NCERT Solutions for Class 12 Political Science: Chapter 07 राजनीतिक सहभागिता
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Practice Class 12 Political Science Solutions: Chapter 07 राजनीतिक सहभागिता
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RBSE Class 12 Political Science Chapter 7 बहुंचयनात्मक प्रश्न
Question 1. राजनीतिक सहभागिता का सूत्रपात किन विचारकों ने किया?
(अ) व्यवहारवादी
(ब) उदारवादी
(स) समाजवादी
(द) अतिवादी
Answer: (अ) व्यवहारवादी
In simple words: राजनीतिक सहभागिता की शुरुआत व्यवहारवादी विचारकों ने की थी. उन्होंने माना कि लोगों को राजनीति में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए.
🎯 Exam Tip: जब भी किसी अवधारणा के सूत्रपात या जनक के बारे में पूछा जाए, तो सही विचारक या सिद्धांत का नाम स्पष्ट रूप से लिखें.
Question 2. इनमें से कौन-सा राजनीतिक सहभागिता का औजार नहीं है?
(अ) मतदान करना
(ब) चुनाव याचिका प्रस्तुत करना
(स) आरम्भक
(द) परिपृच्छा
Answer: (द) परिपृच्छा
In simple words: चुनाव याचिका प्रस्तुत करना राजनीतिक सहभागिता का सीधा साधन नहीं है, बल्कि कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है. मतदान करना, आरम्भक और जनसुनवाई जैसे उपाय लोगों को सीधे राजनीति में शामिल करते हैं.
🎯 Exam Tip: राजनीतिक सहभागिता के औजारों को याद करते समय प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीकों में अंतर स्पष्ट रखें.
Question 4. 'प्रत्याह्वान' का तात्पर्य है
(अ) कानूनी प्रस्ताव तैयार करना
(ब) निर्वाचित प्रतिनिधि को वापस बुलाना
(स) किसी प्रस्ताव पर मतदान करना
(द) विशेष अभियान चलाना
Answer: (ब) निर्वाचित प्रतिनिधि को वापस बुलाना
In simple words: प्रत्याह्वान का मतलब है कि अगर जनता अपने चुने हुए प्रतिनिधि से खुश नहीं है, तो उसे उसके पद से हटा सकती है. यह एक तरह से जनता की सीधी शक्ति है.
🎯 Exam Tip: प्रत्यक्ष लोकतंत्र के साधनों जैसे प्रत्याह्वान (Recall), आरम्भक (Initiative) और जनमत संग्रह (Referendum) के अर्थ और कार्य को स्पष्ट रूप से समझें.
Question 5. गैर परम्परागत राजनीतिक सहभागिता के उपायों में कौन-सा बेमेल है?
(अ) सविनय अवज्ञा
(ब) शासकीय पुरस्कार लौटाना
(स) नुक्कड़ नाटक
(द) आत्मघात
Answer: (द) आत्मघात
In simple words: आत्मघात राजनीतिक सहभागिता का हिस्सा नहीं है. सविनय अवज्ञा, पुरस्कार लौटाना और नुक्कड़ नाटक जैसे उपाय विरोध या असहमति व्यक्त करने के गैर-परम्परागत तरीके हैं.
🎯 Exam Tip: परम्परागत और गैर-परम्परागत राजनीतिक सहभागिता के बीच का अंतर स्पष्ट करें और प्रत्येक श्रेणी के उदाहरणों को याद रखें.
RBSE Class 12 Political Science Chapter 7 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. प्रत्यक्ष लोकतन्त्र का आरम्भ कहाँ से हुआ था
Answer: प्रत्यक्ष लोकतन्त्र का आरम्भ स्विट्जरलैण्ड से हुआ था. स्विट्जरलैण्ड एक ऐसा देश है जहाँ नागरिक सीधे अपने कानूनों पर निर्णय लेते हैं.
In simple words: प्रत्यक्ष लोकतंत्र स्विट्जरलैण्ड में शुरू हुआ था, जहाँ लोग सीधे कानून बनाने में भाग लेते हैं.
🎯 Exam Tip: प्रत्यक्ष लोकतंत्र के उदय से संबंधित ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमुख देशों को जानें.
Question 2. वर्तमान में लोकतन्त्र का कौन-सा रूप विद्यमान है?
Answer: वर्तमान में प्रतिनिधि लोकतन्त्र का स्वरूप विद्यमान है. इसमें नागरिक सीधे कानून नहीं बनाते, बल्कि अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं जो उनके बदले निर्णय लेते हैं.
In simple words: आजकल दुनिया में प्रतिनिधि लोकतंत्र का रूप ज्यादा देखने को मिलता है, जहाँ लोग वोट देकर अपने नेता चुनते हैं.
🎯 Exam Tip: प्रतिनिधि लोकतंत्र की विशेषताओं और यह प्रत्यक्ष लोकतंत्र से कैसे भिन्न है, इसे समझना महत्वपूर्ण है.
Question 4. राजनीतिक सहभागिता के दो अभिकरणों के नाम लिखिए।
Answer: राजनीतिक सहभागिता के दो प्रमुख अभिकरण इस प्रकार हैं:
1. दबाव समूह
2. सलाहकार परिषद
In simple words: राजनीतिक सहभागिता के दो मुख्य तरीके हैं दबाव समूह और सलाहकार परिषद. ये दोनों ही लोगों को सरकार के फैसलों में शामिल होने में मदद करते हैं.
🎯 Exam Tip: राजनीतिक सहभागिता के विभिन्न साधनों और उनकी भूमिका को समझें, विशेषकर दबाव समूह और सलाहकार परिषदों की.
RBSE Class 12 Political Science Chapter 7 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. अभिजात्य वर्ग की अधिक राजनीतिक सहभागिता से क्या आशय है?
Answer: अभिजात्य वर्ग की अधिक राजनीतिक सहभागिता का अर्थ है राजनीति में व्यावसायिक राजनीतिज्ञों का बहुत अधिक सक्रिय होना. जोसेफ शुम्पीटर का मानना था कि जनप्रतिनिधित्व करने वाले नेता या राजनीतिक दलों के सक्रिय सदस्य आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी जटिलताओं के कारण केवल सतही काम ही कर पाते हैं. वास्तविक शक्ति और भागीदारी केवल ब्यूरोक्रेट्स और टेक्नोक्रेट्स के हाथों में होती है. वर्तमान में सच्ची सहभागिता केवल अभिजात्य वर्ग के पास सीमित होकर रह गई है. आधुनिक लोकतंत्र में, शासन मूलतः राजनीतिज्ञों का होता है, जहाँ आम नागरिकों की भूमिका बहुत कम, अस्थायी और केवल कल्पना मात्र होती है.
