Step-by-Step Textbook Solutions for Class 12 Political Science Chapter 19 भारत की संघीय व्यवस्था के आधारभूत
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Question 1. वर्तमान में हमारे देश में कितने राज्य हैं?
(अ) 29
(ब) 30
(स) 35
(द) 14
Answer: (अ) 29
In simple words: भारत में अभी 29 राज्य हैं। प्रत्येक राज्य अपने क्षेत्र में शासन करता है और केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में वर्तमान जानकारी का ध्यान रखें, क्योंकि राज्यों की संख्या समय के साथ बदल सकती है।
Question 2. संघ सूची के विषयों पर कानून बनाने का अधिकार है
(अ) राज्य सरकार
(ब) केन्द्र सरकार
Answer: (ब) केन्द्र सरकार
In simple words: संघ सूची में दिए गए विषयों पर कानून बनाने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास है। यह व्यवस्था देश की एकता और मजबूत शासन के लिए बनाई गई है।
🎯 Exam Tip: संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची के मुख्य विषयों को याद रखें ताकि कानून बनाने की शक्तियों को पहचान सकें।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 19 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. राज्य सूची में कितने विषय हैं?
Answer: राज्य सूची में कुल 66 विषय शामिल हैं। इन विषयों पर कानून बनाने का अधिकार मुख्य रूप से राज्य सरकारों को दिया गया है, जो स्थानीय महत्व के मुद्दों से संबंधित होते हैं।
In simple words: राज्य सूची में 66 विषय होते हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न सूचियों (संघ, राज्य, समवर्ती) में विषयों की संख्या याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व कौन-सा सदन करता है?
Answer: संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व राज्यसभा करती है। इसे संसद का उच्च सदन भी कहा जाता है, जहाँ राज्यों के हितों का प्रतिनिधित्व होता है।
In simple words: राज्यसभा संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है।
🎯 Exam Tip: संसद के दोनों सदनों - लोकसभा और राज्यसभा - के कार्यों और संरचना को समझें।
Question 3. केन्द्र व राज्यों के मध्य विवादों का निपटारा कौन - सी संस्था करती है।
Answer: केंद्र और राज्यों के बीच किसी भी विवाद का निपटारा न्यायपालिका करती है। सर्वोच्च न्यायालय इन विवादों को संविधान के नियमों के अनुसार सुलझाता है, ताकि संघीय व्यवस्था बनी रहे।
In simple words: न्यायपालिका केंद्र और राज्यों के बीच के विवादों को हल करती है।
🎯 Exam Tip: न्यायपालिका की भूमिका, विशेषकर सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को याद रखें, जो संवैधानिक विवादों को सुलझाता है।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 19 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. एकल नागरिकता क्या है?
Answer: एकल नागरिकता का मतलब है कि भारत में हर व्यक्ति केवल भारत का नागरिक है, राज्यों का नहीं। हमारे देश ने संघीय व्यवस्था अपनाई है, लेकिन अमेरिका जैसी दोहरी नागरिकता की जगह एकल नागरिकता का प्रावधान किया गया है। यह देश की एकता को बनाए रखने में मदद करता है।
In simple words: एकल नागरिकता का अर्थ है कि देश का हर नागरिक केवल भारत का ही नागरिक है, किसी राज्य का नहीं।
🎯 Exam Tip: एकल नागरिकता भारतीय संघीय व्यवस्था की एक प्रमुख विशेषता है, जो देश में एकता और समानता को बढ़ावा देती है।
Question 2. "विधि के शासन” से आप क्या समझते हैं?
Answer: 'विधि का शासन' का अर्थ है कि देश में कानून सबसे ऊपर है, और सभी लोग, चाहे वे कोई भी हों, कानून के सामने बराबर हैं। इसे लागू करने के लिए एक स्वतंत्र न्यायपालिका बहुत जरूरी है, जो बिना किसी दबाव के काम कर सके। स्वतंत्र न्यायपालिका ही लोकतंत्र को मजबूत बनाती है। इसकी तीन मुख्य शर्तें हैं:
1. न्यायपालिका को सरकार के दूसरे हिस्सों से आजादी मिलनी चाहिए।
2. न्यायपालिका के फैसलों में कार्यपालिका और विधायिका को दखल नहीं देना चाहिए।
3. न्यायाधीशों को बिना किसी डर या पक्षपात के फैसले लेने की आजादी होनी चाहिए। इस तरह, न्यायपालिका केंद्र और राज्यों के बीच के झगड़ों को संविधान के अनुसार सुलझा पाती है।
In simple words: 'विधि का शासन' मतलब है कि देश में कानून सबसे बड़ा है और सभी लोग कानून के सामने एक जैसे हैं। इसके लिए न्यायपालिका का स्वतंत्र होना बहुत जरूरी है ताकि वह सही फैसले ले सके।
🎯 Exam Tip: विधि के शासन के मुख्य सिद्धांतों और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को याद रखें, क्योंकि ये एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए आधारभूत हैं।
Question 3. सरकारिया आयोग का संबंध किससे था?”
Answer: सरकारिया आयोग का संबंध केंद्र और राज्यों के बीच के रिश्तों को बेहतर बनाने से था। केंद्र सरकार ने 1983 में न्यायाधीश रणजीत सिंह सरकारिया की अध्यक्षता में इस तीन सदस्यीय आयोग को बनाया था ताकि संघ और राज्यों के आपसी संबंधों का अध्ययन किया जा सके। आयोग ने 1988 में अपनी रिपोर्ट दी, जिसमें प्रशासन, कानून बनाने और वित्तीय संबंधों को सुधारने के लिए कई सुझाव दिए गए। आयोग ने संविधान की मूल बनावट को बदलने की सलाह नहीं दी, बल्कि संघीय ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया और पिछड़े क्षेत्रों के विकास पर ध्यान देने को कहा। आयोग ने राज्यों को ज्यादा आर्थिक मदद देने और केंद्र-राज्य संबंधों को सुधारने के लिए आर्थिक सुधारों और संविधान संशोधनों की भी सिफारिश की थी।
In simple words: सरकारिया आयोग केंद्र और राज्यों के बीच के रिश्तों को सुधारने के लिए बनाया गया था। इसने 1988 में अपनी रिपोर्ट दी, जिसमें कई महत्वपूर्ण सुझाव थे।
🎯 Exam Tip: सरकारिया आयोग का गठन वर्ष, अध्यक्ष और केंद्र-राज्य संबंधों में इसकी भूमिका को याद रखें, क्योंकि यह संघीय व्यवस्था में महत्वपूर्ण था।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 19 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. भारतीय संघीय व्यवस्था की विशेषताओं पर व्याख्यात्मक लेख लिखिए।
Answer: भारतीय संघीय व्यवस्था में कई खास बातें हैं जो इसे अद्वितीय बनाती हैं:
(क) **संविधान की सर्वोच्चता:** भारत का संविधान देश का सबसे बड़ा कानून है, जिसे सभी को मानना पड़ता है। संसद और राज्य विधानमंडल दोनों को अपनी शक्तियां संविधान से मिलती हैं। संविधान ही सबको बांधे रखता है।
(ख) **शक्तियों का बँटवारा:** सरकार की शक्तियों को तीन सूचियों में बांटा गया है:
1. **संघ सूची:** इसमें 97 विषय हैं, जिन पर केंद्र सरकार कानून बनाती है।
2. **राज्य सूची:** इसमें 66 विषय हैं, जो राज्यों के खास महत्व के हैं और उन पर राज्य सरकारें कानून बनाती हैं।
3. **समवर्ती सूची:** इसमें 47 विषय हैं, जिन पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। जो विषय इन तीनों में नहीं आते, उन पर कानून बनाने की शक्ति केंद्र के पास है। यह विभाजन एक संतुलित शासन सुनिश्चित करता है।
(ग) **स्वतंत्र न्यायपालिका:** संघीय व्यवस्था में संविधान की सही व्याख्या करने और केंद्र-राज्य विवादों को सुलझाने के लिए एक स्वतंत्र न्यायपालिका होती है। भारत में सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय स्वतंत्र रूप से काम करते हैं।
(घ) **राज्यपाल का पद:** राज्यपाल केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त होते हैं और राज्य में केंद्र के प्रतिनिधि के रूप में काम करते हैं। हालाँकि, कभी-कभी यह पद केंद्र-राज्य विवादों का कारण बनता है, फिर भी इसकी अपनी उपयोगिता है।
(ङ) **एकल नागरिकता:** अमेरिका जैसी दोहरी नागरिकता के बजाय भारत में सभी नागरिकों के लिए एकल नागरिकता का प्रावधान है। यह भारत की विशाल विविधता के बावजूद देश को एकजुट रखने में मदद करता है।
