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Detailed Chapter 3 बाह्य आक्रमण एवं आत्मसातीकरण RBSE Solutions for Class 12 History
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Class 12 History Chapter 3 बाह्य आक्रमण एवं आत्मसातीकरण RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 History Chapter 3 बहुचयनात्मक प्रश्न
Question 1. प्राचीन इतिहासकार कल्हण की प्रसिद्ध पुस्तक का नाम है।
(अ) इण्डिका
(ब) सूर्य - अलंकार
(स) राजतरंगिणी
(द) दिव्यावदान।
Answer: (स) राजतरंगिणी
In simple words: कल्हण एक प्रसिद्ध इतिहासकार थे जिन्होंने 'राजतरंगिणी' नामक पुस्तक लिखी थी। यह पुस्तक कश्मीर के इतिहास के बारे में बताती है।
🎯 Exam Tip: इतिहास में महत्वपूर्ण पुस्तकों और उनके लेखकों के नाम याद रखना बहुत जरूरी है, खासकर प्राचीन भारत के संदर्भ में।
Question 2. चरक संहिता के रचयिता महर्षि चरक किस शासक के दरबार की शोभा बढ़ाते थे।
(अ) कनिष्क
(ब) रुद्रदमन
(स) हर्षवर्द्धन
(द) अशोक।
Answer: (अ) कनिष्क
In simple words: महर्षि चरक, जिन्होंने चरक संहिता लिखी थी, राजा कनिष्क के दरबार में एक महत्वपूर्ण वैद्य थे। उन्होंने चिकित्सा विज्ञान में बहुत योगदान दिया।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण विद्वानों और वे किस राजा के दरबार से जुड़े थे, यह तथ्य अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है।
Question 4. त्रिपिटक सम्बन्धित है।
(अ) बौद्ध धर्म से
(ब) जैन धर्म से
(स) ईसाई धर्म से
(द) मुस्लिम धर्म से।
Answer: (अ) बौद्ध धर्म से
In simple words: त्रिपिटक बौद्ध धर्म के प्रमुख ग्रंथ हैं। इनमें बुद्ध की शिक्षाएं और नियम शामिल हैं, जिन्हें तीन 'पेटियों' में बांटा गया है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न धर्मों के प्रमुख ग्रंथों और उनसे जुड़े सिद्धांतों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 5. जूनागढ़ अभिलेख किसकी जानकारी उपलब्ध करवाता है?
(अ) चीनी शासक की
(ब) कुषाण शासक की
(स) यूनानी शासक की
(द) शक शासक की।
Answer: (द) शक शासक की।
In simple words: जूनागढ़ अभिलेख शक शासक रुद्रदमन के बारे में जानकारी देता है। यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज है।
🎯 Exam Tip: अभिलेख और शिलालेख प्राचीन इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं, इनसे शासकों और उनके समय की जानकारी मिलती है।
Question 6. बौद्ध धर्म का विभाजन किसके काल में हुआ था?
(अ) पृथ्वीराज
(ब) रुद्रदमन
(स) उदयराज
(द) कनिष्क।
Answer: (द) कनिष्क।
In simple words: बौद्ध धर्म का हीनयान और महायान शाखाओं में विभाजन राजा कनिष्क के शासनकाल में हुआ था। यह विभाजन बौद्ध संगीति के दौरान हुआ।
🎯 Exam Tip: बौद्ध संगीतियों और उनके परिणामों को याद रखना, विशेषकर प्रमुख शासकों के संदर्भ में, ऐतिहासिक घटनाओं को समझने में मदद करता है।
Question 7. बौद्ध धर्म की चतुर्थ संगीति का स्थान था।
(अ) पेशावर
(ब) कुण्डलवन (कश्मीर)
(स) उज्जैन
(द) मथुरा।
Answer: (ब) कुण्डलवन (कश्मीर)
In simple words: बौद्ध धर्म की चौथी बड़ी सभा कुण्डलवन में हुई थी, जो कश्मीर में है। इस सभा में बौद्ध धर्म के सिद्धांतों पर चर्चा हुई थी।
🎯 Exam Tip: बौद्ध संगीतियों के स्थान और उनसे जुड़े प्रमुख निर्णय अक्सर पूछे जाते हैं।
RBSE Class 12 History Chapter 3 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. मेगस्थनीज की पुस्तक का नाम बताइए।
Answer: मेगस्थनीज की पुस्तक का नाम 'इण्डिका' है। यह पुस्तक भारतीय इतिहास और भूगोल के बारे में जानकारी देती है।
In simple words: मेगस्थनीज ने 'इण्डिका' नाम की किताब लिखी थी।
🎯 Exam Tip: प्राचीन भारत के विदेशी यात्रियों और उनकी रचनाओं के नाम याद रखें क्योंकि वे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत हैं।
Question 2. शून्यवाद के प्रवर्तक कौन थे?
Answer: शून्यवाद के प्रवर्तक कनिष्क के दरबार के प्रसिद्ध वैज्ञानिक नागार्जुन थे। नागार्जुन एक महान दार्शनिक और रसायनशास्त्री भी थे।
In simple words: नागार्जुन ने शून्यवाद के सिद्धांत की शुरुआत की थी।
🎯 Exam Tip: विभिन्न दार्शनिक सिद्धांतों के प्रवर्तकों और उनके योगदान को याद रखना बौद्धिक इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. सिकन्दर कहाँ का शासक था?
Answer: सिकन्दर मकदुनिया का शासक था। मकदुनिया यूरोप के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित एक प्राचीन साम्राज्य था।
In simple words: सिकन्दर मकदुनिया का राजा था।
🎯 Exam Tip: विश्व इतिहास के प्रमुख शासकों और उनके मूल स्थानों को जानना सामान्य ज्ञान के लिए आवश्यक है।
Question 4. हिन्दू राजा पोरस ने किससे मुकाबला किया था?
Answer: हिन्दू राजा पोरस ने सिकन्दर से मुकाबला किया था। यह युद्ध झेलम नदी के किनारे हुआ था और राजा पोरस की वीरता के लिए जाना जाता है।
In simple words: राजा पोरस ने सिकन्दर से लड़ाई की थी।
🎯 Exam Tip: भारत पर हुए विदेशी आक्रमणों और भारतीय शासकों के प्रतिरोध के बारे में तथ्यों को याद रखें।
Question 6. भारतीय व यूनानी मिश्रण से किस शैली की मूर्तिकला का विकास हुआ था?
Answer: भारतीय व यूनानी मिश्रण से गान्धार शैली की मूर्तिकला का विकास हुआ था। यह शैली बुद्ध की प्रतिमाओं के निर्माण में प्रमुख थी।
In simple words: भारत और यूनान की कला को मिलाकर गान्धार शैली बनी।
🎯 Exam Tip: कला शैलियों के विकास और उन पर पड़ने वाले विभिन्न सांस्कृतिक प्रभावों को समझना आवश्यक है।
Question 7. शकों को किस चीन जाति ने परास्त किया था?
Answer: शकों को चीन की यू-ची जाति ने परास्त किया था। यू-ची जाति मध्य एशिया से संबंधित थी।
In simple words: चीन की यू-ची जाति ने शकों को हराया था।
🎯 Exam Tip: विभिन्न प्राचीन जातियों और उनके संघर्षों को याद रखें क्योंकि ये इतिहास के महत्वपूर्ण पहलू हैं।
Question 8. पराक्रम व साहस के लिए इस काल के शासक किस उपाधि को धारण करते थे?
Answer: पराक्रम व साहस के लिए इस काल के शासक 'विक्रमादित्य' की उपाधि धारण करते थे। यह उपाधि वीरता और शक्ति का प्रतीक थी।
In simple words: उस समय के वीर राजा 'विक्रमादित्य' की उपाधि लेते थे।
🎯 Exam Tip: प्राचीन भारतीय उपाधियाँ और उनके महत्व को समझना शासकों की विशेषताओं को जानने में मदद करता है।
Question 9. सुदर्शन झील का जीर्णोद्धार करवाने वाले शासक का क्या नाम था?
Answer: सुदर्शन झील का जीर्णोद्धार गुप्त सम्राट स्कन्दगुप्त के सौराष्ट्र प्रान्त के गवर्नर सु-विशाख द्वारा सम्पन्न कराया गया था। यह झील सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण थी।
In simple words: सुदर्शन झील को स्कन्दगुप्त के गवर्नर सु-विशाख ने ठीक करवाया था।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण ऐतिहासिक निर्माणों और उनके रखरखाव से जुड़े व्यक्तियों और घटनाओं को याद रखें।
Question 10. संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने वाला शासक कौन था?
Answer: संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने वाला शासक रुद्रदमन प्रथम था। उसके जूनागढ़ अभिलेख विशुद्ध संस्कृत में लिखे गए थे।
In simple words: रुद्रदमन प्रथम ने संस्कृत भाषा को बहुत समर्थन दिया।
🎯 Exam Tip: शासकों के सांस्कृतिक योगदान, विशेषकर भाषा और साहित्य के क्षेत्र में, को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 11. कुषाण वंश का संस्थापक कौन था?
Answer: कुषाण वंश का संस्थापक कजुलकेडफिसिज था। उसने मध्य एशिया में इस वंश की नींव रखी थी।
In simple words: कजुलकेडफिसिज ने कुषाण वंश की स्थापना की थी।
🎯 Exam Tip: विभिन्न राजवंशों के संस्थापकों के नाम और उनके प्रमुख योगदान को याद रखना चाहिए।
Question 12. 'आक्सस नदी से पूर्व में गंगा नदी तक मध्य एशिया में खुरासन से लेकर उत्तर प्रदेश में वाराणसी तक' कौन शासक राज्य करता था?
Answer: बौद्ध धर्म हीनयान और महायान नामक दो शाखाओं में विभक्त हो गया था। यह विभाजन कनिष्क के शासनकाल में हुआ था।
In simple words: बौद्ध धर्म दो मुख्य भागों, हीनयान और महायान में बंट गया।
🎯 Exam Tip: बौद्ध धर्म की प्रमुख शाखाओं और उनके मूल सिद्धांतों को समझना आवश्यक है।
Question 14. प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान वसुमित्र ने किस सभा (संगीति) की अध्यक्षता की थी?
Answer: प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान वसुमित्र ने कश्मीर के कुण्डलवन नामक विहार में आयोजित चतुर्थ बौद्ध संगीति की अध्यक्षता की थी। इस संगीति में बौद्ध धर्म के सिद्धांतों पर चर्चा हुई।
In simple words: वसुमित्र ने चौथी बौद्ध सभा की अध्यक्षता की थी जो कश्मीर में हुई थी।
🎯 Exam Tip: बौद्ध संगीतियों के अध्यक्षों और उनके स्थानों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 15. विदेशी व्यापार की समृद्धि को प्रदर्शित करने वाले चीन से रोम तक फैले मार्ग को किस नाम से जाना जाता था?
Answer: विदेशी व्यापार की समृद्धि को प्रदर्शित करने वाले चीन से रोम तक फैले मार्ग को रेशम मार्ग के नाम से जाना जाता था। यह मार्ग व्यापार और संस्कृति के आदान-प्रदान के लिए महत्वपूर्ण था।
In simple words: चीन से रोम तक का व्यापार मार्ग 'रेशम मार्ग' कहलाता था।
🎯 Exam Tip: प्राचीन व्यापार मार्गों, उनके महत्व और उनसे जुड़े देशों को जानना भू-आर्थिक इतिहास के लिए आवश्यक है।
Question 16. किस विद्वान को भारतीय आइन्सटीन कहा जाता है?
Answer: कनिष्क के दरबार के प्रसिद्ध दार्शनिक एवं वैज्ञानिक नागार्जुन को भारतीय आइन्सटीन कहा जाता है। उन्होंने शून्यवाद का सिद्धांत दिया था।
In simple words: नागार्जुन को भारत का आइन्सटीन कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: भारत के महान वैज्ञानिकों और दार्शनिकों के योगदान को याद रखना उनके सम्मान और भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने के लिए जरूरी है।
Question 17. पाटलिपुत्र का सम्बन्ध दक्षिण में किस बन्दरगाह से था?
Answer: पाटलिपुत्र का सम्बन्ध दक्षिण में ताम्रलिप्ति बन्दरगाह से था। ताम्रलिप्ति एक महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक केंद्र था।
In simple words: पाटलिपुत्र का व्यापारिक संबंध दक्षिण के ताम्रलिप्ति बंदरगाह से था।
🎯 Exam Tip: प्राचीन बंदरगाहों और उनके व्यापारिक महत्व को याद रखना व्यापारिक इतिहास को समझने में मदद करता है।
RBSE Class 12 History Chapter 3 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. हूण शासक तोरमाण से किन भारतीय शासकों ने मुकाबला किया?
