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Detailed Chapter 7 विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव RBSE Solutions for Class 12 Physics
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Class 12 Physics Chapter 7 विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Physics Chapter 7 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर
RBSE Class 12 Physics Chapter 7 बहुचयनात्मक प्रश्न
Question 1. कोई आवेशित कण जो एक समान चाल से गति कर रहा है, उत्पन्न करता है।
(a) केवल विद्युत क्षेत्र
(b) केवल चुम्बकीय क्षेत्र
(c) विद्युत क्षेत्र एवं चुम्बकीय क्षेत्र दोनों
(d) विद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र के साथ विद्युत चुम्बकीय तरंगें।
Answer: (c) विद्युत क्षेत्र एवं चुम्बकीय क्षेत्र दोनों
In simple words: जब कोई आवेशित कण एक स्थिर गति से चलता है, तो वह अपने आस-पास विद्युत क्षेत्र और चुम्बकीय क्षेत्र दोनों बनाता है। यह नियम बताता है कि गतिमान आवेशित कणों में दोहरी क्षेत्र-उत्पन्न करने की क्षमता होती है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि स्थिर आवेश केवल विद्युत क्षेत्र बनाते हैं, जबकि त्वरित आवेश विद्युत चुम्बकीय तरंगें उत्पन्न करते हैं।
Question 2. किसी चालक तार से दूसरी पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र B है। यदि तार में प्रवाहित धारा का मान नियत रखें तो,
Answer: (अ) 2B
प्रथम स्थिति में, चुम्बकीय क्षेत्र \( B = \frac{\mu_0 I}{4 \pi r} \)
यदि दूरी आधी कर दी जाए \( (r/2) \), तो द्वितीय स्थिति में नया चुम्बकीय क्षेत्र \( B' = \frac{\mu_0 I}{4 \pi (r/2)} = 2 \left( \frac{\mu_0 I}{4 \pi r} \right) = 2B \)
In simple words: यदि तार में धारा स्थिर रहे, और हम दूरी को आधा कर दें, तो चुम्बकीय क्षेत्र दोगुना हो जाता है। यह दिखाता है कि चुम्बकीय क्षेत्र दूरी के विपरीत अनुपात में बदलता है।
🎯 Exam Tip: यह संबंध सीधे तार के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र के लिए है, जहाँ क्षेत्र दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
Question 3. एक वृत्ताकार धारावाही कुण्डली के केन्द्र पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का मान Bo है। इसी कुण्डली के अक्षीय बिन्दु पर, इसकी त्रिज्या के बराबर दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र B है, तो B/B0 का मान होगा
(a) 1 : \( \sqrt{2} \)
(b) 1:2 \( \sqrt{2} \)
(c) 2 \( \sqrt{2} \) : 1
(d) \( \sqrt{2} \) : 1
Answer: (b) 1:2 \( \sqrt{2} \)
प्रथम स्थिति में, कुण्डली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र \( B_0 = \frac{\mu_0 N I}{2R} \)
द्वितीय स्थिति में, अक्षीय बिन्दु पर \( (x=R) \) चुम्बकीय क्षेत्र \( B = \frac{\mu_0 N I R^2}{2(R^2 + R^2)^{3/2}} = \frac{\mu_0 N I R^2}{2(2R^2)^{3/2}} = \frac{\mu_0 N I R^2}{2 \cdot 2\sqrt{2} R^3} = \frac{\mu_0 N I}{4\sqrt{2} R} \)
अब, अनुपात \( \frac{B}{B_0} = \frac{\frac{\mu_0 N I}{4\sqrt{2} R}}{\frac{\mu_0 N I}{2R}} = \frac{1}{4\sqrt{2}} \times 2 = \frac{1}{2\sqrt{2}} \)
तो \( B : B_0 \) का मान \( 1 : 2\sqrt{2} \) होगा।
In simple words: कुण्डली के केंद्र पर चुम्बकीय क्षेत्र और उसकी अक्ष पर त्रिज्या के बराबर दूरी पर क्षेत्र के बीच एक निश्चित अनुपात होता है, जो \( 1 : 2\sqrt{2} \) है। यह कुण्डली की ज्यामिति के कारण होता है।
🎯 Exam Tip: अक्षीय बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र का सूत्र और केंद्र पर सूत्र याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे तुलनात्मक प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
Question 4. हेल्महोल्ट्ज़ कुण्डलियों का उपयोग किया जाता है-
(a) एक समान चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने में
(b) विद्युत धारा मापन में
(c) चुम्बकीय क्षेत्र मापन में
(d) ज्ञात करने में
Answer: (a) एक समान चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने में
In simple words: हेल्महोल्ट्ज़ कुण्डलियाँ विशेष रूप से एक जैसे चुम्बकीय क्षेत्र बनाने के लिए उपयोग की जाती हैं, जो प्रयोगों के लिए बहुत उपयोगी है। यह क्षेत्र समान और स्थिर होता है।
🎯 Exam Tip: हेल्महोल्ट्ज़ कुण्डलियों का उपयोग अनुसंधान और अंशांकन में महत्वपूर्ण है, जहाँ एक समान चुंबकीय क्षेत्र की आवश्यकता होती है।
Question 5. चित्र के अनुसार दो समरूप कुण्डलियों में समान विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। कुण्डलियों के केन्द्र उभयनिष्ठ तथा तल परस्पर लम्बवत् हैं। यदि एक कुण्डली के कारण इसके केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र B है तो उभयनिष्ठ केन्द्र पर परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र का मान होगा
(a) शून्य
(b) 2B
(c) \( \mathrm{B} / \sqrt{2} \)
(d) \( \sqrt{2} \mathrm{B} \)
Answer: (d) \( \sqrt{2} \mathrm{B} \)
उभयनिष्ठ केन्द्र पर परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र, जब दो लम्बवत् क्षेत्र \( B_1 \) और \( B_2 \) हों, तो \( B_{\text{परिणामी}} = \sqrt{B_1^2 + B_2^2} \)
चूंकि दोनों कुण्डलियों के कारण क्षेत्र समान है \( B_1 = B_2 = B \), तो \( B_{\text{परिणामी}} = \sqrt{B^2 + B^2} = \sqrt{2B^2} = \sqrt{2} B \)
In simple words: जब दो समान चुम्बकीय क्षेत्र एक-दूसरे के 90 डिग्री पर होते हैं, तो कुल चुम्बकीय क्षेत्र हर एक क्षेत्र के \( \sqrt{2} \) गुना होता है। यह सदिशों के जोड़ के नियम के कारण होता है।
🎯 Exam Tip: सदिश योग का नियम याद रखें: जब दो सदिश एक-दूसरे के लंबवत होते हैं, तो उनका परिणामी सदिश \( \sqrt{A^2 + B^2} \) होता है।
Question 6. समान वेग से समरूप चुम्बकीय क्षेत्र में लम्बवत् प्रक्षेपित, निम्न में से किस कण पर सर्वाधिक बल लगेगा ?
(a) \( _{-1}\mathrm{e}^0 \)
(b) \( _1\mathrm{H}^1 \)
(c) \( _2\mathrm{He}^4 \)
(d) \( _3\mathrm{Li} \)
Answer: (d) \( _3\mathrm{Li} \)
चुम्बकीय क्षेत्र में गतिमान आवेशित कण पर लगने वाला बल \( F = qvB \sin\theta \) है। चूंकि वेग \( v \), चुम्बकीय क्षेत्र \( B \) और \( \sin\theta \) सभी कणों के लिए समान हैं (क्योंकि लंबवत प्रक्षेपित किया गया है, \( \sin\theta = 1 \)), इसलिए बल \( F \) आवेश \( q \) के समानुपाती होगा। जिस कण का आवेश सबसे अधिक होगा, उस पर सर्वाधिक बल लगेगा।
(a) \( _{-1}\mathrm{e}^0 \) (इलेक्ट्रॉन) का आवेश \( q = -1e \)
(b) \( _1\mathrm{H}^1 \) (प्रोटॉन) का आवेश \( q = +1e \)
(c) \( _2\mathrm{He}^4 \) (अल्फा कण) का आवेश \( q = +2e \)
(d) \( _3\mathrm{Li} \) (लिथियम आयन) का आवेश \( q = +3e \)
इसलिए, लिथियम आयन \( _3\mathrm{Li} \) पर सर्वाधिक बल लगेगा क्योंकि इसका आवेश सबसे अधिक है।
In simple words: एक चुम्बकीय क्षेत्र में, आवेशित कण पर लगने वाला बल उसके आवेश पर निर्भर करता है। जिस कण का आवेश सबसे ज्यादा होता है, उस पर सबसे ज्यादा बल लगता है। यहाँ लिथियम आयन में सबसे ज्यादा आवेश है, इसलिए उस पर सबसे ज्यादा बल लगेगा।
🎯 Exam Tip: आवेशित कण पर लगने वाले बल के सूत्र \( F = qvB \sin\theta \) में, \( q \) कण का आवेश होता है। बल को अधिकतम करने के लिए \( q \) का मान अधिकतम होना चाहिए।
Question 8. 100eV ऊर्जा का एक प्रोटॉन 10-4T के चुम्बकीय क्षेत्र में उसके लम्बवत गतिमान है। प्रोटॉन की साइक्लोट्रॉन आवृत्ति rad/sec में होगी
(a) 2.80 × 10^6
(b) 9.6 × 10^3
(c) 5.6 × 10^6
(d) 1.76 x 10^6
Answer: (b) 9.6 × 10^3 Hz
साइक्लोट्रॉन आवृत्ति (लीनियर आवृत्ति) \( \nu_c = \frac{q B}{2 \pi m} \)
प्रोटॉन का आवेश \( q = 1.6 \times 10^{-19} \) C
चुम्बकीय क्षेत्र \( B = 10^{-4} \) T
प्रोटॉन का द्रव्यमान \( m = 1.67 \times 10^{-27} \) kg
\( \nu_c = \frac{1.6 \times 10^{-19} \times 10^{-4}}{2 \times 3.14 \times 1.67 \times 10^{-27}} \)
\( \nu_c \approx 9.6 \times 10^3 \) Hz
प्रश्न में साइक्लोट्रॉन आवृत्ति rad/sec में पूछी गई है, जो कोणीय आवृत्ति (\( \omega \)) होती है। \( \omega = 2\pi\nu_c \)
\( \omega = 2 \times 3.14 \times 9.6 \times 10^3 \approx 6.03 \times 10^4 \) rad/sec.
(स्रोत ने Hz में उत्तर दिया है, लेकिन प्रश्न rad/sec में कोणीय आवृत्ति पूछ रहा है। विकल्प (b) Hz में \( 9.6 \times 10^3 \) है।)
In simple words: साइक्लोट्रॉन आवृत्ति हमें बताती है कि एक आवेशित कण चुम्बकीय क्षेत्र में कितनी बार घूमेगा। यहाँ प्रोटॉन के लिए यह लगभग \( 9.6 \times 10^3 \) चक्कर प्रति सेकंड (Hz) है। अगर इसे कोणीय आवृत्ति में बदलना हो तो इसे \( 2\pi \) से गुणा करना पड़ेगा।
🎯 Exam Tip: प्रश्न में लीनियर आवृत्ति (Hz) और कोणीय आवृत्ति (rad/sec) के बीच का अंतर ध्यान से देखें। कोणीय आवृत्ति \( \omega = 2\pi\nu \), जबकि लीनियर आवृत्ति \( \nu \) है।
Question 9. यदि G प्रतिरोध के धारामापी से मुख्य धारा की 2% धारा पूर्ण विक्षेप के लिए आवश्यक हो तो पाश्र्व पथ (शण्ट) का प्रतिरोध होगा
(a) \( \frac{\mathrm{G}}{50} \)
(b) \( \frac{\mathrm{G}}{49} \)
(c) 49G
(d) 50G.
Answer: (b) \( \frac{\mathrm{G}}{49} \)
धारामापी से पूर्ण विक्षेप धारा \( I_g = 2\% \) मुख्य धारा \( I \implies I_g = \frac{2}{100} I = 0.02 I \)
शण्ट से प्रवाहित धारा \( I_s = I - I_g = I - 0.02 I = 0.98 I \)
शण्ट प्रतिरोध \( S = \frac{I_g G}{I_s} = \frac{0.02 I \times G}{0.98 I} = \frac{0.02}{0.98} G = \frac{2}{98} G = \frac{1}{49} G \)
तो शण्ट प्रतिरोध \( S = \frac{G}{49} \)
In simple words: जब किसी धारामापी को कम रेंज के एमीटर में बदलना होता है, तो उसके समानांतर एक छोटा प्रतिरोध (शण्ट) जोड़ा जाता है। यहाँ शण्ट का प्रतिरोध धारामापी के प्रतिरोध का 1/49 गुना है, ताकि अधिकांश धारा शण्ट से होकर गुजरे।
🎯 Exam Tip: शण्ट प्रतिरोध की गणना करते समय, यह सुनिश्चित करें कि धारामापी और शण्ट के समानांतर संयोजन में समान वोल्टेज ड्रॉप हो रहा है।
Question 10. एक परिनालिका में विद्युत धारा प्रवाहित होने के उपरान्त चुम्बकीय क्षेत्र B है। परिनालिका की लम्बाई व फेरों की संख्या को दुगुना करने पर वही चुम्बकीय क्षेत्र प्राप्त करने के लिए प्रवाहित धारा करनी पड़ेगी
(a) 21
(b) I
(c) 1/2
(d) 1/4.
Answer: (b) I
परिनालिका के अन्दर चुम्बकीय क्षेत्र \( B = \mu_0 \frac{N}{l} I \)
जहाँ \( N \) फेरों की संख्या है, \( l \) लम्बाई है, और \( I \) धारा है।
यदि लम्बाई \( l' = 2l \) और फेरों की संख्या \( N' = 2N \) हो,
तो नया चुम्बकीय क्षेत्र \( B' = \mu_0 \frac{N'}{l'} I' = \mu_0 \frac{2N}{2l} I' = \mu_0 \frac{N}{l} I' \)
वही चुम्बकीय क्षेत्र \( B \) प्राप्त करने के लिए, \( B' = B \implies \mu_0 \frac{N}{l} I' = \mu_0 \frac{N}{l} I \implies I' = I \)
In simple words: परिनालिका का चुम्बकीय क्षेत्र फेरों की संख्या प्रति इकाई लम्बाई और धारा पर निर्भर करता है। अगर फेरों की संख्या और लम्बाई दोनों को दोगुना कर दिया जाए, तो वही चुम्बकीय क्षेत्र पाने के लिए हमें उतनी ही धारा (I) प्रवाहित करनी पड़ेगी।
🎯 Exam Tip: परिनालिका के चुम्बकीय क्षेत्र का सूत्र \( B = \mu_0 n I \) याद रखें, जहाँ \( n = N/l \) फेरों की संख्या प्रति इकाई लम्बाई है। यदि \( N \) और \( l \) दोनों समान अनुपात में बदलते हैं, तो \( n \) अपरिवर्तित रहता है।
Question 11. एक टोरॉइड के अन्दर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का मान B है। यदि टोरॉइड की एकांक लम्बाई में फेरों की संख्या n है एवं इसमें प्रवाहित विद्युत धारा। हो तो इसके बाहर चुम्बकीय क्षेत्र का मान होगा
(a) B
(b) B/2
(c) शून्य
(d) 2B
Answer: (c) शून्य
टोरॉइड के बाहर चुम्बकीय क्षेत्र शून्य होता है क्योंकि बाहर के किसी भी एम्पीयरियन लूप द्वारा कोई शुद्ध धारा नहीं घिरी होती है।
In simple words: टोरॉइड के बाहर कोई चुम्बकीय क्षेत्र नहीं होता क्योंकि टोरॉइड के तार में प्रवाहित धाराएँ इस तरह से व्यवस्थित होती हैं कि बाहर की तरफ उनका चुम्बकीय प्रभाव एक-दूसरे को रद्द कर देता है।
🎯 Exam Tip: एम्पीयर के परिपथीय नियम के अनुसार, एक बंद लूप द्वारा घिरा शुद्ध धारा ही उस लूप पर चुम्बकीय क्षेत्र के रेखीय समाकलन को निर्धारित करती है। टोरॉइड के बाहर, शुद्ध धारा शून्य होती है।
Question 12. किसी धारामापी को एक वोल्टमीटर में रूपान्तरित किया जाता है
Answer: (अ) श्रेणीक्रम में उच्च प्रतिरोध जोड़कर
एक चल कुण्डली धारामापी को वोल्टमीटर में बदलने के लिए, उसके साथ श्रेणीक्रम में एक बहुत उच्च प्रतिरोध जोड़ा जाता है। यह उच्च प्रतिरोध धारामापी को उच्च वोल्टेज को मापने में मदद करता है और उसे क्षतिग्रस्त होने से बचाता है।
In simple words: धारामापी को वोल्टमीटर बनाने के लिए, एक बड़ा प्रतिरोध उसके साथ एक लाइन में जोड़ा जाता है। यह उसे ज़्यादा वोल्टेज झेलने और मापने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: वोल्टमीटर को हमेशा परिपथ में समानांतर में जोड़ा जाता है, और इसका प्रतिरोध आदर्श रूप से अनंत होना चाहिए ताकि यह परिपथ से न्यूनतम धारा ले।
Question 13. आदर्श वोल्टमीटर एवं आदर्श अमीटर के प्रतिरोध होने चाहिए
(a) क्रमशः शून्य एवं अनन्त
(b) क्रमशः अनन्त एवं शून्य
(c) दोनों के शून्य होने चाहिए
(d) दोनों के शून्य होने चाहिए
Answer: (b) क्रमशः अनन्त एवं शून्य
एक आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध अनन्त होना चाहिए ताकि यह परिपथ से कोई धारा न ले और वोल्टेज को सही ढंग से माप सके। एक आदर्श अमीटर का प्रतिरोध शून्य होना चाहिए ताकि यह परिपथ में कोई प्रतिरोध न जोड़े और धारा को सही ढंग से माप सके।
In simple words: अच्छे वोल्टमीटर का प्रतिरोध बहुत-बहुत ज़्यादा होता है, ताकि वह तार से बिजली न खींचे। वहीं, अच्छे एमीटर का प्रतिरोध एकदम शून्य होता है, ताकि वह बिजली के बहाव में रुकावट न डाले।
🎯 Exam Tip: वोल्टमीटर को हमेशा समानांतर में और एमीटर को श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है। इनके प्रतिरोध की यह विशेषता उन्हें सही रीडिंग देने में मदद करती है।
RBSE Class 12 Physics Chapter 7 अति लघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के विभिन्न स्रोतों के नाम लिखिए।
Answer: चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के प्रमुख स्रोत हैं:
1. स्थायी चुम्बक (जैसे बार चुम्बक)
2. धारावाही चालक (जिसमें विद्युत धारा प्रवाहित हो रही हो)
3. गतिमान आवेश (जैसे इलेक्ट्रॉन या प्रोटॉन)
4. विद्युत क्षेत्र में परिवर्तन (जैसे बदलते विद्युत क्षेत्र के कारण)
In simple words: चुम्बकीय क्षेत्र बनाने वाली चीज़ें स्थायी चुम्बक, बिजली ले जाने वाले तार, चलते हुए आवेश और बदलते हुए बिजली के क्षेत्र हैं।
🎯 Exam Tip: इन स्रोतों को याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये चुंबकत्व के मूल सिद्धांत हैं। स्थायी चुम्बक और धारावाही चालक सबसे सामान्य उदाहरण हैं।
Question 2. चुम्बकीय क्षेत्र की विमाएँ एवं मात्रक लिखिए।
Answer: चुम्बकीय क्षेत्र की विमाएँ \( [M^1 L^0 T^{-2} A^{-1}] \) होती हैं। इसका मात्रक टेसला (T) है।
न्यूटन/एम्पीयर-मीटर (N/Am) भी चुम्बकीय क्षेत्र का एक अन्य मात्रक है, जो टेसला के बराबर होता है।
In simple words: चुम्बकीय क्षेत्र को टेसला (T) में मापा जाता है। इसकी विमाएँ द्रव्यमान, समय और धारा पर निर्भर करती हैं।
🎯 Exam Tip: विमाओं को याद करने के लिए बल (\( F=qvB \)) या टॉर्क (\( \tau = NIAB \)) के सूत्रों का उपयोग करें, जहाँ से आप \( B \) की विमाएँ निकाल सकते हैं।
Question 3. गतिशील आवेश कौन से क्षेत्र उत्पन्न करते हैं ?
