Get the most accurate RBSE Solutions for Class 12 Political Science Chapter 13 पर्यावरण व प्राकृतिक संसाधन here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest RBSE textbooks for Class 12 Political Science. Our expert-created answers for Class 12 Political Science are available for free download in PDF format.
Detailed Chapter 13 पर्यावरण व प्राकृतिक संसाधन RBSE Solutions for Class 12 Political Science
For Class 12 students, solving RBSE textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 12 Political Science solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 13 पर्यावरण व प्राकृतिक संसाधन solutions will improve your exam performance.
Class 12 Political Science Chapter 13 पर्यावरण व प्राकृतिक संसाधन RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Political Science Chapter 13 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
RBSE Class 12 Political Science Chapter 13 बहुंचयनात्मक प्रश्न
Question 1. अन्तर्राष्ट्रीय ओजोन दिवस मनाया जाता है।
(अ) 16 सितम्बर
(ब) 16 अक्टूबर
(स) 16 नवम्बर
(द) 16 दिसम्बर
Answer: (अ) 16 सितम्बर
In simple words: हर साल 16 सितम्बर को दुनिया भर में ओजोन दिवस मनाया जाता है। यह दिन ओजोन परत को बचाने के महत्व को याद दिलाता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि ओजोन परत हमें सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाती है, इसलिए इसका संरक्षण बहुत ज़रूरी है।
Question 2. विश्व जल दिवस मनाया जाता है
(अ) 12 मार्च
(ब) 22 मार्च
(स) 23 मार्च
(द) 24 मार्च
Answer: (ब) 22 मार्च
In simple words: हर साल 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। इस दिन पानी बचाने के तरीकों पर चर्चा की जाती है।
🎯 Exam Tip: पानी एक बहुत ही कीमती प्राकृतिक संसाधन है, इसलिए इसे बचाना और सही ढंग से इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है।
Question 4. निम्न में से धात्विक खनिज है
(अ) जिप्सम
(ब) ग्रेनाइट
(स) रॉक फॉस्फेट
(द) जस्ता
Answer: (द) जस्ता
In simple words: जिप्सम, ग्रेनाइट और रॉक फॉस्फेट अधात्विक खनिज हैं, जबकि जस्ता एक धात्विक खनिज है क्योंकि इसमें धातु के गुण होते हैं।
🎯 Exam Tip: धात्विक खनिज वे होते हैं जिनसे धातुएँ मिलती हैं, जैसे लोहा, तांबा, जस्ता। अधात्विक खनिज वे होते हैं जिनसे धातुएँ नहीं मिलतीं, जैसे चूना पत्थर, जिप्सम।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 13 अति लघूउत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. बिश्नोई समाज के पर्यावरण संरक्षण हेतु बलिदान की घटना किस गाँव में व कब हुई?
Answer: बिश्नोई समाज द्वारा पर्यावरण बचाने के लिए बलिदान की घटना 21 सितम्बर 1730 को राजस्थान के खेजड़ली गाँव में हुई थी। यह एक ऐतिहासिक घटना है जहाँ 363 लोगों ने पेड़ों को बचाने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया।
In simple words: बिश्नोई समाज के लोगों ने 21 सितम्बर 1730 को राजस्थान के खेजड़ली गाँव में पेड़ों को बचाने के लिए अपनी जान दे दी थी।
🎯 Exam Tip: इस घटना को 'खेजड़ली आंदोलन' के नाम से भी जाना जाता है और यह पर्यावरण संरक्षण का एक बड़ा उदाहरण है।
Question 2. बिश्नोई समाज की किस महिला ने सबसे पहले वृक्ष रक्षा हेतु अपने प्राणों की आहुति दे दी?
Answer: बिश्नोई समाज की अमृता देवी ने पेड़ों की रक्षा के लिए सबसे पहले अपने जीवन का बलिदान दिया था। उन्होंने और उनके परिवार के अन्य सदस्यों ने पेड़ों को काटने से रोकने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी।
In simple words: अमृता देवी ने पेड़ों को बचाने के लिए अपनी जान सबसे पहले दे दी थी।
🎯 Exam Tip: अमृता देवी का बलिदान पर्यावरण संरक्षण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण प्रेरणा स्रोत है।
Question 3. सी.एफ.सी. गैस का पूरा नाम लिखें।
Answer: सी.एफ.सी. गैस का पूरा नाम क्लोरो-फ्लोरोकार्बन है। यह गैस ओजोन परत को नुकसान पहुँचाती है और ग्लोबल वार्मिंग में भी योगदान देती है।
In simple words: सी.एफ.सी. का पूरा नाम क्लोरो-फ्लोरोकार्बन है।
🎯 Exam Tip: क्लोरो-फ्लोरोकार्बन गैस रेफ्रिजरेटर और एयर कंडीशनर जैसे उपकरणों में उपयोग की जाती थी, लेकिन अब इसके उपयोग को कम करने पर जोर दिया जाता है।
Question. पृथ्वादिवस कब मनाया जाता ह?
Answer: विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को मनाया जाता है। इस दिन पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाई जाती है।
In simple words: विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाते हैं।
🎯 Exam Tip: पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल को मनाया जाता है, जो पर्यावरण दिवस से अलग है। दोनों का उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
Question 6. आणविक ऊर्जा में काम आने वाले मुख्य रासायनिक तत्व का नाम लिखिए।
Answer: आणविक ऊर्जा में काम आने वाला मुख्य रासायनिक तत्व यूरेनियम है। यूरेनियम एक रेडियोधर्मी धातु है जिसका उपयोग परमाणु रिएक्टरों में बिजली बनाने के लिए होता है।
In simple words: आणविक ऊर्जा बनाने के लिए यूरेनियम का इस्तेमाल होता है।
🎯 Exam Tip: यूरेनियम एक भारी धातु है जो परमाणु विखंडन के माध्यम से बड़ी मात्रा में ऊर्जा छोड़ती है।
Question 7. राजस्थान में पन बिजली उत्पन्न करने वाले किन्हीं दो स्थानों के नाम लिखें।
Answer: राजस्थान में पन बिजली (जलविद्युत) उत्पन्न करने वाले दो मुख्य स्थान चम्बल नदी और इन्दिरा गाँधी नहर हैं। चम्बल नदी पर कई बाँध बनाए गए हैं जो बिजली पैदा करते हैं, और इन्दिरा गाँधी नहर भी सिंचाई के साथ-साथ कुछ बिजली उत्पादन में मदद करती है।
In simple words: राजस्थान में चम्बल नदी और इन्दिरा गाँधी नहर पर पानी से बिजली बनाई जाती है।
🎯 Exam Tip: पन बिजली एक स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है जो पानी के बहाव का उपयोग करके बिजली बनाता है।
Question 8. यू. एन. एफ. सी. सी. सी. का पूरा नाम लिखें।
Answer: यू. एन. एफ. सी. सी. सी. का पूरा नाम यूनाइटेड नेशन्स फ्रेमवर्क ऑन क्लाइमेट चेन्ज (United Nations Framework Convention on Climate Change) है। यह एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है जो जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बनाया गया है।
In simple words: यू.एन.एफ.सी.सी.सी. का पूरा नाम यूनाइटेड नेशन्स फ्रेमवर्क ऑन क्लाइमेट चेन्ज है।
🎯 Exam Tip: यह समझौता जलवायु परिवर्तन से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों का आधार है और इसके तहत कई सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 13 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. भारतीय संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण को किस तरह महत्व प्रदान किया गया?
Answer: भारतीय संस्कृति में पर्यावरण को हमेशा से बहुत महत्व दिया गया है। प्रकृति को 'माँ' कहा जाता है। ऋग्वेद जैसे पुराने ग्रंथों में पृथ्वी, जल और वायु को देवताओं के रूप में पूजा गया है। पहाड़ों, पेड़ों, नदियों और जलवायु को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत के ऋषि-मुनियों ने पेड़ों और जंगलों को बचाने पर जोर दिया।
कई पौधे जैसे पीपल, तुलसी, पलाश, दूर्वा और बिल्व धार्मिक और औषधीय रूप से महत्वपूर्ण हैं। जैन धर्म 'अहिंसा' को सबसे बड़ा धर्म मानता है, जिसमें सभी जीवों की रक्षा की बात कही गई है।
In simple words: भारतीय संस्कृति में पर्यावरण को माँ के समान माना जाता है। पुराने ग्रंथों में प्रकृति के तत्वों जैसे पृथ्वी, जल, वायु को पूजा जाता है। पेड़ों और जीवों को बचाने पर हमेशा जोर दिया गया है।
🎯 Exam Tip: अपनी भारतीय संस्कृति के उदाहरण देते समय धर्मों और पुराने ग्रंथों का जिक्र करना बहुत प्रभावी होता है, जैसे ऋग्वेद और जैन धर्म।
Question 2. "सिर साट रूख रह ता मा सस्ता जाण" इसस सम्बन्धित घटना का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।
Answer: अमृता देवी के नेतृत्व में बिश्नोई समाज के 363 लोगों ने राजस्थान के खेजड़ली गाँव में खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। उन्होंने कहा, "'सिर साटे रूख रह ता मा सस्ता जाण'" जिसका मतलब है कि अगर पेड़ जीवित रहें तो हमारे सिर कटवाना भी सस्ता है। वे इसके लिए तैयार थे। यह घटना मंगलवार को हुई थी और इसे 'काला मंगलवार' के नाम से जाना जाता है।
In simple words: बिश्नोई समाज की अमृता देवी और 362 अन्य लोगों ने खेजड़ली गाँव में पेड़ों को बचाने के लिए अपनी जान दे दी। उनका मानना था कि पेड़ों को बचाना जीवन से भी बढ़कर है।
🎯 Exam Tip: इस कहावत का अर्थ बताते हुए खेजड़ली गाँव की घटना को विस्तार से समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 3. वायु प्रदूषण मानव स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है?
Answer: वायुमंडल में जहरीली गैसों के बढ़ने से इंसान के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन के अलग-अलग ऑक्साइड, क्लोरो-फ्लोरोकार्बन और फॉर्मेल्डिहाइड जैसी जहरीली गैसें धुंध (स्मॉग) बनाती हैं, जिससे कई लोगों की जान चली जाती है।
कार्बन मोनोऑक्साइड खून के हीमोग्लोबिन से मिलकर एक जहरीला पदार्थ कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन बनाता है, जिससे कई बीमारियाँ होती हैं। क्लोरीन आँखों, नाक और गले में सूजन पैदा करती है। लेड (सीसा) के कणों से कैंसर हो सकता है। रेडियोधर्मी कण भी कैंसर का कारण बनते हैं। धूल और मैंगनीज के कणों से साँस की बीमारियाँ हो सकती हैं।
In simple words: वायु प्रदूषण से कई बीमारियाँ होती हैं। जहरीली गैसें जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड साँस की समस्या, कैंसर और आँखों में जलन पैदा करती हैं।
🎯 Exam Tip: वायु प्रदूषण के प्रमुख प्रदूषकों और उनसे होने वाली विशिष्ट बीमारियों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 4. वायु प्रदूषण रोकने के चार प्रमुख उपाय इस प्रकार हैं
Answer: वायु प्रदूषण रोकने के लिए ये कुछ मुख्य उपाय हैं:
1. ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं क्योंकि पेड़ हवा से कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं और हमें ऑक्सीजन देते हैं।
2. हर फैक्ट्री में हवा साफ करने वाली मशीनें लगानी चाहिए।
3. फैक्ट्रियों की चिमनियां काफी ऊंची होनी चाहिए।
4. पेट्रोल और कोयले जैसे ईंधन का इस्तेमाल कम करें। इसकी जगह सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे साफ ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल करें।
5. घरों में धुआँ रहित (बिना धुएं वाला) ईंधन इस्तेमाल करने को बढ़ावा दें।
6. पेट्रोल से चलने वाली कारों में कैटेलिटिक कन्वर्टर लगाएं, यह हवा को कम प्रदूषित करता है।
In simple words: वायु प्रदूषण रोकने के लिए पेड़ लगाएं, फैक्ट्रियों में फिल्टर लगाएं, धुएं वाले ईंधन का कम इस्तेमाल करें और कारों में प्रदूषण कम करने वाले उपकरण लगाएं।
🎯 Exam Tip: उपायों को लिखते समय व्यावहारिक और तकनीकी दोनों पहलुओं को शामिल करें।
Question 5. जल प्रदूषण के कोई चार प्रभाव लिखिए।
Answer: जल प्रदूषण के कुछ हानिकारक प्रभाव यहाँ दिए गए हैं:
4. फैक्ट्रियों से निकलने वाले रासायनिक पदार्थ जैसे क्लोरीन, अमोनिया, हाइड्रोजन, सल्फाइड, जस्ता, सीसा, निकिल और पारा पानी को जहरीला बनाते हैं। यह पानी पीने या इसमें रहने वाली मछलियों को खाने से कई गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं।
In simple words: औद्योगिक कचरे और जहरीले रसायन पानी को गंदा करते हैं। इस गंदे पानी को पीने या इसमें रहने वाले जीवों को खाने से बीमारियाँ फैलती हैं।
🎯 Exam Tip: जल प्रदूषण के प्रभावों को लिखते समय मानव स्वास्थ्य और जलीय जीवन दोनों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को बताएं।
Question 6. पॉलीथीन प्रदूषण प्रकृति के लिए किस प्रकार हानिप्रद है?
