Get the most accurate RBSE Solutions for Class 12 Physics Chapter 17 विद्युत चुम्बकीय तरंगें, संचार एवं समकालीन here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest RBSE textbooks for Class 12 Physics. Our expert-created answers for Class 12 Physics are available for free download in PDF format.
Detailed Chapter 17 विद्युत चुम्बकीय तरंगें, संचार एवं समकालीन RBSE Solutions for Class 12 Physics
For Class 12 students, solving RBSE textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 12 Physics solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 17 विद्युत चुम्बकीय तरंगें, संचार एवं समकालीन solutions will improve your exam performance.
Class 12 Physics Chapter 17 विद्युत चुम्बकीय तरंगें, संचार एवं समकालीन RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Physics Chapter 17 बहुचयनात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. विद्युत चुम्बकीय तरंग में औसत ऊर्जा घनत्व सम्बंधित होता है
(अ) केवल विद्युत क्षेत्र से
(ब) केवल चुम्बकीय क्षेत्र से
(स) विद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्र दोनों से बराबर
(द) औसत विद्युत घनत्व शून्य होता है।
Answer: (स) विद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्र दोनों से बराबर
In simple words: एक विद्युत चुम्बकीय तरंग में, ऊर्जा विद्युत क्षेत्र और चुम्बकीय क्षेत्र दोनों में बराबर बंटी होती है। ऊर्जा का यह बंटवारा तरंग के चलने के दौरान हमेशा बना रहता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि विद्युत चुम्बकीय तरंगों में ऊर्जा, विद्युत क्षेत्र और चुम्बकीय क्षेत्र के बीच समान रूप से विभाजित होती है, जिससे उनका कुल ऊर्जा घनत्व बनता है।
प्रश्न 3. विद्युत चुम्बकीय तरंगे परिवहन नहीं करती है।
(अ) ऊर्जा
(ब) आवेश
(स) संवेग
(द) सूचना
Answer: (ब) आवेश
In simple words: विद्युत चुम्बकीय तरंगें ऊर्जा, संवेग और सूचना को एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकती हैं, लेकिन वे खुद आवेश (चार्ज) नहीं ले जातीं। वे बिना किसी कण को ढोए यात्रा करती हैं।
🎯 Exam Tip: विद्युत चुम्बकीय तरंगें, जैसे प्रकाश, ऊर्जा और संवेग ले जाती हैं, लेकिन वे आवेशित कणों से नहीं बनी होतीं, इसलिए वे आवेश का परिवहन नहीं करतीं।
प्रश्न 4. यदि \( \vec{E} \) है तथा \( \vec{B} \) एक विद्युत चुम्बकीय तरंग के सदिश है तो विद्युत चुम्बकीय तरंग का संचरण किस के अनुदिश है-
(अ) \( \vec{E} \) के
(ब) \( \vec{B} \) के
(स) \( \vec{E} \times \vec{B} \) के
(द) \( \vec{E} \cdot \vec{B} \) के
Answer: (स) \( \vec{E} \times \vec{B} \) के
In simple words: विद्युत चुम्बकीय तरंग जिस दिशा में चलती है, वह विद्युत क्षेत्र \( \vec{E} \) और चुम्बकीय क्षेत्र \( \vec{B} \) के क्रॉस प्रोडक्ट की दिशा होती है। यह दिशा इन दोनों क्षेत्रों के लम्बवत होती है।
🎯 Exam Tip: Poynting vector (\( \vec{S} \)) की दिशा हमेशा विद्युत चुम्बकीय तरंग के संचरण की दिशा बताती है, जो \( \vec{E} \times \vec{B} \) के समानुपाती होती है।
प्रश्न 5. निम्न में से कौनसे विकिरण की तरंग दैर्ध्य न्यूनतम होती है।
(अ) X – किरणें
(ब) \( \gamma \) – किरणें ।
(स) \( \beta \) – किरणें
(द) 0 – किरणें ।
Answer: (ब) \( \gamma \) – किरणें ।
In simple words: गामा किरणें विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम में सबसे कम तरंगदैर्ध्य वाली होती हैं। इनकी ऊर्जा सबसे अधिक होती है, इसलिए ये बहुत शक्तिशाली होती हैं।
🎯 Exam Tip: विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम में, जैसे-जैसे आवृत्ति बढ़ती है, तरंगदैर्ध्य घटती जाती है। गामा किरणें उच्चतम आवृत्ति और न्यूनतम तरंगदैर्ध्य वाली होती हैं।
प्रश्न 6. विद्युत चुम्बकीय तरंगों के गुणधर्म के बारे में कौनसा कथन गलत है?
(अ) विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र सदिश एक ही समय व स्थान पर अधिकतम व न्यूनतम मान ग्रहण करते है।
(ब) ऊर्जा विद्युत व चुम्बकीय सदिशों में समान रूप से विभाजित होते हैं।
Answer: (प्रश्न का उत्तर स्रोत में प्रदान नहीं किया गया है।)
In simple words: इस प्रश्न का उत्तर स्रोत सामग्री में उपलब्ध नहीं है।
🎯 Exam Tip: जब MCQs में सभी विकल्प सही या गलत लगें, तो प्रश्न को ध्यान से दोबारा पढ़ें और देखें कि कहीं कोई बारीक अंतर तो नहीं।
प्रश्न 7. किसके लिए भू-तरंगें सम्भव हैं-
(अ) लघु परास पर कम रेडियो आवृत्ति
(ब) लघु परास पर उच्च रेडिया आवृत्ति
(स) दीर्घ परास पर निम्न रेडियो आवृत्ति
(द) लघु परास निम्न कम रेडिया आवृत्ति
Answer: (अ) लघु परास पर कम रेडियो आवृत्ति
In simple words: भू-तरंगें छोटी दूरी और कम आवृत्ति वाली रेडियो तरंगों के लिए सबसे अच्छी काम करती हैं। ये तरंगें पृथ्वी की सतह के पास ही चलती हैं।
🎯 Exam Tip: भू-तरंग संचरण मुख्य रूप से कम आवृत्ति (कुछ मेगाहर्ट्ज़ तक) पर प्रभावी होता है और पृथ्वी की वक्रता का पालन करता है, जिससे इसका परास सीमित होता है।
प्रश्न 8. एक TV टावर की ऊँचाई h मीटर है यदि पृथ्वी की त्रिज्या R मीटर है तब TV प्रसारण के द्वारा घेरा गया क्षेत्रफल (यदि h< R)
(अ) \( \pi R^2 \)
(ब) \( \pi h^2 \)
(स) \( 2\pi Rh \)
(द) \( \pi Rh \)
Answer: (स) \( 2\pi Rh \)
In simple words: एक टीवी टावर से सिग्नल जितने क्षेत्रफल को कवर करता है, उसे \( 2\pi Rh \) सूत्र से पता कर सकते हैं। यहाँ 'h' टावर की ऊंचाई और 'R' पृथ्वी की त्रिज्या है। यह सूत्र दिखाता है कि टावर जितना ऊंचा होगा, कवरेज उतना ही ज्यादा होगा।
🎯 Exam Tip: टीवी प्रसारण का क्षेत्रफल टावर की ऊंचाई और पृथ्वी की त्रिज्या पर निर्भर करता है। यह लाइन-ऑफ़-साइट संचार के लिए एक महत्वपूर्ण सूत्र है।
प्रश्न 9. संचरण के किस तरीके के द्वारा रेडियो तरंगो को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जा सकता है?