In simple words: अभिजात्य वर्ग की ज्यादा राजनीतिक सहभागिता का मतलब है कि राजनीति में केवल कुछ खास और अनुभवी लोग ही सक्रिय रहते हैं. आम जनता की भूमिका बहुत कम होती है, और असली फैसले ताकतवर अधिकारी और विशेषज्ञ लेते हैं.
🎯 Exam Tip: अभिजात्य वर्ग की सहभागिता के विभिन्न पहलुओं और शुम्पीटर के विचारों को ध्यान में रखें.
Question 2. सामुदायिक गतिविधि किसे कहते हैं?
Answer: सामुदायिक गतिविधि राजनीतिक सहभागिता का एक तरीका है. इसमें समुदाय के लोग किसी एक साझा लक्ष्य को पूरा करने के लिए मिलकर काम करते हैं, जैसे सफाई या सुरक्षा. जब कोई नागरिक अपने या सार्वजनिक मुद्दों के लिए प्रतिनिधियों से संपर्क करता है, या जब वह रैलियों, विरोध प्रदर्शनों, हड़तालों या धरने में भाग लेता है, तो इसे राजनीतिक सहभागिता माना जाता है. नागरिक सहभागिता की असली पहचान यह है कि कोई व्यक्ति अपने सामुदायिक कामों से सार्वजनिक नीतियों और फैसलों को कितना प्रभावित कर पाता है.
In simple words: सामुदायिक गतिविधि का मतलब है कि लोग किसी साझा मकसद के लिए मिलकर काम करें, जैसे सफाई. अगर कोई नागरिक नेताओं से संपर्क करता है या विरोध प्रदर्शन में भाग लेता है, तो यह भी राजनीतिक सहभागिता है.
🎯 Exam Tip: सामुदायिक गतिविधियों के उदाहरणों और उनके राजनीतिक प्रभाव को समझने पर जोर दें.
RBSE Class 12 Political Science Chapter 7 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 2. राजनीतिक सहभागिता के पक्ष को रखते हुए आलोचनात्मक विवेचन कीजिए।
Answer: राजनीतिक सहभागिता का अर्थ है कि आम जनता का राजनीतिक प्रक्रियाओं में सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होना. जब राजनीतिक व्यवस्था के सदस्य शासन के बेहतर संचालन के लिए अलग-अलग स्तरों पर राजनीतिक प्रक्रियाओं में भाग लेते हैं, तो इसे जन सहभागिता या राजनीतिक सहभागिता कहते हैं. लोकतंत्र और राजनीतिक सहभागिता एक-दूसरे से जुड़े हैं. पैरी ने कहा है कि "राजनीतिक सहभागिता से संबंधित हर किताब लोकतंत्र से भी संबंधित है." राजनीतिक सहभागिता के पक्ष में कुछ मुख्य बातें यहाँ दी गई हैं:
1. राजनीतिक सहभागिता खुद नागरिकों के हितों की रक्षा करती है और उन्हें बढ़ावा देती है. लोग राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने से पहले उसके फायदे और नुकसान का हिसाब लगाते हैं.
2. सहभागिता से नागरिकों में सामान्य नैतिकता, सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता बढ़ती है.
3. राजनीतिक सहभागिता एक साझा हित के लिए लोगों में एकता की भावना पैदा करती है.
4. राजनीतिक सहभागिता स्थानीय, जातीय और ऊँच-नीच के भेदभाव को भुलाकर लोगों को साझा हित के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करती है.
समालोचना:
राजनीतिक सहभागिता लोकतंत्र के लिए जरूरी है, लेकिन इसके लिए सिर्फ सिद्धांतों की बजाय ठोस काम की जरूरत है. लोकतंत्र के समर्थक आज की लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर देते हैं, पर इसके लिए कोई दूसरा तरीका नहीं बताते. राजनीतिक सहभागिता की आलोचना इस प्रकार है:
1. कभी-कभी गैर-परंपरागत तरीके जैसे नुक्कड़ नाटक, हड़ताल और भूख हड़ताल का इस्तेमाल किया जाता है.
2. सरकारी पुरस्कारों को मना करना या लौटाना भी एक तरीका है.
3. सविनय अवज्ञा.
4. राजनीतिक हिंसा.
5. जब अत्यधिक राजनीतिक सहभागिता होती है, तो समाज में इसके बुरे रूप भी देखने को मिलते हैं. आए दिन रैलियां, विरोध प्रदर्शन, हड़ताल, तोड़फोड़, आगजनी, रास्ता रोकना, जेल भरो आंदोलन जैसी घटनाएं होती हैं. ऐसी स्थिति में, अक्सर नेता लोकतंत्र के नाम पर अपनी गलत मांगें भी मनवा लेते हैं. राजनीतिक सहभागिता का सही उपयोग ही अच्छे परिणाम दे सकता है.
In simple words: राजनीतिक सहभागिता का मतलब है लोगों का राजनीति में भाग लेना. यह उनके हितों की रक्षा करती है, जागरूकता बढ़ाती है और एकता लाती है. पर इसकी आलोचना यह है कि कभी-कभी लोग हिंसा या तोड़फोड़ जैसे गलत तरीके अपनाते हैं, जिससे समाज में अराजकता फैलती है. सही उपयोग ही अच्छे नतीजे देता है.
🎯 Exam Tip: विवेचनात्मक प्रश्नों में पक्ष और विपक्ष दोनों का संतुलित विश्लेषण प्रस्तुत करना चाहिए, साथ ही ठोस उदाहरणों का प्रयोग करें.
Question 3. राजनीतिक सहभागिता के प्रमुख अभिकरणों की जानकारी देते हुए उनका इस प्रक्रिया में योगदान बताइए।
Answer: राजनीतिक सहभागिता के प्रमुख अभिकरण वे कारक हैं जो राजनीति में लोगों की भागीदारी में मदद करते हैं. इन्हें राजनीतिक सहभागिता के साधन भी कहते हैं. राजनीतिक सहभागिता के प्रमुख अभिकरण और उनकी जरूरत को नीचे समझाया गया है:
1. दबाव समूह: ये समूह किसी खास हित के लिए बनते हैं और प्रशासन पर अपनी बात मनवाने के लिए दबाव डालते हैं. पश्चिमी देशों में यह तरीका बहुत प्रभावी है.