Answer: पॉलीथीन के इस्तेमाल से प्रकृति को कई तरह से नुकसान होता है:
1. पॉलीथीन को बनाने में ज़ाइलिन, एथिलीन ऑक्साइड और बेंजीन जैसे जहरीले रसायन इस्तेमाल होते हैं, जो इंसानों के लिए खतरनाक हैं।
2. प्लास्टिक जल्दी नहीं सड़ता। जहां प्लास्टिक पड़ा रहता है, वहां की मिट्टी उपजाऊ नहीं रहती और पेड़-पौधे नहीं उग पाते।
3. प्लास्टिक के थैलों में फेंका गया खाना खाकर गाय, बंदर और दूसरे जानवर तड़प-तड़पकर मर जाते हैं।
4. पॉलीथीन को जलाने पर जहरीली गैसें निकलती हैं जो हवा को प्रदूषित करती हैं।
In simple words: पॉलीथीन बनाने में जहरीले रसायन लगते हैं। यह मिट्टी को खराब करता है, जानवरों की जान लेता है, और जलाने पर जहरीली हवा फैलाता है।
🎯 Exam Tip: पॉलीथीन के पर्यावरण पर पड़ने वाले सभी मुख्य नकारात्मक प्रभावों को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करें।
Question 7. ग्लोबल वार्मिंग रोकने के उपाय सुझाइए।
Answer: ग्लोबल वार्मिंग (धरती का तापमान बढ़ने) को रोकने के लिए ये कदम उठाने चाहिए:
1. अपने आसपास ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं ताकि वातावरण हरा-भरा रहे।
2. पेट्रोल और कोयले जैसे कार्बन वाले ईंधन का इस्तेमाल कम करें।
3. सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा जैसे साफ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा दें।
4. जंगलों की कटाई रोकने के लिए सही उपाय करें।
In simple words: ग्लोबल वार्मिंग रोकने के लिए पेड़ लगाएं, कम जीवाश्म ईंधन का उपयोग करें, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दें और वनों की कटाई रोकें।
🎯 Exam Tip: ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए व्यक्तिगत और सरकारी स्तर पर किए जाने वाले उपायों को शामिल करें।
Question 8. विश्व के किन्हीं तीन मरुस्थलों के नाम लिखें।
Answer: कम बारिश, ज्यादा तापमान और कम उपजाऊ मिट्टी के कारण कई बार सामान्य जमीन भी रेगिस्तान बन जाती है। कुछ प्रमुख रेगिस्तान हैं:
1. राजस्थान का थार मरुस्थल।
In simple words: दुनिया के रेगिस्तानों में राजस्थान का थार मरुस्थल एक उदाहरण है।
🎯 Exam Tip: रेगिस्तान के निर्माण के कारणों के साथ-साथ प्रसिद्ध रेगिस्तानों के नाम भी याद रखें।
Question 9. बायो गैस पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: बायो गैस, जिसे गोबर गैस भी कहते हैं, पशुओं के गोबर और दूसरे कचरे को सड़ाकर बनाई जाती है। इसमें 50-60 प्रतिशत मीथेन गैस होती है। यह ऊर्जा का एक गैर-पारंपरिक साधन है। जिन ग्रामीण इलाकों में पशुपालन ज्यादा होता है, वहां बायो गैस संयंत्र लगाकर बायो गैस बनाई जा सकती है।
यह बायो गैस ज्वलनशील गैसों का मिश्रण है, जिसमें मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसें शामिल होती हैं।
इसकी गर्मी पैदा करने की क्षमता मिट्टी के तेल, उपलों और तारकोल से ज्यादा होती है। इस ऊर्जा को बिजली या खाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। बायो गैस को पाइपलाइन के जरिए एल.पी.जी. चूल्हों तक पहुँचाया जाता है। गैस बनाने के बाद बचा हुआ पदार्थ खेतों में खाद के रूप में इस्तेमाल होता है।
In simple words: बायो गैस गोबर और कचरे से बनती है, जिसमें मीथेन मुख्य गैस होती है। यह ऊर्जा का एक साफ स्रोत है, जिसका उपयोग खाना बनाने और खाद के लिए किया जाता है।
🎯 Exam Tip: बायो गैस के मुख्य घटक, इसके स्रोत, उपयोग और इसके गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत होने की विशेषता को स्पष्ट करें।
Question 10. पेरिस समझौते पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
Answer: पेरिस समझौता 30 नवम्बर से 12 दिसम्बर 2015 तक फ्रांस की राजधानी पेरिस में संयुक्त राष्ट्र संघ का जलवायु परिवर्तन सम्मेलन था। यह संयुक्त राष्ट्र संघ यू.एन.एफ.सी.सी.सी. का 21वाँ वार्षिक सम्मेलन था, जिसे कोप-21 (COP-21) के नाम से भी जाना जाता है। इस सम्मेलन में भारत सहित 175 देशों के प्रतिनिधियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह एक ही दिन में दुनिया में इतनी बड़ी संख्या में देशों द्वारा किसी समझौते पर हस्ताक्षर करने का रिकॉर्ड है।
हस्ताक्षर के बाद सभी देशों को अपने देश की संसद से इस समझौते को मंजूरी लेनी जरूरी थी। भारत के पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि यह सिर्फ एक समझौता नहीं, बल्कि सात अरब लोगों के जीवन में एक नई शुरुआत है। इस समझौते के तहत सदस्यों ने 21वीं सदी में दुनिया के तापमान वृद्धि को दो डिग्री सेल्सियस से कम रखने का लक्ष्य रखा है।
In simple words: पेरिस समझौता 2015 में हुआ एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन था जहाँ 175 देशों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए हस्ताक्षर किए। इसका लक्ष्य था 21वीं सदी में धरती का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से कम रखना।
🎯 Exam Tip: पेरिस समझौते की तारीखें, स्थान, मुख्य लक्ष्य और भारत की भूमिका को बताएं।
Question 11. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 में सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण हेतु कौन-से संवैधानिक प्रावधान किये गये हैं ?
Answer: पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 में सरकार द्वारा पर्यावरण बचाने के लिए ये संवैधानिक प्रावधान किए गए हैं:
इस अधिनियम का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को 5 साल की जेल और एक लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है। बार-बार उल्लंघन करने पर 5 हजार रुपये जुर्माना और 7 साल की जेल का प्रावधान है।
पर्यावरण से जुड़े नियमों को तोड़ने पर कोई भी व्यक्ति दो महीने का नोटिस देकर जनहित में मुकदमा कर सकता है। इस अधिनियम के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार है कि वह नियम न मानने वाले उद्योगों को बंद करवा सकती है और जल, बिजली व पानी की सेवाएं रोक सकती है।
(2) वायु प्रदूषण (निवारण व नियन्त्रण) अधिनियम 1981: इस कानून के अनुसार, राज्य सरकार अपनी इच्छा से किसी भी क्षेत्र को वायु प्रदूषण नियंत्रण क्षेत्र घोषित कर सकती है। सभी फैक्ट्रियों को राज्य बोर्ड से 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' लेना होगा। नियम न मानने पर फैक्ट्रियां बंद की जा सकती हैं।
(3) जल प्रदूषण (निवारण व नियन्त्रण) अधिनियम, 1974: इस कानून के प्रावधान पानी को प्रदूषण से बचाने से संबंधित हैं। इस कानून के तहत प्रदूषण फैलाने वाले लोगों पर जुर्माना और कड़ी सजा का प्रावधान है।
(4) वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: यह कानून 9 सितम्बर 1972 को पास हुआ था। इसके तहत वन्य जीव संरक्षण को राज्य सूची से हटाकर 'समवर्ती सूची' में डाला गया। इसमें वन्य जीवों को बचाने से संबंधित प्रावधान हैं। राष्ट्रीय पशु बाघ और राष्ट्रीय पक्षी मोर का शिकार करने पर 10 साल [की सजा हो सकती है।]
In simple words: पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 में कई कानून बनाए गए हैं। इसमें प्रदूषण फैलाने वालों पर जुर्माना और जेल का प्रावधान है। वायु, जल और वन्य जीव संरक्षण के लिए भी अलग-अलग नियम बनाए गए हैं, जैसे उद्योगों पर प्रतिबंध और शिकार पर रोक।
🎯 Exam Tip: पर्यावरण संरक्षण से संबंधित प्रमुख अधिनियमों (1986, 1981, 1974, 1972) और उनके मुख्य प्रावधानों को बिंदुवार बताएं।
Question 12. उपभोक्तावादी संस्कृति किस प्रकार पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रही है? संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer: उपभोक्तावादी संस्कृति का सीधा संबंध बहुत अधिक खर्च करने और बेकार की चीजें खरीदने से है। इससे पर्यावरण को कई तरह से नुकसान होता है:
1. उपभोक्तावादी संस्कृति के कारण घरों और गाड़ियों में एयर कंडीशनर का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है। इससे ग्रीनहाउस गैसें बढ़ती हैं और ग्लोबल वार्मिंग हो रही है।
2. लगातार गैर-जरूरी खरीदारी से लोगों का पैसा बर्बाद होता है, जिससे वे कर्ज में डूब सकते हैं।
3. उत्पादों की पैकिंग और एक बार इस्तेमाल होने वाली चीजों के बढ़ने से कचरा प्रबंधन एक बड़ी समस्या बन गया है।
4. उत्पादों को बनाने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का बहुत ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है।
In simple words: उपभोक्तावादी संस्कृति में लोग ज्यादा चीजें खरीदते हैं। इससे एयर कंडीशनर का उपयोग बढ़ता है, कचरा बढ़ता है, और प्राकृतिक संसाधनों का ज्यादा इस्तेमाल होता है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है।
🎯 Exam Tip: उपभोक्तावादी संस्कृति के नकारात्मक प्रभावों को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें, जैसे ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ना और संसाधनों का अत्यधिक दोहन।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 13 निबंधात्मक प्रश्न
Question 1. पर्यावरण संरक्षण में भारतीय संस्कृति किस प्रकार सहायक है? विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer: प्राचीन भारतीय ग्रंथों को पढ़ने से पता चलता है कि हमारी संस्कृति में शुरू से ही पर्यावरण को बचाने पर जोर दिया गया है। यह माना जाता रहा है कि इंसानों के जीवित रहने के लिए स्वच्छ प्राकृतिक वातावरण जरूरी है। भारतीय संस्कृति में प्रकृति को 'माँ' कहा गया है। धरती माँ के रूप में पूरे ब्रह्मांड के जीवों का पालन-पोषण करती है।
इसलिए इसका संरक्षण करना हमारा नैतिक कर्तव्य है। भारतीय समाज ने हमेशा से पर्यावरण संरक्षक की भूमिका निभाई है। वेदों, पुराणों, उपनिषदों और अन्य धार्मिक ग्रंथों में पेड़-पौधों और जानवरों के सामाजिक महत्व को बताकर उन्हें पर्यावरण से जोड़ा गया है। ऋग्वेद में पृथ्वी, जल और वायु को देवताओं के रूप में पूजा गया है। हमारे ऋषि-मुनियों ने पेड़ों और जंगलों के महत्व को स्पष्ट करते हुए उनके संरक्षण की बात कही है।
ऋग्वेद में ज्ञानी लोगों ने बताया है कि पेड़ और जंगली जानवर इंसानों के लिए कितने उपयोगी हैं। उदाहरण के लिए, उन्होंने बताया कि कौन से पौधे औषधीय रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसी तरह, कुछ पौधों को धार्मिक आस्था से जोड़कर उनके संरक्षण का प्रयास किया गया। भारतीय परंपरा में धार्मिक अनुष्ठानों में वृक्ष-पूजा का विशेष महत्व है। पीपल के पेड़ को अटल सुहाग से जुड़ा मानकर उसकी पूजा की जाती है।
यजुर्वेद में इंद्र, सूर्य, नदी, पर्वत, आकाश, ऊषा और जल के देवता वरुण का सम्मान करने की बात कही गई है, जैसे कि वे देवता हों।
In simple words: भारतीय संस्कृति में प्रकृति को माँ माना गया है। पुराने ग्रंथों में पेड़, जल और वायु को पूजते थे। धर्म और रीति-रिवाजों से पर्यावरण को बचाने की सीख दी जाती है, जैसे पीपल की पूजा और जीवों की रक्षा।
🎯 Exam Tip: भारतीय संस्कृति की विशेषताओं को बताते हुए धार्मिक ग्रंथों, पेड़ों और जानवरों के महत्व पर प्रकाश डालें।
Question 2. पर्यावरण प्रदूषण से क्या अभिप्राय है? इसके विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
Answer: पर्यावरण प्रदूषण का मतलब है जब पर्यावरण के मुख्य हिस्सों में बाहर से गंदी चीजें बहुत ज्यादा मात्रा में मिल जाती हैं। यह सभी जीवों और पर्यावरण के लिए हानिकारक होता है। पर्यावरण प्रदूषण कई तरह का होता है:
(1) वायु प्रदूषण: शहरों के बेतहाशा विस्तार, फैक्ट्रियों, गाड़ियों और विलासिता के साधनों के बढ़ने से हवा में हानिकारक गैसें मिल रही हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बुरी हैं। इन गैसों में सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन के कई ऑक्साइड, क्लोरोफ्लोरोकार्बन और फॉर्मेल्डिहाइड मुख्य हैं।
इसके अलावा, गाड़ियों से निकलने वाला सीसा, अधजले हाइड्रोकार्बन और जहरीला धुआँ भी हवा को गंदा कर रहे हैं। वायु प्रदूषण का हमारे जीवन पर बुरा असर पड़ता है। प्रदूषक गैसों से कई बीमारियाँ होती हैं। ओजोन परत भी पतली हो रही है, जो हमें सूर्य की खतरनाक पराबैंगनी किरणों से बचाती है। ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ने से ग्लोबल वार्मिंग की समस्या और बढ़ रही है।
(2) जल प्रदूषण: जब पानी में ठोस कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थ, रेडियोधर्मी तत्व, फैक्ट्रियों का कचरा और सीवेज का पानी मिल जाता है, तो पानी प्रदूषित हो जाता है। फैक्ट्रियों से निकलने वाला कचरा अपने साथ पारा, सीसा और कैडमियम जैसी धातुएँ भी ले आता है। इसी तरह, सीवेज के पानी में यूरिया और यूरिक एसिड मिले होते हैं। इसके अलावा, उर्वरक और कीटनाशक रसायन भी पानी को गंदा करते हैं। गंदे पानी से दस्त, पेचिश, हैजा और टाइफाइड जैसी बीमारियाँ फैलती हैं। इससे कैंसर, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और मस्तिष्क पर बुरा असर जैसी गंभीर बीमारियाँ भी हो सकती हैं।
(3) मृदा प्रदूषण: बारिश से मिट्टी की संरचना बिगड़ना, ज्यादा उर्वरक और कीटनाशकों का इस्तेमाल, और रासायनिक उर्वरकों से मिट्टी प्रदूषित हो जाती है। इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति खत्म हो जाती है। मिट्टी की उपजाऊ शक्ति खत्म होने से मिट्टी का कटाव बढ़ जाता है। मिट्टी का कटाव रोकने के लिए पेड़ लगाना जरूरी है।
(4) रेडियोएक्टिव प्रदूषण: परमाणु बम और परमाणु परीक्षणों से रेडियोधर्मी प्रदूषण बढ़ रहा है। रेडियोधर्मी तत्व वातावरण में मिल जाते हैं। ये तत्व इंसान और दूसरे जीवों की कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं। पॉलीथिन के [कारण भी प्रदूषण बढ़ता है।]
In simple words: पर्यावरण प्रदूषण तब होता है जब हवा, पानी या मिट्टी में गंदगी बढ़ जाती है। इसमें वायु प्रदूषण (जहरीली गैसें, ओजोन परत को नुकसान), जल प्रदूषण (गंदा पानी, रसायन), मृदा प्रदूषण (मिट्टी खराब होना) और रेडियोएक्टिव प्रदूषण (परमाणु विकिरण) शामिल हैं, जिनसे स्वास्थ्य और प्रकृति को नुकसान होता है।
🎯 Exam Tip: पर्यावरण प्रदूषण की परिभाषा दें और फिर इसके विभिन्न प्रकारों (वायु, जल, मृदा, रेडियोधर्मी) को उनके मुख्य कारणों और प्रभावों के साथ अलग-अलग बिंदुओं में समझाएं।
Question 5. भारतीय संविधान में पर्यावरण संरक्षण हेतु किये गये प्रावधानों का विस्तृत वर्णन करें।
Answer: भारतीय संविधान में पर्यावरण संरक्षण के लिए निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं:
1. राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के अनुच्छेद 48 में कहा गया है कि राज्य पर्यावरण को सुधारेगा और बचाएगा, साथ ही वन्य जीवन की सुरक्षा भी करेगा।
2. संविधान के भाग 4 क के अनुच्छेद 51 में मूल कर्तव्यों के तहत पर्यावरण को बचाने और उसे बढ़ाने की बात कही गई है, जिसमें वन, झील, नदी और अन्य जीवों की रक्षा करना और सभी प्राणियों के प्रति दया भाव रखना शामिल है।
3. अनुच्छेद 21 में कहा गया है कि हर व्यक्ति को उन गतिविधियों से बचाया जाए जो उसके जीवन, स्वास्थ्य और शरीर को नुकसान पहुँचाती हों।