(च) **एकात्मकता का प्रभुत्व:** भारतीय संघीय व्यवस्था में केंद्र को मजबूत रखा गया है, जिसे एकात्मक व्यवस्था भी कहते हैं। भारत की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए केंद्र का मजबूत होना स्वाभाविक था। संविधान संशोधन, राज्यों के गठन, आपातकाल और अधिकारों के मामलों में केंद्र की भूमिका बहुत निर्णायक है।
(छ) **केन्द्रीय व्यवस्थापिका में राज्यों का सदन (राज्यसभा):** भारतीय संघीय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए संसद के उच्च सदन, राज्यसभा को राज्यों की प्रतिनिधि संस्था के रूप में बनाया गया है।
In simple words: भारतीय संघीय व्यवस्था की मुख्य बातें हैं: संविधान सबसे ऊपर है, शक्तियाँ केंद्र और राज्यों में बंटी हैं, न्यायपालिका स्वतंत्र है, सभी की एक ही नागरिकता है, केंद्र मजबूत है, और राज्यसभा राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है।
🎯 Exam Tip: भारतीय संघीय व्यवस्था की सभी प्रमुख विशेषताओं को बिंदुवार याद करें और प्रत्येक विशेषता का संक्षिप्त विवरण दें।
Question 2. भारत में संघवाद की नवीन प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालिए।
Answer: भारत में संघवाद की नई प्रवृत्तियों को लेकर बहस चल रही है कि क्या हमारी व्यवस्था सच में संघीय है। संविधान के संघीय होने पर तो सभी सहमत हैं, लेकिन इसकी "संघीयता की मात्रा" पर अलग-अलग राय है। के.सी. व्हीयर ने इसे 'अर्द्धसंघीय' कहा है, जबकि ग्रेनविले ऑस्टिन ने इसे 'सहयोगी संघवाद' बताया है। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने इसे कठोर संघीय ढांचा मानने से मना किया है, और मोरिस जॉन्स ने इसे 'सौदेबाजी वाला संघवाद' कहा है। सच्चाई यह है कि भारतीय संघवाद केवल किताबी नहीं है; खास स्थितियों में केंद्र को ज्यादा ताकत दी गई है। कानून बनाने, प्रशासन, न्याय और आपातकाल, सभी में केंद्र की भूमिका निर्णायक है। नए व्यावहारिक दृष्टिकोण बताते हैं कि केंद्र और राज्यों के बीच सत्ता के संबंध बहुत महत्वपूर्ण हैं। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि नियोजन (योजना बनाने) के कारण संघीय व्यवस्था की शक्तियां कम हुई हैं। यह स्वीकार करना होगा कि संविधान निर्माताओं ने संघीय ढांचा बनाया था, लेकिन इसमें एकात्मकता के मजबूत तत्व भी मौजूद हैं।
In simple words: भारत में संघवाद की नई प्रवृत्तियों पर बहस है कि यह कितना संघीय है। विशेषज्ञ इसे 'अर्द्धसंघीय', 'सहयोगी', या 'सौदेबाजी वाला संघवाद' कहते हैं। केंद्र को कई मामलों में ज्यादा शक्तियां मिली हैं, जिससे यह एकात्मक भी लगता है।
🎯 Exam Tip: भारतीय संघवाद पर विभिन्न विद्वानों के विचारों को याद रखें और एकात्मक तथा संघात्मक दोनों विशेषताओं को स्पष्ट करें।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 19 बहुंचयनात्मक प्रश्न
Question 1. सत्ता की शक्तियों के वितरण एवं स्तरों के आधार पर अपनायी जानी वाली शासन प्रणाली कहलाती है
(अ) संघवाद
(ब) एकात्मवाद
(स) केन्द्रवाद
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (अ) संघवाद
In simple words: जब शासन की शक्तियां बंटी होती हैं, तो उसे संघवाद कहते हैं।
🎯 Exam Tip: संघवाद और एकात्मवाद के बीच के अंतर को समझें, विशेषकर शक्तियों के वितरण के संदर्भ में।
Question 2. संघीय शासन के एक प्रकार "पूर्व में अनेक संप्रभु इकाइयों का आपस में एक हो जाना' का उदाहरण है
(अ) रूस
(ब) संयुक्त राज्य अमेरिका
(स) भारत
(द) चीन
Answer: (ब) संयुक्त राज्य अमेरिका
In simple words: संयुक्त राज्य अमेरिका इस प्रकार के संघवाद का उदाहरण है जहाँ कई राज्य मिलकर एक बड़ा देश बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: संघीय प्रणालियों के दो मुख्य प्रकार (एक साथ आना और मिलकर रहना) के उदाहरणों को याद रखें।
Question 4. वर्तमान में भारत में कितने केन्द्र शासित प्रदेश हैं?
(अ) 25
(ब) 7
(स) 33
(द) 28
Answer: (ब) 7
In simple words: उस समय भारत में 7 केंद्र शासित प्रदेश थे।
🎯 Exam Tip: केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या और नाम समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए सबसे नवीनतम जानकारी पर ध्यान दें।
Question 5. भारतीय संघीय व्यवस्था का प्रमुख तत्व है
(अ) शासन शक्तियों का स्पष्ट विभाजन
(ब) निष्पक्ष व स्वतंत्र न्यायपालिका
(स) एकल नागरिकता
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: शासन शक्तियों का बँटवारा, स्वतंत्र न्यायपालिका और एकल नागरिकता, ये सभी भारतीय संघवाद के मुख्य तत्व हैं।
🎯 Exam Tip: संघीय व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं को समझें और उन्हें एक साथ याद रखें, क्योंकि ये आपस में जुड़े हुए हैं।
Question 6. संघीय सूची में कितने विषय हैं?
(अ) 47
(ब) 66
(स) 97.
(द) 99
Answer: (स) 97
In simple words: संघीय सूची में 97 विषय हैं, जिन पर केंद्र सरकार कानून बनाती है।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक सूची (संघ, राज्य, समवर्ती) में विषयों की संख्या और उनके महत्व को याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी है।
Question 7. संघीय सूची में 97 विषय हैं, इसी कारण यह सबसे लंबी सूची है। इसमें किस प्रकार के विषय हैं?
(अ) राष्ट्रीय महत्व के
(ब) क्षेत्रीय महत्व के
Answer: (अ) राष्ट्रीय महत्व के
In simple words: संघीय सूची में राष्ट्रीय महत्व के विषय शामिल होते हैं।
🎯 Exam Tip: संघीय सूची में शामिल विषयों के प्रकार (जैसे रक्षा, विदेश नीति) को याद रखें, जो राष्ट्रीय एकता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 9. संघ सूची पर केन्द्र और राज्य सूची पर राज्य कानून बनाता है, परंतु समवर्ती सूची पर कौन कानून बनाता है?
(अ) केन्द्र सरकार
(ब) राज्य सरकार
(स) केन्द्र व राज्य दोनों ही सरकारें
(द) स्थानीय निकाय
Answer: (स) केन्द्र व राज्य दोनों ही सरकारें
In simple words: समवर्ती सूची पर केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारें कानून बना सकती हैं।
🎯 Exam Tip: समवर्ती सूची की खास बात यह है कि केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं; हालांकि, किसी विवाद की स्थिति में केंद्र का कानून मान्य होता है।
Question 10. निम्न में से भारतीय संविधान की एकात्मकता का लक्षण नहीं है
(अ) एक संविधान
(ब) शक्तियों का विभाजन
(स) राज्यपाल का पद
(द) राज्यों को पृथक का अधिकार नहीं।
Answer: (ब) शक्तियों का विभाजन
In simple words: शक्तियों का बँटवारा भारतीय संविधान की एकात्मकता का लक्षण नहीं है, यह संघवाद की निशानी है।
🎯 Exam Tip: भारतीय संविधान के संघीय और एकात्मक लक्षणों के बीच का अंतर स्पष्ट रखें, खासकर शक्तियों के बँटवारे के संबंध में।
Question 11. निम्न में से किसने भारतीय संघवाद को अर्द्धसंघीय कहा?
(अ) ग्रेनविले ऑस्टिन ने
(ब) के. सी. व्हीयर ने
(स) डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने
(द) मोरिस जॉन्स ने
Answer: (ब) के. सी. व्हीयर ने
In simple words: के. सी. व्हीयर ने भारतीय संघवाद को 'अर्द्धसंघीय' कहा है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न विद्वानों द्वारा भारतीय संघवाद के लिए दिए गए नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनकी समझ को दर्शाता है।
Question 12. निम्न में से किस विद्वान ने भारतीय संघवाद को सौदेबाजी वाला संघवाद माना?
(अ) मोरिस जॉन्स ने।
(ब) ऑस्टिन ने
(स) अम्बेडकर ने
(द) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने।
Answer: (अ) मोरिस जॉन्स ने।
In simple words: मोरिस जॉन्स ने भारतीय संघवाद को 'सौदेबाजी वाला संघवाद' कहा है।
🎯 Exam Tip: भारतीय संघवाद पर महत्वपूर्ण विद्वानों की टिप्पणियों को याद रखें, क्योंकि ये विभिन्न दृष्टिकोणों को दर्शाती हैं।
Question 1. संघवाद से क्या आशय है?