Answer: हूण शासक तोरमाण से स्थानीय शासकों यशोवर्मन तथा बालदित्य ने मिलकर मुकाबला किया। 528 ई. में यशोवर्मन के आक्रमण से हूण परास्त हो गए थे परन्तु वे अपने मूल स्थान मध्य एशिया नहीं गए बल्कि हिन्दू धर्म व संस्कृति को आत्मसात करके इसके अभिन्न अंग बन गए और इसी में विलीन हो गए। यह भारतीय समाज की समावेशी प्रकृति को दर्शाता है।
In simple words: तोरमाण से यशोवर्मन और बालदित्य ने लड़ाई की। हूण हार गए लेकिन भारत में ही बस गए और भारतीय संस्कृति का हिस्सा बन गए।
🎯 Exam Tip: विदेशी आक्रमणकारियों और उनके भारतीय शासकों के साथ संघर्षों के परिणामों को विस्तार से समझना महत्वपूर्ण है।
Question 4. महान कवि अश्वघोष की रचनाओं का नाम लिखिए।
Answer: अश्वघोष कुषाण वंश के शासक कनिष्क का दरबारी कवि था जिसने संस्कृत में बुद्धचरित, सौंदरानन्द महाकाव्य व सारीपुत्र प्रकरण की रचना की। उनकी रचनाएं बौद्ध धर्म और साहित्य को समृद्ध करती हैं।
In simple words: अश्वघोष ने 'बुद्धचरित', 'सौंदरानन्द महाकाव्य' और 'सारीपुत्र प्रकरण' जैसी किताबें लिखीं।
🎯 Exam Tip: दरबारी कवियों और उनके साहित्यक योगदान को याद रखना सांस्कृतिक इतिहास के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 5. यूनानी आक्रमण के समय भारत की राजनैतिक स्थिति को अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: यूनानी आक्रमण के समय उत्तरी-पश्चिमी भारत कई छोटे-छोटे राज्यों में विभक्त था। काबुल के उत्तर में गांधार, झेलम और चिनाब के बीच में पौरव, रावलपिण्डी और पेशावर के हिस्से में तक्षशिला, कश्मीर के पश्चिम में रावी और व्यास नदियों के बीच का भाग कठ, उसके निकट क्षुद्रक, इन नदियों के संगम स्थल के भाग में मालव, मूसक, सम्बोस और ऐसे ही अन्य राज्यों को मिलाकर उस काल में भारत का उत्तरी-पश्चिमी भाग कुल 25 राज्यों में बँटा था। इनमें से कुछ गणतंत्र थे और कुछ राज्य राजतंत्रात्मक शासन पद्धति से शासित थे। राजतंत्र के शासक गणतंत्रों से विरोध रखते थे। इनमें आपस में संघर्ष होता रहता था। ऐसी राजनैतिक परिस्थितियों में मकदुनिया के शासक सिकन्दर ने ईसा पूर्व 327 में भारत की ओर प्रस्थान किया। भारत की यह फूट यूनानी आक्रमण का एक बड़ा कारण बनी।
In simple words: जब यूनानी आए, भारत के उत्तर-पश्चिम में बहुत से छोटे-छोटे राज्य थे। कुछ पर राजा शासन करते थे, कुछ गणतंत्र थे। वे आपस में लड़ते रहते थे, जिससे सिकन्दर को भारत में आने का मौका मिल गया।
🎯 Exam Tip: विदेशी आक्रमणों से पहले की आंतरिक राजनीतिक स्थिति का विश्लेषण करना ऐतिहासिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझने में सहायक होता है।
Question 6. “राजा पुरु अथवा पोरस का प्रतिरोध पराक्रम व साहस से परिपूर्ण था।” इस वाक्य को स्पष्ट करें।
Answer: सिकन्दर ने अपने विजय अभियान के अन्तर्गत झेलम और चिनाब नदियों के मध्य स्थित पौरव राज्य पर अधिकार करने का निश्चय किया तथा वहाँ के शासक पुरु या पोरस को आत्मसमर्पण कर उसकी अधीनता स्वीकार करने का संदेश भेजा। देशभक्ति से ओत-प्रोत, पराक्रमी एवं वीर राजा पोरस ने सिकन्दर को युद्ध के लिए ललकारा तथा मातृभूमि की रक्षा के लिए वीरता से लड़ा परन्तु सिकन्दर की सेना विजयी रही तथा उसे युद्ध में बन्दी बना लिया गया। सिकन्दर के यह पूछने पर कि उसके साथ क्या बर्ताव किया जाए राजा पोरस ने कहा, "जैसा एक राजा को दूसरे राजा के साथ करना चाहिए।” सिकन्दर राजा पोरस की इस निर्भीकता से प्रसन्न हुआ एवं उसने उसका राज्याधिकार लौटा दिया। इस वक्तव्य से स्पष्ट होता है कि राजा पुरु पोरस का प्रतिरोध पराक्रम व साहस से परिपूर्ण था। पोरस की वीरता ने सिकन्दर को भी प्रभावित किया।
In simple words: राजा पोरस ने बहुत हिम्मत और बहादुरी से सिकन्दर का सामना किया। जब सिकन्दर ने उसे पकड़ लिया और पूछा कि उसके साथ कैसा व्यवहार किया जाए, तो पोरस ने कहा, "जैसा एक राजा दूसरे राजा के साथ करता है।" सिकन्दर पोरस की इस बहादुरी से खुश होकर उसे उसका राज्य वापस लौटा दिया।
🎯 Exam Tip: राजा पोरस और सिकन्दर के संवाद को याद रखें, यह भारतीय वीरता और कूटनीति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
Question 8. राजा मेनाण्डर पर 15 पंक्तियाँ लिखिए।
Answer: मेनाण्डर इण्डो-यूनानी राजाओं में सबसे महान था। उसका जन्म कलसी गाँव में हुआ था जो मेनाण्डर की राजधानी शाकल से 200 योजन दूर स्थित अलासण्ड द्वीप पर था। 'मिलिन्दपन्ह' ग्रन्थ में मेनाण्डर को एक राजवंश से सम्बन्धित बताया गया है। मेनाण्डर के सिक्कों के अध्ययन से पता चलता है कि उसने डेमेट्रियस की पुत्री अगैथीक्लीया से विवाह किया। मेनाण्डर एक महान विजेता भी था उसने सिकन्दर से भी अधिक राष्ट्रों पर विजय पाई। मेनाण्डर के सिक्कों के प्राप्ति स्थानों से यह निष्कर्ष निकलता है कि वह कई राज्यों का शासक था। वह एक न्यायप्रिय शासक था जिसने बौद्ध धर्म को अपनाया और कई बौद्ध भिक्षुओं को आश्रय दिया। मेनाण्डर एक दार्शनिक के रूप में भी प्रसिद्ध था।
In simple words: मेनाण्डर एक बहुत शक्तिशाली इण्डो-यूनानी राजा था। उसने कई युद्ध जीते और बौद्ध धर्म को माना। उसके बारे में 'मिलिन्दपन्ह' किताब से पता चलता है। वह एक समझदार और न्यायप्रिय राजा था जिसने कई राज्यों पर शासन किया।
🎯 Exam Tip: विदेशी शासकों, उनके शासन विस्तार, धार्मिक नीतियों और साहित्यिक संदर्भों को विस्तृत रूप से याद रखना चाहिए।
Question 9. मुद्रा (सिक्के) के क्षेत्र में यूनानी मुद्रा की विशेषताएँ बताइए।
Answer: भारतीय बैक्ट्रियनों के शासन का भारत में महत्वपूर्ण प्रभाव मुद्रा पर पड़ा। पहले के सिक्के तकनीकी रूप से कम श्रेष्ठ होते थे तथा इन पर किसी शासक का नाम, उपाधि तथा तिथि अंकित नहीं होती थी। भारतीय यूनानी शासकों ने जो मुद्राएँ (सिक्के) चलायीं उनकी विशेषताएँ निम्नलिखित थीं-
1. भारतीय यूनानी शासकों ने सोने के सिक्के चलाए जिन पर राजा का नाम, उपाधि और तिथि अंकित होती थी।
2. उनके सिक्के पहले के सिक्कों की तुलना में श्रेष्ठ थे, जिनमें कलात्मकता अधिक थी।
यूनानी शासकों द्वारा चलाए गए सिक्के भारतीय मुद्रा निर्माण में एक नया अध्याय थे।
In simple words: यूनानी शासकों ने बेहतर सोने के सिक्के बनाए। इन सिक्कों पर राजा का नाम, पद और तारीख लिखी होती थी। ये सिक्के पहले के भारतीय सिक्कों से बहुत अच्छे थे।
🎯 Exam Tip: प्राचीन सिक्कों की विशेषताएं, उनके बनाने वाले शासक और उनका महत्व आर्थिक इतिहास को समझने में मदद करता है।
Question 10. “शक शासक रुद्रदमन को जनकल्याण के लिए स्मरण किया जाएगा।” इसके पक्ष में अपने तर्क संक्षेप में लिखिए।
Answer: शक शासकों के वंशजों में जयदमन के पुत्र रुद्रदमन प्रथम (130 - 150 ई.) उज्जैन के शक शासकों में सबसे प्रख्यात था। 150 ई. में रुद्रदमन प्रथम द्वारा जारी किये गये जूनागढ़ अभिलेख में रुद्रदमन के व्यक्तित्व के बारे में जानकारी मिलती है। इस लेख में उसके व्यक्तित्व का जो पक्ष सर्वाधिक उभरा वह है जनकल्याण की भावना। उसने प्रजा के लिए अपने मंत्रियों के विरोध के बावजूद अपने निजी कोष से भारी धन व्यय करके सुदर्शन झील का पुनर्निर्माण करवाया था। उसने बाँध के लिए प्रजा से कोई अतिरिक्त या अनुचित कर नहीं लिया। वह उच्च आदर्शों का पालन करने वाला प्रजावत्सल राजा था। वह सदैव शरणागत की रक्षा करने वाला और युद्ध के अतिरिक्त किसी का भी वध न करने की प्रतिज्ञा लेने वाला दयालु व्यक्ति था। उसने अपने प्रजाजनों को डाकुओं, जंगली पशुओं व रोगों से भयमुक्त किया। इस प्रकार के लोक कल्याणकारी कार्यों के लिए रुद्रदमन प्रथम को सदैव स्मरण किया जाएगा। उसने जनता की भलाई के लिए कई काम किए।
In simple words: रुद्रदमन प्रथम एक बहुत प्रसिद्ध शक राजा था। उसने जनता की भलाई के लिए बहुत काम किए। उसने अपनी जेब से पैसे खर्च करके सुदर्शन झील को ठीक करवाया और लोगों से कोई नया टैक्स नहीं लिया। वह हमेशा सबकी मदद करता था और अपनी प्रजा को डाकुओं और बीमारियों से बचाता था। इसीलिए उसे हमेशा याद किया जाता है।
🎯 Exam Tip: जनकल्याणकारी शासकों के कार्यों और उनके प्रभाव को उदाहरण सहित याद रखना चाहिए।
Question 11. बौद्ध धर्म के उत्थान हेतु अशोक के बाद सर्वाधिक रूप से कुषाण शासक कनिष्क को श्रेय जाता है। समझाइए।
Answer: बौद्ध धर्म के उत्थान हेतु अशोक के पश्चात् सर्वाधिक श्रेय कुषाण शासक कनिष्क को जाता है क्योंकि:
1. बौद्ध साहित्य में कनिष्क का उल्लेख दूसरे अशोक के रूप में किया गया है जिसके प्रोत्साहन एवं संरक्षण के कारण बौद्ध धर्म का व्यापक प्रचार - प्रसार हुआ।
2. कनिष्क ने बौद्ध धर्म को राज्याश्रय प्रदान कर कनिष्कपुर, पुरुषपुर, मथुरा व तक्षशिला में स्तूप और विहार बनवाए।
3. उसने विदेशों में बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए बौद्ध भिक्षुओं को मध्य एशिया, चीन, तिब्बत, जापान आदि देशों में भेजा।
4. कनिष्क द्वारा चतुर्थ संगीति का आयोजन इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि कनिष्क बौद्ध था और महायान शाखा के प्रसार के लिए उसने प्रयत्न किए।
5. कनिष्क ने महायान को राजधर्म घोषित किया तथा मध्य एशिया में बौद्ध धर्म की इस शाखा को बहुत अधिक विकसित किया। कनिष्क का संरक्षण बौद्ध धर्म के विकास के लिए निर्णायक था।
In simple words: अशोक के बाद कनिष्क ने बौद्ध धर्म को बहुत फैलाया। उसने बौद्ध धर्म को बढ़ावा दिया, स्तूप और विहार बनवाए, और भिक्षुओं को दूसरे देशों में भेजा। उसने चौथी बौद्ध संगीति भी करवाई और महायान शाखा को अपना राजधर्म बनाया।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण शासकों के धार्मिक योगदान, विशेषकर धर्म प्रचार और संरक्षण में उनकी भूमिका को विस्तार से लिखना चाहिए।
Question 13. विदेशी व्यापार की उन्नति का काल किसे कहेंगे वे क्यों?
Answer: कुषाणों के काल को विदेशी व्यापार की उन्नति का काल कहा जा सकता है क्योंकि: इस काल में स्थल मार्गों एवं नदी मार्गों के विकास ने जहाँ आन्तरिक व्यापार में वृद्धि की वहीं समुद्री मार्गों ने विदेशी व्यापार को सुदृढ़ता प्रदान की। कुषाणों ने रेशम मार्ग पर नियंत्रण कर लिया जो चीन से चलकर मध्य एशिया होते हुए रोमन साम्राज्य तक पहुँचता था। भारतीय व्यापारियों ने चीनी सिल्क व्यापार में मध्यस्थ के रूप में भाग लेना शुरू कर दिया। वे चीन से रेशम खरीदकर रोमन साम्राज्य के व्यापारियों तक पहुँचाकर लाभ कमाते थे। भारत में हाथी दाँत का सामान, काली मिर्च, लौंग, मसाले, सुगन्धित पदार्थ और औषधियों तथा सूती व रेशमी कपड़े बड़ी मात्रा में रोम निर्यात किये जाते थे। भारत का बारीक मलमल रोम में बहुत लोकप्रिय था। चीन व रोम के अतिरिक्त इस काल में भारत का व्यापार बर्मा, जावा, सुमात्रा, चम्पा आदि दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों के साथ भी था। इण्डो-ग्रीक शासकों व कुषाण शासकों ने बड़ी संख्या में सोने के सिक्के भी चलाए। मुद्रा एवं व्यापार के कारण देश में कई नगरों का विकास हुआ। इस प्रकार नगरीय संस्कृति, मुद्रा व व्यापार के प्रसार ने कुषाणों के काल में विदेशी व्यापार को विकसित किया। कुषाणों के समय में भारत का विदेशी व्यापार बहुत फला-फूला।
In simple words: कुषाणों का समय विदेशी व्यापार के लिए बहुत अच्छा था। उन्होंने रेशम मार्ग पर नियंत्रण किया और भारत से बहुत सारे सामान जैसे मसाले और कपड़े रोम भेजे। कई देशों के साथ व्यापार बढ़ा और सोने के सिक्के भी खूब चले।
🎯 Exam Tip: किसी विशेष काल के आर्थिक विकास, व्यापारिक मार्गों और वस्तुओं का उल्लेख करते हुए उत्तर को विस्तृत करें।
Question 14. 'गान्धार कला' भारतीय मूर्तिकला का नवीन रूप था। इसकी विशेषताओं को समझाइए।
Answer: गान्धार कला को ग्रीको-रोमन, ग्रीको-बुद्धिष्ट, हिन्द-यूनानी आदि नामों से जाना जाता है। इस शैली का विकास भारतीयों ने किया। भारत के गान्धार प्रदेश में विकसित होने के कारण ही इसे गंधार शैली कहा गया। गांधार में भारतीय शिल्पकारों का एशियाई, यूनानी व रोमन शिल्पियों के सम्पर्क में आने पर इस शैली का उद्भव हुआ। इसमें बुद्ध की प्रतिमाएँ यूनान व रोम मिश्रित शैली में बनायी गयीं। इस शैली की विशेषताएँ निम्नलिखित थीं-
1. गांधार कला में बनायी गयी बुद्ध की मूर्तियाँ यूनानी ढंग से बनने लगीं जो यूनानियों के पवित्र देवता अपोलो की भाँति लगती हैं।
2. गांधार कला की विषयवस्तु भारतीय थी केवल निर्माता यूनानी थे।
3. इस शैली में बनाई गई मूर्तियों में यूनानी श्रृंगार तथा अलंकार की प्रधानता थी। ये भूरे तथा स्लेटी रंग के पत्थरों से बनती थीं बाद में चूना प्लास्टर का भी उपयोग होने लगा।
4. इस शैली में भारी ओष्ठ, खिंची हुई आँखें, घंघराले बाल, लम्बी पूँछे, बोझिल, हठ-युक्त वस्त्रों से ढकी मूर्तियों में बुद्ध की आकृति को यथार्थता के निकट लाने का प्रयास किया गया है।
5. यूनानी प्रभाव के कारण बुद्ध की मूर्तियों में यूनानी देवताओं का प्रभाव दृष्टिगोचर होने लगा। इस कारण इस कला को इण्डो-ग्रीक अथवा ग्रीको-बुद्धिष्ट कला भी कहते हैं। यह कला भारतीय और विदेशी कला का सुंदर मिश्रण थी।
