RBSE Solutions Class 12 Home Science Chapter 35 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-1986

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Class 12 Home Science Chapter 35 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-1986 RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Home Science Chapter 35 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

 

Question 1. निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनें -
(i) उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम निम्न में से किस वर्ष में लागू किया गया –
(अ) 1956
(ब) 1965
(स) 1986
(द) 2001
Answer: (स) 1986
In simple words: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 में लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना है।

🎯 Exam Tip: यह एक महत्वपूर्ण अधिनियम है, इसलिए इसका लागू वर्ष याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी है।

 

Question 1. (ii) उपभोक्ता संरक्षण कानून का मुख्य उद्देश्य है –
(अ) वस्तुओं को सस्ते दाम पर उपलब्ध करवाना
(ब) नकली माल को पकड़वाना
(स) उपभोक्ता को बेहतर संरक्षण देना
(द) वस्तु पुनः बिक्री या व्यापार के लिए खरीदी गई हो
Answer: (स) उपभोक्ता को बेहतर संरक्षण देना
In simple words: इस कानून का सबसे बड़ा मकसद यह है कि उपभोक्ताओं को धोखे और गलत कामों से बचाया जाए और उनके हितों की रक्षा हो सके।

🎯 Exam Tip: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का मुख्य लक्ष्य हमेशा उपभोक्ताओं को अनुचित व्यापार प्रथाओं से सुरक्षित रखना होता है।

 

Question 1. (iii) उपभोक्ता शिकायत करने से अयोग्य ठहराया जाएगा यदि –
(अ) वस्तु पुनः बिक्री या व्यापार के लिए खरीदी गई हो
(ब) वस्तु में कोई दोष पाया गया हो
(स) वस्तु व सेवा का उपभोग उपभोक्ता स्वयं कर रहा हो
(द) वस्तु का मूल्य बढ़ाकर माँगा गया हो
Answer: (अ) वस्तु पुनः बिक्री या व्यापार के लिए खरीदी गई हो
In simple words: अगर किसी ने कोई सामान दोबारा बेचने या व्यापार करने के लिए खरीदा है, तो वह उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत शिकायत नहीं कर सकता। यह कानून सिर्फ अंतिम उपभोक्ता के लिए है।

🎯 Exam Tip: उपभोक्ता संरक्षण कानून का लाभ सिर्फ वे व्यक्ति उठा सकते हैं जिन्होंने वस्तु या सेवा अपने निजी उपयोग के लिए खरीदी हो, न कि व्यापार के लिए।

 

Question 1. (iv) उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत निम्न का प्रावधान है –
(अ) अर्द्धन्यायिक तंत्र की स्थापना
(ब) उपभोक्ता को क्षतिपूर्ति दिलाना
(स) उपभोक्ताओं की शिकायतों को शीघ्र, सरल तरीके से तथा कम समय एवं खर्चों में दूर करना
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: इस अधिनियम में उपभोक्ताओं की शिकायतों को जल्दी, आसानी से और कम खर्चे में सुलझाने के लिए खास अदालतों का प्रावधान है। इसका मकसद उन्हें हुए नुकसान की भरपाई दिलाना भी है।

🎯 Exam Tip: यह अधिनियम उपभोक्ताओं को कई तरीकों से सहायता प्रदान करता है, जिसमें कानूनी ढांचे और त्वरित समाधान शामिल हैं।

 

Question 1. (v) अर्द्धन्यायिक तंत्र के विभिन्न स्तर निर्भर करते हैं –
(अ) वस्तु या सेवा की मात्रा पर
(ब) मुआवजे के प्रकार पर
(स) मुआवजे की वित्तीय सीमा पर
(द) वस्तु के क्षेत्र की सीमा पर
Answer: (स) मुआवजे की वित्तीय सीमा पर
In simple words: उपभोक्ताओं की शिकायतें सुनने वाली अदालतों के अलग-अलग स्तर होते हैं। ये स्तर इस बात पर तय होते हैं कि उपभोक्ता कितने रुपये का मुआवजा मांग रहा है।

🎯 Exam Tip: जिला, राज्य और राष्ट्रीय आयोगों के बीच शिकायत का निर्धारण मुआवजे की राशि के आधार पर होता है।

 

Question 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(1) राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस ............ को मनाया जाता है?
(2) जिला मंच के निष्कर्षों को न मानने पर विरोधी पक्ष को न्यायालय द्वारा...........मिल सकती है।
(3) उपभोक्ता को शिकायत के साथ एक ........... भी देना होगा।
(4) अपनी शिकायत की पुष्टि हेतु आपके पास सभी जरूरी............का होना आवश्यक है।
(5) यदि मुआवजा 20,00,000 रु. से कम है तो अपनी शिकायत............में दायर करवायें।
(6) जब किसी वस्तु या सेवा में............पाया जाए तक शिकायत दर्ज करवायें।
Answer:
(1) राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस **24 दिसम्बर** को मनाया जाता है?
(2) जिला मंच के निष्कर्षों को न मानने पर विरोधी पक्ष को न्यायालय द्वारा **सजा** मिल सकती है।
(3) उपभोक्ता को शिकायत के साथ एक **शपथ-पत्र** भी देना होगा।
(4) अपनी शिकायत की पुष्टि हेतु आपके पास सभी जरूरी **दस्तावेज** का होना आवश्यक है।
(5) यदि मुआवजा 20,00,000 रु. से कम है तो अपनी शिकायत **जिला मंच** में दायर करवायें।
(6) जब किसी वस्तु या सेवा में **दोष** पाया जाए तक शिकायत दर्ज करवायें।
In simple words: राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 24 दिसंबर को होता है। जिला मंच के फैसले न मानने पर सजा मिल सकती है। शिकायत के साथ शपथ-पत्र देना होता है और जरूरी दस्तावेज भी होने चाहिए। 20 लाख रुपये से कम मुआवजे के लिए जिला मंच में शिकायत होती है, और वस्तु में कमी पाए जाने पर शिकायत दर्ज करें।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति करते समय, सुनिश्चित करें कि आपके द्वारा भरे गए शब्द वाक्य के संदर्भ में पूरी तरह सटीक हों।

 

Question 3. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये -
(1) सुरक्षा का अधिकार
(2) उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार
(3) नियंत्रित व्यापार नीतियाँ
(4) अर्द्धन्यायिक तंत्र
Answer:
**(1) सुरक्षा का अधिकार (Right to safety):** हर उपभोक्ता को ऐसी चीजों से सुरक्षा पाने का हक है जो उसके जीवन के लिए खतरनाक हो सकती हैं। इसमें बिजली के उपकरण, दवाएँ, खाने का सामान, साबुन और मेकअप के सामान जैसी सभी चीजें शामिल हैं। उपभोक्ता को यह हक है कि वह ऐसी चीजों को खरीदने से बचे या उनके खिलाफ आवाज उठाए जो उसे नुकसान पहुंचा सकती हैं।
**(2) उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार (Right to consumer education):** उपभोक्ता को यह हक है कि उसे सभी तरह के उत्पादों की सही जानकारी हो। उसे सामान के दाम, उसकी क्वालिटी और मूल्य के बारे में पता होना चाहिए। इसके लिए सरकार समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम चलाती है ताकि उपभोक्ता समझदार बन सकें। एक शिक्षित उपभोक्ता ही सही निर्णय ले पाता है।
**(3) नियंत्रित व्यापार नीतियाँ:** ये वे नियम हैं जो व्यापारी खुद बनाते हैं। इनका उद्देश्य अक्सर उपभोक्ताओं का शोषण करना होता है, जैसे चीजों के दाम बढ़ाना। वे अपने फायदे के लिए ऐसी नीतियां अपनाते हैं। इससे बाजार में असमानता आती है और उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर चीजें नहीं मिल पातीं।
**(4) अर्द्ध-न्यायिक तंत्र:** उपभोक्ताओं की शिकायतों को सुलझाने के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में तीन तरह की अदालतों की व्यवस्था की गई है। ये अदालतें जिला मंच, राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग के नाम से जानी जाती हैं। जिला मंच 20 लाख रुपये तक के मामलों को देखता है, राज्य आयोग 20 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के मामलों को और राष्ट्रीय आयोग 1 करोड़ रुपये से अधिक के मामलों को सुलझाता है। यह तंत्र यह सुनिश्चित करता है कि उपभोक्ताओं को न्याय मिले।
In simple words: सुरक्षा का अधिकार मतलब खतरनाक चीजों से बचना। उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार मतलब सामान की पूरी जानकारी होना। नियंत्रित व्यापार नीतियां वे नियम हैं जो व्यापारी अपने फायदे के लिए बनाते हैं। अर्द्ध-न्यायिक तंत्र उपभोक्ता विवादों को सुलझाने के लिए बनी अदालतें हैं, जिनके तीन स्तर (जिला, राज्य, राष्ट्रीय) मुआवजे की राशि के हिसाब से काम करते हैं।