अधिनियमों और दंड:
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 का उल्लंघन करने पर 5 साल की जेल और एक लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है। लगातार उल्लंघन करने पर 5 हजार रुपये जुर्माना और 7 साल की जेल का प्रावधान है।
पर्यावरण से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर कोई भी व्यक्ति दो महीने का नोटिस देकर जनहित में मुकदमा कर सकता है। इस अधिनियम के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार है कि वह नियम न मानने वाले उद्योगों को बंद करवा सकती है, और जल, बिजली व पानी की सेवाएं रोकने का निर्देश दे सकती है।
(2) वायु प्रदूषण (निवारण व नियन्त्रण) अधिनियम 1981: इस कानून के अनुसार, राज्य सरकार अपनी समझ से किसी भी क्षेत्र को वायु प्रदूषण नियंत्रण क्षेत्र घोषित कर सकती है। सभी फैक्ट्रियों को राज्य बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होगा। नियम न मानने पर फैक्ट्रियां बंद की जा सकती हैं।
(3) जल प्रदूषण (निवारण व नियन्त्रण) अधिनियम, 1974: इस कानून के प्रावधान पानी को प्रदूषण से मुक्त रखने से संबंधित हैं। इस कानून के तहत प्रदूषण फैलाने वाले लोगों पर जुर्माना और कड़ी सजा का प्रावधान है।
(4) वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: यह कानून 9 सितम्बर 1972 को पास हुआ था। इसके द्वारा वन्य जीव संरक्षण को राज्य सूची से हटाकर 'समवर्ती सूची' में डाला गया। इसमें वन्य जीवों को बचाने से संबंधित प्रावधान हैं। राष्ट्रीय पशु बाघ और राष्ट्रीय पक्षी मोर का शिकार करने पर 10 साल [की सजा हो सकती है।]
In simple words: भारतीय संविधान पर्यावरण को बचाने के लिए कई नियम बनाता है। अनुच्छेद 48 राज्य को पर्यावरण और वन्यजीवों की रक्षा करने को कहता है। अनुच्छेद 51 पर्यावरण संरक्षण को नागरिकों का कर्तव्य बताता है। इसके अलावा, पर्यावरण अधिनियम 1986 और जल-वायु प्रदूषण अधिनियम जैसे कानून प्रदूषण फैलाने वालों को दंडित करते हैं, और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 जीवों की सुरक्षा करता है।
🎯 Exam Tip: भारतीय संविधान के मुख्य अनुच्छेदों (48, 51, 21) और विभिन्न पर्यावरण कानूनों (1986, 1981, 1974, 1972) का जिक्र करें और उनके प्रमुख प्रावधानों को विस्तार से समझाएं।
Question 6. जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक चिन्तन पर लेख लिखिए।
Answer: जलवायु परिवर्तन का मतलब है किसी जगह की सामान्य मौसमी स्थितियों (जैसे- प्रकाश, तापमान, बारिश) में बदलाव आना। जब प्रकृति से छेड़छाड़ होती है, तो संतुलित जलवायु में कई बदलाव आते हैं, जिससे कई बुरे परिणाम सामने आते हैं।
तेजी से औद्योगीकरण, जंगलों का कटना और गाड़ियों की बढ़ती संख्या के कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे जलवायु बदल रही है। ध्रुवों की बर्फ पिघलने लगी है। जलवायु परिवर्तन से समुद्र, बर्फ, झील और नदियाँ जैसे सभी पर्यावरणीय घटक प्रभावित हो रहे हैं। इन बदलावों से पृथ्वी के जीव-जंतु और पेड़-पौधे भी प्रभावित होते हैं।
ओजोन परत में छेद होना एक बड़ी चुनौती है। इस समस्या पर ध्यान आकर्षित करने के लिए पहली बार दुनिया भर में 5 से 16 जून 1972 को स्टॉकहोम (स्वीडन) में संयुक्त राष्ट्र का सम्मेलन हुआ था, जहाँ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर चर्चा हुई थी। इस सम्मेलन की दसवीं वर्षगांठ मनाने के लिए 10 से 18 मई 1982 को नैरोबी (केन्या) में देशों का सम्मेलन हुआ, जिसमें पर्यावरण से जुड़ी योजनाओं को मंजूरी दी गई।
इस सम्मेलन की बीसवीं वर्षगांठ पर 3 से 14 जून 1992 को रियो डी जनेरियो (ब्राजील) में संयुक्त राष्ट्र का पृथ्वी शिखर सम्मेलन हुआ था, जिसमें जलवायु परिवर्तन की समस्याओं से निपटने के लिए यू.एन.एफ.सी.सी.सी. संधि की गई। इसके तहत पहला जलवायु परिवर्तन सम्मेलन 1995 में बर्लिन (जर्मनी) में हुआ था। तब से अब तक हर साल सम्मेलन हो रहे हैं। 1 से 14 दिसम्बर 2014 को इसका बीसवां सम्मेलन पेरू की राजधानी लीमा में आयोजित किया गया था, जिसमें दुनिया के 194 देशों और अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
भारत का प्रतिनिधित्व पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने किया था। इस सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने का संकल्प था। संयुक्त राष्ट्र संघ जलवायु परिवर्तन का 21वां सम्मेलन पेरिस में 30 नवंबर से 12 दिसंबर 2015 को आयोजित किया गया था। इसमें 175 देशों के प्रतिनिधियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह एक ही दिन में दुनिया में इतनी बड़ी संख्या में देशों द्वारा किसी समझौते पर हस्ताक्षर करने का रिकॉर्ड है।
In simple words: जलवायु परिवर्तन का मतलब है मौसम में बड़े बदलाव आना, जो फैक्ट्रियों और पेड़ों की कटाई के कारण हो रहे हैं। इससे तापमान बढ़ रहा है और ध्रुवों की बर्फ पिघल रही है। इस समस्या पर चर्चा करने के लिए स्टॉकहोम (1972), रियो (1992) और पेरिस (2015) जैसे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन हुए हैं, जहाँ देशों ने मिलकर तापमान को कम करने के लक्ष्य तय किए हैं।
🎯 Exam Tip: जलवायु परिवर्तन की परिभाषा, कारण और प्रभावों को स्पष्ट करें। स्टॉकहोम, रियो और पेरिस जैसे प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों और उनके परिणामों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 7. उपभोक्तावादी संस्कृति के कारण व इससे पर्यावरण व मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों की विस्तृत विवेचना कीजिए।
Answer: उपभोक्तावादी संस्कृति एक ऐसी आर्थिक प्रक्रिया है जिसका सीधा मतलब है कि समाज की हर चीज इस्तेमाल करने योग्य है। इसे बाजार में सही तरीके से बेचा जाना चाहिए। आजकल उद्योगपति अपने फायदे के लिए ग्राहकों को अपनी चीजें खरीदने के लिए लुभाते हैं। ग्राहक को लगता है कि उन चीजों के बिना उसका काम नहीं चल सकता।
यहीं से फिजूलखर्ची वाली खपत शुरू होती है, और इसी को उपभोक्तावादी संस्कृति कहते हैं। विज्ञापन इस सोच को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। विकसित देशों में दुनिया की एक चौथाई आबादी रहती है, लेकिन दुनिया के कुल संसाधनों का तीन चौथाई वे ही इस्तेमाल करते हैं। उदाहरण के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका में दुनिया की लगभग 5 प्रतिशत आबादी रहती है, लेकिन वहाँ दुनिया के कुल पेट्रोलियम उत्पादों का 20 प्रतिशत इस्तेमाल होता है। यह बढ़ती हुई उपभोक्तावादी प्रकृति का एक बड़ा उदाहरण है। इसी तरह, विकसित देशों में इस संस्कृति के प्रभाव से घरों और गाड़ियों में एयर कंडीशनर का इस्तेमाल बढ़ रहा है। पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव भारत में भी देखा जा रहा है।
In simple words: उपभोक्तावादी संस्कृति लोगों को ज्यादा चीजें खरीदने के लिए उकसाती है, जिससे संसाधनों का बहुत अधिक इस्तेमाल होता है। विज्ञापन इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान होता है, जैसे एयर कंडीशनर का ज्यादा उपयोग और अधिक पेट्रोलियम खपत।
🎯 Exam Tip: उपभोक्तावादी संस्कृति की परिभाषा, इसके कारणों (जैसे विज्ञापन) और पर्यावरण व मानव जीवन पर इसके नकारात्मक प्रभावों को विस्तार से समझाएं। उदाहरणों का उपयोग करना प्रभावी होता है।
Question 8. उपभोक्तावादी संस्कृति किस प्रकार प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुँचा रही है? विस्तृत विवेचना कीजिए।
Answer: आजकल उपभोक्तावादी संस्कृति के तहत उत्पादों को बनाने के लिए प्राकृतिक संसाधनों जैसे खनिज, वन, पानी और ऊर्जा स्रोतों का बहुत अधिक उपयोग किया जा रहा है। यह तरीका प्रकृति के कीमती और स्वस्थ संसाधनों को नष्ट कर रहा है और वातावरण को प्रदूषित कर रहा है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि प्राकृतिक संसाधनों को बनाया या बढ़ाया नहीं जा सकता।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग वर्तमान दर से जारी रहा तो धरती के अंदर उपलब्ध तांबा 277 साल में, कोबाल्ट और प्लेटिनम 400 साल में, पेट्रोल 49 साल में, पेट्रोलियम गैस 60 साल में, और कोयला कुछ सालों में खत्म हो जाएगा। आज दुनिया में एक साल में जितने ऊर्जा स्रोत (पेट्रोल, कोयला और प्राकृतिक गैस) का उपयोग हो रहा है, उसे बनाने में प्रकृति को दस लाख साल लगते हैं।
इसलिए यह स्पष्ट है कि उपभोक्तावादी संस्कृति में इतनी सुख-सुविधाएं जुटाने के बावजूद इंसान वास्तव में खुश और संतुष्ट नहीं है। लगातार नई जरूरतों को पूरा करने की इच्छा के कारण इंसान मानसिक तनाव का शिकार हो रहा है। पृथ्वी किसी की निजी संपत्ति नहीं है। इसलिए वर्तमान प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना हमारा नैतिक कर्तव्य है। हमें अपनी जरूरतों को सीमित रखना चाहिए।
In simple words: उपभोक्तावादी संस्कृति प्राकृतिक संसाधनों, जैसे खनिज, वन, पानी और ऊर्जा का बहुत अधिक उपयोग करती है। इससे ये संसाधन जल्दी खत्म हो रहे हैं और पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसी दर से उपयोग करने पर ये संसाधन जल्द ही खत्म हो जाएंगे, जिससे भविष्य में बड़ी समस्या होगी।
🎯 Exam Tip: उपभोक्तावादी संस्कृति के मुख्य पहलुओं को समझाएं और प्राकृतिक संसाधनों पर इसके प्रत्यक्ष और दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभावों पर जोर दें। आंकड़ों का उपयोग करना उत्तर को प्रभावी बनाता है।
Question 9. ऊर्जा के पारम्परिक व गैर पारम्परिक स्रोतों का विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer: ऊर्जा के परम्परागत और गैर-परम्परागत स्रोत इस प्रकार हैं:
(क) ऊर्जा के परम्परागत स्रोत – इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
1. खनिज कोयला: खनिज कोयला चार प्रकार का होता है- एन्थ्रेसाइट, बिटुमिनस, लिग्नाइट और पीट। इनमें एन्थ्रेसाइट सबसे अच्छी किस्म का है। खनिज कोयला करोड़ों साल पहले जमीन में दबे जीवों और पेड़ों के अवशेषों से बनता है। कोयला जलने पर वायु प्रदूषण होता है।
2. पेट्रोलियम: यह हाइड्रोकार्बन यौगिकों का मिश्रण है। इसे शुद्ध करने पर हाई-स्पीड पेट्रोल, डीजल और केरोसिन मिलता है। दुनिया का 50 प्रतिशत तेल खाड़ी देशों में बनता है। खाड़ी देशों में सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर शामिल हैं। इनमें भी सऊदी अरब और ईरान दुनिया का 40 प्रतिशत पेट्रोलियम उत्पादन करते हैं।
(ख) ऊर्जा के गैर-परम्परागत स्रोत: परम्परागत स्रोतों के लगातार उपयोग के कारण अब नए, गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों पर शोध किया जा रहा है। इस श्रेणी के प्रमुख स्रोत हैं:
1. सौर ऊर्जा: सूर्य से मिलने वाली रोशनी या ऊर्जा को सौर ऊर्जा कहते हैं। सूर्य में ऊर्जा का बहुत बड़ा भंडार है। यह ऊर्जा पाने का सबसे सस्ता और प्रदूषण रहित तरीका है।
2. पवन ऊर्जा: यह भी प्रकृति से मिलने वाला प्रदूषण रहित स्रोत है। पश्चिमी राजस्थान में हवा की गति 20-40 किमी/घंटा रहती है। इससे हर साल 25000 किलोवाट बिजली पैदा की जा सकती है।
3. भूतापीय ऊर्जा: धरती के अंदर कई जगहों पर 3-15 किमी गहराई पर बहुत गर्म चट्टानें पाई जाती हैं, जहाँ गर्म पानी के सोते मिलते हैं। इस भूगर्भीय गर्मी का उपयोग टर्बाइन घुमाकर बिजली बनाने में किया जा सकता है।
4. बायो गैस: पशुओं के गोबर और कचरे को सड़ाकर बायो गैस बनाई जाती है। इसमें 50-60 प्रतिशत मीथेन गैस होती है। इस गैस का उपयोग खाना बनाने में किया जाता है।
In simple words: ऊर्जा के परम्परागत स्रोत कोयला और पेट्रोलियम हैं, जो पुराने समय से इस्तेमाल होते आ रहे हैं और प्रदूषण फैलाते हैं। गैर-परम्परागत स्रोत सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा और बायो गैस हैं, जो नए हैं और पर्यावरण को कम नुकसान पहुँचाते हैं।
🎯 Exam Tip: ऊर्जा के परम्परागत और गैर-परम्परागत स्रोतों को परिभाषित करें और प्रत्येक के कम से कम दो उदाहरणों का उनके गुणों और उपयोगों के साथ वर्णन करें।
Question 10. पर्यावरण संरक्षण पर भारतीय न्यायपालिका द्वारा दिये गये महत्वपूर्ण निर्णयों का वर्णन कीजिए।
Answer: पर्यावरण संरक्षण पर भारतीय न्यायपालिका ने कई महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं:
1. सिनेमाघरों, वीडियो पार्लरों आदि में कम से कम दो पर्यावरण संबंधी फिल्में/संदेश हर शो में मुफ्त दिखाए जाएं। लाइसेंस देते समय यह शर्त होनी चाहिए।
2. सिनेमाघरों में पर्यावरण और प्रदूषण संबंधी छोटी जानकारी वाली फिल्में दिखाई जाएं। साथ ही, पर्यावरण और प्रदूषण संबंधी रोचक कार्यक्रम रोजाना 5 से 7 मिनट के लिए प्रसारित किए जाएं।
3. छात्रों में जागरूकता लाने के लिए शिक्षण संस्थानों में यह एक अनिवार्य विषय हो।
4. सन् 1996 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और स्थानीय अधिकारियों को दिल्ली के ऐतिहासिक शहर को रोजाना साफ करने, घने वन लगाने और आरक्षित वन कानूनों को लागू करने का आदेश दिया।
5. सुप्रीम कोर्ट ने जनहित में और आगरा-ताजमहल जैसी विश्व धरोहरों को बचाने के लिए 292 कोयला आधारित उद्योगों को बंद करने या दूसरी जगह ले जाने या गैस ईंधन इस्तेमाल करने का आदेश दिया।
6. सुप्रीम कोर्ट ने गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए कई निर्देश जारी किए।
7. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण ही सन् 2000 से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे चार महानगरों में सीसा रहित पेट्रोल का इस्तेमाल हो रहा है।
8. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण ही दिल्ली में अप्रैल 2001 से टैक्सियों, ऑटो रिक्शा और बसों में सी.एन.जी. (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) का इस्तेमाल हो रहा है।
9. वाहन प्रदूषण नियंत्रण और धूम्रपान निषेध पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
In simple words: भारतीय न्यायपालिका ने पर्यावरण बचाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। इसमें फिल्मों के जरिए जागरूकता फैलाना, स्कूलों में पर्यावरण शिक्षा देना, शहरों को साफ रखना, उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण और गाड़ियों में सी.एन.जी. जैसे साफ ईंधन का उपयोग शामिल है।
🎯 Exam Tip: न्यायपालिका के निर्णयों को बिंदुवार लिखें और बताएं कि इन निर्णयों से पर्यावरण संरक्षण में क्या बदलाव आए हैं।
Question 1. विश्व पर्यावरण दिवस किस दिन मनाया जाता है?
(अ) 3 जून
(ब) 4 जून
(स) 5 जून
(द) 6 जून
Answer: (स) 5 जून
In simple words: विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है। यह दिन लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए है।
🎯 Exam Tip: पर्यावरण से संबंधित महत्वपूर्ण दिवसों की तारीखें याद रखना आवश्यक है, क्योंकि ये अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
Question 2. निम्न में से किस दिन पृथ्वी दिवस मनाया जाता है?