2. आरम्भक: यह प्रणाली स्विट्जरलैण्ड में बहुत मशहूर है. इसमें आम मतदाता किसी कानून या संविधान संशोधन का मसौदा तैयार करके विधानमण्डल को भेज सकता है, जिस पर बाद में विचार या मतदान होता है. इस प्रस्ताव पर एक निश्चित संख्या में मतदाताओं के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं.
3. प्रत्याह्वान: इस व्यवस्था में मतदाता अपने चुने हुए प्रतिनिधि को उसका कार्यकाल खत्म होने से पहले उसके पद से हटा सकते हैं. इस प्रस्ताव पर भी निश्चित संख्या में मतदाताओं के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं. स्विट्जरलैण्ड में यह प्रथा प्रचलित है. भारत में भी कई सालों से ऐसे सुधार की मांग की जा रही है.
4. जन सुनवाई: इस प्रक्रिया में जन प्रतिनिधि जनता के विचारों और समस्याओं को जानने के लिए सार्वजनिक मुद्दों पर सुनवाई करते हैं और उन्हें जल्दी सुलझाने की कोशिश करते हैं. वर्तमान में भारत में यह व्यवस्था संस्थागत हो चुकी है.
5. सलाहकार परिषद: आजकल सरकारें अलग-अलग विभागों से जुड़े कामों के खास पहलुओं पर सलाह लेने के लिए नागरिकों के संगठन बनाती हैं, जिन्हें सलाहकार परिषद कहते हैं. भारत में कई विभागों में ऐसी सलाहकार समितियां और परिषदें बनाई गई हैं.
6. परिपृच्छा: इसके तहत किसी सार्वजनिक महत्व के सवाल पर, जैसे किसी नए कानून, संविधान या संवैधानिक संशोधन के मुद्दे पर आम जनता से मतदान कराया जाता है. ब्रिटेन में यूरोपीय यूनियन की सदस्यता के लिए भी हाल ही में मतदान करवाया गया था.
In simple words: राजनीतिक सहभागिता के मुख्य तरीके दबाव समूह, आरम्भक, प्रत्याह्वान, जन सुनवाई, सलाहकार परिषद और परिपृच्छा हैं. ये सभी तरीके लोगों को सरकार के फैसलों में शामिल होने और उन्हें प्रभावित करने में मदद करते हैं.
🎯 Exam Tip: राजनीतिक सहभागिता के विभिन्न अभिकरणों को उनके कार्यों और उदाहरणों के साथ याद रखना चाहिए. स्विट्जरलैण्ड के उदाहरणों पर विशेष ध्यान दें.
RBSE Class 12 Political Science Chapter 7 बहुंचयनात्मक प्रश्न
Question 1. अपने चुने हुए प्रतिनिधियों को वापस बुलाने का अधिकार किस देश में है ?
(अ) भारत में
(ब) संयुक्त राज्य अमेरिका में
(स) स्विट्जरलैण्ड में।
(द) न्यूजीलैण्ड में निबन्धात्मक
Answer: (स) स्विट्जरलैण्ड में।
In simple words: स्विट्जरलैण्ड में लोगों को यह अधिकार है कि वे अपने चुने हुए प्रतिनिधियों को उनके कार्यकाल से पहले वापस बुला सकें.
🎯 Exam Tip: यह एक प्रत्यक्ष लोकतांत्रिक उपकरण है. ऐसे देशों के उदाहरण याद रखें जहाँ प्रत्यक्ष लोकतांत्रिक उपकरण जैसे प्रत्याह्वान लागू हैं.
Question 2. "राजनीतिक सहभागिता से सम्बन्धित प्रत्येक पुस्तक लोकतन्त्र से भी सम्बन्धित होती हैं" यह कथन है
(अ) मैक्ग्लोस्की का.
(ब) पैरी का
(स) काश और मार्श का
(द) सिडनी बर्बा का
Answer: (ब) पैरी का
In simple words: यह बात पैरी ने कही थी कि राजनीतिक सहभागिता के बारे में लिखी गई हर किताब लोकतंत्र से जुड़ी होती है.
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण विचारकों के कथन और परिभाषाएँ याद रखें, खासकर जब वे लोकतंत्र और राजनीतिक सहभागिता जैसे मुख्य विषयों से संबंधित हों.
Question 3. “लोकतन्त्र की निराली विशेषता उसके नागरिकों को प्राप्त भूमिका में निहित है” – यह कथन है
(अ) पैरीक्लीज का
(ब) बेन्जामिन बार्बर का
(स) सिडनी बर्बा का
(द) राबर्ट डहल का
Answer: (ब) बेन्जामिन बार्बर का
In simple words: बेन्जामिन बार्बर ने कहा था कि लोकतंत्र की खास बात यह है कि उसमें नागरिकों को कितनी भूमिका मिलती है.
🎯 Exam Tip: लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका पर विभिन्न विचारकों के दृष्टिकोणों की तुलना करें और उन्हें याद रखें.
Question 4. निम्न में से कौन से तत्व राजनीतिक सहभागिता को सुनिश्चित करते हैं?
(अ) नागरिकों की चेतना
(ब) शिक्षा का स्तर
(स) व्यावसायिक राजनीतिज्ञों की
(द) उपर्युक्त सभी की।
Answer: (द) उपर्युक्त सभी की।
In simple words: राजनीतिक सहभागिता के लिए नागरिकों की जागरूकता, उनकी शिक्षा का स्तर और व्यावसायिक राजनीतिज्ञों की भूमिका, ये सभी तत्व मिलकर लोगों की भागीदारी को पक्का करते हैं.
🎯 Exam Tip: राजनीतिक सहभागिता को प्रभावित करने वाले कारकों को जानें और समझें कि वे कैसे काम करते हैं.
Question 6. 'सार्वजनिक पद के लिए चुनाव लड़ना' किस प्रकार की राजनीतिक सहभागिता है?
(अ) परम्परागत नागरिक राजनीतिक सहभागिता
(ब) परम्परागत राज्य – राजनीतिक सहभागिता .
(स) गैर – परम्परागत नागरिक राजनीतिक सहभागिता
(द) गैर – परम्परागत राज्य राजनीतिक सहभागिता
Answer: (अ) परम्परागत नागरिक राजनीतिक सहभागिता
In simple words: सार्वजनिक पद के लिए चुनाव लड़ना एक पारंपरिक तरीका है जिससे नागरिक राजनीति में भाग लेते हैं.