(अ) भू-तरंग संचरण
(ब) आकाश तरंग संचरण
(स) अन्तरिक्ष तरंग संचरण
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: रेडियो तरंगों को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए कई तरीके इस्तेमाल होते हैं, जैसे भू-तरंग, आकाश तरंग और अंतरिक्ष तरंग। हर तरीके की अपनी खासियत और उपयोग होता है।
🎯 Exam Tip: संचार के लिए उपयुक्त विधि का चुनाव आवृत्ति, दूरी और वांछित कवरेज क्षेत्र पर निर्भर करता है।
प्रश्न 10. अधिकतम आयाम 10V व न्यूनतम आयाम 2V है। मॉडुलन सूचकांक \( \mu \) है-
(अ) 2/3
Answer: (अ) 2/3
In simple words: मॉडुलन सूचकांक \( \mu \) यह बताता है कि एक रेडियो तरंग कितनी गहराई तक मॉडुलित हुई है। इसे अधिकतम और न्यूनतम आयामों का उपयोग करके \( \mu = \frac{A_{max} - A_{min}}{A_{max} + A_{min}} \) सूत्र से निकाला जाता है।
🎯 Exam Tip: मॉडुलन सूचकांक की गणना के लिए सही सूत्र को याद रखना महत्वपूर्ण है, जो अधिकतम और न्यूनतम आयाम के अंतर और योग के अनुपात पर आधारित होता है।
प्रश्न 11. अति मॉडूलित (Over modilated) तरंग का मॉडूलेशन गुणांक है-
(अ) 1
(ब) शून्य
(स) < 1
(द) >1
Answer: (द) >1
In simple words: जब एक तरंग को 'अति मॉडुलित' किया जाता है, तो उसका मॉडुलन गुणांक हमेशा 1 से ज़्यादा होता है। इसका मतलब है कि संकेत को बहुत ज़्यादा बदल दिया गया है।
🎯 Exam Tip: मॉडुलन गुणांक का मान 1 से अधिक होने पर ओवर-मॉडुलन होता है, जिससे ध्वनि में विकृति (distortion) आ सकती है।
RBSE Class 12 Physics Chapter 17 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. विद्युत चुम्बकीय तरंगे निर्वात में किस वेग से गमन करती है?
Answer: विद्युत चुम्बकीय तरंगें निर्वात में प्रकाश के वेग \( C = 3 \times 10^8 \) मी/से से गमन करती हैं। ये तरंगें बिना किसी माध्यम के भी चल सकती हैं।
In simple words: विद्युत चुम्बकीय तरंगें, जैसे प्रकाश, खाली जगह में बहुत तेज़ी से चलती हैं। उनकी चाल प्रकाश की गति के बराबर होती है, जो \( 3 \times 10^8 \) मीटर प्रति सेकंड है।
🎯 Exam Tip: निर्वात में प्रकाश का वेग \( C \) एक सार्वभौमिक स्थिरांक है और सभी विद्युत चुम्बकीय तरंगें इसी वेग से गमन करती हैं।
प्रश्न 2. विद्युत चुम्बकीय तरंगों के लिए आयनमण्डल के अपवर्तनांक पर पृथ्वी तल से ऊँचाई बढ़ने पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: आयन मण्डल की परत की पृथ्वी तक ऊँचाई बढ़ने पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ता है, जिससे माध्यम का प्रभावी अपवर्तनांक घटता जाता है। यह आयनमण्डल रेडियो तरंगों के परावर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: जब हम पृथ्वी की सतह से ऊपर आयनमंडल में जाते हैं, तो इलेक्ट्रॉन ज़्यादा घने हो जाते हैं। इस वजह से, उस जगह का अपवर्तनांक कम होता जाता है।
🎯 Exam Tip: आयनमण्डल में इलेक्ट्रॉन घनत्व में परिवर्तन रेडियो तरंगों के संचरण को प्रभावित करता है, जिससे वे पृथ्वी पर वापस परावर्तित हो पाती हैं।
प्रश्न 3. x-दिशा में संचरित विद्युत चुम्बकीय तरंग के \( \overrightarrow{\mathrm{E}} \) सदिश के कंपन Y-अक्ष के समान्तर है तो \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) सदिश कम्पन किस अक्ष के समान्तर होंगे?
Answer: \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) सदिश के कम्पन Z-दिशा में होंगे क्योंकि विद्युत चुम्बकीय तरंगों के संचरण की दिशा \( \overrightarrow{\mathrm{E}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}} \) द्वारा दी जाती है। विद्युत चुम्बकीय तरंगों में, \( \overrightarrow{\mathrm{E}} \), \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) और संचरण की दिशा एक-दूसरे के लम्बवत होती हैं।
In simple words: अगर एक तरंग x-दिशा में चल रही है और उसका विद्युत क्षेत्र \( \overrightarrow{\mathrm{E}} \) Y-दिशा में हिल रहा है, तो उसका चुम्बकीय क्षेत्र \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) Z-दिशा में हिलेगा। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ये तीनों दिशाएँ एक-दूसरे से 90 डिग्री पर होती हैं।
🎯 Exam Tip: विद्युत चुम्बकीय तरंगों में \( \vec{E} \) और \( \vec{B} \) सदिश हमेशा एक-दूसरे और तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत होते हैं, जिससे यह एक अनुप्रस्थ तरंग बनती है।
प्रश्न 4. अधिक दूरी तक संचरण के लिए किस विधा का उपयोग किया जाता है?
Answer: (प्रश्न का उत्तर स्रोत में प्रदान नहीं किया गया है।)
In simple words: इस प्रश्न का उत्तर स्रोत सामग्री में उपलब्ध नहीं है।
🎯 Exam Tip: लंबी दूरी के संचार के लिए, आमतौर पर आकाश तरंग (sky wave) या उपग्रह संचार (satellite communication) विधियों का उपयोग किया जाता है, जो आयनमंडल से परावर्तन या उपग्रहों के माध्यम से सिग्नल भेजते हैं।
प्रश्न 6. संचार तंत्र का वह भाग क्या कहलाता है, जो संदेश को संचार चैनल पर संचरित होने योग्य परिवर्तित कर अभिग्राही को प्रेषित करता है?
