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Question 1. गाँधीजी इनमें से किसे जीवन मूल्य नहीं मानते थे
(अ) अहिंसा
(ब) सत्य
(स) प्रेम
(द) धन संग्रह
Answer: (द) धन संग्रह
In simple words: गाँधीजी का मानना था कि अहिंसा, सत्य और प्रेम जैसे मूल्य जीवन के लिए बहुत ज़रूरी हैं, लेकिन वे धन इकट्ठा करने को जीवन का महत्वपूर्ण मूल्य नहीं मानते थे।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी के नैतिक सिद्धांतों और मूल्यों को याद रखें, खासकर उन चीजों को जिन्हें वे जीवन के लिए अनुपयोगी मानते थे, जैसे अत्यधिक धन संग्रह।
Question 4. हिजरत का तात्पर्य है
(अ) हज करना।
(ब) अपना निवास स्थान छोड़, अन्यत्र जाना
(स) अहिंसात्मक आन्दोलन
(द) सामाजिक बहिष्कार
Answer: (ब) अपना निवास स्थान छोड़, अन्यत्र जाना
In simple words: 'हिजरत' का मतलब है जब कोई व्यक्ति अपनी जगह छोड़कर किसी दूसरी जगह चला जाता है, अक्सर सुरक्षा या बेहतर जीवन की तलाश में।
🎯 Exam Tip: हिजरत शब्द के सही अर्थ को समझें, विशेष रूप से जब यह विस्थापन या पलायन के संदर्भ में आता है।
Question 5. ट्रस्टीशिप सिद्धान्त का अर्थ है कि व्यक्ति
(अ) सार्वजनिक सम्पत्ति का मालिक है।
(ब) सार्वजनिक सम्पत्ति का ट्रस्टी है।
(स) निजी सम्पत्ति नहीं रख सकता है।
(द) सम्पत्तियों का त्याग कर दे।
Answer: (ब) सार्वजनिक सम्पत्ति का ट्रस्टी है।
In simple words: ट्रस्टीशिप का मतलब है कि धनी लोग अपनी संपत्ति को अपनी नहीं, बल्कि समाज की अमानत समझें और उसका उपयोग दूसरों की भलाई के लिए करें।
🎯 Exam Tip: ट्रस्टीशिप सिद्धांत गाँधीजी के आर्थिक विचारों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है; इसे समाज में धन के उचित वितरण से जोड़कर याद रखें।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 11 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. गाँधीजी के चार प्रमुख जीवन मूल्य क्या हैं?
Answer: गाँधीजी के चार प्रमुख जीवन मूल्य थे सत्य, अहिंसा, प्रेम और भाईचारा (भ्रातृभाव)।
In simple words: गाँधीजी सत्य, अहिंसा, प्रेम और भाईचारे को बहुत ज़रूरी मानते थे।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी के इन चार मुख्य नैतिक मूल्यों को हमेशा याद रखें क्योंकि वे उनके पूरे दर्शन का आधार हैं।
Question 2. गाँधीवाद क्या है?
Answer: गाँधीजी के विचारों और आदर्शों को ही 'गाँधीवाद' कहा जाता है।
In simple words: गाँधीवाद मतलब गाँधीजी के सिखाए हुए विचार और रास्ते।
🎯 Exam Tip: गाँधीवाद को गाँधीजी के समग्र दर्शन के रूप में परिभाषित करें, जिसमें उनके सिद्धांत और व्यवहार शामिल हैं।
Question 4. गाँधीजी की प्रथम प्रयोगशाला कहाँ थी?
Answer: दक्षिण अफ्रीका गाँधीजी की प्रथम प्रयोगशाला थी।
In simple words: गाँधीजी ने अपने विचारों को सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में आज़माया था।
🎯 Exam Tip: दक्षिण अफ्रीका को गाँधीजी के राजनीतिक और आध्यात्मिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान के रूप में चिह्नित करें।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 11 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. गाँधीजी किन समाज सुधार आन्दोलनों से प्रभावित हुए थे?
Answer: गाँधीजी के विचारों पर कई चीज़ों का असर पड़ा, जैसे धार्मिक ग्रंथ, दार्शनिक विचार और समाज सुधार आंदोलन। वे भारत में चल रहे सांस्कृतिक, दार्शनिक और धार्मिक सुधार आंदोलनों से बहुत प्रभावित हुए थे। विशेष रूप से, गाँधीजी रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानन्द से प्रेरित हुए थे। उन्हीं से उन्होंने देश प्रेम और अपनी भाषा के इस्तेमाल को सीखा।
In simple words: गाँधीजी भारत के धार्मिक और सामाजिक सुधार आंदोलनों, खासकर रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानन्द से बहुत कुछ सीखे थे।
🎯 Exam Tip: उन प्रमुख हस्तियों और आंदोलनों के नाम याद रखें जिन्होंने गाँधीजी के विचारों को आकार दिया था।
Question 2. राजनीति के आध्यात्मीकरण से क्या आशय है?
Answer: गाँधीजी के लिए धर्म और राजनीति एक ही काम के दो नाम थे। वे मानते थे कि दोनों का लक्ष्य समाज के अन्याय, गलत व्यवहार और शोषण वाले संबंधों को बदलना है। उनका उद्देश्य समाज में न्याय और ईमानदारी लाना था। उनके अनुसार, सच्चे धर्म और सच्ची राजनीति का सीधा संबंध मानव जीवन और कामों से है, क्योंकि मानव के कामों को धर्म से अलग नहीं किया जा सकता। गाँधीजी के लिए इन दोनों का आधार नैतिकता के सामान्य मूल्य थे।
In simple words: गाँधीजी चाहते थे कि राजनीति सिर्फ सत्ता का खेल न हो, बल्कि धर्म और नैतिकता पर आधारित हो, ताकि समाज में न्याय और ईमानदारी आ सके।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी के राजनीति के आध्यात्मीकरण के विचार में धर्म और नैतिकता को राजनीति से जोड़ना मुख्य बिंदु है।
Question 3. गाँधीजी के सत्याग्रह की सात प्रमुख विशेषतायें बताइये।
