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Detailed Chapter 10 मनोवैज्ञानिक कौशल विकास RBSE Solutions for Class 12 Psychology
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Class 12 Psychology Chapter 10 मनोवैज्ञानिक कौशल विकास RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Psychology Chapter 10 अभ्यास प्रश्न
RBSE Class 12 Psychology Chapter 10 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. मनोविज्ञान की रुचि है –
(अ) मानव के स्वभाव को जानने के बारे में
(ब) मौसम के बारे में जानने में
(स) संस्कृति को जानने में
(द) समाज को जानने में
Answer: (अ) मानव के स्वभाव को जानने के बारे में
In simple words: मनोविज्ञान इंसानों के स्वभाव, उनके व्यवहार और मानसिक प्रक्रियाओं को समझने में रुचि रखता है। यह इंसानों के सोचने, महसूस करने और काम करने के तरीके का अध्ययन करता है।
🎯 Exam Tip: मनोवैज्ञानिक अध्ययन हमेशा मानव व्यवहार और मानसिक प्रक्रियाओं पर केंद्रित होता है, जो इसे अन्य विज्ञानों से अलग करता है।
Question 2. कौशल को कैसे अर्जित किया जा सकता है?
(अ) आनुवांशिकता से
(ब) प्रशिक्षण से
(स) अवलोकन से
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: कौशल सीखने, अभ्यास करने और दूसरों को देखकर हासिल किए जाते हैं। यह कोई जन्मजात चीज़ नहीं है, बल्कि समय के साथ विकसित होती है।
🎯 Exam Tip: कौशल विकसित करने के लिए लगातार सीखने और अभ्यास की आवश्यकता होती है, जिसमें आनुवंशिकता की भूमिका सीमित होती है।
Question 3. सहभागी प्रेक्षण में प्रेक्षणकर्ता -
(अ) सक्रिय सदस्य के रूप में संलग्न होता है।
(ब) दूर से प्रेक्षण करता है
(स) अशाब्दिक व्यवहारों का संप्रेक्षण करता है
(द) परामर्श देता है
Answer: (अ) सक्रिय सदस्य के रूप में संलग्न होता है।
In simple words: सहभागी प्रेक्षण में, जो व्यक्ति देख रहा होता है, वह उस समूह का हिस्सा बन जाता है जिसका वह अध्ययन कर रहा है। वह खुद उनके साथ जुड़कर चीजें सीखता है।
🎯 Exam Tip: सहभागी प्रेक्षण सामाजिक संदर्भों में गहरी अंतर्दृष्टि प्राप्त करने के लिए सबसे प्रभावी तरीका है।
Question 4. मानव सम्प्रेषण के घटक हैं –
(अ) कूट संकेत
(ब) श्रवण
(स) भाषा
(द) साक्षात्कार
Answer: (अ) कूट संकेत
In simple words: मानव संचार में, जानकारी को संकेतों के रूप में भेजा जाता है, जिसे प्राप्तकर्ता समझता है। कूट संकेत (encoding) जानकारी को भेजने योग्य रूप में बदलने की प्रक्रिया है।
🎯 Exam Tip: संचार के घटकों में स्रोत, संदेश, चैनल, प्राप्तकर्ता, कूट संकेत, विकूट संकेत और प्रतिक्रिया शामिल हैं।
Question 5. प्रकृतिवादी प्रेक्षण (Naturalistic Observation) की सबसे प्रमुख पूर्वकल्पना (Assumption) क्या है?
(अ) प्राणी एक स्वाभाविक परिस्थिति में व्यवहार ठीक ढंग से करता है
(ब) अनुसंधानकर्ता के हस्तक्षेप से व्यवहार प्रभावित हो सकता है
(स) अनुसंधानकर्ता प्राणी के व्यवहारों का अध्ययन आनुभाविक ढंग से (Empirically) करता है
(द) अनुसंधानकर्ता स्वाभाविक परिस्थिति में व्यवहारों के अध्ययन में उत्तम ढंग से कारण-परिणाम सम्बन्ध स्थापित करता है
Answer: (अ) प्राणी एक स्वाभाविक परिस्थिति में व्यवहार ठीक ढंग से करता है
In simple words: प्रकृतिवादी प्रेक्षण यह मानता है कि जब किसी प्राणी को उसके प्राकृतिक माहौल में देखा जाता है, तो वह अपना असली व्यवहार दिखाता है। इसमें कोई बाहरी छेड़छाड़ नहीं होती।
🎯 Exam Tip: प्रकृतिवादी प्रेक्षण का मुख्य लक्ष्य वास्तविक और अनछुए व्यवहार का अध्ययन करना होता है।
Question 6. प्रभावी मनोवैज्ञानिक के लिये क्या आवश्यक है?
(अ) सक्षमता
(ब) अखंडता
(स) व्यावसायिक उत्तरदायित्व
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: एक अच्छे मनोवैज्ञानिक को सक्षम, ईमानदार और अपने काम के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए। इन सभी गुणों का होना एक सफल पेशेवर मनोवैज्ञानिक के लिए जरूरी है।
🎯 Exam Tip: एक प्रभावी मनोवैज्ञानिक में केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि नैतिक मूल्य और सामाजिक जिम्मेदारियां भी महत्वपूर्ण होती हैं।
Question 7. प्रभावी सम्प्रेषण के लिए प्रेक्षणकर्ता को क्या करना चाहिए?
(अ) पर्यावरणीय शोर को नियन्त्रित करके
(ब) अच्छी वेश-भूषा पहन कर
(स) मीठी बातें करके
(द) चिकित्सापरक हस्तक्षेप करके
Answer: (अ) पर्यावरणीय शोर को नियन्त्रित करके
In simple words: अच्छे संचार के लिए, आसपास के शोर को कम करना बहुत जरूरी है ताकि संदेश साफ सुनाई दे और समझा जा सके। शांतिपूर्ण माहौल में बात करना सबसे अच्छा होता है।
🎯 Exam Tip: संचार में बाधाओं (जैसे पर्यावरणीय शोर) को कम करना संदेश की स्पष्टता और समझ में सुधार करता है।
RBSE Class 12 Psychology Chapter 10 लघु उत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. कौशल किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार के होते हैं?
Answer: कौशल का सीधा अर्थ है 'प्रवीणता' या किसी कार्य को अच्छी तरह से करने की क्षमता। जब कोई व्यक्ति किसी काम को कुशलता और दक्षता के साथ करता है, तो उसे 'कौशल' कहा जाता है। कौशल कई प्रकार के होते हैं, जैसे:
1. **सामान्य कौशल:** ये बुनियादी कौशल होते हैं जिनकी जरूरत सभी मनोवैज्ञानिकों को पड़ती है।
2. **प्रेक्षण कौशल:** इसमें मनोवैज्ञानिक लोगों और उनके व्यवहारों का ध्यान से अवलोकन करते हैं।
3. **विशिष्ट कौशल:** ये मनोवैज्ञानिक सेवाओं के लिए बहुत जरूरी बुनियादी कौशल होते हैं।
4. **सम्प्रेषण कौशल:** इसमें व्यक्तिगत संबंध बनाने और दूसरों पर सकारात्मक प्रभाव डालने की भूमिका होती है।
5. **मनोवैज्ञानिक परीक्षण कौशल:** ये मनोविज्ञान के ज्ञान पर आधारित होते हैं, जिनसे मानसिक स्थितियों को समझा जाता है।
6. **साक्षात्कार कौशल:** इसमें साक्षात्कारकर्ता और जानकारी देने वाला (सूचनादाता) आमने-सामने बैठकर बातचीत करते हैं और अध्ययन के विषय में जानकारी जुटाते हैं।
7. **परामर्श कौशल:** एक सफल मनोवैज्ञानिक बनने के लिए यह कौशल बहुत महत्वपूर्ण है। यह कौशल व्यक्तियों को समस्याओं से निपटने में मदद करता है।
In simple words: कौशल का मतलब किसी काम को अच्छे से करने की काबिलियत है। यह कई तरह के होते हैं, जैसे देखने का कौशल, बात करने का कौशल, लोगों को समझने का कौशल और सलाह देने का कौशल।
🎯 Exam Tip: कौशल की परिभाषा और उसके प्रकारों को याद रखें, विशेषकर उन कौशलों को जो मनोवैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 2. प्रभावी मनोवैज्ञानिक के रूप में विकसित होने के लिए क्या आवश्यक है?
