RBSE Solutions Class 12 Physics Chapter 12 प्रकाश की प्रकृति

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Detailed Chapter 12 प्रकाश की प्रकृति RBSE Solutions for Class 12 Physics

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Class 12 Physics Chapter 12 प्रकाश की प्रकृति RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Physics Chapter 12 बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. व्यतिकरण की घटना को दर्शाने के लिए दो स्रोतों की आवश्यकता होती है जो विकिरण उत्सर्जित करते हैं-
(अ) समान आवृत्ति और निश्चित कलान्तर के
(ब) लगभग समान आवृत्ति के
(स) समान आवृत्ति के
(द) भिन्न तरंगदैर्ध्य के।
Answer: (अ) समान आवृत्ति और निश्चित कलान्तर के
In simple words: व्यतिकरण पैटर्न बनाने के लिए, प्रकाश के दो स्रोतों से निकलने वाली तरंगों की आवृत्ति एक जैसी होनी चाहिए और उनके बीच का कलांतर (फेज डिफरेंस) भी समय के साथ स्थिर रहना चाहिए। इससे एक स्थिर और साफ व्यतिकरण पैटर्न बनता है।

🎯 Exam Tip: व्यतिकरण के लिए कला-सम्बद्ध स्रोत (coherent sources) एक महत्वपूर्ण शर्त हैं, जहाँ तरंगों की आवृत्ति समान और कलांतर नियत होता है।

 

Question 2. एक यंग के द्विस्लिट प्रयोग में एकवर्णी प्रकाश स्रोत प्रयुक्त किया जाता है। पर्दे पर प्राप्त व्यतिकरण फ्रिन्जों का आकार होगा ?
(अ) सीधी रेखा
Answer: (अ) सीधी रेखा
In simple words: जब यंग के द्विस्लिट प्रयोग में केवल एक रंग का प्रकाश इस्तेमाल होता है, तो पर्दे पर दिखने वाली चमकदार और काली पट्टियाँ (फ्रिन्जें) सीधी रेखाओं जैसी दिखती हैं। इन फ्रिन्जों का आकार प्रकाश की सीधी तरंगों के कारण ऐसा होता है।

🎯 Exam Tip: यंग के द्विस्लिट प्रयोग में फ्रिन्जों का आकार स्लिटों की प्रकृति और प्रकाश के स्रोत पर निर्भर करता है; एकवर्णी प्रकाश सीधी फ्रिन्जें बनाता है।

 

Question 3. व्यतिकरण के किसी प्रयोग में पर्दे पर किसी बिन्दु पर 700nm के प्रकाश को प्रयुक्त करने पर तीसरी चमकीली फ्रिन्ज प्राप्त होती है। उसी बिन्दु पर 5वीं चमकीली फ्रिज प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्रकाश स्रोत की तरंगदैर्ध्य होगी-
(अ) 210 nm
(ब) 315 nm
(स) 420 nm
(द) 490 nm.
Answer: (स) 420 nm
\( \lambda_1 = 700 \text{ nm} = 700 \times 10^{-9} \text{ m} = 7 \times 10^{-7} \text{ m}; n_1 = 3 \) (चमकीली फ्रिन्ज)
\( \lambda_2 = ?, n_2 = 5 \) (चमकीली फ्रिन्ज); \( y_3 = y_5 \)
केन्द्रीय दीप्त फ्रिन्ज से \( n \) वीं दीप्त फ्रिन्ज की दूरी \( y_n = \frac{n \lambda D}{d} \)
जब \( y_n, D \) व \( d \) नियत रहें तब \( \lambda \propto \frac{1}{n} \)
तो, \( \frac{\lambda_2}{\lambda_1} = \frac{n_1}{n_2} \)
\( \lambda_2 = \frac{n_1}{n_2} \times \lambda_1 \)
\( \lambda_2 = \frac{3}{5} \times 700 \)
\( \lambda_2 = 420 \text{ nm} \)
In simple words: चमकीली फ्रिन्ज की स्थिति, प्रकाश की तरंगदैर्ध्य के सीधे अनुपात में होती है और फ्रिन्ज की संख्या के सीधे अनुपात में होती है। जब फ्रिन्ज की स्थिति और अन्य चीजें स्थिर हों, तो तरंगदैर्ध्य फ्रिन्ज की संख्या के विपरीत अनुपात में होती है।

🎯 Exam Tip: व्यतिकरण फ्रिन्ज की स्थिति के समीकरणों को ठीक से याद रखें, विशेषकर चमकीली और काली फ्रिन्जों के लिए, और \( n \) के मानों का ध्यान रखें।

 

Question 4. यंग द्विस्लिट प्रयोग में यदि स्लिटों की चौड़ाइयों को अनुपात 4 : 9 है तो उच्चिष्ठ एवं निम्निष्ठ की तीव्रताओं को अनुपात होगा-
(अ) 196 : 25
(ब) 81 : 16
(स) 25:1
(द) 9 : 4.
Answer: (स) 25:1
यदि \( I_1 \) और \( I_2 \) तीव्रताओं का अनुपात \( \frac{I_1}{I_2} = \frac{4}{9} \) है।
तो आयामों का अनुपात \( \frac{a_1}{a_2} = \sqrt{\frac{I_1}{I_2}} = \sqrt{\frac{4}{9}} = \frac{2}{3} \)
उच्चिष्ठ की तीव्रता (अधिकतम तीव्रता) \( I_{max} \) और निम्निष्ठ की तीव्रता (न्यूनतम तीव्रता) \( I_{min} \) के लिए:
\( \frac{I_{max}}{I_{min}} = \left( \frac{a_1 + a_2}{a_1 - a_2} \right)^2 \)
पहले, आयामों के योग और अंतर का अनुपात ज्ञात करें:
\( \frac{a_{max}}{a_{min}} = \frac{a_1 + a_2}{a_1 - a_2} = \frac{a_1/a_2 + 1}{a_1/a_2 - 1} = \frac{2/3 + 1}{2/3 - 1} = \frac{5/3}{-1/3} = -5 \)
तो, \( \frac{I_{max}}{I_{min}} = (-5)^2 = 25 \)
इसलिए, उच्चिष्ठ एवं निम्निष्ठ की तीव्रताओं का अनुपात \( 25:1 \) होगा।
In simple words: प्रकाश की तीव्रता उसके आयाम के वर्ग के अनुपात में होती है। जब दो तरंगें मिलती हैं, तो अधिकतम और न्यूनतम तीव्रता का अनुपात उनके आयामों के योग और अंतर के वर्गों के अनुपात के बराबर होता है।

🎯 Exam Tip: व्यतिकरण में अधिकतम और न्यूनतम तीव्रता के अनुपात को याद रखें, जो आयामों के योग और अंतर के वर्गों पर आधारित होता है। यह सूत्र अक्सर ऐसे सवालों में उपयोग होता है।

 

Question 5. द्विस्लिट प्रयोग में दो भिन्न-भिन्न तरंगदैर्यों का प्रकाश प्रयुक्त किया जाता है। पीले-नारंगी (λ= 600 nm) रंग के लिए तीसरे क्रम की चमकीली फ्रिन्ज की स्थिति दूसरे रंग के प्रकाश के चौथे क्रम की चमकीली फ्रिज की स्थिति से सम्पाती होती है। दूसरे रंग की तरंगदैर्ध्य होगी-
(अ) 500 nm
(ब) 450 nm
(स) 225 nm
(द) 350 nm.
Answer: (ब) 450 nm
दिया है: \( \lambda_1 = 600 \text{ nm}; \lambda_2 = ?; n_1 = 3; n_2 = 4 \)
चमकीली फ्रिन्ज की स्थिति का सूत्र है: \( y = \frac{n \lambda D}{d} \)
चूँकि दोनों फ्रिन्जें एक ही स्थिति पर सम्पाती होती हैं, तो \( y_1 = y_2 \)
\( \frac{n_1 \lambda_1 D}{d} = \frac{n_2 \lambda_2 D}{d} \)
\( n_1 \lambda_1 = n_2 \lambda_2 \)
अब, \( \lambda_2 = \frac{n_1 \lambda_1}{n_2} \)
मान रखने पर:
\( \lambda_2 = \frac{3 \times 600 \text{ nm}}{4} \)
\( \lambda_2 = 450 \text{ nm} \)
In simple words: जब दो अलग-अलग तरंगदैर्ध्य के प्रकाश से बनने वाली फ्रिन्जें एक ही जगह पर दिखती हैं, तो उनका क्रम और तरंगदैर्ध्य का गुणनफल बराबर होता है। इससे आप दूसरी तरंगदैर्ध्य का पता लगा सकते हैं।

🎯 Exam Tip: सम्पाती फ्रिन्जों के सवालों में, उनकी स्थिति को बराबर रखकर अज्ञात तरंगदैर्ध्य या क्रम का पता लगाया जा सकता है। याद रखें कि \( n \lambda \) का मान नियत रहता है।

 

Question 7. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सबसे सही समझाता है कि अधिकांश परिस्थितियों में ध्वनि का विवर्तन प्रकाश के विवर्तन से ज्यादा संभाव्य होता है ?
(अ) ध्वनि संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है ।
(ब) ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य होती हैं जबकि प्रकाश तरंगें अनुप्रस्थ
(स) प्रकाश की तरंगदैर्ध्य ध्वनि की तुलना में बहुत कम है।
(द) ध्वनि का वेग प्रकाश के वेग की तुलना में परिमाण की कोटि 6 से भी कम है।
Answer: (स) प्रकाश की तरंगदैर्ध्य ध्वनि की तुलना में बहुत कम है।
In simple words: विवर्तन तब आसानी से होता है जब रुकावट का आकार तरंग की लंबाई के बराबर या उससे छोटा होता है। ध्वनि तरंगें प्रकाश तरंगों से बहुत लंबी होती हैं, इसलिए रोजमर्रा की जिंदगी में ध्वनि का मुड़ना (विवर्तन) देखना ज्यादा आसान होता है, जबकि प्रकाश का विवर्तन देखने के लिए खास परिस्थितियाँ चाहिए होती हैं।

🎯 Exam Tip: विवर्तन की घटना के लिए, अवरोध का आकार तरंगदैर्ध्य के क्रम का होना चाहिए। ध्वनि की तरंगदैर्ध्य बड़ी होने के कारण इसका विवर्तन अधिक सामान्य है।

 

Question 8. चित्र (A) के अनुसार एक प्रयोग में इलेक्ट्रॉनों को उनकी डी ब्रॉगली तरंगदैर्ध्य के तुलनात्मक चौड़ाई की एक पतली स्लिट से गुजारा जाता है। स्लिट से D दूरी पर पर्दा स्थित है जिस पर इन्हें संसूचित किया जाता है। पर्दे पर प्राप्त तीव्रता प्रतिरूप होगा
Answer: विकल्प (ब) में दर्शाया गया प्रतिरूप सही है, जहाँ विवर्तन प्रतिरूप स्लिट की चौड़ाई से अधिक चौड़ा होता है। इसका मतलब है कि केंद्रीय चमकीली पट्टी (उच्चिष्ठ) सबसे चौड़ी होती है और किनारे की पट्टियाँ (निम्निष्ठ) धीरे-धीरे कम चमकीली होती जाती हैं। इलेक्ट्रॉन भी तरंगों की तरह व्यवहार करते हैं और प्रकाश की तरह विवर्तन पैटर्न बनाते हैं।
In simple words: जब इलेक्ट्रॉन बहुत पतली स्लिट से गुजरते हैं, तो वे फैल जाते हैं और पर्दे पर एक खास पैटर्न बनाते हैं। इस पैटर्न में बीच की पट्टी सबसे चौड़ी और चमकीली होती है, और किनारे की पट्टियाँ कम चमकीली होती जाती हैं।

🎯 Exam Tip: विवर्तन पैटर्न में केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई हमेशा सबसे अधिक होती है, और इसकी तीव्रता अधिकतम होती है। यह इलेक्ट्रॉनों और प्रकाश दोनों के लिए समान है।

 