🎯 Exam Tip: संक्षिप्त टिप्पणी लिखते समय, प्रत्येक बिंदु को स्पष्ट और सीधे शब्दों में समझाएं, और मुख्य अवधारणाओं को उजागर करें।

 

Question 4. उपभोक्ता अपनी शिकायत को कब दर्ज करवा सकता है?
Answer: उपभोक्ता कुछ खास स्थितियों में अपनी शिकायत दर्ज करवा सकता है। इसमें मुख्य रूप से तब शिकायत की जाती है जब उसे किसी सामान या सेवा में कोई कमी महसूस होती है, या उसके साथ धोखाधड़ी हुई हो। उपभोक्ता को यह अधिकार है कि वह अपनी शिकायत उपयुक्त मंच पर प्रस्तुत करे। एक उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं के उपयोग में त्रुटि या दोष पाने पर शिकायत दर्ज करवा सकता है।
In simple words: उपभोक्ता तब शिकायत कर सकता है जब उसे किसी सामान या सेवा में कोई खराबी मिले, या जब उसके साथ कोई गलत काम हुआ हो।

🎯 Exam Tip: शिकायत दर्ज करने का मुख्य कारण वस्तु या सेवा में दोष या अनुचित व्यापारिक व्यवहार होना चाहिए।

 

Question 5. शिकायत दर्ज करवाने से पूर्व उपभोक्ता को क्या आवश्यक कदम उठाने चाहिए?
Answer: उपभोक्ता को शिकायत दर्ज करवाने से पहले कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए:
* उसे दुकान का बिल, गारंटी कार्ड, वारंटी कार्ड और व्यापारी से मिले सभी पत्र जैसे संबंधित दस्तावेज इकट्ठा कर लेने चाहिए। ये दस्तावेज उसकी शिकायत को सही साबित करने में मदद करेंगे।
* सबसे पहले व्यापारी को शिकायत की जानकारी देनी चाहिए और उसे 15 दिन का समय देना चाहिए ताकि वह समस्या को ठीक कर सके।
* उपभोक्ता न्यायालय का औपचारिक फॉर्म भरना चाहिए, जिसका प्रारूप उपलब्ध होता है।
* आवेदन-पत्र में दी गई जानकारी को शपथ-पत्र पर फिर से लिखकर नोटरी पब्लिक से प्रमाणित करवाना चाहिए और उसे आवेदन के साथ लगाना चाहिए।
* जितने विरोधी पक्षकार हैं, शिकायत की उतनी ही प्रतियाँ अलग से लगानी चाहिए।
* शिकायत के समर्थन में एक शपथ-पत्र सादे कागज पर देना चाहिए।
In simple words: शिकायत करने से पहले, उपभोक्ता को सभी बिल और दस्तावेज जमा करने चाहिए। पहले व्यापारी से शिकायत करें और उसे 15 दिन दें। फिर औपचारिक फॉर्म भरें, शपथ-पत्र और सभी जरूरी कागज लगाएं।

🎯 Exam Tip: हमेशा याद रखें कि शिकायत दर्ज करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेज और संचार रिकॉर्ड एकत्र करना बहुत महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में उपभोक्ताओं को किस प्रकार बेहतर संरक्षण प्रदान किया जाता है?
Answer: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम उपभोक्ताओं को कई तरीकों से बेहतर सुरक्षा देता है:
* यह उपभोक्ताओं को उपभोक्ता शिक्षा के माध्यम से जागरूक और मजबूत बनाता है।
* इसमें तीन स्तर के अर्द्ध-न्यायिक तंत्र की व्यवस्था है (जिला, राज्य, राष्ट्रीय आयोग) ताकि शिकायतों का समाधान हो सके।
* यह सुनिश्चित करता है कि शिकायतकर्ता को पूरा मुआवजा मिले।
* विरोधी पक्ष को वह रकम भी दिलवाना जो उसकी लापरवाही के कारण उपभोक्ता को झेलनी पड़ी। इस तरह यह कानून उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करता है और उन्हें न्याय दिलाता है।
In simple words: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, उपभोक्ताओं को जागरूक करके, तीन स्तर की अदालतें बनाकर और उन्हें पूरा मुआवजा दिलवाकर सुरक्षित रखता है। यह सुनिश्चित करता है कि उन्हें हुई परेशानी का भुगतान मिले।

🎯 Exam Tip: उपभोक्ताओं को सशक्त बनाने के लिए शिक्षा, न्यायपालिका और मुआवजे की व्यवस्था, ये सभी इस अधिनियम के प्रमुख पहलू हैं।

 

Question 4. उपभोक्ता अपनी शिकायत को कब दर्ज करवा सकता है?
Answer: उपभोक्ता कानून का पूरा फायदा न मिलने के कई कारण हैं।
**(1) उपभोक्ता का जागरूक न होना:** उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम बनने के काफी समय बाद भी बहुत से उपभोक्ता इसके बारे में नहीं जानते। वे विज्ञापनों की बातों में आकर गलत क्वालिटी का सामान खरीद लेते हैं। वे खरीदते समय दाम, गुणवत्ता या मात्रा पर ध्यान नहीं देते और नुकसान होने पर शिकायत भी नहीं करते। इससे पता चलता है कि उन्हें इस कानून के बारे में जानकारी नहीं है।
**(2) उपभोक्ता का अशिक्षित होना:** शिक्षा की कमी मनुष्य के विकास में एक बड़ी रुकावट है। जब उपभोक्ता अशिक्षित होता है तो कोई भी व्यापारी उसे आसानी से ठग सकता है, क्योंकि उसे अपने अधिकारों के बारे में कोई जानकारी नहीं होती।
**(3) न्याय मिलने में देरी:** उपभोक्ता संरक्षण के तहत शिकायत करने से लोग कतराते हैं, क्योंकि इसमें समय और मेहनत ज्यादा लगती है। न्याय मिलने में देरी होने के कारण उपभोक्ता निराश होकर शिकायत नहीं करते।
**(4) कानून सम्बन्धी जानकारी का अभाव:** ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की कमी के कारण आम लोग कानून की जानकारी का फायदा नहीं उठा पाते और उन्हें नुकसान झेलना पड़ता है।
**(5) उपभोक्ता शिक्षा का अभाव:** उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम लागू होने के बावजूद भी उपभोक्ता शिक्षा की कमी दिखती है। उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों की जानकारी नहीं होती, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि हर उपभोक्ता को अपने अधिकारों की पूरी जानकारी हो, ताकि वह इस अधिनियम का लाभ उठा सके।
In simple words: उपभोक्ता कानून का पूरा लाभ न मिल पाने के कई कारण हैं। लोग जागरूक नहीं हैं, अशिक्षित हैं, न्याय मिलने में देर होती है, और कानून की जानकारी की कमी है। इसी वजह से उन्हें अपने अधिकारों का पूरा फायदा नहीं मिल पाता।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, अधिनियम के कमजोर बिंदुओं को उजागर करना और समस्याओं को स्पष्ट रूप से बताना महत्वपूर्ण है।

 

Question 1. राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस घोषित किया गया
(अ) 25 दिसम्बर
(ब) 1 दिसम्बर
(स) 24 दिसम्बर
(द) 26 नवम्बर
Answer: (स) 24 दिसम्बर
In simple words: भारत में हर साल 24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है। यह दिन उपभोक्ताओं के अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है।

🎯 Exam Tip: यह एक सामान्य ज्ञान का प्रश्न है, इसलिए सही तारीख याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. उपभोक्ता अधिनियम के अर्न्तगत उपभोक्ता को अधिकार है –
(अ) सुरक्षा का
(ब) चयन का
(स) सुनवाई का
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: उपभोक्ता कानून के तहत, उपभोक्ताओं को सुरक्षित रहने, सही सामान चुनने और अपनी बात सुनाने का हक है। ये सभी अधिकार उन्हें संरक्षण देते हैं।

