RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 6 राजस्थान के गौरव

Get the most accurate RBSE Solutions for Class 12 Hindi Chapter 6 राजस्थान के गौरव here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest RBSE textbooks for Class 12 Hindi. Our expert-created answers for Class 12 Hindi are available for free download in PDF format.

Detailed Chapter 6 राजस्थान के गौरव RBSE Solutions for Class 12 Hindi

For Class 12 students, solving RBSE textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 12 Hindi solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 6 राजस्थान के गौरव solutions will improve your exam performance.

Class 12 Hindi Chapter 6 राजस्थान के गौरव RBSE Solutions PDF

Rajasthan Board RBSE Class 12 Hindi पीयूष प्रवाह Chapter 6 राजस्थान के गौरव

RBSE Class 12 Hindi पीयूष प्रवाह Chapter 6 राजस्थान के गौरव पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Hindi पीयूष प्रवाह Chapter 6 राजस्थान के गौरव वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. 'सम्पसभा' की स्थापना किसने की?
(a) महाराजा सूरजमल ने
(b) संत जम्भेश्वर ने
(c) पूज्य गोविन्द गुरु ने
(d) बाबा रामदेव ने
Answer: (d) बाबा रामदेव ने
In simple words: बाबा रामदेव ने 'सम्पसभा' नाम की संस्था बनाई थी। यह संस्था लोगों को एक साथ जोड़ने और समाज को बेहतर बनाने का काम करती थी।

🎯 Exam Tip: संस्थापक का नाम और संस्था का उद्देश्य याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. देव नारायण थे -
(a) बगड़ावत सिद्ध वंशीय गुर्जर
(b) बगड़ावते शाक्य वंशीय गुर्जर
(c) बगड़ावत नागवंशीय गुर्जर
(d) बगड़ावत शैव वंशीय गुर्जर
Answer: (c) बगड़ावत नागवंशीय गुर्जर
In simple words: देवनारायण जी बगड़ावत कुल के नागवंशीय गुर्जर समुदाय से थे। वे इस समुदाय के एक प्रमुख संत और लोक देवता थे।

🎯 Exam Tip: लोक देवताओं और संतों के वंश या कुल को समझना इतिहास के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. गुर्जर समाज देव नारायण जी को मानता है -
(a) विष्णु का अवतार
(b) शिव का अवतार
(c) शंकर का अवतार
(d) राम का अवतार
Answer: (a) विष्णु का अवतार
In simple words: गुर्जर समाज के लोग देवनारायण जी को भगवान विष्णु का ही रूप मानते हैं। वे उन्हें विष्णु का ही एक अवतार मानते हैं।

🎯 Exam Tip: किसी भी लोक देवता को किस प्रमुख देवता का अवतार माना जाता है, यह याद रखें।

 

Question 5. देव नारायण जी का जन्म माना जाता है –
(a) माघ कृष्ण सप्तमी को
(b) माघ शुक्ल पंचमी को
(c) माघ शुक्ल सप्तमी को
(d) माघ कृष्ण पंचमी को
Answer: (c) माघ शुक्ल सप्तमी को
In simple words: देवनारायण जी का जन्म माघ महीने की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को हुआ था। यह तिथि उनके भक्तों के लिए बहुत खास है।

🎯 Exam Tip: संतों और महत्वपूर्ण व्यक्तियों की जन्मतिथि को याद रखना अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है।

 

Question 6. सिद्ध वट के योग्य गुरुओं ने देव नारायण को सिखाया –
(a) योग विद्या
(b) तंत्र विद्या
(c) शस्त्र विद्या
(d) शास्त्र विद्या
Answer: (b) तंत्र विद्या
In simple words: सिद्ध-वट के आश्रम में देवनारायण जी को उनके गुरुओं ने तंत्र विद्या की शिक्षा दी थी। इसके अलावा उन्होंने आयुर्वेद और युद्ध कौशल भी सीखा था।

🎯 Exam Tip: किसी संत के गुरु और उनसे मिली शिक्षा को ध्यान में रखें।

 

Question 7. आज भी देव नारायण जी की पूजा होती है –
(a) आम की पत्तियों से
(b) पीपल की पत्तियों से
(c) बड़ की पत्तियों से
(d) नीम की पत्तियों से
Answer: (d) नीम की पत्तियों से
In simple words: आज भी देवनारायण जी की पूजा में नीम की पत्तियों का उपयोग किया जाता है। उन्होंने नीम और गोबर के महत्व को समझाया था।

🎯 Exam Tip: किसी लोक देवता से जुड़ी विशेष पूजा सामग्री या परंपरा को याद रखना उपयोगी होता है।

 

Question 9. 'पूत रा पग पालणे दीखे' यह लोकोक्ति किसके लिए प्रयुक्त हुई है?
(a) संत जम्भेश्वर
(b) देव नारायण
(c) महाराजा सूरजमल
(d) बाबा रामदेव
Answer: (d) बाबा रामदेव
In simple words: यह कहावत बाबा रामदेव के लिए कही जाती है। इसका मतलब है कि महान व्यक्ति के लक्षण बचपन में ही दिख जाते हैं।

🎯 Exam Tip: लोकोक्तियों और कहावतों का अर्थ तथा वे किसके लिए प्रयुक्त हुईं, इसे स्पष्ट रूप से जानें।

 

Question 10. बाबा रामदेव ने परिस्थितियों को पहचान कर अपना जीवन खपाया
(a) लोक कल्याण में
(b) धार्मिक भावना में
(c) शास्त्र अध्ययन में
(d) तंत्र विद्या में
Answer: (a) लोक कल्याण में
In simple words: बाबा रामदेव ने अपना पूरा जीवन लोगों की भलाई के कामों में लगा दिया था। उन्होंने समाज सेवा को ही अपना मुख्य लक्ष्य बनाया।

🎯 Exam Tip: संतों और महानुभावों के जीवन का मुख्य उद्देश्य और उनके प्रमुख कार्य याद रखें।

 

Question 11. 'जम्मा-जागरण' आन्दोलन चलाया
(a) पूज्य गोविन्द गुरु ने
(b) देव नारायण ने
(c) बाबा रामदेव ने
(d) संत जम्भेश्वर ने
Answer: (c) बाबा रामदेव ने
In simple words: बाबा रामदेव ने दलितों और पिछड़े वर्गों को जागरूक करने के लिए 'जम्मा-जागरण' आंदोलन शुरू किया था। इसका मकसद उन्हें अच्छाई की राह पर लाना था।

🎯 Exam Tip: प्रमुख आंदोलनों के नाम, उनके उद्देश्य और उनके प्रवर्तक को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 12. जम्भेश्वर जी का जन्म हुआ था -
(a) रामनवमी को
(b) विजयादशमी को
(c) कृष्ण जन्माष्टमी को
(d) दीपावली को
Answer: (c) कृष्ण जन्माष्टमी को
In simple words: संत जम्भेश्वर जी का जन्म कृष्ण जन्माष्टमी के दिन हुआ था। यह तिथि हिंदू धर्म में भगवान कृष्ण के जन्म के रूप में मनाई जाती है।

