RBSE Solutions Class 12 Geography Chapter 15 संसाधनों का वर्गीकरण, संरक्षण एवं पोषणीय

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Class 12 Geography Chapter 15 संसाधनों का वर्गीकरण, संरक्षण एवं पोषणीय RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Geography Chapter 15 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Geography Chapter 15 बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. निम्न में से जैविक संसाधन कौन-सा है?
(अ) खनिज
(ब) पशु
(स) पेट्रोल
(द) हवा
Answer: (ब) पशु
In simple words: जैविक संसाधन वो होते हैं जो जीवित होते हैं या जीवित चीजों से आते हैं। इन विकल्पों में से पशु जीवित हैं, इसलिए वे जैविक संसाधन हैं।

🎯 Exam Tip: जैविक संसाधनों में जीव-जंतु, पेड़-पौधे और मानव शामिल होते हैं क्योंकि ये सब जीवित होते हैं और इनमें बढ़ने व प्रजनन की क्षमता होती है।

 

Question 2. अजैविक संसाधन का उदाहरण है?
(अ) कोयला
(ब) वन
Answer: (अ) कोयला
In simple words: अजैविक संसाधन वे होते हैं जो निर्जीव होते हैं। कोयला धरती के अंदर से निकलता है और यह कभी जीवित नहीं था, इसलिए यह अजैविक है। वन जीवित होते हैं, इसलिए वे जैविक हैं।

🎯 Exam Tip: अजैविक संसाधनों में चट्टानें, धातुएँ, पानी, हवा और जमीन जैसी सभी निर्जीव चीजें शामिल होती हैं।

 

Question 4. ऊर्जा का गैर परम्परागत संसाधन कौन-सा है?
(अ) सौर ऊर्जा
(ब) कोयला
(स) प्राकृतिक गैस
(द) डीजल
Answer: (अ) सौर ऊर्जा
In simple words: गैर-परम्परागत संसाधन वे हैं जिनका उपयोग ऊर्जा के लिए हाल ही में शुरू हुआ है और जो कभी खत्म नहीं होते, जैसे सूर्य की रोशनी। कोयला, गैस और डीजल पुराने और खत्म होने वाले संसाधन हैं।

🎯 Exam Tip: गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधन पर्यावरण के लिए भी बेहतर होते हैं क्योंकि वे प्रदूषण नहीं फैलाते।

 

Question 5. संसाधन संरक्षण में बाधक तत्व है –
(अ) धरातल का ऊबड़-खाबड़ होना
(ब) तीव्र औद्योगिक एवं नगरीयकरण
(स) अल्प विकास की दर होना
(द) सतत विकास को अपनाना
Answer: (ब) तीव्र औद्योगिक एवं नगरीयकरण
In simple words: जब बहुत तेजी से उद्योग बढ़ते हैं और शहर फैलते हैं, तो संसाधनों का बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है। इससे उन्हें बचाना मुश्किल हो जाता है। सतत विकास को अपनाना तो संरक्षण में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: संसाधनों को बचाने में सबसे बड़ी बाधाएँ जनसंख्या वृद्धि, तेज़ी से औद्योगिकीकरण और गलत उपभोग आदतें हैं।

 

Question 6. पोषणीय विकास से आशय है –
(अ) संसाधनों का दुरुपयोग
(ब) संसाधनों का अत्यधिक उपयोग
(स) संसाधनों का सतत् उपयोग
(द) संसाधनों के उपयोग को रोकना
Answer: (स) संसाधनों का सतत् उपयोग
In simple words: पोषणीय विकास का मतलब है कि हम संसाधनों का इस्तेमाल इस तरह करें कि वे आज की जरूरतें भी पूरी करें और भविष्य के लिए भी बचे रहें। हमें उन्हें बर्बाद नहीं करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: पोषणीय विकास में संसाधनों का न्यायसंगत उपयोग, पर्यावरण का ध्यान रखना और भावी पीढ़ियों की जरूरतों को पूरा करना शामिल होता है।

RBSE Class 12 Geography Chapter 15 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 8. मानव को संसाधन का जनक क्यों कहा जाता है?
Answer: मानव को संसाधनों का जनक इसलिए कहा जाता है क्योंकि वही संसाधनों का निर्माण करता है। किसी भी भौतिक वस्तु का संसाधन बनना उसकी उपयोगिता पर निर्भर करता है, और यह उपयोगिता मानव ही तय करता है। मानव अपनी बुद्धि और कौशल से प्राकृतिक चीजों को उपयोगी बनाता है।
In simple words: इंसान प्राकृतिक चीज़ों को उपयोगी बनाता है, इसलिए उसे संसाधनों का जनक कहते हैं।

🎯 Exam Tip: मानव अपनी ज्ञान और तकनीक से ही प्रकृति की चीजों को संसाधन में बदलता है।

 

Question 9. संसाधन संरक्षण क्यों आवश्यक है?
Answer: संसाधनों का संरक्षण इसलिए ज़रूरी है ताकि उनका उपयोग लगातार होता रहे और वे भविष्य के लिए भी उपलब्ध रहें। संसाधनों का अंधाधुंध उपयोग उन्हें खत्म कर सकता है। अगर हम आज उनका सही से उपयोग नहीं करेंगे, तो हमारी आने वाली पीढ़ियों को ये संसाधन नहीं मिलेंगे।
In simple words: संसाधनों को बचाना इसलिए ज़रूरी है ताकि वे हमेशा उपलब्ध रहें और भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी काम आ सकें।

🎯 Exam Tip: संरक्षण का मतलब सिर्फ बचाना नहीं, बल्कि बुद्धिमानी से उपयोग करना भी है ताकि उनका दुरुपयोग न हो।

 

Question 10. संसाधन संरक्षण में बाधक चार कारणों का उल्लेख कीजिए।
Answer: संसाधन संरक्षण में बाधक चार प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
1. जनसंख्या का तेजी से बढ़ना, जिससे इंसानों की जरूरतें बढ़ती हैं।
2. विज्ञान और नई तकनीकों के कारण उद्योगों, शहरों और परिवहन में बहुत तेजी से वृद्धि।
3. पश्चिमी देशों जैसी उपभोगवादी संस्कृति का फैलाव, जिससे संसाधनों का अत्यधिक उपयोग होता है।
4. विकास की असीमित इच्छा, जो संसाधनों पर अधिक दबाव डालती है।
In simple words: ज़्यादा लोग, तेज़ी से बढ़ते उद्योग, शहरों का फैलाव और बहुत ज्यादा खर्च करने की आदतें संसाधनों को बचाने में रुकावट डालती हैं।

🎯 Exam Tip: संरक्षण में बाधक इन कारकों को समझना, प्रभावी नीतियों और जन जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 11. जैविक संसाधनों के चार उदाहरण लिखिए।
Answer: जैविक संसाधनों के चार उदाहरण ये हैं:
1. मानव
2. जीव-जन्तु
3. चारागाह
4. प्राकृतिक वनस्पति
ये सभी जीवित चीजें हैं और पर्यावरण का हिस्सा हैं।
In simple words: इंसान, जानवर, घास के मैदान और पेड़-पौधे जैविक संसाधन हैं।

🎯 Exam Tip: जैविक संसाधन हमेशा जीवित या जीवित चीजों से ही बनते हैं, जिनमें वृद्धि और प्रजनन की क्षमता होती है।

 

Question 12. पुनर्चक्रण विधि द्वारा किस प्रकार संसाधन संरक्षण किया जा सकता है।
Answer: पुनर्चक्रण विधि से संसाधन संरक्षण ऐसे किया जा सकता है: इसमें किसी धातु के टूटे या खराब टुकड़ों को पिघलाकर बार-बार इस्तेमाल किया जाता है। इससे उस धातु को नए सिरे से निकालने की ज़रूरत कम हो जाती है, जिससे भविष्य के लिए धातु के भंडार सुरक्षित रहते हैं। यह विधि संसाधनों को बचाती है और कचरा भी कम करती है।
In simple words: चीज़ों को दोबारा इस्तेमाल करके हम नए संसाधन निकालने से बचते हैं, जिससे वे लंबे समय तक बचे रहते हैं।

🎯 Exam Tip: पुनर्चक्रण न केवल संसाधनों को बचाता है, बल्कि कचरे को कम करके पर्यावरण प्रदूषण को भी नियंत्रित करता है।

RBSE Class 12 Geography Chapter 15 लघूत्तरात्मक प्रश्न

सभी संसाधनों का उपयोग वर्तमान में इस प्रकार करना चाहिए जिससे उनसे वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की आपूर्ति तो हो ही, के साथ ही उन्हें भावी पीढ़ी के लिए भी सुरक्षित रखा जा सके।

 

Question 14. संसाधनों का वर्गीकरण कीजिए।
Answer: संसाधनों को उनके उपयोग की सततता के आधार पर, उत्पत्ति के आधार पर और उद्देश्य के आधार पर नीचे दिए गए रेखाचित्र के अनुसार वर्गीकृत किया जा सकता है:
संसाधनों का वर्गीकरण:

  • उपयोग की सततता के आधार पर:
    • नवीनीकरण योग्य या असमाप्य (जैसे वायु, जल और ऊर्जा)
    • नवीनीकरण के अयोग्य या समाप्य (जैसे लकड़ी, कोयला, खनिज तेल)
  • उत्पत्ति के आधार पर:
    • चक्रीय संसाधन
    • जैविक संसाधन (जैसे वनस्पति, पशु एवं जीव-जन्तु)
    • अजैविक संसाधन (जैसे खनिज - नमक)
  • उद्देश्य के आधार पर:
    • ऊर्जा संसाधन (जैसे व्यक्तिगत, राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय ऊर्जा)
    • कच्चा माल (जैसे खनिज - लोहा, ताँबा, सीसा, जस्ता, बॉक्साइट)
    • खाद्य पदार्थ (जैसे वनस्पति, पशु एवं जीव-जन्तु)
    • प्राकृतिक (जैसे लकड़ी, प्राकृतिक शैवाल)
    • कृषिगत (जैसे रबड़, गन्ना, कपास, घास)
संसाधनों का यह वर्गीकरण हमें उनकी प्रकृति और उपयोग को समझने में मदद करता है।
In simple words: संसाधनों को तीन मुख्य तरीकों से बाँटा जाता है: वे कितने समय तक चलेंगे, वे कहाँ से आते हैं, और वे किस काम आते हैं।

🎯 Exam Tip: वर्गीकरण करते समय, प्रत्येक आधार पर कम से कम दो-तीन प्रमुख उदाहरणों को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।

 

Question 15. जैविक व अजैविक संसाधनों में अन्तर कीजिए।
Answer: जैविक और अजैविक संसाधनों में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
1. जैविक संसाधन: इन संसाधनों में सभी जीवित चीज़ें शामिल होती हैं, जैसे मानव, पशु, पक्षी, जीव-जंतु और प्राकृतिक वनस्पति। इनमें प्रजनन की क्षमता होती है, इसलिए ये अपनी संख्या बढ़ा सकते हैं। इस कारण इन्हें नवीनीकरण योग्य और असमाप्य संसाधन भी कहते हैं। ये प्रकृति में पुनः उत्पन्न हो सकते हैं।
2. अजैविक संसाधन: इस वर्ग में सभी निर्जीव चीजें शामिल होती हैं, जैसे सभी खनिज, भूमि, मिट्टी आदि। इनमें प्रजनन की क्षमता नहीं होती, इसलिए एक बार उपयोग होने के बाद ये खत्म हो जाते हैं। इस कारण इन्हें अनवीनीकरण योग्य और समाप्य संसाधन कहते हैं। ये सीमित मात्रा में होते हैं।
In simple words: जैविक संसाधन जीवित होते हैं और बढ़ सकते हैं, जैसे इंसान और जानवर। अजैविक संसाधन निर्जीव होते हैं और खत्म हो सकते हैं, जैसे पत्थर और खनिज।

🎯 Exam Tip: जैविक और अजैविक संसाधनों के अंतर को स्पष्ट करने के लिए हमेशा उनके जीवन चक्र और पुनरुत्पादन क्षमता पर ध्यान दें।

 

Question 16. पोषणीय विकास किसे कहते हैं?
Answer: पोषणीय विकास का मतलब है कि संसाधनों का इस्तेमाल इस तरह से किया जाए कि पर्यावरण के साथ संतुलन बना रहे। इसमें संसाधनों का विवेकपूर्ण, मितव्ययी और विनाश रहित उपयोग शामिल है, जिससे वे खुद को फिर से बना सकें। इसका मुख्य लक्ष्य वर्तमान पीढ़ी की ज़रूरतों को पूरा करना और भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी संसाधनों को बचाए रखना है। यह विकास पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना होता है।
In simple words: पोषणीय विकास मतलब संसाधनों का समझदारी से उपयोग करना ताकि वे आज और भविष्य दोनों की ज़रूरतों को पूरा कर सकें।

🎯 Exam Tip: पोषणीय विकास की परिभाषा में 'संतुलित उपयोग', 'भावी पीढ़ी' और 'पर्यावरण संरक्षण' जैसे मुख्य शब्दों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 17. नव्यकरणीय और अनव्यकरणीय संसाधनों में अन्तर कीजिए।
Answer: नव्यकरणीय और अनव्यकरणीय संसाधनों में मुख्य अंतर ये हैं:
1. नव्यकरणीय संसाधन वे होते हैं जिन्हें एक बार उपयोग करने के बाद मानव या प्रकृति द्वारा फिर से बनाया या नवीनीकृत किया जा सकता है। इनके भंडार कभी खत्म नहीं होते, जैसे मानव, पशु, वन, जल, पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा और ज्वारीय ऊर्जा।
2. अनव्यकरणीय संसाधन वे होते हैं जिन्हें एक बार उपयोग करने के बाद फिर से बनाया या नवीनीकृत नहीं किया जा सकता। इन्हें सीमित संसाधन भी कहते हैं क्योंकि इनके भंडार सीमित हैं और लगातार उपयोग से खत्म हो सकते हैं, जैसे लोहा, कोयला और पेट्रोलियम।
In simple words: नव्यकरणीय संसाधन फिर से बन सकते हैं, जैसे धूप और हवा। अनव्यकरणीय संसाधन खत्म हो जाते हैं, जैसे कोयला और तेल।

🎯 Exam Tip: नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों के बीच अंतर को स्पष्ट करने के लिए उनकी उपलब्धता और बनने की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करें।

RBSE Class 12 Geography Chapter 15 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 18. संसाधन अर्थ, संरक्षण की आवश्यकता, समस्या और प्रकारों का विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer: संसाधन वे सभी प्राकृतिक और मानवीय तत्व हैं जिनका उपयोग इंसान अपनी ज़रूरतें पूरी करने के लिए करता है। कोई भी प्राकृतिक चीज़ तभी संसाधन बनती है जब मानव उसे अपने लिए उपयोगी बनाता है। इसीलिए कहा जाता है कि 'संसाधन होते नहीं, बनाए जाते हैं।' जिम्मरमैन के अनुसार, संसाधन का अर्थ किसी उद्देश्य को पूरा करना है, जो इंसान की व्यक्तिगत और सामाजिक ज़रूरतों को पूरा करता है। किसी वस्तु के संसाधन बनने के लिए ये बातें ज़रूरी हैं:
1. उस वस्तु का मानव की ज़रूरतों के लिए उपयोग संभव हो।
2. उसे बदलकर और अधिक मूल्यवान और उपयोगी बनाया जा सके।
3. वह वस्तु किसी खास मकसद को पूरा करने में सक्षम हो।
4. इन संसाधनों को निकालने या इस्तेमाल करने की योग्यता रखने वाला मानव संसाधन उपलब्ध हो।

संसाधन संरक्षण की आवश्यकता:
1. मानव के लगातार विकास और संसाधनों के लंबे समय तक उपयोग के लिए उनका संरक्षण ज़रूरी है।
2. आर्थिक विकास के लिए संसाधनों का बहुत तेज़ी से इस्तेमाल हो रहा है, जिससे उनके खत्म होने का खतरा बढ़ गया है। भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए उनका सही संरक्षण ज़रूरी है।
3. जनसंख्या की तेज़ी से वृद्धि, बढ़ते शहरीकरण और औद्योगीकरण, और बड़े पैमाने पर जंगल काटने से संसाधन तेज़ी से खत्म हो रहे हैं। इससे पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ रहा है और प्रदूषण बढ़ रहा है। इन समस्याओं को ठीक करने और पर्यावरण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए संसाधनों का संरक्षण आवश्यक है। संसाधन हमारे जीवन का आधार हैं, और उनका विवेकपूर्ण उपयोग ही हमें एक स्थायी भविष्य की ओर ले जाएगा।

संसाधन संरक्षण की समस्या:
मानव द्वारा किए जा रहे तेज़ी से आर्थिक विकास ने संसाधनों के शोषण की दर बढ़ा दी है। नवीकरणीय संसाधनों को एक सीमा तक ही फिर से बनाया जा सकता है, जबकि अनवीकरणीय संसाधनों को फिर से बनने में बहुत लंबा समय लगता है। इसलिए, निकट भविष्य में उनके खत्म होने का संकट पैदा हो गया है, जिससे आने वाली पीढ़ियाँ विकास से वंचित रह सकती हैं। संसाधन संरक्षण की समस्या के मुख्य कारण ये हैं:
1. जनसंख्या का तेजी से बढ़ना, जिससे मानवीय ज़रूरतें बढ़ती हैं।
2. वैज्ञानिक खोजों से औद्योगीकरण, शहरीकरण और परिवहन में तेज़ी से वृद्धि।
3. पश्चिमी उपभोगवादी संस्कृति का फैलाव, जिससे संसाधनों का अधिकतम उपयोग होता है।
4. विकास की असीमित इच्छा, जो संसाधनों पर अत्यधिक दबाव डालती है।

संसाधनों के प्रकार: संसाधनों का वर्गीकरण चार मुख्य आधारों पर किया गया है:
1. उत्पाद के आधार पर:
• जैविक संसाधन
• अजैविक संसाधन
2. उद्देश्य के आधार पर:
• ऊर्जा संसाधन (परम्परागत और गैर-परम्परागत)
• गैर-ऊर्जा संसाधन
4. स्वामित्व के आधार पर:
• व्यक्तिगत संसाधन
• राष्ट्रीय संसाधन
• अन्तर्राष्ट्रीय या विश्व संसाधन
In simple words: संसाधन वो सब हैं जो इंसान अपनी ज़रूरतें पूरी करने के लिए इस्तेमाल करता है। इन्हें बचाना ज़रूरी है क्योंकि जनसंख्या बढ़ रही है और हम इन्हें बहुत तेज़ी से इस्तेमाल कर रहे हैं। संसाधनों को अलग-अलग तरीकों से बाँटा जाता है, जैसे वे जीवित हैं या निर्जीव, ऊर्जा देते हैं या नहीं, और किसके पास उनका अधिकार है।

