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Detailed Chapter 4 मांग की कीमत लोच RBSE Solutions for Class 12 Economics
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Class 12 Economics Chapter 4 मांग की कीमत लोच RBSE Solutions PDF
Rajasthan Board RBSE Class 12 Economics Chapter 4 मांग की कीमत लोच
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 अभ्यासार्थ प्रश्न
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. यदि किसी वस्तु की कीमत बढ़ने के फलस्वरूप उस वस्तु की मांग में कोई परिवर्तन नहीं होता है तब उसकी मांग होगी
(अ) पूर्णतया बेलोचदार
(ब) इकाई के बराबर
(स) अनन्त
(द) पूर्णतया लोचदार
Answer: (अ) पूर्णतया बेलोचदार
In simple words: जब किसी चीज की कीमत बढ़ जाती है, लेकिन उसकी मांग में कोई बदलाव नहीं आता, तो इसे पूरी तरह से बेलोचदार मांग कहते हैं।
🎯 Exam Tip: यह याद रखें कि 'पूर्णतया बेलोचदार' का मतलब है कि कीमत बदलने पर भी मांग बिलकुल नहीं बदलती।
Question 3. ज्यामिति विधि से मांग की लोच का सूत्र है –
(अ) मांग वक्र का निचला हिस्सा / मांग वक्र का ऊपरी हिस्सा
(ब) मांग वक्र का ऊपरी हिस्सा / मांग वक्र का निचला हिस्सा
(स) \( \frac { \Delta q }{ q } / \frac { \Delta p }{ p } \)
(द) \( \frac { \Delta p }{ p } / \frac { \Delta q }{ q } \)
Answer: (अ) मांग वक्र का निचला हिस्सा / मांग वक्र का ऊपरी हिस्सा
In simple words: ज्यामिति विधि से मांग की लोच निकालने के लिए मांग वक्र के उस बिंदु से नीचे के हिस्से की लंबाई को ऊपर के हिस्से की लंबाई से भाग देते हैं।
🎯 Exam Tip: बिंदु विधि का सूत्र याद रखें: मांग वक्र पर किसी बिंदु पर लोच = बिंदु से नीचे का हिस्सा / बिंदु से ऊपर का हिस्सा।
Question 4. यदि समोसे की कीमत में 10 प्रतिशत वृद्धि होने से उसकी मांग 10 प्रतिशत गिरती है। अतः समोसे की मांग होगी-
(अ) इकाई लोच के बराबर
(ब) शून्य लोच
(स) इकाई लोच से अधिक
(द) इकाई लोच से कम
Answer: (ब) शून्य लोच
In simple words: यदि कीमत में जितने प्रतिशत बदलाव आता है, मांग में भी उतना ही बदलाव आए, तो इसे इकाई लोच कहते हैं। यहां 10% की वृद्धि के कारण 10% की कमी हुई है, तो यह इकाई लोच है।
🎯 Exam Tip: जब कीमत में बदलाव के कारण मांग में समान अनुपात में बदलाव आता है, तो इसे इकाई लोचदार मांग कहते हैं।
Question 5. बिन्दु विधि में बिन्दु P पर मांग की लोच होगी।
(अ) ज्यादा लोचदार
(ब) इकाई लोच
(स) कम लोचदार
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (स) कम लोचदार
In simple words: यदि मांग वक्र पर बिंदु P नीचे की ओर (X-अक्ष के करीब) होता है, तो उस बिंदु पर मांग की लोच कम होती है।
🎯 Exam Tip: एक सीधी रेखा वाले मांग वक्र पर, मध्य बिंदु पर लोच 1 होती है, मध्य बिंदु से ऊपर लोच 1 से अधिक होती है, और मध्य बिंदु से नीचे लोच 1 से कम होती है।
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 अतिलघु उत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. मांग की कीमत लोच को परिभाषित कीजिए।
Answer: श्रीमती रोबिन्सन के अनुसार, मांग की कीमत लोच एक निश्चित कीमत पर मांग में थोड़े बदलाव के जवाब में खरीदी गई मात्रा में आनुपातिक परिवर्तन को कीमत में आनुपातिक परिवर्तन से भाग देने पर प्राप्त होती है। यह मांग में कीमत के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।
In simple words: मांग की कीमत लोच बताती है कि कीमत में थोड़ा बदलाव आने पर किसी चीज़ की मांग में कितना बदलाव आता है।
🎯 Exam Tip: परिभाषा में 'आनुपातिक परिवर्तन' और 'कीमत के प्रति मांग की संवेदनशीलता' जैसे मुख्य शब्द शामिल करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. यदि मांग वक्र \( \times \) अक्ष के समानान्तर है तो मांग की लोच होगी।
Answer: पूर्णतया लोचदार।
In simple words: यदि मांग वक्र एक सीधी लाइन है जो \( \times \) अक्ष के समान चलती है, तो इसका मतलब है कि कीमत में छोटे से बदलाव पर भी मांग बहुत ज्यादा बदल जाएगी।
🎯 Exam Tip: \( \times \) अक्ष के समानांतर मांग वक्र का मतलब है कि वस्तु की मांग अनंत है।
Question 3. किसी मांग वक्र के मध्य बिन्दु पर मांग की लोच क्या होगी?
Answer: मांग वक्र के मध्य बिन्दु पर मांग की लोच इकाई के बराबर होगी।
In simple words: मांग वक्र के बीच के बिंदु पर, मांग और कीमत में बदलाव का अनुपात बराबर होता है, इसलिए लोच 1 होती है।
🎯 Exam Tip: बिंदु विधि में एक सीधी रेखा वाले मांग वक्र पर मध्य बिंदु पर लोच हमेशा इकाई के बराबर होती है।
Question 4. पानी की मांग बेलोचदार क्यों होती है?
Answer: पानी की मांग बेलोचदार इसलिए होती है क्योंकि कीमत में बदलाव का पानी की मांग पर बहुत कम प्रभाव पड़ता है। यह एक आवश्यक वस्तु है, इसलिए लोग इसकी कीमत बढ़ने पर भी इसकी खपत में ज्यादा कमी नहीं करते।
In simple words: पानी की मांग इसलिए नहीं बदलती क्योंकि यह बहुत जरूरी है और लोग कीमत बदलने पर भी इसे उतना ही इस्तेमाल करते हैं।
🎯 Exam Tip: आवश्यक वस्तुओं की मांग अक्सर बेलोचदार होती है क्योंकि वे जीवन जीने के लिए जरूरी होती हैं।
Question 5. ज्यामितीय विधि से मांग की लोच ज्ञात करने का सूत्र क्या है?
Answer: ज्यामितीय विधि से मांग की लोच ज्ञात करने का सूत्र है:
\( ed = \frac { निचला \ हिस्सा }{ ऊपरी \ हिस्सा } = \frac { MB }{ MA } \)
In simple words: मांग की लोच निकालने के लिए, मांग वक्र के जिस बिंदु पर लोच निकालनी है, उस बिंदु से नीचे के हिस्से की लंबाई को ऊपर के हिस्से की लंबाई से भाग देते हैं।
🎯 Exam Tip: इस सूत्र का उपयोग केवल एक सीधी रेखा वाले मांग वक्र के लिए किया जाता है।
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 लघु उत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. मांग की कीमत लोच को प्रभावित करने वाले दो कारकों को समझाइए।
Answer: मांग की कीमत लोच को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक इस प्रकार हैं:
1. वस्तु की प्रकृति: आवश्यक वस्तुओं (जैसे-अनाज, नमक) की मांग आमतौर पर बेलोचदार होती है, क्योंकि उनकी कीमत में बदलाव का मांग पर ज्यादा असर नहीं पड़ता। इसके विपरीत, आरामदायक वस्तुओं की मांग लोचदार होती है, क्योंकि उनकी कीमत बदलने पर मांग में बड़ा बदलाव आता है। विलासिता की वस्तुओं की मांग बहुत अधिक लोचदार होती है।
2. स्थानापन्न वस्तुओं की उपलब्धता: जिन वस्तुओं के स्थानापन्न विकल्प आसानी से उपलब्ध होते हैं, उनकी मांग लोचदार होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यदि किसी वस्तु की कीमत बढ़ जाती है, तो उपभोक्ता आसानी से उसके सस्ते स्थानापन्न वस्तु पर चले जाते हैं, जिससे मूल वस्तु की मांग घट जाती है। इसके विपरीत, जिन वस्तुओं के स्थानापन्न वस्तुएँ नहीं होती हैं, उनकी मांग कम लोचदार होती है।
3. वस्तु के वैकल्पिक प्रयोग: जिन वस्तुओं का उपयोग कई अलग-अलग कामों में किया जा सकता है, उनकी मांग लोचदार होती है। उदाहरण के लिए, बिजली की मांग लोचदार होती है, क्योंकि यदि बिजली सस्ती हो जाती है, तो लोग इसका उपयोग कई कार्यों में ज्यादा करने लगते हैं, जिससे इसकी मांग तेजी से बढ़ जाती है।
4. आदत की वस्तुएँ: जिन वस्तुओं की लोगों को आदत हो जाती है, उनकी मांग बेलोचदार होती है। जैसे-सिगरेट, तंबाकू आदि। इन वस्तुओं की कीमत बढ़ने पर भी इनकी मांग में ज्यादा कमी नहीं आती है क्योंकि उपभोक्ता इन आदतों को आसानी से नहीं छोड़ पाते।
5. धन का वितरण: यदि समाज में धन का वितरण समान होता है और लोगों की आय लगभग एक जैसी होती है, तो आवश्यक और आरामदायक वस्तुओं की मांग ज्यादा होती है, लेकिन विलासिता की वस्तुओं की मांग ज्यादा नहीं होती। ऐसी स्थिति में मांग लोचदार होती है। यदि धन का वितरण असमान होता है, तो मांग बेलोचदार होती है।
6. उपभोग स्थगन की संभावना: जिन वस्तुओं के उपभोग को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है, उनकी मांग लोचदार होती है (जैसे-रेडियो, साइकिल)। लेकिन जिन वस्तुओं के उपभोग को टालना संभव नहीं है (जैसे-रोटी, कपड़ा), उनकी मांग बेलोचदार होती है।
7. उपभोक्ता के बजट में वस्तु का हिस्सा: यदि कोई उपभोक्ता अपने बजट का बहुत छोटा हिस्सा किसी वस्तु पर खर्च करता है, तो ऐसी वस्तुओं की मांग बेलोचदार होती है (जैसे-माचिस, पेंसिल)। इसके विपरीत, जिन वस्तुओं पर उपभोक्ता अपनी आय का बड़ा हिस्सा खर्च करता है, उनकी मांग अधिक लोचदार होती है (जैसे-कार, फर्नीचर)।
8. समयावधि: अल्पकाल में वस्तुओं की मांग बेलोचदार होती है, जबकि दीर्घकाल में मांग लोचदार होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि लंबी अवधि में उपभोक्ता अपनी उपभोग प्रवृत्ति को बदल सकते हैं और नए विकल्प ढूंढ सकते हैं।
In simple words: किसी चीज की मांग कितनी बदलती है, यह उसकी जरूरत, उसके विकल्प, और लोग उसे कितना इस्तेमाल करते हैं, इस पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: मांग की लोच को प्रभावित करने वाले कारकों को उदाहरणों के साथ समझाएं। कम से कम दो या तीन मुख्य कारकों का विस्तार से वर्णन करें।
Question 2. पूर्णतया बेलोच मांग व पूर्णतया लोचदार मांग वक्र को चित्र बनाकर समझाइए।
Answer:
**पूर्णतया बेलोचदार मांग (Perfectly Inelastic Demand) [ed = 0]:** इस स्थिति में कीमत में बदलाव आने पर भी मांग में कोई परिवर्तन नहीं होता। इसका मतलब है कि मांग वक्र Y-अक्ष के समानांतर एक सीधी रेखा होता है। यह एक काल्पनिक स्थिति है और वास्तविक जीवन में बहुत कम देखने को मिलती है। उदाहरण के लिए, जीवन रक्षक दवाइयों की मांग ऐसी हो सकती है।
नीचे दिया गया चित्र पूर्णतया बेलोचदार मांग को दर्शाता है:
इस चित्र से स्पष्ट है कि जब कीमत OP थी तो भी मांग OQ थी। जब कीमत घटकर OP₂ या बढ़कर OP₁ हो जाती है, तब भी मांग OQ ही रहती है। इसका मतलब है कि वस्तु की मांग पूर्णतया बेलोचदार है।
**पूर्णतया लोचदार मांग (Perfectly Elastic Demand) [ed = \( \infty \)]:** इस स्थिति में कीमत में थोड़ा सा भी बदलाव आने पर वस्तु की मांग अनंत हो जाती है। कीमत में थोड़ी सी कमी होने पर मांग बहुत बढ़ जाती है और कीमत में थोड़ी सी भी वृद्धि होने पर मांग शून्य हो जाती है। यह भी एक काल्पनिक स्थिति है। इस स्थिति में मांग वक्र आधार रेखा (X-अक्ष) के समानांतर होता है।
नीचे दिया गया चित्र पूर्णतया लोचदार मांग को दर्शाता है:
इस चित्र से स्पष्ट है कि कीमत OP पर वस्तु की मांग OQ, OQ₁ या OQ₂ या कोई भी अन्य मात्रा हो सकती है। यह दिखाता है कि वस्तु की मांग पूर्णतया लोचदार है।
In simple words: पूर्णतया बेलोचदार मांग में कीमत बदलने पर भी मांग वही रहती है (सीधी खड़ी रेखा)। पूर्णतया लोचदार मांग में कीमत में थोड़ा बदलाव आने पर भी मांग अनंत हो जाती है (सीधी पड़ी रेखा)।
🎯 Exam Tip: इन दोनों प्रकार की मांग को दर्शाने वाले मांग वक्रों के आकार (बेलोचदार के लिए लंबवत और लोचदार के लिए क्षैतिज) को याद रखें।
Question 3. प्रतिशत विधि से मांग की लोच कैसे ज्ञात करते हैं?