🎯 Exam Tip: संतों के जन्म से जुड़ी महत्वपूर्ण धार्मिक तिथियों को याद रखें।

 

Question 13. सन्त जम्भेश्वर ने 1485 में अपना उपदेश किस तिथि को दिया?
(a) कार्तिक अष्टमी
(b) कार्तिक नवमी
Answer: (a) कार्तिक अष्टमी
In simple words: संत जम्भेश्वर ने 1485 में कार्तिक महीने की अष्टमी तिथि को अपना पहला उपदेश दिया था। यह दिन उनके अनुयायियों के लिए बहुत खास है।

🎯 Exam Tip: किसी संत द्वारा दिए गए पहले उपदेश की तिथि को याद रखना उपयोगी है।

 

Question 15. विराट स्वाधीनता आन्दोलन का नेतृत्व किया था –
(a) महाराजा सूरजमल ने
(b) पूज्य गोविन्द गुरु ने
(c) सन्त जम्भेश्वर ने
(d) बाबा रामदेव ने
Answer: (b) पूज्य गोविन्द गुरु ने
In simple words: पूज्य गोविंद गुरु ने एक बड़े स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया था। यह आंदोलन आदिवासी लोगों को अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट करने के लिए था।

🎯 Exam Tip: प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों और उनके आंदोलनों के नेताओं को पहचानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 16. 1880 में गोविन्द गुरु तीन महीने जिसके साथ रहे, वे थे –
(a) विवेकानन्द
(b) रामकृष्ण परमहंस
(c) शंकराचार्य
(d) दयानन्द सरस्वती
Answer: (d) दयानन्द सरस्वती
In simple words: गोविंद गुरु 1880 में तीन महीने तक स्वामी दयानंद सरस्वती के साथ रहे थे। इस समय ने उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डाला।

🎯 Exam Tip: महान व्यक्तियों के जीवन में अन्य प्रमुख हस्तियों के प्रभाव को जानना अक्सर पूछा जाता है।

 

Question 17. मानगढ़ के विशाल पहाड़ पर प्रतिवर्ष मेला लगता है –
(a) मार्गशीर्ष अमावस्या पर
(b) मार्गशीर्ष प्रतिपदा पर
(c) मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर
(d) मार्गशीर्ष पंचमी पर
Answer: (c) मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर
In simple words: मानगढ़ पहाड़ी पर हर साल मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा को एक बड़ा मेला लगता है। यह मेला उन शहीदों की याद में होता है जिन्होंने वहां बलिदान दिया था।

🎯 Exam Tip: प्रमुख मेलों और त्योहारों का स्थान और तिथि याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 18. युवावस्था तक आते-आते सूरजमल निष्णात हो गये –
(a) रणनीति में
(b) कूटनीति में
(c) न्याय नीति में
(d) व्यवहार नीति में
Answer: (b) कूटनीति में
In simple words: महाराजा सूरजमल अपनी युवावस्था तक राजनीति और युद्ध की कूटनीति में बहुत माहिर हो गए थे। वे एक कुशल योद्धा और रणनीतिकार थे।

🎯 Exam Tip: शासकों और योद्धाओं की प्रमुख योग्यताओं या कौशल को जानना इतिहास के लिए उपयोगी है।

 

Question 20. तुर्की को उन्हीं के हथियार से मात देने वाला एक वीर पुरुष भारत की धरती पर अवतरित हुआ था। वह वीर पुरुष कौन था?
(a) महाराणा प्रताप
(b) शिवाजी
(c) अशोक
(d) सूरजमल
Answer: (d) सूरजमल
In simple words: महाराजा सूरजमल एक ऐसे वीर थे जिन्होंने तुर्कों को उन्हीं के तरीकों से हराया था। उन्हें भारत की धरती पर एक महान योद्धा माना जाता है।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक युद्धों और उनमें शामिल प्रमुख व्यक्तियों के बारे में जानना महत्वपूर्ण है।

RBSE Class 12 Hindi पीयूष प्रवाह Chapter 6 राजस्थान के गौरव अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. राजस्थान की धरती वीर प्रसूती भूमि है। स्पष्ट कीजिए।
Answer: राजस्थान की भूमि हमेशा से वीरों को जन्म देने वाली रही है। यहाँ ऐसे योद्धा पैदा हुए हैं, जो युद्ध में हारने के बजाय अपना सिर कट जाने पर भी लड़ते रहते हैं। ऐसे वीर हमेशा संघर्ष करने के लिए तैयार रहते हैं।
In simple words: राजस्थान की भूमि ने कई बहादुर योद्धाओं को जन्म दिया है जो हमेशा लड़ने के लिए तैयार रहते थे।

🎯 Exam Tip: 'वीर प्रसूति भूमि' जैसे वाक्यांशों का अर्थ और उनसे जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों को स्पष्ट करें।

 

Question 3. वीरों और सिद्धों की समाधियों पर आये जातरुओं को रोकने के लिए क्या प्रयत्न किया जाता है?
Answer: वीरों और सिद्धों की समाधियों पर आने वाले यात्रियों को रोकने के लिए स्थानीय लोग बहुत कोशिश करते हैं। वे हाथ जोड़कर विनती करते हैं, कई बार तो सड़क पर लेटकर कहते हैं कि अगर आपको जाना है तो हमें रौंदकर ही जाना होगा, वरना हमें आपकी सेवा का मौका दें। यह उनकी गहरी सेवा भावना को दर्शाता है।
In simple words: लोग यात्रियों को रोककर उनकी सेवा करना चाहते हैं। वे हाथ जोड़कर या सड़क पर लेटकर उन्हें रुकने को कहते हैं।

🎯 Exam Tip: सेवा भाव और स्थानीय परंपराओं का वर्णन करते समय भावनात्मक पहलुओं को शामिल करें।

 

Question 4. चौहान राजा ने बगड़ावतों को कहाँ की जागीर दी थी?
Answer: चौहान राजा ने बगड़ावत समुदाय को 'गोठा' नाम की जगह की जागीर दी थी। यह क्षेत्र उनके अधिकार में था।
In simple words: चौहान राजा ने बगड़ावतों को 'गोठा' नामक जगह की जागीर दी थी।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक स्थानों और उनसे जुड़े व्यक्तियों के बारे में जानकारी सटीकता से दें।

 

Question 5. देव नारायण किस कुल में जन्मे थे और उनको किस रूप में देखा जाता है?
Answer: देवनारायण जी बगड़ावत कुल के नागवंशीय गुर्जर थे। पूरे गुर्जर समाज के लोग उन्हें भगवान विष्णु का अवतार मानते हैं। वे उनके लिए एक पूजनीय व्यक्ति हैं।
In simple words: देवनारायण जी बगड़ावत नागवंशीय गुर्जर थे। गुर्जर समाज उन्हें विष्णु का अवतार मानता है।

