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Detailed Chapter 9 दैनिक जीवन में पृथक्करण विधियाँ RBSE Solutions for Class 6 Science
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Class 6 Science Chapter 9 दैनिक जीवन में पृथक्करण विधियाँ RBSE Solutions PDF
Question 1. चने की दाल में मुरमुरों की थोड़ी मात्रा मिल गई है। क्या आप हस्त चयन के अलावा किसी अन्य विधि से इस मिश्रण को पृथक करने के विषय में सोच सकते हैं?
Answer: हाँ, हम चने की दाल और मुरमुरे के मिश्रण को हस्त चयन के अलावा एक दूसरी विधि से अलग कर सकते हैं. इस विधि को ओसाई (विनोइंग) कहते हैं. ओसाई में हवा का उपयोग करके हल्के मुरमुरों को भारी दाल से अलग किया जाता है.
In simple words: हाँ, हम ओसाई विधि का इस्तेमाल कर सकते हैं. ओसाई में हवा की मदद से हल्के मुरमुरों को भारी दाल से अलग किया जाता है.
🎯 Exam Tip: जब मिश्रण में मौजूद चीज़ों का वजन अलग-अलग हो, तो ओसाई विधि बहुत काम आती है क्योंकि इसमें हवा का इस्तेमाल होता है.
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
Question 1. पृथक्करण विधि के रूप में हस्त चयन का क्या प्रयोजन है?
(a) निस्यंदन
(b) छँटाई
(c) वाष्पन
(d) निस्तारण
Answer: (b) छँटाई
In simple words: हस्त चयन का मतलब है हाथ से चुनकर चीज़ों को अलग करना. यह छोटे पत्थरों या गंदगी को अनाज से अलग करने का एक तरीका है.
🎯 Exam Tip: हस्त चयन विधि सबसे अच्छी तब काम करती है जब मिश्रण में अशुद्धियाँ कम मात्रा में हों और आसानी से हाथ से उठाई जा सकें.
Question 2. निम्नलिखित में से किन पदार्थों का पृथक्करण मथना विधि से किया जाता है?
(a) तेल का पानी से
(b) रेत का पानी से
(c) मक्खन का दूध से
(d) ऑक्सीजन का वायु से
Answer: (c) मक्खन का दूध से
In simple words: मथना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें दूध या क्रीम को तेजी से घुमाया जाता है ताकि उसमें से मक्खन अलग हो जाए. यह भारी और हल्के कणों को अलग करने का एक तरीका है.
🎯 Exam Tip: मथना विधि में अपकेंद्रण (centrifugation) के सिद्धांत का उपयोग होता है, जहाँ हल्के घटक ऊपर आ जाते हैं और भारी घटक नीचे बैठ जाते हैं.
Question 3. निस्यंदन के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कारक प्रायः अनिवार्य होता है?
(a) उपकरण का आकार
(b) वायु की उपस्थिति
(c) छिद्रों का आकार
(d) मिश्रण का तापमान
Answer: (c) छिद्रों का आकार
In simple words: निस्यंदन (फिल्टरेशन) में, फिल्टर पेपर या कपड़े में छोटे-छोटे छेद होते हैं. ये छेद ही तय करते हैं कि कौन से कण छनकर बाहर निकलेंगे और कौन से रुकेंगे.
🎯 Exam Tip: निस्यंदन का मुख्य उद्देश्य तरल पदार्थ से अघुलनशील ठोस कणों को अलग करना है, और छिद्रों का सही आकार इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
Question 4. कारण देते हुए बताएँ कि निम्नलिखित कथनों में सही (√) और गलत (X) कौन-कौन से हैं? असत्य कथनों को सही करके लिखें।
(ग) मुरमुरे और चावल के दानों के मिश्रण को थ्रेशिंग द्वारा पृथक कर सकते हैं।
Answer: गलत, क्योंकि किसी मिश्रण के भारी और हल्के अवयवों को पृथक करने के लिए ओसाई (विनोइंग) विधि का उपयोग करते हैं।
सही कथन: मुरमुरे और चावल के दानों के मिश्रण को ओसाई (विनोइंग) द्वारा पृथक कर सकते हैं।
In simple words: यह कथन गलत है क्योंकि थ्रेशिंग का उपयोग अनाज को डंडियों से अलग करने के लिए होता है, न कि मिश्रण के भारी और हल्के घटकों को. ओसाई विधि वजन में अंतर के कारण चीजों को अलग करने में मदद करती है.
🎯 Exam Tip: थ्रेशिंग का काम अनाज के दानों को उनके पौधों से अलग करना है, जबकि ओसाई हल्के भूसे को भारी अनाज से अलग करने के लिए हवा का इस्तेमाल करती है.
Question 4. कारण देते हुए बताएँ कि निम्नलिखित कथनों में सही (√) और गलत (X) कौन-कौन से हैं? असत्य कथनों को सही करके लिखें।
(घ) सरसों के तेल और नींबू पानी के मिश्रण को निस्तारण विधि द्वारा पृथक कर सकते हैं।
Answer: सही-कारण- तेल और पानी अलग-अलग परत बनाएँगे जिन्हें निस्तारण द्वारा अलग कर सकते हैं।
In simple words: यह कथन सही है. तेल और पानी आपस में घुलते नहीं हैं, इसलिए वे अलग-अलग परत बनाते हैं. इन परतों को निस्तारण विधि से आसानी से अलग किया जा सकता है.
🎯 Exam Tip: निस्तारण विधि उन द्रवों के मिश्रण के लिए सबसे प्रभावी होती है जो आपस में नहीं घुलते और अलग-अलग घनत्व के कारण अलग-अलग परतें बनाते हैं.
Question 4. कारण देते हुए बताएँ कि निम्नलिखित कथनों में सही (√) और गलत (X) कौन-कौन से हैं? असत्य कथनों को सही करके लिखें।
(ङ) छानने की विधि का उपयोग चावल के आटे और पानी को पृथक करने में होता है।
Answer: गलत – कारण- चालन (छानना) विधि का उपयोग अलग-अलग आकार वाले कणों के ठोस मिश्रण को पृथक करने में किया जाता है।
सही कथन: निस्पंदन विधि का उपयोग चावल के आटे और पानी को पृथक करने में होता है।
In simple words: यह कथन गलत है. चालन (छानना) विधि का उपयोग तब करते हैं जब ठोस कणों का आकार अलग-अलग हो. चावल के आटे और पानी को अलग करने के लिए निस्यंदन (फिल्टरेशन) विधि का उपयोग करते हैं.
🎯 Exam Tip: निस्यंदन विधि का उपयोग द्रव में घुले या निलंबित ठोस पदार्थों को अलग करने के लिए किया जाता है, जबकि चालन का उपयोग ठोस मिश्रण में बड़े और छोटे कणों को अलग करने के लिए होता है.
