RBSE Solutions Class 12 Physics Chapter 14 परमाणवीय भौतिकी

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Detailed Chapter 14 परमाणवीय भौतिकी RBSE Solutions for Class 12 Physics

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Class 12 Physics Chapter 14 परमाणवीय भौतिकी RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Physics Chapter 14 बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. हाइड्रोजन परमाणु की मूल अवस्था में ऊर्जा -13.6 eV है। n = 5 ऊर्जा स्तर में इसकी ऊर्जा होगी।
(अ) -0.54 eV
(ब) -0.85 eV
(स) -5.4 eV
(द) -2.72 eV
Answer: (अ) -0.54 eV
In simple words: हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा उसके ऊर्जा स्तर पर निर्भर करती है। जब इलेक्ट्रॉन n=5 के ऊर्जा स्तर में होता है, तो उसकी ऊर्जा -0.54 eV होती है। यह सूत्र \( E_n = \frac{-13.6}{n^2} \) eV से आता है, जहाँ n ऊर्जा स्तर की संख्या है।

🎯 Exam Tip: बोर मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा स्तर \(n\) के साथ \( \frac{1}{n^2} \) के व्युत्क्रमानुपाती होती है, इसलिए ऊर्जा की गणना करते समय \(n^2\) को सही ढंग से वर्ग करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. हाइड्रोजन परमाणु की n वीं कक्षा में ऊर्जा \(E_n = -\frac{13.6}{n^2} eV\) है। इलेक्ट्रान को प्रथम कक्षा में द्वितीय कक्षा में भेजने के लिए आवश्यक ऊर्जा होगी।
(अ) 10.2 eV
(ब) 12.1 eV
(स) 13.6 eV
(द) 3.4 eV
Answer: (अ) 10.2 eV
\( E_n = \frac{-13.6}{n^2} \, \text{eV} \)
प्रथम कक्षा के लिए, \( n = 1 \)
\( E_1 = \frac{-13.6}{(1)^2} = -13.6 \, \text{eV} \)
द्वितीय कक्षा के लिए, \( n = 2 \)
\( E_2 = \frac{-13.6}{(2)^2} = \frac{-13.6}{4} = -3.4 \, \text{eV} \)
आवश्यक ऊर्जा \( \Delta E = E_2 - E_1 \)
\( \Delta E = -3.4 - (-13.6) \)
\( \Delta E = -3.4 + 13.6 \)
\( \Delta E = 10.2 \, \text{eV} \)
In simple words: इलेक्ट्रॉन को एक ऊर्जा स्तर से दूसरे ऊर्जा स्तर में ले जाने के लिए जितनी ऊर्जा की जरूरत होती है, वह दोनों स्तरों की ऊर्जा के बीच का अंतर होती है। हाइड्रोजन परमाणु में, पहले से दूसरे स्तर में जाने के लिए 10.2 eV ऊर्जा चाहिए होती है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा स्तरों के बीच के अंतर की गणना करते समय, हमेशा अंतिम ऊर्जा से प्रारंभिक ऊर्जा घटाएं, और ऋणात्मक मानों का ध्यान रखें।

 

Question 3. हाइड्रोजन परमाणु में यदि इलेक्ट्रॉन तीसरी कक्षा से दूसरी कक्षा में संक्रमण करता है तो उत्सर्जित विकिरण की तरंगदैर्ध्य होगी।
(अ) \( \frac{5R}{36} \)
(ब) \( \frac{36}{5R} \)
(स) \( \frac{R}{36} \)
(द) \( \frac{R}{5} \)
Answer: (ब) \( \frac{36}{5R} \)
रिडबर्ग सूत्र के अनुसार, जब इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर \( n_2 \) से निम्न ऊर्जा स्तर \( n_1 \) में संक्रमण करता है, तो उत्सर्जित विकिरण की तरंगदैर्ध्य \( \lambda \) के व्युत्क्रम का मान इस प्रकार दिया जाता है:
\( \frac{1}{\lambda} = R \left( \frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2} \right) \)
यहाँ, इलेक्ट्रॉन तीसरी कक्षा से दूसरी कक्षा में संक्रमण कर रहा है, इसलिए \( n_1 = 2 \) और \( n_2 = 3 \)।
\( \frac{1}{\lambda} = R \left( \frac{1}{2^2} - \frac{1}{3^2} \right) \)
\( \frac{1}{\lambda} = R \left( \frac{1}{4} - \frac{1}{9} \right) \)
\( \frac{1}{\lambda} = R \left( \frac{9-4}{36} \right) \)
\( \frac{1}{\lambda} = R \left( \frac{5}{36} \right) \)
अब, \( \lambda \) का मान ज्ञात करने के लिए, समीकरण को उल्टा करें:
\( \lambda = \frac{36}{5R} \)
In simple words: जब इलेक्ट्रॉन एक ऊर्जा स्तर से दूसरे में जाता है, तो वह प्रकाश छोड़ता है। उस प्रकाश की तरंगदैर्ध्य निकालने के लिए, हम रिडबर्ग सूत्र का उपयोग करते हैं। तीसरे स्तर से दूसरे स्तर में जाने पर, उत्सर्जित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य \( \frac{36}{5R} \) होती है।

🎯 Exam Tip: रिडबर्ग सूत्र का उपयोग करते समय, हमेशा \(n_1\) (निम्न ऊर्जा स्तर) और \(n_2\) (उच्च ऊर्जा स्तर) को सही ढंग से पहचानें ताकि गणना सटीक हो।

 

Question 4. हाइड्रोजन की लाइमन श्रेणी विद्युत चुंबकीय स्पैक्ट्रम के किस भाग में पाई जाती है।
(अ) पराबैंगनी
(ब) अवरक्त
(स) 12.1 eV
(द) \( \times \) किरण क्षेत्र
Answer: (अ) पराबैंगनी
In simple words: हाइड्रोजन परमाणु का लाइमन श्रेणी का स्पेक्ट्रम पराबैंगनी क्षेत्र में पाया जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस श्रेणी में इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तरों से सीधे सबसे निचले ऊर्जा स्तर (n=1) पर आते हैं, जिससे बहुत अधिक ऊर्जा वाले फोटॉन निकलते हैं।

🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की विभिन्न श्रेणियों (लाइमन, बामर, पाश्चन, ब्रैकेट, फुण्ड) और वे विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के किस भाग में आती हैं, इसे याद रखना महत्वपूर्ण है। लाइमन श्रेणी हमेशा पराबैंगनी में होती है।

 

Question 5. किसी हाइड्रोजन परमाणु जो ऊर्जा स्तर \(n = 4\) तक उत्तेजित किया गया है द्वारा उत्सर्जित स्पैक्ट्रमी रेखाओं की संख्या होगी-
(अ) 2
(ब) 3
(स) 4
(द) 6
Answer: (द) 6
किसी परमाणु को यदि ऊर्जा स्तर n तक उत्तेजित किया जाता है, तो उसके द्वारा उत्सर्जित स्पेक्ट्रमी रेखाओं की कुल संख्या निम्न सूत्र से दी जाती है:
संख्या \( = \frac{n(n-1)}{2} \)
यहाँ, परमाणु को ऊर्जा स्तर \( n = 4 \) तक उत्तेजित किया गया है।
उत्सर्जित स्पेक्ट्रमी रेखाओं की संख्या \( = \frac{4(4-1)}{2} \)
\( = \frac{4 \times 3}{2} \)
\( = \frac{12}{2} \)
\( = 6 \)
In simple words: जब एक परमाणु को ऊर्जा दी जाती है, तो उसके इलेक्ट्रॉन ऊंचे स्तरों पर चले जाते हैं। जब वे वापस नीचे आते हैं, तो अलग-अलग रंगों की रोशनी (स्पेक्ट्रमी रेखाएं) छोड़ते हैं। यदि इलेक्ट्रॉन n=4 स्तर तक उत्तेजित होता है, तो वह 6 अलग-अलग रेखाएं छोड़ सकता है।

🎯 Exam Tip: इस सूत्र का उपयोग विभिन्न उत्तेजित ऊर्जा स्तरों से होने वाले कुल संभावित संक्रमणों को निर्धारित करने के लिए किया जाता है, जो एक महत्वपूर्ण अवधारणा है।

 

Question 6. हाइड्रोजन की लाइमन श्रेणी के लिए लघुत्तम एवं अधिकतम तरंगदैर्ध्य क्रमशः है।
(अ) 909 A तथा 1212 A
(ब) 9091 A तथा 12120 A
(स) 303 A तथा 404 A
(द) 1000 A तथा 3000 A
Answer: (अ) 909 A तथा 1212 A
लाइमन श्रेणी के लिए, \( n_1 = 1 \)।
अधिकतम तरंगदैर्ध्य के लिए, इलेक्ट्रॉन \( n_2 = 2 \) से \( n_1 = 1 \) में संक्रमण करता है।
\( \frac{1}{\lambda_{max}} = R \left( \frac{1}{1^2} - \frac{1}{2^2} \right) = R \left( 1 - \frac{1}{4} \right) = R \left( \frac{3}{4} \right) \)
\( \lambda_{max} = \frac{4}{3R} \)
रिडबर्ग स्थिरांक \( R \approx 1.097 \times 10^7 \, \text{m}^{-1} \).
\( \lambda_{max} = \frac{4}{3 \times 1.097 \times 10^7} \, \text{m} \approx 1.215 \times 10^{-7} \, \text{m} = 1215 \, \text{Å} \)
न्यूनतम तरंगदैर्ध्य (श्रेणी सीमा) के लिए, इलेक्ट्रॉन \( n_2 = \infty \) से \( n_1 = 1 \) में संक्रमण करता है।
\( \frac{1}{\lambda_{min}} = R \left( \frac{1}{1^2} - \frac{1}{\infty^2} \right) = R (1 - 0) = R \)
\( \lambda_{min} = \frac{1}{R} \)
\( \lambda_{min} = \frac{1}{1.097 \times 10^7} \, \text{m} \approx 9.11 \times 10^{-8} \, \text{m} = 911 \, \text{Å} \)
दिए गए विकल्पों में 909 A तथा 1212 A सबसे निकटतम हैं।
In simple words: लाइमन श्रेणी में, इलेक्ट्रॉन पहले ऊर्जा स्तर पर वापस आते हैं। सबसे लंबी तरंगदैर्ध्य तब निकलती है जब इलेक्ट्रॉन दूसरे स्तर से पहले पर आता है, और सबसे छोटी तरंगदैर्ध्य तब जब वह अनंत से पहले पर आता है। ये मान लगभग 909 Å और 1212 Å होते हैं।

🎯 Exam Tip: अधिकतम और न्यूनतम तरंगदैर्ध्य की गणना करने के लिए, \(n_2\) के मानों को क्रमशः 2 (पहले संक्रमण के लिए) और \( \infty \) (श्रेणी सीमा के लिए) के रूप में याद रखें।

 

Question 7. दिया गया चित्र किसी परमाणु के ऊर्जा स्तरों को दर्शाता है। जब इलेक्ट्रॉन ऊर्जा 2E के स्तर से ऊर्जा E के स्तर में संक्रमित होता है तो तरंगदैर्ध्य \( \lambda \) का फोटॉन उत्सर्जित होता है। इलेक्ट्रॉन के ऊर्जा \( \frac{4E}{3} \) के स्तर से ऊर्जा E के स्तर में संक्रमण करने पर उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा है।
(अ) \( \lambda/3 \)
(ब) \( 3\lambda/4 \)
(स) \( 4\lambda/3 \)
(द) \( 3\lambda \)
Answer: (द) \( 3\lambda \)
पहले संक्रमण के लिए (2E से E तक):
उत्सर्जित ऊर्जा \( \Delta E_1 = 2E - E = E \)
फोटॉन की ऊर्जा और तरंगदैर्ध्य का संबंध \( \Delta E = \frac{hc}{\lambda} \) होता है।
तो, \( E = \frac{hc}{\lambda} \) ...(i)
दूसरे संक्रमण के लिए (\( \frac{4E}{3} \) से E तक):
उत्सर्जित ऊर्जा \( \Delta E_2 = \frac{4E}{3} - E = \frac{4E - 3E}{3} = \frac{E}{3} \)
मान लीजिए इस संक्रमण से उत्सर्जित फोटॉन की तरंगदैर्ध्य \( \lambda' \) है।
तो, \( \frac{E}{3} = \frac{hc}{\lambda'} \) ...(ii)
समीकरण (i) और (ii) को भाग देने पर:
\( \frac{E}{E/3} = \frac{hc/\lambda}{hc/\lambda'} \)
\( 3 = \frac{\lambda'}{\lambda} \)
\( \implies \lambda' = 3\lambda \)
In simple words: जब एक इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा से निम्न ऊर्जा स्तर पर कूदता है, तो वह प्रकाश के रूप में ऊर्जा छोड़ता है, जिसकी अपनी तरंगदैर्ध्य होती है। यदि ऊर्जा का अंतर E है और तरंगदैर्ध्य \( \lambda \) है, तो जब ऊर्जा का अंतर E/3 होता है, तो तरंगदैर्ध्य \( 3\lambda \) होगी।

🎯 Exam Tip: फोटॉन की ऊर्जा और तरंगदैर्ध्य के बीच के संबंध \( E = \frac{hc}{\lambda} \) को याद रखना महत्वपूर्ण है, जहाँ \(h\) प्लांक स्थिरांक और \(c\) प्रकाश की गति है।

 