Answer: आसान शब्दों में कहें तो सत्याग्रह बुराई को दूर करने या झगड़ों को बिना हिंसा के सुलझाने का तरीका है। यह 'सत्य' और 'आग्रह' शब्दों से मिलकर बना है, जिसका मतलब है सत्य के मार्ग पर मज़बूती से बने रहना। सत्याग्रह की सात मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. ईश्वर में श्रद्धा
2. सत्य और अहिंसा पर अटल विश्वास
3. चरित्र
4. निर्व्यसनी (नशा न करने वाला)
5. शुद्ध ध्येय (साफ लक्ष्य)
6. हिंसा का त्याग (हिंसा छोड़ना)
7. उत्साह, धैर्य और सहिष्णुता (जोश, धीरज और सहनशीलता)
In simple words: सत्याग्रह सच्चाई और अहिंसा के रास्ते पर चलकर बुराई का सामना करने का तरीका है। इसमें भगवान पर भरोसा, अच्छा चरित्र, धैर्य और हिंसा से दूर रहना शामिल है।
🎯 Exam Tip: सत्याग्रह की इन सात विशेषताओं को क्रमवार याद करें, क्योंकि ये गाँधीजी के प्रतिरोध के दर्शन की नींव हैं।
Question 4. उपवास की अवधारणा पर टिप्पणी लिखिए
Answer: उपवास एक तरह का कष्ट है जिसे व्यक्ति खुद पर लेता है। गाँधीजी के अनुसार यह सत्याग्रह का सबसे शक्तिशाली हथियार है। गाँधीजी ने उपवास को 'आध्यात्मिक औषधि' कहा है, जिसका उपयोग केवल कुशल व्यक्ति ही कर सकते हैं। यह खास बीमारियों में ही असरदार होता है। अगर इसे गलत जगह पर इस्तेमाल किया जाए तो बहुत जोखिम होता है। इसलिए, सही परिस्थितियों में ही उपवास सबसे बेहतरीन अपील है।
In simple words: उपवास खुद को कष्ट देना है, जिसे गाँधीजी सत्याग्रह का शक्तिशाली हथियार मानते थे। इसे सही समय पर ही इस्तेमाल करना चाहिए, जैसे एक खास दवाई।
🎯 Exam Tip: उपवास को सत्याग्रह के एक शक्तिशाली लेकिन जोखिम भरे उपकरण के रूप में प्रस्तुत करें, जिसमें इसके आध्यात्मिक पहलू और सावधानीपूर्वक उपयोग पर जोर दें।
Question 5. राजनीति शास्त्र को गाँधीजी की प्रमुख देन बताइए।
Answer: गाँधीजी की राजनीति शास्त्र को निम्नलिखित प्रमुख देनें हैं:
1. गाँधीजी के विचारों में अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र और धर्म सभी आपस में जुड़े हुए हैं। वे सब एक साथ मिलकर काम करते हैं।
2. गाँधीजी ने राजनीति को आध्यात्मिक रूप दिया और उसे नैतिक आधार पर खड़ा किया।
3. राजनीति शास्त्र को उनकी सबसे महत्वपूर्ण देन अहिंसा और सत्याग्रह का सिद्धांत है।
4. गाँधीजी ने साध्य (लक्ष्य) और साधन (तरीका) दोनों की पवित्रता में विश्वास दिखाया।
In simple words: गाँधीजी ने राजनीति को नैतिकता और धर्म से जोड़ा। उन्होंने अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांत दिए और लक्ष्य और उसे पाने के तरीके दोनों की पवित्रता पर ज़ोर दिया।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी की राजनीति को धर्म, नैतिकता, अहिंसा और सत्याग्रह के साथ जोड़कर उनके प्रमुख योगदानों को संक्षेप में बताएं।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 11 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. गाँधीवाद के मूल तत्व क्या हैं? क्या यह आज भी सार्थक हैं? सिद्ध कीजिए।
Answer:
गाँधीवाद के मूल तत्व:
गाँधीवाद के चार मूल तत्व हैं - सत्य, अहिंसा, प्रेम और भाईचारा। ये तत्व इंसान को उसकी बुरी आदतों से दूर करते हैं। इन चार तत्वों के आधार पर गाँधीवाद सभी की भलाई की बात करता है। यह हिंसा वाले हथियारों की जगह अहिंसक तरीकों को बेहतर मानता है। यह दुश्मनी की जगह दोस्ती और नफरत की जगह प्यार सिखाता है।
वर्तमान में गाँधीवाद की सार्थकता:
गाँधीजी के विचार और आदर्श किसी खास व्यक्ति, देश या समय के लिए नहीं थे, बल्कि वे पूरी मानवता के लिए और हर जगह, हर समय लागू होने वाले हैं। गाँधीजी ने खुद कहा था - "गाँधी मर सकता है, लेकिन सत्य और अहिंसा हमेशा ज़िंदा रहेंगे।" सच में, गाँधीजी के विचार और आदर्श इतने स्थायी हैं कि अगर हम उनका पालन करें तो ही दुनिया में शांति रह सकती है।
ये नैतिक विचार इंसानों के बीच दोस्ती बढ़ाने के लिए बहुत अच्छे हैं। राजनीतिक तौर पर ये विचार ज़्यादा आसान, बड़े और लागू करने योग्य हैं। सामाजिक तौर पर, ये मानवता और व्यवहारिकता के साथ-साथ सहयोग पैदा करने वाले और मानवता से भरे हुए हैं। गाँधीजी के विचार समाजवाद का सबसे अच्छा रूप हैं, जो पूंजीपतियों की क्रूरता से लोगों को बचाते हैं।
साथ ही, ये विचारों को नैतिक और आध्यात्मिक बनाने की कोशिश भी करते हैं। गाँधीजी के विचार व्यक्ति, समाज, देश और दुनिया सभी को सुरक्षा देते हैं। उन्होंने सभी को सत्य, अहिंसा, प्रेम, सहयोग, सहानुभूति, बलिदान और त्याग सिखाया। ये सभी आदर्श किसी एक देश के लोगों से संबंधित नहीं हैं, बल्कि ये हर जगह और हर समय के मानवीय गुण हैं। निस्संदेह, इसी वजह से गाँधीजी के विचार और आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं।
In simple words: गाँधीवाद सत्य, अहिंसा, प्रेम और भाईचारे पर आधारित है, जो बुरी आदतों को दूर कर सभी की भलाई चाहता है। गाँधीजी के विचार आज भी बहुत प्रासंगिक हैं क्योंकि वे दुनिया में शांति और मानवता को बढ़ावा देते हैं, जो किसी एक देश या समय के लिए नहीं, बल्कि हमेशा के लिए उपयोगी हैं।
🎯 Exam Tip: गाँधीवाद के मूल तत्वों को स्पष्ट रूप से बताएं और उदाहरणों के साथ उनकी वर्तमान प्रासंगिकता को सिद्ध करें।
Question 2. गाँधीवाद आधुनिक सभ्यता को कैसे प्रभावित करता है?
