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Detailed Chapter 19 केन्द्रीय बैंक कार्य एवं साख नियन्त्रण RBSE Solutions for Class 12 Economics
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Class 12 Economics Chapter 19 केन्द्रीय बैंक कार्य एवं साख नियन्त्रण RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Economics Chapter 19 अभ्यासार्थ प्रश्न
RBSE Class 12 Economics Chapter 19 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. बैंक दर से क्या तात्पर्य है।
(अ) जिस पर व्यापारिक बैंक उधार देते हैं।
(ब) जिस दर पर केन्द्रीय बैंक व्यापारिक बैंकों के बिलों की पुनर्कटौती करता है।
(स) महाजनों द्वारा बैंकों को जिस दर पर उधार दिया जाता है।
(द) बैंक जनता को जिस दर पर उधार देता है।
Answer: (ब) जिस दर पर केन्द्रीय बैंक व्यापारिक बैंकों के बिलों की पुनर्कटौती करता है।
In simple words: बैंक दर वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक, व्यापारिक बैंकों के बिलों को फिर से भुनाता है या उन्हें पैसे देता है। यह एक महत्वपूर्ण दर है जो अर्थव्यवस्था में पैसे की आपूर्ति को प्रभावित करती है।
🎯 Exam Tip: बैंक दर केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति का एक प्रमुख उपकरण है। इसे हमेशा 'पुनर्कटौती दर' (re-discount rate) के रूप में याद रखें, जिस पर केंद्रीय बैंक अन्य बैंकों को पैसा देता है।
Question 2. निम्नलिखित में से कौन-सा साख नियन्त्रण का गुणात्मक उपाय नहीं है?
(अ) साख राशनिंग
(ब) नैतिक दबाव
(स) नोट निर्गमन करना
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (स) नोट निर्गमन करना
In simple words: साख नियंत्रण के गुणात्मक उपाय वे होते हैं जो ऋण के उपयोग की दिशा या उद्देश्य को बदलते हैं। नोट छापना एक परिमाणात्मक उपाय है जो पैसे की कुल मात्रा को नियंत्रित करता है, न कि उसके उपयोग की गुणवत्ता को।
🎯 Exam Tip: गुणात्मक उपाय विशिष्ट क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं, जबकि परिमाणात्मक उपाय पूरी अर्थव्यवस्था में पैसे की कुल मात्रा को प्रभावित करते हैं।
Question 3. केन्द्रीय बैंक का प्रमुख कार्य है।
(अ) नोट निर्गमन करना
(ब) जनता से सीधा धन जमा करना
(स) जनता को ऋण देना।
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (अ) नोट निर्गमन करना
In simple words: केंद्रीय बैंक का सबसे खास काम नोट छापना है। यह अकेला ही देश की करेंसी जारी करता है। यह काम कोई और बैंक नहीं कर सकता।
🎯 Exam Tip: केंद्रीय बैंक के पास नोट जारी करने का एकाधिकार होता है, जो उसकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में से एक है। अन्य कार्य जैसे जनता से जमा लेना या ऋण देना वाणिज्यिक बैंकों के होते हैं।
Question 4. भारत का केन्द्रीय बैंक है –
(अ) भारतीय स्टेट बैंक
(ब) भारतीय रिजर्व बैंक
(स) यूनियन बैंक
(द) सिंडीकेट बैंक
Answer: (ब) भारतीय रिजर्व बैंक
In simple words: भारत का केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक है। यह देश की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करता है। यह सरकार और अन्य बैंकों के लिए भी बैंक का काम करता है।
🎯 Exam Tip: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भारत में सभी बैंकों का नेतृत्व करता है और मौद्रिक नीति बनाने का काम भी करता है।
Question 5. एक रुपये के नोट पर किसके हस्ताक्षर होते हैं?
(अ) गवर्नर
(ब) प्रधानमंत्री
(स) वित्त सचिव
(द) वित्त मंत्री
Answer: (स) वित्त सचिव
In simple words: एक रुपये के नोट पर भारत सरकार के वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं। बाकी सभी नोटों पर रिजर्व बैंक के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: यह एक सामान्य ज्ञान का प्रश्न है, ध्यान रखें कि एक रुपये के नोट और बाकी सभी भारतीय करेंसी नोटों पर अलग-अलग अधिकारियों के हस्ताक्षर होते हैं।
RBSE Class 12 Economics Chapter 19 अतिलघु उत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. केन्द्रीय बैंक की परिभाषा लिखिए।
Answer: केन्द्रीय बैंक किसी भी देश का सबसे बड़ा और प्रमुख बैंक होता है। यह देश में मुद्रा जारी करने और पैसे की आपूर्ति को नियंत्रित करने का काम करता है। यह देश की मौद्रिक स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है।
In simple words: केंद्रीय बैंक देश का मुख्य बैंक है, जो पैसा छापता है और बाजार में पैसों के लेन-देन को संभालता है।
🎯 Exam Tip: केंद्रीय बैंक की परिभाषा में उसके दो मुख्य कार्य - मुद्रा निर्गमन और साख नियंत्रण - को शामिल करना महत्वपूर्ण है।
Question 3. साख की राशनिंग से आप क्या समझते हैं?
Answer: साख की राशनिंग का मतलब है कि केन्द्रीय बैंक अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए ऋण की एक तय सीमा निर्धारित करता है। यह सुनिश्चित करता है कि पैसा सही जगहों पर लगे और कुछ क्षेत्रों में ज्यादा या कम पैसा न पहुंचे।
In simple words: साख की राशनिंग का मतलब है कि केंद्रीय बैंक अलग-अलग उद्योगों या क्षेत्रों को कितना उधार मिलेगा, इसकी सीमा तय कर देता है।
🎯 Exam Tip: यह मौद्रिक नीति का एक गुणात्मक उपाय है जिसका उपयोग केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में ऋण प्रवाह को निर्देशित करने के लिए करता है।
Question 4. भारत के केन्द्रीय बैंक का नाम लिखिए।
Answer: भारत के केन्द्रीय बैंक का नाम 'भारतीय रिजर्व बैंक' है। इसकी स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई थी।
In simple words: भारत का केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक है।
🎯 Exam Tip: भारतीय रिजर्व बैंक को 'RBI' के नाम से भी जाना जाता है और यह भारत का सर्वोच्च मौद्रिक प्राधिकरण है।
Question 5. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी एक मासिक बुलेटिन का नाम लिखिए।
Answer: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी एक मासिक बुलेटिन का नाम 'आर.बी.आई. बुलेटिन' (RBI Bulletin) है। यह बुलेटिन भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण आँकड़े और विश्लेषण प्रकाशित करता है।
In simple words: रिजर्व बैंक हर महीने 'आर.बी.आई. बुलेटिन' नाम की एक रिपोर्ट छापता है।
🎯 Exam Tip: आरबीआई बुलेटिन देश की मौद्रिक और आर्थिक नीतियों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
RBSE Class 12 Economics Chapter 19 लघु उत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. केन्द्रीय बैंक के नोट निर्गमन के कार्यों को समझाइए।
Answer: केन्द्रीय बैंक को नोट जारी करने का एकमात्र अधिकार होता है। इस वजह से सभी नोट एक जैसे दिखते हैं और पैसों का लेन-देन आसान हो जाता है। केंद्रीय बैंक अलग-अलग कीमत के नोट छापता है। नोट छापते समय केंद्रीय बैंक को यह ध्यान रखना पड़ता है कि देश को कितने नोटों की जरूरत है, न कम न ज्यादा। बहुत ज्यादा नोट छापने से महंगाई (मुद्रास्फीति) बढ़ सकती है और अगर कम नोट छापे जाएं तो व्यापार में दिक्कत आ सकती है। केंद्रीय बैंक इस संतुलन को बनाए रखता है।
In simple words: केंद्रीय बैंक ही देश में नोट छापने का काम करता है। यह देखता है कि कितने नोट छापने हैं ताकि महंगाई न बढ़े और व्यापार में कोई परेशानी न आए।
🎯 Exam Tip: नोट निर्गमन का एकाधिकार केंद्रीय बैंक को मौद्रिक नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद करता है।
Question 2. केन्द्रीय बैंक द्वारा साख नियन्त्रण के लिए अपनाये जाने वाले परिमाणात्मक उपाय लिखिए।
Answer: केन्द्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में ऋण की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए कुछ परिमाणात्मक उपाय अपनाता है। ये उपाय सीधे तौर पर बैंकों की ऋण देने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। ये उपाय निम्नलिखित हैं:
1. बैंक दर में परिवर्तन: केंद्रीय बैंक बैंक दर को बदलकर बैंकों के लिए कर्ज महंगा या सस्ता करता है।
2. खुले बाजार की क्रियाएँ: केंद्रीय बैंक बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदता या बेचता है ताकि बैंकों के पास नकदी की मात्रा को बदला जा सके।
3. नकद कोषानुपात में परिवर्तन: केंद्रीय बैंक बैंकों को अपनी जमा राशि का एक निश्चित हिस्सा केंद्रीय बैंक के पास रखने का निर्देश देता है। इस अनुपात को बदलकर ऋण देने की क्षमता को प्रभावित किया जाता है। ये उपाय अर्थव्यवस्था में पैसे की कुल मात्रा को नियंत्रित करते हैं।
In simple words: केंद्रीय बैंक बैंक दर बदलकर, बाजार में सरकारी चीजें बेच-खरीदकर और बैंकों के पास रखे जाने वाले पैसे का अनुपात बदलकर ऋण को नियंत्रित करता है।
🎯 Exam Tip: परिमाणात्मक उपाय सीधे तौर पर पूरे वित्तीय प्रणाली में ऋण की उपलब्धता को प्रभावित करते हैं, जिससे पैसे की कुल मात्रा पर असर पड़ता है।
Question 4. भारतीय रिजर्व बैंक के केन्द्रीय निदेशक मण्डल को एक फ्लो चार्ट से समझाइए।
Answer: भारतीय रिजर्व बैंक का केन्द्रीय निदेशक मण्डल उसके कामकाज को देखता है। इसका ढाँचा कुछ इस तरह है:
गवर्नर (1)
\( \downarrow \)
उप-गवर्नर (4)
\( \downarrow \)
निदेशक (10) - भारत सरकार द्वारा मनोनीत
\( \downarrow \)
निदेशक (4) - चार स्थानीय मण्डलों से
\( \downarrow \)
सरकारी अधिकारी (1) - भारत सरकार का प्रतिनिधित्व
इस तरह केन्द्रीय निदेशक मण्डल में गवर्नर सहित कुल 20 सदस्य होते हैं। यह ढाँचा रिजर्व बैंक को प्रभावी ढंग से काम करने में मदद करता है।
In simple words: रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल में एक गवर्नर, चार उप-गवर्नर, 10 सरकार द्वारा चुने गए निदेशक, चार स्थानीय निदेशक और एक सरकारी अधिकारी होते हैं। कुल मिलाकर 20 लोग होते हैं।
🎯 Exam Tip: इस फ्लोचार्ट को याद रखें क्योंकि यह RBI की निर्णय लेने वाली संरचना को दर्शाता है, जिसमें सरकारी प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय विशेषज्ञता शामिल है।
Question 5. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रकाशित कोई चार वार्षिक प्रकाशनों के नाम लिखिए।
Answer: भारतीय रिजर्व बैंक अर्थव्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रकाशित करता रहता है। इसके चार वार्षिक प्रकाशन इस प्रकार हैं:
1. मुद्रा एवं बैंकिंग सांख्यिकी पर मेन्युअल (Manual on Money and Banking Statistics)
2. भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति और प्रगति रिपोर्ट (Report on Trend and Progress of Banking in India)
