RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 4 बिहारी

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RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 4 बिहारी वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. बिहारी सतसई में किस रस की प्रधानता है –
(अ) शान्त
(ब) श्रृंगार
(स) वीर
(द) हास्य
Answer: (ब) श्रृंगार
In simple words: बिहारी सतसई की कविताओं में मुख्य रूप से प्रेम और सौंदर्य का वर्णन किया गया है। यह वर्णन प्रेम की सुंदरता और आकर्षण को दिखाता है, जो श्रृंगार रस की पहचान है।

🎯 Exam Tip: बिहारी की रचनाओं को पढ़ते समय उनके भावों और रसों पर ध्यान दें। श्रृंगार रस उनकी कविताओं की प्रमुख विशेषता है, इसे याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 4 बिहारी अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. "कब कौ टेरतु दीन-रट जगनाइक जग बाय॥ प्रस्तुत दोहे में कवि ने उलाहना देते हुए किस पर कटाक्ष किया है?
Answer: कवि इस दोहे में भगवान श्रीकृष्ण पर व्यंग्य कर रहे हैं। वे श्रीकृष्ण को 'जगत के गुरु' और 'नायक' कहकर कहते हैं कि वे कितने समय से दीनता से पुकार रहे हैं, पर श्रीकृष्ण उनकी सहायता के लिए नहीं आ रहे हैं, जैसे उन्हें संसार की हवा लग गई हो। यह एक भक्त की अपने आराध्य से शिकायत है, जिसमें वह भगवान की निष्क्रियता पर कटाक्ष करता है।
In simple words: कवि भगवान श्रीकृष्ण पर कटाक्ष कर रहा है। वह कहता है कि भगवान भी अब दुनिया के बड़े लोगों की तरह हो गए हैं, जो गरीबों की पुकार नहीं सुनते।

🎯 Exam Tip: दोहे में प्रयोग किए गए शब्दों 'दीन-रट', 'जगनाइक' और 'जग बाय' को ध्यान से समझें, ये कटाक्ष को स्पष्ट करने में सहायक हैं।

 

Question 2. किस लालच में गोपियाँ श्रीकृष्ण की मुरली छिपा लेती हैं?
Answer: गोपियाँ श्रीकृष्ण से अधिक देर तक बातें करने के लालच में उनकी बाँसुरी को छिपा लेती हैं। वे जानती थीं कि जब मुरली खो जाएगी, तो श्रीकृष्ण उसे ढूँढ़ने में अधिक समय लगाएंगे और उनसे बात करेंगे, जिससे उन्हें कृष्ण के साथ और समय बिताने का मौका मिलेगा। यह उनकी प्रेमपूर्ण शरारत थी।
In simple words: गोपियाँ श्रीकृष्ण से बातें करने के लिए उनकी बाँसुरी को छिपा देती हैं। वे चाहती थीं कि कृष्ण उनसे बात करें।

🎯 Exam Tip: 'बतरस लालच' जैसे मुहावरों को समझें, क्योंकि ये गोपियों की शरारत और कृष्ण के प्रति उनके प्रेम को दर्शाते हैं।

 

Question 3. श्रीकृष्ण के आगमन पर मोर क्या प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं?
Answer: श्रीकृष्ण के आगमन पर मोर उन्हें देखकर बहुत प्रसन्न होते हैं और खुशी से नाचने लगते हैं। मोर श्रीकृष्ण के सांवले शरीर को बारिश वाले काले बादल समझ लेते हैं, और क्योंकि मोर बादलों को देखकर नाचते हैं, वे श्रीकृष्ण को देखकर भी नाच उठते हैं। यह एक सुंदर प्राकृतिक वर्णन है जो कृष्ण की उपस्थिति के प्रभाव को दर्शाता है।
In simple words: श्रीकृष्ण को देखकर मोर नाचने लगते हैं। वे उनके सांवले शरीर को बादल समझकर नाचते हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय 'श्याम स्वरूप' को 'बादल' समझने की कल्पना को स्पष्ट करें, यह महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. समान आभा के कारण नजर न आने वाले नायिका के आभूषणों की पहचान किस प्रकार होती है?
Answer: नायिका के शरीर का रंग इतना गोरा और चमकीला है कि उसके सोने के आभूषण शरीर में मिलकर दिखाई नहीं देते। उनकी पहचान तभी हो पाती है जब कोई उन्हें हाथ से छूता है और आभूषणों की कठोरता महसूस करता है। यह नायिका के अत्यधिक सौंदर्य का वर्णन है।
In simple words: नायिका के आभूषण उसके गोरे शरीर में घुल-मिल जाते हैं, इसलिए उन्हें छूकर ही पहचाना जा सकता है।

🎯 Exam Tip: नायिका के असाधारण सौंदर्य को दर्शाने वाले शब्दों पर ध्यान दें, जैसे 'समान आभा' और 'कठोरता से पहचान'।

 

RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 4 बिहारी लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. जगत के चतुर चितेरों को भी मूढ़ बनना पड़ा। कवि ने ऐसा क्यों कहा?
Answer: कवि ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि नायिका का सौंदर्य हर पल बदलता रहता था। पुराने समय में चित्रकार हाथों से चित्र बनाते थे, जिसके लिए व्यक्ति को एक ही मुद्रा में लंबे समय तक बैठना होता था। पर इस नायिका की सुंदरता इतनी गतिशील थी कि उसकी छवि हर पल बदलती रहती थी, जिससे कोई भी चतुर चित्रकार उसकी एक स्थिर तस्वीर नहीं बना पाया और वे असफल होकर मूर्ख सिद्ध हो गए। यह नायिका के अनुपम और गतिशील सौंदर्य का वर्णन है।
In simple words: नायिका का चेहरा हर पल बदलता रहता था। इसलिए बड़े-बड़े चित्रकार भी उसकी तस्वीर नहीं बना पाए और हार मान गए।

🎯 Exam Tip: नायिका के सौंदर्य की 'गतिशीलता' और चित्रकारों की 'अक्षमता' को प्रमुख बिंदुओं के रूप में प्रस्तुत करें।

 

Question 2. "भरे भौन में करत है, नैननु ही सों बात ॥" प्रस्तुत दोहे के माध्यम से नायक नायिका आँखों की चेष्टाओं के माध्यम से किन भावों को प्रकट कर रहे हैं?
Answer: इस दोहे में नायक और नायिका एक भरे हुए घर में उपस्थित अन्य लोगों की मौजूदगी में आँखों के इशारों से अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहे हैं। उनकी आँखों की चेष्टाएँ—कुछ कहने की इच्छा, असहमति, प्रसन्नता, खीझ, मिलन का सुख, हर्ष और लज्जा—जैसे कई मनोभावों को प्रकट करती हैं। यह मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि व्यक्ति के हृदय की भावनाएँ उसकी आँखों से स्पष्ट दिख जाती हैं, और यहाँ वे अपने प्रेम को गुप्त रखने के लिए ऐसा कर रहे हैं।
In simple words: नायक और नायिका सबकी मौजूदगी में आँखों के इशारों से बात कर रहे हैं। वे अपनी खुशी, गुस्सा, प्रेम और शर्म जैसी सारी भावनाएं आँखों से ही दिखा रहे हैं।

🎯 Exam Tip: आँखों की चेष्टाओं से व्यक्त होने वाले विभिन्न भावों को विस्तार से लिखें और यह भी बताएं कि वे ऐसा क्यों कर रहे थे (प्रेम को गुप्त रखना)।

 

Question 3. “अंग-अंग नग जगमगत दीपसिखा सी देह।। दिया बढ़ाएँ हूँ, बड़ौ उज्यारौ गेह॥ प्रस्तुत दोहे में सखी नायक से नायिका की छवि की प्रशंसा करते हुए क्या कहना चाहती है?
Answer: इस दोहे में सखी नायक से नायिका के अत्यंत उज्ज्वल और चमकीले रूप की प्रशंसा कर रही है। वह बताना चाहती है कि नायिका का शरीर इतना दीप्तिमान है कि उसके प्रत्येक अंग में जड़े रत्नों के आभूषण जगमगाते रहते हैं, मानो वह दीपक की लौ के समान प्रकाशवान हो। सखी नायक को नायिका के प्रति आकर्षित करना चाहती है और यह भी संकेत देती है कि नायिका के रूप और रत्नजटित आभूषणों के कारण रात में भी उसके घर में प्रकाश फैला रहता है। यह नायिका के असाधारण सौंदर्य का अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन है।
In simple words: सखी नायक से नायिका की बहुत सुंदरता बताती है। वह कहती है कि नायिका का शरीर इतना चमकता है कि उसके गहनों से रात में भी घर में रोशनी रहती है, जैसे वह खुद एक दीपक हो।