Answer: गाँधीजी के विचार सत्य, अहिंसा और भाईचारे जैसे मूल तत्वों पर आधारित थे। इन तत्वों के ज़रिए वे बुरी प्रवृत्तियों को दूर करके आधुनिक सभ्यता का विकास करना चाहते थे।
जीवन शैली में सुधार:
गाँधीजी अपने आदर्शों से लोगों में प्यार और आज़ादी लाना चाहते थे। वे लोगों को मेहनत (पुरुषार्थ) का महत्व समझाना चाहते थे। गाँधीवाद में काम करने की प्रेरणा सत्य, धर्म और ईश्वर से मिलती है। इसमें धोखाधड़ी, बेईमानी, क्रूरता, हिंसा और दुश्मनी के लिए कोई जगह नहीं है। इस तरह, उनके आदर्श एक अच्छे इंसान को बुरी आदतों से मुक्त करते हैं और उसकी जीवन शैली में सुधार करके आधुनिक सभ्यता का रास्ता खोलते हैं।
जीवन की समस्याओं का समाधान:
जब जीवन कई समस्याओं से घिरा होता है, तो सभ्यता का विकास रुक जाता है। गाँधीजी ने आज के समाज की समस्याओं को सुलझाने के लिए कुछ आदर्श दिए थे, जो उस समय भी और आज भी काम आते हैं। उन्होंने हमें सिखाया कि हिंसा का सामना बिना हिंसा के तरीकों से करना चाहिए। दुश्मनी को दोस्ती से और नफरत को प्यार से दूर करने की कोशिश करनी चाहिए।
गाँधीजी ने जीवन की अलग-अलग समस्याओं पर स्थिति के अनुसार विचार दिए थे। गाँधीजी मानते थे कि किसी भी विचार को समय के हिसाब से बदला जा सकता है। इसलिए, आधुनिक समय में भी उनकी सीखों को आज की परिस्थितियों के हिसाब से थोड़ा बदलकर अपनाया जा सकता है।
गाँधीजी के विचार धर्म और नैतिकता पर आधारित हैं। वे सिर्फ़ सोचने वाले ही नहीं, बल्कि नेक इंसान भी थे। जिस विचार को वे व्यवहार में नहीं ला सकते थे, उसे कम महत्वपूर्ण मानते थे। उन्हें भगवान पर पूरा भरोसा था और वे अहिंसा और नैतिकता के रास्ते पर चलकर अपने लक्ष्य को पाना चाहते थे। ऊपर बताई गई बातों से साफ है कि गाँधीजी एक व्यावहारिक आदर्शवादी थे। उनके विचार बहुत व्यापक और गहरे थे, जो आज भी पूरी तरह से नहीं तो काफी हद तक लागू किए जा सकते हैं।
आध्यात्मिक समाजवाद को मानने के कारण, उन्होंने इतिहास को आध्यात्मिक तरीके से समझाया। उन्होंने केवल भौतिक कामों को सभ्यता और संस्कृति का वाहक नहीं माना, बल्कि अंदरूनी विकास पर बहुत जोर दिया। गाँधीजी का मानना था कि मानव जाति की मुख्य शक्तियाँ सत्य, अहिंसा और प्रेम हैं। गाँधीजी राजनीतिक और आर्थिक शक्ति को विकेन्द्रीकृत (सब में बांटने) करने के समर्थक थे, जो आज के राज्यों की एक बड़ी पहचान है।
In simple words: गाँधीजी चाहते थे कि आधुनिक सभ्यता सत्य, अहिंसा और भाईचारे पर चले, जिससे बुरी आदतें ख़त्म हों। उन्होंने लोगों को प्रेम, आज़ादी और मेहनत का महत्व सिखाया। वे हिंसा की जगह अहिंसा और दुश्मनी की जगह दोस्ती को मानते थे, और कहते थे कि उनके विचार हर युग में काम आ सकते हैं।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी के विचारों का वर्णन करते समय, उनकी जीवन शैली में सुधार, समस्याओं का समाधान और आधुनिक सभ्यता पर उनके प्रभाव पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 3. गाँधीवाद राज्य को कम से कम कार्य क्यों सौंपना चाहता है?
Answer: गाँधीजी अपनी आदर्श शासन व्यवस्था में राज्य के किसी भी रूप को अस्वीकार करते हैं जो हिंसा और बल पर आधारित हो। गाँधीजी एक बहुत शक्तिशाली राज्य को दो कारणों से स्वीकार नहीं करते:
1. पहला, केंद्रीय रूप में राज्य हिंसा का प्रतिनिधित्व करता है।
2. दूसरा, सभी मनुष्य मूल रूप से सामाजिक प्राणी होते हैं और हर स्थिति में नैतिक व्यवहार नहीं कर पाते, न ही हमेशा समाज के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हैं।
मर्यादित राज्य:
गाँधीजी ने एक सीमित राज्य की ज़रूरत महसूस की। उन्होंने ऐसे राज्य का विरोध किया जो पूरी तरह से राजनीति और सत्ता का प्रतिनिधित्व करता हो। वे राज्य की शक्ति बढ़ने को संदेह की दृष्टि से देखते थे। गाँधीजी के अनुसार, एक कल्याणकारी राज्य भी हिंसा का प्रतिनिधित्व करने वाली एक आदर्श अनैतिक संस्था है। उनका मानना था कि निरंकुश सत्ता व्यक्ति की आज़ादी और समाज की भलाई के लिए बाधक है।
उन्होंने निरपेक्ष संप्रभुता का विरोध किया और एक 'सीमित राज्य' की स्थापना पर ज़ोर दिया। राज्य का उद्देश्य सिर्फ़ शासन करना नहीं, बल्कि उच्च, श्रेष्ठ और कल्याणकारी होना चाहिए। गाँधीजी राज्य की शक्ति बढ़ाने के पक्ष में नहीं थे। राज्य को व्यक्ति के विकास के लिए काम करना चाहिए और व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास को रोकने वाली सभी बाधाओं को दूर करने की कोशिश करनी चाहिए।
राज्य शक्ति व्यक्ति के विकास में बाधक:
गाँधीजी के अनुसार, राज्य की शक्ति का दबाव व्यक्ति के कामों के नैतिक मूल्यों को नष्ट कर देता है और उसके विकास को भी रोक देता है।
वे संपूर्ण मानवता के लिए सबसे अच्छे आदर्श समाज की कल्पना करते हैं। गाँधीजी एक ऐसे विकेंद्रीकृत आदर्श समाज की स्थापना पर जोर देते हैं जिसमें व्यक्ति के सर्वांगीण विकास की सबसे ज़्यादा संभावनाएँ हों। गाँधीजी एक आदर्श अहिंसक राज्य की स्थापना करना चाहते हैं, जिसे बहुमत पर आधारित स्वराज्य कहा जा सकता है।
स्थानीय स्वशासन का समर्थन:
गाँधीजी ने राजनीतिक विकेंद्रीकरण का समर्थन किया और आत्मनिर्भर ग्रामीण समुदायों से बने शासन की वकालत की। उनका मानना था कि हर नागरिक को अपनी अंतरात्मा की आवाज़ से प्रेरित होकर काम करना चाहिए। उन्होंने गाँवों और शहरों के आपसी संबंधों को निष्क्रिय प्रतिरोध के सिद्धांत से सुलझाने पर ज़ोर दिया।
In simple words: गाँधीजी चाहते थे कि राज्य कम से कम काम करे क्योंकि वे हिंसा और बल पर आधारित केंद्रीय राज्य को नहीं मानते थे। वे एक सीमित राज्य चाहते थे जो व्यक्ति की आज़ादी और विकास में बाधा न डाले, बल्कि स्थानीय स्वशासन को बढ़ावा दे।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी के राज्य संबंधी विचारों को समझाते समय, राज्य की सीमित भूमिका, अहिंसा पर जोर और स्थानीय स्वशासन के समर्थन को स्पष्ट करें।
Question 4. "आर्थिक समता का स्त्रोत ट्रस्टीशिप से गुजरता है।” सिद्ध कीजिए।
Answer: गाँधीजी ने आर्थिक असमानता को दूर करने के लिए न तो पश्चिमी अर्थव्यवस्था को सही माना और न ही पूर्वी अर्थव्यवस्था को। इसका कारण यह था कि पश्चिमी अर्थव्यवस्था पूंजीवाद पर आधारित होने के कारण शोषण, प्रतिस्पर्धा और संघर्ष को जन्म देती है, जबकि पूर्वी अर्थव्यवस्था विकेंद्रीकरण को बढ़ावा देती है। गाँधीजी ने मौजूदा आर्थिक असमानता और असंतोष को दूर करने के लिए ट्रस्टीशिप का सिद्धांत दिया। इस सिद्धांत के अनुसार, पूंजीपति अपनी ज़रूरत के हिसाब से अपनी संपत्ति का उपयोग करें और बाकी संपत्ति का ट्रस्टी बनकर उसे लोगों की भलाई में लगाएँ।
ट्रस्टीशिप सिद्धांत के प्रमुख तत्व: गाँधीजी के ट्रस्टीशिप सिद्धांत की प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:
1. यह मौजूदा पूंजीवादी व्यवस्था को समतावादी समाज में बदलने का एक तरीका है।
2. यह पूंजीपतियों, यानी धन के मालिकों को सुधारने का अवसर देता है।
3. यह हृदय परिवर्तन में विश्वास रखता है। यह मनुष्य को धन के लालच से मुक्त करना चाहता है।
4. यह सिद्धांत संपत्ति के निजी स्वामित्व के अधिकार का विरोध करता है और व्यक्ति की केवल उचित ज़रूरतों को ही स्वीकार करता है।
5. ज़रूरत पड़ने पर संपत्ति को राज्य कानून द्वारा नियंत्रित करने का समर्थन करता है।
6. संपत्ति का उपयोग न तो स्वार्थ पूरा करने के लिए किया जाना चाहिए और न ही सामाजिक हितों के खिलाफ होना चाहिए।
7. इसका संबंध धन या वस्तु के स्वामित्व की बजाय समाज की भलाई से ज़्यादा है।
8. इसमें आय की न्यूनतम और अधिकतम सीमाएँ तय की जाएँगी। समय-समय पर इनमें बदलाव होता रहेगा, जिसका उद्देश्य इन असमानताओं को ख़त्म करना होगा।
9. इसमें उत्पादन लाभ के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक ज़रूरतों के हिसाब से तय होगा।
तो, यह साफ है कि ट्रस्टीशिप के सिद्धांत से गाँधीजी समाज में आर्थिक समानता लाना चाहते थे।
In simple words: गाँधीजी का ट्रस्टीशिप सिद्धांत कहता है कि धनी लोग अपनी संपत्ति को समाज की भलाई के लिए इस्तेमाल करें, न कि सिर्फ़ अपने लिए। यह सिद्धांत धन की असमानता को कम करके एक न्यायपूर्ण समाज बनाने का तरीका है, जहाँ सभी की ज़रूरतें पूरी हों।
🎯 Exam Tip: ट्रस्टीशिप के सिद्धांत को गाँधीजी के आर्थिक दर्शन के केंद्र में रखें, और उसके प्रमुख तत्वों और उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से समझाएं।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 11 अति लघूउत्तरीय प्रश्न
Question 1. गाँधीजी राजनीति को किन आदर्शों पर आधारित करना चाहते थे?
