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Detailed Chapter 1 विद्युत क्षेत्र RBSE Solutions for Class 12 Physics
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Class 12 Physics Chapter 1 विद्युत क्षेत्र RBSE Solutions PDF
प्रश्न 1. दो एकसमान तथा बराबर आवेशों को 3 मीटर की दूरी पर रखने पर उनके मध्य 1.6 न्यूटन का प्रतिकर्षण बल कार्य करता है। प्रत्येक आवेश का मान होगा
(अ) 2C
(ब) 4C
(स) 40C
(द) 80C
Answer: (अ) 2C
In simple words: जब दो आवेशों के बीच लगने वाले बल को मापा जाता है और वे एक-दूसरे को दूर धकेल रहे हों (प्रतिकर्षित करें), तो हम कूलॉम के नियम का उपयोग करके यह पता लगा सकते हैं कि प्रत्येक आवेश कितना है. इस सवाल में, दो समान आवेश 3 मीटर की दूरी पर रखे हैं और उनके बीच 1.6 न्यूटन का प्रतिकर्षण बल लग रहा है, जिससे पता चलता है कि प्रत्येक आवेश का मान 2C है।
🎯 Exam Tip: कूलॉम के नियम को याद रखें: \( F = k \frac { q_1 q_2 }{ r^2 } \), जहाँ k एक स्थिरांक है। प्रतिकर्षण का अर्थ है कि आवेश समान प्रकृति के हैं (दोनों धनात्मक या दोनों ऋणात्मक)।
प्रश्न 2. दो आवेशों के मध्य बल F है। यदि उनके मध्य की दूरी तीन गुना कर दी जाये तब इन आवेशों के मध्य बल होगा
(अ) F
(ब) F/3
(स) F/9
(द) F/27
Answer: (स) F/9
In simple words: कूलॉम का नियम कहता है कि दो आवेशों के बीच का बल उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसका मतलब है कि अगर आप दूरी को तीन गुना कर देंगे, तो बल तीन के वर्ग यानी 9 गुना कम हो जाएगा। इसलिए, नया बल F/9 होगा।
🎯 Exam Tip: कूलॉम के नियम में बल (F) दूरी (r) के वर्ग (r²) के व्युत्क्रमानुपाती होता है, यानी \( F \propto \frac { 1 }{ r^2 } \) । यह संबंध प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है।
प्रश्न 3. किसी वस्तु को \( 5 \times 10^{-19} \text{C} \) से धनावेशित करने के लिये उसमें से निकाले गये इलेक्ट्रॉनों की संख्या होगी
(अ) 3
(ब) 5
(स) 7
(द) 9
Answer: (अ) 3
In simple words: किसी वस्तु को धनावेशित करने का मतलब है कि उससे इलेक्ट्रॉन हटा दिए गए हैं। हर इलेक्ट्रॉन पर एक निश्चित ऋणात्मक आवेश होता है। तो, कुल आवेश पता करने के लिए, हमें पता लगाना होगा कि कितने इलेक्ट्रॉन निकाले गए हैं ताकि कुल धनात्मक आवेश उतना ही हो।
🎯 Exam Tip: आवेश का क्वाण्टमीकरण सूत्र \( q = ne \) का उपयोग करें, जहाँ \( q \) कुल आवेश है, \( n \) इलेक्ट्रॉनों की संख्या है, और \( e \) एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश (\( 1.6 \times 10^{-19} \text{C} \)) है।
प्रश्न 5. दो समान गोले जिन पर विपरीत तथा असमान आवेश है परस्पर 90 cm दूरी पर रखे हुए हैं। इनको परस्पर स्पर्श कराकर पुनः जब उतनी ही दूरी पर रख दिया जाता है तो वे परस्पर 0.025N बल से प्रतिकर्षित करने लगते हैं। दोनों का अन्तिम आवेश होगा
(अ) 1.5C
(ब) 1.5µc
(स) 3c
(द) 3µe
Answer: (अ) 1.5C
In simple words: जब दो आवेशित गोले एक-दूसरे को छूते हैं, तो उनका कुल आवेश उन दोनों गोलों पर समान रूप से बंट जाता है। यदि वे बाद में एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं, तो इसका मतलब है कि स्पर्श करने के बाद उन पर समान प्रकार का आवेश आ गया है। इस गणना से, हम ज्ञात बल से प्रत्येक गोले पर अंतिम आवेश का मान निकाल सकते हैं।
🎯 Exam Tip: जब दो समान चालक गोलों को स्पर्श कराया जाता है, तो कुल आवेश उनमें समान रूप से वितरित हो जाता है। कूलॉम के नियम \( F = k \frac { q^2 }{ r^2 } \) का उपयोग करके अंतिम आवेश ज्ञात किया जा सकता है।
प्रश्न 6. यदि दो आवेशों के मध्य काँच की प्लेट रख दी जाये तब उनके मध्य कार्यरत् विद्युत बल पूर्व की तुलना में हो जायेगा
(अ) अधिक
(ब) कम
(स) शून्य
(द) अनन्त।
Answer: (ब) कम
In simple words: जब दो आवेशों के बीच हवा या निर्वात की जगह कोई परावैद्युत माध्यम (जैसे काँच) रखा जाता है, तो उस माध्यम की उपस्थिति के कारण आवेशों के बीच लगने वाला विद्युत बल कम हो जाता है। काँच एक परावैद्युत माध्यम है।
🎯 Exam Tip: किसी माध्यम में विद्युत बल निर्वात में लगने वाले बल से \( \varepsilon_r \) गुना कम हो जाता है, जहाँ \( \varepsilon_r \) माध्यम का परावैद्युतांक है। \( F_{माध्यम} = \frac { F_{निर्वात} }{ \varepsilon_r } \)।
प्रश्न 8. एक इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटॉन समरूपी विद्युत क्षेत्र में स्थित हैं। उनके त्वरणों का अनुपात होगा
(अ) शून्य
(ब) \( m_p / m_e \)
(स) 1 (एक)
(द) \( m_e / m_p \)
Answer: (ब) \( m_p / m_e \)
In simple words: एकसमान विद्युत क्षेत्र में, इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन पर लगने वाला बल समान होता है क्योंकि उनके आवेश का परिमाण समान होता है। लेकिन चूंकि उनका द्रव्यमान अलग-अलग होता है, इसलिए न्यूटन के दूसरे नियम (\( F=ma \)) के अनुसार उनका त्वरण उनके द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होगा।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन पर आवेश का परिमाण समान होता है (\( e \)), लेकिन प्रोटॉन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान से काफी अधिक होता है। बल (\( F=qE \)) समान होगा, लेकिन त्वरण (\( a=F/m \)) द्रव्यमान पर निर्भर करेगा।
प्रश्न 9. किसी वर्ग के चारों कोनों पर समान परिमाण के सजातीय आवेश स्थित हैं। यदि किसी एक आवेश के कारण वर्ग के केन्द्र पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता E हो तो वर्ग के केन्द्र पर परिणामी विद्युत क्षेत्र की तीव्रता होगी
(अ) शुन्य
(ब) E
(स) E/4
(द) 4E
Answer: (अ) शुन्य
In simple words: अगर एक वर्ग के चारों कोनों पर एक जैसे आवेश रखे हों, तो वे सभी मिलकर केंद्र पर एक-दूसरे के विद्युत क्षेत्र को रद्द कर देंगे। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि केंद्र से प्रत्येक आवेश की दूरी समान होती है और विपरीत दिशाओं से आने वाले क्षेत्र एक-दूसरे को संतुलित कर देते हैं।
🎯 Exam Tip: सममित आकृतियों (जैसे वर्ग या समबाहु त्रिभुज) के केंद्र पर विद्युत क्षेत्र की गणना करते समय, विपरीत या संतुलित होने वाले घटकों पर ध्यान दें। सजातीय आवेशों की सममित व्यवस्था में, केंद्र पर शुद्ध विद्युत क्षेत्र अक्सर शून्य होता है।
प्रश्न 10. एक विद्युत द्विध्रुव को समरूप विद्युत क्षेत्र में रखने पर उस पर लगेगा
(अ) केवल बलाघूर्ण
(ब) केवल बल
(स) बल तथा बलाघूर्ण दोनों
(द) अनन्त।
Answer: (अ) केवल बलाघूर्ण
In simple words: जब एक विद्युत द्विध्रुव को एकसमान विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक बल युग्म (टॉर्क) लगता है जो उसे क्षेत्र की दिशा में संरेखित करने की कोशिश करता है। हालांकि, द्विध्रुव के धनात्मक और ऋणात्मक आवेशों पर लगने वाले बल बराबर और विपरीत होते हैं, इसलिए उन पर कुल बल शून्य होता है।
🎯 Exam Tip: एकसमान विद्युत क्षेत्र में द्विध्रुव पर कुल बल हमेशा शून्य होता है। यदि क्षेत्र एकसमान न हो, तो द्विध्रुव पर बल और बलाघूर्ण दोनों लग सकते हैं।
प्रश्न 12. एक इलेक्ट्रॉन व प्रोटॉन 1A दूरी पर स्थित हैं। निकाय का द्विध्रुव आघूर्ण हैं
(अ) \( 3.2 \times 10^{-29} \text{C-m} \)
(ब) \( 1.6 \times 10^{-19} \text{C-m} \)
(स) \( 1.6 \times 10^{-29} \text{C-m} \)
(द) \( 3.2 \times 10^{-19} \text{C-m}. \)
Answer: (स) \( 1.6 \times 10^{-29} \text{C-m} \)
In simple words: विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण यह बताता है कि एक धनात्मक और एक ऋणात्मक आवेश कितनी दूरी पर रखे हैं। इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन के आवेश का मान समान होता है, और उनकी दूरी दी गई है, तो हम इस सूत्र का उपयोग करके द्विध्रुव आघूर्ण की गणना कर सकते हैं।
🎯 Exam Tip: विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण (\( p \)) का सूत्र \( p = q \times 2l \) है, जहाँ \( q \) आवेश का परिमाण है और \( 2l \) आवेशों के बीच की दूरी है। 1 Å (एंगस्ट्रॉम) \( = 10^{-10} \) मीटर होता है।
प्रश्न 13. एक विद्युत द्विध्रुव के कारण अनुदैर्ध्य तथा अनुप्रस्थ स्थिति में समान दूरी पर स्थित प्रेक्षण बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रताओं का अनुपात होगा
(अ) 1:2
(ब) 2:1
(स) 1:4
(द) 4:1
Answer: (ब) 2:1
In simple words: एक विद्युत द्विध्रुव के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता, अक्षीय स्थिति (अनुदैर्ध्य) में निरक्षीय स्थिति (अनुप्रस्थ) की तुलना में दोगुना होती है, यदि प्रेक्षण बिंदु समान दूरी पर हो। यह एक महत्वपूर्ण संबंध है जो द्विध्रुवीय व्यवहार को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: अक्षीय स्थिति में विद्युत क्षेत्र \( E_{अक्ष} = \frac { 2kp }{ r^3 } \) और निरक्षीय स्थिति में \( E_{निरक्ष} = \frac { kp }{ r^3 } \) होता है। इन दोनों का अनुपात \( E_{अक्ष} : E_{निरक्ष} = 2:1 \) होता है।
प्रश्न 14. कुछ दूरी पर स्थित + 5µC तथा – 5µC आवेशों के मध्य 9N का आकर्षण बल कार्यशील हैं। इन आवेशों के परस्पर स्पर्श कराकर पुनः उतनी ही दूरी पर रखने पर उनके मध्य कार्यशील बल हो जायेगा-
(अ) अनन्त
(ब) \( 9 \times 10^0 \text{N} \)
(स) 1N
(द) शून्य।
Answer: (द) शून्य।
In simple words: जब +5µC और -5µC के आवेशों को एक-दूसरे से स्पर्श कराया जाता है, तो वे एक-दूसरे के आवेश को रद्द कर देते हैं। इसका मतलब है कि स्पर्श करने के बाद उन पर कुल आवेश शून्य हो जाएगा। जब आवेश शून्य हो जाता है, तो उनके बीच कोई विद्युत बल नहीं लगेगा।
🎯 Exam Tip: आवेशों के स्पर्श कराने पर उनका कुल आवेश वितरित हो जाता है। यदि आवेश बराबर और विपरीत हों, तो कुल आवेश शून्य हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप उनके बीच कोई बल कार्य नहीं करेगा।
प्रश्न 15. दो परिमाण में समान विजातीय आवेश परस्पर कुछ दूरी पर रखे हैं। उनके मध्य F न्यूटन बल कार्यरत् है। यदि एक आवेश का 75% दूसरे आवेश को स्थानान्तरित कर दिया जाये तब उनके मध्य बल पूर्व मान का कितना गुना हो जायेगा ?
(अ) \( \frac { F }{ 16 } \)
(ब) \( \frac { 7F }{ 16 } \)
(स) \( \frac { 9F }{ 16 } \)
(द) \( \frac { 15 }{ 16 } F. \)
Answer: (द) \( \frac { 15 }{ 16 } F. \)
In simple words: शुरू में, दो आवेशों के बीच एक निश्चित बल लग रहा होता है। जब एक आवेश का कुछ हिस्सा दूसरे आवेश पर चला जाता है, तो दोनों आवेशों का परिमाण बदल जाता है। यह बदलाव कूलॉम के नियम के अनुसार बल को भी बदल देगा, और हम नए बल का अनुपात पुराने बल से निकाल सकते हैं।
🎯 Exam Tip: आवेश स्थानांतरण के बाद, नए आवेशों \( q'_1 \) और \( q'_2 \) की गणना करें, फिर कूलॉम के नियम का उपयोग करके नए बल \( F' \) को ज्ञात करें और उसका मूल बल \( F \) से अनुपात निकालें।
RBSE Class 12 Physics Chapter 1 अति लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. एक क्वाण्टम आवेश का मान लिखिए।
Answer: एक क्वाण्टम आवेश का मान \( 1.6 \times 10^{-19} \text{C} \) होता है। यह आवेश की सबसे छोटी संभव इकाई है जो मुक्त रूप से मौजूद हो सकती है।
In simple words: सबसे छोटा आवेश जो किसी कण पर हो सकता है, वह \( 1.6 \times 10^{-19} \text{C} \) है।
🎯 Exam Tip: यह मान एक इलेक्ट्रॉन या प्रोटॉन के आवेश का परिमाण है और इसे 'प्राथमिक आवेश' भी कहते हैं।
प्रश्न 2. दूरी पर स्थित दो प्रोटॉनों के मध्य स्थिर विद्युत बल F है। प्रोटॉनों को हटाकर इलेक्ट्रॉन रख दें तो अब विद्युत बल कितना होगा ?
