RBSE Solutions Class 12 Physics Chapter 9 विद्युत चुम्बकीय प्रेरण

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Detailed Chapter 9 विद्युत चुम्बकीय प्रेरण RBSE Solutions for Class 12 Physics

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Class 12 Physics Chapter 9 विद्युत चुम्बकीय प्रेरण RBSE Solutions PDF

Rbse Class 12 Physics Chapter 9 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर

Rbse Class 12 Physics Chapter 9 बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. एक चालक छड़ नियत वेग से चुम्बकीय क्षेत्र B में गतिशील है। इसके दोनों सिरों के मध्य प्रेरित वि. वा. बल उत्पन्न होगा यदि
(अ) v और B समान्तर हो।
(ब) v और B परस्पर लम्बवत् हो
(स) v और B विपरीत दिशा में हो
(द) उपरोक्त सभी।
Answer: (ब) v और B परस्पर लम्बवत् हो
In simple words: जब एक चालक छड़ एक चुम्बकीय क्षेत्र में चलती है, तो उसमें बिजली तभी बनती है जब छड़ की गति और चुम्बकीय क्षेत्र एक-दूसरे के बिल्कुल सीधे (लम्बवत्) हों। गति और क्षेत्र के बीच यह लम्बवत् संबंध ही प्रेरित विद्युत वाहक बल को उत्पन्न करता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का मान \( \varepsilon = ( \vec{v} \times \vec{B} ) \cdot \vec{l} \) सूत्र से दिया जाता है। यदि \( \vec{v} \) और \( \vec{B} \) समानांतर या प्रति-समानांतर हों, तो \( \vec{v} \times \vec{B} = 0 \) होगा, जिससे कोई EMF उत्पन्न नहीं होगा।

 

Question 2. एक वर्गाकार लूप जिसकी प्रत्येक भुजा की लम्बाई x है, अपने एक विकर्ण के सापेक्ष कोणीय वेग ω से लम्बवत् चुम्बकीय क्षेत्र में। यदि इसमें घेरों की संख्या 20 हो तो किसी क्षण इस लूप से सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स का मान होगा-
(स) \( 20 Bx^2 \cos \omega t \)
Answer: (स) \( 20 Bx^2 \cos \omega t \)
In simple words: जब कोई चौकोर तार का लूप, जिसमें 20 चक्कर हों और हर भुजा 'x' लम्बी हो, एक चुम्बकीय क्षेत्र में घूमता है, तो किसी भी समय उससे जुड़ा कुल चुम्बकीय फ्लक्स \( 20 Bx^2 \cos \omega t \) होता है। यह दिखाता है कि लूप के घूमने के साथ फ्लक्स कैसे बदलता है।

🎯 Exam Tip: चुम्बकीय फ्लक्स (\( \Phi \)) का सामान्य सूत्र \( NBA \cos \theta \) होता है, जहाँ N फेरों की संख्या, B चुम्बकीय क्षेत्र, A क्षेत्रफल और \( \theta \) चुम्बकीय क्षेत्र और क्षेत्रफल सदिश के बीच का कोण होता है। घूर्णन करते समय \( \theta = \omega t \) होता है।

 

Question 3. चुम्बकीय फ्लक्स और प्रतिरोध का अनुपात का मात्रक निम्न में से किस राशि के मात्रक के समान होगा-
(अ) आवेश
(ब) विभवान्तर
(स) धारा
(द) चुम्बकीय क्षेत्र
Answer: (अ) आवेश
In simple words: चुम्बकीय फ्लक्स को प्रतिरोध से भाग देने पर जो संख्या मिलती है, उसकी इकाई वही होती है जो आवेश (चार्ज) की इकाई होती है। फैराडे के नियम से प्रेरित आवेश \( q = \frac{\Delta\Phi_B}{R} \) होता है।

🎯 Exam Tip: यह एक महत्वपूर्ण संबंध है। प्रेरित आवेश (q) चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन (\( \Delta\Phi_B \)) और परिपथ के प्रतिरोध (R) पर निर्भर करता है, और समय अंतराल पर निर्भर नहीं करता।

 

Question 4. विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के प्रेरित वि, वा, बल का मान केवल निर्भर करता है-
(अ) चालक के प्रतिरोध पर
(ब) चुम्बकीय क्षेत्र के मान पर।
(स) चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा के सापेक्ष चालक के झुकाव पर
(द) सम्बद्ध फ्लक्स के परिवर्तन की दर पर।
Answer: (द) सम्बद्ध फ्लक्स के परिवर्तन की दर पर।
In simple words: किसी सर्किट में कितनी बिजली (विद्युत वाहक बल) बनेगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि सर्किट से जुड़ा चुम्बकीय फ्लक्स कितनी तेजी से बदल रहा है। अगर फ्लक्स जल्दी बदलता है, तो ज्यादा बिजली बनती है।

🎯 Exam Tip: फैराडे का विद्युत चुम्बकीय प्रेरण का दूसरा नियम बताता है कि प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन की दर के सीधे आनुपातिक होता है, यानी \( \varepsilon = -\frac{d\Phi_B}{dt} \)।

 

Question 6. एक ताँबे के तार की कुण्डली को एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में क्षेत्र के समान्तर गतिशील होने पर प्रेरित विद्युत धारा का मान होगा-
(अ) अनन्त
(ब) शून्य
(स) चुम्बकीय क्षेत्र के बराबर
(द) कुण्डली अनुप्रस्थ काट के क्षेत्र के बराबर ।
Answer: (ब) शून्य
In simple words: अगर एक तांबे की कुण्डली चुम्बकीय क्षेत्र के बिल्कुल समानांतर चलती है, तो वह क्षेत्र रेखाओं को नहीं काटती है। क्योंकि कोई रेखा नहीं कटती, इसलिए कुण्डली में कोई बिजली नहीं बनती (प्रेरित धारा शून्य होती है)।

🎯 Exam Tip: प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) केवल तभी उत्पन्न होता है जब कुण्डली चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं को काटती है। यदि कुण्डली क्षेत्र के समानांतर चलती है, तो कोई फ्लक्स परिवर्तन नहीं होता और इसलिए कोई EMF प्रेरित नहीं होता।

 

Question 7. लेंज का नियम देता है-
(अ) प्रेरित धारा का परिमाण
(ब) प्रेरित वि. वा. बल का परिमाण
(स) प्रेरित धारा की दिशा
(द) प्रेरित धारा का परिमाण और दिशा दोनों।
Answer: (स) प्रेरित धारा की दिशा
In simple words: लेंज का नियम हमें बताता है कि बिजली किस दिशा में बहेगी जब वह चुम्बकीय क्षेत्र में बदलाव के कारण बनती है। यह हमेशा उस बदलाव का विरोध करती है जिसने इसे बनाया है।

🎯 Exam Tip: लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है। यह बताता है कि प्रेरित धारा की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिसके कारण वह उत्पन्न हुई है।

 

Question 8. एक 50 सेमी लम्बी लोहे की रॉड 4 ms⁻¹ के वेग से एक चुम्बकीय क्षेत्र B = 0.01 T में चलाई जाती है। उत्पन्न विद्युत वाहक बल होगा-
(अ) 0.01 V
(ब) 0.02 V
(स) 0.03 V
(द) 0.04 V
Answer: (ब) 0.02 V
\( L = 50 \text{ सेमी} = 0.5 \text{ मी} \)
\( v = 4 \text{ मी/से} \)
\( B = 0.01 \text{ T} \)
प्रेरित विद्युत वाहक बल \( \varepsilon = Blv \)
\( \varepsilon = 0.01 \times 0.50 \times 4 \)
\( \varepsilon = 0.02 \text{ V} \)
In simple words: जब एक लोहे की छड़ चुम्बकीय क्षेत्र में चलती है, तो उसमें 0.02 वोल्ट का विद्युत वाहक बल बनता है। यह इसलिए होता है क्योंकि छड़ चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं को काटती है।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, सुनिश्चित करें कि सभी इकाइयाँ (जैसे लम्बाई, वेग, चुम्बकीय क्षेत्र) SI प्रणाली में हों, ताकि गणना सही हो।

 

Question 9. धातु की एक चकती अपनी अक्ष के सापेक्ष घुमाई जाती है यदि चुम्बकीय क्षेत्र समरूप तथा घूर्णन अक्ष के अनुदिश हो तो व्यास AB के दोनों सिरों के मध्य विभवान्तर होगा।
(अ) शून्य
(ब) केन्द्र और परिधि के विभवान्तर का आधा
(स) केन्द्र और परिधि के विभवान्तर का दुगुना
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
Answer: (स) केन्द्र और परिधि के विभवान्तर का दुगुना
In simple words: जब एक धातु की गोल चकती अपनी धुरी पर घूमती है और चुम्बकीय क्षेत्र घूमने वाली धुरी के साथ ही हो, तो चकती के व्यास के दोनों कोनों पर कोई बिजली (विभवान्तर) नहीं बनेगी। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस स्थिति में, व्यास के सिरे चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं को प्रभावी ढंग से नहीं काटते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रेरित EMF केवल तभी उत्पन्न होता है जब चालक चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं को काटता है। यदि चालक चुम्बकीय क्षेत्र के समानांतर गति करता है, तो कोई EMF प्रेरित नहीं होता है।

A B ω

 

Question 10. चुम्बकीय क्षेत्र B में एक चालक तार दायीं ओर चल रहा है उसमें प्रेरित विद्युत धारा की दिशा चित्रानुसार से तो चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा होगी।
(अ) कागज़ के तल में बायीं ओर
(व) कागज के तल में दायीं और
(स) कागज के तल के लम्बवत् नीचे की ओर ।
Answer: (स) कागज के तल के लम्बवत् नीचे की ओर ।
In simple words: यदि एक तार चुम्बकीय क्षेत्र में दाईं ओर जा रहा है और उसमें बिजली एक खास दिशा में बन रही है (जैसा कि फ्लेमिंग के नियम से), तो चुम्बकीय क्षेत्र कागज के अंदर की ओर, यानी लम्बवत् नीचे की दिशा में होगा।

🎯 Exam Tip: फ्लेमिंग के दाएं हाथ का नियम उपयोग करें, जहाँ अंगूठा गति की दिशा, तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा प्रेरित धारा की दिशा दर्शाती है। इससे आप अज्ञात दिशा ज्ञात कर सकते हैं।

 

Question 12. समरूप चुम्बकीय क्षेत्र में घूर्णन करती हुई किसी कुण्डली में प्रेरित वि. वा. बल तथा सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स के मध्य कलान्तर होगा-
(अ) \( \frac{\pi}{4} \)
(ब) \( \frac{\pi}{2} \)
(स) \( \frac{\pi}{3} \)
(द) \( \pi \)
Answer: (ब) \( \frac{\pi}{2} \)
In simple words: जब एक कुण्डली चुम्बकीय क्षेत्र में घूमती है, तो उसमें बनने वाली बिजली (विद्युत वाहक बल) और कुण्डली से जुड़े चुम्बकीय फ्लक्स के बीच \( \frac{\pi}{2} \) (या 90 डिग्री) का अंतर होता है। इसका मतलब है जब फ्लक्स सबसे ज्यादा होता है, तब बिजली शून्य होती है, और जब फ्लक्स शून्य होता है, तब बिजली सबसे ज्यादा होती है।

🎯 Exam Tip: चुम्बकीय फ्लक्स \( \Phi_B = \Phi_{max} \cos \omega t \) होता है, और प्रेरित EMF \( \varepsilon = -\frac{d\Phi_B}{dt} = \Phi_{max} \omega \sin \omega t = \varepsilon_{max} \sin \omega t \) होता है। \( \cos \omega t \) और \( \sin \omega t \) के बीच \( \frac{\pi}{2} \) का कलान्तर होता है।

 

Question 13. यदि \( 2 \times 10^{-3} \) स्वप्रेरण गुणांक वाली कुण्डली में धारा 0.1s में एक समान रूप से 1A तक बढ़ती है तो प्रेरित वि. वा. बल का परिमाण होगा-
(अ) 2V
(ब) 0.2 V
(स) 0.02 V
(द) शून्य
Answer: (स) 0.02 V
दिया है:
स्वप्रेरण गुणांक \( L = 2 \times 10^{-3} \text{ H} \)
समय में परिवर्तन \( dt = 0.1 \text{ s} \)
धारा में परिवर्तन \( dI = 1 \text{ A} \)
प्रेरित विद्युत वाहक बल \( \varepsilon = - L \frac{dI}{dt} \)
\( \varepsilon = - (2 \times 10^{-3}) \times \frac{(1 - 0)}{0.1} \)
\( \varepsilon = - (2 \times 10^{-3}) \times 10 \)
\( \varepsilon = - 0.02 \text{ V} \)
परिमाण \( | \varepsilon | = 0.02 \text{ V} \)
In simple words: जब एक कुण्डली में बिजली की मात्रा बदलती है, तो उसमें एक नया वोल्टेज (विद्युत वाहक बल) बन जाता है। यहाँ, यह वोल्टेज 0.02 वोल्ट है क्योंकि धारा 0.1 सेकंड में 1 एम्पीयर बढ़ती है।

🎯 Exam Tip: प्रेरित EMF की दिशा लेंज के नियम से दी जाती है (माइनस चिन्ह दर्शाता है)। परिमाण की गणना करते समय, \( dI \) का मान हमेशा अंतिम धारा माइनस प्रारंभिक धारा होता है।

 

Question 14. 100 घेरों वाली उस कुण्डली का स्वप्रेरण गुणांक कितना होगा यदि इसमें 5A की धारा \( 5 \times 10^{-3} \) मैक्सवेल का चुम्बकीय फ्लक्स उत्पन्न करे।
Answer:
दिया है:
फेरों की संख्या \( N = 100 \)
धारा \( I = 5 \text{ A} \)
चुम्बकीय फ्लक्स \( \Phi_B = 5 \times 10^{-3} \text{ Mx} \)
मैक्सवेल को वेबर में बदलें: \( 1 \text{ Mx} = 10^{-8} \text{ Wb} \)
\( \Phi_B = 5 \times 10^{-3} \times 10^{-8} \text{ Wb} \)
\( \Phi_B = 5 \times 10^{-11} \text{ Wb} \)
स्वप्रेरण गुणांक का सूत्र है: \( L = \frac{N \Phi_B}{I} \)
\( L = \frac{100 \times (5 \times 10^{-11})}{5} \)
\( L = 100 \times 10^{-11} \)
\( L = 10^{-9} \text{ H} \)
इस प्रकार, स्वप्रेरण गुणांक \( 10^{-9} \) हेनरी या 1 नैनोहेनरी होगा।
In simple words: एक कुण्डली का स्वप्रेरण गुणांक बताता है कि उसमें कितनी बिजली बनेगी जब उसमें से धारा बदलेगी। इस कुण्डली के लिए, यह 10-9 हेनरी है, जो बहुत कम है। यह तब होता है जब 100 फेरों में 5 एम्पीयर धारा 5 x 10-3 मैक्सवेल फ्लक्स बनाती है।