Question 5. स्तंभ I में दिए गए प्रत्येक मिश्रण को स्तंभ II में उपयुक्त पृथक्करण विधि से मिलान करें।
| स्तंभ I | स्तंभ II |
|---|---|
| (क) बेसन और काले चने का मिश्रण | (i) हस्त चयन |
| (ख) चॉक पाउडर और पानी का मिश्रण | (ii) चुंबकीय पृथक्करण |
| (ग) भुट्टे और आलू का मिश्रण | (iii) निस्तारण |
| (घ) लोहे के चूरे और बुरादे का मिश्रण | (iv) छानना |
| (ङ) तेल और पानी का मिश्रण | (v) निस्यंदन |
| स्तंभ I | स्तंभ II |
|---|---|
| (1) रेत से जल पृथक् करना | (D) निस्तारण |
| (2) अनाज से डंडियाँ पृथक् करना | (C) थ्रेसिंग |
| (3) चाय छानना | (B) निस्यंदन |
| (4) वायु के उपयोग से पृथक्करण | (A) ओसाई |
Answer:
(क) बेसन और काले चने का मिश्रण - (i) हस्त चयन
(ख) चॉक पाउडर और पानी का मिश्रण - (v) निस्यंदन
(ग) भुट्टे और आलू का मिश्रण - (i) हस्त चयन
(घ) लोहे के चूरे और बुरादे का मिश्रण - (ii) चुंबकीय पृथक्करण
(ङ) तेल और पानी का मिश्रण - (iii) निस्तारण
In simple words: सही मिलान के लिए, हमें देखना होगा कि किस मिश्रण को अलग करने के लिए कौन सी विधि सबसे अच्छी है. जैसे, हाथ से चुनना (हस्त चयन) तब काम आता है जब चीजें बड़ी और आसानी से देखी जा सकें.
🎯 Exam Tip: मिश्रण के गुणों (जैसे आकार, वजन, घुलनशीलता) के आधार पर सही पृथक्करण विधि का चयन करना सीखें.
Question 6. किस परिस्थिति में आप ठोस और द्रव के मिश्रण को पृथक करने में निस्यंदन के स्थान पर निस्तारण विधि का उपयोग करेंगे?
Answer: जब ठोस और द्रव के मिश्रण में ठोस अवयव भारी हों और उनके कणों का आकार भी बड़ा हो, तब मिश्रण को अलग करने के लिए निस्यंदन की जगह निस्तारण विधि का उपयोग करना ज्यादा अच्छा रहता है. निस्तारण में भारी कण नीचे बैठ जाते हैं.
In simple words: अगर ठोस कण भारी और बड़े हों, तो हम निस्यंदन की जगह निस्तारण विधि का उपयोग करेंगे, क्योंकि भारी कण नीचे बैठ जाते हैं और फिर द्रव को आसानी से अलग किया जा सकता है.
🎯 Exam Tip: निस्तारण विधि उन मामलों में उपयोगी है जहाँ ठोस कण द्रव में अघुलनशील होते हैं और गुरुत्वाकर्षण के कारण आसानी से नीचे बैठ जाते हैं.
Question 7. नासिका में बालों की उपस्थिति को आप किस पृथक्करण प्रक्रिया से जोड़कर देखते हैं?
Answer: नासिका (नाक) में मौजूद बाल, हवा में मौजूद छोटे कणों को अलग करने का काम करते हैं. ये बाल एक फिल्टर की तरह काम करते हैं, जिससे हवा में मौजूद धूल और गंदगी हमारे शरीर में नहीं जा पाती. इस तरह, नासिका में पृथक्करण की निस्यंदन (फिल्टरेशन) प्रक्रिया होती है.
In simple words: नाक के बाल हवा में मौजूद धूल और गंदगी को छानने का काम करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे निस्यंदन की प्रक्रिया में होता है.
🎯 Exam Tip: शरीर की प्राकृतिक प्रक्रियाएँ भी कई बार वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित होती हैं. नाक के बाल हवा को शुद्ध करके हमारे फेफड़ों तक पहुँचने में मदद करते हैं.
Question 8. कोविड- 19 (कोरोना वायरस महामारी) के समय, हम सभी ने मास्क पहने थे। सामान्यतया वे किस सामग्री से बने होते हैं? आपके मुँह और नथुनों (नाक) को ढँकने में मास्क की क्या भूमिका है?
Answer: कोविड-19 महामारी के समय हम जो मास्क पहनते थे, वे आमतौर पर कपड़े या कागज से बने होते थे. मास्क हमारे मुँह और नाक को ढकते हैं और साँस लेने वाली हवा को फिल्टर करते हैं. इससे बीमारी फैलाने वाले कण हवा के साथ शरीर में नहीं जा पाते और हम संक्रमण से सुरक्षित रहते हैं. मास्क एक सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं.
In simple words: मास्क कपड़े या कागज के बने होते थे. वे मुँह और नाक को ढककर हवा को छानते हैं, जिससे हमें बीमारी फैलाने वाले कणों से बचाव मिलता है.
🎯 Exam Tip: मास्क का मुख्य कार्य हवा में मौजूद सूक्ष्मजीवों और कणों को साँस के साथ शरीर में जाने से रोकना है, जिससे संक्रमण का खतरा कम होता है.
Question 9. आपको आलू, नमक और लकड़ी के बुरादे का मिश्रण दिया गया है। इस मिश्रण के प्रत्येक अवयव को पृथक करने के लिए चरणबद्ध विधि बताइए।
Answer:
1. सबसे पहले आलू, नमक और लकड़ी के बुरादे के मिश्रण से आलू को हाथ से चुनकर अलग कर लेंगे, क्योंकि आलू का आकार बाकी चीजों से बड़ा होता है.
2. बचे हुए नमक और लकड़ी के बुरादे के मिश्रण को पानी में मिलाएँगे और घोल लेंगे. लकड़ी का बुरादा पानी की सतह पर तैरने लगेगा, जिसे हम निस्यंदन विधि से आसानी से अलग कर सकते हैं.
3. अब पानी में नमक घुला हुआ है. इस पानी को एक बर्तन में डालकर गर्म करेंगे. पानी भाप बनकर उड़ जाएगा और बर्तन की तली में नमक बच जाएगा. इस प्रक्रिया को वाष्पन कहते हैं. इस तरह सभी चीजों को अलग किया जा सकता है.
In simple words: पहले हाथ से आलू निकालें. फिर पानी डालकर लकड़ी के बुरादे को छान लें. आखिर में, पानी को गर्म करके भाप बना दें, नमक पीछे रह जाएगा.
🎯 Exam Tip: जटिल मिश्रणों को अलग करने के लिए अक्सर कई पृथक्करण विधियों को एक क्रम में उपयोग किया जाता है, जिन्हें 'चरणबद्ध पृथक्करण' कहते हैं.
Question 10. अग्रलिखित 'बुद्धिमान लीला' शीर्षक कहानी पढ़ें। इसमें यत्र-तत्र आए दो वैकिल्पक शब्दों में से सबसे उचित विकल्प पर सही (√) का निशान लगाएँ। अपनी पसंद से अनुच्छेद का कोई अन्य उपयुक्त शीर्षक दें।
लीला अपने पिता के साथ खेत में काम कर रही थी। जब उसे ध्यान आया कि वे पीने का पानी घर पर ही छोड़ आए हैं। इसमें पहले कि उसके पिता को प्यास / भूख लगे, वह पास के तालाब से पानी / अनाज लेने गई। डिब्बे में पानी लेने के बाद उसने ध्यान दिया कि पानी मटमैला है और पीने के लिए योग्य / अयोग्य है। पानी शुद्ध करने के लिए, उसने पानी को कुछ समय के लिए रख दिया और उसके बाद मटमैले पानी को कागज / मलमल के कपड़े से निस्पंदित किया / मथा। तब लीला ने पानी को दस मिनट तक ढके बर्तन में ठंडा किया / उबाला। ठंडे / उबले पानी को उसने दोबारा से निस्पंदित किया / मथा और उसने पानी पीने योग्य / अयोग्य बनाया। यह पानी उसने अपने पिताजी को दिया। उन्होंने लीला को आशीर्वाद दिया और उसके इस प्रयास की सराहना की।
Answer:
(i) प्यास (ii) पानी (iii) अयोग्य (iv) कागज (v) निस्पंदित किया (vi) उबाला (vii) उबले (viii) निस्पंदित (ix) योग्य
उपयुक्त शीर्षक: 'शुद्ध पानी'
In simple words: कहानी में सही शब्दों का चुनाव करके लीला ने प्यासे पिता को पीने योग्य शुद्ध पानी दिया. इसका सबसे अच्छा नाम 'शुद्ध पानी' है.
