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Detailed Chapter 14 प्रकाश का परावर्तन RBSE Solutions for Class 7 Science
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Class 7 Science Chapter 14 प्रकाश का परावर्तन RBSE Solutions PDF
सही विकल्प का चयन कीजिए
Question 1. वक्रता केन्द्र से दूर स्थित वस्तु का अवतल दर्पण से प्रतिबिम्ब बनता है
(क) वक्रता केन्द्र पर
(ख) फोकस बिन्दु पर
(ग) अनन्त दूरी पर
(घ) वक्रता केन्द्र व फोकस बिन्दु के मध्य
Answer: (घ) वक्रता केन्द्र व फोकस बिन्दु के मध्य
In simple words: जब कोई वस्तु अवतल दर्पण से वक्रता केंद्र से दूर रखी जाती है, तो उसका प्रतिबिम्ब वक्रता केंद्र और फोकस बिंदु के बीच में बनता है। यह प्रतिबिम्ब वास्तविक, उल्टा और वस्तु से छोटा होता है।
🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण के लिए विभिन्न स्थितियों में प्रतिबिम्ब की प्रकृति, स्थिति और आकार को याद रखना महत्वपूर्ण है। किरण आरेख का अभ्यास करने से इसे समझना आसान हो जाता है।
Question 2. वाहनों में पीछे का दृश्य देखने के लिए प्रयोग करते
(क) अवतल दर्पण का
(ख) उत्तल दर्पण का
(ग) समतल दर्पण का
(घ) ये सभी
Answer: (ख) उत्तल दर्पण का
In simple words: वाहनों में पीछे का दृश्य देखने के लिए उत्तल दर्पण का उपयोग किया जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उत्तल दर्पण हमेशा सीधा, छोटा और आभासी प्रतिबिम्ब बनाता है, जिससे ड्राइवर को पीछे का बड़ा क्षेत्र दिखाई देता है।
🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण का बड़ा दृष्टि-क्षेत्र ड्राइवर को पीछे से आने वाले वाहनों को आसानी से देखने में मदद करता है, जो सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।
Question 3. समतल दर्पण के सामने रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब बनता
(क) वस्तु से दर्पण के मध्य की दूरी के बराबर दूरी पर
(ख) दुगुनी दूरी पर
(ग) आधी दूरी पर
(घ) चार गुना दूरी पर ।
Answer: (क) वस्तु से दर्पण के मध्य की दूरी के बराबर दूरी पर
In simple words: समतल दर्पण में वस्तु का प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है, जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने रखी होती है। यह हमेशा वस्तु के आकार का होता है।
🎯 Exam Tip: समतल दर्पण में बनने वाला प्रतिबिम्ब सीधा और आभासी होता है। इसकी दूरी वस्तु से दर्पण की दूरी के बिल्कुल बराबर होती है।
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
Question 1. उत्तल दर्पण से सदैव सीधा, छोटा व आभासी प्रतिबिम्ब बनता है।
Answer: उत्तल दर्पण से हमेशा सीधा, छोटा और आभासी प्रतिबिम्ब बनता है। यह दर्पण अपने बड़े दृष्टि-क्षेत्र के कारण वाहनों में पीछे देखने के लिए उपयोग किया जाता है।
In simple words: उत्तल दर्पण से हमेशा सीधा, छोटा और आभासी प्रतिबिम्ब बनता है।
🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब की प्रकृति हमेशा निश्चित होती है: सीधा, आभासी और वस्तु से छोटा, चाहे वस्तु कहीं भी रखी हो।
Question 2. दो समतल दर्पणों के मध्य 0 डिग्री का कोण होने पर अनन्त प्रतिबिम्ब बनते हैं।
Answer: जब दो समतल दर्पण एक-दूसरे के समानांतर रखे जाते हैं, तो उनके बीच 0 डिग्री का कोण होता है और वस्तु के अनन्त प्रतिबिम्ब बनते हैं। ऐसी स्थिति में, प्रत्येक प्रतिबिम्ब अगले प्रतिबिम्ब के लिए वस्तु का काम करता है।
In simple words: अगर दो समतल दर्पणों को एक-दूसरे के बिल्कुल सामने (समानांतर) रखा जाए, तो हमें अनगिनत प्रतिबिम्ब दिखाई देते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रतिबिम्बों की संख्या ज्ञात करने का सूत्र \( N = \frac{360^{\circ}}{\theta} - 1 \) है। यदि \(\theta = 0^{\circ}\) हो, तो प्रतिबिम्बों की संख्या अनन्त होती है।
Question 3. अपना प्रतिबिम्ब देखने के लिए समतल दर्पण का उपयोग करते हैं।
Answer: हम अपना प्रतिबिम्ब देखने के लिए समतल दर्पण का उपयोग करते हैं। समतल दर्पण में बना प्रतिबिम्ब वस्तु के आकार का, सीधा और आभासी होता है, जैसा कि हम खुद को देखते हैं।
In simple words: हम खुद को देखने के लिए समतल दर्पण का इस्तेमाल करते हैं।
🎯 Exam Tip: समतल दर्पण हमारे घरों में सामान्यतः उपयोग होते हैं क्योंकि वे हमारी छवि को वास्तविक आकार और सीधी दिशा में दिखाते हैं।
लघु उत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. परावर्तन किसे कहते हैं ?
Answer: प्रकाश किरणों का किसी दर्पण या किसी अन्य चमकीली सतह से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौटने की घटना को प्रकाश का परावर्तन (Reflection) कहते हैं। यह घटना प्रकाश को दिशा बदलने में मदद करती है।
In simple words: जब प्रकाश किसी चिकनी चीज से टकराकर वापस लौटता है, तो इसे परावर्तन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: परावर्तन के लिए सतह का चिकना और पॉलिश किया हुआ होना जरूरी है ताकि प्रकाश व्यवस्थित तरीके से वापस लौटे।
Question 2. एक अवतल दर्पण की फोकस दूरी 20 सेन्टीमीटर है, उसकी वक्रता त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
Answer: अवतल दर्पण की फोकस दूरी \( f = 20 \) सेन्टीमीटर है।
वक्रता त्रिज्या (R) और फोकस दूरी (f) के बीच संबंध है: \( R = 2 \times f \)
इसलिए, \( R = 2 \times 20 \) सेन्टीमीटर
\( R = 40 \) सेन्टीमीटर
In simple words: एक अवतल दर्पण की फोकस दूरी 20 सेन्टीमीटर है, तो उसकी वक्रता त्रिज्या 40 सेन्टीमीटर होगी, क्योंकि वक्रता त्रिज्या फोकस दूरी की दोगुनी होती है।
🎯 Exam Tip: यह याद रखें कि गोलीय दर्पण में फोकस दूरी (f) हमेशा वक्रता त्रिज्या (R) की आधी होती है, यानी \( f = \frac{R}{2} \) या \( R = 2f \)। यह संबंध सभी गोलीय दर्पणों (अवतल और उत्तल) के लिए मान्य है।
Question 3. परावर्तन के नियम लिखिए।
Answer: परावर्तन के दो मुख्य नियम हैं:
1. प्रथम नियम: आपतन कोण (i) और परावर्तन कोण (r) का मान हमेशा बराबर होता है। यानी, \( \text{आपतन कोण} (i) = \text{परावर्तन कोण} (r) \)।
2. द्वितीय नियम: आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब तीनों एक ही तल में स्थित होते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि परावर्तन एक व्यवस्थित तरीके से होता है।
In simple words: परावर्तन के दो नियम हैं: पहला, रोशनी जिस कोण पर टकराती है, उसी कोण पर वापस जाती है; दूसरा, टकराने वाली रोशनी, वापस जाने वाली रोशनी और बीच की सीधी रेखा (अभिलंब) सब एक ही जगह पर होते हैं।
🎯 Exam Tip: परावर्तन के नियम प्रकाश के व्यवहार को समझने के लिए मौलिक हैं। इन्हें सटीक रूप से याद रखना और किरण आरेख में इनका उपयोग करना महत्वपूर्ण है।
Question 4. समतल दर्पण में प्रतिबिम्ब में वस्तु (बिम्ब) को दायाँ भाग बायाँ दिखाई देने को क्या कहते हैं ?
Answer: समतल दर्पण में प्रतिबिम्ब में वस्तु का दायाँ भाग बायाँ दिखाई देता है और बायाँ भाग दायाँ दिखाई देता है। इस घटना को 'पाश्र्व परिवर्तन' कहते हैं। यह प्रभाव हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आसानी से देखा जा सकता है, जैसे एम्बुलेंस पर उल्टा लिखा हुआ "AMBULANCE" हमें सीधा दिखता है।
In simple words: जब हम समतल दर्पण में देखते हैं, तो हमारा दायाँ हाथ बायाँ और बायाँ हाथ दायाँ दिखाई देता है। इसे पाश्र्व परिवर्तन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: पाश्र्व परिवर्तन केवल समतल दर्पण में ही नहीं, बल्कि उन सभी प्रतिबिम्बों में होता है जिनमें प्रकाश का परावर्तन होता है। यह एक महत्वपूर्ण प्रकाशीय घटना है।
Question 5. अवतल और उत्तल दर्पण में बनावट एवं प्रतिबिम्ब की दृष्टि से क्या अन्तर होता है ?