🎯 Exam Tip: इस तरह के निबंधात्मक प्रश्नों में, प्रत्येक भाग (अर्थ, आवश्यकता, समस्या, प्रकार) को अलग-अलग उपशीर्षकों के साथ स्पष्ट रूप से समझाएँ और उदाहरणों का उपयोग करें।

 

Question 19. संसाधन संरक्षण की विधियों पर एक लेख लिखिये।
Answer: संसाधन संरक्षण के लिए निम्नलिखित 10 प्रमुख विधियाँ महत्वपूर्ण हैं:
1. जनसंख्या वृद्धि पर प्रभावी नियन्त्रण: संसाधनों की उपलब्धता की तुलना में जब जनसंख्या तेज़ी से बढ़ती है, तो संसाधनों का शोषण भी बढ़ जाता है। इससे अनवीकरणीय संसाधन जल्दी खत्म हो सकते हैं। इसलिए, किसी भी देश में संसाधन संरक्षण के लिए जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना बहुत ज़रूरी है। नियंत्रित जनसंख्या से संसाधनों पर दबाव कम होता है।
2. नियोजन में समग्र दृष्टिकोण: पर्यावरण के सभी घटकों का सही उपयोग और संरक्षण एक समग्र योजना से ही संभव है। पर्यावरण के विभिन्न घटक आपस में जुड़े हुए हैं। अगर एक घटक में कमी आती है, तो पूरा पर्यावरण असंतुलित हो जाता है। इसलिए, देश की विकास योजनाएँ बनाते समय पर्यावरण के इस समग्रता का ध्यान रखना चाहिए। इससे पर्यावरण संतुलन बना रहता है और संसाधन भी बचते हैं।
3. जैविक सन्तुलन बनाए रखना: मानव के अस्तित्व के लिए जल, वायु, वनस्पति और जीव-जंतु जैसे जैविक आधार बहुत ज़रूरी हैं। इसलिए, मानव के लगातार विकास और संसाधनों के संरक्षण के लिए जैविक संतुलन का ध्यान रखते हुए आर्थिक नियोजन कार्यक्रम चलाने चाहिए। जैविक असंतुलन, पर्यावरण प्रदूषण और पारिस्थितिकी असंतुलन की समस्याएँ पैदा करता है, जिससे मानव के आर्थिक विकास की जगह विनाश का खतरा बढ़ जाता है।
4. ऊर्जा के गैर-पारम्परिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग: संसाधनों के संरक्षण के लिए सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा और तापीय ऊर्जा जैसे नवीकरणीय और गैर-पारम्परिक ऊर्जा संसाधनों का ज़्यादा से ज़्यादा उपयोग करना चाहिए। इससे पेट्रोलियम, कोयला और परमाणु खनिजों जैसे सीमित संसाधनों को बचाया जा सकता है, और साथ ही पर्यावरण प्रदूषण की समस्या भी कम होती है।
6. प्राथमिकता के आधार पर उपयोग: प्रकृति में सीमित और खत्म होने वाले संसाधनों का उपयोग बहुत ज़रूरी कामों और राष्ट्रीय महत्व के कार्यों में ही करना चाहिए। साथ ही, ऐसे संसाधनों के विकल्पों का ज़्यादा से ज़्यादा उपयोग करना भी आवश्यक है।
7. पुनर्चक्रण: इस विधि में किसी धातु को एक बार उपयोग करने के बाद खराब होने पर उसे पिघलाकर दोबारा उपयोग किया जाता है। यह संसाधन संरक्षण की एक बहुत उपयोगी और महत्वपूर्ण विधि है। पुनर्चक्रण से कच्चे माल की आवश्यकता कम होती है।
8. कृत्रिम वस्तुओं का उपयोग: प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग की जगह वैकल्पिक रूप से कृत्रिम पदार्थों का उपयोग बढ़ाने से प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता लंबे समय तक बनी रह सकती है। उदाहरण के लिए, लकड़ी के सामान की जगह प्लास्टिक के सामान का उपयोग किया जा सकता है।
9. उन्नत एवं परिष्कृत तकनीक का उपयोग: प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते समय अगर उन्नत और परिष्कृत तकनीक का इस्तेमाल किया जाए, तो ऊर्जा और अन्य संसाधनों की बचत की जा सकती है। उदाहरण के लिए, बहुमंजिली इमारतों का निर्माण करके भूमि संसाधनों की बचत की जा सकती है।
10. संसाधनों का बहुउद्देशीय उपयोग: जब एक ही परियोजना से कई उद्देश्य पूरे होते हैं, तो उन्हें बहुउद्देशीय परियोजनाएँ कहते हैं। ऐसी परियोजनाओं से संसाधनों के संरक्षण में मदद मिलती है। उदाहरण के लिए, नदियों पर बाँध बनाने से सिंचाई, पेयजल, बिजली उत्पादन, मछली पालन, बाढ़ नियंत्रण, वन विकास, मिट्टी संरक्षण, भूमिगत जलस्तर में वृद्धि और जल परिवहन जैसे कई उद्देश्य पूरे होते हैं।
In simple words: संसाधनों को बचाने के लिए जनसंख्या को नियंत्रित करना, योजनाबद्ध तरीके से काम करना, पर्यावरण को संतुलित रखना, सौर ऊर्जा जैसे नए ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल करना, ज़रूरी चीज़ों को पहले इस्तेमाल करना, चीज़ों को रीसायकल करना, प्लास्टिक जैसी कृत्रिम चीज़ें इस्तेमाल करना, अच्छी तकनीक अपनाना और एक ही परियोजना से कई काम लेना ज़रूरी है।

🎯 Exam Tip: संरक्षण की विधियों को लिखते समय, प्रत्येक विधि को एक छोटे शीर्षक के साथ स्पष्ट करें और उसके महत्व को भी संक्षेप में बताएं।

 

Question 20. संसाधनों के पोषणीय विकास पर आपके विचार लिखिये।
Answer: पोषणीय विकास का मतलब है कि पर्यावरण के साथ संतुलन बनाकर संसाधनों का इस्तेमाल विवेकपूर्ण, मितव्ययी और विनाश रहित तरीके से करना चाहिए, ताकि वे खुद को फिर से बना सकें। पोषणीय विकास के ज़रिए हम ऐसा सतत विकास कर सकते हैं जिससे मानव की वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों की ज़रूरतें पूरी हो सकें। इसमें संसाधनों के सही और नवीनीकरण क्षमता के अनुसार उपयोग और संरक्षण पर खास ज़ोर दिया जाता है।

आजकल सतत विकास का मार्ग बहुत ज़रूरी हो गया है क्योंकि पुराने समय से लेकर अब तक इंसान ने संसाधनों का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल किया है। इस अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण के प्राकृतिक और जैविक संतुलन पर बुरा असर पड़ा है। पर्यावरण और विकास के बीच असंतुलन के कारण पर्यावरण प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएँ पैदा हुई हैं, जिससे आज धरती पर जीवन के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने और संसाधनों के लगातार खत्म होने से बचने के लिए, विकास को लगातार बनाए रखना ज़रूरी है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, भविष्य में पर्यावरणीय समस्याओं से बचने के लिए, अस्थाई विकास के बजाय सतत विकास का रास्ता अपनाना बहुत ज़रूरी हो गया है। पोषणीय विकास हमें एक ऐसा रास्ता दिखाता है जहाँ हम अपनी ज़रूरतों को पूरा करते हुए भी प्रकृति का सम्मान करते हैं और उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित रखते हैं। यह सिर्फ आर्थिक विकास नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का भी मामला है।
In simple words: पोषणीय विकास का मतलब है कि संसाधनों का इस्तेमाल समझदारी से किया जाए, ताकि हमारी आज की ज़रूरतें भी पूरी हों और भविष्य के लिए भी वे बचे रहें। ऐसा करना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि हमने संसाधनों का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल किया है, जिससे प्रदूषण बढ़ गया है और प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया है। सतत विकास ही एक ऐसा रास्ता है जिससे हम पर्यावरण को बचाकर आगे बढ़ सकते हैं।

🎯 Exam Tip: पोषणीय विकास के महत्व को समझाते हुए 'वर्तमान और भावी पीढ़ियों की आवश्यकता', 'पर्यावरण संतुलन' और 'सतत विकास' जैसे मुख्य बिंदुओं पर बल दें।

RBSE Class 12 Geography Chapter 15 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Geography Chapter 15 बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 3. निम्नलिखित में से कौन एक परम्परागत संसाधन नहीं है?
(अ) सौर ऊर्जा
(ब) कोयला
(स) पेट्रोलियम
(द) प्राकृतिक गैस
Answer: (अ) सौर ऊर्जा
In simple words: सौर ऊर्जा नया तरीका है जबकि कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस पुराने तरीके हैं जिनसे ऊर्जा मिलती है।