🎯 Exam Tip: 'दीपसिखा सी देह' और 'बड़ौ उज्यारौ गेह' जैसे बिम्बों का प्रयोग करें ताकि नायिका के असाधारण सौंदर्य का प्रभाव स्पष्ट हो।

 

RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 4 बिहारी व्याख्यात्मक प्रश्न

 

Question 1. कहत सबै बेंदी बढ़तु उदोतु । – प्रस्तुत दोहे का भाव लिखिए।
Answer: इस दोहे का भाव यह है कि सभी लोग कहते हैं कि किसी संख्या के आगे शून्य (बिंदी) लगाने से उसका मान दस गुना बढ़ जाता है। लेकिन कवि बिहारी कहते हैं कि जब वही बिंदी किसी सुंदरी के माथे पर लगाई जाती है, तो उसकी सुंदरता अनगिनत गुना बढ़ जाती है। यह कथन गणित के नियम और सौंदर्यशास्त्र के अंतर को दर्शाता है, जहाँ एक बिंदी सुंदरता को अतुलनीय बना देती है। कवि यहाँ नायिका के सौंदर्य का अद्भुत और चमत्कारी वर्णन करते हैं।
In simple words: कवि कहता है कि संख्या के आगे बिंदी लगाने से वह दस गुना हो जाती है। पर सुंदरी के माथे पर बिंदी लगाने से उसकी सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है, जिसकी गिनती नहीं की जा सकती।

🎯 Exam Tip: गणितीय नियम और सौंदर्यशास्त्र के नियम में अंतर को स्पष्ट करते हुए बिंदी के महत्व को समझाएं।

 

Question 2. कागद पर लिखत हिय की बात ॥ - दोहे की व्याख्या कीजिए।
Answer: इस दोहे में नायिका अपने प्रेम की भावनाएं नायक तक पहुंचाना चाहती है, लेकिन वह ऐसा कर नहीं पाती। वह कागज पर लिखने बैठती है तो उसे लज्जा आती है, और मुंह से कहने में भी संकोच होता है। नायिका अंत में यह सोचकर स्वयं को दिलासा देती है कि यदि नायक का प्रेम सच्चा है, तो वह उसके हृदय की बात बिना कहे ही समझ जाएगा। यह सच्चे प्रेम की गहराई को दर्शाता है जहाँ शब्दों की आवश्यकता नहीं होती।
In simple words: नायिका अपने दिल की बात नायक को लिख या कहकर नहीं बता पा रही क्योंकि उसे शर्म आ रही है। वह सोचती है कि अगर नायक सच्चा प्यार करता है, तो वह उसके मन की बात खुद ही समझ जाएगा।

🎯 Exam Tip: इस दोहे में नायिका की लज्जा और सच्चे प्रेम की निशानी के रूप में नायक द्वारा भावनाओं को समझने की उम्मीद को प्रमुखता से उजागर करें।

 

RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 4 बिहारी वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. "तो पर बारौं उरबसी ....... उरबसी समान।" दोहे में प्रयुक्त अलंकार हैं –
(क) रूपक और उपमा
(ख) यमक और उपमा
(ग) श्लेष और उपमा
(घ) पुनरुक्ति प्रकाश
Answer: (ग) श्लेष और उपमा
In simple words: इस कविता में 'उरबसी' शब्द का दो या दो से ज़्यादा मतलब निकलता है, इसलिए श्लेष अलंकार है। साथ ही, नायिका की तुलना उर्वशी अप्सरा से की गई है, जिससे उपमा अलंकार भी है।

🎯 Exam Tip: जब एक ही शब्द के कई अर्थ हों (श्लेष) और एक वस्तु की तुलना दूसरी से की जाए (उपमा), तो इन अलंकारों का प्रयोग होता है। उदाहरण में 'उरबसी' शब्द के विभिन्न अर्थों को पहचानें।

 

Question 3. स्याम शरीर पर पीताम्बर धारण किए कृष्ण लगते हैं –
(क) मानो नीलकमल के बीच पराग हो
(ख) मानो काले बादलों के बीच सूर्य हो
(ग) मानो नीले आकाश में इन्द्रधनुष हो
(घ) मानो नीलम की शिला पर प्रात:काल की धूप पड़ रही हो।
Answer: (घ) मानो नीलम की शिला पर प्रात:काल की धूप पड़ रही हो।
In simple words: श्रीकृष्ण का सांवला शरीर और उस पर पीला वस्त्र ऐसा लगता है जैसे किसी नीलम पत्थर पर सुबह की धूप चमक रही हो। यह एक सुंदर कल्पना है।

🎯 Exam Tip: उपमा अलंकार के ऐसे प्रश्नों में, कृष्ण के 'श्याम शरीर' और 'पीताम्बर' के रंगों को ध्यान में रखकर सही तुलना का चयन करें।

 

Question 4. गोपियों ने श्रीकृष्ण की वंशी छिपा ली है –
(क) वंशी के द्वेष के कारण
(ख) कृष्ण का ध्यान आकर्षित करने के लिए।
(ग) बातें करने के लालच में
(घ) कृष्ण को तंग करने के लिए।
Answer: (ख) कृष्ण का ध्यान आकर्षित करने के लिए।
In simple words: गोपियों ने कृष्ण की बाँसुरी इसलिए छिपाई थी ताकि कृष्ण उनसे बात करें और उनका ध्यान अपनी ओर खींच सकें। वे कृष्ण से बात करना चाहती थीं।

🎯 Exam Tip: गोपियों के कार्य के पीछे के वास्तविक उद्देश्य को समझें, जो प्रेम और ध्यान आकर्षित करने की इच्छा थी, न कि द्वेष या तंग करना।

 

Question 5. आगे बिंदी लगने पर अंक हो जाते हैं -
(क) दुगुना।
(ख) दस गुना
(ग) शून्य
(घ) पाँच गुना
Answer: (ख) दस गुना
In simple words: किसी भी अंक के आगे बिंदी या शून्य लगाने से उसकी कीमत दस गुना बढ़ जाती है, यह गणित का एक नियम है।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न संख्यात्मक मानों और उनके परिवर्तन के आधार पर है। ध्यान दें कि बिंदी (शून्य) का सामान्य गणितीय प्रभाव क्या होता है।

 

RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 4 बिहारी अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 2. कवि ने रघुपति राम पर क्या आरोप लगाया है?
Answer: कवि ने भगवान श्रीराम पर यह आरोप लगाया है कि वे झूठी प्रशंसा पाकर इठलाते फिरते हैं। कवि का मानना है कि श्रीराम को 'पतित-पावन' कहा जाता है, लेकिन वे अभी तक कवि जैसे दीन व्यक्ति का उद्धार नहीं कर पाए हैं। यह कवि का भगवान को एक प्रकार का उलाहना है, जिसमें वह अपनी सहायता के लिए भगवान को चुनौती देता है।
In simple words: कवि कहता है कि भगवान राम झूठी तारीफों से खुश होते हैं। वे गरीबों का उद्धार करने वाले कहे जाते हैं, पर अभी तक उन्होंने कवि की मदद नहीं की है।

🎯 Exam Tip: कवि के 'उलाहना' या 'आरोप' को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें, और उसके पीछे की भावना (भक्त की व्यथा) को समझाएं।

 

Question 3. “आपको भी संसार की हवा लग गई है।” कवि ने भगवान से ऐसा क्यों कहा है?
Answer: कवि ने भगवान से यह बात इसलिए कही क्योंकि वह बहुत समय से दीन-भाव से भगवान को पुकार रहा है, लेकिन भगवान उसकी सहायता के लिए नहीं आ रहे हैं। कवि को लगता है कि जैसे संसार के बड़े लोग कठोर हृदय के होते हैं और गरीबों की नहीं सुनते, वैसे ही भगवान को भी 'संसार की हवा' लग गई है। यह एक व्यंग्य है जो भगवान की उदासीनता को दर्शाता है और कवि की गहरी निराशा को प्रकट करता है।
In simple words: कवि ने भगवान से यह बात इसलिए कही क्योंकि भगवान उसकी पुकार नहीं सुन रहे थे। कवि को लगा कि भगवान भी अब दुनिया के अमीर लोगों जैसे हो गए हैं, जो गरीबों की नहीं सुनते।

