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Detailed Chapter 8 प्राथमिक व्यवसाय RBSE Solutions for Class 12 Geography
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Class 12 Geography Chapter 8 प्राथमिक व्यवसाय RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Geography Chapter 8 बहुचयनात्मक प्रश्न
Question 1. निम्न में से कौनसी जनजाति उत्तरी साईबेरिया में नहीं रहती है?
(अ) सेमोयड
(ब) तुंग
(स) याकूत
(द) एस्किमो
Answer: (अ) सेमोयड
In simple words: सेमोयड जनजाति उत्तरी साइबेरिया में नहीं पाई जाती है। बाकी तुंग, याकूत, और एस्किमो जनजातियाँ उत्तरी साइबेरिया में रहती हैं।
🎯 Exam Tip: जनजातियों के नाम और उनके निवास स्थान को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से संबंधित हों।
Question 3. निम्न में से कौन-सी रोपण फसल नहीं है?
(अ) कॉफी
(ब) गेहूँ
(स) गन्ना
(द) चाय
Answer: (ब) गेहूँ
In simple words: कॉफी, गन्ना और चाय रोपण फसलें हैं, जिन्हें बड़े बागानों में उगाया जाता है। गेहूँ एक रोपण फसल नहीं है, इसे आमतौर पर बड़े खेतों में बोया जाता है।
🎯 Exam Tip: रोपण फसलें वे होती हैं जिन्हें बड़े पैमाने पर एक ही स्थान पर उगाया जाता है, अक्सर निर्यात के लिए, और उनकी खेती में अधिक पूंजी और श्रम लगता है।
Question 4. निम्न में से कौन-सी कृषि प्रकार का विकास यूरोप औपनिवेशिक समूहों द्वारा किया गया था?
(अ) टूक फार्मिंग
(ब) मिश्रित कृषि
(स) रोपण कृषि
(द) निर्वाहन कृषि
Answer: (स) रोपण कृषि
In simple words: रोपण कृषि को यूरोपीय देशों ने उपनिवेशों में विकसित किया था। इसका मुख्य उद्देश्य अपनी मातृभूमि के लिए विशेष फसलें उगाना था।
🎯 Exam Tip: औपनिवेशिक कृषि पद्धतियों को समझने के लिए, उपनिवेशवाद के इतिहास और यूरोपीय देशों की ज़रूरतों को जानना ज़रूरी है।
Question 5. निम्न प्रदेशों में से किसमें वाणिज्य अनाज कृषि नहीं की जाती ?
(अ) प्रेयरीज क्षेत्र
(ब) सवाना क्षेत्र
(स) पम्पाज क्षेत्र
(द) डाउन्स क्षेत्र
Answer: (द) डाउन्स क्षेत्र
In simple words: डाउन्स क्षेत्र वाणिज्यिक अनाज कृषि के लिए नहीं जाना जाता है।
🎯 Exam Tip: वाणिज्यिक अनाज कृषि के प्रमुख क्षेत्रों को याद रखें, जैसे प्रेयरीज, सवाना, और पम्पाज, क्योंकि ये अक्सर भौगोलिक प्रश्नों में पूछे जाते हैं।
Question 6. व्यापारिक स्तर पर लकड़ी काटने का व्यवसाय कौन से क्षेत्र में किया जाता है?
(अ) कोणधारी वन क्षेत्र
(ब) भूमध्य सागरीय वन
(स) उष्ण कटिबंधीय वन क्षेत्र
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (स) उष्ण कटिबंधीय वन क्षेत्र
In simple words: व्यापार के लिए लकड़ी काटने का काम मुख्य रूप से उष्ण कटिबंधीय वन क्षेत्रों में होता है।
🎯 Exam Tip: लकड़ी काटने के व्यवसाय के लिए उपयुक्त वन क्षेत्रों की विशेषताओं को समझें, जैसे वृक्षों के प्रकार और उनकी उपयोगिता।
उत्तरमाला:
1. (अ), 2. (स), 3. (ब), 4. (अ), 5. (द), 6. (स), 7. (ब), 8. (द), 9. (ब), 10. (स)
Question 8. ब्राजील में कहवा के बागानों को क्या कहते हैं?
Answer: ब्राजील में कहवा के बागानों को 'फेजेंडा' कहते हैं। ये बड़े-बड़े कॉफी के खेत होते हैं।
In simple words: ब्राजील के बड़े कॉफी बागानों को 'फेजेंडा' कहते हैं।
🎯 Exam Tip: कुछ देशों में विशिष्ट कृषि उत्पादों के लिए दिए गए स्थानीय नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 9. मछलियों की लगभग कितनी किस्में व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं?
Answer: व्यापारिक दृष्टि से लगभग 1,000 किस्में मछलियों की महत्वपूर्ण हैं। ये किस्में बाजार में बेची जाती हैं।
In simple words: लगभग एक हज़ार तरह की मछलियाँ व्यापार के लिए जरूरी मानी जाती हैं।
🎯 Exam Tip: मत्स्य पालन के महत्व को समझने के लिए आर्थिक और पर्यावरणीय पहलुओं पर ध्यान दें।
Question 10. गहन निर्वाहन कृषि के मुख्य प्रकार बताइए।
Answer: गहन निर्वाहन कृषि के दो मुख्य प्रकार हैं:
1. चावल प्रधान निर्वाहन कृषि
2. चावल विहीन निर्वाहन कृषि (गेहूँ प्रधान निर्वाहन कृषि) चावल विहीन निर्वाहन कृषि में गेहूँ मुख्य फसल होती है।
In simple words: गहन निर्वाहन कृषि दो तरह की होती है - एक जहाँ चावल ज्यादा उगाया जाता है, और दूसरी जहाँ गेहूँ या कोई और फसल उगाई जाती है।
🎯 Exam Tip: गहन निर्वाहन कृषि में जनसंख्या घनत्व और प्रति इकाई उत्पादन के संबंध को समझना महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 12 Geography Chapter 8 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 11. प्राथमिक व्यवसायों के कोई चार उदाहरण बताइए।
Answer: प्राथमिक व्यवसायों के चार उदाहरण निम्नलिखित हैं:
1. आखेट: यह दुनिया का सबसे पुराना काम है, जिसमें लोग शिकार करके अपना जीवन चलाते थे।
2. संग्रहण: इस काम में लोग जंगलों से फल, जड़ें, बैरी और पत्ते इकट्ठा करते हैं।
3. मछली पकड़ना: इस काम में प्राकृतिक रूप से मिलने वाली मछलियाँ पकड़ी जाती हैं।
4. पशुचारण: इस काम में पशुओं से भोजन, चमड़ा और ऊन जैसी चीजें पाने के लिए पशुपालन किया जाता है।
In simple words: प्राथमिक व्यवसाय वो होते हैं जिनमें हम सीधे प्रकृति से चीजें लेते हैं, जैसे शिकार करना, जंगल से चीजें जमा करना, मछली पकड़ना और पशु पालना।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक व्यवसायों के उदाहरणों को याद रखें और प्रत्येक की मुख्य विशेषता को भी समझें।
Question 13. टूक कृषि का क्या अर्थ है? इसकी मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer: टूक कृषि का मतलब है एक खास तरह की खेती जिसमें सब्जियाँ उगाई जाती हैं। इन सब्जियों को रोज़ाना ट्रकों में भरकर पास के शहरों के बाजारों में बेचा जाता है। बाजार से खेत की दूरी इस बात पर निर्भर करती है कि ट्रक रात भर में कितनी दूर जा सकता है। इसलिए इसे टूक कृषि कहते हैं।
ट्रक कृषि की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. यह कृषि शहरीकरण से बहुत जुड़ी हुई है, क्योंकि शहर इसके उत्पादों के बड़े बाजार होते हैं।
2. इसमें सिर्फ सब्जियाँ उगाई जाती हैं, किसी और फसल को उतनी प्राथमिकता नहीं मिलती।
3. शहरी आबादी की बढ़ती शाकाहारी जनसंख्या इस तरह की खेती को बढ़ावा देती है।
In simple words: टूक कृषि का मतलब है सब्जियों की खेती करके उन्हें रात भर में ट्रकों से शहर के बाजारों तक पहुँचाना। यह शहरी इलाकों के पास की जाती है और इसमें मुख्य रूप से सब्जियाँ उगाई जाती हैं।
🎯 Exam Tip: टूक कृषि का नाम और उसकी शहरी बाजारों से दूरी के संबंध को हमेशा याद रखें।
Question 14. बागाती कृषि की मुख्य विशेषताएँ कौन-कौन सी हैं?
Answer: बागाती कृषि की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. इसमें बहुत ज्यादा पूंजी लगाई जाती है, अच्छे तरीके से प्रबंधन किया जाता है, और खेती के लिए वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग किया जाता है।
2. इस कृषि में बहुत सारे मज़दूरों की ज़रूरत होती है।
3. यह एक ही फसल वाली कृषि है, मतलब एक बार में एक ही मुख्य फसल उगाई जाती है।
4. इससे उद्योगों को कच्चा माल मिलता है, जैसे चाय उद्योग को चाय पत्ती।
5. इलायची, काली मिर्च, गन्ना, रबड़, चाय, कहवा, नारियल और केले जैसी फसलें प्रमुख बागाती फसलें हैं।
6. इस तरह की कृषि इंडोनेशिया, मलेशिया, दक्षिणी व पूर्वी भारत, दक्षिणी चीन, म्यांमार, कंबोडिया, फिलीपींस, श्रीलंका, मध्य अफ्रीका, ब्राजील, फिजी, क्यूबा और हवाई द्वीपों पर की जाती है।
In simple words: बागाती कृषि में बहुत पैसे लगते हैं, बहुत लोग काम करते हैं, और इसमें एक ही खास फसल उगाई जाती है, जिससे उद्योगों को कच्चा सामान मिलता है।
🎯 Exam Tip: बागाती कृषि की विशेषताओं को पूंजी, श्रम और फसल के प्रकार के संदर्भ में याद रखें।
Question 15. खनिज कार्य को प्रभावित करने वाले कारक बताइए।
Answer: खनिज कार्य केवल खनन से ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक और मानवीय स्थितियों से भी जुड़ा है। खनिजों के खनन को कई चीजें प्रभावित करती हैं। खनन प्रक्रिया के आधार पर खनिज कार्य को प्रभावित करने वाले कारक निम्न हैं:
1. प्राकृतिक कारक: इनमें खनिज भंडारों की स्थिति, उनकी गुणवत्ता, मात्रा, खनिज के प्रकार और बाजार क्षेत्र से उनकी दूरी शामिल है।
In simple words: खनिज निकालने का काम कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे खनिज कहाँ है, कितना है, कैसा है, और बाजार से कितनी दूर है।
🎯 Exam Tip: खनिज खनन के प्राकृतिक और मानवीय दोनों कारकों को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए।
Question 10. विश्व के मुख्य कृषि प्रकारों का वर्णन कीजिए।
Answer: कृषि प्राथमिक स्तर की आर्थिक क्रियाओं में बहुत महत्वपूर्ण है और यह दुनिया में सबसे ज़्यादा प्रचलित व्यवसाय है। दुनिया भर में अलग-अलग भौतिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के कारण कृषि के कई अलग-अलग प्रकार देखने को मिलते हैं। विश्व में मुख्य रूप से निम्न कृषि प्रकार पाए जाते हैं:
1. स्थानान्तरित कृषि
2. आदिम स्थायी कृषि
3. जीवन-निर्वाहन कृषि
4. विस्तृत वाणिज्यिक अनाज कृषि
5. बागाती कृषि
6. मिश्रित कृषि
7. दुग्ध कृषि
8. टूक कृषि
9. फलोद्यान कृषि।
इनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:
1. स्थानान्तरित कृषि: यह कृषि का सबसे पुराना रूप है। यह उष्णकटिबंधीय वन क्षेत्रों में की जाती है। इसमें वनों को जलाकर भूमि साफ की जाती है और उस पर खेती की जाती है। यह आदिम जनजातियों द्वारा की जाती है और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इसके अलग-अलग नाम हैं।
2. आदिम स्थायी कृषि: धीरे-धीरे जब स्थानान्तरणशील कृषि स्थायी हो गई, तो इसे आदिम स्थायी कृषि कहा गया।
3. जीवन-निर्वाहन कृषि: खेती की शुरुआत जीवनयापन के लिए हुई थी, लेकिन बाद में यह किसानों के लिए आय का मुख्य साधन बन गई। जब यह भोजन की जरूरतों के साथ-साथ अन्य जरूरतों को पूरा करने लगी, तो इसे जीवन-निर्वाहन कृषि कहा जाने लगा। पिछले 100 सालों में इस कृषि का तेज़ी से विकास हुआ है। इसे दो भागों में बांटा गया है:
- चावल प्रधान निर्वाहन कृषि
- चावल विहीन निर्वाहन कृषि।
चावल प्रधान गहन जीवन निर्वाहन कृषि: इस खेती में चावल मुख्य फसल होती है। इसमें प्रति इकाई ज़्यादा उत्पादन होता है, लेकिन प्रति किसान उत्पादन कम होता है। अधिक जनसंख्या के कारण खेत छोटे होते हैं। इसमें किसान को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
4. विस्तृत वाणिज्यिक अनाज कृषि: यह खेती उन विकसित देशों में की जाती है जहाँ जमीन ज़्यादा और जनसंख्या कम होती है। यह दुनिया के मध्य अक्षांशीय क्षेत्रों के सूखे इलाकों में बड़े कृषि फार्मों पर आधुनिक मशीनों से की जाती है। इसकी मुख्य फसल गेहूँ है। इसमें खेत बहुत बड़े होते हैं और जुताई से लेकर कटाई तक का सारा काम मशीनों से होता है। इसमें प्रति एकड़ उत्पादन कम होता है, लेकिन प्रति व्यक्ति उत्पादन ज़्यादा होता है।
5. बागाती कृषि: इस तरह की व्यापारिक कृषि को यूरोपीय लोगों ने उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उपनिवेश काल में विकसित किया था। इसका मुख्य मकसद यूरोपीय देशों के लिए ऐसी फसलें उगाना था जो उष्णकटिबंधीय मौसम में ही उग सकती थीं। जैसे ब्रिटिश लोगों ने भारत और श्रीलंका में चाय के बागान, मलेशिया में रबड़ के बागान और पश्चिमी द्वीप समूह में गन्ना व केले के बागान विकसित किए।