3. भारत में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की आधारभूत सांख्यिकीय विवरणियाँ (Basic Statistical Returns of Scheduled Commercial Banks in India)
4. मुद्रा और वित्त सम्बन्धी रिपोर्ट (Report on Currency and Finance) यह रिपोर्टें आर्थिक नीतियों और विकास को समझने में सहायक होती हैं।
In simple words: रिजर्व बैंक हर साल पैसे, बैंकिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़ी कई रिपोर्टें छापता है, जैसे 'मुद्रा और बैंकिंग आंकड़े' और 'बैंकिंग की प्रगति रिपोर्ट'।
🎯 Exam Tip: इन प्रकाशनों से अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति और केंद्रीय बैंक की नीतियों के प्रभाव के बारे में जानकारी मिलती है।
RBSE Class 12 Economics Chapter 19 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. केन्द्रीय बैंक की परिभाषा दीजिए तथा उसके प्रमुख कार्यों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
Answer: केन्द्रीय बैंक देश का सबसे ऊँचा बैंक होता है। यह मुद्रा और साख का नियंत्रण करता है। केन्द्रीय बैंक की कुछ मुख्य परिभाषाएँ इस प्रकार हैं:
4. शॉ (Shaw) के अनुसार, “केन्द्रीय बैंक देश में साख मुद्रा पर नियन्त्रण रखने वाला बैंक है।”
केन्द्रीय बैंक के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:
1. मुद्रा का निर्गमन – केन्द्रीय बैंक का सबसे महत्वपूर्ण काम देश की मौद्रिक जरूरतों को देखते हुए नोट छापना है। यह अकेला ही नोट छापने का काम करता है।
2. बैंकों का बैंक – केन्द्रीय बैंक अन्य बैंकों पर नजर रखता है ताकि वे सरकार की नीतियों के हिसाब से काम करें। यह मुश्किल समय में अन्य बैंकों को आखिरी कर्जदाता के रूप में पैसे भी देता है।
3. सरकार का बैंकर - केन्द्रीय बैंक सरकार के बैंक के रूप में काम करता है। यह सरकार का पैसा जमा करता है और उसके लिए भुगतान भी करता है। यह सरकार को वित्तीय मामलों में सलाह देता है और कर्ज की व्यवस्था भी करता है।
4. अन्तर्राष्ट्रीय विनिमय कोषों का संरक्षक- केन्द्रीय बैंक विदेशी मुद्राओं का भंडार रखता है। यह विभिन्न जगहों से विदेशी मुद्रा जमा करता है और जरूरत पड़ने पर सरकार के लिए भुगतान भी करता है। इससे विनिमय दर स्थिर रहती है।
5. केन्द्रीय समाशोधन गृह- यह बैंक व्यापारिक बैंकों के आपसी लेन-देन को खातों में डेबिट-क्रेडिट करके बिना नकदी के निपटाने में मदद करता है।
6. साख का नियमन एवं नियन्त्रण- केन्द्रीय बैंक देश में पैसे की आपूर्ति को नियमित और नियंत्रित करता है। इसके लिए यह मौद्रिक नीति के उपकरणों का उपयोग करता है। यह सुनिश्चित करता है कि देश में पैसे का सही संतुलन बना रहे।
In simple words: केंद्रीय बैंक देश का सबसे बड़ा बैंक है, जो नोट छापता है, सरकार और अन्य बैंकों के लिए काम करता है, विदेशी पैसों का ध्यान रखता है, बैंकों के लेन-देन को निपटाता है और बाजार में पैसों की मात्रा को नियंत्रित करता है।
🎯 Exam Tip: केंद्रीय बैंक की परिभाषा के साथ उसके सभी प्रमुख कार्यों को विस्तार से बताना आवश्यक है, क्योंकि ये अर्थव्यवस्था में उसकी बहुआयामी भूमिका को दर्शाते हैं।
Question 2. भारतीय रिजर्व बैंक के मौद्रिक उपकरणों को विस्तार से समझाइए।
Answer: भारतीय रिजर्व बैंक अर्थव्यवस्था में पैसे की मात्रा और ऋण को नियंत्रित करने के लिए कई मौद्रिक उपकरणों का उपयोग करता है। ये उपकरण नीचे दिए गए हैं:
(i) बैंक दर (Bank Rate) – रिजर्व बैंक बैंक दर को घटाकर या बढ़ाकर ऋण की मात्रा को नियंत्रित करता है। जब देश में ऋण बढ़ाना होता है, तो रिजर्व बैंक बैंक दर कम कर देता है, जिससे ऋण सस्ता हो जाता है और ऋण की मांग बढ़ जाती है। इसके उलट, जब ऋण कम करना होता है, तो बैंक दर बढ़ा दी जाती है, जिससे ऋण महंगा हो जाता है और मांग घट जाती है। यह एक महत्वपूर्ण नीति है जो पैसों की उपलब्धता को सीधे प्रभावित करती है।
(ii) रेपो दर (Repo Rate) – रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर रिजर्व बैंक व्यापारिक बैंकों को बहुत कम समय के लिए ऋण देता है। रिजर्व बैंक इस दर को भी बैंक दर की तरह घटाकर या बढ़ाकर ऋण की मात्रा को नियंत्रित करता है। जब रेपो दर घटती है, तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है, जिससे वे आगे ज्यादा कर्ज दे पाते हैं।
(v) तरल कोषानुपात अथवा वैधानिक तरलता अनुपात (Statutory Liquidity Ratio - SLR) – सभी बैंकों को अपनी कुल जमाओं का एक निश्चित प्रतिशत अपने पास तरल संपत्ति (जैसे सोना, सरकारी प्रतिभूतियां) के रूप में रखना पड़ता है। इससे वे ग्राहकों की अचानक मांग पूरी कर पाते हैं। रिजर्व बैंक इस प्रतिशत को घटाकर ऋण विस्तार को बढ़ा सकता है और इसे बढ़ाकर ऋण विस्तार को कम कर सकता है। यह सुनिश्चित करता है कि बैंकों के पास हमेशा कुछ सुरक्षित संपत्ति रहे।
In simple words: रिजर्व बैंक बैंक दर, रेपो दर और एसएलआर जैसे तरीकों का इस्तेमाल करके बाजार में पैसे के लेन-देन को नियंत्रित करता है। इससे यह तय होता है कि बैंकों को कितना पैसा उधार मिलेगा और वे आगे कितना कर्ज दे पाएंगे।
🎯 Exam Tip: मौद्रिक उपकरणों में बैंक दर, रेपो दर और SLR प्रमुख हैं। प्रत्येक उपकरण का अर्थव्यवस्था में ऋण उपलब्धता पर अलग प्रभाव होता है, इसे स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 3. केन्द्रीय बैंक द्वारा साख नियन्त्रण के लिए अपनाये जाने वाले उपायों को विस्तार से वर्णन कीजिए।
Answer: केन्द्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में साख (ऋण) की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए दो तरह के उपाय अपनाता है:
1. परिमाणात्मक विधियाँ (Quantitative Methods)
2. गुणात्मक विधियाँ (Qualitative Methods)
साख नियन्त्रण की विधियाँ
(यह फ्लो चार्ट पाठ्यपुस्तक में दिए गए आरेख को दर्शाता है, जिसमें साख नियंत्रण की विधियों को दो मुख्य वर्गों - परिमाणात्मक और गुणात्मक - में बांटा गया है। परिमाणात्मक विधियों में बैंक दर नीति, खुले बाजार की क्रियाएँ, नकद कोषानुपात में परिवर्तन और वैधानिक कोषानुपात में परिवर्तन शामिल हैं। गुणात्मक विधियों में चयनात्मक साख नियन्त्रण, साख की राशनिंग, नैतिक दबाव, प्रचार और प्रत्यक्ष कार्यवाही शामिल हैं।)
1. परिमाणात्मक विधियाँ (Quantitative Methods) – इन उपायों से केन्द्रीय बैंक सीधे तौर पर व्यापारिक बैंकों की ऋण देने की शक्ति को प्रभावित करता है। इस श्रेणी की विधियाँ निम्नलिखित हैं:
(a) बैंक दर नीति (Bank Rate Policy) – बैंक दर वह ब्याज दर है जिस पर केन्द्रीय बैंक व्यापारिक बैंकों को स्वीकृत प्रतिभूतियों या बिलों की पुनर्कटौती के बदले ऋण देता है। जब केन्द्रीय बैंक को ऋण का विस्तार करना होता है, तो वह बैंक दर कम कर देता है, और जब ऋण को कम करना होता है, तो बैंक दर बढ़ा देता है। यह केंद्रीय बैंक का सबसे पुराना और असरदार तरीका है।
(c) नकद कोषानुपात में परिवर्तन (Change in CRR) – नकद कोषानुपात को बदलकर भी केन्द्रीय बैंक ऋण निर्माण की मात्रा को प्रभावित करता है। जब उसे ऋण का विस्तार करना होता है तो वह इस अनुपात को घटा देता है। और जब ऋण को कम करना होता है तो इसे बढ़ा देता है।
(d) तरल कोषानुपात में परिवर्तन (Change in SLR) – ऋण की मात्रा बढ़ाने के लिए इस अनुपात में भी कमी कर दी जाती है, और ऋण की मात्रा घटाने के लिए इस अनुपात को बढ़ा दिया जाता है।
2. गुणात्मक विधियाँ (Qualitative Methods) – केन्द्रीय बैंक ऋण नियंत्रण के लिए कुछ गुणात्मक उपाय भी अपनाता है, जो इस प्रकार हैं:
(a) चयनात्मक साख नियन्त्रण (Selective Credit Control) - इसमें केन्द्रीय बैंक कुछ खास क्षेत्रों में ऋण देने की नीति को आसान बनाता है जहाँ ऋण विस्तार की जरूरत होती है। वहीं, जिन क्षेत्रों में ऋण कम करने की जरूरत होती है, वहाँ कठोर नीति अपनाई जाती है।
(b) साख की राशनिंग (Credit Rationing) – इस विधि में केन्द्रीय बैंक विभिन्न क्षेत्रों के लिए ऋण की अधिकतम सीमा तय कर देता है। इससे बैंकों की ऋण देने की शक्ति सीमित हो जाती है। साख की राशनिंग इन तरीकों से की जा सकती है:
1. किसी बैंक के बिलों को फिर से भुनाने की सुविधा को पूरी तरह खत्म कर देना।
2. बैंकों के बिलों की पुनर्कटौती की एक सीमा तय करना।
3. विभिन्न उद्योगों या व्यवसायों को दिए जाने वाले ऋण की सीमा तय करना या कोटा निर्धारित करना।
(c) नैतिक दबाव (Moral Pressure) – केन्द्रीय बैंक ऋण नियंत्रण के लिए नैतिक दबाव की नीति भी अपनाता है। इसके तहत वह सलाह और मार्गदर्शन देकर अपनी नीति को लागू कराता है। बैंक आमतौर पर केन्द्रीय बैंक की सलाह मानते हैं।
(d) प्रचार (Advertisement) – कभी-कभी केन्द्रीय बैंक पत्रिकाओं में लेख और भाषणों के माध्यम से प्रचार करके भी ऋण को नियंत्रित करने का काम करता है।
(e) प्रत्यक्ष कार्यवाही (Direct Action) – यदि कोई बैंक केन्द्रीय बैंक के आदेशों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ सीधी कार्यवाही की जा सकती है। इसमें केन्द्रीय बैंक ऐसे बैंक को ऋण देने से रोक सकता है या व्यापारिक बिलों को फिर से भुनाने से इनकार कर सकता है। वह ऊंची ब्याज दर भी वसूल सकता है। इन उपायों से बैंक को उसके आदेशों का पालन करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
In simple words: केंद्रीय बैंक पैसों को नियंत्रित करने के लिए दो तरीके अपनाता है: एक तो बाजार में कुल पैसे की मात्रा को बदलता है (जैसे बैंक दर और CRR) और दूसरा, कुछ खास क्षेत्रों में पैसों के लेन-देन को नियंत्रित करता है (जैसे नैतिक दबाव और साख राशनिंग)।
🎯 Exam Tip: साख नियंत्रण के परिमाणात्मक और गुणात्मक उपायों को उनके प्रभावों के साथ समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अर्थव्यवस्था में पैसों के प्रवाह को नियंत्रित करने में केंद्रीय बैंक की भूमिका को दर्शाते हैं।
RBSE Class 12 Economics Chapter 19 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
RBSE Class 12 Economics Chapter 19 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. केन्द्रीय बैंक का प्रमुख निर्देशक सिद्धान्त है।
(अ) लाभ कमाना
(ब) सम्पूर्ण देश का हित
(स) साधारण बैंकिंग कार्य करना
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ब) सम्पूर्ण देश का हित
In simple words: केंद्रीय बैंक का मुख्य लक्ष्य पैसा कमाना नहीं, बल्कि पूरे देश का भला करना होता है। वे देश की आर्थिक स्थिरता और विकास के लिए काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: केंद्रीय बैंक का प्राथमिक उद्देश्य हमेशा देश की आर्थिक स्थिरता और कल्याण होता है, जबकि वाणिज्यिक बैंकों का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है।