Answer: अवतल और उत्तल दर्पण में बनावट और प्रतिबिम्ब की प्रकृति दोनों में अन्तर होता है, जिसे निम्न तालिका में समझाया गया है:
| विशेषता | अवतल दर्पण | उत्तल दर्पण |
|---|---|---|
| परावर्तक सतह | भीतरी (दबा हुआ) भाग परावर्तक होता है। | बाहरी (उभरा हुआ) भाग परावर्तक होता है। |
| प्रतिबिम्ब की प्रकृति | वस्तु की स्थिति के अनुसार वास्तविक, उल्टा और आभासी, सीधा दोनों प्रकार के प्रतिबिम्ब बनाता है। | हमेशा आभासी, सीधा और वस्तु से छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है। |
In simple words: अवतल दर्पण अंदर की ओर मुड़ा होता है और वास्तविक या आभासी प्रतिबिम्ब बना सकता है, जबकि उत्तल दर्पण बाहर की ओर मुड़ा होता है और हमेशा आभासी और छोटे प्रतिबिम्ब बनाता है।
🎯 Exam Tip: इन दोनों दर्पणों के बीच मुख्य अन्तर उनकी परावर्तक सतह की बनावट और उनके द्वारा बनाए गए प्रतिबिम्बों की प्रकृति में है। इनके उपयोग भी इसी अन्तर पर आधारित होते हैं।
दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. समतल दर्पण के सामने रखी वस्तु के प्रतिबिम्ब बनने की प्रक्रिया को सचित्र समझाइए।
Answer: समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब हमेशा आभासी, सीधा और वस्तु के आकार के बराबर होता है। यह दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने रखी होती है। समतल दर्पण के सामने रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब बनने की प्रक्रिया को नीचे दिए चित्र की मदद से समझा जा सकता है।
माना एक समतल दर्पण MN के सामने एक बिन्दु प्रकाश स्रोत O रखा गया है। चित्र के अनुसार बिन्दु O से चलने वाली दो किरणें OA तथा OC दर्पण पर आपतित होती हैं। हम दर्पण MN के बिन्दुओं A तथा C पर अभिलंब खींचते हैं। अब बिन्दुओं A तथा C पर परावर्तित किरणें AB तथा CD खींचते हैं। इन्हें आगे की ओर बढ़ाने पर ये किरणें नहीं मिलती हैं। अब इन्हें पीछे की ओर बढ़ाने पर जिस बिन्दु पर ये किरणें मिलती हुई प्रतीत होती हैं, उस बिन्दु को I से अंकित करते हैं। बिन्दु I वस्तु O का आभासी प्रतिबिम्ब है। हमें ये परावर्तित किरणें हमारी आँख को बिन्दु I से आती हुई प्रतीत होंगी। चूंकि परावर्तित किरणें वास्तव में I पर नहीं मिलतीं, बल्कि मिलती हुई प्रतीत होती हैं, इसलिए हम कहते हैं कि यह प्रतिबिम्ब आभासी है।
In simple words: समतल दर्पण में, वस्तु से निकलने वाली प्रकाश किरणें टकराकर ऐसे वापस आती हैं जैसे वे दर्पण के पीछे किसी एक बिंदु से आ रही हों। यही बिंदु वस्तु का आभासी प्रतिबिम्ब होता है, और यह दर्पण के पीछे उतनी ही दूर बनता है जितनी वस्तु सामने होती है।
🎯 Exam Tip: समतल दर्पण के किरण आरेख में, आपतित और परावर्तित किरणों को सही ढंग से दिखाना और आभासी प्रतिबिम्ब के लिए पीछे बढ़ाई गई रेखाओं को बिंदीदार दिखाना महत्वपूर्ण है।
Question 2. वास्तविक तथा आभासी प्रतिबिंबों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: वास्तविक और आभासी प्रतिबिम्बों में मुख्य अन्तर नीचे दी गई तालिका में समझाया गया है:
| क्र. सं. | वास्तविक प्रतिबिम्ब | आभासी प्रतिबिम्ब |
|---|---|---|
| 1. | यदि किसी बिन्दु से चलने वाली किरणें दर्पण से परावर्तन के पश्चात् किसी दूसरे बिन्दु पर वास्तव में मिलती हैं, तो यह प्रतिबिम्ब वास्तविक प्रतिबिम्ब कहलाता है। | यदि किरणें दर्पण से परावर्तन के पश्चात् किसी बिन्दु पर मिलती हुई प्रतीत होती हैं (वास्तव में नहीं मिलतीं), तो वह प्रतिबिम्ब आभासी प्रतिबिम्ब कहलाता है। |
| 2. | वास्तविक प्रतिबिम्ब को पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है। | आभासी प्रतिबिम्ब को पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता है क्योंकि यह दर्पण के पीछे बनता है। |
In simple words: वास्तविक प्रतिबिम्ब तब बनता है जब प्रकाश किरणें सच में एक बिंदु पर मिलती हैं और इसे पर्दे पर देखा जा सकता है। आभासी प्रतिबिम्ब तब बनता है जब किरणें मिलती हुई सिर्फ महसूस होती हैं, और इसे पर्दे पर नहीं देखा जा सकता।
🎯 Exam Tip: वास्तविक और आभासी प्रतिबिम्ब के अन्तर को स्पष्ट करने के लिए "पर्दे पर प्राप्त करना" सबसे महत्वपूर्ण कसौटी है। वास्तविक प्रतिबिम्ब हमेशा उल्टा होता है, जबकि आभासी प्रतिबिम्ब हमेशा सीधा होता है।
Question 3. नियमित तथा विसरित परावर्तन को चित्र बनाते हुए समझाइए।
Answer: परावर्तन दो प्रकार का होता है - नियमित और विसरित परावर्तन:
नियमित परावर्तन: जब प्रकाश की समांतर किरणें किसी समतल और चिकनी सतह पर आपतित होती हैं, तो परावर्तित किरणें भी एक-दूसरे के समांतर एक विशेष दिशा में जाती हैं। इस प्रकार के परावर्तन को नियमित परावर्तन कहते हैं। समतल दर्पण और अन्य चिकने व चमकीले पृष्ठों से नियमित परावर्तन होता है।
विसरित परावर्तन: किसी खुरदरे धरातल पर आपतित प्रकाश की किरणें समांतर होने पर भी परावर्तन के पश्चात् समांतर नहीं होती हैं, बल्कि ये भिन्न-भिन्न दिशाओं में परावर्तित होती हैं। इस प्रकार के अनियमित परावर्तन को विसरित परावर्तन कहते हैं। विसरित परावर्तन परावर्तक धरातल की अनियमित सतह के कारण होता है। अनियमित सतहों, जैसे-पुस्तक, लकड़ी की मेज आदि से विसरित परावर्तन होता है। इसी कारण हमें छायादार पेड़ के नीचे तथा कमरे के अन्दर तक प्रकाश प्राप्त होता है।
In simple words: नियमित परावर्तन में, समांतर प्रकाश किरणें चिकनी सतह से टकराकर समांतर रूप से वापस लौटती हैं। विसरित परावर्तन में, प्रकाश किरणें खुरदुरी सतह से टकराकर अलग-अलग दिशाओं में बिखर जाती हैं।
🎯 Exam Tip: नियमित परावर्तन पॉलिश की हुई सतहों पर होता है जिससे स्पष्ट प्रतिबिम्ब बनते हैं, जबकि विसरित परावर्तन खुरदरी सतहों पर होता है जो प्रकाश को चारों दिशाओं में फैला देता है, जिससे हमें वस्तुएं दिखाई देती हैं लेकिन कोई स्पष्ट प्रतिबिम्ब नहीं बनता।
क्रियात्मक कार्य
गतिविधि- 1 (पृष्ठ 131)
Question 1. इमारत की दीवार पर प्रकाश का यह धब्बा क्यों बनता है?
Answer: इमारत की दीवार पर प्रकाश का धब्बा प्रकाश के परावर्तन के कारण बनता है। जब दर्पण या कोई चमकीली सतह अपने ऊपर आपतित प्रकाश को एक बिंदु पर केंद्रित करके परावर्तित करती है, तो वह दीवार पर एक चमकदार धब्बा बनाती है।
In simple words: दीवार पर प्रकाश का धब्बा इसलिए बनता है क्योंकि दर्पण या चमकदार सतह रोशनी को एक जगह पर इकट्ठा करके दीवार पर वापस फेंकती है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के धब्बे बनने के लिए, प्रकाश स्रोत, परावर्तक सतह और दीवार के बीच की दूरी महत्वपूर्ण होती है। अवतल दर्पण अक्सर प्रकाश को केंद्रित करने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
Question 2. प्रकाश का परावर्तन किसे कहते हैं ?