6. मिश्रित कृषि: दुनिया के सबसे विकसित हिस्सों में, मध्यम आकार के खेतों में फसल उगाने के साथ-साथ पशुपालन भी किया जाता है। यह उत्तर-पश्चिमी यूरोप, उत्तरी अमेरिका के पूर्वी भाग, यूरेशिया के कुछ हिस्सों और दक्षिणी द्वीपों के ज़्यादातर हिस्सों में की जाती है। इसमें खेत मध्यम आकार के होते हैं। इसमें बोई जाने वाली मुख्य फसलों में गेहूँ, जौ, राई, जई, मक्का, धान और कंदमूल शामिल हैं। फसल उत्पादन और पशुपालन साथ-साथ किया जाता है। मवेशी, भेड़, सूअर और मुर्गियाँ आय के मुख्य स्रोत होते हैं।
7. डेरी कृषि: डेरी कृषि में उन्नत मशीनें, गहन खेती और आधुनिक पशु स्वास्थ्य सेवाओं की मदद से दुधारू पशुओं से व्यावसायिक स्तर पर दूध उत्पादन किया जाता है। इस कृषि में बहुत ज़्यादा पूंजी लगती है। पशुओं के स्वास्थ्य, प्रजनन और चिकित्सा पर भी ध्यान दिया जाता है। पशुओं को चराने और दूध निकालने जैसे कामों के लिए पूरे साल मज़दूरों की ज़रूरत होती है। यह कृषि शहरी क्षेत्रों के पास की जाती है।
8. टूक कृषि: यह भी एक खास तरह की खेती है जिसमें सब्जियाँ उगाई जाती हैं। इन चीज़ों को रोज़ाना ट्रकों में भरकर पास के शहरी बाजारों में बेचा जाता है। बाजार से खेत की दूरी इस बात पर निर्भर करती है कि ट्रक रात भर में कितनी दूर जा सकता है। इसलिए इस कृषि को ट्रक कृषि कहते हैं।
9. फलोद्यान कृषि: यह भी एक खास तरह की कृषि है, जिसमें ट्रक फार्मिंग की तरह सब्जियों की जगह फल और फूल उगाए जाते हैं। फलों और फूलों की मांग शहरों में ज़्यादा होती है। अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तरह के फल उगाए जाते हैं। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में केला, आम, नारियल; शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में सेब, नाशपाती और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में नींबू, नारंगी, संतरा जैसे मुख्य फल हैं।
In simple words: दुनिया में कई तरह की खेती होती है, जो जगह और मौसम के हिसाब से बदलती है। इनमें शिकार, जंगल से चीजें इकट्ठा करना, पशु पालना, फसलें उगाना, और फल-फूल उगाना शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: कृषि के प्रत्येक प्रकार की मुख्य विशेषताएँ और भौगोलिक क्षेत्र याद रखें, खासकर स्थानान्तरित, गहन निर्वाहन, बागाती और मिश्रित कृषि।
Question 18. मानव के प्रमुख आदिम व्यवसायों का विवरण दीजिए।
Answer: मानव ने पुराने समय से ही अपनी ज़रूरतों और विकास के साथ अपने व्यवसायों को बदला है, लेकिन मानव के कुछ आदिम व्यवसाय हमेशा आधार रहे हैं। मानव के इन आदिम व्यवसायों का वर्णन इस प्रकार है:
1. आखेट (शिकार): यह दुनिया का सबसे पुराना व्यवसाय माना जाता है। इसमें कम लोगों की ज़रूरत होती है, लेकिन यह किसी भी दूसरे आर्थिक काम से ज़्यादा जगह घेरता है। इस व्यवसाय में जीवनयापन के लिए कम से कम साधन उपलब्ध होते हैं। शिकार करके लोग भोजन, कपड़े और रहने की जगह जुटाते हैं। बहुत ठंडे या बहुत गर्म इलाकों में लोग शिकार करके ही अपना जीवन चलाते हैं। यह काम मुश्किल मौसम में खानाबदोश जीवन जीते हुए किया जाता है। इसमें बहुत कम पूंजी और बहुत कम तकनीकी ज्ञान की ज़रूरत होती है। इसमें खाने के लिए कुछ भी नहीं बचता। लोग शिकार के लिए नुकीले औजार, ज़हर वाले बाण और फंदे इस्तेमाल करते हैं।
2. संग्रहण (जमा करना): भोजन इकट्ठा करना भी मनुष्य का सबसे पुराना और आर्थिक रूप से सबसे कम महत्व का व्यवसाय है। सामाजिक और तकनीकी विकास के साथ इस व्यवसाय का महत्व कम होता जा रहा है। अब कुछ हज़ार लोग ही इस काम में लगे हैं। मानव अपनी रोटी, कपड़े और मकान जैसी ज़रूरतों के लिए अलग-अलग तरह की चीज़ें इकट्ठा करता रहा है। इस काम में लगे लोग जंगलों से फल, कंद-मूल, नट, बैरी, जड़ें और पत्तियाँ आदि जमा करते हैं। ये लोग खेती नहीं करते और न ही पशु पालते हैं। ये पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचाते और कम मेहनत से मिलने वाली चीज़ों का सेवन करते हैं।
3. मछली पकड़ना: यह व्यवसाय भी पुराने समय से होता आ रहा है। इसमें मानव को प्राकृतिक बाधाओं से लगातार जूझना पड़ता है। मछलियाँ तालाबों, पोखरों, नदियों, नालों, झीलों और समुद्र तटों से पकड़ी जाती हैं। इस काम में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध मछलियों को पकड़ते हैं और अपना जीवन चलाते हैं।
4. पशुचारण (पशु पालना): पशुचारण का काम भी मानव का एक आदिम क्रियाकलाप है। जब से मानव ने पशुओं को पालतू बनाना शुरू किया, तब से पशु पालने की प्रवृत्ति बढ़ी। पशुओं से मिलने वाले लाभों के कारण धीरे-धीरे मानव इन्हें आर्थिक रूप से पालने लगा। मानव का यही काम 'पशुचारण' का आधार बना।
पशुचारण का विकास:
शिकार और संग्रहण पर निर्भर रहने वाले मानव समूहों ने जब महसूस किया कि वे ठीक से जीवनयापन नहीं कर सकते, तब उन्होंने पशुपालन का काम अपनाया। अलग-अलग प्राकृतिक परिस्थितियों में रहने वाले लोगों ने उन क्षेत्रों में पाए जाने वाले पशुओं को चुनकर पालतू बनाया। पशुओं से भोजन, कपड़े, चमड़ा और ऊन मिलते हैं। यह काम मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में किया जाता है जहाँ मौसम गर्म और सूखा या शीतोष्ण और सूखा होता है, और ज़मीन ऊबड़-खाबड़ या पहाड़ी होती है।
पशुचारण के क्षेत्र: पशुचारण के मुख्य रूप से चार क्षेत्र हैं:
- उष्ण कटिबंधीय घास के मैदान: ये 5° से 30° अक्षांशों के बीच फैले हैं। जहाँ औसत वर्षा 100 सेमी से कम होती है। इनमें सवाना, लानोस, कम्पास और पार्कलैंड क्षेत्र प्रमुख हैं।
- शीतोष्ण कटिबंधीय घास के मैदान: ये 30° से 45° अक्षांशों के बीच महाद्वीपों के पश्चिमी भागों में फैले हैं। जहाँ औसत वर्षा 50 सेमी होती है। इन घास के मैदानों को रूस में स्टेपीज, संयुक्त राज्य अमेरिका में पम्पाज और ऑस्ट्रेलिया में डाउन्स के नाम से जाना जाता है।
- मरुस्थलीय क्षेत्र: थार मरुस्थल, कालाहारी, अरब मरुस्थल।
- पर्वतीय क्षेत्र: विश्व के सभी पर्वतीय स्थल। यह आदिम तरीके से भी हो सकता है और बहुत विकसित तथा वैज्ञानिक तरीके से व्यापारिक स्तर पर भी हो सकता है।
पशुचारण के प्रकार: पशुचारण की प्रक्रिया दुनिया भर में बहुत अलग-अलग है। इसी वजह से पशुचारण में जो विविधताएँ मिलती हैं, उनके आधार पर पशुचारण की प्रक्रिया को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है: चलवासी पशुचारण और व्यापारिक पशुचारण। इन दोनों प्रकारों का संक्षिप्त विवरण आगे दिया गया है।
(क) चलवासी पशुचारण: लोगों के जीवन का तरीका जिसमें उन्हें अपने पशुओं और अपनी अर्थव्यवस्था के आधार पर चारागाहों की तलाश में बार-बार एक जगह से दूसरी जगह जाना पड़ता है, उसे चलवासी पशुचारण कहते हैं। चलवासी पशुचारक अपने भोजन, कपड़े, रहने की जगह, औजार और आने-जाने के लिए पशुओं पर निर्भर रहते हैं। वे अपने पालतू पशुओं के साथ पानी और चारागाहों की उपलब्धता की तलाश में एक जगह से दूसरी जगह घूमते रहते हैं और अपनी ज़रूरतों को पूरा करते हैं। चलवासी पशुचारण के तीन मुख्य क्षेत्र हैं:
- उत्तरी अफ्रीका के अटलांटिक तट से अरब प्रायद्वीप होते हुए मंगोलिया और मध्य चीन तक।
- यूरोप और एशिया के टुंडा क्षेत्र।
- दक्षिणी-पश्चिमी अफ्रीका और मेडागास्कर द्वीप।
5. लकड़ी काटना: यह भी मानव का एक प्रमुख प्राथमिक व्यवसाय है। इसमें वनों से लकड़ी काटना, लट्ठे बनाना और उन्हें आरा मशीनों तक भेजना शामिल है। इस व्यवसाय में भी दूसरे व्यवसायों की तरह महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। पहले लकड़ी केवल ईंधन के लिए काटी जाती थी, लेकिन आज इसका उपयोग कई उद्योगों में कच्चे माल के रूप में किया जाता है।
In simple words: मानव के पुराने समय के मुख्य काम थे शिकार, जंगल से चीजें जमा करना, मछली पकड़ना, पशु पालना और लकड़ी काटना। ये सभी काम सीधे प्रकृति से जुड़े थे और जीवन जीने के लिए ज़रूरी थे।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक आदिम व्यवसाय की परिभाषा, प्रमुख विशेषताएँ और भौगोलिक वितरण को स्पष्ट रूप से लिखें।
आंकिक प्रश्न
Question 1. विश्व के मानचित्र में प्राथमिक व्यवसाय के क्षेत्रों को दर्शाइए।
Answer:
यहां एक विश्व मानचित्र है जो प्राथमिक व्यवसाय के क्षेत्रों को दर्शाता है। मानचित्र पर विभिन्न प्रकार के व्यवसायों के क्षेत्र छायांकन और संकेतों के माध्यम से दिखाए गए हैं।
संकेत (Legend):
- आखेट, मत्स्यन एवं संग्रहकर्ता (शिकार, मछली पकड़ना और इकट्ठा करना)
- चलवासी पशुचारण (खानाबदोश पशुपालन)
- आदिम कृषि (पुराने तरीके की खेती)
- व्यापारिक पशुचारण (व्यापार के लिए पशुपालन)
- बागाती कृषि (बागानों वाली खेती)
- विस्तृत व्यापारिक कृषि क्षेत्र (बड़े पैमाने पर व्यापारिक खेती वाले इलाके)
- जीवन निर्वाह कृषि (केवल गुजारे के लिए खेती)
- विनिर्माण उद्योग (चीजें बनाने वाले उद्योग)
In simple words: यह मानचित्र दुनिया के उन हिस्सों को दिखाता है जहाँ लोग मुख्य रूप से प्रकृति से सीधे जुड़े काम करते हैं, जैसे शिकार करना, खेती करना या पशु पालना।
🎯 Exam Tip: मानचित्र में दिए गए संकेतों (legend) को ध्यान से पढ़ें ताकि आप विभिन्न प्राथमिक व्यवसाय क्षेत्रों को सही ढंग से पहचान सकें।
RBSE Class 12 Geography Chapter 8 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. विश्व का सबसे प्राचीनतम उद्यम किसे माना जाता है?
(अ) आखेट
(ब) पशुपालन
(स) लकड़ी काटना
(द) खनन
Answer: (अ) आखेट
In simple words: शिकार करना (आखेट) दुनिया का सबसे पुराना काम है जो इंसान करता आया है।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक व्यवसायों के ऐतिहासिक क्रम को याद रखें, क्योंकि इससे आपको उनके विकास को समझने में मदद मिलेगी।
Question 3. बोरो जनजाति का निवास स्थान है -
(अ) मलाया प्रायद्वीप
(ब) अमेजन बेसिन
(स) अरब का मरुस्थल
(द) टैगा क्षेत्र
Answer: (ब) अमेजन बेसिन
In simple words: बोरो जनजाति अमेजन के जंगल वाले इलाकों में रहती है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न जनजातियों और उनके निवास स्थानों को याद रखें, क्योंकि यह भूगोल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Question 4. विश्व का सबसे प्रमुख मछली उत्पादक सागरीय क्षेत्र है?
(अ) उत्तरी अटलांटिक
(ब) दक्षिणी अटलांटिक
(स) उत्तरी हिन्द सागरीय
(द) दक्षिणी प्रशान्त
Answer: (अ) उत्तरी अटलांटिक
In simple words: उत्तरी अटलांटिक महासागर में दुनिया की सबसे ज़्यादा मछली पकड़ी जाती है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख मछली उत्पादक क्षेत्रों के नाम और उनके भौगोलिक स्थान को याद रखना चाहिए।
Question 5. घास के मैदानों (उष्ण कटिबंधीय) को सूडान में क्या कहा जाता है?
(अ) लानोस
(ब) कम्पास
(स) पार्कलैंड
(द) सवाना
Answer: (द) सवाना
In simple words: सूडान में गर्म इलाकों के घास के मैदानों को सवाना कहते हैं।
🎯 Exam Tip: विश्व के विभिन्न घास के मैदानों के स्थानीय नामों को याद रखें, जैसे सूडान में सवाना।
Question 6. डाउन्स घास के मैदान कहाँ पाए जाते हैं?
(अ) रूस
(ब) ब्राजील
(स) आस्ट्रेलिया
(द) कैंटनबरी
Answer: (स) आस्ट्रेलिया
In simple words: डाउन्स घास के मैदान ऑस्ट्रेलिया में मिलते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख घास के मैदानों के नाम और उनके संबंधित देशों को याद रखना चाहिए।
Question 7. कृषि
(अ) ट्रक कृषि
(ब) रोपण कृषि
Answer: (ब) रोपण कृषि
In simple words: रोपण कृषि खेती का एक तरीका है जिसमें बड़े बागानों में एक ही फसल उगाई जाती है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न कृषि प्रकारों के नाम और उनकी मुख्य विशेषताओं को याद रखें।
Question 9. स्थानान्तरित कृषि को मैक्सिको में क्या कहा जाता है?
(अ) झूमग
(ब) मिल्पी
(स) लदांग
(द) रे
Answer: (ब) मिल्पी
In simple words: मैक्सिको में स्थानान्तरित कृषि को 'मिल्पा' कहते हैं।
🎯 Exam Tip: स्थानान्तरित कृषि के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 10. ट्रक कृषि का शुभारम्भ कहाँ हुआ था?
