी हवा फंसी होती है। यह फंसी हुई हवा और ऊन मिलकर हमारे शरीर की गर्मी को बाहर नहीं जाने देते। इस तरह, ऊनी कपड़े हमें सर्दियों में ठंड से बचाते हैं और शरीर को गर्म रखते हैं।
In simple words: ऊनी कपड़ों में फंसी हवा और ऊन दोनों गर्मी को बाहर नहीं जाने देते, इसलिए ये हमें ठंड से बचाते हैं।
🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि ऊन की बनावट में फंसी हवा एक इन्सुलेटर के रूप में कार्य करती है, जो शरीर की गर्मी को बाहर निकलने से रोकती है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. तापमापी किसे कहते हैं? ये कितने प्रकार के होते हैं ?
Answer: जिस उपकरण का उपयोग वस्तुओं का तापमान जानने के लिए किया जाता है, उसे तापमापी (Thermometer) कहते हैं। तापमापी कई तरह के होते हैं। कुछ मुख्य प्रकार हैं: प्रयोगशाला तापमापी, गैस तापमापी, ऐल्कोहॉल तापमापी, और अंकीय (डिजिटल) तापमापी। हर प्रकार का तापमापी अलग-अलग ज़रूरतों के हिसाब से बनाया गया है।
In simple words: तापमापी वह यंत्र है जिससे तापमान नापते हैं। यह कई तरह के होते हैं, जैसे प्रयोगशाला, गैस और डिजिटल तापमापी।
🎯 Exam Tip: तापमापी की परिभाषा और कम से कम तीन प्रकारों के नाम याद रखना इस प्रश्न के लिए पर्याप्त है, क्योंकि विभिन्न प्रकारों का उद्देश्य अलग-अलग उपयोगों के लिए होता है।
Question 2. अंकीय (डिजीटल) तापमापी का प्रयोग क्यों सुरक्षित है?
Answer: अंकीय (डिजिटल) तापमापी का उपयोग करना ज़्यादा सुरक्षित है क्योंकि ये पारे का उपयोग नहीं करते। पारा एक जहरीला पदार्थ होता है और अगर पारे वाला तापमापी टूट जाए, तो पारा बिखर सकता है। अगर यह पारा गलती से किसी के खाने में चला जाए, तो शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसलिए, पारे वाले तापमापी की जगह अंकीय तापमापी का उपयोग करना ज़्यादा सुरक्षित विकल्प है।
In simple words: अंकीय तापमापी सुरक्षित हैं क्योंकि उनमें पारा नहीं होता है। पारा जहरीला होता है और अगर थर्मामीटर टूट जाए तो यह खतरनाक हो सकता है।
🎯 Exam Tip: डिजिटल थर्मामीटर की सुरक्षा का मुख्य कारण उनमें पारे का न होना है, जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए संभावित जोखिमों को कम करता है।
Question 3. दो वस्तुओं के मध्य ऊष्मा का आदान-प्रदान कब तक होता है ?
Answer: दो वस्तुओं के बीच गर्मी का आदान-प्रदान तब तक होता रहता है, जब तक कि दोनों वस्तुओं का तापमान समान न हो जाए। दूसरे शब्दों में, गर्म और ठंडी वस्तुओं के बीच गर्मी का प्रवाह तब तक जारी रहता है, जब तक वे दोनों एक ही तापमान पर न पहुँच जाएँ। इस स्थिति को ऊष्मीय संतुलन कहते हैं।
In simple words: दो चीज़ों के बीच गर्मी का लेन-देन तब तक होता है जब तक उनका तापमान एक जैसा न हो जाए।
🎯 Exam Tip: ऊष्मा का प्रवाह हमेशा ऊष्मीय संतुलन (thermal equilibrium) की ओर होता है, जहाँ सभी संपर्क में आने वाली वस्तुओं का तापमान समान हो जाता है।
Question 4. मकानों में संवातन (रोशनदान) का क्या महत्व है ?