Answer: प्रतिशत विधि से मांग की लोच ज्ञात करने के लिए मांग में आनुपातिक या प्रतिशत परिवर्तन को कीमत में आनुपातिक या प्रतिशत परिवर्तन से भाग दिया जाता है। इसका सूत्र इस प्रकार है:
\( ed = \frac { मांग \ में \ आनुपातिक \ (प्रतिशत) \ परिवर्तन }{ कीमत \ में \ आनुपातिक \ (प्रतिशत) \ परिवर्तन } \)
या
\( ed = \frac { \Delta Q }{ Q } \div \frac { \Delta P }{ P } \) या \( ed = \frac { \Delta Q }{ \Delta P } \times \frac { P }{ Q } \)
यहाँ पर:
\( ed \) = मांग की कीमत लोच
\( P \) = प्रारंभिक कीमत
\( \Delta P \) = कीमत में परिवर्तन
\( Q \) = प्रारंभिक मांग मात्रा
\( Q_1 \) = परिवर्तित मांग मात्रा
\( \Delta Q \) = मांग में परिवर्तन
**उदाहरण:** माना कि सेब की कीमत Rs. 100 प्रति किलोग्राम होने पर मांग 200 किलोग्राम है। यदि सेब की कीमत घटकर Rs. 80 प्रति किलोग्राम हो जाती है और इसके फलस्वरूप मांग बढ़कर 250 किलोग्राम हो जाती है, तो मांग की कीमत लोच इस प्रकार निकाली जाएगी:
\( P = 100, P_1 = 80 \Rightarrow \Delta P = P_1 - P = 80 - 100 = -20 \)
\( Q = 200, Q_1 = 250 \Rightarrow \Delta Q = Q_1 - Q = 250 - 200 = 50 \)
\( ed = \frac { \Delta Q }{ \Delta P } \times \frac { P }{ Q } = \frac { 50 }{ -20 } \times \frac { 100 }{ 200 } \)
\( ed = -2.5 \times 0.5 = -1.25 \)
(मांग की कीमत लोच सदैव ऋणात्मक होती है, इसलिए ऋण का चिन्ह लगाने या न लगाने से कोई फर्क नहीं पड़ता है।) इस प्रकार सेब की मांग की कीमत लोच इकाई से अधिक है।
In simple words: मांग की लोच निकालने के लिए, हम देखते हैं कि मांग कितने प्रतिशत बदली, और उसे कीमत कितने प्रतिशत बदली, उससे भाग देते हैं। इससे पता चलता है कि कीमत बदलने पर मांग में कितना बदलाव आता है।
🎯 Exam Tip: सूत्र को सही ढंग से याद रखें और गणना करते समय प्रारंभिक कीमत और मात्रा का उपयोग करें। ऋणात्मक चिन्ह अक्सर छोड़ दिया जाता है लेकिन इसका अर्थ समझना महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. मांग की लोच की विभिन्न श्रेणियों को चित्र बनाकर समझाइए।
Answer: मांग की लोच की पाँच मुख्य श्रेणियाँ होती हैं:
1. **पूर्णतया लोचदार मांग (Perfectly elastic demand) [ed = \( \infty \)]:** यह वह स्थिति है जिसमें प्रचलित कीमतों पर वस्तु की मांग अनंत होती है। कीमत में थोड़ी सी वृद्धि मांग को शून्य कर देती है, और कीमत में थोड़ी सी कमी मांग को अनंत तक बढ़ा देती है। यह एक काल्पनिक स्थिति है। इस अवस्था में मांग वक्र आधार रेखा (X-अक्ष) के समानांतर होता है।
चित्र से स्पष्ट है कि OP कीमत पर वस्तु की मात्रा OQ, Q₁, या Q₂ या इससे कुछ भिन्न हो सकती है।
2. **लोचदार मांग (Elastic demand) [ed = 1]:** मांग की यह स्थिति तब होती है जब मांग में आनुपातिक परिवर्तन कीमत में आनुपातिक परिवर्तन के बराबर होता है। इस अवस्था में मांग की लोच इकाई के बराबर होती है। उदाहरण के लिए, यदि कीमत में 20 प्रतिशत वृद्धि होने पर मांग में भी 20 प्रतिशत कमी हो जाए।
चित्र को देखने से स्पष्ट है कि OP कीमत पर मांग OQ है। जब कीमत बढ़कर OP₁ हो जाती है, तो वस्तु की मांग घटकर OQ₁ रह जाती है। कीमत में परिवर्तन PP₁ मांग में परिवर्तन QQ₁ के बराबर है। मांग में कमी उसी अनुपात में हुई है जिस अनुपात में कीमत में वृद्धि हुई है। आरामदायक वस्तुओं की मांग प्रायः लोचदार होती है।
3. **अत्यधिक लोचदार मांग (Highly elastic demand) [ed > 1]:** जब किसी वस्तु की मांग में आनुपातिक परिवर्तन कीमत में होने वाले आनुपातिक परिवर्तन से अधिक होता है, तो ऐसी मांग को अत्यधिक लोचदार मांग कहते हैं।
रेखाचित्र में OP कीमत पर वस्तु की मांग OQ है। जब कीमत गिरकर OP₁ हो जाती है, तो वस्तु की मांग बढ़कर OQ₁ हो जाती है। कीमत में कमी PP₁ से मांग की मात्रा में वृद्धि QQ₁ ज्यादा है। अतः वस्तु की मांग अधिक लोचदार है।
4. **बेलोचदार मांग (Inelastic demand) [ed < 1]:** जब किसी वस्तु की मांगी जाने वाली मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन कीमत में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन से कम होता है, तो ऐसी मांग को बेलोचदार मांग कहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि वस्तु की कीमत 30 प्रतिशत कम हो और मांग में केवल 10 प्रतिशत वृद्धि हो, तो इसे बेलोचदार मांग कहेंगे। इस अवस्था में मांग की कीमत लोच इकाई से कम होती है।
उपरोक्त चित्र में DD मांग वक्र है। जब वस्तु की कीमत OP है तथा वस्तु की मांग OQ है। जब वस्तु की कीमत OP₁ से घटकर OQ₁ हो जाती है, तो वस्तु की मांग बढ़कर OQ₁ हो जाती है। कीमत में परिवर्तन PP₁ की तुलना में मांग में परिवर्तन OQ₁ कम है। अतः मांग बेलोचदार कही जाएगी।
5. **शून्य लोच या पूर्णतया बेलोचदार मांग (Perfectly inelastic demand) [ed = 0]:** जब वस्तु की कीमत में बदलाव आने पर भी मांग में कोई परिवर्तन नहीं होता, तो ऐसी मांग को पूर्णतया बेलोचदार मांग कहते हैं। इस अवस्था में मांग की लोच शून्य होती है। मांग वक्र Y-अक्ष के समानांतर होता है।
उपरोक्त चित्र में कीमत OP, OP₁ तथा OP₂ तीनों स्थितियों में वस्तु की मांग समान OQ ही रहती है, उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता है। यह मांग की शून्य लोच की स्थिति है।
In simple words: मांग की लोच की पाँच श्रेणियां हैं: पूरी तरह लोचदार (अनंत), लोचदार (1 के बराबर), बहुत लोचदार (1 से अधिक), बेलोचदार (1 से कम), और पूरी तरह बेलोचदार (शून्य)। ये दिखाती हैं कि कीमत बदलने पर मांग में कितना बदलाव आता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक श्रेणी की परिभाषा, लोच का मान (ed = 0, ed = 1, ed > 1 आदि), और संबंधित मांग वक्र का आकार याद रखें। हर एक के साथ एक छोटा उदाहरण दें।
Question 2. मांग की कीमत लोच को मापने की विधियों को समझाइये।
Answer: मांग की कीमत लोच को मापने की निम्नलिखित मुख्य विधियाँ हैं:
1. **आनुपातिक या प्रतिशत विधि (Percentage method):** इस विधि का प्रतिपादन फ्लक्स द्वारा किया गया है। इसमें मांग में होने वाले आनुपातिक या प्रतिशत परिवर्तन को कीमत में आनुपातिक या प्रतिशत परिवर्तन से भाग देकर मांग की लोच निकाली जाती है। यह विधि तब काम आती है जब कीमत और मांग में संख्यात्मक बदलाव पता हो। यह लोच मापने की एक अच्छी विधि है, लेकिन अगर संख्यात्मक माप उपलब्ध न हो तो इसका उपयोग संभव नहीं है।
सूत्र:
\( ed = \frac { मांग \ में \ आनुपातिक \ (प्रतिशत) \ परिवर्तन }{ कीमत \ में \ आनुपातिक \ (प्रतिशत) \ परिवर्तन } \)
या
\( ed = \frac { \Delta Q }{ Q } \div \frac { \Delta P }{ P } \) या \( ed = \frac { \Delta Q }{ \Delta P } \times \frac { P }{ Q } \)
2. **कुल व्यय विधि (Total Expenditure Method):** इस विधि का प्रतिपादन अर्थशास्त्री मार्शल ने किया था। यह मांग की लोच मापने की सबसे सरल विधि है। इसमें कीमत में बदलाव के कारण कुल खर्च में होने वाले परिवर्तन के आधार पर मांग की लोच मापी जाती है। मार्शल के अनुसार, मांग की कीमत लोच तीन प्रकार की होती है:
(i) **इकाई के बराबर (ed = 1):** जब कीमत में बदलाव के बाद भी कुल व्यय पहले जैसा रहता है, तो मांग की लोच इकाई के बराबर होती है।
| वस्तु की कीमत (प्रति किग्रा Rs. में) | मांग की मात्रा (किग्रा में) | कुल व्यय (Rs. में) |
|---|---|---|
| 10 | 20 | 200 |
| 8 | 25 | 200 |
| 4 | 50 | 200 |
इस तालिका से स्पष्ट है कि जब कीमत Rs. 10 प्रति इकाई थी, तो कुल व्यय Rs. 200 था। कीमत कम होकर Rs. 8 और Rs. 4 हो जाती है, तो भी कुल व्यय Rs. 200 ही रहता है। इसलिए मांग की लोच इकाई के बराबर है।
(ii) **इकाई से अधिक (ed > 1):** यदि वस्तु की कीमत में कमी होने से कुल व्यय बढ़ता है, या कीमत में वृद्धि होने पर कुल व्यय घटता है, तो मांग अधिक लोचदार होती है।
| वस्तु की कीमत (प्रति किग्रा Rs. में) | मांग की मात्रा (किग्रा में) | कुल व्यय (Rs. में) |
|---|---|---|
| 10 | 20 | 200 |
| 8 | 35 | 280 |
| 4 | 80 | 320 |
उपरोक्त तालिका से स्पष्ट है कि जैसे-जैसे कीमत घटती जाती है, कुल व्यय बढ़ता जाता है। दूसरे शब्दों में, जैसे-जैसे कीमत बढ़ती जाती है, कुल व्यय घटता जाता है। अतः इस अवस्था में मांग की लोच इकाई से ज्यादा है।
(iii) **इकाई से कम (ed < 1):** यदि वस्तु की कीमत में कमी होने पर कुल व्यय कम हो जाता है, और वस्तु की कीमत बढ़ने पर कुल व्यय बढ़ जाता है, तो मांग की लोच इकाई से कम मानी जाती है।
| वस्तु की कीमत (प्रति किग्रा Rs. में) | मांग की मात्रा (किग्रा में) | कुल व्यय (Rs. में) |
|---|---|---|
| 10 | 20 | 200 |
| 8 | 24 | 192 |
| 4 | 40 | 160 |
इस तालिका से स्पष्ट है कि जैसे-जैसे वस्तु की कीमत में कमी आती है, कुल व्यय की राशि भी घटती जाती है।
3. **ज्यामिति अथवा बिन्दु विधि (Geometric or point method):** इस विधि का उपयोग मांग वक्र के किसी विशेष बिंदु पर मांग की कीमत लोच का पता लगाने के लिए किया जाता है। मांग वक्र के विभिन्न बिंदुओं पर कीमत लोच अलग-अलग होती है। जिस बिंदु पर मांग की लोच ज्ञात करनी हो, उस बिंदु से नीचे के हिस्से और ऊपर के हिस्से की लंबाई की सहायता से लोच ज्ञात की जाती है।
सूत्र:
\( ed = \frac { PB }{ PA } \)
यहाँ \( PB \) = बिंदु से नीचे का हिस्सा, \( PA \) = बिंदु से ऊपर का हिस्सा
यदि दोनों हिस्से बराबर हों, तो मांग की लोच इकाई के बराबर होती है। यदि नीचे का हिस्सा ऊपर के हिस्से से ज्यादा हो, तो मांग की लोच इकाई से ज्यादा होती है, और यदि नीचे का हिस्सा ऊपर के हिस्से से कम हो, तो मांग की लोच इकाई से कम होती है।
इस चित्र में R बिंदु पर मांग की लोच इकाई के बराबर है क्योंकि R बिंदु से नीचे और ऊपर का हिस्सा दोनों बराबर हैं। S बिंदु पर मांग की लोच इकाई से अधिक है क्योंकि S बिंदु से नीचे का हिस्सा ऊपर के हिस्से से ज्यादा है। इसके विपरीत, T बिंदु पर मांग की लोच इकाई से कम होगी क्योंकि नीचे का हिस्सा ऊपर के हिस्से से कम है। यदि मांग वक्र एक सीधी रेखा न होकर वक्र के आकार में होता है, तो जिस बिंदु पर मांग की लोच ज्ञात करनी होती है, उस बिंदु पर स्पर्श रेखा खींचकर उपरोक्त विधि से मांग की लोच ज्ञात कर लेते हैं।
In simple words: मांग की लोच को मापने के तीन तरीके हैं: प्रतिशत विधि (जो कीमत और मांग में प्रतिशत बदलाव देखती है), कुल व्यय विधि (जो कीमत बदलने पर कुल खर्च में बदलाव देखती है), और बिंदु विधि (जो मांग वक्र के किसी खास बिंदु पर लोच निकालती है)।
🎯 Exam Tip: तीनों विधियों के नाम और उनके मूल सिद्धांत को याद रखें। प्रत्येक विधि के लिए एक छोटा उदाहरण या चित्र उपयोगी हो सकता है।
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. आवश्यक आवश्यकता की वस्तुओं की मांग की कीमत लोच होती है।
(अ) इकाई से कम
(ब) इकाई के बराबर
(स) इकाई से अधिक
(द) शून्य
🎯 Exam Tip: आवश्यक वस्तुओं की लोच को समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि वे रोजमर्रा के जीवन के लिए जरूरी हैं।
Question 2. विलासिता की वस्तुओं की मांग की कीमत लोच होती है।
(अ) इकाई के बराबर
(ब) इकाई से कम
(स) इकाई से ज्यादा
(द) अनन्त
🎯 Exam Tip: विलासिता की वस्तुओं की लोच अक्सर उच्च होती है, क्योंकि वे जरूरी नहीं होतीं।
Question 3. यदि किसी वस्तु की कीमत 10 प्रतिशत कम होने पर उसकी मांग 10 इकाई से बढ़कर 14 इकाई हो जाती है तो मांग की लोच होगी –
(अ) 1
(ब) 2
(स) 3
(द) 4
🎯 Exam Tip: मांग की लोच की गणना करते समय प्रतिशत परिवर्तन का सूत्र सही ढंग से लागू करें।
Question 4. यदि किसी वस्तु का मूल्य Rs. 20 प्रति इकाई होने पर उसकी मांग 50 इकाई है जब मूल्य घटकर Rs. 10 प्रति इकाई रह गया तो मांग बढ़कर 100 इकाई हो गई। उसकी मांग की कीमत लोच होगी
(अ) 1
(ब) 2
(स) 2.5
(द) 3
🎯 Exam Tip: संख्यात्मक प्रश्नों में दी गई सभी जानकारी का सही ढंग से उपयोग करें और गणना में सटीकता रखें।
उत्तरमाला:
1. (अ)
2. (स)
3. (द)
4. (ब)
5. (स)
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. कौन-सी मांग की लोच काल्पनिक मानी जाती है?
Answer: पूर्णतया लोचदार एवं पूर्णतया बेलोचदार मांग की स्थितियाँ काल्पनिक मानी जाती हैं। वास्तविक जीवन में ऐसी स्थितियाँ कम ही देखने को मिलती हैं।
In simple words: पूरी तरह लोचदार और पूरी तरह बेलोचदार मांग को असल जिंदगी में नहीं देखा जाता, ये सिर्फ कल्पना में होती हैं।
🎯 Exam Tip: इन दोनों चरम स्थितियों को 'आदर्श' या 'सैद्धांतिक' स्थिति के रूप में याद रखें, न कि वास्तविक।
Question 2. मांग वक्र Y अक्ष के समानान्तर एक लम्बवत् रेखी होने पर मांग की लोच कैसी होती है?
Answer: जब मांग वक्र Y अक्ष के समानान्तर एक लम्बवत् रेखा होती है, तो उस वस्तु की मांग पूर्णतया बेलोचदार होती है। इसका मतलब है कि कीमत में कोई भी बदलाव आने पर मांग में कोई परिवर्तन नहीं होता।
In simple words: अगर मांग वक्र सीधी खड़ी लाइन है, तो इसका मतलब है कि कीमत चाहे जितनी भी बदले, मांग बिल्कुल नहीं बदलेगी।
🎯 Exam Tip: Y-अक्ष के समानांतर मांग वक्र का मतलब है 'ed = 0' (पूर्णतया बेलोचदार मांग)।
Question 3. विलासिता की वस्तुओं की मांग की कीमत लोच कैसी होती है?
Answer: विलासिता की वस्तुओं की मांग अधिक लोचदार होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये वस्तुएँ आवश्यक नहीं होतीं, और इनकी कीमत में थोड़ा सा भी बदलाव आने पर मांग में बड़ा बदलाव आता है। आवश्यक आवश्यकता की वस्तुओं की मांग बेलोचदार होती है।
In simple words: महंगी या शौकिया चीजों की मांग बहुत बदलती है, क्योंकि लोग अपनी मर्जी से उन्हें खरीदते या छोड़ सकते हैं।
🎯 Exam Tip: विलासिता की वस्तुओं की मांग में बदलाव बहुत तेज होता है, जबकि जरूरी चीजों की मांग स्थिर रहती है।
Question 4. मांग की लोच को मापने की कौन-कौन सी विधियाँ हैं?
Answer: मांग की लोच को मापने की तीन प्रमुख विधियाँ हैं –
1. कुल व्यय विधि
2. प्रतिशत या आनुपातिक विधि
3. ज्यामितीय या बिंदु विधि
In simple words: मांग की लोच नापने के तीन मुख्य तरीके हैं: कुल खर्च का तरीका, प्रतिशत वाला तरीका और बिंदु वाला तरीका।
🎯 Exam Tip: तीनों विधियों के नाम याद रखें और संक्षिप्त में बताएं कि प्रत्येक विधि किस आधार पर काम करती है।
Question 6. मांग की कीमत लोच का गुणांक सदैव ऋणात्मक क्यों होता है?
Answer: कीमत एवं वस्तु की मांग में ऋणात्मक सम्बन्ध होने का कारण मांग की कीमत लोच का गुणांक हमेशा ऋणात्मक ही होता है। यह दर्शाता है कि कीमत बढ़ने पर मांग घटती है और कीमत घटने पर मांग बढ़ती है।
In simple words: मांग की लोच का जवाब हमेशा माइनस में आता है क्योंकि कीमत बढ़ती है तो मांग घटती है, और कीमत घटती है तो मांग बढ़ती है।
🎯 Exam Tip: ऋणात्मक चिन्ह कीमत और मांग के बीच विपरीत संबंध को दर्शाता है।
Question 7. लोचदार मांग से क्या आशय है?
Answer: लोचदार मांग उस स्थिति को कहते हैं जबकि वस्तु की मांग में परिवर्तन उसी अनुपात में होता है जिस अनुपात में कीमत में परिवर्तन होता है। इसका मतलब है कि मांग की लोच इकाई के बराबर (ed = 1) होती है।
In simple words: लोचदार मांग तब होती है जब कीमत में जितना बदलाव आता है, मांग में भी ठीक उतना ही बदलाव आता है।
🎯 Exam Tip: लोचदार मांग (ed=1) का अर्थ है कि मांग कीमत के प्रति आनुपातिक रूप से प्रतिक्रिया करती है।
Question 8. मांग की कीमत लोच शून्य कब होती है?
Answer: जब कीमत परिवर्तन के फलस्वरूप मांग में कोई परिवर्तन नहीं होता है, तो मांग की कीमत लोच शून्य होती है। इसे पूर्णतया बेलोचदार मांग भी कहते हैं, और इस स्थिति में मांग वक्र Y-अक्ष के समानान्तर होता है।
In simple words: अगर कीमत बदलने पर भी मांग बिल्कुल नहीं बदलती, तो मांग की लोच शून्य होती है।
🎯 Exam Tip: शून्य लोच का मतलब है कि वस्तु की मांग कीमत के प्रति बिल्कुल संवेदनशील नहीं है।
Question 9. मांग की लोच मापने की ज्यामिति विधि का सूत्र क्या है?
Answer: मांग की लोच मापने की ज्यामिति विधि का सूत्र है:
\( मांग \ की \ कीमत \ लोच = \frac { मांग \ वक्र \ का \ निचला \ हिस्सा }{ मांग \ वक्र \ का \ ऊपरी \ हिस्सा } \)
In simple words: मांग की लोच को ज्यामिति विधि से निकालने के लिए, वक्र के नीचे वाले हिस्से की लंबाई को ऊपर वाले हिस्से की लंबाई से भाग देते हैं।
🎯 Exam Tip: इस सूत्र का उपयोग सीधी रेखा वाले मांग वक्र पर किसी भी बिंदु पर लोच ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
Question 10. यदि कीमत में कमी होने पर कुल व्यय बढ़ता है तथा कीमत में वृद्धि होने पर कुल व्यय घटता है तो मांग की कीमत लोच क्या होगी?
Answer: ऐसी अवस्था में मांग की कीमत लोच इकाई से अधिक होगी। यह स्थिति लोचदार मांग कहलाती है, जहाँ कीमत और कुल व्यय में विपरीत संबंध होता है।
In simple words: जब कीमत घटने पर ज्यादा खर्च होता है और कीमत बढ़ने पर खर्च घटता है, तो मांग की लोच 1 से ज्यादा होती है।
🎯 Exam Tip: कुल व्यय विधि में, कीमत और कुल व्यय के विपरीत संबंध का अर्थ है कि मांग लोचदार है।
Question 11. यदि कीमत घटने पर कुल व्यय घटता है तथा कीमत बढ़ने पर कुल व्यय बढ़ता है तो मांग की कीमत लोच क्या होगी?
Answer: इस अवस्था में मांग की लोच इकाई से कम होगी। यह बेलोचदार मांग कहलाती है, जहाँ कीमत और कुल व्यय में सीधा संबंध होता है।
In simple words: अगर कीमत कम होने पर खर्च भी कम हो और कीमत बढ़ने पर खर्च भी बढ़े, तो मांग की लोच 1 से कम होती है।
🎯 Exam Tip: कुल व्यय विधि में, कीमत और कुल व्यय के समान संबंध का अर्थ है कि मांग बेलोचदार है।
Question 13. मांग की लोच की वास्तविक अवस्थाएँ कौन-कौन सी हैं?
Answer: मांग की लोच की वास्तविक अवस्थाएँ हैं – लोचदार मांग (ed=1), अधिक लोचदार मांग (ed>1) तथा बेलोचदार मांग (ed<1)। पूर्णतया लोचदार और पूर्णतया बेलोचदार मांग काल्पनिक मानी जाती हैं।
In simple words: असल जिंदगी में मांग की लोच तीन तरह की होती है: लोचदार, ज्यादा लोचदार और कम लोचदार।
🎯 Exam Tip: वास्तविक अवस्थाओं में चरम (अनंत या शून्य) लोच शामिल नहीं होती है।
Question 14. मांग की लोच को प्रभावित करने वाले दो घटक बताइए।
Answer: मांग की लोच को प्रभावित करने वाले दो घटक हैं –
1. वस्तु की प्रकृति: आवश्यक वस्तुओं की मांग बेलोचदार होती है, जबकि विलासिता की वस्तुओं की मांग लोचदार होती है।
2. वस्तु के विभिन्न प्रयोग: जिन वस्तुओं के कई उपयोग होते हैं, उनकी मांग लोचदार होती है, जैसे बिजली।
In simple words: किसी चीज की मांग कितनी बदलती है, यह उस चीज की जरूरत और उसके इस्तेमाल के तरीकों पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: इन घटकों को उदाहरणों के साथ याद रखें, जैसे कि जीवन रक्षक दवा बनाम कार।
Question 15. मांग की लोच की गणना की कुल व्यय रीति का प्रतिपादन किसने किया है?
Answer: मांग की लोच की गणना की कुल व्यय रीति का प्रतिपादन अर्थशास्त्री मार्शल द्वारा किया गया है। उन्होंने इस विधि से मांग की लोच को इकाई के बराबर, इकाई से अधिक और इकाई से कम के रूप में समझाया।
In simple words: कुल खर्च वाले तरीके से मांग की लोच निकालने का तरीका अर्थशास्त्री मार्शल ने बताया था।
🎯 Exam Tip: कुल व्यय विधि को विकसित करने वाले अर्थशास्त्री का नाम याद रखें।
Question 16. मांग की लोच का समय से क्या सम्बन्ध है?
