RBSE Solutions Class 12 Hindi Chapter 16 ममता

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Detailed Chapter 16 ममता RBSE Solutions for Class 12 Hindi

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Class 12 Hindi Chapter 16 ममता RBSE Solutions PDF

Rbse Class 12 Hindi सृजन Chapter 16 ममता पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

Rbse Class 12 Hindi सृजन Chapter 16 ममता वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. कहानी की केन्द्रीय पात्र ममता कौन थी –
(अ) रोहतास-दुर्गपति की दुहिता
(ब) शेरशाह के मंत्री की पुत्री
(स) रोहतास-दुर्गपति के मन्त्री की दुहिता
(द) हुमायूँ की दुहिता
Answer: (स) रोहतास-दुर्गपति के मन्त्री की दुहिता
In simple words: ममता रोहतास किले के सेनापति चूड़ामणि की बेटी थी, जो कहानी की मुख्य किरदार थी। वह एक सशक्त और आदर्श भारतीय महिला थी।

🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य पात्रों और उनके रिश्तों को हमेशा याद रखें, क्योंकि इन पर सीधे प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।

Rbse Class 12 Hindi सृजन Chapter 16 ममता अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. शेरशाह ने किस युद्ध में हुमायूँ को परास्त किया था?
Answer: शेरशाह ने चौसा के युद्ध में हुमायूँ को हराया था। यह युद्ध भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी।
In simple words: शेरशाह ने हुमायूँ को चौसा की लड़ाई में हराया था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक कहानियों में युद्धों के नाम और प्रमुख व्यक्तियों को याद रखना महत्वपूर्ण होता है।

 

Question 2. किस बादशाह ने ममता की झोपड़ी के स्थान पर अष्टकोण मंदिर बनवाया?
Answer: बादशाह अकबर ने ममता की झोपड़ी वाली जगह पर अष्टकोण मंदिर बनवाया था। यह मंदिर हुमायूँ को आश्रय देने की स्मृति में बनाया गया था।
In simple words: अकबर बादशाह ने ममता की झोपड़ी की जगह पर आठ कोनों वाला मंदिर बनवाया।

🎯 Exam Tip: कहानी में किसी स्थान पर बने नए निर्माण और उसके पीछे की वजह को ध्यान से पढ़ें।

 

Question 3. किसने कहा-'हे भगवान! तबके लिए! विपदा के लिए! इतना आयोजन!'
Answer: ये शब्द ममता ने कहे थे जब उसने अपने पिता को शेरशाह से रिश्वत लेते देखा था। ममता का मानना था कि भविष्य के लिए इतना धन जमा करना गलत है, क्योंकि ईश्वर सबकी ज़रूरतें पूरी करते हैं।
In simple words: यह बात ममता ने कही थी, जब उसने देखा कि भविष्य की मुश्किलों के लिए बहुत सारा धन इकट्ठा किया जा रहा है।

🎯 Exam Tip: कहानी में दिए गए संवादों को याद रखें और समझें कि वे किस पात्र ने, किस स्थिति में और किस भावना से कहे थे।

Rbse Class 12 Hindi सृजन Chapter 16 ममता लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. ममता ने स्वर्ण-मुद्राओं का उपहार लेने से मना क्यों कर दिया?
Answer: ममता ने अपने पिता चूड़ामणि से सोने के सिक्के लेने से मना कर दिया क्योंकि उसके पिता ने वे सिक्के शेरशाह से रिश्वत के तौर पर लिए थे। ममता एक ब्राह्मण थी, जो त्याग और संतोष में विश्वास रखती थी। उसे भरोसा था कि धरती पर रहने वाला कोई भी उसे दो मुट्ठी अनाज ज़रूर देगा, इसलिए उसे इतने ज़्यादा धन की कोई ज़रूरत नहीं थी। वह ऐसी संपत्ति को अनर्थ मानती थी जो गलत तरीके से कमाई गई हो।
In simple words: ममता ने सोने के सिक्के लेने से मना कर दिया, क्योंकि उसके पिता ने उन्हें रिश्वत में लिया था। वह एक संतोषी ब्राह्मण थी और उसे गलत तरीके से कमाए गए धन की ज़रूरत नहीं थी।

🎯 Exam Tip: पात्रों के नैतिक मूल्यों और उनके फैसलों के पीछे के कारणों को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 2. हुमायूँ कब और क्यों ममता की झोपड़ी में आश्रय के लिए आया था?
Answer: हुमायूँ मुगल-पठान युद्ध में परास्त होने के बाद, रात के समय ममता की झोपड़ी में आश्रय के लिए आया था। वह बहुत थका हुआ, प्यासा और भूखा था, और उसके साथी भी बिछड़ गए थे। उसे एक सुरक्षित जगह की तलाश थी। चौसा के युद्ध में हारने के बाद वह अपने प्राण बचाने के लिए भटक रहा था।
In simple words: हुमायूँ युद्ध में हारकर बहुत थका और अकेला था, इसलिए रात को ममता की झोपड़ी में रुकने आया था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक घटनाओं और पात्रों के आगमन के कारणों को सही क्रम में और स्पष्ट रूप से बताएँ।

 

Question 4. शेरशाह ने किस प्रकार रोहतास-दुर्ग पर कब्जा किया?
Answer: शेरशाह ने रोहतास-दुर्ग पर धोखे से कब्ज़ा किया। उसने पहले मंत्री चूड़ामणि को रिश्वत के तौर पर सोने के सिक्के दिए। फिर, उसने अपने सैनिकों को डोलियों में छिपाकर महिलाओं के रूप में किले में भेजा। जब मंत्री चूड़ामणि ने पर्दा हटवाने को कहा, तो शेरशाह के सैनिकों ने उसकी हत्या कर दी। इस तरह, शेरशाह ने धोखे और क्रूरता से रोहतास-दुर्ग और राजा-रानी को अपने अधिकार में ले लिया। यह उसकी धूर्त रणनीति का हिस्सा था।
In simple words: शेरशाह ने धोखे से रोहतास-दुर्ग पर कब्ज़ा किया। उसने रिश्वत दी और अपने सैनिकों को डोलियों में छिपाकर किले में भेजा, फिर मंत्री की हत्या कर दी।

🎯 Exam Tip: किसी भी घटना के क्रम को सही ढंग से और उसके सभी महत्वपूर्ण चरणों के साथ बताएँ।

Rbse Class 12 Hindi सृजन Chapter 16 ममता निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. 'ममता' के माध्यम से नारी के त्याग एवं आदर्शों पर एक लेख लिखिए।
Answer: 'ममता' कहानी की मुख्य पात्र ममता एक आदर्श भारतीय महिला है। उसके चरित्र में त्याग, संतोष और अतिथि-सत्कार जैसे कई गुण देखने को मिलते हैं। कहानीकार ने ममता के माध्यम से भारतीय नारी के इन आदर्शों को उजागर किया है।

भारतीय नारी संतोषी होती है और उसकी ज़रूरतें कम होती हैं। वह किसी से कोई गलत उपहार स्वीकार नहीं करती। वह हमेशा दूसरों की भलाई के लिए अपनी संपत्ति और सुख-सुविधाओं का त्याग करने में पीछे नहीं हटती। उसमें मेहमानों का आदर-सत्कार करने की भावना होती है, और वह घर आए मेहमान को देवता मानती है। वह अपने पड़ोसियों के साथ मिलकर रहती है और उनके सुख-दुख में हमेशा मदद करती है। वह किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करती और जाति या धर्म को देखे बिना सभी ज़रूरतमंदों की सहायता के लिए तैयार रहती है। इस तरह, भारतीय नारी में मानवता के उच्च आदर्श पाए जाते हैं, जो ममता के चरित्र में गहराई से समाए हुए हैं। ममता का चरित्र इन सभी गुणों का प्रतीक है।
In simple words: ममता एक आदर्श भारतीय महिला है जो संतोष, त्याग और अतिथि-सत्कार जैसे गुणों को दर्शाती है। वह बिना भेदभाव के सबकी मदद करती है और गलत धन स्वीकार नहीं करती।

🎯 Exam Tip: पात्रों के गुणों को उदाहरणों के साथ समझाएँ और बताएँ कि वे किस प्रकार सामाजिक आदर्शों को प्रस्तुत करते हैं।

 

Question 2. मुगलकालीन भारतीय नारी की स्थिति का वर्णन कीजिए तथा आज इस स्थिति में सुधार पर प्रकाश डालिए।
Answer: मुगल काल में भारतीय नारी की दशा अच्छी नहीं थी। मुगल शासक विदेशी और अलग धर्म के थे, जिनकी परंपराएँ भी भिन्न थीं। मुगलों के भारत आने के बाद भारतीय नारियों को अपने धर्म, मान्यताओं और रीति-रिवाजों को सुरक्षित रखने की चिंता होने लगी थी। इस दौरान नारी की स्वतंत्रता पर सबसे ज़्यादा बुरा असर पड़ा। उनकी सुरक्षा के लिए उनके ही लोगों ने उन पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे। बाल-विवाह आम था और शिक्षा का प्रसार कम था।

हालांकि, आज भारतीय नारियों की स्थिति में बहुत सुधार हुआ है। यह सुधार समाज सुधारकों के प्रयासों और शिक्षा के विकास के कारण संभव हुआ है। महिलाओं में अब पिछड़ापन और अशिक्षा जैसे दोष दूर हुए हैं। लड़कियों को स्कूल-कॉलेजों में भेजा जाने लगा है, और पर्दा-प्रथा में भी कमी आई है। भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद से नारी-उत्थान में तेज़ी आई है। अब भारतीय नारियाँ जीवन के कई क्षेत्रों में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं, जैसे कि शिक्षा, राजनीति, खेल और विज्ञान। फिर भी, कुछ ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में अभी भी सुधार की ज़रूरत है।
In simple words: मुगल काल में भारतीय नारियों की स्थिति अच्छी नहीं थी, उनकी स्वतंत्रता कम हो गई थी। आज शिक्षा और समाज सुधार के कारण उनकी स्थिति में काफी सुधार हुआ है, वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक घटनाओं के संदर्भ में सामाजिक स्थिति का वर्णन करते समय, वर्तमान स्थिति से तुलना करना और सुधार के बिंदुओं को उजागर करना महत्वपूर्ण है।

Rbse Class 12 Hindi सृजन Chapter 16 ममता अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

Rbse Class 12 Hindi सृजन Chapter 16 ममता वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. ममता बैठी थी –
(क) रोहतास दुर्ग के प्रांगण में
(ख) रोहतास दुर्ग के प्रकोष्ठ में
(ग) रोहतास दुर्ग के बरामदे में
(घ) रोहतास दुर्ग के बाहर
Answer: (ख) रोहतास दुर्ग के प्रकोष्ठ में
In simple words: ममता रोहतास किले के एक कमरे में बैठी हुई थी।

🎯 Exam Tip: कहानी के शुरुआती दृश्यों और पात्रों के स्थान को ध्यान से याद रखें।

 

Question 2. चूड़ामणि थे-ममता के –
(क) पिता
(ख) भाई
(ग) गुरु
(घ) शिक्षक
Answer: (क) पिता
In simple words: चूड़ामणि ममता के पिता थे।

🎯 Exam Tip: पात्रों के आपसी संबंधों को सही ढंग से पहचानें।

 

Question 3. काशी के उत्तर में स्थित बिहार को बनवाने वाले थे-
(क) मुगल सम्राट
(ख) पठान शासक
(ग) मौर्य और गुप्त सम्राट
(घ) अंग्रेज शासक
Answer: (ग) मौर्य और गुप्त सम्राट
In simple words: काशी के उत्तर में बिहार को मौर्य और गुप्त राजाओं ने बनवाया था।

🎯 Exam Tip: कहानी में वर्णित ऐतिहासिक स्थानों और उनके निर्माताओं को याद रखना ज़रूरी है।

 

Question 4. 'मैं ब्राह्मणी हूँ, मुझे तो अपने धर्म-अतिथि देव की उपासना का पालन करना चाहिए। परन्तु यहाँ....... नहीं... नहीं ये एक विधर्मी दया के पात्र नहीं। परन्तु यह दया तो नहीं...... कर्तव्य करना है। तब?' ममता के उपर्युक्त विचारों में है –
(क) दृढ़ता
(ख) द्वन्द्व
(ग) त्याग
(घ) सभी विकल्प
Answer: (ख) द्वन्द्व
In simple words: ममता के मन में अतिथि सत्कार के कर्तव्य और विधर्मी की मदद करने के बीच एक उलझन थी।