In simple words: गांधार कला भारतीय और यूनानी कला का मिश्रण थी, जिसमें बुद्ध की मूर्तियाँ यूनानी देवताओं जैसी दिखती थीं। इन मूर्तियों में यूनानी सजावट ज्यादा होती थी और ये भूरे या स्लेटी पत्थरों से बनती थीं।
🎯 Exam Tip: कला शैलियों की विशेषताओं, उनके नामकरण और उन पर पड़ने वाले विभिन्न प्रभावों को विस्तार से समझाएं।
Question 16. यूनानी आक्रमण के प्रभाव को रेखांकित कीजिए।
Answer: यूनानी शासकों ने लगभग दो शताब्दियों तक भारत के उत्तर-पश्चिम सीमान्त प्रदेशों पर शासन किया। इस काल में भारतीयों तथा यूनानियों में पर्याप्त सांस्कृतिक सम्बन्ध रहे और दोनों की एक-दूसरे पर प्रतिक्रिया हुई। यूनानी सभ्यता का प्रभाव भारतीय मुद्रा, मूर्तिकला, व्यापार तथा वाणिज्य के क्षेत्र में विशेष रूप से पड़ा। भारतीयों की कई धार्मिक धारणाओं और आदर्शों को यूनानी शासकों ने अपनाया। असंख्य यूनानी भारतीय धर्मों के अनुयायी बन गए तथा अन्त में यूनानी विशेषताएँ भारत में ही आत्मसात होकर भारतीय समाज व संस्कृति की मुख्य धारा में विलीन हो गईं। यह एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक संगम था।
In simple words: यूनानियों के भारत पर आक्रमण से भारतीय संस्कृति में बहुत बदलाव आए। उनकी कला, मुद्रा और व्यापार का असर भारत पर पड़ा। बहुत से यूनानी लोग भारतीय धर्म अपनाने लगे और धीरे-धीरे वे भारतीय समाज का हिस्सा बन गए।
🎯 Exam Tip: विदेशी आक्रमणों के केवल युद्धगत परिणामों को ही नहीं, बल्कि उनके दीर्घकालिक सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभावों को भी उल्लेख करना चाहिए।
RBSE Class 12 History Chapter 3 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. “भारतीय समाज की धारा में विदेशियों का समावेश” विषय पर विस्तार से लिखिए।
Answer: मौर्यों के पतन से गुप्त साम्राज्य के आविर्भाव तक के काल को मौर्योत्तर काल कहा जाता है। इस काल में कोई बड़ा साम्राज्य तो स्थापित नहीं हुआ परन्तु यह युग ऐतिहासिक दृष्टिकोण से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस युग में मध्य एशिया से सांस्कृतिक सम्बन्ध स्थापित हुए और भारतीय समाज की धारा में विदेशियों का समावेश हुआ। मौर्योत्तर काल में किसी एक राजवंश का सम्पूर्ण भारत पर नियंत्रण नहीं था बल्कि अनेक क्षेत्रीय व स्थानीय राजवंशों को अलग - अलग क्षेत्र में शासन था। मौर्योत्तर काल में शासन करने वाले विदेशी शासक, जैसे यूनानी, शक, कुषाण और हूण, भारत में आए और यहाँ बस गए। अन्त में उनकी संस्कृतियाँ भारत में ही आत्मसात होकर मुख्यधारा में विलीन हो गयीं। विदेशियों व भारतीयों के मध्य इस सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने दोनों को एक-दूसरे की संस्कृतियों से अवगत कराया तथा अन्त में ये विदेशी भारतीय संस्कृति के रीति - रिवाजों को अपनाकर सदा के लिए भारतीय बन गए और इनके धर्म व संस्कृति भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग बन गए। यह भारतीय समाज की सहिष्णुता और अनुकूलनशीलता का प्रमाण है।
In simple words: मौर्यों के बाद और गुप्तों से पहले का समय मौर्योत्तर काल कहलाता है। इस दौरान भारत में कई विदेशी लोग आए और यहीं बस गए, जैसे यूनानी, शक, कुषाण और हूण। उन्होंने भारतीय संस्कृति को अपनाया और अपनी संस्कृति को भी भारत से मिलाया। धीरे-धीरे वे भारतीय समाज का अटूट हिस्सा बन गए।
🎯 Exam Tip: विदेशी जातियों के आगमन, उनके भारतीय समाज में घुलने-मिलने की प्रक्रिया और इसके सांस्कृतिक प्रभावों को विस्तार से समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 2. कुषाण राजा कनिष्क का एक महान शासक के रूप में मूल्यांकन करते हुए उसके कार्यकाल की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer: कनिष्क कुषाण वंश का सबसे प्रतापी शासक था। कनिष्क के समय में कुषाण सत्ता अपने शिखर पर पहुँच गई थी। कनिष्क एक महान विजेता, कुशल प्रशासक एवं कला प्रेमी शासक था। कनिष्क जब सिंहासनारूढ़ हुआ तब उत्तराधिकार में उसे छोटा - सा राज्य मिला था। अपने पराक्रम के बल पर उसने अपना साम्राज्य पश्चिम में आक्सस नदी से पूर्व में गंगा नदी तक मध्य एशिया में खुरासन से लेकर उत्तर प्रदेश में वाराणसी तक विस्तृत कर लिया था। एक महान योद्धा व साम्राज्य निर्माता होने के साथ-साथ कनिष्क कलाकारों तथा विद्वानों को आश्रयदाता था। हर्ष व अशोक की भाँति वह बौद्ध धर्म का प्रचारक एवं पोषक था। बौद्ध होते हुए भी कनिष्क ने अन्य धर्मों का आदर किया और धार्मिक सहिष्णुता की नीति का पालन किया। उसके कार्यकाल के समय कुषाण काल अपने चरमोत्कर्ष पर था। उसके शासन काल की प्रमुख विशेषताएँ अग्रलिखित थीं:
1. कनिष्क का शासन शकों की भाँति क्षेत्रप प्रणाली पर आधारित था। प्रत्येक प्रान्त क्षत्रप द्वारा शासित होता था।
2. दण्डनायक और महादण्डनायक पद कुषाण प्रशासकीय मशीनरी के महत्वपूर्ण भाग थे।
3. कनिष्क ने कनिष्कपुर, पुरुषपुर, सिरमुख अरदि नगरों की स्थापना की तथा अनेक स्तूपों, विहारों का निर्माण कराया।
4. कनिष्क ने महायान धर्म को राजाश्रय प्रदान किया तथा बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए बौद्ध भिक्षुओं को मध्य एशिया, चीन, तिब्बत, जापान आदि देशों में भेजा।
5. कनिष्क ने कश्मीर के कुण्डलवन नामक विहार में चतुर्थ बौद्ध संगीति का आयोजन किया जिसका अध्यक्ष वसुमित्र था।
6. कनिष्क के काल में हुई चतुर्थ बौद्ध संगीति में बौद्ध धर्म हीनयान तथा महायान दो शाखाओं में विभाजित हो गया।
7. कनिष्क के काल में स्थल मार्गों एवं नदी मार्गों के विकास ने जहाँ आन्तरिक व्यापार में वृद्धि की वहीं समुद्री मार्गों ने विदेशी व्यापार को सुदृढ़ता प्रदान की।
8. कनिष्क के काल में भारत का व्यापार रोम, चीन, बर्मा, जावा, सुमात्रा, चम्पा आदि दक्षिणी-पूर्वी एशिया के देशों के साथ भी था।
9. कनिष्क ने बड़ी संख्या में सोने के सिक्के चलाए। मुद्रा एवं व्यापार के कारण देश में कई नगरों का विकास हुआ।
10. कनिष्क के काल में साहित्य, विज्ञान तथा कला के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई।
11. कनिष्क के शासनकाल में मूर्तिकला की तीन प्रमुख शैलियों का विकास हुआ – मथुरा, अमरावती एवं गान्धार।
12. कनिष्क के काल में भारतीय ज्योतिष में नवीन सिद्धान्तों की स्थापना हुई और खगोल विद्या की वैज्ञानिक प्रामाणिकता बढ़ी।
13. कनिष्क ने 78 ई. में एक नया संवत् आरम्भ किया जो शक संवत् कहलाता है। कनिष्क एक दूरदर्शी और प्रभावी शासक था।
In simple words: कनिष्क कुषाण वंश का सबसे शक्तिशाली राजा था। उसने अपना राज्य बहुत फैलाया और बौद्ध धर्म को बढ़ावा दिया। उसने कई शहर और स्तूप बनवाए, और चीन तक व्यापार बढ़ाया। उसके समय में कला, विज्ञान और व्यापार खूब फला-फूला। उसने शक संवत् भी शुरू किया।
🎯 Exam Tip: कनिष्क के साम्राज्य विस्तार, धार्मिक नीति, प्रशासनिक व्यवस्था और सांस्कृतिक योगदान को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करना चाहिए।
Question 4. कुषाणकालीन समाज, धर्म व वाणिज्य व्यापार का वर्णन कीजिए।
Answer: कुषाणकालीन समाज समृद्ध था। महिलाओं को पर्याप्त स्वतंत्रता थी। घर में उनके पृथक् कक्ष होते थे। पोशाक में एकरूपता नहीं थी। गाँव में लोग कमर में फेंटा लगाते थे और सिर पर रूमाल या साफा बाँधते थे। राजा को देवतुल्य माना जाता था। सामाजिक स्वीकृति हेतु यह धार्मिक वैधता आवश्यक थी।
वाणिज्य एवं व्यापारः व्यापारिक दृष्टि से भारत कुषाणों के काल में आर्थिक रूप से सम्पन्न राष्ट्र बन गया था। इस काल में स्थल मार्गों एवं नदी मार्गों के विकास ने जहाँ आन्तरिक व्यापार में वृद्धि की, वहीं समद्री मार्गों ने विदेशी व्यापार को सुदृढ़ता प्रदान की। कुषाणों ने चीन से चलकर मध्य एशिया होते हुए रोम को जाने वाले रेशम मार्ग पर नियंत्रण कर लिया। भारत के व्यापारी चीन से रेशम खरीदकर रोमन साम्राज्य के व्यापारियों तक पहुँचाते थे जिससे उन्हें बड़ा लाभ मिलता था। भारत में हाथी दाँत का सामान, मसाले, सुगन्धित पदार्थ, औषधियाँ, सूती व रेशमी वस्त्र आदि बड़ी मात्रा में रोम निर्यात किये जाते थे। चीन व रोम के अलावा भारत का व्यापार बर्मा, जावा, सुमात्रा, चम्पा आदि दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों के साथ भी था। मुद्रा एवं व्यापार के कारण देश में कई नगरों का विकास हुआ जिससे आन्तरिक व्यापार को बढ़ावा मिला। यह काल भारत के आर्थिक विकास का स्वर्णकाल था।
In simple words: कुषाणों के समय समाज बहुत समृद्ध था और महिलाओं को आजादी थी। राजा को भगवान जैसा मानते थे। व्यापार बहुत बढ़ा क्योंकि सड़कों और समुद्री रास्तों का विकास हुआ। रेशम मार्ग पर कुषाणों का नियंत्रण था। भारत से रोम, चीन और दक्षिण-पूर्वी एशिया को बहुत सारा सामान बेचा जाता था, जिससे खूब पैसा आता था।
🎯 Exam Tip: किसी विशेष काल के समाज, धर्म और अर्थव्यवस्था का वर्णन करते समय सभी प्रमुख पहलुओं को शामिल करें और उन्हें उदाहरणों से स्पष्ट करें।
Question 5. “शक राजा रुद्रदमन एक महान शासक था।” समझाइए।
Answer: शक शासकों के वंशजों में जयदमन का पुत्र रुद्रदमन प्रथम उज्जैन के शक शासकों में सबसे विख्यात था। उसने 130 ई. से 150 ई. तक शासन किया। रुद्रदमन प्रथम ने 150 ई. में जूनागढ़ अभिलेख जारी किया जिससे उसके विषय में सर्वाधिक जानकारी प्राप्त होती है। इस अभिलेख को विशुद्ध संस्कृत भाषा में लिखा गया था जिससे स्पष्ट होता है कि रुद्रदमन ने संस्कृत को बढ़ावा दिया। रुद्रदमन के जूनागढ़ अभिलेख से उसके सम्बन्ध में निम्नलिखित जानकारी मिलती है:
1. जूनागढ़ अभिलेख से रुद्रदमन प्रथम के व्यक्तित्व की जो पक्ष सर्वाधिक उभरी वह जनकल्याण की भावना है।
2. अपने मंत्रियों के विरोध के बावजूद रुद्रदमन ने अपनी प्रजा के लिए अपने निजी कोष में से भारी धन व्यय करके सुदर्शन झील का पुनर्निर्माण करवाया था।
3. रुद्रदमन ने बाँध के लिए प्रजा से कोई अनुचित कर नहीं लिया।
4. वह उच्च आदर्शों का पालन करने वाला प्रजावत्सल राजा था।
5. वह सदैव शरणागत की रक्षा करने वाला और युद्ध के अतिरिक्त किसी का भी वध न करने की प्रतिज्ञा लेने वाला दयालु व्यक्ति था।
6. रुद्रदमन ने अपने प्रजाजनों को डाकुओं, जंगली पशुओं व रोगों से भयमुक्त किया।
7. वह एक कुशल सेनानायक और योद्धा था।
8. वह शस्त्र व शास्त्र दोनों विधाओं में पारंगत था। वह संगीत वे शास्त्रों का ज्ञाता, संस्कृत व संस्कृति का संरक्षक, काव्यशास्त्र का मर्मज्ञ, शब्दार्थ (व्याकरण), तर्कशास्त्र का ज्ञाता तथा हाथी, घोड़े, रथादि के संचालन एवं तलवार ढाल आदि के युद्ध में प्रवीण था।
9. इन गुणों के साथ-साथ वह अद्भुत शारीरिक सौन्दर्य का स्वामी भी था। ये सभी गुण उसे एक महान शासक सिद्ध करते हैं।
In simple words: रुद्रदमन प्रथम एक बहुत प्रसिद्ध शक राजा था। उसने जूनागढ़ अभिलेख लिखवाया और संस्कृत को बढ़ावा दिया। वह जनता की भलाई करने वाला, वीर योद्धा और विद्वान था। उसने अपनी प्रजा की रक्षा की और सुदर्शन झील को ठीक करवाया, इसलिए उसे महान शासक माना जाता है।
🎯 Exam Tip: किसी शासक की महानता का मूल्यांकन करते समय उसके प्रशासनिक, सांस्कृतिक, सैन्य और जनकल्याणकारी कार्यों को उदाहरणों सहित स्पष्ट करें।
RBSE Class 12 History Chapter 3 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Class 12 History Chapter 3 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. मौर्य वंश का अंतिम सम्राट कौन था?
(क) पुष्यमित्र शुंग
(ख) वृहद्रथ
(ग) चन्द्रगुप्त मौर्य
(घ) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (ख) वृहद्रथ
In simple words: वृहद्रथ मौर्य वंश का आखिरी राजा था, जिसके बाद यह वंश खत्म हो गया।
🎯 Exam Tip: राजवंशों के संस्थापक और अंतिम शासकों के नाम याद रखना ऐतिहासिक घटनाओं की क्रमिकता समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 2. निम्नलिखित में से किन्हें विदेशी शासकों के अन्तर्गत नहीं रखा जा सकता है?
(क) शक
(ख) कुषाण
(ग) हूण
(घ) सातवाहन।
Answer: (घ) सातवाहन।
In simple words: सातवाहन शासक भारतीय थे, जबकि शक, कुषाण और हूण विदेशी आक्रमणकारी थे जो भारत आए थे।
🎯 Exam Tip: भारतीय और विदेशी राजवंशों को पहचानना और उनके मूल को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 3. हर्षचरित किसकी रचना है?
(क) ह्वेनसांग
(ख) कल्हण
(ख) कल्हण
(ग) बाणभट्ट
(घ) पतंजलि।
Answer: (ग) बाणभट्ट
In simple words: 'हर्षचरित' नाम की किताब बाणभट्ट ने लिखी थी, जिसमें राजा हर्षवर्धन के जीवन के बारे में बताया गया है।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथों और उनके लेखकों के नाम याद रखना साहित्य और इतिहास को जोड़ने में मदद करता है।
Question 5. सिकन्दर को भारत में आगमन कब हुआ?
(क) 315 ई. पू.
(ख) 327 ई. पू.
(ग) 298 ई. पू.
(घ) 302 ई. पू.
Answer: (ख) 327 ई. पू.