Answer: अल्प अवधि में मांग बेलोचदार होती है जबकि दीर्घअवधि में यह लोचदार होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि लंबी अवधि में उपभोक्ता अपनी आदतों और विकल्पों को बदल सकते हैं।
In simple words: कम समय में मांग ज्यादा नहीं बदलती, लेकिन लंबे समय में यह ज्यादा बदल सकती है।
🎯 Exam Tip: समय अवधि एक महत्वपूर्ण कारक है जो उपभोक्ता की प्रतिक्रिया क्षमता को प्रभावित करता है।
Question 17. जिन वस्तुओं के उपभोक्ता आदी हो जाते हैं उनकी मांग की लोच कैसी होती है?
Answer: ऐसी वस्तुओं की मांग बेलोचदार होती है जिनके उपभोक्ता आदी हो जाते हैं। इन वस्तुओं की कीमत में बदलाव का मांग पर ज्यादा असर नहीं पड़ता, क्योंकि लोग इन्हें अपनी आदत के कारण खरीदते रहते हैं।
In simple words: जिन चीजों की आदत लग जाती है, उनकी मांग जल्दी नहीं बदलती, चाहे कीमत कितनी भी हो।
🎯 Exam Tip: आदत वाली वस्तुओं की मांग आमतौर पर बेलोचदार होती है क्योंकि उपभोक्ता इन आदतों को आसानी से नहीं छोड़ पाते।
Question 18. मांग की लोच के गुणांक को मापने का सूत्र लिखिए।
Answer: मांग की लोच के गुणांक को मापने का सूत्र है:
\( ed = \frac { \Delta Q }{ \Delta P } \times \frac { P }{ Q } \)
In simple words: मांग की लोच निकालने के लिए, मांग में बदलाव को कीमत में बदलाव से भाग करके उसे प्रारंभिक कीमत को प्रारंभिक मांग से भाग करके गुणा करते हैं।
🎯 Exam Tip: इस सूत्र को 'बिंदु लोच सूत्र' भी कहते हैं और यह प्रतिशत विधि का एक रूप है।
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 अतिलघु उत्तरात्मक प्रश्न
Question 13. मांग की लोच की वास्तविक अवस्थाएँ कौन-कौन सी हैं?
Answer: मांग की लोच की वास्तविक अवस्थाएँ लोचदार मांग, अधिक लोचदार मांग तथा बेलोचदार मांग हैं। ये तीन प्रकार की स्थितियाँ होती हैं जो बताती हैं कि किसी वस्तु की कीमत में बदलाव होने पर उसकी मांग में कितना परिवर्तन होगा।
In simple words: मांग की लोच की मुख्य तीन स्थितियाँ हैं: लोचदार (elastic), अधिक लोचदार (highly elastic), और बेलोचदार (inelastic).
🎯 Exam Tip: इन तीनों वास्तविक अवस्थाओं के नाम स्पष्ट रूप से लिखें और हो सके तो प्रत्येक को एक वाक्य में परिभाषित करें।
Question 14. मांग की लोच को प्रभावित करने वाले दो घटक बताइए।
Answer:
1. वस्तु की प्रकृति: वस्तु की प्रकृति मांग की लोच को प्रभावित करती है। उदाहरण के लिए, आवश्यक वस्तुओं की मांग बेलोचदार होती है जबकि आरामदायक वस्तुओं की मांग लोचदार होती है।
2. वस्तु के विभिन्न प्रयोग: यदि किसी वस्तु का उपयोग कई कामों में किया जा सकता है, तो उसकी मांग लोचदार होती है। यदि इसके उपयोग सीमित हैं, तो मांग बेलोचदार होगी।
In simple words: वस्तु किस तरह की है (ज़रूरी या आरामदायक) और उसके कितने अलग-अलग उपयोग हैं, ये दो बातें मांग की लोच को बदलती हैं।
🎯 Exam Tip: घटकों के नाम स्पष्ट रूप से लिखें और प्रत्येक के लिए एक छोटा उदाहरण दें ताकि आपका उत्तर पूरा लगे।
Question 15. मांग की लोच की गणना की कुल व्यय रीति का प्रतिपादन किसने किया है?
Answer: मांग की लोच की गणना की कुल व्यय रीति का प्रतिपादन अर्थशास्त्री मार्शल द्वारा किया गया है। उन्होंने इस विधि के ज़रिए मांग की लोच को समझने का एक आसान तरीका दिया।
In simple words: मांग की लोच निकालने की कुल खर्च विधि प्रोफेसर मार्शल ने बताई थी।
🎯 Exam Tip: अर्थशास्त्री का नाम सही से याद रखें और लिखें।
Question 16. मांग की लोच का समय से क्या सम्बन्ध है?
Answer: अल्प अवधि में मांग बेलोचदार होती है जबकि दीर्घअवधि में यह लोचदार होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लम्बे समय में उपभोक्ता अपनी खपत की आदतों को बदल सकते हैं।
In simple words: कम समय में मांग ज़्यादा नहीं बदलती (बेलोचदार), लेकिन लम्बे समय में यह आसानी से बदल जाती है (लोचदार)।
🎯 Exam Tip: अल्प अवधि और दीर्घ अवधि के बीच के अंतर को स्पष्ट करें, खासकर उपभोक्ता के व्यवहार के संबंध में।
Question 17. जिन वस्तुओं के उपभोक्ता आदी हो जाते हैं उनकी मांग की लोच कैसी होती है?
Answer: ऐसी वस्तुओं की मांग बेलोचदार होती है जिनके उपभोक्ता आदी हो जाते हैं। इसका मतलब है कि कीमत में बदलाव होने पर भी लोग इन वस्तुओं की खरीद में ज़्यादा कमी नहीं करते।
In simple words: जिन चीज़ों की हमें आदत पड़ जाती है, उनकी मांग कीमत बदलने पर भी ज़्यादा नहीं बदलती, यानी वे बेलोचदार होती हैं।
🎯 Exam Tip: यह अवधारणा स्पष्ट करें कि आदतें मांग की संवेदनशीलता को कैसे कम करती हैं।
Question 18. मांग की लोच के गुणांक को मापने का सूत्र लिखिए।
Answer: मांग की लोच के गुणांक को मापने का सूत्र है:
\( ed = \frac { \Delta Q }{ \Delta P } \times \frac { P }{ Q } \)
यहां \( \Delta Q \) मांग में परिवर्तन को दर्शाता है, \( \Delta P \) कीमत में परिवर्तन को दर्शाता है, \( P \) प्रारंभिक कीमत है, और \( Q \) प्रारंभिक मांग मात्रा है।
In simple words: मांग में बदलाव को कीमत में बदलाव से गुणा करके शुरुआती कीमत को शुरुआती मांग से भाग देने पर मांग की लोच का सूत्र मिलता है।
🎯 Exam Tip: सूत्र को सही ढंग से लिखें और प्रत्येक प्रतीक का अर्थ स्पष्ट करें ताकि कोई भ्रम न रहे।
Question 20. मार्शल के अनुसार मांग की कीमत लोच के प्रकार बताइए।
Answer: मार्शल के अनुसार मांग की कीमत लोच तीन प्रकार की होती है:
1. लोचदार मांग
2. ऐकिक मांग की लोच
3. बेलोचदार मांग
In simple words: मार्शल ने मांग की लोच को तीन मुख्य भागों में बांटा है: लोचदार, ऐकिक लोचदार और बेलोचदार।
🎯 Exam Tip: मार्शल द्वारा दिए गए मांग की लोच के प्रकारों को सूचीबद्ध करें।
Question 21. क्या एक मांग वक्र के विभिन्न बिन्दुओं पर मांग की लोच समान होती है?
Answer: नहीं, एक मांग वक्र के विभिन्न बिन्दुओं पर मांग की लोच अलग-अलग होती है। वक्र के हर बिंदु पर कीमत और मात्रा का संबंध अलग होता है, इसलिए लोच भी भिन्न होती है।
In simple words: एक ही मांग वक्र पर हर जगह मांग की लोच एक जैसी नहीं होती; यह अलग-अलग बिंदुओं पर बदलती रहती है।
🎯 Exam Tip: स्पष्ट रूप से बताएं कि मांग की लोच वक्र के विभिन्न बिंदुओं पर क्यों भिन्न होती है, जिसमें कीमत और मात्रा के अनुपात का जिक्र हो।
Question 22. यदि मांग रेखा सीधी न होकर वक्र के आकार की हो तो बिन्दु रीति से मांग की लोच कैसे ज्ञात करते हैं?
Answer: यदि मांग रेखा सीधी न होकर वक्र के आकार की होती है, तो बिंदु रीति से मांग की लोच ज्ञात करने के लिए जिस बिंदु पर मांग की लोच जाननी है, उस बिंदु पर एक स्पर्श रेखा खींची जाती है। फिर उस स्पर्श रेखा के ऊपर और नीचे के हिस्से को देखकर मांग की लोच का पता लगाया जाता है।
In simple words: जब मांग का ग्राफ मुड़ा हुआ हो, तो जिस बिंदु पर लोच जाननी है, वहां एक सीधी लाइन (स्पर्श रेखा) खींचकर लोच पता की जाती है।
🎯 Exam Tip: यह बताएं कि स्पर्श रेखा का उपयोग कैसे किया जाता है और यह वक्र मांग को मापने में कैसे मदद करती है।
Question 23. धनी लोगों के लिए वस्तुओं की मांग की लोच कैसी होती है?
Answer: धनी लोगों के लिए वस्तुओं की मांग प्रायः बेलोचदार होती है। इसका कारण यह है कि उनकी आय ज़्यादा होती है, इसलिए कीमत में बदलाव का उनकी खरीद पर कम प्रभाव पड़ता है।
In simple words: अमीर लोगों के लिए चीज़ों की मांग ज़्यादा नहीं बदलती, भले ही उनकी कीमतें बदलें, यानी वह बेलोचदार होती है।
🎯 Exam Tip: धनी वर्ग की मांग व्यवहार पर आय के प्रभाव को स्पष्ट करें।
Question 24. निर्धन लोगों के लिए वस्तुओं की मांग की लोच कैसी होती है?
Answer: निर्धन लोगों के लिए वस्तुओं की मांग प्रायः लोचदार होती है। उनकी आय सीमित होती है, इसलिए कीमत में छोटा सा बदलाव भी उनकी खरीद को काफी प्रभावित कर सकता है।
In simple words: गरीब लोगों के लिए चीज़ों की मांग बहुत बदलती है जब कीमतें बदलती हैं, यानी वह लोचदार होती है।
🎯 Exam Tip: निर्धन वर्ग की मांग व्यवहार पर आय के प्रभाव को स्पष्ट करें।
Question 25. हीरे जवाहरात की मांग की लोच कैसी होती है?
Answer: हीरे-जवाहरात विलासिता की वस्तुएँ हैं। अतः इनकी मांग अधिक लोचदार होती है। इसका मतलब है कि इनकी कीमत में थोड़ा सा बदलाव होने पर भी इनकी मांग में बड़ा परिवर्तन आता है।
In simple words: हीरे और गहने विलासिता की चीज़ें हैं, इसलिए उनकी मांग बहुत लोचदार होती है, यानी कीमत बदलने पर लोग उन्हें कम या ज़्यादा खरीदते हैं।
🎯 Exam Tip: विलासिता की वस्तुओं और उनकी अधिक लोचदार मांग के संबंध को समझाइए।
Question 2. मांग की लोच ऋणात्मक क्यों होती है?
Answer: मांग की लोच ऋणात्मक होती है क्योंकि कीमत बढ़ने पर मांग घटती है और कीमत घटने पर मांग बढ़ती है। इसका मतलब है कि मांग और कीमत के परिवर्तन हमेशा एक-दूसरे की विपरीत दिशा में होते हैं। इस विपरीत संबंध के कारण ही मांग की लोच का गुणांक ऋणात्मक होता है।
In simple words: मांग की लोच माइनस में होती है क्योंकि जब दाम बढ़ते हैं, तो लोग कम खरीदते हैं, और जब दाम घटते हैं, तो ज़्यादा खरीदते हैं, यानी ये उल्टी दिशा में चलते हैं।
🎯 Exam Tip: कीमत और मांग के बीच के व्युत्क्रम संबंध को स्पष्ट करें और बताएं कि यह ऋणात्मक गुणांक का कारण क्यों है।
Question 3. मांग की लोच की श्रेणियों के नाम लिखिए।
Answer: मांग की लोच की पाँच श्रेणियाँ हैं:
1. पूर्णतया लोचदार \( (ed = \infty) \)
2. लोचदार \( (ed > 1) \)
3. इकाई के बराबर लोचदार \( (ed = 1) \)
4. बेलोचदार \( (ed < 1) \)
5. शून्य लोचदार \( (ed = 0) \)
In simple words: मांग की लोच पांच तरह की होती है: पूरी तरह लोचदार, लोचदार, इकाई के बराबर, बेलोचदार और शून्य लोचदार।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक श्रेणी का नाम उसके संबंधित \( ed \) मान के साथ सही ढंग से लिखें।
Question 4. पूर्णतया लोचदार मांग से क्या आशय है?
Answer: पूर्णतया लोचदार मांग वह स्थिति है जिसमें प्रचलित कीमतों पर किसी वस्तु की मांग अनंत होती है। इसका मतलब है कि कीमतों के स्थिर रहने पर भी मांग की मात्रा में कमी या वृद्धि हो सकती है, और कीमत में बहुत कम वृद्धि होने पर भी मांग शून्य हो सकती है। यह एक काल्पनिक स्थिति है जो वास्तविक जीवन में आमतौर पर देखने को नहीं मिलती।
In simple words: पूरी तरह लोचदार मांग तब होती है जब कीमत में मामूली बदलाव से भी मांग बहुत ज़्यादा बदल जाती है, या तो बहुत बढ़ जाती है या पूरी तरह ख़त्म हो जाती है। यह बस एक कल्पना है।
🎯 Exam Tip: 'अनंत' मांग के विचार को स्पष्ट करें और बताएं कि यह एक सैद्धांतिक अवधारणा क्यों है।
Question 5. सापेक्षतया लोचदार मांग क्या है?
अथवा
मांग की लोच एक से अधिक कब होती है?
Answer: सापेक्षतया लोचदार मांग तब होती है जब कीमत में आनुपातिक परिवर्तन की तुलना में मांग में आनुपातिक परिवर्तन अधिक होता है। इसका मतलब है कि कीमत में थोड़ा सा बदलाव होने पर भी मांग में बड़ा बदलाव आता है। इस स्थिति को लोचदार मांग भी कहते हैं।
In simple words: सापेक्ष लोचदार मांग तब होती है जब कीमत में बदलाव से ज़्यादा असर मांग पर पड़ता है। इसे लोचदार मांग भी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: यह स्पष्ट करें कि सापेक्ष लोचदार मांग में मांग परिवर्तन का प्रतिशत कीमत परिवर्तन के प्रतिशत से अधिक क्यों होता है।
Question 7. आयताकार अतिपरवलय वक्र क्या है?
Answer: आयताकार अतिपरवलय वक्र वह वक्र होता है जिसके नीचे खींचे गए सभी आयतों का क्षेत्रफल समान होता है। जब मांग की लोच इकाई के बराबर होती है, तब मांग वक्र आयताकार अतिपरवलय (Rectangular hyperbola) होता है।
In simple words: आयताकार अतिपरवलय एक ऐसा मांग वक्र है जिसके नीचे बने सभी आयतों का आकार एक जैसा होता है, और यह तब बनता है जब मांग की लोच एक के बराबर होती है।
🎯 Exam Tip: आयताकार अतिपरवलय की मुख्य विशेषता (समान क्षेत्रफल) और उसके मांग की लोच से संबंध को समझाएं।
Question 8. इकाई से कम लोचदार मांग अथवा बेलोचदार मांग की लोच क्या है?
Answer: इकाई से कम लोचदार मांग (या बेलोचदार मांग) वह स्थिति है जब कीमत में आनुपातिक परिवर्तन की तुलना में मांग में आनुपातिक परिवर्तन कम होता है। इसका मतलब है कि कीमत में बड़ा बदलाव होने पर भी मांग में छोटा बदलाव आता है।
In simple words: बेलोचदार मांग तब होती है जब कीमत बदलने पर भी मांग ज़्यादा नहीं बदलती।
🎯 Exam Tip: बेलोचदार मांग की विशेषता को स्पष्ट करें, खासकर मांग में परिवर्तन के छोटे प्रतिशत के संबंध में।
Question 9. शून्य लोच क्या है? इस स्थिति में मांग वक्र की स्थिति कैसी होती है?
Answer: शून्य लोच तब होती है जब कीमत में परिवर्तन होने पर भी मांग में कोई परिवर्तन नहीं होता है। इस स्थिति में मांग वक्र Y-अक्ष के समानांतर एक सीधी खड़ी रेखा होती है।
In simple words: शून्य लोच का मतलब है कि कीमत कितनी भी बदल जाए, मांग उतनी ही रहती है। इसमें मांग का ग्राफ सीधा खड़ा होता है।
🎯 Exam Tip: शून्य लोच की परिभाषा और मांग वक्र के आकार के बीच के संबंध को स्पष्ट करें।
Question 10. मार्शल के अनुसार लोचदार मांग से क्या आशय है?
Answer: मार्शल के अनुसार, लोचदार मांग वह स्थिति है जब कीमत में थोड़ी सी कमी करने से कुल खर्च बढ़ता है या कीमत को थोड़ा सा बढ़ाने पर कुल खर्च घटता है। इसका मतलब है कि कीमत में बदलाव कुल व्यय को प्रभावित करता है।
In simple words: मार्शल के अनुसार, लोचदार मांग तब होती है जब कीमत थोड़ी कम होने पर कुल खर्च बढ़ जाए या कीमत थोड़ी बढ़ जाए तो कुल खर्च घट जाए।
🎯 Exam Tip: मार्शल की लोचदार मांग की परिभाषा में कुल खर्च के बदलाव को सही ढंग से जोड़ें।
Question 11. मार्शल के अनुसार ऐकिक मांग की लोच क्या है?
Answer: मार्शल के अनुसार, ऐकिक मांग की लोच तब होती है जब कीमत में थोड़ा सा परिवर्तन करने पर कुल खर्च अपरिवर्तित रहता है। इसका मतलब है कि कीमत बदलने पर भी कुल व्यय उतना ही रहता है।
In simple words: मार्शल कहते हैं कि ऐकिक मांग लोच तब होती है जब कीमत बदलने पर भी कुल खर्च (कुल पैसा जो खर्च होता है) उतना ही रहे।
🎯 Exam Tip: ऐकिक मांग लोच को परिभाषित करते समय 'कुल खर्च अपरिवर्तित' बिंदु पर ज़ोर दें।
Question 12. मार्शल के अनुसार बेलोचदार मांग से क्या आशय है?