Answer: एक प्रभावी मनोवैज्ञानिक बनने के लिए कई कौशलों का होना जरूरी है, जो इस प्रकार हैं:
1. **सामान्य कौशल:** ये बुनियादी कौशल सभी तरह के मनोवैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, चाहे वे नैदानिक, स्वास्थ्य या सामाजिक मनोविज्ञान के क्षेत्र से जुड़े हों।
2. **प्रेक्षण कौशल:** इसमें मनोवैज्ञानिक अपने आसपास के माहौल और लोगों के व्यवहार का ध्यान से अवलोकन करते हैं। लोगों के हाव-भाव और बातचीत को समझना महत्वपूर्ण है।
3. **विशिष्ट कौशल:** ये मनोवैज्ञानिक सेवाओं के लिए बहुत जरूरी बुनियादी कौशल होते हैं। उदाहरण के लिए, एक नैदानिक मनोवैज्ञानिक को चिकित्सा तकनीकों, मूल्यांकन और परामर्श में प्रशिक्षित होना चाहिए, जबकि एक संगठनात्मक मनोवैज्ञानिक को शोध और मूल्यांकन कौशल में निपुण होना चाहिए।
4. **सम्प्रेषण कौशल:** इसमें बोलचाल, ध्यान से सुनना और शारीरिक भाषा का सही उपयोग शामिल है।
5. **मनोवैज्ञानिक परीक्षण कौशल:** यह मनोविज्ञान के ज्ञान पर आधारित होता है, जिससे मानसिक स्थितियों को समझने में मदद मिलती है।
6. **साक्षात्कार कौशल:** इसमें साक्षात्कारकर्ता और जानकारी देने वाला आमने-सामने बैठकर बातचीत करते हैं और जानकारी जुटाते हैं।
7. **परामर्श कौशल:** एक सफल मनोवैज्ञानिक के लिए यह कौशल बहुत महत्वपूर्ण है, जो लोगों को समस्याओं से निकलने में मदद करता है।
In simple words: एक अच्छे मनोवैज्ञानिक बनने के लिए बहुत सारे गुणों की जरूरत होती है। इसमें लोगों को ध्यान से देखना, उनसे अच्छे से बात करना, उनकी बातें सुनना, उनकी समस्याओं को समझना और उन्हें सही सलाह देना शामिल है।
🎯 Exam Tip: मनोवैज्ञानिक की प्रभावी भूमिका के लिए आवश्यक सभी कौशलों को स्पष्ट और व्यवस्थित तरीके से सूचीबद्ध करें, और प्रत्येक की संक्षिप्त व्याख्या दें।
Question 3. सम्प्रेषण किसे कहते हैं?
Answer: सम्प्रेषण (Communication) मानव बातचीत का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। 'Communication' शब्द लैटिन भाषा के 'Communis' से आया है, जिसका मतलब 'सामान्य' होता है। सम्प्रेषण एक ऐसी मानवीय प्रक्रिया है जिसमें लोग भाषा या अन्य संकेतों का उपयोग करके एक-दूसरे के साथ जानकारी, विचार, भावनाएँ और अनुभव बांटते हैं। यह एक जगह से दूसरी जगह या एक समय से दूसरे समय तक हो सकता है। सीधे शब्दों में, संचार का मतलब है एक अर्थपूर्ण संदेश भेजने वाले (Sender) और उसे पाने वाले (Receiver) दोनों के लिए जानकारी का सामान्य होना। संचार में संकेतों का आदान-प्रदान और उनकी व्याख्या शामिल होती है।
In simple words: संचार का मतलब है अपने विचारों और बातों को दूसरों तक पहुँचाना और उनकी बातें समझना। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें लोग एक-दूसरे से जानकारी और भावनाएँ बांटते हैं।
🎯 Exam Tip: सम्प्रेषण की परिभाषा देते समय लैटिन मूल और इसके प्रमुख घटकों (प्रेषक, प्राप्तकर्ता, संदेश) का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 4. विशिष्ट कौशल क्या है?
Answer: विशिष्ट कौशल मनोवैज्ञानिक सेवाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण बुनियादी कौशल होते हैं। जिस तरह एक नैदानिक मनोवैज्ञानिक को उपचार तकनीकों, मूल्यांकन और परामर्श में प्रशिक्षित होना चाहिए, उसी तरह एक संगठनात्मक मनोवैज्ञानिक को शोध, मूल्यांकन और सुगमीकरण परामर्श जैसे विशिष्ट कौशलों में निपुण होना चाहिए। ये कौशल हर क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए जरूरी होते हैं।
विशिष्ट कौशलों को मुख्य रूप से चार भागों में बांटा गया है:
1. **सम्प्रेषण कौशल** - इसमें बात करना (वाचन), सक्रिय रूप से सुनना (सक्रिय श्रवण) और शरीर की भाषा (शरीर भाषा) का सही उपयोग शामिल है।
2. **मनोवैज्ञानिक परीक्षण कौशल** - इसमें मनोवैज्ञानिक परीक्षणों का उपयोग करके लोगों की मानसिक स्थिति को समझना शामिल है।
3. **साक्षात्कार कौशल** - यह लोगों से सीधे बात करके जानकारी इकट्ठा करने का कौशल है।
4. **परामर्श कौशल** - इसमें लोगों को उनकी समस्याओं को हल करने में मदद करने के लिए सलाह देना और मार्गदर्शन करना शामिल है। ये कौशल व्यक्ति को अपने पेशेवर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने में सहायता करते हैं।
In simple words: विशिष्ट कौशल वे खास क्षमताएं होती हैं जो किसी खास काम या पेशे के लिए जरूरी होती हैं, जैसे डॉक्टर के लिए ऑपरेशन का कौशल या मनोवैज्ञानिक के लिए लोगों की समस्याओं को समझने का कौशल। ये हर काम के लिए अलग-अलग होते हैं।
🎯 Exam Tip: विशिष्ट कौशलों को उनकी प्रासंगिकता के साथ स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और उनके प्रमुख प्रकारों का उल्लेख करें।
Question 5. प्रेक्षण किसे कहते हैं?
Answer: प्रेक्षण का मतलब है किसी घटना या वस्तु का व्यवस्थित तरीके से अध्ययन करना। इसमें किसी चीज़ को बहुत ध्यान से देखना-परखना और फिर उसके बारे में जानकारी दर्ज करना शामिल है। उदाहरण के लिए, सूक्ष्मदर्शक यंत्र, दूरबीन, टेप रिकॉर्डर या वीडियो कैमरा जैसे उपकरणों का उपयोग करके प्रेक्षण किया जाता है। वैज्ञानिक शोध की एक विधि के रूप में, प्रेक्षण हमारे रोजमर्रा के देखने से अलग होता है। यह अक्सर उद्देश्यपूर्ण, निष्पक्ष और सटीक होता है। प्रेक्षण कई प्रकार के होते हैं, जैसे नियंत्रित-अनियंत्रित अवलोकन, सहभागी-असहभागी या अर्द्ध-सहभागी अवलोकन। इन विधियों से व्यवहारों को गहराई से समझा जा सकता है।
In simple words: प्रेक्षण का मतलब है किसी चीज को ध्यान से देखना और उसके बारे में जानकारी इकट्ठा करना। यह किसी व्यक्ति या घटना को उसके असली माहौल में समझने का एक तरीका है।
🎯 Exam Tip: प्रेक्षण की परिभाषा देते समय, वैज्ञानिक संदर्भ में इसकी व्यवस्थित प्रकृति और उपकरणों के उपयोग पर जोर दें।
Question 6. परामर्श क्या है? प्रभावी सहायक की विशेषताएँ कौन-सी हैं?
Answer: परामर्श एक प्रक्रिया है जिसमें कोई व्यक्ति (सेवार्थी) यह सीखता है कि सही निर्णय कैसे लें और अपने व्यवहार व सोच के नए तरीकों को कैसे अपनाएं। एक प्रभावी परामर्शदाता (सहायक) में कुछ खास गुण होने चाहिए:
1. **प्रामाणिकता:** इसका मतलब है कि परामर्शदाता का व्यवहार उसके मूल्यों, भावनाओं और अपनी छवि के अनुरूप होना चाहिए।
2. **पुनर्वाक्यविन्यास:** परामर्शदाता को सेवार्थी की बातों या भावनाओं को अलग-अलग शब्दों का उपयोग करके दोबारा कहने में सक्षम होना चाहिए, जिससे सेवार्थी को लगे कि उसे समझा जा रहा है।
3. **तद्नुभूति:** यह परामर्शदाता की क्षमता है कि वह सेवार्थी की भावनाओं को उसके ही नजरिए से समझे।
4. **दूसरों के प्रति सकारात्मक आदर:** परामर्शदाता को सेवार्थी के प्रति सकारात्मक सम्मान दिखाना चाहिए, चाहे सेवार्थी कैसा भी महसूस कर रहा हो। एक प्रभावी परामर्शदाता इन गुणों से सेवार्थी को बेहतर ढंग से समझने और मदद करने में सक्षम होता है।
In simple words: परामर्श एक तरीका है जिससे लोग अपनी समस्याओं के लिए सलाह और मदद लेते हैं। एक अच्छे सलाहकार में ईमानदारी, दूसरों की भावनाओं को समझने की क्षमता और सभी के प्रति सम्मान जैसे गुण होने चाहिए।
🎯 Exam Tip: परामर्श की परिभाषा के साथ-साथ प्रभावी सहायक की विशेषताओं को विस्तार से समझाएं, क्योंकि ये दोनों अवधारणाएं एक-दूसरे से जुड़ी हैं।
Question 7. साक्षात्कार किसे कहते हैं? साक्षात्कार का विशिष्ट प्रारूप क्या है?
