RBSE Solutions Class 12 Political Science Chapter 23 राज्य स्तरीय एवं स्थानीय शासन, 73

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Class 12 Political Science Chapter 23 राज्य स्तरीय एवं स्थानीय शासन, 73 RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Political Science Chapter 23 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

RBSE Class 12 Political Science Chapter 23 बहुविकल्पात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत भारत के राष्ट्रपति, राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति करते हैं?
(अ) अनुच्छेद 154
(ब) अनुच्छेद 155
(स) अनुच्छेद 160
(द) अनुच्छेद 356
Answer: (ब) अनुच्छेद 155
In simple words: भारत के राष्ट्रपति राज्यपाल की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 155 के तहत करते हैं। यह अनुच्छेद राज्यपाल के पद की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा है।

🎯 Exam Tip: संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेदों को याद रखें, विशेषकर जो राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों से संबंधित हैं, क्योंकि ये सीधे सवाल अक्सर आते हैं।

 

Question 2. राज्य का संवैधानिक प्रधान है
(अ) वित्तमंत्री
(ब) राज्यपाल
(स) मुख्यमंत्री
(द) विधानसभा अध्यक्ष
Answer: (ब) राज्यपाल
In simple words: किसी भी राज्य का राज्यपाल उस राज्य का मुख्य संवैधानिक मुखिया होता है। वे राज्य सरकार के सभी बड़े फैसले उन्हीं के नाम पर लिए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: संवैधानिक प्रधान और वास्तविक प्रधान के बीच के अंतर को समझें; राज्यपाल संवैधानिक प्रधान होता है, जबकि मुख्यमंत्री वास्तविक प्रधान होता है।

 

Question 4. राज्य का मुख्यमंत्री किस अनुच्छेद के अन्तर्गत राज्यपाल को राज्य सम्बन्धी सूचनाएँ देता है
(अ) 167 (1)
(ब) 163 (1)
(स) 162 (1)
(द) 155 (1)
Answer: (अ) 167 (1)
In simple words: अनुच्छेद 167(1) यह बताता है कि मुख्यमंत्री को राज्य से जुड़ी सभी जानकारी राज्यपाल को देनी होती है। यह मुख्यमंत्री का कर्तव्य है।

🎯 Exam Tip: मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच के संबंध और उनके कर्तव्यों को स्पष्ट रूप से याद रखें, यह शासन के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

 

Question 5. त्रिस्तरीय पंचायती राज प्रणाली का आरम्भ 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के कौन से जिले में किया गया?
(अ) जोधपुर
(ब) नागौर
(स) झालावाड़
(द) बीकानेर
Answer: (ब) नागौर
In simple words: भारत में पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत राजस्थान के नागौर जिले से हुई थी। यह महात्मा गांधी की जयंती पर एक बड़ा कदम था।

🎯 Exam Tip: पंचायती राज से संबंधित महत्वपूर्ण तिथियों और स्थानों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये ऐतिहासिक तथ्य अक्सर पूछे जाते हैं।

 

Question 6. कौन - सा इतिहासकार भारतीय गाँवों को गणराज्यों की संज्ञा देता है?
(अ) अल्टेकर
(ब) पणिन्धिकर
(स) जेम्स टॉड
(द) अशोक मेहता
Answer: (अ) अल्टेकर
In simple words: इतिहासकार अल्टेकर ने भारतीय गाँवों को पुराने समय के गणराज्यों के रूप में देखा था। वे गांवों की आत्मनिर्भरता और स्वशासन पर जोर देते थे।

🎯 Exam Tip: विभिन्न इतिहासकारों के विचारों को याद रखें, खासकर जब वे भारत के सामाजिक या राजनीतिक ढांचे पर टिप्पणी करते हैं।

 

Question 7. इनमें से कौन – सी संस्था ग्रामीण स्वशासन से सम्बन्धित नहीं है?
(अ) ग्राम पंचायत
(ब) पंचायत समिति
Answer: (स)
In simple words: ग्रामीण स्वशासन में ग्राम पंचायत और पंचायत समिति जैसी संस्थाएं शामिल हैं। विकल्प (स) ग्रामीण स्वशासन का हिस्सा नहीं है।

🎯 Exam Tip: ग्रामीण और शहरी स्थानीय स्वशासन की विभिन्न संस्थाओं को स्पष्ट रूप से समझें ताकि उनकी भूमिकाओं को अलग कर सकें।

 

Question 8. किए गए?
(अ) 72 वाँ संशोधन अधिनियम
(ब) 73 वाँ एवं 74 वाँ संशोधन अधिनियम
(स) 75 वाँ संशोधन अधिनियम
(द) 43 वां संशोधन अधिनियम
Answer: (ब) 73 वाँ एवं 74 वाँ संशोधन अधिनियम
In simple words: भारतीय संविधान में 73वें और 74वें संशोधन स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने के लिए किए गए थे। इन संशोधनों ने पंचायती राज और नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा दिया।

🎯 Exam Tip: 73वें और 74वें संविधान संशोधन के मुख्य प्रावधानों को याद रखें, ये पंचायती राज व्यवस्था के आधार हैं।

 

Question 9. नगर निगम का निर्वाचित प्रमुख कहलाता है
(अ) सभापति
(ब) अध्यक्ष
(स) आयुक्त
(द) मेयर,
Answer: (द) मेयर,
In simple words: नगर निगम का मुख्य मुखिया मेयर या महापौर कहलाता है। ये शहर के विकास और प्रशासन का काम देखते हैं।

🎯 Exam Tip: शहरी स्थानीय निकायों जैसे नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम के प्रमुखों के नाम और उनके कार्यों को याद रखें।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 23 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. राज्य का नाममात्र का कार्यपालक कौन है?
Answer: राज्य का नाममात्र का कार्यपालक राज्यपाल होता है। राज्यपाल राज्य में राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है।
In simple words: राज्यपाल राज्य का सिर्फ नाम का मुखिया होता है। असली काम मुख्यमंत्री और मंत्री करते हैं।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि राज्यपाल की भूमिका औपचारिक होती है, जबकि मुख्यमंत्री की भूमिका वास्तविक कार्यपालक की होती है।

 

Question 2. राज्यपाल को परामर्श कौन देता है?
Answer: राज्यपाल को राज्य मंत्रिपरिषद परामर्श देती है। मंत्रिपरिषद मुख्यमंत्री के नेतृत्व में काम करती है।
In simple words: राज्यपाल को सलाह देने का काम राज्य की मंत्री परिषद करती है।

🎯 Exam Tip: राज्यपाल और मंत्रिपरिषद के बीच के संबंधों को समझें, खासकर परामर्श की प्रक्रिया को।

 

Question 3. राज्यपाल किसको मुख्यमंत्री नियुक्त करता है?
Answer: राज्यपाल विधानसभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करता है। यह लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
In simple words: राज्यपाल उस नेता को मुख्यमंत्री बनाता है जिसकी पार्टी को चुनाव में सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं।

🎯 Exam Tip: मुख्यमंत्री की नियुक्ति प्रक्रिया और उसमें राज्यपाल की भूमिका पर ध्यान दें, यह संसदीय प्रणाली का एक मुख्य भाग है।

 

Question 4. भारत क सावधान म "राज्या का सघ" शब्दा का प्रयोग किस बात की ओर संकेत करता है?
Answer: भारत के संविधान में "राज्यों का संघ" शब्द इस बात की ओर संकेत करता है कि भारत विभिन्न राज्यों का एक संघ है, और कोई भी राज्य भारत से अलग नहीं हो सकता। यह भारतीय एकता का प्रतीक है।
In simple words: "राज्यों का संघ" का मतलब है कि भारत कई राज्यों से मिलकर बना है, और कोई भी राज्य इससे अलग नहीं हो सकता।

🎯 Exam Tip: संविधान के प्रमुख शब्दों और वाक्यांशों का अर्थ समझें, जैसे "राज्यों का संघ", क्योंकि ये भारत की राजनीतिक संरचना को दर्शाते हैं।

 

Question. संविधान के किस संशोधन द्वारा राज्य मंत्रिपरिषद की संख्या, विधानसभा के कुल सदस्यों की अधिकतम 15 प्रतिशत निश्चित कर दी गई है?
Answer: राज्य मंत्रिपरिषद की संख्या 91वें संविधान संशोधन द्वारा विधानसभा के कुल सदस्यों की अधिकतम 15 प्रतिशत निश्चित कर दी गई है। यह संशोधन मंत्रिपरिषद के आकार को सीमित करता है।
In simple words: 91वें संविधान संशोधन ने तय किया कि राज्य में मंत्रियों की संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों के 15% से ज्यादा नहीं होगी।

🎯 Exam Tip: संविधान संशोधनों से संबंधित संख्या सीमाओं और उनके प्रभावों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. पंचायती राज व्यवस्था में स्थानीय शासन के कौन-से स्तर विद्यमान हैं?
Answer: पंचायती राज व्यवस्था में स्थानीय शासन के दो स्तर विद्यमान हैं-1. ग्रामीण स्थानीय शासन (पंचायती राज), 2. शहरी स्थानीय शासन । ये दोनों स्तर जनता की भागीदारी सुनिश्चित करते हैं।
In simple words: पंचायती राज व्यवस्था में दो तरह के स्थानीय शासन होते हैं - गाँव के लिए पंचायती राज और शहरों के लिए शहरी शासन।

🎯 Exam Tip: ग्रामीण और शहरी स्थानीय स्वशासन के अलग-अलग संरचनाओं को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 7. 'पंचायती राज दिवस' कब मनाया जाता है?
Answer: प्रतिवर्ष 24 अप्रैल को पंचायती राज दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारत में स्थानीय स्वशासन के महत्व को दर्शाता है।
In simple words: हर साल 24 अप्रैल को पंचायती राज दिवस मनाते हैं।

🎯 Exam Tip: पंचायती राज से संबंधित महत्वपूर्ण तिथियों और घटनाओं को याद रखें।

 

Question 8. ग्रामीण स्थानीय शासन में सबसे छोटी निर्वाचित संस्था कौन – सी है?
Answer: ग्रामीण स्थानीय शासन में सबसे छोटी निर्वाचित संस्था 'ग्राम पंचायत' है। यह गाँव के स्तर पर काम करती है।
In simple words: गाँव में सबसे छोटी सरकार 'ग्राम पंचायत' होती है।

🎯 Exam Tip: पंचायती राज के त्रिस्तरीय ढांचे में प्रत्येक स्तर की संस्थाओं के नाम और उनके क्रम को याद रखें।

 

Question 9. नगरीय स्वशासन की सबसे बड़ी संस्था का नाम बताइए।
Answer: नगरीय स्वशासन की सबसे बड़ी संस्था का नाम 'नगर निगम' है। यह बड़े शहरों में काम करती है।
In simple words: बड़े शहरों में 'नगर निगम' सबसे बड़ी स्थानीय सरकार होती है।

🎯 Exam Tip: शहरी स्वशासन के विभिन्न स्तरों को पहचानें, जैसे नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम।

 

Question 10. स्थानीय निकायों के चुनाव कौन-सी संस्था करवाती है?
Answer: स्थानीय निकायों के चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग करवाता है। यह एक स्वतंत्र संस्था है।
In simple words: राज्य निर्वाचन आयोग गाँव और शहर के स्थानीय चुनाव करवाता है।

🎯 Exam Tip: राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यों और इसकी स्वायत्तता को समझें।

Chapter 23 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 2. राज्यपाल की नियुक्ति के संबंध में सरकारिया आयोग की प्रमुख सिफारिशें बताइए।
Answer: सरकारिया आयोग की प्रमुख सिफारिशें निम्नलिखित हैं:
1. राज्यपाल के रूप में मनोनीत व्यक्ति को उसके कार्यकाल के बाद पुनः लाभ का पद नहीं देना चाहिए। राज्यपाल का पद एक गैर-राजनीतिक और सम्मानजनक पद है।
2. केन्द्र में सत्तारूढ़ दल का नेता राज्यपाल न बने। यह सुनिश्चित करता है कि राज्यपाल निष्पक्ष रहे।
3. राज्यपाल राष्ट्रपति और उप - राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ सकता है, लेकिन दलगत राजनीति में सक्रिय भाग नहीं ले सकता है। राज्यपाल को राजनीतिक विवादों से दूर रहना चाहिए।
4. आवश्यक संतक परिवर्तन कर राज्यपाल की नियुक्ति में मुख्यमंत्री से सलाह लेने की व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है।
5. राज्यपाल के पद पर ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति हो जो किसी क्षेत्र में जानी - मानी हस्ती हो। ऐसे व्यक्ति का चयन उनके अनुभव और ज्ञान के आधार पर होना चाहिए।
In simple words: सरकारिया आयोग ने कहा कि राज्यपाल को दोबारा सरकारी नौकरी नहीं मिलनी चाहिए। केंद्र की सत्ता वाली पार्टी का नेता राज्यपाल नहीं बनना चाहिए। राज्यपाल को मुख्यमंत्री की सलाह से नियुक्त करना चाहिए और ऐसे व्यक्ति को चुनना चाहिए जो बहुत प्रसिद्ध हो।

🎯 Exam Tip: सरकारिया आयोग की सिफारिशें केंद्र-राज्य संबंधों में राज्यपाल की भूमिका को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं, इन्हें विस्तार से याद रखें।

 

Question 3. मुख्यमंत्री और राज्यपाल के पारस्परिक संबंधों पर प्रकाश डालिए।
Answer: मुख्यमंत्री व राज्यपाल के पारस्परिक सम्बन्ध इस प्रकार हैं: मुख्यमंत्री तथा राज्यपाल एक-दूसरे के पूरक हैं। इनके पारस्परिक संबंधों को निम्नलिखित आधारों पर स्पष्ट किया जा सकता है-
1. राज्यपाल राज्य विधानसभा में बहुमत प्राप्त दल/दलों के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करता है और पद की गोपनीयता की शपथ दिलाता है। मुख्यमंत्री ही वास्तविक कार्यकारी प्रमुख होता है।
2. मुख्यमंत्री, राज्यपाल को अपने मंत्रियों की नियुक्ति तथा उनके विभागों के आवंटन, परिवर्तन या उनके त्यागपत्र स्वीकार या अस्वीकार करने में सलाह देता है। यह मुख्यमंत्री का विशेष अधिकार है।
3. किसी भी मंत्री द्वारा लिए गए निर्णय को मुख्यमंत्री, राज्यपाल के कहने पर पूर्ण मंत्रिपरिषद में विचार के लिए रखवा सकता है। राज्यपाल को मंत्रिपरिषद् के निर्णयों से अवगत कराना मुख्यमंत्री का कर्तव्य है।
4. ध्य संपर्क सूत्र के रूप में कार्य करता है। जिससे राज्यपाल को कोई समस्या न हो। मुख्यमंत्री दोनों के बीच सेतु का काम करता है।
In simple words: मुख्यमंत्री और राज्यपाल एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं। राज्यपाल मुख्यमंत्री को नियुक्त करते हैं, और मुख्यमंत्री मंत्रियों की नियुक्ति और काम की सलाह देते हैं। मुख्यमंत्री राज्यपाल को सारी जानकारी देते हैं।

🎯 Exam Tip: मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच के सहयोगात्मक और नियंत्रक संबंधों को समझें, यह राज्य प्रशासन की रीढ़ हैं।

 

