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Detailed रचना कहानी लेखन RBSE Solutions for Class 5 Hindi
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Class 5 Hindi रचना कहानी लेखन RBSE Solutions PDF
Question 1. निम्नलिखित रूपरेखा के आधार पर 'शेर व खरगोश' की कहानी लिखिए:
परेशान............। वे सब मिलकर खरगोश........... को कुएँ के पास...........।खरगोश...........अपनी परछाईं...........कुएँ में छलांग लगा दी।
Answer: एक जंगल में एक बहुत क्रूर शेर रहता था। वह जानवरों को मारकर खा जाता था, जिससे सभी जानवर बहुत परेशान थे। एक दिन वे सब मिलकर एक बुद्धिमान खरगोश के पास गए। खरगोश ने शेर को एक योजना बताई। वह शेर के पास गया और बोला, "महाराज! इस जंगल में एक और शेर है जो खुद को यहाँ का राजा कहता है और आपको चुनौती देता है।" यह सुनकर शेर को बहुत गुस्सा आया। उसने खरगोश से उस दूसरे शेर के पास ले जाने को कहा। खरगोश उसे एक कुएँ के पास ले गया और बताया कि दूसरा शेर इसी में रहता है। शेर ने कुएँ में झाँका और अपनी परछाई को दूसरा शेर समझकर कुएँ में कूद गया और मर गया। इस तरह, बुद्धिमान खरगोश ने सभी जानवरों की जान बचाई और उन्हें शांति मिली।
In simple words: एक चतुर खरगोश ने एक लालची शेर को अपनी परछाई दिखाकर कुएँ में कूदने पर मजबूर कर दिया। इस तरह खरगोश ने सभी जानवरों को शेर से बचाया।
🎯 Exam Tip: कहानी लिखते समय रूपरेखा के सभी बिंदुओं को क्रम से जोड़ते हुए कहानी को एक शीर्षक और शिक्षा के साथ पूरा करें।
Question 2. निम्नलिखित रूपरेखा के आधार पर 'टोपीवाला और बन्दर' की कहानी लिखिए
एक कस्बे में............ टोपियां बेचा............ 'पेड़ के नीचे............ बन्दर आये।........... 'टोपी लेकर पेड़ पर............'आँख खुली'............'गट्ठर को खाली............ बन्दरों पर............ 'सिर की टोपी उतारकर............ वैसा ही किया............ टोपियों को उठाया............'चला गया।
Answer: एक कस्बे में एक टोपीवाला था जो गाँवों में अपनी टोपियाँ बेचता था। एक दिन दोपहर में वह थककर एक पेड़ के नीचे बैठ गया। गर्मी बहुत थी, इसलिए ठंडी छाया में वह टोपियों का गट्ठर रखकर सो गया। उसके सोते ही कुछ बंदर पेड़ से नीचे आए और गट्ठर से एक-एक टोपी लेकर पेड़ पर चले गए। उन्होंने अपने सिर पर टोपियाँ पहन लीं और उछल-कूद करने लगे। थोड़ी देर बाद टोपीवाले की आँख खुली। उसने देखा कि उसका गट्ठर खाली था, तो वह हैरान रह गया। उसने आसपास देखा और उसकी नज़र बंदरों पर पड़ी। टोपीवाले ने बंदरों से टोपियाँ वापस लेने का एक उपाय सोचा। उसने अपनी सिर की टोपी उतारकर जोर से फेंक दी। बंदरों ने भी उसे देखकर वैसा ही किया और सारी टोपियाँ जमीन पर गिरा दीं। टोपीवाले ने उन्हें उठाया और अपना गट्ठर बाँधकर वहाँ से चला गया। यह कहानी दिखाती है कि बुद्धिमानी से काम लेना बल से बेहतर होता है।
In simple words: एक टोपी बेचने वाले ने सो जाते समय अपनी टोपियाँ बंदरों द्वारा ले लीं। उसने बुद्धिमानी से अपनी टोपी फेंकी, जिसे देखकर बंदरों ने भी अपनी टोपियाँ फेंक दीं, और उसे अपनी टोपियाँ वापस मिल गईं।
