RBSE Solutions Class 12 Geography Chapter 18 कृषि

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Detailed Chapter 18 कृषि RBSE Solutions for Class 12 Geography

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Class 12 Geography Chapter 18 कृषि RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारतीय कृषि को कहा जाता है –
(a) किसान की खेती
(b) मानसून का जुआ
(c) मजदूर की खेती
(d) व्यापारिक खेती
Answer: (b) मानसून का जुआ
In simple words: Indian agriculture is often called a gamble of the monsoon because its success largely depends on the timing and amount of rainfall from the monsoon season.

🎯 Exam Tip: When describing the nature of agriculture in India, mentioning its dependence on monsoons is a key point.

 

Question 2. प्रथम पूर्ण जैविक कृषि वाला राज्य है –
(a) सिक्किम
(b) अरुणाचल प्रदेश
(c) हिमाचल प्रदेश
(d) उत्तराखंड
Answer: (a) सिक्किम
In simple words: Sikkim is the first state in India to fully adopt organic farming, meaning it uses only natural methods without chemical fertilizers or pesticides.

🎯 Exam Tip: Remember Sikkim as a pioneering state in sustainable agriculture. This is a common fact-based question.

 

Question 3. भारत में मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है –
(a) तमिलनाडु
(b) कर्नाटक
(c) गुजरात
(d) महाराष्ट्र
Answer: (c) गुजरात
In simple words: Gujarat is the largest producer of spices in India.

🎯 Exam Tip: Knowing the top producing states for major crops and spices is crucial for geography exams.

 

Question 4. गेहूँ उत्पादन में प्रथम स्थान किस राज्य का है?
(a) पंजाब
(b) हरियाणा
(c) गुजरात
(d) उत्तर प्रदेश
Answer: (d) उत्तर प्रदेश
In simple words: Uttar Pradesh holds the top position in wheat production among all states in India.

🎯 Exam Tip: Keep updated on the latest agricultural production statistics, as they can change over time. Uttar Pradesh consistently ranks high in wheat production.

 

Question 5. तमिलनाडु की कौन-सा जिला चावल उत्पादन में अग्रणी है?
(a) तंजावूर
(b) मदुरै
(c) रामनाथपुरम
(d) चेन्नई
Answer: (a) तंजावूर
In simple words: Thanjavur district in Tamil Nadu is the leading area for rice production.

🎯 Exam Tip: For state-specific questions, focus on key districts known for particular crop productions.

 

Question 6. गुजरात देश कितना प्रतिशत कपास उत्पादित करता है?
(a) 20 प्रतिशत
(b) 34 प्रतिशत
(c) 38 प्रतिशत
Answer: (s) 38 प्रतिशत
In simple words: Gujarat produces about 38% of the total cotton in India.

🎯 Exam Tip: Specific percentage-based questions often test your knowledge of major agricultural statistics. Pay attention to key crop shares by state.

 

Question 7. गन्ना उत्पादन में कौन-सा राज्य प्रथम है?
(a) तमिलनाडु
(b) पंजाब
(c) महाराष्ट्र
(d) उत्तर प्रदेश
Answer: (d) उत्तर प्रदेश
In simple words: Uttar Pradesh is the leading state in India for sugarcane production.

🎯 Exam Tip: Remember the top producing states for important cash crops like sugarcane.

 

Question 8. चाय निर्यात में भारत का स्थान है –
(a) प्रथम
(b) द्वितीय
(c) तृतीय
(d) चतुर्थ
Answer: (b) द्वितीय
In simple words: India is the second-largest exporter of tea globally.

🎯 Exam Tip: Global rankings for India's major export crops are important to remember.

 

Question 9. असम देश की कितनी प्रतिशत चाय उत्पादित करता है?
(a) 50 प्रतिशत
(b) 60 प्रतिशत
(c) 54 प्रतिशत
(d) 45 प्रतिशत
Answer: (c) 54 प्रतिशत
In simple words: Assam produces about 54% of India's total tea output.

🎯 Exam Tip: For major agricultural products like tea, knowing the contribution of the primary producing state is crucial.

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 10. भारत की अधिकांश जनसंख्या किस व्यवसाय में कार्यरत/संलग्न है?
Answer: भारत की अधिकांश जनसंख्या (54.6 प्रतिशत) कृषि व्यवसाय में कार्यरत/संलग्न है।
In simple words: Most of India's population (about 54.6%) works in agriculture.

🎯 Exam Tip: Always include statistics like percentages if available in the source to make your answer more precise.

 

Question 12. भारत के किस राज्य का सब्जी उत्पादन में प्रथम स्थान है?
Answer: पश्चिमी बंगाल का भारत में सब्जियों के उत्पादन में प्रथम स्थान है।
In simple words: West Bengal is the top state in India for vegetable production.

🎯 Exam Tip: Remember the leading states for major food categories like vegetables.

 

Question 13. चाय उत्पादन में असम का भारत में कौन सा स्थान है?
Answer: चाय उत्पादन में असम का भारत में प्रथम स्थान है।
In simple words: Assam is the leading state in India for tea production.

🎯 Exam Tip: For questions about crop production, identifying the top state is often the key information. Make sure to clearly state its position.

 

Question 14. भारत में पूर्ण जैविक खेती वाले राज्य को गौरव किस राज्य को मिला है?
Answer: भारत में पूर्ण जैविक खेती वाले राज्य का गौरव सिक्किम राज्य को मिला है।
In simple words: Sikkim is the state in India that has achieved the status of being fully organic in its farming.

🎯 Exam Tip: Sikkim's achievement in organic farming is a significant environmental and agricultural milestone, so it's a frequently asked question.

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 15. टूक फार्मिंग कृषि की विशेषताएँ बताइए।
Answer: ट्रक फार्मिंग उद्यान कृषि का ही एक प्रकार है। यह महानगरों में जनसंख्या की अधिकता व भूमि की कमी के कारण विकसित हुआ है। इस प्रकार की खेती में फलों व सब्जियों को उगाया जाता है और ट्रकों तथा रेफ्रिजरेटेड वाहनों से महानगरों तक पहुंचाया जाता है। ट्रक फार्मिंग कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –
1. खेतों का आकार छोटा होता है।
2. गहन कृषि की जाती है, जिसमें साल में सब्जियों की तीन-चार फसलें पैदा होती हैं।
3. इसमें बहुत अधिक श्रम की आवश्यकता होती है।
4. खेतों का प्रबंधन वैज्ञानिक तरीकों से किया जाता है।
5. खादों एवं उर्वरकों का अधिक उपयोग होता है।
6. इसमें पूँजी की भी अधिक आवश्यकता होती है।
7. रेफ्रिजरेटेड गाड़ियों तथा ट्रकों की व्यवस्था भी इसमें महत्वपूर्ण है।
In simple words: Truck farming is a type of gardening where fruits and vegetables are grown near big cities and then quickly transported to markets using trucks, often refrigerated ones. It needs small fields, lots of labor, and good management.

🎯 Exam Tip: When explaining types of agriculture, defining the method and listing its key characteristics or features is essential for full marks.

 

Question 17. भारतीय कृषि की कोई चार विशेषताएँ लिखिए।
Answer: प्रारंभ में भारत में पारंपरिक और खाद्यान्न-प्रधान कृषि होती थी। हरित क्रांति के बाद कृषि के तरीकों में बदलाव आया है। भारतीय कृषि की प्रमुख चार विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –
1. खाद्यान्न फसलों की प्रधानता: भारत में मुख्य रूप से खाने वाली फसलें उगाई जाती हैं।
2. कृषि जोतों का छोटा आकार: खेतों का आकार आमतौर पर छोटा होता है।
3. मानसून पर निर्भरता: कृषि वर्षा (मानसून) पर बहुत अधिक निर्भर करती है।
4. प्रति हेक्टेयर कम उत्पादन: प्रति एकड़ जमीन से मिलने वाला उत्पादन कम होता है।
In simple words: Indian farming mainly grows food crops on small fields, depends a lot on rain, and produces less per land area.

🎯 Exam Tip: When asked for characteristics, list distinct points clearly. Mentioning both historical context and current trends can add depth to your answer.

 

Question 18. भारत के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों के नाम लिखिए।
Answer: भारत को गन्ने की जन्मस्थली होने का गौरव प्राप्त है। विश्व के कुल गन्ना क्षेत्र का लगभग 35 प्रतिशत भारत में पाया जाता है। भारत के कुल गन्ना उत्पादन का 60 प्रतिशत उत्तर भारत से प्राप्त होता है। भारत के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य निम्नलिखित हैं –
1. उत्तर प्रदेश: देश के कुल उत्पादन का 38.56 प्रतिशत (2013-14 में) यहीं होता है।
2. महाराष्ट्र: देश के कुल उत्पादन का 22.89 प्रतिशत (2013-14) यहीं होता है।
3. तमिलनाडु: देश के कुल उत्पादन का 10.68 प्रतिशत यहीं होता है।
4. अन्य राज्य: कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, ओडिशा तथा मध्य प्रदेश भी गन्ना उगाते हैं।
In simple words: India is where sugarcane first grew. Key states that grow sugarcane are Uttar Pradesh, Maharashtra, Tamil Nadu, Karnataka, Andhra Pradesh, Gujarat, Punjab, Haryana, Rajasthan, Bihar, Odisha, and Madhya Pradesh.

🎯 Exam Tip: Listing states along with their approximate percentage contribution to total production strengthens the answer for distribution-based questions.

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 20. भारतीय कृषि के महत्व को स्पष्ट करते हुए प्रमुख कृषि प्रकारों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
Answer: भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ की लगभग 54.6 प्रतिशत जनसंख्या सीधे तौर पर कृषि पर निर्भर है। इसका महत्व निम्नलिखित तरीकों से समझा जा सकता है –
1. भारत में कृषि जीवन-निर्वाह का मुख्य साधन है। यह लोगों को भोजन और आजीविका प्रदान करती है।
2. भारत में कई उद्योग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर करते हैं, जैसे कपड़ा उद्योग या चीनी उद्योग।
3. कृषि राष्ट्रीय आय का एक प्रमुख स्रोत है।
4. यह विदेशी मुद्रा कमाने में भी मदद करती है।
5. कृषि पौष्टिक पदार्थों का मुख्य स्रोत है।
In simple words: India is a farming country where most people depend on agriculture for their livelihood. Farming provides food, raw materials for industries, earns money for the country, and is a big part of the national income.

🎯 Exam Tip: When asked to explain the importance of a sector, discuss its contributions to employment, economy, industry, and food security. Describe types briefly if the question asks.

जैविक एवं रासायनिक कृषि में अन्तर:

जैविक कृषिरासायनिक कृषि
1. जैविक खाद और पारंपरिक तरीकों से की जाने वाली खेती को जैविक कृषि कहते हैं।1. रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाओं के प्रयोग से की जाने वाली खेती को रासायनिक कृषि कहते हैं।
2. जैविक खाद में कम्पोस्ट, गोमूत्र, वर्मी कम्पोस्ट, नीम की खली और पौधों की पत्तियों से बनी खादें शामिल होती हैं। यह जीवों से सड़े-गले पदार्थों से बनती है।2. रासायनिक खादों में फॉस्फेट, नाइट्रोजन, अमोनिया जैसे रासायनिक तत्व होते हैं जिनके मिट्टी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं।
3. जैव पदार्थों द्वारा निर्मित खादों का उपयोग किया जाता है।3. रासायनिक खादों और कीटनाशक दवाओं का उपयोग किया जाता है।
4. जैविक कृषि से जैव-विविधता पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।4. रासायनिक कृषि से जैव विविधता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
5. जैविक कृषि से प्रकृति के साथ तालमेल बिठाते हुए कृषि उत्पादन को बढ़ाया जाता है।5. रासायनिक कृषि में पर्यावरण के लाभ-हानि को सोचे बिना रासायनिक खादों का उपयोग करके कृषि उत्पादन बढ़ाया जाता है।
6. जैविक खाद घर या खेत पर तैयार की जाती है।6. रासायनिक खाद औद्योगिक केंद्रों (कारखानों) में तैयार की जाती है।
9. जैविक कृषि द्वारा भूमि की उर्वरा शक्ति और उत्पादन दोनों में धीरे-धीरे वृद्धि होती है।9. रासायनिक कृषि से भूमि की उर्वरा शक्ति कुछ दिनों तक बनी रहती है। इसके बाद उर्वरा शक्ति कम होने लगती है।
10. जैविक कृषि में पानी की कम आवश्यकता पड़ती है।10. रासायनिक कृषि में पानी की अधिक आवश्यकता पड़ती है।
11. जैविक कृषि भूमिगत जल की शुद्धता पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं डालती।11. रासायनिक कृषि में उपयोग किए गए रसायनों का भूमिगत जल पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
12. जैविक कृषि से प्राप्त उपज स्वास्थ्य के लिए उपयोगी होने से इसकी मांग अधिक रहती है।12. रासायनिक कृषि से प्राप्त उपज स्वास्थ्य के लिए अपेक्षाकृत कम उपयोगी होती है। इससे कई बीमारियों की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।
13. जैविक कृषि प्रकृति पर आधारित है। अधिकांश आवश्यक चीजें प्रकृति से व मानव श्रम द्वारा प्राप्त हो जाती हैं।13. रासायनिक कृषि पूरी तरह बाजार पर निर्भर है। बीज, खाद, दवाइयाँ, यंत्र, तकनीक आदि सब बाजार से ही प्राप्त होती हैं।
14. जैविक कृषि मानव श्रम प्रधान कृषि है।14. यह तकनीक प्रधान कृषि है।
15. प्रति हेक्टेयर उत्पादन कम लेकिन गुणवत्ता अधिक होती है।15. प्रति हेक्टेयर उत्पादन अधिक लेकिन गुणवत्ता कम होती है।

🎯 Exam Tip: For comparison questions, always present the information in a clear, tabular format to highlight the differences effectively.