🎯 Exam Tip: उपभोक्ता के प्रमुख अधिकारों को याद रखना आवश्यक है, जैसे सुरक्षा, चयन, सुनवाई और सूचना का अधिकार।

 

Question 3. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम उद्देश्य है –
(अ) उपभोक्ता को बेहतर संरक्षण देना
(ब) उपभोक्ता की शिकायतों को शीघ्र, सरल तरीके से कम खर्च में दूर करना
(स) उपभोक्ता के अधिकारों को महत्त्व देना
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: उपभोक्ता संरक्षण कानून का मुख्य मकसद उपभोक्ताओं को सुरक्षित रखना, उनकी शिकायतों को जल्दी और सस्ते में सुलझाना और उनके अधिकारों को महत्व देना है।

🎯 Exam Tip: यह अधिनियम कई उद्देश्यों को पूरा करता है, जिसमें उपभोक्ता हितों की रक्षा और शिकायतों का प्रभावी समाधान शामिल है।

 

Question 4. वस्तु खरीदने के दिनांक के कितने साल के भीतर शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है -
(अ) 2 साल
(ब) 3 साल
(स) 4 साल
(द) 5 साल
Answer: (अ) 2 साल
In simple words: कोई भी उपभोक्ता सामान खरीदने की तारीख से दो साल के अंदर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकता है। दो साल की समय-सीमा के बाद शिकायत स्वीकार नहीं की जाती है।

🎯 Exam Tip: शिकायत दर्ज करने की समय-सीमा याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है, ताकि आप अपना अधिकार न खोएं।

 

Question 5. उपभोक्ता अधिनियम के अर्न्तगत कितने दिनों के भीतर विवाद का निस्तारण करने का प्रावधान है –
(अ) 20
(ब) 50
(स) 90
(द) 30
Answer: (स) 90
In simple words: उपभोक्ता संरक्षण कानून में यह नियम है कि किसी भी विवाद को 90 दिनों के अंदर सुलझा लिया जाए। यह उपभोक्ताओं को त्वरित न्याय दिलाने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: विवादों के शीघ्र निपटान के लिए निर्धारित समय-सीमा को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. यदि मुआवजे के राशि 20,00,000 रु. से कम है तो शिकायत दर्ज होगी –
(अ) जिला संघ में
(ब) राज्य आयोग में
(स) राष्ट्रीय आयोग में
(द) इनमें से किसी में नहीं
Answer: (अ) जिला संघ में
In simple words: अगर मुआवजे की रकम 20 लाख रुपये से कम है, तो शिकायत जिला मंच में दर्ज की जाती है। यह सबसे निचला स्तर का उपभोक्ता फोरम है।

🎯 Exam Tip: मुआवजे की राशि के आधार पर सही उपभोक्ता फोरम का चयन करना आवश्यक है।

 

Question 7. यदि मुआवजे की राशि 1 करोड़ से अधिक है तो शिकायत दर्ज होगी –
(अ) जिला मंच में
(ब) राज्य आयोग में
(स) राष्ट्रीय आयोग में
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (स) राष्ट्रीय आयोग में
In simple words: जब मुआवजे की रकम 1 करोड़ रुपये से ज्यादा होती है, तो शिकायत सीधे राष्ट्रीय आयोग में दर्ज की जाती है। यह उपभोक्ता अदालतों का सबसे ऊंचा स्तर है।

🎯 Exam Tip: वित्तीय सीमा के अनुसार सही न्यायिक मंच का चुनाव करना शिकायत दर्ज करने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 8. यदि कोई व्यापारी आपको 25 ग्राम वस्तु न देकर कम-से-कम आधा किलो के लिये बाध्य करे तो यह है –
(अ) नियन्त्रित व्यापार नीति
(ब) अनियन्त्रित व्यापार नीति
(स) गलत, अवैध व्यापार नीति
(द) ये सभी।
Answer: (ब) अनियन्त्रित व्यापार नीति
In simple words: अगर कोई दुकानदार आपको जबरदस्ती ज्यादा सामान खरीदने के लिए मजबूर करता है, तो यह गलत और अनियन्त्रित व्यापार नीति है। यह उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।

🎯 Exam Tip: उपभोक्ताओं को अपनी पसंद के अनुसार खरीदारी करने का अधिकार है, और व्यापारी उन्हें जबरदस्ती ज्यादा सामान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।

 

Question 9. वस्तु के पैकेट पर लिखा मूल्य कहलाता है –
(अ) खुदरा
(ब) अधिकतम खुदरा
(स) मूल्य / इकाई
(द) थोक मूल्य।
Answer: (ब) अधिकतम खुदरा
In simple words: किसी भी सामान के पैकेट पर जो कीमत लिखी होती है, उसे अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) कहते हैं। इसका मतलब है कि दुकानदार उस सामान को उस कीमत से ज्यादा में नहीं बेच सकता।

🎯 Exam Tip: MRP (Maximum Retail Price) वह अधिकतम मूल्य है जिस पर कोई उत्पाद खुदरा विक्रेता द्वारा बेचा जा सकता है।

 

Question 10. उपभोक्ता शिकायत करने से पहले निम्न में से कौन सा कदम उठाना चाहिए?
(ब) उपभोक्ता संरक्षण न्यायालय में अपना विवाद प्रस्तुत करें
(स) व्यापारी से झगड़ा कर वस्तु / सेवा को बदलवाएँ
(द) चुपचाप अपनी किस्मत को दोष देकर बैठे रहें।
Answer: (अ) व्यापारी को पत्र भेजें जिसमें शिकायत एवं मुआवजे का वर्णन हो
In simple words: शिकायत करने से पहले, उपभोक्ता को सबसे पहले व्यापारी को एक पत्र भेजना चाहिए। इस पत्र में उसे अपनी शिकायत और मांगे गए मुआवजे के बारे में बताना चाहिए। यह एक शांतिपूर्ण और कानूनी पहला कदम है।

🎯 Exam Tip: शिकायत दर्ज करने का प्रारंभिक और सबसे महत्वपूर्ण कदम हमेशा संबंधित पार्टी को लिखित सूचना देना होता है।

 

Question 11. सचना का अधिकार अधिनियम किस वर्ष में लाग किया गया?
(अ) 2000
(ब) 2002
(स) 2004
(द) 20051
Answer: (द) 2005
In simple words: सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) भारत में वर्ष 2005 में लागू किया गया था। यह कानून नागरिकों को सरकारी विभागों से जानकारी मांगने का हक देता है।

🎯 Exam Tip: आरटीआई अधिनियम का लागू वर्ष और उसका मुख्य उद्देश्य याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 12. प्रार्थना-पत्र देने के बाद कितने दिनों में नागरिक सूचना प्राप्त कर सकता है' –
(अ) 15
(ब) 20
(स) 45.
(द) 90.
Answer: (ब) 20
In simple words: सूचना के अधिकार (RTI) के तहत आवेदन करने के बाद, नागरिक को आमतौर पर 30 दिनों के भीतर जानकारी मिल जानी चाहिए। कुछ विशेष मामलों में यह अवधि कम या ज्यादा हो सकती है। हालांकि, यहां दिए गए विकल्पों में, 20 दिन एक सामान्य अवधि है।

🎯 Exam Tip: सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी प्राप्त करने की समय-सीमा को याद रखें, जो आमतौर पर 30 दिन होती है, लेकिन तत्काल मामलों में 48 घंटे भी हो सकती है। दिए गए विकल्पों में, सबसे सटीक उत्तर चुनें।

 

