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Detailed Chapter 27 गठबंधन की राजनीति RBSE Solutions for Class 12 Political Science
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Class 12 Political Science Chapter 27 गठबंधन की राजनीति RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Political Science Chapter 27 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
RBSE Class 12 Political Science Chapter 27 बहुंचयनात्मक प्रश्न
Question 1. देश के प्रथम तीन आम चुनावों में जिस दल का वर्चस्व रहा वह है
(अ) भारतीय जनता पार्टी
(ब) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
(स) भारतीय साम्यवादी दल
(द) समाजवादी दल
Answer: (ब) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
In simple words: भारत के पहले तीन बड़े चुनावों में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी ने सबसे ज़्यादा सीटें जीतीं और उनकी सरकार बनी थी।
🎯 Exam Tip: भारतीय राजनीति में शुरुआती वर्षों में कांग्रेस के प्रभुत्व को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत की राजनीतिक व्यवस्था की नींव है।
Question 2. कौन से आम चुनाव के बाद गठबंधन की राजनीति का प्रारम्भ हुआ
(अ) 1967 ई.
(ब) 1977 ई.
Answer: (ब) 1977 ई.
In simple words: 1977 के चुनाव के बाद भारत में गठबंधन वाली सरकारें बनने लगीं, जहाँ कई पार्टियाँ मिलकर सरकार बनाती थीं।
🎯 Exam Tip: 1977 का चुनाव एक महत्वपूर्ण मोड़ था जिसने भारत में गठबंधन की राजनीति की शुरुआत की।
Question 4. डा. मनमोहन की गठबंधन सरकार जिस गठबंधन की थी वह है
(अ) वामपंथी
(ब) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन
(स) संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन
(द) राष्ट्रीय गठबंधन
Answer: (स) संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन
In simple words: डॉ. मनमोहन सिंह की गठबंधन सरकार का नाम संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) था, जिसमें कई पार्टियाँ शामिल थीं।
🎯 Exam Tip: भारत में प्रमुख गठबंधन सरकारें और उनके नेताओं के नाम याद रखें।
Question 5. राजनीतिक दलों की दृष्टि से भारत में जो दलीय व्यवस्था है वह
(अ) द्विदलीय व्यवस्था
(ब) निर्दलीय व्यवस्था
(स) बहुदलीय व्यवस्था
(द) एक दलीय व्यवस्था
Answer: (स) बहुदलीय व्यवस्था
In simple words: भारत में कई राजनीतिक दल एक साथ काम करते हैं, इसलिए इसे बहुदलीय व्यवस्था कहते हैं।
🎯 Exam Tip: भारत की राजनीतिक प्रणाली को समझने के लिए बहुदलीय व्यवस्था की अवधारणा को स्पष्ट रखें।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 27 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. यू.पी.ए. गठबंधन के प्रधानमंत्री कौन रहे?
Answer: यू.पी.ए. गठबंधन के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह रहे थे।
In simple words: डॉ. मनमोहन सिंह, यू.पी.ए. गठबंधन के प्रधानमंत्री थे।
🎯 Exam Tip: प्रमुख गठबंधनों और उनके प्रधानमंत्रियों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. जनता पार्टी के विघटन का तत्कालीन मुख्य मुद्दा क्या था?
Answer: जनता पार्टी के टूटने का मुख्य कारण दोहरी सदस्यता का मुद्दा था। यह मुद्दा पार्टी के सदस्यों के एक साथ दो संगठनों में शामिल होने से जुड़ा था, जिससे विवाद बढ़ा।
In simple words: जनता पार्टी के टूटने का बड़ा कारण 'दोहरी सदस्यता' का सवाल था।
🎯 Exam Tip: राजनीतिक दलों के आंतरिक मुद्दों पर ध्यान दें जो उनके विघटन का कारण बनते हैं।
Question 4. वर्तमान में कौन से गठबंधन की सरकार है?
Answer: वर्तमान में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एन.डी.ए.) की सरकार है।
In simple words: अभी भारत में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार है।
🎯 Exam Tip: वर्तमान राजनीतिक स्थिति को जानना आवश्यक है।
Question 5. 16 वीं लोकसभा चुनाव में किस राजनीतिक दल को लोकसभा में स्पष्ट बहुमत मिला?
Answer: 16 वीं लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को लोकसभा में स्पष्ट बहुमत मिला था। इससे उन्हें अकेले दम पर सरकार बनाने का मौका मिला।
In simple words: 16वें लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को सबसे ज़्यादा सीटें मिलीं।
🎯 Exam Tip: लोकसभा चुनावों में प्रमुख दलों के प्रदर्शन और बहुमत की स्थिति पर ध्यान दें।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 27 लघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. वर्तमान समय में भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में कौन-कौन से गठबंधन हैं। उनमें मुख्य दल कौन – से हैं?
Answer: वर्तमान में भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में मुख्य रूप से तीन प्रमुख गठबंधन हैं, जो इस प्रकार हैं:
1. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एन.डी.ए.): इसमें भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दल जैसे अकाली दल, शिवसेना, लोक जनशक्ति पार्टी, तेलगु देशम, आई.एल.एस.पी., पी.एम.के. आदि शामिल हैं।
2. संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यू.पी.ए.): इसमें कांग्रेस पार्टी प्रमुख है, और राष्ट्रीय कांग्रेस दल, राष्ट्रीय जनता दल, झारखंड मुक्ति मोर्चा, केरल कांग्रेस जैसे अन्य दल इसके सहयोगी हैं।
3. वामपंथी राजनीतिक दल: यह तीसरा गठबंधन है, जिसका शासन पहले पश्चिम बंगाल और केरल में था, लेकिन अब पश्चिम बंगाल में इसका शासन खत्म हो गया है।
अन्य राजनीतिक दल भी हैं जो इन तीनों गठबंधनों में शामिल नहीं हैं, जैसे अन्नाद्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, बीजू जनता दल, जनता दल यूनाइटेड, आम आदमी पार्टी और जनता दल सेकुलर।
In simple words: अभी भारत में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA), संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) और वामपंथी दल मुख्य रूप से हैं। NDA का मुख्य दल BJP है, और UPA का मुख्य दल कांग्रेस है।
🎯 Exam Tip: भारत के प्रमुख राष्ट्रीय और क्षेत्रीय गठबंधनों के नाम और उनके मुख्य दलों को याद रखें।
Question 2. गठबंधन की राजनीति सरकार के स्थायित्व के लिए खतरा है कैसे?
Answer: गठबंधन की राजनीति सरकार के स्थायित्व के लिए एक खतरा है। इसे निम्नलिखित बातों से समझा जा सकता है:
यह सरकार के स्थायित्व के लिए खतरा पैदा करती है क्योंकि इसमें "आया राम, गया राम" (दल-बदल) की प्रवृत्ति देखने को मिलती है, जिससे शासन में अस्थिरता बनी रहती है। विभिन्न दल अपने हितों के लिए दबाव डालते रहते हैं, जिससे सरकार कभी भी गिर सकती है।
In simple words: गठबंधन सरकारें स्थिर नहीं होतीं क्योंकि दल अपनी फायदे के लिए कभी भी साथ छोड़ सकते हैं, जिससे सरकार गिर सकती है।
🎯 Exam Tip: गठबंधन सरकारों की अस्थिरता के कारणों पर ध्यान दें, खासकर दल-बदल की प्रवृत्ति पर।
Question 3. क्या जनता पार्टी की सरकार एक गठबंधन सरकार थी?
Answer: हाँ, 1977 में बनी जनता पार्टी की सरकार एक गठबंधन सरकार थी। इसमें पाँच दल शामिल थे जिन्होंने मिलकर मोरारजी देसाई के नेतृत्व में सरकार बनाई थी। इस सरकार ने एक गठबंधन सरकार की तरह ही काम किया, लेकिन दोहरी सदस्यता के मुद्दे पर यह जल्दी ही बिखर गई और सरकार गिर गई।
In simple words: हाँ, 1977 की जनता पार्टी सरकार कई दलों को मिलाकर बनी थी, इसलिए वह एक गठबंधन सरकार थी।
🎯 Exam Tip: जनता पार्टी के गठन और उसके गठबंधन स्वरूप को याद रखें।
Question 4. गठबंधन की राजनीति के कोई दो लाभ बताइए।
Answer: गठबंधन की राजनीति के दो मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
1. शासन निरंकुश नहीं बन पाता: गठबंधन मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री का उतना ज़्यादा दबदबा नहीं होता जितना अकेले दल की सरकार में होता है। मंत्रियों को एक साझा कार्यक्रम के तहत काम करना पड़ता है और वे मनमानी नहीं कर सकते। सभी दलों की नीतियों और विचारों का ध्यान रखना पड़ता है।
2. अतिवादी सोच से बचाव: गठबंधन की राजनीति से अतिवादी सोच से बचा जा सकता है। एक अकेला दल अपने विचार दूसरों पर थोपने की कोशिश कर सकता है, लेकिन गठबंधन में कोई भी दल ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि अन्य दल विरोध कर सकते हैं। इससे सभी की बात सुनी जाती है।
In simple words: गठबंधन से सरकार तानाशाह नहीं बनती और किसी एक दल की ज़्यादा सोच थोपी नहीं जा सकती, क्योंकि सभी दल मिलकर फैसले लेते हैं।
🎯 Exam Tip: गठबंधन राजनीति के सकारात्मक पहलुओं को स्पष्ट रूप से लिखें, खासकर लोकतांत्रिक संतुलन और समावेशी निर्णयों पर।
Question 5. भारतीय गठबंधन राजनीति की तीन विशेषताएँ बताए?
Answer: भारतीय गठबंधन राजनीति की तीन मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. गठबंधन में एक दल की प्रधानता: भारतीय राजनीति में बने ज़्यादातर गठबंधनों में एक मुख्य दल ही हावी रहता है। सहयोगी दलों का प्रभाव मुख्य दल के सांसदों की संख्या और उनके सहयोग पर निर्भर करता है। अगर कोई सहयोगी दल गठबंधन से अलग भी हो जाए तो भी सरकार पर ज़्यादा असर नहीं पड़ता।
2. दल-बदल की प्रवृत्ति: गठबंधन सरकारों के कारण भारतीय राजनीति में 'आया राम गया राम' (दल-बदल) की प्रवृत्ति ज़्यादा देखने को मिलती है, जिससे सरकारों की स्थिरता को खतरा बना रहता है। नेता अपनी सुविधा के अनुसार दल बदलते रहते हैं।
3. विचारधारागत समानता का अभाव: गठबंधन में शामिल दल अक्सर अपनी विचारधाराओं में समान नहीं होते हैं, वे केवल सत्ता में आने या किसी को सत्ता से रोकने के लिए एक साथ आते हैं।
In simple words: भारतीय गठबंधन राजनीति में एक दल प्रमुख होता है, नेता दल बदलते रहते हैं, और अक्सर अलग-अलग सोच वाली पार्टियाँ साथ आती हैं।
🎯 Exam Tip: भारतीय गठबंधन राजनीति की प्रमुख विशेषताओं को उदाहरणों के साथ याद रखें, जैसे दल-बदल की प्रवृत्ति।
Question 1. गठबंधन की राजनीति के भारतीय राजनीति पर क्या – क्या नकारात्मक प्रभाव पड़े?