कृषि के प्रकार:

 

Question 21. भारत में गेहूं के उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करते हुए वितरण एवं उत्पादन का वर्णन कीजिए।
Answer: गेहूँ एक शीतोष्ण कटिबन्धीय फसल है। भारत में चावल के बाद गेहूँ दूसरी महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है। भारत में गेहूँ की खेती बहुत पुराने समय से की जा रही है। भारत विश्व का लगभग 12 प्रतिशत गेहूँ उत्पादित करता है। देश के कुल बोये गये क्षेत्र के लगभग 14 प्रतिशत भाग पर गेहूँ की खेती की जाती है।

आवश्यक भौगोलिक दशाएँ:
गेहूँ की कृषि के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाएँ निम्नलिखित हैं –
• तापमान: गेहूँ मुख्य रूप से ठंडी जलवायु का पौधा है। गेहूँ को बोते समय 10°C, बढ़ते समय 15°C और पकते व काटते समय 20°C से 28°C तापमान की आवश्यकता होती है।
• वर्षा: गेहूँ की खेती के लिए 50 से 75 सेमी. वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है। अधिक वर्षा इसकी खेती के लिए हानिकारक होती है।
• भूमि: गेहूँ की खेती के लिए समतल और अच्छे जल निकासी वाली भूमि होनी चाहिए।
• श्रम: गेहूँ की खेती के लिए अधिक श्रम की आवश्यकता होती है, लेकिन आजकल मशीनों के उपयोग बढ़ने से श्रम का महत्व कम हो गया है।

उत्पादन एवं वितरण:
भारत विश्व का लगभग 12 प्रतिशत गेहूँ उत्पादित करता है। यह ठंडी जलवायु की फसल होने के कारण भारत में सर्दियों में रबी की फसल के रूप में उगाई जाती है। रबी की फसल होने के कारण गेहूँ की खेती उन क्षेत्रों में मुख्य रूप से की जाती है जहाँ सिंचाई की सुविधा है। हालांकि, हिमालय के ऊँचे पहाड़ी भागों और मध्य प्रदेश में मालवा के पठारी भाग में गेहूँ की खेती पूरी तरह से वर्षा पर निर्भर रहती है।

भारत के प्रमुख गेहूँ उत्पादक क्षेत्र:
भारत में गेहूँ उत्पादन की दृष्टि से सतलज, यमुना के ऊपरी गंगा का मैदान सबसे महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में भारत का लगभग 68 प्रतिशत गेहूँ उत्पादित किया जाता है। भारत के प्रमुख गेहूँ उत्पादक राज्यों व उनके क्षेत्रों का संक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है।

उत्तर प्रदेश: यह भारत का अग्रणी गेहूँ उत्पादक राज्य है। इस राज्य में गंगा-यमुना, गंगा-घाघरा दोआब क्षेत्र गेहूँ की खेती के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। यहाँ राज्य का 75 प्रतिशत गेहूँ पैदा होता है। इस राज्य के मुख्य उत्पादक जिले सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, मुरादाबाद, रामपुर, बदायूं, बुलंदशहर आदि हैं। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2014-15 में 25.2 मिलियन टन गेहूँ का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ।

पंजाब: यह दूसरा बड़ा गेहूँ उत्पादक राज्य है। हरित क्रांति के प्रभाव से पंजाब में गेहूँ की उपज में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यहाँ कुल कृषि भूमि के 30 प्रतिशत भाग पर गेहूँ की खेती की जाती है। सिंचाई सुविधा और उपजाऊ मिट्टी, उन्नत खाद बीज के उपयोग से राज्य की औसत उपज 5017 किग्रा प्रति हेक्टेयर है जो देश का सर्वाधिक है। 2014-15 में राज्य में 15.8 मिलियन टन गेहूँ का उत्पादन हुआ। इस के मुख्य उत्पादक जिले-लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, कपूरथला, फिरोजपुर, भटिंडा, पटियाला तथा संगरूर हैं।

हरियाणा: क्षेत्रफल की दृष्टि से छोटा लेकिन सिंचाई सुविधाओं के कारण 13.5 प्रतिशत गेहूँ उत्पादन कर बड़ा उत्पादक राज्य बन गया है। यहाँ रोहतक, हिसार, जींद, कुरुक्षेत्र, सिरसा, फतेहाबाद, अंबाला, गुड़गाँव, फरीदाबाद जिलों में देश का 8 प्रतिशत गेहूँ उत्पादन क्षेत्र स्थित है।

मध्य प्रदेश: मैदानी भागों और मालवा की काली मिट्टी क्षेत्रों में सिंचाई द्वारा गेहूँ उत्पादन किया जाता है। वर्ष 2014-15 में राज्य में 14.2 मिलियन टन उत्पादन हुआ। इंदिरा गांधी नहर के निर्माण के बाद राजस्थान में गेहूँ की उपज में वृद्धि हुई है। यहाँ देश का 7-9 प्रतिशत गेहूँ उत्पादन किया जाता है। इसके प्रमुख उत्पादक जिले श्रीगंगानगर, भरतपुर, कोटा, अलवर, बारां, जयपुर, भीलवाड़ा, सवाई माधोपुर, बांसवाड़ा आदि हैं।

बिहार: बिहार के उत्तरी मैदानी भागों में गेहूँ उत्पादन किया जाता है। राज्य में देश का 6 प्रतिशत गेहूँ उत्पादन होता है। चंपारण, शाहबाद, दरभंगा, गया, मुजफ्फरनगर, पटना आदि प्रमुख उत्पादक गेहूँ जिले हैं।

अन्य गेहूँ उत्पादक राज्य: पश्चिम बंगाल (मुर्शिदाबाद, नादिया, वीरभूमि, दीनापुर), हिमाचल प्रदेश (कांगड़ा मंडी, शिमला), कर्नाटक (बीजापुर, धारवाड़) भी गेहूँ उत्पादक राज्य हैं।
In simple words: Wheat is a cold-weather crop grown in India, which is the second-largest food crop after rice. It needs moderate temperatures and rainfall. Uttar Pradesh, Punjab, and Madhya Pradesh are the main states that grow wheat, with Uttar Pradesh being the largest producer.

🎯 Exam Tip: For questions requiring discussion of both conditions and distribution, ensure you cover temperature, rainfall, soil, and labor for conditions, and then list the major producing states with relevant statistics for distribution.

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारत की कितनी प्रतिशत जनसंख्या प्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है?
(a) 40.6 प्रतिशत
(b) 54.6 प्रतिशत
Answer: (b) 54.6 प्रतिशत
In simple words: About 54.6% of India's population directly depends on agriculture for their livelihood.

🎯 Exam Tip: This is a key demographic statistic for understanding the importance of agriculture in India. Remember the percentage accurately.

 

Question 2. कृषि के लिए अनुकूल भौगोलिक परिस्थिति है –
(a) समतल भूमि
(b) पर्याप्त जलापूर्ति
(c) उपजाऊ मिट्टी
(d) ये सभी
Answer: (d) ये सभी
In simple words: Flat land, enough water, and fertile soil are all good conditions for farming.

🎯 Exam Tip: Understand the basic requirements for successful agriculture. Options like "All of the options" often indicate a comprehensive answer.

 

Question 3. निम्नलिखित में से जो भारतीय कृषि की समस्या है, बताइए –
(a) खाद्यान्नों की प्रधानता
(b) फसलों की विविधता
(c) चारा फसलों की कमी
(d) भूमि पर जनसंख्या का बढ़ता भार
Answer: (d) भूमि पर जनसंख्या का बढ़ता भार
In simple words: One big problem for Indian agriculture is the increasing pressure of population on land.

🎯 Exam Tip: Identify the core challenges faced by Indian agriculture, especially those related to resource scarcity and demographic pressure.

 

Question 4. हरित क्रान्ति का सम्बन्ध है –
(a) मत्स्य विकास से
(b) दुग्ध विकास से
(c) कृषि विकास से
(d) इन सभी से
Answer: (c) कृषि विकास से
In simple words: The Green Revolution is connected to the development of agriculture, focusing on improving crop production.

🎯 Exam Tip: The Green Revolution is a pivotal event in Indian agriculture. Know its primary focus to avoid confusion with other revolutions like White (milk) or Blue (fish).

 

Question 7. भारत में आलू के उत्पादन में किस राज्य का प्रथम स्थान है?
(a) उत्तर प्रदेश
(b) महाराष्ट्र
(c) बिहार
(d) राजस्थान
Answer: (a) उत्तर प्रदेश
In simple words: Uttar Pradesh is the state that ranks first in potato production in India.

🎯 Exam Tip: Familiarize yourself with the leading states for various agricultural products.

 

Question 8. निम्नलिखित में से जो जैविक कृषि की विशेषता है, बताइए –
(a) जैवविविधता पर विपरीत प्रभाव
(b) अधिक उत्पादन
(c) कृषि उपज स्वास्थ्य के लिए उपयोगी
(d) रासायनिक खादों का उपयोग
Answer: (c) कृषि उपज स्वास्थ्य के लिए उपयोगी
In simple words: A key feature of organic farming is that its produce is good for health.

🎯 Exam Tip: When distinguishing between farming methods, focus on their unique benefits and drawbacks to clearly identify their characteristics.

 

Question 9. निम्नलिखित में से जो खाद्यान्न फसल नहीं है, बताइए –
(a) चावल
(b) बाजरा
(c) दालें
(d) जूट
Answer: (d) जूट
In simple words: Jute is not a food crop; it is mainly used for making fibers and fabrics.

🎯 Exam Tip: Classify crops based on their primary use (food, fiber, cash, etc.). This helps in eliminating incorrect options in MCQs.

 

Question 11. भारत में चाय के उत्पादन में किस राज्य का प्रथम स्थान है?
(अ) असम
(ब) पश्चिम बंगाल
(स) तमिलनाडु
(द) केरल
Answer: (अ) असम
In simple words: असम राज्य भारत में चाय का सबसे बड़ा उत्पादक है, जहाँ देश की अधिकांश चाय उगाई जाती है.

🎯 Exam Tip: राज्यों के भौगोलिक उत्पादों और उनकी राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग को याद रखना महत्वपूर्ण है.

 

Question 12. सब्जियों के उत्पादन में विश्व में भारत का स्थान है –
(अ) प्रथम
(ब) द्वितीय
(स) तृतीय
(द) चतुर्थ
Answer: (ब) द्वितीय
In simple words: भारत दुनिया में सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है.

🎯 Exam Tip: कृषि उत्पादन में भारत की वैश्विक रैंकिंग को हमेशा ध्यान में रखें, खासकर प्रमुख फसलों और सब्जियों के लिए.

सुमेलन सम्बन्धी प्रश्न

(क)

स्तम्भ (अ)
(राज्य का नाम/क्षेत्र का नाम)
स्तम्भ (ब)
(स्थानान्तरित कृषि का नाम)
1. मध्यप्रदेश(अ) पोनम
2. आन्ध्रप्रदेश(ब) वालरा

Answer: (i) द (ii) य (iii) अ (iv) ब (v) स
In simple words: प्रश्न में दी गई तालिका और उत्तर में दिए गए विकल्प असंगत हैं. कृपया प्रश्न को सही करें.

🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, दोनों स्तंभों के विकल्पों को ध्यान से देखें और सही जोड़े बनाएं. कभी-कभी, क्षेत्र-विशिष्ट नामों को याद रखना महत्वपूर्ण होता है.

(ख)

स्तम्भ (अ)
(फसल का नाम)
स्तम्भ (ब)
(अग्रणी उत्पादक राज्य)
1. गेहूँ(अ) पश्चिमी बंगाल
2. चावल(ब) असम
3. कपास(स) उत्तरप्रदेश
4. चाय(द) गुजरात

Answer:
(i) स
(ii) अ
(iii) द
(iv) ब
In simple words: गेहूँ का सबसे बड़ा उत्पादक उत्तर प्रदेश है, चावल का पश्चिम बंगाल, कपास का गुजरात और चाय का असम है.

🎯 Exam Tip: फसलों और उनके प्रमुख उत्पादक राज्यों के बीच सही संबंध याद रखना महत्वपूर्ण है.

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 अतिलघूउत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. किस रूसी विद्वान ने भारत को एक कृषि उद्भव केन्द्र माना है?
Answer: रूसी विद्वान वेविलोव ने भारत को एक कृषि उद्भव केन्द्र माना है. वेविलोव ने अपने शोध में बताया कि कई महत्वपूर्ण फसलें भारत में ही पैदा हुई हैं.
In simple words: रूसी वैज्ञानिक वेविलोव ने कहा कि भारत कई फसलों की शुरुआत का केंद्र रहा है.

🎯 Exam Tip: कृषि भूगोल में प्रमुख विद्वानों और उनके योगदानों के बारे में जानकारी रखें.

 

Question 2. भारत की संस्कृति और समाज का मूलाधार कृषि है-कैसे?
Answer: प्रकृति ने भारत को अच्छी भौगोलिक स्थिति, समतल भूमि, उपजाऊ मिट्टी, पर्याप्त पानी, और मानसूनी जलवायु दी है. इन सब चीजों ने भारत को खेती के क्षेत्र में एक खास देश बना दिया है, जिससे कृषि यहाँ की संस्कृति और समाज का आधार बनी.
In simple words: भारत में अच्छी जमीन, पानी और मौसम के कारण खेती बहुत जरूरी हो गई है, जिससे यह हमारी संस्कृति और समाज का आधार बनी.

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्न में भारत की भौगोलिक विशेषताओं और उनके कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों को स्पष्ट करें.

 

Question 4. भारत के कुल क्षेत्रफल के कितने प्रतिशत, भाग पर कृषि कार्य होता है?
Answer: भारत के कुल क्षेत्रफल के 40.5 प्रतिशत भाग पर कृषि कार्य होता है. इसका मतलब है कि देश के काफी बड़े हिस्से में खेती की जाती है.
In simple words: भारत की कुल जमीन के लगभग 40.5% हिस्से पर खेती होती है.

🎯 Exam Tip: कृषि से संबंधित प्रमुख आँकड़े और प्रतिशत याद रखना सहायक होता है.

 

Question 5. भारतीय कृषि का अत्यधिक महत्व क्यों है?
Answer: भारतीय कृषि लोगों को रोजगार देती है, उद्योगों के लिए कच्चा माल देती है, राष्ट्रीय आय का मुख्य स्रोत है, विदेशी मुद्रा कमाने में मदद करती है, पौष्टिक भोजन पैदा करती है और यातायात के साधनों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इन्हीं कारणों से इसका महत्व बहुत अधिक है.
In simple words: भारतीय कृषि रोजगार, कच्चा माल, राष्ट्रीय आय, विदेशी पैसा और भोजन देती है, इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण है.

🎯 Exam Tip: कृषि के महत्व को बताते समय उसके आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक पहलुओं को शामिल करें.

 

Question 6. भारत में कृषि जोतों का आकार छोटा क्यों हो रहा है?
Answer: भारत में बढ़ती जनसंख्या के कारण खेती की जमीन का पीढ़ी-दर-पीढ़ी विभाजन और छोटे-छोटे टुकड़ों में बँटना हो रहा है. इसी वजह से कृषि जोतों का आकार छोटा होता जा रहा है.
In simple words: जनसंख्या बढ़ने से जमीनें बँटती जा रही हैं, इसलिए खेत छोटे होते जा रहे हैं.

🎯 Exam Tip: कृषि जोतों के छोटे आकार के कारणों में जनसंख्या वृद्धि और विरासत के नियम प्रमुख हैं.

 

Question 7. भारतीय कृषि के प्रकार कौन-कौन से हैं?
Answer: भारतीय कृषि के मुख्य प्रकारों में आदिम निर्वहन कृषि, गहन निर्वहन कृषि, आर्द्र व शुष्क कृषि, गहन व विस्तीर्ण कृषि, उद्योग कृषि और जैविक कृषि शामिल हैं. ये अलग-अलग प्रकार खेती करने के तरीकों और उद्देश्यों पर आधारित होते हैं.
In simple words: भारतीय कृषि के कई प्रकार हैं, जैसे पुरानी निर्वहन खेती, घनी खेती, सूखी-गीली खेती, बड़ी खेती, औद्योगिक खेती और जैविक खेती.

🎯 Exam Tip: कृषि के विभिन्न प्रकारों को उनके मुख्य लक्षणों के साथ याद रखें.