Answer: प्रेषित्र (Transmitter) संचार तंत्र का वह भाग कहलाता है जो संदेश को संचार चैनल पर संचरित होने योग्य परिवर्तित कर अभिग्राही को प्रेषित करता है। यह स्रोत से सूचना को लेता है और उसे इस तरह से बदलता है कि वह संचार चैनल से आसानी से जा सके।
In simple words: संचार तंत्र में, 'प्रेषित्र' वह हिस्सा होता है जो जानकारी को लेता है और उसे इस तरह से बदलता है कि वह भेजने के लिए तैयार हो जाए। यह जानकारी को प्राप्तकर्ता तक भेजने का काम शुरू करता है।
🎯 Exam Tip: प्रेषित्र का मुख्य कार्य स्रोत से प्राप्त संदेश को मॉड्यूलेट करना और उसे एक उपयुक्त वाहक तरंग पर आरोपित करके संचरण माध्यम में भेजना है।
प्रश्न 7. सूचना संकेत को वाहक तरंगों पर अध्यारोपित करने की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
Answer: सूचना संकेत को वाहक तरंगों पर अध्यारोपित करने की प्रक्रिया मॉडुलन (Modulation) कहलाती है। मॉडुलन के बिना, कम आवृत्ति वाले सूचना संकेत को लंबी दूरी तक प्रभावी ढंग से नहीं भेजा जा सकता है।
In simple words: जानकारी को लंबी दूरी तक भेजने के लिए, उसे एक ऊंची आवृत्ति वाली तरंग पर मिलाया जाता है, जिसे 'मॉडुलन' कहते हैं। यह प्रक्रिया जानकारी को दूर तक ले जाने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: मॉडुलन सूचना संकेत की आवृत्ति को बढ़ाकर संचरण की दक्षता को बढ़ाता है और एंटीना के आकार को व्यावहारिक बनाता है।
प्रश्न 8. नैनो तकनीकी में किस आकार की वस्तुओं का अध्ययन किया जाता है?
Answer: नैनो तकनीकी में 100nm से छोटी वस्तुओं का अध्ययन किया जाता है। ये वस्तुएँ इतनी छोटी होती हैं कि उन्हें सामान्य आँखों से नहीं देखा जा सकता।
In simple words: नैनो तकनीक उन बहुत छोटी चीजों का अध्ययन करती है जो 100 नैनोमीटर से भी कम होती हैं। ये इतनी छोटी होती हैं कि इन्हें देखने के लिए खास माइक्रोस्कोप चाहिए होते हैं।
🎯 Exam Tip: नैनो टेक्नोलॉजी 1 से 100 नैनोमीटर के पैमाने पर पदार्थ के गुणों और व्यवहार का अध्ययन करती है, जिससे नए और अद्वितीय अनुप्रयोगों का विकास होता है।
RBSE Class 12 Physics Chapter 17 लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के घटको के नाम बताते हुए तरंगदैर्ध्य के बढ़ते क्रम में लिखो।
Answer: विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के घटकों को तरंगदैर्ध्य के बढ़ते क्रम में निम्नलिखित रूप से सूचीबद्ध किया जा सकता है, जो उच्च ऊर्जा से कम ऊर्जा वाले क्रम को भी दर्शाता है:
1. गामा किरणें: \( 10^{-14} \) मी. से \( 10^{-10} \) मी.
2. X-किरणें: \( 10^{-12} \) मी. से \( 10^{-8} \) मी.
3. पराबैंगनी किरणें: \( 10^{-9} \) मी. से \( 10^{-7} \) मी.
4. दृश्य किरणें: \( 4 \times 10^{-7} \) मी. से \( 7.8 \times 10^{-7} \) मी.
5. अवरक्त किरणें: \( 7.8 \times 10^{-7} \) मी. से \( 10^{-3} \) मी.
6. सूक्ष्म तरंगे: \( 10^{-3} \) मी. से \( 0.3 \) मी.
7. रेडियो तरंगें: \( 0.3 \) मी. से \( 10^4 \) मी.
In simple words: विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम में कई तरह की तरंगें होती हैं, जैसे गामा, एक्स-रे, पराबैंगनी, दृश्य प्रकाश, अवरक्त, सूक्ष्म तरंगें और रेडियो तरंगें। जब हम इनकी लंबाई (तरंगदैर्ध्य) को छोटे से बड़े क्रम में लगाते हैं, तो यह एक विशेष क्रम बनाता है।
🎯 Exam Tip: विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के घटकों को याद रखने का सबसे अच्छा तरीका उनकी तरंगदैर्ध्य या आवृत्ति के क्रम में याद रखना है। यह उनके गुणों और उपयोगों को समझने में मदद करता है।
प्रश्न 2. विद्युत चुम्बकीय तरंगों के चार मुख्य गुण लिखिये।
Answer: विद्युत चुम्बकीय तरंगों के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं:
1. ये तरंगें निर्वात में प्रकाश के वेग \( C = 3 \times 10^8 \) मी/से से गमन करती हैं। ये तरंगें बिना किसी भौतिक माध्यम के भी ऊर्जा और संवेग का संचरण करती हैं।
2. विद्युत चुम्बकीय तरंगें अनुप्रस्थ प्रकृति की होती हैं। इसका मतलब है कि इनमें विद्युत क्षेत्र सदिश \( (\vec{E}) \) और चुंबकीय क्षेत्र सदिश \( (\vec{B}) \) एक-दूसरे और तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत कंपन करते हैं।
3. ये तरंगें परावर्तन, अपवर्तन, व्यतिकरण, विवर्तन और ध्रुवण जैसे गुणों को प्रदर्शित करती हैं। इन गुणों के कारण ही प्रकाश और अन्य विद्युत चुम्बकीय तरंगों का व्यवहार निर्धारित होता है।
4. इन तरंगों में विद्युत ऊर्जा घनत्व \( (u_E) \) और चुम्बकीय ऊर्जा घनत्व \( (u_B) \) समान होते हैं, यानी \( u_E = u_B \)। यह दर्शाता है कि तरंगों में ऊर्जा इन दोनों क्षेत्रों के बीच समान रूप से बंटी होती है।
In simple words: विद्युत चुम्बकीय तरंगें प्रकाश की गति से चलती हैं, इन्हें चलने के लिए किसी माध्यम की ज़रूरत नहीं होती। ये तरंगें सीधी नहीं बल्कि अनुप्रस्थ होती हैं, मतलब इनके कंपन चलने की दिशा के तिरछे होते हैं। ये तरंगें शीशे से टकराकर वापस आ सकती हैं, मुड़ सकती हैं और एक-दूसरे को काट भी सकती हैं। इनमें ऊर्जा विद्युत और चुम्बकीय क्षेत्र में बराबर बंटी होती है।
🎯 Exam Tip: विद्युत चुम्बकीय तरंगों के मुख्य गुण जैसे कि निर्वात में वेग, अनुप्रस्थ प्रकृति और ऊर्जा का समान वितरण उनके व्यवहार और अनुप्रयोगों को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्न 3. भू-तरंगों तथा व्योम तरंगों को समझाइये।
Answer: विद्युत-चुम्बकीय तरंग संचरण के प्रकार (Types of Electromagnetic Wave Propagation)
