RBSE Solutions Class 12 Geography Chapter 9 द्वितीयक व्यवसाय

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Class 12 Geography Chapter 9 द्वितीयक व्यवसाय RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Geography Chapter 9 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Geography Chapter 9 बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. निम्नलिखित में से कौन-सा शक्ति का साधन नहीं है?
(अ) कोयला
(ब) पेट्रोलियम
(स) जल विद्युत
(द) ताँबा
Answer: (द) ताँबा
In simple words: ताँबा एक धातु है और इसका उपयोग बिजली पैदा करने के लिए सीधे नहीं किया जाता, जबकि कोयला, पेट्रोलियम और जल विद्युत सभी ऊर्जा के स्रोत हैं.

🎯 Exam Tip: ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों को पहचानना और उनमें से कौन-सा धातु नहीं है, यह समझना महत्वपूर्ण है.

 

Question 2. वह देश जिसमें कच्चे माल न्यून होने पर भी उद्योगों का विकास हुआ है?
(अ) जापान
(ब) भारत
(स) पेट्रोलियम
(द) प्राकृतिक गैस
Answer: (अ) जापान
In simple words: जापान के पास प्राकृतिक कच्चे माल बहुत कम हैं, लेकिन उसने अच्छी तकनीक और कड़ी मेहनत से अपने उद्योगों को बहुत विकसित किया है.

🎯 Exam Tip: जापान का उदाहरण दिखाता है कि कैसे तकनीकी नवाचार और मानव संसाधन कच्चे माल की कमी को दूर कर सकते हैं.

 

Question 4. कौन-सा कथन कुटीर उद्योगों से सम्बन्धित नहीं है?
(अ) स्थानीय कच्चा माल
(ब) परिवार के सदस्यों द्वारा श्रम
(स) उत्पाद की कम मात्रा
(द) अधिक पूंजी
Answer: (द) अधिक पूंजी
In simple words: कुटीर उद्योग छोटे पैमाने पर होते हैं और उनमें बहुत कम पैसा लगता है. इसलिए, 'अधिक पूंजी' कुटीर उद्योगों की पहचान नहीं है.

🎯 Exam Tip: कुटीर उद्योगों की मुख्य विशेषताओं को याद रखें, जैसे स्थानीय कच्चे माल का उपयोग और पारिवारिक श्रम.

 

Question 5. निम्नलिखित में से कौन-सा कृषि आधारित उद्योग नहीं है?
(अ) सूती वस्त्र उद्योग
(ब) रबड़े उद्योग
(स) सीमेण्ट उद्योग
(द) वनस्पति तेल उद्योग
Answer: (स) सीमेण्ट उद्योग
In simple words: सूती वस्त्र, रबर और वनस्पति तेल उद्योग सीधे खेती से मिलने वाले उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन सीमेंट उद्योग पत्थर और खनिजों से बनता है, खेती से नहीं.

🎯 Exam Tip: उद्योगों को उनके कच्चे माल के स्रोत के आधार पर वर्गीकृत करना सीखें, जैसे कृषि-आधारित या खनिज-आधारित.

 

Question 6. वनोत्पाद आधारित उद्योग है –
(अ) चमड़ा उद्योग
(ब) चीनी उद्योग
(स) कागज उद्योग
(द) एल्युमिनियम उद्योग
Answer: (स) कागज उद्योग
In simple words: कागज पेड़ों से बनता है, इसलिए यह वन उत्पादों पर आधारित है. चमड़ा जानवरों से, चीनी गन्ने से और एल्यूमीनियम बॉक्साइट अयस्क से बनता है.

🎯 Exam Tip: विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चे माल के स्रोत को जानना महत्वपूर्ण है. वन उत्पाद पेड़ों और अन्य जंगल से मिलने वाली चीजें होती हैं.

 

Question 7. निम्नलिखित में से कौन-सा चीन का प्रमुख लौह-इस्पात उत्पादक क्षेत्र है?
(अ) मंचूरिया
(ब) नागासाकी-यावाता
(स) पिट्सबर्ग-टंगस्टन
(द) पिट्सबर्ग,
Answer: (अ) मंचूरिया
In simple words: मंचूरिया चीन का एक बड़ा इलाका है जहाँ बहुत सारा लोहा और स्टील बनता है. बाकी विकल्प दूसरे देशों के क्षेत्र हैं.

🎯 Exam Tip: प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों और वे किस देश में हैं, इसका मिलान करना सीखें.

RBSE Class 12 Geography Chapter 9 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारत के प्रमुख लौह-इस्पात केन्द्र कौन-से कोयला क्षेत्र के समीप अवस्थित हैं?
Answer: भारत के अधिकांश लौह-इस्पात केन्द्र दामोदर घाटी में झरिया व रानीगंज कोयला खदानों के निकट स्थापित हैं। यहाँ कोयला आसानी से मिल जाता है.
In simple words: भारत में ज्यादातर लोहा-इस्पात कारखाने झरिया और रानीगंज की कोयला खदानों के पास हैं, जो दामोदर घाटी में हैं.

🎯 Exam Tip: याद रखें कि लौह-इस्पात उद्योग अक्सर कोयला खदानों के पास स्थापित होते हैं क्योंकि कोयला एक महत्वपूर्ण कच्चा माल और ऊर्जा स्रोत है.

 

Question 2. लौह-इस्पात निर्माण की विधियों के नाम बताइए।
Answer: आधुनिक लौह-इस्पात निर्माण की तीन प्रमुख विधियाँ प्रचलन में हैं –
1. बेसीमर विधि
2. उन्मुक्त भट्टी विधि तथा
3. विद्युत भट्टी विधि।
In simple words: लोहा और स्टील बनाने के तीन मुख्य तरीके हैं: बेसीमर विधि, खुली भट्टी विधि और बिजली की भट्टी विधि.

🎯 Exam Tip: लौह-इस्पात उत्पादन की इन विधियों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये उद्योग के मूल हैं.

RBSE Class 12 Geography Chapter 9 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. लौह-इस्पात उत्पादक देशों के नाम बताइए।
Answer: लौह-इस्पात उद्योगों का केन्द्रीकरण अमेरिका, यूरोप तथा एशिया के विकसित देशों में हुआ है। चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, रूस और जर्मनी विश्व के प्रमुख लौह-इस्पात उत्पादक देश हैं। इसके अलावा दक्षिण कोरिया, यूक्रेन, ब्राजील, इटली व भारत में भी लौह-इस्पात का उत्पादन होता है। चीन विश्व का सबसे बड़ा तथा जापान दूसरा बड़ा इस्पात उत्पादक देश है। लोहे-इस्पात का उपयोग कई उद्योगों में होता है.
In simple words: चीन, अमेरिका, जापान, रूस, जर्मनी दुनिया के बड़े लोहा-इस्पात बनाने वाले देश हैं. दक्षिण कोरिया, यूक्रेन, ब्राजील, इटली और भारत भी इसे बनाते हैं. चीन सबसे बड़ा उत्पादक है और जापान दूसरे नंबर पर है.

🎯 Exam Tip: विश्व के प्रमुख लौह-इस्पात उत्पादक देशों के नाम और उनके उत्पादन के क्रम को याद रखें.

 

Question 2. वस्त्र निर्माण उद्योग का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer: वस्त्र निर्माण उद्योग का आरम्भ कुटीर उद्योगों से हुआ। आज यह मुख्य औद्योगिक देशों में उच्च कोटि का उद्योग हो गया है। बड़े पैमाने के उद्योगों का सूत्रपात औद्योगिक क्रान्ति के बाद हुआ। इन उद्योगों में विभिन्न प्रकार के कच्चे माल, शक्ति के साधन, विस्तृत बाजार, कुशल श्रमिक, अधिक पूंजी तथा उच्च प्रौद्योगिकी की आवश्यकता होती है। उत्पाद की गुणवत्ता तथा उत्पादन में विशिष्टीकरण इनकी विशेषताएँ हैं। उत्पादित माल का निर्यात किया जाता है। सीमेण्ट, पेट्रोलियम, लौह-इस्पात आदि बड़े पैमाने के उद्योग हैं। ऐसी विशेषताओं से युक्त उद्योग बड़े पैमाने के उद्योग कहलाते हैं।
In simple words: कपड़ा बनाने का काम पहले घरों में छोटे स्तर पर शुरू हुआ था. अब यह बड़े-बड़े कारखानों में होता है, जहाँ बहुत पैसा, मशीनें, कच्चा माल और कुशल लोग काम करते हैं. ये कारखाने अच्छी गुणवत्ता के कपड़े बनाते हैं और उन्हें दूसरे देशों में भी बेचते हैं.

🎯 Exam Tip: वस्त्र उद्योग के विकास और बड़े पैमाने के उद्योगों की प्रमुख विशेषताओं को संक्षेप में बताएं, जिसमें उत्पादन के कारक शामिल हों.

 

Question 4. जापान में लौह-इस्पात उद्योग का वर्णन कीजिए।
Answer: लौह-इस्पात उद्योग की दृष्टि से जापान विश्व का दूसरा प्रमुख उत्पादक देश है। यहाँ कच्चे माल की कमी है। किन्तु उत्कृष्ट तकनीकी, यातायात के साधनों, पर्याप्त पूंजी व सरकारी नीतियों के कारण यहाँ इस्पात उद्योग विकसित अवस्था में है। यहाँ के प्रमुख इस्पात उत्पादक क्षेत्र निम्नलिखित हैं -
1. नागासाकी-यावाता क्षेत्रः यह क्षेत्र उत्तरी क्यूशू द्वीप में स्थित है। इसके मुख्य केन्द्र यावाता, नागासाकी, कोकुरा, मौजी तथा शिमोनोसेकी है।
2. कोबे-ओसाका क्षेत्र: यह होशू द्वीप में स्थित है। इसके मुख्य केन्द्रों में कोबे, ओसाका, हिरोहिता तथा सिकाई है।
3. टोकियो-याकोहामा क्षेत्र: यह होशू द्वीप में स्थित है। इसके प्रमुख केन्द्रों में टोकियो, याकोहामा तथा कावासाकी है।
4. मुरोरान क्षेत्रः यह होकैडो द्वीप के दक्षिणी भाग में स्थित है। इसके प्रमुख केन्द्रों में मुरोरान, वैनिशी तथा इशीकारी है।
In simple words: जापान दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा लोहा-इस्पात बनाने वाला देश है. भले ही उसके पास कच्चा माल कम हो, लेकिन अच्छी तकनीक, परिवहन और सरकारी मदद से यह उद्योग यहाँ बहुत विकसित है. नागासाकी-यावाता, कोबे-ओसाका, टोकियो-याकोहामा और मुरोरान यहाँ के मुख्य इस्पात क्षेत्र हैं.

🎯 Exam Tip: जापान में लौह-इस्पात उद्योग के विकास के कारणों (तकनीक, पूंजी) और उसके प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों के नाम याद रखें.

 

Question 5. ऊनी वस्त्र उद्योग का वर्णन कीजिए।
Answer: ऊनी वस्त्र उद्योग विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उद्योग है। इस उद्योग का विकास 17 वीं शताब्दी में इंग्लैण्ड में हुआ। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान में आधुनिक मशीनों के आविष्कार से इस उद्योग में तेजी आई। स्थानीयकरण के कारक-ऊनी वस्त्र उद्योग के प्रमुख स्थानीयकरण के कारक हैं-
1. कच्चे माल की प्राप्ति
2. बाजार
3. कुशल श्रम
4. स्वच्छ जल की आपूर्ति
5. शक्ति साधनों की उपलब्धता
In simple words: ऊनी वस्त्र उद्योग दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उद्योग है, जो 17वीं सदी में इंग्लैंड में शुरू हुआ था. जापान में आधुनिक मशीनों के आने से यह तेजी से बढ़ा. इसके मुख्य स्थान निर्धारण के कारण हैं कच्चे माल की उपलब्धता, बाजार, कुशल मजदूर, साफ पानी और बिजली.