🎯 Exam Tip: रूपरेखा आधारित कहानी में पात्रों के भावों और क्रियाओं को स्पष्ट रूप से दर्शाएं ताकि कहानी जीवंत लगे।
Question 3. निम्नलिखित रूपरेखा के आधार पर 'लालची कुत्ता' कहानी लिखिये
खोला............ पानी में गिर गया............ पछताया............।
Answer: एक कुत्ते को कहीं से एक रोटी का टुकड़ा मिला। वह उसे अपने मुँह में दबाकर एक शांत जगह की ओर जाने लगा। रास्ते में एक छोटा नाला था, जिसे पार करने के लिए उस पर एक लकड़ी का तख्ता रखा हुआ था। जब कुत्ता उस तख्ते पर से गुजर रहा था, तो उसे पानी में अपनी परछाई दिखाई दी। उसे लगा कि नीचे कोई दूसरा कुत्ता है जो रोटी का टुकड़ा मुँह में लेकर उसे देख रहा है। वह उस पर झपटने के लिए जोर-जोर से भौंकने लगा। भौंकने के लिए उसका मुँह खुलते ही रोटी का टुकड़ा पानी में गिर गया। इस प्रकार वह लालची कुत्ता बहुत पछताया और अपनी दुम दबाकर वहाँ से चला गया। यह कहानी हमें बताती है कि लालच हमेशा बुरा होता है।
In simple words: एक लालची कुत्ता अपनी रोटी का टुकड़ा लेकर जाते समय पानी में अपनी परछाई देखकर उसे दूसरा कुत्ता समझ बैठा। वह उस पर भौंकने लगा और उसका टुकड़ा पानी में गिर गया, जिससे उसे पछतावा हुआ।
🎯 Exam Tip: लालच बुरी बला है" जैसी कहानियों में नैतिक शिक्षा को स्पष्ट रूप से बताएं और कहानी को सरल शब्दों में प्रस्तुत करें।
Question 4. निम्रलिखित रूपरेखा के आधार पर चतुर किसान' की कहानी लिखिए
एक गाँव में रामलाल नाम का किसान............ शहर गया।............ सौदा-सामान खरीदा।............ भूख............ दुकान पर पहुँचा............ दुकानदार बेईमान............ मिठाई कम तौली............ खाने में कम कष्ट होगा।............ मिठाई खायी............ कम पैसे दिये............ गिनने में कम कष्ट होगा............ कम तौलने की आदत छोड़ दी।
Answer: एक गाँव में रामलाल नाम का एक किसान रहता था। एक बार वह किसी काम से शहर गया। उसने अपने घर के लिए कुछ सामान खरीदा। उसे भूख लगी थी, इसलिए वह मिठाई की एक दुकान पर पहुँचा और दुकानदार से मिठाई माँगी। दुकानदार बेईमान था, उसने मिठाई कम तौली। रामलाल ने पूछा कि तुम कम क्यों तौल रहे हो? दुकानदार ने कहा कि कम होने से तुम्हें खाने में कम कष्ट होगा। रामलाल एक चतुर व्यक्ति था। उसने पहले मिठाई खाई और फिर दुकानदार को कम पैसे दिए। दुकानदार ने उससे पूरे पैसे देने को कहा। रामलाल ने जवाब दिया कि कम पैसे देने से तुम्हें गिनने में कम कष्ट होगा। यह सुनकर दुकानदार चुप हो गया। इस घटना के बाद से दुकानदार ने कम तौलने की अपनी आदत छोड़ दी। यह दिखाता है कि चतुराई से कभी-कभी गलत काम को भी सुधारा जा सकता है।
In simple words: एक चतुर किसान ने बेईमान दुकानदार को उसी की बात का उपयोग करके सबक सिखाया, जब उसने कम मिठाई के बदले कम पैसे दिए और दुकानदार की कम तौलने की आदत छुड़वा दी।
🎯 Exam Tip: चतुर पात्रों वाली कहानियों में संवादों को ध्यान से लिखें, क्योंकि वे कहानी की मुख्य सीख को उजागर करते हैं।
Question 5. निम्नलिखित रूपरेखा के आधार पर 'दो मित्र एवं एक भालू' की कहानी लिखिए:
घने जंगल से होकर............ भालू आता दिखाई दिया............ सोनू पेड़ पर चढ़ गया............ मोनू जमीन पर लेट........... श्वास रोक........... मरा जानकर........... 'भालू ने कान में क्या कहा........... सच्चे मित्र नहीं होते............।।
Answer: एक गाँव में सोनू और मोनू नाम के दो दोस्त रहते थे, जिनके बीच गहरा प्यार था। एक दिन वे दोनों शहर जाने का फैसला किया। शहर जाने का रास्ता घने जंगल से होकर गुजरता था। जब वे जंगल से गुजर रहे थे, तो उन्हें सामने से एक भालू आता दिखाई दिया। भालू को देखकर वे दोनों डर गए। सोनू ने अपने दोस्त को छोड़कर एक पेड़ पर चढ़ गया। मोनू को पेड़ पर चढ़ना नहीं आता था, इसलिए वह तुरंत जमीन पर लेट गया और अपनी साँस रोक ली। भालू उसके पास आया, और उसे मरा हुआ समझकर छोड़ दिया। भालू के चले जाने के बाद, सोनू पेड़ से नीचे उतरा और मोनू से पूछा कि भालू ने उसके कान में क्या कहा। मोनू ने कहा कि भालू ने कहा कि जो लोग मुसीबत में अपने दोस्त को अकेला छोड़कर भाग जाते हैं, वे सच्चे दोस्त नहीं होते, बल्कि धोखेबाज होते हैं। सोनू को मोनू की बात समझ में आ गई और उसने मोनू से माफी माँगी। सच्चे दोस्त हमेशा एक-दूसरे का साथ देते हैं।
In simple words: दो दोस्त जंगल में भालू देखकर भाग रहे थे, एक पेड़ पर चढ़ गया और दूसरा जमीन पर लेटकर मरने का नाटक करने लगा। भालू के जाने के बाद, लेटे हुए दोस्त ने बताया कि भालू ने कहा था कि मुश्किल में साथ छोड़ने वाले सच्चे दोस्त नहीं होते, जिससे दूसरे दोस्त को अपनी गलती का एहसास हुआ।
🎯 Exam Tip: दोस्ती और वफादारी पर आधारित कहानियों में, दोस्तों के बीच के विश्वास और धोखे के परिणामों को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
Question 6. निम्नलिखित शब्दों के आधार पर 'प्यासा कौआ' कहानी लिखिए
एक कौआ............'।' एक दिन............'प्यासा था। वह उड़कर............। उसे एक:............। उसमें पानी............'कम था। कौए ने एक तरकीब............। उसने............'मटके:............। पानी............आया। कौए ने तथा उड़ गया।
Answer: एक कौआ था। एक दिन उसे बहुत प्यास लगी। वह पानी की तलाश में इधर-उधर उड़ने लगा। उसे एक मटका दिखाई दिया। वह मटके के पास गया। उसने देखा कि उसमें पानी बहुत कम था, और उसकी चोंच पानी तक नहीं पहुँच पा रही थी। कौए ने एक तरकीब सोची। उसने पास में पड़े कंकड़ों को एक-एक करके मटके में डालना शुरू किया। धीरे-धीरे पानी ऊपर आ गया। अब कौए की चोंच पानी तक पहुँच गई। उसने पानी पिया, अपनी प्यास बुझाई और संतुष्ट होकर उड़ गया। यह कहानी बताती है कि जहाँ चाह है, वहाँ राह है।
In simple words: एक प्यासे कौए ने एक मटके में कम पानी देखकर कंकड़ डालकर पानी को ऊपर लाया, अपनी प्यास बुझाई और अपनी बुद्धिमानी से समस्या हल की।
🎯 Exam Tip: 'प्यासा कौआ' जैसी कहानियों में समस्या, समाधान और अंत में मिलने वाली सीख को सरल और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करें।
आज खाना नहीं मिलेगा
