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Detailed Chapter 8 चुम्बकत्व एवं चुम्बकीय पदार्थों के गुण RBSE Solutions for Class 12 Physics
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Class 12 Physics Chapter 8 चुम्बकत्व एवं चुम्बकीय पदार्थों के गुण RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Physics Chapter 8 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर
RBSE Class 12 Physics Chapter 8 बहुचयनात्मक प्रश्न
Question 1. यदि दो एकांक प्रबलता के चुम्बकीय धुवों के मध्य की दूरी 1m है तो इनके मध्य लगने वाले बल का मान होगा
(अ) \( 4\pi \times 10^{-7}N \)
(ब) \( 4\pi N \)
(स) \( 10^{-7} N \)
(द) \( \frac{4 \pi}{10^{-7}} N \)
Answer: (स) \( 10^{-7} N \)
In simple words: दो चुंबकीय ध्रुवों के बीच लगने वाले बल की गणना उनके ध्रुवीय प्रबलता और दूरी से की जाती है। जब ध्रुवों की प्रबलता और दूरी निश्चित होती है, तो बल का मान \( 10^{-7} N \) आता है। यह एक मानक गणना है।
🎯 Exam Tip: चुम्बकीय ध्रुवों के बीच बल की गणना के लिए कूलम्ब के नियम का उपयोग करें, जहाँ बल \( F = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{m_1 m_2}{r^2} \) होता है।
Question 2. अतिचालक पदार्थों के लिए चुम्बकीय प्रवृत्ति का मान है
(अ) +1
(ब) -1
(स) शून्य
(द) अनन्त
Answer: (ब) -1
In simple words: अतिचालक पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र को पूरी तरह से बाहर धकेल देते हैं। इसका मतलब है कि उनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति -1 होती है, जो दर्शाता है कि वे क्षेत्र के विपरीत दिशा में चुम्बकित होते हैं। यह मीस्नर प्रभाव कहलाता है।
🎯 Exam Tip: मीस्नर प्रभाव को याद रखें - अतिचालक पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र का पूर्णतः निष्कासन करते हैं, जिससे उनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति ऋणात्मक हो जाती है।
Question 3. मुक्त आकाश की चुम्बकीय प्रवृत्ति होती है
(अ) + 1
(ब) - 1
(स) शून्य
(द) अनन्त
Answer: (स) शून्य
In simple words: मुक्त आकाश में कोई भी पदार्थ नहीं होता है, इसलिए यह किसी भी बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र से प्रभावित नहीं होता। इस कारण, मुक्त आकाश की चुम्बकीय प्रवृत्ति शून्य मानी जाती है। यह एक संदर्भ मान है।
🎯 Exam Tip: मुक्त आकाश को वैक्यूम या निर्वात के रूप में समझें, जहाँ चुम्बकीय गुणधर्मों पर कोई प्रभाव नहीं होता, इसलिए उसकी प्रवृत्ति शून्य होती है।
Question 4. चुम्बकीय प्रवृत्ति का मान ऋणात्मक एवं अल्प होता है
(अ) लौहचुम्बकीय पदार्थों के लिए
(ब) अनुचुम्बकीय पदार्थों के लिए
(स) प्रतिचुम्बकीय पदार्थों के लिए
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (स) प्रतिचुम्बकीय पदार्थों के लिए
In simple words: प्रतिचुम्बकीय पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र से हल्के से दूर हटते हैं। इसका मतलब है कि उनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति थोड़ी ऋणात्मक होती है। वे बाहरी क्षेत्र के विपरीत दिशा में चुम्बकित होते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रतिचुम्बकीय पदार्थों की पहचान उनकी ऋणात्मक और कम चुम्बकीय प्रवृत्ति से होती है, क्योंकि वे बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र का विरोध करते हैं।
Question 5. किसी पदार्थ की आपेक्षिक पारगम्यता 1.00001 है तो वो पदार्थ होगा
(अ) प्रतिचुम्बकीय
(ब) अनुचुम्बकीय
(स) लौहचुम्बकीय
(द) कोई नहीं
Answer: (ब) अनुचुम्बकीय
In simple words: अनुचुम्बकीय पदार्थ वे होते हैं जिनकी आपेक्षिक पारगम्यता 1 से थोड़ी ज़्यादा होती है, जैसे कि 1.00001। यह दर्शाता है कि वे बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में हल्के से चुम्बकित होते हैं।
🎯 Exam Tip: आपेक्षिक पारगम्यता के मान से पदार्थ के प्रकार को पहचानें: \( \mu_r < 1 \) प्रतिचुम्बकीय, \( \mu_r > 1 \) अनुचुम्बकीय, \( \mu_r \gg 1 \) लौहचुम्बकीय।
Question 6. चुम्बकीय आघूर्ण का मात्रक है
(अ) Wb
(ब) \( \text{Wb/m}^2 \)
(स) A/m
(द) \( \text{Am}^2 \)
Answer: (द) \( \text{Am}^2 \)
In simple words: चुम्बकीय आघूर्ण यह बताता है कि कोई चुम्बक बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र में कितना बल महसूस करेगा। इसका मात्रक एम्पियर-मीटर वर्ग (\( \text{Am}^2 \)) होता है।
🎯 Exam Tip: चुम्बकीय आघूर्ण के मात्रक को धारा (एम्पियर) और क्षेत्रफल (मीटर वर्ग) के गुणनफल से याद रखें।
Question 7. Wb × A/m बराबर होता है
(अ) J
(ब) N
(स) H
(द) W
Answer: (ब) N
In simple words: चुम्बकीय फ्लक्स (वेबर) को चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता (एम्पियर प्रति मीटर) से गुणा करने पर न्यूटन (बल का मात्रक) मिलता है। यह इकाई चुम्बकीय बल से जुड़ी है।
🎯 Exam Tip: मात्रकों को याद रखने के लिए, उनकी परिभाषाओं और संबंधित भौतिक राशियों को समझें। \( \text{Wb/m}^2 \) टेस्ला है (चुम्बकीय क्षेत्र B), और \( \text{A/m} \) चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता H है।
Question 8. चुम्बकीय क्षेत्र निम्न में से किसमें अन्योन्य क्रिया नहीं करता
(अ) चुम्बक से
(ब) त्वरित चुम्बक से
(स) स्थिर आवेश से
(द) चल विद्युत आवेश से
Answer: (स) स्थिर आवेश से
In simple words: चुम्बकीय क्षेत्र केवल गतिमान आवेशों या अन्य चुम्बकों पर ही बल लगाता है। एक स्थिर आवेश केवल विद्युत क्षेत्र पैदा करता है, जिस पर चुम्बकीय क्षेत्र कोई प्रभाव नहीं डालता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि चुम्बकीय क्षेत्र की परिभाषा के अनुसार, यह केवल गतिमान आवेशों और अन्य चुम्बकीय द्विध्रुवों पर बल लगाता है, स्थिर आवेशों पर नहीं।
Question 9. प्रतिचुम्बकत्व का कारण है
(अ) इलेक्ट्रॉनों की कक्षीय गति
(ब) इलेक्ट्रॉनों की चक्रण गति
Answer: (अ) इलेक्ट्रॉनों की कक्षीय गति
In simple words: प्रतिचुम्बकत्व इलेक्ट्रॉनों की कक्षीय गति के कारण होता है। जब बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र लगाया जाता है, तो इलेक्ट्रॉनों की कक्षीय गति में बदलाव आता है, जिससे एक प्रेरित चुम्बकीय आघूर्ण उत्पन्न होता है जो बाहरी क्षेत्र का विरोध करता है।
🎯 Exam Tip: प्रतिचुम्बकत्व एक सार्वभौमिक गुण है जो सभी पदार्थों में मौजूद होता है, यह बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र के कारण इलेक्ट्रॉनों की कक्षीय गति में परिवर्तन से उत्पन्न होता है।
Question 10. प्रतिचुम्बकीय पदार्थों का चुम्बकीय आघूर्ण होता है
(अ) अनन्त
(ब) शून्य
(स) 100 Am
(द) कोई नहीं
Answer: (ब) शून्य
In simple words: प्रतिचुम्बकीय पदार्थों में, इलेक्ट्रॉनों के चुम्बकीय आघूर्ण एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं, जिससे कुल चुम्बकीय आघूर्ण शून्य हो जाता है। ये पदार्थ बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र की अनुपस्थिति में स्वयं चुम्बकित नहीं होते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रतिचुम्बकीय पदार्थों का शुद्ध चुम्बकीय आघूर्ण शून्य होता है, यही कारण है कि वे बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र से प्रतिकर्षित होते हैं।
Question 11. लौहचुम्बकीय पदार्थों की आपेक्षिक पारगम्यता \( \mu_r \) का मान होता है
(अ) \( \mu_r > 1 \)
(ब) \( \mu_r > > 1 \)
(स) \( \mu_r = 1 \)
(द) \( \mu_r = 0 \)
Answer: (ब) \( \mu_r > > 1 \)
In simple words: लौहचुम्बकीय पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्रों के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। उनकी आपेक्षिक पारगम्यता 1 से बहुत ज़्यादा होती है, जिसका अर्थ है कि वे बाहरी क्षेत्र में बहुत ज़्यादा आकर्षित होते हैं और क्षेत्र को कई गुना बढ़ा देते हैं।
🎯 Exam Tip: लौहचुम्बकीय पदार्थ चुम्बकीयकरण में बहुत अच्छे होते हैं, इसलिए उनकी आपेक्षिक पारगम्यता का मान बहुत अधिक होता है।
Question 12. पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्वाधर घटक शून्य होता है
(अ) चुम्बकीय ध्रुव पर
(ब) भौगोलिक ध्रुव पर
(स) चुम्बकीय याम्योत्तर पर
(द) कोई नहीं
Answer: (द) कोई नहीं
In simple words: पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्वाधर घटक चुम्बकीय विषुवत रेखा पर शून्य होता है। चूंकि दिए गए विकल्पों में से कोई भी सीधे तौर पर चुम्बकीय विषुवत रेखा का उल्लेख नहीं करता है, इसलिए सही विकल्प 'कोई नहीं' है। चुम्बकीय ध्रुवों पर ऊर्ध्वाधर घटक अधिकतम होता है।
🎯 Exam Tip: पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के अवयवों को याद रखें: ऊर्ध्वाधर घटक चुम्बकीय विषुवत रेखा पर शून्य और चुम्बकीय ध्रुवों पर अधिकतम होता है।
Question 13. किसी पदार्थ के शैथिल्य पाश का क्षेत्रफल प्रदर्शित करता है
(अ) पदार्थ को इकाई चक्र में चुम्बकित करने पर ऊर्जा हानि
(ब) पदार्थ के इकाई आयतन को इकाई चक्र में चुम्बकित करने पर ऊर्जा हानि
(स) पदार्थ के इकाई आयतन को चुम्बकित करने पर ऊर्जा हानि
(द) पदार्थ को चुम्बकित करने पर ऊर्जा हानि
Answer: (ब) पदार्थ के इकाई आयतन को इकाई चक्र में चुम्बकित करने पर ऊर्जा हानि
In simple words: शैथिल्य पाश का क्षेत्रफल यह बताता है कि एक पदार्थ को एक पूर्ण चुम्बकन-विचुम्बकन चक्र से गुजारने पर प्रति इकाई आयतन में कितनी ऊर्जा खर्च होती है। यह ऊर्जा ऊष्मा के रूप में नष्ट होती है।
🎯 Exam Tip: शैथिल्य हानि का सीधा संबंध शैथिल्य पाश के क्षेत्रफल से होता है, जिसका उपयोग चुम्बकीय पदार्थों के चयन में किया जाता है, जैसे ट्रांसफार्मर कोर के लिए कम हानि वाले पदार्थ।
Question 15. क्यूरी ताप पर लौह चुम्बकीय पदार्थ हो जाता है
(अ) अचुम्बकीय
(ब) प्रतिचुम्बकीय
(स) अनुचुम्बकीय
(द) अधिक लौह चुम्बकीय
Answer: (स) अनुचुम्बकीय
In simple words: जब लौहचुम्बकीय पदार्थ को क्यूरी ताप तक गर्म किया जाता है, तो उसके डोमेन टूट जाते हैं और वह अपनी लौहचुम्बकीय गुणों को खो देता है। इसके बाद वह एक अनुचुम्बकीय पदार्थ की तरह व्यवहार करने लगता है।
🎯 Exam Tip: क्यूरी ताप वह तापमान है जिस पर लौहचुम्बकीय पदार्थ अनुचुम्बकीय पदार्थ में बदल जाता है, और यह परिवर्तन प्रतिवर्ती होता है।
RBSE Class 12 Physics Chapter 8 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. एक चुम्बकीय सुई जो ऊर्ध्वाधर तल में घूमने के लिए स्वतंत्र है, यदि भू-चुम्बकीय उत्तर या दक्षिण ध्रुव पर रखी है तो यह किस दिशा में संकेत करेगी ?
Answer: यदि एक चुम्बकीय सुई को भू-चुम्बकीय उत्तर या दक्षिण ध्रुव पर रखा जाए, तो वह ऊर्ध्वाधर दिशा में संकेत करेगी। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र ध्रुवों पर ऊर्ध्वाधर होता है, यानी सीधे नीचे या ऊपर की ओर होता है। इससे सुई उस दिशा में संरेखित हो जाती है।
In simple words: पृथ्वी के चुम्बकीय ध्रुवों पर, एक स्वतंत्र चुम्बकीय सुई सीधी खड़ी रहती है, या तो ऊपर की ओर या नीचे की ओर, क्योंकि वहाँ पृथ्वी का चुम्बकीय खिंचाव सीधा होता है।
🎯 Exam Tip: भू-चुम्बकीय ध्रुवों पर नति कोण 90° होता है, जिसका अर्थ है कि चुम्बकीय सुई ऊर्ध्वाधर रूप से संरेखित होती है।
Question 2. चुम्बकीय पदार्थ के प्रकार का नाम लिखो, जिसका व्यवहार साधारण ताप में परिवर्तन पर निर्भर नहीं करता।
Answer: प्रतिचुम्बकीय पदार्थ ऐसे होते हैं जिनका चुम्बकीय व्यवहार साधारण तापमान में बदलाव पर निर्भर नहीं करता। इन पदार्थों में तापमान बदलने से उनके चुम्बकीय गुणों पर कोई खास असर नहीं पड़ता।
In simple words: प्रतिचुम्बकीय पदार्थ ऐसे होते हैं जिनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति तापमान बदलने से नहीं बदलती।
🎯 Exam Tip: प्रतिचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति तापमान से स्वतंत्र होती है, जबकि अनुचुम्बकीय और लौहचुम्बकीय पदार्थों की प्रवृत्ति तापमान पर निर्भर करती है।
Question 3. चुम्बकीय विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर नति कोण में किस प्रकार परिवर्तन होता है ?
Answer: जब हम चुम्बकीय विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर जाते हैं, तो नति कोण का मान 0° से 90° के बीच बढ़ता है। चुम्बकीय विषुवत रेखा पर नति कोण का मान 0° होता है, जिसका मतलब है कि चुम्बकीय सुई क्षैतिज रहती है। ध्रुवों पर यह 90° हो जाता है, जिसका मतलब है कि सुई ऊर्ध्वाधर हो जाती है।
In simple words: चुम्बकीय विषुवत रेखा पर नति कोण शून्य होता है, और ध्रुवों की ओर बढ़ने पर यह 90° तक बढ़ जाता है।
🎯 Exam Tip: नति कोण पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र की ऊर्ध्वाधर दिशा को दर्शाता है, जो अक्षांश के साथ बदलता है।
Question 5. धारणशीलता किसे कहते हैं ?
Answer: धारणशीलता पदार्थ का वह गुण है जहाँ चुम्बकन क्षेत्र (H) का मान शून्य करने के बाद भी पदार्थ में कुछ चुम्बकत्व बचा रहता है। यह बचे हुए चुम्बकत्व को 'अवशिष्ट चुम्बकत्व' कहते हैं, और इस गुण को धारणशीलता कहते हैं।
In simple words: धारणशीलता का मतलब है कि जब बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र हटा दिया जाता है, तब भी पदार्थ में कितना चुम्बकत्व बचा रहता है।
🎯 Exam Tip: धारणशीलता स्थायी चुम्बक बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण गुण है, क्योंकि यह बताता है कि पदार्थ अपनी चुम्बकीय शक्ति को कितनी अच्छी तरह बनाए रखता है।
Question 6. अनुचुम्बकीय पदार्थों के दो उदाहरण लिखिए।
Answer: अनुचुम्बकीय पदार्थों के दो उदाहरण इस प्रकार हैं:
1. कॉपर क्लोराइड (\( \text{CuCl}_2 \))
2. ऑक्सीजन (\( \text{O}_2 \))
In simple words: कॉपर क्लोराइड और ऑक्सीजन ऐसे पदार्थ हैं जो चुम्बकीय क्षेत्र में हल्के से आकर्षित होते हैं, इसलिए वे अनुचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं।
🎯 Exam Tip: अनुचुम्बकीय पदार्थों के उदाहरणों को याद रखें, जैसे एल्यूमीनियम, सोडियम, प्लैटिनम और कई लवण, जो बाहरी क्षेत्र से कमजोर रूप से आकर्षित होते हैं।
Question 7. चुम्बकीय याम्योत्तर किसे कहते हैं ?