Question 8. उत्तेजित हाइड्रोजन परमाणु में यदि बोर सिद्धांत के अनुसार कोणीय संवेग \( \frac{2h}{2\pi} \) हो तो उसकी ऊर्जा होगी
(अ) 13.6 eV
(ब) – 13.4 eV
(स) -3.4 eV
(द) -12.8 eV
Answer: (स) -3.4 eV
बोर सिद्धांत के अनुसार, इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग \( L = n \frac{h}{2\pi} \) होता है, जहाँ \(n\) मुख्य क्वांटम संख्या है।
प्रश्न में दिया गया है कि कोणीय संवेग \( = \frac{2h}{2\pi} \)
इसलिए, \( n \frac{h}{2\pi} = \frac{2h}{2\pi} \)
\( \implies n = 2 \)
तो, इलेक्ट्रॉन दूसरे ऊर्जा स्तर में है।
हाइड्रोजन परमाणु के लिए \( n \) वीं कक्षा में ऊर्जा का सूत्र है: \( E_n = \frac{-13.6}{n^2} \, \text{eV} \)
दूसरे ऊर्जा स्तर के लिए \( (n=2) \):
\( E_2 = \frac{-13.6}{(2)^2} \)
\( E_2 = \frac{-13.6}{4} \)
\( E_2 = -3.4 \, \text{eV} \)
In simple words: बोर के नियम के अनुसार, इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग एक खास तरह से मापा जाता है। अगर कोणीय संवेग \( \frac{2h}{2\pi} \) है, तो इसका मतलब है कि इलेक्ट्रॉन दूसरे ऊर्जा स्तर में है। हाइड्रोजन परमाणु के दूसरे ऊर्जा स्तर की ऊर्जा -3.4 eV होती है।

🎯 Exam Tip: कोणीय संवेग \( n \frac{h}{2\pi} \) और ऊर्जा \( E_n = \frac{-13.6}{n^2} \, \text{eV} \) के सूत्रों को याद रखें। यह आपको दिए गए कोणीय संवेग से ऊर्जा स्तर और फिर ऊर्जा की गणना करने में मदद करेगा।

 

Question 9. उस उत्तेजित अवस्था की मुख्य क्वांटम संख्या क्या होगी जिसमें उत्तेजित हाइड्रोजन परमाणु \( \lambda \) तरंग दैर्ध्य के फोटॉन का उत्सर्जन करने के बाद मूल अवस्था में लौटता है।
(अ) \( \sqrt{\frac{\lambda R}{\lambda R - 1}} \)
(ब) \( \sqrt{1 - \lambda R} \)
(स) \( \frac{\lambda}{\sqrt{\lambda R - 1}} \)
(द) \( \frac{1}{\sqrt{\lambda R}} \)
Answer: (अ) \( \sqrt{\frac{\lambda R}{\lambda R - 1}} \)
रिडबर्ग सूत्र के अनुसार, जब इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर \( n \) से मूल अवस्था \( n_1 = 1 \) में संक्रमण करता है, तो उत्सर्जित विकिरण की तरंगदैर्ध्य \( \lambda \) के व्युत्क्रम का मान इस प्रकार दिया जाता है:
\( \frac{1}{\lambda} = R \left( \frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n^2} \right) \)
चूंकि इलेक्ट्रॉन मूल अवस्था \( (n_1 = 1) \) में लौटता है, तो:
\( \frac{1}{\lambda} = R \left( \frac{1}{1^2} - \frac{1}{n^2} \right) \)
\( \frac{1}{\lambda R} = 1 - \frac{1}{n^2} \)
अब, \( \frac{1}{n^2} \) को समीकरण के एक तरफ लाएं:
\( \frac{1}{n^2} = 1 - \frac{1}{\lambda R} \)
दाहिनी ओर के पदों को एक ही भिन्न के रूप में लिखें:
\( \frac{1}{n^2} = \frac{\lambda R - 1}{\lambda R} \)
\( n^2 \) का मान प्राप्त करने के लिए समीकरण को उल्टा करें:
\( n^2 = \frac{\lambda R}{\lambda R - 1} \)
\( n \) का मान प्राप्त करने के लिए दोनों तरफ का वर्गमूल लें:
\( n = \sqrt{\frac{\lambda R}{\lambda R - 1}} \)
In simple words: जब एक इलेक्ट्रॉन मूल अवस्था में वापस आता है और प्रकाश छोड़ता है, तो हम उसकी तरंगदैर्ध्य का उपयोग करके यह पता लगा सकते हैं कि वह किस ऊर्जा स्तर से आया था। इस गणना के लिए रिडबर्ग सूत्र का इस्तेमाल करते हैं।

🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करें कि आप सूत्र को सही ढंग से पुनर्व्यवस्थित कर रहे हैं, विशेषकर जब \(n^2\) को अलग कर रहे हों, और ध्यान से वर्गमूल लें।

 

Question 10. नीचे दिए गए प्राचलों में से कौनसा सभी हाइड्रोजन सदृश आयनों के लिए इनकी मूल अवस्थाओं में समान है ?
(अ) इलेक्ट्रान की कक्षीय चाल
(ब) कक्षा की त्रिज्या
(स) इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग
(द) परमाणु की ऊर्जा
Answer: (स) इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग
In simple words: हाइड्रोजन जैसे परमाणुओं (जिनमें केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है) के लिए, इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग (जिस तरह से वह घूमता है) उसकी मूल अवस्था में हमेशा एक जैसा होता है, चाहे वह कोई भी परमाणु या आयन हो। यह बोर मॉडल के सिद्धांतों में से एक है।

🎯 Exam Tip: बोर के क्वांटमीकरण नियम के अनुसार, कोणीय संवेग \(L = n\frac{h}{2\pi}\) होता है। मूल अवस्था (ground state) में \(n=1\), इसलिए \(L = \frac{h}{2\pi}\), जो एक नियत मान है और परमाणु की पहचान पर निर्भर नहीं करता।

 

Question 11. हाइड्रोजन सदृश किसी आयन की मूल अवस्था में ऊर्जा -54.4 eV है। यह हो सकता है।
(अ) He+
(ब) Li++
(स) ड्यटीरियम
(द) Be+++
Answer: (अ) He+
हाइड्रोजन सदृश आयन की \( n \) वीं कक्षा में ऊर्जा का सूत्र है:
\( E_n = \frac{-13.6 \, Z^2}{n^2} \, \text{eV} \)
मूल अवस्था के लिए, \( n = 1 \)।
दी गई ऊर्जा \( E_1 = -54.4 \, \text{eV} \)
तो, \( -54.4 = \frac{-13.6 \, Z^2}{1^2} \)
\( -54.4 = -13.6 \, Z^2 \)
दोनों तरफ -13.6 से भाग देने पर:
\( Z^2 = \frac{-54.4}{-13.6} \)
\( Z^2 = 4 \)
\( Z = \sqrt{4} = 2 \)
परमाणु क्रमांक \( Z=2 \) वाला तत्व हीलियम (He) है।
चूंकि यह एक हाइड्रोजन सदृश आयन है (जिसमें एक इलेक्ट्रॉन होता है), इसलिए यह \( \text{He}^+ \) होगा।
In simple words: किसी परमाणु की ऊर्जा उसके परमाणु क्रमांक (Z) और ऊर्जा स्तर (n) पर निर्भर करती है। यदि मूल अवस्था में ऊर्जा -54.4 eV है, तो परमाणु क्रमांक 2 होगा, जो हीलियम को दर्शाता है। एक इलेक्ट्रॉन वाला हीलियम आयन \( \text{He}^+ \) होता है।

🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन सदृश आयनों के ऊर्जा सूत्र में \( Z^2 \) कारक का ध्यान रखें। यह सुनिश्चित करें कि आप \( n=1 \) मूल अवस्था के लिए सही मान का उपयोग करते हैं।

 

Question 12. हाइड्रोजन में मुख्य क्वांटम संख्या n का मान बढ़ने पर परमाणु की स्थितिज ऊर्जा
(अ) घटती है।
(ब) बढ़ती है।
(स) वही रहती है।
(द) स्थितिज ऊर्जा एकान्तर क्रम से घटती-बढ़ती है।
Answer: (अ) घटती है।
In simple words: हाइड्रोजन परमाणु में, इलेक्ट्रॉन की स्थितिज ऊर्जा नाभिक से उसकी दूरी के साथ बदलती है। जैसे-जैसे मुख्य क्वांटम संख्या (n) बढ़ती है, इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर जाता है। क्योंकि इलेक्ट्रॉन और नाभिक के बीच आकर्षण होता है, तो इलेक्ट्रॉन के दूर जाने पर उसकी स्थितिज ऊर्जा कम नकारात्मक होती जाती है, यानी यह बढ़ती है।

🎯 Exam Tip: स्थितिज ऊर्जा को अक्सर नकारात्मक मान के साथ दर्शाया जाता है। जैसे-जैसे इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर जाता है (n बढ़ता है), स्थितिज ऊर्जा का निरपेक्ष मान कम होता जाता है, जिसका अर्थ है कि ऊर्जा बढ़ती है (कम नकारात्मक होती है)।

 

Question 13. हाइड्रोजन परमाणु \( n = 4 \) से \( n = 1 \) अवस्था तक संक्रमण करता है। तब H-परमाणु का प्रतिक्षिप्त संवेग (eV/c मात्रक में) है।
(अ) 13.60
(ब) 12.75
(स) 0.85
(द) 22.1
Answer: (ब) 12.75
इलेक्ट्रॉन के \( n=4 \) से \( n=1 \) अवस्था तक संक्रमण में उत्सर्जित ऊर्जा \( \Delta E \) है:
\( \Delta E = E_4 - E_1 \)
हाइड्रोजन परमाणु के लिए ऊर्जा सूत्र \( E_n = \frac{-13.6}{n^2} \, \text{eV} \)
\( E_4 = \frac{-13.6}{(4)^2} = \frac{-13.6}{16} = -0.85 \, \text{eV} \)
\( E_1 = \frac{-13.6}{(1)^2} = -13.6 \, \text{eV} \)
\( \Delta E = -0.85 - (-13.6) \)
\( \Delta E = -0.85 + 13.6 = 12.75 \, \text{eV} \)
यह उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा है।
फोटॉन का संवेग \( p = \frac{\Delta E}{c} \) होता है।
तो, प्रतिक्षिप्त संवेग \( p = \frac{12.75 \, \text{eV}}{c} \)
इसलिए, प्रतिक्षिप्त संवेग \(12.75 \, \text{eV/c}\) मात्रक में है।
In simple words: जब हाइड्रोजन परमाणु का इलेक्ट्रॉन चौथे ऊर्जा स्तर से पहले ऊर्जा स्तर पर आता है, तो वह ऊर्जा छोड़ता है। इस छोड़ी गई ऊर्जा से एक फोटॉन बनता है, और उस फोटॉन का संवेग 12.75 eV/c होता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि फोटॉन की ऊर्जा \(\Delta E\) और उसका संवेग \(p\) के बीच संबंध \(p = \frac{\Delta E}{c}\) होता है, जहाँ \(c\) प्रकाश की गति है।

 

Question 14. हाइड्रोजन परमाणु की nर्वी कक्षा में (कोणीय संवेग L) इलेक्ट्रॉन की कक्षीय गति के कारण चुंबकीय आघूर्ण है।
(अ) \( \frac{-neL}{2m} \)
(ब) \( \frac{-eL}{2m} \)
(स) \( \frac{-eL}{2mn} \)
(द) \( \frac{-eLm}{2m} \)
Answer: (ब) \( \frac{-eL}{2m} \)
In simple words: हाइड्रोजन परमाणु में, इलेक्ट्रॉन की गति एक छोटा सा चुंबक बनाती है। इस चुंबकीय प्रभाव को चुंबकीय आघूर्ण कहते हैं। इलेक्ट्रॉन के कोणीय संवेग (L) के कारण यह चुंबकीय आघूर्ण \( \frac{-eL}{2m} \) के बराबर होता है, जहाँ e इलेक्ट्रॉन का आवेश और m उसका द्रव्यमान है।

🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉन के कक्षीय चुंबकीय आघूर्ण का सूत्र \( \mu = \frac{-eL}{2m} \) होता है, जिसे अक्सर गायरोमैग्नेटिक अनुपात के रूप में भी जाना जाता है। नकारात्मक चिन्ह इलेक्ट्रॉन के ऋणात्मक आवेश को दर्शाता है।

 

Question 15. जब एक हाइड्रोजन परमाणु मूल अवस्था से प्रथम उत्तेजित ऊर्जा अवस्था में संक्रमण करता है तो इसके कोणीय संवेग में वृद्धि है।
(अ) \( 6.63 \times 10^{-34} Js \)
(ब) \( 1.05 \times 10^{-34} Js \)
(स) \( 41.5 \times 10^{-34} Js \)
(द) \( 2.11 \times 10^{-34} Js \)
Answer: (ब) \( 1.05 \times 10^{-34} Js \)
बोर सिद्धांत के अनुसार, \( n \) वीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग \( L_n = n \frac{h}{2\pi} \) होता है।
मूल अवस्था के लिए, \( n_1 = 1 \)।
प्रथम उत्तेजित ऊर्जा अवस्था के लिए, \( n_2 = 2 \)।
मूल अवस्था में कोणीय संवेग \( L_1 = 1 \cdot \frac{h}{2\pi} = \frac{h}{2\pi} \)
प्रथम उत्तेजित अवस्था में कोणीय संवेग \( L_2 = 2 \cdot \frac{h}{2\pi} = \frac{2h}{2\pi} = \frac{h}{\pi} \)
कोणीय संवेग में वृद्धि \( \Delta L = L_2 - L_1 \)
\( \Delta L = \frac{h}{\pi} - \frac{h}{2\pi} = \frac{2h - h}{2\pi} = \frac{h}{2\pi} \)
प्लांक स्थिरांक \( h = 6.63 \times 10^{-34} \, \text{Js} \).
\( \Delta L = \frac{6.63 \times 10^{-34}}{2 \times 3.14} \)
\( \Delta L = \frac{6.63 \times 10^{-34}}{6.28} \)
\( \Delta L \approx 1.05 \times 10^{-34} \, \text{Js} \)
In simple words: जब हाइड्रोजन परमाणु का इलेक्ट्रॉन अपनी सबसे निचली ऊर्जा अवस्था से अगली ऊर्जा अवस्था में जाता है, तो उसके घूमने का तरीका (कोणीय संवेग) बदल जाता है। इस बदलाव की मात्रा \( 1.05 \times 10^{-34} \, \text{Js} \) होती है।

