RBSE Solutions Class 7 Science Chapter 11 प्रकाश छाया एवं परावर्तन

Get the most accurate RBSE Solutions for Class 7 Science Chapter 11 प्रकाश छाया एवं परावर्तन here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest RBSE textbooks for Class 7 Science. Our expert-created answers for Class 7 Science are available for free download in PDF format.

Detailed Chapter 11 प्रकाश छाया एवं परावर्तन RBSE Solutions for Class 7 Science

For Class 7 students, solving RBSE textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 7 Science solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 11 प्रकाश छाया एवं परावर्तन solutions will improve your exam performance.

Class 7 Science Chapter 11 प्रकाश छाया एवं परावर्तन RBSE Solutions PDF

आइए, और अधिक सीखें

 

प्रश्न 1. निम्नलिखित पिंडों में से कौन से पिंड दीप्त पिंड हैं? मंगल ग्रह, चंद्रमा, ध्रुव तारा, सूर्य, शुक्र ग्रह तथा दर्पण
Answer: सूर्य और ध्रुव तारा दीप्त पिंड हैं। ये पिंड अपना खुद का प्रकाश पैदा करते हैं और इसी से चमकते हैं। जैसे सूर्य एक बहुत बड़ा आग का गोला है जो रोशनी देता है, वैसे ही ध्रुव तारा भी अपनी रोशनी से चमकता है। दीप्त पिंड वे होते हैं जो ऊष्मा और प्रकाश ऊर्जा को उत्सर्जित करते हैं। बाकी सभी वस्तुएं, जैसे मंगल ग्रह, चंद्रमा, शुक्र ग्रह और दर्पण, सूर्य के प्रकाश से ही रोशन होते हैं या उसे परावर्तित करते हैं।
In simple words: सूर्य और ध्रुव तारा दीप्त पिंड हैं क्योंकि वे अपनी खुद की रोशनी बनाते हैं। बाकी सभी चीजें सूर्य के प्रकाश से चमकती हैं।

🎯 Exam Tip: दीप्त और अदीप्त पिंडों को उनकी प्रकाश उत्पन्न करने की क्षमता के आधार पर पहचानें।

 

प्रश्न 2. स्तंभ I को स्तंभ II से सुमेलित कीजिए।

स्तंभ Iस्तंभ II
सूची छिद्र कैमराप्रकाश पूर्णतः अवरुद्ध करती है।
अपारदर्शी वस्तुवस्तु के पीछे बना गहरा काला क्षेत्र ।।
पारदर्शी वस्तुव्युत्क्रमित प्रतिबिंब बनता है।
छायाप्रकाश लगभग पूर्णतः संचारित होता है।

Answer: स्तंभ I में दी गई वस्तुओं या परिघटनाओं को स्तंभ II में उनके सही विवरण से मिलाया गया है। यह मिलान प्रकाश के मूलभूत गुणों और विभिन्न प्रकार की वस्तुओं के साथ उसकी अंतःक्रिया को समझने में मदद करता है।

स्तंभ Iस्तंभ II
सूची छिद्र कैमराव्युत्क्रमित प्रतिबिंब बनता है।
अपारदर्शी वस्तुप्रकाश पूर्णतः अवरुद्ध करती है।
पारदर्शी वस्तुप्रकाश लगभग पूर्णतः संचारित होता है।
छायावस्तु के पीछे बना गहरा काला क्षेत्र।

In simple words: सूची छिद्र कैमरा उल्टा प्रतिबिंब बनाता है। अपारदर्शी वस्तु प्रकाश को रोकती है। पारदर्शी वस्तु से प्रकाश लगभग पूरा गुजरता है। छाया वस्तु के पीछे का काला क्षेत्र है।

🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, पहले उन जोड़ियों को मिलाएं जिनके बारे में आप निश्चित हैं, फिर बाकी विकल्पों पर विचार करें।

 