Answer: गठबंधन की राजनीति के भारतीय राजनीति पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़े हैं:
1. कमजोर सरकार: गठबंधन की सरकारें अक्सर कमजोर होती हैं। वे बड़े फैसले लेने में मुश्किल महसूस करती हैं, चाहे वह विदेश नीति से जुड़े हों या देश के अंदर के मुद्दे हों।
2. सरकार का स्पष्ट नीति पर कार्य न कर पाना: गठबंधन में अलग-अलग विचारों और सिद्धांतों वाले राजनीतिक दल होते हैं। सभी दल अपनी नीति को सरकार की नीति में शामिल करना चाहते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि सरकार कोई साफ नीति तय नहीं कर पाती, जिससे उसके काम पर असर पड़ता है।
3. सरकारों में स्थिरता की कमी: गठबंधन की सरकारों में स्थिरता कम होती है। गठबंधन में शामिल राजनीतिक दल अपने हितों को पूरा करने के लिए सरकार पर लगातार दबाव डालते रहते हैं, जिससे सरकार अस्थिर रहती है।
4. गठबंधनों में क्षेत्रीय दलों का प्रभाव: क्षेत्रीय दलों का गठबंधनों पर असर बढ़ रहा है, जो राष्ट्रीय हितों के बजाय अपने क्षेत्र के हितों को ज़्यादा महत्व देते हैं। इससे देश के हितों को नुकसान होता है।
5. राष्ट्रीय एकता को नुकसान: क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बढ़ने से वे अपने क्षेत्रीय हितों पर ज़्यादा ज़ोर देते हैं। प्रधानमंत्री भी सरकार की स्थिरता बनाए रखने के लिए उनके दबाव में आने को मजबूर होते हैं। इससे राष्ट्रीय एकता को नुकसान होता है।
6. मजबूत विदेश नीति का अभाव: गठबंधन सरकार में विदेश नीति के मामले में देश की स्थिति कमजोर रहती है। प्रधानमंत्री सहयोगी दलों के दबाव में रहते हैं और उन्हें विदेशों में किए जाने वाले समझौतों में उनकी सलाह लेनी पड़ती है। इससे विदेशों के सामने हमारी स्थिति कमजोर दिखती है।
7. प्रधानमंत्री की भूमिका में कमी: गठबंधन सरकार में प्रधानमंत्री अपनी मंत्रिपरिषद में शामिल अपने और अन्य दलों के सदस्यों पर उतना प्रभावी नियंत्रण नहीं रख पाते। सरकार में शामिल मंत्री अपने दल के निर्देशों का पालन करते हैं। प्रधानमंत्री अपनी कमजोर भूमिका के कारण फैसले लेने में हिचकिचाते हैं।
8. अन्य नकारात्मक प्रभाव:
• गठबंधन शासन में सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच तालमेल की कमी होती है।
• गठबंधन से छोटे-छोटे राजनीतिक दलों को बढ़ावा मिलता है, जिससे ज़्यादा राजनीतिक दल स्थायी सरकारों के गठन में रुकावट डालते हैं।
• इसमें प्रधानमंत्री का अपने मंत्रियों और अन्य दलों के सदस्यों पर ज़्यादा नियंत्रण नहीं रहता।
In simple words: गठबंधन सरकारें अक्सर कमजोर होती हैं, साफ नीतियाँ नहीं बना पातीं, और अस्थिर रहती हैं। क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बढ़ने से राष्ट्रीय एकता कमजोर होती है, विदेश नीति पर असर पड़ता है और प्रधानमंत्री की ताकत कम हो जाती है।
🎯 Exam Tip: गठबंधन राजनीति के नकारात्मक प्रभावों को याद रखें, खासकर सरकारी स्थिरता, नीति निर्माण और राष्ट्रीय एकता पर उनके असर को।
Question 2. गठबंधन की राजनीति के सकारात्मक पक्ष का विश्लेषण कीजिए।
Answer: गठबंधन की राजनीति के कुछ सकारात्मक पक्ष इस प्रकार हैं:
1. अतिवादी सोच से बचाव: गठबंधन की राजनीति से अतिवादी सोच को रोका जा सकता है। एक अकेला दल अपनी सोच थोपने की कोशिश कर सकता है, लेकिन गठबंधन में कोई भी दल केवल अपनी नीति और सिद्धांत को थोप नहीं सकता क्योंकि अन्य दल इसका विरोध कर सकते हैं। इससे सबको मिलकर चलना पड़ता है।
2. मजबूत विपक्ष का निर्माण: गठबंधन राजनीति का एक फायदा यह भी है कि इससे एक मजबूत विपक्ष तैयार होता है। एक अकेला राजनीतिक दल सत्ताधारी दल का उतना प्रभावी विरोध नहीं कर सकता जितना कई दलों से मिलकर बना गठबंधन कर सकता है। उदाहरण के लिए, जब यू.पी.ए. की सरकार थी, तब एन.डी.ए. गठबंधन ने सरकार का प्रभावी ढंग से विरोध करके उसकी मनमानी रोकी। इसी तरह, अब एन.डी.ए. की सरकार है और यू.पी.ए. गठबंधन विपक्ष के रूप में उसकी मनमानी को रोकता है।
3. शासन निरंकुश नहीं बन पाता: गठबंधन मंत्रिपरिषद पर प्रधानमंत्री का उतना दबदबा नहीं होता जितना एक अकेले दल की सरकार में होता है। मंत्रिपरिषद को न्यूनतम साझा कार्यक्रम के आधार पर काम करना पड़ता है। मंत्रिपरिषद मनमानी तरीके से काम नहीं कर सकती। प्रधानमंत्री को गठबंधन में शामिल सभी दलों की नीतियों और सिद्धांतों का ध्यान रखना पड़ता है।
4. योग्य लोगों के योगदान का देश को लाभ: एक अकेले दल की सरकार में उसी दल के लोगों में से मंत्री लेने पड़ते हैं, जिससे दूसरे दल के योग्य लोगों का योगदान नहीं मिलता। गठबंधन की स्थिति में, गठबंधन में शामिल सभी दलों के योग्य लोगों को मंत्रिपरिषद में शामिल किया जाता है। इन सभी दलों के वरिष्ठ और योग्य लोगों की योग्यता का लाभ देश को मिलता है। इससे मंत्रिपरिषद का दायरा बढ़ जाता है और अधिक योग्य लोग शामिल हो पाते हैं।
In simple words: गठबंधन से सरकार तानाशाह नहीं बनती, विपक्ष मजबूत होता है, और अलग-अलग सोच वाले दल मिलकर काम करते हैं। इससे ज़्यादा योग्य लोग सरकार में शामिल हो पाते हैं।
🎯 Exam Tip: गठबंधन राजनीति के सकारात्मक पहलुओं को स्पष्ट रूप से समझाएं, जैसे कि बेहतर लोकतांत्रिक संतुलन और समावेशी शासन।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 24 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Class 12 Political Science Chapter 27 बहुंचयनात्मक प्रश्न
Question 1. भारत का प्रतिनिधि सदन है
(अ) लोकसभा
(ब) राज्यसभा
(स) विधानसभा
(द) कोई भी नहीं।
Answer: (अ) लोकसभा
In simple words: लोकसभा वह सदन है जहाँ जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनकर भेजती है।
🎯 Exam Tip: भारतीय संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की भूमिका और संरचना को स्पष्ट रखें।
Question 2. किस स्थिति में सरकार का चलना असंभव होता है
(अ) बिना तहमत
(ब
Answer: (अ) बिना तहमत
In simple words: अगर सरकार को बहुमत न मिले तो वह काम नहीं कर सकती।
🎯 Exam Tip: लोकतांत्रिक सरकारों के लिए बहुमत के महत्व को समझें।
Question 4. चतुर्थ आम चुनाव किस वर्ष में सम्पन्न हुए थे
(अ) 1964
(ब) 1965
(स) 1966
(द) 1967
Answer: (द) 1967
In simple words: भारत में चौथा बड़ा चुनाव साल 1967 में हुआ था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख आम चुनावों के वर्षों को याद रखना ऐतिहासिक संदर्भ के लिए उपयोगी है।
Question 5. निम्नलिखित में किस प्रधानमंत्री की सरकार मात्र 13 दिन चल पाई
(अ) मनमोहन सिंह
(ब) इन्द्रकुमार गुजराल
(स) एच. डी. देवेगौड़ा
(द) अटल बिहारी वाजपेयी
Answer: (द) अटल बिहारी वाजपेयी
In simple words: अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार सिर्फ 13 दिनों के लिए ही बनी थी।
🎯 Exam Tip: भारत में गठबंधन सरकारों की अस्थिरता से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाओं और प्रधानमंत्रियों को याद रखें।
Question 6. U.P.A. का पूर्ण नाम क्या है?