🎯 Exam Tip: परम्परागत संसाधन वे होते हैं जिनका उपयोग पुराने समय से हो रहा है और जो खत्म हो सकते हैं, जबकि गैर-परम्परागत संसाधन नए और नवीकरणीय होते हैं।

 

Question 4. निम्नलिखित में से कौन एक अनवीनीकरण संसाधन नहीं है?
(अ) वन
(ब) लोहा
(स) कोयला
(द) पेट्रोलियम
Answer: (अ) वन
In simple words: वन फिर से उगाए जा सकते हैं, इसलिए वे अनवीकरणीय नहीं हैं। लोहा, कोयला और पेट्रोलियम एक बार इस्तेमाल होने के बाद खत्म हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: अनवीकरणीय संसाधन वो होते हैं जो एक बार इस्तेमाल होने के बाद दोबारा नहीं बन सकते या बनने में लाखों साल लगते हैं।

 

Question 5. निम्नलिखित में से कौन एक व्यक्तिगत संसाधन नहीं है?
(अ) मकान
(ब) भूमि
(स) शारीरिक-मानसिक क्षमता
(द) खनिज
Answer: (द) खनिज
In simple words: मकान, भूमि और इंसान की क्षमता किसी एक व्यक्ति की हो सकती है। खनिज आमतौर पर देश या राज्य की संपत्ति होते हैं, न कि किसी एक व्यक्ति की।

🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत संसाधन वे होते हैं जिन पर किसी एक व्यक्ति या परिवार का निजी अधिकार होता है।

 

Question 6. संसाधनों के संरक्षण से अभिप्राय है, संसाधनों का -
(अ) कंजूसी से उपयोग
(ब) आवश्यकतानुसार उपयोग
(स) अत्यधिक उपयोग
(द) विवेकपूर्ण ढंग से दीर्घकालीन उपयोग
Answer: (द) विवेकपूर्ण ढंग से दीर्घकालीन उपयोग
In simple words: संरक्षण का मतलब सिर्फ बचाना नहीं, बल्कि बुद्धिमानी और योजनाबद्ध तरीके से उनका उपयोग करना है ताकि वे लंबे समय तक काम आ सकें।

🎯 Exam Tip: 'विवेकपूर्ण ढंग से दीर्घकालीन उपयोग' वाक्यांश संसाधनों के टिकाऊ और न्यायसंगत उपयोग पर बल देता है।

सुमलेन सम्बन्धी प्रश्न

निम्न में स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से सुमेलित कीजिए –

 

स्तम्भ (अ)
(संसाधन)
स्तम्भ (ब)
(प्रकार)
(i) मानव(द) जैविक संसाधन
(ii) मिट्टी(अ) अजैविक संसाधन
(iii) पवन ऊर्जा(ब) नव्यकरणीय संसाधन
(iv) पेट्रोलियम(स) अनव्यकरणीय संसाधन

Answer:
(i) मानव – (द) जैविक संसाधन
(ii) मिट्टी – (अ) अजैविक संसाधन
(iii) पवन ऊर्जा – (ब) नव्यकरणीय संसाधन
(iv) पेट्रोलियम – (स) अनव्यकरणीय संसाधन
In simple words: यह मिलान बताता है कि कौन सा संसाधन किस तरह के प्रकार में आता है। जैसे मानव जीवित है तो जैविक है, मिट्टी निर्जीव है तो अजैविक है, हवा से बनी ऊर्जा फिर से मिल सकती है तो नवीकरणीय है, और पेट्रोलियम एक बार खत्म होने पर दोबारा नहीं मिलता तो अनवीकरणीय है।

🎯 Exam Tip: इस तरह के मिलान वाले प्रश्नों में, प्रत्येक संसाधन और उसके प्रकार को ध्यान से समझकर ही सही जोड़ी बनाएँ।

RBSE Class 12 Geography Chapter 15 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. जिम्मरमेन ने संसाधनों की क्या परिभाषा दी है?
Answer: जिम्मरमेन के अनुसार, संसाधन का मतलब किसी ऐसे उद्देश्य को पूरा करना है जो किसी व्यक्ति की ज़रूरतों या समाज के लक्ष्यों को पूरा करता हो। इसका मतलब है कि कोई भी चीज़ तभी संसाधन बनती है जब उसका कोई उपयोग हो।
In simple words: जिम्मरमेन कहते हैं कि जो चीज़ किसी काम आती है और किसी की ज़रूरत पूरी करती है, वही संसाधन है।

🎯 Exam Tip: जिम्मरमेन की परिभाषा में 'उद्देश्य की प्राप्ति' और 'आवश्यकताओं व लक्ष्यों की पूर्ति' मुख्य बिंदु हैं।

 

Question 2. “संसाधन होते नहीं, बनाए जाते हैं। इस कथन का क्या आशय है?
Answer: इस कथन का मतलब है कि प्रकृति में मौजूद कोई भी चीज़ अपने आप में संसाधन नहीं होती। उसे संसाधन तब कहा जाता है जब मानव अपने ज्ञान, कौशल और तकनीक का उपयोग करके उसे अपने लिए उपयोगी बनाता है। उदाहरण के लिए, ज़मीन में छुपा लोहा तब तक संसाधन नहीं था जब तक इंसान ने उसे निकालकर औज़ार बनाना नहीं सीखा। इंसान ही प्राकृतिक चीज़ों को उपयोगी बनाकर संसाधन का रूप देता है।
In simple words: इसका मतलब है कि प्राकृतिक चीज़ें अपने आप संसाधन नहीं होतीं। इंसान उन्हें अपनी ज़रूरत के हिसाब से उपयोगी बनाता है।

🎯 Exam Tip: इस कथन की व्याख्या करते समय मानव की भूमिका और प्राकृतिक पदार्थों को उपयोगी बनाने की प्रक्रिया पर बल दें।

 

Question 3. उत्पाद के आधार पर संसाधनों को कितने भागों में बांटा गया है?
Answer: उत्पाद के आधार पर संसाधनों को दो मुख्य भागों में बाँटा गया है: जैविक संसाधन और अजैविक संसाधन। जैविक संसाधन जीवित चीज़ों से आते हैं, जबकि अजैविक संसाधन निर्जीव चीज़ों से।
In simple words: संसाधनों को दो तरह से बांटा गया है: जीवित चीज़ों से बनने वाले (जैविक) और निर्जीव चीज़ों से बनने वाले (अजैविक)।

🎯 Exam Tip: उत्पाद के आधार पर वर्गीकरण में हमेशा जैविक और अजैविक संसाधनों का उल्लेख करें।

 

Question 4. जैविक संसाधन असमाप्य क्यों होते हैं?
Answer: जैविक संसाधन असमाप्य होते हैं क्योंकि उनमें प्रजनन द्वारा अपनी संख्या बढ़ाने की क्षमता होती है। इसका मतलब है कि वे अपनी पीढ़ी को आगे बढ़ा सकते हैं और इस तरह खुद को नवीनीकृत कर सकते हैं, जिससे वे आसानी से खत्म नहीं होते।
In simple words: जैविक संसाधन फिर से बन सकते हैं क्योंकि उनमें बच्चे पैदा करने की क्षमता होती है, इसलिए वे खत्म नहीं होते।

🎯 Exam Tip: 'प्रजनन क्षमता' जैविक संसाधनों के असमाप्य होने का मुख्य कारण है।

 

Question 5. चल जैविक संसाधन कौन से होते हैं?
Answer: मानव और सभी जीव-जंतु चल जैविक संसाधन कहलाते हैं क्योंकि वे एक जगह से दूसरी जगह जा सकते हैं। इनकी गतिशीलता इन्हें खास बनाती है।
In simple words: इंसान और सभी जानवर चल जैविक संसाधन हैं क्योंकि वे चल-फिर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: चल जैविक संसाधनों में वे सभी जीव आते हैं जो गतिमान होते हैं।

 

Question 6. अजैविक संसाधन किसे कहते हैं?
Answer: अजैविक संसाधन वे होते हैं जो सभी प्रकार के निर्जीव घटकों से संबंधित होते हैं। इनमें कोई जीवन नहीं होता और ये प्राकृतिक प्रक्रियाओं से बनते हैं, जैसे चट्टानें, मिट्टी, खनिज और पानी।
In simple words: अजैविक संसाधन वे चीज़ें हैं जो जीवित नहीं होतीं, जैसे पत्थर, मिट्टी और खनिज।

🎯 Exam Tip: अजैविक संसाधनों को याद रखने के लिए 'निर्जीव' और 'प्राकृतिक घटक' शब्द महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 7. अजैविक संसाधन अनव्यकरणीय क्यों होते हैं?
Answer: अजैविक संसाधन अनव्यकरणीय होते हैं क्योंकि उनमें प्रजनन की क्षमता नहीं होती और एक बार इस्तेमाल होने के बाद वे खत्म हो जाते हैं। इन्हें फिर से बनने में लाखों साल लग सकते हैं, इसलिए ये सीमित मात्रा में होते हैं।
In simple words: अजैविक संसाधन खत्म हो जाते हैं क्योंकि वे दोबारा नहीं बन सकते और उनमें बच्चे पैदा करने की शक्ति नहीं होती।

🎯 Exam Tip: 'प्रजनन क्षमता का अभाव' और 'एक बार उपयोग के बाद समाप्त' होना अजैविक संसाधनों के अनव्यकरणीय होने का मुख्य कारण है।