Answer: चूंकि प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन पर आवेश का परिमाण समान होता है (केवल प्रकृति विपरीत होती है), इसलिए यदि समान दूरी पर दो इलेक्ट्रॉनों को रखा जाए, तो उनके मध्य लगने वाला विद्युत बल का परिमाण भी F ही रहेगा। केवल बल की प्रकृति प्रतिकर्षण से आकर्षण में बदल जाएगी, क्योंकि अब दोनों इलेक्ट्रॉन हैं।
In simple words: प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन पर आवेश का मान एक बराबर होता है। इसलिए, यदि दूरी समान रखी जाए, तो बल का परिमाण F ही रहेगा, बस वह प्रतिकर्षण की जगह आकर्षण बल होगा।
🎯 Exam Tip: आवेश का परिमाण बल की शक्ति को निर्धारित करता है, जबकि आवेश की प्रकृति (धनात्मक या ऋणात्मक) बल की दिशा (आकर्षण या प्रतिकर्षण) को निर्धारित करती है।
प्रश्न 3. एक आवेश के द्वारा दूसरे आवेश पर लगने वाला विद्युत बल F है। एक अन्य आवेश की उपस्थिति में प्रथम आवेश के द्वारा दूसरे आवेश पर कितना विद्युत बल होगा ?
Answer: अन्य आवेश की उपस्थिति में विद्युत बल पर कोई प्रभाव नहीं होगा। कूलॉम के नियम के अनुसार, दो आवेशों के बीच का बल तीसरे आवेश की उपस्थिति से प्रभावित नहीं होता है। अतः विद्युत बल F ही रहेगा।
In simple words: दो आवेशों के बीच का बल केवल उन्हीं दो आवेशों पर निर्भर करता है, तीसरे आवेश के होने या न होने से इस बल पर कोई फर्क नहीं पड़ता।
🎯 Exam Tip: यह बलों के अध्यारोपण के सिद्धांत का आधार है, जिसमें कहा गया है कि किसी बिंदु आवेश पर कुल बल उसके चारों ओर के अन्य आवेशों के कारण लगने वाले अलग-अलग बलों का सदिश योग होता है।
प्रश्न 4. यदि किसी माध्यम का परावैद्युतांक एक हो तो उसकी निरपेक्ष विद्युत्शीलता कितनी होगी ?
Answer: यदि किसी माध्यम का परावैद्युतांक (relative permittivity) एक हो, तो उसकी निरपेक्ष विद्युत्शीलता (absolute permittivity) निर्वात की विद्युत्शीलता (\( \varepsilon_0 \)) के बराबर होगी। परावैद्युतांक एक ऐसी संख्या है जो बताती है कि कोई माध्यम विद्युत क्षेत्र को कितना प्रभावित करता है।
In simple words: अगर किसी चीज़ का परावैद्युतांक 1 है, तो उसकी विद्युत्शीलता उतनी ही होगी जितनी खाली जगह (निर्वात) की होती है।
🎯 Exam Tip: निरपेक्ष विद्युत्शीलता \( \varepsilon = \varepsilon_r \varepsilon_0 \) होती है, जहाँ \( \varepsilon_r \) परावैद्युतांक है। यदि \( \varepsilon_r = 1 \), तो \( \varepsilon = \varepsilon_0 \) होगा, जो निर्वात की विद्युत्शीलता है।
प्रश्न 5. दो बिन्दु आवेशों \( q_1 \) तथा \( q_2 \) के लिए \( q_1 q_2 < 0 \) है। दोनों आवेशों के मध्य बल की प्रकृति क्या होगी ?
Answer: यदि \( q_1 q_2 < 0 \) है, तो इसका अर्थ है कि \( q_1 \) और \( q_2 \) विपरीत प्रकृति के आवेश हैं; अर्थात, एक धनावेशित होगा और दूसरा ऋणावेशित होगा। इस स्थिति में, दोनों आवेशों के मध्य आकर्षण बल लगेगा।
In simple words: अगर दो आवेशों को गुणा करने पर जवाब ऋणात्मक आता है, तो इसका मतलब है कि वे एक-दूसरे को खींचेंगे (आकर्षण करेंगे)।
🎯 Exam Tip: विपरीत प्रकृति के आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं, जबकि समान प्रकृति के आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं। यह विद्युत बलों का एक मौलिक सिद्धांत है।
प्रश्न 6. दो बिन्दु आवेशों \( q_1 \) तथा \( q_2 \) के लिए \( q_1 q_2 > 0 \) हैं दोनों आवेशों के मध्य बल की प्रकृति क्या होगी ?
Answer: यदि \( q_1 q_2 > 0 \) है, तो इसका अर्थ है कि \( q_1 \) और \( q_2 \) समान प्रकृति के आवेश हैं। या तो दोनों धनात्मक हैं या दोनों ऋणात्मक हैं। इस स्थिति में, दोनों आवेशों के मध्य प्रतिकर्षण का बल लगेगा।
In simple words: अगर दो आवेशों को गुणा करने पर जवाब धनात्मक आता है, तो इसका मतलब है कि वे एक-दूसरे को दूर धकेलेंगे (प्रतिकर्षण करेंगे)।
🎯 Exam Tip: समान प्रकृति के आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं, जबकि विपरीत प्रकृति के आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। यह कूलॉम के नियम का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष है।
प्रश्न 7. विद्युत क्षेत्र E में रखे \( q \) आवेश पर कार्यरत् बल कितना होता है ?
Answer: विद्युत क्षेत्र E में रखे \( q \) आवेश पर कार्यरत् बल \( \overrightarrow{F} = q\overrightarrow{E} \) होता है। बल की दिशा विद्युत क्षेत्र की दिशा में होती है यदि आवेश धनात्मक हो, और विपरीत दिशा में यदि आवेश ऋणात्मक हो।
In simple words: अगर किसी आवेश \( q \) को विद्युत क्षेत्र \( E \) में रखा जाए, तो उस पर लगने वाला बल \( q \) गुणा \( E \) के बराबर होता है।
🎯 Exam Tip: यह सूत्र विद्युत क्षेत्र की परिभाषा से आता है: \( \overrightarrow{E} = \frac { \overrightarrow{F} }{ q } \)। बल एक सदिश राशि है, इसलिए इसकी दिशा और परिमाण दोनों होते हैं।
प्रश्न 8. किसी आवेशित कण के द्रव्यमान और आवेश पर चाल (speed) का क्या प्रभाव पड़ता है ?
Answer: यदि आवेशित कण की चाल (speed) प्रकाश की चाल \( c \) के बराबर या उसके करीब हो, तो उसके द्रव्यमान में वृद्धि होती है। यह आपेक्षिकता के सिद्धांत के अनुसार होता है। हालांकि, कण का आवेश उसकी चाल से प्रभावित नहीं होता है; आवेश हमेशा नियत रहता है।
In simple words: जब कोई आवेशित कण बहुत तेज़ चलता है (प्रकाश की गति के पास), तो उसका वजन बढ़ जाता है, लेकिन उसका आवेश वही रहता है।
🎯 Exam Tip: द्रव्यमान का चाल पर निर्भरता आपेक्षिकता के सिद्धांत का एक महत्वपूर्ण परिणाम है, जबकि आवेश का क्वाण्टमीकरण एक मौलिक गुण है जो चाल पर निर्भर नहीं करता।
प्रश्न 9. उस विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का परिमाण कितना होगा जो एक इलेक्ट्रॉन के भार को सन्तुलित रखेगा। दिया है : \( e = 1.6 \times 10^{-19} \text{C} \) तथा \( m_e = 9.1 \times 10^{-31} \text{kg}. \)
Answer: एक इलेक्ट्रॉन के भार को संतुलित करने के लिए, उस पर लगने वाला विद्युत बल उसके भार के बराबर और विपरीत दिशा में होना चाहिए। इलेक्ट्रॉन का भार \( m_e g \) होता है। यदि विद्युत क्षेत्र की तीव्रता \( E \) हो, तो इलेक्ट्रॉन पर लगने वाला बल \( eE \) होगा।
संतुलन के लिए: \( eE = m_e g \)
\( \implies E = \frac { m_e g }{ e } \)
\( E = \frac { (9.1 \times 10^{-31} \text{ kg}) \times (9.8 \text{ m/s}^2) }{ 1.6 \times 10^{-19} \text{ C} } \)
\( E \approx 5.57 \times 10^{-11} \text{ N/C} \)
यह विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का परिमाण है।
In simple words: हमें इतना विद्युत क्षेत्र चाहिए जो इलेक्ट्रॉन को नीचे गिरने से रोक सके। इसके लिए, विद्युत क्षेत्र द्वारा लगाए गए बल को इलेक्ट्रॉन के वजन के बराबर होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: संतुलन की स्थिति में, ऊपर की ओर लगने वाला बल नीचे की ओर लगने वाले बल के बराबर होता है। यहाँ, विद्युत बल (\( eE \)) गुरुत्वाकर्षण बल (\( m_e g \)) को संतुलित करता है।
प्रश्न 10. यदि आवेशों के मध्य बल लग रहा है। यदि इन आवेशों के मध्य पीतल की प्लेट रख दी जाए तब बल का मान
Answer: यदि आवेशों के मध्य पीतल की प्लेट रख दी जाए, तो उनके मध्य लगने वाला बल शून्य हो जाएगा। पीतल एक चालक (conductor) है। जब आवेशों के बीच एक चालक रखा जाता है, तो चालक के अंदर विद्युत क्षेत्र शून्य हो जाता है, जिससे आवेशों के बीच कोई बल नहीं लगता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं जो विद्युत क्षेत्र को रद्द कर देते हैं।
In simple words: अगर दो आवेशों के बीच पीतल की पट्टी रख दी जाए, तो उनके बीच का बल एकदम खत्म हो जाएगा, क्योंकि पीतल बिजली का अच्छा चालक है और वह विद्युत क्षेत्र को खत्म कर देता है।
🎯 Exam Tip: किसी भी चालक के अंदर स्थिर विद्युत क्षेत्र हमेशा शून्य होता है। यह विद्युत चुंबकत्व का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है और गॉस के नियम से समझाया जा सकता है।
प्रश्न 11. उस प्रयोग का नाम लिखिए जिससे विद्युत आवेश की क्वाण्टम प्रकृति की स्थापना हुई।
Answer: विद्युत आवेश की क्वाण्टम प्रकृति की स्थापना मिलिकन तेल बूंद प्रयोग (Millikan Oil Drop Experiment) द्वारा हुई थी। इस प्रयोग ने यह दिखाया कि आवेश असतत (discreet) होता है और हमेशा एक मौलिक इकाई \( e \) के पूर्णांक गुणज के रूप में पाया जाता है।
In simple words: जिस प्रयोग से यह पता चला कि आवेश हमेशा छोटे-छोटे पैकेटों (क्वांटा) में होता है, उसे मिलिकन तेल बूंद प्रयोग कहते हैं।
🎯 Exam Tip: मिलिकन का तेल बूंद प्रयोग (1909) न केवल आवेश के क्वाण्टमीकरण को सिद्ध करता है, बल्कि इलेक्ट्रॉन के आवेश का मान भी सटीक रूप से निर्धारित करता है।
प्रश्न 12. विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण की परिभाषा दीजिए।
Answer: विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण को एक विद्युत द्विध्रुव के किसी एक आवेश के परिमाण (magnitude) और दोनों आवेशों के बीच की विस्थापन दूरी के गुणनफल के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह एक सदिश राशि है जिसकी दिशा ऋणात्मक आवेश से धनात्मक आवेश की ओर होती है। यह द्विध्रुव की शक्ति और संरेखण को दर्शाता है।
In simple words: विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण यह बताता है कि एक धनात्मक और एक ऋणात्मक आवेश कितनी दूरी पर रखे हैं और उनकी शक्ति कितनी है।
🎯 Exam Tip: विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण (\( p \)) का सूत्र \( p = q \times 2l \) है, जहाँ \( q \) आवेश का परिमाण है और \( 2l \) आवेशों के बीच की दूरी है। इसकी SI इकाई कूलॉम-मीटर (C-m) है।
प्रश्न 13. आदर्श विद्युत द्विध्रुव की शर्त लिखिए।
Answer: एक आदर्श विद्युत द्विध्रुव की शर्त यह है कि आवेशों का परिमाण बहुत अधिक (अनंत की ओर अग्रसर) हो और उनके बीच की दूरी बहुत कम (शून्य की ओर अग्रसर) हो। साथ ही, आवेश और दूरी का गुणनफल (द्विध्रुव आघूर्ण) एक निश्चित, गैर-शून्य मान बना रहे।
In simple words: एक बेहतरीन विद्युत द्विध्रुव तब बनता है जब उसके आवेश बहुत बड़े हों और वे एक-दूसरे के बहुत पास हों।
🎯 Exam Tip: आदर्श द्विध्रुव एक सैद्धांतिक अवधारणा है जो छोटे द्विध्रुवों के व्यवहार को समझने में मदद करती है, खासकर जब प्रेक्षण बिंदु द्विध्रुव से बहुत दूर हो।
प्रश्न 14. ऐसे कण का उदाहरण दीजिए जिसका विराम द्रव्यमान शून्य होता है तथा अनावेशित होता है।
Answer: फोटॉन एक ऐसा कण है जिसका विराम द्रव्यमान शून्य होता है और यह अनावेशित (उदासीन) होता है। फोटॉन प्रकाश का मूल कण है और हमेशा प्रकाश की गति से चलता है। फोटॉन विद्युत चुम्बकीय बल का वाहक भी है।
In simple words: फोटॉन एक ऐसा कण है जिसका वजन तब कुछ नहीं होता जब वह स्थिर हो, और उस पर कोई आवेश भी नहीं होता।
🎯 Exam Tip: न्यूट्रिनो भी अनावेशित होते हैं और उनका द्रव्यमान बहुत कम होता है, लेकिन उनका विराम द्रव्यमान शून्य नहीं होता है। फोटॉन एक अद्वितीय कण है जिसकी कोई विराम ऊर्जा नहीं होती।
प्रश्न 15. नियतांक \( k=\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \) का मान किन कारकों पर निर्भर करता है ?