🎯 Exam Tip: 'संसार की हवा लग गई' मुहावरे का अर्थ और कवि की निराशा को स्पष्ट करें। भगवान की तुलना संसार के बड़े लोगों से करना भी महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. भगवान के प्रेमी हृदय के कवि ने क्या विशेषता बताई है?
Answer: भगवान के प्रेमी हृदय के बारे में कवि ने बताया है कि यह हृदय जितना अधिक श्याम रंग यानी श्रीकृष्ण के प्रेम (भक्ति) में डूबता है, उतना ही वह अधिक उज्ज्वल और पवित्र होता जाता है। यह एक विरोधाभासी बात है क्योंकि सामान्यतः काले रंग में डूबने से कोई चीज़ काली होती है, पर यहाँ श्याम रंग में डूबने से हृदय पवित्र होता है। यह प्रेम की अद्भुत शक्ति को दर्शाता है।
In simple words: कवि ने बताया है कि जो दिल भगवान के प्रेम (श्याम रंग) में जितना ज्यादा डूबता है, वह उतना ही ज्यादा साफ और पवित्र हो जाता है।

🎯 Exam Tip: 'श्याम रंग' में डूबने से 'उज्ज्वल' होने का विरोधाभास स्पष्ट करें, क्योंकि यह कवि की भक्ति-भावना का मुख्य बिन्दु है।

 

Question 5. कवि ने 'आँवार' किसे कहा है?
Answer: कवि ने 'गँवार' उन लोगों को कहा है जो भगवान का भजन और स्मरण छोड़कर सांसारिक विषयों के भोग-विलास में लिप्त रहते हैं। कवि का मानना है कि सच्चा सुख और कल्याण ईश्वर की भक्ति में है, और जो इससे विमुख होकर माया-मोह में फंसते हैं, वे वास्तव में अज्ञानी या 'गँवार' हैं।
In simple words: कवि ने उन लोगों को 'गँवार' कहा है जो भगवान को भूलकर दुनिया के सुखों में ही डूबे रहते हैं।

🎯 Exam Tip: 'गँवार' शब्द के प्रयोग के पीछे कवि का नैतिक और आध्यात्मिक संदेश स्पष्ट करें, कि सांसारिक भोगों में लिप्त रहना अज्ञानता है।

 

Question 6. "अजों तयौन....... बसि मुकुतन के संग।।”
Answer: इस दोहे के माध्यम से कवि यह संदेश देना चाहते हैं कि महापुरुषों और ज्ञानी लोगों की संगति व्यक्ति को सहजता से मोक्ष का मार्ग दिखा सकती है। जिस प्रकार एक साधारण सी बेसर (नाक का आभूषण) मोतियों के साथ रहकर नाक जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर पहुँच जाती है, उसी प्रकार सत्संग से साधारण व्यक्ति भी अपने जीवन को सफल बना सकता है। यह बाहरी दिखावे की बजाय आंतरिक गुणों और अच्छे लोगों की संगति के महत्व को दर्शाता है।
In simple words: कवि का कहना है कि अच्छे लोगों की संगति से हमें आसानी से मोक्ष मिल सकता है। जैसे नाक का आभूषण मोतियों के साथ रहकर सुंदर लगता है, वैसे ही अच्छे लोगों के साथ रहकर हमारा जीवन भी बेहतर हो जाता है।

🎯 Exam Tip: 'तयौन' (कान का आभूषण) और 'मुकुतन' (मोती) के प्रतीकात्मक अर्थ को समझाएं, जो सत्संग के महत्व को उजागर करता है।

 

Question 7. यमुना के तट पर जाकर कवि को कैसा अनुभव होता है?
Answer: यमुना तट पर पहुँचकर कवि को बहुत सुखद अनुभव होता है। वहाँ वृक्षों और लताओं की घनी छाया, ठंडी और सुगंधित हवा व्यक्ति के तन और मन को शांत करती है। इस वातावरण में कवि को ऐसा लगता है मानो वह भगवान श्रीकृष्ण की निकटता महसूस कर रहा हो। उसका मन वैसे ही आनंदित हो उठता है जैसे गोपियों का मन कृष्ण की लीलाओं को देखकर प्रसन्न होता था। यह स्थान कृष्ण की उपस्थिति का अनुभव कराता है।
In simple words: यमुना तट पर कवि को बहुत अच्छा लगता है। वहाँ की ठंडी हवा और घनी छाया उसे ऐसा महसूस कराती है जैसे वह श्रीकृष्ण के पास ही हो।

🎯 Exam Tip: यमुना तट के प्राकृतिक सौंदर्य (कुंज, शीतल समीर) का वर्णन करें और उसे कृष्ण की उपस्थिति से जोड़ें, जिससे अनुभव की गहराई स्पष्ट हो।

 

Question 8. श्रीकृष्ण के श्याम-सलौने शरीर पर पीताम्बर देखकर कवि के मन में क्या कल्पना जागती है?
Answer: श्रीकृष्ण के सांवले और सुंदर शरीर पर पीले वस्त्र (पीताम्बर) को देखकर कवि के मन में अद्भुत कल्पना जागती है। कवि को ऐसा लगता है मानो कोई नीलमणि की विशाल शिला हो और उस पर सुबह की पीली धूप पड़ रही हो। यह उपमा कृष्ण के सौंदर्य को एक दिव्य और प्राकृतिक रूप प्रदान करती है, जहाँ उनका सांवला रंग नीलम और पीला वस्त्र धूप जैसा प्रतीत होता है।
In simple words: श्रीकृष्ण के सांवले शरीर पर पीला वस्त्र देखकर कवि को लगता है जैसे नीले रंग के किसी बड़े पत्थर पर सुबह की सुनहरी धूप पड़ रही हो।

🎯 Exam Tip: श्रीकृष्ण के 'श्याम-सलौने शरीर' और 'पीताम्बर' के लिए दी गई विशिष्ट उपमा 'नीलमणि शिला पर प्रात:काल की धूप' को विस्तार से समझाएं।

 

Question 10. सांसारिक सुखों के जाल में फंसने के बाद जीव के साथ क्या होता है?
Answer: सांसारिक सुखों के जाल में फंसने के बाद जीव जितना अधिक इनसे छूटने का प्रयास करता है, वह उतना ही अधिक इनमें उलझता चला जाता है। यह ठीक वैसे ही है जैसे कोई हिरण जाल में फंसकर जितना छटपटाता है, उतना ही वह और कसता जाता है। कवि यह संदेश देना चाहते हैं कि माया-मोह के बंधन बहुत गहरे होते हैं, और इनसे निकलने का प्रयास भी अक्सर व्यक्ति को और गहराई से फंसा देता है।
In simple words: जब कोई जीव दुनिया के सुखों के जाल में फंस जाता है, तो वह जितना बाहर निकलने की कोशिश करता है, उतना ही ज़्यादा उसमें उलझता जाता है।

🎯 Exam Tip: 'जाल में फंसने' और 'उलझने' की प्रक्रिया को स्पष्ट करें। 'हिरण' के उदाहरण का प्रयोग इस विचार को और अधिक समझाने में मदद करता है।

 

Question 11. कृष्ण से बात करने के लालच में गोपियों ने क्या किया?
Answer: कृष्ण से अधिक देर तक बातें करने के लालच में गोपियों ने उनकी प्रिय बाँसुरी को छिपा दिया। वे जानती थीं कि बाँसुरी के खो जाने पर कृष्ण उनसे बात करेंगे और उसे ढूँढने में समय बिताएंगे, जिससे उन्हें कृष्ण के साथ और अधिक समय बिताने का अवसर मिलेगा। यह उनकी प्रेमपूर्ण युक्ति थी।
In simple words: गोपियों ने कृष्ण से ज़्यादा बात करने के लिए उनकी बाँसुरी छिपा दी थी।

🎯 Exam Tip: गोपियों के कार्य (बाँसुरी छिपाना) और उसके पीछे के उद्देश्य (बातें करने का लालच) को सीधे और स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 12. वन के मोरों को बिना वर्षा ऋतु के ही नाचते देख गोपी ने क्या अनुमान किया?
Answer: वन में मोरों को बिना वर्षा ऋतु के ही नाचते देखकर एक गोपी ने यह अनुमान लगाया कि संभवतः श्रीकृष्ण वहाँ आए हुए हैं। मोर अक्सर काले बादलों को देखकर नाचते हैं, और श्रीकृष्ण के सांवले शरीर को देखकर मोरों ने उन्हें बादल समझ लिया होगा, इसीलिए वे खुशी से नाचने लगे। यह गोपी की कृष्ण के प्रति गहरी आसक्ति और उनके सौंदर्य की कल्पनाशीलता को दर्शाता है।
In simple words: जंगल में बिना बारिश के मोरों को नाचते देख गोपी ने सोचा कि श्रीकृष्ण वहीं पास में आ गए हैं। मोरों ने उनके सांवले शरीर को बादल समझ लिया होगा।