(अ) Union Progressive Alliance
(ब) United Progressive Alliance
(स) United Protective Alliance
(द) None of the options
Answer: (ब) United Progressive Alliance
In simple words: UPA का पूरा नाम 'यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस' है।
🎯 Exam Tip: भारतीय राजनीति में प्रमुख गठबंधनों के पूरे नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 7. भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला गठबंधन है
(अ) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन
(ब) वामपंथी गठबंधन
(स) संयुक्त मोर्चा
Answer: (अ) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन
In simple words: भारतीय जनता पार्टी (BJP) जिस गठबंधन का नेतृत्व करती है, उसका नाम राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा नेतृत्व किए जाने वाले गठबंधनों को जानें।
Question 9. जनता पार्टी की गठबंधन सरकार के मुखिया थे
(अ) चरण सिंह
(ब) मोरारजी देसाई
(स) इंदिरा गाँधी
(द) वी. पी. सिंह
Answer: (ब) मोरारजी देसाई
In simple words: मोरारजी देसाई जनता पार्टी की गठबंधन सरकार के प्रमुख नेता थे।
🎯 Exam Tip: जनता पार्टी सरकार के नेतृत्वकर्ता को याद रखना ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है।
Question 10. कांग्रेस से मतभेद होने पर किस प्रधानमंत्री को 6 मार्च 1991 को त्याग-पत्र देना पड़ा था
(अ) अटल बिहारी वाजपेयी
(ब) वी.पी. सिंह
(स) चन्द्रशेखर
(द) चरण सिंह
Answer: (स) चन्द्रशेखर
In simple words: कांग्रेस से मतभेद होने के कारण चंद्रशेखर को 1991 में प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
🎯 Exam Tip: भारत के प्रधानमंत्रियों और उनके कार्यकाल के प्रमुख राजनीतिक घटनाक्रमों को याद रखें।
Question 11. एच.डी. देवगौड़ा कितने माह सत्ता में रहे।
(अ) एक वर्ष
(ब) आठ माह
(स) दो वर्ष
(द) दस माह
Answer: (द) दस माह
In simple words: एच.डी. देवगौड़ा सिर्फ दस महीने के लिए प्रधानमंत्री रहे थे।
🎯 Exam Tip: अल्पकालिक प्रधानमंत्रियों और उनके कार्यकाल की अवधि पर ध्यान दें।
Question 12. भारत के कौन-से प्रधानमंत्री भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर भी रहे थे
(अ) डॉ. मनमोहन सिंह
(ब) नरेन्द्र मोदी
(स) इन्द्र कुमार गुजराल
(द) चरण सिंह
Answer: (अ) डॉ. मनमोहन सिंह
In simple words: डॉ. मनमोहन सिंह भारत के एकमात्र प्रधानमंत्री हैं जो पहले भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर भी थे।
🎯 Exam Tip: भारत के प्रमुख नेताओं के पिछले महत्वपूर्ण पदों को याद रखें, जैसे डॉ. मनमोहन सिंह का RBI गवर्नर का पद।
Question 13. 1984 के पश्चात् प्रथम बार किस दल को जनता ने स्पष्ट बहुमत प्रदान किया था?
(अ) कांग्रेस
(ब) लोकजन शक्ति पार्टी
(स) भाजपा
(द) कोई भी नहीं
Answer: (स) भाजपा
In simple words: 1984 के बाद पहली बार भाजपा को 2014 के चुनावों में जनता से साफ बहुमत मिला।
🎯 Exam Tip: भारतीय चुनाव इतिहास में प्रमुख बदलावों को याद रखें, खासकर बहुमत वाले दलों के उदय को।
Question 15. 16वीं लोकसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का दूसरा प्रमुख दल है
(अ) शिवसेना
(ब) अकालीदल
(स) तेलगुदेशम
(द) लोक जनशक्ति पार्टी
Answer: (अ) शिवसेना
In simple words: 16वीं लोकसभा में, शिवसेना राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का दूसरा सबसे बड़ा दल था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख गठबंधनों के भीतर महत्वपूर्ण सहयोगी दलों को पहचानना सीखें।
Question 16. 16 वीं लोकसभा में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन का प्रमुख दल है
(अ) राष्ट्रीय कांग्रेस
(ब) कांग्रेस
(स) झारखण्ड मुक्ति मोर्चा
(द) राष्ट्रीय जनता दल
Answer: (ब) कांग्रेस
In simple words: 16वीं लोकसभा में, कांग्रेस संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) का मुख्य दल था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख गठबंधनों के नेतृत्व वाले दलों को जानना महत्वपूर्ण है।
Question 17. भारतीय गठबंधन की राजनीति की प्रमुख विशेषता है
(अ) एक दल की प्रधानता
(ब) विचारधारागत समानता का अभाव
(स) दल-बदल की प्रवृत्ति
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: भारतीय गठबंधन राजनीति में एक दल का दबदबा होता है, विचारधाराएँ अलग-अलग होती हैं, और नेता अक्सर दल बदलते रहते हैं।
🎯 Exam Tip: भारतीय गठबंधन राजनीति की सभी प्रमुख विशेषताओं को एक साथ समझें।
Question 18. निम्न में से गठबंधन की राजनीति का लाभ नहीं है
(अ) शासन निरंकुश नहीं बन पाता
(ब) व्यापक जन समर्थन
(स) अस्थायी सरकारों का निर्माण
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (स) अस्थायी सरकारों का निर्माण
In simple words: गठबंधन की राजनीति का एक नुकसान यह है कि इससे अक्सर अस्थिर सरकारें बनती हैं।
🎯 Exam Tip: गठबंधन राजनीति के लाभों और हानियों के बीच अंतर को स्पष्ट रखें।
Question 20. राजनीतिक दलों की मुख्य धाराएँ कितनी हैं
(अ) चार
(ब) दो
(स) तीन
(द) पाँच
Answer: (स) तीन
In simple words: भारतीय राजनीति में मुख्य रूप से तीन तरह की राजनीतिक दल धाराएँ हैं।
🎯 Exam Tip: भारतीय राजनीतिक दलों के वर्गीकरण और उनकी मुख्य धाराओं को समझें।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 27 अति लघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. मिलीजुली सरकार किसे कहते हैं?
Answer: मिलीजुली सरकार ऐसी सरकार होती है, जिसमें कम से कम दो राजनीतिक दल एक साथ मिलकर भागीदारी करते हैं। यह तब होता है जब किसी एक दल को चुनाव में बहुमत नहीं मिलता।
In simple words: मिलीजुली सरकार तब बनती है जब दो या दो से ज़्यादा राजनीतिक पार्टियाँ मिलकर सरकार चलाती हैं।
🎯 Exam Tip: मिलीजुली सरकार की परिभाषा को स्पष्ट और सरल शब्दों में समझाएं।
Question 2. कौन – से आम चुनाव में प्रथम बार केन्द्र में कांग्रेस की हार हुई?
Answer: 1977 के आम चुनाव में पहली बार केंद्र में कांग्रेस पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था।
In simple words: 1977 के आम चुनाव में पहली बार कांग्रेस केंद्र में हार गई थी।
🎯 Exam Tip: 1977 के आम चुनाव के महत्व को याद रखें, जिसने भारतीय राजनीति में एक बड़े बदलाव को चिह्नित किया।
Question 3. एन.डी.ए. का पूर्ण नाम बताइए।
Answer: एन.डी.ए. का पूर्ण नाम राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन है।
In simple words: NDA का पूरा नाम राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन है।
🎯 Exam Tip: भारतीय राजनीति के प्रमुख गठबंधनों के पूरे नाम याद रखें।
Question 4. मोरारजी देसाई की सरकार के गिरने के पश्चात् कांग्रेस के बहारी समर्थन से किसने सरकार बनायी?
Answer: मोरारजी देसाई की सरकार गिरने के बाद, कांग्रेस के बाहर से समर्थन के साथ चौधरी चरण सिंह ने सरकार बनाई थी।
In simple words: मोरारजी देसाई के बाद, कांग्रेस के सहारे चौधरी चरण सिंह ने सरकार बनाई।
🎯 Exam Tip: भारत में गठबंधन सरकारों के गठन और उनके नेतृत्व में हुए बदलावों को याद रखें।
Question 6. एच.डी. देवगौड़ा सरकार में कितने दल सम्मिलित थे?
Answer: एच.डी. देवगौड़ा की सरकार में 13 राजनीतिक दल शामिल थे।
In simple words: एच.डी. देवगौड़ा की सरकार में 13 पार्टियाँ साथ थीं।
🎯 Exam Tip: गठबंधन सरकारों में शामिल दलों की संख्या अक्सर उनकी जटिलता को दर्शाती है।
Question 7. इन्द्र कुमार गुजराल सरकार में कितने राजनीतिक दल शामिल थे?
Answer: इन्द्र कुमार गुजराल की सरकार में 15 राजनीतिक दल शामिल थे।
In simple words: इन्द्र कुमार गुजराल की सरकार में 15 राजनीतिक दल शामिल थे।
🎯 Exam Tip: गठबंधन सरकारों में शामिल दलों की संख्या को याद रखें।
Question 8. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का गठन कब हुआ?
Answer: 12वीं लोकसभा में जब किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, तब भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का गठन हुआ था।
In simple words: NDA तब बना जब 12वीं लोकसभा में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला।
🎯 Exam Tip: प्रमुख गठबंधनों के गठन के पीछे के कारणों और समय को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 9. भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय किस घटना को कहा जाता है?
Answer: अप्रैल 1999 में एन.डी.ए. की सरकार का सिर्फ एक वोट से गिर जाना भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय कहा जाता है।
In simple words: 1999 में NDA सरकार का एक वोट से गिरना भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय माना जाता है।
🎯 Exam Tip: भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की महत्वपूर्ण और विवादास्पद घटनाओं को याद रखें।
Question 10. अप्रैल 1999 में ए में एन. डी. ए. की सरकार का मात्र एक मत से गिरने को भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय क्यों कहा जाता है?
Answer: अप्रैल 1999 में एन.डी.ए. सरकार का केवल एक वोट से गिरना भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय इसलिए कहलाता है, क्योंकि विपक्ष ने सरकार तो गिरा दी लेकिन खुद किसी तालमेल के अभाव में अपनी सरकार नहीं बना पाया। इससे देश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई थी।
In simple words: सरकार गिरने के बाद विपक्ष नई सरकार नहीं बना पाया, इसलिए इसे भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय कहते हैं।
🎯 Exam Tip: इस घटना के पीछे के राजनीतिक कारणों और इसके नतीजों पर ध्यान दें।
Question 11. 13 वीं लोकसभा चुनाव के बाद किसकी सरकार बनी थी?
Answer: 13वीं लोकसभा चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेता अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार बनी थी।
In simple words: 13वीं लोकसभा के बाद, अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में BJP गठबंधन की सरकार बनी।
🎯 Exam Tip: लोकसभा चुनावों के नतीजों और उनके बाद बनी सरकारों के बारे में जानकारी रखें।
Question 12. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के प्रधानमंत्री कौन रहे?
Answer: 14वीं लोकसभा के चुनावों में कांग्रेस पार्टी के नेता मनमोहन सिंह थे।
In simple words: 14वीं लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के नेता मनमोहन सिंह थे।
🎯 Exam Tip: प्रमुख गठबंधनों के नेताओं और उनके संबंधित चुनाव काल को जानें।
Question 14. वर्तमान में एन.डी.ए. गठबंधन के कौन-से नेता प्रधानमंत्री है?
Answer: वर्तमान में एन.डी.ए. गठबंधन के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।
In simple words: अभी नरेंद्र मोदी NDA गठबंधन के प्रधानमंत्री हैं।
🎯 Exam Tip: वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व और उनके गठबंधनों को याद रखें।
Question 15. मोदी मंत्रिमंडल में किन दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए?