🎯 Exam Tip: ऊनी वस्त्र उद्योग के ऐतिहासिक विकास, प्रमुख स्थान निर्धारण कारकों और इसके महत्व को ध्यान में रखें.

RBSE Class 12 Geography Chapter 9 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. उद्योगों के स्थानीयकरण के कारकों का वर्णन कीजिए।
Answer: वे कारक जो किसी उद्योग की स्थापना में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं उन्हें स्थानीयकरण के कारकों के रूप में जाना जाता है। उद्योगों के स्थानीयकरण के प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं –
1. कच्चा मालः कच्चा माल किसी उद्योग का आधार है। कच्चा माल सुगमतापूर्वक पर्याप्त तथा सस्ते दर पर उपलब्ध होना चाहिए। जिन उद्योगों में प्रयुक्त कच्चा माल भारी, सस्ता तथा निर्माण के दौरान वजन कम हो जाता है, वे उद्योग कच्चे माल के स्त्रोत के समीप अवस्थित होते हैं। इसी प्रकार जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं से सम्बन्धित उद्योग फल, सब्जी दूध, मछली आदि कच्चे मालों के स्त्रोत के समीप ही स्थापित होते हैं। गैर-ह्रास मूल को उद्योग जैसे सूती वस्त्र उद्योग इनके कच्चे माल के स्त्रोत अथवा बाजार कहीं भी स्थापित किये जा सकते हैं। इससे परिवहन व्यय में कोई अन्तर नहीं आता है।
2. शक्ति के साधनः कोयला, पेट्रोलियम, जल विद्युत, प्राकृतिक गैस, परमाणु ऊर्जा प्रमुख शक्ति संसाधन हैं। लौह-इस्पात उद्योग कोयले की खदानों के समीप स्थापित होते हैं। जल विद्युत उत्पादक क्षेत्रों में स्थापित होते हैं। जल विद्युत तारों से सम्प्रेषण व पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस में पाइपलाइन सुविधाजनक है। अतएव उद्योगों में विकेन्द्रीकरण की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
3. परिवहन व संचार के साधनः परिवहन लागत का औद्योगिक इकाई की अवस्थिति में महत्वपूर्ण स्थान होता है। संचार साधनों का महत्त्व भी औद्योगिक विकास में सहायक है। अतएव इनकी सुलभता औद्योगीकरण को प्रभावित करती है।
4. बाजार: बाजार उद्योगों के स्थानीयकरण का प्रमुख कारक है। अधिक क्रय शक्ति तथा सघन आबादी उद्योगों के लिए वृहद् बाजार उपलब्ध कराती हैं।
5. कुशल श्रमिकः यद्यपि वर्तमान समय में मशीनीकरण का बोलबाला है किन्तु उद्योगों में कुशल श्रमिकों की प्राप्ति उनके स्थानीयकरण को प्रभावित करती है।
6. पूंजी: विकासशील देशों में पूंजी की कमी के कारण आशातीत औद्योगिक विकास नहीं हो पाता है।
7. यातायात के साधनों की सुलभता आदि।
8. जलवायुः उपयुक्त एवं स्वास्थ्यप्रद जलवायु श्रमिकों की कार्यक्षमता बढ़ाती है। इसके अलावा कुछ उद्योग ऐसे हैं। जिनके लिए विशिष्ट जलवायु आवश्यक होती है। जैसे-वस्त्र उद्योग के लिए आर्द्र जलवायु व सिनेमाउद्योग के लिए स्वच्छ, आकाश व सूर्यप्रकाश वाली जलवायु आदि।
9. उच्च तकनीकी: उच्च तकनीकी के द्वारा विनिर्माण की गुणवत्ता को नियंत्रित करने, अपशिष्टों के निस्तारण व प्रदूषण बचाव सम्भव है। अतः इसका अहम् योगदान रहता है। इन सभी कारकों के अलावा सरकारी नीतियाँ, सस्ती भूमि, राजनीतिक स्थिरता, बैंकिंग व बीमा सम्बन्धी सुविधाएँ भी। उद्योगों के स्थानीयकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कारक हैं।
In simple words: उद्योगों को लगाने के लिए कई चीजें जरूरी होती हैं, जैसे कच्चा माल, बिजली, अच्छी सड़कें और संचार साधन, बड़ा बाजार, कुशल मजदूर, पैसा, साफ पानी, सही मौसम और नई तकनीक. सरकार की नीतियां, सस्ती जमीन और स्थिर माहौल भी उद्योग लगाने में मदद करते हैं.

🎯 Exam Tip: उद्योगों के स्थान निर्धारण के कारकों को विस्तृत रूप से समझाएं, जिसमें प्रत्येक कारक की भूमिका और महत्व शामिल हो.

 

Question 2. उद्योगों का वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिए।
Answer: उद्योगों का वर्गीकरण कई आधारों पर किया जाता है। उद्योगों को आकार, उनमें प्रयुक्त कच्चे माल, उत्पाद व स्वामित्व के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
आकार के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण: उद्योगों का आकार, उनमें निवेशित पूंजी, कार्यरत श्रमिकों की संख्या तथा उत्पादन की मात्रा द्वारा निर्धारित होता है। इस आधार पर उद्योगों को निम्नलिखित भागों में बाँटा गया है –
1. कुटीर उद्योग: ये उद्योग परिवार के सदस्यों द्वारा घर पर ही स्थानीय कच्चे माल द्वारा कम पूंजी और साधारण औजारों द्वारा संचालित किये जाते हैं। इनसे दैनिक जीवन के उपभोग की वस्तुएँ बनाई जाती हैं।
2. लघु उद्योग: ये छोटे पैमाने के उद्योग हैं। इनमें स्थानीय कच्चे माल का उपयोग होता है। इनमें अर्द्ध कुशल श्रमिक, शक्ति के साधनों से चलने वाले यन्त्रों का प्रयोग करते हैं।
3. बड़े पैमाने के उद्योग: इन उद्योगों का विकास औद्योगिक क्रान्ति के बाद हुआ। इन उद्योगों में उत्पाद की गुणवत्ता, विशिष्टीकरण तथा निर्यात के उद्देश्य से उत्पादन किया जाता है। सीमेण्ट, सूती वस्त्र, लौह-इस्पात आदि बड़े पैमाने के उद्योग हैं।
कच्चे माल के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण: कच्चे माल के आधार पर उद्योगों को निम्नलिखित भागों में बाँटा गया है -
1. कृषि आधारित उद्योग: ऐसे उद्योग जिनके लिए कच्चा माल कृषि से प्राप्त होता है, उन्हें कृषि आधारित उद्योग कहते हैं। सूती, रेशमी, जूट उद्योग, चाय, कहवा व कोको पर आधारित उद्योग कृषि आधारित उद्योग हैं।
2. खनिज आधारित उद्योग: इन उद्योगों में खनिजों को कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है। लौह-इस्पात उद्योग, तथा सीमेण्ट उद्योग में अधात्विक खनिजों का उपयोग होता है।
3. रसायन आधारित उद्योग: ये उद्योग प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले रासायनिक पदार्थों का उपयोग करते हैं, जैसे पेट्रो-रसायन, नमक, गन्धक आदि.
4. वनोत्पाद आधारित उद्योग: ये उद्योग वनों से प्राप्त उत्पादों का उपयोग करते हैं, जैसे कागज, फर्नीचर, माचिस आदि.
5. पशु आधारित उद्योग: ये उद्योग जानवरों से प्राप्त उत्पादों का उपयोग करते हैं, जैसे चमड़ा, ऊनी वस्त्र आदि.
स्वामित्व के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण: स्वामित्व के आधार पर उद्योगों को निम्नलिखित भागों में बाँटा गया है –
1. सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग: ऐसे उद्योग सरकार के अधीन होते हैं। इन पर आम जनता का अधिकार होता है। साम्यवादी देशों में अधिकांश उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र में हैं।
2. निजी क्षेत्र के उद्योग: इन उद्योगों पर पूर्ण नियन्त्रण व्यक्तिगत होता है। पूंजीवादी अर्थव्यवस्था वाले देशों में अधिकांश उद्योग निजी क्षेत्र में हैं।
3. संयुक्त क्षेत्र के उद्योग: इन उद्योगों का संचालन संयुक्त कम्पनी द्वारा किसी निजी व सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनी के संयुक्त प्रयासों द्वारा किया जाता है। इसके अलावा उत्पाद के आधार पर उद्योगों को मूलभूत उद्योग (लौह-इस्पात उद्योग) तथा उपभोक्ता उत्पादक उद्योगों (खाद्य सामग्री, वस्तु आदि) में वर्गीकृत किया गया है।
In simple words: उद्योगों को उनके आकार (जैसे छोटे या बड़े), वे किस तरह का कच्चा माल इस्तेमाल करते हैं (जैसे खेती या खनिज), और उनका मालिक कौन है (सरकार, निजी व्यक्ति या दोनों मिलकर) के आधार पर बांटा जाता है. कुटीर उद्योग घरों में होते हैं, लघु उद्योग छोटे कारखानों में और बड़े उद्योग बहुत बड़े प्लांटों में.

🎯 Exam Tip: उद्योगों के वर्गीकरण के विभिन्न आधारों (आकार, कच्चे माल, स्वामित्व) और प्रत्येक श्रेणी के उदाहरणों को स्पष्ट रूप से समझाएं.

 