Answer: नियतांक \( k=\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \) का मान माध्यम की प्रकृति और मापन की पद्धति पर निर्भर करता है। निर्वात के लिए, \( k \) का मान \( 9 \times 10^9 \text{ N m}^2/\text{C}^2 \) होता है, लेकिन किसी अन्य माध्यम में इसका मान बदल जाता है क्योंकि \( \varepsilon_0 \) की जगह माध्यम की निरपेक्ष विद्युत्शीलता \( \varepsilon \) आ जाती है।
In simple words: \( k \) का मान इस बात पर निर्भर करता है कि आवेशों के बीच कौन सी चीज़ रखी है (माध्यम) और आप किस इकाई प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं।
🎯 Exam Tip: \( \varepsilon_0 \) निर्वात की विद्युत्शीलता है, लेकिन किसी अन्य माध्यम में \( \varepsilon = \varepsilon_r \varepsilon_0 \) का उपयोग किया जाता है। इसलिए, माध्यम बदलने पर \( k \) का प्रभावी मान भी बदल जाता है।
प्रश्न 16. \( _{7} \mathrm{N}^{14} \) नाभिक पर आवेश का मान कूलॉम में लिखिए।
Answer: नाइट्रोजन \( _{7} \mathrm{N}^{14} \) नाभिक में 7 प्रोटॉन होते हैं। एक प्रोटॉन पर आवेश \( +1.6 \times 10^{-19} \text{C} \) होता है। इसलिए, नाइट्रोजन नाभिक पर कुल आवेश \( 7 \times (1.6 \times 10^{-19} \text{C}) = 11.2 \times 10^{-19} \text{C} \) होगा।
In simple words: नाइट्रोजन के नाभिक में 7 प्रोटॉन होते हैं, और हर प्रोटॉन पर एक निश्चित आवेश होता है। तो, कुल आवेश पता करने के लिए प्रोटॉन की संख्या को एक प्रोटॉन के आवेश से गुणा करना होगा।
🎯 Exam Tip: नाभिक पर आवेश की गणना केवल प्रोटॉनों की संख्या (परमाणु क्रमांक Z) से की जाती है, क्योंकि न्यूट्रॉन अनावेशित होते हैं।
प्रश्न 18. आवेश के CGS तथा SI मात्रकों के नाम लिखिए। इनके मध्य क्या सम्बन्ध है ?
Answer: आवेश का CGS मात्रक ए.एस.यू. (esu) या स्टेट कूलॉम (statcoulomb) है, और SI मात्रक कूलॉम (C) है। उनके बीच का संबंध है: 1 कूलॉम \( = 3 \times 10^9 \) esu. यह संबंध विभिन्न प्रणालियों में आवेश के परिमाण को जोड़ने में मदद करता है।
In simple words: आवेश को नापने के दो तरीके हैं: CGS सिस्टम में इसे esu कहते हैं और SI सिस्टम में इसे कूलॉम कहते हैं। एक कूलॉम तीन अरब esu के बराबर होता है।
🎯 Exam Tip: आवेश की इकाईयाँ और उनके बीच के रूपांतरण कारक याद रखना भौतिकी के प्रश्नों को हल करने में महत्वपूर्ण है। SI इकाई कूलॉम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है।
प्रश्न 19. एक समान विद्युत क्षेत्र में विद्युत द्विध्रुव कब स्थायी साम्यावस्था में होता है ?
Answer: एक समान विद्युत क्षेत्र में विद्युत द्विध्रुव स्थायी साम्यावस्था (stable equilibrium) में तब होता है जब उसका द्विध्रुव आघूर्ण (\( \vec{p} \)) विद्युत क्षेत्र (\( \vec{E} \)) के समांतर हो। इस स्थिति में, द्विध्रुव पर लगने वाला बलाघूर्ण शून्य होता है और उसकी स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम होती है।
In simple words: एक विद्युत द्विध्रुव तब स्थिर होता है जब वह विद्युत क्षेत्र की दिशा में सीधा खड़ा हो, जैसे एक चुंबक चुंबकीय क्षेत्र में खुद को संरेखित करता है।
🎯 Exam Tip: स्थायी साम्यावस्था के लिए कोण \( \theta = 0^\circ \) होता है, जिसका अर्थ है कि \( \vec{p} \) और \( \vec{E} \) की दिशा समान होती है। इस स्थिति में बलाघूर्ण \( \tau = pE \sin 0^\circ = 0 \) होता है।
प्रश्न 20. एक समान विद्युत क्षेत्र में विद्युत द्विध्रुव पर परिणामी बल कितना होता है ?
Answer: एक समान विद्युत क्षेत्र में विद्युत द्विध्रुव पर परिणामी बल हमेशा शून्य होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि द्विध्रुव के धनात्मक आवेश पर लगने वाला बल (\( q\vec{E} \)) और ऋणात्मक आवेश पर लगने वाला बल (\( -q\vec{E} \)) परिमाण में बराबर और दिशा में विपरीत होते हैं, जिससे वे एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं।
In simple words: यदि विद्युत क्षेत्र हर जगह एक जैसा हो, तो एक विद्युत द्विध्रुव पर कुल बल हमेशा शून्य होता है।
🎯 Exam Tip: यह महत्वपूर्ण है कि बल 'शून्य' होता है, लेकिन बलाघूर्ण 'शून्य' नहीं होता जब तक कि द्विध्रुव क्षेत्र के समानांतर न हो। बलाघूर्ण इसे संरेखित करने का प्रयास करता है।
RBSE Class 12 Physics Chapter 1 लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. घर्षण विद्युत से क्या तात्पर्य है ? इसकी उत्पत्ति की व्याख्या कीजिए।
Answer: घर्षण विद्युत से तात्पर्य उस विद्युत् से है जो दो उचित पदार्थों को आपस में रगड़ने से उत्पन्न होती है। जब दो उपयुक्त पदार्थों को एक-दूसरे से रगड़ा जाता है, तो एक पदार्थ से इलेक्ट्रॉन दूसरे पदार्थ में स्थानांतरित हो जाते हैं। जिस पदार्थ से इलेक्ट्रॉन निकलते हैं, वह धनावेशित हो जाता है, और जो पदार्थ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, वह ऋणावेशित हो जाता है। आवेश के इस स्थानांतरण के कारण ही घर्षण विद्युत उत्पन्न होती है। ऐसा अक्सर तब होता है जब दोनों पदार्थों के इलेक्ट्रॉनों के बंधन ऊर्जा में अंतर होता है।
In simple words: घर्षण विद्युत तब बनती है जब दो चीज़ों को आपस में रगड़ते हैं, जिससे एक चीज़ से इलेक्ट्रॉन निकलकर दूसरी चीज़ में चले जाते हैं। एक चीज़ पर धनात्मक और दूसरी पर ऋणात्मक आवेश आ जाता है।
🎯 Exam Tip: घर्षण विद्युत में आवेश का स्थानांतरण होता है, न कि उत्पादन या विनाश। आवेश संरक्षण का नियम यहाँ भी लागू होता है।
प्रश्न 2. दो स्थिर बिन्दु आवेशों के मध्य लगने वाले बल के लिए कूलॉम के नियम का कथन लिखिए।
Answer: कूलॉम का नियम कहता है कि दो स्थिर बिन्दु आवेशों के मध्य कार्य करने वाला आकर्षण या प्रतिकर्षण बल दोनों आवेशों के परिमाणों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती होता है और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह बल दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश कार्य करता है। गणितीय रूप से इसे \( F = k \frac { q_1 q_2 }{ r^2 } \) से व्यक्त किया जाता है, जहाँ \( k \) एक आनुपातिकता स्थिरांक है।
In simple words: कूलॉम का नियम बताता है कि दो आवेश कितने बल से एक-दूसरे को खींचते या धकेलते हैं। यह बल आवेशों की मात्रा पर निर्भर करता है और उनके बीच की दूरी के वर्ग के उल्टा चलता है।
🎯 Exam Tip: कूलॉम का नियम केवल स्थिर बिंदु आवेशों के लिए मान्य है और गुरुत्वाकर्षण नियम के समान व्युत्क्रम वर्ग नियम का पालन करता है।
प्रश्न 4. बलों के लिए अध्यारोपण का सिद्धान्त लिखिए।
Answer: बलों के अध्यारोपण का सिद्धांत कहता है कि जब कई आवेश किसी एक आवेश पर बल लगाते हैं, तो उस विशेष आवेश पर लगने वाला कुल परिणामी बल उन सभी अलग-अलग बलों का सदिश योग होता है जो प्रत्येक अन्य आवेश अकेले उस पर लगाते हैं। इस सिद्धांत का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि किसी एक आवेश द्वारा दूसरे पर लगाया गया विशिष्ट बल किसी भी अन्य आवेश की उपस्थिति से प्रभावित नहीं होता है।
In simple words: जब किसी एक आवेश पर बहुत सारे आवेश बल लगाते हैं, तो उस आवेश पर कुल बल उन सभी अलग-अलग बलों को जोड़ने से मिलता है। एक बल दूसरे बल को प्रभावित नहीं करता।
🎯 Exam Tip: अध्यारोपण का सिद्धांत विद्युत क्षेत्र, विद्युत विभव और अन्य रैखिक प्रभावों के लिए भी लागू होता है, जिससे जटिल आवेश विन्यासों का विश्लेषण सरल हो जाता है।
प्रश्न 5. दो बिन्दु आवेशों के मध्य उन्हें मिलाने वाली रेखा के किसी बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता शुन्य है। इससे आप आवेशों के बारे में क्या निष्कर्ष निकाल सकते हो ?
Answer: यदि दो बिन्दु आवेशों को मिलाने वाली रेखा पर किसी बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता शून्य है, तो इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि दोनों आवेश सजातीय (समान प्रकृति के) हैं। अगर वे विजातीय होते, तो शून्य क्षेत्र वाला बिंदु आवेशों के बीच की रेखा पर नहीं, बल्कि रेखा पर बाहर की ओर होता। यदि शून्य क्षेत्र आवेशों के बीच में है, तो बल एक-दूसरे को रद्द कर रहे होंगे।
In simple words: अगर दो आवेशों के बीच की रेखा पर कहीं भी विद्युत क्षेत्र शून्य है, तो इसका मतलब है कि दोनों आवेश एक ही तरह के हैं (दोनों धनात्मक या दोनों ऋणात्मक)।
🎯 Exam Tip: यदि शून्य क्षेत्र आवेशों के बीच स्थित है, तो दोनों आवेश समान प्रकृति के होने चाहिए। यदि शून्य क्षेत्र आवेशों को जोड़ने वाली रेखा के बाहर स्थित है, तो आवेश विपरीत प्रकृति के होंगे।
प्रश्न 6. एक इकाई ऋण आवेशित आयन तथा एक इलेक्ट्रॉन विद्युत क्षेत्र E के प्रभाव में गतिमान हैं। इन दोनों में से कौन-सा कण तीव्र गति से चलेगा और क्यों ?
Answer: इलेक्ट्रॉन तीव्र गति से चलेगा क्योंकि इसका द्रव्यमान इकाई ऋण आवेशित आयन की अपेक्षा बहुत कम होता है। विद्युत क्षेत्र में, दोनों कणों पर बल का परिमाण समान होगा क्योंकि उनका आवेश समान है। न्यूटन के गति के दूसरे नियम (\( F=ma \)) के अनुसार, जिसका द्रव्यमान कम होता है, उसका त्वरण अधिक होता है। इसलिए, इलेक्ट्रॉन, जिसका द्रव्यमान आयन से काफी कम है, अधिक त्वरण के साथ तीव्र गति प्राप्त करेगा।
In simple words: इलेक्ट्रॉन तेज़ी से चलेगा क्योंकि उसका वजन बहुत हल्का होता है। विद्युत क्षेत्र दोनों पर बराबर बल लगाएगा, लेकिन हल्का होने के कारण इलेक्ट्रॉन ज़्यादा तेज़ी से भागेगा।
🎯 Exam Tip: त्वरण द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है। एक इकाई ऋण आवेशित आयन में एक या अधिक परमाणु होते हैं, जिससे इसका द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन की तुलना में बहुत अधिक होता है।
प्रश्न 7. विद्युत क्षेत्र रेखा किसे कहते हैं ? इनके दो गुण लिखिए।
Answer: विद्युत क्षेत्र रेखा एक काल्पनिक वक्र या सीधी रेखा होती है, जिस पर स्वतंत्रतापूर्वक छोड़ा गया एक धन परीक्षण आवेश गति करता है। यह रेखा विद्युत क्षेत्र की दिशा और तीव्रता का प्रतिनिधित्व करती है। विद्युत क्षेत्र रेखाओं के दो गुण निम्नलिखित हैं:
1. विद्युत क्षेत्र रेखाएं धनात्मक आवेश से शुरू होकर ऋणात्मक आवेश पर समाप्त होती हैं या अनंत तक जाती हैं।
2. कोई भी दो विद्युत क्षेत्र रेखाएं एक-दूसरे को कभी नहीं काटती हैं। यदि वे काटतीं, तो कटान बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की दो दिशाएं होतीं, जो संभव नहीं है।
In simple words: विद्युत क्षेत्र रेखाएं वे रास्ते हैं जिन पर एक छोटा सा धनात्मक आवेश चलता है। ये रेखाएं धनात्मक से निकलकर ऋणात्मक आवेश पर खत्म होती हैं और कभी एक-दूसरे को काटती नहीं हैं।
🎯 Exam Tip: विद्युत क्षेत्र रेखाओं की सघनता क्षेत्र की तीव्रता को दर्शाती है - जहाँ रेखाएं अधिक पास होती हैं, वहाँ क्षेत्र अधिक तीव्र होता है।
प्रश्न 9. माध्यम के लिए आपेक्षिक विद्युत्शीलता की परिभाषा दीजिए।
Answer: माध्यम के लिए आपेक्षिक विद्युत्शीलता (\( \varepsilon_r \)) को निर्वात की विद्युत्शीलता (\( \varepsilon_0 \)) और किसी माध्यम की निरपेक्ष विद्युत्शीलता (\( \varepsilon \)) के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसे माध्यम का परावैद्युतांक (dielectric constant) भी कहते हैं। यह दर्शाता है कि कोई माध्यम निर्वात की तुलना में विद्युत क्षेत्र को कितना कम कर देता है।
\( \varepsilon_r = K = \frac { \varepsilon }{ \varepsilon_0 } \)
In simple words: आपेक्षिक विद्युत्शीलता बताती है कि कोई माध्यम बिजली के असर को खाली जगह (निर्वात) के मुकाबले कितना कम कर देता है।
🎯 Exam Tip: आपेक्षिक विद्युत्शीलता एक विमाहीन राशि है और इसका मान हमेशा 1 या 1 से अधिक होता है। निर्वात के लिए इसका मान 1 होता है।
प्रश्न 10. किसी धात्विक गोले को बिना स्पर्श किए आप किस प्रकार धनावेशित कर सकते हैं ?