🎯 Exam Tip: मोर के नाचने और श्रीकृष्ण के श्याम-शरीर को बादल समझने के बीच के संबंध को स्पष्ट करें। यह कवि की कल्पनाशीलता का उदाहरण है।

 

Question 13. संसार के चतुर चित्रकार मूर्ख क्यों सिद्ध हुए?
Answer: संसार के चतुर चित्रकार इसलिए मूर्ख सिद्ध हुए क्योंकि वे परम सुंदरी नायिका की छवि को चित्र में नहीं उतार पाए। नायिका का सौंदर्य इतना गतिशील और पल-पल बदलने वाला था कि जब तक चित्रकार उसका एक रूप बनाता, तब तक उसकी छवि बदल जाती थी। इस कारण वे नायिका के अनुपम सौंदर्य को कागज पर अंकित करने में असफल रहे और उनका सारा कौशल व्यर्थ हो गया।
In simple words: नायिका की सुंदरता हर पल बदलती रहती थी। इसलिए कोई भी कलाकार उसकी सही तस्वीर नहीं बना पाया और सब हार मान गए।

🎯 Exam Tip: नायिका के सौंदर्य की 'गतिशीलता' और चित्रकारों की 'स्थिरता' के बीच के विरोधाभास पर जोर दें, जो उनकी असफलता का कारण बना।

 

Question 14. झीने वस्त्रों में नायिका कैसी लग रही है?
Answer: झीने और पारदर्शी वस्त्रों में नायिका इतनी सुंदर लग रही थी मानो वह समुद्र के जल में झिलमिलाती हुई कल्पवृक्ष की पत्तियों से लदी हुई डाली हो। कल्पवृक्ष अपनी सुंदरता और इच्छाओं को पूरा करने के लिए जाना जाता है, और नायिका भी उतनी ही मनमोहक और आकर्षित करने वाली लग रही थी। यह नायिका के सौंदर्य का अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन है।
In simple words: नायिका पतले कपड़ों में ऐसी दिख रही थी जैसे समुद्र के पानी में कल्पवृक्ष की पत्तों वाली टहनी चमक रही हो। वह बहुत ही सुंदर और मनमोहक लग रही थी।

🎯 Exam Tip: 'झीने वस्त्र' और 'कल्पवृक्ष की डाली' के बीच की उपमा को समझाएं, यह नायिका के सौंदर्य की अलौकिकता को दर्शाता है।

 

Question 15. नायिका और नायक नेत्रों ही नेत्रों में बातें क्यों कर रहे हैं?
Answer: नायिका और नायक नेत्रों ही नेत्रों में इसलिए बातें कर रहे हैं ताकि उनके प्रेम प्रसंग का किसी और को पता न चल पाए। वे एक ऐसे भरे हुए भवन में हैं जहाँ अन्य लोग भी मौजूद हैं, इसलिए वे अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करने की बजाय आँखों के इशारों से ही एक-दूसरे तक पहुंचा रहे हैं। यह उनके प्रेम की गोपनीयता और गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।
In simple words: नायिका और नायक अपनी आँखों के इशारों से बात कर रहे हैं ताकि उनके प्यार के बारे में किसी को पता न चले। वे लोगों के बीच चुपचाप अपनी भावनाएं बांट रहे थे।

🎯 Exam Tip: 'नेत्रों ही नेत्रों में बातें' करने के पीछे के दो मुख्य कारण – गोपनीयता और प्रेम की गहराई – को स्पष्ट करें।

 

Question 17. स्त्री के मस्तक पर बिंदी लगाने पर क्या होता है?
Answer: जब कोई स्त्री अपने मस्तक पर बिंदी लगाती है, तो उसकी सुंदरता अनगिनत गुना बढ़ जाती है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना असंभव हो जाता है। कवि का यह कथन दर्शाता है कि बिंदी मात्र एक सजावट नहीं, बल्कि स्त्री के चेहरे की शोभा को कई गुना बढ़ा देती है, उसे और अधिक आकर्षक और मनमोहक बना देती है।
In simple words: स्त्री के माथे पर बिंदी लगाने से उसकी सुंदरता बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है, इतनी कि उसे बताया नहीं जा सकता।

🎯 Exam Tip: बिंदी लगाने से सुंदरता के 'अवर्णनीय' होने पर जोर दें, जो उसके प्रतीकात्मक और सौंदर्यपरक महत्व को बताता है।

 

Question 18. नायिका के शरीर पर सोने के गहने दिखाई क्यों नहीं पड़ते?
Answer: नायिका के शरीर का रंग इतना अधिक गोरा और सोने जैसा चमकीला है कि उसके शरीर पर पहने गए सोने के आभूषण दिखाई नहीं पड़ते। सोने के गहने उसके शरीर के रंग में ऐसे घुल-मिल जाते हैं, जैसे वे शरीर का ही हिस्सा हों। उनकी पहचान केवल तभी हो पाती है जब उन्हें हाथ से छूकर उनकी कठोरता को महसूस किया जाए। यह नायिका के असाधारण शारीरिक सौंदर्य का वर्णन है।
In simple words: नायिका का शरीर सोने जैसा चमकीला और गोरा है। इसलिए उसके सोने के गहने शरीर में मिल जाते हैं और दिखाई नहीं देते, उन्हें छूकर ही पहचाना जा सकता है।

🎯 Exam Tip: नायिका के शरीर के रंग की तुलना सोने से करें और बताएं कि यह समानता गहनों के अदृश्य होने का कारण है।

 

Question 19. कवि ने नायिका की देह को किसके समान बताया है?
Answer: कवि ने नायिका की देह को दीपक की लौ (दीपशिखा) के समान बताया है। इसका अर्थ है कि नायिका का शरीर इतना उज्ज्वल और कांतिमय है, जैसे एक जलता हुआ दीपक प्रकाश फैलाता है। यह उपमा नायिका के सौंदर्य, चमक और दीप्ति को दर्शाती है, जो उसके आसपास के वातावरण को भी आलोकित करती प्रतीत होती है।
In simple words: कवि ने नायिका के शरीर को दीपक की लौ जैसा चमकदार बताया है।

🎯 Exam Tip: 'दीपशिखा' की उपमा का प्रयोग करते हुए नायिका के शरीर की चमक और प्रकाशमानता को स्पष्ट करें।

 

Question 20. आपकी पाठ्य-पुस्तक में संकलित कवि बिहारीलाल के दोहे किन-किन विषयों पर हैं? लिखिए।
Answer: कवि बिहारीलाल के पाठ्य-पुस्तक में संकलित दोहे मुख्य रूप से भक्ति, नीति और श्रृंगार जैसे तीन विषयों पर आधारित हैं। इन दोहों में कवि ने भगवान के प्रति अपनी भक्ति, जीवन के नैतिक मूल्यों और प्रेम तथा सौंदर्य के विभिन्न पहलुओं का सुंदर चित्रण किया है। यह बिहारी की काव्य-प्रतिभा की विविधता को दर्शाता है।
In simple words: बिहारीलाल के दोहे तीन मुख्य विषयों पर लिखे गए हैं - भगवान की भक्ति, जीवन के नियम (नीति) और प्रेम-सौंदर्य (श्रृंगार)।

🎯 Exam Tip: बिहारी के काव्य के तीन प्रमुख विषयों – भक्ति, नीति, और श्रृंगार – को स्पष्ट रूप से लिखें और हो सके तो प्रत्येक का एक छोटा उदाहरण भी दें।

 

Question 21. बिहारी की कविता की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
Answer: कवि बिहारी की कविता की दो प्रमुख विशेषताएँ हैं:
1. गागर में सागर भरना: इसका अर्थ है कि बिहारी ने अपने छोटे-से दोहों में गहरे और विस्तृत अर्थ को समाहित किया है। वे कम शब्दों में बहुत बड़ी बात कह देते हैं।
2. आलंकारिक कथन-शैली का प्रयोग: उनकी कविताओं में अलंकारों का बहुत सुंदर और प्रभावशाली प्रयोग मिलता है, जिससे काव्य की शोभा बढ़ जाती है और भाव अधिक स्पष्ट हो जाते हैं।
In simple words: बिहारी की कविता की दो बड़ी खासियतें हैं। पहली, वे कम शब्दों में बहुत बड़ी बात कह देते हैं, जिसे 'गागर में सागर भरना' कहते हैं। दूसरी, वे अपनी बातों को सजाने के लिए बहुत सारे अलंकारों का इस्तेमाल करते हैं।