Question 3. लौह-इस्पात उद्योग या सूती वस्त्र उद्योग पर एक टिप्पणी लिखिए।
Answer:
लौह-इस्पात उद्योग-लौह-इस्पात उद्योग आधुनिक औद्योगिक युग की आधारशिला है। आधुनिक निर्माण उद्योगों में सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण लौह-इस्पात का निर्माण है क्योंकि अन्य निर्माण उद्योगों के लिए लोहा-इस्पात कच्चे माल की तरह प्रयुक्त होता है। अतएव इसे आधारभूत उद्योग या धुरी उद्योग भी कहा जाता है।
स्थानीयकरण के कारकः परम्परागत रूप से भारी इस्पात उद्योग की अवस्थिति कच्चे माल के भण्डारों के समीप ही होती है। जहाँ लौह अयस्क, कोयला, मैंगनीज, चूना पत्थर आदि पदार्थ आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। इसके अलावा इस उद्योग के लिए अन्य निम्न कारक, स्थानीयकरण में महत्वपूर्ण हैं –
1. परिवहन एवं यातायात के साधन
2. सस्ती जलविद्युत शक्ति।
3. कुशल श्रमिक।
4. पूंजी की उपलब्धता
5. वित्तीय एवं बैंकिंग सुविधाएँ
6. बाजार की सुविधा
7. राजनीतिक प्रोत्साहन आदि।
विश्व के प्रमुख लौह-इस्पात उत्पादक देश: चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, रूस और जर्मनी प्रमुख लौह-इस्पात उत्पादक देश हैं। इसके अलावा दक्षिण कोरिया, यूक्रेन, ब्राजील, इटली और भारत में भी लौह-इस्पात का उत्पादन होता है। चीन विश्व का सबसे बड़ा तथा जापान दूसरा बड़ा इस्पात उत्पादक देश है।
चीन के प्रमुख लौह-इस्पात क्षेत्र:
• उत्तरी चीन क्षेत्रः प्रमुख केन्द्र पाओटाओ, बीजिंग, टिटसिन।
• यांग्टिसी घाटी क्षेत्र: प्रमुख केन्द्र बुहान, शंघाई, हैकॉऊ तथा चुंगकिंग।
• अन्य केन्द्रः इसके अन्तर्गत केण्टन, कुनमिंग तथा सिगटाओ प्रमुख हैं।
जापान-यह विश्व का दूसरा बड़ा इस्पात उत्पादक देश है। इसके प्रमुख उत्पादक क्षेत्र निम्नलिखित हैं –
• नागासाकी-यावाता क्षेत्र: यह उत्तरी क्यूशू द्वीप में स्थित हैं। इसके प्रमुख केन्द्रों में यावाता, नागासाकी, कोकुरा, मौजी तथा शिमोनोस्की हैं।
• कोबे-ओसाका क्षेत्रः यह होशू द्वीप में स्थित है। इसके प्रमुख केन्द्रों में कोबे, ओसाका, हिरोहिता तथा सिकाई हैं।
• टोकियो-याकोहामा क्षेत्रः यह होशू द्वीप में स्थित है। इसके प्रमुख केन्द्रों में टोकियो, योकोहामा तथा कावासाकी शामिल हैं।
• मुरोरान क्षेत्र-यह होकैडो द्वीप में स्थित हैं। इसके प्रमुख केन्द्रों में मुरोरान, वैनिशी तथा इशीकारी हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका: संयुक्त राज्य अमेरिका में लौह-इस्पात उद्योग की स्थापना कच्चे माल की स्थानीय उपलब्धता के आधार पर हुई थी। यहाँ के प्रमुख लौह-इस्पात उत्पादक केन्द्र निम्नलिखित हैं –
• पिट्सबर्ग-यंगस्टन क्षेत्र: इस क्षेत्र के प्रमुख केन्द्रों में पिट्सबर्ग-यंगस्टन, ब्रेडाक, जार्ज टाउन तथा होम्सटेड हैं।
• शिकागो-गैरी क्षेत्र: इसके प्रमुख केन्द्रों में शिकागो, गैरी व मिलबाउकी शामिल हैं।
• ईरी झील क्षेत्र: इसके प्रमुख केन्द्रों में डेट्रायट, बफेलो, क्लीवलैण्ड व टालेडो शामिल हैं।
• मध्य अटलाण्टिक क्षेत्र प्रमुख केन्द्र स्पेरोज प्वाइण्ट, एलन टाउन, स्टीलटन आदि हैं।
• अलाबामा क्षेत्र प्रमुख केन्द्र अलाबामा तथा बर्मिंघम हैं।
• पश्चिमी क्षेत्रः प्रमुख केन्द्र प्यूक्लो, सैन्फ्रांसिसको तथा लास एंजिल्स हैं।
रूस-रूस विश्व का चौथा बड़ा लौह-इस्पात उत्पादक देश है। यहाँ लौह-इस्पात के प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं –
• यूराल क्षेत्रः प्रमुख केन्द्र मैगनिटोगोस्क, निझनीतागिल है। यह सबसे पुराना उत्पादक क्षेत्र है।
• कुजनेत्सक क्षेत्रः मुख्य केन्द्र कुजनेस्क, नोवा कुजनेत्सक है।
• मध्यवर्ती क्षेत्रः प्रमुख केन्द्र टुला, लिपेस्क, मास्को, लेनिनग्राड तथा गोर्की है। उपर्युक्त देशों के अलावा, जर्मनी, यूक्रेन, भारत, ब्रिटेन, कनाडा, ब्राजील, आस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया आदि में भी लौह-इस्पात का उत्पादन होता है।
सूती वस्त्र उद्योग: सूती वस्त्र उद्योग वस्त्र उद्योगों में सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है। इस उद्योग का प्रारम्भ सबसे पहले भारत में कुटीर उद्योग के रूप में हुआ। इस उद्योग का वास्तविक विकास 18वीं शताब्दी में यान्त्रिक चरखी और यान्त्रिक करघों के आविष्कारों के बाद हुआ।
सूती वस्त्र उद्योग के स्थान निर्धारण के कारक:
• प्रचुर मात्रा में सस्ता एवं कुशल श्रम।
• समुद्री समीर युक्त आर्द्र जलवायु।
• बड़ी मात्रा में शुद्ध जल की प्राप्ति।
• विस्तृत बाजार तथा
• सरकारी प्रोत्साहन।
सूती वस्त्र उद्योग का विश्व वितरण: विश्व के लगभग 40 देशों में सूती वस्त्र निर्माण की मिले हैं। मुख्य उत्पादक देश चीन, पूर्व सोवियत संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, जापान, पोलैण्ड, यूनाइटेड किंगडम, हांगकांग, पूर्वी व पश्चिमी जर्मनी, फ्रांस तथा चेकोस्लोवाकिया हैं। प्रमुख देशों में इसका वितरण निम्नलिखित प्रकार है -
• चीन: सूती वस्त्र उत्पादन की दृष्टि से चीन विश्व में प्रथम स्थान पर है। शंघाई, केण्टन, सिग्टाओं, टीण्टसिन, शांतुंग डेआरिन आदि सूती वस्त्र उद्योग के प्रमुख केन्द्र हैं।
• भारतः सूती वस्त्र उत्पादन की दृष्टि से विश्व में चीन के बाद भारत का दूसरा स्थान है। यहाँ सूती वस्त्र उद्योग के प्रमुख केन्द्र मुम्बई, अहमदाबाद, शोलापुर, नासिक, सूरत, बड़ौदा, नागपुर, इन्दौर, वारंगल, ग्वालियर, कोलकाता, दिल्ली, कानपुर, भीलवाड़ा, ब्यावर, पाली, कोयम्बटूर, मदुरई, सलेम, बंगलौर आदि हैं।
• संयुक्त राज्य अमेरिका: संयुक्त राज्य अमेरिका में सूती वस्त्र उद्योग की अधिकांश मिलें पूर्वी भाग में अप्लेशियन राज्य में स्थित है। सबसे पहले न्यूइंग्लैण्ड राज्य में सूती वस्त्र निर्माण का विकास हुआ था। किन्तु बाद में दक्षिण अप्लेशियन राज्यों में सर्वाधिक निर्माण होने लगा है। मध्य अटलांटिक राज्यों में भी सूती वस्त्र का उत्पादन होता है।
विश्व के प्रमुख सूती वस्त्र उत्पादक देशों में सूती धागे का वार्षिक उत्पादन निम्नलिखित प्रकार रहा है -

देशउत्पादन प्रतिशत
चीन26.4
भारत21.0
संयुक्त राज्य अमेरिका14.7
पाकिस्तान10.7
इण्डोनेशिया7.0
...3.8

In simple words: लौह-इस्पात उद्योग आधुनिक युग की नींव है, क्योंकि इसका उपयोग कई अन्य उद्योगों के लिए कच्चा माल बनाने में होता है. यह उन जगहों पर लगता है जहाँ कच्चा लोहा, कोयला और अन्य चीजें आसानी से मिल जाती हैं. चीन, जापान, अमेरिका, रूस और जर्मनी इसके बड़े उत्पादक हैं. सूती वस्त्र उद्योग भी बहुत महत्वपूर्ण है, जो भारत में छोटे स्तर पर शुरू हुआ और फिर मशीनों के आने से तेजी से बढ़ा. इसके लिए सस्ते मजदूर, नम जलवायु, साफ पानी और बाजार जैसे कारक जरूरी हैं. चीन, भारत और अमेरिका सूती वस्त्र के बड़े उत्पादक हैं.

🎯 Exam Tip: लौह-इस्पात और सूती वस्त्र उद्योग दोनों के महत्व, स्थानीयकरण के कारक और विश्व वितरण पर ध्यान केंद्रित करें. दोनों उद्योगों की तुलना करके भी उत्तर दे सकते हैं.

आंकिक प्रश्न

 

Question 1. विश्व मानचित्र में विश्व के प्रमुख लौह-इस्पात केन्द्रों को दर्शाइये।
Answer: यहाँ विश्व मानचित्र पर प्रमुख लौह-इस्पात केन्द्रों को दर्शाया गया है:
विश्व का मानचित्र (सरलीकृत) शिकागो पिट्सबर्ग लासएंजिल्स सानफ्रांसिस्को बफ़ेलो बर्मिंघम ग्लासगो बर्मिंघम लिले सार लेनिनग्राड मास्को क्रिबोईराग ओसाका शंघाई यावाता चेल्याबिन्स्क जोहांसबर्ग पर्थ सिडनी अटलांटिक महासागर हिन्द महासागर
In simple words: ऊपर दिए गए मानचित्र में, हमने दुनिया के मुख्य लोहा-इस्पात बनाने वाले केंद्रों को दिखाया है, जैसे अमेरिका में शिकागो, जापान में ओसाका, चीन में शंघाई और रूस में मास्को.

🎯 Exam Tip: विश्व के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों को मानचित्र पर सही ढंग से पहचानने और चिह्नित करने का अभ्यास करें.

 

Question 2. विश्व मानचित्र में विश्व के प्रमुख वस्त्र उत्पादक देशों को दर्शाइए।
Answer: यहाँ विश्व मानचित्र पर प्रमुख वस्त्र उत्पादक देशों को दर्शाया गया है:
विश्व का मानचित्र (सरलीकृत) ITALY BELGIUM ETHIOPIA PAKISTAN BANGLADESH PHILIPPINES INDONESIA VIETNAM
In simple words: इस मानचित्र में, इटली, बेल्जियम, पाकिस्तान, इथियोपिया, बांग्लादेश, फिलीपींस, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों को प्रमुख वस्त्र उत्पादक के रूप में दिखाया गया है.

🎯 Exam Tip: विश्व के प्रमुख वस्त्र उत्पादक देशों को मानचित्र पर सही ढंग से पहचानने और चिह्नित करने का अभ्यास करें.

RBSE Class 12 Geography Chapter 9 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Geography Chapter 9 बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. निम्नलिखित में में से जो मानव की द्वितीयक क्रिया है, बताइए -
(अ) खान खोदना
(ब) एकत्रीकरण
(स) उद्योग
(द) व्यापार एवं वाणिज्य
Answer: (स) उद्योग
In simple words: द्वितीयक क्रियाओं में कच्चे माल को बदलकर नई चीजें बनाई जाती हैं, और उद्योग इसी का हिस्सा है. खान खोदना और एकत्रीकरण प्राथमिक क्रियाएँ हैं, जबकि व्यापार तृतीयक क्रिया है.

🎯 Exam Tip: प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक आर्थिक क्रियाओं के बीच का अंतर समझें.

 

Question 2. निम्नलिखित में से कौन-सा ऐसा देश है, जहाँ के अधिकांश उद्योग आयातित कच्चे माल पर आधारित हैं?
(अ) भारत
(ब) चीन
(स) संयुक्त राज्य अमेरिका
(द) जापान
Answer: (द) जापान
In simple words: जापान में बहुत कम प्राकृतिक संसाधन हैं, इसलिए वह ज्यादातर कच्चा माल दूसरे देशों से खरीदता है ताकि अपने उद्योग चला सके.

🎯 Exam Tip: जापान जैसे देशों के आर्थिक मॉडल को समझें जो संसाधनों की कमी के बावजूद तकनीकी नवाचार पर निर्भर करते हैं.

 

Question 3. भारत की झरिया की खदानों का सम्बन्ध है -
(अ) कोयला उत्पादन से
(ब) लौह अयस्क उत्पादन से
(स) तांबा उत्पादन से
(द) जूट उद्योग
Answer: (अ) कोयला उत्पादन से
In simple words: झरिया भारत की एक बहुत बड़ी कोयला खदान है, जो कोयले के उत्पादन के लिए जानी जाती है.

🎯 Exam Tip: भारत के प्रमुख खनिज उत्पादक क्षेत्रों और वे किस खनिज के लिए प्रसिद्ध हैं, इसे याद रखें.

 

Question 5. निम्नलिखित में से जो कृषि आधारित उद्योग नहीं है, बताइए -
(अ) सूती वस्त्र उद्योग
(ब) चीनी उद्योग
(स) सीमेण्ट उद्योग
(द) जूट उद्योग
Answer: (स) सीमेण्ट उद्योग
In simple words: सीमेंट उद्योग खनिजों पर आधारित है, जबकि सूती वस्त्र, चीनी और जूट उद्योग कृषि उत्पादों पर निर्भर करते हैं.