🎯 Exam Tip: पैसेज-आधारित प्रश्नों में, सही विकल्प चुनते समय कहानी के संदर्भ और वैज्ञानिक सिद्धांतों दोनों को ध्यान में रखें. शीर्षक हमेशा कहानी के मुख्य विचार को दर्शाना चाहिए.
बहुचयनात्मक प्रश्न
Question 1. गेहूँ तथा चावल से पत्थर एवं भूसे को पृथक् करने की सर्वोत्तम विधि है-
(a) हस्त चयन
(b) थ्रेसिंग
(c) चालन
(d) संघनन
Answer: (a) हस्त चयन
In simple words: गेहूँ और चावल में से पत्थर और भूसे को हाथ से चुनकर अलग करना सबसे आसान और अच्छा तरीका है, क्योंकि ये चीजें आसानी से दिख जाती हैं और उठाई जा सकती हैं.
🎯 Exam Tip: हस्त चयन विधि का उपयोग तब किया जाता है जब अशुद्धियाँ बड़ी और कम मात्रा में होती हैं, जिससे उन्हें हाथ से चुनना संभव होता है.
Question 2. पृथक्करण की ओसाई (विनोइंग) विधि में सबसे महत्त्वपूर्ण कारक है-
(a) [विकल्प उपलब्ध नहीं]
(b) [विकल्प उपलब्ध नहीं]
(c) वायु
(d) [विकल्प उपलब्ध नहीं]
Answer: (c) वायु
In simple words: ओसाई विधि में हल्के और भारी घटकों को अलग करने के लिए हवा का उपयोग किया जाता है. इसलिए, वायु सबसे महत्वपूर्ण है.
🎯 Exam Tip: ओसाई विधि किसानों द्वारा अनाज से भूसे को अलग करने के लिए व्यापक रूप से उपयोग की जाती है, जो हवा की गति पर निर्भर करती है.
Question 3. किसी मिश्रण में जल मिलाने पर भारी अवयवों के नीचे तली में बैठ जाने की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
(a) निस्तारण
(b) अवसादन
(c) निस्पंदन
(d) ओसाई
Answer: (b) अवसादन
In simple words: जब मिश्रण में पानी मिलाते हैं और भारी चीजें नीचे बैठ जाती हैं, तो इस प्रक्रिया को अवसादन कहते हैं.
🎯 Exam Tip: अवसादन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें गुरुत्वाकर्षण के कारण भारी, अघुलनशील ठोस कण द्रव में नीचे बैठ जाते हैं.
Question 4. घर में पनीर बनाने के लिए पृथक्करण की कौनसी विधि का उपयोग किया जाता है?
(a) वाष्पीकरण
(b) संघनन
(c) निस्तारण
(d) निस्यंदन
Answer: (d) निस्यंदन
In simple words: पनीर बनाने के लिए दूध को फाड़ा जाता है, फिर ठोस पनीर को पानी से अलग करने के लिए कपड़े या छलनी का उपयोग किया जाता है. इसे निस्यंदन कहते हैं.
🎯 Exam Tip: निस्यंदन विधि का उपयोग अक्सर घर में दूध से पनीर बनाने या चाय की पत्तियों को अलग करने जैसे काम में किया जाता है, जहाँ एक फिल्टर माध्यम ठोस को रोकता है और तरल को गुजरने देता है.
Question 5. किसान अन्नकणों को सूखे पौधों के गट्ठरों से किस विधि से पृथक् करते हैं?
(a) हस्त चयन
(b) थ्रेसिंग
(c) चालन
(d) वाष्पन
Answer: (b) थ्रेसिंग
In simple words: किसान अनाज के दानों को सूखे पौधों से अलग करने के लिए थ्रेसिंग विधि का उपयोग करते हैं. इस विधि में पौधों को पीटा जाता है ताकि दाने अलग हो जाएँ.
🎯 Exam Tip: थ्रेसिंग एक यांत्रिक प्रक्रिया है जो अनाज के दानों को उनकी बालियों से अलग करने में मदद करती है, जिससे फसल कटाई का काम आसान हो जाता है.
Question 7. नमक निर्माण में पृथक्करण की कौनसी विधि प्रयुक्त होती है?
(a) वाष्पन
(b) निस्तारण
(c) हस्त चयन
(d) थ्रेसिंग
Answer: (a) वाष्पन
In simple words: समुद्र के पानी से नमक बनाने के लिए वाष्पन विधि का उपयोग किया जाता है. इसमें पानी को धूप में रखकर भाप बनाया जाता है और नमक पीछे छूट जाता है.
🎯 Exam Tip: वाष्पन विधि उन ठोस पदार्थों को अलग करने के लिए आदर्श है जो तरल में घुलनशील होते हैं और तरल को भाप में बदलकर ठोस को छोड़ देते हैं.
Question 8. आटे से चोकर को पृथक् करने के लिए किस विधि का उपयोग किया जाता है?
(a) अवसादन
(b) ओसाई
(c) चालन
(d) वाष्पन
Answer: (c) चालन
In simple words: आटे में से चोकर को अलग करने के लिए चालन (छानना) विधि का उपयोग किया जाता है. इसमें एक छलनी का प्रयोग करते हैं जिससे आटा तो निकल जाता है, लेकिन चोकर छलनी में रह जाता है.
🎯 Exam Tip: चालन विधि उन मिश्रणों के लिए उपयुक्त है जहाँ घटक कणों के आकार में पर्याप्त अंतर होता है, जिससे छलनी का उपयोग करके उन्हें अलग किया जा सके.
Question 9. निस्यंदन विधि किस प्रक्रिया के लिए उपयुक्त है-
(a) तैयार चाय से पत्तियाँ हटाने में
(b) आटे से चोकर हटाने में
(c) समुद्र के जल से नमक प्राप्त करने में
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (a) तैयार चाय से पत्तियाँ हटाने में
In simple words: चाय से पत्तियों को अलग करने के लिए निस्यंदन विधि का उपयोग करते हैं, जहाँ छलनी एक फिल्टर का काम करती है.
🎯 Exam Tip: निस्यंदन में एक फिल्टर माध्यम का उपयोग किया जाता है जो अघुलनशील ठोस पदार्थों को द्रव से अलग करता है. चाय से पत्तियाँ हटाना इसका एक सामान्य उदाहरण है.
Question 10. अपशिष्ट सामग्री से लोहे की कतरनें पृथक करने की सर्वोत्तम विधि है-
(a) हस्त चयन
(b) थ्रेसिंग
(c) विनोइंग
(d) चुंबकीय पृथक्करण
Answer: (d) चुंबकीय पृथक्करण
In simple words: लोहे की कतरनों को अपशिष्ट से अलग करने के लिए चुंबक का उपयोग करना सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि लोहा चुंबकीय होता है और आसानी से चिपक जाता है.
🎯 Exam Tip: चुंबकीय पृथक्करण विधि का उपयोग विशेष रूप से उन मिश्रणों को अलग करने के लिए किया जाता है जिनमें एक चुंबकीय घटक (जैसे लोहा) और एक गैर-चुंबकीय घटक शामिल होते हैं.