🎯 Exam Tip: 'गागर में सागर भरना' मुहावरे का अर्थ समझाएं और बताएं कि बिहारी ने इसका उपयोग कैसे किया। अलंकारों के प्रयोग पर भी प्रकाश डालें।

 

RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 4 बिहारी लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. "तो पर बारौं ...... उरबसी समान॥” दोहे की काव्यपरक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: इस दोहे में कवि ने राधा की अनुपम सुंदरता का वर्णन किया है, जो मनमोहन श्रीकृष्ण को भी मोहित कर लेती है। कवि कहता है कि वह राधा की एक झलक पर अप्सरा उर्वशी को भी न्यौछावर कर सकता है, क्योंकि राधा को देखते ही कृष्ण का मन प्रसन्न हो जाता है। इस दोहे में कवि ने अपनी अलंकारप्रियता का भी प्रमाण दिया है, जहाँ 'उरबसी' शब्द का प्रयोग यमक अलंकार के साथ किया गया है, जिसके दो भिन्न अर्थ हैं। यह दोहा राधा के सौंदर्य के बखान पर केंद्रित है, भले ही इसमें भक्ति का भाव नाममात्र को ही हो।
In simple words: यह दोहा राधा की सुंदरता बताता है, जो कृष्ण को भी मोह लेती है। कवि कहता है कि राधा इतनी सुंदर हैं कि उनके सामने उर्वशी अप्सरा भी कुछ नहीं है। इसमें यमक अलंकार का सुंदर प्रयोग किया गया है।

🎯 Exam Tip: राधा के सौंदर्य का वर्णन करते हुए 'उरबसी' शब्द के विभिन्न अर्थों और यमक अलंकार के प्रयोग को स्पष्ट करें।

 

Question 3. 'तूठे-तूठे फिरत हो' कवि ने यह व्यंग्य किस पर किया है और क्यों? संकलित दोहे के आधार पर लिखिए।
Answer: कवि ने यह व्यंग्य भगवान श्रीराम पर किया है। कवि कहता है कि श्रीराम 'दीनबन्धु' और 'पतितों का उद्धारक' कहे जाते हैं, लेकिन वे अभी तक कवि जैसे दीन व्यक्ति का उद्धार नहीं कर पाए हैं। कवि का मानना है कि श्रीराम ऐसी झूठी प्रशंसा पाकर ही संतुष्ट घूम रहे हैं। कवि अपनी सहायता के लिए भगवान को चुनौती देता है कि यदि वे वास्तव में पतित-पावन हैं, तो उसका भी उद्धार करके दिखाएं। यह एक भक्त का भगवान से करुण उलाहना है।
In simple words: कवि ने भगवान श्रीराम पर व्यंग्य किया है। वह कहता है कि राम झूठी तारीफें सुनकर खुश घूम रहे हैं, जबकि उन्होंने कवि जैसे दुखी इंसान की मदद नहीं की है।

🎯 Exam Tip: 'तूठे-तूठे फिरत हो' कथन में छिपे व्यंग्य और भगवान श्रीराम के 'पतित-पावन' होने की अवधारणा को स्पष्ट करें।

 

Question 4. आज के सांसारिक गुरु और नायकों का स्वभाव कवि के अनुसार कवि ने अपने इष्टदेव पर क्या व्यंग्य किया है? लिखिए।
Answer: कवि ने अपने इष्टदेव पर व्यंग्य किया है कि उन्हें भी 'संसार की हवा' लग गई है, यानी वे भी आज के सांसारिक गुरुओं और नायकों की तरह हो गए हैं। कवि बहुत समय से भगवान को दीन-भाव से पुकार रहा है, लेकिन भगवान उसकी पुकार को अनसुना करते आ रहे हैं और उसकी सहायता नहीं कर रहे हैं। कवि व्यंग्यात्मक लहजे में कहता है कि जैसे आज के गुरु और नायक दुखियों और असहायों की पुकार नहीं सुनते, वैसे ही भगवान भी उदासीन हो गए हैं। यह भगवान की उपेक्षा के प्रति भक्त की वेदना है।
In simple words: कवि ने भगवान पर व्यंग्य करते हुए कहा कि उन्हें भी दुनिया के बड़े लोगों जैसी आदत पड़ गई है। जैसे आज के गुरु और नायक गरीबों की नहीं सुनते, वैसे ही भगवान भी कवि की पुकार को अनदेखा कर रहे हैं।

🎯 Exam Tip: कवि के व्यंग्य को स्पष्ट करें और बताएं कि वह भगवान की तुलना सांसारिक गुरुओं और नायकों से क्यों कर रहा है। 'संसार की हवा लग जाना' मुहावरा महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. 'अनुरागी चित्त' की कवि ने क्या विशेषता बताई है? इसका आशय क्या है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: कवि ने 'अनुरागी चित्त' (प्रेम में डूबे हृदय) की अद्भुत विशेषता बताई है कि यह जितना-जितना श्याम (काला) रंग यानी श्रीकृष्ण की भक्ति या प्रेम में डूबता है, उतना ही अधिक उज्ज्वल और पवित्र होता जाता है। यह कथन विरोधाभासी है क्योंकि आमतौर पर काले रंग में डूबने से कोई चीज़ काली होती है। इसका आशय यह है कि व्यक्ति जितना अधिक भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम या भक्ति में लीन होता है, उसका हृदय उतना ही निर्मल और पाप-रहित होता जाता है। यह भक्ति की अनूठी शक्ति को दर्शाता है।
In simple words: कवि कहता है कि प्रेम में डूबा दिल जितना ज़्यादा कृष्ण (श्याम रंग) के प्रेम में जाता है, उतना ही साफ और पवित्र होता जाता है। इसका मतलब है कि कृष्ण-भक्ति से दिल शुद्ध हो जाता है।

🎯 Exam Tip: 'श्याम रंग' में डूबने से 'उज्ज्वल' होने के विरोधाभास को स्पष्ट करें और इसका आध्यात्मिक अर्थ (हृदय की पवित्रता) समझाएं।

 

Question 6. "भजन कयौ ...... भज्यौ गॅवार।” इस दोहे द्वारा कवि बिहारी के काव्य की कौन-सी विशेषता सामने आती है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस दोहे द्वारा कवि बिहारी के काव्य की अलंकारप्रियता और उक्ति चमत्कार की विशेषता सामने आती है। बिहारीलाल रीतिकाल के प्रमुख कवि हैं, और उनकी कविता इस शैली का पूरा प्रतिनिधित्व करती है। इस दोहे में 'भजन' और 'भज्यौ' शब्दों का चमत्कारपूर्ण प्रयोग किया गया है, जहाँ 'भजन' का अर्थ 'स्मरण करना' और 'दूर भागना' दोनों हैं। कवि कहते हैं कि जिस मूर्ख ने ईश्वर का भजन करने को कहा, उससे वह दूर भागा, और जिससे दूर रहने को कहा, उसी में लीन हो गया। यह शब्दों के माध्यम से गहरा संदेश देने की बिहारी की कला को दर्शाता है।
In simple words: इस दोहे से बिहारी के काव्य की दो खास बातें दिखती हैं - शब्दों का कमाल (अलंकार) और बात कहने का अनोखा तरीका। 'भजन' और 'भज्यौ' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके कवि ने एक ही बात से कई मतलब निकाले हैं।

🎯 Exam Tip: 'भजन' और 'भज्यौ' शब्दों के श्लेष अर्थों को समझाएं। यह बिहारी के काव्य में शब्दों के चमत्कारी प्रयोग का एक बेहतरीन उदाहरण है।

 

Question 8. कवि बिहारी ने यमुना तट की क्या विशेषताएँ बताई हैं? सम्बन्धित दोहे के आधार पर बताइए।
Answer: कवि बिहारी ने यमुना तट की कई विशेषताएँ बताई हैं। वे कहते हैं कि यमुना का तट भगवान श्रीकृष्ण की अनेक लीलाओं का साक्षी रहा है। इस तट पर घने वृक्षों और लताओं की सुखद छाया रहती है, और यहाँ बहने वाली ठंडी, सुगंधित हवा शरीर तथा मन को आनंदित करती है। इस वातावरण में व्यक्ति को ऐसा लगता है मानो वह श्रीकृष्ण की निकटता का अनुभव कर रहा हो। उसका मन वैसे ही प्रसन्न हो जाता है, जैसे गोपियों का मन कृष्ण की लीलाओं को देखकर हुआ करता था। यमुना तट आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम स्थल है।
In simple words: कवि ने यमुना तट को श्रीकृष्ण की लीलाओं का गवाह बताया है। वहाँ घनी छाया और ठंडी-सुगंधित हवा मन को बहुत सुख देती है, ऐसा लगता है जैसे श्रीकृष्ण पास ही हों।