रेडियो तरंगें तथा सूक्ष्म तरंगें, यानी विद्युत-चुम्बकीय तरंगें, आवृत्ति के आधार पर प्रेषी से ग्राही तक कई तरीकों से जा सकती हैं। इसका कारण यह है कि अलग-अलग आवृत्ति परासों के लिए वातावरण का व्यवहार अलग-अलग होता है। विभिन्न तरंग संचरण की विधियाँ जिनके द्वारा ये विद्युत-चुम्बकीय तरंगें (यानी रेडियो तथा सूक्ष्म तरंगें) प्रेषी से ग्राही एण्टीना तक पहुँच सकती हैं, वे निम्न हैं:
1. भू-तरंगें अथवा पृष्ठ तरंगें (Ground Waves or Surface Waves): ये वे तरंगें हैं जो प्रेषी के एण्टीना द्वारा विकिरित होती हैं और पृथ्वी की वक्रता का अनुकरण करते हुए, लगभग पृथ्वी के पृष्ठ के समान्तर चलती हैं। इन तरंगों की तरंगदैर्ध्य आमतौर पर लंबी होती है। संचरण की यह विधि तभी तक प्रभावी रहती है जब तक कि प्रेषी तथा ग्राही एण्टीना पृथ्वी के निकट हों। ये कम आवृत्ति की रेडियो तरंगों (जैसे AM रेडियो) के लिए उपयुक्त होती हैं।
2. अन्तरिक्ष या क्षोभमण्डलीय तरंगें (Space or Tropospheric Waves): ये वे तरंगें होती हैं जो प्रेषी एण्टीना तथा ग्राही एण्टीना के बीच अन्तरिक्ष में होकर सीधे चलती हैं। ये तरंगें वायुमण्डल के क्षोभमण्डलीय क्षेत्र (Tropospherical region) के भीतर होती हैं। संचरण को परास बढ़ाने के लिए इन्हें संचार उपग्रह से परावर्तित किया जाता है। संचरण की यह विधि (मोड) टेलीविजन, रडार तथा आवृत्ति मॉडुलित तरंग संचरण में विशेष रूप से उपयोगी है।
3. व्योम अथवा आयन मण्डलीय तरंगें (Sky or Ionospheric Waves): ये तरंगें वायुमण्डल में होकर संचरित होती हैं तथा प्रेषी एण्टीना से पृथ्वी के सापेक्ष बड़े कोणों पर आयनमण्डल तक पहुँच जाती हैं। आयनमंडल में मौजूद मुक्त इलेक्ट्रॉन और आयन इन तरंगों को पृथ्वी की ओर वापस परावर्तित कर देते हैं, जिससे ये लंबी दूरी तक संचरित हो पाती हैं। इसका उपयोग AM रेडियो प्रसारण में होता है।
In simple words: भू-तरंगें जमीन के साथ-साथ चलती हैं और छोटी दूरी के लिए होती हैं। अंतरिक्ष तरंगें सीधी रेखा में चलती हैं और वायुमंडल की निचली परत में रहती हैं। व्योम तरंगें आयनमंडल से टकराकर लंबी दूरी तय करती हैं, जैसे कि रेडियो प्रसारण में।
🎯 Exam Tip: भू-तरंगों का परास कम आवृत्ति पर अधिक होता है, जबकि व्योम तरंगें आयनमंडल के परावर्तन का उपयोग करके लंबी दूरी तय करती हैं, और अंतरिक्ष तरंगें उपग्रहों के माध्यम से बहुत लंबी दूरी के लिए इस्तेमाल होती हैं।
प्रश्न 4. संचार किसे कहते हैं?
Answer: संचार शब्द का अर्थ है संदेश (Information) या सूचनाओं को पूर्ण सही रूप से एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक पहुँचाना। यह सूचना के आदान-प्रदान की एक प्रक्रिया है।
In simple words: संचार का मतलब है एक जगह से दूसरी जगह तक जानकारी को सही तरीके से भेजना। इसमें किसी बात या संदेश को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुँचाना शामिल है।
🎯 Exam Tip: संचार की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि संदेश कितनी स्पष्टता और सटीकता से स्रोत से गंतव्य तक पहुँचाया गया है।
प्रश्न 5. संचार तंत्र में कितने और कौन-कौन से भाग होते हैं?
Answer: संचार तंत्र में मुख्य रूप से तीन भाग होते हैं-
1. प्रेषी (Transmitter): यह सूचना स्रोत से संदेश को लेता है और उसे संचार चैनल पर भेजने के लिए उपयुक्त रूप में परिवर्तित करता है।
2. संचरण का माध्यम (Communication Medium): यह वह रास्ता है जिसके माध्यम से संदेश प्रेषी से ग्राही तक यात्रा करता है (जैसे तार, हवा, फाइबर ऑप्टिक)। इस माध्यम में शोर भी शामिल हो सकता है।
3. ग्राही (Receiver): यह संचार चैनल से संदेश को प्राप्त करता है और उसे मूल रूप में परिवर्तित करता है ताकि सूचना के उपभोक्ता उसे समझ सकें।
In simple words: संचार तंत्र में तीन मुख्य हिस्से होते हैं: जानकारी भेजने वाला (प्रेषी), जानकारी जिस रास्ते से जाती है (माध्यम), और जानकारी पाने वाला (ग्राही)। ये तीनों मिलकर जानकारी को एक जगह से दूसरी जगह तक पहुँचाते हैं।
🎯 Exam Tip: संचार प्रणाली के ब्लॉक आरेख में प्रेषी, माध्यम और ग्राही के कार्य को समझना महत्वपूर्ण है, साथ ही यह भी कि शोर कैसे माध्यम में संदेश को प्रभावित करता है।
प्रश्न 7. नैनो संरचना के प्रेक्षण के लिए प्रयोग किये जाने वाले उपकरणों के नाम दीजिए।
Answer: नैनो संरचना का अध्ययन करने के लिए निम्नलिखित प्रमुख उपकरणों का प्रयोग किया जाता है:
1. स्केनिंग प्रोब सूक्ष्मदर्शी (Scanning Probe Microscope - SPM)
2. इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (Electron Microscope - EM)
3. स्केनिंग टनलिंग सूक्ष्मदर्शी (Scanning Tunneling Microscope - STM)
4. प्रकाशीय सूक्ष्मदर्शी (Optical Microscope) - हालांकि इसकी सीमाएं नैनो पैमाने पर होती हैं, उन्नत संस्करणों का उपयोग किया जाता है।
In simple words: बहुत छोटी नैनो चीजों को देखने के लिए कुछ खास माइक्रोस्कोप इस्तेमाल होते हैं। इनमें स्कैनिंग प्रोब माइक्रोस्कोप और इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप जैसे उपकरण शामिल हैं, जो हमें नैनो स्तर पर चीज़ें देखने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: नैनोस्केल संरचनाओं के अध्ययन के लिए, उच्च विभेदन क्षमता वाले सूक्ष्मदर्शी जैसे STM और AFM महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे परमाणविक स्तर पर भी विवरण प्रदान कर सकते हैं।
RBSE Class 12 Physics Chapter 17 निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. विद्युत चुम्बकीय तरंगों की क्या प्रकृति होती है ? विद्युत चुम्बकीय तरंगों से सम्बन्धित हर्ज के प्रयोग का वर्णन कीजिए।
Answer: विद्युत चुम्बकीय तरंगें एवं इनके अभिलक्षण (Electro Magnetic Waves and their Characteristics)
मैक्सवेल का विद्युत चुम्बकीय तरंग सिद्धांत (Maxwell's Electromagnetic Wave Theory)