(अ) 21 अप्रैल
(ब) 22 अप्रैल
(स) 23 अप्रैल
(द) 24 अप्रैल
Answer: (ब) 22 अप्रैल
In simple words: पृथ्वी दिवस हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता है। यह हमारी धरती को बचाने और उसकी देखभाल करने का दिन है।
🎯 Exam Tip: पृथ्वी दिवस का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। इस दिन से जुड़े महत्व को समझना ज़रूरी है।
Question 3. बिश्नोई समाज के द्वारा प्राणों की आहुति देने की घटना का संबंध भारत के किस राज्य से है?
(अ) उत्तर प्रदेश
(ब) मध्य प्रदेश
(स) हरियाणा
(द) राजस्थान
Answer: (द) राजस्थान
In simple words: बिश्नोई समाज ने पेड़ों की रक्षा के लिए अपनी जान दी थी। यह घटना भारत के राजस्थान राज्य में हुई थी।
🎯 Exam Tip: बिश्नोई आंदोलन और अमृता देवी के बलिदान का ऐतिहासिक संदर्भ और महत्व याद रखें। यह पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
Question 4. निम्न में से कौन - सी ग्रीन हाउस गैस नहीं है?
(अ) क्लोरो - फ्लोरो कार्बन
(ब) कार्बन डाइ - ऑक्साइड
(स) कार्बन मोनो - ऑक्साइड
(द) मीथेन
Answer: (स) कार्बन मोनो - ऑक्साइड
In simple words: कार्बन मोनो-ऑक्साइड ग्रीन हाउस गैस नहीं है। यह एक अलग तरह की हानिकारक गैस है।
🎯 Exam Tip: ग्रीन हाउस गैसों के नाम और उनके प्रभावों को समझना महत्वपूर्ण है। यह ग्लोबल वार्मिंग से संबंधित एक बुनियादी अवधारणा है।
Question 5. उत्तराखंड में किस वर्ष भीषण बाढ़ आई?
(अ) 2011
(ब) 2012
(स) 2012
(द) ZOTT
Answer: (स) 2012
In simple words: उत्तराखंड में बहुत भयानक बाढ़ साल 2012 में आई थी। इस बाढ़ से काफी नुकसान हुआ था।
🎯 Exam Tip: प्राकृतिक आपदाओं से संबंधित प्रमुख घटनाओं का वर्ष और स्थान याद रखें। यह सामान्य ज्ञान और पर्यावरण अध्ययन दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 7. ओजोन परत को सर्वाधिक नुकसान पहुँचाने वाली गैस है
(अ) क्लोरो - फ्लोरो कार्बन
(ब) क्लोरीन
(स) नाइट्रिक आक्साइड
(द) कार्बन डाइआक्साइड
Answer: (अ) क्लोरो - फ्लोरो कार्बन
In simple words: क्लोरो-फ्लोरो कार्बन (CFC) गैस ओजोन परत को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचाती है। यह गैस ओजोन परत में छेद कर देती है।
🎯 Exam Tip: ओजोन परत के क्षरण के लिए जिम्मेदार मुख्य गैस और उसके पर्यावरणीय प्रभावों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 8. निम्न में से कौन - सा प्रदूषण रक्त के हीमोग्लोबिन से मिलकर विषैला पदार्थ कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन बनाता है?
(अ) रेडियोधर्मी कण
(ब) मैंगनीज कण
(स) कार्बन मोनोआक्साइड
(द) क्लोरीन
Answer: (स) कार्बन मोनोआक्साइड
In simple words: कार्बन मोनोऑक्साइड जब रक्त के हीमोग्लोबिन से मिलता है, तो यह एक बहुत ज़हरीला पदार्थ बनाता है, जिससे शरीर को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।
🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रदूषकों के मानव शरीर पर पड़ने वाले विशिष्ट प्रभावों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जो रक्त से संबंधित हैं।
Question 9. ग्रीन हाउस गैसों के कारण वातावरण का तापमान ........रहा है।
(अ) घट
(ब) बढ़
(स) कोई परिवर्तन नहीं
(द) समान
Answer: (ब) बढ़
In simple words: ग्रीन हाउस गैसों के कारण हमारे वातावरण का तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसे ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं।
🎯 Exam Tip: ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य प्रभावों में से एक वातावरण के तापमान में वृद्धि है। इस संबंध को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 10. राजस्थान के किस शहर में आणविक ईंधन द्वारा चालित विद्युत गृह की स्थापना की गई है?
(अ) रावतभाटा
(ब) अजमेर
(स) किशनगढ़
(द) माउण्ट आबू
Answer: (अ) रावतभाटा
In simple words: राजस्थान के रावतभाटा शहर में परमाणु ऊर्जा से बिजली बनाने का संयंत्र लगाया गया है। यह देश के महत्वपूर्ण परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में से एक है।
🎯 Exam Tip: भारत में प्रमुख परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के स्थान और उनसे संबंधित राज्यों को जानना उपयोगी है।
Question 11.
(अ)
(ब)
(स)
(द)
Answer: (द)
In simple words: चूंकि प्रश्न अधूरा है, इसलिए सटीक उत्तर देना संभव नहीं है।
🎯 Exam Tip: यदि प्रश्न अधूरा हो तो सामान्यतः ऐसे प्रश्न का उत्तर देने से बचें, लेकिन यदि बहुविकल्पीय हो तो विकल्पों का मूल्यांकन करें।
Question 12. निम्न में से ऊर्जा का गैर - परम्परागत स्रोत है
(अ) सौर ऊर्जा
(ब) पैट्रोलियम
(स) खनिज कोयला
(द) जल विद्युत
Answer: (अ) सौर ऊर्जा
In simple words: सौर ऊर्जा एक ऐसा स्रोत है जिसे हम बार-बार इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे कि सूरज की रोशनी। यह पर्यावरण के लिए भी अच्छा है।
🎯 Exam Tip: ऊर्जा के परम्परागत और गैर-परम्परागत स्रोतों के बीच अंतर को समझना और प्रत्येक के उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 13. जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र संघ जलवायु परिवर्तन सम्मेलन कोप - 20 किस स्थान पर आयोजित किया गया?
(अ) पैरिस (फ्रांस)
(ब) लीमा (पेरू)
(स) लंदन (इंग्लैण्ड)
(द) क्योटो (जापान)
Answer: (ब) लीमा (पेरू)
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ का कोप-20 जलवायु परिवर्तन सम्मेलन लीमा, पेरू में हुआ था। यह एक बड़ी बैठक थी जहाँ देशों ने जलवायु पर बात की।
🎯 Exam Tip: प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय जलवायु सम्मेलनों के स्थान और वर्ष को याद रखना प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 14. वन महोत्सव मनाया जाता है
(अ) 12 मार्च
(ब) 28 जुलाई
(स) 22 मार्च
(द) 5 जून
Answer: (ब) 28 जुलाई
In simple words: वन महोत्सव हर साल 28 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिन लोग ज़्यादा से ज़्यादा पेड़ लगाते हैं ताकि पर्यावरण अच्छा रहे।
🎯 Exam Tip: वन महोत्सव जैसे राष्ट्रीय पर्वों की तारीख और उनके उद्देश्य को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये पर्यावरण जागरूकता से संबंधित हैं।
Question 15. हमारा राष्ट्रीय पशु है
(अ) चिकारा
(ब) हिरन
(स) हाथी
(द) बाघ
Answer: (द) बाघ
In simple words: भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ है। यह अपनी ताकत और सुंदरता के लिए जाना जाता है।
🎯 Exam Tip: अपने देश के राष्ट्रीय प्रतीकों, जैसे राष्ट्रीय पशु, पक्षी, फूल आदि के बारे में बुनियादी जानकारी रखना सामान्य ज्ञान के लिए आवश्यक है।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 13 अति लघूउत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. 'माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्या' का क्या अर्थ है?
Answer: इसका अर्थ यह है कि पृथ्वी हमारी माता के समान है और हम सभी उसके बच्चे हैं। जिस प्रकार माता अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है, उसी प्रकार पृथ्वी भी सभी जीवों का पालन-पोषण करती है। इसलिए हमें उसकी रक्षा करनी चाहिए.
In simple words: इस बात का मतलब है कि धरती हमारी माँ है और हम उसके बच्चे हैं, जैसे एक माँ अपने बच्चों का ध्यान रखती है, वैसे ही धरती भी हमारा पोषण करती है।
🎯 Exam Tip: यह कथन पर्यावरण संरक्षण के भारतीय सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है। इसका अर्थ और संदर्भ याद रखें।
Question 3. भारतीय संस्कृति के कौन से चार वेद हैं?
Answer: भारतीय संस्कृति के मुख्य चार वेद हैं:
1. ऋग्वेद
2. यजुर्वेद
3. सामवेद
4. अथर्ववेद
In simple words: हमारी भारतीय संस्कृति में चार मुख्य किताबें हैं जिन्हें वेद कहते हैं: ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।
🎯 Exam Tip: चारों वेदों के नाम और उनके महत्व को संक्षेप में समझना भारतीय इतिहास और संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 4. यह कथन किसका है -"साम्राज्य की स्थिरता पर्यावरण की स्वच्छता पर निर्भर करती है।"
Answer: यह कथन महान अर्थशास्त्री और राजनीतिज्ञ चाणक्य का है। उन्होंने बताया था कि एक राज्य तभी स्थिर रह सकता है जब उसका पर्यावरण स्वच्छ और सुरक्षित हो, यह पर्यावरण के महत्व को दर्शाता है.
In simple words: यह बात चाणक्य ने कही थी। उनका मतलब था कि कोई भी राज्य तभी अच्छा और स्थिर रह सकता है जब उसका पर्यावरण साफ़ और सुरक्षित हो।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व्यक्तियों द्वारा दिए गए पर्यावरण संबंधी कथनों को याद रखें, क्योंकि ये अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
Question 5. बिश्नोई समाज के कितने लोगों ने पर्यावरण संरक्षण हेतु अपने प्राणों की आहुति दी?
Answer: 21 सितंबर 1730 को बिश्नोई समाज के 363 लोगों ने अमृता देवी के नेतृत्व में पेड़ों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। उन्होंने यह कहकर अपने प्राणों का बलिदान दिया था कि 'सिर साटे रूख रहे तो भी सस्तो जाण', जिसका अर्थ है कि सिर कटने पर भी यदि पेड़ बच जाए तो यह सस्ता सौदा है.
In simple words: बिश्नोई समाज के 363 लोगों ने अमृता देवी के साथ मिलकर पेड़ों को बचाने के लिए अपनी जान दे दी थी।
🎯 Exam Tip: खेजड़ली आंदोलन और इसमें शामिल लोगों की संख्या को याद रखना पर्यावरण आंदोलनों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण तथ्य है।
Question 6. जनसंख्या वृद्धि के कोई दो प्रभाव लिखिए।
Answer: जनसंख्या वृद्धि के दो प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं:
1. जनसंख्या बढ़ने से खेती योग्य ज़मीन कम होती जा रही है, जिससे ज़मीन की उपजाऊ शक्ति भी घट रही है।
2. इससे खाने-पीने की चीज़ों की कमी हो रही है, क्योंकि बढ़ती आबादी के लिए पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता है.
In simple words: ज़्यादा लोग होने से खेती की ज़मीन कम हो रही है और खाने की चीज़ें भी कम पड़ रही हैं।
🎯 Exam Tip: जनसंख्या वृद्धि के पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को संक्षेप में समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 7. ओजोन परत क्या है?
Answer: ओजोन परत पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद गैसों की एक सुरक्षात्मक ढाल है। यह सूर्य से आने वाली बहुत खतरनाक पराबैंगनी किरणों को धरती पर पहुँचने से रोकती है, जिससे पृथ्वी पर जीवन सुरक्षित रहता है। यह परत हमारी धरती को हानिकारक विकिरण से बचाती है.
In simple words: ओजोन परत हवा की एक चादर है जो सूरज की बुरी किरणों को धरती तक आने से रोकती है, ताकि हम सुरक्षित रह सकें।
🎯 Exam Tip: ओजोन परत की परिभाषा और उसके कार्य को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है, खासकर पराबैंगनी किरणों से सुरक्षा के संबंध में।
Question 9. किस धर्म में अहिंसा को परमधर्म मानते हुए जीव संरक्षण को आवश्यक बताया गया है?
Answer: जैन धर्म में अहिंसा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है और इसी कारण से जीव-जंतुओं की रक्षा करना बहुत ज़रूरी बताया गया है। जैन धर्म सभी जीवों के प्रति दया और सम्मान सिखाता है.
In simple words: जैन धर्म में जीवों को चोट न पहुँचाना सबसे बड़ा धर्म माना गया है। इसलिए, इसमें जानवरों की रक्षा करना बहुत ज़रूरी बताया गया है।
🎯 Exam Tip: जैन धर्म के अहिंसा सिद्धांत और उसके पर्यावरण संरक्षण से संबंध को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 10. राजस्थान के किस सम्प्रदाय के 29 सूत्र प्रकृति संरक्षण हेतु बहुमूल्य नियम हैं?
Answer: राजस्थान में बिश्नोई सम्प्रदाय के 29 नियम प्रकृति संरक्षण के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। ये नियम प्रकृति और सभी जीवों की रक्षा करने की शिक्षा देते हैं, जो उनके जीवन का अभिन्न अंग है.
In simple words: राजस्थान के बिश्नोई सम्प्रदाय के 29 नियम प्रकृति को बचाने के लिए बहुत खास हैं।
🎯 Exam Tip: बिश्नोई सम्प्रदाय के नियमों और उनके प्रकृति संरक्षण के योगदान को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 11. जल में कैडमियम की मात्रा से क्या हानि होती है?
Answer: पानी में कैडमियम की मात्रा ज़्यादा होने से कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। इससे उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर), रक्त कणिकाओं (खून की कोशिकाओं) का कम होना, उल्टी, दस्त और दिल की बीमारियाँ हो सकती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक है.
In simple words: पानी में ज़्यादा कैडमियम होने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, खून की कमी हो सकती है और दिल की बीमारियाँ भी हो सकती हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न धातुओं के प्रदूषण और उनके मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 12. किन्हीं 4 ग्रीन हाउस गैसों के नाम लिखिए।
Answer: चार ग्रीन हाउस गैसों के नाम निम्नलिखित हैं:
1. कार्बन डाइऑक्साइड
2. मीथेन
3. नाइट्रोजन ऑक्साइड
4. क्लोरो - फ्लोरो कार्बन
In simple words: चार ग्रीन हाउस गैसें हैं: कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रोजन ऑक्साइड और क्लोरो-फ्लोरो कार्बन।
🎯 Exam Tip: ग्रीन हाउस गैसों के नाम और उनकी भूमिका को समझना ग्लोबल वार्मिंग के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 13. ग्लोबल वार्मिंग के दो कारण बताइए।
Answer: ग्लोबल वार्मिंग के दो मुख्य कारण हैं:
1. इंसानों की गतिविधियों जैसे ज़्यादा गाड़ियाँ चलाना और कारखानों से निकलने वाला धुआँ, जिससे ग्रीन हाउस गैसें वातावरण में बढ़ती जा रही हैं।
2. जंगलों की तेज़ी से कटाई, क्योंकि पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को सोखते हैं, और पेड़ों की कमी से यह गैस वातावरण में ज़्यादा जमा हो रही है.
In simple words: ग्लोबल वार्मिंग के दो कारण हैं: इंसानों द्वारा ग्रीन हाउस गैसों का ज़्यादा उत्पादन और पेड़ों की ज़्यादा कटाई।
🎯 Exam Tip: ग्लोबल वार्मिंग के कारणों को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये पर्यावरण संबंधी समस्याओं का मूल हैं।
Question 15. दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप कौन - सा है?