Question 1. फिल्टर पत्र एक ऐसा निस्यंदक होता है, जिसमें अत्यन्त सूक्ष्म छिद्र होते हैं।
Answer: फिल्टर पत्र एक ऐसा निस्यंदक होता है, जिसमें अत्यन्त सूक्ष्म छिद्र होते हैं। यह एक विशेष प्रकार का कागज होता है जिसका उपयोग तरल पदार्थों से ठोस कणों को अलग करने के लिए किया जाता है.
In simple words: फिल्टर पेपर में बहुत छोटे छेद होते हैं. यह तरल से ठोस चीज़ों को अलग करने में मदद करता है.
🎯 Exam Tip: फिल्टर पेपर के छिद्रों का आकार बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह तय करता है कि कौन से कण छनकर निकलेंगे और कौन से रुकेंगे.
Question 2. वाष्पन की विधि का उपयोग द्रव में घुले ठोस को पृथक् करने में किया जा सकता है।
Answer: वाष्पन की विधि का उपयोग द्रव में घुले ठोस को पृथक् करने में किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में तरल पदार्थ भाप बनकर उड़ जाता है और ठोस अवशेष पीछे छूट जाता है.
In simple words: वाष्पन से हम घुले हुए ठोस को तरल से अलग कर सकते हैं, जैसे नमक को पानी से.
🎯 Exam Tip: वाष्पन विधि केवल तभी काम करती है जब ठोस पदार्थ अवाष्पशील हो और तरल पदार्थ वाष्पशील हो.
Question 3. मथनी का उपयोग दही से मक्खन निकालने के लिए किया जाता है।
Answer: मथनी का उपयोग दही से मक्खन निकालने के लिए किया जाता है। यह प्रक्रिया दही को तेजी से मथकर हल्के मक्खन को भारी दही से अलग करती है.
In simple words: दही से मक्खन निकालने के लिए मथनी का प्रयोग होता है.
🎯 Exam Tip: मथना एक अपकेंद्रण विधि है जहाँ घूर्णन गति के कारण घनत्व में अंतर वाले पदार्थ अलग हो जाते हैं.
Question 4. वाष्पन वह प्रक्रिया है जिसमें एक द्रव अपने वाष्प में परिवर्तित हो जाता है।
Answer: वाष्पन वह प्रक्रिया है जिसमें एक द्रव अपने वाष्प में परिवर्तित हो जाता है। यह एक धीमी प्रक्रिया है जो द्रव की सतह पर होती है.
In simple words: वाष्पन में तरल गर्मी पाकर भाप बन जाता है.
🎯 Exam Tip: वाष्पन तापमान, सतह क्षेत्र और हवा की गति जैसे कारकों पर निर्भर करता है, जो इसकी दर को प्रभावित करते हैं.
Question 5. निस्तारण प्रक्रिया का उपयोग चावल और दालों को धोने और साफ करने में भी किया जाता है।
Answer: निस्तारण प्रक्रिया का उपयोग चावल और दालों को धोने और साफ करने में भी किया जाता है। इसमें, चावल या दालों को पानी में भिगोकर भारी कणों को नीचे बैठने दिया जाता है और फिर हल्के पानी को सावधानी से निकाल दिया जाता है.
In simple words: चावल और दाल को धोते समय निस्तारण का इस्तेमाल होता है, जिससे गंदगी नीचे बैठ जाती है.
🎯 Exam Tip: निस्तारण विधि का उपयोग तब किया जाता है जब ठोस कण भारी होते हैं और द्रव में नीचे बैठ जाते हैं, जिससे ऊपरी द्रव को बिना हिलाए अलग किया जा सके.
Question 6. निस्यंदक का चुनाव पृथक की जाने वाली सामग्रियों के कणों के आकार पर निर्भर करता है।
Answer: निस्यंदक का चुनाव पृथक की जाने वाली सामग्रियों के कणों के आकार पर निर्भर करता है। हमें ऐसा फिल्टर चुनना होता है जिसके छिद्र कणों के आकार के अनुसार सही हों ताकि वे छन सकें.
In simple words: फिल्टर को चुनने के लिए, हमें यह देखना होता है कि जिन चीज़ों को अलग करना है, उनके कण कितने बड़े हैं.
🎯 Exam Tip: सही निस्यंदक का चयन करने से ही प्रभावी पृथक्करण संभव होता है, अन्यथा या तो कण फिल्टर से निकल जाएंगे या फिल्टर अवरुद्ध हो जाएगा.
निम्न में से सत्य / असत्य कथन छाँटिए
Question 1. हस्त चयन द्वारा पृथक्करण कणों के आकार, रंग और आकृति के अंतर के आधार पर किया जाता है। (सत्य/असत्य)
Answer: सत्य
In simple words: यह बात सच है कि हस्त चयन विधि में हम चीज़ों को उनके आकार, रंग या बनावट के फर्क से चुनकर अलग करते हैं.
🎯 Exam Tip: हस्त चयन एक सरल विधि है जो तब सबसे प्रभावी होती है जब मिश्रण के घटक स्पष्ट रूप से अलग-अलग होते हैं और आसानी से पहचाने जा सकते हैं.
Question 2. जब दो या दो से अधिक ठोसों के मिश्रण के अवयवों के कणों के आकार भिन्न होते हैं, तब चालन की विधि का उपयोग किया जाता है। (सत्य/असत्य)
Answer: सत्य
In simple words: जब ठोस चीज़ों के कणों का आकार अलग-अलग होता है, तो चालन (छानने) का उपयोग करके उन्हें अलग कर सकते हैं.
🎯 Exam Tip: चालन विधि आटे से चोकर या रेत से कंकड़ अलग करने जैसे कामों में बहुत उपयोगी है, जहाँ कणों के आकार में अंतर होता है.
कॉलम – 1 में दिए गए शब्दों का मिलान कॉलम- 2 से कीजिए
Question 1. कॉलम 1 में दिए गए शब्दों का मिलान कॉलम- 2 से कीजिए।
| कॉलम 1 | कॉलम 2 |
|---|---|
| (1) रेत से जल पृथक् करना | (A) ओसाई |
| (2) अनाज से डंडियाँ पृथक् करना | (B) निस्यंदन |
| (3) चाय छानना | (C) थ्रेसिंग |
| (4) वायु के उपयोग से पृथक्करण | (D) निस्तारण |
| कॉलम 1 | कॉलम 2 |
|---|---|
| (1) रेत से जल पृथक् करना | (D) निस्तारण |
| (2) अनाज से डंडियाँ पृथक् करना | (C) थ्रेसिंग |
| (3) चाय छानना | (B) निस्यंदन |
| (4) वायु के उपयोग से पृथक्करण | (A) ओसाई |
In simple words: मिलान करते समय, हमें हर क्रिया के लिए सही पृथक्करण विधि को चुनना होता है, जैसे रेत से पानी अलग करने के लिए निस्तारण.
🎯 Exam Tip: कॉलम मिलान वाले प्रश्नों में, प्रत्येक पद के अर्थ और संबंधित विधि को स्पष्ट रूप से समझें ताकि सही जोड़े बन सकें.
Question 2. कॉलम 1 में दिए गए शब्दों का मिलान कॉलम- 2 से कीजिए।
| कॉलम 1 | कॉलम 2 |
|---|---|
| (1) चालन | (A) चालनी से छानना |
| (2) अवसादन | (B) भारी अवयवों का तली में बैठना |
| (3) वाष्पन | (C) जल का वाष्प में बदलना |
| (4) हस्तचयन | (D) हाथों से अशुद्धियों को हटाना |
| कॉलम 1 | कॉलम 2 |
|---|---|
| (1) चालन | (A) चालनी से छानना |
| (2) अवसादन | (B) भारी अवयवों का तली में बैठना |
| (3) वाष्पन | (C) जल का वाष्प में बदलना |
| (4) हस्तचयन | (D) हाथों से अशुद्धियों को हटाना |
In simple words: सही मिलान के लिए, हर विधि के मतलब को समझना जरूरी है. जैसे, चालन का मतलब छलनी से छानना और वाष्पन का मतलब पानी का भाप बनना.
🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करें कि आप प्रत्येक पृथक्करण विधि की परिभाषा और उसके व्यावहारिक अनुप्रयोग को अच्छी तरह से जानते हैं, ताकि मिलान सही हो.
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. पृथक्करण की प्रमुख विधियों के नाम बताइए।
Answer: पृथक्करण की कुछ मुख्य विधियाँ हैं: हस्त चयन, थ्रेसिंग, ओसाई, चालन, अवसादन, निस्तारण, निस्यंदन, वाष्पन, और चुंबकीय पृथक्करण. इन विधियों का उपयोग अलग-अलग मिश्रणों को अलग करने के लिए किया जाता है.
In simple words: कुछ मुख्य पृथक्करण विधियाँ हैं: हाथ से चुनना, थ्रेसिंग, ओसाई, छानना, बैठना, बहाना, फिल्टर करना, भाप बनाना और चुंबक का उपयोग करना.
🎯 Exam Tip: इन सभी पृथक्करण विधियों के नाम और उनके बुनियादी सिद्धांतों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर सीधे प्रश्न के रूप में पूछे जाते हैं.
Question 2. थ्रेसिंग किसे कहते हैं?
Answer: थ्रेसिंग वह प्रक्रिया है जिसमें अनाज के पूलों (डंडियों) को पीटकर उनमें से अनाज के दानों को अलग किया जाता है. यह विधि किसानों द्वारा फसल कटाई के बाद अनाज निकालने के लिए उपयोग की जाती है.
In simple words: थ्रेसिंग मतलब अनाज के पौधों को पीटकर दाने निकालना.
🎯 Exam Tip: थ्रेसिंग एक यांत्रिक प्रक्रिया है जो अनाज के दानों को उनके पौधों के ऊपरी हिस्से से अलग करती है, जिससे उन्हें इकट्ठा करना आसान हो जाता है.
Question 3. पारंपरिक रूप से किसी मिश्रण के भारी और हल्के अवयवों को पृथक करने के लिए किस पात्र का उपयोग किया जाता है?
Answer: मिश्रण में से भारी और हल्के अवयवों को हवा या फूँक मारकर अलग करने की विधि ओसाई (विनोइंग) कहलाती है। यह विधि अनाज से भूसे को अलग करने में उपयोग की जाती है.
In simple words: भारी और हल्के कणों को हवा से अलग करने को ओसाई कहते हैं. यह भूसे को अनाज से अलग करती है.
🎯 Exam Tip: हालांकि प्रश्न में पात्र पूछा गया है, उत्तर में विधि का वर्णन है. इस स्थिति में, दिए गए उत्तर को सरल भाषा में प्रस्तुत करें. ओसाई में आमतौर पर सूप या छाज जैसे पात्र का उपयोग किया जाता है, जो अनाज को हवा में उछालने में मदद करता है.
Question 5. चालन विधि का उपयोग कब किया जाता है?
Answer: चालन विधि का उपयोग तब किया जाता है जब दो या दो से अधिक ठोस पदार्थों के मिश्रण के कणों का आकार अलग-अलग होता है. एक चालनी (छलनी) का उपयोग करके बड़े कण छलनी में रह जाते हैं और छोटे कण उससे निकल जाते हैं.
In simple words: चालन विधि तब उपयोग करते हैं जब ठोस चीज़ों के कण छोटे-बड़े हों, उन्हें छानकर अलग करने के लिए.
🎯 Exam Tip: चालन विधि अनाज से कंकर या आटे से चोकर जैसे मिश्रणों को अलग करने के लिए बहुत प्रभावी है जहाँ कणों के आकार में स्पष्ट अंतर होता है.
Question 6. राजस्थान में साधारण नमक के एक स्रोत का नाम बताइए।
Answer: राजस्थान में साधारण नमक का एक मुख्य स्रोत सांभर झील है. यह भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झीलों में से एक है जहाँ से बड़ी मात्रा में नमक का उत्पादन होता है.
In simple words: राजस्थान में नमक का एक स्रोत सांभर झील है.
🎯 Exam Tip: सांभर झील भारत के महत्वपूर्ण प्राकृतिक नमक स्रोतों में से एक है, जो राजस्थान के लिए आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण है.
Question 7. अवसादन (सेडीमेंटेशन) किसे कहते हैं?
Answer: किसी द्रव के तल पर भारी और अघुलनशील अवयवों के जमा हो जाने की प्रक्रिया को अवसादन (सेडीमेंटेशन) कहते हैं. यह गुरुत्वाकर्षण के कारण होता है जब भारी कण नीचे बैठ जाते हैं.
In simple words: अवसादन मतलब जब द्रव में भारी चीजें नीचे बैठ जाती हैं.
🎯 Exam Tip: अवसादन, निस्तारण विधि का पहला चरण है, जहाँ ठोस कणों को तल पर बैठने दिया जाता है, जिससे उन्हें तरल से अलग करना आसान हो जाता है.
Question 8. चालन (छानना) से क्या तात्पर्य है?
Answer: एक चालनी (छलनी) का उपयोग करके कणों के आकार में अंतर के आधार पर मिश्रण से ठोस पदार्थों को पृथक करने की प्रक्रिया को चालन (छानना) कहते हैं. यह विधि विभिन्न आकार के ठोस कणों को अलग करने में मदद करती है.
In simple words: चालन मतलब एक छलनी से चीज़ों को छानकर अलग करना, जब उनके कणों का आकार अलग हो.
🎯 Exam Tip: चालन का उपयोग घरों में आटा छानने या निर्माण स्थलों पर रेत से बड़े कणों को अलग करने जैसे कार्यों में किया जाता है.
Question 9. 'फिल्टर पत्र' क्या होता है?
Answer: फिल्टर-पत्र एक विशेष प्रकार का निस्यंदक होता है, जिसमें बहुत छोटे छिद्र होते हैं. यह तरल पदार्थ से ठोस कणों को अलग करने के लिए उपयोग किया जाता है, जहाँ ठोस कण फिल्टर पेपर पर रुक जाते हैं और तरल गुजर जाता है.
In simple words: फिल्टर पेपर एक खास तरह का कागज होता है जिसमें बहुत छोटे छेद होते हैं, जो तरल से ठोस चीज़ों को छानने का काम करता है.
🎯 Exam Tip: फिल्टर पेपर प्रयोगशालाओं में और घरेलू उपयोग में, जैसे चाय बनाने में, तरल पदार्थों को शुद्ध करने के लिए एक आवश्यक उपकरण है.
Question 10. चुंबकीय पृथक्करण किसे कहते हैं?
Answer: निस्यंदन (फिल्टरेशन) का उपयोग अघुलनशील ठोस अवयवों को द्रव से पृथक् करने के लिए किया जाता है। यह एक प्रक्रिया है जहाँ एक फिल्टर माध्यम ठोस कणों को रोक लेता है.
In simple words: निस्यंदन का मतलब है तरल में घुली अघुलनशील ठोस चीज़ों को फिल्टर से अलग करना.