Answer: प्रकाश किरणों का किसी दर्पण या किसी अन्य चमकीली सतह से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौटने की घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं। यह घटना हमें आसपास की वस्तुओं को देखने में मदद करती है।
In simple words: जब रोशनी किसी चिकनी चीज से टकराकर वापस उछलती है, तो उसे प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: परावर्तन प्रकाश के व्यवहार का एक मौलिक गुण है, जो दर्पणों, लेंसों और हमारी आँखों के कार्य करने के तरीके के लिए आवश्यक है।
गतिविधि- 2 (पृष्ठ 132)
Question 2. प्रकाश के परावर्तन का प्रथम नियम लिखिए।
Answer: प्रकाश के परावर्तन का प्रथम नियम यह कहता है कि आपतन कोण और परावर्तन कोण का मान हमेशा बराबर होता है। इसे गणितीय रूप में \( \text{आपतन कोण} (i) = \text{परावर्तन कोण} (r) \) लिखा जा सकता है।
In simple words: रोशनी जिस कोण से किसी सतह पर टकराती है, ठीक उसी कोण से वापस भी जाती है।
🎯 Exam Tip: यह नियम परावर्तन की सभी स्थितियों में लागू होता है, चाहे वह नियमित हो या विसरित। कोणों को हमेशा अभिलंब (सतह पर लंबवत रेखा) से मापा जाता है।
Question 3. परावर्तन का द्वितीय नियम लिखिए।
Answer: परावर्तन का द्वितीय नियम यह बताता है कि आपतित किरण, परावर्तित किरण और दर्पण की सतह पर आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब, ये तीनों हमेशा एक ही तल में स्थित होते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि परावर्तन एक व्यवस्थित और predictable तरीके से होता है।
In simple words: टकराने वाली रोशनी की किरण, वापस जाने वाली रोशनी की किरण और सतह पर खींची गई सीधी खड़ी रेखा (अभिलंब) - ये तीनों एक ही सपाट जगह पर होते हैं।
🎯 Exam Tip: द्वितीय नियम परावर्तन की त्रि-आयामी ज्यामिति को परिभाषित करता है और किरण आरेख बनाने में बहुत महत्वपूर्ण है।
गतिविधि- 3 (पृष्ठ 134)
Question 1. दर्पण से प्रतिबिंब कैसा दिखाई देता है ? सीधा या उल्टा।
Answer: समतल दर्पण में प्रतिबिंब सीधा दिखाई देता है। उत्तल दर्पण में भी प्रतिबिंब सीधा बनता है।
In simple words: दर्पण में हमारा प्रतिबिम्ब हमेशा सीधा दिखाई देता है।
🎯 Exam Tip: सीधे प्रतिबिम्ब हमेशा आभासी होते हैं, जिन्हें पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता। उल्टे प्रतिबिम्ब आमतौर पर वास्तविक होते हैं।
Question 2. यह प्रतिबिम्ब वस्तु (पेंसिल) की तुलना में बड़ा है। या छोटा ?
Answer: समतल दर्पण में प्रतिबिंब वस्तु (पेंसिल) के बराबर होता है। उत्तल दर्पण में प्रतिबिम्ब वस्तु से छोटा होता है।
In simple words: समतल दर्पण में प्रतिबिम्ब वस्तु के बराबर ही होता है, जबकि उत्तल दर्पण में यह वस्तु से छोटा होता है।
🎯 Exam Tip: दर्पणों के प्रकार के आधार पर प्रतिबिम्ब का आकार बदलता है। समतल दर्पण में आकार समान रहता है, उत्तल दर्पण में छोटा हो जाता है, और अवतल दर्पण में यह वस्तु की स्थिति पर निर्भर करता है (बड़ा, छोटा या बराबर)।
गतिविधि- 4 (पृष्ठ 135)
Question 1. प्रतिबिम्ब का अवलोकन कर पता कीजिए कि इसकी दर्पण से दूरी कितनी है ?
Answer: समतल दर्पण में प्रतिबिम्ब की दूरी दर्पण से वस्तु की दूरी के बराबर होती है। यह एक प्रमुख विशेषता है जो समतल दर्पणों को विशिष्ट बनाती है।
In simple words: समतल दर्पण में, प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे उतनी ही दूर बनता है जितनी वस्तु सामने रखी होती है।
🎯 Exam Tip: यह दूरी संबंध केवल समतल दर्पणों के लिए सत्य है। गोलीय दर्पणों में प्रतिबिम्ब की दूरी वस्तु की दूरी और दर्पण की फोकस दूरी पर निर्भर करती है।
Question 2. क्या पर्दे पर वस्तु का प्रतिबिम्ब प्राप्त हो रहा है?
Answer: नहीं, समतल दर्पण से बनने वाला प्रतिबिम्ब पर्दे पर प्राप्त नहीं होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि समतल दर्पण से बनने वाले प्रतिबिम्ब आभासी होते हैं, जो प्रकाश किरणों के वास्तविक कटाव से नहीं बनते।
In simple words: समतल दर्पण का प्रतिबिम्ब पर्दे पर नहीं आता क्योंकि यह सिर्फ आभासी होता है।
🎯 Exam Tip: यदि प्रतिबिम्ब को पर्दे पर प्राप्त किया जा सके, तो वह वास्तविक होता है। यदि नहीं, तो वह आभासी होता है। यह वास्तविक और आभासी प्रतिबिम्ब के बीच मुख्य अन्तर है।
• आभासी प्रतिबिम्ब तथा
• वास्तविक प्रतिबिम्ब।
Question 4. आभासी प्रतिबिम्ब किसे कहते हैं ?
Answer: जिस प्रतिबिम्ब को पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता, उसे आभासी प्रतिबिम्ब कहते हैं। ये प्रतिबिम्ब तब बनते हैं जब प्रकाश किरणें परावर्तन या अपवर्तन के बाद किसी एक बिंदु पर वास्तव में नहीं मिलतीं, बल्कि मिलती हुई प्रतीत होती हैं।
In simple words: आभासी प्रतिबिम्ब वह होता है जिसे हम पर्दे पर नहीं देख सकते, यह हमें सिर्फ लगता है कि बन रहा है।
🎯 Exam Tip: आभासी प्रतिबिम्ब हमेशा सीधे होते हैं। समतल दर्पण और उत्तल दर्पण हमेशा आभासी प्रतिबिम्ब बनाते हैं।
Question 5. वास्तविक प्रतिबिम्ब किसे कहते हैं ?
Answer: ऐसे प्रतिबिम्ब जिन्हें पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है, उन्हें वास्तविक प्रतिबिम्ब कहते हैं। ये प्रतिबिम्ब तब बनते हैं जब प्रकाश किरणें परावर्तन या अपवर्तन के बाद वास्तव में किसी एक बिंदु पर मिलती हैं।
In simple words: वास्तविक प्रतिबिम्ब वह होता है जिसे हम किसी पर्दे पर देख सकते हैं, क्योंकि प्रकाश किरणें सच में एक जगह मिलती हैं।
🎯 Exam Tip: वास्तविक प्रतिबिम्ब हमेशा उल्टे होते हैं। अवतल दर्पण वास्तविक प्रतिबिम्ब बना सकता है जब वस्तु फोकस और अनंत के बीच रखी हो।
गतिविधि- 5 (पृष्ठ 136)
Question 1. समतल दर्पण से वस्तु का कैसा प्रतिबिंब बनता है?
Answer: समतल दर्पण से वस्तु का आभासी प्रतिबिम्ब बनता है। यह प्रतिबिम्ब सीधा और वस्तु के आकार के बराबर होता है, तथा दर्पण के पीछे बनता है।
In simple words: समतल दर्पण से वस्तु का प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा और वस्तु के बराबर आकार का बनता है।
🎯 Exam Tip: समतल दर्पण हमेशा आभासी प्रतिबिम्ब बनाते हैं, जिसका अर्थ है कि वे प्रकाश किरणों के वास्तविक अभिसरण से नहीं बनते।
Question 2. समतल दर्पण से प्राप्त प्रतिबिंब को आभासी क्यों कहते हैं ?