Answer: साक्षात्कार का शाब्दिक अर्थ है 'आंतरिक रूप से देखना'। यह एक ऐसी विधि है जिसमें साक्षात्कारकर्ता (व्यक्ति) सीधे संपर्क स्थापित करता है और किसी घटना या समस्या के बारे में अनौपचारिक बातचीत करता है। इससे वह व्यक्ति की भावनाओं, प्रतिक्रियाओं और विचारों को जानकर तथ्यों को इकट्ठा करता है।
साक्षात्कार के दो विशिष्ट प्रारूप निम्न हैं:
1. **वर्णनात्मक साक्षात्कार:** इसमें साक्षात्कारकर्ता जानकारी देने वाले (सूचनादाता) से उसकी भावनाओं, विचारों और मनोवृत्तियों के बारे में जानकारी लेता है। इस जानकारी का उपयोग नई परिकल्पनाएं बनाने में मदद करता है। हालांकि, इसमें विश्वसनीयता और वस्तुनिष्ठता की कमी हो सकती है और यह समय लेने वाला भी होता है।
2. **जानकारी प्राप्त करना:** साक्षात्कार में साक्षात्कारकर्ता सूचनादाता से सीधे मिलकर बातचीत के माध्यम से जानकारी प्राप्त करता है। इससे उसे सूचनादाताओं के विचारों, भावनाओं और रुचियों से जुड़ी अनजान बातें पता चलती हैं। कभी-कभी साक्षात्कार का उद्देश्य नई जानकारी प्राप्त करना नहीं, बल्कि अध्ययनकर्ता के विचारों या निष्कर्षों की वैज्ञानिकता को जांचना होता है। साक्षात्कार के माध्यम से ऐसी जानकारी भी प्राप्त होती है जो केवल वही व्यक्ति जानता है और कहीं और से नहीं मिल सकती।
In simple words: साक्षात्कार का मतलब है किसी से आमने-सामने बात करके जानकारी इकट्ठा करना। इसमें दो लोग मिलते हैं- एक सवाल पूछता है और दूसरा जवाब देता है, ताकि किसी खास बात को समझा जा सके।
🎯 Exam Tip: साक्षात्कार की परिभाषा में 'आंतरिक रूप से देखना' पर जोर दें और इसके विभिन्न प्रारूपों को स्पष्ट करें, जिसमें उद्देश्य और प्रक्रिया दोनों शामिल हों।
Question 8. तद्नुभूति किसे कहते हैं और परामर्शदाता के लिए यह आवश्यक क्यों है?
Answer: तद्नुभूति का अर्थ है दूसरों की भावनाओं को खुद की भावनाओं की तरह महसूस करना। यह एक परामर्शदाता की ऐसी योग्यता है जिसके द्वारा वह सेवार्थी की भावनाओं को उसके ही नजरिए से समझता है।
परामर्शदाता के लिए तद्नुभूति कई कारणों से आवश्यक है:
1. तद्नुभूति परामर्शदाता के लिए इसलिए जरूरी है क्योंकि इसके माध्यम से वह अन्य सेवार्थियों की अनुभूतियों और मनोभावों को उनके नजरिए से ही समझ पाता है। यह व्यक्ति को यह महसूस कराता है कि कोई उसकी बात समझ रहा है।
2. तद्नुभूति परामर्शदाता को एक प्रभावी सहायक बनने में मदद करती है, क्योंकि यह विश्वास और जुड़ाव पैदा करती है।
3. तद्नुभूति के माध्यम से परामर्शदाता सेवार्थी को उसकी समस्या को सुलझाने के लिए सही सलाह दे सकता है।
In simple words: तद्नुभूति का मतलब है किसी और की भावनाओं को ठीक वैसे ही समझना जैसे वे खुद महसूस करते हैं। यह एक सलाहकार के लिए बहुत जरूरी है ताकि वह लोगों की समस्याओं को बेहतर तरीके से समझकर उनकी मदद कर सके।
🎯 Exam Tip: तद्नुभूति की परिभाषा स्पष्ट होनी चाहिए, और इसके महत्व को परामर्शदाता की भूमिका के संदर्भ में समझाना चाहिए।
Question 9. श्रवण में संस्कृति की क्या भूमिका है?
Answer: एक सफल संचार में सुनने (श्रवण) की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है, जिसे इन बातों से समझा जा सकता है:
1. सुनने से ही एक व्यक्ति स्रोत द्वारा दी गई जानकारी को सही ढंग से ग्रहण कर पाता है।
2. यदि सुनने वाला जानकारी को सुन नहीं पाता, तो वह जानकारी का सही अर्थ नहीं लगा पाता और गलतफहमी हो सकती है।
3. आपसी संचार (अंतर्वैयक्तिक सम्प्रेषण) के लिए बोलना जितना जरूरी है, उतना ही सुनना भी आवश्यक है।
4. सुनने में एक तरह की ध्यान सक्रियता होती है, जिससे स्रोतों का सही अर्थ लगाने में मदद मिलती है।
5. सुनने से व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के मनोभावों को स्पष्ट रूप से समझ सकता है और उन्हें अच्छी तरह व्यक्त भी कर सकता है।
6. सुनने से व्यक्ति में धैर्य के साथ-साथ विश्लेषण की क्षमता भी पैदा होती है।
संस्कृति सुनने की प्रक्रिया को गहराई से प्रभावित करती है, क्योंकि अलग-अलग संस्कृतियों में सुनने के तरीके, प्रतिक्रियाएं और अशाब्दिक संकेत भिन्न हो सकते हैं।
In simple words: सुनने की क्षमता संचार में बहुत जरूरी है। यह हमें जानकारी सही से समझने और दूसरों की भावनाओं को पहचानने में मदद करती है। हमारी संस्कृति यह तय करती है कि हम कैसे सुनते हैं और प्रतिक्रिया देते हैं।
🎯 Exam Tip: श्रवण के महत्व के साथ-साथ संस्कृति के प्रभाव को उजागर करें, क्योंकि सांस्कृतिक संदर्भ संचार को महत्वपूर्ण रूप से आकार देते हैं।
Question 10. मानव सम्प्रेषण के घटक कौन-कौन से हैं?
Answer: मानव संचार के मुख्य घटक निम्नलिखित हैं:
1. **स्रोत (Sender):** यह वह व्यक्ति है जो संदेश भेजना शुरू करता है।
2. **संदेश (Message):** यह जानकारी, विचार या भावना है जिसे भेजा जा रहा है।
3. **कूट संकेत (Encoding):** स्रोत द्वारा संदेश को संकेतों (जैसे शब्दों, हाव-भाव) में बदलने की प्रक्रिया।
4. **चैनल (Channel):** वह माध्यम जिसके द्वारा संदेश भेजा जाता है (जैसे आवाज, लेखन, फोन)।
5. **विकूट संकेत (Decoding):** प्राप्तकर्ता द्वारा संकेतों को समझकर संदेश का अर्थ निकालने की प्रक्रिया।
6. **प्राप्तकर्ता (Receiver):** वह व्यक्ति जिसे संदेश भेजा जाता है और जो उसे प्राप्त करता है।
7. **अर्थ परिवर्तन:** संदेश में संकेतों के अर्थ की व्याख्या।
8. **पुनर्निवेशन (Feedback):** प्राप्तकर्ता की ओर से स्रोत को मिलने वाली प्रतिक्रिया, जो बताती है कि संदेश कितना समझा गया। यह प्रभावी संचार के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: मानव संचार में कुछ मुख्य चीजें होती हैं - एक भेजने वाला, एक संदेश, संदेश को भेजने का तरीका, उसे समझने वाला और संदेश को कैसे समझा गया, इसकी प्रतिक्रिया। यह सभी मिलकर संचार को पूरा करते हैं।
🎯 Exam Tip: संचार के सभी घटकों को क्रमबद्ध तरीके से सूचीबद्ध करें और प्रत्येक की संक्षिप्त व्याख्या दें, जिससे संचार प्रक्रिया की स्पष्टता बनी रहे।
RBSE Class 12 Psychology Chapter 10 दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. एक प्रभावी मनोवैज्ञानिक बनने के लिए कौन-कौन-सी सक्षमताएँ आवश्यक होती हैं?