Question. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(1) .दिसम्बर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस घोषित किया गया।
(2) उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अर्न्तगत वे वस्तुएँ नहीं आती जो उपभोक्ता को प्राप्त होती हैं।
(3) उपभोक्ताओं की शिकायतों को दूर करने के लिए इस अधिनियम में तीन स्तरीय तंत्र की स्थापना की गई है।
(4) अधिनियम में शिकायत प्राप्त करने के दिनों के अन्दर विवाद का निस्तारण कर दिए जाने का प्रावधान है।
(5) यदि मुआवजा से अधिक है तो शिकायत राज्य आयोग में दर्ज की जाएगी।
(6) यदि मुआवजा 1 करोड़ से अधिक है तो शिकायत में दर्ज होगी।
(7) जन-सूचना अधिकारी को आवेदन प्राप्ति के दिन के अन्दर आवेदन को सूचना देनी होगी।
(8) भाव-ताव करना; लॉटरी खोलकर सामान देना; प्रतियोगिता करवाना आदि सभी व्यापार नीतियाँ हैं।
(9) वह व्यक्ति जो किसी वस्तु / सेवा का क्रय करता है कहलाता है।
Answer:
(1) **24** दिसम्बर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस घोषित किया गया।
(2) उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अर्न्तगत वे वस्तुएँ नहीं आती जो उपभोक्ता को **निशुल्क** प्राप्त होती हैं।
(3) उपभोक्ताओं की शिकायतों को दूर करने के लिए इस अधिनियम में तीन स्तरीय **अर्द्ध-न्यायिक** तंत्र की स्थापना की गई है।
(4) अधिनियम में शिकायत प्राप्त करने के **90** दिनों के अन्दर विवाद का निस्तारण कर दिए जाने का प्रावधान है।
(5) यदि मुआवजा **20,00,000** रु. से अधिक है तो शिकायत राज्य आयोग में दर्ज की जाएगी।
(6) यदि मुआवजा 1 करोड़ से अधिक है तो शिकायत **राष्ट्रीय आयोग** में दर्ज होगी।
(7) जन-सूचना अधिकारी को आवेदन प्राप्ति के **30** दिन के अन्दर आवेदन को सूचना देनी होगी।
(8) भाव-ताव करना; लॉटरी खोलकर सामान देना; प्रतियोगिता करवाना आदि सभी **अवैध** व्यापार नीतियाँ हैं।
(9) वह व्यक्ति जो किसी वस्तु / सेवा का क्रय करता है **उपभोक्ता** कहलाता है।
In simple words: राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 24 दिसंबर को होता है। निशुल्क मिली चीजें उपभोक्ता कानून में नहीं आतीं। उपभोक्ता शिकायतों के लिए तीन स्तरीय अर्द्ध-न्यायिक तंत्र है। शिकायतें 90 दिनों में सुलझनी चाहिए। 20 लाख से ज्यादा मुआवजे के लिए राज्य आयोग और 1 करोड़ से ज्यादा के लिए राष्ट्रीय आयोग में शिकायत होती है। जन-सूचना अधिकारी 30 दिनों में सूचना देता है। भाव-ताव, लॉटरी जैसी चीजें अवैध व्यापार नीतियां हैं। सामान खरीदने वाला व्यक्ति उपभोक्ता कहलाता है।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति में अधिनियम से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य और परिभाषाएं अक्सर पूछी जाती हैं, इन्हें ध्यान से याद रखें।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 35 अति लघुत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
Answer: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर संरक्षण प्रदान करना है। यह उन्हें अनुचित व्यापार प्रथाओं और शोषण से बचाता है।
In simple words: इस कानून का खास मकसद उपभोक्ताओं को सुरक्षित रखना और उनके हितों की रक्षा करना है।

🎯 Exam Tip: अधिनियम का प्राथमिक उद्देश्य हमेशा उपभोक्ताओं के अधिकारों और हितों की रक्षा करना होता है।

 

Question 2. क्षतिपूर्ति के अधिकार में किस प्रकार का प्रावधान है?
Answer: क्षतिपूर्ति के अधिकार में उपभोक्ता को हुए किसी भी नुकसान या हानि के लिए हर्जाना प्राप्त करने का अधिकार है। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि यदि किसी उत्पाद या सेवा से उपभोक्ता को नुकसान होता है, तो उसे उसकी भरपाई मिल सके।
In simple words: अगर किसी सामान या सेवा से उपभोक्ता को नुकसान होता है, तो उसे उस नुकसान की भरपाई पाने का हक है।

🎯 Exam Tip: यह अधिकार सुनिश्चित करता है कि उपभोक्ता को हुए नुकसान की उचित भरपाई मिल सके।

 

Question 3. उपभोक्ता किसी भी वस्तु अथवा सेवा की शिकायत किस अवधि में कर सकता है?
Answer: उपभोक्ता वस्तु खरीदने की दिनांक से ठीक दो साल के अंदर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इस समय-सीमा के बाद शिकायत दर्ज नहीं की जा सकती।
In simple words: कोई भी उपभोक्ता सामान खरीदने के दो साल के अंदर ही शिकायत कर सकता है।

🎯 Exam Tip: शिकायत दर्ज करने की दो साल की समय-सीमा का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है।

 

Question 4. 1 करोड़ से अधिक मूल्य वाले केस की सुनवाई कहाँ होती है?
Answer: 1 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य वाले मुकदमे राष्ट्रीय आयोग में सुने जाते हैं। यह उपभोक्ता विवादों के समाधान के लिए सबसे उच्च स्तरीय मंच है।
In simple words: अगर मामला 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का है, तो उसकी सुनवाई राष्ट्रीय आयोग में होती है।

🎯 Exam Tip: मुआवजे की राशि के आधार पर न्यायिक मंच का चुनाव करना महत्वपूर्ण है, राष्ट्रीय आयोग सबसे बड़े मामलों को संभालता है।

 

Question 6. उपभोक्ता कानून का मुख्य उद्देश्य क्या है?
Answer: उपभोक्ता कानून का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ता को बेहतर संरक्षण प्रदान करना है। यह उन्हें अनुचित व्यापारिक प्रथाओं और शोषण से बचाता है।
In simple words: उपभोक्ता कानून का मुख्य लक्ष्य उपभोक्ताओं को सुरक्षा देना है।

🎯 Exam Tip: उपभोक्ता कानून का मूल मकसद हमेशा उपभोक्ता के हितों की रक्षा करना होता है।

 

Question 7. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के दो उद्देश्य लिखिए।
Answer: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के दो मुख्य उद्देश्य ये हैं:
* उपभोक्ता को व्यापारियों द्वारा की जाने वाली धोखाधड़ी या गलत काम से बचाना।
* एक न्यायिक व्यवस्था बनाना ताकि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हो सके।
In simple words: इस कानून का मकसद उपभोक्ताओं को धोखे से बचाना और उनके लिए न्याय दिलाना है।

🎯 Exam Tip: अधिनियम के मुख्य उद्देश्यों को संक्षिप्त और स्पष्ट रूप से याद रखना चाहिए।

 

Question 8. राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस कब होता है?
Answer: राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 24 दिसम्बर को होता है। इस दिन उपभोक्ताओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाती है।
In simple words: राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस हर साल 24 दिसंबर को मनाया जाता है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस की तारीख एक सामान्य ज्ञान का महत्वपूर्ण बिंदु है।

 

Question 9. सुरक्षा का अधिकार क्या है?
Answer: प्रत्येक उपभोक्ता को ऐसे माल के क्रय-विक्रय के विरुद्ध सुरक्षा पाने का अधिकार है जो जीवन के लिए हानिकारक है। इसमें वे सभी उत्पाद और सेवाएं शामिल हैं जिनसे स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
In simple words: सुरक्षा का अधिकार का मतलब है कि उपभोक्ता को उन चीजों से बचाया जाए जो उसके जीवन के लिए खतरनाक हो सकती हैं।

🎯 Exam Tip: सुरक्षा का अधिकार उपभोक्ता के मौलिक अधिकारों में से एक है, जो उसे हानिकारक उत्पादों से बचाता है।

 

Question 10. बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति का अधिकार क्या है?
Answer: मनुष्य के लिए जीवन की आवश्यक वस्तुएँ जैसे आवास, वस्त्र, भोजन, बिजली आदि की प्राप्ति, बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति का अधिकार कहलाता है। इसका अर्थ है कि हर व्यक्ति को इन मूलभूत सुविधाओं तक पहुंच का हक है।
In simple words: बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति का अधिकार यह है कि हर इंसान को घर, कपड़े, खाना और बिजली जैसी जरूरी चीजें मिलें।

🎯 Exam Tip: बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने का अधिकार मानव गरिमा के लिए आवश्यक है।

 