🎯 Exam Tip: लोक देवताओं के वंश और धार्मिक मान्यता को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 6. सिद्ध-वट में देव नारायण को कैसी शिक्षा मिली?
Answer: सिद्ध-वट में देवनारायण जी को योग्य गुरुओं ने आयुर्वेद के साथ-साथ तंत्र विद्या भी सिखाई थी। इस शिक्षा से वे जल्दी ही एक कुशल योद्धा और आयुर्वेद तथा तंत्र शास्त्र के पंडित बन गए। उन्होंने कई रोगों का इलाज भी किया।
In simple words: सिद्ध-वट में देवनारायण जी ने आयुर्वेद और तंत्र विद्या सीखी। वे एक कुशल योद्धा और पंडित बन गए थे।

🎯 Exam Tip: संतों द्वारा प्राप्त शिक्षा और उनके विभिन्न कौशलों का उल्लेख करें।

 

Question 7. देव नारायण की महत्त्वपूर्ण देन क्या है?
Answer: देवनारायण जी ने गोबर और नीम के औषधीय महत्व को लोगों को समझाया। उन्होंने तुलसी की तरह नीम और गोबर को रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल करने का सफल प्रयास किया। इसी कारण आज भी उनकी पूजा नीम की पत्तियों से की जाती है। नीम और गोबर के गुण बहुत खास हैं।
In simple words: देवनारायण जी ने नीम और गोबर के औषधीय फायदे बताए। आज भी उनकी पूजा नीम की पत्तियों से होती है।

🎯 Exam Tip: संतों के सामाजिक योगदान और उनके द्वारा बताई गई उपयोगी बातों को याद रखें।

 

Question 8. 'पूत रा पग पालणे दीखे' यह कहावत किसके लिए कही गई है और क्यों?
Answer: यह कहावत बाबा रामदेव के लिए कही गई है। इसका अर्थ है कि महान व्यक्तियों के लक्षण उनके बचपन में ही दिखाई देने लगते हैं। बाबा रामदेव ने बचपन में गुरु बालकनाथ से शिक्षा लेना शुरू किया था। उन्होंने इतिहास, धर्म, दर्शन, और शस्त्र व शास्त्रों की शिक्षा भी प्राप्त की। उनकी बुद्धिमत्ता बचपन से ही झलकने लगी थी।
In simple words: यह कहावत बाबा रामदेव के लिए है, जिसका मतलब है कि बड़े लोगों के गुण बचपन में ही दिख जाते हैं। उन्होंने बचपन से ही अच्छी शिक्षा प्राप्त की थी।

🎯 Exam Tip: कहावतों का संदर्भ और उनका अर्थ बताते हुए उससे जुड़े व्यक्ति के बारे में जानकारी दें।

 

Question 10. बाबा रामदेव का जम्मा-जागरण' आन्दोलन चलाने का कारण क्या था?
Answer: बाबा रामदेव ने दलितों और पिछड़े वर्गों से संपर्क बढ़ाया। उन्होंने 'जम्मा-जागरण' आंदोलन चलाया ताकि इन लोगों को जागरूक किया जा सके और उन्हें अच्छी आदतों की ओर प्रेरित किया जा सके। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य सामाजिक समानता लाना था।
In simple words: बाबा रामदेव ने दलितों को जागरूक करने और उन्हें अच्छी बातें सिखाने के लिए 'जम्मा-जागरण' आंदोलन चलाया।

🎯 Exam Tip: आंदोलनों के कारण और उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 11. चिकित्सा के क्षेत्र में रामदेव ने क्या चमत्कार किया?
Answer: बाबा रामदेव एक सिद्ध योगी और वैद्यकीय चिकित्सा में बहुत माहिर थे। उन्होंने अपनी चमत्कारी शक्तियों से कई विकलांग लोगों की मदद की। कुष्ठ रोग और हैजा जैसी बीमारियों के इलाज में उनकी चिकित्सा बहुत असरदार थी। लोग दूर-दूर से उनके पास इलाज के लिए आते थे।
In simple words: रामदेव बाबा एक अच्छे वैद्य और योगी थे। उन्होंने विकलांगों और बीमारों को अपनी चिकित्सा से ठीक किया।

🎯 Exam Tip: संतों के चमत्कारी कार्यों और उनके औषधीय ज्ञान का उल्लेख करें।

 

Question 12. रामदेव ने प्रमुख परचे देकर लोगों को
Answer: बाबा रामदेव के प्रमुख चमत्कारों में लखी बनजारे की मिश्री को नमक बनाना, पाँच पीरों के कटोरे में मक्का को पलभर में लाकर रखना, नेतलदे की लंगड़ाहट दूर करना, सारथिये को तथा अपनी बहन सुगना के पुत्र को जीवित करना शामिल हैं। ये सभी उनके दिव्य चमत्कारी कार्य थे।
In simple words: रामदेव बाबा ने कई चमत्कार दिखाए, जैसे मिश्री को नमक बनाना, मक्का प्रकट करना, और लोगों को ठीक करना।

🎯 Exam Tip: संतों से जुड़े प्रमुख चमत्कारी किस्सों को याद रखें और उन्हें संक्षेप में बताएं।

 

Question 13. माता-पिता की मृत्यु के पश्चात् सन्त जम्भेश्वर ने क्या किया?
Answer: अपने माता-पिता की मृत्यु के बाद, संत जम्भेश्वर ने अपनी सारी संपत्ति दान कर दी। इसके बाद वे समाज की भलाई और उत्थान के कार्यों में लग गए। उन्होंने अपना जीवन समाज सेवा को समर्पित कर दिया।
In simple words: माता-पिता की मृत्यु के बाद संत जम्भेश्वर ने अपनी संपत्ति दान करके समाज सेवा शुरू कर दी।

🎯 Exam Tip: संतों के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं और उनके सामाजिक योगदान को याद रखें।

 

Question 14. सन्त जम्भेश्वर को दिव्य ज्ञान की प्राप्ति किस स्थान पर हुई?
Answer: संत जम्भेश्वर जी को बीकानेर जिले की नोखा तहसील के समराथल धोरा नामक स्थान पर दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ। उन्होंने इसी स्थान को अपना निवास स्थान बनाया।
In simple words: संत जम्भेश्वर को बीकानेर के समराथल धोरा में दिव्य ज्ञान मिला था।

🎯 Exam Tip: संतों से जुड़े महत्वपूर्ण स्थानों और उनके आध्यात्मिक अनुभव को याद रखें।

 

Question 17. गोविन्द गुरु ने पीड़ित समाज को सुधारने का बीड़ा उठाया। स्पष्ट कीजिए।
Answer: गोविंद गुरु ने उन लाखों वनवासी लोगों को सुधारने का बीड़ा उठाया जो अशिक्षा, बेरोजगारी, भूख, अकाल, बीमारियों, गलत आदतों और अंधविश्वासों से जूझ रहे थे। इसके साथ ही, वे सामंती और अंग्रेजी सरकार के अत्याचारों को भी सह रहे थे। गोविंद गुरु ने ऐसे दुखी समाज को बेहतर बनाने का संकल्प लिया।
In simple words: गोविंद गुरु ने गरीब और पीड़ित वनवासी समाज को सुधारने का काम हाथ में लिया। वे उनकी अशिक्षा और समस्याओं को दूर करना चाहते थे।