Answer: संघवाद एक शासन प्रणाली है जहाँ सत्ता को केंद्र सरकार और क्षेत्रीय या राज्य सरकारों के बीच बांटा जाता है। इसमें हर स्तर की सरकार अपनी तय शक्तियों का इस्तेमाल करती है, जिससे शासन व्यवस्थित और प्रभावी होता है।
In simple words: संघवाद वह शासन प्रणाली है जिसमें शक्तियों को केंद्र और राज्यों के बीच बांटा जाता है।
🎯 Exam Tip: संघवाद की परिभाषा को स्पष्ट रूप से समझें, जिसमें शक्तियों के वितरण पर जोर दिया गया है।
Question 2. संघीय शासन प्रणाली का संचालन किसके माध्यम से होता है?
Answer: संघीय शासन प्रणाली को चलाने के लिए केंद्र सरकार और उसकी अलग-अलग इकाइयां, यानी राज्य सरकारें, मिलकर काम करती हैं। इसमें केंद्र और राज्य दोनों के पास अपनी-अपनी शक्तियां होती हैं, जिनका वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस्तेमाल करते हैं।
In simple words: संघीय शासन केंद्र और उसकी राज्य इकाइयों द्वारा चलाया जाता है।
🎯 Exam Tip: केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग और समन्वय संघीय शासन के सफल संचालन के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. संघीय शासन का निर्माण कितने प्रकार से होता है?
Answer: संघीय शासन का निर्माण मुख्य रूप से दो तरीकों से हो सकता है। पहला तरीका यह है कि पहले से स्वतंत्र कई छोटी-छोटी इकाइयां या राज्य मिलकर एक बड़ा संघ बना लें। दूसरा तरीका यह है कि एक बड़ी राजनीतिक इकाई या देश अपनी शासन-प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए खुद को छोटी-छोटी इकाइयों या राज्यों में बांट दे। दोनों ही तरीकों से शक्तियों का वितरण होता है।
In simple words: संघीय शासन दो तरह से बनता है: कई छोटे राज्य मिलकर एक हो जाएं, या एक बड़ा देश खुद को छोटे राज्यों में बांट दे।
🎯 Exam Tip: संघवाद के निर्माण के दोनों प्रमुख तरीकों (coming together और holding together federations) को उदाहरणों के साथ याद करें।
Question 4. सफल संघीय व्यवस्था वाले देश कौन-कौन से हैं?
Answer: दुनिया में कई देश हैं जहाँ संघीय व्यवस्था सफल रही है। इनमें संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, रूस, कनाडा और भारत जैसे प्रमुख देश शामिल हैं। इन देशों ने अपनी-अपनी जरूरतों के हिसाब से संघीय प्रणाली को अपनाया है।
In simple words: संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, रूस, कनाडा और भारत जैसे देश सफल संघीय व्यवस्था वाले हैं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख संघीय देशों के नाम याद रखें, क्योंकि यह संघीय व्यवस्था की व्यापकता को दर्शाता है।
Question 5. भारत में संघीय शासन की स्थापना किसके अंतर्गत की गयी है ?
Answer: भारत में संघीय शासन की स्थापना हमारे देश के संविधान के अनुसार की गई है। संविधान में ही केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का बँटवारा और उनके संबंधों को तय किया गया है, जिससे संघीय ढाँचा मजबूत होता है।
In simple words: भारत में संघीय शासन संविधान के तहत स्थापित किया गया है।
🎯 Exam Tip: संविधान को संघीय शासन का आधार स्तंभ मानें, क्योंकि यह ही शक्तियों के वितरण और सरकारों के अधिकारों को परिभाषित करता है।
Question 6. संविधान में 'संघवाद' के स्थान पर किस शब्द का प्रयोग किया गया है?
Answer: भारतीय संविधान में 'संघवाद' शब्द का सीधा इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसकी जगह 'राज्यों का संघ' (Union of States) शब्द का प्रयोग किया गया है, जो इस बात पर जोर देता है कि भारत के राज्य किसी समझौते का परिणाम नहीं हैं और उन्हें संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है।
In simple words: संविधान में 'संघवाद' की जगह 'राज्यों का संघ' शब्द का इस्तेमाल हुआ है।
🎯 Exam Tip: भारतीय संविधान में 'राज्यों का संघ' शब्द के प्रयोग का महत्व समझें, जो देश की अविनाशी प्रकृति को दर्शाता है।
Question 8. किस देश को 'विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ' की संज्ञा दी जाती है?
Answer: भारत को 'विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ' कहा जाता है। इसका मतलब है कि भारत में राज्यों की सीमाएं या नाम बदले जा सकते हैं (वे विनाशी हैं), लेकिन भारत का संघ खुद कभी खत्म नहीं हो सकता (वह अविनाशी है)।
In simple words: भारत को 'विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ' कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: भारत को 'विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ' क्यों कहते हैं, इस अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 9. भारत के किस राज्य का अपना एक संविधान है?
Answer: पहले जम्मू और कश्मीर राज्य का अपना एक अलग संविधान था। हालांकि, अनुच्छेद 370 के हटने के बाद, अब यह स्थिति बदल गई है और पूरे भारत में एक ही संविधान लागू होता है।
In simple words: पहले जम्मू और कश्मीर राज्य का अपना संविधान था, पर अब नहीं है।
🎯 Exam Tip: जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे और अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में हुए बदलावों को याद रखें।
Question 10. भारतीय संसद का उच्च सदन कौन-सा है?
Answer: भारतीय संसद का उच्च सदन राज्यसभा है। इसे 'राज्यों की परिषद्' भी कहा जाता है और यह राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है।
In simple words: राज्यसभा भारतीय संसद का उच्च सदन है।
🎯 Exam Tip: संसद के दोनों सदनों - लोकसभा और राज्यसभा - के नाम और उनके मुख्य कार्य याद रखें।
Question 11. राज्य में केन्द्र के प्रतिनिधि के रूप में कौन कार्य करता है?
Answer: राज्य में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में राज्यपाल कार्य करता है। राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह राज्य में केंद्र की नीतियों को लागू करने में भूमिका निभाता है।
In simple words: राज्य में केंद्र के प्रतिनिधि के तौर पर राज्यपाल काम करता है।
🎯 Exam Tip: राज्यपाल की नियुक्ति और राज्य में उसकी भूमिका, खासकर केंद्र के प्रतिनिधि के रूप में, को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 12. भारतीय संघीय व्यवस्था के कोई दो तत्व लिखिए।
Answer:
1. एक स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका का होना, जो केंद्र और राज्यों के विवादों को सुलझाती है।
2. संविधान की सर्वोच्चता, जिसका अर्थ है कि संविधान देश का सबसे बड़ा कानून है और सभी को इसका पालन करना होता है।
In simple words: भारतीय संघीय व्यवस्था के दो तत्व हैं: स्वतंत्र न्यायपालिका और संविधान की सर्वोच्चता।
🎯 Exam Tip: संघीय व्यवस्था के मूल तत्वों को याद रखें, क्योंकि ये किसी भी संघीय प्रणाली के लिए आवश्यक होते हैं।
Question 13. भारतीय संविधान को एकात्मक रूप देने वाले कोई दो तत्व लिखिए।
Answer:
1. पूरे देश के लिए एक ही संविधान है, जबकि सच्चे संघों में राज्यों के अपने संविधान हो सकते हैं।
2. राज्यों की सीमाओं में बदलाव करने के लिए उनकी सहमति हमेशा जरूरी नहीं होती, जिससे केंद्र को ज्यादा शक्ति मिलती है।
In simple words: भारतीय संविधान को एकात्मक बनाने वाले दो तत्व हैं: पूरे देश के लिए एक संविधान और राज्यों की सीमाओं में बदलाव के लिए उनकी सहमति का अनिवार्य न होना।
🎯 Exam Tip: भारतीय संविधान के एकात्मक लक्षणों को पहचानना महत्वपूर्ण है, जो इसे अन्य संघीय प्रणालियों से अलग करते हैं।
Question 15. संविधान में शक्तियों का विभाजन किसके पक्ष में है?
Answer: भारतीय संविधान में शक्तियों का विभाजन इस तरह से किया गया है कि केंद्र सरकार को अधिक शक्तियां मिली हैं। संघ सूची में ज्यादा विषय हैं और कुछ विशेष परिस्थितियों में केंद्र राज्य सूची के विषयों पर भी कानून बना सकता है, जिससे केंद्र मजबूत स्थिति में रहता है।
In simple words: संविधान में शक्तियों का बँटवारा केंद्र सरकार के पक्ष में अधिक है।
🎯 Exam Tip: संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची में शक्तियों के वितरण को समझें, और जानें कि केंद्र को किन स्थितियों में अधिक शक्ति मिलती है।
Question 16. राज्य सूची में अंकित विषयों पर कानून का निर्माण कौन करता है?