Question 3. बैंक दर में वृद्धि करने से
(अ) साख का विस्तार होता है।
(ब) साख का संकुचन होता है।
(स) साख निर्माण पूर्ववत् रहता है।
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ब) साख का संकुचन होता है।
In simple words: जब बैंक दर बढ़ती है, तो बैंकों को केंद्रीय बैंक से कर्ज लेना महंगा हो जाता है, जिससे वे आगे कम कर्ज दे पाते हैं और बाजार में पैसों की कमी हो जाती है।
🎯 Exam Tip: बैंक दर में वृद्धि से अर्थव्यवस्था में ऋण महंगा होता है, जिससे निवेश और उपभोक्ता खर्च कम हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप साख का संकुचन होता है।
Question 4. बैंकों को तरल कोष रखने होते हैं।
(अ) केन्द्रीय बैंक के पास
(ब) अपने पास
(स) सरकार के पास
(द) इनमें से किसी के पास नहीं
Answer: (ब) अपने पास
In simple words: बैंकों को ग्राहकों की अचानक पैसों की मांग को पूरा करने के लिए अपने पास कुछ पैसा रखना पड़ता है, जिसे तरल कोष या एसएलआर कहते हैं।
🎯 Exam Tip: बैंकों को वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) के तहत अपनी जमाओं का एक हिस्सा अपने पास तरल संपत्ति के रूप में रखना अनिवार्य है।
Question 5. बैंक दर का अभिप्राय है।
(अ) बैंक ब्याज दर से
(ब) विनिमय दर से
(स) रिजर्व बैंक की दर से
(द) बाजार दर से
Answer: (स) रिजर्व बैंक की दर से
In simple words: बैंक दर वह दर है जिस पर रिजर्व बैंक दूसरे बैंकों को कर्ज देता है। यह केंद्रीय बैंक द्वारा तय की गई एक खास दर है।
🎯 Exam Tip: बैंक दर केंद्रीय बैंक द्वारा अन्य बैंकों को दीर्घकालिक ऋण देने की ब्याज दर है, जो मौद्रिक नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Question 6. चयनात्मक साख नियन्त्रण से आशय है।
(अ) विभिन्न क्षेत्रों में उदार साख नीति अपनाने से
(ब) विभिन्न क्षेत्रों में कठोर साख नीति अपनाने से
(स) आवश्यकतानुसार अलग-अलग क्षेत्र में अलग नीति से
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (स) आवश्यकतानुसार अलग-अलग क्षेत्र में अलग नीति से
In simple words: चयनात्मक साख नियंत्रण में, केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों के लिए अलग-अलग ऋण नियम बनाता है, ताकि जरूरत के हिसाब से पैसे का लेन-देन हो सके।
🎯 Exam Tip: चयनात्मक साख नियंत्रण एक गुणात्मक उपाय है जिसका उपयोग केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था के विशिष्ट क्षेत्रों को बढ़ावा देने या प्रतिबंधित करने के लिए करता है।
Question 7. गुणात्मक साख नियन्त्रण की विधियों में शामिल है।
(अ) साख को राशनिंग
(ब) नैतिक दबाव
(स) प्रचार
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: साख को राशनिंग, नैतिक दबाव और प्रचार - ये सभी तरीके केंद्रीय बैंक द्वारा अर्थव्यवस्था में ऋण के उपयोग की गुणवत्ता को नियंत्रित करने के लिए अपनाए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: गुणात्मक साख नियंत्रण के उपाय ऋण की उपलब्धता के बजाय उसके उपयोग को निर्देशित करते हैं, और इसमें साख की राशनिंग, नैतिक दबाव, प्रचार और प्रत्यक्ष कार्यवाही शामिल हैं।
Question 8. व्यापारिक बैंक नहीं है।
(अ) भारतीय स्टेट बैंक
(ब) पंजाब नेशनल बैंक
(स) भारतीय रिजर्व बैंक
(द) सहकारी बैंक
Answer: (स) भारतीय रिजर्व बैंक
In simple words: भारतीय रिजर्व बैंक एक केंद्रीय बैंक है, न कि एक व्यापारिक बैंक। बाकी सभी विकल्प व्यापारिक बैंक हैं जो जनता से सीधे लेन-देन करते हैं।
🎯 Exam Tip: भारतीय रिजर्व बैंक देश का सर्वोच्च बैंक है, जो अन्य बैंकों को नियंत्रित करता है, जबकि अन्य दिए गए बैंक आम जनता के साथ सीधे वित्तीय व्यवहार करते हैं।
Question 9. मौद्रिक नीति के उपकरण है।
(अ) बैंक दर
(ब) नकद कोषानुपात
(स) वैधानिक कोषानुपात
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: बैंक दर, नकद कोषानुपात और वैधानिक कोषानुपात - ये सभी केंद्रीय बैंक द्वारा बाजार में पैसे की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मुख्य उपकरण हैं।
🎯 Exam Tip: ये सभी उपकरण केंद्रीय बैंक को अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति और ऋण की लागत को प्रभावित करने में मदद करते हैं, जिससे महंगाई और आर्थिक विकास को नियंत्रित किया जा सकता है।
Question 10. निम्न में से कौन-सा साख नियन्त्रण का परिमाणात्मक उपाय नहीं है?
(अ) बैंक दर
(ब) खुले बाजार की क्रियाएँ
(स) नैतिक दबाव
(द) नकद कोषानुपात
Answer: (स) नैतिक दबाव
In simple words: नैतिक दबाव एक गुणात्मक उपाय है, जहाँ केंद्रीय बैंक दूसरे बैंकों को सलाह या अनुरोध करके प्रभावित करता है। बैंक दर, खुले बाजार की क्रियाएं और नकद कोषानुपात परिमाणात्मक उपाय हैं जो सीधे पैसों की मात्रा को बदलते हैं।
🎯 Exam Tip: परिमाणात्मक उपाय पैसे की कुल मात्रा को बदलते हैं, जबकि गुणात्मक उपाय पैसों के उपयोग की दिशा या तरीके को प्रभावित करते हैं।
Question 11. रिजर्व बैंक की स्थापना हुई थी
(अ) सन् 1935 में
(ब) सन् 1947 में
(स) सन् 1951 में
(द) सन् 1971 में
Answer: (अ) सन् 1935 में
In simple words: भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना 1934 के अधिनियम के तहत 1 अप्रैल 1935 को हुई थी। यह भारत का केंद्रीय बैंक है।
🎯 Exam Tip: रिजर्व बैंक की स्थापना की तारीख भारतीय बैंकिंग इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और इसे याद रखना चाहिए।
Question 12. रिजर्व बैंक का राष्ट्रीयकरण हुआ था
(अ) सन् 1935 में
(ब) सन् 1947 में
(स) सन् 1949 में
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (स) सन् 1949 में
In simple words: भारतीय रिजर्व बैंक को भारत सरकार ने 1949 में पूरी तरह से अपने नियंत्रण में ले लिया था, जिसे राष्ट्रीयकरण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: स्थापना (1935) और राष्ट्रीयकरण (1949) की तारीखों में भ्रमित न हों; ये दोनों भारतीय रिजर्व बैंक के इतिहास में महत्वपूर्ण घटनाएँ हैं।
Question 14. रिजर्व बैंक का प्रधान कार्यालय स्थित है।
(अ) नई दिल्ली में
(ब) कोलकाता में
(स) मुम्बई में
(द) चेन्नई में
Answer: (स) मुम्बई में
In simple words: भारतीय रिजर्व बैंक का मुख्य दफ्तर मुम्बई शहर में है। यहीं से पूरे देश की मौद्रिक नीतियां बनाई जाती हैं।
🎯 Exam Tip: भारत में कई वित्तीय संस्थानों के मुख्यालय मुंबई में हैं, जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक भी शामिल है।
Question 15. रेपो रेट एवं रिवर्स रेपो रेट का निर्धारण किया जाता है।
(अ) स्टेट बैंक द्वारा
(ब) रिजर्व बैंक द्वारा
(स) व्यापारिक बैंकों द्वारा
(द) सरकार द्वारा
Answer: (ब) रिजर्व बैंक द्वारा
In simple words: रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट दोनों को भारतीय रिजर्व बैंक तय करता है। ये दरें बाजार में पैसों के लेन-देन को नियंत्रित करने में मदद करती हैं।
🎯 Exam Tip: रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट केंद्रीय बैंक के मुख्य मौद्रिक उपकरण हैं जो तरलता को नियंत्रित करते हैं और ब्याज दरों को प्रभावित करते हैं।
Question 2. रिवर्स रेपो रेट' क्या है?
Answer: रिवर्स रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक व्यापारिक बैंकों से कम समय के लिए पैसा उधार लेता है। यह एक महत्वपूर्ण उपकरण है जिसका उपयोग केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था से अतिरिक्त नकदी को सोखने के लिए करता है।
In simple words: रिवर्स रेपो रेट वह ब्याज है जो रिजर्व बैंक, दूसरे बैंकों से कर्ज लेने पर देता है।
🎯 Exam Tip: रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट दोनों ही केंद्रीय बैंक द्वारा बाजार में तरलता (नकदी) को नियंत्रित करने के लिए उपयोग किए जाते हैं, एक ऋण देने के लिए और दूसरा ऋण लेने के लिए।
Question 3. वैधानिक तरलता अनुपात' क्या होता है?
Answer: वैधानिक तरलता अनुपात (Statutory Liquidity Ratio - SLR) एक नियम है जिसके तहत व्यापारिक बैंकों को अपनी कुल जमा राशि का एक निश्चित प्रतिशत अपने पास तरल संपत्ति, जैसे नकदी, सोना, या सरकारी प्रतिभूतियों के रूप में रखना अनिवार्य होता है। यह सुनिश्चित करता है कि बैंक ग्राहकों की मांग को पूरा करने के लिए हमेशा पर्याप्त नकदी बनाए रखें।
In simple words: यह वह तय किया गया प्रतिशत है जो बैंकों को अपनी जमा राशि का कुछ हिस्सा नकदी, सोने या सरकारी कागजात के रूप में अपने पास रखना पड़ता है।
🎯 Exam Tip: SLR बैंकों की ऋण देने की क्षमता को प्रभावित करता है; उच्च SLR का मतलब कम ऋण देने की क्षमता।
Question 4. नकद कोषानुपात क्या है?
Answer: नकद कोषानुपात (Cash Reserve Ratio - CRR) वह प्रतिशत है जो सभी सदस्य बैंकों को अपनी कुल जमा राशि का एक तय हिस्सा भारतीय रिजर्व बैंक के पास नकदी के रूप में जमा करना अनिवार्य होता है। यह अनुपात केंद्रीय बैंक द्वारा निर्धारित किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बैंकों की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था में पैसे की आपूर्ति को नियंत्रित करना है।
In simple words: यह एक नियम है जिसके तहत सभी बैंकों को अपनी जमा राशि का एक छोटा हिस्सा रिजर्व बैंक के पास नकदी के रूप में रखना पड़ता है।
🎯 Exam Tip: CRR बैंकों की ऋण देने की क्षमता को सीधे प्रभावित करता है; यह मौद्रिक नीति का एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
Question 5. नकद कोषानुपात में वृद्धि कब की जाती है?
Answer: नकद कोषानुपात (CRR) में वृद्धि तब की जाती है जब केन्द्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में ऋण की मात्रा को कम करना (साख का संकुचन करना) चाहता है। CRR बढ़ने से बैंकों के पास ऋण देने के लिए कम पैसा बचता है, जिससे बाजार में पैसे की आपूर्ति घट जाती है और महंगाई नियंत्रित होती है।
In simple words: जब केंद्रीय बैंक बाजार में पैसे को कम करना चाहता है, तो वह बैंकों को ज्यादा पैसा अपने पास रिजर्व बैंक में रखने के लिए कहता है, जिससे उनके पास उधार देने के लिए कम पैसा बचे।
🎯 Exam Tip: CRR में वृद्धि से बैंकों की ऋण देने की क्षमता घट जाती है, जिससे तरलता कम होती है और महंगाई पर नियंत्रण पाने में मदद मिलती है।
Question 6. वैधानिक कोषानुपात बढ़ने से साख पर क्या असर होता है?
