RBSE Solutions Class 12 Economics Chapter 23 सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था

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Detailed Chapter 23 सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था RBSE Solutions for Class 12 Economics

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Class 12 Economics Chapter 23 सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Economics Chapter 23 अभ्यासार्थ प्रश्न

RBSE Class 12 Economics Chapter 23 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. सन्तुलित बजट से आशय है।
(अ) कुल आय > कुल व्यय
(ब) कुल आय < कुल व्यय
(स) कुल आय = कुल व्यय
(द) कुल आय = 0
Answer: (स) कुल आय = कुल व्यय
In simple words: जब सरकार की कुल कमाई और उसका कुल खर्च बराबर होते हैं, तो इसे संतुलित बजट कहते हैं।

🎯 Exam Tip: बजट के विभिन्न प्रकारों (संतुलित, घाटे का, आधिक्य का) को उनकी परिभाषाओं और प्रभावों के साथ याद रखें।

 

Question 3. जनता की क्रय शक्ति में कमी करने हेतु सरकार का प्रमुख उपाय है।
(अ) करों में छूट देना
(ब) नये कर लगाना
(स) सरकारी व्यय में वृद्धि करना
(द) सब्सिडी देना
Answer: (ब) नये कर लगाना
In simple words: जब सरकार नए टैक्स लगाती है, तो लोगों के पास खर्च करने के लिए कम पैसे बचते हैं, जिससे उनकी खरीदने की क्षमता कम हो जाती है।

🎯 Exam Tip: राजकोषीय नीति के उपकरणों (कर, सरकारी व्यय) को समझें और वे अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करते हैं, इसे जानें।

 

Question 4. जिस बजट में विगत व्ययों को आधार नहीं बनाया जाता, वह है।
(अ) आम बजट
(ब) घाटे का बजट
(स) पूरक बजट
(द) जीरोबेस बजट
Answer: (द) जीरोबेस बजट
In simple words: जीरोबेस बजट में हर साल बजट की शुरुआत शून्य से होती है, यानी पिछले साल के खर्चों को आधार नहीं बनाया जाता और हर खर्च को नए सिरे से मंजूरी लेनी पड़ती है।

🎯 Exam Tip: जीरोबेस बजटिंग (ZBB) की मुख्य विशेषताएँ और यह कैसे पारंपरिक बजटिंग से अलग है, इसे समझें।

 

Question 5. संसद में प्रतिवर्ष बजट पास करवाने की व्यवस्था से किसकी सर्वोच्चता सिद्ध होती है?
(अ) राष्ट्रपति
(ब) प्रधानमन्त्री
(स) संसद
(द) वित्तमंत्री
Answer: (स) संसद
In simple words: हर साल संसद में बजट पास होने की प्रक्रिया दिखाती है कि देश में संसद ही सबसे ज़्यादा ताकतवर है, क्योंकि वह सरकार के पैसों के इस्तेमाल पर नियंत्रण रखती है।

🎯 Exam Tip: भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में संसद की भूमिका और वित्तीय मामलों में उसकी सर्वोच्चता पर ध्यान दें।

RBSE Class 12 Economics Chapter 23 अतिलघु उत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. राजस्व प्राप्तियों को दो भागों में बाँटा जाता है, दोनों भागों के नाम लिखो।
Answer: राजस्व प्राप्तियों को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा जाता है:
1. कर राजस्व (Tax Revenue)
2. गैर-कर राजस्व (Non-tax Revenue)
In simple words: सरकार की कमाई के दो मुख्य तरीके हैं: टैक्स से मिलने वाला पैसा और बिना टैक्स वाले तरीकों से मिलने वाला पैसा।

🎯 Exam Tip: कर और गैर-कर राजस्व के तहत आने वाले कुछ प्रमुख उदाहरणों को याद रखें।

 

राजस्व घाटा = राजस्व प्राप्तियाँ - राजस्व व्यय

 

Question 3. भारत में वित्तीय वर्ष की अवधि बताइए।
Answer: भारत में वित्तीय वर्ष की अवधि 1 अप्रैल से शुरू होकर अगले साल 31 मार्च तक होती है। इस समय को आर्थिक गणना के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
In simple words: भारत में वित्तीय साल 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलता है।

🎯 Exam Tip: वित्तीय वर्ष की सही अवधि को याद रखें, क्योंकि यह आर्थिक गणनाओं का आधार है।

 

Question 4. शून्य आधारित बजट का जनक कौन है?
Answer: शून्य आधारित बजट के जनक के रूप में अमेरिका के पीटर ए. पायर को जाना जाता है। इन्होंने इस अवधारणा को बढ़ावा दिया।
In simple words: पीटर ए. पायर ने जीरोबेस बजट की शुरुआत की थी।

🎯 Exam Tip: प्रमुख आर्थिक अवधारणाओं के जनक या संबंधित व्यक्तियों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।

RBSE Class 12 Economics Chapter 23 लघु उत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. 'आम बजट' से आपका क्या आशय है?
Answer: आम बजट को पारंपरिक बजट भी कहा जाता है। इस बजट का मुख्य लक्ष्य सरकारी खर्चों को नियंत्रित करना होता है, न कि बहुत तेज़ी से विकास करना। इसमें वेतन, मजदूरी, उपकरण, मशीनें खरीदने जैसे खर्चों और विभिन्न स्रोतों से होने वाली आय का ब्यौरा दिया जाता है।
In simple words: आम बजट वह पारंपरिक बजट है जो सरकारी खर्चों को नियंत्रित करने और आय-व्यय का हिसाब रखने पर जोर देता है।

🎯 Exam Tip: आम बजट की परिभाषा में उसके मुख्य उद्देश्य (खर्च नियंत्रण) और उसमें शामिल प्रमुख मदों को शामिल करें।

 

Question 2. बजट की तुलना जादू के पिटारे से की गई है, क्यों? स्पष्ट करें।
Answer: बजट शब्द फ्रांसीसी शब्द 'Bougette' से आया है, जिसका मतलब 'चमड़े का थैला' होता है। 1773 में, इंग्लैंड में बजट शब्द का इस्तेमाल 'जादू के पिटारे' के रूप में किया गया था। बजट सरकार की आय और व्यय का एक दस्तावेज है, जिसमें अगले साल के लिए आय-व्यय के अनुमान, सामाजिक-आर्थिक कार्यक्रम और आय-व्यय को घटाने-बढ़ाने के प्रस्ताव एक थैले में बंद रहते हैं। इन तथ्यों को तब तक गुप्त रखा जाता है जब तक इसे देश की संसद में प्रस्तुत नहीं किया जाता। इसी कारण, इस थैले की तुलना जादू के पिटारे से की जाती है जो संसद के सामने खुलता है।
In simple words: बजट को 'जादू के पिटारे' से तुलना की जाती है क्योंकि इसमें सरकार की आय-व्यय के सभी गुप्त अनुमान और योजनाएँ एक थैले में बंद रहती हैं, जिन्हें संसद में ही खोला जाता है।

🎯 Exam Tip: बजट शब्द की उत्पत्ति और इसके ऐतिहासिक उपयोग को उदाहरण के साथ समझाएँ, खासकर 'जादू के पिटारे' वाली उपमा को स्पष्ट करें।

 

Question 3. बचत का बजट किसे कहा जाता है?
Answer: बचत का बजट (या आधिक्य का बजट) वह बजट होता है जहाँ सरकार की कुल आय उसके कुल व्यय से ज़्यादा होती है। इसका मतलब है कि सरकार की कुल आय कुल व्यय से अधिक हो \( \implies \) कुल आय > कुल व्यय।
In simple words: जब सरकार की कमाई उसके खर्च से ज़्यादा होती है, तो उसे बचत का बजट कहते हैं।

🎯 Exam Tip: बचत बजट को परिभाषित करते समय "आय का व्यय से अधिक होना" पर जोर दें और इसका सूत्र भी स्पष्ट करें।

 

सूत्र - प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा - ब्याज अदायगियाँ

 

Question 5. यदि एक देश के बजट में राजस्व घाटा Rs 700 करोड़ एवं कुल राजस्व व्यय Rs 1800 करोड़ है तो राजस्व प्राप्तियाँ ज्ञात कीजिए।
Answer: दिया है,
राजस्व घाटा = Rs 700 करोड़
राजस्व व्यय = Rs 1,800 करोड़
राजस्व प्राप्तियाँ = ?
राजस्व घाटा = राजस्व व्यय - राजस्व प्राप्तियाँ
\( \implies \) राजस्व प्राप्तियाँ = राजस्व व्यय - राजस्व घाटा
\( \implies \) राजस्व प्राप्तियाँ = 1,800 - 700
\( \implies \) राजस्व प्राप्तियाँ = Rs 1,100 करोड़
In simple words: दिए गए राजस्व घाटे और कुल राजस्व व्यय का उपयोग करके, हमने राजस्व प्राप्तियाँ 1,100 करोड़ रुपये निकालीं।

🎯 Exam Tip: राजस्व घाटे के सूत्र को सही ढंग से लागू करें और इकाइयों (करोड़ रुपये) का ध्यान रखें।

RBSE Class 12 Economics Chapter 23 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. बजट घाटे से आप क्या समझते हैं? इसकी विभिन्न अवधारणाओं को समझाइये।
Answer: बजट घाटा तब होता है जब किसी वित्तीय वर्ष में सरकार की आय उसके खर्च से कम हो जाती है। आजकल लोकतांत्रिक सरकारें अपने बजट में कई तरह के बजट घाटे दिखाती हैं, जिससे अर्थव्यवस्था की स्थिति को समझने में मदद मिलती है। प्रो. डाल्टन के अनुसार, एक बजट घाटा तब पूरा होता है जब किसी निश्चित समय में खर्च आय से ज़्यादा होता है।
विभिन्न अवधारणाएँ:
(i) राजस्व घाटा - यह तब होता है जब बजट में दिखाया गया कुल राजस्व व्यय कुल राजस्व प्राप्तियों से ज़्यादा होता है।
सूत्र - राजस्व घाटा = राजस्व व्यय - राजस्व प्राप्तियाँ
(ii) राजकोषीय घाटा - यह सरकार के कुल खर्च (राजस्व और पूँजीगत खर्च, जिसमें उधार लिया गया शुद्ध ऋण भी शामिल है) का कुल राजस्व प्राप्तियों और गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियों से ज़्यादा होना है। साफ है कि बजट घाटे में उधार और बाकी सभी देनदारियों को जोड़ने पर यह राजकोषीय घाटा कहलाता है। राजकोषीय घाटा अर्थव्यवस्था की वर्तमान आर्थिक स्थिति को पूरी तरह दिखाता है।
सूत्र - राजकोषीय घाटा = बजटीय घाटा + उधार + समस्त देनदारियाँ
In simple words: बजट घाटा तब होता है जब सरकार का खर्च उसकी कमाई से ज़्यादा हो जाता है। इसके मुख्य प्रकार राजस्व घाटा (जब राजस्व खर्च राजस्व आय से ज़्यादा हो) और राजकोषीय घाटा (जब कुल सरकारी खर्च कुल प्राप्तियों से ज़्यादा हो, उधार छोड़कर) हैं।

🎯 Exam Tip: बजट घाटे की परिभाषा को स्पष्ट करें और राजस्व घाटा व राजकोषीय घाटा दोनों के सूत्र और अर्थ को अच्छे से याद करें।

 

सूत्र - प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा - ब्याज अदायगियाँ।

 

Question 2. बजट को परिभाषित करते हुए इसके महत्त्व की विवेचना कीजिए।
Answer: बजट शब्द की उत्पत्ति फ्रांसीसी शब्द 'Bougette' से हुई है, जिसका अर्थ 'चमड़े का थैला' है। 1773 में, इंग्लैंड में इसका इस्तेमाल 'जादू के पिटारे' के रूप में किया गया था। बजट सरकार की आय और व्यय का एक विस्तृत दस्तावेज है, जिसमें अगले वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित आय-व्यय के आंकड़े और सामाजिक-आर्थिक कार्यक्रमों के साथ-साथ आय-व्यय को बढ़ाने या घटाने के प्रस्ताव होते हैं। आमतौर पर बजट सरकार के उस विवरण पत्र को कहते हैं जिसमें पूरे साल की आय-व्यय का ब्यौरा दिखाया जाता है। इसका व्यापक अर्थ यह है कि बजट में शामिल बातों को तब तक गुप्त रखा जाता है जब तक उसे देश की संसद में प्रस्तुत न कर दिया जाए।
बजट का महत्व - बजट का मुख्य उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को दिशा देना है। देश की अर्थव्यवस्था पर सरकार के बजट का सीधा असर होता है।
1. सरकारी बजट से न केवल विकास प्रभावित होता है, बल्कि विकास की दिशा भी बजट से तय होती है।
2. उत्पादन बढ़ाने में भी बजट की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बजट में टैक्स छूट और शुल्क में रियायतें देकर दिए जाने वाले प्रोत्साहन उत्पादन बढ़ाने में मदद करते हैं।
3. सरकार आमतौर पर बजट के जरिए नए टैक्स लगाकर और जनता से कर्ज लेकर लोगों की क्रय शक्ति कम करती है, जिससे महंगाई नियंत्रित होती है।
4. यह देश के आर्थिक और सामाजिक विकास को गति देता है।
5. यह देश की उत्पादन संरचना और उत्पादन के स्तर को दिशा देता है। बजट में टैक्स रियायतें और प्रोत्साहन उत्पादन वृद्धि में सहायक होते हैं।
6. देश में प्रचलित मुद्रास्फीति को बजट प्रावधानों में बदलाव करके नियंत्रित किया जाता है।
7. कल्याणकारी राज्य की स्थापना का लक्ष्य बजट की मदद से हासिल किया जा सकता है।
8. आर्थिक असमानता कम करने, सामाजिक सुरक्षा के लिए विभिन्न योजनाएं लागू करने और आर्थिक विकास के लिए योजनाएं बनाने का काम बजट के माध्यम से किया जाता है।
In simple words: बजट सरकार के एक साल की कमाई और खर्च का पूरा हिसाब होता है। यह सिर्फ पैसे का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि देश के विकास की दिशा तय करने, महंगाई कंट्रोल करने और लोगों की भलाई के लिए भी बहुत जरूरी है।