Question 11. सूचना का अधिकार क्या है?
Answer: उपभोक्ता को वस्तुओं के पूरे बाजार में अपनी पसंद की गुणवत्ता, मात्रा एवं अन्य मानको पर पूर्ण वस्तु का चयन करने का अधिकार है। यह अधिकार उपभोक्ता को सूचित निर्णय लेने में मदद करता है।
In simple words: सूचना का अधिकार बताता है कि उपभोक्ता को बाजार में मौजूद चीजों की क्वालिटी, मात्रा और बाकी सभी जानकारी जानने का हक है, ताकि वह अपनी पसंद की चीज चुन सके।

🎯 Exam Tip: सूचना का अधिकार उपभोक्ता को धोखाधड़ी से बचाता है और उसे बेहतर चुनाव करने में मदद करता है।

 

Question 13. सुनवाई का अधिकार क्या है?
Answer: उपभोक्ता द्वारा किसी वस्तु या सेवा के उपयोग में त्रुटि या दोष आने पर सही मंच पर शिकायत दायर करने पर उसकी सुनवाई होने का अधिकार है। यह सुनिश्चित करता है कि उपभोक्ता की शिकायतों को सुना जाए और उन पर कार्रवाई हो।
In simple words: अगर किसी सामान या सेवा में कोई खराबी हो, तो उपभोक्ता को अपनी शिकायत दर्ज कराने और उस पर सुनवाई पाने का हक है।

🎯 Exam Tip: सुनवाई का अधिकार उपभोक्ता को न्याय दिलाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

Question 14. स्वस्थ एवं सुरक्षित वातावरण का अधिकार क्या है?
Answer: प्रत्येक उपभोक्ता को ऐसे वातावरण में रहने का अधिकार है जो दूषित न हो। यदि आस-पास का वातावरण किसी कारखाने या उद्योग से दूषित होता है तो उपभोक्ता को उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने का अधिकार है। यह अधिकार साफ और सुरक्षित परिवेश में रहने की गारंटी देता है।
In simple words: हर उपभोक्ता को साफ और सुरक्षित जगह पर रहने का हक है। अगर कोई फैक्ट्री वातावरण को गंदा करती है, तो उपभोक्ता उसके खिलाफ शिकायत कर सकता है।

🎯 Exam Tip: यह अधिकार न केवल उत्पादों से बल्कि पर्यावरण से भी संबंधित है, जो उपभोक्ता के समग्र कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 15. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत उपभोक्ताओं की शिकायत को कौन दूर करता है?
Answer: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत उपभोक्ताओं की शिकायत को तीन स्तरीय अर्द्धन्यायिक तंत्र दूर करता है। इस तंत्र में जिला मंच, राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग शामिल हैं।
In simple words: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत, तीन अलग-अलग स्तर की अदालतें (जिला, राज्य, राष्ट्रीय) उपभोक्ताओं की शिकायतों को सुलझाती हैं।

🎯 Exam Tip: तीन स्तरीय अर्द्धन्यायिक तंत्र उपभोक्ताओं को उनके विवादों के समाधान के लिए एक संरचित प्रणाली प्रदान करता है।

 

Question 16. जिला मंच एवं राज्य आयोग कौन स्थापित करता है?
Answer: जिला मंच एवं राज्य आयोग राज्य सरकार स्थापित करती है। ये उपभोक्ता विवादों के समाधान के लिए महत्वपूर्ण निकाय हैं।
In simple words: राज्य सरकार जिला मंच और राज्य आयोग बनाती है।

🎯 Exam Tip: इन न्यायिक निकायों की स्थापना संबंधित राज्य सरकार द्वारा की जाती है।

 

Question 17. उपभोक्ता अधिनियम के अन्तर्गत कितनी अवधि में विवाद का निस्तारण किया जाता है?
Answer: उपभोक्ता अधिनियम के अन्तर्गत 90 दिन की अवधि में विवाद का निस्तारण किया जाता है। यह उपभोक्ताओं को त्वरित न्याय सुनिश्चित करता है।
In simple words: उपभोक्ता कानून के तहत, किसी भी विवाद को 90 दिनों के अंदर सुलझाना होता है।

🎯 Exam Tip: विवाद निपटारे के लिए निर्धारित 90 दिनों की समय-सीमा उपभोक्ताओं के लिए त्वरित न्याय सुनिश्चित करती है।

 

Question 19. यदि मुआवजे की राशि 20,00,000 से 1 करोड़ के बीच में हो तो मामले की सुनवाई कहां होगी?
Answer: यदि मुआवजे की राशि 20,00,000 रुपये से 1 करोड़ रुपये के बीच में हो तो मामले की सुनवाई राज्य आयोग में होगी। राज्य आयोग, जिला मंच से ऊपर का न्यायिक स्तर है।
In simple words: 20 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के मुआवजे वाले मामले राज्य आयोग में सुने जाते हैं।

🎯 Exam Tip: अलग-अलग मुआवजे की राशि के लिए सही न्यायिक मंच का चुनाव करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 20. जन सूचना अधिकारी को कितने दिन में आवेदक को सूचना देनी होती है?
Answer: जन सूचना अधिकारी को आवेदन पत्र प्राप्ति के 30 दिन के अन्दर आवेदक को सूचना देनी होती है। कुछ विशेष मामलों में यह अवधि कम हो सकती है।
In simple words: सूचना के लिए आवेदन मिलने के 30 दिनों के अंदर, जन सूचना अधिकारी को जानकारी देनी होती है।

🎯 Exam Tip: सूचना के अधिकार के तहत, जानकारी प्रदान करने की सामान्य समय-सीमा 30 दिन है।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 35 लघुत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. उपभोक्ता के लिए चयन के अधिकार का क्या महत्त्व है?
Answer: उपभोक्ता के लिए चयन का अधिकार बहुत महत्वपूर्ण है। यह अधिकार उपभोक्ता को विभिन्न प्रकार की और अच्छी क्वालिटी की वस्तुओं में से अपनी पसंद की चीज चुनने की आजादी देता है। दुकानदार या व्यापारी अगर उपभोक्ता को ज्यादा फायदे वाली चीज दिखाकर उसके गुण बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, तो भी उपभोक्ता को अपनी जरूरत और इच्छा के अनुसार वस्तु चुनने का हक है। यह अधिकार यह सुनिश्चित करता है कि उपभोक्ता पर कोई दबाव न हो और वह स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सके।
In simple words: चयन का अधिकार उपभोक्ता को अपनी पसंद की अच्छी चीज चुनने की आजादी देता है, भले ही दुकानदार उसे कुछ और बेचना चाहे। यह उपभोक्ता को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: चयन का अधिकार उपभोक्ता को सशक्त बनाता है, जिससे वह अपनी जरूरतों और बजट के अनुसार सबसे उपयुक्त उत्पाद चुन सके।

 

Question 2. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम कब पारित हुआ? इसके क्या उद्देश्य हैं ?
Answer: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम वर्ष 1986 में पारित हुआ था। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित रखना और उनकी समस्याओं को सुलझाना है। इस अधिनियम के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:
* यह अधिनियम उपभोक्ताओं के अधिकारों को सबसे ऊपर रखता है।
* उपभोक्ताओं को अच्छी सुरक्षा देना।
* यह कानून मौजूदा कानूनों जैसा एकात्मक और अलग नहीं है। इसमें नुकसान की भरपाई का भी प्रावधान है।
* इसमें उपभोक्ताओं की शिकायतों को जल्दी, आसानी से और कम खर्चे में सुलझाने की व्यवस्था है।
* इसमें केंद्र और राज्य में उपभोक्ता संरक्षण परिषदों की स्थापना का भी नियम है, जिनका काम उपभोक्ताओं के अधिकारों को बढ़ाना और उनकी रक्षा करना है।
* उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर तीन तरह की अर्द्ध-न्यायिक अदालतों की स्थापना की गई है।
* यह अधिनियम सरकारी, सार्वजनिक या निजी सभी क्षेत्रों पर लागू होता है।
* यह सभी वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होता है, सिवाय उन वस्तुओं के जो उपभोक्ताओं को मुफ्त मिलती हैं।
* यदि कोई व्यक्ति व्यापार के लिए कोई सामान या सेवा खरीदता है, तो उस पर यह अधिनियम लागू नहीं होता।
जैसे, अगर किसी ने टैक्सी चलाने के लिए गाड़ी खरीदी और उसमें कोई खराबी निकली, तो वह इस कानून के तहत मुआवजा नहीं मांग सकता। लेकिन अगर वही गाड़ी घर के काम के लिए खरीदी गई हो, तो उसे सुरक्षा मिलेगी।
In simple words: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 में बना था। इसका लक्ष्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित रखना, उनके अधिकारों को महत्व देना, शिकायतों को जल्दी और सस्ते में सुलझाना, और तीन स्तर की अदालतें बनाना है। यह सभी तरह के उत्पादों और सेवाओं पर लागू होता है, लेकिन व्यापार के लिए खरीदी गई चीजों पर नहीं।