प्रश्न 3. साहिल, रेखा, पैट्रिक और कासिमा चित्र 11.16 में दर्शाए गए पाइप से मोमबत्ती की लौ को देखने का प्रयास कर रहे हैं। इनमें से कौन लौ देख पाएगा?
Answer: चित्र 11.16 में, केवल रेखा ही मोमबत्ती की लौ देख पाएगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि उसका पाइप सीधा है और उसकी देखने की रेखा (line of sight) मोमबत्ती की लौ तक बिना किसी रुकावट के पहुँच रही है। प्रकाश हमेशा सीधी रेखा में चलता है, जिसे प्रकाश का ऋजुरेखीय संचरण कहते हैं। साहिल, कासिमा और पैट्रिक के पाइप मुड़े हुए हैं या उनमें रुकावट है, जिस कारण वे लौ नहीं देख सकते।
In simple words: केवल रेखा ही लौ देख पाएगी क्योंकि उसका पाइप सीधा है। प्रकाश सीधी रेखा में चलता है, इसलिए मुड़े पाइप से लौ नहीं दिखती।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि प्रकाश सीधी रेखा में गमन करता है; मुड़े हुए या अवरुद्ध मार्ग से इसे नहीं देखा जा सकता।

 

प्रश्न 4. चित्र 11.17 में दर्शाए गए प्रतिबिंबों को देखिए और बालक की छाया को दर्शाने वाले सही चित्र का चयन कीजिए।
Answer: दिए गए चित्रों में से, चित्र (घ) बालक की छाया को सही ढंग से दर्शाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब सूर्य सिर के ठीक ऊपर होता है, तो छाया सबसे छोटी बनती है। वहीं, जब सूर्य दाईं या बाईं ओर होता है, तो छाया सूर्य की दिशा के विपरीत बनती है। यह छाया की लंबाई और स्थिति में दिन भर होने वाले बदलाव को स्पष्ट करता है, जो सूर्य की स्थिति पर निर्भर करता है।
In simple words: चित्र (घ) सही है क्योंकि दोपहर में जब सूर्य ऊपर होता है, तो छाया छोटी और सीधी बनती है। सुबह और शाम को यह लंबी और विपरीत दिशा में होती है।

🎯 Exam Tip: छाया की लंबाई और दिशा सूर्य की स्थिति पर निर्भर करती है: दोपहर में छोटी और सीधी, सुबह-शाम लंबी और विपरीत दिशा में।

 

प्रश्न 5. चित्र 11.18 में दर्शाया गया है कि एक स्थिर टॉर्च के सामने रखी गेंद की छाया दीवार पर बनी है। परिदृश्य (i) में गेंद टॉर्च के समीप है जबकि परिदृश्य (ii) में गेंद दीवार के समीप है । दिए गए विकल्पों (क) और (ख) में से दोनों परिदृश्यों का सबसे उपयुक्त प्रदर्शन करने वाले चित्र का चयन कीजिए।
Answer: चित्र 11.18 में, गेंद और टॉर्च की स्थिति के आधार पर छाया के विभिन्न रूप दिखाए गए हैं। जब गेंद टॉर्च के समीप होती है, तो दीवार पर बनने वाली छाया बड़ी और धुंधली (पेनंब्रा) होती है। यह स्थिति चित्र (ख) में सबसे अच्छे से दिखाई गई है। इसके विपरीत, जब गेंद दीवार के समीप होती है (यानी टॉर्च से दूर होती है), तो छाया छोटी और तेज (अंब्रा) बनती है। यह स्थिति चित्र (क) में सबसे उपयुक्त रूप से दर्शाई गई है। पेनंब्रा धुंधली छाया होती है जबकि अंब्रा तेज और गहरी छाया होती है। छाया का आकार और स्पष्टता प्रकाश स्रोत, वस्तु और स्क्रीन के बीच की दूरी पर निर्भर करती है।
In simple words: गेंद टॉर्च के पास होने पर बड़ी और धुंधली छाया (ख) बनती है। गेंद दीवार के पास (टॉर्च से दूर) होने पर छोटी और तेज छाया (क) बनती है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि प्रकाश स्रोत के पास वस्तु रखने पर बड़ी और धुंधली छाया (पेनंब्रा) बनती है, जबकि वस्तु को स्क्रीन के पास रखने पर छोटी और तेज छाया (अंब्रा) बनती है।

 

प्रश्न 6. चित्र 11.18 के आधार पर स्तंभ '।' में टॉर्च की स्थिति का स्तंभ '।।' में गेंद की छाया लक्षणों के आधार पर मिलान कीजिए।