In simple words: सिकंदर 327 ईसा पूर्व में भारत आया था। वह एशिया पर जीत हासिल करने के बाद भारतीय उपमहाद्वीप में पहुंचा था।
🎯 Exam Tip: इतिहास में महत्वपूर्ण तिथियों को याद रखने के लिए उन्हें एक समयरेखा पर व्यवस्थित करें, जिससे घटनाओं का क्रम स्पष्ट हो जाए।
Question 6. सिकन्दर के आक्रमण के समय तक्षशिला का शासक कौन था?
(क) अष्टक
(ख) आंभी
(ग) पोरस
(घ) शशिगुप्त।
Answer: (ख) आंभी
In simple words: सिकंदर जब भारत पर हमला करने आया था, तब आंभी तक्षशिला का राजा था। उसने सिकंदर की मदद भी की थी।
🎯 Exam Tip: प्रमुख ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और उनके राज्यों को याद रखें, क्योंकि यह अक्सर सीधे सवालों में पूछा जाता है।
Question 7. भारत की उत्तरी - पश्चिमी सीमा पर सिकन्दर का सामना सबसे पहले किससे हुआ?
(क) शकों से
(ख) पौरव से
(ग) अश्मकों से
(घ) क्षुद्रकों से।
Answer: (ग) अश्मकों से
In simple words: सिकंदर का पहला बड़ा मुकाबला भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में अश्मकों के साथ हुआ था। उन्होंने सिकंदर का वीरता से सामना किया।
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक लड़ाइयों के शुरुआती प्रतिरोध और प्रमुख शक्तियों को हमेशा याद रखें।
Question 8. सिकन्दर की मृत्यु कब हुई?
(क) 320 ई. पू.
(ख) 323 ई. पू.
(ग) 330 ई. पू.
(घ) 323 ई. पू.
Answer: (ख) 323 ई. पू.
In simple words: सिकंदर की मौत 323 ईसा पूर्व में हुई थी। यह उसके भारत से लौटने के बाद हुई थी।
🎯 Exam Tip: शासकों के जन्म, मृत्यु और महत्वपूर्ण घटनाओं की तारीखें इतिहास के प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण होती हैं।
Question 9. इण्डो – ग्रीक नाम से जाने गए यूनानी शासक किस शाखा से सम्बन्धित थे?
(क) पार्थियन
(ख) बैक्ट्रियन
(ग) क्षत्रप
(घ) मेनाण्डर।
Answer: (ख) बैक्ट्रियन
In simple words: इण्डो-ग्रीक शासक बैक्ट्रियन शाखा से आते थे। ये वे यूनानी थे जिन्होंने भारत में आकर शासन किया था।
🎯 Exam Tip: विभिन्न विदेशी शासकों की शाखाओं और उनके भारतीय उपनामों को पहचानें, जैसे 'इण्डो-ग्रीक'।
Question 11. मिलिन्दपन्ह किस भाषा से लिखी गई पुस्तक है?
(क) संस्कृत
(ख) पाली
(ग) हिन्दी
(घ) ग्रीक।
Answer: (ख) पाली
In simple words: मिलिन्दपन्ह एक मशहूर किताब है जिसे पाली भाषा में लिखा गया था। यह पुस्तक बौद्ध धर्म से जुड़ी है।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक ग्रंथों की भाषा और उनके विषय वस्तु को याद रखें।
Question 12. शक मूल रूप से कहाँ के निवासी थे?
(क) काबुल
(ख) यूरोप
(ग) मध्य एशिया
(घ) अफगानिस्तान।
Answer: (ग) मध्य एशिया
In simple words: शक लोग असल में मध्य एशिया से आए थे। वे खानाबदोश थे और बाद में भारत में बस गए।
🎯 Exam Tip: भारत में विभिन्न विदेशी आक्रमणकारियों के मूल स्थानों और उनके प्रवेश मार्गों को समझें।
Question 13. भारत के दक्कन में अपना राज्य स्थापित करने वाली शको की प्रमुख शाखा थी
(क) दूसरी
(ख) पाँच
(ग) तीसरी
(घ) चौथी।
Answer: (ख) पाँच
In simple words: शकों की पाँच शाखाओं में से एक ने भारत के दक्कन इलाके में अपना राज स्थापित किया था। यह उनकी प्रमुख शाखाओं में से एक थी।
🎯 Exam Tip: विभिन्न राजवंशों की प्रमुख शाखाओं और उनके भारत में फैलाव के बारे में जानकारी रखें।
Question 14. उज्जैन के शक शासकों में सबसे प्रख्यात कौन था?
(क) चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य
(ख) स्कन्दगुप्त
(ग) रुद्रदमन प्रथम
(घ) महाक्षत्रप।
Answer: (ग) रुद्रदमन प्रथम
In simple words: रुद्रदमन प्रथम उज्जैन के शक राजाओं में सबसे मशहूर था। वह अपने कामों और गुणों के लिए जाना जाता था।
🎯 Exam Tip: किसी विशेष क्षेत्र से संबंधित सबसे प्रसिद्ध शासक को याद रखें और उनके प्रमुख योगदानों को भी जानें।
Question 15. दक्कन में राज्य करने वाली शक शाखा की राजधानी क्या थी?
(क) उज्जैन
Answer: (घ) [Option text not available from source]
In simple words: दक्कन में शक शासकों की राजधानी नासिक थी, जहाँ से वे अपना शासन चलाते थे। यह उनके दक्षिण भारतीय प्रभुत्व का केंद्र था।
🎯 Exam Tip: विभिन्न राजवंशों की राजधानियों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनके शासन के भौगोलिक विस्तार को दर्शाता है।
Question 16. [Question text not available in source]
(क) हूण
(ख) शक
(ग) कुषाण
(घ) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (ख) शक
In simple words: यह विकल्प शकों को इंगित करता है, जो मध्य एशिया से भारत आए थे। उन्होंने भारत के कई हिस्सों में शासन किया था।
🎯 Exam Tip: भले ही प्रश्न का पाठ उपलब्ध न हो, विकल्पों और उत्तरमाला से अनुमान लगाने का अभ्यास करें।
Question 17. शक शासक रुद्रदमन की उपलब्धियों का उल्लेख किस अभिलेख में मिलता है?
(क) नासिक अभिलेख
(ख) महरौली स्तम्भ लेख
(ग) जूनागढ़ अभिलेख
(घ) उपरोक्त सभी।
Answer: (ग) जूनागढ़ अभिलेख
In simple words: रुद्रदमन प्रथम की सारी खास बातें जूनागढ़ अभिलेख में लिखी हुई हैं। यह अभिलेख उसकी विजयों और अच्छे कामों के बारे में बताता है।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण शासकों से जुड़े प्रमुख अभिलेखों और उनमें दर्ज जानकारी को याद रखें।
Question 18. महाक्षत्रप की उपाधि किसने धारण की?
(क) पुष्यमित्र शुंग
(ख) रुद्रदमन प्रथम
(ग) तोरमाण
(घ) कनिष्क।
Answer: (ख) रुद्रदमन प्रथम
In simple words: महाक्षत्रप एक बड़ी उपाधि थी जिसे रुद्रदमन प्रथम ने धारण किया था। यह उसकी शक्ति और बड़े राजा होने का प्रतीक था।
🎯 Exam Tip: विभिन्न शासकों द्वारा धारण की गई उपाधियों और उनके महत्व को समझें।
Question 19. विक्रम संवत की शुरूआत कब हुई?
(क) 56 ई. पू.
(ख) 50 ई. पू.
(ग) 57 ई. पू.
(घ) 52 ई. पू.
Answer: (ग) 57 ई. पू.
In simple words: विक्रम संवत की शुरुआत 57 ईसा पूर्व में हुई थी। यह भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण कैलेंडर है।
🎯 Exam Tip: भारत में विभिन्न संवतों (कैलेंडर) की शुरुआत की तारीखों और उनके संस्थापकों को याद रखें।
Question 20. शक शासक रुद्रदमन ने किस भाषा को बढ़ावा दिया?
(क) पालि
(ख) संस्कृत
(ग) प्राकृत
(घ) स्थानीय।
Answer: (ख) संस्कृत
In simple words: शक राजा रुद्रदमन संस्कृत भाषा को बहुत महत्व देता था। उसने संस्कृत को आगे बढ़ाने के लिए कई काम किए।
🎯 Exam Tip: शासकों के कला, साहित्य और भाषा के संरक्षण से जुड़े योगदानों को याद रखें।
Question. मिलान कीजिए
(i) खण्ड-'अ' 'शासक' को खण्ड 'ब' 'वंश/जाति' से मिलाएं।
खण्ड-'अ' 'शासक'
1. कनिष्क
2. रुद्रदमन प्रथम
3. तोरमाण
4. सिकन्दर
5. पुष्यमित्र
खण्ड 'ब' 'वंश/जाति'
(क) शुंग वंश
(ख) कुषाण वंश
(ग) शक जाति
(घ) हूण जाति
(ङ) यूनानी शासक
(ii) खण्ड-'अ' 'ग्रन्थ' को खण्ड 'ब' 'लेखक' से मिलाएं।
खण्ड-'अ' 'ग्रन्थ'
1. बुद्धचरित
2. राजतरंगिणी
3. माध्यमिक सूत्र
4. मालविकाग्निमित्रम्
5. हर्षचरित
खण्ड 'ब' 'लेखक'
(क) कालिदास
(ख) अश्वघोष
(ग) कल्हण
(घ) बाणभट्ट
(ङ) नागार्जुन
Answer:
(i) शासक और उनके वंश/जाति का सही मिलान:
1. कनिष्क - (ख) कुषाण वंश
2. रुद्रदमन प्रथम - (ग) शक जाति
3. तोरमाण - (घ) हूण जाति
4. सिकन्दर - (ङ) यूनानी शासक
5. पुष्यमित्र - (क) शुंग वंश
(ii) ग्रन्थ और उनके लेखक का सही मिलान:
1. बुद्धचरित - (ख) अश्वघोष
2. राजतरंगिणी - (ग) कल्हण
3. माध्यमिक सूत्र - (ङ) नागार्जुन
4. मालविकाग्निमित्रम् - (क) कालिदास
5. हर्षचरित - (घ) बाणभट्ट
In simple words: यह मिलान ऐतिहासिक शासकों को उनके वंशों से और महत्वपूर्ण किताबों को उनके लिखने वालों से जोड़ता है। यह याद रखना इतिहास को समझने के लिए जरूरी है।
🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, एक-दूसरे से जुड़े हुए विकल्पों को पहले मिलाएं, जिससे बाकी के लिए अनुमान लगाना आसान हो जाए।
RBSE Class 12 History Chapter 3 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. मौर्य साम्राज्य का अन्त कब और किसने किया?
Answer: मौर्य साम्राज्य का अंत 185 ईसा पूर्व में हुआ था। इसके अंतिम सम्राट वृहद्रथ की हत्या करके पुष्यमित्र शुंग ने मौर्य साम्राज्य को खत्म कर दिया। इस घटना के बाद शुंग वंश का उदय हुआ।
In simple words: मौर्य साम्राज्य 185 ईसा पूर्व में समाप्त हो गया, जब पुष्यमित्र शुंग ने अंतिम राजा वृहद्रथ को मार दिया।
🎯 Exam Tip: किसी भी प्रमुख साम्राज्य के अंत और उसके बाद के शासक या राजवंश को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 4. सिकन्दर कहाँ का शासक था? उसने भारत की ओर कब प्रस्थान किया?
Answer: सिकन्दर मकदुनिया का शासक था। वह ईरान के शासक को अराबेला के युद्ध में हराने के बाद 327 ईसा पूर्व में भारत की तरफ आया। सिकंदर ने दुनिया को जीतने का सपना देखा था, जिसके लिए उसने भारत की ओर अपनी सेना भेजी।
In simple words: सिकंदर मकदुनिया का राजा था। उसने 327 ईसा पूर्व में भारत पर हमला करने के लिए यात्रा शुरू की थी।
🎯 Exam Tip: आक्रमणकारी शासकों के मूल स्थान और भारत पर उनके आक्रमण की तारीख को याद रखें।
Question 5. राजा पुरु का राज्य कहाँ स्थित था?
Answer: राजा पुरु का राज्य झेलम और चिनाब नदियों के बीच स्थित था। यह क्षेत्र पंजाब का हिस्सा था और सिकंदर के आक्रमण के समय एक महत्वपूर्ण राज्य था।
In simple words: राजा पुरु का राज्य झेलम और चिनाब नदियों के बीच वाले इलाके में था।
🎯 Exam Tip: प्राचीन भारत के प्रमुख राज्यों और उनकी भौगोलिक स्थिति को हमेशा याद रखें।
Question 6. सिकन्दर राजा पोरस के किस गुण से प्रसन्न हुआ?
Answer: सिकंदर राजा पोरस की निर्भीकता से बहुत खुश हुआ। युद्ध में बंदी बनने के बाद भी पोरस ने सिकंदर से कहा कि उसके साथ वैसा ही व्यवहार किया जाए जैसा एक राजा दूसरे राजा के साथ करता है। पोरस की यह निडरता सिकंदर को बहुत प्रभावित कर गई।
In simple words: सिकंदर राजा पोरस की बहादुरी और निडरता से खुश हुआ, क्योंकि पोरस ने बंदी बनने के बाद भी आत्मसम्मान नहीं छोड़ा।
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के महत्वपूर्ण गुणों और उन घटनाओं को याद रखें जिन्होंने दूसरों को प्रभावित किया।
Question 7. सिकन्दर भारत से वापस कब लौटा?
Answer: सिकंदर 325 ईसा पूर्व में भारत से वापस लौट गया। उसकी सेना ने आगे बढ़ने से मना कर दिया था, जिसके बाद उसे वापस लौटना पड़ा। यह उसकी लंबी सैन्य यात्रा का अंत था।
In simple words: सिकंदर 325 ईसा पूर्व में भारत से लौट गया।
🎯 Exam Tip: आक्रमणकारी शासकों की भारत में प्रवेश और वापसी की तारीखों को याद रखें।
Question 8. सिकन्दर की मृत्यु कहाँ, कब व किस कारण से हुई?
Answer: सिकंदर की मृत्यु ईरान में 323 ईसा पूर्व में हुई थी। उसे तेज बुखार हो गया था, जिसके कारण उसकी मौत हुई। सिकंदर की मृत्यु उसकी लंबी यात्राओं और लगातार लड़ाइयों के कारण हुई कमजोरी से जुड़ी थी।
In simple words: सिकंदर की मौत 323 ईसा पूर्व में ईरान में तेज बुखार के कारण हुई थी।
🎯 Exam Tip: प्रमुख ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की मृत्यु की तारीख, स्थान और कारण हमेशा याद रखें।
Question 9. शकों की दो शाखाएँ कौन – सी थीं?
Answer: शकों की दो प्रमुख शाखाएँ थीं जिन्होंने भारत में शासन किया था। इनमें से एक शाखा ने पश्चिमी भारत में उज्जैन को अपनी राजधानी बनाया, जबकि दूसरी शाखा ने उत्तरी दक्कन में नासिक को अपना केंद्र बनाया था।
In simple words: शकों की दो शाखाएँ थीं, जिन्होंने भारत के अलग-अलग हिस्सों में राज किया था।
🎯 Exam Tip: किसी भी राजवंश या जाति की प्रमुख शाखाओं और उनके शासन के क्षेत्रों को याद रखें।
Question 11. यूनानी राजाओं में सबसे महान शासक का नाम बताइए।
Answer: यूनानी राजाओं में सबसे महान शासक मेनाण्डर था। वह अपने ज्ञान, न्याय और सैन्य विजयों के लिए जाना जाता था। उसकी प्रसिद्धि 'मिलिंदपन्ह' जैसे ग्रंथों में भी मिलती है।
In simple words: यूनानी राजाओं में मेनाण्डर सबसे महान शासक था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख शासकों और उनकी खासियतों को याद रखना इतिहास के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 12. मेनाण्डर के सम्बन्ध में किस ग्रन्थ से महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है?