Answer: मार्शल के अनुसार, बेलोचदार मांग तब होती है जब कीमत में कमी होने पर कुल व्यय घट जाता है और कीमत बढ़ने पर कुल व्यय बढ़ जाता है। इसका मतलब है कि कीमत और कुल व्यय एक ही दिशा में बदलते हैं।
In simple words: मार्शल के अनुसार, बेलोचदार मांग तब होती है जब कीमत घटने पर कुल खर्च घट जाए या कीमत बढ़ने पर कुल खर्च बढ़ जाए।
🎯 Exam Tip: बेलोचदार मांग की परिभाषा में कीमत और कुल खर्च के बीच सीधे संबंध को स्पष्ट करें।
Question 14. गेहूँ की मांग की लोच किस श्रेणी की है? कारण सहित बताइए।
Answer: गेहूँ की मांग बेलोचदार होती है। इसका कारण यह है कि गेहूँ एक आवश्यक वस्तु है जिसका उपभोग कीमत में बदलाव होने पर भी कम या ज़्यादा करना संभव नहीं होता है। कीमत परिवर्तन का इसकी मांग पर बहुत कम प्रभाव पड़ता है।
In simple words: गेहूँ की मांग बेलोचदार है क्योंकि यह एक ज़रूरी चीज़ है, इसलिए इसकी कीमत बदलने पर भी लोग लगभग उतनी ही मात्रा में खरीदते हैं।
🎯 Exam Tip: बताएं कि आवश्यक वस्तुओं की मांग आमतौर पर बेलोचदार क्यों होती है, जिसमें उदाहरण के साथ समझाएं।
Question 15. कार की मांग की लोच किस श्रेणी में आती है? बताइए।
Answer: कार एक विलासिता की वस्तु है, अतः इसकी मांग अधिक लोचदार होती है। कीमत बढ़ने पर कई उपभोक्ता इसका उपयोग करना बंद कर देते हैं या कम कर देते हैं, जिससे इसकी मांग में काफी कमी आ जाती है।
In simple words: कार की मांग ज़्यादा लोचदार होती है क्योंकि यह विलासिता की चीज़ है, और दाम बढ़ने पर लोग इसे खरीदना कम कर देते हैं।
🎯 Exam Tip: विलासिता की वस्तुओं और उनकी अधिक लोचदार मांग के संबंध को स्पष्ट करें।
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 लघु उत्तरीय प्रश्न (SA-II)
Question 1. मांग की लोच से क्या आशय है? समझाइए।
Answer: मांग की लोच का मतलब है कि वस्तु की कीमत में बदलाव होने पर उसकी मांग में कितना परिवर्तन होता है। यह वस्तु की कीमत और उसकी मांग के बीच के मात्रात्मक संबंध को बताती है। अर्थशास्त्री केयर्न क्रॉस के अनुसार, मांग की लोच वह दर है जिस पर कीमत बदलने से खरीदी जाने वाली मात्रा बदलती है। यह दिखाता है कि उपभोक्ता कीमत के प्रति कितने संवेदनशील हैं।
In simple words: मांग की लोच बताती है कि जब किसी चीज़ का दाम बदलता है, तो लोग उसे कितना कम या ज़्यादा खरीदते हैं।
🎯 Exam Tip: मांग की लोच की स्पष्ट परिभाषा दें और एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री के उद्धरण का उपयोग करें, यदि संभव हो, तो अपने उत्तर को मज़बूत करें।
Question 2. बेलोचदार मांग से क्या आशय है?
Answer: बेलोचदार मांग वह स्थिति है जब वस्तु की मांग में आनुपातिक परिवर्तन, कीमत में आनुपातिक परिवर्तन से कम होता है। इसका मतलब है कि कीमत में बड़ा बदलाव होने पर भी मांग में बहुत छोटा बदलाव आता है। यह निम्न चित्र से स्पष्ट है:
चित्र से स्पष्ट है कि कीमत में परिवर्तन \( PP_1 \) के बराबर हुआ है, लेकिन मांग में परिवर्तन उससे कम \( QQ_1 \) के बराबर ही हुआ है। यह बेलोचदार मांग की स्थिति है।
In simple words: बेलोचदार मांग का मतलब है कि जब कीमत में बहुत बड़ा बदलाव होता है, तब भी लोग उस चीज़ को लगभग उतना ही खरीदते हैं (मांग में कम बदलाव आता है)।
🎯 Exam Tip: बेलोचदार मांग की परिभाषा दें और रेखाचित्र के साथ समझाएं कि कीमत में बड़े बदलाव के बावजूद मांग में छोटा बदलाव कैसे होता है।
Question 3. अधिक लोचदार मांग क्या होती है?
Answer: अधिक लोचदार मांग तब होती है जब किसी वस्तु की मांग में आनुपातिक परिवर्तन, कीमत में आनुपातिक परिवर्तन से ज़्यादा होता है। इसका मतलब है कि कीमत में थोड़ा सा बदलाव होने पर भी मांग में बड़ा बदलाव आता है। यह निम्नलिखित चित्र से स्पष्ट है:
चित्र से स्पष्ट है कि कीमत में परिवर्तन \( PP_1 \) से वस्तु की मांग में परिवर्तन \( QQ_1 \) ज़्यादा है। अतः वस्तु की मांग अधिक लोचदार है।
In simple words: अधिक लोचदार मांग का मतलब है कि जब किसी चीज़ का दाम थोड़ा सा बदलता है, तो लोग उसे बहुत ज़्यादा या बहुत कम खरीदने लगते हैं।
🎯 Exam Tip: अधिक लोचदार मांग को परिभाषा और रेखाचित्र के साथ समझाएं, यह दिखाते हुए कि मांग में परिवर्तन का प्रतिशत कीमत में परिवर्तन के प्रतिशत से ज़्यादा होता है।
Question 4. पूर्णतया लोचदार मांग से क्या आशय है?
Answer: पूर्णतया लोचदार मांग (Perfectly elastic demand) [ed = \( \infty \)] - पूर्णतया लोचदार मांग की अवस्था वह होती है जिसमें वस्तु की प्रचलित कीमतों पर मांग अनंत होती है। इस अवस्था में कीमत में थोड़ी सी वृद्धि भी मांग को शून्य कर देती है, और कीमत में कमी मांग को अनंत तक बढ़ा देती है। यह एक काल्पनिक स्थिति है जो वास्तविक जीवन में आमतौर पर देखने को नहीं मिलती है। इस अवस्था में एक फर्म का मांग वक्र पूरी तरह लोचदार होता है और वह आधार रेखा के समानांतर होता है जैसा कि निम्न चित्र से स्पष्ट है:
चित्र से स्पष्ट है कि OP कीमत पर वस्तु की मात्रा कुछ भी हो सकती है, जैसे – OQ, \( OQ_1 \) या \( OQ_2 \) या इससे कुछ भिन्न।
मांग की मात्रा जैसे \( OQ, OQ_1 \) या \( OQ_2 \) या इससे कुछ भिन्न।
In simple words: पूरी तरह लोचदार मांग तब होती है जब एक ही कीमत पर लोग किसी चीज़ को कितना भी ज़्यादा या कम खरीद सकते हैं। कीमत में ज़रा सा बदलाव भी मांग को पूरी तरह बदल देता है।
🎯 Exam Tip: पूर्णतया लोचदार मांग की परिभाषा दें, यह बताएं कि यह एक काल्पनिक स्थिति क्यों है, और इसके समानांतर मांग वक्र का रेखाचित्र बनाएं।
Question 5. इकाई के बराबर लोच अथवा लोचदार मांग से क्या आशय है?
Answer: लोचदार मांग (Elastic Demand) [ed = 1] - लोचदार मांग की स्थिति तब होती है जब मांग में आनुपातिक परिवर्तन कीमत में आनुपातिक परिवर्तन के बराबर होता है। इस अवस्था में मांग की लोच इकाई के बराबर होती है। उदाहरण के लिए, यदि कीमत में 20 प्रतिशत वृद्धि होने पर मांग में 20 प्रतिशत कमी हो जाए तो किसी वस्तु की ऐसी मांग लोचदार मांग कहलायेगी। यह स्थिति निम्न चित्र में दर्शायी गई है:
चित्र को देखने से स्पष्ट है कि OP कीमत पर मांग OQ है। जब कीमत बढ़कर \( OP_1 \) हो जाती है तो वस्तु की मांग घटकर \( OQ_1 \) रह जाती है। चित्र में कीमत में परिवर्तन \( PP_1 \) मांग में परिवर्तन \( OQ_1 \) के बराबर है। अतः मांग में कमी उसी अनुपात में है जिस अनुपात में कीमत में वृद्धि हुई है। प्रायः आरामदायक वस्तुओं की मांग लोचदार होती है।
In simple words: इकाई लोचदार मांग तब होती है जब कीमत में जितना बदलाव होता है, मांग में भी ठीक उतना ही बदलाव होता है, जैसे 20% कीमत बदलने पर 20% मांग बदल जाए।
🎯 Exam Tip: इकाई लोचदार मांग की परिभाषा दें, यह बताएं कि मांग और कीमत में प्रतिशत परिवर्तन समान क्यों होता है, और एक रेखाचित्र बनाएं जो इसे दर्शाता हो।
Question 7. मांग की कीमत लोच के मापन की ज्यामिति विधि (बिंदु रीति वक्र) का संक्षेप में वर्णन कीजिए?
Answer: बिंदु रीति या ज्यामिति विधि का प्रयोग मांग वक्र के किसी बिंदु पर मांग की कीमत लोच का पता लगाने के लिए किया जाता है। मांग वक्र के विभिन्न बिंदुओं पर कीमत लोच बराबर नहीं होती है, वह अलग-अलग होती है। जिस बिंदु पर मांग की लोच ज्ञात करनी होती है, उस बिंदु से ऊपर के हिस्से तथा नीचे के हिस्से की सहायता से मांग की लोच निम्न सूत्र द्वारा ज्ञात की जाती है:
\( ed = \frac { PB }{ PA } \)
यहां \( PB \) = बिंदु से नीचे का हिस्सा, और \( PA \) = बिंदु से ऊपर का हिस्सा।
यदि दोनों हिस्से बराबर होते हैं तो मांग की लोच इकाई के बराबर होती है। यदि नीचे का हिस्सा ऊपर के हिस्से से ज़्यादा होता है तो मांग की लोच इकाई से ज़्यादा होती है तथा नीचे का हिस्सा ऊपर के हिस्से से कम होने पर मांग की लोच इकाई से कम होती है। इन तीनों स्थितियों को रेखाचित्र में दिखाया गया है:
इस चित्र में R बिंदु पर मांग की लोच इकाई के बराबर है क्योंकि R बिंदु से नीचे का हिस्सा तथा ऊपर का हिस्सा दोनों बराबर हैं। S बिंदु पर मांग की कीमत इकाई से अधिक है क्योंकि S बिंदु से नीचे का हिस्सा ऊपर के हिस्से से ज़्यादा है। इसके विपरीत T बिंदु पर मांग की लोच इकाई से कम होगी क्योंकि नीचे का हिस्सा ऊपर के हिस्से से कम है। यदि मांग वक्र एक सीधी रेखा न होकर वक्र की आकृति में होती है तो जिस बिंदु पर मांग की मात्रा पर मांग की लोच ज्ञात करनी होती है, उस बिंदु से स्पर्श रेखा खींच कर उपरोक्त विधि से मांग की लोच ज्ञात कर लेते हैं।
In simple words: ज्यामिति विधि में मांग वक्र पर किसी भी बिंदु पर लोच जानने के लिए, उस बिंदु से नीचे और ऊपर के हिस्से की लंबाई को मापकर एक सूत्र का उपयोग करते हैं।
🎯 Exam Tip: बिंदु रीति का सूत्र याद रखें और रेखाचित्र पर विभिन्न लोच बिंदुओं को स्पष्ट रूप से लेबल करें।
Question 8. मांग की लोच मापने की आनुपातिक विधि क्या है? समझाइए।
Answer: मांग की आनुपातिक विधि से मांग की लोच ज्ञात करने के लिए मांग में होने वाले आनुपातिक परिवर्तन को, कीमत में होने वाले आनुपातिक परिवर्तन द्वारा भाग दिया जाता है। इस विधि से मांग की लोच का एक निश्चित माप संभव होता है। इसे सूत्र रूप में निम्न प्रकार व्यक्त किया जाता है:
\( ed = \frac { \text{मांग मात्रा में आनुपातिक परिवर्तन} }{ \text{कीमत में आनुपातिक परिवर्तन} } \)
\( \implies ed = \frac { \text{मांग में परिवर्तन / प्रारम्भिक मांग} }{ \text{कीमत में परिवर्तन / प्रारम्भिक कीमत} } \)
\( \implies ed = \frac { \Delta Q }{ Q } \times \frac { P }{ \Delta P } \)
यहां \( \Delta Q \) मांग में परिवर्तन, \( Q \) प्रारंभिक मांग मात्रा, \( \Delta P \) कीमत में परिवर्तन और \( P \) प्रारंभिक कीमत है।
In simple words: इस विधि में मांग में हुए प्रतिशत बदलाव को कीमत में हुए प्रतिशत बदलाव से भाग देकर मांग की लोच निकालते हैं।
🎯 Exam Tip: आनुपातिक विधि का सूत्र और प्रत्येक प्रतीक का अर्थ सही ढंग से लिखें।
Question 9. मांग की लोच पर स्थानापन्न वस्तुओं का क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: जिन वस्तुओं की निकट की स्थानापन्न वस्तुएँ होती हैं, उनकी मांग ज़्यादा लोचदार होती है। उदाहरण के लिए, चाय और कॉफी की मांग लोचदार होती है क्योंकि एक वस्तु के मूल्य में वृद्धि होने पर उपभोक्ता दूसरी वस्तु का ज़्यादा प्रयोग करने लगते हैं, जिससे पहली वस्तु की मांग गिर जाती है। अगर कोई स्थानापन्न वस्तु नहीं है, तो मांग बेलोचदार होती है।
In simple words: अगर किसी चीज़ की जगह कोई दूसरी चीज़ इस्तेमाल की जा सकती है, तो उसकी मांग लोचदार होगी क्योंकि दाम बढ़ने पर लोग दूसरी चीज़ खरीदने लगेंगे।
🎯 Exam Tip: स्थानापन्न वस्तुओं की उपलब्धता और मांग की लोच के बीच सीधा संबंध समझाएं, एक उदाहरण के साथ।
Question 10. कुल व्यय रीति से मांग की लोच किस प्रकार ज्ञात की जाती है?
Answer: कुल व्यय रीति से मांग की लोच ज्ञात करने के लिए कीमत में परिवर्तन के बाद कुल व्यय में होने वाले बदलाव को देखा जाता है। इसकी तीन स्थितियाँ होती हैं:
1. यदि कीमत परिवर्तन से कुल व्यय अपरिवर्तित रहता है तो मांग की लोच इकाई के बराबर होती है।
2. यदि कीमत में कमी से कुल व्यय बढ़ता है तथा कीमत बढ़ने से कुल व्यय घटता है तो मांग की लोच इकाई से अधिक होती है।
3. यदि कीमत में कमी से कुल व्यय घटता है तथा कीमत बढ़ने से कुल व्यय बढ़ता है तो मांग की लोच इकाई से कम होती है।
In simple words: कुल खर्च की विधि से मांग की लोच निकालने के लिए यह देखते हैं कि कीमत बदलने पर लोगों का कुल खर्च बढ़ता है, घटता है या उतना ही रहता है।
🎯 Exam Tip: कुल व्यय विधि की तीनों स्थितियों को स्पष्ट रूप से बताएं और प्रत्येक के साथ लोच के प्रकार को जोड़ें।
Question 11. वस्तु की प्रकृति तथा उपभोक्ता की आदत मांग की लोच को कैसे प्रभावित करते हैं?
Answer:
1. वस्तु की प्रकृति - आवश्यक वस्तुओं (जैसे-दवा, अनाज) की मांग बेलोचदार होती है क्योंकि कीमत बढ़ने पर भी उपभोक्ता इनकी मांग में ज़्यादा कमी नहीं कर पाते हैं। आरामदायक वस्तुओं की मांग लोचदार होती है क्योंकि इनकी मांग में कीमत में परिवर्तन के अनुपात में परिवर्तन हो जाते हैं। विलासिता की वस्तुओं की मांग अधिक लोचदार होती है क्योंकि इनकी मांग में गिरावट कीमत में वृद्धि से ज़्यादा होती है।
2. उपभोक्ता की आदत - जिन वस्तुओं के उपभोक्ता आदी हो जाते हैं, उनकी मांग बेलोचदार होती है, जैसे सिगरेट, बीड़ी आदि। इन वस्तुओं की मांग कीमत में बदलाव से ज़्यादा प्रभावित नहीं होती है।
In simple words: कोई चीज़ कितनी ज़रूरी है और उसकी हमें आदत है या नहीं, ये दो बातें बताती हैं कि उसकी मांग कीमत बदलने पर कितनी बदलेगी।
🎯 Exam Tip: वस्तु की प्रकृति (आवश्यक, आरामदायक, विलासिता) और उपभोक्ता की आदत के प्रभावों को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें।
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. मांग की कीमत लोच को परिभाषित कीजिए तथा मांग के नियम एवं मांग की लोच में क्या अंतर है?
Answer: मांग की कीमत लोच की परिभाषा- अर्थशास्त्र में मांग की कीमत लोच का आशय वस्तु की कीमत में होने वाले परिवर्तन के फलस्वरूप उस वस्तु की मांगी जाने वाली मात्रा में परिवर्तन से लगाया जाता है। यह वस्तु की कीमत एवं उसकी मांगी जाने वाली मात्रा के बीच के मात्रात्मक संबंध को व्यक्त करती है।
मांग की लोच की प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं:
1. प्रो. ईस्थम के शब्दों में, "मांग की लोच', कीमत में होने वाले परिवर्तनों के फलस्वरूप मांग की मात्रा में होने वाले परिवर्तन की एक माप है।"
2. प्रो. केयर्न क्रॉस के अनुसार, “किसी वस्तु की मांग की लोच वह दर है जिस पर खरीदी जाने वाली मात्रा कीमत परिवर्तनों के परिणामस्वरूप बदलती है।"
3. मार्शल के अनुसार, “बाजार में मांग की लोच को कम या अधिक होना इस बात पर निर्भर करता है कि एक निश्चित मात्रा में कीमत के घट जाने पर मांग की मात्रा में अधिक वृद्धि होती है या कम तथा एक निश्चित मात्रा में कीमत के बढ़ जाने पर मांग की मात्रा में अधिक कमी आती है या कम।”
मांग का नियम यह बताता है कि कीमत घटने पर मांग बढ़ेगी तथा कीमत बढ़ने पर मांग घटेगी, लेकिन कितनी बढ़ेगी या घटेगी, यह नहीं बताता है। मांग की लोच की व्याख्या मांग के नियम की इसी कमी को दूर करती है। मांग की लोच कीमत एवं मांग के बीच परिवर्तन का मात्रात्मक माप है।
In simple words: मांग की लोच बताती है कि दाम बदलने पर कोई चीज़ कितनी ज़्यादा या कम खरीदी जाएगी। मांग का नियम सिर्फ़ यह बताता है कि दाम बदलने पर मांग बदलेगी, लेकिन कितना बदलेगी, यह नहीं बताता।
🎯 Exam Tip: मांग की लोच और मांग के नियम की परिभाषाएं स्पष्ट करें, फिर उनके बीच के मुख्य अंतर (दिशा बनाम मात्रा) को रेखांकित करें।
Question 2. उदाहरण की सहायता से समझाइए कि किन परिस्थितियों में (1) मांग की प्रतिशत विधि, (2) मांग की ज्यामिति विधि काम में ली जाती है?