🎯 Exam Tip: बोर के क्वांटमीकरण नियम का उपयोग करते समय, \(n\) के मानों को सही ढंग से पहचानें (मूल अवस्था \(n=1\), प्रथम उत्तेजित अवस्था \(n=2\)), और प्लांक स्थिरांक \(h\) का सही मान इस्तेमाल करें।

RBSE Class 12 Physics Chapter 14 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. परमाणु का समस्त धनावेश उसके भीतर एक अत्यन्त सूक्ष्म क्षेत्र में संकेन्द्रित होता है। यह किस प्रयोग द्वारा पता चलता है?
Answer: यह रदरफोर्ड के \( \alpha \)-कण प्रकीर्णन प्रयोग द्वारा पता चलता है। यह प्रयोग बताता है कि परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान और धनावेश एक छोटे से केंद्रीय भाग, जिसे नाभिक कहते हैं, में केंद्रित होता है।
In simple words: रदरफोर्ड के \( \alpha \)-कण प्रयोग से पता चला कि परमाणु का सारा धन आवेश उसके बीच में एक बहुत छोटे हिस्से में जमा होता है।

🎯 Exam Tip: रदरफोर्ड का \( \alpha \)-कण प्रकीर्णन प्रयोग परमाणु संरचना के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था, जिसके निष्कर्षों ने नाभिक की खोज की।

 

Question 2. परमाणु संरचना से संबंधित रदरफोर्ड मॉडल की कोई दो कमियाँ लिखो।
Answer: रदरफोर्ड परमाणु मॉडल की दो मुख्य कमियाँ निम्नलिखित हैं:
1. यह रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या करने में असफल रहा। यह मॉडल यह नहीं समझा सका कि परमाणु केवल कुछ विशिष्ट आवृत्तियों पर ही प्रकाश क्यों उत्सर्जित करते हैं।
2. यह परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या करने में असफल रहा। शास्त्रीय विद्युतगतिकी के अनुसार, नाभिक के चारों ओर घूमते हुए इलेक्ट्रॉन को लगातार ऊर्जा उत्सर्जित करनी चाहिए, जिससे वह नाभिक में गिर जाए, लेकिन ऐसा नहीं होता है।
In simple words: रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल दो बातें नहीं समझा पाया: पहली, परमाणु केवल कुछ खास रंग की रोशनी क्यों छोड़ता है, और दूसरी, परमाणु स्थिर क्यों रहते हैं (इलेक्ट्रॉन नाभिक में क्यों नहीं गिरते)।

🎯 Exam Tip: रदरफोर्ड मॉडल की कमियों को याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि इनसे बोर मॉडल और क्वांटम यांत्रिकी के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ।

 

Question 3. हाइड्रोजन परमाणु में यदि इलेक्ट्रॉन के कोणीय संवेग का मान \( \frac{h}{\pi} \), तो यह कौन-सी कक्षा में स्थित होगा?
Answer: बोर सिद्धांत के अनुसार, \( n \) वीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग \( L = n \frac{h}{2\pi} \) होता है।
प्रश्न में दिया गया है कि कोणीय संवेग \( L = \frac{h}{\pi} \)
इन दोनों को बराबर करने पर:
\( n \frac{h}{2\pi} = \frac{h}{\pi} \)
दोनों तरफ \( \frac{h}{\pi} \) से भाग देने पर:
\( \frac{n}{2} = 1 \)
\( \implies n = 2 \)
अतः इलेक्ट्रॉन द्वितीय कक्षा में स्थित होगा।
In simple words: बोर के नियम के अनुसार, इलेक्ट्रॉन का घूमने का मान (कोणीय संवेग) उसके ऊर्जा स्तर (कक्षा) पर निर्भर करता है। यदि कोणीय संवेग \( \frac{h}{\pi} \) है, तो इलेक्ट्रॉन दूसरी कक्षा में होगा।

🎯 Exam Tip: कोणीय संवेग \(L = n\frac{h}{2\pi}\) के क्वांटमीकरण नियम को समझें, जहाँ \(n\) मुख्य क्वांटम संख्या है जो कक्षा को दर्शाती है।

 

Question 5. किसी हाइड्रोजन सम-परमाणु की प्रथम बोर कक्षा में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा - 27.2 eV है। तृतीय बोर कक्षा में इसकी ऊर्जा कितनी होगी?
Answer: हाइड्रोजन सम-परमाणु के लिए \( n \) वीं कक्षा में ऊर्जा का सूत्र है:
\( E_n = \frac{-13.6 \, Z^2}{n^2} \, \text{eV} \)
प्रथम बोर कक्षा \( (n=1) \) में ऊर्जा \( E_1 = -27.2 \, \text{eV} \) दी गई है।
\( -27.2 = \frac{-13.6 \, Z^2}{1^2} \)
\( Z^2 = \frac{-27.2}{-13.6} = 2 \)
अब, तृतीय बोर कक्षा \( (n=3) \) में ऊर्जा ज्ञात करनी है:
\( E_3 = \frac{-13.6 \, Z^2}{3^2} \)
\( E_3 = \frac{-13.6 \times 2}{9} \)
\( E_3 = \frac{-27.2}{9} \)
\( E_3 \approx -3.02 \, \text{eV} \)
In simple words: यदि किसी हाइड्रोजन जैसे परमाणु की पहली कक्षा में ऊर्जा -27.2 eV है, तो इसका मतलब है कि उसका परमाणु क्रमांक का वर्ग 2 है। फिर, तीसरी कक्षा में ऊर्जा निकालने के लिए, हम इसी मान को सूत्र में रखते हैं, जिससे ऊर्जा लगभग -3.02 eV आती है।

🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन सम-परमाणु के लिए ऊर्जा सूत्र में परमाणु क्रमांक \(Z\) के वर्ग \(Z^2\) को शामिल करना न भूलें, क्योंकि यह एकल-इलेक्ट्रॉन वाले किसी भी आयन पर लागू होता है।

 

Question 6. हाइड्रोजन परमाणु की विभिन्न कक्षाओं की त्रिज्याओं का अनुपात क्या होता है?
Answer: हाइड्रोजन परमाणु की \( n \) वीं कक्षा की त्रिज्या का सूत्र है:
\( r_n = \frac{\epsilon_0 h^2 n^2}{\pi m Z e^2} \)
जहाँ \( \epsilon_0, h, \pi, m, Z, e \) स्थिरांक हैं।
इसलिए, \( r_n \propto n^2 \)।
इसका मतलब है कि त्रिज्या मुख्य क्वांटम संख्या \(n\) के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है।
विभिन्न कक्षाओं की त्रिज्याओं का अनुपात होगा:
\( r_1 : r_2 : r_3 : \dots = (1)^2 : (2)^2 : (3)^2 : \dots \)
\( r_1 : r_2 : r_3 : \dots = 1 : 4 : 9 : \dots \)
In simple words: हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन जिन रास्तों पर घूमते हैं, उनकी त्रिज्या (आकार) एक खास नियम से बढ़ती है। पहली कक्षा की त्रिज्या अगर 1 इकाई है, तो दूसरी की 4, और तीसरी की 9 होगी। यह उनके कक्षा संख्या के वर्ग के हिसाब से बढ़ता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि हाइड्रोजन परमाणु में बोर कक्षा की त्रिज्या \(n^2\) के अनुक्रमानुपाती होती है, जो परमाणु भौतिकी में एक मूलभूत संबंध है।

 

Question 7. हाइड्रोजन परमाणु की प्रथम कक्षा में इलेक्ट्रॉन की स्थितिज ऊर्जा का मान eV में क्या होगा?
Answer: हाइड्रोजन परमाणु की \(n\) वीं कक्षा में कुल ऊर्जा \(E_n = \frac{-13.6}{n^2}\) eV होती है।
प्रथम कक्षा \( (n=1) \) के लिए, कुल ऊर्जा \( E_1 = \frac{-13.6}{1^2} = -13.6 \, \text{eV} \)।
इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा \(E\) उसकी गतिज ऊर्जा \(K\) और स्थितिज ऊर्जा \(U\) का योग होती है: \( E = K + U \)।
बोर मॉडल में, गतिज ऊर्जा \(K\) और स्थितिज ऊर्जा \(U\) के बीच एक संबंध है: \( K = -E \) और \( U = 2E \)।
तो, प्रथम कक्षा में स्थितिज ऊर्जा \( U_1 = 2 E_1 \)
\( U_1 = 2 \times (-13.6 \, \text{eV}) \)
\( U_1 = -27.2 \, \text{eV} \)
In simple words: हाइड्रोजन परमाणु की पहली कक्षा में, इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा -13.6 eV होती है। स्थितिज ऊर्जा कुल ऊर्जा का दोगुना होती है, इसलिए यह -27.2 eV होगी।

🎯 Exam Tip: बोर मॉडल में, इलेक्ट्रॉन की स्थितिज ऊर्जा हमेशा कुल ऊर्जा का दोगुना होती है \(U = 2E\), जबकि गतिज ऊर्जा कुल ऊर्जा का ऋणात्मक मान होती है \(K = -E\)। यह संबंध ऊर्जा गणना में बहुत उपयोगी है।

 

Question 8. यदि हाइड्रोजन परमाणु में प्रथम बोर कक्षा की त्रिज्या .5A ली जाय, तो चौथी बोर कक्षा की त्रिज्या लिखो।
Answer: हाइड्रोजन परमाणु की \( n \) वीं कक्षा की त्रिज्या \( r_n \) मुख्य क्वांटम संख्या \( n \) के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है:
\( r_n \propto n^2 \)
हम इसे इस प्रकार भी लिख सकते हैं: \( r_n = r_1 n^2 \), जहाँ \( r_1 \) प्रथम बोर कक्षा की त्रिज्या है।
प्रथम बोर कक्षा की त्रिज्या \( r_1 = 0.5 \, \text{Å} \) दी गई है।
हमें चौथी बोर कक्षा \( (n=4) \) की त्रिज्या ज्ञात करनी है।
\( r_4 = r_1 \times (4)^2 \)
\( r_4 = 0.5 \, \text{Å} \times 16 \)
\( r_4 = 8.0 \, \text{Å} \)
In simple words: हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की कक्षा की त्रिज्या उसकी कक्षा संख्या के वर्ग के अनुसार बढ़ती है। यदि पहली कक्षा 0.5 Å की है, तो चौथी कक्षा की त्रिज्या 16 गुना बड़ी होगी, यानी 8.0 Å।

🎯 Exam Tip: इस संबंध \(r_n = r_1 n^2\) को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हाइड्रोजन परमाणु की विभिन्न कक्षाओं की त्रिज्याओं की गणना के लिए एक सीधा तरीका प्रदान करता है।

 

Question 9. बामर श्रेणी की अन्तिम रेखा की तरंगदैर्ध्य लिखो।
Answer: बामर श्रेणी के लिए, इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तरों \( n_2 \) से दूसरे ऊर्जा स्तर \( n_1 = 2 \) में संक्रमण करता है।
रिडबर्ग सूत्र है: \( \frac{1}{\lambda} = R \left( \frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2} \right) \)
बामर श्रेणी की अंतिम रेखा (या श्रेणी सीमा) के लिए, इलेक्ट्रॉन अनंत \( (n_2 = \infty) \) से \( n_1 = 2 \) में संक्रमण करता है।
\( \frac{1}{\lambda} = R \left( \frac{1}{2^2} - \frac{1}{\infty^2} \right) \)
\( \frac{1}{\lambda} = R \left( \frac{1}{4} - 0 \right) \)
\( \frac{1}{\lambda} = \frac{R}{4} \)
\( \implies \lambda = \frac{4}{R} \)
रिडबर्ग स्थिरांक \( R \approx 1.097 \times 10^7 \, \text{m}^{-1} \)
\( \lambda = \frac{4}{1.097 \times 10^7 \, \text{m}^{-1}} \)
\( \lambda \approx 3.646 \times 10^{-7} \, \text{m} \)
\( \lambda = 3646 \, \text{Å} \)
In simple words: बामर श्रेणी में, इलेक्ट्रॉन दूसरे ऊर्जा स्तर पर वापस आते हैं। अंतिम रेखा तब बनती है जब इलेक्ट्रॉन अनंत से दूसरे स्तर पर आता है। इस रेखा की तरंगदैर्ध्य लगभग 3646 Å होती है।

🎯 Exam Tip: बामर श्रेणी के लिए \(n_1 = 2\) और अंतिम रेखा के लिए \(n_2 = \infty\) याद रखें। रिडबर्ग स्थिरांक का मान सटीक परिणाम के लिए आवश्यक है।

 

Question 11. हाइड्रोजन स्पैक्ट्रम की उस श्रेणी का नाम लिखो, जिसकी कुछ रेखाएँ दृश्य प्रकाश क्षेत्र में पड़ती है?
Answer: बामर श्रेणी की कुछ रेखाएँ दृश्य प्रकाश क्षेत्र में पड़ती हैं। इस श्रेणी में इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तरों से दूसरे ऊर्जा स्तर (n=2) में संक्रमण करते हैं।
In simple words: हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की बामर श्रेणी की कुछ लाइनें हमें दिखती हैं, यानी वे रोशनी के उस हिस्से में आती हैं जिसे हम अपनी आँखों से देख सकते हैं।

🎯 Exam Tip: बामर श्रेणी ही हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की एकमात्र श्रेणी है जिसकी कुछ रेखाएँ दृश्य प्रकाश क्षेत्र में आती हैं, जबकि अन्य पराबैंगनी (लाइमन) या अवरक्त (पाश्चन, ब्रैकेट, फुण्ड) में होती हैं।

 

Question 12. बोर सिद्धान्त के द्वितीय अभिगृहीत की व्याख्या किस परिकल्पना के आधार पर संभव है?
Answer: बोर सिद्धान्त के द्वितीय अभिगृहीत की व्याख्या डी-ब्रॉग्ली द्रव्य तरंग परिकल्पना के आधार पर संभव है। डी-ब्रॉग्ली ने प्रस्तावित किया कि इलेक्ट्रॉन जैसे गतिशील कण भी तरंगों के समान व्यवहार करते हैं।
In simple words: बोर के दूसरे नियम को डी-ब्रॉग्ली के विचार से समझा जा सकता है, जिसमें कहा गया है कि इलेक्ट्रॉन जैसे कण भी तरंगों की तरह व्यवहार करते हैं।