Answer: मेनाण्डर के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी पाली भाषा में लिखी गई पुस्तक 'मिलिन्दपन्ह' से मिलती है। यह ग्रंथ राजा मेनाण्डर और बौद्ध भिक्षु नागसेन के बीच हुए संवाद को दर्शाता है।
In simple words: मेनाण्डर के बारे में जानकारी 'मिलिन्दपन्ह' नाम की किताब से मिलती है, जो पाली भाषा में है।
🎯 Exam Tip: शासकों से संबंधित प्रमुख ऐतिहासिक ग्रंथों और उनकी भाषा को याद रखें।
Question 13. मेनाण्डर किस धर्म का अनुयायी था?
Answer: मेनाण्डर बौद्ध धर्म का अनुयायी था। उसने बौद्ध धर्म को अपनाया और उसका प्रचार-प्रसार भी किया। 'मिलिन्दपन्ह' ग्रंथ से पता चलता है कि वह बौद्ध दर्शन में गहरा विश्वास रखता था।
In simple words: मेनाण्डर बौद्ध धर्म को मानता था।
🎯 Exam Tip: शासकों द्वारा अपनाए गए धर्मों और उनके धार्मिक योगदानों को याद रखें।
Question 14. यूनानी सभ्यता का प्रभाव भारतीय संस्कृति के किन क्षेत्रों पर विशेष रूप से पड़ा?
Answer: यूनानी सभ्यता का प्रभाव भारतीय संस्कृति की मुद्रा, कला, मूर्तिकला, व्यापार और वाणिज्य के क्षेत्रों पर बहुत अधिक पड़ा। यूनानी सिक्कों में राजाओं के चित्र और नाम मिलते हैं, जो भारतीय सिक्कों में पहले नहीं थे। गांधार कला इसका एक सुंदर उदाहरण है।
In simple words: यूनानी सभ्यता से भारत की मुद्रा, कला, मूर्तिकला और व्यापार पर बहुत असर पड़ा।
🎯 Exam Tip: विभिन्न सभ्यताओं के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के प्रमुख क्षेत्रों और उनके प्रभावों को जानें।
Question 15. सांस्कृतिक सम्बन्धों के सन्दर्भ में भारतीय यूनानी शासकों की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है?
Answer: भारतीय यूनानी शासकों की भूमिका सांस्कृतिक संबंधों के मामले में बहुत महत्वपूर्ण थी। उन्होंने उत्तर-पश्चिम भारत में हेलेनिस्टिक कला को पेश किया, जिसने बाद में गांधार कला शैली का रूप ले लिया। इससे भारतीय और यूनानी संस्कृतियों का मिलाप हुआ।
In simple words: भारतीय यूनानी शासक सांस्कृतिक मेलजोल के लिए महत्वपूर्ण थे, क्योंकि वे भारत में यूनानी कला और संस्कृति लाए।
🎯 Exam Tip: सांस्कृतिक आदान-प्रदान में विदेशी शासकों के योगदान को समझें और उदाहरणों के साथ उन्हें स्पष्ट करने का अभ्यास करें।
Question 16. गान्धार कला शैली किन शैलियों का मिश्रण है?
Answer: गांधार कला शैली भारतीय और यूनानी शैलियों का मिश्रण है। इसमें भारतीय कला के भावों और यूनानी-रोमन कला की तकनीकों का संगम दिखाई देता है, खासकर बुद्ध की मूर्तियों में।
In simple words: गांधार कला शैली भारतीय और यूनानी कला को मिलाकर बनी है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख कला शैलियों और उनके उद्भव में योगदान देने वाली विभिन्न संस्कृतियों को याद रखें।
Question 17. यूनानी प्रभाव की विवेचना कीजिए।
Answer: [Answer not available in source]
In simple words: [Answer not available in source]
🎯 Exam Tip: यदि किसी प्रश्न का सीधा उत्तर उपलब्ध न हो, तो संबंधित जानकारी का उपयोग करके एक तार्किक निष्कर्ष निकालने का प्रयास करें।
Question 19. विक्रमादित्य की उपाधि किस शासक ने धारण की?
Answer: विक्रमादित्य की उपाधि चंद्रगुप्त द्वितीय ने धारण की थी। यह उपाधि उनकी महान प्रतिष्ठा और पराक्रम का प्रतीक थी। यह उपाधि विशेष रूप से उनके शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के बाद धारण की गई थी।
In simple words: चंद्रगुप्त द्वितीय ने विक्रमादित्य की उपाधि ली थी।
🎯 Exam Tip: भारतीय इतिहास में "विक्रमादित्य" जैसी प्रसिद्ध उपाधियों को धारण करने वाले शासकों और उनके कारणों को याद रखें।
Question 20. नहपान किस विदेशी जाति से सम्बन्धित था?
Answer: नहपान शक जाति से सम्बन्धित था। वह पश्चिमी भारत में एक शक्तिशाली शक शासक था। शकों ने भारत के कई हिस्सों में शासन किया था।
In simple words: नहपान शक जाति का था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख विदेशी शासकों और उनके जातीय संबंधों को याद रखना इतिहास के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 21. शक शासकों में सर्वाधिक प्रतापी शासक कौन था?
Answer: शक शासकों में रुद्रदमन प्रथम सबसे प्रतापी शासक था। वह अपने सैन्य विजयों, प्रशासनिक कौशल और संस्कृत भाषा के संरक्षण के लिए जाना जाता था। जूनागढ़ अभिलेख उसकी उपलब्धियों का प्रमाण है।
In simple words: रुद्रदमन प्रथम शक राजाओं में सबसे शक्तिशाली था।
🎯 Exam Tip: किसी भी राजवंश के सबसे शक्तिशाली या प्रसिद्ध शासक को पहचानें और उनके मुख्य योगदानों को भी याद रखें।
Question 22. राजा विक्रमादित्य द्वारा विक्रम संवत किस वर्ष से आरम्भ हुआ?
Answer: राजा विक्रमादित्य द्वारा विक्रम संवत 57 ईसा पूर्व में शुरू हुआ। यह भारतीय इतिहास के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण कैलेंडरों में से एक है। यह संवत शकों पर विजय के उपलक्ष्य में शुरू किया गया था।
In simple words: विक्रम संवत 57 ईसा पूर्व में राजा विक्रमादित्य ने शुरू किया था।
🎯 Exam Tip: भारतीय इतिहास के प्रमुख संवतों की शुरुआत की तारीखों और उनके संस्थापकों को याद रखें।
Question 23. सुदर्शन झील के जीर्णोद्धार का कार्य किसके द्वारा सम्पन्न कराया गया?
Answer: सुदर्शन झील का जीर्णोद्धार सौराष्ट्र प्रांत के गवर्नर सु-विशाख द्वारा कराया गया था। यह कार्य गुप्त सम्राट स्कंदगुप्त के शासनकाल में हुआ, जिससे झील को मरम्मत कर फिर से उपयोग में लाया जा सके।
In simple words: सुदर्शन झील को गवर्नर सु-विशाख ने ठीक करवाया था।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्यों और उनके पीछे के प्रमुख व्यक्तियों या शासकों को याद रखें।
Question 24. रुद्रदमन प्रथम का जूनागढ़ अभिलेख किस वर्ष लिखा गया?
Answer: रुद्रदमन प्रथम का जूनागढ़ अभिलेख 150 ईस्वी में लिखा गया था। यह अभिलेख संस्कृत भाषा में लिखा गया पहला लंबा शिलालेख था। यह रुद्रदमन की विजयों और व्यक्तित्व के बारे में बताता है।
In simple words: रुद्रदमन प्रथम का जूनागढ़ अभिलेख 150 ईस्वी में लिखा गया था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख ऐतिहासिक अभिलेखों की तारीखों और उनके महत्व को समझें।
Question 26. सुदर्शन झील का निर्माण किसने करवाया?
Answer: सुदर्शन झील का निर्माण मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त के गवर्नर पुष्यमित्र ने गिरनार के पास करवाया था। यह झील सिंचाई के लिए बहुत महत्वपूर्ण थी। इस झील को बाद में कई शासकों ने मरम्मत करवाया।
In simple words: सुदर्शन झील को मौर्य राजा चंद्रगुप्त के गवर्नर पुष्यमित्र ने बनवाया था।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संरचनाओं के निर्माताओं और उनके उद्देश्य को याद रखें।
Question 27. रुद्रदमन प्रथम ने कौन – सी उपाधि धारण की?
Answer: रुद्रदमन प्रथम ने 'महाक्षत्रप' की उपाधि धारण की थी। यह उपाधि उसकी महान शक्ति और शाही दर्जे का प्रतीक थी। यह उपाधि शक शासकों द्वारा व्यापक रूप से उपयोग की जाती थी।
In simple words: रुद्रदमन प्रथम ने 'महाक्षत्रप' की उपाधि ली थी।
🎯 Exam Tip: विभिन्न शासकों द्वारा धारण की गई उपाधियों और उनके अर्थ को जानें।
Question 28. रुद्रदमन की शासन व्यवस्था एवं कर प्रणाली किस पर आधारित थी?
Answer: रुद्रदमन की शासन व्यवस्था और कर प्रणाली धर्म पर आधारित थी। वह न्याय और प्रजा के कल्याण को महत्व देता था। उसकी नीतियां धार्मिक सिद्धांतों पर आधारित थीं, जो एक न्यायपूर्ण शासन का प्रतीक था।
In simple words: रुद्रदमन की शासन व्यवस्था और कर प्रणाली धर्म के नियमों पर आधारित थी।
🎯 Exam Tip: शासकों के प्रशासनिक सिद्धांतों और कर नीतियों के आधार को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 29. कुषाण चीन की किस जाति से सम्बन्धित थे?
Answer: कुषाण चीन की यू-ची जाति से सम्बन्धित थे। यू-ची एक खानाबदोश जनजाति थी जो मध्य एशिया से भारत आई थी। उन्होंने भारत में एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया।
In simple words: कुषाण चीन की यू-ची जाति से जुड़े थे।
🎯 Exam Tip: विभिन्न विदेशी आक्रमणकारियों के मूल स्थानों और उनके जातीय संबंधों को याद रखें।
Question 30. यू-ची जाति को उनकी मातृभूमि से कब और किसने खदेड़ा?
Answer: यू-ची जाति को उनकी मातृभूमि से लगभग 165 ईसा पूर्व में हूणों ने खदेड़ दिया था। इस घटना के बाद यू-ची भारत की ओर बढ़े। हूणों के आक्रमण से यू-ची जाति को अपनी जगह छोड़नी पड़ी।
In simple words: यू-ची जाति को 165 ईसा पूर्व में हूणों ने उनकी मातृभूमि से भगा दिया था।
🎯 Exam Tip: विभिन्न जनजातियों के पलायन और उनके पीछे के कारणों को याद रखें।
Question 31. यू-ची जाति की पाँच शाखाओं में सर्वाधिक शक्तिशाली शाखा कौन - सी थी?
Answer: यू-ची जाति की पाँच शाखाओं में सर्वाधिक शक्तिशाली शाखा कुषाण शाखा थी। इसी शाखा ने बाद में भारत में एक बड़ा साम्राज्य स्थापित किया, जिसे कुषाण साम्राज्य के नाम से जाना गया।
In simple words: कुषाण शाखा यू-ची जाति की सबसे शक्तिशाली शाखा थी।
🎯 Exam Tip: किसी भी जनजाति की प्रमुख शाखाओं और उनमें से सबसे शक्तिशाली शाखा को पहचानें।
Question 32. महाराज की उपाधि धारण करने वाले कुषाण वंश के शासक का नाम बताइए।
Answer: कुषाण वंश के कई शासकों ने 'महाराज' की उपाधि धारण की, जिनमें कुजुल कडफिसेस और कनिष्क जैसे प्रमुख शासक शामिल थे। यह उपाधि उनके शाही और सार्वभौम दर्जे को दर्शाती थी।
In simple words: कुषाण शासकों में कुजुल कडफिसेस और कनिष्क ने महाराज की उपाधि धारण की।
🎯 Exam Tip: शासकों द्वारा धारण की गई विभिन्न उपाधियों और उनके संबंधित राजवंशों को याद रखें।
Question 34. कनिष्क का साम्राज्य विस्तार कहाँ से कहाँ तक था?
Answer: कनिष्क का साम्राज्य पश्चिम में आक्सस नदी से लेकर पूर्व में गंगा नदी तक फैला हुआ था। इसमें मध्य एशिया में खुरासन से लेकर उत्तर प्रदेश में वाराणसी तक का विशाल क्षेत्र शामिल था। यह कुषाणों का सबसे बड़ा विस्तार था।
In simple words: कनिष्क का साम्राज्य आक्सस नदी से गंगा नदी तक, और मध्य एशिया से वाराणसी तक फैला हुआ था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख शासकों के साम्राज्य की भौगोलिक सीमाएं और उनके विस्तार के प्रमुख क्षेत्रों को याद रखें।
Question 35. कनिष्क ने अपनी राजधानी कहाँ स्थापित की?
Answer: कनिष्क ने अपनी राजधानी पुरुषपुर में स्थापित की, जिसे आज पेशावर के नाम से जाना जाता है। यह उसकी साम्राज्यिक शक्ति का केंद्र था। पुरुषपुर एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग पर स्थित था।
In simple words: कनिष्क ने अपनी राजधानी पुरुषपुर (पेशावर) में बनाई थी।
🎯 Exam Tip: शासकों की राजधानियों और उनके वर्तमान नामों को जानना परीक्षा के लिए उपयोगी है।
Question 36. कनिष्क ने कश्मीर में किस नगर की स्थापना की?
Answer: कनिष्क ने कश्मीर में कनिष्कपुर नगर की स्थापना की थी। यह नगर उसके नाम पर रखा गया था और कुषाण साम्राज्य का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया था।
In simple words: कनिष्क ने कश्मीर में कनिष्कपुर शहर बनाया था।
🎯 Exam Tip: शासकों द्वारा स्थापित प्रमुख शहरों और उनके स्थानों को याद रखें।
Question 37. किस शक शासक को कनिष्क ने परास्त किया था?
Answer: कनिष्क ने शक शासक क्षेत्रप चष्टन को परास्त किया था। इस विजय से कनिष्क का साम्राज्य और अधिक मजबूत हुआ। चष्टन उज्जैन का एक महत्वपूर्ण शक शासक था।
In simple words: कनिष्क ने शक शासक क्षेत्रप चष्टन को हराया था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख शासकों के महत्वपूर्ण युद्धों और उनके प्रतिद्वंद्वियों को याद रखें।
Question 38. कनिष्क ने मध्य एशिया के किन क्षेत्रों पर अधिकार किया?
Answer: कनिष्क ने मध्य एशिया के चीनी तुर्किस्तान के काशगर, योरकन्द और खोतान जैसे क्षेत्रों पर अधिकार किया था। इन क्षेत्रों पर नियंत्रण से रेशम मार्ग पर उसका प्रभाव बढ़ गया था। यह उसके साम्राज्य के रणनीतिक विस्तार का हिस्सा था।
In simple words: कनिष्क ने मध्य एशिया के काशगर, योरकन्द और खोतान पर कब्जा किया था।
🎯 Exam Tip: शासकों के साम्राज्य विस्तार के क्षेत्रों और उनके सामरिक महत्व को जानें।
Question 39. कनिष्क ने किस बौद्ध संगीति का आयोजन किया?