Answer: मोदी मंत्रिमंडल में शिवसेना, तेलगु देशम, अकाली दल, लोकजन शक्ति पार्टी जैसे दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।
In simple words: मोदी सरकार में शिवसेना, तेलगु देशम, अकाली दल और लोकजन शक्ति पार्टी के नेता मंत्री बने थे।
🎯 Exam Tip: गठबंधन सरकार में शामिल प्रमुख सहयोगी दलों और उनके मंत्रियों को जानना महत्वपूर्ण है।
Question 16. 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में बीजेपी को कितनी सीटें प्राप्त हई थीं?
Answer: 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में बीजेपी को 282 सीटें प्राप्त हुई थीं।
In simple words: 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 282 सीटें मिली थीं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख चुनावों में मुख्य दलों द्वारा जीती गई सीटों की संख्या याद रखें।
Question 17. यू.पी.ए. गठबंधन में प्रधान राजनीतिक दल कौन - सा है?
Answer: यू.पी.ए. गठबंधन में प्रधान राजनीतिक दल कांग्रेस है।
In simple words: UPA गठबंधन का मुख्य दल कांग्रेस पार्टी है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख गठबंधनों के मुख्य दलों को याद रखें।
Question 18. भारतीय गठबंधन की राजनीति की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
Answer: भारतीय गठबंधन की राजनीति की दो मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. स्थायित्व का अभाव: गठबंधन सरकारों में अक्सर स्थिरता की कमी होती है, जिससे वे अस्थिर हो सकती हैं।
2. दल-बदल की प्रवृत्ति: गठबंधन के कारण नेताओं में दल-बदल की प्रवृत्ति बढ़ जाती है, जिससे राजनीतिक अस्थिरता आती है।
In simple words: भारतीय गठबंधन राजनीति में सरकारें अक्सर स्थिर नहीं होतीं और नेता आसानी से दल बदलते रहते हैं।
🎯 Exam Tip: गठबंधन राजनीति की प्रमुख विशेषताओं को संक्षेप में स्पष्ट करें।
Question 20. 1977 में निषेधात्मक आधार पर कांग्रेस के विरूद्ध गठित राजनीतिक गठबंधन का नाम बताइए?
Answer: 1977 में कांग्रेस के खिलाफ बने राजनीतिक गठबंधन का नाम जनता पार्टी था।
In simple words: 1977 में कांग्रेस के खिलाफ बनी पार्टी का नाम जनता पार्टी था।
🎯 Exam Tip: भारतीय राजनीति में प्रमुख गठबंधनों के ऐतिहासिक संदर्भ और उनके गठन के कारणों को जानें।
Question 21. दल – बदल से क्या आशय है?
Answer: दल-बदल का मतलब है जब कोई चुना हुआ नेता किसी खास पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव जीतकर, अपने फायदे के लिए या किसी और वजह से अपनी पार्टी छोड़कर किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो जाता है।
In simple words: दल-बदल यानी जब कोई नेता चुनाव जीतने के बाद अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में चला जाता है।
🎯 Exam Tip: दल-बदल की परिभाषा और उसके प्रभावों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 22. भारतीय राजनीति में किस प्रवृति के लिए आयाराम – गयाराम शब्द का प्रयोग किया जाता है?
Answer: भारतीय राजनीति में 'आया राम – गया राम' शब्द का प्रयोग दल-बदल की प्रवृत्ति के लिए किया जाता है। यह उन नेताओं के लिए इस्तेमाल होता है जो राजनीतिक लाभ के लिए बार-बार दल बदलते हैं।
In simple words: 'आया राम – गया राम' शब्द दल-बदल करने वाले नेताओं के लिए इस्तेमाल होता है।
🎯 Exam Tip: भारतीय राजनीति से जुड़े महत्वपूर्ण मुहावरों और उनके अर्थ को जानें।
Question 23. भारतीय राजनीति में क्या स्थायी तत्व बन गया है?
Answer: गठबंधन की राजनीति भारतीय राजनीति का एक स्थायी तत्व बन गई है। अब सरकारें अक्सर एक से ज़्यादा दलों के साथ मिलकर बनती हैं।
In simple words: गठबंधन की राजनीति अब भारतीय राजनीति का एक पक्का हिस्सा बन गई है।
🎯 Exam Tip: भारतीय राजनीतिक प्रणाली में गठबंधन राजनीति के बढ़ते महत्व को स्पष्ट करें।
Question 24. गठबंधन की राजनीति के कोई दो लाभ बताइए?
Answer: गठबंधन की राजनीति के दो लाभ निम्नलिखित हैं:
1. जन समर्थन का व्यापक रूप से समाहित होना: गठबंधन सरकारें विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों के लोगों का समर्थन प्राप्त करती हैं, जिससे उनका आधार व्यापक होता है।
2. अतिवादी दृष्टिकोण से मुक्ति: गठबंधन में कई दल होने के कारण किसी एक दल की अतिवादी सोच थोपी नहीं जा सकती, जिससे अधिक संतुलित नीतियाँ बनती हैं।
In simple words: गठबंधन से ज़्यादा लोगों का साथ मिलता है और कोई भी पार्टी अपनी बात जबरदस्ती नहीं मनवा पाती।
🎯 Exam Tip: गठबंधन राजनीति के सकारात्मक प्रभावों को याद रखें।
Question 25. गठबंधन की राजनीति से होने वाली कोई दो हानि बताइए।
Answer: गठबंधन की राजनीति से होने वाली दो हानियाँ निम्नलिखित हैं:
1. अस्थायी सरकारों का निर्माण: गठबंधन सरकारों में अक्सर स्थिरता की कमी होती है, क्योंकि सहयोगी दल अपने हितों के लिए समर्थन वापस ले सकते हैं, जिससे सरकार गिर सकती है।
2. कमजोर सरकार: गठबंधन की सरकारें अक्सर मजबूत फैसले लेने में हिचकिचाती हैं, क्योंकि उन्हें सभी सहयोगी दलों की सहमति लेनी होती है।
In simple words: गठबंधन से सरकारें जल्दी बदल सकती हैं और वे मजबूत फैसले लेने में कमजोर हो सकती हैं।
🎯 Exam Tip: गठबंधन राजनीति की प्रमुख हानियों को समझें, खासकर सरकार की स्थिरता पर उनके प्रभाव को।
Question 27. संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन में सम्मिलित किन्हीं दो दलों के नाम लिखिए?
Answer: संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यू.पी.ए.) में सम्मिलित किन्हीं दो दलों के नाम हैं:
1. कांग्रेस
2. राष्ट्रीय जनता दल।
In simple words: UPA गठबंधन में कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल जैसी पार्टियाँ शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख राजनीतिक गठबंधनों के घटक दलों को याद रखें।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 27 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. गठबंधन की राजनीति से आप क्या समझते हैं?
Answer: गठबंधन की राजनीति का मतलब है कि जब लोकसभा या राज्यों की विधानसभा के चुनावों में किसी एक दल को साफ बहुमत नहीं मिलता, तो सरकार चलाने के लिए कई दल मिलकर एक गठबंधन बना लेते हैं। वे आपसी बातचीत से एक साझा कार्यक्रम तय करते हैं, क्योंकि उनके विचार और सिद्धांत अलग-अलग हो सकते हैं। इस गठबंधन में शामिल सभी दल ऐसा कार्यक्रम तय करते हैं जिस पर कोई विरोध न हो। ऐसा गठबंधन चुनाव से पहले या बाद में भी बन सकता है, जहाँ दल सरकार बनाने या अन्य मामलों में आपसी सहमति से काम करते हैं।
In simple words: गठबंधन की राजनीति तब होती है जब चुनाव में किसी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिलता, तो कई पार्टियाँ मिलकर एक साझा कार्यक्रम पर सरकार बनाती हैं।
🎯 Exam Tip: गठबंधन की राजनीति की परिभाषा और इसके गठन के कारणों को स्पष्ट रूप से समझाएं।
Question 2. मिलीजुली सरकारों के लक्षणों को स्पष्ट कीजिए। अथवा गठबंधन सरकारों की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
Answer: मिलीजुली सरकारों (गठबंधन सरकारों) के प्रमुख लक्षण या विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. मिलीजुली सरकार में कम से कम दो दल भागीदार होते हैं, जो मिलकर सरकार चलाते हैं।
2. इन सरकारों का लक्ष्य अक्सर किसी खास चीज़ को पाना होता है, चाहे वह कोई भौतिक लक्ष्य हो या लोगों के मन को जीतना हो।
In simple words: मिलीजुली सरकार में कम से कम दो पार्टियाँ मिलकर काम करती हैं। उनका मकसद कुछ खास हासिल करना होता है, चाहे वो भौतिक रूप से हो या लोगों की सोच बदलना हो।
🎯 Exam Tip: गठबंधन सरकारों की प्रमुख विशेषताओं को याद रखें, खासकर इसमें शामिल दलों की संख्या और उनके उद्देश्यों को।
Question 3. 16वीं लोकसभा चुनाव के पश्चात् एन.डी.ए. गठबंधन की स्थिति को बताइए।
Answer: 16वीं लोकसभा चुनाव 2014 में हुए थे। इन चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एन.डी.ए.) को ज़्यादा वोट मिले। इस गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी और 12 अन्य राजनीतिक दल शामिल थे, जैसे शिवसेना, अकाली दल, लोक जनशक्ति पार्टी और तेलुगु देशम। लोकसभा में इन दलों को मिली सीटें इस प्रकार थीं: भाजपा- 282, शिवसेना- 18, तेलुगु देशम- 16, एन.पी.एफ.- 01, लोक जनशक्ति पार्टी- 06, एस.डब्लू.पी.- 01, अकाली दल-04, एन.आई.एन.आर.सी.-01, आई.एल.एस.पी.-03, एन.पी.पी.-01, ए.डी.-02, पी.एम. के-01। कुल मिलाकर, इस गठबंधन को लोकसभा में 336 सीटें मिली थीं।
सरल शब्दों में: 2014 के लोकसभा चुनाव में एन.डी.ए. गठबंधन ने जीत हासिल की थी। इसमें भाजपा और 12 छोटे दल थे, जिन्हें कुल 336 सीटें मिलीं।
🎯 Exam Tip: जब भी किसी गठबंधन के बारे में पूछा जाए, तो उसके मुख्य दल, कुल सदस्य दल और मिली हुई सीटों का ज़िक्र ज़रूर करें।
Question 4. लोकसभा चुनाव के पश्चात् यू.पी.ए. गठबंधन की स्थिति को बताइए।
Answer: 16वीं लोकसभा चुनाव 2014 में हुए थे। इन चुनावों के बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यू.पी.ए.) को हार का सामना करना पड़ा। इस गठबंधन का मुख्य दल कांग्रेस पार्टी है। इसमें कांग्रेस के साथ अन्य राजनीतिक दल भी शामिल थे। वर्तमान लोकसभा में इस गठबंधन को कुल 59 सीटें मिली थीं। दलों के हिसाब से मिली सीटें इस प्रकार थीं: कांग्रेस- 44, झारखंड मुक्ति मोर्चा – 02, राष्ट्रीय कांग्रेस-06, आई.यू.एम.एल-02, राष्ट्रीय जनता दल-04 और केरल कांग्रेस (एम)-01।
सरल शब्दों में: 2014 के चुनाव में यू.पी.ए. गठबंधन हार गया था। इस गठबंधन का मुख्य दल कांग्रेस था, और इसे कुल 59 सीटें मिली थीं।
🎯 Exam Tip: किसी भी गठबंधन की स्थिति बताते समय, आपको चुनाव का साल, प्रमुख दलों और मिली हुई सीटों की संख्या को स्पष्ट रूप से दर्शाना चाहिए।
Question 5. भारतीय राजनीति में गठबंधन के प्रकारों का संक्षेप में वर्णन कीजिए?