Question 5. मुख्यमंत्री और राज्य विधायिका के संबंधों पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
Answer: मुख्यमंत्री और राज्य विधायिका के सम्बन्ध इस प्रकार हैं: मुख्यमंत्री तथा राज्य विधायिका के संबंधों को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से स्पष्ट किया जा सकता है-
1. मुख्यमंत्री विधानसभा में बहुमत प्राप्त दल का नेता होता है, इस प्रकार वह सदन का नेता होता है। वह अपनी पार्टी का नेतृत्व करता है।
2. मुख्यमंत्री राज्यपाल को राज्य विधायिका (विधानमंडल) का सत्र बुलाने और सत्रावसान करने की सलाह देता है। राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर ही काम करता है।
3. मुख्यमंत्री विधानसभा में अपना बहुमत रहते हुए राज्यपाल को कभी भी विधानसभा भंग करने की सलाह दे सकता है। यह मुख्यमंत्री का एक महत्वपूर्ण अधिकार है।
4. मुख्यमंत्री सरकार की नीतियों की घोषणा विधायिका में करता है। सभी महत्वपूर्ण नीतियां विधायिका के माध्यम से जनता तक पहुंचाई जाती हैं।
5. विधानसभा के बहुमत दल के सदस्य दलीय अनुशासन के कारण मुख्यमंत्री का समर्थन करने के लिए बाध्य होते हैं। यह पार्टी की एकता को बनाए रखता है।
In simple words: मुख्यमंत्री विधानसभा में अपनी पार्टी के नेता होते हैं। वे राज्यपाल को विधानसभा बुलाने या भंग करने की सलाह देते हैं। वे सरकार की नई नीतियां बताते हैं और उनकी पार्टी के सदस्य हमेशा उनका साथ देते हैं।

🎯 Exam Tip: मुख्यमंत्री की विधायी भूमिकाओं और राज्यपाल के साथ उनकी बातचीत पर ध्यान दें, यह राज्य शासन की कार्यप्रणाली को दर्शाते हैं।

 

Question 6. अशोक मेहता समिति की दो प्रमुख सिफारिशें क्या थीं? लिखिए।
Answer: अशोक मेहता समिति की सिफारिशें – पंचायती राज संस्थाओं की कार्यप्रणाली का अध्ययन करने तथा उनके वर्तमान ढाँचे में आव श्यक परिवर्तन हेतु सुझाव देने के लिए जनता पार्टी सरकार ने दिसम्बर 1977 में अशोक मेहता समिति गठित की। इस समिति ने अगस्त 1978 में अपनी रिपोर्ट सौंपी और देश में पतनोन्मुख पंचायती राज पद्धति को पुनजीविंत एवं शक्तिसम्पन्न बनाने हेतु 132 सि खित हैं-
1. समिति ने द्विस्तरीय पंचायती राज प्रणाली को अपनाने की सिफारिश की। इसने मंडल पंचायतों के गठन का सुझाव दिया।
2. समिति ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव दलगत आधार पर करवाने की सिफारिश की। इससे राजनीतिक भागीदारी बढ़ती है।
In simple words: अशोक मेहता समिति ने पंचायती राज के लिए दो स्तरों की सरकार बनाने और चुनावों को राजनीतिक दलों के आधार पर करवाने की सलाह दी थी।

🎯 Exam Tip: पंचायती राज से संबंधित महत्वपूर्ण समितियों और उनकी मुख्य सिफारिशों को याद रखें।

 

Question. त्रिस्तरीय पंचायती राज ढाँचे के तीन स्तर कौन-कौन से हैं?
Answer: त्रिस्तरीय पंचायती राज ढाँचा-भारत में पंचायती राज को त्रिस्तरीय स्वरूप प्रदान किया गया है। जिसके अन्तर्गत स्थानीय स्तर पर ग्राम पंचायत, मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत समिति एवं जिला स्तर पर जिला परिषद है। जिनका वर्णन निम्नानुसार है:
(i) ग्राम पंचायत – ग्रामीण क्षेत्र में स्थानीय स्वशासन की सबसे छोटी इकाई ग्राम पंचायत होती है। ग्राम पंचायत कम से कम 9 वार्डों में विभक्त की जाती है। ग्राम पंचायत का प्रमुख सरपंच कहलाता है जिसका निर्वाचन पंचायत क्षेत्र के मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से किया जाता है । ॥प्रत्येक वार्ड के मतदाला एक पंच का निर्वाचन करते हैं। ग्राम पंचायत का कार्यकाल 5 वर्ष होता है। ग्राम पंचायत में सरकारी प्रतिनिधि के रूप में पंचायत सचिव का पद होता है। ग्राम पंचायत का मुख्य कार्य पंचायत क्षेत्र में ग्रामीण विकास से सम्बन्धित कार्यक्रम को क्रियान्वित करना है।
(ii) पंचायत समिति – पंचायत राज व्यवस्था की मध्य स्तरीय संस्था.पंचायत समिति है। जिसमें जिसमें जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि होते हैं जो अपने में से प्रधान व उपप्रधान का चयन करते हैं। प्रशासक के रूप में विकास अधिकारी व अन्य कर्मचारी होते हैं इसका कार्यकाल भी 5 वर्ष होता है। इसका प्रमुख कार्य वार्षिक योजनाएँ तैयार करना तथा ग्रामीण विकास के कार्यक्रमों का क्रियान्वयन एवं मूल्यांकन करना भी है।
(iii) जिला परिषद – यह पंचायती राज व्यवस्था की सर्वोच्च संस्था है। इसके सदस्य प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित होते हैं। इसका अध्यक्ष जिला प्रमुख कहलाता है। जिला परिषद का कार्यकाल 5 वर्ष होता है। प्रशासक के रूप में मुख्य कार्यकारी अधिकारी व राज्य कर्मचारी होते हैं। इसका मुख्य कार्य जिले की सभी ग्राम पंचायत व पंचायत समितियों के मध्य समन्वय बनाये रखना है।
In simple words: पंचायती राज के तीन स्तर हैं: गाँव में ग्राम पंचायत, ब्लॉक में पंचायत समिति और जिले में जिला परिषद। ये सभी मिलकर गाँवों में सरकार चलाते हैं।

🎯 Exam Tip: पंचायती राज के प्रत्येक स्तर की संरचना, पदाधिकारियों और मुख्य कार्यों को विस्तार से समझें, यह महत्वपूर्ण है।

 

Question 8. राज्य वित्त आयोग के कोई दो कार्य बताइए।
Answer: संविधान के अनुच्छेद 243 के तहत प्रत्येक राज्य का राज्यपाल 5 वर्ष के अन्तराल पर एक राज्य वित्त आयोग का गठन करता है। जिसके द्वारा पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा की जाती है तथा इसमें सुधार के लिए किए जाने वाले उपायों के संबंध में राज्यपाल को संस्तुति दी जाती है। राज्य वित्त आयोग के दो प्रमुख कार्य हैं:
1. पंचायतों को कुछ मदों पर कर वसूलने, शुल्कों, पथ करों तथा फीसों से आय अर्जित करने का अधिकार प्रदान करता है। यह पंचायतों की आय का मुख्य स्रोत है।
2. पंचायतों की आर्थिक स्थिति के लिए उचित उपायों के सुझाव राज्य सरकार को देना। यह पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करता है।
In simple words: राज्य वित्त आयोग पंचायतों के लिए टैक्स इकट्ठा करने और फीस लेने का अधिकार देता है। यह पंचायतों की आर्थिक हालत सुधारने के लिए सरकार को सुझाव भी देता है।

🎯 Exam Tip: राज्य वित्त आयोग के कार्यों और इसकी स्थापना के उद्देश्य को याद रखें, जो स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करते हैं।

 

Question 10. नगरीय स्थानीय शासन की तीन इकाइयाँ कौन – कौन सी हैं?
Answer: नगरीय स्थानीय शासन की तीन इकाइयाँ निम्नलिखित हैं:
1. नगर पालिका – नगर में पंचायत को नगर पालिका का नाम दिया गया है। 10 हजार से 1 लाख तक जनसंख्या वाले कस्बों में इसकी स्थापना की जाती है। इसका अध्यक्ष चैयरमैन कहलाता है। यह छोटे शहरों का प्रशासन देखती है।
2. नगर परिषद -1 लाख से से 3 लाख तक की जनसंख्या वाले शहरों में नगर परिषद की स्थापना की जाती है। इसे कई वार्डों में बाँट दिया जाता है। प्रत्येक वार्ड से एक पार्षद का जनता द्वारा सीधे निर्वाचन किया जाता है। नगर परिषद के अध्यक्ष को सभापति कहते हैं। यह मध्यम आकार के शहरों का प्रशासन संभालती है।
3. नगर निगम – 3 लाख से अधिक जनसंख्या वाले बड़े शहरों में नगर निगम की स्थापना की जाती है। इसका अध्यक्ष मेयर या महापौर कहलाता है। इनका चुनाव प्रत्यक्ष या परोक्ष (पार्षदों द्वारा) विधि जो भी, राज्य सरकार के विधान द्वारा निर्धारित की गई है-द्वारा किया जाता है। इनका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, किंतु अविश्वास प्रस्ताव से समय पूर्व भी इन निर्वाचित मंडलों को भंग किया जा सकता है। यह सबसे बड़े शहरों का प्रशासन चलाती है।
In simple words: शहरी शासन में तीन तरह की संस्थाएँ होती हैं: छोटे कस्बों के लिए नगर पालिका, मध्यम शहरों के लिए नगर परिषद और बड़े शहरों के लिए नगर निगम।

🎯 Exam Tip: शहरी स्थानीय शासन की प्रत्येक इकाई की जनसंख्या सीमा, प्रमुख और कार्यप्रणाली को याद रखें।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 23 निबंधात्मक प्रश्न

 

Question 1. राज्य प्रशासन पर एक लेख लिखिए।
Answer: राज्य प्रशासन को निम्नलिखित आधारों पर स्पष्ट किया जा सकता है:
1. राज्यों के ऊपर संघीय नियंत्रण – संकटकाल में केन्द्रीय सरकार का राज्य सरकार के ऊपर पूर्ण नियंत्रण रहता है। साधारण काल में यद्यपि राज्य सरकारों को सामान्यतया अपने क्षेत्र में पूर्ण स्वायत्तता प्राप्त रहती है फिर भी केन्द्रीय सरकार कुछ सीमा तक उन्हें नियंत्रित करती है। यह केंद्र और राज्यों के बीच संबंध को दर्शाता है।
2. राज्य सरकारों को संघीय कृत्य सौंपना – अनुच्छेद 258 में निर्धारित शर्तों के अनुसार संघ राज्यों को अपने कुछ प्रशासनिक कृत्य हस्तांतरित कर सकता है तथा राज्य संघ को अपने कुछ प्रशासनिक कृत्य सौंप सकते हैं। संघीय सरकार द्वारा राज्य सरकारों को अपने प्रशासनिक कृत्य सौंपे जाने पर इन कृत्यों को संपन्न करने में जो भी खर्च होगा उसका वहन संघीय सरकार द्वारा किया जाता है। यह राज्यों पर केंद्र के प्रभाव को दिखाता है।
नियंत्रण स्थापित हो जाता है। राज्य प्रशासन के अन्य आधार:
• राज्य प्रशासन का स्वयं का एक स्वतंत्र अस्तित्व है। यह अपनी नीतियों और कार्यों को स्वयं निर्धारित करता है।
• राज्य प्रशासन जन सहभागिता पर आधारित है। जनता की भागीदारी से प्रशासन अधिक प्रभावी बनता है।
• सचिवालये राज्य प्रशासन की एक महत्वपूर्ण धुरी है। यह नीतियों के निर्माण और क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
• राज्य प्रशासन के प्रमुख प्रशासक अखिल भारतीय सेवाओं से चयनित होकर आते हैं। ये अधिकारी केंद्र द्वारा नियुक्त होते हैं।
• राज्य प्रशासन में राज्यों में राज्यपाल, राष्ट्रपति का प्रतिनिधि होता है। राज्यपाल केंद्र सरकार और राज्य के बीच एक कड़ी का काम करता है।
In simple words: राज्य प्रशासन पर केंद्र सरकार का नियंत्रण होता है, खासकर आपातकाल में। केंद्र राज्यों को कुछ काम सौंप सकता है। राज्य प्रशासन का अपना अस्तित्व है, यह जनता की भागीदारी पर चलता है, और सचिवालय इसका मुख्य केंद्र है। राज्यपाल केंद्र का प्रतिनिधि होता है।

🎯 Exam Tip: राज्य प्रशासन की विशेषताओं और केंद्र-राज्य संबंधों को विस्तार से समझाएं, इसमें राज्यपाल की भूमिका और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लेख करें।

 

Question 2. राज्यपाल व मुख्यमंत्री के आपसी संबंधों का विवरण देते हुए, राज्य प्रशासन की कार्यप्रणाली बताइए।
Answer: राज्यपाल व मुख्यमंत्री के आपसी संबंधों को निम्नलिखित आधारों पर स्पष्ट किया जा सकता है:
1. संवैधानिक दृष्टि से संविधान के अनुच्छेद 163 के अनुसार जहाँ कार्यपालिका का प्रधान राज्यपाल है, वहाँ व्यावहारिक दृष्टि से शासन का वास्तविक मुखिया मुख्यमंत्री होता है। राज्यपाल केवल नाममात्र का मुखिया होता है।
2. राज्यपाल का पहला कार्य मुख्यमंत्री की नियुक्ति करना है। यदि विधानसभा में किसी एक राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त है और बहुमत वाले राजनीतिक दल का नेता होने पर तो राज्यपाल उसे मुख्यमंत्री पद पर नियुक्त करता है। यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है।
3. मुख्यमंत्री, मंत्रियों का चयन कर सूची राज्यपाल को दे देता है, जिसे राज्यपाल स्वीकार कर लेता है तथा मुख्यमंत्री की सूची के आधार राज्यपाल उन्हें नियुक्त करता है। मुख्यमंत्री अपनी मंत्रिपरिषद को अपनी इच्छा से चुनता है।
4. विधानसभा को भंग करने का कार्य राज्यपाल उसी समय करेगा, जब मुख्यमंत्री उसे ऐसा करने के लिए परामर्श देगा। मुख्यमंत्री का विश्वास होना चाहिए कि वह सरकार बना सकता है।
5. संविधान के अनुसार मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद तथा राज्यपाल के बीच संपर्क स्थापित करता है। मुख्यमंत्री राज्यपाल को सभी निर्णयों से अवगत कराता है।
6. मुख्यमंत्री ही मंत्रिमंडल के निर्णयों की सूचना राज्यपाल को देता है तथा राज्यपाल के विचार मंत्रिमंडल तक पहुँचाता है। यह सूचना का प्रवाह बनाए रखता है।
7. राज्यपाल मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करता है। राज्यपाल मंत्रिपरिषद के निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं करता।
राज्य प्रशासन की कार्यप्रणाली: राज्य प्रशासन में मंत्रिपरिषद की सबसे अधिक महत्वपूर्ण इकाई मंत्रिमंडल है और मंत्रिमंडल ही सभी महत्वपूर्ण विषयों में निर्णय लेता है। मंत्रिमंडल की बैठक को मुख्यमंत्री जब चाहे बुला सकता है। इन बैठकों की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करता है। बैठक को कोई कोरम (गणपूर्ति) नहीं होता है। मंत्रिमंडल की कार्यवाही के दो प्रमुख नियम हैं - सामूहिक उत्तरदायित्व तथा गोपनीयता।
1. सामूहिक उत्तरदायित्व – मंत्रिमंडल की बैठकों में प्रायः समस्त निर्णय एकमत में लिए जाते हैं। मतभेद की स्थिति में पारस्परिक विचार-विमर्श के आधार पर निर्णय लिया जाता है और यह निर्णय सभी मंत्रियों का संयुक्त निर्णय माना जाता है। यदि कोई मंत्री इसे स्वीकार करने में अपने को असमर्थ पाता है तो उसे त्यागपत्र देना होता है। सभी मंत्री एक साथ जिम्मेदार होते हैं।
2. गोपनीयता – मंत्रिपरिषद के प्रत्येक सदस्य द्वारा गोपनीयता की शपथ ली जाती है और मंत्रिमंडल की कार्यवाही तथा निर्णय गुप्त रखे जाते हैं। यदि कोई मंत्री गोपनीयता को भंग करता है तो उसे त्यागपत्र देना होता है। यह सुनिश्चित करता है कि सरकार के फैसले सुरक्षित रहें।
In simple words: राज्यपाल और मुख्यमंत्री मिलकर राज्य चलाते हैं। राज्यपाल मुख्यमंत्री को चुनते हैं, और मुख्यमंत्री मंत्रियों को चुनते हैं। मुख्यमंत्री राज्यपाल को सारी जानकारी देते हैं। मंत्रिमंडल सभी बड़े फैसले लेता है, मुख्यमंत्री इसकी अध्यक्षता करते हैं। सभी मंत्री मिलकर जिम्मेदार होते हैं और फैसलों को गुप्त रखते हैं।