Answer:
1. मांग की प्रतिशत विधि- मांग की प्रतिशत विधि के द्वारा मांग की लोच का एक निश्चित मापन संभव होता है। इस विधि का प्रयोग तभी किया जा सकता है जबकि कीमत एवं मांग में परिवर्तन की संख्यात्मक माप ज्ञात हो। मांग की लोच को मापने की यह एक श्रेष्ठ विधि है, लेकिन संख्यात्मक माप उपलब्ध न होने पर इसका प्रयोग संभव नहीं है। उदाहरण के लिए निम्न संख्यात्मक तथ्यों के आधार पर इस विधि से मांग की लोच की गणना आसानी से की जा सकती है:
प्रारंभिक कीमत = Rs 10 (P), नई कीमत = Rs 12 (\( P_1 \)), प्रारंभिक मांग = 500 इकाई (Q), नई मांग = 400 इकाइयाँ (\( Q_1 \))
सूत्र- \( ed = \frac { \Delta Q }{ \Delta P } \times \frac { P }{ Q } = \frac { (400 - 500) }{ (12 - 10) } \times \frac { 10 }{ 500 } \)
\( \implies ed = \frac { -100 }{ 2 } \times \frac { 10 }{ 500 } \)
\( \implies ed = -50 \times \frac { 1 }{ 50 } \)
\( \implies ed = -1 \)
मांग की लोच इकाई के बराबर है।
2. मांग की ज्यामिति विधि - जब मांग वक्र दिया होता है तथा उस मांग वक्र के किसी बिंदु पर मांग की लोच ज्ञात करनी होती है, तब ज्यामिति विधि का प्रयोग करके मांग की लोच ज्ञात की जा सकती है। इसे निम्न उदाहरण द्वारा स्पष्ट किया गया है:
मांग रेखा पर मांग की लोच जानने के लिए निम्न सूत्र का प्रयोग करते हैं:
\( ed = \frac { \text{बिंदु से नीचे की दूरी (निचला हिस्सा)} }{ \text{बिंदु से ऊपर की दूरी (ऊपर का हिस्सा)} } \)
A बिंदु पर \( ed = \frac { AS }{ AR } \) = यहां \( AS \) की दूरी ज़्यादा है \( AR \) से अतः मांग की लोच इकाई से अधिक है।
B बिंदु पर \( ed = \frac { BS }{ BR } \) = यहां \( BS \) व \( SR \) दोनों बराबर हैं इसलिए मांग की लोच इकाई के बराबर है।
C बिंदु पर \( ed = \frac { CS }{ CR } \) = यहां \( CS, CR \) से कम है अतः मांग की लोच इकाई से कम है।
In simple words: प्रतिशत विधि तब काम आती है जब संख्याएं दी हों, जैसे दाम और मांग में बदलाव। ज्यामिति विधि तब काम आती है जब मांग का ग्राफ दिया हो और हमें किसी खास बिंदु पर लोच जाननी हो।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक विधि की व्याख्या करते समय, यह स्पष्ट करें कि उन्हें कब लागू किया जाता है और प्रत्येक के लिए एक सरल उदाहरण दें। सूत्र और रेखाचित्र को सही ढंग से प्रस्तुत करें।
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 अभ्यासार्थ प्रश्न
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. यदि किसी वस्तु की कीमत बढ़ने के फलस्वरूप उस वस्तु की मांग में कोई परिवर्तन नहीं होता है तब उसकी मांग होगी
(a) पूर्णतया बेलोचदार
(b) इकाई के बराबर
(c) अनन्त
(d) पूर्णतया लोचदार
Answer: (a) पूर्णतया बेलोचदार
In simple words: जब किसी वस्तु की कीमत बढ़ती है, लेकिन उसकी मांग में कोई बदलाव नहीं आता, तो उसकी मांग को पूर्णतया बेलोचदार कहा जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ कीमत का मांग पर कोई असर नहीं होता।
🎯 Exam Tip: पूर्णतया बेलोचदार मांग की स्थिति में मांग वक्र Y-अक्ष के समानांतर एक सीधी खड़ी रेखा होता है।
Question 3. ज्यामिति विधि से मांग की लोच का सूत्र है –
(a) मांग वक्र का निचला हिस्सा / मांग वक्र का ऊपरी हिस्सा
(b) मांग वक्र का ऊपरी हिस्सा / मांग वक्र का निचला हिस्सा
(c) \( \frac { \Delta q / q }{ \Delta p / p } \)
(d) \( \frac { \Delta p / p }{ \Delta q / q } \)
Answer: (d) \( \frac { \Delta p / p }{ \Delta q / q } \)
In simple words: ज्यामिति विधि में मांग की लोच का सूत्र वस्तु की मांग में प्रतिशत बदलाव को कीमत में प्रतिशत बदलाव से भाग देकर निकाला जाता है।
🎯 Exam Tip: ज्यामिति विधि में मांग की लोच को किसी मांग वक्र के किसी बिंदु पर ऊपरी हिस्से और निचले हिस्से के अनुपात से भी निकाला जा सकता है।
Question 4. यदि समोसे की कीमत में 10 प्रतिशत वृद्धि होने से उसकी मांग 10 प्रतिशत गिरती है। अतः समोसे की मांग होगी
(a) इकाई लोच के बराबर
(b) शून्य लोच
(c) इकाई लोच से अधिक
(d) इकाई लोच से कम
Answer: (b) शून्य लोच
In simple words: अगर समोसे की कीमत 10 प्रतिशत बढ़ती है और मांग 10 प्रतिशत गिरती है, तो इसका मतलब है कि मांग पर कीमत का बहुत ज्यादा असर नहीं हो रहा है, जिससे लोच शून्य के बराबर हो जाती है।
🎯 Exam Tip: जब कीमत में बदलाव के बावजूद मांग में कोई बदलाव न आए, तो वह शून्य लोचदार मांग होती है।
Question 5. बिन्दु विधि में बिन्दु P पर मांग की लोच होगी।
(a) ज्यादा लोचदार
(b) इकाई लोच
(c) कम लोचदार
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (c) कम लोचदार
In simple words: चित्र में बिन्दु P मांग वक्र के निचले हिस्से में है। मांग वक्र पर किसी बिन्दु पर लोच निकालने के लिए निचले हिस्से को ऊपरी हिस्से से भाग देते हैं। यदि P निचले हिस्से में है, तो लोच इकाई से कम होगी।
🎯 Exam Tip: मांग वक्र के मध्यबिंदु पर लोच इकाई के बराबर होती है, मध्यबिंदु के ऊपर लोच इकाई से अधिक होती है, और मध्यबिंदु के नीचे लोच इकाई से कम होती है।
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 अतिलघु उत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. मांग की कीमत लोच को परिभाषित कीजिए।
Answer: श्रीमती रोबिन्सन के अनुसार, मांग की कीमत लोच बताती है कि जब कीमत में थोड़ा बदलाव आता है, तो खरीदी गई मात्रा में कितना बदलाव आता है। इसे कीमत में प्रतिशत बदलाव से खरीदी गई मात्रा में प्रतिशत बदलाव को भाग देकर निकाला जाता है।
In simple words: मांग की कीमत लोच यह दिखाती है कि कीमत बदलने पर वस्तु की मांग कितनी बदलती है।
🎯 Exam Tip: परिभाषा को सटीक रूप से याद रखें, विशेषकर अर्थशास्त्री के नाम के साथ।
Question 2. यदि मांग वक्र \( \times \) अक्ष के समानान्तर है तो मांग की लोच होगी।
Answer: मांग पूर्णतया लोचदार होगी।
In simple words: जब मांग वक्र X-अक्ष के समानांतर होता है, तो मांग की लोच असीमित होती है।
🎯 Exam Tip: पूर्णतया लोचदार मांग में कीमत में जरा सा भी बदलाव मांग को अनंत तक बदल सकता है।
Question 3. किसी मांग वक्र के मध्य बिन्दु पर मांग की लोच क्या होगी?
Answer: मांग वक्र के बीच वाले बिन्दु पर मांग की लोच हमेशा एक (इकाई के बराबर) होती है।
In simple words: मांग वक्र के बिल्कुल बीच वाले बिन्दु पर मांग की लोच एक के बराबर होती है।
🎯 Exam Tip: यह बिंदु विधि का एक महत्वपूर्ण नियम है जो लोच को समझने में मदद करता है।
Question 4. पानी की मांग बेलोचदार क्यों होती है?
Answer: पानी की मांग बेलोचदार होती है क्योंकि इसकी कीमत में बदलाव आने पर भी इसकी मांग में ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। पानी एक बहुत जरूरी चीज है, जिसकी जरूरत हर किसी को होती है, चाहे कीमत कुछ भी हो।
In simple words: पानी एक आवश्यक वस्तु है, इसलिए इसकी कीमत बदलने पर भी इसकी मांग कम नहीं होती।
🎯 Exam Tip: आवश्यक वस्तुओं की मांग आमतौर पर बेलोचदार होती है।
Question 5. ज्यामितीय विधि से मांग की लोच ज्ञात करने का सूत्र क्या है?
Answer: ज्यामितीय विधि से मांग की लोच निकालने का सूत्र है: \( \text{ed} = \frac{\text{मांग वक्र का निचला हिस्सा}}{\text{मांग वक्र का ऊपरी हिस्सा}} \) इसे \( \text{ed} = \frac{MB}{MA} \) भी लिख सकते हैं।
In simple words: ज्यामितीय विधि में, किसी बिंदु पर लोच जानने के लिए उस बिंदु से मांग वक्र के निचले भाग की लंबाई को ऊपरी भाग की लंबाई से भाग देते हैं।
🎯 Exam Tip: इस सूत्र को 'बिंदु विधि' भी कहते हैं और यह केवल रेखीय मांग वक्रों पर लागू होता है।
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 लघु उत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. मांग की कीमत लोच को प्रभावित करने वाले दो कारकों को समझाइए।
Answer: मांग की कीमत लोच को प्रभावित करने वाले दो मुख्य कारक निम्नलिखित हैं:
1. **वस्तु की प्रकृति:** वस्तु की प्रकृति उसकी लोच को बहुत प्रभावित करती है। आवश्यक वस्तुओं (जैसे अनाज, नमक) की मांग आमतौर पर बेलोचदार होती है, क्योंकि इनकी कीमत बढ़ने पर भी इनकी मांग ज्यादा नहीं घटती। आरामदायक वस्तुओं की मांग लोचदार होती है, जबकि विलासिता की वस्तुओं (जैसे कार, हीरे) की मांग बहुत अधिक लोचदार होती है। इनकी कीमत में थोड़ा सा बदलाव भी मांग में बड़ा बदलाव लाता है।
2. **स्थानापन्न वस्तुओं की उपलब्धता:** यदि किसी वस्तु के कई अच्छे स्थानापन्न (विकल्प) बाजार में मौजूद हैं, तो उसकी मांग लोचदार होगी। उदाहरण के लिए, चाय और कॉफी एक-दूसरे के स्थानापन्न हैं। यदि चाय महंगी हो जाती है, तो लोग कॉफी पीना शुरू कर देते हैं, जिससे चाय की मांग घट जाती है। लेकिन अगर किसी वस्तु का कोई विकल्प नहीं है, तो उसकी मांग बेलोचदार होगी।
In simple words: किसी वस्तु की मांग की लोच इस बात पर निर्भर करती है कि वह किस तरह की वस्तु है (ज़रूरी या विलासिता की) और उसके कितने विकल्प बाजार में हैं।
🎯 Exam Tip: कारकों को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें ताकि यह समझ में आए कि वे लोच को कैसे प्रभावित करते हैं।
Question 2. पूर्णतया बेलोच मांग व पूर्णतया लोचदार मांग वक्र को चित्र बनाकर समझाइए।
Answer:
**1. पूर्णतया बेलोचदार मांग (Perfectly Inelastic Demand) [ed = 0]**
पूर्णतया बेलोचदार मांग वह स्थिति होती है जहाँ कीमत में कितना भी बदलाव आए, वस्तु की मांग बिल्कुल नहीं बदलती। यह एक काल्पनिक स्थिति है, जो वास्तविक जीवन में बहुत कम मिलती है। इस स्थिति में मांग वक्र Y-अक्ष के समानांतर एक सीधी खड़ी रेखा होता है।
इस चित्र से पता चलता है कि जब कीमत OP थी, तो भी मांग OQ थी। कीमत घटकर OP2 या बढ़कर OP1 हो जाने पर भी मांग OQ ही रहती है। यानी, मांग पूरी तरह बेलोचदार है।
**2. पूर्णतया लोचदार मांग (Perfectly Elastic Demand) [ed = ∞]**
पूर्णतया लोचदार मांग वह स्थिति होती है जहाँ कीमत में बिल्कुल भी बदलाव न आने पर भी वस्तु की मांग अनंत तक बढ़ या घट सकती है। यहाँ तक कि कीमत में मामूली सी बढ़ोतरी भी मांग को एकदम शून्य कर सकती है। यह भी एक काल्पनिक स्थिति है। इस स्थिति में मांग वक्र X-अक्ष के समानांतर एक सीधी क्षैतिज रेखा होता है।
चित्र से स्पष्ट है कि कीमत OP पर वस्तु की मात्रा कुछ भी हो सकती है, जैसे OQ, OQ1 या OQ2। इसका मतलब है कि वस्तु की मांग पूर्णतया लोचदार है।
In simple words: पूर्णतया बेलोचदार मांग में कीमत बदलने पर मांग बिल्कुल नहीं बदलती (मांग वक्र सीधा खड़ा होता है)। पूर्णतया लोचदार मांग में कीमत में छोटे बदलाव से मांग बहुत ज्यादा बदल जाती है (मांग वक्र सीधा लेटा हुआ होता है)।
🎯 Exam Tip: दोनों ही स्थितियाँ वास्तविक जीवन में कम ही देखने को मिलती हैं; ये केवल सैद्धांतिक अवधारणाएँ हैं।
Question 3. प्रतिशत विधि से मांग की लोच कैसे ज्ञात करते हैं?
Answer: मांग की लोच निकालने के लिए प्रतिशत विधि में, हम यह देखते हैं कि कीमत में कितने प्रतिशत का बदलाव हुआ और मांग में कितने प्रतिशत का बदलाव हुआ। फिर, मांग के प्रतिशत बदलाव को कीमत के प्रतिशत बदलाव से भाग देते हैं।
इसका सूत्र निम्न प्रकार है:
\[ \text{ed} = \frac{\text{मांग में आनुपातिक (प्रतिशत) परिवर्तन}}{\text{कीमत में आनुपातिक (प्रतिशत) परिवर्तन}} \]
अर्थात् \( \text{ed} = \frac { \Delta Q / Q }{ \Delta P / P } \) या \( \text{ed} = \frac { \Delta Q }{ \Delta P } \times \frac { P }{ Q } \)
**उदाहरण:** माना कि सेब की कीमत 50 Rs प्रति किलो होने पर मांग 500 किलोग्राम थी। यदि कीमत घटकर 25 Rs प्रति किलो हो जाती है, और मांग बढ़कर 750 किलोग्राम हो जाती है, तो मांग की कीमत लोच इस प्रकार निकाली जाएगी:
यदि \( Q = 500 \text{ ग्राम} \), \( Q_1 = 750 \text{ ग्राम} \), \( P = 50 \), \( P_1 = 25 \)
\( \Delta Q = Q_1 - Q = 750 - 500 = 250 \)
\( \Delta P = P_1 - P = 25 - 50 = -25 \)
तब, \( \text{ed} = \frac { \Delta Q }{ \Delta P } \times \frac { P }{ Q } = \frac { 250 }{ -25 } \times \frac { 50 }{ 500 } \)
\( \text{ed} = -10 \times \frac { 1 }{ 10 } = -1 \)
मांग की कीमत लोच (ed) = 1 (ऋणात्मक चिन्ह को आमतौर पर छोड़ दिया जाता है)
In simple words: प्रतिशत विधि में, मांग में हुए प्रतिशत बदलाव को कीमत में हुए प्रतिशत बदलाव से भाग देकर मांग की लोच निकालते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रतिशत विधि से गणना करते समय, हमेशा ध्यान रखें कि लोच का गुणांक ऋणात्मक होता है, लेकिन आमतौर पर हम इसे निरपेक्ष मान (absolute value) में ही दिखाते हैं।
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. मांग की लोच की विभिन्न श्रेणियों को चित्र बनाकर समझाइए।
Answer: मांग की लोच की पाँच श्रेणियाँ होती हैं, जिन्हें चित्रों द्वारा समझाया जा सकता है:
**1. पूर्णतया लोचदार मांग (Perfectly Elastic Demand) [ed = ∞]**
यह मांग की वह अवस्था है जिसमें वस्तु की प्रचलित कीमतों पर मांग अनंत होती है। कीमत में जरा सी भी वृद्धि मांग को शून्य कर देती है और कमी मांग को अनंत कर देती है। यह एक काल्पनिक स्थिति है। इस अवस्था में मांग वक्र आधार रेखा (X-अक्ष) के समानांतर होता है।
चित्र से स्पष्ट है कि OP कीमत पर वस्तु की मात्रा कुछ भी हो सकती है जैसे – OQ, Q1 या Q2 या इससे कुछ भिन्न।
**2. लोचदार मांग (Unitary Elastic Demand) [ed = 1]**
लोचदार मांग की स्थिति तब होती है जब मांग में आनुपातिक परिवर्तन कीमत में आनुपातिक परिवर्तन के बराबर होता है। ऐसी अवस्था में मांग की लोच इकाई के बराबर होती है। उदाहरण के लिए, यदि कीमत में 20 प्रतिशत वृद्धि होने पर मांग में 20 प्रतिशत कमी हो जाए, तो ऐसी वस्तु की मांग को लोचदार मांग कहेंगे। यह स्थिति निम्न चित्र में दिखाई गई है:
चित्र को देखने से स्पष्ट है कि OP कीमत पर मांग OQ है। जब कीमत बढ़कर OP1 हो जाती है तो वस्तु की मांग घटकर OQ1 रह जाती है। कीमत में परिवर्तन PP1 मांग में परिवर्तन QQ1 के बराबर है। अतः मांग में कमी उसी अनुपात में है जिस अनुपात में कीमत में वृद्धि हुई है। प्रायः आरामदायक वस्तुओं की मांग लोचदार होती है।
**3. अत्यधिक लोचदार मांग (Highly Elastic Demand) [ed > 1]**
जब किसी वस्तु की मांग में आनुपातिक परिवर्तन कीमत के आनुपातिक परिवर्तन से ज्यादा होता है, तो ऐसी मांग को अत्यधिक लोचदार मांग कहते हैं। इस स्थिति में मांग वक्र का ढलान कम (अधिक सपाट) होता है, जो दर्शाता है कि कीमत में थोड़ा बदलाव भी मांग में बड़ा बदलाव लाता है।
रेखाचित्र में OP कीमत पर वस्तु की मांग OQ है। जब कीमत गिरकर OP1 हो जाती है तो वस्तु की मांग बढ़कर OQ1 हो जाती है। कीमत की कमी PP1 से मांग की मात्रा में वृद्धि QQ1 ज्यादा है। अतः वस्तु की मांग अधिक लोचदार है। मांग की लोच इकाई से ज्यादा है।
**4. बेलोचदार मांग (Inelastic Demand) [ed < 1]**
जब किसी वस्तु की मांगी जाने वाली मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन कीमत में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन से कम होता है, तो ऐसी मांग को बेलोचदार मांग कहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि वस्तु की कीमत 30 प्रतिशत कम हो और मांग में केवल 10 प्रतिशत वृद्धि हो, तो इसे बेलोचदार मांग कहेंगे। इस अवस्था में मांग की कीमत लोच इकाई से कम होती है।