Answer: राज्य सूची में जो विषय दिए गए हैं, उन पर कानून बनाने का अधिकार संबंधित राज्य के विधानमंडल को होता है। ये विषय आमतौर पर स्थानीय महत्व के होते हैं, जैसे पुलिस, स्वास्थ्य और कृषि।
In simple words: राज्य सूची के विषयों पर राज्य विधानमंडल कानून बनाता है।
🎯 Exam Tip: राज्य सूची के विषयों की प्रकृति और उन पर कानून बनाने की राज्य सरकारों की शक्ति को याद रखें।
Question 17. किन अनुच्छेदों के अंतर्गत राष्ट्रपति संकटकाल की उद्घोषणा कर सकता है?
Answer: राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 352, 356 और 360 के तहत आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं। अनुच्छेद 352 युद्ध या बाहरी हमले के लिए, अनुच्छेद 356 राज्यों में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर, और अनुच्छेद 360 वित्तीय संकट के लिए उपयोग होता है।
In simple words: राष्ट्रपति अनुच्छेद 352, 356 और 360 के तहत आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं।
🎯 Exam Tip: भारतीय संविधान के विभिन्न आपातकालीन प्रावधानों (अनुच्छेद 352, 356, 360) और उनके उपयोग की स्थितियों को याद रखें।
Question 18. संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राज्यों में केन्द्र द्वारा राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है।
Answer: संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत, अगर किसी राज्य में संवैधानिक व्यवस्था ठीक से काम नहीं कर पा रही हो, तो केंद्र सरकार उस राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सकती है। इस स्थिति में राज्य सरकार की शक्तियां राष्ट्रपति के अधीन आ जाती हैं।
In simple words: राज्यों में राष्ट्रपति शासन अनुच्छेद 356 के तहत लागू किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) और इसकी प्रक्रिया को विस्तार से समझें, क्योंकि यह केंद्र-राज्य संबंधों में एक महत्वपूर्ण प्रावधान है।
Question 19. राज्यसभा में राज्यों का प्रतिनिधित्व किसके आधार पर किया जाता है?
Answer: राज्यसभा में राज्यों का प्रतिनिधित्व उनकी जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, न कि समानता के आधार पर। इसका मतलब है कि जिन राज्यों की जनसंख्या ज्यादा है, उन्हें राज्यसभा में अधिक सीटें मिलती हैं। यह अमेरिकी सीनेट से अलग है, जहाँ सभी राज्यों को बराबर प्रतिनिधित्व मिलता है।
In simple words: राज्यसभा में राज्यों का प्रतिनिधित्व उनकी जनसंख्या के आधार पर होता है।
🎯 Exam Tip: राज्यसभा में राज्यों के प्रतिनिधित्व के तरीके (जनसंख्या के आधार पर) को याद रखें और इसकी तुलना अन्य संघीय देशों से करें।
Question 20. किस देश में दोहरी नागरिकता की प्रणाली पायी जाती है?
Answer: दोहरी नागरिकता की प्रणाली संयुक्त राज्य अमेरिका और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में पाई जाती है। इसका मतलब है कि वहां के नागरिक एक साथ देश और अपने राज्य, दोनों के नागरिक होते हैं। भारत में एकल नागरिकता है।
In simple words: संयुक्त राज्य अमेरिका और स्विट्जरलैंड में दोहरी नागरिकता होती है।
🎯 Exam Tip: एकल और दोहरी नागरिकता के बीच के अंतर को और उनके उदाहरणों को समझें, यह एक महत्वपूर्ण संवैधानिक अवधारणा है।
Question 21. अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है?
Answer: अखिल भारतीय सेवाओं, जैसे IAS और IPS, के सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है। इन अधिकारियों का चयन संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा किया जाता है। इनकी सेवा शर्तें केंद्र सरकार तय करती है, पर ये केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के अधीन काम करते हैं।
In simple words: अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है।
🎯 Exam Tip: अखिल भारतीय सेवाओं (IAS, IPS, IFS) की भूमिका, उनकी नियुक्ति प्रक्रिया और केंद्र-राज्य संबंधों में उनके महत्व को समझें।
Question 23. क्या राज्यों को भारत संघ से अलग होने का अधिकार प्राप्त है ?
Answer: भारत संघ के राज्यों को संघ से अलग होने का अधिकार बिल्कुल नहीं है। भारतीय संविधान के अनुसार, भारत 'राज्यों का संघ' है और इसका कोई भी राज्य अपनी मर्जी से संघ से अलग नहीं हो सकता, जिससे देश की एकता बनी रहती है।
In simple words: भारत के राज्यों को संघ से अलग होने का कोई अधिकार नहीं है।
🎯 Exam Tip: भारतीय संघ की अविनाशी प्रकृति को समझें, जिसमें राज्यों को अलग होने की अनुमति नहीं है, यह देश की एकता के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 24. अनुच्छेद 312 किससे संबंधित है ?
Answer: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 312 अखिल भारतीय सेवाओं, जैसे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के गठन से संबंधित है। यह अनुच्छेद संसद को नई अखिल भारतीय सेवाएं बनाने का अधिकार देता है, जिससे पूरे देश में समान प्रशासनिक मानक बनाए जा सकें।
In simple words: अनुच्छेद 312 अखिल भारतीय सेवाओं को बनाने से जुड़ा है।
🎯 Exam Tip: अनुच्छेद 312 और अखिल भारतीय सेवाओं के महत्व को याद रखें, जो देश में प्रशासनिक एकरूपता लाती हैं।
Question 25. संघवाद की प्रवृत्ति बताइए।
Answer: संघवाद की मुख्य प्रवृत्ति यह है कि इसमें शासन की शक्तियों को केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच स्पष्ट रूप से बांटा जाता है। यह बँटवारा संविधान द्वारा तय किया जाता है, जिससे दोनों स्तर की सरकारें अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से काम कर सकें।
In simple words: संघवाद में शासन की शक्तियां केंद्र और राज्यों के बीच बंटी होती हैं।
🎯 Exam Tip: संघवाद की बुनियादी प्रवृत्ति, यानी शक्तियों के वितरण को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।
Question 26. भारतीय संघ को किन-किन नामों से जाना जाता है?
Answer: भारतीय संघ को कई नामों से जाना जाता है, जैसे 'अर्द्धसंघात्मक' और 'सहयोगी संघवाद'। इसे अर्द्धसंघात्मक इसलिए कहते हैं क्योंकि इसमें एकात्मक और संघात्मक दोनों तरह की विशेषताएं हैं। सहयोगी संघवाद इसलिए क्योंकि केंद्र और राज्य मिलकर काम करते हैं।
In simple words: भारतीय संघ को 'अर्द्धसंघात्मक' और 'सहयोगी संघवाद' जैसे नामों से जाना जाता है।
🎯 Exam Tip: भारतीय संघवाद की विभिन्न विशेषताओं और उसके लिए उपयोग किए गए विभिन्न शब्दों को याद रखें।
Question 27. साझा सरकारों के दौर में केन्द्र की स्थिति को स्पष्ट कीजिए।
Answer: साझा सरकारों के समय में केंद्र सरकार की स्थिति अक्सर कमजोर हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि केंद्र में अलग-अलग क्षेत्रीय दलों के गठबंधन से सरकार बनती है, जिससे नीतियों को बनाने और लागू करने में राज्यों की भूमिका बढ़ जाती है और केंद्र को अधिक समझौते करने पड़ते हैं।
In simple words: साझा सरकारों के समय में केंद्र की सरकार थोड़ी कमजोर हो जाती है।
🎯 Exam Tip: गठबंधन सरकारों के प्रभाव को समझें, विशेषकर केंद्र-राज्य संबंधों और केंद्र की शक्ति पर इसके असर को।
Question 28. सरकारिया आयोग का गठन कब किया गया ?
Answer: सरकारिया आयोग का गठन 1983 में किया गया था। इस आयोग का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों की जांच करना और उन्हें बेहतर बनाने के लिए सुझाव देना था।
In simple words: सरकारिया आयोग 1983 में बना था।
🎯 Exam Tip: सरकारिया आयोग के गठन का वर्ष और उसका मुख्य उद्देश्य याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 29. सरकारिया आयोग का गठन क्यों किया गया ?
