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प्रश्न 1. क्या चुंबक केवल कुछ विशेष पदार्थों से बनी वस्तुओं पर ही चिपकते हैं?
Answer: हाँ, चुंबक केवल लोहा, निकेल और कोबाल्ट जैसी धातुओं से बनी वस्तुओं पर ही चिपकते हैं। इन पदार्थों को चुंबकीय पदार्थ कहा जाता है क्योंकि ये चुंबक द्वारा आकर्षित होते हैं।
In simple words: चुंबक सिर्फ लोहा, निकेल और कोबाल्ट से बनी चीजों को अपनी तरफ खींचता है।
🎯 Exam Tip: यह याद रखें कि चुंबक कुछ खास धातुओं (जैसे लोहा, निकेल, कोबाल्ट) को ही आकर्षित करता है, सभी धातुओं को नहीं।
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प्रश्न 3. क्या हम एक ध्रुव वाला चुंबक प्राप्त कर सकते हैं?
Answer: नहीं, एक ध्रुव वाला चुंबक प्राप्त करना संभव नहीं है। चुंबक को कितना भी छोटा कर दिया जाए, उसके हर टुकड़े में हमेशा उत्तरी और दक्षिणी दोनों ध्रुव मौजूद रहते हैं। यह चुंबक का एक मूल गुण है।
In simple words: नहीं, हम एक चुंबक का सिर्फ एक ध्रुव (जैसे सिर्फ उत्तरी या सिर्फ दक्षिणी ध्रुव) नहीं बना सकते। चुंबक के हर छोटे टुकड़े में भी हमेशा दोनों ध्रुव होते हैं।
🎯 Exam Tip: हमेशा याद रखें कि चुंबक के दो ध्रुव (उत्तरी और दक्षिणी) कभी एक-दूसरे से अलग नहीं हो सकते, चाहे चुंबक को कितना भी तोड़ दिया जाए।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. निम्नलिखित में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
(क) दो चुंबकों के विपरीत ध्रुव एक-दूसरे को.......... करते हैं, जबकि समान ध्रुव एक-दूसरे को. करते हैं।
(ख) वे पदार्थ जो चुंबक की ओर आकर्षित होते हैं, उन्हें .......... कहते हैं।
(ग) चुंबकीय दिक्सूचक की सुई .......... दिशा में ही ठहरती है।
(घ) चुंबक में सर्वद.............ध्रुव होते हैं।
Answer:
(क) आकर्षित, प्रतिकर्षित
(ख) चुंबकीय पदार्थ
(ग) उत्तर- दक्षिण
(घ) दो। एक चुंबक में हमेशा दो ध्रुव होते हैं - उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव।
In simple words: विपरीत ध्रुव एक-दूसरे को खींचते हैं और समान ध्रुव एक-दूसरे को धकेलते हैं। जो चीज़ें चुंबक से चिपकती हैं, वे चुंबकीय पदार्थ कहलाती हैं। कंपास की सुई हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में रुकती है। एक चुंबक में हमेशा दो ध्रुव होते हैं।
🎯 Exam Tip: आकर्षण और प्रतिकर्षण के नियमों को ठीक से याद रखें, यह चुंबकत्व की बुनियादी अवधारणा है।
प्रश्न 2. निम्नलिखित कथन सत्य (√) हैं या असत्य (X)-
(क) किसी चुंबक को टुकड़ों में तोड़कर एक ध्रुव प्राप्त किया जा सकता है।
(ख) चुंबक के समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।
Answer:
(क) असत्य। चुंबक को तोड़ने पर भी हर टुकड़े में दोनों ध्रुव मौजूद रहते हैं।
(ख) सत्य। समान ध्रुव हमेशा एक-दूसरे को दूर धकेलते हैं।
In simple words: किसी चुंबक को तोड़ने पर एक ध्रुव नहीं मिलता, हमेशा दो ध्रुव रहते हैं, इसलिए पहला कथन गलत है। चुंबक के एक जैसे ध्रुव (जैसे उत्तरी-उत्तरी) एक-दूसरे को दूर धकेलते हैं, इसलिए दूसरा कथन सही है।