 

Question 8. अनव्यकरणीय संसाधनों के तीन उदाहरण दीजिए।
Answer: अनव्यकरणीय संसाधनों के तीन उदाहरण हैं:
1. कोयला
2. पेट्रोलियम
3. लोहा
ये सभी धरती के अंदर से निकलते हैं और एक बार इस्तेमाल होने के बाद दोबारा नहीं बनते।
In simple words: कोयला, पेट्रोलियम और लोहा ऐसे संसाधन हैं जो एक बार इस्तेमाल होने पर खत्म हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: अनव्यकरणीय संसाधन हमेशा सीमित होते हैं और उनके संरक्षण की बहुत आवश्यकता होती है।

 

Question 9. नव्यकरणीय संसाधनों के तीन उदाहरण दीजिए।
Answer: नव्यकरणीय संसाधनों के तीन उदाहरण हैं:
1. वन
2. भूमिगत जल
3. मानव
ये सभी संसाधन फिर से बन सकते हैं या अपनी संख्या बढ़ा सकते हैं।
In simple words: जंगल, ज़मीन के नीचे का पानी और इंसान ऐसे संसाधन हैं जो फिर से बन सकते हैं या बढ़ सकते हैं।

🎯 Exam Tip: नव्यकरणीय संसाधन वे होते हैं जो प्रकृति द्वारा या मानवीय प्रयासों से नवीनीकृत हो सकते हैं।

 

Question 11. परम्परागत संसाधन किसे कहते हैं ?
Answer: परम्परागत संसाधन उन संसाधनों को कहते हैं जिनका उपयोग बहुत पुराने समय से चला आ रहा है। ये संसाधन अक्सर सीमित मात्रा में होते हैं और इनके बनने में बहुत लंबा समय लगता है। जैसे कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस।
In simple words: परम्परागत संसाधन वो हैं जिनका इस्तेमाल लोग बहुत पुराने समय से कर रहे हैं।

🎯 Exam Tip: परम्परागत संसाधनों में जीवाश्म ईंधन प्रमुख उदाहरण हैं, जो सीमित और प्रदूषणकारी होते हैं।

 

Question 12. गैर परम्परागत संसाधनों से क्या तात्पर्य है?
Answer: गैर परम्परागत संसाधनों से तात्पर्य उन संसाधनों से है जिनका उपयोग हाल ही में शुरू हुआ है और जो नवीकरणीय होते हैं, यानी वे कभी खत्म नहीं होते। ये पर्यावरण के लिए भी बेहतर माने जाते हैं। जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और ज्वारीय ऊर्जा।
In simple words: गैर परम्परागत संसाधन नए तरह के संसाधन हैं जिनका इस्तेमाल अभी-अभी शुरू हुआ है और जो कभी खत्म नहीं होते।

🎯 Exam Tip: गैर-परम्परागत संसाधनों को अक्सर 'नवीकरणीय' या 'अक्षय' ऊर्जा स्रोत भी कहा जाता है।

 

Question 13. गैर ऊर्जा संसाधन किसे कहते हैं?
Answer: गैर ऊर्जा संसाधन उन संसाधनों को कहते हैं जिनका उपयोग कच्चे माल के रूप में या उद्योगों में कुछ बनाने के लिए किया जाता है, न कि ऊर्जा पैदा करने के लिए। इन संसाधनों में खनिज जैसे लोहा, सोना, चाँदी और ताँबा शामिल हैं।
In simple words: गैर ऊर्जा संसाधन वो हैं जो ऊर्जा नहीं देते, बल्कि किसी और चीज़ को बनाने के लिए काम आते हैं, जैसे धातुएँ।

🎯 Exam Tip: गैर-ऊर्जा संसाधन अक्सर विभिन्न उद्योगों में निर्माण के लिए आधारभूत कच्चे माल के रूप में उपयोग होते हैं।

 

Question 14. उपयोग की सततता के आधार पर – संसाधनों को कितने भागों में बांटा गया है?
Answer: उपयोग की सततता के आधार पर संसाधनों को दो मुख्य भागों में बाँटा गया है: अनव्यकरणीय या समाप्य संसाधन, और नव्यकरणीय या असमाप्य संसाधन। यह विभाजन उनकी उपलब्धता और फिर से बनने की क्षमता पर आधारित है।
In simple words: संसाधनों को इस आधार पर दो हिस्सों में बांटा गया है कि वे कितने समय तक चलेंगे: जो खत्म हो सकते हैं (अनव्यकरणीय) और जो हमेशा बने रहेंगे (नव्यकरणीय)।

🎯 Exam Tip: सततता के आधार पर वर्गीकरण करते समय, प्रत्येक वर्ग के साथ 'समाप्य' और 'असमाप्य' जैसे पर्यायों का उल्लेख करें।

 

Question 15. अनव्यकरणीय संसाधन किस कहते हैं?
अथवा
सीमित संसाधनों से क्या तात्पर्य है?

Answer: अनव्यकरणीय संसाधन उन संसाधनों को कहते हैं जिनका एक बार उपयोग होने के बाद उन्हें फिर से नहीं बनाया जा सकता। इन्हें सीमित संसाधन भी कहते हैं क्योंकि इनके भंडार धरती पर एक निश्चित मात्रा में ही उपलब्ध हैं। लगातार उपयोग करने से ये जल्दी खत्म हो जाते हैं और दोबारा नहीं बनते। जैसे कोयला, पेट्रोलियम और खनिज।
In simple words: अनव्यकरणीय संसाधन या सीमित संसाधन वे हैं जो एक बार इस्तेमाल होने के बाद खत्म हो जाते हैं और दोबारा नहीं बन सकते।

🎯 Exam Tip: 'पुनस्थापन नहीं किया जा सकता' और 'सीमित भंडार' अनव्यकरणीय संसाधनों की मुख्य पहचान हैं।

 

Question 16. नव्यकरणीय संसाधन क्या होते हैं?
अथवा
असमाप्य संसाधन किसे कहते हैं?

Answer: नव्यकरणीय संसाधन या असमाप्य संसाधन वे होते हैं जिन्हें एक बार उपयोग करने के बाद प्रकृति या मानव द्वारा फिर से बनाया या नवीनीकृत किया जा सकता है। इनके भंडार कभी खत्म नहीं होते क्योंकि ये लगातार बनते रहते हैं। जैसे मानव, पशु, वन, जल, पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा और भूतापीय ऊर्जा।
In simple words: नव्यकरणीय संसाधन वो होते हैं जो फिर से बन सकते हैं और कभी खत्म नहीं होते, जैसे हवा और सूरज की रोशनी।

🎯 Exam Tip: नवीकरणीय संसाधनों को समझाते समय 'नवीनीकृत', 'असीमित' और 'फिर से उत्पन्न' जैसे शब्दों का प्रयोग करें।

 

Question 17. स्वामित्व के आधार पर संसाधनों का किन-किन भागों में बाँटा गया है?
Answer: स्वामित्व के आधार पर संसाधनों को तीन मुख्य भागों में बाँटा गया है:
1. व्यक्तिगत संसाधन
2. राष्ट्रीय संसाधन
3. अन्तर्राष्ट्रीय या विश्व संसाधन
यह वर्गीकरण संसाधनों पर अलग-अलग स्तरों के अधिकार को दर्शाता है।
In simple words: संसाधनों को इस आधार पर तीन तरह से बांटा गया है कि उनका मालिक कौन है: कोई व्यक्ति, कोई देश या पूरा विश्व।

🎯 Exam Tip: स्वामित्व के आधार पर वर्गीकरण में प्रत्येक प्रकार के अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 18. व्यक्तिगत संसाधन किसे कहते हैं?
Answer: व्यक्तिगत संसाधन उन संसाधनों को कहते हैं जिन पर किसी एक व्यक्ति, परिवार या संस्था का निजी अधिकार होता है। ये संसाधन केवल उन्हीं लोगों द्वारा उपयोग किए जाते हैं जो उनके मालिक हैं। उदाहरण के लिए, मकान, ज़मीन, नकदी और गहने।
In simple words: व्यक्तिगत संसाधन वो हैं जो किसी एक इंसान या परिवार के होते हैं, जैसे अपना घर या पैसा।

🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत संसाधनों के उदाहरणों में निजी संपत्ति और स्वामित्व के अधिकार को स्पष्ट करें।

 

Question 19. राष्ट्रीय संसाधन से क्या तात्पर्य है?
Answer: राष्ट्रीय संसाधन वे होते हैं जिन पर पूरे राष्ट्र का अधिकार होता है। ये किसी देश की सीमा के अंदर पाए जाते हैं और सरकार इनका उपयोग अपने नागरिकों के कल्याण के लिए करती है। उदाहरण के लिए, जनसंख्या, खनिज, वन और जल।
In simple words: राष्ट्रीय संसाधन वो हैं जो पूरे देश की संपत्ति होते हैं, जैसे उस देश के लोग, खनिज या जंगल।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय संसाधनों में देश की भौगोलिक सीमा के भीतर आने वाली सभी प्राकृतिक और मानव निर्मित संपदा शामिल होती है।

 

Question 20. अन्तर्राष्ट्रीय संसाधन किसे कहते हैं?
अथवा
विश्व संसाधन किसे कहते हैं?