🎯 Exam Tip: मैक्सवेल (Mx) CGS इकाई है और वेबर (Wb) SI इकाई है। गणना करते समय हमेशा सुनिश्चित करें कि आप SI इकाइयों का उपयोग कर रहे हैं। \( 1 \text{ Mx} = 10^{-8} \text{ Wb} \) का रूपांतरण याद रखें।

 

Question 15. एक कुण्डली के लम्बवत् गुजरने वाला चुम्बकीय फ्लक्स \( \phi = 10t^2 + 5t + 1 \) समय के साथ परिवर्तित होता है यहाँ t s में तथा \( \phi \) mWb में है तो t = 5s पर कुण्डली में प्रेरित वि. वा. बल होगा।
(अ) 1 V
(ब) 0.105 V
(स) 2v
(द) 0 V
Answer: (ब) 0.105 V
दिया है:
चुम्बकीय फ्लक्स \( \phi = (10t^2 + 5t + 1) \text{ mWb} \)
समय \( t = 5 \text{ s} \)
प्रेरित विद्युत वाहक बल का सूत्र \( \varepsilon = -\frac{d\phi}{dt} \) है।
\( \frac{d\phi}{dt} = \frac{d}{dt} (10t^2 + 5t + 1) \)
\( \frac{d\phi}{dt} = (20t + 5) \text{ mWb/s} \)
\( \frac{d\phi}{dt} = (20t + 5) \times 10^{-3} \text{ Wb/s} \)
\( t = 5 \text{ s} \) पर,
\( \frac{d\phi}{dt} = (20 \times 5 + 5) \times 10^{-3} \text{ Wb/s} \)
\( \frac{d\phi}{dt} = (100 + 5) \times 10^{-3} \text{ Wb/s} \)
\( \frac{d\phi}{dt} = 105 \times 10^{-3} \text{ Wb/s} \)
\( \varepsilon = - (105 \times 10^{-3}) \text{ V} \)
\( \varepsilon = - 0.105 \text{ V} \)
परिमाण \( | \varepsilon | = 0.105 \text{ V} \)
In simple words: जब एक कुण्डली से जुड़ा चुम्बकीय फ्लक्स समय के साथ बदलता है, तो उसमें एक वोल्टेज (विद्युत वाहक बल) बनता है। इस सवाल में, 5 सेकंड के बाद यह वोल्टेज 0.105 वोल्ट होगा, क्योंकि फ्लक्स बदलने की दर उस समय यही है।

🎯 Exam Tip: जब फ्लक्स का मान समय के फलन के रूप में दिया हो, तो प्रेरित EMF ज्ञात करने के लिए दिए गए व्यंजक का समय के सापेक्ष अवकलन (differentiation) करें। याद रखें कि mWb को Wb में बदलना न भूलें।

Rbse Class 12 Physics Chapter 9 अति लघूत्तराताक प्रश्न

 

Question 1. यदि किसी कुण्डली में धारा का मान दुगुना कर दिया जाए तो संग्रहीत ऊर्जा कितने गुना हो जाएगी ?
Answer: संग्रहीत ऊर्जा का मान चार गुना होगा।
In simple words: किसी कुण्डली में जो ऊर्जा जमा होती है, वह उसमें बहने वाली बिजली (धारा) की मात्रा पर निर्भर करती है। अगर आप बिजली की मात्रा को दोगुना कर देंगे, तो कुण्डली में जमा होने वाली ऊर्जा चार गुना बढ़ जाएगी।

🎯 Exam Tip: एक प्रेरक में संग्रहीत ऊर्जा का सूत्र \( U = \frac{1}{2}LI^2 \) होता है, जहाँ L स्वप्रेरकत्व और I धारा है। चूंकि ऊर्जा धारा के वर्ग के समानुपाती है, धारा दोगुनी करने पर ऊर्जा चार गुनी हो जाती है।

 

Question 2. किसी विद्युत परिपथ को अचानक तोड़ने पर उस स्थान पर चिंगारी उत्पन्न क्यों होती है ?
Answer: विद्युत परिपथ को अचानक तोड़ने पर परिपथ से सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स का मान शून्य हो जाता है जिससे प्रेरित धारा की प्रबलता बढ़ जाती है। इस कारण चिंगारी उत्पन्न होने लगती है। यह उच्च प्रेरित वोल्टेज के कारण हवा के आयनीकरण से होता है।
In simple words: जब हम किसी बिजली के सर्किट को अचानक तोड़ते हैं, तो एक तेज चमक या चिंगारी निकलती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बिजली अचानक बंद होने से सर्किट में एक बहुत तेज वोल्टेज बनता है, जो हवा में बिजली चला देता है।

🎯 Exam Tip: यह घटना स्वप्रेरण के कारण होती है। जब धारा तेजी से बदलती है (\( dI/dt \) बहुत अधिक होता है), तो प्रेरित EMF (\( \varepsilon = -L dI/dt \)) बहुत अधिक हो जाता है, जिससे हवा का आयनीकरण होता है और चिंगारी दिखती है।

 

Question 3. दो कुण्डलियों के मध्य अन्योन्य प्रेरण गुणांक किस प्रकार बढ़ाया जा सकता है ?
Answer:
1. कुण्डलियों में फेरों की संख्या बढ़ाकर
2. कुण्डलियों का क्षेत्रफल बढ़ाकर अन्योन्य प्रेरण गुणांक का मान बढ़ाया जा सकता हैं।
इसके अलावा, कुण्डलियों को एक दूसरे के करीब लाकर और नर्म लोहे जैसे उच्च पारगम्यता वाले क्रोड का उपयोग करके भी इसे बढ़ाया जा सकता है।
In simple words: दो कुण्डलियों के बीच बिजली के जुड़ाव को मजबूत करने के लिए, आप उनमें ज्यादा तार के चक्कर लगा सकते हैं या उनका आकार बड़ा कर सकते हैं। आप उन्हें पास भी ला सकते हैं और उनके बीच नर्म लोहा डाल सकते हैं।

🎯 Exam Tip: अन्योन्य प्रेरण गुणांक (M) निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है: कुण्डलियों के फेरों की संख्या, उनका अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल, उनके बीच की दूरी, और कुण्डलियों के बीच रखे पदार्थ की चुम्बकीय पारगम्यता।

 

Question 4. एक कुण्डली के फेरों की संख्या तनी ही रखकर उसका अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल दुगुना कर देने पर स्वप्रेरकत्व का मान कितना होगा ?
Answer:
स्वप्रेरकत्व का सामान्य सूत्र \( L = \frac{\mu N^2 A}{l} \) होता है, जहाँ \( \mu \) चुम्बकीय पारगम्यता, N फेरों की संख्या, A अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल और \( l \) लम्बाई है।
यदि फेरों की संख्या और लम्बाई समान रखी जाए और क्षेत्रफल (A) दुगुना कर दिया जाए, तो
\( L' = \frac{\mu N^2 (2A)}{l} = 2 \left( \frac{\mu N^2 A}{l} \right) \)
\( L' = 2L \)
अतः स्वप्रेरकत्व दुगुना हो जाएगा।
(नोट: स्रोत में दिया गया \( L \propto \sqrt{A} \) और \( L' = \sqrt{2}L \) इस संदर्भ में गलत है, क्योंकि स्वप्रेरकत्व क्षेत्रफल के समानुपाती होता है, वर्गमूल के नहीं)।
In simple words: अगर एक कुण्डली की तारों की संख्या और लम्बाई को वैसे ही रहने दें, लेकिन उसके सामने वाले क्षेत्रफल को दोगुना कर दें, तो उसकी बिजली बनाने की क्षमता (स्वप्रेरकत्व) भी दोगुनी हो जाएगी।

🎯 Exam Tip: स्वप्रेरकत्व (L) कुण्डली के ज्यामितीय आकार और उसमें उपयोग की गई सामग्री पर निर्भर करता है। यह फेरों की संख्या के वर्ग (\( N^2 \)) और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (A) के समानुपाती होता है।

 

Question 5. धारामापी के क्रोड में भंवर धारा के प्रभाव को किस प्रकार कम किया जा सकता है ?
Answer: धारामापी में ताँबे की फ्रेम पर तार को लपेटकर कुण्डली बनायी जाती है। जिससे चुम्बकीय क्षेत्र में घूर्णन करने से इसमें भंवर धाराएँ उत्पन्न होती हैं जो विद्युत चुम्बकीय अवमंदन के कारण कुण्डली को शीघ्र साम्यावस्था में ले जाती है। भंवर धाराओं को कम करने के लिए क्रोड को पटलित (laminated) बनाया जाता है।
In simple words: धारामापी को जल्दी रुकने और सही रीडिंग देने के लिए, हम उसकी कुण्डली को तांबे के फ्रेम पर बनाते हैं। इससे जो अतिरिक्त बिजली बनती है (भंवर धाराएँ), वह कुण्डली को तुरंत रोक देती है।

🎯 Exam Tip: भंवर धाराएँ उपकरण में ऊर्जा हानि का कारण बनती हैं। इन्हें कम करने के लिए, क्रोड को पतली, विद्युतरोधी परतों (पटलित क्रोड) से बनाया जाता है, जिससे प्रतिरोध बढ़ता है और धाराएँ कम हो जाती हैं।

 

Question 6. एक धातु और दूसरा अधातु का सिक्का एक ही ऊंचाई से पृथ्वी तल के समीप गिराए जाते हैं। कौन-सा पहले पृथ्वी पर पहुँचेगा और क्यों ?
Answer: अधातु का सिक्का पृथ्वी तल पर पहले पहुँचेगा क्योंकि धातु के सिक्के में भू-चुम्बकत्व के कारण भंवर धाराएँ उत्पन्न हो जाती हैं। जो इसकी गति का विरोध करती हैं। अधातु में ऐसी धाराएँ नहीं बनतीं, इसलिए वह बिना किसी अतिरिक्त रुकावट के गिरता है।
In simple words: जब धातु का सिक्का गिरता है, तो पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के कारण उसमें हल्की बिजली (भंवर धाराएँ) बनती है। यह बिजली सिक्के की गिरने की गति को थोड़ा धीमा कर देती है। लेकिन अधातु के सिक्के में ऐसा नहीं होता, इसलिए वह पहले जमीन पर पहुंचता है।

🎯 Exam Tip: धातुएँ चालक होती हैं, इसलिए उनमें चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होने पर भंवर धाराएँ उत्पन्न हो सकती हैं। अधातुएँ अचालक होती हैं, इसलिए उनमें ऐसी धाराएँ उत्पन्न नहीं होतीं। यह एक सरल प्रयोग है जो विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के प्रभाव को दर्शाता है।

 

Question 7. स्वप्रेरण को विद्युत का जड़त्व क्यों कहते हैं ? (राज. बोर्ड 2017)
Answer: स्वप्रेरण विद्युत परिपथ में धारा की वृद्धि या कमी का विरोध करता है और परिपथ को मूल स्थिति में लाने का प्रयास करता है। जिस प्रकार जड़त्व किसी वस्तु की गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करता है, उसी प्रकार स्वप्रेरण धारा के परिवर्तन का विरोध करता है। अतः इसे विद्युत का जड़त्व कहते हैं।
In simple words: स्वप्रेरण का मतलब है कि एक बिजली का सर्किट खुद अपनी बिजली के बहाव में बदलाव को पसंद नहीं करता। अगर बिजली कम हो या ज्यादा हो, तो वह बदलाव का विरोध करता है। यह ठीक वैसे ही है जैसे कोई भारी चीज अपनी जगह से हिलना नहीं चाहती।

🎯 Exam Tip: जड़त्व एक गुण है जो किसी वस्तु की गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करता है। इसी तरह, स्वप्रेरण एक परिपथ का गुण है जो उसमें प्रवाहित धारा के मान या दिशा में परिवर्तन का विरोध करता है।

 

Question 8. किसी परिनालिका का स्वप्रेरण गुणांक किन कारणों पर व किस प्रकार निर्भर करता है ?
Answer: किसी परिनालिका का स्वप्रेरण गुणांक उसकी ज्यामिति (लम्बाई, अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल), फेरों की संख्या और उसके क्रोड के पदार्थ की चुम्बकीय पारगम्यता पर निर्भर करता है। यह फेरों की संख्या के वर्ग, अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के सीधे समानुपाती और लम्बाई के व्युत्क्रमानुपाती होता है। एक नर्म लोहे का क्रोड हवा के क्रोड से कहीं अधिक स्वप्रेरकत्व प्रदान करता है।
In simple words: परिनालिका का स्वप्रेरण गुणांक इस बात पर निर्भर करता है कि वह कितनी बड़ी है, उसमें कितने तार लपेटे गए हैं, और उसके अंदर किस तरह की चीज (जैसे हवा या लोहा) है। जितने ज्यादा तार और जितना बड़ा आकार होगा, उतना ही ज्यादा यह गुणांक होगा।

🎯 Exam Tip: एक लम्बी परिनालिका के लिए स्वप्रेरण गुणांक \( L = \mu_0 \mu_r \frac{N^2 A}{l} \) होता है, जहाँ \( \mu_0 \) निर्वात की पारगम्यता, \( \mu_r \) आपेक्षिक पारगम्यता, N फेरों की संख्या, A अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल और \( l \) लम्बाई है।

 

Question 10. \( \frac{\mathbf{L}}{\mathbf{R}} \) का विमीय सूत्र लिखिए जहाँ L स्वप्रेरकत्व तथा R प्रतिरोध है।
Answer:
प्रेरित विद्युत वाहक बल \( \varepsilon = L \frac{dI}{dt} \)
\( \varepsilon \) का विमीय सूत्र \( [ML^2T^{-3}A^{-1}] \) है।
\( L = \frac{\varepsilon dt}{dI} \)
\( L \) का विमीय सूत्र \( [ML^2T^{-2}A^{-2}] \) है।