Answer: गतिशील आवेश विद्युत क्षेत्र और चुम्बकीय क्षेत्र दोनों उत्पन्न करते हैं।
जब कोई आवेश गति करता है, तो वह केवल विद्युत क्षेत्र ही नहीं, बल्कि एक चुम्बकीय क्षेत्र भी बनाता है।
In simple words: चलता हुआ आवेश बिजली का क्षेत्र और चुम्बक का क्षेत्र, दोनों बनाता है।
🎯 Exam Tip: ध्यान दें कि स्थिर आवेश केवल विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करते हैं, लेकिन गतिमान आवेश दोनों क्षेत्र उत्पन्न करते हैं। त्वरित आवेश विद्युत चुम्बकीय तरंगें भी उत्पन्न करते हैं।
Question 4. एक आवेश q चुम्बकीय क्षेत्र \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) के लम्बवत् दिशा में वेग से प्रवेश करता है। इस आवेश पर बल का पथ कैसा होगा ?
Answer: जब कोई आवेशित कण चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् गति करता है, तो उस पर लगने वाला बल कण को एक वृत्ताकार पथ पर गति कराता है। यह बल हमेशा कण के वेग की दिशा के लम्बवत् होता है, जिससे कण की गति की दिशा लगातार बदलती रहती है, लेकिन उसकी चाल स्थिर रहती है।
In simple words: अगर एक आवेश सीधी रेखा में चुम्बकीय क्षेत्र में घुसता है, तो वह गोल-गोल घूमने लगता है, यानी उसका रास्ता एक वृत्त बन जाता है।
🎯 Exam Tip: चुम्बकीय बल कभी भी आवेशित कण की गतिज ऊर्जा को नहीं बदलता, यह केवल उसकी गति की दिशा को बदलता है।
Question 5. ऐम्पीयर धारा की अन्तर्राष्ट्रीय मात्रक पद्धति में परिभाषा दीजिए।
Answer: 1 ऐम्पीयर वह स्थिर विद्युत धारा है जो निर्वात् में एक-दूसरे से 1 मीटर की दूरी पर रखे दो सीधे, लम्बे, समानांतर और नगण्य अनुप्रस्थ काट वाले चालकों में प्रवाहित होने पर, प्रत्येक तार की प्रति मीटर लम्बाई पर \( 2 \times 10^{-7} \) न्यूटन का बल उत्पन्न करती है।
In simple words: 1 ऐम्पीयर बिजली की वह मात्रा है जो दो तारों में बहने पर उन्हें 1 मीटर दूर रखने पर उनके बीच \( 2 \times 10^{-7} \) न्यूटन का बल लगाती है। यह बिजली मापने की मानक इकाई है।
🎯 Exam Tip: यह परिभाषा बल के अनुभव के आधार पर दी गई है, जो चुम्बकीय प्रभाव को दर्शाती है। यह धारा की मूलभूत परिभाषाओं में से एक है।
Question 6. यदि कोई प्रोटॉन ऊर्ध्व तल में ऊपर की ओर गति कर रहा है तथा उस पर चुम्बकीय बल क्षैतिज तल में उत्तर की ओर लगता है, तो चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा क्या है ?
Answer: फ्लेमिंग के वामहस्त नियम (Fleming's Left-Hand Rule) के अनुसार, यदि प्रोटॉन ऊर्ध्व तल में ऊपर की ओर गति कर रहा है (अंगूठा - बल की दिशा), और उस पर चुम्बकीय बल क्षैतिज तल में उत्तर की ओर लग रहा है (तर्जनी - चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा), तो चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा क्षैतिज तल में पश्चिम की ओर होगी।
In simple words: फ्लेमिंग के नियम का उपयोग करके, यदि प्रोटॉन ऊपर जा रहा है और उस पर उत्तर की ओर बल लग रहा है, तो चुम्बकीय क्षेत्र पश्चिम की तरफ होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: फ्लेमिंग के वामहस्त नियम को सही ढंग से लागू करने के लिए, अंगूठा, तर्जनी और मध्यमा को एक-दूसरे के लंबवत रखें और उन्हें बल, क्षेत्र और धारा (आवेश की गति की दिशा) से संबंधित करें।
Question 7. एक आवेशित कर्ण, सम चुम्बकीय क्षेत्र के समान्तर गति करता है, तो कण की पथ कैसा होगा ?
Answer: जब एक आवेशित कण समरूप चुम्बकीय क्षेत्र के समानांतर गति करता है, तो उस पर कोई चुम्बकीय बल नहीं लगता है क्योंकि \( \theta = 0^\circ \) या \( \theta = 180^\circ \) होने पर \( \sin\theta = 0 \) होता है। इस स्थिति में कण का पथ अपरिवर्तित रहता है, अर्थात वह सीधा गति करता रहेगा।
In simple words: जब एक आवेशित कण चुम्बकीय क्षेत्र के साथ-साथ चलता है, तो उस पर कोई बल नहीं लगता। इसलिए, उसका रास्ता सीधा ही रहता है, वह मुड़ता नहीं है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि चुम्बकीय बल \( F = qvB \sin\theta \) में \( \theta \) वेग सदिश और चुम्बकीय क्षेत्र सदिश के बीच का कोण होता है। जब वेग और क्षेत्र समानांतर होते हैं, तो \( \sin\theta \) शून्य होता है।
Question 8. किसी वृत्ताकार कुण्डली के व्यासभिमुखी सिरों पर एक नियत-वोल्टता की बैटरी संयोजित है। कुण्डली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र कितना होगा?
Answer: जब एक नियत-वोल्टता की बैटरी वृत्ताकार कुण्डली के व्यासभिमुखी (diametrically opposite) सिरों पर संयोजित होती है, तो कुण्डली दो समान अर्धवृत्ताकार भागों में बंट जाती है। इन दोनों अर्धवृत्ताकार भागों में धारा विपरीत दिशाओं में प्रवाहित होती है, और प्रत्येक भाग केंद्र पर समान लेकिन विपरीत चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। इसलिए, कुण्डली के केंद्र पर परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र शून्य होगा।
In simple words: जब बिजली एक गोल तार में आमने-सामने से जाती है, तो वह केंद्र में कोई चुम्बकीय क्षेत्र नहीं बनाती। दोनों तरफ की बिजली का चुम्बकीय प्रभाव एक-दूसरे को खत्म कर देता है।
🎯 Exam Tip: यह एम्पीयर के नियम और चुम्बकीय क्षेत्र के सदिश योग के सिद्धांत पर आधारित है। समान और विपरीत प्रभावों के कारण केंद्र पर शुद्ध क्षेत्र रद्द हो जाता है।
Question 9. किसी N फेरों वाली R त्रिज्या की धारावाही कुण्डली को खोलकर सीधे लम्बे तार में बदलने पर, इससे R दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान कुण्डली के केन्द्र पर मान का कितना गुना होगा ?
Answer: कुण्डली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र \( B_c = \frac{\mu_0 NI}{2R} \)
तार की लम्बाई \( L = N \times (2\pi R) \)
सीधे तार से R दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र \( B_t = \frac{\mu_0 I}{2\pi R} \)
अब, \( \frac{B_t}{B_c} = \frac{\frac{\mu_0 I}{2\pi R}}{\frac{\mu_0 NI}{2R}} = \frac{1}{N\pi} \)
इसलिए, सीधे तार से \( R \) दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान कुण्डली के केंद्र पर मान का \( \frac{1}{N\pi} \) गुना होगा।
In simple words: जब एक गोल कुण्डली को खोलकर सीधा तार बनाते हैं, तो तार के केंद्र से उसी त्रिज्या की दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र कुण्डली के केंद्र पर बने क्षेत्र का \( \frac{1}{N\pi} \) गुना हो जाता है। इसका मतलब है कि कुण्डली का क्षेत्र ज्यादा मजबूत होता है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के तुलनात्मक प्रश्नों को हल करते समय, दोनों स्थितियों के लिए सही सूत्रों का उपयोग करें और फिर अनुपातों को सावधानी से सरल करें।
Question 10. हेल्महोल्ट्ज़ कुण्डली में दोनों नति परिवर्तन बिन्दुओं के मध्य दूरी कितनी होती है ?
Answer: हेल्महोल्ट्ज़ कुण्डली में दोनों नति परिवर्तन बिन्दुओं के मध्य दूरी कुण्डली की त्रिज्या के बराबर होती है।
नति परिवर्तन बिंदु वे बिंदु होते हैं जहां चुम्बकीय क्षेत्र का ढाल अधिकतम होता है। हेल्महोल्ट्ज़ कुंडलियाँ एक समान चुम्बकीय क्षेत्र बनाने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।
In simple words: हेल्महोल्ट्ज़ कुण्डली में, जहाँ चुम्बकीय क्षेत्र की ताकत सबसे तेज़ी से बदलती है, उन दो जगहों के बीच की दूरी कुण्डली की गोलाई (त्रिज्या) जितनी ही होती है।
🎯 Exam Tip: हेल्महोल्ट्ज़ कुण्डली की यह विशेषता इसे एक समान चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए आदर्श बनाती है, जो कई भौतिकी प्रयोगों में आवश्यक है।
Question 11. ऐम्पीयर के परिपथीय नियम का गणितीय रूप लिखो।
Answer: एम्पीयर के परिपथीय नियम के अनुसार, "निर्वात् में किसी बन्द पथ के चुम्बकीय क्षेत्र का रेखीय समाकलन का मान, निर्वात् की चुम्बकशीलता (\( \mu_0 \)) तथा उस बन्द पथ से गुजरने वाली धाराओं के बीजगणितीय योग के गुणनफल के बराबर होता है।"
अतः गणितीय रूप में इसे ऐसे लिखा जाता है: \( \oint \overrightarrow{\mathrm{B}} \cdot \overrightarrow{d l}=\mu_{0} \Sigma \mathrm{1} \)
जहाँ \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) चुम्बकीय क्षेत्र है, \( \overrightarrow{d l} \) बंद पथ का एक छोटा तत्व है, \( \mu_0 \) निर्वात् की चुम्बकशीलता है, और \( \Sigma \mathrm{1} \) बंद पथ द्वारा घिरी कुल धारा है।
In simple words: एम्पीयर का नियम कहता है कि किसी भी बंद रास्ते के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र को जोड़ने पर, उसका मान उस रास्ते के अंदर बहने वाली कुल बिजली (धारा) के \( \mu_0 \) गुना होता है।
🎯 Exam Tip: यह नियम चुम्बकीय क्षेत्रों की गणना करने के लिए बहुत उपयोगी है, खासकर उन स्थितियों में जहाँ उच्च समरूपता होती है (जैसे सीधे तार, परिनालिका, और टोरॉइड)।
Question 12. किसी आन्तरिक त्रिज्या R की ताँबे की लम्बी नली में विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। नली के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र का मान लिखिए।
Answer: एक लम्बी ताँबे की नली में विद्युत धारा प्रवाहित होने पर, नली के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र का मान शून्य होगा।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एम्पीयर के परिपथीय नियम के अनुसार, नली के भीतर किसी भी बंद पथ द्वारा घिरी शुद्ध धारा शून्य होती है।
In simple words: जब बिजली एक खाली ताँबे की लंबी नली (ट्यूब) से होकर बहती है, तो उस नली के अंदर कोई चुम्बकीय क्षेत्र नहीं बनता। अंदर कोई बिजली नहीं होती, इसलिए चुम्बकीय क्षेत्र भी नहीं होता।
🎯 Exam Tip: यह परिणाम एम्पीयर के नियम का एक महत्वपूर्ण अनुप्रयोग है। धारा केवल चालक की सतह पर ही होती है, जिसके कारण भीतर का क्षेत्र शून्य हो जाता है।
Question 13. धारामापी में प्रयुक्त स्थायी चुम्बक के ध्रुवखण्ड अवतल आकृति में क्यों बनाए जाते हैं ?
Answer: धारामापी में प्रयुक्त स्थायी चुम्बक के ध्रुवखण्ड अवतल आकृति में इसलिए बनाए जाते हैं ताकि चुम्बकीय क्षेत्र त्रिज्यीय (radial) हो।
त्रिज्यीय क्षेत्र यह सुनिश्चित करता है कि कुण्डली पर लगने वाला बल आघूर्ण (torque) हमेशा अधिकतम रहे, क्योंकि कुण्डली का तल चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं के समानांतर रहता है, जिससे \( \sin\theta = 1 \) होता है।
In simple words: धारामापी में लगे चुम्बक के किनारों को घुमावदार (अवतल) इसलिए बनाया जाता है ताकि कुण्डली पर हमेशा सबसे ज्यादा घूमने वाला बल लग सके। इससे माप लेना आसान हो जाता है।
🎯 Exam Tip: त्रिज्यीय चुम्बकीय क्षेत्र के कारण, विक्षेप धारा के सीधे समानुपाती होता है, जिससे धारामापी एक रैखिक पैमाने पर काम करता है और रीडिंग लेना आसान हो जाता है।
Question 14. धारामापी की सुग्राहिता कैसे बढ़ाई जा सकती है ?
Answer: धारामापी की सुग्राहिता बढ़ाने के लिए निम्नलिखित तरीके अपनाए जा सकते हैं:
1. कुण्डली में फेरों की संख्या (N) बढ़ाकर।
2. कुण्डली का क्षेत्रफल (A) बढ़ाकर।
3. चुम्बकीय क्षेत्र (B) की तीव्रता बढ़ाकर।
4. स्प्रिंग के मरोड़ नियतांक (C) को कम करके।
5. नरम लोहे का क्रोड (soft iron core) उपयोग करके, जो चुम्बकीय क्षेत्र को केंद्रित करता है।
In simple words: धारामापी को और संवेदनशील बनाने के लिए, हम उसकी कुण्डली में तार के अधिक फेरे लगा सकते हैं, कुण्डली को बड़ा बना सकते हैं, मजबूत चुम्बक का उपयोग कर सकते हैं, या नरम लोहे का कोर लगा सकते हैं। इससे वह छोटी से छोटी बिजली को भी माप पाएगा।
🎯 Exam Tip: सुग्राहिता के लिए सूत्र \( S_i = \frac{NAB}{C} \) याद रखें। सुग्राहिता सीधे \( N, A, B \) के समानुपाती और \( C \) के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
Question 16. साइक्लोट्रॉन का उपयोग हल्के आवेशित कण को त्वरित करने के लिए नहीं करते हैं। क्यों ?