 

Question 8. निर्वहन कृषि की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
Answer: निर्वहन कृषि की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं –
1. यह एक परम्परागत कृषि विधि रही है. यह खेती परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए की जाती है.
In simple words: यह खेती का एक पुराना तरीका है, जो परिवार की खाने की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है.

🎯 Exam Tip: निर्वहन कृषि की परिभाषा और इसकी मूलभूत विशेषताओं पर ध्यान दें.

 

Question 10. स्थाई आदिम निर्वहन कृषि के कोई दो क्षेत्र बताइए।
Answer: स्थाई आदिम निर्वहन कृषि के दो मुख्य क्षेत्र हैं –
1. मध्य हिमालय
2. प्रायद्वीपीय भारत का उत्तरी-पूर्वी भाग
ये वे क्षेत्र हैं जहाँ पारंपरिक तरीकों से खेती की जाती है, और लोग एक ही स्थान पर बसकर खेती करते हैं.
In simple words: मध्य हिमालय और प्रायद्वीपीय भारत का उत्तरी-पूर्वी हिस्सा स्थाई आदिम खेती के दो मुख्य क्षेत्र हैं.

🎯 Exam Tip: कृषि के विभिन्न प्रकारों के क्षेत्रीय वितरण को मानचित्र पर देखकर याद करें.

 

Question 11. गहन निर्वहन कृषि के दो प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।
Answer: गहन निर्वहन कृषि के दो प्रमुख क्षेत्र हैं –
1. भारत का उत्तरी विशाल मैदान
2. समुद्र तटीय मैदान
इन क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व अधिक होने के कारण कम जमीन पर ज्यादा उपज लेने का प्रयास किया जाता है.
In simple words: भारत का उत्तरी विशाल मैदान और समुद्र तटीय मैदान घनी खेती के दो मुख्य क्षेत्र हैं.

🎯 Exam Tip: गहन निर्वहन कृषि के क्षेत्रों को जनसंख्या घनत्व से जोड़कर याद रखें.

 

Question 12. गहन निर्वहन कृषि में हो रहे। आधुनिकीकरण का उल्लेख कीजिए।
Answer: गहन निर्वहन कृषि में तेजी से निम्नलिखित आधुनिकीकरण हो रहा है –
1. कृषि में मशीनों का प्रयोग बढ़ रहा है. इससे काम आसान और तेज होता है.
2. फसल आवर्तन (अदला-बदली) पर जोर दिया जा रहा है. यह जमीन की उपजाऊ शक्ति बनाए रखने में मदद करता है.
In simple words: घनी खेती में अब मशीनें ज्यादा इस्तेमाल हो रही हैं और किसान फसलें बदल-बदल कर बो रहे हैं.

🎯 Exam Tip: कृषि में आधुनिकीकरण के तरीकों और उनके लाभों को समझने पर ध्यान दें.

 

Question 13. चावल प्रधान गहन निर्वहन कृषि के प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।
Answer: चावल प्रधान गहन निर्वहन कृषि के प्रमुख क्षेत्र पश्चिमी बंगाल, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश तथा तटीय मैदान हैं. इन क्षेत्रों में चावल मुख्य फसल है और अधिक जनसंख्या के कारण कम जमीन पर ज्यादा पैदावार पर जोर दिया जाता है.
In simple words: चावल प्रधान घनी खेती मुख्य रूप से पश्चिमी बंगाल, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश और तटीय इलाकों में होती है.

🎯 Exam Tip: चावल की खेती के लिए अनुकूल भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों को भी याद रखना महत्वपूर्ण है.

 

Question 15. व्यापारिक कृषि की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
Answer: व्यापारिक कृषि की दो मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –
1. निर्यात के लिए ज्यादा उत्पादन किया जाता है. इसका उद्देश्य फसलों को बेचकर पैसा कमाना होता है.
2. भौगोलिक स्थिति के अनुसार एक ही फसल को प्राथमिकता दी जाती है. इससे बड़े पैमाने पर खेती संभव होती है.
In simple words: व्यापारिक खेती में ज्यादा फसल उगाकर निर्यात करते हैं और एक ही जगह पर मौसम के हिसाब से एक ही खास फसल उगाते हैं.

🎯 Exam Tip: व्यापारिक कृषि और निर्वहन कृषि के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें.

 

Question 16. आर्दकृषि किसे कहते हैं?
Answer: ऐसी खेती जिसमें फसलों को अपनी जरूरत से ज्यादा पानी मिलता है, उसे आर्द्र कृषि कहते हैं. यह उन क्षेत्रों में होती है जहाँ वार्षिक वर्षा अधिक होती है.
In simple words: जिस खेती में फसलों को जरूरत से ज्यादा पानी मिलता है, उसे आर्द्र कृषि कहते हैं.

🎯 Exam Tip: आर्द्र कृषि को शुष्क कृषि से अलग करने वाली मुख्य विशेषता (वर्षा की मात्रा) को याद रखें.

 

Question 17. शुष्क कृषि से क्या तात्पर्य है?
Answer: 50 सेमी. से कम वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में की जाने वाली खेती को शुष्क कृषि कहते हैं. इन इलाकों में कम पानी में उगने वाली फसलें उगाई जाती हैं.
In simple words: जहाँ 50 सेमी. से कम बारिश होती है, वहाँ की जाने वाली खेती को शुष्क कृषि कहते हैं.

🎯 Exam Tip: शुष्क कृषि के लिए वर्षा की मात्रा की सीमा (50 सेमी.) को याद रखें.

 

Question 18. शुष्क कृषि के प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारत में शुष्क कृषि के मुख्य क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अरावली के पश्चिम में पश्चिमी राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे कम वर्षा वाले राज्य हैं. इन क्षेत्रों में पानी की कमी के कारण खास तरीके की खेती की जाती है.
In simple words: पश्चिमी राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश शुष्क खेती के मुख्य क्षेत्र हैं.

🎯 Exam Tip: शुष्क कृषि वाले क्षेत्रों को भारत के मानचित्र पर पहचानना सीखें.

 

Question 19. भारत में शुष्क कृषि अनुसन्धान कार्यालय कहाँ स्थापित है?
Answer: भारत में शुष्क कृषि अनुसंधान कार्यालय राँची में स्थापित किया गया है. यह कार्यालय सूखे वाले इलाकों में खेती को बेहतर बनाने पर काम करता है.
In simple words: शुष्क खेती के लिए रिसर्च ऑफिस राँची में है.

🎯 Exam Tip: भारत में प्रमुख कृषि अनुसंधान संस्थानों के स्थानों को याद रखें.

 

Question 20. शुष्क कृषि अनुसन्धान कार्यालय का क्या प्रमुख कार्य है?
Answer: जिन देशों में जनसंख्या के मुकाबले भूमि ज्यादा होती है, वहाँ बड़े-बड़े खेतों में मशीनों और आधुनिक उपकरणों से खेती की जाती है. इस खेती के लिए ज्यादा पूंजी की जरूरत होती है और इसे विस्तीर्ण कृषि कहते हैं. यह कार्यालय ऐसी कृषि प्रणालियों पर अनुसंधान करता है जो इन परिस्थितियों के लिए उपयुक्त हों.
In simple words: जहाँ आबादी कम और जमीन ज्यादा होती है, वहाँ मशीनों से बड़े खेतों में की जाने वाली खेती को विस्तीर्ण कृषि कहते हैं, यह कार्यालय इसी पर रिसर्च करता है.

🎯 Exam Tip: अनुसंधान कार्यालयों के प्रमुख कार्यों को उनके संबंधित कृषि प्रकारों से जोड़कर समझें.

 

Question 22. चकबन्दी के क्या उद्देश्य हैं?
Answer: चकबंदी का मुख्य उद्देश्य बिखरे हुए छोटे-छोटे खेतों को एक साथ मिलाकर बड़े खेत बनाना है. इससे खेतों की देखभाल करना और सिंचाई का इंतजाम करना आसान हो जाता है, जिससे खेती ज्यादा कुशल बनती है.
In simple words: चकबंदी का मकसद छोटे-छोटे खेतों को जोड़कर बड़ा खेत बनाना है, ताकि खेती और सिंचाई अच्छे से हो सके.

🎯 Exam Tip: चकबंदी के उद्देश्यों में भूमि सुधार और कृषि दक्षता में वृद्धि को शामिल करें.

 

Question 23. चकबन्दी के कोई दो लाभ बताइए।
Answer: चकबंदी के दो मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं –
1. खेत एक जगह मिल जाने से उनकी देखभाल करना बहुत आसान हो जाता है.
2. एक ही जगह पर खेत होने से सिंचाई की उचित व्यवस्था आसानी से की जा सकती है, जिससे पानी का बेहतर उपयोग होता है.
In simple words: चकबंदी से खेतों की देखभाल और सिंचाई का इंतजाम करना आसान हो जाता है.

🎯 Exam Tip: चकबंदी के लाभों को बताते समय कृषि प्रबंधन और संसाधन उपयोग पर ध्यान दें.

 

Question 24. भारत के किन राज्यों में चकबन्दी का कार्य हो चुका है?
Answer: भारत के तीन राज्यों – पंजाब, हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश में चकबंदी का काम लगभग पूरा हो चुका है. इन राज्यों में बड़े पैमाने पर खेतों को व्यवस्थित किया गया है.
In simple words: पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में चकबंदी का काम लगभग खत्म हो गया है.

🎯 Exam Tip: भूमि सुधार कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन वाले राज्यों के नाम याद रखें.

 

Question 25. उद्यान कृषि के प्रमुख उपभेद बताइए।
Answer: उद्यान कृषि के मुख्य छह प्रकार निम्नलिखित हैं –
1. बाजार के पास सब्जी उत्पादन
2. ट्रक कृषि
3. ग्रीन हाउस फार्मिंग
4. पुष्प कृषि
5. पादप नर्सरी
6. व्यापारिक फलोत्पादन आदि. यह सभी प्रकार विशेष फसलों या उद्देश्यों पर आधारित होते हैं.
In simple words: उद्यान कृषि के कई प्रकार हैं, जैसे सब्जी, ट्रक खेती, ग्रीन हाउस, फूल, नर्सरी और फलों की खेती.

🎯 Exam Tip: उद्यान कृषि के विभिन्न उपभेदों को उनकी मुख्य विशेषताओं के साथ याद रखें.

 

Question 27. गैर जैविक कृषि (रासायनिक कृषि) की ओर लोग क्यों अग्रसर हुए?
Answer: बढ़ती आबादी के कारण भोजन की कमी और अनाज संकट को दूर करने के लिए, 1960 के दशक में लोगों का रुझान रासायनिक कृषि (गैर जैविक कृषि) की ओर बढ़ा. इस तरीके से कम समय में ज्यादा अनाज पैदा किया जा सका.
In simple words: ज्यादा आबादी को खाना खिलाने और अनाज की कमी दूर करने के लिए लोग रासायनिक खेती की तरफ बढ़े.

🎯 Exam Tip: हरित क्रांति और उसके कारणों को गैर जैविक कृषि के प्रसार से जोड़कर समझें.

 

Question 28. विश्व में कितने क्षेत्रफल पर जैविक कृषि, की जा रही है?
Answer: वर्तमान समय में विश्व में लगभग 3.7 करोड़ हेक्टेयर भूमि पर जैविक कृषि की जा रही है. यह दुनिया की कुल खेती वाली जमीन का 0.9 प्रतिशत है. यह खेती पर्यावरण के अनुकूल होती है.
In simple words: दुनिया में करीब 3.7 करोड़ हेक्टेयर जमीन पर जैविक खेती हो रही है, जो कुल खेती का लगभग 0.9% है.

🎯 Exam Tip: जैविक कृषि से जुड़े वैश्विक आँकड़ों और इसके महत्व पर ध्यान दें.

 

Question 29. भारत के किन राज्यों में जैविक कृषि का प्रचलन बढ़ रहा है?
Answer: भारत के कई राज्यों जैसे महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, पंजाब, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, झारखंड, बिहार और राजस्थान में जैविक कृषि का चलन बढ़ रहा है. इन राज्यों के किसान पर्यावरण के अनुकूल खेती को अपना रहे हैं.
In simple words: महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, पंजाब, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, झारखंड, बिहार और राजस्थान में जैविक खेती बढ़ रही है.

🎯 Exam Tip: जैविक कृषि को बढ़ावा देने वाले राज्यों को याद रखें, खासकर सिक्किम जैसे पूर्ण जैविक राज्यों को.

 

Question 30. खरीफ की फसल में कौन-कौन सी फसले आती हैं ?
Answer: खरीफ की फसलों में चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का, कपास, जूट, मूंगफली, तिल, गन्ना, उड़द, मूंग और सोंठ आदि फसलें आती हैं. ये फसलें आमतौर पर मानसून के मौसम में बोई जाती हैं.
In simple words: चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का, कपास, जूट, मूंगफली, तिल, गन्ना, उड़द, मूंग, सोंठ खरीफ की फसलें हैं.

🎯 Exam Tip: खरीफ की फसलों को उनके बुवाई और कटाई के समय के साथ याद रखें.

 

Question 31. रबी की फसलों के नाम लिखिए।
Answer: रबी की फसलों में गेहूँ, जौ, चना, सरसों, मटर, अरहर और मसूर आदि फसलें आती हैं. ये फसलें सर्दियों के मौसम में बोई जाती हैं.
In simple words: गेहूँ, जौ, चना, सरसों, मटर, अरहर, मसूर रबी की फसलें हैं.

🎯 Exam Tip: रबी की फसलों को उनके बुवाई और कटाई के समय के साथ याद रखें.

 

Question 32. जायद की फसलों से क्या अभिप्राय है?
Answer: जैविक खाद और पारंपरिक तरीकों से की जाने वाली खेती को जैविक कृषि कहते हैं. इसमें रसायनों का इस्तेमाल नहीं होता. हालांकि, यह प्रश्न जायद की फसलों के बारे में है.
In simple words: जैविक खेती में प्राकृतिक खाद और पुराने तरीके इस्तेमाल होते हैं, बिना रसायनों के.

🎯 Exam Tip: कृषि के विभिन्न प्रकारों की परिभाषाओं को स्पष्ट रूप से समझें और याद रखें.

 

Question 34. रासायनिक कृषि किसे कहते हैं?
Answer: रासायनिक खादों और कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल करके की जाने वाली खेती को रासायनिक कृषि कहते हैं. इसका मुख्य उद्देश्य ज्यादा पैदावार प्राप्त करना होता है.
In simple words: रासायनिक खाद और कीटनाशक डालकर खेती करने को रासायनिक कृषि कहते हैं.

🎯 Exam Tip: रासायनिक कृषि के फायदे और नुकसान दोनों को समझें.

 

Question 35. उपयोग के आधार पर फसलों को कितने भागों में बाँटा गया है?
Answer: उपयोग के आधार पर फसलों को चार मुख्य भागों में बाँटा गया है: खाद्यान्न फसलें, बागानी फसलें, रेशेदार फसलें और नकदी फसलें. ये वर्गीकरण उनके मुख्य इस्तेमाल पर आधारित होते हैं.
In simple words: फसलों को खाने, बगीचे में उगाने, रेशे पाने और पैसे कमाने के हिसाब से चार भागों में बांटा गया है.

🎯 Exam Tip: फसलों के वर्गीकरण को उनके उपयोग के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है.