🎯 Exam Tip: राजनीतिक सहभागिता के परम्परागत और गैर-परम्परागत रूपों के बीच अंतर करें और प्रत्येक के उदाहरणों को याद रखें.
Question 7. भारत में राजनीतिक सहभागिता का कौन - सा स्वरूप लगभग संस्थाबद्ध हो चुका है?
(अ) दबाव समूह
(ब) प्रत्याह्वान
(स) जन सुनवाई
(द) परिपृच्छा
Answer: (स) जन सुनवाई
In simple words: भारत में जन सुनवाई एक ऐसा तरीका है जिससे लोग राजनीति में शामिल होते हैं, और यह अब काफी स्थापित हो चुका है.
🎯 Exam Tip: भारत में राजनीतिक सहभागिता के विभिन्न साधनों की वर्तमान स्थिति और उनकी संस्थागत प्रकृति पर ध्यान दें.
Question 8. राजनीतिक सहभागिता के लिए आवश्यक है-
(अ) जनसाधारण को खुली छूट देना
(ब) कुछ चयनित सदस्यों को ही अवसर देना
(स) जाति और वर्ग का ध्यान रखना
(द) विवेकसंगत उपयोग को सुनिश्चित करना
Answer: (द) विवेकसंगत उपयोग को सुनिश्चित करना
In simple words: राजनीतिक सहभागिता के लिए यह जरूरी है कि लोग अपनी भागीदारी का सही और समझदारी से इस्तेमाल करें.
🎯 Exam Tip: राजनीतिक सहभागिता के सिद्धांतों और व्यवहारिक आवश्यकताओं को समझें, विशेष रूप से 'विवेकसंगत उपयोग' की अवधारणा पर.
Question 9. राजनीतिक सहभागिता की सामुदायिक गतिविधि में जो शामिल नहीं है, बताइए
(अ) स्वच्छता अभियान
(ब) पल्स पोलियो कार्यक्रम
(स) सार्वजनिक सुरक्षा
(द) सरकार और नागरिकों के बीच
Answer: (द) सरकार और नागरिकों के बीच
In simple words: 'सरकार और नागरिकों के बीच' कोई सामुदायिक गतिविधि नहीं है, जबकि स्वच्छता अभियान, पल्स पोलियो और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे कार्य सामुदायिक गतिविधियों के उदाहरण हैं.
🎯 Exam Tip: सामुदायिक गतिविधियों के वास्तविक उदाहरणों और उनके उद्देश्यों को समझें ताकि आप सही पहचान कर सकें कि कौन सा विकल्प इनसे मेल नहीं खाता.
RBSE Class 12 Political Science Chapter 7 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. राजनीतिक सहभागिता क्या है? बताइए। अथवा जन सहभागिता किसे कहते हैं?
Answer: राजनीतिक सहभागिता का अर्थ है कि आम जनता का राजनीतिक प्रक्रियाओं में सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से भाग लेना. इसमें नागरिक चुनाव में वोट देना, नीतियों पर चर्चा करना या विरोध प्रदर्शन जैसे तरीकों से अपनी राय देते हैं.
In simple words: राजनीतिक सहभागिता का मतलब है जब आम लोग सरकार के फैसलों और राजनीतिक कामों में सीधे या परोक्ष रूप से शामिल होते हैं.
🎯 Exam Tip: राजनीतिक सहभागिता की परिभाषा को स्पष्ट और संक्षिप्त रखें, और इसके प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूपों का उल्लेख करें.
Question 2. राजनीतिक सहभागिता और प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र के लिए विश्व का अग्रणी देश कौन-सा है?
Answer: राजनीतिक सहभागिता और प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र के लिए विश्व का अग्रणी देश स्विट्जरलैण्ड है. यहाँ पर नागरिकों को सीधे कानून बनाने और प्रतिनिधियों को वापस बुलाने जैसे अधिकार मिले हैं.
In simple words: राजनीतिक सहभागिता और सीधा लोकतंत्र अपनाने वाला सबसे आगे वाला देश स्विट्जरलैण्ड है.
🎯 Exam Tip: प्रत्यक्ष लोकतंत्र के मॉडल के रूप में स्विट्जरलैण्ड के उदाहरण को याद रखें और इसके कारणों को समझें.
Question 3. कोई दो अधिकार बताइये जिनसे चयनित जनप्रतिनिधि निर्वाचकों की उपेक्षा नहीं कर सकते।
Answer: दो ऐसे अधिकार जिनसे चुने हुए प्रतिनिधि मतदाताओं की उपेक्षा नहीं कर सकते, वे हैं:
1. चुने हुए प्रतिनिधियों को समय से पहले वापस बुलाने का अधिकार.
2. जनमत संग्रह द्वारा जनता की सहमति से देश के कानूनों में बदलाव करने का अधिकार.
In simple words: चुने हुए प्रतिनिधि मतदाताओं की बात इसलिए सुनते हैं क्योंकि जनता उन्हें वापस बुला सकती है और जनमत संग्रह के जरिए कानूनों में बदलाव करा सकती है.
🎯 Exam Tip: ये अधिकार प्रत्यक्ष लोकतंत्र के महत्वपूर्ण साधन हैं, जो प्रतिनिधियों को जवाबदेह बनाते हैं. इनके नाम और कार्य याद रखें.
Question 4. स्वस्थ लोकतान्त्रिक परम्पराओं के विकास के लिए कोई दो उपाय बताइए।
Answer: स्वस्थ लोकतान्त्रिक परम्पराओं के विकास के लिए दो उपाय:
1. राजनीतिक रूप से मजबूत और सत्ताधारी व्यक्ति को आम जनता को राजनीतिक सहभागिता के लिए प्रेरित करना चाहिए.
2. आम जनता की राजनीतिक सहभागिता को सकारात्मक रूप में स्वीकार करना चाहिए.
In simple words: लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए नेताओं को लोगों को राजनीति में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और लोगों की भागीदारी को अच्छे ढंग से स्वीकार करना चाहिए.
🎯 Exam Tip: लोकतंत्र को मजबूत बनाने में जनता की भागीदारी और नेतृत्व की भूमिका पर ध्यान दें.
Question 5. राजनीति विज्ञान में राजनीतिक सहभागिता का सूत्रपात किसने किया?
Answer: राजनीति विज्ञान में राजनीतिक सहभागिता का सूत्रपात व्यवहारवादियों ने किया. उन्होंने इस विचार पर जोर दिया कि केवल संस्थाओं के बजाय वास्तविक राजनीतिक व्यवहार का अध्ययन किया जाना चाहिए.