Answer: गाँधीजी राजनीति को धर्म और न्याय पर आधारित करना चाहते थे।
In simple words: गाँधीजी चाहते थे कि राजनीति धर्म और न्याय के सिद्धांतों पर चले।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी के अनुसार राजनीति का नैतिक और धार्मिक आधार होना चाहिए।
Question 2. यह कथन किसका है – “गाँधीवाद सिद्धान्तों का, मतों का, नियमों का, विनियमों का और आदर्शों का समूह नहीं है। वह जीवन शैली या जीवन – दर्शन है।”
Answer: यह कथन पट्टाभि सीतारमैय्या का है।
In simple words: यह बात पट्टाभि सीतारमैय्या ने कही थी कि गाँधीवाद सिर्फ नियम नहीं, बल्कि जीने का एक तरीका है।
🎯 Exam Tip: ऐसे महत्वपूर्ण कथनों और उनके कहने वाले व्यक्तियों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. गाँधीवाद किसकी पवित्रता पर बल देता है?
Answer: गाँधीवाद साध्य (लक्ष्य) और साधन (उसे पाने का तरीका) दोनों की पवित्रता पर बल देता है।
In simple words: गाँधीवाद कहता है कि हमारा लक्ष्य और उसे पाने का तरीका, दोनों ही शुद्ध होने चाहिए।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी के दर्शन में साध्य और साधन की पवित्रता एक केंद्रीय सिद्धांत है; इस पर विशेष ध्यान दें।
Question 4. यह किसने कहा था – “गाँधी मर सकता है परन्तु सत्य, अहिंसा सर्वदा जीवित रहेंगे।”
Answer: यह स्वयं गाँधीजी ने कहा था।
In simple words: यह बात गाँधीजी ने खुद कही थी।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी के इन प्रसिद्ध वचनों को याद रखें, जो उनके सिद्धांतों की अमरता को दर्शाते हैं।
Question 5. गाँधीजी किस विचार को गौण समझते थे?
Answer: गाँधीजी जिस विचार को व्यवहार में नहीं ला सकते थे, उसे वह गौण (कम महत्वपूर्ण) समझते थे।
In simple words: गाँधीजी उस बात को कम अहमियत देते थे जिसे अमल में नहीं लाया जा सकता था।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी के व्यावहारिक दृष्टिकोण को उजागर करें, जहाँ वे सिद्धांत से ज़्यादा व्यवहार पर ज़ोर देते थे।
Question 6. गाँधीजी पर किसके विचारों का प्रभाव पड़ा?
Answer: गाँधीजी पर महावीर स्वामी, गौतम बुद्ध, सुकरात, थोरो, क्रोपोटकिन और रस्किन के विचारों का प्रभाव पड़ा।
In simple words: गाँधीजी पर महावीर स्वामी, गौतम बुद्ध, सुकरात, थोरो, क्रोपोटकिन और रस्किन जैसे कई महान विचारकों का असर था।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी पर विभिन्न दार्शनिकों और धार्मिक गुरुओं के प्रभाव को सूचीबद्ध करें।
Question 7. गाँधीजी ने मार्क्स की इतिहास की आर्थिक व्याख्या को क्यों नकार दिया?
Answer: गाँधीजी ने मार्क्स की इतिहास की आर्थिक व्याख्या को नकार दिया क्योंकि यह हिंसा पर आधारित थी।
In simple words: गाँधीजी ने मार्क्स के इतिहास के आर्थिक विचार को नहीं माना क्योंकि वह विचार हिंसा पर आधारित था।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी और मार्क्स के विचारों के बीच के मुख्य अंतर को स्पष्ट करें, खासकर हिंसा के मुद्दे पर।
Question 8. गाँधीजी ने किस प्रकार के समाजवाद का समर्थन किया?
Answer: गाँधीजी आध्यात्मिक समाजवाद के समर्थक थे, इसलिए उन्होंने इतिहास की आध्यात्मिक व्याख्या की।
In simple words: गाँधीजी ने ऐसा समाजवाद चाहा जो आध्यात्मिकता पर आधारित हो, न कि सिर्फ़ धन पर।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी के समाजवाद को 'आध्यात्मिक समाजवाद' के रूप में परिभाषित करें, जो भौतिकवाद से भिन्न है।
Question 9. गाँधीजी के अनुसार मानव जाति के ऊर्जा स्त्रोत क्या हैं?
Answer: गाँधीजी के अनुसार सत्य, अहिंसा और प्रेम मानव जाति के ऊर्जा स्त्रोत हैं।
In simple words: गाँधीजी मानते थे कि सत्य, अहिंसा और प्रेम ही इंसान की असली ताकत हैं।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी के इन तीन मुख्य ऊर्जा स्त्रोतों को याद रखें, जो उनके नैतिक दर्शन का आधार हैं।
Question 10. गाँधीजी की किसी एक रचना का नाम बताइए।
Answer: गाँधीजी की एक रचना 'हिन्द स्वराज' है।
In simple words: उनकी एक किताब का नाम 'हिन्द स्वराज' है।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी की प्रमुख रचनाओं में से कम से कम एक का नाम याद रखें।
Question 11. गाँधीजी के विचारों पर किसका प्रभाव पड़ा?
Answer: गाँधीजी के विचारों पर चार तरह के प्रभाव नज़र आते हैं:
1. धार्मिक ग्रंथों का प्रभाव
2. दर्शन का प्रभाव
3. सुधारवादी आंदोलनों का प्रभाव
4. सामाजिक - आर्थिक परिस्थितियों का प्रभाव।
In simple words: गाँधीजी पर धार्मिक किताबों, दार्शनिकों, समाज सुधार आंदोलनों और समाज की आर्थिक स्थितियों का असर पड़ा।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी के विचारों को प्रभावित करने वाले इन चार मुख्य कारकों को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 12. गाँधीजी के विचारों पर किन दार्शनिकों का प्रभाव पड़ा?