(अ) एशिया में
(ब) डेनमार्क में
(स) संयुक्त राज्य अमेरिका में
(द) नाइजीरिया में
Answer: (स) संयुक्त राज्य अमेरिका में
In simple words: ट्रक कृषि सबसे पहले संयुक्त राज्य अमेरिका में शुरू हुई थी।
🎯 Exam Tip: विभिन्न कृषि पद्धतियों के मूल स्थान को याद रखना अक्सर परीक्षा में पूछा जाता है।
उत्तरमाला:
1. (अ), 2. (स), 3. (ब), 4. (अ), 5. (द), 6. (स), 7. (ब), 8. (द), 9. (ब), 10. (स)
सुमेलन सम्बन्धी प्रश्न
Question (क) निम्न में स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से सुमेलित कीजिए -
Answer:
| स्तम्भ (अ) (जनजाति) | स्तम्भ (ब) (निवास क्षेत्र) |
|---|---|
| (v) यागुआ व जिवारो | (र) अमेज़न बेसिन |
| (vi) सकाई व सेमांग | (ब) बोर्नियो |
| (vii) बुशमैन | (अ) कालाहारी मरुस्थल |
| (i) पिग्मी | (ल) कांगो बेसिन |
| (ii) सेमोयड | (य) उत्तरी साइबेरिया |
| (iii) तुंग | (अ) उत्तरी साइबेरिया |
| (iv) एस्किमो | (स) अतिशीत क्षेत्र (टुण्ड्रा व टैगा) |
सही सुमेलन इस प्रकार है:
(i) पिग्मी -> (ल) कांगो बेसिन
(ii) सेमोयड -> (य) उत्तरी साइबेरिया
(iii) तुंग -> (अ) उत्तरी साइबेरिया
(iv) एस्किमो -> (स) अतिशीत क्षेत्र (टुण्ड्रा व टैगा)
(v) यागुआ व जिवारो -> (र) अमेज़न बेसिन
(vi) सकाई व सेमांग -> (ब) बोर्नियो
(vii) बुशमैन -> (अ) कालाहारी मरुस्थल
In simple words: इस प्रश्न में विभिन्न जनजातियों को उनके रहने के स्थानों से मिलाना था। जैसे बुशमैन कालाहारी मरुस्थल में रहते हैं और पिग्मी कांगो बेसिन में।
🎯 Exam Tip: विभिन्न जनजातियों और उनके संबंधित निवास स्थानों को याद रखना मानचित्र-आधारित प्रश्नों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
Question (ख) निम्न में स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से सुमेलित कीजिए -
Answer:
| स्तम्भ अ (क्षेत्र) | स्तम्भ ब (स्थानान्तरित कृषि का नाम) |
|---|---|
| (i) भारत | (द) झूमिंग |
| (ii) मैक्सिको | (अ) मिल्पा |
| (iii) मलेशिया | (य) लदांग |
| (iv) वियतनाम | (ब) रे |
| (v) श्रीलंका | (स) चेना |
सही सुमेलन इस प्रकार है:
(i) भारत -> (द) झूमिंग
(ii) मैक्सिको -> (अ) मिल्पा
(iii) मलेशिया -> (य) लदांग
(iv) वियतनाम -> (ब) रे
(v) श्रीलंका -> (स) चेना
In simple words: इस प्रश्न में अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानान्तरित कृषि के स्थानीय नामों को मिलाना था। जैसे भारत में इसे झूमिंग और मैक्सिको में मिल्पा कहते हैं।
🎯 Exam Tip: स्थानान्तरित कृषि के क्षेत्रीय नामों को याद रखें, क्योंकि यह भौगोलिक ज्ञान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Question (ग) निम्न में स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से सुमेलित कीजिए -
Answer:
| स्तम्भ अ (कृषि का प्रकार) | स्तम्भ ब (विशेषता) |
|---|---|
| (i) गहन निर्वाह कृषि (चावल प्रधान) [Inferred] | (य) अत्यधिक मानवीय श्रम |
| (ii) विस्तृत वाणिज्यिक अनाज कृषि | (अ) प्रति व्यक्ति उत्पादन अधिक [Inferred] |
| (iii) स्थानान्तरित कृषि | (द) वनों को जलाकर कृषि भूमि तैयार करना। |
| (iv) बागाती कृषि | (ब) रोपण फसलों की प्रधानता |
| (v) मिश्रित कृषि | (स) कृषि व पशुपालन साथ-साथ |
सही सुमेलन इस प्रकार है:
(i) गहन निर्वाह कृषि (चावल प्रधान) -> (य) अत्यधिक मानवीय श्रम
(ii) विस्तृत वाणिज्यिक अनाज कृषि -> (अ) प्रति व्यक्ति उत्पादन अधिक
(iii) स्थानान्तरित कृषि -> (द) वनों को जलाकर कृषि भूमि तैयार करना।
(iv) बागाती कृषि -> (ब) रोपण फसलों की प्रधानता
(v) मिश्रित कृषि -> (स) कृषि व पशुपालन साथ-साथ
In simple words: इस प्रश्न में अलग-अलग तरह की खेती को उनकी मुख्य विशेषताओं से मिलाना था, जैसे स्थानान्तरित कृषि में जंगल जलाकर ज़मीन तैयार करते हैं।
🎯 Exam Tip: कृषि के विभिन्न प्रकारों की विशेषताओं को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर उनके श्रम, पूंजी और प्रक्रियाओं के संदर्भ में।
RBSE Class 12 Geography Chapter 8 अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. प्राथमिक व्यवसाय किसे कहते हैं ?
Answer: वे मानवीय क्रियाएँ जिनका सीधा संबंध प्रकृति से मिले संसाधनों, जैसे भूमि, जल, वनस्पति और खनिजों के उपयोग से होता है, प्राथमिक व्यवसाय कहलाती हैं। मानव अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए इन संसाधनों का उपयोग करता है।
In simple words: प्राथमिक व्यवसाय वे काम हैं जिनमें हम सीधे प्रकृति से चीजें लेते हैं, जैसे खेती करना या खनिज निकालना।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक व्यवसाय की परिभाषा को हमेशा प्रकृति के संसाधनों से उसके सीधे संबंध के साथ स्पष्ट करें।
Question 2. प्राथमिक व्यवसाय कौन-कौन से हैं?
Answer: आखेट (शिकार), संग्रहण (जमा करना), मछली पकड़ना, पशुचारण (पशु पालना), कृषि (खेती) और लकड़ी काटना व खनन (खनिज निकालना) आदि प्राथमिक व्यवसाय हैं।
In simple words: शिकार, जंगल से चीजें जमा करना, मछली पकड़ना, पशु पालना, खेती और खनन ये सभी प्राथमिक काम हैं।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक व्यवसायों के प्रमुख उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. आखेट से क्या तात्पर्य है?
Answer: आखेट एक ऐसा मानवीय व्यवसाय है जिसमें इंसान अपने जीवन-यापन के लिए पशु-पक्षियों और जीव-जन्तुओं का शिकार करके अपनी ज़रूरतें पूरी करता है। शिकार करने की यह प्रक्रिया ही आखेट कहलाती है।
In simple words: आखेट का मतलब है अपनी ज़रूरतों के लिए जानवरों का शिकार करना।
🎯 Exam Tip: आखेट की परिभाषा को स्पष्ट और संक्षिप्त शब्दों में दें।
Question 4. संग्रहण से क्या तात्पर्य है?
Answer: संग्रहण मानव की एक ऐसी आर्थिक क्रिया है जिसमें वह जंगलों से फल, कंद-मूल, बैरी, जड़ें और पत्तियां इकट्ठा करता है। यह प्रक्रिया संग्रहण कहलाती है।
In simple words: संग्रहण का मतलब है जंगल से फल, जड़ें आदि इकट्ठा करना।
🎯 Exam Tip: संग्रहण की परिभाषा को प्रकृति से प्राप्त संसाधनों के साथ उसके सीधे संबंध पर ध्यान दें।
Question 6. मत्स्य व्यवसाय में आधुनिकीकरण क्यों हुआ है?
Answer: तकनीकी विकास और बढ़ती जनसंख्या की भोजन की मांग को पूरा करने के लिए मत्स्य व्यवसाय में आधुनिकीकरण हुआ है। नई तकनीकों से ज़्यादा मछली पकड़ी जा सकती है।
In simple words: मछली पकड़ने के काम में नए तरीके इसलिए आए क्योंकि जनसंख्या बढ़ गई और ज्यादा भोजन की ज़रूरत थी।
🎯 Exam Tip: आधुनिकीकरण के कारणों में बढ़ती जनसंख्या और तकनीकी प्रगति जैसे प्रमुख बिंदुओं को शामिल करें।
Question 7. विश्व में मत्स्य पालन के प्रमुख क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
Answer: विश्व में मछली पकड़ने के प्रमुख क्षेत्र उत्तरी प्रशांत महासागर का तटीय क्षेत्र, उत्तरी अटलांटिक तटीय अमेरिकी क्षेत्र, उत्तरी-पश्चिमी यूरोपीय क्षेत्र और जापानी सागर क्षेत्र हैं। ये सभी क्षेत्र मछली उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।
In simple words: दुनिया में मुख्य मछली पकड़ने वाले क्षेत्र उत्तरी प्रशांत, उत्तरी अटलांटिक, उत्तरी-पश्चिमी यूरोप और जापानी सागर के किनारे हैं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख मत्स्य पालन क्षेत्रों के भौगोलिक स्थानों को याद रखें।
Question 8. पशुचारण क्या हैं?
Answer: पशुचारण का मतलब है पशुओं को चारागाहों पर चराने की क्रिया, या ऐसे चारागाह जहाँ उगी हुई घास और अन्य वनस्पतियों को पशुओं द्वारा चरने के लिए उपयोग किया जाता है। यह पशुपालन का एक हिस्सा है।
In simple words: पशुचारण का मतलब है जानवरों को घास के मैदानों में चराना।
🎯 Exam Tip: पशुचारण की परिभाषा में चारागाहों के उपयोग पर ज़ोर दें।
Question 9. पशुपालन के मुख्य क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
Answer: पशुपालन के मुख्य क्षेत्रों में उष्ण कटिबंधीय घास के मैदान, शीतोष्ण कटिबंधीय घास के मैदान, मरुस्थलीय क्षेत्र और पर्वतीय क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में अलग-अलग तरह के पशु पाले जाते हैं।
In simple words: पशु पालने के मुख्य क्षेत्र गर्म और ठंडे घास के मैदान, रेगिस्तान और पहाड़ हैं।
🎯 Exam Tip: पशुपालन के प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों को याद रखें और उनके विशिष्ट वातावरण को भी समझें।
Question 10. उष्ण कटिबंधीय घास के मैदान कहाँ पाए जाते हैं?
Answer: उष्ण कटिबंधीय घास के मैदान 5° से 30° अक्षांशों के बीच पाए जाते हैं। इन क्षेत्रों में औसत वर्षा 100 सेमी से कम होती है।
In simple words: गर्म इलाकों के घास के मैदान दुनिया में 5° से 30° अक्षांशों के बीच मिलते हैं।
🎯 Exam Tip: उष्ण कटिबंधीय घास के मैदानों के अक्षांशीय विस्तार को याद रखें।
Question 12. कम्पाज कहाँ मिलते हैं?
Answer: कम्पाज घास के मैदान दक्षिणी अमेरिका के ब्राजील नामक देश में मिलते हैं। ये घास के मैदान उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं.
In simple words: कम्पाज घास के मैदान दक्षिण अमेरिका के देश ब्राजील में मिलते हैं.
🎯 Exam Tip: Remember to link specific grasslands to their respective continents and countries to score full marks.
Question 13. पार्कलैंड किसे कहा जाता है?
Answer: दक्षिणी अफ्रीका में मिलने वाले उष्णकटिबंधीय घास के मैदानों को पार्कलैंड के नाम से जाना जाता है. यह क्षेत्र पेड़ों और घासों का मिश्रण होता है.
In simple words: दक्षिण अफ्रीका के गरम घास के मैदानों को पार्कलैंड कहते हैं.
🎯 Exam Tip: Distinguish between different types of grasslands and their regional names.
Question 14. शीतोष्ण कटिबंधीय घास के मैदान कहाँ मिलते हैं?
Answer: शीतोष्ण कटिबंधीय घास के मैदान 30°- 45° अक्षांशों के बीच महाद्वीपों के पश्चिमी भागों में फैले हुए हैं. इन क्षेत्रों में सर्दियाँ और गर्मियाँ स्पष्ट होती हैं.
In simple words: शीतोष्ण घास के मैदान 30° से 45° अक्षांशों के बीच महाद्वीपों के पश्चिमी हिस्सों में मिलते हैं.
🎯 Exam Tip: Understand the latitudinal distribution of different climatic zones for accurate answers.
Question 15. स्टेपीज कहाँ पाए जाते हैं?
Answer: यूरोप व एशिया में मिलने वाले शीतोष्ण कटिबंधीय घास के मैदानों को स्टेपीज कहा जाता है. यह घास का मैदान समतल और पेड़ों रहित होता है.
In simple words: यूरोप और एशिया के शीतोष्ण घास के मैदानों को स्टेपीज कहते हैं.
🎯 Exam Tip: Learn the local names of major grasslands around the world.
Question 16. पम्पाज कहाँ हैं?
Answer: पम्पाज घास के मैदान दक्षिणी अमेरिका के अर्जेन्टाइना नामक राष्ट्र में मिलते हैं. ये मैदान कृषि और पशुपालन के लिए बहुत उपजाऊ होते हैं.
In simple words: पम्पाज घास के मैदान दक्षिण अमेरिका के देश अर्जेन्टाइना में मिलते हैं.
🎯 Exam Tip: Relate each grassland name to its specific country or region to avoid confusion.
Question 17. चलवासी पशुचारण से क्या आशय है?
Answer: पशुपालन करने वाले लोगों के द्वारा अपने पशुओं को मौसमी दशाओं, जल व चारागाह उपलब्धता के अनुसार विभिन्न स्थानों पर चराने हेतु लाने व ले जाने की प्रक्रिया चलवासी पशुचारण कहलाती है. इसमें चरवाहे अपने पशुओं के साथ एक जगह से दूसरी जगह घूमते रहते हैं.
In simple words: चलवासी पशुचारण का मतलब है कि पशुपालक अपने जानवरों को पानी और घास के लिए मौसम के हिसाब से एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं.
🎯 Exam Tip: Define nomadic pastoralism by highlighting its key features: movement, seasonal migration, and dependence on natural resources.
Question 18. भारत में हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में - कौन से जाति समूह ऋतु प्रवास करते हैं?
Answer: भारत में हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में गुज्जर, बकरवाल, गद्दी एवं भूटिया लोगों के समूह ऋतु प्रवास करते हैं. ये समूह मौसम बदलने पर अपने पशुओं के साथ ऊँचे या नीचे पहाड़ों की ओर चले जाते हैं.
In simple words: हिमालय के पहाड़ों में गुज्जर, बकरवाल, गद्दी और भूटिया जैसे लोग मौसम के अनुसार अपनी जगह बदलते हैं.
🎯 Exam Tip: List the specific tribal communities involved in transhumance (seasonal migration) in the Himalayan region.
Question 20. वर्तमान में चलवासी पशुचारकों की संख्या घटने के कोई दो कारण लिखिए।
Answer: वर्तमान में चलवासी पशुचारकों की संख्या घटने के दो मुख्य कारण हैं:
1. राजनीतिक सीमाओं का अधिरोपण. देशों के बीच बनी नई सीमाओं के कारण उन्हें एक जगह से दूसरी जगह जाने में दिक्कत होती है.
2. कई देशों द्वारा नई बस्तियों की योजना बनाना. सरकारें चरवाहों के लिए स्थायी गाँव बना रही हैं, जिससे उनके घूमने की ज़रूरत कम हो रही है.
In simple words: चलवासी पशुपालकों की संख्या इसलिए कम हो रही है क्योंकि नई देशों की सीमाएं बन गई हैं और सरकारें उनके लिए पक्के घर बना रही हैं.
🎯 Exam Tip: Focus on modern changes like political borders and settlement policies that affect traditional practices.