🎯 Exam Tip: अधिनियम का लागू वर्ष, इसके व्यापक उद्देश्य और प्रमुख प्रावधानों को विस्तार से समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. उपभोक्ता संरक्षण के अन्तर्गत शिकायत किसे सन्दर्भित करायी जाती है, यह समझाइये।
Answer: उपभोक्ता संरक्षण के अन्तर्गत शिकायत दर्ज करवाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है:
**(1) शिकायत दर्ज करवाने से पहले:** उपभोक्ता को सभी जरूरी दस्तावेज, जैसे दुकान का बिल, गारंटी कार्ड, वारंटी कार्ड और व्यापारी से हुए पत्र व्यवहार के जवाब इकट्ठा कर लेने चाहिए। ये दस्तावेज शिकायत को सही साबित करने में मदद करेंगे।
**(2) उपभोक्ता न्यायालय में:** शिकायत दर्ज करने से पहले उपभोक्ता को एक रजिस्टर्ड डाक (पंजीकृत ए.डी.) से विरोधी पार्टी को एक पत्र भेजना चाहिए। इस पत्र में उसे अपनी शिकायत के बारे में बताना चाहिए और समस्या को सुलझाने के लिए कहना चाहिए। इसके लिए उसे कम से कम 15 दिन का समय देना चाहिए, क्योंकि एक अच्छा व्यापारी उपभोक्ता की शिकायत को सुलझा सकता है और मामला न्यायालय तक जाने से बच सकता है। अगर व्यापारी ऐसा करने से मना करता है, तो मामला उपभोक्ता न्यायालय में सुलझाया जाएगा।
**(3) उपभोक्ता न्यायालय में:** शिकायत दर्ज कराने के लिए एक औपचारिक फॉर्म भरना होता है। इस फॉर्म में सारी जानकारी सही-सही भरनी पड़ती है।
In simple words: शिकायत करने से पहले, उपभोक्ता को सभी बिल, गारंटी कार्ड जैसे दस्तावेज जमा करने चाहिए। फिर, रजिस्टर्ड डाक से व्यापारी को शिकायत का पत्र भेजना चाहिए और 15 दिन का इंतजार करना चाहिए। अगर समस्या न सुलझे, तो उपभोक्ता न्यायालय में औपचारिक फॉर्म भरकर शिकायत दर्ज की जा सकती है।

🎯 Exam Tip: शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को क्रमिक रूप से समझना महत्वपूर्ण है, जिसमें दस्तावेज़ संग्रह, प्रारंभिक नोटिस और औपचारिक शिकायत शामिल है।

 

Question 5. उपभोक्ता संरक्षण के अन्तर्गत शिकायत दर्ज कराने के बाद कौन-कौन सी प्रक्रियाएँ सम्पन्न होती हैं?
Answer: उपभोक्ता संरक्षण के अन्तर्गत शिकायत दर्ज कराने के बाद ये प्रक्रियाएँ पूरी होती हैं:
* शिकायत प्राप्त होने के बाद, जिला मंच शिकायत पत्र की एक कॉपी विरोधी पक्ष को भेजता है और उसे एक तय समय में अपना जवाब देने का निर्देश देता है।
* अगर विरोधी पक्ष उन आरोपों से इनकार करता है, तो जिला मंच इस विवाद को सुलझाने के लिए कार्रवाई करता है।
* यदि वस्तु में कोई खराबी पाई जाती है, तो प्रयोगशाला में उसका नमूना भेजकर जांच करवाई जाती है। प्रयोगशाला अधिकारी से 45 दिनों के अंदर परीक्षण रिपोर्ट मांगी जाती है।
* शिकायतकर्ता द्वारा, जो शुल्क वहन किया जा सकता है, वह जिला मंच में जमा करवाया जाता है। जमा रकम को जिला मंच द्वारा प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा जाता है। वहां से मिली रिपोर्ट विरोधी पक्ष को भेजी जाती है। जमा की गई राशि को उपभोक्ता विपक्षी पार्टी से वसूल कर लेता है।
* विरोधी पक्ष को अपना पक्ष रखने के लिए एक और अवसर दिया जाता है, यदि वह विरोध करता है।
In simple words: शिकायत दर्ज होने के बाद, विरोधी पक्ष को जवाब देने का मौका मिलता है। अगर वस्तु में खराबी है, तो उसकी प्रयोगशाला जांच होती है। शिकायतकर्ता को हुए नुकसान की भरपाई विरोधी पक्ष से करवाई जाती है, और दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलता है।

🎯 Exam Tip: शिकायत दर्ज करने के बाद की प्रक्रिया में दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर देना, दोषपूर्ण उत्पादों का परीक्षण और उचित मुआवजे का प्रावधान शामिल है।

 

Question 6. उपभोक्ता अधिनियम की क्या विशेषताएँ है?
Answer: उपभोक्ता अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
* इस अधिनियम में उपभोक्ताओं की शिकायतों की सुनवाई और समाधान के लिए तीन स्तरीय अर्द्धन्यायिक तंत्र की स्थापना की गई है। इन तीनों स्तरों पर मुआवजे की वित्तीय सीमाएं निर्धारित हैं: 20 लाख रुपये से कम के मामले जिला मंच में, 20 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के मामले राज्य आयोग में, और 1 करोड़ रुपये से अधिक के मामले राष्ट्रीय आयोग में दायर किए जाते हैं।
* जिला मंच और राज्य आयोग स्थापित करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है।
* इस अधिनियम के तहत उपभोक्ताओं की शिकायतों का जल्दी समाधान किया जाता है, जिससे उन्हें ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता। अधिनियम में शिकायत प्राप्त होने के 90 दिनों के भीतर विवाद का निपटारा करने का प्रावधान है।
* इस अधिनियम के तहत संरक्षण के लिए दायर की गई शिकायतें निःशुल्क होती हैं। इससे उपभोक्ताओं को आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
In simple words: उपभोक्ता अधिनियम की मुख्य बातें हैं- तीन तरह की अदालतों (जिला, राज्य, राष्ट्रीय) की व्यवस्था जो मुआवजे की रकम के हिसाब से काम करती हैं। राज्य सरकार आयोगों को बनाती है। शिकायतें 90 दिनों में सुलझ जाती हैं और शिकायत दर्ज करने का कोई पैसा नहीं लगता।

🎯 Exam Tip: अधिनियम की विशेषताओं को समझना इसके महत्व और प्रभावशीलता को दर्शाता है, खासकर इसकी न्याय प्रणाली और उपभोक्ता-अनुकूल प्रावधानों को।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 35 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये -
(1) सुरक्षा का अधिकार
(2) उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार
(3) नियंत्रित व्यापार नीतियाँ
(4) अर्द्धन्यायिक तंत्र
Answer:
(1) सुरक्षा का अधिकार (Right to safety):
प्रत्येक उपभोक्ता को उन सभी वस्तुओं को खरीदने या बेचने से मना करने का अधिकार है जो उसके जीवन के लिए खतरनाक हो सकती हैं. उपभोक्ता को हर तरह की हानिकारक वस्तु से सुरक्षित रहने का अधिकार है, खासकर बिजली के उपकरण, दवाइयाँ, खाने का रंग, साबुन और सौंदर्य प्रसाधन जैसी चीज़ों से. यह अधिकार सुनिश्चित करता है कि उपभोक्ता को किसी भी संभावित खतरे से बचाया जा सके.
(2) उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार (Right to consumer education):
उपभोक्ता को यह अधिकार है कि वह अपनी बात को मजबूत करने के लिए सभी प्रकार की वस्तुओं के बारे में जानकारी प्राप्त करे. इससे उसे वस्तु की कीमत, गुणवत्ता और मूल्य का पूरा ज्ञान होता है. इस जानकारी को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर कई जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं. यह सुनिश्चित करता है कि उपभोक्ता धोखाधड़ी का शिकार न हो.
(3) नियंत्रित व्यापार नीतियाँ:
ये वे नीतियाँ हैं जो व्यापारियों द्वारा बनाई जाती हैं. इनका उद्देश्य उपभोक्ता का शोषण करना होता है और वे सामूहिक रूप से किसी वस्तु या सेवा का मूल्य बढ़ा देते हैं. इन नीतियों को वे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं, ताकि उन्हें अधिक लाभ मिल सके.
(4) अर्द्ध-न्यायिक तंत्र:
उपभोक्ताओं की शिकायतों को हल करने के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में तीन स्तरों पर अर्द्ध-न्यायिक तंत्र स्थापित किया गया है. ये तीन स्तर जिला मंच, राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग हैं. 20,00,000 Rs. तक के मामले जिला मंच में, 20,00,000 Rs. से 1 करोड़ Rs. तक के मामले राज्य आयोग में, और 1 करोड़ Rs. से अधिक के मामले राष्ट्रीय आयोग में दायर किए जाते हैं.
In simple words: उपभोक्ता के पास सुरक्षित रहने, जानकारी पाने, शोषण से बचने और अपनी शिकायतें सही जगह दर्ज करने का अधिकार है. यह कानून उन्हें इन सभी चीजों में मदद करता है.