Question 9. एक स्लिट द्वारा 5000A तरंगदैर्ध्य का प्रकाश विवर्तित होता है। विवर्तन प्रतिरूप में पाँचवाँ निम्निष्ठ केन्द्रीय उच्चिष्ठ से 5mm दूरी पर बनता है। यदि पर्दे व स्लिट में बीच की दूरी 1m है तो स्लिट की चौड़ाई होगी-
(अ) 0.1 mm
(ब) 0.3 mm
(स) 0.5 mm
(द) 0.8 mm.
Answer: (स) 0.5 mm
दिया है: तरंगदैर्ध्य \( \lambda = 5000 \text{ A} = 5000 \times 10^{-10} \text{ m} = 5 \times 10^{-7} \text{ m} \)
निम्निष्ठ का क्रम \( n = 5 \)
केन्द्रीय उच्चिष्ठ से निम्निष्ठ की दूरी \( y_n = 5 \text{ mm} = 5 \times 10^{-3} \text{ m} \)
स्लिट और पर्दे के बीच की दूरी \( D = 1 \text{ m} \)
स्लिट की चौड़ाई \( e = ? \)
एकल स्लिट विवर्तन में \( n \) वें निम्निष्ठ के लिए स्थिति का सूत्र है:
\( e \sin \theta = n \lambda \)
चूँकि \( \theta \) बहुत छोटा है, तो \( \sin \theta \approx \tan \theta = \frac{y_n}{D} \)
तो, \( e \frac{y_n}{D} = n \lambda \)
\( e = \frac{n \lambda D}{y_n} \)
मान रखने पर:
\( e = \frac{5 \times (5 \times 10^{-7} \text{ m}) \times (1 \text{ m})}{5 \times 10^{-3} \text{ m}} \)
\( e = \frac{25 \times 10^{-7}}{5 \times 10^{-3}} \text{ m} \)
\( e = 5 \times 10^{-4} \text{ m} \)
\( e = 0.5 \times 10^{-3} \text{ m} \)
\( e = 0.5 \text{ mm} \)
In simple words: विवर्तन पैटर्न में काली पट्टी (निम्निष्ठ) की स्थिति, प्रकाश की तरंगदैर्ध्य और स्लिट व पर्दे की दूरी पर निर्भर करती है। स्लिट की चौड़ाई को जानने के लिए आप इन मानों का उपयोग कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: एकल स्लिट विवर्तन में निम्निष्ठ की स्थिति के सूत्र \( e \sin \theta = n \lambda \) को याद रखें। छोटे कोणों के लिए \( \sin \theta \approx \frac{y_n}{D} \) का प्रयोग करें।

 

Question 10. सुक्ष्म तरंगों जिनकी तरंगदैर्ध्य 0.052 m है, का एक पुंज 0.35m चौड़ाई के एक आयताकार छिद्र की ओर आ रहा है। परिणामी विवर्तन प्रतिरूप, छिद्र से 8.0m दूर स्थित दीवार पर प्रेक्षित किया जा रहा है। प्रथम एवं द्वितीय कोटि की दीप्ति फ्रिन्जों के मध्य दूरी क्या है ?
(अ) 1.19 m
(ब) 1.8 m
(स) 2.1 m
(द) 2.5 m.
Answer: (अ) 1.19 m
दिया है: तरंगदैर्ध्य \( \lambda = 0.052 \text{ m} \)
छिद्र की चौड़ाई \( e = 0.35 \text{ m} \)
छिद्र से दीवार की दूरी \( D = 8.0 \text{ m} \)
प्रथम दीप्ति फ्रिन्ज की स्थिति \( y_1 = \frac{3 \lambda D}{2e} \)
द्वितीय दीप्ति फ्रिन्ज की स्थिति \( y_2 = \frac{5 \lambda D}{2e} \)
प्रथम व द्वितीय दीप्ति फ्रिन्जों के मध्य दूरी \( \Delta y = y_2 - y_1 \)
\( \Delta y = \frac{5 \lambda D}{2e} - \frac{3 \lambda D}{2e} \)
\( \Delta y = \frac{2 \lambda D}{2e} = \frac{\lambda D}{e} \)
मान रखने पर:
\( \Delta y = \frac{0.052 \text{ m} \times 8.0 \text{ m}}{0.35 \text{ m}} \)
\( \Delta y = \frac{0.416}{0.35} \text{ m} \)
\( \Delta y \approx 1.1885 \text{ m} \)
\( \Delta y \approx 1.19 \text{ m} \)
In simple words: विवर्तन पैटर्न में चमकीली पट्टियों की दूरी तरंगदैर्ध्य, स्लिट की दूरी और स्लिट की चौड़ाई पर निर्भर करती है। दो लगातार चमकीली पट्टियों के बीच की दूरी निकालने के लिए, उनकी स्थितियों का अंतर लिया जाता है।

🎯 Exam Tip: विवर्तन में दीप्ति फ्रिन्जों (Secondary maxima) की स्थिति के सूत्र को याद रखें, जो \( y_n = \frac{(2n+1)\lambda D}{2e} \) द्वारा दिया जाता है, जहाँ \( n=1, 2, 3, \ldots \) । केंद्रीय उच्चिष्ठ से उनकी दूरी को ठीक से पहचानें।

 

Question 11. खगोलीय दूरदर्शी का द्वारक बड़ा होता है-
(अ) गोलीय विपथन का दोष दूर करने के लिए
(ब) उच्च विभेदन क्षमता के लिए।
(स) प्रेक्षण का दायरा बढ़ाने के लिए।
(द) कम विक्षेपण के लिए।
Answer: (ब) उच्च विभेदन क्षमता के लिए।
In simple words: दूरदर्शी का लेंस जितना बड़ा होता है, उसकी विभेदन क्षमता उतनी ही अच्छी होती है। इसका मतलब है कि वह दो पास-पास की चीजों को अलग-अलग दिखा पाता है।

🎯 Exam Tip: दूरदर्शी की विभेदन क्षमता द्वारक के सीधे आनुपातिक होती है। बड़ा द्वारक अधिक प्रकाश एकत्रित करता है और बेहतर स्पष्टता देता है।

 

Question 12. एक काले कागज पर सफेद बिन्दु एक-दूसरे से 1mm दूरी पर रखे हैं। उन्हें लगभग 3mm व्यास वाली आँख की पुतली से देखा जाता है। उनके मध्य अधिकतम दूरी क्या होगी कि उन्हें आँख द्वारा ठीक विभेदित ही किया जा सके ? (प्रकाश की तरंगदैर्ध्य = 500 nm)
(अ) 6m
(ब) 3m
(स) 5m
(द) 1m.
Answer: (स) 5m
दिया है: दो बिंदुओं के बीच की दूरी \( l = 1 \text{ mm} = 1 \times 10^{-3} \text{ m} \)
आँख की पुतली का व्यास \( D = 3 \text{ mm} = 3 \times 10^{-3} \text{ m} \)
प्रकाश की तरंगदैर्ध्य \( \lambda = 500 \text{ nm} = 5 \times 10^{-7} \text{ m} \)
अधिकतम दूरी \( d_{max} = ? \)
आँख की विभेदन सीमा का सूत्र है:
\( d\theta = \frac{1.22 \lambda}{D} \)
जहाँ \( d\theta \) दो बिंदुओं द्वारा आँख पर बनाया गया कोण है, और \( d\theta \approx \frac{l}{d_{max}} \) (यदि \( d_{max} \) बहुत बड़ी दूरी है)
तो, \( \frac{l}{d_{max}} = \frac{1.22 \lambda}{D} \)
\( d_{max} = \frac{l D}{1.22 \lambda} \)
मान रखने पर:
\( d_{max} = \frac{(1 \times 10^{-3} \text{ m}) \times (3 \times 10^{-3} \text{ m})}{1.22 \times (5 \times 10^{-7} \text{ m})} \)
\( d_{max} = \frac{3 \times 10^{-6}}{6.1 \times 10^{-7}} \text{ m} \)
\( d_{max} = \frac{30}{6.1} \text{ m} \)
\( d_{max} \approx 4.918 \text{ m} \)
\( d_{max} \approx 5 \text{ m} \)
In simple words: हमारी आँखें पास की दो चीजों को तब तक अलग-अलग देख पाती हैं जब तक वे बहुत दूर न हों। यह दूरी इस बात पर निर्भर करती है कि चीजों के बीच कितनी जगह है, हमारी आँख की पुतली कितनी बड़ी है, और प्रकाश की तरंगदैर्ध्य क्या है।

🎯 Exam Tip: विभेदन क्षमता के लिए रैले की कसौटी के सूत्र को ध्यान में रखें, जो यह बताता है कि दो वस्तुओं को कब विभेदित किया जा सकता है। इसमें पुतली का व्यास और प्रकाश की तरंगदैर्ध्य मुख्य भूमिका निभाते हैं।

 

Question 13. विद्युत चुम्बकीय तरंगों की प्रकृति अनुप्रस्थ होती है। इसका प्रमाण है-
(अ) ध्रुवण
(ब) व्यतिकरण
(स) परावर्तन ।
(द) विवर्तन।
Answer: (अ) ध्रुवण
In simple words: ध्रुवण एक ऐसी घटना है जो केवल अनुप्रस्थ तरंगों में होती है। इसका मतलब है कि विद्युत चुम्बकीय तरंगें, जैसे प्रकाश, अनुप्रस्थ प्रकृति की होती हैं क्योंकि उनमें ध्रुवण देखा जा सकता है।

🎯 Exam Tip: ध्रुवण केवल अनुप्रस्थ तरंगों का गुण है, अनुदैर्ध्य तरंगों का नहीं। इसलिए, ध्रुवण की घटना विद्युत चुम्बकीय तरंगों की अनुप्रस्थ प्रकृति को साबित करती है।

 

Question 14. हवा से काँच परावर्तन के लिए आपतन कोण का वह मान जिसके लिए परावर्तित प्रकाश पूर्णतः धुवित होता है। (अपवर्तनांक = n)।
(अ) \( \tan^{-1} (\frac{1}{n}) \)
(ब) \( \sin^{-1} (\frac{1}{n}) \)
(स) \( \sin^{-1} (n) \)
(द) \( \tan^{-1} (n) \).
Answer: (द) \( \tan^{-1} (n) \)
ब्रूस्टर के नियम से, जब प्रकाश पूर्णतः ध्रुवित होता है, तो आपतन कोण \( i_p \) और माध्यम के अपवर्तनांक \( n \) के बीच संबंध होता है:
\( n = \tan i_p \)
\( \implies i_p = \tan^{-1} (n) \)
In simple words: ब्रूस्टर का नियम कहता है कि जब प्रकाश किसी सतह से इस खास कोण पर टकराता है कि परावर्तित प्रकाश पूरी तरह ध्रुवित हो जाए, तो उस कोण का टैन मान उस माध्यम के अपवर्तनांक के बराबर होता है।

🎯 Exam Tip: ब्रूस्टर के कोण पर, परावर्तित किरण और अपवर्तित किरण एक-दूसरे के लंबवत होती हैं, जो पूर्ण ध्रुवण की स्थिति को दर्शाता है।

 

Question 15. अधुवित प्रकाश का एक पुंज चार ध्रुवणकारी शीटों, जो इस प्रकार व्यवस्थित हैं कि प्रत्येक की अभिलाक्षणिक दिशा अपने पूर्ववर्ती से 30° का कोण बनाती है, से गुजरता है। निकाय से निर्गत प्रकाश की तीव्रता, आपतित अध्रुवित प्रकाश की तीव्रता का कितना प्रतिशत होगी?
Answer: (द) 21%
प्रथम शीट से निर्गत तीव्रता:
एक अध्रुवित प्रकाश जब पहले पोलेरॉइड से गुजरता है, तो उसकी तीव्रता आधी हो जाती है।
\( I_1 = \frac{I_0}{2} \)
दूसरी शीट से निर्गत तीव्रता:
मालुस के नियम के अनुसार, जब प्रकाश एक पोलेरॉइड से गुजरता है, तो तीव्रता \( I = I_0' \cos^2 \theta \) होती है, जहाँ \( I_0' \) आपतित प्रकाश की तीव्रता और \( \theta \) दो ध्रुवण दिशाओं के बीच का कोण है।
\( I_2 = I_1 \cos^2 (30^\circ) = \frac{I_0}{2} \left( \frac{\sqrt{3}}{2} \right)^2 = \frac{I_0}{2} \times \frac{3}{4} = \frac{3I_0}{8} \)
तीसरी शीट से निर्गत तीव्रता:
\( I_3 = I_2 \cos^2 (30^\circ) = \frac{3I_0}{8} \times \frac{3}{4} = \frac{9I_0}{32} \)
चौथी शीट से निर्गत तीव्रता:
\( I_4 = I_3 \cos^2 (30^\circ) = \frac{9I_0}{32} \times \frac{3}{4} = \frac{27I_0}{128} \)
निर्गत प्रकाश का प्रतिशत:
\( \text{प्रतिशत} = \frac{I_4}{I_0} \times 100 = \frac{27I_0/128}{I_0} \times 100 = \frac{27}{128} \times 100 \)
\( \text{प्रतिशत} = 21.09\% \approx 21\% \)
In simple words: जब प्रकाश एक के बाद एक कई ध्रुवणकारी शीटों से गुजरता है और हर शीट पिछली शीट से एक खास कोण पर मुड़ी होती है, तो हर बार प्रकाश की तीव्रता कम होती जाती है। इस कमी को मालुस के नियम से मापा जा सकता है।