🎯 Exam Tip: यह याद रखें कि चुंबक के ध्रुवों को कभी अलग नहीं किया जा सकता और समान ध्रुव हमेशा प्रतिकर्षित करते हैं।
प्रश्न 3. स्तंभ I में विभिन्न स्थितियाँ दर्शाई गई हैं, जिनमें एक चुंबक का कोई एक ध्रुव दूसरे चुंबक के किसी ध्रुव के निकट स्थित होता है। स्तंभ II में विभिन्न स्थितियों के लिए उनके बीच होने वाली अंतः क्रिया दर्शाई गई है। रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
| स्तंभ I | स्तंभ II |
|---|---|
| N-N | ...... |
| N------ | आकर्षण |
| S-N | ...... |
| ------ S | प्रतिकर्षण |
Answer:
| स्तंभ I | स्तंभ II |
|---|---|
| N-N | प्रतिकर्षण |
| N-S | आकर्षण |
| S-N | आकर्षण |
| S-S | प्रतिकर्षण |
चुंबक के समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं, जबकि विपरीत ध्रुव एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
In simple words: एक जैसे ध्रुव (N-N या S-S) एक-दूसरे को दूर धकेलते हैं, और अलग-अलग ध्रुव (N-S या S-N) एक-दूसरे को अपनी तरफ खींचते हैं।
🎯 Exam Tip: आकर्षण और प्रतिकर्षण के नियमों को हमेशा ध्यान में रखें: समान ध्रुव प्रतिकर्षित करते हैं, विपरीत ध्रुव आकर्षित करते हैं।
प्रश्न 4. अथर्व ने एक प्रयोग किया जिसमें उसने एक छड़ चुंबक लिया और उसे स्टील की पिनों के ढेर पर घुमाया (चित्र 4. 15)। आपके अनुसार तालिका में दिए गए अवलोकनों के समुच्चय में से कौन-सा विकल्प संभवतः उसका वास्तविक अवलोकन है?
Answer: लोहे की पत्ती को चुंबक बनाने के लिए, सबसे पहले उसे एक सपाट मेज पर रखें। फिर एक छड़ चुंबक का एक ध्रुव पत्ती के एक सिरे पर रखें। चुंबक को बिना ऊपर उठाए, पत्ती के दूसरे सिरे तक एक ही दिशा में रगड़ते रहें। इस प्रक्रिया को तीस से चालीस बार दोहराएं। ऐसा करने से लोहे की पत्ती में चुंबकीय गुण आ जाएंगे और वह चुंबक बन जाएगी। यह प्रक्रिया 'प्रेरण' कहलाती है, जहाँ एक चुंबकीय वस्तु दूसरी अचुंबकीय वस्तु को चुंबकित करती है।
In simple words: लोहे की पत्ती को चुंबक बनाने के लिए, एक छड़ चुंबक को पत्ती पर एक ही तरफ बार-बार रगड़ें। रगड़ने से पत्ती में चुंबक की शक्ति आ जाती है।
🎯 Exam Tip: क्रियाकलाप के चरणों को क्रम से लिखें और स्पष्ट करें कि चुंबक को बिना उठाए रगड़ना क्यों महत्वपूर्ण है।
Question 2. एक छड़ चुंबक से लोहरेतन के चिपकने की प्रक्रिया को चित्र बनाते हुए समझाइए।
Answer: जब एक छड़ चुंबक को लोहे के बुरादे (लोहरेतन) के पास लाया जाता है, तो लोहे का बुरादा चुंबक के साथ चिपक जाता है। यह बुरादा चुंबक के सभी हिस्सों पर बराबर नहीं चिपकता है। सबसे ज्यादा लोहे का बुरादा चुंबक के दोनों सिरों (ध्रुवों) पर चिपकता है, जबकि बीच के हिस्से में बहुत कम चिपकता है। इससे पता चलता है कि चुंबक के ध्रुवों पर चुंबकीय शक्ति सबसे अधिक होती है। यह दिखाता है कि चुंबक के ध्रुव (poles) ही उसकी सबसे मजबूत चुंबकीय शक्ति वाले क्षेत्र होते हैं।