Answer: मकानों में रोशनदान (संवातन) का बहुत महत्व है। जब हम सांस लेते हैं, तो हमारे शरीर से निकली हुई हवा सामान्य हवा से गर्म और हल्की होती है। यह गर्म हवा ऊपर उठकर छत के पास बने रोशनदानों से बाहर निकल जाती है। इससे घर के अंदर की हवा ताजी रहती है क्योंकि खिड़कियों और दरवाजों से ठंडी और ताजी हवा अंदर आती रहती है। यह हवा के प्राकृतिक चक्र को बनाए रखता है।
In simple words: रोशनदान घरों में ज़रूरी हैं क्योंकि वे गर्म, गंदी हवा को बाहर निकालते हैं और ताजी हवा को अंदर आने देते हैं।
🎯 Exam Tip: रोशनदान संवहन के सिद्धांत पर काम करते हैं, जहाँ गर्म हवा ऊपर उठकर बाहर निकल जाती है और ठंडी हवा नीचे से प्रवेश करती है, जिससे वेंटिलेशन बना रहता है।
Question 6. समुद्र समीर तथा थल समीर किसे कहते हैं ?
Answer: दिन के समय, जमीन (स्थल भाग) समुद्र के पानी से ज़्यादा गर्म होती है. इस वजह से हवा समुद्र से जमीन की ओर चलती है. इसे समुद्र समीर कहते हैं. रात में जमीन जल्दी ठंडी हो जाती है. इसलिए हवा जमीन से समुद्र की ओर चलती है. इसे थल समीर कहते हैं. यह एक प्राकृतिक वायु संचरण है जो पृथ्वी की सतह पर तापमान के अंतर के कारण होता है.
In simple words: दिन में, हवा समुद्र से जमीन की ओर चलती है (समुद्र समीर) क्योंकि जमीन गर्म होती है. रात में, हवा जमीन से समुद्र की ओर चलती है (थल समीर) क्योंकि जमीन जल्दी ठंडी हो जाती है.
🎯 Exam Tip: याद रखें कि हवा हमेशा अधिक दबाव वाले क्षेत्र से कम दबाव वाले क्षेत्र की ओर चलती है, और गर्म हवा का दबाव कम होता है.
Question 7. रेगिस्तान में दिन बहुत गर्म तथा रातें बहुत ठण्डी क्यों होती हैं ?
Answer: रेगिस्तान की रेत गर्मी को बहुत अच्छे से सोखती है और बहुत अच्छे से छोड़ती भी है. दिन में, रेत सूरज की गर्मी को सोखकर जल्दी गर्म हो जाती है. रात में, यह अपनी गर्मी को बहुत जल्दी बाहर छोड़ देती है और तेजी से ठंडी हो जाती है. इसी कारण रेगिस्तान में दिन बहुत गर्म और रातें बहुत ठंडी होती हैं. यह रेत की विशिष्ट ऊष्मा क्षमता के कम होने का परिणाम है.
In simple words: रेगिस्तान की रेत दिन में सूरज की गर्मी को जल्दी सोखकर गर्म हो जाती है, और रात में उसी गर्मी को जल्दी छोड़ कर ठंडी हो जाती है.
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय रेत के "अच्छे अवशोषक" और "अच्छे उत्सर्जक" गुणों पर ध्यान दें.
Question 8. गर्मियों में सफेद कपड़े तथा जाड़ों में रंगीन कपड़े क्यों सुखदायी होते है ?
Answer: सफेद कपड़े ऊष्मा के विकिरण को ज़्यादातर परावर्तित कर देते हैं और केवल थोड़ा ही सोखते हैं. इसलिए गर्मियों में सफेद कपड़े पहनने से हमें कम गर्मी लगती है. इसके उलट, रंगीन कपड़े ऊष्मा के अच्छे अवशोषक होते हैं. वे ज़्यादा गर्मी सोखते हैं. इसलिए सर्दियों में रंगीन कपड़े पहनना आरामदायक होता है क्योंकि वे हमें गर्म रखते हैं. यह कपड़ों के रंग और उनके ऊष्मा अवशोषण गुणों पर निर्भर करता है.
In simple words: गर्मियों में सफेद कपड़े गर्मी को दूर भगाते हैं, जिससे ठंडक महसूस होती है. सर्दियों में रंगीन कपड़े गर्मी को सोखते हैं, जिससे हम गर्म रहते हैं.
🎯 Exam Tip: परावर्तन और अवशोषण के सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से बताएं और उन्हें सही मौसम से जोड़ें.
Question 9. बादलों वाली रात में स्वच्छ आकाश वाली रात की तुलना में अधिक गर्मी क्यों होती है ?