🎯 Exam Tip: राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच के सांविधानिक और व्यावहारिक संबंधों को अच्छी तरह समझाएं, और राज्य प्रशासन में मंत्रिपरिषद की भूमिका पर प्रकाश डालें।

 

Question 4. पंचायती राज ढाँचे के त्रिस्तरीय स्वरूप को विस्तार से समझाइए।
Answer: पंचायती राज ढाँचे के त्रिस्तरीय स्वरूप को विस्तार से इस प्रकार समझा जा सकता है:
ग्राम पंचायत का त्रिस्तरीय स्वरूप:
1. ग्राम पंचायत: ग्रामीण क्षेत्र में स्थानीय स्वशासन की सबसे छोटी इकाई ग्राम – पंचायत होती है। ग्राम पंचायत कम से कम 9 वार्डों में विभक्त की जाती है। ग्राम पंचायत का प्रमुख सरपंच कहलाता है। सरपंच का निर्वाचन समस्त पंचायत, क्षेत्र के मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से गुप्त मतदान पद्धति के द्वारा किया जाता है। पंच का चुनाव सम्बन्धित वार्ड के मतदाता प्रत्यक्ष रूप से करते हैं। प्रत्येक वार्ड के मतदाला एक पंच का निर्वाचन करते हैं। ग्राम पंचायत का कार्यकाल 5 वर्ष होता है। ग्राम पंचायत में सरकारी प्रतिनिधि के रूप में पंचायत सचिव का पद होता है। ग्राम पंचायत का मुख्य कार्य पंचायत क्षेत्र में ग्रामीण विकास से सम्बन्धित कार्यक्रम को क्रियान्वित करना है। यह गाँव के विकास की नींव है।
पंचायत समितियों में भी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातियों अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान है। ये सभी आरक्षित किए गये स्थान चक्रानुक्रम से बारी – बारी से आवंटित किए जाते हैं। पंचायत समिति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है पंचायत समिति में प्रशासक के रूप में विकास अधिकारी का पद होता है। विकास अधिकारी कर्मचारियों के कार्यों में समन्वय स्थापित करता है।
पंचायत समिति के प्रमुख कार्य है:
1. वार्षिक योजनाएँ तैयार करना, ग्राम पंचायतों की योजनाओं पर विचार करना, वार्षिक बजट तैयार करना आदि। यह योजना बनाने में महत्वपूर्ण है।
2. लघुसिंचाई व जल प्रबन्ध संबंधी कार्य
3. कृषि उत्पादन एवं विस्तार संबंधी कार्य
4. गरीबी उन्मूलन सम्बन्धी कार्य
5. पशुपालन, डेयरी, कुक्कुट तथा मत्स्य पालन संबंधी कार्य
6. प्राथमिक शिक्षा संबंधी कार्य
7. अन्य कार्य, जैसे-खादी, कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन, पेयजल व्यवस्था, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी कार्य। ये सभी स्थानीय विकास में मदद करते हैं।
3. जिला परिषदः पंचायती राज व्यवस्था में जिला स्तरीय संस्था जिला परिषद है। इसका गठन चार प्रकार के सदस्यों से मिलकर होता है:
1. प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचित प्रतिनिधि
2. जिला परिषद क्षेत्र के लोकसभा व विधानसभा सदस्य
3. जिला परिषद क्षेत्र में निर्वाचकों के रूप में पंजीकृत सभी राज्यसभा सदस्य और
4. जिला परिषद क्षेत्र की समस्त पंचायत समितियों के प्रधान।
जिला प्रमुख व उप जिला प्रमुख को पहले प्रकार के सदस्य अपनों में से निर्वाचित करते हैं। अविश्वास द्वारा हटाने का अधिकार भी इन्हीं को है। अन्य कार्यों में अन्य प्रकार के सदस्य भी मतदान कर सकते हैं। जिला परिषद में जिला प्रमुख और उप – जिला प्रमुख जनता के प्रतिनिधि हैं। इनके अतिरिक्त एक मुख्य अधिकारी निर्माण कार्य देखने हेतु, एक सहायक अभियन्ता एवं अन्य कर्मचारी होते है। जिला प्रमुख की अध्यक्षता में जिला परिषद की बैठक व अन्य गतिविधिया सम्पन्न होती है। जिला परिषद पूरे जिले के विकास की योजना बनाती है।
समस्त अधिकारियों व कर्मचारियों पर उसका नियंत्रण रहता है। जिला परिषद में अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्गों एवं महिलाओं के लिए नियमानुसार एवं चक्रानुक्रमानुसार आरक्षण दिया गया है। जिला परिषद का कार्यकाल 5 वर्ष होता है एवं इसे समय से पहले भंग करने पर चुनाव 6 माह के अंदर कराना आवश्यक है, जो कि शेष कार्यकाल के लिए होता है। यदि कार्यकाल छः माह से कम शेष हो तो निर्वाचन नही कराए जा सकते।
अन्य कार्य:
3. कृषि विकास तथा आर्थिक सामाजिक विकास के लिए कार्य करना।
4. ग्राम नियोजन, जन स्वास्थ्य एवं शिक्षा व्यवस्था के लिए कार्य करना।
5. प्राकृतिक आपदाओं वाले क्षेत्रों के लिए विशेष कार्यक्रमों का निर्माण करना।
In simple words: पंचायती राज के तीन स्तर हैं: ग्राम पंचायत (गाँवों के लिए), पंचायत समिति (ब्लॉक के लिए) और जिला परिषद (जिले के लिए)। हर स्तर पर चुने हुए लोग काम करते हैं और उनका अपना मुखिया होता है। ग्राम पंचायत गाँवों की छोटी समस्याएँ देखती है, पंचायत समिति ब्लॉक स्तर पर योजनाएँ बनाती है और जिला परिषद पूरे जिले के विकास को संभालती है।

🎯 Exam Tip: पंचायती राज के त्रिस्तरीय ढांचे के प्रत्येक स्तर की विस्तृत कार्यप्रणाली, सदस्यों की संरचना और आरक्षण प्रावधानों को याद रखें।

 

Question 5. संविधान की 11 वीं अनुसूची में उल्लिखित पंचायती राज संस्थाओं के प्रमुख कार्य कौन - कौन से हैं?
Answer: संविधान की 11 वीं अनुसूची में वर्णित पंचायती राज संस्थाओं के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
1. कृषि, जिसमें कृषि विस्तार सम्मिलित है। कृषि उत्पादन बढ़ाना एक मुख्य कार्य है।
2. भूमि विकास, भूमि सुधार लागू करना, भूमि संगठन व भू - संरक्षण।
3. लघु सिंचाई, जल प्रबन्धन एवं नदियों के मध्य का भूमि विकास।
4. पशुधन, दुग्ध का व्यवसाय एवं मुर्गीपालन। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है।
5. मछली उद्योग।
6. वनजीवन एवं वनों में कृषि।
7. लघु वन उत्पादन।
8. लघु उद्योग, जिसमें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग भी शामिल है।
9. खादी, ग्राम तथा कुटीर उद्योग। यह स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देता है।
10. ग्रामीण विकास ।
11. ईंधन व चारा।
12. पेयजल। गाँवों में साफ पानी पहुंचाना महत्वपूर्ण है।
13. सड़क, पुल, नदी तट, जलमार्ग एवं संचार के अन्य साधन।
14. ग्रामीण, विद्युत तथा विद्युत विभाजन।
15. गैर परम्परागत ऊर्जा स्त्रोत।
16. गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम। गरीबों की मदद करना एक सामाजिक जिम्मेदारी है।
17. शिक्षा-प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा के विद्यालय।
18. तकनीकी प्रशिक्षण व व्यावसायिक शिक्षा।
19. प्रौढ़ व अनौपचारिक शिक्षा,
20. पुस्तकालय एवं वाचनालय। ज्ञान को बढ़ाना महत्वपूर्ण है।
21. पुस्तकालय एवं वाचनालय। (दोबारा लिखा गया, एक ही बिंदु है।)
22. मेले तथा बाजार। स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देते हैं।
23. सांस्कृतिक गतिविधियाँ। स्थानीय संस्कृति को जीवित रखना महत्वपूर्ण है।
24. स्वास्थ्य एवं इससे संबंधित संस्थाएँ–अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र आदि। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना आवश्यक है।
In simple words: 11वीं अनुसूची में पंचायती राज के लिए 29 काम बताए गए हैं। इनमें खेती, जमीन सुधार, पानी का इंतजाम, पशुपालन, मछली पालन, छोटे उद्योग, गाँव का विकास, बिजली, सड़कें, शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे कई काम शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: 11वीं अनुसूची में सूचीबद्ध सभी 29 विषयों को याद रखें, क्योंकि ये पंचायती राज संस्थाओं के व्यापक कार्यों को दर्शाते हैं।

 

Question 6. हमारे शहरों का स्थानीय प्रशासन कौन – कौन से कार्य करता है? वर्णन कीजिए।
Answer: शहरों का स्थानीय प्रशासन तीन तरह की संस्थाओं नगर पालिका, नगर परिषद तथा नगर निगम के माध्यम से कार्य करता है, जिसका विवरण इस प्रकार है:
1. पेयजल की व्यवस्था करना। शहरों में साफ पानी पहुंचाना एक महत्वपूर्ण काम है।
2. मल का निस्तारण करना।
3. नगर को साफ – सुथरा रखना। साफ-सफाई बनाए रखना आवश्यक है।
4. नगर में फैली बीमारियों को दूर करते हुए उपचार का प्रबंध करना। सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना।
5. सड़कों की मरम्मत व निर्माण करना। अच्छी सड़कें शहर के विकास का संकेत हैं।
6. प्रकाश अर्थात् बिजली की व्यवस्था करना।
7. जन्म तथा मृत्यु का पंजीकरण एवं प्रमाण-पत्र देना। यह नागरिक रिकॉर्ड बनाए रखने में मदद करता है।
8. अतिक्रमणों को रोकना। सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित रखना।
9. वर्षा के दिनों में जलभराव पर जल की निकासी। बाढ़ को रोकने के लिए जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करना।
10. सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण करना।
11. प्रौढ़-शिक्षा केन्द्रों की स्थापना करना।
12. धर्मशालाओं, पार्क, संग्रहालय व मूर्तियों का निर्माण व उनकी व्यवस्था करना। यह शहर की सौंदर्यता और संस्कृति को बढ़ावा देता है।
13. पार्किंग स्थलों की समुचित व्यवस्था करना।
14. शहरी गरीबी को दूर करने के लिए नीतियों का सृजन करना। गरीबों के जीवन स्तर को ऊपर उठाना।
15. काजी गृहों का प्रबंध करना।
16. वधशालाओं एवं चमड़ा उद्योग का विनियमन करना।
17. कब्रिस्तानों व मरघटों की व्यवस्था करना।
18. वाचनालय तथा पुस्तकालय का निर्माण। शिक्षा और ज्ञान को बढ़ावा देना।
19. नगरीय व वानिकी पर्यावरण संरक्षण एवं पारिस्थिकी तंत्र का प्रबंध करना। शहरों के पर्यावरण को स्वस्थ रखना।
20. गंदी व मलिन बस्तियों में समुचित व्यवस्था करना।
21. भूमि उपयोग नियमन व भवनों का निर्माण करना। शहर के विकास को योजनाबद्ध तरीके से करना।
22. नागरिकों को अग्निशमन सेवाएँ उपलब्ध करवाना। यह आपातकालीन सुरक्षा प्रदान करता है।
In simple words: शहरी प्रशासन शहरों में पानी, सफाई, सड़कें, बिजली, स्वास्थ्य सेवाएं, जन्म-मृत्यु पंजीकरण जैसी बुनियादी सुविधाएं देता है। वे गरीबी दूर करने, पर्यावरण बचाने और गंदी बस्तियों को सुधारने जैसे काम भी करते हैं।

🎯 Exam Tip: शहरी स्थानीय निकायों के मुख्य कार्यों को याद रखें, खासकर वे जो सार्वजनिक सेवाओं और शहरी विकास से संबंधित हैं।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 23 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Political Science Chapter 23 बहुंचयनात्मक प्रश्न

 

Question 2. राज्यपाल पूर्ण रूप से उत्तरदायी होता है
(अ) संसद के प्रति
(ब) राष्ट्रपति के प्रति
(स) जनता के प्रति
(द) प्रधानमंत्री के प्रति
Answer: (ब) राष्ट्रपति के प्रति
In simple words: राज्यपाल पूरी तरह से राष्ट्रपति के प्रति जवाबदेह होता है, क्योंकि राष्ट्रपति ही उसे नियुक्त करते हैं।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि राज्यपाल केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है, इसलिए उसकी जवाबदेही राष्ट्रपति के प्रति होती है।

 

Question 3. राज्यपाल पद पर नियुक्ति हेतु न्यूनतम आयु है
(अ) 25 वर्ष
(ब) 30 वर्ष
(स) 35 वर्ष
(द) 45 वर्ष
Answer: (स) 35 वर्ष
In simple words: राज्यपाल बनने के लिए कम से कम 35 साल की उम्र होनी चाहिए।

🎯 Exam Tip: विभिन्न संवैधानिक पदों के लिए निर्धारित न्यूनतम आयु सीमाएँ याद रखें, जैसे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा सदस्य आदि।

 

Question 4. राज्य के मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है
(अ) राष्ट्रपति
(ब) प्रधानमंत्री
(स) न्यायाधीश
(द) राज्यपाल
Answer: (द) राज्यपाल
In simple words: राज्य के मुख्यमंत्री को राज्यपाल नियुक्त करते हैं।

🎯 Exam Tip: मुख्यमंत्री को राज्यपाल नियुक्त करता है, लेकिन वह उस दल का नेता होना चाहिए जिसे विधानसभा में बहुमत मिला हो।

 

Question 5. राज्य का मुख्यमंत्री होता है
(अ) विधानसभा में बहुमत दल / दलों का नेता
(ब) विधानसभा का सदस्य
(स) विधानपरिषद का सदस्य
(द) विधानमंडल का मुखिया।
Answer: (अ) विधानसभा में बहुमत दल / दलों का नेता
In simple words: मुख्यमंत्री विधानसभा में सबसे ज़्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी का नेता होता है।

🎯 Exam Tip: मुख्यमंत्री राज्य सरकार का वास्तविक प्रमुख होता है, जबकि राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख होते हैं।

 

Question 6. राज्य की मंत्रिपरिषद के मुखिया को कहा जाता है
(अ) गृहमंत्री
(ब) मुख्यमंत्री
(स) राज्यपाल
(द) विधानसभा
Answer: (ब) मुख्यमंत्री
In simple words: राज्य की मंत्रिपरिषद के प्रमुख को मुख्यमंत्री कहते हैं।

🎯 Exam Tip: मुख्यमंत्री ही मंत्रिपरिषद की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं और विभागों का बंटवारा भी उन्हीं की सलाह से होता है।

 