Answer: समतल दर्पण से परावर्तित किरणें किसी एक बिन्दु पर वास्तव में नहीं मिलती हैं, बल्कि मिलती हुई प्रतीत होती हैं। इसलिए हम कहते हैं कि यह प्रतिबिम्ब आभासी है। आभासी प्रतिबिम्ब को पर्दे पर भी प्राप्त नहीं किया जा सकता।
In simple words: समतल दर्पण से निकलने वाली रोशनी की किरणें वास्तव में नहीं मिलतीं, बल्कि सिर्फ मिलती हुई लगती हैं, इसलिए उनका प्रतिबिम्ब आभासी होता है।
🎯 Exam Tip: "आभासी" शब्द का अर्थ है कि प्रतिबिम्ब वास्तविक नहीं है और इसे किसी भौतिक सतह पर प्रक्षेपित नहीं किया जा सकता।
Question 3. क्या आभासी प्रतिबिम्ब को पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है ?
Answer: नहीं, आभासी प्रतिबिम्ब को पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता है। आभासी प्रतिबिम्ब केवल आभासी रूप से बनते हैं और प्रकाश किरणों के वास्तविक कटाव से नहीं बनते।
In simple words: नहीं, आभासी प्रतिबिम्ब को पर्दे पर नहीं दिखाया जा सकता।
🎯 Exam Tip: यह वास्तविक और आभासी प्रतिबिम्बों के बीच का निर्णायक अन्तर है; यदि इसे पर्दे पर नहीं दिखाया जा सकता, तो वह आभासी है।
गतिविधि- 6 (पृष्ठ 137)
गतिविधि- 8 (पृष्ठ 139)
Question 2. किसी कोण पर रखे दो समतल दर्पणों के बीच रखी गयी वस्तु के प्रतिबिम्बों की संख्या ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
Answer: किसी कोण \( \theta \) पर रखे दो समतल दर्पणों के बीच रखी गयी वस्तु के प्रतिबिम्बों की संख्या (\( N \)) ज्ञात करने का सूत्र है:
\( N = \frac{360^{\circ}}{\theta} - 1 \)
यह सूत्र उन मामलों में लागू होता है जहां \(\frac{360^{\circ}}{\theta}\) एक सम संख्या होती है, या जब यह विषम संख्या होती है और वस्तु को असममित रूप से रखा जाता है।
In simple words: अगर दो दर्पणों के बीच का कोण \( \theta \) है, तो कुल प्रतिबिम्बों की संख्या जानने के लिए 360 को \( \theta \) से भाग करके 1 घटा दें।
🎯 Exam Tip: यह सूत्र कोण पर निर्भर करता है। यदि \( \frac{360^{\circ}}{\theta} \) एक विषम संख्या हो और वस्तु को सममित रूप से रखा गया हो, तो प्रतिबिम्बों की संख्या \( \frac{360^{\circ}}{\theta} - 1 \) ही रहती है।
Question 3. दो दर्पणों को समान्तर रखने पर उनके मध्य रखी वस्तु के कितने प्रतिबिम्ब बनते हैं ?
Answer: जब दो दर्पणों को समानांतर रखा जाता है, तो उनके बीच का कोण \( \theta = 0^{\circ} \) होता है। इस स्थिति में, वस्तु के अनन्त प्रतिबिम्ब बनते हैं। यह एक अंतहीन परावर्तन श्रृंखला बनाता है।
In simple words: जब दो दर्पण एक-दूसरे के बिल्कुल समानांतर होते हैं, तो उनके बीच रखी किसी भी चीज़ के अनगिनत प्रतिबिम्ब बनते हैं।
🎯 Exam Tip: अनन्त प्रतिबिम्बों की स्थिति तब भी उत्पन्न होती है जब \( \theta = 0^{\circ} \) के लिए सूत्र \( N = \frac{360^{\circ}}{\theta} - 1 \) में भागफल अनंत हो जाता है।
Question 1. इन वक्रित भागों को क्या कहते हैं ?
Answer: इन वक्रित भागों को अवतल भाग तथा उत्तल भाग कहते हैं। ये भाग ही गोलीय दर्पणों की परावर्तक सतहों का निर्माण करते हैं।
In simple words: इन घुमावदार हिस्सों को अंदर धँसा हुआ (अवतल) या बाहर निकला हुआ (उत्तल) भाग कहते हैं।
🎯 Exam Tip: अवतल भाग अंदर की ओर मुड़ा होता है, जबकि उत्तल भाग बाहर की ओर उभरा होता है, और यही उनकी प्रकाशीय विशेषताओं को निर्धारित करता है।
Question 2. उत्तल दर्पण किसे कहते हैं ?
Answer: जिस गोलीय दर्पण का उभरा हुआ भाग परावर्तक पृष्ठ के रूप में कार्य करता है, उसे उत्तल दर्पण (Convex mirror) कहते हैं। उत्तल दर्पण प्रकाश किरणों को फैलाता है।
In simple words: उत्तल दर्पण वह होता है जिसकी उभरी हुई बाहर वाली सतह से रोशनी टकराकर वापस जाती है।
🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण को अपसारी दर्पण भी कहते हैं क्योंकि यह समांतर प्रकाश किरणों को परावर्तन के बाद फैला देता है।
Question 3. अवतल दर्पण किसे कहते हैं ?
Answer: वह गोलीय दर्पण जिसका दबा हुआ (गोले के केन्द्र की ओर वाला भाग) परावर्तक के रूप में कार्य करता है, उसे अवतल दर्पण (Concave mirror) कहते हैं। अवतल दर्पण प्रकाश किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित करता है।
In simple words: अवतल दर्पण वह होता है जिसकी अंदर धँसी हुई सतह से रोशनी टकराकर वापस जाती है।
🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण को अभिसारी दर्पण भी कहते हैं क्योंकि यह समांतर प्रकाश किरणों को परावर्तन के बाद एक बिंदु पर केंद्रित करता है।
गतिविधि- 9 (पृष्ठ 140)
Question 2. कागज क्यों जलने लगता है ?
Answer: अवतल दर्पण सूर्य की आपतित समांतर किरणों को एक बिंदु पर अभिकेन्द्रित (फोकस) कर देता है। जब ये किरणें एक छोटे से क्षेत्र में केंद्रित होती हैं, तो बहुत अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिसके कारण कागज आग पकड़ लेता है और जलने लगता है।
In simple words: अवतल दर्पण सूरज की रोशनी को एक छोटी जगह पर इकट्ठा कर देता है, जिससे बहुत गर्मी पैदा होती है और कागज जलने लगता है।
🎯 Exam Tip: यह घटना अवतल दर्पण के अभिसारी गुण को दर्शाती है, जिसका उपयोग सौर भट्टियों और दूरबीनों में भी किया जाता है।
गतिविधि- 10 (पृष्ठ 141)
Question 1. क्या आपको कागज की शीट पर प्रकाश का एक चमकीला तीक्ष्ण बिंदु प्राप्त होता है ?
Answer: कागज की शीट पर प्रकाश का चमकीला तीक्ष्ण बिंदु उत्तल दर्पण द्वारा प्राप्त नहीं होता है। उत्तल दर्पण प्रकाश को फैलाता है, केंद्रित नहीं करता।
In simple words: नहीं, उत्तल दर्पण से कागज पर तेज रोशनी का बिंदु नहीं बनता क्योंकि यह रोशनी को फैलाता है।
🎯 Exam Tip: केवल अवतल दर्पण ही सूर्य के प्रकाश को एक बिंदु पर केंद्रित करके एक चमकीला तीक्ष्ण बिंदु बना सकता है।
Question 2. उत्तल दर्पण को अपसारी दर्पण क्यों कहते हैं ?
Answer: उत्तल दर्पण समांतर आपतित किरणों को परावर्तन के पश्चात् फैला देता है (अपसारित करता है)। इसी कारण उत्तल दर्पण को अपसारी दर्पण कहते हैं। यह इसका मुख्य प्रकाशीय गुण है।
In simple words: उत्तल दर्पण रोशनी को फैलाने का काम करता है, इसलिए इसे अपसारी दर्पण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: "अपसारी" का अर्थ है प्रकाश किरणों को फैलाना। यह गुण उत्तल दर्पणों को वाहनों के पीछे के दृश्य देखने वाले दर्पणों के लिए उपयोगी बनाता है।
Question 3. उत्तल दर्पण द्वारा मुख्य अक्ष के समान्तर आपतित किरणें परावर्तन के पश्चात् मुख्य अक्ष पर एक बिन्दु से
Answer: उत्तल दर्पण द्वारा मुख्य अक्ष के समान्तर आपतित किरणें परावर्तन के पश्चात् मुख्य अक्ष पर एक बिन्दु से आती हुई प्रतीत होती हैं। यह बिंदु उत्तल दर्पण का मुख्य फोकस कहलाता है।
In simple words: उत्तल दर्पण पर सीधी आने वाली रोशनी टकराकर ऐसे फैलती है जैसे वह दर्पण के पीछे एक खास बिंदु से आ रही हो।
🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण का फोकस हमेशा दर्पण के पीछे होता है और आभासी होता है, क्योंकि किरणें वहां वास्तव में नहीं मिलतीं।
गतिविधि- 11 (पृष्ठ 141)
Question 1. सामान्यतः अवतल दर्पण से प्राप्त प्रतिबिम्ब की प्रकृति कैसी होती है ?