🎯 Exam Tip: यमुना तट के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ उसके आध्यात्मिक महत्व को भी उजागर करें, जो श्रीकृष्ण से जुड़ा है।

 

Question 9. "सोहत ओढ़ पीत पट......" दोहे में कवि ने किस अलंकार का प्रयोग किया है? अलंकार के लक्षण बताते हुए स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस दोहे में कवि ने उत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग किया है। उत्प्रेक्षा अलंकार वहाँ होता है जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना प्रकट की जाती है, यानी एक वस्तु में दूसरी वस्तु होने की कल्पना की जाती है। इस दोहे में श्रीकृष्ण के सांवले शरीर पर पीले वस्त्र (पीताम्बर) की शोभा उपमेय है, जिसमें कवि ने 'नीलमणि शैल पर प्रात:काल की धूप' (उपमान) होने की संभावना व्यक्त की है। कवि कहता है कि कृष्ण ऐसे लगते हैं मानो नीलम की शिला पर सुबह की धूप पड़ रही हो।
In simple words: इस दोहे में उत्प्रेक्षा अलंकार का इस्तेमाल हुआ है। इसमें कवि ने श्रीकृष्ण के सांवले शरीर पर पीले वस्त्र को देखकर ऐसी कल्पना की है जैसे नीलम के पहाड़ पर सुबह की धूप पड़ रही हो।

🎯 Exam Tip: उत्प्रेक्षा अलंकार की परिभाषा दें और बताएं कि 'मनौ' (मानो) जैसे शब्द अक्सर इसकी पहचान होते हैं। उदाहरण में उपमेय और उपमान को स्पष्ट करें।

 

Question 10. "इन्हीं आस अटक्यौ...... वै फूल।” इस दोहे से आपको क्या सन्देश प्राप्त होता है? लिखिए।
Answer: इस दोहे से हमें कठिन परिस्थितियों में भी निराश न होने और सकारात्मक सोच बनाए रखने का संदेश मिलता है। कवि कहता है कि गुलाब का पौधा फूलों और पत्तों से रहित होकर केवल सूखी डालियों वाला हो गया है, पर भौंरा अभी भी उसकी जड़ में इस आशा से अटका है कि बसंत ऋतु आने पर इन डालियों पर फिर से सुंदर और सुगंधित फूल खिलेंगे। यह हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाई आए, हमें भविष्य के प्रति आशावादी रहना चाहिए।
In simple words: यह दोहा सिखाता है कि मुश्किल समय में भी हमें उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। जैसे भौंरा सूखी गुलाब की डालियों पर फिर से फूल खिलने की उम्मीद में अटका रहता है।

🎯 Exam Tip: दोहे के माध्यम से 'आशावाद' और 'सकारात्मकता' के संदेश को स्पष्ट करें। गुलाब के उदाहरण को इसके समर्थन में उपयोग करें।

 

Question 11. "को छूट्यौ.... उरझत जात ॥” इस दोहे में कवि ने 'जाल' और 'कुरंग' शब्दों को किनका प्रतीक बनाया है? दोहे की शैलीगत विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Answer: इस दोहे में कवि ने 'जाल' शब्द को सांसारिक माया-मोह और लोभ-मोह का प्रतीक बनाया है, जबकि 'कुरंग' (हिरण) शब्द को मनुष्य का प्रतीक बनाया है, जो इन बंधनों में फंस जाता है। कवि यह संदेश देना चाहता है कि मनुष्य एक बार इन सांसारिक बंधनों में फंस जाने पर जितना उनसे छूटने का प्रयास करता है, उतना ही अधिक उनमें उलझता चला जाता है। यह दोहा बिहारी की अन्योक्ति शैली का सुंदर उदाहरण है, जिसमें अप्रत्यक्ष रूप से गहरा जीवन-दर्शन व्यक्त किया गया है।
In simple words: 'जाल' का मतलब दुनिया के मोह-माया के बंधन हैं और 'कुरंग' का मतलब इंसान है। कवि कहता है कि इंसान मोह-माया में फंसकर जितना बाहर निकलने की कोशिश करता है, उतना ही और फंसता जाता है।

🎯 Exam Tip: 'जाल' और 'कुरंग' के प्रतीकात्मक अर्थ को स्पष्ट करें और बताएं कि यह दोहा अन्योक्ति अलंकार का एक उत्कृष्ट उदाहरण कैसे है।

 

Question 12. "बतरस लालच नटि जाइ ॥” इस दोहे में आप रस-योजना की दृष्टि से क्या विशेषता देखते हैं? स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस दोहे में कवि ने संयोग श्रृंगार रस की सर्वांगपूर्ण योजना की है। गोपियाँ कृष्ण से बातें करने के लालच में उनकी वंशी छिपा लेती हैं। जब कृष्ण वंशी के बारे में पूछते हैं तो गोपियाँ सौगंध खाकर मना कर देती हैं, लेकिन उनकी भौंहों में झलकती हँसी उनके झूठ को उजागर कर देती है। कृष्ण जब वंशी वापस मांगते हैं तो वे साफ मना कर देती हैं। कवि ने इस प्यार भरी छेड़छाड़ का सजीव शब्द-चित्र अंकित किया है, जिसमें प्रेम, उत्साह और चंचलता जैसे भाव, अनुभाव और संचारी भाव पूरी तरह से उपस्थित हैं। यह श्रृंगार रस का एक सुंदर उदाहरण है।
In simple words: यह दोहा प्रेम के श्रृंगार रस का पूरा वर्णन करता है। इसमें गोपियाँ कृष्ण से बात करने के लिए उनकी बाँसुरी छिपाती हैं, फिर झूठी कसम खाकर हंसती हैं और देने से मना करती हैं। यह सब प्रेम भरी छेड़छाड़ को दिखाता है।

🎯 Exam Tip: 'संयोग श्रृंगार रस' की परिभाषा दें और दोहे के उदाहरणों (गोपियों की शरारत, कृष्ण की प्रतिक्रिया) से इसके विभिन्न अंगों (भाव, अनुभाव, संचारी भाव) को स्पष्ट करें।

 

Question 13. "नाचि अचानक नंद किसोर ॥” दोहे के कथन के कलात्मक और भावात्मक पक्ष को स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस दोहे का कलात्मक और भावात्मक पक्ष दोनों ही बहुत सुंदर हैं। देखने में यह एक साधारण सी बात लगती है कि मोरों ने अचानक नाचना शुरू कर दिया, जिससे गोपी अनुमान लगाती है कि श्रीकृष्ण आ गए हैं। पर इसकी गहराई में कृष्ण के प्रति गोपी का गहरा प्रेमभाव छिपा है, जिससे वह कृष्ण के सांवले रूप को बादल समझकर मोर नाचने लगते हैं। कला की दृष्टि से इसमें अनुप्रास, भ्रम और उत्प्रेक्षा जैसे अलंकारों का सुंदर प्रयोग किया गया है, जो कथन को चमत्कारी और प्रभावशाली बनाते हैं। 'नंदित' और 'नंद किशोर' जैसे शब्दों का प्रयोग सार्थक है।
In simple words: इस दोहे में कला और भावनाओं का सुंदर मेल है। मोर बिना बारिश के नाचने लगते हैं, जिससे गोपी सोचती है कि कृष्ण आ गए हैं। यह गोपी के प्रेम और कृष्ण के सांवले रूप की सुंदरता को दिखाता है, जिसमें सुंदर अलंकारों का प्रयोग हुआ है।

🎯 Exam Tip: दोहे के कलात्मक पक्ष (अलंकार) और भावात्मक पक्ष (गोपी का प्रेम) दोनों को अलग-अलग समझाएं। 'मोरों का नाचना' और 'कृष्ण का आगमन' के बीच के संबंध पर ध्यान दें।

 