Answer: गाँधीजी के विचारों पर जॉन रस्किन, हेनरी डेविड थोरो, लियो टॉलस्टॉय और सुकरात जैसे दार्शनिकों का प्रभाव पड़ा।
In simple words: जॉन रस्किन, हेनरी डेविड थोरो, लियो टॉलस्टॉय और सुकरात जैसे विचारकों ने गाँधीजी को प्रभावित किया।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी पर पड़ने वाले प्रमुख दार्शनिक प्रभावों को सूचीबद्ध करें।
Question 13. गाँधीजी पर किन चीनी विचारकों को प्रभाव पड़ा?
Answer: गाँधीजी पर चीनी विचारक लाओत्से और कन्फ्यूशियस की विचारधाराओं का प्रभाव पड़ा।
In simple words: गाँधीजी चीनी विचारकों लाओत्से और कन्फ्यूशियस से प्रेरित थे।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी के विचारों पर चीनी दार्शनिकों के प्रभाव को याद रखें।
Question 15. गाँधीजी ने पतंजलि के योगशास्त्र का अध्ययन कब और कहाँ किया?
Answer: गाँधीजी ने पतंजलि के योगशास्त्र का अध्ययन सन् 1903 में अफ्रीका के जोहान्सबर्ग जेल में किया था।
In simple words: गाँधीजी ने 1903 में जोहान्सबर्ग जेल, अफ्रीका में पतंजलि के योगशास्त्र को पढ़ा था।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी के जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों और उनके सीखने के अनुभवों को याद रखें।
Question 16. गाँधीजी का सर्वाधिक प्रिय धार्मिक ग्रन्थ कौन-सा था?
Answer: गाँधीजी का सबसे प्रिय धार्मिक ग्रंथ भगवद्गीता था। यह उनकी 'रास्ता दिखाने वाली', 'आध्यात्मिक मार्गदर्शक' और 'आध्यात्मिक माता' थी।
In simple words: भगवद्गीता गाँधीजी का सबसे पसंदीदा धार्मिक ग्रंथ था, जो उन्हें रास्ता दिखाता था।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी के आध्यात्मिक जीवन में भगवद्गीता के महत्व को रेखांकित करें।
Question 17. गाँधीजी के इंग्लैण्ड जाते समय किसने उनसे तीन प्रतिज्ञाएँ ली थी?
Answer: गाँधीजी के इंग्लैण्ड जाते समय एक जैन साधु ने उनसे तीन प्रतिज्ञाएँ ली थीं कि वह कभी शराब, पराई स्त्री और माँस को नहीं छुएँगे।
In simple words: इंग्लैण्ड जाते समय एक जैन साधु ने गाँधीजी से शराब, पराई स्त्री और माँस से दूर रहने की कसम ली थी।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी के जीवन की प्रारंभिक घटनाओं और उनके नैतिक मूल्यों पर उनके प्रभाव को याद रखें।
Question 18. अहिंसा का क्या अर्थ है?
Answer: अहिंसा का अर्थ है मन, वचन और कर्म से किसी को कष्ट न देना, यानी किसी का दिल न दुखाना।
In simple words: अहिंसा मतलब मन, बोली और काम से किसी को भी दुख न पहुँचाना।
🎯 Exam Tip: अहिंसा की परिभाषा में मन, वचन और कर्म तीनों को शामिल करें।
Question 19. गाँधीजी ने सत्याग्रह का सर्वप्रथम प्रयोग कहाँ किया?
Answer: गाँधीजी ने सत्याग्रह का सबसे पहला प्रयोग दक्षिण अफ्रीका में किया।
In simple words: गाँधीजी ने पहली बार सत्याग्रह का इस्तेमाल दक्षिण अफ्रीका में किया था।
🎯 Exam Tip: सत्याग्रह के उद्भव और उसके पहले प्रयोग स्थल को याद रखें।
Question 20. सत्याग्रह की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
Answer: सत्याग्रह की प्रमुख विशेषताएँ हैं:
1. ईश्वर में श्रद्धा
2. सत्य, अहिंसा पर अटल विश्वास
In simple words: सत्याग्रह की मुख्य बातें भगवान पर विश्वास और सत्य-अहिंसा पर पक्का भरोसा हैं।
🎯 Exam Tip: सत्याग्रह के मूलभूत सिद्धांतों को संक्षेप में सूचीबद्ध करें।
Question 21. गाँधीजी ने किस चीज की तुलना बीज व वृक्ष से की?
Answer: गाँधीजी के लिए साधन एक बीज की तरह है और साध्य (लक्ष्य) एक वृक्ष की तरह है।
In simple words: गाँधीजी ने काम करने के तरीके (साधन) को बीज और परिणाम (लक्ष्य) को पेड़ बताया।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी के साध्य और साधन की अवधारणा को इस उपमा के माध्यम से समझाएं।
Question 22. सत्याग्रह के मुख्य रूप कौन-कौन से हैं?
Answer: सत्याग्रह के विभिन्न रूप हैं – असहयोग, हिजरत, सविनय अवज्ञा और उपवास।
In simple words: सत्याग्रह के मुख्य तरीकों में असहयोग, हिजरत, सविनय अवज्ञा और उपवास शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: सत्याग्रह के विभिन्न रूपों को याद रखें, क्योंकि ये गाँधीजी के आंदोलन के प्रमुख हथियार थे।
Question 23. हिजरत को अन्य किस नाम से जाना जाता है?
Answer: हिजरत को प्रवजन भी कहा जाता है।
In simple words: हिजरत को 'प्रवजन' भी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: हिजरत के पर्यायवाची शब्द को याद रखें।
Question 24. हिजरत का क्या अर्थ है?
Answer: हिजरत वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने आत्म-सम्मान की सुरक्षा के लिए अपना निवास स्थान छोड़कर किसी दूसरी जगह चला जाता है।
In simple words: हिजरत का मतलब है, जब कोई व्यक्ति अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए अपना घर-बार छोड़कर कहीं और चला जाए।
🎯 Exam Tip: हिजरत की परिभाषा में 'आत्म-सम्मान की सुरक्षा' और 'निवास स्थान छोड़ना' को प्रमुखता दें।
Question 25. गाँधीजी ने अपनी किस पुस्तक में वर्तमान सभ्यता की आलोचना की है?
Answer: गाँधीजी ने अपनी पुस्तक 'हिन्द स्वराज' में वर्तमान सभ्यता की आलोचना की है।
In simple words: गाँधीजी ने 'हिन्द स्वराज' किताब में आज की सभ्यता की कमियाँ बताई हैं।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी की महत्वपूर्ण कृति 'हिन्द स्वराज' और उसमें उठाए गए मुख्य मुद्दे को याद रखें।
Question 26. गाँधीजी ने पूँजीवाद का विरोध क्यों किया?
Answer: गाँधीजी ने पूंजीवाद का विरोध किया क्योंकि उनका मानना था कि पूंजीवाद ने गरीबी, बेरोजगारी, शोषण और साम्राज्यवाद की भावनाओं को बढ़ावा दिया है।
In simple words: गाँधीजी ने पूंजीवाद का विरोध इसलिए किया क्योंकि उनका मानना था कि यह गरीबी, बेरोजगारी और शोषण बढ़ाता है।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी के पूंजीवाद विरोधी विचारों को गरीबी, शोषण और साम्राज्यवाद से जोड़कर समझाएं।
Question 28. 'खादी का अर्थशास्त्र' से क्या अभिप्राय है?