🎯 Exam Tip: किसी संवाद में पात्र के मन की स्थिति (जैसे द्वन्द्व या दृढ़ता) को समझने का प्रयास करें।

 

Question 5. चौसा में युद्ध हुआ था –
(क) हिन्दू और मुगलों के बीच
(ख) मुगलों और पठानों के बीच
(ग) मुगलों-मुगलों के बीच
(घ) मुगलों और अंग्रेजों के बीच।
Answer: (ख) मुगलों और पठानों के बीच
In simple words: चौसा का युद्ध मुगल और पठान शासकों के बीच हुआ था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक लड़ाइयों में शामिल मुख्य पक्षों को सही ढंग से पहचानें।

Rbse Class 12 Hindi सृजन Chapter 16 ममता अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. ममता कौन थी?
Answer: ममता रोहतास दुर्ग के मंत्री चूड़ामणि की बेटी थी। वह एक विधवा युवती थी और कहानी की मुख्य पात्र थी।
In simple words: ममता रोहतास किले के मंत्री चूड़ामणि की बेटी और एक विधवा थी।

🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य पात्र का नाम, उसके पिता का नाम और उसकी सामाजिक स्थिति याद रखें।

 

Question 2. 'मन में वेदना, मस्तक में आँधी, आँखों में पानी की बरसात लिए, वह सुख के कण्टक-शयन में विकल थी। इस कथन का आशय क्या है?
Answer: इस कथन का अर्थ है कि ममता मंत्री की पुत्री होने के बावजूद सुख से व्याकुल थी। उसके मन में गहरा दुख था, विचारों का तूफान चल रहा था, और उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। उसे अपना सुख भी काँटों जैसा चुभ रहा था, क्योंकि वह एक हिन्दू विधवा थी और वैधव्य का दुख उसे घेरे हुए था।
In simple words: इस पंक्ति का मतलब है कि ममता, मंत्री की बेटी होने पर भी, विधवा होने के कारण बहुत दुखी और बेचैन थी।

🎯 Exam Tip: किसी भी काव्यात्मक या प्रतीकात्मक कथन का अर्थ स्पष्ट करते समय, पात्र की स्थिति और भावनाओं को ज़रूर बताएँ।

 

Question 3. 'सब अपना धर्म छोड़ दें तो मैं क्यों छोड़ दें?' यहाँ ममता किस धर्म की बात कर रही हैं?
Answer: यहाँ ममता अतिथि सत्कार के धर्म की बात कर रही है। वह मानती है कि चाहे कोई भी अपना कर्तव्य छोड़ दे, लेकिन वह मेहमानों का सम्मान करने का अपना धर्म नहीं छोड़ेगी। यह उसके नैतिक मूल्यों को दर्शाता है।
In simple words: ममता यहाँ मेहमानों की सेवा करने के अपने धर्म के बारे में बात कर रही है।

🎯 Exam Tip: पात्र के संवादों से उसके मुख्य मूल्यों और सिद्धांतों को पहचानें।

 

Question 5. ममता सत्तर वर्ष की थी। हुमायूँ ने उसकी झोपड़ी में कितने वर्ष पूर्व विश्राम किया था?
Answer: हुमायूँ ने ममता की झोपड़ी में सैंतालीस वर्ष पहले विश्राम किया था। ममता जब युवती थी तब यह घटना हुई थी।
In simple words: हुमायूँ ने ममता की झोपड़ी में सैंतालीस साल पहले आराम किया था।

🎯 Exam Tip: कहानी में दिए गए समय अंतराल और घटनाओं के बीच के संबंध को याद रखें।

 

Question 6. 'ममता' किस गद्य विधा की रचना है?
Answer: 'ममता' हिन्दी गद्य की कहानी नामक विधा की रचना है। यह जयशंकर प्रसाद द्वारा लिखी गई एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक कहानी है।
In simple words: 'ममता' हिंदी की एक कहानी है।

🎯 Exam Tip: किसी भी साहित्यिक रचना की विधा (विधा का प्रकार) को याद रखना आवश्यक है।

 

Question 7. प्रसाद जी की 'ममता' की भाषा की क्या विशेषता है?
Answer: प्रसाद जी की 'ममता' कहानी में तत्सम शब्दों वाली संस्कृतनिष्ठ और परिमार्जित भाषा का उपयोग हुआ है। इसका मतलब है कि भाषा बहुत शुद्ध और साहित्यिक है। यह भाषा कहानी को गंभीरता प्रदान करती है।
In simple words: 'ममता' कहानी की भाषा शुद्ध हिंदी (संस्कृतनिष्ठ) है, जिसमें कठिन शब्द भी हैं।

🎯 Exam Tip: लेखक की भाषा शैली की विशेषताओं को समझने का प्रयास करें।

 

Question 8. 'ममता' अपने कर्तव्य से मुंह न मोड़ने वाली स्त्री की कहानी है। ममता की इस विशेषता के लिए एक शब्द लिखिए।
Answer: ममता की इस विशेषता के लिए 'कर्तव्यनिष्ठ' शब्द का प्रयोग किया जा सकता है। इसका अर्थ है जो अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित हो।
In simple words: ममता की कर्तव्यपरायणता को 'कर्तव्यनिष्ठ' शब्द से बताया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: पात्रों के गुणों को व्यक्त करने वाले सटीक विशेषण शब्दों का उपयोग करना सीखें।

 

Question 9. रोहिताश्व' को तद्भव शब्द क्या है?
Answer: 'रोहिताश्व' का तद्भव शब्द 'रोहतास' है। तद्भव शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से बदलकर हिंदी में आए हैं।
In simple words: 'रोहिताश्व' का बदला हुआ हिंदी शब्द 'रोहतास' है।

🎯 Exam Tip: तत्सम और तद्भव शब्दों के उदाहरणों पर ध्यान दें, यह भाषा ज्ञान को बढ़ाता है।

 

Question 10. 'ममता' कहानी को संदेश क्या है?
Answer: 'ममता' कहानी का मुख्य संदेश अतिथि का सत्कार करने, सभी मनुष्यों से प्रेम करने और निस्वार्थ भाव से सेवा करने के बारे में है। यह कहानी त्याग और मानवीय मूल्यों को दर्शाती है।
In simple words: 'ममता' कहानी बताती है कि मेहमानों का सम्मान करना चाहिए और सभी से प्यार करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: कहानी के केंद्रीय संदेश या सीख को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से बताएँ।

 

Question 11. हुमायूँ के प्रति ममता के मन में घृणा क्यों पैदा हुई?
Answer: ममता के मन में हुमायूँ के प्रति घृणा इसलिए पैदा हुई क्योंकि उसे लगा कि वह भी एक विधर्मी मुगल आक्रमणकारी है, ठीक वैसे ही जैसे शेरशाह था जिसने धोखे से उसके पिता की हत्या की थी और उनके राज्य पर कब्ज़ा कर लिया था। उसे डर था कि हुमायूँ भी उसके साथ छल कर सकता है। उसके पिता चूड़ामणि भी विधर्मी शेरशाह के लालच में फंसकर मारे गए थे।
In simple words: ममता को लगा कि हुमायूँ भी एक विधर्मी मुगल है जिसने उसके पिता को धोखा दिया था, इसलिए उसे घृणा हुई।

🎯 Exam Tip: पात्रों के विचारों और भावनाओं के पीछे के कारणों को गहराई से समझें।

Rbse Class 12 Hindi सृजन Chapter 16 ममता लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. “परमपिता की इच्छा के विरुद्ध इतना साहस”-ममता के इस कथन में क्या भाव निहित है?
Answer: ममता के इस कथन में उसके पिता चूड़ामणि द्वारा शेरशाह से रिश्वत के रूप में स्वर्ण मुद्राएँ स्वीकार करने के प्रति उसकी अस्वीकृति और विरोध का भाव निहित है। वह मानती है कि ईश्वर सभी की ज़रूरतों का ध्यान रखते हैं और भविष्य के लिए आवश्यकता से अधिक धन इकट्ठा करना परमपिता परमात्मा की इच्छा के खिलाफ है। वह रिश्वतखोरी को अनैतिक और साहसपूर्ण मानती है।
In simple words: इस बात से ममता दिखा रही है कि उसे अपने पिता का रिश्वत लेना गलत लग रहा है। वह मानती है कि भगवान सबको देते हैं, इसलिए ज़रूरत से ज़्यादा धन इकट्ठा करना ठीक नहीं।

🎯 Exam Tip: किसी भी कथन के पीछे छिपे भाव और उसके संदर्भ को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 2. "पिताजी यह अनर्थ है, अर्थ नहीं”-यह कथन किसने कहा है? तथा क्यों?
Answer: यह कथन ममता ने अपने पिता चूड़ामणि से कहा है। उसने यह इसलिए कहा क्योंकि उसके पिता ने भविष्य की सुरक्षा के लिए शेरशाह से रिश्वत के तौर पर सोने के सिक्के लिए थे। ममता का मानना था कि जो धन मेहनत से नहीं कमाया जाता, वह अनर्थकारी होता है और उससे कोई भलाई नहीं होती। वह उस धन को अस्वीकार करती थी।
In simple words: यह बात ममता ने अपने पिता से कही, क्योंकि उसे रिश्वत का धन अनैतिक और गलत लग रहा था।

🎯 Exam Tip: कहानी में दिए गए विशिष्ट संवादों के वक्ता और उसके कारण को सही ढंग से पहचानें।

 

Question 3. मौर्य और गुप्त सम्राटों की कीर्ति का खंडहर किसको कहा गया है? इसको खंडहर कहने का कारण क्या है?
Answer: मौर्य तथा गुप्त सम्राटों द्वारा काशी के उत्तर में बनवाया गया बौद्ध विहार आज खंडहर बन चुका था, उसी को उनकी कीर्ति का खंडहर कहा गया है। इन सम्राटों ने बौद्ध धर्म को मानने वाले होकर, अपनी प्रसिद्धि को दूर-दूर तक फैलाया था। लेकिन समय के साथ, यह विहार ध्वस्त हो गया और इन महान राजाओं का यश भी धूमिल पड़ गया। यह टूटे-फूटे धर्मचक्र उन्हीं सम्राटों की कीर्ति के खंडहर बन गए थे, जो समय के साथ सब कुछ बदल देता है।
In simple words: मौर्य और गुप्त सम्राटों के बनवाए गए बौद्ध विहार जो अब टूट चुके थे, उन्हें ही उनकी प्रसिद्धि का खंडहर कहा गया है। समय के साथ उनकी महानता फीकी पड़ गई थी।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक स्थलों के महत्व और उनके क्षय के कारणों को स्पष्ट रूप से वर्णित करें।

 

Question 4. "वह सुख के कण्टक-शयन में विकल थी”-इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस कथन का आशय यह है कि ममता रोहिताश्व राज्य के मंत्री की पुत्री थी, इसलिए उसे किसी भी चीज़ की कमी नहीं थी। वह युवती थी लेकिन विधवा होने के कारण उसका जीवन बहुत दयनीय था। हिन्दू समाज में विधवा की स्थिति बहुत खराब मानी जाती थी। उसके पास धन और भौतिक सुख-सुविधाएँ होने के बावजूद, वैधव्य का दुख उसे लगातार सता रहा था। यह सारा सुख उसे काँटों के बिस्तर जैसा लगता था और उसे व्याकुल कर देता था। वह अपनी इच्छाओं को दबाए रखती थी।
In simple words: इस कथन का मतलब है कि ममता को, मंत्री की बेटी होने पर भी, विधवा होने के कारण अपना सुख भी काँटों जैसा चुभता था और वह हमेशा दुखी रहती थी।

🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक भाषा वाले कथनों का अर्थ समझाते हुए, पात्र की भावनाओं और तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियों को ज़रूर बताएँ।

 

Question 6. ममता रोहतास दुर्ग को त्यागकर किस स्थान पर जाकर रहने लगी?
Answer: रोहतास दुर्ग पर शेरशाह का कब्ज़ा होने के बाद, ममता दुर्ग छोड़कर बच निकली। वह काशी के उत्तर में मौर्य तथा गुप्त सम्राटों द्वारा बनवाए गए बौद्ध विहार के खंडहरों में जाकर रहने लगी। उसने वहीं पर एक झोपड़ी बनाकर अपना जीवन बिताया।
In simple words: रोहतास दुर्ग छोड़कर ममता काशी के उत्तर में बने पुराने बौद्ध विहार के खंडहरों में रहने लगी।

🎯 Exam Tip: कहानी में पात्रों के निवास स्थान में परिवर्तन और उसके कारण को याद रखें।

 