Answer: सामान्यतः अवतल दर्पण से प्राप्त प्रतिबिम्ब की प्रकृति वास्तविक होती है, और यह उल्टा भी होता है। हालाँकि, जब वस्तु को ध्रुव और फोकस के बीच रखा जाता है, तो यह आभासी और सीधा प्रतिबिम्ब भी बनाता है।
In simple words: अवतल दर्पण से ज्यादातर प्रतिबिम्ब वास्तविक और उल्टे बनते हैं, लेकिन कभी-कभी यह आभासी और सीधा भी बना सकता है।
🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण की प्रतिबिम्ब बनाने की क्षमता वस्तु की स्थिति पर बहुत निर्भर करती है, जिससे यह विभिन्न प्रकार के प्रतिबिम्ब बना सकता है।
Question 2. अवतल दर्पण से आभासी प्रतिबिंब कब बनता है ?
Answer: अवतल दर्पण से आभासी प्रतिबिंब तब प्राप्त होता है जब वस्तु दर्पण के ध्रुव और फोकस के मध्य रखी गयी हो। इस स्थिति में, प्रतिबिम्ब सीधा और वस्तु से बड़ा होता है, तथा दर्पण के पीछे बनता है।
In simple words: अवतल दर्पण से आभासी प्रतिबिम्ब तब बनता है जब आप वस्तु को दर्पण के बहुत पास, यानी उसके ध्रुव और फोकस के बीच रखते हैं।
🎯 Exam Tip: यह स्थिति शेविंग दर्पणों में अवतल दर्पण के उपयोग के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह चेहरे का एक बड़ा और सीधा प्रतिबिम्ब प्रदान करता है।
Question 1. किसी वस्तु का वस्तु से बड़ा आभासी प्रतिबिम्ब बन सकता है।
(अ) उत्तल दर्पण द्वारा
(ब) अवतल दर्पण द्वारा
(स) समतल दर्पण द्वारा
(द) सम्भव नहीं है।
Answer: (ब) अवतल दर्पण द्वारा
In simple words: अवतल दर्पण ही एकमात्र ऐसा दर्पण है जो वस्तु से बड़ा और आभासी प्रतिबिम्ब बना सकता है।
🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण द्वारा वस्तु से बड़ा और आभासी प्रतिबिम्ब तब बनता है जब वस्तु को दर्पण के ध्रुव और फोकस के बीच रखा जाता है।
Question 2. किस दर्पण से वस्तु से छोटा तथा आभासी प्रतिबिम्ब बनता है
(अ) समतल दर्पण से
(ब) अवतल दर्पण से
(स) उत्तल दर्पण से
(द) ये तीनों से
Answer: (स) उत्तल दर्पण से
In simple words: उत्तल दर्पण से वस्तु का प्रतिबिम्ब हमेशा छोटा और आभासी बनता है।
🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण का यह गुण इसे पीछे देखने वाले (रियर-व्यू) दर्पणों में उपयोग के लिए आदर्श बनाता है, क्योंकि यह एक बड़ा दृष्टि-क्षेत्र प्रदान करता है।
Question 3. फोकस दूरी (f) तथा वक्रता त्रिज्या (R) में सम्बन्ध
(अ) फोकस दूरी = वक्रता त्रिज्या
(ब) फोकस दूरी = 1/वक्रता त्रिज्या
(स) 2 X फोकस दूरी = वक्रता त्रिज्या
(द) फोकस दूरी = 2 x वक्रता त्रिज्या
Answer: (स) 2 X फोकस दूरी = वक्रता त्रिज्या
In simple words: फोकस दूरी (f) वक्रता त्रिज्या (R) की आधी होती है, या वक्रता त्रिज्या (R) फोकस दूरी (f) की दोगुनी होती है।
🎯 Exam Tip: यह संबंध सभी गोलीय दर्पणों (अवतल और उत्तल) के लिए मान्य है और इसे \( R = 2f \) या \( f = R/2 \) के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
Question 4. समतल दर्पण की फोकस दूरी होती है
(अ) 0
(ब) अनन्त
(स) 25 सेमी
(द) - 25 सेमी
Answer: (ब) अनन्त
In simple words: समतल दर्पण की फोकस दूरी अनन्त होती है, क्योंकि उसकी सतह सपाट होती है और वह प्रकाश किरणों को किसी एक बिंदु पर केंद्रित या फैलाता नहीं है।
🎯 Exam Tip: एक समतल दर्पण को एक गोलीय दर्पण का हिस्सा माना जा सकता है जिसकी वक्रता त्रिज्या अनन्त हो, और इसलिए उसकी फोकस दूरी भी अनन्त होती है।
Question 5. समतल दर्पण से बने प्रतिबिंब की स्थिति कैसी होती है?
(अ) वस्तु की स्थिति पर
(ब) दर्पण के सामने वस्तु की स्थिति से दोगुनी दूरी पर
(स) दर्पण के सामने वस्तु की स्थिति से आधी दूरी पर
(द) दर्पण के पीछे
Answer: (द) दर्पण के पीछे
In simple words: समतल दर्पण में वस्तु का प्रतिबिम्ब हमेशा दर्पण के पीछे बनता है।
🎯 Exam Tip: समतल दर्पण में बनने वाला प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर होता है जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने रखी होती है।
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
Question 1. प्रकाश किरणों का दर्पण या अन्य चमकीली सतह से टकराकर पुनः वापस उसी माध्यम में लौटने की घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।
Answer: प्रकाश किरणों का दर्पण या अन्य चमकीली सतह से टकराकर पुनः वापस उसी माध्यम में लौटने की घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं। यह प्रकाशीय घटना हमें वस्तुओं को देखने में सक्षम बनाती है।
In simple words: जब रोशनी किसी चिकनी सतह से टकराकर वापस लौटती है, तो उसे परावर्तन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: परावर्तन की परिभाषा सीधे तौर पर याद रखें, क्योंकि यह प्रकाशिकी का एक मूलभूत सिद्धांत है।
Question 2. आपतित किरण तथा अभिलंब के मध्य का कोण आपतन कोण कहलाता है।
Answer: आपतित किरण तथा अभिलंब के मध्य का कोण आपतन कोण कहलाता है। यह कोण सतह पर प्रकाश किरण के झुकाव को दर्शाता है।
In simple words: जिस कोण पर रोशनी की किरण किसी सतह पर टकराती है, उसे आपतन कोण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: आपतन कोण को हमेशा सतह पर खींचे गए अभिलंब से मापा जाता है, न कि सतह से।
Question 3. अनियमित सतह से होने वाला परावर्तन विसरित परावर्तन कहलाता है।
Answer: अनियमित सतह से होने वाला परावर्तन विसरित परावर्तन कहलाता है। इस प्रकार के परावर्तन में प्रकाश किरणें विभिन्न दिशाओं में बिखर जाती हैं।
In simple words: जब रोशनी खुरदरी जगह से टकराकर चारों तरफ बिखर जाती है, तो उसे विसरित परावर्तन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: विसरित परावर्तन के कारण ही हम आसपास की अधिकांश वस्तुओं को देख पाते हैं, क्योंकि प्रकाश उनसे टकराकर सभी दिशाओं में फैल जाता है।
Question 4. जिस प्रतिबिम्ब को पर्दे पर प्राप्त किया जा सके उसे वास्तविक प्रतिबिम्ब कहते हैं।
Answer: जिस प्रतिबिम्ब को पर्दे पर प्राप्त किया जा सके उसे वास्तविक प्रतिबिम्ब कहते हैं। वास्तविक प्रतिबिम्ब हमेशा उल्टे होते हैं।
In simple words: वह प्रतिबिम्ब जिसे हम पर्दे पर देख सकते हैं, वास्तविक प्रतिबिम्ब कहलाता है।
🎯 Exam Tip: वास्तविक प्रतिबिम्ब तब बनता है जब प्रकाश किरणें परावर्तन या अपवर्तन के बाद वास्तव में एक बिंदु पर मिलती हैं।
अतिलघु उत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. आपतन कोण तथा परावर्तन कोण में क्या सम्बन्ध होता है?