🎯 Exam Tip: ध्रुवक और विश्लेषक से गुजरने वाले प्रकाश की तीव्रता के लिए मालुस के नियम का उपयोग करें, और कोणों को सही ढंग से लागू करना सुनिश्चित करें, खासकर जब कई शीटें एक क्रम में हों।

 

Question 16. दो निकोल प्रिज्म इस प्रकार विन्यस्त हैं कि उनके मुख्य तलों के मध्य कोण 60° है तो निकाय से आपतित अनुचित प्रकाश का कितनी प्रतिशत गुजरेगा-
(अ) 50%
(ब) 100%
(स) 12.5%
(द) 37.5%.
Answer: (स) 12.5%
आपतित अनुचित प्रकाश की तीव्रता को \( I_0 \) मान लें।
जब यह पहले निकोल प्रिज्म (ध्रुवक) से गुजरता है, तो निर्गत प्रकाश की तीव्रता आधी हो जाती है।
\( I_1 = \frac{I_0}{2} \)
अब, यह ध्रुवित प्रकाश दूसरे निकोल प्रिज्म (विश्लेषक) पर आपतित होता है। दोनों निकोल प्रिज्मों के मुख्य तलों के बीच का कोण \( \theta = 60^\circ \) है।
मालुस के नियम के अनुसार, दूसरे प्रिज्म से निर्गत तीव्रता \( I_2 \) होगी:
\( I_2 = I_1 \cos^2 (60^\circ) \)
\( I_2 = \frac{I_0}{2} \left( \frac{1}{2} \right)^2 \)
\( I_2 = \frac{I_0}{2} \times \frac{1}{4} \)
\( I_2 = \frac{I_0}{8} \)
निकाय से निर्गत प्रकाश का प्रतिशत:
\( \text{प्रतिशत} = \frac{I_2}{I_0} \times 100 = \frac{I_0/8}{I_0} \times 100 = \frac{1}{8} \times 100 \)
\( \text{प्रतिशत} = 12.5\% \)
In simple words: जब अध्रुवित प्रकाश पहले ध्रुवक से गुजरता है तो उसकी आधी तीव्रता ध्रुवित होकर निकलती है। फिर जब यह ध्रुवित प्रकाश दूसरे ध्रुवक (विश्लेषक) से गुजरता है जो पहले से एक कोण पर रखा है, तो निकलने वाले प्रकाश की तीव्रता मालुस के नियम के हिसाब से और कम हो जाती है।

🎯 Exam Tip: मालुस का नियम \( I = I_0 \cos^2 \theta \) ध्रुवण पर आधारित सभी गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण है। ध्यान रखें कि अध्रुवित प्रकाश जब पहले ध्रुवक से गुजरता है तो तीव्रता आधी हो जाती है।

RBSE Class 12 Physics Chapter 12 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. तरंगाग्र के लम्बवत् रेखा किसकी दिशा को व्यक्त करती
Answer: तरंगाग्र के लम्बवत् रेखा तरंग संचरण की दिशा को व्यक्त करती है। इसी को किरण की दिशा भी कहते हैं।
In simple words: तरंगाग्र से सीधी बाहर निकलने वाली रेखा हमें बताती है कि प्रकाश या तरंग किस तरफ जा रही है।

🎯 Exam Tip: हमेशा याद रखें कि किरण (ray) तरंग संचरण की दिशा को दर्शाती है और यह तरंगाग्र के हमेशा लंबवत होती है।

 

Question 2. यंग की फ्रिजों की चौड़ाई पर किन-किन भौतिक राशियों का प्रभाव पड़ता है ?
Answer: यंग के द्विस्लिट प्रयोग में फ्रिन्ज की चौड़ाई \( \beta \) का सूत्र \( \beta = \frac{D\lambda}{d} \) होता है। इस सूत्र के अनुसार, फ्रिन्ज की चौड़ाई मुख्य रूप से निम्न बातों पर निर्भर करती है:
1. तरंगदैर्ध्य \( \lambda \) पर: फ्रिन्ज की चौड़ाई तरंगदैर्ध्य के सीधे समानुपाती होती है। मतलब, तरंगदैर्ध्य ज्यादा होने पर फ्रिन्जें चौड़ी होती हैं।
2. स्लिटों से पर्दे की दूरी D पर: फ्रिन्ज की चौड़ाई स्लिटों और पर्दे के बीच की दूरी \( D \) के सीधे समानुपाती होती है। \( D \) बढ़ने पर फ्रिन्जें चौड़ी होती हैं।
3. स्लिटों के मध्य दूरी 2d पर: फ्रिन्ज की चौड़ाई दोनों स्लिटों के बीच की दूरी \( 2d \) के व्युत्क्रमानुपाती होती है। \( 2d \) बढ़ने पर फ्रिन्जें पतली होती हैं।
In simple words: फ्रिन्ज की चौड़ाई इस बात पर निर्भर करती है कि प्रकाश की रंगीन (तरंगदैर्ध्य) क्या है, स्लिटों से कितनी दूर पर्दा रखा है, और दोनों स्लिटों के बीच कितनी जगह है।

🎯 Exam Tip: फ्रिन्ज की चौड़ाई के सूत्र को याद रखें और समझें कि प्रत्येक कारक इसे कैसे प्रभावित करता है, खासकर जब प्रयोग की शर्तें बदलती हैं।

 

Question 3. प्रकाश के विवर्तन के रूइगेन्स सिद्धान्त का कथन कीजिए।
Answer: फ्रेनल (Fresnel) ने हाइगेन्स के तरंग सिद्धान्त के आधार पर विवर्तन की व्याख्या करते हुए कहा है। उन्होंने बताया कि विवर्तन उन द्वितीयक तरंगिकाओं के अध्यारोपण का परिणाम है जो एक ही तरंगाग्र के उस हिस्से से चलती हैं जिसे किसी रुकावट (अवरोध) द्वारा रोका नहीं जाता है। इससे प्रकाश मुड़ जाता है और अपनी सीधी दिशा से भटक जाता है।
In simple words: रूइगेन्स का सिद्धान्त कहता है कि विवर्तन तब होता है जब प्रकाश की तरंगें किसी चीज के किनारे से मुड़ती हैं। यह मुड़ना उन छोटी-छोटी तरंगों के आपस में मिलने से होता है जो रुकावट से नहीं रुक पातीं।

🎯 Exam Tip: रूइगेन्स का सिद्धान्त प्रकाश की तरंग प्रकृति को दर्शाता है और यह बताता है कि प्रकाश कैसे सीधी रेखा में चलने के बजाय मुड़ सकता है।

 

Question 5. दो तरंगों के द्वारा व्यतिकरण प्राप्त झेने की सबसे महत्वपूर्ण शर्त क्या है ?
Answer: व्यतिकरण प्राप्त करने की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि दोनों प्रकाश स्रोत कला सम्बद्ध (coherent) होने चाहिए। कला सम्बद्ध स्रोत वे होते हैं जिनसे निकलने वाली तरंगों की आवृत्ति समान होती है और उनके बीच का कलांतर (phase difference) समय के साथ स्थिर रहता है। यह स्थिर कलांतर ही एक स्थायी व्यतिकरण पैटर्न बनाने में मदद करता है।
In simple words: व्यतिकरण के लिए सबसे जरूरी है कि प्रकाश के दोनों स्रोत एक जैसे हों और उनकी तरंगें हमेशा एक ही तरीके से साथ-साथ चलती रहें।

🎯 Exam Tip: कला सम्बद्ध स्रोतों के बिना, एक स्थिर व्यतिकरण पैटर्न नहीं बन सकता, क्योंकि तरंगों के बीच का कलांतर लगातार बदलता रहेगा।

 

Question 6. किसी एकल स्लिट विवर्तन प्रयोग में फ्रिन्जों के मध्य कोणीय पार्थक्य किस प्रकार बदलता है ? जब स्लिट एवं पर्दे के मध्य दूरी दो गुनी कर दी जाती है।
Answer: एकल स्लिट विवर्तन में, कोणीय पार्थक्य \( \theta \) स्लिट से पर्दे की दूरी \( D \) के व्युत्क्रमानुपाती होता है, यानी \( \theta \propto \frac{1}{D} \)। इसका मतलब है कि यदि स्लिट और पर्दे के बीच की दूरी \( D \) को दोगुना कर दिया जाए, तो कोणीय पार्थक्य (या फ्रिन्जों का कोणीय फैलाव) आधा हो जाएगा। फ्रिन्जें पास-पास दिखेंगी।
In simple words: विवर्तन पैटर्न में फ्रिन्जें कितनी फैलेंगी, यह स्लिट और पर्दे के बीच की दूरी पर निर्भर करता है। अगर आप पर्दे को स्लिट से दोगुना दूर कर दें, तो फ्रिन्जें आधी फैलेंगी या पास दिखेंगी।

🎯 Exam Tip: कोणीय पार्थक्य और फ्रिन्ज चौड़ाई को प्रभावित करने वाले कारकों को समझें। कोणीय पार्थक्य स्लिट और पर्दे के बीच की दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

 

Question 7. तरंगों के विवर्तन के लिए अवरोध अथवा छिद्र का आकार किस कोटि का होना चाहिए ?
Answer: तरंगों के विवर्तन (मुड़ने) के लिए, अवरोध (रुकावट) या छिद्र का आकार उस तरंग की तरंगदैर्ध्य की कोटि (लगभग बराबर) का होना चाहिए। यदि अवरोध बहुत बड़ा या बहुत छोटा हो, तो विवर्तन की घटना स्पष्ट रूप से नहीं दिखती है। उदाहरण के लिए, ध्वनि तरंगें लंबी होती हैं, इसलिए उनका विवर्तन सामान्य अवरोधों से आसानी से होता है।
In simple words: किसी भी तरंग को मुड़ने के लिए, उसे जिस चीज से गुजरना है या टकराना है, उसका आकार तरंग की लंबाई जितना होना चाहिए।

🎯 Exam Tip: विवर्तन की घटना तब सबसे अधिक स्पष्ट होती है जब अवरोध या छिद्र का आकार तरंगदैर्ध्य के तुलनीय हो।

 

Question 8. उन दो भौतिक घटनाओं का उल्लेख कीजिए जिनसे प्रकाश के तरंग स्वरूप की पुष्टि होती है ?
Answer: प्रकाश की तरंग स्वरूप की पुष्टि करने वाली दो मुख्य भौतिक घटनाएँ हैं:
1. व्यतिकरण (Interference): यह तब होता है जब दो प्रकाश तरंगें मिलती हैं और एक-दूसरे को मजबूत या कमजोर करती हैं, जिससे चमकदार और काली पट्टियाँ बनती हैं। यह घटना बताती है कि प्रकाश तरंगों से बना है।
2. ध्रुवण (Polarisation): यह घटना तब होती है जब प्रकाश तरंगों के कंपन एक विशेष दिशा में सीमित हो जाते हैं। ध्रुवण केवल अनुप्रस्थ तरंगों में संभव है, जो प्रकाश के तरंग स्वरूप का प्रमाण है।
In simple words: प्रकाश एक तरंग है, यह दो तरीकों से साबित होता है: पहला, जब प्रकाश की दो तरंगें मिलकर नए पैटर्न बनाती हैं (व्यतिकरण), और दूसरा, जब प्रकाश के कंपन एक ही दिशा में रुक जाते हैं (ध्रुवण)।

🎯 Exam Tip: व्यतिकरण और ध्रुवण, दोनों ही प्रकाश की तरंग प्रकृति के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं, जबकि परावर्तन और अपवर्तन दोनों प्रकृति (कण और तरंग) द्वारा समझाए जा सकते हैं।

 

Question 9. प्रकाश की तरंग प्रकृति होते हुए भी वह सीधी रेखा में गमन करता हुआ क्यों प्रतीत होता है ?
Answer: प्रकाश की तरंग प्रकृति होते हुए भी वह सीधी रेखा में चलता हुआ इसलिए प्रतीत होता है क्योंकि प्रकाश की तरंगदैर्ध्य (wavelength) बहुत कम होती है। विवर्तन (मुड़ने) की घटना तभी स्पष्ट होती है जब अवरोध का आकार तरंगदैर्ध्य के लगभग बराबर हो। क्योंकि प्रकाश की तरंगदैर्ध्य नैनोमीटर में होती है, जो हमारे आस-पास की अधिकांश वस्तुओं के आकार की तुलना में बहुत छोटी है, इसलिए विवर्तन सामान्य परिस्थितियों में कम दिखता है और प्रकाश सीधी रेखा में चलता हुआ लगता है।
In simple words: प्रकाश की तरंगें इतनी छोटी होती हैं कि वे सीधी चलती हुई दिखती हैं, जब तक कि वे बहुत छोटी चीजों से न टकराएं। तभी उनका मुड़ना (विवर्तन) साफ दिखाई देता है।