इस सिद्धांत के अनुसार एक त्वरित आवेश को विद्युत चुम्बकीय तरंगें उत्सर्जित करनी चाहिए। इन तरंगों में विद्युत एवं चुम्बकीय दोनों क्षेत्र साथ-साथ समान कला में सरल आवर्ती रूप से परिवर्तित होते हैं। इन तरंगों में विद्युत क्षेत्र सदिश \( (\overrightarrow{\mathrm{E}}) \) और चुम्बकीय क्षेत्र सदिश \( (\overrightarrow{\mathrm{B}}) \) परस्पर लम्बवत होते हैं और दोनो संचरण की दिशा के भी लम्बवत होते हैं। इस प्रकार विद्युत चुम्बकीय तरंगे अनुप्रस्थ तरंगे होती हैं। इन तरंगों में दोनों क्षेत्र ऊर्जा भी ले जाते हैं।
(i) हर्ट्ज का प्रयोग (Hertz's Experiment)
विद्युत चुम्बकीय तरंगों का प्रायोगिक प्रदर्शन सर्वप्रथम हेनरिच रूडोल्फ हर्ट्ज ने सन् 1887 में दोलित आवेशों द्वारा किया था। उन्होंने यह दिखाया कि विद्युत चुम्बकीय तरंगों को प्रयोगशाला में उत्पन्न और संसूचित किया जा सकता है। प्रयोग व्यवस्था तथा हर्ट्ज के प्रयोग का सैद्धांतिक आरेख चित्र 17.4 में दर्शाया गया है। इसमें \( S_1 \) व \( S_2 \) दो बड़ी चालक प्लेटें हैं जो पीतल की छड़ों \( R_1 \) व \( R_2 \) से जुड़ी रहती हैं। पीतल की छड़ें दो धातु की गोलियों \( A_1 \) व \( A_2 \) से जुड़ी रहती हैं। इन गोलियों के मध्य वायु का अन्तराल (Airgap) होता है। दोनों गोलियों का सम्बन्ध एक प्रेरण कुण्डली की द्वितीयक कुण्डली से होता है, ताकि उनके मध्य उच्च विभवान्तर लगाया जा सके। विद्युत चुम्बकीय तरंगों के संसूचन के लिए हर्ट्ज़ ने एक संसूचक बनाया जो दो गोलों \( D_1 \) व \( D_2 \) से जुड़े तार के एक लूप के रूप में है।
कार्यविधि-प्रेरण कुण्डली में धारा प्रवाहित करने पर गोलों \( A_1 \) व \( A_2 \) के बीच वायु अन्तराल में उच्च वोल्टता आरोपित होती है। उच्च वोल्टता गोलों के मध्य वायु को आयनित कर देती है। गोलों के मध्य वायु के आयनीकरण के फलस्वरूप उत्पन्न इलेक्ट्रॉन व धनायन विसर्जन के लिए चालक पथ प्रदान करते हैं, जिससे अन्तराल में चिनगारी उत्पन्न होती है। ये आवेशित कण आगे-पीछे दोलन करने लगते हैं जिससे विद्युत चुम्बकीय तरंग उत्पन्न होती है। उत्पन्न विद्युत चुम्बकीय तरंगों की आवृत्ति प्लेटों के मध्य धारिता एवं कुण्डली के प्रेरकत्व द्वारा निर्धारित की जाती है जो निम्नांकित सूत्र से मिलती है-
\( f = \frac{1}{2 \pi \sqrt{\mathrm{LC}}} \)
संसूचक ऐसी स्थिति में रखा जाता है कि दोलित आयनों द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र संसूचक कुण्डली के लम्बवत रहे। यह दोलित चुम्बकीय क्षेत्र संसूचक कुण्डली के अंतराल \( D_1 \) व \( D_2 \) में दोलित विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है तथा अंतराल में चिनगारी उत्पन्न करता है। यह प्रयोग विद्युत चुम्बकीय तरंगों की उत्पत्ति का प्रदर्शन है।
(iii) मार्कोनी की खोज (Discovery of Marconi)
जी मार्कोनी ने हर्ट्ज के कार्यों को आगे बढ़ाते हुए कई किलोमीटर की दूरियों तक विद्युत चुम्बकीय तरंगों का सफलतापूर्वक संचार प्रणाली के युग की शुरूआत की। उन्होंने दिखाया कि इन तरंगों को लंबी दूरी तक भेजा जा सकता है, जिससे वायरलेस संचार की नींव पड़ी।
विद्युत चुम्बकीय तरंगों के अभिलक्षण (Characteristic of Electromagnetic Waves)
(i) विद्युत चुम्बकीय तरंगें परिवर्ती विद्युत क्षेत्र एवं चुम्बकीय क्षेत्र के रूप में संचरण करती हैं। ये दोनों क्षेत्र एक-दूसरे को उत्पन्न करते हैं और एक साथ आगे बढ़ते हैं।
(ii) विद्युत चुम्बकीय तरंगों में विद्युत क्षेत्र सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{E}} \) तथा चुम्बकीय सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) एक-दूसरे के लम्बवत होते हैं तथा तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत होते हैं। इस प्रकार विद्युत चुम्बकीय तरंग संचरण की दिशा सदिश गुणन \( \overrightarrow{\mathrm{E}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}} \) की दिशा में होती है। विद्युत चुम्बकीय तरंगें ऊर्जा और संवेग का वहन करती हैं।
धनात्मक दिशा में गतिमान एक समतल ध्रुवित विद्युत चुम्बकीय तरंग चित्र 17.5 में दर्शायी है। यह तरंग x दिशा में गमन कर रही है। जिसका दोलनशील विद्युत क्षेत्र y दिशा में तथा दोलनकारी चुम्बकीय क्षेत्र z दिशा के अनुदिश है। इस प्रकार विद्युत चुम्बकीय तरंगों के लिए विद्युत क्षेत्र \( E_y \) तथा चुम्बकीय क्षेत्र \( B_z \) को निम्नानुसार लिख सकते हैं-
\( E_y (x, t) = E_m \sin (kx - \omega t) \) ...(1)
\( B_z (x, t) = B_m \sin (kx - \omega t) \) ...(2)
यहाँ \( E_y \) व \( B_z \) क्रमशः विद्युत व चुम्बकीय क्षेत्रों के तात्क्षणिक मान हैं तथा \( E_m \) एवं \( B_m \) इन क्षेत्रों के आयाम हैं। \( k = 2\pi/\lambda \) कोणीय तरंग संख्या है, \( \lambda \) तरंग दैर्ध्य है तथा \( \omega \) कोणीय आवृत्ति है।
(iii) ये मुक्त आकाश में प्रकाश के वेग \( (C = 3 \times 10^8 \text{ m/s}) \) से चलती हैं और इनकी चाल तरंगदैर्ध्य पर निर्भर नहीं करती है। निर्वात में विद्युत चुम्बकीय तरंग की चाल है:
\[ C = \frac{1}{\sqrt{\mu_0 \epsilon_0}} \]
(v) विद्युत चुम्बकीय तरंग का ऊर्जा घनत्व
विद्युत क्षेत्र के एकांक आयतन की ऊर्जा, विद्युत ऊर्जा घनत्व कहलाती है। अर्थात्
\( u_E = \frac{1}{2} \epsilon_0 E^2 \)
इसी प्रकार चुम्बकीय क्षेत्र में संबद्ध चुम्बकीय ऊर्जा घनत्व
\( u_B = \frac{1}{2} \frac{B^2}{\mu_0} \)
अतः कुल ऊर्जा घनत्व \( u = u_E + u_B \)
\[ u = \frac{1}{2} \epsilon_0 E^2 + \frac{1}{2} \frac{B^2}{\mu_0} \]
यहाँ \( c = \frac{E}{B} \implies B = \frac{E}{c} \).
इसलिए, \( u_B = \frac{1}{2} \frac{(E/c)^2}{\mu_0} = \frac{1}{2} \frac{E^2}{\mu_0 c^2} \).