Answer: एक प्रभावी मनोवैज्ञानिक बनने के लिए कुछ खास क्षमताओं का होना बहुत जरूरी है, जो इस प्रकार हैं:
1. **व्यक्तित्व सम्बन्धी क्षमताएँ:** एक कुशल मनोवैज्ञानिक का व्यक्तित्व उच्च कोटि का होना चाहिए। उसे धैर्यवान, विनम्र और स्पष्टवादी होना चाहिए ताकि वह अपनी भूमिका को अच्छी तरह निभा सके। एक अच्छा व्यक्तित्व लोगों का विश्वास जीतने में मदद करता है।
2. **मनोविज्ञान का ज्ञान:** एक प्रभावी मनोवैज्ञानिक को मनोविज्ञान विषय की पूरी जानकारी होनी चाहिए। इससे वह दूसरे व्यक्तियों की भावनाओं और व्यवहारों का सही ढंग से अवलोकन करके उचित सलाह दे पाता है।
3. **कौशल क्षमताओं का होना:** यह जरूरी है कि मनोवैज्ञानिक को सामान्य, विशिष्ट और प्रेक्षण कौशल में महारत हासिल हो। इससे वह मरीज की समस्याओं का सही तरीके से निदान कर पाता है।
4. **कुशल प्रेक्षक:** एक अच्छे मनोवैज्ञानिक को अपने आसपास के वातावरण और लोगों के व्यवहार की गहरी समझ होनी चाहिए। उसे चीजों को ध्यान से देखना आना चाहिए ताकि वह व्यवस्थित और विश्वसनीय जानकारी इकट्ठा कर सके।
5. **व्यवहारों का क्रमबद्ध स्पष्टीकरण:** मनोवैज्ञानिक को मरीज के व्यवहारों, उनके हाव-भाव, संकेतों और प्रतिक्रियाओं को नोट करना चाहिए। इससे वह व्यवस्थित तरीके से व्यवहारों की जांच कर पाता है।
6. **एक कुशल परामर्शदाता:** एक प्रभावी मनोवैज्ञानिक को सामाजिक रूप से कुशल परामर्शदाता भी होना चाहिए। उसे मरीज के जीवन की घटनाओं को समझते हुए सही मार्गदर्शन देना चाहिए और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने व समाज में ढलने के लिए नए तरीके खोजने में मदद करनी चाहिए।
In simple words: एक अच्छा मनोवैज्ञानिक बनने के लिए धैर्य, मनोविज्ञान का पूरा ज्ञान, लोगों को ध्यान से देखने और समझने का कौशल, और दूसरों को सही सलाह देने की क्षमता जैसे गुण बहुत जरूरी हैं। इन गुणों से वह लोगों की समस्याओं को बेहतर ढंग से हल कर पाता है।
🎯 Exam Tip: प्रभावी मनोवैज्ञानिक के लिए आवश्यक क्षमताओं को सूचीबद्ध करते समय, उनके व्यक्तिगत गुणों, ज्ञान, और विभिन्न प्रकार के कौशलों के बीच संतुलन पर जोर दें।
Question 3. मनोवैज्ञानिक परीक्षण कौशल को उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: मनोवैज्ञानिक परीक्षण कौशल का अर्थ है ऐसे कौशल जिनसे मनोवैज्ञानिक व्यक्तियों या समूहों की समस्याओं को समझते हुए उनका समाधान करते हैं। इस कौशल की मदद से मनोवैज्ञानिक लोगों की मानसिक स्थिति को समझने में निपुण होते हैं।
**उदाहरण के लिए:** यदि किसी व्यक्ति को शराब पीने की बुरी लत लग गई है और वह इससे छुटकारा पाना चाहता है, लेकिन प्रयासों के बावजूद सफल नहीं हो पा रहा है, तो इस स्थिति में मनोवैज्ञानिक उस व्यक्ति की पूरी दिनचर्या, काम करने के तरीके और उस पर पड़ने वाले अन्य दबावों का अध्ययन करेगा। इसी आधार पर मनोवैज्ञानिक अपने विवेक और कौशल से उस व्यक्ति के व्यवहार का परीक्षण करेगा और उसे कई युक्तियाँ बताएगा, जिससे उसकी यह आदत छूट जाएगी। इस तरह, मनोवैज्ञानिक परीक्षण मनोविज्ञान के ज्ञान पर आधारित होते हैं। यह कौशल समस्याओं की जड़ तक पहुँचने और प्रभावी समाधान खोजने में मदद करता है।
In simple words: मनोवैज्ञानिक परीक्षण कौशल का मतलब है लोगों की मानसिक समस्याओं को समझने और उन्हें हल करने की खास क्षमता। जैसे, यदि कोई शराब की लत से परेशान है, तो मनोवैज्ञानिक उसकी पूरी ज़िंदगी का अध्ययन करके उसे इस लत से बाहर निकालने के तरीके बताते हैं।
🎯 Exam Tip: मनोवैज्ञानिक परीक्षण कौशल की परिभाषा के साथ एक वास्तविक जीवन का उदाहरण अवश्य दें, जिससे अवधारणा की स्पष्टता बढ़े।
Question 4. प्रेक्षण किसे कहते हैं और यह कितने प्रकार का होता है?
Answer: मोजर के अनुसार, "निरीक्षण विधि वैज्ञानिक खोज का एक शास्त्रीय तरीका है।" इसका मतलब है कि निरीक्षण में किसी चीज़ को ध्यान से देखने और सुनने का इस्तेमाल होता है। सामान्यतः निरीक्षण विधि चार प्रकार की होती है:
1. **अनियंत्रित निरीक्षण विधि:** इस विधि में निरीक्षणकर्ता लोगों के व्यवहारों या घटनाओं का अवलोकन स्वाभाविक स्थिति में करता है। इसमें पहले से कोई योजना नहीं होती, इसलिए इसे अव्यवस्थित या क्रमविहीन निरीक्षण भी कहते हैं। जब किसी समस्या या घटना का अध्ययन प्रयोगशाला में नहीं किया जा सकता, तब यह विधि अपनाई जाती है।
2. **नियंत्रित निरीक्षण विधि:** यह वह अध्ययन विधि है जिसमें निरीक्षणकर्ता और अध्ययन विषय या घटना दोनों पर नियंत्रण स्थापित करके अध्ययन किया जाता है। इसमें एक निश्चित योजना के अनुसार नियंत्रित स्थिति में व्यवहार का अवलोकन किया जाता है।
3. **सहभागी निरीक्षण विधि:** इसमें अध्ययनकर्ता उस समूह या समुदाय में जाकर उसका सदस्य बन जाता है जिसका वह अध्ययन कर रहा है। वह वहाँ के लोगों के साथ घुल-मिलकर उनके और उनके समूह के बारे में वास्तविक जानकारी इकट्ठा करता है।
4. **असहभागी निरीक्षण विधि:** इस विधि में अध्ययनकर्ता समूह या समुदाय का सदस्य बने बिना ही केवल जरूरत के अनुसार समय-समय पर एक तटस्थ भाव से निरीक्षण करता है और जानकारी इकट्ठा करता है।
5. **अर्द्ध-सहभागी निरीक्षण विधि:** इस विधि में अध्ययनकर्ता समूह में कभी-कभी ही हिस्सा लेता है और बाकी गतिविधियों में शामिल नहीं होता है। यह नियंत्रित और अनियंत्रित प्रेक्षण का मिला-जुला रूप है।
In simple words: प्रेक्षण का मतलब है किसी चीज को ध्यान से देखना और समझना। यह चार तरह का होता है: बिना किसी रोक-टोक के देखना, सब कुछ नियंत्रित करके देखना, खुद शामिल होकर देखना और दूर से देखना।
🎯 Exam Tip: प्रेक्षण के प्रकारों को उदाहरण सहित स्पष्ट करें और प्रत्येक विधि की विशेषताओं को संक्षेप में बताएं।
सामान्य कौशल की आवश्यकताः
Question. सामान्य कौशल की आवश्यकता क्यों होती है?
Answer: सामान्य कौशल की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से होती है:
1. एक मनोवैज्ञानिक को कुशल और निपुण बनने के लिए सामान्य कौशल बहुत जरूरी है।
2. एक मनोवैज्ञानिक सामान्य कौशल के आधार पर व्यक्तियों की रोजमर्रा की गतिविधियों का अध्ययन करता है।
3. एक मनोवैज्ञानिक सामान्य कौशल के आधार पर शोध में सैद्धांतिक नियम खोजता है।
4. एक मनोवैज्ञानिक सामान्य कौशल के आधार पर व्यक्तियों की समस्याओं का समाधान करता है और उन्हें सुलझाने के लिए उपाय भी सुझाता है। ये कौशल किसी भी पेशे में सफलता के लिए नींव का काम करते हैं।
In simple words: सामान्य कौशल इसलिए जरूरी हैं ताकि एक मनोवैज्ञानिक अपने काम को अच्छी तरह कर सके, लोगों के व्यवहार को समझ सके, शोध कर सके और उनकी समस्याओं को हल कर सके।
🎯 Exam Tip: सामान्य कौशल की आवश्यकता को मनोवैज्ञानिक की समग्र प्रभावशीलता और समस्या-समाधान क्षमताओं के संदर्भ में समझाएं।
सामान्य कौशल निम्नलिखित हैं –
Question. सामान्य कौशल में कौन-कौन से घटक शामिल हैं?