🎯 Exam Tip: कृषि आधारित उद्योगों और खनिज आधारित उद्योगों के बीच के अंतर को स्पष्ट करें.

 

Question 6. निम्रलिखित में से जो भार ह्रास मूलक (Weight Lossing Industry) उद्योग नहीं है, बताइए -
(अ) लौह-इस्पात उद्योग
(ब) चीनी उद्योग
(स) सीमेण्ट उद्योग
(द) सूती वस्त्र उद्योग
Answer: (द) सूती वस्त्र उद्योग
In simple words: लोहा-इस्पात, चीनी और सीमेंट बनाने में कच्चे माल का वजन तैयार माल से काफी कम हो जाता है, लेकिन सूती वस्त्र उद्योग में ऐसा नहीं होता.

🎯 Exam Tip: 'भार ह्रास मूलक उद्योग' की अवधारणा को समझें, जहाँ तैयार उत्पाद का वजन कच्चे माल की तुलना में काफी कम होता है.

 

Question 7. शिकागो गैरी लौह-इस्पात क्षेत्र निम्नलिखित में में से किस देश में स्थित है?
(अ) संयुक्त राज्य अमेरिका
(ब) जापान
(स) चीन
(द) रूस
Answer: (अ) संयुक्त राज्य अमेरिका
In simple words: शिकागो-गैरी संयुक्त राज्य अमेरिका का एक प्रमुख लोहा-इस्पात उत्पादन क्षेत्र है.

🎯 Exam Tip: विश्व के प्रमुख लौह-इस्पात क्षेत्रों को उनके संबंधित देशों के साथ याद रखें.

 

Question 8. आधुनिक वस्त्र निर्माण का जन्म किस देश में हुआ?
(अ) संयुक्त राज्य अमेरिका
(ब) ब्रिटेन
(स) चीन
(द) जापान
Answer: (ब) ब्रिटेन
In simple words: आधुनिक मशीनों से कपड़ा बनाने का काम सबसे पहले ब्रिटेन में औद्योगिक क्रांति के दौरान शुरू हुआ था.

🎯 Exam Tip: औद्योगिक क्रांति और उसके प्रमुख उद्योगों के जन्मस्थान को याद रखें.

 

Question 9. सूती वस्त्र उत्पादन में प्रथम स्थान पर कौन-सा देश है?
(अ) चान
(ब) जापान
(स) चीन
(द) रूस
Answer: (स) चीन
In simple words: चीन दुनिया में सबसे ज्यादा सूती कपड़े का उत्पादन करता है.

🎯 Exam Tip: विश्व के प्रमुख कृषि और औद्योगिक उत्पादों में अग्रणी देशों को जानें.

 

Question 10. कच्चे रेशम के उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान पर रहने वाला देश है -
(अ) भारतं
(ब) जापान
(स) चीन
(द) रूस
Answer: (स) चीन
In simple words: चीन दुनिया में सबसे ज्यादा कच्चा रेशम पैदा करने वाला देश है.

🎯 Exam Tip: विभिन्न कृषि उत्पादों के शीर्ष उत्पादक देशों को याद रखना सहायक होता है.

सुमलेन सम्बन्धी प्रश्न

 

Question. निम्न में स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से सुमेलित कीजिए -

स्तम्भ (अ)
(प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र)
स्तम्भ (ब)
(राष्ट्र)
(i) नागासाकी-यावाता(य) जापान
(ii) शिकागो-गैरी(अ) संयुक्त राज्य अमेरिका
(iii) मंचूरिया(ब) चीन
(iv) मैगनिटोगोर्क(स) रूस
(v) बर्मिंघम(द) ब्रिटेन

Answer: (i) य (ii) अ (iii) ब (iv) स (v) द
In simple words: नागासाकी-यावाता जापान में है, शिकागो-गैरी अमेरिका में, मंचूरिया चीन में, मैगनिटोगोर्क रूस में और बर्मिंघम ब्रिटेन में है.

🎯 Exam Tip: विश्व के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को उनके संबंधित देशों के साथ सही ढंग से मिलान करना सीखें.

RBSE Class 12 Geography Chapter 9 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. द्वितीयक व्यवसाय के अन्तर्गत कौन-कौन सी क्रियाएँ आती हैं?
Answer: उद्योग मानव की द्वितीयक आर्थिक क्रिया है। इसके अन्तर्गत निम्नलिखित तीन क्रियाएँ आती हैं –
1. प्राकृतिक संसाधनों को परिष्कृत करना।
2. संसाधनों के रूप में परिवर्तन तथा
3. प्राकृतिक संसाधनों को मानव जीवन के लिए अधिक उपयोगी बनाना।
In simple words: द्वितीयक व्यवसाय में प्राकृतिक चीजों को बदलकर नया और उपयोगी उत्पाद बनाना शामिल है. इसमें संसाधनों को साफ करना, उन्हें बदलना और उन्हें लोगों के लिए अधिक उपयोगी बनाना आता है.

🎯 Exam Tip: द्वितीयक आर्थिक क्रियाओं की मुख्य विशेषताओं और उदाहरणों को याद रखें.

 

Question 2. प्राथमिक क्रियाओं के अन्तर्गत आने वाली प्रमुख क्रियाओं के नाम बताइए।
Answer: मानव की प्राथमिक क्रियाओं में कृषि, खनन, एकत्रीकरण, मछलीपालन, प्रारम्भिक ढंग से शिकार करना आदि को शामिल किया गया है।
In simple words: प्राथमिक क्रियाएँ वे हैं जहाँ लोग सीधे प्रकृति से चीजें प्राप्त करते हैं, जैसे खेती करना, खदानों से खुदाई करना, फल-सब्जी इकट्ठा करना, मछली पकड़ना और शिकार करना.

🎯 Exam Tip: प्राथमिक क्रियाओं के विभिन्न उदाहरणों को सूचीबद्ध करें, जो सीधे प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित होती हैं.

 

Question 3. द्वितीयक आर्थिक क्रियाएँ कौन-सी हैं?
Answer: उद्योगों को मानव की द्वितीयक आर्थिक क्रियाओं में शामिल किया गया है।
In simple words: द्वितीयक आर्थिक क्रियाओं में वे सभी उद्योग शामिल हैं जो कच्चे माल को तैयार उत्पादों में बदलते हैं.

🎯 Exam Tip: द्वितीयक क्रियाओं में उद्योगों की भूमिका और उनका महत्व समझें.

 

Question 4. तृतीयक आर्थिक क्रियाएँ क्या हैं?
Answer: व्यापार-वाणिज्य मानव की तृतीयक आर्थिक क्रियाएँ हैं।
In simple words: तृतीयक क्रियाएँ वे सेवाएँ हैं जो लोगों को मिलती हैं, जैसे खरीदना और बेचना (व्यापार).

🎯 Exam Tip: तृतीयक क्रियाओं को सेवाओं के क्षेत्र के रूप में समझें, जैसे व्यापार, परिवहन और बैंकिंग.

 

Question 5. चतुर्थक आर्थिक क्रियाओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: वित्तीय एवं बेकिंग सुविधाएँ, बीमा आदि मानव की चतुर्थक क्रियाएँ हैं।
In simple words: चतुर्थक क्रियाएँ वे हैं जो जानकारी और ज्ञान पर आधारित हैं, जैसे बैंक और बीमा सेवाएँ.

🎯 Exam Tip: चतुर्थक क्रियाओं में ज्ञान-आधारित सेवाओं और उनके उदाहरणों को पहचानें.

 

Question 6. विनिर्माण उद्योग की दो विशेषताएँ बताइए।
Answer: विनिर्माण उद्योग की दो विशेषताएँ निम्न हैं –
1. इससे देश की राष्ट्रीय आय बढ़ती है।
2. औद्योगिक विकास देश की आर्थिक सम्पन्नता का मापदण्ड होता है।
In simple words: विनिर्माण उद्योग देश की कुल कमाई को बढ़ाता है और यह बताता है कि देश कितना अमीर और विकसित है.

🎯 Exam Tip: विनिर्माण उद्योग के महत्व को उसके आर्थिक योगदान और विकास संकेतक के रूप में बताएं.

 

Question 8. उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारकों के नाम लिखिए।
Answer: उद्योगों की जगह को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक हैं: कच्चा माल, बिजली के साधन, परिवहन और संचार के साधन, बाजार, कुशल मजदूर, पूंजी, पानी की उपलब्धता, मौसम, आधुनिक तकनीक, सरकारी नियम, सस्ती जमीन, राजनीतिक स्थिरता और बैंकिंग व बीमा की सुविधाएँ।
In simple words: Many factors influence where an industry is located, including raw materials, power, transportation, market, skilled labor, capital, water, climate, technology, government policies, land cost, political stability, and financial services.

🎯 Exam Tip: Remember to list at least 5-7 distinct factors that influence industrial location, as this shows a comprehensive understanding.

 

Question 9. ऐसे दो प्रकार के उद्योगों के नाम बताइए जो कच्चे माल के स्त्रोतों की ओर आकर्षित होते हैं।
Answer: कच्चे माल के स्रोतों के पास लगने वाले दो मुख्य प्रकार के उद्योग ये हैं:
1. वे उद्योग जिनमें भारी कच्चा माल उपयोग होता है और तैयार माल का वजन घट जाता है, जैसे- लौह-इस्पात उद्योग।
2. दूध, मछली, फल और सब्जियों से जुड़े उद्योग जो जल्दी खराब होने वाले होते हैं, वे भी कच्चे माल के पास ही स्थापित होते हैं।
In simple words: Industries that use heavy raw materials or process perishable goods usually set up near where the raw materials are found.

🎯 Exam Tip: Focus on the two key characteristics: raw material weight loss and perishability, as these are strong drivers for location near sources.

 

Question 10. एल्यूमिनियम उद्योग अधिकांश कहाँ स्थापित है?
Answer: एल्युमिनियम उद्योग आमतौर पर उन क्षेत्रों में स्थापित किए जाते हैं जहाँ सस्ती बिजली आसानी से मिल जाती है।
In simple words: Aluminum industries are mostly found in places with cheap and abundant electricity.

🎯 Exam Tip: Highlight "cheap electricity" as the primary locational factor for the aluminum industry, as it's an energy-intensive process.

 

Question 11. वर्तमान समय में उद्योगों के विकेन्द्रीकरण के क्या कारण हैं?
Answer: आजकल उद्योगों का विकेंद्रीकरण इसलिए हो रहा है क्योंकि बिजली को तारों से और गैस व पेट्रोलियम को पाइपलाइनों से आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है, जिससे उद्योगों को किसी एक खास जगह पर केंद्रित रहने की जरूरत नहीं पड़ती।
In simple words: Industries are spreading out because electricity, gas, and oil can now be easily transported over long distances, reducing the need for factories to be near their energy sources.

🎯 Exam Tip: Emphasize the improved transportability of energy sources (electricity, gas, petroleum) as the main reason for industrial decentralization.

 

Question 12. प्रमुख संचार के साधन कौन-कौन से हैं?
Answer: प्रमुख संचार के साधन डाक, तार, टेलीफोन, ई-मेल और इंटरनेट हैं।
In simple words: Main ways to communicate include mail, telegrams, phones, email, and the internet.

🎯 Exam Tip: When listing communication methods, ensure you include both traditional and modern examples for a complete answer.

 

Question 14. जलापूर्ति की दृष्टि से आवश्यक उद्योगों के नाम बताइए।
Answer: लौह-इस्पात उद्योग, कपड़ा उद्योग, रासायनिक उद्योग, कागज उद्योग और चमड़ा उद्योग ऐसे उद्योग हैं जिन्हें बहुत अधिक पानी की जरूरत होती है।
In simple words: Industries like iron-steel, textile, chemical, paper, and leather need a lot of water to operate.

🎯 Exam Tip: When identifying water-intensive industries, think of those involved in processing, cleaning, or cooling, as these activities require substantial water.