चूंकि \( c = \frac{1}{\sqrt{\mu_0 \epsilon_0}} \implies c^2 = \frac{1}{\mu_0 \epsilon_0} \implies \mu_0 c^2 = \frac{1}{\epsilon_0} \).
तो, \( u_B = \frac{1}{2} E^2 \epsilon_0 = u_E \).
अतः स्पष्ट है विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र के विद्युत ऊर्जा घनत्व \( u_E \) तथा चुम्बकीय ऊर्जा घनत्व \( u_B \) समान होते हैं। अतः विद्युत चुम्बकीय तरंग का कुल ऊर्जा घनत्व
\( u = 2u_E = 2u_B \)
या \( u = \epsilon_0 E^2 = \frac{B^2}{\mu_0} \).
एक पूर्ण चक्र में \( \sin^2(kx - \omega t) \) का औसत मान विद्युत चुम्बकीय तरंग की कुल माध्य ऊर्जा घनत्व
\( u_{av} = \epsilon_0
या \( u_{av} = \frac{B_m^2}{2\mu_0} \).
(vii) विद्युत चुम्बकीय तरंग की तीव्रता \( I \) एक चक्र पर पॉयटिंग सदिश के औसत मान के बराबर होती है। यह ऊर्जा संचरण की दर को बताता है।
\( I = S_{av} = \frac{E_m B_m}{2\mu_0} \)
या \( I = \frac{E_m^2}{2\mu_0 c} \)
या \( I = c u_{av} \).
(viii) विद्युत चुम्बकीय तरंगों का संवेग
विद्युत चुम्बकीय तरंगें जिस सतह पर गिरती हैं उस पर दाब (Pressure) डालती हैं। विद्युत चुम्बकीय तरंगों द्वारा डाले गये दाब को विकिरण दाब (Radiation Pressure) कहते हैं। यदि सतह ऊर्जा \( U \) को पूरी तरह अवशोषित कर ले, तो दाब \( p = \frac{U}{c} \) होता है। यदि सतह ऊर्जा को पूरी तरह से परावर्तित कर दे, तो दाब \( p = \frac{2U}{c} \) होता है।
तीव्रता \( I \) के रूप में, अवशोषण के लिए \( p = \frac{I}{c} \) और परावर्तन के लिए \( p = \frac{2I}{c} \) होता है।
(ix) विद्युत चुम्बकीय तरंगे अध्यारोपण के सिद्धांत का पालन करती हैं। इस प्रकार तरंगों द्वारा प्रदर्शित गुण जैसे परावर्तन, अपवर्तन, व्यतिकरण, विवर्तन आदि विद्युत चुम्बकीय तरंगों द्वारा दर्शाए जाते हैं। अनुप्रस्थ प्रकृति होने के कारण इनका ध्रुवण भी किया जा सकता है। अप्रगामी विद्युत चुम्बकीय तरंगे भी उत्पनन की जा सकती हैं तथा इनके लिए डॉप्लर प्रभाव भी प्रेक्षित होता है।
In simple words: विद्युत चुम्बकीय तरंगें विद्युत और चुम्बकीय क्षेत्रों के हिलने से बनती हैं और ये प्रकाश की गति से चलती हैं। हर्ट्ज ने एक प्रयोग करके दिखाया कि ये तरंगें कैसे बनाई और पकड़ी जा सकती हैं। मार्कोनी ने इन्हीं तरंगों का उपयोग करके दूर तक संदेश भेजने का तरीका खोजा। इन तरंगों की खास बात यह है कि ये अनुप्रस्थ होती हैं, मतलब इनके कंपन चलने की दिशा के तिरछे होते हैं। ये तरंगें ऊर्जा और दबाव भी डालती हैं।
🎯 Exam Tip: हर्ट्ज के प्रयोग का आरेख और उसका कार्य सिद्धांत, साथ ही विद्युत चुम्बकीय तरंगों के अनुप्रस्थ प्रकृति और वेग का सूत्र, महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं जिन्हें ध्यान में रखना चाहिए।
प्रश्न 2. विद्युत चुम्बकीय तरंगों के विभिन्न घटकों का वर्णन करते हुए इनके गुणों का उल्लेख कीजिए।
Answer: विद्युत-चुम्बकीय स्पेक्ट्रम (Electromagnetic Magnetic Spectrum)
न्यूटन ने सूर्य के प्रकाश का स्पेक्ट्रम प्राप्त किया और देखा कि इस स्पेक्ट्रम में बैंगनी रंग से लेकर लाल रंग तक होते हैं। यह स्पेक्ट्रम दृश्य स्पेक्ट्रम (visible spectrum) कहलाता है। यह स्पेक्ट्रम 4000 Å में से 7800 Å तक (अर्थात् बैंगनी रंग से लाल रंग तक) फैला होता है।
विभिन्न प्रकार की वैद्युत-चुम्बकीय तरंगों का आरोही तरंगदैर्ध्य के क्रम में संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है:
1. गामा किरणें (y-rays): ये किरणें विद्युत-चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के ऊपरी आवृत्ति के क्षेत्र में होती हैं तथा इनकी तरंगदैर्ध्य \( 10^{-14} \) m से लेकर \( 10^{-10} \) m से भी कम होती है। गामा किरणों की खोज सन् 1896 में बेकेरल तथा क्यूरी ने की थी। उच्च आवृत्ति (higher frequency) का यह विकिरण नाभिकीय अभिक्रियाओं में उत्पन्न होता है। यह रेडियो नाभिकों द्वारा भी उत्सर्जित होता है। यह किरणें आवेश रहित होती हैं और इनकी वेधन क्षमता (penetrating power) काफी अधिक होती है। यह प्रतिदीप्ति आयनीकरण (fluorescence ionisation) उत्पन्न करती हैं। तथा फोटोग्राफिक प्लेट को भी प्रभावित करती हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में इनका उपयोग कैंसर के इलाज में बीमार कोशिकाओं को नष्ट करने में किया जाता है। इनकी आवृत्ति का परास \( 10^{18} \) Hz से \( 10^{22} \) Hz होता है।
3. पराबैंगनी किरणें (Ultra-violet Rays): इन किरणों की तरंगदैर्ध्य \( 4 \times 10^{-7} \) m (400 nm) से \( 6 \times 10^{-10} \) m (0.6 nm) तक होती है। इनकी खोज सन् 1801 में रिटर ने की थी। सूर्य पराबैंगनी किरणों का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत है परन्तु सौभाग्य से इनका अधिकांश भाग वायुमण्डल की लगभग 40-50 km की ऊँचाई पर स्थित ओजोन परत में अवशोषित हो जाता है। अधिक परिमाण में पराबैंगनी किरणों के सम्पर्क में आने से मानव शरीर पर हानिकारक प्रभाव होता है। पराबैंगनी किरणों के त्वचा पर पड़ने से त्वचा में अधिक मेलानिन का उत्पादन होता है जिससे त्वचा ताम्र रंग की हो जाती है। सामान्य काँच द्वारा इनका अवशोषण हो जाता है, अत: काँच लगी खिड़कियों से छनकर आने वाले प्रकाश में धूप-ताम्रता (sun-burn) नहीं होती है। कीड़े मारने तथा प्रकाश-संश्लेषण में भी इनका उपयोग होता है। वेल्डिंग करने वाले लोग अपनी आँखों की सुरक्षा के लिए विशेष काँचयुक्त धूप के चश्मे पहनते हैं।