Answer: अन्तर्राष्ट्रीय संसाधन या विश्व संसाधन वे होते हैं जिन पर पूरे विश्व का अधिकार रहता है। इन संसाधनों का प्रबंधन और उपयोग अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा किया जाता है ताकि सभी देशों को इनका लाभ मिल सके। उदाहरण के लिए, समुद्र के गहरे हिस्से के संसाधन या अंटार्कटिका के संसाधन।
In simple words: अन्तर्राष्ट्रीय संसाधन वो हैं जो पूरे विश्व के होते हैं और जिनका उपयोग सभी देशों के लिए किया जाता है।

🎯 Exam Tip: अन्तर्राष्ट्रीय संसाधनों के लिए 'पूरे विश्व का अधिकार' और 'अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा प्रबंधन' मुख्य पहचान हैं।

 

Question 21. संसाधन संरक्षण को परिभाषित कीजिए।
Answer: संसाधन संरक्षण का मतलब है कि सभी संसाधनों का योजनाबद्ध, विवेकपूर्ण, मितव्ययी और विनाश-रहित तरीके से उपयोग किया जाए। साथ ही, जनसंख्या की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए उनका लंबे समय तक उपयोग सुनिश्चित किया जाए। यह संसाधनों को भविष्य के लिए बचाने का एक तरीका है।
In simple words: संसाधन संरक्षण का मतलब है कि हम संसाधनों का समझदारी से और योजना बनाकर इस्तेमाल करें ताकि वे लंबे समय तक रहें।

🎯 Exam Tip: 'नियोजित', 'विवेकपूर्ण', 'मितव्ययी' और 'दीर्घकालीन उपयोग' संसाधन संरक्षण की परिभाषा के प्रमुख शब्द हैं।

 

Question 22. संसाधन संरक्षण की समस्या क्यों उत्पन्न हुई है?
Answer: संसाधन संरक्षण की समस्या मुख्य रूप से तीव्र आर्थिक विकास के कारण हुई है, जिससे संसाधनों का बहुत ज़्यादा शोषण हो रहा है। नवीकरणीय संसाधन एक हद तक ही फिर से बन सकते हैं, जबकि अनवीकरणीय संसाधन बहुत धीरे-धीरे बनते हैं, जिससे उनके खत्म होने का खतरा बढ़ गया है। बढ़ती जनसंख्या और उपभोग की आदतें भी इस समस्या को बढ़ाती हैं।
In simple words: संसाधन संरक्षण की समस्या इसलिए पैदा हुई है क्योंकि हम बहुत तेज़ी से संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं और उन्हें खत्म कर रहे हैं, जबकि वे दोबारा नहीं बन पाते।

🎯 Exam Tip: संसाधनों के अत्यधिक दोहन, धीमी नवीनीकरण दर और बढ़ती जनसंख्या को संरक्षण की समस्या के मूल कारण के रूप में उजागर करें।

 

Question 23. संसाधनों के बहुउद्देशीय संरक्षण उपयोग के प्रमुख उद्देश्य लिखिए।
Answer: संसाधनों के बहुउद्देशीय संरक्षण उपयोग के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:
1. सिंचाई और पीने के पानी के साथ-साथ बिजली पैदा करना। यह पानी के विभिन्न उपयोगों को सुनिश्चित करता है।
2. बाढ़ को नियंत्रित करना, मछली पालन को बढ़ावा देना, वनों का विकास करना और मिट्टी के कटाव को रोकना। ये सभी कार्य पर्यावरण को संतुलित रखने में मदद करते हैं।
3. भूजल स्तर को बढ़ाना और जल परिवहन को सुविधाजनक बनाना। इससे जल संसाधनों का सही तरीके से इस्तेमाल हो पाता है।
In simple words: संसाधनों को कई तरीकों से इस्तेमाल करने का मकसद पानी, जंगल और मिट्टी को बचाना है, ताकि वे भविष्य में भी काम आ सकें और बाढ़ जैसी समस्याओं से बचा जा सके।

🎯 Exam Tip: जब बहुउद्देशीय उपयोग के उद्देश्यों को सूचीबद्ध करें, तो प्रत्येक बिंदु को स्पष्ट और संक्षिप्त रखें, और यह दिखाएँ कि यह कई समस्याओं का समाधान कैसे करता है।

 

Question 24. पेट्रोलियम के बहुउद्देशीय उपयोग के उदाहरण लिखिए।
Answer: पेट्रोल और डीजल पेट्रोलियम के दो मुख्य ऊर्जा उत्पाद हैं। इसके साथ ही, मिट्टी का तेल, ग्रीस, तेल, वैसलीन, सिंथेटिक पदार्थ, मोम और कोलतार जैसे कई अन्य गौण उत्पाद भी पेट्रोलियम से बनते हैं। पेट्रोलियम एक ऐसा जीवाश्म ईंधन है जिसका हमारे दैनिक जीवन में बहुत व्यापक उपयोग होता है।
In simple words: पेट्रोलियम से पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन बनते हैं। इससे मिट्टी का तेल, ग्रीस, वैसलीन और प्लास्टिक जैसी कई दूसरी चीजें भी बनाई जाती हैं।

🎯 Exam Tip: पेट्रोलियम के मुख्य और गौण उत्पादों दोनों का उल्लेख करके अपनी जानकारी दिखाएँ, यह दर्शाता है कि आप इसके बहुमुखी उपयोग को समझते हैं।

 

Question 25. विकास से क्या तात्पर्य है?
Answer: विकास का मतलब प्रति व्यक्ति आय, औद्योगिक और कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी, बेहतर परिवहन, स्वच्छ पेयजल, शुद्ध हवा, आधुनिक चिकित्सा और शिक्षा की उपलब्धता में वृद्धि से है। इसका सीधा संबंध लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने से है।
In simple words: विकास का मतलब है लोगों की आय बढ़ना, उद्योगों और खेती का बढ़ना, अच्छी परिवहन सुविधाएँ मिलना, साफ पानी और हवा मिलना, और अच्छी शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएँ होना।

🎯 Exam Tip: विकास की परिभाषा देते समय, केवल आर्थिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, जीवन की गुणवत्ता और सेवाओं की उपलब्धता जैसे व्यापक कारकों को शामिल करें।

RBSE Class 12 Geography Chapter 15 लघूत्तरात्मक प्रश्न (SA-I)

 

Question 1. पृथ्वी पर कोई भी वस्तु संसाधन कब बन सकती है? अथवा संसाधन बनने हेतु आवश्यक दशाएँ कौन-कौन सी हैं?
Answer: पृथ्वी पर कोई भी वस्तु तब संसाधन बनती है जब वह मानव के लिए उपयोगी हो और उसे प्राप्त करने की योग्यता हो। इसके लिए निम्न दशाएँ आवश्यक हैं:
1. उस वस्तु का उपयोग संभव हो। कोई भी चीज तभी संसाधन बनती है जब इंसान उसका इस्तेमाल कर सकें।
2. उसे अधिक मूल्यवान और उपयोगी वस्तु के रूप में बदला जा सके। जैसे, पेड़ को काटकर फर्नीचर बनाना।
3. उससे निश्चित उद्देश्यों की पूर्ति की क्षमता हो। मतलब वह किसी खास जरूरत को पूरा कर सकती हो।
4. इन वस्तुओं को निकालने या उपयोग करने की योग्यता रखने वाला मानव संसाधन उपलब्ध हो। इंसान के ज्ञान और तकनीक से ही कोई वस्तु संसाधन बन पाती है।
In simple words: कोई भी चीज तभी संसाधन बनती है जब इंसान उसका इस्तेमाल कर सकें, उसे बदल कर और काम का बना सकें, किसी खास जरूरत को पूरा कर सकें, और इंसान के पास उसे इस्तेमाल करने का ज्ञान हो।

🎯 Exam Tip: संसाधन बनने के लिए वस्तु के साथ-साथ मानवीय योग्यता (तकनीकी ज्ञान और उपयोगिता) का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. स्वामित्व के आधार पर संसाधनों को वर्गीकृत कीजिए।
Answer: स्वामित्व के आधार पर संसाधनों को तीन मुख्य वर्गों में बाँटा गया है:
1. **व्यक्तिगत संसाधन:** ये वे संसाधन होते हैं जिन पर किसी व्यक्ति, परिवार या संस्था का अपना अधिकार होता है। जैसे- किसी का घर, अपनी जमीन, पैसा या सोने के गहने। ये निजी संपत्ति की तरह होते हैं।
2. **राष्ट्रीय संसाधन:** इन संसाधनों पर पूरे देश या राष्ट्र का अधिकार होता है। जैसे- देश के जंगल, पानी, सौर ऊर्जा और तकनीकी ज्ञान। सरकार इन पर नियंत्रण रखती है और इनका उपयोग सभी नागरिकों के लिए करती है।
3. **अंतर्राष्ट्रीय या विश्व संसाधन:** इन संसाधनों पर पूरे विश्व का अधिकार होता है और इनका उपयोग सभी देशों के कल्याण के लिए किया जाता है। जैसे- विश्व के सभी भौतिक और जैविक संसाधन, जो किसी एक देश की सीमा में नहीं आते।
In simple words: संसाधनों को तीन तरह से बांटा जाता है: जो किसी एक व्यक्ति के हैं (जैसे घर), जो पूरे देश के हैं (जैसे जंगल), और जो पूरे विश्व के हैं (जैसे खुले समुद्र)।