Answer: किसी धात्विक गोले को बिना स्पर्श किए धनावेशित करने की प्रक्रिया को प्रेरण (induction) द्वारा आवेशण कहते हैं, जो निम्न चरणों में किया जाता है:
1. पहले एक अनावेशित धात्विक गोला लेते हैं।
2. फिर गोले के निकट एक ऋणावेशित छड़ को लाते हैं, लेकिन उसे स्पर्श नहीं कराते। ऋणावेशित छड़ गोले के मुक्त इलेक्ट्रॉनों को दूर धकेल देती है, जिससे छड़ के पास का सिरा धनावेशित और दूर का सिरा ऋणावेशित हो जाता है।
3. इसके बाद, गोले के ऋणावेशित सिरे को भूसंपर्कित (grounded) किया जाता है। ऐसा करने से अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन पृथ्वी में चले जाते हैं।
4. फिर भूसंपर्कण कनेक्शन को हटा दिया जाता है, जबकि ऋणावेशित छड़ अभी भी निकट रहती है।
5. अंत में, ऋणावेशित छड़ को हटा दिया जाता है। अब, गोले पर शेष धनावेश एकसमान रूप से फैल जाता है, और गोला धनावेशित हो जाता है।
In simple words: बिना छुए एक धातु के गोले को धनात्मक आवेश देने के लिए, पहले एक ऋणात्मक छड़ को पास लाओ, फिर गोले को ज़मीन से जोड़ो ताकि ऋणात्मक आवेश ज़मीन में चला जाए। फिर ज़मीन का कनेक्शन हटा दो और छड़ को भी हटा दो, गोला धनात्मक हो जाएगा।
🎯 Exam Tip: प्रेरण द्वारा आवेशण में, प्रेरित आवेश हमेशा प्रेरित करने वाले आवेश के विपरीत प्रकृति का होता है। यह आवेश संरक्षण के सिद्धांत का एक अच्छा उदाहरण भी है।
प्रश्न 11. आप किस प्रकार प्रदर्शित करेंगे कि आवेश दो प्रकार के होते हैं ?
Answer: आवेश दो प्रकार के होते हैं, यह दर्शाने के लिए हम निम्नलिखित प्रयोग कर सकते हैं:
1. जब दो काँच की छड़ों को रेशम के कपड़े से रगड़कर पास-पास लाया जाता है, तो वे एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करती हैं। इससे पता चलता है कि उन पर समान प्रकार का आवेश आया है।
2. इसी तरह, जब दो आबनूस की छड़ों को बिल्ली की खाल से रगड़कर पास-पास लाया जाता है, तो वे भी एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करती हैं। यह भी समान आवेश को इंगित करता है।
3. अब, एक काँच की छड़ (जिसे रेशम से रगड़ा गया हो) और एक आबनूस की छड़ (जिसे बिल्ली की खाल से रगड़ा गया हो) को पास-पास लाया जाता है, तो वे एक-दूसरे को आकर्षित करती हैं।
यह प्रयोग स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि काँच की छड़ और आबनूस की छड़ पर अलग-अलग प्रकार के आवेश हैं। पारंपरिक रूप से, काँच की छड़ पर उत्पन्न आवेश को धनावेश (या विट्रियस) और आबनूस की छड़ पर उत्पन्न आवेश को ऋणावेश (या रेजिनस) कहा जाता है।
In simple words: हम यह दिखा सकते हैं कि आवेश दो तरह के होते हैं। जब एक जैसी रगड़ी हुई चीज़ों को पास लाते हैं, तो वे दूर धकेलती हैं। लेकिन जब अलग-अलग रगड़ी हुई चीज़ों को पास लाते हैं, तो वे एक-दूसरे को खींचती हैं। इससे पता चलता है कि आवेश दो तरह के होते हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रयोग में, रेशम से रगड़ने पर काँच की छड़ से इलेक्ट्रॉन निकल जाते हैं (यह धनावेशित हो जाती है), जबकि बिल्ली की खाल से रगड़ने पर आबनूस की छड़ इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर लेती है (यह ऋणावेशित हो जाती है)।
प्रश्न 12. आवेशों के सन्दर्भ में \( q_1 + q_2 = 0 \) क्या सूचित करता है ?
Answer: आवेशों के सन्दर्भ में \( q_1 + q_2 = 0 \) यह सूचित करता है कि दोनों आवेशों का परिमाण (magnitude) बराबर है और उनकी प्रकृति विपरीत है। इसका मतलब है कि एक आवेश धनात्मक है (\( q_1 \)) और दूसरा आवेश ऋणात्मक है (\( q_2 \)), और \( |q_1| = |q_2| \)। जब उन्हें जोड़ा जाता है, तो वे एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं, जिससे कुल आवेश शून्य हो जाता है।
In simple words: अगर दो आवेशों को जोड़ने पर जवाब शून्य आता है, तो इसका मतलब है कि वे एक-दूसरे के विपरीत (जैसे एक धनात्मक और एक ऋणात्मक) हैं और उनकी मात्रा बिल्कुल बराबर है।
🎯 Exam Tip: \( q_1 + q_2 = 0 \) की स्थिति अक्सर विद्युत द्विध्रुव में देखी जाती है, जहाँ दो बराबर और विपरीत आवेश एक छोटी दूरी पर रखे होते हैं।
प्रश्न 14. एक आवेशित छड़ P द्वारा आवेशित छड़ R को आकर्षित किया जाता है जबकि P द्वारा अन्य आवेशित छड़ Q को प्रतिकर्षित किया जाता है। Q तथा R के मध्य उत्पन्न बल की प्रकृति क्या होगी ?
Answer: यदि आवेशित छड़ P, छड़ R को आकर्षित करती है, तो P और R पर विपरीत प्रकार के आवेश होंगे। यदि P, छड़ Q को प्रतिकर्षित करती है, तो P और Q पर समान प्रकार के आवेश होंगे। इन दोनों निष्कर्षों से पता चलता है कि R और Q पर आवेश एक-दूसरे के विपरीत प्रकृति के होंगे (क्योंकि Q और P समान हैं, जबकि R और P विपरीत हैं)। इसलिए, Q तथा R के मध्य आकर्षण बल उत्पन्न होगा।
In simple words: यदि P, R को खींचती है और Q को धकेलती है, तो R और Q एक-दूसरे को खींचेंगे।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों को हल करते समय, आवेशों की प्रकृति (धनात्मक या ऋणात्मक) को एक संदर्भ बिंदु (जैसे P को धनात्मक मानना) से शुरू करके निर्धारित करना सहायक होता है।
प्रश्न 15. किसी बिन्दु आवेश के कारण विद्युत क्षेत्र का निर्धारण करने के लिए प्रयुक्त परीक्षण आवेश (Test charge) अत्यन्त सूक्ष्म होना चाहिए। व्याख्या कीजिये कि क्यों ?
Answer: किसी बिंदु आवेश के कारण विद्युत क्षेत्र का निर्धारण करने के लिए प्रयुक्त परीक्षण आवेश (test charge) अत्यन्त सूक्ष्म होना चाहिए क्योंकि एक बड़ा परीक्षण आवेश स्वयं अपने विद्युत क्षेत्र को उत्पन्न करके स्रोत आवेश (जिसका क्षेत्र मापा जा रहा है) के आवेश वितरण को बदल सकता है। यह स्रोत आवेश के कारण वास्तविक विद्युत क्षेत्र की तीव्रता को विकृत कर देगा। इसलिए, परीक्षण आवेश को इतना छोटा मानते हैं कि वह मूल विद्युत क्षेत्र को प्रभावित न करे और उसका मान न बदले।
In simple words: विद्युत क्षेत्र को मापने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला परीक्षण आवेश बहुत छोटा होना चाहिए, ताकि वह खुद अपने बल से असली विद्युत क्षेत्र को बदल न दे।
🎯 Exam Tip: एक आदर्श परीक्षण आवेश का परिमाण बहुत कम (शून्य के करीब) होना चाहिए, और इसका कोई स्वयं का विद्युत क्षेत्र नहीं होना चाहिए ताकि यह माप में हस्तक्षेप न करे।
प्रश्न 16. 2gm के ताँबे के गोले में \( 2 \times 10^{22} \) परमाणु हैं। प्रत्येक परमाणु के नाभिक पर आवेश 29e हैं। गोले को 2C आवेश देने के लिए कितने अंश इलेक्ट्रॉन घटाए जाएँ ?
Answer: सबसे पहले, गोले में कुल प्रोटॉनों की संख्या ज्ञात करते हैं। गोले में \( 2 \times 10^{22} \) परमाणु हैं, और प्रत्येक परमाणु के नाभिक पर आवेश \( 29e \) है, जिसका अर्थ है कि प्रत्येक नाभिक में 29 प्रोटॉन हैं।
कुल प्रोटॉन \( = 2 \times 10^{22} \times 29 = 58 \times 10^{22} \) प्रोटॉन।
एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश \( e = 1.6 \times 10^{-19} \text{C} \)।
गोले को \( +2\text{C} \) आवेश देने के लिए, हमें \( n \) इलेक्ट्रॉन हटाने होंगे ताकि \( ne = 2\text{C} \)।
\( n = \frac { 2\text{C} }{ 1.6 \times 10^{-19} \text{C} } = 1.25 \times 10^{19} \) इलेक्ट्रॉन।
कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या (जब यह उदासीन था) \( = 58 \times 10^{22} \) इलेक्ट्रॉन।
हटाए गए इलेक्ट्रॉनों का अंश \( = \frac { \text{हटाए गए इलेक्ट्रॉनों की संख्या} }{ \text{कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या} } = \frac { 1.25 \times 10^{19} }{ 58 \times 10^{22} } \)
\( = \frac { 1.25 }{ 58000 } \times 10^{-3} = 0.00002155 \times 10^{-3} = 2.155 \times 10^{-8} \)
यानी, लगभग \( 2.155 \times 10^{-8} \) अंश इलेक्ट्रॉन घटाए जाएँगे।
In simple words: एक तांबे के गोले में बहुत सारे परमाणु हैं, और हर परमाणु में प्रोटॉन होते हैं जिन पर आवेश होता है। गोले को 2 कूलॉम का धनात्मक आवेश देने के लिए, हमें कुछ इलेक्ट्रॉन निकालने होंगे। निकाले गए इलेक्ट्रॉनों की संख्या को कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या से भाग देकर हम अंश निकालते हैं।
🎯 Exam Tip: आवेश की मात्रा और इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बीच संबंध (\( q=ne \)) का उपयोग करके ऐसे प्रश्नों को हल किया जाता है। प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन की संख्या बराबर होती है जब परमाणु उदासीन होता है।
प्रश्न 17. ठीक बराबर द्रव्यमान के सर्वसम धातु के दो गोले लिए गए हैं, जिनमें एक को ऋणावेश तथा दूसरे को उतने ही धनवेश से आवेशित किया गया है। क्या दोनों गोलों के द्रव्यमान में कोई अन्तर आएगा ? यदि हाँ तो क्यों ?
Answer: हाँ, दोनों गोलों के द्रव्यमान में अंतर आएगा। जिस गोले को ऋणावेशित किया गया है, उसका द्रव्यमान बढ़ जाएगा क्योंकि उसने इलेक्ट्रॉन ग्रहण किए हैं। प्रत्येक इलेक्ट्रॉन का एक निश्चित द्रव्यमान होता है (\( 9.1 \times 10^{-31} \text{kg} \))। जिस गोले को धनावेशित किया गया है, उसका द्रव्यमान कम हो जाएगा क्योंकि उसने इलेक्ट्रॉन खो दिए हैं। भले ही आवेश का परिमाण बराबर हो, इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण के कारण द्रव्यमान में परिवर्तन होता है।
In simple words: हाँ, जिस गोले पर ऋणात्मक आवेश है, उसका वजन थोड़ा बढ़ जाएगा क्योंकि उसमें इलेक्ट्रॉन जुड़ गए हैं, और जिस गोले पर धनात्मक आवेश है, उसका वजन थोड़ा कम हो जाएगा क्योंकि उसमें से इलेक्ट्रॉन निकल गए हैं।
🎯 Exam Tip: आवेश का स्थानांतरण हमेशा इलेक्ट्रॉनों के माध्यम से होता है। इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान बहुत कम होने के बावजूद, यह द्रव्यमान में सूक्ष्म परिवर्तन का कारण बनता है।
प्रश्न 19. आवेश संरक्षण नियम का उपयोग करके निम्न नाभिकीय अभिक्रियाओं में X तत्व को पहचानिए।
(a) \( _{1} \mathrm{H}^{1} + _{4} \mathrm{Be}^{9} \longrightarrow \mathrm{X} + _{0} \mathrm{n}^{1} \)
(b) \( _{6} \mathrm{C}^{12} + _{1} \mathrm{H}^{1} \longrightarrow \mathrm{X} \)
(c) \( _{8} \mathrm{N}^{15} + _{1} \mathrm{H}^{1} \longrightarrow \mathrm{X} + _{2} \mathrm{He}^{4} \)
Answer: नाभिकीय अभिक्रियाओं में आवेश संरक्षण (परमाणु संख्या) और द्रव्यमान संरक्षण (द्रव्यमान संख्या) के नियमों का पालन होता है।
(a) \( _{1} \mathrm{H}^{1} + _{4} \mathrm{Be}^{9} \longrightarrow \mathrm{X} + _{0} \mathrm{n}^{1} \)
परमाणु संख्या: \( 1+4 = Z_X + 0 \implies Z_X = 5 \)
द्रव्यमान संख्या: \( 1+9 = A_X + 1 \implies A_X = 9 \)
तत्व \( \mathrm{X} \) है: \( _{5} \mathrm{B}^{9} \) (बोरॉन)
(b) \( _{6} \mathrm{C}^{12} + _{1} \mathrm{H}^{1} \longrightarrow \mathrm{X} \)
परमाणु संख्या: \( 6+1 = Z_X \implies Z_X = 7 \)
द्रव्यमान संख्या: \( 12+1 = A_X \implies A_X = 13 \)
तत्व \( \mathrm{X} \) है: \( _{7} \mathrm{N}^{13} \) (नाइट्रोजन)
(c) \( _{8} \mathrm{N}^{15} + _{1} \mathrm{H}^{1} \longrightarrow \mathrm{X} + _{2} \mathrm{He}^{4} \)
परमाणु संख्या: \( 8+1 = Z_X + 2 \implies Z_X = 7 \)
द्रव्यमान संख्या: \( 15+1 = A_X + 4 \implies A_X = 12 \)
तत्व \( \mathrm{X} \) है: \( _{6} \mathrm{C}^{12} \) (कार्बन)
नाभिकीय अभिक्रियाओं में तत्व की पहचान उसके परमाणु क्रमांक से होती है।
In simple words: नाभिकीय अभिक्रियाओं में, हमें यह सुनिश्चित करना होता है कि अभिक्रिया से पहले और बाद में परमाणुओं की संख्या (नीचे वाला अंक) और कुल वजन (ऊपर वाला अंक) बराबर रहे। इसी से हम लापता तत्व X का पता लगा सकते हैं।
🎯 Exam Tip: नाभिकीय अभिक्रियाओं में, परमाणु क्रमांक (Z) आवेश संरक्षण को दर्शाता है और द्रव्यमान संख्या (A) द्रव्यमान संरक्षण को दर्शाती है। इन दोनों का उपयोग करके अज्ञात तत्व को पहचानें।
प्रश्न 20. एक आवेशित कण विद्युत क्षेत्र में गति करने के लिए स्वतन्त्र है। क्या यह सदैव विद्युत बल रेखा के अनुदिश गति करेगा?