Answer: साइक्लोट्रॉन का उपयोग हल्के आवेशित कणों (जैसे इलेक्ट्रॉन) को त्वरित करने के लिए नहीं किया जाता है क्योंकि अधिक ऊर्जा पर हल्के कणों का द्रव्यमान अपेक्षीय प्रभाव (relativistic effect) के कारण काफी बढ़ जाता है।
द्रव्यमान में यह वृद्धि कण की आवृत्ति को बदल देती है, जिससे वह रेडियो आवृत्ति विद्युत क्षेत्र के साथ अपनी कला (phase) से बाहर हो जाता है और त्वरित नहीं हो पाता है।
In simple words: साइक्लोट्रॉन छोटे कणों को तेज करने के लिए अच्छा नहीं है क्योंकि जब वे बहुत तेज हो जाते हैं, तो उनका वजन बहुत बढ़ जाता है। इससे साइक्लोट्रॉन ठीक से काम नहीं कर पाता और कणों को और तेज नहीं कर पाता।
🎯 Exam Tip: अपेक्षीय प्रभाव भारी कणों (जैसे प्रोटॉन) के लिए कम महत्वपूर्ण होता है, इसलिए साइक्लोट्रॉन प्रोटॉन जैसे भारी कणों को त्वरित करने में अधिक प्रभावी होता है।
Question 17. आप समचुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए किस युक्ति का चयन करेंगे?
Answer: समचुम्बकीय क्षेत्र (uniform magnetic field) उत्पन्न करने के लिए हेल्महोल्ट्ज़ कुण्डली (Helmholtz coil) का चयन किया जाएगा।
हेल्महोल्ट्ज़ कुण्डलियाँ दो समान वृत्ताकार कुण्डलियों का एक युग्म होती हैं, जो एक-दूसरे से एक निश्चित दूरी पर रखी होती हैं, जिससे उनके बीच के क्षेत्र में एक अत्यधिक समान चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।
In simple words: एक बराबर चुम्बकीय क्षेत्र बनाने के लिए हेल्महोल्ट्ज़ कुण्डली का इस्तेमाल किया जाता है। यह दो एक जैसी गोल कुण्डलियाँ होती हैं जो खास दूरी पर रखी जाती हैं।
🎯 Exam Tip: हेल्महोल्ट्ज़ कुण्डली का उपयोग प्रयोगशालाओं में बहुत महत्वपूर्ण है, जहाँ किसी विशेष प्रयोग के लिए एक नियंत्रित और एक समान चुम्बकीय क्षेत्र की आवश्यकता होती है।
Question 18. किसी साइक्लोट्रॉन में आवेशित कण का किसी dee में अर्द्ध-आवर्तकाल पथ की त्रिज्या एवं कण की चाल पर किस प्रकार निर्भर करता है।
Answer: साइक्लोट्रॉन में आवेशित कण का अर्द्ध-आवर्तकाल \( t = \frac{\pi m}{q \mathrm{B}} \)
यहाँ \( m \) कण का द्रव्यमान है, \( q \) कण का आवेश है, और \( B \) चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता है।
इस सूत्र से स्पष्ट है कि अर्द्ध-आवर्तकाल कण की चाल \( v \) और पथ की त्रिज्या \( r \) पर निर्भर नहीं करता है। यह केवल कण के द्रव्यमान, आवेश और चुम्बकीय क्षेत्र पर निर्भर करता है।
In simple words: साइक्लोट्रॉन में, एक आवेशित कण को आधे चक्कर पूरा करने में लगने वाला समय उसकी गति या उसके रास्ते की गोलाई पर निर्भर नहीं करता। यह बस कण के वजन, आवेश और चुम्बकीय क्षेत्र की ताकत पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: यह साइक्लोट्रॉन के काम करने का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है, जिसे 'अनुनाद शर्त' (resonance condition) कहा जाता है। इससे कण को लगातार त्वरित किया जा सकता है।
Question 19. धारामापी को वोल्टमीटर में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक उच्च प्रतिरोध का सूत्र लिखिए।
Answer: धारामापी को वोल्टमीटर में बदलने के लिए आवश्यक उच्च प्रतिरोध का सूत्र है:
उच्च प्रतिरोध \( R = \frac{\mathrm{V}}{\mathrm{I}_{g}} – G \)
जहाँ \( V \) वोल्टमीटर का अधिकतम परास (range) है, \( \mathrm{I}_g \) धारामापी से पूर्ण स्केल पर विक्षेप के लिए आवश्यक धारा है, और \( G \) धारामापी का प्रतिरोध है।
यह प्रतिरोध धारामापी के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है।
In simple words: धारामापी को वोल्टमीटर बनाने के लिए, एक बड़ा प्रतिरोध \( R \) उसके साथ लाइन में जोड़ा जाता है। इस प्रतिरोध का मान वोल्टमीटर की कुल माप क्षमता \( V \), धारामापी से बहने वाली बिजली \( I_g \) और धारामापी के अपने प्रतिरोध \( G \) पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: वोल्टमीटर में, यह उच्च श्रेणी प्रतिरोध धारामापी को अत्यधिक धारा से बचाता है और यह सुनिश्चित करता है कि यह एक विस्तृत वोल्टेज रेंज को माप सके।
RBSE Class 12 Physics Chapter 7 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. ऑरस्टेड के प्रयोग से प्राप्त निष्कर्षों को लिखिए।
Answer: ऑरस्टेड के प्रयोग से प्राप्त निष्कर्ष (Conclusions of Oersted's Experiments) निम्नलिखित हैं:
1. जब किसी चालक तार में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उसके चारों ओर एक चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। यह पहला प्रयोग था जिसने विद्युत धारा और चुम्बकीय क्षेत्र के बीच संबंध स्थापित किया।
2. चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण चालक तार में प्रवाहित धारा की प्रबलता पर निर्भर करता है। जितनी अधिक धारा, उतना ही प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र।
3. चालक तार के चारों ओर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र चालक तार के सापेक्ष प्रेक्षण बिंदु की स्थिति पर भी निर्भर करता है। तार से दूर जाने पर क्षेत्र की प्रबलता कम हो जाती है।
In simple words: ऑरस्टेड के प्रयोग ने दिखाया कि जब बिजली किसी तार में बहती है, तो उसके चारों ओर चुम्बक जैसा क्षेत्र बन जाता है। यह क्षेत्र बिजली की मात्रा और तार से दूरी पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: यह प्रयोग विद्युत चुम्बकत्व के अध्ययन का आधार बना और मैक्सवेल के समीकरणों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Question 2. बायो-सावर्ट नियम का सदिश रूप लिखिए और इसकी व्याख्या कीजिए।
Answer: बायो-सावर्ट नियम का सदिश रूप (Vector form of Biot-Savart Law):
एक लघु धारावाही अल्पांश \( \overrightarrow{dl} \) से \( \vec{r} \) दूरी पर स्थित किसी बिंदु \( P \) पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र \( \overrightarrow{dB} \) का सदिश रूप इस प्रकार दिया जाता है:
\( \overrightarrow{dB} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I (\overrightarrow{dl} \times \vec{r})}{r^3} \)
यहाँ, \( \mu_0 \) निर्वात् की चुम्बकशीलता है, \( I \) धारा है, \( \overrightarrow{dl} \) धारा अल्पांश की सदिश लंबाई है, और \( \vec{r} \) धारा अल्पांश से बिंदु \( P \) तक का स्थिति सदिश है।
इस नियम के अनुसार, \( \overrightarrow{dB} \) की दिशा अल्पांश \( \overrightarrow{dl} \) तथा स्थिति सदिश \( \vec{r} \) के तल के लम्बवत् होती है, जिसे दाहिने हाथ के नियम से ज्ञात किया जा सकता है।
In simple words: बायो-सावर्ट का नियम बताता है कि एक छोटे से तार के टुकड़े में बहने वाली बिजली (धारा) से कितनी दूर और किस दिशा में चुम्बकीय क्षेत्र बनता है। यह सूत्र हमें दिशा और ताकत दोनों बताता है।
🎯 Exam Tip: सदिश गुणनफल \( (\overrightarrow{dl} \times \vec{r}) \) का उपयोग दिशा को इंगित करता है, जो एम्पीयर के दाहिने हाथ के नियम के अनुरूप है। \( r^3 \) हर में होने के बावजूद, यह दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती ही है क्योंकि अंश में \( r \) सदिश भी शामिल है।
Question 3. चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए दो नियमों की व्याख्या कीजिए।
Answer: चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित दो नियमों का उपयोग किया जा सकता है:
(i) **SNOW नियम:** यह नियम चालक तार में धारा प्रवाह के कारण उसके समीप उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित कम्पास सुई के उत्तरी ध्रुव (N-pole) के विक्षेप की दिशा ज्ञात करने में मदद करता है। इस नियम के अनुसार, "यदि चालक में धारा प्रवाह दक्षिण (S) से उत्तर (N) की ओर हो रहा है और कम्पास सुई चालक के ऊपर (Over-O) है, तो कम्पास सुई का उत्तरी ध्रुव पश्चिम (W) की ओर विक्षेपित हो जाता है।" यह नियम विशेष रूप से सीधे चालकों के लिए लागू होता है।
(ii) **दाँये हाथ के अंगूठे का नियम (Right Hand Thumb Rule):** इस नियम के अनुसार, "यदि किसी धारावाही चालक को दाहिने हाथ से इस प्रकार पकड़ा जाए कि अंगूठा चालक में प्रवाहित धारा की दिशा में हो, तो अँगुलियों का घुमाव (जो चालक को घेरे हुए हैं) चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा व्यक्त करेगा।" यह नियम सीधे और वृत्ताकार चालकों दोनों के लिए उपयोगी है। यह हमें चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा बताता है।
(iv) **मैक्सवेल का कार्क पेंच नियम (Maxwell's Cork-Screw Rule):** इस नियम के अनुसार, "यदि धारावाही चालक के अक्ष पर दाहिने हाथ से एक दक्षिणावर्त (Clockwise) पेंच को घुमाने की कल्पना करें और पेंच की नोंक चालक में प्रवाहित धारा की दिशा में गति करे, तो पेंच के घूमाने की दिशा चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा व्यक्त करेगी।" यह नियम भी दाहिने हाथ के अंगूठे के नियम के समान ही परिणाम देता है और वृत्ताकार चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा निर्धारित करता है।
In simple words: चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा जानने के दो मुख्य तरीके हैं: पहला, SNOW नियम जो कम्पास का उपयोग करता है और दूसरा, दाहिने हाथ के अंगूठे का नियम, जिसमें अंगूठा बिजली की दिशा और उंगलियाँ चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा बताती हैं। मैक्सवेल का पेंच नियम भी इसी सिद्धांत पर आधारित है।
🎯 Exam Tip: दाहिने हाथ के अंगूठे का नियम सबसे व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। इन नियमों का उपयोग करके चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को आसानी से दृश्यमान किया जा सकता है।
Question 4. जब आवेशित कण किसी समचुम्बकीय क्षेत्र में \( \theta \) से कोण (जहाँ \( 0 < \theta < 90^\circ \) है) पर प्रवेश करता है, तो कण का पथ कैसा होगा ? इस पथ का चूड़ी अन्तराल या पिच (Pitch) ज्ञात कीजिए।
Answer: जब एक आवेशित कण \( \theta \) कोण पर एक समचुम्बकीय क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो कण का पथ एक कुंडलिनी (helical) होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वेग के दो घटक होते हैं:
1. चुम्बकीय क्षेत्र के समानांतर घटक \( v_{||} = v \cos\theta \), जिसके कारण कण क्षेत्र की दिशा में सीधा आगे बढ़ता है।
2. चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् घटक \( v_{\perp} = v \sin\theta \), जिसके कारण कण एक वृत्ताकार पथ पर गति करता है।
इन दोनों गतियों के संयोजन से कण एक कुंडलिनी पथ पर चलता है।
**चूड़ी अन्तराल या पिच (Pitch):** आवेशित कण के एक घूर्णन में कण द्वारा चुम्बकीय क्षेत्र के अनुदिश चली गई दूरी चूड़ी अन्तराल या पिच कहलाती है।
आवर्तकाल \( T = \frac{2\pi m}{qB} \)
पिच \( P = v_{||} T = (v \cos\theta) \frac{2\pi m}{qB} = \frac{2\pi mv \cos\theta}{qB} \)
कुंडलिनी पथ की त्रिज्या \( r = \frac{m v_{\perp}}{qB} = \frac{mv \sin\theta}{qB} \)
In simple words: जब एक आवेशित कण चुम्बकीय क्षेत्र में एक तिरछे कोण पर घुसता है, तो वह सीधा चलने और गोल घूमने, दोनों को मिलाकर एक स्प्रिंग जैसे रास्ते (कुंडलिनी) पर चलता है। एक चक्कर पूरा करने में वह जितनी दूरी आगे बढ़ता है, उसे पिच कहते हैं।
🎯 Exam Tip: वेग के दो घटकों को याद रखें – एक क्षेत्र के समानांतर (जो सीधी गति देता है) और दूसरा क्षेत्र के लम्बवत् (जो वृत्ताकार गति देता है)। इन दोनों के संयोजन से ही कुंडलिनी बनती है।
Question 5. वृत्ताकार धारावाही कुण्डली के अक्ष पर केन्द्र से R/2 दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र तथा केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र के मध्य सम्बन्ध ज्ञात कीजिए। यहाँ R कुण्डली की त्रिज्या है।
Answer: कुण्डली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र \( B_0 = \frac{\mu_0 N I}{2R} \)
कुण्डली की अक्ष पर केन्द्र से \( x \) दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र \( B_x = \frac{\mu_0 N I R^2}{2(R^2 + x^2)^{3/2}} \)
यहाँ अभीष्ट बिंदु \( P \) की दूरी \( x = \frac{R}{2} \) है। तो अक्षीय स्थिति में चुम्बकीय क्षेत्र \( B_{R/2} \) होगा:
\( B_{R/2} = \frac{\mu_0 N I R^2}{2(R^2 + (\frac{R}{2})^2)^{3/2}} = \frac{\mu_0 N I R^2}{2(R^2 + \frac{R^2}{4})^{3/2}} = \frac{\mu_0 N I R^2}{2(\frac{5R^2}{4})^{3/2}} \)
\( B_{R/2} = \frac{\mu_0 N I R^2}{2 \cdot (\frac{5}{4})^{3/2} \cdot (R^2)^{3/2}} = \frac{\mu_0 N I R^2}{2 \cdot \frac{5\sqrt{5}}{8} \cdot R^3} = \frac{4 \mu_0 N I}{5\sqrt{5} R} \)
अब \( B_{R/2} \) और \( B_0 \) का अनुपात लेते हैं:
\( \frac{B_{R/2}}{B_0} = \frac{\frac{4 \mu_0 N I}{5\sqrt{5} R}}{\frac{\mu_0 N I}{2R}} = \frac{4}{5\sqrt{5}} \times 2 = \frac{8}{5\sqrt{5}} \)
तो \( B_{R/2} = \frac{8}{5\sqrt{5}} B_0 \)
संख्यात्मक मान: \( \frac{8}{5\sqrt{5}} \approx \frac{8}{5 \times 2.236} \approx \frac{8}{11.18} \approx 0.7155 \)
अतः \( B_{R/2} \approx 0.72 B_0 \)
In simple words: एक गोल कुण्डली के केंद्र से उसकी आधी त्रिज्या की दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र, केंद्र पर बने चुम्बकीय क्षेत्र का लगभग 0.72 गुना होता है। यह दिखाता है कि केंद्र से दूर जाने पर चुम्बकीय क्षेत्र थोड़ा कमजोर हो जाता है।
🎯 Exam Tip: यह सूत्र बायो-सावर्ट नियम का उपयोग करके व्युत्पन्न किया जाता है। \( (\frac{5R^2}{4})^{3/2} \) जैसे पदों को सरल करते समय गणितीय गणनाओं में सावधानी बरतें।
Question 7. चुम्बकीय क्षेत्र का परिसंचरण क्या है ? समझाइए।
Answer: चुम्बकीय क्षेत्र का परिसंचरण (Circulation of Magnetic Field) किसी बंद पथ के अनुदिश चुम्बकीय क्षेत्र के रेखीय समाकलन को कहते हैं। इसे एम्पीयर के परिपथीय नियम द्वारा परिभाषित किया जाता है।
यदि हम एक बंद पथ (जिसे एम्पीयरियन लूप कहते हैं) पर विचार करें और इस पथ को छोटे-छोटे अल्पांशों (\( \overrightarrow{\delta l} \)) में विभाजित करें, तथा प्रत्येक अल्पांश पर चुम्बकीय क्षेत्र \( \overrightarrow{B} \) का मान ज्ञात करें, तो परिसंचरण इन सभी \( \overrightarrow{B} \cdot \overrightarrow{\delta l} \) गुणनफलों का योग होता है।
गणितीय रूप में, चुम्बकीय क्षेत्र का परिसंचरण \( \oint \overrightarrow{B} \cdot \overrightarrow{dl} \) द्वारा दिया जाता है।
एम्पीयर का परिपथीय नियम कहता है कि किसी बंद पथ के अनुदिश चुम्बकीय क्षेत्र का परिसंचरण उस पथ द्वारा घिरी हुई कुल धारा (\( I_{enc} \)) के \( \mu_0 \) गुना होता है:
\( \oint \overrightarrow{B} \cdot \overrightarrow{dl} = \mu_0 I_{enc} \)
In simple words: चुम्बकीय क्षेत्र का परिसंचरण किसी बंद रास्ते पर चुम्बकीय क्षेत्र की 'घूमने की ताकत' को बताता है। यह उस रास्ते के अंदर बह रही कुल बिजली (धारा) से जुड़ा होता है।
🎯 Exam Tip: परिसंचरण एक अदिश राशि है, जबकि चुम्बकीय क्षेत्र और पथ अल्पांश सदिश राशियाँ हैं। यह एम्पीयर के नियम का एक मूलभूत सिद्धांत है।
Question 8. किसी धारावाही परिनालिका तथा दण्ड चुम्बक के व्यवहार में क्या अन्तर है ?