Question 7. हुमायूँ जब ममता से आश्रय माँगने आया तो उसकी दशा कैसी थी?
Answer: हुमायूँ जब ममता से आश्रय माँगने आया, तो उसकी दशा बहुत खराब थी। वह शेरशाह से चौसा का युद्ध हार चुका था, रास्ता भटक गया था, और उसके सैनिक भी उससे बिछड़ गए थे। वह बहुत थका हुआ, भूखा और प्यासा था। थकावट के कारण वह ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था, मानो उसकी साँसें अटकी हुई हों।
In simple words: जब हुमायूँ ममता के पास आया, तो वह युद्ध हारकर, थका हुआ, भूखा-प्यासा और अकेला था।

🎯 Exam Tip: किसी भी पात्र की स्थिति का वर्णन करते समय उसकी शारीरिक और मानसिक दशा को स्पष्ट करें।

 

Question 8. "यहाँ कौन दुर्ग है! यही झोपड़ी न, जो चाहे ले ले, मुझे तो अपना कर्तव्य करना पड़ेगा”-ममता के ऐसा सोचने का क्या कारण है?
Answer: ममता ने विधर्मी शेरशाह को छल से रोहतास के दुर्ग, राजा-रानी और कोष पर कब्ज़ा करते और अपने पिता की हत्या होते देखा था। उसे शरण माँगने वाला मुगल (हुमायूँ) भी विधर्मी ही लग रहा था। उसे डर था कि हुमायूँ भी उसकी झोपड़ी पर कब्ज़ा कर सकता है। लेकिन तुरंत ही उसके मन में अपना कर्तव्य पूरा करने का विचार आया। वह शरणागत को शरण देने का अपना धर्म निभाना चाहती थी। उसे अपनी झोपड़ी के रहने या चले जाने की कोई चिंता नहीं थी, बल्कि अपने कर्तव्य की परवाह थी।
In simple words: ममता ने देखा था कि विधर्मी ने उसके पिता को मार दिया था। उसे डर था कि हुमायूँ भी धोखा दे सकता है, लेकिन उसने अपना कर्तव्य (शरण देना) निभाने का फैसला किया।

🎯 Exam Tip: पात्र के आंतरिक संघर्षों और उसके फैसलों के पीछे के नैतिक कारणों को विस्तार से समझाएँ।

 

Question 9. "तैमूर का वंशधर स्त्री से छल करेगा! जाता हूँ, भाग्य का खेल है।" हुमायूँ के उपर्युक्त कथन से उसकी किस विशेषता का पता चलता है?
Answer: हुमायूँ के इस कथन से उसकी कुछ महत्वपूर्ण विशेषताएँ पता चलती हैं: 1. **आत्मसम्मान:** उसे ममता द्वारा अपने ऊपर छल की शंका करना बिल्कुल पसंद नहीं आया। वह खुद को तैमूर के वंश का मानता था और ऐसे महान वंश का होकर एक स्त्री से छल करना उसे अपनी शान के खिलाफ लगा। 2. **वीरता और ईमानदारी:** वह छल-कपट से दूर रहना पसंद करता था और सीधे-सादे ढंग से अपनी बात कहता था। 3. **विवशता और आश्रय की ज़रूरत:** वह इस समय बहुत थका हुआ था और उसे रात में शत्रुओं के हाथों पकड़े जाने का डर था, इसलिए उसे आश्रय की सख्त ज़रूरत थी। वह अपनी इस विवशता को 'भाग्य का खेल' कहता है। 4. **महानता का बोध:** उसे अपने तैमूरी वंश पर गर्व था, जो उसे छोटे-मोटे छल-कपट से दूर रखता था। इन बातों से पता चलता है कि हुमायूँ एक वीर, स्वाभिमानी और परिस्थितियों से लाचार बादशाह था, जो छल-कपट पसंद नहीं करता था।
In simple words: हुमायूँ के इस कथन से पता चलता है कि वह तैमूर का वंशज होने पर गर्व करता था, छल-कपट से दूर रहता था, और थका होने के कारण मजबूरी में आश्रय माँग रहा था।

🎯 Exam Tip: किसी भी पात्र के संवादों का विश्लेषण करते समय, उसके व्यक्तित्व, भावनाओं और स्थिति को उजागर करें।

 

Question 10. “वह अपनी मूर्खता पर अपने को कोसने लगी”-ममता ने क्या मूर्खता की थी जिसके लिए वह स्वयं को दोषी ठहरा रही थी?
Answer: ममता को यह शंका थी कि हुमायूँ एक विधर्मी मुगल है और वह छल करके उसकी झोपड़ी पर कब्ज़ा कर सकता है। लेकिन जब हुमायूँ ने अपनी बेबसी बताई और कहा कि वह चला जाएगा, तो ममता को लगा कि उसने अतिथि को अपमानित करके अपने कर्तव्य से मुँह मोड़ा है। उसे अपनी इस कठोरता पर पछतावा हुआ और वह स्वयं को दोषी ठहराने लगी। उसे लगा कि एक भूखे-प्यासे व्यक्ति को आश्रय न देना उसकी मूर्खता थी।
In simple words: ममता को लगा कि हुमायूँ को विधर्मी मानकर आश्रय न देना उसकी मूर्खता थी, क्योंकि अतिथि को शरण देना उसका कर्तव्य था।

🎯 Exam Tip: पात्रों के आत्म-विश्लेषण और पश्चाताप के कारणों को स्पष्ट करें।

 

Question 12. कोई विपन्न अनजान व्यक्ति आये तो उसको शरण देना मानव का धर्म है किन्तु आजकल ऐसा करने के खतरे भी हैं? ऐसा करने से क्या खतरा है?
Answer: मानवता के अनुसार, दीन-दुखियों की सेवा करना, भूखे को खाना और प्यासे को पानी देना, तथा बेसहारा को आश्रय देना मानव का धर्म है। लेकिन आज के समय में ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। विपन्न या अनजान व्यक्ति बनकर लोग लूटपाट कर सकते हैं और विरोध करने पर हत्या तक कर सकते हैं। अक्सर, पड़ोसी भी ऐसे मामलों से दूर रहते हैं और अपनी सुरक्षा देखते हैं। अगर कोई घटना हो जाए, तो पुलिस पूछताछ के नाम पर पीड़ित को ही परेशान कर सकती है, जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है। आजकल धोखाधड़ी और अपराध बहुत बढ़ गए हैं।
In simple words: अनजान ज़रूरतमंद को शरण देना धर्म है, पर आज के समय में इससे लूटपाट, हत्या या पुलिस की परेशानी का खतरा होता है।

🎯 Exam Tip: नैतिक मूल्यों के साथ-साथ व्यावहारिक खतरों को भी समझाएँ और तार्किक रूप से विचार प्रस्तुत करें।

 

Question 13. जब अश्वारोही ममता के द्वार के सामने पहुँचा उस समय ममता की क्या दशा थी?
Answer: जब अश्वारोही ममता के द्वार पर पहुँचा, उस समय ममता सत्तर वर्ष की बूढ़ी हो चुकी थी। वह बहुत कमज़ोर और बीमार थी। सर्दी का मौसम था और सुबह होने के कारण उसका शरीर काँप रहा था। उसे बार-बार खाँसी आ रही थी। गाँव की दो-तीन औरतें उसकी सेवा कर रही थीं और पानी माँगने पर उसे पानी पिला रही थीं। कुछ समय बाद ही उसका देहांत हो गया, वह जीवन के अंतिम क्षणों में थी।
In simple words: जब घुड़सवार आया, ममता 70 साल की बूढ़ी, बीमार और कमज़ोर थी। वह खाँस रही थी और गाँव की औरतें उसकी सेवा कर रही थीं।

🎯 Exam Tip: पात्र की अंतिम अवस्था का वर्णन करते समय, उसकी शारीरिक और आसपास की स्थिति को विस्तार से बताएँ।

 

Question 14. ममता ने अश्वारोही को पास बुलाकर उससे क्या कहा?
Answer: ममता ने अश्वारोही को अपने पास बुलाया और उसे बताया कि उसकी इसी झोपड़ी में एक रात एक व्यक्ति ठहरा था। ममता को यह नहीं पता था कि वह कोई साधारण मुगल था या बादशाह। उसने अपने कानों से सुना था कि उस व्यक्ति ने उसका घर बनवाने का आदेश दिया था। अब ममता ईश्वर के पास जा रही थी। उसने अश्वारोही से कहा कि वे इस झोपड़ी का मकान या महल कुछ भी बनाएँ, उसे अब इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। यह उसके जीवन की आखिरी इच्छा थी।
In simple words: ममता ने अश्वारोही से कहा कि यहीं एक व्यक्ति ठहरा था जिसने घर बनवाने को कहा था। अब वह मर रही है, इसलिए वे जो चाहें बना लें।

🎯 Exam Tip: पात्र के अंतिम संवादों को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि वे अक्सर उसके जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर करते हैं।

 

Question 15. ममता की झोपड़ी के स्थान पर बने अष्टकोण मन्दिर पर क्या शिलालेख लगाया? इसमें ममता का नाम क्यों नहीं था?
Answer: ममता की झोपड़ी के स्थान पर बने अष्टकोण मंदिर पर यह शिलालेख लगाया गया था: "सातों देश के नरेश हुमायूँ ने एक दिन यहाँ विश्राम किया था। उनके पुत्र अकबर ने उनकी स्मृति में यह गगनचुंबी मंदिर बनवाया।"

इसमें ममता का नाम इसलिए नहीं था क्योंकि अकबर और उसके दरबारी हुमायूँ की सहायता करने वाली एक साधारण स्त्री को महत्व नहीं देते थे। वे सिर्फ बादशाह के नाम और उसकी महिमा को ही उजागर करना चाहते थे। ममता की उदारता और त्याग को इतिहास में भुला दिया गया था।
In simple words: मंदिर पर लिखा था कि हुमायूँ ने यहाँ विश्राम किया था और अकबर ने यह मंदिर बनवाया। ममता का नाम नहीं था क्योंकि बादशाहों को उसकी मदद याद नहीं रही।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक स्मारकों पर अंकित शिलालेखों के विवरण और उनमें निहित संदेश को समझें, विशेषकर जब कोई महत्वपूर्ण पात्र उसमें अनुपस्थित हो।

 

Question 16. ममता के चरित्र की दो विशेषताएँ लिखिए।
Answer: ममता के चरित्र की दो विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

1. **प्रधान पात्र तथा त्यागी:** ममता इस कहानी की मुख्य पात्र और नायिका है। वह अपने पिता द्वारा रिश्वत के रूप में प्राप्त स्वर्ण मुद्राओं को अस्वीकार कर देती है, जो उसके त्याग और संतोष को दर्शाता है। वह भौतिक सुखों से दूर रहती है। 2. **अतिथि-सत्कार करने वाली और कर्तव्यनिष्ठ:** वह मंत्री चूड़ामणि की विधवा युवती पुत्री है। वैधव्य का दुख उसे सताता है, लेकिन वह अपने कर्तव्य से मुँह नहीं मोड़ती। जब हुमायूँ आश्रय माँगने आता है, तो वह उसे विधर्मी जानते हुए भी शरण देती है, क्योंकि अतिथि सत्कार को वह अपना धर्म मानती है।
In simple words: ममता कहानी की मुख्य पात्र है जो त्याग और संतोष में विश्वास रखती है। वह कर्तव्यनिष्ठ है और अतिथि का सत्कार करना अपना धर्म मानती है।

🎯 Exam Tip: पात्रों के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं को बिंदुओं में लिखें और उनके उदाहरण भी दें।

 

Question 17. हुमायूँ के चरित्र की दो विशेषताएँ लिखिए।
Answer: हुमायूँ के चरित्र की दो विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

1. **विदेशी और विधर्मी आक्रमणकारी:** हुमायूँ एक मुगल बादशाह था, जो भारत के लिए विदेशी और विधर्मी आक्रमणकारी था। वह तैमूर लंग का वंशज था और भारत के राज्यों को अपने अधीन करने का प्रयास कर रहा था। 2. **वीर, परंतु असहाय और आश्रय-खोजी:** हुमायूँ चौसा के युद्ध में पठान शेरशाह से हारने के बाद एक सुरक्षित स्थान की तलाश में था। वह उस समय भूखा-प्यासा और बहुत थका हुआ था। उसके घोड़े भी गिर गए थे और उसके साथी भी बिछड़ गए थे, इसलिए वह ममता की झोपड़ी में आश्रय चाहता था। विपरीत परिस्थितियों में वह अपनी जान बचाने के लिए भटक रहा था।
In simple words: हुमायूँ एक विदेशी आक्रमणकारी और तैमूर का वंशज था। वह युद्ध में हारकर थका हुआ और असहाय था, इसलिए ममता की झोपड़ी में शरण चाहता था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक पात्रों के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं को उनकी भूमिका और परिस्थितियों के साथ स्पष्ट करें।