🎯 Exam Tip: यह महत्वपूर्ण है कि आप प्रश्न में पूछे गए विषय (चुंबकीय पृथक्करण) और दिए गए उत्तर (निस्यंदन) के बीच के अंतर को समझें, भले ही आपको दिए गए उत्तर को प्रस्तुत करना हो. चुंबकीय पृथक्करण में, चुंबक का उपयोग करके चुंबकीय पदार्थों को गैर-चुंबकीय पदार्थों से अलग किया जाता है.
Question 12. ऐसे द्रवों के मिश्रण को पृथक् करने के लिए कौनसी विधि का उपयोग किया जा सकता है जो आपस में मिश्रित नहीं होते हैं?
Answer: ऐसे द्रवों के मिश्रण को पृथक् करने के लिए निस्तारण विधि का उपयोग किया जा सकता है जो आपस में मिश्रित नहीं होते हैं. जब दो तरल पदार्थ आपस में नहीं घुलते, तो वे अलग-अलग परतें बनाते हैं, जिन्हें निस्तारण द्वारा अलग किया जा सकता है.
In simple words: जो तरल आपस में नहीं घुलते, उन्हें अलग करने के लिए निस्तारण विधि का उपयोग करते हैं.
🎯 Exam Tip: निस्तारण विधि का उपयोग अक्सर तेल और पानी जैसे मिश्रणों को अलग करने के लिए किया जाता है, जहाँ घनत्व में अंतर के कारण वे अलग-अलग परतें बनाते हैं.
Question 13. समुद्रों में पृथक्करण की कौनसी प्रक्रिया निरन्तर होती रहती है?
Answer: समुद्रों में वाष्पन (वाष्पीकरण) की प्रक्रिया निरन्तर होती रहती है. इस प्रक्रिया में सूर्य की गर्मी से समुद्री जल भाप बनकर उड़ जाता है, जिससे पीछे नमक बच जाता है. यह प्राकृतिक नमक उत्पादन का तरीका है.
In simple words: समुद्रों में लगातार वाष्पन की प्रक्रिया होती रहती है, जिससे पानी भाप बनता है और नमक रह जाता है.
🎯 Exam Tip: वाष्पन एक प्राकृतिक जल चक्र का हिस्सा है और यह समुद्र के पानी से नमक निकालने का एक महत्वपूर्ण तरीका है, जो बिना किसी बाहरी ऊर्जा स्रोत के होता है.
Question 14. पृथक्करण की कौनसी विधियों द्वारा जल से मिट्टी जैसी अविलेय अशुद्धियाँ दूर कर सकते हैं?
Answer: जल से मिट्टी जैसी अविलेय अशुद्धियों को दूर करने के लिए अवसादन, निस्तारण तथा निस्यंदन विधि का उपयोग कर सकते हैं. ये तीनों विधियाँ मिलकर पानी को साफ करने में बहुत प्रभावी होती हैं.
In simple words: पानी से मिट्टी हटाने के लिए अवसादन, निस्तारण और निस्यंदन विधियों का उपयोग करते हैं.
🎯 Exam Tip: पानी को शुद्ध करने के लिए इन तीनों विधियों का संयोजन बहुत प्रभावी होता है, क्योंकि अवसादन बड़े कणों को बैठाता है, निस्तारण ऊपरी पानी को अलग करता है, और निस्यंदन बचे हुए महीन कणों को हटाता है.
Question 15. दही से मक्खन निकालने के लिए किसका उपयोग किया जाता है?
Answer: दही से मक्खन निकालने के लिए मथनी का उपयोग किया जाता है. मथनी की मदद से दही को तेजी से घुमाया जाता है, जिससे मक्खन अलग होकर ऊपर आ जाता है.
In simple words: दही से मक्खन निकालने के लिए मथनी का उपयोग किया जाता है.
🎯 Exam Tip: मथनी द्वारा मक्खन निकालने की प्रक्रिया अपकेंद्रण के सिद्धांत पर आधारित है, जहाँ घनत्व में अंतर के कारण पदार्थ अलग हो जाते हैं.
लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. पृथक्करण की हस्त चयन विधि से आप क्या समझते हैं? इस विधि का उपयोग कब सुविधाजनक होता है?
Answer: हस्त चयन विधि में किसी ठोस मिश्रण में से हाथ द्वारा छोटे कंकड़, भूसी, या अन्य अवांछित पदार्थों को अलग किया जाता है. यह कणों के आकार, रंग और आकृति में अंतर के आधार पर किया जाता है. यह विधि तब सुविधाजनक होती है जब अलग किए जाने वाले कण कम मात्रा में हों और उन्हें हाथ से आसानी से उठाया जा सके, जैसे चावल से कंकड़ चुनना. हस्त चयन सबसे पुरानी और सरल पृथक्करण विधियों में से एक है.
In simple words: हस्त चयन में हाथ से चुनकर बड़ी या अलग दिखने वाली चीज़ों को मिश्रण से अलग करते हैं. यह तब आसान होता है जब गंदगी कम हो और आसानी से उठाई जा सके.
🎯 Exam Tip: हस्त चयन विधि की दक्षता मिश्रण में अशुद्धियों की मात्रा और उनकी पहचान में आसानी पर निर्भर करती है.
Question 3. नमक कहाँ से व कैसे प्राप्त होता है? समझाइए।
Answer: नमक समुद्री जल से प्राप्त होता है. समुद्री जल विभिन्न लवणों और अन्य पदार्थों का मिश्रण होता है. नमक प्राप्त करने के लिए समुद्र के जल को उथले गड्ढों में इकट्ठा किया जाता है जहाँ यह धूप और हवा के संपर्क में आता है. कुछ दिनों में, जल पूरी तरह से वाष्पित हो जाता है और ठोस नमक पीछे रह जाता है. फिर, इस लवण के मिश्रण को शुद्ध करके सामान्य खाने वाला नमक बनाया जाता है. यह एक प्राकृतिक और सरल तरीका है.
In simple words: नमक समुद्र के पानी से मिलता है. समुद्री पानी को धूप में सुखाया जाता है, पानी भाप बनकर उड़ जाता है और नमक पीछे बच जाता है.
🎯 Exam Tip: समुद्री जल से नमक प्राप्त करने की प्रक्रिया वाष्पन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो सौर ऊर्जा का उपयोग करता है और पर्यावरण के अनुकूल है.
Question 4. अवसादन एवं निस्तारण में क्या अंतर है? समझाइए।
Answer: किसी मिश्रण में जल मिलाने पर मिश्रण के भारी अवयवों के नीचे तली में बैठ जाने की प्रक्रिया को अवसादन कहते हैं. यह गुरुत्वाकर्षण के कारण होता है. जबकि अवसादित मिश्रण को बिना हिलाए, अवसाद के ऊपर के साफ जल को सावधानी से अलग करने की प्रक्रिया को निस्तारण कहते हैं. निस्तारण में ऊपरी द्रव को धीरे-धीरे दूसरे बर्तन में उंडेला जाता है.
In simple words: अवसादन में भारी चीजें नीचे बैठ जाती हैं, और निस्तारण में उस पानी को बिना हिलाए ऊपर से अलग करते हैं.
🎯 Exam Tip: अवसादन और निस्तारण अक्सर एक साथ उपयोग की जाने वाली विधियाँ हैं, विशेष रूप से पानी से निलंबित ठोस पदार्थों को हटाने के लिए, जहाँ अवसादन पहला चरण होता है और निस्तारण दूसरा.
Question 5. तैयार चाय से चाय की पत्तियाँ पृथक् करने में निस्तारण और निस्यंदन में से कौनसी विधि अच्छी है। व क्यों?