प्रतिरोध \( R = \frac{\varepsilon}{I} \)
\( R \) का विमीय सूत्र \( [ML^2T^{-3}A^{-2}] \) है।

अब \( \frac{L}{R} \) का विमीय सूत्र ज्ञात करते हैं:
\( \frac{L}{R} = \frac{[ML^2T^{-2}A^{-2}]}{[ML^2T^{-3}A^{-2}]} \)
\( \frac{L}{R} = [T] \)
अतः \( \frac{L}{R} \) का विमीय सूत्र \( [M^0L^0T^1] \) होगा। यह समय की इकाई है।
In simple words: \( L/R \) का मान समय की इकाई के बराबर होता है। इसे 'प्रेरकत्व का समय स्थिरांक' भी कहते हैं, जो बताता है कि किसी सर्किट में धारा को बदलने में कितना समय लगता है।

🎯 Exam Tip: \( L/R \) का विमीय सूत्र अक्सर \( [T] \) होता है, जिसे प्रेरकत्व परिपथ का 'समय स्थिरांक' कहा जाता है। यह परिपथ में धारा के वृद्धि या क्षय की दर को दर्शाता है।

 

Question 11. किसी आयताकार लूप को समांग चुम्बकीय क्षेत्र में नियत वेग से चलाया जाए तो प्रेरित वि. वा. बल का मान कितना होगा ?
Answer: यदि आयताकार लूप को समांग चुम्बकीय क्षेत्र में नियत वेग से चलाया जाए, और पूरा लूप क्षेत्र के अंदर ही रहे, तो लूप से सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में कोई परिवर्तन नहीं होता। इसलिए प्रेरित विद्युत वाहक बल शून्य होगा।
In simple words: जब एक चौकोर तार का टुकड़ा एक जैसे चुम्बकीय क्षेत्र में सीधा चलता है, तो उसमें कोई बिजली (विद्युत वाहक बल) नहीं बनती। ऐसा इसलिए क्योंकि तार के हर हिस्से में चुम्बकीय क्षेत्र का असर एक जैसा रहता है और कोई नया बदलाव नहीं होता।

🎯 Exam Tip: प्रेरित EMF केवल तभी उत्पन्न होता है जब चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है। यदि लूप पूरी तरह से एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में गति करता है, तो नेट फ्लक्स परिवर्तन शून्य होता है, भले ही लूप गतिमान हो।

 

Question 12. दो कुण्डलियों को किस प्रकार लपेटा जाए जिससे प्रेरित वि. वा. बल का मान अधिकतम होगा?
Answer: दो कुण्डलियों को इस प्रकार लपेटना चाहिए कि उनका चुम्बकीय फ्लक्स अधिकतम रूप से एक दूसरे से जुड़ा हो। एक कुण्डली के ऊपर ही दूसरी कुण्डली को लपेटना चाहिए जिससे चुम्बकीय क्षरण (magnetic flux leakage) नगण्य किया जा सकता है। इससे अन्योन्य प्रेरण गुणांक अधिकतम होगा, जिससे प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान अधिकतम होगा।
In simple words: अगर आप दो बिजली की कुण्डलियों को एक साथ बिल्कुल पास-पास लपेटते हैं, तो एक में बदलाव करने से दूसरे में सबसे ज्यादा बिजली बनेगी। यह तब होता है जब दोनों कुण्डलियों का चुम्बकीय प्रभाव एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़ जाता है।

🎯 Exam Tip: अन्योन्य प्रेरण गुणांक (M) तब अधिकतम होता है जब दो कुण्डलियाँ एक ही अक्ष पर और एक दूसरे के बहुत करीब होती हैं, जिससे एक कुण्डली का लगभग सारा फ्लक्स दूसरी से जुड़ जाता है।

 

Question 13. किसी कुण्डली (आयताकार लूप) को चुम्बकीय क्षेत्र में घूर्णन कराने पर उसमें उत्पन्न प्रेरित वि. वा. बल किन कारकों से प्रभावित होता है?
Answer: किसी कुण्डली (आयताकार लूप) को चुम्बकीय क्षेत्र में घूर्णन कराने पर उत्पन्न प्रेरित वि. वा. बल \( \varepsilon_0 = NBA\omega \) फेरों की संख्या (N), कुण्डली के क्षेत्रफल (A), चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता (B) और कोणीय चाल (\( \omega \)) पर निर्भर होता है। प्रेरित विद्युत वाहक बल इन सभी कारकों के समानुपाती होता है।
In simple words: जब एक तार की कुण्डली चुम्बकीय क्षेत्र में घूमती है, तो उसमें बनने वाली बिजली (विद्युत वाहक बल) कई बातों पर निर्भर करती है: कुण्डली में कितने तार लपेटे गए हैं, कुण्डली कितनी बड़ी है, चुम्बकीय क्षेत्र कितना मजबूत है, और कुण्डली कितनी तेजी से घूम रही है।

🎯 Exam Tip: यह सूत्र AC जनरेटर के सिद्धांत का आधार है। अधिकतम प्रेरित EMF प्राप्त करने के लिए, N, B, A और \( \omega \) सभी को अधिकतम होना चाहिए।

Rbse Class 12 Physics Chapter 9 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. विद्युत चुम्बकीय प्रेरण से आप क्या समझते हैं ? फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण सम्बन्धी नियम लिखिए तथा प्रेरित वि. वा. बल का मान लिखिए।
Answer:
विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electro-magnetic Induction): यह वह घटना है जिसमें चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन के कारण किसी चालक में विद्युत वाहक बल (EMF) और धारा प्रेरित होती है। यह बिजली पैदा करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है।

फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के नियम:
1. जब किसी परिपथ से सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो उस परिपथ में एक प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। यह तब तक बना रहता है जब तक फ्लक्स में परिवर्तन होता रहता है।
2. प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन की दर के सीधे समानुपाती होता है। गणितीय रूप से, \( \varepsilon = -N \frac{d\Phi_B}{dt} \) जहाँ N फेरों की संख्या और \( \frac{d\Phi_B}{dt} \) फ्लक्स परिवर्तन की दर है। ऋणात्मक चिन्ह लेंज के नियम को दर्शाता है।
In simple words: विद्युत चुम्बकीय प्रेरण का मतलब है कि जब किसी तार के पास चुम्बकीय क्षेत्र बदलता है, तो उस तार में बिजली बन जाती है। फैराडे ने बताया कि यह बिजली तब तक बनती है जब तक बदलाव होता रहता है, और जितनी तेजी से बदलाव होता है, उतनी ही ज्यादा बिजली बनती है।

🎯 Exam Tip: फैराडे के नियम विद्युत चुम्बकीय प्रेरण की मात्रा (प्रेरित EMF) को परिभाषित करते हैं, जबकि लेंज का नियम उसकी दिशा बताता है। दोनों नियम एक साथ ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत की व्याख्या करते हैं।

 

Question 2. एक कुण्डली को चुम्बकीय क्षेत्र में (i) तीव्र गति से (ii) धीमी गति से हटाया जाता है तो किस स्थिति में प्रेरित वि. वा. बल तथा किया गया कार्य अधिक होगा।
Answer:
(i) तीव्र गति से हटाने पर: कुण्डली को चुम्बकीय क्षेत्र में तीव्र गति से हटाने पर प्रेरित वि. वा. बल का मान अधिक होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि तीव्र गति से हटाने पर समय अंतराल \( dt \) का मान अल्प होगा। इससे फ्लक्स परिवर्तन की दर \( \frac{d\Phi_B}{dt} \) का मान अधिक बढ़ जायेगा। फैराडे के नियम के अनुसार, उत्पन्न प्रेरित वि. वा. बल \( \varepsilon = -\frac{d\Phi_B}{dt} \) का मान भी अधिक होगा। इस स्थिति में कुण्डली को हटाने में किया गया कार्य भी अधिक होगा, क्योंकि हमें भंवर धाराओं द्वारा लगाए गए विरोधी बल के विरुद्ध तेजी से कार्य करना पड़ता है।

(ii) धीमी गति से हटाने पर: धीमी गति से हटाने पर \( dt \) का मान अधिक होगा, जिससे \( \frac{d\Phi_B}{dt} \) का मान कम होगा। अतः प्रेरित वि. वा. बल का मान भी कम होगा। किया गया कार्य भी कम होगा।
In simple words: अगर आप किसी कुण्डली को चुम्बकीय क्षेत्र से जल्दी हटाते हैं, तो उसमें ज्यादा बिजली (विद्युत वाहक बल) बनती है और उसे हटाने में ज्यादा ताकत लगती है। अगर धीरे-धीरे हटाते हैं, तो कम बिजली बनती है और कम ताकत लगती है।

🎯 Exam Tip: प्रेरित EMF सीधे फ्लक्स परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है। त्वरित गति से अधिक तेजी से फ्लक्स बदलता है, जिससे अधिक EMF और अधिक कार्य होता है, जो ऊर्जा संरक्षण के अनुरूप है।

 

Question 3. विद्युत चुम्बकीय प्रेरण सम्बन्धी लेंज का नियम लिखो तथा समझाइए कि लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम की पालना करता है।
Answer:
लेंज का नियम (Lenz's Law): इस नियम के अनुसार, विद्युत चुम्बकीय प्रेरण की प्रत्येक अवस्था में किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल एवं प्रेरित धारा की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिसके कारण वह उत्पन्न हुई है।

उदाहरण के लिए, यदि एक चुम्बक का उत्तरी ध्रुव एक कुण्डली के पास लाया जाता है, तो कुण्डली में ऐसी धारा प्रेरित होती है कि कुण्डली का वह सिरा उत्तरी ध्रुव बन जाता है। यह चुम्बक को पास आने से रोकता है, यानी गति का विरोध करता है।

लेंज का नियम एवं ऊर्जा संरक्षण:
लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन करता है। यदि प्रेरित धारा उस कारण का विरोध नहीं करती जिसने उसे उत्पन्न किया है, बल्कि उसका समर्थन करती है, तो चुम्बक स्वयं ही तेजी से गति करेगा और ऊर्जा अपने आप बढ़ती चली जाएगी। यह ऊर्जा संरक्षण के नियम का उल्लंघन होगा।

वास्तव में, चुम्बक को गतिमान रखने के लिए हमें बाहरी बल लगाकर कार्य करना पड़ता है। यह यांत्रिक कार्य प्रेरित धारा के कारण परिपथ में ऊष्मा ऊर्जा (जूल तापन) के रूप में परिवर्तित होता है। इस प्रकार, ऊर्जा न तो उत्पन्न होती है और न ही नष्ट होती है, बल्कि एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती है। इसलिए, लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम की अनुपालना करता है।
In simple words: लेंज का नियम कहता है कि बिजली जब भी बनती है, तो वह हमेशा उस चीज का विरोध करती है जिससे वह बनी है। यह नियम ऊर्जा के बचाकर रखने वाले सिद्धांत को मानता है। अगर यह विरोध न करे तो हमें बिना कुछ किए बहुत सारी बिजली मिल जाएगी, जो कि संभव नहीं है।

🎯 Exam Tip: लेंज के नियम का मुख्य बिंदु 'विरोध' है। चाहे चुम्बक पास आ रहा हो या दूर जा रहा हो, कुण्डली में उत्पन्न धारा हमेशा उस गति का विरोध करेगी। ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत से इस विरोध की आवश्यकता सिद्ध होती है।

 

Question 4. एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में रखी धातु की लेट को क्षेत्र से बाहर खींचने या क्षेत्र में प्रवेश कराने पर हमें विरोधी बल का अनुभव क्यों होता है ?
Answer: एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में रखी धातु की प्लेट को क्षेत्र से बाहर खींचने या क्षेत्र में प्रवेश कराने पर उसमें प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है जिसके कारण धातु की प्लेट में भंवर धाराएँ उत्पन्न होती हैं। लेंज के नियम के अनुसार, ये प्रेरित धाराएँ अपनी उत्पत्ति के कारण का विरोध करती हैं, यानी प्लेट की गति का विरोध करती हैं। इसी कारण हमें विरोधी बल का अनुभव होता है। यह बल प्लेट को क्षेत्र से बाहर खींचने या क्षेत्र में प्रवेश कराने के लिए अतिरिक्त प्रयास की आवश्यकता को दर्शाता है।
In simple words: जब आप किसी धातु की प्लेट को चुम्बकीय क्षेत्र में हिलाते हैं, तो उसमें हल्की बिजली (भंवर धाराएँ) बनती हैं। ये धाराएँ प्लेट के हिलने का विरोध करती हैं, जैसे आप किसी चिपचिपी चीज को खींच रहे हों। इसीलिए आपको एक विरोधी ताकत महसूस होती है।

🎯 Exam Tip: भंवर धाराओं के कारण लगने वाला विरोधी बल 'विद्युत चुम्बकीय अवमंदन' का एक उदाहरण है। इसका उपयोग गति को नियंत्रित करने या रोकने के लिए किया जाता है, जैसे कि ट्रेनों में विद्युत चुम्बकीय ब्रेक में।

 

Question 5. क्या कारण है कि मोटे तार की कुण्डलियों को दोहरा मोड़ा जाता है।
Answer: मोटे तार की कुण्डलियों को दोहरा मोड़ा जाता है ताकि स्वप्रेरण के प्रभाव को कम किया जा सके। जब तार को दोहरा मोड़ा जाता है, तो धारा एक दिशा में जाती है और फिर वापस उसी दिशा में विपरीत दिशा में आती है, जिससे उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र एक-दूसरे को लगभग रद्द कर देते हैं। इस प्रकार कुण्डली से बद्ध कुल चुम्बकीय फ्लक्स शून्य हो जाता है और स्वप्रेरण का प्रभाव नगण्य हो जाता है।
In simple words: मोटी तार की कुण्डलियों को दो बार लपेटकर इसलिए बनाते हैं ताकि जब उनमें बिजली बहे तो वे खुद ही अपनी बिजली को बनने से न रोकें (स्वप्रेरण न हो)। इससे तार की कुण्डली में बिजली बिना किसी रुकावट के आसानी से बहती रहती है।

🎯 Exam Tip: प्रतिरोध बॉक्स में उपयोग की जाने वाली मानक प्रतिरोध कुण्डलियाँ अक्सर इस 'गैर-प्रेरक' तरीके से घाव की जाती हैं ताकि स्वप्रेरण के कारण होने वाली किसी भी त्रुटि से बचा जा सके, खासकर जब उच्च आवृत्ति वाली धाराओं के साथ काम कर रहे हों।