 

Question 18. 'ममता' कहानी के कथानक की दो विशेषताएँ लिखिए।
Answer: 'ममता' कहानी के कथानक की दो विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

1. **ऐतिहासिकता और कल्पना का समन्वय:** 'ममता' जयशंकर प्रसाद की एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक कहानी है। इसका कथानक इतिहास पर आधारित है, लेकिन कहानीकार ने इसमें अपनी कल्पना का भी रंग भरा है। ऐतिहासिक तथ्यों को कल्पना के साथ मिलाकर प्रस्तुत किया गया है। 2. **ममता-केंद्रित विकास और चरम बिंदु:** कहानी का आरंभ रोहतास दुर्ग में बैठी युवती ममता के यौवनकाल से होता है। इसमें उसकी मृत्यु तक का पूरा समय समाया हुआ है। कथानक के विकास में ममता के जीवन की विभिन्न घटनाएँ ही योगदान देती हैं। कहानी का अंत भी चरम बिंदु पर होता है, जो ममता के जीवन के अंत के साथ जुड़ता है।
In simple words: 'ममता' कहानी इतिहास और कल्पना का मिश्रण है। इसका कथानक ममता के जीवन की घटनाओं पर आधारित है और उसके जन्म से मृत्यु तक की कहानी बताता है।

🎯 Exam Tip: कहानी के कथानक की विशेषताओं को बताते समय, उसके ऐतिहासिक आधार और कहानीकार की कल्पना के योगदान को ज़रूर स्पष्ट करें।

 

Question 19. 'ममता' कहानी के शीर्षक का औचित्य प्रगट कीजिए।
Answer: कहानी का शीर्षक 'ममता' पूरी तरह से उचित है। ममता इस कहानी की प्रधान पात्र और नायिका है। कहानी का पूरा कथानक ममता पर ही आधारित है। कहानी की शुरुआत एक युवती और विधवा ममता के रोहतास दुर्ग के एक कमरे में बैठे होने के दृश्य से होती है। कहानी का अंत भी ममता के जीवन के अंतिम क्षणों और उसकी मृत्यु के साथ होता है।

ममता के चरित्र में त्याग, संतोष, सेवा, सहयोग, दया, अतिथि-सत्कार और कर्तव्यनिष्ठा जैसे मानवीय गुण भरे हुए हैं। वह अपने पिता द्वारा रिश्वत में लिए गए धन को अस्वीकार करती है और विधर्मी हुमायूँ को भी संकट में आश्रय देती है। उसके ये सारे गुण उसके 'ममता' नाम को सार्थक करते हैं। कहानी का नाम उसके केंद्रीय विषय और पात्र के गुणों को पूरी तरह से दर्शाता है।
In simple words: 'ममता' कहानी का शीर्षक बिल्कुल सही है, क्योंकि यह कहानी की मुख्य पात्र है और उसका पूरा जीवन, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा कहानी का केंद्र बिंदु है।

🎯 Exam Tip: कहानी के शीर्षक की सार्थकता बताते समय, मुख्य पात्र के गुणों, कहानी के केंद्रीय विषय और घटनाओं से उसका संबंध स्पष्ट करें।

 

Question 20. 'ममता' कहानी की रचना का क्या उद्देश्य है?
अथवा
'ममता' कहानी में क्या संदेश दिया गया है?
Answer: 'ममता' कहानी की रचना का मुख्य उद्देश्य ममता के चरित्र के माध्यम से त्याग, संतोष, सेवा, सहयोग और संग्रह की प्रवृत्ति से विमुखता (दूर रहना) जैसे मानवीय गुणों का चित्रण करना है।

कहानी में यह संदेश दिया गया है कि ममता अपने पिता द्वारा प्राप्त रिश्वत के स्वर्ण को उपहार के रूप में स्वीकार नहीं करती, क्योंकि उसकी दृष्टि में वह धन 'अर्थ' नहीं बल्कि 'अनर्थ' था। वह रोहतास दुर्ग को छोड़कर चली जाती है और अपनी झोपड़ी को भी अंत में छोड़ देती है। उसके चरित्र-चित्रण के माध्यम से इन मानवीय गुणों की महत्ता बताना ही कहानी की रचना का उद्देश्य है। कहानी में त्याग, अतिथि-सत्कार, दया और अनावश्यक वस्तुओं के संग्रह से बचने का संदेश दिया गया है। कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा धन चरित्र और नैतिक मूल्यों में है, न कि भौतिक संपत्ति में।
In simple words: 'ममता' कहानी का उद्देश्य त्याग, संतोष, सेवा, और दया जैसे मानवीय गुणों को दिखाना है। यह संदेश देती है कि रिश्वत का धन गलत है और अनावश्यक चीज़ें जमा करने से बचना चाहिए।

🎯 Exam Tip: कहानी के उद्देश्य या संदेश को स्पष्ट करते समय, मुख्य नैतिक सीख और पात्रों के माध्यम से दिखाए गए गुणों को ज़रूर बताएँ।

 

Question 21. 'ममता' कहानी में इतिहास और कल्पना का सुन्दर समन्वय हुआ है। कहानी के आधार पर उत्तर दीजिए।
Answer: 'ममता' कहानी की पृष्ठभूमि ऐतिहासिक है। मुगल शहंशाह हुमायूँ और शेरशाह भारतीय इतिहास से संबंधित पात्र हैं। हुमायूँ तथा शेरशाह के बीच हुए युद्ध का वर्णन भी इतिहास में मिलता है। लेकिन ममता और चूड़ामणि जैसे पात्र कहानीकार की कल्पना से जन्मे हैं। ममता की झोपड़ी में हुमायूँ का आश्रय लेना और उसके स्थान पर एक विशाल मंदिर बनवाने की बात भी लेखक की कल्पना पर आधारित है। कहानी में ऐतिहासिक तथ्यों को काल्पनिक घटनाओं के साथ खूबसूरती से जोड़ा गया है। इस प्रकार, हम कह सकते हैं कि 'ममता' कहानी में इतिहास और कल्पना का एक सुंदर मेल है, जिससे कहानी रोचक और शिक्षाप्रद बनती है।
In simple words: 'ममता' कहानी में हुमायूँ और शेरशाह जैसे ऐतिहासिक पात्र हैं, लेकिन ममता और कुछ घटनाएँ कल्पना पर आधारित हैं। इस तरह, इसमें इतिहास और कल्पना का अच्छा मेल है।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक और काल्पनिक तत्वों को अलग-अलग पहचानें और बताएँ कि वे कहानी में कैसे एक साथ काम करते हैं।

 

Question 22. 'ममता' कहानी के संवादों की विशेषताएँ क्या है?
Answer: 'ममता' कहानी में प्रयुक्त संवादों की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

1. **छोटे तथा बड़े संवाद:** कहानी में छोटे और बड़े दोनों प्रकार के संवाद हैं, जो चुस्त और प्रभावी हैं। 2. **पात्रों के चरित्र का उद्घाटन:** संवाद पात्रों के चरित्रगत गुणों को उजागर करने वाले हैं, जैसे ममता का कर्तव्यनिष्ठ स्वभाव या हुमायूँ का स्वाभिमान। 3. **कथानक का विकास:** इन संवादों के माध्यम से कहानी के कथानक को विकसित करने में भी कहानीकार सफल हुआ है। 4. **नाटकीयता और सूक्ति रूप:** संवाद नाटकीय हैं और वे सुंदर सूक्ति (कहावत) के रूप में हैं, जैसे-"पिताजी, यह अनर्थ है, अर्थ नहीं"। 5. **संस्कृतनिष्ठ और परिमार्जित भाषा:** संवादों की भाषा तत्सम शब्दों से युक्त, संस्कृतनिष्ठ और परिमार्जित है, जो कहानी को साहित्यिक गरिमा प्रदान करती है।
In simple words: 'ममता' कहानी के संवाद छोटे-बड़े, पात्रों के गुण बताने वाले, कहानी को आगे बढ़ाने वाले और नाटकीय होते हैं। इनकी भाषा शुद्ध और साहित्यिक है।

🎯 Exam Tip: कहानी के संवादों का विश्लेषण करते समय, उनकी लंबाई, प्रभाव, और भाषा शैली पर ध्यान दें।

Rbse Class 12 Hindi सृजन Chapter 16 ममता निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. 'ममता' कहानी की प्रधान पात्र का चरित्र चित्रण कीजिए।
Answer: 'ममता' कहानी की प्रधान पात्र ममता का चरित्र चित्रण इस प्रकार है:

1. **विधवा युवती:** ममता एक युवा विधवा है। उसका यौवन सोन नदी के तेज़ बहाव की तरह उमड़ रहा था। हिन्दू समाज में विधवाओं को कई कष्ट सहने पड़ते हैं, और सभी सुख-सुविधाएँ होने के बावजूद ममता का वैधव्य उसे बहुत पीड़ा देता था। 2. **संतोषी और बुद्धिमती:** ममता संतोषी स्वभाव की है। जब वह थालों में रखी स्वर्ण मुद्राओं को देखती है, तो समझ जाती है कि उसके पिता ने शेरशाह से रिश्वत ली है। वह कहती है कि हम ब्राह्मण हैं और हमें इतना सोना नहीं चाहिए, क्योंकि यह 'अर्थ' नहीं 'अनर्थ' है। उसका यह निर्णय उसकी बुद्धिमत्ता और नैतिक दृढ़ता को दर्शाता है। 3. **अतिथि-सत्कार करने वाली और कर्तव्यनिष्ठ:** ममता अपने कर्तव्य, अतिथि सत्कार से कभी पीछे नहीं हटती। पहले वह मुगल (हुमायूँ) को शरण देने से मना करती है, लेकिन बाद में उसे अपनी झोपड़ी में विश्राम करने को कह देती है। वह कहती है-"मैं ब्राह्मण कुमारी, सब अपना धर्म छोड़ दें, तो मैं भी क्यों छोड़ दूँ?” 4. **त्यागी और परोपकारी:** वह त्यागी स्वभाव की है और दूसरों के सुख-दुख में हमेशा साथ देती है। अपनी मृत्यु से ठीक पहले वह अपनी झोपड़ी को अश्वारोही (अकबर के सेनापति) को सौंप देती है। वह निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करती है। 5. **साहसी और दृढ़ निश्चयी:** वह विपरीत परिस्थितियों में भी अपना धैर्य नहीं खोती और अपने सिद्धांतों पर अडिग रहती है। रोहतास दुर्ग छोड़ने के बाद भी वह संघर्षपूर्ण जीवन बिताती है।

इस प्रकार ममता का चरित्र भारतीय नारी के त्याग, संतोष, कर्तव्यनिष्ठा और परोपकार का एक अद्भुत उदाहरण है।
In simple words: ममता एक युवा विधवा थी जो संतोषी, बुद्धिमान, अतिथि-सत्कार करने वाली और त्यागी थी। वह अपने पिता की रिश्वत ठुकरा देती है और हुमायूँ को शरण देती है, जिससे उसका कर्तव्यनिष्ठ स्वभाव दिखता है।

🎯 Exam Tip: पात्र के चरित्र चित्रण में उसकी सभी प्रमुख विशेषताओं को स्पष्ट बिंदुओं में लिखें और प्रत्येक विशेषता के लिए कहानी से उदाहरण भी दें।

 

Question 2. वृद्ध ममता के अन्तिम समय का वर्णन कीजिए।
Answer: ममता अपने अंतिम समय में बहुत वृद्ध हो चुकी थी, उसकी आयु सत्तर वर्ष थी। मुगल-पठान युद्ध को बीते सैंतालीस साल हो चुके थे। वह अपनी झोपड़ी में लेटी हुई थी। सर्दी का मौसम था और सुबह का समय था। उसका शरीर बहुत दुर्बल हो गया था और सर्दी के कारण उसे बार-बार खाँसी उठ रही थी। गाँव की दो-तीन स्त्रियाँ उसके पास बैठी उसकी सेवा कर रही थीं। ममता ने जीवनभर सभी के सुख-दुख में साथ दिया था, इसलिए वे स्त्रियाँ उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहती थीं।