Answer: वैधानिक कोषानुपात (SLR) बढ़ने से बैंकों को अपनी जमा राशि का एक बड़ा हिस्सा तरल संपत्ति के रूप में अपने पास रखना पड़ता है। इससे बैंकों के पास ऋण देने के लिए कम पैसा बचता है, जिसका सीधा असर साख निर्माण पर पड़ता है। नतीजतन, साख का निर्माण कम होता है, क्योंकि बैंकों की ऋण देने की क्षमता घट जाती है।
In simple words: अगर बैंकों को अपने पास ज्यादा तरल पैसा रखना पड़े, तो वे लोगों को कम कर्ज दे पाएंगे, जिससे बाजार में कुल पैसों की मात्रा घट जाएगी।
🎯 Exam Tip: SLR में वृद्धि से बैंक की ऋण देने की क्षमता घटती है, जिससे अर्थव्यवस्था में पैसे की आपूर्ति कम होती है और निवेश प्रभावित होता है।
Question 7. भारत में रिजर्व बैंक की स्थापना किस वर्ष में हुई थी?
Answer: भारत में रिजर्व बैंक की स्थापना सन् 1935 में हुई थी। यह भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत स्थापित किया गया था।
In simple words: रिजर्व बैंक भारत में 1935 में शुरू हुआ था।
🎯 Exam Tip: भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना की तारीख भारतीय मौद्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण बिंदु है।
Question 9. भारतीय रिजर्व बैंक के केन्द्रीय निदेशक मण्डल में कितने सदस्य होते हैं?
Answer: भारतीय रिजर्व बैंक के केन्द्रीय निदेशक मण्डल में कुल 20 सदस्य होते हैं। इस मंडल में एक गवर्नर, चार उप-गवर्नर, सरकार द्वारा मनोनीत दस निदेशक, चार स्थानीय मंडलों से चुने गए निदेशक और एक सरकारी अधिकारी शामिल होते हैं।
In simple words: भारतीय रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल में कुल 20 लोग होते हैं जो बैंक के काम को देखते हैं।
🎯 Exam Tip: निदेशक मंडल की संरचना भारतीय रिजर्व बैंक के शासन और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व को दर्शाती है।
Question 10. भारतीय रिजर्व बैंक के निदेशक मण्डल में कितने उप-गर्वनर होते हैं?
Answer: भारतीय रिजर्व बैंक के निदेशक मण्डल में 4 उप-गवर्नर होते हैं। ये उप-गवर्नर गवर्नर के साथ मिलकर बैंक के विभिन्न कार्यों और नीतियों को लागू करने में मदद करते हैं।
In simple words: रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल में 4 उप-गवर्नर होते हैं।
🎯 Exam Tip: उप-गवर्नर केंद्रीय बैंक के दैनिक कार्यों और विशेष विभागों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Question 11. मौद्रिक नीति से क्या आशय है?
Answer: मौद्रिक नीति का मतलब उन नियमों और तरीकों से है जो केंद्रीय बैंक देश में मुद्रा (पैसों) की मात्रा और साख (ऋण) को नियंत्रित करने के लिए अपनाता है। इसका मुख्य लक्ष्य अर्थव्यवस्था में स्थिरता, विकास और कीमतों को नियंत्रित रखना है।
In simple words: मौद्रिक नीति उन नियमों का समूह है जिनसे केंद्रीय बैंक देश में पैसों की मात्रा और ऋण को संभालता है।
🎯 Exam Tip: मौद्रिक नीति का उद्देश्य अक्सर महंगाई को नियंत्रित करना, आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और विनिमय दर को स्थिर रखना होता है।
Question 12. केन्द्रीय बैंक के दो प्रमुख कार्य बताइए।
Answer: केन्द्रीय बैंक के दो प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
1. मुद्रा निर्गमन: केन्द्रीय बैंक को देश में नोट जारी करने का एकमात्र अधिकार होता है। यह सुनिश्चित करता है कि देश में मुद्रा की आपूर्ति सही मात्रा में हो।
2. बैंकों के बैंक के रूप में कार्य करना: केन्द्रीय बैंक अन्य व्यापारिक बैंकों के लिए एक संरक्षक और अंतिम ऋणदाता के रूप में कार्य करता है। यह बैंकों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है और उनके संचालन को नियंत्रित करता है।
In simple words: केंद्रीय बैंक के दो मुख्य काम हैं: नोट छापना और दूसरे बैंकों के लिए बैंक का काम करना।
🎯 Exam Tip: ये दोनों कार्य केंद्रीय बैंक की अर्थव्यवस्था में सर्वोच्च स्थिति और नियंत्रण को दर्शाते हैं।
Question 13. केन्द्रीय बैंक के दो प्रमुख उद्देश्य बताइए।
Answer: केन्द्रीय बैंक के दो प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं:
1. बैंकिंग प्रणाली में लोगों का विश्वास बनाये रखना: केन्द्रीय बैंक का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश की बैंकिंग प्रणाली मजबूत और भरोसेमंद रहे, ताकि लोग उस पर भरोसा कर सकें।
2. जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करना: केन्द्रीय बैंक यह सुनिश्चित करता है कि बैंकों में पैसा जमा करने वाले लोगों के हितों की रक्षा हो। यह बैंकों को उचित नियमों का पालन करने के लिए मजबूर करता है ताकि जमाकर्ताओं को कोई नुकसान न हो।
In simple words: केंद्रीय बैंक का लक्ष्य है कि लोग बैंकों पर भरोसा करें और जमाकर्ताओं का पैसा सुरक्षित रहे।
🎯 Exam Tip: केंद्रीय बैंक के उद्देश्य वित्तीय स्थिरता और उपभोक्ता संरक्षण के आसपास केंद्रित होते हैं, जो उसकी भूमिका को लाभ कमाने वाले वाणिज्यिक बैंकों से अलग करते हैं।
Question 14. केन्द्रीय बैंक एवं व्यापारिक बैंकों में दो अन्तर बताइए।
Answer: केन्द्रीय बैंक और व्यापारिक बैंकों में दो मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
1. उद्देश्य: केन्द्रीय बैंक का मुख्य उद्देश्य देशहित में काम करना और मौद्रिक स्थिरता बनाए रखना है, जबकि व्यापारिक बैंकों का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है।
2. कार्यक्षेत्र: केन्द्रीय बैंक नोट जारी करता है और बैंकों पर नियंत्रण रखता है, जबकि व्यापारिक बैंक जनता से सीधे जमा स्वीकार करते हैं और ऋण प्रदान करते हैं।
In simple words: केंद्रीय बैंक का मकसद देश का भला करना है, जबकि व्यापारिक बैंक पैसा कमाना चाहते हैं। केंद्रीय बैंक नोट छापता है, लेकिन व्यापारिक बैंक जनता से लेन-देन करते हैं।
🎯 Exam Tip: इन दोनों प्रकार के बैंकों के मूल उद्देश्य और कार्यक्षेत्र में अंतर को समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनकी भूमिकाओं को स्पष्ट करता है।
Question 16. खुले बाजार की क्रियाओं से क्या आशय है?
Answer: खुले बाजार की क्रियाओं का मतलब है केन्द्रीय बैंक द्वारा बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों (जैसे बॉन्ड) को खरीदना और बेचना। जब केंद्रीय बैंक इन प्रतिभूतियों को बेचता है, तो बाजार से पैसा कम होता है और जब खरीदता है, तो बाजार में पैसा बढ़ता है। यह पैसों की आपूर्ति को नियंत्रित करने का एक तरीका है।
In simple words: खुले बाजार की क्रियाएं मतलब केंद्रीय बैंक सरकारी बॉन्ड खरीदता और बेचता है ताकि बाजार में पैसों की मात्रा को नियंत्रित कर सके।
🎯 Exam Tip: खुले बाजार की क्रियाएं मौद्रिक नीति का एक शक्तिशाली उपकरण है जो सीधे बाजार में तरलता (नकदी) को प्रभावित करता है।
Question 17. साख की राशनिंग से क्या आशय है?
Answer: साख की राशनिंग का मतलब है केन्द्रीय बैंक द्वारा अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए ऋण की अधिकतम सीमा तय कर देना। यह नीति सुनिश्चित करती है कि ऋण का प्रवाह उन क्षेत्रों में निर्देशित हो जहाँ इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है, और उन क्षेत्रों में कम हो जहाँ अति-ऋण की संभावना है।
In simple words: साख की राशनिंग का मतलब है कि केंद्रीय बैंक अलग-अलग उद्योगों के लिए यह तय कर देता है कि उन्हें कितना अधिकतम कर्ज मिल सकता है।
🎯 Exam Tip: साख राशनिंग एक गुणात्मक साख नियंत्रण उपाय है, जो अर्थव्यवस्था में ऋण के वितरण को लक्षित करता है।
Question 18. रिजर्व बैंक द्वारा नोट जारी करने के लिए कौन-सी प्रणाली अपनायी जाती है?
Answer: रिजर्व बैंक द्वारा नोट जारी करने के लिए 'न्यूनतम कोष प्रणाली' अपनायी जाती है। इस प्रणाली के तहत, रिजर्व बैंक को नोट छापने के लिए हमेशा एक निश्चित मात्रा में सोना और विदेशी मुद्रा कोष अपने पास रखना पड़ता है। यह भारत की मुद्रा प्रणाली को स्थिरता प्रदान करता है।
In simple words: रिजर्व बैंक नोट छापने के लिए 'न्यूनतम कोष प्रणाली' का इस्तेमाल करता है, जिसमें एक तय मात्रा में सोना और विदेशी मुद्रा रखनी पड़ती है।
🎯 Exam Tip: न्यूनतम कोष प्रणाली भारत में मुद्रा के मूल्य को स्थिरता प्रदान करने और जनता का विश्वास बनाए रखने में मदद करती है।
Question 19. भारतीय रिजर्व बैंक के स्थानीय मण्डलों की संख्या बताइए।
Answer: भारतीय रिजर्व बैंक के 4 स्थानीय मण्डल हैं जो मुम्बई, कोलकत्ता, चेन्नई एवं नई दिल्ली में स्थित हैं। ये मंडल क्षेत्रीय स्तर पर बैंक के कार्यों को देखने और स्थानीय आर्थिक मुद्दों पर सलाह देने का काम करते हैं।
In simple words: रिजर्व बैंक के चार स्थानीय दफ्तर मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई और नई दिल्ली में हैं।
🎯 Exam Tip: स्थानीय मंडल केंद्रीय बैंक को देश के विभिन्न क्षेत्रों की विशेष आर्थिक जरूरतों और चुनौतियों को समझने में मदद करते हैं।
Question 20. भारत में मौद्रिक नीति का क्रियान्वयन कौन करता है?
Answer: भारत में मौद्रिक नीति का क्रियान्वयन भारतीय रिजर्व बैंक करता है। रिजर्व बैंक, अपनी मौद्रिक नीति समिति के माध्यम से, देश की आर्थिक स्थिरता और मुद्रास्फीति नियंत्रण के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए विभिन्न उपकरण और रणनीतियाँ अपनाता है।
In simple words: भारत में मौद्रिक नीति को लागू करने का काम भारतीय रिजर्व बैंक करता है।
🎯 Exam Tip: मौद्रिक नीति का सफल क्रियान्वयन अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 21. भारतीय रिजर्व बैंक के निदेशक मण्डल में कितने गैर-सरकारी निदेशक होते हैं?
Answer: भारतीय रिजर्व बैंक के निदेशक मण्डल में 12 गैर-सरकारी निदेशक होते हैं। इन निदेशकों को भारत सरकार द्वारा मनोनीत किया जाता है और वे विभिन्न क्षेत्रों से विशेषज्ञता लाते हैं।
In simple words: रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल में सरकार के बाहर के 12 लोग भी होते हैं, जो बैंक के काम में अपनी राय देते हैं।
🎯 Exam Tip: गैर-सरकारी निदेशकों की उपस्थिति यह सुनिश्चित करती है कि निदेशक मंडल में विविध दृष्टिकोण और विशेषज्ञता शामिल हो।
Question 23. रिजर्व बैंक द्वारा नोट जारी करने के लिए न्यूनतम कोष प्रणाली के अन्तर्गत कितना कोष रखा जाता है?
Answer: रिजर्व बैंक न्यूनतम कोष प्रणाली के तहत Rs 200 करोड़ का कोष रखता है। इस कोष में Rs 115 करोड़ का सोना और Rs 85 करोड़ की विदेशी प्रतिभूतियाँ शामिल होती हैं। यह प्रणाली मुद्रा जारी करने के लिए एक महत्वपूर्ण तरीका है।
In simple words: रिजर्व बैंक नोट छापने के लिए कुल Rs 200 करोड़ का फंड रखता है, जिसमें सोना और विदेशी पैसे होते हैं।
🎯 Exam Tip: न्यूनतम कोष प्रणाली की राशि और उसमें सोने व विदेशी मुद्रा के अनुपात को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अक्सर पूछा जाता है।
Question 24. अमेरिका के केन्द्रीय बैंक का क्या नाम है?