Answer: यह आवश्यक नहीं है कि एक आवेशित कण सदैव विद्युत बल रेखा के अनुदिश गति करे। विद्युत बल रेखा किसी भी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की दिशा को दर्शाती है, जिसका अर्थ है कि यह कण पर लगने वाले बल की दिशा बताती है। यदि कण शुरू में विराम अवस्था में है या उसकी प्रारंभिक गति बल रेखा के अनुदिश है, तो वह बल रेखा के अनुदिश गति करेगा। हालांकि, यदि कण के पास बल रेखा की दिशा से अलग कोई प्रारंभिक वेग है, तो वह एक घुमावदार पथ पर चलेगा, जो बल रेखा से भिन्न हो सकता है, लेकिन किसी भी बिंदु पर उस पर लगने वाला बल हमेशा बल रेखा की स्पर्शरेखा के अनुदिश ही होगा।
In simple words: एक आवेशित कण हमेशा विद्युत बल रेखा के साथ नहीं चलता है। बल रेखा केवल बल की दिशा दिखाती है। अगर कण की शुरुआत की चाल अलग दिशा में हो, तो वह बल रेखा से हटकर अलग रास्ते पर चलेगा।
🎯 Exam Tip: विद्युत बल रेखाएं विद्युत क्षेत्र की दिशा को दर्शाती हैं, जो कण पर लगने वाले बल की दिशा है। कण का पथ उसके प्रारंभिक वेग और बल की दिशा के संयोजन पर निर्भर करता है।
RBSE Class 12 Physics Chapter 1 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. दो आवेशों के मध्य स्थिर विद्युत बल को कूलॉम के नियम से परिभाषित कीजिए तथा इसकी सीमाएँ बताइए। इस नियम द्वारा इकाई आवेश की परिभाषा दीजिए।
Answer: कूलॉम का नियम हमें बताता है कि दो स्थिर बिंदु आवेशों के बीच कितना बल लगता है। यह बल आवेशों की मात्राओं के गुणनफल के सीधा समानुपाती होता है और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह बल दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश कार्य करता है। कूलॉम का नियम परमाणुओं में नाभिक और इलेक्ट्रॉनों के बीच लगने वाले बल को समझने में मदद करता है। यह अणुओं को एक साथ रखने वाले बंधनों की व्याख्या करता है, जिससे पदार्थ द्रव या ठोस बन पाते हैं।
नियम की सीमाएँ:
1. यह नियम केवल बिंदु आवेशों के लिए सही है।
2. यह नियम केवल स्थिर आवेशों के लिए लागू होता है। यदि आवेश गतिमान हों, तो चुंबकीय बल भी काम करने लगते हैं।
3. यह नियम उन दूरियों के लिए सही नहीं है जो \( 10^{-15} \) मीटर से कम हों, क्योंकि तब नाभिकीय बल अधिक प्रभावी हो जाते हैं।
4. यह नियम उन माध्यमों के लिए भी उपयुक्त नहीं है जहाँ आवेशों का वितरण समान न हो।
इकाई आवेश की परिभाषा:
यदि दो समान बिंदु आवेश निर्वात में 1 मीटर की दूरी पर रखे हों और उनके बीच 9 x 109 न्यूटन का बल लगे, तो प्रत्येक आवेश का मान 1 कूलॉम कहलाता है।
विद्युत क्षेत्र एवं विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric Field and Intensity of Electric Field):
किसी आवेश या आवेशों के समूह के चारों ओर का वह क्षेत्र जहाँ तक उसका विद्युत प्रभाव अनुभव किया जा सके, यानी जहाँ तक वह किसी अन्य आवेश पर बल लगा सके, उसे विद्युत क्षेत्र कहते हैं। यह एक सदिश राशि है और इसकी दिशा धन परीक्षण आवेश (+q₀) पर लगने वाले बल की दिशा से निर्धारित होती है। विद्युत क्षेत्र को विद्युत बल रेखाओं से दर्शाया जाता है।
यदि किसी बिंदु पर धन परीक्षण आवेश को कोई बल अनुभव नहीं होता है, तो उस बिंदु पर अन्य किसी आवेश द्वारा उत्पन्न विद्युत क्षेत्र शून्य होगा। विद्युत क्षेत्र का विचार सबसे पहले फैराडे ने दिया था।
आवेश q, जो विद्युत क्षेत्र बनाता है, स्रोत आवेश कहलाता है। \( +q_0 \) आवेश, जो स्रोत आवेश के प्रभाव की जाँच करता है, परीक्षण आवेश कहलाता है। स्रोत आवेश एक अकेला आवेश या आवेशों का समूह हो सकता है।
बिंदु आवेश के कारण उत्पन्न विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Intensity of Electric Field due to a Point Charge):
माना कि एक बिंदु आवेश +q मूलबिंदु O पर रखा है और r दूरी पर स्थित बिंदु P पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है। बिंदु P पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करने के लिए इस बिंदु पर एक बहुत छोटा धन परीक्षण आवेश \( +q_0 \) रखा हुआ मानते हैं, तो कूलॉम के नियम से इस परीक्षण आवेश पर लगने वाला वैद्युत बल:
\( F = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q q_0}{r^2} \)
यहां \( \overrightarrow{r} \) से \( \overrightarrow{q_0} \) की दिशा में इकाई सदिश है।
P पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता:
\( \overrightarrow{E} = \frac{\overrightarrow{F}}{q_0} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{r^2} \)
इसका परिमाण:
\( E = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{r^2} \)
अतः \( E \propto \frac{1}{r^2} \)। इसका मतलब है कि बिंदु आवेश के चारों ओर खींचे गए गोलीय पृष्ठ पर स्थित सभी बिंदुओं के लिए \( \overrightarrow{E} \) का परिमाण समान होगा और यह \( \overrightarrow{r} \) की दिशा पर निर्भर नहीं होगा। इस प्रकार का क्षेत्र गोलीय सममित (spherically symmetric) या त्रिज्यीय क्षेत्र (radial field) कहलाता है। यदि आवेश 1 से देखा जाए तो इसका परिमाण आवेश से दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुसार घटता है। विद्युत क्षेत्र की तीव्रता और दूरी के साथ आलेख को चित्र में दिखाया गया है।
चित्र 1.18 : विद्युत क्षेत्र में परिवर्तन
यदि बिंदु आवेश परावैद्युतांक के माध्यम में रखा है, तो विद्युत क्षेत्र:
\( E_m = \frac{1}{4\pi\varepsilon} \frac{q}{r^2} \)
चूंकि \( \varepsilon = \varepsilon_0 \varepsilon_r \), इसलिए:
\( E_m = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0 \varepsilon_r} \frac{q}{r^2} \)
हम जानते हैं कि \( E = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{r^2} \), अतः
\( E_m = \frac{E}{\varepsilon_r} \)
\( \implies E_m < E \) (क्योंकि \( \varepsilon_r > 1 \))
इसका मतलब है कि परावैद्युत माध्यम में विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का मान, निर्वात में तीव्रता की अपेक्षा \( \varepsilon_r \) गुना कम हो जाता है।
विद्युत द्विध्रुव (Electric Dipole):
जब परिमाण में समान लेकिन प्रकृति में विपरीत (यानी, एक धन और एक ऋण) दो आवेश बहुत कम दूरी पर रखे होते हैं, तो वे एक विद्युत द्विध्रुव बनाते हैं। एक आवेश और दोनों आवेशों के बीच की दूरी के गुणनफल को विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण (electric dipole moment) कहते हैं। इसे \( \overrightarrow{p} \) से दर्शाया जाता है। यह एक सदिश राशि है जिसकी दिशा हमेशा ऋण आवेश से धन आवेश की ओर होती है।
माना कि एक विद्युत द्विध्रुव के आवेश \( -q \) और \( +q \) कूलॉम हैं तथा उनके बीच की अल्प दूरी \( 2l \) है, तो विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण:
चित्र 1.30 : विद्युत द्विध्रुव
\( \therefore P = q \times 2l \quad \quad ...(1) \)
विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण का मात्रक = कूलॉम-मीटर (Cm)
विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण का विमीय सूत्र = \( [A^1T^1L^1] \)
= \( [M^0L^1T^1A^1] \)
विद्युत द्विध्रुव के कारण उत्पन्न विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Intensity of Electric Field due to an Electric Dipole):
अक्षीय रेखा (Axial Line) पर: माना एक विद्युत द्विध्रुव AB, \( +q \) तथा \( -q \) कूलॉम के आवेशों का बना है जिनके बीच की दूरी \( 2l \) है। द्विध्रुव के मध्य-बिंदु O से r दूरी पर स्थित बिंदु P पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है।
\( +q \) आवेश के कारण P पर उत्पन्न विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का परिमाण:
\( E_1 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{(r-l)^2} \) (BP दिशा में)
चित्र 1.32
\( -q \) आवेश के कारण P पर उत्पन्न विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का परिमाण:
\( E_2 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{(r+l)^2} \) (AP दिशा में)
\( \overrightarrow{E_1} \) और \( \overrightarrow{E_2} \) की दिशाएँ परस्पर विपरीत हैं तथा \( E_1 > E_2 \)
\( \therefore \) P पर परिणामी विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का परिमाण:
\( E = E_1 - E_2 \)
\( = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{(r-l)^2} - \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{(r+l)^2} \)
\( = \frac{q}{4\pi\varepsilon_0} \left[ \frac{1}{(r-l)^2} - \frac{1}{(r+l)^2} \right] \)
\( = \frac{q}{4\pi\varepsilon_0} \frac{(r+l)^2 - (r-l)^2}{(r-l)^2(r+l)^2} \)
\( = \frac{q}{4\pi\varepsilon_0} \frac{(r^2+l^2+2rl) - (r^2+l^2-2rl)}{(r^2-l^2)^2} \)
\( = \frac{q}{4\pi\varepsilon_0} \frac{4rl}{(r^2-l^2)^2} \)
चूँकि द्विध्रुव आघूर्ण \( p = q \times 2l \) होता है:
\( E = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{p2r}{(r^2-l^2)^2} \quad \quad ...(3) \)
\( \therefore \overrightarrow{p} \) की दिशा ऋण आवेश से धन आवेश की ओर होती है, अतः \( \overrightarrow{p} \) व \( \overrightarrow{E} \) एक ही दिशा में होंगे। इस प्रकार सदिश रूप में समीकरण (3) को निम्न प्रकार व्यक्त करेंगे-
\( \overrightarrow{E} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{p2r}{(r^2-l^2)^2} \)
दीर्घ दूरियों के लिए \( r \gg l \), अतः \( l^2 \) को \( r^2 \) की तुलना में छोड़ने पर समीकरण (3) से:
\( E = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{p2r}{r^4} \)
\( E = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{2p}{r^3} \quad \quad ...(5) \)
सदिश रूप में:
\( \overrightarrow{E} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{2\overrightarrow{p}}{r^3} \quad \quad ...(6) \)
In simple words: कूलॉम का नियम बताता है कि दो चार्ज के बीच कितना बल लगता है, जो उनकी मात्रा पर निर्भर करता है और उनके बीच की दूरी के साथ घटता है। विद्युत द्विध्रुव तब बनता है जब दो विपरीत चार्ज बहुत पास हों। विद्युत क्षेत्र वह जगह है जहाँ एक चार्ज दूसरे पर बल लगाता है।
🎯 Exam Tip: कूलॉम के नियम और विद्युत द्विध्रुव के कांसेप्ट को अच्छी तरह से समझें, क्योंकि ये विद्युतस्थैतिकी के आधारभूत सिद्धांत हैं। सूत्रों को याद रखें और उनकी सीमाएँ भी ध्यान में रखें।
Question 4. किसी विद्युत द्विध्रुव के कारण उसकी निरक्ष पर स्थित बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।
Answer:निरक्ष रेखा या विषुवतीय रेखा (Equatorial Line) पर: विद्युत द्विध्रुव की निरक्षीय स्थिति में r दूरी पर स्थित बिंदु P पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है। बिंदु P से दोनों आवेशों की दूरियाँ समान \( \left(\sqrt{r^{2}+l^{2}}\right) \) होंगी। अतः P पर \( +q \) आवेश के कारण उत्पन्न विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का परिमाण:
\( E_1 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{(r^2+l^2)} \) (AP दिशा में)
चित्र 1.33
और \( -q \) आवेश के कारण P पर उत्पन्न विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का परिमाण:
\( E_2 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{(r^2+l^2)} \) (PB दिशा में)
इस प्रकार \( |\overrightarrow{E_1}| = |\overrightarrow{E_2}| \)
या \( E_1 = E_2 = E' \) (मान लेते हैं)
बिंदु P पर परिणामी विद्युत क्षेत्र की तीव्रता:
\( E = \sqrt{E_1^2 + E_2^2 + 2E_1 E_2 \cos 2\theta} \)
\( = \sqrt{2(E')^2 + 2(E')^2 \cos 2\theta} \)
\( = \sqrt{2(E')^2 (1+\cos 2\theta)} \)
क्योंकि \( 1+\cos 2\theta = 2\cos^2\theta \), अतः
\( = \sqrt{2(E')^2 (2\cos^2\theta)} \)
\( = \sqrt{4(E')^2 \cos^2\theta} \)
\( = 2E' \cos\theta \)
चित्र 1.33 से, \( \cos\theta = \frac{l}{\sqrt{r^2+l^2}} \)
तो परिणामी विद्युत क्षेत्र:
\( E = 2 \times \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{(r^2+l^2)} \times \frac{l}{\sqrt{r^2+l^2}} \)
\( E = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q2l}{(r^2+l^2)^{3/2}} \)
चूँकि द्विध्रुव आघूर्ण \( p = q \times 2l \) होता है:
\( E = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{p}{(r^2+l^2)^{3/2}} \quad \quad ...(7) \)
चित्र 1.33 में \( \overrightarrow{E} \) की दिशा द्विध्रुव की अक्ष के समान्तर होगी। चूँकि \( \overrightarrow{p} \) की दिशा ऋण आवेश से धन आवेश की ओर होती है अतः \( \overrightarrow{E} \) व \( \overrightarrow{p} \) की दिशाएँ परस्पर विपरीत होंगी। इस प्रकार समीकरण (7) को सदिश रूप में निम्न प्रकार लिख सकते हैं-
\( \overrightarrow{E} = \frac{-1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{\overrightarrow{p}}{(r^2+l^2)^{3/2}} \quad \quad ...(8) \)
दीर्घ दूरियों के लिए \( r \gg l \)
अतः \( l^2 \) को \( r^2 \) की तुलना में छोड़ने पर समीकरण (7) से:
\( E = \frac{-1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{p}{r^3} \quad \quad ...(9) \)
सदिश रूप में:
\( \overrightarrow{E} = \frac{-1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{\overrightarrow{p}}{r^3} \quad \quad ...(10) \)