Question 8. लोक विकेन्द्रीकृत संरचना का मुख्य अधिकर्ता व समन्वयकर्ता है
(अ) जिलाध्यक्ष
(ब) संसद
(स) जनता
(द) राष्ट्रपति
Answer: (अ) जिलाध्यक्ष
In simple words: स्थानीय स्तर पर विकेन्द्रीकृत व्यवस्था का मुख्य अधिकारी और तालमेल बैठाने वाला जिलाध्यक्ष होता है।

🎯 Exam Tip: जिलाध्यक्ष जिले में प्रशासन और विकास कार्यों की देखरेख करता है और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करता है।

 

Question 9. राज्यपाल विधानसभा में कितने आंग्ल भारतीय सदस्य मनोनीत कर सकता है?
(अ) 5
(ब) 3
(स) 1
(द) 2
Answer: (स) 1
In simple words: राज्यपाल विधानसभा में एक आंग्ल भारतीय सदस्य को चुन सकता है, अगर उन्हें लगता है कि उनकी संख्या कम है।

🎯 Exam Tip: यह प्रावधान आंग्ल-भारतीय समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए है।

 

Question 10. राज्यपाल जिला जजों की नियुक्ति किसके परामर्श से करता है?
(अ) जिला न्यायालय
(ब) क्षेत्रीय न्यायालय
(स) सर्वोच्च न्यायालय
(द) उच्च न्यायालय
Answer: (द) उच्च न्यायालय
In simple words: राज्यपाल जिला न्यायाधीशों को उच्च न्यायालय की सलाह पर नियुक्त करता है।

🎯 Exam Tip: न्यायिक नियुक्तियों में उच्च न्यायालय का परामर्श लेना, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 11. किस अनुच्छेद के अनुसार राज्यपाल विधानमंडल का अभिन्न अंग है?
(अ) अनुच्छेद 168
(ब) अनुच्छेद 169
(स) अनुच्छेद 170.
(द) कोई भी नहीं
Answer: (अ) अनुच्छेद 168
In simple words: संविधान के अनुच्छेद 168 के अनुसार राज्यपाल विधानमंडल का एक ज़रूरी हिस्सा होता है।

🎯 Exam Tip: यह अनुच्छेद स्पष्ट करता है कि राज्यपाल राज्य की विधायी प्रक्रिया का एक अविभाज्य अंग है, भले ही उसके पास प्रत्यक्ष मतदान का अधिकार न हो।

 

Question 13. कौन से संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा ग्रामीण स्थानीय शासन को सांविधानिक दर्जा दिया गया है?
(अ) 72 वाँ संशोधन अधिनियम
(ब) 73 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम
(स) 101 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम
(द) 42 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम
Answer: (ब) 73 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम
In simple words: 73वें संविधान संशोधन अधिनियम से ग्रामीण स्थानीय शासन को संवैधानिक पहचान मिली।

🎯 Exam Tip: यह संशोधन पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था।

 

Question 14. 74 वें संविधान संशोधन अधिनियम का संबंध है
(अ) नगरीय स्थानीय स्वशासन से
(ब) ग्रामीण स्थानीय स्वशासन से
(स) जिला स्तरीय स्वशासन से
(द) पंचायत समिति से
Answer: (अ) नगरीय स्थानीय स्वशासन से
In simple words: 74वां संविधान संशोधन शहरी स्थानीय शासन से जुड़ा है।

🎯 Exam Tip: 74वें संशोधन ने नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा देकर शहरी क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन को मजबूत किया।

 

Question 15. 11 वीं अनुसूची का संबंध है
(अ) शहरी स्वशासन से
(ब) पंचायती राज से
(स) नगर परिषद से
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (ब) पंचायती राज से
In simple words: 11वीं अनुसूची पंचायती राज से संबंधित है, इसमें पंचायतों के काम बताए गए हैं।

🎯 Exam Tip: 11वीं अनुसूची में पंचायतों को दिए गए 29 विषयों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये ग्रामीण विकास के विभिन्न पहलुओं को कवर करते हैं।

 

Question 16. संविधान की 11 वीं अनुसूची में विषय हैं
(अ) 18
(ब) 29
(स) 13
(द) 11
Answer: (ब) 29
In simple words: संविधान की 11वीं अनुसूची में 29 विषय शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: इन 29 विषयों में कृषि, भूमि सुधार, लघु सिंचाई, पशुपालन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं, जो स्थानीय स्तर पर विकास के लिए ज़रूरी हैं।

 

Question 17. ग्रामीण स्थानीय शासन में संबंधित समिति है
(अ) बलवंत राय मेहता समिति
(ब) अशोक मेहता समिति
(स) पी.के. शुंगल समिति
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: बलवंत राय मेहता, अशोक मेहता और पी.के. शुंगलु समितियाँ सभी ग्रामीण स्थानीय शासन से जुड़ी हैं।

🎯 Exam Tip: इन समितियों ने पंचायती राज व्यवस्था को विकसित और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, प्रत्येक ने अपने सुझावों से इसमें योगदान दिया।

 

Question 19. पंचायती राज की त्रिस्तरीय व्यवस्था करने वाली समिति थी
(अ) बलवंत राय मेहता समिति
(ब) अशोक मेहता समिति
(स) पी.के. शुंगल समिति
(द) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (अ) बलवंत राय मेहता समिति
In simple words: बलवंत राय मेहता समिति ने पंचायती राज की तीन-स्तरीय व्यवस्था बनाने को कहा था।

🎯 Exam Tip: यह समिति लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण आधारशिला थी, जिसने ग्राम, खंड और जिला स्तरों पर निकायों का सुझाव दिया।

 

Question 20. भारत के किस राज्य ने सर्वप्रथम बलवंत राय मेहता समिति की सिफारिशें लागू की
(अ) राजस्थान
(ब) पंजाब
(स) हरियाणा
(द) उत्तर प्रदेश
Answer: (अ) राजस्थान
In simple words: राजस्थान वह पहला राज्य था जिसने बलवंत राय मेहता समिति की सिफारिशें लागू कीं।

🎯 Exam Tip: राजस्थान ने 2 अक्टूबर 1959 को नागौर जिले में पंचायती राज व्यवस्था का शुभारंभ किया, जो भारत में स्थानीय स्वशासन के लिए एक ऐतिहासिक कदम था।

 

Question 21. नगर निकायों के अंतर्गत शामिल है
(अ) नगर परिषद्
(ब) नगरपालिका
(स) नगर निगम
(द) उपर्युक्त सभी।
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: नगर परिषद, नगरपालिका और नगर निगम सभी नगर निकायों में आते हैं।

🎯 Exam Tip: ये सभी शहरी स्थानीय स्वशासन के अलग-अलग स्तर हैं, जो जनसंख्या के आधार पर काम करते हैं।

 

Question 22. नगर परिषद के प्रमुख को क्या कहा जाता है?
(अ) उपसभापति
(ब) चेयरमैन
(स) सभापति
(द) महापौर
Answer: (स) सभापति
In simple words: नगर परिषद के प्रमुख को 'सभापति' कहते हैं।

🎯 Exam Tip: शहरी स्थानीय निकायों के प्रमुखों के अलग-अलग नाम होते हैं, जैसे नगर निगम के लिए 'महापौर' और नगर पालिका के लिए 'अध्यक्ष'।

 

Question 24. संविधान की 12 वीं अनुसूची में विषय हैं
(अ) 29
(ब) 13
(स) 18
(द) 36
Answer: (स) 18
In simple words: संविधान की 12वीं अनुसूची में 18 विषय शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: 12वीं अनुसूची में शहरी स्थानीय निकायों से संबंधित 18 विषय दिए गए हैं, जो उन्हें नगर नियोजन, सड़कों और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे कार्यों के लिए अधिकार देते हैं।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 22. अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. जिला प्रशासन का प्रमुख दायित्व क्या है?
Answer: जिला प्रशासन का मुख्य काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना, राजस्व इकट्ठा करना और विकास के कामों को लागू करना है. यह सुनिश्चित करता है कि जिले में सभी सरकारी योजनाएं ठीक से चलें.
In simple words: ज़िले में शांति बनाए रखना, टैक्स इकट्ठा करना और विकास के काम करना जिला प्रशासन का मुख्य काम है।

🎯 Exam Tip: जिला प्रशासन का मुख्य अधिकारी जिलाधिकारी या कलेक्टर होता है, जिसके पास तीनों (कार्यकारी, राजस्व और विकास) क्षेत्रों में व्यापक शक्तियां होती हैं।

 

Question 2. राज्यपाल विधान परिषद में कितने सदस्य मनोनीत कर सकता है?
Answer: राज्यपाल विधान परिषद में कुल सदस्यों के 1/6 हिस्से को मनोनीत कर सकता है. ये सदस्य कला, साहित्य, विज्ञान, सहकारिता और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों से आते हैं.
In simple words: राज्यपाल विधान परिषद के कुल सदस्यों के छठे हिस्से को नियुक्त कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: यह मनोनयन व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी विधायी प्रक्रिया में भाग ले सकें।

 

Question 3. मन्त्रिपरिषद की बैठक की तिथि वे स्थान कौन तय करता है।
Answer: मंत्रिपरिषद की बैठक की तारीख और जगह मुख्यमंत्री तय करते हैं. मुख्यमंत्री ही कैबिनेट की बैठकों की अध्यक्षता भी करते हैं.
In simple words: मुख्यमंत्री मंत्रिपरिषद की बैठक कब और कहाँ होगी, यह तय करते हैं।

🎯 Exam Tip: मुख्यमंत्री का यह अधिकार उन्हें सरकार के कामकाज पर महत्वपूर्ण नियंत्रण देता है और नीतियों के निर्धारण में उनकी केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है।

 

Question 4. भारत के संविधान में "राज्यों का संघ" शब्द का प्रयोग किस बात की ओर संकेत करता है?
Answer: भारतीय संविधान में "राज्यों का संघ" शब्द इस बात की ओर संकेत करता है कि भारत एक संघ है जो विभिन्न राज्यों से मिलकर बना है, लेकिन किसी भी राज्य को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है। यह भारत की अविनाशी प्रकृति को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि भारत में राज्य आपसी समझौते का परिणाम नहीं हैं.
In simple words: "राज्यों का संघ" का मतलब है कि भारत कई राज्यों से बना है, पर कोई भी राज्य भारत से अलग नहीं हो सकता।

🎯 Exam Tip: यह वाक्यांश भारत के संघीय ढांचे की प्रकृति को स्पष्ट करता है, जहां केंद्र मजबूत है लेकिन राज्यों को भी स्वायत्तता प्राप्त है।

 

Question 6. किसकी स्वीकृति के बिना धन विधेयक को विधानसभा में प्रस्तुत नही किया जा सकता है?
Answer: धन विधेयक को विधानसभा में पेश करने से पहले राज्यपाल की मंजूरी लेना ज़रूरी है. राज्यपाल की अनुमति के बिना कोई भी धन विधेयक पास नहीं हो सकता.
In simple words: धन विधेयक को विधानसभा में पेश करने के लिए राज्यपाल की मंज़ूरी ज़रूरी है।

🎯 Exam Tip: यह प्रावधान राज्यपाल को राज्य के वित्तीय मामलों में एक महत्वपूर्ण नियामक भूमिका प्रदान करता है।

 

Question 7. किसकी स्वीकृति के बिना राज्य के राजस्व की कोई राशि व्यय नही की जा सकती है?
Answer: राज्य के राजस्व से कोई भी पैसा खर्च करने के लिए राज्यपाल की स्वीकृति आवश्यक होती है. यह सुनिश्चित करता है कि राज्य के वित्तीय मामलों में उचित नियंत्रण रहे.
In simple words: राज्य का पैसा खर्च करने के लिए राज्यपाल की मंज़ूरी लेनी पड़ती है।

🎯 Exam Tip: राज्यपाल की स्वीकृति राज्य के वित्त पर नियंत्रण का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो सरकार की वित्तीय जवाबदेही को बढ़ाता है।

 

Question 8. राज्य निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति कौन करता है?
Answer: राज्य निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है. यह अधिकारी राज्य में पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार होता है.
In simple words: राज्यपाल राज्य निर्वाचन अधिकारी को नियुक्त करते हैं।

🎯 Exam Tip: राज्य निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है, जो स्थानीय निकायों के चुनावों को निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से आयोजित कराता है।

 

Question 9. राज्यपाल की किन्हीं दो शक्तियों का उल्लेख कीजिए।
Answer: राज्यपाल की दो मुख्य शक्तियाँ ये हैं: 1. मुख्यमंत्री को नियुक्त करना, जो विधानसभा में बहुमत दल का नेता होता है. 2. हर वित्तीय वर्ष का बजट विधानसभा में पेश करवाना, जिससे राज्य के खर्चों और आय का हिसाब दिया जा सके.
In simple words: राज्यपाल मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों को नियुक्त करते हैं, और मुख्यमंत्री की सलाह से मंत्रियों के विभाग बाँटते हैं।

🎯 Exam Tip: राज्यपाल की शक्तियाँ व्यापक होती हैं, जिनमें कार्यकारी, विधायी, वित्तीय और न्यायिक शक्तियां शामिल हैं, जो राज्य के शासन में उनकी केंद्रीय भूमिका को दर्शाती हैं।

 

Question 10. जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है?
Answer: जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं. वे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से सलाह लेने के बाद यह नियुक्ति करते हैं.
In simple words: राज्यपाल जिला न्यायाधीशों को नियुक्त करते हैं।

🎯 Exam Tip: यह नियुक्ति प्रक्रिया न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें उच्च न्यायिक अधिकारियों का परामर्श शामिल होता है।

 

Question 11. भारत में राज्यों के उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है?
Answer: भारत में राज्यों के उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, लेकिन इसमें राज्यपाल और सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सलाह ली जाती है। यह प्रक्रिया न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करती है।
In simple words: राष्ट्रपति, राज्यपाल और सर्वोच्च न्यायालय की सलाह से राज्यों के उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को नियुक्त करते हैं।

🎯 Exam Tip: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति में केंद्र और राज्य दोनों के प्रमुखों की भागीदारी होती है, जो संघीय ढांचे में संतुलन बनाए रखती है।

 

Question 13. राज्य का शासनाध्यक्ष एवं वास्तविक कार्यपालक कौन होता है?
Answer: राज्य का वास्तविक शासनाध्यक्ष और कार्यपालक मुख्यमंत्री होता है. वह राज्य सरकार का प्रमुख होता है और सभी बड़े निर्णय लेता है.
In simple words: मुख्यमंत्री राज्य का असली मुखिया और काम करने वाला अधिकारी होता है।

🎯 Exam Tip: मुख्यमंत्री की शक्तियां और जिम्मेदारियां बहुत व्यापक होती हैं, जिनमें नीति निर्माण, प्रशासन का नेतृत्व और विधानसभा के प्रति जवाबदेही शामिल है।

 

Question 14. ग्रामीण स्थानीय स्वशासन को किस नाम से जाना जाता है?
Answer: ग्रामीण स्थानीय स्वशासन को आमतौर पर पंचायती राज के नाम से जाना जाता है. यह ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर शासन की व्यवस्था है.
In simple words: गाँव के स्थानीय शासन को पंचायती राज कहते हैं।

🎯 Exam Tip: पंचायती राज व्यवस्था भारत में लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक ले जाने और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 15. ग्रामीण एवं शहरी स्थानीय स्वशासन संस्थाओं का कार्यकाल बताइए।
Answer: ग्रामीण और शहरी स्थानीय स्वशासन संस्थाओं, जैसे ग्राम पंचायत और नगरपालिका का कार्यकाल 5 साल का होता है. चुनाव हर 5 साल में होते हैं.
In simple words: ग्रामीण और शहरी स्थानीय शासन का कार्यकाल 5 साल का होता है।

🎯 Exam Tip: यह निश्चित कार्यकाल स्थानीय निकायों में स्थिरता सुनिश्चित करता है और उन्हें अपने विकास कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने का अवसर देता है।