Question 21. वाणिज्यिक पशुपालन से क्या तात्पर्य है?
Answer: पशुओं को व्यापार के दृष्टिकोण से पालने की प्रक्रिया वाणिज्यिक पशुचारण कहलाती है. इसमें पशुओं से दूध, माँस, ऊन व चमड़े की प्राप्ति हेतु पशुओं को पाला जाता है. इस प्रकार का पशुपालन व्यवस्थित व उन्नत किस्मों से युक्त होता है. यह बड़े-बड़े फ़ार्मों पर वैज्ञानिक तरीकों से किया जाता है.
In simple words: वाणिज्यिक पशुपालन का मतलब है जानवरों को दूध, माँस या ऊन जैसी चीजें बेचने के लिए बड़े पैमाने पर पालना, जिसमें अच्छी तकनीक का इस्तेमाल होता है.
🎯 Exam Tip: Explain commercial livestock rearing by emphasizing its market-oriented nature, organized methods, and focus on specific animal products.
Question 22. विश्व में वाणिज्य पशुधन पालन किन देशों में किया जाता है?
Answer: न्यूजीलैण्ड, आस्ट्रेलिया, अर्जेन्टाइना, उरुग्वे तथा संयुक्त राज्य अमेरिका विश्व में वाणिज्य पशुधन पालन करने वाले प्रमुख देश हैं. इन देशों में बड़े-बड़े फार्म होते हैं जहाँ बड़ी संख्या में पशु पाले जाते हैं.
In simple words: न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, उरुग्वे और अमेरिका जैसे देश बड़े पैमाने पर पशुपालन करते हैं.
🎯 Exam Tip: Name the leading countries that practice commercial livestock farming, particularly in temperate grassland regions.
Question 23. विश्व में विभिन्न प्रकार की कृषि प्रणालियाँ क्यों पायी जाती हैं?
Answer: विश्व में पायी जाने वाली विभिन्न भौतिक, सामाजिक एवं आर्थिक दशाएँ कृषि कार्य को प्रभावित करती हैं. इसी प्रभाव के कारण विश्व में विभिन्न प्रकार की कृषि प्रणालियाँ पायी जाती हैं. जैसे, कहीं जमीन उपजाऊ है तो कहीं नहीं, कहीं आबादी ज्यादा है तो कहीं कम, और कहीं किसानों के पास ज्यादा पैसे हैं तो कहीं कम. इन सब कारणों से अलग-अलग तरह की खेती होती है.
In simple words: दुनिया में अलग-अलग तरह की खेती इसलिए होती है क्योंकि हर जगह की ज़मीन, मौसम, लोगों की ज़रूरतें और पैसे की हालत अलग-अलग होती है.
🎯 Exam Tip: Explain that geographical, socio-economic, and technological factors influence the diversity of agricultural systems worldwide.
Question 24. कृषि से क्या तात्पर्य है?
Answer: मृदा को जोतने, फसलें उगाने, पशुओं के पालन-पोषण व बागवानी करने के विज्ञान एवं कला को कृषि कहते हैं. यह एक ऐसा काम है जिससे हमें भोजन मिलता है.
In simple words: कृषि का मतलब है ज़मीन जोतना, फसलें उगाना, पशु पालना और बगीचे लगाना ताकि हमें भोजन और दूसरी चीजें मिल सकें.
🎯 Exam Tip: Provide a concise and comprehensive definition of agriculture that includes crop cultivation, animal husbandry, and horticulture.
Question 26. स्थानान्तरणशील कृषि को विश्व में किन-किन नामों से जाना जाता है?
Answer: स्थानान्तरणशील कृषि को भारत के पूर्वी राज्यों में झूमिंग, राजस्थान के दक्षिणी भाग में वालरा, मध्य अमेरिका व मैक्सिको में मिल्पा, मलेशिया व इण्डोनेशिया में लेदांग, वियतनाम में रे व श्रीलंका में चेना के नाम से जाना जाता है.
In simple words: स्थानान्तरणशील कृषि को भारत में झूमिंग और वालरा, मध्य अमेरिका में मिल्पा, मलेशिया में लेदांग, वियतनाम में रे और श्रीलंका में चेना कहते हैं.
🎯 Exam Tip: List the regional names for shifting cultivation in different parts of the world.
Question 27. आदिम स्थायी कृषि से क्या आशय है?
Answer: स्थानान्तरणशील कृषि का प्रारम्भिक स्थायी रूप ही आदिम स्थायी कृषि के नाम से जाना जाता है. इसमें लोग एक ही जगह पर खेती करना शुरू करते हैं, बजाय बार-बार जगह बदलने के.
In simple words: जब घूमने वाली खेती एक जगह रुककर की जाने लगती है, तो उसे आदिम स्थायी कृषि कहते हैं.
🎯 Exam Tip: Define primitive sedentary agriculture as the initial stage of settled farming, evolving from shifting cultivation.
Question 28. जीवन-निर्वाहन कृषि से क्या तात्पर्य है?
Answer: मानव द्वारा की जाने वाली ऐसी कृषि जिसमें कृषि का मुख्य उद्देश्य भोजन की आवश्यकताओं को पूरा करना होता है. जीवन निर्वाहन करने के कारण ही ऐसी जीवन निर्वाहन कृषि कहलाती है. किसान और उसका परिवार केवल अपने खाने के लिए ही फसल उगाते हैं, न कि बेचने के लिए.
In simple words: जीवन-निर्वाहन कृषि वह खेती है जिसका मुख्य मकसद अपने परिवार का पेट भरना होता है, न कि बाज़ार में बेचना.
🎯 Exam Tip: Clearly state that subsistence agriculture is primarily for self-consumption and meeting family needs.
Question 29. चावल प्रधान निर्वाहन कृषि कहाँ की जाती है?
Answer: चावल प्रधान निर्वाहन कृषि भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, इंडोनेशिया, कम्बोडिया, थाईलैंड, दक्षिणी व मध्य चीन में की जाती है. इन सभी क्षेत्रों में चावल मुख्य फसल होती है.
In simple words: चावल प्रधान खेती भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, इंडोनेशिया, कंबोडिया, थाईलैंड और चीन के दक्षिणी हिस्सों में होती है.
🎯 Exam Tip: Identify the geographical regions where rice-dominated intensive subsistence farming is prevalent.
Question 30. विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: विस्तृत वाणिज्य कृषि की मुख्य फसल गेहूँ है. इसके अतिरिक्त मक्का, जौ, राई व जई भी बोयी जाती है. इस कृषि में खेतों का आकार बहुत विशाल होता है तथा यंत्रों का प्रयोग किया जाता है. इस प्रकार की कृषि में प्रति एकड़ उत्पादन कम होता है लेकिन प्रति व्यक्ति औसत उत्पादन अधिक होता है. इस प्रकार की कृषि यूरेशिया के स्टेपीज, उत्तरी अमेरिका के प्रेयरीज, अर्जेन्टाइना के पंपाज एवं न्यूजीलैण्ड के कैंटरबरी के घासे प्रदेशीय मैदानों में की जाती है. यह खेती बड़े फार्मों पर मशीनों का उपयोग करके की जाती है.
In simple words: विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि में बड़े-बड़े खेतों में गेहूँ और दूसरी फसलें उगाई जाती हैं, मशीनों का बहुत इस्तेमाल होता है, और यह यूरेशिया, अमेरिका, अर्जेंटीना और न्यूजीलैंड जैसे देशों के घास के मैदानों में की जाती है.
🎯 Exam Tip: Describe the key characteristics of extensive commercial grain farming, including crop types, farm size, mechanization, and geographic distribution.
Question 32. मिश्रित कृषि किसे कहते हैं?
Answer: एक ऐसी कृषि पद्धति जिसमें फसलें उगाने तथा पशुओं को पालने का कार्य एक साथ किया जाता है. उसे मिश्रित कृषि कहते हैं. यह कृषि अत्यधिक विकसित भागों में की जाती है. इसमें किसान अनाज उगाने के साथ-साथ पशु भी पालते हैं, जिससे उनकी आय बढ़ती है.
In simple words: मिश्रित कृषि का मतलब है, जब किसान एक ही खेत में फसलें उगाते हैं और साथ में जानवर भी पालते हैं.
🎯 Exam Tip: Define mixed farming by emphasizing the simultaneous cultivation of crops and raising of livestock.
Question 33. दुग्ध कृषि से क्या तात्पर्य है? अथवा डेरी कृषि क्या है?
Answer: यह कृषि का एक विशिष्ट तरीका है. इसमें दूध देने वाले पशुओं के प्रजनन, पशुचारण व नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाता है. अतः एक ऐसी कृषि जिसमें पर्याप्त पूँजी व पशु स्वास्थ्य सेवाओं की सहायता से दुधारू पशुओं से व्यावसायिक स्तर पर दुग्ध उत्पादन करने का कार्य किया जाता है उसे डेरी कृषि कहते हैं. इसमें पशुओं को साफ-सफाई और अच्छे चारे का भी ध्यान रखा जाता है.
In simple words: दुग्ध कृषि या डेरी कृषि का मतलब है, दूध देने वाले जानवरों को बड़े पैमाने पर पालना ताकि दूध और दूध से बनी चीजें बेची जा सकें.
🎯 Exam Tip: Highlight the commercial aspect, capital investment, and scientific management of dairy farming.
Question 34. ट्रक कृषि से क्या तात्पर्य है?
Answer: ऐसी कृषि जिसमें साग-सब्जियों की कृषि की जाती है तथा इन वस्तुओं को प्रतिदिन ट्रकों में भरकर निकटवर्ती नगरीय बाजारों में ले जाकर बेचा जाता है. इसलिए ऐसी कृषि को ट्रक कृषि कहा जाता है. इस कृषि में ताज़ी सब्जियाँ उगाकर रात भर में ट्रकों से शहरों तक पहुँचाई जाती हैं.
In simple words: ट्रक कृषि वह खेती है जिसमें सब्जियाँ उगाई जाती हैं और रोज़ रात में ट्रकों से पास के शहरों में बेची जाती हैं.
🎯 Exam Tip: Explain truck farming by focusing on its specialization in high-value, perishable crops and proximity to urban markets facilitated by fast transport.
Question 35. फलोद्यान कृषि क्या है?
Answer: यह एक विशिष्ट प्रकार की कृषि होती है. जिसमें फल व फूलों की कृषि की जाती है. इस प्रकार की कृषि में नगरों की प्रमुख भूमिका होती है. शहरों में फलों और फूलों की बहुत मांग होती है, इसलिए किसान इन्हें उगाते हैं.
In simple words: फलोद्यान कृषि एक खास तरह की खेती है जिसमें शहरों की मांग को पूरा करने के लिए फल और फूल उगाए जाते हैं.
🎯 Exam Tip: Define horticulture as the cultivation of fruits and flowers, often driven by urban demand.
Question 36. खनन क्या है?
Answer: धरती के अंदर से उपयोगी खनिजों को मशीनों या मानव द्वारा बाहर निकालने की प्रक्रिया खनन कहलाती है. इसमें कोयला, लोहा, सोना जैसे खनिज निकाले जाते हैं.
In simple words: खनन का मतलब है ज़मीन के अंदर से कीमती खनिज जैसे कोयला या सोना खोदकर निकालना.
🎯 Exam Tip: Provide a clear and simple definition of mining as the extraction of minerals from the earth.
Question 38. खनन को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं?
Answer: खनन कार्य को प्रभावित करने वाले कारकों में प्राकृतिक व मानवीय कारक मुख्य होते हैं. प्राकृतिक कारकों में खनिज निक्षेपों के आकार, श्रेणी व उपलब्धता की अवस्था व मानवीय दशाओं में खनिज की मांग, वर्तमान तकनीकी ज्ञान का स्तर व उसका उपयोग, आधारभूत अवसंरचना, उपलब्ध पूँजी, परिवहन व मानवीय श्रम को शामिल किया जाता है. ये सभी कारक तय करते हैं कि खनन कितना आसान या मुश्किल होगा.
In simple words: खनन को प्राकृतिक चीज़ें जैसे खनिजों की मात्रा और मानवीय चीज़ें जैसे पैसे, तकनीक और मज़दूरों की उपलब्धता प्रभावित करती है.
🎯 Exam Tip: Categorize and explain both natural (mineral characteristics, geology) and human (demand, technology, capital, labor, transport) factors influencing mining.
Question 39. खनिजों का सम्बन्ध किन चट्टानों से है?
Answer: खनिजों का सम्बन्ध-आग्नेय, कायान्तरित व अवसादी चट्टानों से है. ये तीनों मुख्य प्रकार की चट्टानें हैं जिनमें अलग-अलग तरह के खनिज पाए जाते हैं.
In simple words: खनिज आग्नेय, कायान्तरित और अवसादी-तीनों तरह की चट्टानों से जुड़े होते हैं.
🎯 Exam Tip: Remember the three main rock types and their association with mineral formation.
Question 40. आग्नेय चट्टानों में कौन-से खनिज मिलते हैं?
Answer: आग्नेय चट्टानों में सोना, चाँदी, ताँबा, जस्ता, सीसा, मैंगनीज, अभ्रक व गंधक आदि खनिज मिलते हैं. ये चट्टानें ज्वालामुखी के लावा से बनती हैं.
In simple words: आग्नेय चट्टानों में सोना, चांदी, तांबा और जस्ता जैसे खनिज पाए जाते हैं.
🎯 Exam Tip: List key metallic and non-metallic minerals typically found in igneous rocks.
Question 41. अवसादी चट्टानों में कौन-से खनिज मिलते हैं?
Answer: अवसादी चट्टानों में कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, रॉक-फास्फेट, पोटाश व नमक के रूप में खनिज पाए जाते हैं. ये चट्टानें परतों में जमा होती हैं.
In simple words: अवसादी चट्टानों में कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और नमक जैसे खनिज मिलते हैं.
🎯 Exam Tip: Focus on the fossil fuels and sedimentary minerals found in sedimentary rocks.
Question 42. विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशं वर्तमान में खनन कार्य से पीछे क्यों हट रहे हैं? अथवा खनन प्रसंस्करण व शोधन कार्य की दृष्टि से विकसित राष्ट्रों के पीछे हटने का मुख्य कारण क्या है? अथवा विकासशील राष्ट्र खनन अथवा प्रसंस्करण व शोधन, कार्यों को अधिक महत्व प्रदान कर रहे हैं, क्यों?
Answer: विकसित राष्ट्रों के खनन, प्रसंस्करण व शोधन कार्य से पीछे हटने का मुख्य कारण इन राष्ट्रों में श्रम लागत का अधिक आना है जबकि विकासशील देश अपनी विशाल श्रम शक्ति के बल पर अपने देशवासियों के जीवन-स्तर को उच्च बनाने के लिए खनन कार्य को महत्व दे रहे हैं. विकसित देश जहाँ मज़दूरी महंगी है, वहीं विकासशील देश में मज़दूर सस्ते हैं और वे अपने लोगों को काम देना चाहते हैं.
In simple words: विकसित देश खनन से पीछे हट रहे हैं क्योंकि वहां मज़दूरी महंगी है, जबकि विकासशील देश इसे अपनी आबादी को रोज़गार देने और अपने विकास के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं.