Answer: कनिष्क ने चतुर्थ बौद्ध संगीति का आयोजन किया था। यह संगीति कश्मीर के कुण्डलवन में हुई थी, जिसका उद्देश्य बौद्ध धर्म के सिद्धांतों पर चर्चा करना था। यह संगीति बौद्ध धर्म के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी।
In simple words: कनिष्क ने चौथी बौद्ध संगीति का आयोजन किया था।
🎯 Exam Tip: सभी बौद्ध संगीतियों की संख्या, उनके आयोजक, स्थान और मुख्य परिणामों को याद रखें।
Question 41. बौद्ध धर्म किन दो शाखाओं में विभक्त हुआ?
Answer: बौद्ध धर्म हीनयान और महायान नामक दो प्रमुख शाखाओं में बंट गया था। यह विभाजन चतुर्थ बौद्ध संगीति के बाद हुआ, जिसमें सिद्धांतों और अभ्यास के तरीकों में अंतर आ गया था। हीनयान बुद्ध को एक गुरु मानता था, जबकि महायान उन्हें देवता के रूप में पूजता था।
In simple words: बौद्ध धर्म हीनयान और महायान नामक दो हिस्सों में बंट गया था।
🎯 Exam Tip: बौद्ध धर्म की प्रमुख शाखाओं और उनके बीच के मुख्य अंतरों को जानें।
Question 42. कनिष्क ने बौद्ध धर्म की किस शाखा को राजधर्म के रूप में मान्यता दी?
Answer: कनिष्क ने बौद्ध धर्म की महायान शाखा को राजधर्म के रूप में मान्यता दी थी। उसने इस शाखा को अपने विशाल साम्राज्य में फैलाने के लिए बहुत प्रयास किए। महायान शाखा मूर्ति पूजा और सरल भक्ति पर जोर देती थी।
In simple words: कनिष्क ने बौद्ध धर्म की महायान शाखा को अपने राज्य का मुख्य धर्म बनाया।
🎯 Exam Tip: शासकों द्वारा समर्थित धर्मों और उनकी विशेष शाखाओं को याद रखें।
Question 43. कनिष्क के शासनकाल में मूर्ति निर्माण और स्थापत्य की दृष्टि से कितनी शैलियों का विकास हुआ?
Answer: कनिष्क के शासनकाल में मूर्ति निर्माण और स्थापत्य की दृष्टि से तीन प्रमुख शैलियों का विकास हुआ- मथुरा, अमरावती और गांधार। ये शैलियां भारतीय और यूनानी कला के मिश्रण को दर्शाती हैं।
In simple words: कनिष्क के समय में मूर्ति बनाने की मथुरा, अमरावती और गांधार- तीन मुख्य शैलियां विकसित हुईं।
🎯 Exam Tip: कला और स्थापत्य की प्रमुख शैलियों और उनके विकास के समय को याद रखें।
Question 44. कनिष्क के दरबार के दो राजवैद्यों के नाम बताइए।
Answer: कनिष्क के दरबार के दो प्रसिद्ध राजवैद्य महर्षि चरक और सुश्रुत थे। चरक ने 'चरक संहिता' लिखी थी जो आयुर्वेद का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। वे दोनों अपने समय के महान चिकित्सक थे।
In simple words: कनिष्क के दरबार में चरक और सुश्रुत नाम के दो बड़े वैद्य थे।
🎯 Exam Tip: प्रमुख शासकों के दरबार के महत्वपूर्ण विद्वानों और उनके योगदानों को याद रखें।
Question 45. 'बुद्धचरित' नामक महाकाव्य के रचयिता कौन थे?
Answer: 'बुद्धचरित' नामक महाकाव्य के रचयिता अश्वघोष थे। अश्वघोष कनिष्क के दरबार के एक महान कवि और दार्शनिक थे। यह महाकाव्य गौतम बुद्ध के जीवन पर आधारित है।
In simple words: अश्वघोष ने 'बुद्धचरित' महाकाव्य लिखा था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख ऐतिहासिक ग्रंथों और उनके लेखकों को याद रखें।
Question 46. शक संवत् की शुरूआत कब और किसने की?
Answer: शक संवत् की शुरूआत कनिष्क ने 78 ईस्वी में की थी। यह भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण कैलेंडर है। यह संवत् कनिष्क के राज्याभिषेक के अवसर पर शुरू किया गया था।
In simple words: शक संवत् को कनिष्क ने 78 ईस्वी में शुरू किया था।
🎯 Exam Tip: विभिन्न ऐतिहासिक कैलेंडरों की शुरुआत की तारीखों और उनके संस्थापकों को याद रखें।
Question 47. हूण कौन थे?
Answer: हूण मध्य एशिया की एक खानाबदोश और बर्बर जाति के लोग थे। वे अपनी क्रूरता और आक्रमणों के लिए जाने जाते थे। हूणों ने भारत पर कई बार आक्रमण किए और गुप्त साम्राज्य को कमजोर किया।
In simple words: हूण मध्य एशिया के एक खानाबदोश और जंगली लोग थे।
🎯 Exam Tip: भारत पर आक्रमण करने वाली विदेशी जनजातियों और उनकी प्रमुख विशेषताओं को याद रखें।
Question 49. हुणों का सबसे प्रतापी शासक कौन था?
Answer: हूणों का सबसे प्रतापी शासक राजा तोरमाण था। उसने भारत के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण स्थापित किया और हूण शक्ति को मजबूत किया। तोरमाण अपने सैन्य अभियानों के लिए प्रसिद्ध था।
In simple words: राजा तोरमाण हूणों का सबसे शक्तिशाली शासक था।
🎯 Exam Tip: किसी भी विदेशी आक्रमणकारी समूह के सबसे प्रमुख नेता को पहचानें।
Question 50. हूणों का सामना किन भारतीय शासकों को करना पड़ा?
Answer: हूणों का सामना गुप्त सम्राट स्कंदगुप्त, यशोवर्मन और बालदित्य जैसे भारतीय शासकों को करना पड़ा था। इन शासकों ने हूणों के आक्रमणों को रोकने के लिए वीरता से संघर्ष किया। स्कंदगुप्त ने हूणों को सफलतापूर्वक पीछे धकेला था।
In simple words: गुप्त सम्राट स्कंदगुप्त, यशोवर्मन और बालदित्य जैसे राजाओं को हूणों से लड़ना पड़ा।
🎯 Exam Tip: विदेशी आक्रमणकारियों का सामना करने वाले प्रमुख भारतीय शासकों और उनके योगदानों को याद रखें।
RBSE Class 12 History Chapter 3 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. मौर्योत्तर काल में किन राजवंशों का भारत पर प्रभुत्व रहा?
Answer: मौर्योत्तर काल में भारत पर कई राजवंशों का प्रभुत्व रहा, जिन्हें दो मुख्य भागों में बांटा जा सकता है: विदेशी शासक और भारतीय शासक। विदेशी शासकों में यूनानी (इण्डो-ग्रीक), शक, कुषाण और हूण प्रमुख थे। भारतीय शासकों में शुंग वंश, कण्व वंश, चेदिवंश और सातवाहन वंश शामिल थे। इन सभी ने मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद भारत के अलग-अलग हिस्सों पर शासन किया।
In simple words: मौर्योत्तर काल में यूनानी, शक, कुषाण, हूण जैसे विदेशी और शुंग, कण्व, चेदि, सातवाहन जैसे भारतीय राजवंशों ने भारत पर राज किया।
🎯 Exam Tip: किसी भी ऐतिहासिक काल के प्रमुख राजवंशों और उनके प्रकार (देशी या विदेशी) को याद रखें।
Question 2. मौर्योत्तर काल से क्या तात्पर्य है?
Answer: मौर्योत्तर काल से मतलब उस समय से है जो मौर्य साम्राज्य के खत्म होने से लेकर गुप्त साम्राज्य के शुरू होने तक का था। इस दौरान मौर्यों की मजबूत शासन व्यवस्था बिखर गई, और कई विदेशी शासकों ने भारत पर हमले किए। साथ ही, कई भारतीय राजवंश भी अपनी पहचान बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे थे। यह काल भारत के इतिहास में एक बड़े बदलाव का दौर था।
In simple words: मौर्योत्तर काल वह समय है जब मौर्य साम्राज्य खत्म हुआ और गुप्त साम्राज्य शुरू नहीं हुआ था, जिसमें कई छोटे राज्य और विदेशी आक्रमण हुए।
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक कालों की परिभाषा और उनकी प्रमुख विशेषताओं को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 3. मौर्योत्तर काल तथा विदेशी आक्रमणकारियों की जानकारी के प्रमुख स्रोतों का वर्णन कीजिए।
Answer: मौर्योत्तर काल और विदेशी आक्रमणकारियों के बारे में जानकारी कई स्रोतों से मिलती है। इनमें गार्गी संहिता, पतंजलि का महाभाष्य, कालिदास का मालविकाग्निमित्रम्, बाणभट्ट का हर्षचरित और कल्हण की राजतरंगिणी जैसे भारतीय ग्रंथ शामिल हैं। इसके अलावा, कनिष्क के दरबारी कवि अश्वघोष की रचनाएं, चरक संहिता और नागार्जुन के शून्यवाद पर आधारित ग्रंथ भी महत्वपूर्ण हैं। ह्वेनसांग का यात्रा विवरण, तारानाथ के वृत्तांत और मिलिन्दपन्ह जैसे विदेशी स्रोतों से भी बहुत जानकारी मिलती है। ये सभी स्रोत हमें उस समय की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्थिति को समझने में मदद करते हैं।
In simple words: मौर्योत्तर काल की जानकारी गार्गी संहिता, महाभाष्य, राजतरंगिणी जैसे भारतीय ग्रंथों और ह्वेनसांग के यात्रा विवरण जैसे विदेशी लेखों से मिलती है।
🎯 Exam Tip: किसी भी ऐतिहासिक काल की जानकारी के प्रमुख स्रोतों को सूचीबद्ध करना और उनके महत्व को संक्षेप में समझाना सीखें।
Question 5. अश्वकायनों पर सिकन्दर ने किस प्रकार विजय प्राप्त की?
Answer: सिकंदर ने उत्तरी-पश्चिमी सीमा पर अश्मकों और नीसा वाले गौरियों को जीतने के बाद अश्वकायनों का सामना किया। अश्वकायनों के राजा हस्ति या अष्टक ने मस्सग के अपने मजबूत किले से सिकंदर का विरोध किया। शुरुआत में सिकंदर को सफलता नहीं मिली, लेकिन एक हमले में राजा अष्टक को तीर लग गया और उसकी मौत हो गई। इसके बाद, उसकी रानी क्लियोफिस ने आत्मसमर्पण कर दिया, और सिकंदर ने उनके राज्य पर कब्जा कर लिया।
In simple words: सिकंदर ने अश्वकायनों के राजा अष्टक की मौत के बाद रानी क्लियोफिस के आत्मसमर्पण करने पर उनके राज्य पर कब्जा कर लिया।
🎯 Exam Tip: युद्धों के महत्वपूर्ण मोड़, जैसे शासक की मृत्यु या प्रमुख व्यक्तित्वों के समर्पण, को याद रखें।
Question 6. मिलिन्दपन्ह में मेनाण्डर की राजधानी शाकल की किन विशेषताओं का वर्णन किया गया है?
Answer: मिलिन्दपन्ह ग्रंथ में मेनाण्डर की राजधानी शाकल की कई विशेषताएं बताई गई हैं। शाकल व्यापार का एक बड़ा केंद्र था, जहाँ पहाड़ियाँ, उपवन, बाग, झीलें और जंगल थे जो उसकी प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाते थे। शहर में पानी की अच्छी व्यवस्था थी, और इसकी सुरक्षा के लिए मजबूत बुर्ज, दीवारें और प्रवेशद्वार थे। शहर की गलियाँ सीधी और चौड़ी थीं, जिनमें कई शानदार भवन थे जो हिमालय की चोटियों जैसे ऊँचे थे। यहाँ हाथियों, घोड़ों और गाड़ियों से भरी सड़कें थीं, और बनारसी मलमल और अन्य कपड़ों का व्यापार होता था।
In simple words: मिलिन्दपन्ह के अनुसार शाकल व्यापार का बड़ा केंद्र था, जो सुंदर प्रकृति, मजबूत सुरक्षा और अच्छी सड़कों वाला एक फलता-फूलता शहर था।
🎯 Exam Tip: प्रमुख ऐतिहासिक शहरों की विशेषताओं और उनके महत्व का वर्णन करना सीखें।
Question 7. यूनानी प्रभाव की विवेचना कीजिए।
Answer: [Answer not available in source]
In simple words: [Answer not available in source]
🎯 Exam Tip: यदि किसी प्रश्न का सीधा उत्तर उपलब्ध न हो, तो संबंधित जानकारी का उपयोग करके एक तार्किक निष्कर्ष निकालने का प्रयास करें।
Question 8. शकों की कितनी शाखाएँ थीं और उन्होंने कहाँ अपना राज्य स्थापित किया?
Answer: इतिहासकारों के अनुसार, शक मध्य एशिया से आए थे और उनकी पाँच मुख्य शाखाएँ थीं जिन्होंने भारत में अपने राज्य स्थापित किए। एक शाखा अफगानिस्तान में (राजधानी कपिशा), दूसरी पंजाब में (राजधानी तक्षशिला), तीसरी मथुरा में, चौथी पश्चिमी भारत में (राजधानी उज्जैन), और पांचवीं ऊपरी दक्कन में (राजधानी नासिक) थी। इनमें से उज्जैन और नासिक की शाखाएँ सबसे महत्वपूर्ण थीं।
In simple words: शकों की पाँच शाखाएँ थीं, जिन्होंने अफगानिस्तान, पंजाब, मथुरा, पश्चिमी भारत (उज्जैन) और ऊपरी दक्कन (नासिक) में अपने राज्य स्थापित किए।
🎯 Exam Tip: विदेशी शासकों की विभिन्न शाखाओं, उनकी राजधानियों और उनके फैलाव के क्षेत्रों को याद रखें।
Question 9. सुदर्शन झील का जीर्णोद्धार किसने और क्यों कराया?