ममता ने पानी पीना चाहा, तो एक स्त्री ने सीपी से उसे पानी पिलाया। उसी क्षण एक घुड़सवार झोपड़ी के द्वार पर दिखाई दिया। वह खुद से कह रहा था कि "मिर्ज़ा ने जो चित्र बनाकर दिया है, वह इसी स्थान का होना चाहिए। वह बुढ़िया मर गई होगी। सैंतालीस साल पुरानी बात है। किससे पूछे कि सम्राट हुमायूँ ने किस झोपड़ी में रात बिताई थी।" ममता ने उसे बुलाया और कहा कि वह नहीं जानती कि वह साधारण मुगल था या बादशाह, पर उसने इसी झोपड़ी में रात बिताई थी। उसने मेरा घर बनवाने का आदेश दिया था। अब मैं जा रही हूँ। तुम इस घर को मकान बनाओ या महल, मुझे इसे छोड़ना है। अश्वारोही अवाक् खड़ा था और ममता के प्राण पखेरू उड़ गए, उसका देहांत हो चुका था।
In simple words: ममता 70 साल की बूढ़ी और बीमार थी। सर्दी में उसे खाँसी आ रही थी और गाँव की स्त्रियाँ उसकी सेवा कर रही थीं। एक घुड़सवार आया जो हुमायूँ के ठिकाने की तलाश में था। ममता ने उसे बताया कि हुमायूँ यहीं रुका था, और फिर उसकी मृत्यु हो गई।

🎯 Exam Tip: कहानी के अंतिम दृश्यों का वर्णन करते समय, पात्र की शारीरिक और भावनात्मक स्थिति को ध्यान में रखें, साथ ही आसपास की घटनाओं को भी जोड़ें।

 

Question 3. ममता से आश्रय माँगने वाले मुगल की दशा कैसी थी? उसको देखकर ममता के मन में उसे द्वन्द्व का वर्णन कीजिए।
Answer: ममता अपनी झोपड़ी में बैठी दीपक के मंद प्रकाश में कुछ पढ़ रही थी। तभी उसने द्वार पर एक थके हुए व्यक्ति को देखा। वह दरवाज़ा बंद करना चाहती थी, तभी उस व्यक्ति ने कहा-"माता! मुझे आश्रय चाहिए।" परिचय पूछने पर उसने बताया कि वह एक मुगल है और चौसा के युद्ध में शेरशाह से हार गया है। वह थका हुआ था और आश्रय चाहता था। ममता के मना करने पर वह धम्म से ज़मीन पर बैठ गया। वह प्यासा था, उसके साथी छूट गए थे और घोड़ा भी गिर गया था। ममता ने उसे पानी पिलाया, जिससे उसकी जान में जान आई। उसने ममता से फिर पूछा कि क्या वह चला जाए?

यह सब देखकर ममता के मन में द्वन्द्व पैदा हो गया। एक ओर, उसे लगा कि वह एक ब्राह्मणी है और उसे अपने धर्म (अतिथि देवो भव:) का पालन करना चाहिए। दूसरी ओर, उसे यह भी याद आया कि यह एक विधर्मी है और उसके पिता की हत्या करने वाले शेरशाह जैसा ही है। उसके मन में घृणा का भाव भी था, क्योंकि ये वही मुगल थे जिन्होंने उसके पिता को धोखा दिया था। वह असमंजस में थी कि क्या यह दया है या उसका कर्तव्य? अंततः, उसने अपने कर्तव्य को चुना और उसे शरण दी।
In simple words: हुमायूँ थका हुआ, प्यासा और युद्ध हारा हुआ ममता की झोपड़ी में आश्रय माँगने आया था। उसे देखकर ममता के मन में द्वन्द्व हुआ कि एक विधर्मी को शरण दे या अपना अतिथि सत्कार का कर्तव्य निभाए।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के मन के द्वन्द्व का वर्णन करते समय, उसके सामने मौजूद दोनों पक्षों (नैतिकता बनाम व्यावहारिक संकट) को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।

 

Question 4. शेरशाह तथा हुमायूँ के चरित्र की तुलना कीजिए।
Answer: शेरशाह तथा हुमायूँ दोनों ही विदेशी आक्रमणकारी थे और दोनों ही भारतीय राज्यों को अपने अधीन करने का प्रयास कर रहे थे। इन दोनों के बीच भी इसी सिलसिले में युद्ध होते रहते थे, जैसे चौसा का युद्ध शेरशाह और हुमायूँ के बीच हुआ था, जिसमें हुमायूँ हार गया था।

**शेरशाह का चरित्र:** * **छली और क्रूर:** शेरशाह बहुत धोखेबाज़ था। उसने छलपूर्वक रोहतास राज्य पर कब्ज़ा किया था और वहाँ के राजा-रानी को बंदी बनाकर खजाना भी छीन लिया था। उसने निर्दयतापूर्वक मंत्री चूड़ामणि की हत्या कर दी थी। * **लालची और सत्ता-लोभी:** वह सत्ता और धन का बहुत लालची था और उसे प्राप्त करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता था।

**हुमायूँ का चरित्र:** * **वीर, पर छली नहीं:** हुमायूँ मुगल था और वीर था, लेकिन उसे छल-कपट पसंद नहीं था। जब ममता ने उस पर छल करने की शंका व्यक्त की, तो उसने कहा-"छल! नहीं, छल नहीं-स्त्री। जाता हूँ, तैमूर का वंशधर स्त्री से छल करेगा? भाग्य का खेल है!” यह उसके आत्मसम्मान और ईमानदारी को दर्शाता है। * **परिस्थितियों का शिकार:** वह अक्सर अपनी परिस्थितियों के कारण हारता था, जैसा कि चौसा के युद्ध में हुआ।

**तुलना:** ममता की दृष्टि में, दोनों ही क्रूर और रक्त-पिपासु थे। ममता कहती है-"परन्तु तुम भी वैसे ही क्रूर हो, वही भीषण रक्त की प्यास, वहीं निष्ठुर प्रतिबिम्ब तुम्हारे मुख पर भी है......।" इस प्रकार, शेरशाह और हुमायूँ दोनों का उद्देश्य भारत पर अधिकार करके उसके धन को लूटना था, लेकिन शेरशाह छल-कपट का इस्तेमाल करता था, जबकि हुमायूँ उसे नापसंद करता था।
In simple words: शेरशाह और हुमायूँ दोनों भारत पर कब्ज़ा करना चाहते थे। शेरशाह धोखेबाज़ और क्रूर था, जबकि हुमायूँ वीर था पर छल-कपट पसंद नहीं करता था। ममता की नज़र में दोनों ही एक जैसे थे।

🎯 Exam Tip: दो पात्रों की तुलना करते समय, उनकी समानताओं और असमानताओं को स्पष्ट बिंदुओं में लिखें और उनके चरित्र के प्रमाण में कहानी से उदाहरण भी दें।

 

Question 5. 'ममता' कहानी के आरम्भ में ममता तथा उसके पिता चूड़ामणि के बीच हुए वार्तालाप को अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: 'ममता' कहानी के आरंभ में, ममता के पिता चूड़ामणि दोबारा उसके कमरे में आए। उनके साथ दस सेवक चांदी के थालों में कुछ लाए थे। मंत्री के कहने पर सेवकों ने थाल ज़मीन पर रख दिए और चले गए। ममता ने पूछा कि ये क्या है, तो चूड़ामणि ने थालों पर ढका पर्दा हटा दिया। उसमें चमकती हुई सोने की मुद्राएँ थीं। ममता के पूछने पर चूड़ामणि ने कहा कि यह उसके लिए उपहार है।

ममता ने पूछा कि इतना सोना कहाँ से आया और वे इसका क्या करेंगे? चूड़ामणि ने बताया कि यह भविष्य के लिए है, क्योंकि इस सामंती वंश का पतन तय है। जब मंत्री का पद नहीं रहेगा, तब इस धन की ज़रूरत पड़ेगी। ममता अपने पिता की बात से सहमत नहीं थी। उसने कहा कि वे ब्राह्मण हैं और उन्हें इतने ज़्यादा धन की ज़रूरत नहीं है। उसे लगा कि उन्होंने यह धन विधर्मी शेरशाह से रिश्वत के तौर पर लिया है। ममता ने कहा कि यह 'अर्थ' नहीं 'अनर्थ' है और इसे लौटा देना चाहिए। वह बोली कि वे ब्राह्मण हैं, और कोई हिन्दू उन्हें भिक्षा ज़रूर देगा। उन्हें इतने धन की आवश्यकता नहीं है। इस पर चूड़ामणि "मूर्ख है" कहकर बाहर चले गए।
In simple words: कहानी की शुरुआत में, ममता के पिता चूड़ामणि उसके लिए सोने के सिक्के लाए, जो उन्होंने रिश्वत में लिए थे। ममता ने इसे लेने से मना कर दिया और कहा कि यह अनैतिक धन है, ब्राह्मणों को इसकी ज़रूरत नहीं होती।

🎯 Exam Tip: किसी भी वार्तालाप को अपने शब्दों में लिखते समय, पात्रों की भावनाओं, उनके तर्क और संवाद के परिणाम को स्पष्ट करें।

 

Question. जयशंकर प्रसाद का जीवन-परिचय देकर उनकी साहित्य साधना का उल्लेख कीजिए।
Answer: **जीवन-परिचय:** जयशंकर प्रसाद का जन्म 1889 में काशी (उत्तर प्रदेश) के प्रसिद्ध सुंघनी साहू नामक वैश्य परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम श्रीदेवीप्रसाद था। बाल्यावस्था में ही उनके माता-पिता का देहांत हो गया था। उनके बड़े भाई भी सत्रह वर्ष की आयु में ही चल बसे, जिससे परिवार की पूरी ज़िम्मेदारी उन पर आ गई। उन्होंने घर पर ही हिंदी, संस्कृत, उर्दू और फ़ारसी का गहन अध्ययन किया।

**साहित्यिक साधना:** प्रसाद जी ने अपनी साहित्यिक यात्रा ब्रजभाषा में 'कलाधर' नाम से कविताएँ लिखकर शुरू की थी। बाद में वे खड़ी बोली में लिखने लगे और हिंदी की छायावादी काव्यधारा के प्रमुख कवि बने। गद्य के क्षेत्र में भी उन्होंने उत्कृष्ट ऐतिहासिक नाटक, उपन्यास, कहानियाँ और निबंध लिखे। उनकी भाषा शुद्ध, साहित्यिक और संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली थी, जिसमें कहीं-कहीं अंग्रेज़ी और उर्दू के शब्द भी मिलते हैं। उनकी भाषा परिमार्जित और तत्सम प्रधान थी, जिसमें भावात्मक, वर्णनात्मक, शब्द-चित्रात्मक, आलंकारिक, सूत्र कथन और संवाद शैलियों का प्रयोग किया गया है। प्रसाद जी ने हिंदी साहित्य की वृद्धि में असाधारण योगदान दिया।

**प्रमुख रचनाएँ:** * **नाटक:** 'चंद्रगुप्त', 'स्कंदगुप्त', 'अजातशत्रु', 'राज्यश्री', 'ध्रुवस्वामिनी', 'जनमेजय का नागयज्ञ'। * **उपन्यास:** 'कंकाल', 'तितली', 'इरावती' (अपूर्ण)। * **कहानी-संग्रह:** 'इंद्रजाल', 'आँधी', 'छाया', 'प्रति ध्वनि', 'आकाशदीप'। * **काव्य:** 'कामायनी' (महाकाव्य), 'झरना', 'लहर', 'प्रेम-पथिक', 'आँसू' आदि। अन्य रचनाएँ: 'एक घूँट', 'कामना', 'करुणालय', 'कल्याणी', 'परिणय', 'अग्निमित्र', 'प्रायश्चित्त', 'सज्जन'।

जयशंकर प्रसाद आधुनिक हिंदी साहित्य के एक बहुमुखी और प्रतिभाशाली रचनाकार थे जिन्होंने अपनी कृतियों से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया।
In simple words: जयशंकर प्रसाद का जन्म काशी में 1889 में हुआ था। वे पहले ब्रजभाषा में लिखते थे, फिर खड़ी बोली में आए और छायावादी कवि बने। उन्होंने कई नाटक, उपन्यास, कहानियाँ और कविताएँ लिखीं, जैसे 'कामायनी', 'चंद्रगुप्त', और 'कंकाल'।

🎯 Exam Tip: किसी भी लेखक या कवि का जीवन-परिचय देते समय, उनके जन्म, शिक्षा, प्रमुख रचनाओं और साहित्य में योगदान को स्पष्ट रूप से बताएँ।

 