उपरोक्त चित्र में DD मांग वक्र है। जब वस्तु की कीमत OP है तथा वस्तु की मांग OQ है। जब वस्तु की कीमत OP1 से घटकर OQ1 हो जाती है तो वस्तु की मांग बढ़कर OQ1 हो जाती है। कीमत में परिवर्तन PP1 की तुलना में मांग में परिवर्तन OQ1 कम है। अतः मांग बेलोचदार कही जायेगी।
**5. शून्य लोच या पूर्णतया बेलोचदार मांग (Perfectly Inelastic Demand) [ed = 0]**
जब वस्तु की कीमत में परिवर्तन होने पर भी वस्तु की मांग अपरिवर्तित रहती है, तो ऐसी मांग को पूर्णतया बेलोचदार मांग कहते हैं। इस अवस्था में मांग की लोच शून्य होती है। इस दशा में मांग वक्र Y-अक्ष के समानांतर होता है।
उपरोक्त चित्र में कीमत OP, OP1 तथा OP2 तीनों अवस्थाओं में वस्तु की मांग समान OQ ही रहती है, उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता है। यह मांग की शून्य लोच की स्थिति है।
In simple words: मांग की लोच की पाँच मुख्य श्रेणियाँ हैं – पूर्णतया लोचदार (अनंत लोच), लोचदार (इकाई के बराबर), अत्यधिक लोचदार (इकाई से अधिक), बेलोचदार (इकाई से कम) और पूर्णतया बेलोचदार (शून्य लोच)। प्रत्येक श्रेणी में मांग वक्र का आकार अलग होता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक श्रेणी की परिभाषा और संबंधित मांग वक्र के आकार को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन्हें अक्सर चित्रों के साथ समझाया जाता है।
Question 2. मांग की कीमत लोच को मापने की विधियों को समझाइये।
Answer: मांग की कीमत लोच को मापने की मुख्य तीन विधियाँ निम्नलिखित हैं:
**1. आनुपातिक या प्रतिशत विधि (Percentage Method)**
इस विधि का प्रतिपादन फ्लक्स ने किया था। इस विधि के अनुसार मांग की लोच निकालने के लिए मांग में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन को कीमत में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन से भाग दिया जाता है। इसका सूत्र निम्न प्रकार है:
\[ \text{ed} = \frac{\text{मांग में आनुपातिक (प्रतिशत) परिवर्तन}}{\text{कीमत में आनुपातिक (प्रतिशत) परिवर्तन}} \]
अर्थात् \( \text{ed} = \frac { \Delta Q / Q }{ \Delta P / P } \) या \( \text{ed} = \frac { \Delta Q }{ \Delta P } \times \frac { P }{ Q } \)
जहाँ,
\( \text{ed} \) = मांग की कीमत लोच
\( P \) = प्रारंभिक कीमत
\( \Delta P \) = कीमत में परिवर्तन
\( Q \) = प्रारंभिक मांग मात्रा
\( Q_1 \) = परिवर्तित मांग मात्रा
\( \Delta Q \) = मांग में परिवर्तन
**उदाहरण:** माना कि सेब की कीमत 100 Rs प्रति किलो होने पर सेब की मांग 200 किलोग्राम है। यदि सेब की कीमत घटकर 80 Rs प्रति किलो हो जाती है और इसके फलस्वरूप सेब की मांग बढ़कर 250 किलोग्राम हो जाती है, तो मांग की कीमत लोच इस प्रकार निकाली जाएगी:
\( P = 100 \), \( Q = 200 \)
\( P_1 = 80 \), \( Q_1 = 250 \)
\( \Delta P = P_1 - P = 80 - 100 = -20 \)
\( \Delta Q = Q_1 - Q = 250 - 200 = 50 \)
\( \text{ed} = \frac { \Delta Q }{ \Delta P } \times \frac { P }{ Q } = \frac { 50 }{ -20 } \times \frac { 100 }{ 200 } = \frac { 5 }{ -2 } \times \frac { 1 }{ 2 } = \frac { 5 }{ -4 } = -1.25 \)
इस प्रकार सेब की मांग की कीमत लोच 1.25 है, जो इकाई से अधिक है। (ऋण का चिन्ह आमतौर पर छोड़ दिया जाता है क्योंकि यह केवल दिशा बताता है)।
**2. कुल व्यय विधि (Total Expenditure Method)**
इस विधि का प्रतिपादन अर्थशास्त्री मार्शल ने किया था। यह मांग की लोच को मापने की सबसे सरल विधि है, जिसमें कीमत में परिवर्तन के कारण कुल खर्च में होने वाले परिवर्तन के आधार पर मांग की कीमत लोच मापी जाती है। मार्शल के अनुसार मांग की कीमत लोच तीन प्रकार की होती है:
(i) **मांग की लोच इकाई के बराबर (ed = 1):** जब कीमत में परिवर्तन होने के बाद भी कुल व्यय पहले जैसा रहता है, तो मांग की लोच इकाई के बराबर होती है।
| वस्तु की कीमत (प्रति कि०ग्रा० Rs में) | मांग की मात्रा (कि०ग्रा० में) | कुल व्यय (Rs में) |
|---|---|---|
| 10 | 20 | 200 |
| 8 | 25 | 200 |
| 4 | 50 | 200 |
उपरोक्त तालिका से पता चलता है कि जब कीमत 10 Rs प्रति किलो थी, तो कुल खर्च 200 Rs था। कीमत घटकर 8 Rs और फिर 4 Rs हो जाने पर भी कुल खर्च 200 Rs ही रहा। इससे पता चलता है कि मांग की लोच इकाई के बराबर है।
(ii) **मांग की लोच इकाई से अधिक (ed > 1):** यदि वस्तु की कीमत में कमी होने से कुल खर्च बढ़ता है, या कीमत में वृद्धि होने पर कुल खर्च घटता है, तो मांग इकाई से अधिक लोचदार कहलाती है।
| वस्तु की कीमत (प्रति कि०ग्रा० Rs में) | मांग की मात्रा (कि०ग्रा० में) | कुल व्यय (Rs में) |
|---|---|---|
| 10 | 20 | 200 |
| 8 | 35 | 280 |
| 4 | 80 | 320 |
उपरोक्त तालिका से स्पष्ट है कि जैसे-जैसे कीमत घटती जाती है, कुल खर्च बढ़ता जाता है। इसे दूसरे तरीके से भी देख सकते हैं कि जैसे-जैसे कीमत बढ़ती जाती है, कुल खर्च घटता जाता है। अतः इस अवस्था में मांग की कीमत लोच इकाई से ज्यादा है।
(iii) **मांग की लोच इकाई से कम (ed < 1):** यदि वस्तु की कीमत में कमी होने पर कुल खर्च कम हो जाता है, या वस्तु की कीमत बढ़ने पर कुल खर्च बढ़ जाता है, तो मांग की लोच इकाई से कम मानी जाती है।
| वस्तु की कीमत (प्रति कि०ग्रा० Rs में) | मांग की मात्रा (कि०ग्रा० में) | कुल व्यय (Rs में) |
|---|---|---|
| 10 | 20 | 200 |
| 8 | 24 | 192 |
| 4 | 40 | 160 |
उपरोक्त तालिका से स्पष्ट है कि जैसे-जैसे वस्तु की कीमत में कमी आती है, कुल खर्च की राशि भी घटती जाती है। 10 Rs कीमत पर कुल खर्च 200 Rs था, जो 8 Rs और 4 Rs कीमत होने पर क्रमशः घटकर 192 Rs और 160 Rs हो गया। अतः यहाँ मांग की लोच इकाई से कम है।
कुल व्यय विधि से निम्न बातें स्पष्ट होती हैं:
(अ) मांग की लोच इकाई के बराबर (ed = 1) होने पर कुल व्यय कीमत परिवर्तित होने पर भी पहले जैसा रहता है।
(ब) मांग की लोच इकाई से अधिक (ed > 1) होने पर कीमत और कुल खर्च में विपरीत दिशा रहती है।
(स) मांग की लोच इकाई से कम (ed < 1) होने पर कीमत और कुल खर्च समान दिशा में बदलते हैं।
**3. ज्यामिति या बिन्दु विधि (Geometric or Point Method)**
इस विधि का प्रयोग मांग वक्र के किसी बिन्दु पर मांग की कीमत लोच का पता लगाने के लिए किया जाता है। मांग वक्र के विभिन्न बिन्दुओं पर कीमत लोच बराबर नहीं होती, वह अलग-अलग होती है। जिस बिन्दु पर भी मांग की लोच ज्ञात करनी होती है, उस बिन्दु से ऊपर के हिस्से तथा नीचे के हिस्से की सहायता से निम्न सूत्र द्वारा मांग की लोच ज्ञात की जाती है:
\[ \text{ed} = \frac{\text{बिन्दु से नीचे का हिस्सा (PB)}}{\text{बिन्दु से ऊपर का हिस्सा (PA)}} \]
यदि दोनों हिस्से बराबर होते हैं तो मांग की लोच इकाई के बराबर होती है। यदि नीचे का हिस्सा ऊपर के हिस्से से ज्यादा होता है तो मांग की लोच इकाई से ज्यादा होती है और नीचे का हिस्सा ऊपर के हिस्से से कम होने पर मांग की लोच इकाई से कम होती है। इन तीनों स्थितियों को निम्न रेखाचित्र में दिखाया गया है:
इस चित्र में R बिन्दु पर मांग की लोच इकाई के बराबर है क्योंकि R बिन्दु से नीचे का हिस्सा तथा ऊपर का हिस्सा दोनों बराबर हैं। S बिन्दु पर मांग की लोच इकाई से अधिक है क्योंकि S बिन्दु से नीचे का हिस्सा ऊपर के हिस्से से ज्यादा है। इसके विपरीत T बिन्दु पर मांग की लोच इकाई से कम होगी क्योंकि नीचे का हिस्सा ऊपर के हिस्से से कम है। यदि मांग वक्र एक सीधी रेखा न होकर वक्र की आकृति में होती है तो जिस बिन्दु पर मांग की लोच ज्ञात करनी होती है उस बिन्दु से स्पर्श रेखा खींच कर उपरोक्त विधि से मांग की लोच ज्ञात कर लेते हैं।
In simple words: मांग की लोच को मापने के लिए तीन मुख्य विधियाँ हैं: प्रतिशत विधि (बदलाव के अनुपात से), कुल व्यय विधि (कुल खर्च में बदलाव देखकर), और ज्यामितीय विधि (मांग वक्र के बिंदुओं पर लोच की गणना करके)।
🎯 Exam Tip: तीनों विधियों के सूत्रों और उनके पीछे के तर्क को स्पष्ट रूप से समझें, क्योंकि ये प्रश्न अक्सर परीक्षाओं में आते हैं।
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. आवश्यक आवश्यकता की वस्तुओं की मांग की कीमत लोच होती है।
(a) इकाई से कम
(b) इकाई के बराबर
(c) इकाई से अधिक
(d) शून्य
Answer: (a) इकाई से कम
In simple words: ज़रूरी चीज़ों की मांग में कीमत बदलने पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, इसलिए उनकी लोच इकाई से कम होती है।
🎯 Exam Tip: आवश्यक वस्तुएं वे होती हैं जिनकी हमें रोज़मर्रा की ज़िंदगी में जरूरत होती है, जैसे खाना या दवा।
Question 2. विलासिता की वस्तुओं की मांग की कीमत लोच होती है।
(a) इकाई के बराबर
(b) इकाई से कम
(c) इकाई से ज्यादा
(d) अनन्त
Answer: (c) इकाई से ज्यादा
In simple words: विलासिता की वस्तुएं, जैसे महंगे सामान, की मांग कीमत बदलने पर बहुत ज्यादा बदल जाती है, इसलिए उनकी लोच इकाई से ज्यादा होती है।
🎯 Exam Tip: विलासिता की वस्तुएं आमतौर पर महंगी होती हैं और उनकी खरीद को टाला जा सकता है।
Question 3. यदि किसी वस्तु की कीमत 10 प्रतिशत कम होने पर उसकी मांग 10 इकाई से बढ़कर 14 इकाई हो जाती है तो मांग की लोच होगी –
(a) 1
(b) 2
(c) 3
(d) 4
Answer: (d) 4
In simple words: कीमत 10% कम हुई और मांग (14-10)/10 * 100% = 40% बढ़ गई। तो लोच = 40%/10% = 4।
🎯 Exam Tip: मांग की लोच की गणना करते समय, प्रतिशत बदलाव के सूत्र का सही उपयोग करें।
Question 4. यदि किसी वस्तु का मूल्य Rs 20 प्रति इकाई होने पर उसकी मांग 50 इकाई है जब मूल्य घटकर Rs 10 प्रति इकाई रह गया तो मांग बढ़कर 100 इकाई हो गई। उसकी मांग की कीमत लोच होगी
(a) 1
(b) 2
(c) 2.5
(d) 3
Answer: (b) 2
In simple words: कीमत में बदलाव 10 Rs और मांग में बदलाव 50 इकाई। लोच \( = |\frac{50}{-10} \times \frac{20}{50}| = |-2| = 2 \)।
🎯 Exam Tip: इस तरह के सवालों में प्रारंभिक कीमत और मात्रा को सही ढंग से पहचानें।
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. कौन-सी मांग की लोच काल्पनिक मानी जाती है?
Answer: पूर्णतया लोचदार मांग (\( \text{ed} = \infty \)) और पूर्णतया बेलोचदार मांग (\( \text{ed} = 0 \)) को काल्पनिक स्थितियां माना जाता है क्योंकि असल जीवन में ऐसी मांग बहुत कम देखने को मिलती है।
In simple words: पूर्णतया लोचदार और पूर्णतया बेलोचदार मांग को हम केवल कल्पना मानते हैं, ये हकीकत में मुश्किल से दिखती हैं।
🎯 Exam Tip: ये दोनों अवधारणाएँ मांग की लोच की चरम सीमाएँ बताती हैं।
Question 2. मांग वक्र Y अक्ष के समानान्तर एक लम्बवत् रेखी होने पर मांग की लोच कैसी होती है?
Answer: जब मांग वक्र Y-अक्ष के बिल्कुल सीधा (समानान्तर) होता है, तो ऐसी वस्तु की मांग पूर्णतया बेलोचदार होती है। इसका मतलब है कि कीमत में कितना भी बदलाव आए, मांग उतनी ही रहती है।
In simple words: अगर मांग वक्र Y-अक्ष के समानांतर है, तो मांग पूर्णतया बेलोचदार होती है।
🎯 Exam Tip: यह स्थिति दिखाती है कि उपभोक्ता कीमत की परवाह किए बिना हमेशा समान मात्रा में वस्तु खरीदेगा।
Question 3. विलासिता की वस्तुओं की मांग की कीमत लोच कैसी होती है?
Answer: विलासिता की वस्तुओं की मांग ज्यादा लोचदार होती है। इसका मतलब है कि कीमत में थोड़ा सा बदलाव आने पर भी इनकी मांग में बहुत बड़ा बदलाव आता है, क्योंकि ये ज़रूरी नहीं होतीं।
In simple words: विलासिता की चीज़ों की मांग बहुत लोचदार होती है, मतलब कीमत बदलने पर उनकी मांग पर बड़ा असर पड़ता है।
🎯 Exam Tip: विलासिता की वस्तुएँ वे होती हैं जिनकी आवश्यकता के बिना भी जीवन जिया जा सकता है।
Question 4. मांग की लोच को मापने की कौन-कौन सी विधियाँ हैं?
Answer: मांग की लोच को मापने की मुख्य तीन विधियाँ हैं:
1. कुल व्यय विधि (Total Expenditure Method)
2. प्रतिशत या आनुपातिक विधि (Percentage Method)
3. ज्यामितीय या बिंदु विधि (Geometric or Point Method)
In simple words: मांग की लोच को मापने के तीन मुख्य तरीके हैं: कुल खर्च, प्रतिशत और बिंदु विधि।
🎯 Exam Tip: इन तीनों विधियों को अक्सर एक साथ पूछा जाता है, इसलिए इनके नाम याद रखें।
Question 6. मांग की कीमत लोच का गुणांक सदैव ऋणात्मक क्यों होता है?
Answer: मांग की कीमत लोच का गुणांक हमेशा ऋणात्मक होता है क्योंकि वस्तु की कीमत बढ़ने पर उसकी मांग घटती है, और कीमत घटने पर मांग बढ़ती है। यानी, कीमत और मांग के बीच उल्टा संबंध होता है।
In simple words: मांग की लोच ऋणात्मक होती है क्योंकि कीमत और मांग हमेशा उल्टी दिशा में चलते हैं।
🎯 Exam Tip: इस उल्टे संबंध को 'मांग का नियम' भी कहा जाता है।
Question 7. लोचदार मांग से क्या आशय है?
Answer: लोचदार मांग ऐसी स्थिति को कहते हैं जहाँ वस्तु की कीमत में जितने प्रतिशत का बदलाव आता है, उसकी मांग में भी लगभग उतने ही प्रतिशत का बदलाव आता है। इसे इकाई लोचदार मांग (\( \text{ed} = 1 \)) भी कहते हैं।
In simple words: लोचदार मांग वह है जहाँ कीमत और मांग में प्रतिशत बदलाव बराबर होते हैं।
🎯 Exam Tip: इकाई लोचदार मांग के लिए कुल व्यय विधि में कुल खर्च स्थिर रहता है।
Question 8. मांग की कीमत लोच शून्य कब होती है?
Answer: जब कीमत में परिवर्तन के फलस्वरूप मांग में कोई परिवर्तन नहीं होता है तो मांग की कीमत लोच शून्य होती है। मतलब, कीमत बदलने पर भी मांग वही रहती है।
In simple words: मांग की लोच शून्य तब होती है जब कीमत बदलने पर भी मांग में कोई बदलाव नहीं आता।
🎯 Exam Tip: शून्य लोचदार मांग का मांग वक्र Y-अक्ष के समानांतर एक सीधी खड़ी रेखा होता है।
Question 9. मांग की लोच मापने की ज्यामिति विधि का सूत्र क्या है?
Answer: ज्यामितीय विधि से मांग की लोच का सूत्र है: \( \text{मांग की कीमत लोच} = \frac{\text{मांग वक्र का निचला हिस्सा}}{\text{मांग वक्र का ऊपरी हिस्सा}} \).
In simple words: बिंदु विधि में लोच का सूत्र है निचले हिस्से की लंबाई को ऊपरी हिस्से की लंबाई से भाग देना।
🎯 Exam Tip: इस सूत्र का उपयोग एक सीधी रेखा वाले मांग वक्र के किसी भी बिंदु पर लोच ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
Question 10. यदि कीमत में कमी होने पर कुल व्यय बढ़ता है तथा कीमत में वृद्धि होने पर कुल व्यय घटता है तो मांग की कीमत लोच क्या होगी?
Answer: ऐसी अवस्था में मांग की कीमत लोच इकाई से अधिक (\( \text{ed} > 1 \)) होगी। इसे लोचदार मांग कहते हैं।
In simple words: अगर कीमत और कुल खर्च उल्टी दिशा में चलें, तो मांग की लोच इकाई से ज्यादा होती है।
🎯 Exam Tip: कुल व्यय विधि में, कीमत और कुल व्यय के विपरीत संबंध का मतलब इकाई से अधिक लोच है।
Question 11. यदि कीमत घटने पर कुल व्यय घटता है तथा कीमत बढ़ने पर कुल व्यय बढ़ता है तो मांग की कीमत लोच क्या होगी?
Answer: इस अवस्था में मांग की लोच इकाई से कम (\( \text{ed} < 1 \)) होगी। इसे बेलोचदार मांग कहते हैं।
In simple words: अगर कीमत और कुल खर्च एक ही दिशा में चलें, तो मांग की लोच इकाई से कम होती है।
🎯 Exam Tip: कुल व्यय विधि में, कीमत और कुल व्यय के समान संबंध का मतलब इकाई से कम लोच है।
Question 13. मांग की लोच की वास्तविक अवस्थाएँ कौन-कौन सी हैं?