स्तंभ 1स्तंभ II
यदि टॉर्च गेंद के समीप हैछाया बहुत बड़ी बनेगी
यदि टॉर्च गेंद से बहत दूरछाया बहुत छोटी बनेगी
यदि गेंद को इस व्यवस्था से हटा दिया जाएपर्दे पर दो छाया दिखाई देगी
यदि इस व्यवस्था में गेंदपर्दे पर एक चमकदार चकता दिखाई देगा
के बाई ओर दो टॉर्च लिए जाएँपर्दे पर दो छाया दिखाई देगी

Answer: स्तंभ I में दी गई टॉर्च की स्थितियों को स्तंभ II में गेंद की छाया के संबंधित लक्षणों से मिलाया गया है। कई प्रकाश स्रोतों से एक वस्तु की कई छायाएँ बन सकती हैं, जो प्रत्येक स्रोत की स्थिति पर निर्भर करती हैं।

स्तंभ 1स्तंभ II
यदि टॉर्च गेंद के समीप हैछाया बहुत बड़ी बनेगी
के बाई ओर दो टॉर्च लिए जाएँपर्दे पर दो छाया दिखाई देगी

In simple words: टॉर्च गेंद के पास होने पर बहुत बड़ी छाया बनती है। गेंद के बाईं ओर दो टॉर्च लगाने पर पर्दे पर दो छाया दिखती हैं।

🎯 Exam Tip: प्रकाश स्रोतों की संख्या और स्थिति छाया के आकार, स्पष्टता और संख्या को सीधे प्रभावित करती है।

 

प्रश्न 7. माना कि आप चित्र 11.19 में दर्शाए गए वृक्ष को सूचीछिद्र कैमरे की सहायता से देखते हैं। वृक्ष के प्रतिबिंब की पर्दे पर प्राप्त आकृति की रूपरेखा बनाइए।
Answer: जब चित्र 11.19 में दिखाए गए सीधे वृक्ष को सूचीछिद्र (पिनहोल) कैमरे से देखा जाता है, तो पर्दे पर उसका प्रतिबिंब उल्टा बनता है। इसका मतलब है कि वृक्ष का ऊपरी हिस्सा नीचे की ओर दिखाई देगा, जबकि उसका तना और जड़ वाला हिस्सा ऊपर की ओर दिखेगा। साथ ही, बनने वाला प्रतिबिंब वास्तविक वृक्ष से आकार में छोटा होगा। यह सूचीछिद्र कैमरे के काम करने के मूलभूत सिद्धांत को दर्शाता है, जहाँ प्रकाश एक छोटे से छेद से होकर गुजरता है और उल्टा प्रतिबिंब बनाता है।
In simple words: सूचीछिद्र कैमरे से देखने पर वृक्ष का प्रतिबिंब उल्टा और छोटा बनता है; ऊपरी भाग नीचे और निचला भाग ऊपर दिखता है।

🎯 Exam Tip: सूचीछिद्र कैमरे से हमेशा उल्टा और छोटा प्रतिबिंब बनता है क्योंकि प्रकाश सीधी रेखाओं में चलता है और छेद से गुजरते ही अपनी दिशा पार कर लेता है।

 