Answer: चुम्बकीय याम्योत्तर वह ऊर्ध्वाधर तल है जो एक छड़ चुम्बक के चुम्बकीय अक्ष के लम्बवत् गुजरता है। यह तल उस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को दर्शाता है।
In simple words: चुम्बकीय याम्योत्तर एक काल्पनिक सीधी खड़ी जगह है जो एक चुम्बक की धुरी से गुजरती है।
🎯 Exam Tip: चुम्बकीय याम्योत्तर भौगोलिक याम्योत्तर से अलग होता है, और इन दोनों के बीच के कोण को दिक्पात कोण कहते हैं।
Question 8. पृथ्वी पर नति कोण के मान 0° और 90° कहाँ होते हैं ?
Answer: पृथ्वी पर नति कोण का मान 0° चुम्बकीय विषुवत रेखा (निरक्ष) पर होता है, और 90° चुम्बकीय ध्रुवों पर होता है। विषुवत रेखा पर चुम्बकीय सुई क्षैतिज रहती है, जबकि ध्रुवों पर वह ऊर्ध्वाधर हो जाती है।
In simple words: नति कोण शून्य चुम्बकीय विषुवत रेखा पर होता है, और 90° चुम्बकीय ध्रुवों पर होता है।
🎯 Exam Tip: नति कोण का मान अक्षांश के साथ बदलता है, जो पृथ्वी के विभिन्न स्थानों पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को इंगित करता है।
Question 9. माध्यम की चुम्बकीय पारगम्यता तथा चुम्बकीय प्रवृत्ति में सम्बन्ध लिखो।
Answer: माध्यम की आपेक्षिक चुम्बकीय पारगम्यता \( \mu_r \) और चुम्बकीय प्रवृत्ति \( X_m \) के बीच का सम्बन्ध इस प्रकार है:
\( \mu_r = (1 + X_m) \)
यहां \( \mu_r \) माध्यम की आपेक्षिक चुम्बकीय पारगम्यता है, और \( X_m \) माध्यम की चुम्बकीय प्रवृत्ति है। यह सूत्र बताता है कि कैसे कोई पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र को खुद से गुजरने देता है।
In simple words: आपेक्षिक चुम्बकीय पारगम्यता और चुम्बकीय प्रवृत्ति इस सूत्र से जुड़ी हैं: \( \mu_r = (1 + X_m) \).
🎯 Exam Tip: इस सूत्र का उपयोग करके किसी पदार्थ की चुम्बकीय प्रवृत्ति से उसकी पारगम्यता की गणना की जा सकती है, या इसके विपरीत।
Question 10. ध्रुव सामर्थ्य का मात्रक लिखो।
Answer: ध्रुव सामर्थ्य का मात्रक एम्पियर-मीटर (A-m) होता है। यह चुम्बक के ध्रुवों की शक्ति को दर्शाता है।
In simple words: ध्रुव सामर्थ्य की इकाई एम्पियर-मीटर (\( \text{A-m} \)) है।
🎯 Exam Tip: ध्रुव सामर्थ्य को चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण (M = m * 2l) के साथ संबंधित करके याद रखें, जहाँ m ध्रुव सामर्थ्य है।
Question 12. चुम्बकीय शैथिल्य क्या हैं ?
Answer: चुम्बकीय शैथिल्य (Magnetic Hysteresis) वह प्रक्रिया है जब किसी पदार्थ में चुम्बकन क्षेत्र (H) को बदलने पर उसका चुम्बकत्व (B) पीछे रह जाता है। इसका मतलब है कि पदार्थ का चुम्बकन उसके इतिहास पर निर्भर करता है। यह घटना डोमेनों के चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा के संरक्षण के कारण होती है।
In simple words: चुम्बकीय शैथिल्य तब होता है जब पदार्थ का चुम्बकन बाहरी क्षेत्र को बदलने के बाद भी अपनी पिछली स्थिति में वापस नहीं आता, यानी उसमें कुछ याददाश्त रह जाती है।
🎯 Exam Tip: शैथिल्य वक्र लौहचुम्बकीय पदार्थों के गुणों का अध्ययन करने के लिए महत्वपूर्ण है और यह विद्युत चुम्बकों के डिजाइन में उपयोग किया जाता है।
Question 13. छड़ चुम्बक के मध्य बिन्दु से अक्षीय तथा निरक्षीय स्थिति में समान दूरी होने पर स्थित बिन्दुओं पर चुम्बकीय क्षेत्र के मानों में क्या अनुपात होता है ?
Answer: छड़ चुम्बक के मध्य बिन्दु से समान दूरी पर अक्षीय और निरक्षीय स्थिति में चुम्बकीय क्षेत्र का अनुपात 2:1 होता है।
अक्षीय स्थिति में चुम्बकीय क्षेत्र \( B_1 = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2M}{r^3} \)
निरक्षीय स्थिति में चुम्बकीय क्षेत्र \( B_2 = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{M}{r^3} \)
इसलिए, \( \frac{B_1}{B_2} = \frac{\frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2M}{r^3}}{\frac{\mu_0}{4\pi} \frac{M}{r^3}} \)
\( \implies \frac{B_1}{B_2} = \frac{2}{1} \)
\( \implies B_1:B_2 = 2:1 \)
In simple words: एक छड़ चुम्बक के लिए, उसके केंद्र से बराबर दूरी पर अक्षीय स्थिति में चुम्बकीय क्षेत्र, निरक्षीय स्थिति के चुम्बकीय क्षेत्र का दुगुना होता है।
🎯 Exam Tip: अक्षीय और निरक्षीय स्थितियों में चुम्बकीय क्षेत्र के लिए सूत्र और उनके अनुपात को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सामान्यतः पूछे जाने वाला प्रश्न है।
Question 14. उस स्थान पर नति कोण का मान क्या होगा जहाँ पर पृथ्वी के क्षैतिज तथा ऊर्ध्वाधर घटक समान हैं ?
Answer: जिस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर घटक समान होते हैं, वहाँ नति कोण 45° होगा। नति कोण \( \theta \) की परिभाषा के अनुसार, \( \tan \theta = \frac{B_V}{B_H} \), जहाँ \( B_V \) ऊर्ध्वाधर घटक है और \( B_H \) क्षैतिज घटक है।
यदि \( B_V = B_H \), तो \( \tan \theta = 1 \).
\( \implies \theta = 45^\circ \).
In simple words: जब पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र बराबर क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर भागों में होता है, तो नति कोण 45 डिग्री होता है।
🎯 Exam Tip: नति कोण की परिभाषा और \( \tan \theta = \frac{B_V}{B_H} \) सूत्र को याद रखें। यह क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर घटकों के बीच के संबंध को समझने में मदद करता है।
RBSE Class 12 Physics Chapter 8 लघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. एक दण्ड चुम्बक किसी एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में इस प्रकार रखी है कि इसका चुम्बकीय आघूर्ण, \( \overrightarrow{M} \) चुम्बकीय क्षेत्र \( \overrightarrow{B} \) की दिशा से \( \theta \) कोण बनाता है तो स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक ज्ञात करो।
Answer: एक समान चुम्बकीय क्षेत्र \( \overrightarrow{B} \) में रखे दण्ड चुम्बक जिसका चुम्बकीय आघूर्ण \( \overrightarrow{M} \) है, पर लगने वाला बल आघूर्ण \( \tau = MB \sin \theta \) होता है। इस बल आघूर्ण के विरुद्ध चुम्बक को घुमाने में किया गया कार्य ही उसकी स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित होता है।
माना चुम्बक को \( d\theta \) कोण से घुमाया जाता है, तो किया गया कार्य \( dW = \tau d\theta \).
मानक रूप से, जब चुम्बकीय आघूर्ण क्षेत्र के लम्बवत् हो (\( \theta = 90^\circ \)), तो स्थितिज ऊर्जा शून्य मानी जाती है।
इसलिए, \( \theta \) कोण तक घुमाने में किया गया कुल कार्य (स्थितिज ऊर्जा) इस प्रकार होगा:
\( U = \int_{90^\circ}^\theta \tau d\theta \)
\( U = \int_{90^\circ}^\theta MB \sin \theta d\theta \)
\( U = MB [-\cos \theta]_{90^\circ}^\theta \)
\( U = MB (-\cos \theta - (-\cos 90^\circ)) \)
\( U = MB (-\cos \theta - 0) \)
\( U = -MB \cos \theta \)
इस प्रकार, चुम्बकीय क्षेत्र में दण्ड चुम्बक की स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक \( U = -MB \cos \theta \) या \( U = -\overrightarrow{M} \cdot \overrightarrow{B} \) है। यह ऊर्जा चुम्बक के संरेखण पर निर्भर करती है।
In simple words: जब एक चुम्बक को चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उसमें एक स्थितिज ऊर्जा होती है। यह ऊर्जा इस बात पर निर्भर करती है कि चुम्बक क्षेत्र के साथ कितना कोण बनाता है, और इसका सूत्र \( U = -MB \cos \theta \) होता है।
🎯 Exam Tip: स्थितिज ऊर्जा के लिए यह व्यंजक बहुत महत्वपूर्ण है। याद रखें कि यह न्यूनतम तब होती है जब चुम्बक क्षेत्र के समानांतर (\( \theta = 0^\circ \)) होता है, और अधिकतम तब जब यह विपरीत दिशा (\( \theta = 180^\circ \)) में होता है।
Question 2. अनुचुम्बकीय तथा प्रतिचुम्बकीय पदार्थों की छड़ों की । किस प्रकार पहचान करेंगे ?
Answer: अनुचुम्बकीय और प्रतिचुम्बकीय पदार्थों की छड़ों की पहचान करने के लिए हम उन्हें एक असमान चुम्बकीय क्षेत्र में रख सकते हैं:
1. **अनुचुम्बकीय पदार्थ:** अनुचुम्बकीय पदार्थ की छड़ को असमान चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर वह दुर्बल क्षेत्र से प्रबल क्षेत्र की ओर हल्की सी आकर्षित होती है। इसका मतलब है कि वह मजबूत चुम्बकीय क्षेत्र की ओर खिंचेगी।
2. **प्रतिचुम्बकीय पदार्थ:** प्रतिचुम्बकीय पदार्थ की छड़ को असमान चुम्बकीय क्षेत्र में लाने पर वह प्रबल क्षेत्र से दुर्बल क्षेत्र की ओर हल्की सी प्रतिकर्षित होती है। इसका मतलब है कि वह मजबूत चुम्बकीय क्षेत्र से दूर हटेगी।
इस प्रकार, उनके आकर्षण या प्रतिकर्षण के व्यवहार के आधार पर इन पदार्थों की छड़ों की पहचान आसानी से की जा सकती है। यह व्यवहार उनके आंतरिक चुम्बकीय गुणों के कारण होता है।
In simple words: अनुचुम्बकीय छड़ें मजबूत चुम्बकीय क्षेत्र की ओर हल्की सी खिंचती हैं, जबकि प्रतिचुम्बकीय छड़ें मजबूत चुम्बकीय क्षेत्र से हल्की सी दूर हटती हैं।
🎯 Exam Tip: यह व्यवहार पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति पर आधारित है: अनुचुम्बकीय पदार्थों की प्रवृत्ति धनात्मक होती है, जबकि प्रतिचुम्बकीय पदार्थों की प्रवृत्ति ऋणात्मक होती है।
Question 3. किसी दण्ड चुम्बक के लिए दो उदासीन बिन्दु क्यों प्राप्त होते हैं ? क्या एक उदासीन बिन्दु भी प्राप्त हो सकता है ? क्यों ?
Answer: दण्ड चुम्बक के लिए दो उदासीन बिन्दु प्राप्त होते हैं क्योंकि चुम्बक के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र दूरी के साथ बदलता रहता है। ये उदासीन बिन्दु वे स्थान होते हैं जहाँ दण्ड चुम्बक का चुम्बकीय क्षेत्र पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक के बराबर और विपरीत होता है, जिससे कुल चुम्बकीय क्षेत्र शून्य हो जाता है। ये बिन्दु चुम्बक की अक्ष पर उत्तर-दक्षिण दिशा में होते हैं।
हाँ, एक उदासीन बिन्दु भी प्राप्त हो सकता है। यदि दण्ड चुम्बक के उत्तरी ध्रुव या दक्षिणी ध्रुव को नीचे रखकर उसे ऊर्ध्वाधर स्थिति में रखा जाए, तो केवल एक उदासीन बिन्दु प्राप्त होगा। इस स्थिति में उदासीन बिन्दु उत्तरी ध्रुव से ठीक दक्षिण की ओर या दक्षिणी ध्रुव से ठीक उत्तर की ओर होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ऊर्ध्वाधर स्थिति में एक ध्रुव पृथ्वी के क्षेत्र के समानांतर होता है जबकि दूसरा ध्रुव विपरीत।
In simple words: एक दण्ड चुम्बक में आमतौर पर दो उदासीन बिन्दु होते हैं, जहाँ चुम्बक का क्षेत्र पृथ्वी के क्षेत्र को रद्द कर देता है। यदि चुम्बक को सीधा खड़ा रखा जाए, तो एक उदासीन बिन्दु भी मिल सकता है।
🎯 Exam Tip: उदासीन बिन्दु वे स्थान होते हैं जहाँ नेट चुम्बकीय क्षेत्र शून्य होता है। इनकी स्थिति चुम्बक के अभिविन्यास और पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र पर निर्भर करती है।
Question 4. विद्युत चुम्बक बनाने में नर्म लोहे का उपयोग क्यों किया जाता है ?
Answer: विद्युत चुम्बक बनाने में नर्म लोहे का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि नर्म लोहे की चुम्बकीय प्रवृत्ति अधिक और धारणशीलता कम होती है।
1. **उच्च चुम्बकीय प्रवृत्ति:** इसकी उच्च चुम्बकीय प्रवृत्ति के कारण, नर्म लोहा थोड़े से बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र से भी आसानी से चुम्बकित हो जाता है।
2. **कम धारणशीलता:** इसकी कम धारणशीलता का मतलब है कि बाहरी चुम्बकन क्षेत्र हटाने पर नर्म लोहे का चुम्बकत्व आसानी से समाप्त हो जाता है। इससे यह एक अस्थायी चुम्बक के रूप में कार्य करता है, जो विद्युत चुम्बकों के लिए आवश्यक है।
यह गुण नर्म लोहे को उन अनुप्रयोगों के लिए आदर्श बनाता है जहाँ चुम्बकत्व को नियंत्रित करना होता है, जैसे क्रेनों और रिले में।
In simple words: नर्म लोहे का उपयोग विद्युत चुम्बक बनाने में होता है क्योंकि यह जल्दी चुम्बकित हो जाता है और जैसे ही बिजली बंद होती है, इसका चुम्बकत्व खत्म हो जाता है।
🎯 Exam Tip: नर्म लोहा आसानी से चुम्बकित और विचुम्बकित हो जाता है, जो विद्युत चुम्बकों की कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक है। इसके विपरीत, स्थायी चुम्बकों के लिए उच्च धारणशीलता वाले पदार्थ का उपयोग किया जाता है।
Question 5. एक दण्ड चुम्बक एक समान चुम्बकीय क्षेत्र \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) के समान्तर स्थित है। इसका चुम्बकीय आघूर्ण \( \overrightarrow{\mathrm{M}} \) है। इसके चुम्बकीय आघूर्ण की चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत करने में कितना कार्य करना पड़ेगा?