Answer: मांग की लोच की तीन मुख्य वास्तविक स्थितियाँ हैं: लोचदार मांग (इकाई के बराबर, \( \text{ed} = 1 \)), अधिक लोचदार मांग (इकाई से अधिक, \( \text{ed} > 1 \)), और बेलोचदार मांग (इकाई से कम, \( \text{ed} < 1 \))। पूर्णतया लोचदार और पूर्णतया बेलोचदार मांग को आमतौर पर काल्पनिक माना जाता है।
In simple words: वास्तविक लोच में इकाई के बराबर, इकाई से अधिक और इकाई से कम लोच शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: पूर्णतया लोचदार और पूर्णतया बेलोचदार मांग सैद्धांतिक स्थितियाँ हैं जो वास्तविक बाजारों में शायद ही कभी देखी जाती हैं।
Question 14. मांग की लोच को प्रभावित करने वाले दो घटक बताइए।
Answer: मांग की लोच को प्रभावित करने वाले दो मुख्य घटक हैं:
1. **वस्तु की प्रकृति:** जैसे कि वह आवश्यक वस्तु है या विलासिता की। आवश्यक वस्तुओं की मांग कम लोचदार होती है, जबकि विलासिता की वस्तुओं की मांग अधिक लोचदार होती है।
2. **वस्तु के विभिन्न प्रयोग:** अगर किसी वस्तु का इस्तेमाल कई कामों में किया जा सकता है, तो उसकी मांग ज्यादा लोचदार होती है। जैसे बिजली।
In simple words: मांग की लोच वस्तु के प्रकार और उसके कितने उपयोग हो सकते हैं, इन दो बातों से प्रभावित होती है।
🎯 Exam Tip: उदाहरणों का उपयोग करके इन घटकों को स्पष्ट करें ताकि वे आसानी से समझ में आ सकें।
Question 15. मांग की लोच की गणना की कुल व्यय रीति का प्रतिपादन किसने किया है?
Answer: मांग की लोच की गणना के लिए कुल व्यय विधि अर्थशास्त्री मार्शल ने बताई थी।
In simple words: कुल व्यय विधि को अर्थशास्त्री मार्शल ने समझाया था।
🎯 Exam Tip: मार्शल ने इस विधि के माध्यम से कीमत और कुल खर्च के संबंधों को स्पष्ट किया था।
Question 16. मांग की लोच का समय से क्या सम्बन्ध है?
Answer: समय अवधि का मांग की लोच पर असर पड़ता है। कम समय में मांग आमतौर पर बेलोचदार होती है, क्योंकि लोग अपनी आदतों को जल्दी नहीं बदल पाते। लेकिन लंबे समय में मांग लोचदार हो जाती है, क्योंकि उपभोक्ताओं को बदलने के लिए ज्यादा समय मिल जाता है, जैसे नए विकल्प ढूंढना।
In simple words: कम समय में मांग बेलोचदार होती है, लेकिन लंबे समय में यह लोचदार हो जाती है।
🎯 Exam Tip: यह संबंध दर्शाता है कि उपभोक्ता कितने समय में कीमत परिवर्तन के प्रति प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
Question 17. जिन वस्तुओं के उपभोक्ता आदी हो जाते हैं उनकी मांग की लोच कैसी होती है?
Answer: ऐसी वस्तुओं की मांग बेलोचदार होती है जिनके उपभोक्ता आदी हो जाते हैं। इसका मतलब है कि कीमत बदलने पर भी लोग उन्हें लगभग उतनी ही मात्रा में खरीदते रहते हैं, क्योंकि उनकी आदत होती है।
In simple words: जिन चीज़ों की आदत पड़ जाती है, उनकी मांग बेलोचदार होती है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार की वस्तुओं में नशे की वस्तुएं (जैसे सिगरेट) शामिल होती हैं।
Question 18. मांग की लोच के गुणांक को मापने का सूत्र लिखिए।
Answer: मांग की लोच को मापने का सूत्र है: \( \text{ed} = \frac{\Delta Q}{\Delta P} \times \frac{P}{Q} \) जहाँ \( \Delta Q \) मांग में परिवर्तन, \( \Delta P \) कीमत में परिवर्तन, \( P \) प्रारंभिक कीमत और \( Q \) प्रारंभिक मांग है।
In simple words: लोच का सूत्र है मांग में बदलाव का अनुपात गुना प्रारंभिक कीमत को प्रारंभिक मांग और कीमत में बदलाव के अनुपात से भाग देना।
🎯 Exam Tip: इस सूत्र को 'बिंदु लोच' या 'प्रतिशत विधि' सूत्र भी कहा जाता है।
Question 20. मार्शल के अनुसार मांग की कीमत लोच के प्रकार बताइए।
Answer: अर्थशास्त्री मार्शल के अनुसार, मांग की कीमत लोच मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है:
1. लोचदार मांग (\( \text{ed} > 1 \))
2. ऐकिक मांग की लोच (\( \text{ed} = 1 \))
3. बेलोचदार मांग (\( \text{ed} < 1 \))
In simple words: मार्शल ने मांग की लोच को तीन श्रेणियों में बांटा: लोचदार, ऐकिक और बेलोचदार।
🎯 Exam Tip: इन तीनों प्रकारों को मार्शल ने कुल व्यय विधि के माध्यम से समझाया था।
Question 21. क्या एक मांग वक्र के विभिन्न बिन्दुओं पर मांग की लोच समान होती है?
Answer: नहीं, एक मांग वक्र के अलग-अलग बिन्दुओं पर मांग की लोच समान नहीं होती है। यह हर बिंदु पर अलग-अलग होती है, खासकर सीधी रेखा वाले मांग वक्र पर।
In simple words: मांग वक्र के हर बिंदु पर लोच अलग-अलग होती है।
🎯 Exam Tip: केवल एक आयताकार अतिपरवलय मांग वक्र पर ही लोच हर बिंदु पर समान (इकाई के बराबर) होती है।
Question 22. यदि मांग रेखा सीधी न होकर वक्र के आकार की हो तो बिन्दु रीति से मांग की लोच कैसे ज्ञात करते हैं?
Answer: जब मांग रेखा सीधी नहीं होती, बल्कि घुमावदार होती है, तो किसी भी बिंदु पर मांग की लोच जानने के लिए, उस बिंदु पर एक सीधी स्पर्श रेखा खींचते हैं। फिर, उस स्पर्श रेखा के निचले हिस्से को ऊपरी हिस्से से भाग देकर लोच ज्ञात करते हैं।
In simple words: घुमावदार मांग वक्र पर लोच जानने के लिए, जिस बिंदु पर लोच चाहिए, वहाँ एक सीधी रेखा खींचते हैं और फिर निचले व ऊपरी हिस्सों को मापते हैं।
🎯 Exam Tip: स्पर्श रेखा खींचने की यह विधि 'ज्यामितीय विधि' का विस्तार है।
Question 23. धनी लोगों के लिए वस्तुओं की मांग की लोच कैसी होती है?
Answer: धनी लोगों के लिए वस्तुओं की मांग आमतौर पर बेलोचदार होती है। इसका मतलब है कि कीमत में बदलाव आने पर भी उनकी खरीदने की आदत में ज्यादा बदलाव नहीं आता है, क्योंकि वे कीमतों के प्रति कम संवेदनशील होते हैं।
In simple words: धनी लोगों के लिए चीज़ों की मांग आमतौर पर बेलोचदार होती है।
🎯 Exam Tip: ऐसा इसलिए है क्योंकि उनकी आय अधिक होती है, जिससे कीमत में बदलाव का उन पर कम प्रभाव पड़ता है।
Question 24. निर्धन लोगों के लिए वस्तुओं की मांग की लोच कैसी होती है?
Answer: निर्धन लोगों के लिए वस्तुओं की मांग आमतौर पर लोचदार होती है। इसका मतलब है कि कीमत में थोड़ा सा बदलाव आने पर भी उनकी खरीदने की मात्रा में काफी बदलाव आता है, क्योंकि उनका बजट सीमित होता है और वे कीमतों के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं।
In simple words: गरीब लोगों के लिए चीज़ों की मांग लोचदार होती है, क्योंकि कीमत बदलने पर वे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
🎯 Exam Tip: यह दिखाता है कि सीमित आय वाले उपभोक्ताओं पर कीमत का बदलाव कितना असर करता है।
Question 25. हीरे जवाहरात की मांग की लोच कैसी होती है?
Answer: हीरे-जवाहरात विलासिता की वस्तुएँ हैं, इसलिए इनकी मांग अधिक लोचदार होती है। मतलब, इनकी कीमत में थोड़ा सा बदलाव आने पर भी लोग इन्हें कम या ज्यादा खरीदना शुरू कर देते हैं, क्योंकि ये आवश्यक नहीं होतीं।
In simple words: हीरे-जवाहरात विलासिता की वस्तुएं हैं, इसलिए इनकी मांग बहुत लोचदार होती है।
🎯 Exam Tip: विलासिता की वस्तुओं की मांग हमेशा अत्यधिक लोचदार होती है।
Question 2. मांग की लोच ऋणात्मक क्यों होती है?
Answer: मांग की लोच ऋणात्मक होती है क्योंकि कीमत और मांग के बीच उल्टा संबंध होता है। जब कीमत बढ़ती है तो मांग घटती है, और जब कीमत घटती है तो मांग बढ़ती है। इसी विपरीत संबंध के कारण लोच ऋणात्मक होती है।
In simple words: कीमत और मांग का उल्टा संबंध होने के कारण लोच हमेशा ऋणात्मक होती है।
🎯 Exam Tip: अर्थशास्त्र में, हम आमतौर पर लोच के निरपेक्ष मान पर विचार करते हैं।
Question 3. मांग की लोच की श्रेणियों के नाम लिखिए।
Answer: मांग की लोच की पाँच मुख्य श्रेणियाँ हैं:
1. पूर्णतया लोचदार मांग (\( \text{ed} = \infty \))
2. लोचदार मांग (\( \text{ed} > 1 \))
3. इकाई के बराबर लोचदार मांग (\( \text{ed} = 1 \))
4. बेलोचदार मांग (\( \text{ed} < 1 \))
5. शून्य लोचदार मांग (\( \text{ed} = 0 \))
In simple words: मांग की लोच की पाँच श्रेणियाँ हैं: पूर्णतया लोचदार, लोचदार, इकाई के बराबर लोचदार, बेलोचदार और शून्य लोचदार।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक श्रेणी के लोच गुणांक (\( \text{ed} \) मान) को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 4. पूर्णतया लोचदार मांग से क्या आशय है?
Answer: पूर्णतया लोचदार मांग वह स्थिति है जहाँ कीमत में बिल्कुल भी बदलाव न आए, तो भी मांग अनंत तक बढ़ या घट सकती है। यहाँ तक कि कीमत में मामूली सी बढ़ोतरी भी मांग को एकदम शून्य कर सकती है। यह एक काल्पनिक स्थिति है जहाँ मांग वक्र X-अक्ष के समानांतर एक सीधी रेखा होती है।
In simple words: पूर्णतया लोचदार मांग मतलब, कीमत में जरा सा भी बदलाव मांग को अनंत तक बदल सकता है।
🎯 Exam Tip: यह स्थिति अक्सर पूर्ण प्रतियोगिता वाले बाजार में देखी जाती है।
Question 5. सापेक्षतया लोचदार मांग क्या है?
अथवा
मांग की लोच एक से अधिक कब होती है?
Answer: सापेक्ष लोचदार मांग या एक से अधिक लोच तब होती है जब कीमत में बदलाव के मुकाबले मांग में ज्यादा प्रतिशत का बदलाव आता है। उदाहरण के लिए, अगर कीमत 10% घटती है, और मांग 20% बढ़ जाती है, तो यह सापेक्ष लोचदार मांग होगी। इस स्थिति में लोच का मान 1 से अधिक होता है।
In simple words: जब मांग में बदलाव कीमत के बदलाव से ज्यादा होता है, तो उसे सापेक्ष लोचदार मांग कहते हैं।
🎯 Exam Tip: विलासिता की वस्तुओं की मांग आमतौर पर सापेक्ष लोचदार होती है।
Question 7. आयताकार अतिपरवलय वक्र क्या है?
Answer: आयताकार अतिपरवलय एक ऐसा वक्र होता है जिसके नीचे किसी भी बिंदु से बनाए गए आयतों का क्षेत्रफल एक समान रहता है। मांग की लोच जब इकाई के बराबर (\( \text{ed} = 1 \)) होती है, तो मांग वक्र इसी आयताकार अतिपरवलय जैसा होता है।
In simple words: आयताकार अतिपरवलय एक ऐसा मांग वक्र है जिस पर हर बिंदु पर मांग की लोच इकाई के बराबर होती है।
🎯 Exam Tip: इस वक्र पर, कीमत और मात्रा का गुणनफल (कुल खर्च) हमेशा स्थिर रहता है।
Question 8. इकाई से कम लोचदार मांग अथवा बेलोचदार मांग की लोच क्या है?
Answer: इकाई से कम लोचदार मांग या बेलोचदार मांग तब होती है जब कीमत में बदलाव के मुकाबले मांग में कम प्रतिशत का बदलाव आता है। उदाहरण के लिए, कीमत 10% घटती है, लेकिन मांग केवल 2% बढ़ती है। इस स्थिति में मांग की लोच 1 से कम होती है।
In simple words: जब मांग में बदलाव कीमत के बदलाव से कम होता है, तो उसे बेलोचदार मांग कहते हैं।
🎯 Exam Tip: आवश्यक वस्तुओं की मांग आमतौर पर बेलोचदार होती है।
Question 9. शून्य लोच क्या है? इस स्थिति में मांग वक्र की स्थिति कैसी होती है?
Answer: शून्य लोच का मतलब है कि कीमत में कितना भी बदलाव आए, वस्तु की मांग पर कोई असर नहीं पड़ता है। इस स्थिति में मांग वक्र हमेशा Y-अक्ष के समानांतर एक सीधी खड़ी रेखा होता है।
In simple words: शून्य लोच तब होती है जब कीमत बदलने पर भी मांग वही रहती है, और मांग वक्र Y-अक्ष के समानांतर होता है।
🎯 Exam Tip: यह पूर्णतया बेलोचदार मांग की स्थिति होती है।
Question 10. मार्शल के अनुसार लोचदार मांग से क्या आशय है?
Answer: मार्शल के अनुसार, लोचदार मांग वह स्थिति है जहाँ कीमत में थोड़ी कमी करने से कुल खर्च बढ़ जाता है, या कीमत में थोड़ी वृद्धि करने से कुल खर्च घट जाता है। ऐसी मांग इकाई से अधिक लोचदार (\( \text{ed} > 1 \)) होती है।
In simple words: मार्शल के अनुसार, जब कीमत घटने पर कुल खर्च बढ़े या कीमत बढ़ने पर कुल खर्च घटे, तो मांग लोचदार होती है।
🎯 Exam Tip: यह कुल व्यय विधि का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है जो मांग की लोच को दर्शाता है।
Question 11. मार्शल के अनुसार ऐकिक मांग की लोच क्या है?
Answer: मार्शल के अनुसार, ऐकिक मांग की लोच तब होती है जब कीमत में थोड़ा सा बदलाव आने पर भी उपभोक्ता का कुल खर्च उतना ही रहता है। इस स्थिति में मांग की लोच इकाई के बराबर (\( \text{ed} = 1 \)) होती है।
In simple words: मार्शल के अनुसार, ऐकिक मांग की लोच तब होती है जब कीमत बदलने पर भी कुल खर्च में कोई बदलाव नहीं आता।
🎯 Exam Tip: ऐकिक मांग वक्र एक आयताकार अतिपरवलय होता है।
Question 12. मार्शल के अनुसार बेलोचदार मांग से क्या आशय है?
Answer: मार्शल के अनुसार, बेलोचदार मांग वह स्थिति है जहाँ कीमत में बदलाव के मुकाबले मांग में कम प्रतिशत का बदलाव आता है। इस स्थिति में मांग की लोच इकाई से कम (\( \text{ed} < 1 \)) होती है। कुल व्यय विधि में, कीमत और कुल खर्च एक ही दिशा में बदलते हैं।
In simple words: मार्शल के अनुसार, जब कीमत घटने पर कुल खर्च भी घटे या कीमत बढ़ने पर कुल खर्च भी बढ़े, तो मांग बेलोचदार होती है।
🎯 Exam Tip: यह भी कुल व्यय विधि का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है।
Question 14. गेहूँ की मांग की लोच किस श्रेणी की है? कारण सहित बताइए।
Answer: गेहूँ की मांग बेलोचदार होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि गेहूँ एक ज़रूरी चीज़ है, और इसकी कीमत में बदलाव आने पर भी लोग इसे कम नहीं खरीद सकते क्योंकि यह उनकी मूलभूत आवश्यकता है। इसलिए कीमत बदलने पर भी इसकी मांग पर ज्यादा असर नहीं पड़ता।
In simple words: गेहूँ आवश्यक वस्तु होने के कारण बेलोचदार मांग की श्रेणी में आता है।
🎯 Exam Tip: आवश्यक वस्तुओं की मांग पर कीमत का प्रभाव कम होता है।
Question 15. कार की मांग की लोच किस श्रेणी में आती है? बताइए।
Answer: कार की मांग अधिक लोचदार होती है। कार एक विलासिता की वस्तु मानी जाती है। जब कार की कीमत बढ़ती है, तो बहुत से लोग इसे खरीदना बंद कर देते हैं या कम खरीदते हैं, जिससे इसकी मांग में तेजी से कमी आती है।
In simple words: कार विलासिता की वस्तु है, इसलिए इसकी मांग बहुत लोचदार होती है।
🎯 Exam Tip: विलासिता की वस्तुओं की मांग पर कीमत का प्रभाव अधिक होता है।
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 लघु उत्तरीय प्रश्न (SA-II)
Question 1. मांग की लोच से क्या आशय है? समझाइए।
Answer: मांग की लोच हमें यह बताती है कि जब किसी वस्तु की कीमत में बदलाव आता है, तो उसकी मांग में कितना बदलाव आता है। यह कीमत और मांग के बीच के संबंध को संख्या में दिखाता है। अर्थशास्त्री केयर्न क्रास ने कहा है कि मांग की लोच वह दर है जिस पर कीमत बदलने से खरीदी गई मात्रा में बदलाव आता है। यह सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि आय या अन्य संबंधित वस्तुओं की कीमत में बदलाव से भी मांग पर पड़ने वाले असर को मापती है।
In simple words: मांग की लोच दिखाती है कि कीमत बदलने पर मांग कितनी बदलती है।
🎯 Exam Tip: मांग की लोच को हमेशा कीमत, आय और संबंधित वस्तुओं की कीमत के संदर्भ में समझा जाता है।
Question 2. बेलोचदार मांग से क्या आशय है?
Answer: बेलोचदार मांग तब होती है जब वस्तु की मांग में प्रतिशत बदलाव कीमत में प्रतिशत बदलाव से कम होता है। इसका मतलब है कि कीमत में बड़ा बदलाव आने पर भी मांग में केवल थोड़ा सा ही बदलाव आता है। इस स्थिति में मांग की लोच 1 से कम (\( \text{ed} < 1 \)) होती है।
चित्र से स्पष्ट है कि कीमत में परिवर्तन PP1 के बराबर हुआ है, लेकिन मांग में परिवर्तन उससे कम QQ1 के बराबर ही हुआ है। यह बेलोचदार मांग की स्थिति है।
In simple words: बेलोचदार मांग तब होती है जब कीमत बदलने पर मांग में थोड़ा बदलाव आता है।
🎯 Exam Tip: बेलोचदार मांग में मांग वक्र का ढलान ज्यादा होता है (यह खड़ा होता है)।
Question 3. अधिक लोचदार मांग क्या होती है?