Answer: धारावाही परिनालिका और दण्ड चुम्बक दोनों ही चुम्बकीय गुण प्रदर्शित करते हैं, लेकिन उनके व्यवहार में कुछ महत्वपूर्ण अन्तर होते हैं:
1. **चुम्बकीय क्षेत्र की एकरूपता:** परिनालिका के अन्दर चुम्बकीय बल रेखाएँ लगभग एक-दूसरे के समानांतर होती हैं, जिससे इसके अन्दर एक समान चुम्बकीय क्षेत्र बनता है (किनारों को छोड़कर)। जबकि दण्ड चुम्बक के अन्दर बल रेखाएँ थोड़ी वक्र प्रकृति की होती हैं, जिससे क्षेत्र पूरी तरह से एक समान नहीं होता।
2. **चुम्बकीय क्षेत्र का नियंत्रण:** परिनालिका में चुम्बकीय क्षेत्र की प्रबलता धारा को बदलकर, फेरों की संख्या को बदलकर, या कोर सामग्री को बदलकर नियंत्रित की जा सकती है। दण्ड चुम्बक का क्षेत्र स्थिर होता है।
3. **ध्रुवों की प्रबलता:** परिनालिका के ध्रुवों की प्रबलता उसके डिज़ाइन और धारा पर निर्भर करती है। दण्ड चुम्बक के ध्रुवों की प्रबलता उसकी अपनी सामग्री और चुम्बकत्व पर निर्भर करती है।
4. **ध्रुवों की पहचान:** परिनालिका में धारा की दिशा को बदलकर उसके ध्रुवों (उत्तरी और दक्षिणी) को पलटा जा सकता है। दण्ड चुम्बक के ध्रुव स्थायी होते हैं।
In simple words: एक बिजली से चलने वाली परिनालिका के अंदर चुम्बकीय क्षेत्र बराबर होता है, और हम बिजली कम-ज्यादा करके इसकी ताकत बदल सकते हैं। वहीं, एक साधारण चुम्बक का क्षेत्र उतना बराबर नहीं होता और उसकी ताकत को बदला नहीं जा सकता। परिनालिका के ध्रुव (उत्तर-दक्षिण) भी बदले जा सकते हैं।
🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि परिनालिका एक विद्युत चुम्बक है, जबकि दण्ड चुम्बक एक स्थायी चुम्बक है, और यही उनके व्यवहार में मुख्य अन्तर का कारण बनता है।
Question 9. दो समान्तर धारावाही चालकों में एक के कारण दूसरे की एकांक लम्बाई पर चुम्बकीय बल की गणना करो।
Answer: जब दो समान्तर धारावाही चालक तारों में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो वे एक-दूसरे पर चुम्बकीय बल आरोपित करते हैं।
**सिद्धांत:** हम जानते हैं कि किसी धारावाही चालक तार के चारों ओर एक चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। यदि इस चुम्बकीय क्षेत्र में कोई अन्य धारावाही चालक तार रखा जाए, तो उस पर बल कार्य करता है। इसी सिद्धांत पर ये तार एक-दूसरे पर बल लगाते हैं।
माना दो सीधे, लम्बे और समानांतर धारावाही चालक तार AB और CD निर्वात् में एक-दूसरे से \( r \) दूरी पर रखे हैं। इनमें क्रमशः \( I_1 \) और \( I_2 \) धाराएँ प्रवाहित हो रही हैं।
तार AB में \( I_1 \) धारा के कारण तार CD की स्थिति पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र \( B_1 = \frac{\mu_0 I_1}{2\pi r} \) होता है।
इस \( B_1 \) चुम्बकीय क्षेत्र में तार CD में प्रवाहित धारा \( I_2 \) के कारण तार CD की \( L \) लम्बाई पर लगने वाला लॉरेंज बल \( F_2 = I_2 L B_1 \sin\theta \) होगा।
चूंकि तार CD, \( B_1 \) के लंबवत है, इसलिए \( \theta = 90^\circ \) और \( \sin 90^\circ = 1 \)
\( F_2 = I_2 L \frac{\mu_0 I_1}{2\pi r} \)
तार CD की एकांक लम्बाई पर लगने वाला बल \( f_2 = \frac{F_2}{L} = \frac{\mu_0 I_1 I_2}{2\pi r} \)
इसी प्रकार, तार CD में \( I_2 \) धारा के कारण तार AB पर लगने वाला बल भी समान परिमाण का होगा।
**बल की दिशा:**
1. यदि दोनों तारों में धाराएँ समान दिशा (same direction) में प्रवाहित होती हैं, तो उनके मध्य आकर्षण बल (force of attraction) लगता है।
2. यदि धाराएँ विपरीत दिशा (opposite direction) में प्रवाहित होती हैं, तो उनके मध्य प्रतिकर्षण बल (force of repulsion) लगता है।
यह दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम या दाहिने हाथ के नियम से ज्ञात की जा सकती है।
In simple words: जब दो तार जिनमें बिजली बह रही हो, एक-दूसरे के समानांतर रखे होते हैं, तो वे एक-दूसरे को खींचते या धकेलते हैं। अगर बिजली एक ही दिशा में बहे, तो वे खींचते हैं, और अगर विपरीत दिशा में बहे, तो धकेलते हैं। उनके बीच लगने वाला बल, तारों में बहने वाली बिजली की मात्रा और उनके बीच की दूरी पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: यह नियम एम्पीयर की परिभाषा का आधार है। बल की दिशा के लिए फ्लेमिंग के वामहस्त नियम का उपयोग करें, और सूत्र \( f = \frac{\mu_0 I_1 I_2}{2\pi r} \) को याद रखें।
Question 9. दो समान्तर धारावाही चालकों में एक के कारण दूसरे की एकांक लम्बाई पर चुम्बकीय बल की गणना करो।
Answer: दो समान्तर धारावाही चालकों के बीच लगने वाला चुम्बकीय बल:
हमने देखा है कि जब किसी चालक तार में करंट बहता है, तो उसके चारों ओर एक चुम्बकीय क्षेत्र बन जाता है। यदि इस चुम्बकीय क्षेत्र में कोई दूसरा करंट-वाहक चालक तार रखा जाए, तो उस पर बल लगता है। इसी सिद्धांत पर दो समानांतर तारों के बीच लगने वाले बल की गणना की जा सकती है। यह बल ही ऐम्पीयर का नियम कहलाता है।
मान लीजिए दो सीधे, समानांतर तार AB और CD निर्वात में एक-दूसरे के पास रखे हैं। इनमें क्रमशः \(I_1\) और \(I_2\) धाराएँ बह रही हैं और उनके बीच की दूरी r है।
यदि दोनों तारों में धाराएँ एक ही दिशा में बहती हैं, तो उनके बीच आकर्षण बल लगता है। अगर धाराएँ विपरीत दिशा में बहती हैं, तो प्रतिकर्षण बल लगता है।
बायो-सावर्ट के नियम के अनुसार, तार AB के कारण तार CD के किसी बिंदु पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र होगा:
\(B_1 = \frac{\mu_0}{2 \pi} \frac{I_1}{r} \mathrm{~N A^{-1} m^{-1}}\)
दाएँ हाथ की हथेली के नियम (नियम 1) के अनुसार, इस चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा कागज के तल के लंबवत नीचे की ओर होगी।
अब, इस चुम्बकीय क्षेत्र में धारावाही चालक CD की लम्बाई \(l\) पर लगने वाला लॉरेंज बल होगा:
\(F_2 = I_2 B_1 l \sin 90^{\circ}\)
\( \implies F_2 = I_2 \left( \frac{\mu_0}{2 \pi} \frac{I_1}{r} \right) l \)
तार CD की प्रति एकांक लम्बाई पर लगने वाला बल \(f = \frac{F_2}{l}\) होगा:
\(f = \frac{\mu_0 I_1 I_2}{2 \pi r}\)
निर्वात में \(\frac{\mu_0}{4\pi} = 10^{-7} \mathrm{~T m / A}\) होता है, इसलिए \(\frac{\mu_0}{2\pi} = 2 \times 10^{-7} \mathrm{~T m / A}\)
अतः \(f = 2 \times 10^{-7} \frac{I_1 I_2}{r} \mathrm{~N/m}\) ...(2)
इसी प्रकार, चालक CD में धारा बहने के कारण चालक AB की प्रति एकांक लम्बाई पर भी इतना ही बल लगेगा:
\(f = \frac{\mu_0 I_1 I_2}{2 \pi r} \mathrm{~N/m}\)
इस बल की दिशा फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम से ज्ञात की जाती है। यदि धाराएँ समान दिशा में हैं, तो आकर्षण बल लगता है, और यदि धाराएँ विपरीत दिशा में हैं, तो प्रतिकर्षण बल लगता है।
In simple words: दो समानांतर तारों में धारा बहने पर वे एक-दूसरे पर बल लगाते हैं। यदि धाराएँ एक ही दिशा में हों तो वे एक-दूसरे को खींचते हैं (आकर्षण बल), और यदि विपरीत दिशा में हों तो वे एक-दूसरे को धकेलते हैं (प्रतिकर्षण बल)। बल की मात्रा तारों में बहने वाली धाराओं और उनके बीच की दूरी पर निर्भर करती है।
🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करें कि आप आकर्षण और प्रतिकर्षण बल के लिए धाराओं की दिशा के साथ-साथ बायो-सावर्ट और फ्लेमिंग के वामहस्त नियमों का सही ढंग से उपयोग करते हैं।
Question 10. ऐम्पीयर के नियम से किसी धारावाही बेलनाकार चालक के अन्दर स्थित किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र ज्ञात कीजिए।
Answer: एक लम्बे बेलनाकार धारावाही चालक के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की गणना ऐम्पीयर के नियम का उपयोग करके की जा सकती है।
मान लीजिए R त्रिज्या का एक बेलनाकार चालक है जिसमें स्थायी धारा \(I\) समान रूप से पूरे अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल में वितरित है। हमें इस चालक से लंबवत दूरी \(r\) पर चुम्बकीय क्षेत्र ज्ञात करना है। धारा के सममित वितरण के कारण, चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ बेलन की अक्ष पर केंद्रित वृत्ताकार या संकेंद्रित वृत्तों के आकार की होंगी।
**चुम्बकीय क्षेत्र का परिकलन:**
**(i) जब बिंदु बेलनाकार चालक के बाहर हो (\(r > R\)):**
चित्र 7.48 के अनुसार, \(r\) त्रिज्या का एक वृत्तीय बंद पथ मानते हैं। इस पथ के हर बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान समान होता है और दिशा पथ के अनुदिश होती है। ऐम्पीयर के नियम से:
\(\int B \cdot dl = \mu_0 I\)
यहाँ \(\int dl = 2\pi r\) (वृत्तीय पथ की परिधि)
इसलिए, \(B_{\text{बाहर}} (2\pi r) = \mu_0 I\)
\( \implies B_{\text{बाहर}} = \frac{\mu_0 I}{2\pi r}\) ...(1)
यह दर्शाता है कि लम्बे बेलनाकार चालक के बाहर चुम्बकीय क्षेत्र दूरी \(r\) के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
**(ii) जब बिंदु बेलनाकार चालक के पृष्ठ पर हो (\(r = R\)):**
समीकरण (1) में \(r = R\) रखने पर, चुम्बकीय क्षेत्र का मान होगा:
\(B_{\text{पृष्ठ}} = \frac{\mu_0 I}{2 \pi R}\)
**(iii) जब बिंदु बेलनाकार चालक के अन्दर हो (\(r < R\)):**
चित्र 7.49 के अनुसार, बेलनाकार चालक के अन्दर \(r\) त्रिज्या का एक वृत्ताकार बंद पथ मानते हैं। ऐम्पीयर के नियम से:
\(\oint \overrightarrow{B} \cdot \overrightarrow{dl} = \mu_0 \Sigma I_{\text{घिराऊ}}\)
चूँकि \(\overrightarrow{B}\) और \(\overrightarrow{dl}\) एक ही दिशा में हैं, \(\cos \theta = 1\)।
\(\int B_{\text{अंदर}} dl = \mu_0 \Sigma I_{\text{घिराऊ}}\)
चूँकि धारा पूरे चालक में समान रूप से वितरित है, तो \(r\) त्रिज्या के वृत्तीय पथ से घिरी हुई धारा पूरे चालक की धारा का अनुपात होगी, जो क्षेत्रफल के अनुपात में है:
\(\Sigma I_{\text{घिराऊ}} = I \frac{\pi r^2}{\pi R^2} = I \frac{r^2}{R^2}\)
अब, ऐम्पीयर के नियम में मान रखने पर:
\(B_{\text{अंदर}} (2\pi r) = \mu_0 I \frac{r^2}{R^2}\)
\( \implies B_{\text{अंदर}} = \frac{\mu_0 I r}{2\pi R^2}\) ...(2)
यह दर्शाता है कि बेलनाकार चालक के अन्दर चुम्बकीय क्षेत्र अक्ष से दूरी \(r\) के समानुपाती होता है।
यदि \(r = 0\) (अक्ष पर) तो \(B_{\text{अंदर}} = 0\)।
इसका मतलब है कि अक्ष पर चुम्बकीय क्षेत्र शून्य होता है और सतह पर (\(r=R\)) अधिकतम होता है।
In simple words: एक मोटी तार (बेलन) के अंदर चुम्बकीय क्षेत्र अक्ष पर शून्य होता है और किनारे पर सबसे ज्यादा होता है। जैसे-जैसे आप केंद्र से दूर जाते हैं, यह रैखिक रूप से बढ़ता है। तार के बाहर, यह दूरी के साथ घटता जाता है।
🎯 Exam Tip: ऐम्पीयर का परिपथीय नियम लागू करते समय, सुनिश्चित करें कि आप बेलन के अंदर और बाहर की स्थितियों के लिए घिरी हुई धारा (enclosed current) को सही ढंग से पहचानते हैं।
Question 11. साइक्लोट्रॉन के अन्दर किसी dee में धने आवेश के अर्द्धवृत्ताकार पथ में लगे समय का मान पथ की त्रिज्या पर निर्भर नहीं करती, यह दर्शाइये।
Answer: साइक्लोट्रॉन में एक आवेशित कण जब वृत्ताकार पथ में चलता है, तो उसे आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल लंबवत चुम्बकीय क्षेत्र से मिलता है।
अभिकेन्द्रीय बल = चुम्बकीय बल
\( \frac{mv^2}{r} = qvB \)
\( \implies r = \frac{mv}{qB} \)
किसी कण को अर्ध-वृत्ताकार पथ पूरा करने में लगा समय (अर्ध-आवर्तकाल) \(t\) होगा:
\(t = \frac{\text{अर्ध-वृत्ताकार पथ की लंबाई}}{\text{कण की चाल}} = \frac{\pi r}{v}\)
अब, \(r\) का मान समीकरण में रखने पर:
\(t = \frac{\pi}{v} \left( \frac{mv}{qB} \right) \)
\( \implies t = \frac{\pi m}{qB} \)
यहाँ \(m\) कण का द्रव्यमान है। इस समीकरण से यह साफ है कि अर्ध-आवर्तकाल कण की चाल \(v\) और पथ की त्रिज्या \(r\) पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि केवल कण के द्रव्यमान, आवेश और चुम्बकीय क्षेत्र पर निर्भर करता है। यह साइक्लोट्रॉन के संचालन के लिए एक महत्वपूर्ण विशेषता है।
In simple words: साइक्लोट्रॉन के अंदर, एक चार्ज पार्टिकल को आधा गोल चक्कर लगाने में जो समय लगता है, वह उसकी गति या रास्ते की गोलाई पर निर्भर नहीं करता। यह बस उसके वजन, चार्ज और चुम्बकीय शक्ति पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: साइक्लोट्रॉन के आवर्तकाल का सूत्र याद रखें और यह समझें कि यह कैसे कण की चाल या त्रिज्या से स्वतंत्र होता है।
Question 12. साइक्लोट्रॉन का सिद्धान्त समझाइये।
Answer: साइक्लोट्रॉन इस सिद्धांत पर काम करता है कि यदि भारी धनावेशित कणों को एक मजबूत चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाए, और उन्हें उच्च आवृत्ति वाले, लेकिन कम प्रत्यावर्ती विद्युत विभव से बार-बार गुजारा जाए, तो कणों को बहुत अधिक ऊर्जा तक त्वरित किया जा सकता है।
साइक्लोट्रॉन एक उपकरण है जो आवेशित कणों या आयनों को उच्च ऊर्जा तक तेज करने के लिए उपयोग किया जाता है। इसका आविष्कार ई. ओ. लॉरेंज और एम. एस. लिविंग्सटन ने 1934 में नाभिकीय अनुसंधान के लिए आवश्यक उच्च ऊर्जा वाले आवेशित कणों को प्राप्त करने के लिए किया था।
सिद्धांत यह है कि एक दिए गए चुम्बकीय क्षेत्र में, एक आयन या धनावेश का परिक्रमण काल (एक पूरा चक्कर लगाने का समय) उसकी चाल या वृत्तीय पथ की त्रिज्या पर निर्भर नहीं करता है। इसका मतलब है कि जब एक धनावेशित कण को उच्च आवृत्ति वाले विद्युत क्षेत्र में और एक मजबूत चुम्बकीय क्षेत्र में बार-बार गति कराई जाती है, तो वह हर बार विद्युत क्षेत्र को पार करते समय ऊर्जा प्राप्त करता है और उसकी ऊर्जा बढ़ती जाती है।
In simple words: साइक्लोट्रॉन एक मशीन है जो चार्ज वाले कणों को बहुत तेज़ करती है। यह इस बात पर काम करता है कि चुम्बकीय क्षेत्र में घूमते हुए कण का चक्कर लगाने का समय उसकी गति या रास्ते की गोलाई पर निर्भर नहीं करता, जिससे उसे बार-बार ऊर्जा मिलती रहती है।
🎯 Exam Tip: साइक्लोट्रॉन के सिद्धांत को समझाते समय 'परिक्रमण काल की स्वतंत्रता' और 'विद्युत क्षेत्र द्वारा बार-बार त्वरण' जैसे मुख्य बिंदुओं पर जोर दें।
Question 13. धारामापी की सुग्राहिता एवं दक्षतांक किसे कहते हैं? इनमें क्या सम्बन्ध है ?