Answer: सामान्य कौशल में निम्नलिखित घटक शामिल हैं:
1. **संज्ञानात्मक कौशल:** इसमें समस्या समाधान की योग्यता और बौद्धिक जिज्ञासा शामिल होती है।
2. **भावात्मक कौशल:** इसमें भावनात्मक नियंत्रण और संतुलन, साथ ही आपसी संघर्षों के प्रति सहनशीलता आती है।
3. **व्यक्तित्व:** इसमें दूसरों की मदद करने की इच्छा, ईमानदारी और नए विचारों के प्रति खुलापन शामिल है।
4. **वैयक्तिक कौशल:** इसमें व्यक्तिगत संगठन, स्वास्थ्य, समय प्रबंधन और उचित वेशभूषा या पहनावा शामिल है।
5. **अभिव्यक्तिपरक कौशल:** इसमें अपने विचारों और भावनाओं को लिखित रूप में व्यक्त करने की क्षमता होती है।
6. **अंतर्वैयक्तिक कौशल:** इसमें सुनने की क्षमता, दूसरों की संस्कृति के प्रति सम्मान, अनुभव, मूल्य, लक्ष्य और इच्छाओं को समझने की क्षमता, साथ ही खुलापन और सकारात्मक या हितैषी भावना शामिल होती है। ये कौशल किसी व्यक्ति के समग्र विकास और सामाजिक अनुकूलन में सहायता करते हैं।
In simple words: सामान्य कौशल में समस्या सुलझाने की समझ, भावनाओं को कंट्रोल करना, ईमानदार होना, समय का सही इस्तेमाल, अपनी बात अच्छे से कहना और दूसरों की बातें सुनना शामिल हैं। ये सभी गुण हमें रोजमर्रा के जीवन में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: सामान्य कौशल के सभी घटकों को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें और प्रत्येक की संक्षिप्त व्याख्या दें, जिससे विषय की व्यापक समझ प्रदर्शित हो।
RBSE Class 12 Psychology Chapter 10 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Class 12 Psychology Chapter 10 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. नियंत्रित निरीक्षण को कहते हैं –
(अ) व्यवस्थित निरीक्षण
(ब) अव्यवस्थित
(स) दोनों
(द) कोई भी नहीं
Answer: (अ) व्यवस्थित निरीक्षण
In simple words: नियंत्रित निरीक्षण का मतलब है किसी चीज को योजनाबद्ध तरीके से और नियमों के अनुसार देखना। यह एक व्यवस्थित प्रक्रिया होती है।
🎯 Exam Tip: नियंत्रित निरीक्षण में 'व्यवस्था' और 'योजना' प्रमुख कीवर्ड हैं; इन्हें उत्तर में शामिल करना सुनिश्चित करें।
Question 2. निरीक्षण व्यवहार के निरीक्षण के विश्लेषण के बाद किया जाता है –
(अ) नीति निर्माण
(ब) व्यवहार की व्याख्या
(स) परिकल्पना निर्माण
(द) सामान्यीकरण
Answer: (ब) व्यवहार की व्याख्या
In simple words: किसी व्यवहार को देखने के बाद, उसका विश्लेषण करके यह समझा जाता है कि वह व्यवहार क्यों हुआ। यानी, देखे गए व्यवहार की वजह समझी जाती है।
🎯 Exam Tip: निरीक्षण का अंतिम चरण हमेशा डेटा के विश्लेषण और उसके आधार पर व्यवहार की व्याख्या से जुड़ा होता है।
Question 3. प्रेक्षण में सर्वाधिक प्रयोग होता है –
(अ) वाणी
(ब) कानों
(स) आँख
(द) कोई भी नहीं
Answer: (स) आँख
In simple words: किसी चीज को देखने की प्रक्रिया में सबसे ज्यादा हमारी आंखों का इस्तेमाल होता है, क्योंकि हम उन्हीं से चीजों को देखते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रेक्षण एक दृश्य प्रक्रिया है, इसलिए आँखें प्राथमिक इंद्रिय अंग हैं।
Question 4. निरीक्षण में कौन-से तत्त्व शामिल हैं?
(अ) क्रमबद्धता
(ब) वस्तुनिष्ठता
(स) प्रमाणिकता
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: जब हम किसी चीज का निरीक्षण करते हैं, तो उसमें चीजें क्रम से देखना, निष्पक्ष होकर देखना और मिली जानकारी का सही होना, ये सभी गुण शामिल होते हैं।
🎯 Exam Tip: निरीक्षण को वैज्ञानिक बनाने के लिए क्रमबद्धता, वस्तुनिष्ठता और प्रमाणिकता तीनों ही आवश्यक हैं।
Question 5. समाज मनोविज्ञान की कौन-सी प्रकृति नहीं है?
(अ) समाजीकरण
(ब) वस्तुनिष्ठता
(स) प्रमाणिकता
(द) पद्धति
Answer: (अ) समाजीकरण
In simple words: समाज मनोविज्ञान मुख्य रूप से सामाजिक व्यवहारों का अध्ययन करता है, लेकिन 'समाजीकरण' खुद इसकी प्रकृति नहीं है, बल्कि एक प्रक्रिया है जिसका वह अध्ययन करता है।
🎯 Exam Tip: समाज मनोविज्ञान की प्रकृति में वैज्ञानिकता, वस्तुनिष्ठता और व्यवस्थित पद्धति शामिल होती है, जबकि समाजीकरण इसका अध्ययन क्षेत्र है।
Question 6. एक अप्रयोगात्मक वैज्ञानिक शोध है –
(अ) साक्षात्कार
(ब) सर्वेक्षण शोध
(स) प्रश्नावली
(द) कोई भी नहीं
Answer: (ब) सर्वेक्षण शोध
In simple words: सर्वेक्षण शोध एक ऐसा वैज्ञानिक तरीका है जिसमें हम प्रयोग नहीं करते, बल्कि लोगों से सवाल पूछकर या उनकी राय लेकर जानकारी इकट्ठा करते हैं।
🎯 Exam Tip: अप्रयोगात्मक शोध में किसी भी तरह का हस्तक्षेप या चर परिवर्तन नहीं होता है, केवल मौजूदा स्थितियों का अवलोकन या मापन किया जाता है।
Question 8. अध्ययनकर्ता समूह के सदस्य के रूप में कार्य करता है -
(अ) असहभागी प्रेक्षण
(ब) व्यवस्थित प्रेक्षण
(स) अव्यवस्थित प्रेक्षण
(द) सहभागी निरीक्षण विधि
Answer: (द) सहभागी निरीक्षण विधि
In simple words: सहभागी निरीक्षण में, जो व्यक्ति अध्ययन कर रहा होता है, वह उस समूह का हिस्सा बन जाता है जिसका वह अवलोकन कर रहा है। वह उनके साथ रहकर चीजों को सीखता है।
🎯 Exam Tip: सहभागी निरीक्षण सामाजिक समूहों के व्यवहार को गहराई से समझने के लिए एक प्रभावी विधि है।
Question 9. चरों के योजनानुसार परिचालित करना, विशेषता है -
(अ) प्रयोगात्मक विधि
(ब) निरीक्षण विधि
(स) साक्षात्कार विधि
(द) कोई भी नहीं
Answer: (अ) प्रयोगात्मक विधि
In simple words: प्रयोगात्मक विधि में, हम अपनी योजना के अनुसार किसी चीज को बदलते हैं या उसका इस्तेमाल करते हैं ताकि यह देख सकें कि उसका क्या असर होता है।
🎯 Exam Tip: प्रयोगात्मक विधि में स्वतंत्र चरों में हेरफेर और आश्रित चरों पर उनके प्रभावों का सावधानीपूर्वक मापन शामिल होता है।
Question 10. योजना निरीक्षण विधि के अध्ययन के पहले आवश्यक है -
(अ) सिद्धान्त बनाना
(ब) निरीक्षण विधि के पद
(स) व्यवहार की व्याख्या
(द) कोई भी नहीं
Answer: (ब) निरीक्षण विधि के पद
In simple words: जब हम योजना बनाकर कोई चीज देखते हैं, तो उससे पहले यह जानना जरूरी है कि उस देखने के तरीके में कौन-कौन से कदम उठाए जाएंगे।
🎯 Exam Tip: किसी भी व्यवस्थित अध्ययन, विशेषकर निरीक्षण में, चरणों की स्पष्टता और क्रमबद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
Question 12. अन्तर्वैयक्तिक सम्प्रेषण सम्बन्धित होता है –
(अ) एक व्यक्ति से
(ब) दो व्यक्ति से
(स) दो से अधिक व्यक्ति
(द) केवल
Answer: (ब) दो व्यक्ति से
In simple words: आपसी संचार (अंतर्वैयक्तिक सम्प्रेषण) का मतलब है दो लोगों के बीच बातचीत। इसमें वे एक-दूसरे से सीधे बात करते हैं।
🎯 Exam Tip: अंतर्वैयक्तिक सम्प्रेषण हमेशा दो व्यक्तियों के बीच सीधा और व्यक्तिगत संचार होता है।
Question 13. 'वाचन' अंग है –
(अ) सम्प्रेषण
(ब) प्रश्नावली
(स) प्रेक्षण
(द) कोई भी नहीं
Answer: (अ) सम्प्रेषण
In simple words: 'बोलना' या 'वाचन' संचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब हम किसी से बात करते हैं, तो हम अपनी बातों को बोलकर ही पहुंचाते हैं।
🎯 Exam Tip: संचार की प्रक्रिया में वाचन, श्रवण और अशाब्दिक संचार सभी महत्वपूर्ण घटक हैं।
Question 14. स्रोत से सूचना की उत्पत्ति को कहा जाता है –
(अ) सूचना
(ब) सम्प्रेषक
(स) माध्यम
(द) पुनर्निवेशन
Answer: (ब) सम्प्रेषक
In simple words: जिस व्यक्ति या जगह से कोई जानकारी या संदेश शुरू होता है, उसे 'सम्प्रेषक' कहते हैं। यह जानकारी का मूल स्रोत होता है।
🎯 Exam Tip: संचार प्रक्रिया में स्रोत या सम्प्रेषक वह होता है जो संदेश उत्पन्न करता है और उसे आगे भेजता है।
RBSE Class 12 Psychology Chapter 10 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. निरीक्षण विधि में अध्ययनकर्ता को किन-किन बातों का ध्यान रखना पड़ता?