🎯 Exam Tip: समाज सुधारकों के कार्यों और उन्होंने किन समस्याओं पर काम किया, इसे स्पष्ट करें।

 

Question 18. 'सम्पसभा' का वार्षिक मेला कब लगता है और क्यों लगता है?
Answer: 'सम्पसभा' का वार्षिक मेला मानगढ़ के विशाल पहाड़ पर लगता है। यह मेला स्वतंत्रता आंदोलन में बलिदान देने वाले लोगों की याद में आयोजित किया जाता है। यह मेला मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा को लगता है। लोग यहां आते हैं और इस पवित्र मिट्टी को अपने मस्तक से लगाते हैं।
In simple words: 'सम्पसभा' का मेला हर साल मानगढ़ पहाड़ी पर मार्गशीर्ष पूर्णिमा को लगता है। यह मेला देश के लिए शहीद हुए लोगों की याद में होता है।

🎯 Exam Tip: किसी भी ऐतिहासिक मेले की तिथि, स्थान और उसके आयोजन के पीछे का कारण स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 19. राजा बदनसिंह ने सूरजमल को ही युवराज क्यों बनाया?
Answer: सूरजमल राजा बदनसिंह के सबसे बड़े पुत्र थे और बहुत तेजस्वी थे। उनका शरीर मजबूत था और वे एक साहसी योद्धा थे। सूरजमल कूटनीति में भी बहुत कुशल थे। इन सभी गुणों के कारण राजा बदनसिंह ने उन्हें अपना युवराज बनाया था।
In simple words: राजा बदनसिंह ने सूरजमल को युवराज बनाया क्योंकि वह उनके सबसे बड़े पुत्र थे, बहादुर थे, और कूटनीति में माहिर थे।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के गुणों और उनके निर्णयों के कारणों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 20. सूरजमल में राष्ट्र भावना प्रबल थी। उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
Answer: सूरजमल में राष्ट्र के प्रति गहरी भावना थी। इसका एक उदाहरण तब देखा गया जब सलावत खाँ ने आत्मसमर्पण किया। संधि करते समय सूरजमल ने दो मुख्य शर्तें रखीं: पहली, मुगल सेना पीपल के वृक्ष नहीं काटेगी, और दूसरी, मंदिरों का अपमान नहीं किया जाएगा तथा किसी भी देवालय को नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा। इन शर्तों से उनकी प्रबल राष्ट्र भावना साफ झलकती है।
In simple words: सूरजमल में राष्ट्रप्रेम बहुत ज्यादा था। उन्होंने मुगलों से संधि करते समय मंदिरों और पेड़ों की सुरक्षा की शर्त रखी थी।

🎯 Exam Tip: किसी व्यक्तित्व में राष्ट्र भावना को दर्शाने वाले ठोस उदाहरणों का उपयोग करें।

RBSE Class 12 Hindi पीयूष प्रवाह Chapter 6 राजस्थान के गौरव लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. 'वीर प्रसूती भूमि ने ऐसे श्रेष्ठ पुरुषों को जन्म दिया है। उन श्रेष्ठ पुरुषों का उल्लेख कीजिए।
Answer: राजस्थान की धरती ने ऐसे महान पुरुषों को जन्म दिया है जो शस्त्र और शास्त्र दोनों में निपुण थे। वे तलवार के धनी होने के साथ-साथ पहुंचे हुए सिद्ध भी थे। इन वीरों ने अपनी शक्तियों और बहादुरी का उपयोग अन्याय का विरोध करने, लोगों को जगाने और समाज में समानता लाने के लिए किया। सैकड़ों साल बाद भी लोग उनके नाम को याद करते हैं। उनकी समाधियों पर मेले लगते हैं जहाँ दूर-दूर से लोग पैदल चलकर आते हैं।
In simple words: राजस्थान ने महान योद्धाओं और संतों को जन्म दिया जो लड़ने और ज्ञान दोनों में माहिर थे। उन्होंने समाज की भलाई के लिए काम किया और आज भी लोग उन्हें याद करते हैं।

🎯 Exam Tip: राजस्थान के वीर पुरुषों के बहुमुखी गुणों और उनके योगदान को एक साथ प्रस्तुत करें।

 

Question 2. समाधियों पर आये जातरुओं की सेवा किस प्रकार होती है?
Answer: समाधियों पर आने वाले यात्रियों की सेवा के लिए भंडारों का आयोजन किया जाता है। आम लोग भी पलकें बिछाकर तैयार रहते हैं। उनके थके हुए और खून से सने पैरों को गर्म पानी से धोया जाता है, उनकी मालिश की जाती है। उनके लिए गर्म चाय, नाश्ते और भोजन की मुफ्त व्यवस्था की जाती है। अमीर और सामान्य लोग दोनों इसे अपना सौभाग्य मानते हैं। जब सेवा करने वाले लोगों को लगता है कि यात्री बिना सेवा लिए ही आगे बढ़ना चाहते हैं, तो वे उन्हें हाथ जोड़कर या सड़क पर लेटकर रोकने की कोशिश करते हैं। यह उनकी सेवा भाव को दर्शाता है।
In simple words: यात्री जब समाधियों पर आते हैं तो लोग उनकी खूब सेवा करते हैं। वे उन्हें भोजन, चाय देते हैं, पैर धोते हैं और उन्हें रुकने की विनती करते हैं।

🎯 Exam Tip: सेवा भाव और स्थानीय रीति-रिवाजों का विस्तृत वर्णन करें।

 

Question 3. 'देव नारायण का यश चारों ओर फैलने लगा।' उनका यश फैलने का क्या कारण था?
Answer: देवनारायण जी ने सिद्ध-वट में योग्य गुरुओं से शिक्षा ली और कुशल योद्धा के साथ-साथ आयुर्वेद तथा तंत्र शास्त्र के भी पंडित बन गए। धार में महाकाली की पूजा के समय उन्होंने राजा जयसिंह की बीमार बेटी पीपलदे को अपने आयुर्वेद के ज्ञान से ठीक कर दिया और बाद में उनसे विवाह भी कर लिया। उन्होंने अपने आयुर्वेद और सिद्धियों से लोगों के दुख दूर किए। पीपलदे की कुरूपता दूर करना, सारंग सेठ को फिर से जीवित करना, सूखी नदी से पानी निकालना आदि उनके चमत्कारी कार्य थे, जिससे उनका यश चारों ओर फैल गया।
In simple words: देवनारायण जी ने आयुर्वेद और तंत्र विद्या सीखी। उन्होंने अपनी चमत्कारी शक्तियों से कई लोगों के दुख दूर किए, जिससे उनकी प्रसिद्धि चारों ओर फैल गई।

🎯 Exam Tip: लोक देवताओं की प्रसिद्धि के कारणों में उनके चमत्कारी कार्य और समाज सेवा को शामिल करें।

 