 

Question 15. जलवायु की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण दो उद्योगों के नाम बताइए।
Answer: दो उद्योग जिनकी स्थापना में जलवायु बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, वे हैं:
1. सूती वस्त्र उद्योग
2. सिनेमा उद्योग
In simple words: Climate is very important for setting up cotton textile industries and film industries.

🎯 Exam Tip: Remember that the cotton textile industry needs humid air, and the cinema industry needs clear, bright weather for filming.

 

Question 16. सरकारी नीतियाँ किस प्रकार किसी उद्योग के स्थानीयकरण को प्रभावित करती हैं?
Answer: सरकारी नीतियाँ दो तरह से उद्योगों के स्थानीयकरण को प्रभावित करती हैं:
1. यदि कोई देश उद्योगों का राष्ट्रीयकरण करता है, तो विदेशी कंपनियाँ वहाँ उद्योग नहीं लगा पातीं।
2. टैक्स में छूट और दूसरी सुविधाएँ देकर सरकार उद्योगों को बढ़ावा देती है।
In simple words: Government policies affect where industries are located; nationalization can deter foreign companies, while tax breaks and incentives can encourage them.

🎯 Exam Tip: Always consider how government intervention, through nationalization or incentives, can significantly alter industrial location decisions.

 

Question 17. विनिर्माण उद्योगों को आकार के आधार पर कितने भागों में बाँटा गया है?
Answer: विनिर्माण उद्योगों को आकार के आधार पर तीन भागों में बाँटा गया है - कुटीर, लघु और बड़े पैमाने के उद्योग।
In simple words: Manufacturing industries are divided into three types based on size: cottage, small-scale, and large-scale industries.

🎯 Exam Tip: Make sure to list all three categories: cottage, small-scale, and large-scale, as these are the standard classifications by size.

 

Question 18. कुटीर उद्योग किसे कहते हैं?
Answer: कुटीर उद्योग ऐसे उद्योग हैं जो कारीगरों द्वारा घर पर स्थानीय कच्चे माल का उपयोग करके चलाए जाते हैं। इनमें केवल परिवार के सदस्य ही काम करते हैं और हाथ से चीजें बनाते हैं।
In simple words: Cottage industries are small-scale, home-based businesses where artisans use local raw materials and family labor to produce goods.

🎯 Exam Tip: Key features of cottage industries are "home-based," "local raw materials," and "family labor," which are important for a full definition.

 

Question 20. गावों में पूर्व में कुटीर उद्योगों में संलग्न कुछ जातियों के नाम बताइए।
Answer: पुराने समय में गांवों में लुहार, कुम्हार, सुनार, नाई, चर्मकार और बढ़ई जैसी जातियाँ कुटीर उद्योगों में काम करती थीं।
In simple words: In old villages, people from specific communities like blacksmiths, potters, goldsmiths, barbers, leatherworkers, and carpenters were involved in cottage industries.

🎯 Exam Tip: When answering about historical village crafts, try to recall examples of traditional service and artisan castes, as they were central to these industries.

 

Question 21. कच्चे माल पर आधारित उद्योगों को कितने भागों में बाँटा गया है?
Answer: कच्चे माल के आधार पर उद्योगों को कृषि आधारित, खनिज आधारित, रसायन आधारित, वनोत्पाद आधारित और पशु आधारित उद्योगों में बाँटा गया है।
In simple words: Industries are classified into five types based on their raw materials: agro-based, mineral-based, chemical-based, forest-based, and animal-based.

🎯 Exam Tip: For classifications, ensure you list all categories clearly. In this case, remembering the five main types of raw materials is key.

 

Question 22. लघु उद्योगों की दो विशेषताएँ बताइए।
Answer: लघु उद्योगों की दो मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. लघु उद्योगों में मशीनों और थोड़ी सी बिजली का उपयोग होता है।
2. इनमें वेतन पर कर्मचारी काम करते हैं।
In simple words: Small-scale industries use machines and power, and they employ paid workers.

🎯 Exam Tip: Focus on "use of machinery/power" and "paid labor" as distinguishing features of small-scale industries compared to cottage industries.

 

Question 23. कृषि आधारित किन्हीं चार उद्योगों के नाम बताइए।
Answer: कृषि पर आधारित चार प्रमुख उद्योग निम्नलिखित हैं:
1. सूती वस्त्र उद्योग
2. चीनी उद्योग
3. जूट उद्योग
4. भोजन प्रसंस्करण उद्योग
In simple words: Four main agriculture-based industries are cotton textiles, sugar, jute, and food processing.

🎯 Exam Tip: When listing agro-based industries, think of common products derived directly from farm produce, like textiles, sugar, and processed foods.

 

Question 26. वनोत्पाद पर आधारित किन्हीं चार उद्योगों के नाम लिखिए।
Answer: वनोत्पाद पर आधारित चार उद्योगों में-कागज व लुग्दी उद्योग, फर्नीचर उद्योग, दियासलाई उद्योग व लाख उद्योग प्रमुख हैं।
In simple words: Four main forest-based industries are paper and pulp, furniture, matchsticks, and lac industries.

🎯 Exam Tip: When listing forest-based industries, remember products made directly from wood and other forest resources like paper, furniture, and resins.

 

Question 27. पशु आधारित प्रमुख दो उद्योगों के नाम बताइए।
Answer: पशुओं पर आधारित दो प्रमुख उद्योग निम्नलिखित हैं:
1. चमड़ा उद्योग
2. ऊनी वस्त्र उद्योग
In simple words: Two important animal-based industries are leather and wool textile.

🎯 Exam Tip: For animal-based industries, consider products obtained directly from animals, such as leather from hides and wool from fleece.

 

Question 28. स्वामित्व के आधार पर उद्योगों को कितने भागों में बाँटा गया है?
Answer: स्वामित्व के आधार पर उद्योगों को तीन भागों में बाँटा गया है: सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग, निजी क्षेत्र के उद्योग और संयुक्त क्षेत्र के उद्योग।
In simple words: Industries are categorized into three types based on ownership: public sector, private sector, and joint sector.

🎯 Exam Tip: Clearly list "public," "private," and "joint" sectors when classifying industries by ownership, as these cover the full spectrum.

 

Question 29. लौह-इस्पात को धुरी उद्योग क्यों कहते हैं?
अथवा
लौह-इस्पात उद्योग आधारभूत उद्योग कहलाता है, क्यों?
Answer: लौह-इस्पात उद्योग को आधुनिक औद्योगिक युग की नींव माना जाता है। यह उद्योग सैकड़ों दूसरे उद्योगों के लिए कच्चे माल का स्रोत है। इसलिए इसे आधारभूत उद्योग कहते हैं। इसके बिना औद्योगिक विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती, इसीलिए इसे धुरी उद्योग भी कहा जाता है।
In simple words: The iron-steel industry is called a basic or pivot industry because it provides raw materials for many other industries and is essential for overall industrial development.

🎯 Exam Tip: Emphasize that the iron-steel industry is foundational ("आधारभूत") because its products (steel) are the raw materials for countless other manufacturing sectors.

 

Question 32. ब्रिटेन के प्रमुख लौह-इस्पात केन्द्रों के नाम बताइए।
Answer: ब्रिटेन के प्रमुख लौह-इस्पात उद्योग के केंद्र कार्डिफ, टालबाट, हार्टफूल, शैफील्ड, ग्लासगो, फालकर्क और लंकाशायर हैं।
In simple words: Key iron-steel production centers in Britain include Cardiff, Talbot, Hartlepool, Sheffield, Glasgow, Falkirk, and Lancashire.

🎯 Exam Tip: When listing industrial centers for a country, try to remember a few prominent names to demonstrate good recall of geographical locations.

 

Question 33. वर्तमान समय में सूती वस्त्र उद्योग की दो आधुनिक प्रवृत्तियाँ क्या हैं?
Answer: वर्तमान समय में सूती वस्त्र उद्योग की दो उभरती हुई प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं:
1. इस उद्योग को कृत्रिम रेशों से प्रतियोगिता के कारण कई देशों में इसका विकास घट रहा है।
2. श्रम लागत कम होने की वजह से यह उद्योग कम विकसित देशों की ओर बढ़ रहा है।
In simple words: The modern cotton textile industry faces competition from artificial fibers and is shifting towards developing countries due to lower labor costs.

🎯 Exam Tip: Highlight "competition from synthetic fibers" and "shift to low-labor-cost countries" as the two primary trends affecting the cotton textile industry.

 

Question 34. ऊनी वस्त्र उद्योग की अवस्थिति के दो प्रमुख कारकों का उल्लेख कीजिए।
Answer: ऊनी वस्त्र उद्योग की अवस्थिति के दो सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं:
1. कच्चे माल की आसान उपलब्धता
2. बाजार की आसान पहुँच
In simple words: The two main factors for locating a wool textile industry are easy access to raw materials and close proximity to the market.

🎯 Exam Tip: For wool industries, remember that both raw material (wool) and market access are crucial, especially as wool can be bulky to transport and finished products need consumers.

 

Question 35. विश्व के ऊनी वस्त्र उत्पादक प्रमुख देशों के नाम बताइए।
Answer: विश्व के प्रमुख ऊनी वस्त्र उत्पादक देश रूस, चीन, जापान, जर्मनी, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, रोमानिया, पोलैंड और ग्रेट ब्रिटेन आदि हैं।
In simple words: Major wool textile producing countries globally include Russia, China, Japan, Germany, India, USA, Romania, Poland, and Great Britain.

🎯 Exam Tip: When listing leading countries, try to include a mix from different continents to show a broader understanding of global production.

 

Question 38. रेशमी वस्त्र उत्पादक प्रमुख देशों के नाम बताइए।
Answer: रेशमी वस्त्र उत्पादक प्रमुख देश जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, चीन, ताइवान, जर्मनी, इंग्लैंड और भारत हैं।
In simple words: Top silk textile producing countries are Japan, USA, France, China, Taiwan, Germany, England, and India.

🎯 Exam Tip: Include both traditional silk-producing nations (like China, India) and those known for high-quality silk products (like France, Japan).

 

Question 39. जापान के प्रमुख रेशमी वस्त्र उद्योग के केन्द्रों के नाम बताइए।
Answer: जापान के प्रमुख रेशमी वस्त्र उद्योग के केंद्र यामागोता, फुकुशिमा, निगीता, किनकी और क्योटो हैं।
In simple words: Yamagata, Fukushima, Niigata, Kinki, and Kyoto are important silk textile centers in Japan.

🎯 Exam Tip: For specific countries, recalling a few key cities or regions associated with a particular industry is often sufficient.

 

Question 40. चीन के प्रमुख रेशमी वस्त्र उद्योग के केन्द्र कौन-कौन से हैं?
Answer: चीन में रेशमी वस्त्र उद्योग प्राचीन काल से ही विकसित है। शंघाई और कांगचाऊ प्रमुख रेशमी वस्त्र उद्योग के केंद्र हैं।
In simple words: China has a long history in silk production; Shanghai and Kangchao are its main silk textile centers.

🎯 Exam Tip: Remember China's historical significance in silk, and for specific centers, Shanghai is a very prominent example.

 

Question 41. भारत के प्रमुख रेशमी वस्त्र उद्योग के केन्द्रों के नाम बताइए।
Answer: भारत के प्रमुख रेशमी वस्त्र उद्योग के केंद्र कोलकाता, मैसूर, बंगलौर और चेन्नई हैं।
In simple words: Kolkata, Mysore, Bangalore, and Chennai are key silk textile production centers in India.

🎯 Exam Tip: When listing Indian centers, try to include a geographical spread, covering different regions known for silk production.