In simple words: लोहे का बुरादा चुंबक के सिरों पर सबसे ज्यादा चिपकता है। चुंबक के बीच वाले हिस्से में कम बुरादा चिपकता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रयोग में, चुंबक के ध्रुवों पर लौह बुरादे का अधिकतम जमाव दर्शाना महत्वपूर्ण है, जो अधिकतम चुंबकीय शक्ति का प्रमाण है।
चुंबकों का रख-रखाव
- छड़ चुंबकों को सुरक्षित रखने के लिए उनके जोड़ों के असमान ध्रुवों को पास-पास रखना चाहिए।
- इन चुंबकों को लकड़ी के टुकड़े से पृथक् करके इनके सिरों पर नर्म लोहे के दो टुकड़े लगाने चाहिए।
- नाल - चुंबक का भण्डारण करने के लिए इसके ध्रुवों के सम्पर्क में लोहे का एक टुकड़ा रखना चाहिए।
- चुंबक को कैसेट, मोबाइल, टेलीविजन, म्यूजिक सिस्टम, कम्प्यूटर जैसे उपकरणों से दूर रखना चाहिए।
Question 4. चुंबकीय दिक्सूचक की सुई भी एक चुंबक है। यदि कोई चुंबक इसके समीप लाया जाए तो वह क्या व्यवहार दिखाएगी? एक क्रियाकलाप द्वारा समझाइए।
Answer: एक चुंबकीय दिक्सूचक की सुई स्वयं एक छोटा चुंबक होती है। जब कोई दूसरा चुंबक इसके पास लाया जाता है, तो यह आकर्षण या प्रतिकर्षण दिखाती है। इसे समझने के लिए एक साधारण प्रयोग कर सकते हैं:
1. एक दिक्सूचक और एक छड़ चुंबक लें।
2. दिक्सूचक को एक समतल जगह पर रखें और सुई को स्थिर होने दें। यह हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में रुकेगी।
3. अब छड़ चुंबक का उत्तरी ध्रुव धीरे-धीरे दिक्सूचक की सुई के उत्तरी ध्रुव के पास लाएं। आप देखेंगे कि दिक्सूचक की सुई दूर हट जाएगी (प्रतिकर्षण)।
4. फिर, छड़ चुंबक का दक्षिणी ध्रुव दिक्सूचक की सुई के उत्तरी ध्रुव के पास लाएं। आप देखेंगे कि सुई आकर्षित होगी और पास आ जाएगी।
यह प्रयोग बताता है कि चुंबक के समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं, जबकि विपरीत ध्रुव एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। यह सिद्धांत कंपास के काम करने का आधार है, जो नाविकों को दिशा खोजने में मदद करता है।
In simple words: चुंबक दिक्सूचक की सुई को पास लाने पर या तो खींचेगा या धकेलेगा। समान ध्रुव धकेलते हैं, और अलग ध्रुव खींचते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रतिकर्षण (repulsion) ही चुंबकत्व का निश्चित परीक्षण है क्योंकि आकर्षण चुंबकीय और अचुंबकीय दोनों पदार्थों के बीच हो सकता है।
निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. चुंबकीय दिक्सूचक (कंपास ) का निर्माण किस आधार पर किया गया? इसकी संरचना को समझाते हुए, इसको उपयोग करने की विधि बताइए।
Answer: चुंबकीय दिक्सूचक (कंपास) इस सिद्धांत पर बनाया गया है कि एक स्वतंत्र रूप से लटका हुआ चुंबक हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में रुकता है। इसी गुण का उपयोग दिशाओं का पता लगाने के लिए किया जाता है।