🎯 Exam Tip: यह अवधारणा बताती है कि विवर्तन रोजमर्रा की जिंदगी में क्यों कम देखा जाता है, क्योंकि हमारे आसपास के अधिकांश अवरोध प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की तुलना में बहुत बड़े होते हैं।

RBSE Class 12 Physics Chapter 12 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 11. मैलस के नियम का गणितीय स्वरूप क्या होता है ?
Answer: मैलस का नियम ध्रुवक (polarizer) या विश्लेषक (analyzer) से निर्गत प्रकाश की तीव्रता को बताता है। इसका गणितीय स्वरूप है:
\( I = I_0 \cos^2 \theta \)
जहाँ:
\( I \) = ध्रुवक या विश्लेषक से निर्गत प्रकाश की तीव्रता।
\( I_0 \) = ध्रुवक या विश्लेषक पर आपतित ध्रुवित प्रकाश की तीव्रता।
\( \theta \) = ध्रुवक की ध्रुवण दिशा और आपतित प्रकाश सदिश (इलेक्ट्रिक वेक्टर) के बीच का कोण।
यह नियम बताता है कि निर्गत प्रकाश की तीव्रता ध्रुवक की अक्ष और प्रकाश के कंपन की दिशा के बीच के कोण की कोज्या के वर्ग के समानुपाती होती है।
In simple words: मैलस का नियम बताता है कि जब ध्रुवित प्रकाश किसी और ध्रुवक से गुजरता है, तो बाहर निकलने वाले प्रकाश की चमक इस बात पर निर्भर करती है कि दोनों ध्रुवकों के बीच कितना कोण है।

🎯 Exam Tip: मैलस का नियम ध्रुवण की गणनाओं के लिए मौलिक है, खासकर जब प्रकाश विभिन्न ध्रुवणकारी तत्वों से गुजरता है। कोण \( \theta \) को हमेशा ध्रुवक की ध्रुवण अक्ष के सापेक्ष मापें।

 

Question 1. प्रकाश तरंगों के लिए हाइगेन्स का सिद्धान्त बताइये।
Answer: हाइगेन्स का तरंग सिद्धान्त प्रकाश के तरंग स्वरूप की व्याख्या करता है, जिसे हाइगेन्स का द्वितीयक तरंगिका सिद्धान्त भी कहते हैं। इस सिद्धान्त के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. तरंगाग्र (Wave-front) की परिभाषा: "समान कला में दोलन करने वाले कणों की निधि तरंगाग्र कहलाती है।" यानी, यह एक काल्पनिक सतह है जिस पर मौजूद सभी कण एक ही समय पर एक ही तरीके से कंपन करते हैं। तरंगाग्र प्रकाश संचरण की दिशा के लंबवत होता है, जिसे किरण कहते हैं।
2. द्वितीयक तरंगिकाएँ (Secondary Wavelets): जब प्रकाश स्रोत से तरंगें निकलती हैं, तो माध्यम में विक्षोभ (disturbance) फैलता है। तरंगाग्र पर मौजूद प्रत्येक बिंदु एक नए प्रकाश स्रोत की तरह कार्य करता है, जिससे सभी दिशाओं में नई तरंगें (द्वितीयक तरंगिकाएँ) निकलती हैं। ये तरंगिकाएँ प्रकाश की चाल से ही आगे बढ़ती हैं।
3. नए तरंगाग्र का निर्माण: किसी भी क्षण इन द्वितीयक तरंगिकाओं पर खींची गई स्पर्शरेखा (tangent surface) उस समय नए तरंगाग्र की स्थिति को व्यक्त करती है। यह तरंगाग्र प्रकाश के आगे बढ़ने को दर्शाता है।
4. ईथर की कल्पना: तरंग संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है, लेकिन प्रकाश निर्वात में भी चलता है। इसलिए, हाइगेन्स ने एक सर्वव्यापी, भारहीन, पूर्ण प्रत्यास्थ और अत्यल्प घनत्व वाले काल्पनिक माध्यम 'ईथर' की कल्पना की, जो सभी पदार्थों में प्रवेश कर सकता है।
5. तरंग वेग: तरंगों का वेग माध्यम की प्रत्यास्थता और घनत्व पर निर्भर करता है: तरंग वेग = \( \sqrt{\frac{\text{प्रत्यास्थता}}{\text{घनत्व}}} \)
6. विवर्तन की व्याख्या: फ्रेनल ने हाइगेन्स के सिद्धांत के आधार पर विवर्तन की व्याख्या करते हुए कहा कि विवर्तन उन द्वितीयक तरंगिकाओं के अध्यारोपण का परिणाम है जो तरंगाग्र के उस हिस्से से निकलती हैं जिसे अवरोध द्वारा रोका नहीं जाता है।
प्रकाश-स्रोत की आकृति के आधार पर तरंगाग्र तीन प्रकार के होते हैं:
(i) **गोलाकार तरंगाग्र (Spherical Wave-front):** जब प्रकाश-स्रोत एक बिंदु की तरह काम करता है, तो उससे निकलने वाली तरंगों के तरंगाग्र गोलाकार होते हैं। यह तब बनता है जब स्रोत सभी दिशाओं में समान रूप से प्रकाश उत्सर्जित करता है।
(ii) **बेलनाकार तरंगाग्र (Cylindrical Wave-front):** जब प्रकाश-स्रोत रेखीय होता है (जैसे-एक पतली स्लिट), तो उससे निकलने वाली तरंगें बेलनाकार तरंगाग्र बनाती हैं। यह तब बनता है जब प्रकाश एक रेखा के साथ उत्सर्जित होता है।
(iii) **समतल तरंगाग्र (Plane Wave-front):** जब प्रकाश स्रोत बहुत दूर होता है (बिंदु स्रोत या रेखीय स्रोत दोनों), तो उनसे निकलने वाले गोलाकार या बेलनाकार तरंगाग्रों का एक छोटा हिस्सा हमें समतल प्रतीत होता है। ऐसे तरंगाग्रों को समतल तरंगाग्र कहते हैं। उदाहरण के लिए, सूर्य से आने वाला प्रकाश हमारी पृथ्वी तक लगभग समतल तरंगाग्र के रूप में पहुँचता है।
चित्र 12.1 (b) और (c) में क्रमशः बेलनाकार और समतल तरंगाग्रों को दर्शाया गया है। चित्र 12.2 में विभिन्न प्रकार के तरंगाग्रों को दिखाया गया है: (a) समतल तरंगाग्र, (b) अपसारी गोलाकार तरंगाग्र, और (c) अभिसारी गोलाकार तरंगाग्र।
In simple words: हाइगेन्स का नियम बताता है कि प्रकाश तरंगों के रूप में चलता है। यह कहता है कि तरंगों का आगे वाला हिस्सा (तरंगाग्र) हर बिंदु पर नई छोटी तरंगें बनाता है। ये छोटी तरंगें मिलकर एक नया तरंगाग्र बनाती हैं, जिससे तरंग आगे बढ़ती है। प्रकाश के स्रोत के हिसाब से तरंगाग्र गोलाकार, बेलनाकार या सपाट हो सकते हैं।

🎯 Exam Tip: हाइगेन्स के सिद्धान्त के मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट रूप से समझें और तीनों प्रकार के तरंगाग्रों को उनके बनने के तरीके के साथ याद रखें। यह सिद्धान्त प्रकाश के परावर्तन, अपवर्तन और विवर्तन को समझने में मदद करता है।

 

Question 2. तरंगों के व्यतिकरण की परिभाषा दीजिए।
Answer: दो तरंगों का व्यतिकरण तब होता है जब समान आवृत्ति की दो तरंगें एक ही माध्यम में और एक ही दिशा में चलती हुई एक-दूसरे पर अध्यारोपित होती हैं. इस प्रक्रिया में, परिणामी तरंग की तीव्रता अलग-अलग स्थानों पर दोनों तरंगों की अलग-अलग तीव्रताओं के योग से भिन्न होती है. कुछ जगहों पर परिणामी तीव्रता दोनों तरंगों की तीव्रताओं के योग से ज़्यादा होती है, जबकि कुछ जगहों पर यह कम होती है. इस उतार-चढ़ाव को व्यतिकरण कहते हैं.
In simple words: जब एक जैसी दो तरंगें एक साथ चलती हैं, तो वे आपस में मिलकर कभी ज़्यादा तेज़ हो जाती हैं और कभी कम तेज़. इसी मिलावट को व्यतिकरण कहते हैं.

🎯 Exam Tip: व्यतिकरण की परिभाषा में 'समान आवृत्ति' और 'कला-सम्बद्ध स्रोत' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये व्यतिकरण की आवश्यक शर्तें हैं.

 

Question 3. कला सम्बद्ध स्रोत क्या होते हैं ?
Answer: कला सम्बद्ध स्रोत वे प्रकाश-स्रोत होते हैं जिनके बीच कलान्तर हमेशा एक जैसा रहता है, या तो शून्य होता है या समय के साथ नहीं बदलता. इसका मतलब है कि दो प्रकाश-स्रोतों से निकलने वाली तरंगों के बीच का फ़र्क़ स्थिर होता है. आम तौर पर, दो अलग-अलग स्रोतों का कला सम्बद्ध होना मुश्किल होता है. एक ही मूल स्रोत से उत्पन्न होने वाले वास्तविक या काल्पनिक स्रोत ही कला सम्बद्ध हो सकते हैं. ऐसे स्रोत एक पर्दे पर स्थायी व्यतिकरण पैटर्न बनाते हैं. यदि कलान्तर नियत नहीं रहता है, तो व्यतिकरण पैटर्न भी स्थिर नहीं रहता है.
In simple words: कला सम्बद्ध स्रोत वे होते हैं जिनसे निकलने वाली प्रकाश तरंगों का कलान्तर (फेज़ का अंतर) हमेशा एक समान रहता है.

🎯 Exam Tip: 'स्थिर कलान्तर' और 'एक ही स्रोत से उत्पन्न' ये दो महत्वपूर्ण विशेषताएँ हैं जिन्हें कला सम्बद्ध स्रोतों की परिभाषा में शामिल करना चाहिए.

 

Question 4. प्रकाश के विवर्तन से आप क्या समझते हैं ? प्रकाश व ध्वनि के विवर्तन की तुलना कीजिए।
Answer:
**विवर्तन (Diffraction)**
प्रकाश का विवर्तन (Diffraction of Light) वह घटना है जब प्रकाश की तरंगें किसी रुकावट के किनारों से मुड़ जाती हैं और उसकी ज्यामितीय छाया वाले क्षेत्र में प्रवेश करती हैं. इस तरह, प्रकाश अपनी सीधी रेखा में चलने की प्रकृति से हट जाता है. यह झुकाव तब और ज़्यादा होता है जब रुकावट का आकार छोटा होता जाता है. प्रकाश का विवर्तन सबसे अधिक तब होता है जब रुकावट का आकार प्रकाश की तरंगदैर्ध्य के बराबर होता है. चित्र 12.18 में विवर्तन की तीन स्थितियों को दर्शाया गया है, जिसमें सबसे स्पष्ट विवर्तन तब होता है जब स्लिट की चौड़ाई बहुत कम होती है (लगभग \( 1.5\lambda \)).
यह बताता है कि विवर्तन के लिए रुकावट का आकार तरंगों की तरंगदैर्ध्य के बराबर होना चाहिए.