🎯 Exam Tip: डी-ब्रॉग्ली की परिकल्पना, जो तरंग-कण द्वैतवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, ने बोर के कोणीय संवेग के क्वांटमीकरण नियम को सैद्धांतिक आधार प्रदान किया।

RBSE Class 12 Physics Chapter 14 लघुत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. थॉमसन परमाणु मॉडल की कमियों का उल्लेख करो।
Answer: थॉमसन का परमाणु मॉडल (जिसे प्लम पुडिंग मॉडल भी कहते हैं) 1838 में जे. जे. थॉमसन द्वारा प्रस्तुत किया गया था। इस मॉडल के अनुसार, परमाणु 10-10 मीटर त्रिज्या का एक धनावेशित गोला होता है, जिसमें इलेक्ट्रॉन ठीक वैसे ही धंसे होते हैं जैसे तरबूज में बीज। परमाणु का पूरा धनावेश और द्रव्यमान पूरे गोले में समान रूप से फैला होता है, और ऋण आवेशित इलेक्ट्रॉन उसे संतुलित करते हैं।
हालांकि, इस मॉडल ने तापायनिक उत्सर्जन और प्रकाश-विद्युत प्रभाव जैसी कुछ घटनाओं की व्याख्या की, लेकिन इसमें कई महत्वपूर्ण कमियाँ थीं:
1. **रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या में असफलता:** थॉमसन मॉडल यह नहीं समझा सका कि परमाणु केवल कुछ विशिष्ट आवृत्तियों पर ही प्रकाश क्यों उत्सर्जित करते हैं (रेखीय स्पेक्ट्रम)। इसके अनुसार, इलेक्ट्रॉन विभिन्न आवृत्तियों पर कंपन कर सकते हैं, जिससे एक सतत स्पेक्ट्रम मिलना चाहिए था।
2. **परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या में असफलता:** इस मॉडल में नाभिक की अवधारणा नहीं थी, जिससे यह परमाणु के स्थायित्व को नहीं समझा सका।
3. **रदरफोर्ड के \( \alpha \)-कण प्रकीर्णन प्रयोग की व्याख्या में असफलता:** यह मॉडल रदरफोर्ड के प्रयोग के परिणामों की व्याख्या नहीं कर सका, जिसमें यह दिखाया गया कि अधिकांश \( \alpha \)-कण सोने की पन्नी से बिना विचलित हुए निकल जाते हैं, जबकि कुछ बड़े कोणों पर विक्षेपित होते हैं। थॉमसन मॉडल में द्रव्यमान और आवेश के समान वितरण के कारण इतने बड़े विक्षेपण की संभावना नहीं थी।
इन कमियों के कारण, थॉमसन मॉडल को अस्वीकृत कर दिया गया और रदरफोर्ड के नाभिकीय मॉडल के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ।
In simple words: थॉमसन ने सोचा था कि परमाणु एक तरबूज जैसा होता है, जिसमें इलेक्ट्रॉन बीज की तरह होते हैं। लेकिन यह मॉडल दो बड़ी बातें नहीं समझा पाया: पहली, परमाणु केवल कुछ खास रंग की रोशनी क्यों छोड़ता है, और दूसरी, रदरफोर्ड के प्रयोग में इलेक्ट्रॉन बड़े कोणों पर क्यों मुड़ते हैं। इन्हीं कारणों से इस मॉडल को सही नहीं माना गया।

U परमाणु Ө Ө Ө Ө Ө

🎯 Exam Tip: थॉमसन मॉडल की मुख्य कमियाँ रदरफोर्ड के प्रयोग के परिणामों की व्याख्या न कर पाना और परमाणु के स्थायित्व तथा रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या न कर पाना हैं।

 

Question 2. रदरफोर्ड परमाणु प्रतिरूप की मुख्य बातों का उल्लेख कीजिये।
Answer: रदरफोर्ड ने 1911 में अपने अल्फा-कण बिखराव प्रयोग के बाद परमाणु का एक मॉडल दिया। इस मॉडल के अनुसार:

  • प्रत्येक परमाणु का सारा धन आवेश और लगभग पूरा द्रव्यमान (इलेक्ट्रॉनों को छोड़कर) उसके केंद्र में एक बहुत छोटे हिस्से में जमा होता है, जिसे नाभिक कहते हैं। इस नाभिक की त्रिज्या लगभग \( 10^{-14} \) मीटर होती है।
  • नाभिक के चारों ओर लगभग \( 10^{-10} \) मीटर त्रिज्या के खाली गोले में इलेक्ट्रॉन फैले रहते हैं। इन इलेक्ट्रॉनों का कुल ऋण आवेश नाभिक के धन आवेश के बराबर होता है।
  • इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर स्थिर नहीं रह सकते, क्योंकि वे नाभिक के खिंचाव के कारण उसमें गिर जाएंगे। इस समस्या को हल करने के लिए रदरफोर्ड ने बताया कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर गोल कक्षाओं में घूमते रहते हैं। उन्हें घूमने के लिए ज़रूरी अभिकेंद्रीय बल नाभिक और इलेक्ट्रॉनों के बीच के वैद्युत आकर्षण बल से मिलता है। इस मॉडल से नाभिक की अवधारणा सामने आई।

In simple words: रदरफोर्ड के मॉडल के अनुसार, परमाणु के केंद्र में एक छोटा, धनावेशित नाभिक होता है और इलेक्ट्रॉन उसके चारों ओर गोल कक्षाओं में घूमते हैं। परमाणु का ज़्यादातर हिस्सा खाली होता है।

🎯 Exam Tip: फोकस करें कि नाभिक धनावेशित होता है, परमाणु का द्रव्यमान नाभिक में केंद्रित होता है, और इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कक्षाओं में घूमते हैं।

 

Question 3. संक्षेप में समझाइये कि किस प्रकार रदरफोर्ड परमाणु मॉडल परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर पाता?
Answer: रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल कुछ प्रयोगों को समझा पाया, लेकिन यह दो मुख्य बातें नहीं समझा पाया:

1. परमाणु का स्थिर रहना (Stability of the Atom): यह मॉडल परमाणु के स्थिर होने के बारे में नहीं बता पाया। क्लासिकल फिजिक्स के नियमों के अनुसार, जब कोई आवेशित कण गोल रास्ते पर चलता है तो वह ऊर्जा छोड़ता है। रदरफोर्ड के मॉडल में इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर गोल कक्षाओं में घूमते हैं, इसलिए उन्हें लगातार ऊर्जा छोड़नी चाहिए। अगर वे ऊर्जा छोड़ेंगे, तो उनकी ऊर्जा कम होती जाएगी, और अंत में वे नाभिक में गिर जाएंगे। लेकिन असलियत में ऐसा नहीं होता; परमाणु स्थिर होते हैं।

2. रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या (Explanation of Line Spectrum): यह मॉडल परमाणु के रेखीय स्पेक्ट्रम को भी नहीं समझा पाया। मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर किसी भी त्रिज्या की कक्षा में घूम सकते हैं। इससे उन्हें हर तरह की आवृत्ति की विद्युत-चुंबकीय तरंगें छोड़नी चाहिए। इसका मतलब है कि परमाणु से निकलने वाले प्रकाश का स्पेक्ट्रम लगातार होना चाहिए (जैसे इंद्रधनुष)। लेकिन वास्तव में, परमाणु सिर्फ कुछ खास आवृत्तियों का प्रकाश छोड़ते हैं, जिससे रेखीय स्पेक्ट्रम बनता है। इस मॉडल से यह बात भी साफ नहीं हो पाई। इलेक्ट्रॉन के निरंतर ऊर्जा उत्सर्जन से परमाणु अस्थिर हो जाता है।

In simple words: रदरफोर्ड का मॉडल यह नहीं समझा पाया कि इलेक्ट्रॉन ऊर्जा खोने के बावजूद नाभिक में क्यों नहीं गिरते (परमाणु स्थिर क्यों है)। साथ ही, यह भी नहीं बता पाया कि परमाणु लगातार स्पेक्ट्रम के बजाय रेखीय स्पेक्ट्रम क्यों देते हैं।

🎯 Exam Tip: रदरफोर्ड मॉडल की कमियों के लिए 'परमाणु का स्थायित्व' और 'रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या न कर पाना' इन दो मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें।

 

Question 4. बोर के सिद्धान्त की कमियों का उल्लेख करो।
Answer: बोर के मॉडल ने रदरफोर्ड की कमियाँ दूर कीं, लेकिन यह भी कुछ ज़रूरी बातों को समझा नहीं पाया। बोर मॉडल की मुख्य कमियाँ ये थीं:

  • यह मॉडल केवल उन परमाणुओं को समझा पाता है जिनमें सिर्फ एक इलेक्ट्रॉन होता है, जैसे हाइड्रोजन या आयनित हीलियम।
  • जब हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की एक रेखा को बहुत अच्छे उपकरण (high resolving power) से देखा जाता है, तो पता चलता है कि वह कई छोटी रेखाओं से बनी है। बोर का सिद्धांत इन छोटी रेखाओं को समझा नहीं पाता।
  • बोर के सिद्धांत से स्पेक्ट्रम की रेखाओं की चमक (तीव्रता) के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती।
  • यह सिद्धांत परमाणु में इलेक्ट्रॉनों के फैलाव (वितरण) के बारे में कुछ नहीं बताता।
  • यह मॉडल स्टार्क प्रभाव (जब विद्युत क्षेत्र से स्पेक्ट्रम रेखाएं टूटती हैं) और जीमान प्रभाव (जब चुंबकीय क्षेत्र से स्पेक्ट्रम रेखाएं टूटती हैं) को नहीं समझा पाया।
  • बोर के मॉडल में कक्षाओं को गोल माना गया जबकि व्युत्क्रम बल के प्रभाव में गतिशील इलेक्ट्रॉनों की कक्षाएं अंडाकार (दीर्घवृत्ताकार) होनी चाहिए।
  • बोर के मॉडल में इलेक्ट्रॉन की जगह और चाल को एक साथ पता लगाया गया था, जो हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत के खिलाफ है। हाइजेनबर्ग के सिद्धांत के अनुसार, एक कण की स्थिति और संवेग को एक साथ ठीक-ठीक नहीं मापा जा सकता। यह सिद्धांत केवल कुछ सरलतम परमाणुओं के लिए ही सटीक परिणाम दे पाता है।

In simple words: बोर का मॉडल सिर्फ एक इलेक्ट्रॉन वाले परमाणुओं को समझाता है, स्पेक्ट्रम की छोटी-छोटी रेखाओं को नहीं बता पाता और स्टार्क-जीमान प्रभावों की व्याख्या नहीं करता। यह कक्षाओं को गोल मानता है, जो हमेशा सही नहीं होता।

🎯 Exam Tip: बोर मॉडल की कमियों को याद करते समय, ध्यान रखें कि यह एक-इलेक्ट्रॉन प्रणालियों के लिए है, सूक्ष्म संरचना और बाहरी क्षेत्रों के प्रभावों को नहीं समझाता।

 

Question 6. रैखिल स्पेक्ट्रम के अध्ययन से तत्वों की पहचान कैसे की जा सकती है?
Answer: हर तत्व के परमाणुओं के ऊर्जा स्तर तय होते हैं और वे दूसरे तत्वों से अलग होते हैं। इसलिए, जब कोई तत्व प्रकाश छोड़ता है, तो उसके स्पेक्ट्रम में हमेशा कुछ खास आवृत्तियों की रेखाएँ मिलती हैं। ये रेखाएँ हर दूसरे तत्व की रेखाओं से अलग होती हैं। इसी वजह से, किसी भी पदार्थ के रेखीय स्पेक्ट्रम को देखकर उसे पहचानना 'फिंगर प्रिंट' देखने जैसा होता है। हर तत्व का स्पेक्ट्रम उसका एक खास निशान होता है। यह तत्वों की संरचना और उनकी रासायनिक पहचान का सीधा प्रमाण है।

In simple words: हर तत्व का अपना एक खास रेखीय स्पेक्ट्रम होता है, जिसमें खास रंगों की रेखाएँ होती हैं। ये रेखाएँ हर तत्व के लिए अलग-अलग होती हैं, जैसे उंगलियों के निशान, जिससे हम तत्वों को पहचान सकते हैं।

🎯 Exam Tip: तत्वों की पहचान के लिए रेखीय स्पेक्ट्रम को 'फिंगर प्रिंट' की तरह उपयोग करने का सिद्धांत याद रखें, क्योंकि प्रत्येक तत्व की उत्सर्जन और अवशोषण रेखाएं अद्वितीय होती हैं।

 

Question 7. हाइड्रोजन गैस के किसी प्रतिदर्श में अधिकांश परमाणु \( n = 1 \) ऊर्जा स्तर में है। इस गैस में से दृश्य प्रकाश गुजारे जाने पर कुछ स्पेक्ट्रमी रेखाओं का अवशोषण हो जाता है। किस श्रेणी (लाइमन अथवा बामर) की स्पेक्ट्रमी रेखाओं का अधिकतम अवशोषण होता है। तथा क्यों?
Answer: जब हाइड्रोजन से भरी ट्यूब से दृश्य प्रकाश गुजारा जाता है, तो हाइड्रोजन के परमाणु प्रकाश के फोटॉनों को सोखकर निचले ऊर्जा स्तर से अलग-अलग ऊँचे ऊर्जा स्तरों में चले जाते हैं। चूंकि सभी ऐसे बदलाव सबसे निचले ऊर्जा स्तर \( (n=1) \) से शुरू होते हैं, इसलिए सभी अवशोषण 'लाइमन' श्रेणी में होते हैं।