Answer: सुदर्शन झील का निर्माण मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त के गवर्नर पुष्यमित्र ने जन कल्याण के लिए करवाया था। रुद्रदमन के जूनागढ़ अभिलेख से पता चलता है कि झील कई सदियों तक सौराष्ट्र के किसानों के लिए सिंचाई का मुख्य स्रोत थी। रुद्रदमन के शासनकाल में भारी बारिश के कारण इसका बांध टूट गया था। प्रजा की भलाई के लिए रुद्रदमन ने अपने मंत्रियों के विरोध के बावजूद अपने निजी खजाने से पैसा खर्च करके बांध की मरम्मत करवाई और कोई अतिरिक्त कर भी नहीं लगाया।
In simple words: सुदर्शन झील का निर्माण चंद्रगुप्त मौर्य के गवर्नर पुष्यमित्र ने करवाया था, और रुद्रदमन प्रथम ने टूट जाने पर इसे जन कल्याण के लिए अपने खर्च पर ठीक करवाया।
🎯 Exam Tip: प्रमुख ऐतिहासिक संरचनाओं के निर्माण, जीर्णोद्धार और उनके उद्देश्यों को याद रखें।
Question 10. रुद्रदमन प्रथम के साम्राज्य विस्तार के विषय में समझाइये।
Answer: रुद्रदमन प्रथम शक शासकों में सबसे प्रसिद्ध था। उसके जूनागढ़ अभिलेख से पता चलता है कि उसने अकर (पूर्वी मालवा), अवन्ति (पश्चिमी मालवा), अनूप (नर्मदा तट), त्रिवृत (उत्तरी काठियावाड़), सुराष्ट्र (दक्षिणी काठियावाड़), मरु (मारवाड़), कच्छ सिन्धु, पूर्वी तट का प्रदेश, कुकुर (पश्चिमी मध्य भारत), निषाढ (विन्ध्याचल), उत्तरी कोंकण और अरावली पर्वतमाला के क्षेत्रों को जीता था। उसके साम्राज्य में सिन्धु सौवीर, मालवा, गुजरात, काठियावाड़, उत्तरी कोंकण, पश्चिमी राजस्थान और सिन्ध के प्रदेश शामिल थे। यह उसके सैन्य कौशल और राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है।
In simple words: रुद्रदमन प्रथम ने अपने शासन में पूर्वी मालवा, पश्चिमी मालवा, सौराष्ट्र, मारवाड़, कच्छ और सिन्ध सहित कई भारतीय क्षेत्रों पर कब्जा करके अपने साम्राज्य का विस्तार किया।
🎯 Exam Tip: प्रमुख शासकों के साम्राज्य की सीमाएं और उनके द्वारा जीते गए मुख्य क्षेत्रों को विस्तार से बताएं।
Question 11. जूनागढ़ अभिलेख के आधार पर रुद्रदमन प्रथम के व्यक्तित्व का मूल्यांकन कीजिए।
Answer: जूनागढ़ अभिलेख के आधार पर रुद्रदमन प्रथम का व्यक्तित्व जनकल्याणकारी, दयालु और पराक्रमी था। वह हमेशा शरणागतों की रक्षा करता था और युद्ध के अलावा किसी का वध न करने की शपथ ली थी। उसने प्रजा को डाकुओं, जंगली पशुओं और रोगों से बचाया। वह एक कुशल सेनानायक और योद्धा था, साथ ही संगीत, शास्त्र, काव्यशास्त्र और तर्कशास्त्र का ज्ञाता था। वह हाथी, घोड़े और रथ चलाने में भी माहिर था। इन गुणों के साथ-साथ वह शारीरिक रूप से भी बहुत सुंदर था।
In simple words: जूनागढ़ अभिलेख से पता चलता है कि रुद्रदमन प्रथम एक दयालु, न्यायप्रिय, कुशल योद्धा और विद्वान शासक था, जिसने हमेशा अपनी प्रजा की भलाई का ध्यान रखा।
🎯 Exam Tip: अभिलेखों जैसे प्राथमिक स्रोतों का उपयोग करके शासकों के व्यक्तित्व और शासन का विश्लेषण करना सीखें।
Question 12. कुषाणों ने अपनी सत्ता किस प्रकार स्थापित की?
Answer: कुषाण पश्चिमी चीन की यू-ची जाति से संबंधित थे। 165 ईसा पूर्व में हूणों द्वारा अपनी मातृभूमि से खदेड़े जाने के बाद, यू-ची आक्सस नदी घाटी के बैक्ट्रिया क्षेत्र में पहुंचे, जहाँ उन्होंने शकों को हराकर कब्जा कर लिया। यू-ची जाति पाँच शाखाओं में बंट गई थी, जिनमें कुषाण शाखा सबसे शक्तिशाली थी। उन्होंने अन्य चारों शाखाओं को हराकर अपने साम्राज्य में मिला लिया। इस तरह उन्होंने अपनी सत्ता स्थापित की और बैक्ट्रिया तथा गांधार प्रदेश में अपना राज्य फैलाया।
In simple words: कुषाणों ने अपनी सत्ता यू-ची जाति की सबसे मजबूत शाखा के रूप में स्थापित की, उन्होंने पहले शकों को हराया और फिर अन्य यू-ची शाखाओं को अपने में मिला लिया।
🎯 Exam Tip: किसी भी राजवंश या शक्ति के उदय और विस्तार के प्रमुख चरणों को याद रखें।
Question 13. पार्थिया के शासक द्वारा कुषाण साम्राज्य पर आक्रमण करने के क्या कारण थे? इसका क्या परिणाम हुआ?
Answer: पार्थिया के शासक द्वारा कुषाण साम्राज्य पर आक्रमण के दो मुख्य कारण थे। पहला, वे व्यापारिक रूप से महत्वपूर्ण बैक्ट्रिया प्रदेश पर नियंत्रण करना चाहते थे। दूसरा, एरियाना प्रदेश पर पहले पार्थिया का अधिकार था, जिसे कुषाणों ने छीन लिया था, इसलिए पार्थिया उसे वापस पाना चाहता था। इस युद्ध का परिणाम यह हुआ कि संपूर्ण पार्थिया प्रदेश कुषाण राज्य का हिस्सा बन गया, जिससे कुषाण साम्राज्य का विस्तार और मजबूत हुआ।
In simple words: पार्थिया ने कुषाणों पर बैक्ट्रिया और एरियाना पर नियंत्रण के लिए हमला किया, लेकिन अंत में पार्थिया खुद कुषाण साम्राज्य का हिस्सा बन गया।
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक संघर्षों के कारणों और उनके परिणामों को विश्लेषण करके समझें।
Question 14. कुषाणों के साम्राज्य विस्तार की पुष्टि किन प्रमाणों के आधार पर की जा सकती है?
Answer: कुषाणों के साम्राज्य विस्तार की पुष्टि मुद्रा, अभिलेख और साहित्यिक स्रोतों के आधार पर की जा सकती है। कनिष्क के शासनकाल में कुषाण साम्राज्य अपने चरम पर था, और उसने पार्थिया, पाटलिपुत्र, कश्मीर, उज्जैन, मध्य एशिया और चीन के क्षेत्रों पर अधिकार करके उन्हें अपने साम्राज्य का हिस्सा बनाया। कौशाम्बी, सारनाथ और मथुरा से प्राप्त अभिलेख इस विस्तार की पुष्टि करते हैं कि शासक पूर्वी प्रदेश से संबंधित था और पूरे उत्तर भारत पर उसका अधिकार था। चीनी स्रोत भी गांधार प्रदेश पर कुषाणों के नियंत्रण की पुष्टि करते हैं।
In simple words: कुषाणों के साम्राज्य विस्तार की पुष्टि उनके सिक्कों, अभिलेखों और तत्कालीन साहित्यिक ग्रंथों से होती है, जो उनके विशाल क्षेत्र पर शासन को दिखाते हैं।
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक दावों की पुष्टि के लिए विभिन्न प्रकार के साक्ष्यों (मुद्रा, अभिलेख, साहित्य) का उपयोग करना सीखें।
Question 16. बौद्ध धर्म की हीनयान तथा महायान शाखा में क्या विभिन्नताएँ थीं?
Answer: चौथी बौद्ध संगीति में बौद्ध धर्म हीनयान और महायान नामक दो मुख्य शाखाओं में बँट गया। इन दोनों शाखाओं के बीच के खास अंतर नीचे दिए गए हैं:
| क्र. सं. | हीनयान | महायान |
|---|---|---|
| 1. | हीनयान बौद्ध धर्म की पुरानी और मूल शाखा थी। | महायान बौद्ध धर्म की नई शाखा थी। |
| 2. | हीनयान में बुद्ध को केवल एक महान व्यक्ति माना जाता था। | महायान में बुद्ध को भगवान का रूप मानकर उनकी मूर्तियाँ पूजी जाने लगीं। |
| 3. | हीनयान शाखा अच्छे कर्मों पर जोर देती थी। | महायान में बुद्ध और बोधिसत्वों की पूजा पर बल दिया जाने लगा। |
| 4. | हीनयान में पालि भाषा का उपयोग होता था। | महायान में पालि की जगह संस्कृत भाषा का उपयोग होने लगा। |
In simple words: हीनयान और महायान बौद्ध धर्म की दो अलग-अलग शाखाएँ हैं। हीनयान बुद्ध को मनुष्य मानता है और पालि भाषा का उपयोग करता है, जबकि महायान बुद्ध को भगवान मानता है, उनकी मूर्तियाँ पूजता है, और संस्कृत भाषा का उपयोग करता है।
🎯 Exam Tip: जब भी बौद्ध धर्म की शाखाओं से संबंधित प्रश्न आएँ, तो उनकी विशेषताओं, बुद्ध के प्रति उनके दृष्टिकोण और उपयोग की जाने वाली भाषाओं के आधार पर स्पष्ट अंतर प्रस्तुत करें।
Question 17. कुषाणों के काल में बौद्ध धर्म की महायान शाखा का प्रसार तेजी से क्यों हुआ?
Answer: कुषाणों के समय में बौद्ध धर्म की महायान शाखा का तेजी से प्रसार हुआ क्योंकि इसके सिद्धांत काफी सरल थे। इन सिद्धांतों को एक आम गृहस्थ व्यक्ति भी आसानी से मान सकता था। मूर्ति पूजा का चलन शुरू होने से महायान धर्म की लोकप्रियता बढ़ गई। राजा कनिष्क ने महायान को राजकीय धर्म बना दिया था, जिससे मध्य एशिया में इसके बड़े साम्राज्य में महायान धर्म के विकास के लिए काफी सुविधा मिली।
In simple words: महायान शाखा के नियम सरल थे, बुद्ध की मूर्ति पूजा होने लगी और कनिष्क ने इसे राजकीय धर्म बनाया, जिससे यह तेजी से फैला।
🎯 Exam Tip: किसी भी धर्म के तेजी से प्रसार के कारणों में हमेशा शासक का समर्थन, सरल सिद्धांत और आम लोगों के लिए स्वीकार्यता जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल करें।
Question 18. कनिष्क के काल में साहित्य के क्षेत्र में हुई प्रगति का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer: कनिष्क के दरबार में बहुत ही उच्च कोटि के दार्शनिक, वैज्ञानिक और साहित्यकार थे। उनके शासनकाल में साहित्य के कई क्षेत्रों में बहुत विकास हुआ। इस दौरान पहली बार संस्कृत में ग्रंथ लिखे गए। अश्वघोष, भास और शूद्रक जैसे महान साहित्यकार इसी युग में हुए थे, जिन्होंने विभिन्न साहित्यिक विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
In simple words: कनिष्क के समय में साहित्य का बहुत विकास हुआ, संस्कृत में लेखन शुरू हुआ और अश्वघोष जैसे बड़े साहित्यकार हुए।
🎯 Exam Tip: किसी शासक के समय हुई साहित्यिक प्रगति का वर्णन करते समय प्रमुख विद्वानों और उनके कार्यों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 19. कनिष्क के काल में विज्ञान के क्षेत्र में हुई प्रगति का वर्णन कीजिए।
Answer: कनिष्क एक बहुत विद्वान और कला प्रेमी सम्राट थे। उनके दरबार में विद्वान, दार्शनिक और वैज्ञानिक रहते थे। चरक और सुश्रुत जैसे महान चिकित्सक और आयुर्वेदाचार्य थे। नागार्जुन इस युग के महान वैज्ञानिक थे, जिन्होंने सापेक्षवाद का सिद्धांत दिया। इस युग में भारतीय ज्योतिष में नए सिद्धांत बने और खगोल विज्ञान की वैज्ञानिक प्रमाणिकता बढ़ी। मध्य एशिया और रोमन साम्राज्य से संपर्कों के कारण प्रौद्योगिकी में नई तकनीकें विकसित हुईं, जैसे कि कुषाण काल में तांबे के सिक्के बनाए गए।
In simple words: कनिष्क के समय में विज्ञान ने खूब तरक्की की। चरक और सुश्रुत जैसे वैद्य थे, नागार्जुन ने सापेक्षवाद का सिद्धांत दिया, और ज्योतिष-खगोल विज्ञान में भी नए खोज हुए।
🎯 Exam Tip: विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति का वर्णन करते समय, प्रमुख वैज्ञानिकों, उनके योगदानों और तकनीकी विकास पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 20. देवत्व का सिद्धान्त क्या है?
Answer: मौर्योत्तर काल में कुषाण राजाओं ने खुद को देवताओं के समान बताया। उन्होंने 'देवपुत्र' की उपाधि ली और खुद को देवताओं का अंश मानते थे। यह तरीका उस समय रोमन, यूनानी और ईरानी सभ्यताओं में भी था, जिसे 'देवत्व का सिद्धांत' कहा गया। विदेशी शासकों ने समाज में अपनी सत्ता को स्वीकार कराने के लिए इस धार्मिक वैधता को जरूरी समझा और अपने राज्य में इसका पालन किया। राजाओं ने खुद को ईश्वरीय शक्ति से जुड़ा बताकर अपनी प्रजा पर अधिक प्रभाव डाला।
In simple words: देवत्व का सिद्धांत कहता है कि राजा खुद को देवता के समान या उनका अंश मानते थे। कुषाण राजाओं ने यह उपाधि अपनी सत्ता को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल की।
🎯 Exam Tip: 'देवत्व का सिद्धांत' की व्याख्या करते समय, शासकों द्वारा इसे अपनाने के कारण और इसके सामाजिक-राजनीतिक प्रभावों पर प्रकाश डालें।
Question 21. कुषाण साम्राज्य का पतन किस प्रकार हुआ?
Answer: कुषाण साम्राज्य कनिष्क प्रथम के समय में सबसे ऊँचाई पर था। उस समय कुषाण साम्राज्य से भारत ही नहीं बल्कि मध्य एशिया के शासक भी डरते थे, लेकिन कनिष्क प्रथम के उत्तराधिकारी इस बड़े साम्राज्य को संभाल नहीं पाए। उनके ज्यादातर राज्य भारतीय शासकों के हाथों में चले गए, जिनमें मुख्य रूप से नाग, मालव और कुणिंद वंश थे। कुषाणों के पतन के दूसरे मुख्य कारण ईरान में सस्सैनियन साम्राज्य का उदय और कुषाणों का भारतीय जातियों में घुलमिल जाना भी था, जिसके कारण कुषाण साम्राज्य खत्म हो गया।
In simple words: कनिष्क के बाद कमजोर राजाओं, सस्सैनियन साम्राज्य के उदय और कुषाणों के भारतीय समाज में घुलने-मिलने के कारण कुषाण साम्राज्य का पतन हो गया।
🎯 Exam Tip: किसी भी साम्राज्य के पतन के कारणों को बताते समय, आंतरिक कमजोरियों (उत्तराधिकारियों की अक्षमता) और बाहरी आक्रमणों (अन्य साम्राज्यों का उदय) दोनों का उल्लेख करें।
Question 22. यशोवर्मन ने हूणों का दमन किस प्रकार किया?