 

Question 42. संयुक्त राज्य अमेरिका में रेशमी वस्त्र उद्योग का प्रमुख केन्द्र कहाँ है?
Answer: संयुक्त राज्य अमेरिका में रेशमी वस्त्र उद्योग में पेन्सिलवेनिया राज्य सबसे आगे है। पैटरसन इसका प्रमुख केंद्र है, इसलिए इसे अमेरिका का रेशम नगर भी कहते हैं।
In simple words: In the USA, Pennsylvania is a leading state for silk textiles, with Paterson being the main center, also known as the "Silk City" of America.

🎯 Exam Tip: Identifying "Paterson" and its nickname "Silk City" is crucial for this answer, as it directly addresses the question about the main center.

 

Question 43. फ्रांस में रेशमी वस्त्र उत्पादक केन्द्रों के नाम बताइए।
Answer: फ्रांस में रॉन घाटी में स्थित ल्योन नगर रेशमी वस्त्रों के उत्पादन का प्रमुख केंद्र है।
In simple words: Lyon, located in the Rhone Valley, is the main silk textile production center in France.

🎯 Exam Tip: For France, "Lyon" is the key city to mention for silk textile production, known for its historical association with the industry.

 

Question 45. जूट की कृषि के अग्रणी दो देशों के नाम बताइए।
Answer: जूट की खेती में भारत और बांग्लादेश सबसे आगे हैं। जूट की खेती ब्रह्मपुत्र घाटी और गंगा के डेल्टाई क्षेत्रों में की जाती है।
In simple words: India and Bangladesh are the top two countries for jute cultivation, mainly in the Brahmaputra Valley and Ganges Delta regions.

🎯 Exam Tip: Remember India and Bangladesh as the primary jute producers and associate jute cultivation with river deltas and valleys.

 

Question 46. जूट उद्योग के महत्त्वपूर्ण देशों के नाम बताइए।
Answer: जूट उद्योग भारत, बांग्लादेश, जर्मनी, ग्रेट ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, बेल्जियम, स्पेन, स्वीडन, जापान, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और थाईलैंड जैसे देशों में विकसित है।
In simple words: Major countries with developed jute industries include India, Bangladesh, Germany, UK, France, Italy, Belgium, Spain, Sweden, Japan, Canada, USA, China, and Thailand.

🎯 Exam Tip: When listing countries for jute industry, include both primary producers (India, Bangladesh) and those that process jute for various products (European/Asian countries).

 

Question 47. जूट उत्पादों के निर्यातक दो देशों के नाम बताइए।
Answer: जूट उत्पादों के प्रमुख निर्यातक दो देश हैं:
1. भारत
2. बांग्लादेश
In simple words: India and Bangladesh are the two leading exporters of jute products.

🎯 Exam Tip: It is logical that the leading producers of jute would also be the leading exporters of jute products; focus on India and Bangladesh.

 

RBSE Class 12 Geography Chapter 9 लघूत्तरात्मक प्रश्न (SA-I)

 

Question 1. द्वितीयक व्यवसाय के अन्तर्गत कौन-कौन सी क्रियाएँ आती हैं?
Answer: उद्योग मानव की द्वितीयक आर्थिक क्रिया है। इसके अन्तर्गत निम्नलिखित तीन क्रियाएँ आती हैं:
1. प्राकृतिक संसाधनों को परिष्कृत करना।
2. संसाधनों के रूप में परिवर्तन करना
3. प्राकृतिक संसाधनों को मानव जीवन के लिए अधिक उपयोगी बनाना।
In simple words: Secondary activities involve refining natural resources, transforming them into new forms, and making them more useful for human life. Industries fall under this category.

🎯 Exam Tip: Remember the three core aspects of secondary activities: refinement, transformation, and adding utility to natural resources.

 

Question 2. द्वितीयक व्यवसायों को किन दस समूहों में बाँटा गया है?
Answer: द्वितीयक व्यवसायों को दस समूहों में बाँटा गया है:
1. विनिर्माण उद्योग
2. शक्ति उद्योग
3. निर्माण उद्योग
4. रसायन उद्योग
5. इंजीनियरिंग उद्योग
6. वस्त्र उद्योग
7. भोजन व पेय पदार्थ उद्योग
8. धातुकर्म उद्योग
9. प्लास्टिक उद्योग तथा
10. परिवहन व संचार उद्योग।
In simple words: Secondary activities are divided into ten main groups like manufacturing, power generation, construction, chemicals, engineering, textiles, food and beverages, metallurgy, plastics, and transportation and communication.

🎯 Exam Tip: When listing categories, try to group similar industries together (e.g., manufacturing, food, textiles) to help with recall.

 

Question 3. परिवहन साधनों का उद्योगों के केन्द्रीयकरण पर क्या प्रभाव पड़ा है? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
Answer: परिवहन साधनों का उद्योगों के स्थानीयकरण पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। जैसे:
1. पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका के पूर्वी भागों में उद्योगों का केंद्रीयकरण इसलिए हुआ क्योंकि वहाँ परिवहन का नेटवर्क बहुत विकसित है।
2. एशिया, अफ्रीका और दक्षिणी अमेरिका के अधिकांश देशों में औद्योगिक विकास कम होने का एक कारण परिवहन के साधनों की कमी है।
In simple words: Transportation greatly affects where industries are concentrated. Developed transport systems lead to industrial centralization (like in Western Europe), while poor transport hinders industrial growth (like in parts of Asia, Africa, and South America).

🎯 Exam Tip: Use contrasting examples (developed vs. developing regions) to clearly illustrate how good transportation promotes industrial centralization, while poor transportation impedes it.

 

Question 4. कुटीर उद्योगों की कोई तीन विशेषताएँ बताइए।
Answer: कुटीर उद्योगों की तीन मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. यह निर्माण की सबसे छोटी इकाई है जो स्थानीय कच्चे माल का उपयोग करती है।
2. ये उद्योग कम पूंजी और सामान्य उपकरणों से परिवार के सदस्यों द्वारा ही चलाए जाते हैं।
3. इससे दैनिक जीवन के लिए उपयोगी वस्तुएँ बनाई जाती हैं।
In simple words: Cottage industries are small, use local raw materials, are run by families with simple tools and little capital, and produce everyday items.

🎯 Exam Tip: Focus on "smallest unit," "local raw materials," "family labor/simple tools," and "daily use items" as the defining characteristics of cottage industries.

 

Question 5. कुटीर एवं छोटे (लघु उद्योग) पैमाने के उद्योगों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
अथवा
उत्पादन की तकनीक व निर्माण स्थल के आधार पर कुटीर एवं छोटे पैमाने के उद्योगों की तुलना कीजिए।
Answer: कुटीर उद्योग तथा लघु उद्योगों में प्रमुख अंतर निम्नलिखित हैं –
3. इस उद्योग में एक शिल्पकार अपनी दक्षता के आधार पर घर में ही वस्तुएँ बनाता है।
4. इस उद्योग द्वारा निर्मित वस्तुओं का व्यापारिक महत्व कम होता है।
5. इस उद्योग में घर के सदस्यों की प्रधानता रहती है।
In simple words: Cottage industries are home-based, use family labor, and have less commercial importance. Small-scale industries, however, involve artisans using small machines and have greater commercial value.

🎯 Exam Tip: When comparing cottage and small-scale industries, differentiate based on production location (home vs. small workshop), use of power/machinery, and the scale of commercial activity.

 

Question 6. छोटे एवं बड़े पैमाने के उद्योगों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: छोटे एवं बड़े पैमाने के उद्योगों में निम्नलिखित अंतर हैं –

छोटे पैमाने के उद्योगबड़े पैमाने के उद्योग
1. इन उद्योगों में शक्ति से चलने वाली छोटी-छोटी मशीनों का प्रयोग होता है।1. इन उद्योगों में शक्तिचालित बड़ी-बड़ी मशीनों का प्रयोग होता है।
2. इन उद्योगों में अर्द्धकुशल श्रमिकों द्वारा कार्य किया जाता है।2. इन उद्योगों में कुशल श्रमिकों द्वारा कार्य किया जाता है।
3. इन उद्योगों में कम मात्रा में पूँजी का निवेश होता है।3. इन उद्योगों में अधिक मात्रा में पूँजी का निवेश होता है।
4. ये उद्योग विकासशील देशों के विकास के आधार होते हैं।4. ये उद्योग विकसित देशों के विकास के आधार होते हैं।

In simple words: Small-scale industries use smaller, power-driven machines with semi-skilled labor and less capital, often serving as a base for developing countries. Large-scale industries use big, powerful machines with skilled labor, require more capital, and are typical in developed countries.

🎯 Exam Tip: When comparing small-scale and large-scale industries, focus on differences in capital investment, technology (machine size/power), labor skill, and their typical role in developed versus developing economies.

 

Question 7. बड़े पैमाने के उद्योगों की कोई तीन विशेषताएँ बताइए।
Answer: बड़े पैमाने के उद्योगों के लिए विभिन्न प्रकार के कच्चे माल, शक्ति के साधन, कुशल श्रमिक, विस्तृत बाजार, उच्च प्रौद्योगिकी और विशाल पूंजी की आवश्यकता होती है। इनका विकास औद्योगिक क्रांति के बाद हुआ। बड़े पैमाने के उद्योगों को तीन प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. इन उद्योगों में शक्तिचालित बड़ी-बड़ी मशीनों का प्रयोग होता है।
2. इन उद्योगों में कुशल श्रमिकों द्वारा कार्य किया जाता है।
3. इन उद्योगों में अधिक मात्रा में पूंजी का निवेश होता है।
In simple words: Large-scale industries need diverse raw materials, power, skilled labor, large markets, high technology, and significant capital. They use big machines, skilled workers, and require high investment.

🎯 Exam Tip: For large-scale industries, remember the need for extensive resources (raw materials, capital, labor) and advanced technology, all typically driven by large-scale production and markets.

 

Question 9. आधुनिक लौह-इस्पात उद्योग की निर्माण प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
Answer: आधुनिक लौह-इस्पात निर्माण में तीन विधियाँ प्रचलित हैं:
1. बेसीमर विधि
2. उन्मुक्त भट्टी विधि
3. विद्युत भट्टी विधि
लौह-इस्पात बनाने के लिए अयस्क को इन भट्टियों में कोक और चूना पत्थर के साथ पिघलाया जाता है। पिघला लोहा ठंडा होने पर कच्चा लोहा कहलाता है। इसी कच्चे लोहे में मैंगनीज मिलाकर इस्पात बनाया जाता है।
In simple words: Modern iron-steel is made using Bessemer, Open Hearth, or Electric Arc methods. Iron ore is melted with coke and limestone, cooled to form pig iron, then manganese is added to turn it into steel.

🎯 Exam Tip: Name the three main methods for steel production and briefly explain the general process of melting ore and refining pig iron into steel.

 

Question 10. प्राकृतिक रेशम प्राप्त करने के प्रमुख चरणों का वर्णन कीजिए।
Answer: प्राकृतिक रेशम 'बायोक्जिम' नामक कीड़े की लार से निकले पदार्थ से प्राप्त होता है। शहतूत के पत्तों पर चलने वाला यह कीड़ा अपने मुँह से निकले लसलसे पदार्थ को अपने शरीर के चारों तरफ लपेटता है। इस स्थिति में इसे कोपे (कोकून) कहते हैं। पूर्ण विकसित कोपों को पानी में उबालकर उन पर लिपटे रेशम को उतारकर अलग धागे के रूप में लपेटा जाता है। इसके बाद रेशम के कपड़े बनाए जाते हैं। स्पष्ट है कि रेशमी वस्त्र उद्योग के तीन चरण हैं:
1. कोपों का उत्पादन
2. कोपों से रेशमी धागा लपेटना
3. रेशमी वस्त्रों की बुनाई
In simple words: Natural silk comes from the saliva of 'Bioxim' worms that spin cocoons on mulberry leaves. These cocoons are boiled, and the silk threads are unwound to make fabric. The process involves cocoon production, unwinding silk threads, and weaving silk into cloth.