 

Question 6. प्रेरित धारा की दिशा व्यक्त करने के लिए फ्लेमिंग का दायें हाथ का नियम लिखिए।
Answer: फ्लेमिंग के दायें हाथ का नियम प्रेरित धारा की दिशा बताता है जब कोई चालक चुम्बकीय क्षेत्र में गति करता है। इस नियम के अनुसार, अपने दाहिने हाथ के अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा को इस प्रकार फैलाएं कि वे एक-दूसरे के लम्बवत् हों:
1. अंगूठा: चालक की गति की दिशा (Motion)
2. तर्जनी: चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा (Field)
3. मध्यमा: प्रेरित धारा की दिशा (Current)
ये तीनों हमेशा एक-दूसरे के लम्बवत् कार्य करते हैं। यह नियम जनरेटर के सिद्धांत का आधार है, जहाँ यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है।
In simple words: फ्लेमिंग का दायां हाथ का नियम हमें बताता है कि जब कोई तार चुम्बकीय क्षेत्र में चलता है तो उसमें बिजली किस तरफ बहेगी। अपने दाहिने हाथ के अंगूठे को तार की गति की तरफ, पहली उंगली को चुम्बकीय क्षेत्र की तरफ रखें, तो बीच वाली उंगली बताएगी कि बिजली किस तरफ जा रही है।

🎯 Exam Tip: फ्लेमिंग का दायां हाथ का नियम जनरेटर के लिए उपयोग होता है (जहाँ गति से धारा बनती है), जबकि बायां हाथ का नियम मोटर के लिए उपयोग होता है (जहाँ धारा से गति होती है)। दोनों नियमों को याद रखने के लिए 'जनरेटर के लिए दायां, मोटर के लिए बायां' याद रखें।

O A r ω x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x x

 

Question 7. अन्योन्य प्रेरण गुणांक की परिभाषा दीजिए तथा इसका मात्रक और विमीय सूत्र लिखो।
Answer:
अन्योन्य प्रेरण (Mutual Induction): यह वह घटना है जिसमें एक कुण्डली में धारा में परिवर्तन के कारण पास रखी दूसरी कुण्डली में विद्युत वाहक बल (EMF) या धारा प्रेरित होती है। यह चुम्बकीय क्षेत्र के माध्यम से एक कुण्डली के प्रभाव को दूसरी पर दर्शाता है।

परिभाषा: यदि प्राथमिक कुण्डली में इकाई धारा परिवर्तन के कारण द्वितीयक कुण्डली में उत्पन्न चुम्बकीय फ्लक्स युग्मन (magnetic flux linkage) होता है, तो उसे अन्योन्य प्रेरण गुणांक (M) कहते हैं। इसे हेनरी (H) में मापा जाता है।

मात्रक: अन्योन्य प्रेरण गुणांक का मात्रक हेनरी (Henry) है।

विमीय सूत्र: \( M = \frac{\Phi_B}{I} \), जहाँ \( \Phi_B \) का विमीय सूत्र \( [ML^2T^{-2}A^{-1}] \) और \( I \) का \( [A] \) है।
अतः, \( M \) का विमीय सूत्र \( [ML^2T^{-2}A^{-2}] \) होगा।
In simple words: अन्योन्य प्रेरण गुणांक यह बताता है कि जब एक तार की कुण्डली में बिजली बदलती है, तो पास रखी दूसरी कुण्डली में कितनी बिजली बनेगी। इसकी इकाई हेनरी होती है। यह दोनों कुण्डलियों के बीच बिजली के जुड़ाव की ताकत को मापता है।

🎯 Exam Tip: अन्योन्य प्रेरण गुणांक दो कुण्डलियों के बीच चुम्बकीय युग्मन की शक्ति का माप है। यह कुण्डलियों की ज्यामिति, उनके बीच की दूरी और क्रोड सामग्री पर निर्भर करता है।

 

Question 9. L लम्बाई की चालक छड़ चुम्बकीय क्षेत्र B में समान कोणीय वेग \( \omega \) से इस प्रकार घूम रही है कि छड़ के घूमने का तल चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् है तो छड़ के सिरों के मध्य प्रेरित वि. वा. वल ज्ञात करो।
Answer: यदि \( L \) लम्बाई की चालक छड़ चुम्बकीय क्षेत्र \( B \) में समान कोणीय वेग \( \omega \) से इस प्रकार घूम रही है कि छड़ के घूमने का तल चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् है, तो छड़ के सिरों के मध्य प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf) निम्न सूत्र द्वारा दिया जाता है:
प्रेरित विद्युत वाहक बल \( \varepsilon = \frac{1}{2} B L^2 \omega \)
यह सूत्र तब लागू होता है जब छड़ एक सिरे के सापेक्ष घूम रही हो और चुम्बकीय क्षेत्र पूरे क्षेत्र में समान हो।
In simple words: जब एक सीधी छड़ चुम्बकीय क्षेत्र में घूमती है, तो उसके सिरों पर एक बिजली का बल बनता है। इस बल का मान चुम्बकीय क्षेत्र की ताकत, छड़ की लम्बाई और उसके घूमने की गति पर निर्भर करता है।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, छड़ की गति की दिशा और चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा के बीच के कोण का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्रेरित विद्युत वाहक बल के मान को प्रभावित करता है।

 

Question 10. दो कुण्डलियाँ A और B एक दूसरे के लम्बवत् चित्रानुसार रखी हैं। यदि किसी एक कुण्डली में धारा में परिवर्तन किया जाए तो क्या दूसरी कुण्डली में धारा प्रेरित होगी ? क्यों ?
Answer: नहीं, यदि दो कुण्डलियाँ A और B एक दूसरे के लम्बवत् रखी हैं, और किसी एक कुण्डली में धारा में परिवर्तन किया जाता है, तो दूसरी कुण्डली में धारा प्रेरित नहीं होगी। इसका कारण यह है कि प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf) केवल तभी उत्पन्न होता है जब कुण्डली से सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन हो। जब कुण्डलियाँ एक-दूसरे के लम्बवत् होती हैं, तो एक कुण्डली द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ दूसरी कुण्डली के तल के समानांतर होती हैं। इस स्थिति में, दूसरी कुण्डली से होकर गुजरने वाला कुल चुम्बकीय फ्लक्स शून्य रहता है, भले ही पहली कुण्डली में धारा बदल रही हो। चुम्बकीय फ्लक्स में कोई परिवर्तन न होने के कारण, दूसरी कुण्डली में कोई विद्युत वाहक बल प्रेरित नहीं होता।
In simple words: अगर दो बिजली की तारें एक-दूसरे से सीधी ऊपर-नीचे (लम्बवत्) रखी हों और हम एक तार में बिजली बदलें, तो दूसरी तार में कोई नई बिजली नहीं बनेगी। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बिजली की रेखाएँ दूसरी तार से सीधी नहीं गुजरतीं।

🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि प्रेरित धारा के लिए चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन आवश्यक है, और फ्लक्स तभी परिवर्तित होता है जब चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ कुण्डली के तल को काटें, न कि उसके समानांतर हों।

 

Question 12. किसी कुण्डली स्वप्रेरकत्व 1H है। इससे आप क्या समझते हैं?
Answer: यदि किसी कुण्डली का स्वप्रेरकत्व 1 हेनरी (H) है, तो इसका मतलब यह है कि जब उस कुण्डली में 1 एम्पीयर प्रति सेकंड की दर से धारा में परिवर्तन होता है, तो कुण्डली में 1 वोल्ट का प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। स्वप्रेरकत्व एक कुण्डली का वह गुण है जो उसमें प्रवाहित होने वाली धारा में होने वाले किसी भी परिवर्तन का विरोध करता है। यह ऊर्जा को चुम्बकीय क्षेत्र के रूप में संग्रहित करने की कुण्डली की क्षमता को भी दर्शाता है।
In simple words: 1 हेनरी स्वप्रेरकत्व का मतलब है कि अगर एक तार के घेरे में 1 सेकंड में 1 एम्पीयर बिजली बदलती है, तो 1 वोल्ट का नया बिजली का दबाव बनता है। यह घेरा बिजली के बदलाव को रोकना चाहता है।

🎯 Exam Tip: स्वप्रेरकत्व (Inductance) को हमेशा 'L' से दर्शाया जाता है और इसकी इकाई हेनरी (H) है। याद रखें कि यह धारा में परिवर्तन का विरोध करता है, स्वयं धारा का नहीं।

 

Question 13. सिद्ध करो कि जब किसी कुण्डली से सम्बद्ध फ्लक्स में परिवर्तन \( \phi_1 \) से \( \phi_2 \) होता है तो प्रेरित आवेश का मान \( q = \frac{N}{R}(\phi_1-\phi_2) \) होता है। यहाँ N कुण्डली में फेरों की संख्या तथा R प्रतिरोध है।
Answer: हम जानते हैं कि आवेश प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते हैं:
\( I = \frac{dq}{dt} \) ...(1)
फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के नियमानुसार, प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf) \( \varepsilon \) कुण्डली से सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन की दर के बराबर होता है:
\( \varepsilon = -N \frac{d\phi}{dt} \)
और ओम के नियमानुसार, प्रेरित धारा \( I = \frac{\varepsilon}{R} \)
तो, हम लिख सकते हैं:
\( I = \frac{-N}{R} \frac{d\phi}{dt} \) ...(2)
समीकरण (1) और (2) से:
\( \frac{dq}{dt} = \frac{-N}{R} \frac{d\phi}{dt} \)
\( dq = \frac{-N}{R} d\phi \)
माना फ्लक्स में परिवर्तन \( \phi_1 \) से \( \phi_2 \) तक हुआ है, तो कुल प्रेरित आवेश \( q \) को ज्ञात करने के लिए हम दोनों पक्षों का समाकलन करेंगे:
\( \int dq = \int_{\phi_1}^{\phi_2} \frac{-N}{R} d\phi \)
\( q = \frac{-N}{R} \int_{\phi_1}^{\phi_2} d\phi \)
\( q = \frac{-N}{R} [\phi]_{\phi_1}^{\phi_2} \)
\( q = \frac{-N}{R} (\phi_2 - \phi_1) \)
\( q = \frac{N}{R} (\phi_1 - \phi_2) \)
यह सिद्ध करता है कि प्रेरित आवेश का मान कुण्डली के फेरों की संख्या, प्रतिरोध और चुम्बकीय फ्लक्स के परिवर्तन पर निर्भर करता है।
In simple words: जब किसी तार के घेरे से गुजरने वाली चुम्बकीय शक्ति बदलती है, तो उसमें थोड़ी देर के लिए बिजली बनती है। यह बिजली की मात्रा (आवेश) इस बात पर निर्भर करती है कि घेरे में कितने तार हैं, तार कितना मजबूत है (प्रतिरोध), और चुम्बकीय शक्ति कितनी बदली है।

🎯 Exam Tip: इस सूत्र में ऋणात्मक चिह्न (अगर प्रयोग किया जाए) लेंज के नियम को दर्शाता है, कि प्रेरित धारा हमेशा फ्लक्स परिवर्तन का विरोध करती है। हालाँकि, आवेश के परिमाण के लिए, हम निरपेक्ष मान का उपयोग करते हैं।

 

Question 14. सिद्ध करो कि एक आयताकार कुण्डली के असमान चुम्बकीय क्षेत्र में उसके लम्बवत् नियत वेग से गति करने पर ऊर्जा संरक्षण नियम की अनुपालना होती है।
Answer: जब एक आयताकार कुण्डली असमान चुम्बकीय क्षेत्र में नियत वेग से लम्बवत् गति करती है, तो इसमें प्रेरित विद्युत वाहक बल और धारा उत्पन्न होती है। यह प्रक्रिया ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन करती है।
मान लीजिए एक आयताकार कुण्डली PQRS को असमान चुम्बकीय क्षेत्र में रखा गया है। कुण्डली की लम्बाई \( l \) और चौड़ाई \( b \) है। कुण्डली की भुजा PQ पर चुम्बकीय क्षेत्र \( B_1 \) और RS भुजा पर चुम्बकीय क्षेत्र \( B_2 \) कार्य करते हैं। कुण्डली को \( v \) वेग से इस प्रकार चलाया जाता है कि वेग \( v \) की दिशा भुजा PQ और RS के लम्बवत् है।

यह समझने के लिए कि ऊर्जा संरक्षण का नियम कैसे लागू होता है, हम कुण्डली के गति के दौरान उत्पन्न होने वाले प्रेरित विद्युत वाहक बल और प्रेरित धारा पर विचार करते हैं। प्रेरित धारा एक ऐसा बल उत्पन्न करती है जो कुण्डली की गति का विरोध करता है। इस विरोधी बल के विरुद्ध कुण्डली को गतिमान रखने के लिए बाहरी स्रोत द्वारा कार्य किया जाता है।
यह यांत्रिक कार्य विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित होता है, जो अंततः कुण्डली के प्रतिरोध के कारण ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाता है। इस प्रकार, ऊर्जा न तो नष्ट होती है और न ही उत्पन्न होती है, बल्कि एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती है, जिससे ऊर्जा संरक्षण का नियम सत्यापित होता है।
In simple words: जब एक आयताकार घेरा एक बदलती हुई चुम्बकीय जगह से गुजरता है, तो उसमें बिजली बनती है। इस बिजली को बनाए रखने के लिए हमें घेरे को लगातार धक्का देना पड़ता है। हम जो काम करते हैं, वही बिजली में बदल जाता है, और फिर वह गर्मी में बदल जाती है। इससे पता चलता है कि ऊर्जा न तो पैदा होती है और न ही खत्म होती, बस रूप बदलती है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत को स्पष्ट करने के लिए, हमेशा यांत्रिक कार्य (कुण्डली को गति देने के लिए आवश्यक) और विद्युत ऊर्जा (प्रेरित धारा और ऊष्मा) के बीच संबंध पर ध्यान दें।

 