Question 14. नायिका की छवि को चित्र में न उतार पाने में गरबीले और अभिमानी चित्रकार क्यों असफल हो गए? इसका क्या कारण हो सकता है? अपना मत लिखिए।
Answer: मेरे मत के अनुसार, गरबीले और अभिमानी चित्रकार नायिका की छवि को इसलिए चित्र में नहीं उतार पाए क्योंकि नायिका का सौंदर्य हर पल बदलता रहता था। भारतीय सौंदर्यशास्त्र में यह मान्यता है कि जो वस्तु क्षण-क्षण में नयापन धारण करे, वही वास्तविक सुंदर है। नायिका की परम सुंदरता इतनी गतिशील थी कि उसकी छवि हर पल बदल जाती थी। इस कारण बड़े-बड़े कुशल चित्रकार भी उसकी एक स्थिर छवि को अंकित नहीं कर पाए और असफल होकर मूर्ख सिद्ध हो गए। यह नायिका के अनुपम और अलौकिक सौंदर्य का वर्णन है।
In simple words: मेरे अनुसार, चित्रकार नायिका की तस्वीर इसलिए नहीं बना पाए क्योंकि वह इतनी सुंदर थी कि उसकी छवि हर पल बदलती रहती थी। जब तक वे उसका एक रूप बनाते, तब तक वह बदल जाता था, इसलिए वे हार मान गए।

🎯 Exam Tip: 'क्षणिक नवीनता' को सौंदर्य की कसौटी के रूप में प्रस्तुत करें और बताएं कि नायिका का यह गुण ही चित्रकारों की असफलता का कारण बना।

 

Question 15. "नैननु ही सौं बात" का आशय क्या है? दोहे के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Answer: "नैननु ही सौं बात" का आशय है कि नायक और नायिका आँखों के इशारों से ही एक-दूसरे से बातें कर रहे हैं। कवि ने दो प्रेमियों की चेष्टाओं का वर्णन किया है जो एक ऐसे घर में मौजूद हैं जहाँ अन्य कई लोग भी उपस्थित हैं। अपने प्रेम संबंध को गुप्त रखने या संकोच के कारण वे शब्दों का प्रयोग नहीं करते, बल्कि अपनी मनोभावनाओं को आँखों के संकेतों से ही व्यक्त करते हैं। यह उनके गहरे प्रेम और एक-दूसरे को समझने की क्षमता को दर्शाता है।
In simple words: इसका मतलब है कि नायक और नायिका आँखों से ही एक-दूसरे से बातें कर रहे हैं। वे भीड़ में चुपचाप अपने प्यार की भावनाएं एक-दूसरे को बता रहे थे।

🎯 Exam Tip: 'नैननु ही सौं बात' के पीछे के कारणों (गोपनीयता, संकोच) और इसके माध्यम से व्यक्त होने वाले गहरे प्रेम को समझाएं।

 

Question 17. एक संख्या के आगे बिंदी (शून्य) लगाने और एक स्त्री के मस्तक पर बिंदी लगाने पर क्या अन्तर दिखाई देता है? दोहे के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Answer: कवि के अनुसार, एक संख्या के आगे बिंदी (शून्य) लगाने पर उसका मान दस गुना बढ़ जाता है। यह गणित का एक सामान्य नियम है। परंतु, जब वही बिंदी किसी रमणी के माथे पर लगाई जाती है, तो उसकी सुंदरता अनगिनत गुना बढ़ जाती है, जिसे किसी संख्या में व्यक्त नहीं किया जा सकता। कवि का यह कथन पाठकों को आश्चर्यचकित करता है और यह भी दिखाता है कि कवि को नारी सौंदर्य की गहरी समझ है, जहाँ एक छोटी सी बिंदी सौंदर्य को अतुलनीय बना देती है।
In simple words: संख्या के आगे बिंदी लगाने से उसका मान दस गुना बढ़ जाता है। लेकिन स्त्री के माथे पर बिंदी लगाने से उसकी सुंदरता अनगिनत गुना बढ़ जाती है, जिसकी कोई सीमा नहीं होती।

🎯 Exam Tip: गणितीय और सौंदर्यपरक प्रभावों के अंतर को स्पष्ट करें। बिंदी के दोनों संदर्भों में 'मूल्य वृद्धि' के तुलनात्मक विश्लेषण पर ध्यान दें।

 

Question 18. “डीठिन परत समान दुति, कनक, कनक-से गात।” इस पंक्ति द्वारा कवि ने नायिका की सुन्दरता के विषय में क्या विशेषता दिखाई है? दोहे के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस पंक्ति द्वारा कवि ने नायिका की अनुपम सुंदरता की विशेषता दिखाई है। कवि कहता है कि नायिका के स्वर्ण जैसे गौर वर्ण शरीर पर पहने गए सोने के आभूषण, उसके शरीर के रंग में ऐसे मिल जाते हैं कि वे दिखाई ही नहीं देते। उनकी चमक शरीर की चमक के समान है। उनकी पहचान केवल हाथ से छूने पर ही होती है, जब उनकी कठोरता महसूस की जाती है। यह नायिका के शरीर के रंग की अत्यधिक पवित्रता और दीप्ति को दर्शाता है, जो सोने से भी बढ़कर है।
In simple words: इस पंक्ति से नायिका की बहुत गोरी और चमकीली त्वचा का पता चलता है। उसका शरीर इतना सोने जैसा है कि सोने के गहने भी उसमें मिलकर दिखाई नहीं देते, उन्हें छूकर ही पहचानना पड़ता है।

🎯 Exam Tip: नायिका के शरीर की 'कनक' (सोने) जैसी चमक और गहनों के अदृश्य होने के संबंध को स्पष्ट करें, जो उसके सौंदर्य की अतिशयोक्तिपूर्ण व्याख्या है।

 

Question 19. "दिया बढ़ाएँ हैं, बड़ौ उज्यारौ गेह॥” कवि ने इस कथन को क्या आप वास्तविक मान सकते हैं? कवि का आशय क्या है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस कथन को वास्तविक नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन है। कवि का आशय नायिका के सौंदर्य की अत्यधिक प्रशंसा करना है। कवि कहता है कि नायिका का शरीर इतना उज्ज्वल और कांतिमय है कि दीपक बुझा देने पर भी उसके घर में प्रकाश फैला रहता है। भले ही कोई कितना भी गोरा या सुंदर हो, वह दीपक की तरह प्रकाश उत्पन्न नहीं कर सकता। यह कथन रीतिकाल की सौंदर्य-वर्णन शैली का एक सुंदर उदाहरण है, जहाँ सुंदरता को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है।
In simple words: नहीं, यह बात सच नहीं हो सकती। कवि का मतलब है कि नायिका इतनी सुंदर है कि उसके शरीर से ही रोशनी निकलती है, जैसे दीपक बुझा देने पर भी घर में उजाला रहे। यह उसकी सुंदरता को बढ़ा-चढ़ाकर बताने का एक तरीका है।

🎯 Exam Tip: कथन की 'अतिशयोक्ति' प्रकृति को स्पष्ट करें और बताएं कि इसका उद्देश्य नायिका के सौंदर्य को अलौकिक रूप से महिमामंडित करना है।

 

Question 20. पाठ्य-पुस्तक में संकलित दोहों के आधार पर बिहारी की कविता की दो प्रमुख विशेषताओं का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
Answer: पाठ्य-पुस्तक में संकलित दोहों के आधार पर कवि बिहारीलाल की कविता की दो प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. गागर में सागर भरना: बिहारी अपनी छोटी-सी दो पंक्तियों के दोहों में गहन अर्थ, विस्तृत अनुभव और कल्पना की गहराई को समाहित कर देते हैं। उनके कम शब्द भी बहुत बड़ी बात कह जाते हैं।
2. अलंकारप्रियता और उक्ति चमत्कार: बिहारी अलंकारों के प्रयोग में अत्यंत निपुण थे। वे अपने दोहों में श्लेष, यमक, उत्प्रेक्षा आदि अलंकारों का चमत्कारपूर्ण ढंग से प्रयोग करते हैं, जिससे उनकी कविता अधिक आकर्षक और प्रभावशाली बन जाती है।
In simple words: बिहारी की कविताओं की दो खासियतें हैं। पहली, वे छोटे से दोहे में बहुत गहरी बात कह देते हैं, जैसे 'गागर में सागर भरना'। दूसरी, वे अपनी कविताओं में बहुत सारे अलंकारों का सुंदर प्रयोग करते हैं।

🎯 Exam Tip: 'गागर में सागर भरना' और 'अलंकारप्रियता' को प्रमुख विशेषताओं के रूप में समझाएं। बिहारी के काव्य में शब्दों के चयनात्मक और प्रभावशाली प्रयोग पर जोर दें।

 