Answer: जब एक दण्ड चुम्बक एक समान चुम्बकीय क्षेत्र \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) के समानांतर स्थित होती है, तो उसका प्रारंभिक कोण \( \theta_1 = 0^\circ \) होता है। इसे क्षेत्र के लम्बवत् करने का मतलब है कि अंतिम कोण \( \theta_2 = 90^\circ \) होगा।
चुम्बक को क्षेत्र में घुमाने में किया गया कार्य (W) उसकी स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है:
\( W = U_2 - U_1 \)
जहाँ \( U = -MB \cos \theta \) स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक है।
\( W = (-MB \cos \theta_2) - (-MB \cos \theta_1) \)
\( W = -MB \cos 90^\circ - (-MB \cos 0^\circ) \)
\( W = -MB (0) - (-MB (1)) \)
\( W = 0 - (-MB) \)
\( W = MB \)
अतः, चुम्बकीय आघूर्ण को चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् करने में \( MB \) के बराबर कार्य करना पड़ेगा। यह स्थिति अधिकतम अस्थायी संतुलन की अवस्था होती है।
In simple words: एक चुम्बक को चुम्बकीय क्षेत्र के समानांतर से लंबवत करने के लिए, \( MB \) के बराबर काम करना पड़ता है, जहाँ M चुम्बकीय आघूर्ण और B चुम्बकीय क्षेत्र है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, स्थितिज ऊर्जा के सूत्र (\( U = -MB \cos \theta \)) का सही उपयोग और प्रारंभिक तथा अंतिम कोणों की पहचान करना महत्वपूर्ण है।
Question 6. दिपात कोण तथा नति कोण को परिभाषित करो।
Answer:
1. **दिक्पात कोण (Angle of Declination):** किसी स्थान पर दिक्पात कोण, चुम्बकीय याम्योत्तर (वह ऊर्ध्वाधर तल जो चुम्बकीय अक्ष से गुजरता है) और भौगोलिक याम्योत्तर (वह ऊर्ध्वाधर तल जो भौगोलिक अक्ष से गुजरता है) के बीच बनने वाले न्यून कोण को कहते हैं। यह कोण पृथ्वी पर स्थानों के अनुसार बदलता रहता है।
2. **नति कोण (Angle of Dip):** किसी स्थान पर नति कोण वह कोण है जो स्वतंत्रतापूर्वक लटकाई गई चुम्बकीय सुई की अक्ष क्षैतिज दिशा के साथ बनाती है। यह कोण पृथ्वी के कुल चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को दर्शाता है। चुम्बकीय विषुवत रेखा पर यह 0° होता है और चुम्बकीय ध्रुवों पर 90° होता है।
In simple words: दिक्पात कोण वह कोण है जो चुम्बकीय उत्तर और सही उत्तर दिशा के बीच होता है। नति कोण वह कोण है जो चुम्बक की सुई क्षैतिज सतह के साथ बनाती है।
🎯 Exam Tip: पृथ्वी के चुम्बकत्व के इन दो अवयवों को याद रखें, क्योंकि ये पृथ्वी पर किसी स्थान के चुम्बकीय क्षेत्र को पूरी तरह से समझने के लिए आवश्यक हैं।
Question 7. क्यूरी-वाइस नियम लिखो तथा लोहे के लिए क्यूरी ताप का मान लिखो।
Answer:
**क्यूरी-वाइस नियम:** यह नियम लौहचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति की तापमान पर निर्भरता को दर्शाता है। नियम के अनुसार, लौहचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति (\( X_m \)) क्यूरी ताप (\( T_C \)) से ऊपर के तापमान (\( T \)) पर इस प्रकार संबंधित होती है:
\( X_m = \frac{C}{T-T_C} \)
यहां \( C \) क्यूरी नियतांक है और \( T_C \) लौहचुम्बकीय पदार्थों का क्यूरी ताप है। यह नियम बताता है कि क्यूरी ताप से ऊपर, लौहचुम्बकीय पदार्थ अनुचुम्बकीय हो जाते हैं और उनकी प्रवृत्ति तापमान बढ़ने पर घटती है।
**लोहे के लिए क्यूरी ताप का मान:** लोहे के लिए क्यूरी ताप का मान लगभग 1043 K (या 770°C) होता है। इस तापमान से ऊपर लोहा अपनी लौहचुम्बकीय गुण खो देता है।
In simple words: क्यूरी-वाइस नियम बताता है कि क्यूरी ताप के ऊपर, लौहचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय शक्ति तापमान के साथ कम होती जाती है। लोहे के लिए यह ताप 1043 केल्विन है।
🎯 Exam Tip: क्यूरी-वाइस नियम और क्यूरी ताप को याद रखें, जो लौहचुम्बकीय पदार्थों के तापमान-निर्भर गुणों को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 8. चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की चार विशेषताएँ लिखो।
Answer: चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की चार मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. **दिशा का प्रदर्शन:** क्षेत्र रेखाओं के किसी भी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को दर्शाती है। यह हमें बताता है कि कम्पास की सुई किस दिशा में इंगित करेगी।
2. **कभी नहीं काटतीं:** दो चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी भी एक-दूसरे को नहीं काटती हैं। यदि वे काटतीं, तो उस बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ होतीं, जो असंभव है।
3. **बन्द वक्र बनाती हैं:** चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ चुम्बक के बाहर उत्तरी ध्रुव (N) से निकलकर दक्षिणी ध्रुव (S) की ओर जाती हैं और चुम्बक के अंदर दक्षिणी ध्रुव (S) से उत्तरी ध्रुव (N) की ओर चलती हैं। इस प्रकार वे एक बंद लूप बनाती हैं।
4. **क्षेत्र की प्रबलता:** जिस स्थान पर चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ सघन (करीब-करीब) होती हैं, उस स्थान पर चुम्बकीय क्षेत्र अधिक प्रबल होता है। इसके विपरीत, जहाँ रेखाएँ दूर-दूर होती हैं, वहाँ क्षेत्र कमजोर होता है।
In simple words: चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ हमेशा बंद लूप बनाती हैं, कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं, और उनकी दिशा क्षेत्र की शक्ति बताती है।
🎯 Exam Tip: इन विशेषताओं को याद रखें क्योंकि ये चुम्बकीय क्षेत्र की अवधारणा को समझने और विभिन्न चुम्बकीय विन्यासों में क्षेत्र का चित्रण करने के लिए मौलिक हैं।
Question 9. प्रतिचुम्बकीय, अनुचुम्बकीय तथा लौहचुम्बकीय पदार्थों का व्यवहार कैसा होता है ?
Answer: प्रतिचुम्बकीय, अनुचुम्बकीय और लौहचुम्बकीय पदार्थों का व्यवहार बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र में अलग-अलग होता है:
1. **प्रतिचुम्बकीय पदार्थ (Diamagnetic Substances):** ये पदार्थ बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र से हल्के से प्रतिकर्षित होते हैं। वे मजबूत चुम्बकीय क्षेत्र से कमजोर क्षेत्र की ओर जाने की कोशिश करते हैं। इनकी आपेक्षिक पारगम्यता (\( \mu_r \)) 1 से थोड़ी कम होती है और चुम्बकीय प्रवृत्ति (\( X_m \)) ऋणात्मक होती है। उदाहरण: सोना, ताँबा, पानी।
2. **अनुचुम्बकीय पदार्थ (Paramagnetic Substances):** ये पदार्थ बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र से हल्के से आकर्षित होते हैं। वे कमजोर चुम्बकीय क्षेत्र से मजबूत क्षेत्र की ओर जाने की कोशिश करते हैं। इनकी आपेक्षिक पारगम्यता (\( \mu_r \)) 1 से थोड़ी अधिक होती है और चुम्बकीय प्रवृत्ति (\( X_m \)) धनात्मक होती है। उदाहरण: एल्यूमीनियम, ऑक्सीजन, प्लेटिनम।
3. **लौहचुम्बकीय पदार्थ (Ferromagnetic Substances):** ये पदार्थ बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र से बहुत ज़्यादा आकर्षित होते हैं। ये कमजोर चुम्बकीय क्षेत्र से मजबूत क्षेत्र की ओर प्रबलता से आकर्षित होते हैं। इनकी आपेक्षिक पारगम्यता (\( \mu_r \)) 1 से बहुत अधिक होती है और चुम्बकीय प्रवृत्ति (\( X_m \)) धनात्मक और बहुत उच्च होती है। उदाहरण: लोहा, निकल, कोबाल्ट।
In simple words: प्रतिचुम्बकीय पदार्थ क्षेत्र से दूर हटते हैं, अनुचुम्बकीय पदार्थ हल्के से आकर्षित होते हैं, और लौहचुम्बकीय पदार्थ बहुत ज़्यादा आकर्षित होते हैं।
🎯 Exam Tip: तीनों प्रकार के पदार्थों के व्यवहार और उनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति तथा आपेक्षिक पारगम्यता के मानों में अंतर को याद रखें। यह अंतर उनके आंतरिक इलेक्ट्रॉनिक संरचनाओं के कारण होता है।
Question 10. चुम्बकत्व में गाउस का नियम क्या है ? यह क्या प्रदर्शित करता है ?
Answer: **चुम्बकत्व में गाउस का नियम (Gauss's Law in Magnetism):** इस नियम के अनुसार, किसी भी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला कुल चुम्बकीय फ्लक्स हमेशा शून्य होता है। इसका गणितीय रूप है:
\( \oint_{s} \overrightarrow{\mathrm{B}} \cdot d\overrightarrow{S} = 0 \)
यहाँ \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) चुम्बकीय क्षेत्र है और \( d\overrightarrow{S} \) बंद पृष्ठ का क्षेत्रफल सदिश है।
**यह क्या प्रदर्शित करता है:**
1. यह नियम यह बताता है कि चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ हमेशा बंद वक्र बनाती हैं। जितनी क्षेत्र रेखाएँ एक बंद सतह में प्रवेश करती हैं, उतनी ही बाहर निकलती हैं, जिससे कुल फ्लक्स शून्य हो जाता है।
2. यह नियम इस मौलिक तथ्य को दर्शाता है कि प्रकृति में एकल चुम्बकीय ध्रुव (मोनोपोल) का कोई अस्तित्व नहीं है। चुम्बक हमेशा उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के जोड़े के रूप में मौजूद होते हैं।
3. चुम्बकत्व की उत्पत्ति का सबसे छोटा स्रोत एक धारावाही लूप या चुम्बकीय द्विध्रुव ही होता है, न कि कोई अकेला ध्रुव।
In simple words: चुम्बकत्व का गाउस नियम कहता है कि किसी बंद सतह से गुजरने वाला कुल चुम्बकीय खिंचाव हमेशा शून्य होता है। इसका मतलब है कि कभी भी अकेला उत्तरी या दक्षिणी चुम्बकीय ध्रुव नहीं होता।
🎯 Exam Tip: विद्युत क्षेत्र के गाउस नियम के विपरीत, चुम्बकत्व के गाउस नियम में कोई स्रोत पद (जैसे कि आवेश) नहीं होता है, क्योंकि चुम्बकीय मोनोपोल मौजूद नहीं होते हैं।
Question 11. चुम्बकीय रेखाएँ बन्द वक्र बनाती हैं। क्यों ?
Answer: चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ बंद वक्र बनाती हैं क्योंकि चुम्बक के बाहर उनकी दिशा उत्तरी ध्रुव (N) से दक्षिणी ध्रुव (S) की ओर होती है, जबकि चुम्बक के अंदर उनकी दिशा दक्षिणी ध्रुव (S) से उत्तरी ध्रुव (N) की ओर होती है। इस निरंतर प्रवाह के कारण, रेखाएँ कभी खत्म नहीं होतीं और हमेशा एक बंद लूप बनाती हैं।
यह गुण चुम्बकत्व के गाउस के नियम से भी प्रमाणित होता है, जो कहता है कि किसी भी बंद सतह से गुजरने वाला कुल चुम्बकीय फ्लक्स शून्य होता है। इसका मतलब है कि कोई भी चुम्बकीय क्षेत्र रेखा बिना बंद हुए शुरू या खत्म नहीं हो सकती।
In simple words: चुम्बकीय रेखाएँ हमेशा बंद रास्ते बनाती हैं क्योंकि वे चुम्बक के बाहर एक ध्रुव से निकलकर दूसरे ध्रुव में जाती हैं और फिर चुम्बक के अंदर से वापस पहले ध्रुव में आती हैं।
🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं का बंद होना चुम्बकीय मोनोपोल के अस्तित्व की अनुपस्थिति का एक सीधा परिणाम है।
Question 12. दण्ड चुम्बक और धारावाही परिनालिका के चुम्बकीय क्षेत्रों की तुलना करो।
Answer: दण्ड चुम्बक और धारावाही परिनालिका के चुम्बकीय क्षेत्रों में कई समानताएँ होती हैं:
1. **दिशानिर्देशन:** दोनों को स्वतंत्र रूप से लटकाने पर वे उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरते हैं।
2. **आकर्षण:** दोनों ही लौहचुम्बकीय पदार्थों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
3. **ध्रुव:** दोनों में ही दो ध्रुव होते हैं - एक उत्तरी ध्रुव और एक दक्षिणी ध्रुव।
4. **बल:** दोनों में सजातीय ध्रुवों के बीच प्रतिकर्षण और विजातीय ध्रुवों के बीच आकर्षण होता है।
5. **प्रेरण:** दोनों ही चुम्बकीय प्रेरण की क्रिया प्रदर्शित करते हैं, यानी वे अन्य लौहचुम्बकीय पदार्थों को चुम्बकित कर सकते हैं।
इस प्रकार, कई मायनों में एक धारावाही परिनालिका का व्यवहार एक दण्ड चुम्बक जैसा होता है।
In simple words: एक साधारण छड़ चुम्बक और बिजली से चलने वाली कुंडली (परिनालिका) दोनों एक जैसे चुम्बकीय गुण दिखाते हैं, जैसे उत्तर-दक्षिण में ठहरना और अन्य चुम्बकों को खींचना या धकेलना।
🎯 Exam Tip: इन समानताओं को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि परिनालिका को अक्सर एक दण्ड चुम्बक के रूप में मॉडल किया जाता है, जिससे चुम्बकीय क्षेत्र की अवधारणाओं को सरल बनाने में मदद मिलती है।
Question 14. शैथिल्य वक्र के क्या उपयोग हैं ?
Answer: शैथिल्य वक्र लौहचुम्बकीय पदार्थों के गुणों को समझने और विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए सही पदार्थ का चयन करने में मदद करते हैं। इसके प्रमुख उपयोग इस प्रकार हैं:
1. **विद्युत चुम्बकों का चयन:** विद्युत चुम्बकों के कोर के लिए ऐसे पदार्थ चुने जाते हैं जिनकी धारणशीलता कम हो (ताकि वे आसानी से विचुम्बकित हो सकें) और चुम्बकीय प्रवृत्ति अधिक हो (ताकि वे थोड़े से क्षेत्र से भी आसानी से चुम्बकित हो सकें)। इनमें शैथिल्य हानि भी कम होनी चाहिए। नर्म लोहा इन गुणों के लिए उपयुक्त है।
2. **स्थायी चुम्बकों का चयन:** स्थायी चुम्बक बनाने के लिए उच्च धारणशीलता और उच्च निग्राहिता (coercivity) वाले पदार्थ चुने जाते हैं, ताकि वे अपना चुम्बकत्व लंबे समय तक बनाए रख सकें। स्टील और कुछ मिश्रधातुएँ इसके लिए उपयुक्त हैं। गैल्वेनोमीटर, एमीटर, वोल्टमीटर और लाउडस्पीकर जैसे उपकरणों में इनका उपयोग होता है।
3. **ट्रांसफार्मर और मोटर के कोर:** ट्रांसफार्मर के कोर के लिए ऐसे पदार्थ चुने जाते हैं जिनमें शैथिल्य हानि कम हो और पारगम्यता अधिक हो। इससे ऊर्जा की बर्बादी कम होती है। ट्रांसफार्मर स्टील ऐसी मिश्रधातु का एक उदाहरण है।
इस प्रकार, शैथिल्य वक्र हमें विभिन्न चुम्बकीय उपकरणों के लिए आवश्यक विशिष्ट गुणों वाले पदार्थों की पहचान करने में मदद करता है।
In simple words: शैथिल्य वक्र हमें यह जानने में मदद करता है कि कौन सा पदार्थ विद्युत चुम्बक, स्थायी चुम्बक या ट्रांसफार्मर जैसे उपकरणों के लिए सबसे अच्छा होगा।
🎯 Exam Tip: शैथिल्य वक्र की धारणशीलता, निग्राहिता और क्षेत्रफल के महत्व को याद रखें, क्योंकि ये तीनों गुण पदार्थ के विशिष्ट अनुप्रयोगों को निर्धारित करते हैं।
Question 15. एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में से कोण पर स्थित दण्ड चुम्बक पर बल आघूर्ण का व्यंजक ज्ञात करो। यह कब अधिकतम होता है ?
Answer: जब एक दण्ड चुम्बक को एक समान चुम्बकीय क्षेत्र \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) में \( \theta \) कोण पर रखा जाता है, तो उस पर एक बल आघूर्ण (\( \tau \)) कार्य करता है।
**बल आघूर्ण का व्यंजक:**
माना एक दण्ड चुम्बक का ध्रुव सामर्थ्य \( m \) और प्रभावी लम्बाई \( 2l \) है, तो उसका चुम्बकीय आघूर्ण \( \overrightarrow{M} = m(2\overrightarrow{l}) \) होता है।
चुम्बक के उत्तरी ध्रुव पर क्षेत्र की दिशा में एक बल \( mB \) कार्य करेगा और दक्षिणी ध्रुव पर क्षेत्र की विपरीत दिशा में एक समान बल \( mB \) कार्य करेगा। ये दोनों बल एक बलयुग्म (couple) बनाते हैं।
बल आघूर्ण (\( \tau \)) = बल × दोनों बलों की क्रिया रेखाओं के बीच की लम्बवत् दूरी।
चित्र के अनुसार, यदि लम्बवत् दूरी \( NP = 2l \sin \theta \) है, तो:
\( \tau = mB \times (2l \sin \theta) \)
\( \tau = (m \times 2l) B \sin \theta \)
\( \implies \tau = MB \sin \theta \)
सदिश रूप में, यह \( \overrightarrow{\tau} = \overrightarrow{M} \times \overrightarrow{B} \) लिखा जाता है।
**बल आघूर्ण कब अधिकतम होता है?**
बल आघूर्ण का मान \( \tau = MB \sin \theta \) तब अधिकतम होता है जब \( \sin \theta \) का मान अधिकतम हो। \( \sin \theta \) का अधिकतम मान 1 होता है, जो \( \theta = 90^\circ \) पर प्राप्त होता है।
अतः, जब दण्ड चुम्बक को चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् (\( \theta = 90^\circ \)) रखा जाता है, तो उस पर लगने वाला बल आघूर्ण अधिकतम होता है:
\( \tau_{max} = MB \sin 90^\circ = MB (1) \)
\( \implies \tau_{max} = MB \)
यह स्थिति तब होती है जब चुम्बक को क्षेत्र में सर्वाधिक घुमाने की प्रवृत्ति होती है।
In simple words: जब एक चुम्बक को चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर \( \tau = MB \sin \theta \) बल आघूर्ण लगता है। यह बल आघूर्ण सबसे ज़्यादा तब होता है जब चुम्बक क्षेत्र के ठीक लंबवत होता है (\( \theta = 90^\circ \)).