एक लड़का अपनी बहन के पास गया और एक रुपया लेकर आया और अपने पिता को दे दिया। पिता ने फिर वह रुपया कुएँ में फेंक दिया। अगले दिन पिता ने अपनी पत्नी और बेटी को घर से बाहर भेज दिया और बेटे को कुछ कमाकर लाने के लिए कहा। बेटा दिनभर सुस्त और उदास बैठा रहा। शाम के समय उसे मजबूरी में मजदूरी ढूँढने बाजार जाना पड़ा। बाजार में एक सेठ ने उसे एक संदूक अपने घर पहुँचाने के काम के लिए चार आने दिए। रात में जब पिता ने उससे कमाई के बारे में पूछा तो उसने चवन्नी निकालकर दे दी। पिता ने उसे भी कुएँ में फेंकने के लिए कहा। इस पर लड़के को गुस्सा आ गया। उसने कहा कि यह मेरी मेहनत की कमाई है, मैं इसे कुएँ में नहीं फेंकूँगा। अनुभवी पिता सब समझ गए। अगले ही दिन उन्होंने अपना सारा कारोबार बेटे को सौंप दिया। यह कहानी जिम्मेदारी का महत्व सिखाती है।
2. अपनी वस्तु
एक महात्माजी कहीं जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने दो भाइयों को जमीन के लिए लड़ते देखा। वे दोनों खुद को उस जमीन का मालिक बताकर एक-दूसरे के प्राण लेने पर उतारू थे। महात्माजी स्वभाव से दयालु और परोपकारी थे। उन्होंने इन दोनों को समझा-बुझाकर शांत करने की बात सोची। वे इन दोनों के पास जाकर शांत भाव से बोले कि यदि तुम दोनों इस भूमि को अपना कहकर लड़ते रहोगे तो कभी निर्णय नहीं हो पाएगा। इसलिए अच्छा यही रहेगा कि इस भूमि से ही पूछ लिया जाए कि इसका असली मालिक कौन है? इस पर दोनों भाई राजी हो गए। तब महात्माजी ने भूख लगने की बात कहकर पहले उन्हें भोजन खिलाने को कहा। दोनों भाई अपने-अपने घर से भोजन लेकर आए। तीनों ने साथ बैठकर भोजन किया। जब दोनों भाइयों का गुस्सा कुछ शांत हुआ तो महात्माजी ने कहा कि अब भूमि से उसके मालिक के बारे में पूछते हैं। उन्होंने अपना कान जमीन के लगाया, जैसे कि कुछ सुन रहे हों। इसके बाद वे बोले कि यह भूमि कह रही है कि यह तुम दोनों में से किसी की नहीं है, हाँ तुम दोनों अवश्य इसके हो। यह भूमि ने तुम्हारी कई पीढ़ियों को पाला है और आते-जाते देखा है। इतना सुनकर दोनों भाई लज्जित होकर महात्माजी के चरणों में गिर गए। तब महात्माजी ने कहा कि इस संसार में कोई वस्तु किसी की नहीं है। तुम्हारी कोई अपनी वस्तु है तो वह है भजन-भक्ति और अच्छे कर्म। इसलिए लड़ने-झगड़ने की अपेक्षा इनमें ध्यान लगाओ। यह सुनकर दोनों भाइयों ने महात्माजी के चरणों में गिरकर क्षमा माँगी और प्रेम-व्यवहार से एक-दूसरे के साथ रहने लगे। यह कहानी शांति और भाईचारे का संदेश देती है।
3. अनोखी सूझ
बहुत पुराने जमाने की बात है। एक बार देवता और दानव मिलकर प्रजापति के पास गए और उनसे पूछा कि हम में से बुद्धि में श्रेष्ठ कौन है? ब्रह्माजी दोनों में से किसी को नाराज करना नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने इस बात का फैसला करने के लिए दोनों को अगले दिन अपने यहाँ भोजन पर आमंत्रित किया। दूसरे दिन जब देवता और दानव उनके यहाँ भोजन के लिए पहुँचे तो प्रजापति ने उन दोनों को अलग-अलग कमरों में बैठाया और लड्डुओं के थाल भिजवा दिए। उन्होंने देवताओं को भी खिलाया। दूसरी तरफ दानवों ने न खुद खाया और न ही दूसरे को खाने दिया। सब तरफ गंदगी और फैला दी। अतः देवता ही बुद्धि में श्रेष्ठ हैं। यह कहानी सूझबूझ और सहयोग का महत्व बताती है।
4. बालक का स्वप्न