**ध्वनि एवं प्रकाश के विवर्तन की तुलना (Comparison of Diffraction of Sound and Light)**
विवर्तन तरंग गति की एक विशेषता है, इसलिए यह प्रकाश और ध्वनि दोनों तरंगों में होता है. विवर्तन के लिए सबसे ज़रूरी शर्त यह है कि रुकावट का आकार तरंग की तरंगदैर्ध्य के बराबर होना चाहिए. ध्वनि तरंगों की तरंगदैर्ध्य काफी बड़ी होती है, इसलिए हम रोज़मर्रा के जीवन में ध्वनि का विवर्तन आसानी से महसूस कर सकते हैं. जैसे, दरवाजों या खिड़कियों के किनारों से ध्वनि मुड़ जाती है, और दीवार के पीछे बैठा व्यक्ति भी दूसरी तरफ़ की आवाज़ सुन लेता है. इसके उलट, प्रकाश तरंगों की तरंगदैर्ध्य बहुत छोटी होती है, इसलिए प्रकाश का विवर्तन देखने के लिए खास प्रयोगशाला व्यवस्था की ज़रूरत होती है. प्रकाश का विवर्तन केवल ब्लेड की पतली धार या सुई की नोंक जैसी बहुत छोटी चीज़ों से ही देखा जा सकता है.
In simple words: विवर्तन तब होता है जब प्रकाश या ध्वनि तरंगें किसी चीज़ के किनारे से मुड़ जाती हैं. ध्वनि तरंगों की लंबाई ज़्यादा होती है, इसलिए उनका मुड़ना आसान होता है और हम उसे रोज़ महसूस करते हैं. प्रकाश तरंगें बहुत छोटी होती हैं, इसलिए उनका मुड़ना मुश्किल होता है और उसे देखने के लिए खास इंतज़ाम चाहिए होते हैं.

🎯 Exam Tip: विवर्तन की परिभाषा में 'तरंगदैर्ध्य के क्रम का' रुकावट का आकार और 'किनारों से मुड़ना' जैसे मुख्य वाक्यांशों का उपयोग करें. ध्वनि और प्रकाश की तुलना में तरंगदैर्ध्य के अंतर को स्पष्ट करें.

 

Question 5. सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता परिभाषित कीजिए। यह किस प्रकार प्रभावित होगी जब
Answer: सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता (Resolving Power of a Microscope) यह बताने की क्षमता है कि वह कितनी अच्छी तरह से दो बहुत पास की वस्तुओं को अलग-अलग दिखा सकता है. इसकी विभेदन सीमा (resolving limit) d से परिभाषित होती है, जो वह न्यूनतम दूरी है जिस पर दो वस्तुओं को अलग-अलग देखा जा सकता है. विभेदन क्षमता विभेदन सीमा का व्युत्क्रम होती है.
सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता निम्नलिखित कारकों से प्रभावित होती है:
(i) **प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्ध्य ( \( \lambda \) )**: विभेदन सीमा प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्ध्य के सीधे आनुपातिक होती है, यानी \( d \propto \lambda \). इसका मतलब है कि अगर तरंगदैर्ध्य कम होगी, तो विभेदन सीमा भी कम होगी और विभेदन क्षमता ज़्यादा होगी. इसलिए, छोटी तरंगदैर्ध्य का प्रकाश (जैसे नीला प्रकाश) उपयोग करने से विभेदन क्षमता बढ़ती है.
(ii) **वस्तु से अभिदृश्यक में पहुँचने वाले प्रकाश के शंकु कोण (cone angle) ( \( 2\theta \) )**: विभेदन सीमा शंकु कोण के व्युत्क्रमानुपाती होती है, यानी \( d \propto \frac{1}{2\sin\theta} \). यहाँ \( \sin\theta \) को 'आंकिक द्वारक' (numerical aperture) कहते हैं. अगर शंकु कोण (या \( \sin\theta \)) बड़ा होगा, तो विभेदन सीमा कम होगी और विभेदन क्षमता ज़्यादा होगी. यह बताता है कि अभिदृश्यक लेंस जितना बड़ा होगा, उतनी ही ज़्यादा रोशनी इकट्ठा कर पाएगा और विभेदन क्षमता बेहतर होगी.
अगर अभिदृश्यक और वस्तु के बीच हवा की बजाय कोई दूसरा माध्यम (जैसे तेल) हो, जिसका अपवर्तनांक \( \mu \) हो, तो विभेदन सीमा \( d = \frac{1.22\lambda}{2\mu\sin\theta} \) हो जाती है. ऐसे में, माध्यम का अपवर्तनांक बढ़ने से भी विभेदन क्षमता बढ़ती है, क्योंकि \( d \) कम हो जाता है.

**रैले की कसौटी (Rayleigh's criterion of limiting resolution)**
रैले की कसौटी के अनुसार, दो पास रखी वस्तुएँ तब अलग-अलग दिखाई देंगी जब एक वस्तु के विवर्तन पैटर्न का केंद्रीय अधिकतम दूसरी वस्तु के विवर्तन पैटर्न के पहले न्यूनतम पर पड़े. यह सिद्धांत हमें यह समझने में मदद करता है कि कोई ऑप्टिकल उपकरण कितनी अच्छी तरह से पास की वस्तुओं को अलग कर सकता है. चित्र 12.27 (b) और (c) इस स्थिति को दर्शाते हैं.
In simple words: सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता का मतलब है कि वह दो पास की चीज़ों को कितना साफ़-साफ़ अलग दिखा पाता है. यह क्षमता प्रकाश की तरंगदैर्ध्य पर निर्भर करती है (कम तरंगदैर्ध्य बेहतर) और लेंस कितना प्रकाश इकट्ठा करता है (ज़्यादा प्रकाश बेहतर). रैले की कसौटी बताती है कि दो चीज़ें कब अलग दिखेंगी - जब एक की सबसे तेज़ रोशनी दूसरे की सबसे कम रोशनी पर पड़े.

🎯 Exam Tip: विभेदन क्षमता की परिभाषा के साथ उसके तरंगदैर्ध्य और आंकिक द्वारक पर निर्भरता को स्पष्ट रूप से समझाएँ. रैले की कसौटी का उल्लेख भी महत्वपूर्ण है.

 

Question 6. दो पतली स्लिटों से आ रहे प्रकाश के व्यतिकरण से एक पर्दे पर फ्रिजें बन रही हैं। यदि स्लिटों के बीच की दूरी चार गुनी तथा स्लिटों से पर्दे की दूरी आधी कर दी जाये तब फ्रिज चौड़ाई कितने गुना हो जायेगी ?
Answer:
फ्रिन्ज चौड़ाई ( \( \beta \) ) का सूत्र है: \( \beta = \frac{D\lambda}{d} \)
जहाँ,
\( D \) = स्लिटों से पर्दे की दूरी
\( d \) = स्लिटों के बीच की दूरी
\( \lambda \) = प्रकाश की तरंगदैर्ध्य

प्रारम्भिक स्थिति में फ्रिन्ज चौड़ाई: \( \beta = \frac{D\lambda}{d} \)

नई स्थिति में:
स्लिटों के बीच की दूरी चार गुनी हो जाती है: \( d' = 4d \)
स्लिटों से पर्दे की दूरी आधी कर दी जाती है: \( D' = \frac{D}{2} \)

नई फ्रिन्ज चौड़ाई \( \beta' \) होगी:
\( \beta' = \frac{D'\lambda}{d'} \)
\( \beta' = \frac{(\frac{D}{2})\lambda}{4d} \)
\( \beta' = \frac{D\lambda}{8d} \)
\( \beta' = \frac{1}{8} \left( \frac{D\lambda}{d} \right) \)
\( \beta' = \frac{1}{8} \beta \)

तो, फ्रिन्ज चौड़ाई आठवें हिस्से ( \( \frac{1}{8} \) गुना) हो जाएगी.
In simple words: फ्रिन्ज की चौड़ाई स्लिटों से पर्दे की दूरी के सीधे अनुपात में होती है और स्लिटों के बीच की दूरी के उल्टे अनुपात में होती है. जब स्लिट से पर्दे की दूरी आधी और स्लिटों के बीच की दूरी चार गुनी कर दी जाती है, तो नई फ्रिन्ज चौड़ाई पुरानी फ्रिन्ज चौड़ाई का आठवाँ हिस्सा हो जाएगी.

🎯 Exam Tip: फ्रिन्ज चौड़ाई के सूत्र \( \beta = \frac{D\lambda}{d} \) को याद रखना और दिए गए परिवर्तनों को सही ढंग से लागू करना महत्वपूर्ण है. अनुपात वाले प्रश्नों में सभी मानों को सूत्र में रखकर गणना करें.

 

Question 7. पोलेरॉइड की बनावट समझाइये।
Answer:
**पोलेरॉइड (Polaroid)**
पोलेरॉइड एक सरल और सस्ता तरीका है जिससे समतल ध्रुवित प्रकाश बनाया जाता है. यह एक बड़ी फ़िल्म होती है जिसे दो काँच की प्लेटों के बीच रखा जाता है. इस फ़िल्म को बनाने के लिए नाइट्रोसेलुलोज (Nitrocellulose) की एक पतली चादर पर बहुत छोटे कुनैन आयोडो-सल्फेट (Herpathite) के क्रिस्टल एक खास तरीके से बिछाए जाते हैं. इन सभी क्रिस्टलों की प्रकाशिक अक्षें एक-दूसरे के समांतर होती हैं. ये क्रिस्टल तीव्र द्विवर्णक होते हैं, जिसका मतलब है कि ये दो द्वि-अपवर्तित किरणों में से एक को पूरी तरह से सोख लेते हैं और दूसरी को ध्रुवित प्रकाश के रूप में बाहर निकाल देते हैं. प्रत्येक पोलेरॉइड फ़िल्म में एक विशेष दिशा होती है जिसे 'ध्रुवण दिशा' (Polarising direction) कहते हैं. चित्र 12.38 में पोलेरॉइड फ़िल्म की ध्रुवण दिशा को समांतर रेखाओं से दिखाया गया है.
जब सामान्य प्रकाश की एक किरण पोलेरॉइड पर पड़ती है, तो ध्रुवण दिशा के लंबवत कंपन सोख लिए जाते हैं, और ध्रुवण दिशा के समांतर कंपन बाहर निकल जाते हैं. इस प्रकार, पोलेरॉइड से समतल ध्रुवित प्रकाश प्राप्त होता है. यह जानने के लिए कि बाहर निकलने वाला प्रकाश समतल ध्रुवित है या नहीं, एक दूसरे पोलेरॉइड का उपयोग किया जाता है.
**पोलेरॉइड से निर्गत प्रकाश की तीव्रता**
यदि किसी पोलेरॉइड पर आपतित प्रकाश की तीव्रता \( I_0 \) हो, तो पोलेरॉइड से निर्गत प्रकाश की तीव्रता \( I = I_0 \cos^2 \theta \) होती है. यहाँ \( \theta \) पोलेरॉइड की ध्रुवण दिशा और आपतित प्रकाश के विद्युत वेक्टर के बीच का कोण है. इसे 'मैलस का नियम' (Malus's Law) कहते हैं. यदि आपतित प्रकाश अध्रुवित है, तो निर्गत प्रकाश की तीव्रता आपतित प्रकाश की आधी हो जाती है (\( I = \frac{1}{2} I_0 \)).

**पोलेरॉइड के उपयोग (Uses of Polaroid)**
1. पोलेरॉइड की मदद से त्रिविमीय (Three-dimensional) चित्र देखे जा सकते हैं.
2. इनका उपयोग मोटरगाड़ियों के सामने वाले काँच में चमक कम करने के लिए किया जाता है.
3. पोलेरॉइड का उपयोग हवाई जहाज़ और ट्रेनों में प्रवेश करने वाले प्रकाश की तीव्रता को नियंत्रित करने के लिए भी होता है.
4. LCD (Liquid crystal display) भी पोलेरॉइड के सिद्धांत पर काम करती है.
5. पोलेरॉइड युक्त ध्रुवमापी से प्रकाशीय घूर्णक पदार्थ (जैसे शक्कर का घोल) की सान्द्रता को मापा जा सकता है.
6. इनका उपयोग धातुओं के प्रकाशीय गुणों और प्रकाशीय घूर्णक पदार्थों की संरचना को जानने में होता है.
In simple words: पोलेरॉइड एक पतली फ़िल्म होती है जिसके अंदर छोटे-छोटे क्रिस्टल एक लाइन में लगे होते हैं. यह सिर्फ़ एक खास दिशा में कंपन करने वाली रोशनी को ही जाने देता है, बाकी को रोक लेता है. इसी से समतल ध्रुवित प्रकाश बनता है. इसका उपयोग चमक कम करने, 3D चित्र देखने और LCD स्क्रीन में होता है.

🎯 Exam Tip: पोलेरॉइड की बनावट में 'द्विवर्णक क्रिस्टल', 'प्रकाशिक अक्षें' और 'ध्रुवण दिशा' जैसे शब्दों का प्रयोग करें. मैलस का नियम और इसके मुख्य उपयोगों को भी शामिल करना चाहिए.