🎯 Exam Tip: Clearly outline the biological process (worm to cocoon) and then the industrial steps (unwinding, weaving) involved in silk production.

 

RBSE Class 12 Geography Chapter 9 लघूत्तरात्मक प्रश्न (SA-II)

 

Question 1. "द्वितीयक गतिविधियों द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का मूल्य बढ़ जाता है।" कथन को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
Answer: द्वितीयक गतिविधियों से प्राकृतिक संसाधनों का मूल्य बढ़ जाता है। द्वितीयक गतिविधियाँ प्रकृति से प्राप्त कच्चे माल का रूप बदलकर उन्हें और अधिक मूल्यवान बना देती हैं। ये गतिविधियाँ खेतों, वनों, खदानों और सागरों से प्राप्त पदार्थों का रूप परिवर्तन कर उन्हें मूल्यवान बना देती हैं। द्वितीयक गतिविधियाँ विनिर्माण, प्रसंस्करण और निर्माण अवसंरचना उद्योग से संबंधित हैं।
उदाहरण:
1. कपास एक कच्चा पदार्थ है जिसका उपयोग सीमित है, लेकिन रेशे में बदलने के बाद यह अधिक मूल्यवान हो जाता है और इसका उपयोग वस्त्र निर्माण में होता है।
2. खदानों से प्राप्त लौह अयस्क का सीधे उपयोग नहीं किया जाता, लेकिन अयस्क से इस्पात बनाने के बाद यह मूल्यवान हो जाता है और इसका उपयोग अनेक प्रकार की मशीनें व औजार बनाने में होता है।
In simple words: Secondary activities increase the value of natural resources by transforming them. For instance, raw cotton becomes more valuable as fabric, and iron ore gains significant worth when processed into steel for machines.

🎯 Exam Tip: Use clear examples like cotton-to-fabric and iron ore-to-steel to demonstrate how processing in secondary activities adds significant value to raw materials.

 

Question 2. विनिर्माण उद्योगों की अवधारणा क्या है? बताइए।
Answer: विनिर्माण उद्योगों का अर्थ है प्राथमिक उत्पादन से प्राप्त कच्ची सामग्री को शारीरिक या यांत्रिक शक्ति का उपयोग करके, पहले से तय और नियंत्रित प्रक्रिया द्वारा किसी इच्छित रूप, आकार या विशेष गुण वाली वस्तुओं में बदलना। विनिर्माण उद्योग में शामिल प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:
1. विनिर्माण उद्योग किसी भी स्तर से शुरू हो सकता है, इसमें बहुत साधारण वस्तुओं से लेकर बहुत भारी वस्तुओं का निर्माण शामिल है।
2. विनिर्माण उद्योग में उपयोग होने वाले पदार्थ प्राकृतिक रूप से कच्चे माल कहलाते हैं।
3. ये संशोधित पदार्थ भी होते हैं, जैसे- इस्पात जिससे यंत्र और कलपुर्जे बनाए जाते हैं।
In simple words: Manufacturing transforms raw materials into finished goods using physical or mechanical power and controlled processes. It ranges from simple to complex products, involves natural raw materials, and also refines intermediate products like steel into parts.

🎯 Exam Tip: Define manufacturing by emphasizing transformation, use of power, and defined processes, and include its wide scope and role in refining materials like steel.

 

Question 3. कच्चे माल की प्राप्ति तक अभिगम्यता उद्योगों की स्थिति को प्रभावित करने वाला एक महत्त्वपूर्ण कारक है। कथन को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
उद्योगों की स्थापना में कच्चे माल की प्राप्ति तक अभिगम्यता की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
Answer: लौह-इस्पात और चीनी के कारखाने, सीमेंट के कारखाने, लुगदी और कागज उद्योग जैसे उद्योग कच्चे माल की उपलब्धता पर निर्भर करते हैं। जो पदार्थ जल्दी खराब होने वाले होते हैं, उनके निर्माण उद्योग भी उन पदार्थों की उपलब्धता के करीब ही स्थापित किए जाते हैं, जैसे- दूध, पनीर, मक्खन और फलों से डिब्बाबंद सामग्री का निर्माण।
In simple words: Easy access to raw materials is crucial for industries. Industries using heavy or perishable raw materials, such as iron-steel, sugar, cement, paper, dairy, or fruit processing, are typically located close to their raw material sources.

🎯 Exam Tip: Focus on two types of raw materials that necessitate proximity: heavy/bulky materials that are costly to transport and perishable materials that spoil quickly.

 

Question 4. "बाजार तक अभिगम्यता उद्योगों की स्थिति को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कारक है।" स्पष्ट कीजिए।
अथवा
उद्योगों की अवस्थिति निर्धारण में बाजार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।" कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: उद्योगों की स्थापना में सबसे महत्वपूर्ण कारक उसके द्वारा उत्पादित माल के लिए उपलब्ध बाजार का होना है। बाजार का अर्थ उस क्षेत्र में तैयार वस्तुओं की मांग और वहाँ के निवासियों में खरीदने की क्षमता या क्रय शक्ति से है। जिन क्षेत्रों में किसी खास उद्योग की वस्तुओं की खपत अधिक होती है, वहीं उद्योग शुरू हो जाते हैं। ऐसा करने से तैयार माल को बाजार तक पहुँचाने का खर्च कम हो जाता है। यह तब अधिक लाभदायक होता है जब तैयार माल कच्चे माल की तुलना में अधिक जगह घेरता है या अधिक भारी होता है। इसी कारण सीमेंट, फर्नीचर, कांच, मिट्टी के बर्तन, चीनी के बर्तन आदि उद्योग खपत क्षेत्र की समीपता पर निर्भर रहते हैं।
In simple words: Access to markets is a key factor in industrial location. Industries are set up where there is high demand and purchasing power, especially for bulky finished goods like cement or furniture. This reduces transport costs and increases profitability.

🎯 Exam Tip: Emphasize that market proximity is crucial when finished goods are bulky or heavy, or when there is high local demand, as it minimizes distribution costs and maximizes sales.

 

Question 5. उद्योगों की स्थापना में परिवहन व संचार की सुविधाओं तक अभिगम्यता की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
Answer: उद्योगों की स्थापना में परिवहन और संचार के साधनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कच्चे माल, श्रमिकों और मशीनों को उद्योगों तक लाने और उत्पादित तैयार माल को बाजार तक पहुँचाने के लिए परिवहन की जरूरत पड़ती है। इसलिए स्थानीयकरण ऐसे ही स्थानों पर होता है, जहाँ सस्ता और तेज परिवहन मिल सके। सस्ता परिवहन उत्पादन खर्च को कम रखता है। पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका के पूर्वी भागों में अत्यधिक परिवहन तंत्र विकसित होने के कारण सदैव इन क्षेत्रों में उद्योगों का संकेन्द्रण रहा है। परिवहन के साधनों की सस्ती दरों ने संयुक्त राज्य अमेरिका में ईरी झील के निकटवर्ती क्षेत्र को औद्योगिक क्षेत्र बना दिया है। परिवहन के अलावा उद्योगों के स्थानीयकरण में उद्योगों हेतु सूचनाओं के आदान-प्रदान और प्रबंध के लिए उत्तम संचार सुविधाओं की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण होती है।
In simple words: Good transportation and communication are vital for industrial location. Efficient transport brings raw materials and labor to factories and takes finished goods to markets cheaply, as seen in Western Europe. Good communication also helps manage industrial operations.

🎯 Exam Tip: Stress that both cost-effective transport for physical goods and efficient communication for information flow are essential for optimal industrial location and success.

 

Question 6. उद्योगों की स्थापना में श्रम आपूर्ति एवं शक्ति के साधनों की अभिगम्यता की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
Answer: श्रम आपूर्ति तक अभिगम्यता-उद्योगों के स्थानीयकरण में मानवीय श्रम की सस्ती और सुलभ उपलब्धता एक महत्वपूर्ण कारक रहा है। स्रोतों की उपलब्धता-उद्योगों की मशीनों को चलाने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है। शक्ति के प्रमुख स्रोतों में कोयला, पेट्रोलियम, जल विद्युत, प्राकृतिक गैस और परमाणु ऊर्जा आदि प्रमुख हैं। ऐसे उद्योग जिनमें ऊर्जा की खपत बहुत अधिक होती है, उनको ऊर्जा उत्पादक स्रोतों के समीप ही स्थापित किया जाता है, जैसे-एल्युमिनियम उद्योग और लौह इस्पात उद्योग। लौह इस्पात जैसे उद्योग जो कोयले से शक्ति प्राप्त करते हैं, कोयला खानों के पास ही स्थापित किए जाते हैं। एल्युमिनियम जैसे उद्योग जिनमें जल विद्युत की अधिक आवश्यकता होती है, जल विद्युत उत्पादक क्षेत्रों के समीप ही स्थापित किए जाते हैं। परन्तु अवस्थिति के कारक के रूप में अब शक्ति का महत्व कम होता जा रहा है क्योंकि ऊर्जा दक्षता में पर्याप्त सुधार हो गया है।
In simple words: Access to cheap and available labor is crucial for industries. Similarly, access to power sources like coal, petroleum, and hydropower is important, especially for energy-intensive industries such as aluminum and iron-steel. However, the importance of power source proximity is decreasing due to improved energy transmission.

🎯 Exam Tip: Explain that both labor (cost and availability) and power (type and proximity) are key factors, but note that advancements in energy transmission have reduced the need for industries to be directly at power source locations.

 

Question 7. विश्व में ऊनी वस्त्र उत्पादन के प्रमुख देशों के उत्पादन को बताइए।
Answer: ऊनी वस्त्र उद्योग वस्त्र उद्योगों में दूसरा महत्वपूर्ण उद्योग है। ऊनी वस्त्र उद्योग का तेजी से विकास 17वीं शताब्दी में इंग्लैंड में हुआ है। मूल्य की दृष्टि से यह विश्व का महत्वपूर्ण उद्योग है। विश्व के प्रमुख देशों में ऊनी वस्त्र का वार्षिक उत्पादन (2013) निम्नलिखित प्रकार रहा है -

देशवार्षिक उत्पादन (प्रतिशत में)
चीन28.8
इटली24.9
जापान6.2
टर्की5.7
जर्मनी5.0
रूस4.2
संयुक्त राज्य अमेरिका3.6
यूनाइटेड किंगडम2.4

In simple words: The wool textile industry, which developed rapidly in 17th-century England, is a significant global industry. Key producing countries include China, Italy, Japan, Turkey, Germany, Russia, USA, and UK, contributing various percentages to global annual output.

🎯 Exam Tip: When presenting data in a table, ensure the table is clearly formatted with headers and all relevant values, making it easy to read and understand.

 

Question 9. स्वामित्व के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिए।
Answer: स्वामित्व के आधार पर उद्योगों को निम्नलिखित तीन भागों में बाँटा गया है:
• सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग: ये उद्योग सरकार के अधीन होते हैं। इन पर आम जनता का अधिकार होता है। साम्यवादी देशों में अधिकांश उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र में हैं। भारत में भी बहुत से उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र में हैं।
• निजी क्षेत्र के उद्योग: इन उद्योगों का स्वामित्व और नियंत्रण निजी निवेशकों के हाथ में होता है। पूंजीवादी अर्थव्यवस्था वाले देशों में अधिकांश उद्योग निजी क्षेत्रों में स्थापित किए जाते हैं।
• संयुक्त क्षेत्र के उद्योग: इस प्रकार के उद्योगों का संचालन सार्वजनिक और निजी दोनों प्रकार के प्रयासों के संयुक्त तत्वाधान में होता है।
In simple words: Industries are classified by ownership into three types: public sector (government-owned, common in communist and some mixed economies), private sector (individually owned, common in capitalist economies), and joint sector (a mix of public and private ownership).

🎯 Exam Tip: Clearly define each ownership type (public, private, joint) by stating who controls it and in which economic systems it is most common.