किसी सेठ के एक छोटा लड़का काम करता था। एक दिन रात में वह स्वप्न देखकर चिल्लाया, 'अहो मेरा भाग्य'। सेठ ने लड़के से स्वप्न की बात पूछी, पर वह टाल गया और छिप कर पढ़ने लगा। सेठ ने स्वप्न नहीं बताने के कारण उसे काम से निकाल दिया। लड़के ने पढ़ाई जारी रखी और गाँव के जमींदार के यहाँ नौकरी करने लगा। एक दिन वह सेठ कपड़े लेकर जमींदार के यहाँ पहुँचा। लड़के को वहाँ देखकर उसने स्वप्न वाली बात जमींदार को बताई। जमींदार ने भी स्वप्न वाली बात लड़के से पूछी, और नहीं बताने पर उसे नौकरी से निकाल दिया। लड़का अपनी सूझबूझ से वहाँ के राजा के पास जाकर पहले साधारण नौकर बन गया और बाद में मंत्री बन गया। एक दिन जमींदार राजा के यहाँ आया। उसने लड़के को पहचान लिया और राजा से उसके स्वप्न वाली बात बताई। राजा ने मंत्री से स्वप्न वाली बात पूछी, परन्तु उसने बताने से मना कर दिया। इससे नाराज होकर राजा ने मंत्री को कैदखाने में डाल दिया। कुछ दिन बाद पड़ोसी राज्य के राजा ने हमला करने की योजना के साथ इस राज्य की सीमा पर सेना जमा कर दी। उसने इस राज्य के राजा और मंत्री की चतुराई जानने के लिए दो घोड़ियाँ भेजीं और पूछा कि इनमें से कौनसी माँ और कौनसी बेटी है। कैद में बंद मंत्री ने इसका सही जवाब दिया। इसके बाद उसने पड़ोसी राजा के कुछ और सवालों का सही जवाब दिया। इससे प्रसन्न होकर पड़ोसी राजा ने अपनी पुत्री का विवाह मंत्री के साथ कर दिया और आधा राज्य भी दे दिया। उसके बाद इस राजा ने भी उसे बहुत सी संपत्ति दी। एक दिन मंत्री राजा ने दोनों राजाओं, जमींदार और सेठ को अपने यहाँ आमंत्रित किया। जब ये सब मंत्री राजा के महल पहुँचे तो मंत्री राजा बड़े भवन में पलंग पर लेटा हुआ था। उसकी पत्नी पास में बैठी थी। अन्य कई नौकर सेवा में जुटे थे। मंत्री राजा ने उन सबसे कहा कि यही दृश्य उसने स्वप्न में देखा था। यदि उस समय वह स्वप्न सबको बता देता तो कोई उसका स्वप्न पूरा होने नहीं देता। संभवतः उसे मार भी दिया जाता। इसलिए यह सच है कि मस्तिष्क में कोई भी विचार आए तो उस पर बेकार चर्चा नहीं करके लगन और निष्ठा से उसे पूरा करना चाहिए। यह कहानी दृढ़ संकल्प और परिश्रम का फल दिखाती है।
5. पन्ना का त्याग
चित्तौड़गढ़ में महाराणा संग्रामसिंह की मृत्यु के बाद बहुत अव्यवस्था फैल गई थी। उनके बड़े पुत्र भोजराज का पहले ही निधन हो चुका था। दूसरा पुत्र विक्रम सिंह चौदह-पंद्रह वर्ष का था और छोटा उदय सिंह केवल सात-आठ वर्ष का। संग्राम सिंह की मृत्यु के बाद विक्रम सिंह का राज्याभिषेक किया गया। उसी समय वहाँ एक दासी-पुत्र बनवीर राजगद्दी हथियाने के लिए षड्यंत्र रच रहा था। वह अपना रास्ता साफ करने के लिए विक्रम सिंह और उदय सिंह को मारना चाहता था। उदयसिंह की देखभाल पन्नाधाय करती थी। जब उसे इस बात की खबर लगी तो उसने उदयसिंह को कीरत बारी की टोकरी में बैठाकर महल से बाहर भेज दिया और उदयसिंह के बिस्तर पर अपने स्वयं के पुत्र चंदन को, जो उदयसिंह के बराबर ही था, लिटा दिया। जब बनवीर उदयसिंह को मारने के लिए महल में पहुँचा तो उसने चंदन को ही उदयसिंह समझकर मार दिया। इस प्रकार पन्ना धाय ने अपने कलेजे पर पत्थर रखकर राजकुमार को बचाने के लिए अपने पुत्र का बलिदान कर दिया। यह कहानी त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और वीरता का एक अनुपम उदाहरण है।
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