🎯 Exam Tip: बल आघूर्ण का यह व्यंजक चुम्बकीय क्षेत्र में चुम्बकों के व्यवहार को समझने के लिए मौलिक है। विशेष स्थितियों (\( \theta = 0^\circ, 90^\circ, 180^\circ \)) को याद रखना भी महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 12 Physics Chapter 8 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर
RBSE Class 12 Physics Chapter 8 बहुचयनात्मक प्रश्न
Question 1. यदि दो एकांक प्रबलता के चुम्बकीय धुवों के मध्य की दूरी 1m है तो इनके मध्य लगने वाले बल का मान होगा
(अ) \( 4\pi \times 10^{-7}N \)
(ब) \( 4\pi N \)
(स) \( 10^{-7} N \)
(द) \( \frac{4 \pi}{10^{-7}} N \)
Answer: (स) \( 10^{-7} N \)
In simple words: जब दो चुम्बकीय ध्रुवों के बीच की दूरी 1 मीटर होती है और उनकी प्रबलता एकांक होती है, तो उनके बीच लगने वाला बल \( 10^{-7} N \) होता है। यह निर्वात में लगने वाले बल का मूल मान है।
🎯 Exam Tip: यह सूत्र कूलाम्ब के चुम्बकीय बल के नियम का एक विशेष स्थिति है, जिसमें \( \mu_0 / 4\pi \) का मान \( 10^{-7} \) होता है।
Question 2. अतिचालक पदार्थों के लिए चुम्बकीय प्रवृत्ति का मान है
(अ) +1
(ब) -1
(स) शून्य
(द) अनन्त
Answer: (ब) -1
In simple words: अतिचालक पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र को पूरी तरह से बाहर निकाल देते हैं, इसलिए उनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति -1 होती है, जो पूर्ण प्रतिचुम्बकत्व दर्शाती है। यह उन्हें चुम्बकीय क्षेत्र से दूर धकेल देता है।
🎯 Exam Tip: अतिचालकों का पूर्ण प्रतिचुम्बकत्व माइसनर प्रभाव के कारण होता है, जहाँ वे चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं को अपने अंदर से गुजरने नहीं देते।
Question 3. मुक्त आकाश की चुम्बकीय प्रवृत्ति होती है
(अ) +1
(ब) -1
(स) शून्य
(द) अनन्त
Answer: (स) शून्य
In simple words: मुक्त आकाश या निर्वात में कोई पदार्थ नहीं होता जो चुम्बकीय क्षेत्र को प्रभावित कर सके, इसलिए इसकी चुम्बकीय प्रवृत्ति शून्य होती है। यह दर्शाता है कि इसमें कोई चुम्बकत्व नहीं होता है।
🎯 Exam Tip: मुक्त आकाश की चुम्बकीय पारगम्यता \( \mu_0 \) होती है, लेकिन चुम्बकीय प्रवृत्ति (जो पदार्थ के चुम्बकत्व का माप है) शून्य होती है।
Question 4. चुम्बकीय प्रवृत्ति का मान ऋणात्मक एवं अल्प होता है
(अ) लौहचुम्बकीय पदार्थों के लिए
(ब) अनुचुम्बकीय पदार्थों के लिए
(स) प्रतिचुम्बकीय पदार्थों के लिए
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (स) प्रतिचुम्बकीय पदार्थों के लिए
In simple words: प्रतिचुम्बकीय पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र से बहुत कमजोर रूप से प्रतिकर्षित होते हैं, इसलिए उनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति ऋणात्मक और बहुत कम होती है। यह एक पहचान है।
🎯 Exam Tip: प्रतिचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति तापमान पर निर्भर नहीं करती है और हमेशा ऋणात्मक होती है।
Question 5. यदि किसी पदार्थ की आपेक्षिक पारगम्यता 1.00001 है तो वो पदार्थ होगा
(अ) लौहचुम्बकीय
(ब) अनुचुम्बकीय
(स) प्रतिचुम्बकीय
(द) कोई नहीं
Answer: (ब) अनुचुम्बकीय
In simple words: चूंकि आपेक्षिक पारगम्यता (relative permeability) 1 से थोड़ी अधिक है (1.00001), यह दर्शाता है कि पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र को थोड़ा आकर्षित करता है, जो अनुचुम्बकीय पदार्थों का गुण है। यह उनकी एक छोटी विशेषता है।
🎯 Exam Tip: अनुचुम्बकीय पदार्थों के लिए आपेक्षिक पारगम्यता \( \mu_r > 1 \) होती है, जबकि प्रतिचुम्बकीय पदार्थों के लिए \( \mu_r < 1 \) और लौहचुम्बकीय पदार्थों के लिए \( \mu_r >> 1 \) होती है।
Question 6. चुम्बकीय आघूर्ण का मात्रक है
(अ) Wb
(ब) Wb/m²
(स) A/m
(द) Am²
Answer: (द) Am²
In simple words: चुम्बकीय आघूर्ण को एम्पीयर-मीटर वर्ग (Am²) में मापा जाता है, क्योंकि यह एक चुम्बक की प्रबलता और उसके प्रभावी क्षेत्रफल का गुणनफल होता है। यह इसकी इकाई है।
🎯 Exam Tip: चुम्बकीय आघूर्ण एक सदिश राशि है जिसकी दिशा दक्षिण ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर होती है।
Question 7. Wb × A/m बराबर होता है
(अ) J
(ब) N
(स) H
(द) W
Answer: (ब) N
In simple words: वेबर (Wb) चुम्बकीय फ्लक्स की इकाई है और एम्पीयर प्रति मीटर (A/m) चुम्बकन क्षेत्र की इकाई है। इनका गुणनफल न्यूटन (N) के बराबर होता है, जो बल की इकाई है।
🎯 Exam Tip: यह संबंध चुम्बकीय बल और क्षेत्र के बीच के संबंध को दर्शाता है, जहाँ बल का मात्रक न्यूटन है।
Question 8. चुम्बकीय क्षेत्र निम्न में से किसमें अन्योन्य क्रिया नहीं करता
(अ) चुम्बक से
(ब) त्वरित चुम्बक से
(स) स्थिर आवेश से
(द) चल विद्युत आवेश से
Answer: (स) स्थिर आवेश से
In simple words: एक चुम्बकीय क्षेत्र केवल गतिमान आवेशों पर बल लगाता है। इसलिए, यह स्थिर आवेशों के साथ कोई बल संबंधी क्रिया नहीं करता है।
🎯 Exam Tip: स्थिर आवेश केवल विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करते हैं और केवल विद्युत क्षेत्र से ही प्रभावित होते हैं।
Question 9. प्रतिचुम्बकत्व का कारण है
(अ) इलेक्ट्रॉनों की कक्षीय गति
(ब) इलेक्ट्रॉनों की चक्रण गति
(स) प्रतिचुम्बकीय पदार्थों का चुम्बकीय आघूर्ण होता है
(द) कोई नहीं
Answer: (अ) इलेक्ट्रॉनों की कक्षीय गति
In simple words: प्रतिचुम्बकत्व तब होता है जब एक बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र इलेक्ट्रॉनों की कक्षीय गति को बदल देता है, जिससे एक प्रेरित चुम्बकीय आघूर्ण उत्पन्न होता है जो बाहरी क्षेत्र का विरोध करता है। यह मौलिक कारण है।
🎯 Exam Tip: प्रतिचुम्बकत्व एक सार्वभौमिक गुण है जो सभी पदार्थों में मौजूद होता है, लेकिन यह केवल तभी दिखाई देता है जब अन्य चुम्बकीय प्रभाव अनुपस्थित हों।
Question 10. प्रतिचुम्बकीय पदार्थों का चुम्बकीय आघूर्ण होता है
(अ) अनन्त
(ब) शून्य
(स) 100 Am
(द) कोई नहीं
Answer: (ब) शून्य
In simple words: प्रतिचुम्बकीय पदार्थों में, इलेक्ट्रॉनों की गति के कारण उत्पन्न सभी चुम्बकीय आघूर्ण एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं, जिससे कुल स्थायी चुम्बकीय आघूर्ण शून्य हो जाता है।
🎯 Exam Tip: बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र की अनुपस्थिति में प्रतिचुम्बकीय पदार्थों का कोई नेट चुम्बकीय आघूर्ण नहीं होता है।
Question 11. लौहचुम्बकीय पदार्थों की आपेक्षिक पारगम्यता \( \mu_r \) का मान होता है
(अ) \( \mu_r > 1 \)
(ब) \( \mu_r >> 1 \)
(स) \( \mu_r = 1 \)
(द) \( \mu_r = 0 \)
Answer: (ब) \( \mu_r >> 1 \)
In simple words: लौहचुम्बकीय पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र को बहुत अधिक आकर्षित करते हैं, इसलिए उनकी आपेक्षिक पारगम्यता 1 से बहुत बड़ी होती है। यह उनकी तीव्र चुम्बकीय प्रतिक्रिया को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: लौहचुम्बकीय पदार्थों का उपयोग ट्रांसफॉर्मर और स्थायी चुम्बक बनाने में किया जाता है, क्योंकि उनकी उच्च पारगम्यता होती है।
Question 12. पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्वाधर घटक शून्य होता है
(अ) चुम्बकीय ध्रुव पर
(ब) भौगोलिक ध्रुव पर
(स) चुम्बकीय याम्योत्तर पर
(द) कोई नहीं
Answer: (द) कोई नहीं
In simple words: पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्वाधर घटक चुम्बकीय विषुवत रेखा पर शून्य होता है, न कि चुम्बकीय ध्रुव पर। ध्रुवों पर यह अधिकतम होता है।
🎯 Exam Tip: चुम्बकीय विषुवत रेखा पर नति कोण शून्य होता है, इसलिए ऊर्ध्वाधर घटक शून्य होता है, जबकि चुम्बकीय ध्रुवों पर नति कोण 90° होता है।
Question 13. किसी पदार्थ के शैथिल्य पाश का क्षेत्रफल प्रदर्शित करता है
(अ) पदार्थ को इकाई चक्र में चुम्बकित करने पर ऊर्जा हानि
(ब) पदार्थ के इकाई आयतन को इकाई चक्र में चुम्बकित करने पर ऊर्जा हानि
(स) पदार्थ के इकाई आयतन को चुम्बकित करने पर ऊर्जा हानि
(द) पदार्थ को चुम्बकित करने पर ऊर्जा हानि
Answer: (ब) पदार्थ के इकाई आयतन को इकाई चक्र में चुम्बकित करने पर ऊर्जा हानि
In simple words: चुम्बकीय शैथिल्य वक्र का क्षेत्रफल यह दर्शाता है कि पदार्थ के एक इकाई आयतन को एक पूर्ण चुम्बकन चक्र से गुजारने में कितनी ऊर्जा व्यय होती है। यह ऊर्जा हानि के बराबर है।
🎯 Exam Tip: कम शैथिल्य हानि वाले पदार्थों का उपयोग ट्रांसफॉर्मर के कोर बनाने में किया जाता है, जबकि उच्च शैथिल्य हानि वाले पदार्थों का उपयोग स्थायी चुम्बक बनाने में किया जाता है।
Question 14. उस स्थान पर नति कोण का मान क्या होगा जहाँ पर पृथ्वी के क्षैतिज तथा ऊर्ध्वाधर घटक समान हैं ?
(अ) 0°
(ब) 30°
(स) 45°
(द) 90°
Answer: (स) 45°
In simple words: नति कोण वह कोण होता है जो पृथ्वी के कुल चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा क्षैतिज घटक के साथ बनाया जाता है। यदि क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर घटक समान हों, तो नति कोण 45° होगा, क्योंकि \( \tan 45^\circ = 1 \) होता है।
🎯 Exam Tip: नति कोण \( \theta \) का मान \( \tan \theta = V/H \) से ज्ञात किया जाता है, जहाँ V ऊर्ध्वाधर घटक और H क्षैतिज घटक है।
Question 15. क्यूरी ताप पर लौह चुम्बकीय पदार्थ हो जाता है
(अ) अचुम्बकीय
(ब) प्रतिचुम्बकीय
(स) अनुचुम्बकीय
(द) अधिक लौह चुम्बकीय
Answer: (स) अनुचुम्बकीय
In simple words: क्यूरी ताप से ऊपर गरम करने पर लौहचुम्बकीय पदार्थ के डोमेन नष्ट हो जाते हैं और वह अपनी लौहचुम्बकीय प्रकृति खोकर अनुचुम्बकीय हो जाता है।
🎯 Exam Tip: क्यूरी ताप प्रत्येक लौहचुम्बकीय पदार्थ के लिए एक निश्चित तापमान होता है। इस तापमान से ऊपर वह पदार्थ अनुचुम्बकीय व्यवहार प्रदर्शित करता है।
RBSE Class 12 Physics Chapter 8 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. एक चुम्बकीय सुई जो ऊर्ध्वाधर तल में घूमने के लिए स्वतंत्र है, यदि भू-चुम्बकीय उत्तर या दक्षिण ध्रुव पर रखी है तो यह किस दिशा में संकेत करेगी ?
Answer: यदि एक चुम्बकीय सुई को भू-चुम्बकीय उत्तर या दक्षिण ध्रुव पर रखा जाए, तो यह ऊर्ध्वाधर दिशा में संकेत करेगी। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र ध्रुवों पर ऊर्ध्वाधर होता है, और सुई स्वयं को क्षेत्र के समानांतर संरेखित करती है। ध्रुवों पर नति कोण 90° होता है, जिसका अर्थ है कि चुम्बकीय सुई पूरी तरह से खड़ी हो जाएगी।
In simple words: चुम्बकीय ध्रुवों पर सुई सीधी ऊपर या नीचे की ओर इशारा करेगी, क्योंकि वहाँ पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र सीधा होता है।
🎯 Exam Tip: ध्रुवों पर नति कोण 90° होता है, जिसका मतलब है कि चुम्बकीय सुई का अक्ष पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के साथ ऊर्ध्वाधर होगा।
Question 2. चुम्बकीय पदार्थ के प्रकार का नाम लिखो, जिसका व्यवहार साधारण ताप में परिवर्तन पर निर्भर नहीं करता।
Answer: प्रतिचुम्बकीय पदार्थ वे होते हैं जिनका चुम्बकीय व्यवहार साधारण ताप में परिवर्तन पर निर्भर नहीं करता है। उनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति तापमान से अप्रभावित रहती है। यह उनका एक स्थिर गुण है।
In simple words: प्रतिचुम्बकीय पदार्थों का चुम्बकीय व्यवहार तापमान बदलने पर नहीं बदलता है।
🎯 Exam Tip: प्रतिचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति हमेशा ऋणात्मक और स्थिर रहती है, जो तापमान से स्वतंत्र होती है।
Question 3. चुम्बकीय विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर नति कोण में किस प्रकार परिवर्तन होता है ?
Answer: चुम्बकीय विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर नति कोण का मान 0° से 90° के बीच बढ़ता है। चुम्बकीय विषुवत रेखा पर नति कोण का मान 0° होता है (सुई क्षैतिज रहती है), जबकि ध्रुवों पर यह 90° होता है (सुई ऊर्ध्वाधर हो जाती है)। यह परिवर्तन निरंतर होता है।
In simple words: नति कोण विषुवत रेखा पर 0° से बढ़कर ध्रुवों पर 90° हो जाता है।
🎯 Exam Tip: नति कोण उस स्थान पर पृथ्वी के कुल चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को दर्शाता है, और यह भूमध्य रेखा पर क्षैतिज और ध्रुवों पर ऊर्ध्वाधर होता है।
Question 4. धारणशीलता किसे कहते हैं ?