🎯 Exam Tip: स्वामित्व के आधार पर संसाधनों के वर्गीकरण को उदाहरणों के साथ समझाएँ, यह स्पष्ट करते हुए कि कौन से संसाधन व्यक्ति, राष्ट्र या अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के अंतर्गत आते हैं।

 

Question 4. संसाधन संरक्षण के लिए आवश्यक प्रमुख विधियों के नाम बताइए।
Answer: संसाधन संरक्षण के लिए निम्नलिखित प्रमुख विधियाँ हैं:
6. प्राथमिकता के आधार पर उपयोग
7. पुनर्चक्रण
8. कृत्रिम/वैकल्पिक वस्तुओं का उपयोग
9. उन्नत व परिष्कृत तकनीक का उपयोग
10. संसाधनों का बहुउद्देशीय उपयोग
इन विधियों को अपनाकर हम अपने बहुमूल्य संसाधनों को भविष्य के लिए सुरक्षित रख सकते हैं।
In simple words: संसाधनों को बचाने के लिए हमें उन्हें सोच-समझकर इस्तेमाल करना चाहिए, पुरानी चीजों को दोबारा उपयोग करना चाहिए, नकली चीजें इस्तेमाल करनी चाहिए, नई तकनीक अपनानी चाहिए और एक ही संसाधन का कई कामों में इस्तेमाल करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: संरक्षण की विधियों को सूचीबद्ध करते समय, प्रत्येक विधि के पीछे के मूल विचार को एक या दो शब्दों में समझाना याद रखें।

 

Question 5. संसाधन संरक्षण वर्तमान में विश्व की महत्त्वपूर्ण आवश्यकता है। क्यों?
Answer: वर्तमान में विश्व में संसाधन संरक्षण की बहुत अधिक आवश्यकता है क्योंकि:
1. तेजी से बढ़ती जनसंख्या और तकनीकी विकास के कारण संसाधनों का उपयोग बहुत तेज़ी से हो रहा है। इससे कई प्राकृतिक संसाधन, खासकर अनव्यकरणीय संसाधन, खत्म होने की कगार पर पहुँच गए हैं। इसलिए, हमें इन संसाधनों को भविष्य की पीढ़ियों के लिए बचाकर रखना बहुत ज़रूरी है।
2. बढ़ते शहरीकरण, औद्योगीकरण और वनों की कटाई से एक तरफ तो महत्वपूर्ण संसाधन तेज़ी से खत्म हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण प्रदूषण और पारिस्थितिकी असंतुलन की गंभीर समस्याएँ भी पैदा हो गई हैं। मानव जीवन और स्वच्छ पर्यावरण को बनाए रखने के लिए संसाधन संरक्षण बहुत ज़रूरी है।
In simple words: संसाधनों को बचाना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि जनसंख्या बढ़ने और बहुत ज़्यादा इस्तेमाल के कारण वे खत्म हो रहे हैं, और इससे पर्यावरण भी खराब हो रहा है।

🎯 Exam Tip: संसाधन संरक्षण की आवश्यकता के कारणों को समझाते हुए, जनसंख्या वृद्धि, तकनीकी विकास और पर्यावरणीय प्रभावों के बीच संबंध को स्पष्ट करें।

 

Question 6. जनसंख्या वृद्धि तथा आर्थिक विकास के स्तर को कायम रखने के प्रमुख उपायों को लिखिए।
Answer: जनसंख्या वृद्धि और आर्थिक विकास के स्तर को बनाए रखने के लिए निम्नलिखित उपाय बहुत ज़रूरी हैं:
1. उन्नत तकनीक का उपयोग करके स्थानीय कच्चे माल का इस्तेमाल करें ताकि रोजगार के अवसर बढ़ें। यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है।
2. जहाँ मानव श्रम की अधिकता है, वहाँ श्रम आधारित तकनीक का उपयोग करें। इससे ज़्यादा लोगों को काम मिल पाता है।
3. संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए बहुउद्देशीय योजनाएँ बनाएँ और उन्हें लागू करें। इससे एक साथ कई समस्याओं का समाधान होता है।
4. जनसंख्या वृद्धि पर सही नियंत्रण और समग्र योजनाएँ बनाएँ। जनसंख्या नियंत्रण से संसाधनों पर दबाव कम होता है।
5. नवीकरणीय संसाधनों का अधिक से अधिक उपयोग करें और वैकल्पिक संसाधनों की खोज करें। इससे गैर-नवीकरणीय संसाधनों पर निर्भरता कम होती है।
6. वैकल्पिक संसाधनों की खोज करें और संसाधनों का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर करें। ज़रूरी संसाधनों को पहले इस्तेमाल करें।
7. संसाधनों के अधिकतम विकास के बजाय आवश्यक विकास पर ध्यान दें। इसका मतलब है कि संसाधनों का बुद्धिमानी से उपयोग करना, न कि उनका अंधाधुंध दोहन करना।
In simple words: जनसंख्या बढ़ने और आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए हमें नई तकनीकें अपनानी चाहिए, स्थानीय चीजों का उपयोग करना चाहिए, जनसंख्या को नियंत्रित करना चाहिए, और संसाधनों का समझदारी से इस्तेमाल करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: जनसंख्या वृद्धि और आर्थिक विकास के संतुलन के लिए उपायों को सूचीबद्ध करते समय, तकनीकी नवाचार, स्थानीयकरण और सतत उपयोग पर जोर दें।

RBSE Class 12 Geography Chapter 15 लघूत्तरात्मक प्रश्न (SA-II)

 

Question 2. जनसंख्या वृद्धि पर प्रभावी नियंत्रण संसाधन संरक्षण में किस प्रकार सहायक है?
Answer: जनसंख्या किसी भी देश का सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है। मानव अपने आर्थिक विकास और जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए संसाधनों का उपयोग करता है। संसाधनों के अनुपात में जनसंख्या की अनुकूलतम अवस्था के बिना आर्थिक विकास में रुकावट नहीं आती। लेकिन जैसे ही जनसंख्या संसाधनों की तुलना में बढ़ती है, संसाधनों का शोषण शुरू हो जाता है। इस कारण अनव्यकरणीय संसाधन तेज़ी से खत्म होते हैं। बढ़ती जनसंख्या की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ज़्यादा संसाधनों की ज़रूरत पड़ती है। इसलिए, अगर संसाधनों का सही से संरक्षण करना है, तो जनसंख्या पर प्रभावी नियंत्रण बहुत ज़रूरी है, नहीं तो असंतुलन और संसाधनों के अत्यधिक दोहन की स्थिति पैदा हो जाएगी। जनसंख्या नियंत्रण से संसाधनों पर दबाव कम होता है और उनकी उपलब्धता बनी रहती है।
In simple words: अगर जनसंख्या बहुत तेज़ी से बढ़ती है, तो संसाधनों का ज़्यादा इस्तेमाल होता है और वे जल्दी खत्म हो जाते हैं। इसलिए, जनसंख्या को नियंत्रित करना ज़रूरी है ताकि संसाधनों को बचाया जा सके और वे भविष्य के लिए भी उपलब्ध रहें।

🎯 Exam Tip: जनसंख्या नियंत्रण और संसाधन संरक्षण के बीच सीधा संबंध स्थापित करें, यह समझाते हुए कि बढ़ती जनसंख्या संसाधनों पर कैसे दबाव डालती है।

 

Question 3. जैविक संतुलन बनाये रखना क्यों आवश्यक है?
Answer: औद्योगिक और आर्थिक विकास का लक्ष्य मानव जीवन को बेहतर और आरामदायक बनाना है। मानव के अस्तित्व के लिए जल, वायु, मिट्टी, वनस्पति और जीव-जन्तु जैसे जैविक आधार बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए, जैविक संतुलन को ध्यान में रखकर आर्थिक योजनाएँ बनाने से मानव के पर्यावरण का संतुलन बना रहेगा और संसाधनों की उपलब्धता भी बनी रहेगी, जिससे मानव लगातार प्रगति करेगा। जैविक संतुलन प्राकृतिक प्रक्रियाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी कारण जैविक संतुलन बनाए रखना बहुत ज़रूरी है।
In simple words: जैविक संतुलन बनाए रखना बहुत ज़रूरी है क्योंकि इंसान के रहने के लिए पानी, हवा, मिट्टी, पेड़-पौधे और जीव-जन्तु सभी आवश्यक हैं। इसके बिना पर्यावरण का संतुलन बिगड़ जाएगा और इंसान का विकास रुक जाएगा।

🎯 Exam Tip: जैविक संतुलन की आवश्यकता को समझाते समय, यह स्पष्ट करें कि यह मानव जीवन और सतत विकास के लिए कैसे एक मौलिक आधार है।

 