 

Question 36. गेहूँ की कृषि के लिए तापमान की क्या स्थिति होनी चाहिए?
Answer: गेहूँ शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र की फसल है. इसे बोते समय 10°C तापमान, बढ़ते समय 15°C तापमान और पकते व काटते समय 20°C से 28°C तापमान की जरूरत होती है. साथ ही, फसल के लिए 100 दिन पाला रहित मौसम होना चाहिए.
In simple words: गेहूँ को बोते, बढ़ते और काटते समय अलग-अलग तापमान चाहिए, और इसे पाले से बचाना होता है.

🎯 Exam Tip: प्रमुख फसलों के लिए आवश्यक तापमान और वर्षा की स्थितियों को याद रखें.

 

Question 37. भारत में चावल की कृषि के सम्बन्ध में रूसी विद्वान वेविलोव का क्या कथन है?
Answer: रूसी विद्वान वेविलोव के अनुसार, भारत चावल का मूल जन्मस्थान है. उन्होंने कहा कि यहाँ से ही चावल लगभग 3000 ईसा पूर्व चीन तक फैला था. मोहनजोदड़ो और हड़प्पा जैसी पुरानी सभ्यताओं में भी चावल के अवशेष मिले हैं, और वैदिक काल में इसका उपयोग धार्मिक व सांस्कृतिक कामों में होता था.
In simple words: रूसी विद्वान वेविलोव के अनुसार, चावल की शुरुआत भारत में हुई थी, और यहाँ से यह दुनिया के दूसरे हिस्सों में फैला.

🎯 Exam Tip: कृषि के इतिहास और प्रमुख फसलों के उत्पत्ति स्थानों से संबंधित तथ्यों को याद रखें.

 

Question 38. उत्तर प्रदेश के प्रमुख चावल उत्पादक जिलों के नाम बताइए।
Answer: उत्तर प्रदेश के प्रमुख चावल उत्पादक जिले सहारनपुर, देवरिया, गोरखपुर, लखनऊ, बहराइच, गोण्डा, बलिया, फैजाबाद, बस्ती, रायबरेली और पीलीभीत आदि हैं. इन जिलों में चावल की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है.
In simple words: उत्तर प्रदेश में सहारनपुर, देवरिया, गोरखपुर, लखनऊ, बहराइच, गोण्डा, बलिया, फैजाबाद, बस्ती, रायबरेली और पीलीभीत चावल उगाने वाले मुख्य जिले हैं.

🎯 Exam Tip: प्रमुख फसलों के लिए विभिन्न राज्यों के मुख्य उत्पादक जिलों को याद रखें.

 

Question 40. चावल उत्पादन में छत्तीसगढ़ की स्थिति क्या है?
Answer: छत्तीसगढ़ के मैदानी इलाकों को 'चावल का कटोरा' कहा जाता है. छत्तीसगढ़ के प्रमुख चावल उत्पादक जिले बिलासपुर, बस्तर, सरगुजा, रायगढ़, दंतेवाड़ा और नारायणपुर हैं. यह राज्य चावल उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है.
In simple words: छत्तीसगढ़ के मैदानी भागों को 'चावल का कटोरा' कहते हैं, और यहाँ बिलासपुर, बस्तर जैसे कई जिलों में चावल उगाया जाता है.

🎯 Exam Tip: किसी क्षेत्र को दिए गए उपनामों और उनके कारण को याद रखना महत्वपूर्ण है.

 

Question 41. भारतीय चावल अनुसन्धान संस्थान केन्द्र कहाँ स्थित है?
Answer: भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान केंद्र कटक (ओडिशा) में स्थित है. यह संस्थान चावल की नई किस्मों और उत्पादन तकनीकों पर शोध करता है.
In simple words: भारतीय चावल अनुसंधान केंद्र कटक, ओडिशा में है.

🎯 Exam Tip: भारत के प्रमुख कृषि अनुसंधान संस्थानों के स्थानों को याद रखें.

 

Question 42. भारत की प्रमुख दो मुद्रादायिनी फसलों के नाम बताइए।
Answer: भारत की प्रमुख दो मुद्रादायिनी फसलें हैं –
1. चाय
2. कपास
ये फसलें किसानों और देश के लिए अच्छी कमाई का स्रोत होती हैं.
In simple words: चाय और कपास भारत की दो मुख्य नकदी फसलें हैं.

🎯 Exam Tip: मुद्रादायिनी (नकदी) फसलों और खाद्यान्न फसलों के बीच के अंतर को समझें.

 

Question 43. भारत की दो प्रमुख रेशेदार फसलें कौन-सी हैं?
Answer: भारत की दो प्रमुख रेशेदार फसलें हैं –
1. कपास
2. जूट
इन फसलों से धागे और कपड़े जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं.
In simple words: कपास और जूट भारत की दो मुख्य रेशे वाली फसलें हैं.

🎯 Exam Tip: रेशेदार फसलों के उपयोग और उनके महत्व को याद रखें.

 

Question 44. कपास के प्रति हेक्टेअर उत्पादन में हरियाणा का कौन-सा स्थान है?
Answer: कपास के प्रति हेक्टेयर उत्पादन में हरियाणा का दूसरा स्थान है. यह राज्य प्रति हेक्टेयर कपास की अच्छी पैदावार के लिए जाना जाता है.
In simple words: हरियाणा प्रति हेक्टेयर कपास उत्पादन में दूसरे नंबर पर है.

🎯 Exam Tip: प्रति हेक्टेयर उत्पादन के आँकड़े अक्सर किसी विशेष क्षेत्र की कृषि दक्षता को दर्शाते हैं.

 

Question 46. कपास की फसल हेतु आवश्यक भौतिक दशाएँ क्या हैं ?
Answer: कपास की फसल के लिए 21°- 25°C तापमान, 50-100 सेमी. वर्षा और कछारी या काली मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है. ये भौगोलिक दशाएँ अच्छी पैदावार के लिए जरूरी हैं.
In simple words: कपास के लिए 21°- 25°C तापमान, 50-100 सेमी. बारिश और कछारी/काली मिट्टी अच्छी होती है.

🎯 Exam Tip: प्रमुख फसलों के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं (तापमान, वर्षा, मिट्टी) को बिंदुवार याद रखें.

 

Question 47. गुजरात के प्रमुख कपास उत्पादक जिलों के नाम बताइए।
Answer: गुजरात राज्य की 70 प्रतिशत कपास बड़ोदरा, अहमदाबाद, सूरत, भरूच, साबरमती, पंचमहल और सुरेंद्रनगर आदि जिलों में पैदा होती है. ये जिले कपास उत्पादन में गुजरात के मुख्य केंद्र हैं.
In simple words: गुजरात में बड़ोदरा, अहमदाबाद, सूरत, भरूच, साबरमती, पंचमहल और सुरेंद्रनगर मुख्य कपास उत्पादक जिले हैं.

🎯 Exam Tip: राज्य-वार प्रमुख फसल उत्पादक जिलों को याद रखना परीक्षा में मददगार होता है.

 

Question 48. महाराष्ट्र के प्रमुख कपास उत्पादक जिलों के नाम बताइए।
Answer: महाराष्ट्र में प्रमुख कपास उत्पादक जिले नागपुर, अकोला, अमरावती, वर्धा, नांदेड़, जलगाँव तथा बुलढाणा हैं. इन जिलों में काली मिट्टी की उपलब्धता के कारण कपास की अच्छी खेती होती है.
In simple words: महाराष्ट्र में नागपुर, अकोला, अमरावती, वर्धा, नांदेड़, जलगाँव और बुलढाणा मुख्य कपास उत्पादक जिले हैं.

🎯 Exam Tip: कपास उत्पादन के लिए काली मिट्टी के महत्व को समझें और उन क्षेत्रों को याद रखें जहाँ यह मिट्टी पाई जाती है.

 

Question 49. भारत में प्रति हेक्टेअर कपास उत्पादन किस राज्य में सर्वाधिक है?
Answer: भारत में प्रति हेक्टेयर कपास उत्पादन पंजाब में सबसे अधिक है. पंजाब में उन्नत कृषि तकनीकों और सिंचाई सुविधाओं के कारण उच्च पैदावार हासिल की जाती है.
In simple words: पंजाब में प्रति हेक्टेयर कपास उत्पादन सबसे ज्यादा होता है.

🎯 Exam Tip: प्रति हेक्टेयर उत्पादन के मामले में शीर्ष राज्यों को याद रखना महत्वपूर्ण है.

 

Question 50. हरियाणा के दो प्रमुख कपास उत्पादक जिलों के नाम बताइए।
Answer: हरियाणा के हिसार और सिरसा जिले राज्य के कुल कपास उत्पादन का 80 प्रतिशत कपास उत्पन्न करते हैं. ये जिले हरियाणा में कपास उत्पादन के मुख्य केंद्र हैं.
In simple words: हरियाणा में हिसार और सिरसा जिले सबसे ज्यादा कपास उगाते हैं.

🎯 Exam Tip: किसी राज्य के भीतर प्रमुख उत्पादक जिलों को याद रखना सहायक होता है.

 

Question 51. राजस्थान में कपास उत्पादन में कौन-सा जिला अग्रणी है?
Answer: राजस्थान में हनुमानगढ़ जिला कपास उत्पादन में सबसे आगे है, जो राज्य का 30 प्रतिशत कपास पैदा करता है. इसके अलावा, कपास की खेती के लिए काली मिट्टी का क्षेत्र-सलहट्टी-बेलारी, शिमोगा, चिकमंगलूर, चित्तलदुर्ग जिले और लाल मिट्टी का क्षेत्र-दौड़हट्टी-रायचूर एवं धारवाड़ जिले भी महत्वपूर्ण हैं.
In simple words: राजस्थान में हनुमानगढ़ सबसे ज्यादा कपास उगाता है, साथ ही काली और लाल मिट्टी वाले कुछ अन्य जिले भी कपास के लिए महत्वपूर्ण हैं.

🎯 Exam Tip: किसी राज्य में अग्रणी जिले और साथ ही संबंधित मिट्टी के प्रकारों को याद रखें.

 

Question 53. गन्ना उत्पादन हेतु आवश्यक भौगोलिक दशाएँ कौन सी है?
Answer: गन्ना उत्पादन के लिए 20°C - 30°C तापमान, 100-200 सेमी. वर्षा और गहरी दोमट, चिकनी तथा लावायुक्त काली मिट्टी उपयुक्त रहती है. ये दशाएँ गन्ने की अच्छी पैदावार के लिए जरूरी हैं.
In simple words: गन्ने के लिए 20-30°C तापमान, 100-200 सेमी. बारिश और गहरी दोमट/काली मिट्टी अच्छी होती है.

🎯 Exam Tip: प्रमुख नकदी फसलों के लिए आवश्यक भौगोलिक परिस्थितियों को याद रखें.

 

Question 54. महाराष्ट्र में कहाँ-कहाँ गन्ने का उत्पादन किया जाता है?
Answer: महाराष्ट्र में अहमदनगर, नासिक, पुणे, शोलापुर और रत्नागिरी क्षेत्रों में गन्ने का उत्पादन किया जाता है. इन क्षेत्रों में गन्ने की खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियां पाई जाती हैं.
In simple words: महाराष्ट्र में अहमदनगर, नासिक, पुणे, शोलापुर और रत्नागिरी में गन्ना उगाया जाता है.

🎯 Exam Tip: राज्य-वार प्रमुख फसल उत्पादक क्षेत्रों को याद रखना सहायक होता है.

 

Question 55. राष्ट्रीय गन्ना अनुसन्धान संस्थान कहाँ स्थित है?
Answer: राष्ट्रीय गन्ना अनुसंधान संस्थान कोयम्बटूर में स्थित है. यह संस्थान गन्ने की खेती और उससे जुड़े शोध कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
In simple words: राष्ट्रीय गन्ना अनुसंधान संस्थान कोयम्बटूर में है.

🎯 Exam Tip: प्रमुख कृषि अनुसंधान संस्थानों के स्थानों को याद रखें.

 

Question 56. राजस्थान के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिले कौन से हैं?
Answer: राजस्थान में मुख्यतः बूंदी, उदयपुर, भीलवाड़ा, श्री गंगानगर, चित्तौड़गढ़ और कोटा जिलों में गन्ने का उत्पादन किया जाता है. इन जिलों में गन्ने की खेती के लिए उपयुक्त परिस्थितियां मौजूद हैं.
In simple words: राजस्थान में बूंदी, उदयपुर, भीलवाड़ा, श्री गंगानगर, चित्तौड़गढ़ और कोटा मुख्य गन्ना उत्पादक जिले हैं.

🎯 Exam Tip: राज्य-वार प्रमुख फसल उत्पादक जिलों को याद रखना सहायक होता है.

 

Question 57. भारत में चाय उत्पादन में किस जिले का प्रथम स्थान है?
Answer: भारत में चाय उत्पादन की दृष्टि से केरल का त्रिचूर जिला प्रति हेक्टेयर 3145 किलोग्राम चाय उत्पादन कर प्रथम स्थान पर रहा है. यह दर्शाता है कि त्रिचूर में चाय की पैदावार बहुत अच्छी होती है.
In simple words: केरल का त्रिचूर जिला भारत में सबसे ज्यादा प्रति हेक्टेयर चाय का उत्पादन करता है.

🎯 Exam Tip: प्रति हेक्टेयर उत्पादन के मामले में शीर्ष जिलों को याद रखना महत्वपूर्ण है.

 

Question 58. असम के प्रमुख चाय उत्पादक जिलों के नाम बताइए।
Answer: असम के प्रमुख चाय उत्पादक जिले शिवसागर, लखीमपुर, दरांग, गोलपाड़ा और नौगाँव आदि हैं. असम भारत में चाय का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है.
In simple words: असम में शिवसागर, लखीमपुर, दरांग, गोलपाड़ा और नौगाँव चाय उगाने वाले मुख्य जिले हैं.

🎯 Exam Tip: चाय उत्पादन के लिए अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों को भी याद रखें.

 

Question 60. ट्रक फार्मिंग कृषि का प्रारम्भ कहाँ हुआ?
Answer: ट्रक फार्मिंग कृषि की शुरुआत संयुक्त राज्य अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया से हुई. इसके बाद यह उत्तरी-पश्चिमी यूरोप के ब्रिटेन, बेल्जियम, जर्मनी तथा डेनमार्क जैसे देशों में भी फैल गई.
In simple words: ट्रक फार्मिंग की शुरुआत अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में हुई और फिर यह यूरोप के कुछ देशों में फैली.

🎯 Exam Tip: कृषि के विभिन्न प्रकारों के उत्पत्ति स्थान और उनके वैश्विक वितरण को याद रखें.

 

Question 61. फलों तथा सब्जियों के उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
Answer: फलों तथा सब्जियों के उत्पादन में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है. यह दर्शाता है कि भारत इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण वैश्विक उत्पादक है.
In simple words: भारत फल और सब्जी उगाने में दुनिया में दूसरे नंबर पर है.

🎯 Exam Tip: प्रमुख कृषि उत्पादों में भारत की वैश्विक रैंकिंग को याद रखना महत्वपूर्ण है.