Answer: निरीक्षण विधि में अध्ययनकर्ता को कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना पड़ता है ताकि परिणामों में अधिक विश्वसनीयता आ सके:
1. अध्ययनकर्ता को स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि वह क्या और क्यों अवलोकन कर रहा है।
2. एक निरीक्षणकर्ता की जगह अगर कई लोग एक ही बात या व्यवहार का अलग-अलग स्थितियों में अवलोकन करें, तो निरीक्षण कार्य में अधिक वैधता, वस्तुनिष्ठता और विश्वास पैदा हो सकता है। इससे परिणामों की सटीकता बढ़ती है।
3. व्यवहार जब हो रहा हो, तभी उसे बारीकी से देखना और संबंधित बातों को नोट या रिकॉर्ड करते जाना चाहिए। इससे जानकारी ताजा और सटीक रहती है।
4. अध्ययनकर्ता को अपनी व्यक्तिगत राय और पूर्वाग्रहों को अवलोकन से दूर रखना चाहिए, ताकि परिणाम निष्पक्ष रहें।
In simple words: निरीक्षण करते समय, अध्ययन करने वाले को बहुत सावधान रहना चाहिए। उसे पता होना चाहिए कि वह क्या देख रहा है, किसी एक चीज को कई लोगों से देखने की कोशिश करनी चाहिए और जो भी व्यवहार हो रहा है, उसे तुरंत नोट करना चाहिए।
🎯 Exam Tip: निरीक्षण विधि की सफलता के लिए अध्ययनकर्ता की निष्पक्षता, सटीकता और व्यवस्थित रिकॉर्डिंग महत्वपूर्ण कारक हैं।
Question 2. अनियंत्रित निरीक्षण विधि के दोष बताइए।
Answer: अनियंत्रित निरीक्षण विधि के दोष निम्नलिखित हैं:
1. इस तरह का निरीक्षण बिना किसी पूर्व निर्धारित योजना के होता है, जिससे यह अव्यवस्थित हो सकता है।
2. इस विधि में निरीक्षणकर्ता को अध्ययन की स्थिति या स्वतंत्र चरों पर नियंत्रण नहीं मिल पाता है, जिससे परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
3. इस विधि से मिलने वाले परिणाम और निष्कर्ष अक्सर दोषपूर्ण और वस्तुनिष्ठता रहित होते हैं क्योंकि इसमें व्यक्तिपरकता का प्रभाव अधिक होता है।
4. अनियंत्रित निरीक्षण पर निरीक्षणकर्ता के व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों (अपनी पसंद-नापसंद) का प्रभाव पड़ने की संभावना अधिक होती है।
5. यह विधि आमतौर पर व्यवस्थित नहीं होती है, इसलिए इसे अव्यवस्थित या क्रमविहीन निरीक्षण विधि भी कहा जाता है।
6. इसमें किसी भी प्रकार का नियंत्रण नहीं होता है, जिससे विश्वसनीय निष्कर्ष निकालना मुश्किल हो जाता है। यह विधि वैज्ञानिक शोध के लिए कम उपयुक्त मानी जाती है।
In simple words: अनियंत्रित निरीक्षण में बहुत सारी कमियां होती हैं। इसमें कोई पहले से योजना नहीं होती, देखने वाले का अपनी बातों पर जोर रहता है, और परिणाम भरोसेमंद नहीं होते। यह तरीका अक्सर अव्यवस्थित होता है और इसे नियंत्रित नहीं किया जा सकता।
🎯 Exam Tip: अनियंत्रित निरीक्षण के दोषों को स्पष्ट रूप से बताएं और यह भी बताएं कि ये दोष कैसे इसकी विश्वसनीयता और वैधता को प्रभावित करते हैं।
Question 3. सहभागी निरीक्षण विधि के गुण-दोष की विवेचना कीजिए।
Answer: सहभागी निरीक्षण विधि के गुण और दोष इस प्रकार हैं:
**सहभागी निरीक्षण विधि के गुण:**
1. इस विधि से अध्ययनकर्ता को समूह या समुदाय से संबंधित प्राथमिक तथ्यों को इकट्ठा करने में मदद मिलती है। क्योंकि वह समूह का हिस्सा बन जाता है, इसलिए उसे अंदर की जानकारी मिलती है।
2. इस विधि द्वारा सूक्ष्म अध्ययन करना आसान होता है। समूह के सदस्य अध्ययनकर्ता को अपना ही मानते हैं, जिससे वे खुलकर जानकारी साझा करते हैं।
**सहभागी निरीक्षण विधि के दोष:**
1. इस विधि में समूह या समुदाय के सदस्यों के विचार आदि अध्ययन परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। अध्ययनकर्ता की उपस्थिति से लोगों के व्यवहार में बदलाव आ सकता है।
2. इस विधि से केवल छोटे समूहों का ही अध्ययन संभव है। बड़े समूहों का अध्ययन करने के लिए यह विधि उपयुक्त नहीं है, क्योंकि सभी सदस्यों के साथ घुलना-मिलना मुश्किल होता है। यह विधि अध्ययनकर्ता के लिए काफी समय लेने वाली और भावनात्मक रूप से थकाऊ हो सकती है।
In simple words: सहभागी निरीक्षण के फायदे हैं कि इससे समूह की अंदरूनी बातें जानने को मिलती हैं और गहराई से अध्ययन हो पाता है। लेकिन इसके नुकसान भी हैं, जैसे कि लोगों का व्यवहार बदल सकता है और यह तरीका सिर्फ छोटे समूहों के लिए ही काम करता है।
🎯 Exam Tip: सहभागी निरीक्षण के गुणों और दोषों को संतुलित तरीके से प्रस्तुत करें, और प्रत्येक बिंदु की व्याख्या करें कि यह विधि की प्रभावशीलता को कैसे प्रभावित करता है।
Question 4. शरीर भाषा पर समुचित टिप्पणी कीजिए।
Answer: 'शरीर भाषा' से मतलब ऐसी भाषा से है जिसमें व्यक्ति अपने शारीरिक अंगों, जैसे चेहरे के हाव-भाव, हाथों के इशारे, आँखों का संपर्क और शरीर की मुद्रा का उपयोग करके दूसरों तक जानकारी या भावनाएँ पहुँचाता है। यह अशाब्दिक संचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। शरीर भाषा अक्सर शब्दों से ज्यादा सच बोलती है और व्यक्ति की आंतरिक भावनाओं को व्यक्त करती है। उदाहरण के लिए, मुस्कुराना खुशी दिखाता है, जबकि झुके हुए कंधे उदासी या थकान दिखा सकते हैं। शरीर भाषा को समझना प्रभावी संचार और दूसरों की भावनाओं को समझने के लिए बहुत जरूरी है, खासकर जब शब्दों में कुछ और कहा जा रहा हो और शरीर कुछ और बता रहा हो।
In simple words: शरीर भाषा का मतलब है अपने शरीर के अंगों, जैसे चेहरे, हाथ और शरीर की स्थिति से दूसरों को कुछ बताना। यह बिना बोले ही हमारी भावनाओं और विचारों को दिखाती है।
🎯 Exam Tip: शरीर भाषा को अशाब्दिक संचार के एक महत्वपूर्ण रूप के रूप में परिभाषित करें और यह कैसे भावनाओं और विचारों को व्यक्त करती है, इसे स्पष्ट करें।
प्रश्न 5. परामर्श के लक्ष्य को बताइए।
Answer: परामर्श के मुख्य लक्ष्य नीचे दिए गए हैं:
1. सहायता देना: इसके तहत, व्यक्ति को उसकी सोच और भावनाओं से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने की क्षमता को सहारा देना और उसे प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण होता है।
2. शैक्षिक मार्गदर्शन: इसका उद्देश्य व्यक्ति को जानकारी देना, प्रशिक्षण प्रदान करना और उसकी योग्यताओं का विकास करना है, ताकि उसका समग्र विकास हो सके। यह व्यक्ति को जीवन के विभिन्न पहलुओं में बेहतर बनने में मदद करता है।
3. सही निर्णय लेना: परामर्श का सबसे खास लक्ष्य यह है कि परामर्श लेने वाले व्यक्ति को सही निर्णय लेने में मदद मिले।
4. समायोजन: इसमें व्यक्ति की क्षमताओं और विशेषताओं को विकसित किया जाता है, ताकि वह भविष्य की समस्याओं का सामना करने के लिए तैयार रह सके।
In simple words: परामर्श का मुख्य उद्देश्य लोगों को उनकी चुनौतियों से निपटने में मदद करना, उन्हें सही जानकारी और कौशल देना, और उन्हें अपने जीवन के लिए बेहतर निर्णय लेने में सहायता करना है। यह उन्हें भविष्य की समस्याओं के लिए भी तैयार करता है।