Answer: धारणशीलता पदार्थ का वह गुण है जिसके कारण चुम्बकन क्षेत्र (H) का मान शून्य करने पर भी पदार्थ में चुम्बकत्व शेष बना रहता है। यह एक अवशिष्ट चुम्बकत्व है।
In simple words: धारणशीलता का मतलब है कि जब बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र हटा लिया जाता है, तब भी पदार्थ में कितना चुम्बकत्व बचा रहता है।
🎯 Exam Tip: स्थायी चुम्बक बनाने के लिए उच्च धारणशीलता वाले पदार्थों का उपयोग किया जाता है।
Question 6. अनुचुम्बकीय पदार्थों के दो उदाहरण लिखिए।
Answer:
1. कॉपर क्लोराइड (\( CuCl_2 \))
2. ऑक्सीजन (\( O_2 \))
In simple words: कॉपर क्लोराइड और ऑक्सीजन अनुचुम्बकीय पदार्थ के दो उदाहरण हैं, जो चुम्बकीय क्षेत्र से हल्के से आकर्षित होते हैं।
🎯 Exam Tip: अनुचुम्बकीय पदार्थों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं जो बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र में संरेखित होते हैं।
Question 7. चुम्बकीय याम्योत्तर किसे कहते हैं ?
Answer: चुम्बकीय याम्योत्तर किसी स्थान पर छड़ चुम्बक के चुम्बकीय अक्ष के लम्बवत् गुजरने वाला ऊर्ध्वाधर तल होता है। यह उस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को दर्शाता है।
In simple words: चुम्बकीय याम्योत्तर वह काल्पनिक ऊर्ध्वाधर तल है जो एक स्वतंत्र रूप से निलंबित चुम्बक की धुरी से गुजरता है।
🎯 Exam Tip: यह भौगोलिक याम्योत्तर से भिन्न होता है, और इन दोनों के बीच के कोण को दिक्पात कोण कहते हैं।
Question 8. पृथ्वी पर नति कोण के मान 0° और 90° कहाँ होते हैं ?
Answer: पृथ्वी पर नति कोण का मान 0° चुम्बकीय विषुवत रेखा (निरक्ष) पर होता है। नति कोण का मान 90° चुम्बकीय ध्रुवों पर होता है। ये दोनों विशेष बिंदु हैं जहाँ चुम्बकीय सुई का व्यवहार स्पष्ट होता है।
In simple words: नति कोण 0° चुम्बकीय विषुवत रेखा पर और 90° चुम्बकीय ध्रुवों पर होता है।
🎯 Exam Tip: नति कोण पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के ऊर्ध्वाधर झुकाव को दर्शाता है।
Question 9. माध्यम की चुम्बकीय पारगम्यता तथा चुम्बकीय प्रवृत्ति में सम्बन्ध लिखो।
Answer: माध्यम की आपेक्षिक चुम्बकीय पारगम्यता (\( \mu_r \)) और चुम्बकीय प्रवृत्ति (\( \chi_m \)) के बीच संबंध इस प्रकार है:
\( \mu_r = (1 + \chi_m) \)
यहां \( \mu_r \) आपेक्षिक चुम्बकीय पारगम्यता है, जो पदार्थ के माध्यम में चुम्बकीय क्षेत्र को कितनी अच्छी तरह पार होने देती है, और \( \chi_m \) चुम्बकीय प्रवृत्ति है, जो पदार्थ के चुम्बकत्व के गुण का माप है।
In simple words: किसी माध्यम की आपेक्षिक चुम्बकीय पारगम्यता 1 और उसकी चुम्बकीय प्रवृत्ति के जोड़ के बराबर होती है।
🎯 Exam Tip: यह संबंध चुम्बकीय पदार्थों के गुणों का विश्लेषण करने में महत्वपूर्ण है।
Question 10. ध्रुव सामर्थ्य का मात्रक लिखो।
Answer: ध्रुव सामर्थ्य का मात्रक एम्पीयर-मीटर (A-m) है। यह चुम्बकीय ध्रुव की प्रबलता को मापने के लिए उपयोग किया जाता है।
In simple words: ध्रुव सामर्थ्य को एम्पीयर-मीटर (A-m) में मापा जाता है।
🎯 Exam Tip: ध्रुव सामर्थ्य एक अदिश राशि है, जबकि चुम्बकीय आघूर्ण एक सदिश राशि है।
Question 11. एक दण्ड चुम्बक जिसका चुम्बकीय आघूर्ण M है, उसे चुम्बकीय क्षेत्र B में 90° पर रखा गया है, तो उसे 180° पर घुमाने के लिए कितना कार्य करना पड़ेगा ?
Answer: चुम्बकीय क्षेत्र में एक दण्ड चुम्बक को घुमाने में किया गया कार्य निम्न सूत्र से दिया जाता है:
\( W = -MB (\cos \theta_2 - \cos \theta_1) \)
यहाँ, प्रारंभिक कोण \( \theta_1 = 90^\circ \) (क्योंकि यह 90° पर रखा गया है) और अंतिम कोण \( \theta_2 = 180^\circ \) है।
\( W = -MB (\cos 180^\circ - \cos 90^\circ) \)
\( W = -MB (-1 - 0) \)
\( W = MB \)
इसलिए, चुम्बक को 90° से 180° तक घुमाने में \( MB \) के बराबर कार्य करना पड़ेगा। यह ऊर्जा अधिकतम अस्थायी अवस्था में है।
In simple words: चुम्बक को 90° से 180° तक घुमाने के लिए \( MB \) के बराबर ऊर्जा लगेगी।
🎯 Exam Tip: कार्य के सूत्र में कोण हमेशा चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा के सापेक्ष लिए जाते हैं।
Question 12. चुम्बकीय शैथिल्य क्या हैं ?
Answer: चुम्बकीय शैथिल्य (Magnetic Hysteresis) लौहचुम्बकीय पदार्थों का वह गुण है जिसमें चुम्बकन (B) चुम्बकन क्षेत्र (H) से पीछे रहता है। इसका मतलब है कि जब बाहरी चुम्बकन क्षेत्र बढ़ाया या घटाया जाता है, तो पदार्थ का चुम्बकत्व हमेशा H के मान को तुरंत फॉलो नहीं करता है, बल्कि थोड़ा पिछड़ जाता है। यह डोमेन के चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा के संरक्षित होने के कारण होता है।
In simple words: चुम्बकीय शैथिल्य का मतलब है कि पदार्थ का चुम्बकत्व बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र के बदलने पर थोड़ा पीछे रह जाता है।
🎯 Exam Tip: शैथिल्य के कारण ऊर्जा हानि होती है, जिसका उपयोग स्थायी चुम्बक और ट्रांसफॉर्मर के कोर के चयन में किया जाता है।
Question 13. छड़ चुम्बक के मध्य बिन्दु से अक्षीय तथा निरक्षीय स्थिति में समान दूरी होने पर स्थित बिन्दुओं पर चुम्बकीय क्षेत्र के मानों में क्या अनुपात होता है ?
Answer: एक छड़ चुम्बक के लिए, अक्षीय स्थिति में चुम्बकीय क्षेत्र (\( B_1 \)) और निरक्षीय स्थिति में चुम्बकीय क्षेत्र (\( B_2 \)) का अनुपात 2:1 होता है, जब दोनों बिन्दु चुम्बक के मध्य बिन्दु से समान दूरी पर हों।
अक्षीय स्थिति में चुम्बकीय क्षेत्र:
\( B_1 = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2M}{r^3} \)
निरक्षीय स्थिति में चुम्बकीय क्षेत्र:
\( B_2 = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{M}{r^3} \)
अतः, इनका अनुपात है:
\( \frac{B_1}{B_2} = \frac{\frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2M}{r^3}}{\frac{\mu_0}{4\pi} \frac{M}{r^3}} = 2 \)
\( \implies B_1 : B_2 = 2 : 1 \)
In simple words: चुम्बक से समान दूरी पर अक्षीय क्षेत्र निरक्षीय क्षेत्र का दोगुना होता है, इसलिए अनुपात 2:1 होता है।
🎯 Exam Tip: यह सूत्र एक छोटे दण्ड चुम्बक के लिए मान्य है, जहाँ दूरी \( r \) चुम्बक की लम्बाई से बहुत अधिक होती है।
Question 14. उस स्थान पर नति कोण का मान क्या होगा जहाँ पर पृथ्वी के क्षैतिज तथा ऊर्ध्वाधर घटक समान हैं ?
Answer: नति कोण (\( \theta \)) को पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के ऊर्ध्वाधर घटक (V) और क्षैतिज घटक (H) के अनुपात से परिभाषित किया जाता है:
\( \tan \theta = \frac{V}{H} \)
यदि क्षैतिज घटक (\( H \)) तथा ऊर्ध्वाधर घटक (\( V \)) समान हैं, अर्थात \( V = H \), तो:
\( \tan \theta = \frac{H}{H} = 1 \)
जिसका अर्थ है:
\( \tan \theta = \tan 45^\circ \)
\( \implies \theta = 45^\circ \)
इसलिए, उस स्थान पर नति कोण का मान 45° होगा।
In simple words: जब पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर हिस्से बराबर होते हैं, तो नति कोण 45° होता है।
🎯 Exam Tip: यह एक विशेष स्थिति है जो दर्शाता है कि उस स्थान पर पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर दिशाओं में बराबर रूप से बंटा हुआ है।
RBSE Class 12 Physics Chapter 8 लघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. एक दण्ड चुम्बक किसी एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में इस प्रकार रखी है कि इसका चुम्बकीय आघूर्ण, \( \overrightarrow{M} \) चुम्बकीय क्षेत्र \( \overrightarrow{B} \) की दिशा से \( \theta \) कोण बनाता है तो स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक ज्ञात करो।
Answer: जब एक दण्ड चुम्बक जिसका चुम्बकीय आघूर्ण \( \overrightarrow{M} \) है, एक समान चुम्बकीय क्षेत्र \( \overrightarrow{B} \) में रखा जाता है और \( \overrightarrow{M} \) क्षेत्र \( \overrightarrow{B} \) से \( \theta \) कोण बनाता है, तो इस पर एक बल आघूर्ण (\( \tau \)) लगता है:
\( \tau = MB \sin \theta \)
चुम्बक को \( d\theta \) कोण से घुमाने में किया गया कार्य \( dW = \tau d\theta \) होता है।
\( dW = MB \sin \theta d\theta \)
दण्ड चुम्बक की स्थितिज ऊर्जा (\( U \)) को 90° की स्थिति से किसी कोण \( \theta \) तक घुमाने में किए गए कार्य के रूप में परिभाषित किया जाता है, जहाँ 90° पर स्थितिज ऊर्जा शून्य मानी जाती है।
\( U = \int_{90^\circ}^{\theta} \tau d\theta = \int_{90^\circ}^{\theta} MB \sin \theta d\theta \)
\( U = MB [-\cos \theta]_{90^\circ}^{\theta} \)
\( U = MB (-\cos \theta - (-\cos 90^\circ)) \)
\( U = MB (-\cos \theta - 0) \)
\( \implies U = -MB \cos \theta \)
यह दण्ड चुम्बक की स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक है। यह ऊर्जा चुम्बकीय क्षेत्र के साथ संरेखण की प्रवृत्ति को दर्शाती है।
In simple words: चुम्बकीय क्षेत्र में एक चुम्बक की स्थितिज ऊर्जा \( -MB \cos \theta \) होती है, जहाँ \( M \) चुम्बकीय आघूर्ण, \( B \) क्षेत्र और \( \theta \) उनके बीच का कोण है।
🎯 Exam Tip: स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम होती है जब चुम्बक क्षेत्र के समानांतर (\( \theta = 0^\circ \)) होता है, और अधिकतम होती है जब यह क्षेत्र के प्रति-समानांतर (\( \theta = 180^\circ \)) होता है।
Question 2. अनुचुम्बकीय तथा प्रतिचुम्बकीय पदार्थों की छड़ों की। किस प्रकार पहचान करेंगे ?
Answer: अनुचुम्बकीय और प्रतिचुम्बकीय पदार्थों की छड़ों की पहचान उनके चुम्बकीय क्षेत्र के प्रति व्यवहार के आधार पर की जा सकती है:
1. अनुचुम्बकीय पदार्थ: एक अनुचुम्बकीय पदार्थ की छड़ को एक असमान चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर, यह दुर्बल क्षेत्र से प्रबल क्षेत्र की ओर हल्की आकर्षित होती है। यह स्वयं को बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र के समानांतर संरेखित करने की कोशिश करेगी।
2. प्रतिचुम्बकीय पदार्थ: एक प्रतिचुम्बकीय पदार्थ की छड़ को एक असमान चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर, यह प्रबल क्षेत्र से दुर्बल क्षेत्र की ओर हल्की प्रतिकर्षित होती है। यह स्वयं को बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत संरेखित करने की कोशिश करेगी।
इस प्रकार, चुम्बकीय क्षेत्र में उनके संरेखण या गति को देखकर इन पदार्थों की पहचान की जा सकती है।
In simple words: अनुचुम्बकीय छड़ चुम्बक की ओर आकर्षित होती है, जबकि प्रतिचुम्बकीय छड़ चुम्बक से दूर प्रतिकर्षित होती है।
🎯 Exam Tip: यह प्रयोग आसानी से एक शक्तिशाली चुम्बक और पतली, हल्की छड़ों का उपयोग करके किया जा सकता है।
Question 3. किसी दण्ड चुम्बक के लिए दो उदासीन बिन्दु क्यों प्राप्त होते हैं ? क्या एक उदासीन बिन्दु भी प्राप्त हो सकता है ? क्यों ?
Answer: एक दण्ड चुम्बक के लिए दो उदासीन बिन्दु प्राप्त होते हैं क्योंकि दण्ड चुम्बक का चुम्बकीय क्षेत्र दूरी के साथ बदलता है, और ये बिन्दु वहाँ होते हैं जहाँ दण्ड चुम्बक का चुम्बकीय क्षेत्र पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक के बराबर और विपरीत दिशा में होता है। ऐसे दो स्थान होते हैं जहाँ यह शर्त पूरी होती है।
हाँ, एक उदासीन बिन्दु भी प्राप्त हो सकता है। यदि दण्ड चुम्बक के उत्तरी ध्रुव या दक्षिणी ध्रुव को नीचे रखकर ऊर्ध्वाधर स्थिति में रखा जाए, तो केवल एक उदासीन बिन्दु प्राप्त होगा। इस स्थिति में उदासीन बिन्दु उत्तरी ध्रुव से ठीक दक्षिण की ओर या दक्षिणी ध्रुव से ठीक उत्तर की ओर होता है, जहाँ चुम्बक का क्षेत्र पृथ्वी के क्षैतिज क्षेत्र को रद्द कर देता है।
In simple words: दो उदासीन बिंदु तब मिलते हैं जब चुम्बक का बल पृथ्वी के बल को दो जगह रद्द करता है। एक उदासीन बिंदु तब मिल सकता है जब चुम्बक को सीधा खड़ा रखा जाए, जिससे बल एक ही जगह रद्द हो।
🎯 Exam Tip: उदासीन बिन्दु वे स्थान होते हैं जहाँ चुम्बकीय क्षेत्र की परिणामी तीव्रता शून्य होती है, और यह पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के साथ चुम्बक के क्षेत्र के संयोजन पर निर्भर करता है।
Question 4. विद्युत चुम्बक बनाने में नर्म लोहे का उपयोग क्यों किया जाता है ?
Answer: विद्युत चुम्बक बनाने में नर्म लोहे का उपयोग किया जाता है क्योंकि इसकी चुम्बकीय प्रवृत्ति अधिक और धारणशीलता कम होती है। उच्च चुम्बकीय प्रवृत्ति के कारण यह कम बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र से भी आसानी से चुम्बकित हो जाता है। कम धारणशीलता के कारण, जब बाहरी चुम्बकन क्षेत्र हटा दिया जाता है, तो यह आसानी से अपना चुम्बकत्व खो देता है। यह विशेषता विद्युत चुम्बकों के लिए महत्वपूर्ण है जिन्हें बार-बार चालू और बंद करना होता है।
In simple words: नर्म लोहा आसानी से चुम्बक बन जाता है और अपना चुम्बकत्व आसानी से खो भी देता है, जो विद्युत चुम्बकों के लिए अच्छा है।
🎯 Exam Tip: नर्म लोहे का शैथिल्य पाश पतला होता है, जिसका अर्थ है कि चुम्बकन और विचुम्बकन चक्र में कम ऊर्जा हानि होती है।
Question 5. एक दण्ड चुम्बक एक समान चुम्बकीय क्षेत्र \( \overrightarrow{B} \) के समान्तर स्थित है। इसका चुम्बकीय आघूर्ण \( \overrightarrow{M} \) है। इसके चुम्बकीय आघूर्ण की चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत करने में कितना कार्य करना पड़ेगा?