 

Question 16. किसने भारतीय गाँवों को गणराज्यों की संज्ञा दी है?
Answer: इतिहासकार अल्टेकर ने भारतीय गाँवों को 'छोटे-छोटे गणराज्यों' कहा था. उनका मानना था कि ये गाँव अपने मामलों में काफी हद तक स्वतंत्र थे.
In simple words: अल्टेकर ने भारतीय गाँवों को छोटे गणराज्यों की तरह बताया था।

🎯 Exam Tip: यह दर्शाता है कि प्राचीन काल से ही भारतीय गांवों में स्थानीय स्वायत्तता की एक मजबूत परंपरा रही है।

 

Question 17. वित्त आयोग का क्या कार्य है?
Answer: वित्त आयोग का काम यह है कि वह स्थानीय निकायों को ज़रूरत के हिसाब से सरकारी खजाने से पैसे दिलवाए और उनके पैसों के हिसाब-किताब की जांच करे. यह स्थानीय संस्थाओं को आर्थिक रूप से मज़बूत करता है.
In simple words: वित्त आयोग स्थानीय संस्थाओं को पैसा देता है और उनके खातों की जांच करता है।

🎯 Exam Tip: वित्त आयोग केंद्र और राज्य सरकारों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

Question 18. राज्य में वित्त आयोग कौन गठित करता है?
Answer: राज्य में वित्त आयोग का गठन राज्यपाल द्वारा किया जाता है. यह हर पाँच साल में पंचायतों और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है.
In simple words: राज्यपाल राज्य में वित्त आयोग बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: राज्यपाल का यह कदम स्थानीय स्वशासन को वित्तीय रूप से स्वतंत्र और जवाबदेह बनाने में सहायक होता है।

 

Question 20. स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को अनुदान कहाँ से प्राप्त होता है?
Answer: स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को राज्य सरकारों से वित्तीय सहायता या अनुदान मिलता है. यह पैसा उन्हें अपने विकास और प्रशासनिक कार्यों के लिए मिलता है.
In simple words: स्थानीय संस्थाओं को राज्य सरकारें पैसा देती हैं।

🎯 Exam Tip: यह अनुदान स्थानीय निकायों को अपने क्षेत्रों में बुनियादी सेवाएं और विकास परियोजनाएं चलाने में मदद करता है।

 

Question 21. जिला परिषद का अध्यक्ष को किस नाम से जानते हैं?
Answer: जिला परिषद के अध्यक्ष को 'जिला प्रमुख' कहा जाता है. यह जिला स्तर पर पंचायती राज व्यवस्था का मुखिया होता है.
In simple words: जिला परिषद के अध्यक्ष को जिला प्रमुख कहते हैं।

🎯 Exam Tip: जिला प्रमुख जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और विभिन्न योजनाओं के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

Question 22. पंचायती राज की ग्राम स्तरीय संस्था का नाम बताइए।
Answer: पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम स्तर पर जो संस्था होती है, उसे ग्राम पंचायत कहते हैं. यह गाँवों में स्थानीय प्रशासन का सबसे निचला स्तर है.
In simple words: गाँव के स्तर पर पंचायती राज की संस्था ग्राम पंचायत है।

🎯 Exam Tip: ग्राम पंचायतें गाँवों में सीधे लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करती हैं और स्थानीय समस्याओं का समाधान करती हैं।

 

Question 23. पंचायती राज की खण्ड स्तरीय संस्था का नाम बताइए।
Answer: पंचायती राज व्यवस्था में खंड या ब्लॉक स्तर पर काम करने वाली संस्था को पंचायत समिति कहते हैं. यह ग्राम पंचायतों और जिला परिषदों के बीच कड़ी का काम करती है.
In simple words: खंड स्तर पर पंचायती राज की संस्था पंचायत समिति है।

🎯 Exam Tip: पंचायत समिति ब्लॉक स्तर पर विभिन्न विकास कार्यक्रमों का क्रियान्वयन और निगरानी करती है।

 

Question 24. पंचायती राज की जिला स्तरीय संस्था का नाम बताइए।
Answer: पंचायती राज व्यवस्था में जिला स्तर पर काम करने वाली संस्था को जिला परिषद कहते हैं. यह पूरे ज़िले के ग्रामीण विकास की निगरानी करती है.
In simple words: ज़िला स्तर पर पंचायती राज की संस्था जिला परिषद है।

🎯 Exam Tip: जिला परिषद जिले की सभी ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के बीच समन्वय स्थापित करने का काम करती है।

 

Question 25. ग्राम पंचायत के अध्यक्ष को किस नाम से जाना जाता है?
Answer: ग्राम पंचायत के अध्यक्ष को 'सरपंच' कहते हैं. सरपंच गाँव का मुखिया होता है और गाँव के विकास कार्यों का नेतृत्व करता है.
In simple words: ग्राम पंचायत के अध्यक्ष को सरपंच कहते हैं।

🎯 Exam Tip: सरपंच गाँव के सभी मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और ग्राम सभा की बैठकों की अध्यक्षता भी करता है।

 

Question 26. जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को किस नाम से जाना जाता है?
Answer: जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के नाम से जाना जाता है। वह जिला परिषद के प्रशासनिक कार्यों का प्रबंधन करता है।
In simple words: जिला परिषद के मुख्य अधिकारी को सीईओ कहते हैं।

🎯 Exam Tip: मुख्य कार्यकारी अधिकारी एक सरकारी अधिकारी होता है जो जिला परिषद के निर्णयों को लागू करने और उसके दैनिक प्रशासनिक कार्यों का प्रबंधन करने के लिए जिम्मेदार होता है।

 

Question 28. नगरीय स्वशासन की सबसे छोटी संस्था का नाम बताइए।
Answer: नगरीय स्वशासन की सबसे छोटी संस्था नगर पंचायत है. यह ऐसे क्षेत्रों में होती है जो ग्रामीण से शहरी में बदल रहे होते हैं.
In simple words: शहरी शासन की सबसे छोटी संस्था नगर पंचायत है।

🎯 Exam Tip: नगर पंचायतें संक्रमणकालीन क्षेत्रों के लिए बनाई जाती हैं, जहां ग्रामीण और शहरी विशेषताओं का मिश्रण होता है।

 

Question 29. त्रिस्तरीय पंचायत राज प्रणाली लागू करने की सिफारिश किस समिति ने की?
Answer: त्रिस्तरीय पंचायती राज प्रणाली को लागू करने की सिफारिश बलवंत राय मेहता समिति ने की थी. इस समिति की रिपोर्ट ने भारत में स्थानीय स्वशासन की नींव रखी.
In simple words: बलवंत राय मेहता समिति ने तीन-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था बनाने को कहा था।

🎯 Exam Tip: यह समिति 1957 में गठित की गई थी और इसकी सिफारिशों को 1959 में राजस्थान में पहली बार लागू किया गया।

 

Question 30. पंचायती राज व्यवस्था में सुधार हेतु गठित किन्हीं दो समितियों के नाम लिखिए।
Answer: पंचायती राज व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए दो मुख्य समितियाँ थीं: 1. अशोक मेहता समिति, जो 1977 में बनी थी, और 2. जी.वी.के. राव समिति, जो 1985 में बनी थी. इन समितियों ने सुधार के कई सुझाव दिए थे.
In simple words: अशोक मेहता समिति और जी.वी.के. राव समिति पंचायती राज सुधार के लिए बनी थीं।

🎯 Exam Tip: इन समितियों ने पंचायती राज व्यवस्था में विभिन्न कमियों की पहचान की और उन्हें दूर करने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिससे इसकी कार्यप्रणाली में सुधार आया।

 

Question 31. जी.वी.के. राव समिति की कोई दो प्रमुख सिफारिशें लिखिए।
Answer: जी.वी.के. राव समिति की दो मुख्य सिफारिशें थीं: 1. ग्राम पंचायतों को ज़्यादा आर्थिक अधिकार दिए जाएँ ताकि वे अपने काम खुद कर सकें. 2. हर राज्य में एक राज्य वित्त आयोग बनाया जाए जो पंचायतों के पैसों का हिसाब देखे.
In simple words: राव समिति ने पंचायतों को ज़्यादा पैसे देने और राज्य वित्त आयोग बनाने की सिफारिश की थी।

🎯 Exam Tip: जी.वी.के. राव समिति ने पंचायती राज संस्थाओं को 'बिना जड़ की घास' कहा था और उन्हें सशक्त बनाने के लिए कई प्रशासनिक और वित्तीय सुधारों का सुझाव दिया था।

 

Question 32. नगरपालिका की स्थापना कब की जाती है?
Answer: नगरपालिका की स्थापना उन शहरों में की जाती है जिनकी आबादी 10 हज़ार से 1 लाख के बीच होती है. यह शहर के स्थानीय विकास और प्रबंधन का काम देखती है.
In simple words: नगरपालिका 10 हज़ार से 1 लाख आबादी वाले शहरों में बनती है।

🎯 Exam Tip: नगरपालिकाएं शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सेवाओं, स्वच्छता और सार्वजनिक सुविधाओं के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होती हैं।

 

Question 33. नगर निगम के प्रमुख को किस नाम से जाना जाता है?
Answer: नगर निगम के प्रमुख को मेयर अथवा महापौर कहा जाता है। वह शहर के प्रशासन का सर्वोच्च अधिकारी होता है।
In simple words: नगर निगम के मुखिया को मेयर या महापौर कहते हैं।

🎯 Exam Tip: महापौर शहर का पहला नागरिक होता है और नगर निगम की बैठकों की अध्यक्षता करता है, जो शहर के महत्वपूर्ण निर्णयों को प्रभावित करता है।

 

Question 35. नगर निकायों को कानून बनाने का अधिकार किस अनुसूची के अंतर्गत दिया गया है?
Answer: नगर निकायों को कानून बनाने का अधिकार संविधान की 12वीं अनुसूची के अंर्तगत दिया गया है।
In simple words: नगर निकायों को कानून बनाने का अधिकार 12वीं अनुसूची में मिला है।

🎯 Exam Tip: 12वीं अनुसूची में 18 विषय शामिल हैं जिन पर शहरी स्थानीय निकाय कानून बना सकते हैं, जैसे नगर नियोजन, भूमि उपयोग का विनियमन और सार्वजनिक स्वास्थ्य।

 

Question 36. नगर निगम की स्थापना कहाँ की जाती है?
Answer: नगर निगम की स्थापना उन बड़े शहरों में की जाती है जिनकी आबादी 3 लाख से ज़्यादा होती है. यह शहर के बुनियादी ढांचे और सेवाओं का प्रबंधन करता है.
In simple words: नगर निगम बड़े शहरों में बनता है, जहाँ 3 लाख से ज़्यादा लोग रहते हैं।

🎯 Exam Tip: नगर निगम शहरी प्रशासन का सबसे बड़ा रूप है और बड़े शहरों में नागरिक सुविधाओं और विकास की जिम्मेदारी निभाता है।

 

Question 37. संविधान की 11वीं अनुसूची में पंचायतों को कितने प्रकार के कार्य करने का अधिकार दिया गया है?
Answer: संविधान की 11वीं अनुसूची में 29 प्रकार के कार्य करने का अधिकार पंचायतों को दिया गया है।
In simple words: 11वीं अनुसूची में पंचायतों को 29 तरह के काम करने का अधिकार मिला है।

🎯 Exam Tip: ये 29 विषय ग्रामीण विकास, गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक वितरण जैसे क्षेत्रों को कवर करते हैं, जिससे पंचायतों को स्थानीय स्तर पर व्यापक अधिकार मिलते हैं।

 

Question 38. पंचायती राज संस्थाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने के लिए प्रत्येक 5 वर्ष पश्चात किस आयोग का गठन किया जाता है?
Answer: वित्त आयोग का।
In simple words: हर 5 साल में वित्त आयोग बनता है, जो पंचायती राज संस्थाओं के पैसों की जांच करता है।

🎯 Exam Tip: राज्य वित्त आयोग यह सुनिश्चित करता है कि स्थानीय निकायों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन मिलें और वे उनका उचित उपयोग करें।

 

Question 39. भारत में पंचायती राज शासन प्रणाली को आदर्श रूप किस शासनकाल में देखा जा सकता है।
Answer: भारत में पंचायती राज व्यवस्था का सबसे अच्छा रूप चोल काल में देखा जा सकता है. इस दौरान स्थानीय स्वशासन बहुत मज़बूत और प्रभावी था.
In simple words: चोल राजाओं के समय में पंचायती राज सबसे अच्छा था।

🎯 Exam Tip: चोल साम्राज्य में गांव स्तर पर स्वायत्त संस्थाएं थीं जो अपने मामलों का प्रबंधन स्वयं करती थीं, जो आधुनिक पंचायती राज प्रणाली का एक प्रारंभिक मॉडल थी।

 

Question 40. खण्ड स्तर पर पंचायत समिति के अध्यक्ष को किस नाम से जाना जाता है।
Answer: खण्ड स्तर पर पंचायत समिति के अध्यक्ष को 'प्रधान' के नाम से जाना जाता है। वह अपने खंड के विकास कार्यों का नेतृत्व करता है।
In simple words: खंड स्तर पर पंचायत समिति के अध्यक्ष को 'प्रधान' कहते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रधान ब्लॉक स्तर पर ग्रामीण विकास योजनाओं को लागू करने और ग्राम पंचायतों के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

Question 2. राज्यपाल की नियुक्ति तथा इस पद के लिए निर्धारित योग्यताओं का वर्णन कीजिए।
Answer: राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है. इस पद के लिए कुछ ज़रूरी योग्यताएँ होती हैं, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 157 में बताया गया है. इन योग्यताओं में शामिल हैं: 1. व्यक्ति को भारत का नागरिक होना चाहिए. 2. उसकी उम्र 35 साल पूरी हो चुकी हो. 3. वह संसद या किसी राज्य के विधानमंडल का सदस्य नहीं होना चाहिए. 4. उसे कोई सरकारी लाभ का पद नहीं संभालना चाहिए. ये शर्तें राज्यपाल के पद की गरिमा और स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए ज़रूरी हैं. राज्यपाल केंद्र और राज्य के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है.
In simple words: राज्यपाल को राष्ट्रपति चुनते हैं. उसे भारत का नागरिक होना चाहिए, 35 साल की उम्र पूरी होनी चाहिए, विधायक या सांसद नहीं होना चाहिए, और कोई सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए।

🎯 Exam Tip: राज्यपाल की योग्यताएं राष्ट्रपति की योग्यताओं के समान हैं, सिवाय इसके कि राज्यपाल को किसी राज्य विशेष का निवासी नहीं होना चाहिए।

 

Question 3. राज्यपाल की बदलती हुई भूमिका के प्रमुख कारक कौन-कौन से हैं?
Answer: राज्यपाल की भूमिका समय के साथ काफी बदल गई है, खासकर राजनीतिक माहौल बदलने के कारण. पहले यह पद ज़्यादातर औपचारिक था, लेकिन अब यह बहुत शक्तिशाली और महत्वपूर्ण हो गया है. राज्यपाल को राष्ट्रपति द्वारा 5 साल के लिए नियुक्त किया जाता है, लेकिन वे नए राज्यपाल के आने तक पद पर बने रह सकते हैं. राष्ट्रपति चाहें तो उन्हें 5 साल से पहले भी हटा सकते हैं या उनका तबादला कर सकते हैं. इन बदलावों का मुख्य कारण राज्य और केंद्र के बीच के राजनीतिक संबंध हैं. राज्यपाल की भूमिका में यह परिवर्तन भारतीय राजनीति के संघीय ढांचे को भी प्रभावित करता है.
In simple words: राज्यपाल की भूमिका राजनीतिक बदलावों के कारण बहुत बदल गई है. पहले यह पद औपचारिक था, अब ज़्यादा शक्तिशाली हो गया है।