RBSE Class 12 Hindi सृजन Chapter 4 बिहारी दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. पाठ्य पुस्तक में संकलित दोहों के आधार पर कवि बिहारीलाल की भक्ति-भावना का परिचय दीजिए।
Answer: कवि बिहारीलाल की भक्ति-भावना का परिचय उनके पांच भक्तिपरक दोहों से मिलता है। इन दोहों में उन्होंने राधा और श्रीकृष्ण की स्तुति की है। पहले दो दोहों में कवि राधा नागरी से अपने सांसारिक कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं और उनके अनुपम सौंदर्य का वर्णन करते हैं, जो श्रीकृष्ण के मन में निवास करती हैं। इन दोहों में भक्ति से ज़्यादा कवि की अलंकारप्रियता और उक्ति-वैचित्र्य की कुशलता दिखाई देती है, जैसे श्लेष और यमक अलंकारों का प्रयोग। तीसरे दोहे में कवि भगवान राम को चुनौती देते हैं कि वे जैसे पापी का उद्धार करके दिखाएं। चौथे दोहे में वे श्रीकृष्ण पर 'संसार की हवा' लगने का आरोप लगाते हैं, क्योंकि वे उनकी पुकार नहीं सुनते। पांचवें दोहे में कवि श्याम रंग (कृष्ण भक्ति) में लीन होने को मनुष्य के चित्त की धन्यता बताते हैं। कवि की भक्ति को सख्यभाव की भक्ति माना जा सकता है, जिसमें वे भगवान से मित्रवत शिकायत भी करते हैं।
In simple words: बिहारीलाल के दोहे उनकी भक्ति को दिखाते हैं। वे राधा और कृष्ण की तारीफ करते हैं और कभी-कभी भगवान राम और कृष्ण से शिकायत भी करते हैं। उनकी भक्ति में प्रेम और दोस्ती का भाव दिखता है, जिसमें वे भगवान से अपनी मदद के लिए कहते हैं।

🎯 Exam Tip: बिहारी की भक्ति-भावना को स्पष्ट करते हुए उनके दोहों में भक्ति और अलंकारप्रियता के संतुलन को उजागर करें। उनके द्वारा विभिन्न देवी-देवताओं के प्रति व्यक्त भावों का उल्लेख करें।

 

Question 2. अपनी पाठ्यपुस्तक में संकलित, नीति संबंधी दोहों की विषय वस्तु और संदेशों पर प्रकाश डालिए।
Answer: पाठ्यपुस्तक में संकलित नीति संबंधी दोहे हमें जीवन के महत्वपूर्ण संदेश देते हैं। इनमें से पहला दोहा "भजन कयौ ...... भज्यौ गॅवार।” यह हमें सांसारिक भोगों से दूर रहकर ईश्वर का भजन करने का संदेश देता है, और बताता है कि माया-मोह में डूबा रहने वाला व्यक्ति अज्ञानी है। दूसरा दोहा "अज तयौन.......बस मुकुतन के संग।” यह सत्संग की महिमा और अच्छे लोगों की संगति के लाभों को बताता है, जहाँ बाहरी दिखावे से ज़्यादा आंतरिक गुणों पर जोर दिया गया है। तीसरा दोहा "को छूट्यौ............उरझत जात ।” यह मनुष्य को लोभ-मोह से दूर रहने की चेतावनी देता है, क्योंकि एक बार इन बंधनों में फंसने पर उनसे निकलना बहुत कठिन हो जाता है, जैसे हिरण जाल में उलझता जाता है। इन दोहों में नीति को आलंकारिक और प्रतीकात्मक शैली में समझाने का सफल प्रयास किया गया है।
In simple words: नीति के दोहे हमें सिखाते हैं कि हमें भगवान का भजन करना चाहिए, अच्छे लोगों के साथ रहना चाहिए और मोह-माया से दूर रहना चाहिए। ये दोहे बताते हैं कि अगर हम इन बातों का पालन नहीं करेंगे, तो जीवन में उलझते चले जाएंगे।

🎯 Exam Tip: नीति संबंधी दोहों के संदेशों को स्पष्ट करें और उनके प्रतीकात्मक अर्थ (जैसे 'जाल', 'कुरंग', 'तयौन') को समझाएं। बिहारी की उपदेशात्मक शैली पर ध्यान दें।

 

Question 4. कवि बिहारीलाल को 'गागर में सागर' भरने वाला कहा जाता है। संचालित दोहों के आधार पर इस कथन पर आप अपना मत लिखिए।
Answer: कवि बिहारीलाल को 'गागर में सागर' भरने वाला कवि कहना बिल्कुल उचित है। इस मुहावरे का अर्थ है कि थोड़े शब्दों में बहुत गहरी और विस्तृत बात कह देना। बिहारी ने अपनी काव्य-रचना के लिए 'दोहा' जैसे छोटे छंद को चुना, और दो पंक्तियों में वे इतना भाव सौंदर्य, अलंकरण और कथन की विचित्रता भर देते हैं कि पाठक मुग्ध हो जाते हैं।
उनके अनेक दोहे इस गुण को प्रमाणित करते हैं। जैसे:
"अज तयौन........मुकुतन के संग ॥" इस दोहे में उन्होंने विरोधाभास का चमत्कार दिखाते हुए नीति संबंधी कई बातें बताई हैं, जैसे सत्संग की महिमा और राजदरबारों में व्याप्त कांट-छांट की संस्कृति।
इसी प्रकार "बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाये।" और "कागद पर लिखत न बनत, कहत संदेसु लज़ात।" जैसे दोहे प्रेम के गहरे भावों को कम शब्दों में व्यक्त करते हैं। "को छूट्यौ....उरझत जात ॥" जैसे दोहे सांसारिक मोह-माया के जाल में फंसने की जटिलता को सरल शब्दों में बताते हैं। यह उनकी अद्भुत काव्य-कुशलता है।
In simple words: बिहारीलाल को 'गागर में सागर' भरने वाला कवि कहना सही है। वे अपने छोटे दोहों में बड़ी और गहरी बातें कह देते हैं। उनके दोहे थोड़े शब्दों में बहुत सारी भावनाएं, सुंदर बातें और जीवन के संदेश देते हैं, जैसे प्रेम की बातें या मोह-माया से दूर रहने का संदेश।

🎯 Exam Tip: 'गागर में सागर भरना' की अवधारणा को स्पष्ट करें और बिहारी के दोहों के विशिष्ट उदाहरणों (कम से कम दो-तीन) का उपयोग करके इस कथन की सत्यता सिद्ध करें।

 

Question 6. बिहारी के श्रृंगार रस के दोहों की विशेषता पाठ्यपुस्तक में संकलित दोहों के आधार पर बताइए।
Answer: बिहारी के श्रृंगार रस के दोहे अत्यंत प्रभावशाली और सुंदर हैं, जो प्रेम के विभिन्न पहलुओं का चित्रण करते हैं। उनकी दो प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. **संयोग श्रृंगार का सजीव चित्रण:** बिहारी के दोहे "बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाये। सौंह करै भौंहनु हसै, दैन कहै नटि जाय।।" में गोपियों द्वारा कृष्ण की वंशी छिपाने और उनके बीच की मीठी छेड़छाड़ का सजीव वर्णन है। इसमें प्रेम, शरारत, क्रोध और मिलन का सुख—सभी भावों का सुंदर मेल मिलता है, जो संयोग श्रृंगार का उत्कृष्ट उदाहरण है।
2. **विरह श्रृंगार की मार्मिक अभिव्यक्ति:** "कागद पर लिखत न बनत, कहत संदेसु लजात। कहि हैं सब तेरौ हियौ, मेरे हिय की बाते।।" दोहे में नायिका की विरह-वेदना का मार्मिक चित्रण है। वह नायक को अपनी भावनाएँ लिखना या कहना चाहती है, लेकिन लज्जा या आंसू उसे रोकते हैं। वह अंत में उम्मीद करती है कि नायक उसके सच्चे प्रेम को बिना शब्दों के ही समझ लेगा। यह विरह की गहराई और प्रेम की आंतरिक अनुभूति को दर्शाता है।
इन दोहों में बिहारी ने भाव, अनुभाव और संचारी भावों का सुंदर प्रयोग करके श्रृंगार रस को पूरी तरह से व्यक्त किया है।
In simple words: बिहारी के दोहे प्रेम के सुंदर वर्णन के लिए जाने जाते हैं। वे प्रेमियों के मिलने (संयोग श्रृंगार) और बिछड़ने (विरह श्रृंगार) दोनों को बहुत अच्छे से दिखाते हैं। जैसे, गोपियों का कृष्ण की बाँसुरी छिपाना प्रेम की शरारत है, और नायिका का प्रेमी को अपना दुख न बता पाना विरह का भाव है।

🎯 Exam Tip: श्रृंगार रस के दो मुख्य भेद – संयोग और विरह – को स्पष्ट करें और बिहारी के दोहों से प्रत्येक का एक-एक उदाहरण देकर उसकी विशेषताओं को समझाएं।

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