**संरचना:** एक चुंबकीय दिक्सूचक आमतौर पर एक छोटा गोल डिब्बा होता है, जिसके ऊपर कांच का ढक्कन होता है। इसके अंदर एक छोटी, सुई के आकार की चुंबक होती है, जो डिब्बे के बीच में एक नुकीली पिन पर लगी होती है। यह चुंबक इस पिन पर आसानी से घूम सकती है। इस सुई का उत्तरी ध्रुव (जो उत्तर दिशा में रुकता है) अक्सर लाल रंग से रंगा होता है। सुई के नीचे एक गोल डायल होता है जिस पर सभी दिशाएं (जैसे उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम) अंकित होती हैं।
**उपयोग विधि:** जब दिक्सूचक को समतल सतह पर रखा जाता है, तो इसकी चुंबकीय सुई घूमकर उत्तर-दक्षिण दिशा में स्थिर हो जाती है। सुई का लाल सिरा हमेशा उत्तर दिशा को दर्शाता है। फिर, डायल को इस तरह घुमाया जाता है कि डायल पर अंकित 'उत्तर' दिशा सुई के उत्तरी सिरे के साथ मेल खाए। इस तरह, आप अन्य सभी दिशाओं का पता लगा सकते हैं। यह प्राचीन काल से ही नाविकों और यात्रियों के लिए दिशा खोजने का एक महत्वपूर्ण उपकरण रहा है।
In simple words: कंपास इस नियम पर आधारित है कि चुंबक हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में रुकता है। इसमें एक छोटी घूमने वाली चुंबक सुई होती है जो हमें सही दिशा बताती है।
🎯 Exam Tip: कंपास की संरचना और उपयोग के चरणबद्ध वर्णन पर ध्यान दें, साथ ही इसके मूल सिद्धांत को भी स्पष्ट करें।
Question 2. हम अपना चुंबकीय दिक्सूचक कैसे बना सकते हैं? एक क्रियाकलाप द्वारा समझाइए।
Answer: हम घर पर ही अपना चुंबकीय दिक्सूचक बना सकते हैं। इसके लिए इन चरणों का पालन करें:
1. हमें लोहे की सुई, एक छड़ चुंबक, कॉर्क का टुकड़ा, कांच का कटोरा और पानी चाहिए।
2. एक लोहे की सुई को मेज पर रखें। अब एक छड़ चुंबक का कोई एक ध्रुव सुई के एक सिरे पर रखें और उसे सुई की पूरी लंबाई पर एक ही दिशा में तब तक रगड़ते रहें जब तक वह दूसरे सिरे तक न पहुंच जाए। फिर चुंबक को उठा लें।
3. इस प्रक्रिया को 30-40 बार दोहराएं, हर बार उसी सिरे से शुरू करें और चुंबक के ध्रुव को न बदलें।
4. यह जांचने के लिए कि सुई चुंबकित हुई है या नहीं, उसके पास थोड़ा लोहे का बुरादा लाएं। यदि लोहे का बुरादा चिपक जाता है, तो सुई अब चुंबक बन गई है।
5. अब इस चुंबकित सुई को एक कॉर्क के टुकड़े में क्षैतिज रूप से (सीधा) घुसा दें।
6. एक कांच के कटोरे में पानी भरकर उसमें इस कॉर्क को सुई के साथ ऐसे रखें कि सुई पानी की सतह से ऊपर रहे।
7. जब सुई स्थिर हो जाए, तो वह उत्तर-दक्षिण दिशा में रुकेगी। इस प्रकार, हमारा अपना चुंबकीय दिक्सूचक तैयार है, जिसका उपयोग दिशाएं ज्ञात करने के लिए किया जा सकता है। यह गतिविधि चुंबकत्व के मूलभूत सिद्धांत को दर्शाती है और बताती है कि कैसे एक सामान्य लोहे की वस्तु को अस्थायी चुंबक में बदला जा सकता है।
In simple words: अपनी सुई को चुंबक बनाने के लिए, एक छड़ चुंबक को सुई पर कई बार रगड़ें। फिर उस सुई को कॉर्क में फंसाकर पानी में तैराएं। यह सुई उत्तर-दक्षिण दिशा में रुक जाएगी, जिससे यह एक कंपास बन जाएगा।
🎯 Exam Tip: प्रक्रिया के प्रत्येक चरण को स्पष्ट रूप से बताएं, विशेष रूप से चुंबक को रगड़ने की विधि और पानी पर तैरने वाले भाग को।
Question 3. दो चुंबकों के मध्य अचुंबकीय पदार्थ आ जाने पर चुंबकों के चुंबकीय प्रभाव में क्या परिवर्तन आ जाता है? एक प्रयोग द्वारा समझाइए। अथवा एक क्रियाकलाप / प्रयोग द्वारा सिद्ध कीजिए कि चुंबकीय प्रभाव अचुंबकीय पदार्थों के भीतर से होकर उनके पार जा सकता है?