Answer: दिन के समय सूरज से पृथ्वी गर्म हो जाती है, और रात में यह अपनी गर्मी को विकिरण के रूप में बाहर निकालती है. जब आकाश साफ होता है, तो यह गर्मी अंतरिक्ष में चली जाती है और पृथ्वी का तापमान कम हो जाता है. लेकिन जब बादल होते हैं, तो वे बादलों से टकराकर पृथ्वी पर वापस आ जाती है. यह गर्मी वातावरण में रुक जाती है, जिससे बादल वाली रातें साफ रातों की तुलना में ज़्यादा गर्म होती हैं. बादल एक कंबल की तरह काम करते हैं जो गर्मी को बाहर जाने से रोकते हैं.
In simple words: साफ रात में गर्मी अंतरिक्ष में चली जाती है, पर बादलों वाली रात में बादल गर्मी को वापस पृथ्वी की ओर भेज देते हैं, जिससे ज़्यादा गर्मी महसूस होती है.
🎯 Exam Tip: बादलों के "कंबल" प्रभाव और विकिरण के परावर्तन की अवधारणा को समझाना ज़रूरी है.
Question 10. पहाड़ गर्मियों में भी ठण्डे रहते हैं, क्यों ?
Answer: पहाड़ों की सतह समतल नहीं होती है, और उनके ज़्यादातर हिस्से छाया में ढके रहते हैं. साथ ही, पहाड़ों पर सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं. तिरछी किरणें कम गर्मी देती हैं और छाया वाले हिस्से सूरज की सीधी रोशनी से बचते हैं, जिससे वे गर्मियों में भी ठंडे रहते हैं. ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान भी कम होता जाता है.
In simple words: पहाड़ों पर सूरज की किरणें तिरछी पड़ती हैं और उनकी ज़्यादातर सतह छाया में रहती है, इसलिए वे गर्मियों में भी ठंडे रहते हैं.
🎯 Exam Tip: ऊँचाई के साथ तापमान में कमी और सूर्य की किरणों के कोण, दोनों कारकों को शामिल करें.
Question 1. ऊष्मा संचरण किसे कहते हैं ? ऊष्मा संचरण की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए।
Answer: ऊष्मा संचरण का मतलब है गर्मी का एक जगह से दूसरी जगह जाना. जब अलग-अलग तापमान वाली चीज़ों को एक साथ रखा जाता है, तो गर्मी ज़्यादा गर्म चीज़ से कम गर्म चीज़ की ओर जाती है. तापमान के अंतर के कारण ऊष्मा का यह बहाव ही ऊष्मा संचरण कहलाता है. ऊष्मा संचरण की तीन मुख्य विधियाँ हैं:
1. **चालन (Conduction):** यह ऊष्मा संचरण की वह विधि है जिसमें ऊष्मा एक अणु से दूसरे अणु में जाती है, लेकिन अणु खुद अपनी जगह नहीं छोड़ते. यह विधि ज़्यादातर ठोस चीज़ों में होती है, जैसे धातुएँ और पारा.
2. **संवहन (Convection):** यह ऊष्मा संचरण की वह विधि है जिसमें माध्यम के कण ऊष्मा लेकर अपनी जगह छोड़ देते हैं और कम तापमान वाली जगह पर चले जाते हैं. ठंडे कण उनकी जगह ले लेते हैं. यह विधि द्रवों और गैसों में होती है.
3. **विकिरण (Radiation):** यह ऊष्मा संचरण की वह विधि है जिसमें ऊष्मा ज़्यादा गर्म चीज़ से कम गर्म चीज़ की ओर बिना किसी माध्यम को प्रभावित किए जाती है. विकिरण के लिए किसी माध्यम की ज़रूरत नहीं होती. सूरज से पृथ्वी तक ऊष्मा विकिरण द्वारा ही आती है.
In simple words: ऊष्मा संचरण का मतलब है गर्मी का एक जगह से दूसरी जगह जाना. यह चालन (ठोस में), संवहन (द्रव और गैस में), और विकिरण (बिना माध्यम के) इन तीन तरीकों से होता है.
🎯 Exam Tip: तीनों विधियों को उनके माध्यम और कणों की गति के आधार पर अलग-अलग बताएं.
Question 2. ऊष्मा संचरण की संवहन विधि के क्या उपयोग हैं? समझाइए।
Answer: संवहन विधि का उपयोग कई जगहों पर होता है जहाँ हवा या पानी गर्म होकर ऊपर उठता है और ठंडा होकर नीचे आता है, जिससे गर्मी फैलती है. इसके कुछ मुख्य उपयोग इस प्रकार हैं:
1. **संवातन (रोशनदान):** हम जो सांस छोड़ते हैं, वह हवा सामान्य हवा से गर्म और हल्की होती है. यह गर्म हवा ऊपर उठकर छत के पास बने रोशनदानों (संवातन) से बाहर निकल जाती है. इससे खिड़कियों और दरवाजों से ताज़ी हवा अंदर आती है, जिससे कमरा ठंडा रहता है.