Answer: आपतन कोण तथा परावर्तन कोण का मान सदैव बराबर होता है। यह परावर्तन के प्रथम नियम के अनुसार है, यानी \( i = r \)।
In simple words: आपतन कोण और परावर्तन कोण हमेशा एक समान होते हैं।
🎯 Exam Tip: यह संबंध परावर्तन का पहला नियम है, जो प्रकाश के व्यवहार को समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
Question 2. परावर्तन का द्वितीय नियम लिखिए।
Answer: परावर्तन का द्वितीय नियम यह है कि आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा अभिलम्ब तीनों एक ही तल में होते हैं। यह नियम प्रकाश के परावर्तन की ज्यामितीय व्यवस्था को परिभाषित करता है।
In simple words: रोशनी की किरण, वापस जाने वाली किरण और बीच की सीधी रेखा (अभिलंब) तीनों एक ही सतह पर होते हैं।
🎯 Exam Tip: इस नियम का उपयोग करके ही किरण आरेख (ray diagrams) सही ढंग से बनाए जाते हैं।
Question 3. समतल दर्पण से प्राप्त प्रतिबिम्ब की विशेषता बताइए।
Answer: समतल दर्पण से प्राप्त प्रतिबिम्ब की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
• समतल दर्पण से प्राप्त प्रतिबिम्ब सदैव आभासी व सीधा होता है।
• प्रतिबिम्ब का आकार वस्तु के बराबर होता है।
• प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है, जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने रखी होती है।
• प्रतिबिम्ब में पाश्र्व परिवर्तन होता है, यानी दायाँ भाग बायाँ और बायाँ भाग दायाँ दिखाई देता है।
In simple words: समतल दर्पण में बनने वाला प्रतिबिम्ब हमेशा आभासी, सीधा, वस्तु के बराबर और दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर होता है, साथ ही यह पाश्र्व रूप से उल्टा होता है।
🎯 Exam Tip: इन चार विशेषताओं को याद रखना समतल दर्पण से संबंधित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 4. आभासी प्रतिबिम्ब किसे कहते हैं ?
Answer: जिस प्रतिबिम्ब को पर्दे पर प्राप्त न किया जा सके, उसे आभासी प्रतिबिम्ब कहते हैं। ये प्रतिबिम्ब प्रकाश किरणों के वास्तविक मिलन से नहीं बनते, बल्कि केवल मिलती हुई प्रतीत होती हैं।
In simple words: आभासी प्रतिबिम्ब वह है जिसे हम किसी पर्दे पर नहीं देख सकते।
🎯 Exam Tip: आभासी प्रतिबिम्ब हमेशा सीधे होते हैं। समतल दर्पण और उत्तल दर्पण हमेशा आभासी प्रतिबिम्ब बनाते हैं।
Question 5. वास्तविक प्रतिबिम्ब किसे कहते हैं ?
Answer: जिस प्रतिबिम्ब को पर्दे पर प्राप्त किया जा सके, उसे वास्तविक प्रतिबिम्ब कहते हैं। ये प्रतिबिम्ब प्रकाश किरणों के वास्तविक कटाव से बनते हैं और हमेशा उल्टे होते हैं।
In simple words: वास्तविक प्रतिबिम्ब वह होता है जिसे पर्दे पर देखा जा सकता है।
🎯 Exam Tip: वास्तविक प्रतिबिम्ब हमेशा उल्टे होते हैं। अवतल दर्पण अक्सर वास्तविक प्रतिबिम्ब बनाता है।
Question 6. गोलीय दर्पण कितने प्रकार के होते हैं ?
Answer: गोलीय दर्पण मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
• अवतल दर्पण (Concave mirror)
• उत्तल दर्पण (Convex mirror)
ये दोनों दर्पण अपनी बनावट और प्रकाश को मोड़ने के तरीके में भिन्न होते हैं।
In simple words: गोलीय दर्पण दो तरह के होते हैं: अवतल दर्पण और उत्तल दर्पण।
🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण अंदर की ओर धँसा होता है जबकि उत्तल दर्पण बाहर की ओर उभरा होता है। यही उनकी मूलभूत पहचान है।
Question 7. अवतल दर्पण को अभिसारी दर्पण क्यों कहते हैं ?
Answer: अवतल दर्पण आपतित प्रकाश किरणों को एक बिन्दु पर अभिसारित (या अभिकेन्द्रित) कर देता है, यानी उन्हें एक जगह इकट्ठा कर देता है। इसलिए इसे अभिसारी दर्पण कहते हैं। यह गुण इसे टॉर्च और सौर भट्टियों में उपयोगी बनाता है।
In simple words: अवतल दर्पण रोशनी को एक जगह इकट्ठा करता है, इसलिए इसे अभिसारी दर्पण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: "अभिसारी" का अर्थ है प्रकाश किरणों को एक बिंदु पर एकत्र करना। यह अवतल दर्पण का एक महत्वपूर्ण गुण है।
Question 8. उत्तल दर्पण को अपसारी दर्पण क्यों कहते हैं ?
Answer: उत्तल दर्पण आपतित प्रकाश किरणों को फैला (अपसारित) देता है, यानी उन्हें विभिन्न दिशाओं में बिखेर देता है। इसी कारण इसे अपसारी दर्पण कहते हैं। यह इसका मुख्य प्रकाशीय गुण है।
In simple words: उत्तल दर्पण रोशनी को फैलाता है, इसलिए इसे अपसारी दर्पण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: "अपसारी" का अर्थ है प्रकाश किरणों को फैलाना। यह गुण इसे वाहनों में पीछे देखने वाले दर्पणों के लिए उपयोगी बनाता है।
Question 9. उत्तल दर्पण से प्राप्त प्रतिबिम्ब की विशेषता लिखिए।
Answer: उत्तल दर्पण से सदैव दर्पण के पीछे, सीधा, आभासी व छोटा प्रतिबिम्ब प्राप्त होता है। यह प्रतिबिम्ब वस्तु की स्थिति पर निर्भर नहीं करता, इसकी प्रकृति हमेशा समान रहती है।
In simple words: उत्तल दर्पण हमेशा दर्पण के पीछे, सीधा, आभासी और वस्तु से छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है।
🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण की ये विशेषताएँ इसे रियर-व्यू दर्पणों के लिए आदर्श बनाती हैं, क्योंकि यह एक विस्तृत दृष्टि-क्षेत्र और सीधे प्रतिबिम्ब प्रदान करता है।
Question 10. उत्तल दर्पण का मुख्य उपयोग लिखिए।
Answer: उत्तल दर्पण का मुख्य उपयोग वाहनों में पाश्र्व दर्पण (side glass) के रूप में होता है। ये दर्पण वाहन के पाश्र्व में लगे होते हैं ताकि ड्राइवर अपने पीछे के वाहनों को देख सके और सुरक्षित रूप से वाहन चला सके। उत्तल दर्पणों को प्राथमिकता इसलिए भी देते हैं क्योंकि ये सदैव सीधा प्रतिबिम्ब बनाते हैं, यद्यपि वह छोटा होता है। इनका दृष्टि-क्षेत्र बहुत अधिक होता है क्योंकि ये बाहर की ओर वक्रित होते हैं। अतः समतल दर्पण की तुलना में उत्तल दर्पण ड्राइवर को अपने पीछे के बहुत बड़े क्षेत्र को देखने में समर्थ बनाते हैं।
In simple words: उत्तल दर्पण का उपयोग गाड़ियों के साइड मिरर में होता है ताकि ड्राइवर पीछे का बड़ा हिस्सा देख सके।
🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण का बड़ा दृष्टि-क्षेत्र और सीधा प्रतिबिम्ब बनाने की क्षमता इसकी सुरक्षा उपयोगिता का मुख्य कारण है।
Question 1. श्रेष्ठ तथा मंद परावर्तक क्या होते हैं ?