🎯 Exam Tip: बजट की परिभाषा और उसके सभी महत्वपूर्ण उद्देश्यों को विस्तार से समझाएँ, खासकर आर्थिक विकास और नियंत्रण से जुड़े बिंदुओं पर ध्यान दें।

 

Question 3. राजस्व प्राप्तियाँ एवं राजस्व व्यय से आपका क्या आशय है? स्पष्ट कीजिए।
Answer:
राजस्व प्राप्तियाँ - इसमें वह आय दिखाई जाती है जो उसी वित्तीय वर्ष से जुड़ी होती है। इसे चालू खाता भी कहते हैं। इस खाते में आय के वे स्रोत शामिल होते हैं जिनके बदले में कोई भुगतान नहीं करना पड़ता। जैसे-कर से मिली आय, सरकारी कंपनियों से मिला लाभ, सरकारी उद्योगों पर मिला ब्याज आदि। राजस्व बजट में राजस्व आय और राजस्व प्राप्तियाँ दिखाई जाती हैं। राजस्व आय और राजस्व प्राप्तियों में:
1. कर राजस्व में आयकर, निगम कर, संपत्ति कर, उपहार कर, दंड कर, उत्पादन शुल्क, सीमा शुल्क और व्यय कर आदि शामिल हैं।
2. गैर-कर राजस्व में ऋण, ब्याज, शुल्क, दंड और जुर्माना आदि शामिल हैं।
राजस्व व्यय - राजस्व व्यय को बजट में गैर-विकासात्मक व्यय और विकासात्मक व्यय के रूप में बांटा जाता है। गैर-विकासात्मक व्यय में सरकारी सेवाओं पर खर्च, सरकारी सब्सिडी, सरकारी अनुदान और ब्याज का भुगतान शामिल है। जबकि विकासात्मक व्यय में सामाजिक और सामुदायिक सेवाओं, कृषि और सहायता सेवाओं, उद्योग, खनिज, उर्वरक सब्सिडी, सामान्य आर्थिक सेवाओं, विद्युत सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, सार्वजनिक निर्माण, परिवहन और संचार, तथा राज्यों को अनुदान पर खर्च शामिल होता है।
राजस्व व्यय को भी दो भागों में दिखाया जाता है:
1. आयोजना भिन्न व्यय-राजस्व खाते से
2. आयोजना व्यय-राजस्व खाते से
इन दोनों मदों में सरकारी बजट के आयोजना और आयोजना भिन्न मदों से होने वाले खर्च को दिखाया जाता है।
In simple words: राजस्व प्राप्तियाँ सरकार की वह कमाई है जो टैक्स या अन्य तरीकों से मिलती है और जिसे वापस नहीं करना पड़ता। राजस्व व्यय सरकार का वह खर्च है जिससे कोई नई संपत्ति नहीं बनती और न ही कोई देनदारी कम होती है, जैसे वेतन या सब्सिडी।

🎯 Exam Tip: राजस्व प्राप्तियों और राजस्व व्यय की परिभाषा, उनके प्रमुख घटक (कर/गैर-कर राजस्व; विकासात्मक/गैर-विकासात्मक व्यय) और उदाहरणों को विस्तार से बताएँ।

 

Question 4. बजट से आपका क्या आशय है? जेन्डर बजटिंग को क्यों उपयोगी माना गया है?
Answer: बजट शब्द फ्रांसीसी शब्द 'Bougette' से आया है, जिसका अर्थ 'चमड़े का थैला' है। 1773 में इंग्लैंड में बजट शब्द का प्रयोग 'जादू के पिटारे' के रूप में किया गया था। बजट सरकार की आय और व्यय का एक विवरण पत्र है जिसमें आगामी वर्ष के लिए आय-व्यय के अनुमानित आंकड़े और अगले वर्ष के सामाजिक-आर्थिक कार्यक्रम तथा आय-व्यय को घटाने-बढ़ाने के प्रस्तावों का विवरण होता है। सामान्यतः बजट सरकार के उस विवरण पत्र को कहते हैं जिसमें पूरे वर्ष की आय-व्यय का ब्यौरा दिखाया जाता है।
In simple words: बजट सरकार की कमाई और खर्च का सालाना लेखा-जोखा है।

🎯 Exam Tip: बजट की परिभाषा को संक्षेप में स्पष्ट करें।

RBSE Class 12 Economics Chapter 23 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

RBSE Class 12 Economics Chapter 23 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. राजकोषीय नीति में शामिल है?
(अ) सार्वजनिक व्यय
(ब) कर
(स) घाटे की वित्त व्यवस्था
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: राजकोषीय नीति में सरकार के खर्च, टैक्स और घाटे को पूरा करने के तरीके, सभी शामिल होते हैं।

🎯 Exam Tip: राजकोषीय नीति के तीनों मुख्य घटकों (सार्वजनिक व्यय, कर, घाटे की वित्त व्यवस्था) को याद रखें।

 

Question 2. बजट शब्द की उत्पत्ति किस शब्द से हुई है?
(अ) Bougette
(ब) Budget
(स) Buddet
(द) Bucket
Answer: (अ) Bougette
In simple words: बजट शब्द की शुरुआत फ्रेंच शब्द 'Bougette' से हुई है, जिसका अर्थ 'छोटा चमड़े का थैला' होता है।

🎯 Exam Tip: आर्थिक शब्दों की व्युत्पत्ति को याद रखें, क्योंकि यह अक्सर सामान्य ज्ञान के प्रश्नों में पूछा जाता है।

 

Question 3. वित्तीय प्रशासन की धुरी किसे कहा जाता है?
(अ) राजस्व प्राप्ति
(ब) राजस्व व्यय
(स) बजट
(द) राजकोषीय नीति
Answer: (स) बजट
In simple words: बजट ही सरकार के सभी वित्तीय कामों का केंद्र होता है, क्योंकि यह बताता है कि पैसा कहाँ से आएगा और कहाँ खर्च होगा।

🎯 Exam Tip: वित्तीय प्रशासन में बजट की केंद्रीय भूमिका को समझाएँ, क्योंकि यह सभी आय और व्यय का मुख्य आधार है।

 

Question 5. संसद में बजट कौन प्रस्तुत करता है?
(अ) प्रधानमन्त्री
(ब) राष्ट्रपति
(स) गृहमन्त्री
(द) वित्तमंत्री
Answer: (द) वित्तमंत्री
In simple words: देश का वित्तमंत्री ही हर साल संसद में बजट पेश करता है।

🎯 Exam Tip: भारतीय संसद में बजट प्रस्तुति से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों और प्रमुख पदाधिकारियों को याद रखें।

 

Question 6. सत्र 2017-18 का बजट प्रस्तुत करने वाले वित्तमंत्री कौन हैं?
(अ) राजनाथ सिंह
(ब) सुरेश प्रभु
(स) अरुण जेटली
(द) अमित शाह
Answer: (स) अरुण जेटली
In simple words: 2017-18 में अरुण जेटली ने भारत का बजट पेश किया था।

🎯 Exam Tip: हाल के वर्षों में बजट प्रस्तुत करने वाले वित्तमंत्रियों के नाम याद रखना सामयिक सामान्य ज्ञान के लिए उपयोगी है।

 

Question 7. बजट की लोकप्रिय अवधारणा है?
(अ) घाटे का बजट
(ब) आम बजट
(स) निष्पादन बजट
(द) सन्तुलित बजट
Answer: (अ) घाटे का बजट
In simple words: घाटे का बजट सबसे ज़्यादा जाना-पहचाना बजट है, जहाँ सरकार का खर्च उसकी कमाई से ज़्यादा होता है।

🎯 Exam Tip: घाटे के बजट की व्यापकता और इसके आर्थिक प्रभावों को समझें, क्योंकि यह अक्सर बहस का विषय रहता है।

 

Question 8. घाटे के बजट से आशय है?
(अ) सरकार का कुल व्यय > सरकार की कुल प्राप्ति
(ब) सरकार का कुल व्यय < सरकार की कुल प्राप्ति
Answer: (अ) सरकार का कुल व्यय > सरकार की कुल प्राप्ति
In simple words: जब सरकार का कुल खर्च उसकी कुल कमाई से ज़्यादा हो जाता है, तो उसे घाटे का बजट कहते हैं।

🎯 Exam Tip: घाटे के बजट को उसके सूत्र के साथ स्पष्ट करें, जहाँ कुल व्यय कुल प्राप्तियों से अधिक होता है।

 

Question 9. वित्तीय वर्ष की अवधि होती है?
(अ) 1 अप्रैल से 31 मार्च
(ब) 1 जनवरी से 31 दिसम्बर
(स) 1 जुलाई से 30 जून
(द) 1 फरवरी से 31 जनवरी
Answer: (अ) 1 अप्रैल से 31 मार्च
In simple words: भारत में वित्तीय साल 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है।

🎯 Exam Tip: भारत में वित्तीय वर्ष की शुरुआत और समाप्ति की तारीखें याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. राजस्व घाटे का सूत्र है?
(अ) राजस्व व्यय - राजस्व प्राप्ति
(ब) राजस्व प्राप्ति - राजस्व व्यय
(स) राजस्व व्यय + राजस्व प्राप्ति
(द) राजस्व व्यय × राजस्व प्राप्ति
Answer: (अ) राजस्व व्यय - राजस्व प्राप्ति
In simple words: राजस्व घाटा निकालने के लिए, सरकार के कुल राजस्व खर्च में से कुल राजस्व कमाई को घटाया जाता है।

🎯 Exam Tip: राजस्व घाटे के सूत्र को ध्यान से याद रखें और उसके घटकों को समझें।

RBSE Class 12 Economics Chapter 23 अतिलघु उत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. आनुपातिक कर से क्या आशय है?
Answer: आनुपातिक कर वह कर होता है जो किसी व्यक्ति की आय के अनुपात में लगाया जाता है। इसमें कर की दर आय बढ़ने या घटने से नहीं बदलती।
In simple words: आनुपातिक कर में सभी लोगों पर उनकी आय के हिसाब से एक ही दर से टैक्स लगता है।

🎯 Exam Tip: आनुपातिक कर की परिभाषा में 'आय के अनुपात में' और 'कर की दर स्थिर रहना' इन दो मुख्य बिंदुओं को शामिल करें।

 

Question 2. सरकारी बजट का कोई एक उद्देश्य बताइए।
Answer: सरकारी बजट का एक मुख्य उद्देश्य देश के संसाधनों का उचित आवंटन करना होता है, ताकि उन्हें सबसे अच्छे तरीके से इस्तेमाल किया जा सके।
In simple words: सरकार बजट का इस्तेमाल देश के साधनों को सही जगह लगाने के लिए करती है।

🎯 Exam Tip: सरकारी बजट के उद्देश्यों में से 'संसाधनों का उचित आवंटन' एक महत्वपूर्ण बिंदु है, इसे विस्तार से समझें।

 

Question 3. भारत में वित्तीय वर्ष की अवधि क्या है?
Answer: भारत में वित्तीय वर्ष की अवधि 1 अप्रैल से शुरू होकर 31 मार्च तक होती है। यह सरकार के वित्तीय लेन-देन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला समय है।
In simple words: भारत में वित्तीय साल 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलता है।

🎯 Exam Tip: वित्तीय वर्ष की सही अवधि को याद रखें क्योंकि यह कई आर्थिक गणनाओं का आधार होता है।

 

Question 5. करों से प्रयोज्य आय तथा उपभोग पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: जब सरकार कर लगाती है, तो लोगों की प्रयोज्य आय (खर्च करने लायक आय) कम हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप, उनका उपभोग भी घट जाता है, क्योंकि उनके पास खर्च करने के लिए कम पैसा बचता है।
In simple words: टैक्स लगने से लोगों की जेब में कम पैसा आता है, जिससे वे कम चीजें खरीदते हैं।

🎯 Exam Tip: करों का प्रयोज्य आय और उपभोग पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 6. बजट से क्या आशय है?
Answer: बजट सरकार के अनुमानित प्राप्तियों (कहाँ से पैसा आएगा) और व्ययों (कहाँ पैसा खर्च होगा) का एक वार्षिक विवरण होता है। यह एक वित्तीय दस्तावेज है जो आगामी वित्तीय वर्ष के लिए सरकार की योजनाओं को दर्शाता है।
In simple words: बजट सरकार की सालाना कमाई और खर्च का अनुमानित हिसाब-किताब होता है।

🎯 Exam Tip: बजट की परिभाषा में 'अनुमानित प्राप्तियाँ' और 'व्यय' तथा 'वार्षिक विवरण' जैसे मुख्य शब्दों को शामिल करें।

 

Question 7. सन्तुलित बजट क्या होता है?
Answer: संतुलित बजट वह स्थिति होती है जब सरकार की कुल आय और कुल व्यय दोनों बराबर होते हैं। इसमें न तो घाटा होता है और न ही आधिक्य।
In simple words: जब सरकार की कमाई और खर्च बराबर होते हैं, तो उसे संतुलित बजट कहते हैं।

🎯 Exam Tip: संतुलित बजट की परिभाषा को 'कुल आय' और 'कुल व्यय' की समानता पर केंद्रित रखें।

 

Question 8. आधिक्य का बजट क्या होता है?
Answer: आधिक्य का बजट तब होता है जब सरकार की कुल आय उसके कुल व्यय से ज़्यादा होती है। यह एक सकारात्मक वित्तीय स्थिति को दर्शाता है।
In simple words: जब सरकार की कुल कमाई उसके कुल खर्च से ज़्यादा होती है, तो उसे आधिक्य का बजट कहते हैं।

🎯 Exam Tip: आधिक्य बजट को परिभाषित करते समय 'कुल आय का कुल व्यय से अधिक होना' पर जोर दें।

 

Question 9. घाटे का बजट होता है? अथवा घाटे के बजट से आप क्या समझते हैं?
Answer: घाटे का बजट तब होता है जब सरकार की कुल आय सरकार के कुल व्यय से कम होती है। इस स्थिति में सरकार को अपने खर्चों को पूरा करने के लिए उधार लेना पड़ता है।
In simple words: जब सरकार का खर्च उसकी कमाई से ज़्यादा हो जाता है, तो उसे घाटे का बजट कहते हैं।