 

Question 10. फ्रेनल एवं फ्रॉनहॉफर विवर्तन में मुख्य अन्तर बताइये।
Answer:
प्रकाश के विवर्तन को दो मुख्य प्रकारों में बांटा जा सकता है: फ्रेनल विवर्तन और फ्रॉनहॉफर विवर्तन. इनके बीच के मुख्य अंतर नीचे एक तालिका में दिए गए हैं:

क्र.सं.फ्रेनल विवर्तन (Fresnel Diffraction)फ्रॉनहॉफर विवर्तन (Fraunhofer Diffraction)
1.प्रकाश-स्रोत और पर्दा, दोनों विवर्तक से सीमित दूरी पर होते हैं.प्रकाश-स्रोत और पर्दा, दोनों प्रभावी विवर्तक से अनंत दूरी पर होते हैं.
2.इसमें आपतित और विवर्तित तरंगाग्र गोलीय या बेलनाकार होते हैं.इसमें आपतित और विवर्तित तरंगाग्र समतल होते हैं.
3.इस विवर्तन में स्रोत और पर्दे की विवर्तक से दूरियाँ महत्वपूर्ण होती हैं.इस विवर्तन में तरंगाग्रों का विवर्तक पर झुकाव महत्वपूर्ण होता है.
4.इसमें प्रेक्षण लेंस या दर्पण की सहायता के बिना लिए जाते हैं.इसमें प्रेक्षण लेंस (दूरदर्शक के लेंस द्वारा) की सहायता से लिए जाते हैं.
5.इसमें केवल एक विवर्तक का विवर्तन प्रभाव होता है.इसमें एक या एक से अधिक विवर्तकों के विवर्तन का सम्मिलित प्रभाव हो सकता है.
6.इसके विवर्तन प्रतिरूप का केंद्र विवर्तक के आकार के अनुसार अदीप्त या प्रदीप्त होता है.इसके विवर्तन प्रतिरूप का केंद्र सदैव प्रदीप्त होता है.

फ्रेनल विवर्तन तब होता है जब प्रकाश-स्रोत और प्रेक्षण बिंदु दोनों विवर्तन पैदा करने वाले द्वारक या बाधा से सीमित दूरी पर होते हैं. इसमें आपतित और विवर्तित तरंगाग्र गोलाकार या बेलनाकार होते हैं. फ्रॉनहॉफर विवर्तन तब होता है जब प्रकाश स्रोत और प्रेक्षण बिंदु दोनों की बाधा या द्वारक से प्रभावी दूरी अनंत होती है, यानी आपतित और विवर्तित तरंगाग्र दोनों समतल होते हैं.
In simple words: फ्रेनल विवर्तन में प्रकाश स्रोत और पर्दा, दोनों विवर्तन पैदा करने वाली चीज़ के पास होते हैं, और तरंगें घुमावदार होती हैं. फ्रॉनहॉफर विवर्तन में स्रोत और पर्दा बहुत दूर होते हैं, और तरंगें सीधी (समतल) होती हैं.

🎯 Exam Tip: फ्रेनल और फ्रॉनहॉफर विवर्तन के बीच के मुख्य अंतरों को तालिका के रूप में प्रस्तुत करना पूरे अंक प्राप्त करने में सहायक होगा. 'स्रोत और पर्दे की दूरी' तथा 'तरंगाग्र के आकार' पर विशेष ध्यान दें.

 

Question 1. हाइगेन्स के द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धान्त के आधार पर प्रकाश के अपवर्तन की घटना समझाइये और स्नेल के नियम का निगमन कीजिए।
Answer:
**हाइगेन्स के द्वितीयक तरंगिका सिद्धांत के आधार पर अपवर्तन की व्याख्या (Explanation of Refraction on the basis of Huygens' Theory of Secondary Wavelets)**
चित्र 12.5 में \( XX' \) दो माध्यमों की सीमा रेखा है. माना पहले माध्यम में तरंग की चाल \( v_1 \) है और दूसरे माध्यम में चाल \( v_2 \) है. एक समतल तरंगाग्र \( AB \) पहले माध्यम में \( v_1 \) वेग से चलता हुआ आपतन कोण \( i \) पर सीमा \( XX' \) पर आपतित होता है. जैसे ही तरंगाग्र का बिंदु \( A \) दूसरे माध्यम की सीमा पर पहुँचता है, द्वितीयक तरंगिकाएँ बननी शुरू हो जाती हैं और \( v_2 \) वेग से आगे बढ़ती हैं. इसी तरह, तरंगाग्र के बाकी बिंदु भी सीमा पर टकराते जाते हैं, और द्वितीयक तरंगिकाएँ बनाते जाते हैं. जब तरंगाग्र का बिंदु \( B \) बिंदु \( B' \) तक पहुँचता है, तब तक बिंदु \( A \) पर बनी तरंगिकाएँ \( A' \) तक पहुँच जाती हैं.
यदि बिंदु \( B \) को \( B' \) तक या \( A \) को \( A' \) तक पहुँचने में समय \( t \) लगता है, तो दूरी \( = \) चाल \( \times \) समय के नियम से:
\( BB' = v_1 t \)
\( AA' = v_2 t \)
चित्र से, समकोण त्रिभुज \( \Delta ABB' \) में:
\( \sin i = \frac{BB'}{AB'} \)
और समकोण त्रिभुज \( \Delta AA'B' \) में:
\( \sin r = \frac{AA'}{AB'} \)
दोनों समीकरणों को भाग देने पर:
\( \frac{\sin i}{\sin r} = \frac{BB'/AB'}{AA'/AB'} = \frac{BB'}{AA'} = \frac{v_1 t}{v_2 t} = \frac{v_1}{v_2} \)
\( \implies \frac{\sin i}{\sin r} = \frac{v_1}{v_2} = \text{नियतांक} \)

**स्नेल का नियम (Snell's Law)**
यह स्नेल का नियम है. स्नेल ने प्रायोगिक अध्ययनों से भी बताया था कि:
\( \frac{\sin i}{\sin r} = \text{नियतांक} = {}_{1}\mu_{2} \)
जहाँ \( {}_{1}\mu_{2} \) पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक है.
इस नियम से दो बातें स्पष्ट होती हैं:
(1) आपतित किरण, अपवर्तित किरण और अभिलम्ब तीनों एक ही तल में होते हैं.
(2) आपतन कोण की ज्या (\( \sin i \)) और अपवर्तन कोण की ज्या (\( \sin r \)) का अनुपात एक नियतांक होता है, जो माध्यमों के अपवर्तनांक पर निर्भर करता है. यह बताता है कि प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर अपनी गति बदलता है, जिससे वह मुड़ जाता है.

**विरल माध्यम पर अपवर्तन (Refraction on a Rarer Medium)**
यदि पहला माध्यम सघन हो और दूसरा विरल हो, तो अपवर्तन की स्थिति चित्र 12.6 के अनुसार होगी, जहाँ \( i < r \). इसका मतलब है कि अपवर्तन कोण, आपतन कोण से बड़ा होता है. जैसे-जैसे आपतन कोण बढ़ता है, एक निश्चित आपतन कोण (\( i_c \), जिसे क्रांतिक कोण कहते हैं) पर अपवर्तन कोण 90° हो जाता है. इस क्रांतिक कोण से अधिक आपतन कोण के लिए, प्रकाश का पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total internal reflection) होता है. इस स्थिति में \( \sin i_c = \frac{\mu_2}{\mu_1} \) होता है.
In simple words: हाइगेन्स के सिद्धांत के अनुसार, प्रकाश जब एक माध्यम से दूसरे में जाता है तो वह मुड़ जाता है. यह मुड़ना इसलिए होता है क्योंकि प्रकाश की चाल अलग-अलग माध्यमों में अलग होती है. स्नेल का नियम कहता है कि प्रकाश के मुड़ने का एक निश्चित अनुपात होता है, जो माध्यमों पर निर्भर करता है.

🎯 Exam Tip: हाइगेन्स के सिद्धांत के आधार पर अपवर्तन की व्याख्या में तरंगिका निर्माण और उनके स्पर्श तल की अवधारणा को स्पष्ट करें. स्नेल के नियम के गणितीय व्युत्पत्ति को स्टेप-बाय-स्टेप दिखाएँ और उसके दो मुख्य निष्कर्षों का उल्लेख करें.

 

Question 2. हाइगेन्स के तरंग सिद्धान्त से प्रकाश के परावर्तन की व्याख्या कीजिए।
Answer:
**हाइगेन्स के द्वितीयक तरंगिका सिद्धांत से परावर्तन की व्याख्या (Explanation of Reflection on the basis of Huygens' Theory of Secondary Wavelets)**
चित्र 12.4 में \( XX' \) एक परावर्तक सतह है और \( AB \) एक समतल तरंगाग्र है जो इस सतह पर आपतित होता है. माना तरंगाग्र का बिंदु \( A \) पहले सतह \( XX' \) पर पहुँचता है. जैसे ही बिंदु \( A \) सतह पर टकराता है, यह द्वितीयक तरंगिकाएँ उत्सर्जित करना शुरू कर देता है, जो पहले माध्यम में \( v \) वेग से चलती हैं. तरंगाग्र का बिंदु \( B \) अभी भी सतह से दूर है और \( B' \) तक पहुँचने में समय \( t \) लेता है. इस समय \( t \) में, बिंदु \( A \) से उत्सर्जित तरंगिकाएँ \( A' \) तक पहुँच जाती हैं, जहाँ \( AA' = vt \). इसी समय में, बिंदु \( B \) सतह पर पहुँचता है और \( BB' = vt \). \( A'B' \) एक नया परावर्तित तरंगाग्र है.
त्रिभुज \( \Delta ABB' \) और \( \Delta AA'B' \) दोनों समकोण त्रिभुज हैं.
\( \angle ABB' = \angle AA'B' \) (प्रत्येक 90° का कोण है)
\( BB' = AA' \) (सिद्ध किया गया है कि \( vt \))
भुजा \( AB' \) दोनों त्रिभुजों में उभयनिष्ठ है.
इसलिए, \( \Delta ABB' \cong \Delta AA'B' \) (सर्वांगसमता)
\( \implies \angle BAB' = \angle A'B'A \)
और क्योंकि आपतन कोण \( i = \angle BAB' \) और परावर्तन कोण \( r = \angle A'B'A \) है,
\( \implies i = r \)

**परावर्तन के नियम (Laws of Reflection)**
हाइगेन्स के सिद्धांत से परावर्तन के दो मुख्य नियम सिद्ध होते हैं:
(1) **आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है (\( i = r \))**: यह नियम बताता है कि प्रकाश जिस कोण पर सतह से टकराता है, उसी कोण पर वह वापस मुड़ता है. प्रकाश एक अनुमानित पथ का अनुसरण करता है जिसे 'न्यूनतम समय का सिद्धांत' कहा जाता है.
(2) **आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलम्ब तीनों एक ही तल में होते हैं**: यह नियम दर्शाता है कि प्रकाश की गति एक समतल क्षेत्र में होती है, न कि त्रिविमीय रूप से फैलती है.
In simple words: हाइगेन्स के सिद्धांत के अनुसार, जब प्रकाश की तरंगें किसी सतह से टकराती हैं, तो वे वापस मुड़ जाती हैं. इस प्रक्रिया में, प्रकाश जिस कोण से आता है, उसी कोण से वापस जाता है. साथ ही, आने वाली किरण, जाने वाली किरण और सतह पर सीधी रेखा (अभिलम्ब) तीनों एक ही सतह पर होती हैं.

🎯 Exam Tip: परावर्तन की व्याख्या में, द्वितीयक तरंगिकाओं का निर्माण और उनकी ज्यामितीय रचना को सही ढंग से दर्शाएँ. आपतन कोण और परावर्तन कोण की समानता को सिद्ध करने के लिए त्रिभुजों की सर्वांगसमता का उपयोग करें.