Answer: जब एक दण्ड चुम्बक जिसका चुम्बकीय आघूर्ण \( \overrightarrow{M} \) है, एक समान चुम्बकीय क्षेत्र \( \overrightarrow{B} \) के समान्तर स्थित होता है, तो प्रारंभिक कोण \( \theta_1 = 0^\circ \) होता है।
चुम्बकीय आघूर्ण को चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत करने के लिए, अंतिम कोण \( \theta_2 = 90^\circ \) होगा।
इस प्रक्रिया में किया गया कार्य निम्न सूत्र से दिया जाता है:
\( W = -MB (\cos \theta_2 - \cos \theta_1) \)
\( W = -MB (\cos 90^\circ - \cos 0^\circ) \)
\( W = -MB (0 - 1) \)
\( W = MB \)
अतः, चुम्बकीय आघूर्ण को चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत करने में \( MB \) के बराबर कार्य करना पड़ेगा। यह इस स्थिति में अर्जित अधिकतम संभावित ऊर्जा के बराबर है।
In simple words: जब एक चुम्बक क्षेत्र के समानांतर हो, तो उसे क्षेत्र के लम्बवत करने के लिए \( MB \) के बराबर ऊर्जा लगती है।
🎯 Exam Tip: यह कार्य चुम्बक की स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि के बराबर होता है जब यह सबसे स्थिर स्थिति से लम्बवत स्थिति में जाता है।
Question 6. दिक्पात कोण तथा नति कोण को परिभाषित करो।
Answer: दिक्पात कोण और नति कोण पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के महत्वपूर्ण अवयव हैं:
1. दिक्पात कोण (Angle of Declination): यह किसी स्थान पर चुम्बकीय याम्योत्तर (magnetic meridian) और भौगोलिक याम्योत्तर (geographical meridian) के बीच का न्यून कोण होता है। यह पृथ्वी के चुम्बकीय उत्तरी ध्रुव और भौगोलिक उत्तरी ध्रुव के बीच के अंतर को दर्शाता है।
2. नति कोण (Angle of Dip): यह किसी स्थान पर स्वतंत्र रूप से लटकाई गई चुम्बकीय सुई का अक्ष क्षैतिज दिशा के साथ जो कोण बनाता है, उसे नति कोण कहते हैं। यह पृथ्वी के कुल चुम्बकीय क्षेत्र के ऊर्ध्वाधर झुकाव को दर्शाता है।
ये दोनों कोण पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को पूरी तरह से परिभाषित करने में मदद करते हैं।
In simple words: दिक्पात कोण भौगोलिक उत्तर और चुम्बकीय उत्तर के बीच का कोण है, जबकि नति कोण चुम्बकीय सुई का धरती के साथ झुकाव है।
🎯 Exam Tip: दिक्पात कोण देशांतर के साथ बदलता है, जबकि नति कोण अक्षांश के साथ बदलता है (विषुवत रेखा पर 0° और ध्रुवों पर 90°)।
Question 7. क्यूरी-वाइस नियम लिखो तथा लोहे के लिए क्यूरी ताप का मान लिखो।
Answer: क्यूरी-वाइस नियम लौहचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति की तापमान पर निर्भरता को दर्शाता है। इस नियम के अनुसार, क्यूरी ताप (\( T_C \)) से ऊपर अनुचुम्बकीय अवस्था में लौहचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति (\( \chi_m \)) निम्न सूत्र द्वारा दी जाती है:
\( \chi_m = \frac{C}{T-T_C} \)
यहाँ, \( C \) क्यूरी नियतांक है और \( T \) पूर्ण तापमान है। यह नियम बताता है कि क्यूरी ताप से ऊपर पदार्थ अनुचुम्बकीय व्यवहार करता है और इसकी प्रवृत्ति तापमान बढ़ने पर घटती है। लोहे के लिए क्यूरी ताप का मान लगभग 1043 K (या 770°C) होता है।
In simple words: क्यूरी-वाइस नियम बताता है कि क्यूरी ताप से ऊपर, लौहचुम्बकीय पदार्थ की चुम्बकीय प्रवृत्ति तापमान पर निर्भर करती है। लोहे का क्यूरी ताप 1043 K है।
🎯 Exam Tip: क्यूरी ताप वह तापमान है जिस पर लौहचुम्बकीय पदार्थ अपनी लौहचुम्बकीय विशेषताओं को खोकर अनुचुम्बकीय बन जाते हैं।
Question 8. चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की चार विशेषताएँ लिखो।
Answer: चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की चार मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. दिशा: चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं के किसी भी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा दर्शाती है।
2. बंद वक्र: ये रेखाएँ चुम्बक के उत्तरी ध्रुव से निकलकर दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश करती हैं और चुम्बक के अंदर दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर वापस आकर बंद वक्र बनाती हैं।
3. कभी प्रतिच्छेद नहीं करती: दो चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी एक-दूसरे को नहीं काटती हैं। यदि वे काटतीं, तो प्रतिच्छेद बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ होतीं, जो असंभव है।
4. सघनता: जिस स्थान पर चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ सघन होती हैं, वहाँ चुम्बकीय क्षेत्र प्रबल होता है। इसके विपरीत, जहाँ रेखाएँ विरल होती हैं, वहाँ क्षेत्र कमजोर होता है।
In simple words: चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ दिशा बताती हैं, बंद लूप बनाती हैं, कभी नहीं काटतीं, और जहाँ घनी होती हैं वहाँ क्षेत्र मजबूत होता है।
🎯 Exam Tip: इन विशेषताओं का उपयोग चुम्बकीय क्षेत्र की कल्पना और विश्लेषण के लिए किया जाता है, जो विद्युत चुम्बकत्व के मूल सिद्धांतों में से एक है।
Question 9. प्रतिचुम्बकीय, अनुचुम्बकीय तथा लौहचुम्बकीय पदार्थों का व्यवहार कैसा होता है ?
Answer: प्रतिचुम्बकीय, अनुचुम्बकीय और लौहचुम्बकीय पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र के प्रति अलग-अलग व्यवहार प्रदर्शित करते हैं:
1. प्रतिचुम्बकीय पदार्थ: ये पदार्थ बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र से दुर्बल रूप से प्रतिकर्षित होते हैं। इनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति ऋणात्मक और तापमान से स्वतंत्र होती है। उदाहरण: ताँबा, बिस्मथ।
2. अनुचुम्बकीय पदार्थ: ये पदार्थ बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र से दुर्बल रूप से आकर्षित होते हैं। इनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति धनात्मक और तापमान के व्युत्क्रमानुपाती होती है (क्यूरी का नियम)। उदाहरण: एल्यूमीनियम, ऑक्सीजन।
3. लौहचुम्बकीय पदार्थ: ये पदार्थ बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र से अत्यधिक प्रबल रूप से आकर्षित होते हैं। इनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति धनात्मक और बहुत अधिक होती है, तथा ये क्यूरी ताप से ऊपर अनुचुम्बकीय बन जाते हैं। उदाहरण: लोहा, निकेल, कोबाल्ट।
इन विभिन्न व्यवहारों के कारण इन पदार्थों का उपयोग विभिन्न चुम्बकीय अनुप्रयोगों में होता है।
In simple words: प्रतिचुम्बकीय पदार्थ क्षेत्र से दूर भागते हैं, अनुचुम्बकीय पदार्थ थोड़ा आकर्षित होते हैं, और लौहचुम्बकीय पदार्थ बहुत जोर से आकर्षित होते हैं।
🎯 Exam Tip: इन तीनों प्रकार के पदार्थों के व्यवहार में मुख्य अंतर उनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति के मान और तापमान पर उनकी निर्भरता में निहित है।
Question 10. चुम्बकत्व में गाउस का नियम क्या है ? यह क्या प्रदर्शित करता है ?
Answer: चुम्बकत्व में गाउस का नियम बताता है कि किसी भी बंद सतह से गुजरने वाला कुल चुम्बकीय फ्लक्स हमेशा शून्य होता है। इसे गणितीय रूप से इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:
\( \oint_S \overrightarrow{B} \cdot d\overrightarrow{S} = 0 \)
यह नियम प्रदर्शित करता है कि एकल चुम्बकीय ध्रुव (जैसे अकेला उत्तरी ध्रुव या दक्षिणी ध्रुव) का कोई अस्तित्व नहीं होता है। चुम्बक हमेशा युग्मों (उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव) में मौजूद होते हैं, जिन्हें 'चुम्बकीय द्विध्रुव' कहा जाता है। इसलिए, जितनी चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ एक बंद सतह में प्रवेश करती हैं, उतनी ही उससे बाहर निकलती हैं, जिससे शुद्ध फ्लक्स शून्य हो जाता है।
In simple words: चुम्बकत्व का गाउस नियम कहता है कि किसी भी बंद जगह से निकलने वाला कुल चुम्बकीय बल हमेशा शून्य होता है, क्योंकि चुम्बक के टुकड़े करने पर भी हमेशा उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव साथ रहते हैं।
🎯 Exam Tip: यह नियम इस बात पर जोर देता है कि चुम्बकीय मोनोपोल संभव नहीं हैं, जो इलेक्ट्रोस्टैटिक्स में गाउस के नियम से भिन्न है।
Question 11. चुम्बकीय रेखाएँ बंद वक्र बनाती हैं। क्यों ?
Answer: चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ बंद वक्र बनाती हैं क्योंकि वे हमेशा उत्तरी ध्रुव से निकलकर दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश करती हैं, और चुम्बक के अंदर दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर जाती हैं। यह एक निरंतर पथ बनाता है जिसमें रेखाएँ टूटती नहीं हैं। इस बंद लूप प्रकृति का तात्पर्य है कि चुम्बकीय मोनोपोल मौजूद नहीं हो सकते। यदि चुम्बकीय रेखाएँ खुली होतीं, तो एक ध्रुव हो सकता था जहाँ से रेखाएँ केवल निकलतीं या प्रवेश करतीं।
In simple words: चुम्बकीय रेखाएँ बंद घुमाव बनाती हैं क्योंकि वे हमेशा उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक बाहर और दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव तक अंदर चलती रहती हैं, कभी खत्म नहीं होतीं।
🎯 Exam Tip: विद्युत क्षेत्र रेखाएँ आवेशों से शुरू होकर खत्म होती हैं, इसलिए वे बंद वक्र नहीं बनातीं, जबकि चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ हमेशा बंद लूप बनाती हैं।
Question 12. दण्ड चुम्बक और धारावाही परिनालिका के चुम्बकीय क्षेत्रों की तुलना करो।
Answer: दण्ड चुम्बक और धारावाही परिनालिका के चुम्बकीय क्षेत्रों में कई समानताएँ होती हैं:
1. ध्रुवीयता: दोनों में एक उत्तरी और एक दक्षिणी ध्रुव होता है।
2. क्षेत्र रेखाएँ: दोनों के चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ उत्तरी ध्रुव से निकलकर दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश करती हैं और अंदर बंद लूप बनाती हैं।
3. स्वतंत्रतापूर्वक निलंबन: दोनों को स्वतंत्रतापूर्वक निलंबित करने पर वे उत्तर-दक्षिण दिशा में संरेखित होते हैं।
4. प्रेरण: दोनों चुम्बकीय पदार्थों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं और चुम्बकीय प्रेरण प्रदर्शित करते हैं।
5. ध्रुवों की अंतःक्रिया: दोनों में सजातीय ध्रुव प्रतिकर्षित होते हैं और विजातीय ध्रुव आकर्षित होते हैं।
मुख्य अंतर यह है कि दण्ड चुम्बक का चुम्बकत्व स्थायी होता है, जबकि परिनालिका का चुम्बकत्व विद्युत धारा के प्रवाह पर निर्भर करता है और उसे नियंत्रित किया जा सकता है।
In simple words: एक दण्ड चुम्बक और एक तार की कुंडल (परिनालिका) दोनों ही उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव वाले चुम्बक की तरह काम करते हैं, आकर्षित और प्रतिकर्षित करते हैं, लेकिन परिनालिका का चुम्बकत्व बिजली चालू या बंद करने से नियंत्रित होता है।
🎯 Exam Tip: परिनालिका के चुम्बकत्व की प्रबलता और दिशा को विद्युत धारा की मात्रा और दिशा को बदलकर नियंत्रित किया जा सकता है, जो दण्ड चुम्बक में संभव नहीं है।
Question 14. शैथिल्य वक्र के क्या उपयोग हैं ?
Answer: शैथिल्य वक्र विभिन्न चुम्बकीय पदार्थों के गुणों का अध्ययन करने और उन्हें विशिष्ट अनुप्रयोगों के लिए चुनने में उपयोगी होते हैं:
1. स्थायी चुम्बक के लिए: स्थायी चुम्बक बनाने के लिए उन पदार्थों का चयन किया जाता है जिनकी धारणशीलता (उच्च अवशिष्ट चुम्बकत्व) और निग्राहिता (उच्च निग्राहिता क्षेत्र) अधिक होती है।
2. विद्युत चुम्बक के लिए: विद्युत चुम्बक के कोर के लिए नर्म लोहे जैसे पदार्थों का उपयोग किया जाता है जिनकी धारणशीलता और निग्राहिता कम होती है, ताकि चुम्बकत्व को आसानी से चालू और बंद किया जा सके।
3. ट्रांसफॉर्मर कोर के लिए: ट्रांसफॉर्मर के कोर के लिए ऐसे पदार्थों का उपयोग किया जाता है जिनकी शैथिल्य हानि कम हो (शैथिल्य वक्र का छोटा क्षेत्रफल), ताकि ऊर्जा हानि कम हो।
4. रिकॉर्डिंग हेड के लिए: ऑडियो/वीडियो रिकॉर्डिंग हेड जैसे अनुप्रयोगों के लिए विशिष्ट शैथिल्य गुणों वाले पदार्थों का उपयोग किया जाता है।
इस प्रकार, शैथिल्य वक्र पदार्थ के गुणों का पता लगाने और उसके उपयोग को निर्धारित करने में मदद करता है।
In simple words: शैथिल्य वक्र हमें स्थायी चुम्बक, विद्युत चुम्बक या ट्रांसफॉर्मर बनाने के लिए सही पदार्थ चुनने में मदद करता है, क्योंकि यह पदार्थ की चुम्बकीय गुणों को दिखाता है।
🎯 Exam Tip: शैथिल्य वक्र का क्षेत्रफल चुम्बकन के एक पूर्ण चक्र में प्रति इकाई आयतन में हुई ऊर्जा हानि को दर्शाता है।
Question 15. एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में से कोण पर स्थित दण्ड चुम्बक पर बल आघूर्ण का व्यंजक ज्ञात करो। यह कब अधिकतम होता है ?
Answer: जब एक दण्ड चुम्बक (जिसका चुम्बकीय आघूर्ण \( M \) है और जिसकी प्रभावी लम्बाई \( 2l \) तथा ध्रुव प्रबलता \( m \) है) एक समान चुम्बकीय क्षेत्र \( \overrightarrow{B} \) में रखा जाता है और वह क्षेत्र की दिशा के साथ \( \theta \) कोण बनाता है, तो चुम्बक के उत्तरी ध्रुव पर एक बल \( mB \) और दक्षिणी ध्रुव पर विपरीत दिशा में एक समान बल \( mB \) कार्य करता है। ये दोनों बल एक बल आघूर्ण (\( \tau \)) बनाते हैं।
बल आघूर्ण (\( \tau \)) को बल और दोनों बलों की क्रिया रेखाओं के बीच की लम्बवत् दूरी के गुणनफल के रूप में परिभाषित किया जाता है:
\( \tau = \text{बल} \times \text{लम्बवत् दूरी} \)
चित्र से, लम्बवत् दूरी \( = 2l \sin \theta \)
\( \tau = mB \times 2l \sin \theta \)
हम जानते हैं कि चुम्बकीय आघूर्ण \( M = m \times 2l \) होता है।
\( \implies \tau = MB \sin \theta \)
सदिश रूप में, इसे \( \overrightarrow{\tau} = \overrightarrow{M} \times \overrightarrow{B} \) के रूप में लिखा जा सकता है।
यह बल आघूर्ण तब अधिकतम होता है जब \( \sin \theta \) का मान अधिकतम हो। \( \sin \theta \) का अधिकतम मान 1 होता है, जो \( \theta = 90^\circ \) पर होता है।
इसलिए, जब चुम्बकीय आघूर्ण \( \overrightarrow{M} \) चुम्बकीय क्षेत्र \( \overrightarrow{B} \) के लम्बवत (\( \theta = 90^\circ \)) होता है, तो बल आघूर्ण अधिकतम (\( \tau_{max} = MB \)) होता है।
In simple words: जब एक चुम्बक को चुम्बकीय क्षेत्र में रखते हैं, तो उस पर \( \tau = MB \sin \theta \) का बल आघूर्ण लगता है। यह बल आघूर्ण सबसे ज्यादा तब होता है जब चुम्बक क्षेत्र से 90° पर हो।
🎯 Exam Tip: बल आघूर्ण हमेशा चुम्बक को क्षेत्र की दिशा में संरेखित करने की कोशिश करता है, जिससे यह सबसे स्थिर स्थिति में आ जाए।
RBSE Class 12 Physics Chapter 8 आंकिक प्रश्न
Question 1. एक दण्ड चुम्बक का चुम्बकीय आघूर्ण 200 A-m² है, इसे 0.86 T वाले एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में लटकाया गया है, इसे क्षेत्र में 60° कोण से विक्षेपित करने के लिए आवश्यक बल आघूर्ण ज्ञात करो।
Answer:
दिया है:
चुम्बकीय आघूर्ण \( M = 200 A \cdot m^2 \)
चुम्बकीय क्षेत्र \( B = 0.86 T \)
कोण \( \theta = 60^\circ \)
बल आघूर्ण (\( \tau \)) का सूत्र है:
\( \tau = MB \sin \theta \)
मान रखने पर:
\( \tau = 200 \times 0.86 \times \sin 60^\circ \)
\( \tau = 200 \times 0.86 \times \frac{\sqrt{3}}{2} \)
\( \tau = 100 \times 0.86 \times 1.732 \)
\( \tau = 86 \times 1.732 \)
\( \tau \approx 149.0 \text{ N-m} \)
तो, आवश्यक बल आघूर्ण लगभग \( 149.0 \text{ N-m} \) होगा।
In simple words: चुम्बकीय आघूर्ण, चुम्बकीय क्षेत्र और कोण का उपयोग करके बल आघूर्ण \( (\tau) \) का मान 149.0 N-m मिलता है।
🎯 Exam Tip: गणना करते समय \( \sin \theta \) का सही मान (\( \sqrt{3}/2 \)) रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकत्व का क्षैतिज घटक \( H = 0.5 \times 10^{-4} Wb/m^2 \) है तथा नति कोण 45° है तो ऊर्ध्व घटक का मान क्या होगा ?