Question 7. "........परन्तु वह विधवा थी-हिन्दू-विधवा संसार में सबसे तुच्छ निराश्रये प्राणी है-तब उसकी विडम्बनाक का कहाँ अन्त था?” उपर्युक्त कथन के आधार पर बताइए कि आज हिन्दू-विधवा की क्या दशा है? उसमें सुधार के लिए आप क्या करना चाहेंगे?
Answer: **कथन का आशय:** यह कथन ममता की विधवा स्थिति पर प्रकाश डालता है। इसका अर्थ है कि ममता, मंत्री की बेटी होने और सभी सुख-सुविधाएँ होने के बावजूद, हिन्दू विधवा होने के कारण बहुत दुखी और बेसहारा थी। उस समय हिन्दू समाज में विधवाओं की स्थिति बहुत ही दयनीय मानी जाती थी, और उनके कष्टों का कोई अंत नहीं था। उन्हें समाज में सबसे छोटा और तुच्छ प्राणी माना जाता था।

**आज हिन्दू-विधवा की दशा और सुधार के उपाय:** प्राचीन काल में हिन्दू धर्म में विधवाओं के प्रति बहुत बुरा व्यवहार किया जाता था। उन्हें घर में बचा-खुचा खाना और पुराने कपड़े मिलते थे, और उन्हें दिन-रात सबकी सेवा में लगना पड़ता था। उन्हें प्रेम या सहानुभूति नहीं मिलती थी। बंगाल जैसे क्षेत्रों में तो उनके सिर मुंडवाकर उन्हें घर से निकाल दिया जाता था।

आज हिन्दू विधवाओं की दशा में बहुत सुधार हुआ है। यह समाज सुधारकों के प्रयासों और शिक्षा के प्रसार के कारण संभव हुआ है। हालाँकि, अभी भी उन्हें समाज और परिवार में वह सम्मान नहीं मिलता जो उन्हें मिलना चाहिए। विधवा पुनर्विवाह होने लगे हैं, लेकिन उनकी संख्या अभी भी कम है और उन्हें पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया जाता। मुंशी प्रेमचंद जैसे कुछ उत्साही लोग ही इस दिशा में काम कर पाए हैं।

**सुधार के लिए मेरे प्रयास:** मैं विधवा स्त्रियों की दशा सुधारने के लिए उनके पुनर्विवाह पर ज़ोर दूँगा। मैं उन्हें समाज और परिवार में सम्मान और अधिकार दिलाने की कोशिश करूँगा। मैं उन्हें विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर शिक्षित करूँगा। मैं उन्हें कानूनी अधिकार दिलाने का भी प्रयास करूँगा, जैसे पिता और पति की संपत्ति में उनके अधिकारों को सुनिश्चित करना। विधवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए उन्हें रोज़गार के अवसर प्रदान करने पर भी बल दूँगा।
In simple words: पहले विधवाओं की हालत बहुत खराब थी, उन्हें कोई सम्मान नहीं मिलता था। आज शिक्षा और सुधारों से स्थिति बेहतर हुई है, पर अभी भी उन्हें पूरा सम्मान और अधिकार मिलना बाकी है। मैं उनके पुनर्विवाह, शिक्षा और संपत्ति के अधिकार के लिए काम करूँगा।

🎯 Exam Tip: किसी सामाजिक समस्या पर आधारित प्रश्न का उत्तर देते समय, पहले समस्या का वर्णन करें, फिर वर्तमान स्थिति और अंत में सुधार के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत करें।

साहित्यिक परिचय

आरम्भ में प्रसाद ब्रजभाषा में 'कलाधर' नाम से कविताएँ लिखते थे। बाद में वे खड़ी बोली में लिखने लगे। आप हिन्दी की छायावादी काव्यधारा के प्रमुख कवि थे। गद्य के क्षेत्र में प्रसाद ने श्रेष्ठ ऐतिहासिक नाटक, उपन्यास, कहानियाँ तथा निबन्ध लिखे हैं। प्रसाद की भाषा शुद्ध, साहित्यिक, संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली है। उसमें कहीं-कहीं अंग्रेजी, उर्दू आदि के शब्द भी मिलते हैं। भाषा परिमार्जित और तत्सम प्रधान है। प्रसाद जी ने वर्ण्य विषय तथा भावों के अनुसार भावात्मक, वर्णनात्मक, शब्द-चित्रात्मक, आलंकारिक, सूत्र कथन और संवाद शैलियों का प्रयोग किया है। प्रसाद ने हिन्दी साहित्य की उन्नति में अपूर्व योगदान दिया है।

कृतियाँ-प्रसाद जी की प्रमुख रचनाएँ इस प्रकार हैं: नाटक-चन्द्रगुप्त, स्कन्दगुप्त, अजातशत्रु, राज्यश्री, ध्रुवस्वामिनी, जनमेजय का नागयज्ञ। उपन्यास-कंकाल, तितली, इरावती (अपूर्ण)।

कहानी-संग्रह

इन्द्रजाल, आँधी, छाया, प्रति ध्वनि, आकाशदीप। निबन्ध-काव्य-कला और अन्य (महाकाव्य), झरना, लहर, प्रेम-पथिक, आँसू आदि। एक चूंट, कामना, करुणालय कल्याणी, परिणय, अग्निमित्र प्रायश्चित, सज्जन।

ममता पाठ सारांश

 

Question. 'ममता' शीर्षक कहानी का सारांश लिखिए।
Answer:
'ममता' जयशंकर प्रसाद जी की एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक कहानी है। इसमें एक कर्तव्यपरायण और त्यागी महिला का चित्रण किया गया है।

युवती ममता: ममता रोहतास के किले में एक कमरे में बैठी हुई थी और शोण नदी के बहाव को देख रही थी। वह एक युवती और विधवा थी। चूड़ामणि उसके पिता थे। जब वे कमरे में आए तो ममता का ध्यान भंग नहीं हुआ और वे वापस लौट गए। वे अपनी बेटी के लिए बहुत चिंतित थे। कुछ समय बाद वे फिर लौटे और अपने साथ दस नौकर लाए, जिनके पास चाँदी के थालों में कीमती सोना था। चूड़ामणि रोहतास-दुर्ग के राजा के मंत्री थे। शेरशाह उस पर अधिकार करना चाहता था और उसने यह धन मंत्री को रिश्वत के रूप में दिया था। ममता ने अपने पिता से यह धन लौटा देने को कहा। उसने कहा कि हम ब्राह्मण हैं और हमें इतने धन की जरूरत नहीं है।

दुर्ग का त्याग: अगले दिन डोलियों की कतारें किले के द्वार से अन्दर आ रही थीं। चूड़ामणि ने उनका पर्दा खुलवाना चाहा, लेकिन साथ चल रहे पठान सैनिक तैयार नहीं हुए। बात बढ़ने पर उन्होंने मंत्री चूड़ामणि की हत्या कर दी। डोलियों में छिपे सैनिक बाहर निकले और उन्होंने दुर्ग पर अधिकार कर लिया। शेरशाह के कब्जे में आने से पहले ही ममता दुर्ग छोड़कर जा चुकी थी। सैनिकों ने ममता को बहुत ढूंढा, पर वह नहीं मिली।

ममता का भय और शंका: ममता को डर लगा क्योंकि वह विधर्मी था। शेरशाह ने बलपूर्वक उसके पिता की हत्या करके रोहतास दुर्ग पर कब्जा कर लिया था, और हुमायूँ भी ऐसा ही कर सकता था। उसने पहले हुमायूँ को आश्रय देने से मना कर दिया। छल की आशंका से दुखी होकर हुमायूँ जब जाने लगा, तो ममता को अपने अतिथि सत्कार का धर्म याद आया। उसने हुमायूँ को रोका और अपनी झोपड़ी में ठहरने को कहा। फिर वह झोपड़ी से बाहर चली गई।

खंडहर में छिपी ममता: सुबह हुई। ममता ने खंडहर की एक दरार से देखा कि कई सैनिक घूम रहे थे। वे किसी को ढूंढ रहे थे। वह डरकर छिपने के लिए पेड़ों के बीच चली गई। मुगल हुमायूँ झोपड़ी से बाहर आया। उसने एक सैनिक से ममता को ढूंढने के लिए कहा। बाद में घोड़े पर सवार होकर उसने कहा, "मिर्ज़ा, मैं उस महिला को कुछ नहीं दे सका, जिसने मुझे आश्रय दिया था। तुम यह जगह याद रखना और उसका घर बनवा देना।" इसके बाद वे सब वहां से चले गए।

वृद्धा ममता: ममता अब सत्तर साल की बूढ़ी हो चुकी थी। सर्दी के दिन थे, और उसे खाँसी आती थी जिससे उसका पूरा शरीर हिल जाता था। गाँव की औरतें उसकी सेवा कर रही थीं क्योंकि ममता ने जीवन भर सबके सुख-दुःख में उनका साथ दिया था। जब उसे प्यास लगी तो एक महिला ने उसे पानी पिलाया।

अश्वारोही का आगमन: तभी एक घुड़सवार आया और कह रहा था, "मिर्ज़ा ने जो चित्र दिया है, वह इसी जगह का है। सैंतालीस साल हो गए हैं। वह महिला बूढ़ी होकर मर गई होगी। अब किससे पूछें कि मुगल सम्राट हुमायूँ ने किस झोपड़ी में रात बिताई थी?" ममता ने यह सुना, तो उसे बुलवाया। उसने उसे बताया कि उसे नहीं पता कि वह साधारण मुगल था या सम्राट। उसने बस यह बताया कि हुमायूँ ने यहीं रात बिताई थी। उसने कहा, "अब मैं यह संसार छोड़कर जा रही हूँ। तुम यहाँ मकान बनाओ या महल, मुझे इससे कोई मतलब नहीं है।" इतना कहते ही ममता की आत्मा निकल गई।

अष्टकोण मंदिर: उस जगह पर एक भव्य अष्टकोण मंदिर बनवाया गया। उस पर एक शिलालेख लगा था- "इस स्थान पर मुगल सम्राट हुमायूँ ने विश्राम किया था। उनके बेटे अकबर ने इसी याद में यह भव्य मंदिर बनवाया।" लेकिन इस शिलालेख में ममता का कहीं कोई नाम नहीं था। ममता के त्याग और अतिथि सत्कार को अक्सर भुला दिया जाता है, जबकि उसकी निस्वार्थ सेवा ही उसे अमर बनाती है।
In simple words: ममता की कहानी में एक विधवा लड़की, ममता, की कहानी है, जिसके पिता को रिश्वत लेने के कारण मार दिया जाता है। ममता अपनी झोपड़ी में हुमायूँ को शरण देती है, जो शेरशाह से हारा हुआ होता है। हुमायूँ बाद में उस जगह पर एक मंदिर बनवाता है, पर ममता का नाम उसमें नहीं होता है, जो उसके त्याग को भुला देने को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: किसी भी कहानी का सारांश लिखते समय, मुख्य घटनाओं और पात्रों के चरित्र पर ध्यान दें, और अपनी भाषा में उसे संक्षिप्त रूप से प्रस्तुत करें।

ममता महत्वपूर्ण गद्यांशों की सन्दर्भ-प्रसंग सहित व्याख्याएँ

 

Question 1. रोहतास-दुर्ग के प्रकोष्ठ में बैठी हुई युवती ममता, शोण के तीक्ष्ण गम्भीर प्रवाह को देख रही है। ममता विधवा थी। उसका यौवन शोण के समान ही उमड़ रहा था। मन में वेदना, मस्तक में आँधी, आँखों में पानी की बरसात लिए, वह सुख के कण्टक-शयन में विकल थी। वह रोहतास-दुर्गपति के मन्त्री चूड़ामणि की अकेली दुहिता थी, फिर उसके लिए कुछ अभाव होना असम्भव था, परन्तु वह विधवा थी-हिन्दू-विधवा संसार में सबसे तुच्छ निराश्रय प्राणी है-तब उसकी विडम्बना का कहाँ अन्त था? (पृष्ठ सं, 86)
Answer:
कठिन शब्दों के अर्थ यहाँ दिए गए हैं: प्रकोष्ठ - कमरा। शोण - सोन नदी। तीक्ष्ण - तेज। प्रवाह - बहाव। वेदना - दर्द, पीड़ा। पानी की बरसात - आँसू। कण्टक-शयन - काँटों भरी नींद, कष्टदायक स्थिति। विकल - व्याकुल। दुर्गपति - किले का स्वामी या राजा। दुहिता - बेटी। तुच्छ - छोटी, उपेक्षित। निराश्रय - बेसहारा। विडम्बना - दुर्भाग्य।