Answer: अमेरिका के केन्द्रीय बैंक का नाम फेडरल रिजर्व बैंक है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका की वित्तीय प्रणाली को नियंत्रित करता है। यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली केंद्रीय बैंकों में से एक है।
In simple words: अमेरिका का सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व बैंक कहलाता है।
🎯 Exam Tip: दुनिया के प्रमुख देशों के केंद्रीय बैंकों के नाम जानना सामान्य ज्ञान के लिए उपयोगी है।
Question 25. भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना किस अधिनियम के अन्तर्गत की गई थी?
Answer: भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 के प्रावधानों के अनुसार की गई थी। इस अधिनियम ने बैंक को भारत में मौद्रिक नीति बनाने का अधिकार दिया।
In simple words: रिजर्व बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 के नियमों से बनाया गया था।
🎯 Exam Tip: अधिनियम का नाम और वर्ष सटीक रूप से याद रखें, यह इतिहास-आधारित प्रश्नों में महत्वपूर्ण है।
Question 26. "संसार में तीन महान आविष्कार हुए है-आग, चक्र एवं केन्द्रीय बैंकिंग।" यह किसका कथन है?
Answer: यह कथन बिल रोजर्स ने कहा है। उनका यह विचार केन्द्रीय बैंकिंग के महत्व को दर्शाता है। यह कथन बताता है कि केन्द्रीय बैंक का आविष्कार कितना क्रांतिकारी था।
In simple words: यह बात बिल रोजर्स ने कही थी।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण अर्थशास्त्रियों या प्रसिद्ध व्यक्तियों के कथनों को सीधे उद्धृत करने के बजाय, उनके नाम और कथन के मुख्य बिंदु को याद रखें।
Question 27. भारतीय रिजर्व बैंक के वर्तमान समय में गवर्नर कौन हैं?
Answer: भारतीय रिजर्व बैंक के वर्तमान गवर्नर उर्जित पटेल हैं। (यह जानकारी स्रोत के समय के अनुसार है।) केंद्रीय बैंक के गवर्नर देश की मौद्रिक नीति के प्रमुख निर्माता होते हैं।
In simple words: भारतीय रिजर्व बैंक के अभी के गवर्नर उर्जित पटेल हैं।
🎯 Exam Tip: करेंट अफेयर्स से जुड़े प्रश्नों के लिए, परीक्षा के समय के अनुसार गवर्नर का नाम अपडेट करना सुनिश्चित करें।
Question 28. क्या रिजर्व बैंक का जनता से सीधा सम्बन्ध होता है?
Answer: नहीं, रिजर्व बैंक का जनता से सीधा सम्बन्ध नहीं होता है। रिजर्व बैंक मुख्य रूप से वाणिज्यिक बैंकों और सरकार के साथ काम करता है, सीधे व्यक्तियों को सेवाएँ नहीं देता।
In simple words: नहीं, रिजर्व बैंक सीधे जनता के साथ काम नहीं करता है।
🎯 Exam Tip: केन्द्रीय बैंक की भूमिका और उसके ग्राहकों को स्पष्ट रूप से समझें ताकि वाणिज्यिक बैंकों के साथ भ्रम से बचा जा सके।
Question 29. भारत में मुद्रा का निर्गमन कौन करता है?
Answer: भारत में न्यूनतम कोष प्रणाली को 6 अक्टूबर, 1956 को अपनाया गया। (यह उत्तर प्रश्न के लिए असंगत है, सही उत्तर भारतीय रिजर्व बैंक होगा। मुद्रा का निर्गमन रिजर्व बैंक द्वारा किया जाता है।) न्यूनतम कोष प्रणाली एक तरीका है जिससे बैंक नोट जारी करते हैं।
In simple words: भारत में मुद्रा छापने का काम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया करता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, मुद्रा जारी करने का अधिकार हमेशा केन्द्रीय बैंक के पास होता है, न्यूनतम कोष प्रणाली केवल वह विधि है जिसका उपयोग किया जाता है।
RBSE Class 12 Economics Chapter 19 लघु उत्तरात्मक प्रश्न (SA-I)
Question 1. केन्द्रीय बैंक की स्थापना का ऐतिहासिक परिचय संक्षेप में दीजिए।
Answer: केन्द्रीय बैंक की शुरुआत सत्रहवीं शताब्दी में हुई थी। दुनिया का पहला केन्द्रीय बैंक सन् 1656 में स्वीडन में बना था। इसके बाद, सन् 1664 में बैंक ऑफ इंग्लैण्ड की स्थापना हुई, जिसे केन्द्रीय बैंकों की 'जननी' कहा जाता है, क्योंकि कई दूसरे बैंकों ने इसी के तरीके अपनाए। सन् 1800 में फ्रांस में, 1856 में नीदरलैण्ड में, 1869 में रूस में और 1875 में जर्मनी में केन्द्रीय बैंक बने। भारत में रिजर्व बैंक के रूप में केन्द्रीय बैंक की स्थापना सन् 1935 में हुई। केन्द्रीय बैंक वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
In simple words: दुनिया का पहला सेंट्रल बैंक 1656 में स्वीडन में बना। बैंक ऑफ इंग्लैण्ड को दूसरे सेंट्रल बैंकों का रास्ता दिखाने वाला माना जाता है। भारत का रिजर्व बैंक 1935 में स्थापित हुआ।
🎯 Exam Tip: प्रमुख देशों में केन्द्रीय बैंकों की स्थापना के महत्वपूर्ण वर्षों को याद रखें, यह इतिहास-आधारित प्रश्नों में सहायक होगा।
Question 2. केन्द्रीय बैंक की परिभाषा दीजिए।
Answer: केन्द्रीय बैंक किसी भी देश का सबसे बड़ा बैंक होता है, जो पैसे और कर्ज को नियंत्रित करता है। इसकी मुख्य परिभाषाएँ इस प्रकार हैं:
1. प्रो. हाटे (Hawtrey) के अनुसार, "केन्द्रीय बैंक बैंकों का बैंक है, क्योंकि यह दूसरे बैंकों के लिए अंतिम ऋणदाता का काम करता है।"
2. प्रो. शॉ (Shaw) के अनुसार, "केन्द्रीय बैंक देश में कर्ज वाले पैसे को नियंत्रित करने वाला बैंक है।"
3. ए.सी.एल. डे (ACL De) के अनुसार, "केन्द्रीय बैंक वह बैंक है जो पैसों और बैंकिंग सिस्टम को नियंत्रित और स्थिर रखने में मदद करता है।" केन्द्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: सेंट्रल बैंक देश का सबसे बड़ा बैंक होता है। यह पैसे और कर्ज को संभालता है। कई बड़े अर्थशास्त्रियों ने इसकी अलग-अलग परिभाषाएँ दी हैं, लेकिन सभी का मतलब है कि यह बैंकों को नियंत्रित करता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न अर्थशास्त्रियों द्वारा दी गई परिभाषाओं को याद रखें और उन्हें सही व्यक्ति के नाम के साथ उद्धृत करें।
Question 3. केन्द्रीय बैंक की स्थापना की आवश्यकता क्यों होती है?
Answer: केन्द्रीय बैंक की स्थापना की जरूरत इन मुख्य कारणों से होती है:
1. नोट छापने के लिए: यह देश में मुद्रा जारी करने का एकमात्र अधिकार रखता है।
2. साख (कर्ज) पर नियंत्रण के लिए: यह अर्थव्यवस्था में कर्ज की मात्रा को नियंत्रित करता है।
3. सरकार के बैंकर के रूप में काम करने के लिए: यह सरकार के लिए वित्तीय लेनदेन का प्रबंधन करता है। एक केन्द्रीय बैंक देश की आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होता है।
In simple words: सेंट्रल बैंक की जरूरत इसलिए होती है ताकि वह नोट छाप सके, कर्ज को कंट्रोल कर सके और सरकार के बैंक के रूप में काम कर सके।
🎯 Exam Tip: केन्द्रीय बैंक के गठन के पीछे के मुख्य कारणों को बिंदुवार याद रखें, यह आपके उत्तर को अधिक संरचित बनाएगा।
Question 5. केन्द्रीय बैंक बैंकों का बैंक किस प्रकार होता है?
Answer: केन्द्रीय बैंक को 'बैंकों का बैंक' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह दूसरे बैंकों के लिए अंतिम ऋणदाता के रूप में काम करता है। सभी वाणिज्यिक बैंकों को केन्द्रीय बैंक के निर्देशों का पालन करना होता है। सभी बैंकों के खाते केन्द्रीय बैंक में होते हैं, और उन्हें अपनी जमा राशि का एक निश्चित प्रतिशत कोष के रूप में केन्द्रीय बैंक के पास रखना होता है। इस तरह, केन्द्रीय बैंक पूरे बैंकिंग प्रणाली की देखरेख और नियंत्रण करता है।
In simple words: सेंट्रल बैंक को बैंकों का बैंक कहते हैं क्योंकि वह दूसरे बैंकों को उधार देता है, उनके पैसों का हिसाब रखता है, और उन्हें बताता है कि क्या करना है।
🎯 Exam Tip: बैंकों का बैंक होने के तीन मुख्य पहलुओं (अंतिम ऋणदाता, खातों का रखरखाव, निर्देशों का पालन) को स्पष्ट रूप से समझाएँ।
Question 6. केन्द्रीय बैंक सरकार के बैंकर के रूप में क्या कार्य करता है?
Answer: केन्द्रीय बैंक सरकार के बैंकर के रूप में काम करता है, मतलब यह सरकार की ओर से भुगतान करता है और सरकार के लिए पैसे प्राप्त करता है। यह जरूरत पड़ने पर सरकार को कर्ज भी देता है और वित्तीय मामलों में सलाह भी देता है। इसके अलावा, यह सार्वजनिक ऋणों का प्रबंधन करता है और सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदने-बेचने का काम भी करता है। यह सरकार के वित्तीय लेनदेन को सरल बनाता है।
In simple words: सेंट्रल बैंक सरकार के लिए पैसे जमा करता है, खर्च करता है, कर्ज देता है, सलाह देता है, और सरकारी कागजात बेचता-खरीदता है।
🎯 Exam Tip: केन्द्रीय बैंक के इस कार्य के विभिन्न पहलुओं (भुगतान, प्राप्ति, ऋण, सलाह, प्रतिभूति) को याद रखें और उनका उल्लेख करें।
Question 7. केन्द्रीय बैंक के साख नियन्त्रण कार्य को संक्षेप में बताइए।
Answer: केन्द्रीय बैंक का एक मुख्य कार्य देश में साख (कर्ज) की मात्रा को नियंत्रित करना है। यह वाणिज्यिक बैंकों की साख बनाने की शक्ति को नियंत्रित करता है ताकि देश में व्यापार चक्रों (जैसे मंदी या तेजी) को रोका जा सके। व्यापार चक्र अर्थव्यवस्था पर बुरा असर डाल सकते हैं, इसलिए उनका नियंत्रण बहुत जरूरी है। साख नियंत्रण से अर्थव्यवस्था स्थिर रहती है।
In simple words: सेंट्रल बैंक का काम है बाजार में कितना कर्ज है, इसे कंट्रोल करना। ऐसा करके यह बाजार में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव को रोकता है।
🎯 Exam Tip: साख नियंत्रण के उद्देश्य (व्यापार चक्रों को रोकना, स्थिरता बनाए रखना) को स्पष्ट रूप से बताएँ।
Question 8. 'न्यूनतम कोष प्रणाली' क्या है?
Answer: न्यूनतम कोष प्रणाली पत्र मुद्रा जारी करने का एक तरीका है। इसमें देश का केन्द्रीय बैंक नोट छापते समय पूरी तरह से धातु कोष नहीं रखता, बल्कि एक निश्चित मात्रा में कोष रखता है, और उसके आधार पर जितनी चाहे उतनी मुद्रा जारी कर सकता है। भारत में रिजर्व बैंक इसी प्रणाली का उपयोग करता है, जिसमें वह Rs 200 करोड़ का कोष रखता है। इस कोष में Rs 115 करोड़ का सोना और Rs 85 करोड़ की विदेशी प्रतिभूतियाँ शामिल होती हैं। यह प्रणाली मुद्रा को अधिक लचीलापन देती है।
In simple words: यह नोट छापने का एक तरीका है। इसमें सेंट्रल बैंक थोड़ी मात्रा में सोना और विदेशी पैसा रखकर बहुत सारे नोट छाप सकता है। भारत में रिजर्व बैंक इसी तरीके का इस्तेमाल करता है।
🎯 Exam Tip: न्यूनतम कोष प्रणाली की परिभाषा, भारत में लागू राशि (Rs 200 करोड़), और उसके घटकों (सोना, विदेशी प्रतिभूतियाँ) को विस्तार से समझाएँ।
Question 10. केन्द्रीय बैंक किस प्रकार बैंक दर द्वारा साख निर्माण को प्रभावित करता है?