Answer: गाँधीजी का विश्वास था कि खादी का अर्थशास्त्र सरल, सस्ता और व्यावहारिक तरीका है। यह गाँवों को आत्मनिर्भर बनाने का भी एक तरीका था।
In simple words: गाँधीजी मानते थे कि खादी का अर्थशास्त्र गाँव वालों को सरल, सस्ते तरीके से आत्मनिर्भर बना सकता है।
🎯 Exam Tip: खादी को गाँधीजी के आत्मनिर्भरता और ग्रामीण विकास के दर्शन के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करें।
Question 29. गाँधीजी ने किस प्रकार के राज्य का समर्थन किया?
Answer: गाँधीजी ने 'सीमित राज्य' की अवधारणा का समर्थन किया।
In simple words: गाँधीजी ने ऐसे राज्य का समर्थन किया जिसकी शक्तियाँ सीमित हों।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी के राजनीतिक दर्शन में 'सीमित राज्य' की अवधारणा के महत्व को याद रखें।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 11 लघूत्तरीय प्रश्न
Question 1. गाँधीजी के विचार को क्या नाम दिया गया है और क्यों? अथवा गाँधीवाद से क्या अभिप्राय है?
Answer: गाँधीजी के विचारों और आदर्शों को 'गाँधीवाद', 'गाँधी मार्ग', 'गाँधी दर्शन' और 'गाँधीवादी राजनीतिक दर्शन' जैसे कई नाम दिए गए हैं। इन विचारों और आदर्शों को अलग-अलग नाम इसलिए दिए गए क्योंकि गाँधीजी खुद किसी वाद, संप्रदाय या सिद्धांत में विश्वास नहीं करते थे और न ही अपने पीछे किसी तरह का 'वाद' छोड़ना चाहते थे। उनका तरीका प्रयोगात्मक, अनुभववादी और वैज्ञानिक था। गाँधीजी एक कर्मयोगी थे। इसलिए, उनके विचारों और आदर्शों को 'वाद' या 'दर्शन' के रूप में प्रस्तुत करना सही है।
In simple words: गाँधीजी के विचारों को गाँधीवाद या गाँधी दर्शन कहते हैं क्योंकि उन्होंने खुद कोई वाद नहीं बनाया, लेकिन उनके विचार जीवन जीने का एक रास्ता थे जिसे लोगों ने बाद में नाम दिया।
🎯 Exam Tip: गाँधीवाद की परिभाषा देते समय, उसके विभिन्न नामों और गाँधीजी के दृष्टिकोण को स्पष्ट करें कि यह सिर्फ़ एक सिद्धांत नहीं, बल्कि एक जीवन शैली है।
Question 2. गाँधीजी मार्क्स के विचारों से किस सीमा तक सहमत थे?
Answer: गाँधीजी ने मार्क्स के समाजवाद और इतिहास की आर्थिक व्याख्या को स्वीकार नहीं किया क्योंकि यह हिंसा पर आधारित थी। वह मार्क्स के वर्ग-संघर्ष के विचारों से भी सहमत नहीं थे। इसके बजाय, उन्होंने वर्ग समन्वय और वर्ग सामंजस्य जैसी विचारधारा का समर्थन किया। मार्क्स के भौतिक समाजवाद की जगह, उन्होंने आध्यात्मिक समाजवाद की अवधारणा दी।
In simple words: गाँधीजी मार्क्स के हिंसक समाजवाद और वर्ग-संघर्ष के विचारों से सहमत नहीं थे। इसके बजाय, उन्होंने शांतिपूर्ण वर्ग सहयोग और आध्यात्मिक समाजवाद का समर्थन किया।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी और मार्क्स के विचारों के बीच के मतभेदों को स्पष्ट रूप से बताएं, विशेषकर हिंसा, वर्ग-संघर्ष और समाजवाद के दृष्टिकोण पर।
Question 3. गाँधीजी के समाजवाद की मुख्य विशेषतायें बताइए।
Answer: गाँधीजी के समाजवाद की मुख्य विशेषताएँ हैं:
1. गाँधीजी आध्यात्मिक समाजवाद के समर्थक थे, इसलिए उन्होंने इतिहास की आध्यात्मिक व्याख्या की थी। उन्होंने केवल भौतिक गतिविधियों को ही सभ्यता और संस्कृति का वाहक नहीं माना। उन्होंने आंतरिक विकास पर बहुत ज़ोर दिया।
2. गाँधीजी ने मार्क्स के समाजवाद और वर्ग-संघर्ष के विपरीत वर्ग सहयोग और वर्ग-सामंजस्य की वकालत की।
गाँधीवाद एक ऐसा दर्शन है जो व्यक्ति को उसके बुरे विचारों से दूर रखता है।
In simple words: गाँधीजी के समाजवाद में आध्यात्मिकता पर ज़ोर था और यह वर्ग-संघर्ष की जगह वर्ग सहयोग और सामंजस्य को बढ़ावा देता था।
🎯 Exam Tip: गाँधीजी के समाजवाद को मार्क्स के समाजवाद से अलग करते हुए उसकी आध्यात्मिक और सहयोगी विशेषताओं पर ज़ोर दें।
Question 9. सहयोग से क्या अभिप्राय है? इसके विभिन्न रुप कौन-कौन से हैं?
Answer: सहयोग का अर्थ है संतृप्त प्रेम की अभिव्यक्ति। इसका मतलब यह है कि जब कोई व्यक्ति किसी चीज़ को असत्य, अवैध, अनैतिक या नुकसानदेह समझता है, तो वह उसके साथ सहयोग नहीं करता। गाँधीजी के अनुसार बुराई के साथ सहयोग न करना सिर्फ़ एक इंसान का कर्तव्य नहीं, बल्कि उसका धर्म भी है। सहयोग कई तरह का होता है, जैसे हड़ताल और सामाजिक बहिष्कार।
In simple words: सहयोग का मतलब है गलत चीज़ों में साथ न देना, जो गाँधीजी के अनुसार हमारा कर्तव्य और धर्म है। इसके कई तरीके हैं जैसे हड़ताल।
🎯 Exam Tip: जब भी "सहयोग" जैसे शब्द का अर्थ पूछा जाए, तो उसकी परिभाषा और उसके विभिन्न रूपों को उदाहरण सहित समझाएं।
Question 10. "गाँधीवाद एक जीवन दर्शन है।” स्पष्ट कीजिए।
Answer: गाँधीजी सत्य, अहिंसा, प्रेम और भाईचारे के पुजारी थे। वे इन जीवन मूल्यों को समझाकर लोगों को उनकी गलत आदतों से दूर करना चाहते थे। वे राजनीति को भी पवित्र बनाना चाहते थे और इसे धर्म व न्याय पर आधारित देखना चाहते थे। गाँधीजी लोगों में प्रेम और आजादी की भावना भरना चाहते थे। व्यक्ति को अपने जीवन के लक्ष्य (पुरुषार्थ) को महत्व देना सिखाना चाहते थे। इस प्रकार, गाँधीजी का तरीका किसी विशेष सिद्धांत से नहीं, बल्कि एक जीवनशैली से जुड़ा है। बी.पी. सीतारमैय्या ने भी कहा था कि गाँधीवाद केवल सिद्धांतों, मतों या नियमों का समूह नहीं है, बल्कि यह एक जीवनशैली या जीवन-दर्शन है। यह एक नई दिशा दिखाता है और इंसान के जीवन व समस्याओं का समाधान बताता है। यह एक ऐसा दर्शन है जो सभी के भले की बात करता है।
In simple words: गाँधीजी सत्य, अहिंसा और प्रेम के पुजारी थे। वे चाहते थे कि लोग इन मूल्यों को अपनाकर एक अच्छी जीवनशैली जिएं। इसीलिए गाँधीवाद को सिर्फ एक सिद्धांत नहीं, बल्कि जीने का एक तरीका माना जाता है।
🎯 Exam Tip: गाँधीवाद को "जीवन दर्शन" के रूप में स्पष्ट करते समय, गाँधीजी के मूल मूल्यों (सत्य, अहिंसा, प्रेम, भ्रातृत्व) और उनके व्यावहारिक पहलुओं को उदाहरण सहित बताएं।
Question 11. गाँधीजी ने साध्य व साधन के बीच क्या सम्बन्ध बताया है?