प्रस्तुत गद्यांश जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित 'ममता' कहानी से लिया गया है और हमारी पाठ्य-पुस्तक 'सृजन' में संकलित है।

कहानी की नायिका ममता बहुत दुखी थी। लेखक उसका परिचय देते हुए बताते हैं कि वह एक युवती थी, जो रोहतास के किले के एक कमरे में बैठी हुई थी। वहाँ से वह सोन नदी के तेज और गहरे पानी के बहाव को देख रही थी। वह विधवा थी, और उसका यौवन भी सोन नदी के उफान की तरह उमड़ रहा था। ममता के मन में बहुत दर्द था, उसके दिमाग में विचारों का तूफान चल रहा था, और उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। महल का सुख भी उसे काँटों के समान चुभ रहा था। वह रोहतास के किले के राजा के मंत्री चूड़ामणि की इकलौती बेटी थी, इसलिए उसे किसी भी चीज़ की कमी नहीं थी, लेकिन उसका विधवा होना उसे बहुत पीड़ा दे रहा था। हिंदू समाज में विधवा को सबसे छोटा और बेसहारा माना जाता है। उसके इस दुर्भाग्य का अंत संभव नहीं था। यह स्थिति जीवन के बड़े बदलावों और कठिनाइयों को दर्शाती है, खासकर जब व्यक्ति को अकेले ही उनका सामना करना पड़ता है।

विशेष:
(i) कहानीकार ने ममता, जो कहानी की नायिका है, का विस्तृत परिचय दिया है।
(ii) ममता मंत्री की बेटी होते हुए भी, उसका विधवा जीवन एक ऐसी पीड़ा थी जिसका कोई अंत नहीं था।
(iii) भाषा संस्कृतनिष्ठ और परिमार्जित है।
(iv) शैली वर्णनात्मक और चित्रात्मक है।
In simple words: ममता, एक युवा विधवा, अपने किले में बैठी सोन नदी को देख रही थी। उसे धन की कोई कमी नहीं थी, पर उसका विधवा जीवन उसे बहुत दुखी और अकेला महसूस करा रहा था। हिंदू समाज में विधवाओं की स्थिति बहुत कठिन थी, जिससे उसे बहुत दुर्भाग्य महसूस होता था।

🎯 Exam Tip: गद्यांश की व्याख्या करते समय, कठिन शब्दों के अर्थ बताएं, प्रसंग स्पष्ट करें, और व्याख्या को सरल व स्पष्ट भाषा में लिखें। पात्र की मनोदशा को भी ठीक से समझाएं।

 

Question 2. "इस पतनोन्मुख प्राचीन सामन्त-वंश का अन्त समीप है, बेटी! किसी भी दिन शेरशाह रोहिताश्व पर अधिकार कर सकता है, उस दिन मन्त्रित्व न रहेगा, तब के लिए बेटी!” "हे भगवान! तबके लिए! विपद के लिए! इतना आयोजन! परम पिता की इच्छा के विरुद्ध इतना साहस! पिताजी, क्या भीख न मिलेगी? क्या कोई हिन्दू-भू-पृष्ठ पर न बचा रह जायेगा, जो ब्राह्मण को दो मुट्ठी अन्न दे सके? यह असम्भव है। फेर दीजिए पिताजी, मैं काँप रही हूँ-इसकी चमक आँखों को अन्धा बना रही है।” “मूर्ख है'-कहकर चूड़ामणि चले गए। (पृष्ठ सं. 87)
Answer:
कठिन शब्दों के अर्थ यहाँ दिए गए हैं: पतनोन्मुख - पतन की ओर जाने वाला, विनाश के करीब। सामन्त - राजशाही। मन्त्रित्व - मंत्री का पद। आयोजन - व्यवस्था या तैयारी। परमपिता - ईश्वर। भूपृष्ठ - जमीन, धरती। फेरना - लौटाना।

प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'सृजन' में संकलित 'ममता' शीर्षक पाठ से लिया गया है। यह जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित एक ऐतिहासिक कहानी है। इस हिस्से में ममता और उसके पिता चूड़ामणि के बीच बातचीत का वर्णन है, जिसमें ममता अपने पिता के रिश्वत लेने पर आपत्ति जताती है।

ममता के पिता चूड़ामणि दोबारा ममता के कमरे में आए और उनके साथ दस सेवक चाँदी के थालों में कुछ लाए। मंत्री के इशारे पर उन्होंने थालों को ज़मीन पर रख दिया। ममता ने पूछा कि यह क्या है, तो चूड़ामणि ने थालों पर ढका पर्दा हटा दिया। उसमें चमकती हुई स्वर्ण-मुद्राएँ रखी थीं। ममता के पूछने पर चूड़ामणि ने कहा कि यह उसके लिए एक उपहार है।

ममता ने पूछा कि इतना सारा सोना कहाँ से आया और वे इसका क्या करेंगे? चूड़ामणि ने बताया कि यह भविष्य के लिए है क्योंकि इस सामंती वंश का पतन निश्चित है, और तब उनका मंत्री पद नहीं रहेगा। उस समय इस धन की जरूरत पड़ेगी।

ममता अपने पिता से सहमत नहीं हुई। उसने कहा कि वे ब्राह्मण हैं और उन्हें इतने अधिक धन की आवश्यकता नहीं है। उसे लगा कि उन्होंने विधर्मी शेरशाह से रिश्वत ली है। ममता ने कहा कि यह धन सही नहीं, बल्कि गलत है, और इसे लौटा देना चाहिए। वह ब्राह्मण हैं और कोई भी हिंदू उन्हें ज़रूर भीख देगा, उन्हें इतने धन की जरूरत नहीं है। ममता का मानना ​​था कि सिद्धांतों से समझौता करना अस्थायी सुरक्षा के लिए सही नहीं है।

लेकिन चूड़ामणि "मूर्ख है" कहकर वहाँ से चले गए।

विशेष:
(i) इस अंश में चूड़ामणि और ममता के स्वभाव की भिन्नता को दर्शाया गया है।
(ii) चूड़ामणि शेरशाह से रिश्वत के रूप में स्वर्ण-मुद्राएँ स्वीकार करते हैं, लेकिन ममता उसे उपहार के रूप में स्वीकार नहीं करती। वह अपने पिता से इसे लौटाने का आग्रह करती है।
(iii) भाषा संस्कृतनिष्ठ और परिमार्जित है।
(iv) शैली संवादात्मक और काव्यात्मक है।
In simple words: ममता के पिता, चूड़ामणि, शेरशाह से रिश्वत में सोने के सिक्के लाते हैं, ताकि भविष्य में सुरक्षित रह सकें। ममता इसे गलत मानती है और अपने पिता से कहती है कि ब्राह्मणों को धन संग्रह नहीं करना चाहिए, और भगवान पर भरोसा रखना चाहिए। वह इस धन को लौटाने का आग्रह करती है, लेकिन चूड़ामणि उसे मूर्ख कहकर चले जाते हैं।

🎯 Exam Tip: संवादों की व्याख्या करते समय, प्रत्येक पात्र के दृष्टिकोण और उसके पीछे के तर्क को स्पष्ट रूप से समझाएं। बताएं कि संवाद कहानी को कैसे आगे बढ़ाते हैं।

 

Question 3. काशी के उत्तर धर्मचक्र विहार, मौर्य और गुप्त सम्राटों की कीर्ति का खंडहर था। भग्न चूड़ा, तृण-गुल्मों से ढके हए प्राचीर, ईंटों की ढेर में बिखरी हुई भारतीय शिल्प की विभूति, ग्रीष्म की चन्द्रिका में अपने को शीतल कर रही थी। जहाँ पंचवर्गीय भिक्षु गौतम का उपदेश ग्रहण करने के लिए पहले मिले थे, उसी स्तूप के भग्नावशेष की मलिन छाया में एक झोपड़ी के दीपालोक में एक स्त्री पाठ कर रही थी” अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते....... (पृष्ठ सं. 87)
Answer:
कठिन शब्दों के अर्थ यहाँ दिए गए हैं: धर्मचक्र विहार - बौद्ध धर्म का पूजा केंद्र। कीर्ति - यश। खंडहर - टूटा-फूटा मकान। भग्न - टूटा। चूड़ा - शिखर, ऊपर का स्थान। तृण - घास। गुल्म - लता, बेल। प्राचीर - चहारदीवारी या दीवार। शिल्प - भवन-निर्माण कला। चन्द्रिका - चाँदनी। स्तूप - बौद्ध धर्म से संबंधित भवन। भग्नावशेष - टूटने के बाद बचा हुआ भाग, खंडहर। दीपालोक - दीपक का प्रकाश।

प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'सृजन' में संकलित जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कहानी 'ममता' से लिया गया है। ममता रोहतास का दुर्ग छोड़कर अपने पिता की हत्या के बाद काशी के उत्तर में एक बौद्ध विहार के खंडहर में झोपड़ी बनाकर रहने लगी थी।

लेखक बताते हैं कि काशी शहर के उत्तर में बौद्ध धर्म का उपासना केंद्र यानी विहार था, जो अब पूरी तरह से टूट-फूट गया था। इस विहार को मौर्य और गुप्त सम्राटों ने बनवाया था, जो दोनों ही बौद्ध धर्म के अनुयायी थे। इस विहार के खंडहरों को देखकर उन सम्राटों का यश स्पष्ट होता था। इस विहार के ऊपरी हिस्से टूट गए थे, और इसकी दीवारें घास-फूस और लताओं से ढकी थीं। भारतीय भवन निर्माण कला के ये प्रमाण, यह विहार टूट गया था, और उसकी ईंटें इधर-उधर बिखरी पड़ी थीं। गर्मियों का मौसम था और चंद्रमा की रोशनी इसे ठंडा कर रही थी। वहाँ एक स्तूप का खंडहर था, जहाँ पंचवर्गीय भिक्षुओं ने गौतम बुद्ध का उपदेश सुनने और उनके शिष्य बनने के लिए एकत्रित हुए थे। उसी स्तूप की हल्की छाया में एक झोपड़ी बनी थी। उसमें एक दीपक जल रहा था, और झोपड़ी में बैठी एक महिला दीपक के धीमे प्रकाश में धार्मिक पाठ कर रही थी, जिसका अर्थ है, "जो लोग मुझे ही अपना अनन्या मानकर मेरी उपासना करते हैं..." यह वर्णन उस समय के वैभव और वर्तमान के एकांत के बीच एक गहरा अंतर दिखाता है, जहाँ एक बार के महान स्थान अब शांति और ध्यान का केंद्र बन गए हैं।
In simple words: काशी के उत्तर में मौर्य और गुप्त सम्राटों द्वारा बनवाया गया एक पुराना बौद्ध विहार अब खंडहर बन गया है। इस टूटे-फूटे विहार के पास एक झोपड़ी में ममता रहती थी, जहाँ वह रात में दीपक की रोशनी में धार्मिक पाठ करती थी। यह स्थान प्राचीन भव्यता और वर्तमान के एकांत का प्रतीक था।

🎯 Exam Tip: किसी स्थान का वर्णन करते समय, उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वर्तमान स्थिति और उससे जुड़ी किसी भी भावना को स्पष्ट करें। प्रकृति और मानवीय तत्वों के बीच के संबंध को भी दर्शाएं।

 

Question 4. "परन्तु तुम भी वैसे ही क्रूर हो, वही भीषण रक्त की प्यास, वही निष्ठुर प्रतिबिम्ब, तुम्हारे मुख पर भी है! सैनिक! मेरी कुटी में स्थान नहीं। जाओ, कहीं दूसरा आश्रय खोज लो।” “गला सूख रहा है, साथी छूट गये हैं, अश्व गिर पड़ा है-इतना थका हुआ हूँ-इतना!” कहते-कहते वह व्यक्ति धम से बैठ गया और उसके सामने ब्रह्माण्ड घूमने लगा। स्त्री ने सोचा, यह विपत्ति कहाँ से आई। उसने जल दिया, मुगल के प्राणों की रक्षा हुई। वह सोचने लगी- “ये सब विधर्मी दया के पात्र नहीं-मेरे पिता का वध करने वाले आततायी!” घृणा से उसका मन विरक्त हो गया। स्वस्थ होकर मुगल ने कहा- “माता! तो फिर मैं चला जाऊँ?” स्त्री विचार कर रही थी-“मैं ब्राह्मणी हूँ, मुझे तो अपने धर्म-अतिथिदेव की उपासना का पालन करना चाहिए। परन्तु यहाँ..... नहीं नहीं ये सब विधर्मी दया के पात्र नहीं। परन्तु यह दया तो नहीं...... कर्तव्य करना है। तब?” (पृष्ठ सं. 88)
Answer:
कठिन शब्दों के अर्थ यहाँ दिए गए हैं: क्रूर - निर्दयी। निष्ठुर - कठोर, निर्दयतापूर्ण। प्रतिबिम्ब - छाया या प्रतिरूप। आश्रय - शरणस्थल। ब्रह्माण्ड - पूरा संसार। विधर्मी - अपने धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाला। आततायी - दुष्ट, अशांति फैलाने वाला। विरक्त - उदासीन या विरक्त होना। अतिथि देव की उपासना - अतिथि को देवता मानकर उसका सत्कार करना।