🎯 Exam Tip: टिप्पणी लिखते समय प्रत्येक अधिकार/नीति के मुख्य बिंदु को स्पष्ट रूप से समझाएँ और उसके उद्देश्य को रेखांकित करें.

 

Question 2. उपभोक्ता अधिनियम के उपयोग के विभिन्न चरण स्पष्ट कीजिए।
Answer: उपभोक्ता अधिनियम का उपयोग करने के कई चरण हैं, जो उपभोक्ता को अपनी शिकायत दर्ज करने और न्याय पाने में मदद करते हैं:
1. शिकायत कौन कर सकता है?
• उपभोक्ता स्वयं अपनी शिकायत दर्ज कर सकता है.
• किसी मान्यता प्राप्त उपभोक्ता संगठन का सदस्य भी शिकायत दर्ज कर सकता है.
• केंद्र या राज्य सरकार भी शिकायत कर सकती है.
• यदि एक ही उत्पाद या सेवा के खिलाफ कई उपभोक्ता शिकायत करना चाहते हैं, तो उपभोक्ता संगठन में एक साथ शिकायत दायर की जा सकती है. यह सामूहिक रूप से न्याय पाने का एक प्रभावी तरीका है.
2. शिकायत कब दायर कर सकते हैं?
• उपभोक्ता किसी वस्तु या सेवा की खरीद की तारीख से ठीक दो साल के भीतर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है. इस समय सीमा का पालन करना महत्वपूर्ण है.
3. शिकायत कहाँ दर्ज करा सकते हैं?
• उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में तीन-स्तरीय अर्द्ध-न्यायिक प्रणाली है. उपभोक्ता मुआवजे की राशि के हिसाब से अलग-अलग स्तरों पर शिकायत दर्ज कर सकता है. यह प्रणाली न्याय को सुलभ बनाती है.

क्र. सं.स्तरन्यायिक तंत्रवित्तीय सीमा (रुपयों में)
1.जिलाजिला मंच20,00,000 तक
2.राज्यराज्य आयोग20,00,000 से 1 करोड़
3.राष्ट्रीयराष्ट्रीय आयोग1 करोड़ से अधिक

• उपभोक्ता उसी जगह शिकायत दर्ज करवा सकता है जहाँ से उसने वस्तु खरीदी है.
4. शिकायत कैसे दर्ज करवा सकते हैं?
• शिकायत दर्ज करने से पहले, उपभोक्ता को सभी संबंधित दस्तावेज जैसे बिल, वारंटी-गारंटी कार्ड, और व्यापारी के साथ हुए पत्राचार को इकट्ठा करना चाहिए. ये दस्तावेज शिकायत की पुष्टि के लिए बहुत ज़रूरी हैं.
• सबसे पहले, उपभोक्ता को एक रजिस्टर्ड ए.डी. पत्र द्वारा विरोधी पक्ष को अपनी शिकायत का विवरण भेजना चाहिए और निवारण का अनुरोध करना चाहिए. यह उन्हें विवाद को अदालत से बाहर सुलझाने का मौका देता है.
• इस पत्र के बाद व्यापारी को कम से कम 15 दिन का समय देना चाहिए. यदि व्यापारी इस पत्र पर ध्यान नहीं देता और शिकायत का समाधान नहीं करता, तो उपभोक्ता न्यायालय की मदद ले सकता है.
5. शिकायत प्राप्त होने पर प्रक्रिया?
• शिकायत मिलने के बाद, जिला मंच शिकायत की एक कॉपी विरोधी पक्ष को भेजता है और उन्हें एक तय समय में अपना जवाब देने को कहता है.
• यदि विरोधी पक्ष आरोपों को नकारता है, तो जिला मंच इस विवाद को निपटाने के लिए कार्यवाही करता है.
• यदि वस्तु में खराबी है, तो प्रयोगशाला में उसका नमूना जाँच के लिए भेजा जाता है. प्रयोगशाला अधिकारी से 45 दिनों के भीतर परीक्षण रिपोर्ट मांगी जाती है. यह रिपोर्ट न्याय के लिए महत्वपूर्ण होती है.
6. जिला मंच का निष्कर्ष?
• उत्पादक को प्रयोगशाला में सिद्ध हुई कमियों को ठीक करने का आदेश दिया जाता है.
• त्रुटिपूर्ण माल को उसी स्तर के माल से बदलने का आदेश दिया जाता है.
• शिकायतकर्ता को उसका पैसा वापस करने का आदेश दिया जाता है.
• यदि उपभोक्ता को कोई आर्थिक नुकसान हुआ है, तो उसे उस रकम का भुगतान करने का आदेश दिया जाता है. यह उपभोक्ता को हुए नुकसान की भरपाई करता है.
जिला मंच के निष्कर्षों को न मानने पर विरोधी पक्ष को अदालत द्वारा सजा या जुर्माना मिल सकता है. यदि उपभोक्ता जिला मंच के फैसले से संतुष्ट नहीं है, तो वह राज्य आयोग, राष्ट्रीय आयोग और फिर सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकता है. यह सुनिश्चित करता है कि उपभोक्ता को न्याय के सभी रास्ते खुले रहें.
In simple words: उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने के लिए पहले दस्तावेज इकट्ठा करते हैं, फिर व्यापारी को सूचित करते हैं. अगर समाधान नहीं होता तो जिला, राज्य या राष्ट्रीय आयोग में शिकायत करते हैं. विवादों को तय समय में निपटाया जाता है और खराबी होने पर जाँच की जाती है, फिर उचित फैसला दिया जाता है.

🎯 Exam Tip: उपभोक्ता अधिनियम के उपयोग के प्रत्येक चरण को क्रमबद्ध तरीके से लिखें और प्रत्येक चरण में किए जाने वाले कार्यों का स्पष्ट उल्लेख करें. विशेषकर विभिन्न मंचों की वित्तीय सीमाओं को याद रखें.

 

Question 3. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 का हमारे जीवन में क्या उपयोग है?
Answer: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 भारत के सामाजिक और आर्थिक कानूनों के इतिहास में एक बहुत महत्वपूर्ण कदम है. इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर सुरक्षा देना है. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 का हमारे जीवन में कई तरह से उपयोग होता है:
• उपभोक्ता को बेहतर सुरक्षा और संरक्षण मिलता है. यह उन्हें ठगी और शोषण से बचाता है.
• इस अधिनियम में उपभोक्ताओं की शिकायतों को जल्दी, आसान तरीके से और कम खर्च में दूर करने की व्यवस्था है. यह न्याय को सुलभ बनाता है.
• इस अधिनियम में राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तरों पर तीन-स्तरीय अर्द्ध-न्यायिक तंत्र की स्थापना की गई है. यह सुनिश्चित करता है कि हर स्तर पर शिकायतों का समाधान हो.
• उपभोक्ता शिकायत उपभोक्ता न्यायालय में कर सकता है और स्वस्थ व सुरक्षित वातावरण के लिए आवाज उठा सकता है. यह उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ने की शक्ति देता है.
उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार (Right to Consumer Education):
प्रत्येक उपभोक्ता को अपनी बात को मजबूत करने के लिए उपभोक्ता शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है. इसमें वस्तुओं की गुणवत्ता, मात्रा, मूल्य, दरों आदि के बारे में सही जानकारी प्राप्त करना शामिल है. स्वयंसेवी संगठन और भारत सरकार कई कार्यक्रम चलाती हैं ताकि उपभोक्ता शिक्षा प्राप्त करके एक जागरूक उपभोक्ता बने और भ्रमित न हो. इन अधिकारों की जानकारी प्राप्त कर उपभोक्ता खुद को एक जागरूक उपभोक्ता बना सकता है. इस प्रकार, यह साफ है कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम हमारे जीवन के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यह हमारे कई उद्देश्यों को पूरा करता है. यह हमें एक सुरक्षित और जानकार उपभोक्ता बनाता है.
In simple words: यह कानून उपभोक्ताओं को सुरक्षित रखता है, उनकी शिकायतों को जल्दी सुलझाता है, और उन्हें अपने अधिकारों के बारे में शिक्षित करता है. यह हमें ठगी से बचाता है और न्याय पाने में मदद करता है.