2. **समुद्र समीर और थल समीर:** दिन में जमीन समुद्र से ज़्यादा गर्म होती है, इसलिए समुद्र से हवा जमीन की ओर चलती है, जिसे समुद्र समीर कहते हैं. रात में जमीन जल्दी ठंडी हो जाती है, इसलिए जमीन से हवा समुद्र की ओर चलती है, जिसे थल समीर कहते हैं. ये दोनों भी संवहन के कारण होते हैं.
3. **गर्म जल की धाराएँ:** ध्रुवों की तुलना में भूमध्य रेखा पर सूरज की किरणें सीधी पड़ती हैं, जिससे महासागरों में भूमध्य रेखा के पास पानी ज़्यादा गर्म हो जाता है. यह गर्म पानी हल्का होकर ऊपर तैरता हुआ ध्रुवीय प्रदेशों की ओर बहता है. इसे गर्म जल की धारा कहते हैं. ध्रुवों के आसपास का ठंडा पानी भारी होकर नीचे से भूमध्य रेखा की ओर बहता है, जिसे ठंडे जल की धारा कहते हैं.
4. **पवन चलना:** हवा हमेशा ज़्यादा वायु दाब वाले स्थान से कम वायु दाब वाले स्थान की ओर चलती है. जब कोई जगह ज़्यादा गर्म होती है, तो वहाँ की हवा गर्म होकर ऊपर उठती है और फैलती है, जिससे वहाँ का वायु दाब कम हो जाता है. तब ठंडी जगह से गर्म जगह की ओर हवा चलने लगती है. गर्मी में मानसूनी हवाएँ भी इसी कारण चलती हैं.
In simple words: संवहन विधि से गर्म हवा या पानी ऊपर उठता है और ठंडा नीचे आता है. इसका उपयोग रोशनदानों में, समुद्र समीर और थल समीर बनने में, गर्म पानी की धाराओं में और हवा के चलने में होता है.
🎯 Exam Tip: संवहन के उदाहरणों को स्पष्ट रूप से समझाएं, खासकर वायुमंडल और जलमंडल में इसके महत्व पर जोर दें.
Question 3. जब वस्तु पर ऊष्मीय विकिरण गिरते हैं तब कौन-सी क्रियाएँ होती हैं ? समझाइए।
Answer: जब किसी वस्तु पर ऊष्मा के विकिरण (गर्मी की किरणें) पड़ते हैं, तो मुख्य रूप से तीन क्रियाएँ होती हैं:
1. **परावर्तन (Reflection):** वस्तु पर पड़ने वाले विकिरण ऊर्जा का कुछ हिस्सा वस्तु से टकराकर वापस लौट जाता है. चमकीली वस्तुएँ, जैसे धातुएँ, ऊष्मा की अच्छी परावर्तक होती हैं.
2. **अवशोषण (Absorption):** विकिरण ऊर्जा का कुछ हिस्सा वस्तु द्वारा सोख लिया जाता है. जब कोई वस्तु गर्मी को सोखती है, तो वह गर्म हो जाती है और उसका तापमान बढ़ जाता है. धूप में हमें गर्मी इसी कारण लगती है. सफेद या हल्के रंग की वस्तुएँ विकिरण कम सोखती हैं, जबकि काले या गहरे रंग की वस्तुएँ ज़्यादा सोखती हैं.
3. **पारगमन (Transmission):** जब विकिरण किसी पारदर्शी वस्तु, जैसे कांच, पर पड़ते हैं, तो अवशोषण और परावर्तन के साथ-साथ उनका कुछ हिस्सा वस्तु के आर-पार भी चला जाता है. यह ऊर्जा का एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश है.
In simple words: जब किसी चीज़ पर गर्मी की किरणें पड़ती हैं, तो वह उन्हें या तो वापस भेज देती है (परावर्तन), सोख लेती है (अवशोषण), या अपने आर-पार जाने देती है (पारगमन).
🎯 Exam Tip: परावर्तन, अवशोषण और पारगमन के बीच अंतर को स्पष्ट करें और प्रत्येक का एक सरल उदाहरण दें.
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Step-by-Step Textbook Answers: Class 7 Science Chapter 15 ताप एवं ऊष्मा
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