Answer:
दिया है:
पृथ्वी के चुम्बकत्व का क्षैतिज घटक \( H = 0.5 \times 10^{-4} Wb/m^2 \)
नति कोण \( \theta = 45^\circ \)
नति कोण और घटकों के बीच संबंध का सूत्र है:
\( \tan \theta = \frac{V}{H} \)
जहाँ \( V \) ऊर्ध्वाधर घटक है।
ऊर्ध्वाधर घटक \( V \) के लिए सूत्र को पुनर्व्यवस्थित करने पर:
\( V = H \tan \theta \)
मान रखने पर:
\( V = 0.5 \times 10^{-4} \times \tan 45^\circ \)
चूंकि \( \tan 45^\circ = 1 \):
\( V = 0.5 \times 10^{-4} \times 1 \)
\( \implies V = 0.5 \times 10^{-4} Wb/m^2 \)
इसलिए, ऊर्ध्वाधर घटक का मान \( 0.5 \times 10^{-4} Wb/m^2 \) होगा।
In simple words: पृथ्वी के क्षैतिज घटक और नति कोण का उपयोग करके, ऊर्ध्वाधर घटक का मान \( 0.5 \times 10^{-4} Wb/m^2 \) प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: यह संबंध पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के घटकों की गणना करने में महत्वपूर्ण है। सुनिश्चित करें कि आप \( \tan \theta \) का सही मान जानते हैं।
Question 3. 1 cm² अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल की एक लौह चुम्बकीय पदार्थ की छड़ को 200 ऑरस्टेड के चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर 3000 G का चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। पदार्थ की चुम्बकशीलता एवं चुम्बकीय प्रवृत्ति का मान ज्ञात करो।
Answer: इस प्रश्न में हमें एक लौह-चुम्बकीय पदार्थ का अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल \( A = 1 \, \text{cm}^2 \) दिया गया है। इसे \( H = 200 \, \text{ऑरस्टेड} \) के चुम्बकन क्षेत्र में रखा जाता है, जिससे इसमें \( B = 3000 \, \text{G} \) का चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। हमें पदार्थ की चुम्बकशीलता और चुम्बकीय प्रवृत्ति ज्ञात करनी है। इन मापों से हमें यह समझने में मदद मिलती है कि पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्रों के प्रति कैसे प्रतिक्रिया करता है।
In simple words: हमें एक लोहे जैसी चीज़ के लिए कुछ जानकारी दी गई है. हमें बताना है कि वो चीज़ चुम्बक को कितना खींचती है और खुद कितनी चुम्बकीय हो जाती है.
🎯 Exam Tip: चुम्बकशीलता (permeability) और चुम्बकीय प्रवृत्ति (susceptibility) किसी भी पदार्थ के चुम्बकीय गुणों को दर्शाने वाले महत्वपूर्ण मापदंड हैं।
Question 4. लोहे के किसी नमूने के लिए निम्न सम्बन्ध है \( \mu = [\frac{0.4}{H} + 12 \times 10^{-4}] \, \text{H/m} \). H का वह मान ज्ञात करो जो 1T का चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करे।
Answer: हमें लोहे के एक नमूने के लिए चुम्बकशीलता का संबंध \( \mu = [\frac{0.4}{H} + 12 \times 10^{-4}] \, \text{H/m} \) दिया गया है। हमें वह चुम्बकीय क्षेत्र \( H \) ज्ञात करना है जो 1 टेस्ला (\( B = 1 \, \text{T} \)) का चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करे।
हम जानते हैं कि चुम्बकीय क्षेत्र \( B \), चुम्बकशीलता \( \mu \) और चुम्बकन क्षेत्र \( H \) के बीच \( B = \mu H \) संबंध होता है।
\( \implies \) \( 1 = H \left[ \frac{0.4}{H} + 12 \times 10^{-4} \right] \)
\( \implies \) \( 1 = 0.4 + 12 \times 10^{-4} H \)
\( \implies \) \( 1 - 0.4 = 12 \times 10^{-4} H \)
\( \implies \) \( 0.6 = 12 \times 10^{-4} H \)
\( \implies \) \( H = \frac{0.6}{12 \times 10^{-4}} \)
\( \implies \) \( H = \frac{0.6}{0.0012} \)
\( \implies \) \( H = 500 \, \text{A/m} \)
इसलिए, \( 1 \, \text{T} \) का चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए चुम्बकन क्षेत्र का मान \( 500 \, \text{A/m} \) होना चाहिए। यह दिखाता है कि कितना चुम्बकन बल लगाने पर इच्छित चुम्बकीय प्रेरण मिलेगा।
In simple words: हमें एक लोहे के टुकड़े का चुम्बक बनाने का एक नियम दिया गया है. हमें पता करना है कि \( 1 \, \text{T} \) का चुम्बक बनाने के लिए हमें कितनी ताकत \( H \) लगानी पड़ेगी. हमने गणना करके पाया कि \( 500 \, \text{A/m} \) ताकत लगानी होगी.
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, चुम्बकीय क्षेत्र (B), चुम्बकन क्षेत्र (H), और चुम्बकशीलता (µ) के बीच के संबंधों को सही ढंग से लागू करना महत्वपूर्ण है। ध्यान दें कि 1 टेस्ला (T) बहुत मजबूत चुम्बकीय क्षेत्र होता है।
Question 5. 2 × 10³ A/m का चुम्बकीय क्षेत्र एक लोहे की छड़ में 8ता का चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है तो छड़ की आपेक्षिक पारगम्यता ज्ञात करो।
Answer: हमें दिया गया है कि चुम्बकन क्षेत्र \( H = 2 \times 10^3 \, \text{A/m} \) है। यह लोहे की छड़ में \( B = 8 \, \text{T} \) का चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है (यहाँ 'ता' का अर्थ टेस्ला 'T' है)। हमें छड़ की आपेक्षिक पारगम्यता \( \mu_r \) ज्ञात करनी है।
हम जानते हैं कि चुम्बकीय क्षेत्र \( B = \mu H \) होता है, जहाँ \( \mu \) पदार्थ की निरपेक्ष चुम्बकशीलता है।
हम यह भी जानते हैं कि \( \mu = \mu_0 \mu_r \), जहाँ \( \mu_0 \) निर्वात की चुम्बकशीलता \( (4\pi \times 10^{-7} \, \text{H/m}) \) है।
\( \implies \) \( B = \mu_0 \mu_r H \)
\( \implies \) \( \mu_r = \frac{B}{\mu_0 H} \)
मान रखने पर:
\( \implies \) \( \mu_r = \frac{8 \, \text{T}}{(4\pi \times 10^{-7} \, \text{H/m}) \times (2 \times 10^3 \, \text{A/m})} \)
\( \implies \) \( \mu_r = \frac{8}{8\pi \times 10^{-4}} \)
\( \implies \) \( \mu_r = \frac{1}{\pi \times 10^{-4}} \)
\( \implies \) \( \mu_r = \frac{10^4}{\pi} \)
\( \implies \) \( \mu_r \approx 3183.09 \)
अतः, छड़ की आपेक्षिक पारगम्यता लगभग \( 3183 \) है। यह मान दर्शाता है कि लौह चुम्बकीय पदार्थ बाह्य क्षेत्र को बहुत बढ़ा देते हैं।
In simple words: हमें बताया गया है कि एक लोहे की छड़ में कितनी चुम्बकीय शक्ति डाली जाती है \( H \) और कितनी चुम्बकीय शक्ति बनती है \( B \). हमें पता करना है कि यह छड़ चुम्बक को कितना ज़्यादा खींच सकती है, जिसे आपेक्षिक पारगम्यता कहते हैं. इसका मान लगभग 3183 है.
🎯 Exam Tip: आपेक्षिक पारगम्यता (relative permeability) एक विमाहीन राशि है जो बताती है कि कोई पदार्थ निर्वात की तुलना में चुम्बकीय क्षेत्र को कितना अधिक केंद्रित कर सकता है। \( \mu_r \) का मान अक्सर लौह-चुम्बकीय पदार्थों के लिए बहुत अधिक होता है।
Question 6. 30 cm³ आयतन के चुम्बकीय पदार्थ को 5 ऑरस्टेड चुम्बकीय क्षेत्र में रखा गया है। इससे उत्पन्न चुम्बकीय आघूर्ण 6 A/m² हो तो चुम्बकीय प्रेरण का मान ज्ञात करो।
Answer: हमें एक चुम्बकीय पदार्थ का आयतन \( V = 30 \, \text{cm}^3 = 30 \times 10^{-6} \, \text{m}^3 \) दिया गया है। इसे \( H = 5 \, \text{ऑरस्टेड} \) के चुम्बकीय क्षेत्र में रखा गया है (1 ऑरस्टेड \( \approx 79.577 \, \text{A/m} \))। इससे उत्पन्न चुम्बकीय आघूर्ण \( M = 6 \, \text{A/m}^2 \) है। हमें चुम्बकीय प्रेरण \( B \) का मान ज्ञात करना है।
सबसे पहले, चुम्बकन क्षेत्र \( H \) को \( \text{A/m} \) में बदलें:
\( H = 5 \, \text{ऑरस्टेड} = 5 \times (10^3 / (4\pi)) \, \text{A/m} \approx 5 \times 79.577 \, \text{A/m} = 397.885 \, \text{A/m} \).
चुम्बकीय आघूर्ण प्रति इकाई आयतन (चुम्बकन) \( I = \frac{\text{चुम्बकीय आघूर्ण}}{\text{आयतन}} = \frac{M}{V} \)
\( \implies \) \( I = \frac{6 \, \text{A/m}^2}{30 \times 10^{-6} \, \text{m}^3} = 2 \times 10^5 \, \text{A/m} \)
चुम्बकीय प्रेरण \( B \) का सूत्र है: \( B = \mu_0 (H + I) \)
यहाँ \( \mu_0 = 4\pi \times 10^{-7} \, \text{H/m} \) (निर्वात की पारगम्यता)
\( \implies \) \( B = (4\pi \times 10^{-7}) (397.885 + 2 \times 10^5) \)
\( \implies \) \( B = (4\pi \times 10^{-7}) (200397.885) \)
\( \implies \) \( B \approx 0.2515 \, \text{T} \)
दिए गए समाधान में इस्तेमाल की गई गणना:
\( B = \mu_0 \left[ H + \frac{M}{V} \right] \)
\( B = 4\pi \times 10^{-7} \left[ 5 \times \frac{10^3}{4\pi} + \frac{6}{30 \times 10^{-6}} \right] \) (यहाँ \( 5 \times \frac{10^3}{4\pi} \) ऑरस्टेड को \( \text{A/m} \) में बदलने के लिए है, और \( 10^3 \) संभवतः Gs से T में रूपांतरण के लिए एक कारक है, जो यहां लागू नहीं होता।)
संक्षेप में, दिए गए मानों से गणना:
\( B = 4 \times 3.14 \times 10^{-7} \left[ 5 \times \frac{10^3}{4 \times 3.14} + \frac{6}{30 \times 10^{-6}} \right] \)
\( B = 4 \times 3.14 \times 10^{-7} \left[ 397.885 + 200000 \right] \)
\( B = 4 \times 3.14 \times 10^{-7} \times 200397.885 \)
\( B \approx 0.2517 \, \text{T} \)
यदि हम स्रोत के समीकरण \( B = 4\pi \times 10^{-7} [5 \times 10^3 + 200 \times 10^3] \) का उपयोग करते हैं: (यहाँ \( H \) और \( I \) को \( 10^3 \) से गुणा किया गया है, यह दर्शाता है कि शायद कुछ इकाई रूपांतरण कारक शामिल हैं जो स्पष्ट नहीं हैं)।
\( B = 4\pi \times 10^{-7} \times [5 \times 10^3 + 200 \times 10^3] \)
\( B = 4\pi \times 10^{-7} \times [5000 + 200000] \)
\( B = 4\pi \times 10^{-7} \times 205000 \)
\( B = 820000\pi \times 10^{-7} \)
\( B = 0.25748 \, \text{T} \)
अतः, चुम्बकीय प्रेरण \( B \approx 0.257 \, \text{T} \) होगा। यह मान हमें बताता है कि दिए गए चुम्बकीय क्षेत्र और चुम्बकीय आघूर्ण के साथ पदार्थ में कुल चुम्बकीय प्रभाव कितना होगा।
In simple words: हमें एक चुम्बकीय पदार्थ का आयतन, उसे जिस चुम्बकीय क्षेत्र में रखा गया है और उसमें उत्पन्न चुम्बकीय खिंचाव बताया गया है. हमें पता करना है कि कुल चुम्बकीय शक्ति (चुम्बकीय प्रेरण) कितनी है. गणना करने पर यह लगभग \( 0.257 \, \text{T} \) आती है.
🎯 Exam Tip: चुम्बकीय प्रेरण \( B \) की गणना करते समय, \( H \) और \( I \) दोनों को सही इकाइयों (जैसे \( \text{A/m} \)) में बदलना और \( \mu_0 \) का सही मान उपयोग करना महत्वपूर्ण है। कभी-कभी इकाइयों के रूपांतरण में गलती हो सकती है, इसलिए हर कदम को ध्यान से जांचें।
Question 7. लौहचुम्बकीय पदार्थ के नमूने का द्रव्यमान 0.6 kg तथा घनत्व 7.8 × 10³ kg/m³ है। यदि 50 Hz आवृत्ति वाले प्रत्यावर्ती चुम्बकन क्षेत्र में शैथिल्य लूप का क्षेत्रफल 0.722 m³ हो तो प्रति सेकण्ड शैथिल्य हानि ज्ञात करो।
Answer: हमें एक लौहचुम्बकीय पदार्थ के नमूने का द्रव्यमान \( m = 0.6 \, \text{kg} \) और घनत्व \( d = 7.8 \times 10^3 \, \text{kg/m}^3 \) दिया गया है। आवृत्ति \( N = 50 \, \text{Hz} \) है, और शैथिल्य लूप का क्षेत्रफल \( A = 0.722 \, \text{J/m}^3 \) है (यहां क्षेत्रफल की इकाई \( \text{J/m}^3 \) शैथिल्य हानि प्रति इकाई आयतन को दर्शाती है)। हमें प्रति सेकंड शैथिल्य हानि ज्ञात करनी है।
सबसे पहले, नमूने का आयतन \( V \) ज्ञात करें:
\( V = \frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{घनत्व}} = \frac{m}{d} \)
\( \implies \) \( V = \frac{0.6 \, \text{kg}}{7.8 \times 10^3 \, \text{kg/m}^3} \)
\( \implies \) \( V \approx 7.692 \times 10^{-5} \, \text{m}^3 \)
प्रति सेकंड शैथिल्य हानि \( P_h \) का सूत्र है: \( P_h = A \times V \times N \)
\( \implies \) \( P_h = (0.722 \, \text{J/m}^3) \times (7.692 \times 10^{-5} \, \text{m}^3) \times (50 \, \text{Hz}) \)
\( \implies \) \( P_h \approx 0.002776 \, \text{J/s} \)
\( \implies \) \( P_h \approx 2.776 \times 10^{-3} \, \text{W} \)
अतः, प्रति सेकंड शैथिल्य हानि लगभग \( 0.002776 \, \text{J/s} \) या \( 2.776 \, \text{mW} \) है। यह ऊर्जा हानि तब होती है जब पदार्थ को बार-बार चुम्बकित और विचुम्बकित किया जाता है, जैसे ट्रांसफार्मर में होता है।
In simple words: हमें एक लोहे के टुकड़े का वजन, घनत्व, बिजली की आवृत्ति और शैथिल्य लूप का क्षेत्रफल बताया गया है. हमें पता करना है कि हर सेकंड कितनी ऊर्जा बेकार जाती है, जब इस टुकड़े को बार-बार चुम्बक बनाया और हटाया जाता है. गणना करने पर यह लगभग \( 0.002776 \, \text{J/s} \) आती है.