प्रश्न 8. कागज के किसी टुकड़े पर अपना नाम लिखिए और इसे समतल दर्पण के सामने इस प्रकार पकड़िए कि कागज दर्पण के समांतर रहे। इसके प्रतिबिंब का आरेख बनाइए। कागज पर लिखे नाम और दर्पण में बने इसके प्रतिबिंब के मध्य आप क्या अंतर देखते हैं? इस अंतर के कारण की व्याख्या कीजिए।
Answer: जब आप कागज पर अपना नाम लिखकर उसे समतल दर्पण के सामने रखते हैं, तो दर्पण में नाम के अक्षर पार्श्वतः उल्टे (laterally inverted) दिखाई देते हैं। इसका मतलब है कि जो अक्षर मूल रूप से बाईं ओर होता है, वह दर्पण में दाईं ओर दिखता है, और जो दाईं ओर होता है, वह बाईं ओर दिखता है। जैसे 'AMBULANCE' शब्द को उल्टा लिखा जाता है ताकि दर्पण में देखने पर वह सीधा दिखाई दे। हालाँकि, अक्षरों की ऊँचाई या आकार में कोई बदलाव नहीं होता है। यह घटना प्रकाश के परावर्तन (reflection) के कारण होती है। वाह्नों पर 'AMBULANCE' शब्द का उल्टा लिखा होना इसी पार्श्व व्युत्क्रमण के सिद्धांत का एक व्यावहारिक उपयोग है, ताकि पीछे के वाहनों के शीशे में वह सीधा दिखे। जब प्रकाश की किरणें दर्पण की सतह से टकराती हैं, तो वे एक समान कोण पर परावर्तित होती हैं, लेकिन यह परावर्तन उनकी बाईं-दाईं स्थिति को बदल देता है।
In simple words: दर्पण में नाम के अक्षर उल्टे दिखते हैं (बाएँ का दाएँ)। यह प्रकाश के परावर्तन के कारण होता है, जहाँ किरणें टकराकर अपनी दिशा बदलती हैं।

🎯 Exam Tip: समतल दर्पण में बने प्रतिबिंब हमेशा आभासी, सीधे और पार्श्वतः उल्टे होते हैं, लेकिन उनका आकार वस्तु के बराबर होता है।

 

प्रश्न 9. अपने मित्र की सहायता से एक समान स्थान पर अपनी छाया की लंबाई सुबह 9 बजे, दोपहर 12 बजे और दोपहर पश्चात 4 बजे मापिए। अपने प्रेक्षणों को लिखिए:
(i) आपकी छाया किस समय सबसे छोटी होती है?
(ii) आपके विचार से ऐसा क्यों होता है?
Answer: छाया की लंबाई दिन के अलग-अलग समय पर बदलती है। प्रेक्षण से पता चलता है कि:
(i) दोपहर 12 बजे छाया सबसे छोटी होती है।
(ii) ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दोपहर के समय सूर्य लगभग हमारे सिर के ठीक ऊपर होता है। इस स्थिति में, सूर्य की किरणें वस्तु पर सीधे लंबवत पड़ती हैं, जिससे छाया सबसे कम लंबी बनती है और सीधे नीचे की ओर होती है। इसके विपरीत, सुबह और शाम को सूर्य क्षितिज के करीब होता है, जिससे किरणें तिरछे कोण पर आती हैं। इस तिरछे कोण के कारण, छाया की लंबाई बढ़ जाती है और वह लंबी दिखाई देती है। छाया की दिशा और लंबाई सूर्य की आकाश में स्थिति और पृथ्वी के घूमने के कारण बदलती है।
In simple words: दोपहर 12 बजे छाया सबसे छोटी होती है क्योंकि सूर्य सिर के ऊपर होता है और किरणें सीधी पड़ती हैं। सुबह-शाम सूर्य तिरछा होने से छाया लंबी बनती है।

🎯 Exam Tip: छाया की लंबाई सूर्य के कोण पर निर्भर करती है: उच्च कोण (दोपहर) पर छोटी छाया और निम्न कोण (सुबह/शाम) पर लंबी छाया।

 

प्रश्न 10. निम्नलिखित कथनों के आधार पर सही विकल्प चुनिए-
(क) किसी समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब पार्श्वतः व्युत्क्रमित होता है।
(ख) अंग्रेजी वर्णमाला के वर्ण ㅜ और ० के समतल दर्पण में बने प्रतिबिम्ब वैसे ही दिखते हैं जैसे ये वर्ण हैं।
(i) दोनों कथन सत्य हैं।
(ii) केवल कथन (क) सत्य है।
(iii) केवल कथन (ख) सत्य है।
(iv) दोनों कथन असत्य हैं।
Answer: (i) दोनों कथन सत्य हैं।
Answer: कथन (क) सत्य है क्योंकि एक समतल दर्पण हमेशा वस्तु के प्रतिबिंब को पार्श्वतः उल्टा दिखाता है, यानी दाएँ का बाएँ और बाएँ का दाएँ। कथन (ख) भी सत्य है क्योंकि 'T' और 'O' जैसे अक्षरों में पार्श्व समरूपता होती है। इसका मतलब है कि जब इन्हें समतल दर्पण में देखा जाता है, तो ये वैसे ही दिखते हैं जैसे वे वास्तव में होते हैं। कुछ अक्षरों जैसे H, I, O, X, A, M, T, U, V, W, Y में भी पार्श्व समरूपता होती है और वे दर्पण में अपरिवर्तित दिखते हैं। तो, दिए गए दोनों कथन सही हैं।
In simple words: दोनों कथन सही हैं। समतल दर्पण में प्रतिबिंब पार्श्वतः उल्टा बनता है, लेकिन 'T' और 'O' जैसे अक्षरों में यह बदलाव नहीं दिखता क्योंकि वे सममित होते हैं।