Answer: दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली द्वीप है। यह भारत के असम राज्य में ब्रह्मपुत्र नदी पर स्थित है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है.
In simple words: दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली है। यह भारत में ब्रह्मपुत्र नदी पर है।
🎯 Exam Tip: विश्व के भूगोल से संबंधित प्रमुख तथ्यों, जैसे सबसे बड़े द्वीप या नदियों से संबंधित जानकारी को याद रखें।
Question 16. भारत में सबसे भीषणतम अकाल किस वर्ष पड़ा था।
Answer: भारत में सबसे भयानक अकाल सन् 1956 में पड़ा था। इस दौरान देश के कई हिस्सों में भोजन और पानी की भारी कमी हो गई थी, जिससे बहुत से लोगों को परेशानी हुई थी.
In simple words: भारत में सबसे बुरा अकाल साल 1956 में आया था।
🎯 Exam Tip: भारत में हुई प्रमुख प्राकृतिक आपदाओं और उनके वर्षों को याद रखना ऐतिहासिक और सामाजिक अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 17. पैट्रोलियम पदार्थों के उपयोग से कौन - कौन - सी हानिकारक गैसें उत्पन्न होती हैं?
Answer: पेट्रोलियम पदार्थों का इस्तेमाल करने से मुख्य रूप से लेड ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें निकलती हैं। ये गैसें हवा को प्रदूषित करती हैं और स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक होती हैं.
In simple words: पेट्रोलियम जलाने से लेड ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी खराब गैसें निकलती हैं।
🎯 Exam Tip: जीवाश्म ईंधन के जलने से निकलने वाले प्रदूषकों और उनके पर्यावरणीय प्रभावों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 18. भूस्खलन क्या है?
Answer: भूस्खलन तब होता है जब पहाड़ की ढलान पर से चट्टानें या मिट्टी गुरुत्वाकर्षण (पृथ्वी की खींच) के कारण नीचे खिसक जाती हैं। यह अक्सर बारिश या भूकंप जैसी प्राकृतिक घटनाओं के कारण होता है, जिससे रास्ते बंद हो जाते हैं या नुकसान होता है.
In simple words: भूस्खलन का मतलब है जब पहाड़ से मिट्टी या पत्थर नीचे गिरते हैं, अक्सर बारिश या भूकंप के कारण।
🎯 Exam Tip: भूस्खलन की परिभाषा, उसके कारणों और प्रभावों को समझना भौगोलिक अध्ययन के लिए आवश्यक है।
Question 19. भारत के कौन - से राज्य में थार मरुस्थल स्थित है?
Answer: भारत में थार मरुस्थल राजस्थान राज्य में स्थित है। यह भारत का सबसे बड़ा मरुस्थल है और अपनी अनूठी पारिस्थितिकी और संस्कृति के लिए जाना जाता है.
In simple words: थार मरुस्थल भारत के राजस्थान राज्य में है।
🎯 Exam Tip: भारत के प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों, जैसे मरुस्थल, पर्वत श्रृंखलाएं, और नदियाँ, तथा उनके स्थानों को याद रखें।
Question 20. केन्द्रीय मरु अनुसंधान संस्थान कहाँ स्थित है?
Answer: केन्द्रीय मरु अनुसंधान संस्थान जोधपुर में स्थित है। यह संस्थान मरुस्थलीय क्षेत्रों में खेती, पानी और पर्यावरण से संबंधित रिसर्च करता है.
In simple words: मरुभूमि पर रिसर्च करने वाला बड़ा दफ्तर जोधपुर में है।
🎯 Exam Tip: भारत में स्थित प्रमुख अनुसंधान संस्थानों और उनके स्थानों को जानना सामान्य ज्ञान के लिए उपयोगी है।
Question 22. खनन कार्यों से पर्यावरण को होने वाले कोई दो नुकसान बताइए।
Answer: खनन कार्यों से पर्यावरण को होने वाले दो मुख्य नुकसान हैं:
(i) खनन से निकलने वाले खनिज के कण और धूल हवा में मिल जाते हैं, जिससे वायु प्रदूषण होता है। यह प्रदूषण साँस लेने में दिक्कत पैदा करता है.
(ii) खनन के लिए ज़मीन खोदने से जंगल और वन्यजीवों के रहने की जगह कम हो जाती है, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ता है.
In simple words: खनन से हवा में धूल फैलती है और जंगल कम होते हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान होता है।
🎯 Exam Tip: खनन के पर्यावरणीय प्रभावों को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर वायु प्रदूषण और वन क्षेत्र की कमी के संबंध में।
Question 23. वनों के निरन्तर कम होने के कोई दो कारण बताइए।
Answer: वनों के लगातार कम होने के दो मुख्य कारण हैं:
1. खनन गतिविधियों के लिए जंगलों को काटा जाता है, ताकि खनिजों को निकाला जा सके।
2. औद्योगिक क्षेत्रों का लगातार बढ़ना, जिसके लिए बड़ी मात्रा में ज़मीन की ज़रूरत होती है, जिससे जंगल साफ़ किए जाते हैं.
In simple words: जंगल कम होने के दो कारण हैं: खनन के लिए पेड़ों को काटना और कारखाने बनाने के लिए जगह बनाना।
🎯 Exam Tip: वनों की कटाई के मुख्य कारणों और उनके पर्यावरणीय प्रभावों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 24. सबसे अधिक ऊर्जावान कोयला कौन - सा है?
Answer: एन्थ्रेसाइट कोयला सबसे ज़्यादा ऊर्जावान कोयला होता है। इसमें कार्बन की मात्रा सबसे अधिक होती है और यह जलने पर कम धुआँ देता है, जिससे यह ऊर्जा उत्पादन के लिए बहुत अच्छा माना जाता है.
In simple words: एन्थ्रेसाइट सबसे अच्छा कोयला है जिससे बहुत ज़्यादा ऊर्जा मिलती है।
🎯 Exam Tip: कोयले के विभिन्न प्रकारों और उनकी ऊर्जा क्षमता को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 25. धात्विक व अधात्विक खनिज के दो - दो उदाहरण दीजिए।
Answer: धात्विक और अधात्विक खनिज के दो-दो उदाहरण निम्नलिखित हैं:
धात्विक खनिज: लोहा, एल्युमिनियम
अधात्विक खनिज: जिप्सम, पन्ना
In simple words: धात्विक खनिज जैसे लोहा और एल्युमिनियम हैं। अधात्विक खनिज जैसे जिप्सम और पन्ना हैं।
🎯 Exam Tip: खनिजों के प्रकारों को समझना और उनके उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये भूविज्ञान और सामान्य ज्ञान के आधार हैं।
Question 26. परम्परागत व गैर - परम्परागत ऊर्जा स्रोतों के दो - दो उदाहरण दीजिए।
Answer: ऊर्जा के परम्परागत और गैर-परम्परागत स्रोतों के दो-दो उदाहरण निम्नलिखित हैं:
परम्परागत ऊर्जा स्रोत: खनिज कोयला, पेट्रोलियम
गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत: सौर ऊर्जा, बायो गैस
In simple words: परम्परागत ऊर्जा स्रोत कोयला और पेट्रोलियम हैं। गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत सौर ऊर्जा और बायो गैस हैं।
🎯 Exam Tip: ऊर्जा स्रोतों को वर्गीकृत करना और प्रत्येक श्रेणी के उदाहरणों को याद रखना ऊर्जा और पर्यावरण अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 27. खनिज कोयले की कौन-कौन सी किस्में हैं तथा इनमें कौन सा सर्वोत्तम है?
Answer: खनिज कोयले की प्रमुख किस्में बिटुमिनी, लिग्नाइट, पीट और एन्थ्रेसाइट हैं। इन सभी में एन्थ्रेसाइट सबसे अच्छी किस्म का कोयला माना जाता है, क्योंकि इसमें कार्बन की मात्रा सबसे अधिक होती है और यह जलने पर ज़्यादा गर्मी व कम धुआँ देता है.
In simple words: कोयले के प्रकार बिटुमिनी, लिग्नाइट, पीट और एन्थ्रेसाइट हैं। एन्थ्रेसाइट सबसे अच्छा कोयला है।
🎯 Exam Tip: कोयले के विभिन्न प्रकारों और उनके गुणों को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर सर्वोत्तम किस्म की पहचान।
Question 29. विश्व के किन देशों में पेट्रोलियम का उत्पादन सर्वाधिक है?
Answer: दुनिया का 50 प्रतिशत तेल उत्पादन खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर में होता है। इनमें से सऊदी अरब और ईरान विश्व का 40 प्रतिशत पेट्रोलियम उत्पादन करते हैं, जो सबसे ज़्यादा है.
In simple words: ज़्यादातर पेट्रोलियम सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे खाड़ी देशों में बनता है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख तेल उत्पादक देशों और उनके वैश्विक योगदान को याद रखना विश्व भूगोल और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 30. यूरेनियम व खनिज कोयले में से किससे अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है?
Answer: एक किलोग्राम यूरेनियम से इतनी ऊर्जा मिलती है जितनी कि 25 लाख किलोग्राम खनिज कोयले से प्राप्त होती है। इसका मतलब है कि यूरेनियम कोयले से कहीं ज़्यादा ऊर्जावान होता है, क्योंकि यह परमाणु ऊर्जा का स्रोत है.
In simple words: यूरेनियम से कोयले की तुलना में बहुत ज़्यादा ऊर्जा मिलती है, जैसे एक किलो यूरेनियम से 25 लाख किलो कोयले जितनी ऊर्जा।
🎯 Exam Tip: यूरेनियम और कोयले जैसे ऊर्जा स्रोतों की तुलनात्मक ऊर्जा क्षमता को समझना परमाणु ऊर्जा के महत्व को दर्शाता है।
Question 31. मृदा अपरदन से आप क्या समझते हैं?
Answer: मृदा अपरदन का मतलब है जब मिट्टी की सबसे ऊपर की, उपजाऊ परत हवा या पानी जैसी प्राकृतिक ताकतों के कारण अपनी जगह से हटकर दूसरी जगह चली जाती है। इससे ज़मीन की उर्वरता कम हो जाती है और खेती करना मुश्किल हो जाता है.
In simple words: मृदा अपरदन मतलब जब हवा या पानी से ज़मीन की सबसे ऊपर की अच्छी मिट्टी बह जाती है।
🎯 Exam Tip: मृदा अपरदन की परिभाषा, उसके कारणों और परिणामों को समझना पर्यावरणीय अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 32. भारतीय राष्ट्रीय पशु व पक्षी का नाम लिखिए।
Answer: भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ है और राष्ट्रीय पक्षी मोर है। ये दोनों ही भारत की प्राकृतिक विरासत के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं, जो अपनी सुंदरता और महत्व के लिए जाने जाते हैं.
In simple words: भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ है और राष्ट्रीय पक्षी मोर है।
🎯 Exam Tip: देश के राष्ट्रीय प्रतीकों के बारे में बुनियादी जानकारी रखना सामान्य ज्ञान के लिए आवश्यक है।
Question 33. मानवीय पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र का प्रथम सम्मेलन कहाँ हुआ था?
Answer: मानवीय पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र का पहला सम्मेलन 5 से 16 जून 1972 के बीच स्टॉकहोम (स्वीडन) में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर पहली बार वैश्विक स्तर पर चर्चा की गई थी.
In simple words: इंसानी पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र की पहली बैठक 1972 में स्टॉकहोम, स्वीडन में हुई थी।
🎯 Exam Tip: प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलनों के स्थान और वर्ष को याद रखना प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 34. संयुक्त राष्ट्र पृथ्वी सम्मेलन कब व कहाँ हुआ था?
Answer: संयुक्त राष्ट्र पृथ्वी सम्मेलन 14 जून 1992 को रियो डि जेनेरियो (ब्राजील) में आयोजित किया गया था। यह सम्मेलन सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित था, जिसमें कई देशों ने भाग लिया था.
In simple words: संयुक्त राष्ट्र पृथ्वी सम्मेलन 1992 में ब्राजील के रियो डि जेनेरियो में हुआ था।
🎯 Exam Tip: पृथ्वी सम्मेलन के महत्व, उसके स्थान और वर्ष को याद रखना पर्यावरण अध्ययन के लिए आवश्यक है।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 13 लघूउत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डालिए।
Answer: इंसान लगातार आगे बढ़ रहा है, लेकिन इस विकास के साथ पर्यावरण को भी बहुत नुकसान हो रहा है। पेड़ काटे जा रहे हैं, कारखाने बढ़ रहे हैं, शहर फैल रहे हैं, नई तकनीकें आ रही हैं, आबादी बहुत बढ़ रही है और रेडियोधर्मी प्रदूषण भी फैल रहा है। इन सब कारणों से प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। धरती का तापमान भी बढ़ रहा है, जिसे ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं, जो आज दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी समस्या है। इसके अलावा, जनसंख्या बढ़ने से खेती की ज़मीन कम हो रही है और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी घट रही है। पशुओं के लिए चारागाह कम होने से खाने की समस्या भी बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र की 2016 की रिपोर्ट के अनुसार, विकासशील देशों में लगभग 1 अरब 20 करोड़ लोगों को साफ़ पानी नहीं मिल पा रहा है, जो एक गंभीर संकट है.
In simple words: पर्यावरण बचाना बहुत ज़रूरी है क्योंकि इंसान के विकास से प्रदूषण बढ़ रहा है, धरती गर्म हो रही है, खेती की ज़मीन और साफ़ पानी कम हो रहा है, जिससे सभी जीवों के जीवन पर खतरा है।
🎯 Exam Tip: पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को समझाते समय, जनसंख्या वृद्धि, औद्योगिकरण, ग्लोबल वार्मिंग और जल संकट जैसे प्रमुख बिंदुओं को शामिल करें।
Question 2. वायु प्रदूषण का ओजोन परत पर क्या प्रभाव पड़ रहा है? बताइए।
Answer: वायु प्रदूषण का ओजोन परत पर गहरा असर पड़ रहा है। हमारी पृथ्वी के चारों ओर 11 से 35 किलोमीटर की ऊँचाई पर समताप मंडल में ओजोन की एक मोटी परत है। यह परत सूरज से आने वाली खतरनाक पराबैंगनी किरणों को सोखकर उन्हें वापस भेज देती है, जिससे धरती पर जीवन सुरक्षित रहता है। इसी परत को ओजोन सुरक्षा कवच कहते हैं। यहाँ पर ओजोन गैस ऑक्सीजन पर पराबैंगनी किरणों के प्रभाव से बनती है। हवा में कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड और क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसी गैसें प्रदूषण बढ़ा रही हैं और ओजोन परत को नुकसान पहुँचा रही हैं। ओजोन परत के बिगड़ने के बहुत बुरे परिणाम होते हैं। शोध से पता चला है कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन का एक अणु समताप मंडल में एक लाख ओजोन अणुओं को नष्ट कर सकता है। अंटार्कटिका और दक्षिणी ध्रुव पर ओजोन में जो छेद पाया गया है, वह किसी एक जगह को नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित करता है.