🎯 Exam Tip: घाटे के बजट की परिभाषा में 'कुल आय का कुल व्यय से कम होना' पर ध्यान दें।

 

Question 10. मूल्यवर्धित कर क्या है?
Answer: मूल्यवर्धित कर (VAT) एक अप्रत्यक्ष कर है जो वस्तुओं और सेवाओं के हर उत्पादन स्तर पर, उनके मूल्य में होने वाली वृद्धि पर लगाया जाता है। यह अंततः उपभोक्ता द्वारा वहन किया जाता है।
In simple words: मूल्यवर्धित कर वह टैक्स है जो किसी चीज की कीमत बढ़ने पर लगता है और इसे ग्राहक चुकाता है।

🎯 Exam Tip: मूल्यवर्धित कर को परिभाषित करते समय 'अप्रत्यक्ष कर' और 'मूल्य वृद्धि पर लगाया जाना' इन दो प्रमुख विशेषताओं को उजागर करें।

 

Question 11. सरकारी ऋण के स्रोत क्या हैं?
Answer: सरकारी ऋण के निम्नलिखित प्रमुख स्रोत हैं:
1. सामान्य जनता (जनता से ऋण)
2. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI से ऋण)
3. शेष विश्व (विदेशी सरकारों या संस्थाओं से ऋण)
In simple words: सरकार तीन मुख्य जगहों से कर्ज लेती है: लोगों से, भारतीय रिजर्व बैंक से, और दूसरे देशों से।

🎯 Exam Tip: सरकारी ऋण के विभिन्न स्रोतों को याद रखें, क्योंकि ये सरकार के वित्तपोषण के मुख्य साधन हैं।

 

Question 13. एक सरकारी बजट में Rs 4,800 करोड़ का प्राथमिक घाटा है। ब्याज भुगतान पर राजस्व व्यय Rs 800 करोड़ है। राजकोषीय घाटा कितना होगा?
Answer: प्राथमिक घाटा = Rs 4,800 करोड़
ब्याज भुगतान = Rs 800 करोड़
राजकोषीय घाटा = प्राथमिक घाटा + ब्याज भुगतान
\( \implies \) राजकोषीय घाटा = 4,800 + 800
\( \implies \) राजकोषीय घाटा = Rs 5,600 करोड़ होगा।
In simple words: प्राथमिक घाटा और ब्याज भुगतान को जोड़कर हमें कुल राजकोषीय घाटा 5,600 करोड़ रुपये मिलता है।

🎯 Exam Tip: राजकोषीय घाटा और प्राथमिक घाटे के बीच संबंध को समझने के लिए सूत्र (राजकोषीय घाटा = प्राथमिक घाटा + ब्याज भुगतान) को याद रखें।

 

Question 14. एक सरकारी बजट में राजस्व घाटा Rs 30,000 करोड़ है और उधार Rs 45,000 करोड़ का है। राजकोषीय घाटा कितना है?
Answer: यहाँ, राजकोषीय घाटा उधार के बराबर होता है, जब राजस्व घाटा दिया गया हो और अन्य जानकारी न हो। अत: राजकोषीय घाटा Rs 45,000 करोड़ होगा।
In simple words: यदि सरकार 45,000 करोड़ रुपये का कर्ज लेती है, तो उसका राजकोषीय घाटा भी 45,000 करोड़ रुपये ही होगा।

🎯 Exam Tip: राजकोषीय घाटा अक्सर सरकार के कुल उधार की आवश्यकता को दर्शाता है, विशेषकर जब अन्य घटक नहीं दिए गए हों।

 

Question 15. सार्वजनिक आय से क्या तात्पर्य है?
Answer: सार्वजनिक आय का मतलब है वह सभी आय जो सरकार को विभिन्न स्रोतों से प्राप्त होती है, जैसे टैक्स, फीस, जुर्माना, और सरकारी उद्यमों से होने वाला लाभ। यह राज्य के कुल वित्तीय संसाधनों को दर्शाता है।
In simple words: सरकार को जो भी पैसा अलग-अलग तरीकों से मिलता है, उसे सार्वजनिक आय कहते हैं।

🎯 Exam Tip: सार्वजनिक आय की परिभाषा में सरकार के राजस्व के सभी प्रमुख स्रोतों को शामिल करें।

 

Question 16. अनुदान से आप क्या समझते हैं?
Answer: अनुदान आर्थिक सहायता होती है जो किसी एक राज्य या संस्था द्वारा दूसरे राज्य या संस्था को बिना किसी सीधे बदले की उम्मीद के दी जाती है। यह अक्सर विकास, कल्याण या आपदा राहत के लिए होता है।
In simple words: अनुदान का मतलब है किसी एक राज्य का दूसरे राज्य को बिना कुछ वापस लिए आर्थिक मदद देना।

🎯 Exam Tip: अनुदान को 'आर्थिक सहायता' और 'बिना प्रत्यक्ष प्रतिफल' जैसे शब्दों के साथ परिभाषित करें।

 

Question 17. कर की दो विशेषताएँ बताइए।
Answer: कर की दो प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. यह एक अनिवार्य अंशदान है: कर का भुगतान करना नागरिकों और व्यवसायों के लिए कानून द्वारा अनिवार्य होता है।
2. अर्थव्यवस्था का नियमन करना: कर सरकार को अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने और सामाजिक-आर्थिक उद्देश्यों को प्राप्त करने में मदद करते हैं।
In simple words: टैक्स देना जरूरी होता है और यह सरकार को देश की आर्थिक व्यवस्था को चलाने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: कर की विशेषताओं को स्पष्ट और संक्षिप्त रखें, जैसे 'अनिवार्य योगदान' और 'आर्थिक नियंत्रण'।

 

Question 19. प्रगतिशील कर के दो दोष बताइए।
Answer: प्रगतिशील कर के दो मुख्य दोष इस प्रकार हैं:
1. इनका आधार मनमाना होता है: प्रगतिशील कर की दरें तय करना अक्सर व्यक्तिपरक होता है और इसमें मनमानी की संभावना होती है।
2. पूँजी संचय पर इनका प्रभाव प्रतिकूल पड़ता है: उच्च आय पर अधिक कर लगने से बचत और निवेश के लिए प्रोत्साहन कम हो सकता है, जिससे पूँजी निर्माण पर नकारात्मक असर पड़ता है।
In simple words: प्रगतिशील टैक्स का आधार मनमानी भरा हो सकता है और यह लोगों को पैसे बचाने और निवेश करने से हतोत्साहित कर सकता है।

🎯 Exam Tip: प्रगतिशील कर के दोष बताते समय 'मनमानी' और 'पूँजी संचय पर नकारात्मक प्रभाव' जैसे प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान दें।

 

Question 20. विशिष्ट कर से क्या तात्पर्य है?
Answer: विशिष्ट कर वह कर होता है जो किसी वस्तु की मात्रा या भार के अनुसार लगाया जाता है, न कि उसके मूल्य के अनुसार। उदाहरण के लिए, प्रति इकाई या प्रति किलोग्राम के हिसाब से कर।
In simple words: विशिष्ट कर किसी चीज की मात्रा या वजन के हिसाब से लगता है, न कि उसकी कीमत के हिसाब से।

🎯 Exam Tip: विशिष्ट कर की परिभाषा में 'मात्रा या भार के अनुसार' लगाए जाने पर जोर दें।

 

Question 21. जे.बी. से के सार्वजनिक व्यय के बारे में क्या विचार थे?
Answer: जे.बी. से का विचार था कि सरकार का लोक व्यय (सार्वजनिक खर्च) और करों की मात्रा यथासंभव न्यूनतम होनी चाहिए। उनका मानना था कि सरकार का हस्तक्षेप कम से कम हो।
In simple words: जे.बी. से सोचते थे कि सरकार को कम से कम खर्च और टैक्स लगाना चाहिए।

🎯 Exam Tip: जे.बी. से के विचारों को 'न्यूनतम सरकारी हस्तक्षेप' और 'कम खर्च व कर' जैसे कीवर्ड्स से जोड़कर प्रस्तुत करें।

 

Question 22. सार्वजनिक व्यय से क्या तात्पर्य है?
Answer: सार्वजनिक व्यय से तात्पर्य उस व्यय से है जो केन्द्रीय, राज्य और स्थानीय सरकारों द्वारा अपने नागरिकों की भलाई और देश के विकास के लिए किया जाता है। इसमें प्रशासन, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि पर होने वाले खर्च शामिल हैं।
In simple words: सार्वजनिक खर्च वह पैसा है जो केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारें लोगों की सेवा और देश के विकास पर लगाती हैं।

🎯 Exam Tip: सार्वजनिक व्यय की परिभाषा में सरकार के तीनों स्तरों (केंद्रीय, राज्य, स्थानीय) द्वारा किए जाने वाले खर्चों को शामिल करें।

 

Question 23. उत्पादक व्यय से क्या आशय है?
Answer: उत्पादक व्यय वे खर्च होते हैं जिनसे देश की राष्ट्रीय आय में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वृद्धि होती है। ये खर्च आम तौर पर पूंजी निर्माण, बुनियादी ढांचे के विकास या मानव संसाधन में सुधार पर होते हैं।
In simple words: उत्पादक खर्च वह होता है जिससे देश की कुल कमाई (राष्ट्रीय आय) बढ़ती है, जैसे नई चीजें बनाना या विकास करना।

🎯 Exam Tip: उत्पादक व्यय को परिभाषित करते समय 'राष्ट्रीय आय में वृद्धि' पर मुख्य रूप से जोर दें।

 

Question 24. कर वंचन किसे कहते हैं?
Answer: कर वंचन का अर्थ है बिना भुगतान किए कानून का उल्लंघन करके कर के दायित्व से मुक्त हो जाना। यह एक अवैध गतिविधि है जिसमें करों का भुगतान करने से बचा जाता है।
In simple words: कर वंचन मतलब टैक्स चोरी करना, यानी कानूनी तौर पर जितना टैक्स देना है, उसे गलत तरीके से न देना।

🎯 Exam Tip: कर वंचन को 'अवैध' और 'कानूनी दायित्व से बचने' के संदर्भ में परिभाषित करें।

 

Question 26. कौन-सी कर प्रणाली आय की असमानता को कम करती है? बताइए।
Answer: प्रगतिशील प्रत्यक्ष कर प्रणाली आय की असमानता को कम करने में मदद करती है। इस प्रणाली में, ज़्यादा आय वाले व्यक्तियों पर उच्च दर से कर लगाया जाता है, जबकि कम आय वालों पर कम दर से।
In simple words: प्रगतिशील प्रत्यक्ष कर प्रणाली अमीर लोगों से ज़्यादा टैक्स लेकर और गरीब लोगों से कम टैक्स लेकर आय की असमानता को घटाती है।

🎯 Exam Tip: प्रगतिशील प्रत्यक्ष कर प्रणाली की कार्यप्रणाली को समझाएँ कि यह कैसे उच्च आय वालों पर अधिक भार डालकर असमानता कम करती है।

 

Question 27. सार्वजनिक ऋण के दो उद्देश्य बताइये।
Answer: सार्वजनिक ऋण के दो मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:
1. सार्वजनिक निर्माण कार्य पूरा करना: सरकार सड़कों, पुलों, अस्पतालों जैसे बड़े सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं को वित्तपोषित करने के लिए ऋण लेती है।
2. प्राकृतिक साधनों का इष्टतम विदोहन करना: देश के प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए आवश्यक निवेश के लिए ऋण का उपयोग किया जाता है।
In simple words: सरकार कर्ज इसलिए लेती है ताकि बड़े विकास के काम पूरे कर सके और देश के प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल कर सके।

🎯 Exam Tip: सार्वजनिक ऋण के उद्देश्यों को बताते समय 'बुनियादी ढाँचे का विकास' और 'संसाधन उपयोग' जैसे प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान दें।

 

Question 28. सार्वजनिक ऋण का निजी क्षेत्र पर कैसा प्रभाव पड़ता है? बताइए।
Answer: सार्वजनिक ऋण का निजी क्षेत्र पर आमतौर पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है। जब सरकार ऋण लेती है और उसे बुनियादी ढांचे या उत्पादक गतिविधियों में निवेश करती है, तो इससे निजी क्षेत्र के लिए विकास के अवसर पैदा होते हैं। हालांकि, अत्यधिक ऋण भीड़-भाड़ प्रभाव भी पैदा कर सकता है।
In simple words: सरकारी कर्ज अक्सर निजी कंपनियों के लिए अच्छा होता है, क्योंकि यह नई सुविधाएँ बनाता है जिससे उन्हें बढ़ने का मौका मिलता है।

🎯 Exam Tip: सार्वजनिक ऋण के निजी क्षेत्र पर अनुकूल प्रभावों को स्पष्ट करें, लेकिन साथ ही संभावित नकारात्मक प्रभावों (जैसे क्राउडिंग आउट) का भी उल्लेख किया जा सकता है।

 

Question 29. ऋण निषेध से क्या तात्पर्य है?
Answer: ऋण निषेध से तात्पर्य ऋण की मूल राशि और उस पर लगने वाले ब्याज, दोनों का भुगतान न करने से है। यह एक गंभीर वित्तीय चूक होती है।
In simple words: ऋण निषेध का मतलब है कर्ज की रकम और उसका ब्याज दोनों न चुकाना।

🎯 Exam Tip: ऋण निषेध को 'मूल राशि और ब्याज दोनों का भुगतान न करने' के संदर्भ में स्पष्ट करें।

 

Question 30. ऋण रूपान्तरण से क्या आशय है?
Answer: ऋण रूपांतरण का अर्थ है पुराने ऋणों को नए ऋणों में बदलना। यह अक्सर उच्च ब्याज दर वाले ऋणों को कम ब्याज दर वाले ऋणों में बदलने के लिए किया जाता है।
In simple words: ऋण रूपांतरण का मतलब है पुराने कर्ज को नए कर्ज में बदलना, ताकि ब्याज कम लगे।