Answer: सरकारिया आयोग का गठन केंद्र और राज्यों के बीच के संबंधों का अध्ययन करने और उन्हें बेहतर बनाने के लिए किया गया था। यह आयोग 1983 में बनाया गया था ताकि संघीय व्यवस्था में आने वाली समस्याओं को समझा जा सके और उनके समाधान के लिए सुझाव दिए जा सकें।
In simple words: सरकारिया आयोग केंद्र और राज्यों के बीच के रिश्तों को सुधारने के लिए बनाया गया था।
🎯 Exam Tip: सरकारिया आयोग के गठन के पीछे के कारणों (केंद्र-राज्य संबंधों में सुधार) को स्पष्ट रूप से समझें।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 19 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. संघीय या संघात्मक सरकार का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
Answer: संघीय या संघात्मक सरकार का अर्थ है एक ऐसी शासन प्रणाली जहाँ सत्ता को केंद्र सरकार और क्षेत्रीय सरकारों (राज्यों) के बीच बांटा जाता है। 'संघवाद' शब्द लैटिन के 'फोडस' से आया है, जिसका मतलब 'संधि' या 'समझौता' है। इसमें दो या दो से अधिक स्वतंत्र राज्य मिलकर एक सामान्य सरकार बनाते हैं, लेकिन अपने अंदरूनी मामलों में स्वतंत्र रहते हैं। ऐसी व्यवस्था में दो तरह की सरकारें होती हैं: एक पूरे संघ के लिए और दूसरी राज्यों के लिए। भारत की संघीय व्यवस्था कनाडा से प्रेरित है।
In simple words: संघीय सरकार वह है जहाँ शक्तियाँ केंद्र और राज्यों के बीच बंटी होती हैं, और राज्य अपने अंदरूनी मामलों में स्वतंत्र रहते हैं।
🎯 Exam Tip: संघीय सरकार की परिभाषा, इसके मूल सिद्धांतों और निर्माण के पीछे के विचार को समझें।
Question 2. भारतीय संघीय व्यवस्था के किन्हीं दो तत्वों का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारतीय संघीय व्यवस्था के दो प्रमुख तत्व ये हैं:
(i) **संविधान की सर्वोच्चता:** भारत का संविधान देश का सबसे बड़ा कानून है, जिसे सभी को मानना पड़ता है। संसद और राज्य विधानमंडल दोनों को अपनी शक्तियां संविधान से मिलती हैं। अगर कोई कानून संविधान के खिलाफ हो, तो सर्वोच्च न्यायालय उसे अमान्य कर सकता है।
(ii) **एकल नागरिकता:** भारत में सभी नागरिकों के लिए एक ही नागरिकता है, जबकि कई संघीय देशों में दोहरी नागरिकता होती है। यह प्रावधान भारत की विशाल विविधता के बावजूद देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने में मदद करता है।
In simple words: भारतीय संघवाद के दो तत्व हैं: संविधान का सबसे ऊपर होना और सभी के लिए एक ही नागरिकता होना।
🎯 Exam Tip: भारतीय संघीय व्यवस्था के मूल तत्वों को याद रखें, क्योंकि ये भारतीय लोकतंत्र की नींव हैं।
Question 3. केन्द्र – राज्यों के विधायी संबंधों का वर्णन कीजिए।
Answer: केंद्र और राज्यों के बीच कानून बनाने के संबंध तीन मुख्य सूचियों पर आधारित होते हैं:
(क) **संघ सूची:** इसमें राष्ट्रीय महत्व के विषय होते हैं, जैसे रक्षा, विदेश मामले। इन पर कानून बनाने का पूरा अधिकार केंद्र सरकार के पास है।
(ख) **राज्य सूची:** इसमें स्थानीय महत्व के विषय होते हैं, जैसे पुलिस, स्वास्थ्य। इन पर कानून बनाने का अधिकार मुख्य रूप से राज्य विधानमंडलों को है। हालांकि, कुछ खास स्थितियों में संसद भी राज्य सूची के विषयों पर कानून बना सकती है।
(ग) **समवर्ती सूची:** इसमें 47 विषय हैं, जिन पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। ये विषय न तो पूरी तरह राष्ट्रीय होते हैं और न ही पूरी तरह क्षेत्रीय, बल्कि दोनों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। अगर केंद्र और राज्य के कानूनों में टकराव होता है, तो केंद्र का कानून ही मान्य होता है।
In simple words: केंद्र और राज्यों के बीच कानून बनाने के संबंध तीन सूचियों (संघ, राज्य, समवर्ती) पर आधारित होते हैं, जो तय करती हैं कि कौन किस विषय पर कानून बना सकता है।
🎯 Exam Tip: संघ, राज्य और समवर्ती सूची में शक्तियों के बँटवारे को विस्तार से समझें, क्योंकि यह केंद्र-राज्य विधायी संबंधों का आधार है।
Question 4. “भारतीय संघीय व्यवस्था मूलतः केन्द्रीकृत अर्थात् एकात्मक प्रभुत्व वाली मानी जा सकती है।” कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारतीय संघीय व्यवस्था को मुख्य रूप से केंद्रीयकृत या एकात्मक माना जा सकता है क्योंकि केंद्र सरकार को राज्यों की तुलना में अधिक शक्तियां दी गई हैं। भारत की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए केंद्र को मजबूत बनाना जरूरी समझा गया था। संविधान में ऐसे कई प्रावधान हैं जो केंद्र को निर्णायक भूमिका देते हैं, जैसे नए राज्यों का गठन, सीमाओं में बदलाव, आपातकाल के दौरान और वित्तीय मामलों में। ये सभी उदाहरण बताते हैं कि भारत का संघीय ढांचा मजबूत केंद्र के साथ बनाया गया है, ताकि देश एकजुट रह सके।
In simple words: भारतीय संघीय व्यवस्था में केंद्र को ज्यादा शक्तियां दी गई हैं, जिससे यह एकात्मक प्रभुत्व वाली लगती है, ताकि देश की एकता बनी रहे।
🎯 Exam Tip: भारतीय संघवाद में केंद्र की मजबूत स्थिति के कारणों (जैसे राष्ट्रीय एकता, अखंडता) और संवैधानिक प्रावधानों को याद रखें।
Question 5. भारतीय संविधान के किन्हीं तीन एकात्मक तत्वों का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारतीय संविधान में कुछ एकात्मक तत्व हैं, जो इसे केंद्र की ओर झुकाव वाला बनाते हैं:
(i) **एक संविधान:** भारत में केंद्र और सभी राज्यों के लिए एक ही संविधान है, जो पूरे देश में एकरूपता बनाए रखता है। यह अमेरिका और स्विजरलैंड जैसे देशों से अलग है जहाँ राज्यों के अपने संविधान हो सकते हैं।
(ii) **एकल नागरिकता:** भारत में प्रत्येक व्यक्ति केवल भारत का नागरिक है, किसी राज्य का नहीं। यह व्यवस्था देश में एकता को बढ़ावा देती है और क्षेत्रीय भेदभाव को कम करती है।
(iii) **अवशिष्ट शक्तियां:** संविधान के अनुच्छेद 248 के अनुसार, वे सभी शक्तियां जिन पर किसी भी सूची (संघ, राज्य, समवर्ती) में कोई कानून नहीं है, केंद्र सरकार के पास रहती हैं। यह व्यवस्था कनाडा के संविधान से ली गई है और केंद्र को और मजबूत बनाती है।
In simple words: भारतीय संविधान के एकात्मक तत्व हैं: एक ही संविधान, एकल नागरिकता और अवशिष्ट शक्तियों का केंद्र के पास होना।
🎯 Exam Tip: भारतीय संविधान के एकात्मक तत्वों को पहचानना और उनके उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, जो केंद्र की मजबूत स्थिति को दर्शाते हैं।
Question 6. भारतीय संविधान में शक्तियों का विभाजन केन्द्र के पक्ष में है।” कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारतीय संविधान में शक्तियों का बँटवारा इस तरह से किया गया है कि केंद्र सरकार को ज्यादा अधिकार मिलते हैं।
(क) **संघ सूची में अधिक विषय:** संघ सूची में राष्ट्रीय महत्व के ज्यादा विषय हैं, जिन पर केंद्र अकेला कानून बनाता है।
(ख) **राज्य सूची में केंद्र का हस्तक्षेप:** सामान्यतः राज्य सूची के विषयों पर राज्य सरकारें कानून बनाती हैं, लेकिन कुछ खास स्थितियों में संसद भी इन विषयों पर कानून बना सकती है।
(ग) **समवर्ती सूची में केंद्र की प्रधानता:** समवर्ती सूची पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, लेकिन यदि दोनों के कानूनों में टकराव होता है, तो केंद्र का कानून ही मान्य होता है।
(घ) **अवशिष्ट शक्तियां:** जो विषय तीनों सूचियों में नहीं हैं, उन पर कानून बनाने की शक्ति केंद्र के पास है।
ये सभी प्रावधान केंद्र को मजबूत बनाते हैं और शक्तियों का झुकाव केंद्र के पक्ष में रखते हैं।
In simple words: भारतीय संविधान में शक्तियों का बँटवारा केंद्र सरकार के पक्ष में अधिक है क्योंकि संघ सूची में ज्यादा विषय हैं, केंद्र राज्य सूची में हस्तक्षेप कर सकता है, और समवर्ती सूची में केंद्र का कानून मान्य होता है।
🎯 Exam Tip: केंद्र के पक्ष में शक्तियों के विभाजन को समझाने के लिए तीनों सूचियों (संघ, राज्य, समवर्ती) और अवशिष्ट शक्तियों के प्रावधानों का उल्लेख करें।
Question 7. संविधान में कितने प्रकार के आपातकालों का उल्लेख किया गया है?