प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'सृजन' में संकलित 'ममता' शीर्षक कहानी से लिया गया है। इसके रचयिता जयशंकर प्रसाद हैं। इस अंश में ममता के मन में हुमायूँ को शरण देने को लेकर उत्पन्न दुविधा का वर्णन है।

ममता ने मुगल (हुमायूँ) से शरण माँगने के बाद, उसे अपनी झोपड़ी में रात बिताने की अनुमति दी थी। उसने बताया था कि वह चौसा के युद्ध में शेरशाह से हारकर भटक रहा था। वह थका हुआ था और किसी सुरक्षित स्थान पर रात बिताना चाहता था।

व्याख्या-ममता ने मुगल की बात सुनकर कहा कि "तुम भी शेरशाह की तरह ही निर्दयी लगते हो। तुम्हारे चेहरे पर भी वैसी ही निर्दयता दिखती है। तुम भी खून के प्यासे हो।" यह कहते हुए ममता ने उसे अपनी झोपड़ी में शरण देने से मना कर दिया और कहा कि वह कोई दूसरा स्थान ढूंढ ले। उस मुगल ने बताया कि उसे बहुत प्यास लगी है, उसका गला सूख रहा है। उसके साथी पीछे छूट गए हैं, और उसका घोड़ा गिर गया है। वह बहुत थका हुआ है। यह बताते-बताते वह धम्म से ज़मीन पर बैठ गया, और उसे लगा जैसे पूरा संसार घूम रहा हो। उसकी इस दयनीय हालत देखकर ममता ने सोचा कि यह क्या मुसीबत आ गई है। उसने मुगल को पानी पिलाया, जिससे उसकी जान में जान आई और वह थोड़ा स्वस्थ हुआ।

ममता ने सोचा कि वह भी शेरशाह की तरह दूसरे और पराये धर्म को मानने वाला है, और ऐसे लोगों पर दया नहीं करनी चाहिए। उसने सोचा कि इन्हीं दुष्टों ने उसके पिता को मारा था। उसके मन में घृणा पैदा हो गई थी, जिससे उसके मन से प्रेम का भाव खत्म हो गया था। जब मुगल थोड़ा स्वस्थ हुआ, तो उसने पूछा, "माता! तो मैं चला जाऊँ?" ममता ने विचार किया कि वह ब्राह्मण जाति की स्त्री है, और उसे अपने धर्म, यानी अतिथि सत्कार का पालन करना चाहिए। फिर उसने सोचा कि उसे उन सभी विधर्मियों पर दया नहीं दिखानी चाहिए क्योंकि वे दया के योग्य नहीं हैं। उसके मन में यह द्वंद्व चल रहा था। वह सोच रही थी कि यह सिर्फ दया नहीं, बल्कि अतिथि सत्कार का अपना कर्तव्य है, तो उसे क्या करना चाहिए? यह आंतरिक संघर्ष दिखाता है कि व्यक्ति अपने नैतिक सिद्धांतों और व्यक्तिगत भावनाओं के बीच कैसे फंसा रहता है।
In simple words: हुमायूँ, शेरशाह से हारकर थका-हारा ममता की झोपड़ी में शरण मांगता है। ममता पहले तो उसे निर्दयी समझकर मना करती है, पर उसकी दयनीय हालत देखकर पानी पिलाती है। फिर वह धर्म और अतिथि सत्कार के कर्तव्य और अपने पिता की हत्या का बदला लेने की इच्छा के बीच उलझ जाती है।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के आंतरिक द्वंद्व को समझाते समय, उसके विचारों और भावनाओं को स्पष्ट करें। बताएं कि वह किन दो बातों के बीच फंसा हुआ है, और उसके फैसले का क्या आधार है।

 

Question 5. ममता ने मन में कहा-"यहाँ कौन दुर्ग है! यही झोपड़ीन, जो चाहे ले-ले, मझे तो अपना कर्तव्य करना पड़ेगा।” वह बाहर चली आई और मुगल से बोली-"जाओ भीतर, थके हुए भयभीत पथिक! तुम चाहे कोई हो, मैं तुम्हें आश्रय देती हूँ। मैं ब्राह्मण-कुमारी हूँ, सब अपना धर्म छोड़ दें, तो मैं भी क्यों छोड़ दूँ? मुगल ने चन्द्रमा के मन्द प्रकाश में वह महिमामय मुखमण्डल देखा, उसने मन-ही-मन नमस्कार किया। ममता पास की टूटी हुई दीवारों में चली गई। भीतर, थके पथिक ने झोपड़ी में विश्राम किया। (पृष्ठ सं. 88)
Answer:
कठिन शब्दों के अर्थ यहाँ दिए गए हैं: दुर्ग - किला। भयभीत - डरा हुआ। धर्म - कर्तव्य।

प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक 'सृजन' में संकलित 'ममता' शीर्षक कहानी से लिया गया है। इसके रचयिता जयशंकर प्रसाद हैं। ममता ने शरण माँगने वाले मुगल से यह कहा था कि वह उसके साथ छल तो नहीं करेगा। 'छल' शब्द सुनकर मुगल आहत हुआ और वहाँ से जाने को तैयार हो गया।

व्याख्या-ममता ने अपने मन में सोचा कि उसे मुगल को आश्रय देना चाहिए। उसके पास एक मामूली सी झोपड़ी ही तो है, वह किसी किले की मालकिन तो है नहीं। इस झोपड़ी को जो चाहे ले ले, उसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उसे अपने अतिथि सत्कार के कर्तव्य से पीछे नहीं हटना चाहिए। यह सोचकर ममता ने मुगल को रोका। वह झोपड़ी से बाहर आई और मुगल से बोली, "जाओ भीतर, थके हुए और डरे हुए पथिक! तुम चाहे कोई भी हो, मैं तुम्हें आश्रय देती हूँ। मैं ब्राह्मण-कुमारी हूँ, सब अपना धर्म छोड़ दें, तो मैं भी क्यों छोड़ूँ?" मुगल ने चाँदनी के हल्के प्रकाश में उसका महिमामय चेहरा देखा और मन ही मन उसे नमस्कार किया। ममता पास की टूटी हुई दीवारों के पीछे चली गई। भीतर, थके हुए पथिक ने झोपड़ी में विश्राम किया। इस क्षण में ममता ने मानवीयता का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत किया, जहां निस्वार्थ सेवा और कर्तव्यपरायणता ने व्यक्तिगत भय और घृणा को पीछे छोड़ दिया।

विशेष:
(i) ममता की उदारता और शरणागतवत्सलता (शरण में आए व्यक्ति के प्रति दया) का भव्य चित्रण हुआ है।
(ii) वह घृणा और भय से मुक्त होकर मुगल को अपनी झोपड़ी में आश्रय प्रदान करती है।
(iii) भाषा प्रवाहपूर्ण, संस्कृतनिष्ठ और तत्समता प्रधान है।
(iv) शैली संवादात्मक है।
In simple words: ममता ने अपने मन में सोचा कि उसे अपना कर्तव्य निभाते हुए मुगल को अपनी झोपड़ी में शरण देनी चाहिए, क्योंकि उसे झोपड़ी खोने का कोई डर नहीं था। उसने हुमायूँ को भीतर आने को कहा, और हुमायूँ ने उसकी उदारता को देखकर मन ही मन सम्मान किया।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के चरित्र की उदारता या विशेष गुणों को दर्शाने वाले गद्यांशों में, बताएं कि पात्र ने किस भावना के साथ कार्य किया और उसका महत्व क्या था।

 

Question 6. अश्वारोही पास आया। ममता ने रुक-रुककर कहा-'मैं नहीं जानती कि वह शहंशाह था या साधारण मुगल, पर एक दिन इसी झोपड़ी के नीचे वह रहा। मैंने सुना था कि वह मेरा घर बनवाने की आज्ञा दे चुका था! भगवान ने सुन लिया, मैं आज इसे छोड़े जाती हूँ। अब तुम इसका मकान बनाओ या महल, मैं अपने चिर-विश्राम-गृह में जाती हूँ।' वह अश्वारोही अवाक् खड़ा था। बुढ़िया के प्राण-पक्षी अनन्त में उड़ गये। वहाँ एक अष्टकोण मन्दिर बना और उस पर शिलालेख लगाया गया 'सातों देश के नरेश हुमायूँ ने एक दिन यहाँ विश्राम किया था। उनके पुत्र अकबर ने उनकी स्मृति में यह गगनचुम्बी मन्दिर बनाया।' पर उसमें ममता का कहीं नाम नहीं। (पृष्ठ सं. 89)
Answer:
ममता सत्तर वर्ष की बूढ़ी, बीमार और मरणासन्न थी। उसी समय उसकी झोपड़ी के द्वार पर एक घुड़सवार आया, जो उस स्थान को ढूंढ रहा था जहाँ कभी हुमायूँ ने रात बिताई थी।

व्याख्या-ममता ने घुड़सवार की बात सुन ली थी और उसे अपने पास बुलाया। घुड़सवार जब उसके पास आया, तो ममता ने रुक-रुककर उसे बताया कि वह जिस स्थान को ढूंढ रहा है, वह यही स्थान है। उसने बताया कि इसी झोपड़ी में कभी एक मुगल सैनिक ने रात बिताई थी। उसे नहीं पता था कि वह साधारण मुगल था या कोई बादशाह। उसने बस इतना सुना था कि हुमायूँ ने उसका घर बनवाने का आदेश दिया था। उसने कहा, "आज ईश्वर ने मेरी बात सुन ली है और मेरा बुलावा आ गया है। मैं इस झोपड़ी को छोड़कर जा रही हूँ। अब वे लोग इसका मकान बनाएँ या महल, यह उनकी मर्जी है। मैं तो अपने स्थायी निवास स्थान, यानी परलोक जा रही हूँ।" यह कहते-कहते ममता ने प्राण त्याग दिए। उस स्थान पर एक बहुत ऊँचा और भव्य आठ कोने वाला भवन बनाया गया। उस पर एक पत्थर का शिलालेख लगा था, जिसमें लिखा था- "यहाँ बादशाह हुमायूँ ने एक रात विश्राम किया था। उस घटना को यादगार बनाने के लिए उनके पुत्र अकबर ने इस आकाश को छूने वाले ऊँचे भवन को बनवाया।" लेकिन इस शिलालेख में ममता का कहीं नाम नहीं था। यह घटना दिखाती है कि कैसे इतिहास में महान लोगों की कहानियों को याद रखा जाता है, जबकि निस्वार्थ सेवा करने वाले साधारण लोगों को अक्सर भुला दिया जाता है।

विशेष:
(i) ममता के अंतिम समय का वर्णन किया गया है।
(ii) शिलालेख में ममता का नाम न होना उसकी उपेक्षा का प्रतीक है। मंदिर बनाने वालों को यह तो याद था कि हुमायूँ कहाँ रुका था, लेकिन ममता की उदारता और त्याग पर उनका ध्यान नहीं गया।
(iii) भाषा संस्कृतनिष्ठ, तत्सम प्रधान और प्रवाहपूर्ण है।
(iv) शैली वर्णनात्मक है। अंतिम पंक्ति व्यंग्यपूर्ण है।
In simple words: एक घुड़सवार हुमायूँ के विश्राम स्थल को ढूंढते हुए ममता की झोपड़ी पर आया। ममता ने अपनी अंतिम साँस लेते हुए उसे बताया कि हुमायूँ ने यहीं रात बिताई थी और उसका घर बनवाने का आदेश दिया था। ममता की मृत्यु के बाद, उस स्थान पर एक भव्य मंदिर बनवाया गया, लेकिन शिलालेख पर ममता का नाम नहीं था, जो उसके त्याग को भुला देने को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: इतिहास से संबंधित किसी घटना का वर्णन करते समय, तथ्यों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें। साथ ही, कहानी के नैतिक या भावनात्मक संदेश को भी उजागर करें, जैसे कि ममता के मामले में त्याग को भुला दिया जाना।

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