Answer: 528 ई. में यशोवर्मन ने हूणों का सामना स्थानीय शासक बालदित्य के साथ मिलकर किया। यशोवर्मन के साथ हुए युद्ध में हूण हार गए, लेकिन वे अपने मूल स्थान मध्य एशिया नहीं लौटे। इसके बजाय, वे हिंदू धर्म और संस्कृति को अपनाकर भारतीय समाज का एक अभिन्न अंग बन गए और इसी में समाहित हो गए। हूणों ने भारत पर हमलावर के रूप में चढ़ाई की थी, लेकिन अंत में वे भारतीय संस्कृति के रीति-रिवाजों को अपनाकर भारतीय बन गए।
In simple words: यशोवर्मन ने बालदित्य के साथ मिलकर 528 ई. में हूणों को हराया। हूण मध्य एशिया नहीं लौटे बल्कि भारतीय धर्म-संस्कृति को अपनाकर यहीं के हो गए।
🎯 Exam Tip: युद्धों के परिणामों का वर्णन करते समय केवल जीत-हार पर ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभावों पर भी ध्यान दें।
RBSE Class 12 History Chapter 3 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. भारत में प्रवेश करने के लिए सिकन्दर के द्वारा किये गये सैनिक अभियानों का वर्णन कीजिए।
Answer: सिकंदर ने 327 ईसा पूर्व में भारत की ओर यात्रा शुरू की थी। वह पूरे एशिया पर जीत हासिल करना चाहता था। उस समय भारत का उत्तर-पश्चिमी हिस्सा 25 छोटे-छोटे राज्यों में बंटा हुआ था। इनमें से कुछ गणतंत्र थे और कुछ में राजशाही व्यवस्था थी। राजशाही शासक गणतंत्रों का विरोध करते थे। इस राजनीतिक अस्थिरता का फायदा उठाकर सिकंदर ने भारत में घुसने की योजना बनाई और ये सैन्य अभियान किए:
1. **अश्मकों से मुठभेड़:** भारत की उत्तरी-पश्चिमी सीमा पर पहले अश्मकों से सिकंदर का सामना हुआ। अश्मकों ने बहुत मजबूती से लड़ाई की। उन्होंने सिकंदर की सेना को काफी परेशान किया, लेकिन अंत में सिकंदर जीत गया। सिकंदर ने चालीस हजार अश्मकों को बंदी बनाया।
2. **नीसा वाले गौरियों पर आक्रमण:** अश्मकों पर जीत के बाद, सिकंदर ने नीसा वाले गौरियों पर हमला किया। उन्होंने बिना लड़ाई के ही आत्मसमर्पण कर दिया।
3. **अश्वकायनों पर विजय:** अश्वकायनों पर सिकंदर के आक्रमण के बाद वहां के शासक अष्टक ने अपने मजबूत दुर्ग मस्सग से युद्ध करने का फैसला किया। शुरू में सिकंदर को सफलता नहीं मिली, लेकिन युद्ध के दौरान राजा की मृत्यु हो गई, जिसके बाद अश्वकायनों का राज्य सिकंदर के कब्जे में आ गया।
4. **पौरव राज्य पर आक्रमण:** तक्षशिला के राजा आंभी ने सिकंदर से दोस्ती कर ली और उसे पौरव राज्य पर हमला करने के लिए उकसाया। सिकंदर ने पौरव राज्य पर हमला किया। वहां के शासक पोरस ने बहादुरी से सिकंदर की सेना का सामना किया। शुरू में सिकंदर की सेना को जीत नहीं मिली, लेकिन अंत में राजा पोरस को सिकंदर के सैनिकों ने पकड़ लिया। जब सिकंदर ने पोरस से पूछा कि उसके साथ कैसा व्यवहार किया जाए, तो पोरस ने कहा, "जैसा एक राजा को दूसरे राजा के साथ करना चाहिए।" सिकंदर पोरस की इस बहादुरी से प्रभावित हुआ और उसने पोरस से दोस्ती करके उसका राज्य वापस कर दिया।
5. **उत्तरी-पूर्वी पंजाब पर विजय और भारत में प्रवेश:** सिकंदर ने कई छोटे राज्यों पर अधिकार कर लिया और भारत के अंदरूनी हिस्सों में बढ़ने लगा। इन अभियानों से सिकंदर ने भारतीय उपमहाद्वीप में अपनी स्थिति मजबूत की।
In simple words: सिकंदर 327 ईसा पूर्व में भारत आया था। उसने अश्मकों और पौरवों जैसे कई राज्यों को हराया। पोरस की बहादुरी से खुश होकर सिकंदर ने उसे अपना राज्य लौटा दिया।
🎯 Exam Tip: सिकंदर के अभियानों का वर्णन करते समय, प्रत्येक मुठभेड़ का नाम, महत्वपूर्ण राजाओं और युद्ध के परिणामों का उल्लेख करें।
Question 3. चतुर्थ बौद्ध संगीति के परिणामों का वर्णन कीजिए।
Answer: कुषाणों के शक्तिशाली शासक कनिष्क ने बौद्ध धर्म के विवादित सिद्धांतों पर निर्णय लेने के लिए कश्मीर के कुण्डलवन नामक विहार में चौथी बौद्ध संगीति का आयोजन किया था। इसमें लगभग 500 बौद्ध विद्वानों ने भाग लिया था। प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान वसुमित्र इसके अध्यक्ष थे और अश्वघोष उपाध्यक्ष थे।
यह सम्मेलन छह महीने तक चला, जिसमें सभी बौद्ध साहित्य की गहराई से जांच की गई और त्रिपिटकों पर टीका लिखकर उसे 'महाविभाष' नामक एक बड़े ग्रंथ में संकलित किया गया। 'महाविभाष' को बौद्ध धर्म का विश्वकोश कहा जाता है। इस बौद्ध सभा में बौद्ध धर्म के तत्कालीन 18 स्कूलों के मतभेदों को सुलझाया गया और उन्हें धर्म के अनुरूप स्वीकार कर लिया गया। इस बौद्ध सभा के मुख्य परिणाम इस प्रकार थे:
1. इस बौद्ध संगीति में बौद्ध धर्म हीनयान और महायान नामक दो शाखाओं में बँट गया।
2. आम लोगों में और विदेशों में बौद्ध धर्म के नियमों और सिद्धांतों का व्यवहारिक रूप से प्रसार हुआ।
3. इस बौद्ध संगीति में मूर्ति पूजा, स्वर्ग, धार्मिक क्रियाएं आदि को स्वीकार कर लिया गया।
4. बौद्ध धर्म की एक नई शाखा का जन्म हुआ जिसे महायान कहा गया।
5. कनिष्क ने बौद्ध धर्म की महायान शाखा को राजकीय धर्म के रूप में मान्यता दी।
6. मूर्ति पूजा का चलन बढ़ने से महायान धर्म की लोकप्रियता बढ़ी।
7. राजकीय धर्म घोषित होने पर मध्य एशिया में महायान का विकास तेजी से हुआ।
In simple words: चौथी बौद्ध संगीति कश्मीर में कनिष्क के समय हुई थी। इसमें बौद्ध धर्म दो शाखाओं- हीनयान और महायान में बँट गया। मूर्ति पूजा शुरू हुई और महायान शाखा को राजा का समर्थन मिला, जिससे यह तेजी से फैली।
🎯 Exam Tip: बौद्ध संगीतियों से संबंधित प्रश्नों में हमेशा उसके स्थान, अध्यक्ष, प्रमुख निर्णय और परिणामों पर ध्यान दें।
Question 3. गान्धार कला पर एक निबन्ध लिखिए।
Answer: गांधार कला का उदय कुषाणों के शासनकाल की एक बड़ी देन थी। इस कला के विकास का समय 50 ईसा पूर्व से 500 ईस्वी तक माना जाता है। मूर्तिकला की गांधार शैली को ग्रीको-रोमन, ग्रीको-बुद्धिस्ट, हिंद-यूनानी आदि नामों से भी जाना जाता है। इस पर यूनानी और रोमन कलाओं का प्रभाव अधिक था, लेकिन इसका विकास भारतीयों ने ही किया था। भारत के गांधार प्रदेश में विकसित होने के कारण इसे गांधार कला कहा गया। यह शैली भारतीय, एशियाई, यूनानी और रोमन शिल्पकारों के संपर्क से विकसित हुई, जिसमें बुद्ध की प्रतिमाएं यूनानी और रोमन शैलियों के मिश्रण से बनाई गईं। इस कला की मूर्तियां भूरे या स्लेटी रंग के पत्थरों से बनाई जाती थीं।
In simple words: गांधार कला कुषाणों के समय में विकसित हुई एक मूर्ति बनाने की शैली थी। इसमें भारतीय और यूनानी कला का मेल था, जहाँ बुद्ध की मूर्तियां यूनानी देवताओं जैसी दिखती थीं।
🎯 Exam Tip: गांधार कला का वर्णन करते समय उसकी उत्पत्ति, समयकाल, अन्य नाम, प्रमुख विशेषताओं और भारतीय-यूनानी मिश्रण पर जोर दें।
Question 4. कुषाणों के काल में हुई आर्थिक प्रगति का वर्णन कीजिए।
Answer: कुषाणों के समय में व्यापार में बहुत वृद्धि हुई, जिससे भारत आर्थिक रूप से समृद्ध देश बन गया और लोगों के जीवन में खुशहाली दिखने लगी। इस दौरान, स्थल मार्गों और नदी मार्गों के विकास ने आंतरिक व्यापार को बढ़ाया और समुद्री मार्गों ने विदेशी व्यापार को मजबूत किया। कुषाणों के काल में हुई आर्थिक प्रगति के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. कुषाणों के समय में मध्य एशिया और पश्चिमी एशिया जाने वाले कई मार्गों का विकास हुआ, जिससे व्यापार करना आसान हो गया।
2. कुषाणों ने रेशम मार्ग पर नियंत्रण कर लिया था, जो चीन से चलकर मध्य एशिया होते हुए रोमन साम्राज्य तक पहुँचता था। यह रेशम मार्ग कुषाणों के लिए आय का एक बड़ा स्रोत था।
3. भारत के व्यापारी चीन से रेशम खरीदकर रोमन साम्राज्य के व्यापारियों तक पहुंचाते थे, जिससे उन्हें काफी मुनाफा होता था।
4. भारत से रोम को हाथी दांत का सामान, काली मिर्च, लौंग, मसाले, सुगंधित पदार्थ, औषधियां, सूती और रेशमी कपड़े बड़ी मात्रा में निर्यात किए जाते थे।
5. कुषाण शासकों ने बड़ी संख्या में सोने के सिक्के चलाए, जिससे मुद्रा और व्यापार के कारण देश में कई नगरों का विकास हुआ।
In simple words: कुषाणों के समय में भारत का व्यापार बहुत बढ़ा। रेशम मार्ग पर उनका नियंत्रण था, जिससे खूब कमाई होती थी। भारत से मसाले और कपड़े रोम को बेचे जाते थे, और सोने के सिक्के भी खूब चले।
🎯 Exam Tip: आर्थिक प्रगति का वर्णन करते समय, व्यापार मार्गों, प्रमुख निर्यात-आयात वस्तुओं और मुद्रा के प्रचलन जैसे महत्वपूर्ण कारकों पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 5. कुषाणों के काल में भारत के विदेशी व्यापार में अभूतपूर्व वृद्धि हुई? इस कथन की व्याख्या कीजिए।
Answer: कुषाणों के समय में भारत का विदेशी व्यापार बहुत उन्नत अवस्था में था। इस दौरान स्थल मार्गों और समुद्री मार्गों के विकास से अन्य देशों के साथ भारत के व्यापारिक संबंध मजबूत हुए। यह समय व्यापार के लिए एक सुनहरा अवसर था।
1. **स्थल मार्गों का विकास:** स्थल मार्गों के विकास ने भारत के आंतरिक व्यापार को मजबूती दी। इन स्थल मार्गों से दूसरे देशों की सीमाएं जुड़ी होने के कारण भारत को अन्य देशों के साथ व्यापार करने में भी सुविधा हुई। एक स्थल मार्ग तक्षशिला से काबुल और दूसरे मार्ग कंधार से ईरान तक जुड़ा था। इस तरह मध्य एशिया और पश्चिमी एशिया को जाने वाले मार्गों का विकास हुआ।
2. **रेशम मार्ग पर नियंत्रण:** कुषाणों ने रेशम मार्ग पर नियंत्रण कर लिया था, जो चीन से चलकर मध्य एशिया होते हुए रोमन साम्राज्य तक पहुंचता था। यह रेशम मार्ग कुषाणों की आय का एक बड़ा स्रोत था। इस प्रकार भारत के व्यापारी दक्षिणी अरब और लाल सागर क्षेत्रों में भी जुड़ गए।
3. **रोमन साम्राज्य के साथ व्यापार:** भारत के व्यापारी चीन से रेशम खरीदकर रोमन साम्राज्य के व्यापारियों तक पहुंचाते थे, जिससे उन्हें बड़ा लाभ होता था। भारत से हाथी दांत का सामान, काली मिर्च, लौंग, मसाले, सुगंधित पदार्थ, औषधियां तथा सूती व रेशमी कपड़े रोम में बड़ी मांग में थे। इस व्यापार का केंद्र केरल प्रदेश था, जिससे प्रतिवर्ष लाखों की स्वर्ण मुद्राएं रोम से भारत आने लगीं।
4. **अन्य देशों के साथ व्यापारिक संबंध:** समुद्री मार्गों ने चीन और रोम के साथ-साथ भारत को अन्य देशों के साथ व्यापार को भी बढ़ावा दिया। चीन व रोम के अलावा भारत का व्यापार बर्मा, जावा, सुमात्रा, चंपा आदि दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ भी था। इन बिंदुओं के आधार पर हम कह सकते हैं कि कुषाणों के काल में भारत के विदेशी व्यापार में अभूतपूर्व वृद्धि हुई।
In simple words: कुषाण काल में भारत का विदेशी व्यापार बहुत बढ़ा। रेशम मार्ग पर नियंत्रण, रोमन साम्राज्य के साथ व्यापार और समुद्री व्यापार से बहुत फायदा हुआ। इससे भारत में सोने की मुद्राएँ भी खूब आने लगीं।
🎯 Exam Tip: विदेशी व्यापार की वृद्धि पर टिप्पणी करते समय, व्यापार मार्गों (विशेषकर रेशम मार्ग), प्रमुख व्यापारिक साझेदारों और आयात-निर्यात की वस्तुओं का उल्लेख करें।
RBSE Class 12 History Chapter 3 मानचित्र कार्य प्रश्न
Question 1. प्राचीन भारत में कुषाणों के साम्राज्य को मानचित्र में दर्शाइए।
Answer: प्राचीन भारत में कुषाणों का साम्राज्य एक विशाल भूभाग पर फैला हुआ था, जिसमें मध्य एशिया से लेकर गंगा नदी घाटी तक के क्षेत्र शामिल थे। उनके महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मथुरा, पुरुषपुर (पेशावर), और कश्मीर शामिल थे, जो व्यापारिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केंद्र थे। उनके साम्राज्य को एक मानचित्र में नीचे दर्शाया गया है:
In simple words: कुषाणों का साम्राज्य मध्य एशिया से लेकर भारत के बड़े हिस्से तक फैला हुआ था, जिसमें मथुरा और पेशावर जैसे प्रमुख शहर शामिल थे।
🎯 Exam Tip: मानचित्र संबंधी प्रश्नों में, दिए गए साम्राज्य के विस्तार को प्रमुख भौगोलिक विशेषताओं और महत्वपूर्ण शहरों के साथ सटीक रूप से चिह्नित करने का अभ्यास करें।
Question 2. विश्व के मानचित्र में निम्नलिखित को दर्शाइए (क) शकों का निवास स्थान सीथिया (ख) पार्थिया (ग) बैक्ट्रियर (घ) भारतीय शकों का अधिकार क्षेत्र।
Answer: विश्व के मानचित्र में शकों का निवास स्थान सीथिया, पार्थिया, बैक्ट्रिया और भारतीय शकों का अधिकार क्षेत्र निम्न प्रकार से दर्शाया जा सकता है। शकों, पार्थियनों और बैक्ट्रियन जैसी मध्य एशियाई जनजातियों ने प्राचीन विश्व के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
In simple words: शकों का मूल घर सीथिया था। बैक्ट्रिया और पार्थिया उनके साम्राज्य के हिस्से थे, और बाद में वे भारतीय शकों के रूप में भारत में भी फैल गए।
🎯 Exam Tip: मानचित्र संबंधी प्रश्नों में, दिए गए स्थानों को सही भौगोलिक संदर्भ में पहचानना और उन्हें स्पष्ट रूप से लेबल करना महत्वपूर्ण है।
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