Answer: जब दो चुंबकों के बीच कोई अचुंबकीय पदार्थ आता है, तो भी चुंबकों का चुंबकीय प्रभाव उस पदार्थ के आर-पार जा सकता है। इसे एक प्रयोग से समझा जा सकता है:
1. एक चुंबकीय दिक्सूचक और एक छड़ चुंबक लें।
2. दिक्सूचक को एक सपाट सतह पर रखें और सुई को स्थिर होने दें।
3. अब दिक्सूचक और छड़ चुंबक के बीच एक पतली प्लास्टिक शीट, कांच की शीट या कार्डबोर्ड शीट जैसे अचुंबकीय पदार्थ को रखें।
4. फिर, छड़ चुंबक के एक ध्रुव को अचुंबकीय पदार्थ के आर-पार दिक्सूचक की सुई के पास लाएं।
आप देखेंगे कि दिक्सूचक की सुई अभी भी आकर्षित या प्रतिकर्षित होती है, ठीक वैसे ही जैसे बिना किसी अवरोध के होती थी। सुई के विक्षेपण में कोई खास बदलाव नहीं आता। इससे यह साबित होता है कि चुंबकीय प्रभाव अचुंबकीय पदार्थों के माध्यम से होकर उनके पार जा सकता है, यानी ये पदार्थ चुंबकीय क्षेत्र को रोकते नहीं हैं। यही कारण है कि मैग्नेट रेफ्रिजरेटर के दरवाजे से चिपक जाते हैं, भले ही दरवाजे में प्लास्टिक की परत हो।
In simple words: चुंबकों के बीच कोई प्लास्टिक या कागज जैसी चीज़ रखने पर भी उनका खिंचाव या धकाव वैसे ही काम करता है। चुंबक की शक्ति इन चीजों के आर-पार जा सकती है।
🎯 Exam Tip: इस प्रयोग में, अचुंबकीय पदार्थ के उपयोग और दिक्सूचक सुई पर पड़ने वाले प्रभाव के अवलोकन पर विशेष जोर दें।
RBSE Class 6 Science Chapter 1 Notes in Hindi
- प्राचीन काल में, नाविक और यात्री दिशाएं जानने के लिए चुंबकीय दिक्सूचक (कंपास) का इस्तेमाल करते थे।
- चुंबक प्रकृति में भी पाए जाते हैं और इन्हें लोहे के टुकड़ों से भी बनाया जा सकता है।
- चुंबक कई अलग-अलग आकारों में होते हैं, जैसे छड़ चुंबक, U-आकार चुंबक और वलय चुंबक।
- सभी चुंबकों में दो ध्रुव होते हैं- एक उत्तरी ध्रुव और एक दक्षिणी ध्रुव।
- चुंबकीय ध्रुव हमेशा जोड़े में होते हैं; अकेला ध्रुव कभी नहीं मिलता।
- जो पदार्थ चुंबक की ओर आकर्षित होते हैं, उन्हें चुंबकीय पदार्थ कहते हैं। जो आकर्षित नहीं होते, उन्हें अचुंबकीय पदार्थ कहते हैं।
- जब एक चुंबक को स्वतंत्र रूप से लटकाया जाता है, तो वह हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है।
- चुंबकीय दिक्सूचक में एक सुई के आकार का चुंबक होता है जो उत्तर-दक्षिण दिशा में रुकता है।
- जब दो चुंबकों को एक-दूसरे के पास लाया जाता है, तो समान ध्रुव एक-दूसरे को धकेलते हैं (प्रतिकर्षण), जबकि विपरीत ध्रुव एक-दूसरे को खींचते हैं (आकर्षण)।
- चुंबकीय प्रभाव अचुंबकीय पदार्थों के पार जा सकता है।
चुंबकत्व के इन बुनियादी गुणों को समझना रोजमर्रा की जिंदगी में इसके कई उपयोगों की कुंजी है।
In simple words: चुंबक दिशा बताते हैं, लोहे की चीजों को खींचते हैं, और इनके दो सिरे होते हैं।
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