Answer: भारतीय राजनीति में गठबंधन अब आम बात हो गई है। यहाँ गठबंधन के दो मुख्य प्रकार हैं:
1. **चुनाव-पूर्व के गठबंधन:** जब राजनीतिक दल चुनाव से पहले ही सत्ता में आने के लिए एक साथ आते हैं और मिलकर काम करने का एक कार्यक्रम तय करते हैं, तो इसे चुनाव-पूर्व गठबंधन कहते हैं। जैसे, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एन.डी.ए.) और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यू.पी.ए.) चुनाव-पूर्व गठबंधन के उदाहरण हैं।
2. **चुनाव-पश्चात् के गठबंधन:** ये गठबंधन चुनाव के बाद बनते हैं, जब दल सत्ता हासिल करने के लिए अपने सिद्धांतों को किनारे रख देते हैं। ऐसे गठबंधन में वे दल भी शामिल हो जाते हैं जो चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे थे और एक-दूसरे की आलोचना कर रहे थे। चुनाव के बाद बने गठबंधनों में अवसरवादिता अधिक होती है, जिससे वे कमज़ोर पड़ सकते हैं। भले ही सरकार बाहर से मजबूत दिखे, लेकिन अंदर ही अंदर उनमें मतभेद हो सकते हैं।
सरल शब्दों में: भारत में गठबंधन दो तरह के होते हैं - चुनाव से पहले बने और चुनाव के बाद बने। चुनाव से पहले वाले मिलकर काम करने का फैसला करते हैं, जबकि चुनाव के बाद वाले दल सत्ता पाने के लिए एक साथ आते हैं, भले ही उनके विचार अलग हों।
🎯 Exam Tip: गठबंधन के प्रकार बताते समय, हर प्रकार की स्पष्ट परिभाषा और एक-दो उदाहरण देना महत्वपूर्ण है।
Question 7. राजनीतिक व्यवस्था पर मिलीजुली सरकारों के प्रभावों को बताइए।
Answer: मिलीजुली सरकारों का राजनीतिक व्यवस्था पर कई प्रभाव पड़ता है:
1. **दल-बदल को बढ़ावा:** 1967-70 के दौरान मिलीजुली सरकारों के कारण दल-बदल की प्रवृत्ति बहुत बढ़ गई थी। सरकार बनने के बाद भी नेता अपने दल बदलते रहते थे।
2. **गैर-कांग्रेसवाद आधारित सरकारें:** 1967-70 और 1977-79 के बीच कई राज्यों में ऐसी मिलीजुली सरकारें बनीं जिनका मुख्य मकसद कांग्रेस को सत्ता से दूर रखना था। इन दलों की बड़ी कमजोरी यह थी कि वे सिर्फ कांग्रेस का विरोध करने के लिए एक साथ आते थे।
सरल शब्दों में: मिलीजुली सरकारें दल-बदल को बढ़ावा देती हैं और कभी-कभी सिर्फ एक दल का विरोध करने के लिए बनाई जाती हैं, जिससे राजनीतिक अस्थिरता आ सकती है।
🎯 Exam Tip: मिलीजुली सरकारों के प्रभावों को समझाते समय, विशिष्ट उदाहरणों या समय अवधियों का उल्लेख करने से आपका उत्तर अधिक विश्वसनीय बनता है।
Question 8. क्या मिलीजुली सरकारों में विकासशीलता का गुणं पाया जाता है?
Answer: मिलीजुली सरकारें अक्सर विकासशील होती हैं क्योंकि वे मुश्किल स्थितियों से निपटने के लिए नई राजनीतिक तकनीकों का उपयोग कर सकती हैं। इन सरकारों में अक्सर ऐसा होता है कि जो दल आज एक-दूसरे के सबसे बड़े विरोधी हैं, वे कल सहयोगी बन सकते हैं। उदाहरण के लिए, 1988-89 में जनता दल, कांग्रेस का सबसे बड़ा विरोधी था और भाजपा का सहयोगी। लेकिन 1996-97 में जनता दल ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को अपना विरोधी मान लिया।
सरल शब्दों में: हाँ, मिलीजुली सरकारें समय के साथ बदलती रहती हैं और नई परिस्थितियों के अनुसार ढलती हैं, अक्सर पुराने विरोधियों को सहयोगी बना लेती हैं।
🎯 Exam Tip: 'विकासशीलता' के सवाल का जवाब देते समय, राजनीतिक दलों के बदलते रिश्तों और अनुकूलन क्षमता पर ज़ोर दें।
Question 9. उदाहरण सहित वताइए कि गठबंधन में विचारधारा की समानता का अभाव रहता है।
Answer: राजनीतिक गठबंधनों में अक्सर दलों के विचारों में समानता नहीं होती। कई बार दल राजनीतिक फायदे के लिए अलग-अलग विचारधाराओं के दलों के साथ हाथ मिला लेते हैं। जो दल चुनाव में एक-दूसरे की आलोचना करते हैं, वे चुनाव के बाद गठबंधन बना लेते हैं। उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सी.पी.एम.) राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस को समर्थन दे रही थी, जबकि दोनों दल एक-दूसरे के विरोधी हैं।
सरल शब्दों में: गठबंधन में दल अक्सर अपने फायदे के लिए मिलते हैं, भले ही उनके विचार एक-दूसरे से बिलकुल अलग हों।
🎯 Exam Tip: इस तरह के सवालों में उदाहरण देना बहुत महत्वपूर्ण है। यह दर्शाता है कि आप अवधारणा को अच्छी तरह समझते हैं।
Question 10. भारतीय राजनीति में गठबंधन दल एवं सिद्धांतों की अपेक्षा नेताओं के आधार पर होते हैं।' कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: यह सच है कि भारतीय राजनीति में गठबंधन अक्सर दलों के सिद्धांतों के बजाय नेताओं के प्रभाव पर आधारित होते हैं। इसे कुछ उदाहरणों से समझा जा सकता है:
1. जय प्रकाश नारायण की विचारधारा मानने वाली समता पार्टी ने राष्ट्रीय जनता दल के बजाय भारतीय जनता पार्टी से गठबंधन किया था। जब नरेंद्र मोदी को भाजपा का नेता घोषित किया गया, तो समता पार्टी ने गठबंधन तोड़ दिया।
2. 1997 में कांग्रेस ने एच.डी. देवगौड़ा की सरकार को समर्थन दिया, लेकिन बाद में प्रधानमंत्री बदलने की शर्त पर समर्थन वापस ले लिया, जिससे इंद्र कुमार गुजराल को 10 महीने बाद अप्रैल 1997 में प्रधानमंत्री बनाया गया। कांग्रेस ने बाद में फिर से समर्थन दे दिया।
3. बिहार में समता पार्टी के गठबंधन में शामिल लालू प्रसाद का राष्ट्रीय जनता दल, उत्तर प्रदेश चुनावों में मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी का समर्थन कर रहा था, जबकि ये दल अक्सर एक-दूसरे के विरोधी थे।
सरल शब्दों में: भारत में गठबंधन ज़्यादातर बड़े नेताओं के असर पर बनते हैं, न कि दलों के विचारों पर। अक्सर विरोधी दल भी नेताओं के कारण साथ आ जाते हैं।
🎯 Exam Tip: नेताओं के प्रभाव को दर्शाने वाले ठोस ऐतिहासिक उदाहरणों का उपयोग करें ताकि आपका तर्क मजबूत हो।
Question 11. भारतीय राजनीति में ‘आयाराम – गयाराम' की प्रवृत्ति को स्पष्ट कीजिए।
Answer: 'आयाराम – गयाराम' शब्द का मतलब दल-बदल से है। जब सांसद या विधायक जल्दी-जल्दी एक पार्टी छोड़कर दूसरी या तीसरी पार्टी में शामिल हो जाते हैं, तो इसे 'आयाराम – गयाराम' कहा जाता है। गठबंधन सरकारों के कारण भारतीय राजनीति में दल-बदल की यह प्रवृत्ति अक्सर देखने को मिलती है। यह मुहावरा दल-बदल की अवधारणा को बताता है। दल-बदल तब होता है जब कोई नेता एक पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़कर जीतता है, लेकिन अपने फायदे या किसी और कारण से अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल हो जाता है। 'आयाराम – गयाराम' की घटना 1967 से जुड़ी है, जब हरियाणा के एक विधायक ने 1967 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर जीतकर एक पखवाड़े में तीन बार दल-बदल करके एक रिकॉर्ड बनाया था।
सरल शब्दों में: 'आयाराम – गयाराम' का मतलब है जब नेता अपने फायदे के लिए बार-बार एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल हो जाते हैं। यह दल-बदल की घटना 1967 में बहुत आम थी।
🎯 Exam Tip: 'आयाराम – गयाराम' की अवधारणा को समझाते समय, इसकी परिभाषा, कारणों और ऐतिहासिक संदर्भ (जैसे 1967 की घटना) को शामिल करें।
Question 13. भारत में गठबंधन सरकारों के बनने के कारण बताइए।
Answer: भारत में गठबंधन सरकारें कई कारणों से बनती हैं:
भारत एक विविधताओं भरा देश है, जहाँ अलग-अलग वर्ग, धर्म, संस्कृतियाँ और जातियाँ हैं। इन सबके अपने हित होते हैं, जिससे सैकड़ों राजनीतिक दल बनते हैं। सत्ता पाने के लिए कई दल एक साथ आते हैं।
जब लोकसभा या राज्यों की विधानसभाओं में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो सरकार बनाना मुश्किल हो जाता है। बहुमत के बिना संसदीय शासन संभव नहीं है। इसलिए, दल बहुमत पाने के लिए गठबंधन बनाते हैं।
उदाहरण के लिए, 16वीं लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी को बहुमत मिलने के बावजूद, उसने अकेले सरकार नहीं बनाई बल्कि गठबंधन सरकार बनाई।
सरल शब्दों में: भारत में गठबंधन सरकारें इसलिए बनती हैं क्योंकि यहाँ कई तरह के लोग हैं और किसी एक दल को अक्सर पूरा बहुमत नहीं मिलता।
🎯 Exam Tip: गठबंधन सरकारों के कारणों पर लिखते समय, देश की विविधता और बहुमत न मिलने की स्थिति को प्रमुख बिंदुओं के रूप में शामिल करें।
Question 14. 'गठबंधन की राजनीति में शासन निरंकुश नहीं बन पाता है।' कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: यह बात सच है कि गठबंधन की राजनीति में कोई भी सरकार निरंकुश नहीं बन सकती। एक दल की सरकार में प्रधानमंत्री का मंत्रिपरिषद पर पूरा नियंत्रण होता है और वह अपने फैसले आसानी से ले सकता है। लेकिन गठबंधन सरकार में ऐसा नहीं होता। मंत्रिपरिषद को सभी सहयोगी दलों की नीतियों और सिद्धांतों को ध्यान में रखकर एक साझा कार्यक्रम पर काम करना पड़ता है। इससे शासन निरंकुश नहीं बन पाता क्योंकि उसे सभी की सहमति लेनी पड़ती है।