 

Question 62. हिमालय पर्वतीय शीतोष्ण क्षेत्र में किन-किन फलों का उत्पादन होता है?
Answer: हिमालय पर्वतीय शीतोष्ण क्षेत्र में श्रीनगर की घाटियाँ, कुल्लू, कांगड़ा, कुमाऊँ की पहाड़ियाँ और हिमाचल प्रदेश आदि आते हैं. यहाँ सेब, अंगूर, नाशपाती, लीची, अंजीर, आलू-बुखारा, बादाम, अखरोट, बेर-खुबानी और स्ट्रॉबेरी जैसे फलों का उत्पादन होता है.
In simple words: हिमालय के ठंडे पहाड़ी इलाकों में सेब, अंगूर, नाशपाती, लीची, बादाम और स्ट्रॉबेरी जैसे कई फल उगाए जाते हैं.

🎯 Exam Tip: पर्वतीय क्षेत्रों में उगाए जाने वाले विशिष्ट फलों और उनकी भौगोलिक स्थितियों को याद रखें.

 

Question 63. फलों के उत्पादन में भारत में प्रथम स्थान किस राज्य का है?
Answer: फलों के उत्पादन में भारत में महाराष्ट्र राज्य का प्रथम स्थान है. महाराष्ट्र में कई तरह के फल उगाए जाते हैं.
In simple words: भारत में सबसे ज्यादा फल महाराष्ट्र में उगाए जाते हैं.

🎯 Exam Tip: फल उत्पादन में अग्रणी राज्यों के नाम याद रखना परीक्षा में मददगार होता है.

 

Question 64. सब्जियों के उत्पादन में भारत में प्रथम स्थान किस राज्य का है?
Answer: सब्जियों के उत्पादन में भारत में पश्चिमी बंगाल का प्रथम स्थान है. यह राज्य विभिन्न प्रकार की सब्जियों के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
In simple words: भारत में सबसे ज्यादा सब्जियां पश्चिमी बंगाल में उगाई जाती हैं.

🎯 Exam Tip: सब्जी उत्पादन में अग्रणी राज्यों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है.

 

Question 65. दक्षिणी प्रदेश के प्रमुख फल उत्पादक राज्य तथा फलों के नाम बताइए।
Answer: दक्षिणी प्रदेश के प्रमुख फल उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश हैं. यहाँ आम, संतरा, केला, नींबू, अनार, खजूर, अंगूर, बेर, पपीता और अमरूद जैसे प्रमुख फल उगाए जाते हैं.
In simple words: दक्षिणी राज्यों जैसे महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में आम, संतरा, केला और पपीता जैसे फल उगाए जाते हैं.

🎯 Exam Tip: भारत के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में उगाए जाने वाले विशिष्ट फलों को याद रखें.

 

Question 67. पूर्वोत्तर आर्दै प्रदेशों में किन-किन फलों का उत्पादन होता है?
Answer: पूर्वोत्तर आर्द्र प्रदेशों में पश्चिमी बंगाल, झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे राज्य शामिल हैं. यहाँ आम, केला, अमरूद, नाशपाती, लीची, अनन्नास, चीकू और पपीता जैसे फल उगाए जाते हैं. यह क्षेत्र अपनी विविध फल संपदा के लिए जाना जाता है.
In simple words: पूर्वोत्तर के आर्द्र इलाकों में आम, केला, अमरूद, नाशपाती, लीची, अनन्नास, चीकू और पपीता जैसे फल उगाए जाते हैं.

🎯 Exam Tip: भारत के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में उगाए जाने वाले विशिष्ट फलों को याद रखें.

 

Question 68. मटर उत्पादन में भारत का विश्व में कौन सा स्थान है?
Answer: मटर उत्पादन में भारत का विश्व में प्रथम स्थान है. भारत मटर का एक प्रमुख उत्पादक देश है.
In simple words: भारत दुनिया में मटर उगाने में पहले नंबर पर है.

🎯 Exam Tip: प्रमुख फसलों में भारत की वैश्विक रैंकिंग को याद रखना महत्वपूर्ण है.

 

Question 69. सब्जियों के उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
Answer: सब्जियों के उत्पादन में भारत का विश्व में चीन के बाद दूसरा स्थान है. भारत एक बड़ा सब्जी उत्पादक देश है, लेकिन चीन पहले स्थान पर है.
In simple words: सब्जी उत्पादन में भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरे नंबर पर है.

🎯 Exam Tip: प्रमुख कृषि उत्पादों में भारत की वैश्विक रैंकिंग को याद रखें.

 

Question 70. बैंगन तथा गोभी के उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
Answer: बैंगन तथा गोभी के उत्पादन में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है. भारत इन सब्जियों के उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है.
In simple words: बैंगन और गोभी उगाने में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है.

🎯 Exam Tip: विशिष्ट सब्जियों के उत्पादन में भारत की वैश्विक स्थिति को याद रखें.

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 लघूत्तरात्मक प्रश्न (SA-I)

 

Question 1. भारतीय कृषि के महत्व को बताइए।
Answer: कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार है. इसका महत्व निम्नलिखित बिंदुओं से स्पष्ट किया जा सकता है –
1. यह सबसे ज्यादा रोजगार देती है.
2. उद्योगों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराती है.
3. राष्ट्रीय आय का एक मुख्य स्रोत है.
4. विदेशी मुद्रा कमाने में मदद करती है.
5. पौष्टिक भोजन का मुख्य स्रोत है. यह सब भारत के विकास के लिए खेती को बहुत महत्वपूर्ण बनाते हैं.
In simple words: भारतीय कृषि लोगों को रोजगार देती है, उद्योगों को कच्चा माल देती है, देश की आय बढ़ाती है, विदेशी पैसा लाती है और भोजन देती है, इसलिए यह बहुत जरूरी है.

🎯 Exam Tip: कृषि के महत्व को बताते समय उसके आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक पहलुओं को शामिल करें.

 

Question 2. मारताय कृाष काविशषताजा का साप म बताइए।
Answer: भारतीय कृषि का शुरुआती रूप खाद्यान्न प्रधान और पारंपरिक था. आज के समय में खेती में तकनीक का बदलाव हो रहा है. भारतीय कृषि की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –
1. बहुत ज्यादा आबादी का इस पर निर्भर होना.
2. मानसून पर निर्भरता.
3. सिंचाई की अपर्याप्त व्यवस्था.
4. प्रति हेक्टेयर कम पैदावार.
5. खाद्यान्नों की प्रधानता और फसलों की विविधता.
6. कृषि जोतों का छोटा आकार.
7. चारा फसलों की कमी. ये सभी विशेषताएं भारतीय कृषि की स्थिति को दर्शाती हैं.
In simple words: भारतीय खेती में बहुत लोग निर्भर हैं, यह मानसून पर निर्भर करती है, सिंचाई कम है, पैदावार कम है, कई तरह के अनाज उगते हैं, खेत छोटे हैं और चारे की कमी है.

🎯 Exam Tip: भारतीय कृषि की विशेषताओं को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं से देखें.

 

Question 3. वर्तमान में भारतीय कृषि की प्रमुख समस्याएँ क्या हैं? बताइए।
Answer: वर्तमान समय में भारतीय कृषि की प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं –
1. अनियमित एवं अनिश्चित मानसून पर निर्भरता. यह खेती को बहुत प्रभावित करता है.
2. निम्न उत्पादकता. प्रति हेक्टेयर पैदावार अभी भी कम है.
3. भूमि सुधारों की कमी. भूमि का सही उपयोग नहीं हो पाता.
4. छोटे खेत एवं विखंडित जोत. खेतों का आकार छोटा होने से आधुनिक खेती मुश्किल होती है.
5. असिंचित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अल्प बेरोजगारी. इन क्षेत्रों में पूरे साल काम नहीं मिलता.
6. वाणिज्यीकरण का अभाव. किसान अपनी उपज को बाजार तक ठीक से नहीं पहुंचा पाते.
7. कृषि भूमि का निम्नीकरण. मिट्टी की गुणवत्ता कम हो रही है.
8. वित्तीय संसाधनों की बाध्यताएँ एवं ऋणग्रस्तता. किसानों को पैसे की कमी और कर्ज की समस्या है.
9. समुचित विपणन सुविधाओं की कमी. फसलों को बेचने की अच्छी व्यवस्था नहीं है. ये समस्याएं भारतीय कृषि के विकास में बाधा डालती हैं.
In simple words: भारतीय खेती की मुख्य समस्याएं हैं: बारिश पर निर्भरता, कम पैदावार, जमीन की कमी, छोटे खेत, बेरोजगारी, व्यापार में कमी, मिट्टी का खराब होना, कर्ज और बाजार की खराब व्यवस्था.

🎯 Exam Tip: भारतीय कृषि की समस्याओं को उनके कारणों और प्रभावों के साथ बिंदुवार याद रखें.

 

Question 4. चावल प्रधान गहन निर्वहन कृषि तथा गेहूँ प्रधान गहन निर्वहन कृषि में अन्तर बताइए।
Answer: चावल प्रधान गहन निर्वहन कृषि तथा गेहूँ प्रधान गहन निर्वहन कृषि में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं-

चावल प्रधान गहन निर्वहन कृषिगेहूँ प्रधान गहन निर्वहन कृषि
3. चावल यहाँ की मुख्य उपज है.3. गेहूँ यहाँ की मुख्य उपज है.
4. यहाँ साल में चावल की 2 या 3 फसलें उगाई जाती हैं.4. गेहूँ की केवल एक ही फसल उगाई जाती है.
5. यह खेती पश्चिमी बंगाल, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्यप्रदेश और तटीय मैदानों में की जाती है.5. यह खेती पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी मध्यप्रदेश, राजस्थान और प्रायद्वीपीय पठार के पश्चिमी भागों में आम है.

In simple words: चावल प्रधान खेती में साल में कई बार चावल उगाते हैं, जबकि गेहूँ प्रधान खेती में एक ही बार गेहूँ उगाते हैं. इनके मुख्य क्षेत्र भी अलग-अलग हैं.

🎯 Exam Tip: फसलों के प्रकारों के बीच अंतर को स्पष्ट करने के लिए तालिका का उपयोग करें और भौगोलिक वितरण पर ध्यान दें.

 

Question 5. व्यापारिक कृषि की विशेषताएँ बताइए।
Answer: व्यापारिक कृषि में अतिरिक्त उत्पादन पर ज़ोर दिया जाता है ताकि इसे बेचा जा सके और बाहर भेजा जा सके। यह कृषि परिवहन और संचार के साधनों पर भी निर्भर करती है ताकि उत्पादों को बाज़ार तक पहुंचाया जा सके। किसान अक्सर एक ही फसल को प्राथमिकता देते हैं जो वहां की मिट्टी और जलवायु के लिए सबसे अच्छी हो। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्यों में इस प्रकार की खेती बढ़ रही है।
In simple words: व्यापारिक कृषि में ज़्यादा उत्पादन होता है ताकि फसलें बेची जा सकें। यह खेती अच्छी सड़कों और संचार पर निर्भर करती है। इसमें अक्सर एक ही तरह की फसल उगाई जाती है, और यह कुछ भारतीय राज्यों में बहुत बढ़ रही है।

🎯 Exam Tip: जब भी व्यापारिक कृषि की विशेषताओं का वर्णन करें, तो उत्पादन का उद्देश्य (बिक्री और निर्यात) और परिवहन की आवश्यकता जैसे प्रमुख बिंदुओं को अवश्य शामिल करें।

 

Question 6. शुष्क कृषि एवं आर्द्र कृषि में क्या अन्तर है?
Answer: शुष्क कृषि एवं आर्द्र कृषि में निम्नलिखित अन्तर हैं –

शुष्क कृषिआर्द्र कृषि
यह खेती उन जगहों पर होती है जहाँ 50 सेंटीमीटर से कम बारिश होती है।यह खेती उन इलाकों में की जाती है जहाँ 100 से 200 सेंटीमीटर तक बारिश होती है।
इस खेती में पानी का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि पानी कम होता है।इन क्षेत्रों में पानी की अधिकता के कारण जल संसाधनों का कम उपयोग होता है।

In simple words: शुष्क कृषि कम बारिश वाली जगहों पर होती है और इसमें पानी बचाने पर बहुत ध्यान दिया जाता है। आर्द्र कृषि ज़्यादा बारिश वाली जगहों पर होती है और वहाँ पानी का कम इस्तेमाल होता है क्योंकि वह आसानी से मिल जाता है।

🎯 Exam Tip: शुष्क और आर्द्र कृषि के बीच अंतर बताते समय, मुख्य रूप से वर्षा की मात्रा और जल उपयोग के तरीके पर ध्यान दें।

 

Question 7. भारत में आई भूमि कृषि की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer: भारत में आर्द्र भूमि कृषि की मुख्य बातें ये हैं: यह खेती उन जगहों पर की जाती है जहाँ खूब बारिश होती है। ज़्यादा बारिश के कारण इन खेती वाले इलाकों को कभी-कभी बाढ़ और मिट्टी के कटने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस प्रकार की खेती में मुख्य रूप से चावल, गन्ना और जूट जैसी फसलें उगाई जाती हैं। बारिश के मौसम में इन क्षेत्रों में फसलों के लिए ज़रूरत से ज़्यादा पानी उपलब्ध रहता है।
In simple words: आर्द्र भूमि कृषि उन जगहों पर होती है जहाँ खूब बारिश होती है। इस वजह से कभी-कभी बाढ़ और मिट्टी का कटाव होता है। इसमें चावल, गन्ना और जूट जैसी फसलें उगाई जाती हैं क्योंकि बारिश के मौसम में पानी बहुत ज़्यादा होता है।

🎯 Exam Tip: आर्द्र भूमि कृषि की विशेषताओं में वर्षा की प्रचुरता, संबंधित प्राकृतिक आपदाएं और प्रमुख फसलें शामिल करें।

 

Question 8. भारत में शुष्क भूमि की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer: भारत में शुष्क भूमि कृषि की प्रमुख विशेषताएँ ये हैं: बारिश शुरू होने से पहले ही खेतों को जोत दिया जाता है ताकि ज़मीन नरम हो जाए। हर बारिश के बाद गहरी जुताई की जाती है ताकि बारिश का पानी ज़मीन के अंदर गहराई तक जा सके। बारिश के पानी को बहने से रोकने के लिए ज़मीन पर छोटे-छोटे मेड़ बनाकर उसे कई हिस्सों में बांटा जाता है। जोती हुई ज़मीन की नमी को बचाए रखने के लिए उस पर सूखी मिट्टी की एक परत बिछाई जाती है। पानी के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए बेकार के पौधे और घास हटा दिए जाते हैं। इस खेती में केवल वही फसलें उगाई जाती हैं जो कम पानी या सूखे को सह सकती हैं।
In simple words: शुष्क खेती में बारिश से पहले खेत जोते जाते हैं ताकि ज़मीन नरम हो। पानी ज़मीन में जाए इसके लिए गहरी जुताई होती है और मेड़ बनाए जाते हैं। ज़मीन की नमी बनाए रखने के लिए सूखी मिट्टी की परत बिछाई जाती है। बेकार पौधे हटा दिए जाते हैं और सिर्फ़ वही फसलें उगती हैं जो सूखे को झेल सकें।