🎯 Exam Tip: समतल दर्पण के गुणों को याद रखें: पार्श्व व्युत्क्रमण एक महत्वपूर्ण गुण है, और कुछ सममित अक्षरों में यह व्युत्क्रमण दिखाई नहीं देता है।

 

प्रश्न 11. मान लीजिए कि आपको चित्र 11.20 में दर्शाई गई आकृति की एक नलिका और दो ऐसे समतल दर्पण दिए गए हैं जिनका व्यास नलिका के व्यास से कम है। क्या इस नलिका का उपयोग परिदर्शी बनाने के लिए किया जा सकता है? यदि आपका उत्तर हाँ है तो नलिका पर वह स्थान अंकित कीजिए जहाँ आप समतल दर्पण लगाएँगे।
Answer: हाँ, इस नलिका का उपयोग एक परिदर्शी (periscope) बनाने के लिए किया जा सकता है। परिदर्शी प्रकाश के परावर्तन के सिद्धांत पर काम करता है, जिससे हम सीधे न देख सकने वाली वस्तुओं को देख पाते हैं। इस नलिका में दो समतल दर्पणों को इस तरह से लगाया जाता है कि वे नलिका के खुले सिरों के अंदर, केंद्रीय धुरी से 45 डिग्री के कोण पर झुके हों। दर्पणों की परावर्तक सतहें एक-दूसरे की ओर मुड़ी होनी चाहिए। जब प्रकाश की किरणें वस्तु से आती हैं, तो वे पहले दर्पण से टकराकर नलिका के अंदर परावर्तित होती हैं। फिर वे दूसरे दर्पण से टकराकर हमारी आँखों तक पहुँचती हैं, जिससे हम वस्तु को देख पाते हैं। परिदर्शी का उपयोग पनडुब्बियों में, युद्ध के मैदान में छिपकर देखने के लिए और भीड़ में ऊपर देखने के लिए किया जाता है।

दर्पण-2 दर्पण-1

In simple words: हाँ, इस नलिका से परिदर्शी बनाया जा सकता है। इसमें दो दर्पण 45 डिग्री पर लगते हैं ताकि प्रकाश दो बार परावर्तित होकर आँखों तक पहुँचे।

🎯 Exam Tip: परिदर्शी में समतल दर्पणों को 45 डिग्री के कोण पर लगाया जाता है, जिससे प्रकाश का दोहरा परावर्तन होकर वस्तु दिखाई देती है।

 

प्रश्न 12. बहुत अधिक ऊँचाई पर उड़ते हुए पक्षियों की छाया हमें धरती पर दिखाई नहीं देती है। परंतु जब कोई पक्षी धरती के निकट उड़ता है तो उसकी छाया धरती पर दिखाई देती है। विचार कीजिए और बताइए कि ऐसा क्यों होता है?
Answer: जब पक्षी बहुत अधिक ऊँचाई पर उड़ते हैं, तो उनकी छाया धरती पर दिखाई नहीं देती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पक्षी और धरती के बीच की दूरी बहुत ज्यादा होती है, जिससे प्रकाश किरणें वस्तु के किनारों से गुजरने के बाद बहुत अधिक फैल जाती हैं (विवर्तन)। इस फैलाव के कारण छाया इतनी धुंधली हो जाती है कि वह अदृश्य हो जाती है। यह 'अंब्रा' और 'पेनंब्रा' के सिद्धांत से संबंधित है, जहाँ बहुत अधिक दूरी पर पेनंब्रा इतना फैल जाता है कि अंब्रा भी नहीं दिखता। इसके विपरीत, जब पक्षी धरती के करीब उड़ता है, तो प्रकाश को फैलने के लिए कम जगह मिलती है, जिससे एक स्पष्ट और अच्छी तरह से परिभाषित छाया दिखाई देती है।
In simple words: ऊँचाई पर पक्षियों की छाया नहीं दिखती क्योंकि प्रकाश फैल जाता है। करीब उड़ने पर छाया स्पष्ट दिखती है क्योंकि प्रकाश को फैलने के लिए कम जगह मिलती है।