🎯 Exam Tip: ऋण रूपांतरण की परिभाषा में 'पुराने ऋण को नए में बदलना' और इसके पीछे के उद्देश्य (जैसे ब्याज दर कम करना) को शामिल करें।

 

Question 31. संसद में बजट कौन प्रस्तुत करता है?
Answer: संसद में बजट भारत का वित्तमंत्री प्रस्तुत करता है। यह एक महत्वपूर्ण संवैधानिक कर्तव्य है।
In simple words: भारत का वित्तमंत्री संसद में बजट पेश करता है।

🎯 Exam Tip: संसद में बजट प्रस्तुत करने वाले अधिकारी का पदनाम स्पष्ट रूप से बताएँ।

 

Question 34. FRBA का पूरा नाम बताइए।
Answer: FRBA का पूरा नाम Fiscal Responsibility and Budget Management Act (वित्तीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम) है। यह अधिनियम भारत में वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए लाया गया था।
In simple words: FRBA का पूरा नाम 'वित्तीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम' है, जो सरकार को जिम्मेदारी से पैसे खर्च करने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: संक्षिप्त रूपों (acronyms) के पूरे नाम और उनके मुख्य उद्देश्य को याद रखें।

 

Question 35. प्रगतिशील कर की परिभाषा लिखिए।
Answer: प्रगतिशील कर वह कर है जिसकी दर आय के बढ़ने के साथ-साथ बढ़ती जाती है। इसका मतलब है कि ज़्यादा आय वाले लोगों पर कर की दर ज़्यादा होती है, जबकि कम आय वालों पर कम।
In simple words: प्रगतिशील टैक्स वह टैक्स होता है जिसमें ज़्यादा कमाने वाले लोग ज़्यादा टैक्स देते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रगतिशील कर की परिभाषा में 'आय के साथ बढ़ती दर' के सिद्धांत को स्पष्ट करें।

 

Question 36. राजस्व घाटे की गणना कैसे की जाती है?
Answer: राजस्व घाटे की गणना राजस्व व्यय में से राजस्व प्राप्तियों को घटाकर की जाती है। यदि राजस्व व्यय राजस्व प्राप्तियों से अधिक हो तो राजस्व घाटा होता है।
सूत्र: राजस्व घाटा = राजस्व व्यय - राजस्व प्राप्तियाँ
In simple words: राजस्व घाटा निकालने के लिए, सरकार के कुल राजस्व खर्च में से उसकी कुल राजस्व कमाई को घटाया जाता है।

🎯 Exam Tip: राजस्व घाटे के सूत्र को सही ढंग से याद करें और उसके घटकों को समझें।

 

Question 37. राजकोषीय नीति के प्रमुख अंगों के नाम बताइए।
Answer: राजकोषीय नीति के प्रमुख अंग निम्नलिखित हैं:
1. कर (Taxation)
2. सार्वजनिक व्यय (Public Expenditure)
3. सार्वजनिक ऋण (Public Debt)
In simple words: सरकार की राजकोषीय नीति के तीन मुख्य हिस्से टैक्स, सरकारी खर्च और सरकारी कर्ज हैं।

🎯 Exam Tip: राजकोषीय नीति के तीनों मुख्य उपकरणों को उनके नामों के साथ याद रखें।

 

Question 38. सकल प्राथमिक घाटा ज्ञात करने का सूत्र बताइए।
Answer: सकल प्राथमिक घाटा ज्ञात करने का सूत्र है:
सकल प्राथमिक घाटा = सकल राजकोषीय घाटा - निवल ब्याज दायित्व (शुद्ध ब्याज भुगतान)
In simple words: कुल राजकोषीय घाटे में से ब्याज चुकाने वाला हिस्सा घटा दें, तो सकल प्राथमिक घाटा मिल जाता है।

🎯 Exam Tip: प्राथमिक घाटे और राजकोषीय घाटे के बीच के संबंध को दर्शाने वाले सूत्र को सही ढंग से याद करें।

 

Question 39. राजस्व व्यय की कोई दो मुख्य मदें लिखिए।
Answer: प्रश्न का उत्तर निर्दिष्ट पृष्ठ सीमा के भीतर उपलब्ध नहीं है।
In simple words: इस प्रश्न का उत्तर दिए गए पाठ में नहीं मिल पा रहा है।

🎯 Exam Tip: राजस्व व्यय की प्रमुख मदों में वेतन, पेंशन, सब्सिडी और ब्याज भुगतान जैसे खर्च शामिल होते हैं, जिनसे कोई नई संपत्ति नहीं बनती।

 

Question 41. कर गुणक का सूत्र बताइए।
Answer: कर गुणक का सूत्र है:
\( \frac{\Delta Y}{\Delta T} = \frac{-C}{1-C} \)
In simple words: यह सूत्र दिखाता है कि जब सरकार टैक्स बदलती है, तो देश की कुल आय (Y) में कितना बदलाव आता है. C का मतलब है कि लोग अपनी कमाई का कितना हिस्सा खर्च करते हैं.

🎯 Exam Tip: टैक्स गुणक का सूत्र याद रखें, खासकर नकारात्मक संकेत का अर्थ क्योंकि कर बढ़ने से डिस्पोजेबल आय घटती है और इसलिए उपभोग व आय घटती है.

 

Question 42. कर गुणक धनात्मक होता है या ऋणात्मक?
Answer: कर गुणक हमेशा ऋणात्मक होता है.
In simple words: जब सरकार टैक्स बढ़ाती है, तो लोगों के पास खर्च करने के लिए कम पैसे बचते हैं, इसलिए देश की कुल आय कम हो जाती है. टैक्स घटने पर उल्टा होता है, इसलिए यह हमेशा उल्टा चलता है, यानी ऋणात्मक होता है.

🎯 Exam Tip: टैक्स गुणक का ऋणात्मक होना एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जो बताता है कि करों और राष्ट्रीय आय के बीच विपरीत संबंध है.

 

Question 43. पूँजीगत प्राप्तियों की सबसे महत्त्वपूर्ण मद क्या है?
Answer: पूँजीगत प्राप्तियों की सबसे महत्वपूर्ण मद सार्वजनिक ऋण है.
In simple words: सरकार जो पैसा कर्ज लेकर इकट्ठा करती है, वह पूँजीगत प्राप्तियों का सबसे बड़ा हिस्सा होता है.

🎯 Exam Tip: पूँजीगत प्राप्तियों में वे सभी प्राप्तियां शामिल होती हैं जो सरकार की देनदारियों को बढ़ाती हैं या उसकी वित्तीय संपत्तियों को कम करती हैं.

 

Question 44. गैर-कर आगम से क्या तात्पर्य है?
Answer: गैर-कर आगम का मतलब है सरकार को करों के अतिरिक्त अन्य स्रोतों से प्राप्त होने वाली आय.
In simple words: यह वह पैसा है जो सरकार को टैक्स (कर) के अलावा दूसरे तरीकों से मिलता है, जैसे फीस या जुर्माना.

🎯 Exam Tip: गैर-कर आगम में ब्याज प्राप्तियां, लाभांश, लाभ और विदेशी अनुदान जैसे स्रोत शामिल होते हैं.

 

Question 45. राजस्व प्राप्तियों की एक विशेषता बताइए।
Answer: राजस्व प्राप्तियों की एक विशेषता यह है कि इनसे सरकार की वित्तीय परिसम्पत्तियों में कोई कमी नहीं होती है.
In simple words: जब सरकार को राजस्व के तौर पर पैसा मिलता है, तो इससे उसकी कोई संपत्ति कम नहीं होती है.

🎯 Exam Tip: राजस्व प्राप्तियां वे प्राप्तियां होती हैं जो सरकार के लिए कोई देनदारी पैदा नहीं करतीं और न ही उसकी संपत्तियों को कम करती हैं.

 

Question 48. बजटीय घाटे का वित्तीयन कैसे किया जाता है?
Answer: बजटीय घाटे का वित्तीयन करारोपण करके, उधार लेकर या नए नोट छापकर किया जाता है.
In simple words: सरकार अपने खर्चों को पूरा करने के लिए या तो ज़्यादा टैक्स लगाती है, कर्ज लेती है, या नए पैसे छापती है.

🎯 Exam Tip: बजटीय घाटे के वित्तीयन के इन तरीकों के अर्थव्यवस्था पर अलग-अलग प्रभाव पड़ते हैं, जैसे मुद्रास्फीति या ऋण का बोझ.

 

Question 49. राजस्व घाटा क्या बताता है?
Answer: राजस्व घाटा यह बताता है कि सरकार की राजस्व प्राप्तियों की तुलना में राजस्व व्यय कितना अधिक है.
In simple words: यह दिखाता है कि सरकार अपने रोज़मर्रा के खर्चों को अपनी रोज़मर्रा की कमाई से कितना ज़्यादा कर रही है.

🎯 Exam Tip: उच्च राजस्व घाटा अक्सर सरकारी खर्चों में कटौती या राजस्व बढ़ाने के उपायों की आवश्यकता को इंगित करता है.

 

RBSE Class 12 Economics Chapter 23 अतिलघु उत्तरात्मक प्रश्न (SA-I)

 

Question 1. कर को परिभाषित कीजिए।
Answer: कर सरकार को दिया जाने वाला एक अनिवार्य भुगतान है जिसके बदले करदाता को किसी प्रकार के प्रत्यक्ष लाभ की आशा नहीं होती है.
In simple words: कर वह अनिवार्य पैसा है जो लोग सरकार को देते हैं, और इसके बदले उन्हें सीधे कोई फायदा नहीं मिलता.

🎯 Exam Tip: कर की परिभाषा में 'अनिवार्य भुगतान' और 'प्रत्यक्ष लाभ की अनुपस्थिति' ये दो मुख्य कीवर्ड्स हैं.

 

Question 2. प्रत्यक्ष कर किसे कहते हैं?
Answer: जिस कर के भुगतान में कर का भार और कर चुकाने की जिम्मेदारी एक ही व्यक्ति पर पड़ती है, उसे प्रत्यक्ष कर कहते हैं. इसके उदाहरण आयकर और संपत्ति कर हैं.
In simple words: जब टैक्स का बोझ और उसे चुकाने वाला व्यक्ति एक ही हो, तो वह प्रत्यक्ष कर होता है, जैसे आय पर लगने वाला टैक्स.

🎯 Exam Tip: प्रत्यक्ष करों की पहचान यह है कि वे सीधे व्यक्ति की आय या संपत्ति पर लगाए जाते हैं और उन्हें स्थानांतरित नहीं किया जा सकता.

 

Question 3. परोक्ष कर किसे कहते हैं?
Answer: जिस कर के भुगतान में कर का भार और कर चुकाने की जिम्मेदारी अलग-अलग व्यक्तियों पर पड़ती है, उसे अप्रत्यक्ष अथवा परोक्ष कर कहते हैं. इसके उदाहरण उत्पाद कर और सेवाकर हैं.
In simple words: जब टैक्स का बोझ किसी और पर और उसे चुकाने वाला कोई और हो, तो वह परोक्ष कर होता है, जैसे चीजों की खरीद पर लगने वाला टैक्स.

🎯 Exam Tip: परोक्ष कर वस्तुओं और सेवाओं पर लगाए जाते हैं और आमतौर पर उपभोक्ताओं पर स्थानांतरित कर दिए जाते हैं.

 

Question 5. प्रगतिशील कर किसे कहते हैं? अथवा प्रगतिशील करारोपण से आपको क्या तात्पर्य है? उसका एक उद्देश्य लिखिए।
Answer: प्रगतिशील कर वह कर है जिसमें कर की प्रतिशत दर आय में वृद्धि के साथ बढ़ती जाती है. इसका मुख्य उद्देश्य आय की असमानता को दूर करना है.
In simple words: प्रगतिशील टैक्स का मतलब है कि ज़्यादा कमाने वाले लोग ज़्यादा प्रतिशत टैक्स देते हैं, ताकि अमीर और गरीब के बीच का अंतर कम हो सके.

🎯 Exam Tip: प्रगतिशील कर प्रणाली का मुख्य उद्देश्य धन और आय के वितरण में समानता लाना है.

 

Question 6. सार्वजनिक प्रावधान का क्या तात्पर्य है?
Answer: सार्वजनिक प्रावधान का तात्पर्य उन वस्तुओं और सेवाओं से है जिनका वित्त प्रबंधन बजट के माध्यम से होता है और वे बिना किसी प्रत्यक्ष भुगतान के मुफ्त में उपलब्ध होती हैं.
In simple words: सार्वजनिक प्रावधान उन चीजों को कहते हैं जिन्हें सरकार बजट से पैसा लगाकर मुफ्त में देती है, जैसे कि सार्वजनिक पार्क या सड़कें.

🎯 Exam Tip: सार्वजनिक प्रावधान आमतौर पर उन वस्तुओं और सेवाओं के लिए होता है जो गैर-प्रतिस्पर्धी और गैर-वर्जीय होती हैं, जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा.

 

Question 7. बजट किसे कहते हैं?
Answer: बजट एक वार्षिक वित्तीय विवरण है जिसमें सरकार के आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित आय और व्ययों का विवरण होता है.
In simple words: बजट सरकार का एक साल का पूरा हिसाब-किताब होता है, जिसमें बताया जाता है कि कितना पैसा आएगा और कितना खर्च होगा.

🎯 Exam Tip: बजट केवल वित्तीय आंकड़े ही नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं का भी दर्पण होता है.

 

Question 8. सरकारी बजट के कोई दो उद्देश्य लिखिए।
Answer: सरकारी बजट के दो मुख्य उद्देश्य हैं: 1. देश में आय और संपत्ति का उचित विवरण प्रस्तुत करना. 2. देश के आर्थिक विकास को बढ़ावा देना.
In simple words: सरकार बजट इसलिए बनाती है ताकि देश में सभी को बराबर मौके मिलें और देश की तरक्की हो.

🎯 Exam Tip: बजट के उद्देश्य अक्सर सामाजिक समानता, आर्थिक स्थिरता और संसाधन आवंटन जैसे व्यापक लक्ष्यों से संबंधित होते हैं.