In simple words: एक द्विध्रुव की निरक्षीय रेखा पर विद्युत क्षेत्र की गणना करने के लिए, हम दोनों आवेशों द्वारा उत्पन्न क्षेत्र को सदिश रूप से जोड़ते हैं। क्योंकि आवेश समान होते हैं और दूरी भी समान होती है, तो परिणामी क्षेत्र द्विध्रुव अक्ष के विपरीत दिशा में होता है।
🎯 Exam Tip: अक्षीय और निरक्षीय स्थितियों के लिए विद्युत क्षेत्र के व्यंजकों में अंतर को समझें। ध्यान दें कि निरक्षीय स्थिति में परिणामी क्षेत्र की दिशा द्विध्रुव आघूर्ण के विपरीत होती है।
Question 5. विद्युत क्षेत्र में एक विद्युत द्विध्रुव के विक्षेप की स्थिति में उस पर लगने वाले बलाघूर्ण का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।
Answer: विद्युत क्षेत्र में एक विद्युत द्विध्रुव को जब किसी कोण \( \theta \) पर रखा जाता है, तो उस पर एक बल आघूर्ण (torque) लगता है। द्विध्रुव के आवेशों \( (+q) \) और \( (-q) \) पर लगने वाले विद्युत बल \( (qE) \) परिमाण में समान लेकिन दिशा में विपरीत होते हैं, और उनकी क्रिया रेखाएँ अलग-अलग होती हैं। अतः ये दोनों बल एक बल-युग्म बनाते हैं। इस बल-युग्म का आघूर्ण नीचे दिए गए चित्र में दिखाया गया है।
चित्र 1.34 एक समरूप
बलाघूर्ण \( \tau = \) बल \( \times \) बलों की क्रिया रेखाओं के मध्य दूरी
\( \tau = qE \times BC \)
चित्र से, \( BC = AB \sin\theta = 2l \sin\theta \)
अतः \( \tau = qE (2l \sin\theta) \)
\( \tau = (q \times 2l) E \sin\theta \)
चूँकि विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण \( p = q \times 2l \) होता है,
\( \tau = pE \sin\theta \)
सदिश राशि बल आघूर्ण \( \overrightarrow{\tau} \) की दिशा दक्षिणावर्त पेंच के नियमानुसार \( \overrightarrow{p} \) व \( \overrightarrow{E} \) के तल के लम्बवत् होती है (चित्र 1.35)।
चित्र 1.35
सदिश रूप में बलयुग्म के आघूर्ण को निम्न प्रकार लिख सकते हैं-
\( \overrightarrow{\tau} = \overrightarrow{p} \times \overrightarrow{E} \quad \quad ...(2) \)
विभिन्न स्थितियाँ:
(i) जब \( \theta = 0^\circ \), तो \( \sin 0^\circ = 0 \)
अतः \( \tau = pE \sin 0^\circ = 0 \)
यह स्थायी संतुलन (stable equilibrium) की अवस्था है।
(ii) जब \( \theta = 90^\circ \), तो \( \sin 90^\circ = 1 \)
\( \tau_{max} = pE \)
(iii) जब \( \theta = 180^\circ \), तो \( \sin 180^\circ = 0 \)
\( \tau = pE \sin 180^\circ = 0 \)
यह द्विध्रुव अस्थायी साम्यावस्था है।
परिभाषा: विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण उस बलयुग्म के आघूर्ण के बराबर होता है जो द्विध्रुव पर तब कार्य करता है जब वह एकांक तीव्रता के समरूप विद्युत क्षेत्र में क्षेत्र के लम्बवत् रखा होता है।
In simple words: जब एक द्विध्रुव को बिजली के क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक घूमने वाला बल लगता है, जिसे बलाघूर्ण कहते हैं। यह बल बलाघूर्ण द्विध्रुव के आघूर्ण और बिजली के क्षेत्र की ताकत पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: बलाघूर्ण के व्यंजक और इसकी विभिन्न स्थितियों (स्थायी संतुलन, अधिकतम बलाघूर्ण, अस्थायी संतुलन) को याद रखें। सदिश रूप में सूत्र \( \overrightarrow{\tau} = \overrightarrow{p} \times \overrightarrow{E} \) को समझना महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 12 Physics Chapter 1 आंकिक प्रश्न
Question 1. दो आवेश \( q_1 = 2 \times 10^{-7} C \) तथा \( q_2 = 3 \times 10^{-7} C \) 30 cm की दूरी पर रखे गए हैं। उनके मध्य वैद्युत बल ज्ञात कीजिए।
Answer: दिया है:
\( q_1 = 2 \times 10^{-7} C \)
\( q_2 = 3 \times 10^{-7} C \)
दूरी \( r = 30 \text{ cm} = 0.30 \text{ m} \)
कूलॉम के नियम से गोलों के मध्य वैद्युत बल:
\( F = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q_1 q_2}{r^2} \)
\( = 9 \times 10^9 \times \frac{(2 \times 10^{-7}) \times (3 \times 10^{-7})}{(0.3 \times 0.3)} \)
\( = 9 \times 10^9 \times \frac{6 \times 10^{-14}}{0.09} \)
\( = 9 \times 10^9 \times 66.67 \times 10^{-14} \)
\( = 600 \times 10^{-5} \)
\( = 6 \times 10^{-3} \text{ N} \) (प्रतिकर्षी)
यहां दोनों आवेश धनात्मक हैं, इसलिए बल प्रतिकर्षण प्रकृति का होगा।
In simple words: हमने कूलॉम के नियम का उपयोग करके दो आवेशों के बीच बल की गणना की। चूंकि दोनों आवेश धनात्मक हैं, इसलिए वे एक-दूसरे को धक्का देंगे।
🎯 Exam Tip: आवेशों का मान और उनके बीच की दूरी को हमेशा SI इकाइयों में बदलें (जैसे सेंटीमीटर को मीटर में)। बल की प्रकृति (आकर्षण या प्रतिकर्षण) को भी दर्शाना न भूलें।
Question 2. दो समान धातु के गोले \( +10C \) एवं \( -20C \) आवेश से आवेशित किये गये हैं। यदि इनको एक दूसरे के संपर्क में लाकर अलग कर पुनः उसी दूरी पर रख दिया जाए, तब दोनों अवस्थाओं में बल का अनुपात ज्ञात कीजिए।
Answer: दिया है:
प्रारंभिक आवेश:
\( q_1 = 10 \text{ C} \)
\( q_2 = -20 \text{ C} \)
माना उनके बीच की दूरी \( r \) है।
प्रारंभिक स्थिति में दोनों गोलों के मध्य बल:
\( F = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q_1 q_2}{r^2} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{(10)(-20)}{r^2} \)
\( F = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{-200}{r^2} \quad \quad ...(i) \)
जब दोनों गोलों को आपस में संपर्क में लाया जाता है, तो आवेशों का पुनर्वितरण होता है। संपर्क के बाद प्रत्येक गोले पर आवेश समान हो जाता है।
प्रत्येक पर अंतिम आवेश \( Q' = \frac{q_1 + q_2}{2} = \frac{10 + (-20)}{2} = \frac{-10}{2} = -5 \text{ C} \)
संपर्क में लाने के बाद उनके मध्य बल:
\( F' = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{(-5)(-5)}{r^2} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{25}{r^2} \quad \quad ...(ii) \)
अब बल का अनुपात ज्ञात करने के लिए समीकरण (i) और (ii) को भाग देने पर:
\( \frac{F}{F'} = \frac{\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{-200}{r^2}}{\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{25}{r^2}} = \frac{-200}{25} = -8 \)
बल का परिमाण का अनुपात \( |\frac{F}{F'}| = \frac{200}{25} = 8 \)
अतः \( F : F' = 8 : 1 \)
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि प्रारंभिक बल आकर्षक प्रकृति का था, जबकि अंतिम बल प्रतिकारक प्रकृति का होगा।
In simple words: पहले, दो चार्ज वाले गोले एक-दूसरे को खींच रहे थे। जब उन्हें छुआया और अलग किया, तो उनके चार्ज बदल गए और अब वे एक-दूसरे को धकेल रहे हैं।
🎯 Exam Tip: आवेशों के संपर्क वाले प्रश्नों में, संपर्क के बाद कुल आवेश को समान रूप से बांटना न भूलें। बल का परिमाण अनुपात निकालते समय, ऋणात्मक चिन्ह को अनदेखा किया जा सकता है, जो केवल बल की प्रकृति दर्शाता है।
Question 3. भुजा a वाले एक समबाहु त्रिभुज के शीर्ष A और B पर समान आवेश q है। त्रिभुज के बिंदु C पर विद्युत क्षेत्र का परिमाण ज्ञात कीजिए।
Answer:
बिंदु C पर बिंदु A पर स्थित आवेश के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (AC की ओर):
\( E_1 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{a^2} \)
बिंदु C पर बिंदु B पर स्थित आवेश के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (BC की ओर):
\( E_2 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{a^2} \)
चूँकि \( E_1 = E_2 \), इसलिए \( E_1 = E_2 = E \) मान लेते हैं।
\( E_1 \) व \( E_2 \) के मध्य बनने वाला कोण \( 60^\circ \) है, अतः बिंदु C पर परिणामी विद्युत क्षेत्र की तीव्रता:
\( E_R = \sqrt{E_1^2 + E_2^2 + 2E_1 E_2 \cos 60^\circ} \)
\( = \sqrt{E^2 + E^2 + 2E \cdot E \cos 60^\circ} \)
\( = \sqrt{2E^2 + 2E^2 \left(\frac{1}{2}\right)} \)
\( = \sqrt{2E^2 + E^2} \)
\( = \sqrt{3E^2} \)
\( = \sqrt{3}E \)
अतः \( E_R = \sqrt{3} \left(\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{a^2}\right) \)
\( E_R = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{\sqrt{3}q}{a^2} \)
In simple words: समबाहु त्रिभुज के दो कोनों पर समान चार्ज रखे हैं। तीसरे कोने पर विद्युत क्षेत्र निकालने के लिए, हमने दोनों चार्ज से उत्पन्न क्षेत्रों को जोड़ा। चूंकि यह एक समबाहु त्रिभुज है, इसलिए कोण \( 60^\circ \) होता है, और परिणामी क्षेत्र \( \sqrt{3} \) गुना होता है।
🎯 Exam Tip: सदिश योग के नियम (समांतर चतुर्भुज नियम) का उपयोग करते समय कोण का सही मान लेना महत्वपूर्ण है। समबाहु त्रिभुज में सभी कोण 60 डिग्री होते हैं।
Question 5. दो समरूप गोलाकार चालक B व C समान आवेश से आवेशित हैं तथा परस्पर F बल से प्रतिकर्षित करते हैं जबकि उनको परस्पर कुछ दूरी पर रख दिया जाता है। तीसरा गोलाकार चालक इन्हीं के समरूप हैं परन्तु अनावेशित है। पहले यह B के संपर्क में लाया जाता है तत्पश्चात् C के संपर्क में लाकर दोनों से अलग कर दिया जाता है। B तथा C के मध्य नवीन प्रतिकर्षण बल ज्ञात कीजिए।
Answer:प्रारंभ में दोनों गोलाकार चालक के मध्य बल:
माना गोले B और C पर आवेश \( Q \) है और उनके बीच की दूरी \( r \) है।
प्रारंभिक बल \( F = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q \times Q}{r^2} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q^2}{r^2} \quad \quad ...(i) \)
तीसरा चालक D, जो अनावेशित है, को पहले B के संपर्क में लाया जाता है।
B और D के संपर्क के बाद, कुल आवेश \( Q+0 = Q \) दोनों पर समान रूप से वितरित हो जाता है।
प्रत्येक पर आवेश \( Q_B = Q_D = \frac{Q}{2} \)
अब चालक D को C के संपर्क में लाया जाता है। C पर प्रारंभिक आवेश \( Q \) था और D पर अब \( \frac{Q}{2} \) है।
D और C के संपर्क के बाद, कुल आवेश \( Q + \frac{Q}{2} = \frac{3Q}{2} \) दोनों पर समान रूप से वितरित हो जाता है।
प्रत्येक पर आवेश \( Q_C = Q_D = \frac{1}{2} \left(\frac{3Q}{2}\right) = \frac{3Q}{4} \)
अतः B व C के मध्य नया बल, अब B पर आवेश \( \frac{Q}{2} \) और C पर आवेश \( \frac{3Q}{4} \) है।
\( F' = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{(\frac{Q}{2}) (\frac{3Q}{4})}{r^2} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{3Q^2}{8r^2} \quad \quad ...(ii) \)
अब समीकरण (i) और (ii) से अनुपात ज्ञात करने पर:
\( \frac{F'}{F} = \frac{\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{3Q^2}{8r^2}}{\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q^2}{r^2}} = \frac{3}{8} \)
इसलिए, \( F' = \frac{3}{8}F \)
In simple words: जब एक अनावेशित गोले को पहले B गोले से और फिर C गोले से छुआया गया, तो उनके आवेश बदल गए। नए आवेशों के साथ, B और C के बीच बल पहले से \( \frac{3}{8} \) गुना हो गया।
🎯 Exam Tip: संपर्क द्वारा आवेशित करने पर, आवेशों का कुल योग हमेशा संरक्षित रहता है और संपर्क के बाद समान चालकों पर समान रूप से वितरित हो जाता है। हर चरण के बाद आवेशों की सही गणना करें।
Question 6. एक वर्ग ABCD जिसकी भुजा 2 cm है, उसके शीर्ष D पर \( +Q \) तथा C पर \( -Q \) आवेश रखे हैं। वर्ग के केंद्र पर परिणामी विद्युत क्षेत्र ज्ञात कीजिए।
Answer: दिया है:
वर्ग की भुजा \( \text{AB} = \text{BC} = \text{CD} = \text{AD} = 2 \text{ cm} \)
वर्ग के केंद्र O से प्रत्येक कोने की दूरी:
विकर्ण की लंबाई \( = \sqrt{(\text{side})^2 + (\text{side})^2} = \sqrt{2^2 + 2^2} = \sqrt{8} = 2\sqrt{2} \text{ cm} \)
केंद्र से कोने की दूरी \( \text{AO} = \text{BO} = \text{CO} = \text{DO} = \frac{2\sqrt{2}}{2} = \sqrt{2} \text{ cm} = \sqrt{2} \times 10^{-2} \text{ m} \)
माना कि A और B पर कोई आवेश नहीं है, या वे शून्य हैं। यदि प्रश्न में नहीं दिया गया हो, तो उन्हें शून्य माना जाता है।
अब, शीर्ष D पर \( +Q \) आवेश के कारण केंद्र O पर विद्युत क्षेत्र \( E_D \):
\( E_D = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{(\text{DO})^2} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{(\sqrt{2} \times 10^{-2})^2} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{2 \times 10^{-4}} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} (5000 Q) \) (OD से O की ओर)
शीर्ष C पर \( -Q \) आवेश के कारण केंद्र O पर विद्युत क्षेत्र \( E_C \):
\( E_C = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{|-Q|}{(\text{CO})^2} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{(\sqrt{2} \times 10^{-2})^2} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} (5000 Q) \) (O से OC की ओर)
चूंकि A और B पर कोई आवेश नहीं है, इसलिए \( E_A = 0 \) और \( E_B = 0 \)
\( E_D \) और \( E_C \) दोनों की दिशा एक ही रेखा (CD को जोड़ने वाली रेखा) के अनुदिश हैं और एक ही ओर हैं (यानी, D से O की ओर और C से O की ओर, तो दोनों DO और OC के अनुदिश हैं। क्योंकि C पर \( -Q \) है, इसका क्षेत्र C की ओर होगा, और D पर \( +Q \) है, इसका क्षेत्र D से दूर होगा)।
चित्र में दिए गए आवेश +Q और -Q विपरीत कोनों पर हैं, केंद्र O पर क्षेत्र निम्न प्रकार होगा:
\( E_{\text{D}} \) का मान: \( E_D = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{r^2} \). दिशा O से दूर (OD के अनुदिश).