Question 14. सिद्ध करो कि एक आयताकार कुण्डली के असमान चुम्बकीय क्षेत्र में उसके लम्बवत् नियत वेग से गति करने पर ऊर्जा संरक्षण नियम की अनुपालना होती है।
Answer: (जारी) चित्र 9.11 में एक आयताकार चालक कुण्डली PQRS एक असमान चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् रखी है। कुण्डली की लम्बाई \( l \) तथा चौड़ाई \( b \) है। कुण्डली की भुजा PQ पर \( B_1 \) तथा RS भुजा पर \( B_2 \) चुम्बकीय क्षेत्र, कुण्डली के लम्बवत् कार्य करता है। चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् कुण्डली को \( v \) वेग से इस प्रकार चलाया जाता है कि वेग \( v \) की दिशा भुजा PQ व RS के लम्बवत् हैं।
U P S Q R B1 B2 Ax l b
चित्र 9.11
अतः अल्प समय \( \Delta t \) में कुण्डली द्वारा तय की गई दूरी \( \Delta x = v \Delta t \)
भुजा PQ या RS द्वारा पार किया गया क्षेत्रफल \( \Delta A = l \Delta x = lv \Delta t \)
इन अल्प क्षेत्रफलों में चुम्बकीय क्षेत्रों के मान क्रमश: \( B_1 \) एवं \( B_2 \) हैं। चित्र 9.11 से स्पष्ट है कि जितना क्षेत्रफल बायीं ओर से चुम्बकीय क्षेत्र \( B_1 \) से बाहर निकलता है उतना ही क्षेत्रफल दायीं ओर से चुम्बकीय क्षेत्र \( B_2 \) में प्रवेश करता है। बायीं ओर से कुण्डली में से पार होने वाले फ्लक्स में कमी आती है, जबकि दायीं ओर से फ्लक्स बढ़ता है।
अतः कुण्डली में से पार होने वाले फ्लक्स में कुल परिवर्तन:
\( \Delta \phi_B = \phi_{B2} - \phi_{B1} = (B_2 - B_1) l v \Delta t \)
तो, फ्लक्स परिवर्तन की दर:
\( \frac{\Delta \phi_B}{\Delta t} = (B_2 - B_1) l v \)
फैराडे के नियमानुसार प्रेरित विद्युत वाहक बल \( \varepsilon = -\frac{\Delta \phi_B}{\Delta t} \)
\( \varepsilon = -(B_2 - B_1) l v \)
या \( \varepsilon = (B_1 - B_2) l v \) ...(3)
यदि कुण्डली का प्रतिरोध \( R \) हो तो कुण्डली में उत्पन्न प्रेरित धारा:
\( I = \frac{\varepsilon}{R} \)
\( I = \frac{(B_1 - B_2) l v}{R} \) ...(4)
यहाँ, कुण्डली की गति के कारण यांत्रिक ऊर्जा का उपयोग विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित होता है, जो ऊर्जा संरक्षण के नियम की पुष्टि करता है। विरोधी बल के विरुद्ध किया गया कार्य ही विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
In simple words: जब एक तार का घेरा असमान चुम्बकीय क्षेत्र में चलता है, तो उसमें बिजली बनती है। यह बिजली उस बल के खिलाफ किए गए काम से आती है जो घेरे की गति को धीमा करने की कोशिश करता है। इससे यह साबित होता है कि ऊर्जा कभी खत्म नहीं होती, बस एक रूप से दूसरे रूप में बदल जाती है।

🎯 Exam Tip: आरेख को स्पष्ट रूप से लेबल करें और गति की दिशा, चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा, और कुण्डली की भुजाओं को सही ढंग से दिखाएँ। गणना करते समय, सुनिश्चित करें कि सभी इकाइयाँ SI प्रणाली में हों।

 

RBSE Class 12 Physics Chapter 9 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. समरुप चुम्बकीय क्षेत्र में एक समान वेग से गतिशील चालक छड़ के कारण प्रेरित वि. वा. बल का मान ज्ञात करो। इस प्रेरित वि, वा, बल की दिशा किस प्रकार ज्ञात करोगे ?
Answer: जब एक चालक छड़ समरूप चुम्बकीय क्षेत्र में एक समान वेग से गति करती है, तो उसके सिरों के मध्य प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। इसे 'गतिक विद्युत वाहक बल' कहते हैं।
मान लीजिए \( L \) लम्बाई की एक चालक छड़ \( \vec{v} \) वेग से एक समरूप चुम्बकीय क्षेत्र \( \vec{B} \) में गति कर रही है। यदि \( \vec{v} \), \( \vec{B} \) और छड़ की लम्बाई परस्पर लम्बवत् हों, तो छड़ में उपस्थित मुक्त इलेक्ट्रॉन भी \( \vec{v} \) वेग से चुम्बकीय क्षेत्र में गति करते हैं। इन गतिशील इलेक्ट्रॉनों पर चुम्बकीय बल कार्य करता है:
\( \vec{F}_m = q (\vec{v} \times \vec{B}) \)
जहाँ \( q \) इलेक्ट्रॉन का आवेश है (ऋणात्मक)।
इस चुम्बकीय बल के कारण इलेक्ट्रॉन छड़ के एक सिरे पर (मान लीजिए P) जमा हो जाते हैं, और दूसरा सिरा (Q) धनात्मक हो जाता है। इससे छड़ के सिरों के मध्य एक स्थिर विद्युत क्षेत्र \( \vec{E} \) उत्पन्न होता है। यह विद्युत क्षेत्र इलेक्ट्रॉनों पर एक विद्युत बल \( \vec{F}_e = q \vec{E} \) लगाता है, जो चुम्बकीय बल की विपरीत दिशा में होता है।
इलेक्ट्रॉनों का जमाव तब तक होता रहता है जब तक विद्युत बल चुम्बकीय बल को संतुलित नहीं कर देता:
\( q \vec{E} + q (\vec{v} \times \vec{B}) = 0 \)
\( \vec{E} = -(\vec{v} \times \vec{B}) \)
प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf) \( \varepsilon \) विद्युत क्षेत्र \( \vec{E} \) और छड़ की लम्बाई \( L \) के गुणनफल के बराबर होता है:
\( \varepsilon = EL \)
\( \varepsilon = | \vec{v} \times \vec{B} | L \)
चूंकि \( \vec{v} \), \( \vec{B} \) और \( L \) परस्पर लम्बवत् हैं, तो \( | \vec{v} \times \vec{B} | = vB \).
अतः, प्रेरित विद्युत वाहक बल \( \varepsilon = BvL \)

प्रेरित विद्युत वाहक बल की दिशा ज्ञात करना:
प्रेरित विद्युत वाहक बल की दिशा फ्लेमिंग के दायें हाथ के नियम से ज्ञात की जाती है। इस नियम के अनुसार, अपने दायें हाथ के अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा को इस प्रकार फैलाएँ कि वे एक-दूसरे के लम्बवत् हों।
1. तर्जनी उंगली चुम्बकीय क्षेत्र (\( \vec{B} \)) की दिशा को दर्शाए।
2. अंगूठा चालक की गति (\( \vec{v} \)) की दिशा को दर्शाए।
3. तब मध्यमा उंगली प्रेरित धारा (\( \vec{I} \)) या प्रेरित विद्युत वाहक बल की दिशा को दर्शाएगी।
इस नियम का उपयोग करके, हम यह निर्धारित कर सकते हैं कि छड़ के किस सिरे पर उच्च विभव (धनात्मक) और किस सिरे पर निम्न विभव (ऋणात्मक) उत्पन्न होता है।
In simple words: जब एक तार की छड़ एक चुम्बकीय जगह में चलती है, तो उसके सिरों पर बिजली का दबाव (वि. वा. बल) बनता है। इस दबाव का मान चुम्बकीय क्षेत्र की ताकत, छड़ की गति और उसकी लम्बाई पर निर्भर करता है। इस बिजली की दिशा को पता करने के लिए हम फ्लेमिंग के दायें हाथ के नियम का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें उंगलियाँ गति, क्षेत्र और बिजली की दिशा बताती हैं।

🎯 Exam Tip: फ्लेमिंग के दायें हाथ के नियम और संबंधित सूत्र \( \varepsilon = BvL \) को याद रखना इस प्रश्न के लिए महत्वपूर्ण है। सुनिश्चित करें कि आप सदिश गुणनफल की अवधारणा और लम्बवत् दिशाओं को सही ढंग से समझते हैं।

 

Question 3. फेरों तथा A क्षेत्रफल वाली एक आयताकार कुण्डली (लूप) समरूप चुम्बकीय क्षेत्र में में एक समान वेग \( \omega \) से घूर्णन कर रही है। तो सिद्ध करो कि कुण्डली में प्रेरित वि. वा. बल NBw sinwt होता है।
Answer: जब फेरों की संख्या \( N \) और क्षेत्रफल \( A \) वाली एक आयताकार कुण्डली समरूप चुम्बकीय क्षेत्र \( B \) में कोणीय वेग \( \omega \) से घूर्णन करती है, तो उसमें प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है।
मान लीजिए किसी क्षण \( t \) पर कुण्डली का तल चुम्बकीय क्षेत्र \( B \) के साथ \( \theta \) कोण बनाता है।
\( \theta \) B S P
चित्र 9.15
कुण्डली से सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स \( \phi_B \) निम्न सूत्र द्वारा दिया जाता है:
\( \phi_B = NBA \cos \theta \)
चूंकि कुण्डली कोणीय वेग \( \omega \) से घूर्णन कर रही है, तो \( \theta = \omega t \) (यदि \( t=0 \) पर \( \theta=0 \) हो)
अतः \( \phi_B = NBA \cos(\omega t) \)
फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के नियमानुसार, प्रेरित विद्युत वाहक बल \( \varepsilon \) चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन की ऋणात्मक दर के बराबर होता है:
\( \varepsilon = -N \frac{d\phi_B}{dt} \)
\( \varepsilon = -N \frac{d}{dt} (BA \cos(\omega t)) \)
\( \varepsilon = -NBA \frac{d}{dt} (\cos(\omega t)) \)
\( \varepsilon = -NBA (-\sin(\omega t) \cdot \omega) \)
\( \varepsilon = NBA \omega \sin(\omega t) \)
यह सिद्ध करता है कि कुण्डली में प्रेरित विद्युत वाहक बल \( NBA \omega \sin(\omega t) \) होता है। इस प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान समय के साथ ज्यावक्रीय रूप से बदलता रहता है।
E T O T/4 T/2 3T/4
चित्र 9.16
जहाँ \( \varepsilon_0 = NBA\omega \) प्रेरित विद्युत वाहक बल का अधिकतम मान है। इस प्रकार, प्रेरित विद्युत वाहक बल अधिकतम होता है जब \( \sin(\omega t) = \pm 1 \) (अर्थात \( \omega t = \frac{\pi}{2}, \frac{3\pi}{2}, ... \)) और शून्य होता है जब \( \sin(\omega t) = 0 \) (अर्थात \( \omega t = 0, \pi, ... \))।
In simple words: जब एक तार का घेरा (कुण्डली) चुम्बकीय क्षेत्र में घूमता है, तो उसमें बिजली का दबाव (वि. वा. बल) बनता है। इस दबाव का मान घेरे के तारों की संख्या, उसके आकार, चुम्बकीय क्षेत्र की ताकत और घूमने की गति पर निर्भर करता है। यह दबाव घुमाव के साथ बदलता रहता है।

🎯 Exam Tip: इस सूत्र को प्राप्त करने के लिए फ्लक्स की परिभाषा \( (\phi_B = NBA \cos \theta) \) और फैराडे के नियम \( (\varepsilon = -N \frac{d\phi}{dt}) \) का सही ढंग से उपयोग करें। \( \theta = \omega t \) प्रतिस्थापन और \( \cos \) का अवकलन \( (-\sin) \) महत्वपूर्ण कदम हैं।

 

Question 4. स्वप्रेरण किसे कहते हैं ? प्रयोग द्वारा स्वप्रेरण की घटना समझाओं तथा परिनालिका में स्वप्रेरकत्व का मान ज्ञात करो।
Answer: स्वप्रेरण या आत्म-प्रेरण (Self-Induction) एक ऐसी घटना है जहाँ किसी कुण्डली में प्रवाहित धारा में परिवर्तन के कारण उसी कुण्डली में एक प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf) उत्पन्न होता है। यह प्रेरित emf हमेशा उस धारा परिवर्तन का विरोध करता है जिसने इसे उत्पन्न किया है। स्वप्रेरकत्व कुण्डली का वह गुण है जो धारा में परिवर्तन का विरोध करता है।

प्रयोग द्वारा स्वप्रेरण की घटना का प्रदर्शन:
हम एक साधारण परिपथ ले सकते हैं जिसमें एक कुण्डली, एक बैटरी और एक कुंजी (स्विच) लगी हो।

K बल्ब कुण्डली चित्र 9.25 स्वप्रेरण का प्रदर्शन
चित्र 9.25 स्व प्रेरण का प्रदर्शन
जब हम कुंजी को बंद करते हैं, तो धारा तुरंत अपने अधिकतम मान तक नहीं पहुँचती, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ती है। इस दौरान, कुण्डली में एक विरोधी प्रेरित emf उत्पन्न होता है जो धारा के बढ़ने का विरोध करता है। इसका मतलब है कि धारा को बढ़ने में थोड़ा समय लगता है।
इसके विपरीत, जब हम कुंजी को खोलते हैं, तो धारा तुरंत शून्य नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे कम होती है। इस स्थिति में, कुण्डली में एक प्रेरित emf उत्पन्न होता है जो धारा के घटने का विरोध करता है। इसी कारण, यदि परिपथ में कोई बल्ब लगा हो, तो कुंजी खोलने पर वह तुरंत बुझने के बजाय थोड़ी देर तक चमकता रहता है। यह स्वप्रेरण की घटना के कारण होता है।

परिनालिका में स्वप्रेरकत्व का मान ज्ञात करना:
एक परिनालिका का स्वप्रेरकत्व (\( L \)) निम्न सूत्र द्वारा दिया जाता है:
\( L = \frac{\mu_0 N^2 A}{l} \)
जहाँ,
\( \mu_0 \) = निर्वात की चुम्बकशीलता (Permeability of free space) \( (4\pi \times 10^{-7} \text{ H/m}) \)
\( N \) = परिनालिका में फेरों की कुल संख्या
\( A \) = परिनालिका का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल
\( l \) = परिनालिका की लम्बाई
यह सूत्र दर्शाता है कि एक परिनालिका का स्वप्रेरकत्व उसकी ज्यामितीय विशेषताओं (लम्बाई और क्षेत्रफल) और उसमें फेरों की संख्या पर निर्भर करता है। यदि परिनालिका के अंदर कोई क्रोड (जैसे नर्म लोहा) रखा जाए, तो \( \mu_0 \) के स्थान पर \( \mu = \mu_0 \mu_r \) का उपयोग किया जाता है, जहाँ \( \mu_r \) क्रोड की आपेक्षिक चुम्बकशीलता है, जिससे स्वप्रेरकत्व का मान काफी बढ़ जाता है।
In simple words: स्वप्रेरण का मतलब है कि जब किसी तार के घेरे (कुण्डली) में बिजली बदलती है, तो वह घेरा खुद एक नई बिजली पैदा करता है जो उस बदलाव को रोकने की कोशिश करती है। इसे देखने के लिए हम एक स्विच और बल्ब का इस्तेमाल कर सकते हैं - जब स्विच बंद करते हैं तो बल्ब धीरे जलता है, और जब खोलते हैं तो धीरे बुझता है। एक लंबी तार की कुण्डली का स्वप्रेरकत्व उसकी लम्बाई, चौड़ाई और तार के घेरों की संख्या पर निर्भर करता है।