🎯 Exam Tip: शुष्क भूमि कृषि की विशेषताओं में पानी बचाने के तरीकों और सूखा सहने वाली फसलों पर ध्यान दें।

 

Question 9. गहन कृषि की विशेषता बताइये।
Answer: गहन कृषि की प्रमुख विशेषताएँ हैं: इस खेती में साल में एक से ज़्यादा फसलें उगाई जाती हैं। किसान फसल बदलने का तरीका अपनाते हैं ताकि ज़मीन की उपजाऊ शक्ति बनी रहे। जहाँ जनसंख्या ज़्यादा होती है, वहाँ सीमित ज़मीन से ज़्यादा फ़सल पैदा की जाती है। इस खेती में मशीनों का कम इस्तेमाल होता है और ज़्यादातर काम मज़दूरों द्वारा ही किया जाता है, यानी मानवीय श्रम को ज़्यादा महत्व दिया जाता है।
In simple words: गहन खेती में साल में कई फसलें उगाई जाती हैं और फसलें बदल-बदल कर बोई जाती हैं। कम ज़मीन से ज़्यादा फ़सल पाने के लिए मज़दूर ज़्यादा काम करते हैं, मशीनों का इस्तेमाल कम होता है।

🎯 Exam Tip: गहन कृषि की विशेषताओं को बताते समय, प्रति इकाई क्षेत्र से अधिकतम उत्पादन, फसल रोटेशन और श्रम-प्रधान प्रकृति पर ज़ोर दें।

 

Question 10. विस्तीर्ण कृषि से आप क्या समझते हैं?
Answer: विस्तीर्ण कृषि उन इलाकों में की जाती है जहाँ लोगों की तुलना में ज़मीन ज़्यादा होती है। इस खेती की मुख्य विशेषताएँ ये हैं: यहाँ खेतों का आकार बहुत बड़ा होता है। खेती में बड़ी मशीनों और औज़ारों का इस्तेमाल ज़्यादा होता है। फसलों में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का खूब उपयोग किया जाता है। इस तरह की खेती में ज़्यादा पैसे लगाने पड़ते हैं।
In simple words: विस्तीर्ण कृषि वहाँ होती है जहाँ ज़मीन ज़्यादा और लोग कम होते हैं। इसमें बड़े खेत होते हैं, बड़ी मशीनें इस्तेमाल होती हैं, खूब खाद और कीटनाशक डालते हैं, और बहुत पैसा लगता है।

🎯 Exam Tip: विस्तीर्ण कृषि को परिभाषित करते समय, भूमि की उपलब्धता, मशीनों के उपयोग और पूंजी की आवश्यकता जैसे कारकों को उजागर करें।

 

Question 11. उद्यान कृषि की विशेषताएँ बताइए।
Answer: उद्यान कृषि एक विशेष प्रकार की खेती है जिसमें विशेषज्ञता की ज़रूरत होती है और यह ज़्यादातर छोटे पैमाने पर की जाती है। यह खेती शहरों में फल और सब्ज़ियों की बढ़ती मांग के कारण बहुत विकसित हुई है। इस विधि से कम ज़मीन पर भी काफी ज़्यादा फसल पैदा की जा सकती है।
In simple words: उद्यान कृषि एक विशेष खेती है जो छोटे खेतों पर होती है। इसमें शहरों में फल और सब्ज़ियों की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए कम जगह में ज़्यादा उत्पादन किया जाता है।

🎯 Exam Tip: उद्यान कृषि की मुख्य विशेषताओं में विशेषीकरण, छोटे पैमाने की खेती और शहरी बाज़ारों से संबंध को शामिल करें।

 

Question 12. सिक्किम देश का पहला पूर्ण जैविक खेती वाला राज्य है-स्पष्ट कीजिए।
Answer: सिक्किम को 18 जनवरी, 2016 को गंगटोक में हुए टिकाऊ कृषि सम्मेलन में भारत का पहला पूरी तरह से जैविक खेती वाला राज्य घोषित किया गया। यहाँ जैविक खेती की शुरुआत 2003 में हुई थी, और तब से 75,000 हेक्टेयर ज़मीन को जैविक खेती के लिए बदला गया है। पर्यावरण की सुरक्षा के लिए यहाँ रासायनिक खाद और दवाइयों का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। 2016 में सिक्किम को देश का सबसे स्वच्छ राज्य भी चुना गया था।
In simple words: सिक्किम भारत का पहला राज्य है जहाँ पूरी तरह से जैविक खेती होती है। यहाँ 2003 से ही रासायनिक खाद और दवाइयों का इस्तेमाल बंद कर दिया गया है ताकि पर्यावरण साफ रहे। इसे 2016 में सबसे स्वच्छ राज्य भी चुना गया था।

🎯 Exam Tip: सिक्किम के जैविक राज्य बनने की तारीख, इसका कारण (पर्यावरण सुरक्षा) और जैविक खेती के महत्व पर ध्यान दें।

 

Question 13. रबी और खरीफ की फसलों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Answer:

रबी की फसलेंखरीफ की फसलें
ये फसलें बारिश के मौसम के बाद, ठंड में (अक्टूबर-नवंबर में) बोई जाती हैं।ये फसलें दक्षिण-पश्चिम मानसून के आने पर (गर्मियों में) बोई जाती हैं।
इनमें मुख्य रूप से गेहूँ, चना और सरसों जैसी फसलें शामिल हैं।इनमें चावल, ज्वार, कपास, जूट, बाजरा और अरहर जैसी मुख्य फसलें शामिल हैं।
ये फसलें गर्मी शुरू होने से पहले (मार्च-अप्रैल में) पक जाती हैं।ये फसलें ठंड का मौसम शुरू होने से पहले पक कर तैयार हो जाती हैं।

In simple words: रबी फसलें ठंड में बोई जाती हैं और गर्मी में काटी जाती हैं, जैसे गेहूँ। खरीफ फसलें बारिश में बोई जाती हैं और ठंड से पहले काटी जाती हैं, जैसे चावल।

🎯 Exam Tip: रबी और खरीफ की फसलों में अंतर बताते समय बुवाई/कटाई का समय और कुछ मुख्य फसलों के उदाहरण ज़रूर दें।

 

Question 14. खाद्यान्न फसलों के वर्गीकरण एवं महत्व बताइए।
Answer: खाद्यान्न फसलों को उनकी बनावट के आधार पर अनाज और दालों में बांटा जाता है। भारतीय कृषि में खाने वाली फसलों का बहुत महत्व है। भारत में कुल खेती वाली ज़मीन के दो-तिहाई हिस्से पर अनाज और दालें उगाई जाती हैं। पूरे देश में, ये फसलें बहुत ज़रूरी हैं, चाहे लोग उन्हें अपने खाने के लिए उगाते हों या बेचने के लिए। भारत दुनिया का लगभग 11% अनाज और 20% दालें पैदा करता है।
In simple words: खाने वाली फसलों को अनाज और दालों में बांटा जाता है। भारत में खेती के लिए ये फसलें बहुत ज़रूरी हैं। देश की ज़्यादातर ज़मीन पर यही उगाई जाती हैं। भारत दुनिया का 11% अनाज और 20% दालें पैदा करता है।

🎯 Exam Tip: खाद्यान्न फसलों के वर्गीकरण में अनाज और दालों का उल्लेख करें और भारत की अर्थव्यवस्था में उनके व्यापक महत्व को रेखांकित करें।

 

Question 15. चावल की प्रमुख किस्में बताइए।
Answer: भारत में चावल की लगभग 200 किस्में हैं, जिन्हें मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है:
1. निम्न भूमि चावल: यह चावल खाने में ज़्यादा स्वादिष्ट होता है और इसकी पैदावार भी प्रति हेक्टेयर ज़्यादा होती है। भारत में ज़्यादातर निम्न भूमि चावल दलदली या निचली ज़मीन पर उगाया जाता है।
2. उच्च भूमि चावल: इस चावल का पौधा छोटा होता है और इसके दाने भी छोटे और लाल रंग के होते हैं। यह उन जगहों पर उगता है जहाँ कम बारिश होती है और यह जल्दी पक जाता है। यह चावल खाने में थोड़ा कम स्वादिष्ट होता है।
In simple words: भारत में चावल की लगभग 200 किस्में हैं। निचली ज़मीन का चावल ज़्यादा स्वादिष्ट होता है और ज़्यादा उगता है। ऊँची ज़मीन का चावल छोटे पौधे वाला, छोटे दाने वाला और कम स्वादिष्ट होता है, जो कम बारिश में उगता है।

🎯 Exam Tip: चावल की प्रमुख किस्मों को वर्गीकृत करते समय उनकी खेती की जगह (निम्न/उच्च भूमि) और स्वाद/उत्पादन की विशेषताओं को बताएं।

 

Question 17. भारत देश कपास का जन्मस्थान है-स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारत को कपास का जन्मस्थान माना जाता है। हमारे पुराने ग्रंथों, जैसे ऋग्वेद और मनुस्मृति, में कपास के धागे का ज़िक्र मिलता है। सिंधु घाटी की खुदाई में मिले सूती कपड़ों के अवशेष बताते हैं कि भारत में 5000 से 8000 साल पहले सूती कपड़ों का इस्तेमाल होता था। यूनानी भूगोलवेत्ता हेरोडोट्स और यात्री मार्कोपोलो के लेखों से भी भारत में कपास के इस्तेमाल और उत्पादन के बारे में जानकारी मिलती है।
In simple words: भारत वह जगह है जहाँ से कपास की शुरुआत हुई। पुराने ग्रंथों और सिंधु घाटी की खुदाई में मिले सबूत बताते हैं कि हज़ारों साल पहले भारत में सूती कपड़ों का इस्तेमाल होता था। विदेशी यात्रियों के लेख भी इसकी पुष्टि करते हैं।

🎯 Exam Tip: कपास के जन्मस्थान के प्रमाण के रूप में प्राचीन ग्रंथों, पुरातात्विक खोजों (सिंधु घाटी) और ऐतिहासिक लेखों का उल्लेख करें।

 

Question 18. भारत में कपास उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों का विवरण दीजिए।
Answer: भारत में कपास उत्पादन के मुख्य तीन क्षेत्र हैं:
1. उत्तर-पश्चिम भारत: इसमें पंजाब, हरियाणा और उत्तरी राजस्थान शामिल हैं।
2. पश्चिमी भारत: इसमें गुजरात और महाराष्ट्र शामिल हैं।
3. दक्षिणी भारत: इसमें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु राज्य शामिल हैं।
महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब और हरियाणा भारत के बड़े कपास उत्पादक राज्य हैं। महाराष्ट्र के बारिश पर निर्भर कपास वाले इलाकों में प्रति हेक्टेयर उत्पादन कम होता है, जबकि पंजाब, हरियाणा और उत्तरी राजस्थान के सिंचित (पानी वाले) क्षेत्रों में प्रति हेक्टेयर उत्पादन ज़्यादा होता है।
In simple words: भारत में कपास मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान), पश्चिम (गुजरात, महाराष्ट्र) और दक्षिण (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु) में उगता है। पंजाब और हरियाणा में ज़्यादा सिंचाई के कारण प्रति हेक्टेयर ज़्यादा कपास पैदा होता है, जबकि महाराष्ट्र के बारिश पर निर्भर इलाकों में कम होता है।

🎯 Exam Tip: कपास उत्पादक क्षेत्रों को भौगोलिक खंडों (उत्तर-पश्चिम, पश्चिम, दक्षिण) में वर्गीकृत करें और प्रत्येक क्षेत्र के प्रमुख राज्यों का उल्लेख करें।

 

Question 19. उत्तर प्रदेश के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।
Answer: वर्ष 2013-14 में, उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन और इसके खेती वाले क्षेत्र दोनों में पहले स्थान पर था। उत्तर प्रदेश में गन्ना उत्पादन के दो मुख्य क्षेत्र हैं:
1. तराई क्षेत्र: यह रामपुर से बरेली, पीलीभीत, सीतापुर, खीरी, मुरादाबाद, फैजाबाद, आजमगढ़, जौनपुर, गोरखपुर से होते हुए बिहार के चंपारण जिले तक फैला हुआ है।
2. दोआब क्षेत्र: यह गंगा और यमुना नदियों के बीच का क्षेत्र है, जो मेरठ से शुरू होकर इलाहाबाद तक फैला हुआ है।
In simple words: उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन में सबसे आगे है। यहाँ के मुख्य गन्ना उत्पादक क्षेत्र तराई क्षेत्र (रामपुर से चंपारण तक) और दोआब क्षेत्र (गंगा-यमुना के बीच, मेरठ से इलाहाबाद तक) हैं।

🎯 Exam Tip: उत्तर प्रदेश के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों को तराई और दोआब क्षेत्रों में बांटकर समझाएं और उनमें शामिल जिलों का उल्लेख करें।

 

Question 21. चाय की कृषि पहाड़ियों के निचले ढालों पर क्यों की जाती है?
Answer: चाय एक उष्णकटिबंधीय रोपण फसल है जिसका उपयोग पेय पदार्थ के रूप में किया जाता है। चाय के पौधों की खेती पहाड़ियों के निचले ढलानों पर इसलिए की जाती है क्योंकि इसकी जड़ों में पानी जमा होना पौधों के लिए हानिकारक होता है। पहाड़ी ढलानों पर पानी आसानी से बह जाता है, जिससे चाय के पौधों की जड़ों में पानी नहीं रुकता। यही मुख्य कारण है कि चाय की खेती ढलानों पर ही की जाती है।
In simple words: चाय की खेती ढलानों पर की जाती है क्योंकि चाय के पौधों की जड़ों में पानी रुकना अच्छा नहीं होता। ढलान पर पानी आसानी से बह जाता है, जिससे पौधे स्वस्थ रहते हैं।

🎯 Exam Tip: चाय की खेती के लिए ढलानदार भूमि की आवश्यकता का मुख्य कारण स्पष्ट करें — जड़ों में पानी जमा होने से बचाव।

 

Question 22. फलोत्पादन के प्रमुख प्रदेशों का उल्लेख कीजिए।
Answer: फल उत्पादन के हिसाब से भारत को इन मुख्य क्षेत्रों में बांटा गया है: हिमालयी पहाड़ी शीतोष्ण क्षेत्र, पूर्वोत्तर आर्द्र क्षेत्र, शुष्क और अर्द्ध-शुष्क क्षेत्र, दक्षिणी प्रदेश और तटीय प्रदेश।
In simple words: भारत में फलों के उत्पादन के लिए हिमालय, पूर्वोत्तर, शुष्क-अर्ध-शुष्क, दक्षिणी और तटीय क्षेत्रों को मुख्य हिस्सों में बांटा गया है।

🎯 Exam Tip: फलोत्पादन के प्रमुख प्रदेशों को सूचीबद्ध करते समय, उनके भौगोलिक स्थान और जलवायु विशेषताओं का ध्यान रखें।

 