बामर श्रेणी के अवशोषण बदलाव वे होंगे जो दूसरे ऊर्जा-स्तर \( (n=2) \) से शुरू होते हैं। लेकिन सामान्य स्थिति में, सभी परमाणु सबसे निचले ऊर्जा स्तर \( (n=1) \) में ही रहते हैं। इसलिए, हाइड्रोजन परमाणु के अवशोषण स्पेक्ट्रम में केवल लाइमन श्रेणी ही मिलती है। बाकी दूसरी श्रेणियाँ दिखाई नहीं देती हैं। लाइमन श्रेणी पराबैंगनी क्षेत्र में होती है, जबकि बामर श्रेणी दृश्य क्षेत्र में।

In simple words: हाइड्रोजन परमाणु आमतौर पर सबसे निचले ऊर्जा स्तर \( (n=1) \) में होते हैं। जब प्रकाश अवशोषित होता है, तो इलेक्ट्रॉन \( n=1 \) से ऊपर जाते हैं, जिससे मुख्य रूप से लाइमन श्रेणी का अवशोषण होता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि अवशोषण स्पेक्ट्रम में संक्रमण आमतौर पर निम्नतम ऊर्जा स्तर \( (n=1) \) से शुरू होता है, जिसके कारण लाइमन श्रेणी सबसे प्रमुख होती है।

 

Question 8. बोर सिद्धान्त के अनुसार इलेक्ट्रॉन की स्थायी कक्षा से क्या आशय है तथा इसके लिये शर्त क्या है?
Answer: बोर के सिद्धांत के अनुसार, इलेक्ट्रॉन की 'स्थायी कक्षा' वह होती है जहाँ इलेक्ट्रॉन बिना किसी ऊर्जा को छोड़े लगातार घूमता रहता है। इसका मतलब है कि इन कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा बदलती नहीं है। स्थायी कक्षाओं की एक खास शर्त यह है कि इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग हमेशा \( \frac{h}{2\pi} \) का पूर्णांक गुणा होता है, जहाँ \( h \) प्लांक नियतांक है। यह क्वांटीकरण शर्त ही स्थायी कक्षाओं के अस्तित्व का आधार है।

In simple words: स्थायी कक्षा वह है जिसमें इलेक्ट्रॉन ऊर्जा नहीं छोड़ता। इसकी शर्त यह है कि इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग \( \frac{h}{2\pi} \) का पूरा गुणा होना चाहिए।

🎯 Exam Tip: स्थायी कक्षा की परिभाषा में 'ऊर्जा उत्सर्जन न करना' और 'कोणीय संवेग का क्वांटीकरण' (\( L = n\frac{h}{2\pi} \)) दोनों ही महत्वपूर्ण बिंदु हैं।

RBSE Class 12 Physics Chapter 14 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. रदरफोर्ड के ∝-कण प्रकीर्णन प्रयोग का संक्षिप्त वर्णन कीजिये। इससे नाभिक की खोज कैसे हुई?
Answer: रदरफोर्ड ने 1911 में अल्फा-कण बिखराव प्रयोग किया, जिसे गीगर-मार्सडन प्रयोग भी कहते हैं। इस प्रयोग का उद्देश्य परमाणु की संरचना को समझना था।

प्रयोग की विधि: इस प्रयोग में, एक रेडियोधर्मी पदार्थ (जैसे पोलोनियम) से निकलने वाले तेज गति वाले अल्फा-कणों की एक पतली किरण को एक बहुत पतली सोने की पन्नी पर गिराया गया। पन्नी से निकलने के बाद, इन अल्फा-कणों को एक जिंक सल्फाइड (ZnS) स्क्रीन पर देखा गया। जब अल्फा-कण स्क्रीन से टकराते हैं, तो चमक पैदा होती है, जिसे माइक्रोस्कोप से देखा और गिना जा सकता है। यह पूरा सेटअप निर्वात में रखा गया था ताकि अल्फा-कण हवा के अणुओं से न टकराएं। सोने की पन्नी बहुत पतली रखी गई थी ताकि अल्फा-कणों का विक्षेपण केवल एक टक्कर से हो।

मुख्य अवलोकन (Observations):

  • ज्यादातर कण सीधे निकल गए: अधिकांश अल्फा-कण सोने की पन्नी से बिना किसी बदलाव के सीधे पार हो गए।
  • कुछ कण छोटे कोणों से मुड़े: कुछ अल्फा-कण अपने रास्ते से थोड़ा मुड़ गए (छोटे कोणों पर विक्षेपित हुए)।
  • बहुत कम कण बड़े कोणों से वापस आए: बहुत ही कम अल्फा-कण (लगभग 8000 में से 1) अपने रास्ते से \( 90^\circ \) से भी ज़्यादा कोण पर मुड़ गए, जैसे वे वापस लौट रहे हों।

निष्कर्ष और नाभिक की खोज:
इन अवलोकनों के आधार पर रदरफोर्ड ने निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले:

  • परमाणु का अधिकांश भाग खाली होता है: चूंकि ज्यादातर अल्फा-कण सीधे निकल गए, इसका मतलब था कि परमाणु का ज़्यादातर हिस्सा खाली है। यह थॉमसन के मॉडल के खिलाफ था, जिसमें परमाणु को ठोस गोला माना गया था।
  • धनावेशित केंद्र (नाभिक): अल्फा-कण धनावेशित होते हैं। वे तभी मुड़ सकते हैं जब वे किसी और धनावेशित चीज़ के पास से गुजरें। छोटे कोणों पर मुड़ने का मतलब था कि परमाणु में कोई धनावेशित हिस्सा है। बड़े कोणों से वापस आने वाले बहुत कम कणों से यह साबित हुआ कि परमाणु का सारा धन आवेश एक बहुत छोटे, सघन हिस्से में केंद्रित है। इसी छोटे, धनावेशित और सघन केंद्र को रदरफोर्ड ने **नाभिक (Nucleus)** कहा। नाभिक का यह केंद्रीयकरण ही बड़े विक्षेपों का कारण था।
  • नाभिक का आकार: गणनाओं से पता चला कि नाभिक की त्रिज्या परमाणु की त्रिज्या के मुकाबले बहुत छोटी होती है (लगभग \( 10^{-14} \) मीटर, जबकि परमाणु की \( 10^{-10} \) मीटर)।
  • इलेक्ट्रॉनों का वितरण: इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर खाली जगह में फैले होते हैं।

इस प्रकार, रदरफोर्ड के अल्फा-कण बिखराव प्रयोग ने परमाणु के केंद्र में एक सघन, धनावेशित नाभिक की उपस्थिति को स्थापित किया, जिससे नाभिक की खोज हुई। गणित के अनुसार, बिखरे हुए कणों की संख्या \( N \) बिखराव कोण \( \theta \) के \( \sin^4(\theta/2) \) के व्युत्क्रमानुपाती होती है, यानी \( N \propto \frac{1}{\sin^4(\theta/2)} \)।

In simple words: रदरफोर्ड के प्रयोग में, ज्यादातर अल्फा-कण सोने की पन्नी से सीधे निकल गए, कुछ मुड़ गए, और बहुत कम वापस आ गए। इससे पता चला कि परमाणु का ज़्यादातर हिस्सा खाली है, और उसका सारा धन आवेश एक बहुत छोटे, सघन केंद्र में होता है, जिसे नाभिक कहते हैं।

🎯 Exam Tip: रदरफोर्ड के प्रयोग के तीनों मुख्य अवलोकनों (सीधे निकलना, छोटे कोणों पर विक्षेपण, बड़े कोणों पर वापस लौटना) और प्रत्येक अवलोकन से निकले निष्कर्षों को याद रखें, क्योंकि इनसे ही नाभिक की अवधारणा स्थापित हुई।

 

Question 2. रदरफोर्ड के मॉडल में क्या कमियाँ रह गई थीं? इनका निराकरण बोर ने अपने मॉडल में कैसे किया? विस्तार से समझाइये।
Answer: रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल परमाणु की संरचना को समझाने में एक बड़ी सफलता थी, लेकिन इसमें दो मुख्य कमियाँ थीं:

1. परमाणु का स्थायित्व (Stability of the Atom): रदरफोर्ड के मॉडल में, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर गोल कक्षाओं में घूमते हैं। क्लासिकल फिजिक्स के अनुसार, कोई भी आवेशित कण जो गोल रास्ते पर चलता है (यानी त्वरित गति में है) वह ऊर्जा छोड़ता है। अगर इलेक्ट्रॉन लगातार ऊर्जा छोड़ते, तो उनकी ऊर्जा कम होती जाती, और वे धीरे-धीरे नाभिक में गिर जाते। लेकिन असल में परमाणु स्थिर होते हैं। रदरफोर्ड का मॉडल इस स्थिरता को समझा नहीं पाया।

2. रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या (Explanation of Line Spectrum): रदरफोर्ड के मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन किसी भी त्रिज्या की कक्षा में घूम सकते हैं, और उन्हें हर तरह की ऊर्जा छोड़नी चाहिए। इससे परमाणु का स्पेक्ट्रम लगातार (continuous) होना चाहिए था। लेकिन प्रयोगों से पता चला कि परमाणु सिर्फ कुछ खास आवृत्तियों का प्रकाश छोड़ते हैं, जिससे रेखीय स्पेक्ट्रम बनता है। रदरफोर्ड का मॉडल इसे भी नहीं समझा पाया।

बोर द्वारा कमियों का निराकरण (Resolution by Bohr):
नील्स बोर ने इन कमियों को दूर करने के लिए 1913 में अपना परमाणु मॉडल दिया, जो तीन मुख्य अभिगृहीतों पर आधारित था:

अभिगृहीत 1 (स्थायी कक्षाएँ): बोर ने कहा कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कुछ खास, निश्चित कक्षाओं में ही घूम सकते हैं। इन कक्षाओं को 'स्थायी कक्षाएँ' कहते हैं। इन स्थायी कक्षाओं में घूमते हुए इलेक्ट्रॉन कोई ऊर्जा नहीं छोड़ते हैं। इससे परमाणु का स्थायित्व (stability) बना रहता है। इलेक्ट्रॉन को इन कक्षाओं में घूमने के लिए ज़रूरी अभिकेंद्रीय बल, नाभिक और इलेक्ट्रॉन के बीच के वैद्युत आकर्षण बल से मिलता है।

\[ K \frac{(Ze)e}{r_n^2} = \frac{mv_n^2}{r_n} \]

यहाँ \( K \) एक स्थिरांक है, \( Z \) परमाणु क्रमांक है, \( e \) इलेक्ट्रॉन का आवेश है, \( r_n \) कक्षा की त्रिज्या है और \( v_n \) इलेक्ट्रॉन की गति है।

अभिगृहीत 2 (कोणीय संवेग का क्वांटीकरण): बोर ने यह शर्त रखी कि इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में घूम सकते हैं जहाँ उनका कोणीय संवेग (angular momentum) \( \frac{h}{2\pi} \) का पूर्णांक गुणा हो।

\[ mvr_n = n \frac{h}{2\pi} \]

यहाँ \( m \) इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान है, \( n \) एक पूर्णांक (मुख्य क्वांटम संख्या \( 1, 2, 3, ... \)) है, और \( h \) प्लांक नियतांक है। इस शर्त से इलेक्ट्रॉन की कक्षाओं की त्रिज्याएँ और ऊर्जाएँ निश्चित हो गईं। यह रेखीय स्पेक्ट्रम को समझने में मदद करता है।

अभिगृहीत 3 (ऊर्जा संक्रमण): बोर ने बताया कि जब कोई इलेक्ट्रॉन एक स्थायी कक्षा से दूसरी स्थायी कक्षा में जाता है, तो वह ऊर्जा को छोड़ता या लेता है।

  • जब इलेक्ट्रॉन ऊँची ऊर्जा वाली कक्षा से नीची ऊर्जा वाली कक्षा में आता है, तो वह ऊर्जा (फोटॉन के रूप में) छोड़ता है।
  • जब इलेक्ट्रॉन नीची ऊर्जा वाली कक्षा से ऊँची ऊर्जा वाली कक्षा में जाता है, तो वह ऊर्जा (फोटॉन के रूप में) लेता है।

इस उत्सर्जित या अवशोषित फोटॉन की ऊर्जा दोनों कक्षाओं की ऊर्जा के अंतर के बराबर होती है:

\[ \Delta E = E_2 - E_1 = hv \]

यहाँ \( E_2 \) और \( E_1 \) कक्षाओं की ऊर्जाएँ हैं, \( h \) प्लांक नियतांक है, और \( \nu \) फोटॉन की आवृत्ति है। इस अभिगृहीत ने परमाणु के रेखीय स्पेक्ट्रम की सफलतापूर्वक व्याख्या की, क्योंकि इलेक्ट्रॉन केवल निश्चित ऊर्जा अंतर वाली कक्षाओं के बीच ही कूद सकते हैं, जिससे केवल कुछ खास आवृत्तियों के प्रकाश ही उत्सर्जित होते हैं। बोर के मॉडल ने इन समस्याओं का एक सरल और प्रभावी समाधान दिया।

In simple words: रदरफोर्ड का मॉडल परमाणु की स्थिरता और रेखीय स्पेक्ट्रम को नहीं समझा पाया। बोर ने इन कमियों को तीन अभिगृहीतों से दूर किया: इलेक्ट्रॉन केवल स्थायी कक्षाओं में घूमते हैं (ऊर्जा नहीं छोड़ते), उनका कोणीय संवेग क्वांटीकृत होता है, और वे कक्षाओं के बीच कूदने पर ऊर्जा लेते या छोड़ते हैं।

🎯 Exam Tip: रदरफोर्ड की कमियों को पहले स्पष्ट करें, फिर बोर के प्रत्येक अभिगृहीत को विस्तार से समझाएं और बताएं कि कैसे प्रत्येक अभिगृहीत रदरफोर्ड की समस्याओं को हल करता है।

 

Question 3. बोर सिद्धान्त के अभिग्रहीत लिखिए। इसकी \( n \) वीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा के लिये सूत्र स्थापित कीजिये।
Answer: बोर के सिद्धांत के तीन मुख्य अभिगृहीत (postulates) ये हैं:

1. स्थायी कक्षाएँ (Stationary Orbits): इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल कुछ खास, निश्चित त्रिज्या वाली कक्षाओं में ही घूम सकते हैं। इन कक्षाओं को 'स्थायी कक्षाएँ' कहते हैं। इन कक्षाओं में घूमते समय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का उत्सर्जन नहीं करते, जिससे परमाणु स्थिर रहता है। इन कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन को आवश्यक अभिकेंद्रीय बल नाभिक और इलेक्ट्रॉन के बीच के वैद्युत आकर्षण बल से मिलता है।

\[ K \frac{(Ze)e}{r_n^2} = \frac{mv_n^2}{r_n} \quad ...(1) \]

यहाँ \( r_n \) \( n \) वीं कक्षा की त्रिज्या और \( v_n \) \( n \) वीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन का वेग है।

2. कोणीय संवेग का क्वांटीकरण (Quantization of Angular Momentum): इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में घूम सकते हैं जहाँ उनका कोणीय संवेग \( \frac{h}{2\pi} \) का पूर्णांक गुणा हो।

\[ mvr_n = n \frac{h}{2\pi} \quad ...(2) \]

यहाँ \( n \) मुख्य क्वांटम संख्या \( (n = 1, 2, 3, ...) \) है और \( h \) प्लांक नियतांक है।

3. ऊर्जा संक्रमण (Energy Transitions): इलेक्ट्रॉन जब एक स्थायी कक्षा से दूसरी स्थायी कक्षा में जाता है, तो वह ऊर्जा छोड़ता या लेता है। जब इलेक्ट्रॉन ऊँची ऊर्जा वाली कक्षा \( (E_2) \) से नीची ऊर्जा वाली कक्षा \( (E_1) \) में आता है, तो वह ऊर्जा \( (hv) \) का एक फोटॉन छोड़ता है।

\[ \Delta E = E_2 - E_1 = hv \quad ...(3) \]

\( n \) वीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा का सूत्र (Formula for Total Energy of Electron in \( n \)th Orbit):
किसी भी स्थायी कक्षा में इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा \( (E_n) \) उसकी गतिज ऊर्जा \( (K_n) \) और स्थितिज ऊर्जा \( (U) \) के योग के बराबर होती है:

\[ E_n = K_n + U \]

**गतिज ऊर्जा \( K_n \):**
\[ K_n = \frac{1}{2}mv_n^2 \]

समीकरण (1) से \( \frac{mv_n^2}{r_n} = K \frac{Ze^2}{r_n^2} \implies mv_n^2 = K \frac{Ze^2}{r_n} \)

तो, गतिज ऊर्जा होगी:

\[ K_n = \frac{1}{2} \left( K \frac{Ze^2}{r_n} \right) = \frac{1}{2} K \frac{Ze^2}{r_n} \quad ...(4) \]

**स्थितिज ऊर्जा \( U \):**
एक इलेक्ट्रॉन \( (-e) \) की \( Ze \) आवेश वाले नाभिक से \( r_n \) दूरी पर स्थितिज ऊर्जा होगी:

\[ U = K \frac{(Ze)(-e)}{r_n} = -K \frac{Ze^2}{r_n} \quad ...(5) \]

**कुल ऊर्जा \( E_n \):**
\[ E_n = K_n + U = \frac{1}{2} K \frac{Ze^2}{r_n} - K \frac{Ze^2}{r_n} \]

\[ E_n = -\frac{1}{2} K \frac{Ze^2}{r_n} \quad ...(6) \]

यहाँ \( K = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \) रखने पर:

\[ E_n = -\frac{1}{2} \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{Ze^2}{r_n} = -\frac{Ze^2}{8\pi\epsilon_0 r_n} \]

अब, \( r_n \) का मान (जो बोर के मॉडल से निकाला जाता है) \( r_n = \frac{\epsilon_0 n^2 h^2}{\pi m Ze^2} \) रखने पर:

\[ E_n = -\frac{Ze^2}{8\pi\epsilon_0 \left( \frac{\epsilon_0 n^2 h^2}{\pi m Ze^2} \right)} \]
\( \implies E_n = -\frac{Z^2 e^4 m}{8\epsilon_0^2 n^2 h^2} \]

यह \( n \) वीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा का सूत्र है। हाइड्रोजन परमाणु के लिए \( (Z=1) \), जब स्थिरांकों के मान रखे जाते हैं, तो ऊर्जा का मान आता है:

\[ E_n = -\frac{13.6}{n^2} \, \text{eV} \]

यह सूत्र दिखाता है कि इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा मुख्य क्वांटम संख्या \( n \) के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होती है, और यह ऋणात्मक होती है, जिसका मतलब है कि इलेक्ट्रॉन नाभिक से बंधा हुआ है। इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा स्तर क्वांटमीकृत होते हैं, जो रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या का आधार है।

In simple words: बोर के तीन नियम हैं: स्थायी कक्षाएँ (ऊर्जा उत्सर्जन नहीं), कोणीय संवेग का क्वांटीकरण, और ऊर्जा संक्रमण। इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा उसकी गतिज और स्थितिज ऊर्जा का जोड़ होती है। सारे मान रखने पर कुल ऊर्जा का सूत्र \( E_n = -\frac{Z^2 e^4 m}{8\epsilon_0^2 n^2 h^2} \) आता है, जो हाइड्रोजन के लिए \( -\frac{13.6}{n^2} \) eV होता है।

🎯 Exam Tip: बोर के अभिगृहीतों को स्पष्ट रूप से लिखें और कुल ऊर्जा के सूत्र के लिए गतिज और स्थितिज ऊर्जा को अलग-अलग निकालकर फिर जोड़ें। \( r_n \) का मान सब्स्टिट्यूट करना न भूलें।

 

Question 4. बोर परमाणु मॉडल के आधार पर हाइड्रोजन परमाणु के रैखिल स्पेक्ट्रम की व्याख्या करो।
Answer: रेखीय स्पेक्ट्रम हमें गैसों तथा धातुओं के वाष्प से मिलता है, जब वे परमाणु अवस्था में होते हैं। इसलिए इसे 'परमाण्वीय स्पेक्ट्रम' भी कहते हैं।

बोर सिद्धांत द्वारा हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की व्याख्या (Explanation of Hydrogen Spectrum by Bohr's Theory):
सामान्य तापमान या कमरे के तापमान पर हाइड्रोजन परमाणु अपनी सबसे निचली ऊर्जा अवस्था \( (n=1) \) में रहते हैं। लेकिन जब गैस को गर्मी दी जाती है या उसमें से बिजली गुजारी जाती है, तो हाइड्रोजन परमाणुओं के कुछ इलेक्ट्रॉन ऊर्जा लेकर ऊँचे ऊर्जा स्तरों में चले जाते हैं।

जब ये इलेक्ट्रॉन इन ऊँचे ऊर्जा स्तरों से वापस नीचे के ऊर्जा स्तरों में लौटते हैं, तो परमाणु विद्युत-चुंबकीय विकिरण छोड़ते हैं। बोर के मॉडल के तीसरे अभिगृहीत के अनुसार, यह ऊर्जा एक फोटॉन के रूप में उत्सर्जित होती है जिसकी ऊर्जा \( E_2 - E_1 = hv \) होती है। इस तरह, इलेक्ट्रॉन केवल निश्चित ऊर्जा स्तरों के बीच ही कूद सकते हैं, जिससे प्रकाश के स्पेक्ट्रम में केवल कुछ खास आवृत्तियाँ ही दिखाई देती हैं, और यही रेखीय स्पेक्ट्रम का कारण है। यह व्याख्या दर्शाता है कि क्यों प्रत्येक तत्व का एक विशिष्ट स्पेक्ट्रम होता है। जब इलेक्ट्रॉन उत्तेजित अवस्था से निम्न अवस्था में लौटता है तो वह उत्सर्जित ऊर्जा की मात्रा के अनुसार विभिन्न स्पेक्ट्रमी श्रेणियां बनाता है।

In simple words: बोर के मॉडल के अनुसार, जब इलेक्ट्रॉन ऊँचे से नीचे ऊर्जा स्तरों में आते हैं, तो वे खास ऊर्जा के फोटॉन छोड़ते हैं। यह सिर्फ कुछ खास रंगों का प्रकाश बनाता है, जिससे रेखीय स्पेक्ट्रम बनता है, न कि लगातार स्पेक्ट्रम।

🎯 Exam Tip: रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या करते समय, बोर के तीसरे अभिगृहीत (इलेक्ट्रॉन संक्रमण) और असतत ऊर्जा स्तरों के महत्व पर जोर दें, जिससे विशिष्ट तरंगदैर्ध्य का उत्सर्जन होता है।

 

Question 1. संवेग के क्वाण्टीकरण की व्याख्या संभव है?
Answer: बोर मॉडल की कुछ कमियाँ (Limitations of Bohr Model) हैं जो संवेग के क्वाण्टीकरण की व्याख्या में बाधा डालती हैं:
1. यह मॉडल केवल उन परमाणुओं के लिए सही है जिनमें केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है, जैसे हाइड्रोजन या आयनित हीलियम। यह बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं के लिए लागू नहीं होता।
2. जब हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम को बहुत शक्तिशाली उपकरण से देखा जाता है, तो पता चलता है कि प्रत्येक स्पेक्ट्रमी रेखा वास्तव में कई बहुत बारीक रेखाओं से मिलकर बनी है। बोर का सिद्धांत इन सूक्ष्म रेखाओं (fine structure) की व्याख्या नहीं कर सका।
3. बोर का सिद्धांत स्पेक्ट्रमी रेखाओं की चमक या तीव्रता (intensity) के बारे में कोई जानकारी नहीं देता है।
4. यह मॉडल परमाणु के भीतर इलेक्ट्रॉनों के फैलाव या वितरण के बारे में कोई सूचना नहीं देता।
5. यह मॉडल विद्युत क्षेत्र (स्टार्क प्रभाव) और चुंबकीय क्षेत्र (जीमान प्रभाव) के कारण स्पेक्ट्रमी रेखाओं के विभाजन की व्याख्या करने में भी असफल रहा।
6. बोर मॉडल में इलेक्ट्रॉनों की कक्षाओं को पूरी तरह से वृत्ताकार माना गया था, जबकि गुरुत्वाकर्षण जैसे व्युत्क्रम-वर्ग बलों के प्रभाव में कक्षाएँ दीर्घवृत्ताकार भी हो सकती हैं।
7. बोर मॉडल में इलेक्ट्रॉन की स्थिति और उसकी गति (वेग) को एक साथ बिल्कुल ठीक-ठीक ज्ञात किया गया, जो हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत का उल्लंघन करता है। यह सिद्धांत बताता है कि आप दोनों को एक साथ सटीकता से नहीं माप सकते।
In simple words: बोर का मॉडल कुछ परमाणुओं के व्यवहार को समझाता है, लेकिन यह एक से ज़्यादा इलेक्ट्रॉन वाले परमाणुओं, स्पेक्ट्रम की बारीक रेखाओं, और बाहरी क्षेत्रों के प्रभावों को समझाने में कमज़ोर पड़ जाता है।

🎯 Exam Tip: बोर मॉडल की कमियाँ याद रखने के लिए, मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें: एक-इलेक्ट्रॉन परमाणु तक सीमित, सूक्ष्म संरचना और तीव्रता की व्याख्या में कमी, स्टार्क-जीमान प्रभाव की असफलता, और कक्षाओं का गलत आकार।

द्रव्य तरंग से बोर के द्वितीय अभिगृहीत की व्याख्या (Explanation of Bohr's Second Postulate by Bohr's Theory)

 

Question 2. यदि लाइमन श्रेणी की प्रथम रेखा की तरंगदैर्ध्य \( 1216 \text{ Å} \) है, तो बामर तथा पाश्चन श्रेणी की प्रथम रेखाओं की तरंगदैर्ध्य ज्ञात करो।
Answer: हम रिडबर्ग सूत्र का उपयोग करके विभिन्न श्रेणी की तरंगदैर्ध्य ज्ञात कर सकते हैं। यह सूत्र परमाणु में इलेक्ट्रॉनों के ऊर्जा स्तरों के बीच संक्रमण से उत्सर्जित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य को दर्शाता है।
लाइमन श्रेणी की प्रथम रेखा के लिए \( n_1 = 1 \) और \( n_2 = 2 \):
\( \frac{1}{\lambda_L} = R \left[ \frac{1}{1^2} - \frac{1}{2^2} \right] \)
\( \frac{1}{\lambda_L} = R \left[ 1 - \frac{1}{4} \right] \)
\( \frac{1}{\lambda_L} = R \left[ \frac{3}{4} \right] \)
चूंकि \( \lambda_L = 1216 \text{ Å} \), इसलिए,
\( \frac{1}{1216} = \frac{3R}{4} \) ... (i)

बामर श्रेणी की प्रथम रेखा के लिए \( n_1 = 2 \) और \( n_2 = 3 \):
\( \frac{1}{\lambda_B} = R \left[ \frac{1}{2^2} - \frac{1}{3^2} \right] \)
\( \frac{1}{\lambda_B} = R \left[ \frac{1}{4} - \frac{1}{9} \right] \)
\( \frac{1}{\lambda_B} = R \left[ \frac{9-4}{36} \right] \)
\( \frac{1}{\lambda_B} = \frac{5R}{36} \) ... (ii)

समीकरण (i) में समीकरण (ii) से भाग देने पर:
\( \frac{1/\lambda_L}{1/\lambda_B} = \frac{3R/4}{5R/36} \)
\( \frac{\lambda_B}{\lambda_L} = \frac{3R}{4} \times \frac{36}{5R} \)
\( \frac{\lambda_B}{1216} = \frac{3 \times 9}{5} \)
\( \lambda_B = \frac{27}{5} \times 1216 \)
\( \lambda_B = 5.4 \times 1216 \)
\( \lambda_B = 6566.4 \text{ Å} \)
पाश्चन श्रेणी की प्रथम रेखा के लिए \( n_1 = 3 \) और \( n_2 = 4 \):
\( \frac{1}{\lambda_P} = R \left[ \frac{1}{3^2} - \frac{1}{4^2} \right] \)
\( \frac{1}{\lambda_P} = R \left[ \frac{1}{9} - \frac{1}{16} \right] \)
\( \frac{1}{\lambda_P} = R \left[ \frac{16-9}{144} \right] \)
\( \frac{1}{\lambda_P} = \frac{7R}{144} \) ... (iii)