Question 4. सतत विकास का मार्ग क्यों आवश्यक हो गया है?
Answer: मानव ने पुराने समय से लेकर आज के उन्नत औद्योगिक युग तक के विकास में संसाधनों का बहुत ज़्यादा उपयोग किया है। संसाधनों के अत्यधिक दोहन से पर्यावरण के प्राकृतिक और जैविक संबंधों का संतुलन बिगड़ गया है। पर्यावरण और विकास के बीच असंतुलन के कारण पर्यावरण प्रदूषण की गंभीर समस्याएँ पैदा हो गई हैं, जिससे आज जीव-जगत के सामने खतरा है। पर्यावरण को नुकसान पहुँचने और संसाधनों के लगातार खत्म होने से विकास को सतत बनाए रखना ज़रूरी हो गया है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए भविष्य में पर्यावरणीय नुकसानों से बचने के लिए अस्थाई विकास की पुरानी सोच को छोड़कर सतत विकास के मार्ग को अपनाना बहुत ज़रूरी है। सतत विकास भविष्य की ज़रूरतों से समझौता किए बिना वर्तमान की ज़रूरतों को पूरा करने पर केंद्रित है।
In simple words: इंसान ने संसाधनों का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल किया है, जिससे पर्यावरण को नुकसान हुआ है। इस नुकसान से बचने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों को बचाने के लिए सतत विकास का रास्ता अपनाना बहुत ज़रूरी हो गया है।

🎯 Exam Tip: सतत विकास की आवश्यकता को समझाते हुए, वर्तमान में संसाधनों के अत्यधिक दोहन और भविष्य पर पड़ने वाले इसके नकारात्मक प्रभावों के बीच संबंध को उजागर करें।

RBSE Class 12 Geography Chapter 15 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 18. संसाधन अर्थ, संरक्षण की आवश्यकता, समस्या और प्रकारों का विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer: **संसाधन का अर्थ:**
संसाधन उन सभी प्राकृतिक और मानवीय चीजों को कहते हैं जिनका उपयोग मानव अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए करता है। कोई भी प्राकृतिक वस्तु तभी संसाधन बनती है जब इंसान उसका उपयोग अपने फायदे के लिए करने लगता है। इसलिए, जिम्मरमैन के अनुसार, "संसाधन का अर्थ किसी उद्देश्य को पूरा करना है।" यह उद्देश्य व्यक्ति की ज़रूरतों और समाज के लक्ष्यों को पूरा करता है। किसी वस्तु के संसाधन बनने के लिए यह ज़रूरी है कि:
1. वस्तु का मानवीय ज़रूरतों के लिए उपयोग संभव हो।
2. ऐसी वस्तुओं को ज़्यादा मूल्यवान और उपयोगी बनाया जा सके।
3. ऐसी वस्तुओं में निश्चित उद्देश्यों को पूरा करने की क्षमता हो।

**संसाधन संरक्षण की आवश्यकता:**
1. मानव के सतत विकास और संसाधनों के लंबे समय तक उपयोग के लिए संरक्षण ज़रूरी है।
2. आर्थिक विकास के लिए संसाधनों का बहुत तेज़ी से इस्तेमाल हो रहा है, जिससे उनके खत्म होने का खतरा पैदा हो गया है। भविष्य की पीढ़ियों के लिए उपलब्धता बनाए रखने हेतु संरक्षण ज़रूरी है।
3. तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण और वनों की कटाई से संसाधन तेज़ी से खत्म हो रहे हैं, और पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याएँ भी बढ़ रही हैं। इन्हें ठीक करने और सतत विकास के लिए संरक्षण ज़रूरी है।

**संसाधन संरक्षण की समस्या:**
तेज़ी से आर्थिक विकास के कारण संसाधनों का दोहन बढ़ गया है। नवीकरणीय संसाधनों को एक सीमा तक ही फिर से बनाया जा सकता है, जबकि अनव्यकरणीय संसाधन बहुत धीरे-धीरे बनते हैं, जिससे उनके खत्म होने का खतरा है। संसाधनों की कमी से भविष्य की पीढ़ियों का विकास रुक सकता है। संरक्षण की समस्या पैदा करने वाले चार मुख्य कारण हैं:
1. जनसंख्या विस्फोट के कारण बढ़ती मानवीय आवश्यकताएँ।
2. वैज्ञानिक खोजों से औद्योगीकरण, शहरीकरण और परिवहन में तेज़ी से वृद्धि।
3. पश्चिमी उपभोगवादी संस्कृति के कारण संसाधनों का ज़्यादा उपयोग।
4. अधिकतम विकास की प्रवृत्ति।

**संसाधनों के प्रकार:**
संसाधनों का वर्गीकरण चार मुख्य आधारों पर किया गया है:

**1. उत्पाद के आधार पर संसाधन:**
इस आधार पर संसाधनों के दो वर्ग हैं:
(क) **जैविक संसाधन:** इन संसाधनों में सभी जीवित चीजें शामिल होती हैं; जैसे- मानव, पशु, पक्षी, जीव-जन्तु और प्राकृतिक वनस्पति। ये संसाधन अपनी संख्या बढ़ाने की क्षमता रखते हैं, इसलिए इन्हें नवीकरणीय और कभी न खत्म होने वाले संसाधन भी कहा जाता है।
(ख) **अजैविक संसाधन:** इस वर्ग में सभी निर्जीव चीजें शामिल होती हैं; जैसे- खनिज, भूमि, मिट्टी। इनमें अपनी संख्या बढ़ाने की क्षमता नहीं होती, इसलिए ये अनव्यकरणीय और एक बार उपयोग के बाद हमेशा के लिए खत्म हो जाने वाले संसाधन होते हैं।

**2. उद्देश्य के आधार पर संसाधन:**
इस आधार पर संसाधनों के दो प्रकार हैं:
(क) **ऊर्जा संसाधन:** ये वे संसाधन हैं जिनसे ऊर्जा या शक्ति मिलती है। जैसे- पेट्रोलियम, कोयला, परमाणु ऊर्जा, सौर ऊर्जा, मानव शक्ति और पशु शक्ति। ऊर्जा संसाधनों को दो उप-वर्गों में रखा जाता है:
    (i) **परम्परागत ऊर्जा संसाधन:** ये वे संसाधन हैं जिनका उपयोग बहुत पुराने समय से किया जा रहा है। जैसे- कोयला, पेट्रोलियम, जल विद्युत और परमाणु ऊर्जा।
    (ii) **गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधन:** ये वे संसाधन हैं जिनका विकास और उपयोग मानव ने हाल ही में या वर्तमान युग में शुरू किया है। जैसे- परमाणु ऊर्जा, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा और ज्वारीय ऊर्जा।
(ख) **गैर-ऊर्जा संसाधन:** ये वे संसाधन हैं जिनका उपयोग कच्चे माल या निर्माण उद्योगों में किया जाता है। इन्हें खनिज संसाधन भी कहते हैं। जैसे- लोहा, सोना, चाँदी, जस्ता, ताँबा और एल्युमिनियम।

**3. स्वामित्व के आधार पर संसाधन:**
इस आधार पर संसाधनों के तीन वर्ग होते हैं:
(क) **व्यक्तिगत संसाधन:** जिन संसाधनों पर किसी व्यक्ति या परिवार का अधिकार होता है; जैसे- मकान, भूमि, नगदी, स्वर्णाभूषण।
(ख) **राष्ट्रीय संसाधन:** जिन संसाधनों पर पूरे राष्ट्र का अधिकार होता है; जैसे- वन, जल, सौर ऊर्जा, तकनीकी ज्ञान।
(ग) **अंतर्राष्ट्रीय या विश्व संसाधन:** जिन संसाधनों पर पूरे विश्व का अधिकार रहता है; जैसे- विश्व के समस्त भौतिक व जैविक संसाधन।

**4. उपयोग की सततता के आधार पर संसाधन:**
इस आधार पर संसाधनों को निम्नलिखित दो वर्गों में रखा जाता है:
(क) **अनव्यकरणीय या समाप्य संसाधन:** इन्हें सीमित संसाधन भी कहते हैं क्योंकि ये पृथ्वी पर एक निश्चित मात्रा में ही उपलब्ध हैं और उपयोग करने के साथ-साथ ये खत्म होते जाते हैं। एक बार उपयोग होने के बाद इन्हें प्रकृति या मानव द्वारा फिर से बनाया या नवीनीकृत नहीं किया जा सकता। जैसे- लोहा, कोयला और पेट्रोलियम।
(ख) **नव्यकरणीय या असमाप्य संसाधन:** इन संसाधनों को एक बार उपयोग करने के बाद प्रकृति या मानव द्वारा फिर से बनाया या नवीनीकृत किया जा सकता है। इनके भंडार कभी खत्म नहीं होते। इसलिए इन्हें असीमित संसाधन भी कहा जाता है। उदाहरण के लिए- वन, जल, वायु, मानव, पशु, पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा और ज्वारीय ऊर्जा। ये सभी प्राकृतिक संसाधन हैं जो सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
In simple words: संसाधन वे सभी चीजें हैं जिनसे इंसान अपनी ज़रूरतें पूरी करते हैं। इन्हें बचाना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि ये खत्म हो रहे हैं और पर्यावरण खराब हो रहा है। संसाधनों के कई प्रकार हैं, जैसे जैविक (जीवित), अजैविक (निर्जीव), ऊर्जा वाले, गैर-ऊर्जा वाले, निजी, राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, और ऐसे जो फिर से बन सकते हैं या खत्म हो सकते हैं।

🎯 Exam Tip: निबन्धात्मक प्रश्नों के उत्तर देते समय, प्रत्येक भाग-अर्थ, आवश्यकता, समस्या और प्रकारों-को स्पष्ट रूप से शीर्षक और उदाहरणों के साथ समझाएँ, ताकि उत्तर व्यवस्थित और विस्तृत लगे।

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