Answer: भारतीय संविधान में तीन प्रकार के आपातकालों का उल्लेख किया गया है, जो संकट के समय राष्ट्रपति द्वारा घोषित किए जाते हैं, जिससे राज्यों की स्वायत्तता सीमित हो जाती है:
1. **राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352):** यह युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह की स्थिति में घोषित होता है।
2. **राज्य आपातकाल या राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356):** यह तब घोषित होता है जब किसी राज्य में संवैधानिक व्यवस्था विफल हो जाती है।
3. **वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360):** यह देश में वित्तीय स्थिरता या साख को खतरा होने पर घोषित होता है।
इन आपातकालों के दौरान संघीय व्यवस्था एकात्मक रूप ले लेती है, जिससे केंद्र को ज्यादा शक्तियां मिलती हैं।
In simple words: संविधान में तीन तरह के आपातकाल हैं: राष्ट्रीय आपातकाल (युद्ध/विद्रोह), राष्ट्रपति शासन (राज्य में व्यवस्था फेल), और वित्तीय आपातकाल (पैसे की कमी)।
🎯 Exam Tip: तीनों प्रकार के आपातकालों (राष्ट्रीय, राज्य, वित्तीय) के अनुच्छेदों और उनकी घोषणा की स्थितियों को विस्तार से समझें।
Question 8. “सीमाओं में परिवर्तन हेतु राज्यों की सहमति अनिवार्य नहीं।” भारतीय संघवाद के इस एकात्मक लक्षण को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारतीय संघवाद का यह एक एकात्मक लक्षण है कि राज्यों की सीमाओं या नामों में बदलाव करने के लिए उनकी सहमति जरूरी नहीं होती। संविधान के अनुसार, संसद साधारण बहुमत से किसी भी राज्य का पुनर्गठन कर सकती है, उसकी सीमाएं बदल सकती है या नाम बदल सकती है। अनुच्छेद 7 स्पष्ट करता है कि संसद को प्रभावित राज्य के विधानमंडल की सहमति की कोई आवश्यकता नहीं है। राष्ट्रपति को सिर्फ संबंधित राज्य विधानमंडल के विचार जानने होते हैं, जो कि बाध्यकारी नहीं होते। यह प्रावधान केंद्र को राज्यों की क्षेत्रीय अखंडता पर अधिक शक्ति देता है।
In simple words: भारत में राज्यों की सीमाओं को बदलने के लिए राज्यों की सहमति जरूरी नहीं है। संसद साधारण बहुमत से ऐसा कर सकती है, यह भारतीय संघवाद का एकात्मक गुण है।
🎯 Exam Tip: राज्यों की सीमाओं में परिवर्तन के संबंध में संसद की शक्ति और इसमें राज्यों की सहमति की गैर-अनिवार्यता को समझाएं, यह एक प्रमुख एकात्मक विशेषता है।
Question 9. भारत में किस कारण से संघात्मक व्यवस्था को लागू किया गया है? कोई पाँच कारण लिखिए।
Answer: भारत में संविधान बनाने वालों ने एकात्मक शासन की बजाय संघात्मक शासन को अपनाया। इसके कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
1. **विशाल आकार और विविधता:** भारत एक बहुत बड़ा और विविधताओं से भरा देश है। अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और धर्मों के लोगों को एक साथ रखने के लिए संघीय व्यवस्था जरूरी थी।
2. **क्षेत्रीय आकांक्षाओं का समायोजन:** विभिन्न क्षेत्रों की अपनी अलग-अलग जरूरतें और पहचान हैं। संघीय व्यवस्था ने उन्हें अपनी स्थानीय सरकारों के माध्यम से अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने का मौका दिया।
3. **शक्ति का विकेंद्रीकरण:** यह व्यवस्था शक्तियों को एक जगह केंद्रित होने से रोकती है, जिससे किसी एक सत्ता के निरंकुश होने का खतरा कम होता है और स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने में मदद मिलती है।
4. **प्रशासनिक दक्षता:** एक बड़े देश को एक ही केंद्र से नियंत्रित करना मुश्किल होता है। संघीय व्यवस्था ने शासन को प्रभावी बनाने के लिए शक्तियों को राज्यों के बीच बांटा।
In simple words: भारत में संघीय व्यवस्था इसलिए अपनाई गई क्योंकि देश बहुत बड़ा और विविधताओं से भरा है, क्षेत्रीय जरूरतों को पूरा करना था, शक्तियों को बांटना था और शासन को बेहतर बनाना था।
🎯 Exam Tip: भारतीय संविधान में संघीय व्यवस्था को अपनाने के पीछे के मुख्य कारणों को बिंदुवार याद रखें, जो देश की विशेष परिस्थितियों को दर्शाते हैं।
Question 10. भारतीय संघवाद की प्रवृत्ति को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारतीय संघवाद एक सिद्धांत-मात्र नहीं है; इसे खास स्थितियों में एकात्मक रूप दिया गया है। केंद्र को बहुत शक्तिशाली बनाया गया है। कानून बनाने, प्रशासन चलाने, न्याय करने और आपातकाल जैसी सभी महत्वपूर्ण स्थितियों में अंतिम और निर्णायक भूमिका केंद्र की ही होती है। अखिल भारतीय सेवाएँ, जैसे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और आपातकालीन प्रावधान (अनुच्छेद 352, 356, 360), साथ ही वित्त आयोग जैसे संस्थान, केंद्रीकरण के मुख्य माध्यम रहे हैं। संविधान के जानकार के.सी. व्हीयर ने भारतीय संघवाद को 'अर्धसंघीय' कहा है। ग्रेनविले ऑस्टिन ने इसे 'सहयोगी संघवाद' कहा, जबकि मोरिस जोन्स ने इसे 'सौदेबाजी वाला संघवाद' बताया। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने इसे कठोर संघीय ढाँचा मानने से इनकार किया। इस 'एकात्मक आत्मा' वाले संघवाद में, इकाइयों को कई संस्थाओं के माध्यम से उचित महत्व और भागीदारी दी गई है। राष्ट्रीय विकास परिषद, अंतर्राज्यीय परिषद और नीति आयोग के ज़रिए राज्यों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है। भारत की संघीय प्रणाली केंद्र और राज्यों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती है।
In simple words: भारत की संघीय प्रणाली पूरी तरह से सिद्धांत पर नहीं चलती; इसे खास समय में केंद्र के साथ मजबूत बनाया गया है। केंद्र कानून बनाने, शासन चलाने और आपात स्थिति में सबसे ताकतवर होता है। कई विशेषज्ञ इसे 'अर्धसंघीय' या 'सहयोगी संघवाद' कहते हैं, क्योंकि राज्यों को भी कुछ हद तक भागीदारी दी जाती है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों के उत्तर में विभिन्न विद्वानों के विचारों और विशिष्ट संवैधानिक प्रावधानों (जैसे अनुच्छेद 352, 356, 360) का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 11. अंतर्राज्यीय परिषद् की स्थापना किन कार्यों के लिए की जाती है?