In simple words: हवा में प्रदूषण बढ़ाने वाली गैसें ओजोन परत को पतला कर रही हैं। ओजोन परत हमें सूरज की खतरनाक किरणों से बचाती है। अगर यह परत कमज़ोर हो गई, तो हमें कई तरह के नुकसान हो सकते हैं, जैसे कि स्किन कैंसर।
🎯 Exam Tip: ओजोन परत के कार्य, उसके क्षरण के कारण (विशेषकर CFCs) और वैश्विक प्रभावों को स्पष्ट रूप से समझाना आवश्यक है।
Question 3. जल प्रदूषण के कारण व रोकने के उपाय बताइए।
Answer: जल प्रदूषण के कारण: जल प्रदूषण के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. उद्योगों से निकलने वाला कचरा, जिसमें पारा, कैडमियम और लेड जैसी जहरीली धातुएँ होती हैं, पानी में मिल जाता है।
2. सीवेज के पानी में हानिकारक पदार्थ, यूरिया और यूरिक एसिड जैसे जीवाणु मिले रहते हैं, जो पानी को प्रदूषित करते हैं।
3. नाइट्रेट और फॉस्फेट जैसे लवणों का खेतों में ज़्यादा इस्तेमाल किया जाता है, जो बारिश में घुल कर पानी को दूषित कर देते हैं।
4. कच्चा पेट्रोल कुओं से निकालते समय समुद्र में मिल जाता है, जिससे पानी प्रदूषित होता है।
5. कीटनाशक रसायनों का फसलों पर छिड़काव करने से ये रसायन मिट्टी में मिलकर जल स्रोतों को प्रदूषित कर देते हैं।
6. अपमार्जक और रासायनिक साबुन जैसे पदार्थ भी जल प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं।
7. कच्चे पेट्रोल, कुएँ से निकालते समय समुद्र में मिलकर जल प्रदूषित करता है।
जल प्रदूषण रोकने के उपाय: जल प्रदूषण को रोकने के उपाय निम्नलिखित हैं:
1. रासायनिक साबुनों का प्रयोग कम करना चाहिए।
2. उद्योगों के कचरे को नदियों में मिलाने से पहले उसमें मौजूद कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थों को साफ़ करना चाहिए।
3. रेडियोधर्मी पदार्थों और अस्पतालों के कचरे को ज़मीन में दबा देना चाहिए।
4. घरेलू इस्तेमाल का पानी सीधे जल स्रोतों में नहीं डालना चाहिए।
5. सीवरेज और गटर के पानी को साफ़ करने वाले संयंत्रों से साफ़ करके ही खेती और दूसरे कामों में इस्तेमाल करना चाहिए।
6. प्रदूषित पानी को मशीनों से साफ़ करना चाहिए।
7. सूर्य के प्रकाश, हवा, छोटे पौधों और पानी में रहने वाले जीवों से पानी की अपने आप सफ़ाई होने की प्रक्रिया में बाधा नहीं डालनी चाहिए।
8. लोगों में जागरूकता और उनकी भागीदारी से जल प्रदूषण को रोका जा सकता है। भारत सरकार और राज्य सरकारें इस दिशा में काम कर रही हैं.
In simple words: जल प्रदूषण कारखानों के कचरे, सीवेज और खेती के रसायनों से होता है। इसे रोकने के लिए कचरे को साफ़ करना चाहिए, साबुन का कम इस्तेमाल करना चाहिए और लोगों को जागरूक करना चाहिए।
🎯 Exam Tip: जल प्रदूषण के कारणों को पहचानना और उसके प्रभावी रोकथाम के उपायों को विस्तृत रूप से बताना महत्वपूर्ण है।
Question 4. मृदा प्रदूषण के कारण एवं प्रभाव बताइए।
Answer: मृदा प्रदूषण के कारण: मिट्टी की गुणवत्ता में कमी आने को मृदा प्रदूषण कहते हैं। यह प्राकृतिक या इंसानों के कारण हो सकता है। मृदा प्रदूषण के निम्नलिखित कारण हैं:
1. अम्लीय वर्षा मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को कम कर देती है।
2. ज़मीन का ज़्यादा इस्तेमाल (जैसे जंगल काटना) मिट्टी के कटाव का कारण बनता है।
3. रासायनिक खादों और कीटनाशकों का ज़्यादा इस्तेमाल मिट्टी को प्रदूषित करता है।
4. कारखानों और शहरों से निकलने वाले कचरे का सही से निपटारा न होना भी एक बड़ा कारण है।
5. प्रदूषित पानी का खेती में इस्तेमाल करना भी मिट्टी को दूषित करता है।
6. कुछ हानिकारक सूक्ष्म जीव भी मिट्टी को प्रदूषित करते हैं।
7. जंगलों में आग लगना भी मिट्टी को नुकसान पहुँचाता है।
8. ज़्यादा पानी जमा होना और ज़मीन का खारा होना भी समस्याएँ हैं।
9. सूखा भी मिट्टी की गुणवत्ता पर असर डालता है।
मृदा प्रदूषण के प्रभाव: मृदा प्रदूषण के प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं:
1. मृदा प्रदूषण से ज़मीन की उत्पादन क्षमता घट जाती है, जिससे कोई भी फसल या पौधे ठीक से उग नहीं पाते। धीरे-धीरे ज़मीन बंजर हो जाती है।
2. पेड़-पौधों के न होने से मिट्टी का कटाव ज़्यादा होता है, जिससे हवा और पानी से मिट्टी बह जाती है।
3. कचरे के ढेरों पर मक्खी, मच्छर और चूहे जैसे जीव पनपते हैं, जो बीमारियों को फैलाते हैं।
4. खुले में शौच करने से मिट्टी और पानी दोनों प्रदूषित होते हैं, जिससे हैजा, पेचिश और पीलिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
In simple words: मिट्टी प्रदूषण अम्लीय वर्षा, ज़्यादा खादों और कचरे से होता है, जिससे ज़मीन बंजर होती है और बीमारियाँ फैलती हैं।
🎯 Exam Tip: मृदा प्रदूषण के कारणों और प्रभावों को विस्तार से समझाते समय, खेती, कचरा प्रबंधन और प्राकृतिक कारकों पर ध्यान दें।
Question 5. मृदा प्रदूषण को नियन्त्रित करने हेतु उपाय सुझाइए।
Answer: मृदा प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
1. एक ही खेत में बार-बार एक ही फसल उगाने के बजाय अलग-अलग फसलें उगानी चाहिए, जैसे अनाज वाली फसलों के साथ दाल वाली फसलें। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है.
2. ज़्यादा से ज़्यादा पेड़ लगाना भी मिट्टी प्रदूषण को रोकने का एक प्रभावी तरीका है, क्योंकि पेड़ मिट्टी को बाँध कर रखते हैं।
3. मिट्टी प्रदूषण का मुख्य कारण ठोस कचरा है। अगर इसका सही तरीके से निपटारा किया जाए तो मिट्टी प्रदूषण कम हो सकता है।
4. खेती में कीटनाशकों और रासायनिक खादों का इस्तेमाल कम करना चाहिए।
5. प्रदूषित पानी से सिंचाई नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे मिट्टी दूषित हो जाती है।
6. लोगों में जागरूकता और उनकी भागीदारी से भी मिट्टी प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
In simple words: मिट्टी प्रदूषण रोकने के लिए अलग-अलग फसलें उगाएँ, ज़्यादा पेड़ लगाएँ, कचरे का सही निपटारा करें, रासायनिक खाद कम इस्तेमाल करें और प्रदूषित पानी से सिंचाई न करें।
🎯 Exam Tip: मृदा प्रदूषण के रोकथाम के उपायों को समझाते समय, कृषि पद्धतियों, कचरा प्रबंधन और जन जागरूकता पर केंद्रित समाधानों को शामिल करें।
Question 6. रेडियोएक्टिव प्रदूषण के प्रभाव बताइए।
Answer: रेडियोएक्टिव प्रदूषण के प्रभाव निम्नलिखित प्रकार से हैं:
1. रेडियोएक्टिव पदार्थ वातावरण में इतनी ज़्यादा ऊर्जा छोड़ते हैं कि यह पौधों, जानवरों और इंसानों की कोशिकाओं को नष्ट कर देता है, जिससे जीवन पर गंभीर खतरा होता है।
2. रेडियोधर्मी प्रदूषण के आसपास रहने से कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि विकिरण शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाता है।
3. परमाणु विस्फोट से नदियाँ और समुद्र का पानी प्रदूषित हो जाता है, जिससे समुद्री जीव-जंतुओं की मृत्यु हो जाती है।
4. विकिरण प्रदूषण से महामारियों और कीटाणुओं से लड़ने की शरीर की क्षमता कम हो जाती है, जिससे बीमारियाँ आसानी से फैल सकती हैं।
5. विकिरण प्रदूषण से त्वचा पर चकत्ते, जलन और त्वचा कैंसर हो सकता है। सिर के बाल झड़ने लगते हैं और समय से पहले सफ़ेद हो जाते हैं।
6. विकिरण प्रदूषण से रक्त कोशिकाएँ नष्ट हो जाती हैं, जिससे एनीमिया (खून की कमी) रोग हो जाता है।
7. विकिरण प्रदूषण से साँस की नली और फेफड़ों की बीमारियाँ हो सकती हैं।
8. इससे तंत्रिका तंत्र की संवेदनशील नसें उत्तेजित हो जाती हैं। इंसान का मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है और वह पागलों जैसा व्यवहार कर सकता है.
In simple words: रेडियोएक्टिव प्रदूषण से कैंसर, खून की कमी, त्वचा और साँस की बीमारियाँ हो सकती हैं, और यह मानसिक संतुलन भी बिगाड़ सकता है।
🎯 Exam Tip: रेडियोएक्टिव प्रदूषण के स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रभावों को विस्तार से समझना महत्वपूर्ण है।
Question 7. पॉलीथीन या प्लास्टिक का प्रयोग कम करने की दिशा में हम किस प्रकार सहयोग कर सकते हैं?
Answer: पॉलीथीन या प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने में हम कई तरह से मदद कर सकते हैं:
1. पॉलीथीन के थैले का इस्तेमाल न करें। सब्ज़ियाँ खरीदने या किसी और काम के लिए बाज़ार जाते समय कपड़े का थैला साथ लेकर जाएँ।
2. प्लास्टिक के कप में चाय बिलकुल न पिएँ। यह स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक होता है। इसकी जगह मिट्टी के कुल्हड़ या दोबारा इस्तेमाल होने वाले कपों का प्रयोग करें.
3. प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल करने के बजाय पानी के लिए स्टील या काँच की बोतलों का इस्तेमाल करें।
4. प्लास्टिक के कचरे को अलग से इकट्ठा करके रीसाइक्लिंग के लिए दें।
5. प्लास्टिक के खिलौने या चीज़ें खरीदने के बजाय लकड़ी या धातु से बनी चीज़ों को प्राथमिकता दें.
In simple words: हम पॉलीथीन की जगह कपड़े के थैले इस्तेमाल करके, प्लास्टिक कप में चाय न पीकर और प्लास्टिक कचरे को रीसाइकिल करके मदद कर सकते हैं।
🎯 Exam Tip: प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर किए जा सकने वाले उपायों को स्पष्ट रूप से बताना महत्वपूर्ण है।
Question 8. ग्लोबल वार्मिंग (भूमण्डलीय तापन) के कारण बताइए।
Answer: ग्लोबल वार्मिंग (भूमंडलीय तापन) के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. रेफ्रिजरेटर और आग बुझाने वाले यंत्रों में इस्तेमाल होने वाली क्लोरो-फ्लोरो कार्बन (CFC) गैस ग्लोबल वार्मिंग का एक बड़ा कारण है।
2. वाहनों और कारखानों से निकलने वाले बहुत ज़्यादा धुएँ से कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है, जिससे वातावरण गर्म हो रहा है।
3. जंगलों की तेज़ी से कटाई भी ग्लोबल वार्मिंग का एक बड़ा कारण है, क्योंकि पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को सोखते हैं।
4. बिजली बनाने के लिए जीवाश्म ईंधन (जैसे कोयला, तेल) का ज़्यादा इस्तेमाल भी हवा में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ा रहा है, जिससे धरती का तापमान बढ़ रहा है।
5. इंसानों की गतिविधियों से वातावरण में ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है, जो ग्लोबल वार्मिंग का सबसे प्रमुख कारण है.
In simple words: ग्लोबल वार्मिंग CFC गैसों, वाहनों और कारखानों से निकलने वाले धुएँ, पेड़ों की कटाई और जीवाश्म ईंधन के ज़्यादा इस्तेमाल से होती है।
🎯 Exam Tip: ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य कारणों, जैसे CFCs, कार्बन उत्सर्जन और वनों की कटाई, को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 9. ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव बताइए।
Answer: ग्लोबल वार्मिंग के प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं:
(i) ग्लोबल वार्मिंग से जलवायु में बदलाव आएगा। तापमान बढ़ने से हवा गर्म होगी और ऋतु चक्र (मौसम का बदलाव) भी बदल जाएगा। कहीं बहुत ज़्यादा बारिश होगी तो कहीं सूखा पड़ेगा, और कहीं बाढ़ या तूफ़ान जैसी स्थितियाँ बनेंगी।
(ii) तापमान बढ़ने से फसलों के उगने का समय प्रभावित होगा, पौधों में बीमारियाँ और हानिकारक कीटों की संख्या बढ़ जाएगी। इससे खाने-पीने की चीज़ों की कमी हो सकती है।
(iii) पृथ्वी का तापमान बढ़ने से ध्रुवों और हिमालय जैसे ठंडे इलाकों की बर्फ तेज़ी से पिघलेगी। इससे समुद्र का जलस्तर बढ़ जाएगा। जलस्तर बढ़ने से समुद्र के किनारे रहने वाले लोग बेघर हो जाएँगे। बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होगी और कई तटीय शहर पानी में डूब जाएँगे।
(iv) तापमान बढ़ने से पृथ्वी के सभी पेड़-पौधे और जीव-जंतुओं का जीवन असुरक्षित और मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि वे नए वातावरण के अनुकूल नहीं ढल पाएंगे.
In simple words: ग्लोबल वार्मिंग से मौसम बदलता है, फसलें खराब होती हैं, बर्फ पिघलती है जिससे समुद्र का पानी बढ़ता है और सभी जीव-जंतुओं का जीवन मुश्किल हो जाता है।
🎯 Exam Tip: ग्लोबल वार्मिंग के व्यापक प्रभावों, जैसे जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, जलस्तर में वृद्धि और जैव विविधता पर पड़ने वाले असर को याद रखें।
Question 10. खनिज संसाधन को वर्गीकृत कीजिए। अथवा खनिजों के प्रकार बताइए।
Answer: खनिज मुख्य रूप से आग्नेय चट्टानों में पाए जाते हैं। इन खनिजों को गलाकर फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है। खनिजों को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
(i) धात्विक खनिज: ये वे खनिज होते हैं जिनमें धातु का अंश होता है। इन्हें ज़मीन से निकालकर शुद्ध किया जाता है। उदाहरण के लिए, लोहा, तांबा, सीसा, जस्ता, सोना और चाँदी।
(ii) अधात्विक खनिज: ये वे खनिज होते हैं जिनमें धातु का अंश नहीं होता। इन खनिजों में मिलावट बहुत कम होती है, इसलिए इन्हें शुद्ध करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। ये ताप और बिजली के कुचालक होते हैं। ये खनिज मुख्य रूप से तलछटी चट्टानों में पाए जाते हैं और इन्हें सिर्फ एक बार ही इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, एस्बेस्टस, चीनी मिट्टी, पन्ना (बहुमूल्य पत्थर), चूना पत्थर, नमक, जिप्सम, रॉक फॉस्फेट, पाइराइट, संगमरमर, ग्रेनाइट और इमारती पत्थर.
In simple words: खनिजों को दो तरह से बाँटा जाता है: धात्विक (जैसे लोहा, सोना) जिनमें धातु होती है, और अधात्विक (जैसे जिप्सम, चूना पत्थर) जिनमें धातु नहीं होती।
🎯 Exam Tip: खनिजों के वर्गीकरण (धात्विक और अधात्विक) को समझना और प्रत्येक श्रेणी के उदाहरणों को याद रखना भूगोल और सामान्य विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 11. खनन का पर्यावरण पर क्या प्रभाव होता है ?
Answer: सभी प्रकार के खनिजों को ज़मीन से निकालने की प्रक्रिया को खनन कहते हैं। खनन के काम से पर्यावरण को कई नुकसान होते हैं:
1. खनन से निकलने वाले खनिज के कण और धूल हवा में मिल जाते हैं, जिससे वायु प्रदूषण होता है।
2. खनन के कारण जंगल और वन्यजीवों के रहने की जगह कम हो जाती है।
3. वन्यजीवों को खतरा होता है, क्योंकि उनका प्राकृतिक आवास छिन जाता है।
4. खनन से ज़मीन बंजर हो जाती है, क्योंकि उपजाऊ मिट्टी नष्ट हो जाती है।
5. कृषि योग्य ज़मीन की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है।
6. खनन से निकलने वाले कचरे का निपटारा एक बड़ी समस्या है।
7. खनन से भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है, खासकर पहाड़ी इलाकों में।
8. खनन श्रमिकों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है, क्योंकि वे धूल और हानिकारक गैसों के संपर्क में आते हैं.