Answer: केन्द्रीय बैंक बैंक दर में बदलाव करके अपने अधीनस्थ बैंकों की ऋण देने की क्षमता को प्रभावित करता है। जब देश में साख की मात्रा कम करनी होती है, तो केन्द्रीय बैंक बैंक दर को बढ़ा देता है। इससे वाणिज्यिक बैंकों के लिए केन्द्रीय बैंक से मिलने वाला ऋण महँगा हो जाता है, और उनकी साख बनाने की क्षमता घट जाती है। इसके उलट, जब साख निर्माण को बढ़ाना होता है, तो केन्द्रीय बैंक बैंक दर को घटा देता है। इससे वाणिज्यिक बैंकों को कम ब्याज पर ऋण मिलने लगते हैं और उनकी साख सृजन क्षमता बढ़ जाती है। बैंक दर एक महत्वपूर्ण मौद्रिक नीति उपकरण है।
In simple words: सेंट्रल बैंक बैंक दर को बढ़ाता या घटाता है। जब बैंक दर बढ़ती है, तो कर्ज महँगा हो जाता है और बैंकों की कर्ज देने की ताकत कम हो जाती है। जब बैंक दर घटती है, तो कर्ज सस्ता हो जाता है और बैंकों की कर्ज देने की ताकत बढ़ जाती है।
🎯 Exam Tip: बैंक दर और साख निर्माण के बीच के विपरीत संबंध को स्पष्ट रूप से समझाएँ: बैंक दर बढ़ने पर साख कम होती है, और बैंक दर घटने पर साख बढ़ती है।
Question 11. खुले बाजार की क्रियाएँ क्या होती हैं?
Answer: खुले बाजार की क्रियाएँ वह प्रक्रिया है जहाँ केन्द्रीय बैंक सरकारी प्रतिभूतियों को बाजार में खरीदता और बेचता है। इन क्रियाओं के माध्यम से केन्द्रीय बैंक साख को नियंत्रित करता है। जब साख का विस्तार करना होता है, तो केन्द्रीय बैंक बैंकों से सरकारी प्रतिभूतियाँ खरीदने लगता है। इससे बैंकों के पास नकद कोष बढ़ जाते हैं और वे अधिक ऋण देने में सक्षम हो जाते हैं। इसी तरह, जब साख की मात्रा कम करनी होती है, तो केन्द्रीय बैंक बैंकों को सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचने लगता है। इससे उनके पास नकद कोष कम हो जाते हैं और उनकी ऋण देने की क्षमता घट जाती है। यह एक शक्तिशाली मौद्रिक उपकरण है।
In simple words: सेंट्रल बैंक बाजार में सरकारी कागजात खरीदता या बेचता है। जब वह खरीदता है, तो बैंकों के पास ज्यादा पैसा आता है और वे ज्यादा कर्ज दे पाते हैं। जब वह बेचता है, तो बैंकों के पास पैसा कम होता है और वे कम कर्ज दे पाते हैं।
🎯 Exam Tip: खुले बाजार की क्रियाओं को समझाते समय, यह स्पष्ट करें कि सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदने और बेचने का सीधा प्रभाव बैंकों के पास नकदी की उपलब्धता पर कैसे पड़ता है।
Question 12. नकद कोषानुपात (CRR) तथा वैधानिक तरल कोषानुपात (SLR) में क्या अन्तर है?
Answer: नकद कोषानुपात (CRR) वह प्रतिशत होता है जिसके आधार पर बैंकों को अपनी जमा राशि का एक हिस्सा अनिवार्य रूप से केन्द्रीय बैंक के पास नकद के रूप में रखना होता है। वहीं, वैधानिक तरल कोषानुपात (SLR) वह प्रतिशत है जिसके आधार पर बैंकों को अपनी कुल संपत्ति का एक हिस्सा अपने पास तरल रूप में रखना होता है, ताकि वे ग्राहकों की माँग जमाओं का आसानी से भुगतान कर सकें। CRR का उद्देश्य मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करना है, जबकि SLR का उद्देश्य बैंकों की तरलता बनाए रखना है।
In simple words: CRR वह पैसा है जो बैंक सेंट्रल बैंक के पास नकद रखते हैं। SLR वह पैसा है जो बैंक अपने पास तरल रूप में रखते हैं ताकि वे लोगों को भुगतान कर सकें।
🎯 Exam Tip: CRR और SLR के बीच के मुख्य अंतर को स्पष्ट रूप से समझाएँ: CRR केन्द्रीय बैंक के पास होता है, जबकि SLR बैंक अपने पास रखता है; दोनों के उद्देश्य भी अलग-अलग हैं।
Question 13. नकद कोषानुपात एवं वैधानिक तरलतानुपात द्वारा साख पर किस प्रकार नियन्त्रण किया जाता है?
Answer: जब केन्द्रीय बैंक को देश में साख (कर्ज) का विस्तार करना होता है, तो वह नकद कोषानुपात (CRR) और वैधानिक तरल कोषानुपात (SLR) दोनों में कमी कर देता है। इससे बैंकों के पास ऋण देने के लिए अधिक पैसा उपलब्ध हो जाता है। इसके विपरीत, जब केन्द्रीय बैंक को साख निर्माण में कमी करनी होती है, तो वह इन अनुपातों को बढ़ा देता है। ऐसा करने से बैंकों की ऋण देने की क्षमता कम हो जाती है और वे कम साख का निर्माण कर पाते हैं। ये दोनों उपकरण मौद्रिक नीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
In simple words: जब सेंट्रल बैंक कर्ज बढ़ाना चाहता है, तो वह CRR और SLR को कम करता है। जब कर्ज कम करना चाहता है, तो वह इन्हें बढ़ा देता है।
🎯 Exam Tip: यह समझें कि CRR और SLR में कमी से साख का विस्तार होता है, और वृद्धि से साख का संकुचन होता है।
Question 15. केन्द्रीय बैंक प्रचार द्वारा कैसे साख को नियन्त्रित करता है?
Answer: केन्द्रीय बैंक अपनी प्रकाशित पत्रिकाओं में लेख लिखकर और भाषणों के माध्यम से वाणिज्यिक बैंकों की गतिविधियों को प्रभावित करता है। यह देश के सामने आने वाली समस्याओं को हल करने के लिए सुझाव भी देता है। उसके द्वारा सुझाए गए उपायों का उपयोग करके वाणिज्यिक बैंक साख (कर्ज) को नियंत्रित करते हैं। प्रचार के माध्यम से केन्द्रीय बैंक वित्तीय नीतियों के बारे में जागरूकता फैलाता है।
In simple words: सेंट्रल बैंक पत्रिकाओं में लिखकर और भाषण देकर बैंकों को सलाह देता है और उन्हें बताता है कि कर्ज कैसे कंट्रोल करना है।
🎯 Exam Tip: प्रचार के माध्यम से साख नियंत्रण के तरीके (लेख, भाषण, सुझाव) और उसके प्रभाव को स्पष्ट रूप से बताएँ।
Question 16. साख नियन्त्रण की साख राशनिंग विधि क्या है?
Answer: साख राशनिंग विधि में, देश का केन्द्रीय बैंक विभिन्न क्षेत्रों के लिए साख की अधिकतम सीमा तय करता है। इसका मतलब है कि वह किसी खास क्षेत्र को ऋण देने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा सकता है या बिलों की पुनर्कटौती पर रोक लगा सकता है। इससे बैंकों की ऋण देने की क्षमता कम हो जाती है। केन्द्रीय बैंक विभिन्न कार्यों के लिए साख का कोटा भी निश्चित कर सकता है। यह एक चयनात्मक उपाय है।
In simple words: साख राशनिंग में सेंट्रल बैंक तय करता है कि किस सेक्टर को कितना कर्ज मिलेगा। यह कर्ज की एक सीमा तय कर देता है।
🎯 Exam Tip: साख राशनिंग के माध्यम से साख नियंत्रण के मुख्य बिंदुओं (अधिकतम सीमा, प्रतिबंध, कोटा निर्धारण) को विस्तार से समझाएँ।
Question 17. केन्द्रीय बैंक द्वारा साख नियन्त्रण के लिए प्रयुक्त उपाय 'सीधी कार्यवाही' से क्या आशय है?
Answer: 'सीधी कार्यवाही' का मतलब है कि जब कोई बैंक केन्द्रीय बैंक के निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो केन्द्रीय बैंक उसके खिलाफ सीधे कदम उठा सकता है। जैसे, वह ऐसे बैंक को ऋण देने पर रोक लगा सकता है, या व्यापारिक बिलों की पुनर्कटौती नहीं करता है, या उस बैंक से अधिक ब्याज वसूल करता है। इससे बैंक को परेशानी होती है और वह मजबूर होकर केन्द्रीय बैंक के निर्देशों का पालन करने लगता है। यह एक कठोर उपाय है।
In simple words: अगर कोई बैंक सेंट्रल बैंक की बात नहीं मानता, तो सेंट्रल बैंक सीधे उसके खिलाफ सख्त कदम उठाता है।
🎯 Exam Tip: सीधी कार्यवाही के विभिन्न उदाहरणों (ऋण पर रोक, पुनर्कटौती पर रोक, उच्च ब्याज दर) को याद रखें।
Question 18. रिजर्व बैंक के दो कार्य बताइए।
Answer: रिजर्व बैंक के दो मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:
1. मुद्रा का निर्गमन: रिजर्व बैंक को देश में नोट जारी करने का एकमात्र अधिकार है, जिससे लेनदेन में आसानी होती है।
2. बैंकों का बैंक: यह अन्य बैंकों के लिए अंतिम ऋणदाता के रूप में कार्य करता है और उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण रखता है। रिजर्व बैंक देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: रिजर्व बैंक नोट छापता है और दूसरे बैंकों का बैंक होता है, उन्हें मदद करता है और नियंत्रित करता है।
🎯 Exam Tip: केन्द्रीय बैंक के मुख्य कार्यों को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें।
Question. सरकार के बैंकर के रूप में रिजर्व बैंक क्या कार्य करता है?
Answer: भारतीय रिजर्व बैंक केंद्र और राज्य सरकारों के लिए एक वाणिज्यिक बैंक की तरह काम करता है। यह उनकी ओर से पैसे जमा करता है और भुगतान भी करता है। वित्तीय संकट के समय यह उनकी आर्थिक मदद भी करता है। आवश्यकता पड़ने पर यह सरकारों के लिए ऋण जुटाने का काम भी करता है। सेंट्रल बैंक सरकार के वित्तीय सलाहकार के रूप में भी कार्य करता है।
In simple words: रिजर्व बैंक सरकार के लिए पैसे जमा करता है, भुगतान करता है, मुश्किल समय में मदद करता है, और उनके लिए कर्ज का इंतजाम करता है।
🎯 Exam Tip: केन्द्रीय बैंक की सरकार के बैंकर के रूप में भूमिका के प्रमुख पहलुओं (जमा, भुगतान, ऋण, वित्तीय सहायता) को याद रखें।
Question 20. रेपो दर (Repo Rate) को विस्तार से समझाइए।
Answer: रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को बहुत कम समय के लिए ऋण देता है। ये ऋण बहुत छोटी अवधि के लिए दिए जाते हैं। इस दर का उपयोग साख (कर्ज) को नियंत्रित करने के लिए भी किया जाता है। जब साख की मात्रा घटानी होती है, तो इस दर को बढ़ा दिया जाता है, और जब साख का विस्तार करना होता है, तो इसे घटा दिया जाता है। इस समय यह दर 6.25% है (स्रोत के अनुसार)। रेपो दर अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह को प्रभावित करती है।
In simple words: रेपो दर वह ब्याज है जिस पर सेंट्रल बैंक दूसरे बैंकों को थोड़े समय के लिए कर्ज देता है। यह दर कर्ज को कंट्रोल करने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: रेपो दर की परिभाषा, उसके उद्देश्य (साख नियंत्रण), और वर्तमान दर को याद रखें।
Question 21. रिवर्स रेपो दर (Reverse Repo Rate) से क्या आशय है?