🎯 Exam Tip: छाया की स्पष्टता प्रकाश स्रोत, वस्तु और स्क्रीन के बीच की दूरी पर निर्भर करती है; अधिक दूरी पर प्रकाश के फैलाव (विवर्तन) के कारण छाया धुंधली या अदृश्य हो जाती है।

Class 7 Science Chapter 11 Question Answer in Hindi (In-Text)

 

प्रश्न 2. क्या होता है जब कोई अपारदर्शी वस्तु प्रकाश- पथ को अवरुद्ध कर देती है?
Answer: जब कोई अपारदर्शी वस्तु प्रकाश के मार्ग को रोक देती है, तो उस वस्तु के पीछे का वह क्षेत्र जहाँ प्रकाश नहीं पहुँच पाता, काला दिखाई देता है। इस काले क्षेत्र को छाया (shadow) कहते हैं। छाया तब बनती है जब प्रकाश सीधी रेखा में चलता है और एक ऐसी वस्तु से टकराता है जो उसे पार नहीं जाने देती। अपारदर्शी वस्तुएं प्रकाश को पूरी तरह अवशोषित या परावर्तित करती हैं, जिससे उनके पीछे अंधेरा क्षेत्र बनता है।
In simple words: अपारदर्शी वस्तु प्रकाश को रोक देती है, जिससे वस्तु के पीछे एक काला क्षेत्र बनता है जिसे छाया कहते हैं।

🎯 Exam Tip: छाया केवल तभी बनती है जब प्रकाश का स्रोत, अपारदर्शी वस्तु और एक स्क्रीन (सतह) मौजूद हो।

 

प्रश्न 3. जब अपारदर्शी वस्तु एक चमकदार वस्तु, जैसे स्टील की प्लेट ली गईं तो पर्दे पर एक छाया प्राप्त हुई साथ ही पर्दे के सामने की दीवार पर एक चमकदार चकता भी दिखा। ऐसा क्यों हुआ?
Answer: जब एक चमकदार वस्तु, जैसे कि स्टील की प्लेट, को अपारदर्शी वस्तु के रूप में उपयोग किया जाता है, तो पर्दे पर छाया बनने के साथ-साथ दीवार पर एक चमकदार धब्बा भी दिखाई देता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि स्टील की प्लेट एक चमकदार सतह होती है, जो उस पर पड़ने वाले प्रकाश को परावर्तित करती है। प्रकाश का अपनी दिशा बदलकर वापस लौटना ही परावर्तन कहलाता है। यह चमकदार धब्बा परावर्तित प्रकाश के कारण बनता है। चमकदार सतहें प्रकाश को नियमित रूप से परावर्तित करती हैं, जिससे एक स्पष्ट प्रतिबिंब या चमकदार धब्बा बनता है, जबकि खुरदरी सतहें प्रकाश को अनियमित रूप से फैलाती हैं।
In simple words: चमकदार स्टील की प्लेट प्रकाश को परावर्तित करती है, जिससे दीवार पर एक चमकदार धब्बा दिखता है। प्रकाश का अपनी दिशा बदलना ही परावर्तन है, और इसी कारण यह चमकदार धब्बा बनता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि छाया प्रकाश के अवरुद्ध होने के कारण बनती है, जबकि चमकदार धब्बा प्रकाश के परावर्तन के कारण बनता है।

 