Answer: गाँधीजी का मानना था कि साध्य (लक्ष्य) और साधन (उसे पाने का तरीका) में कोई अंतर नहीं होता। वे कहते थे कि "मेरे जीवन दर्शन में साधन और साध्य दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।" उनका मानना था कि सिर्फ लक्ष्य ही नहीं, बल्कि उसे पाने का तरीका भी नैतिक, पवित्र और शुद्ध होना चाहिए। वे इन दोनों को एक-दूसरे से अलग नहीं मानते थे।
In simple words: गाँधीजी मानते थे कि हमारा लक्ष्य और उसे पाने का तरीका दोनों ही सही और साफ-सुथरे होने चाहिए। गलत तरीके से सही लक्ष्य नहीं पाया जा सकता।
🎯 Exam Tip: साध्य और साधन के बीच गाँधीजी के संबंधों को समझाते समय, उनके कथन को उद्धृत करना और नैतिकता पर उनके जोर को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question 12. 'सत्याग्रह' पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: 'सत्याग्रह' शब्द की शुरुआत गाँधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में की थी। इसे इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका में चल रहे निष्क्रिय प्रतिरोध से अलग दिखाने के लिए बनाया गया था। आसान भाषा में सत्याग्रह का मतलब है बुराई को दूर करने या विवादों को अहिंसक तरीके से सुलझाने का एक तरीका। साहित्यिक तौर पर यह 'सत्य + आग्रह' से बना है, जिसका अर्थ है सत्य के रास्ते पर दृढ़ रहना। सत्याग्रह को पूरा करने के लिए कुछ खास बातों का होना बहुत जरूरी है: 1. ईश्वर में विश्वास 2. सत्य और अहिंसा पर पक्का यकीन 3. अच्छा चरित्र 4. किसी बुरी लत से दूर रहना 5. नेक मकसद 6. हिंसा का त्याग 7. उत्साह, धैर्य और सहनशीलता। सत्याग्रह के अलग-अलग रूप हैं: 1. असहयोग 2. पलायन या हिजरत 3. सविनय अवज्ञा 4. उपवास। असहयोग करने के भी कई तरीके हैं, जैसे: 1. हड़ताल 2. सामाजिक बहिष्कार 3. धरना प्रदर्शन।
In simple words: सत्याग्रह गाँधीजी का एक तरीका था बुराई का सामना करने का, जिसमें सत्य और अहिंसा का प्रयोग किया जाता है। इसमें भगवान पर भरोसा, अच्छा चरित्र और शांतिपूर्ण तरीके शामिल थे, जैसे असहयोग और उपवास।
🎯 Exam Tip: सत्याग्रह पर टिप्पणी लिखते समय, उसकी उत्पत्ति, अर्थ, प्रमुख विशेषताओं और विभिन्न रूपों को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करें।
Question 13. सामाजिक बहिष्कार का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
Answer: सामाजिक बहिष्कार एक पुराना रिवाज है, जिसकी शुरुआत जातियों के बनने के साथ हुई थी। यह एक तरह का निषेधात्मक (नकारात्मक) और बहुत कठोर दंड है, जिसका इस्तेमाल बहुत असरदार तरीके से किया जा सकता है। इसमें जिस व्यक्ति का बहिष्कार किया जाता है, उसे समाज से अलग कर दिया जाता है। गाँधीजी ने बहिष्कार को घेराबंदी कहा था।
In simple words: सामाजिक बहिष्कार का मतलब है किसी व्यक्ति को समाज से अलग कर देना, यह एक पुराना और सख्त दंड है जिसका उपयोग किसी को गलत काम करने से रोकने के लिए किया जाता था।
🎯 Exam Tip: सामाजिक बहिष्कार को समझाते समय, इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और गाँधीजी के दृष्टिकोण को भी शामिल करें।
Question 14. गाँधीजी ने यन्त्रों पर निर्भरता को दुखदायी क्यों माना है?
Answer: गाँधीजी ने अपनी किताब 'हिन्द स्वराज' में आधुनिक सभ्यता की बहुत आलोचना की है। मशीनों के बारे में उनके विचार रस्किन, टॉल्सटॉय और आर.सी. दत्ता से प्रभावित थे। गाँधीजी मशीनों की तुलना ऐसे साधन से करते थे जो इंसान या पशु के काम में मदद करने या उसकी कुशलता बढ़ाने की बजाय, उसका स्थान ले लेता है। मशीनें गलत होती हैं, इसलिए गाँधीजी उन्हें अच्छा नहीं मानते थे। उनके अनुसार मशीनों की तीन मुख्य बुराइयाँ थीं: 1. उनकी नकल आसानी से हो सकती है। 2. उनका विकास करने की कोई सीमा नहीं है। 3. वे इंसान के श्रम की जगह ले लेती हैं। इन बुराइयों के कारण मशीनों में नैतिक और आर्थिक दोष होते हैं।
In simple words: गाँधीजी को मशीनें पसंद नहीं थीं क्योंकि वे इंसानों का काम छीन लेती हैं और उनकी नकल करना आसान होता है। उनका मानना था कि मशीनों से नैतिक और आर्थिक नुकसान होता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय, गाँधीजी के 'हिन्द स्वराज' का उल्लेख करें और मशीनों के प्रति उनके नकारात्मक दृष्टिकोण के कारणों को स्पष्ट करें।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 11 निबंधात्मक प्रश्न
Question 1. गाँधीवाद के मूल तत्व क्या हैं? क्या यह आज भी सार्थक हैं? सिद्ध कीजिए।
Answer: गाँधीवाद के मूल तत्व: गाँधीजी के विचार और आदर्शों को 'गाँधीवाद', 'गाँधी दर्शन' और 'गाँधी मार्ग' जैसे नामों से जाना जाता है। गाँधीजी के जीवन के चार मुख्य आदर्श- सत्य, अहिंसा, प्रेम और भाईचारा थे। इन तत्वों के जरिए वे व्यक्ति को उसकी गलत आदतों से दूर करना चाहते थे। वे राजनीति को भी धर्म और नैतिकता पर आधारित करना चाहते थे। वे लोगों में प्रेम, आजादी, पुरुषार्थ और धर्म जैसे अच्छे गुणों का विकास करना चाहते थे। इस तरह गाँधीवाद जीने का एक तरीका या जीवनशैली से जुड़ा है। गाँधीवाद विचारों का समूह मात्र नहीं है: गाँधीजी के विचार और आदर्श उस समय की परिस्थितियों पर आधारित होने के बावजूद सभी देशों और सभी समय के लिए सही थे। उनके विचार बहुत व्यापक और बहुआयामी थे। उन पर भारतीय और पश्चिमी दोनों तरह के विचारकों का असर था। वे पहले एक मानवतावादी थे, फिर व्यक्तिवादी, आदर्शवादी, समाजवादी, उदारवादी, राष्ट्रवादी और अंतरराष्ट्रीयवादी बने। आध्यात्मिक समाजवाद: गाँधीजी ने मार्क्स के इतिहास के