Question 23. बागवानी कृषि की विशेषताएँ बताइए।
Answer: बागवानी कृषि की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं: इसमें खाद और उर्वरकों का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल होता है। इस कृषि के लिए तेज़ परिवहन साधनों की ज़रूरत होती है ताकि ताज़ी उपज जल्दी बाज़ार तक पहुँच सके। यह एक बहुत फ़ायदेमंद खेती है, जिससे किसान ज़्यादा मुनाफा कमाते हैं।
In simple words: बागवानी खेती में ज़्यादा खाद डालते हैं। इसे बाज़ार तक तेज़ी से पहुँचाने के लिए अच्छे परिवहन की ज़रूरत होती है। यह खेती बहुत फ़ायदेमंद होती है।

🎯 Exam Tip: बागवानी कृषि की विशेषताओं में उर्वरकों के उपयोग, कुशल परिवहन और उच्च लाभप्रदता पर ध्यान दें।

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 लघूत्तरात्मक प्रश्न (SA-II)

 

Question 1. स्थानान्तरित कृषि के स्थाई कृषि में क्या अन्तर है?
Answer:

स्थानान्तरित कृषि (झूम खेती)स्थाई कृषि (स्थिर खेती)
यह खेती पुराने तरीके से जंगल में रहने वाले लोग करते हैं।यह खेती उन आदिवासी इलाकों में होती है जहाँ ज़्यादा लोग होने से खेती की ज़मीन पर दबाव बढ़ता है।
इसमें खेती की जगह बदलती रहती है।इसमें खेती की जगह तय रहती है, बदलती नहीं।
यह सिर्फ़ परिवार की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए की जाती है।इस खेती में ज़रूरत से ज़्यादा अनाज पैदा किया जाता है।
ज़मीन की उपजाऊ शक्ति बनाए रखने के लिए जंगल जलाकर राख को खाद के रूप में इस्तेमाल करते हैं।ज़मीन की उपजाऊ शक्ति बनाए रखने के लिए पशुओं के गोबर से बनी खाद का इस्तेमाल होता है।
यह खेती भारत में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, केरल के पश्चिमी घाट और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में की जाती है।यह खेती भारत में मध्य हिमालय और प्रायद्वीप के उत्तरी-पूर्वी हिस्सों में की जाती है।

In simple words: स्थानांतरित कृषि में लोग खेती की जगह बदलते रहते हैं, जंगल जलाकर खाद बनाते हैं, और सिर्फ़ अपने लिए उगाते हैं। स्थाई कृषि में खेती की जगह तय रहती है, पशु खाद का इस्तेमाल होता है, और ज़रूरत से ज़्यादा अनाज उगाया जाता है, खासकर ज़्यादा आबादी वाले इलाकों में।

🎯 Exam Tip: स्थानान्तरित और स्थाई कृषि के बीच अंतर बताते समय, खेती की जगह, उद्देश्य, उर्वरक के स्रोत और भारत में उनके प्रचलित क्षेत्रों को शामिल करें।

 

Question 2. रासायनिक कृषि के कोई सात दुष्परिणाम बताइए।
Answer: रासायनिक कृषि के कई बुरे नतीजे सामने आए हैं:
1. फसलों पर रासायनिक अवशेष रह जाते हैं जो खाने वालों के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
2. रासायनिक खाद और कीटनाशकों से मिट्टी की प्राकृतिक उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है।
3. मिट्टी में रहने वाले फायदेमंद जीव-जंतुओं और सूक्ष्मजीवों को नुकसान होता है।
4. ये रसायन ज़मीन के पानी में मिलकर उसे दूषित कर देते हैं, जिससे पीने का पानी भी खराब होता है।
5. जैव-विविधता पर नकारात्मक असर पड़ता है, यानी कई प्रकार के पौधे और जीव खत्म हो जाते हैं।
6. खेती में ज़्यादा पानी की ज़रूरत पड़ने से ज़मीन के नीचे का पानी कम होता जा रहा है।
7. ज़मीन की उपजाऊ शक्ति बहुत तेज़ी से घटती जाती है।
In simple words: रासायनिक खेती से फसलों में रसायन रह जाते हैं, मिट्टी खराब होती है, ज़मीन के नीचे का पानी गंदा होता है, जीव-जंतु मरते हैं, पानी की कमी होती है, और ज़मीन की ताकत तेज़ी से घट जाती है।

🎯 Exam Tip: रासायनिक कृषि के दुष्परिणामों को बताते समय, पर्यावरण (मिट्टी, जल, जैव-विविधता) और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों पर ध्यान दें।

 

Question 3. भारत में विभिन्न फसल ऋतुएँ कौन-कौन सी हैं? प्रत्येक का विवरण दीजिए।
Answer: भारत में तीन मुख्य फसलें हैं:
1. खरीफ: यह मौसम दक्षिण-पश्चिम मानसून के साथ जून से सितंबर तक आता है। इस समय चावल, कपास, जूट, ज्वार, बाजरा और अरहर जैसी मुख्य फसलें उगाई जाती हैं। इन फसलों को ज़्यादा गर्मी और ज़्यादा नमी की ज़रूरत होती है।
2. रबी: खरीफ के बाद, अक्टूबर से मार्च तक रबी का मौसम शुरू होता है। इस ठंडे मौसम में गेहूँ, चना और सरसों जैसी फसलें उगाई जाती हैं। इन फसलों को कम तापमान और कम बारिश की ज़रूरत होती है।
3. जायद: यह एक छोटी गर्मी की फसल है जो रबी की कटाई के बाद शुरू होती है। इसमें चावल, सब्ज़ियाँ, फल जैसे तरबूज, खरबूज, खीरा और चारा उगाया जाता है। जायद की फसलों को उगाने के लिए सिंचाई की ज़रूरत होती है।
In simple words: भारत में तीन फसलें हैं: खरीफ (जून-सितंबर, चावल, कपास, ज़्यादा गर्मी-नमी), रबी (अक्टूबर-मार्च, गेहूँ, चना, कम गर्मी-बारिश) और जायद (रबी के बाद, सब्ज़ियाँ, फल, सिंचाई ज़रूरी)।

🎯 Exam Tip: फसल ऋतुओं का वर्णन करते समय, प्रत्येक ऋतु के बुवाई-कटाई के समय, प्रमुख फसलों और आवश्यक जलवायु परिस्थितियों को स्पष्ट करें।

 

Question 4. बी.टी. काटन/जी.एम. फसल पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: बी.टी. कपास या जी.एम. फसलें आनुवंशिक रूप से बदली हुई फसलें हैं। इन फसलों के इस्तेमाल से जुड़ा एक बड़ा खतरा यह है कि कभी-कभी कीटों या बीमारियों का ऐसा भयानक प्रकोप हो जाता है, जो बहुत ज़्यादा घातक सिद्ध होता है और फसल को भारी नुकसान पहुँचाता है।
In simple words: बी.टी. कपास और जी.एम. फसलें बदली हुई फसलें हैं। इनके इस्तेमाल से कभी-कभी कीटों या बीमारियों का ऐसा हमला होता है जो बहुत खतरनाक हो सकता है।

🎯 Exam Tip: बी.टी. कपास/जी.एम. फसल पर टिप्पणी लिखते समय, इसके आनुवंशिक परिवर्तन और संभावित नकारात्मक प्रभावों (जैसे कीट प्रकोप) को संक्षेप में बताएं।

 

Question 5. भारत में गन्ना उत्पादन की प्रमुख समस्याएँ क्या हैं?
Answer: भारत गन्ने का मूल स्थान है और यहाँ से यह पूरी दुनिया में फैला। यह भारत की एक महत्वपूर्ण नकदी फसल है, और दुनिया की लगभग 35% गन्ने की खेती भारत में होती है। हालांकि, आज भारत में गन्ना उगाने में कुछ चुनौतियाँ हैं:
1. आदर्श गन्ना उगाने वाली स्थितियाँ दक्षिणी भारत के समुद्री इलाकों में ज़्यादा अच्छी हैं, लेकिन उत्तर भारत में भी गन्ना उगाया जाता है। उत्तर भारत में लंबे मौसम के कारण गन्ने में रस की मात्रा कम हो जाती है।
2. गन्ना खेती में नई तकनीकों का पूरी तरह से उपयोग नहीं हो पा रहा है।
3. गन्ना किसानों को अपनी फसल का सही दाम समय पर नहीं मिल पाता है।
4. गन्ना तौलते समय गड़बड़ी की समस्या होती है।
5. मौसम का उल्टा असर भी पड़ता है।
6. गन्ने की फसल का सही दाम तय नहीं हो पाता है।
In simple words: भारत में गन्ना उगाने में कई दिक्कतें हैं। जैसे, उत्तर भारत में रस कम होना, नई तकनीक का इस्तेमाल न होना, किसानों को सही दाम न मिलना, तौलने में दिक्कत, खराब मौसम, और सही दाम तय न होना।

🎯 Exam Tip: गन्ना उत्पादन की समस्याओं में भौगोलिक बाधाएं (रस की गुणवत्ता), तकनीकी कमी, आर्थिक मुद्दे (मूल्य निर्धारण, भुगतान) और मौसम के प्रभाव को शामिल करें।

 

Question 6. ट्रक फार्मिंग कृषि की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
Answer: ट्रक फार्मिंग एक तरह की गहन व्यापारिक खेती है। इसमें शहरों से दूर, अच्छी जलवायु वाली जगहों पर फल और सब्ज़ियाँ उगाई जाती हैं, और फिर उन्हें ठंडे ट्रकों या गाड़ियों से बड़े शहरों तक पहुंचाया जाता है। इसकी मुख्य विशेषताएँ ये हैं:
1. खेतों का आकार छोटा होता है।
2. साल में तीन-चार बार सब्ज़ियाँ उगाई जाती हैं।
3. यह खेती ज़्यादातर मज़दूरों द्वारा की जाती है।
4. खेतों को वैज्ञानिक तरीकों से चलाया जाता है।
5. ज़मीन की उपजाऊ शक्ति बनाए रखने के लिए ज़्यादा खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल होता है।
6. ठंडे ट्रकों और गाड़ियों से सामान जल्दी बाज़ार तक पहुँचाया जाता है।
7. इस खेती में ज़्यादा पैसे लगाने पड़ते हैं।
In simple words: ट्रक फार्मिंग में शहरों से दूर फल और सब्ज़ियाँ उगाकर ठंडे ट्रकों से शहरों तक पहुँचाते हैं। इसमें छोटे खेत, ज़्यादा फसलें, मज़दूरों का काम, वैज्ञानिक तरीके, खूब खाद, तेज़ परिवहन और ज़्यादा पैसा लगता है।

🎯 Exam Tip: ट्रक फार्मिंग की विशेषताओं में छोटे खेत, सघन उत्पादन, श्रम-प्रधान प्रकृति, वैज्ञानिक प्रबंधन और त्वरित परिवहन पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 7. भारत में सब्जियों की कृषि पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: भारत में सब्ज़ियों की खेती बहुत व्यापक है, और ये लगभग हर जगह उगाई जाती हैं। इन सब्ज़ियों को फिर ट्रकों या अन्य परिवहन माध्यमों का उपयोग करके छोटे शहरों और बड़े महानगरों तक पहुँचाया जाता है ताकि ताज़ी सब्ज़ियाँ सभी को मिल सकें।
In simple words: भारत में सब्ज़ियाँ लगभग हर जगह उगाई जाती हैं। इन्हें ट्रकों और अन्य साधनों से शहरों तक पहुँचाया जाता है।

🎯 Exam Tip: सब्ज़ियों की कृषि पर टिप्पणी करते समय, उनके व्यापक वितरण और परिवहन के महत्व को रेखांकित करें।

 

Question 8. भारत के फल उत्पादक क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
Answer: भारत में फल उत्पादन के लिए देश को इन मुख्य क्षेत्रों में बांटा गया है:
1. हिमालय पर्वतीय शीतोष्ण क्षेत्र: इसमें श्रीनगर, कुल्लू, कांगड़ा, कुमाऊं की पहाड़ियाँ और हिमाचल प्रदेश जैसे इलाके शामिल हैं। यहाँ सेब, अंगूर, नाशपाती, लीची, अंजीर, आलू-बुखारा, बादाम, अखरोट, बेर, खुबानी और स्ट्रॉबेरी जैसे फल उगाए जाते हैं।
2. पूर्वोत्तर आर्द्र क्षेत्र: इस क्षेत्र में पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे राज्य आते हैं। यहाँ आम, केला, अमरूद, नाशपाती, लीची, अनानास, चीकू, पपीता और सीताफल मुख्य रूप से पैदा होते हैं।
3. शुष्क एवं अर्द्ध-शुष्क क्षेत्र: इस क्षेत्र में पंजाब, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं। यहाँ आम, जामुन, मौसमी, माल्टा, केला, नींबू, अनार, खजूर, अंगूर, बेर, पपीता, अमरूद और अंजीर जैसे फल प्रमुख हैं।
4. दक्षिणी क्षेत्र: इसमें महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं। यहाँ आम, संतरा, केला, अमरूद, अनानास, अंगूर, अनार, नारियल, काजू और पपीता जैसे फल मुख्य रूप से उगाए जाते हैं।
5. तटीय क्षेत्र: इस क्षेत्र के बारे में विस्तृत जानकारी स्रोत में नहीं दी गई है।
In simple words: भारत में फल उत्पादन के लिए पाँच मुख्य क्षेत्र हैं: हिमालयी क्षेत्र (सेब, अंगूर), पूर्वोत्तर आर्द्र क्षेत्र (आम, केला), शुष्क-अर्ध-शुष्क क्षेत्र (आम, जामुन), दक्षिणी क्षेत्र (आम, संतरा) और तटीय क्षेत्र। हर क्षेत्र में अलग-अलग तरह के फल उगते हैं।

🎯 Exam Tip: भारत के फल उत्पादक क्षेत्रों का वर्णन करते समय, प्रत्येक क्षेत्र के भौगोलिक स्थान और वहाँ उगाए जाने वाले विशिष्ट फलों का उल्लेख करें।

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारत में चावल उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं को उल्लेख करते हुए उत्पादन एवं वितरण की विवेचना कीजिये।
Answer: भारत में चावल एक बहुत ज़रूरी अनाज है, जो देश की ज़्यादातर आबादी का मुख्य भोजन है। भारत दुनिया में चावल पैदा करने में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है, और यह दुनिया के कुल चावल का लगभग 22% उगाता है। देश की कुल खेती योग्य ज़मीन के एक-चौथाई हिस्से पर चावल की खेती होती है।

चावल उत्पादन के लिए ज़रूरी भौगोलिक दशाएँ:
1. तापमान: चावल की खेती के लिए 20°C तापमान बोते समय, 27°C तापमान फसल पकते समय चाहिए। इसे कम से कम 100 दिन पाले से मुक्त मौसम की ज़रूरत होती है।
2. वर्षा: चावल की खेती के लिए 100 से 200 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा की ज़रूरत होती है। जहाँ 100 सेंटीमीटर से कम बारिश होती है, वहाँ सिंचाई का इस्तेमाल किया जाता है।
3. मिट्टी: उपजाऊ और गहरी दोमट या चिकनी मिट्टी चावल के लिए सबसे अच्छी होती है क्योंकि यह पानी को लंबे समय तक रोक कर रखती है। नदियों द्वारा लाई गई जलोढ़ मिट्टी भी बहुत फायदेमंद होती है।
4. धरातल: समतल मैदानी इलाके चावल की खेती के लिए सबसे अच्छे होते हैं ताकि पानी आसानी से भर सके या सिंचाई हो सके। पहाड़ी इलाकों में सीढ़ीदार खेत बनाकर चावल उगाया जाता है।
5. श्रम: चावल की खेती में ज़्यादातर काम मशीनों से नहीं हो सकता, इसलिए इसमें बहुत ज़्यादा मानवीय श्रम की ज़रूरत पड़ती है।