🎯 Exam Tip: Explain the economic reasons (high labor costs in developed countries vs. employment generation in developing countries) behind the shift in mining activities.
RBSE Class 12 Geography Chapter 8 अतुलघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. प्राथमिक व्यवसाय किसे कहते हैं?
Answer: मानव की ऐसी क्रियाएँ जिनका प्रत्यक्ष सम्बन्ध प्रकृति प्रदत्त संसाधनों के उपयोग से जुड़ा होता है जिसमें भूमि, जल, वनस्पति व खनिजों का उपयोग मानव अपनी आवश्यकता पूर्ति हेतु करता है ऐसे व्यवसाय प्राथमिक व्यवसाय कहलाते हैं. ये सीधे प्रकृति से जुड़े होते हैं.
In simple words: प्राथमिक व्यवसाय वे काम हैं जिनमें इंसान अपनी ज़रूरतों के लिए ज़मीन, पानी, जंगल और खनिजों जैसे प्राकृतिक चीज़ों का सीधा इस्तेमाल करता है.
🎯 Exam Tip: Provide a clear definition of primary activities, highlighting their direct dependence on natural resources.
Question 2. प्राथमिक व्यवसाय कौन-कौन से हैं?
Answer: आखेट, संग्रहण, मछली पकड़ना, पशुचारण, कृषि, लकड़ी काटना व खनन आदि प्राथमिक व्यवसाय हैं. ये सभी काम सीधे प्रकृति से संसाधन प्राप्त करने से जुड़े हैं.
In simple words: शिकार करना, चीज़ें इकट्ठा करना, मछली पकड़ना, पशु पालना, खेती करना, लकड़ी काटना और खनन करना- ये सभी प्राथमिक व्यवसाय हैं.
🎯 Exam Tip: List common examples of primary economic activities to illustrate the definition.
Question 3. आखेट से क्या तात्पर्य है?
Answer: मानव का एक ऐसा व्यवसाय जिसमें जीवन-यापन हेतु पशु-पक्षियों व जीव-जन्तुओं का शिकार करके अपनी आवश्यकताओं की आपूर्ति की जाती है. शिकार की यह प्रक्रिया आखेट कहलाती है. यह मानव का सबसे पुराना काम है.
In simple words: आखेट का मतलब है, जानवरों और पक्षियों का शिकार करके अपनी खाने-पीने की ज़रूरतें पूरी करना.
🎯 Exam Tip: Define hunting (आखेट) as a primitive economic activity focused on procuring food and resources by killing animals.
Question 4. संग्रहण से क्या तात्पर्य है?
Answer: मानव की एक ऐसी आर्थिक क्रिया जिसमें मानव जंगलों से फल, कंद-मूल, बेर, जड़ों व पत्तियों का एकत्रण करता है. यह प्रक्रिया संग्रहण कहलाती है. यह भी मानव का एक बहुत पुराना काम है.
In simple words: संग्रहण का मतलब है जंगलों से फल, जड़ें और पत्तियां इकट्ठा करके अपनी ज़रूरतें पूरी करना.
🎯 Exam Tip: Define gathering (संग्रहण) as collecting wild fruits, roots, and other plant products for subsistence.
Question 6. मत्स्य व्यवसाय में आधुनिकीकरण क्यों हुआ है?
Answer: तकनीकी विकास व बढ़ती जनसंख्या की उदरपूर्ति की मांग के कारण मत्स्य व्यवसाय में आधुनिकीकरण हुआ है. नई तकनीकों और बड़े जहाजों के इस्तेमाल से ज्यादा मछली पकड़ी जा सकती है ताकि बढ़ती आबादी को खाना मिल सके.
In simple words: मछली पकड़ने में आधुनिक तरीके इसलिए आए क्योंकि नई तकनीकें उपलब्ध हुईं और दुनिया की आबादी बढ़ने से मछलियों की मांग भी बढ़ी.
🎯 Exam Tip: Relate the modernization of fishing to technological advancements and increasing global demand for food.
Question 7. विश्व में मत्स्य पालन के प्रमुख क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
Answer: विश्व में मछली पकड़ने के प्रमुख क्षेत्रों में उत्तरी प्रशांत महासागर का तटवर्ती क्षेत्र, उत्तरी अटलांटिक तटीय अमेरिकन क्षेत्र, उत्तरी-पश्चिमी यूरोपियन क्षेत्र व जापानी सागर क्षेत्र प्रमुख हैं. इन जगहों पर मछलियाँ बहुत ज्यादा पाई जाती हैं.
In simple words: दुनिया में मछली पकड़ने के खास इलाके उत्तरी प्रशांत, उत्तरी अटलांटिक (अमेरिका के पास), उत्तरी-पश्चिमी यूरोप और जापानी सागर हैं.
🎯 Exam Tip: Identify the major fishing grounds globally, often located in continental shelf areas with nutrient-rich waters.
Question 8. पशुचारण क्या है?
Answer: पशुओं को चारागाहों पर चराने की क्रिया अथवा चारागाह जहाँ पर उगी हुई घासों व अन्य वनस्पतियों को, चराकर पशुपालन किया जाता है उसे ही पशुचारण कहते हैं. यह जानवरों को घास खिलाने का तरीका है.
In simple words: पशुचारण का मतलब है जानवरों को घास के मैदानों या खुले में चराकर पालना.
🎯 Exam Tip: Define pastoralism as the practice of raising livestock by grazing them on natural pastures.
Question 9. पशुपालन के मुख्य क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
Answer: पशुपालन के मुख्य क्षेत्रों में उष्ण कटिबंधीय घास के मैदान, शीतोष्ण कटिबंधीय घास के मैदान, मरुस्थलीय क्षेत्र व पर्वतीय क्षेत्रों को शामिल किया जाता है. इन सभी क्षेत्रों में पशुओं को चराने के लिए घास या दूसरी वनस्पतियां उपलब्ध होती हैं.
In simple words: पशुपालन के मुख्य क्षेत्र हैं गरम घास के मैदान, ठंडे घास के मैदान, रेगिस्तान और पहाड़ी इलाके.
🎯 Exam Tip: List the major climatic and physiographic regions where pastoral activities are concentrated.
Question 10. उष्ण कटिबंधीय घास के मैदान कहाँ पाए जाते हैं?
Answer: उष्ण कटिबंधीय घास के मैदान 5° से 30° अक्षांशों के मध्य पाए जाते हैं. इन क्षेत्रों में ज़्यादा गर्मी और मध्यम बारिश होती है.
In simple words: गरम घास के मैदान 5° से 30° अक्षांशों के बीच मिलते हैं.
🎯 Exam Tip: Specify the latitudinal range for tropical grasslands.
Question 11. चलवासी पशुचारण व व्यापारिक पशुचारण में क्या अन्तर है? अथवा चलवासी पशुचारण, व्यापारिक पशुचारण से किस प्रकार भिन्न है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: चलवासी पशुचारण व व्यापारिक पशुचारण में अग्रलिखित अंतर पाए जाते हैं –
| अन्तर का आधार | चलवासी पशुचारण | व्यापारिक पशुचारण |
|---|---|---|
| 1. स्थान | 1. ये चारे व पानी की खोज में एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते हैं। | 1. इस प्रकार का पशुपालन एक निश्चित स्थान पर बाड़ों में किया जाता है। |
| 3. उद्देश्य | 3. चलवासी पशुपालक जीवन निर्वाह की एक आर्थिक क्रिया ही है। | 3. यह व्यापार पर आधारित आर्थिक क्रिया है। |
| 4. विस्तार | 4. यह पुरानी दुनिया तक सीमित है। | 4. यह मुख्यतः नई दुनिया के देशों में प्रचलित है। |
| 5. पशु सुरक्षा | 5. पशुओं के प्रजनन, किस्म सुधार, बीमारियों पर नियन्त्रण तथा स्वास्थ्य पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जाता। | 5. पशुओं के प्रजनन, किस्म सुधार, बीमारियों पर नियन्त्रण तथा स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाता है। |
| 6. क्षेत्र | 6. यह व्यवसाय सहारा मरुस्थल, पश्चिमी एशिया के मरुस्थल, मंगोलिया, मध्य चीन, तिब्बत व एंडीज के पर्वतीय भागों, यूरेशिया के टुण्ड्रा प्रदेश तथा दक्षिणी-पश्चिमी अफ्रीका के मेडागास्कर द्वीप पर प्रमुख रूप से किया जाता है। | 6. यह व्यवसाय न्यूजीलैण्ड, आस्ट्रेलिया, अर्जेन्टाइना, युरुग्वे एवं संयुक्त राज्य अमेरिका आदि देशों में प्रमुख रूप से किया जाता है। |
In simple words: चलवासी पशुचारण में लोग जानवरों को चराने के लिए जगह-जगह घूमते हैं और यह केवल अपने जीवन के लिए करते हैं, जबकि व्यापारिक पशुचारण में जानवर एक ही जगह पर बड़े फार्मों में पाले जाते हैं ताकि उनसे पैसे कमाए जा सकें.
🎯 Exam Tip: Differentiate between nomadic and commercial pastoralism based on factors like mobility, purpose (subsistence vs. market), scale, and geographical distribution.
Question 12. कृषि क्या है? इसके प्रकार बताइए।
Answer: कृषि-मृदा को जोतने, फसलें उगाने एवं पशुओं के पालन-पोषण के विज्ञान एवं कला को कृषि कहा जाता है. कृषि के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं –
1. निर्वाह कृषि
• आदिकालीन निर्वाह कृषि
• गहन निर्वाह कृषि
2. रोपण कृषि.
3. विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि.
4. मिश्रित कृषि.
5. डेरी कृषि.
6. ट्रक कृषि.
7. फलोद्यान कृषि.
ये सभी प्रकार अलग-अलग जगहों और ज़रूरतों के हिसाब से होते हैं.
In simple words: कृषि का मतलब है ज़मीन पर खेती करना, जानवर पालना, और बागवानी करना. इसके मुख्य प्रकार हैं निर्वाह कृषि, रोपण कृषि, अनाज कृषि, मिश्रित कृषि, डेरी कृषि, ट्रक कृषि और फलोद्यान कृषि.
🎯 Exam Tip: Define agriculture clearly and list its various types, briefly explaining the distinguishing features of each.
Question 13. आदिकालीन निर्वाह कृषि क्या है?
Answer: आदिकालीन निर्वाह कृषि-इसे स्थानांतरणशील कृषि या कर्तन या दहन कृषि भी कहते हैं. कृषि की इस पद्धति में वन भूमि के एक हिस्से में से पेड़ और झाड़ियों को काटकर उसे साफ कर दिया जाता है. इस प्रकार से कटी हुई वनस्पति को जला दिया जाता है और उससे प्राप्त हुई राख को मिट्टी में मिला दिया जाता है. यह राख मिट्टी में खाद का काम करती है. इसे साफ किए भू-भाग पर तब तक फसलें उगायी जाती हैं जब तक उसमें उर्वरा शक्ति बनी रहती है. मृदा की उर्वरा शक्ति समाप्त होने पर कृषक नए क्षेत्र में वनों को जलाकर उस पर कृषि कार्य करते हैं. यह प्रक्रिया सतत् रूप से चलती रहती है. यह एक बहुत पुरानी और साधारण तरीके की खेती है.
In simple words: आदिकालीन निर्वाह कृषि वह तरीका है जिसमें जंगल के एक हिस्से को काटकर और जलाकर खेती की जाती है. जब ज़मीन की उपजाऊ शक्ति खत्म हो जाती है, तो किसान नई जगह चले जाते हैं.
🎯 Exam Tip: Explain primitive subsistence farming by detailing its slash-and-burn method, temporary nature, and shifting practices.
Question 14. वह कौन-सी कृषि पद्धति है जिसे क्षेत्रानुसार भिन्न-भिन्न नामों से पुकारा जाता है?
Answer: आदिकालीन निर्वाह कृषि अथवा स्थानांतरणशील कृषि को भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न नामों से पुकारा जाता है. इस कृषि पद्धति को भारत के उत्तरी-पूर्वी राज्यों में झूमिंग, मध्य अमेरिका एवं मैक्सिको में मिल्पा, मलेशिया व इंडोनेशिया में लादांग, श्रीलंका में चेना तथा सूडान में न्गासू के नाम से जाना जाता है. यह एक ही तरह की खेती है लेकिन हर जगह इसका नाम अलग है.
In simple words: स्थानान्तरणशील कृषि एक ऐसी खेती है जिसके अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नाम हैं, जैसे झूमिंग, मिल्पा, लादांग और चेना.
🎯 Exam Tip: Identify shifting cultivation as the agricultural practice with diverse regional names, and list some of these names with their locations.
Question 15. चावल प्रधान गहन निर्वाह कृषि की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
Answer: चावल प्रधान गहन निर्वाह कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं –
1. चावल प्रधान गहन निर्वाह कृषि में चावल प्रमुख फसल होती है. यह मुख्य भोजन का स्रोत होता है.
2. इस प्रकार की कृषि में भूमि का गहन उपयोग किया जाता है. मतलब एक ही ज़मीन पर बार-बार खेती की जाती है.
3. इस प्रकार की कृषि में यंत्रों की तुलना में मानव श्रम का अधिक महत्व है. ज़्यादातर काम हाथ से किए जाते हैं.
4. इस प्रकार की कृषि में प्रति इकाई उत्पादन अधिक होता है लेकिन प्रति कृषक उत्पादन कम होता है. यानी थोड़ी ज़मीन से ज्यादा अनाज निकलता है, लेकिन हर किसान कम ही पैदा कर पाता है.
5. इस प्रकार की कृषि में कृषक का पूरा परिवार कृषि कार्य में लगा रहता है. सब मिलकर खेतों में काम करते हैं.
6. इस कृषि में भूमि की उत्पादकता एवं उपजाऊपन को बनाये रखने के लिए पशुओं के गोबर की खाद व हरी खाद का उपयोग किया जाता है. इससे ज़मीन की ताक़त बनी रहती है.
In simple words: चावल प्रधान गहन निर्वाह कृषि में चावल मुख्य फसल है, इसमें ज़मीन का खूब इस्तेमाल होता है, ज़्यादातर काम लोग हाथों से करते हैं, और ज़मीन की उर्वरता बनाए रखने के लिए खाद का उपयोग होता है.
🎯 Exam Tip: Enumerate the key characteristics of intensive subsistence agriculture (rice dominant), such as high labor input, small farm size, intensive land use, and fertilizer application.
Question 17. लकड़ी काटने का कार्य किन क्षेत्रों में व किन उद्देश्यों से किया जाता है?
Answer: लकड़ी काटने का कार्य उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में मुख्य रूप से किया जाता है. इन क्षेत्रों में साल, सागौन, महोगनी, चंदन, रोजवुड आदि वृक्षों को इमारती लकड़ी व फर्नीचर बनाने हेतु काटा जाता है. शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में लकड़ी काटने का कार्य कोणधारी वनों के क्षेत्रों में होता है. यहाँ लकड़ी व्यापारिक दृष्टि से काटी जाती है. इस लकड़ी से लुग्दी, कागज, पैकिंग का सामान आदि बनाए जाते हैं. कनाडा, नॉर्वे, फिनलैंड व संयुक्त राज्य अमेरिका में लकड़ी काटने का कार्य बाजारी मांग के कारण व्यापक रूप में किया जाता है. लकड़ी काटना एक महत्वपूर्ण प्राथमिक व्यवसाय है.