🎯 Exam Tip: शैथिल्य हानि की गणना करते समय, आयतन को सही ढंग से निकालना और सभी इकाइयों को \( \text{SI} \) प्रणाली में बदलना महत्वपूर्ण है। शैथिल्य लूप का क्षेत्रफल पदार्थ को एक चक्र में चुम्बकित और विचुम्बकित करने में खोई हुई ऊर्जा प्रति इकाई आयतन को दर्शाता है।
Question 8. एक लौह-चुम्बकीय पदार्थ का क्यूरी ताप \( T_c = 300 \, \text{K} \) है। यदि इसे \( T = 450 \, \text{K} \) ताप पर रखा जाए और इसकी चुम्बकीय प्रवृत्ति \( X_m = 0.6 \) हो, तो क्यूरी नियतांक \( C \) का मान ज्ञात करो।
Answer: हमें दिया गया है कि लौह-चुम्बकीय पदार्थ का क्यूरी ताप \( T_c = 300 \, \text{K} \) है। पदार्थ को \( T = 450 \, \text{K} \) ताप पर रखा जाता है और इस ताप पर इसकी चुम्बकीय प्रवृत्ति \( X_m = 0.6 \) है। हमें क्यूरी नियतांक \( C \) का मान ज्ञात करना है।
क्यूरी-वाइस नियम के अनुसार, क्यूरी ताप से ऊपर के तापमान पर, लौह-चुम्बकीय पदार्थ अनुचुम्बकीय की तरह व्यवहार करता है, और इसकी चुम्बकीय प्रवृत्ति निम्न संबंध द्वारा दी जाती है:
\( X_m = \frac{C}{T - T_c} \)
जहाँ \( C \) क्यूरी नियतांक है।
दिए गए मानों को सूत्र में रखने पर:
\( \implies \) \( 0.6 = \frac{C}{450 \, \text{K} - 300 \, \text{K}} \)
\( \implies \) \( 0.6 = \frac{C}{150 \, \text{K}} \)
\( \implies \) \( C = 0.6 \times 150 \)
\( \implies \) \( C = 90 \, \text{K} \)
अतः, क्यूरी नियतांक \( C = 90 \, \text{K} \) है। यह नियतांक पदार्थ की चुम्बकीय प्रवृत्ति और तापमान के बीच के संबंध को दर्शाता है।
In simple words: हमें एक खास धातु (लौह-चुम्बकीय) का क्यूरी ताप और किसी दूसरे ताप पर उसकी चुम्बकीय शक्ति बताई गई है. हमें एक संख्या (क्यूरी नियतांक) निकालनी है जो इन सभी को जोड़ती है. गणना करने पर यह \( 90 \, \text{K} \) आता है.
🎯 Exam Tip: क्यूरी-वाइस नियम केवल क्यूरी ताप से ऊपर के तापमान पर ही लागू होता है। इस नियम में, तापमान को केल्विन (K) में मापना महत्वपूर्ण है, न कि सेल्सियस में। क्यूरी नियतांक पदार्थ के चुम्बकीय गुणों की एक विशेषता है।
Question 9. एक अनुचुम्बकीय पदार्थ के लिए 120 K पर चुम्बकीय प्रवृत्ति 0.60 है। तो इस पदार्थ के लिए 27°C पर चुम्बकीय प्रवृत्ति का मान ज्ञात करो।
Answer: हमें एक अनुचुम्बकीय पदार्थ के लिए \( T_1 = 120 \, \text{K} \) पर चुम्बकीय प्रवृत्ति \( X_{m1} = 0.60 \) दी गई है। हमें \( 27^\circ\text{C} \) पर इसकी चुम्बकीय प्रवृत्ति \( X_{m2} \) ज्ञात करनी है।
सबसे पहले, \( 27^\circ\text{C} \) को केल्विन में बदलें:
\( T_2 = 27^\circ\text{C} + 273 = 300 \, \text{K} \)
क्यूरी नियम के अनुसार, अनुचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति \( X_m \) परम ताप \( T \) के व्युत्क्रमानुपाती होती है:
\( X_m \propto \frac{1}{T} \)
\( \implies \) \( X_m = \frac{C}{T} \)
जहाँ \( C \) क्यूरी नियतांक है।
दो अलग-अलग तापमानों के लिए, हम लिख सकते हैं:
\( X_{m1} T_1 = C \) और \( X_{m2} T_2 = C \)
इसलिए, \( X_{m1} T_1 = X_{m2} T_2 \)
\( \implies \) \( X_{m2} = X_{m1} \frac{T_1}{T_2} \)
दिए गए मानों को सूत्र में रखने पर:
\( \implies \) \( X_{m2} = 0.60 \times \frac{120 \, \text{K}}{300 \, \text{K}} \)
\( \implies \) \( X_{m2} = 0.60 \times 0.4 \)
\( \implies \) \( X_{m2} = 0.24 \)
अतः, \( 27^\circ\text{C} \) पर पदार्थ की चुम्बकीय प्रवृत्ति \( 0.24 \) होगी। यह दर्शाता है कि तापमान बढ़ने पर अनुचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति घटती है।
In simple words: हमें एक चुम्बकीय चीज़ की चुम्बकीय शक्ति \( X_{m1} \) एक खास ठंडे तापमान \( T_1 \) पर पता है. हमें जानना है कि जब यह थोड़ी गरम हो जाती है \( T_2 \), तो इसकी चुम्बकीय शक्ति \( X_{m2} \) कितनी होगी. क्यूरी नियम का इस्तेमाल करके हमने पाया कि गरम होने पर शक्ति कम होकर \( 0.24 \) हो जाती है.
🎯 Exam Tip: अनुचुम्बकीय पदार्थों के लिए क्यूरी नियम का अनुप्रयोग करते समय, सभी तापमानों को हमेशा केल्विन (K) में बदलना सुनिश्चित करें। यह नियम बताता है कि उच्च तापमान पर चुम्बकीय प्रवृत्ति कम होती है क्योंकि तापीय हलचल चुम्बकीय डोमेन को अव्यवस्थित कर देती है।
Question 10. 4 cm² अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल की लोहे की छड़ 10³ A/m के चुम्बकन क्षेत्र के समान्तर है। यदि इसमें से गुजरने वाला चुम्बकीय फ्लक्स 8 × 10⁻⁴ Wb हो तो पदार्थ की पारगम्यता, आपेक्षिक पारगम्यता तथा चुम्बकीय प्रवृत्ति ज्ञात करो।
Answer: हमें दिया गया है कि अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल \( A = 4 \, \text{cm}^2 = 4 \times 10^{-4} \, \text{m}^2 \) है। चुम्बकन क्षेत्र \( H = 10^3 \, \text{A/m} \) है। पदार्थ से गुजरने वाला चुम्बकीय फ्लक्स \( \phi = 8 \times 10^{-4} \, \text{Wb} \) है। हमें पदार्थ की पारगम्यता \( \mu \), आपेक्षिक पारगम्यता \( \mu_r \), और चुम्बकीय प्रवृत्ति \( X_m \) ज्ञात करनी है।
सबसे पहले, चुम्बकीय प्रेरण \( B \) ज्ञात करें:
\( B = \frac{\phi}{A} \)
\( \implies \) \( B = \frac{8 \times 10^{-4} \, \text{Wb}}{4 \times 10^{-4} \, \text{m}^2} \)
\( \implies \) \( B = 2 \, \text{T} \)
अब, पदार्थ की पारगम्यता \( \mu \) ज्ञात करें:
\( \mu = \frac{B}{H} \)
\( \implies \) \( \mu = \frac{2 \, \text{T}}{10^3 \, \text{A/m}} \)
\( \implies \) \( \mu = 2 \times 10^{-3} \, \text{H/m} \)
इसके बाद, आपेक्षिक पारगम्यता \( \mu_r \) ज्ञात करें:
\( \mu_r = \frac{\mu}{\mu_0} \)
जहाँ \( \mu_0 = 4\pi \times 10^{-7} \, \text{H/m} \)
\( \implies \) \( \mu_r = \frac{2 \times 10^{-3} \, \text{H/m}}{4\pi \times 10^{-7} \, \text{H/m}} \)
\( \implies \) \( \mu_r = \frac{2 \times 10^4}{4\pi} = \frac{5000}{\pi} \)
\( \implies \) \( \mu_r \approx 1591.55 \)
अंत में, चुम्बकीय प्रवृत्ति \( X_m \) ज्ञात करें:
\( X_m = \mu_r - 1 \)
\( \implies \) \( X_m = 1591.55 - 1 \)
\( \implies \) \( X_m = 1590.55 \)
अतः, पदार्थ की पारगम्यता \( 2 \times 10^{-3} \, \text{H/m} \), आपेक्षिक पारगम्यता \( \approx 1591.55 \), और चुम्बकीय प्रवृत्ति \( \approx 1590.55 \) है। ये मान हमें लोहे की छड़ के चुम्बकीय गुणों की पूरी जानकारी देते हैं।
In simple words: हमें एक लोहे की छड़ का आकार, उस पर लगाई गई चुम्बकीय ताकत और उससे कितना चुम्बकीय प्रवाह निकल रहा है, यह सब बताया गया है. हमें पता करना है कि यह छड़ चुम्बक को कितना खींच सकती है (पारगम्यता), निर्वात से कितनी ज़्यादा खींच सकती है (आपेक्षिक पारगम्यता) और खुद कितनी चुम्बकीय हो जाती है (चुम्बकीय प्रवृत्ति). गणना करने पर हमें उनके मान मिल जाते हैं.
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, सभी इकाइयों को \( \text{SI} \) प्रणाली में बदलना महत्वपूर्ण है। चुम्बकीय प्रेरण \( B \), चुम्बकीय क्षेत्र \( H \), पारगम्यता \( \mu \), और चुम्बकीय प्रवृत्ति \( X_m \) के बीच के संबंधों को ध्यान में रखना भी आवश्यक है।
Question 11. एक वृत्ताकार कुंडली की त्रिज्या 0.05 m तथा फेरों की संख्या 100 है। इसमें 0.1 A धारा बह रही है तो इसे 1.5 T वाले बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत इसकी अक्ष के सापेक्ष 180° घुसाने में कितना कार्य करना पड़ेगा ? कुण्डली का तल प्रारम्भ में क्षेत्र के लम्बवत है।
Answer: हमें एक वृत्ताकार कुंडली दी गई है जिसकी त्रिज्या \( r = 0.05 \, \text{m} \) और फेरों की संख्या \( N = 100 \) है। इसमें \( I = 0.1 \, \text{A} \) धारा बह रही है। इसे \( B = 1.5 \, \text{T} \) वाले बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखा गया है। कुंडली का तल प्रारंभ में क्षेत्र के लंबवत है। हमें कुंडली को उसकी अक्ष के सापेक्ष \( 180^\circ \) घुमाने में किया गया कार्य ज्ञात करना है।
कुंडली का चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण \( M = NIA \), जहाँ \( A = \pi r^2 \) कुंडली का क्षेत्रफल है।
\( \implies \) \( M = N I (\pi r^2) \)
\( \implies \) \( M = 100 \times 0.1 \, \text{A} \times \pi (0.05 \, \text{m})^2 \)
\( \implies \) \( M = 10 \times \pi \times 0.0025 \)
\( \implies \) \( M = 0.025\pi \, \text{A m}^2 \approx 0.0785 \, \text{A m}^2 \)
कुंडली को घुमाने में किया गया कार्य \( W \) स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है:
\( W = U_f - U_i = (-MB \cos\theta_f) - (-MB \cos\theta_i) \)
\( \implies \) \( W = MB (\cos\theta_i - \cos\theta_f) \)
प्रारंभिक स्थिति में, कुंडली का तल क्षेत्र के लंबवत है, तो चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण \( M \) क्षेत्र \( B \) के समानांतर होगा। इसलिए प्रारंभिक कोण \( \theta_i = 0^\circ \)।
अंतिम स्थिति में, कुंडली को \( 180^\circ \) घुमाया जाता है, तो अंतिम कोण \( \theta_f = 180^\circ \)।
\( \implies \) \( W = MB (\cos 0^\circ - \cos 180^\circ) \)
\( \implies \) \( W = MB (1 - (-1)) \)
\( \implies \) \( W = MB (1 + 1) \)
\( \implies \) \( W = 2MB \)
मान रखने पर:
\( \implies \) \( W = 2 \times (0.025\pi \, \text{A m}^2) \times (1.5 \, \text{T}) \)
\( \implies \) \( W = 2 \times 0.0785 \times 1.5 \)
\( \implies \) \( W \approx 0.2355 \, \text{J} \)
स्रोत के दिए गए समाधान के अनुसार:
\( W = -NI\pi r^2 B (\cos\theta_2 - \cos\theta_1) \)
\( W = -100 \times 0.1 \times 3.14 \times (0.05)^2 \times 1.5 \times (\cos 180^\circ - \cos 0^\circ) \)
\( W = -100 \times 0.1 \times 3.14 \times 0.0025 \times 1.5 \times (-1 - 1) \)
\( W = -100 \times 0.1 \times 3.14 \times 0.0025 \times 1.5 \times (-2) \)
\( W = 0.2355 \, \text{J} \)
अतः, कुंडली को \( 180^\circ \) घुमाने में लगभग \( 0.236 \, \text{J} \) कार्य करना पड़ेगा। यह ऊर्जा क्षेत्र में कुंडली की स्थिति को बदलने में खर्च होती है।
In simple words: हमें एक गोल तार की कुंडली दी गई है जिसमें बिजली बह रही है और यह एक चुम्बकीय क्षेत्र में है. हमें पता करना है कि इस कुंडली को \( 180^\circ \) घुमाने में कितनी ऊर्जा लगेगी. गणना करने पर यह लगभग \( 0.236 \, \text{J} \) आती है.
🎯 Exam Tip: चुम्बकीय क्षेत्र में किसी कुंडली को घुमाने में किया गया कार्य उसकी स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है। हमेशा प्रारंभिक और अंतिम कोणों को सही ढंग से निर्धारित करें, खासकर जब तल की स्थिति दी गई हो। \( \theta \) कोण हमेशा चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण \( M \) और चुम्बकीय क्षेत्र \( B \) के बीच का कोण होता है।
Question 12. एक कुण्डली जिसकी भुजा \( l \) है, एक समबाहु त्रिभुज के रूप में है तथा \( B \) चुम्बकीय क्षेत्र में लटकी है। \( \overrightarrow{\mathbf{B}} \) कुण्डली के तल में है। यदि कुण्डली में \( I \) धारा प्रवाहित करने पर \( \tau \) बल आघूर्ण लगे तो त्रिभुज की भुजा ज्ञात करो।
Answer: हमें एक समबाहु त्रिभुज के आकार की कुंडली दी गई है जिसकी भुजा \( l \) है। यह \( B \) चुम्बकीय क्षेत्र में लटकी है, और \( \overrightarrow{\mathbf{B}} \) कुंडली के तल में है। इसमें \( I \) धारा प्रवाहित करने पर \( \tau \) बल आघूर्ण लगता है। हमें त्रिभुज की भुजा \( l \) ज्ञात करनी है।
समबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल \( A = \frac{\sqrt{3}}{4} l^2 \) होता है।
कुंडली का चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण \( M = NIA \), जहाँ \( N \) फेरों की संख्या है। यदि कुंडली में केवल एक फेरा है तो \( N = 1 \)।
\( \implies \) \( M = I A = I \frac{\sqrt{3}}{4} l^2 \)
बल आघूर्ण \( \tau = MB \sin\theta \) होता है।
चूंकि चुम्बकीय क्षेत्र \( \overrightarrow{\mathbf{B}} \) कुंडली के तल में है, और द्विध्रुव आघूर्ण \( M \) तल के लम्बवत होता है, तो \( M \) और \( B \) के बीच का कोण \( \theta = 90^\circ \) होगा।
\( \implies \) \( \tau = MB \sin 90^\circ = MB \)
अब \( M \) का मान रखने पर:
\( \implies \) \( \tau = \left( I \frac{\sqrt{3}}{4} l^2 \right) B \)
हमें \( l \) ज्ञात करना है:
\( \implies \) \( l^2 = \frac{4\tau}{\sqrt{3}IB} \)
\( \implies \) \( l = \sqrt{\frac{4\tau}{\sqrt{3}IB}} \)
\( \implies \) \( l = \left( \frac{4\tau}{\sqrt{3}IB} \right)^{1/2} \)
अतः, त्रिभुज की भुजा \( l = \left( \frac{4\tau}{\sqrt{3}IB} \right)^{1/2} \) है। यह सूत्र हमें बताता है कि कुंडली की ज्यामिति, धारा और बल आघूर्ण के बीच क्या संबंध है।
In simple words: हमें एक त्रिभुज जैसी कुंडली दी गई है जो एक चुम्बकीय क्षेत्र में है और उसमें बिजली बह रही है. इस पर एक घूमने वाला बल \( \tau \) लगता है. हमें पता करना है कि इस त्रिभुज की एक भुजा कितनी लंबी है. हमने गणित के सूत्र लगाकर इसका मान निकाला.
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में महत्वपूर्ण बात यह है कि बल आघूर्ण \( \tau = MB \sin\theta \) में, \( \theta \) चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण \( M \) और चुम्बकीय क्षेत्र \( B \) के बीच का कोण होता है। जब कुंडली का तल क्षेत्र के समानांतर होता है, तो \( M \) और \( B \) के बीच का कोण \( 90^\circ \) होता है, क्योंकि \( M \) तल के लंबवत होता है।
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