Answer: अंतर्राज्यीय परिषद् की स्थापना, संविधान के अनुच्छेद 263 के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय और सार्वजनिक हित में की जा सकती है। इसकी स्थापना मुख्य रूप से तीन कार्यों के लिए की जाती है:
1. विभिन्न राज्यों के बीच के झगड़ों की जाँच करके उन पर सलाह देना।
2. राज्यों के सामान्य हितों से जुड़े मामलों की जाँच-पड़ताल करना।
3. अंतर्राज्यीय विषयों से संबंधित नीतियों में तालमेल बिठाना।
इस परिषद के ज़रिए केंद्र सरकार राज्यों के मामलों में दखल दे सकती है। ऐसी अंतर्राज्यीय परिषदें केंद्र सरकार को राज्यों को हर साल आर्थिक मदद और अनुदान देने में मदद करती हैं। इस सहायता के बदले में, केंद्र सरकार राज्यों पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगा सकती है, जिससे राष्ट्रीय एकता और नीतिगत समन्वय सुनिश्चित होता है।
In simple words: अंतर्राज्यीय परिषद् राज्यों के झगड़े निपटाने, उनके साझा हितों पर काम करने और नीतियों में तालमेल बिठाने के लिए बनाई जाती है। यह केंद्र सरकार को राज्यों के साथ बेहतर संबंध बनाने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: अंतर्राज्यीय परिषद् के कार्यों को याद करते समय, 'विवादों का समाधान', 'साझा हित' और 'नीतियों में समन्वय' जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें।
Question 12. सरकारिया आयोग की मुख्य सिफारिशों पर प्रकाश डालिए।
Answer: सरकारिया आयोग ने केंद्र-राज्य संबंधों को सुधारने के लिए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें कीं, जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं:
3. आयोग का मानना है कि अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) का उपयोग बहुत सोच-विचार के बाद ही किया जाना चाहिए।
4. अनुच्छेद 263 के तहत एक अंतर्राज्यीय परिषद का गठन किया जाना चाहिए, जिसमें राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी शामिल किया जाए।
5. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में योजना आयोग और वित्त आयोग के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया।
6. राष्ट्रीय विकास परिषद का नाम बदलकर राष्ट्रीय आर्थिक एवं विकास परिषद रखा जाना चाहिए।
7. आयोग ने केंद्र और राज्यों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए एक अंतर्राज्यीय परिषद की स्थापना का भी समर्थन किया।
8. संविधान संशोधन द्वारा राज्यों को अनुच्छेद 252 के अधीन राज्य सूची के कानूनों में संशोधन करने का अधिकार दिया जाना चाहिए।
यह आयोग केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय को मजबूत करना चाहता था ताकि संघीय व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके।
In simple words: सरकारिया आयोग ने कहा कि राष्ट्रपति शासन का इस्तेमाल कम हो, अंतर्राज्यीय परिषद बने, योजना आयोग और वित्त आयोग मिलकर काम करें, और राष्ट्रीय विकास परिषद का नाम बदल दिया जाए। इसका मुख्य लक्ष्य केंद्र और राज्यों के संबंधों को बेहतर बनाना था।
🎯 Exam Tip: सरकारिया आयोग की सिफारिशें याद करते समय, उन प्रमुख संवैधानिक निकायों (जैसे अनुच्छेद 356, अनुच्छेद 263 के तहत परिषदें) और आर्थिक संस्थाओं (योजना आयोग, वित्त आयोग) पर ध्यान दें जिन पर आयोग ने सुझाव दिए थे।
Question 1. संघीय शासन प्रणाली के गुणों पर प्रकाश डालिए।
Answer: संघीय शासन प्रणाली के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं:
(क) राष्ट्रीय एकता में वृद्धि- इस शासन व्यवस्था में राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत होती है और लोगों में राष्ट्रीय भावना बढ़ती है, क्योंकि विभिन्न राज्य एक साथ मिलकर कार्य करते हैं।
(ख) निर्बल व छोटे राज्यों के लिए उपयुक्त – यह शासन प्रणाली कमजोर और छोटे राज्यों के लिए बहुत अच्छी होती है। इससे वे मजबूत बनते हैं और उन्हें बड़े राज्यों से खतरा कम होता है।
(ग) स्थानीय संस्थाओं को प्रोत्साहन – इस शासन व्यवस्था में स्थानीय संस्थाओं के विकास पर जोर दिया जाता है। स्थानीय समस्याओं को हल करने की जिम्मेदारी स्थानीय संस्थाओं को ही दी जाती है। इससे नागरिकों को राजनीतिक शिक्षा मिलती है और स्थानीय स्तर पर विकास होता है।
(घ) शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत का व्यावहारिक रूप – इस शासन प्रणाली में शक्तियों के बंटवारे का सिद्धांत लागू होता है। शासन की शक्तियाँ केंद्र सरकार और राज्यों की सरकारों के बीच बंटी होती हैं, जिससे आपस में टकराव कम होता है।
(ङ) निरंकुशता का अभाव – इस शासन व्यवस्था में संविधान लिखित और कठोर होता है। इसमें नागरिकों के अधिकार और सरकार के काम का क्षेत्र साफ-साफ बताया जाता है। कोई भी राज्य या सरकार अपने तय किए गए क्षेत्र से बाहर जाकर काम नहीं कर सकती, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय को न्यायिक समीक्षा का अधिकार होता है। इससे सरकार मनमानी नहीं कर पाती।
In simple words: संघीय शासन प्रणाली से देश में एकता बढ़ती है, छोटे राज्य सुरक्षित रहते हैं, स्थानीय विकास को बढ़ावा मिलता है, सरकार की शक्तियां बंट जाती हैं जिससे टकराव कम होता है, और कोई भी सरकार अपनी मनमानी नहीं कर सकती।
🎯 Exam Tip: संघीय शासन के गुणों को लिखते समय, 'राष्ट्रीय एकता', 'स्थानीय स्वशासन', 'शक्तियों का बंटवारा' और 'निरंकुशता पर रोक' जैसे मुख्य बिंदुओं को याद रखना चाहिए।
Question 2. संघीय शासन प्रणाली के दोषों की विवेचना कीजिए।
Answer: संघीय शासन प्रणाली के प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं:
1. यह संकटकाल में ठीक नहीं: युद्ध या किसी बड़े आंतरिक संकट के समय, केंद्र सरकार राज्यों की सहमति के बिना जल्दी कोई बड़ा फैसला नहीं ले पाती।
2. केवल बड़े देशों के लिए उपयुक्त: यह प्रणाली सिर्फ बड़े देशों के लिए ठीक है, छोटे देशों के लिए नहीं।
3. धन का अपव्यय: इसमें दो तरह की सरकारें होती हैं, जिससे एक ही काम पर दो बार खर्च हो सकता है और पैसे की बर्बादी होती है।
4. दोहरी नागरिकता से खतरा: कुछ संघीय व्यवस्थाओं में नागरिकों को दोहरी नागरिकता मिलती है, जिससे देश की एकता पर खतरा आ सकता है।
5. कानूनी झगड़े होते हैं: केंद्र और राज्य सरकारें कभी-कभी एक ही विषय पर अलग-अलग कानून बना देती हैं, जिससे कानूनी झगड़े होते हैं और उन्हें सुलझाने के लिए अदालत जाना पड़ता है।
6. कठोर शासन व्यवस्था: इस व्यवस्था में संविधान बहुत कठोर होता है, जिसमें आसानी से बदलाव नहीं किए जा सकते। संविधान संशोधन की प्रक्रिया सामान्य कानून बनाने से अलग और मुश्किल होती है।
7. प्रशासनिक शक्तियों का बंटवारा: प्रशासनिक शक्तियाँ बंटी होने के कारण सरकारी काम में देरी हो सकती है। जिम्मेदारियों के बंटवारे से प्रशासन का कोई भी काम आसानी से पूरा नहीं हो पाता।
8. अंतर्राष्ट्रीय नीति में कम सफल: संघीय शासन प्रणाली अंतर्राष्ट्रीय मामलों या विदेश नीति में पूरी तरह सफल नहीं हो पाती। विदेश नीति तय करने के लिए केंद्र सरकार को राज्यों के सहयोग की जरूरत पड़ती है, और कभी-कभी राज्य सरकारें केंद्र की विदेश नीति का विरोध भी कर सकती हैं।
In simple words: संघीय प्रणाली में संकट के समय फैसले लेने में मुश्किल होती है, यह छोटे देशों के लिए ठीक नहीं, इसमें पैसे की बर्बादी हो सकती है, नागरिकों में दोहरी पहचान का खतरा होता है, और सरकार के बीच कानूनी झगड़े हो सकते हैं।
🎯 Exam Tip: संघीय प्रणाली के दोषों को बताते समय, 'संकटकाल में अनुपयुक्तता', 'धन का अपव्यय', 'कठोर संविधान' और 'प्रशासनिक अक्षमता' जैसे मुख्य नकारात्मक बिंदुओं पर ध्यान दें।
Question 3. केन्द्र व राज्यों के मध्य तनावों को दूर करने हेतु सुझावों की विवेचना कीजिए।
Answer: केंद्र और राज्यों के बीच के तनावों को कम करने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं, जो इस प्रकार हैं:
1. केंद्र के पास राज्यों को अपनी इच्छा से अनुदान देने की शक्ति नहीं होनी चाहिए।
2. वित्त आयोग को एक स्थायी संस्था बनाया जाना चाहिए और इसे केंद्र को सलाह देने वाला निकाय बनाना चाहिए।
3. नीति आयोग को एक स्वायत्त संवैधानिक दर्जा दिया जाना चाहिए।
4. संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत एक अंतर्राज्यीय परिषद बनाई जानी चाहिए जो राष्ट्रपति को सलाह दे।
5. राष्ट्रपति की सलाह के लिए एक समिति बनाई जानी चाहिए, जिसके सुझाव पर राज्यपालों, न्यायाधीशों और नीति आयोग के सदस्यों की नियुक्ति हो।