सरल शब्दों में: गठबंधन सरकारें निरंकुश नहीं हो सकतीं, क्योंकि प्रधानमंत्री को सभी सहयोगी दलों की बात माननी पड़ती है और वे अकेले कोई बड़ा फैसला नहीं ले सकते।
🎯 Exam Tip: निरंकुशता के अभाव को समझाते समय, मंत्रिपरिषद के साझा कार्यक्रम और सहयोगी दलों के प्रभाव पर विशेष ध्यान दें।
Question 16. गठबंधन की राजनीति में सशक्त विपक्ष का निर्माण होता है। कथन के औचित्य को सिद्ध कीजिए।
Answer: गठबंधन की राजनीति का एक बड़ा फायदा यह है कि इससे एक मजबूत विपक्ष बनता है। उदाहरण के लिए, जब मनमोहन सिंह के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यू.पी.ए.) की सरकार केंद्र में थी, तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एन.डी.ए.) ने एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाई थी। इसने सरकार के गलत फैसलों का विरोध किया और उसकी मनमानी को रोका। इसी तरह, वर्तमान में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एन.डी.ए. की सरकार है और यू.पी.ए. विपक्ष के रूप में सरकार की मनमानी के फैसलों को रोक रहा है।
सरल शब्दों में: गठबंधन राजनीति से विपक्ष मजबूत होता है, क्योंकि कई दल मिलकर सरकार के गलत कामों पर रोक लगाते हैं।
🎯 Exam Tip: इस कथन की पुष्टि करते समय, सत्ताधारी और विपक्षी गठबंधन दोनों के उदाहरण दें ताकि आपकी बात स्पष्ट हो।
Question 17. 'गठबंधन सरकार व्यापक जन समर्थन पर आधारित होती है।' कथन की व्याख्या कीजिए।
Answer: गठबंधन सरकार को बहुत ज़्यादा लोगों का समर्थन मिलता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ऐसी सरकार में कोई एक दल नहीं, बल्कि 15-20 दल शामिल होते हैं। इन सभी दलों को जनता के एक बड़े हिस्से का समर्थन प्राप्त होता है। सरकार में शामिल मंत्रियों को भी जनता से मिले समर्थन का बड़ा आधार मिलता है। जितने ज़्यादा दल गठबंधन में शामिल होते हैं, उतना ही ज़्यादा जन समर्थन उसे मिलता है। ऐसी सरकार को जनता आसानी से मान लेती है और वह जनता के हित में अच्छे फैसले लेती है। विदेशों में भी ऐसी सरकारों को महत्व दिया जाता है। वर्तमान में भारत में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एन.डी.ए.) की सरकार अच्छे फैसले ले रही है और उसे विदेशों में भी बहुत सम्मान मिल रहा है।
सरल शब्दों में: गठबंधन सरकार में कई दल होते हैं, इसलिए उसे बहुत लोगों का साथ मिलता है। यह सरकार जनता के लिए अच्छे फैसले लेती है और उसे देश-विदेश में सम्मान मिलता है।
🎯 Exam Tip: व्यापक जन समर्थन की व्याख्या करते समय, यह बताएं कि कई दलों के शामिल होने से विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व कैसे बढ़ता है।
Question 18. गठबंधन की राजनीति की कोई दो हानि बताइए। अथवा भारत में गठबंधन राजनीति के कोई दो नकारात्मक पक्ष बताइए।
Answer: गठबंधन की राजनीति के दो मुख्य नकारात्मक प्रभाव या हानियाँ इस प्रकार हैं:
1. **अस्थायी सरकारें बनना:** गठबंधन में शामिल दल अपने राजनीतिक फायदे को ध्यान में रखकर कभी भी अपना समर्थन वापस ले सकते हैं। इससे सरकार का बहुमत खत्म हो जाता है और उसे इस्तीफा देना पड़ता है। इस प्रकार, सरकारों का टिके रहना मुश्किल हो जाता है। अस्थायी सरकारें देश के विकास के लिए स्थायी काम नहीं कर पातीं। ये दल अपने-अपने गुप्त एजेंडे पर काम करते हैं और सरकार से अपने फायदे के लिए समर्थन वापस लेते रहते हैं। इससे संसद में सरकार का बहुमत खत्म हो जाता है और उसे इस्तीफा देना पड़ता है। इसके बाद या तो नई सरकार बनती है, या फिर देश को नए चुनाव की ओर जाना पड़ता है। बार-बार चुनाव होना देश के हित में नहीं होता। अस्थायी सरकारें स्थायी विकास के काम नहीं कर पातीं। उदाहरण के लिए, मई 1996 में बनी अटल बिहारी वाजपेयी की गठबंधन सरकार सिर्फ 13 दिन चल पाई थी। इसी तरह, देवगौड़ा और गुजराल की सरकारें भी गठबंधन के आपसी खींचतान के कारण जल्दी गिर गईं थीं, क्योंकि कांग्रेस ने उनसे समर्थन वापस ले लिया था।
2. **राष्ट्रीय एकता को नुकसान:** गठबंधन में क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बढ़ने से वे अपने क्षेत्रीय हितों पर ज़्यादा ध्यान देते हैं। इससे प्रधानमंत्री को सरकार को बचाने के लिए उनके दबाव में आना पड़ता है। उदाहरण के लिए, ममता बनर्जी के विरोध के कारण प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बांग्लादेश के साथ संबंधों में दबाव का सामना करना पड़ा था। क्षेत्रीय हितों का अधिक दबाव राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुँचाता है।
सरल शब्दों में: गठबंधन राजनीति से सरकारें अक्सर अस्थिर होती हैं और गिर जाती हैं, जिससे विकास रुक जाता है। साथ ही, क्षेत्रीय दलों का दबाव राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुँचा सकता है।
🎯 Exam Tip: गठबंधन की हानियों पर लिखते समय, सरकार की अस्थिरता और क्षेत्रीय हितों के राष्ट्रीय हितों पर हावी होने को प्रमुख बिंदुओं के रूप में उजागर करें।
Question 20. मिलीजुली सरकारों में सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धान्त कमजोर पड़ जाता है। कथन की व्याख्या कीजिए।
Answer: मंत्रिपरिषद का सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धांत 'एक सबके लिए और सब एक के लिए' की नीति पर आधारित है। इसका मतलब है कि जब प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा मंत्रियों को अलग-अलग विभाग दिए जाते हैं, तो सभी मंत्री व्यक्तिगत रूप से संसद में अपने विभागों से जुड़े सवालों के जवाब देते हैं। पूरी मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से जवाबदेह होती है। अगर लोकसभा किसी मंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दे या किसी मंत्री का रखा बिल नामंज़ूर कर दे, तो पूरी मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है। यही सामूहिक उत्तरदायित्व है। यह सिद्धांत गठबंधन सरकार में कमज़ोर पड़ जाता है क्योंकि अलग-अलग दलों के मंत्रियों के विचार और विचारधाराएँ अलग होती हैं। अलग-अलग विचारों वाले लोगों को एक साथ मिलकर काम करना बहुत कठिन होता है। कई गठबंधन सरकारों में मंत्रियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ जाते हैं, जिससे शीर्ष नेतृत्व की कार्यक्षमता और काम करने का तरीका भी प्रभावित होता है।
सरल शब्दों में: मिलीजुली सरकार में सभी मंत्रियों के विचार अलग होने के कारण 'सबके लिए एक' का नियम कमजोर पड़ जाता है। इससे मंत्री एक साथ मिलकर काम नहीं कर पाते और सरकार के फैसले लेने में दिक्कत आती है।
🎯 Exam Tip: सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत को समझाते हुए, यह बताएं कि गठबंधन सरकार में विभिन्न विचारधाराओं के कारण यह सिद्धांत कैसे प्रभावित होता है।
Question 21. मिली-जुली सरकारों में प्रधानमंत्री की स्थिति बताइए।
Answer: मिलीजुली सरकारों में प्रधानमंत्री की स्थिति मजबूत नहीं रहती। ऐसी सरकारों में प्रधानमंत्री का अपने मंत्रिपरिषद के सदस्यों और सहयोगी दलों पर ज़्यादा नियंत्रण नहीं होता है। गठबंधन में शामिल मंत्री अपने दल के नेताओं के निर्देशों का पालन करते हैं। कमज़ोर प्रधानमंत्री प्रभावशाली भूमिका नहीं निभा पाते और वे फैसले लेने में हिचकिचाते हैं। गठबंधन में शामिल राजनीतिक दल अपने हितों को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री पर लगातार दबाव डालते रहते हैं।
सरल शब्दों में: मिलीजुली सरकार में प्रधानमंत्री की शक्ति कमज़ोर हो जाती है। वे मंत्रियों पर नियंत्रण नहीं कर पाते और सहयोगी दल अपने फायदे के लिए उन पर दबाव डालते रहते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रधानमंत्री की स्थिति पर लिखते समय, उनके नियंत्रण में कमी और सहयोगी दलों के दबाव को मुख्य बिंदु के रूप में समझाएँ।
Question 22. गठबंधन सरकारों से राष्ट्रीय एकता को किस प्रकार नुकसान पहुँचता है? बताइए।
Answer: गठबंधन सरकारों से राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुँचता है क्योंकि इसमें कई दल शामिल होते हैं। ये दल आपसी बातचीत से एक साझा कार्यक्रम तय करते हैं, लेकिन इनके सिद्धांत और विचार अलग-अलग होते हैं। ये गठबंधन सत्ता पाने के लिए सिद्धांतों को किनारे रखकर बनते हैं। गठबंधन में राष्ट्रीय दलों की तुलना में क्षेत्रीय दलों की संख्या ज़्यादा होती है, जिससे क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बढ़ जाता है। इस कारण प्रधानमंत्री क्षेत्रीय दलों के दबाव में आ जाते हैं। उदाहरण के लिए, पिछली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यू.पी.ए.) सरकार में तृणमूल कांग्रेस (जो पश्चिम बंगाल का एक क्षेत्रीय दल है) की नेता ममता बनर्जी के विरोध के कारण प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बांग्लादेश के साथ संबंधों में दबाव का सामना करना पड़ा था। क्षेत्रीय हितों पर ज़्यादा दबाव होने से राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुँचता है।