4. दृश्य प्रकाश तरंगें (Visible Light Waves): यह विद्युत-चुम्बकीय तरंगों का सर्वाधिक सुपरिचित रूप है। यह स्पेक्ट्रम का वह भाग है जिसके लिए मानव नेत्र संवेदनशील होते हैं। इनकी तरंगदैर्ध्य 3800 Å से 7800 Å तक होती है। दृश्य प्रकाश तरंगों की खोज सन् 1666 में न्यूटन ने की थी। आयनित गैसें एवं तापदीप्त वस्तुएँ दृश्य प्रकाश का स्रोत हैं। उत्तेजित परमाणु जब अपनी मूल अवस्था को वापस लौटते हैं तो इन तरंगों का उत्पादन होता है। हमारे चारों ओर की वस्तुओं से उत्सर्जित या परावर्तित होने वाला प्रकाश हमें हमारे परिवेश के विषय में सूचनाएँ देता है। यह वस्तुओं को देखने के लिए प्रयुक्त होने वाली एकमात्र किरणें हैं।
5. अवरक्त तरंगें (Infra-red Waves): इन तरंगों की खोज सन् 1800 में हरशैल ने की थी। इनकी तरंगदैर्ध्य 7800 Å से 1 mm तक होती है। ये गर्म पिण्डों एवं अणुओं से उत्पन्न होती हैं। अवरक्त तरंगों को ही हम ऊष्मा तरंगें भी कहते हैं क्योंकि ये ऊष्मीय प्रभाव उत्पन्न करती हैं। रात्रि में फोटोग्राफी करने में तथा रोगों के उपचार हेतु काय-चिकित्सा में अवरक्त लैम्प का उपयोग किया जाता है। उपग्रहों में लगे अवरक्त संसूचकों का उपयोग सैनिक उद्देश्यों एवं फसलों की वृद्धि का प्रेक्षण करने के लिए किया जाता है। इलेक्ट्रॉनिक युक्तियाँ (जैसे-प्रकाश उत्सर्जक डायोड) भी अवरक्त तरंगें उत्सर्जित करती हैं तथा घरेलू इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों, जैसे-टी. वी. सेट, वीडियो-रिकॉर्डर एवं हाई-फाई प्रणालियों के रिमोट नियन्त्रकों में ये बहुलता से प्रयोग की जाती हैं।
In simple words: विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम में गामा किरणों, पराबैंगनी किरणों, दृश्य प्रकाश और अवरक्त तरंगों जैसे कई हिस्से होते हैं। गामा किरणें सबसे छोटी तरंगदैर्ध्य वाली होती हैं और कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होती हैं। पराबैंगनी किरणें त्वचा के लिए हानिकारक होती हैं लेकिन कीटाणुओं को मारने में काम आती हैं। दृश्य प्रकाश वह हिस्सा है जिसे हम देख सकते हैं, और अवरक्त तरंगें गर्मी पैदा करती हैं और रात की फोटोग्राफी में उपयोग होती हैं।
🎯 Exam Tip: विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के प्रत्येक घटक की तरंगदैर्ध्य सीमा, आवृत्ति, स्रोत और मुख्य अनुप्रयोगों को याद रखना इस प्रकार के वर्णनात्मक प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. मॉडुलन व विमांडूलन की प्रक्रिया समझाइए। यह किस प्रकार सन्देश संचरण में उपयोग में लाये जाते हैं ?
Answer:
मॉडुलन (Modulation)
मॉडुलन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कम आवृत्ति वाले सिग्नल को, जिसे जानकारी (संदेश) कहा जाता है, बहुत दूर भेजने के लिए उसे ज़्यादा आवृत्ति वाली एक वाहक तरंग (carrier wave) के साथ मिलाया जाता है। इस प्रक्रिया में, कम आवृत्ति वाले सिग्नल को मॉडुलेटिंग तरंग कहते हैं, ज़्यादा आवृत्ति वाली तरंग को वाहक तरंग कहते हैं, और इन दोनों को मिलाकर बनी नई तरंग को मॉडुलित तरंग (modulated wave) कहते हैं। यह प्रक्रिया सिग्नल को अधिक दूरी तक ले जाने में मदद करती है, क्योंकि कम आवृत्ति वाले सिग्नल अकेले ज़्यादा दूर नहीं जा सकते। मॉडुलन के तीन मुख्य प्रकार हैं: आयाम मॉडुलन (Amplitude Modulation), आवृत्ति मॉडुलन (Frequency Modulation) और कला मॉडुलन (Phase Modulation)।
विमॉडुलन (Demodulation)
विमॉडुलन मॉडुलन की उल्टी प्रक्रिया है। इसमें मॉडुलित तरंग से मूल संदेश सिग्नल और वाहक तरंग को फिर से अलग किया जाता है। इसे संसूचन (detection) भी कहते हैं। जब मॉडुलित रेडियो तरंगें एक रिसीवर एंटीना द्वारा ग्रहण की जाती हैं, तो वे कमजोर रेडियो आवृत्ति धाराएँ बनाती हैं। इन धाराओं से सीधे ध्वनि उत्पन्न नहीं की जा सकती क्योंकि ध्वनि उपकरण इतनी ज़्यादा आवृत्तियों के प्रति संवेदनशील नहीं होते। इसलिए, विमॉडुलन के द्वारा मूल ध्वनि सिग्नल को वाहक तरंग से अलग करना ज़रूरी हो जाता है ताकि उसे सुना जा सके। इस तरह, मॉडुलन और विमॉडुलन एक साथ काम करके यह सुनिश्चित करते हैं कि संदेश एक जगह से दूसरी जगह तक सफलतापूर्वक भेजा और प्राप्त किया जा सके।
In simple words: मॉडुलन में हम जानकारी वाले धीमे सिग्नल को तेज़ तरंग के साथ मिलाते हैं ताकि वह दूर तक जा सके। विमॉडुलन में हम उस मिली हुई तरंग से जानकारी वाले सिग्नल को वापस अलग करते हैं ताकि उसे समझा जा सके।
🎯 Exam Tip: मॉडुलन और विमॉडुलन दोनों की परिभाषाएँ, उनके उद्देश्य और वे कैसे काम करते हैं, यह स्पष्ट रूप से बताएँ। साथ ही, संचार में उनकी भूमिका को समझाएँ।
Question 5. प्रकृति में प्रेक्षित नैनोतकनीक के उदाहरणों को समझाइये।
Answer: प्रकृति में कई छोटी-छोटी नैनो संरचनाएँ मौजूद हैं, जो खास गुणों वाली होती हैं। इनके कुछ उदाहरण नीचे दिए गए हैं:
1. **कीटों की आँखें:** मक्खी जैसी कीटों की आँखों में बहुत छोटे-छोटे उभार होते हैं। ये संरचनाएँ 380nm से 780nm की नैनो-रेंज में होती हैं और हेक्सागोनल (छह-कोणीय) आकार की होती हैं। ये कीटों को कम रोशनी में भी इंसानों से बेहतर देखने में मदद करती हैं क्योंकि ये प्रकाश को प्रभावी ढंग से पकड़ती हैं।
2. **एडेलवाइस फूल:** यह फूल (जो ऊँचे पहाड़ी इलाकों में उगता है) 100 से 200 nm के नैनो आकार के खोखले रेशों से ढका होता है। ये रेशे सूरज की हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को सोख लेते हैं और दिखने वाली रोशनी को वापस भेजते हैं, जिससे फूल सफेद दिखता है। यह फूल को ज़्यादा ऊर्जा वाली किरणों से बचाता है। वैज्ञानिकों को इनसे प्रेरणा मिली है कि वे विकिरण से बचाव के लिए नई चीजें बना सकें।
In simple words: प्रकृति में कुछ बहुत छोटी संरचनाएँ होती हैं जिन्हें नैनो-संरचना कहते हैं। जैसे, मक्खी की आँखें जो उसे कम रोशनी में देखने में मदद करती हैं, और एडेलवाइस फूल जो खुद को सूरज की तेज किरणों से बचाता है।