Question 4. गोठा पहुँचकर देव नारायण ने क्या किया? उनका महत्त्वपूर्ण कार्य क्या था?
Answer: गोठा पहुँचकर सभी देवनारायण जी से मिले। देवनारायण जी ने गोठा में शांति व्यवस्था स्थापित की और जनता को हिम्मत बंधाई। उस समय राज्य और पड़ोसी राज्यों में राणा का अत्याचार चल रहा था। देवनारायण जी ने उनके बुरे शासन को खत्म करने और अच्छा शासन स्थापित करने के लिए क्रांति की। उनकी एक और महत्वपूर्ण देन यह है कि उन्होंने औषधि के रूप में गोबर और नीम के महत्व को स्पष्ट किया। तुलसी की तरह, उन्होंने नीम और गोबर को रोजमर्रा के व्यवहार में लाने का सफल प्रयास किया, जिसके कारण आज भी उनकी पूजा नीम की पत्तियों से होती है।
In simple words: देवनारायण जी ने गोठा में शांति लाई और अत्याचारों को खत्म किया। उन्होंने गोबर और नीम के औषधीय महत्व को भी समझाया।

🎯 Exam Tip: किसी ऐतिहासिक घटना के स्थान, उसमें शामिल व्यक्ति और उसके परिणामों का स्पष्ट वर्णन करें।

 

Question 6. रामदेव सिद्ध योगी भी थे और वैद्यकीय चिकित्सक भी। इस कथन की सार्थकता प्रमाणित कीजिए।
Answer: बाबा रामदेव न केवल एक सिद्ध योगी थे, बल्कि वैद्यकीय चिकित्सा में भी निपुण थे। उन्होंने अपनी चमत्कारी शक्तियों से विकलांगता जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों की मदद की। कुष्ठ रोग और हैजा जैसे रोगों में उनकी चिकित्सा रामबाण साबित हुई। लखी बनजारे की मिश्री को नमक बनाना, पाँच पीरों के कटोरे में पल भर में मक्का लाना, नेतलदे की लंगड़ाहट दूर करना, सारथिये को और अपनी बहन सुगना के पुत्र को जीवित करना उनके प्रमुख चमत्कार थे, जो उनकी वैद्यकीय क्षमताओं को प्रमाणित करते हैं।
In simple words: रामदेव बाबा एक सिद्ध योगी और अच्छे डॉक्टर दोनों थे। उन्होंने कई बीमारों और विकलांगों को अपनी शक्तियों और चिकित्सा ज्ञान से ठीक किया, जिससे उनकी योग्यता साबित हुई।

🎯 Exam Tip: किसी व्यक्ति के विभिन्न कौशलों को दर्शाने के लिए ठोस उदाहरण और उपलब्धियों का उल्लेख करें।

 

Question 7. सन्त जम्भेश्वर जी के कार्यों का उल्लेख कीजिए।
Answer: संत जम्भेश्वर जी प्रकृति के महान पुजारी थे। उन्हें समराथल धोरा में दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ था। उन्होंने 1485 की कार्तिक अष्टमी को अपना पहला उपदेश दिया। उन्होंने समाज में धर्म स्थापित करने और प्रकृति के साथ मिलकर रहने के उद्देश्य से जीवन के लिए उनतीस नियम बनाए। इन नियमों को मानने वाले बिश्नोई कहलाए। ये सभी नियम ईमानदारी, जीवन की नियमितता और प्रकृति की रक्षा पर आधारित हैं। उन्होंने कट्टरता का भी हमेशा विरोध किया। उन्होंने अपने चमत्कारी व्यक्तित्व से दुष्टों को हराया और सुल्तान सिकंदर लोदी को गायों की हत्या न करने के लिए राजी कर लिया था। समाज को उनके नेतृत्व में एक नई ऊर्जा मिली। उनके नियम सरल थे और सुखी जीवन के लिए थे, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग उनके अनुयायी बन गए।
In simple words: संत जम्भेश्वर प्रकृति प्रेमी थे। उन्होंने समाज के लिए 29 नियम बनाए जो प्रकृति और ईमानदारी पर आधारित थे। उन्होंने सुल्तान सिकंदर लोदी को गायों की हत्या रोकने के लिए भी राजी किया था।

🎯 Exam Tip: संतों के सामाजिक, धार्मिक और पर्यावरण संरक्षण संबंधी कार्यों का विस्तार से वर्णन करें।

 

Question 8. “प्रकृति की रक्षा हेतु दिया गया यह बलिदान अत्यन्त प्रेरक एवं अद्वितीय है।” यहाँ किस बलिदान का उल्लेख है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: यहाँ खेजड़ली गाँव में हुए बलिदान का उल्लेख है। जोधपुर महाराज के कहने पर सैनिक खेजड़ी के वृक्ष काटने खेजड़ली गाँव आए थे। इमरती देवी ने इसका विरोध किया और उन्हें चुनौती दी। जब सैनिक नहीं माने, तो इमरती देवी, उनकी पुत्रियाँ और पति एक-एक वृक्ष के सामने खड़े हो गए और अपना बलिदान दे दिया। यह देखकर गाँव के अन्य लोग भी प्रेरित हुए और वृक्षों को बचाने के लिए आगे आए। उस दिन लगभग 363 लोगों ने खेजड़ली गाँव में बलिदान दिया। ये सभी बलिदानी संत जम्भेश्वर के शिष्य थे। प्रकृति की रक्षा के लिए यह बलिदान बहुत प्रेरणादायक और अद्भुत है।
In simple words: यह बलिदान खेजड़ली गाँव का है जहाँ इमरती देवी और 363 लोगों ने पेड़ों को बचाने के लिए अपनी जान दे दी थी। यह प्रकृति के लिए एक महान बलिदान था।

🎯 Exam Tip: किसी भी ऐतिहासिक बलिदान के स्थान, कारण और उसमें शामिल व्यक्तियों का विस्तृत वर्णन करें।

 

Question 9. 'मानगढ़ का विशाल पहाड़ एक दिव्य बलिदान का साक्षी है।' उस बलिदान की भयंकरता का उल्लेख कीजिए।
Answer: मानगढ़ का विशाल पहाड़ एक दिव्य बलिदान का गवाह है, जो राजस्थान के धुर दक्षिण में गुजरात और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है। लगभग एक शताब्दी पहले, इस घने वन क्षेत्र में वनवासी लोगों ने एक बड़ा स्वतंत्रता आंदोलन चलाया था। इस बड़े अभियान से अंग्रेज सरकार डर गई थी। आंदोलन को दबाने के लिए अंग्रेजों ने 17 नवंबर, 1913 को देशभक्तों के विशाल सम्मेलन पर अंधाधुंध गोलियाँ चलाईं, जिसमें 1,500 वनवासी मौत के घाट उतर गए थे। इस हत्याकांड की तुलना जलियांवाला बाग हत्याकांड से भी अधिक भयानक माना जाता है। आज भी यह बलिदान वनवासियों के गीतों और कहानियों में जीवित है।
In simple words: मानगढ़ का पहाड़ एक बड़े बलिदान का गवाह है। 1913 में अंग्रेजों ने वनवासियों पर गोलियाँ चलाईं, जिसमें 1,500 लोग मारे गए। यह जलियांवाला बाग से भी भयानक घटना थी।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक हत्याकांडों के तथ्य- तिथि, स्थान, कारण और परिणाम को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।