In simple words: राजनीति विज्ञान में राजनीतिक सहभागिता का विचार व्यवहारवादी विद्वानों ने शुरू किया.
🎯 Exam Tip: 'व्यवहारवाद' और राजनीति विज्ञान में उसके योगदान को समझना महत्वपूर्ण है.
Question 7. राजनीतिक सहभागिता के दो सैद्धान्तिक स्वरूप क्या हैं?
Answer: सिद्धांत के रूप में राजनीतिक सहभागिता के दो मुख्य स्वरूप इस प्रकार हैं:
1. विकासपरक
2. लोकतान्त्रिक
In simple words: राजनीतिक सहभागिता के दो मुख्य विचार हैं- विकासपरक और लोकतांत्रिक.
🎯 Exam Tip: राजनीतिक सहभागिता के सैद्धांतिक आधारों को जानें और इन दो स्वरूपों के बीच के अंतर को समझें.
Question 8. राजनीतिक सहभागिता में वृद्धि के कोई दो पहलू बताइए।
Answer: राजनीतिक सहभागिता में वृद्धि के दो पहलू इस प्रकार हैं:
1. जैसे-जैसे सरकारी गतिविधियाँ और जिम्मेदारियाँ बढ़ी हैं, राजनीतिक सहभागिता भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है.
2. सोशल मीडिया ने राजनीतिक सहभागिता को और अधिक बढ़ावा दिया है.
In simple words: सरकार के काम बढ़ने और सोशल मीडिया के बढ़ने से लोगों की राजनीति में भागीदारी भी बहुत ज्यादा बढ़ गई है.
🎯 Exam Tip: उन कारकों पर ध्यान दें जो समकालीन समाज में राजनीतिक सहभागिता को बढ़ाते हैं, जैसे तकनीकी प्रगति और सरकारी कार्यक्षेत्र का विस्तार.
Question 9. लोकतन्त्र और राजनीतिक सहभागिता के सम्बन्ध में पैरी महोदय का क्या कथन है?
Answer: पैरी महोदय के अनुसार, "राजनीतिक सहभागिता से संबंधित हर किताब लोकतंत्र से भी संबंधित होती है." इसका मतलब है कि लोकतंत्र में लोगों की भागीदारी एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है.
In simple words: पैरी ने कहा था कि राजनीतिक भागीदारी पर लिखी हर किताब लोकतंत्र के बारे में भी होती है, क्योंकि दोनों आपस में जुड़े हैं.
🎯 Exam Tip: विचारकों के महत्वपूर्ण कथनों को उनके सही संदर्भ और अर्थ के साथ याद रखें.
Question 10. लोकतन्त्र और राजनीतिक सहभागिता के सम्बन्ध के विषय में काश और मार्श के कथन को बताइए।
Answer: लोकतंत्र और राजनीतिक सहभागिता के संबंध में काश और मार्श ने लिखा है, "राजनीतिक सहभागिता की धारणा लोकतांत्रिक राज्य की अवधारणा के केंद्र में स्थित है." यह दर्शाता है कि लोगों की भागीदारी के बिना एक लोकतांत्रिक राज्य अधूरा है.
In simple words: काश और मार्श ने कहा कि राजनीतिक सहभागिता का विचार ही लोकतांत्रिक देश के लिए सबसे जरूरी है.
🎯 Exam Tip: लोकतंत्र और सहभागिता के बीच के गहरे संबंध को दर्शाने वाले विचारकों के कथनों को याद रखें.
Question 11. लोकतन्त्र और राजनीतिक सहभागिता पर वरबा और नी के क्या विचार थे?
Answer: लोकतंत्र और राजनीतिक सहभागिता पर वरबा और नी ने लिखा है, "जहाँ फैसलों में कम लोग भाग लेते हैं, वहाँ लोकतंत्र का अंश कम होता है, और जहाँ फैसलों में ज्यादा भागीदारी होती है, वहाँ अधिक प्रभावी लोकतंत्र पाया जाता है." यह दर्शाता है कि लोगों की अधिक भागीदारी से लोकतंत्र अधिक मजबूत और प्रभावी होता है.
In simple words: वरबा और नी ने कहा कि जहाँ कम लोग फैसले लेते हैं, वहाँ लोकतंत्र कमजोर होता है, और जहाँ ज्यादा लोग शामिल होते हैं, वहाँ लोकतंत्र मजबूत होता है.
🎯 Exam Tip: लोकतंत्र की प्रभावशीलता पर सहभागिता के स्तर के प्रभाव को स्पष्ट करने वाले इन विचारों पर ध्यान दें.
Question 13. बैंजामिन बार्बर ने कमजोर उदार लोकतन्त्र की क्या कमी बताई है?
Answer: बैंजामिन बार्बर ने 'थिन डेमोक्रेसी या पॉलिटिक्स एज ज़ुकीपिंग' (Thin Democracy or Politics as Zookeeping) जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए बताया है कि कमजोर उदार लोकतंत्र में लोग व्यापक रूप से अपने स्वार्थों को ही महत्व देते हैं.
In simple words: बैंजामिन बार्बर ने कहा कि कमजोर लोकतंत्र में लोग केवल अपने फायदे के बारे में सोचते हैं, जिससे वह कमजोर हो जाता है.
🎯 Exam Tip: बार्बर की आलोचना के मुख्य बिंदुओं और उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों को याद रखें, जो उदार लोकतंत्र की कमियों को उजागर करते हैं.
Question 14. राजनीतिक सहभागिता का स्वरूप कैसे मुखर हुआ?
Answer: राजनीतिक सहभागिता का स्वरूप राजशाही से लोकतंत्र की ओर बढ़ते हुए, नागरिकों की बढ़ती इच्छाओं और अपेक्षाओं का नतीजा है. जब लोकतंत्र एक सैद्धांतिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर प्रतिनिधि लोकतंत्र के रूप में विकसित हुआ, तब राजनीतिक सहभागिता का स्वरूप ज्यादा स्पष्ट हो गया. यह लोगों को अपनी बात रखने का मंच मिला.
In simple words: राजनीतिक सहभागिता का रूप तब सामने आया जब राजतंत्र से लोकतंत्र बना, और लोगों की उम्मीदें बढ़ीं, खासकर जब प्रतिनिधि लोकतंत्र विकसित हुआ.