Answer: तैयार चाय से चाय की पत्तियाँ पृथक् करने में निस्यंदन विधि निस्तारण विधि से अच्छी है, क्योंकि निस्तारण विधि में चाय में कुछ पत्तियाँ पीछे रह सकती हैं जो निस्यंदन विधि में पूरी तरह से छलनी में रुक जाती हैं. निस्यंदन में फिल्टर माध्यम (छलनी) का उपयोग होता है जो पत्तियों को पूरी तरह से रोक लेता है और हमें साफ चाय मिलती है.
In simple words: चाय से पत्तियां अलग करने के लिए निस्यंदन (छानना) विधि अच्छी है, क्योंकि इससे सभी पत्तियां पूरी तरह अलग हो जाती हैं, जबकि निस्तारण में कुछ पत्तियां रह सकती हैं.
🎯 Exam Tip: निस्यंदन विधि महीन ठोस कणों को तरल से अलग करने में अधिक प्रभावी होती है, खासकर जब मिश्रण को पूरी तरह से साफ करना हो, जबकि निस्तारण बड़े और आसानी से बैठने वाले ठोस पदार्थों के लिए उपयुक्त है.
Question 6. निस्यंदक के रूप में किन सामग्रियों का उपयोग किया जा सकता है? इनका चुनाव किस पर निर्भर करता है?
Answer: फिल्टर-पत्र के अलावा कपास, चारकोल, रेत इत्यादि अनेक सामग्रियों का उपयोग निस्यंदक के रूप में किया जा सकता है. निस्यंदक का चुनाव पृथक की जाने वाली सामग्रियों के कणों के आकार पर निर्भर करता है. हमें ऐसा निस्यंदक चुनना चाहिए जिसके छिद्र उन कणों के आकार से छोटे हों जिन्हें हमें रोकना है और बड़े हों जिन्हें गुजरने देना है. सामग्री की प्रकृति भी महत्वपूर्ण है.
In simple words: फिल्टर पेपर के अलावा, कपास, चारकोल और रेत का उपयोग फिल्टर के रूप में हो सकता है. इसे चुनने के लिए, हमें यह देखना होता है कि जिन चीज़ों को अलग करना है, उनके कणों का आकार कैसा है.
🎯 Exam Tip: निस्यंदक के चयन में न केवल कणों का आकार, बल्कि तरल की प्रकृति (जैसे उसकी अम्लीयता या चिपचिपाहट) और आवश्यक शुद्धता का स्तर भी महत्वपूर्ण होता है.
Question 7. क्या कपड़े के टुकड़े का उपयोग निस्यंदक की तरह किया जा सकता है? समझाइए।
Answer: हाँ, कपड़े के टुकड़े का उपयोग निस्यंदक की तरह किया जा सकता है, क्योंकि कपड़े के टुकड़े की बुनाई में धागों के बीच छोटे-छोटे रंध्र या छिद्र होते हैं. कपड़ों के इन छिद्रों का उपयोग तरल पदार्थों से ठोस कणों को छानने के लिए किया जा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे फिल्टर पेपर काम करता है. यह एक सरल और आसानी से उपलब्ध निस्यंदक है.
In simple words: हाँ, कपड़े का टुकड़ा फिल्टर की तरह काम कर सकता है. कपड़े में छोटे-छोटे छेद होते हैं जिनसे पानी छन सकता है और ठोस चीजें रुक जाती हैं.
🎯 Exam Tip: कपड़े का फिल्टर घरेलू स्तर पर पानी को साफ करने या अन्य तरल पदार्थों से बड़े कणों को अलग करने के लिए उपयोगी होता है, लेकिन बहुत महीन कणों के लिए यह पर्याप्त नहीं हो सकता है.
Question 1. तेल तथा जल को उनके मिश्रण से निम्न प्रक्रिया द्वारा पृथक् कर सकते हैं-
Answer:
1. सबसे पहले तेल और जल के मिश्रण को किसी बर्तन में लेकर कुछ समय के लिए शांत छोड़ देते हैं.
2. कुछ समय बाद तेल और जल दो अलग-अलग परतों में बँट जाते हैं, क्योंकि तेल पानी से हल्का होता है और ऊपर तैरता है.
3. इसके बाद जो अवयव ऊपरी परत बनाता है (यानी तेल), उसे निस्तारण विधि द्वारा सावधानी से दूसरे बर्तन में निकाल लेते हैं. इस प्रकार तेल और जल को अलग किया जा सकता है.
In simple words: पहले तेल और पानी को शांत छोड़ दें, वे अलग-अलग परत बना लेंगे. फिर ऊपर की तेल की परत को धीरे से निकाल लें.
🎯 Exam Tip: निस्तारण विधि उन द्रवों के लिए सबसे अच्छी है जो आपस में नहीं घुलते और जिनके घनत्व में अंतर होता है, जिससे वे स्पष्ट परतें बनाते हैं.
Question 2. जल तथा नमक के मिश्रण से नमक को किस प्रकार पृथक् किया जा सकता है? समझाइए।
Answer: जल तथा नमक के मिश्रण से नमक को निम्न प्रक्रिया द्वारा पृथक् किया जा सकता है:
1. सबसे पहले नमक मिले जल को एक बीकर या बर्तन में लेकर गर्म करते हैं.
2. जल को लगातार गर्म करते रहने से सारा पानी भाप बनकर उड़ जाता है.
3. इससे जल तो वाष्प बनकर वायुमंडल में मिल जाता है, लेकिन बर्तन की तली में ठोस नमक शेष रह जाता है. इस विधि को वाष्पन कहते हैं. यह एक प्रभावी तरीका है क्योंकि नमक अवाष्पशील होता है.
In simple words: नमक और पानी के मिश्रण को गर्म करें. पानी भाप बन जाएगा और बर्तन में नमक बच जाएगा.
🎯 Exam Tip: वाष्पन विधि का उपयोग तब किया जाता है जब हमें घोलक (पानी) की तुलना में विलेय (नमक) को पुनः प्राप्त करना होता है, क्योंकि घोलक आसानी से वाष्पित हो जाता है.
Question 3. निस्तारण (डीकेंटेशन) किसे कहते हैं? दैनिक जीवन में इसका एक उपयोग बताइए।
Answer: किसी द्रव के तल पर भारी अघुलनशील अवयवों के जमा हो जाने के बाद, बर्तन को तिरछा करके द्रव को सावधानी से निकाल दिया जाता है, इस प्रक्रिया को निस्तारण (डीकेंटेशन) कहते हैं. इसमें बिना हिलाए ऊपरी साफ द्रव को अलग किया जाता है. दैनिक जीवन में निस्तारण प्रक्रिया का उपयोग चावल और दालों को धोने और साफ करने में किया जाता है, जहाँ मिट्टी और पत्थर नीचे बैठ जाते हैं.
In simple words: निस्तारण मतलब जब भारी चीजें नीचे बैठ जाएं तो ऊपर के पानी को धीरे से अलग कर लेना. चावल धोने में इसका उपयोग होता है.
🎯 Exam Tip: निस्तारण विधि का सफल उपयोग यह सुनिश्चित करने पर निर्भर करता है कि नीचे बैठे ठोस पदार्थ को दोबारा न हिलाया जाए, जिससे द्रव साफ बना रहे.
Question 4. 'टी बैग' का उपयोग पृथक्करण की किस विधि पर आधारित है? इसके लिए किन सामग्रियों का उपयोग टी बैग बनाने में किया जाता है?