 

Question 9. सरकारी बजट में राजस्व घाटे की परिभाषा दीजिए।
Answer: राजस्व घाटा, राजस्व प्राप्तियों पर राजस्व व्यय के आधिक्य को दर्शाता है.
In simple words: राजस्व घाटा तब होता है जब सरकार का सामान्य खर्च, उसकी सामान्य कमाई से ज़्यादा हो जाता है.

🎯 Exam Tip: राजस्व घाटा सरकार की दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों को चलाने के लिए उधार लेने की आवश्यकता को दर्शाता है.

 

Question 10. राजकोषीय घाटा किसे कहते हैं?
Answer: कुल बजट व्यय का कुल प्राप्तियों (ऋण प्राप्तियों को छोड़कर) पर आधिक्य राजकोषीय घाटा कहलाता है.
In simple words: राजकोषीय घाटा तब होता है जब सरकार का कुल खर्च उसकी कुल कमाई (कर्ज छोड़कर) से ज़्यादा हो. यह दिखाता है कि सरकार को कितना पैसा उधार लेना पड़ेगा.

🎯 Exam Tip: राजकोषीय घाटा सरकार के कुल ऋण की आवश्यकता का एक महत्वपूर्ण संकेतक है और यह अर्थव्यवस्था की समग्र वित्तीय स्थिति को दर्शाता है.

 

Question 12. राजस्व प्राप्तियों से क्या आशय है?
Answer: राजस्व प्राप्तियों में कर राजस्व और गैर-कर राजस्व दोनों शामिल होते हैं. इनमें कर, ब्याज, लाभांश, लाभ और विदेशी अनुदान जैसी मदें आती हैं.
In simple words: राजस्व प्राप्तियां वह पैसा है जो सरकार को टैक्स और बिना टैक्स वाले स्रोतों से मिलता है, और इसे वापस नहीं करना पड़ता.

🎯 Exam Tip: राजस्व प्राप्तियां सरकार की देनदारियों को नहीं बढ़ाती हैं और न ही उसकी संपत्तियों को कम करती हैं.

 

Question 13. पूँजीगत प्राप्तियों से क्या अभिप्राय है?
Answer: पूँजीगत प्राप्तियां वे प्राप्तियां होती हैं जो देनदारियों में वृद्धि या परिसंपत्तियों में कमी के कारण प्राप्त होती हैं. इनमें ऋण, ऋणों की वसूली, सार्वजनिक उद्यमों के शेयरों की बिक्री आदि शामिल हैं.
In simple words: पूँजीगत प्राप्तियां वह पैसा है जो सरकार को कर्ज लेकर या अपनी संपत्ति बेचकर मिलता है, जिससे या तो उसका कर्ज बढ़ता है या संपत्ति घटती है.

🎯 Exam Tip: पूँजीगत प्राप्तियां अक्सर सरकार की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिति को प्रभावित करती हैं, क्योंकि वे ऋण या परिसंपत्ति निपटान से संबंधित होती हैं.

 

Question 14. पूँजीगत व्यय से क्या अभिप्राय है?
Answer: परिसंपत्तियों पर होने वाला व्यय पूँजीगत व्यय कहलाता है. जैसे- भवन निर्माण, सड़क निर्माण, नहर निर्माण, शेयरों पर व्यय करना और संपत्तियां खरीदना आदि.
In simple words: पूँजीगत व्यय वह खर्च है जो सरकार नई संपत्ति बनाने या पुरानी संपत्ति खरीदने में करती है, जैसे स्कूल या सड़क बनाना.

🎯 Exam Tip: पूँजीगत व्यय देश की उत्पादक क्षमता को बढ़ाते हैं और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होते हैं.

 

Question 15. योजनागत व्यय क्या है?
Answer: सरकार द्वारा पंचवर्षीय योजनाओं या अन्य केन्द्रीय योजनाओं हेतु बजट में प्रावधान करके प्राथमिकताओं के आधार पर किया गया व्यय योजनागत व्यय कहलाता है.
In simple words: योजनागत व्यय वह खर्च है जो सरकार अपनी खास योजनाओं और तरक्की के कामों पर करती है, जिनके लिए पहले से योजना बनाई गई होती है.

🎯 Exam Tip: योजनागत व्यय आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीतिक उपकरण है.

 

Question 16. गैर-योजनागत व्यय क्या है?
Answer: सरकार द्वारा विभिन्न विभागों के कार्यों को संचालित करने हेतु प्रतिदिन के आधार पर किए गए व्यय गैर-योजनागत व्यय कहलाते हैं.
In simple words: गैर-योजनागत व्यय वह खर्च है जो सरकार अपने रोज़मर्रा के कामों को चलाने के लिए करती है, जैसे वेतन देना या रक्षा पर खर्च.

🎯 Exam Tip: गैर-योजनागत व्यय में अक्सर ब्याज भुगतान, रक्षा व्यय और सरकारी सेवाओं पर सामान्य प्रशासनिक व्यय शामिल होते हैं.

 

Question 17. ऋणों की वसूली को पूँजी प्राप्ति क्यों माना जाता है?
Answer: ऋणों की वसूली को पूँजी प्राप्ति माना जाता है क्योंकि इसके कारण सरकार की वित्तीय परिसम्पत्तियों में कमी आ जाती है.
In simple words: जब सरकार अपने दिए हुए कर्ज वापस लेती है, तो वह पूँजीगत प्राप्ति कहलाती है, क्योंकि इससे उसकी संपत्ति (दिया हुआ कर्ज) कम हो जाती है.

🎯 Exam Tip: ऋणों की वसूली सरकार की वित्तीय स्थिति को मजबूत करती है, लेकिन यह राजस्व प्राप्ति नहीं है क्योंकि इसमें परिसंपत्ति में बदलाव होता है.

 

Question 19. आर्थिक सहायता को राजस्व व्यय क्यों माना जाता है?
Answer: आर्थिक सहायता से कोई नई परिसंपत्ति नहीं बनती है और न ही सरकार की देनदारियों में कमी आती है, इसलिए इसे राजस्व व्यय माना जाता है.
In simple words: आर्थिक सहायता को राजस्व खर्च इसलिए कहते हैं क्योंकि इससे कोई नई सरकारी चीज़ नहीं बनती और न ही कोई पुराना कर्ज घटता है.

🎯 Exam Tip: राजस्व व्यय वे खर्च होते हैं जिनसे सरकार की संपत्ति या देनदारियों में कोई बदलाव नहीं आता है, जैसे वेतन या सब्सिडी.

 

Question 20. राजस्व नीति के उद्देश्य बताइये।
Answer: राजस्व नीति के मुख्य उद्देश्य हैं: 1. आर्थिक विकास के लिए संसाधन इकट्ठा करना. 2. संसाधनों का सही तरीके से बंटवारा करना. 3. आय और संपत्ति के बंटवारे में असमानताओं को कम करना.
In simple words: राजस्व नीति का लक्ष्य पैसा जुटाना, संसाधनों को ठीक से लगाना और आय के अंतर को कम करना है.

🎯 Exam Tip: राजस्व नीति में सरकार के कराधान (टैक्स) और व्यय (खर्च) संबंधी निर्णय शामिल होते हैं, जिनका अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ता है.

 

Question 21. सरकार द्वारा प्राप्त कर पूँजीगत प्राप्तियाँ क्यों नहीं कहलाती है?
Answer: सरकार द्वारा प्राप्त कर पूँजीगत प्राप्तियाँ नहीं कहलाते क्योंकि कर मिलने से सरकार की देनदारियों में कोई वृद्धि नहीं होती है.
In simple words: टैक्स से मिले पैसे को पूँजीगत प्राप्ति नहीं कहते क्योंकि इससे सरकार पर कोई नया कर्ज नहीं बनता.

🎯 Exam Tip: कर राजस्व सरकार की नियमित आय का स्रोत होते हैं और ये उसकी वित्तीय स्थिति में कोई बदलाव नहीं लाते (देनदारी या संपत्ति के संदर्भ में).

 

Question 22. ऋणों का पुनर्भुगतान पूँजीगत व्यय क्यों कहलाता है?
Answer: ऋणों का पुनर्भुगतान पूँजीगत व्यय इसलिए कहलाता है क्योंकि ऋणों का पुनर्भुगतान करने से सरकार की देनदारियों में कमी आती है.
In simple words: कर्ज चुकाना पूँजीगत खर्च कहलाता है क्योंकि इससे सरकार का कर्ज (देनदारी) घटता है.

🎯 Exam Tip: पूँजीगत व्यय वे होते हैं जो सरकार की देनदारियों या परिसंपत्तियों को प्रभावित करते हैं, और ऋण चुकाना देनदारी कम करता है.

 

Question 23. सार्वजनिक वस्तुओं और निजी वस्तुओं में अन्तर बताइए।
Answer: वे वस्तुएँ जिनका लाभ सभी लोगों को मिलता है, वे सार्वजनिक वस्तुएँ होती हैं जबकि निजी वस्तुओं का लाभ केवल एक व्यक्ति विशेष को ही प्राप्त होता है.
In simple words: सार्वजनिक वस्तुएं सभी के लिए होती हैं (जैसे सड़क), जबकि निजी वस्तुएं केवल एक व्यक्ति के लिए होती हैं (जैसे एक कप चाय).

🎯 Exam Tip: सार्वजनिक वस्तुओं की दो मुख्य विशेषताएं होती हैं - गैर-प्रतिस्पर्धात्मकता (किसी के उपयोग से दूसरे का उपयोग कम नहीं होता) और गैर-वर्जीयता (किसी को उपयोग करने से रोका नहीं जा सकता).

 

Question 24. कर वंचन किसे कहते हैं?
Answer: बिना भुगतान किए कर के दायित्व से मुक्त हो जाने को कर वंचन कहते हैं.
In simple words: कर वंचन का मतलब है गैर-कानूनी तरीके से टैक्स न चुकाना.

🎯 Exam Tip: कर वंचन एक गैर-कानूनी गतिविधि है, जबकि कर परिहार (tax avoidance) कानूनी तरीकों से कर के बोझ को कम करना है.

 

Question 25. गैर-विकासात्मक व्यय से क्या आशय है?
Answer: जब सरकार सामान्य सरकारी सेवाओं पर व्यय करती है तो यह गैर-विकासात्मक व्यय कहलाता है. इसके उदाहरण प्रशासन और सुरक्षा पर किया गया व्यय हैं.
In simple words: गैर-विकासात्मक खर्च वह होता है जो सरकार अपने रोज़मर्रा के कामकाज, जैसे सरकारी दफ्तर चलाने या देश की सुरक्षा पर करती है.

🎯 Exam Tip: गैर-विकासात्मक व्यय से सीधे तौर पर उत्पादन क्षमता में वृद्धि नहीं होती है, बल्कि यह सामान्य प्रशासन को बनाए रखने के लिए आवश्यक है.

 

Question 26. कर की दो विशेषताएँ लिखिए।
Answer: कर की दो विशेषताएँ: 1. यह लोगों द्वारा सरकार को दिया जाने वाला एक अनिवार्य भुगतान है. 2. कर से मिलने वाली राशि को समाज कल्याण और सार्वजनिक लाभ पर व्यय किया जाता है.
In simple words: कर देना ज़रूरी होता है, और उससे मिले पैसे से सरकार लोगों की भलाई के काम करती है.

🎯 Exam Tip: कर प्रणाली सरकार के लिए राजस्व का मुख्य स्रोत है और यह सार्वजनिक सेवाओं के वित्तपोषण में मदद करती है.

 

Question 27. निगम कर राजस्व प्राप्ति क्यों कहलाता है?
Answer: निगम कर राजस्व प्राप्ति इसलिए कहलाता है क्योंकि इससे सरकार की देनदारियों में वृद्धि नहीं होती है और न ही परिसंपत्तियों में कमी आती है.
In simple words: कंपनियों पर लगने वाला टैक्स सरकार की रोज़मर्रा की कमाई है, जिससे न कर्ज बढ़ता है और न ही संपत्ति घटती है.

🎯 Exam Tip: राजस्व प्राप्तियां वे प्राप्तियां होती हैं जो सरकार के लिए कोई देनदारी पैदा नहीं करतीं और न ही उसकी संपत्तियों को कम करती हैं.

 

Question 28. राजस्व व्यय तथा पूँजीगत व्यय में एक अन्तर लिखो।
Answer: राजस्व व्यय से सरकारी परिसंपत्तियों का निर्माण नहीं होता जबकि पूँजीगत व्यय से सरकारी परिसंपत्तियों का निर्माण होता है.
In simple words: राजस्व खर्च से सरकार की कोई नई संपत्ति नहीं बनती, लेकिन पूँजीगत खर्च से नई संपत्ति बनती है.

🎯 Exam Tip: राजस्व व्यय प्रकृति में आवर्ती होते हैं (जैसे वेतन), जबकि पूँजीगत व्यय गैर-आवर्ती और दीर्घकालिक लाभ वाले होते हैं (जैसे बुनियादी ढांचे का निर्माण).

 

RBSE Class 12 Economics Chapter 23 लघु उत्तरात्मक प्रश्न (SA-II)

 

Question 1. योजनागत तथा गैर-योजनागत राजस्व व्यय से आपका क्या अभिप्राय है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: योजनागत राजस्व व्यय केन्द्रीय योजनाओं और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की योजनाओं पर किए गए व्यय से संबंधित होता है. वहीं, गैर-योजनागत राजस्व व्यय सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली विभिन्न सामान्य, सामाजिक और आर्थिक सेवाओं पर किए गए व्यय से संबंधित होता है.
In simple words: योजनागत खर्च वो है जो पहले से बनी सरकारी योजनाओं पर होता है, जबकि गैर-योजनागत खर्च सरकार के रोज़मर्रा के सामान्य कामों पर होता है.

🎯 Exam Tip: योजनागत व्यय देश के विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए रणनीतिक रूप से नियोजित होते हैं, जबकि गैर-योजनागत व्यय प्रशासनिक और आवश्यक सेवाओं के लिए होते हैं.