🎯 Exam Tip: राजनीतिक सहभागिता के विकास को राजशाही से लोकतंत्र की यात्रा के संदर्भ में समझें, और इसमें जनता की बढ़ती आकांक्षाओं की भूमिका पर जोर दें.
Question 15. राजनीतिक सहभागिता को सुनिश्चित करने वाले दो कारकों का उल्लेख कीजिए।
Answer: राजनीतिक सहभागिता को सुनिश्चित करने वाले दो कारक हैं:
1. साक्षरता (लोगों का पढ़ा-लिखा होना)
2. जनसंचार का विस्तृत फैलाव (मीडिया का प्रसार)
In simple words: लोगों की राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए शिक्षा और मीडिया का प्रसार बहुत जरूरी है.
🎯 Exam Tip: उन सामाजिक और शैक्षणिक कारकों पर ध्यान दें जो राजनीतिक सहभागिता के स्तर को बढ़ाते हैं.
Question 16. साक्षरता और राजनीतिक सहभागिता में क्या सम्बन्ध है?
Answer: जिन देशों में साक्षरता का प्रतिशत जितना अधिक होता है, वहाँ के नागरिकों की राजनीतिक सहभागिता का स्तर भी उतना ही अधिक होता है. इसका मतलब है कि शिक्षित लोग राजनीति में ज्यादा रुचि लेते हैं और भाग लेते हैं.
In simple words: जिस देश में लोग जितने ज्यादा पढ़े-लिखे होते हैं, वहाँ के नागरिक राजनीति में उतनी ही ज्यादा भागीदारी करते हैं.
🎯 Exam Tip: साक्षरता के महत्व को राजनीतिक शिक्षा और नागरिक जागरूकता से जोड़कर समझाएँ.
Question 17. लोकतन्त्र में राजनीतिक सहभागिता के लिए अपनाये जाने वाले किन्हीं दो मानदण्डों का उल्लेख कीजिए।
Answer: लोकतंत्र में राजनीतिक सहभागिता के लिए अपनाए जाने वाले कोई दो मानदंड इस प्रकार हैं:
1. मतदान में भाग लेने वाले नागरिकों की प्रतिशत मात्रा.
2. राजनीतिक दलों के प्रचार-प्रसार में हिस्सा लेने वाले नागरिकों की प्रतिशत मात्रा.
In simple words: लोकतंत्र में लोगों की राजनीतिक भागीदारी मापने के दो तरीके हैं- कितने लोग वोट देते हैं, और कितने लोग राजनीतिक पार्टियों के प्रचार में हिस्सा लेते हैं.
🎯 Exam Tip: राजनीतिक सहभागिता को मापने के लिए उपयोग किए जाने वाले ठोस संकेतकों को याद रखें.
Question 19. गैर – परम्परागत राजनीतिक नागरिक सहभागिता के दो रूप लिखिए।
Answer: गैर-परम्परागत राजनीतिक नागरिक सहभागिता के दो रूप हैं:
1. सविनय अवज्ञा
2. राजनीतिक हिंसा
In simple words: गैर-परम्परागत राजनीतिक भागीदारी के दो तरीके सविनय अवज्ञा (कानून तोड़ना पर शांति से) और राजनीतिक हिंसा हैं.
🎯 Exam Tip: गैर-परंपरागत तरीकों में से सविनय अवज्ञा और राजनीतिक हिंसा जैसे चरम रूपों को पहचानना महत्वपूर्ण है, और उनके प्रभावों को भी समझें.
Question 20. गैर – परम्परागत राजनीतिक-राज्य सहभागिता के दो रूप बताइये।
Answer: गैर-परम्परागत राजनीतिक राज्य सहभागिता के दो रूप निम्न हैं:
1. राष्ट्रीय पर्वों का आयोजन, गणतंत्र दिवस परेड जैसी चीजें.
2. सार्वजनिक दौड़ या मानव श्रृंखला का आयोजन.
In simple words: राज्य की गैर-पारंपरिक राजनीतिक भागीदारी के दो तरीके राष्ट्रीय त्योहार मनाना और सार्वजनिक दौड़ या मानव श्रृंखला जैसे आयोजन करना हैं.
🎯 Exam Tip: राज्य द्वारा आयोजित की जाने वाली ऐसी गतिविधियों पर ध्यान दें जो सीधे चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन राजनीतिक जागरूकता और भागीदारी को बढ़ावा देती हैं.
Question 21. स्विट्जरलैण्ड में प्रचलित राजनीतिक सहभागिता के दो प्रमुख अभिकरणों का उल्लेख कीजिए।
Answer: स्विट्जरलैण्ड में प्रचलित राजनीतिक सहभागिता के दो प्रमुख अभिकरण हैं:
1. आरम्भक (प्रस्ताव तैयार करना),
2. प्रत्याह्वान (प्रतिनिधि वापस बुलाना).
In simple words: स्विट्जरलैण्ड में लोग दो खास तरीकों से राजनीति में भाग लेते हैं- पहला, नए कानून का प्रस्ताव देना (आरम्भक) और दूसरा, चुने हुए प्रतिनिधियों को वापस बुलाना (प्रत्याह्वान).
🎯 Exam Tip: स्विट्जरलैण्ड के प्रत्यक्ष लोकतांत्रिक मॉडलों को विशेष रूप से याद रखें, क्योंकि यह इन अभिकरणों का एक प्रमुख उदाहरण है.
Question 22. क्या राजनीतिक प्रतिहिंसा राजनीतिक सहभागिता का अभिकरण है?
Answer: राजनीतिक प्रतिहिंसा, राजनीतिक सहभागिता का एक गैर-परम्परागत स्वरूप है. इसमें विरोध प्रदर्शन का सबसे उग्र रूप जैसे बमबारी, हत्या, उपद्रव, लोगों को बंधक बनाना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना आदि शामिल हैं. इन सभी गतिविधियों को लोकतंत्र का उल्लंघन माना जाता है, इसलिए इसे राजनीतिक सहभागिता का स्वस्थ तरीका नहीं कहा जा सकता.
In simple words: राजनीतिक हिंसा राजनीतिक भागीदारी का एक चरम तरीका है, जिसमें तोड़फोड़ और हिंसा शामिल है. इसे लोकतंत्र के नियमों का उल्लंघन माना जाता है.
🎯 Exam Tip: राजनीतिक प्रतिहिंसा को राजनीतिक सहभागिता के एक अवांछनीय और अलोकतांत्रिक रूप के रूप में परिभाषित करें.