Answer: रिवर्स रेपो दर वह ब्याज दर है जो रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों की अल्पकालिक जमाओं पर देता है। रिजर्व बैंक इस दर का उपयोग बैंकों की नकदी (तरलता) को प्रभावित करने के लिए करता है। इस दर को बढ़ाने से बैंक रिजर्व बैंक के पास अपनी जमाओं को बढ़ा देते हैं, जिससे उनकी ऋण देने की क्षमता कम हो जाती है। यदि इस दर को घटा दिया जाता है, तो बैंक अपनी जमाओं को कम कर देते हैं, जिससे उनकी ऋण देने की क्षमता बढ़ जाती है। इस समय यह दर 5.75% है (स्रोत के अनुसार)। यह प्रणाली बाजार में अधिक नकदी को सोखने में मदद करती है।
In simple words: रिवर्स रेपो दर वह ब्याज है जो सेंट्रल बैंक दूसरे बैंकों को उनके कम समय के लिए जमा पैसों पर देता है। इससे बैंकों की नकदी को कंट्रोल किया जाता है।
🎯 Exam Tip: रेपो और रिवर्स रेपो दर के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें कि कौन ऋण दे रहा है और कौन प्राप्त कर रहा है।
Question 22. बैंक दर क्या है? स्पष्ट रूप से समझाइए।
Answer: बैंक दर वह ब्याज दर है जिस पर रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को लंबी अवधि के लिए ऋण देता है। इसी दर पर रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों के बिलों की पुनर्कटौती भी करता है। रिजर्व बैंक ने अपनी स्थापना के बाद से बैंक दर को कई बार बदला है, लेकिन साख नियंत्रण के लिए यह नीति बहुत सफल नहीं रही है। आजकल रिजर्व बैंक मौद्रिक प्रबंधन के लिए इसका सीधे उपयोग नहीं कर रहा है। बैंक दर अर्थव्यवस्था में ऋण की लागत को प्रभावित करती है।
In simple words: बैंक दर वह ब्याज है जिस पर सेंट्रल बैंक दूसरे बैंकों को लंबे समय के लिए कर्ज देता है। इस दर पर बिलों का पैसा भी दोबारा दिया जाता है।
🎯 Exam Tip: बैंक दर की परिभाषा और उसके इतिहास में साख नियंत्रण में उसकी प्रभावशीलता को नोट करें।
Question 23. भारतीय रिजर्व बैंक अन्तर्राष्ट्रीय विनिमय कोषों के संरक्षक के रूप में क्या कार्य करता है?
Answer: भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी मुद्राओं को अपने पास सुरक्षित रूप में रखता है तथा देश की घरेलू मुद्रा की दर को स्थिर बनाने के लिए काम करता है। यह देश के अंतर्राष्ट्रीय भुगतानों को संतुलित रखने में भी मदद करता है। इस तरह, यह विदेशी व्यापार और निवेश को बढ़ावा देता है।
In simple words: रिजर्व बैंक विदेशी पैसे को अपने पास संभाल कर रखता है और देश के पैसे की कीमत को स्थिर रखने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: विदेशी विनिमय कोषों के संरक्षक के रूप में रिजर्व बैंक की भूमिका (विदेशी मुद्रा का प्रबंधन, विनिमय दर स्थिरता) को समझें।
Question 24. भारतीय रिजर्व बैंक का प्रबन्धन एवं संचालन किस प्रकार होता है?
Answer: भारतीय रिजर्व बैंक का प्रबंधन और संचालन केन्द्रीय निदेशक मण्डल द्वारा किया जाता है। इस निदेशक मण्डल में कुल 20 सदस्य होते हैं। इसमें एक गवर्नर और चार उप-गवर्नर होते हैं, जिनका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। इसके अलावा, भारत सरकार द्वारा 10 संचालक मनोनीत किए जाते हैं। प्रत्येक स्थानीय मण्डल से भी भारत सरकार एक संचालक नियुक्त करती है, इस प्रकार चार मण्डलों से 4 संचालक नियुक्त होते हैं। इन सभी संचालकों का कार्यकाल चार वर्ष का होता है। एक सरकारी अधिकारी भारत सरकार के प्रतिनिधि के रूप में भी नियुक्त किया जाता है। यह मण्डल बैंक के सभी महत्वपूर्ण निर्णय लेता है।
In simple words: रिजर्व बैंक को एक सेंट्रल बोर्ड चलाता है, जिसमें एक गवर्नर, चार डिप्टी गवर्नर, और सरकार द्वारा चुने गए 14 और लोग होते हैं।
🎯 Exam Tip: रिजर्व बैंक के निदेशक मण्डल की संरचना (गवर्नर, उप-गवर्नर, मनोनीत सदस्य, स्थानीय मण्डल के प्रतिनिधि) और उनके कार्यकाल को याद रखें।
Question 25. भारतीय रिजर्व बैंक के स्थानीय मण्डलों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
Answer: भारतीय रिजर्व बैंक के चार स्थानीय मण्डल हैं, जिनके कार्यालय मुम्बई, कोलकत्ता, चेन्नई और नई दिल्ली में स्थित हैं। प्रत्येक स्थानीय मण्डल में 5 सदस्य होते हैं। ये सदस्य विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ होते हैं। प्रत्येक स्थानीय मण्डल का एक अध्यक्ष होता है, जिसे सभी सदस्य मिलकर चुनते हैं। इन सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। ये स्थानीय मण्डल समय-समय पर स्थानीय और अन्य महत्वपूर्ण समस्याओं पर केन्द्रीय संचालक मण्डल को सलाह देते हैं। यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को समझने में मदद करता है।
In simple words: रिजर्व बैंक के चार स्थानीय ऑफिस हैं (मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, नई दिल्ली)। हर ऑफिस में 5 एक्सपर्ट होते हैं जो अपने इलाके की समस्याओं पर सेंट्रल बोर्ड को सलाह देते हैं।
🎯 Exam Tip: चारों स्थानीय मण्डलों के नाम और उनके मुख्य कार्य (सलाह देना) को याद रखें।
RBSE Class 12 Economics Chapter 19 लघु उत्तरात्मक प्रश्न (SA-II)
Question 1. केन्द्रीय बैंक की परिभाषा दीजिए
Answer: केन्द्रीय बैंक किसी भी देश का शीर्षस्थ बैंक होता है, जो देश में मुद्रा और साख (कर्ज) की मात्रा को नियंत्रित करता है। केन्द्रीय बैंक की कुछ मुख्य परिभाषाएँ इस प्रकार हैं:
1. प्रो. हॉटे (Hawtrey) के अनुसार, "केन्द्रीय बैंक बैंकों का बैंक है क्योंकि यह अन्य बैंकों के लिए अंतिम ऋणदाता का काम करता है।"
2. प्रो. कैन्ट (Kent) के अनुसार, "केन्द्रीय बैंक एक ऐसी संस्था है जिसे सामान्य जनता के हित में मुद्रा की मात्रा में विस्तार और संकुचन का प्रबंधन करने का दायित्व सौंपा जाता है।"
3. प्रो. शॉ (Shaw) के अनुसार, "केन्द्रीय बैंक देश में साख मुद्रा पर नियंत्रण रखने वाला बैंक है।"
4. प्रो. ए.सी.एल. डे (ACL De) के अनुसार, "केन्द्रीय बैंक वह बैंक है जो मौद्रिक एवं बैंकिंग प्रणाली को नियंत्रित एवं स्थिर करने में सहायक होता है।" केन्द्रीय बैंक का मुख्य उद्देश्य देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखना होता है।
In simple words: सेंट्रल बैंक देश का सबसे बड़ा बैंक है, जो पैसों और कर्ज को नियंत्रित करता है। अलग-अलग विद्वानों ने इसे अलग-अलग तरह से परिभाषित किया है, लेकिन सबका सार यही है कि यह वित्तीय प्रणाली को स्थिर रखता है।
🎯 Exam Tip: केन्द्रीय बैंक की परिभाषा देते समय, कम से कम दो अर्थशास्त्रियों के नाम और उनकी परिभाषाएँ अवश्य उद्धृत करें।
Question 3. केन्द्रीय बैंक एवं व्यापारिक बैंकों की तुलना कीजिए।
Answer: केन्द्रीय बैंक और व्यापारिक बैंकों के बीच तुलना इस प्रकार है:
1. केन्द्रीय बैंक देश का शीर्षस्थ बैंक होता है और उसका उद्देश्य लाभ कमाना नहीं होता है, जबकि व्यापारिक बैंक उसके अधीनस्थ काम करते हैं और उनका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है।
2. केन्द्रीय बैंक नोट जारी करके साख (कर्ज) का निर्माण करता है, जबकि व्यापारिक बैंक व्युत्पन्न जमाओं के माध्यम से साख का निर्माण करते हैं।
3. केन्द्रीय बैंक को नोट जारी करने का एकाधिकार है, जबकि व्यापारिक बैंकों को यह अधिकार नहीं होता।
4. केन्द्रीय बैंक साख के नियमन का कार्य करता है, जबकि व्यापारिक बैंक केवल साख निर्माण का कार्य ही करते हैं।
5. केन्द्रीय बैंक देश की आवश्यकता के अनुसार मौद्रिक नीति बनाता है, जबकि व्यापारिक बैंक उस नीति का पालन करते हैं। केन्द्रीय बैंक एक राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने का काम करता है।
In simple words: सेंट्रल बैंक देश का सबसे बड़ा बैंक है, लाभ नहीं कमाता, नोट छापता है और कर्ज को कंट्रोल करता है। वहीं, व्यापारिक बैंक छोटे होते हैं, लाभ कमाते हैं, जमा से कर्ज बनाते हैं और सेंट्रल बैंक के नियमों का पालन करते हैं।
🎯 Exam Tip: केन्द्रीय बैंक और व्यापारिक बैंकों के बीच के मुख्य अंतरों को स्पष्ट रूप से बिंदुवार समझाएँ, खासकर उनके उद्देश्यों, कार्यों और साख निर्माण की शक्ति में अंतर।
Question 4. भारतीय रिजर्व बैंक केन्द्रीय बैंकिंग सम्बन्धी कौन-से कार्य करता है?