 

Question 3. सरकार की पूँजीगत प्राप्तियाँ एवं पूँजीगत व्यय को स्पष्ट कीजिए।
Answer: पूँजीगत प्राप्तियाँ सरकार की वे सभी प्राप्तियाँ होती हैं, जो देनदारियों का सृजन करती हैं या वित्तीय परिसंपत्तियों को कम करती हैं. पूँजीगत व्यय सरकार के वे व्यय होते हैं जिनके द्वारा भौतिक अथवा वित्तीय परिसंपत्तियों का सृजन किया जाता है. उदाहरण के लिए, सड़क निर्माण के लिए किया गया व्यय.
In simple words: पूँजीगत प्राप्तियां वो पैसा है जो सरकार को कर्ज लेकर या संपत्ति बेचकर मिलता है, और पूँजीगत खर्च वो है जो सरकार नई संपत्ति बनाने या कर्ज चुकाने पर करती है.

🎯 Exam Tip: पूँजीगत प्राप्तियाँ और व्यय सरकार की बैलेंस शीट को प्रभावित करते हैं, क्योंकि वे देनदारियों या परिसंपत्तियों में बदलाव लाते हैं.

 

Question 4. सरकारी घाटे को कम करने के कोई दो उपायों का वर्णन कीजिए।
Answer: सरकारी घाटे को कम करने के दो उपाय: 1. सरकार को अपने खर्चों को कुशलतापूर्वक और मितव्ययितापूर्वक प्रबंधित करना चाहिए, और गैर-ज़रूरी खर्चों में कमी करने का प्रयास करना चाहिए. 2. सरकार को उचित नीतियों के माध्यम से अधिक से अधिक राजस्व प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए.
In simple words: घाटा कम करने के लिए सरकार को फालतू खर्च रोकना चाहिए और ज़्यादा से ज़्यादा पैसा इकट्ठा करना चाहिए, जैसे टैक्स से.

🎯 Exam Tip: घाटा कम करने के उपाय अक्सर वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और भविष्य की पीढ़ियों पर ऋण का बोझ कम करने पर केंद्रित होते हैं.

 

Question 5. सन्तुलित बजट', 'बचत पूर्ण बजट' एवं 'घाटे का बजट' को स्पष्ट कीजिए।
Answer:

  • सन्तुलित बजट (Balanced Budget) – यह वह बजट है जिसमें कुल आय और कुल व्यय बराबर होते हैं.
  • बचत पूर्ण बजट (Surplus Budget) – यह वह बजट है जिसमें कुल आय, कुल व्यय से अधिक होती है.
  • घाटे का बजट (Deficit Budget) – यह वह बजट है जिसमें सरकार की कुल आय, सरकार के कुल व्यय से कम होती है.

In simple words: संतुलित बजट में आय और खर्च बराबर होते हैं, बचत बजट में आय खर्च से ज़्यादा होती है, और घाटे के बजट में आय खर्च से कम होती है.

🎯 Exam Tip: इन तीनों प्रकार के बजटों के अर्थव्यवस्था पर अलग-अलग प्रभाव होते हैं, खासकर आर्थिक स्थिरता और विकास के संबंध में.

 

Question 6. सार्वजनिक एवं निजी वस्तुओं से क्या आशय है? इनमें अन्तर कीजिए।
Answer: सार्वजनिक वस्तुएं वे होती हैं जिनका लाभ सभी लोगों को मिलता है, जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक पार्क. वहीं, निजी वस्तुएं वे होती हैं जिनका लाभ केवल एक विशेष व्यक्ति को ही प्राप्त होता है, जैसे एक कपड़ा या एक भोजन का पैकेट.
In simple words: सार्वजनिक वस्तुएं सभी के इस्तेमाल के लिए होती हैं, जबकि निजी वस्तुएं सिर्फ खरीदने वाले व्यक्ति के लिए होती हैं.

🎯 Exam Tip: सार्वजनिक वस्तुओं की मुख्य विशेषताएं गैर-प्रतिस्पर्धा और गैर-वर्जीयता हैं, जो उन्हें निजी वस्तुओं से अलग बनाती हैं.

 

Question 7. बजट क्या है और इसके प्रकार क्या हैं?
Answer: एक वित्तीय वर्ष के दौरान अनुमानित प्राप्तियों और व्ययों को मदों के अनुसार दर्शाया जाता है. भारत में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक माना जाता है. केन्द्र सरकार के वार्षिक वित्तीय विवरण को 'संघीय बजट' कहा जाता है. बजट मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: 1. राजस्व बजट तथा 2. पूँजीगत बजट.
In simple words: बजट सरकार का सालाना वित्तीय लेखा-जोखा है, जो आय और खर्च दिखाता है. यह राजस्व बजट और पूँजीगत बजट दो तरह का होता है.

🎯 Exam Tip: बजट केवल वित्तीय आंकड़े नहीं बल्कि सरकार की आर्थिक नीतियों और उद्देश्यों को भी दर्शाता है.

 

Question 8. राजस्व बजट और पूँजीगत बजट में अन्तर कीजिए।
Answer: राजस्व बजट में कर राजस्व और गैर-कर राजस्व प्राप्तियां शामिल होती हैं. राजस्व व्यय वे खर्च होते हैं जो परिसंपत्तियों में वृद्धि या देनदारियों में कमी नहीं करते. इसके विपरीत, पूँजीगत बजट में सरकार की पूँजीगत प्राप्तियां और पूँजीगत व्यय शामिल होते हैं. पूँजीगत प्राप्तियां वे होती हैं जिनसे देनदारियों में वृद्धि होती है या वित्तीय परिसंपत्तियां कम होती हैं, और पूँजीगत व्यय वे खर्च हैं जो परिसंपत्तियां बनाते हैं.
In simple words: राजस्व बजट रोज़मर्रा की कमाई और खर्च का हिसाब है, जिससे न संपत्ति बनती है न कर्ज घटता है. पूँजीगत बजट संपत्ति बनाने या कर्ज लेने/देने का हिसाब है.

🎯 Exam Tip: राजस्व बजट सरकार की परिचालन गतिविधियों को दर्शाता है, जबकि पूँजीगत बजट निवेश और ऋण संबंधी गतिविधियों को दर्शाता है.

 

Question 9. गैर-कर राजस्व क्या है? इसके स्रोत का उल्लेख करो।
Answer: कर को छोड़कर राजस्व प्राप्तियों के अन्य सभी स्रोत गैर-कर राजस्व के अंतर्गत आते हैं. भारत में केंद्रीय सरकार के गैर-कर राजस्व के तीन मुख्य स्रोत हैं – ब्याज प्राप्तियां, लाभांश और लाभ, तथा विदेशी अनुदान.
In simple words: गैर-कर राजस्व वह पैसा है जो सरकार को टैक्स के अलावा दूसरे तरीकों से मिलता है, जैसे ब्याज, कंपनियों से मिला लाभ या दूसरे देशों से मिली मदद.

🎯 Exam Tip: गैर-कर राजस्व भी सरकार के कुल राजस्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और विभिन्न सरकारी सेवाओं और निवेशों के वित्तपोषण में मदद करता है.

 

Question 10. राजस्व प्राप्तियों तथा पूँजीगत प्राप्तियों में अन्तर कीजिए। अथवा सरकारी बजट की राजस्व प्राप्तियों एवं पूँजीगत प्राप्तियों में अन्तर बताइए। प्रत्येक के उदाहरण दीजिए।
Answer: राजस्व और पूँजीगत प्राप्तियों में मुख्य अंतर यह है कि राजस्व प्राप्तियों को भविष्य में वापस करने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं होती, जबकि पूँजीगत प्राप्तियां एक प्रकार का ऋण होती हैं जिन्हें सरकार को ब्याज सहित वापस करना पड़ता है. उदाहरण के लिए, कर राजस्व राजस्व प्राप्ति है, जबकि ऋण पूँजीगत प्राप्ति है.
In simple words: राजस्व प्राप्ति सरकार को बिना वापस किए मिला पैसा है, जबकि पूँजीगत प्राप्ति कर्ज है जिसे सरकार को चुकाना पड़ता है.

🎯 Exam Tip: राजस्व प्राप्तियां सरकार के लिए कोई देनदारी नहीं बनातीं, जबकि पूँजीगत प्राप्तियां देनदारियां बनाती हैं या संपत्तियों को कम करती हैं.

 

Question 12. कर की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
Answer: कर की प्रमुख विशेषताएं निम्न हैं: 1. यह लोगों द्वारा सरकार को दिया जाने वाला एक अनिवार्य भुगतान है. 2. कर से प्राप्त राशि को इकट्ठा करके सामूहिक हित के कार्यों पर सरकार द्वारा व्यय किया जाता है, जिससे समाज कल्याण में वृद्धि होती है. 3. कर का भुगतान अनिवार्य रूप से निश्चित समय पर किया जाता है; ऐसा न करने पर दंड का प्रावधान होता है.
In simple words: कर देना अनिवार्य है, इससे मिले पैसे से सरकार जनकल्याण के काम करती है, और इसे समय पर न देने पर जुर्माना लगता है.

🎯 Exam Tip: कर प्रणाली सरकार के लिए राजस्व का मुख्य स्रोत है और यह सार्वजनिक सेवाओं और बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

 

Question 13. प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष करों से क्या आशय है? अन्तर बताइए। अथवा प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष करों में अन्तर स्पष्ट करते हुए प्रत्येक के दो-दो उदाहरण दीजिए।
Answer: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों में अंतर निम्न प्रकार हैं: 1. प्रत्यक्ष कर का भार अन्य व्यक्तियों पर स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है, जबकि अप्रत्यक्ष करों का भार अन्य व्यक्तियों पर स्थानांतरित किया जा सकता है. 2. प्रत्यक्ष कर प्रगतिशील होते हैं क्योंकि आय में वृद्धि के साथ इनकी दर भी बढ़ती है, जबकि अप्रत्यक्ष कर प्रगतिशील नहीं होते हैं. 3. प्रत्यक्ष करों का भुगतान अनिवार्य रूप से करना होता है, जबकि अप्रत्यक्ष करों का भुगतान करने से बचा जा सकता है.
उदाहरण -
प्रत्यक्ष कर – 1. आयकर 2. संपत्ति कर.
अप्रत्यक्ष कर – 1. सीमा कर.
In simple words: प्रत्यक्ष कर का बोझ बदला नहीं जा सकता और ये आय बढ़ने पर बढ़ते हैं (जैसे इनकम टैक्स), जबकि अप्रत्यक्ष करों का बोझ बदला जा सकता है और ये सभी के लिए एक जैसे होते हैं (जैसे चीज़ों पर लगने वाला टैक्स).

🎯 Exam Tip: प्रत्यक्ष कर आय असमानता को कम करने में मदद करते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष करों का मुख्य उद्देश्य राजस्व जुटाना है और ये सभी आय समूहों पर समान रूप से लागू होते हैं.

 

Question 15. बजट घाटा क्या है?
Answer: बजटीय घाटे से आशय सरकार के कुल व्यय का कुल प्राप्तियों से अधिक होना है. दूसरे शब्दों में, जब सरकार की राजस्व और पूँजीगत प्राप्तियों का योग राजस्व और पूँजीगत व्ययों के योग से कम होता है तो उसे बजटीय घाटा कहा जाता है.
In simple words: बजट घाटा तब होता है जब सरकार का कुल खर्च उसकी कुल कमाई से ज़्यादा हो जाता है.

🎯 Exam Tip: बजटीय घाटा सरकार की वित्तीय स्थिति में असंतुलन को दर्शाता है और इसे वित्तपोषित करने के लिए सरकार को उधार लेना पड़ता है.

 

Question 16. प्राथमिक घाटा किसे कहते हैं? यह क्या दर्शाता है?
Answer: प्राथमिक घाटा राजकोषीय घाटे से ब्याज भुगतान की राशि को घटाकर निकाला जाता है. यह राजकोषीय घाटे और ब्याज भुगतान का अंतर होता है. प्राथमिक घाटा सरकार की ऋण संबंधी जरूरतों को दर्शाता है, जिसमें ब्याज अदायगियां शामिल नहीं होतीं.
In simple words: प्राथमिक घाटा बताता है कि सरकार को अपने नए खर्चों (ब्याज चुकाने के अलावा) के लिए कितना पैसा उधार लेना पड़ेगा.

🎯 Exam Tip: प्राथमिक घाटा सरकार की वर्तमान वित्तीय नीति की प्रभावशीलता का एक बेहतर संकेतक है, क्योंकि यह अतीत के ऋणों पर ब्याज के बोझ को हटा देता है.

 

Question 17. राजकोषीय घाटे से क्या आशय है?
Answer: ऋण प्राप्तियों को छोड़कर शेष कुल प्राप्तियों पर कुल बजट व्यय के आधिक्य को राजकोषीय घाटा कहा जाता है. राजकोषीय घाटा वर्ष के दौरान देनदारियों में वृद्धि की माप करता है और यह व्यय को पूरा करने के लिए धन जुटाने की समस्या की माप करता है.
In simple words: राजकोषीय घाटा तब होता है जब सरकार का कुल खर्च उसकी कमाई (कर्ज छोड़कर) से ज़्यादा हो. यह दिखाता है कि सरकार को कितना नया कर्ज लेना पड़ेगा.

🎯 Exam Tip: उच्च राजकोषीय घाटा भविष्य में ब्याज भुगतान के बोझ को बढ़ा सकता है और अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है.

 

Question 18. अर्थव्यवस्था के लिए राजकोषीय घाटा कैसे समस्या बन जाता है?
Answer: विकासशील देश बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अधिक व्यय करते हैं. यदि सरकार इन व्ययों को पूरा करने के लिए ऋण लेती है, तो उसे ब्याज के रूप में एक बड़ी धनराशि खर्च करनी पड़ती है. इससे यह एक समस्या बन जाती है, और इसके कारण बजटीय घाटा बढ़ जाता है, जिससे अंततः सरकार ऋण जाल में फंस जाती है.
In simple words: अगर सरकार ज़्यादा कर्ज लेती है तो उसे ज़्यादा ब्याज चुकाना पड़ता है, जिससे उसका घाटा और बढ़ता जाता है, और देश कर्ज के जाल में फंस जाता है.