🎯 Exam Tip: राज्यपाल की भूमिका दलगत राजनीति, गठबंधन सरकारों और संवैधानिक संकटों के कारण अधिक जटिल और निर्णायक हो गई है।

 

Question 4. राज्यपाल को मनोनीत करने के प्रमुख कारण कौन-कौन से हैं?
Answer: राज्यपाल को नियुक्त करने के कई मुख्य कारण हैं, जिन्हें राष्ट्रपति चुनते हैं. 1. देश और राज्यों दोनों में संसदीय शासन प्रणाली है, जहाँ एक संवैधानिक प्रमुख की ज़रूरत होती है. 2. राज्यपाल को नाममात्र की कार्यपालिका शक्ति दी जाती है ताकि असली शक्ति मुख्यमंत्री के पास रहे. 3. राज्यपाल राज्य में एक स्वतंत्र और निष्पक्ष मध्यस्थ और निर्णायक की तरह काम करते हैं. 4. भारत की विविधता को देखते हुए, राज्यों और केंद्र के बीच एकता और अखंडता बनाए रखने में राज्यपाल की भूमिका अहम है. यह पद केंद्र और राज्य के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है.
In simple words: राज्यपाल को राष्ट्रपति चुनते हैं ताकि वे राज्य के संवैधानिक प्रमुख बनें, मुख्यमंत्री को काम करने दें, निष्पक्ष रहें और देश की एकता बनाए रखें।

🎯 Exam Tip: राज्यपाल की नियुक्ति का यह तरीका भारत के संघीय ढांचे में केंद्र सरकार को राज्यों पर कुछ नियंत्रण प्रदान करने में मदद करता है।

 

Question 5. राज्यपाल की नियुक्ति के संबंध में विकसित परम्पराओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारतीय संविधान लागू होने के बाद से राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर कुछ परंपराएँ विकसित हुई हैं. इनमें से कुछ मुख्य बातें हैं: 1. आमतौर पर, किसी व्यक्ति को उसी राज्य का राज्यपाल नहीं बनाया जाता जहाँ का वह निवासी हो. 2. हालांकि राज्य मंत्रिपरिषद से राज्यपाल के नाम पर सहमति लेने की परंपरा है, पर इसका पालन हमेशा नहीं होता. 3. वरिष्ठ राजनेताओं, अनुभवी अधिकारियों और सेना के सेवानिवृत्त अधिकारियों को राज्यपाल नियुक्त किया जाता है. 4. प्रशासनिक सुधार आयोग ने सुझाव दिया है कि किसी व्यक्ति को केवल एक बार ही राज्यपाल बनाना चाहिए. ये परंपराएँ राज्यपाल के पद की निष्पक्षता और सम्मान बनाए रखने में मदद करती हैं. ये परंपराएं राज्यपाल के पद की स्वायत्तता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में सहायक होती हैं.
In simple words: राज्यपाल की नियुक्ति के लिए कुछ खास बातें मानी जाती हैं, जैसे अपने राज्य का निवासी न होना और एक ही बार राज्यपाल बनना।

🎯 Exam Tip: इन परंपराओं का उद्देश्य राज्यपाल को दलगत राजनीति से ऊपर रखना और उन्हें एक निष्पक्ष संवैधानिक प्रमुख के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाना है।

 

Question 6. राज्यपाल की कार्यपालिका शक्तियों का उल्लेख कीजिए।
Answer: राज्यपाल की कार्यपालिका शक्तियाँ बहुत महत्वपूर्ण होती हैं. उनमें से दो मुख्य ये हैं: 1. राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करते हैं और मुख्यमंत्री की सलाह पर बाकी मंत्रियों को भी नियुक्त करते हैं. 2. मंत्रियों के बीच विभागों का बँटवारा भी मुख्यमंत्री की सलाह से राज्यपाल ही करते हैं. इन शक्तियों के माध्यम से राज्यपाल राज्य के प्रशासन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं. राज्यपाल राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और महाधिवक्ता जैसे महत्वपूर्ण अधिकारियों की भी नियुक्ति करते हैं.
In simple words: राज्यपाल मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों को नियुक्त करते हैं, और मुख्यमंत्री की सलाह से मंत्रियों के विभाग बाँटते हैं।

🎯 Exam Tip: राज्यपाल की कार्यपालिका शक्तियां उसे राज्य के प्रशासन का औपचारिक प्रमुख बनाती हैं, हालांकि वास्तविक शक्ति मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास होती है।

 

Question 7. राज्यपाल के विधायी अधिकार लिखिए।
Answer: राज्यपाल के कई महत्वपूर्ण विधायी अधिकार हैं. 1. राज्यपाल राज्य विधानमंडल का एक ज़रूरी हिस्सा होता है. वह विधानमंडल के सत्र बुला सकता है, उन्हें खत्म कर सकता है और विधानसभा को भंग भी कर सकता है. 2. आम चुनावों के बाद, वह विधानमंडल की पहली बैठक को संबोधित करते हैं. 3. राज्यपाल विधानमंडल को किसी भी विषय पर संदेश भेज सकते हैं. 4. जब विधानमंडल सत्र में न हो, तो राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकते हैं. ये अध्यादेश 6 सप्ताह तक लागू रहते हैं और अगर विधानमंडल उन्हें मंज़ूर कर ले, तो वे कानून बन जाते हैं, वरना रद्द हो जाते हैं. 5. यदि विधानमंडल किसी सामान्य विधेयक को दोबारा पास करता है, तो राज्यपाल को उसे मंज़ूरी देनी होती है. 6. जब कोई विधेयक राज्यपाल के पास मंज़ूरी के लिए आता है, तो उनके पास उसे मंज़ूर करने, अस्वीकार करने या राष्ट्रपति की सहमति के लिए सुरक्षित रखने का अधिकार होता है. ये अधिकार राज्य की कानून बनाने की प्रक्रिया में राज्यपाल की महत्वपूर्ण भूमिका दर्शाते हैं.
In simple words: राज्यपाल विधानमंडल के सत्र बुलाते हैं, पहली बैठक को संबोधित करते हैं, अध्यादेश जारी करते हैं और विधेयकों को मंज़ूरी देते हैं या राष्ट्रपति के लिए सुरक्षित रखते हैं।

🎯 Exam Tip: अध्यादेश की शक्ति राज्यपाल को आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत कानून बनाने में सक्षम बनाती है, जब विधानमंडल सत्र में न हो।

 

Question 8. राज्यपाल की वित्तीय शक्तियों का उल्लेख कीजिए।
Answer: राज्यपाल के पास कुछ ज़रूरी वित्तीय शक्तियाँ भी होती हैं. 1. कोई भी धन विधेयक राज्यपाल की पहले से मंज़ूरी के बिना विधानसभा में पेश नहीं किया जा सकता. 2. राज्य के सरकारी खजाने से किसी भी पैसे को खर्च करने के लिए राज्यपाल की स्वीकृति ज़रूरी है. 3. राज्य का वार्षिक बजट भी राज्यपाल के नाम पर ही विधानसभा में पेश किया जाता है. 4. किसी भी अप्रत्याशित खर्च के लिए आकस्मिक निधि से पैसा निकालने के लिए राज्यपाल की अनुमति चाहिए होती है. ये शक्तियाँ राज्य के वित्तीय मामलों में राज्यपाल के नियंत्रण को सुनिश्चित करती हैं. राज्यपाल यह भी सुनिश्चित करते हैं कि राज्य वित्त आयोग का गठन समय पर हो.
In simple words: राज्यपाल की मंज़ूरी के बिना धन विधेयक पेश नहीं हो सकता, राज्य का पैसा खर्च नहीं हो सकता और बजट भी उनके नाम पर पेश होता है।

🎯 Exam Tip: राज्यपाल की वित्तीय शक्तियां यह सुनिश्चित करती हैं कि राज्य के वित्त का प्रबंधन संवैधानिक प्रावधानों और उचित प्रक्रियाओं के अनुसार हो।

 

Question 9. राज्यपाल की न्याय संबंधी शक्तियाँ बताइए।
Answer: राज्यपाल के पास कुछ न्यायिक शक्तियाँ होती हैं, जो इस प्रकार हैं: 1. संविधान के अनुच्छेद 161 के अनुसार, राज्यपाल राज्य के कानूनों के खिलाफ अपराध करने वाले लोगों की सज़ा को कम कर सकता है, रोक सकता है, बदल सकता है या माफ़ कर सकता है. 2. उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में राष्ट्रपति को राज्यपाल सलाह देते हैं. 3. राज्यपाल जिला न्यायाधीशों को नियुक्त करते हैं. 4. जब तक राज्यपाल अपने पद पर हैं, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता. ये शक्तियाँ सुनिश्चित करती हैं कि न्याय प्रक्रिया में उनका एक महत्वपूर्ण स्थान हो. यह शक्ति राज्यपाल को न्यायिक सुधारों में भी योगदान देने का अवसर देती है.
In simple words: राज्यपाल सज़ा कम कर सकते हैं या माफ़ कर सकते हैं, न्यायाधीशों की नियुक्ति में सलाह देते हैं और उन पर पद पर रहते हुए मुकदमा नहीं चल सकता।

🎯 Exam Tip: राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति मृत्युदंड के मामलों में लागू नहीं होती, यह केवल राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में आता है।

 

Question 10. राज्यपाल की स्वविवेकीय एवं अन्य शक्तियों के बारे में बताइए।
Answer: राज्यपाल के पास कुछ विवेकाधीन और अन्य विशेष शक्तियाँ होती हैं: 1. यदि राज्य में संवैधानिक व्यवस्था बिगड़ जाए, तो राज्यपाल राष्ट्रपति को इसकी जानकारी देते हैं, जिसके बाद राष्ट्रपति शासन लग सकता है. 2. आपातकाल के दौरान, राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में काम करते हैं. 3. असम के राज्यपाल को असम सरकार के तौर पर और आदिवासी क्षेत्रों की जिला परिषदों के बीच खनन से होने वाली आय के बँटवारे से जुड़े विवादों में अपने विवेक से काम करने का अधिकार है. 4. बिहार, मध्य प्रदेश और ओडिशा में राज्यपाल का एक खास कर्तव्य है कि वे आदिवासी समुदायों के कल्याण के लिए एक मंत्री की नियुक्ति करें. ये शक्तियाँ राज्यपाल को विशेष परिस्थितियों में स्वायत्त निर्णय लेने का अधिकार देती हैं. इन शक्तियों का उपयोग राज्य के हित में किया जाता है.
In simple words: राज्यपाल राष्ट्रपति को राज्य की स्थिति की जानकारी देते हैं, आपातकाल में राष्ट्रपति के एजेंट के रूप में काम करते हैं, और कुछ राज्यों में आदिवासी कल्याण के लिए विशेष काम करते हैं।

🎯 Exam Tip: विवेकाधीन शक्तियाँ राज्यपाल को कुछ परिस्थितियों में मुख्यमंत्री या मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना भी निर्णय लेने का अधिकार देती हैं, जो पद की जटिलता को बढ़ाती हैं।

 

Question 11. मुख्यमन्त्री की नियुक्ति कैसे होती है? बताइए।
Answer: मुख्यमंत्री की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत राज्यपाल करते हैं. राज्यपाल आमतौर पर उस व्यक्ति को मुख्यमंत्री नियुक्त करते हैं, जो विधानसभा में बहुमत प्राप्त दल का नेता हो या जिसके पास बहुमत का समर्थन हो. ऐसा इसलिए होता है ताकि सरकार स्थिर रहे और कुशलता से काम कर सके. राज्यपाल यह सुनिश्चित करते हैं कि नियुक्त व्यक्ति विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर सके.
In simple words: मुख्यमंत्री को राज्यपाल नियुक्त करते हैं. वे ऐसे व्यक्ति को चुनते हैं, जिसे विधानसभा में ज़्यादातर विधायकों का समर्थन मिला हो।

🎯 Exam Tip: यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत न मिले, तो राज्यपाल अपने विवेक का उपयोग करके सबसे बड़े दल या गठबंधन के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त कर सकते हैं, जिसे एक निश्चित समय में बहुमत साबित करना होता है।

 

Question 12. मुख्यमंत्री और राज्य मंत्रिपरिषद के संबंधों की विवेचना कीजिए।
Answer: मुख्यमंत्री राज्य का वास्तविक मुखिया होता है। राज्य मंत्री परिषद को बनाना, तोड़ना, और विभागों को बांटना मुख्यमंत्री के हाथ में होता है। हर मंत्री मुख्यमंत्री की मर्जी से ही पद पर रहता है। मुख्यमंत्री किसी भी मंत्री से इस्तीफा मांग सकता है या उसे राज्यपाल से हटवा भी सकता है। मुख्यमंत्री ही मंत्री परिषद की बैठकों का समय और जगह तय करता है। वह इन बैठकों की अध्यक्षता भी करता है। मंत्री परिषद के फैसलों पर अंतिम मंजूरी या नामंजूरी मुख्यमंत्री की इच्छा पर निर्भर करती है। अगर मुख्यमंत्री इस्तीफा दे देता है, तो पूरी मंत्री परिषद का इस्तीफा माना जाता है। मुख्यमंत्री का पद बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि वह राज्य के सभी विभागों को एक साथ चलाने में मदद करता है।
In simple words: मुख्यमंत्री राज्य का असली नेता होता है। वह मंत्रियों को चुनता है, विभाग बांटता है और उनकी बैठकों की अध्यक्षता करता है। अगर मुख्यमंत्री इस्तीफा देता है, तो सारे मंत्री हट जाते हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में मुख्यमंत्री की वास्तविक शक्तियों और मंत्रिपरिषद पर उसके नियंत्रण को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए।

 

Question 13. मन्त्रिपरिषद् की शक्तियों तथा कार्यों की विवेचना कीजिए।
Answer: राज्य की कार्यपालिका शक्ति मंत्री परिषद में होती है। मंत्री परिषद के मुख्य कार्य और शक्तियाँ इस प्रकार हैं:
(1) शासन की नीति निर्धारित करना – मंत्री परिषद का सबसे जरूरी काम शासन की नीतियां तय करना है। चाहे वह गृह विभाग हो या शिक्षा, सभी नीतियां मंत्री परिषद द्वारा ही तय की जाती हैं।
(2) बजट तैयार करवाना – राज्य का सालाना बजट वित्त मंत्री द्वारा विधानसभा में पेश करने से पहले मंत्री परिषद की तय नीतियों के आधार पर तैयार किया जाता है। बजट पास करवाना भी मंत्री परिषद की जिम्मेदारी होती है। यह वित्तीय योजना राज्य की प्राथमिकताओं को दर्शाती है।
(3) विधानमंडल में शासन का प्रतिनिधित्व – मंत्री परिषद विधानमंडल की बैठकों में सरकार का प्रतिनिधित्व करती है। मंत्री विधानमंडल और विधान परिषद में मौजूद होकर सदस्यों के सवालों के जवाब देते हैं और सरकार की नीतियों का समर्थन करते हैं।
(4) उच्च पदों पर नियुक्ति के संबंध में राज्यपाल को सलाह – संविधान के अनुसार राज्यपाल महाधिवक्ता, राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति मुख्यमंत्री के परामर्श से करता है। व्यवहार में राज्यपाल ये सभी नियुक्तियां मंत्री परिषद की सलाह से करता है, और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में भी सलाह देता है।
In simple words: मंत्री परिषद राज्य के फैसले लेती है, नीतियां बनाती है और बजट तैयार करती है। यह विधानमंडल में सरकार की तरफ से बात करती है और बड़े अधिकारियों की नियुक्ति में राज्यपाल को सलाह देती है।

🎯 Exam Tip: मंत्री परिषद की शक्तियों को बताते समय प्रत्येक बिंदु को उदाहरण सहित समझाना महत्वपूर्ण है, ताकि उत्तर अधिक प्रभावी लगे।