🎯 Exam Tip: प्रकृति से नैनोतकनीक के उदाहरण देते समय, संरचना का नाम, उसका आकार (नैनो-रेंज में), और वह कैसे किसी खास काम में मदद करती है, यह ज़रूर बताएँ।
RBSE Class 12 Physics Chapter 17 आंकिक प्रश्न
Question 1. X-दिशा में संचरित समतल ज्यावक्रीय विद्युत चुम्बकीय तरंग के E सदिश का अधिकतम मान किसी क्षण बिन्दु पर 600 वोल्ट/मीटर है। इस बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें विद्युत चुम्बकीय तरंग में विद्युत क्षेत्र का अधिकतम मान \( E_m \) दिया गया है। हमें चुम्बकीय क्षेत्र का मान \( B_m \) ज्ञात करना है। हम जानते हैं कि प्रकाश का वेग \( c \), विद्युत क्षेत्र \( E_m \) और चुम्बकीय क्षेत्र \( B_m \) के बीच एक संबंध होता है, जो उन्हें आपस में जोड़ता है। यह संबंध दर्शाता है कि विद्युत और चुम्बकीय क्षेत्र हमेशा एक दूसरे के अनुपात में होते हैं और प्रकाश की गति से जुड़े होते हैं।
प्रश्नानुसार,
\( E_m = 600 \, \text{V/m} \)
प्रकाश का वेग \( c = 3 \times 10^8 \, \text{m/s} \)
सूत्र: \( c = \frac{E_m}{B_m} \)
\( \implies B_m = \frac{E_m}{c} \)
\( B_m = \frac{600}{3 \times 10^8} \)
\( B_m = 2 \times 10^{-6} \, \text{Wb/m}^2 \)
In simple words: विद्युत क्षेत्र का अधिकतम मान 600 वोल्ट/मीटर है। प्रकाश की गति 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड है। इन मानों का उपयोग करके, हम चुम्बकीय क्षेत्र का मान \( 2 \times 10^{-6} \, \text{Wb/m}^2 \) पाते हैं।
🎯 Exam Tip: ऐसे आंकिक प्रश्नों में, दिए गए मानों को सही इकाइयों के साथ लिखें। सूत्र को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ और गणना के सभी चरणों को ध्यान से करें ताकि अंतिम उत्तर सही इकाई के साथ मिल सके।
Question 2. एक दूरदर्शन मीनार की ऊँचाई 75m हैं। किस महत्तम दूरी व क्षेत्रफल में यह दूरदर्शन संचरण प्राप्त किया जा सकता है ? पृथ्वी की त्रिज्या = 6.4 × 106m
Answer: हमें एक टीवी टावर की ऊँचाई और पृथ्वी की त्रिज्या दी गई है। हमें यह पता लगाना है कि यह टावर कितनी अधिकतम दूरी तक सिग्नल भेज सकता है और कितने क्षेत्र को कवर कर सकता है। इसके लिए हम विशिष्ट सूत्रों का उपयोग करते हैं। ये सूत्र दिखाते हैं कि टीवी प्रसारण की पहुँच टावर की ऊँचाई और पृथ्वी की वक्रता पर निर्भर करती है, यही कारण है कि ऊँचे टावर ज़्यादा क्षेत्र कवर करते हैं।
दिया है:
मीनार की ऊँचाई \( h = 75 \, \text{m} \)
पृथ्वी की त्रिज्या \( R = 6.4 \times 10^6 \, \text{m} \)
संचरण की महत्तम दूरी \( d \):
\( d = \sqrt{2Rh} \)
\( d = \sqrt{2 \times 6.4 \times 10^6 \, \text{m} \times 75 \, \text{m}} \)
\( d = \sqrt{960 \times 10^6} \, \text{m} \)
\( d = \sqrt{96 \times 10^7} \, \text{m} \)
\( d \approx 30.98 \times 10^3 \, \text{m} \)
\( d \approx 31 \, \text{km} \)
संचरण का महत्तम क्षेत्रफल \( A \):
\( A = \pi d^2 = 2\pi Rh \)
\( A = 2 \times 3.14 \times 6.4 \times 10^6 \, \text{m} \times 75 \, \text{m} \)
\( A = 3014.4 \times 10^6 \, \text{m}^2 \)
\( A \approx 3014 \, \text{km}^2 \)
In simple words: टीवी टावर की ऊँचाई 75 मीटर और पृथ्वी की त्रिज्या 6.4 × 106 मीटर है। हम सूत्रों का उपयोग करके पता लगाते हैं कि टावर लगभग 31 किलोमीटर की दूरी तक सिग्नल भेज सकता है और लगभग 3014 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर कर सकता है।
🎯 Exam Tip: दूरदर्शन मीनार की अधिकतम दूरी और क्षेत्रफल के लिए सही सूत्रों को याद रखें। गणना करते समय इकाइयों और वैज्ञानिक संकेतन (scientific notation) का विशेष ध्यान रखें।
Free study material for Physics
RBSE Solutions Class 12 Physics Chapter 17 विद्युत चुम्बकीय तरंगें, संचार एवं समकालीन
Students can now access the RBSE Solutions for Chapter 17 विद्युत चुम्बकीय तरंगें, संचार एवं समकालीन prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 12 Physics textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.
Detailed Explanations for Chapter 17 विद्युत चुम्बकीय तरंगें, संचार एवं समकालीन
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 12 Physics chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 12 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Physics Class 12 Solved Papers
Using our Physics solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 12 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 17 विद्युत चुम्बकीय तरंगें, संचार एवं समकालीन to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated RBSE Solutions Class 12 Physics Chapter 17 विद्युत चुम्बकीय तरंगें, संचार एवं समकालीन is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Physics are as per latest RBSE curriculum.
Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 12 Physics Chapter 17 विद्युत चुम्बकीय तरंगें, संचार एवं समकालीन as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Physics concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 12 Physics Chapter 17 विद्युत चुम्बकीय तरंगें, संचार एवं समकालीन will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 12 Physics. You can access RBSE Solutions Class 12 Physics Chapter 17 विद्युत चुम्बकीय तरंगें, संचार एवं समकालीन in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 12 Physics Chapter 17 विद्युत चुम्बकीय तरंगें, संचार एवं समकालीन in printable PDF format for offline study on any device.