 

Question 10. उत्पाद आधारित उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए।
अथवा
आधारभूत एवं गैर-आधारभूत उद्योगों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
Answer:
1. आधारभूत उद्योग: वे उद्योग जिनके उत्पाद को अन्य वस्तुएँ बनाने के लिए कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है, आधारभूत उद्योग कहलाते हैं। जैसे-लौह-इस्पात उद्योग एक आधारभूत उद्योग है, जिसके उत्पादों का उपयोग दूसरे उद्योगों में कच्चे माल के रूप में किया जाता है।
2. गैर-आधारभूत उद्योग: इसे उपभोक्ता वस्तु उद्योग भी कहा जाता है। इन उद्योगों से निर्मित उत्पादों को सीधे उपभोग के लिए उपयोग किया जाता है। उदाहरण के रूप में ब्रेड व बिस्कुट, चाय, साबुन, वस्त्र, लिखने के लिए कागज, रेडियो, टेलीविजन और श्रृंगार का सामान आदि।
In simple words: Basic industries produce raw materials for other industries (like iron-steel). Non-basic or consumer goods industries create products directly for consumer use (like bread, soap, clothes).

🎯 Exam Tip: Differentiate between basic and non-basic industries based on whether their output serves as a raw material for other industries or is consumed directly by the end-user. Provide clear examples for each.

RBSE Class 12 Geography Chapter 9 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. उद्योगों के स्थानीयकरण के कारकों का वर्णन कीजिए।
Answer: वे कारक जो किसी उद्योग की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, उन्हें स्थानीयकरण के कारक कहा जाता है। उद्योगों के स्थानीयकरण के प्रमुख कारक इस प्रकार हैं:
1. कच्चा माल: कच्चा माल किसी भी उद्योग का आधार होता है। कच्चा माल आसानी से, पर्याप्त मात्रा में और सस्ती दर पर उपलब्ध होना चाहिए। जिन उद्योगों में भारी और सस्ते कच्चे माल का उपयोग होता है, जो निर्माण के दौरान वजन कम करते हैं, वे कच्चे माल के स्रोत के पास स्थित होते हैं। इसी तरह, फल, सब्जी, दूध, मछली आदि जैसी जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं से संबंधित उद्योग भी कच्चे माल के स्रोत के पास ही स्थापित होते हैं। गैर-भार-ह्रास वाले उद्योगों, जैसे सूती वस्त्र उद्योग, कच्चे माल के स्रोत या बाजार कहीं भी स्थापित किए जा सकते हैं, क्योंकि परिवहन लागत में कोई अंतर नहीं आता है।
2. शक्ति के साधन: कोयला, पेट्रोलियम, जल विद्युत, प्राकृतिक गैस और परमाणु ऊर्जा मुख्य शक्ति संसाधन हैं। लौह-इस्पात उद्योग कोयले की खदानों के पास स्थापित होते हैं। एल्युमिनियम उद्योग जल विद्युत उत्पादक क्षेत्रों में स्थापित होते हैं। जल विद्युत का तारों के माध्यम से संचरण और पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस का पाइपलाइन द्वारा परिवहन सुविधाजनक है। इसलिए, उद्योगों में विकेंद्रीकरण की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
3. परिवहन व संचार के साधन: औद्योगिक इकाई की अवस्थिति में परिवहन लागत का महत्वपूर्ण स्थान होता है। संचार साधन भी औद्योगिक विकास में सहायक हैं। इसलिए इनकी सुलभता औद्योगीकरण को प्रभावित करती है।
4. बाजार: बाजार उद्योगों के स्थानीयकरण का एक प्रमुख कारक है। अधिक क्रय शक्ति और घनी आबादी उद्योगों के लिए एक बड़ा बाजार उपलब्ध कराती है।
5. कुशल श्रमिक: यद्यपि वर्तमान समय में मशीनीकरण का प्रभाव अधिक है, फिर भी उद्योगों में कुशल श्रमिकों की उपलब्धता उनके स्थानीयकरण को प्रभावित करती है।
6. पूँजी: पूँजी की उपलब्धता औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विकासशील देशों में पूँजी की कमी के कारण अपेक्षित औद्योगिक विकास नहीं हो पाता है।
8. जलवायु: उपयुक्त और स्वास्थ्यवर्धक जलवायु श्रमिकों की कार्यक्षमता बढ़ाती है। इसके अतिरिक्त, कुछ उद्योगों के लिए विशिष्ट जलवायु आवश्यक होती है, जैसे वस्त्र उद्योग के लिए आर्द्र जलवायु और सिनेमा उद्योग के लिए स्वच्छ, खुले आकाश व सूर्यप्रकाश वाली जलवायु आदि।
9. उच्च तकनीकी: उच्च तकनीकी के माध्यम से विनिर्माण की गुणवत्ता को नियंत्रित करना, अपशिष्टों का निस्तारण और प्रदूषण से बचाव संभव है। अतः इसका महत्वपूर्ण योगदान रहता है। इन सभी कारकों के अलावा, सरकारी नीतियाँ, सस्ती भूमि, राजनीतिक स्थिरता, बैंकिंग व बीमा संबंधी सुविधाएँ भी उद्योगों के स्थानीयकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

कच्चे माल के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण: कच्चे माल के आधार पर उद्योगों को निम्नलिखित भागों में बाँटा गया है-
1. कृषि आधारित उद्योग
2. खनिज आधारित उद्योग
3. रसायन आधारित उद्योग
4. वन आधारित उद्योग
5. पशु आधारित उद्योग।
1. कृषि आधारित उद्योग: इस वर्ग के उद्योग कृषि से प्राप्त उत्पादों को कच्चे माल के रूप में उपयोग करते हैं। इनमें भोजन प्रसंस्करण उद्योग, चीनी उद्योग, सूती व रेशमी वस्त्र उद्योग, जूट, चाय, कॉफी तथा रबर उद्योग सम्मिलित हैं।
2. खनिज आधारित उद्योग: इस वर्ग में वे उद्योग सम्मिलित हैं जो कच्चे माल के रूप में खनिजों का उपयोग करते हैं। इनमें से कुछ उद्योग लौह अंश वाले धात्विक खनिजों का उपयोग करते हैं, जैसे-लौह-इस्पात उद्योग। जबकि कुछ उद्योग अलौह धात्विक खनिजों का उपयोग करते हैं, जैसे-ताँबा, एल्युमिनियम एवं रत्न-आभूषण उद्योग। दूसरी ओर कुछ उद्योग ऐसे होते हैं जो कच्चे माल के रूप में अधात्विक खनिजों का उपयोग करते हैं, जैसे-सीमेंट व चीनी मिट्टी के बर्तनों का उद्योग।
3. रसायन आधारित उद्योग: इस वर्ग के उद्योग कच्चे माल के रूप में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले रासायनिक पदार्थों का उपयोग करते हैं। पेट्रो-रसायन उद्योग, नमक, गंधक उद्योग, पोटाश उद्योग, प्लास्टिक उद्योग तथा कृत्रिम रेशे बनाने का उद्योग इस वर्ग के प्रमुख रसायन आधारित उद्योग हैं।
In simple words: उद्योगों को स्थापित करने के लिए कई चीजें महत्वपूर्ण होती हैं। इनमें कच्चा माल, बिजली, अच्छी सड़कें, पास का बाजार, कुशल मजदूर, पैसा और सही मौसम शामिल हैं। सरकार की नीतियां और नई तकनीकें भी तय करती हैं कि उद्योग कहाँ लगेंगे। कच्चे माल के आधार पर उद्योगों को कृषि, खनिज, रसायन, वन और पशु आधारित उद्योगों में बांटा जाता है, जैसे कपड़े के लिए कपास या स्टील के लिए लौह अयस्क।

🎯 Exam Tip: उद्योगों के स्थानीयकरण के कारकों को सूचीबद्ध करते समय, केवल नाम लिखने के बजाय प्रत्येक कारक का संक्षिप्त विवरण देना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. रेशमी वस्त्र उद्योग का वर्णन कीजिए।
Answer: प्रारंभिक काल से ही रेशमी वस्त्र धनी लोगों की वस्तु रहा है। इसलिए यह उद्योग सूती वस्त्र और ऊनी वस्त्र उद्योग की तुलना में अधिक सीमित और केंद्रित रहा है। रेशमी वस्त्र उद्योग का विकास सबसे पहले चीन में कुटीर उद्योगों के रूप में हुआ। यहीं से यह उद्योग दुनिया के अन्य देशों में फैला। स्वचालित कारखानों के आविष्कार के साथ, इस उद्योग ने फैक्ट्री उद्योग का रूप ले लिया। रेशमी वस्त्र उद्योग के प्रमुख तीन चरण इस प्रकार हैं:
1. कोयों (कोकून) का उत्पादन
2. कोयों से रेशमी धागा लपेटना तथा
3. रेशमी वस्त्रों की बुनाई।
प्राकृतिक रेशम 'बायोक्जिम' नामक कीड़े की लार से निकले पदार्थ से प्राप्त होता है। शहतूत के पत्तों पर पलने वाला यह कीड़ा अपने मुँह से निकले चिपचिपे पदार्थ को अपने शरीर के चारों ओर लपेटता है। इस स्थिति में इसे कोया (कोकून) कहते हैं। पूर्ण विकसित कोयों को पानी में उबालकर उनसे लिपटे रेशम को उतारकर अलग धागे के रूप में लपेटा जाता है। इसके बाद रेशम के कपड़े बनाए जाते हैं। स्पष्ट है कि रेशमी वस्त्र उद्योग के ये तीन चरण हैं।

विश्व के प्रमुख रेशम उत्पादक देश: विश्व में प्राकृतिक कच्चे रेशम का उत्पादन करने वाले देशों में जापान लगभग 50 प्रतिशत, चीन 28 प्रतिशत, रूस 6 प्रतिशत और भारत 6 प्रतिशत रेशम का उत्पादन करता है। रेशमी वस्त्र मुख्य रूप से बाजार और मांग से प्रभावित होता है। इस उद्योग का विकास वहीं सफलतापूर्वक होता है जहाँ पर्याप्त संख्या में कुशल श्रम उपलब्ध होता है।
जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, चीन, ताइवान, जर्मनी, इंग्लैण्ड तथा भारत रेशमी वस्त्र के प्रमुख निर्माण करने वाले देश हैं। पूर्वी एशिया के देशों में विश्व का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा रेशम तैयार होता है। किन्तु यहाँ से विश्व के रेशम उत्पादन का लगभग 35 प्रतिशत भाग ही प्राप्त होता है। विश्व के प्रमुख रेशम उत्पादक देश निम्नलिखित हैं-
1. जापान: यह विश्व का प्रमुख रेशम उत्पादक देश है। जापान के यामागोता, फुकुशिमा, निगीता, किनकी तथा क्योटो रेशमी वस्त्रों की बुनाई के प्रमुख केंद्र हैं।
2. चीन: चीन में रेशमी वस्त्र उद्योग अति प्राचीन काल से विकसित रहा है। चीन से यूरोप के स्थलीय मार्ग को इतिहासकार रेशम मार्ग कहते हैं। रेशम उद्योग के केंद्र शंघाई तथा कांगचाऊ हैं।
In simple words: रेशमी कपड़े हमेशा से अमीर लोगों के लिए होते थे। यह उद्योग चीन में छोटे घरेलू व्यवसायों के रूप में शुरू हुआ और फिर फैल गया। नई मशीनों के साथ, यह एक कारखाने का उद्योग बन गया। रेशम बनाने के मुख्य कदम हैं: कोकून उगाना, उनसे रेशम का धागा निकालना और फिर कपड़े बुनना। जापान और चीन दुनिया के सबसे बड़े रेशम उत्पादक देशों में से हैं।

🎯 Exam Tip: रेशमी वस्त्र उद्योग के विकास में चीन की ऐतिहासिक भूमिका और आधुनिक उत्पादन में जापान के योगदान पर ध्यान दें।

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