🎯 Exam Tip: स्वप्रेरण की परिभाषा को सरल शब्दों में व्यक्त करें और उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें। परिनालिका के स्वप्रेरकत्व के सूत्र में प्रत्येक पद का अर्थ समझाएँ और यह भी बताएं कि यह किन कारकों पर निर्भर करता है।

 

Question 5. भँवर धाराएँ किसे कहते हैं ? इनके कोई दो उपयोग लिखो तथा ट्रांसफार्मर में अवांछनीय भंवर धाराओं को कम करने हेतु क्या किया जाता हैं ?
Answer: भँवर धाराएँ (Eddy Currents) वे प्रेरित धाराएँ हैं जो किसी चालक पदार्थ में तब उत्पन्न होती हैं जब वह पदार्थ किसी परिवर्तित चुम्बकीय फ्लक्स में रखा होता है। ये धाराएँ पानी में उत्पन्न होने वाले भँवरों (eddy) के समान गोल-गोल घूमती हैं, इसलिए इन्हें भँवर धाराएँ कहा जाता है। ये धाराएँ लेंज के नियम का पालन करती हैं और उस कारण का विरोध करती हैं जिससे वे उत्पन्न हुई हैं।

U भँवर धारा-लूप (Eddy current) P चालक ब्लॉक B असमान चुम्बकीय क्षेत्र
चित्र 9.17 भँवर धाराओं का प्रदर्शन

भँवर धाराओं के उपयोग:
1. प्रेरण भट्टी (Induction Furnace): प्रेरण भट्टियों में धातुओं को पिघलाने के लिए भँवर धाराओं का उपयोग किया जाता है। प्रबल परिवर्तित चुम्बकीय क्षेत्र में धातु को रखने पर उसमें तीव्र भँवर धाराएँ उत्पन्न होती हैं, जो अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न करती हैं और धातु पिघल जाती है।
2. विद्युत चुम्बकीय अवमंदन (Electromagnetic Damping): धारामापी (galvanometer) में कुण्डली को एल्यूमीनियम फ्रेम पर लपेटते हैं। जब कुण्डली विक्षेपित होती है, तो फ्रेम में भँवर धाराएँ उत्पन्न होती हैं जो कुण्डली की गति का विरोध करती हैं और उसे जल्दी स्थिर स्थिति में ले आती हैं।

ट्रांसफार्मर में अवांछनीय भँवर धाराओं को कम करने हेतु उपाय:
ट्रांसफार्मर में भँवर धाराओं के कारण ऊर्जा हानि (ऊष्मा के रूप में) होती है, जिसे कम करने के लिए क्रोड को पटलित (laminated) किया जाता है। पटलित क्रोड में पतली-पतली नरम लोहे की चादरों का उपयोग किया जाता है, जिन्हें एक-दूसरे से विद्युतरोधी वार्निश द्वारा अलग किया जाता है।
B K चित्र 9.18 भँवर धाराओं का प्रायोगिक प्रदर्शन
चित्र 9.18 भँवर धाराओं का प्रायोगिक प्रदर्शन
ये पतली चादरें चुम्बकीय क्षेत्र के समानांतर रखी जाती हैं। इससे भँवर धाराओं को बड़े लूप बनाने से रोका जाता है, क्योंकि धारा को प्रत्येक पतली शीट के अंदर ही प्रवाहित होना पड़ता है, जिससे इसका प्रतिरोध बढ़ जाता है और धारा का मान कम हो जाता है। इस प्रकार, ऊर्जा हानि में कमी आती है और ट्रांसफार्मर की दक्षता बढ़ती है।
In simple words: भँवर धाराएँ धातु में गोल-गोल घूमने वाली बिजली होती हैं जो तब बनती हैं जब धातु चुम्बकीय क्षेत्र में बदलती है। इनका उपयोग धातु गलाने वाली भट्टी और मीटरों को जल्दी रोकने में होता है। ट्रांसफार्मर में इन्हें कम करने के लिए उसकी कोर को पतली-पतली धातु की पत्तियों से बनाते हैं, ताकि बिजली गोल-गोल न घूम पाए और गर्मी कम बने।

🎯 Exam Tip: भँवर धाराओं की परिभाषा को याद रखें और इसके उत्पादन के लिए परिवर्तित चुम्बकीय फ्लक्स की आवश्यकता पर जोर दें। उपयोगों और कम करने के तरीकों (पटलित क्रोड) को विस्तार से समझाएँ।

भँवर धाराओं के उपयोग (Applications Of Eddy Currents)

एक ओर भँवर धाराएँ अवांछनीय हैं जहाँ इनकी आवश्यकता नहीं होती है। दूसरा पहलू इनकी उपयोगिता का भी है। ये निम्न रूपों में उपयोगी हैं-

(i) प्रेरण भट्टी (induction furnace) में इनका उपयोग होता है। इसमें धातु को प्रबल बदलते चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है जिससे धातु में मजबूत भँवर धाराएँ (strong eddy currents) उत्पन्न होकर इतनी ऊष्मा पैदा करती हैं कि धातु पिघल जाती है।

(ii) धारामापी को रुद्ध दोलन (ballistic) बनाने में भँवर धाराओं का उपयोग होता है। धारामापी की कुण्डली ताँबे के विद्युतरोधी तार को एल्यूमीनियम के फ्रेम पर लपेटकर बनाई जाती है। जब कुण्डली विक्षेपित होती है, तो फ्रेम में भँवर धाराएँ उत्पन्न हो जाती हैं जो कुण्डली की गति का विरोध करती हैं। अतः कुण्डली विक्षेपित होकर शीघ्र ही उपयुक्त स्थिति में रुक जाती है। यह घटना विद्युत-चुम्बकीय अवमंदन (electromagnetic damping) कहलाती है।

(iii) विद्युत ट्रेनों को रोकने के लिए भँवर धाराओं का उपयोग विद्युत ब्रेक के रूप में किया जाता है। पहिए की धुरी (rim) के साथ-साथ धातु का ड्रम (metal drum) लगा होता है जो पहिए के साथ-साथ घूमता है। जब ट्रेन को रोकना होता है, तो ड्रम के पास प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न कर दिया जाता है जिससे ड्रम में भँवर धाराएँ प्रेरित हो जाती हैं, जो ड्रम की गति का विरोध करती हैं और ट्रेन रुक जाती है।

(iv) वाहनों के गतिमापी (speedometer) भँवर धाराओं के सिद्धान्त पर ही कार्य करते हैं। मोटर गाड़ियों में एक चुम्बक गियर द्वारा पहिए की धुरी से जुड़ा होता है। यह चुम्बक धातु के ड्रम से घिरा होता है। पहिए के साथ-साथ ड्रम भी घूमता है जिससे ड्रम में भँवर धाराएँ उत्पन्न हो जाती हैं जो घूमते हुए पहिए और ड्रम के बीच आपेक्षिक गति का विरोध करती हैं, अतः ड्रम भी घूमने लगता है। ड्रम का घुमाव गाड़ी की चाल के सीधे अनुपात में होता है, अतः ड्रम में संकेतक (pointer) लगाकर एक पैमाने द्वारा गाड़ी की चाल मापी जा सकती है।

RBSE Class 12 Physics Chapter 9 आंकिक प्रश्न

 

Question 2. एक 50 फेरों वाली कुण्डली में पारित फ्लक्स का मान निम्न है- \( \Phi_B = 0.02 \cos 100ntwb \) ज्ञात करो
(a) अधिकतम प्रेरित वोल्टता
(b) \( t = 0.01\text{s} \) पर प्रेरित वि. वा. बल
(c) \( t = 0.005\text{s} \) पर प्रेरित विद्युत धारा (बाह्य प्रतिरोध \( 100\Omega \))

Answer:
दिया है:
कुण्डली में फेरों की संख्या \( N = 50 \)
चुम्बकीय फ्लक्स \( \Phi_B = 0.02 \cos 100 \pi t \text{ Wb} \)
प्रेरित विद्युत वाहक बल \( \varepsilon = - \frac{d\Phi_B}{dt} \)
\( \varepsilon = - \frac{d}{dt} (0.02 \cos 100 \pi t) \)
\( \varepsilon = -0.02 \times (-100 \pi \sin 100 \pi t) \)
\( \varepsilon = 2\pi \sin 100 \pi t \)
\( \varepsilon = 2 \times 3.14 \sin 100 \pi t \)
\( \varepsilon = 6.28 \sin 100 \pi t \text{ V} \)

(a) अधिकतम प्रेरित वोल्टता (\( \varepsilon_0 \)):
अधिकतम प्रेरित वोल्टता तब होती है जब \( \sin 100 \pi t = 1 \).
इसलिए, \( \varepsilon_0 = 6.28 \text{ V} \).

(b) \( t = 0.01\text{s} \) पर प्रेरित वि. वा. बल:
\( \varepsilon = 6.28 \sin (100 \pi \times 0.01) \)
\( \varepsilon = 6.28 \sin (\pi) \)
चूँकि \( \sin \pi = 0 \),
इसलिए, \( \varepsilon = 0 \text{ V} \).

(c) \( t = 0.005\text{s} \) पर प्रेरित विद्युत धारा:
बाह्य प्रतिरोध \( R = 100\Omega \).
\( \varepsilon = 6.28 \sin (100 \pi \times 0.005) \)
\( \varepsilon = 6.28 \sin (0.5 \pi) \)
चूँकि \( \sin (0.5 \pi) = \sin (\frac{\pi}{2}) = 1 \),
इसलिए, \( \varepsilon = 6.28 \text{ V} \).
प्रेरित धारा \( I = \frac{\varepsilon}{R} \)
\( I = \frac{6.28}{100} \)
\( I = 0.0628 \text{ A} \). यह एक महत्वपूर्ण परिणाम है क्योंकि यह विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के व्यवहार को दर्शाता है।
In simple words: हमें फ्लक्स का मान समय के साथ बदलते हुए दिया गया है। प्रेरित वोल्टता (वोल्टेज) निकालने के लिए, हमें फ्लक्स में बदलाव की दर ज्ञात करनी होगी। अधिकतम वोल्टेज तब होता है जब यह बदलाव सबसे तेज़ होता है। एक खास समय पर वोल्टेज या धारा जानने के लिए, हमें उस समय के मान को सूत्र में डालना होगा।

🎯 Exam Tip: फ्लक्स का अवकलन (differentiation) करते समय चिह्न का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि प्रेरित वि. वा. बल की दिशा लेंज के नियम के अनुसार होती है।

 

Question 3. एक 50 फेरों वाली कुण्डली 0.6 टेसला चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् रखी है। इस कुण्डली का क्षेत्रफल 0.2 तथा कुण्डली के परिपथ का प्रतिरोध \( 10\Omega \) हो तो प्रेरित आवेश का मान ज्ञात करो जब
(a) कुण्डली को \( 180^\circ \) से घुमा दिया जाए
(b) कुण्डली को चुम्बकीय क्षेत्र से बाहर निकाल दें।

Answer:
दिया है:
कुण्डली में फेरों की संख्या \( N = 50 \)
चुम्बकीय क्षेत्र \( B = 0.6\text{T} \)
क्षेत्रफल \( A = 0.2\text{m}^2 \)
प्रतिरोध \( R = 10\Omega \)

प्रेरित आवेश \( q = \frac{N}{R}(\Phi_1 - \Phi_2) \)

(a) कुण्डली को \( 180^\circ \) से घुमाने पर:
प्रारंभिक फ्लक्स \( \Phi_1 = BA \cos 0^\circ = BA \)
अंतिम फ्लक्स \( \Phi_2 = BA \cos 180^\circ = -BA \)
\( \Phi_1 - \Phi_2 = BA - (-BA) = 2BA \)
\( q = \frac{N}{R}(2BA) \)
\( q = \frac{50}{10} (2 \times 0.6 \times 0.2) \)
\( q = 5 \times (0.24) \)
\( q = 1.20 \text{ C} \)

(b) कुण्डली को चुम्बकीय क्षेत्र से बाहर निकालने पर:
प्रारंभिक फ्लक्स \( \Phi_1 = BA \cos 0^\circ = BA \)
अंतिम फ्लक्स \( \Phi_2 = 0 \) (क्योंकि कुण्डली क्षेत्र से बाहर है)
\( \Phi_1 - \Phi_2 = BA - 0 = BA \)
\( q = \frac{N}{R}(BA) \)
\( q = \frac{50}{10} (0.6 \times 0.2) \)
\( q = 5 \times (0.12) \)
\( q = 0.60 \text{ C} \). यह दर्शाता है कि फ्लक्स में बदलाव होने पर ही आवेश प्रेरित होता है।
In simple words: प्रेरित आवेश निकालने के लिए, हमें पहले कुण्डली से गुजरने वाले चुम्बकीय फ्लक्स में कुल बदलाव जानना होगा। जब कुण्डली घूमती है या क्षेत्र से बाहर निकलती है, तो फ्लक्स बदलता है। इस बदलाव को कुण्डली के फेरों की संख्या और प्रतिरोध से भाग देने पर हमें प्रेरित आवेश मिल जाता है।

🎯 Exam Tip: फ्लक्स परिवर्तन की गणना करते समय प्रारंभिक और अंतिम कोणों का सही चुनाव महत्वपूर्ण है, विशेषकर \( \cos 0^\circ \) और \( \cos 180^\circ \) के मानों का।

 