Answer: **धारामापी की सुग्राहिता (Sensitivity of Galvanometer):**
धारामापी की धारा सुग्राहिता \((S_I)\) एकांक धारा मान से प्राप्त विक्षेप को कहते हैं। दूसरे शब्दों में, यह बताता है कि कितनी धारा से धारामापी में कितना विक्षेप होता है।
\(S_I = \frac{\text{विक्षेप} (\phi)}{\text{धारा} (I)} = \frac{nAB}{C}\)
जहाँ, \(n\) फेरों की संख्या, \(A\) कुंडली का क्षेत्रफल, \(B\) चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता, और \(C\) मरोड़ दृढ़ता है।
इसकी इकाई रेडियन प्रति ऐम्पीयर या डिग्री प्रति ऐम्पीयर होती है।
**धारामापी का दक्षतांक (Figure of Merit of Galvanometer):**
धारामापी का दक्षतांक \((X)\) धारामापी में एकांक विक्षेप के लिए आवश्यक धारा के मान को कहते हैं। यह धारामापी की सुग्राहिता के व्युत्क्रम के बराबर होता है।
\(X = \frac{1}{S_I} = \frac{I}{\phi}\)
\( \implies X = \frac{C}{nAB} \)
इसकी इकाई ऐम्पीयर प्रति रेडियन या ऐम्पीयर प्रति डिग्री होती है।
**संबंध:**
सुग्राहिता और दक्षतांक एक-दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं। यदि धारामापी अधिक सुग्राही है, तो उसका दक्षतांक कम होगा, और इसके विपरीत।
In simple words: धारामापी की सुग्राहिता बताती है कि वह कितनी कम धारा पर भी प्रतिक्रिया देता है, और दक्षतांक बताता है कि उसे थोड़ा हिलने के लिए कितनी धारा चाहिए। ये दोनों एक-दूसरे के उलटे होते हैं – अगर एक ज्यादा है तो दूसरा कम होगा।
🎯 Exam Tip: सुग्राहिता और दक्षतांक की परिभाषाएँ और उनके सूत्र याद रखें, साथ ही यह भी कि वे एक-दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं।
Question 15. एक आयताकार धारावाही पाश EFGH चित्रानुसार समरूपी चुम्बकीय क्षेत्र में रखा है।
**(a) धारा पाश पर चुम्बकीय आघूर्ण की दिशा क्या है ?**
**(b) पाश पर कार्यरत् बल आघूर्ण कब (i) अधिकतम तथा (ii) शून्य होगा ?**
Answer:
**(a) धारा पाश पर चुम्बकीय आघूर्ण की दिशा:**
दाएँ हाथ के नियम के अनुसार, आयताकार पाश EFGH पर चुम्बकीय आघूर्ण की दिशा कागज के तल के लम्बवत् अंदर की ओर होगी, यदि धारा दक्षिणावर्त दिशा में प्रवाहित हो।
**(b) पाश पर कार्यरत् बल आघूर्ण:**
**(i) अधिकतम बल आघूर्ण:**
जब पाश का तल चुम्बकीय क्षेत्र के समानांतर होता है, यानी \(\theta = 90^{\circ}\) (जहाँ \(\theta\) चुम्बकीय क्षेत्र और पाश के क्षेत्रफल सदिश के बीच का कोण है), तो बल आघूर्ण अधिकतम होगा।
\(\tau_{\text{max}} = NIAB \sin 90^{\circ}\)
\( \implies \tau_{\text{max}} = NIAB \)
यहाँ, \(N\) फेरों की संख्या, \(I\) पाश में धारा, \(A\) पाश का क्षेत्रफल और \(B\) चुम्बकीय क्षेत्र है।
**(ii) शून्य बल आघूर्ण:**
जब पाश का तल चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् होता है, यानी \(\theta = 0^{\circ}\) (क्षेत्रफल सदिश चुम्बकीय क्षेत्र के समानांतर होता है), तो बल आघूर्ण शून्य होगा।
\(\tau_{\text{min}} = NIAB \sin 0^{\circ}\)
\( \implies \tau_{\text{min}} = 0 \)
In simple words: चुम्बकीय आघूर्ण कागज के अंदर की तरफ होगा। बल आघूर्ण तब सबसे ज्यादा होगा जब पाश सीधा (चुम्बकीय क्षेत्र के समानांतर) रखा हो, और तब शून्य होगा जब पाश फ्लैट (चुम्बकीय क्षेत्र के लंबवत) रखा हो।
🎯 Exam Tip: बल आघूर्ण की दिशा के लिए दाएँ हाथ के नियम का उपयोग करें, और याद रखें कि बल आघूर्ण तब अधिकतम होता है जब कुंडली का तल क्षेत्र के समानांतर होता है, और शून्य तब होता है जब यह लंबवत होता है।
निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. बायो-सावर्ट का नियम लिखिए तथा इसके सदिश रूप की व्युत्पत्ति कीजिए।
Answer: **बायो-सावर्ट का नियम (Biot-Savart's Law):**
ऑरस्टेड के प्रयोग से पता चला कि जब किसी चालक में धारा प्रवाहित होती है, तो उसके चारों ओर एक चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। इस क्षेत्र की बल रेखाएँ संकेंद्रित वृत्तों के रूप में होती हैं। किसी धारावाही चालक के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र को ज्ञात करने के लिए, चालक को छोटे-छोटे अल्पांशों में विभाजित किया जाता है।
फ्रांसीसी वैज्ञानिक बायो और सावर्ट ने 1820 में धारावाही चालक के विभिन्न अल्पांशों के कारण किसी बिंदु पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का अध्ययन किया और निष्कर्षों को एक नियम के रूप में प्रस्तुत किया, जिसे बायो-सावर्ट नियम के नाम से जाना जाता है।
मान लीजिए एक चालक XY में धारा \(I\) प्रवाहित हो रही है। इस चालक के एक छोटे से अल्पांश \(\overrightarrow{dl}\) के कारण बिंदु O से \(\theta\) दिशा में, \(\vec{r}\) दूरी पर स्थित बिंदु P पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र \(\overrightarrow{dB}\) निम्न चार बातों पर निर्भर करता है:
(i) \(\overrightarrow{dB}\) का मान चालक में प्रवाहित धारा \(I\) के अनुक्रमानुपाती होता है:
\( \overrightarrow{dB} \propto I \) ...(1)
(ii) \(\overrightarrow{dB}\) का मान अल्पांश \(\overrightarrow{dl}\) की लंबाई के अनुक्रमानुपाती होता है:
\( \overrightarrow{dB} \propto \overrightarrow{dl} \) ...(2)
(iii) \(\overrightarrow{dB}\) का मान अल्पांश और बिंदु P को मिलाने वाली रेखा के बीच के कोण \(\theta\) की ज्या (\(\sin \theta\)) के अनुक्रमानुपाती होता है:
\( \overrightarrow{dB} \propto \sin \theta \) ...(3)
(iv) \(\overrightarrow{dB}\) का मान अल्पांश से बिंदु P की दूरी \(\vec{r}\) के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है:
\( \overrightarrow{dB} \propto \frac{1}{r^2} \) ...(4)
उपरोक्त चारों बातों को मिलाकर, चुम्बकीय क्षेत्र का मान होगा:
\( dB = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I dl \sin \theta}{r^2} \) ...(5)
यहाँ \(k = \frac{\mu_0}{4\pi}\) एक समानुपाती नियतांक है। निर्वात में इसका मान \(10^{-7} \mathrm{~T m / A}\) या \(10^{-7} \mathrm{~N / A}\) होता है। \(\mu_0\) निर्वात की चुम्बकशीलता कहलाती है।
चित्र 7.2 में दिखाए गए अनुसार, धारावाही चालक के अल्पांश \(\overrightarrow{dl}\) के कारण बिंदु P पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा कागज के तल के लंबवत नीचे की ओर होगी (जिसे \(\otimes\) द्वारा दिखाया गया है) या लंबवत बाहर की ओर होगी (जिसे \(\cdot\) द्वारा दिखाया गया है)।
**सदिश रूप (Vector Form):**
समीकरण (5) को सदिश रूप में व्यक्त करने के लिए, हम एकांक सदिश \(\hat{r} = \frac{\vec{r}}{r}\) का उपयोग करते हैं।
\( \overrightarrow{dB} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I dl \sin \theta}{r^2} \hat{r} \)
\( \implies \overrightarrow{dB} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I dl \sin \theta}{r^3} \vec{r} \)
क्रॉस उत्पाद \(\overrightarrow{dl} \times \vec{r} = dl \cdot r \sin \theta \cdot \hat{n}\) का उपयोग करके, हम इसे और सरल बना सकते हैं:
\( \overrightarrow{dB} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I (\overrightarrow{dl} \times \vec{r})}{r^3} \) ...(7)
चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता का परिमाण निम्न समीकरण से ज्ञात किया जा सकता है:
\( |\overrightarrow{dB}| = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I |\overrightarrow{dl} \times \vec{r}|}{r^3} \) ...(8)
धारा घनत्व के पदों में बायो-सावर्ट नियम:
धारा घनत्व \(\vec{J} = \frac{I \overrightarrow{dl}}{A dl}\) या \(\vec{J} = \frac{I \overrightarrow{dl}}{dV}\) जहाँ \(dV\) अल्पांश का आयतन है।
\( \implies I \overrightarrow{dl} = \vec{J} dV \)
यह मान समीकरण (8) में रखने पर:
\( \overrightarrow{dB} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{(\vec{J} \times \vec{r})}{r^3} dV \) ...(9)
**लम्बे सीधे धारावाही तार के कारण चुम्बकीय क्षेत्र:**
चित्र 7.7 के अनुसार, मान लीजिए XY एक सीधा पतला धारावाही चालक तार है। इसमें स्थायी धारा \(I\) x सिरे से Y सिरे की ओर प्रवाहित हो रही है। इस तार के कारण, कागज के तल में तार से लंबवत दूरी \(d\) पर स्थित बिंदु P पर चुम्बकीय क्षेत्र ज्ञात करना है।
चुम्बकीय क्षेत्र ज्ञात करने के लिए, हम एक अल्पांश \(\overrightarrow{dl}\) मानते हैं जिसकी लंबाई \(dl\) है। यह अल्पांश, बिंदु P से दूरी \(r\) पर है और कोण \(\theta\) बनाता है।
बायो-सावर्ट के नियम से इस अल्पांश के कारण बिंदु P पर चुम्बकीय क्षेत्र:
\( dB = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I dl \sin \theta}{r^2} \) ...(1)
दाएँ हाथ के नियम के अनुसार, बिंदु P पर अल्पांश के कारण चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा कागज के तल के लंबवत नीचे की ओर होगी।
ज्यामिति से: \(l = -d \cot \theta\)
\( \implies dl = d \text{cosec}^2 \theta d\theta \) ...(2)
और \(r = d \text{cosec} \theta \) ...(4)
समीकरण (1) में \(dl\) और \(r\) के मान रखने पर और \(\theta\) के लिए \(\theta_1\) से \(\theta_2\) तक समाकलन करने पर, एक लम्बे सीधे धारावाही तार के कारण कुल चुम्बकीय क्षेत्र \(B\) होगा:
\( B = \int_{\theta_1}^{\theta_2} \frac{\mu_0 I \sin \theta}{4\pi d} d\theta \)
\( \implies B = \frac{\mu_0 I}{4\pi d} [-\cos \theta]_{\theta_1}^{\theta_2} \)
\( \implies B = \frac{\mu_0 I}{4\pi d} (\cos \theta_1 - \cos \theta_2) \) ...(6)
चित्र 7.7 की ज्यामिति से, \(\theta_1 = 90^{\circ} - \phi_1\) और \(\theta_2 = 90^{\circ} + \phi_2\)।
मान रखने पर:
\( B = \frac{\mu_0 I}{4\pi d} [\sin \phi_1 + \sin \phi_2] \) ...(7)
यहाँ \(\phi_1\) और \(\phi_2\) तार के सिरों X और Y द्वारा बिंदु P पर अंतरित कोण हैं।
In simple words: बायो-सावर्ट का नियम बताता है कि एक छोटे से तार के टुकड़े में बहने वाली धारा से कितना चुम्बकीय क्षेत्र पैदा होता है। यह क्षेत्र धारा की मात्रा, तार के टुकड़े की लंबाई और उस बिंदु की दूरी पर निर्भर करता है जहाँ हम क्षेत्र माप रहे हैं।
🎯 Exam Tip: बायो-सावर्ट के नियम के सदिश रूप और सीधे तार के लिए उसके अनुप्रयोग दोनों को ध्यान से याद करें। सदिश दिशाओं को सही ढंग से दर्शाना महत्वपूर्ण है।
Question 2. बायो सावर्ट के नियम का उपयोग करते हुए किसी धारावाही वृत्ताकार लूप (पाश) के अक्ष पर किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र के लिए व्यंजक (सदिश रूप में) व्युत्पन्न कीजिए। आवश्यक चित्र बनाइए।
Answer: **वृत्ताकार धारावाही कुंडली के अक्ष पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र:**
मान लीजिए \(R\) त्रिज्या की एक वृत्ताकार कुंडली में \(N\) फेरे हैं और इसमें धारा \(I\) प्रवाहित हो रही है। कुंडली के केंद्र \(O\) से \(x\) दूरी पर अक्षीय स्थिति में एक बिंदु \(P\) पर हमें चुम्बकीय क्षेत्र ज्ञात करना है।
चित्र 7.17 से स्पष्ट है कि केंद्र O के दोनों ओर सममिति में लिए गए समान लंबाई के दो अल्पांशों \(\overrightarrow{dl_1}\) और \(\overrightarrow{dl_2}\) द्वारा बिंदु P पर समान परिमाण के चुम्बकीय क्षेत्र \(\overrightarrow{dB_1}\) और \(\overrightarrow{dB_2}\) उत्पन्न होते हैं।
\(\overrightarrow{dB_1} = \frac{\mu_0 I dl}{4\pi r^2}\)
और \(\overrightarrow{dB_2} = \frac{\mu_0 I dl}{4\pi r^2}\)
इन दोनों के निरक्षीय घटक \((dB_1 \cos \theta\) और \(dB_2 \cos \theta)\) परिमाण में समान और दिशा में विपरीत होने के कारण एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं। केवल अक्षीय घटक \((dB_1 \sin \theta\) और \(dB_2 \sin \theta)\) ही जुड़कर कुल चुम्बकीय क्षेत्र प्रदान करते हैं।
कुंडली के केंद्र पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र
\( B = \int dB \sin \theta \)
जहाँ \(r = \sqrt{R^2 + x^2}\) और \(\sin \theta = \frac{R}{r}\)
\( B = \int \frac{\mu_0 I dl}{4\pi r^2} \frac{R}{r} \)
\( B = \frac{\mu_0 I R}{4\pi r^3} \int dl \)
\( \int dl \) कुंडली की कुल लंबाई है, जो \(2\pi R\) है।
\( B = \frac{\mu_0 I R}{4\pi r^3} (2\pi R) \)
\( B = \frac{\mu_0 I R^2}{2 r^3} \)
\( \implies B = \frac{\mu_0 I R^2}{2 (R^2 + x^2)^{3/2}} \)
यदि कुंडली में \(N\) फेरे हैं, तो कुल चुम्बकीय क्षेत्र होगा:
\( \overrightarrow{B} = \frac{\mu_0 N I R^2}{2 (R^2 + x^2)^{3/2}} \hat{x} \) ...(1)
यह सदिश रूप है, जहाँ \(\hat{x}\) अक्ष की दिशा में एकांक सदिश है।
**विशेष स्थितियाँ:**
**(i) कुंडली के केंद्र पर (\(x=0\)):**
समीकरण (1) में \(x=0\) रखने पर, चुम्बकीय क्षेत्र का मान अधिकतम होता है:
\( B_{\text{max}} = \frac{\mu_0 N I R^2}{2 (R^2 + 0)^{3/2}} = \frac{\mu_0 N I R^2}{2 R^3} = \frac{\mu_0 N I}{2 R} \) ...(3)
**(ii) जब बिंदु P कुंडली से बहुत दूर हो (\(x \gg R\)):**
समीकरण (1) में \(R^2\) को नगण्य मानने पर:
\( B = \frac{\mu_0 N I R^2}{2 (x^2)^{3/2}} = \frac{\mu_0 N I R^2}{2 x^3} \) ...(3)
**(iii) जब बिंदु P कुंडली की अर्ध-त्रिज्या के समान दूरी पर हो (\(x = R/2\)):**
समीकरण (1) में \(x = R/2\) रखने पर:
\( B_{x=R/2} = \frac{\mu_0 N I R^2}{2 [R^2 + (R/2)^2]^{3/2}} = \frac{\mu_0 N I R^2}{2 [R^2 + R^2/4]^{3/2}} \)
\( = \frac{\mu_0 N I R^2}{2 [\frac{5R^2}{4}]^{3/2}} = \frac{\mu_0 N I R^2}{2 \frac{5\sqrt{5}R^3}{8}} = \frac{4 \mu_0 N I}{5\sqrt{5} R} \) ...(4)
तुलना करने पर, \( B_{x=R/2} = \frac{8}{5\sqrt{5}} B_{\text{केंद्र}} \approx 0.72 B_{\text{केंद्र}} \) ...(5)
कुंडली के अक्ष पर चुम्बकीय क्षेत्र दूरी x के साथ कैसे बदलता है, इसे चित्र 7.18 में दिखाया गया है। केंद्र पर क्षेत्र अधिकतम होता है और फिर दोनों तरफ घटता जाता है, जिससे एक घंटी के आकार का ग्राफ बनता है।
In simple words: बायो-सावर्ट नियम का उपयोग करके, एक गोल तार की कुंडली के बीच में और अक्ष पर कितना चुम्बकीय क्षेत्र बनता है, यह निकाला जा सकता है। क्षेत्र केंद्र पर सबसे मजबूत होता है और जैसे-जैसे हम केंद्र से दूर जाते हैं, वह कमजोर होता जाता है।
🎯 Exam Tip: कुंडली के अक्ष पर चुम्बकीय क्षेत्र के व्यंजक की व्युत्पत्ति में ज्यामिति और सदिश घटकों को ध्यान से समझें। विभिन्न विशेष स्थितियों (केंद्र पर, दूर और अर्ध-त्रिज्या पर) के लिए परिणाम याद रखें।
Question 16. साइक्लोट्रॉन का उपयोग हल्के आवेशित कण को त्वरित करने के लिए नहीं करते हैं। क्यों ?