\( E_{\text{C}} \) का मान: \( E_C = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{r^2} \). दिशा O की ओर (OC के अनुदिश).
चूँकि \( |\text{DO}| = |\text{CO}| \) और आवेशों का परिमाण समान है, इसलिए \( E_D = E_C = E' \).
\( E_D \) और \( E_C \) एक दूसरे के विपरीत हैं।
इसलिए, \( E_1 = E_D - E_C = 0 \). (यदि D और C विपरीत कोनों पर हैं, और A और B पर शून्य आवेश हैं)
| शीर्ष पर आवेश | केंद्र O पर क्षेत्र की तीव्रता | दिशा |
|---|---|---|
| \( +Q \) (D पर) | \( E_D = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{r^2} \) | OD के अनुदिश |
| \( -Q \) (C पर) | \( E_C = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{r^2} \) | OC के अनुदिश |
यहाँ \( r = \text{AO} = \text{BO} = \text{CO} = \text{DO} = \sqrt{2} \text{ cm} = \sqrt{2} \times 10^{-2} \text{ m} \)
\( E_D = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{(\sqrt{2} \times 10^{-2})^2} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{2 \times 10^{-4}} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} (5 \times 10^3 Q) \)
\( E_C = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{(\sqrt{2} \times 10^{-2})^2} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} (5 \times 10^3 Q) \)
अब, चूंकि D पर \( +Q \) है, तो \( E_D \) की दिशा O से दूर (OA की ओर) होगी।
और C पर \( -Q \) है, तो \( E_C \) की दिशा O की ओर (OA की ओर) होगी।
दोनों \( E_D \) और \( E_C \) एक ही दिशा में हैं, यानी A की ओर।
इसलिए, परिणामी विद्युत क्षेत्र \( E = E_D + E_C \)
\( E = 2 \times \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} (5 \times 10^3 Q) = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} (10 \times 10^3 Q) = 9 \times 10^9 \times 10^4 Q = 9 \times 10^{13} Q \)
यदि \( Q = 0.02 \mu C = 0.02 \times 10^{-6} C = 2 \times 10^{-8} C \)
तो \( E = 9 \times 10^{13} \times (2 \times 10^{-8}) = 18 \times 10^5 = 1.8 \times 10^6 \text{ N/C} \)
(यह गणना दिए गए मानों और दिशाओं के आधार पर है। यदि प्रश्न के चित्र में D पर +Q और C पर -Q हैं, और केंद्र पर क्षेत्र निकालना है, तो D का क्षेत्र OD के अनुदिश होगा, और C का क्षेत्र CO के अनुदिश होगा। ये दोनों विपरीत दिशाओं में हैं, इसलिए परिणामी क्षेत्र शून्य हो जाएगा। लेकिन OCRed text and calculations indicate a different interpretation where the fields align. Let's re-interpret the image as +Q at D, -Q at C, and center O. Then E_D (due to +Q) is away from D, so along OD. E_C (due to -Q) is towards C, so along OC. These are opposite along the diagonal DC. Hence they cancel out.)
**यदि D पर +Q और B पर -Q हो (जैसे एक विकर्ण पर विपरीत आवेश):**
\( E_D = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{r^2} \) (DO के अनुदिश)
\( E_B = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{r^2} \) (BO के अनुदिश, चूंकि B पर \( -Q \) है, तो क्षेत्र B की ओर होगा)
ये दोनों एक ही दिशा में हैं (D से B की ओर)।
तो, \( E_{DB} = E_D + E_B = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{2Q}{r^2} \)
इसी प्रकार, यदि A और C पर आवेश समान हों, तो उनका क्षेत्र भी उसी प्रकार से जुड़ेगा या घटेगा।
यहाँ, OCRed text में \( E_A, E_B, E_C \) के लिए \( \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} Q \times 10^4 \) मान दिए गए हैं। यह संभवतः प्रश्न को अलग तरीके से व्याख्या करता है। दिए गए हल के अनुसार:
\( E_A = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{(\text{OA})^2} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} Q \times 10^4 \), OA की ओर
\( E_B = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{(\text{OB})^2} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} Q \times 10^4 \), OD की ओर
\( E_C = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{(\text{OC})^2} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} Q \times 10^4 \), OB की ओर
OA की ओर नैट विद्युत क्षेत्र:
\( E_1 = E_A - E_C = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{r^2} \times 10^4 \)
OD की ओर नैट विद्युत क्षेत्र:
\( E_2 = E_B - E_D = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{r^2} \times 10^4 \)
अतः O पर परिणामी विद्युत क्षेत्र,
\( E = \sqrt{E_1^2 + E_2^2} \)
\( = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{r^2} \times \sqrt{10^8+10^8} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{r^2} \times \sqrt{2 \times 10^8} \)
\( = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{r^2} \times 10^4 \times \sqrt{2} \)
यदि \( Q = 0.02\mu C = 0.02 \times 10^{-6} C \)
तो \( E = 9 \times 10^9 \times \frac{0.02 \times 10^{-6} \times 10^4}{\sqrt{2}} \)
\( = \frac{9 \times 0.02 \times 10^{3}}{\sqrt{2}} = \frac{0.18 \times 10^3}{\sqrt{2}} = \frac{180}{\sqrt{2}} = 90\sqrt{2} \approx 127.28 \text{ N/C} \)
दिए गए हल से:
\( E = 9 \times 10^9 \times \frac{0.02 \times 10^{-6} \times 10^4}{\sqrt{2}} = 9\sqrt{2} \times 10^5 \text{ N C}^{-1} \) (BA के समान्तर दिशा में)
यह हल एक विशेष विन्यास को दर्शाता है जहाँ आवेशों की व्यवस्था इस प्रकार है कि परिणामी क्षेत्र BA के समानांतर हो। यह इंगित करता है कि A पर \( +Q \) और B पर \( -Q \) तथा C और D पर \( +Q \) और \( -Q \) इस तरह से हैं कि कुछ घटक रद्द हो जाते हैं।
In simple words: एक वर्ग के केंद्र पर बिजली का क्षेत्र ढूंढने के लिए, हमें हर कोने पर रखे चार्ज से केंद्र पर पड़ने वाले प्रभाव को जोड़ना होगा। चार्ज की स्थिति और मात्रा के आधार पर, कुछ बल एक दूसरे को रद्द कर सकते हैं, जिससे कुल क्षेत्र कम या ज्यादा हो सकता है।
🎯 Exam Tip: सदिश योग करते समय दिशा का विशेष ध्यान रखें। धन आवेश के कारण विद्युत क्षेत्र उससे दूर होता है, जबकि ऋण आवेश के कारण उसकी ओर होता है। घटक विधि का उपयोग गणनाओं को सरल बनाने में मदद कर सकता है।
Question 8. a भुजा वाले समबाहु त्रिभुज ABC के शीर्षों पर तीन आवेशों + 2q, - q तथा -q को क्रमशः A, B एवं C पर चित्र के अनुसार रखा गया है। इस निकाय का द्विध्रुव आघूर्ण ज्ञात कीजिए।
Answer:
इस समायोजन को दो विद्युत द्विध्रुवों AB और CB के बराबर माना जा सकता है, जो एक-दूसरे से 60° के कोण पर झुके हुए हैं।
AB विद्युत द्विध्रुव का आघूर्ण \( P_1 = qa \) (BA की दिशा में)
CA विद्युत द्विध्रुव का आघूर्ण \( P_2 = qa \) (CA की दिशा में)
परिणामी विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण \( P_R \) की गणना इस प्रकार की जाती है:
\( P_R = P_1 \cos 30^\circ + P_2 \cos 30^\circ \)
\( P_R = qa \cos 30^\circ + qa \cos 30^\circ \)
\( P_R = 2qa \cos 30^\circ \)
\( P_R = 2qa \times \frac{\sqrt{3}}{2} \)
\( P_R = \sqrt{3}qa \)
अतः, परिणामी विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण \( P_R \), आवेश 2q से बने कोण के अर्द्धक के अनुदिश और त्रिभुज से दूर की ओर है।
In simple words: हमने त्रिभुज के आवेशों को दो छोटे द्विध्रुवों में बाँटा. फिर उनके आघूर्णों को एक साथ जोड़ा. इसका अंतिम उत्तर \( \sqrt{3}qa \) है, जो त्रिभुज के कोने A से बाहर की ओर इशारा करता है.
🎯 Exam Tip: When dealing with multiple charges, break down the system into individual dipoles and then use vector addition to find the net dipole moment.
Question 9. दो समान छोटी गेंदें, प्रत्येक का द्रव्यमान तथा प्रत्येक पर आवेश । सिल्क के धागों से (प्रत्येक धागे की लम्बाई) चित्र के अनुासर लटकाई गई हैं। इनके मध्य दूरी x और धागों के मध्य कोण (28 ≈ 10°) है। तब साम्यावस्था की स्थिति में दूरी × का मान ज्ञात करो।
Answer:
दो आवेशित गेंदों के बीच लगने वाला बल \( F = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q^2}{x^2} \) है।
साम्यावस्था में, प्रत्येक गेंद पर तीन बल कार्य करते हैं: तनाव (T), गुरुत्वाकर्षण बल (mg), और विद्युत प्रतिकर्षण बल (F)।
जब गेंदें संतुलन में होती हैं, तो बलों का क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर घटक संतुलित होते हैं।
धागे के साथ बनने वाले कोण \(\theta\) का उपयोग करके, हम इन बलों को संबंधित घटकों में विभाजित कर सकते हैं।
ऊर्ध्वाधर दिशा में, \( T \cos \theta = mg \)
क्षैतिज दिशा में, \( T \sin \theta = F \)
इन समीकरणों को भाग देने पर:
\( \frac{T \sin \theta}{T \cos \theta} = \frac{F}{mg} \)
\( \tan \theta = \frac{F}{mg} \)
\( \implies F = mg \tan \theta \)
अब F का मान रखने पर:
\( \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q^2}{x^2} = mg \tan \theta \)
\( \implies x^2 = \frac{q^2}{4\pi\varepsilon_0 mg \tan \theta} \)
अंत में, x का मान ज्ञात करने के लिए वर्गमूल लेने पर:
\( x = \sqrt{\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q^2}{mg \tan \theta}} \)
दिए गए मानों के अनुसार, \(\theta \approx 10^\circ\) है।
संख्यात्मक मान डालने पर, हमें लगभग यह मिलता है:
\( x = 1.19 \frac{q}{\sqrt{m}} \)
In simple words: दो आवेशित गेंदें एक-दूसरे को धकेलती हैं और गुरुत्वाकर्षण बल उन्हें नीचे खींचता है. जब वे हिलना बंद कर देती हैं, तो हम कुलोंब के नियम और त्रिकोणमिति का उपयोग करके उनके बीच की दूरी का पता लगा सकते हैं.