समीकरण (i) में समीकरण (iii) से भाग देने पर:
\( \frac{1/\lambda_L}{1/\lambda_P} = \frac{3R/4}{7R/144} \)
\( \frac{\lambda_P}{\lambda_L} = \frac{3R}{4} \times \frac{144}{7R} \)
\( \frac{\lambda_P}{1216} = \frac{3 \times 36}{7} \)
\( \frac{\lambda_P}{1216} = \frac{108}{7} \)
\( \lambda_P = \frac{108}{7} \times 1216 \)
\( \lambda_P \approx 18783.3 \text{ Å} \)
In simple words: हम लाइमन श्रेणी की ज्ञात तरंगदैर्ध्य का उपयोग करके रिडबर्ग नियतांक के पदों में अनुपात निकालते हैं, जिससे बामर और पाश्चन श्रेणी की प्रथम रेखाओं की तरंगदैर्ध्य आसानी से मिल जाती है। प्रत्येक श्रेणी के लिए \( n_1 \) और \( n_2 \) मान अलग-अलग होते हैं, जो यह तय करते हैं कि इलेक्ट्रॉन किस ऊर्जा स्तर से कूदकर किस ऊर्जा स्तर पर आता है।

🎯 Exam Tip: रिडबर्ग सूत्र का उपयोग करते समय, \( n_1 \) हमेशा निचला ऊर्जा स्तर होता है और \( n_2 \) हमेशा वह उच्च ऊर्जा स्तर होता है जहाँ से इलेक्ट्रॉन संक्रमण करता है। श्रेणी की पहली रेखा के लिए, \( n_2 = n_1 + 1 \) होता है।

 

Question 3. किसी परमाणु में ऊर्जा स्तर A से C में संक्रमण में \( 1000 \text{ Å} \) तथा ऊर्जा स्तर B से C में संक्रमण में \( 5000 \text{ Å} \) तरंगदैर्ध्य के फोटॉन उत्सर्जित होते हैं। ऊर्जा स्तर A से B में संक्रमण से उत्सर्जित फोटॉन की तरंगदैर्ध्य कितनी होगी?
Answer: उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा ऊर्जा स्तरों के बीच के ऊर्जा अंतर के बराबर होती है, और यह ऊर्जा तरंगदैर्ध्य के व्युत्क्रमानुपाती होती है \( (E = \frac{hc}{\lambda}) \)।
ऊर्जा स्तर A से C में संक्रमण के लिए:
\( E_A - E_C = \frac{hc}{\lambda_1} \)
जहाँ \( \lambda_1 = 1000 \text{ Å} \) ... (i)
ऊर्जा स्तर B से C में संक्रमण के लिए:
\( E_B - E_C = \frac{hc}{\lambda_2} \)
जहाँ \( \lambda_2 = 5000 \text{ Å} \) ... (ii)
ऊर्जा स्तर A से B में संक्रमण के लिए:
\( E_A - E_B = \frac{hc}{\lambda_3} \)
जहाँ \( \lambda_3 \) हमें ज्ञात करनी है ... (iii)
समीकरण (i) में से समीकरण (ii) घटाने पर:
\( (E_A - E_C) - (E_B - E_C) = \frac{hc}{\lambda_1} - \frac{hc}{\lambda_2} \)
\( E_A - E_B = hc \left[ \frac{1}{\lambda_1} - \frac{1}{\lambda_2} \right] \)
अब समीकरण (iii) से \( E_A - E_B \) का मान रखने पर:
\( \frac{hc}{\lambda_3} = hc \left[ \frac{1}{\lambda_1} - \frac{1}{\lambda_2} \right] \)
\( \frac{1}{\lambda_3} = \frac{1}{\lambda_1} - \frac{1}{\lambda_2} \)
\( \frac{1}{\lambda_3} = \frac{\lambda_2 - \lambda_1}{\lambda_1 \lambda_2} \)
\( \lambda_3 = \frac{\lambda_1 \lambda_2}{\lambda_2 - \lambda_1} \)
दिए गए मान रखने पर:
\( \lambda_3 = \frac{1000 \times 5000}{5000 - 1000} \)
\( \lambda_3 = \frac{5000000}{4000} \)
\( \lambda_3 = 1250 \text{ Å} \)
In simple words: जब इलेक्ट्रॉन एक ऊर्जा स्तर से दूसरे में जाता है, तो प्रकाश निकलता है। इस प्रकाश की ऊर्जा ऊर्जा के अंतर के बराबर होती है और तरंगदैर्ध्य से जुड़ी होती है। हम पहले दो संक्रमणों की ऊर्जाओं के अंतर से तीसरे संक्रमण की ऊर्जा और फिर उसकी तरंगदैर्ध्य ज्ञात कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, ऊर्जा के संरक्षण के सिद्धांत का उपयोग करें: \( E_{AB} = E_{AC} - E_{BC} \), जिसे तरंगदैर्ध्य के पदों में \( \frac{1}{\lambda_{AB}} = \frac{1}{\lambda_{AC}} - \frac{1}{\lambda_{BC}} \) के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। यह आपको गणनाओं को सरल बनाने में मदद करेगा।

 

Question 4. हाइड्रोजन परमाणु का परमाणु क्रमांक 3 है। यह हाइड्रोजन सदृश होता है। (i) इस परमाणु में इलेक्ट्रॉन को प्रथम कक्षा से तृतीय कक्षा में उत्तेजित करने के लिये आवश्यक विकिरण की तरंगदैर्ध्य ज्ञात करो।
Answer: हाइड्रोजन सदृश परमाणु के लिए ऊर्जा स्तर \( E_n = -13.6 \frac{Z^2}{n^2} \text{ eV} \) सूत्र से दिया जाता है। उत्तेजित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा दो ऊर्जा स्तरों के बीच का अंतर होती है।
दिए गए परमाणु के लिए \( Z = 3 \)।
इलेक्ट्रॉन को प्रथम कक्षा \( n=1 \) से तृतीय कक्षा \( n=3 \) में उत्तेजित किया जा रहा है।
प्रथम कक्षा में ऊर्जा \( E_1 \):
\( E_1 = -13.6 \frac{Z^2}{1^2} = -13.6 \times \frac{3^2}{1^2} = -13.6 \times 9 = -122.4 \text{ eV} \)
तृतीय कक्षा में ऊर्जा \( E_3 \):
\( E_3 = -13.6 \frac{Z^2}{3^2} = -13.6 \times \frac{3^2}{3^2} = -13.6 \text{ eV} \)
आवश्यक ऊर्जा \( \Delta E \):
\( \Delta E = E_3 - E_1 = -13.6 - (-122.4) \text{ eV} \)
\( \Delta E = -13.6 + 122.4 \text{ eV} \)
\( \Delta E = 108.8 \text{ eV} \)
विकिरण की तरंगदैर्ध्य \( \lambda \) ज्ञात करने के लिए, हम सूत्र \( \Delta E = \frac{hc}{\lambda} \) का उपयोग करते हैं, जहाँ \( hc = 1242 \text{ eV nm} \) (एक सामान्य उपयोगी नियतांक)।
\( \lambda = \frac{hc}{\Delta E} \)
\( \lambda = \frac{1242 \text{ eV nm}}{108.8 \text{ eV}} \)
\( \lambda \approx 11.415 \text{ nm} \)
\( \lambda \approx 114.15 \text{ Å} \) (क्योंकि \( 1 \text{ nm} = 10 \text{ Å} \))
In simple words: जब हम किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉन को एक निचली ऊर्जा वाली कक्षा से ऊपर की ऊर्जा वाली कक्षा में भेजना चाहते हैं, तो उसे कुछ खास मात्रा में ऊर्जा देनी पड़ती है। इस ऊर्जा से जुड़ी प्रकाश की तरंगदैर्ध्य को हम एक सरल सूत्र से निकाल सकते हैं, जो यह बताता है कि कितनी छोटी या लंबी प्रकाश की तरंगें चाहिए होंगी।

🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन जैसे परमाणुओं के लिए ऊर्जा स्तरों की गणना करते समय, परमाणु क्रमांक \( Z \) का सही मान और \( n \) (कक्षा संख्या) का वर्ग सूत्र में ध्यान से रखें। \( hc \) के लिए \( 1242 \text{ eV nm} \) का मान याद रखना गणनाओं को तेज करता है।

 

Question 5. बामर श्रेणी की प्रथम रेखा का तरंगदैर्ध्य \( 6564 \text{ Å} \) हो, तो रिडबर्ग नियतांक तथा तरंग संख्या का मान ज्ञात करो।
Answer: बामर श्रेणी की प्रथम रेखा के लिए इलेक्ट्रॉन \( n_2 = 3 \) से \( n_1 = 2 \) ऊर्जा स्तर में संक्रमण करता है। रिडबर्ग सूत्र का उपयोग करके हम रिडबर्ग नियतांक \( R \) और तरंग संख्या \( \overline{\nu} \) ज्ञात कर सकते हैं।
रिडबर्ग सूत्र है:
\( \frac{1}{\lambda} = R \left[ \frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2} \right] \)
दिए गए मान:
\( \lambda = 6564 \text{ Å} = 6564 \times 10^{-10} \text{ m} \)
\( n_1 = 2 \), \( n_2 = 3 \)
सूत्र में मान रखने पर:
\( \frac{1}{6564 \times 10^{-10}} = R \left[ \frac{1}{2^2} - \frac{1}{3^2} \right] \)
\( \frac{1}{6564 \times 10^{-10}} = R \left[ \frac{1}{4} - \frac{1}{9} \right] \)
\( \frac{1}{6564 \times 10^{-10}} = R \left[ \frac{9-4}{36} \right] \)
\( \frac{1}{6564 \times 10^{-10}} = R \left[ \frac{5}{36} \right] \)
रिडबर्ग नियतांक \( R \) के लिए:
\( R = \frac{36}{5 \times 6564 \times 10^{-10}} \)
\( R = \frac{36}{32820 \times 10^{-10}} \)
\( R = \frac{36 \times 10^{10}}{32820} \)
\( R \approx 0.00109695 \times 10^{10} \text{ m}^{-1} \)
\( R \approx 1.09695 \times 10^7 \text{ m}^{-1} \)
तरंग संख्या \( \overline{\nu} \) के लिए:
तरंग संख्या \( \overline{\nu} = \frac{1}{\lambda} \)
\( \overline{\nu} = \frac{1}{6564 \times 10^{-10} \text{ m}} \)
\( \overline{\nu} \approx 1523466.8 \text{ m}^{-1} \)
\( \overline{\nu} \approx 1.523 \times 10^6 \text{ m}^{-1} \)
In simple words: बामर श्रेणी की पहली लाइन तब बनती है जब इलेक्ट्रॉन तीसरी कक्षा से दूसरी कक्षा में आता है। इस संक्रमण की तरंगदैर्ध्य का मान पता होने पर, हम रिडबर्ग सूत्र का उपयोग करके एक महत्वपूर्ण नियतांक (रिडबर्ग नियतांक) और तरंग संख्या का पता लगा सकते हैं, जो प्रकाश की विशेषताओं को दर्शाते हैं।

🎯 Exam Tip: तरंगदैर्ध्य को मीटर में बदलने के लिए \( 10^{-10} \) से गुणा करना न भूलें ताकि रिडबर्ग नियतांक का मान SI इकाइयों में \( (\text{m}^{-1}) \) सही आए। तरंग संख्या केवल तरंगदैर्ध्य का व्युत्क्रम होती है, इसलिए एक बार \( \lambda \) ज्ञात हो जाए तो \( \overline{\nu} \) आसानी से मिल जाती है।

 

Question 8. हाइड्रोजन परमाणुओं में संक्रमण \(n = 4\) से \(n = 2\) के संगत प्रकाश किसी धातु जिसका कार्यफलन \(1.9\) eV है पर आपतित होता है। उत्सर्जित फोटो इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा ज्ञात करो।
Answer: हाइड्रोजन परमाणु में जब इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न ऊर्जा स्तर में संक्रमण करता है, तो एक फोटॉन उत्सर्जित होता है। इस फोटॉन की ऊर्जा ऊर्जा स्तरों के अंतर के बराबर होती है। उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा की गणना रिडबर्ग सूत्र से की जाती है। यह ऊर्जा \(2.55\) eV होती है। जब यह फोटॉन \(1.9\) eV कार्यफलन वाली धातु पर गिरता है, तो प्रकाश विद्युत प्रभाव के कारण इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। इन उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा फोटॉन ऊर्जा में से कार्यफलन को घटाकर प्राप्त होती है।

हाइड्रोजन परमाणु के ऊर्जा स्तर का सूत्र है: \(E_n = \frac{-13.6}{n^2}\) eV

संक्रमण \(n = 4\) से \(n = 2\) के लिए ऊर्जा अंतर \(\Delta E\) (उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा) ज्ञात करें:

\(E_4 = \frac{-13.6}{4^2} = \frac{-13.6}{16} = -0.85\) eV

\(E_2 = \frac{-13.6}{2^2} = \frac{-13.6}{4} = -3.4\) eV

\(\Delta E = E_4 - E_2 = (-0.85 \text{ eV}) - (-3.4 \text{ eV})\)

\(\Delta E = -0.85 \text{ eV} + 3.4 \text{ eV} = 2.55 \text{ eV}\)

यह उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा है। अब, आइंस्टीन के प्रकाश विद्युत समीकरण का उपयोग करें:

अधिकतम गतिज ऊर्जा \(K_{max} = \Delta E - W_0\)

जहाँ \(W_0\) कार्यफलन है, जो \(1.9\) eV दिया गया है।

\(K_{max} = 2.55 \text{ eV} - 1.9 \text{ eV}\)

\(K_{max} = 0.65 \text{ eV}\)