Answer: साइक्लोट्रॉन का उपयोग हल्के चार्ज वाले कणों को गति देने के लिए नहीं किया जाता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि जब हल्के कणों को बहुत अधिक ऊर्जा मिलती है, तो उनका द्रव्यमान बढ़ जाता है, जिसे 'अपेक्षीय प्रभाव' कहते हैं. यह प्रभाव साइक्लोट्रॉन की कार्यप्रणाली को बाधित कर सकता है.
In simple words: हल्के चार्ज वाले कणों को साइक्लोट्रॉन में गति नहीं देते हैं, क्योंकि बहुत ज़्यादा ऊर्जा मिलने पर उनका वज़न बढ़ जाता है.
🎯 Exam Tip: साइक्लोट्रॉन की कार्यप्रणाली में कणों का द्रव्यमान एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है; द्रव्यमान में परिवर्तन से उपकरण की दक्षता प्रभावित होती है।
Question 17. आप समचुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए किस युक्ति का चयन करेंगे?
Answer: एक समान चुम्बकीय क्षेत्र बनाने के लिए हम हेल्महोल्ट्ज़ कुण्डली का उपयोग करेंगे. हेल्महोल्ट्ज़ कुण्डली एक खास तरह की व्यवस्था होती है जिसमें दो समान वृत्ताकार कुंडलियों को एक निश्चित दूरी पर रखा जाता है.
In simple words: एक जैसा चुम्बकीय क्षेत्र बनाने के लिए हेल्महोल्ट्ज़ कुण्डली का इस्तेमाल किया जाता है.
🎯 Exam Tip: हेल्महोल्ट्ज़ कुण्डली को सटीक रूप से संरेखित (aligned) करना और उनके बीच की दूरी को बनाए रखना एक समान क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 18. किसी साइक्लोट्रॉन में आवेशित कण का किसी dee में अर्द्ध-आवर्तकाल पथ की त्रिज्या एवं कण की चाल पर किस प्रकार निर्भर करता है।
Answer: साइक्लोट्रॉन में एक चार्ज किए गए कण का dee में आधा चक्कर लगाने का समय (अर्द्ध-आवर्तकाल) उसके पथ की त्रिज्या या कण की गति पर निर्भर नहीं करता है. यह केवल कण के द्रव्यमान (m), उस पर मौजूद चार्ज (q), और चुम्बकीय क्षेत्र की ताकत (B) पर निर्भर करता है. यह साइक्लोट्रॉन का एक मुख्य सिद्धांत है जो कणों को उच्च ऊर्जा तक त्वरित करने में मदद करता है.
\( t = \frac{\pi m}{q \mathrm{B}} \)
यहाँ m कण का द्रव्यमान है। इस प्रकार अर्द्ध आवर्तकाल कण की चाल v व त्रिज्या r पर निर्भर नहीं करता है।
In simple words: साइक्लोट्रॉन में कण का आधा चक्कर लगाने का समय उसकी गति या रास्ते की त्रिज्या पर निर्भर नहीं करता, बल्कि सिर्फ उसके वज़न और चार्ज पर निर्भर करता है.
🎯 Exam Tip: साइक्लोट्रॉन की कार्यप्रणाली में कण का आवर्तकाल एक महत्वपूर्ण स्थिर मान होता है, जो कण के वेग या त्रिज्या से स्वतंत्र होता है।
Question 19. धारामापी को वोल्टमीटर में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक उच्च प्रतिरोध का सूत्र लिखिए।
Answer: एक धारामापी को वोल्टमीटर में बदलने के लिए, हमें उसके साथ श्रेणीक्रम में एक उच्च प्रतिरोध (R) जोड़ना पड़ता है. इस आवश्यक उच्च प्रतिरोध का सूत्र \( R = \frac{V}{I_g} - G \) है. यहाँ, V उस वोल्टमीटर की अधिकतम माप सीमा है जिसे हम बनाना चाहते हैं, \( I_g \) धारामापी से पूरी स्केल पर गुज़रने वाली धारा है, और G धारामापी का अपना प्रतिरोध है.
In simple words: धारामापी को वोल्टमीटर बनाने के लिए, एक बड़े प्रतिरोध R को श्रेणीक्रम में जोड़ते हैं. इसका सूत्र \( R = \frac{V}{I_g} - G \) है.
🎯 Exam Tip: एक धारामापी को वोल्टमीटर में बदलते समय, श्रेणीक्रम में जोड़ा गया उच्च प्रतिरोध यह सुनिश्चित करता है कि धारामापी से केवल एक छोटा सा हिस्सा ही प्रवाहित हो, जिससे यह उच्च वोल्टेज को माप सके।
Rbse Class 12 Physics Chapter 7 लघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. ऑरस्टेड के प्रयोग से प्राप्त निष्कर्षों को लिखिए।
Answer: ऑरस्टेड के प्रयोग से हमें कुछ महत्वपूर्ण बातें पता चलीं:
1. जब किसी तार में बिजली प्रवाहित होती है, तो उसके चारों ओर एक चुम्बकीय क्षेत्र बनता है.
2. इस चुम्बकीय क्षेत्र की ताकत तार में बहने वाली बिजली की मात्रा पर निर्भर करती है. जितनी ज़्यादा बिजली, उतना ही मज़बूत चुम्बकीय क्षेत्र.
3. चुम्बकीय क्षेत्र का मान उस जगह पर भी निर्भर करता है जहाँ हम इसे देख रहे हैं, यानी तार से कितनी दूर है.
चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा पता करने के लिए कुछ नियम भी हैं:
* **दाएँ हाथ के अंगूठे का नियम:** कल्पना कीजिए कि आप एक तार को अपने दाएँ हाथ से इस तरह पकड़े हुए हैं कि आपका अंगूठा बिजली के प्रवाह की दिशा में है. तब आपकी मुड़ी हुई उंगलियाँ चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा दिखाएंगी.
* **मैक्सवेल का कार्क पेंच नियम:** सोचिए आप एक कार्क स्क्रू को घुमा रहे हैं. यदि स्क्रू का सिरा बिजली के प्रवाह की दिशा में आगे बढ़ता है, तो स्क्रू के घुमाव की दिशा चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा बताएगी. यह एक आसान तरीका है दिशा जानने का.
In simple words: ऑरस्टेड के प्रयोग से पता चला कि बिजली वाले तार के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र बनता है. इसकी ताकत बिजली की मात्रा और तार से दूरी पर निर्भर करती है. दिशा पता करने के लिए दाएँ हाथ का अंगूठा नियम और कार्क पेंच नियम इस्तेमाल होते हैं.
🎯 Exam Tip: ऑरस्टेड के प्रयोग के मुख्य निष्कर्षों में धारा के चुम्बकीय प्रभाव और चुम्बकीय क्षेत्र की निर्भरता को स्पष्ट रूप से समझाएँ। विभिन्न दिशा नियमों का उल्लेख करना अतिरिक्त अंक दिला सकता है।
Question 4. जब आवेशित कण किसी समचुम्बकीय क्षेत्र में \( \theta \) से कोण (जहाँ \( 0 < \theta < 90^\circ \) है) पर प्रवेश करता है, तो कण का पथ कैसा होगा ? इस पथ का चूड़ी अन्तराल या पिच (Pitch) ज्ञात कीजिए।
Answer: जब एक चार्ज किया हुआ कण एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में \( \theta \) कोण पर घुसता है (जहाँ \( 0 < \theta < 90^\circ \) है), तो उसका रास्ता घुमावदार (helical) होता है, जैसे एक स्प्रिंग या पेंच. यह एक सीधी रेखा और एक वृत्त का मिश्रण होता है. इस घुमावदार पथ के दो चक्करों के बीच की दूरी को 'चूड़ी अन्तराल' या 'पिच' कहते हैं.
पिच (P) का सूत्र है:
\( P = v_x T \)
\( P = v \cos \theta \frac{2 \pi m}{qB} \)
\( P = \frac{2 \pi m v \cos \theta}{qB} \)
यह सूत्र दिखाता है कि पिच किन बातों पर निर्भर करती है.
In simple words: जब चार्ज कण चुम्बकीय क्षेत्र में एक कोण पर जाता है, तो उसका रास्ता स्प्रिंग जैसा घुमावदार होता है. दो घुमावों के बीच की दूरी को पिच कहते हैं, जिसका सूत्र \( P = \frac{2 \pi m v \cos \theta}{qB} \) है.
🎯 Exam Tip: हेलिक्स पथ को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और पिच के लिए सही सूत्र को उसके सभी घटकों (m, v, q, B, \( \theta \)) के साथ समझाएँ।
Question 6. ऐम्पीयर का नियम लिखिए। एक अत्यधिक लम्बी परिनालिका के अक्ष पर चुम्बकीय क्षेत्र का व्यंजक प्राप्त कीजिए। आवश्यक चित्र बनाइये।
Answer: **ऐम्पीयर का परिपथीय नियम:**
इस नियम के अनुसार, किसी बंद रास्ते के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र का कुल प्रभाव (जिसे रेखीय समाकलन कहते हैं) उस बंद रास्ते से गुज़रने वाली कुल धारा का \( \mu_0 \) गुना होता है. \( \mu_0 \) निर्वात की चुम्बकशीलता है. यह नियम बताता है कि चुम्बकीय क्षेत्र धारा से कैसे जुड़ा है.
\[ \oint \overrightarrow{B} \cdot \overrightarrow{dl} = \mu_0 \Sigma I \]
**एक बहुत लंबी परिनालिका के अक्ष पर चुम्बकीय क्षेत्र:**
एक लंबी परिनालिका एक प्रकार की कुंडली होती है जिसमें तार को बेलनाकार रूप में लपेटा जाता है. जब इसमें बिजली (धारा I) प्रवाहित होती है, तो इसके अंदर एक चुम्बकीय क्षेत्र बनता है. इस चुम्बकीय क्षेत्र का मान परिनालिका की लंबाई पर लगभग एक समान होता है, खासकर अक्ष पर.
परिनालिका के अक्ष पर चुम्बकीय क्षेत्र (B) का सूत्र है:
\( B = \mu_0 n I \)
यहाँ, \( \mu_0 \) निर्वात की चुम्बकशीलता है, 'n' प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या है (यानी, एक मीटर में कितने तार के लूप हैं), और 'I' परिनालिका में प्रवाहित होने वाली धारा है. यह सूत्र दिखाता है कि परिनालिका के अंदर का चुम्बकीय क्षेत्र फेरों की संख्या और धारा की ताकत पर सीधा निर्भर करता है. परिनालिका का उपयोग एक समान और मजबूत चुम्बकीय क्षेत्र बनाने के लिए किया जाता है, जो कई वैज्ञानिक और तकनीकी अनुप्रयोगों में महत्वपूर्ण है. परिनालिका के सिरों पर चुम्बकीय क्षेत्र केंद्र की तुलना में लगभग आधा होता है.
\[ B_c = \mu_0 n I \]
\[ B_e = \frac{1}{2} \mu_0 n I \]
In simple words: ऐम्पीयर का नियम बताता है कि बंद रास्ते के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र, उस रास्ते से गुजरने वाली कुल बिजली का \( \mu_0 \) गुना होता है. एक लंबी परिनालिका के अंदर का चुम्बकीय क्षेत्र \( B = \mu_0 n I \) होता है, जो प्रति मीटर फेरों की संख्या (n) और बिजली (I) पर निर्भर करता है.
🎯 Exam Tip: ऐम्पीयर का नियम और परिनालिका का सूत्र दोनों को स्पष्ट रूप से समझाएँ. परिनालिका के अंदर क्षेत्र की एकरूपता और सिरों पर कमी का उल्लेख करें.
Question 7. टोरॉइड के अन्दर चुम्बकीय क्षेत्र के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए, यदि टोरॉइड में r औसत त्रिज्या है,
Answer: **टोरॉइड के अंदर चुम्बकीय क्षेत्र का व्यंजक:**
टोरॉइड एक डोनट के आकार की गोलाकार कुंडली होती है. जब इसमें बिजली प्रवाहित होती है, तो इसके अंदर एक चुम्बकीय क्षेत्र बनता है. ऐम्पीयर के नियम का उपयोग करके, हम इसके अंदर चुम्बकीय क्षेत्र की गणना कर सकते हैं.
टोरॉइड के अंदर चुम्बकीय क्षेत्र (B) का सूत्र है:
\( B = \mu_0 n I \)
यदि N फेरों की कुल संख्या है, तो \( n = \frac{N}{2 \pi r} \)
\[ B = \frac{\mu_0 N I}{2 \pi r} \]
यहाँ, \( \mu_0 \) निर्वात की चुम्बकशीलता है, N तार के फेरों की कुल संख्या है, I टोरॉइड में प्रवाहित होने वाली धारा है, और r टोरॉइड की औसत त्रिज्या है. यह सूत्र बताता है कि टोरॉइड के अंदर का चुम्बकीय क्षेत्र फेरों की संख्या और धारा पर सीधा निर्भर करता है, और त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती होता है.
**टोरॉइड में चुम्बकीय क्षेत्र की तीन स्थितियाँ:**
1. **टोरॉइड के अंदर खाली जगह में (कोर के अंदरूनी हिस्से में):** यहाँ कोई धारा नहीं गुज़रती, इसलिए चुम्बकीय क्षेत्र शून्य होता है.
\[ B = 0 \text{ (टोरॉइड के भीतर रिक्त स्थान में)} \]
2. **टोरॉइड के बाहर (पूरी कुंडली के बाहर):** यहाँ भी कुल धारा शून्य हो जाती है क्योंकि धाराएँ विपरीत दिशाओं में एक-दूसरे को काट देती हैं, इसलिए चुम्बकीय क्षेत्र शून्य होता है.
\[ B = 0 \text{ (टोरॉइड के बाहर किसी बिन्दु पर)} \]
3. **टोरॉइड की कोर (तारों के लपेटे हुए हिस्से) के अंदर:** इस क्षेत्र में चुम्बकीय क्षेत्र मौजूद होता है और इसका मान ऊपर दिए गए सूत्र से दिया जाता है. यह टोरॉइड के मुख्य कार्य क्षेत्र को दर्शाता है.
In simple words: टोरॉइड के अंदर चुम्बकीय क्षेत्र का सूत्र \( B = \frac{\mu_0 N I}{2 \pi r} \) है, जहाँ N फेरों की संख्या, I धारा, और r औसत त्रिज्या है. टोरॉइड के अंदर खाली जगह और बाहर, चुम्बकीय क्षेत्र शून्य होता है.
🎯 Exam Tip: टोरॉइड के अंदर चुम्बकीय क्षेत्र के लिए सूत्र को स्पष्ट रूप से व्युत्पन्न करें और तीनों क्षेत्रों (अंदरूनी खाली जगह, कोर, और बाहर) में क्षेत्र के मानों का उल्लेख करें।
Question 1. तार की एक वृत्ताकार कुण्डली में 100 फेरे हैं, प्रत्येक की त्रिज्या 8.0cm है और इनमें 0.40A विद्यत धारा प्रवाहित हो रही है। कुण्डली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण क्या है ?
Answer: दिए गए मान हैं: फेरों की संख्या \( N = 100 \), कुण्डली की त्रिज्या \( R = 8.0 \) cm = \( 8.0 \times 10^{-2} \) m, तथा प्रवाहित धारा \( I = 0.40 \) A है। एक वृत्ताकार कुण्डली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र \( B \) ज्ञात करने के लिए, हम सूत्र \( B = \frac{\mu_0 NI}{2R} \) का उपयोग करते हैं। यह सूत्र बायो-सावर्ट के नियम से आता है। दिए गए मानों को सूत्र में रखने पर, हमें मिलता है:
\( B = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 100 \times 0.40}{2 \times 8.0 \times 10^{-2}} \)
\( B = \frac{4 \times 3.14 \times 0.40 \times 10^{-3}}{16 \times 10^{-2}} \)
\( B = \frac{5.024 \times 10^{-3}}{16 \times 10^{-2}} \)
\( B \approx 0.314 \times 10^{-1} = 3.14 \times 10^{-4} \) T.