🎯 Exam Tip: राजकोषीय घाटा अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति, निजी निवेश में कमी (क्राउडिंग आउट) और भविष्य की पीढ़ियों पर ऋण के बोझ को जन्म दे सकता है.

 

Question 19. सरकारी व्यय से क्या अभिप्राय है?
Answer: सरकारी व्यय से अभिप्राय उन सभी खर्चों से है जो सरकार अपने कार्यों को चलाने, सेवाएं प्रदान करने और देश के विकास के लिए करती है. इसमें राजस्व व्यय और पूँजीगत व्यय दोनों शामिल होते हैं.
In simple words: सरकारी व्यय वह सारा पैसा है जो सरकार देश को चलाने, लोगों की मदद करने और विकास के काम करने पर खर्च करती है.

🎯 Exam Tip: सरकारी व्यय को सामान्यतः योजनागत और गैर-योजनागत व्यय, तथा राजस्व और पूँजीगत व्यय में वर्गीकृत किया जाता है.

 

Question 21. सरकार के उन तीन विशिष्ट कार्यों का उल्लेख कीजिए जिनका संचालन वह राजस्व और व्यय सम्बन्धी बजटीय उपायों के द्वारा करती है।
Answer: सरकार बजट के माध्यम से तीन प्रमुख कार्य करती है: 1. संसाधनों का पुनः आवंटन: सरकार सामाजिक और आर्थिक न्याय को ध्यान में रखकर बजट के माध्यम से संसाधनों का पुनर्वितरण करती है. 2. आय और संपत्ति का पुनः वितरण: सरकार धनी लोगों पर कर लगाती है और निर्धन लोगों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है. 3. आर्थिक स्थायित्व: मंदी और तेजी के प्रभावों को कम करने के लिए, सरकार मंदी के दिनों में घाटे का बजट और तेजी के दिनों में बचत का बजट बनाकर स्थिरता लाने का प्रयास करती है.
In simple words: सरकार बजट से संसाधनों को फिर से बांटती है, आय के अंतर को कम करती है, और अर्थव्यवस्था को स्थिर रखती है ताकि मंदी या तेजी का बुरा असर न पड़े.

🎯 Exam Tip: ये कार्य सरकार की अर्थव्यवस्था में हस्तक्षेप करने और सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने की क्षमता को दर्शाते हैं.

 

Question 22. राजस्व तथा पूँजीगत व्यय से क्या तात्पर्य है?
Answer: राजस्व व्यय वे सरकारी खर्च होते हैं जो सरकारी विभागों के सामान्य संचालन, सरकारी निःशुल्क सेवाओं, ऋणों के ब्याज भुगतान आदि पर किए जाते हैं. पूँजीगत व्यय वे खर्च होते हैं जिनसे भूमि, मशीनरी, कंपनियों के शेयर आदि खरीदने या सड़क, पुल आदि के निर्माण पर किया जाता है.
In simple words: राजस्व खर्च रोज़मर्रा के कामों पर होता है (जैसे वेतन), जबकि पूँजीगत खर्च नई संपत्ति बनाने या खरीदने पर होता है (जैसे इमारतें).

🎯 Exam Tip: राजस्व व्यय आमतौर पर आवर्ती होते हैं और सरकार की खपत संबंधी जरूरतों को पूरा करते हैं, जबकि पूँजीगत व्यय निवेश प्रकृति के होते हैं और भविष्य के लाभ पैदा करते हैं.

 

Question 23. योजनागत व्यय तथा गैर-योजनागत व्यय से क्या आशय है?
Answer: योजनागत व्यय वे खर्च होते हैं जो पंचवर्षीय योजनाओं या अन्य विशेष योजनाओं के माध्यम से किए जाते हैं. शेष सभी व्यय जो योजनाओं के माध्यम से नहीं किए जाते हैं, वे गैर-योजनागत व्यय कहलाते हैं.
In simple words: योजनागत खर्च वो है जो तय योजनाओं पर होता है, और जो योजना में नहीं होता वो गैर-योजनागत खर्च होता है.

🎯 Exam Tip: योजनागत व्यय विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने पर केंद्रित होते हैं, जबकि गैर-योजनागत व्यय सामान्य प्रशासनिक और रखरखाव कार्यों के लिए होते हैं.

 

Question 25. पूँजी निर्माण में सार्वजनिक व्यय किस प्रकार सहायक होते हैं?
Answer: सरकार घाटे का बजट बनाकर सार्वजनिक व्ययों में वृद्धि करती है, जिससे मुद्रा बाजार में आती है और लोगों की आय में वृद्धि होती है. इस आय का उपयोग व्यक्ति उपभोग या बचत में करते हैं. जो आय उपभोग से बच जाती है, उससे पूँजी का निर्माण होता है.
In simple words: सरकार जब खर्च बढ़ाती है तो लोगों के पास ज़्यादा पैसा आता है. लोग उस पैसे को बचाकर निवेश करते हैं, जिससे देश में नई पूँजी बनती है.

🎯 Exam Tip: सार्वजनिक व्यय सीधे बुनियादी ढांचे में निवेश करके या निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन देकर पूँजी निर्माण को बढ़ावा दे सकता है.

 

Question 26. 'प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष कर एक-दूसरे के पूरक होते हैं।” टिप्पणी कीजिए।
Answer: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर एक-दूसरे के पूरक होते हैं क्योंकि: 1. अप्रत्यक्ष कर वस्तुओं और सेवाओं के उपभोग पर लगाए जाते हैं. ये आय की उस मात्रा पर वसूल किए जाते हैं जो प्रत्यक्ष करों के लगने के बाद शेष रह जाती है. 2. अप्रत्यक्ष कर उन वस्तुओं पर भी लगाए जाते हैं जिनका उपभोग स्वयं उत्पादकों द्वारा किया जाता है. इस प्रकार उत्पादकों के उपभोग पर भी कर लग जाता है.
In simple words: प्रत्यक्ष टैक्स लोगों की आय पर लगते हैं, और अप्रत्यक्ष टैक्स चीजों के इस्तेमाल पर. दोनों मिलकर सरकार के लिए पैसा इकट्ठा करते हैं और एक-दूसरे के अधूरेपन को पूरा करते हैं.

🎯 Exam Tip: एक प्रभावी कर प्रणाली में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों का संतुलित मिश्रण होता है ताकि राजस्व जुटाने के साथ-साथ समानता और आर्थिक दक्षता के लक्ष्यों को भी प्राप्त किया जा सके.

 

Question 27. सरकार किन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए ऋण लेती है?
Answer: सरकार निम्न उद्देश्यों की पूर्ति के लिए ऋण लेती है: 1. देश पर आने वाले सामरिक या आर्थिक संकट का सामना करने के लिए. 2. सामूहिक उपयोग में आने वाली वस्तुओं के निर्माण हेतु. 3. प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग करके देश का आर्थिक विकास करने के लिए. 4. अन्य विकास कार्यों के संचालन हेतु वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए. 5. सरकारी बजट के अस्थायी घाटों को पूरा करने तथा लोगों के आर्थिक जीवन को संतुलित बनाए रखने के लिए.
In simple words: सरकार कर्ज इसलिए लेती है ताकि देश को संकट से बचा सके, सभी के लिए चीज़ें बना सके, विकास के काम कर सके, और अपने बजट के घाटे को पूरा कर सके.

🎯 Exam Tip: सरकारी ऋण का उपयोग अक्सर बड़े पैमाने के निवेश, आपदा राहत, या मंदी के दौरान अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है.

 

Question 28. विदेशी ऋणों (बाह्य ऋणों) के मुख्य दो दोष बताइए।
Answer: विदेशों से लिए जाने वाले ऋणों के मुख्य दोष निम्नलिखित हैं: 1. विदेशी ऋणों का भार आंतरिक ऋणों की अपेक्षा अधिक होता है क्योंकि इनके भुगतान के लिए देश के महत्वपूर्ण आर्थिक संसाधनों का उपयोग करना पड़ता है. 2. विकासशील अर्थव्यवस्थाएं अपनी विकास परियोजनाओं को पूरा करने के लिए विदेशों से ऋण प्राप्त करती हैं, जिससे विदेशी ऋणों पर ब्याज का बोझ बढ़ता जाता है. परिणामस्वरूप, ऋणों को चुकाने के लिए उन्हें फिर से ऋण लेना पड़ता है, जिससे वे देश उत्तरोत्तर ऋण प्राप्त कर ऋण चक्र में फंस जाते हैं. इसी को ऋण जाल कहा जाता है.
In simple words: विदेशी कर्ज का बोझ ज़्यादा होता है और इससे देश कर्ज के जाल में फंस सकता है, क्योंकि उसे पुराने कर्ज चुकाने के लिए नए कर्ज लेने पड़ते हैं.

🎯 Exam Tip: विदेशी ऋणों पर निर्भरता से देश की संप्रभुता और आर्थिक नीति निर्माण में स्वायत्तता पर भी असर पड़ सकता है.

 

Question 30. सरकारी बजट की प्राप्तियों को एक चार्ट के माध्यम से प्रदर्शित कीजिए।
Answer:

बजट प्राप्तियाँ
राजस्व प्राप्तियाँपूँजीगत प्राप्तियाँ
कर राजस्वगैर-कर राजस्वऋण प्राप्तियाँऋण की वसूली
आयकरप्राप्त ब्याजसार्वजनिक उद्यमों के शेयरों की बिक्री से प्राप्त आय
निगम करलाभ तथा लाभांशलघु बचतें
उत्पाद शुल्कशुल्क तथा जुर्माना
सीमा शुल्कविदेशी सहायता/अनुदान
धन कर
व्यय कर
उपहार कर
ब्याज कर
सेवा कर

In simple words: यह चार्ट दिखाता है कि सरकार को पैसा कहां-कहां से मिलता है, जैसे टैक्स से, ब्याज से, या कर्ज लेकर.

🎯 Exam Tip: बजट प्राप्तियों को राजस्व और पूँजीगत प्राप्तियों में विभाजित करना महत्वपूर्ण है क्योंकि इनकी प्रकृति और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव भिन्न होते हैं.

 

Question 31. लेखानुदान से क्या तात्पर्य है?
Answer: लेखानुदान का अर्थ है कि यदि किसी वर्ष बजट 1 अप्रैल से पहले पारित नहीं हो पाता है, तो सरकार को 1 अप्रैल से बजट पारित होने तक की अवधि के लिए अपने खर्चों को पूरा करने हेतु संसद से स्वीकृति लेनी पड़ती है.
In simple words: जब पूरा बजट पास होने में देर हो, तो सरकार को कुछ समय के लिए पैसे खर्च करने की खास अनुमति लेनी पड़ती है, इसे लेखानुदान कहते हैं.

🎯 Exam Tip: लेखानुदान आमतौर पर आगामी वित्तीय वर्ष के केवल एक छोटे हिस्से (दो से चार महीने) के लिए व्यय को अधिकृत करता है.

 

Question 32. सरकारी बजट की व्यय की मदों को एक चार्ट के माध्यम से प्रदर्शित करो।
Answer:

बजट व्यय
योजनागत व्ययगैर-योजनागत व्यय
केन्द्रीय योजनाओं पर व्ययब्याज भुगतान
राज्यों एवं संघशासित प्रदेशों की योजनाओं हेतु सहायतावेतन तथा मजदूरी
केन्द्रीय पूँजीगत योजनाओं पर व्ययआर्थिक सहायता
राज्यों एवं संघशासित प्रदेशों की पूँजीगत परियोजनाओं हेतु सहायताराज्यों की सहायता
सुरक्षा सेवाओं पर व्यय
शिक्षा तथा स्वास्थ्य पर व्यय
ग्रामीण विकास
बाढ़ नियंत्रण कार्यक्रमों पर व्यय
विदेशों को अनुदान
सुरक्षा या पूँजी व्यय
राज्यों व संघशासित प्रदेशों को ऋण
सार्वजनिक उपक्रमों को ऋण
शेष विश्व को ऋण

In simple words: यह चार्ट दिखाता है कि सरकार किन-किन चीज़ों पर पैसा खर्च करती है, चाहे वह योजनाओं पर हो या रोज़मर्रा के कामों पर.

🎯 Exam Tip: व्यय की मदों को योजनागत और गैर-योजनागत में वर्गीकृत करना सरकार की विकासात्मक प्राथमिकताओं और आवश्यक प्रशासनिक खर्चों को समझने में मदद करता है.

 

Question 33. विनियोग विधेयक से क्या तात्पर्य है?
Answer: विनियोग विधेयक वह विधेयक है जिसके संसद में पास हो जाने पर सरकार को बजट की राशि को खर्च करने का अधिकार मिल जाता है. यह संचित निधि से व्यय करने का अधिकार देता है, लेकिन धन इकट्ठा करने का अधिकार नहीं देता.
In simple words: विनियोग विधेयक एक कानून है जो सरकार को संसद से पास होने के बाद, तय बजट से पैसा खर्च करने की अनुमति देता है.

🎯 Exam Tip: विनियोग विधेयक का पास होना सरकारी खर्चों को कानूनी वैधता प्रदान करने के लिए आवश्यक है, क्योंकि इसके बिना सरकार कोई भी पैसा खर्च नहीं कर सकती.

 

Question 34. पूरक बजट से क्या आशय है?
Answer: पूरक बजट तब पेश किया जाता है जब सरकार के किसी विभाग के बजट में स्वीकृत धनराशि अपर्याप्त होती है, और अतिरिक्त मांगों को पूरा करने के लिए लोकसभा में एक और बजट प्रस्तुत करके स्वीकृति ली जाती है.
In simple words: पूरक बजट तब लाया जाता है जब सरकार को साल के बीच में किसी काम के लिए ज़्यादा पैसों की ज़रूरत पड़ती है, जो पहले बजट में तय नहीं हुए थे.

🎯 Exam Tip: पूरक बजट वित्तीय वर्ष के दौरान अप्रत्याशित या बढ़ी हुई व्यय आवश्यकताओं को पूरा करने का एक साधन है.