In simple words: गरम इलाकों में लकड़ी फर्नीचर के लिए काटी जाती है, जबकि ठंडे इलाकों में यह कागज और पैकिंग के लिए व्यापारिक तौर पर काटी जाती है, खासकर कनाडा और नॉर्वे जैसे देशों में.
🎯 Exam Tip: Discuss logging practices in both tropical (for hardwoods, furniture) and temperate (for softwoods, pulp) regions, mentioning specific countries and uses.
Question 18. वर्तमान युग में खनिजों के आर्थिक महत्व को स्पष्ट कीजिए।
Answer: वर्तमान युग सभ्यता एवं आर्थिक युग के रूप में जाना जाता है. आज किसी भी देश की सभ्यता व आर्थिक जीवन का निर्धारण खनिजों के उपयोग की मात्रा के बिना करना सम्भव नहीं है. खनिज उद्योगों एवं व्यापार जगत में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसी कारण इन्हें उद्योग व व्यापार जगत की धुरी कहा जाता है. ये किसी राष्ट्र की प्राकृतिक सम्पदा होते हैं. कोयला व पेट्रोलियम तो शक्ति को आधार स्तम्भ बन गए हैं. अनेक प्रकार के धात्विक व अधात्विक खनिज भी किसी राष्ट्र के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होते हैं. खनिज हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी में भी बहुत काम आते हैं.
In simple words: आज के समय में खनिजों का बहुत आर्थिक महत्व है क्योंकि ये उद्योगों, व्यापार और ऊर्जा के लिए बहुत ज़रूरी हैं, जिससे किसी भी देश की तरक्की होती है.
🎯 Exam Tip: Explain the economic significance of minerals by highlighting their role in industry, trade, energy production, and overall national development.
Question 19. खनिजों की आधारभूत विशेषताएँ बताइए। अथवा खनिज किन-किन विशेषताओं से युक्त होते हैं? उत्तर-खनिजों की निम्न आधारभूत विशेषताएँ मिलती हैं –
Answer: खनिजों की निम्न आधारभूत विशेषताएँ मिलती हैं –
1. पृथ्वी पर इनका वितरण असमान मिलता है. यानी हर जगह खनिज एक जैसे नहीं मिलते.
2. अधिकांश खनिज निश्चित व अनंव्यकरणीय होते हैं. एक बार इस्तेमाल होने के बाद ये दोबारा नहीं बनते.
3. अधिकांश खनिज भूगर्भ में छिपे रहते हैं जिनके सर्वेक्षण एवं उत्खनन के लिए बड़ी मात्रा में पूँजी, श्रम और विकसित विधि व तकनीक की आवश्यकता पड़ती है. इन्हें निकालने में बहुत पैसा, मेहनत और खास तकनीक लगती है.
4. निरन्तर खनन द्वारा खाने, दिन-प्रतिदिन खर्चीली वे कम लाभदायक होती जाती हैं. जैसे-जैसे खनन होता है, उन्हें निकालना महंगा होता जाता है.
5. कोई भी देश खनिजों के उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं है. हर देश को खनिजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है.
6. खनिजों का उत्खनन, उपयोग, बाजार तथा माँग पर आधारित होता है. खनन इस बात पर निर्भर करता है कि उनकी मांग कितनी है और बाज़ार कैसा है.
In simple words: खनिजों की कुछ खास बातें हैं कि वे हर जगह बराबर नहीं मिलते, एक बार खत्म हो जाएं तो दोबारा नहीं बनते, उन्हें निकालना महंगा और मुश्किल होता है, और कोई भी देश खनिजों के लिए पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं है.
🎯 Exam Tip: List and explain the fundamental characteristics of minerals, such as their uneven distribution, non-renewable nature, high extraction costs, and economic dependence.
RBSE Class 12 Geography Chapter 8 लघूत्तरात्मक प्रश्न (SA-II)
Question 2. आधुनिक समय में भोजन संग्रह के कार्य का कुछ भागों में व्यापारीकरण होने से क्या परिवर्तन आया है।
Answer: आधुनिक समय में भोजन संग्रह के कार्य का कुछ भागों में व्यापारीकरण होने से यह परिवर्तन आया है कि अब अधिक पूँजी तथा उच्च तकनीक के माध्यम से भोजन संग्रह व्यवसाय का उपयोग किया जाने लगा है. जहाँ पहले लोग सिर्फ खाने के लिए इकट्ठा करते थे, अब कुछ जगहों पर उसे बेचकर पैसे कमाने लगे हैं, जिसके लिए मशीनों और ज्यादा पैसों का इस्तेमाल होता है.
In simple words: आज के समय में भोजन संग्रह का काम कुछ जगहों पर व्यापारिक बन गया है, जिससे अब इसमें ज़्यादा पैसा और अच्छी तकनीक का इस्तेमाल होने लगा है.
🎯 Exam Tip: Explain how the commercialization of gathering has led to increased capital investment and the use of advanced technology in certain areas.
Question 3. चलवासी पशुचारण की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करते हुए इस व्यवसाय के प्रमुख क्षेत्रों को मानचित्र पर प्रदर्शित कीजिए।
Answer: चलवासी पशुचारण की प्रमुख विशेषताएँ –
1. यह एक प्राचीन जीवन-निर्वाह व्यवसाय है जिसमें पशुचारक अपने भोजन, वस्त्र, शरण, औजार तथा आवागमन के लिए पालित पशुओं पर पूर्णतया निर्भर रहता है. पशुपालक अपने जानवरों पर पूरी तरह निर्भर रहते हैं.
2. पशुचारक अपने परिवार तथा पालित पशुओं के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर पानी व चारागाहों की तलाश में ऋतु के अनुसार स्थानांतरित होता रहता है. वे मौसम के हिसाब से अपनी जगह बदलते रहते हैं.
3. प्रत्येक पशुचारक समुदाय के अपने-अपने निश्चित चारागाह होते हैं तथा इनकी सम्पत्ति इनके पशु होते हैं. हर समूह का अपना तय क्षेत्र होता है.
4. अधिकांश चलवासी चरवाहे कबीलों में रहते हैं. वे छोटे-छोटे समूहों में रहते हैं.
In simple words: चलवासी पशुचारण में लोग अपने जानवरों के साथ खाने और चारे के लिए जगह-जगह घूमते रहते हैं. यह एक पुराना तरीका है और हर समूह का अपना चारागाह होता है.
🎯 Exam Tip: Detail the characteristics of nomadic pastoralism, emphasizing their mobility, subsistence lifestyle, and specific routes, and mentally visualize its global distribution on a map.
Question 4. वाणिज्यिक पशुचारण की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए इस व्यवसाय के प्रमुख क्षेत्रों को मानचित्र पर दर्शाइए।
Answer: वाणिज्यिक पशुचारण की प्रमुख विशेषताएँ –
1. यह एक व्यवस्थित तथा पूँजी प्रधान व्यवसाय है जो पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित है. इसमें बहुत पैसा लगता है और यह बहुत योजनाबद्ध तरीके से किया जाता है.
2. इसमें पशु चारागाह फार्म स्थायी तथा एक विशाल क्षेत्र में फैले हुए मिलते हैं. ये फार्म बहुत बड़े होते हैं और एक ही जगह पर रहते हैं.
3. पशुओं की चराई को नियन्त्रित करने के लिये इन विशाल चारागाह फार्मों में बाड़ लगाकर उसे अनेक भागों में बाँट दिया जाता है. जानवरों को अलग-अलग हिस्सों में चराया जाता है.
4. इस व्यवसाय में पशुओं की संख्या चारागाह की वहन क्षमता के अनुसार रखी जाती है. यानी जितने जानवर चारे के लिए पर्याप्त हों, उतने ही पाले जाते हैं.
5. इसमें केवल एक ही प्रकार के पशु पाले जाते हैं. भेड़, बकरी, गाय-बैल तथा घोड़े इस व्यवसाय के प्रमुख पालित पशु हैं. एक ही तरह के जानवर पाले जाते हैं.
6. पशुओं का पालन वैज्ञानिक ढंग व उच्च तकनीक के माध्यम से किया जाता है. अच्छी नस्ल और स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाता है.
7. पशु उत्पादों का अधिकांश भाग वैज्ञानिक ढंग से संसाधित कर अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों में निर्यात कर दिया जाता है. दूध, माँस या ऊन को अच्छे से पैक करके विदेशों में बेचा जाता है.
8. व्यापारिक पशुपालन मुख्यतः शीतोष्ण घास के मैदानों में किया जाता है. ये ठंडे इलाकों के घास के मैदानों में होता है.
9. डेनमार्क व न्यूजीलैण्ड दूध के लिए, आस्ट्रेलिया दूध व ऊन के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका माँस व दूध उत्पादन के लिए विशेष पहचान रखते हैं. ये देश खास उत्पादों के लिए जाने जाते हैं.
In simple words: व्यापारिक पशुचारण में बड़े फार्मों पर वैज्ञानिक तरीके से जानवर पाले जाते हैं, एक ही तरह के जानवर होते हैं, और उनसे मिलने वाले उत्पादों को बेचा जाता है. यह न्यूजीलैंड और अमेरिका जैसे देशों के ठंडे घास के मैदानों में ज़्यादा होता है.
🎯 Exam Tip: Describe the key features of commercial livestock farming, including its capital-intensive nature, scientific management, specialization in animal products, and market orientation, along with its major global regions.
Question 5. स्थानान्तरित कृषि की प्रमुख विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए। अथवा आदिकालीन निर्वाह कृषि (झुमिंग) की विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
Answer: आदिकालीन निर्वाह कृषि (झुमिंग) की प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं –
1. इस कृषि में बोए गए खेतों का आकार बहुत ही छोटा होता है. खेत छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटे होते हैं.
2. यह कृषि पुराने औजारों; जैसे-लकड़ी, कुदाली, फावड़े आदि से की जाती है. इसमें आधुनिक मशीनों का उपयोग नहीं होता.
3. इस कृषि में दो-तीन वर्षों में भूमि में उर्वरता समाप्त होने पर दूसरी जगह नए सिरे से खेत तैयार कर खेती की जाती है. ज़मीन की ताकत खत्म होने पर किसान दूसरी जगह चले जाते हैं.
4. इस प्रकार की कृषि को भारत के पूर्वी राज्यों से झूमिंग, मध्य अमेरिका एवं मैक्सिको में मिल्पा, मलेशिया व इण्डोनेशिया में लदांग तथा वियतनाम में 'रे' कहा जाता है. इसके हर जगह अलग-अलग नाम हैं.
5. यह कृषि अमेजन नदी बेसिन, कांगो बेसिन व पूर्वी द्वीप समूह में भी की जाती है. ये गरम और नम इलाकों में ज़्यादा होती है.
6. वर्तमान में इसमें धान, स्थानीय मोटे अनाज मक्का, ज्वार, बाज़रा, दालें, तिलहन आदि फसलें पैदा की जाती हैं. ये फसलें मुख्य रूप से खाने के लिए उगाई जाती हैं.
In simple words: झूमिंग कृषि में छोटे खेतों में पुराने औजारों से खेती होती है, ज़मीन की उर्वरता कम होने पर जगह बदल दी जाती है, और इसमें चावल, मक्का जैसी फसलें उगाई जाती हैं.
🎯 Exam Tip: Detail the characteristics of shifting cultivation (Jhuming), focusing on farm size, tools used, shifting nature, crop types, and regional distribution.
Question 6. आदिम स्थायी कृषि की विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
Answer: आदिम स्थायी कृषि की विशेषताएँ –
1. यह कृषि का स्थायी रूप है तथा अनुकूल प्राकृतिक दशाओं वाले क्षेत्रों में की जाती है. इसमें किसान एक ही जगह पर खेती करते हैं.
2. इस कृषि में भूमि पर जनसंख्या के दबाव के कारण भूमि का गहनतम उपयोग होता है. यानी ज़्यादा लोग होने के कारण एक ही ज़मीन का खूब इस्तेमाल किया जाता है.
3. इस कृषि की गहनता इतनी है कि वर्ष में दो या तीन, फसलें ली जाती हैं. एक साल में कई बार फसलें उगाई जाती हैं.
4. इस कृषि में भू-जोत छोटे आकार के व छितरे हुए होते हैं. किसानों के खेत छोटे और बिखरे हुए होते हैं.
5. इस कृषि में मानवीय श्रम के भरपूर उपयोग के साथ-साथ कृषि यंत्रों का प्रयोग भी किया जाता है. खेती में लोग ज़्यादा काम करते हैं, पर मशीनों का भी इस्तेमाल होता है.
6. इस कृषि में उन्नत बीजों, रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशक दवाओं के प्रयोग द्वारा उत्पादकता बढ़ी है. अच्छे बीज और खाद से ज्यादा फसल पैदा होती है.
7. इस कृषि में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हुआ है तथा फसल-चक्र का अनुसरण किया जाता है. पानी की अच्छी व्यवस्था और अलग-अलग फसलें उगाने का तरीका अपनाया जाता है.
8. इस कृषि में सघन जनसंख्या के कारण मुख्यतः खाद्यान्नों का उत्पादन किया जाता है. ज़्यादा लोग होने के कारण खाने के लिए अनाज ज़्यादा उगाया जाता है.
9. इस प्रकार की कृषि मानसून एशिया के घने बसे क्षेत्रों में की जाती है. यह उन इलाकों में होती है जहाँ बारिश अच्छी होती है और आबादी ज़्यादा होती है.
In simple words: आदिम स्थायी कृषि में एक ही ज़मीन पर लगातार खेती होती है, जहाँ आबादी ज़्यादा होने के कारण ज़मीन का खूब इस्तेमाल होता है. इसमें अच्छी तकनीक और खाद का उपयोग होता है, जिससे ज़्यादा फसलें उगती हैं, खासकर मानसून वाले इलाकों में.
🎯 Exam Tip: Enumerate the key characteristics of primitive sedentary agriculture, focusing on its permanent nature, intensive land use, multi-cropping, small holdings, and dependence on human labor and basic technology.
Question 7. जीवन-निर्वाहन कृषि की विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
Answer: जीवन-निर्वाहन कृषि की निम्न विशेषताएँ हैं –
1. यह कृषि का स्थायी रूप है तथा अनुकूल प्राकृतिक दशाओं वाले क्षेत्रों में की जाती है. यह खेती एक ही जगह पर की जाती है, जो वहाँ के मौसम के अनुकूल होती है.
2. इस कृषि में भूमि पर जनसंख्या के दबाव के कारण भूमि का गहनतम उपयोग होता है. आबादी ज़्यादा होने से ज़मीन का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल किया जाता है.
3. इस कृषि की गहनता इतनी है कि वर्ष में दो या तीन, फसलें ली जाती हैं. एक साल में दो या तीन बार फसलें उगाई जाती हैं.
4. इस कृषि में भू-जोत छोटे आकार के व छितरे हुए होते हैं. किसानों के खेत छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटे होते हैं.
5. इस कृषि में मानवीय श्रम के भरपूर उपयोग के साथ-साथ कृषि यंत्रों का प्रयोग भी किया जाता है. इसमें ज़्यादातर काम हाथ से होता है, पर कुछ मशीनों का भी इस्तेमाल करते हैं.