 

Question 3. प्रकाश के व्यतिकरण की विश्लेषणात्मक विवेचना करते हुए संपोषी एवं विनाशी व्यतिकरण की शर्ते बताइये।
Answer:
**दो तरंगों का व्यतिकरण (Interference of Two Waves)**
जब समान आवृत्ति की दो तरंगें कला-सम्बद्ध स्रोतों (Coherent sources) से एक ही माध्यम में और एक ही दिशा में चलती हुई एक-दूसरे पर अध्यारोपित होती हैं, तो परिणामी तरंग की तीव्रता दोनों तरंगों की अलग-अलग तीव्रताओं के योग से भिन्न होती है. कुछ स्थानों पर परिणामी तीव्रता दोनों तीव्रताओं के योग से अधिक होती है, जबकि कुछ स्थानों पर यह कम होती है. अध्यारोपण के क्षेत्र में परिणामी तीव्रता में इस उतार-चढ़ाव उत्पन्न होने की घटना को व्यतिकरण कहते हैं.
व्यतिकरण दो प्रकार का होता है:

**1. रचनात्मक या संपोषी व्यतिकरण (Constructive Interference)**
जिन स्थानों पर परिणामी तीव्रता दोनों तरंगों की तीव्रताओं के योग से अधिक होती है, वहाँ पर रचनात्मक व्यतिकरण होता है. यह तब होता है जब दोनों तरंगें एक ही कला (phase) में मिलती हैं, जिससे उनका प्रभाव जुड़ जाता है और चमक बढ़ जाती है. इसकी शर्तें हैं:
(i) **कलान्तर (Phase Difference)**: कलान्तर शून्य या \( 2\pi \) का पूर्णांक गुणज होना चाहिए, यानी \( \phi = 2n\pi \), जहाँ \( n = 0, 1, 2, 3, \dots \).
(ii) **पथान्तर (Path Difference)**: पथान्तर शून्य या तरंगदैर्ध्य \( \lambda \) का पूर्णांक गुणज होना चाहिए, यानी \( \Delta x = n\lambda \), जहाँ \( n = 0, 1, 2, 3, \dots \).
इस स्थिति में, प्रकाश की तीव्रता अधिकतम होती है (\( I_{max} = (\sqrt{I_1} + \sqrt{I_2})^2 \)), जो दोनों तरंगों की अलग-अलग तीव्रताओं के योग से ज़्यादा होती है. अगर आयाम \( A_1 \) और \( A_2 \) हों, तो अधिकतम आयाम \( A_{max} = A_1 + A_2 \) होता है.

**2. विनाशी व्यतिकरण (Destructive Interference)**
जिन स्थानों पर परिणामी तीव्रता दोनों तरंगों की तीव्रताओं के योग से कम होती है, वहाँ पर विनाशी व्यतिकरण होता है. यह तब होता है जब दोनों तरंगें विपरीत कला (opposite phase) में मिलती हैं, जिससे उनका प्रभाव एक-दूसरे को रद्द कर देता है और चमक कम हो जाती है या शून्य हो जाती है. इसकी शर्तें हैं:
(i) **कलान्तर (Phase Difference)**: कलान्तर \( \pi \) का विषम पूर्णांक गुणज होना चाहिए, यानी \( \phi = (2n + 1)\pi \), जहाँ \( n = 0, 1, 2, 3, \dots \).
(ii) **पथान्तर (Path Difference)**: पथान्तर \( \frac{\lambda}{2} \) का विषम पूर्णांक गुणज होना चाहिए, यानी \( \Delta x = (2n + 1)\frac{\lambda}{2} \), जहाँ \( n = 0, 1, 2, 3, \dots \).
इस स्थिति में, प्रकाश की तीव्रता न्यूनतम होती है (\( I_{min} = (\sqrt{I_1} - \sqrt{I_2})^2 \)). अगर आयाम \( A_1 \) और \( A_2 \) हों, तो न्यूनतम आयाम \( A_{min} = |A_1 - A_2| \) होता है. यदि दोनों तरंगों की तीव्रता समान हो, तो \( I_{min} \) शून्य हो सकती है, जिससे अंधेरा बिंदु प्राप्त होता है.
In simple words: प्रकाश का व्यतिकरण तब होता है जब दो प्रकाश तरंगें मिलकर कहीं ज़्यादा तेज़ और कहीं कम तेज़ हो जाती हैं. जब तरंगें एक साथ मिलती हैं और चमक बढ़ जाती है, तो उसे संपोषी व्यतिकरण कहते हैं. यह तब होता है जब उनके कलान्तर में \( 2\pi \) का अंतर हो. जब तरंगें एक-दूसरे को रद्द कर देती हैं और चमक कम हो जाती है (या अंधेरा हो जाता है), तो उसे विनाशी व्यतिकरण कहते हैं. यह तब होता है जब उनके कलान्तर में \( \pi \) का अंतर हो.

🎯 Exam Tip: संपोषी और विनाशी व्यतिकरण की शर्तों को अलग-अलग स्पष्ट रूप से लिखें, जिसमें कलान्तर और पथान्तर दोनों शामिल हों. अधिकतम और न्यूनतम तीव्रता के सूत्रों का उल्लेख भी करें.

फ्रेनल तथा फ्रॉनहॉफर विवर्तनों की तुलना

क्र.सं.फ्रेनल विवर्तनफ्रॉनहॉफर विवर्तन
1.प्रकाश-स्रोत एवं पर्दा दोनों विवर्तक से सीमित दूरी पर होते हैं।प्रकाश-स्रोत एवं पर्दा दोनों प्रभावी विवर्तक से अनन्त दूरी पर होते हैं।
2.इसमें आपतित एवं विवर्तित तरंगाग्र गोलीय या बेलनाकार होते हैं।इसमें आपतित एवं विवर्तित तरंगाग्र समतल होते हैं।
3.इस विवर्तन में स्त्रोत एवं पर्दे की विवर्तक से दूरियाँ महत्वपूर्ण होती हैं।इस विवर्तन में तरंगाग्रों का विवर्तक पर झुकाव महत्वपूर्ण होता है।
4.इसमें प्रेक्षण लेन्स या दर्पण की सहायता के बिना लिये जाते हैं।इसमें प्रेक्षण लेन्स (दूरदर्शक के लेन्स द्वारा) की सहायता से लिये जाते हैं।
5.इसमें केवल एक विवर्तक का विवर्तन प्रभाव होता है।इसमें एक या एक से अधिक विवर्तकों के विवर्तन का सम्मिलित प्रभाव हो सकता है।
6.इसके विवर्तन प्रतिरूप का केन्द्र विवर्तक के आकार के अनुसार अदीप्त या प्रदीप्त होता है।इसके विवर्तन प्रतिरूप का केन्द्र सदैव प्रदीप्त होता है।

 

Question 5. एकल झिरी से फ्रॉनहॉफर विवर्तन को समझाइये।
Answer: फ्रॉनहॉफर विवर्तन को समझने के लिए, हम एक एकल रेखा-छिद्र का उपयोग करते हैं। एक मोनोक्रोमेटिक प्रकाश स्रोत (जैसे एक तंतु लैंप) को उत्तल लेंस के पहले फोकस पर रखा जाता है। इससे एक समानांतर किरण पुंज उत्पन्न होता है जो एक रेखा-छिद्र पर आपतित होता है। हाइगेन्स के सिद्धांत के अनुसार, रेखा-छिद्र के प्रत्येक बिंदु से द्वितीयक तरंगिकाएं उत्पन्न होती हैं। इन विवर्तित किरणों को एक दूसरे उत्तल लेंस द्वारा एक पर्दे पर फोकस किया जाता है। इससे पर्दे पर विवर्तन पैटर्न बनता है। इस पैटर्न में एक चौड़ी केंद्रीय दीप्त पट्टी होती है, जिसके दोनों ओर घटती तीव्रता की अदीप्त और दीप्त पट्टियाँ एकांतर क्रम में होती हैं। जैसे-जैसे रेखा-छिद्र की चौड़ाई कम होती है, विवर्तन पैटर्न अधिक फैलता जाता है और केंद्रीय पट्टी चौड़ी होती जाती है। यह दर्शाता है कि प्रकाश जब एक रेखा-छिद्र से गुजरता है तो किनारों पर थोड़ा मुड़ जाता है। विवर्तन तब अधिक होता है जब रुकावट का आकार प्रकाश की तरंगदैर्ध्य के लगभग होता है।
In simple words: जब प्रकाश एक पतली रेखा से गुजरता है, तो वह थोड़ा मुड़ जाता है, और एक पैटर्न बनाता है जिसमें बीच में एक उज्ज्वल पट्टी होती है और किनारों पर कम चमकदार पट्टियां होती हैं। यह मुड़ना तभी सबसे ज़्यादा होता है जब छेद की चौड़ाई प्रकाश की तरंग की लंबाई के बराबर होती है।

🎯 Exam Tip: जब आप फ्रॉनहॉफर विवर्तन का वर्णन करें, तो सुनिश्चित करें कि आप 'समानांतर किरणें' और 'पर्दे पर फोकस' जैसे प्रमुख शब्दों का उपयोग करें, क्योंकि ये फ्रेनल विवर्तन से मुख्य अंतर हैं।

 

Question 6. ध्रुवण किसे कहते हैं ? विद्युत सदिश की सहायता से धुवण को समझाइये। स्पष्ट कीजिए कि यह अनुप्रस्थ तरंगों का ही गुण क्यों है?
Answer: ध्रुवण वह प्रक्रिया है जिसमें प्रकाश तरंगों के कंपन एक निश्चित दिशा या तल तक सीमित हो जाते हैं। साधारण प्रकाश, जो अध्रुवित होता है, में विद्युत सदिश कंपन संचरण की दिशा के लंबवत सभी संभव दिशाओं में होते हैं। जब यह प्रकाश एक पोलेरॉइड (एक विशेष फिल्टर) से गुजरता है, तो केवल वे कंपन ही पार हो पाते हैं जो पोलेरॉइड की ध्रुवण दिशा के समानांतर होते हैं। बाकी कंपन अवशोषित हो जाते हैं। इस प्रकार, पोलेरॉइड से निकलने वाला प्रकाश 'समतल ध्रुवित' होता है, जिसमें कंपन एक ही तल में सीमित होते हैं। यह घटना बताती है कि प्रकाश तरंगें अनुप्रस्थ प्रकृति की होती हैं। यदि प्रकाश अनुदैर्ध्य तरंगें होतीं (जैसे ध्वनि), तो कंपन संचरण की दिशा में होते और उन्हें किसी एक तल तक सीमित नहीं किया जा सकता था। चूंकि अनुप्रस्थ तरंगों में कंपन संचरण की दिशा के लंबवत होते हैं, इसलिए उन्हें एक विशिष्ट तल में सीमित करना संभव है, जिससे ध्रुवण की घटना होती है। यह ध्रुवण की घटना प्रकाश के अनुप्रस्थ स्वभाव का एक स्पष्ट प्रमाण है।
In simple words: ध्रुवण का मतलब है कि प्रकाश की तरंगों के कंपन एक खास दिशा में ही हों, न कि सभी दिशाओं में। यह तभी हो सकता है जब प्रकाश की तरंगें सीधी चलें और उनके कंपन बगल में हों (अनुप्रस्थ तरंगें), जैसे रस्सी में लहरें। अगर कंपन आगे-पीछे होते (अनुदैर्ध्य तरंगें), तो उन्हें एक दिशा में नहीं रोका जा सकता था।

🎯 Exam Tip: ध्रुवण की परिभाषा देते समय 'विद्युत सदिश के कंपन', 'संचरण की दिशा के लंबवत' और 'एक निश्चित तल में सीमित' जैसे वाक्यांशों का उपयोग करें। यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि ध्रुवण केवल अनुप्रस्थ तरंगों के लिए ही क्यों संभव है।

 

Question 8. परावर्तन द्वारा समतल धुवित प्रकाश किस प्रकार प्राप्त किया जा सकता है ? बूस्टर को नियम क्या है ? सिद्ध कीजिए कि जब एक
Answer: जब अध्रुवित प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम (जैसे काँच या पानी) की सतह पर आपतित होता है, तो परावर्तित प्रकाश आंशिक रूप से ध्रुवित हो जाता है। आपतन कोण को बदलने पर एक विशेष कोण पर परावर्तित प्रकाश पूर्णतः समतल ध्रुवित हो जाता है। इस विशेष आपतन कोण को 'बूस्टर कोण' \( (i_p) \) या ध्रुवण कोण कहते हैं। इस स्थिति में, परावर्तित प्रकाश के कंपन आपतन तल के लंबवत होते हैं।