सरल शब्दों में: गठबंधन सरकारें राष्ट्रीय एकता को कमज़ोर करती हैं, क्योंकि उनमें क्षेत्रीय दल ज़्यादा होते हैं जो अपने इलाके के फायदे को देश के फायदे से ऊपर रखते हैं, जिससे प्रधानमंत्री को झुकना पड़ता है।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय एकता पर नकारात्मक प्रभाव को समझाते समय, क्षेत्रीय दलों के बढ़ते प्रभाव और उनके हितों के टकराव को स्पष्ट करें।
Question 23. गठबंधन सरकार होने की स्थिति में सदृढ़ विदेश नीति का अभाव रहता है। कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: गठबंधन सरकार होने पर देश की विदेश नीति कमज़ोर रहती है। गठबंधन सरकार का प्रधानमंत्री एक मजबूत विदेश नीति बनाने और उसे चलाने में सक्षम नहीं हो पाता, क्योंकि उसे अपने सहयोगी दलों के दबाव में काम करना पड़ता है और वह स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं ले पाता। इस तरह, विदेश नीति के मामलों में देश की स्थिति कमज़ोर हो जाती है। विदेशों के साथ किए जाने वाले समझौतों या संधियों के समय सहयोगी दलों से सलाह लेनी पड़ती है, जिससे विदेशों के सामने हमारी स्थिति कमज़ोर दिखती है। इसके विपरीत, एक दल की सरकार या प्रधानमंत्री स्वतंत्र और मजबूत नीति अपना सकते हैं, जिससे देश की प्रतिष्ठा बढ़ती है। इसलिए, विदेश नीति के हिसाब से गठबंधन सरकारों में मतभेद बने रहते हैं, जिससे एक मजबूत विदेश नीति नहीं बन पाती।
सरल शब्दों में: गठबंधन सरकार में प्रधानमंत्री को सहयोगी दलों की बात माननी पड़ती है, इसलिए देश की विदेश नीति कमजोर हो जाती है और वह स्वतंत्र फैसले नहीं ले पाती।
🎯 Exam Tip: विदेश नीति पर गठबंधन के प्रभाव को समझाते समय, प्रधानमंत्री की निर्णय लेने की शक्ति पर पड़ने वाले प्रतिबंधों और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर देश की स्थिति को हाइलाइट करें।
Question 24. गठबंधन की राजनीति से छोटे-छोटे राजनीतिक दलों के निर्माण को क्यों प्रोत्साहन मिलता है? बताइए।
Answer: गठबंधन की राजनीति से छोटे-छोटे राजनीतिक दलों के बनने को बढ़ावा मिलता है। गठबंधन में शामिल सभी दलों को सरकार में मंत्री पद मिलता है। लेकिन इन पदों पर बड़े नेता ही कब्जा कर लेते हैं जो दल के सबसे बड़े मुखिया होते हैं। इसलिए, कई नेता अपने दल के अध्यक्ष या सबसे बड़े मुखिया बनने के लिए नए दल बना लेते हैं।
सरल शब्दों में: गठबंधन की राजनीति छोटे दलों को बढ़ावा देती है, क्योंकि नेता मंत्री पद पाने या अपनी पार्टी का मुखिया बनने के लिए नए दल बना लेते हैं।
🎯 Exam Tip: छोटे दलों के निर्माण को प्रोत्साहन मिलने के कारण बताते समय, मंत्री पद की आकांक्षा और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को मुख्य तर्क के रूप में प्रस्तुत करें।
Question 26. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन एवं संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन पर सक्षिप्त टिप्पणी लिखिए?
Answer:**राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एन.डी.ए.):** इसे एन.डी.ए. के नाम से जाना जाता है। इस गठबंधन का मुख्य दल भारतीय जनता पार्टी है। इसमें शिवसेना, लोक जनशक्ति पार्टी और तेलुगु देशम सहित 13 अन्य दल शामिल हैं। वर्तमान में इस गठबंधन की लोकसभा में 336 सीटें हैं। अकेले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 282 सीटें मिली हैं। वर्तमान में केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस गठबंधन की सरकार है।
**संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यू.पी.ए.):** इसे यू.पी.ए. के नाम से जाना जाता है। इसमें मुख्य रूप से कांग्रेस पार्टी है। इसमें राष्ट्रीय कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, झारखंड मुक्ति मोर्चा, केरल और कांग्रेस आदि जैसे अन्य राजनीतिक दल शामिल हैं। वर्तमान में इस गठबंधन की लोकसभा में 59 सीटें हैं, जिनमें से कांग्रेस के पास 44 सीटें हैं। वर्तमान में यह गठबंधन एक विपक्षी दल के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है।
सरल शब्दों में: एन.डी.ए. भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन है जो केंद्र में सरकार चला रहा है, जबकि यू.पी.ए. कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन है जो विपक्ष में है।
🎯 Exam Tip: दोनों गठबंधनों पर टिप्पणी करते समय, उनके मुख्य दल, प्रमुख सहयोगी, मिली हुई सीटों की संख्या और वर्तमान भूमिका (सत्ता में या विपक्ष में) को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 27 निबंधात्मक प्रश्न
Question 1. गठबंधन की राजनीति क्या है? भारत में गठबंधन की राजनीति का उदय किस प्रकार हुआ?
Answer:**गठबंधन की राजनीति:** जब लोकसभा या राज्यों की विधानसभाओं के चुनावों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता और सरकार चलाने के लिए बहुमत की ज़रूरत होती है, तो कुछ दल मिलकर एक गठबंधन बना लेते हैं। ये दल आपसी चर्चा से एक साझा कार्यक्रम तय करते हैं, क्योंकि अलग-अलग दलों के सिद्धांत और विचार अलग होते हैं। गठबंधन में शामिल दल ऐसा कार्यक्रम तय करते हैं जो सभी दलों को मंजूर हो और जिसका गठबंधन में कोई दल विरोध न करे। कभी-कभी विरोधी दल भी मिलकर एक गठबंधन बना लेते हैं। ऐसी राजनीति जिसमें चुनाव से पहले या बाद में ज़रूरत के हिसाब से दलों में सरकार बनाने या अन्य मामलों (जैसे राष्ट्रपति चुनाव) में आपसी सहमति बन जाए और वे एक स्वीकृत साझा कार्यक्रम के अनुसार देश में राजनीति चलाएँ, उसे गठबंधन की राजनीति कहते हैं।
**भारत में गठबंधन की राजनीति का उदय:**
पहले राज्यों में कांग्रेस को बहुमत मिलता रहा था, लेकिन चौथे आम चुनाव में केंद्र में कांग्रेस को सरकार बनाने में मुश्किल हुई। कांग्रेस को कई राज्यों में बहुमत नहीं मिला। राजस्थान, पंजाब और उत्तर प्रदेश की विधानसभाओं में कांग्रेस को पूरा बहुमत नहीं मिला, वह बस सबसे बड़ा दल बनकर रह गई। केरल, उड़ीसा और तमिलनाडु में उसे बहुत कम सीटें मिलीं। चौथे आम चुनावों के इन परिणामों ने गठबंधन की राजनीति की शुरुआत की। कई राज्यों में एक से ज़्यादा राजनीतिक दलों ने मिलकर सरकार बनाई। कुछ राज्यों में तो एक-दूसरे के बिलकुल विरोधी विचारधारा वाले दलों ने भी मिलकर सरकार बनाई।
1977 में बनी जनता पार्टी भी एक तरह का गठबंधन ही थी। इसके बाद, 11वीं से 15वीं लोकसभा तक किसी भी दल को लोकसभा में स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। कोई भी दल अकेले सरकार नहीं बना पाया और उसे दूसरे दलों से गठबंधन करना पड़ा। इस तरह अस्थायी सरकारों का दौर शुरू हुआ। मई 1996 में बनी अटल बिहारी वाजपेयी की अल्पमत सरकार सिर्फ 13 दिन चल पाई।
इसके बाद कांग्रेस के समर्थन से संयुक्त मोर्चा की सरकार बनी, जिसे अपना प्रधानमंत्री बदलना पड़ा। एच.डी. देवगौड़ा की जगह इंद्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री बने। 12वीं लोकसभा में भी स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। धीरे-धीरे भारतीय राजनीति में दो महत्वपूर्ण गठबंधन उभरे: भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एन.डी.ए.) और कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यू.पी.ए.)। 16वीं लोकसभा के चुनाव भी मुख्य रूप से इन दो गठबंधनों के बीच हुए, जिसमें भाजपा के नेतृत्व वाले एन.डी.ए. ने विजय प्राप्त कर अपनी सरकार बनाई।
सरल शब्दों में: गठबंधन राजनीति तब होती है जब कई दल मिलकर सरकार बनाते हैं क्योंकि किसी एक को बहुमत नहीं मिलता। भारत में यह स्थिति 1977 के बाद ज़्यादा देखने को मिली जब कांग्रेस का प्रभाव कम हुआ और छोटे दलों को सत्ता में आने का मौका मिला, जिससे एन.डी.ए. और यू.पी.ए. जैसे बड़े गठबंधन बने।
🎯 Exam Tip: गठबंधन की राजनीति की परिभाषा को स्पष्ट करें और भारत में इसके उदय के कारणों व प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं को क्रमबद्ध तरीके से समझाएँ।
Question 2. भारत में गठबंधन अथवा मिली-जुली सरकारों के इतिहास का वर्णन कीजिए।
Answer: भारत में गठबंधन या मिलीजुली सरकारों का इतिहास निम्नलिखित बिंदुओं में बताया गया है:
(i) **1977 का चुनाव:** 1977 के लोकसभा चुनावों में पहली बार कांग्रेस को हार मिली और उसे बहुमत नहीं मिला। जनता पार्टी के नेतृत्व में 5 दलों के गठबंधन ने लोकसभा में बहुमत प्राप्त किया और मोरारजी देसाई को अपना नेता चुना। मोरारजी देसाई ने गठबंधन सरकार के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली, लेकिन आपसी मतभेद के कारण यह सरकार जल्दी गिर गई।