अतः कुण्डली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण लगभग \( 3.1 \times 10^{-4} \) T है।
In simple words: हम कुण्डली में फेरों की संख्या, धारा और उसकी त्रिज्या का उपयोग करके उसके केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात करते हैं।
🎯 Exam Tip: सूत्र में मान रखने से पहले सभी इकाइयों को SI इकाइयों (जैसे cm को m में) में बदलना सुनिश्चित करें, ताकि गणना में कोई त्रुटि न हो।
Question 2. एक 6.28m लम्बे तार से 0.10m त्रिज्या की कुण्डली बनाकर इसमें 1.0A धारा प्रवाहित की गई है। इसके केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: दिए गए मान हैं: तार की लम्बाई \( L = 6.28 \) m, कुण्डली की त्रिज्या \( R = 0.10 \) m, तथा प्रवाहित धारा \( I = 1.0 \) A है। सबसे पहले, हमें फेरों की संख्या (\( N \)) ज्ञात करनी होगी। तार की कुल लम्बाई कुण्डली की परिधि (\( 2\pi R \)) को फेरों की संख्या से गुणा करने के बराबर होती है: \( L = N \times (2\pi R) \)।
इस प्रकार, फेरों की संख्या \( N = \frac{L}{2\pi R} = \frac{6.28}{2 \times 3.14 \times 0.10} = \frac{6.28}{0.628} = 10 \) है।
अब, कुण्डली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र \( B \) का सूत्र है: \( B = \frac{\mu_0 NI}{2R} \)। यह गणना यह समझने के लिए महत्वपूर्ण है कि तार की लम्बाई चुंबकीय क्षेत्र को कैसे प्रभावित करती है। दिए गए मानों को सूत्र में रखने पर:
\( B = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 10 \times 1.0}{2 \times 0.10} \)
\( B = \frac{4 \times 3.14 \times 10 \times 10^{-7}}{0.20} \)
\( B = \frac{12.56 \times 10^{-6}}{0.20} \)
\( B = 62.8 \times 10^{-6} = 6.28 \times 10^{-5} \) T.
अतः कुण्डली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र का मान \( 6.28 \times 10^{-5} \) T होगा।
In simple words: पहले हम तार की कुल लम्बाई और कुण्डली की त्रिज्या का उपयोग करके यह पता लगाते हैं कि तार कितने फेरों में लिपटा है। फिर, इस संख्या, धारा और त्रिज्या का उपयोग करके कुण्डली के ठीक बीच में चुंबकीय क्षेत्र की गणना करते हैं।
🎯 Exam Tip: जब तार की कुल लम्बाई दी गई हो, तो चुंबकीय क्षेत्र के सूत्र का उपयोग करने से पहले हमेशा फेरों की संख्या की गणना करें।
Question 3. एक सीधे धारावाही तार में 35A विद्युतधारा प्रवाहित हो रही है। तार से 20cm दूरी पर स्थित किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण ज्ञात कीजिए।
Answer: दिए गए मान हैं: प्रवाहित धारा \( I = 35 \) A, तथा तार से दूरी \( d = 20 \) cm = \( 0.20 \) m है। एक लम्बे सीधे तार के कारण चुंबकीय क्षेत्र \( B \) का सूत्र \( B = \frac{\mu_0 I}{2\pi d} \) है। यह सूत्र किसी भी धारावाही तार के चारों ओर क्षेत्र की शक्ति की गणना करने में मदद करता है। दिए गए मानों को सूत्र में रखने पर:
\( B = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 35}{2\pi \times 0.20} \)
\( B = \frac{2 \times 10^{-7} \times 35}{0.20} \)
\( B = \frac{70 \times 10^{-7}}{0.20} \)
\( B = 350 \times 10^{-7} = 3.5 \times 10^{-5} \) T.
अतः तार से 20 cm दूरी पर स्थित बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण \( 3.5 \times 10^{-5} \) T होगा।
In simple words: सीधे तार में बहने वाली बिजली और तार से दूरी का उपयोग करके हम उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की ताकत ज्ञात करते हैं।
🎯 Exam Tip: दूरी (\( d \)) को हमेशा मीटर में बदलें और \( \mu_0 = 4\pi \times 10^{-7} \) T m/A का सही मान उपयोग करें।
Question 4. एक तार AB से होकर 10A की स्थिर (अपरिवर्ती) विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। यह तार एक मेज पर क्षैतिज रखा है। एक अन्य तार CD इस तार AB के ठीक ऊपर 2mm की ऊँचाई पर स्थित है। तोर CD से 6A की विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। तार CD की प्रति एकांक लम्बाई का द्रव्यमान कितना हो ताकि मुक्त अवस्था में यह अपनी स्थिति में ही लटका रहे? तार AB के सापेक्ष तार CD में प्रवाहित विद्युत धारा की दिशा क्या होगी ? (g का मान = 10 m/s²लीजिए)
Answer: दिए गए मान हैं: तार AB में धारा \( I_{AB} = 10 \) A, तारों के बीच की दूरी \( r = 2 \) mm = \( 2 \times 10^{-3} \) m, तार CD में धारा \( I_{CD} = 6 \) A, और गुरुत्वाकर्षण त्वरण \( g = 10 \) m/s\( ^2 \)।
तार CD को हवा में तैरने के लिए, उसकी प्रति एकांक लम्बाई पर लगने वाला चुंबकीय बल उसके प्रति एकांक लम्बाई के भार के बराबर होना चाहिए।
तार CD पर AB के कारण प्रति एकांक लम्बाई पर लगने वाला चुंबकीय बल \( \frac{F}{l} = \frac{\mu_0 I_{AB} I_{CD}}{2\pi r} \) होता है। यह बल समानांतर धारावाही तारों के बीच की बातचीत को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
दिए गए मानों को सूत्र में रखने पर:
\( \frac{F}{l} = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 10 \times 6}{2\pi \times 2 \times 10^{-3}} \)
\( \frac{F}{l} = \frac{2 \times 10^{-7} \times 10 \times 6}{2 \times 10^{-3}} \)
\( \frac{F}{l} = 6 \times 10^{-3} \) N/m.
CD को तैरने के लिए, \( \frac{F}{l} = \frac{mg}{l} \) होना चाहिए, जहाँ \( \frac{m}{l} \) प्रति एकांक लम्बाई का द्रव्यमान है।
इसलिए, \( \frac{m}{l} = \frac{F/l}{g} = \frac{6 \times 10^{-3}}{10} = 6 \times 10^{-4} \) kg/m.
बल को ऊपर की ओर (प्रतिकर्षण) होने के लिए, तार CD में धारा तार AB में धारा की दिशा के विपरीत होनी चाहिए।
In simple words: हम तार CD पर तार AB के कारण लगने वाले ऊपर की ओर के चुंबकीय बल की गणना करते हैं। CD को हवा में तैरने के लिए, यह चुंबकीय बल उसके नीचे की ओर के भार के बराबर होना चाहिए। बल ऊपर की ओर लगे, इसके लिए दोनों तारों में धारा विपरीत दिशा में बहनी चाहिए।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि समानांतर धाराएं एक-दूसरे को आकर्षित करती हैं और विपरीत धाराएं एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करती हैं। बल की दिशा निर्धारित करने के लिए यह नियम महत्वपूर्ण है। साथ ही, गणना में सभी इकाइयों को संगत (मीटर, किलोग्राम, सेकंड) रखें।
Question 5. क्षैतिज तल में रखे एक लम्बे तथा सीधे तार में 50A की विद्युतधारा दक्षिण से उत्तर दिशा में प्रवाहित हो रही है। तार के पूर्व में 2.5m दूरी पर स्थित किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण एवं उसकी दिशा ज्ञात कीजिए।
Answer: दिए गए मान हैं: प्रवाहित धारा \( I = 50 \) A (दक्षिण से उत्तर की ओर), तथा तार से दूरी \( d = 2.5 \) m (तार के पूर्व में)। एक लम्बे सीधे तार के कारण चुंबकीय क्षेत्र \( B \) का सूत्र \( B = \frac{\mu_0 I}{2\pi d} \) है। यह मौलिक नियम विद्युत धाराओं के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्रों की भविष्यवाणी करने में मदद करता है। दिए गए मानों को सूत्र में रखने पर:
\( B = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 50}{2\pi \times 2.5} \)
\( B = \frac{2 \times 10^{-7} \times 50}{2.5} \)
\( B = \frac{100 \times 10^{-7}}{2.5} \)
\( B = 40 \times 10^{-7} = 4 \times 10^{-6} \) T.
दाहिने हाथ के नियम के अनुसार, यदि धारा दक्षिण से उत्तर की ओर बह रही है और बिंदु तार के पूर्व में है, तो चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर होगी।
In simple words: हम एक लंबे, सीधे तार से एक निश्चित दूरी पर चुंबकीय क्षेत्र की ताकत की गणना करने के लिए एक सूत्र का उपयोग करते हैं। फिर, दाहिने हाथ के नियम का उपयोग करके हम इस चुंबकीय क्षेत्र की दिशा का पता लगाते हैं, जो इस मामले में नीचे की ओर है।
🎯 Exam Tip: दाहिने हाथ के अंगूठे के नियम जैसे नियम का उपयोग करके चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को स्पष्ट रूप से बताएं, न कि केवल परिमाण को।
Question 6. दो लम्बे समान्तर तार परस्पर 4cm की दूरी पर है। इनमें क्रमशः 1 तथा 31 मान की धाराएँ एक ही दिशा में बह रही है। दोनों के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र कहाँ पर शून्य होगा?
Answer: दिए गए मान हैं: तारों के बीच की कुल दूरी \( d_{total} = 4 \) cm, पहले तार में धारा \( I_1 = I \), तथा दूसरे तार में धारा \( I_2 = 3I \) (एक ही दिशा में)। मान लीजिए कि वह बिंदु जहाँ चुंबकीय क्षेत्र शून्य है, \( I_1 \) से \( x \) दूरी पर है। क्योंकि धाराएँ एक ही दिशा में हैं, शून्य बिंदु तारों के बीच में होगा।
\( I_1 \) के कारण चुंबकीय क्षेत्र \( B_1 = \frac{\mu_0 I_1}{2\pi x} \) है।
\( I_2 \) के कारण चुंबकीय क्षेत्र \( B_2 = \frac{\mu_0 I_2}{2\pi (d_{total} - x)} \) है।
कुल चुंबकीय क्षेत्र शून्य होने के लिए, \( B_1 = B_2 \) होना चाहिए। यह सिद्धांत यह समझने के लिए आवश्यक है कि कई स्रोतों से चुंबकीय क्षेत्र एक-दूसरे पर कैसे अध्यारोपित होते हैं।
\( \frac{\mu_0 I}{2\pi x} = \frac{\mu_0 (3I)}{2\pi (4-x)} \)
\( \frac{1}{x} = \frac{3}{4-x} \)
\( 4 - x = 3x \)
\( 4 = 4x \)
\( x = 1 \) cm.
अतः, चुंबकीय क्षेत्र पहले तार (कम धारा वाले तार) से 1 cm की दूरी पर शून्य होगा।
In simple words: जब दो समानांतर तार एक ही दिशा में धारा प्रवाहित करते हैं, तो उनके चुंबकीय क्षेत्र एक बिंदु पर रद्द हो जाते हैं। यह बिंदु हमेशा तारों के बीच में होता है, जो कमजोर धारा वाले तार के करीब होता है।
🎯 Exam Tip: जब धाराएँ एक ही दिशा में होती हैं, तो शून्य क्षेत्र बिंदु तारों के *बीच* होता है। यदि धाराएँ विपरीत दिशा में होती हैं, तो शून्य क्षेत्र बिंदु तारों के *बाहर*, कमजोर धारा के करीब होता है।
Question 7. एक प्रोटॉन 0.2T के चुम्बकीय क्षेत्र में \( 6.0 \times 10^5 \) m/s की चाल से चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् प्रवेश करता है। प्रोटॉन पर लगने वाले बल एवं पथ की त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
Answer: दिए गए मान हैं: चुंबकीय क्षेत्र \( B = 0.2 \) T, प्रोटॉन की चाल \( v = 6.0 \times 10^5 \) m/s, तथा कोण \( \theta = 90^\circ \)।
प्रोटॉन का आवेश \( q = 1.6 \times 10^{-19} \) C और प्रोटॉन का द्रव्यमान \( m_p = 1.67 \times 10^{-27} \) kg होता है।
प्रोटॉन पर लगने वाला बल \( F = qvB \sin\theta \) है। लॉरेंज बल चुंबकीय क्षेत्रों के साथ आवेशित कणों की बातचीत को समझाता है।
दिए गए मानों को सूत्र में रखने पर:
\( F = (1.6 \times 10^{-19}) \times (6.0 \times 10^5) \times 0.2 \times \sin(90^\circ) \)
\( F = 1.92 \times 10^{-14} \) N.
वृत्ताकार पथ के लिए, चुंबकीय बल अभिकेंद्री बल प्रदान करता है: \( qvB = \frac{m_p v^2}{r} \)।
पथ की त्रिज्या होगी: \( r = \frac{m_p v}{qB} \)। यह दर्शाता है कि समान क्षेत्र में तेज या भारी कणों के वृत्ताकार पथ बड़े होंगे।
दिए गए मानों को सूत्र में रखने पर:
\( r = \frac{(1.67 \times 10^{-27}) \times (6.0 \times 10^5)}{(1.6 \times 10^{-19}) \times 0.2} \)
\( r = \frac{10.02 \times 10^{-22}}{0.32 \times 10^{-19}} \)
\( r \approx 31.31 \times 10^{-3} = 0.03131 \) m.
अतः प्रोटॉन के पथ की त्रिज्या लगभग \( 0.031 \) m है।
In simple words: जब एक प्रोटॉन चुंबकीय क्षेत्र में चलता है, तो उस पर एक बल लगता है जो उसे एक वृत्त में घूमने को मजबूर करता है। हम इस बल को प्रोटॉन की गति, आवेश और क्षेत्र की ताकत का उपयोग करके निकालते हैं। फिर, हम इसी बल का उपयोग करके उस वृत्त की त्रिज्या ज्ञात करते हैं।
🎯 Exam Tip: चुंबकीय क्षेत्र में आवेशित कणों के लिए, चुंबकीय बल वृत्ताकार गति के लिए अभिकेंद्री बल प्रदान करता है। दोनों के लिए प्रासंगिक सूत्रों को याद रखें।
Question 8. एक तार जिसमें 8A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है, 0.15T के एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में क्षेत्र से 30° का कोण बनाते हुए रखा है। इसकी एकांक लम्बाई पर लगने वाले बल का परिमाण एवं इसकी दिशा क्या है ?
Answer: दिए गए मान हैं: प्रवाहित धारा \( I = 8 \) A, चुंबकीय क्षेत्र \( B = 0.15 \) T, तथा कोण \( \theta = 30^\circ \)। चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही तार पर प्रति एकांक लम्बाई पर लगने वाला बल \( \frac{F}{l} = IB \sin\theta \) द्वारा दिया जाता है। यह बल विद्युत मोटरों का आधार है।
दिए गए मानों को सूत्र में रखने पर:
\( \frac{F}{l} = 8 \times 0.15 \times \sin(30^\circ) \)
\( \frac{F}{l} = 8 \times 0.15 \times 0.5 \)
\( \frac{F}{l} = 0.6 \) N/m.
बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से ज्ञात की जा सकती है। यदि धारा एक निश्चित दिशा में है और चुंबकीय क्षेत्र उससे 30 डिग्री पर है, तो बल दोनों के लंबवत होगा।
In simple words: हम एक चुंबकीय क्षेत्र के अंदर धारा ले जाने वाले तार के हर मीटर पर लगने वाले बल की गणना करते हैं। यह बल धारा की ताकत, चुंबकीय क्षेत्र की ताकत और उनके बीच के कोण पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: बल के सूत्र (\( F = BIL\sin\theta \)) में हमेशा साइन (\( \sin\theta \)) पद का ध्यान रखें और सही कोण का उपयोग करें। यदि कोण \( 90^\circ \) नहीं है, तो \( \sin\theta \) 1 से कम होगा, जिससे बल कम हो जाएगा।
Question 9. दो एक समान कुण्डलियाँ, प्रत्येक की त्रिज्या 8cm तथा फेरों की संख्या 100 है, समाक्षतः व्यवस्थित है, इनके केन्द्रों के मध्य दूरी 12cm है। यदि प्रत्येक कुण्डली में 1A धारा एक ही दिशा में प्रवाहित हो तो अक्षीय रेखा पर ठीक मध्य में चुम्बकीय क्षेत्र का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: दिए गए मान हैं: दो समान कुण्डलियाँ, प्रत्येक की त्रिज्या \( R = 8 \) cm = \( 8 \times 10^{-2} \) m, फेरों की संख्या \( N = 100 \), केंद्रों के बीच की दूरी \( d = 12 \) cm, और प्रत्येक कुण्डली में धारा \( I = 1 \) A (एक ही दिशा में)।
हमें अक्षीय रेखा के मध्यबिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात करना है। मध्यबिंदु प्रत्येक कुण्डली से \( x = d/2 = 12/2 = 6 \) cm = \( 6 \times 10^{-2} \) m की दूरी पर है।
एक वृत्ताकार कुण्डली की अक्ष पर केंद्र से \( x \) दूरी पर चुंबकीय क्षेत्र \( B = \frac{\mu_0 NI R^2}{2(R^2 + x^2)^{3/2}} \) होता है। यह सूत्र कुण्डली के केंद्र से दूर चुंबकीय क्षेत्रों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
चूंकि दोनों कुण्डलियों में धारा एक ही दिशा में है, इसलिए मध्यबिंदु पर उनके चुंबकीय क्षेत्र जुड़ जाएंगे। अतः, कुल चुंबकीय क्षेत्र \( B_{total} = B_1 + B_2 = 2B \) होगा।
एक कुण्डली के लिए मानों को सूत्र में रखने पर:
\( R^2 = (8 \times 10^{-2})^2 = 64 \times 10^{-4} \)
\( x^2 = (6 \times 10^{-2})^2 = 36 \times 10^{-4} \)
\( R^2 + x^2 = (64+36) \times 10^{-4} = 100 \times 10^{-4} \)
\( (R^2 + x^2)^{3/2} = (100 \times 10^{-4})^{3/2} = (10^2)^{3/2} \times 10^{-6} = 10^3 \times 10^{-6} = 10^{-3} \)
\( B = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 100 \times (8 \times 10^{-2})^2}{2 \times (10^{-3})} \)
\( B = \frac{4 \times 3.14 \times 100 \times 64 \times 10^{-11}}{2 \times 10^{-3}} \)
\( B = \frac{80384 \times 10^{-11}}{2 \times 10^{-3}} = 40192 \times 10^{-8} = 4.0192 \times 10^{-4} \) T.