Answer: श्रेष्ठ परावर्तक: ऐसी सतहें जो स्वयं पर आपतित प्रकाश के अधिकतम भाग को परावर्तित कर देती हैं, वे श्रेष्ठ या अच्छे परावर्तक कहलाती हैं। जैसे चिकनी व अच्छी पॉलिश वाली चमकीली सतह और दर्पण आदि।
मंद परावर्तक: दूसरी ओर, ऐसी सतहें जो प्रकाश में केवल कुछ भाग को ही परावर्तित कर सकें, वे मंद परावर्तक कहलाती हैं। ये सतहें आमतौर पर खुरदुरी होती हैं।
In simple words: जो सतहें ज़्यादा रोशनी वापस भेजती हैं, वे श्रेष्ठ परावर्तक हैं (जैसे दर्पण), और जो कम रोशनी वापस भेजती हैं, वे मंद परावर्तक हैं (जैसे खुरदुरी चीजें)।
🎯 Exam Tip: श्रेष्ठ परावर्तक नियमित परावर्तन करते हैं, जबकि मंद परावर्तक विसरित परावर्तन करते हैं। सतह की चिकनाई परावर्तन के प्रकार को निर्धारित करती है।
Question 2. समतल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
Answer: समतल दर्पण से प्राप्त प्रतिबिम्ब की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
• समतल दर्पण से प्राप्त प्रतिबिम्ब सदैव आभासी व सीधा होता है।
• प्रतिबिम्ब का आकार वस्तु के बराबर होता है।
• प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है, जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने रखी होती है।
• प्रतिबिम्ब में पाश्र्व परिवर्तन होता है, यानी दायाँ भाग बायाँ और बायाँ भाग दायाँ दिखाई देता है।
In simple words: समतल दर्पण में बनने वाला प्रतिबिम्ब हमेशा आभासी, सीधा, वस्तु के बराबर और दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर होता है, साथ ही यह पाश्र्व रूप से उल्टा होता है।
🎯 Exam Tip: इन चार विशेषताओं को याद रखना समतल दर्पण से संबंधित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. गोलीय दर्पणों को चित्र सहित समझाइए।
Answer: गोलीय दर्पण ऐसे दर्पण होते हैं जिनकी परावर्तक सतह एक गोले का हिस्सा होती है। ये दो प्रकार के होते हैं, जैसा कि नीचे दिए गए चित्र में दिखाया गया है:
(1) अवतल दर्पण (Concave mirror)- वह दर्पण जिसमें गोलीय पृष्ठ का उभरा हुआ तल पॉलिश किया हुआ होता है और दबा हुआ भीतरी तल परावर्तन का कार्य करता है। यह प्रकाश किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित करता है।
(2) उत्तल दर्पण (Convex mirror)- वह दर्पण जिसमें गोलीय पृष्ठ का दबा हुआ तल पॉलिश किया हुआ होता है और उभरा हुआ बाहरी तल परावर्तन का कार्य करता है। यह प्रकाश किरणों को फैलाता है।
In simple words: गोलीय दर्पण दो तरह के होते हैं - अवतल (अंदर धँसा हुआ, रोशनी को इकट्ठा करता है) और उत्तल (बाहर उभरा हुआ, रोशनी को फैलाता है)।
🎯 Exam Tip: दोनों दर्पणों की पहचान उनकी परावर्तक सतह की बनावट से की जाती है। अवतल दर्पण अभिसारी होता है और उत्तल दर्पण अपसारी होता है।
Question 4. दर्पण की फोकस दूरी किसे कहते हैं? फोकस दूरी तथा वक्रता त्रिज्या में क्या सम्बन्ध होता है ?
Answer: फोकस दूरी (Focus length): गोलीय दर्पण के ध्रुव से मुख्य फोकस तक की दूरी को दर्पण की फोकस दूरी कहते हैं। इसे अक्षर \( f \) से प्रदर्शित करते हैं। मुख्य फोकस वह बिंदु होता है जहाँ मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली प्रकाश किरणें परावर्तन के बाद मिलती हैं (अवतल दर्पण) या मिलती हुई प्रतीत होती हैं (उत्तल दर्पण)।
फोकस दूरी तथा वक्रता त्रिज्या में सम्बन्ध: फोकस दूरी \( (f) \) और वक्रता त्रिज्या \( (R) \) के बीच का संबंध है कि फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है। इसे इस प्रकार लिखा जा सकता है: \( f = \frac{R}{2} \) या \( R = 2f \)। यह संबंध सभी गोलीय दर्पणों (अवतल और उत्तल) के लिए मान्य है।
In simple words: फोकस दूरी दर्पण के केंद्र से उस बिंदु तक की दूरी है जहां सीधी रोशनी इकट्ठा होती है या आती हुई लगती है। फोकस दूरी हमेशा वक्रता त्रिज्या की आधी होती है।
🎯 Exam Tip: फोकस दूरी और वक्रता त्रिज्या के बीच का संबंध (\( f=R/2 \)) एक मौलिक सूत्र है जो गोलीय दर्पणों के लिए हमेशा लागू होता है। इस सूत्र को और इसकी परिभाषाओं को अच्छे से समझ लें।
Question 5. प्रतिबिम्ब किसे कहते हैं? ये कितने प्रकार के होते हैं?
Answer: जब किसी वस्तु को दर्पण के सामने रखते हैं, तो दर्पण में उस वस्तु की एक आकृति बन जाती है। इसी आकृति को वस्तु का प्रतिबिम्ब (Image) कहते हैं। दूसरे शब्दों में, जब प्रकाश की किरणें किसी वस्तु के एक बिंदु से चलकर दर्पण से टकराती हैं और परावर्तन के बाद किसी दूसरे बिंदु पर मिलती हैं, या मिलती हुई महसूस होती हैं, तो इस दूसरे बिंदु को पहले बिंदु का प्रतिबिम्ब कहते हैं। प्रतिबिम्ब मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
- वास्तविक प्रतिबिम्ब (Real Image)
- आभासी प्रतिबिम्ब (Virtual Image)
In simple words: जब कोई वस्तु दर्पण के सामने होती है, तो दर्पण में उसकी जो तस्वीर बनती है, उसे प्रतिबिम्ब कहते हैं. यह दो तरह का होता है - असली (वास्तविक) और नकली (आभासी).
🎯 Exam Tip: प्रतिबिम्ब की परिभाषा को हमेशा प्रकाश के परावर्तन के साथ जोड़कर समझाना चाहिए, और दोनों प्रकार के प्रतिबिम्बों के बीच के अंतर को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है.
Question 6. गोलीय दर्पण के मुख्य फोकस या फोकस को परिभाषित कीजिए।
Answer: गोलीय दर्पण के मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश की किरणें दर्पण से परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष पर जिस बिंदु पर वास्तव में मिलती हैं (अवतल दर्पण में) या मिलती हुई प्रतीत होती हैं (उत्तल दर्पण में), उस बिंदु को दर्पण का मुख्य फोकस या फोकस कहते हैं। इसे अंग्रेजी अक्षर F से दर्शाते हैं। फोकस बिंदु दर्पण की प्रकाशिकी में एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
In simple words: मुख्य फोकस वह जगह है जहाँ समानांतर किरणें दर्पण से टकराने के बाद या तो सच में मिलती हैं या मिलती हुई दिखती हैं. इसे 'F' से दिखाते हैं.
🎯 Exam Tip: मुख्य फोकस की परिभाषा देते समय अवतल और उत्तल दर्पण दोनों में किरणों के मिलने या मिलती हुई प्रतीत होने का उल्लेख करना न भूलें, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण अंतर है.
Question 7. वक्रता केन्द्र किसे कहते हैं?
Answer: गोलीय दर्पण जिस खोखले गोले का एक हिस्सा होता है, उस गोले के केंद्र को दर्पण का वक्रता केंद्र (Centre of Curvature) कहते हैं। इसे अक्षर C से दिखाया जाता है। अवतल दर्पण में वक्रता केंद्र परावर्तक सतह की ओर होता है, जबकि उत्तल दर्पण में यह परावर्तक सतह के दूसरी ओर स्थित होता है। यह दर्पण की गोलाई का केंद्रीय बिंदु होता है.
In simple words: गोलीय दर्पण जिस बड़े गोले का टुकड़ा होता है, उस गोले के बीच वाले बिंदु को वक्रता केंद्र कहते हैं. इसे 'C' से दिखाया जाता है.
🎯 Exam Tip: वक्रता केंद्र को हमेशा उस काल्पनिक गोले के केंद्र के रूप में परिभाषित करें जिसका दर्पण एक हिस्सा है, और 'C' अक्षर का उपयोग करें.
Question 8. स्ट्रीट लैम्पों में परावर्तक के रूप में किस दर्पण का प्रयोग किया जाता है?
Answer: स्ट्रीट लैम्पों में प्रकाश को सड़क के बड़े क्षेत्र में फैलाने के लिए उत्तल दर्पण का उपयोग परावर्तक के रूप में किया जाता है। उत्तल दर्पण आपतित प्रकाश किरणों को फैलाने का काम करता है, जिससे रोशनी एक विस्तृत क्षेत्र में फैल जाती है। यह सड़कों पर समान रोशनी फैलाने में मदद करता है.
In simple words: सड़क की बत्तियों में उत्तल दर्पण लगाते हैं. यह रोशनी को फैलाकर बड़े इलाके को रोशन करता है.
🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण का उपयोग हमेशा उसकी प्रकाश फैलाने वाली प्रकृति (अपसारी) के कारण होता है, जिसे आपको उत्तर में उल्लेख करना चाहिए.