 

Question 10. पीड़ित समाज को सुधारने का बीड़ा उठाया गोविन्द ने।' गोविन्द ने क्या सुधार किये?
Answer: पूज्य गोविंद गुरु के जीवन में एक निर्णायक मोड़ आया जब उन्होंने दुनिया को देखा। उन्होंने समाज को सुधारने का संकल्प लिया। लाखों वनवासी बंधु अशिक्षा, गरीबी, भूख, अकाल, बीमारियों, बुरी आदतों और अंधविश्वासों के साथ-साथ सामंती और अंग्रेजी सरकार के अत्याचारों को भी सह रहे थे। गोविंद गुरु ने 'सम्पसभा' नामक सामाजिक संगठन की स्थापना की। उन्होंने स्वच्छता, भजन-कीर्तन, बच्चों की शिक्षा, कड़ी मेहनत, चोरी न करना, शराब-मांस का सेवन न करना, आपसी विवाद न करना, बेगार न करना और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करके अपने धर्म पर दृढ़ रहने जैसे भाव स्थापित किए।
In simple words: गोविंद गुरु ने समाज सुधार का काम किया। उन्होंने 'सम्पसभा' बनाई और लोगों को स्वच्छता, शिक्षा, मेहनत, और बुरी आदतों से दूर रहने के लिए प्रेरित किया।

🎯 Exam Tip: किसी समाज सुधारक के द्वारा किए गए विशिष्ट सुधारों और उनके तरीकों को याद रखें।

 

Question 11. महाराजा सूरजमल की वीरता का वर्णन कीजिए।
Answer: महाराजा सूरजमल तलवार के बहुत धनी और कुशल योद्धा थे। उन्होंने मुगलों की शक्ति को हमेशा के लिए समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सन् 1731 में उन्होंने मेवात के दावर जंग को हरा दिया। नवंबर 1745 में उन्होंने अलीगढ़ के नवाब और मुगल बादशाह से युद्ध किया। सन् 1750 में दिल्ली के बादशाह के मीर बख्शी सलावत खाँ ने सूरजमल पर हमला किया। नारनौल के पास रात के अंधेरे में सूरजमल ने सलावत खाँ के ठिकाने पर हमला करके उसे आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर दिया। इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि सूरजमल एक कुशल योद्धा और युद्ध में निपुण थे।
In simple words: महाराजा सूरजमल एक बहादुर योद्धा थे। उन्होंने मुगलों को हराया और मेवात, अलीगढ़ के नवाब और सलावत खाँ से युद्ध करके अपनी वीरता दिखाई।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक शासकों की वीरता को दर्शाने के लिए उनके युद्धों, विजयों और रणनीतियों का उल्लेख करें।

 

Question 12. दिल्ली से मुगलों को हटाने के लिए सूरजमल ने क्या किया?
Answer: सूरजमल तुर्कों के कट्टर दुश्मन थे। जब दिल्ली से मुगलों को पूरी तरह हटाने की जिम्मेदारी उन पर आई, तो उन्होंने सबसे पहले आगरा से मुगल सत्ता को खत्म करके किले पर अधिकार कर लिया। कुछ ही समय में उन्होंने दक्षिण में चंबल के क्षेत्र पर भी विजय प्राप्त की। पूर्व दिशा में हरियाणा का पूरा क्षेत्र भी उनके अधिकार में आ गया था। उन्होंने अलीगढ़, हापुड़ और गढ़ मुक्तेश्वर तक अपना प्रभाव फैलाया। आगरा से मुगल आक्रमणकारियों के सभी निशान मिटा दिए। पेशवा की अचानक मृत्यु के बाद, सूरजमल ने दिल्ली को मुगलों से पूरी तरह मुक्त करने का निश्चय किया। उन्होंने दिल्ली को तीन तरफ से घेरकर गोलाबारी शुरू कर दी। रुहेले भरतपुर के वीरों की मार से पीछे हटते जा रहे थे। हिंडन नदी के नाले को पार करते समय छिपे रुहेलों ने हमला कर दिया जिससे सूरजमल को जानलेवा चोट लगी। इसी कारण उनका निधन हो गया।
In simple words: सूरजमल ने दिल्ली से मुगलों को हटाने के लिए आगरा और चंबल जैसे क्षेत्रों पर कब्जा किया। उन्होंने दिल्ली को घेरकर गोलाबारी की, लेकिन एक हमले में उनकी जान चली गई।

🎯 Exam Tip: किसी भी ऐतिहासिक युद्ध या अभियान के चरणों, रणनीतियों और उसके परिणामों का क्रमबद्ध वर्णन करें।

RBSE Class 12 Hindi पीयूष प्रवाह Chapter 6 राजस्थान के गौरव निबन्धात्मक प्रश्न

राजस्थ (जीवन चरित्र) पाठ सारांश

देव नारायण जी देव नारायण जी बगड़ावत कुल के थे और बगड़ावत नागवंशीय गुर्जर थे। सारा गुर्जर समाज देव नारायण जी को विष्णु का अवतार मानता है। आपने राज्य क्रान्ति की और अत्याचारी शासन का अन्त किया। इनके जन्म-समय में मतभेद है। फिर भी 4142 वि. सं. 1097 की माघ शुक्ल सप्तमी को इनका जन्म हुआ ऐसा माना जाता है। चौहान राजा ने बगड़ावतों को गोठा की जागीर दी। यह भीलवाड़ा जिले के आसीन्द से अजमेर जिले के मसूदा तक खारी नदी के आस-पास का क्षेत्र माना जाता है। इनका देवास में लालन-पालन हुआ, क्योंकि राणा दुर्जनसाल के अत्याचार के कारण माता सोढ़ी उन्हें वहाँ ले गई थीं। बचपन में घुड़सवारी और शस्त्र संचालन सीखा और क्षिप्रा के किनारे सिद्ध-वट में साधना करने लगे। गुरुओं ने उन्हें आयुर्वेद के साथ तंत्र-विद्या भी सिखाई। इससे वे कुशल योद्धा और तंत्र शास्त्र के पंडित हो गये।

बगडावतों का अनन्य मित्र छोटू भाट उन्हें गोठा ले गया। देव नारायण जी, छोटू भाट, माता सोढ़ी अंगरक्षकों के साथ देवास से चल दिये। धार में महाकाली की आराधना के समय राजा जयसिंह की बीमार पुत्री पीपलदे को देव नारायण जी ने भला-चंगा कर दिया। वहीं उससे उनका विवाह हो गया। आयुर्वेद के ज्ञान से लोगों का भला किया। गोठा में अमन-चैन कायम किया और लोगों को ढाँढ़स बँधाया। पड़ोसी राज्य के राणा के अत्याचार चल रहे थे, लेकिन क्रान्ति कर सुशासन स्थापित किया। इन्होंने गोबर और नीम का महत्व स्थापित किया।

बाबा रामदेव:

बाबा रामदेव का जन्म पोकरण के समीप लंगभग 653 वर्ष पूर्व विक्रम संवत् 1409 में भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को रूणीचा के तँवर वंशीय ठाकुर अजमल जी व माता मैणादे के घर हुआ। पूत के पाँव पालने में ही दिखाई देते हैं, यह उक्ति उनके प्रति चरितार्थ होती है। आपने अपनी माँ को चमत्कार दिखाया। कुछ बड़े होने पर गुरु बालकनाथ से शिक्षा लेना आरम्भ किया। इतिहास, धर्म, दर्शन के साथ शस्त्र और शास्त्रों की शिक्षा ग्रहण की। किशोरावस्था में साथलमेर में भैरव तांत्रिक को मारकर सम्पूर्ण क्षेत्र को उसके आतंक से मुक्त किया।

अपने जीवन को लोक-कल्याण में खपाने का निश्चय किया। राजपूत होकर भी दलितों से सम्पर्क बढ़ाया तथा 'जम्मा-जागरण' आन्दोलन के माध्यम से दलितों को जागृत कर अच्छाइयों की ओर प्रवृत्त किया। जम्मा-जागरण' का यह पुनीत कार्य मेघवाल जाति के

 

Question 4. चौहान राजा ने बगड़ावतों को कहाँ की जागीर दी थी?
Answer: चौहान राजा ने बगड़ावतों को 'गोठा' नाम का क्षेत्र दिया था। यह क्षेत्र उनके अधिकार में था। 'जागीर' का अर्थ होता है एक भूमि का टुकड़ा जो किसी व्यक्ति को सेवा के बदले मिलता है।
In simple words: चौहान राजा ने बगड़ावतों को 'गोठा' नामक जगह दी थी। 'जागीर' का मतलब है जमीन का एक टुकड़ा।

🎯 Exam Tip: इतिहास से संबंधित सवालों में, नाम और जगह के साथ-साथ उनके अर्थ भी स्पष्ट करने से उत्तर ज़्यादा प्रभावी होता है।

 

Question 5. देव नारायण किस कुल में जन्मे थे और उनको किस रूप में देखा जाता है?
Answer: देव नारायण नागवंशीय गुर्जर कुल से थे। गुर्जर समाज के सभी लोग उन्हें भगवान विष्णु का अवतार मानते हैं। उन्हें यह मान्यता उनकी चमत्कारी शक्तियों और लोक कल्याण के कार्यों के कारण मिली।
In simple words: देव नारायण नागवंशीय गुर्जर परिवार में पैदा हुए थे। सभी गुर्जर समाज के लोग उन्हें भगवान विष्णु का रूप मानते हैं।

🎯 Exam Tip: जब किसी व्यक्ति के कुल और मान्यता के बारे में पूछा जाए, तो दोनों बातों को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए।

राजस्थ (जीवन चरित्र) पाठ-परिचय

इन समाधियों पर आने वाले व्यक्तियों का सामान्य जन स्वागत करते हैं, सेवा करते हैं। वे सेवा करने को अपना सौभाग्य समझते हैं। यदि आगन्तुक अपनी सेवा नहीं कराना चाहते, तो वे उनको रोकने सप्रेम कोशिश करते हैं। वे उनको रोकने के अनेक प्रयत्न करते हैं। यात्रियों की सेवा करने के ऐसे दृश्य हर वर्ष देखने को मिलते हैं। हमें ऐसे नर पुंगवों के कर्तव्य का अनुकरण करें, समाज में समरसता का संचार करें और लोक सेवा में अपना जीवन लगायें।

राजस्थ (जीवन चरित्र) पाठ सारांश

सन्त जम्भेश्वर हमारे देश की मूल आत्मा प्रकृति प्रधान है। सन्त जम्भेश्वर जी इसी आत्मा के तत्वान्वेषी और सशक्त उद्बोधक थे। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन आपका जन्म हुआ था। आप जाम्भोजी के नाम से प्रसिद्ध थे। नागौर जिले के पीपासर गाँव में आपका जन्म हुआ था। आप विनयशील थे। माता-पिता की मृत्यु के पश्चात् आपने सारी सम्पत्ति दान कर दी और सामाजिक उत्थान में लग गये।

समरा थल धोरा में आपने अपना मुकाम बनाया और यहीं आपको दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ। धर्म स्थापना और प्रकृति से सहजीवन के उद्देश्य को ध्यान में रखकर आपने उनतीस नियम बनाये। इन्हें मानने वाले बिश्नोई कहलाये। आपने कट्टरता का विरोध किया। आपने सिकन्दर लोदी को गौ हत्या न करने के लिए राजी कर लिया। कई विधर्मी आपके शिष्य बन गये। विराट व्यक्तित्व के कारण आप लोकमन के देव बन गये। बीकानेर के लालसर गाँव में आपने समाधि ली।

जम्भेश्वर जी के बाद उनके अनुयायियों ने उनका अनुसरण कर बलिदान दिया। प्रकृति की रक्षा के लिए उनका दिया बलिदान अत्यन्त प्रेरक और अद्वितीय है। जोधपुर का खेजड़ली गाँव इस बलिदान के लिए प्रसिद्ध है। जोधपुर महाराजा ने अपने सैनिकों को वृक्ष काटने के लिए कहा। सैनिकों ने खेजड़ली गाँव को चुना और वे खेजड़ी वृक्ष काटने लगे। इमरती देवी ने विरोध किया। उसने और उसकी बेटियों ने इसके विरोध में अपना बलिदान दिया। फिर तो सारे गाँव के लोग तैयार हो गये। गाँव में 363 लोगों का बलिदान हुआ। आज भी उनकी स्मृति में मेला लगता है। हजारों लोग यहाँ आते हैं और प्रकृति तथा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हैं। बिश्नोइयों के गाँव में वृक्ष आज भी नहीं काटे जाते और हिरण नहीं मारे जाते।

पूज्य गोविन्द गुरु राजस्थान के दक्षिण में गुजरात और मध्य प्रदेश की सीमा पर बलिदान का साक्षी मानगढ़ का विशाल पहाड़ है। लगभग एक शताब्दी पूर्व सघन वनांचल में वनवासी बन्धुओं ने एक स्वाधीनता आन्दोलन का संचालन किया था। इस अभियान से अंग्रेज सरकार भी काँप गई। 17 नवम्बर, 1913 ई. को आयोजित राष्ट्र भक्तों के विराट सम्मेलन में अंग्रेजों ने लाखों वन बन्धुओं पर अन्धाधुन्ध गोलियाँ चलाईं, जिसमें 1,500 वनवासियों की मौत हो गई, जो जलियाँवाला बाग से भी भयंकर था। आज भी वह स्थल वनवासियों के गीतों तथा कथाओं में रचा-बसा है। ऐसे विराट स्वाधीनता आन्दोलन का नेतृत्व करने वाले महापुरुष पूज्य गोविन्द गुरु थे।