कुल चुंबकीय क्षेत्र \( B_{total} = 2B = 2 \times 4.0192 \times 10^{-4} = 8.0384 \times 10^{-4} \) T है।
यह व्यवस्था हेल्महोल्ट्ज़ कुण्डली के समान है, जिसे एक विशिष्ट क्षेत्र पर बहुत समान चुंबकीय क्षेत्र बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
In simple words: हम दोनों कुण्डलियों के बीच के ठीक मध्यबिंदु पर एक कुण्डली द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की गणना करते हैं। चूंकि दोनों कुण्डलियाँ एक समान हैं और एक ही दिशा में धारा प्रवाहित कर रही हैं, इसलिए उनके चुंबकीय क्षेत्र मध्यबिंदु पर जुड़ जाते हैं, जिससे हमें कुल चुंबकीय क्षेत्र प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि एक ही दिशा में धारा वाले दो कुण्डलियों के लिए, क्षेत्र जुड़ जाते हैं। अक्षीय क्षेत्र सूत्र में 'x' के लिए प्रत्येक कुण्डली से मध्यबिंदु तक की दूरी का उपयोग करें।
Question 10. दो 2m लम्बे समान्तर तार परस्पर 0.2m की दूरी पर निर्वात में स्थित है। दोनों तारों में 0.2A की विद्युत धारा एक ही दिशा में प्रवाहित हो तो तारों की प्रति एकांक लम्बाई पर लगने वाला बल ज्ञात कीजिए।
Answer: दिए गए मान हैं: तारों की लम्बाई \( l = 2 \) m, तारों के बीच की दूरी \( r = 0.2 \) m, पहले तार में धारा \( I_1 = 0.2 \) A, तथा दूसरे तार में धारा \( I_2 = 0.2 \) A (एक ही दिशा में)।
दो समानांतर धारावाही तारों के बीच प्रति एकांक लम्बाई पर लगने वाला बल \( \frac{F}{l} = \frac{\mu_0 I_1 I_2}{2\pi r} \) होता है। यह बल एम्पीयर इकाई की परिभाषा के लिए जिम्मेदार है।
दिए गए मानों को सूत्र में रखने पर:
\( \frac{F}{l} = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 0.2 \times 0.2}{2\pi \times 0.2} \)
\( \frac{F}{l} = \frac{2 \times 10^{-7} \times 0.2 \times 0.2}{0.2} \)
\( \frac{F}{l} = 2 \times 10^{-7} \times 0.2 \)
\( \frac{F}{l} = 0.4 \times 10^{-7} = 4 \times 10^{-8} \) N/m.
चूंकि धाराएँ एक ही दिशा में हैं, इसलिए बल आकर्षक होगा।
In simple words: हम एक सूत्र का उपयोग करते हैं जो हमें बताता है कि जब दो लंबे समानांतर तार विद्युत धारा प्रवाहित करते हैं, तो उनके प्रत्येक मीटर पर कितना बल लगता है। यह बल धाराओं और तारों के बीच की दूरी पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि समानांतर धाराएं एक-दूसरे को आकर्षित करती हैं, और विपरीत धाराएं एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करती हैं। प्रति एकांक लम्बाई पर बल की गणना के लिए तार की लम्बाई की आवश्यकता नहीं होती है।
Question 12. समान वेग \( v \) से \( \alpha \) कण तथा प्रोटॉन के पुंज किसी समरूप चुम्बकीय क्षेत्र में लम्बवत् प्रवेश करते हैं। ये कण वृत्ताकार पथ अनुरेखित करते हैं। इन पथों की त्रिज्याओं का अनुपात ज्ञात करो।
Answer: जब एक आवेशित कण \( (\alpha) \) किसी चुम्बकीय क्षेत्र में लम्बवत् गति करता है, तो उसके वृत्ताकार पथ की त्रिज्या \( r \) का मान \( r = \frac { mv }{ qB } \) होता है। यहाँ \( m \) कण का द्रव्यमान, \( v \) वेग, \( q \) आवेश और \( B \) चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता है।
प्रोटॉन के लिए, त्रिज्या \( r_p = \frac { m_p v }{ eB } \).
\( \alpha \) कण के लिए, त्रिज्या \( r_\alpha = \frac { m_\alpha v }{ q_\alpha B } \).
हम जानते हैं कि \( \alpha \) कण का द्रव्यमान प्रोटॉन के द्रव्यमान का चार गुना होता है \( (m_\alpha = 4m_p) \) और इसका आवेश प्रोटॉन के आवेश का दोगुना होता है \( (q_\alpha = 2q_p = 2e) \).
इन मानों को सूत्र में रखने पर, \( r_\alpha = \frac { (4m_p)v }{ (2e)B } = \frac { 4m_p v }{ 2eB } = \frac { 2m_p v }{ eB } \).
अब \( \alpha \) कण और प्रोटॉन की त्रिज्याओं का अनुपात ज्ञात करेंगे:
\( \frac { r_\alpha }{ r_p } = \frac { \frac { 2m_p v }{ eB } }{ \frac { m_p v }{ eB } } = \frac { 2 }{ 1 } \).
In simple words: जब एक प्रोटॉन और एक अल्फा कण एक जैसे वेग से चुम्बकीय क्षेत्र में जाते हैं, तो उनके गोल घूमने वाले रास्ते की त्रिज्याओं का अनुपात 2:1 होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अल्फा कण का द्रव्यमान और आवेश प्रोटॉन से अलग होते हैं।
🎯 Exam Tip: हमेशा \( \alpha \) कण के द्रव्यमान और आवेश को प्रोटॉन के सापेक्ष सही ढंग से याद रखें ताकि अनुपात सही से निकाल सकें.
Question 14. 120 प्रतिरोध की कुण्डली वाले किसी धारामापी के पूर्ण स्केल पर विक्षेप के लिए आवश्यक धारा 2mA है। आप इस धारामापी को 0 से 18 V परास वाले वोल्टमीटर में कैसे रूपान्तरित करेंगे।
Answer: हमें एक धारामापी को वोल्टमीटर में बदलना है। इसके लिए धारामापी के साथ श्रेणीक्रम (series) में एक उच्च प्रतिरोध जोड़ना होगा।
दिया है:
धारामापी का प्रतिरोध \( G = 120 \, \Omega \).
पूर्ण स्केल पर विक्षेप के लिए धारा \( I_g = 2 \, mA = 2 \times 10^{-3} \, A \).
वांछित वोल्टमीटर का परास \( V = 18 \, V \).
उच्च प्रतिरोध \( R_H \) का मान निम्न सूत्र से ज्ञात किया जा सकता है:
\( R_H = \frac { V }{ I_g } - G \)
मान रखने पर:
\( R_H = \frac { 18 }{ 2 \times 10^{-3} } - 120 \)
\( R_H = \frac { 18000 }{ 2 } - 120 \)
\( R_H = 9000 - 120 \)
\( R_H = 8880 \, \Omega \).
इस तरह, धारामापी को 0 से 18 V परास के वोल्टमीटर में बदलने के लिए, हमें इसके साथ श्रेणीक्रम में \( 8880 \, \Omega \) का उच्च प्रतिरोध जोड़ना होगा। यह उच्च प्रतिरोध धारामापी को जलने से बचाता है और वोल्टेज को सही ढंग से मापने में मदद करता है।
In simple words: धारामापी को वोल्टमीटर बनाने के लिए, आपको इसके साथ एक बहुत बड़ा प्रतिरोध तार जोड़ना होगा। इस तार का मान 8880 ओम होना चाहिए और इसे धारामापी के साथ एक ही लाइन में (श्रेणीक्रम में) जोड़ना है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि वोल्टमीटर बनाने के लिए उच्च प्रतिरोध हमेशा श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है, जबकि अमीटर बनाने के लिए कम प्रतिरोध (शंट) समान्तर क्रम में जोड़ा जाता है.
Question 15. एक 99 ओम प्रतिरोध वाले धारामापी के पूर्ण स्केल पर विक्षेप के लिए आवश्यक धारा 4 mA है। इस धारामापी को 0 से 6A परास के अमीटर में परिवर्तित करने के लिए आप क्या करेंगे?
Answer: धारामापी को अमीटर में बदलने के लिए, हमें इसके साथ समान्तर क्रम (parallel) में एक कम प्रतिरोध (शंट प्रतिरोध, \( S \)) जोड़ना होगा।
दिया है:
धारामापी का प्रतिरोध \( G = 99 \, \Omega \).
पूर्ण स्केल पर विक्षेप के लिए धारा \( I_g = 4 \, mA = 4 \times 10^{-3} \, A \).
अमीटर का वांछित परास \( I = 6 \, A \).
शंट प्रतिरोध \( S \) का मान निम्न सूत्र से ज्ञात किया जा सकता है:
\( S = \frac { I_g G }{ I - I_g } \)
मान रखने पर:
\( S = \frac { (4 \times 10^{-3}) \times 99 }{ 6 - (4 \times 10^{-3}) } \)
\( S = \frac { 0.396 }{ 6 - 0.004 } \)
\( S = \frac { 0.396 }{ 5.996 } \)
\( S \approx 0.06604 \, \Omega \).
अतः, इस धारामापी को 0 से 6A परास के अमीटर में बदलने के लिए, हमें इसके साथ समान्तर क्रम में लगभग \( 0.06604 \, \Omega \) का शंट प्रतिरोध जोड़ना होगा। शंट प्रतिरोध का मान बहुत कम होता है ताकि अधिकांश धारा इससे होकर गुजर सके।
In simple words: धारामापी को अमीटर बनाने के लिए, आपको इसके साथ एक बहुत छोटा प्रतिरोध तार जोड़ना होगा। इस तार का मान लगभग 0.066 ओम होना चाहिए और इसे धारामापी के साथ बाजू में (समान्तर क्रम में) जोड़ना है।
🎯 Exam Tip: शंट प्रतिरोध हमेशा समान्तर क्रम में जोड़ा जाता है और इसका मान हमेशा धारामापी के प्रतिरोध से बहुत कम होता है। यह कुल धारा के बड़े हिस्से को अमीटर से गुजारने में मदद करता है।
Question 16. 1.0 m लम्बी एक परिनालिका की त्रिज्या। 1 cm है तथा इसमें 100 फेरे हैं। परिनालिका में 5A की धारा प्रवाहित हो रही है। परिनालिका में अक्षीय चुम्बकीय क्षेत्र का मान ज्ञात कीजिए। यदि एक इलेक्ट्रॉन उसकी अक्ष के अनुदिश \( 10^4 \) m/s की चाल की गति करता है तो इलेक्ट्रॉन कितना बल अनुभव करेगा ?
Answer: सबसे पहले, परिनालिका के अंदर चुम्बकीय क्षेत्र का मान ज्ञात करेंगे।
दिया है:
परिनालिका की लम्बाई \( l = 1.0 \, m \).
परिनालिका की त्रिज्या \( R = 1 \, cm = 0.01 \, m \). (यह त्रिज्या चुम्बकीय क्षेत्र की गणना में सीधे उपयोग नहीं होती है)
फेरों की संख्या \( N = 100 \).
प्रवाहित धारा \( I = 5 \, A \).
परिनालिका में अक्षीय चुम्बकीय क्षेत्र \( B \) का मान निम्न सूत्र से ज्ञात किया जाता है:
\( B = \mu_0 \frac { N }{ l } I \)
यहाँ, \( \mu_0 = 4\pi \times 10^{-7} \, T \cdot m/A \) (निर्वात की चुम्बकशीलता)।
मान रखने पर:
\( B = (4\pi \times 10^{-7}) \times \frac { 100 }{ 1.0 } \times 5 \)
\( B = 4\pi \times 10^{-7} \times 500 \)
\( B = 2000\pi \times 10^{-7} \)
\( B \approx 6.28 \times 10^{-4} \, T \).
अब, इलेक्ट्रॉन पर लगने वाला बल ज्ञात करेंगे।
इलेक्ट्रॉन की चाल \( v = 10^4 \, m/s \).
इलेक्ट्रॉन पर आवेश \( q = 1.6 \times 10^{-19} \, C \).
इलेक्ट्रॉन अक्ष के अनुदिश गति कर रहा है, जिसका अर्थ है कि चुम्बकीय क्षेत्र \( B \) की दिशा भी अक्ष के अनुदिश ही है। इसलिए, इलेक्ट्रॉन के वेग \( v \) और चुम्बकीय क्षेत्र \( B \) के बीच का कोण \( \theta = 0^\circ \) होगा।
इलेक्ट्रॉन पर लगने वाला चुम्बकीय बल \( F = qvB \sin \theta \) सूत्र से दिया जाता है।
चूंकि \( \theta = 0^\circ \), \( \sin 0^\circ = 0 \).
अतः \( F = qvB \times 0 = 0 \, N \).
इसलिए, इलेक्ट्रॉन पर कोई बल नहीं लगेगा। यह कण चुम्बकीय क्षेत्र की रेखाओं के समानांतर गति कर रहा है, इसलिए उस पर कोई बल नहीं लगता।
In simple words: पहले परिनालिका के अंदर चुम्बकीय शक्ति निकाली जाती है। फिर, क्योंकि इलेक्ट्रॉन परिनालिका की दिशा में ही चल रहा है, उस पर कोई बल नहीं लगता।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि जब एक आवेशित कण चुम्बकीय क्षेत्र के समानांतर (या विपरीत) गति करता है, तो उस पर कोई चुम्बकीय बल नहीं लगता है, क्योंकि \( \sin \theta \) शून्य हो जाता है.
Question 17. किसी 0.5 मीटर लम्बी परिनालिका में दो परतों में ताँबें के विद्युत रुद्ध तार लपेटे गए हैं। प्रत्येक परत में फेरों की संख्या 500 है। यदि इसकी त्रिज्या 1.4 cm वे इसमें प्रवाहित धारा 5A हो तो केन्द्र पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का ज्ञात कीजिए।
Answer: परिनालिका के केंद्र पर चुम्बकीय क्षेत्र ज्ञात करेंगे।
दिया है:
परिनालिका की लम्बाई \( l = 0.5 \, m \).
परतों की संख्या = 2.
प्रत्येक परत में फेरों की संख्या = 500.
इसलिए, कुल फेरों की संख्या \( N = 2 \times 500 = 1000 \).
परिनालिका की त्रिज्या \( R = 1.4 \, cm = 0.014 \, m \). (यह त्रिज्या चुम्बकीय क्षेत्र की गणना में सीधे उपयोग नहीं होती है)
प्रवाहित धारा \( I = 5 \, A \).
परिनालिका के केंद्र पर चुम्बकीय क्षेत्र \( B \) का मान निम्न सूत्र से ज्ञात किया जाता है:
\( B = \mu_0 \frac { N }{ l } I \)
यहाँ, \( \mu_0 = 4\pi \times 10^{-7} \, T \cdot m/A \) (निर्वात की चुम्बकशीलता)।
मान रखने पर:
\( B = (4\pi \times 10^{-7}) \times \frac { 1000 }{ 0.5 } \times 5 \)
\( B = 4\pi \times 10^{-7} \times 2000 \times 5 \)
\( B = 4\pi \times 10^{-7} \times 10000 \)
\( B = 4\pi \times 10^{-7} \times 10^4 \)
\( B = 4\pi \times 10^{-3} \, T \)
\( B \approx 4 \times 3.14 \times 10^{-3} \, T \)
\( B \approx 12.56 \times 10^{-3} \, T \).
अतः, परिनालिका के केंद्र पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का मान लगभग \( 12.56 \times 10^{-3} \, T \) होगा। यह क्षेत्र परिनालिका की अक्ष के अनुदिश होता है।
In simple words: हम परिनालिका की कुल फेरों की संख्या और उसकी लंबाई का उपयोग करके अंदर की चुम्बकीय शक्ति को निकालते हैं। जितनी ज्यादा धारा और फेरे होते हैं, उतनी ही ज्यादा चुम्बकीय शक्ति बनती है।
🎯 Exam Tip: लंबी परिनालिका के लिए केंद्र पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान \( B = \mu_0 n I \) होता है, जहाँ \( n = N/l \) प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या है।
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