प्रश्न 4. किसी दर्पण में मैं अपना चेहरा भी देख सकती हूँ। क्या यह भी प्रकाश के परावर्तन के कारण होता है?
Answer: हाँ, किसी दर्पण में अपना चेहरा देख पाना प्रकाश के परावर्तन के कारण ही संभव होता है। जब प्रकाश हमारे चेहरे से टकराकर दर्पण पर पड़ता है, तो दर्पण उस प्रकाश को हमारी आँखों की ओर वापस परावर्तित कर देता है। हमारी आँखें इस परावर्तित प्रकाश को एक प्रतिबिंब के रूप में देखती हैं, जिससे हमें अपना चेहरा दिखाई देता है। परावर्तन के बिना, हम दर्पणों में कुछ भी नहीं देख पाते, क्योंकि प्रकाश हमारी आँखों तक नहीं पहुँच पाता।
In simple words: हाँ, दर्पण में चेहरा प्रकाश के परावर्तन के कारण ही दिखता है, जहाँ प्रकाश चेहरे से टकराकर दर्पण से हमारी आँखों तक लौटता है।

🎯 Exam Tip: परावर्तन वह प्रक्रिया है जिसमें प्रकाश की किरणें किसी सतह से टकराकर वापस लौटती हैं, जिससे हमें प्रतिबिंब दिखाई देते हैं।

 

प्रश्न 5. क्या किसी वस्तु का प्रतिबिंब हम केवल दर्पण में ही देख सकते हैं अथवा इन्हें देखने की कोई अन्य विधि भी है?
Answer: नहीं, किसी वस्तु का प्रतिबिंब केवल दर्पण में ही नहीं देखा जा सकता। इसे देखने के कई और तरीके भी हैं। उदाहरण के लिए, आप किसी चमकदार पानी की सतह में, एक चमकदार धातु की सतह पर, या किसी पॉलिश की हुई सतह पर भी प्रतिबिंब देख सकते हैं। इसके अलावा, एक सूचीछिद्र कैमरा भी वस्तुओं के प्रतिबिंब बनाता है, जो पर्दे पर दिखाई देते हैं। प्रकाश को मोड़ने और प्रतिबिंब बनाने के लिए लेंस का उपयोग भी किया जा सकता है। आधुनिक ऑप्टिकल उपकरण जैसे कैमरे और प्रोजेक्टर भी प्रतिबिंब बनाने के लिए परावर्तन और अपवर्तन दोनों सिद्धांतों का उपयोग करते हैं।
In simple words: हम प्रतिबिंब सिर्फ दर्पण में नहीं, बल्कि पानी, चमकदार धातु या पॉलिश वाली सतहों पर भी देख सकते हैं। सूचीछिद्र कैमरे और लेंस भी प्रतिबिंब बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रतिबिंब देखने के कई तरीके हैं, जिनमें दर्पण, चमकदार सतहें, सूचीछिद्र कैमरे और लेंस शामिल हैं, जो सभी प्रकाश के परावर्तन या अपवर्तन के सिद्धांतों पर आधारित हैं।

Free study material for Science

RBSE Solutions Class 7 Science Chapter 11 प्रकाश छाया एवं परावर्तन

Students can now access the RBSE Solutions for Chapter 11 प्रकाश छाया एवं परावर्तन prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 7 Science textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.

Detailed Explanations for Chapter 11 प्रकाश छाया एवं परावर्तन

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 7 Science chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 7 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Science Class 7 Solved Papers

Using our Science solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 7 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 11 प्रकाश छाया एवं परावर्तन to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest RBSE Solutions Class 7 Science Chapter 11 प्रकाश छाया एवं परावर्तन for the 2026-27 session?

The complete and updated RBSE Solutions Class 7 Science Chapter 11 प्रकाश छाया एवं परावर्तन is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 7 Science are as per latest RBSE curriculum.

Are the Science RBSE solutions for Class 7 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 7 Science Chapter 11 प्रकाश छाया एवं परावर्तन as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 7 RBSE solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 7 Science Chapter 11 प्रकाश छाया एवं परावर्तन will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 7 Science Chapter 11 प्रकाश छाया एवं परावर्तन in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 7 Science. You can access RBSE Solutions Class 7 Science Chapter 11 प्रकाश छाया एवं परावर्तन in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Science RBSE solutions for Class 7 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 7 Science Chapter 11 प्रकाश छाया एवं परावर्तन in printable PDF format for offline study on any device.