 

RBSE Class 12 Economics Chapter 23 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. सरकारी बजट क्या है? इसके उद्देश्यों की चर्चा करें। अथवा बजट से क्या आशय है? सरकारी बजट के उद्देश्यों का वर्णन करो।
Answer: सरकारी बजट का आशय – भारत में केन्द्र सरकार के वार्षिक वित्तीय विवरण को संघीय बजट कहा जाता है. यह पिछले वर्ष की वास्तविक प्राप्तियों तथा व्ययों का वर्तमान वर्ष के संशोधित अनुमानों को और आगामी वर्ष के बजट अनुमानों का विवरण प्रस्तुत करता है. सरकारी बजट के प्रमुख उद्देश्य निम्न हैं:
1. देश को आर्थिक रूप से विकसित करना.
2. सरकारी कामकाज एवं सरकारी प्रशासन को बिना रुकावट के चलाने में बनाए रखना.
3. अर्थव्यवस्था में मौजूद मंदी के प्रभाव को कम करना.
4. लोगों की सामूहिक उपभोग वाली वस्तुओं का उत्पादन कर उनकी आवश्यकता को पूरा करना.
5. देश के विकास हेतु आवश्यक आधारभूत ढांचे का निर्माण करना.
In simple words: सरकारी बजट सरकार का सालाना वित्तीय लेखा-जोखा है जो दिखाता है कि कितना पैसा आएगा और कितना खर्च होगा. इसका मुख्य लक्ष्य देश का विकास करना, सरकार का कामकाज सुचारू रखना, मंदी से निपटना और लोगों की जरूरतों को पूरा करना है.

🎯 Exam Tip: बजट के उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे सरकार की आर्थिक नीतियों और प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं.

 

Question 2. बजट क्यों बनाये जाते हैं? सन्तुलन एवं मदों की प्रकृति के आधार पर बजट का वर्गीकरण कीजिए।
Answer: बजट वह विवरण होता है जिसमें वित्तमंत्री संसद के सामने पिछले वर्ष की वित्तीय स्थिति, चालू वर्ष में सरकारी कोष की स्थिति, और अगले वर्ष की योजनाओं तथा आय-व्यय में कमी या वृद्धि के नए प्रस्ताव प्रस्तुत करते हैं। इसलिए, बजट सिर्फ आय-व्यय का विवरण नहीं है, बल्कि यह देश में आर्थिक बदलाव लाने के लिए सरकार का एक महत्वपूर्ण उपकरण भी है। इसकी मदद से सरकार अर्थव्यवस्था में समानता, स्थिरता और आर्थिक विकास को गति देने का काम करती है।

बजट को निम्न प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है:

(i) बजट की मदों की प्रकृति के आधार पर:
(a) राजस्व बजट: यह वह बजट है जिसमें केवल राजस्व प्राप्ति की आय-व्यय मदों को शामिल किया जाता है।
(ii) बजट के संतुलन के आधार पर:
(a) घाटे का बजट: जब बजटीय आय की तुलना में खर्च अधिक होता है, तो इसे घाटे का बजट कहा जाता है। यह मंदी के समय अपनाई जाने वाली राजकोषीय नीति में बहुत महत्वपूर्ण होता है। जब आय की तुलना में सरकारी खर्च ज्यादा होता है, तो अर्थव्यवस्था में लोगों की खरीदने की शक्ति बढ़ती है। घाटे का बजट सरकार के वास्तविक घाटे को दर्शाता है। इससे राष्ट्रीय आय कई गुना बढ़ जाती है, जिससे मांग में वृद्धि होती है और अर्थव्यवस्था मंदी से बाहर आती है। घाटे का बजट दो तरह से बनता है: सार्वजनिक व्यय बढ़ाकर या करों में कमी करके। मंदी के समय करों में कमी करके घाटे का बजट बनाना ज्यादा फायदेमंद होता है क्योंकि इससे लोगों के पास खर्च करने के लिए अधिक पैसा बचता है, जिससे कुल मांग बढ़ती है। यह मंदी को खत्म करने में मदद करता है। आमतौर पर, सभी सरकारें कल्याणकारी राज्य स्थापित करने के लिए घाटे का बजट बनाती हैं।
(b) आधिक्य बजट: यह वह बजट है जिसमें कुल सरकारी खर्च, कुल सरकारी आय से कम होता है, इसे आधिक्य बजट कहते हैं। आमतौर पर, आधिक्य बजट तब बनाए जाते हैं जब वस्तुओं की कीमतें नियंत्रित करनी हों और मांग को कम करना हो। यह राजकोषीय नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
(c) संतुलित बजट: यह वह बजट है जिसमें सरकार की आय और व्यय दोनों संतुलित होते हैं, यानी बराबर होते हैं।
In simple words: बजट सरकार के पैसों के हिसाब-किताब का एक ब्योरा है, जो बताता है कि सरकार कैसे पैसे खर्च करेगी और कहाँ से लाएगी। इसे दो तरह से बांटा जा सकता है: पहला, पैसे के प्रकार के हिसाब से (जैसे राजस्व बजट); और दूसरा, पैसे के संतुलन के हिसाब से (जैसे घाटे का बजट, फायदे का बजट या बराबर का बजट)।

🎯 Exam Tip: जब बजट के वर्गीकरण को प्रस्तुत करें, तो प्रत्येक प्रकार के बजट (राजस्व, घाटा, आधिक्य, संतुलित) को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और उसके उद्देश्य या विशेषताओं को बताएं।

 

Question 3. भारत में सार्वजनिक व्यय में वृद्धि के कारणों की व्याख्या कीजिए।
Answer: भारत में सार्वजनिक व्यय में वृद्धि के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

(i) मूल्यों का बढ़ना: पिछले कई सालों में महंगाई बहुत बढ़ी है। चीजों और सेवाओं की कीमतें पहले से ज्यादा हो गई हैं, इसलिए सरकार को अब ज्यादा खर्च करना पड़ता है।
(ii) औद्योगिक विकास: औद्योगिक विकास दर बढ़ाने के लिए नए उद्योग लगाने और पुराने उद्योगों का राष्ट्रीयकरण करने में बहुत बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है।
(iii) उत्पादकों को आर्थिक सहायता: सरकार देश में खेती और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए किसानों और उद्योगपतियों को पर्याप्त मात्रा में कर्ज, दान और सहायता देती है, जिससे सार्वजनिक खर्च बढ़ जाता है।
(iv) राष्ट्रीय आय में बढ़ोत्तरी: पिछले कुछ सालों में आर्थिक वृद्धि होने से लोगों की राष्ट्रीय आय बढ़ी है, जिससे उनका जीवन स्तर सुधरा है और वे राज्य से ज्यादा सेवाओं और सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।
(vii) जनसंख्या वृद्धि: पिछले वर्षों में देश में जनसंख्या तेजी से बढ़ी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में लगभग 1.93% वार्षिक दर से जनसंख्या बढ़ रही है, जिससे सार्वजनिक खर्च भी बढ़ा है।
(viii) सामाजिक सुरक्षा उपायों में वृद्धि: सरकार कल्याण और सामाजिक सुरक्षा के लिए कई योजनाएं चलाती है, जैसे बेरोजगारी बीमा, स्वास्थ्य बीमा, वृद्धावस्था पेंशन और प्रसव लाभ, जिन पर खर्च होता है।
(ix) सुरक्षा व्यय में वृद्धि: सार्वजनिक खर्च में वृद्धि का मुख्य कारण हथियारों पर भारी मात्रा में खर्च करना है, जैसे परमाणु शक्ति के विकास, जल, वायु, सेना और युद्ध की तैयारियों के कारण अधिक व्यय होता है।
(x) प्रजातन्त्र शासन प्रणाली विकसित होना: तानाशाही या पुराने राजतंत्र की तुलना में प्रजातंत्र में प्रशासनिक खर्च तेजी से बढ़ता है। भारत में संघीय व्यवस्था की दोहरी शासन प्रणाली के कारण भी सार्वजनिक खर्च बढ़ा है।
In simple words: भारत में सरकार का खर्च कई कारणों से बढ़ रहा है, जैसे महंगाई, उद्योगों का विकास, किसानों को मदद, लोगों की बढ़ती आय, जनसंख्या वृद्धि, सामाजिक सुरक्षा की योजनाएं, देश की सुरक्षा पर खर्च और लोकतांत्रिक सरकार चलाने का खर्च।

🎯 Exam Tip: सार्वजनिक व्यय में वृद्धि के कारणों को समझाते समय, प्रत्येक बिंदु को स्पष्ट उदाहरणों के साथ प्रस्तुत करें ताकि आपकी व्याख्या सटीक हो।

RBSE Class 12 Economics Chapter 23 आंकिक प्रश्न

 

Question 1. एक वित्तीय वर्ष के दौरान सरकार द्वारा दिए गये ब्याज के भुगतान का अनुमान है Rs 80,000 है जबकि बजट प्राप्तियों पर बजट व्यय के आधिक्य (शुद्ध ऋण) का अनुमान Rs 1,25,000 है। प्राथमिक घाटे की गणना कीजिए।
Answer:
प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा – ब्याज का भुगतान
= 1,25,000 - 80,000
= Rs 45,000
In simple words: प्राथमिक घाटा निकालने के लिए, कुल सरकारी कर्ज से ब्याज का भुगतान घटा दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: प्राथमिक घाटा की गणना करते समय, हमेशा राजकोषीय घाटे से ब्याज भुगतान को घटाना याद रखें।

 

Question 2. निम्नलिखित सूचनाओं के आधार पर राजकोषीय घाटा ज्ञात करो
(i) सरकार का अनुमानित कुल व्यय राशि (Rs) 2,50,000
(ii) राजस्व प्राप्तियाँ 1,50,000
(iii) गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ 20,000
Answer:
राजकोषीय घाटा = सरकार का कुल व्यय – (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ)
= 2,50,000 – (1,50,000 + 20,000)
= 2,50,000 – 1,70,000
= Rs 80,000
In simple words: राजकोषीय घाटा जानने के लिए, सरकार के कुल खर्च में से राजस्व से मिली आय और बिना कर्ज के पूंजी से मिली आय को घटाया जाता है।

🎯 Exam Tip: राजकोषीय घाटे की गणना के लिए सूत्र को ध्यान से समझें और सभी संबंधित प्राप्तियों को सही ढंग से घटाना सुनिश्चित करें।

 

Question 3. राजस्व व्यय की गणना करो।
Answer:
राजस्व घाटा = राजस्व व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ
\( \implies \) राजस्व व्यय = राजस्व घाटा + राजस्व प्राप्तियाँ
= 50 + 500
= Rs 550 करोड़
In simple words: राजस्व व्यय निकालने के लिए, राजस्व घाटा और राजस्व प्राप्तियों को जोड़ दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: सूत्र का सही उपयोग करें: राजस्व व्यय = राजस्व घाटा + राजस्व प्राप्तियाँ। यदि कोई दो मान दिए गए हों, तो आप तीसरे मान को आसानी से ज्ञात कर सकते हैं।

 

Question 4. निम्न आँकड़ों से बजट घाटा ज्ञात कीजिए।
(i) राजस्व प्राप्तियाँ 80,000 करोड़
(ii) राजस्व व्यय 60,000 करोड़
(iii) पूँजीगत प्राप्तियाँ 50,000 करोड़
(iv) पूँजीगत व्यय 90,000 करोड़
Answer:
बजट घाटा = (राजस्व व्यय + पूँजीगत व्यय) - (राजस्व प्राप्तियाँ + पूँजीगत प्राप्तियाँ)
= (60,000 + 90,000) – (80,000 + 50,000)
= 1,50,000 - 1,30,000
= Rs 20,000 करोड़
In simple words: बजट घाटा निकालने के लिए, सरकार के कुल खर्च (राजस्व और पूंजीगत व्यय) में से कुल प्राप्तियों (राजस्व और पूंजीगत प्राप्तियाँ) को घटाया जाता है।

🎯 Exam Tip: बजट घाटे की गणना करते समय, सभी प्रकार के व्यय (राजस्व और पूंजीगत) को एक साथ जोड़ें और सभी प्रकार की प्राप्तियों (राजस्व और पूंजीगत) को एक साथ जोड़ें, फिर दोनों के अंतर को ज्ञात करें।

 

Question 5. निम्न सूचनाओं से सरकार का कुल व्यय ज्ञात करें।
(i) ऋण व अन्य दायित्व 50,000 करोड़
(ii) राजस्व प्राप्तियाँ 3,00,000 करोड़
(iii) गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ 20,000 करोड़
Answer:
सरकार का कुल व्यय = ऋण एवं अन्य दायित्व + राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ
= 50,000 + 3,00,000 + 20,000 = Rs 3,70,000 करोड़
In simple words: सरकार का कुल खर्च निकालने के लिए, उसके कर्ज और अन्य जिम्मेदारियों को राजस्व प्राप्तियों और बिना कर्ज वाली पूंजीगत प्राप्तियों के साथ जोड़ दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: कुल सरकारी व्यय की गणना में, सभी प्रकार के वित्तीय दायित्वों और प्राप्तियों को सही ढंग से शामिल करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. सरकारी बजट के बारे में निम्नलिखित आँकड़ों से (i) राजस्व घाटा (ii) राजकोषीय घाटा और (iii) प्राथमिक आय ज्ञात कीजिए।
Answer:
(i) राजस्व घाटा = राजस्व व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ
= 100 - 80 = Rs 20 अरब
(ii) राजकोषीय घाटा = राजस्व व्यय + पूँजीगत व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ – पूँजीगत प्राप्तियाँ
= 100 + 110 - 80 - 95 = 210 - 175 = Rs 35 अरब
(iii) प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा – ब्याज भुगतान
= 35 - 10 = Rs 25 अरब
In simple words: राजस्व घाटा, राजकोषीय घाटा और प्राथमिक घाटा निकालने के लिए, दिए गए खर्च और आय के आंकड़ों का उपयोग करके संबंधित सूत्रों को लागू किया जाता है।

🎯 Exam Tip: इन तीनों घाटों की गणना के सूत्र याद रखें: राजस्व घाटा = राजस्व व्यय - राजस्व प्राप्तियाँ; राजकोषीय घाटा = कुल व्यय - (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियाँ); प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा - ब्याज भुगतान।

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