 

Question 15. मुख्यमंत्री की स्थिति का वर्णन कीजिए।
Answer: मुख्यमंत्री की स्थितिः जिस तरह केंद्र में प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यपालिका का मुखिया होता है, उसी तरह राज्य में मुख्यमंत्री मंत्री परिषद का प्रधान होता है। राज्य प्रशासन में मुख्यमंत्री की भूमिका केंद्र के प्रधानमंत्री जैसी होती है। मुख्यमंत्री के कार्यों और शक्तियों से राज्य प्रशासन में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका साफ हो जाती है:
1. मंत्री परिषद का अध्यक्ष होने के नाते वह मंत्री परिषद बनाता है।
2. मंत्री परिषद की बैठकों की अध्यक्षता करता है।
3. मंत्रियों से इस्तीफा मांग सकता है और उन्हें बर्खास्त कर सकता है।
4. मंत्री परिषद के फैसलों के बारे में राज्यपाल को जानकारी देता है।
5. मुख्यमंत्री, मंत्री परिषद और राज्यपाल के बीच बातचीत की एक कड़ी है।
6. मुख्यमंत्री की सलाह से ही राज्यपाल विभिन्न पदों पर नियुक्तियां करता है।
7. वह विधानसभा का नेता होता है और शासकीय नीतियों और कार्यों की घोषणा और स्पष्टीकरण भी करता है। मुख्यमंत्री अपनी प्रशासनिक क्षमता से राज्य की दिशा तय करते हैं।
In simple words: मुख्यमंत्री राज्य का सबसे ताकतवर नेता होता है, जो मंत्री परिषद का मुखिया होता है और राज्यपाल के साथ मिलकर सरकार चलाता है।

🎯 Exam Tip: मुख्यमंत्री की स्थिति को बताते समय उसकी शक्तियों और राज्यपाल के साथ उसके संबंधों पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 17. भारत में प्रचलित स्थानीय स्वशासन के दो रूपों का वर्णन कीजिए।
Answer: भारत में स्थानीय स्वशासन के दो मुख्य रूप हैं:
(i) ग्रामीण स्थानीय स्वशासन- इसका मतलब ग्रामीण इलाकों के लोगों की जरूरतों को पूरा करने की जिम्मेदारी है। ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाली प्रमुख स्थानीय स्वशासन संस्थाएँ हैं। इन संस्थाओं के माध्यम से गांवों में विकास और प्रशासन का काम किया जाता है।
(ii) नगरीय स्थानीय स्वशासन- इसका मतलब शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों की जरूरतों को पूरा करने की जिम्मेदारी है। नगर पालिका, नगर परिषद, नगर निगम, छावनी बोर्ड, टाउन एरिया कमेटी और अधिसूचित क्षेत्र समितियां शहरी इलाकों में काम करने वाली प्रमुख स्थानीय स्वशासन संस्थाएँ हैं। ये शहर के विकास और व्यवस्था को देखती हैं।
In simple words: भारत में स्थानीय स्वशासन दो तरह का होता है - ग्रामीण इलाकों के लिए (ग्राम पंचायत) और शहरी इलाकों के लिए (नगर पालिका)।

🎯 Exam Tip: ग्रामीण और नगरीय स्वशासन के मुख्य संस्थाओं के नाम और उनके काम को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 18. भारत में पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए समय-समय पर उठाये गए किन्हीं तीन कदमों के बारे में बताइये।
Answer: भारत सरकार द्वारा पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाए गए तीन प्रमुख कदम इस प्रकार हैं:
(i) 1957 ई. में भारत सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं के बारे में बलवंत राय मेहता समिति बनाई। इस समिति की सिफारिशों के आधार पर 2 अक्टूबर 1959 को नागौर में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था शुरू की गई। इसने स्थानीय स्तर पर शासन को एक नई दिशा दी।
(ii) 1986 में एल.एम.सिंघवी समिति ने ग्राम पंचायतों को और पैसा देकर उन्हें ज्यादा सक्षम बनाने और पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक मान्यता देने पर जोर दिया। इससे पंचायतों को अपना काम बेहतर तरीके से करने में मदद मिली।
(iii) देश में पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा देने और उनके अनुभवों के आधार पर कमियों को दूर करके उन्हें प्रभावी बनाने के लिए 73वां संविधान संशोधन विधेयक 1992 पास किया गया। यह 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ। यह संशोधन पंचायती राज को एक मजबूत कानूनी आधार प्रदान करता है।
In simple words: पंचायती राज को मजबूत बनाने के लिए बलवंत राय मेहता समिति ने तीन स्तरों की व्यवस्था की शुरुआत की, एल.एम.सिंघवी समिति ने उन्हें संवैधानिक दर्जा और ज्यादा पैसा देने की बात कही, और 73वें संविधान संशोधन ने इसे कानूनी रूप से मजबूत किया।

🎯 Exam Tip: प्रमुख समितियों (बलवंत राय मेहता, एल.एम.सिंघवी) और 73वें संविधान संशोधन की तारीखों और उनकी मुख्य सिफारिशों को याद रखें।

 

Question 20. पंचायती राज व्यवस्था में सुधार हेतु गठित जी.वी. राव समिति के प्रमुख सिफारिशों को लिखिए।
Answer: जी.वी.के. राव समिति की प्रमुख सिफारिशें:
ग्रामीण विकास और गरीबी हटाने के कार्यक्रमों के लिए योजना आयोग द्वारा 1985 में जी.वी.के. राव की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई थी। इस समिति ने 1986 में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी और पंचायती संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए ये सिफारिशें कीं:
1. विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया में जिला परिषद को मजबूत भूमिका निभानी चाहिए। योजना और विकास कार्यों के लिए जिला एक अच्छा स्तर है।
2. विकास कार्यक्रमों की निगरानी, योजना और उन्हें लागू करने का काम जिला या उससे निचले स्तर की पंचायती संस्थाओं द्वारा किया जाना चाहिए।
3. जिला विकास आयुक्त का पद बनाना चाहिए और उसे जिले के विकास कार्यों का प्रभारी बनाना चाहिए।
4. राज्य स्तर पर राज्य विकास परिषद, जिला स्तर पर जिला विकास परिषद मंडल स्तर पर मंडल पंचायत और ग्राम स्तर पर ग्रामसभा की सिफारिश की गई।
5. ग्राम पंचायतों को अधिक वित्तीय शक्तियां दी जानी चाहिए।
6. राज्य वित्त आयोग का गठन किया जाना चाहिए।
7. संस्थाओं का कार्यकाल 8 वर्ष किया जाना चाहिए। इस अवधि से उन्हें स्थिरता और निरंतरता मिलेगी।
In simple words: जी.वी.के. राव समिति ने पंचायती राज को मजबूत बनाने के लिए जिला परिषद को अधिक शक्तियां देने, वित्तीय आयोग बनाने और कार्यकाल 8 साल करने की सलाह दी।

🎯 Exam Tip: समिति का नाम, गठन का वर्ष और उसकी मुख्य 2-3 सिफारिशें याद रखें, खासकर जिला परिषद को सशक्त बनाने वाली बातें।

 

Question 21. पंचायती राज से संबंधित एल.एम.सिंघवी समिति की प्रमुख सिफारिशों को लिखिए।
Answer: एल.एम.सिंघवी समिति (1986) की सिफारिशें:
इस समिति ने पंचायती राज संस्थाओं के लिए नियमित, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की सिफारिश की। साथ ही, ग्राम पंचायतों को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए गांवों का पुनर्गठन करने की सलाह दी गई। समिति ने ग्राम पंचायतों को अधिक वित्तीय शक्ति देने और इन संस्थाओं के चुनाव, विघटन और कार्यों से संबंधित विवादों को सुलझाने के लिए न्यायिक संस्थाएं बनाने की भी सिफारिश की।
पी.के. श्रृंगन समिति (1988) की सिफारिशें:
इस समिति ने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा देने की सिफारिश की। यह एक महत्वपूर्ण कदम था, जिसने पंचायती राज को कानूनी सुरक्षा प्रदान की।
In simple words: एल.एम.सिंघवी समिति ने पंचायतों के लिए नियमित चुनाव, ज्यादा पैसे और संवैधानिक दर्जा देने की सलाह दी। पी.के. श्रृंगन समिति ने भी संवैधानिक दर्जे का समर्थन किया।

🎯 Exam Tip: एल.एम.सिंघवी समिति की सिफारिशें मुख्य रूप से पंचायतों की वित्तीय स्वतंत्रता और विवादों के समाधान पर केंद्रित थीं।

 

Question 22. राज्य निर्वाचन आयोग को स्पष्ट कीजिए।
Answer: पंचायतों और नगर निकायों के निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने के लिए 73वें संविधान संशोधन अधिनियम में राज्य निर्वाचन आयोग का गठन किया गया है। यह आयोग पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनावों की जिम्मेदारी निभाता है। आयोग पंचायतों और नगर निकायों के चुनावों के लिए मतदाता सूची तैयार करता है और चुनावों के संचालन की देखरेख, निर्देशन और नियंत्रण करता है। इससे चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहती है। राज्य का राज्यपाल राज्य निर्वाचन अधिकारी/आयुक्त की नियुक्ति करता है। उनकी नियुक्ति की अवधि और सेवा शर्तें भी राज्यपाल द्वारा ही तय की जाती हैं। राज्य निर्वाचन अधिकारी/आयुक्त को उन्हीं कारणों और उसी तरीके से हटाया जा सकता है जैसे न्यायाधीश को हटाया जाता है।
In simple words: राज्य निर्वाचन आयोग पंचायतों और नगर पालिकाओं के चुनाव करवाता है। राज्यपाल इसके मुखिया को चुनता है और उसे न्यायाधीश की तरह ही हटाया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: राज्य निर्वाचन आयोग की नियुक्ति, कार्य और उसे पद से हटाने की प्रक्रिया भारतीय संविधान के अनुसार ही होती है।

 

Question 23. राज्य वित्त आयोग पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: राज्य वित्त आयोग – पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए राज्य वित्त आयोग का गठन किया गया है। संविधान के अनुच्छेद 243 के तहत प्रत्येक राज्य का राज्यपाल हर 5 साल में एक राज्य वित्त आयोग बनाता है। यह आयोग पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है, उनकी आय के स्रोत, धन का बंटवारा, राज्य सरकार से मिलने वाले अनुदान, कर, चुंगी और सुधार के उपायों के संबंध में राज्यपाल को सलाह देता है। इस आयोग का मुख्य उद्देश्य स्थानीय निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। राज्य वित्त आयोग की संरचना, उसके सदस्यों की संख्या, योग्यताएं और उनके चुने जाने के तरीके राज्य विधानमंडल तय कर सकता है। राज्य वित्त आयोग द्वारा की गई सिफारिशों पर राज्य विधानमंडल के सामने एक रिपोर्ट भी रखी जाती है।
In simple words: राज्य वित्त आयोग हर 5 साल में बनता है। यह पंचायतों की पैसे की हालत की जांच करता है और उन्हें आर्थिक मदद देने के लिए सरकार को सलाह देता है।

🎯 Exam Tip: राज्य वित्त आयोग का गठन हर 5 साल में राज्यपाल द्वारा किया जाता है और इसका मुख्य काम पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करना है।

 

RBSE Class 12 Political Science Chapter 23 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. राज्यपाल की शक्तियों एवं अधिकारों पर प्रकाश डालिए।
Answer: राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। राज्य में राज्यपाल की वही स्थिति होती है जो केंद्र में राष्ट्रपति की होती है। राज्यपाल की शक्तियाँ और अधिकार निम्नलिखित हैं:
**1. कार्यपालिका शक्तियाँ:**
* नियुक्ति संबंधी शक्तियाँ: राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है और उसकी सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है। वह राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, महाधिवक्ता और राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति भी करता है।
* प्रशासनिक शक्तियाँ: राज्यपाल राज्य सरकार के कार्यों के संबंध में नियम बनाता है और मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा करता है। उसे मुख्यमंत्री से शासन संबंधी सभी जानकारी लेने का अधिकार है।
* राष्ट्रपति का प्रतिनिधि: राज्यपाल राज्य में राष्ट्रपति का प्रतिनिधि होता है और राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता की रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजता है, जिसके बाद राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है।
**2. विधायी शक्तियाँ:**
* विधानमंडल का अभिन्न अंग: राज्यपाल राज्य विधानमंडल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। वह विधानमंडल के दोनों सदनों के सत्र बुलाता, स्थगित करता और विधानसभा को भंग भी कर सकता है।
* अध्यादेश जारी करना: जब विधानमंडल का सत्र नहीं चल रहा होता है, तो राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकता है। ये अध्यादेश विधानमंडल द्वारा पारित अधिनियमों के समान ही प्रभावी होते हैं।
* विधेयकों पर स्वीकृति: राज्यपाल विधानमंडल द्वारा पारित किसी भी विधेयक पर अपनी सहमति दे सकता है, उसे अस्वीकार कर सकता है या पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है। कुछ विधेयकों को वह राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए सुरक्षित रख सकता है।
**3. वित्तीय शक्तियाँ:**
* धन विधेयक: राज्यपाल की पूर्व स्वीकृति के बिना कोई भी धन विधेयक विधानसभा में पेश नहीं किया जा सकता।
* बजट प्रस्तुत करना: वह हर साल राज्य का बजट विधानसभा के सामने प्रस्तुत करवाता है।
* अनुदान की मांग: उसकी अनुमति के बिना किसी भी अनुदान की मांग नहीं की जा सकती। राज्य की संचित निधि राज्यपाल के अधिकार में रहती है।
**4. न्यायिक शक्तियाँ:**
* क्षमादान: अनुच्छेद 161 के अनुसार, राज्यपाल राज्य के कानूनों के तहत अपराध करने वाले व्यक्तियों की सजा को कम कर सकता है, स्थगित कर सकता है, बदल सकता है या उन्हें माफ कर सकता है।
* न्यायाधीशों की नियुक्ति: वह जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति में राष्ट्रपति को सलाह देता है।
**5. स्वविवेकीय और अन्य शक्तियाँ:**
* स्वतंत्र निर्णय: असम, बिहार, मध्य प्रदेश और ओडिशा के राज्यपालों को कुछ विशेष कार्यों में अपने विवेक का उपयोग करने का अधिकार है, जैसे आदिवासी क्षेत्रों के कल्याण से संबंधित मामले।
* राष्ट्रपति के अभिकर्ता: आपातकाल में राज्यपाल राष्ट्रपति के एजेंट के रूप में काम करता है और राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद करता है।
राज्यपाल का पद राज्य के प्रशासन और राजनीति में बहुत महत्वपूर्ण होता है, जो केंद्र और राज्य के बीच एक सेतु का काम करता है।
In simple words: राज्यपाल राज्य का मुखिया होता है। उसके पास मंत्रियों को चुनने, कानून बनाने, पैसे से जुड़े फैसले लेने और कुछ लोगों की सजा माफ करने जैसी कई शक्तियां होती हैं। वह राज्य को राष्ट्रपति से भी जोड़ता है।

🎯 Exam Tip: राज्यपाल की शक्तियों को कार्यपालिका, विधायी, वित्तीय और न्यायिक श्रेणियों में बांटकर याद करना आसान होता है। प्रत्येक शक्ति का एक-एक मुख्य बिंदु अवश्य बताएं।

 