Answer: 'टी बैग' का उपयोग पृथक्करण की निस्यंदन (फिल्टरेशन) विधि पर आधारित है. टी बैग पहले रेशम जैसे मुलायम कपड़ों से बनाए जाते थे, क्योंकि ये चाय की पत्ती को रोक लेते थे और जल इनके आर-पार निकल सकता था. रेशम मजबूत होने के कारण गरम पानी में भी नहीं फटता था और छोटे रेशे भी नहीं छोड़ता था. आजकल टी बैग अक्सर फिल्टर पेपर या मलमल के कपड़े से भी बनाए जाते हैं.
In simple words: टी बैग निस्यंदन विधि पर आधारित है. यह रेशम या फिल्टर पेपर से बनता है, जिससे चाय की पत्तियां रुक जाती हैं और चाय छन जाती है.
🎯 Exam Tip: टी बैग में उपयोग होने वाली सामग्री का चुनाव उसकी फिल्टरिंग क्षमता, मजबूती और किसी भी अवांछित स्वाद या रसायन को पानी में न छोड़ने की क्षमता पर निर्भर करता है.
निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. दैनिक जीवन में प्रयुक्त पृथक्करण की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए।
Answer: दैनिक जीवन में पृथक्करण की निम्नलिखित विधियों का उपयोग किया जाता है:
(1) हस्त चयन - इस विधि में मिश्रण में से ठोस अशुद्धियों को हाथ से अलग किया जाता है। यह तब काम आता है जब अलग की जाने वाली चीजें आकार, रंग या रूप में अलग दिखती हैं, जिससे उन्हें पहचानना और उठाना आसान हो जाता है। यह विधि आमतौर पर दाल या चावल से पत्थर या कंकड़ निकालने के लिए उपयोग की जाती है।
(2) थ्रेसिंग - इस विधि में अनाज के डंठलों को पीटा जाता है ताकि उनसे अनाज के दाने अलग हो जाएँ। यह तरीका खासकर खेतों में कटाई के बाद अनाज को भूसे से अलग करने के लिए इस्तेमाल होता है।
(3) ओसाई (विनोइंग) - इसमें हवा का इस्तेमाल करके भारी अनाज के दानों को हल्के भूसे और धूल से अलग किया जाता है। किसान हवा में मिश्रण को उछालते हैं जिससे हल्की चीजें दूर उड़ जाती हैं और भारी दाने नीचे गिर जाते हैं। यह विधि फसल कटाई के बाद अनाज को साफ करने में बहुत उपयोगी है।
(4) चालन (छानना) - इस विधि में एक छलनी का उपयोग करके बड़े और छोटे कणों वाले ठोस पदार्थों को अलग किया जाता है। छोटे कण छलनी के छेदों से निकल जाते हैं, जबकि बड़े कण ऊपर रह जाते हैं। यह विधि आटा छानने या रेत से कंकड़ अलग करने के लिए बहुत काम आती है।
(5) वाष्पन (वाष्पीकरण) - इसमें किसी द्रव को गर्म करके उसे भाप में बदला जाता है, जिससे उसमें घुले हुए ठोस पदार्थ पीछे रह जाते हैं। इस विधि का उपयोग समुद्र के पानी से नमक बनाने में किया जाता है, जहाँ पानी भाप बनकर उड़ जाता है और नमक बच जाता है।
(6) निस्तारण (डीकेंटेशन) - जब किसी द्रव में मिले भारी अघुलनशील पदार्थ नीचे बैठ जाते हैं (जिसे अवसादन कहते हैं), तब उस द्रव को धीरे से दूसरे बर्तन में निकाल लिया जाता है ताकि नीचे बैठे पदार्थ हिलें नहीं। यह प्रक्रिया मिट्टी वाले पानी को साफ करने में मदद करती है, जहाँ मिट्टी नीचे बैठ जाती है और साफ पानी अलग कर लिया जाता है।
(7) निस्यंदन (फिल्टरेशन) - इसमें फिल्टर पेपर या कपड़े जैसी किसी चीज़ का उपयोग करके द्रव में घुले हुए न घुलने वाले ठोस कणों को अलग किया जाता है। द्रव फिल्टर से गुजर जाता है, लेकिन ठोस कण ऊपर रह जाते हैं। यह चाय छानने या पानी से बारीक अशुद्धियाँ दूर करने जैसी प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होती है।
(8) चुंबकीय पृथक्करण - इस विधि में चुंबक का उपयोग करके चुंबकीय गुणों वाले पदार्थों को ऐसे पदार्थों से अलग किया जाता है जिनमें चुंबकीय गुण नहीं होते। जैसे, लोहे के बुरादे को रेत से अलग करने के लिए चुंबक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
In simple words: दैनिक जीवन में वस्तुओं को अलग करने के लिए कई तरीके इस्तेमाल होते हैं, जैसे हाथ से चुनना, अनाज को पीटना, हवा से अलग करना, छानना, पानी को भाप बनाना, पानी से भारी चीजों को अलग करना, फिल्टर करना और चुंबक का इस्तेमाल करना। हर तरीके का अपना एक खास काम होता है।
🎯 Exam Tip: इन विधियों के नाम और उनकी परिभाषाएँ याद रखना महत्वपूर्ण है। हर विधि के उपयोग का एक उदाहरण भी दें ताकि आप उन्हें आसानी से समझा सकें।
RBSE Class 6 Science Chapter 9 Notes in Hindi
1. किसी पदार्थ का उपयोग करने से पहले हमें उसमें मिले हानिकारक और बेकार पदार्थों को अलग करना ज़रूरी होता है, और कभी-कभी हमें ज़रूरी पदार्थों को भी अलग से उपयोग करने के लिए अलग करने की ज़रूरत पड़ती है।
2. किसी ठोस मिश्रण से छोटे कंकड़ और भूसी को हाथ से अलग करने की प्रक्रिया को हस्त चयन कहते हैं। यह कणों के आकार, रंग और आकृति के अंतर पर आधारित होता है।
3. वह तरीका जिसमें अनाज के डंठलों को पीटकर उनसे अनाज के दाने अलग किए जाते हैं, थ्रेसिंग कहलाता है।
4. पारंपरिक रूप से किसी मिश्रण के भारी और हल्के घटकों को अलग-अलग करने के लिए सूप (बाँस से बना एक पात्र) का उपयोग किया जाता है।
5. तेज़ हवा या पवन का उपयोग करके हल्के भूसे को भारी अनाज से अलग करने की विधि ओसाई (विनोइंग) कहलाती है।
6. एक चालनी का उपयोग करके कणों के आकार में अंतर के आधार पर मिश्रण से ठोस पदार्थों को अलग करने की प्रक्रिया छानना कहलाती है।
7. किसी द्रव को उसकी भाप में बदलने की क्रिया वाष्पन या वाष्पीकरण कहलाती है। इसका उपयोग आमतौर पर किसी द्रव में घुले ठोस पदार्थ को अलग करने के लिए किया जाता है।
8. किसी द्रव के तल पर भारी अघुलनशील घटक के जमा हो जाने की प्रक्रिया अवसादन (सेडीमेंटेशन) कहलाती है। जब बर्तन को तिरछा करके द्रव को निकाल लिया जाता है तो इस प्रक्रिया को निस्तारण (डीकेंटेशन) कहते हैं।
9. किसी द्रव से अघुलनशील ठोस घटकों को निस्यंदन (फिल्टरेशन) विधि से अलग किया जा सकता है।
10. फिल्टर पत्र एक ऐसा निस्यंदक होता है, जिसमें बहुत छोटे छिद्र होते हैं।
11. दही से मक्खन निकालने के लिए मथनी का उपयोग किया जाता है।
12. चुंबक का उपयोग करके चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थों को अलग करने को चुंबकीय पृथक्करण कहते हैं।
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