Question 4. एक \( -3\hat{\boldsymbol{k}} \) मीटर लम्बा चालक \( \hat{\boldsymbol{i}} + 2\hat{\boldsymbol{j}} + 3\hat{\boldsymbol{k}} \) m/s के वेग से \( \hat{\boldsymbol{i}} + 3\hat{\boldsymbol{j}} + \hat{\boldsymbol{k}} \) T चुम्बकीय क्षेत्र में गतिशील है। चालक के सिरों के मध्य विभवान्तर ज्ञात करो।
Answer:
दिया है:
चालक की लम्बाई सदिश \( \vec{l} = -3\hat{\boldsymbol{k}} \) मीटर
चालक का वेग सदिश \( \vec{v} = \hat{\boldsymbol{i}} + 2\hat{\boldsymbol{j}} + 3\hat{\boldsymbol{k}} \) m/s
चुम्बकीय क्षेत्र सदिश \( \vec{B} = \hat{\boldsymbol{i}} + 3\hat{\boldsymbol{j}} + \hat{\boldsymbol{k}} \) T

प्रेरित विभवान्तर (वि. वा. बल) \( \varepsilon = (\vec{v} \times \vec{B}) \cdot \vec{l} \)
पहले \( \vec{v} \times \vec{B} \) ज्ञात करते हैं:
\[ \vec{v} \times \vec{B} = \begin{vmatrix} \hat{\boldsymbol{i}} & \hat{\boldsymbol{j}} & \hat{\boldsymbol{k}} \\ 1 & 2 & 3 \\ 1 & 3 & 1 \end{vmatrix} \]
\( = \hat{\boldsymbol{i}}(2 \times 1 - 3 \times 3) - \hat{\boldsymbol{j}}(1 \times 1 - 3 \times 1) + \hat{\boldsymbol{k}}(1 \times 3 - 2 \times 1) \)
\( = \hat{\boldsymbol{i}}(2 - 9) - \hat{\boldsymbol{j}}(1 - 3) + \hat{\boldsymbol{k}}(3 - 2) \)
\( = -7\hat{\boldsymbol{i}} + 2\hat{\boldsymbol{j}} + \hat{\boldsymbol{k}} \)

अब, प्रेरित विभवान्तर \( \varepsilon = (\vec{v} \times \vec{B}) \cdot \vec{l} \)
\( \varepsilon = (-7\hat{\boldsymbol{i}} + 2\hat{\boldsymbol{j}} + \hat{\boldsymbol{k}}) \cdot (-3\hat{\boldsymbol{k}}) \)
\( \varepsilon = (-7 \times 0) + (2 \times 0) + (1 \times -3) \)
\( \varepsilon = -3 \text{ V} \).
प्रेरित विभवान्तर का मान 3 वोल्ट होगा। यहाँ ऋणात्मक चिन्ह दिशा को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि विभवान्तर की गणना सदिश गुणनफल और अदिश गुणनफल के नियमों का उपयोग करके की जाती है।
In simple words: हमें एक चालक की लम्बाई, वेग और चुम्बकीय क्षेत्र सदिश के रूप में दिए गए हैं। चालक के सिरों के बीच वोल्टेज (विभवान्तर) जानने के लिए, हमें पहले वेग और चुम्बकीय क्षेत्र का सदिश गुणा (cross product) करना होगा। फिर, इस परिणाम को लम्बाई सदिश के साथ अदिश गुणा (dot product) करने पर हमें वोल्टेज मिल जाएगा।

🎯 Exam Tip: सदिश गुणनफल \( \vec{v} \times \vec{B} \) और अदिश गुणनफल \( (\vec{v} \times \vec{B}) \cdot \vec{l} \) की गणना करते समय \( \hat{\boldsymbol{i}}, \hat{\boldsymbol{j}}, \hat{\boldsymbol{k}} \) घटकों और उनके चिह्नों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. 1000 फेरोंको तथा \( 0.2 \times 0.1\text{m}^2 \) आकार की एक आयताकार कुण्डली \( 0.2\text{T} \) के चुम्बकीय क्षेत्र में 4200 चक्कर प्रति मिनट लगा रही है। काली में प्रेरित वि. वा. बल का अधिकतम मान ज्ञात करो।
Answer:
दिया है:
कुण्डली में फेरों की संख्या \( N = 1000 \)
कुण्डली का क्षेत्रफल \( A = 0.2 \times 0.1 \text{ m}^2 = 0.02 \text{ m}^2 \)
चुम्बकीय क्षेत्र \( B = 0.2 \text{ T} \)
घूर्णन आवृत्ति \( f = 4200 \) चक्कर प्रति मिनट
\( f = \frac{4200}{60} = 70 \) चक्कर प्रति सेकण्ड
कोणीय आवृत्ति \( \omega = 2\pi f \)
\( \omega = 2 \times 3.14 \times 70 \)
\( \omega = 439.60 \text{ रेडियन/से} \)

अधिकतम प्रेरित वि. वा. बल \( \varepsilon_0 = NBA\omega \)
\( \varepsilon_0 = 1000 \times 0.2 \times 0.02 \times 439.60 \)
\( \varepsilon_0 = 1758.4 \text{ volt} \). यह मान दिखाता है कि घूर्णन करने वाली कुण्डली में कितना अधिकतम वोल्टेज उत्पन्न हो सकता है।
In simple words: एक कुण्डली जो चुम्बकीय क्षेत्र में घूम रही है, उसमें सबसे ज़्यादा वोल्टेज कब पैदा होगा, यह जानने के लिए हमें उसके फेरों की संख्या, क्षेत्र का मान, क्षेत्रफल और घूमने की गति (कोणीय आवृत्ति) को गुणा करना होगा।

🎯 Exam Tip: घूर्णन आवृत्ति (RPM) को प्रति सेकंड चक्कर में बदलना न भूलें और फिर कोणीय आवृत्ति \( \omega \) की गणना करें। सभी इकाइयों को SI प्रणाली में रखें।

 

Question 6. एक मीटर लम्बी चालक छड़ एक सिरे के सापेक्ष \( 0.001\text{T} \) के चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् तल में 50 चक्कर प्रति सेकण्ड के कोणीय वेग से घूर्णन कर रही है। छड़ के सिरों के मध्य प्रेरित वि. वा. बल का मान ज्ञात करो।
Answer:
दिया है:
छड़ की लम्बाई \( L = 1 \text{ m} \)
चुम्बकीय क्षेत्र \( B = 0.001 \text{ T} \)
घूर्णन आवृत्ति \( f = 50 \) चक्कर/सेकण्ड
प्रेरित वि. वा. बल का सूत्र जब एक छड़ एक सिरे के सापेक्ष घूमती है:
\( \varepsilon_0 = \frac{1}{2} B \omega L^2 \)
जहाँ \( \omega = 2\pi f \)
\( \omega = 2 \times 3.14 \times 50 \)
\( \omega = 314 \text{ रेडियन/से} \)
अब, \( \varepsilon_0 = \frac{1}{2} \times 0.001 \times 314 \times (1)^2 \)
\( \varepsilon_0 = 0.001 \times 157 \)
\( \varepsilon_0 = 0.157 \text{ volt} \). यह मान दिखाता है कि घूमने वाली छड़ में कितना वोल्टेज उत्पन्न होता है।
In simple words: जब एक छड़ एक सिरे से घूमती है और चुम्बकीय क्षेत्र में होती है, तो उसके सिरों के बीच वोल्टेज पैदा होता है। इसे निकालने के लिए, हमें चुम्बकीय क्षेत्र, घूमने की गति और छड़ की लम्बाई को सूत्र में रखना होगा।

🎯 Exam Tip: घूमने वाली छड़ के लिए प्रेरित वि. वा. बल का सूत्र याद रखें, जो कि \( \frac{1}{2} B \omega L^2 \) है, और सभी मानों को SI इकाइयों में रखें।

 

Question 7. 0.05m व्यास एवं 500 फेरे/cm वाली परिनालिका की लम्बाई 1m है। जब इसमें 3A की धारा प्रवाहित की जाती है तो चुम्बकीय फ्लक्स का मान ज्ञात करो।
Answer:
दिया है:
परिनालिका का व्यास \( = 0.05 \text{ m} \)
त्रिज्या \( r = \frac{0.05}{2} = 0.025 \text{ m} \)
परिनालिका की लम्बाई \( L = 1 \text{ m} \)
प्रति एकांक लम्बाई में फेरों की संख्या \( n = 500 \text{ फेरे/cm} = 500 \times 100 \text{ फेरे/m} = 50000 \text{ फेरे/m} \)
प्रवाहित धारा \( I = 3 \text{ A} \)

परिनालिका के अन्दर चुम्बकीय क्षेत्र \( B = \mu_0 n I \)
\( B = 4\pi \times 10^{-7} \times 50000 \times 3 \)
\( B = 4 \times 3.14 \times 5 \times 10^4 \times 3 \times 10^{-7} \)
\( B = 0.188 \text{ T} \)

परिनालिका से गुजरने वाला कुल चुम्बकीय फ्लक्स \( \Phi_B = N B A \)
जहाँ कुल फेरों की संख्या \( N = n \times L = 50000 \times 1 = 50000 \)
क्षेत्रफल \( A = \pi r^2 \)
\( \Phi_B = n L B (\pi r^2) \)
\( \Phi_B = 50000 \times 0.188 \times 3.14 \times (0.025)^2 \)
\( \Phi_B = 18.49 \text{ Wb} \). यह मान दिखाता है कि परिनालिका के अंदर कितना चुम्बकीय फ्लक्स होता है।
In simple words: हमें एक परिनालिका का व्यास, फेरों की संख्या प्रति सेंटीमीटर, लम्बाई और उसमें बहने वाली धारा दी गई है। चुम्बकीय फ्लक्स निकालने के लिए, पहले हमें परिनालिका के अंदर चुम्बकीय क्षेत्र की ताकत ज्ञात करनी होगी, फिर उसे कुल फेरों की संख्या और परिनालिका के क्षेत्रफल से गुणा करना होगा।

🎯 Exam Tip: प्रति एकांक लम्बाई में फेरों की संख्या को मीटर में बदलने का ध्यान रखें और चुम्बकीय क्षेत्र के लिए \( \mu_0 \) का मान सही ढंग से उपयोग करें।

 

Question 8. एक 2 cm त्रिज्या तथा 100 फेरों वाली परिनालिका की लम्बाई 50 cm है। यदि परिनालिका के अन्दर निवांत हो तो परिनालिका का स्वप्रेरकत्व ज्ञात करो।
Answer:
दिया है:
परिनालिका की त्रिज्या \( r = 2 \text{ cm} = 2 \times 10^{-2} \text{ m} \)
फेरों की संख्या \( N = 100 \)
परिनालिका की लम्बाई \( l = 50 \text{ cm} = 50 \times 10^{-2} \text{ m} = 0.5 \text{ m} \)

परिनालिका के अन्दर निर्वात होने पर स्वप्रेरकत्व \( L = \frac{\mu_0 N^2 A}{l} \)
जहाँ \( A = \pi r^2 \) परिनालिका का अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल है।
\( A = \pi (2 \times 10^{-2})^2 = 3.14 \times 4 \times 10^{-4} \text{ m}^2 \)
\( L = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times (100)^2 \times (3.14 \times 4 \times 10^{-4})}{0.5} \)
\( L = \frac{4 \times 3.14 \times 10^{-7} \times 10000 \times 3.14 \times 4 \times 10^{-4}}{0.5} \)
\( L = \frac{4 \times 3.14 \times 3.14 \times 4 \times 10^{-7+4-4}}{0.5} \)
\( L = \frac{4 \times 3.14 \times 3.14 \times 4 \times 10^{-7}}{0.5} \)
\( L = \frac{157.7536 \times 10^{-7}}{0.5} \)
\( L = 315.5072 \times 10^{-7} \text{ H} \)
\( L = 31.55 \times 10^{-6} \text{ H} = 31.55 \mu\text{H} \). यह स्वप्रेरकत्व का मान दर्शाता है जब परिनालिका के अंदर निर्वात होता है।
In simple words: एक परिनालिका का स्वप्रेरकत्व ज्ञात करने के लिए, हमें उसकी त्रिज्या, फेरों की संख्या और लम्बाई को सूत्र में रखना होगा। यह स्वप्रेरकत्व बताता है कि परिनालिका में धारा बदलने पर कितना वोल्टेज खुद पैदा होगा।

🎯 Exam Tip: स्वप्रेरकत्व की गणना करते समय सभी इकाइयों को SI प्रणाली में बदलना और \( \mu_0 \) (निर्वात की पारगम्यता) का सही मान उपयोग करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. दो कुण्डलियाँ लोहे की क्रोड पर लिपटी हैं जिसका अन्योन्य प्रेरकत्व 0.5H है। यदि एक कुण्डली में \( 10^{-2}\text{s} \) में धारा का मान 2 से 3A कर दिया जाए तो दूसरी कुण्डली में प्रेरित वि. वा. बल का मान ज्ञात करो।
Answer:
दिया है:
अन्योन्य प्रेरकत्व \( M = 0.5 \text{ H} \)
समय अंतराल \( dt = 10^{-2} \text{ s} \)
प्रारंभिक धारा \( I_1 = 2 \text{ A} \)
अंतिम धारा \( I_2 = 3 \text{ A} \)

द्वितीय कुण्डली में प्रेरित वि. वा. बल का सूत्र:
\( \varepsilon_2 = - M \frac{dI}{dt} \)
जहाँ \( dI = I_2 - I_1 = 3 \text{ A} - 2 \text{ A} = 1 \text{ A} \)
\( \varepsilon_2 = -0.5 \times \frac{1}{10^{-2}} \)
\( \varepsilon_2 = -0.5 \times 100 \)
\( \varepsilon_2 = -50 \text{ V} \). ऋणात्मक चिन्ह दर्शाता है कि प्रेरित वि. वा. बल धारा परिवर्तन का विरोध करता है। यह अन्योन्य प्रेरण का एक सीधा उदाहरण है।
In simple words: जब एक कुण्डली में धारा बदलती है, तो पास वाली दूसरी कुण्डली में वोल्टेज पैदा होता है। इसे अन्योन्य प्रेरकत्व कहते हैं। इस वोल्टेज को निकालने के लिए, हमें अन्योन्य प्रेरकत्व को धारा में बदलाव और समय में बदलाव के अनुपात से गुणा करना होता है।

🎯 Exam Tip: अन्योन्य प्रेरकत्व के सूत्र में ऋणात्मक चिन्ह लेंज के नियम को दर्शाता है, जिसका अर्थ है कि प्रेरित वि. वा. बल हमेशा परिवर्तन का विरोध करता है।