Answer: अधिक लोचदार मांग तब होती है जब वस्तु की मांग में प्रतिशत बदलाव कीमत में प्रतिशत बदलाव से ज्यादा होता है। इसका मतलब है कि कीमत में थोड़ा सा बदलाव आने पर भी मांग में बहुत बड़ा बदलाव आता है। इस स्थिति में मांग की लोच 1 से अधिक (\( \text{ed} > 1 \)) होती है।
चित्र से स्पष्ट है कि कीमत में परिवर्तन PP1 से वस्तु की मांग में परिवर्तन QQ1 ज्यादा है। अतः वस्तु की मांग अधिक लोचदार है।
In simple words: अधिक लोचदार मांग तब होती है जब कीमत बदलने पर मांग में बहुत ज्यादा बदलाव आता है।
🎯 Exam Tip: अधिक लोचदार मांग में मांग वक्र का ढलान कम होता है (यह अधिक सपाट होता है)।
Question 4. पूर्णतया लोचदार मांग से क्या आशय है?
Answer: पूर्णतया लोचदार मांग (\( \text{Perfectly elastic demand} \)) वह स्थिति है जहाँ कीमत में बिल्कुल भी बदलाव न आए, तो भी वस्तु की मांग अनंत तक बढ़ या घट सकती है। यहाँ तक कि कीमत में मामूली सी बढ़ोतरी भी मांग को एकदम शून्य कर सकती है। यह एक काल्पनिक स्थिति है, जो वास्तविक जीवन में बहुत कम मिलती है। इस अवस्था में मांग वक्र X-अक्ष के समानांतर एक सीधी क्षैतिज रेखा होता है।
चित्र से स्पष्ट है कि OP कीमत पर वस्तु की मात्रा कुछ भी हो सकती है। मांग की मात्रा जैसे OQ, Q1 या Q2 या इससे कुछ भिन्न हो सकती है।
In simple words: पूर्णतया लोचदार मांग वह है जहाँ कीमत में बिना बदलाव के मांग अनंत हो जाती है।
🎯 Exam Tip: पूर्णतया लोचदार मांग एक सैद्धांतिक अवधारणा है जो पूर्ण प्रतियोगिता वाले बाजारों को समझने में मदद करती है।
Question 5. इकाई के बराबर लोच अथवा लोचदार मांग से क्या आशय है?
Answer: इकाई के बराबर लोच या लोचदार मांग (\( \text{Elastic Demand} \)) तब होती है जब वस्तु की मांग में प्रतिशत बदलाव कीमत में प्रतिशत बदलाव के बराबर होता है। इस अवस्था में मांग की लोच इकाई के बराबर (\( \text{ed} = 1 \)) होती है। उदाहरण के लिए, यदि कीमत में 20 प्रतिशत वृद्धि होने पर मांग में भी 20 प्रतिशत कमी हो जाए, तो ऐसी वस्तु की मांग इकाई के बराबर लोचदार कहलाएगी।
चित्र को देखने से स्पष्ट है कि OP कीमत पर मांग OQ है। जब कीमत बढ़कर OP1 हो जाती है तो वस्तु की मांग घटकर OQ1 रह जाती है। चित्र में कीमत में परिवर्तन PP1 मांग में परिवर्तन OQ1 के बराबर है। अतः मांग में कमी उसी अनुपात में है जिस अनुपात में कीमत में वृद्धि हुई है। प्रायः आरामदायक वस्तुओं की मांग लोचदार होती है।
In simple words: इकाई के बराबर लोच तब होती है जब कीमत और मांग में प्रतिशत बदलाव समान होते हैं।
🎯 Exam Tip: इस स्थिति में कुल खर्च हमेशा स्थिर रहता है।
Question 6. जब वस्तु की कीमत में परिवर्तन होने पर भी वस्तु की मांग अपरिवर्तित रहती है तो ऐसी वस्तु की मांग को पूर्णतया बेलोचदार मांग कहते हैं। इस अवस्था में मांग की लोच शून्य होती है। इस दशा में मांग वक्र Y अक्ष के समानान्तर होता है। इस स्थिति को रेखाचित्र में दिखाया गया है –
उपरोक्त चित्र में कीमत OP, OP1 तथा OP2 तीनों अवस्थाओं में वस्तु की मांग समान OQ ही रहती है, उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता है। यह मांग की शून्य लोच की स्थिति है। यह स्थिति कोरी कल्पना है। वास्तविक जीवन में देखने को नहीं मिलती है।
In simple words: इस प्रश्न में पूर्णतया बेलोचदार मांग को चित्र सहित समझाया गया है, जहाँ कीमत बदलने पर भी मांग स्थिर रहती है।
🎯 Exam Tip: पूर्णतया बेलोचदार मांग की अवधारणा को समझना महत्वपूर्ण है, भले ही यह वास्तविक बाजारों में दुर्लभ हो।
Question 7. मांग की कीमत लोच के मापन की ज्यामिति विधि (बिन्दू रीति वक्र) का संक्षेप में वर्णन कीजिए?
Answer: बिंदु रीति या ज्यामितीय विधि का प्रयोग मांग वक्र के किसी बिंदु पर मांग की कीमत लोच का पता लगाने के लिए किया जाता है। मांग वक्र के विभिन्न बिंदुओं पर कीमत लोच बराबर नहीं होती, वह अलग-अलग होती है। जिस बिंदु पर भी मांग की लोच ज्ञात करनी होती है, उस बिंदु से मांग वक्र के निचले हिस्से और ऊपरी हिस्से की लंबाई की सहायता से निम्न सूत्र द्वारा मांग की लोच ज्ञात की जाती है:
\[ \text{ed} = \frac{\text{बिन्दु से नीचे का हिस्सा (PB)}}{\text{बिन्दु से ऊपर का हिस्सा (PA)}} \]
यदि दोनों हिस्से बराबर होते हैं तो मांग की लोच इकाई के बराबर (\( \text{ed} = 1 \)) होती है। यदि नीचे का हिस्सा ऊपर के हिस्से से ज्यादा होता है तो मांग की लोच इकाई से ज्यादा (\( \text{ed} > 1 \)) होती है और नीचे का हिस्सा ऊपर के हिस्से से कम होने पर मांग की लोच इकाई से कम (\( \text{ed} < 1 \)) होती है। इन तीनों स्थितियों को रेखाचित्र में दिखाया गया है:
इस चित्र में R बिन्दु पर मांग की लोच इकाई के बराबर है क्योंकि R बिन्दु से नीचे का हिस्सा तथा ऊपर का हिस्सा दोनों बराबर हैं। S बिन्दु पर मांग की कीमत इकाई से अधिक है क्योंकि S बिन्दु से नीचे का हिस्सा ऊपर के हिस्से से ज्यादा है। इसके विपरीत T बिन्दु पर मांग की लोच इकाई से कम होगी क्योंकि नीचे का हिस्सा ऊपर के हिस्से से कम है। यदि मांग वक्र एक सीधी रेखा न होकर वक्र की आकृति में होती है तो जिस बिन्दु पर मांग की लोच ज्ञात करनी होती है उस बिन्दु से स्पर्श रेखा खींच कर उपरोक्त विधि से मांग की लोच ज्ञात कर लेते हैं।
In simple words: ज्यामितीय विधि में, किसी बिंदु पर लोच जानने के लिए उस बिंदु से मांग वक्र के निचले हिस्से को ऊपरी हिस्से से भाग देते हैं, और यह लोच मांग वक्र के हर बिंदु पर अलग होती है।
🎯 Exam Tip: इस विधि को समझने के लिए मांग वक्र पर विभिन्न बिंदुओं पर लोच का मान याद रखें।
Question 8. मांग की लोच मापने की आनुपातिक विधि क्या है? समझाइए।
Answer: मांग की लोच मापने की आनुपातिक विधि हमें बताती है कि मांग में प्रतिशत बदलाव को कीमत में प्रतिशत बदलाव से भाग देने पर लोच कैसे मिलती है। यह विधि तब उपयोगी होती है जब हमें कीमत और मांग में संख्यात्मक बदलाव पता हो। इस विधि का सूत्र निम्न प्रकार है:
\[ \text{ed} = \frac{\text{मांग मात्रा में आनुपातिक परिवर्तन}}{\text{कीमत में आनुपातिक परिवर्तन}} = \frac{\Delta Q}{\Delta P} \times \frac{P}{Q} \]
जहाँ, \( \Delta Q \) मांग में परिवर्तन, \( \Delta P \) कीमत में परिवर्तन, \( P \) प्रारंभिक कीमत और \( Q \) प्रारंभिक मांग है।
In simple words: आनुपातिक विधि में, मांग में हुए प्रतिशत बदलाव को कीमत में हुए प्रतिशत बदलाव से भाग देकर लोच ज्ञात करते हैं।
🎯 Exam Tip: यह विधि मांग की लोच को संख्यात्मक रूप से मापने का सबसे आम तरीका है।
Question 9. मांग की लोच पर स्थानापन्न वस्तुओं का क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: स्थानापन्न वस्तुओं की उपलब्धता मांग की लोच को बढ़ाती है। अगर किसी वस्तु के कई अच्छे विकल्प (स्थानापन्न) बाजार में मौजूद हैं (जैसे चाय और कॉफी), तो उसकी मांग लोचदार होती है। क्योंकि एक वस्तु की कीमत बढ़ने पर, उपभोक्ता आसानी से उसके विकल्प पर चले जाते हैं, जिससे पहली वस्तु की मांग घट जाती है। इसके विपरीत, जिन वस्तुओं का कोई स्थानापन्न नहीं होता, उनकी मांग बेलोचदार होती है।
In simple words: स्थानापन्न वस्तुएं जितनी ज्यादा होती हैं, मांग उतनी ही लोचदार होती है।
🎯 Exam Tip: स्थानापन्न वस्तुओं का प्रभाव अक्सर उपभोक्ता के चुनाव और बाजार की प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।
Question 10. कुल व्यय रीति से मांग की लोच किस प्रकार ज्ञात की जाती है?
Answer: कुल व्यय विधि से मांग की लोच ज्ञात करने के लिए हम यह देखते हैं कि कीमत बदलने पर उपभोक्ता के कुल खर्च में क्या बदलाव आता है। इसके तीन मुख्य तरीके हैं:
1. **इकाई के बराबर लोच (\( \text{ed} = 1 \)):** अगर कीमत बदलने पर कुल खर्च वही रहता है, तो लोच इकाई के बराबर होती है।
2. **इकाई से अधिक लोच (\( \text{ed} > 1 \)):** अगर कीमत और कुल खर्च उल्टी दिशा में बदलते हैं (जैसे कीमत घटने पर खर्च बढ़े), तो लोच इकाई से ज्यादा होती है।
3. **इकाई से कम लोच (\( \text{ed} < 1 \)):** अगर कीमत और कुल खर्च एक ही दिशा में बदलते हैं (जैसे कीमत घटने पर खर्च घटे), तो लोच इकाई से कम होती है।
In simple words: कुल खर्च विधि में, हम कीमत में बदलाव के साथ कुल खर्च में हुए बदलाव को देखकर मांग की लोच पता करते हैं।
🎯 Exam Tip: कुल व्यय विधि यह समझने में मदद करती है कि कीमत में बदलाव का व्यवसायों की आय पर कैसे असर पड़ता है।
Question 11. वस्तु की प्रकृति तथा उपभोक्ता की आदत मांग की लोच को कैसे प्रभावित करते हैं?
Answer: वस्तु की प्रकृति और उपभोक्ता की आदतें मांग की लोच को इस तरह प्रभावित करती हैं:
1. **वस्तु की प्रकृति:**
- **आवश्यक वस्तुएं:** जैसे दवा, अनाज, इनकी मांग बेलोचदार होती है क्योंकि कीमत बढ़ने पर भी इनकी मांग ज्यादा नहीं घटती।
- **आरामदायक वस्तुएं:** इनकी मांग लोचदार होती है, क्योंकि इनकी कीमत में बदलाव से मांग में भी अनुपात में बदलाव आता है।
- **विलासिता की वस्तुएं:** इनकी मांग सबसे अधिक लोचदार होती है, क्योंकि कीमत में थोड़ी वृद्धि होने पर भी इनकी मांग में बहुत ज्यादा गिरावट आती है।
2. **उपभोक्ता की आदत:**
- जिन वस्तुओं की उपभोक्ताओं को आदत पड़ जाती है, उनकी मांग बेलोचदार होती है, जैसे सिगरेट या बीड़ी। कीमत बदलने पर भी उपभोक्ता इनकी मांग कम नहीं कर पाते।
In simple words: वस्तु का प्रकार (ज़रूरी या विलासिता) और उसकी आदत है या नहीं, ये दोनों मांग की लोच को बहुत प्रभावित करते हैं।
🎯 Exam Tip: इन कारकों को ध्यान में रखकर कंपनियां अपनी मूल्य निर्धारण रणनीतियाँ बनाती हैं।
RBSE Class 12 Economics Chapter 4 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. मांग की कीमत लोच को परिभाषित कीजिए तथा मांग के नियम एवं मांग की लोच में क्या अन्तर है?
Answer:
**मांग की कीमत लोच की परिभाषा:**
मांग की कीमत लोच हमें यह बताती है कि जब किसी वस्तु की कीमत में बदलाव आता है, तो उसकी मांगी गई मात्रा में कितना प्रतिशत बदलाव आएगा। यह कीमत और मांग के बीच के संख्यात्मक संबंध को दर्शाता है। अर्थशास्त्री केयर्न क्रास के अनुसार, "किसी वस्तु की मांग की लोच वह दर है जिस पर खरीदी जाने वाली मात्रा कीमत परिवर्तनों के परिणामस्वरूप बदलती है।" प्रो. ईस्थम के शब्दों में, "मांग की लोच, कीमत में होने वाले परिवर्तनों के फलस्वरूप मांग की मात्रा में होने वाले परिवर्तन की एक माप है।"
**मांग का नियम एवं मांग की लोच में अन्तर:**
मांग का नियम और मांग की लोच दोनों ही कीमत और मांग के बीच संबंध बताते हैं, लेकिन उनमें महत्वपूर्ण फर्क है:
1. **दिशा बनाम मात्रा:**
- **मांग का नियम:** यह केवल यह बताता है कि कीमत बढ़ने पर मांग घटेगी और कीमत घटने पर मांग बढ़ेगी। यह कीमत और मांग के बीच 'विपरीत दिशा' का संबंध बताता है, लेकिन यह नहीं बताता कि कितना बदलाव आएगा।
- **मांग की लोच:** यह बताता है कि कीमत बदलने पर मांग में 'कितना' बदलाव आएगा। यह बदलाव की मात्रा या 'डिग्री' को संख्यात्मक रूप से मापती है। यह कीमत और मांग के बीच के संबंध की 'ताकत' को दर्शाती है।
2. **गुणात्मक बनाम मात्रात्मक:**
- **मांग का नियम:** यह एक गुणात्मक कथन है जो बताता है कि संबंध की दिशा क्या होगी।
- **मांग की लोच:** यह एक मात्रात्मक माप है जो बताता है कि संबंध कितना मजबूत है। यह हमें एक संख्यात्मक मूल्य देती है जिससे हम तुलना कर सकते हैं।
3. **व्याख्या:**
- **मांग का नियम:** इसकी व्याख्या केवल यह बताती है कि कीमत में बदलाव होने पर मांग में बदलाव की दिशा क्या होगी।
- **मांग की लोच:** इसकी व्याख्या हमें यह बताती है कि मांग में बदलाव कितना 'संवेदनशील' या 'असंवेदनशील' होगा कीमत में बदलाव के प्रति। यह हमें विभिन्न वस्तुओं की मांग की तुलना करने में मदद करती है।
मांग की लोच की व्याख्या मांग के नियम की इसी कमी को दूर करती है, क्योंकि यह कीमत एवं मांग के बीच परिवर्तन का मात्रात्मक माप है।
In simple words: मांग की लोच बताती है कि कीमत बदलने पर मांग कितनी बदलती है। मांग का नियम सिर्फ यह बताता है कि कीमत और मांग उल्टी दिशा में चलते हैं, जबकि मांग की लोच बताती है कि वे कितनी मात्रा में बदलते हैं।
🎯 Exam Tip: मांग का नियम गुणात्मक है, जबकि मांग की लोच मात्रात्मक है – इस अंतर को स्पष्ट रूप से उजागर करें।
Question 2. उदाहरण की सहायता से समझाइए कि किन परिस्थितियों में (1) मांग की प्रतिशत विधि, (2) मांग की ज्यामिति विधि काम में ली जाती है?
Answer:
**1. मांग की प्रतिशत विधि (Percentage Method):**
मांग की प्रतिशत विधि का उपयोग तब किया जाता है जब हमें वस्तु की कीमत और उसकी मांगी गई मात्रा में संख्यात्मक बदलाव पता हो। यह विधि मांग की लोच का एक निश्चित संख्यात्मक मान देती है। यह सबसे श्रेष्ठ विधि मानी जाती है जब हमें कीमत और मात्रा के सटीक आंकड़े उपलब्ध हों।
**उदाहरण:**
प्रारंभिक कीमत \( P = \text{Rs } 10 \), नई कीमत \( P_1 = \text{Rs } 12 \)
प्रारंभिक मांग \( Q = 500 \text{ इकाइयाँ} \), नई मांग \( Q_1 = 400 \text{ इकाइयाँ} \)
यहां, \( \Delta P = P_1 - P = 12 - 10 = 2 \)
और \( \Delta Q = Q_1 - Q = 400 - 500 = -100 \)
प्रतिशत विधि सूत्र से:
\[ \text{ed} = \frac{\Delta Q}{\Delta P} \times \frac{P}{Q} = \frac{-100}{2} \times \frac{10}{500} = -50 \times \frac{1}{50} = -1 \]
मांग की लोच (निरपेक्ष मान) = 1 (इकाई के बराबर लोचदार)।
**2. मांग की ज्यामिति विधि (Geometric or Point Method):**
मांग की ज्यामिति विधि का उपयोग तब किया जाता है जब हमें मांग वक्र दिया होता है और हमें उस मांग वक्र के किसी विशेष बिंदु पर मांग की लोच ज्ञात करनी होती है। यह विधि रेखाचित्रों पर मांग की लोच को समझने के लिए बहुत उपयोगी है। यह हमें बताती है कि मांग वक्र के अलग-अलग बिंदुओं पर लोच का मान कैसे बदलता है।
इस चित्र में:
- R बिंदु पर मांग की लोच इकाई के बराबर (\( \text{ed} = 1 \)) है, क्योंकि निचले हिस्से की लंबाई ऊपरी हिस्से के बराबर है।
- S बिंदु पर मांग की लोच इकाई से अधिक (\( \text{ed} > 1 \)) है, क्योंकि S से निचला हिस्सा S से ऊपरी हिस्से से ज्यादा लंबा है।
- T बिंदु पर मांग की लोच इकाई से कम (\( \text{ed} < 1 \)) होगी, क्योंकि T से निचला हिस्सा T से ऊपरी हिस्से से कम लंबा है।
In simple words: प्रतिशत विधि का उपयोग तब होता है जब हमें संख्यात्मक डेटा दिया गया हो, जबकि ज्यामितीय विधि का उपयोग तब होता है जब हमें किसी मांग वक्र पर लोच पता करनी हो।
🎯 Exam Tip: दोनों विधियों का सही उपयोग जानने से आपको विभिन्न प्रकार के मांग लोच के प्रश्नों को हल करने में मदद मिलेगी।
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