Answer: भारतीय रिजर्व बैंक केन्द्रीय बैंक के रूप में निम्नलिखित कार्य करता है:
1. नोटों का निर्गमन: इसे मुद्रा जारी करने का एकाधिकार प्राप्त है, जिससे विभिन्न मूल्य की मुद्रा जारी करके लेनदेन और मुद्रा के रखरखाव में सुविधा होती है।
2. सरकार का बैंकर: यह सरकार के बैंकर, एजेंट और सलाहकार के रूप में भी कार्य करता है।
3. बैंकों का बैंक: यह वाणिज्यिक बैंकों के बैंकर के रूप में काम करता है और उनका अंतिम ऋणदाता भी है।
4. विदेशी विनिमय का नियमन: यह विदेशी मुद्राओं को अपने कोष में सुरक्षित रखता है और आवश्यकता पड़ने पर सरकार व जनता को उपलब्ध कराता है।
5. समाशोधन गृह का कार्य: यह समाशोधन गृह की सुविधा प्रदान करता है, जिससे बैंकों के बीच के कई लेनदेन बिना नकदी के निपट जाते हैं।
6. साख का नियमन: यह देश में आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए साख को भी नियंत्रित करता है। ये कार्य अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं।
In simple words: रिजर्व बैंक नोट छापता है, सरकार का बैंक होता है, दूसरे बैंकों को संभालता है, विदेशी मुद्रा को नियंत्रित करता है, बैंकों के बीच पैसे का हिसाब-किताब रखता है और बाजार में कर्ज को कंट्रोल करता है।
🎯 Exam Tip: केन्द्रीय बैंक के सभी प्रमुख कार्यों को विस्तार से याद रखें और प्रत्येक कार्य के महत्व को संक्षेप में समझाएँ।
RBSE Class 12 Economics Chapter 19 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यों का विस्तार से वर्णन कीजिए। अथवा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा कौन-कौन-से कार्य सम्पादित किये जाते हैं? स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यों का अध्ययन दो मुख्य शीर्षकों के तहत किया जा सकता है:
(अ) केन्द्रीय बैंकिंग संबंधी कार्य
(ब) साधारण बैंकिंग कार्य
(अ) केन्द्रीय बैंकिंग संबंधी कार्य – केन्द्रीय बैंक के रूप में भारतीय रिजर्व बैंक निम्नलिखित कार्य करता है:
(a) मुद्रा जारी करना: यह बैंक पर्याप्त मात्रा में नोट और सिक्के जारी करता है, जिससे जनता को लेनदेन में सुविधा होती है। यह बैंक एक रुपये के नोट को छोड़कर सभी नोट और सिक्के जारी करता है। पत्र मुद्रा जारी करने के लिए न्यूनतम कोष प्रणाली को अपनाया गया है। 1956 से पहले आनुपातिक कोष प्रणाली का उपयोग किया जाता था। न्यूनतम कोष प्रणाली के तहत, बैंक Rs 200 करोड़ का कोष रखता है (जिसमें Rs 115 करोड़ का सोना और Rs 85 करोड़ की विदेशी प्रतिभूतियाँ शामिल हैं) और चाहे जितनी मुद्रा जारी कर सकता है।
(b) सरकार का बैंकर, एजेंट और सलाहकार: रिजर्व बैंक का दूसरा महत्वपूर्ण काम केंद्र और राज्य सरकारों के बैंकर के रूप में काम करना है। यह सरकार के एजेंट और सलाहकार के रूप में भी कार्य करता है। इसके द्वारा सरकार की ओर से धन प्राप्त किया जाता है और भुगतान भी किया जाता है। यह सरकारी कोषों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने और सरकार के लिए ऋण जुटाने का काम भी करता है। यह सरकारों के लिए विदेशी विनिमय का प्रबंधन करता है और विभिन्न वित्तीय मामलों में सरकारों को सलाह भी देता है।
(c) बैंकों का बैंक और अंतिम ऋणदाता: रिजर्व बैंक बैंकों का बैंक है और उनका अंतिम ऋणदाता भी है। यह अनुसूचित बैंकों पर पर्याप्त नियंत्रण रखता है, उनके बिलों की पुनर्कटौती करता है और साथ ही उनकी गतिविधियों पर भी नजर रखता है।
(e) समाशोधन गृह कार्य: भारतीय रिजर्व बैंक समाशोधन गृह का कार्य भी करता है। इससे विभिन्न बैंकों के चेक, ड्राफ्ट आदि से संबंधित लेनदेन बिना नकदी के आदान-प्रदान के केवल खातों में लिखकर निपटाए जाते हैं। इससे बैंकों को बहुत सुविधा होती है और नकदी के अनावश्यक आदान-प्रदान से मुक्ति मिलती है।
(f) साख का नियमन: भारतीय रिजर्व बैंक देश में साख की मात्रा को भी नियंत्रित करता है, जिससे बाजार के अनावश्यक उतार-चढ़ावों से बचा जा सके। साख नियंत्रण के लिए यह परिमाणात्मक और गुणात्मक दोनों प्रकार की विधियों का उपयोग करता है।
(g) आँकड़ों का संकलन और प्रकाशन: रिजर्व बैंक अर्थव्यवस्था से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों के आंकड़े इकट्ठा करता है और विभिन्न पत्रिकाओं के माध्यम से उन्हें प्रकाशित करता है। इससे देश की आर्थिक स्थिति को समझने में आसानी रहती है और नीति निर्माण में मदद मिलती है।
(ब) साधारण बैंकिंग कार्य – भारतीय रिजर्व बैंक उपरोक्त कार्यों के साथ-साथ कुछ साधारण बैंकिंग से संबंधित कार्य भी करता है:
(a) केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और बैंकिंग संस्थाओं से जमाएँ स्वीकार करना।
(b) आवश्यकता पड़ने पर वाणिज्यिक बैंकों और विदेशी बैंकों से ऋण लेना।
(c) केंद्र और राज्य सरकारों को ऋण प्रदान करना।
(d) विदेशी प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय करना।
(e) व्यापारिक बिलों की पुनर्कटौती करना।
(f) कृषि बिलों को क्रय-विक्रय एवं पुनर्कटौती करना।
(g) विदेशी बैंकों में अपना खाता खोलना।
(h) लॉकर की सुविधा प्रदान करना आदि। रिजर्व बैंक का कार्य देश की वित्तीय स्थिरता को बनाए रखना है।
In simple words: रिजर्व बैंक के दो मुख्य काम हैं: सेंट्रल बैंकिंग के काम (जैसे नोट छापना, सरकार का बैंक होना, बैंकों का बैंक होना, कर्ज को कंट्रोल करना) और सामान्य बैंकिंग के काम (जैसे जमा लेना, कर्ज देना, विदेशी मुद्रा का हिसाब रखना)।
🎯 Exam Tip: भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यों को दो मुख्य श्रेणियों (केन्द्रीय बैंकिंग और साधारण बैंकिंग) में बाँटकर, प्रत्येक श्रेणी के तहत आने वाले सभी कार्यों को विस्तार से समझाएँ। सटीक उदाहरणों और आंकड़ों (जैसे न्यूनतम कोष प्रणाली की राशि) का उल्लेख करें।
Question 2. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अपनाये जाने वाले साख नियन्त्रण के विभिन्न तरीकों का वर्णन कीजिए। अथवा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा साख नियन्त्रण के लिए समय-समय पर कौन-से तरीके अपनाये गए हैं?
Answer: साख (कर्ज) नियंत्रण के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अपनाए जाने वाले तरीकों का अध्ययन दो मुख्य शीर्षकों के तहत किया जा सकता है:
(i) परिमाणात्मक विधियाँ
(ii) गुणात्मक विधियाँ
(i) परिमाणात्मक विधियाँ (Quantitative Methods) – इस प्रकार के उपायों से केन्द्रीय बैंक सीधे तौर पर वाणिज्यिक बैंकों की साख निर्माण की शक्ति को प्रभावित करता है। इस श्रेणी की विधियाँ निम्नलिखित हैं:
(a) बैंक दर नीति (Bank Rate Policy) – बैंक दर वह ब्याज दर है जिस पर केन्द्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को स्वीकृत प्रतिभूतियों या प्रथम श्रेणी के बिलों की पुनर्कटौती के आधार पर ऋण देता है। जब केन्द्रीय बैंक को साख का विस्तार करना होता है, तो वह बैंक दर कम कर देता है। इसके विपरीत, साख का संकुचन करने के लिए बैंक दर बढ़ा दी जाती है। इससे बैंकों की ऋण देने की क्षमता सीधे प्रभावित होती है। बैंक दर बढ़ने से ऋण महँगे हो जाते हैं, जिससे ऋणों की माँग कम हो जाती है और साख सृजन घट जाता है। बैंक दर घटने से ऋण सस्ते हो जाते हैं, ऋणों की माँग बढ़ जाती है और साख सृजन ज्यादा होता है। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी स्थापना के बाद बैंक दर में कई बार बदलाव किए हैं, लेकिन भारत में यह नीति बहुत सफल नहीं रही है। 4 अक्टूबर, 2016 से यह दर 6.75% थी।
(b) खुले बाजार की क्रियाएँ (Open Market Operations) – इसके तहत रिजर्व बैंक सरकारी प्रतिभूतियों, प्रथम श्रेणी के बिलों और प्रतिज्ञा पत्रों को खुले बाजार में खरीदता-बेचता है। साख को कम करने के लिए प्रतिभूतियों को बाजार में बेचा जाता है, जिससे बाजार में मुद्रा की मात्रा कम हो जाती है और साख का संकुचन होता है। साख का विस्तार करने के लिए यह प्रतिभूतियों को बाजार से खरीदता है, जिससे बाजार में मुद्रा की मात्रा बढ़ जाती है। मुद्रा की मात्रा बढ़ने से साख का विस्तार होने लगता है। साख को नियंत्रित करने का यह एक बहुत प्रभावी तरीका है।
(c) नकद कोषानुपात में परिवर्तन (Change in CRR) – नकद कोषानुपात में बदलाव करके भी केन्द्रीय बैंक साख निर्माण की मात्रा को प्रभावित करता है। जब साख का विस्तार करना होता है, तो वह इस अनुपात को घटा देता है। साख का संकुचन करने के लिए इसे बढ़ा देता है।
(d) वैधानिक तरल कोषानुपात में परिवर्तन (Change in SLR) – वैधानिक तरल कोषानुपात वह निश्चित प्रतिशत है जिसे सभी वाणिज्यिक बैंकों को अपनी कुल जमाओं का एक हिस्सा तरल रूप में अपने पास रखना होता है, ताकि वे ग्राहकों की माँग जमाओं का भुगतान कर सकें। इस अनुपात में वृद्धि करने से साख निर्माण कम होता है, और कमी करने से साख निर्माण ज्यादा होता है। रिजर्व बैंक आवश्यकतानुसार इसमें भी परिवर्तन कर सकता है।
(e) रेपो दर व रिवर्स रेपो दर में परिवर्तन (Change in Repo Rate and Reverse Repo Rate) – रेपो दर वह दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों से अल्पकालीन ऋणों पर ब्याज वसूल करता है। रिवर्स रेपो दर वह ब्याज दर है जो रिजर्व बैंक अल्पकालीन जमाओं पर वाणिज्यिक बैंकों को देता है। जब साख की मात्रा कम करनी होती है, तो रिजर्व बैंक इन दोनों दरों को बढ़ा देता है। साख की मात्रा बढ़ाने के लिए इन्हें कम कर देता है। इस समय रेपो दर 6.25% और रिवर्स रेपो दर 5.75% है (स्रोत के अनुसार)।
(ii) गुणात्मक विधियाँ (Qualitative Methods) – साख नियंत्रण की गुणात्मक विधियों में ऐसे उपाय शामिल किए जाते हैं जिनसे बैंकों के नकद कोषों को बिना प्रभावित किए साख के उपयोग पर नियंत्रण किया जाता है। गुणात्मक विधियाँ निम्न हैं:
(a) ऋणों की मार्जिन मनी को घटाना-बढ़ाना (Change in Margin Requirement) – रिजर्व बैंक साख को संकुचित करने के लिए मार्जिन मनी बढ़ा देता है। साख का विस्तार करने के लिए इसे घटा देता है। उदाहरण के लिए, यदि Rs 200 के माल पर ऋण राशि Rs 60 से Rs 50 कर दी जाए, तो मार्जिन मनी 40% से बढ़कर 50% हो जाएगी, जिससे ऋण देने की क्षमता घट जाएगी।
(d) नैतिक दबाव (Moral Pressure) – रिजर्व बैंक विभिन्न बैंकों पर नैतिक दबाव डालकर भी साख की मात्रा को नियंत्रित करने का प्रयास करता है। इसमें सलाह, मार्गदर्शन और अनुरोध शामिल होते हैं।
(e) प्रचार (Advertisement) – रिजर्व बैंक अपनी पत्रिकाओं के माध्यम से प्रचार करके भी साख को नियंत्रित करने का प्रयास करता है। वह वित्तीय जानकारी और नीतियों को प्रकाशित करता है।
(f) सीधी कार्यवाही (Direct Action) – जब कोई बैंक रिजर्व बैंक की सलाह पर ध्यान नहीं देता, तो वह ऐसे बैंक के खिलाफ सीधी कार्यवाही कर सकता है। जैसे, बैंक के शाखा विस्तार पर रोक लगाना या उसका लाइसेंस रद्द कर देना। इससे बैंक मजबूर होकर रिजर्व बैंक के आदेशों का पालन करने लगता है।
रिजर्व बैंक अपनी आवश्यकतानुसार इनमें से किसी एक विधि या कई तरीकों का एक साथ उपयोग कर सकता है। ये सभी उपकरण देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में सहायक होते हैं।
In simple words: रिजर्व बैंक कर्ज को कंट्रोल करने के लिए दो तरह के तरीके अपनाता है: पहला है 'परिमाणात्मक तरीके', जिसमें बैंक दर, खुले बाजार की क्रियाएँ, CRR, SLR और रेपो दर को बदलकर कर्ज की कुल मात्रा को नियंत्रित किया जाता है। दूसरा है 'गुणात्मक तरीके', जिसमें नैतिक दबाव, प्रचार, सीधी कार्यवाही और मार्जिन मनी को बदलकर यह देखा जाता है कि कर्ज कहाँ और कैसे इस्तेमाल हो।
🎯 Exam Tip: साख नियंत्रण के परिमाणात्मक और गुणात्मक दोनों विधियों को उनके सभी उप-बिंदुओं के साथ विस्तार से याद रखें और प्रत्येक विधि का अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को समझाएँ।
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