Question 2. मुख्यमंत्री के कार्य एवं शक्तियों का वर्णन कीजिए।
Answer: मुख्यमंत्री के कार्य एवं शक्तियाँ: मुख्यमंत्री राज्य का वास्तविक मुखिया होता है। वह राज्यपाल को अपने मंत्रियों की नियुक्ति और उनके विभागों को बदलने या त्यागपत्र स्वीकार करने की सलाह देता है। मुख्यमंत्री के मुख्य कार्य और शक्तियाँ निम्नलिखित हैं:
1. सरकार का वास्तविक अध्यक्ष – मुख्यमंत्री सरकार का असली मुखिया होता है। वह राज्यपाल को अपने मंत्रियों की नियुक्ति और उनके विभागों को बांटने, बदलने या इस्तीफा लेने की सलाह देता है।
2. मंत्री परिषद की अध्यक्षता – मुख्यमंत्री मंत्री परिषद की सभी बैठकों की अध्यक्षता करता है और यह पक्का करता है कि मंत्री परिषद सामूहिक रूप से काम करे।
3. कैबिनेट के निर्णयों से राज्यपाल को सूचित करना – वह राज्य के प्रशासन और कानून संबंधी फैसलों के बारे में राज्यपाल को समय-समय पर बताता रहता है। मुख्यमंत्री राज्यपाल के कहने पर किसी भी मंत्री द्वारा लिए गए फैसलों को मंत्री परिषद में फिर से विचार के लिए रखवा सकता है।
4. पूरे प्रशासन में तालमेल बिठाना – वह अपने मंत्रियों के विभागों के कामों की भी देखरेख करता है और मंत्रियों के बीच मतभेदों को दूर करके पूरे प्रशासन में तालमेल बनाए रखता है।
5. विधानमंडल के काम को दिशा देना – मुख्यमंत्री विधानमंडल के काम को दिशा देता है। सभी सरकारी विधेयक उसकी देखरेख में और उसकी सलाह से तैयार होते हैं। वह सदन के समय और कार्यक्रम का खाका तैयार करता है और सरकारी और निजी काम का समय तय करता है। मुख्यमंत्री अपनी घोषणाओं से राज्य की नीतियों का मार्गदर्शन करते हैं।
6. राज्यपाल को परामर्श देना – वह एडवोकेट जनरल, राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य और अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियों के संबंध में राज्यपाल को सलाह देता है।
7. बहुमत दल का नेता – मुख्यमंत्री बहुमत वाले दल का नेता होता है, इसलिए वह अपने दल में एकता और अनुशासन बनाए रखने के लिए दलीय सचेतकों के माध्यम से नियंत्रण रखता है।
8. विधानसभा एवं विधानपरिषद के बीच संपर्क सूत्र - मुख्यमंत्री विधानसभा एवं विधान परिषद के बीच संपर्क बनाए रखता है। वह राज्यपाल को सलाह देता है कि विधानमंडल का सत्र कब बुलाया जाए, कब स्थगित किया जाए और कब भंग किया जाए।
In simple words: मुख्यमंत्री राज्य सरकार का मुखिया है। वह मंत्रियों को चुनता है, कैबिनेट की अध्यक्षता करता है, राज्यपाल को सलाह देता है, और विधानमंडल में सरकार की अगुवाई करता है। वह राज्य के प्रशासन में तालमेल बिठाता है।

🎯 Exam Tip: मुख्यमंत्री की भूमिका में उसकी नेतृत्व क्षमता, मंत्रिपरिषद से संबंध, और राज्यपाल से समन्वय पर जोर देना चाहिए।

 

Question 3. स्थानीय स्वशासन का महत्व व उपयोगिता बताइए।
Answer: लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में स्थानीय स्वशासन पहला कदम है, जिससे लोकतंत्र के अंतिम लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है। स्थानीय स्वशासन लोकतंत्र की सफलता के लिए बहुत महत्वपूर्ण और उपयोगी है:
(1) लोकतंत्र की नींव – शासन व्यवस्था में जनता का शासन से सीधा संबंध स्थापित हो, इसके लिए निचले स्तर पर यानी स्थानीय स्तर पर जनता को शासन में शामिल होने का मौका मिलता है। स्थानीय स्तर पर ही रोजमर्रा की समस्याएं होती हैं, जिन्हें सुलझाने के लिए स्थानीय स्वशासन की मदद लेनी पड़ती है।
(2) लोकतंत्र की पाठशाला – स्थानीय स्वशासन से नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अभ्यास करने का मौका मिलता है। इससे उनमें अपने कर्तव्यों के प्रति भावना जागृत होती है। उनमें ईमानदारी और काम करने की कुशलता आती है। इसलिए स्थानीय स्वशासन को लोकतंत्र की पाठशाला माना जाता है।
(3) राजनीतिक प्रशिक्षण – स्थानीय स्वशासन की इकाइयों में जनता का प्रतिनिधित्व करने से राजनीतिक प्रशिक्षण तो मिलता ही है, प्रशासनिक प्रशिक्षण भी मिलता है। 5 साल तक स्थानीय इकाई में काम करने के बाद जब वह विधानसभा या संसद में जाता है, तो उसे इन अनुभवों से बहुत फायदा मिलता है और वह जनता की बेहतर सेवा कर पाता है।
(6) स्थानीय समस्याएं – स्थानीय समस्याएं केवल स्थानीय निकायों में ही दिखती हैं और यहीं पर उन्हें हल किया जा सकता है। स्थानीय सरकारें लोगों की जरूरतों के करीब होती हैं।
(7) प्रशासनिक खर्च में बचत – स्थानीय स्वशासन की इकाइयों में प्रशासनिक खर्च बहुत कम होता है। इसलिए खर्च में बचत होती है।
(8) व्यापक सोच – स्थानीय स्वायत्त संस्थाओं के काम की सोच बहुत बड़ी होती है। इन संस्थाओं के माध्यम से स्थानीय प्रतिनिधि अपने क्षेत्र में साफ-सफाई, निर्माण और शिक्षा जैसे काम अपनी देखरेख में कर सकते हैं।
(9) नागरिक गुण – स्थानीय इकाइयां जनता में नागरिक गुणों का विकास करती हैं। भाईचारा, सहयोग, स्वच्छता और तालमेल जैसे गुण स्थानीय निकायों द्वारा ही मिलते हैं।
(10) अन्य उपयोगिता-
1. प्रशासनिक कार्यों में स्थानीय स्वशासी संस्थाएं जनता को भागीदारी का मौका देती हैं।
2. राज्य और केंद्र सरकार के कार्यालयों में नौकरशाही से जिस तरह जनता को परेशानी होती है और जो भ्रष्टाचार उन कार्यालयों में दिखता है, स्थानीय स्वशासन में उससे जनता को मुक्ति मिलती है।
3. स्थानीय निकायों के सभी काम जन-भावनाओं पर आधारित होते हैं। स्वच्छता, गंदगी और प्रदूषण, महिला कल्याण और कमजोर व दलित वर्ग के लोगों के लिए सरकार द्वारा चलाई जाने वाली योजनाएं अक्सर स्थानीय निकायों के माध्यम से पूरी होती हैं। स्थानीय स्वशासन से नागरिकों की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझा और पूरा किया जा सकता है।
In simple words: स्थानीय स्वशासन लोकतंत्र की नींव है, जिससे आम लोगों को शासन में शामिल होने का मौका मिलता है। यह नागरिकों को राजनीतिक और प्रशासनिक सीख देता है, स्थानीय समस्याओं को हल करता है और प्रशासन में खर्च बचाता है।

🎯 Exam Tip: स्थानीय स्वशासन के महत्व को बताते समय उसके लोकतांत्रिक और प्रशासनिक फायदों पर ध्यान दें और प्रत्येक बिंदु को सरल भाषा में समझाएं।

 

Question 4. 73वें संविधान संशोधन की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Answer: 73वें संविधान संशोधन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
(1) त्रिस्तरीय प्रणाली - 73वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा भारत के सभी राज्यों के लिए तीन स्तरों की संस्थागत व्यवस्था की गई है। ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत, ब्लॉक स्तर पर पंचायत समिति और जिला स्तर पर जिला परिषद का गठन किया गया है। यह व्यवस्था शासन को लोगों के करीब लाती है।
(2) पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा देना – 73वें संविधान संशोधन द्वारा भारत के संविधान में एक नया अध्याय 'भाग - 9' पंचायत के शीर्षक के साथ अनुच्छेद 243 और एक नई 11वीं अनुसूची जोड़ी गई। इन संस्थाओं के अधिकार और शक्ति को बढ़ाने के लिए इन्हें 29 विषय (कार्य) दिए गए हैं। इसके साथ ही पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा मिल गया, जिससे उन्हें कानूनी मान्यता और स्थिरता मिली।
(5) पंचायतों का कार्यकाल – भारतीय संविधान के 73वें संशोधन के अनुसार पंचायतों के तीनों स्तरों पर उनका कार्यकाल 5 साल तय किया गया है। इन पंचायतों का चुनाव कार्यकाल खत्म होने से पहले ही करा लिया जाना चाहिए।
(6) सदस्यों की योग्यताएं: हर मतदाता जो 21 साल का हो चुका है, वह पंचायत के चुनाव में भाग ले सकता है। साथ ही, उसे अदालत द्वारा अपराधी घोषित न किया गया हो और वह पागल न हो।
(7) आरक्षण की व्यवस्था- यह संविधान संशोधन अधिनियम सभी संस्थाओं में अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान करता है। इससे समाज के कमजोर वर्गों को प्रतिनिधित्व मिलता है।
(8) कराधान का अधिकार – राज्यों के विधानमंडल द्वारा पंचायतों को कुछ खास तरह के कर लगाने का अधिकार दिया गया है। विभिन्न प्रकार के कर और शुल्क तय करने और उन्हें वसूल करने का अधिकार राज्य सरकार द्वारा पंचायतों को दिया गया है।
(9) राज्य निर्वाचन आयोग का गठन- पंचायतों के चुनाव की तैयारी करना, मतदाता सूचियां तैयार करना, चुनाव करवाना, निरीक्षण करना आदि राज्य निर्वाचन आयोग का काम है। इस आयोग की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाएगी। राज्यपाल निर्वाचन आयोग के कार्यों को पूरा करने के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराएगा।
(10) राज्य वित्त आयोग का गठन- इस संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा पंचायती राज संस्थाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए हर 5 साल बाद वित्त आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है। यह आयोग राज्यपाल को इन संस्थाओं की वित्तीय स्थिति, आय के स्रोत, धन का बंटवारा, राज्य सरकार से मिलने वाले अनुदान, कर और चुंगी आदि के बारे में सलाह देता है।
(11) लेख परीक्षण- इस संविधान संशोधन अधिनियम में यह भी बताया गया है कि राज्य सरकार इन संस्थाओं के खातों की समय-समय पर जांच और परीक्षण के नियम बना सकती है। इससे पारदर्शिता बनी रहती है।
In simple words: 73वें संविधान संशोधन ने पंचायती राज को तीन स्तरों में बांटा, संवैधानिक दर्जा दिया, चुनाव और वित्त आयोग बनाए, और अनुसूचित जाति, जनजाति व महिलाओं के लिए आरक्षण तय किया।

🎯 Exam Tip: 73वें संविधान संशोधन की मुख्य विशेषताओं जैसे त्रिस्तरीय प्रणाली, संवैधानिक दर्जा, आरक्षण और चुनाव/वित्त आयोगों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. नगरों में स्थानीय स्वशासन से संबंधित 74 वें संविधान संशोधन अधिनियम 1992 का विस्तार से वर्णन कीजिए।
Answer: नगरों में स्थानीय स्वशासन से संबंधित 74वां संविधान संशोधन अधिनियम:
नगरों में स्थानीय स्वशासन को मजबूत बनाने के लिए सन् 1992 में संसद द्वारा 74वां संविधान संशोधन पारित किया गया। इस संशोधन की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
1. नगर पंचायत – इसे राजस्थान में नगर पालिका का नाम दिया गया है। 10 हजार से 1 लाख तक की जनसंख्या वाले कस्बों में इसकी स्थापना की जाती है, जिसका मुखिया चेयरमैन कहलाता है। जनसंख्या का यह आधार समय-समय पर बदल सकता है।
2. नगर परिषद – आमतौर पर एक लाख से तीन लाख तक की जनसंख्या वाले शहरों में नगर परिषद की स्थापना की जाती है। इसे कई वार्डों में बांटा जाता है। हर वार्ड से एक पार्षद का चुनाव जनता सीधे करती है। नगर परिषद के मुखिया को अध्यक्ष या सभापति कहते हैं।
3. नगर निगम – तीन लाख से अधिक जनसंख्या वाले बड़े शहरों में नगर निगम की स्थापना की जाती है। इसका मुखिया मेयर या महापौर कहलाता है। इनका चुनाव सीधे या परोक्ष (पार्षदों द्वारा) तरीके से होता है, जो भी राज्य सरकार के कानून द्वारा तय किया गया हो।
4. कार्यकाल संबंधी प्रावधान - 74वें संविधान संशोधन अधिनियम के अनुसार नगर निकायों का कार्यकाल 5 साल होता है। यदि किसी संस्था को कार्यकाल से पहले भंग कर दिया जाता है, तो 6 महीने के अंदर दोबारा चुनाव कराना जरूरी होता है। प्रत्येक नगर निकाय में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
अनुसूचित जातियों और जनजातियों का आरक्षण उस नगर निकाय क्षेत्र में इन वर्गों की जनसंख्या के अनुपात में होगा। आरक्षित स्थान चक्रानुक्रम (रोटेशन) से बांटे जाएंगे। पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने के लिए भी राज्य विधानमंडल कानून बना सकता है। महिलाओं के लिए कुल स्थानों का एक-तिहाई स्थान आरक्षित होगा, जिसमें अनुसूचित जातियों, जनजातियों और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित स्थानों में भी महिलाओं का आरक्षण होगा।
5. चुनाव हेतु आयु संबंधी प्रावधान – सभी नगरीय निकायों में चुनाव लड़ने के लिए कम से कम 21 साल की उम्र होनी चाहिए।
6. नगर निकायों की शक्तियाँ व दायित्व – नगर निकायों को 74वें संविधान संशोधन द्वारा 12वीं अनुसूची जोड़कर 18 विषयों पर शक्तियां और जिम्मेदारियां दी गई हैं। ये इस प्रकार हैं:
1. नगरीय योजना जिसमें शहरी योजना भी शामिल है।
2. भूमि उपयोग नियम और भवन निर्माण।
3. आर्थिक और सामाजिक विकास की योजनाएं।
4. सड़कें और पुल।
5. घरेलू, औद्योगिक और वाणिज्यिक कामों का प्रबंधन।
6. सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता, साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन।
7. समाज की खास जरूरतों वाले कामों के हितों का संरक्षण।
8. अग्निशमन सेवाएं।
15. कांजी गृहों का प्रबंधन।
16. जन्म-मृत्यु का पंजीकरण।
17. रोड लाइट, पार्किंग, बस स्टॉप जैसी सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार।
18. वधशालाएं और चमड़ा उद्योग का नियमन।
19. राजस्थान में शहरी, स्थानीय शासन के इन तीन स्तरों के अलावा कुछ खास संस्थाएं जैसे छावनी बोर्ड, टाउन एरिया कमेटी और अधिसूचित क्षेत्र समितियां आदि भी काम करती हैं।
In simple words: 74वां संविधान संशोधन शहरी स्थानीय निकायों (नगर पंचायत, नगर परिषद, नगर निगम) से जुड़ा है। इसने उन्हें संवैधानिक दर्जा दिया, 5 साल का कार्यकाल तय किया, आरक्षण दिया और उन्हें 18 विषयों पर काम करने की शक्तियां दीं, जैसे शहरों की योजना और सफाई।

🎯 Exam Tip: 74वें संशोधन की मुख्य बातें जैसे शहरी निकायों के प्रकार, कार्यकाल, आरक्षण और उन्हें दिए गए 18 विषय याद रखें। इन संस्थाओं की संरचना और कार्यप्रणाली को विस्तार से बताएं।

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RBSE Solutions Class 12 Political Science Chapter 23 राज्य स्तरीय एवं स्थानीय शासन, 73

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