6. इस कृषि में उन्नत बीजों, रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशक दवाओं के प्रयोग द्वारा उत्पादकता बढ़ी है. अच्छे बीज और दवाइयों से ज़्यादा फसल पैदा होती है.
7. इस कृषि में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हुआ है तथा फसल-चक्र का अनुसरण किया जाता है. पानी की अच्छी व्यवस्था और अलग-अलग फसलें उगाने का तरीका अपनाया जाता है.
8. इस कृषि में सघन जनसंख्या के कारण मुख्यतः खाद्यान्नों का उत्पादन किया जाता है. ज़्यादा आबादी के लिए खाने का अनाज ज़्यादा उगाया जाता है.
9. इस प्रकार की कृषि मानसून एशिया के घने बसे क्षेत्रों में की जाती है. यह उन इलाकों में होती है जहाँ बारिश अच्छी होती है और आबादी ज़्यादा होती है.
In simple words: जीवन-निर्वाहन कृषि में एक ही ज़मीन का बहुत इस्तेमाल होता है, साल में कई फसलें उगाई जाती हैं, खेत छोटे होते हैं, और ज़्यादातर काम लोग हाथों से करते हैं. यह मुख्य रूप से खाने के लिए होती है और मानसून वाले इलाकों में ज़्यादा होती है.
🎯 Exam Tip: Explain the key characteristics of subsistence agriculture, emphasizing intensive land use, small holdings, high labor input, and focus on food crops for self-consumption.
Question 8. विस्तृत वाणिज्यिक अनाज कृषि की विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
Answer: विस्तृत वाणिज्यिक अनाज कृषि की निम्न विशेषताएँ हैं –
1. इस प्रकार की कृषि विस्तृत भू-जोतों पर की जाती है. इनका क्षेत्रफल प्राय: 240 से 1600 हैक्टेयर तक होता है. खेत बहुत बड़े होते हैं.
2. इस कृषि में खेत तैयार करने से फसल काटने तक का समस्त कार्य मशीनों के द्वारा किया जाता है. ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, थ्रेसर, कम्बाईन, विनोअर आदि मुख्य यंत्र हैं. इसमें सारे काम मशीनों से होते हैं.
3. इस प्रकार की कृषि की मुख्य फसल गेहूँ है. जौ, जई, राई, तिलहन आदि फसलें भी बोई जाती है. मुख्य रूप से अनाज उगाया जाता है.
4. खाद्यान्नों को सुरक्षित रखने के लिए बड़े-बड़े माल गोदाम बनाए जाते हैं. अनाज को स्टोर करने के लिए बड़ी जगह होती है.
5. इस कृषि में मानवीय श्रम का उपयोग न्यूनतम होता है. इसमें कम मज़दूरों की ज़रूरत पड़ती है.
6. इस कृषि में प्रति हैक्टेयर उपज कम तथा प्रति व्यक्ति उपज अधिक होती है. यानी एक एकड़ में कम फसल होती है, लेकिन हर किसान ज्यादा फसल पैदा कर पाता है.
7. शीतोष्ण कटिबंधीय घास के मैदानों में इस प्रकार की कृषि की जाती है. यूरेशिया के स्टेपीज, उत्तरी अमेरिका के प्रेयरीज, अर्जेन्टाइना के पंपास, दक्षिणी अफ्रीका के वेल्डस, आस्ट्रेलिया के डाउन्स तथा न्यूजीलैंड के कैंटरबरी के मैदानों में इस प्रकार की कृषि होती है. यह ठंडे इलाकों के घास के मैदानों में होती है.
In simple words: विस्तृत वाणिज्यिक अनाज कृषि में बड़े-बड़े खेतों में मशीनों से गेहूँ जैसी फसलें उगाई जाती हैं. इसमें कम मज़दूर लगते हैं और ज़्यादा अनाज पैदा होता है, खासकर ठंडे घास के मैदानों वाले देशों में.
🎯 Exam Tip: Detail the characteristics of extensive commercial grain farming, focusing on large farm size, high mechanization, single crop specialization, low labor input, and its association with temperate grasslands.
Question 5. स्थानान्तरित कृषि की प्रमुख विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए। अथवा आदिकालीन निर्वाह कृषि (झुमिंग) की विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
Answer: आदिकालीन निर्वाह कृषि की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
- इस खेती में बोए गए खेतों का आकार बहुत छोटा होता है।
- यह कृषि पुराने औजारों जैसे लकड़ी, कुदाली और फावड़े की मदद से की जाती है।
- इस खेती में दो-तीन साल के बाद जब जमीन की उपजाऊ शक्ति खत्म हो जाती है, तो किसान दूसरी जगह नया खेत तैयार करके खेती करते हैं।
- इस तरह की खेती को भारत के पूर्वी राज्यों में झूमिंग, मध्य अमेरिका और मैक्सिको में मिल्पा, मलेशिया और इंडोनेशिया में लदांग, तथा वियतनाम में 'रे' कहा जाता है।
- यह खेती अमेजन नदी बेसिन, कांगो बेसिन और पूर्वी द्वीप समूह में भी की जाती है।
- आजकल इसमें धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, दालें और तिलहन जैसी फसलें उगाई जाती हैं।
In simple words: यह एक पुरानी खेती का तरीका है जहाँ छोटे खेतों में पुराने औजारों से काम किया जाता है। कुछ साल बाद जमीन बदलकर नई जगह खेती करते हैं क्योंकि मिट्टी की ताकत कम हो जाती है। इसे अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है।
🎯 Exam Tip: जब भी स्थानांतरण कृषि के बारे में पूछा जाए, तो उसके स्थानीय नाम और औजारों के बारे में जरूर बताएं।
Question 6. आदिम स्थायी कृषि की विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस प्रश्न का उत्तर प्रदान करने के लिए पर्याप्त शैक्षिक सामग्री उपलब्ध नहीं है।
In simple words: इस प्रश्न का उत्तर उपलब्ध नहीं है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों के लिए, यदि जानकारी उपलब्ध न हो तो सीधे बताएं कि सामग्री अनुपलब्ध है।
Question 7. जीवन-निर्वाहन कृषि की विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
Answer: जीवन-निर्वाहन कृषि की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
- यह खेती का एक स्थायी तरीका है और उन जगहों पर की जाती है जहाँ प्राकृतिक हालात इसके लिए अच्छे होते हैं।
- इस खेती में जनसंख्या के दबाव के कारण जमीन का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल होता है।
- इस खेती में साल में दो या तीन फसलें भी ली जाती हैं।
- इस खेती में किसानों के खेत छोटे और बिखरे हुए होते हैं।
- इस खेती में इंसानों का श्रम ज़्यादा इस्तेमाल होता है, साथ ही खेती की मशीनें भी उपयोग की जाती हैं।
- इस खेती में अच्छे बीज, रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाओं के इस्तेमाल से उत्पादन बढ़ा है।
- इसमें सिंचाई की सुविधाएँ बढ़ी हैं और फसलों को बदल-बदल कर बोया जाता है।
- ज्यादा जनसंख्या होने के कारण ज़्यादातर अनाज का ही उत्पादन किया जाता है।
- इस तरह की खेती मानसून एशिया के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में की जाती है।
In simple words: यह खेती स्थायी होती है और घनी आबादी वाले इलाकों में की जाती है। इसमें ज़मीन का खूब इस्तेमाल होता है, साल में कई फसलें ली जाती हैं, और ज़्यादातर इंसान ही काम करते हैं। अच्छी खाद और बीज से उत्पादन बढ़ता है।
🎯 Exam Tip: जीवन-निर्वाहन कृषि की विशेषताओं में भूमि के गहन उपयोग और मानवीय श्रम के महत्व को रेखांकित करना महत्वपूर्ण है।
Question 8. विस्तृत वाणिज्यिक अनाज कृषि की विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
Answer: विस्तृत वाणिज्यिक अनाज कृषि की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
- इस तरह की खेती बड़े भू-भागों पर की जाती है। इनके खेत का आकार आमतौर पर 240 से 1600 हेक्टेयर तक होता है।
- इस खेती में खेत तैयार करने से लेकर फसल काटने तक का सारा काम मशीनों से किया जाता है। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, थ्रेशर, कंबाइन और विनोअर जैसे मुख्य यंत्र इसमें उपयोग होते हैं।
- इस तरह की खेती की मुख्य फसल गेहूँ है। जौ, जई, राई और तिलहन जैसी फसलें भी बोई जाती हैं।
- अनाज को सुरक्षित रखने के लिए बड़े-बड़े गोदाम बनाए जाते हैं।
- इस खेती में इंसानों का श्रम बहुत कम इस्तेमाल होता है।
- इस खेती में प्रति हेक्टेयर उत्पादन कम होता है, लेकिन प्रति व्यक्ति उत्पादन ज़्यादा होता है।
- यह खेती ठंडे घास के मैदानों में की जाती है। यूरेशिया के स्टेपीज, उत्तरी अमेरिका के प्रेयरीज, अर्जेंटीना के पंपास, दक्षिणी अफ्रीका के वेल्डस, ऑस्ट्रेलिया के डाउन्स और न्यूजीलैंड के कैंटरबरी के मैदानों में यह खेती होती है।
- जनसंख्या बढ़ने के कारण कृषि क्षेत्र लगातार घटता जा रहा है।
In simple words: यह खेती बड़े खेतों में मशीनों से होती है, जिसमें मुख्य फसल गेहूँ होती है। इसमें कम लोगों की ज़रूरत पड़ती है और प्रति व्यक्ति उत्पादन ज़्यादा होता है। यह ठंडी जगहों के घास के मैदानों में ज़्यादा होती है।
🎯 Exam Tip: विस्तृत वाणिज्यिक अनाज कृषि के लिए मशीनों का उपयोग, बड़े खेत और प्रति व्यक्ति उच्च उत्पादन जैसे मुख्य बिंदुओं को याद रखें।
Question. मिश्रित कृषि किन-किन विशेषताओं से युक्त है?
Answer: मिश्रित कृषि की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
- इस खेती में फसल उगाना और पशुपालन दोनों को बराबर महत्व दिया जाता है।
- इस खेती में खेत का आकार मध्यम होता है।
- गेहूँ, जौ, राई, जई, मक्का, सोयाबीन और चारे की फसलें इसमें मुख्य रूप से बोई जाती हैं।
- फसलों के साथ-साथ भेड़-बकरी, सूअर, मवेशी और मुर्गी जैसे पशु भी पाले जाते हैं।
- फसलों को बदल-बदल कर बोने और एक साथ कई फसलें उगाने से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है।
- इस तरह की खेती में बहुत ज़्यादा पूंजी लगती है।
- कुशल और योग्य किसान ही इस तरह की खेती करते हैं।
- यह खेती बड़े शहरों के पास की जाती है।
- खेती के अच्छे तरीके, बेहतर परिवहन और भरोसेमंद बारिश से इस खेती को बहुत मदद मिलती है।
In simple words: मिश्रित कृषि में फसलें उगाना और पशु पालना, दोनों साथ-साथ होते हैं। इसमें मध्यम आकार के खेतों में अनाज और चारे की फसलें बोई जाती हैं और पशु भी पाले जाते हैं। इसमें ज़्यादा पैसे और हुनरमंद किसानों की ज़रूरत होती है और यह बड़े शहरों के पास होती है।
🎯 Exam Tip: मिश्रित कृषि की परिभाषा में फसल और पशुपालन दोनों का उल्लेख करना तथा मध्यम आकार के खेत और पूंजी निवेश का महत्व बताना महत्वपूर्ण है।
Question 10. दुग्ध कृषि की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। अथवा डेरी कृषि की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: विश्व में डेरी कृषि की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
- यह व्यवसाय बहुत उन्नत और कुशल तकनीक की मदद से दुधारू पशुओं को बड़े पैमाने पर पालकर दूध उत्पादन के लिए किया जाता है।
- इस व्यवसाय में बहुत ज़्यादा इंसानी श्रम और काफी पूंजी की ज़रूरत होती है।
- पाले गए पशुओं के रहने की जगह, चारे के भंडार और दूध उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली मशीनों पर भी खूब पैसा खर्च होता है।
- पाले गए पशुओं की देखभाल और दूध उत्पादन के लिए पूरे साल इंसानों के श्रम की ज़रूरत पड़ती है।
- पशुओं के स्वास्थ्य, प्रजनन और पशु चिकित्सा पर पूरा ध्यान दिया जाता है।
- डेरी कृषि का व्यवसाय शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों के पास होता है, और डेरी कृषि से मिलने वाला ताज़ा दूध तथा अन्य डेरी उत्पाद इन्हीं शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में बिकते हैं।
- इस व्यवसाय में विकसित यातायात के साधन, दूध को ठंडा रखने वाले उपकरण और पाश्चरीकरण की सुविधा उपलब्ध होती है, जिससे उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
In simple words: डेरी कृषि में उन्नत तरीकों से दुधारू पशुओं को पाला जाता है ताकि व्यापारिक स्तर पर दूध और उससे बने उत्पाद मिल सकें। इसमें बहुत मेहनत और पूंजी लगती है, और यह शहरों के पास होती है।
🎯 Exam Tip: डेरी कृषि में पशु स्वास्थ्य, वैज्ञानिक प्रजनन और शहरी बाजारों से निकटता को मुख्य बिंदुओं के रूप में याद रखें।
Question 12. फलोद्यान कृषि की विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
Answer: फलोद्यान कृषि की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
- यह एक खास तरह की खेती है।
- इसमें फलों और फूलों की खेती की जाती है।
- इस खेती को शहरों की ज़्यादा मांग के कारण किया जाता है।
- इसमें मुख्य रूप से केला, आम, सेब, नाशपाती, नींबू, नारंगी और संतरा जैसे फल उगाए जाते हैं।
- इस खेती से किसानों को ज़्यादा लाभ मिलता है।
- इस खेती में गुलाब, गेंदा, ट्यूलिप और अन्य फूलों की खेती मुख्य रूप से की जाती है।
- इस खेती में फलों और फूलों को खेतों से शहरों या बाजारों तक रात के समय उन्नत तकनीकी साधनों से पहुँचाया जाता है।
In simple words: फलोद्यान कृषि में शहरों की मांग के लिए फल और फूल उगाए जाते हैं। इसमें किसानों को अच्छा फायदा होता है और उत्पादों को रात में जल्दी से बाजार तक पहुँचाया जाता है।