🎯 Exam Tip: Remember to resolve forces into their horizontal and vertical components for equilibrium problems, and relate the electrostatic force to the tangent of the angle.
Question 10. किसी निकाय में दो आवेश q₁ = 2.5 × 10-7C तथा qB = -2.5 × 107C क्रमशः दो बिन्दुओं A: (0, 0, - 15 cm) तथा B: (0, 0, + 15 cm) पर स्थित हैं। निकाय का कुल आवेश तथा विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण क्या है ?
Answer:
**निकाय का कुल आवेश:**
कुल आवेश \( Q_{total} \) दोनों आवेशों का योग होता है।
\( Q_{total} = q_A + q_B \)
\( Q_{total} = (2.5 \times 10^{-7} \text{ C}) + (-2.5 \times 10^{-7} \text{ C}) \)
\( Q_{total} = 0 \text{ C} \)
निकाय का कुल आवेश शून्य है।
**विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण:**
बिंदु A का स्थिति सदिश: \( \vec{r_A} = -15 \hat{k} \text{ cm} \)
बिंदु B का स्थिति सदिश: \( \vec{r_B} = +15 \hat{k} \text{ cm} \)
A और B के बीच की दूरी \( 2l \) इस प्रकार है:
\( \vec{r_{AB}} = \vec{r_B} - \vec{r_A} \)
\( \vec{r_{AB}} = (+15 \hat{k}) - (-15 \hat{k}) \)
\( \vec{r_{AB}} = 30 \hat{k} \text{ cm} \)
अतः, प्रभावी लंबाई \( 2l = |\vec{r_{AB}}| = 30 \text{ cm} = 0.30 \text{ m} \)
विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण \( p \) आवेश का परिमाण और उनके बीच की दूरी का गुणनफल होता है।
\( p = q \times (2l) \)
\( p = (2.5 \times 10^{-7} \text{ C}) \times (0.30 \text{ m}) \)
\( p = 0.75 \times 10^{-7} \text{ Cm} \)
\( p = 7.5 \times 10^{-8} \text{ Cm} \)
In simple words: इस व्यवस्था में कुल आवेश शून्य है क्योंकि एक आवेश धनात्मक है और दूसरा उतना ही ऋणात्मक है. विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण को आवेश के मान को उनके बीच की दूरी से गुणा करके निकाला जाता है.
🎯 Exam Tip: Always remember that the net charge of a dipole is zero, but it still has a dipole moment if the charges are separated. Convert all units to SI (meters, Coulombs) before calculating.
Question 11. 4 × 10-9Cm द्विध्रुव आघूर्ण का कोई विद्युत द्विध्रुव 5 × 104 NC-1 परिमाण के किसी एक-समान विद्युत क्षेत्र की दिशा से 30 पर संरेखित है। द्विध्रुव पर कार्यरत् बल आघूर्ण का परिमाण परिकलित कीजिए।
Answer: हमें दिया गया है:
विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण \( p = 4 \times 10^{-9} \text{ Cm} \)
विद्युत क्षेत्र का परिमाण \( E = 5 \times 10^4 \text{ N C}^{-1} \)
कोण \( \theta = 30^\circ \)
विद्युत द्विध्रुव पर कार्यरत् बल आघूर्ण \( \tau \) का सूत्र इस प्रकार है:
\( \tau = pE \sin \theta \)
अब दिए गए मानों को सूत्र में रखने पर:
\( \tau = (4 \times 10^{-9} \text{ Cm}) \times (5 \times 10^4 \text{ N C}^{-1}) \times \sin 30^\circ \)
हम जानते हैं कि \( \sin 30^\circ = \frac{1}{2} \).
\( \tau = (4 \times 10^{-9}) \times (5 \times 10^4) \times \frac{1}{2} \)
\( \tau = 20 \times 10^{(-9+4)} \times \frac{1}{2} \)
\( \tau = 20 \times 10^{-5} \times \frac{1}{2} \)
\( \tau = 10 \times 10^{-5} \)
\( \tau = 10^{-4} \text{ Nm} \)
अतः, द्विध्रुव पर लगने वाला बल आघूर्ण \( 10^{-4} \text{ Nm} \) है।
In simple words: एक विद्युत द्विध्रुव को जब विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक घुमाने वाला बल लगता है जिसे बल आघूर्ण कहते हैं. इस बल आघूर्ण की गणना द्विध्रुव आघूर्ण, विद्युत क्षेत्र और उनके बीच के कोण के साइन (sine) को गुणा करके की जाती है.
🎯 Exam Tip: Remember the formula for torque on a dipole in an electric field: \( \tau = pE \sin \theta \). Pay close attention to units and scientific notation in calculations.
Question 12. दो बिन्दु आवेशों q₁ तथा q2 के मध्य दूरी 3m है। इन आवेशों का योग 20µC है। यदि एक आवेश दूसरे आवेश को 0.075N के बल से प्रतिकर्षित करें तब दोनों आवेशों के मान ज्ञात करो।
Answer: हमें दिया गया है:
प्रतिकर्षण बल \( F = 0.075 \text{ N} \)
आवेशों के मध्य दूरी \( r = 3 \text{ m} \)
आवेशों का योग \( q_1 + q_2 = 20 \mu C = 20 \times 10^{-6} \text{ C} \) (समीकरण i)
कूलम्ब के नियम के अनुसार:
\( F = k \frac{q_1 q_2}{r^2} \)
यहाँ, \( k = 9 \times 10^9 \text{ Nm}^2/\text{C}^2 \).
\( 0.075 = (9 \times 10^9) \frac{q_1 q_2}{(3)^2} \)
\( 0.075 = (9 \times 10^9) \frac{q_1 q_2}{9} \)
\( 0.075 = 10^9 q_1 q_2 \)
\( q_1 q_2 = \frac{0.075}{10^9} \)
\( q_1 q_2 = 0.075 \times 10^{-9} \)
\( q_1 q_2 = 7.5 \times 10^{-11} \text{ C}^2 \) (समीकरण ii)
अब हम एक बीजगणितीय पहचान का उपयोग करते हैं:
\( (q_1 - q_2)^2 = (q_1 + q_2)^2 - 4q_1 q_2 \)
समीकरण (i) और (ii) से मान रखने पर:
\( (q_1 - q_2)^2 = (20 \times 10^{-6})^2 - 4 \times (7.5 \times 10^{-11}) \)
\( (q_1 - q_2)^2 = (400 \times 10^{-12}) - (30 \times 10^{-11}) \)
\( (q_1 - q_2)^2 = (4 \times 10^{-10}) - (3 \times 10^{-10}) \)
\( (q_1 - q_2)^2 = 1 \times 10^{-10} \)
वर्गमूल लेने पर:
\( q_1 - q_2 = \sqrt{1 \times 10^{-10}} \)
\( q_1 - q_2 = 1 \times 10^{-5} \text{ C} \) (समीकरण iii)
अब समीकरण (i) और (iii) को हल करते हैं:
\( q_1 + q_2 = 20 \times 10^{-6} \text{ C} \)
\( q_1 - q_2 = 1 \times 10^{-5} \text{ C} \)
दोनों समीकरणों को जोड़ने पर:
\( (q_1 + q_2) + (q_1 - q_2) = (20 \times 10^{-6}) + (1 \times 10^{-5}) \)
\( 2q_1 = (20 \times 10^{-6}) + (10 \times 10^{-6}) \)
\( 2q_1 = 30 \times 10^{-6} \text{ C} \)
\( q_1 = 15 \times 10^{-6} \text{ C} \)
\( q_1 = 15 \mu C \)
अब \( q_1 \) का मान समीकरण (i) में रखने पर:
\( 15 \times 10^{-6} + q_2 = 20 \times 10^{-6} \)
\( q_2 = (20 - 15) \times 10^{-6} \)
\( q_2 = 5 \times 10^{-6} \text{ C} \)
\( q_2 = 5 \mu C \)
अतः, दोनों आवेशों का मान \( 15 \mu C \) और \( 5 \mu C \) है।
In simple words: हमें दो आवेशों का कुल मान और उनके बीच का बल पता था. कूलम्ब के नियम और बीजगणित का उपयोग करके, हमने पता लगाया कि प्रत्येक आवेश का मान क्या है.
🎯 Exam Tip: For problems involving the sum and product of two variables (like \( q_1 \) and \( q_2 \)), use the algebraic identity \( (a-b)^2 = (a+b)^2 - 4ab \) to find their difference, then solve the two resulting linear equations simultaneously.
Question 13. + 10C तथा – 10C के दो आवेशों को 2cm की दूरी पर रखा जाता है। इनकी अक्षीय रेखा एवं निरक्ष रेखा पर द्विध्रुव के केन्द्र से 60 cm की दूरी पर स्थित किसी बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की गणना करो।
Answer: हमें दिया गया है:
आवेश का परिमाण \( q = 10 \text{ C} \)
द्विध्रुव की लंबाई \( 2l = 2 \text{ cm} = 2 \times 10^{-2} \text{ m} \). इससे \( l = 1 \times 10^{-2} \text{ m} \).
बिंदु की दूरी \( r = 60 \text{ cm} = 60 \times 10^{-2} \text{ m} \).
पहले हम द्विध्रुव आघूर्ण \( p \) की गणना करते हैं:
\( p = q \times (2l) \)
\( p = 10 \text{ C} \times (2 \times 10^{-2} \text{ m}) \)
\( p = 20 \times 10^{-2} \text{ Cm} \)
**अक्षीय रेखा पर विद्युत क्षेत्र (Axial Line):**
अक्षीय रेखा पर विद्युत क्षेत्र \( E_a \) का सूत्र है:
\( E_a = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{2pr}{(r^2 - l^2)^2} \)
यहाँ, \( \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} = 9 \times 10^9 \text{ Nm}^2/\text{C}^2 \).
मानों को सूत्र में रखने पर:
\( E_a = (9 \times 10^9) \frac{2 \times (20 \times 10^{-2}) \times (60 \times 10^{-2})}{((60 \times 10^{-2})^2 - (1 \times 10^{-2})^2)^2} \)
\( E_a \approx 1.67 \times 10^4 \text{ N/C} \)
**निरक्ष रेखा पर विद्युत क्षेत्र (Equatorial Line):**
निरक्ष रेखा पर विद्युत क्षेत्र \( E_e \) का सूत्र है:
\( E_e = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{p}{(r^2 + l^2)^{3/2}} \)
मानों को सूत्र में रखने पर:
\( E_e = (9 \times 10^9) \frac{20 \times 10^{-2}}{((60 \times 10^{-2})^2 + (1 \times 10^{-2})^2)^{3/2}} \)
\( E_e \approx 0.83 \times 10^4 \text{ N/C} \)
In simple words: हमने एक विद्युत द्विध्रुव के लिए अक्षीय और निरक्षीय स्थितियों पर विद्युत क्षेत्र की गणना की. अक्षीय स्थिति में, विद्युत क्षेत्र द्विध्रुव के साथ सीधी रेखा में होता है, जबकि निरक्षीय स्थिति में, यह द्विध्रुव के केंद्र से लंबवत होता है.
🎯 Exam Tip: Remember the formulae for electric field on axial and equatorial lines of a dipole. Note that the axial field is typically stronger and in the direction of the dipole moment, while the equatorial field is weaker and opposite to the dipole moment.
Question 14. दो समान बिन्दुवत् आवेश Q जो परस्पर कुछ दूरी पर रखे गये हैं को मिलाने वाली रेखा के मध्य में अन्य आवेश q रखा गया है। q का मान एवं प्रकृति ज्ञात कीजिए कि निकाय सन्तुलित रहे।
Answer:
निकाय के संतुलन में रहने के लिए, प्रत्येक आवेश पर कुल बल शून्य होना चाहिए।
मान लीजिए कि दो आवेश Q बिंदुओं A और B पर रखे हैं, और उनके बीच की दूरी 2x है। तीसरा आवेश q उनके मध्य बिंदु C पर रखा है।
आवेश A पर परिणामी बल शून्य होगा (क्योंकि आवेश A और B समान हैं, इसलिए C पर आवेश q उनके बीच संतुलन में होना चाहिए)।
आवेश A पर लगने वाला बल, आवेश C पर रखे q के कारण और आवेश B पर रखे Q के कारण लगने वाले बलों का सदिश योग होता है।
\( \vec{F}_A = \vec{F}_{AC} + \vec{F}_{AB} = 0 \)
मान लें कि आवेश Q धनात्मक है। तब आवेश A पर आवेश C पर रखे q के कारण बल \( F_{AC} \) और आवेश B पर रखे Q के कारण बल \( F_{AB} \) एक-दूसरे को संतुलित करना चाहिए।
यदि C पर रखा आवेश q भी धनात्मक है, तो दोनों बल प्रतिकर्षण प्रकृति के होंगे और एक ही दिशा में होंगे, जिससे संतुलन संभव नहीं होगा।
इसलिए, q ऋणात्मक होना चाहिए ताकि \( F_{AC} \) आकर्षण बल हो और \( F_{AB} \) प्रतिकर्षण बल हो, और ये दोनों एक-दूसरे को संतुलित कर सकें।
बल समीकरण इस प्रकार है:
\( \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Qq}{x^2} + \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q^2}{(2x)^2} = 0 \)
\( \frac{Qq}{x^2} = - \frac{Q^2}{4x^2} \)
दोनों तरफ \( \frac{Q}{4\pi\varepsilon_0 x^2} \) से भाग देने पर:
\( q = - \frac{Q}{4} \)
अतः, आवेश q का मान \( -\frac{Q}{4} \) होना चाहिए। इसकी प्रकृति ऋणात्मक (Q के विपरीत) होनी चाहिए।
In simple words: तीन आवेशों को एक पंक्ति में रखने पर, बीच वाले आवेश का मान और प्रकार ऐसा होना चाहिए कि सभी आवेश संतुलन में रहें, यानी किसी भी आवेश पर कोई शुद्ध बल न लगे. ऐसा तभी होता है जब बीच वाला आवेश बाहरी आवेशों के विपरीत प्रकार का हो और उसका परिमाण \( \frac{Q}{4} \) हो.
🎯 Exam Tip: For problems involving equilibrium of charges, ensure that the net force on *each* charge in the system is zero. Pay close attention to the signs of charges (attractive vs. repulsive forces) and vector directions.
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