In simple words: खनन से हवा प्रदूषित होती है, जंगल और वन्यजीवों को नुकसान होता है, ज़मीन बंजर हो जाती है और श्रमिकों का स्वास्थ्य खराब होता है।
🎯 Exam Tip: खनन के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को विस्तृत रूप से समझना और बताना आवश्यक है।
Question 12. वन संसाधन के संरक्षण हेतु कौन - कौन से उपाय किए जा सकते हैं? बताइए। अथवा वनों को बचाने हेतु कौन - कौन से उपाय किये जा सकते हैं?
Answer: वन संसाधनों के संरक्षण के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
1. पेड़ों की कटाई तभी करनी चाहिए जब वे पूरी तरह बड़े हो जाएँ। बिना सोचे-समझे पेड़ों की कटाई रोकनी चाहिए और ज़्यादा से ज़्यादा पेड़ लगाने चाहिए।
2. जंगलों में आग से सुरक्षा करनी चाहिए। आग से बचाव के लिए निगरानी घर और आग से बचाव के रास्ते बनाने चाहिए।
3. सामाजिक वानिकी और कृषि वानिकी को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि लोग अपने खेतों और खाली ज़मीनों पर पेड़ लगाएँ।
4. ऐसी नदी घाटी परियोजनाएँ और बाँध या पुल बनाने की अनुमति नहीं देनी चाहिए जिनसे जंगल डूब जाते हों।
5. चारागाह क्षेत्रों को सुरक्षित रखना चाहिए ताकि जानवरों को चरने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।
6. खेती के लिए ज़मीन बढ़ाने के लिए जंगल काटने से बचना चाहिए। इसके लिए कड़े कानून बनाकर वनों की सुरक्षा करनी चाहिए.
In simple words: जंगल बचाने के लिए पेड़ों की कटाई रोकनी चाहिए, ज़्यादा पेड़ लगाने चाहिए, आग से सुरक्षा करनी चाहिए और ऐसे विकास कार्यों से बचना चाहिए जिनसे जंगल कटते हों।
🎯 Exam Tip: वन संरक्षण के लिए किए जा सकने वाले उपायों को स्पष्ट और विस्तृत रूप से बताना महत्वपूर्ण है, जिसमें सरकारी नीतियों और व्यक्तिगत प्रयासों दोनों को शामिल किया जा सके।
Question 13. ऊर्जा संसाधन क्या है? इनका वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिए।
Answer: ऊर्जा संसाधन वे जैविक और अजैविक पदार्थ होते हैं जिनके उपयोग से शक्ति (ऊर्जा) प्राप्त होती है। किसी भी देश का आर्थिक विकास वहाँ के ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर करता है। उद्योगों, परिवहन, कृषि और चिकित्सा जैसे सभी क्षेत्रों में ऊर्जा की ज़रूरत होती है। ऊर्जा संसाधनों को उनके स्रोत के आधार पर दो भागों में बांटा जा सकता है:
(i) परम्परागत ऊर्जा संसाधन: ये ऊर्जा के वे स्रोत हैं जिनका इंसान पुराने समय से इस्तेमाल करता आ रहा है। इन्हें परम्परागत ऊर्जा संसाधन कहते हैं। उदाहरण के लिए, कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और जल विद्युत। इनका ज़्यादा इस्तेमाल पर्यावरण को प्रदूषित करता है।
(ii) गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधन: ये ऊर्जा के वे स्रोत हैं जिनका इंसान ने कुछ साल पहले ही इस्तेमाल करना शुरू किया है। इन्हें गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधन कहते हैं। उदाहरण के लिए, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा और बायो गैस। ये स्रोत पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करते हैं.
In simple words: ऊर्जा संसाधन वे चीज़ें हैं जिनसे हमें शक्ति मिलती है। ये दो तरह के होते हैं: परम्परागत (जैसे कोयला, पेट्रोलियम) जो पुराने समय से इस्तेमाल हो रहे हैं और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाते हैं; और गैर-परम्परागत (जैसे सूरज की रोशनी, हवा) जो नए हैं और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचाते।
🎯 Exam Tip: ऊर्जा संसाधनों की परिभाषा, उनके वर्गीकरण (परम्परागत और गैर-परम्परागत) और प्रत्येक श्रेणी के उदाहरणों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 14. भूतापीय ऊर्जा क्या है? संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: भूतापीय ऊर्जा: पृथ्वी का अंदरूनी हिस्सा बहुत गर्म और पिघला हुआ है। इसलिए, पृथ्वी के अंदरूनी भागों से कभी-कभी कुछ जगहों पर सूखी भाप या गर्म पानी के स्रोत के रूप में ऊर्जा बाहर निकलती रहती है। पृथ्वी के अंदरूनी भागों की गर्मी का इस्तेमाल करके बिजली बनाई जाती है, जिसे भूतापीय ऊर्जा कहते हैं। भूतापीय ऊर्जा इसलिए मौजूद है क्योंकि पृथ्वी की गहराई बढ़ने के साथ उसका तापमान लगातार बढ़ता जाता है.
In simple words: भूतापीय ऊर्जा वह गर्मी है जो धरती के अंदर से निकलती है। इस गर्मी से बिजली बनाई जा सकती है, क्योंकि धरती की गहराई में तापमान हमेशा ज़्यादा होता है।
🎯 Exam Tip: भूतापीय ऊर्जा की परिभाषा, उसके स्रोत और ऊर्जा उत्पादन में उसके उपयोग को संक्षेप में समझाना आवश्यक है।
प्रश्न 15. भूस्खलन क्या है? इसके कारण एवं प्रभाव बताइए।
Answer: भूस्खलन का मतलब है जब पहाड़ी ढलान पर चट्टानें गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे खिसक जाती हैं।
भूस्खलन के कारण और प्रभाव: पहाड़ी इलाकों में पेड़ों की कमी से चट्टानें कमजोर हो जाती हैं। खनन और बांध बनाने से भी भूस्खलन होता है। गुरुत्वाकर्षण से चट्टानें नीचे खिसकती हैं, लेकिन इंसानों की गतिविधियों से भी भूस्खलन होता है। जब भूस्खलन आबादी वाले इलाकों में होता है, तो लोग मलबे में दब जाते हैं। इससे जान-माल का बड़ा नुकसान होता है। यातायात के रास्ते बंद हो जाते हैं। कई बार भूस्खलन से नदियों के रास्ते रुक जाते हैं और वहां अस्थाई झीलें बन जाती हैं। जब यह झील टूटती है, तो भी भारी जान-माल का नुकसान होता है।
In simple words: भूस्खलन तब होता है जब चट्टानें पहाड़ से नीचे गिरती हैं। यह पेड़ों की कमी, खनन और गुरुत्वाकर्षण के कारण होता है। इससे लोगों की जान जा सकती है, रास्ते बंद हो सकते हैं और अस्थायी झीलें बन सकती हैं।
🎯 Exam Tip: जब भूस्खलन के कारणों और प्रभावों का वर्णन करें, तो प्राकृतिक और मानवीय दोनों कारकों को स्पष्ट रूप से बताएं और उनके परिणामों को विस्तार से समझाएं।
प्रश्न 16. मृदा अपरदन क्या है? इसे किस प्रकार रोका जा सकता है?
Answer: मृदा अपरदन का अर्थ है जब मिट्टी की सबसे ऊपर की उपजाऊ परत मानवीय या प्राकृतिक कारणों से हवा या पानी द्वारा एक जगह से दूसरी जगह चली जाती है, जिससे मिट्टी अनुपजाऊ हो जाती है। मृदा अपरदन से खेती की पैदावार में बहुत कमी आती है।
मृदा अपरदन को रोकने के उपाय:
(i) वनारोपण: पेड़-पौधे जमीन को सुरक्षात्मक आवरण देते हैं। पेड़ों के कारण पानी सीधे जमीन पर नहीं गिर पाता, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। वनारोपण मृदा अपरदन की समस्या को हल करने में बहुत मदद करता है।
(ii) पेड़ों की रक्षक मेखला: पेड़ों की ऐसी कतारें लगाना जो मिट्टी को कटाव से बचाएं, वे भी मृदा अपरदन को कम करने में सहायक होती हैं।
(iii) रेतीले टीलों का स्थिरीकरण: रेगिस्तानी इलाकों में रेत के टीलों को स्थिर करना बहुत जरूरी है। यह काम कंटीले पौधे लगाकर किया जा सकता है।
In simple words: मिट्टी की ऊपरी परत का हवा या पानी से बह जाना मृदा अपरदन कहलाता है। इसे रोकने के लिए पेड़ लगाने, पेड़ों की कतारें बनाने और रेतीले टीलों को स्थिर करने जैसे उपाय करने चाहिए।
🎯 Exam Tip: मृदा अपरदन के कारणों को समझाते हुए इसके प्रभावों को विस्तार से लिखें और साथ ही इसके रोकथाम के उपाय भी स्पष्ट रूप से बताएं।
प्रश्न 17. मरुस्थलीकरण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: पुराने समय की विकसित सभ्यताएं, जैसे कालीबंगा और रंगमहल, में मरुस्थल के अवशेष देखे जा सकते हैं। मरुस्थलीकरण वह प्रक्रिया है जो सूखे, अर्ध-शुष्क और कम बारिश वाले इलाकों में लगातार चलती रहती है। संयुक्त राष्ट्र संघ के पर्यावरण कार्यक्रम की रिपोर्ट के अनुसार, पृथ्वी का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा मरुस्थल है और यह लगातार बढ़ रहा है। सहारा, थार, कालाहारी और अरब के मरुस्थल दुनिया के मुख्य मरुस्थलों में से हैं।
In simple words: मरुस्थलीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें उपजाऊ जमीन रेगिस्तान में बदल जाती है। यह सूखे इलाकों में होता है और दुनिया का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही मरुस्थल बन चुका है।
🎯 Exam Tip: मरुस्थलीकरण को परिभाषित करते हुए इसके विस्तार के वैश्विक आंकड़ों और प्रमुख मरुस्थलों के उदाहरणों को शामिल करें।
प्रश्न 18. भारतीय संविधान में पर्यावरण संरक्षण के बारे में क्या वर्णित है? बताइए।
Answer: भारतीय संविधान में पर्यावरण संरक्षण के लिए कुछ मुख्य प्रावधान किए गए हैं:
(i) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में कहा गया है कि हर व्यक्ति को उन गतिविधियों से बचाया जाना चाहिए, जिनसे उसके जीवन, स्वास्थ्य और शरीर को नुकसान पहुँचता है।
(ii) राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के अनुच्छेद 48 में बताया गया है कि राज्य पर्यावरण को सुधारेगा, उसकी रक्षा करेगा और वन्य जीवन को भी सुरक्षा देगा।
(iii) संविधान के भाग 4 (क) के अनुच्छेद 51 में मूल कर्तव्यों के तहत प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार करने की बात कही गई है, जिसमें जंगल, झीलें, नदियाँ और अन्य जीव शामिल हैं, और सभी प्राणियों के प्रति दया का भाव रखने को कहा गया है।
(iv) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 252 और 253 बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि ये पर्यावरण को ध्यान में रखकर कानून बनाने का अधिकार देते हैं।
In simple words: भारतीय संविधान लोगों के जीवन और पर्यावरण की रक्षा के लिए नियम बनाता है। यह राज्य को पर्यावरण सुधारने और जानवरों की सुरक्षा का काम देता है, और नागरिकों को पर्यावरण का ध्यान रखने का कर्तव्य देता है।
🎯 Exam Tip: भारतीय संविधान के प्रासंगिक अनुच्छेदों का उल्लेख करें और बताएं कि वे पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या प्रावधान करते हैं।
प्रश्न 19. वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
Answer: वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
1. इस अधिनियम के तहत वन्य जीव संरक्षण को राज्य सूची से हटाकर समवर्ती सूची में डाल दिया गया, जिससे केंद्र और राज्य दोनों इस पर कानून बना सकें।
2. यह वन्य पशुओं की सुरक्षा और उनके प्रबंधन को सुनिश्चित करता है।
3. पशुओं के शिकार, उनके चमड़े और चमड़े से बनी चीजों पर रोक लगाता है।
4. अवैध शिकार को रोकता है और वन्य जीवों के संरक्षण को बढ़ावा देता है। इस कानून के तहत इसका उल्लंघन करने पर 5 साल तक की कैद और 1 लाख रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यदि बार-बार उल्लंघन किया जाता है, तो 5 हजार रुपये का जुर्माना और 7 साल तक की कैद का प्रावधान है।
In simple words: वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 जानवरों की सुरक्षा के लिए एक कानून है। यह शिकार को रोकता है, वन्य जीवों का प्रबंधन करता है और उन्हें बचाने के लिए सजा का प्रावधान करता है।
🎯 Exam Tip: वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की मुख्य विशेषताओं को क्रमबद्ध तरीके से बताएं, विशेषकर इसके कानूनी प्रावधानों पर ध्यान दें।
प्रश्न 1. जल प्रदूषण का कारण, प्रभाव एवं रोकने के उपाय बताइए।
Answer:
जल प्रदूषण: प्राकृतिक जल में किसी भी अवांछित बाहरी पदार्थ के मिलने से जब पानी की गुणवत्ता कम हो जाती है, तो उसे जल प्रदूषण कहते हैं।
जल प्रदूषण के कारण: जल प्रदूषण के मुख्य कारण नीचे दिए गए हैं-
1. कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ।
2. सीवेज का पानी जिसमें कई बैक्टीरिया और हानिकारक पदार्थ जैसे- यूरिया और यूरिक एसिड मिले होते हैं, जिससे जल प्रदूषण होता है।
3. नाइट्रेट और फॉस्फेट लवण जो आमतौर पर खेतों में उर्वरक के रूप में उपयोग किए जाते हैं, वे बारिश में मिलकर जल को प्रदूषित कर देते हैं।
4. कच्चा पेट्रोल कुओं से निकालते समय समुद्र में मिल जाता है, जिससे जल प्रदूषित होता है।
5. फसलों पर कीटनाशक रसायनों का छिड़काव करने से ये रसायन मिट्टी और जल स्रोतों को प्रदूषित कर देते हैं।
6. कुछ हानिकारक सूक्ष्म जीव।
7. वनों में आग लगना।
8. जल भराव और लवणीयता।
9. सूखा।
जल प्रदूषण के प्रभाव: जल प्रदूषण के मुख्य प्रभाव निम्नलिखित हैं-
1. दस्त, पेचिश, हैजा और टायफाइड जैसी बीमारियाँ दूषित जल के इस्तेमाल से होती हैं।
2. पानी में जहरीले रसायनों के मिलने से उसमें रहने वाले जीव-जन्तु मर जाते हैं।
3. जब मनुष्य दूषित जल के संपर्क में आता है, तो कई परजीवी शरीर में प्रवेश कर नारू जैसी बीमारी पैदा करते हैं।
4. पानी में मौजूद दूषित रासायनिक पदार्थों से मनुष्यों में मिनीमाता जैसी कई बीमारियाँ फैल जाती हैं।
5. प्रदूषित जल में विभिन्न प्रदूषक तत्व जमा होकर जलाशय की तली में बैठ जाते हैं, जिससे पानी के पौधे खत्म हो जाते हैं।
6. प्रदूषित जल में शैवाल के बढ़ने और ऑक्सीजन की कमी से जलीय जन्तु, खासकर मछलियाँ, ऑक्सीजन न मिलने के कारण मरने लगती हैं।
7. घरेलू कचरे में बहकर आए डिटर्जेंट पदार्थ सूक्ष्म जीवों को नष्ट कर देते हैं।
8. समुद्रों में तेल के रिसाव से जलीय जन्तु, खासकर मछलियाँ और जल पक्षी (जैसे बतख, जल मुर्गी) बुरी तरह प्रभावित होते हैं।
9. जल प्रदूषण से कई जीव-जन्तु और वनस्पतियाँ नष्ट हो जाती हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो जाता है।
10. बढ़ते जल प्रदूषण से पीने के पानी का संकट गहराने लगा है और पानी को लेकर झगड़े होने लगे हैं।
11. जल प्रदूषण का बुरा प्रभाव संसाधनों की उपलब्धता और गुणवत्ता पर भी पड़ता है। उदाहरण के लिए, प्रदूषित जल से सिंचाई फसल उत्पादन और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
जल प्रदूषण रोकने के उपाय: जल प्रदूषण रोकने के उपाय निम्नलिखित हैं-
1. रासायनिक साबुनों का प्रयोग कम करना चाहिए।
2. उद्योगों के कचरे को नदियों में डालने से पहले उसमें मौजूद जैविक और अजैविक पदार्थों को नष्ट कर देना चाहिए।
3. रेडियोधर्मी पदार्थ और अस्पतालों के कचरे को जमीन में गाड़ना चाहिए।