भौतिकवादी या आर्थिक विश्लेषण और वर्ग संघर्ष के सिद्धांत को स्वीकार नहीं किया, क्योंकि वे हिंसा पर आधारित थे। इसके बजाय उन्होंने 'आध्यात्मिक समाजवाद' का सिद्धांत दिया। उन्होंने केवल भौतिक गतिविधियों को ही सभ्यता और संस्कृति का आधार नहीं माना, बल्कि उन्होंने अंदरूनी विकास पर जोर दिया। **धार्मिक ग्रन्थों का प्रभाव:** गाँधीजी वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत और भगवद्गीता जैसे सनातन धर्म ग्रंथों से बहुत प्रभावित थे। इसके अलावा, जैन और बौद्ध धर्म ग्रंथों तथा बाइबिल की शिक्षाएँ भी उनके विचारों का स्रोत थीं। **दार्शनिकों का प्रभाव:** गाँधीजी के विचारों पर जॉन रस्किन, हेनरी डेविड थोरो, लियो टॉल्सटॉय और सुकरात जैसे दार्शनिकों का भी असर पड़ा। **सुधारवादी आंदोलनों का प्रभाव:** भारत में चल रहे सांस्कृतिक, दार्शनिक और धर्म सुधारवादी आंदोलनों का गाँधीजी पर व्यापक प्रभाव पड़ा। वे रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद से बहुत प्रभावित थे। **सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का प्रभाव:** उस समय की सामाजिक और आर्थिक स्थितियों का भी उनके विचारों पर गहरा असर हुआ। **राजनीति का आध्यात्मीकरण:** गाँधीजी के लिए धर्म और राजनीति अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही काम के दो पहलू थे। दोनों का लक्ष्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और न्याय पर आधारित समाज बनाना था। **साध्य और साधनों की पवित्रता:** गाँधीजी साध्य (लक्ष्य) और साधन (तरीके) में कोई फर्क नहीं करते थे। उनके अनुसार, दोनों ही शुद्ध, श्रेष्ठ और पवित्र होने चाहिए। साधन एक बीज की तरह होता है और साध्य उसका पेड़। **साधन के रूप में अहिंसा और सत्याग्रह:** गाँधीजी के अनुसार, अहिंसा का मतलब है मन, वचन और कर्म से किसी को चोट न पहुँचाना, यानी किसी का दिल न दुखाना। सत्याग्रह का अर्थ है सत्य को पाने के लिए अटल रहना। गाँधीजी ने सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह का इस्तेमाल किया था। सत्याग्रह का उपयोग निम्नलिखित तरीकों से किया जाता है: 1. **असहयोग-** इसका मतलब है कि व्यक्ति जिसे गलत समझता है, उसके साथ सहयोग न करे। इसके लिए हड़ताल, सामाजिक बहिष्कार और धरना जैसे तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं। 2. **हिजरत-** पलायन या हिजरत वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति आत्म-सम्मान की रक्षा के लिए अपना घर छोड़कर कहीं और चला जाता है। 3. **सविनय अवज्ञा-** इसका मतलब है गलत कानूनों का शांतिपूर्ण तरीके से उल्लंघन करना। 4. **उपवास-** गाँधीजी इसे 'आध्यात्मिक औषधि' कहते थे। **पूँजीवाद का विरोध:** गाँधीजी ने मशीनों की आलोचना की। उनके अनुसार, मशीनें मानव श्रम की जगह ले लेती हैं। उन्होंने पूँजीवाद की भी आलोचना की क्योंकि यह शोषण, गरीबी और साम्राज्यवाद को बढ़ावा देता है। **आर्थिक-सामाजिक असमानता दूर करने के लिए गाँधीजी ने चार सुझाव दिए:** 1. **अस्तेय और अपरिग्रह-** अस्तेय का मतलब है चोरी न करना, यानी किसी की अनुमति के बिना उसकी चीज़ या धन न लेना। गाँधीजी ने शारीरिक, मानसिक, वैचारिक और आर्थिक सभी तरह की चोरी से दूर रहने को कहा था। उनके अनुसार, इससे आर्थिक असमानता खत्म होगी। 2. **ट्रस्टीशिप का सिद्धांत-** इसके अनुसार, पूंजीपतियों को अपनी जरूरत के हिसाब से ही संपत्ति का इस्तेमाल करना चाहिए और बाकी संपत्ति को जनता की भलाई के लिए ट्रस्टी के तौर पर उपयोग करना चाहिए। **वर्तमान में गाँधीवाद की सार्थकता:** गाँधीजी के विचार और आदर्श किसी व्यक्ति, देश या समय विशेष के लिए नहीं थे, बल्कि वे पूरी मानवता के लिए और हमेशा के लिए सही थे। गाँधीजी ने खुद कहा था- "गाँधी मर सकता है, लेकिन सत्य और अहिंसा हमेशा जीवित रहेंगे।" असल में, गाँधीजी के विचार और आदर्श इतने शाश्वत हैं कि दुनिया में शांति तभी आ सकती है जब उनका पालन किया जाए। ये विचार मानव प्रेम बढ़ाने के लिए बहुत अच्छे हैं। राजनीतिक तौर पर ये सरल, व्यापक और व्यावहारिक हैं। सामाजिक तौर पर और मानवीय व्यवहार के साथ-साथ ये सहयोग बढ़ाने वाले और मानवता से भरे हुए हैं। गाँधीजी के विचार समाजवाद का सबसे अच्छा रूप हैं जो पूंजीपतियों की क्रूरता से जनता को सुरक्षा देते हैं। वे लोगों को नैतिक और आध्यात्मिक बनाने की कोशिश भी करते हैं। गाँधीजी के विचार व्यक्ति, समाज, राष्ट्र और दुनिया को सुरक्षा देते हैं। उन्होंने सभी को सत्य, अहिंसा, प्रेम, सहयोग, सहानुभूति, बलिदान और त्याग सिखाया। ये सभी आदर्श किसी एक देश के लोगों से जुड़े नहीं हैं, बल्कि ये सभी देशों और सभी समय के लिए मानवीय गुण हैं। निस्संदेह, इसी आधार पर गाँधीजी के विचार और आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं।
In simple words: गाँधीवाद के मूल तत्व सत्य, अहिंसा, प्रेम और भाईचारा हैं। ये तत्व व्यक्ति को सुधारते हैं और समाज में न्याय लाते हैं। गाँधीजी ने राजनीति को धर्म से जोड़ा, साध्य-साधन की पवित्रता मानी, अहिंसक सत्याग्रह को अपनाया और पूंजीवाद का विरोध किया। उन्होंने असमानता मिटाने के लिए अस्तेय और ट्रस्टीशिप के सिद्धांत दिए। आज भी ये विचार दुनिया में शांति और नैतिकता के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
🎯 Exam Tip: निबंधात्मक प्रश्नों में, पहले मूल तत्वों को परिभाषित करें, फिर उनकी सार्थकता पर तर्क दें और उदाहरणों या गाँधीजी के कथनों से अपनी बात को सिद्ध करें।
मीरा के पद
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