अतः, उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा \(0.65\) eV होगी। उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा ऊर्जा स्तरों के बीच के अंतर से निर्धारित होती है।
In simple words: हाइड्रोजन परमाणु में जब इलेक्ट्रॉन ऊर्जा स्तर \(n=4\) से \(n=2\) में आता है, तो वह \(2.55\) eV ऊर्जा का फोटॉन छोड़ता है। जब यह फोटॉन किसी धातु पर पड़ता है जिसका कार्यफलन \(1.9\) eV है, तो उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की सबसे ज़्यादा गतिज ऊर्जा \(0.65\) eV होती है। यह ऊर्जा फोटॉन की ऊर्जा में से कार्यफलन घटाकर मिलती है।

🎯 Exam Tip: आइंस्टीन के प्रकाश विद्युत समीकरण \(K_{max} = h\nu - W_0\) का उपयोग करते समय, सुनिश्चित करें कि सभी ऊर्जा मान एक ही इकाई (eV या जूल) में हों।

 

Question 9. हाइड्रोजन का एक प्रतिदर्श किसी उत्तेजित अवस्था विशेष A में है। इस प्रतिदर्श द्वारा \(2.55\) eV के फोटॉनों के अवशोषण से यह आगे किसी अन्य उत्तेजित अवस्था B में पहुँचता है। अवस्थाओं A तथा B के लिये मुख्य क्वाण्टम संख्या ज्ञात करो।
Answer: हाइड्रोजन परमाणु के ऊर्जा स्तर \(E_n = \frac{-13.6}{n^2}\) eV द्वारा दिए जाते हैं। हमें दो अवस्थाएँ A और B ज्ञात करनी हैं जहाँ \(E_B - E_A = 2.55\) eV। इलेक्ट्रॉन \(2.55\) eV ऊर्जा का फोटॉन अवशोषित करके निम्न ऊर्जा स्तर A से उच्च ऊर्जा स्तर B में पहुँचता है।

हाइड्रोजन परमाणु के कुछ ऊर्जा स्तरों की गणना करते हैं:

\(E_1 = \frac{-13.6}{1^2} = -13.6\) eV (मूल अवस्था)

\(E_2 = \frac{-13.6}{2^2} = \frac{-13.6}{4} = -3.4\) eV

\(E_3 = \frac{-13.6}{3^2} = \frac{-13.6}{9} = -1.51\) eV (लगभग -1.5 eV)

\(E_4 = \frac{-13.6}{4^2} = \frac{-13.6}{16} = -0.85\) eV

हमें ऐसा ऊर्जा अंतर \(\Delta E = E_B - E_A = 2.55\) eV खोजना है। ऊर्जा स्तरों के बीच के अंतरों की जाँच करने पर:

यदि अवस्था A, \(n_A = 2\) पर हो और अवस्था B, \(n_B = 4\) पर हो, तो ऊर्जा अंतर होगा:

\(\Delta E = E_4 - E_2 = (-0.85 \text{ eV}) - (-3.4 \text{ eV})\)

\(\Delta E = -0.85 \text{ eV} + 3.4 \text{ eV}\)

\(\Delta E = 2.55 \text{ eV}\)

यह मान अवशोषित फोटॉन की ऊर्जा के बराबर है। अतः, अवस्था A की मुख्य क्वाण्टम संख्या \(n_A = 2\) और अवस्था B की मुख्य क्वाण्टम संख्या \(n_B = 4\) है। हाइड्रोजन के ऊर्जा स्तर क्वांटाइज्ड होते हैं, जिसका अर्थ है कि इलेक्ट्रॉन केवल विशिष्ट ऊर्जा मानों पर ही रह सकते हैं।
In simple words: हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन अलग-अलग ऊर्जा स्तरों में रहते हैं। जब इलेक्ट्रॉन \(2.55\) eV ऊर्जा सोखता है, तो वह निचले ऊर्जा स्तर (\(n=2\)) से ऊपर वाले ऊर्जा स्तर (\(n=4\)) में चला जाता है। इसलिए, शुरुआती अवस्था A की संख्या \(2\) है और अंतिम अवस्था B की संख्या \(4\) है।

🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन के ऊर्जा स्तरों \(E_n = -13.6/n^2\) को याद रखना ऐसे प्रश्नों को हल करने में मदद करता है। ऊर्जा स्तरों के अंतरों को व्यवस्थित रूप से जांचें जब तक कि अवशोषित ऊर्जा के बराबर मान न मिल जाए।

 

Question 10. एक परमाणु का ऊर्जा स्तर आरेख चित्र में दर्शाया गया है। संक्रमण B तथा D के संगत फोटोनों के तरंगदैर्ध्य ज्ञात करो।
Answer: परमाणु के ऊर्जा स्तर आरेख में दिखाए गए संक्रमणों के संगत उत्सर्जित फोटॉन की तरंगदैर्ध्य की गणना ऊर्जा अंतर \(\Delta E\) का उपयोग करके की जाती है। ऊर्जा और तरंगदैर्ध्य के बीच संबंध है \(\lambda = \frac{hc}{\Delta E}\) । यह संबंध बताता है कि अधिक ऊर्जा वाले फोटॉन की तरंगदैर्ध्य कम होती है।

यहां \(h = 6.62 \times 10^{-34}\) J-s (प्लांक नियतांक), \(c = 3 \times 10^8\) m/s (प्रकाश की चाल)।

ऊर्जा को eV से जूल में बदलने के लिए \(1 \text{ eV} = 1.6 \times 10^{-19}\) J का उपयोग करें।

1. संक्रमण के लिए जहाँ ऊर्जा अंतर \(4.5\) eV है (यह संक्रमण स्तर \(-4.5\) eV से \(0\) eV तक हो सकता है):

\(\Delta E = 4.5\) eV

\(\lambda = \frac{hc}{\Delta E} = \frac{6.62 \times 10^{-34} \text{ J s} \times 3 \times 10^8 \text{ m/s}}{4.5 \text{ eV} \times 1.6 \times 10^{-19} \text{ J/eV}}\)

\(\lambda = \frac{19.86 \times 10^{-26}}{7.2 \times 10^{-19}} = 2.758 \times 10^{-7}\) m

\(\lambda = 2758\) Å \( \approx 2750\) Å (जैसा कि स्रोत में दिया गया है)

2. संक्रमण D के लिए (जो स्तर \(-10\) eV से स्तर \(-2\) eV तक है), ऊर्जा अंतर है:

\(\Delta E = (-2 \text{ eV}) - (-10 \text{ eV}) = 8\) eV

\(\lambda = \frac{hc}{\Delta E} = \frac{6.62 \times 10^{-34} \text{ J s} \times 3 \times 10^8 \text{ m/s}}{8 \text{ eV} \times 1.6 \times 10^{-19} \text{ J/eV}}\)

\(\lambda = \frac{19.86 \times 10^{-26}}{12.8 \times 10^{-19}} = 1.551 \times 10^{-7}\) m

\(\lambda = 1551\) Å \( \approx 1550\) Å (जैसा कि स्रोत में दिया गया है)

इस प्रकार, दिए गए संक्रमणों के संगत तरंगदैर्ध्य लगभग 2750 Å और 1550 Å हैं। उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा ऊर्जा स्तरों के अंतर के बराबर होती है।
In simple words: परमाणु के ऊर्जा स्तरों में जब इलेक्ट्रॉन एक स्तर से दूसरे स्तर में कूदता है, तो वह फोटॉन छोड़ता है। इन फोटॉनों की ऊर्जा दो स्तरों के अंतर के बराबर होती है। ऊर्जा को प्रकाश की गति और प्लांक के नियतांक से भाग देकर तरंगदैर्ध्य निकालते हैं। इस प्रश्न में दो अलग-अलग ऊर्जा अंतरों के लिए तरंगदैर्ध्य की गणना की गई है।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, ऊर्जा को हमेशा जूल से इलेक्ट्रॉन वोल्ट में या इसके विपरीत बदलना न भूलें, और \(\lambda (\text{in Å}) = \frac{12400}{\Delta E (\text{in eV})} \) सूत्र का उपयोग करके गणना को सरल बनाएं।

 

Question 11. हाइड्रोजन परमाणु के लिये एक स्थायी कक्षा में इलेक्ट्रॉन की अधिकतम कोणीय चाल ज्ञात करो।
Answer: हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की कोणीय चाल \(\omega_n = \frac{v_n}{r_n}\) द्वारा दी जाती है, जहाँ \(v_n\) इलेक्ट्रॉन की कक्षीय चाल है और \(r_n\) कक्षा की त्रिज्या है। अधिकतम कोणीय चाल तब होती है जब इलेक्ट्रॉन नाभिक के सबसे करीब, यानी पहली कक्षा में होता है।

बोर मॉडल के अनुसार, हाइड्रोजन परमाणु (Z=1) के लिए nवीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन की चाल और त्रिज्या के सूत्र हैं:

\(v_n = \frac{2.18 \times 10^6}{n}\) m/s

\(r_n = 0.529 \times n^2 \times 10^{-10}\) m (बोर त्रिज्या)

इन मानों को कोणीय चाल के सूत्र में रखने पर:

\(\omega_n = \frac{\left(\frac{2.18 \times 10^6}{n}\right)}{0.529 \times n^2 \times 10^{-10}}\)

\(\omega_n = \frac{2.18 \times 10^6}{n \times 0.529 \times n^2 \times 10^{-10}}\)

\(\omega_n = \frac{2.18}{0.529} \times 10^{6+10} \times \frac{1}{n^3}\)

\(\omega_n = 4.12 \times 10^{16} \times \frac{1}{n^3}\) रेडियन/सेकंड

अधिकतम कोणीय चाल तब होगी जब n का मान न्यूनतम हो। हाइड्रोजन परमाणु के लिए न्यूनतम n मान \(1\) है (मूल अवस्था)।

\(n = 1\) रखने पर:

\(\omega_{max} = \omega_1 = 4.12 \times 10^{16} \times \frac{1}{1^3}\)

\(\omega_{max} = 4.12 \times 10^{16}\) रेडियन/सेकंड

यह दर्शाता है कि इलेक्ट्रॉन मूल अवस्था में सबसे तेजी से घूमता है।
In simple words: हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन जितना नाभिक के पास होता है, उतनी ही तेजी से घूमता है। सबसे तेज़ घुमाव पहली कक्षा (\(n=1\)) में होता है, जिसकी कोणीय चाल लगभग \(4.1 \times 10^{16}\) रेडियन प्रति सेकंड होती है।

🎯 Exam Tip: कोणीय चाल को अधिकतम करने के लिए \(n\) के न्यूनतम संभव मान का उपयोग करें, जो कि हाइड्रोजन परमाणु के लिए \(1\) है। सूत्र को सही ढंग से याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 12. \(n = 5\) अवस्था से \(n = 1\) अवस्था में जाने में फोटॉन के उत्सर्जन के पश्चात् हाइड्रोजन परमाणु का प्रतिक्षिप्त संवेग क्या है ? (दिया है R = \(1.097 \times 10^7\)m\(-1\) = \(6.63 \times 10^{-34}\)J-s तथा हाइड्रोजन का द्रव्यमान = \(1.67 \times 10^{-27}\) kg I
Answer: जब एक हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर \(n=5\) से मूल अवस्था \(n=1\) में संक्रमण करता है, तो एक फोटॉन उत्सर्जित होता है। इस फोटॉन की ऊर्जा ऊर्जा स्तरों के अंतर के बराबर होती है। उत्सर्जित फोटॉन के पास एक संवेग होता है, और संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार, परमाणु विपरीत दिशा में समान संवेग के साथ प्रतिक्षिप्त होता है।

हाइड्रोजन परमाणु के ऊर्जा स्तर \(E_n = \frac{-13.6}{n^2}\) eV द्वारा दिए जाते हैं।

ऊर्जा स्तर \(n=5\) में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा: \(E_5 = \frac{-13.6}{5^2} = \frac{-13.6}{25} = -0.544\) eV

ऊर्जा स्तर \(n=1\) में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा: \(E_1 = \frac{-13.6}{1^2} = -13.6\) eV

उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा \(\Delta E = E_1 - E_5\)

\(\Delta E = (-13.6 \text{ eV}) - (-0.544 \text{ eV})\)

\(\Delta E = -13.6 \text{ eV} + 0.544 \text{ eV}\)

\(\Delta E = -13.056 \text{ eV}\) (ऊर्जा का परिमाण \(13.056\) eV है)

इस ऊर्जा को जूल में बदलने पर: ( \(1 \text{ eV} = 1.6 \times 10^{-19}\) J)

\(\Delta E = 13.056 \times 1.6 \times 10^{-19}\) J

\(\Delta E = 20.8896 \times 10^{-19}\) J \( \approx 20.88 \times 10^{-19}\) J

फोटॉन का संवेग \(p = \frac{\Delta E}{c}\), जहाँ \(c = 3 \times 10^8\) m/s (प्रकाश की चाल) है।

\(p = \frac{20.88 \times 10^{-19} \text{ J}}{3 \times 10^8 \text{ m/s}}\)

\(p = 6.96 \times 10^{-27}\) kg m/s

यह उत्सर्जित फोटॉन का संवेग है, और संवेग संरक्षण के कारण हाइड्रोजन परमाणु का प्रतिक्षिप्त संवेग भी समान होगा। इस प्रकार, परमाणु का प्रतिक्षिप्त संवेग \(6.96 \times 10^{-27}\) kg m/s है। यह नियम भौतिकी में संवेग के संरक्षण के महत्व को दर्शाता है।
In simple words: जब हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन ऊपर की कक्षा (\(n=5\)) से नीचे की कक्षा (\(n=1\)) में आता है, तो वह ऊर्जा के साथ एक फोटॉन बाहर निकालता है। इस फोटॉन का जो संवेग होता है, वही संवेग परमाणु को उल्टी दिशा में मिलता है। इस संवेग का मान लगभग \(6.96 \times 10^{-27}\) kg m/s होता है।

🎯 Exam Tip: प्रतिक्षिप्त संवेग की गणना करते समय, यह सुनिश्चित करें कि फोटॉन की ऊर्जा जूल में है, क्योंकि संवेग की इकाई kg m/s होती है। संवेग संरक्षण एक मौलिक सिद्धांत है।

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