 

Question 10. 0.1 m लम्बी तथा 0.01m त्रिज्या की नर्म लोहे की छड़ पर तार लपेटकर एक कुण्डली बनाई गई है। यदि नर्म लोहे की आपेक्षिक चुम्बकशीलता 1200 है तो कुण्डली में फेरों की संख्या ज्ञात करो। (कुण्डली का स्वप्रेरकत्व 0.25 H है)
Answer:<
दिया है:
कुण्डली की लम्बाई \( l = 0.1 \text{ m} \)
कुण्डली की त्रिज्या \( r = 0.01 \text{ m} \)
नर्म लोहे की आपेक्षिक चुम्बकशीलता \( \mu_r = 1200 \)
कुण्डली का स्वप्रेरकत्व \( L = 0.25 \text{ H} \)

परिनालिका (कुण्डली) के स्वप्रेरकत्व का सूत्र है:
\( L = \frac{\mu N^2 A}{l} \)
जहाँ \( \mu = \mu_0 \mu_r \) माध्यम की निरपेक्ष चुम्बकशीलता है,
\( A = \pi r^2 \) अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है।

\( L = \frac{\mu_0 \mu_r N^2 \pi r^2}{l} \)
हमें \( N \) (फेरों की संख्या) ज्ञात करनी है। सूत्र को \( N^2 \) के लिए पुनर्व्यवस्थित करने पर:
\( N^2 = \frac{L l}{\mu_0 \mu_r \pi r^2} \)
\( N^2 = \frac{0.25 \times 0.1}{4\pi \times 10^{-7} \times 1200 \times \pi \times (0.01)^2} \)
\( N^2 = \frac{0.025}{4 \times (3.14159)^2 \times 1200 \times 10^{-7} \times 10^{-4}} \)
\( N^2 = \frac{0.025}{4 \times 9.8696 \times 1200 \times 10^{-11}} \)
\( N^2 = \frac{0.025}{47374.08 \times 10^{-11}} \)
\( N^2 = \frac{0.025}{4.737408 \times 10^{-7}} \)
\( N^2 \approx 52760 \)
\( N = \sqrt{52760} \approx 229.7 \).
चूँकि फेरों की संख्या पूर्णांक होनी चाहिए, अतः \( N \approx 230 \) फेरे होंगे। यह गणना दिखाती है कि दिए गए स्वप्रेरकत्व को प्राप्त करने के लिए कितने फेरों की आवश्यकता होगी।
In simple words: हमें एक लोहे की कुण्डली की लम्बाई, त्रिज्या, चुम्बकशीलता और स्वप्रेरकत्व दिया गया है। कुण्डली में कितने तार के फेरे हैं, यह जानने के लिए हमें स्वप्रेरकत्व के सूत्र का उपयोग करके गणना करनी होगी।

🎯 Exam Tip: स्वप्रेरकत्व के सूत्र को फेरों की संख्या के लिए सही ढंग से पुनर्व्यवस्थित करें और \( \mu_0 \) तथा \( \mu_r \) के मानों का सही उपयोग करें। गणना में पाई \( \pi \) के मान का भी ध्यान रखें।

 

Question 11. एक धात्विक चकती का व्यास 15 cm है, यह \( \frac{100}{3} \) चक्कर प्रति मिनट की दर से क्षैतिज तल में घूमती है। यदि चुम्बकीय क्षेत्र के ऊर्ध्व घटक का मान \( 0.01 \text{ Wb/m}^2 \) हो तो चकती के केन्द्र तथा परिधि के मध्य प्रेरित वि. वा. बल का मान ज्ञात करो।
Answer:
दिया है:
धात्विक चकती का व्यास \( = 15 \text{ cm} \)
चकती की त्रिज्या \( r = \frac{15}{2} = 7.5 \text{ cm} = 7.5 \times 10^{-2} \text{ m} \)
घूर्णन आवृत्ति \( f = \frac{100}{3} \text{ चक्कर/मिनट} \)
\( f = \frac{100}{3 \times 60} = \frac{100}{180} = \frac{5}{9} \text{ चक्कर/सेकण्ड} \)
चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्व घटक \( B_v = 0.01 \text{ Wb/m}^2 \)

चकती के केन्द्र तथा परिधि के मध्य प्रेरित वि. वा. बल का सूत्र है:
\( \varepsilon = B_v \pi r^2 f \)
\( \varepsilon = 0.01 \times 3.14 \times (7.5 \times 10^{-2})^2 \times \frac{5}{9} \)
\( \varepsilon = 0.01 \times 3.14 \times (56.25 \times 10^{-4}) \times 0.5555 \)
\( \varepsilon = 9.81 \times 10^{-5} \text{ V} \). यह मान एक घूमती हुई धात्विक चकती में उत्पन्न होने वाले वोल्टेज को दर्शाता है।
In simple words: जब एक धातु की गोल चकती चुम्बकीय क्षेत्र में घूमती है, तो उसके बीच में और किनारे पर वोल्टेज पैदा होता है। इस वोल्टेज को निकालने के लिए, हमें चुम्बकीय क्षेत्र, चकती की त्रिज्या और घूमने की गति को गुणा करना होगा।

🎯 Exam Tip: घूर्णन आवृत्ति को प्रति मिनट से प्रति सेकंड में बदलना न भूलें, और सभी दूरियों को मीटर में रखें। प्रेरित वि. वा. बल के सूत्र में पाई (\( \pi \)) का मान सही ढंग से उपयोग करें।

 

Question 12. एक 20 cm लम्बाई का एक चालक तार \( 5 \times 10^{-4} \text{ Wb/m}^2 \) के चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् रखा है तथा यह चुम्बकीय क्षेत्र और तार की लम्बाई के लम्बवत् गतिशील है। यदि चालक तार 1 m दूरी 4 s में तय करता हैं तो चालक तार के सिरों पर उत्पन्न प्रेरित वि, वा. बल ज्ञात करो।
Answer:
दिया है:
चालक तार की लम्बाई \( L = 20 \text{ cm} = 0.20 \text{ m} \)
चुम्बकीय क्षेत्र \( B = 5 \times 10^{-4} \text{ Wb/m}^2 \)
तार द्वारा तय की गई दूरी \( d = 1 \text{ m} \)
समय \( t = 4 \text{ s} \)

चालक तार का वेग \( v = \frac{\text{दूरी}}{\text{समय}} = \frac{d}{t} = \frac{1 \text{ m}}{4 \text{ s}} = 0.25 \text{ m/s} \)

प्रेरित वि. वा. बल \( \varepsilon = BLv \)
(क्योंकि तार, वेग और चुम्बकीय क्षेत्र तीनों एक-दूसरे के लम्बवत् हैं)
\( \varepsilon = (5 \times 10^{-4}) \times 0.20 \times 0.25 \)
\( \varepsilon = 5 \times 10^{-4} \times 0.05 \)
\( \varepsilon = 2.5 \times 10^{-5} \text{ V} \). यह मान दिखाता है कि चुम्बकीय क्षेत्र में गतिमान चालक में कितना वोल्टेज उत्पन्न होता है।
In simple words: जब एक तार चुम्बकीय क्षेत्र में चलता है, तो उसके सिरों के बीच वोल्टेज पैदा होता है। इस वोल्टेज को निकालने के लिए, हमें चुम्बकीय क्षेत्र की ताकत, तार की लम्बाई और तार की गति को गुणा करना होगा। पहले गति को दूरी और समय से निकालना होगा।

🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि लम्बाई और वेग की इकाइयाँ SI प्रणाली में हों। प्रेरित वि. वा. बल के लिए \( BLv \) सूत्र तभी मान्य है जब \( B, L, v \) तीनों परस्पर लम्बवत् हों।

 

Question 13. 2m लम्बी एक धात्विक छड़ को (i) ऊपर (ii) क्षैतिज रखकर 15 km/h की चाल से पश्चिम से पूर्व की ओर ले जाया जाता है। यदि पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक \( 0.5 \times 10^{-5} \text{ Wb/m}^2 \) है तो प्रत्येक स्थिति में छड़ के सिरों के मध्य उत्पन्न प्रेरित वि. वा. बल ज्ञात करो।
Answer:
दिया है:
धात्विक छड़ की लम्बाई \( L = 2 \text{ m} \)
छड़ की चाल \( v = 15 \text{ km/h} = 15 \times \frac{5}{18} \text{ m/s} = \frac{75}{18} \text{ m/s} = \frac{25}{6} \text{ m/s} \)
पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक \( B_H = 0.5 \times 10^{-5} \text{ Wb/m}^2 \)

(i) जब छड़ को ऊर्ध्वाधर रखकर गति करायी जाती है:
इस स्थिति में, छड़ की लम्बाई (\( \vec{L} \)), वेग (\( \vec{v} \)) और चुम्बकीय क्षेत्र (\( \vec{B}_H \)) तीनों परस्पर लम्बवत् होते हैं।
प्रेरित वि. वा. बल \( \varepsilon = B_H L v \)
\( \varepsilon = (0.5 \times 10^{-5}) \times 2 \times \frac{25}{6} \)
\( \varepsilon = 1 \times 10^{-5} \times \frac{25}{6} \)
\( \varepsilon = 4.166 \times 10^{-5} \text{ volt} \approx 4.17 \times 10^{-5} \text{ volt} \).

(ii) जब धात्विक छड़ को क्षैतिज रखकर गति करायी जाती है:
इस स्थिति में, छड़ की लम्बाई (\( \vec{L} \)), वेग (\( \vec{v} \)) और चुम्बकीय क्षेत्र (\( \vec{B}_H \)) तीनों एक ही तल में होते हैं।
इसलिए, \( \vec{L} \) और \( (\vec{v} \times \vec{B}_H) \) के बीच का कोण \( 90^\circ \) होगा।
प्रेरित वि. वा. बल \( \varepsilon = (\vec{v} \times \vec{B}_H) \cdot \vec{L} \)
चूंकि \( \vec{v} \times \vec{B}_H \) का मान \( \vec{L} \) के लम्बवत् होगा जब ये तीनों एक ही तल में हों (या \( \vec{L} \) इन दोनों के लम्बवत् नहीं है), तो प्रेरित वि. वा. बल शून्य होगा। जब चालक गति की दिशा और चुंबकीय क्षेत्र के बीच का कोण 90 डिग्री होता है, तो प्रेरित वोल्टेज अधिकतम होता है; यदि कोण 0 या 180 डिग्री हो तो यह शून्य होता है।
\( \varepsilon = 0 \text{ volt} \).
In simple words: जब एक धातु की छड़ चुम्बकीय क्षेत्र में चलती है, तो उसमें वोल्टेज पैदा होता है। अगर छड़, उसकी गति और चुम्बकीय क्षेत्र एक-दूसरे के सीधे (लम्बवत्) हैं, तो वोल्टेज बनेगा। लेकिन अगर वे सभी एक ही लाइन में हों या एक ही तल में हों, तो कोई वोल्टेज नहीं बनेगा।

🎯 Exam Tip: प्रेरित वि. वा. बल के लिए \( BLv \) सूत्र तभी लागू होता है जब छड़, वेग और चुम्बकीय क्षेत्र तीनों परस्पर लम्बवत् हों। किसी भी अन्य विन्यास में प्रेरित वि. वा. बल शून्य या कम होगा।

 

Question 15. एक कुण्डली का प्रेरकत्व 2H है, इसमें प्रवाहित धारा का समय के साथ परिवर्तन निम्न ग्राफ में प्रदर्शित है। समय के साथ प्रेरित वि. वा. बल का परिवर्तन आलेखित करो।
Answer:
दिया है:
कुण्डली का स्वप्रेरकत्व \( L = 2 \text{ H} \)
प्रेरित वि. वा. बल का सूत्र \( \varepsilon = -L \frac{dI}{dt} \)

धारा (\( I \)) बनाम समय (\( t \)) का दिया गया ग्राफ:

6 0 2 5 6 समय (सेकण्ड) धारा (ऐम्पियर)

(i) प्रथम 0 से 2 सेकण्ड के मध्य (धारा बढ़ती है):
इस अंतराल में, धारा \( I \) शून्य से 6 ऐम्पियर तक बढ़ती है।
धारा परिवर्तन की दर \( \frac{dI}{dt} = \frac{(6-0)}{(2-0)} = \frac{6}{2} = 3 \text{ A/s} \)
प्रेरित वि. वा. बल \( \varepsilon = -L \frac{dI}{dt} = -2 \times 3 = -6 \text{ V} \).

(ii) 2 सेकण्ड से 5 सेकण्ड के मध्य (धारा नियत रहती है):
इस अंतराल में, धारा \( I \) 6 ऐम्पियर पर स्थिर रहती है।
धारा परिवर्तन की दर \( \frac{dI}{dt} = 0 \)
प्रेरित वि. वा. बल \( \varepsilon = -L \times 0 = 0 \text{ V} \).

(iii) 5 सेकण्ड से 6 सेकण्ड के मध्य (धारा घटती है):
इस अंतराल में, धारा \( I \) 6 ऐम्पियर से शून्य तक घटती है।
धारा परिवर्तन की दर \( \frac{dI}{dt} = \frac{(0-6)}{(6-5)} = \frac{-6}{1} = -6 \text{ A/s} \)
प्रेरित वि. वा. बल \( \varepsilon = -L \frac{dI}{dt} = -2 \times (-6) = +12 \text{ V} \).

उपरोक्त गणनाओं के आधार पर, प्रेरित वि. वा. बल (\( \varepsilon \)) बनाम समय (\( t \)) का ग्राफ निम्न प्रकार होगा:
12 9 6 0 -3 -6 -9 2 5 6

In simple words: जब किसी कुण्डली में धारा बदलती है, तो उसमें एक वोल्टेज (प्रेरित वि. वा. बल) पैदा होता है। अगर धारा बढ़ रही हो, तो वोल्टेज एक दिशा में होगा; अगर घट रही हो, तो दूसरी दिशा में। अगर धारा स्थिर है, तो कोई वोल्टेज नहीं बनेगा। हमें यह देखना होगा कि धारा कितनी तेज़ी से बदल रही है।

🎯 Exam Tip: प्रेरित वि. वा. बल का मान \( -L \frac{dI}{dt} \) होता है। ग्राफ बनाते समय \( \frac{dI}{dt} \) के मान और उसके चिन्ह का ध्यान रखें, क्योंकि यह वोल्टेज की दिशा बताता है।

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