4. घरेलू इस्तेमाल किए गए पानी को सीधे जल स्रोतों में नहीं मिलाना चाहिए।
5. सीवरेज और गटर के पानी को सीवरेज उपचार संयंत्रों द्वारा साफ करने के बाद ही खेती और अन्य कामों में इस्तेमाल करना चाहिए।
6. प्रदूषित जल का यांत्रिक तरीकों से शुद्धिकरण किया जाना चाहिए।
7. सूर्य के प्रकाश, हवा, छोटे पौधों और जलीय जीवों द्वारा पानी के प्राकृतिक शुद्धिकरण की प्रक्रिया को बाधित नहीं करना चाहिए।
8. जन जागरूकता और लोगों की भागीदारी से जल प्रदूषण को रोका जा सकता है। भारत सरकार और राज्य सरकारें इस दिशा में काम कर रही हैं।
In simple words: जल प्रदूषण तब होता है जब पानी में हानिकारक चीजें मिल जाती हैं, जैसे कारखानों का कचरा और सीवेज। इससे बीमारियाँ फैलती हैं और जलीय जीवन को नुकसान होता है। इसे रोकने के लिए कचरा कम करना, पानी को साफ करना और पेड़ों को लगाना जरूरी है।
🎯 Exam Tip: जल प्रदूषण के कारणों, प्रभावों और उपायों को अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से समझाएं। उदाहरणों का प्रयोग करें।
प्रश्न 2. ग्रीन हाउस प्रभाव पर विस्तृत नोट लिखिए।
Answer:
ग्रीन हाउस प्रभाव (हरित गृह प्रभाव): ग्लोबल वार्मिंग आज दुनिया की एक बड़ी समस्या बन चुकी है। इसे ग्रीन हाउस प्रभाव के आधार पर समझा जा सकता है। ग्रीन हाउस एक ऐसे कमरे को कहते हैं जहां पौधे उगाए जाते हैं। इस कमरे की दीवारें और छत गर्मी रोकने वाले शीशे से बनी होती हैं, जिससे सूरज की रोशनी और गर्मी अंदर तो आ जाती है, लेकिन बाहर नहीं निकल पाती। इससे सर्दियों में भी कमरे का तापमान कम नहीं होता, जिससे पौधे आसानी से उग सकते हैं।
पृथ्वी के वातावरण का तापमान भी इसी तरह बढ़ रहा है। सूरज की किरणें वातावरण से होकर धरती की सतह से टकराती हैं और फिर परावर्तित होकर लौट जाती हैं। धरती का वातावरण कई गैसों से बना है। इनमें से ज़्यादातर गैसें धरती के ऊपर एक प्राकृतिक आवरण बना देती हैं। यह आवरण लौटती हुई किरणों के एक हिस्से को उसी तरह रोक लेता है जैसे ग्रीन हाउस में शीशे की दीवारें।
इसके परिणामस्वरूप पृथ्वी एक गर्म गैस वाले कमरे जैसी हो जाती है। ऐसी गैसों को ग्रीन हाउस गैसें कहते हैं। इनमें मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रोजन ऑक्साइड, क्लोरो-फ्लोरो कार्बन शामिल हैं।
जब पृथ्वी के वातावरण में कुछ प्रदूषित गैसों की मात्रा बढ़ जाती है, तो पृथ्वी की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। इससे पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ता रहता है, इसी प्रभाव को ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं। ऑक्सफोर्ड शब्दकोश के अनुसार, मानव द्वारा उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड के आवरण के प्रभाव से पृथ्वी की सतह के लगातार गर्म होने को ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं। ग्रीन हाउस गैसों के प्रभाव से पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसी को ग्लोबल वार्मिंग या वैश्विक तापमान कहते हैं।
ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य कारण:
1. इंसानों की गतिविधियों से वातावरण में ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा लगातार बढ़ रही है।
2. वाहनों और उद्योगों से निकलने वाले धुएं और गैसों से कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है।
3. वनों की तेजी से कटाई भी इसका एक बड़ा कारण है।
4. रेफ्रिजरेटर और आग बुझाने वाले यंत्रों में इस्तेमाल होने वाली क्लोरो-फ्लोरो कार्बन (CFC) ग्लोबल वार्मिंग का सबसे बड़ा कारण है। CFC पृथ्वी के ऊपर बनी प्राकृतिक ओजोन परत को नष्ट कर देती है, जो सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस ओजोन परत में एक बड़ा छेद हो चुका है, जिससे पराबैंगनी किरणें सीधे पृथ्वी पर पहुँच रही हैं। इसी कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। इस तापमान वृद्धि से ध्रुवों पर जमी बर्फ भी पिघल रही है, जिससे समुद्र का जलस्तर बढ़ने का खतरा है और समुद्र किनारे के शहर डूब सकते हैं।
5. बिजली उत्पादन के लिए जीवाश्म ईंधन का ज़्यादा इस्तेमाल भी वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ा रहा है, जिससे तापमान बढ़ रहा है।
6. नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों और ईंधन के इस्तेमाल से नाइट्रोजन ऑक्साइड वायुमंडल में पहुँचते हैं, जो ग्रीन हाउस प्रभाव पैदा करते हैं।
7. ज्वालामुखी विस्फोट।
ग्रीन हाउस प्रभाव को नियंत्रित करने के उपाय:
1. वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, क्लोरो-फ्लोरो कार्बन जैसे यौगिकों की मात्रा कम करना।
2. औद्योगिक संस्थानों में ऐसे संयंत्र लगाना जो कार्बन यौगिकों और अन्य गैसों को कम उत्सर्जित करें और उत्सर्जित होने से पहले उन्हें वायुमंडल में जाने से रोक दें।
3. जीवाश्म ईंधनों का प्रयोग कम करना।
4. वनों का संरक्षण और विस्तार करना ताकि ग्रीन हाउस प्रभाव वाली गैसों को अधिक से अधिक सोखा जा सके।
5. जीवाश्म ईंधनों की जगह सौर ऊर्जा जैसे गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करना ताकि ग्रीन हाउस प्रभाव वाली गैसों की मात्रा कम हो सके।
6. जैविक खाद का अधिक प्रयोग करना।
7. बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करना ताकि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कम हो सके।
ग्रीन हाउस प्रभाव से होने वाले नुकसान:
1. तापमान में वृद्धि: ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा बढ़ने से पृथ्वी की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती, जिससे ग्लोबल वार्मिंग की समस्या पैदा होती है।
2. बर्फ का पिघलना: तापमान बढ़ने से ग्लेशियर पिघलकर जल स्तर बढ़ा देंगे, जिससे समुद्र के तटीय इलाके जलमग्न हो जाएंगे।
3. वर्षा में बदलाव: तापमान बढ़ने से जलीय भागों से अधिक वाष्पीकरण होगा, जिससे अधिक वर्षा होगी। साथ ही मौसम में भी बदलाव आएंगे।
4. खेती पर प्रभाव: ग्रीन हाउस प्रभाव से तापमान में वृद्धि होगी, जिससे जलवायु परिवर्तन होगा और फसल उत्पादन व जनजीवन प्रभावित होगा।
In simple words: ग्रीन हाउस प्रभाव तब होता है जब पृथ्वी के वातावरण में कुछ गैसें (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड) बढ़ जाती हैं और गर्मी को बाहर जाने से रोकती हैं, जिससे पृथ्वी का तापमान बढ़ता है। इसके कारण बर्फ पिघलती है, मौसम बदलता है और खेती को नुकसान होता है। इसे रोकने के लिए कम प्रदूषण करना और पेड़ लगाना जरूरी है।
🎯 Exam Tip: ग्रीन हाउस प्रभाव को परिभाषित करते हुए, इसके कारणों, नियंत्रण के उपायों और प्रभावों को अलग-अलग शीर्षकों में स्पष्ट और विस्तृत रूप से समझाएं।
प्रश्न 3. संघ जलवायु धार्मिक सम्मेलन कोप-20 के बारे में आप क्या जानते हैं? बताइए।
Answer: संघ जलवायु धार्मिक सम्मेलन कोप-20 का आयोजन 1 से 14 दिसंबर 2014 तक हुआ था। इस सम्मेलन की मुख्य बातें निम्नलिखित थीं:
(1) इस सम्मेलन में दुनिया के 194 देशों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं, गैर-सरकारी संगठनों के 12500 राजनेताओं, जलवायु कार्यकर्ताओं और मीडिया कर्मियों ने भाग लिया। इसमें जलवायु परिवर्तन की समस्या और उसके समाधान पर गंभीरता से चर्चा की गई।
(2) पीस के पर्यावरण मंत्री मैनुएल पुलगर विदाल इस सम्मेलन के अध्यक्ष थे। भारत की ओर से पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसमें भाग लिया। संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्कालीन महासचिव बान की मून ने इस सम्मेलन को संबोधित किया।
(3) इस सम्मेलन में वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय संकल्पों के एक आम सहमति वाले प्रस्ताव को मंजूरी मिली।
(4) सम्मेलन में भारत के लिए सबसे बड़ी सफलता यह थी कि वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में कमी के राष्ट्रीय संकल्पों के लिए बने सहमति प्रस्ताव में विकासशील देशों की चिंताओं का समाधान किया गया। विकसित देशों को अधिक वित्तीय सहायता देने और 2020 तक हरित जलवायु कोष को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर प्रतिवर्ष करने का अधिकार भी दिया गया।
(5) समझौते के अनुसार, सभी संयुक्त राष्ट्र संघ देशों को पेरिस सम्मेलन में अपने कार्बन उत्सर्जन में कमी के लक्ष्य प्रस्तुत करने थे।
In simple words: कोप-20 एक बड़ा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन था जो 2014 में हुआ था। इसमें दुनिया भर के देशों ने जलवायु परिवर्तन की समस्या पर चर्चा की और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य तय किए। भारत के लिए यह सफल रहा क्योंकि इसमें विकासशील देशों की चिंताओं पर ध्यान दिया गया।
🎯 Exam Tip: कोप-20 सम्मेलन की तिथि, स्थान, मुख्य चर्चा बिंदुओं और प्रमुख उपलब्धियों को संक्षेप में स्पष्ट करें।
प्रश्न 4. संयुक्त राष्ट्र संघ जलवायु परिवर्तन के पेरिस सम्मेलन 2015 पर एक टिप्पणी लिखिए।
Answer: जलवायु परिवर्तन हमारे जीवन और अस्तित्व से जुड़ी एक गंभीर वैश्विक समस्या है। इसके कारण दुनिया में कई गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं, जैसे प्राकृतिक आपदाओं का बढ़ना, मानव स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव, घातक बीमारियों का प्रकोप, पशु-पक्षियों के अस्तित्व को खतरा और द्वीपों का डूबना।
इन सभी समस्याओं की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए पहली बार वैश्विक स्तर पर 5 से 16 जून 1972 तक स्टॉकहोम (स्वीडन) में मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र का सम्मेलन हुआ। स्टॉकहोम सम्मेलन की बीसवीं वर्षगांठ पर 1992 में रियो डी जनेरियो (ब्राजील) में संयुक्त राष्ट्र पृथ्वी सम्मेलन हुआ। इसी सम्मेलन में यू.एन.एफ.सी.सी.सी. संधि के तहत जलवायु परिवर्तन पर पहला संयुक्त सम्मेलन (कोप) 1995 में बर्लिन (जर्मनी) में हुआ। तब से इसके लगातार वार्षिक सम्मेलन हो रहे हैं। इसी क्रम में 21वां वार्षिक सम्मेलन पेरिस में संपन्न हुआ।
संयुक्त राष्ट्र संघ जलवायु परिवर्तन का पेरिस सम्मेलन 30 नवंबर से 12 दिसंबर तक फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित किया गया। इसकी प्रमुख बातें निम्नलिखित रहीं:
4. विश्व के कम से कम उन 55 देशों के अनुमोदन के बाद, जो कि 55 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार थे, इसे 30 दिनों के अंदर लागू किया जाना था।
5. सदस्य देशों ने 21वीं सदी में विश्व के तापमान में वृद्धि को दो डिग्री सेल्सियस से कम स्तर तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा।
6. भारत ने जीवाश्म ईंधन के उत्सर्जन में कटौती के साथ 2022 तक 175 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा।
भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा था, "पेरिस समझौते में न कोई विजेता है और न ही किसी की हार हुई है। पर्यावरण को लेकर न्याय की जीत हुई है। हम सब एक हरे-भरे भविष्य पर काम कर रहे हैं।" फ्रांस के राष्ट्रपति ने इसे धरती के लिए "महान दिन" कहा। उन्होंने कहा कि पेरिस में कई सदियों से कई क्रांतियां देखी गई हैं और आज सबसे खूबसूरत और शांतिपूर्ण क्रांति हुई है। भारत के पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह एक समझौता नहीं, बल्कि 7 अरब लोगों के जीवन में एक नया अध्याय है। भारत ने 2 अक्टूबर 2016 से समझौते को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
In simple words: पेरिस सम्मेलन 2015 एक बड़ा समझौता था जिसका उद्देश्य वैश्विक तापमान वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस से कम रखना था। यह जलवायु परिवर्तन की गंभीर समस्या का समाधान करने के लिए किया गया था। भारत ने भी इसमें शामिल होकर अक्षय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा।
🎯 Exam Tip: पेरिस समझौते की पृष्ठभूमि, उसके मुख्य लक्ष्यों और प्रमुख परिणामों को विस्तार से बताएं, साथ ही इसमें भारत की भूमिका का भी उल्लेख करें।
Free study material for Political Science
RBSE Solutions Class 12 Political Science Chapter 13 पर्यावरण व प्राकृतिक संसाधन
Students can now access the RBSE Solutions for Chapter 13 पर्यावरण व प्राकृतिक संसाधन prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 12 Political Science textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.
Detailed Explanations for Chapter 13 पर्यावरण व प्राकृतिक संसाधन
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 12 Political Science chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 12 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Political Science Class 12 Solved Papers
Using our Political Science solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 12 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 13 पर्यावरण व प्राकृतिक संसाधन to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated RBSE Solutions Class 12 Political Science Chapter 13 पर्यावरण व प्राकृतिक संसाधन is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Political Science are as per latest RBSE curriculum.
Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 12 Political Science Chapter 13 पर्यावरण व प्राकृतिक संसाधन as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Political Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 12 Political Science Chapter 13 पर्यावरण व प्राकृतिक संसाधन will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 12 Political Science. You can access RBSE Solutions Class 12 Political Science Chapter 13 पर्यावरण व प्राकृतिक संसाधन in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 12 Political Science Chapter 13 पर्यावरण व प्राकृतिक संसाधन in printable PDF format for offline study on any device.