🎯 Exam Tip: परामर्श के लक्ष्यों को याद करते समय, व्यक्ति के विकास (क्षमताओं, निर्णयों) और चुनौतियों के समाधान पर केंद्रित बिंदुओं पर ध्यान दें।
प्रश्न 6. परामर्श की विशेषताएँ स्पष्ट कीजिए।
Answer: परामर्श की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. यह एक ऐसा तरीका है जिसमें कम से कम दो लोग शामिल होते हैं: एक जो परामर्श लेता है और दूसरा जो परामर्श देता है।
2. परामर्श देने और लेने के लिए दोनों व्यक्तियों का लगातार एक-दूसरे से सीधे संपर्क में रहना बहुत जरूरी है।
3. परामर्शदाता और परामर्श लेने वाले के बीच अच्छे संबंध होने चाहिए, जिससे उनमें एक-दूसरे के प्रति विश्वास बना रहे।
4. परामर्श का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को अपने जीवन में आने वाली समस्याओं को खुद ही सुलझाने में मदद करना है।
5. परामर्शदाता व्यक्ति को सोचने-समझने और भावनात्मक रूप से सहायता देता है, ताकि वह अपनी परेशानियों का समाधान खुद निकाल सके। परामर्श एक ऐसी प्रक्रिया है जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाती है।
In simple words: परामर्श में दो लोग सीधे बात करते हैं, उनके बीच अच्छा रिश्ता होता है, और इसका लक्ष्य व्यक्ति को खुद अपनी समस्याएँ हल करने में मदद करना है।
🎯 Exam Tip: परामर्श की विशेषताओं को याद करते समय, इसमें शामिल लोगों की संख्या, उनके संबंध और परामर्श के अंतिम उद्देश्य (आत्मनिर्भरता) को केंद्र में रखें।
RBSE Class 12 Psychology Chapter 10 दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 2. असहभागी अवलोकन/प्रेक्षण के गुण एवं दोषों की विवेचना कीजिए।
Answer: असहभागी अवलोकन के गुण और दोष नीचे दिए गए हैं:
असहभागी अवलोकन के गुण:
1. सही रिकॉर्डिंग: इसमें अवलोकनकर्ता (देखने वाला) खुद समूह का हिस्सा नहीं बनता। इसलिए वह घटना को देखते ही सारी जानकारी आसानी से लिख लेता है, जिससे बाद में याददाश्त की गलती नहीं होती।
2. स्वाभाविक अध्ययन: इस तरीके से समूह की गतिविधियों का अध्ययन उनके असली और स्वाभाविक रूप में किया जा सकता है, क्योंकि देखने वाले के हस्तक्षेप से व्यवहार प्रभावित नहीं होता। देखने वाला एक तटस्थ और वैज्ञानिक नजरिया बनाए रखता है, जिससे पक्षपात की संभावना कम होती है।
3. अपरिचित होने का लाभ: असहभागी अवलोकन में अवलोकनकर्ता समूह के लिए नया होता है। इस वजह से समूह की हर छोटी-बड़ी घटना उसका ध्यान खींचती है और वह उसका गहराई से अध्ययन कर पाता है। इससे किसी भी विषय पर विस्तृत जानकारी मिल सकती है।
असहभागी अवलोकन के दोष:
1. कृत्रिम अध्ययन: इस तरीके से समूह के व्यवहार का स्वाभाविक रूप से अध्ययन नहीं हो पाता। दूर से देखने के कारण समूह के सदस्य जागरूक हो सकते हैं। अगर देखने वाला परिचित न हो तो उनके व्यवहार में बनावटीपन आ सकता है, जिससे असली व्यवहार का अध्ययन मुश्किल हो जाता है।
2. गहरे संबंधों का अभाव: इस विधि में समूह के सदस्यों के साथ कोई गहरा संबंध नहीं बन पाता, जिस कारण उनसे सहयोग मिलना मुश्किल होता है।
3. पक्षपातपूर्ण अध्ययन: इस विधि में पक्षपात की संभावना रहती है। अनुसंधानकर्ता समूह के व्यवहार को अपने नजरिए से देखता है, न कि उन लोगों के नजरिए से जो व्यवहार कर रहे हैं। इससे वह घटनाओं के असली मायने नहीं समझ पाता और अध्ययन में पक्षपात आ सकता है।
4. अन्य सीमाएँ:
• इस विधि में देखने वाला केवल उन्हीं घटनाओं को देख सकता है जो उसके सामने होती हैं।
• वह सारी गतिविधियों को क्रम से नहीं देख पाता।
• समूह के सदस्यों से बिना पूछे और उनकी गतिविधियों में शामिल हुए बिना, केवल थोड़ी-सी बातों को देखकर समूह के व्यवहार को पूरी तरह समझना मुश्किल होता है।
In simple words: असहभागी अवलोकन में देखने वाला समूह का हिस्सा नहीं होता, जिससे वह चीजों को स्वाभाविक रूप से देख पाता है और सही जानकारी नोट कर सकता है। लेकिन इससे समूह के व्यवहार में बनावटीपन आ सकता है, और गहराई से समझना मुश्किल हो सकता है क्योंकि कोई गहरा संबंध नहीं बन पाता।
🎯 Exam Tip: असहभागी अवलोकन के गुण और दोष बताते समय, मुख्य रूप से "बाहरी व्यक्ति" होने के फायदों (तटस्थता, सही रिकॉर्डिंग) और नुकसानों (कृत्रिमता, गहराई की कमी) पर फोकस करें।
प्रश्न 3. नियंत्रित एवं अनियंत्रित अवलोकन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: नियंत्रित और अनियंत्रित अवलोकन में मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
नियंत्रित अवलोकन के परिणाम अधिक विश्वसनीय होते हैं, क्योंकि इसमें अवलोकनकर्ता के व्यक्तिगत गुणों का प्रभाव नहीं पड़ता। इसके उलट, अनियंत्रित अवलोकन से मिले परिणाम कम विश्वसनीय होते हैं क्योंकि उन पर अवलोकनकर्ता के निजी गुणों का असर पड़ने की संभावना रहती है।
3. योजना के आधार पर: नियंत्रित अवलोकन में अवलोकन की योजना पहले से बना ली जाती है और उसी के अनुसार काम किया जाता है। अनियंत्रित अवलोकन में ऐसा नहीं होता; यह बिना किसी पूर्व योजना के होता है।
4. उपकरणों के आधार पर: नियंत्रित अवलोकन में डेटा इकट्ठा करने के लिए कुछ खास उपकरण जैसे अनुसूची, मानचित्र और क्षेत्रीय नोट्स आदि का उपयोग होता है। अनियंत्रित अवलोकन में ऐसे कोई खास उपकरण इस्तेमाल नहीं किए जाते।
5. पहलुओं के आधार पर: नियंत्रित अवलोकन में किसी घटना के खास पहलुओं का अध्ययन संभव होता है। जबकि अनियंत्रित अवलोकन में घटना के सभी पहलुओं का अध्ययन संभव नहीं हो पाता है।
6. निर्देशों के आधार पर: नियंत्रित अवलोकन में अवलोकनकर्ता कुछ तय निर्देशों के अनुसार अपना व्यवहार करता है। वहीं, अनियंत्रित अवलोकन में व्यवहार पर कोई पाबंदी नहीं होती है।
7. घटकों के आधार पर: नियंत्रित अवलोकन में अध्ययन की जाने वाली स्थितियों और घटकों पर नियंत्रण रखा जाता है। अनियंत्रित अवलोकन में ऐसा नहीं होता, वहाँ स्थितियाँ और घटक अनियंत्रित रहते हैं।
In simple words: नियंत्रित अवलोकन में सब कुछ योजनाबद्ध होता है और उपकरणों का उपयोग किया जाता है, जिससे परिणाम भरोसेमंद होते हैं। अनियंत्रित अवलोकन में कोई योजना नहीं होती और चीजें स्वाभाविक रूप से होती हैं, लेकिन परिणाम कम विश्वसनीय हो सकते हैं।
🎯 Exam Tip: नियंत्रित और अनियंत्रित अवलोकन के बीच अंतर बताते समय, योजना, उपकरण, नियंत्रण और परिणामों की विश्वसनीयता जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें।
प्रश्न 4. साक्षात्कार की विशेषताओं तथा उद्देश्यों पर प्रकाश डालिए।
Answer: साक्षात्कार की विशेषताएँ और उद्देश्य इस प्रकार हैं:
साक्षात्कार की विशेषताएँ:
1. साक्षात्कार विधि में दो लोग मिलते हैं: एक शोधकर्ता और दूसरा वह व्यक्ति जिसका अध्ययन किया जा रहा है।
2. इस विधि में शोधकर्ता और अध्ययन इकाई के बीच सीधा या आमने-सामने का संबंध होता है। दोनों लोग किसी समस्या या घटना के बारे में सीधे बातचीत करते हैं।
3. शोधकर्ता और अध्ययन इकाई के बीच यह मुलाकात किसी खास उद्देश्य से होती है। असल में, शोधकर्ता किसी घटना या समस्या के बारे में व्यक्ति के अंदरूनी विचारों, भावनाओं और एहसासों को जानने के लिए उससे बात करता है।
1. साक्षात्कार के जरिए शोधकर्ता लोगों की भावनाओं, विचारों और नजरियों के बारे में जानकारी लेता है। इस जानकारी के आधार पर नई धारणाएँ बनाई जा सकती हैं।
2. साक्षात्कार में शोधकर्ता सीधे बात करके जानकारी इकट्ठा करता है। इससे उसे व्यक्ति के विचार, भावनाएँ और रुचियाँ जैसी छिपी हुई बातें पता चलती हैं।
3. कभी-कभी साक्षात्कार सिर्फ नई जानकारी पाने के लिए नहीं, बल्कि शोधकर्ता के खास विचारों या निष्कर्षों की वैज्ञानिकता जाँचने के लिए भी होता है।
4. साक्षात्कार के माध्यम से शोधकर्ता ऐसे लोगों से जानकारी लेता है, जिसे कोई दूसरा नहीं जानता और जो किसी और जगह से नहीं मिल सकती। साक्षात्कार एक शक्तिशाली उपकरण है जो व्यक्तियों के अनुभवों को सीधे समझने में मदद करता है।
In simple words: साक्षात्कार एक सीधी बात है जहाँ दो लोग मिलते हैं। इसका मकसद लोगों के विचारों, भावनाओं और छिपी हुई जानकारी को समझना है, ताकि नई बातें पता चलें और सही निर्णय लिए जा सकें।
🎯 Exam Tip: साक्षात्कार की विशेषताओं को बताते समय, सीधा संपर्क, उद्देश्य-केंद्रित बातचीत, और अप्रकट जानकारी प्राप्त करने पर जोर दें।
प्रश्न 5. साक्षात्कार विधि के गुण/लाभ/महत्व एवं दोषों का उल्लेख कीजिए।
Answer: साक्षात्कार विधि के गुण, लाभ, महत्व और दोष इस प्रकार हैं:
साक्षात्कार विधि के गुण:
1. साक्षात्कार के जरिए शोधकर्ता व्यक्ति के हाव-भाव और चेहरे के हाव-भाव पर ध्यान देता है। वह कई मनोवैज्ञानिक सवालों से व्यक्ति के मन की बात जानने की कोशिश करता है, जिससे उसकी मानसिक स्थिति को समझा जा सकता है।
2. कई ऐसी बातें और घटनाएँ होती हैं जिन्हें सीधे देखकर नहीं समझा जा सकता। इनकी जानकारी केवल व्यक्ति (सूचना देने वाले) को होती है। साक्षात्कार के दौरान, खुली बातचीत में सूचना देने वाला अपनी भावनाओं में सब कुछ बता देता है, यहाँ तक कि गोपनीय बातें भी। ऐसी जानकारी के लिए सामाजिक अनुसंधान में साक्षात्कार एक सही तरीका है।
3. साक्षात्कार की मदद से व्यक्ति अपने जीवन की पिछली घटनाओं और अनुभवों का ब्योरा दे सकता है। यानी, उसकी पुरानी घटनाओं की सच्ची तस्वीर के आधार पर शोधकर्ता वैज्ञानिक निष्कर्ष निकाल सकता है।
4. इस विधि में शोधकर्ता और सूचना देने वाले के बीच सीधा संपर्क रहता है। शोधकर्ता बीच-बीच में जरूरत के हिसाब से सहायक सवाल पूछकर, कुछ उत्साहवर्धक वाक्य बोलकर, अपने व्यक्तित्व से सूचना देने वाले को प्रभावित करके, उसका विश्वास जीतकर, पूरी जानकारी ले सकता है। वह अपने किसी भी संदेह को भी तुरंत दूर कर सकता है।
5. साक्षात्कार विधि में शुरुआत से अंत तक कई सावधानियाँ बरत कर सही और विश्वसनीय निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं। खुली बातचीत, सीधा संपर्क और मनोवैज्ञानिक अध्ययन जैसी परिस्थितियाँ ही साक्षात्कारकर्ता को सही और सच्चे निष्कर्ष निकालने में मदद करती हैं।
साक्षात्कार विधि में कुछ चुनौतियाँ भी होती हैं, जिन्हें अक्सर इसके दोष कहा जाता है:
2. वर्णनात्मक प्रकृति: साक्षात्कार में भावनाएँ और आवेग बहुत ज्यादा प्रभावित करते हैं। इसलिए, इनकी संख्यात्मक रूप से जाँच नहीं की जा सकती।
3. पक्षपातपूर्ण सामग्री: साक्षात्कार से मिली जानकारी में अक्सर पक्षपात होता है। इसकी सच्चाई पर संदेह रहता है। स्वतंत्र साक्षात्कार में, सूचना देने वाला मनमानी तरीके से बातों को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है। इसलिए, पक्षपातपूर्ण जानकारी मिलती है जिससे गलत निष्कर्ष निकल सकते हैं।
4. कुशल साक्षात्कारकर्ताओं की समस्या: कुशल साक्षात्कारकर्ता मिलना मुश्किल होता है। साक्षात्कारकर्ता को मानवीय व्यवहार का मनोवैज्ञानिक ज्ञान होना चाहिए। उसमें बोलने की कला, समय पर समझदारी और बुद्धि कौशल जैसे गुण होने चाहिए। ज्यादातर क्षेत्रीय कार्यकर्ता, जिन्हें साक्षात्कारकर्ता के रूप में नियुक्त किया जाता है, उनमें ये गुण नहीं होते। नतीजतन, वे सफलतापूर्वक साक्षात्कार नहीं कर पाते। इसलिए, उनके द्वारा इकट्ठा की गई जानकारी भी विश्वसनीय नहीं होती।
5. खर्चीली विधि: साक्षात्कार की विधि में बहुत समय लगता है और इसके आयोजन में काफी पैसा भी खर्च होता है, जिससे यह एक महंगी विधि बन जाती है।
In simple words: साक्षात्कार से गहरी जानकारी मिलती है क्योंकि सीधे बात करने से भावनाओं और छिपी बातों का पता चलता है, और यह पिछली घटनाओं को समझने में मदद करता है। लेकिन इसमें पक्षपात होने की संभावना होती है, अच्छे साक्षात्कारकर्ता मिलना मुश्किल होता है, और यह समय के साथ महंगा भी होता है।
🎯 Exam Tip: साक्षात्कार के गुण और दोषों पर चर्चा करते समय, सूचना की गहराई और विश्वसनीयता बनाम पक्षपात और लागत जैसे प्रमुख व्यापार-बंदों पर ध्यान दें।
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RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 10 मनोवैज्ञानिक कौशल विकास
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Detailed Explanations for Chapter 10 मनोवैज्ञानिक कौशल विकास
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Benefits of using Psychology Class 12 Solved Papers
Using our Psychology solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 12 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 10 मनोवैज्ञानिक कौशल विकास to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 10 मनोवैज्ञानिक कौशल विकास is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Psychology are as per latest RBSE curriculum.
Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 10 मनोवैज्ञानिक कौशल विकास as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Psychology concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 10 मनोवैज्ञानिक कौशल विकास will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 12 Psychology. You can access RBSE Solutions Class 12 Psychology Chapter 10 मनोवैज्ञानिक कौशल विकास in both English and Hindi medium.
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