Question 9. अवतल दर्पणों के प्रमुख उपयोग लिखिए।
Answer: अवतल दर्पणों के प्रमुख उपयोग इस प्रकार हैं:
- दाढ़ी बनाने के लिए या मेकअप के लिए इनका उपयोग किया जाता है ताकि चेहरे का बड़ा और स्पष्ट प्रतिबिम्ब दिख सके।
- सौर चूल्हों और हीटरों में सूर्य से आने वाली समानांतर प्रकाश किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित करने के लिए बड़े अवतल दर्पणों का उपयोग होता है, जिससे अधिक गर्मी उत्पन्न हो।
- दांतों के डॉक्टरों द्वारा मरीजों के दांतों का बड़ा और स्पष्ट प्रतिबिम्ब देखने के लिए भी अवतल दर्पण का उपयोग किया जाता है।
- टॉर्च, सर्चलाइट और वाहनों की हेडलाइट में भी प्रकाश की मजबूत, समानांतर किरणें प्राप्त करने के लिए इनका उपयोग होता है।
In simple words: अवतल दर्पण का इस्तेमाल दाढ़ी बनाने, सौर चूल्हों में गर्मी इकट्ठा करने, दांतों के इलाज में और टॉर्च व हेडलाइट में होता है.
🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण के उपयोगों को याद रखने के लिए, हमेशा सोचें कि यह प्रकाश को केंद्रित करता है या बड़ा प्रतिबिम्ब बनाता है.
Question 10. उत्तल दर्पण के प्रमुख उपयोग लिखिए।
Answer: उत्तल दर्पणों के प्रमुख उपयोग इस प्रकार हैं:
उत्तल दर्पणों का उपयोग आमतौर पर वाहनों में साइड मिरर (rear-view mirror) के रूप में किया जाता है। ये दर्पण वाहन के किनारे लगे होते हैं और ड्राइवर को पीछे आने वाले वाहनों को देखने में मदद करते हैं, जिससे वे सुरक्षित रूप से गाड़ी चला सकें।
उत्तल दर्पणों को प्राथमिकता इसलिए दी जाती है क्योंकि ये हमेशा सीधा प्रतिबिम्ब बनाते हैं, भले ही वह छोटा हो। साथ ही, इनका देखने का क्षेत्र (दृष्टि-क्षेत्र) भी बहुत बड़ा होता है, क्योंकि ये बाहर की ओर मुड़े होते हैं। इस कारण, समतल दर्पण की तुलना में उत्तल दर्पण ड्राइवर को अपने पीछे के बहुत बड़े क्षेत्र को देखने में सक्षम बनाते हैं।
In simple words: उत्तल दर्पण का मुख्य उपयोग गाड़ियों में साइड मिरर के रूप में होता है. यह पीछे का बड़ा इलाका दिखाता है और हमेशा सीधा प्रतिबिम्ब बनाता है, जिससे गाड़ी चलाना आसान होता है.
🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण के उपयोगों में उसके विस्तृत दृष्टि-क्षेत्र और हमेशा सीधा प्रतिबिम्ब बनाने की क्षमता पर जोर देना चाहिए.
दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. नामांकित चित्र की सहायता से गोलीय दर्पण के सन्दर्भ में निम्न को समझाइए-
(i) दर्पण का ध्रुव
(ii) वक्रता केन्द्र
(iii) वक्रता त्रिज्या
(iv) मुख्य अक्ष
(v) अभिलम्ब
(vi) फोकस दूरी।
Answer: गोलीय दर्पण से संबंधित विभिन्न पद निम्नलिखित हैं, जिन्हें चित्र की सहायता से समझाया गया है:
(i) **दर्पण का ध्रुव (Pole - P):** गोलीय दर्पण के परावर्तक सतह के केंद्र बिंदु को दर्पण का ध्रुव कहते हैं। यह दर्पण की सतह पर स्थित होता है। इसे अक्षर 'P' से दिखाते हैं।
(ii) **वक्रता केंद्र (Centre of Curvature - C):** गोलीय दर्पण जिस खोखले गोले का हिस्सा होता है, उस गोले के केंद्र को दर्पण का वक्रता केंद्र कहते हैं। यह दर्पण की गोलाई का केंद्रीय बिंदु है।
(iii) **वक्रता त्रिज्या (Radius of Curvature - R):** गोलीय दर्पण जिस खोखले गोले का हिस्सा होता है, उसकी त्रिज्या को दर्पण की वक्रता त्रिज्या कहते हैं। यह वक्रता केंद्र (C) और ध्रुव (P) के बीच की दूरी होती है।
(iv) **मुख्य अक्ष (Principal Axis):** गोलीय दर्पण के ध्रुव (P) और वक्रता केंद्र (C) से होकर जाने वाली सीधी रेखा को दर्पण का मुख्य अक्ष कहते हैं। यह अक्ष दर्पण के परावर्तन गुणों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
(v) **अभिलंब (Normal):** गोलीय दर्पण के किसी भी बिंदु पर वक्रता केंद्र (C) को उस बिंदु से जोड़ने वाली रेखा उस बिंदु पर अभिलंब होती है। दूसरे शब्दों में, गोलीय दर्पण के किसी भी बिंदु पर अभिलंब उस गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या के बराबर होता है और सतह पर लंबवत होता है।
(vi) **फोकस दूरी (Focal Length - f):** गोलीय दर्पण के ध्रुव (P) से मुख्य फोकस (F) तक की दूरी को दर्पण की फोकस दूरी कहते हैं। इसे अक्षर 'f' से दर्शाते हैं। फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है, यानी \( f = R/2 \).
In simple words: गोलीय दर्पण के कई हिस्से होते हैं. ध्रुव दर्पण का बीच का बिंदु है. वक्रता केंद्र उस बड़े गोले का केंद्र है जिससे दर्पण बना है. वक्रता त्रिज्या उस गोले की त्रिज्या है. मुख्य अक्ष ध्रुव और वक्रता केंद्र को जोड़ने वाली सीधी रेखा है. अभिलंब दर्पण की सतह पर 90 डिग्री का कोण बनाता है और फोकस दूरी ध्रुव से मुख्य फोकस तक की दूरी है.
🎯 Exam Tip: गोलीय दर्पण के सभी महत्वपूर्ण पदों की परिभाषाएं उनके संबंधित चित्रों के साथ याद रखें. यह प्रकाशिकी के बुनियादी सिद्धांतों को समझने के लिए आवश्यक है.
Question 2. उत्तल दर्पण से बने प्रतिबिम्ब की प्रकृति को उचित चित्रों की सहायता से समझाइए।
Answer: उत्तल दर्पण द्वारा हमेशा आभासी, सीधा और वस्तु से छोटा प्रतिबिम्ब बनता है। यह प्रतिबिम्ब हमेशा दर्पण के पीछे, ध्रुव (P) और मुख्य फोकस (F) के बीच बनता है। यह दर्पण की एक खास विशेषता है कि वस्तु को कहीं भी रखा जाए, प्रतिबिम्ब की प्रकृति नहीं बदलती। इसे नीचे दिए गए चित्रों से समझा जा सकता है:
**प्रतिबिम्ब निर्माण प्रक्रिया:**
मान लीजिए कि एक वस्तु OO' उत्तल दर्पण के सामने रखी है।
1. **पहली किरण:** बिंदु O' से निकलकर मुख्य अक्ष के समानांतर (parallel) दर्पण पर आपतित होती है (किरण O'A)। परावर्तन के बाद, यह किरण ऐसे परावर्तित होती है जैसे कि यह मुख्य फोकस F से आ रही हो।
2. **दूसरी किरण:** बिंदु O' से निकलकर वक्रता केंद्र C की दिशा में दर्पण पर आपतित होती है (किरण O'B)। यह किरण दर्पण पर अभिलंबवत गिरती है और बिना किसी विचलन के उसी पथ पर वापस परावर्तित हो जाती है।
ये दोनों परावर्तित किरणें (A से परावर्तित और B से परावर्तित) वास्तव में एक दूसरे को नहीं काटती हैं। लेकिन, जब इन्हें पीछे की ओर बढ़ाया जाता है, तो वे मुख्य अक्ष पर एक बिंदु I' पर मिलती हुई प्रतीत होती हैं। बिंदु I' वस्तु O' का आभासी प्रतिबिम्ब है। इस प्रकार, उत्तल दर्पण द्वारा वस्तु का प्रतिबिम्ब हमेशा ध्रुव (P) और फोकस (F) के बीच, दर्पण के पीछे बनता है, और यह आभासी, सीधा व वस्तु से छोटा होता है।
In simple words: उत्तल दर्पण से बनने वाली हर तस्वीर (प्रतिबिम्ब) हमेशा सीधी, छोटी और आभासी होती है. यह दर्पण के पीछे फोकस (F) और ध्रुव (P) के बीच बनती है. किरणें दर्पण से टकराकर ऐसे फैलती हैं जैसे वे एक बिंदु से आ रही हों, जिससे यह छोटा और सीधा प्रतिबिम्ब दिखता है.
🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्बों के लिए किरण आरेखों का अभ्यास करें. ध्यान दें कि प्रतिबिम्ब की स्थिति और प्रकृति वस्तु की स्थिति पर निर्भर नहीं करती, यह हमेशा एक जैसी रहती है.
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