उत्पादन और वितरण:
1. पश्चिम बंगाल: यह राज्य देश का 14% चावल क्षेत्र है और 14.32% उत्पादन करता है। यहाँ अमन, औस और बोरो तीनों प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं।
2. उत्तर प्रदेश: हरित क्रांति के बाद यहाँ उत्पादन में बहुत वृद्धि हुई है और यह देश का 12% चावल पैदा करता है।
3. आंध्र प्रदेश: 2014-15 में यह राज्य 11% उत्पादन के साथ तीसरे स्थान पर था।
4. पंजाब: हरित क्रांति के बाद यहाँ चावल उत्पादन में बहुत तेज़ी से वृद्धि हुई है। यहाँ प्रति हेक्टेयर 3952 किलोग्राम चावल का उत्पादन होता है।
5. बिहार: इस राज्य में साल में दो बार चावल की फसल ली जाती है, और कुल कृषि भूमि के 40% पर चावल उगाया जाता है।
6. तमिलनाडु: यह राज्य देश के कुल उत्पादन का 6-10% हिस्सा देता है, जिसमें कावेरी डेल्टा में स्थित तंजावुर जिला अकेला 25% चावल पैदा करता है।
7. छत्तीसगढ़: इसे 'चावल का कटोरा' कहा जाता है क्योंकि मैदानी इलाके चावल की खेती के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
8. मध्य प्रदेश और ओडिशा: ये भी चावल उत्पादक राज्य हैं।
9. अन्य राज्य: गोवा, मणिपुर, नागालैंड और मिजोरम भी चावल उत्पादन करते हैं।
प्रमुख क्षेत्र गौण क्षेत्र मानचित्र - भारत में चावल उत्पादक क्षेत्र
In simple words: चावल भारत का मुख्य भोजन है, और भारत दुनिया में इसका दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। इसे उगाने के लिए गरम मौसम, अच्छी बारिश, उपजाऊ मिट्टी, समतल ज़मीन और बहुत सारे मज़दूरों की ज़रूरत होती है। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, पंजाब, बिहार, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और ओडिशा इसके मुख्य उत्पादक राज्य हैं।

🎯 Exam Tip: चावल उत्पादन पर विस्तृत उत्तर देते समय, भौगोलिक दशाओं (तापमान, वर्षा, मिट्टी, धरातल, श्रम) और प्रमुख उत्पादक राज्यों का नाम और योगदान अवश्य शामिल करें। मानचित्र को स्पष्ट और लेबल करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. भारत में कपास उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं को उल्लेख करते हुए उत्पादन एवं वितरण की विवेचना कीजिये।
Answer: कपास भारत की एक प्रमुख नकदी फसल है। दुनिया के कुल कपास उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा भारत में होता है।

कपास उत्पादन के लिए ज़रूरी भौगोलिक दशाएँ:
1. तापमान: कपास उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय पौधा है। इसे 21°-25°C तापमान की ज़रूरत होती है, हालांकि यह 40°C तक के तापमान में भी उग सकता है। फसल के लिए कम से कम 200 दिन पाले से मुक्त मौसम और साफ आसमान चाहिए।
2. वर्षा: कपास की खेती के लिए 50-100 सेंटीमीटर बारिश पर्याप्त होती है। अगर बारिश कम हो तो सिंचाई से भी खेती की जा सकती है।
3. मिट्टी: कपास सभी तरह की मिट्टियों में उग सकता है। लेकिन उत्तरी भारत की जलोढ़ मिट्टी और दक्षिणी पठारी क्षेत्रों की काली मिट्टी इसके लिए सबसे अच्छी मानी जाती है।
4. धरातल: कपास की खेती के लिए ऐसा धरातल चाहिए जहाँ पानी आसानी से निकल जाए, क्योंकि जड़ों में पानी जमा होना फसल के लिए हानिकारक होता है।
5. श्रम: कपास की खेती में बीज बोने, सिंचाई करने और कपास चुनने जैसे कामों के लिए ज़्यादा मज़दूरों की ज़रूरत पड़ती है।

उत्पादन और वितरण:
भारत के कुल कपास उत्पादन का 60% गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से आता है।
1. गुजरात: यह भारत के कुल उत्पादन का 34.09% कपास पैदा करके पहले स्थान पर है। यहाँ की जलवायु और मिट्टी कपास के लिए बहुत अच्छी है।
2. महाराष्ट्र: यह देश का 20.45% कपास उत्पादन करके दूसरे स्थान पर है। यहाँ लंबी रेशे वाली कपास उगाई जाती है, और लावा युक्त काली मिट्टी कपास की खेती के लिए बहुत उपयुक्त है।
3. आंध्र प्रदेश: यह देश का 13.92% उत्पादन करके तीसरा बड़ा उत्पादक राज्य है। यहाँ कपास की खेती कृष्णा नदी की घाटी में की जाती है।
In simple words: कपास एक महत्वपूर्ण फसल है। इसे उगने के लिए गर्म तापमान, मध्यम बारिश, अच्छी मिट्टी (खासकर काली) और अच्छी तरह से सूखा हुआ खेत चाहिए। बुवाई से लेकर कटाई तक बहुत मज़दूर लगते हैं। गुजरात, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश भारत के मुख्य कपास उत्पादक राज्य हैं।

🎯 Exam Tip: कपास उत्पादन पर निबंधात्मक प्रश्न के लिए, आवश्यक भौगोलिक दशाओं (तापमान, वर्षा, मिट्टी, धरातल, श्रम) और प्रमुख उत्पादक राज्यों (गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश) का वर्णन उनके योगदान प्रतिशत के साथ करें।

 

Question 3. भारत में गन्ने की कृषि के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करते हुए उत्पादन एवं वितरण की विवेचना कीजिए।
Answer: गन्ना एक उष्णकटिबंधीय फसल है। यह उन क्षेत्रों में भी उग सकता है जहाँ वर्षा पर निर्भरता होती है, खासकर आर्द्र और उप-आर्द्र जलवायु वाले क्षेत्रों में। गन्ने की खेती के लिए कुछ खास भौगोलिक स्थितियाँ चाहिए।
आवश्यक भौगोलिक दशाएँ:
1. **तापमान:** गन्ने की खेती के लिए 20°C से 30°C के बीच तापमान अच्छा होता है।
2. **वर्षा:** इसके लिए 100 से 200 सेमी वार्षिक वर्षा की जरूरत होती है। अगर वर्षा कम हो तो सिंचाई से भी खेती की जा सकती है।
3. **मिट्टी:** नमी वाली, उपजाऊ और गहरी दोमट मिट्टी गन्ने के लिए सबसे अच्छी होती है। मिट्टी में चूने की मौजूदगी भी फायदेमंद मानी जाती है। लावा मिट्टी भी इसके लिए अच्छी होती है।
4. **श्रम:** गन्ने की खेती में बहुत ज्यादा इंसानी मेहनत लगती है, क्योंकि बुवाई से लेकर कटाई और मिलों तक पहुँचाने का ज्यादातर काम हाथों से ही होता है।
उत्पादन एवं वितरण:
भारत दुनिया में गन्ने का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, ब्राजील के बाद। विश्व के कुल गन्ना उत्पादन का लगभग 23 प्रतिशत भारत में होता है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक भारत के मुख्य गन्ना उत्पादक राज्य हैं। उत्तर प्रदेश देश के कुल गन्ने का लगभग 40 प्रतिशत पैदा करता है, और यहाँ दक्षिणी भारत की तुलना में प्रति हेक्टेयर उपज भी अधिक है।
भारत में गन्ना उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र हैं:
1. **उत्तर प्रदेश:** यह भारत का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है, जो देश के कुल उत्पादन का 38.56 प्रतिशत (2013-14 के अनुसार) पैदा करता है। कृषि क्षेत्र के हिसाब से भी यह पहले स्थान पर है।
    • **तराई क्षेत्र:** इसमें रामपुर से बरेली, पीलीभीत, सीतापुर, खीरी, मुरादाबाद, फैजाबाद, आजमगढ़, जौनपुर, गोरखपुर से लेकर बिहार के चम्पारन जिले तक के इलाके शामिल हैं।
    • **दोआब क्षेत्र:** गंगा-यमुना का दोआब क्षेत्र, जो मेरठ से शुरू होकर इलाहाबाद तक फैला है।
2. **महाराष्ट्र:** यह दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है, जो देश के कुल उत्पादन का 22.89 प्रतिशत (2013-14 के अनुसार) पैदा करता है। गोदावरी नदी की ऊपरी घाटी गन्ने की खेती के लिए मशहूर है। महाराष्ट्र चीनी उत्पादन में पहले स्थान पर है। अहमदनगर, नासिक, पुणे, शोलापुर और रत्नागिरी यहाँ के मुख्य गन्ना उत्पादक जिले हैं।
3. **तमिलनाडु:** यह तीसरा बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है, जहाँ प्रति हेक्टेयर उत्पादन देश में सबसे ज्यादा (113.41 टन) होता है। बेलगाँव, बेलारी, माण्डवा, कोलार, मैसूर, तुमकूर और रायचूर जैसे जिले प्रमुख उत्पादक हैं।
4. **आंध्र प्रदेश:** कृष्णा-गोदावरी नदियों के डेल्टाई क्षेत्रों में यह गन्ना उगाया जाता है, जो देश के 4.67 प्रतिशत गन्ने का उत्पादन करता है। पूर्वी और पश्चिमी गोदावरी, श्रीकाकुलम, विशाखापट्टनम और चित्तूर यहाँ के मुख्य उत्पादक जिले हैं।
5. **गुजरात:** यह देश के 3.17 प्रतिशत गन्ने का उत्पादन करता है। सूरत, भावनगर, जामनगर, राजकोट और जूनागढ़ यहाँ के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिले हैं।
6. **पंजाब:** यह भारत के कुल गन्ने का 2.21 प्रतिशत पैदा करता है। अमृतसर, जालंधर, फिरोजपुर और गुरदासपुर यहाँ के मुख्य उत्पादक जिले हैं।
7. **हरियाणा:** यह देश के कुल गन्ने का 2.04 प्रतिशत पैदा करता है। पंजाब की तरह, यहाँ भी अच्छी मिट्टी और सिंचाई के कारण गन्ना क्षेत्र और उत्पादन लगातार बढ़ रहा है।
8. **राजस्थान:** बूंदी, उदयपुर, भीलवाड़ा, श्रीगंगानगर, चित्तौड़गढ़ और कोटा यहाँ के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिले हैं।
9. **अन्य उत्पादक क्षेत्र:** बिहार में चम्पारन, गया, दरभंगा, सारन जैसे तराई के इलाके और ओडिशा में पुरी, कटक भी गन्ना उत्पादन करते हैं।
In simple words: गन्ना उगने के लिए गर्म मौसम, खूब पानी और अच्छी मिट्टी चाहिए। भारत में गन्ना बहुत होता है, खासकर उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में। यह चीनी बनाने के लिए एक खास फसल है और इसकी खेती में बहुत लोग काम करते हैं।

🎯 Exam Tip: जब भी किसी फसल के उत्पादन और वितरण पर प्रश्न आए, तो पहले उसकी भौगोलिक आवश्यकताओं को बताएं और फिर भारत के प्रमुख उत्पादक राज्यों का विस्तृत विवरण दें, जिसमें प्रतिशत और प्रमुख जिले शामिल हों।

 

Question 4. भारत में चाय उत्पादन के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करते हुए प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
Answer: चाय उत्पादन के लिए खास भौगोलिक स्थितियाँ चाहिए। भारत में चाय की खेती के लिए अच्छी स्थितियाँ मिलती हैं, खासकर असम की ब्रह्मपुत्र घाटी में जहाँ इसकी शुरुआत 1840 में हुई थी।
आवश्यक भौगोलिक दशाएँ:
1. **तापमान:** चाय एक उष्णकटिबंधीय पौधा है। इसके लिए 25 से 30°C का तापमान सबसे अच्छा होता है।
2. **धरातल:** चाय के बागानों को ढलान वाली पहाड़ियों पर उगाया जाता है जहाँ पानी जमा न हो, क्योंकि जड़ों में पानी रुकना पौधों के लिए हानिकारक होता है।
भारत के प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्र इस प्रकार हैं:
1. **असम:** सभी जरूरी भौगोलिक स्थितियाँ होने के कारण असम देश के कुल चाय क्षेत्र का 52 प्रतिशत और उत्पादन का 54 प्रतिशत पैदा करता है, जिससे यह पहले स्थान पर है। शिवसागर, लखीमपुर, दरांग, गोलपाड़ा और नौगाँव यहाँ के मुख्य जिले हैं।
2. **पश्चिम बंगाल:** यह दूसरा बड़ा उत्पादक राज्य है, जो देश के कुल चाय उत्पादन का 22.36 प्रतिशत पैदा करता है। दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और पुरुलिया यहाँ के मुख्य उत्पादक जिले हैं। दार्जिलिंग की चाय अपनी अच्छी खुशबू और गुणवत्ता के लिए मशहूर है और इसकी मांग देश-विदेश में बहुत ज्यादा है।
3. **तमिलनाडु:** यह देश में तीसरे स्थान पर है, जो कुल चाय उत्पादन का 12 प्रतिशत पैदा करता है। नीलगिरि और अन्नामलाई की पहाड़ियाँ क्रमशः 46 और 33 प्रतिशत उत्पादन करती हैं। यूरोपियन देशों में यहाँ की चाय की बहुत मांग रहती है।
4. **केरल:** यहाँ देश के 8.5 प्रतिशत चाय पैदा होती है। त्रिचूर, पालघाट, कन्नूर, त्रिवेन्द्रम, कोझिकोड और मालापुरम यहाँ के प्रमुख उत्पादक जिले हैं।
5. **अन्य उत्पादक राज्य:** हिमाचल प्रदेश (कांगड़ा मंडी में हरी चाय), उत्तराखंड (देहरादून, अल्मोड़ा, गढ़वाल जिले), कर्नाटक (कूर्ग, मैसूर, चिकमंगलूर जिले), मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश भी थोड़ी मात्रा में चाय पैदा करते हैं।
In simple words: चाय उगने के लिए गर्म मौसम और ढलान वाली जगह चाहिए जहाँ पानी जमा न हो। भारत में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल मुख्य रूप से चाय उगाते हैं। दार्जिलिंग चाय दुनिया भर में मशहूर है।

🎯 Exam Tip: चाय की खेती से संबंधित प्रश्नों में, ढलान वाले क्षेत्रों और अच्छी जल निकासी के महत्व पर जोर दें। विभिन्न क्षेत्रों की चाय की गुणवत्ता और मांग का भी उल्लेख करें।

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