🎯 Exam Tip: फलोद्यान कृषि में शहरी मांग, विशेष फसलों (फल और फूल) और रात में परिवहन की भूमिका को याद रखें।
Question 13. खनिजों के वर्गीकरण को स्पष्ट कीजिए।
Answer: खनिजों का वर्गीकरण निम्न प्रकार से किया जा सकता है:
| लौह धात्विक | अलौह धात्विक | इमारती | रासायनिक | रत्न | ईंधन खनिज |
|---|---|---|---|---|---|
| लोहा | ताँबा | संगमरमर | नमक | सोना | कोयला |
| निकिल | सीसा | बलुआ पत्थर | अभ्रक | चाँदी | पेट्रोलियम |
| मैंगनीज | जस्ता | ग्रेनाइट | जिप्सम | प्लेटिनम | गैस |
| एल्युमीनियम | चूना पत्थर |
In simple words: खनिजों को मुख्य रूप से धात्विक (जैसे लोहा), अधात्विक (जैसे अभ्रक) और ईंधन (जैसे कोयला) खनिजों में बांटा जाता है। इनमें इमारती पत्थर और रत्न जैसे अन्य प्रकार भी होते हैं।
🎯 Exam Tip: खनिजों का वर्गीकरण करते समय, प्रत्येक प्रकार के कम से कम दो-तीन उदाहरण अवश्य दें।
RBSE Class 12 Geography Chapter 8 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. निर्वाह कृषि के प्रमुख प्रकार बताइए। स्थानान्तरणशील कृषि क्षेत्रों का वितरण एवं विशेषताएँ बताइए।
Answer: निर्वाह कृषि में किसान और उनके परिवार स्थानीय उत्पादों का लगभग पूरा हिस्सा खुद ही इस्तेमाल करते हैं। इसे दो मुख्य प्रकारों में बांटा जा सकता है:
1. आदिकालीन निर्वाह कृषि:
आदिकालीन निर्वाह कृषि को स्थानांतरणशील कृषि भी कहा जाता है। यह खेती उष्णकटिबंधीय वन क्षेत्रों में की जाती है। इसमें वनों को जलाकर साफ कर दिया जाता है और जली हुई राख मिट्टी में मिलकर खाद का काम करती है। बारिश के मौसम के बाद इसमें फसलें बोई जाती हैं। जब मिट्टी की उपजाऊ शक्ति 5 साल के बाद खत्म हो जाती है, तो किसान नए क्षेत्रों में वनों को जलाकर खेती करते हैं।
इस प्रकार की कृषि के क्षेत्रों का विस्तार अब कम होता जा रहा है। इसे कर्तन एवं दहन कृषि भी कहते हैं। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में स्थानांतरणशील कृषि को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। जैसे उत्तरी-पूर्वी भारत में झूमिंग, मध्य अमेरिका और मैक्सिको में मिल्पा, मलेशिया और इंडोनेशिया में लदांग आदि।
आदिकालीन निर्वाह कृषि की प्रमुख विशेषताएँ –
- इस खेती में वनों को काटकर और आग लगाकर कृषि योग्य भूमि तैयार की जाती है। जली हुई राख मिट्टी के लिए खाद का काम करती है। इसीलिए इसे कर्तन-दहन कृषि भी कहते हैं।
- इस खेती में खेत छोटे होते हैं और खेती का काम पुराने औजारों (जैसे लकड़ी, कुदाली और फावड़े) से किया जाता है।
- इस खेती में 3 से 5 साल तक एक ही खेत पर खेती की जाती है। इसके बाद जब मिट्टी की उर्वरता खत्म हो जाती है, तो नए क्षेत्रों में वनों को जलाकर खेती की जाती है।
- कुछ सालों बाद किसान फिर से पहले वाले खेत पर (जब उसकी उर्वरता बढ़ जाती है) खेती करने आ जाता है। इस प्रकार यह झूम का चक्र चलता रहता है, जिसमें आग लगाकर कृषि भूमि तैयार की जाती है।
2. गहन निर्वाह कृषि:
इस तरह की खेती मानसून एशिया के घनी आबादी वाले देशों में की जाती है। यह कृषि दो प्रकार की होती है:
(अ) चावल प्रधान गहन निर्वाह कृषि:
इस खेती में चावल मुख्य फसल होती है। ज़्यादा जनसंख्या घनत्व के कारण खेती का आकार छोटा होता है और कृषि का सारा काम परिवार के सदस्य मिलकर करते हैं। इसमें भूमि का बहुत ज़्यादा उपयोग होता है। उर्वरता बनाए रखने के लिए पशुओं के गोबर की खाद का उपयोग होता है। इस खेती में प्रति एकड़ औसत उत्पादन ज़्यादा होता है, लेकिन प्रति किसान उत्पादन कम होता है।
(ब) चावल विहीन गहन निर्वाह कृषि:
जिन क्षेत्रों में बारिश कम होती है और चावल उगाना संभव नहीं होता, उन क्षेत्रों में अन्य फसलें उगाई जाती हैं।
In simple words: निर्वाह कृषि में किसान अपनी ज़रूरतों के लिए खेती करते हैं। इसके दो मुख्य प्रकार हैं: आदिकालीन (या स्थानांतरणशील) कृषि, जिसमें जंगल जलाकर खेत बनाते हैं और कुछ साल बाद जगह बदल देते हैं; और गहन निर्वाह कृषि, जिसमें छोटी ज़मीन पर ज़्यादा मेहनत करके चावल या अन्य फसलें उगाई जाती हैं।
🎯 Exam Tip: निर्वाह कृषि के प्रकारों का वर्णन करते समय, प्रत्येक प्रकार की मुख्य विशेषताओं और उदाहरणों को स्पष्ट रूप से लिखें। स्थानांतरणशील कृषि के स्थानीय नामों को याद रखना भी सहायक होगा।
Question 2. मिश्रित कृषि की विशेषताओं का वर्णन करते हुए विश्व में मिश्रित कृषि के प्रमुख क्षेत्रों का सचित्र विवरण दीजिए।
Answer: मिश्रित कृषि की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
- इस खेती में फसल उगाना और पशुपालन दोनों को बराबर महत्व दिया जाता है।
- इस खेती में खेत का आकार मध्यम होता है, जहाँ गेहूँ, जौ, राई, मक्का, चारे की फसलें और कंद-मूल मुख्य रूप से बोई जाती हैं। चारे की फसलें मिश्रित कृषि में उगाना ज़रूरी होता है।
- किसान एक तरफ कृषि फसलों के उत्पादन से आय कमाते हैं, वहीं दूसरी तरफ पशुपालन से गाय-बैल, सूअर और मुर्गीपालन से भी आय प्राप्त करते हैं।
- इस कृषि में खेतों की मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बनाए रखने के लिए विभिन्न फसलों को एक क्रम में बोया जाता है।
- इस कृषि में आधुनिक कृषि यंत्रों और रासायनिक तथा जैविक खाद का बहुत ज़्यादा उपयोग होता है, जिसमें काफी पूंजी लगती है।
- इस कृषि में किसान खेती के कामों में बहुत कुशल होते हैं।
- इस तरह की कृषि में खेती के वैज्ञानिक तरीकों का प्रयोग किया जाता है।
विश्व में मिश्रित कृषि के प्रमुख क्षेत्र: विश्व में मिश्रित कृषि उन शीतोष्ण जलवायु वाले अत्यधिक विकसित क्षेत्रों में की जाती है जहाँ:
- उत्तरी-पश्चिमी यूरोप में।
- उत्तरी अमेरिका के पूर्वी भाग में।
- यूरेशिया में पूर्वी यूरोप, दक्षिणी यूरोप और साइबेरिया के दक्षिणी भाग में।
In simple words: मिश्रित कृषि में फसल उगाने और पशु पालने का काम एक साथ होता है। इसमें मध्यम खेत होते हैं और इसमें यूरोप, उत्तरी अमेरिका और यूरेशिया के कुछ खास ठंडे इलाकों में यह खेती की जाती है।
🎯 Exam Tip: मिश्रित कृषि की मुख्य विशेषताएँ जैसे कि फसल और पशुपालन का संतुलन, मशीनों का उपयोग और इसके प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों को मानचित्र पर दर्शाना याद रखें।
Question 3. विश्व में दुग्ध कृषि एवं सब्जी की खेती व फलोद्यान कृषि को विस्तार से बताइए।
Answer:
दुग्ध कृषि: दूध और दूध से बनने वाले उत्पाद जैसे मक्खन, पनीर, पाउडर, दही आदि के लिए दुधारू पशुओं और अन्य पशुओं को पालने के व्यवसाय को डेरी या दुग्ध कृषि कहते हैं।
विश्व में डेरी कृषि की प्रमुख विशेषताएँ:
- यह व्यवसाय सबसे उन्नत और कुशल तकनीक की मदद से दुधारू पशुओं को व्यापारिक स्तर पर पालने के लिए किया जाता है।
- इस व्यवसाय में बहुत ज़्यादा मानवीय श्रम और पर्याप्त पूंजी की ज़रूरत होती है।
- पाले गए पशुओं के रहने की जगह, चारे के भंडार और दूध उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली मशीनों पर काफी पूंजी खर्च होती है।
- पाले गए पशुओं की देखभाल और दूध उत्पादन के लिए पूरे साल इंसानी श्रम की ज़रूरत पड़ती है।
- पशुओं के स्वास्थ्य, प्रजनन और पशु चिकित्सा पर पूरा ध्यान दिया जाता है।
- डेरी कृषि का व्यवसाय शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों के पास होता है, और डेरी कृषि से मिलने वाला ताज़ा दूध तथा अन्य डेरी उत्पाद इन्हीं शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में बिकते हैं।
- इस व्यवसाय में विकसित यातायात के साधन, दूध को ठंडा रखने वाले उपकरण और पाश्चरीकरण की सुविधा उपलब्ध होती है, जिससे उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
सब्जी की खेती और फलोद्यान कृषि: इस प्रकार की कृषि उत्तरी पश्चिमी यूरोप, संयुक्त राज्य अमेरिका के उत्तरी-पूर्वी राज्य और भूमध्यसागरीय प्रदेश में ज़्यादा विकसित है।
सब्जी की खेती एवं फलोद्यान कृषि की विशेषताएँ:
- इस कृषि में ज़्यादा आर्थिक लाभ देने वाली फसलें जैसे सब्जियाँ, फल और फूल उगाए जाते हैं, जिनकी मांग आसपास के शहरी क्षेत्रों में ज़्यादा होती है।
- इस कृषि में ज़्यादा पूंजी और गहन श्रम की ज़रूरत होती है।
- इस कृषि में खेत का आकार छोटा होता है और इन खेतों का सीधा संपर्क अच्छे यातायात साधनों से आसपास के उन शहरों से होता है जहाँ इन कृषि उत्पादों की खपत होती है।
- इस कृषि व्यवसाय में पर्याप्त सिंचाई, उर्वरक, अच्छी किस्म के बीज और कीटनाशक रसायनों का उपयोग किया जाता है। कम तापमान वाले क्षेत्रों में ग्रीन हाउस और कृत्रिम ताप का भी प्रयोग होता है।
- जिन क्षेत्रों में किसान केवल सब्ज़ियाँ उगाते हैं, उन खेतों को ट्रक फार्म कहा जाता है। ट्रक फार्म से बाज़ार तक की दूरी, ट्रक द्वारा ज़्यादा से ज़्यादा एक रात में तय की जाती है, इसीलिए इस प्रकार की जाने वाली कृषि ट्रक कृषि कहलाती है।
विश्व में सब्जी की खेती व फलोद्यान कृषि के प्रमुख क्षेत्र: यह कृषि विश्व के निम्नलिखित क्षेत्रों में विकसित अवस्था में मिलती है:
- उत्तरी-पश्चिमी यूरोप
- संयुक्त राज्य अमेरिका का उत्तरी-पूर्वी भाग
- कनाडा का दक्षिणी-पूर्वी भाग
- दक्षिणी-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया, तस्मानिया और न्यूजीलैंड
In simple words: दुग्ध कृषि में दूध के लिए पशु पाले जाते हैं, जिसमें उन्नत तकनीक और शहरों के पास का इलाका मुख्य होता है। वहीं, सब्जी और फलोद्यान कृषि में शहरों की मांग के लिए फल, फूल और सब्जियाँ उगाई जाती हैं, जिसमें ज़्यादा पूंजी और मेहनत लगती है, और उत्पादों को जल्दी बाजार तक पहुँचाया जाता है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के विस्तृत प्रश्नों में, प्रत्येक कृषि प्रकार की परिभाषा, विशेषताएँ और प्रमुख क्षेत्रों को अलग-अलग उपशीर्षकों के तहत स्पष्ट रूप से लिखें। मानचित्रों का उल्लेख करते हुए मुख्य क्षेत्रों को ध्यान में रखें।
Question 4. खनन को परिभाषित करते हुए इसको प्रभावित करने वाली दशाओं को स्पष्ट करते हुए खनिजों का वर्गीकरण कीजिए।
Answer:
खनन: पृथ्वी के अंदर से विभिन्न प्रकार के धात्विक, अधात्विक और ईंधन खनिजों को मशीनों या इंसानों द्वारा खोदकर निकालने की प्रक्रिया को खनन कहते हैं।
खनन को प्रभावित करने वाली दशाएँ: खनन की प्रक्रिया मुख्य रूप से प्राकृतिक और मानवीय दशाओं से प्रभावित होती है। ये दशाएँ निम्न प्रकार हैं:
1. प्राकृतिक दशाएँ: इसमें खनिज भंडारों की स्थिति, खनिज की गुणवत्ता, मात्रा, प्रकार, कितनी आसानी से खनिज मिल सकता है और बाजार क्षेत्र से उसकी निकटता जैसी बातें शामिल हैं।
2. मानवीय दशाएँ: इसमें खनिजों की मांग, यातायात की सुविधा, पूंजी, श्रम, तकनीकी विकास का स्तर और सरकारी नीतियाँ जैसी बातें शामिल हैं।
खनिजों का वर्गीकरण: खनिजों का संबंध चट्टानों से होता है। चट्टानें मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती हैं:
1. आग्नेय चट्टानें
2. कायांतरित चट्टानें
3. अवसादी चट्टानें
| धात्विक खनिज | अधात्विक खनिज | ईंधन खनिज |
|---|---|---|
| लौह धात्विक | अलौह धात्विक | |
| - लोहा | - ताँबा | कोयला |
| - निकिल | - सीसा | पेट्रोलियम |
| - मैंगनीज | - जस्ता | गैस |
| - एल्युमीनियम | ||
| इमारती | रासायनिक | रत्न |
| - संगमरमर | - नमक | - सोना |
| - बलुआ पत्थर | - अभ्रक | - चाँदी |
| - ग्रेनाइट | - जिप्सम | - प्लेटिनम |
| - चूना पत्थर |
विश्व के प्रमुख देशों में खनिज उत्पादन का वितरण (विश्व के कुल उत्पादन का प्रतिशत)
| देश का नाम | खनिजों का उत्पादन (विश्व के कुल उत्पादन का प्रतिशत) |
|---|---|
| संयुक्त राज्य अमेरिका | 34.10 |
| रूस | 10.50 |
| इंग्लैंड | 10.50 |
| जर्मनी | 5.22 |
| वेनेजुएला | 5.00 |
| कनाडा | 2.93 |
| फ्रांस | 2.61 |
| कुवैत | 2.31 |
| सऊदी अरब | 2.27 |
| पोलैंड | 2.06 |
| भारत | 1.03 |
| 22.43 |
In simple words: खनन ज़मीन से खनिज निकालने की प्रक्रिया है, जो खनिजों की उपलब्धता, मांग, और तकनीक जैसे प्राकृतिक और मानवीय कारकों से प्रभावित होती है। खनिज मुख्य रूप से धात्विक, अधात्विक और ईंधन खनिजों में बांटे जाते हैं, जो आग्नेय, कायांतरित और अवसादी चट्टानों में मिलते हैं।
🎯 Exam Tip: खनन की परिभाषा देते समय, प्रभावित करने वाले कारकों और खनिजों के प्रकारों को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें।
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