6. प्रशासन, वित्त और कानून बनाने के क्षेत्रों में केंद्र का नियंत्रण थोड़ा ढीला किया जाना चाहिए।
7. अखिल भारतीय सेवा के वे अधिकारी जो राज्य सेवाओं में काम कर रहे हैं, उन पर पूरा नियंत्रण राज्य सरकार का होना चाहिए।
8. अंतर्राज्यीय परिषद के अलावा, प्रत्येक राज्य के लिए एक संवैधानिक सलाहकार समिति होनी चाहिए जो संघीय मुद्दों पर राज्य सरकार को सलाह दे।
9. केंद्र को राज्य सूची के विषयों में बिल्कुल भी दखल नहीं देना चाहिए। राज्य सूची के विषयों से संबंधित कार्यक्रमों को लागू करने और उन पर पैसा खर्च करने की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होनी चाहिए।
10. केंद्र को राज्यों के प्रति अधिक उदार होना चाहिए और महत्वपूर्ण मुद्दों पर राज्यों का विश्वास जीतना चाहिए। इसलिए 'सम्मेलन और विचार-विमर्श प्रणाली' को और प्रभावी बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।
11. समवर्ती सूची के कुछ ऐसे विषय राज्य सूची में रखे जाने चाहिए, जिससे राज्यों के अधिकार बढ़ें, लेकिन केंद्र की शक्ति पर कोई बुरा असर न पड़े। यह भी संभव है कि इन विषयों को कुछ शर्तों के साथ राज्यों को सौंपा जाए।
12. राज्यों की आर्थिक समस्याओं को सुलझाने के लिए एक स्थायी, लेकिन गैर-राजनीतिक समिति बनाई जानी चाहिए, जो केंद्र और राज्यों के बीच आर्थिक तालमेल का काम करे।
13. राष्ट्रपति और राज्यपाल से संबंधित संवैधानिक व्यवस्थाओं में बदलाव करके उनकी शक्तियों को इस तरह बढ़ाया जाना चाहिए कि वे बिना किसी दबाव के अपने विवेक से काम कर सकें।
केंद्र-राज्य संबंध मजबूत होने से देश का संघीय ढाँचा और अधिक प्रभावी होगा।
In simple words: केंद्र और राज्यों के बीच अच्छे संबंध बनाने के लिए सुझाव दिए गए हैं कि केंद्र को कम दखल देना चाहिए, वित्त और नीति आयोग जैसी संस्थाओं को मजबूत और स्वतंत्र बनाना चाहिए, और राज्यों को अपने मामलों में अधिक अधिकार मिलने चाहिए।
🎯 Exam Tip: केंद्र-राज्य संबंधों में सुधार के सुझावों को लिखते समय, 'राज्यों को अधिक स्वायत्तता', 'केंद्रीय हस्तक्षेप में कमी' और 'सहकारी संघीय ढांचे को मजबूत करना' जैसे बिंदुओं पर केंद्रित रहें।
Question 4. भारतीय संविधान के एकात्मक लक्षणों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारतीय संविधान के एकात्मक लक्षण निम्नलिखित हैं:
(i) संघ व राज्यों के लिए एक ही संविधान – अमेरिका और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में केंद्र और राज्यों के अलग-अलग संविधान होते हैं, लेकिन भारत में केंद्र और राज्यों के लिए केवल एक ही संविधान है।
(iii) अवशिष्ट शक्ति – भारतीय संविधान के अनुच्छेद 248 के अनुसार, वे शक्तियाँ जो किसी भी सूची (संघ, राज्य या समवर्ती) में नहीं लिखी गई हैं, केंद्र सरकार को दी गई हैं। यह व्यवस्था कनाडा के संविधान से ली गई है।
(iv) संविधान संशोधन – संविधान में बदलाव करने के संबंध में केंद्र को राज्यों की तुलना में ज़्यादा अधिकार प्राप्त हैं। संविधान का ज़्यादातर हिस्सा संसद सामान्य बहुमत से बदल सकती है। बहुत कम ऐसे हिस्से हैं जिनमें बदलाव के लिए कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं की मंजूरी चाहिए होती है।
(v) एकल नागरिकता – भारत में दोहरी शासन व्यवस्था होने के बावजूद एकल नागरिकता ही है। संघ और राज्यों के लिए कोई अलग नागरिकता नहीं है। यह व्यवस्था राज्यों की तुलना में केंद्र को अधिक शक्तिशाली बनाती है।
(vi) एकीकृत न्याय व्यवस्था – अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में केंद्र और राज्यों के न्यायालय अलग-अलग होते हैं, लेकिन भारत में एक ही सर्वोच्च न्यायालय है। देश के सभी न्यायालय सर्वोच्च न्यायालय के अधीन हैं और उसके निर्णय सभी अधीनस्थ न्यायालयों पर बाध्यकारी होते हैं।
(vii) राज्यसभा में राज्यों का असमान प्रतिनिधित्व - संघीय प्रणाली में अक्सर दूसरे सदन में राज्यों को समान प्रतिनिधित्व मिलता है, जैसे अमेरिका में सीनेट में हर राज्य से दो प्रतिनिधि भेजे जाते हैं। लेकिन भारत की राज्यसभा में राज्यों को जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व दिया गया है, जो संघीय प्रणाली के सिद्धांतों के खिलाफ है।
(viii) एकात्मक रूप – सामान्य स्थिति में भारतीय संविधान संघीय आधार पर काम करता है, लेकिन संकटकाल में राष्ट्रपति द्वारा आपातकाल की घोषणा करने पर राज्यों की स्वायत्तता खत्म हो जाती है। संविधान के अनुच्छेद 352, 356 और 360 के अनुसार राष्ट्रपति आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं।
(ix) प्रारंभिक बातों में एकरूपता – भारतीय संविधान की एक मुख्य विशेषता कुछ शुरुआती मामलों में एकरूपता है। जैसे, पूरे देश के लिए एक ही तरह के दीवानी और फौजदारी कानून का इंतजाम किया गया है। पूरे देश के लिए एक ही चुनाव आयोग है। अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्य केंद्र और राज्यों में शासन का प्रबंध करते हैं। इन सेवाओं के अधिकारियों की नियुक्ति केंद्र सरकार करती है, पर वे राज्य सरकारों के ऊँचे पदों पर काम करते हैं। इन बातों से संविधान का झुकाव एकात्मकता की ओर दिखता है।
(x) राज्यों को अलग होने का अधिकार नहीं – भारत संघ के राज्यों को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है। 1963 में संविधान के 16वें संशोधन द्वारा यह साफ किया गया था कि संघ से अलग होने के समर्थन को बोलने की आजादी का संरक्षण नहीं मिलेगा।
In simple words: भारतीय संविधान में कुछ ऐसे लक्षण हैं जो इसे केंद्र की तरफ झुकाते हैं, जैसे एक ही संविधान, केंद्र के पास बची हुई शक्तियाँ, संशोधन में केंद्र का अधिक अधिकार, एकल नागरिकता, एक ही न्याय व्यवस्था, और राज्यों को संघ से अलग न होने का अधिकार। ये सभी बातें केंद्र को मजबूत बनाती हैं।
🎯 Exam Tip: एकात्मक लक्षणों को स्पष्ट करते समय, 'एकल संविधान', 'केंद्रीकृत शक्ति', 'आपातकालीन प्रावधान' और 'राज्यों की स्वायत्तता पर सीमाएं' जैसे प्रमुख तत्वों पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 5. “भारतीय संविधान का स्वरूप संघात्मक है परन्तु आत्मा एकात्मक।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
Answer: भारतीय संविधान का ढाँचा संघात्मक है, लेकिन इसकी भावना एकात्मक है। यह उन विशेषताओं से साबित होता है जो भारत के संविधान में संघीय और एकात्मक दोनों रूपों में पाई जाती हैं। भारत राज्यों का एक संघ है, जिसमें राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों को तीन सूचियों द्वारा बांटा गया है:
1. केंद्र सूची
2. राज्य सूची
3. समवर्ती सूची
संविधान को सर्वोच्च माना गया है। यह एक लिखित और कठोर संविधान है, और एक स्वतंत्र न्यायपालिका भी है। इस तरह, भारत एक संघ है, लेकिन इसमें कई एकात्मक लक्षण भी हैं। केंद्र-राज्य संबंधों को देखने पर लगता है कि केंद्र अधिक शक्तिशाली है। राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति केंद्र द्वारा की जाती है, जो केंद्र के एजेंट के रूप में काम करते हैं। भारत में एकल नागरिकता है, और संसद के ऊपरी सदन में राज्यों का प्रतिनिधित्व असमान है।
संविधान में संघीय ढांचे को बिना छेड़े, एक न्यूनतम साझा प्रशासनिक स्तर बनाया गया है। अखिल भारतीय सेवाएँ (जैसे IAS और IPS) केंद्र द्वारा नियंत्रित होती हैं। वित्तीय मामलों में भी राज्य केंद्र पर निर्भर रहते हैं। वित्तीय संकट के समय केंद्र राज्यों की वित्तीय स्थिति पर पूरा नियंत्रण करना शुरू कर देता है। इस प्रकार, राज्यों की शक्तियों को कम करते हुए सभी नीतियाँ केंद्र सरकार के पक्ष में झुक जाती हैं। राज्य केंद्र द्वारा तय की गई नीतियों के अनुसार ही काम करने के लिए बाध्य होते हैं। इस तरह, भारतीय संविधान अपने स्वरूप में तो संघीय है, लेकिन आंतरिक रूप से एकात्मक है, इसलिए भारत को 'अर्ध-संघात्मक' राज्य भी कहा जाता है।
In simple words: भारतीय संविधान एक संघ जैसा दिखता है, लेकिन असल में यह एक मजबूत केंद्र सरकार की तरह काम करता है। इसमें राज्य और केंद्र के बीच शक्तियां बंटी हैं, लेकिन केंद्र के पास ज्यादा ताकत है, जैसे एक ही संविधान, राज्यपालों की नियुक्ति और वित्तीय नियंत्रण। इसीलिए इसे 'अर्ध-संघात्मक' कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: इस कथन की व्याख्या करते समय, संविधान के संघीय (जैसे शक्तियों का विभाजन) और एकात्मक (जैसे एकल नागरिकता, केंद्र द्वारा राज्यपालों की नियुक्ति) दोनों पहलुओं को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
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