(iv) **1989 का चुनाव:** 1989 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ी हार मिली। भाजपा को उम्मीद से ज़्यादा सफलता मिली और उसने कांग्रेस के विकल्प के रूप में अपनी ताकत दिखाई। कांग्रेस से अलग होकर वी.पी. सिंह ने जनता दल का गठन किया और 1989 में लोकसभा चुनाव लड़ा। उन्हें पूरा बहुमत नहीं मिला, लेकिन भाजपा ने बाहर से समर्थन देकर संयुक्त मोर्चा की सरकार बनाई। अक्टूबर 1990 में भाजपा का समर्थन वापस लेने पर यह सरकार गिर गई।
(v) **चंद्रशेखर सरकार:** वी.पी. सिंह के नेतृत्व वाला जनता दल बिखर गया और उससे टूटकर जनता दल (एस) नामक पार्टी बनी। इस पार्टी के नेता चंद्रशेखर ने कांग्रेस के बाहर के समर्थन से सरकार बनाई, लेकिन कुछ महीने बाद कांग्रेस से मतभेद होने के कारण 6 मार्च 1991 को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
(vi) **नरसिंह राव सरकार:** 10वीं लोकसभा में 1991 से 1996 तक नरसिंह राव के नेतृत्व में कांग्रेस की अल्पमत सरकार चलती रही।
(vii) **1996 के बाद गठबंधन का दौर:** 11वीं लोकसभा के चुनाव के बाद अप्रैल-मई 1996 से फिर गठबंधन सरकारों का दौर शुरू हुआ। 1996 के लोकसभा चुनावों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इस नाते भाजपा को सरकार बनाने का निमंत्रण मिला, लेकिन ज़्यादातर सांसद भाजपा की कुछ नीतियों के खिलाफ थे। इसी कारण भाजपा की सरकार लोकसभा में बहुमत साबित नहीं कर पाई। भाजपा ने शिवसेना, अकाली दल और हरियाणा विकास पार्टी के गठबंधन के साथ सरकार बनाई। बहुमत साबित न कर पाने के कारण 13 दिन बाद ही प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा।
(viii) **देवगौड़ा और गुजराल सरकारें:** अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के पतन के बाद कांग्रेस के बाहर के समर्थन से एच.डी. देवगौड़ा की सरकार बनी, लेकिन कुछ ही महीनों बाद कांग्रेस ने समर्थन के लिए प्रधानमंत्री (नेता) बदलने की शर्त रख दी। इसलिए 10 महीने में ही एच.डी. देवगौड़ा सत्ता से बाहर हो गए और इंद्र कुमार गुजराल को नेता चुनकर प्रधानमंत्री बनाया गया। जहाँ देवगौड़ा सरकार में 13 राजनीतिक दल थे, वहीं गुजराल सरकार में 15 राजनीतिक दल शामिल थे। इन दलों के बीच विभिन्न राजनीतिक मुद्दों और समस्याओं पर विचारों में समानता की कमी थी। इसके परिणामस्वरूप केंद्र सरकार को लगातार दबाव में काम करना पड़ रहा था।
(ix) **1999 में एन.डी.ए. सरकार:** 12वीं लोकसभा के चुनाव में भी किसी दल को पूरा बहुमत नहीं मिला। सबसे बड़े दल के आधार पर भारतीय जनता पार्टी के नेता अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री पद के लिए आमंत्रित किया गया। 18 दलों को मिलाकर सरकार का गठन किया गया। यहाँ प्रभावशाली प्रधानमंत्री के नेतृत्व में काम कर रही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एन.डी.ए.) सरकार अप्रैल 1999 में सिर्फ एक मत से गिर गई।
(xii) **2014 का चुनाव:** 16वीं लोकसभा के चुनाव 2014 में हुए। यह चुनाव मुख्य रूप से भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एन.डी.ए.) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यू.पी.ए.) के बीच हुआ। इस चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को जीत मिली और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनी। 1984 के बाद पहली बार किसी एक दल को जनता ने स्पष्ट बहुमत प्रदान किया था।
सरल शब्दों में: भारत में गठबंधन सरकारों का इतिहास 1977 से शुरू हुआ जब कांग्रेस को पहली बार हार मिली। तब से, कई बार किसी एक दल को बहुमत नहीं मिला और मिलीजुली सरकारें बनीं, जिनमें कई बार स्थिरता की कमी देखी गई, जब तक कि 2014 में भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिला।
🎯 Exam Tip: गठबंधन सरकारों के इतिहास को कालक्रम के अनुसार लिखें, हर महत्वपूर्ण चुनाव और उसके परिणामस्वरूप बनी सरकारों का उल्लेख करते हुए।
Question 3. भारतीय गठबंधन की राजनीति की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer: भारतीय गठबंधन की राजनीति की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. **एक दल की प्रधानता:** भारतीय राजनीति में जितने भी गठबंधन बने हैं, उनमें एक दल का ज़्यादा प्रभाव रहा है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एन.डी.ए.) का नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी करती है, और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यू.पी.ए.) का नेतृत्व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस करती है। सहयोगी दल ज़्यादा प्रभावी भूमिका नहीं निभा पाते।
2. **विचारधारागत समानता का अभाव:** राजनीतिक फायदे के लिए अक्सर विरोधी विचारधाराओं के राजनीतिक दल गठबंधन में शामिल हो जाते हैं। जो दल चुनावों में एक-दूसरे की आलोचना करते हैं, वे अपने फायदे के लिए गठबंधन में शामिल हो जाते हैं। उदाहरण के लिए, बिहार में जय प्रकाश नारायण को आदर्श मानने वाली समता पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ा, जबकि जय प्रकाश नारायण के विचार कांग्रेस की नीतियों से मेल नहीं खाते थे। इसका मतलब है कि गठबंधनों का आधार विचारधारा नहीं, बल्कि सिर्फ सत्ता पाना या किसी को सत्ता में आने से रोकना है।
3. **स्थायित्व का अभाव:** गठबंधन में सरकारें अक्सर अस्थिर होती हैं। कई बार राजनीतिक दल अपने फायदे के लिए एक गठबंधन छोड़कर दूसरे में शामिल हो जाते हैं। उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल के चुनावों के बाद तृणमूल कांग्रेस ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एन.डी.ए.) छोड़ दिया था। वहीं कभी समता पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा थी, लेकिन उसने बिहार विधानसभा चुनावों में उसका साथ छोड़कर कांग्रेस से गठबंधन कर लिया था।
4. **नेताओं के आधार पर गठबंधन:** भारतीय राजनीति में गठबंधन सिद्धांतों और विचारधारा के बजाय नेताओं के प्रभाव पर आधारित होते हैं। उदाहरण के लिए, समाजवादी विचारधारा होने के बावजूद समता पार्टी का गठबंधन राष्ट्रीय जनता दल के बजाय भारतीय जनता पार्टी से था। जब नरेंद्र मोदी को भारतीय जनता पार्टी ने अपना नेता घोषित किया, तो समता पार्टी ने उससे गठबंधन तोड़ लिया।
सरल शब्दों में: भारतीय गठबंधन राजनीति में एक बड़े दल का दबदबा होता है, दलों के विचारों में समानता नहीं होती, सरकारें अस्थिर रहती हैं और गठबंधन नेताओं के असर पर बनते हैं।
🎯 Exam Tip: गठबंधन की विशेषताओं को समझाते समय, हर विशेषता को स्पष्ट उदाहरणों के साथ प्रस्तुत करें ताकि आपकी बात प्रभावी लगे।
Question 4. मिलीजुली सरकारों या संयुक्त सरकारों के विभिन्न प्रतिमानों पर प्रकाश डालिए।
Answer: मिलीजुली सरकारों के कई अलग-अलग प्रतिमान (मॉडल) होते हैं। मिलीजुली सरकारों के मुख्य प्रतिमान इस प्रकार हैं:
1. **निषेधात्मक आधार पर गठित गठबंधन:** यह ऐसा गठबंधन होता है जहाँ कई राजनीतिक दल किसी दूसरे राजनीतिक दल को अपना समान और मजबूत दुश्मन मानते हैं और उसे सत्ता से दूर रखने के लिए गठबंधन की राजनीति अपनाते हैं। इस तरह के गठबंधन में आमतौर पर मिलीजुली सरकार के सहयोगी दलों के बीच राजनीतिक विचारधारा की समानता नहीं होती।
2. **समान शक्तिशाली दो विरोधी गठबंधन:** ये गठबंधन आमतौर पर चुनाव से पहले ही बन जाते हैं। राज्य की राजनीति इन दो गठबंधनों में बँट जाती है। केरल की राजनीति इसका अच्छा उदाहरण है। केरल की राजनीति में दो गठबंधन हैं: पहला संयुक्त लोकतांत्रिक गठबंधन, जिसका नेतृत्व कांग्रेस करती है, और दूसरा संयुक्त वाम मोर्चा गठबंधन, जिसका नेतृत्व मार्क्सवादी दल करता है। इस स्थिति में, जनता ही तय करती है कि किस गठबंधन को सत्ता मिलेगी। कुछ हद तक यह स्थिति द्विदलीय व्यवस्था के समान काम करती है।
3. **राष्ट्रीय सरकार:** गठबंधन का चौथा प्रतिमान 'राष्ट्रीय सरकार' के रूप में होता है। यह राष्ट्रीय सरकार आमतौर पर किसी राष्ट्रीय संकट का सामना करने के लिए बनाई जाती है। इसमें देश के सभी प्रमुख राजनीतिक दल शामिल होते हैं।
सरल शब्दों में: मिलीजुली सरकारें कई तरह की होती हैं: कुछ एक दुश्मन को हराने के लिए बनती हैं, कुछ दो बड़े गुटों में बँटी होती हैं, और कुछ राष्ट्रीय संकट के समय सभी दलों को मिलाकर बनती हैं।
🎯 Exam Tip: मिलीजुली सरकारों के प्रतिमानों को समझाते समय, हर प्रकार की परिभाषा दें और विशिष्ट उदाहरणों (जैसे केरल की राजनीति) का उपयोग करें।
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