बूस्टर का नियम कहता है कि जब परावर्तित प्रकाश पूर्णतः ध्रुवित होता है, तो बूस्टर कोण \( (i_p) \) का स्पर्शज्या (tangent) माध्यम के अपवर्तनांक \( (\mu) \) के बराबर होता है।
\[ \mu = \tan i_p \]
इस नियम को सिद्ध करने के लिए, हम स्नेल के नियम का उपयोग करते हैं। जब प्रकाश बूस्टर कोण पर आपतित होता है, तो परावर्तित किरण और अपवर्तित किरण एक-दूसरे के लंबवत होती हैं।
स्नेल के नियम से:
\( \frac{\sin i_p}{\sin r} = \mu \)
बूस्टर के नियम से: \( \mu = \tan i_p = \frac{\sin i_p}{\cos i_p} \)
दोनों समीकरणों को मिलाने पर:
\( \frac{\sin i_p}{\sin r} = \frac{\sin i_p}{\cos i_p} \)
इससे \( \sin r = \cos i_p \)
हम जानते हैं कि \( \cos i_p = \sin (90^\circ - i_p) \)
तो, \( \sin r = \sin (90^\circ - i_p) \)
\( \implies r = 90^\circ - i_p \)
\( \implies i_p + r = 90^\circ \)
यह दर्शाता है कि परावर्तित और अपवर्तित किरणें एक-दूसरे के लंबवत होती हैं (अर्थात, उनके बीच का कोण 90° होता है)। यह बूस्टर के नियम का प्रमाण है, जो बताता है कि परावर्तन द्वारा ध्रुवित प्रकाश कैसे प्राप्त किया जा सकता है।
In simple words: जब प्रकाश किसी चिकनी सतह से एक खास कोण पर टकराता है, तो वापस लौटने वाला प्रकाश एक ही दिशा में कंपन करने लगता है, इसे ध्रुवित प्रकाश कहते हैं। बूस्टर का नियम कहता है कि इस खास कोण का टैन मान, उस सतह के अपवर्तनांक के बराबर होता है। यह भी बताता है कि इस कोण पर, परावर्तित किरण और सतह के अंदर जाने वाली किरण ठीक 90 डिग्री का कोण बनाती हैं।

🎯 Exam Tip: बूस्टर के नियम को समझाते समय, यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि बूस्टर कोण पर परावर्तित और अपवर्तित किरणें हमेशा एक दूसरे के लंबवत क्यों होती हैं। स्नेल के नियम का उपयोग करके व्युत्पत्ति को विस्तार से समझाएँ।

RBSE Class 12 Physics Chapter 12 आंकिक प्रश्न

 

Question 1. एक ही आकृति की दो तरंगों के आयाम 2 : 1 अनुपात में है। व्यतिकरण क्षेत्र में कम्पनों के महत्तम व न्यूनतम आयामों तथा तीव्रताओं का अनुपात ज्ञात कीजिए।
Answer: तरंगों के आयामों का अनुपात \( a_1 : a_2 = 2 : 1 \) है।
महत्तम आयाम \( A_{max} \) और न्यूनतम आयाम \( A_{min} \) का अनुपात निकालने के लिए, हम आयामों को जोड़ते और घटाते हैं:
\[ \frac{A_{max}}{A_{min}} = \frac{a_1 + a_2}{a_1 - a_2} = \frac{2 + 1}{2 - 1} = \frac{3}{1} \] इसलिए, महत्तम और न्यूनतम आयामों का अनुपात \( A_{max} : A_{min} = 3 : 1 \) होगा।

तीव्रता आयाम के वर्ग के समानुपाती होती है, यानी \( I \propto A^2 \).
इसलिए, महत्तम और न्यूनतम तीव्रताओं का अनुपात होगा:
\[ \frac{I_{max}}{I_{min}} = \left( \frac{A_{max}}{A_{min}} \right)^2 = \left( \frac{3}{1} \right)^2 = \frac{9}{1} \] अतः, महत्तम और न्यूनतम तीव्रताओं का अनुपात \( I_{max} : I_{min} = 9 : 1 \) है।
In simple words: जब दो तरंगें मिलती हैं, तो उनके सबसे बड़े और सबसे छोटे आयामों का अनुपात 3:1 होता है। उनकी चमक (तीव्रता) का अनुपात उनके आयामों के वर्ग का होता है, जो 9:1 है।

🎯 Exam Tip: आयामों और तीव्रताओं के अनुपात से संबंधित प्रश्नों में, हमेशा ध्यान रखें कि तीव्रता आयाम के वर्ग के समानुपाती होती है, न कि सीधे आयाम के।

 

Question 2. किसी व्यतिकरण प्रयोग में I और 4I तीव्रताओं के दो स्रोतों का उपयोग किया जाता है। उन बिन्दुओं पर तीव्रता ज्ञात कीजिए जहाँ अध्यारोपण करती हुई दोनों स्रोतों से तरंगों के मध्य कलान्तर (अ) शून्य (0), (ब) \( \frac{\pi}{2} \), (स) \( \pi \) है।
Answer: दिए गए स्रोतों की तीव्रताएँ हैं: \( I_1 = I \) और \( I_2 = 4I \).
परिणामी तीव्रता \( I_R \) ज्ञात करने का सूत्र है: \( I_R = I_1 + I_2 + 2\sqrt{I_1 I_2} \cos \phi \).

(अ) जब कलान्तर \( \phi = 0 \) हो:
\( \cos 0 = 1 \)
\( I_R = I + 4I + 2\sqrt{I \times 4I} \times 1 \)
\( I_R = 5I + 2\sqrt{4I^2} \)
\( I_R = 5I + 2(2I) \)
\( I_R = 5I + 4I \)
\( I_R = 9I \)

(ब) जब कलान्तर \( \phi = \frac{\pi}{2} \) हो:
\( \cos \left( \frac{\pi}{2} \right) = 0 \)
\( I_R = I + 4I + 2\sqrt{I \times 4I} \times 0 \)
\( I_R = 5I + 0 \)
\( I_R = 5I \)

(स) जब कलान्तर \( \phi = \pi \) हो:
\( \cos \pi = -1 \)
\( I_R = I + 4I + 2\sqrt{I \times 4I} \times (-1) \)
\( I_R = 5I - 2(2I) \)
\( I_R = 5I - 4I \)
\( I_R = I \)
In simple words: जब दो प्रकाश स्रोत अलग-अलग कोणों पर मिलते हैं, तो उनकी कुल चमक बदल जाती है। जब वे सीधे मिलते हैं (कोण 0), चमक सबसे ज़्यादा 9I होती है। जब वे आधे कोण (π/2) पर मिलते हैं, तो चमक 5I होती है। और जब वे उल्टे मिलते हैं (कोण π), तो चमक सबसे कम I होती है।

🎯 Exam Tip: व्यतिकरण के प्रश्नों में, परिणामी तीव्रता के सूत्र को सही ढंग से लागू करें और कलान्तर के विभिन्न मानों के लिए कोज्या फलन के मानों का सही उपयोग करें।

 

Question 4. 5500A तरंगदैर्ध्य का प्रकाश 22 \( \times 10^{-5} \) cm चौड़े रेखा छिद्र पर अभिलम्बवत् आपतित है। केन्द्रीय उच्चिष्ठ के दोनों ओर प्रथम दो निम्निष्ठों की कोणीय स्थिति ज्ञात कीजिए।
Answer: दिया गया है:
प्रकाश की तरंगदैर्ध्य \( \lambda = 5500 \, \text{A} = 5500 \times 10^{-10} \, \text{m} = 5.5 \times 10^{-7} \, \text{m} \).
रेखा छिद्र की चौड़ाई \( e = 22 \times 10^{-5} \, \text{cm} = 22 \times 10^{-7} \, \text{m} \).
हमें प्रथम दो निम्निष्ठों की कोणीय स्थिति \( \theta_1 \) और \( \theta_2 \) ज्ञात करनी है।

एकल छिद्र विवर्तन में निम्निष्ठों की कोणीय स्थिति के लिए सूत्र है:
\( e \sin \theta_n = n\lambda \)
चूंकि \( \theta_n \) बहुत छोटा है, हम \( \sin \theta_n \approx \theta_n \) ले सकते हैं।
इसलिए, \( \theta_n = \frac{n\lambda}{e} \)

प्रथम निम्निष्ठ के लिए (\( n = 1 \)):
\( \theta_1 = \frac{1 \times \lambda}{e} = \frac{5.5 \times 10^{-7} \, \text{m}}{22 \times 10^{-7} \, \text{m}} \)
\( \theta_1 = \frac{5.5}{22} = \frac{1}{4} = 0.25 \, \text{rad} \)

द्वितीय निम्निष्ठ के लिए (\( n = 2 \)):
\( \theta_2 = \frac{2 \times \lambda}{e} = \frac{2 \times 5.5 \times 10^{-7} \, \text{m}}{22 \times 10^{-7} \, \text{m}} \)
\( \theta_2 = \frac{11}{22} = \frac{1}{2} = 0.50 \, \text{rad} \)
In simple words: जब प्रकाश एक पतले छेद से गुजरता है, तो वह मुड़ जाता है। हम इस घुमाव के पहले और दूसरे सबसे कम चमक वाले बिंदुओं का कोण निकालते हैं। पहला कोण 0.25 रेडियन और दूसरा कोण 0.50 रेडियन आता है।

🎯 Exam Tip: एकल स्लिट विवर्तन में निम्निष्ठों की स्थिति के लिए \( e \sin \theta = n\lambda \) सूत्र याद रखें। कोण छोटे होने पर \( \sin \theta \approx \theta \) का उपयोग करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. जब सूर्य क्षितिज से 37° कोण पर होता है तो पानी की सतह से परावर्तित प्रकाश पूर्णतः ध्रुवित होता है। पानी का अपवर्तनांक ज्ञात कीजिए।
Answer: जब सूर्य क्षितिज से 37° के कोण पर होता है, तो इसका मतलब है कि परावर्तित प्रकाश पूरी तरह से ध्रुवित होता है।
यह आपतन कोण को ध्रुवण कोण (Brewster's angle, \( i_p \)) बनाता है।
क्षितिज से कोण 37° है, इसलिए आपतन कोण (पानी की सतह के लम्बवत् से) होगा:
\( i_p = 90^\circ - 37^\circ = 53^\circ \)

ब्रूस्टर के नियम के अनुसार, पानी का अपवर्तनांक \( \mu \) ध्रुवण कोण की स्पर्शज्या (tangent) के बराबर होता है:
\( \mu = \tan i_p \)
\( \mu = \tan 53^\circ \)
\( \mu \approx 1.33 \)
In simple words: जब सूरज क्षितिज से 37° पर होता है, तो पानी से टकराकर वापस आने वाली रोशनी पूरी तरह से सीधी (ध्रुवित) हो जाती है। ब्रूस्टर के नियम का उपयोग करके, हम पानी का अपवर्तनांक 1.33 निकालते हैं, जो बताता है कि रोशनी पानी में कितनी धीमी चलती है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि ध्रुवण कोण हमेशा सतह के लम्बवत् (सामान्य) से मापा जाता है। यदि कोण क्षितिज से दिया गया हो, तो 90° में से घटाकर आपतन कोण ज्ञात करें।

 

Question 7. दो ध्रुवक प्लेटों की ध्रुवण दिशाएँ समान्तर हैं जिससे निर्गत प्रकाश की तीव्रता अधिकतम है। इनमें से एक प्लेट को कम से कम कितना घुमाया जाये कि निर्गत प्रकाश की तीव्रता अधिकतम की चौथाई रह जाये ?
Answer: प्रारंभिक स्थिति में, दोनों ध्रुवक प्लेटों की ध्रुवण दिशाएँ समान्तर हैं, इसलिए निर्गत प्रकाश की तीव्रता अधिकतम है। इसे \( I_{max} \) मानें।
हम चाहते हैं कि निर्गत प्रकाश की तीव्रता अधिकतम तीव्रता की चौथाई रह जाए, यानी \( I = \frac{I_{max}}{4} \).
मैलस के नियम के अनुसार, जब ध्रुवक को कोण \( \theta \) से घुमाया जाता है, तो निर्गत प्रकाश की तीव्रता होती है:
\( I = I_{max} \cos^2 \theta \)

अब दिए गए मानों को सूत्र में रखने पर:
\( \frac{I_{max}}{4} = I_{max} \cos^2 \theta \)
\( \implies \cos^2 \theta = \frac{1}{4} \)
दोनों तरफ वर्गमूल लेने पर:
\( \implies \cos \theta = \pm \frac{1}{2} \)
न्यूनतम घुमाव के लिए, हम धनात्मक मान लेते हैं:
\( \cos \theta = \frac{1}{2} \)
यह तब होता है जब \( \theta = 60^\circ \).
In simple words: जब दो फ़िल्टर सीधे होते हैं, तो सारी रोशनी आर-पार चली जाती है। यदि हम एक फ़िल्टर को 60 डिग्री घुमाते हैं, तो रोशनी केवल एक-चौथाई रह जाती है क्योंकि वह घुमा हुआ फ़िल्टर बची हुई रोशनी को रोक देता है।

🎯 Exam Tip: मैलस के नियम \( I = I_0 \cos^2 \theta \) का उपयोग करते समय, \( \theta \) प्लेटों की ध्रुवण दिशाओं के बीच का कोण है। अधिकतम तीव्रता के लिए \( \theta = 0^\circ \) और न्यूनतम (शून्य) तीव्रता के लिए \( \theta = 90^\circ \) होता है।

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