🎯 Exam Tip: अधिनियम के महत्व को समझाते हुए, उसके मुख्य उद्देश्यों को बिंदुवार लिखें. उपभोक्ता शिक्षा के अधिकार को विशेष रूप से उल्लेख करें क्योंकि यह अधिनियम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

RBSE Class 12 Home Science Chapter 35 प्रयोगात्मक प्रश्न

निर्धारित रुपये होना आवश्यक है.

3. निकासी पत्र (Withdrawl form) के साथ भुगतान के लिए पास-बुक का होना ज़रूरी है.

4. निकासी पत्र द्वारा निकाले गए पैसों का विवरण पास-बुक में लिख दिया जाता है.

चेक के प्रमुख प्रकार तथा विशेषताएँ -

(i) साधारण या वाहक चेक (Bearer cheque):
ये सामान्य चेक होते हैं. वाहक चेक के जरिए खाताधारी खुद या कोई दूसरा व्यक्ति खाते से पैसा निकाल सकता है. वाहक चेक को कोई भी भुना सकता है, लेकिन जिसके नाम पर चेक होता है, उसे चेक के पीछे दो हस्ताक्षर करने पड़ते हैं. यह चेक तुरंत पैसे निकालने के लिए उपयोगी होता है.

(ii) आदेशित चेक (Order cheque):
इस चेक में पैसा सिर्फ उसी व्यक्ति को मिलता है जिसके नाम चेक है. इसे वाहक चेक में नहीं बदला जा सकता. यदि चेक जिस व्यक्ति के नाम है और उसका बैंक में खाता है, तो वह चेक के पीछे अपने हस्ताक्षर करता है और अपना खाता नंबर लिखता है, फिर बैंक उसके हस्ताक्षर की जाँच करके उसे भुगतान कर देता है. यदि उस व्यक्ति का खाता बैंक में नहीं है, तो उसे बैंक के किसी खाताधारी से पुष्टि करवानी पड़ती है. यह चेक ज़्यादा सुरक्षित होता है.

(iii) रेखांकित चेक (Crossed cheque):
इस चेक में चेक के ऊपरी बाएँ कोने पर दो तिरछी लाइनें खींची जाती हैं. उनके बीच 'And Co.', 'Account Payee only' या 'Not Negotiable' जैसे शब्द लिखे होते हैं. इन चेक का भुगतान सिर्फ उस व्यक्ति के खाते में ही जमा किया जाता है जिसके नाम चेक है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि पैसा सीधे सही व्यक्ति तक पहुँचे और चोरी का खतरा कम हो.

(iv) यात्री चेक (Traveller Cheque):
इसका उपयोग यात्रा के दौरान किया जाता है. लंबी यात्राओं में ज़्यादा नकदी ले जाने का खतरा होता है, इसलिए इससे बचने के लिए इसका उपयोग किया जाता है. इसे किसी भी दुकानदार को दिया जा सकता है. आजकल बैंक मास्टर कार्ड निकाल रहे हैं जो यात्री चेक से ज़्यादा सुविधाजनक हैं. यह यात्रा के लिए एक सुरक्षित भुगतान विकल्प है.

चेक अस्वीकृत होने के कारण -

  • चेक पर किए गए हस्ताक्षर अलग होने पर.
  • चेक में भरी गई राशि खाते में न होने पर.
  • चेक में काट-पीट होने पर.
  • अंकों और शब्दों में लिखी गई राशि में अंतर होने पर.
  • चेक कटा-फटा, गला या जला होने पर.
  • चेक देने वाले व्यक्ति ने भुगतान रोकने का अनुरोध किया हो.

बैंक से खाता खुलवाने का फार्म भरना विधि-बैंक में खाता खोलना -

  • बैंक में जिस प्रकार का खाता खोलना है, उसका फार्म बैंक से प्राप्त करें.
  • फार्म में मांगी गई ज़रूरी जानकारी भरें; जैसे - नाम, पिता/पति का नाम, पता, तारीख, व्यवसाय आदि.
  • बैंक का घोषणा-पत्र भरें.
  • फार्म और दूसरे कार्ड पर हस्ताक्षर करें.
  • जो हस्ताक्षर नहीं कर सकते, वे अंगूठे का निशान लगाएँ और फार्म पर अपना फोटो लगाएँ.
  • फार्म पर परिचयकर्ता के हस्ताक्षर करवाएँ; परिचयकर्ता ऐसा व्यक्ति हो जिसे बैंक अच्छी तरह जानता हो.
  • फार्म पूरा करने के बाद जितनी राशि का खाता खोलना है, उतनी राशि बैंक में जमा करें और उसकी रसीद फार्म पर लगा दें.
  • बैंक अधिकारी की सहमति के बाद बैंक का खाता क्रमांक प्राप्त करें.
  • बैंक द्वारा पास-बुक प्राप्त करें और उसमें विवरणों की पूरी जाँच कर लें.
  • पास-बुक गुम होने की स्थिति में बैंक को सूचित करें और नयी पास-बुक प्राप्त करें.

प्रयोग-2 उद्देश्य:

विभिन्न वस्तुओं के लेबल का मूल्यांकन एवं लेबल लगाना.

विधि-1. विभिन्न वस्तुओं के लेबिल का मूल्यांकन

क्र.सं.वस्तु का नामब्राण्ड का नामगुण/चिह्नसही/गलतचिह्न साफ/धुँधलाचिह्न
पैकेट परडिब्बे पर
1.नमकटाटाशुद्ध/एगमार्कउचितस्पष्टपैकेट परशीशी पर
2.हल्दीशिल्पाशुद्ध/एगमार्कउचितस्पष्टपैकेट परशीशी पर
3.गेहूँत्रिशूलउत्तम दाना/एगमार्कउचितस्पष्टपैकेट परशीशी पर
4.मिर्च पाउडरएम.डी.एच.शुद्ध/एगमार्कउचितस्पष्टपैकेट परशीशी पर
5.मक्खनअमूलउत्तम/एगमार्कसहीस्पष्ट-शीशी पर
6.शर्बतरूहआफजाउत्तम/एफ.पी.ओसहीस्पष्ट-शीशी पर
7.घीपरागशुद्ध/एगमार्कसहीस्पष्ट-डिब्बे पर
8.अचारनिलॉन्सशुद्ध/एफ.पी.ओ.सहीस्पष्ट-पैकेट या डिब्बे पर
9.तेलपतंजलिशुद्ध/एगमार्कसहीस्पष्ट-शीशी पर
10.बल्वविप्रोअच्छी रोशनी। I.S.Iसहीस्पष्ट-डिब्बे पर
11.-------
12.-------
13.-------
14.-------
15.-------

लेबल तैयार करना:

घरों में भी एक छोटा उद्योग चलता है, जिसके तहत परिवार के सदस्य निम्नलिखित वस्तुओं का उत्पादन करते हैं -

  • मसाले तैयार किए हुए
  • साबुन
  • शहद
  • बड़ी व पापड़
  • घी
  • अचार आदि.

अधिकतम मूल्य : 12 रुपये
निर्माण तिथि : 4.06.18
बैच नं० : 201A
पैक तिथि : 4.06.18
पैकिंग से 12 माह के अंदर श्रेष्ठ उपयोग.
गुणों को संरक्षित रखने का प्रयास किया गया है.
प्रताप नगर
सुरवाड़िया सर्किल
जयपुर-282003

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