डूंगरपुर जिले के बासिया गाँव में 20 दिसम्बर, 1858 ई. को एक बनजारा परिवार में आपका जन्म हुआ। गाँव के शिव मन्दिर के पुजारी से आपको संस्कार मिले। परिवार की घुमन्तू जीवन शैली से आपको दुनिया देखने का अवसर दिया। 1880 में स्वामी दयानन्द सरस्वती के साथ रहने से जीवन में नया मोड़ आया। लाखों वनवासी बन्धु अशिक्षा, बेकारी, भूख, अकाल, बीमारियों, व्यसनों तथा अन्धविश्वासों से घिरे थे और सामन्ती व्यवस्था तथा अंग्रेजी सरकार के अत्याचार सह रहे थे। आपने ऐसे परिवारों को सुधारने का बीड़ा उठाया। 'सम्पसभा' नामक सामाजिक संगठन की स्थापना के साथ गाँव में सघन कुण्डों की स्थापना का कार्य आरम्भ हुआ। आपने स्वच्छता, भजन-सत्संग, बच्चों की शिक्षा, मेहनत करना, चोरी न करना, मद्य-मांस सेवन न करना, आपसी विवाद न करना, बेगार न करना, विदेशी बहिष्कार और स्वधर्म पर दृढ़ रहने के निर्देश दिये। समाज-सुधार के कारण वे गोविन्द गुरु हो गए।

सन् 1903 में प्रतिवर्ष मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर 'सम्पसभा' का वार्षिक सम्मेलन मानगढ़ के विशाल पहाड़ पर होने लगा। स्थानीय सामन्त और जागीरदार उनसे पहले से ही नाराज थे, जिसका परिणाम हुआ सन् 1913 का मानगढ़ हत्याकाण्ड। कर्नल शटल ने भक्तों पर

महाराजा सूरजमल महाराजा सूरजमल ने यवनों की सत्ता समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 13 फरवरी सन् 1907 में ननिहाल कामर में आपका जन्म हुआ। आप राव राजा बदनसिंह और रानी देवकी के पुत्र थे। सूरजमल जन्म से ही तेजस्वी थे। युवावस्था में वे साहसी योद्धा हो गये। वे कूटनीति में भी निष्णात थे। बदनसिंह के बड़े पुत्र थे और गुणी थे। अतः इन्हें ही युवराज बनाया गया। सन् 1731 में मेवात के दावर जंग को पराजित किया। नवम्बर 1745 में उन्होंने अलीगढ़ के नवाब और मुगल बादशाह से युद्ध किया। सन् 1750 में दिल्ली के बादशाह के मीर बख्शी सलावत खाँ ने उन पर आक्रमण किया। सूरजमल ने नारनौल के पास रात में सिंह झपट्टा मार कर उसे आत्म-समर्पण के लिए मजबूर कर दिया।

इन्होंने सन्धि करने के लिए कई शर्ते रखीं, जिनमें दो मुख्य र्थी

1. मुगल सेना पीपल के पेड़ नहीं काटेगी।
2. मन्दिरों का अपमान न किया जाय और देवालयों को क्षति न पहुँचायी जाए।

9 जून, 1756 को सूरजमल भरतपुर के राजा बने। अहमद शाह अब्दाली ने सूरजमल को दबाने का प्रयत्न किया। सूरजमल ने अब्दाली को पत्र लिखा, जिसमें उसे चुनौती दी। शिवाजी की तरह तुर्कों को परास्त करने वाला दूसरा राजा सूरजमल हुआ, जिसने उन्हीं के हथियार से उन्हें मात दी। आगरा की मुगल सत्ता को मात दी और किले पर अधिकार किया। चम्बल के क्षेत्र पर अधिकार किया। हरियाणा, अलीगढ़, हापुड़, गढ़ मुक्तेश्वर तक अपना प्रभाव जमाया। आगरा को यवनों के दुष्प्रभाव से मुक्त कराया। सूरजमल ने दिल्ली को घेर लिया और आगे बढ़ते रहे। हिण्डन नदी के नाले को पार करते समय रुहेलों ने आक्रमण कर दिया। सूरजमल को प्राणघातक चोट लगी। 25 दिसम्बर 63 ई. को उनका निधन हो गया।

शब्दार्थ-

(पृष्ठ 44) रौद्र = प्रचंड, क्रोधपूर्ण। पराक्रमियों = वीरों। वीर प्रसूता = वीरों को जन्म देने वाली। जुझारों = वीरों। तेजस्वी = कीर्तिमान, प्रभावशाली। रणबांकुरों = योद्धओं।

(पृष्ठ 50) निष्णात = पारंगत। प्रतिकार = प्रतिशोध, बदला। जातरू = यात्री, मनौती = मनुहार। आयोजन = प्रबन्ध, तैयारी। नर पुंगव = नर श्रेष्ठ। पलक पाँवड़े बिछाना = स्वागत को तैयार रहना। अल्पाहार = नाश्ता। सेवारू = सेवा करने वाले।

(पृष्ठ 45) अविस्मरणीय = जिसे भूला न जा सके। दृष्टिगोचर = दिखाई देना, प्रदत्त = दिया हुआ। पण्डित = विद्वान। लक्ष्य = उद्देश्य। अंगरक्षक = सुरक्षा के लिए रखा गया भृत्य। आराधना = पूजा, सेवा, प्रार्थना। साक्षात् = प्रत्यक्ष। पुनर्जीवित = पुनः दोबारा जीवित करना। कुशासन = बुरा शासन। परास्त = पराजित। आतंक = अत्याचार।

(पृष्ठ 46) संकल्प = किसी कार्य को करने का निश्चय या इरादा। जाग्रत कर = जगाकर, सचेत करके, पारंगत = निष्पात। पीड़ितों = रोगियों। दर्शनार्थ = दर्शन करने के लिए। चिन्तनशील = विचारवान, चिन्तन करने वाला। प्रवृत्ति = स्वभाव। उत्थान = विकास, उद्धार। मुकाम = रहने का स्थान, ठहरने का स्थान।

(पृष्ठ 49) सशर्त = शर्त के साथ। मुक्त = आजाद। यवन = मुसलमान जाति, विधिवत = नियमानुसार। आत्मसमर्पण = हथियार डालना, गुलामी स्वीकार करना।। अवतरित = पैदा हुए। पताका = ध्वजा। दुष्प्रभाव = बुरा प्रभाव।

Free study material for Hindi

RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 6 राजस्थान के गौरव

Students can now access the RBSE Solutions for Chapter 6 राजस्थान के गौरव prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 12 Hindi textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.

Detailed Explanations for Chapter 6 राजस्थान के गौरव

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 12 Hindi chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 12 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Hindi Class 12 Solved Papers

Using our Hindi solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 12 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 6 राजस्थान के गौरव to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 6 राजस्थान के गौरव for the 2026-27 session?

The complete and updated RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 6 राजस्थान के गौरव is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Hindi are as per latest RBSE curriculum.

Are the Hindi RBSE solutions for Class 12 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 6 राजस्थान के गौरव as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 12 RBSE solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 6 राजस्थान के गौरव will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 6 राजस्थान के गौरव in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 12 Hindi. You can access RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 6 राजस्थान के गौरव in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Hindi RBSE solutions for Class 12 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 6 राजस्थान के गौरव in printable PDF format for offline study on any device.