RBSE Class 12 Political Science Chapter 7 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. स्वस्थ लोकतान्त्रिक परम्पराओं के विकास की शर्ते क्या हैं?
Answer: हर राजनीतिक व्यवस्था में शक्ति कुछ खास लोगों के हाथ में ही होती है. लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था लोगों की इच्छा पर निर्भर करती है और सत्ता संघर्ष में ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी की उम्मीद की जाती है. लोकतंत्र में व्यापक जन सहभागिता रहती है. स्वस्थ लोकतांत्रिक परम्पराओं के विकास के लिए यह जरूरी है कि:
1. राजनीतिक शक्ति वाले लोगों को आम जनता को राजनीतिक भागीदारी के लिए प्रेरित करना चाहिए.
2. राजनीतिक भागीदारी का स्तर जितना ज्यादा होगा, व्यवस्था उतनी ही मजबूत बनेगी.
3. यदि जनता राजनीतिक प्रक्रियाओं के प्रति उदासीन रहेगी, तो सरकार की बेरुखी का नतीजा यह होगा कि व्यवस्था के खराब होने का खतरा बना रहेगा.
In simple words: लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि नेता लोगों को राजनीति में शामिल होने के लिए उत्साहित करें, लोगों की भागीदारी बढ़े, और जनता राजनीतिक प्रक्रियाओं में उदासीन न रहे.
🎯 Exam Tip: लोकतांत्रिक परम्पराओं को मजबूत करने के लिए जनता की भागीदारी के महत्व को समझाएँ, और इसके लिए आवश्यक शर्तों पर जोर दें.
Question 2. राजनीतिक सहभागिता के सम्बन्ध में मैक्लोस्की ने क्या लिखा है?
Answer: राजनीतिक सहभागिता के संबंध में मैक्लोस्की का कथन है, "यह उन स्वैच्छिक कामों और प्रतिक्रियाओं से जुड़ा है जिनमें नागरिक और जनता भाग लेती है, और सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से जन-नीतियों को बनाने में हिस्सा लेती है. ये अंततः शासन में नीति निर्माण की पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं, और सत्ताधारी लोगों की मनमानी पर रोक लगाती हैं." मैक्लोस्की का मानना है कि राजनीतिक सहभागिता केवल लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की ही प्रवृत्ति नहीं है, बल्कि यह सभी व्यवस्थाओं में कमोबेश मौजूद रहती है. उनका यह भी मानना है कि आधुनिक मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था में इसकी मात्रा ज्यादा होना जरूरी नहीं है. राजनीतिक सहभागिता विकासशील और अन्य व्यवस्थाओं में भी पाई जा सकती है. यह मात्रात्मक होने के बजाय गुणात्मक भी हो सकती है.
In simple words: मैक्लोस्की ने कहा कि राजनीतिक सहभागिता वह है जब लोग अपनी मर्जी से नीतियों को बनाने में भाग लेते हैं, जिससे सरकार की मनमानी रुकती है. उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल लोकतंत्र में ही नहीं, बल्कि हर तरह की व्यवस्था में होती है.
🎯 Exam Tip: मैक्लोस्की की परिभाषा को ध्यान में रखें और यह भी समझाएँ कि कैसे सहभागिता केवल मात्रात्मक नहीं बल्कि गुणात्मक भी हो सकती है.
Question 3. राजनीतिक सहभागिता के प्रमुख औजार कौन से हैं?
Answer: 1940 और 1950 के दशक में, चुनावी सहभागिता पर जोर दिया जाता था, जो राजनीतिक व्यवस्था की हर प्रक्रिया को प्रभावित करती थी. इसके तहत निम्न औजार अपनाए जाते हैं:
1. वोट देना और दिलाना.
2. चंदा देना.
In simple words: राजनीतिक सहभागिता के मुख्य औजारों में वोट डालना और दूसरों से भी वोट दिलवाना, और राजनीतिक दलों को चंदा देना शामिल है.
🎯 Exam Tip: राजनीतिक सहभागिता के पारंपरिक और प्रत्यक्ष साधनों को याद रखें, विशेषकर चुनावी प्रक्रियाओं के संदर्भ में.
Question 4. एक सशक्त व सहभागी लोकतन्त्र के लिए बेन्जामिन बार्बर ने क्या आवश्यक बताया है?
Answer: बेन्जामिन बार्बर एक प्रसिद्ध राजनीतिशास्त्री थे, जिन्होंने मजबूत लोकतंत्र का जोरदार समर्थन किया. उनका मानना है कि मजबूत और सहभागी लोकतंत्र कमजोर उदार लोकतंत्र से बेहतर है. मजबूत लोकतंत्र के लिए उन्होंने ये बातें जरूरी बताईं:
1. विरोधी नागरिक समूह बिना किसी बिचौलिये के सीधे खुद शासन में भाग लें.
2. हर व्यक्ति का एक-दूसरे से सीधा संपर्क होना चाहिए.
3. संपर्क के लिए किसी बिचौलिये या विशेष योग्य व्यक्ति की जरूरत नहीं होनी चाहिए.
In simple words: बेन्जामिन बार्बर ने कहा कि एक मजबूत लोकतंत्र के लिए लोगों को सीधे सरकार में शामिल होना चाहिए, एक-दूसरे से सीधे बात करनी चाहिए और किसी बिचौलिये की जरूरत नहीं होनी चाहिए.
🎯 Exam Tip: बेन्जामिन बार्बर के विचारों को सीधे लोकतंत्र और मजबूत सहभागिता के संदर्भ में समझें, और उनके मुख्य बिंदुओं को याद रखें.
Question 5. जनसंख्या घनत्व व क्षेत्रीय विस्तार राजनीतिक सहभागिता को कैसे प्रभावित करते हैं?
Answer: राजनीतिक सहभागिता का मतलब है कि आम जनता फैसलों में सक्रिय रूप से भाग ले. नागरिकों की जागरूकता, उनका शिक्षा का स्तर और उनके विचार जैसे तत्व राजनीतिक सहभागिता को पक्का करते हैं. लेकिन ज्यादा जनसंख्या और बड़े भौगोलिक क्षेत्र राजनीतिक सहभागिता पर बुरा असर डालते हैं. ऐसा देखा गया है कि बड़े देशों में नागरिक बहुत कम समय के लिए ही अपने प्रतिनिधियों से बात कर पाते हैं. ऐसी स्थिति में नागरिकों की लोकतांत्रिक और राजनीतिक सहभागिता बहुत कम सक्रिय रह पाती है. इस स्थिति को स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सही नहीं माना जा सकता.
In simple words: ज्यादा जनसंख्या और बड़ा इलाका राजनीतिक भागीदारी को कम करता है, क्योंकि लोगों को अपने नेताओं से बात करने का कम मौका मिलता है. इससे लोकतंत्र कमजोर होता है.
🎯 Exam Tip: भौगोलिक और जनसांख्यिकीय कारकों को राजनीतिक सहभागिता पर उनके नकारात्मक प्रभावों के संदर्भ में समझें.
Question 6. वर्तमान समय में वास्तविक सहभागिता अल्पमात्रा में अभिजात्य वर्ग के हाथों में सिमट गयी है-इस सम्बन्ध में जोसेफ शुम्पीटर के विचार बताइए।
Answer: जोसेफ शुम्पीटर का मानना है कि लोकतंत्र में नागरिकों की प्रभावी और सक्रिय भागीदारी पहली और सबसे जरूरी शर्त है, लेकिन व्यवहार में ऐसा नहीं होता. शुम्पीटर का कहना है कि शासन चलाना और सार्वजनिक नीतियां बनाना व्यावसायिक राजनीतिज्ञों का काम है. आम नागरिक चुनावों के समय राजनीतिक दलों के माध्यम से केवल प्रतिनिधियों के चुनाव तक ही सीमित रहते हैं. यह प्रक्रिया नागरिकों को पीछे धकेल देती है और शासन, सत्ता या विपक्ष में केवल कुछ खास राजनीतिज्ञ ही होते हैं.
In simple words: जोसेफ शुम्पीटर का मानना था कि आजकल लोकतंत्र में असली शक्ति कुछ खास पढ़े-लिखे लोगों के हाथों में है, और आम नागरिक केवल चुनाव में वोट देने तक ही सीमित रहते हैं.
🎯 Exam Tip: शुम्पीटर के अभिजात्य लोकतांत्रिक मॉडल को समझें और यह कैसे नागरिकों की सीमित भूमिका पर जोर देता है.
RBSE Class 12 Political Science Chapter 7 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. राजनीतिक सहभागिता की उपादेयता का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
Answer: प्राचीन समय से यह माना जाता रहा है कि लोकतंत्र की सफलता के लिए जनता की राजनीतिक भागीदारी बहुत ज़रूरी है। यह भी सच है कि आज के प्रतिनिधि लोकतंत्र में नागरिकों को फैसले लेने में ज़्यादा मौके नहीं मिलते हैं। इस कारण से कई समस्याएँ आती हैं, जैसे:
1. मतदाता चुनाव में कम रुचि दिखाते हैं।
2. जनप्रतिनिधि अपनी सार्वजनिक जिम्मेदारियों से बचते हैं।
3. प्रशासन में पद और शक्ति का गलत इस्तेमाल और भ्रष्टाचार बढ़ गया है।
इन समस्याओं को ठीक करने और सहभागिता बढ़ाने के लिए कुछ सुझाव हैं:
1. शासन और प्रशासन के अधिकार स्थानीय समुदायों को दिए जाएँ। भारत में पंचायती राज व्यवस्था इसका एक अच्छा उदाहरण है।
2. नए कानून या संविधान बदलने जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दों पर जनता से वोट करवाया जाए (पिपृच्छा)। इससे नागरिकों की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी।
In simple words: राजनीतिक सहभागिता यानी लोगों का सरकार के कामों में हिस्सा लेना बहुत ज़रूरी है। पुराने समय से ही इसे लोकतंत्र की कामयाबी के लिए अहम माना गया है। आजकल लोगों को फैसले लेने में कम मौके मिलते हैं, जिससे वोट देने में अरुचि, नेताओं का गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं। इसे सुधारने के लिए, स्थानीय लोगों को ज़्यादा अधिकार देने और बड़े मुद्दों पर लोगों से सीधे वोट लेने जैसे उपाय अपनाने चाहिए।
🎯 Exam Tip: जब राजनीतिक सहभागिता की उपयोगिता या महत्व पूछा जाए, तो उसकी परिभाषा से शुरुआत करें। फिर, उसके फायदे और चुनौतियों को समझाते हुए, उसे बेहतर बनाने के लिए सुझाव देकर एक विस्तृत उत्तर प्रस्तुत करें।
Question 2. राजनीतिक सहभागिता के पक्ष में कोई तीन तर्क दीजिए।
Answer: राजनीतिक सहभागिता के पक्ष में तीन मुख्य बातें हैं:
1. यह लोगों के अपने हितों की रक्षा करने और उन्हें आगे बढ़ाने में मदद करती है। लोग इसमें तभी हिस्सा लेते हैं जब वे इससे होने वाले फायदे और नुकसान को समझते हैं।
2. सहभागिता से नागरिकों में सामान्य नैतिक मूल्यों, सामाजिक समझ और राजनीतिक जागरूकता बढ़ती है।
3. राजनीतिक सहभागिता लोगों को किसी एक खास लक्ष्य के लिए एक साथ लाती है, जिससे उनमें एकता बढ़ती है।
In simple words: राजनीतिक सहभागिता लोगों को अपने अधिकार दिलाने, उनमें जागरूकता बढ़ाने और एक साथ मिलकर काम करने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: राजनीतिक सहभागिता के पक्ष में तर्क देते समय, इस बात पर ध्यान दें कि यह नागरिकों को कैसे सशक्त बनाती है, समाज को बेहतर बनाती है, और लोकतंत्र को मजबूत करती है।
Question 3. राजनीतिक सहभागिता के प्रमुख औजार कौन से हैं?
Answer: विश्व में 1940 और 1950 के दशकों में, राजनीतिक व्यवस्था में लोगों की भागीदारी को चुनावी सहभागिता के माध्यम से देखा जाता था। इसके मुख्य औजार ये थे:
1. मतदान करना और दूसरों को मतदान के लिए प्रेरित करना।
2. राजनीतिक दलों या उम्मीदवारों को चंदा देना।
In simple words: राजनीतिक सहभागिता के मुख्य तरीके (खासकर 1940-50 के दशक में चुनाव के लिए) वोट देना और चुनाव में पैसे से मदद करना थे।
🎯 Exam Tip: राजनीतिक सहभागिता के औजारों या रूपों के बारे में उत्तर देते समय, यदि प्रश्न या उत्तर में कोई विशिष्ट संदर्भ (जैसे चुनावी, पारंपरिक, या गैर-पारंपरिक) दिया गया हो, तो उसे ध्यान में रखें।
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